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Where are all the Good Politicians? — Transcript

by Sachin Awasthi Unscripted · 2,130 words · 286 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00क्या आप ईमानदारी से इस देश में पांच
  2. 0:01अच्छे नेताओं के नाम बता सकते हो? चलो
  3. 0:03शुरू हो जाओ। मोह
  4. 0:05कट जाओ।
  5. 0:06ऐसे नहीं करना है। आपका जवाब आपके धर्म,
  6. 0:08जात, आईडियोलॉजी या पार्टी से इन्फ्लुएंस
  7. 0:10नहीं होना चाहिए। सिर्फ तीन चीजों के बेस
  8. 0:12पर होना चाहिए। काम, ईमानदारी और
  9. 0:14जवाबदेही। अगर आपको पांच नाम याद आ गए तो
  10. 0:16कमेंट्स में लिख देना। लेकिन अगर पांच नाम
  11. 0:17नहीं आ रहे तो टेंशन मत लो। तीन। तीन नहीं
  12. 0:20तो चलो अच्छा एक नाम लिख और अगर एक भी नाम
  13. 0:22याद नहीं आ रहा है तो शायद हमारे सामने एक
  14. 0:24बहुत इंटरेस्टिंग प्रॉब्लम है।
  15. 0:25वी हैव अ प्रॉब्लम। क्योंकि मैं मानता हूं
  16. 0:27कि इस देश में अच्छे नेता तो हैं लेकिन वो
  17. 0:29पॉलिटिक्स में सर्वाइव नहीं कर पाते। अब
  18. 0:31जैसे आप अगर सचिन अवस्थी की बात ले लो तो
  19. 0:34गॉड
  20. 0:35मजाक कर रहा हूं अगर कोई अच्छा नेता
  21. 0:36पॉलिटिक्स में आ भी जाता है तो कुछ टाइम
  22. 0:38बाद या तो वो बदल जाता है या हार जाता है।
  23. 0:41इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि जो जीत
  24. 0:42रहा है वो बुरा है। मैंने जो भी थोड़ी
  25. 0:44बहुत पॉलिटिक्स समझी है उससे एक बात तो
  26. 0:46गांठ मार के रख ली है। क्या क्या मार के?
  27. 0:48गांठ गांठ मार के।
  28. 0:50कि द वोटर इज नेवर रोंग। पर हम सब जानते
  29. 0:52हैं कि इंडिया में वोटर बैड और वर्स्ट में
  30. 0:54चुनता है। और यही इस वीडियो का सवाल है।
  31. 0:56वेयर आर ऑल द गुड पॉलिटिशियंस?
  32. 0:58अबे मुझे नहीं मालूम।
  33. 1:00मैं यह वीडियो किसी एक पार्टी या एक
  34. 1:01आईडियोलॉजी या एक पॉलिटिशियन को टारगेट
  35. 1:03करने के लिए नहीं बना रहा हूं। एक्चुअली
  36. 1:05अगर आप वीडियो के बीच में किसी एक
  37. 1:06पॉलिटिशियन के बारे में सोचने लग गए कि
  38. 1:08अरे यह तो इसकी बात कर रहा है। तो शायद आप
  39. 1:10मेरी बात समझे ही नहीं। क्योंकि प्रॉब्लम
  40. 1:12एक पॉलिटिशियन की नहीं है। प्रॉब्लम पूरे
  41. 1:14सिस्टम की है।
  42. 1:15और थोड़ा प्रॉब्लम हमारी भी है।
  43. 1:17सुना क्या? यह भी मेरी गलती है।
  44. 1:19वी टर्न पॉलिटिक्स इनू एंटरटेनमेंट एंड
  45. 1:21नाउ वी आर पेइंग फॉर इट। सबसे पहले एक चीज
  46. 1:23नोटिस कीजिए। पॉलिटिक्स अब सिर्फ
  47. 1:25पॉलिटिक्स नहीं रही है। पॉलिटिक्स
