Why the World’s Safest Train Suddenly Failed — Transcript
Full transcript
- 0:00थर्ड जून 1998 की सुबह एक जर्मन फैमिली
- 0:04कॉफी पीकर अपने ट्रेन के सफर को एंजॉय कर
- 0:07रही थी। यह हाई स्पीड ट्रेन म्यूनिक से
- 0:09हेमबर्ग जा रही थी। सुबह 10:30 का वक्त था
- 0:13और अभी तक सब कुछ नॉर्मल था। लेकिन ठीक 12
- 0:16मिनटों के बाद वो फैमिली तब खौफजदा हो गई
- 0:19जब अचानक उनके पांव के नीचे से स्टील का
- 0:22एक टुकड़ा फ्लोर को फाड़ कर निकलता है। वो
- 0:26भी सीधा उनकी सीटों के बीच से। लेकिन यह
- 0:29सिर्फ एक शुरुआत थी। जर्मन हाई स्पीड
- 0:32ट्रेन की हिस्ट्री में सबसे खतरनाक हादसे
- 0:35की शुरुआत। ZM टीवी की वीडियोस में एक बार
- 0:38फिर से खुशामदीद। नाजरीन 1950 के आखिर में
- 0:41जापान ने दुनिया को तब हैरान कर दिया जब
- 0:44उनकी शिनकानसेन यानी बुलेट ट्रेन दुनिया
- 0:47की पहली हाई स्पीड ट्रेन बनी। इस ट्रेन ने
- 0:51पूरे मुल्क के शहरों को आपस में जैसे
- 0:53कनेक्ट [संगीत] कर दिया था और सफर इतना
- 0:55तेज बना दिया कि घंटों का सफर मिनटों तक आ
- 0:59पहुंचा। जापान की देखादेखी फ्रांस और इटली
- 1:02ने भी अपना हाई स्पीड ट्रेन
- 1:04इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया और फिर जर्मनी भी
- 1:06पीछे नहीं रहा। जर्मनी ने अपना खुद का हाई
- 1:10स्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट शुरू किया जिसका
- 1:12नाम रखा गया आईसीई यानी इंटरसिटी
- 1:15एक्सप्रेस। [संगीत] 1980 में जब यह ट्रेंस
- 1:18मंजरेआम पर आई तो दुनिया को लगा कि ट्रेंस
- 1:21का बस यही फ्यूचर है। इनमें हर उस चीज का
- 1:25ख्याल रखा गया जो इंसान तसवुर कर सकता था।
- 1:28एोडायनेमिक डिजाइन, मॉडर्न कंप्यूटरटर्स
- 1:31का इस्तेमाल और बेमिसाल आरामदेह सफर। सब
- 1:34कुछ परफेक्ट लग रहा था। लेकिन हर परफेक्ट
- 1:38सिस्टम के अंदर एक छुपी हुई कमजोरी जरूर
- 1:41होती है। और आइस ट्रेंस की कमजोरी थी उनके
- 1:44व्हील्स। आइस जनरेशन वन ट्रेंस के व्हील्स
- 1:48शुरुआत में मोनोब्लॉक डिजाइन में बने थे।
- 1:50यानी पूरा [संगीत] व्हील एक सॉलिड वन पीस
- 1:53स्टील में बना था जो कि मजबूत, सस्ता और
- 1:56रिलायबल होता था। पर इस मोनोब्लॉक व्हील
- 1:59में एक मसला नोटिस किया गया। कुछ सालों
- 2:02बाद पैसेंजर्स शिकायत करने लगे कि जब
- 2:04ट्रेन हाई स्पीड पर चलती है तो उसमें एक
- 2:07अजीब सी वाइब्रेशन होती है। बूफे कार जहां
- 2:11फूड सर्व किया जाता है वहां पड़े ग्लासेस
- 2:14चमचे कांटे वाइब्रेशन की वजह से आवाज करने
- 2:17लगते थे। यह वाइबेशंस और आवाजें सफर को
- 2:20काफी अनप्लेज़ेंट बना रही थी। और फिर
- 2:22आखिरकार जब इंजीनियर्स ने चेक किया तो
- 2:25मसला व्हील्स के अंदर था। मोनोब्लॉक
- 2:28व्हील्स बेशक वन पीस में बने थे और
- 2:30व्हील्स हर साइड से इक्वली बैलेंस्ड भी
- 2:33थे। लेकिन अगर किसी एक साइड पर 5 ग्राम का
- 2:36वजन भी बढ़ेगा तो हाई आरपीएम पर यह
- 2:39एक्स्ट्रा वेट का डिफरेंस व्हील में
