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Why Every Krishna Devotee Must Read Geet Govind — Transcript

by RADHIKA TENORIA · 4,234 words · 492 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:04हाय एवरीवन कैसे हैं आप सब? आज से कुछ
  2. 0:07महीनों पहले ना मैंने सोचा था कि एक रूटीन
  3. 0:09ऐड करते हैं अपनी लाइफ में गीत गोविंद
  4. 0:12पढ़ने का। कोई भी चैलेंज नहीं था। कोई भी
  5. 0:15मुझे गोल सेट नहीं करना था। कोई भी टेस्ट
  6. 0:18नहीं था। कोई भी ट्रांसफॉर्मेशन ऐसा कुछ
  7. 0:21भी नहीं था मेरे दिमाग में। इट वास जस्ट
  8. 0:23कि मुझे अपनी लाइफ में कुछ पॉजिटिव चेंजेस
  9. 0:26लाने थे। इट वास जस्ट कि मुझे अपनी डेली
  10. 0:28रूटीन में कुछ ऐड करना था। कुछ प्रोडक्टिव
  11. 0:31ऐड करना था जिससे मैं राधा कृष्ण जी से और
  12. 0:33भी ज्यादा कनेक्ट फील कर सकूं। अगर आप यह
  13. 0:36वीडियो देख रहे हैं ना, सो लेट मी टेल यू
  14. 0:37कि ये सेकंड पार्ट है। इससे पहली वाली
  15. 0:40वीडियो आपको देखनी पड़ेगी इफ यू वांट टू
  16. 0:42अंडरस्टैंड कि मैं ये वीडियो क्यों बना
  17. 0:44रही हूं। इस वीडियो के ना चार सेगमेंट है।
  18. 0:46हम सबसे पहले बात करते हैं वीडियो के पहले
  19. 0:48सेगमेंट के बारे में। माय पर्सनल
  20. 0:50एक्सपीरियंस विद गीत गोविंद। जब मैंने गीत
  21. 0:52गोविंद पढ़ना शुरू किया था ना तो मैं आपको
  22. 0:55बताती हूं कि यह शुरू कैसे हुआ था।
  23. 0:56एक्चुअली मैंने राधा कृपा कटाक्ष और गीत
  24. 0:58गोविंद यह ऑलमोस्ट एक ही टाइम पे मैंने
  25. 1:01पढ़ने शुरू किए थे। हुआ क्या कि मेरी
  26. 1:03मम्मी गीत गोविंद पढ़ रही थी। ठीक है? तब
  27. 1:06मैंने तब मेरी यू नो मेरे नॉलेज में सबसे
  28. 1:09पहली बार आया कि हां गीत गोविंद जैसा कुछ
  29. 1:11होता है। इससे पहले आई हैव नो आईडिया
  30. 1:14अबाउट दैट। उसके बाद से मुझे इंद्रेश जी
  31. 1:17महाराज की कोई कथा दिखाई दी जिसमें
  32. 1:19उन्होंने जयदेव जी के चरित्र के बारे में
  33. 1:22बताया और फिर अल्टीमेटली वो गीत गोविंद के
  34. 1:24बारे में बताया। एंड देन अल्टीमेटली मुझे
  35. 1:26ऐसी वीडियोस दिखाई देने लग गई। अब आप इसको
  36. 1:29कुछ भी कह लो एसइओ का पाठ कर लो जो भी कह
  37. 1:32लो। बट फिर धीरे-धीरे मुझे गीत गोविंद
  38. 1:34लिरिक्स और गीत गोविंद के बारे में। फिर
  39. 1:36मैं पूरी गई थी जगन्नाथ जी मंदिर। उधर
  40. 1:39मुझे पता चला कि गीत गोविंद पे रोज नृत्य
  41. 1:41होते हैं रात को सोने से पहले। रोज जो
  42. 1:43वहां के लोग हैं जो वहां के लोकल लोग हैं
  43. 1:45वो इस पर नृत्य परफॉर्म करते हैं। तो उसके
  44. 1:48बाद से ना मैं गीत गोविंद से इंट्रोड्यूस
  45. 1:51मेरा होने लग गया धीरे-धीरे। राइट? फिर
  46. 1:53मैं मम्मी को सुनती थी गाते हुए। तो इट्स
  47. 1:55लाइक कि मेरे मन में आया यार मुझे भी गाना
  48. 1:57है। मैं भी ये शुरू करती हूं क्योंकि इसकी
  49. 1:59जो लैंग्वेज है ना बहुत ज्यादा डिफरेंट
  50. 2:02है। आपको समझ में नहीं आएगी अंटिल अनलेस
  51. 2:04आप इसका ट्रांसलेशन ना सुनो और मीनिंग के
  52. 2:07साथ वीडियो को ना देखो। तो मैंने ना
  53. 2:09स्टार्टिंग में बस गाना शुरू किया। मैंने
  54. 2:11मैंने कुछ नहीं सोचा कि मुझे इसका मतलब
  55. 2:12जानना है नहीं जानना। इट जस्ट दैट कि मुझे
  56. 2:15पता था कि गीत गोविंद एक्चुअली है क्या?