  48. 1:26एंटरटेनमेंट बन गई है। टीवी खोलो डिबेट चल
  49. 1:29रही है। एक पॉलिटिशियन दूसरे पॉलिटिशियन
  50. 1:30को इंटरप्ट कर रहा है। दूसरा उसको जवाब दे
  51. 1:32रहा है। एंकर चिल्ला रहा है। ऑडियंस चीयर
  52. 1:35कर रही है। और सोशल मीडिया खोलो। 15-15
  53. 1:37सेकंड की क्लिप्स हैं। किसी पॉलिटिशियन का
  54. 1:39वन लाइनर वायरल है। कोई शुभ के गाने लगा
  55. 1:41के करना चार। वो बंदे दो ने कर रहा है
  56. 1:4412 ने
  57. 1:46तो कोई आरंभ है प्रचंड कर रहा है सब
  58. 1:48अपना-अपना लगे हुए हैं
  59. 1:50सब साले सबके दिमाग में अपनी-अपनी पिक्चर
  60. 1:53चल रही है
  61. 1:53किसी ने किसी को रोस्ट कर दिया किसी ने
  62. 1:55किसी को पेल दिया इसने उसकी ले ली और उसने
  63. 1:57उसको दे दी फिर उसका रील फिर उसका रील का
  64. 1:59मीम फिर मीम का रिएक्शन फिर रिएक्शन का
  65. 2:01रिएक्शन और हम सब कंज्यूम कर रहे हैं हम
  66. 2:03पॉलिटिक्स को फॉलो नहीं कर रहे हैं हम
  67. 2:05पॉलिटिक्स को बिंज वॉच कर रहे हैं और
  68. 2:06इसमें प्रॉब्लम ये नहीं है कि पॉलिटिक्स
  69. 2:08या पॉलिटिशियंस एंटरटेनिंग नहीं हो सकते
  70. 2:10बिल्कुल हो सकते हैं बाहर बाहर के
  71. 2:11पॉलिटिशियंस भी ये कर रहे हैं। पर उसके
  72. 2:14बाद उनको अच्छा काम भी करना पड़ता है।
  73. 2:16लोगों का प्रेशर भी झेलना पड़ता है।
  74. 2:18प्रॉब्लम तब शुरू होती है जब एंटरटेनमेंट
  75. 2:20कॉम्पिटेंस का सब्सीट्यूट बन जाता है। जो
  76. 2:22आदमी क्वाइटली एक कॉम्प्लिकेटेड पॉलिसी
  77. 2:24प्रॉब्लम सॉल्व कर रहा है, उसकी रील कौन
  78. 2:26बनाएगा? हम पॉलिटिशियन नहीं ढूंढते हैं।
  79. 2:28हम ढूंढते हैं हीरो। अब इसके बाद एक और
  80. 2:30इंटरेस्टिंग प्रॉब्लम आती है। हम
  81. 2:32पॉलिटिशियंस को पॉलिटिशियन की तरह देखते
  82. 2:34ही नहीं है। हम उन्हें हीरोज़ की तरह देखते
  83. 2:36हैं। और शायद यह प्रॉब्लम इंडिया तक
  84. 2:38लिमिटेड भी नहीं है। लेकिन इंडिया में ये
  85. 2:40पर्टिकुलरली इंटरेस्टिंग है। हमको ऐसा
  86. 2:42पॉलिटिशियन पसंद आता है जो पावरफुल लगे,
  87. 2:44स्ट्रांग लगे, किसी को डांट सके, किसी को
  88. 2:47सीधा कर दे। आपने देखा होगा सब
  89. 2:49पॉलिटिशियंस पता नहीं अपने आप को शेर
  90. 2:51क्यों दिखाना पसंद करते हैं। जबकि और भी
  91. 2:53वाइस जानवर हैं और अकलमंद और खूंखार जानवर
  92. 2:56भी हैं। पर सबको दिखाना है शेर। शेर क्या
  93. 2:58करता है? दूसरे कमजोर जानवरों के छोटे
  94. 3:00बच्चों को मार के खाता है। पर सारे नेताओं
  95. 3:02को हमारे देश में शेर ही बनना है। हमको
  96. 3:04एकदम बॉस टाइप पर्सनालिटी चाहिए। मैंने
  97. 3:06कहीं सुना था कि पूरे इंडिया को डैडी
  98. 3:08इश्यूज हैं। रील में ही सुना था किसने
