आत्मदृष्टि : स्वामी ज्ञान अविर्भाव : Vision of the Self : Swami Gyan Avirbhav — Transcript
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- 0:03ओके
- 0:09अज्ञात से अज्ञात
- 0:13अज्ञात में जाते-जाते
- 0:21आपका मन आपकी बुद्धि
- 0:25सब खो जाएगी।
- 0:28यह दुनिया एब्सेंट हो जाएगा।
- 0:31वहां कोई दुनिया नहीं है। वहां कोई मन
- 0:35बुद्धि नहीं है। शरीर नहीं है।
- 0:38केवल अज्ञात है।
- 0:42वह है शुद्ध चेतन।
- 0:48वह चेतन सत्ता में जो जैसे भाव करता है वह
- 0:54वैसे ही हो जाता है।
- 0:57जैसे हवा की सत्ता है,
- 1:00आकाश की सत्ता है, चेतन की भी सत्ता है।
- 1:05वो व्यापक है, अनंत है।
- 1:09और आप अपने को शरीर समझ के जी रहे हो। आप
- 1:13सीमित हो।
- 1:15बहुत लंबी यात्रा है साहब।
- 1:20रोज रात को नींद आती है। आप सो जाते हो।
- 1:26क्या जानते हो आप
- 1:29नींद में कोई दुनिया है क्या कोई दुनिया
- 1:33नहीं है सब झूठा है ये शरीर झूठा ये मन
- 1:37झूठा ये दुनिया झूठा
- 1:41अब झूठ की दुनिया में आप फंसे हो और सुख
- 1:45चाहते हो कभी नहीं मिलेगा
- 1:48भटकते ही रहोगे
- 1:50इसको मायाजाल कहते हैं इल्ल्यूजन
- 1:54माया का खेल है पूरा।
- 1:57यह माया का शरीर है आपका। आपका मन माया का
- 2:01है। अब आप सुख चाहते हो कभी नहीं मिलेगा।
- 2:06दुख ही दुख है वहां।
- 2:09सुख जैसे लगता है। सुख मिलेगा कभी नहीं।
- 2:14आप सुखी कभी हो नहीं सकते।
- 2:19सुख का एक ही मात्र रहस्य है।
- 2:23आपकी आत्मा
- 2:26जब तक आत्मा में नहीं जाओगे आप सुखी हो
- 2:30नहीं सकते भटकते रहोगे।
- 2:35अब आत्मा क्या है?
- 2:40जितना दिखाई देता है वह सब मायाजाल है।
- 2:46आत्मा दिखता नहीं है।
- 2:51आत्मा सबको देखता है।
- 2:57आत्मा को आप जान नहीं सकते।
- 3:01आत्मा ही सबको जानता है।
- 3:05मन को, बुद्धि को, जिंदगी को, जन्म मृत्यु
- 3:09को, इस संसार को जानने वाला कौन? वह आपके
- 3:14भीतर बैठा है। वो आत्मा है। वो जान भी रहा
- 3:18है। आप समझते हो मैं शरीर हूं।
- 3:22तो चला फिर बीमारी मन बुद्धि उस आत्मा को
- 3:27चारों ओर से माया घेर के रखी हुई है। आपको
- 3:31आत्मा में जाने नहीं देगी वो।
- 3:34यह याद रखना है।
- 3:37आप शरीर नहीं हो, मन नहीं हो, बुद्धि नहीं
- 3:40हो।
- 3:42यह सब मर जाएंगे।
- 3:44आत्मा अमर है। आत्मा की मृत्यु कभी नहीं
- 3:48होती।
- 3:50वह आत्मा है। हवा जैसे
- 3:56हवा उसका स्वरूप है।
- 4:00और वो जिंदा है।
- 4:03दिखाई नहीं देता और वो जिंदा है।
- 4:07वही आत्मा है।
- 4:10इसी कारण आप पहचान नहीं पाते।
- 4:13[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 4:20आप अपने मन बुद्धि से
- 4:24पार नहीं जा सकते।
- 4:30बिरला कोई होगा जो मन बुद्धि से पार
- 4:34जाएगा। मन बुद्धि आपको भटकाते ही रहेगा और
- 4:37जन्म पे जन्म लेते ही रहोगे।
- 4:40यह इसका कोर्स है।
- 4:45पुनरति जननम पुनरति मरणम पुनरति जननी जटरे
- 4:51सहनम
- 4:52यह जीवात्मा पुनः पुनः जन्म लेता है। पुनः
- 4:56पुनः मरता है और पुनः पुनः मां के गर्भ
- 5:00में प्रवेश करता है। यह जीवात्मा की
- 5:03यात्रा है।
- 5:09जब इस यात्रा को आप देखोगे और समझोगे
- 5:15आपको रोना आएगा। आप रो डालोगे।
- 5:21मृत्यु इसका मार्ग है।
- 5:28अद्भुत है।
- 5:30मृत्यु के बाद की यात्रा।
- 5:36इस कारण
- 5:39जो मन बुद्धि से पार होता है
- 5:43और आत्मा में जाता है
- 5:47केवल वही सुखी होगा
- 5:50केवल वही आत्मज्ञानी ही भवसागर को तरेगा
- 5:58बाकी सब इस भवसागर में घूमते रहेंगे
- 6:04उसका आदि अंत नहीं है।
- 6:06[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 6:17भवसागर से तरना क्या है?