- 2:41वाइब्रेशन पैदा करेगा और असल में हो भी
- 2:44कुछ ऐसा ही रहा था। हाई स्पीड पर चलने की
- 2:47वजह से फ्रिक्शन ने मोनोब्लॉक व्हील्स की
- 2:50कुछ साइड्स को अनक्वली घिसा दिया था।
- 2:52जिससे व्हील का बैलेंस बिगड़ गया। स्लो
- 2:55स्पीड पर तो महसूस नहीं होता था। लेकिन जब
- 2:58यह अनबैलेंस्ड व्हील 250 कि.मी. पर आर पर
- 3:02घूमता, तो पूरी ट्रेन में एक वाइब्रेशन
- 3:05होने लगती। यह किसी भी व्हील की एक कॉमन
- 3:08प्रॉब्लम होती है। गाड़ी के व्हील्स में
- 3:10भी अगर किसी एक साइड पर दो पंचर एक साथ
- 3:13लगाए जाएं तो उस तरफ सिर्फ कुछ ग्राम्स ही
- 3:16सही लेकिन वजन बढ़ जाता है जो तेज स्पीड
- 3:19में वाइबेशंस पैदा कर सकता है। इसको हल
- 3:22करने के लिए व्हील बैलेंसिंग करवाई जाती
- 3:24है और टेक्नशियन ऑपोजिट साइड पे उतना ही
- 3:27वजन लगाकर व्हील को बैलेंस कर देता है। पर
- 3:31ट्रेन के लादाद पहियों को बैलेंस करना एक
- 3:34बहुत ही मुश्किल काम हो सकता है। खासकर
- 3:37अगर वह एक ही पीस में बना हो और व्हील्स
- 3:40को रिप्लेस करना भी ना सिर्फ मुश्किल
- 3:43बल्कि काफी कॉस्टली पड़ जाता है। लिहाजा
- 3:46जर्मन इंजीनियर्स ने आइस ट्रेंस के इस
- 3:48मसले को फिक्स करने का एक नया सॉल्यूशन
- 3:51निकाला और वो था रेिलिएंट व्हील्स।
- 3:55रेिलिएट व्हील्स की खास बात यह थी कि यह
- 3:57वन पीस में नहीं थे। अंदर की रिंग अलग और
- 4:00बाहर की अलग पीस में बनी थी। और इन दोनों
- 4:03के बीच में लगाई गई थी रबड़ की एक रिंग जो
- 4:06वाइबेशंस को अब्सॉर्ब करेगी। यह डिजाइन
- 4:09खासतौर पर इस वजह से अपनाया गया ताकि जब
- 4:12कभी आउटर व्हील घिसेगा तो सिर्फ उसी पार्ट
- 4:15को रिप्लेस कर दिया जाएगा ना कि पूरे
- 4:18व्हील को। उस वक्त जर्मनी की ट्रम्स में
- 4:21भी यह डिजाइन इस्तेमाल हो रहा था। लेकिन
- 4:23मसला यह था कि ट्रम्स सिर्फ 30 कि.मी. पर
- 4:26आर पर चलती थी और आइस ट्रेंस को 250
- 4:30कि.मी. पर आर पर चलना था। यह एक बहुत बड़ा
- 4:33मसला था जिसकी बारीकी के बारे में आपको
- 4:36आगे चलकर पता चलेगा। पर उस वक्त इस पर
- 4:39किसी ने ध्यान नहीं दिया। एग्जीक्यूटिव्स
- 4:42ने बिना किसी टेस्टिंग के रेजिलियंट
- 4:44व्हील्स का डिजाइन अप्रूव कर दिया और फिर
- 4:461992 में तमाम हाई स्पीड ट्रेंस पर यह नए
- 4:50व्हील्स लगा दिए गए। कुछ सालों तक सब कुछ
- 4:54ठीक चलता रहा। लेकिन 1997 में हेनोवर की
- 4:58ट्रम कंपनी उस्ट्रा ने एक शॉकिंग चीज
- 5:00डिस्कवर की। उन्होंने अपनी ट्रम के
- 5:03व्हील्स में कुछ क्रैक्स नोटिस किए।
- 5:05उन्होंने अपने क्रैक व्हील्स के पार्ट्स
- 5:07बदल दिए और एहतियातन यह बात डइचेबान को भी
- 5:10बता दी जो जर्मनी की नेशनल रेलवे कंपनी
- 5:13थी। मगर क्योंकि उस वक्त आइस ट्रेंस में
- 5:16वाइबेशंस की कोई शिकायत नहीं थी। इसीलिए
- 5:19डुइजबान ने इस वार्निंग को नजरअंदाज कर
- 5:22दिया और फिर ठीक 1 साल बाद थर्ड जून 1998
- 5:26को सब कुछ बदल गया। सुबह 10:30 बजे आइस