  99. 3:10बोला था याद नहीं। आपको पता हो तो उसको
  100. 3:12भाई को क्रेडिट दे देना। ऑब्वियसली ये
  101. 3:14साइंटिफिक स्टेटमेंट नहीं है। लेकिन इसमें
  102. 3:16थोड़ा सा तो अनकंफर्टेबल ट्रुथ छुपा है।
  103. 3:18हमको ऐसा नेता पसंद आता है जो हमसे ऊपर
  104. 3:20खड़ा हो। लेकिन डेमोक्रेसी का बेसिक
  105. 3:22आईडिया तो इसका ऑोजिट है। पॉलिटिशियन
  106. 3:24हमारा बाप नहीं है। किसी किसी के बाप
  107. 3:26पॉलिटिशियन जरूर होते हैं।
  108. 3:32पॉलिटिशियन हमारा एंप्लई है और हम उसके
  109. 3:35एंप्लयर हैं। लेकिन हम बिहेव ऐसे करते हैं
  110. 3:37जैसे पॉलिटिशियन हमारा फेवरेट सुपर हीरो
  111. 3:39हो या हमारी फेवरेट आईपीएल टीम हो। और फिर
  112. 3:41अगर कोई आम आदमी पॉलिटिक्स में आता है तो
  113. 3:44आम आदमी। हम उसमें प्रॉब्लम ढूंढना शुरू
  114. 3:46कर देते हैं कि ये तो इतना यंग है। इसको
  115. 3:48एक्सपीरियंस क्या है? इसकी पर्सनालिटी
  116. 3:50स्ट्रांग नहीं है। ये तो बहुत सिंपल है।
  117. 3:51ये पावरफुल नहीं लगता। इसमें लीडरशिप वाली
  118. 3:54बात नहीं है। ये खांसता बहुत है आम आदमी।
  119. 3:57मजाक कर रहा हूं। मजाक है। ठीक है।
  120. 3:59चढा समझाओ इसे। समझाओ।
  121. 4:01लीडरशिप वाली बात नहीं का एक्सजेक्टली
  122. 4:03मतलब क्या है? अगर एक 28 साल का नॉर्मल
  123. 4:05एजुकेटेड आदमी पॉलिटिक्स में आए जो
  124. 4:06तुम्हारी तरह मेट्रो में ट्रेवल करता हो,
  125. 4:08ईएमआई देता हो, जॉब करता हो तो वो
  126. 4:10पॉलिटिशियन बनने के लायक क्यों नहीं है?
  127. 4:12या हमें सिर्फ वही आदमी चाहिए जिसके आसपास
  128. 4:1450 लोग चल रहे हो। हमें अपने जैसे लोग
  129. 4:16पॉलिटिक्स में क्यों नहीं चाहिए? लेकिन
  130. 4:18आयरनी यह है हम अपने जैसे लोगों को वोट
  131. 4:20नहीं करते। हम हीरो चाहते हैं। हम ढूंढते
  132. 4:22हैं दादा, कोई दादा मिले। और फिर हम
  133. 4:24कंप्लेन करते हैं कि नॉर्मल एजुकेटेड
  134. 4:27डिसेंट लोग पॉलिटिक्स में क्यों नहीं आते?
  135. 4:29नो गॉड प्लीज नो।
  136. 4:31मतलब आप बात को समझ रहे हो ना? शायद वो
  137. 4:33इसलिए नहीं आते क्योंकि उन्होंने हमें देख
  138. 4:35लिया है कि हम कैसे वोट करते हैं। वी डोंट
  139. 4:37नीड अ गुड पॉलिटिशियन। वी नीड अ परफेक्ट
  140. 4:39पॉलिटिशियन। हम नए पॉलिटिशियन से तो
  141. 4:41परफेक्शन एक्सपेक्ट करते हैं। पर अगर कोई
  142. 4:43इस्टैब्लिश्ड पॉलिटिशियन है तो उसमें भले
  143. 4:45ही 10 गलतियां हो। हम उसको टोलरेट कर
  144. 4:47लेंगे। लेकिन अगर कोई नया आदमी पॉलिटिक्स
  145. 4:48में आ रहा है तो हम बोलेंगे इसने ये गलती
  146. 4:51क्यों की? इसने ये स्टेटमेंट क्यों दिया?
