YouTube2Text

Why Would a Government Want Protests? — Transcript

by Vigyan Recharge · 4,035 words · 488 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00हेलो एंड आई वेलकम यू टू विज्ञान रिचार्ज।
  2. 0:01आज के समय दुनिया भर में प्रोटेस्ट हो रहे
  3. 0:03हैं। कोई कहता है यह जनता का गुस्सा है।
  4. 0:05कोई कहता है यह सब पैसे देकर कराया गया
  5. 0:07है। और आम जनता हमेशा इस कंफ्यूजन में
  6. 0:09रहती है कि भैया सच क्या है और झूठ क्या?
  7. 0:11और आज हम इस वीडियो में प्रोटेस्ट के पूरे
  8. 0:13डीएनए को खोल देंगे। लोग क्यों भड़कते
  9. 0:15हैं? भीड़ कहां से जुटती है? पैसा कहां से
  10. 0:17आता है? और कभी-कभी सरकार अपने खिलाफ ही
  11. 0:20प्रोटेस्ट क्यों करा देती है? या फिर हो
  12. 0:22रहे प्रोटेस्ट को रोकती क्यों नहीं है?
  13. 0:23देखो प्रोटेस्ट को समझने से पहले आपको
  14. 0:25बंदरों के ऊपर किए गए एक एक्सपेरिमेंट के
  15. 0:27बारे में पता होना चाहिए। साल था 2003
  16. 0:29अमेरिका की एक लैब में दो कैपोचिन बंदरों
  17. 0:32को अलग-अलग पिंजरे में रखा गया। यह दोनों
  18. 0:34बंदर एक दूसरे को देख सकते थे। इन्हें एक
  19. 0:35सिंपल सा काम दिया गया कि भैया तुम अपने
  20. 0:37पिंजरे में से एक पत्थर उठाकर सामने जो
  21. 0:39आदमी खड़ा है उसे दो और बदले में तुम्हें
  22. 0:41खीरा मिलेगा। जब पहले बंदर ने पत्थर दिया
  23. 0:43तो उसे खीरा मिला लेकिन जब दूसरे बंदर ने
  24. 0:46पत्थर दिया तो उसे बदले में अंगूर दिया
  25. 0:48गया। अब कैपोचीन बंदर को अंगूर बहुत पसंद
  26. 0:50है। अब पहले बंदर ने दूसरे बंदर को मिलता
  27. 0:53हुआ अंगूर देख लिया। जब फिर से पहले बंदर
  28. 0:55को पत्थर देने के बदले में खीरा दिया गया
  29. 0:58तो उसने खीरा उठाकर देने वाले के मुंह पे
  30. 1:00दे मारा। यानी 2 मिनट पहले जो खीरा बहुत
  31. 1:02अच्छा लग रहा था अब अचानक से वो बिल्कुल
  32. 1:05बेकार हो चुका था। यह स्टडी सारा बॉसनैन
  33. 1:07और फ्रेंच डी वाल ने नेचर जनरल में छापी
  34. 1:10थी। अब आपको लग रहा होगा कि भैया कि इन
  35. 1:12बंदरों की कहानी से प्रोटेस्ट का क्या
  36. 1:13लेना देना? देखो ध्यान से सुनना। इसका नाम
  37. 1:16है रिलेटिव डेप्रिवेशन। मतलब इंसान को इस
  38. 1:18चीज से दर्द नहीं होता कि उसके पास क्या
  39. 1:20है बल्कि इस चीज से होता है कि उसके पास
  40. 1:23क्या नहीं है जो दूसरे के पास है और यही
  41. 1:25चीज दर्द गुस्सा बेइंसाफी और विरोध को
  42. 1:28जन्म देती है। अब अगर आप ध्यान से देखोगे
  43. 1:30तो हर प्रोटेस्ट का एक कोर मुद्दा होता
  44. 1:31है। जहां अन्याय, बेइंसाफी या किसी चीज की
  45. 1:34खास मांग को सामने रखा जाता है। अब यहां
  46. 1:36एक और जेन्युइन सवाल आता है कि किसी
  47. 1:38प्रोटेस्ट में अचानक से भीड़ कैसे जुटने
  48. 1:40लगती है? मतलब आज 10 लोग खड़े थे और कल
  49. 1:4210,000 हो गए तो अब इस गणित के पीछे क्या
  50. 1:44जादू है? देखो 1978 में सोशलॉजिस्ट मार्क
  51. 1:47ग्रेनोवेटर ने एक मॉडल बना कर दिया जिसे
  52. 1:50थ्रेशहशोल्ड मॉडल कहते हैं। यानी हर इंसान
  53. 1:52का एक थ्रेशहोल्ड होता है कि भैया पहले
  54. 1:54कितने लोग जुड़ेंगे तब जाकर मैं जुड़ूंगा।
  55. 1:56अब किसी का थ्रेशहोल्ड जीरो हो सकता है।
  56. 1:58वो अकेला ही चलेगा। मतलब प्रोटेस्ट करने
  57. 2:00अकेला ही निकल पड़ेगा। अब इसी तरीके से
  58. 2:02किसी का थ्रेशहोल्ड वन हो सकता है, किसी
  59. 2:04का 50 हो सकता है, किसी का 1000, किसी का
  60. 2:0610,000। आप शादी वाले डीजे का एग्जांपल
  61. 2:08लो। भैया डीजे बजा और कोई नाचने नहीं आया।
  62. 2:10फिर अचानक से कोई अंकल जी आए और उनके पीछे