- 6:24आप जिस चीज को जानते हो
- 6:28वो आप नहीं हो।
- 6:33आप शरीर को देखते हो आप शरीर नहीं हो।
- 6:37मन को देखते हो आप मन नहीं हो। यह दुनिया
- 6:40दिखाई दे रहा है यह भी आप नहीं हो।
- 6:45आपकी मृत्यु होगी वो भी आप नहीं हो।
- 6:49आत्मा कभी मरते ही नहीं।
- 6:54शरीर मरेगा, मन मरेगा।
- 7:00लेकिन आपको आत्मा का ज्ञान है ही नहीं।
- 7:04जो अमर है वह आप जानते नहीं हो।
- 7:10वो है साक्षी गोपाल।
- 7:12वह साक्षी है।
- 7:16वह हर चीज को जानता है।
- 7:20आपके जन्म, आपकी मृत्यु, सुख, दुख
- 7:25क्या सोचते हो, क्या समझते हो वो सबका
- 7:28साक्षी है। उसको कहते हैं साखी गोपाल।
- 7:32वह आपकी अंतरात्मा है।
- 7:36जब तक आत्मा में प्रवेश नहीं होगा, आप
- 7:39मुक्त नहीं हो सकते।
- 7:43पुनरति जननम पुनरति मरणम
- 7:47पुनरति जननी जटरे शयनम
- 7:51पुनः पुनः
- 7:53आपको मां के गर्भ में आना पड़ेगा।
- 7:57यह उसकी सजा है।
- 8:02बहुत भयंकर है यह भवसागर।
- 8:07किसी की समझ में आता नहीं।
- 8:12दुख ही दुख है वहां।
- 8:19आप सुख तो चाहते हो पर सुख आपको कभी नहीं
- 8:23मिलेगा।
- 8:25वो माया का खेल है।
- 8:33कितने प्रकार के आपकी कल्पना चलती रहती
- 8:35है।
- 8:37सुबह से ले रात सोते तक।
- 8:40आप कल्पना में जीते हो।
- 8:44आत्मा का ज्ञान बिल्कुल नहीं है।
- 8:48आत्मा केवल साक्षी है।
- 8:51आत्मा विषय नहीं बनता।
- 8:55वो शरीर का, मन का, संसार का, जन्म का,
- 8:58मृत्यु का केवल वो साक्षी है।
- 9:03आत्मा विषय कभी नहीं बनेगा।
- 9:08इसी कारण आपको आत्मा का ज्ञान नहीं हो
- 9:11पाता
- 9:14और जब तक आत्मा में नहीं जाओगे आप मुक्त
- 9:18नहीं हो सकते बंधे रहोगे
- 9:22यही आपकी सजा है जन्म और मृत्यु
- 9:27क्योंकि आपने अपने आप को ही नहीं जाना कि
- 9:30आप कौन हो
- 9:38उसी के लिए यह दुनिया
- 9:42एक पागलखाना है। यह पागलों की दुनिया है।
- 9:47जहां सब पागल लोग रहते हैं।
- 9:51वो पागलखाना अलग है।
- 9:55और यह पागलखाना भी अलग है।
- 9:59जी हां।
- 10:02यहां सब पागल ही पागल रहते हैं।
- 10:13पाया कहे सो बावरा
- 10:16जो कहता है भगवान को पा लिया वो पागल है।
- 10:21खोया कहे सो
- 10:24जो कहता है मैंने नहीं पाया वो भी नहीं
- 10:27जानता।
- 10:29पाया खोया कुछ नहीं ना पाना होता ना खोना
- 10:34होता
- 10:35ज्यों का त्यों भरपूर वो कंप्लीट हमेशा
- 10:39रहेगा आप नहीं जानते हो वो क्या करेगा
- 10:43आप कंप्लीट हो आप परमात्मा ही हो आप नहीं
- 10:47जानते करके जीव बने हो
- 10:50अब जीव बन के नाटक कर रहे हो
- 10:53भगवान बचा है
- 11:03जब आप अपने आप को ही नहीं जानते
- 11:07तो और क्या जानोगे?
- 11:10आपको अपना ही पता नहीं कि आप कौन हो।
- 11:14इससे बड़ा पागलपन क्या होगा?
- 11:18सब पागलों की दुनिया है।
- 11:23मस्त पागल हो के जियो।
- 11:26वही नहीं आती है आपकी
- 11:33क्या बोलते हैं ना एक संसार पिक्चर देखा
- 11:36था फिफ्थ क्लास में था बाबूलाल टाकी में
- 11:40लगा था संसार पिक्चर तो उसमें एक गाना था
- 11:43वो गाना क्या था कोई एक आना पहले आना चलता
- 11:47था कोई एक आना कोई दो आना कोई तीन आना कोई
- 11:51चार आना दुनिया में देखो जितने सब पागल है
- 11:55सब पागल है। वो टीचर का गाना था। मेरे को
- 11:58बहुत पसंद आया वो।
- 12:02सभी पागलों की दुनिया है ये।
- 12:11जितने समझदार हैं वो सब पागल है।
- 12:18[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 12:25तो जो
- 12:28समझदार नहीं है जो कुछ समझते ही नहीं
- 12:34बस वही पागल नहीं है
- 12:38और जितने समझदार है सब पागल है
- 12:48पागलों की दुनिया में जीने में भी बहुत
- 12:51मजा आता है।
- 12:58[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 13:01कभी-कभी यह जिंदगी
- 13:06जितने आप समझदार हो
- 13:09उतने ही आप बेवकूफ हो। यह जान लेना।
- 13:16रियल क्या है?
- 13:20अगर सत्य को जानना हो
- 13:23तो आप अपनी समझदारी को एक साइड रखो। समझो
- 13:26ही मत कुछ पढ़े हो
- 13:29नासमझ हो जा।
- 13:32तेरे को भगवान मिल जाएगा।
- 13:37जितने समझदार हैं सब पागल है।
- 13:41रात को सोते हो
- 13:44नासमझ हो आप।
- 13:48तब आपको नींद आती है। जितने समझदार हैं
- 13:51उसको रात को कभी नींद नहीं आएगी। [हंसी]
- 14:00तो जिंदगी है
- 14:04ना समझ वालों की जिंदगी है।
- 14:08जहां जितने समझदार हैं सब भटक रहे हैं।
- 14:12कोई शास्त्र पढ़ रहा है, कोई गीता रामायण
- 14:15पढ़ रहा है। मिलेगा कुछ नहीं
- 14:27एक ही वहां पर उपाय है
- 14:34आप समझो ही मत कुछ
- 14:39ना कुछ देखो ना कुछ जानो ना कुछ समझो
- 14:46यह आपका आत्मा का होमवर्क है।
- 14:52जैसे रात को आप सोते हो।
- 14:55क्या जानते हो आप?
