गरीब अंधी लड़की का अंडा अचार,भाभी ने समझा बोझ हैं,लेकिन दो बहनों ने अंडे का अचार बेचकर बदली किस्मत ! — Transcript
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- 0:00छत्तीसगढ़ के बिहोली गांव में राजुला नाम
- 0:02की एक अंधी लड़की रहती थी। वह गांव-गांव
- 0:05घूमकर चूड़ियां बेचती थी।
- 0:06राजुला अपने बड़े भाई, भाभी और अपनी छोटी
- 0:09बहन के साथ रहती थी। राजुला की शादी कुछ
- 0:11साल पहले हुई थी। लेकिन उसकी आंखों की
- 0:14रोशनी ना होने के कारण ससुराल वालों ने
- 0:16उसे बोझ समझ लिया और हमेशा के लिए मायके
- 0:19छोड़ गया। [संगीत] तब से वह अपने बड़े
- 0:21भाई, भाभी और छोटी बहन बिता के साथ रह रही
- 0:24थी। वह जन्म से ही अंधी थी। [संगीत] फिर
- 0:26भी चूड़ियां बेचकर अपना और अपने परिवार की
- 0:29आर्थिक मदद करती थी। नेत्रहीन होने के बाद
- 0:31भी वह किसी पर बोझ [संगीत] बनना नहीं
- 0:33चाहती थी। फिर भी भाभी हमेशा ताना देती
- 0:36रहती थी।
- 0:36पता नहीं कब तक हम इसका बोझ उठाते रहेंगे।
- 0:39इसके ससुराल वालों ने तो इसे हमारे सिर पर
- 0:41[संगीत] छोड़ दिया। इसका खर्चा और
- 0:43जिम्मेदारी हम कब तक उठाएंगे। तुम्हारे
- 0:46भैया भी परदेस में कब [संगीत] तक मजदूर की
- 0:48तरह खटेंगे? तुम दोनों का बोझ उठाने के
- 0:51लिए।
- 0:52सुबह-सुबह भाभी की कड़वी आवाज पूरे घर में
- 0:54गूंज रही थी। इसके
- 0:56राजुला चुपचाप अपने कमरे में बैठी थी। वह
- 0:58भले ही देख नहीं सकती थी लेकिन अपनी भाभी
- 1:01के हर ताने को साफ महसूस कर सकती थी।
- 1:04राजुला की सबसे बड़ी सहारा उसकी बहन बिता
- 1:06थी।
- 1:07बिता सुबह उठते ही घर का काम संभालती। फिर
- 1:10अपनी दीदी को नहलाती खाना खिलाती और उसकी
- 1:13जरूरत की हर चीज उसके हाथ में। मुझे क्यों
- 1:16नहीं जाने देती हो चूड़ियां [संगीत]
- 1:17बेचने? आज से मैं जाऊंगी। नहीं बिनता मैं
- 1:21घर पर बैठकर क्या करूंगी? और भाभी का ताना
- 1:24तो सुनती हो ना? अगर काम नहीं करूंगी तो
- 1:26हम दोनों को खाना भी नहीं मिलेगा।
- 1:28राजुला चूड़ियां बेचने निकल [संगीत] जाती
- 1:30हैं। तब बिता घर के काम निपटाने के बाद
- 1:32अपनी प्यारी मुर्गी लाजो को दाना खिलाती
- 1:34है।
- 1:35लाजो ही उसकी सबसे प्यारी साथी थी। लेकिन
- 1:38बिता दिन भर कितना भी काम कर ले भाभी का
- 1:41ताना खत्म नहीं होता था।
- 1:42तुम्हारी दीदी के कारण ही घर का खर्च बढ़
- 1:45रहा है। उसके ससुराल वालों ने तो पीछा
- 1:47छुड़ा लिया। अब जिंदगी भर हमें ही इसका
- 1:49बोझ उठाना पड़ेगा।
- 1:52तुम लोग का खर्च उठाने के लिए तुम्हारे
- 1:54भैया भी परदे कमाने चले गए हैं। आखिर कब
- 1:56तक तुम दोनों बहनों का बोझ उठाता रहे? भर