  63. 2:13पीछे दो चार और आ गए। फिर और लोग जुड़ते
  64. 2:15चले गए। इस तरह से भीड़ बढ़ती चली जाएगी।
  65. 2:17यानी सबसे पहले जाकर नाचने में किसी एक को
  66. 2:19शर्म आ रही होगी या कोई और कारण होगा।
  67. 2:21लेकिन जैसे ही उसका थ्रेशहोल्ड पार हुआ,
  68. 2:23उसने देखा कि अब दो लोग पहुंच चुके हैं या
  69. 2:26चार पहुंच गए हैं तो वो भी जुड़ गया और
  70. 2:28यही डोमिनो इफेक्ट भीड़ को इकट्ठा करता
  71. 2:30है। अब अगर आपको इसे रोकना है तो उस पहले
  72. 2:34आदमी को हटा दो जिसका थ्रेशहोल्ड जीरो था।
  73. 2:36भीड़ इकट्ठा होगी ही नहीं। मतलब भीड़
  74. 2:38सिर्फ इस बात पे नहीं जुड़ती है कि कितने
  75. 2:40लोग नाराज हैं बल्कि इस बात पर जुड़ती है
  76. 2:42कि किसका थ्रेशहोल्ड कब जाकर अचीव होता
  77. 2:45है। तो अब एक सवाल आता है कि आखिर किसी
  78. 2:47प्रोटेस्ट को सफल बनाने के लिए कितने लोग
  79. 2:49चाहिए मतलब कितनी भीड़ चाहिए? इसका भी तो
  80. 2:51कोई नंबर होना चाहिए ना। तो हारवर्ड के
  81. 2:53प्रोफेसर एरिका चेनोवेथ ने एक नंबर दिया
  82. 2:55है और वो है 3.5% यानी कि अगर किसी देश की
  83. 2:58पॉपुलेशन का 3.5% किसी प्रोटेस्ट में जाकर
  84. 3:01जुड़ जाता है तो यह लोग इतना दबाव बना
  85. 3:04सकते हैं जो सत्ता को उखाड़ कर बाहर फेंक
  86. 3:05दे। अब ऐसा कोई थंब रूल नहीं है कि इससे
  87. 3:08कम लोग किसी प्रोटेस्ट को सफल नहीं बना
  88. 3:10सकते। बिल्कुल बना सकते हैं। लेकिन रिसर्च
  89. 3:12में जो नंबर सामने आया वो है 3.5%।
  90. 3:16देखो किसी भी प्रोटेस्ट से जुड़ा हुआ एक
  91. 3:18बहुत जरूरी सवाल है कि आखिर इतने बड़े
  92. 3:20प्रोटेस्ट को ऑर्गेनाइज करने में जो पैसा
  93. 3:23लगता है वो कहां से आएगा? मतलब कोई अपनी
  94. 3:25जमीन जायदाद बेच के तो पैसा नहीं लगाएगा।
  95. 3:27देखो भैया पैसे के तो बहुत सारे सोर्सेस
  96. 3:29हैं। आइए आपको एक-एक करके समझाता हूं।
  97. 3:30देखो सबसे पहले आता है प्रोटेस्ट करने
  98. 3:32वाले लोग। यह खुद अपना पैसा लगा सकते हैं।
  99. 3:35अगर इनके पास पैसा है और ये खर्च करने के
  100. 3:37इच्छुक हैं तो यह बिल्कुल लगाएंगे। फिर
  101. 3:39दूसरा आता है कोई संगठन जो कि अपना फंड का
  102. 3:42इस्तेमाल कर सकता है। जैसे मजदूर यूनियन
  103. 3:44हो गई या किसान यूनियन हो गया। फिर तीसरा
  104. 3:46आता है सीधी मदद। किसी ने अनाज दे दिया,
  105. 3:49किसी ने रहने की व्यवस्था कर दी, किसी ने
  106. 3:51टेंट वगैरह दे दिया। और कई बार लोग अपनी
  107. 3:54गाड़ियां तक दे देते हैं। आपने इस तरह की
  108. 3:56मदद किसान आंदोलन के समय जरूर देखी होगी।
  109. 3:59अब इसके बाद आता है चौथा नंबर ऑनलाइन चंदे
  110. 4:01का यानी कि क्राउड फंडिंग का। फिर पांचवा
  111. 4:04है कोई राजनीतिक संगठन यानी कि अपोजिशन
  112. 4:06पार्टीज वगैरह भी पैसा देती हैं
  113. 4:08प्रोटेस्ट। और भैया छठा सबसे जरूरी। यह है
  114. 4:10विदेश से मिलने वाला पैसा यानी कि फॉरेन
  115. 4:13एड और सातवें नंबर पर आता है कोई अमीर
  116. 4:16कंपनी, बिजनेसमैन या कोई ऐसा आउटफिट जिसके
  117. 4:19बारे में किसी को ना पता हो। आप एक कमाल
  118. 4:21की कहानी सुनो जरा। 1990 में अमेरिका
  119. 4:23रेस्टोरेंट और ऑफिसेस में स्मोकिंग पर बैन
  120. 4:26लगाने की बात चल रही थी। फिर भैया अचानक
  121. 4:28से एक ग्रुप सामने आता है जिसका नाम था
  122. 4:31नेशनल बीड़ी बार संगठन मतलब नेशनल स्मोकर
  123. 4:34अलायंस। अब इनकी मांग बड़ी सिंपल सी थी कि
  124. 4:37भैया हमारी आजादी मत छीनो। अब देखने में
  125. 4:39तो यह बिल्कुल आम जनता का प्रोटेस्ट लग
  126. 4:41रहा था। अब मुद्दा उछला कोर्ट पहुंच गया।
  127. 4:43जांच हुई तो पता लगा कि नेशनल स्मोकर