- 14:58कुछ नहीं।
- 15:02वही विश्राम है।
- 15:04कुछ ना जानना ही मंजिल है।
- 15:11जितना जानते हो
- 15:20उतना ही भटकोगे।
- 15:22[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 15:29कुछ ही देर की बात रहती है।
- 15:32आप जो शरीर में जिंदा हो
- 15:36मृत्यु आएगी
- 15:39और आपके सपने टूट जाएंगे।
- 15:44आप जो कामना कर के जी रहे हो यह कर लूं वह
- 15:48कर लूं
- 15:50कोई पूरा होने वाला नहीं है
- 15:53मरोगे सबको छोड़ के जाओगे ये स्वप्न जगत
- 15:57है यहां कुछ मिलेगा नहीं
- 16:13हम
- 16:23ना कुछ जानो ना कुछ समझो।
- 16:29बस आराम से बैठो।
- 16:33कुछ पाने का नहीं है। कुछ जानने का भी
- 16:36नहीं है।
- 16:46पाया कहे सो बावरा
- 16:49खोया कहे सो कूर
- 16:52पाया खोया कुछ नहीं ज्यों का त्यों भरपूर
- 16:57ना कुछ पाना है ना कुछ खोना है
- 17:03अपूर्ण हो
- 17:06यह याद रखो
- 17:08आप में कोई कमी नहीं है।
- 17:15आप जितनी कामना करोगे
- 17:18उतना ही भटकोगे।
- 17:21जितना चाहोगे उतना भटकोगे।
- 17:25ना कुछ चाहो ना कोई काम ना करो।
- 17:32जैसे रात को आपको नींद आती है।
- 17:37ऐसे आप ध्यान में जाओगे
- 17:41और सब खोते जाएगा।
- 17:46मन के परत के परत है
- 17:50जो भी कामना उठ रही है फेंको।
- 17:54फिर दूसरा परत आएगा। फिर उठाओ फिर उसको
- 17:56फेंको। बस फेंकते ही जाओ। रखो मत।
- 18:01कुछ भी चाहो मत।
- 18:03यह आपका होमवर्क है। आपका कोर्स है।
- 18:07यह नहीं करोगे तो पछताओगे।
- 18:10थैंक यू। बहुत समझदार हो।
- 18:21[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 18:26समझदारों के लिए यह दुनिया नहीं है।
- 18:35नासमझ हो जा और मौज मस्ती में जी इसी का
- 18:40नाम जिंदगी है
- 18:44तो नासमझी से समझ पड़े
- 18:48नासमझ हो जाओ उसके बाद एक और समझ है
- 18:53वो आप हो
- 18:57मन बुद्धि की समझ एक है मन बुद्धि से अलग
- 19:01एक और समझ है।
- 19:04बस वह छिपा हुआ है।
- 19:07तो ध्यान करते करते
- 19:10जब मन बुद्धि खो गया, शरीर खो गया
- 19:15तब क्या बचा?
- 19:19वही आपको पाना है।
- 19:22उसको शेष पद कहते हैं। शेष नारायण उसी का
- 19:26नाम आत्मा है। आत्मा विषय नहीं है।
- 19:31नहीं
- 19:35जैसे हवा फैली हुई है सबको प्राप्त है।
- 19:41आकाश फैली हुई है।
- 19:44ऐसी आत्मा
- 19:48आकाश जैसे फैला हुआ है।
- 19:55आप उस आत्मा को
- 19:58शरीर समझ के जी रहे हो
- 20:02जो अनंत है
- 20:04उसको आपने सीमित कर दिया
- 20:09इसके लिए आपको सजा मिलेगी
- 20:13आप अनंत आत्मा हो आप ये शरीर नहीं हो वो
- 20:18कैसे
- 20:19इस कमरे में हवा है तो हवा क्या इस कमरे
- 20:23का है नहीं हवा अनंत है। ऐसे आपके भीतर जो
- 20:29मौजूद है वह अनंत है। उसको आपने कह दिया
- 20:33कि आई एम बॉडी
- 20:35तो बत्ती पड़ेगी फिर। हां
- 20:39ये जान लो आप। आप शरीर नहीं हो। शरीर समझ
- 20:44के कितने आप दुख सुख भोग रहे हो। आपको पता
- 20:47ही नहीं है।
- 20:55बहुत नरक का जीवन है जी।
- 20:58भयंकर नरक
- 21:07पुनरति जननम पुनरति मरणम
- 21:13निरंतर निरंतर क्या बोले आप
- 21:17आपको होमवर्क दूं? हां।
- 21:22ये सब बोल रहा हूं वो होमवर्क है।
- 21:27और यह केवल होमवर्क नहीं है।
- 21:32आपके जिंदगी भर और मरतेमरते दम तक आपके
- 21:36मृत्यु काल में भी यह साथ देगा। आपको
- 21:42अमरलोक की यात्रा मैं करा रहा हूं। मृत्यु
- 21:46लोक की यात्रा नहीं है। यह
- 21:49[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 21:50तो जिनको पूछना हो पूछ सकते हो।
- 21:54पूछिए
- 21:59कोई सीरियस नहीं। मजाक ही मजाक क्या है?
- 22:02कुछ तो नहीं है।
- 22:06सब मजाक है।
- 22:15बिल्कुल सरल है।
- 22:18अरे प्रकाश आता है। अंधेरा कहां है?
- 22:21प्रकाश के आते ही अंधेरा चला जाता है।
- 22:25वैसी चेतना के आते ही माया भाग जाएगी।
- 22:30माया वहां नहीं रहती।
- 22:36अरे वो सब कल्पना है। काहे के चक्कर में
- 22:39पड़ते हो? डरते हो क्या? बात खत्म करो।
- 22:45निडर निडर होके जियो।
- 22:55कभी जिंदगी में डरना नहीं। जो डर गया वो
- 22:59मर गया। बस कभी डरो मत। मौत आती आए ना
- 23:03तैयार हूं। डरना कभी नहीं।
- 23:08वही मुक्ति है। डरो तो फिर मरो।
- 23:14डरना कभी नहीं।
- 23:25हां सब छोड़ दिए हो। अब डरना बंद हो गया।
- 23:29अब आप क्या हो गया मालूम है? बेशर्म।
- 23:33[हंसी]
- 23:36इसको बेशर्म कहते हैं। अब उसको लाशर्म है
- 23:41ही नहीं। कपड़ा पहने चाहे नंगा है। अब
- 23:45बेशर्म हो गया वो। अब शरीर में रचा मर जाए
- 23:49वो बेशर्म है।
- 23:52तो जो बेशर्म है उसी को परमात्मा मिलता
- 23:56है।
- 23:58बेशर्मी से समझ पड़े जो बेशर्म होगा उसी
- 24:03को आत्मज्ञान होता है। दूसरे को नहीं।
- 24:06[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 24:11जो मन में आए पूछ सकते हो। मौका है।
- 24:23आप सिद्धांत को समझो नियम को समझो
- 24:27जहां पर कुछ नहीं है वहां सब कुछ है ये
- 24:31जान लेना
- 24:35जैसे आप भीतर देखते हो कुछ नहीं दिखता
- 24:37वहां आत्मा है और आत्मा सब कुछ है
- 24:42हवा नहीं दिखता
- 24:44और हवा आपकी जिंदगी है
- 24:48तो कुछ नहीं दिखता वही जिंदगी है।
- 24:52ठीक पूछे आप और जिसको पूछना है पूछो फटाफट
- 25:03वो तो आप जानते ही हो। मैं क्या बताऊं?
- 25:12हां।
- 25:16अच्छा अच्छा मेरी परीक्षा ले रहे थे कोई
- 25:19बात [हंसी] नहीं
- 25:22कोई बात नहीं परीक्षा लेना चाहिए
- 25:26[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 25:50वहां पर जिंदगी में ना कुछ पाना होता है
- 25:54ना कुछ खोना होता है।
- 25:57यह जैसे हवा है हवा को आप कैसे पाओगे? वह
- 26:02खोया ही नहीं है तो पाने का सवाल कहां है?