- 1:59बिता सब सुनकर चुप रहती। वह अपनी दीदी को
- 2:02दुखी नहीं करना चाहती थी। भाभी की बातें
- 2:04सुनकर बिता की आंखों में आंसू आ गए। बिता
- 2:07मन ही मन सोचने लगी।
- 2:08मेरी दीदी ने किसी का क्या बिगाड़ा है। वह
- 2:11तो खुद से कुछ कर भी नहीं सकती। [संगीत]
- 2:13फिर भी घर खर्च में मदद कर सके इसलिए
- 2:15गांव-गांव जाकर चूड़ियां भी बेचती हैं।
- 2:17[संगीत] फिर भी भाभी उसे बोझ क्यों समझती
- 2:20हैं? उस दिन बिता ने मन ही मन ठान [संगीत]
- 2:22लिया कि वह अपनी दीदी राजुल्ला को कभी खुद
- 2:24को अकेला महसूस नहीं होने देगी। राजुला
- 2:27अपनी लाठी के सहारे चूड़ियों की टोकरी
- 2:29लेकर गांव की गलियों में निकल पड़ी। वह
- 2:32धीरे-धीरे आवाज लगाती हुई कहती,
- 2:34चूड़ियां ले लो। सुंदर-सुंदर रंगीन
- 2:37चूड़ियां
- 2:37कुछ लोग उसकी मजबूरी समझते थे।
- 2:39वे चूड़ियां पसंद करके ईमानदारी से पूरे
- 2:42पैसे देते और कहते बहन
- 2:44भगवान तुम्हें हमेशा खुश रखे। लेकिन हर
- 2:47इंसान एक जैसा नहीं होता था। कुछ लोग
- 2:50राजुला की आंखों की कमजोरी का [संगीत]
- 2:51फायदा उठाते थे। कोई चूड़ियां लेकर कम
- 2:54पैसे उसके हाथ में रख देता तो कोई पैसे
- 2:56दिए बिना ही आगे बढ़ जाता। राजुला को कई
- 2:59बार अंदाजा हो जाता कि उसके साथ धोखा होता
- 3:01है। लेकिन वह किसी से झगड़ा नहीं करती।
- 3:04उसे पता था एकमात्र
- 3:06[संगीत]
- 3:06यही काम था जिसकी वजह से वह अपने घर में
- 3:08रह सकती है। वह बस अपनी लाठी संभालती और
- 3:11अगले घर की ओर बढ़ जाती। एक दिन [संगीत]
- 3:13एक आदमी ने चूड़ियों का पूरा गुच्छा ले
- 3:15लिया और राजुला के हाथ में बहुत कम पैसे
- 3:18रखकर चला गया। राजुला ने सिक्कों [संगीत]
- 3:20को हाथ से टटोलते हुए गिनने की कोशिश की।
- 3:23फिर समझ गई कि उसके साथ धोखा हुआ है। उसकी
- 3:26आंखों में आंसू आ गए लेकिन उसने खुद को
- 3:28संभाल लिया।
- 3:29मैं देख नहीं सकती। इसका मतलब यह तो नहीं
- 3:31कि मैं मेहनत नहीं कर सकती। [संगीत] लेकिन
- 3:33मेहनत करती हूं तो लोग मेरे साथ ऐसा क्यों
- 3:35करते हैं।
- 3:37वह अपनी टोकरी उठाकर फिर आगे बढ़ गई। उसे
- 3:40उम्मीद थी कि [संगीत] एक दिन उसकी मेहनत
- 3:41जरूर रंग लाएगी।
- 3:44उधर घर पर बिता की प्यारी मुर्गी लाजो ने
- 3:47भी अंडे देने शुरू कर दिए थे। बिता खुशी
- 3:49से लाजो के पास बैठकर अंडों को देख रही
- 3:52थी। वह मन ही मन सोच रही थी।
- 3:55कुछ दिनों बाद इन अंडों से ढेर सारे चूजे
- 3:58निकलेंगे। फिर हमारे पास बहुत सारी
- 4:00मुर्गियां और अंडे होंगे। [संगीत] मैं भी
- 4:02दीदी की थोड़ी मदद कर पाऊंगी।
- 4:05अगर अंडे बेचकर कुछ पैसे जमा हो गए तो मैं
- 4:08दीदी की आंखों का इलाज करवाऊंगी। मेरी