  128. 4:46अलायंस के पीछे जो पैसा था वो फिलिप मॉरिस
  129. 4:49का था और इस पैसे को इस्तेमाल करके एक
  130. 4:51पीआर फर्म पर्सन मॉरस टेलर ने इस बीड़ी
  131. 4:53बाज संगठन के लिए प्रोटेस्ट तैयार करवाया
  132. 4:56था। मतलब संगठन के जरिए प्रोटेस्ट तैयार
  133. 4:58करवाया था। और यह फिलिप मॉरिस थे एक
  134. 5:00सिगरेट कंपनी के मालिक। अब देखो इस तरह के
  135. 5:02खेल का ना एक टेक्निकल नाम भी है जिसे हम
  136. 5:05कहते हैं एस्ट्रोटर्फिंग। एस्ट्रोफ का
  137. 5:07मतलब वो नकली घास जो कि असली जैसी दिखती
  138. 5:10है। अब जरा आप एक चीज सोचो। क्या इस तरह
  139. 5:12की फंडिंग का स्केल इतना बड़ा हो सकता है
  140. 5:15कि एक देश की सरकार को ही गिराया जा सके।
  141. 5:17तो भाई साहब बिल्कुल हो सकता है और इतिहास
  142. 5:19में कई बार हुआ भी है। आप यह उदाहरण देखो।
  143. 5:21देखो ईरान के एक प्राइम मिनिस्टर थे
  144. 5:22मोहम्मद मोसादे। अब इनके देश का तेल एक
  145. 5:25ब्रिटिश कंपनी के हाथ में था। इन्होंने
  146. 5:27उनसे वापस लिया और उसे राष्ट्रीय घोषित कर
  147. 5:29दिया। मतलब नेशनलाइज कर दिया। अब इसके बाद
  148. 5:3219 अगस्त 1953 में तेहरान की सड़कों पर
  149. 5:35जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुए और यह विरोध
  150. 5:38प्रदर्शन इतने ज्यादा बढ़ गए कि भैया
  151. 5:40प्राइम मिनिस्टर साहब की सत्ता ही चली गई।
  152. 5:42अब पूरी दुनिया में लोगों को लगा कि भैया
  153. 5:44जनता का गुस्सा था और उन्होंने सरकार को
  154. 5:46पलट दिया। लेकिन 60 साल बाद 2013 में जब
  155. 5:49सीआईए के डॉक्यूमेंट क्लासिफाई हुए मतलब
  156. 5:51डीक्लासिफाइड हुए तो पता लगा कि ये ऑपरेशन
  157. 5:54तो सीआईए ने कराया था। मतलब तेहरान की
  158. 5:57सड़कों पर पेड रूफेंस उतारे गए थे। ऐसे
  159. 5:59लोग जो पैसा लेकर विरोध प्रदर्शन करते थे।
  160. 6:02अब इन लोगों के साथ जो मौजूदा सरकार से
  161. 6:04खफा लोग थे वो भी जुड़ गए। इसीलिए
  162. 6:06प्रदर्शन इतने बड़े हो गए। आपको पता होना
  163. 6:09चाहिए कि अमेरिका में एक संस्था है एनईडी
  164. 6:11यानी कि नेशनल एंडमेंट डेमोक्रेसी मतलब
  165. 6:14फॉर डेमोक्रेसी। अब इस संस्था का काम है
  166. 6:16कि अमेरिका की सरकारी पैसे को दुनिया भर
  167. 6:19में फ्री में बांटना। अब आप खुद ही हिसाब
  168. 6:21लगा लो कोई अपने पैसे को फ्री में क्यों
  169. 6:23बांटेगा? इसी संस्था के कोफाउंडर एलेन
  170. 6:25वेंस्टीन ने 1991 में वाशिंगटन पोस्ट में
  171. 6:28कहा था कि जो काम पहले सीआईए चुपके से
  172. 6:31करता था अब यूएस यही सेम काम को यूएस एड
  173. 6:34की मदद से दूसरे देशों में करता है और अगर
  174. 6:36आपको यह लग रहा है कि भैया अमेरिका तो
  175. 6:39बड़ा निकम्मा है। अरे नहीं महाराज इससे भी
  176. 6:41बड़े-बड़े निकम्मे मौजूद हैं। पूरी दुनिया
  177. 6:43में हर देश में ऐसी कंपनियां मौजूद हैं जो
  178. 6:46पैसे लेकर प्रोटेस्ट अरेंज कराती हैं। अगर
  179. 6:49नहीं सुना है तो एक उदाहरण देख लो। लॉस
  180. 6:51एंजेलिस में कंपनी है क्राउड ऑन डिमांड।
  181. 6:53यह बिल्कुल खुलेआम सर्विस बेच रही है कि
  182. 6:55भैया रैली चाहिए, प्रोटेस्ट चाहिए,
  183. 6:57तालियां बजाने वाले लोग चाहिए, आप पैसे
  184. 7:00दो, लोग मिलेंगे। एक्टर्स आएंगे, अपना काम
  185. 7:02करेंगे और शाम को अपने घर चले जाएंगे। और
  186. 7:05ये सिर्फ अमेरिका की कहानी नहीं है। ऐसी
  187. 7:07कंपनियां हर देश में मौजूद है। बस आप यह
  188. 7:09कह सकते हो कि अमेरिका जैसे देश में यह
  189. 7:11खुलेआम काम कर रही है। और हो सकता है बाकी
  190. 7:14देशों में यह चुपके से कर रही हो। अब देखो