- 26:05वह हमेशा मौजूद है।
- 26:09तो भगवान परमात्मा हमेशा मौजूद है। आप खोए
- 26:13ही नहीं हो।
- 26:15तो पाओगे कैसे?
- 26:18पाया कहे सो बावरा।
- 26:21खोया कहे सो
- 26:23पाया खोया कुछ नहीं। ज्यों का त्यों
- 26:26भरपूर।
- 26:29परमात्मा में ना पाना होता ना खोना होता।
- 26:32ना जन्म होता ना मृत्यु होती। आप ना भटक
- 26:37रहे हो।
- 26:41पिक्चर देख रहे हो और क्या कर रहे हो?
- 26:51हम नेक्स्ट
- 26:53साइलेंट हर एक को मौका दो बोलने का।
- 26:58हर एक कोई बोल सकता है। क्या इच्छा है बता
- 27:00दो। फाइनल है फटाफट।
- 27:06100 जन्म का रास्ता आप चलोगे 100 जन्म
- 27:09लगेंगे।
- 27:11और गुरु मिला तो गुरु पल में दिए बता है।
- 27:15गुरु अगर मिला तो एक पल में पहुंचाएगा। आप
- 27:19चलोगे 100 जन्म लगेंगे। यह याद रखो।
- 27:23वह मौका है पूछ लो।
- 27:27मौका बार-बार नहीं मिलेगा।
- 27:29[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 27:43बिल्कुल राइट है। आप पहुंच गए बस। हां।
- 27:46दूसरा
- 27:49फटाफट पूछो।
- 28:03इसका मतलब है सब आप पहुंच गए हो। कोई
- 28:06प्रश्न नहीं है।
- 28:17क्या बोले? बताओ आप
- 28:21पहुंचना है। क्या क्या
- 28:23गुरु का सानिध्य है हां गुरु द्वार बोलते
- 28:27हैं इसको
- 28:29और गुरु ही परमात्मा में पहुंचने का
- 28:32दरवाजा है वही पहुंचाएगा
- 28:36गुरु मिले बिना अब गुरु कई प्रकार के हैं।
- 28:40आत्मा वाला गुरु जब तक नहीं मिलेगा आप
- 28:43नहीं जा सकते वहां साधन वाले गुरु अलग है।
- 28:46आत्मा वाला गुरु अलग है।
- 29:34आपको जिंदगी का रहस्य जानने के लिए
- 29:41विषय रहित होना पड़ेगा।
- 29:47और निर्विषय है
- 29:51कुछ दिखाई ना देना।
- 29:56यहां आपको क्या दिख रहा है?
- 29:59कोई दिख रहा है क्या?
- 30:02इसी में जाओगे आप। नहीं दिख रहा है उसी
- 30:04में जिओगे।
- 30:30नहीं दिख रहा है उसमें कोई प्रवेश किया
- 30:35जो प्रवेश किया वह आंख खोल दो
- 30:40मंजिल है वह नहीं दिख रहा है वह
- 30:43मृत्यु के बाद वहीं जाओगे
- 31:00अब उसको देखने चलोगे
- 31:03तो कई भूत प्रेत आपको दिखेंगे।
- 31:06यह जान लेना। डायरेक्ट आप नहीं जा सकते।
- 31:11हां।
- 31:22मेरे को तो अभी चार पांच चेहरे आके चले गए
- 31:28कई रूप कई ढंग होगा वहां
- 31:33कई रूप दिखेगा आपको
- 32:00खैर जो भी दिखाई देता है आपको उसके साक्षी
- 32:03आप खुद ही हो
- 32:06और आप ही उसके जिम्मेवार
- 32:10पिछला जो रिकॉर्ड पिछला जो आप जिए हो
- 32:16जब आप खाली होते हो तो उसको प्रकट होने का
- 32:19मौका मिलता है
- 32:22तो आप खाली बैठो कुछ करो मत
- 32:26वो प्रकट होते चला जाएगा इस प्रकार आप कई
- 32:30जन्म को जान सकते हो कई जन्म
- 32:34उसको जान सकते हो प्रवेश कर सकते हो आप
- 32:43जिस कारण
- 32:45खाली बैठे हो आप कुछ कर नहीं रहे हो
- 32:50जो होता है होने दो
- 32:52बस आप चुपचाप पड़े हो
- 33:01इसकी अवस्थाएं
- 33:04प्राग भाव प्रद्वंसा भाव
- 33:09अन्योन्या भाव अत्यंतता भाव चार प्रकार के
- 33:14भाव से जब आप पार जाओगे तब भवसागर पार हो
- 33:19जाओगे वो भाव आपको रोक देंगे जाने नहीं
- 33:22देंगे वो ना
- 33:26ओके
- 33:31सभी आप जो जी रहे हो इस शरीर में
- 33:37यह भावना के सागर में जी रहे हो।
- 33:42स्त्री भाव, पुरुष भाव
- 33:45सब भाव ही भाव है।
- 33:54इसका नाम है भवसागर।
- 33:57इस भवसागर से बिरले को ही प्राप्त पार
- 34:00होगा।
- 34:02बाकी आप जन्मों जन्मों घूमते रहोगे यहां
- 34:07जैसे रात और दिन होता है निरंतर
- 34:12ऐसे जन्म और मृत्यु होते रहेगा निरंतर
- 34:17तो इस जन्म में जिसको आत्मा का ज्ञान होगा
- 34:22वह भवसागर तर जाता है। उसकी यात्रा खत्म
- 34:25हो जाती है। इस कारण हम ध्यान करते हैं।
- 34:29यह जान लेना।
- 34:32आपको यात्रा करनी हो तो ध्यान मत करो।
- 34:35जन्मों जन्मों यात्रा होगी। फिर
- 34:39ध्यान का मतलब है यात्रा खत्म।
- 34:46ना कुछ जानो ना कुछ समझो।
- 34:51इसका नाम ध्यान।
- 34:54[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 34:57आपकी समझदारी है।
- 35:00आपको बांध दिया है।
- 35:03कोई बांधा नहीं है। आप बहुत समझदार हो।
- 35:07इसी काम बंधे हो।
- 35:13अब आत्मा क्या है?
- 35:16आत्मा किसको दिखाई देता है? मिलता है।
- 35:23जो नासमझ होता है।
- 35:25जो कुछ समझते ही नहीं।
- 35:31उसी को आत्मा की प्राप्ति होगी।
- 35:35आत्मा मन बुद्धि का विषय नहीं है।
- 35:39वो साधना का विषय नहीं है।
- 35:46वो कैसा है? क्या है?
