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स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर | मैं कौन हूँ | Who am I? by Swami Brahmmimansa Bharti — Transcript

by Jayghoshgeeta · 3,863 words · 489 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00गुरुदेव भगवान की जय हो। सच्चिदानंद भगवान
  2. 0:04की जय हो। हम चर्चा कर रहे हैं मैं कौन
  3. 0:09हूं। वास्तव में यह तीन हाथ का जो शरीर है
  4. 0:14जो हमको आंखों से दिखाई पड़ रहा है। एक तो
  5. 0:17यह चीज है पर इसके भीतर में बहुत कुछ है
  6. 0:21और वो सब पूरा का पूरा हमको समझना है।
  7. 0:24इसके भीतर में जो चेतन आत्मा है वो मैं
  8. 0:27हूं। पर चेतन आत्मा के पहले बीच में कई
  9. 0:32आवरण हैं। वो सब कुछ हमको समझना है। आज हम
  10. 0:36आपको बताएंगे कि तीन शरीर क्या है? हमने
  11. 0:40आपको पिछली बार बताया था कि पंचमहाभूत
  12. 0:45तमा प्रधान प्रकृति से पंचमहाभूत आकाश,
  13. 0:48वायु, तेज, जल और पृथ्वी ये क्रम से
  14. 0:52उत्पन्न होते हैं। फिर इनका इन
  15. 0:55पंचमहाभूतों से जब ये जैसे उत्पन्न होते
  16. 0:58हैं तो इनको अपकृत कहा जाता है। इनसे
  17. 1:01सूक्ष्म सृष्टि की उत्पत्ति होती है। उसके
  18. 1:04बाद इनका पंचीकरण होता है। पंजीकरण से
  19. 1:06स्थूल शरीरों की उत्पत्ति होती है। यह इसी
  20. 1:10विषय को आज हम आगे और विस्तार से बताएंगे।
  21. 1:15सबसे पहले हम आपको बता रहे हैं तीन शरीर।
  22. 1:20आज हम बता रहे हैं तीन शरीर।
  23. 1:25तीन शरीर कौन-कौन से हैं? यह हमको समझना
  24. 1:28है। तीन शरीरों के अंतर्गत
  25. 1:32सबसे पहले शरीर है स्थूल शरीर।
  26. 1:37हमारी चर्चा चल रही है। मैं कौन हूं? मैं
  27. 1:41कौन हूं? यानी इस सा हाथ के शरीर के भीतर
  28. 1:45में जो चेतन आत्मा जानने वाला है और
  29. 1:49संपूर्ण शरीर को सत्ता स्फूर्ति देने वाला
  30. 1:52है। वो चेतन आत्मा मैं हूं। पर वो चेतन
  31. 1:56आत्मा को समझने के लिए मुख्य बात है उसका
  32. 2:00हमको साक्षात्कार करने के लिए हमको ये जो
  33. 2:04बाहरी ढांचे बाहरी कवरिंग है इसको भी
  34. 2:07समझना पड़ेगा तभी तो हम इनको तोड़ पाएंगे
  35. 2:09और इनको अलग कर पाएंगे। इसी क्रम में आज
  36. 2:13हम आपको बताएंगे कि तीन शरीर कौन है। यह
  37. 2:16सबसे ऊपर जो शरीर दिखाई पड़ रहा है, यह है
  38. 2:19स्थूल शरीर। इसके भीतर में है सूक्ष्म
  39. 2:22शरीर और उसके भीतर में है कारण शरीर और
  40. 2:25उसके भीतर में कारण शरीर के भीतर में है
  41. 2:28चेतन आत्मा तो चेतन आत्मा तक पहुंचने के
  42. 2:32लिए सबसे पहले हम आज समझेंगे स्थूल शरीर
  43. 2:35तो तीन शरीर हम और फिर स्थूल शरीर उसमें
  44. 2:39फिर है
  45. 2:41सूक्ष्म शरीर
  46. 2:48सूक्ष्म शरीर के लिए दूसरा दूसरा नाम है
  47. 2:50लिंग शरीर
  48. 2:56और तीसरा है कारण शरीर।
  49. 3:05ठीक है? ये तीन शरीर है। इसके अंतर्गत जो
  50. 3:09स्थूल शरीर है, स्थूल शरीर पंचीकृत पंच
  51. 3:13महाभूतों के 25 तत्वों से बना हुआ है।
  52. 3:29यह हमने आप लोगों को उस दिन बताया था कि
  53. 3:32जो तमाम प्रधान प्रकृति है तमाम प्रधान
  54. 3:36प्रकृति से आकाश, आकाश से वायु, वायु से
  55. 3:40तेज, तेज से जल और जल से पृथ्वी की
  56. 3:44उत्पत्ति होती है। उसके बाद में उनका
  57. 3:47पंजीकरण और उसके बाद में उनका पंजीकरण
  58. 3:51होता है। पंजीकरण यानी उनका एक विशेष
  59. 3:54प्रकार से पिंटुप्लिकेशन इसको कहा जाता है
  60. 3:57इंग्लिश में। इनका विशेष प्रकार से मेल
  61. 4:00होता है और वो मेल कैसा होता है वो अब अभी
  62. 4:04हम बता रहे हैं आपको उसका मेल कैसा होता
  63. 4:07है और उसको बताने के पहले उसका मेल अभी हम
  64. 4:12बताएंगे। उसके पहले आप देख लीजिए कि
  65. 4:13सूक्ष्म शरीर क्या होता है।
  66. 4:15ठीक है?