- 4:10दीदी की आंखों की रोशनी वापस आ जाएगी। फिर
- 4:12कोई उन्हें बोझ नहीं कहेगा।
- 4:14तभी राजुला अपनी चूड़ियों की टोकरी लेकर
- 4:16वापस आ गई। बिता दौड़कर उसके पास गई और
- 4:18खुशी से बोली
- 4:20दीदी आ गई। बताओ आज कैसी रही कमाई? सारी
- 4:23चूड़ियां [संगीत] बिक गई।
- 4:24राजुला ने थके हुए चेहरे से मुस्कुराने की
- 4:26कोशिश की और अपनी मुट्ठी में रखे कुछ पैसे
- 4:29बिता के हाथ पर रख दिए। बस इतने ही मिले।
- 4:33बिनता ने पैसे गिने तो उसका चेहरा उतर
- 4:35गया।
- 4:36दीदी लेकिन आपकी टोकरी में तो 25 दर्जन
- 4:38चूड़ियां थी। यह पैसे तो मुश्किल से दो
- 4:40चार दर्जन चूड़ियों के ही लग रहे हैं।
- 4:41क्या करूं बिता? लोगों ने मेरी मजबूरी का
- 4:44फायदा उठाते हैं। कुछ लोग चूड़ियां लेकर
- 4:47बिना पैसे दिए चले गए होंगे और कुछ ने
- 4:50शायद पैसे दिए भी होंगे तो बहुत कम। मुझे
- 4:53दिखाई नहीं देता ना। इसी बात का फायदा उठा
- 4:55रहे हैं लोग। मैं मेहनत करके कमाना चाहती
- 4:57हूं बिता। किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना
- 5:00चाहती। लेकिन लगता है मेरी अंधेरी आंखों
- 5:02को देखकर लोग मेरी मेहनत की भी कीमत नहीं
- 5:04समझते।
- 5:06बिनता ने तुरंत अपनी दीदी का हाथ पकड़
- 5:08लिया।
- 5:08दीदी आप दुखी मत हो। मैं हूं ना आपके साथ।
- 5:12हम दोनों मिलकर जरूर कुछ ऐसा करेंगे कि
- 5:14किसी को आपको बोझ कहने की हिम्मत नहीं
- 5:16होगी।
- 5:17दीदी अब से चूड़ियां बेचने मैं जाऊंगी।
- 5:20मेरे साथ कोई दगाबाजी नहीं कर पाएगा। बिता
- 5:23ने राजुला से कहा। राजुला ने तुरंत मना
- 5:26करते हुए कहा।
- 5:26नहीं [गला साफ़ करने की आवाज़] बहन तू
- 5:27जाएगी तो घर का काम कौन करेगा?
- 5:30भाभी [नाक से की जाने वाली आवाज़] पहले ही
- 5:31तुझसे नाराज रहती हैं। दीदी घर का काम भी
- 5:34कर लूंगी और चूड़ियां भी बेच आऊंगी। तुम
- 5:37बस घर पे रहो।
- 5:39दीदी अब से चूड़ियां बेचने मैं जाऊंगी।
- 5:42मेरे साथ कोई दगाबाजी नहीं कर पाएगा। नहीं
- 5:45बहन तू जाएगी तो।
- 5:47अगले दिन बिता चूड़ियों की टोकरी लेकर
- 5:49बाजार के लिए निकल पड़ी। लेकिन रास्ते में
- 5:51अचानक एक बाइक से उसकी टक्कर हो गई और वह
- 5:54सड़क पर गिर पड़ी। बाइक चलाने वाले युवक
- 5:56का नाम राहुल था। उसने तुरंत बिंदा
- 5:58[संगीत] को उठाया। उसके घायल पैर पर पट्टी
- 6:01करवाई और उसे उसके घर तक छोड़ने चला आया।
- 6:04घर पर कोई है क्या?
- 6:06घर के दरवाजे पर राहुल ने आवाज लगाई।
- 6:08राजुला आवाज सुनकर बाहर निकली। राहुल ने
- 6:11बिता के घायल होने के बारे में राजुला को
- 6:13बताया। यह सब सुनकर राजुला घबरा गई।
- 6:16बिंता यह क्या हो गया?