- 35:52देखो
- 35:54ओके। दिखाओ। यह देखो।
- 36:00यह क्या है?
- 36:04इसको क्या कहते हैं?
- 36:07छड़ी है कि नहीं?
- 36:09अच्छा नाम और रूप इसका नाम माया।
- 36:14अब नाम और रूप को हटा दो। तब ये क्या है?
- 36:18लकड़ी है। ऐसे ही आपका शरीर और मन यह नाम
- 36:24और रूप है।
- 36:26आपका नाम है वो और ये शरीर
- 36:31ये आप समझ रहे हो कि मैं हूं। यह नाम और
- 36:34रूप को हटा दो।
- 36:37आप बॉडी नहीं हो, मन नहीं हो।
- 36:40अब क्या हुआ?
- 36:44बोलो।
- 36:46हम
- 36:50बॉडी भी नहीं है, मन भी नहीं है।
- 36:58तब ये आपका रिसर्च है।
- 37:01जिंदगी में आप जान लिए कि आप बॉडी नहीं
- 37:04हो, मन नहीं हो।
- 37:08वो आपका अंतिम क्लास है। आप मुक्त हो
- 37:11जाओगे। उसके लिए आप मनुष्य शरीर में आए
- 37:14हो। दूसरा कोई उपाय नहीं है।
- 37:25आए थे हरि भजन को घोटन लगे कपास। माया में
- 37:31फंसे जीव है सत्यानाश।
- 37:35यह क्या है भैया?
- 37:37ओके ओके
- 37:48आप सब अपने मन को देखोगे
- 37:52और मन कहां है मेरे को बताओगे
- 37:56मैं अभी भगा दूंगा
- 38:00बिल्कुल
- 38:02क्योंकि मेरे को छड़ी रखना पड़ेगा
- 38:05यस
- 38:07बोलो मन कहां है बताओ
- 38:14अरे अरे रहेगा तब ना अरे यार मुश्किल है
- 38:22मन है नहीं
- 38:25और वो आपको बांध दिया है
- 38:29वो कैसे बताऊं कथा बताओ ऐसा थोड़ा सुन लो
- 38:34पति पत्नी
- 38:36दोनों एक खाट में सोए थे
- 38:40हां
- 38:41उन लोगों का कोई बच्चा नहीं था। तो पत्नी
- 38:45पूछती है
- 38:48पति पूछ रहा है कि देखो जी
- 38:52यदि बच्चा हुआ हमारा तो क्या होगा आपको?
- 38:57स्त्री पूछ रही है अब पति बोलता है थोड़ा
- 39:01खसक गया। यह जगह है ना यहां सो जाएगा ना
- 39:05बच्चा।
- 39:06बोला ठीक है जी वो भी मान गए अब दूसरा
- 39:11बच्चा पैदा हुआ तब क्या होगा
- 39:14अब वो पति फिर खसक गया हां अब खसक गया फिर
- 39:20पत्नी पूछती है अब तीसरा बच्चा होगा तब
- 39:22क्या होगा
- 39:25अब वो पति जो है ऐसा पलटी किया और खाट से
- 39:29गिरा और उसका पैर टूट गया
- 39:35अब लोग पूछे भाई आपका ये पैर कैसे टूट
- 39:39गया? [हंसी]
- 39:44अब वो बोलता है जो बच्चा अभी पैदा नहीं
- 39:48हुआ वो तोड़ दिया मैंने। [हंसी]
- 39:52अरे पागल है क्या? बच्चा पैदा नहीं हुआ वो
- 39:56कैसे तोड़ेगा? [हंसी]
- 39:59ऐसी आपकी जिंदगी है।
- 40:04आप खामोखा माया जाल में फंसे हो। [हंसी]
- 40:11अपनी कल्पना में अपने ही मरे जा रहे हो।
- 40:15[हंसी]
- 40:15भगवान बचा है।
- 40:22सब कल्पना की दुनिया है। ये सत्य नहीं है।
- 40:25आपको सच लगता है।
- 40:31अब उसको सच लगा बच्चा पैदा हुआ तो सच हो
- 40:35गया अब जगह बनाया फिर हटा हटते हटते
- 40:41अब गिरा खाट से पैर टूट गया ऐसी जिंदगी है
- 40:46वो क्या है भैया
- 40:48अरे चाय तो यार
- 40:52दे ही दो बोलते बोलते थक गया
- 40:58बस ले आपका अरे थोड़ा और दो ना भाई वाह
- 41:02[हंसी]
- 41:03हां अब ठीक है
- 41:08[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 41:21ये चाय कौन बनाया
- 41:24शुगर फ्री चाय बनाती हो
- 41:29मेरे कोई डायबिटीज है क्या? [हंसी]
- 41:49थैंक यू।
- 41:51मेरा चेतन चूर्ण कहां है? अब रहने दो।
- 41:55हटो।
- 41:58ओके।
- 42:03ये किसकी लाठी है भैया?
- 42:07अच्छा।
- 42:09तो पाया कहे सो बावरा जो कहता है भगवान
- 42:13मिल गया उसको निश्चित जानो पागल है भगवान
- 42:17किसी को मिलता ही नहीं
- 42:21पाया कहे सो बावरा खोया कहे सो को और जो
- 42:26कहता है भगवान खो गया
- 42:31वह भी मूर्ख है भगवान खोता ही नहीं
- 42:35भगवान नहीं रहेगा तो आप नहीं रहोगे
- 42:38आपके भीतर भगवान है
- 42:41पर आपको देखना नहीं आ रहा है
- 42:46तो पाया कहे सो बावरा खोया कहे सो पाया
- 42:50खोया कुछ नहीं
- 42:53जो का त्यों भरपूर
- 42:57ना कुछ पाना है ना कुछ खोना है
- 43:01आप कंप्लीट हो आप पूर्ण हो
- 43:05कोई बता सकता है कोई अधूरा है या मेरे को
- 43:08बता दो अभी इलाज कर दूंगा। कोई अधूरा नहीं
- 43:13है। सब कंप्लीट है।
- 43:31अच्छा आज आप लोग रात को सोते हो
- 43:38तो क्या जानते हो आपको नींद आ गई आप सो गए
- 43:44क्या जानते हो बताओ
- 43:51हर कोई अपना अनुभव बताओ
- 43:54कुछ जानते हो क्या?
- 43:57कुछ नहीं जानते।
- 43:59क्यों कुछ नहीं जानते?
- 44:02अरे कुछ रहेगा तब ना जानोगे।
- 44:06वहां कुछ है ही नहीं।
- 44:11देखो यह मकान बन गया। यह हाल बना हुआ है।
- 44:14अब हाल नहीं बना था तब क्या था? यह था ही
- 44:18नहीं।
- 44:22ऐसे यह शरीर नहीं बना था तब क्या था
- 44:27अब शरीर तो बाद में बना ना अब शरीर नहीं
- 44:31बना था तब क्या था
- 44:38हम
- 44:42वो थोड़ा मुश्किल है
- 44:46जैसे रात को आपको नींद आई
- 44:49तो तो क्या जानते हो आप?
