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विधवा बहू की शादी | Vidhwa Bahu Ki Shadi | Emotional Love Story | Love City | Episode 11-15 — Transcript

by Love City · 8,640 words · 1,115 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:03शाम का वक्त सिया और अथर्व का रूम। सिया
  2. 0:07कमरे में टेबल पर बैठी यूनिवर्सिटी की
  3. 0:09भारीभरकम किताबें खोलकर नोट्स बना रही थी।
  4. 0:12तभी दरवाजा जोर से खुला और ताने अंदर
  5. 0:14दाखिल हुई। उसके हाथ में कपड़ों का एक
  6. 0:16बड़ा सा ढेर था। अरे प्रोफेसर साहिबा
  7. 0:20पढ़ाई बाद में करना। पहले आंटी के सारे
  8. 0:23डिजाइनर कपड़े ड्राई क्लीन के लिए अलग करो
  9. 0:26और इन्हें प्रेस करो। तान्या मैं इस घर की
  10. 0:29बहू हूं। तुम्हारी अम्मा जी की नौकरानी
  11. 0:32नहीं और इस वक्त मैं अपनी पढ़ाई कर रही
  12. 0:34हूं। तभी पीछे से गायत्री सिंघानिया भी
  13. 0:36आधम की। बहू बनने का शौक है ना तुझे तो
  14. 0:40बहू के सारे काम करने होंगे। किताबें
  15. 0:43पढ़कर कोई कलेक्टर नहीं बन जाती। दिन भर
  16. 0:45घर का काम करेगी और रात को जो वक्त बचेगा
  17. 0:48उसमें पढ़ना। अगर एक भी काम अधूरा रहा तो
  18. 0:51तेरी यह सारी किताबें उठाकर चूल्हे में
  19. 0:53झोंक दूंगी। सिया की आंखों में आंसू आ गए।
  20. 0:57उसने चुपचाप सर झुका लिया। तभी दरवाजे पर
  21. 0:59कोट हाथ में लिए अथर्व आकर खड़ा हो गया।
  22. 1:02ऑफिस की पहली थकान उसके चेहरे पर थी।
  23. 1:04लेकिन अपनी मां और तान्या को सिया पर
  24. 1:06जुल्म करते देख उसकी आंखें गुस्से से सुलग
  25. 1:09उठी।
  26. 1:09कपड़े चूल्हे में नहीं। उन लोगों की सोच
  27. 1:12को झोंकना चाहिए जिनकी नजरें इतनी छोटी
  28. 1:14है।
  29. 1:15गायत्री और तान्या चौंक कर मुड़ी। अथर्व
  30. 1:17ने सीधे जाकर टेबल से वो सारे कपड़े उठाए
  31. 1:19और तान्या के हाथों में वापस थमा दिए।
  32. 1:22तान्या तुम इस घर की मेहमान हो। अपनी हद
  33. 1:25में रहो। और मॉम सिया इस घर के किसी भी
  34. 1:28काम को तब हाथ लगाएगी जब उसकी पढ़ाई पूरी
  35. 1:30हो जाएगी। कल से इसके लिए एक अलग स्टडी
  36. 1:33रूम बनेगा। और जो कोई भी इसकी और उसकी
  37. 1:36किताबों के बीच में आया मैं भूल जाऊंगा कि
  38. 1:39मेरा उससे क्या रिश्ता है।
  39. 1:41अथर्व तू अपनी मां से जुबान लड़ा रहा है
  40. 1:43इस औरत के लिए।
  41. 1:45यह औरत मेरी पत्नी है मॉम। और इसके सपने
  42. 1:48को पूरा करना अब मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा
  43. 1:51मकसद है।
  44. 1:52गायत्री पैर पटकती हुई तान्या के साथ बाहर
  45. 1:54निकल गई। कमरे में सन्नाटा छा गया। सिया
  46. 1:57की आंखों से आंसू बह रहे थे। अथर्व ने थके
  47. 2:00हुए कदमों से आगे बढ़कर सिया के दोनों
  48. 2:02आंसू अपनी उंगलियों से पोंछ दिए। उसने
  49. 2:04बड़े प्यार से सिया के सर पर हाथ रखा।
  50. 2:07अरे पगली रोती क्यों हो? [संगीत] जब तक
  51. 2:09तुम्हारा यह पति तुम्हारे साथ है। दुनिया
  52. 2:11की कोई ताकत तुम्हें तुम्हारी मंजिल से
  53. 2:13नहीं रोक सकती। चलो बताओ आज कौन सा चैप्टर