  147. 4:52इसको यह नहीं पता इसका एक्सपीरियंस कितना
  148. 4:55है।
  149. 4:55नमक कम है, जोड़ी सही नहीं है, टेंट सही
  150. 4:59नहीं है।
  151. 4:59और धीरे-धीरे हम उसे एक इंपॉसिबल
  152. 5:01स्टैंडर्ड पे जज करने लग पर यहां मैं
  153. 5:03लिटरल क्राइम या करप्शन की बात नहीं कर
  154. 5:05रहा हूं। वो अकाउंटेबिलिटी वहां पर होनी
  155. 5:07चाहिए। सोचो अगर आप एक कंपनी के लिए
  156. 5:09एंप्लई हायर कर रहे हो तो आप उसमें क्या
  157. 5:10देखोगे कि यह काम कर सकता है कि नहीं?
  158. 5:12ऑनेस्ट है कि नहीं? रिस्पांसिबिलिटी लेता
  159. 5:14है, गलती होने पर एक्सेप्ट करता है,
  160. 5:16इंप्रूव करता है और अगर रिपीटेडली परफॉर्म
  161. 5:18नहीं करता तो फायर हिम। बस पॉलिटिक्स में
  162. 5:20भी आइडियली यही होना चाहिए। कोई
  163. 5:22पॉलिटिशियन परफेक्ट नहीं होता। क्या
  164. 5:24ह्यूमन बीइंग भी कोई परफेक्ट नहीं होता?
  165. 5:26प्रॉब्लम यह है कि हम पॉलिटिशियन को
  166. 5:27एंप्लई नहीं समझते। और एक प्रॉब्लम जो
  167. 5:29शायद सबसे ज्यादा हमारे अंदर है कि हम एक
  168. 5:32बार किसी पॉलिटिशियन को सही या गलत मान
  169. 5:34लेते हैं तो उसके बाद हमारे लिए अपनी
  170. 5:35ओपिनियन बदलना बहुत मुश्किल हो जाता है।
  171. 5:37एक बार जो मैंने कमिटमेंट कर दी। उसके बाद
  172. 5:40तुम्हें खुद की भी नहीं सुन।
  173. 5:42क्योंकि किसी पॉलिटिशियन को गलत मानना
  174. 5:44सिर्फ उस पॉलिटिशियन को गलत मानना नहीं
  175. 5:46होता है। कहीं ना कहीं यह एक्सेप्ट करना
  176. 5:47भी होता है कि हां हम भी गलत और यह हमारे
  177. 5:50लिए बहुत अनकंफर्टेबल है। अगर मैंने किसी
  178. 5:51पॉलिटिशियन को सपोर्ट किया है, उसके लिए
  179. 5:53आर्गुमेंट्स किए हैं। उसके अगेंस्ट बोलने
  180. 5:55वालों से लड़ा हूं, सोशल मीडिया पे उसको
  181. 5:57डिफेंड किया है, तो कल अगर मुझे कोई
  182. 5:59एविडेंस मिलता है कि उस पॉलिटिशियन ने कोई
  183. 6:00डिसीजन गलत लिया था, तो मेरे दिमाग को ये
  184. 6:02एक्सेप्ट करना पड़ेगा कि शायद मेरी चॉइस
  185. 6:04गलत थी और हम अपनी चॉइस को गलत मानना नहीं
  186. 6:07चाहते। इसलिए हम फैक्ट्स को ऑब्जेक्टिवली
  187. 6:09देखने के बजाय अपने फेवरेट पॉलिटिशियन के
  188. 6:11फेवर में एक्सप्लेनेशन ढूंढने लग। अगर
  189. 6:13हमारा पॉलिटिशियन कुछ अच्छा करे तो हम
  190. 6:15बोलेंगे कि देखा मैंने कहा था मैंने। और
  191. 6:18अगर वही पॉलिटिशियन कुछ गलत करे तो हम
  192. 6:20बोलेंगे अरे तो वो दूसरे तो इनसे भी
  193. 6:21ज्यादा गलत करते हैं। ये सिर्फ पॉलिटिक्स
  194. 6:23में नहीं होता है। ये नॉर्मल लाइफ में भी