  67. 4:17तो ये 25 तत्वों का मेल होता है। उस मेल
  68. 4:21से मतलब मेल मतलब मिश्रण। उससे यह जो
  69. 4:25स्थूल शरीर हमको सामने दिखाई पड़ रहा है।
  70. 4:28यह स्थूल शरीर बनता है। और जो ये सूक्ष्म
  71. 4:31शरीर है आपको याद होगा कि जो पंची जो
  72. 4:36पंचमहाभूत आकाश, वायु, तेज, जल, पृथ्वी की
  73. 4:39उत्पत्ति हुई। उनसे उनके सतोगुण से पांच
  74. 4:42ज्ञानेंद्रियां कर्म और उनसे पांच
  75. 4:45कर्मेंद्रियां, पांच प्राण और चार अंतःकरण
  76. 4:47उत्पन्न हुए हैं। यह हमने बताया था। तो वो
  77. 4:51जो तत्व है कितने हो गए? 19। ठीक है ना?
  78. 4:55पांच ज्ञानेंद्रियां।
  79. 5:07पांच कर्मेंद्रियां
  80. 5:14और पांच प्राण
  81. 5:18और चार अंतःकरण।
  82. 5:25यह कुल मिला के 19 तत्व।
  83. 5:29ठीक है? यह जो 19 तत्व है कुल मिलाकर इन
  84. 5:3319 तत्वों से
  85. 5:37यह जो 19 तत्व तैयार हुए हैं पांच
  86. 5:40ज्ञानेंद्रियां पांच कर्मेंद्रियां पांच
  87. 5:43प्राण चार अंतःकरण चार अंतःकरण यानी मन
  88. 5:47बुद्धि चित्त और अहंकार इन उनसे मिलाकर सब
  89. 5:52हो गए 19 तत्व कहीं-कहीं अंतःकरण को दो ही
  90. 5:56बताया गया है। वहां पे कह दिया कि 17
  91. 5:59तत्व। ठीक है? 17 तत्व कह दिया गया है। ये
  92. 6:02है 1 9 ये मैंने हिंदी में लिखा है और ये
  93. 6:051
  94. 6:07ठीक है? कहीं जैसे ये चार है मन,
  95. 6:12बुद्धि,
  96. 6:17चित्त
  97. 6:20और अहंकार।
  98. 6:27तो कहीं-कहीं क्या किया है कि चित्त और
  99. 6:30अहंकार को मन और बुद्धि में ही इंक्लूड कर
  100. 6:35लिया है। तो वहां पर अंतःकरण सिर्फ मन और
  101. 6:38बुद्धि को ही माना है। तो जहां पर मन और
  102. 6:41बुद्धि को ही सिर्फ अंतःकरण माना है।
  103. 6:44चित्त और अहंकार का ग्रहण नहीं किया है।
  104. 6:46वहां पर ये दो हुए तो वहां पे 17 तत्व
  105. 6:50बताए गए हैं। ओनली 17 एलिमेंट्स।
  106. 6:54तो यह 17 तत्वों का या 19 तत्वों का
  107. 6:57सूक्ष्म शरीर बना हुआ है। उसके बाद में
  108. 7:01बात आती है कारण शरीर की। ठीक है? कारण
  109. 7:05शरीर यानी क्या? कारण शरीर का मतलब होता
  110. 7:07है अविद्या।
  111. 7:11अविद्या या अज्ञान।
  112. 7:17यह अविद्या या अज्ञान को ही कारण शरीर कहा
  113. 7:21जाता है। अब यह अविद्या क्या है? यह हम
  114. 7:24समझ लें। अविद्या मतलब हम लोग बोलते हैं
  115. 7:27ना यह मैं नहीं जानता। वहां पर वो आपसे
  116. 7:31पूछा जाए कोई ऐसी चीज कई बारे में आप
  117. 7:33बोलते मुझे नहीं मालूम है। बोलते हैं ना
  118. 7:35तो मुझे नहीं मालूम है। मैं नहीं जानता
  119. 7:38हूं। यह अज्ञान है। आपको रूसी भाषा आती है
  120. 7:42क्या? नहीं आती। तो नहीं आती है तो जो
  121. 7:45रशियन भाषा आपको नहीं आती है तो यह आपको
  122. 7:48रशियन भाषा का अज्ञान है। है ना? तो ये जो
  123. 7:50अज्ञान है ये आप सभी लोग जानते हैं। जागृत
  124. 7:54अवस्था में जो हमारा व्यवहार चल रहा है
  125. 7:56इसमें बहुत सी बातें ऐसी होती है कि ये
  126. 7:58मैं नहीं जानता वो नहीं जानता। ठीक है?