  54. 2:16पढ़ना है? मैं तुम्हारी मदद करता हूं।
  55. 2:19सिया ने अथर्व की तरफ देखा। उसकी आंखों
  56. 2:22में वो बेइंतहा प्यार और सुरक्षा देखकर
  57. 2:24सिया का सारा दर्द गायब हो गया। उसने अपने
  58. 2:27दोनों हाथ अथर्व के सीने पर रखे और धीरे
  59. 2:29से मुस्कुरा दी। अगली सुबह सुबह के 6:00
  60. 2:33बज रहे थे। सिंघानिया हवेली की रसोई में
  61. 2:35गर्म तेल की छन छन आवाज आ रही थी। सिया ने
  62. 2:39लाल सूती साड़ी पहन रखी थी। एक हाथ में
  63. 2:41इकोनॉमिक्स की मोटी किताब थी और दूसरे हाथ
  64. 2:44से वह चाय छान रही थी। तभी गायत्री देवी
  65. 2:46तेजी से रसोई में दाखिल हुई। उनके चेहरे
  66. 2:49पर नफरत साफ चमक रही थी। गायत्री सिया के
  67. 2:52हाथ से किताब छीनकर जमीन पर फेंक देती है।
  68. 2:56यह क्या नौटंकी चल रही है सुबह-सुबह। घर
  69. 2:58की रसोई को लाइब्रेरी समझ रखा है तूने।
  70. 3:01सिया ने चुपचाप झुककर किताब उठाई और आंचल
  71. 3:04से उस पर लगी धूल साफ की। मां जी मैं बस
  72. 3:08रिवीजन कर रही थी। नाश्ता लगभग तैयार है।
  73. 3:11बस पूरियां तली जा रही हैं। तानिया भी
  74. 3:13वहीं आ धमकी। उसके हाथ में जूस का गिलास
  75. 3:16था और होठों पर जहरीली मुस्कान।
  76. 3:19आंटी देखिए ना इसके हाथ की बनी पूरियां
  77. 3:22खाएंगे तो पूरे दिन तबीयत खराब रहेगी। ऐसी
  78. 3:24गवार औरत के हाथ का खाना हमारे स्टैंडर्ड
  79. 3:26का नहीं है। सही कहा तान्या। सुनसिया। आज
  80. 3:30दोपहर को मेरी किटी पार्टी के मेहमान आ
  81. 3:32रहे हैं। पूरे 50 लोगों का खाना तू अकेली
  82. 3:35बनाएगी। कोई नौकर तेरी मदद नहीं करेगा। और
  83. 3:38हां अगर एक भी चीज खराब हुई तो अथर्व के
  84. 3:40सामने तेरा यह भोलापन मैं नोच लूंगी।
  85. 3:44लेकिन मां जी आज दोपहर 2:00 बजे मेरा
  86. 3:47प्रोफेसर पात्रता का मॉक एंट्रेंस एग्जाम
  87. 3:50है। कॉलेज जाना बहुत जरूरी है।
  88. 3:53[हंसी]
  89. 3:54एग्जाम भूल जा अपने एग्जाम को। इस घर में
  90. 3:58रहना है तो पहले इस घर की गुलामी करनी
  91. 4:00होगी। जा लग जा काम पर। दोनों हंसते हुए
  92. 4:04बाहर निकल गई। सिया की आंखों में आंसू आ
  93. 4:07गए। हे भोलेनाथ राहुल जी ने मुझे पढ़ने को
  94. 4:10कहा था और अथर्व ने अपना सब कुछ दांव पर
  95. 4:12लगा दिया। मैं इन साजिशों के आगे टूट नहीं
  96. 4:15सकती। दोपहर के 1:00 बज रहे थे। हवेली का
  97. 4:18बड़ा हॉल मेहमानों से भरा था। सिया सुबह
  98. 4:21से पसीने से तरब-बतर होकर 50 लोगों का
  99. 4:24खाना अकेले बना चुकी थी। उसका सर घूम रहा
  100. 4:26था। तानिया रसोई के पास आई और चुपके से
  101. 4:29दाल सब्जी के बड़े पतीले में दो मुट्ठी
  102. 4:31भरकर नमक और लाल मिर्च उड़ेल दी। अब देखती
  103. 4:35हूं अथर्व तुझे कैसे बचाता है। जब सारी
  104. 4:39औरतें थूकेगी तब आंटी तुझे धक्के मारकर
  105. 4:42बाहर निकालेंगी। कुछ देर बाद डाइनिंग टेबल
  106. 4:45पर खाना परोसा गया। गायत्री की सहेलियों
  107. 4:48ने पहला निवाला मुंह में लिया और फौरन थूक
  108. 4:50दिया। छी गायत्री यह कैसा खाना बनवाया है?