  195. 6:25होता है। लेकिन पॉलिटिक्स में इसका
  196. 6:26इंपैक्ट बहुत बड़ा होता है। क्योंकि यहां
  197. 6:28हम सिर्फ एक ओपिनियन नहीं डिफेंड कर रहे
  198. 6:30होते। हम अपनी पूरी आइडेंटिटी और अपने
  199. 6:31जजमेंट को डिफेंड कर रहे होते हैं। और जब
  200. 6:33हम किसी पॉलिटिशियन को अपनी आइडेंटिटी का
  201. 6:35पार्ट बना लेते हैं तो उसका क्रिटिसिज्म
  202. 6:37हमें अपना क्रिटिसिज्म लगता है। इसलिए
  203. 6:39शायद एक मैच्योर वोटर की सबसे इंपॉर्टेंट
  204. 6:41क्वालिटी ये नहीं होती है कि वो अपने
  205. 6:42पॉलिटिशियन को कितना स्ट्रांगली सपोर्ट
  206. 6:44करता है। सबसेेंट क्वालिटी यह होती है कि
  207. 6:46वो अपना माइंड चेंज करने के लिए कितना
  208. 6:48रेडी है। क्योंकि अगर हमने किसी को वोट दे
  209. 6:49दिया इसका मतलब यह नहीं कि अब हम उसकी हर
  210. 6:51गलती भी डिफेंड करें। वोट लॉयल्टी कार्ड
  211. 6:54नहीं है, परफॉर्मेंस रिव्यु है। चलिए अब
  212. 6:56लेनदेन की बात कर लेते हैं। भाई मतलब
  213. 6:59पॉलिटिक्स इज एक्सपेंसिव। इस बारे में बात
  214. 7:01मैंने अपने पिछले वीडियो में भी की थी।
  215. 7:03अभी भी थोड़ा सा ब्रीफ में आपको समझा देता
  216. 7:04हूं। पॉलिटिक्स इज एक्सपेंसिव। बहुत
  217. 7:07ज्यादा एक्सपेंसिव। आज के टाइम में अगर आप
  218. 7:09पॉलिटिक्स में एंट्री लेना चाहते हो तो
  219. 7:11सबसे पहले एक बेसिक प्रॉब्लम आपके सामने
  220. 7:13आती है विजिबिलिटी की। आपके लोगों को पता
  221. 7:15तो होना चाहिए कि आप एक्सिस्ट करते हो और
  222. 7:17विजिबिलिटी फ्री नहीं है। बैनर, पोस्टर,
  223. 7:20होल्डिंग, सोशल मीडिया, एडवरटाइजिंग,
  224. 7:23कैंपेनिंग, इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग। कोई
  225. 7:25भी अपनी खून पसीने की कमाई इसमें कभी नहीं
  226. 7:27लगाएगा। या तो दो नंबर का पैसा लगता है या
  227. 7:30किसी बड़े बिजनेसमैन से डोनेशन लगता है और
  228. 7:32डोनेशन से इलेक्शन जीतने के बाद वह
  229. 7:33पॉलिटिशियन आपका एंप्लई नहीं होता है। उस
  230. 7:35बिजनेसमैन का एंप्लई बन जाता है।
  231. 7:43और बाकी इसके बारे में मैंने बहुत डिटेल
  232. 7:44में बात अपने पिछले पॉलिटिक्स वाले वीडियो
  233. 7:46में की है। तो आप वो जाके देख लेना। मैं
  234. 7:48एंड में इधर कहीं लगा दूंगा। कुल मिला के
  235. 7:50बाद का पॉइंट यह है कि पैसे के बिना
  236. 7:52ईमानदार आदमी तो पॉलिटिक्स में आ ही नहीं
  237. 7:54सकता। अब वापस से वही सवाल आ जाता है कि
  238. 7:56वेयर आर ऑल द गुड पॉलिटिशियंस? मुझे लगता
  239. 7:58है इसका आंसर थोड़ा अनकंफर्टेबल है। वो
  240. 8:01हैं लेकिन वो ढूंढने से मिलेंगे ना कि