- 5:31ट्रेन 884 हेनोवर स्टेशन से हैंमबर्ग के
- 5:35लिए निकली। ट्रेन में टोटल 14 कोचेस थी।
- 5:37दो पावर कार्स और 12 पैसेंजर कार्स। अंदर
- 5:41287 पैसेंजर्स और आठ क्रू मेंबर्स मौजूद
- 5:45थे। हेनोवर स्टेशन से निकलते वक्त सब कुछ
- 5:48नॉर्मल था। कोच नंबर वन में जॉर्ज डिटमैन
- 5:51अपनी फैमिली के साथ सवार थे। उनका सफर मजे
- 5:54से गुजर रहा था। लेकिन कुछ मिनटों के बाद
- 5:57ट्रेन के फ्लोर से अचानक कोई चीज आकर लगी
- 6:00और अगले ही लम्हे दो सीट्स के बीच से
- 6:03स्टील का एक पुरजा फ्लोर को फाड़ कर अंदर
- 6:06निकल आया। यह शार्प स्टील का पुरजा असल
- 6:09में व्हील का ही एक टुकड़ा था। यह देखकर
- 6:12जॉर्ज और उसकी फैमिली फौरन पैनिकिक में आ
- 6:15गई। जैसे उनके पैरों तले जमीन खिसक गई हो।
- 6:19जिस तेजी से वो लोहा अंदर आया अगर वह
- 6:22थोड़ा सा लेफ्ट या राइट होता तो उसकी
- 6:24फैमिली जिंदा नहीं बचती। उसने फौरन अपने
- 6:27बीवी बच्चों को बराबर वाले कंपार्टमेंट
- 6:30में भेजा और खुद कंडक्टर को ढूंढने चला
- 6:33गया। कंडक्टर उस वक्त तीसरी कोच में मौजूद
- 6:36था। जॉर्ज ने उसे सब कुछ एक्सप्लेन किया।
- 6:39लेकिन कंपनी पॉलिसी के मुताबिक कंडक्टर
- 6:42ट्रेन को तब तक नहीं रोक सकता जब तक वह
- 6:45खुद मसले को देख ना ले। लिहाजा दोनों
- 6:48मिलके पहली कोच की तरफ चल पड़े। ट्रेन अब
- 6:51भी 200 कि.मी. पर आर से दौड़ रही थी और अब
- 6:54आहिस्ता-आहिस्ता इसमें वाइबेशंस बढ़ रही
- 6:57थी। जब तक कंडक्टर और जॉर्ज पहली कोच के
- 7:00पास पहुंचे, ट्रेन 3 कि.मी. आगे निकल चुकी
- 7:04थी और अब वो एक डेंजरस सेक्शन से गुजरने
- 7:07वाली थी। जहां ट्रैक्स स्प्लिट होते हैं।
- 7:10टूटे हुए व्हील का टुकड़ा अब भी ट्रेन के
- 7:13नीचे लटका पटरी से खिसता हुआ जा रहा था।
- 7:16जब ट्रेन ने पहला सेक्शन पॉइंट क्रॉस किया
- 7:19वो टायर नीचे गिरकर ट्रैक के लिवर से टकरा
- 7:22गया और उस मोमेंट पर एक खतरनाक चीज हुई।
- 7:26ट्रैक स्विच चेंज हो गया। अब ट्रेन का
- 7:29पहला और दूसरा कोच एक ट्रैक पर था। लेकिन
- 7:32तीसरा कोच दूसरे ट्रैक पर चला गया। यानी
- 7:35फ्रंट और रियर होगी अलग-अलग डायरेक्शंस
- 7:38में। ट्रेन की बॉडी ट्विस्ट हो गई और कोच
- 7:41नंबर थ्री सीधा एक ब्रिज के कंक्रीट पिलर
- 7:44से टकरा गई।
- 7:50इस खौफनाक तसादम ने ब्रिज का आधा हिस्सा
- 7:53तोड़ दिया। कोच नंबर फोर ने कोलैप्स होते
- 7:56हुए ब्रिज को तो अवॉइड कर लिया लेकिन
- 7:58एंबेंगमेंट से टकरा गई और तीन रेलवे
- 8:01वर्कर्स उसी वक्त कुचले गए। कोच नंबर फाइव
- 8:05और सिक्स गिरते हुए ब्रिज के 300 टन
- 8:07कंक्रीट के नीचे दब गई। उन दोनों कोचेस की
- 8:11हाइट बाद में सिर्फ 6 इंच बच गई। जी हां,
- 8:15सिर्फ 6 इंच। पीछे से आने वाली बाकी कोचेस
- 8:187, 8, 9 और 10। फुल स्पीड पर एक दूसरे से
- 8:23टकराती गई और किसी कागज की तरह फोल्ड होती
- 8:26गई। सिर्फ पहली दो कोचेस जहां जॉर्ज और
- 8:29उसकी फैमिली थी वो बच गई और फ्रंट