  127. 8:01अच्छा उसी प्रकार से जब हम सो जाते गहरी
  128. 8:04नींद में
  129. 8:07तो गहरी नींद के समय पर हम सो गए बिल्कुल
  130. 8:12तो हमको बाहर का कोई चीज का कोई ज्ञान
  131. 8:14नहीं होता। और जब जागते हैं तो जब जागते
  132. 8:19हैं तो हम क्या बोलते हैं कि ऐसे सुख से
  133. 8:21सोया कि कुछ भी नहीं जाना। ऐसे सुख से
  134. 8:24सोया कि मैं कुछ भी नहीं जाना। तो ऐसे सुख
  135. 8:28से सोया और कुछ भी नहीं जाना। तो ये जो
  136. 8:32कुछ भी नहीं जाना यह क्या है? अज्ञान है।
  137. 8:35ठीक है? यही जो अज्ञान है या इसी को
  138. 8:38अविद्या भी कहते हैं। यह अविद्या ही कारण
  139. 8:42शरीर है और यह अज्ञान उसी प्रकार से क्या
  140. 8:46हमको अपने आत्मा का ज्ञान है? नहीं है। तो
  141. 8:49आत्मा का ज्ञान नहीं है। यानी आत्मा का
  142. 8:52अज्ञान है। यह ज्ञान नहीं है कि मैं आत्मा
  143. 8:56हूं। मैं आत्मा हूं। यह ज्ञान नहीं है।
  144. 9:00आत्मा को मैं नहीं जानता हूं। तो आत्मा का
  145. 9:03ज्ञान नहीं है। इसी कारण से यह हो रहा है
  146. 9:07कि मैं शरीर हूं। अगर आत्मा का ज्ञान हो
  147. 9:10जाए कि मैं आत्मा हूं तो मैं शरीर हूं। यह
  148. 9:13ज्ञान होगा? नहीं होगा। तो मैं आत्मा हूं।
  149. 9:16यह ज्ञान नहीं है। अर्थात आत्मा का अज्ञान
  150. 9:20है। इसी कारण से बार-बार यह स्थूल शरीर,
  151. 9:24सूक्ष्म शरीर यह सब मिलते हैं। यह सब हमको
  152. 9:27बार-बार जन्मना पड़ता है। बार-बार मरना
  153. 9:29पड़ता है। तो इस ये अविद्या ये अज्ञान के
  154. 9:33कारण सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर सूक्ष्म
  155. 9:38शरीर और स्थूल शरीर मिलते हैं। इसीलिए
  156. 9:42अज्ञान को ये जो अज्ञान है इसको कारण शरीर
  157. 9:46कहा गया है। समझ गए? अज्ञान को कारण शरीर
  158. 9:51कहा गया है। ये एक कहना चाहिए भाववाचक
  159. 9:55संज्ञा है। इसको हम भाववाचक संज्ञा इसको
  160. 9:59हम कोई ऐसी स्थूल स्थूल शरीर दिख रहा है।
  161. 10:01ऐसा नहीं है। दिखाई देने में तो आंख से
  162. 10:04केवल स्थूल शरीर ही दिखाई पड़ता है।
  163. 10:06सूक्ष्म शरीर भी आंखों से दिखाई नहीं
  164. 10:08देता। और जो आंखों से दिखाई नहीं देता उसी
  165. 10:11को सूक्ष्म कहा जाता है। इसको सूक्ष्म
  166. 10:13इसीलिए कहा जाता है क्योंकि आंखों से
  167. 10:16दिखाई नहीं देते। और ये जो दिखाई पड़ रहे
  168. 10:19हैं हमको ये स्थूल शरीर के अंदर में इसके
  169. 10:22सब गोलक बने हुए हैं। इसके जैसे घर होता
  170. 10:25है तो उसमें खिड़की हमने बताया था कमीज
  171. 10:27है। शर्ट हमारी बनती है तो उसमें हमारे
  172. 10:29हाथ डालने के लिए बाहें होती है। गला होता
  173. 10:33है। पट होगा तो उसमें नीचे के पांव बने
  174. 10:35होंगे ताकि उसके अंदर में शरीर सेट हो
  175. 10:38जाए। उसी प्रकार से यह जो शरीर है यह जो
  176. 10:42पंचीकृत पंचमहाभूतों के 25 तत्वों से बना
  177. 10:46हुआ यह जो शरीर है यह जो स्थूल शरीर है
  178. 10:49इसके अंदर में भी यह जो सूक्ष्म शरीर है
  179. 10:52इसके बैठने के लिए इसके सेट होने के लिए
  180. 10:55आंख कान नाक और सब पूरे हाथ पैर सब पूरा
  181. 11:00पूरा वाक इंद्री सब कुछ बना हुआ है।
  182. 11:03सूक्ष्म शरीर आता है उसके अंदर में बैठ
  183. 11:05जाता है। अगर कहीं स्थूल शरीर के अंदर में
  184. 11:09कहीं कोई गड़बड़ी हो जाए उस पार्ट में
  185. 11:11बोले आंख का कॉर्निया खराब है तो दिखाई