  57. 2:18गीत गोविंद हमारे राधा कृष्ण जी के प्रेम
  58. 2:21को दर्शाता है। उनके पवित्र रिश्ते के
  59. 2:23बारे में बताता है। डे टू डे बेसिस पे जो
  60. 2:25भी वो लीला करते हैं। उन छोटी-छोटी लीला
  61. 2:27ये गीत गोविंद के अंदर एक पोएट्री के रूप
  62. 2:30में गाई गई है। जब भी दोस्तों एंड ट्रस्ट
  63. 2:33इट यह एकदम निश्चित वर्ड के साथ लिखा हुआ
  64. 2:36है हमारे वेद में कि जब भी आप गीत गोविंद
  65. 2:40गाना शुरू करते हैं ना। जैसे ही आपने गीत
  66. 2:43गोविंद का पहला अक्षर गा दिया वैसे ही
  67. 2:45ठाकुर जी आ जाते हैं आपके पीछे-पीछे गीत
  68. 2:47गोविंद सुनने के लिए। जब मैंने इतनी इतनी
  69. 2:50सारी चीजें सुनी ना गीत गोविंद के बारे
  70. 2:52में तो इट्स लाइक कि मुझे भी गाना है। तो
  71. 2:55मैंने ना शुरू किया मैंने लिटरली मैंने
  72. 2:57फोन लिया। ठीक है? फोन पे मैंने गीत
  73. 3:00गोविंद खोला। इंद्रेश जी का गीत गोविंद
  74. 3:02सबसे ऊपर आया। वो ब्लू सा एक थंबनेल होता
  75. 3:05है। आई विल शो इट हियर समवेयर। इसको
  76. 3:07थोड़ा-थोड़ा जैसे शित कमल कुछ कंड तो
  77. 3:11ऑनेस्टली मेरे को बिल्कुल भी गाना नहीं आ
  78. 3:14रहा था। तो एक-एक एक-एक वर्ड पढ़ के मैं
  79. 3:16उस टाइम वो गा रही थी। बट ग्रेजुअली वि
  80. 3:20टाइम एक महीना बीता, दो महीने बीते। एंड
  81. 3:23फाइनली एक ऐसा मोमेंट आता है जब मैं गीत
  82. 3:26गोविंद गाने लग जाती हूं। कुछ गलतियां
  83. 3:28नहीं होती। मतलब मुझे अभी भी उसका कुछ समझ
  84. 3:30में नहीं आया। हां। मुझे अभी भी नहीं पता
  85. 3:32कि गीत गोविंद का मतलब क्या है? वो जो मैं
  86. 3:34श्लोक गा रही हूं उसका मतलब क्या है? मुझे
  87. 3:36वो अभी भी नहीं पता। वो मेरे वो मुझे ना
  88. 3:38याद हो गया। ऐसे बोलते हैं ना यार आप कोई
  89. 3:40चीज डेली बेसिस पे करते हो तो अल्टीमेटली
  90. 3:43आपको उसकी आदत हो जाती है। सो गीत गोविंद
  91. 3:45का जो पूरा पार्ट है ना वो अलग-अलग अध्याय
  92. 3:48में है। तो मैंने सिर्फ डेली बेसिस पे एक
  93. 3:50अध्याय गाना शुरू किया। आज के टाइम पे
  94. 3:52मुझे वो एक एक अध्याय आ गया है। थैंकफुली।
  95. 3:56इसने तो प्रैक्टिस कर लिया है। इसको गीत
  96. 3:58गोविंद पढ़ना आ गया है। यह गा सकती है।
  97. 4:00लेकिन मैं यह कैसे शुरू करूं? क्योंकि
  98. 4:02मैंने तो आज तक गीत गोविंद ना कभी गाया है
  99. 4:05ना कभी निकाल के उसको पढ़ा है ना कभी सुना
  100. 4:09है तो मैं इसे कैसे स्टार्ट करूं तो किसी
  101. 4:12टाइम पे मैं भी इसमें एकदम फ्रेशर थी मुझे
  102. 4:15भी बिल्कुल भी आईडिया नहीं था कि गीत
  103. 4:17गोविंद एक्चुअली होता क्या है इसमें यू नो
  104. 4:20इसको क्यों बनाया गया इसको किसने बनाया
  105. 4:23इसका मतलब क्या होता है तो मुझे कुछ भी
  106. 4:25आईडिया नहीं था बट मैंने जब नॉलेज लेना
  107. 4:28शुरू किया तो मुझे आईडिया हुआ कि हां गीत
  108. 4:30गोविंद जयदेव जी ने लिखा था। गीत गोविंद
  109. 4:33लिखने के पीछे उनका क्या ऐ था? उनकी क्या
  110. 4:36भावनाएं थी? वो सब मुझे धीरे-धीरे पता
  111. 4:39चला। जैसे ये गाते थे ना इनके साथ-साथ मैं
  112. 4:41नहीं गा पाती थी। तो इट्स लाइक कि
  113. 4:43स्टार्टिंग में मैंने सुनना शुरू किया। तो
  114. 4:45स्टार्टिंग में मैंने इसको खोला एंड आई
  115. 4:46जस्ट यूज्ड टू लिसन।
  116. 4:48कुंद
  117. 4:51कलिल ललित मन मान
  118. 4:56जय जय देव हरे। स्टार्टिंग में मैं सिर्फ
  119. 5:01सुनती थी। श्रृत कमल कुछ मंडल रित कुंडल ए
  120. 5:07इस तरीके से मैं शुरू में पढ़ती थी। लाइक