- 8:32लोकोमोटिव 3 कि.मी. आगे जाकर रुक गया। जिस
- 8:36वक्त कोच नंबर थ्री ब्रिज से टकराई थी उस
- 8:39वक्त इंजीनियर और ड्राइवर को एक झटका जरूर
- 8:42लगा था। लेकिन वह इस बात से बिल्कुल लाल
- 8:45थे कि उनके पीछे क्या कयामत गुजर रही है।
- 8:49जहां यह कयामतखेज हादसा पेश आया। वहां ऐशी
- 8:53नामी एक छोटा सा टाउन था। जब वहां के
- 8:56लोगों ने धमाके की आवाज सुनी तो सब दौड़कर
- 8:59मौके पर पहुंच गए। उनके सामने जो मंजर था
- 9:02वह शायद जिंदगी भर कभी भूल नहीं पाएंगे।
- 9:05टूटी हुई कोचेस, लोहे के टुकड़े, आग और
- 9:08लोगों की चीखें। कुछ लोग ब्रिज के मलबे के
- 9:11नीचे फंसे थे, कुछ अपनी सीट्स में अटके
- 9:14हुए थे और प्रेशर प्रूफ विंडोज़ इतनी
- 9:17मजबूत थी कि उन्हें तोड़ना ऑलमोस्ट
- 9:19नामुमकिन था। रेस्क्यू वर्कर्स को हैवी
- 9:22मशीनंस बुलवानी पड़ी लेकिन फिर भी फंसे
- 9:25हुए पहले लोगों तक पहुंचने में कई घंटे लग
- 9:28गए। 1000 से ज्यादा रेस्क्यू वर्कर्स साइट
- 9:31पर पहुंचे एंबुलेंसेस, मिलिट्री डॉक्टर्स
- 9:34सब ने मिलकर ऑपरेशन शुरू किया। करीब ही एक
- 9:38मेडिकल कॉन्फ्रेंस हो रही थी। वहां के 40
- 9:40डॉक्टर्स भी फॉरेन साइट पर पहुंच गए।
- 9:43लेकिन तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था। इस
- 9:47हादसे में टोटल 101 लोग मारे गए। 88 लोग
- 9:50शदीद जख्मी हालत में पाए गए और 100 के
- 9:53करीब लोगों को मामूली जख्म आए। जो लोग
- 9:57पहली दो कोचेस में थे, खुशकिस्मती से उनकी
- 10:00जिंदगी बच गई। जर्मन हाई स्पीड ट्रेंस
- 10:04जिनको कभी दुनिया की सबसे सेफ ट्रेंस माना
- 10:07जाता था, एशिएट डिजास्टर ने यह इंप्रेशन
- 10:10खाक में मिला दिया। इस एक्सीडेंट ने सिर्फ
- 10:12जर्मनी ही नहीं बल्कि हाई स्पीड ट्रेन
- 10:15नेटवर्क इस्तेमाल करने वाले फ्रांस, इटली
- 10:18और जापान तक के लोगों को भी शॉक कर दिया
- 10:21था। जब इन्वेस्टिगेटर्स ने पूरी साइट का
- 10:24एनालिसिस किया तब शुरुआत में तो ऐसा लग
- 10:26रहा था जैसे कोई गाड़ी ट्रैक पर आ गई हो।
- 10:30लेकिन जब उन्होंने कोच नंबर वन के फ्लोर
- 10:32पर घुसने वाला व्हील का पुरजा देखा तो सब
- 10:35कुछ क्लियर होने लगा। लॉग्स देखे गए तो
- 10:38मालूम पड़ा कि ट्रेन के उसी व्हील में
- 10:41पहले भी फ्लैट स्पॉट का इशू रिपोर्ट हुआ
- 10:44था। [संगीत] वह भी आठ मर्तबा। लेकिन फिर
- 10:46भी उसे रिप्लेस नहीं किया गया। क्रैक्स
- 10:49डिटेक्ट करने वाली मशीनंस भी मौजूद थी।
- 10:52लेकिन फिर भी विजुअल इंस्पेक्शंस टॉर्च की
- 10:54मदद से की जाती थी। कंपनी यह कहकर टाल
- 10:58देती थी कि वह मशीनंस फॉल्स अलार्म्स देती
- 11:01हैं। 1992 में फ्राउन होफा नामी एक जर्मन
- 11:05रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन ने एक वार्निंग भी दी
- 11:08थी कि हाई स्पीड ट्रेंस पर रेजिलियंट
- 11:10व्हील्स खतरनाक हो सकते हैं और 1997 में
- 11:14हेनओवर ट्रम कंपनी ने भी वार्निंग दी थी।