  186. 11:14नहीं देगा पार्ट खराब होने से कभी-कभी जो
  187. 11:19अंदर की जो रहती उसका अच्छा एक तो पार्ट
  188. 11:22खराब हो गई उसके अतिरिक्त में और भी कुछ
  189. 11:25बातें हैं फिर हम बाद में बताएंगे अभी
  190. 11:27इतना ही रखिए। ठीक है? अब ये पंचीकृत
  191. 11:29पंचमहाभूतों के 25 तत्वों से जो शरीर बना
  192. 11:33हुआ है यह हमको जो आंखों से दिखाई पड़ रहा
  193. 11:36है यह स्थूल शरीर है। इस चीज को हम अब
  194. 11:39डिटेल में बताएंगे। यह चीज आप अपनी कॉपी
  195. 11:42में लिख लीजिए। इसको हम अभी बोर्ड साफ कर
  196. 11:45देंगे।
  197. 11:54यहां पर हमने आपको बताया था पांच तत्व है।
  198. 11:57एक है आकाश।
  199. 12:02ठीक है? दूसरा है वायु।
  200. 12:05तीसरा है तेज।
  201. 12:09फिर है जल और पांचवा है पृथ्वी।
  202. 12:15ठीक है? यह पांच तत्व है। इधर हम यहां पर
  203. 12:20ऊपर में भी लिखेंगे।
  204. 12:23यह है आकाश।
  205. 12:32वायु
  206. 12:37तेज
  207. 12:44जल
  208. 12:47और उसके बाद में है पृथ्वी।
  209. 12:51यह पांच तत्व हमने आपको बताया था कि हर
  210. 12:56भाग हर एक पंच महाभूतों में से हर एक जो
  211. 13:00अपना आधा भाग कर लेता है। अपने दो भाग
  212. 13:02करता है। आधा भाग अपने पास रखता है। ठीक
  213. 13:05है? आधा भाग वो अपने पास रखा। और जो दूसरा
  214. 13:09आधा भाग है सपोज़ करो यह आकाश है। ठीक है?
  215. 13:12आकाश ने क्या किया? अपना आधा भाग किया।
  216. 13:15अपने दो भाग कर लिए। ठीक है? दिखाई पड़
  217. 13:18रहा है बराबर। अपने दो भाग कर लिए। मैं
  218. 13:20इसको बड़ा करके दिखा देती हूं एक बार।
  219. 13:24हम्
  220. 13:25हम् जैसे यह आकाश है।
  221. 13:29ठीक है? आकाश ने खुद के
  222. 13:32दो भाग कर लिए। ठीक है? तो दो भाग में से
  223. 13:36आधा भाग तो अपने पास रख लिया। और यह जो
  224. 13:39भाग है इसके उसने चार भाग कर लिए।
  225. 13:46ठीक है? 1 2 3 4 एक
  226. 13:51एक भाग इसने आकाश को दे दिया। दूसरा तेज
  227. 13:55को दे दिया। तीसरा जल को और चौथा पृथ्वी
  228. 13:59को दे दिया। ठीक है? खुद का एक भाग इसके
  229. 14:01पास में है। उसी प्रकार से वायु ने भी
  230. 14:04किया। वायु ने भी इसी प्रकार से अपना एक
  231. 14:08भाग इसको दे दिया। एक भाग इसको दिया। ठीक
  232. 14:11है? अब खुद का भाग तो इसके पास खुद का है
  233. 14:13ही। फिर दूसरा भाग इसको दिया। तीसरा भाग
  234. 14:15इसको दिया। चौथा भाग इसको दिया। उसी
  235. 14:18प्रकार से जो तेज है तेज ने भी वही
  236. 14:21प्रक्रिया किया। तो सबके पास में खुद का
  237. 14:24आधा भाग मुख्य है। हर एक के पास में खुद
  238. 14:27का आधा भाग मुख्य है। और दूसरे भाग जो है
  239. 14:32वायु तेज इनके छोटे-छोटे पार्ट है। तो हर
  240. 14:35एक के पास हो गए 25। तो ये पांच मिले।
  241. 14:40पांच मिले इसीलिए इनको पंजीकरण बोलते हैं।
  242. 14:43ठीक है? और पंजीकरण हुआ और उससे 25 बन गई
  243. 14:47है। ठीक है? इसी का नाम है पंचीकरण। अब हम
  244. 14:50यह समझेंगे कि आकाश का वह भाग दिया है तो
  245. 14:54हमारे शरीर में इसके कौन-कौन से भाग हैं।
  246. 14:56यह बात आज हम आपको बताएंगे।
  247. 15:05अब यहां पर हम समझेंगे कि आकाश का भाग कौन
  248. 15:09सा है? जो आकाश का है तो आकाश का भाग शरीर
  249. 15:12के अंदर में है शोक
  250. 15:14आकाश का भाग शरीर में है शोक आका अच्छा जो