  121. 5:09लिटरली मैं आई यूज्ड टू रीड वीडियो को पॉज
  122. 5:12करती थी और फिर मैं एक-एक श्लोक पढ़ती थी।
  123. 5:15ललित ललित वन माल जय जय देव हरे। अभी तो
  124. 5:19मैं फिर भी इतनी आसानी से पढ़ रही हूं।
  125. 5:21लेकिन जब मैंने एकदम इनिशियल में पढ़ना
  126. 5:23शुरू किया था तो मैं इससे भी टुकड़ों में
  127. 5:26पढ़ती थी क्योंकि अभी तो मुझे आ गया है।
  128. 5:28राइट? फिर धीरे धीरे धीरे मुझे थोड़ा यू
  129. 5:30नो वर्ड्स इसको समझ में आने लगे। फिर धीरे
  130. 5:33धीरे धीरे मेरे को इसकी ट्यूनिंग समझ में
  131. 5:35आने लगी। धीरे धीरे धीरे मैं इसको गाने
  132. 5:38लगी। तो इट्स लाइक पहला जो हमारा श्लोक है
  133. 5:42शित कमल कुच मंडल
  134. 5:46रित कुंडल
  135. 5:48कलित ललित वनमाल
  136. 5:52जय जय देव हरे कलित ललित वनमाल
  137. 5:59जय जय देव हरे अगर मैं इस श्लोक का आपको
  138. 6:03मतलब बताऊं तो इस श्लोक का मतलब है कि जो
  139. 6:06भगवान विष्णु यानी कि श्री कृष्ण देवी
  140. 6:08लक्ष्मी के वक्ष स्थल का में आश्रय लिए
  141. 6:12हुए हैं। बेसिकली जो भगवान विष्णु देवी
  142. 6:14लक्ष्मी के वक्ष स्थल में विराजमान है।
  143. 6:17जिन्होंने बहुत ही ज्यादा सुंदर-सुंदर
  144. 6:19कुंडल पहन रखे हैं। अत्यंत सुंदर है जो
  145. 6:22अत्यंत मनमोहक हैं और जो बहुत ही ज्यादा
  146. 6:24मनमोहक और सुंदर वनमाला पहनते हैं। उनको
  147. 6:27मैं प्रणाम करता हूं। कृष्ण को यानी कि
  148. 6:30विष्णु जी को प्रणाम कर रहे हैं और उनकी
  149. 6:32स्तुति कर रहे हैं। धीरे धीरे धीरे जब
  150. 6:34मुझे गीत गोविंद का यह एक अध्याय पूरा
  151. 6:37अच्छे से पढ़ने आ गया ना मैंने सोचा कि
  152. 6:40यार अब मैं पढ़ तो रही हूं बट कभी कबार
  153. 6:42पता है क्या होता था? इट्स लाइक जैसे कि
  154. 6:44मैं ऑफिस से आई मैंने डिनर कर लिया अपना
  155. 6:46भी और फिर उनको मैं सुलाते टाइम मैं ये
  156. 6:49गाती हूं। है ना? तो जब मैं ये गा रही
  157. 6:50होती हूं तो इट्स लाइक कि कभी कबभार मैं
  158. 6:52बहुत ज्यादा थकी हुई हूं। तो कभी कबभार
  159. 6:54मैंने जस्ट यू नो जैसे मैंने बस गा दिया
  160. 6:58क्योंकि रूटीन है। जैसे मैंने पहले भी यही
  161. 7:01एग्जांपल लिया था कि जैसे सपोज आप स्कूल
  162. 7:03जाते हो स्कूल में प्रेयर करते हो। है ना?
  163. 7:05तो वो आपका एक रूटीन बन जाता है। आपको मन
  164. 7:07हो ना हो यू हैव टू डू इट क्योंकि इट्स
  165. 7:10इट्स अ रूल बेसिकली। तो बस वही चीज थी कि
  166. 7:13कभी बहुत ज्यादा थकी आ रही होती थी लेकिन
  167. 7:15बस गाना होता था तो कई बार मुझे ऐसा लगा
  168. 7:18यार ये सोचती थी कि मेरा जो मेन पर्पस था
  169. 7:20इसको शुरू करने का मेरा मेन पर्पस क्या था
  170. 7:23ये था कि मैं और भी ज्यादा कनेक्टेड फील
  171. 7:25करना चाहती थी मैं यू नो उनके राधा कृष्ण
  172. 7:28जी के और करीब जाना चाहती थी मैं इस चीज
  173. 7:30को और ज्यादा अच्छे से उनके उनके प्रेम को
  174. 7:33और ज्यादा अच्छे से समझना चाहती थी वो चीज
  175. 7:35तो फुलफिलमेंट अब हो ही नहीं रही। ये तो
  176. 7:37मेरा एक एक रूटीन बन चुका है जिसको मुझे
  177. 7:39करना है। चाहे मेरा मन हो या ना हो। जस्ट
  178. 7:42आई वांट टू डू इट। मुझे लगा कि ये मुझे ये
  179. 7:45तो नहीं करना था। मैंने सोचा कि इसका ना
  180. 7:47मतलब पता पता करते हैं। इसका मतलब जानते
  181. 7:49हैं। ये जानने की कोशिश करते हैं कि इसमें
  182. 7:52ये बोल क्या रहे हैं। तो जब मैंने इसका
  183. 7:54मतलब जानना शुरू किया एंड इट केम आउट टू
  184. 7:58बी सो ब्यूटीफुल। और फिर मैंने इसकी महिमा