  109. 4:53जहर जैसा तीखा और नमक का ढेर। सुना था
  110. 4:57तुम्हारे बेटे ने किसी विधवा से शादी कर
  111. 4:59ली है। पर यह नहीं पता था कि वह तुम्हें
  112. 5:01खाने में जहर खिलाना चाहती है। गायत्री का
  113. 5:04गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया। उन्होंने
  114. 5:07आगे बढ़कर सिया की बाह पकड़ ली और उसे
  115. 5:09खींचकर हॉल के बीच में ले आई। तुझे बोला
  116. 5:12था ढंग से खाना बनाने को। तूने जानबूझकर
  117. 5:14मेरी नाक कटवाने के लिए किया ना? तेरी
  118. 5:16औकात सिर्फ सड़क पर भटकने की थी। मैंने
  119. 5:19अपने घर में पनाह दी और तूने मेरे
  120. 5:21मेहमानों के आगे मुझे बेइज्जत कर दिया।
  121. 5:24गायत्री ने हाथ उठाया। सिया को थप्पड़
  122. 5:26मारने के लिए। सिया ने डर कर आंखें बंद कर
  123. 5:28ली। लेकिन थप्पड़ पड़ने से पहले ही किसी
  124. 5:31ने गायत्री का हाथ हवा में ही मजबूती से
  125. 5:33थाम लिया। अथर्व ऑफिस के सूट में खड़ा था।
  126. 5:36उसका चेहरा गुस्से से लाल हो चुका था।
  127. 5:39मां बस कीजिए।
  128. 5:41अथर्व छोड़ मेरा हाथ। देख इस लड़की ने
  129. 5:44क्या किया है। अथर्व ने अपनी मां का हाथ
  130. 5:46धीरे से छोड़ दिया और डाइनिंग टेबल की तरफ
  131. 5:49गया। उसने चम्मच से सब्जी उठाई और बिना
  132. 5:52हिचकिचाए मुंह में डाल ली। उसका गला
  133. 5:54तीखेपन से जल गया लेकिन उसके चेहरे पर कोई
  134. 5:56शिकन नहीं आई।
  135. 5:58खाना बहुत अच्छा बना है मां। पर हां किसी
  136. 6:01ने जानबूझकर इसमें अलग से नमक और मिर्च
  137. 6:03मिलाई है और मैं अच्छी तरह से जानता हूं
  138. 6:05कि इस घर में ऐसी गंदी साजिश कौन कर सकता
  139. 6:08है।
  140. 6:09तान्या का चेहरा पीला पड़ गया।
  141. 6:12अथर्व तुम मुझ पर शक कर रहे हो?