- 6:19दीदी मैं ठीक हूं। सब मेरी वजह से हुआ है।
- 6:23मैंने ही तुझे चूड़ियां बेचने भेजा
- 6:25[संगीत] था। अगर मैं ना कहती तो तुझे चोट
- 6:27नहीं लगती।
- 6:29दीदी, मैं ठीक हूं। सब मेरी वजह से हुआ
- 6:33है। मैंने ही तुझे चूड़ियां बेचने भेजा
- 6:35था। [संगीत] अगर मैं ना कहती तो तुझे चोट
- 6:37नहीं लगती।
- 6:38तभी भाभी भी वहां आ गई और ताना मारते हुए
- 6:40बोली,
- 6:41एक तो पहले से ही घर पर बोझ बनी हुई है।
- 6:43अब दूसरी का भी पैर तुड़वा लाई। अब इसका
- 6:45जिम्मेदारी भी मेरे पति को ही उठानी
- 6:46पड़ेगी।
- 6:48राहुल ने सब सुन लिया। उसे दोनों बहनों की
- 6:50मजबूरी देखकर बहुत दुख हुआ। उसने हाथ
- 6:53जोड़कर कहा,
- 6:54मुझे माफ कर दीजिए। गलती मेरी वजह से हुई
- 6:56है। मैं ध्यान [संगीत] से बाइक चला रहा
- 6:58होता तो बिता को चोट नहीं लगती।
- 7:00इतना कहकर राहुल वहां से चला गया। राहुल
- 7:03के जाने [संगीत] के बाद दोनों बहनें
- 7:04चुपचाप बैठी रही। तभी भाभी फिर बोली,
- 7:07अब घर का काम कौन करेगा? मुफ्त में खाना
- 7:10नहीं मिलेगा। या तो काम करो या राशन का
- 7:12खर्चा दो।
- 7:13राजुला की आंखों में आंसू आ गए।
- 7:15तू चिंता मत [संगीत] कर बहन। अब मैं
- 7:17चूड़ियां बेचने जाऊंगी। नहीं दीदी,
- 7:19तुम्हें दिखाई नहीं देता। अकेले कहीं कुछ
- 7:21हो गया तो जब मेरा पैर ठीक हो जाएगा तब
- 7:23मैं जाऊंगी। नहीं बिनता मैं बोझ बनकर नहीं
- 7:26बैठ सकती। दीदी हमारी लाजों ने अंडे दिए
- 7:29हैं। कुछ ही दिनों में उनसे चूजे
- 7:30निकलेंगे। हम उन्हें पा लेंगे। धीरे-धीरे
- 7:32हमारे पास बहुत सारी मुर्गियां हो जाएंगी।
- 7:34फिर हमारी मुर्गियां ढेर सारे अंडे देंगी।
- 7:37उन्हीं अंडों से हम अचार बनाएंगे। मैंने
- 7:39अपनी एक सहेली के घर खाया था। बहुत
- 7:41स्वादिष्ट था और उन्हें बेचकर तुम्हारी
- 7:43आंखों का इलाज कराएंगे।
- 7:44राजुला कुछ पल चुप रही। उसके चेहरे पर
- 7:47पहली बार हल्की सी उम्मीद दिखाई दी। कुछ
- 7:49ही दिनों बाद लाजो के दिए अंडों से एक-एक
- 7:51[संगीत] करके ढेर सारे छोटे-छोटे चूजे
- 7:53निकलने लगे। बिता उन्हें देखकर बहुत खुश
- 7:56होती। वह रोज उन्हें दाना पानी देती और
- 7:59बड़े प्यार से उनकी देखभाल करती। समय
- 8:01बीतता गया और वे छोटे-छोटे चूजे बड़ी होकर
- 8:04मुर्गियां बन गई। अब घर में कई मुर्गियां
- 8:07थी और वे रोज ढेर सारे अंडे देने लगी। एक
- 8:10दिन बिता ने खुश होकर कहा
- 8:12दीदी अब हमारे पास इतने अंडे [संगीत] हैं
- 8:14कि हम अंडे का अचार बना के बेच सकते हैं।
- 8:17लेकिन अचार बनाएंगे कैसे? पहले
- 8:20फिर बिता और राजुला दोनों अंडे के अचार
- 8:22बनाने की तैयारी करने लगे। बिता राजुला को
- 8:24अचार बनाने की पूरी विधि समझाने लगी। पहले
- 8:27अंडों को अच्छी तरह उबालना है। फिर ठंडा
- 8:29करके उनका छिलका उतारना है। उसके बाद
- 8:31सरसों का तेल गर्म करके उसमें राई, सौंफ,
- 8:34मेथी, हल्दी, लाल मिर्च और नमक डालना है।
- 8:36मसाला अच्छी तरह भुन जाए तो उसमें अंडे