  185. 8:01सुननी शुरू करी कि गीत गोविंद गाने की
  186. 8:03क्या महिमा होती है ताकि यू नो मेरा वो
  187. 8:05इंटरेस्ट आए अंदर से। मैं जब भी गीत
  188. 8:07गोविंद गा रही हूं मैं सिर्फ इसलिए नहीं
  189. 8:09गा रही क्योंकि ये रूटीन का पार्ट है। मैं
  190. 8:11इसलिए गा रही हूं ताकि क्योंकि मुझे ये
  191. 8:13गाना पसंद है। मैं इसलिए गाऊं क्योंकि
  192. 8:15किशन जी मेरे को सुने और आए मेरे पास बैठे
  193. 8:19और सुने जब मैं गा रही हूं। अगर मैं ऐसी
  194. 8:22गा रही हूं बिना मन के तो यार किसी को भी
  195. 8:24सुनने में पसंद नहीं आएगा ना। मैं जब भी
  196. 8:26गाऊं मैं इतने ज्यादा इंटरेस्ट के साथ
  197. 8:28गाऊं, इतने ज्यादा प्रेम के साथ गाऊं कि
  198. 8:29उनको आना पड़े। तो ऐसी फीलिंग लाने के लिए
  199. 8:32ना मेरे आई आई ऑलवेज से दिस कि हम किसी भी
  200. 8:36मंदिर जा रहे होते हैं ना तो शायद हमारे
  201. 8:38अंदर ना उतनी श्रद्धा नहीं होती। अंटिल
  202. 8:42अनलेस जब हमें उस मंदिर का इतिहास पता हो।
  203. 8:45अब सपोज़ ये मान लो कि मैं जा रही हूं
  204. 8:48तटिया स्थान। ठीक है? अब कोई किसी ने मेरे
  205. 8:51को बोला यार वृंदावन में ना तटीय स्थान
  206. 8:53है। आप वहां पर जाके उस वहां के दर्शन
  207. 8:55जरूर कीजिएगा। ठीक है? मैं वहां चली गई।
  208. 8:57मैंने वहां के दर्शन कर लिए। मैंने देख
  209. 8:58लिया आसपास जो भी ये देखने लायक था। मैंने
  210. 9:01दर्शन किए, माथा टेका सब कुछ कर लिया। एक
  211. 9:03यूजुअल जैसे सब लोग मंदिर जाते हैं वैसे
  212. 9:05ही। लेकिन अब सपोज ये मानो कि अब मैं
  213. 9:08तटिया स्थान गई। किसी ने मुझे बोला कि
  214. 9:11तटिया स्थान जाओ। वहां के दर्शन जरूर
  215. 9:13करना। लेकिन वहां जाने से पहले मैंने यह
  216. 9:16पता किया कि वहां की क्या महिमा थी। तटिया
  217. 9:20स्थान की क्या महिमा है। वहां का ऐसा क्या
  218. 9:22इतिहास था? वहां पे ऐसा क्या हुआ था? और
  219. 9:25जब मैंने उससे रिलेटेड कथाएं सुनना शुरू
  220. 9:27किया। जब मुझे वहां के इतिहास के बारे में
  221. 9:29पता चला तब मुझे उस जगह में उस उस चीज में
  222. 9:33मुझे और भी ज्यादा इंटरेस्ट आया। मेरी और
  223. 9:34भी ज्यादा श्रद्धा बढ़ गई। है ना? क्यों?
  224. 9:37क्योंकि मुझे उसके बारे में एक नॉलेज हो
  225. 9:39गई। मुझे पता चला कि यहां पे ऐसा कुछ हुआ
  226. 9:41था। इसका मतलब इट्स अ वेरी ब्यूटीफुल
  227. 9:44प्लेस। तो इसी तरह अगर आप कुछ भी शुरू कर
  228. 9:47रहे हैं ना आप राधा कृपा कटाक्ष शुरू कर
  229. 9:49रहे हैं। आप गीत गोविंद शुरू कर रहे हैं।
  230. 9:52आप श्री राम स्तुति शुरू कर रहे हैं। राधा
  231. 9:55स्तुति शुरू कर रहे हैं। जो भी आप शुरू कर
  232. 9:57रहे हैं। उसको शुरू करने से पहले आप एक
  233. 9:59बार यह जान लीजिए कि इस चीज को करने की
  234. 10:03महत्व क्या है? मतलब क्यों करना चाहिए?
  235. 10:06क्या इसका क्या मतलब क्या है? आप जब वो
  236. 10:09जान लेंगे ना तो आपको अल्टीमेटली अपने आप
  237. 10:12ही उसमें इंटरेस्ट आने लगेगा। पता है पहले
  238. 10:14अगर कोई भी मुझसे ये बोल देता था ना कि
  239. 10:16सपोज मैं ऑफिस जा रही हूं। ऑफिस में मुझे
  240. 10:19कोई टास्क दिया है एंड मान लो कि वो मैं
  241. 10:22अच्छे से नहीं कर पाई और फिर मुझे सुनने
  242. 10:24को मिल रहा है। पहले वाली राधिका को अगर
  243. 10:27वो सुनने को मिलता था तो शी यूज्ड टू गेट
  244. 10:30ट्रिगरर्ड। मैं रिएक्ट कुछ नहीं करती थी।
  245. 10:33पर वो जो रिएक्शन था मेरे अंदर-अंदर चलता
  246. 10:35रहता था। इसने मुझे ऐसे कैसे बोल दिया?