  142. 6:16शक नहीं यकीन है मुझे। तान्या तुम भूल रही
  143. 6:19हो कि हवेली के हर कोने में सीसीटीवी
  144. 6:21कैमरे लगे हैं। अगर मैंने फुटेज निकलवा ली
  145. 6:24तो पुलिस बुलाने में एक सेकंड नहीं
  146. 6:26लगाऊंगा।
  147. 6:27अथर्व तू मेहमानों के सामने अपनी मां और
  148. 6:30तान्या का अपमान कर रहा है।
  149. 6:32अपमान मैं नहीं आप लोग कर रही हैं। एक ऐसी
  150. 6:35लड़की का जो सुबह 4:00 बजे से बिना पानी
  151. 6:37पिए आप सबके लिए काम कर रही थी। और जानती
  152. 6:41है क्यों? क्योंकि आज उसका एग्जाम था और
  153. 6:44आपने उसे रोकने के लिए यह तमाशा खड़ा
  154. 6:46किया।
  155. 6:47अथर्व ने घड़ी देखी। 1:40 हो रहे थे।
  156. 6:50अथर्व आगे बढ़ा और उसने सिया का हाथ अपने
  157. 6:53हाथ में ले लिया।
  158. 6:54सिया तुम्हारी फाइल कहां है?
  159. 6:56अथर्व एग्जाम में सिर्फ 20 मिनट बचे हैं।
  160. 7:00सेंटर शहर के दूसरे कोने पर है। मैं नहीं
  161. 7:02पहुंच पाऊंगी। सब खत्म हो गया। [हंसी]
  162. 7:08जब तक मैं जिंदा हूं कुछ खत्म नहीं हो
  163. 7:10सकता। चलो मेरे साथ।
  164. 7:12गायत्री आगे जाकर सिया और अथर्व का रास्ता
  165. 7:16रोक देती है। कहीं नहीं जाएगी यह। पहले
  166. 7:19मेहमानों से माफी मांगेगी और सारा कचरा
  167. 7:21साफ करेगी। अथर्व ने अपनी मां की तरफ
  168. 7:24देखा। उसकी आवाज में ऐसी ठंडक थी जिसने
  169. 7:26सबको डरा दिया।
  170. 7:28मां अगर आज मेरी पत्नी का एग्जाम छूटा तो
  171. 7:31मैं इस हवेली का हिस्सा हमेशा के लिए छोड़
  172. 7:34दूंगा। और आप अच्छी तरह जानती हैं कि
  173. 7:36अथर्व सिंघानिया जो बोलता है वह करता है।
  174. 7:40दक्षराज सिंघानिया लाइब्रेरी से निकल कर
  175. 7:42सीढ़ियों पर खड़े थे। उन्होंने अपनी छड़ी
  176. 7:44थपथपाई।
  177. 7:45अथर्व गाड़ी निकालो और सिया बेटी जाओ अपना
  178. 7:50परचम लहरा कर आओ। देखता हूं कौन रोकता है
  179. 7:53तुम्हें।
  180. 7:54अथर्व ने सिया की फाइल उठाई और उसका हाथ
  181. 7:56पकड़ कर तेजी से बाहर निकल गया। स्पोर्ट्स
  182. 7:59कार शहर की सड़कों पर हवा से बातें कर रही
  183. 8:02थी। अथर्व कार चला रहा था और सिया बगल में
  184. 8:05बैठी कांप रही थी।
  185. 8:06सिया इधर देखो।
  186. 8:08सिया ने अपनी भीगी पलकों से अथर्व को
  187. 8:10देखा।
  188. 8:11तुमने मुझसे अस्पताल में वादा किया था ना
  189. 8:14कि हम दोनों मिलकर हर तूफान से लड़ेंगे।
  190. 8:17तो ये तो छोटा सा तूफान है। 5 मिनट में हम
  191. 8:20सेंटर पर होंगे। तुम्हारा ध्यान सिर्फ
  192. 8:22अपने सवालों पर होना चाहिए। उन लोगों की
  193. 8:24बातों पर नहीं।
  194. 8:26अथर्व आप मेरे लिए इतना सब क्यों करते हो?