  251. 15:18इनका ये शोक है आप देखेंगे आकाश का भाग
  252. 15:21आकाश में तो आकाश ने जो भाग खुद रख लिया
  253. 15:25है आधा वही भाग शोक है ठीक है आकाश का भाग
  254. 15:30ये आकाश में यह मुख्य भाग है आकाश का ठीक
  255. 15:33है उसी प्रकार से वायु का भी मुख्य भाग
  256. 15:35कुछ है तेज का भी मुख्य भाग कुछ है जल का
  257. 15:38भी है पृथ्वी का भी है। तो आकाश का मुख्य
  258. 15:41भाग है शोक। शोक के समय पर आप देखें कि जो
  259. 15:44दिमाग है शून्य हो जाता है। शोक मतलब गहरा
  260. 15:48जब शोक होता है तो दिमाग बिल्कुल शून्य हो
  261. 15:52जाता है। और आकाश भी कैसा है? शून्य है।
  262. 15:55शोक आकाश क्या है? पूरा खाली जगह है ना?
  263. 15:58शून्य है। तो इसीलिए शोक को आकाश का भाग
  264. 16:02कंसीडर किया गया है। उसके बाद में है काम।
  265. 16:07आकाश जो आकाश है उस आकाश का दूसरा भाग है।
  266. 16:15आकाश ने जो अपना भाग वायु को दिया है।
  267. 16:19आकाश ने अपना भाग जो वायु को दिया है वो
  268. 16:22है काम। काम यानी इच्छा।
  269. 16:31ठीक है? कोई भी चीज की जो इच्छा होती है
  270. 16:33तो मन चंचल हो जाता है। तो इसी से समझ में
  271. 16:37आता है अच्छा यह जो है आकाश का भाग है
  272. 16:40चंचलता।
  273. 16:42ठीक है? कुछ लोग यह शोक, काम आदि को इस
  274. 16:46सूक्ष्म शरीर का भी हिस्सा मानते हैं।
  275. 16:49परंतु जब यह इनका जब वेग आता है तो इसका
  276. 16:54प्रभाव स्थूल शरीर पर भी पड़ता है। इसीलिए
  277. 16:57इनको स्थूल शरीर के भाग भी माने गए हैं।
  278. 17:01तो तेज इसके बाद में है क्रोध। आकाश का
  279. 17:04भाग है क्रोध। क्रोध आता है तो दिमाग
  280. 17:07बिल्कुल शून्य मतलब दिमाग का स्विच ऑफ हो
  281. 17:11जाता है। क्या करना क्या नहीं स्विच ऑफ।
  282. 17:14साथ-साथ में क्रे क्रोध के समय पर शरीर
  283. 17:17बहुत गर्म हो जाता है। तेज मतलब तपायमान
  284. 17:21हो जाता है। तो इसीलिए क्रोध जो है वो तेज
  285. 17:24का भाग है आकाश में।
  286. 17:30उसके बाद में पृथ्वी
  287. 17:33ये जल जल का भाग है मोह।
  288. 17:37ठीक है? जल का भाग है आकाश। जल ने भाग
  289. 17:40दिया आकाश को मोह। तो जो मोह है जो क्या
  290. 17:43होता है जल का स्वभाव है फैलना तो मोह भी
  291. 17:47मोह के समय भी जीव बिल्कुल अंधा हो जाता
  292. 17:50है उसको दिखता नहीं है तो इसलिए बोला है
  293. 17:52उसको अंधा हो जाना शून्य हो जाना उसका
  294. 17:55दिमाग शून्य हो जाना दूसरी बात यह है कि
  295. 17:58जल के मोह जो है ये भी फैलता है अपने
  296. 18:00सर्वजन संबंधियों में मोह फैलता है इसीलिए
  297. 18:03मोह को जल का आकाश में भाग माना गया है
  298. 18:07फिर उसके बाद में पृथ्वी पृथ्वी का भाग है
  299. 18:11भय भय
  300. 18:14भय के समय पर भी आप देखो कि जो मन है
  301. 18:18बिल्कुल शून्य हो जाता है। यह दिमाग नहीं
  302. 18:21होता क्या करें और जड़ सरी का हो जाता है।
  303. 18:24व्यक्ति जो होता है जड़ सरी का हो जाता
  304. 18:26है। भय के मारे आगे नहीं बढ़ जाता। घिग्गी
  305. 18:28बन जाती है। तो इसको पृथ्वी का भाग माना
  306. 18:31गया है। उसके बाद में वायु में आकाश का
  307. 18:36भाग माना गया है। आकाश का भाग वायु को जो
  308. 18:39मिला है वो है प्रसारण।
  309. 18:42प्रसारण का मतलब होता है फैलना।
  310. 18:46ठीक है? वायु को जो मिला है वह प्रसारण।
  311. 18:48प्रसारण यानी फैलना। तो शरीर जो है फैलता