- 11:17लेकिन दोनों वार्निंग्स इग्नोर कर [संगीत]
- 11:20दी गई। इंजीनियर्स ने बाद में बताया कि यह
- 11:23टायर हर दिन 5 लाख मर्तबा रोटेट करते थे
- 11:26और वह भी हाई स्पीड पर। हर रोटेशन में
- 11:29स्टील टायर हल्का सा कंप्रेस होता और वापस
- 11:32एक्सपेंड होता। इससे फटीग क्रैक्स बन गए
- 11:35जो दिन-बदिन बढ़ते चले गए और बीच में रबड़
- 11:39लगाने की वजह से वाइबेशंस अब्सॉर्ब हो गई
- 11:42और किसी को पता ही नहीं चला कि व्हील्स
- 11:44असल में क्रैक हो रहे हैं। और फिर फाइनली
- 11:48थर्ड जून 1998 को सिर्फ एक व्हील टूटने की
- 11:52वजह से इतना बड़ा हादसा हो गया। एट
- 11:55डिजास्टर को दुनिया का सबसे खतरनाक हाई
- 11:58स्पीड ट्रेन एक्सीडेंट माना जाता है। इस
- 12:02हादसे के बाद सभी हाई स्पीड ट्रेंस के
- 12:04व्हील्स वापस मोनोब्लॉक डिजाइन में
- 12:06रिप्लेस किए गए और जंक्शन पॉइंट्स के
- 12:09आसपास तमाम ब्रिजेस को रीोकेट किया गया
- 12:12ताकि दोबारा ऐसा हादसा ना हो सके। जर्मनी
- 12:15ने इस हादसे के बाद अपने पूरे रेल सिस्टम
- 12:18को दोबारा इवैलुएट किया। प्रेशर प्रूफ
- 12:20विंडोज़ रिप्लेस की गई ताकि फ्यूचर में अगर
- 12:23रेस्क्यू की जरूरत पेश आए तो अंदर फंसे
- 12:26लोगों को विंडोज़ तोड़कर बाहर निकाला जा
- 12:28सके। आज भी जर्मनी के रेलवे ट्रेनिंग
- 12:31सेंटर्स में एशीट डिजास्टर एक एग्जांपल के
- 12:34तौर पर पढ़ाया जाता है। मोनोब्लॉक व्हील्स
- 12:37में बेशक मेंटेनेंस कॉस्ट ज्यादा है और
- 12:40टाइम भी ज्यादा लगता है। लेकिन हाई स्पीड
- 12:42पर यह वन पीस में कास्ट होने की वजह से कम
- 12:46से कम टूटते नहीं हैं। और वाइबेशंस एक
- 12:49सिग्नल होता है कि अब व्हील्स को [संगीत]
- 12:51बैलेंसिंग की जरूरत है। उम्मीद है ZM टीवी
- 12:54की यह वीडियो भी आप लोग भरपूर लाइक और
- 12:56शेयर करेंगे। आप लोगों के प्यार भरे
- 12:58कमेंट्स का बेहद शुक्रिया। मिलते हैं अगली
- 13:02शानदार वीडियो में।
About this transcript
This page contains the full transcript of Why the World’s Safest Train Suddenly Failed by Zem TV, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 2,066 words across 259 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
What you can do with it
Use the transcript to take notes, quote the speaker, build a study guide, generate a summary with ChatGPT or Claude via the YouTube Summary tool, or export it as a timed subtitle file with YouTube to SRT. You can also re-open it in the transcriber to translate the transcript into 100+ languages.
Free YouTube transcript tool
YouTube2Text is a free YouTube transcript generator — no signup, no daily limit. Paste any YouTube link and get the full transcript instantly, with timestamps, click-to-jump, translation to 100+ languages, AI prompts for ChatGPT, Claude, and Gemini, and exports to TXT, SRT, VTT, or Markdown.