  247. 10:38मैं कुछ नहीं बोल पाई और वो चीजें
  248. 10:40अंदर-अंदर चल रही होती थी। अंदर ही अंदर
  249. 10:42फिर मुझे घुटन कर रही होती थी। एंड नाउ इट
  250. 10:45इज कंप्लीटली चेंज्ड। अगर सपोज कोई भी
  251. 10:47मुझे कुछ बोलता है इस दैट कि मैं अभी
  252. 10:50रिफ्लेक्टिव वे से देखने की कोशिश करती
  253. 10:53हूं कि इसने जो बोला यार इसको मैं किस
  254. 10:55तरीके से ले सकती हूं। क्या इसमें कोई ऐसी
  255. 10:57चीजें थी जो मैं एक इंप्रूवमेंट के तौर पे
  256. 10:59ले सकती हूं। अगर हां तो वेल एंड गुड मैं
  257. 11:01ले लेती हूं। अगर नहीं तो मैं नहीं लेती।
  258. 11:04इट्स लेकिन अब वह चीज़ ना मुझे ज्यादा
  259. 11:07इंपैक्ट नहीं करती। कोई कुछ बोल के चला
  260. 11:10जाए आई नो हाउ टू आंसर दैट। मुझे पता है
  261. 11:12कि मुझे लोगों की बकवास नहीं सुननी है।
  262. 11:14मुझे पता है कि मुझे किस तरीके से रिएक्ट
  263. 11:16करना है। मुझे पता है कि मुझे कब क्या
  264. 11:18बोलना है और मुझे यह भी पता है कि कैसे एक
  265. 11:21शांत एक पीसफुल जिंदगी जीनी है। ये मतलब
  266. 11:24आपको ना सपोज आपकी लाइफ में एक बहुत
  267. 11:26ज्यादा बड़ी प्रॉब्लम आ गई। अब उस
  268. 11:28प्रॉब्लम से भागने की जगह कि मैं इस चीज
  269. 11:31को फेस ही नहीं करूंगी। मैं इसके बारे में
  270. 11:33बात ही नहीं करूंगी। बात नहीं करूंगी तो
  271. 11:35इसके बारे में कुछ यू नो सामने से कुछ बात
  272. 11:37नहीं होएगी और फिर ये चीज ना साइड में हो
  273. 11:40जाएगी। मुझे इस चीज को फेस नहीं करना
  274. 11:42पड़ेगा। नहीं वो जो भागने वाला एटीट्यूड
  275. 11:44होता है ना अपनी प्रॉब्लम से वो आप भूल
  276. 11:47जाओगे। आप जिंदगी से डरना भूल जाओगे। आप
  277. 11:50लोगों से डरना भूल जाओगे। आप यू नो आपके
  278. 11:53अंदर वो हिम्मत आती है। वो करज आता है
  279. 11:55अपनी प्रॉब्लम को फेस करने का। अच्छा यह
  280. 11:57प्रॉब्लम आई है। ठीक है। इसका क्या सशन हो
  281. 12:00सकता है? मतलब अब मैं क्या ऐसा कर सकती
  282. 12:02हूं कि इस चीज को मैं ठीक कर सकूं। अगर
  283. 12:04ठीक वो चीज हो सकती है तो वेल एंड गुड।
  284. 12:06अगर वो चीज ठीक नहीं भी हो सकती है तो
  285. 12:09मुझे उस चीज को एक्सेप्ट करना है कि यह
  286. 12:11चीज अब ऐसी ही रहने वाली है। मुझे इसके
  287. 12:13साथ अब ऐसी ही जीना है। वो एक्सेप्शन वो
  288. 12:16एक्सेप्टेंस वाली चीज भी आपके अंदर आ जाती
  289. 12:18है।
  290. 12:20तो इट्स लाइक कि ओवरऑल ओवरऑल आप एक बहुत
  291. 12:25ही ज्यादा पीसफुल और हैप्पी लाइफ जीने लग
  292. 12:27जाते हो और अल्टीमेटली यह धीरे-धीरे आपके
  293. 12:30अंदर चेंजेस आने लग जाते हैं। और फिर यू
  294. 12:32नो एक ऐसा मोमेंट आता है जब आपको रियलाइज
  295. 12:34होता है कि
  296. 12:37तू कितनी बदल गई है फॉर पॉजिटिव मतलब तेरे
  297. 12:40अंदर बहुत ज्यादा पॉजिटिव चेंजेस आ रहे
  298. 12:42हैं। और जब आपको यह रियलाइज होने लग जाता
  299. 12:44है ना इट्स लाइक कि आपका फिर उस चीज पे
  300. 12:47विश्वास और ज्यादा बढ़ जाता है। आपको पता
  301. 12:49है आपने ना कुछ एक चीज बोली कि यार मेरा
  302. 12:52ना ये करने का मन कर रहा है यार मेरा ना
  303. 12:55यहां जाने का मन कर रहा है। यार पता है
  304. 12:57मैं चाहती हूं ना कि मेरी लाइफ में ना कुछ
  305. 13:00कुछ बहुत ज्यादा इंटरेस्टिंग सा हो। मैं
  306. 13:02चाहती हूं कि मुझे मुझे ना मेरे को ना
  307. 13:04यहां जाना है यार। मुझे ना उनके दर्शन
  308. 13:06करने हैं। मैं चाहती हूं कि मुझे यहां
  309. 13:08जाने का मौका मिले। एंड यू रियलाइज कि वो