  191. 7:16मैं नाम लेने से बच रहा हूं, लेकिन मैं
  192. 7:18आपको ना इसका दूसरा चेहरा दिखाता हूं।
  193. 7:20मतलब सेफ साइड खेल रहा है थोड़ा। आपने
  194. 7:22देखा होगा कि भैया फलां फला नेता की रैली
  195. 7:24आने वाली है और उसमें जाने के लिए भीड़
  196. 7:26चाहिए। तो यह जो लोकल के छुट भैया नेता
  197. 7:29होते हैं यह ₹500 का लालच और मुफ्त खाने
  198. 7:32का वादा करके भीड़ को इकट्ठा करके नेता की
  199. 7:34रैली में पहुंचा देते हैं। अब वहां पर लोग
  200. 7:36गए नारे लगाए अपना काम पूरा किया। किसी को
  201. 7:39शायद पैसे भी मिले, किसी को ना भी मिले।
  202. 7:41अब आप जरा यह सोचो कि जब लोग रैली में
  203. 7:44जाने के लिए मिल सकते हैं तो क्या दंगा
  204. 7:46करने के लिए या विरोध प्रदर्शन के लिए
  205. 7:48नहीं मिल सकते? बिल्कुल मिल सकते हैं। अब
  206. 7:49देखो आपको यहां से एक बात तो क्लियर हो गई
  207. 7:51होगी कि बाहर से प्रोटेस्ट को कंट्रोल
  208. 7:53किया जा सकता है। लेकिन क्या आपको यह पता
  209. 7:55है कि सरकार अपने खिलाफ प्रोटेस्ट क्यों
  210. 7:58कराती है? हां यह बिल्कुल सच है। सरकार
  211. 8:00अपने खिलाफ भी प्रोटेस्ट करा सकती है। आइए
  212. 8:03समझाता हूं आपको।
  213. 8:06देखो साल था 2007 कनाडा के क्यूबक में तीन
  214. 8:09देशों के नेता इकट्ठे हुए थे। जिस
  215. 8:11बिल्डिंग में ये लोग इकट्ठा हुए थे उस
  216. 8:13बिल्डिंग के बाहर विरोध प्रदर्शन चल रहे
  217. 8:15थे। अब ये प्रोटेस्ट बिल्कुल शांत था।
  218. 8:17लेकिन तभी भीड़ में से कुछ नकाबपश लोग
  219. 8:19बाहर आते हैं जिनके हाथ में पत्थर थे। अब
  220. 8:22यहां पर भीड़ ने इन्हें दबोच लिया और बाद
  221. 8:24में जाकर पता लगा कि यह और कोई नहीं बल्कि
  222. 8:27पुलिस वाले ही थे। अब क्या पुलिस अपनी
  223. 8:29मर्जी से किसी प्रोटेस्ट में दंगा भड़काना
  224. 8:31चाहती थी? अब यह सब देख के तो ऐसा ही लगता
  225. 8:34है और इस चीज का नाम है एजेंट प्रोवोकेटर।
  226. 8:37यानी एक ऐसा इंसान जो कि प्रोटेस्ट को
  227. 8:40हिंसक बनाने की कोशिश कर रहा हो और ये कोई
  228. 8:42अकेला केस नहीं है। कई बार अलग-अलग देशों
  229. 8:44में सरकार अपने खिलाफ ही प्रोटेस्ट अरेंज
  230. 8:47कराती है ताकि उनका जो कोर वोटर है वो ना
  231. 8:49छिटके। भाई साहब भारत में 1984 में जो सिख
  232. 8:52विरोधी दंगे हुए थे उस पर आई हुई नानावटी
  233. 8:55कमीशन की रिपोर्ट ने यह साफ-साफ कहा था कि
  234. 8:58पुलिस उन दंगों को कंट्रोल कर सकती थी और
  235. 9:00हुआ क्या यह आप और मैं जानते हैं। अब जरा
  236. 9:0326 जनवरी 2021 पर आ जाओ। किसान आंदोलन
  237. 9:05खत्म होने के बाद जब किसान ट्रैक्टर मार्च
  238. 9:08हां ट्रैक्टर मार्च करते हुए लाल किले की
  239. 9:10तरफ गए थे तो यह बात सबको पता थी।
  240. 9:12इंटेलिजेंस इनपुट भी था कि यह जो मार्च है
  241. 9:15यह हिंसक हो सकता है। यह भीड़ उत्पात मचा
  242. 9:18सकती है। जब रिसोर्सेज अपने पास थे,
  243. 9:20इंटेलिजेंस इनपुट अपने पास था तो फिर इसे
  244. 9:23रोका क्यों नहीं गया? भैया आईपीएस ऑफिसर
  245. 9:25विभूति नारायण राय जिन्होंने हाशिमपुरा
  246. 9:28केस की जांच की थी। उन्होंने एक इंटरव्यू
  247. 9:30के दौरान कहा था कि देश में किसी भी शहर
  248. 9:32में दंगे को 24 घंटे के अंदर कंट्रोल किया
  249. 9:35जा सकता है। जब तक स्टेट यह ना चाहे कि वो
  250. 9:37दंगा चलता रहे।
  251. 9:41अब सवाल यह आता है कि अगर सरकार रोक सकती
  252. 9:44थी तो कभी-कभी इन विरोध प्रदर्शन को रोकती
  253. 9:47क्यों नहीं है? अब देखो ये सब इस बात पर
  254. 9:49निर्भर करता है कि सरकार के लिए किसी
  255. 9:51संगठन की मांग मानना कितना मुश्किल है।