  195. 8:29मैं तो आपके रास्ते का कांटा बन गई हूं।
  196. 8:32अथर्व ने एक हाथ स्टीयरिंग से हटाकर सिया
  197. 8:34के कांपते हाथों पर रख दिया।
  198. 8:36क्योंकि तुम कांटा नहीं। मेरी जिंदगी का
  199. 8:39सबसे खूबसूरत फूल हो सिया। तुम्हारा सपना
  200. 8:42सिर्फ तुम्हारा नहीं अब वो मेरी जीत बन
  201. 8:44चुका है।
  202. 8:46कार ठीक 1:55 पर एग्जाम सेंटर के गेट पर
  203. 8:49रुकी। सिया ने उतर कर सेंटर की तरफ कदम
  204. 8:51बढ़ाए। गेट पर पहुंचकर उसने मुड़कर देखा।
  205. 8:54अथर्व कार के पास खड़ा था। उसने दो
  206. 8:56उंगलियों से ऑल द बेस्ट का इशारा किया और
  207. 8:59मुस्कुरा दिया। सिया के चेहरे पर एक गजब
  208. 9:01का आत्मविश्वास छा गया। वह अब अकेली नहीं
  209. 9:04थी। उसके पीछे एक चट्टान जैसा पति खड़ा था
  210. 9:07जो दुनिया से लड़ने का दम रखता था। शाम के
  211. 9:11ठीक 5:00 बज रहे थे। परीक्षा केंद्र के
  212. 9:13बड़े लोहे के गेट से परीक्षार्थियों की
  213. 9:16भीड़ बाहर निकल रही थी। सिया चेहरे पर
  214. 9:18हल्की राहत और आंखों में चमक लिए बाहर आई।
  215. 9:21गेट के ठीक सामने अथर्व अपनी गाड़ी के
  216. 9:23बोनेट से टेक लगाए खड़ा था। उसने जैसे ही
  217. 9:25सिया को देखा, उसके होठों पर एक सुकून भरी
  218. 9:28मुस्कान तैर गई। वो सीधा सिया की तरफ
  219. 9:30बढ़ा।
  220. 9:31कैसा रहा पेपर? चेहरे की यह चमक बता रही
  221. 9:34है कि तुमने सारे सवालों को उनकी औकात
  222. 9:37दिखा दी।
  223. 9:38बहुत अच्छा रहा अथर्व। सारे सवाल वही आए
  224. 9:41थे जो आपने कल रात मुझे देर तक बैठकर
  225. 9:43समझाए थे। अगर आप वक्त पर नहीं पहुंचते तो
  226. 9:46मेरा ये साल बर्बाद हो जाता।
  227. 9:48जब तक मैं हूं तुम्हारी जिंदगी का कोई
  228. 9:50लम्हा बर्बाद नहीं हो सकता। चलो आज
  229. 9:53तुम्हें तुम्हारी मनपसंद कुल्फी खिलाता
  230. 9:55हूं।
  231. 9:56नहीं अथर्व घर चलना चाहिए। मां जी पहले ही
  232. 10:00बहुत गुस्से में थी। अगर देर हुई तो घर
  233. 10:03में फिर से महाभारत छिड़ जाएगी।
  234. 10:05महाभारत तो रोज का काम है उनका। पर मेरी
  235. 10:08पत्नी ने आज अपनी जिंदगी की एक बड़ी सीढ़ी
  236. 10:10चढ़ी है। इसका जश्न तो बनता है। बैठो
  237. 10:13गाड़ी में।
  238. 10:14शाम के 7:00 बजे सिंघानिया हवेली का मुख्य
  239. 10:17हॉल। घर का माहौल ऐसा था जैसे किसी की
  240. 10:20तेवीं हो रही हो। गायत्री सिंघानिया सोफे
  241. 10:23पर बैठी उस समय अपने हाथ की अंगूठी घुमा
  242. 10:25रही थी। उनके ठीक सामने दानिया चाय का कप
  243. 10:28लिए विष खोलने में जुटी थी। आंटी आपने
  244. 10:31देखा ना अथर्व कैसे आपके सामने से उस
  245. 10:33मनहूस को भगा कर ले गया। पूरे शहर में