  312. 18:51है। तो वह वायु का हिस्सा है। उसी प्रकार
  313. 18:54से धावन। धावन यानी दौड़ना।
  314. 19:05वलन
  315. 19:09वलन मतलब शरीर का टेढ़ा होना।
  316. 19:16ठीक है? तो वायु का वायु तेज दौड़ता है।
  317. 19:20ठीक है? यह वायु का मुख्य भाग है। वायु का
  318. 19:23वायु में मुख्य भाग है। अपना भाग जो आधा
  319. 19:27अधिक रहता है वह भाग है धावन। तो वायु
  320. 19:29क्या होता है? वायु का स्वभाव है दौड़ना।
  321. 19:31और ये दौड़ना जो है ये दौड़ ये वायु के
  322. 19:35अंश के कारण ही शरीर में दौड़ने की क्रिया
  323. 19:37होती है। उसके बाद में तेज। तेज का मतलब
  324. 19:41है वलन। तेज से क्या होता है? वलन। टेढ़ा
  325. 19:44होना। यह वायु के अंदर में इसका मतलब
  326. 19:47टेढ़ा होना। इसमें नहीं। उसके बाद में जल।
  327. 19:51जल का भाग है चलन
  328. 19:58और इस आकुंचन।
  329. 20:04यह हमारे ऋषियों ने जिज्ञासुओं को समझने
  330. 20:08की सुविधा के लिए यह सब इस प्रकार की
  331. 20:11प्रक्रिया बताई है कि आप ये समझ लीजिए कि
  332. 20:14जो भी कुछ है यह सब पूरे शरीर में
  333. 20:16पंचमहाभूतों की ही देन है।
  334. 20:22उसकी
  335. 20:33तृषा
  336. 20:35और तेज का मुख्य भाग है छुधा। छुधा यानी
  337. 20:40भूख।
  338. 20:47ठीक है? आकाश का भाग है तेज। जैसे आप
  339. 20:51सोओगे तो ज्यादा गर्मी लगती है। है ना?
  340. 20:54निद्रा जब शरीर में कुछ गर्मी उत्पन्न
  341. 20:57होती है तो नींद आती है और निद्रा के समय
  342. 21:00पर मस्तिष्क शून्य हो जाता है। तो यह आकाश
  343. 21:03का भाग है तेज में। ठीक है? निद्रा तृषा
  344. 21:07प्यास। तृषा का मतलब है प्यास। प्यास के
  345. 21:10समय पर कंठ सूखता है। तो वायु का काम है
  346. 21:13सुखाना। और साथ-साथ में गर्मी तेज। तो
  347. 21:18वायु का काम होता है सुखाना। तो प्यास जो
  348. 21:21है वो वायु और तेज का अंश है। वायु वायु
  349. 21:25का अंश तेज में है। उसके बाद में जल
  350. 21:30जल का अंश है कांत।
  351. 21:34कांत मतलब तेज।
  352. 21:40कांत मतलब तेज। जैसे किसी के चेहरे पे अपन
  353. 21:43बोलते हैं ना इसके चेहरे पे बड़ा तेज है
  354. 21:45और कई बार आपने ये भी सुना होगा इसके
  355. 21:48चेहरे पर पानी बहुत है। कहते हैं ना तो
  356. 21:50तेज को पानी कहा जाता है। शरीर के तेज को
  357. 21:54पानी कहा जाता है। तो पानी जो है यह जल जो
  358. 21:57है और उसमें चमकता है। तो तेज जो है यह
  359. 22:00बोलते समझ में अपने को भी बात गले से
  360. 22:03उतरती है कि जो तेज है यह क्या है? चमक
  361. 22:07होती है। तो जो कांत है चेहरे की कांत वो
  362. 22:11कांत जो है वो जल का अंश तेज में है। उसके
  363. 22:17बाद में फिर है आलस्य।
  364. 22:25आलस्य के समय क्या होता है? शरीर जड़ हो
  365. 22:27जाता है। और जब ज्यादा गर्मियों के दिन
  366. 22:30में ज्यादा आलस आता है। क्यों? क्योंकि
  367. 22:32गर्माहट होती है। है ना? तो आप लोग भूमध्य
  368. 22:35सागर भूमध्य रेखा के निकट जो लोग रहते हैं
  369. 22:38वो अधिक आलसी होते हैं। गर्मी में आलस आता
  370. 22:41है और शरीर के अंदर में वैसे भी खूब अन्न
  371. 22:43खा लो गर्मी खूब तो भी आलस आता है। अन्न
  372. 22:46की कुछ गर्मी होती है उसके कारण आलस आता
  373. 22:49है। तो पृथ्वी जो है पृथ्वी का तेज में
  374. 22:52अंश है आलस्य। पृथ्वी भी क्या होती है?