  310. 13:13चीज अल्टीमेटली हो रही है। मतलब सपोज़ आपने
  311. 13:16अपने आप से अपने आप से बोल दिया। आपने पता
  312. 13:19है आपने आपने मैनिफेस्ट भी नहीं किया। यह
  313. 13:21नहीं है कि आप उस चीज को इसलिए बोल रहे हो
  314. 13:23ताकि आप उस चीज को मैनिफेस्ट कर सको। नहीं
  315. 13:25आपने आपने बस वो चीज चाही। आपने वो चीज
  316. 13:28बोल दी और वो चीज हो गई। यह अल्टीमेटली
  317. 13:32होने लग जाएगा क्योंकि आपका ओरा इतना
  318. 13:34ज्यादा स्ट्रांग होने लग जाता है कि आप जो
  319. 13:37चीज बोलते हो ना वो धीरे-धीरे वो चीजें
  320. 13:39होने लग जाती है। आपको लगता है कि यार
  321. 13:42भगवान ना कुछ बहुत ही ज्यादा ही खुश हो गए
  322. 13:44हैं मुझसे क्योंकि अब मैं जो बोलती हूं वो
  323. 13:46वैसा करते हैं। नहीं मतलब इसको गलत वे में
  324. 13:49मत लेना। लेकिन अब मैं जो सोचती हूं, मैं
  325. 13:52जो चाहती हूं वो मुझे मिल जाता है। बड़ी
  326. 13:54आसानी से मिल जाता है। ऐसे कि बहुत बहुत
  327. 13:57कृपा है भगवान की। मतलब ऐसा नहीं है कि
  328. 13:59आपकी लाइफ में कोई प्रॉब्लम्स नहीं
  329. 14:01होएंगी। पता है आपकी लाइफ में प्रॉब्लम्स
  330. 14:03ना अभी भी उतनी ही रहेंगी। इट जस्ट दैट कि
  331. 14:06आपका जो पर्सपेक्टिव है ना वो कंप्लीटली
  332. 14:08डिफरेंट हो जाएगा। पहले आपके लाइफ में कोई
  333. 14:11भी प्रॉब्लम आती थी तो आप परेशान हो जाते
  334. 14:13थे। आप उस चीज को लेके सोचते रहते थे।
  335. 14:17प्रॉब्लम अब भी वही होगी। अब भी वही सेम
  336. 14:20प्रॉब्लम होगी। लेकिन अब वो सोचने का
  337. 14:22तरीका, वो पर्सपेक्टिव, वो नजरिया वो
  338. 14:24कंप्लीटली बदल गया होगा। अब आपको पता होगा
  339. 14:27यार ये छोटी-मोटी प्रॉब्लम्स हैं। आती
  340. 14:29जाती रहती हैं। अब इससे मैं अपना अंदर
  341. 14:31स्ट्रेस क्यों लूं? मैं अपनी लाइफ क्यों
  342. 14:33खराब करूं? मैं अपना माइंड क्यों खराब
  343. 14:35करूं? जो चीज हो रही है होने दो। वैसे भी
  344. 14:38सारी चीजें टेंपरेरी हैं। अब यहां पे चलना
  345. 14:40है जो नहीं चलना। मुझे तो अपना नाम भजन
  346. 14:42करना है। बस मुझे उस पे ध्यान देना है।
  347. 14:44मेन चीज ये वाला माइंडसेट आपके अंदर आ
  348. 14:46जाता है। और फिर जब ये वाला माइंडसेट आपका
  349. 14:49आता है ना ये वाला पर्सेक्टिव आपका आता है
  350. 14:51और फिर आपको लिटरली कुछ चीजों की टेंशन
  351. 14:54नहीं होती है। कोई त्रेता युग, द्वापर युग
  352. 14:57या सतयुग नहीं इन सब युगों में नहीं हुई
  353. 15:00थी। गीत गोविंद की रचना कलयुग में ही हुई
  354. 15:03थी। इसी युग में जिस युग में हम जी रहे
  355. 15:05हैं। 12 सेंचुरी में जयदेव जी ने गीत
  356. 15:08गोविंद लिखा था। और अगर आप इसके पीछे की
  357. 15:11स्टोरी जानेंगे ना इसकी पीछे की कथा
  358. 15:14जानेंगे कि गीत गोविंद हाउ डस इट केम इनू
  359. 15:16बीइंग जयदेव जी थे जयदेव जी और उनकी पत्नी
  360. 15:19दोनों एक साथ रहते थे तो जयदेव जी गीत
  361. 15:22गोविंद लिख रहे थे उस समय तो जब जयदेव जी
  362. 15:25के मन में ना भाव आता था भाव आ गया कि अभी
  363. 15:29राधाकृष्ण जी बैठे हुए हैं बाग में निकुंज
  364. 15:32में बैठे हैं और ये दोनों एक दूसरे से
  365. 15:34बातें कर रहे हैं डे टू डे बेसिस की
  366. 15:37बेसिकली उनके जो नित्य प्रतिदिन जो भी
  367. 15:39उनकी लीला चलती है वो उनके मन में आती थी
  368. 15:43और जैसे ही वो उनके मन में आती थी वो उनको
  369. 15:46पंक्ति में पिरो देते थे। तो जयदेव जी के
  370. 15:49ना मन में मन में भाव आता था कि आज राधा