- 8:39डालकर धीरे-धीरे मिलाना है। फिर अचार को
- 8:42साफ और सूखे मर्तबान में भरकर कुछ समय
- 8:45रखना है।
- 8:46राजुला ध्यान से उसकी सारी बातें सुनती
- 8:48रही और बिता के बताए अनुसार अंडों का अचार
- 8:51तैयार करने लगी। कुछ देर बाद पूरे घर में
- 8:54मसालों की खुशबू [संगीत] फैल गई।
- 8:56अगले दिन राजुला अचार की टोकरी लेकर बाजार
- 8:59पहुंची।
- 9:00वह दुकान के पास बैठकर आवाज लगाने लगी।
- 9:02अंडे का अचार ले लो। घर का बना स्वादिष्ट
- 9:06अंडे का अचार। लेकिन काफी देर [संगीत] तक
- 9:08कोई उसके पास नहीं आया। लोग देखते और आगे
- 9:11बढ़ जाते। राजुला का मन उदास हो गया। फिर
- 9:14भी वह उम्मीद लगाए बैठी रही। अगले दिन भी
- 9:17वह वही अचार लेकर बाजार पहुंची। लेकिन उस
- 9:19दिन भी कोई ग्राहक घर का बना।
- 9:21उसी समय राहुल बाजार से गुजर रहा था। उसने
- 9:24राजुला को देखा। वह कुछ देर दूर खड़ा होकर
- 9:27देखता रहा।
- 9:27इतनी सुंदर और सीधी साधी लड़की जिसे दिखाई
- 9:31भी नहीं देता। फिर भी अपने पैरों पर खड़े
- 9:33होने के लिए इतनी मेहनत कर रही है। ऊपर से
- 9:35घर में भी उसे ताने सुनने पड़ते थे।
- 9:37राहुल के मन में राजुला के लिए सम्मान
- 9:39पैदा होने लगा और धीरे-धीरे उसके मन में
- 9:42उसके लिए एक खास लगाव भी जन्म लेने लगा।
- 9:45मैं अचार बेचने में राजुला की मदद कर देता
- 9:47हूं। मैं उससे अचार खरीद कर गांव-गांव ले
- 9:49जाकर बेच दूंगा और उसके अचार की पूरी कीमत
- 9:52दूंगा। लेकिन अगर मैं उसे पूरा पैसा अभी
- 9:54दे दूंगा तो शायद बाद में वह मुझसे बाकी
- 9:56पैसे नहीं लेगी। इसलिए मैं उससे कहूंगा कि
- 9:58अभी आधी कीमत दे रहा हूं बाकी बाद में
- 10:00दूंगा। फिर जो अचार बेचकर पैसे आएंगे वह
- 10:02भी उसे दे दूंगा। इससे राजुला की मदद हो
- 10:04जाएगी।
- 10:04वो राजुला के पास गया और बोला
- 10:06यह अंडे का अचार कितने का है?
- 10:08राजुला ने कीमत बताई।
- 10:10राहुल ने थोड़ा अचार चख कर देखा। स्वाद
- 10:12लेते ही [संगीत] उसके चेहरे पर मुस्कान आ
- 10:14गई।
- 10:15अरे यह तो बहुत स्वादिष्ट है। मुझे तो
- 10:18यकीन ही नहीं हो रहा कि इतना अच्छा अचार
- 10:20यहां कोई खरीद नहीं रहा। आपके पास जितना
- 10:22अचार है सब मुझे दे।
- 10:23राजुला हैरान हो गई। राहुल ने उसे उसकी
- 10:25मेहनत का सही दाम दिया और कहा
- 10:27मैं अभी आधी कीमत दे रहा हूं आधी बाद में
- 10:29दूंगा। अगर यह अचार मुझे पसंद आया तो आगे
- 10:31इससे भी ज्यादा कीमत दूंगा।
- 10:32लेकिन राहुल ने पूरे पैसे से भी ज्यादा
- 10:34दिए और राजुला को बताया कि आधी दाम दे रहा
- 10:37हूं अभी। राजुला के चेहरे पर खुशी आ गई।
- 10:39वह खाली टोकरी लेकर घर लौट आई। इधर राहुल
- 10:42अचार को खरीद कर सारी बोतलें अपने साथ
- 10:45लेकर आसपास के गांवों में घूमने लगा। जहां
- 10:48भी कोई मिलता उसे अचार चखाता। भाई
- 10:51जिसने भी चखा वह बोल उठा अरे वाह ऐसा अचार
- 10:55तो पहले कभी नहीं खाया। लोग पूछते भाई यह
- 10:58अचार मिलता कहां है?