  256. 9:53कोई प्रोटेस्ट कितना प्रेशर बना रहा है और
  257. 9:56बात करने पर या बल का प्रयोग करके
  258. 9:58प्रोटेस्ट को दबाने पर किसका वोट खिसक
  259. 10:00सकता है। मतलब दुनिया भर की सरकारें इस
  260. 10:03बात का ध्यान रखती है कि आग को सबसे पहले
  261. 10:06वहां बुझाना है जहां उनका अपना वोट जल रहा
  262. 10:09है। पॉलिटिकल साइंटिस्ट स्टीवन विल्किंसन
  263. 10:11ने 2004 में अपनी किताब वोट्स एंड वायलेंस
  264. 10:15में यही कहा था कि भैया दंगे अपने आप फूटा
  265. 10:18हुआ लोगों का गुस्सा नहीं होता बल्कि
  266. 10:20दुनिया भर में नेता इसे चुनावी माहौल
  267. 10:22बनाने के लिए इस्तेमाल करते और जहां पर
  268. 10:25पुलिस को हर हाल में दंगा रोकना होता है
  269. 10:27वहां इस तरह के उग्र दंगे होते ही नहीं
  270. 10:29है। लेकिन यहां एक और सवाल भी तो आता है
  271. 10:31कि भाई अगर दंगे होते रहेंगे तो डर का
  272. 10:34माहौल बनेगा। तो आखिर इस डर के माहौल से
  273. 10:36किसी देश की सरकारों को क्या फायदा हो
  274. 10:38सकता है? तो भैया 1970 में पॉलिटिकल
  275. 10:40साइंटिस्ट जॉन मूलर ने एक पैटर्न नोट किया
  276. 10:43और इन्होंने उसका नाम दिया रैली अराउंड
  277. 10:45फ्लैग इफेक्ट यानी कि डर और संकट के वक्त
  278. 10:49लोग सरकार या नेता के पीछे खड़े हो जाते
  279. 10:51हैं और सवाल पूछना कम कर देते हैं। मैं
  280. 10:54आपको एक उदाहरण देता हूं। 2001 में 91 के
  281. 10:57हमले से पहले प्रेसिडेंट जॉर्ज डब्ल्यू
  282. 10:59बुश की जो अप्रूवल रेटिंग थी वो मात्र 51%
  283. 11:02थी। लेकिन जैसे ही हमला हुआ उसके बाद वो
  284. 11:05अप्रूवल रेटिंग 86% तक पहुंच गई थी और दो
  285. 11:08हफ्ते में ही 90% क्रॉस कर गई। यह अमेरिका
  286. 11:11के इतिहास में आज तक की सबसे बड़ी अप्रूवल
  287. 11:14रेटिंग थी। अब देखो मैं यह नहीं कह रहा कि
  288. 11:1691 का हमला सेटअप था। बल्कि मैं आपको इस
  289. 11:19उदाहरण से यह समझाना चाह रहा हूं कि डर के
  290. 11:22वक्त लोग नेता के पीछे या अपने देश की
  291. 11:25सरकार के पीछे खड़े हो जाते हैं। आप एक
  292. 11:27छोटा सा घर का एग्जांपल ही ले लो। मान
  293. 11:29लेते हैं कि दो भाई बहन आपस में लड़ रहे
  294. 11:30हैं। अब बहुत देर से बच्चों के पेरेंट्स
  295. 11:32उन्हें झगड़ा ना करने के लिए बोल रहे हैं,
  296. 11:34लेकिन वह सुन ही नहीं रहे। फिर अचानक से
  297. 11:36कोई घर की खिड़की पर एक पत्थर देके मारता
  298. 11:38है। कांच टूटता है तो दोनों बिना सोचे
  299. 11:41समझे अपना झगड़ा तुरंत बंद करके अपने
  300. 11:43पेरेंट्स के पीछे जाकर खड़े हो जाते हैं
  301. 11:45और जो भी उन्हें कहा जाएगा उस बात को
  302. 11:48मानते हैं। इसी इफेक्ट को रैली अराउंड
  303. 11:50फ्लैग कहा जाता है। अब देखो यहां पर ना एक
  304. 11:52दूसरा सवाल ये बनता है कि अगर सरकार को
  305. 11:55प्रोटेस्ट से फायदे होते हैं या अपने
  306. 11:57खिलाफ प्रदर्शन से फायदा मिल सकता है तो
  307. 11:59सरकार क्रैकडाउन काहे करती है? मतलब हम यह
  308. 12:01भी तो सुनते हैं कि गवर्नमेंट गैर जरूरी
  309. 12:03क्रैकडाउन कर रही है। तो देखो भैया एक बात
  310. 12:05ऐसी है जो प्रोटेस्ट सरकार को सूट नहीं
  311. 12:08करते उनके एजेंडे को नुकसान पहुंचा रहे
  312. 12:10हैं उन पर सरकार छह तरीके की स्ट्रेटजी का
  313. 12:13प्रयोग करती है। जिसमें पहली है स्ट्रेटजी
  314. 12:15ऑफ एट्रिशन। जैसे घर में कोई बच्चा शोर
  315. 12:17मचाए या फिर दंगा करे या रोना पीट ना करे
  316. 12:20और मां-बाप बिल्कुल चुप बैठे रह। इंतजार
  317. 12:22करते रह कि भैया यह अपना रोना-धोना बंद
  318. 12:24करके अपने आप ही चुप हो जाएगा। इसको कहते