  371. 15:52कृष्ण जी निकुंज में बैठे हुए हैं बाग में
  372. 15:55राधा जी बैठी हैं उनके बगल में कृष्ण जी
  373. 15:57बैठे हैं और दोनों ही वार्तालाप कर रहे
  374. 16:00हैं। तो यह उनके मन में भाव आता था और
  375. 16:03जैसे ही उनके मन में ऐसे भाव आते थे ना वो
  376. 16:05इसको बस शब्दों में पिरो देते थे। आज राधा
  377. 16:08कृष्ण रास कर रहे हैं निधि वन में। तो
  378. 16:10जैसे उनके मन में ये भाव आता था ना वो
  379. 16:12इसको शब्दों में पिरो देते थे। आज मेरी
  380. 16:15राधा जी ना मान करके बैठ गई है कान्हा से
  381. 16:17और मेरे कान्हा उनको मना रहे हैं। जैसे
  382. 16:20उनके मन में ये भाव आता था ना वो इसको
  383. 16:21शब्दों में पिरो देते थे। जयदेव जी गए
  384. 16:24किसी कथा में उन्होंने कथा सुनी। अब जैसे
  385. 16:26ही उन्होंने कथा सुनी तो उनके मन में ना
  386. 16:28वही चलता रहे। वही कथा के बारे में चीजें
  387. 16:30चलती रही। अल्टीमेटली उनको भाव आने लग गए
  388. 16:33कि अब मेरे राधा कृष्ण ये कर रहे हैं अब
  389. 16:35ये कर रहे हैं अब ये हो रहा है तो जैसे
  390. 16:37उनको वो भाव आता था वो उनको बस शब्दों में
  391. 16:39पिरो देते थे और आप सच मानिए कि वो भाव
  392. 16:43लाने वाले कौन थे उनके उनके में वो भाव
  393. 16:45कौन लाते थे स्वयं मेरे जगन्नाथ जी मेरे
  394. 16:48स्वयं मेरे कान्हा जो है उनके भाव में वो
  395. 16:51भाव उनके चित्त में वो भाव ला रहे होते थे
  396. 16:53और फिर जयदेव जी उनको शब्दों में पिरो रहे
  397. 16:56होते थे। एक बार क्या हुआ कि एक बार वो
  398. 16:58बैठे थे लिखने के लिए जयदेव जी लिख रहे थे
  399. 17:02अपना अध्याय पूरा कर रहे थे गीत गोविंद का
  400. 17:04और तब उनके मन में ना एक ऐसा भाव आया कि
  401. 17:07उनको बहुत ज्यादा संकोच हुआ वो लिखने में
  402. 17:10मतलब उनको पता था कि यार ये कुछ गलत नहीं
  403. 17:13है लेकिन इसको मैं लिखूं कैसे कहीं कहीं
  404. 17:15कुछ गलत ना हो जाए कहीं उनको पसंद नहीं
  405. 17:18आया फिर क्या होगा उनके मन में ना एक
  406. 17:20संकोच सा आ गया कि इस भाव को मैं कैसे
  407. 17:23लिखूं उनसे लिखा ही नहीं गया तो उन्होंने
  408. 17:25सोचा मैं मैं एक काम करता हूं। इसको अभी
  409. 17:27छोड़ता हूं लिखना। मैं अभी स्नान करके आता
  410. 17:30हूं नदी में। और क्या पता उतनी देर में
  411. 17:32मेरे मन में कोई और भाव आ जाए और फिर मैं
  412. 17:34वो वाला भाव लिख दूंगा। तो उनके मन में यह
  413. 17:37ख्याल आया। वो चले गए नदी पे। लेकिन अब
  414. 17:40उनके मन में जो भी भाव आते थे वो स्वयं
  415. 17:42जगन्नाथ जी भेजते थे। स्वयं जगन्नाथ जी की
  416. 17:45इच्छा होती थी कि यह लिखा जाए इसलिए वो
  417. 17:47लिखा जाता था। तो अब जगन्नाथ जी देख रहे
  418. 17:50हैं कि यार इसको तो संकोच हो रहा है यह
  419. 17:51लिखने में। लेकिन मैं तो चाहता हूं कि आप
  420. 17:54ये शब्दों में पिरो ताकि मुझे भी सुननी है
  421. 17:56ना मेरी मेरी लीलाएं मेरे को ऐसे सुननी है
  422. 17:58उनको बहुत अच्छा लगता था तो उन्होंने सोचा
  423. 18:00कि अब ये नहीं लिखेगा तो मैं ही लिख देता
  424. 18:02हूं तो वो जयदेव जी का रूप धारण करके उनकी
  425. 18:05कुटिया में गए और उनसे बोलते कि उनसे मतलब
  426. 18:10उनकी पत्नी से जयदेव जी की पत्नी से बोलते
  427. 18:13हैं कि एक काम कीजिए देवी आप जल्दी से
  428. 18:15भोजन ले आइए भोजन लाने से पहले आप मुझे
  429. 18:17मेरा कमल दे दीजिए मेरे दिमाग में ना
  430. 18:20पंक्तियां आ रही है मैं जल्दी से उसको
  431. 18:21उसको लिख लूं। इससे पहले मैं भूल जाऊं।