- 11:00[गला साफ़ करने की आवाज़] राहुल मुस्कुरा
- 11:01कर कहता
- 11:01बिहोली गांव में राजुला नाम की एक लड़की
- 11:03बनाती है।
- 11:04अच्छा अगली बार हमारे लिए भी जरूर लाना।
- 11:08राहुल को अचार की बहुत अच्छी कीमत मिली।
- 11:10वह एक भी पैसा अपने पास नहीं रखता और सारी
- 11:13कमाई लेकर राजुला के पास पहुंच गया। यह
- 11:16आपके अचार के पूरे पैसे हैं।
- 11:18इतने सारे पैसे?
- 11:19आपने मेहनत की है इसलिए पूरा दाम मिलना ही
- 11:21चाहिए।
- 11:22धीरे-धीरे राजुला के अचार की चर्चा आसपास
- 11:24के गांवों में फैलने लगी। अब लोग खुद उसके
- 11:27घर आने लगे और अचार खरीद कर ले जाने लगे।
- 11:30बिता अपनी बहन की बढ़ती कमाई देखकर बहुत
- 11:32खुश थी। कुछ ही दिनों में उसका पैर भी
- 11:34पूरी तरह से ठीक हो गई और वह फिर से अपनी
- 11:37बहन के साथ काम में हाथ बटाने लगी। लेकिन
- 11:39राजुला की भाभी यह सब देखकर अंदर ही अंदर
- 11:42जलने लगी। जिस राजुला को वह हमेशा बोझ
- 11:44कहती थी,
- 11:46अब उसी के अचार की इतनी मांग होने लगी थी।
- 11:48एक दिन उसने मन ही मन सोचा,
- 11:50अगर राजुला के अचार का स्वाद ही खराब कर
- 11:53दूं, तो लोग इसे खरीदना बंद कर देना बंद
- 11:56कर देंगे।
- 11:58एक दिन राजुला की भाभी ने मौका देखकर सारे
- 12:00अचार के बड़े मटके में बहुत ज्यादा नमक और
- 12:03लाल मिर्च मिला दी। उसे लगा कि अब अचार का
- 12:06स्वाद खराब हो जाएगा और लोग राजुला का
- 12:08अचार खरीदना बंद कर देंगे। अगले दिन राहुल
- 12:10हमेशा की तरह राजुला से अचार लेकर गांव
- 12:12पहुंचा। जिन लोगों को पहले उसका अचार बहुत
- 12:15पसंद था, उन्होंने जैसे ही अचार चखा, सबके
- 12:18चेहरे बिगड़ गए। एक आदमी बोला,
- 12:21राहुल, यह कैसा अचार है? बहुत नमक मिर्च
- 12:25है। इतना खराब अचार तो हम नहीं खरीदेंगे।
- 12:30धीरे-धीरे लोगों ने अचार खरीदना बंद कर
- 12:32दिया।
- 12:33राहुल को भी समझ नहीं आया कि अचानक अचार
- 12:35का स्वाद इतना कैसे बदल गया। कुछ दिनों
- 12:38में राजुला की कमाई लगभग बंद हो गई। बिंता
- 12:40बहुत दुखी होकर बोली,
- 12:42दीदी, हम कितनी मुश्किल से आपकी आंखों के
- 12:45इलाज के लिए पैसे जमा कर रहे थे। [संगीत]
- 12:47अब अचार ही नहीं बिकेगा तो हम पैसे कैसे
- 12:49जुटाएंगे?