- 44:54नींद आ गई। कुछ जाने क्या कुछ नहीं जाने।
- 45:00आप कुछ भी नहीं जानते फिर भी आप हो कि
- 45:03नहीं।
- 45:05वही आत्मा है। उसी को जानना है।
- 45:15पाया कहे सो बावरा खोया कहे सो।
- 45:20पाया खोया कुछ नहीं ज्यों का त्यों भरपूर
- 45:26आप अपने शरीर में भरपूर हो कि नहीं कि
- 45:30कहीं खाली है कहीं खाली नहीं है
- 45:36लेकिन आपकी बीमारी क्या है
- 45:41आप अपने को शरीर समझे
- 45:45और शरीर आप हो नहीं
- 45:48जैसे देखो यह हाल है।
- 45:52इस हाल में हवा है।
- 45:55अब यह हवा है। अगर यह समझे
- 45:58कि यह हाल ही मेरा शरीर है।
- 46:03तो क्या समझ वो ठीक समझा क्या?
- 46:06नहीं।
- 46:08ऐसे आप समझ रहे हो कि शरीर ही मेरी जिंदगी
- 46:11है।
- 46:15यह समझ आपको
- 46:18कई जन्म ले जाएगा। कई जन्म
- 46:21याद रखो
- 46:25यह जन्म जो है
- 46:28यह आपका अंतिम जन्म होना चाहिए।
- 46:34अंतिम जन्म क्या है?
- 46:44बताएं कि जानते हो?
- 46:47बताना ही पड़ेगा
- 46:50अंतिम जन्म
- 46:55आपको नींद आती है रात को
- 47:00आप क्या जानते हो कुछ नहीं जानते अरे कुछ
- 47:04रहेगा उसको जानोगे कुछ नहीं रहता
- 47:09हम
- 47:11अब अभी बैठे हो
- 47:16केवल 5 मिनट के लिए आप कुछ भी मत जानो।
- 47:24कुछ जानो ही मत जो भी जानते हो फेंक दो।
- 47:27मेरे को कुछ जानना ही नहीं है।
- 47:47जिसको कुछ ना जानना आ गया
- 47:52वो आपकी मंजिल है।
- 47:55कुछ जानना नहीं है आपको।
- 47:58अरे आपके भीतर आत्मा है।
- 48:04और आत्मा पावरफुल है।
- 48:11आप कुछ मत जानो।
- 48:26अब जो कुछ भी नहीं जानता
- 48:29उसमें आ गया वो हाथ उठाएंगे।
- 48:35राइट राइट राइट राइट राइट
- 48:45पीछे कुछ हैं एक दो जो अभी तक हाथ नहीं
- 48:48उठाए।
- 48:57पाया कहे सो बावरा खोया कहे सो कूर पाया
- 49:01खोया कुछ नहीं जो का त्यों भरपूर
- 49:08ना कुछ पाना है ना कुछ खोना है
- 49:14आप पूर्ण हो।
- 49:21आपका होना पूर्ण है।
- 49:27मन बुद्धि को हटा दो। वो आपको धोखा देगा।
- 49:31मन बुद्धि फेंको। हटाओ।
- 49:34अपन को कुछ जानना नहीं। समझना नहीं। अपन
- 49:37है बात खत्म हो गई।
- 49:40जैसे रात को आपको नींद आती है
- 49:44तो कहां है दुनिया आपकी? कोई दुनिया नहीं
- 49:47है।
- 49:53हम
- 49:57आप बिल्कुल शून्य हो जाओ।
- 50:01ना कोई शरीर ना कोई दुनिया।
- 50:13कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा।
- 50:27कुछ नहीं दिखता वही आपकी मंजिल है।
- 50:34कुछ नहीं दिखता उसमें कौन-कौन आया हाथ
- 50:36उठाओ।
- 50:38वन टू थ्री फोर फाइव।
- 50:42बस आप सब पहुंच गए हो।
- 50:45बस याद रखना
- 50:48कुछ नहीं दिखता उसी में आप जिओगे।
- 50:53कुछ नहीं मालूम उसी में जिओगे आप। यह आपका
- 50:57होमवर्क है। आप पहुंच जाओगे।
- 51:00यह अंतिम जन्म होगा।
- 51:05जिसको और ज्यादा जन्म लेना हो, खूब काम ना
- 51:08करो। खूब इच्छा करो।
- 51:11खूब आश्रम बनाओ। सब चलते रहेगा।
- 51:17नो डिजायर एट ऑल। कोई डिजायर नहीं। कोई
- 51:20कामना नहीं।
- 51:23यह आपकी मंजिल है। बता दिया हूं।
- 51:26कामना करोगे फसोगे।
- 51:31तो बीज बोए बबूल का आम कहां पे हो? बबूल
- 51:37का बीज बोते हो और कहते हो कि आम फले कभी
- 51:41नहीं फलेगा।
- 51:45आप संसार के बीज बो रहे हो और आप सोचते हो
- 51:49परमात्मा मिले मुक्ति मिले कभी नहीं
- 51:52मिलेगा यह जान लो आप
- 51:57यथा बीजम तथा निष्पत्ति जो बीज भोगे वही
- 52:00आपको प्राप्त होगा
- 52:03यह अका सत्य है यह जान लो आप
- 52:08[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 52:10बीज कैसे हो ना
- 52:14वो थोड़ा टाइम लगेगा कल क्लियर करेंगे
- 52:17चलेगा कोई बात नहीं
- 52:20बीजारोपण कैसे की जाती है वो थोड़ा लंबा
- 52:24समय लगे ओके धन्यवाद
- 52:30हम
- 52:32और जिसको भी समझना हो
- 52:36वो मेरे कमरे में आ सकता है
- 52:40नो टाइम मेरे मिलने के लिए कोई टाइम नहीं।
- 52:44कभी भी मिल सकते हो।
- 52:46मैं जिज्ञासुओं को बताने के लिए सदा तैयार
- 52:49हूं।
- 52:51बिल्कुल।
- 52:56अरे मैं कुरुडी में रहता हूं।
- 53:00और यह अमित शाह आधी रात को पर्दा कूद के
- 53:04आते थे। हां जी।
- 53:13मैं बोला इधर साल लगा है, ताला लगा है। तू
- 53:16कैसे आया मकान में? मैं कूद के आया हूं।
- 53:19बोले अच्छा ठीक है।
- 53:24दूसरे रोज उसके पिताजी आ गए। अरे मेरा
- 53:28बच्चा कहां है?