  432. 18:23राधा जी बैठी हुई है और राधा जी के चरणों
  433. 18:26में श्री कृष्ण बैठी है और उनके जो कृष्ण
  434. 18:30जी के जो मस्तक है वो राधा जी के चरणों
  435. 18:33में है। मतलब राधा जी के चरण उनके हाथ में
  436. 18:36और उन्होंने राधा जी के चरणों को अपने
  437. 18:38मस्तक पे लगा रखा है। तो उन्होंने भोजन
  438. 18:40किया। वो भोजन करके उन्होंने बोला कि अब
  439. 18:43मैं ना थोड़ा सा टहलने के लिए जा रहा हूं।
  440. 18:44वो टहलने के लिए निकल गए। इतने में जो
  441. 18:47असली वाले जयदेव जी हैं वो नहा कर वापस
  442. 18:49आए। वो देखते हैं कि यार मेरी जो भार है
  443. 18:53मेरी पत्नी है वो भोजन कर रही है। वो ये
  444. 18:55देख के बहुत ज्यादा आश्चर्य हुए। आश्चर्य
  445. 18:57इसलिए हुआ क्योंकि उनकी जो पत्नी थी जयदेव
  446. 19:00जी की पत्नी का यह नियम था कि जब जयदेव जी
  447. 19:04भोजन खा लेंगे उसके बाद ही वो भोजन
  448. 19:06खाएंगी। वो भी उनकी जो झूठी थाली होती है
  449. 19:08वो उसी में भोजन खाएंगी। यह उनका रोज का
  450. 19:11नियम था। तो उन्होंने देखा कि आज आपको
  451. 19:13देवी आज आपको इतनी ज्यादा भूख लग रही थी
  452. 19:16कि आपने मेरे आने का वेट ही नहीं किया।
  453. 19:18आपने मेरे भोजन का वेट नहीं किया। आप आपने
  454. 19:20खुद ही खा लिया बना के। तो वो बोलती क्या
  455. 19:24ये क्या कह रहे हैं आप? अभी तो आप खा कर
  456. 19:26गए हैं। अभी तो इतना सारा आप खा कर गए हैं
  457. 19:28टहलने के लिए। और आप बोल रहे हैं कि मैं
  458. 19:30मैंने पहले खा लिया। मैंने आपका वेट नहीं
  459. 19:32किया। ये कहां से? तब उनके दिमाग में आया
  460. 19:36एक काम कीजिए। आप आप मुझे एक बार मेरी वो
  461. 19:39पुस्तक दीजिए जहां पे मैं लिखता हूं।
  462. 19:41उन्होंने देखा कि वो जो भाव है जो उनके
  463. 19:43मस्तक पे आया था स्वयं वही भाव लिखा हुआ
  464. 19:46था।
  465. 19:48उन्होंने बोला कि देवी वो मैं नहीं था जो
  466. 19:51आया। आप मेरी झूठी प्रसादी नहीं खा रहे।
  467. 19:53आप स्वयं जगन्नाथ जी की झूठी प्रसादी खा
  468. 19:56रहे हैं। देख रहे हैं आप इतनी सुंदर सुंदर
  469. 19:58सुंदर सुंदर लीलाएं करते हैं मेरे जगन्नाथ
  470. 20:00जी। मेरे मन में जो भाव आ रहे हैं वो
  471. 20:03स्वयं वही ला रहे हैं। मैं नहीं लिख पाया
  472. 20:06लेकिन वो खुद आ गए। उनको खुद आना पड़ा
  473. 20:08लिखने के लिए। क्या कुछ नहीं करते जगन्नाथ
  474. 20:11जी? उन्होंने क्या कुछ नहीं किया जयदेव जी
  475. 20:13के लिए। तो अगर यह सब महिमा सुनने के बाद
  476. 20:15अगर आपका भी मन कर रहा है ना कि आप भी गीत
  477. 20:18गोविंद पढ़ें तो इसका पाठ करना आप जरूर
  478. 20:21शुरू करना। अब इसमें आपके एक और क्वेश्चंस
  479. 20:24आएंगे कि गीत गोविंद को किस तरह पढ़ना
  480. 20:27चाहिए? इसको पढ़ने का क्या कोई समय होता
  481. 20:29है या फिर इसको पढ़ने का कोई कोई रूल्स
  482. 20:31होते हैं। कोई कोई ऐसे कुछ भाव होता है।
  483. 20:35कुछ भी गीत गोविंद से ना बस आपके मन में
  484. 20:37ना वह प्रेम जागृत होगा। गीत गोविंद से आप
  485. 20:41आपके मन में एक एक अलग ही संतुष्टि जागृत
  486. 20:45होगी। गीत गोविंद पढ़ने से ना आप खुशी
  487. 20:48जानते हैं असली खुशी क्या होती है? गीत
  488. 20:50गोविंद पढ़ने से ना आप खुश रहने लगेंगे।
  489. 20:52तो यह सारी चीजें हमारी नेक्स्ट वीडियो
  490. 20:54में आ रही होंगी। तो इस वीडियो में बस
  491. 20:57इतना ही मिलते हैं हम नेक्स्ट वीडियो में।
  492. 20:59तब तक के लिए बाय-ब राधे-राधे।

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