- 12:51चिंता मत कर बहन। मेहनत करने वालों का
- 12:54रास्ता कभी हमेशा के लिए बंद नहीं होता।
- 12:57अगले दिन दोनों बहनों ने बहुत सावधानी से
- 12:59फिर से अचार बनाया। इस बार अचार बिल्कुल
- 13:02स्वादिष्ट [संगीत] बना। रात को उन्होंने
- 13:04उसे घर के अंदर रखे बड़े मटके में भर दिया
- 13:06और सोने चली गई। लेकिन आधी रात को भाभी
- 13:09चुपके से उठी और मटके के पास पहुंच गई। इस
- 13:12बार उसके हाथ में नमक और मिर्च की पाउडर
- 13:14थी। वह फिर अचार खराब करने ही वाली थी कि
- 13:17तभी बिता पानी पीने के लिए कमरे से बाहर
- 13:19आई। तभी उसने अपने भाभी के हाथ में ढेर
- 13:22नमक और मिर्च की पाउडर देख लेती है।
- 13:24भाभी आप यह क्या कर रही हैं? कैसी भाभी
- 13:27हैं आप? भाभी तो मां जैसी होती है ना?
- 13:30भाभी घबरा [संगीत] गई। मेरी दीदी को दिखाई
- 13:32नहीं देता। फिर भी वह कितनी मुश्किल से
- 13:34मेहनत करती हैं। हम उनकी आंखों का इलाज
- 13:36कराने के लिए पैसे जोड़ रहे हैं और आप
- 13:39उनका आचार खराब कर रही हैं। बिंदा की आवाज
- 13:41सुनकर राजुला भी वहां आ गई। सारी बात
- 13:44सुनकर भाभी का सिर शर्म से झुक गया। उसे
- 13:47अपनी गलती का एहसास हुआ और वह राजुला से
- 13:49माफी मांगने लगी।
- 13:50मुझे माफ कर दो राजुला। मैं अपनी जलन में
- 13:53बहुत गलत कर बैठी। भाभी [संगीत] गलती मान
- 13:56लेना ही बड़ी बात है। आगे से ऐसा किसी के
- 13:58साथ मत करना। अगले दिन राजुला फिर अचार
- 14:00लेकर बाजार पहुंची। राहुल भी वहां आया।
- 14:02उसने अचार चखा तो उसके चेहरे पर फिर वही
- 14:05मुस्कान आ गई।
- 14:06अरे यह तो
- 14:07अब आया असली स्वाद।
- 14:08राहुल ने राजुला का सारा अचार खरीद लिया।
- 14:11लेकिन इस बार उसने अचार की कीमत से भी
- 14:13कहीं ज्यादा पैसे राजुला के हाथ में रख
- 14:15दिए। राजुला ने हैरान होकर पूछा, "इतने
- 14:18पैसे क्यों?" राहुल बोला, "यह ज्यादा नहीं
- 14:21है। आपके आचार के सही दाम है।" धीरे-धीरे
- 14:23[गला साफ़ करने की आवाज़] राजुला के पास
- 14:24इलाज के लिए पर्याप्त पैसे जमा हो गए।
- 14:26आखिरकार उसकी आंखों का ऑपरेशन हुआ और कुछ
- 14:29समय बाद उसकी आंखों की रोशनी वापस आ गई।
- 14:32जिस दिन राजुला ने पहली बार साफ देखा,
- 14:35उसने सबसे पहले अपनी बहन बिता का चेहरा
- 14:37देखा। दोनों बहनें खुशी से रो पड़ी। लेकिन
- 14:40राजुला ने अंडे का अचार बेचना नहीं छोड़ा।
- 14:43वह अब भी रोज अपनी टोकरी लेकर बाजार जाती
- 14:46थी। पर राजुला कुछ दिनों से जिस ग्राहक को
- 14:48ढूंढ रही थी, वो उसके आंखों की रोशनी आने
- 14:51के बाद उसके पास आया नहीं था।
- 14:53राहुल कुछ दिनों से बाजार नहीं आ रहा था।
- 14:55राजुला सोच रही थी
- 14:57वो ग्राहक [संगीत] कौन था मेरे लिए भगवान
- 14:59से कम नहीं था। उसी की वजह से मेरे सारे
- 15:03अचार [संगीत] बिकते थे। आज मैं अपनी आंखों
- 15:05से देख पा रही हूं। आज मैं अपनी आंखों से
- 15:08देख पा रही हूं। उसमें उसका बहुत बड़ा हाथ
- 15:11है।
- 15:13एक दिन राजुला अचार बेचकर घर लौट रही थी।
- 15:15रास्ते में उसे किसी की जानी पहचानी आवाज
- 15:18सुनाई दी। राजुला अचानक रुक गई। वह आवाज
- 15:21उसके लिए अनजान नहीं थी। पीछे देखा एक
- 15:23सुंदर जवान लड़का अपने किसी दोस्त के साथ
- 15:26बात कर रहा है।
- 15:26वही हो ना?