  319. 12:26हैं स्ट्रेटजी ऑफ़ अट्रिशन। सरकार भी लोगों
  320. 12:29को विरोध प्रदर्शन करने देगी। बैठे रहने
  321. 12:31दो। कोई क्या दिक्कत है? अपनी सेहत पे
  322. 12:32क्या फर्क पड़ रहा है? इससे मिलताजुलता
  323. 12:34उदाहरण आपको दिल्ली के शाहीन बाग में मिल
  324. 12:36जाएगा। लोग बैठे सड़कें जाम कर दी। आसपास
  325. 12:38के लोग परेशान होते रहे। सरकार के कान पे
  326. 12:40जू तक ना रहेंगी। फिर एक दिन सरकार का मन
  327. 12:42करा चलो इन्हें साफ कर देते हैं। कोविड आ
  328. 12:44ही गया था और एक घंटे में मतलब दो-चार
  329. 12:47घंटे में सबको साफ कर दिया। तो भैया ये तो
  330. 12:49हो गई पहली स्ट्रेटजी। अब इसके बाद आता है
  331. 12:51सेफ्टी वॉल वाली टेक्निक। अब इसका मतलब
  332. 12:53क्या है? आप इसे प्रेशर कुकर की तरह समझो।
  333. 12:55मतलब प्रेशर कुकर में प्रेशर बढ़ता जा रहा
  334. 12:57था। तो उसके ऊपर एक सेफ्टी वाल्व है। उससे
  335. 12:59वो प्रेशर रिलीज हुआ और जैसे ही प्रेशर
  336. 13:01रिलीज हुआ वापस फिर से प्रेशर बढ़ना शुरू
  337. 13:03हो गया। सरकार भी प्रोटेस्ट पर इस
  338. 13:05स्ट्रेटजी का इस्तेमाल करती है। मतलब मान
  339. 13:07लेते हैं कोई प्रोटेस्ट शुरू हुए किसी
  340. 13:08मांग को लेकर। अब सरकार ने उसको आंशिक रूप
  341. 13:11से यानी कि उसमें से कुछ बात को मान लिया।
  342. 13:13लेकिन जैसे ही प्रोटेस्ट हल्का पड़ा सरकार
  343. 13:15पलट गई। अब इसी चीज को साइकोलॉजिस्ट
  344. 13:17फ्रांसिस फॉक्स पेबन और रिचर्ड क्लोवर्ड
  345. 13:20ने 1977 की अपनी किताब पुअर्स पीपल्स
  346. 13:24मूवमेंट में बहुत अच्छे समझाया है।
  347. 13:26उन्होंने अपनी किताब में यह बताया कि ऊपर
  348. 13:28बैठे हुए लोग रियायत देते हैं। लेकिन तब
  349. 13:30देते हैं जब उन्हें ऐसा लगता है कि दबाव
  350. 13:32बहुत बढ़ रहा है। लेकिन जैसे ही दबाव घटता
  351. 13:35है वो अपने द्वारा दी हुई रियायत को वापस
  352. 13:37भी ले लेते हैं। चलो आपको इसका दूसरा रूप
  353. 13:39दिखाता हूं। भैया मान लेते हैं चुनावी
  354. 13:41माहौल चल रहा है। अब इसी माहौल में अचानक
  355. 13:43से गैस के दाम बहुत बढ़ चुके हैं। फ्यूल
  356. 13:45प्राइसेस बहुत बढ़ चुके हैं। अब लोग
  357. 13:47सड़कों पर हंगामा मचा रहे हैं। मतलब
  358. 13:48विपक्षी पार्टी ने एक प्रोटेस्ट ऑर्गेनाइज
  359. 13:51करा दिया। तो जरा गौर करिएगा कि इलेक्शन
  360. 13:53के आसपास अचानक से फ्यूल प्राइसेस या गैस
  361. 13:56के दामों को तुरंत घटा दिया जाता है। अब
  362. 13:58जो लोग ऑर्गेनिकली इस प्रोटेस्ट में जुड़े
  363. 14:01थे उन्हें लगा कि जो डिमांड थी वो पूरी हो
  364. 14:03गई। या आप इसे दूसरे तरीके से भी देख सकते
  365. 14:05हो कि मान लेते हैं सरकार ने दामों को
  366. 14:08बढ़ाया ही नहीं। लेकिन जैसे ही इलेक्शन
  367. 14:10निकल गए तो उसके बाद वापस दामों को बढ़ा
  368. 14:13दिया जाता है। यानी जो रियायत दी वो वापस
  369. 14:15ले ली गई। इसके बाद सरकार के द्वारा जो
  370. 14:17अगली स्ट्रेटजी अपनाई जाती है किसी
  371. 14:19प्रोटेस्ट को ठंडा करने के लिए वो है
  372. 14:23ऑस्ट्रेलियन रिसर्चरर्स ब्राइन मार्टिन ने
  373. 14:262007 की अपनी किताब जस्टिस इग्नाइटेड में
  374. 14:28कहा है कि ताकतवर लोग गुस्से को ठंडा करने
  375. 14:31के लिए कोर्ट और इंक्वायरी कमेटी का चूर्ण
  376. 14:34बनाकर आम जनता को पकड़ा देते हैं। आपने यह
  377. 14:36चीज भारत में बहुत सुनी होगी। जब भी कोई
  378. 14:38प्रोटेस्ट होता है तो सबसे पहला जवाब यही
  379. 14:41होता है कि भैया हमने कमेटी बना दी है।
  380. 14:43इसकी रिपोर्ट आने दो कारवाई करेंगे। अब
  381. 14:44इसके बाद चौथा आता है लॉ ऑफ करेक्टिव