- 53:31बोले बच्चा है ना? क्या करोगे?
- 53:36नहीं नहीं वो भाग के आ गया है।
- 53:40तो मैं बोला आप पूछ लो ना अपने बेटे से वो
- 53:45जाना चाहता है क्या?
- 53:48क्यों रे अमित जाएगा?
- 53:50मैं नहीं जाऊंगा यहां से।
- 53:53आप जाओ वापस वो झगड़ा करके तो आया था।
- 54:01तो जब भी अमित कभी भी परेशान हो झगड़ा हो
- 54:04लड़ाई हो या ध्यान अगर नहीं जम रहा हो
- 54:07हमेशा कुरट आता था
- 54:10आधी रात को
- 54:12अब दरवाजा बंद है ताला लगा है पर्दा कूद
- 54:15के आ जाएगा बोला अच्छी बात है ठीक है
- 54:19[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 54:20ऐसे होते हैं जिज्ञासु
- 54:24आज उसका इतना बड़ा आश्रम है और उसके कारण
- 54:28आप इतना ध्यान में लाभ उठा रहे हो। यह उसी
- 54:31का पुरुषार्थ है। यह जाना।
- 54:37ओ ओ यार दिमाग खराब हो गया साला। इसके
- 54:41अंदर कुछ डाले हो कि नहीं? हां। हां ठीक
- 54:44है। ठीक है। चलो।
- 54:48जगत कहे भगत भैया। और भगत कहे जगत भैया।
- 54:54सब एक दूसरे के लिए पागल है।
- 55:02पागलों की जिंदगी है।
- 55:06पागल किसको कहते हैं मालूम है? अरे जो पा
- 55:10करके गल गया उसको पागल कहते हैं।
- 55:14समझ में आया कि नहीं? आया।
- 55:34हेलो
- 55:40यहां पर
- 55:42कुछ ऐसे प्रेतात आत्मा का वास है
- 55:46जो स्पिरिचुअल लाइफ में
- 55:50पर भटक गए। है।
- 55:54वो यहां आकर सुनते हैं।
- 55:59अभी भाई भी उस कोने में
- 56:02एक बुड्ढ आई थी।
- 56:06उसके बड़े-बड़े बाल सफेद बाल
- 56:09मैं देख रहा हूं उसको। तो मैं पूछ भी रहा
- 56:13हूं कैसे आ गए यहां?
- 56:16वो मुस्कुरा दी। अब वो वहां से चली गई।
- 56:21इस आश्रम में बहुत से पागल घूमते हैं।
- 56:24प्रत आत्मा भी घूमती है।
- 56:36[हंसी]
- 56:41[हंसी]
- 56:43अब इसका मतलब ये नहीं है
- 56:46कि अमित भाई अपना रात को ध्यान में बुलाते
- 56:49हैं।
- 56:52रात को डांस वगैरह होता है
- 56:56तो उसको बंद नहीं करना है।
- 57:01वो आत्मा भी प्यासी है।
- 57:06और आपको देखकर के वह मगन हो जाती है। और
- 57:10वह भी कोने में छिप के नाचती है।
- 57:15मैं इसको बहुत दिनों से अनुभव कर रहा हूं।
- 57:21इस आश्रम में जो भटके हुए आत्मा है आपके
- 57:25जो नाइट क्लास चलता है उसमें उपस्थित होती
- 57:30हैं। वो
- 57:32मेरा आंखों देखी हाल है वो।
- 57:36अभी-अभी
- 57:38वो जो बुजुर्ग के बुड्ढे आदमी बैठे हैं
- 57:41उनके पीछे में
- 57:45हम
- 57:47मजाक नहीं कर रहा उनके पीछे में एक बूटी
- 57:49आई वो सफेद सफेद बाल ऐसा अब वो बैठी मैं
- 57:55बोला आप कैसे आए हो
- 57:58वो मुस्कुरा दी और उसके बाद चली गई
- 58:06जहां जो भी प्रेत आत्मा आएगा
- 58:11नहीं वह तो मुक्त हो जाएगा
- 58:15पर मैं उसके आते ही जान लूंगा
- 58:19थैंक यू बहुत समझदार हो
- 58:29तो समझदार को इशारा काफी है हम यह आत्मा
- 58:35साधन का विषय नहीं है।
- 58:39यह फल साधन ते नहीं होई। तुम ही कृपा
- 58:45ऊपर वाले कृपा जब तक नहीं होगी आप आत्मा
- 58:48में नहीं जा सकते।
- 58:52उसकी कृपा कब होती है?
- 58:55जब आप सिलेंडर होते हो। बहुत साधन किया,
- 59:00बहुत जाना समझा। समझ में कुछ नहीं आया। अब
- 59:04तेरी मर्जी तू जा
- 59:09वो उतर जाएगा।
- 59:11वो आ जाएगा। लास्ट में वो आप जब तक से
- 59:16अपनी साधना का अहंकार है आपको
- 59:21वो नहीं आएगा। आप साधना करते रहो।
- 59:26जब तक आप सरेंडर नहीं होगे। अब तेरी मर्जी
- 59:30तू जान।
- 59:31अब मैं नहीं हूं।
- 59:34वह पहुंचा देगा आपको तुरंत।
- 59:38यह जान लो आप।
- 59:41वो आत्मा आपके साधन का विषय नहीं है। उसका
- 59:45भूखा नहीं है। वो
- 59:48वो प्रेम का भूखा है। बस
- 59:54उस आत्मा में जाना चाहते हो तो सबसे प्रेम
- 59:58करो।
- 59:59सबसे गले मिलो।
- 1:00:02बस
- 1:00:04वही उसका अंतिम कोर्स है। प्रेम प्रेम से
- 1:00:09देखो। प्रेम से जियो।
- 1:00:11वही उसका मार्ग है। किसी से घृणा ना करो।
- 1:00:17किसी को दुश्मन ना समझो।
- 1:00:20वो दुश्मन भी आपका साथी है।
- 1:00:31अब आप
- 1:00:34प्रेम स्वरूप होकर प्रेम में डूब कर अपने
- 1:00:38आप को देखो।
- 1:00:40आप केवल प्रेम हो। अपने आप से प्रेम करो।
- 1:00:45अपनी आत्मा से प्रेम करो।
- 1:00:48वो कहीं बाहर नहीं गया है। आपके पास में
- 1:00:50ही है।
- 1:00:52आप उसको शरीर समझ के भूल करते हो। शरीर और
- 1:00:55है नहीं।
- 1:00:58आप अपने आप से कैसे प्रेम करोगे? अब
- 1:01:07जैसे आप प्रेम का अनुभव है आपको।
- 1:01:12अपनी आत्मा से प्रेम करो।
- 1:01:21वो तुरंत मिलेगा।
- 1:01:24तुरंत