- 15:27राजुला उसके पास गई और बोली
- 15:30आप तो वही हो ना जो मेरी दुकान से रोज
- 15:33अचार खरीद कर ले जाते थे। जब मुझे दिखाई
- 15:36नहीं देता था तब भी तुमने मेरे काम पर
- 15:38भरोसा किया। तुमने सिर्फ मेरा अचार नहीं
- 15:40खरीदा था।
- 15:41नहीं वो लड़का मैं नहीं था।
- 15:44तुम झूठ मत बोलो। [संगीत] मैं तुम्हारी
- 15:46आवाज को पहचानती हूं। तुम झूठ क्यों बोल
- 15:49रहे हो?
- 15:51और मेरी आंखों की रोशनी आने के बाद मुझसे
- 15:53मिलने कभी क्यों नहीं आए?
- 15:55राहुल बोला राजुला
- 15:56आंखों की रोशनी आने के बाद मुझे लगा कि
- 15:59तुम मुझे अपनाओगी नहीं। इसलिए मैंने
- 16:01तुम्हें अपना-अपना परिचय नहीं दिया।
- 16:02[संगीत]
- 16:02ऐसा कुछ नहीं है जब तुम अनजान होते हुए भी
- 16:05मेरा सहारा बने।
- 16:08मैं भला तुम्हें कैसे भूल सकती हूं? मैं
- 16:10भला तुम्हें कैसे छोड़ सकती हूं? क्या हम
- 16:13आज [संगीत] से दोस्त बन सकते हैं?
- 16:18राजुला भी राहुल की अच्छाई [संगीत] से
- 16:20प्रभावित हुई और धीरे-धीरे दोनों में
- 16:22प्यार गहरा हो गया।
- 16:25कुछ महीने बाद राहुल ने राजुला से शादी की
- 16:27इच्छा जताई और राजुला ने भी अपनी खुशी से
- 16:30हां कर दी। शादी के दिन राजुल्ला की खुशी
- 16:33का ठिकाना नहीं था। उसका भाई परदेश से
- 16:35वापस आ गया और अपनी बहन की शादी धूमधाम
- 16:38करवाया।
- 16:40ओम मंगलम भगवान विष्णु मंगलम गरुड़ाध्वज
- 16:45स्वाहा।
- 16:46[संगीत]
- 16:46बिता को भी राजुला ने अपने साथ अपने घर ले
- 16:49गई क्योंकि वह जानती थी कि उसकी छोटी बहन
- 16:52ने उसके लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया था।
- 16:55बाद में बिता की शादी राजुला [संगीत] के
- 16:57देवरराज से कर दिया। अब दोनों बहन
- 16:59खुशी-खुशी एक ही घर में साथ-साथ रहने लगी।
- 17:02इस तरह जिस राजुला को कभी घर में बोझ
- 17:04[संगीत] कहा जाता था वही अपने मेहनत और
- 17:06हिम्मत से सम्मान प्यार और एक नया परिवार
- 17:09पाने में सफल हुई और उसके अंडे [संगीत] के
- 17:12अचार का काम भी चलता रहा क्योंकि राजुला
- 17:14के लिए वह सिर्फ कमाई का जरिया नहीं था
- 17:17बल्कि उसकी जिंदगी के संघर्ष और उसकी नई
- 17:20शुरुआत [संगीत] की निशानी बन चुका था। सीख
- 17:23किसी इंसान की कमजोरी को उसकी किस्मत मत
- 17:25समझो। सच्ची मेहनत, [संगीत] हिम्मत और
- 17:28अच्छे लोगों का साथ मिले तो जिंदगी कितनी
- 17:30भी अंधेरी क्यों ना हो एक दिन उसमें रोशनी
- 17:33[संगीत] जरूर लौटती है।
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This page contains the full transcript of गरीब अंधी लड़की का अंडा अचार,भाभी ने समझा बोझ हैं,लेकिन दो बहनों ने अंडे का अचार बेचकर बदली किस्मत ! by Pikku ki Duniya, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 3,353 words across 458 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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