  382. 14:47रिस्पांसिवनेस। यानी भैया अगर खतरा बड़ा
  383. 14:49दिखाई दे तो डंडा चला दो। फोर्स का
  384. 14:51इस्तेमाल करो और ये आपको वहां दिखाई देगा
  385. 14:54कि जहां पर सरकार को ऐसा लगे कि अगर
  386. 14:57उन्होंने इस दबाव वाली नीति को नहीं कुचला
  387. 15:00तो उनकी कुर्सी हिल जाए। जब चाइनीस
  388. 15:02कम्युनिस्ट पार्टी यानी कि चाइनीस सरकार
  389. 15:03के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे थे। तो चाइना की
  390. 15:06अपनी ही सरकार ने अपने ही लोगों को
  391. 15:08गोलियों से भून दिया, टैंक से उड़ा दिया।
  392. 15:10अत्याधिक फोर्स का इस्तेमाल करना यह था
  393. 15:13आपका चौथा तरीका और अब आते हैं पांचवें पर
  394. 15:16जिसमें आता है इंफॉर्मेशन कंट्रोल। आप एक
  395. 15:18घटना के बारे में सुनो। 1 फरवरी 2005 सुबह
  396. 15:21के 10:30 बजे नेपाल के राजा ज्ञानेंद्र
  397. 15:24टीवी पर आते हैं और सरकार को बर्खास्त कर
  398. 15:26देते हैं। मतलब इलेक्टेड गवर्नमेंट को
  399. 15:28बर्खास्त कर देते हैं। इसके बाद देश में
  400. 15:30इमरजेंसी [संगीत] लगती है। जब लोग घबराए
  401. 15:32उन्होंने अपने फोन वगैरह या इंटरनेट का
  402. 15:34इस्तेमाल करना चाहा तो पता लगा पूरे देश
  403. 15:37में टेलीकम्युनिकेशन और इंटरनेट को बंद कर
  404. 15:39दिया गया है। इतिहास का यह पहला मेजर
  405. 15:41इंसिडेंट बना जहां पर टेलीकम्युनिकेशन और
  406. 15:43इंटरनेट पर कंट्रोल करके इंफॉर्मेशन के
  407. 15:45फैलने को रोका गया था और इसके बाद से ही
  408. 15:48पूरी दुनिया में इस तरह के इंटरनेट शटडाउन
  409. 15:51और इंफॉर्मेशन कंट्रोल के मेजर्स का
  410. 15:53इस्तेमाल होने लगा। अब इंफॉर्मेशन कंट्रोल
  411. 15:55के बाद आता है डीवैल्यूएशन कर देना। यानी
  412. 15:57कि प्रोटेस्ट करने वाले की इज्जत ही गिरा
  413. 15:59दो। मतलब जैसे मोहल्ले में किसी के लिए
  414. 16:01कहा जाए अरे ये तो ऐकी बात पे क्या ध्यान
  415. 16:03देना ये तो ऐसे ही कुछ भी कहता रहता है और
  416. 16:05धीरे-धीरे जब ये पैटर्न रिपीट होता है तो
  417. 16:08उस इंसान की जिसके बारे में यह बात कही जा
  418. 16:10रही है उसकी बात की वैल्यू ही खत्म हो
  419. 16:12जाती है। अब बिल्कुल ठीक ऐसे ही प्रोटेस्ट
  420. 16:15करने वालों को यह बोल देना कि भैया यह तो
  421. 16:17देशद्रोही है। इनके पीछे तो विदेशी पैसा
  422. 16:19लगा है या यह तो किसी विदेशी सरकार के
  423. 16:22एजेंट की तरह काम कर रहे हैं। यह बोलकर भी
  424. 16:24ईवैल्यूएशन किया जाता है। यानी आवाज की
  425. 16:27सोशल क्रेडिबिलिटी ही खत्म कर दो। जब समाज
  426. 16:30का भरोसा टूटेगा तो प्रोटेस्ट भी दम तोड़
  427. 16:32देंगे। तो अब आपको एक चीज समझ में आ गई
  428. 16:34होगी कि भैया प्रोटेस्ट करने वाले सही भी
  429. 16:36होते हैं और गलत भी। और सरकार भी सही हो
  430. 16:39सकती है या गलत भी हो सकती है। तो मतलब हम
  431. 16:41कैसे पहचाने कि क्या सही है या क्या सच है
  432. 16:44क्या झूठ है।
  433. 16:47तो देखो इसके लिए आप एक टेक्निक का
  434. 16:48इस्तेमाल कर सकते हो जिसे मैं पर्सनली आर
  435. 16:50यू के ओ यानी कि रुको टेक्निक कहता हूं।
  436. 16:52अब यहां पर आर का मतलब है रुको। यानी कि
  437. 16:55कोई भी ऐसी पोस्ट, कोई भी ऐसी जानकारी जो
  438. 16:57आपको तुरंत गुस्सा दिलाती है, रेज डालती
  439. 17:00है। मतलब आपके अंदर रेज पैदा करती है उसे
  440. 17:02शेयर करने से पहले 10 मिनट रुक जाओ।
  441. 17:04क्योंकि क्या पता कोई चीज इसी इंटेंशन से
  442. 17:06आपके पास भेजी गई हो कि आप उसे तुरंत शेयर
  443. 17:09कर दो और वो तेजी से फैले। अब यहां पे