- 1:01:29यह पल साधन ते नहीं होई आप कितनी भी साधना
- 1:01:33करो वो प्रकट नहीं होगा
- 1:01:38तुम ही कृपा पाओ कोई कोई आत्मज्ञान कृपा
- 1:01:42साध्य साधन साध्य नहीं है साधन आप जन्मों
- 1:01:47जन्मों करते रहो नहीं मिलेगा वो प्रेम का
- 1:01:50भूखा है बस आप प्रेम करो अपने आप
- 1:01:57अपने आप से कोई प्रेम करता है क्या? कोई
- 1:02:00नहीं करता।
- 1:02:05प्रेम से देखो अपने आप को प्रेमास्पद हो
- 1:02:09जाओ।
- 1:02:11ये शरीर दिखता है शरीर से प्रेम करो। मन
- 1:02:14दिखता है मन से प्रेम करो। बस प्रेम में
- 1:02:17जियो आप
- 1:02:20पहुंच जाओगे।
- 1:02:23आप साधन करोगे कई जन्म लगेंगे
- 1:02:27यह फल साधन ते नहीं हो तुम कृपा पाव कोई
- 1:02:32कोई कृपा साध्य है साधन साध्य नहीं है इस
- 1:02:37कारण जब भी आप ध्यान में जाते हो
- 1:02:42आप प्रेमास्पद हो जाओ
- 1:02:47प्रेम में डूबो
- 1:02:50अपने आप से प्रेम करो।
- 1:03:00प्रेम में डूबते ही वो आत्मा प्रकट होगा।
- 1:03:07साधन मत करो। प्रेम में डूबो।
- 1:03:14अपने आप से प्रेम करना सीखो।
- 1:03:18आप अपने आप से प्रेम नहीं करते हो।
- 1:03:25प्रेम से अपने शरीर को देखो। प्रेम से
- 1:03:29अपने मन को देखो।
- 1:03:32वो शांत हो जाएगा।
- 1:03:38आप प्रेम में डूब जाओ। यह पूरा हाल प्रेम
- 1:03:43से भर जाएगा।
- 1:03:53तो 100 जन्म का रास्ता आप चलोगे तो 100
- 1:03:57जन्म लगेंगे।
- 1:04:00उसको गुरु पल में दिए हो बताएं। एक पल में
- 1:04:04पहुंचाएगा आपको। अगर वह सच्चा गुरु है तो
- 1:04:08एक पल में पहुंचा देगा। वह क्या है?
- 1:04:11प्रेम।
- 1:04:16बस प्रेम में डूबो आप
- 1:04:22पहुंच जाओगे। साधना करोगे तो कई जन्म
- 1:04:27प्रेम में डूबोगे तो अभी अभी इसी क्षण हो
- 1:04:30जाएगा।
- 1:04:32100 जन्म का रास्ता गुरु पल में दिए हो
- 1:04:36बताए।
- 1:04:38गुरु अगर मिला तो एक पल में पहुंचाएगा।
- 1:04:46आप एक पल में अभी और यही इसी क्षण
- 1:04:53प्रेम में डूब जाओ
- 1:04:57ना सोचो ना समझो
- 1:05:06प्रेम में डूबते ही वह मिल जाएगा
- 1:05:14अगर आप प्रेम नहीं करोगे अपने आप से
- 1:05:19तो 100 जन्म लगेंगे।
- 1:05:21अपने आप से आप प्रेम करो।
- 1:05:30इस शरीर को प्रेम से देखो।
- 1:05:33मन को प्रेम से देखो।
- 1:05:39परमात्मा प्रेम का भूखा है।
- 1:05:42आपके साधना का भूखा नहीं है वह।
- 1:05:45नहीं
- 1:05:50और आपके भीतर जो आत्मा है
- 1:05:55जो सब जानता है
- 1:05:58उस आत्मा से प्रेम करो।
- 1:06:06प्रेम में डूब जाओ।
- 1:06:14अभी इसी क्षण मिल जाएगा।
- 1:06:20आप नाहक बुद्धि लगाते हो। दुनिया भर की
- 1:06:24साधना करते हो वो कभी नहीं मिलेगा।
- 1:06:29यह फल साधन ते नहीं हो।
- 1:06:33तुम्हारी कृपा बिना भगवत कृपा के
- 1:06:38आप आत्मा में नहीं जा सकते।
- 1:06:41अपने आप को छोड़ दो।
- 1:06:44अब जैसी तेरी मर्जी
- 1:06:47छोड़ो अपने आप को।
- 1:06:53वो मिल जाएगा। मिला बुलाया।
- 1:07:05अपने आप को प्रेम से देखो।
- 1:07:24बस इतना ही में यह पूरा हाल प्रेम से भर
- 1:07:29गया।
- 1:07:31प्रेम ही प्रेम है। वह
- 1:07:39इसका नाम है भगवत दर्शन।
- 1:07:43आप साधना करोगे कई जन्म लगेंगे।
- 1:07:47उसको गुरु एक पल में पहुंचाता है। वह एक
- 1:07:52पल क्या है? प्रेम।
- 1:08:00प्रेमास्पद हो जाओ।
- 1:08:05प्रेम में डूबो।
- 1:08:15कहां है शरीर?
- 1:08:17कहां है दुनिया? सब भगवास।
- 1:08:24अपने आप से प्रेम करो।
- 1:08:37ना कोई शरीर है, ना कोई संसार है, आप नाक
- 1:08:42भटक रहे हो।
- 1:08:57अपने आप को प्रेम से देखोगे।
- 1:09:01अपने आप से प्रेम करो।
- 1:09:18वही आत्मा से प्रेम है।
- 1:09:23आप अपने आप को छोड़ देते हो और दुनिया भर
- 1:09:27के ध्यान करते हो वो कभी नहीं मिलेगा।
- 1:09:32वह आत्मा प्रेम का भूखा है और प्रेम आप
- 1:09:36करते नहीं हो।
- 1:09:43अपने आप को प्रेमास्पद बना दो।
- 1:09:48प्रेम ही प्रेम
- 1:09:52ना कोई शरीर, ना कोई मन, ना कोई दुनिया,
- 1:09:59केवल है तो प्रेम।
- 1:10:21बिल्कुल
- 1:10:23अब ये पूरा हॉल प्रेम से भर गया
- 1:10:27लबालब
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This page contains the full transcript of आत्मदृष्टि : स्वामी ज्ञान अविर्भाव : Vision of the Self : Swami Gyan Avirbhav by स्वामी ज्ञान आविर्भाव, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 5,246 words across 901 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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