  375. 22:55आलस्य के कारण जड़ता आ जाती है। तो पृथ्वी
  376. 22:57का अंश है जड़ता और ये गर्मी। उसके बाद
  377. 23:01में तेज जल का जो है लार से
  378. 23:08लार
  379. 23:09लार मतलब हम जानते ही है सलाइवा
  380. 23:31मूत्र
  381. 23:40और शोित।
  382. 23:42शोणित का मतलब है ब्लड।
  383. 23:48ठीक है?
  384. 23:54हम तो यह हमने अब यह जो है आकाश देखो आर
  385. 23:58आकाश जो होता है लार जो होता है ऊंचा है
  386. 24:01ना तो वहां गैप मिलता है तो ये जो है आकाश
  387. 24:04का भाग जल में है लार इसी के कारण उसके
  388. 24:08अंदर में ऊंचानीचा होता है श्वेद यानी
  389. 24:11पसीना तो वायु का भाग जल में है श्वेद तो
  390. 24:16वायु से क्या होता है जल यहां पर जब गर्म
  391. 24:19हवा आती तो या कैसे भी तो हवा से पसीना
  392. 24:22सूखता है तो इसको सोख लेता है। उसके बाद
  393. 24:26में तेज का अंश है जल में मूत्र। यह मूत्र
  394. 24:32में गर्माहट होती है क्योंकि तेज का शरीर
  395. 24:34की सारी गर्मी हो लेता है। उसके बाद में
  396. 24:36सीमन में शुक्र यह क्या है? जल का अंश है
  397. 24:40जल में। मुख्य रूप से। फिर शोित यानी कि
  398. 24:43ब्लड जो है पृथ्वी का अंश है जल में।
  399. 24:48उसके बाद में पृथ्वी में पृथ्वी का अंश
  400. 24:51पृथ्वी में है।
  401. 24:53पृथ्वी का आकाश का अंश पृथ्वी में है रोम।
  402. 24:56रोम मतलब जो हमारे यह होते हैं रोंगटे सब
  403. 25:00ये रोम ये रोम। उसके बाद में रोम के
  404. 25:04अंतर्गत ही हमको सिर के शरीर के बाल भी
  405. 25:06समझ लेना चाहिए। बाल
  406. 25:10फिर है त्वचा। त्वचा जो है
  407. 25:13यह वायु का भाग है। देखो एक तो त्वचा वह
  408. 25:18है जो सूक्ष्म शरीर में तक इंद्री है। और
  409. 25:21एक त्वचा ये जो हमारे को यहां पर ये दिखाई
  410. 25:24पड़ रही है। यह त्वचा है। उसके बाद में
  411. 25:28नाड़ी
  412. 25:33नाड़ी नर्स जो है
  413. 25:38मांस
  414. 25:47और
  415. 25:49अस्थि।
  416. 25:57ठीक है?
  417. 26:02ये इस प्रकार से ये 25 तत्व है। आकाश का
  418. 26:05भाग आकाश में शोक। वायु का भाग वायु में
  419. 26:10वायु का भाग, आकाश में काम, व तेज का भाग
  420. 26:12ये हमने आपको पूरी प्रक्रिया बता दी। इस
  421. 26:15प्रकार से ये 25 तत्व है। इन 25 तत्व पूरे
  422. 26:18शरीर में रहते हैं। अब ये 25 तत्व में जब
  423. 26:21होते हैं तो हमको ये चिंतन ये इसको बताने
  424. 26:24का दृष्टिकोण क्या है? इसको बताने का
  425. 26:27दृष्टिकोण येते हैं कि जब होता है जैसे
  426. 26:29हमको शोक हो रहा है। अब शोक जब होता है तो
  427. 26:32हमको यह चिंतन करना चाहिए कि ये जो शोक है
  428. 26:35यह आकाश का भाग आकाश में है। मुझ आत्मा
  429. 26:39में शोक नहीं है।
  430. 26:42यह जो प्रसारण हो रहा है शरीर का फैलना है
  431. 26:46ना? तो ठंडी में शरीर सिकुड़ जाता है।
  432. 26:48गर्मी में फैलता है। यह प्रसारण जो है यह
  433. 26:50आकाश का भाग वायु में है। मुझ आत्मा में
  434. 26:53प्रसारण नहीं है। जो ये निद्रा आ रही है
  435. 26:56यह निद्रा मुझ आत्मा में नहीं है। जो भी
  436. 27:00है लार ये मुझ आत्मा में नहीं। सभी चीजें
  437. 27:02जो हैं यह पंचमहाभूतों का ही भाग है। जो
  438. 27:06भूख लगी है। अब इसका मतलब यह नहीं कि आपको
  439. 27:09भूख लगे तो भोजन ना करो। भोजन आप करिए।
  440. 27:13लेकिन साथ-साथ में चिंतन भी करिए कि ये जो
  441. 27:16भूख है यह जो भूख है यह तेज का अंश है। अब
  442. 27:19देखिए तेज छुदाग्नि
  443. 27:22जठराग्नि मानी गई है। तो तेज का तेज में
  444. 27:25मुख्य अंश है भूख। ये भूख क्या करती है?