  246. 10:36आपकी किटी पार्टी की बेइज्जती हो गई। सब
  247. 10:38कह रहे हैं सिंघानिया हवेली की बहू ने
  248. 10:40खाने में जहर मिला दिया।
  249. 10:43उसने मेरी इज्जत मिट्टी में मिलाई है
  250. 10:45तानिया। दक्षराज जी ने बीच में आकर उसका
  251. 10:48हाथ पकड़ लिया। वरना आज उस सड़क छाप को
  252. 10:51मैं धक्के मारकर घर से निकाल देती। तभी
  253. 10:54मुख्य दरवाजा खुला। अथर्व और सिया अंदर
  254. 10:57दाखिल हुए। सिया के हाथ में किताबों का
  255. 10:59बंडल था। गायत्री झटके से उठकर खड़ी हो
  256. 11:01गई। आ गई महारानी शर्म बची है थोड़ी बहुत
  257. 11:05या वो भी उस सफेद साड़ी के साथ बेच खाई।
  258. 11:07अपनी सास का सरेआम तमाशा बनवाकर अब
  259. 11:10मुस्कुराती हुई घर में कदम रख रही है।
  260. 11:12सिया ने फौरन हाथ जोड़े और सर झुका लिया।
  261. 11:16मां जी मुझसे जो गलती हुई मुझे माफ कर
  262. 11:19दीजिए। पर दाल में नमक और मिर्च मैंने
  263. 11:22नहीं मिलाई थी। भगवान की कसम खाकर कहती
  264. 11:25हूं ओ प्लीज भगवान का नाम अपने इन गंदे
  265. 11:28होठों से मत लो। रसोई में तुम्हारे अलावा
  266. 11:30कोई नहीं था। तो क्या भूत आकर मिर्च डाल
  267. 11:32गया था?
  268. 11:33तान्या मैंने दोपहर को भी समझाया था। अपनी
  269. 11:36ये घटिया जुबान बंद रखो। और मां आपको सिया
  270. 11:40की मेहनत कभी नहीं दिखेगी क्योंकि आपकी
  271. 11:42आंखों पर नफरत की पट्टी बंधी है।
  272. 11:44अथर्व तू फिर इसके लिए मुझसे जुबान लड़ा
  273. 11:47रहा है। भूल गया कि 9 महीने पेट में मैंने
  274. 11:50रखा था तुझे।
  275. 11:52भला नहीं हूं मां। पर सही और गलत का फर्क
  276. 11:55करना मुझे पापा ने सिखाया है। सी आज से इस
  277. 11:57घर के किसी फालतू काम में हाथ नहीं
  278. 11:59लगाएगी। अगले महीने इसका फाइनल इंटरव्यू
  279. 12:01और मुख्य परीक्षा है। यह सिर्फ पढ़ेगी।
  280. 12:05पढ़ेगी। यह बनेगी प्रोफेसर। इसके नसीब में
  281. 12:08चूल्हा चौका और मातम लिखा है। वह अब
  282. 12:11यूनिवर्सिटी में बच्चों को पढ़ाएगी। अगर
  283. 12:13यह पास हो गई ना अथर्व तो मैं अपनी जीभ
  284. 12:16काट लूंगी। सिया के सीने में बात तीर की
  285. 12:18तरह छू। उसने धीरे से अथर्व के पीछे से
  286. 12:21बाहर कदम निकाला। उसकी आंखों में अब आंसू
  287. 12:23नहीं एक जिद्दी स्वाभिमान था। मां जीभ मत
  288. 12:28काटिएगा। बस उस दिन अपनी आंखों से वह नफरत
  289. 12:30हटाकर देख लीजिएगा कि एक बेसहारा विधवा
  290. 12:33लड़की अपने पति के वादे और अपनी मेहनत से
  291. 12:36क्या बनकर दिखा सकती है। मैं पास भी होंगी
  292. 12:38और शहर के सबसे बड़े कॉलेज की प्रोफेसर
  293. 12:41बनकर इस चौखट पर आऊंगी। पूरे हॉल में
  294. 12:44सन्नाटा छा गया। तान्या की आंखें फटी रह