  241. 8:03टहलते टहलते बस पोलिंग बूथ पे पहुंचे और
  242. 8:05सीधा ईवीएम में नाम और ऊपर के चार सिंबल
  243. 8:07दे के कोई भी बटन दबा के घर आ गए। हमें हर
  244. 8:09कॉन्स्टिट्यूएंसी में बेटर कैंडिडेट्स
  245. 8:11चाहिए। हर लेवल पर, म्यनिसिपल लेवल पर,
  246. 8:12स्टेट लेवल, पार्लियामेंट, लोकल पॉलिटिक्स
  247. 8:14और इसके लिए हमें पॉलिटिशियंस को देखने का
  248. 8:17तरीका बदलना पड़ेगा। हमें पॉलिटिशियंस में
  249. 8:20ऐसे लोग ढूंढने पड़ेंगे जो हमारे जैसे हो
  250. 8:22जो परफेक्ट ना हो जो कभी गलती करें लेकिन
  251. 8:25रिस्पांसिबिलिटी लें जो डिसए्रीमेंट
  252. 8:27टोलरेट करें जो हर वक्त कैमरा के सामने
  253. 8:29परफॉर्मेंस नहीं करने लगे जो सिर्फ
  254. 8:31पावरफुल नहीं दिखना चाहते हो हर समय काम
  255. 8:33करना चाहते हो तो अगली बार इलेक्शन आए तो
  256. 8:35सिर्फ ऊपर के टॉप चार नाम मत देखो सिर्फ
  257. 8:38पार्टी के सिंबल मत देखो और सोशल मीडिया
  258. 8:40पे वायरलिटी मत देखो पूरी कैंडिडेट लिस्ट
  259. 8:42देखो उसको स्टडी करो पता करो कौन कितना
  260. 8:44क्वालीिफाइड है क्या है और हो सकता है कि
  261. 8:46ईवीएम की उस लंबी लिस्ट में कोई ऐसा नाम
  262. 8:48हो जिसके बारे में आपने कभी ना सुना हो और
  263. 8:50हो सकता है कि वो सबसे क्वालिफाइड हो,
  264. 8:52सबसे ट्रांसपेरेंट हो और सबसे अच्छा ट्रैक
  265. 8:54रिकॉर्ड वाला हो। लेकिन वो परफेक्ट ना हो।
  266. 8:56रिसेंटली सोनम वांगचुक जी ने भी एक वीडियो
  267. 8:58डाली और बोला कि हमारे आधे से ज्यादा
  268. 9:00पॉलिटिशियंस करप्ट हैं या क्रिमिनल केसेस
  269. 9:02वाले हैं। तो आप ऐसे लोगों के नाम सजेस्ट
  270. 9:03करो जो आपके हिसाब से अच्छे हैं पॉलिटिक्स
  271. 9:05में आने के लिए या जो पहले से हैं मतलब
  272. 9:07अच्छे लोगों के नाम सजेस्ट करो। तो आप
  273. 9:09उनसे एग्री करो या ना करो। आपके हिसाब से
  274. 9:10जो भी आपके पांच हैं उनका नाम आप कमेंट कर
  275. 9:13देना। हम डिस्कस करके कमेंट में कुछ
  276. 9:15सॉल्यूशन निकालेंगे और जरूरी नहीं है कि
  277. 9:16उन पांच में से जो नाम हो वो सारे फेमस
  278. 9:18हो। हमें अच्छे लोगों को ढूंढ के फेमस
  279. 9:21करना पड़ेगा और क्या पता जो नाम आप लोग
  280. 9:23कमेंट करो उन्हीं नामों में हमारे देश का
  281. 9:25अगला लीडर छुपा हो।
  282. 9:27बहुत-बहुत धन्यवाद। थैंक यू फॉर वाचिंग।
  283. 9:30सुनहरे हरा समंदर है ये सजीना।
  284. 9:33प्लीज यार मेरा नाम मत लिखना। ठीक है। मैं
  285. 9:35फीलिंग आपकी समझता हूं पर आई हैव रिटायर्ड
  286. 9:37फ्रॉम पॉलिटिक्स।

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