  444. 17:11दूसरी चीज आती है यू। यानी कि यह पता करना
  445. 17:14कि उसका सोर्स क्या है? मतलब पोस्ट किसने
  446. 17:16डाली है। उस अकाउंट पे कितने फॉलोअ हैं।
  447. 17:18कहीं अचानक से तो उसके फॉलोवर नहीं बढ़
  448. 17:20गए। क्या बात शेयर करने वाला उसी एक
  449. 17:22मुद्दे को बार-बार शेयर तो नहीं कर रहा।
  450. 17:24ये सारे संकेत आपको एक आईडिया दे देंगे कि
  451. 17:27जिसके पास से ये इंफॉर्मेशन आपके पास
  452. 17:29पहुंची है उसकी इंटेंशन क्या हो सकती है।
  453. 17:32अब यहां पर चौथा आता है के यानी कि कौन?
  454. 17:34कोई भी प्रोटेस्ट जब होता है तो उसके पीछे
  455. 17:36कोई ना कोई ऑर्गेनाइजर होता है। या तो वह
  456. 17:38कोई पर्सन हो सकता है, कंपनी हो सकती है
  457. 17:40या कोई संगठन हो सकता है। तो अगर किसी
  458. 17:42प्रोटेस्ट का ऑर्गेनाइजर बिल्कुल ओपन हो
  459. 17:44यानी कि सामने हो तो उसके बैकग्राउंड से
  460. 17:46भी आपको अंदाजा लग सकता है। और देखो भैया
  461. 17:48सबसे मुश्किल जांच आपकी फोन स्क्रीन पर
  462. 17:50नहीं बल्कि आपको अपने दिमाग में करनी है।
  463. 17:52अगर एक उदाहरण से समझाऊं तो जब कोई खबर
  464. 17:55आपकी पसंद की पार्टी के खिलाफ होती है तब
  465. 17:57आप तुरंत सबूत मांगते हो। लेकिन अगर वही
  466. 18:00खबर आपकी पसंदीदा पार्टी ने बाहर फैलाई
  467. 18:03होती है तो ज्यादातर लोग उसे तुरंत सच मान
  468. 18:05लेते हैं। अब अगर सच पहचानना है तो आपको
  469. 18:07दोनों खबरों को एक ही तराजू में तोलना
  470. 18:10होगा। यानी पैमाना दोनों के लिए आपको सेम
  471. 18:12रखना पड़ेगा और जब किसी चीज के बारे में
  472. 18:15ना पता हो यानी कि उसके सबूत अधूरे हैं तो
  473. 18:17अभी पता नहीं कहना सीखना पड़ेगा। किसी गलत
  474. 18:21बात पर भरोसा करने से पहले यह अच्छा है कि
  475. 18:24हम यह बोल दें कि हमें उसके बारे में पता
  476. 18:26नहीं। देखो इस वीडियो का मकसद यह नहीं है
  477. 18:28कि हर प्रोटेस्ट पर या हर तरीके के
  478. 18:29प्रोटेस्ट पर शक किया जाए। बल्कि इस
  479. 18:31वीडियो का मकसद था कि आप लोगों की तकलीफ
  480. 18:33को सुनो। नेताओं के दावों की जांच परख करो
  481. 18:36और किसी भी शेयर की गई तस्वीर या वीडियो
  482. 18:39के पीछे का कॉन्टेक्स्ट को समझो, देखो,
  483. 18:41परखो क्योंकि कई बार गुस्सा असली होता है,
  484. 18:44लेकिन उसका फायदा कोई और उठा ले जाता।
  485. 18:46इसलिए जरूरी है कि आप सवाल पूछें, लेकिन
  486. 18:49अपने गुस्से का रिमोट किसी और के हाथ में
  487. 18:51ना दें। तो मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में।
  488. 18:53जय हिंद, जय भारत।

About this transcript

This page contains the full transcript of Why Would a Government Want Protests? by Vigyan Recharge, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 4,035 words across 488 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

What you can do with it

Use the transcript to take notes, quote the speaker, build a study guide, generate a summary with ChatGPT or Claude via the YouTube Summary tool, or export it as a timed subtitle file with YouTube to SRT. You can also re-open it in the transcriber to translate the transcript into 100+ languages.

Free YouTube transcript tool

YouTube2Text is a free YouTube transcript generator — no signup, no daily limit. Paste any YouTube link and get the full transcript instantly, with timestamps, click-to-jump, translation to 100+ languages, AI prompts for ChatGPT, Claude, and Gemini, and exports to TXT, SRT, VTT, or Markdown.