  445. 27:27जो भी कुछ हम खाते पीते उसको भस्म कर देती
  446. 27:30है। जला देती है। तो जो छुदा है जब भूख
  447. 27:34लगती है तो हम बराबर भोजन करें क्योंकि
  448. 27:37शरीर की रक्षा तभी होगी जब हम भोजन
  449. 27:40करेंगे। शरीर अन्नमय कोष कहलाता है। यह
  450. 27:43आगे हम बताएंगे कि शरीर अन्नमय कोष है। तो
  451. 27:46लेकिन जो छुधा लेकिन साथ-साथ में चिंतन भी
  452. 27:48करें कि छुधा जो है यह तेज का अंश है।
  453. 27:53इसमें नहीं और आपने इसमें कहा अहम
  454. 27:57अहम
  455. 28:00वैश्वानर अग्नि मानी गई है। पेट की जो
  456. 28:03अग्नि है उसको वैश्वानर अग्नि मानी गई।
  457. 28:06अहम वैश्वा नरो भूत्वा ये भगवान श्री
  458. 28:09कृष्ण चंद्र जी ने कहा है तो वैश्वानर
  459. 28:11अग्नि मानी गई है ये छुदा की छुदा अग्नि
  460. 28:13ठीक है उसी प्रकार से कांतिया जो भी कभी
  461. 28:17मन में हमारे चेहरे पे तो बड़ा तेज है
  462. 28:19हमारा बड़ा सौंदर्य है तो जिस समय पर ये
  463. 28:21हमारे में सौंदर्य नहीं है ये शरीर का भाग
  464. 28:24है ये पंच महाभूतों का जल का जल में भाग
  465. 28:27है जल जल का तेज में भाग है मुझ में मुझ
  466. 28:30आत्मा में सौंदर्य तेज या फीकापन कुछ भी
  467. 28:34नहीं है इस प्रकार से मेन मेन बात शरीर के
  468. 28:37अंदर में होने वाली हर एक छोटी-छोटी
  469. 28:39वृत्ति हर एक छोटी-छोटी चीजें उनको हम उन
  470. 28:44से अलग करना है। इसीलिए यह सब चीजें बताई
  471. 28:47जा रही है। यह थोड़ा सा कठिन है लेकिन आप
  472. 28:51लोग इसमें घबराएंगे नहीं। इसको ध्यान से
  473. 28:54समझेंगे तो समझ में आएगा। इसमें कोई
  474. 28:56कठिनाई नहीं है और इसको याद कर लें तो
  475. 28:59बहुत अच्छी बात है। जो मांस है, अस्थि है,
  476. 29:02नाड़ी है, त्वचा ये सब पंचमाभूतों का भाग
  477. 29:05है। अब देखिए सब कुछ पंचमहाभूतों का है।
  478. 29:08आगे हम इसको और भी अच्छी प्रकार से
  479. 29:10बताएंगे कि कैसे अब ये मांस में हम
  480. 29:13पंचमहाभूत कैसे पहचाने।
  481. 29:15ठीक है? अस्थि में पंचमहाभूत कैसे हम
  482. 29:18पहचाने? हमको सामने की सब चीजें दिख रही
  483. 29:20है। पंचभूत कैसे पहचाने? यह हम आगे
  484. 29:22बताएंगे। पर फिलहाल इतनी चीज को आप अच्छी
  485. 29:26प्रकार से समझ लीजिए। ठीक है? और फिर वो
  486. 29:29टेस्टर आप लगाइएगा।
  487. 29:32इतना उसको हम अगले बार में बताएंगे। आज
  488. 29:36हमने तीन शरीरों का ज्ञान आपको बताया है।
  489. 29:51[संगीत]

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