  295. 12:46गई। देख लिया अथर्व इसके पर कितने निकल आए
  296. 12:50हैं। यह मुझे चुनौती दे रही है।
  297. 12:53चुनौती नहीं मां। यह उसका आत्मविश्वास है
  298. 12:56और इस आत्मविश्वास को टूटने नहीं दूंगा।
  299. 12:58चलो सिया कमरे में चलो।
  300. 13:00अथर्व ने सिया का हाथ पकड़ा और उसे अपने
  301. 13:03साथ अपने कमरे में ले गया। पीछे गायत्री
  302. 13:05और तान्या जल भुन गई। रात के 12:00 बजे
  303. 13:08सिया और अथर्व का कमरा। हवेली में चारों
  304. 13:11तरफ गहरा अंधेरा था। सब सो चुके थे। कमरे
  305. 13:14के एक कोने में टेबल लैंप की पीली रोशनी
  306. 13:17जल रही थी। सिया फर्श पर बैठी थी। उसके
  307. 13:20सामने चार अलग-अलग किताबें खुली थी। वो
  308. 13:22पसीने से भीगे माथे के साथ लगातार पन्नों
  309. 13:25पर नोट्स लिख रही थी। आंखों में नींद का
  310. 13:27भारीपन था। पर पलकें झुकने का नाम नहीं ले
  311. 13:30रही थी। तभी दरवाजे की कुंडी धीरे से खुली
  312. 13:33और अथर्व अंदर आया। उसने ऑफिस की टाही
  313. 13:35ढीली कर रखी थी और हाथ में गर्म दूध का एक
  314. 13:38बड़ा मग था।
  315. 13:4012:00 बज चुके हैं प्रोफेसर साहिबा। क्या
  316. 13:42आज रात ही सारी डिग्रियां हासिल करने का
  317. 13:44इरादा है?
  318. 13:45सिया ने चौंक कर सर उठाया। अथर्व को देखकर
  319. 13:48उसकी थकी हुई आंखों में एक मासूम मुस्कान
  320. 13:50आ गई।
  321. 13:52अथर्व आप अभी तक सोए नहीं? आपको सुबह
  322. 13:55जल्दी ऑफिस निकलना है। पापा जी के साथ
  323. 13:57बड़ी मीटिंग है आपकी। अथर्व ने दूध का मग
  324. 14:00टेबल पर रखा और खुद सिया के सामने फर्श पर
  325. 14:02बाल्टी मार कर बैठ गया।
  326. 14:04मेरी मीटिंग तो रोज होती है सिया। पर
  327. 14:07तुम्हारी जिंदगी का यह सबसे बड़ा इम्तिहान
  328. 14:09है। जब मेरी पत्नी जागकर अपनी तकदीर लिख
  329. 14:12रही हो तो उसका पति चैन की नींद कैसे सो
  330. 14:15सकता है?
  331. 14:16आप दिन भर ऑफिस में पापा जी का बिजनेस
  332. 14:18संभालते हैं। वहां मां जी की नाराजगी का
  333. 14:21ताना सहते हैं और रात को यहां मेरे लिए
  334. 14:23जागते हैं। मैं आपकी इस मोहब्बत का कर्ज
  335. 14:25कैसे चुकाऊंगी अथर्व? अथर्व ने आगे बढ़कर
  336. 14:28सिया के गाल पर गिरे बालों की लठ को बड़े
  337. 14:30प्यार से पीछे किया। उसकी उंगलियों का
  338. 14:33स्पर्श सिया की रूह तक सिहरन पैदा कर गया।
  339. 14:35कर्ज कैसा सिया? उस दिन जब तुमने आईसीयू
  340. 14:38में अपना सिर मेरे सीने पर रखकर कहा था कि
  341. 14:41तुम्हें मुझसे प्यार है। उस दिन मेरी बंजर
  342. 14:44जिंदगी में जान लौटाई थी। राहुल ने
  343. 14:46तुम्हें सपना दिया। मैं बस उस सपने को
  344. 14:49हकीकत का आसमान देना चाहता हूं। मैं
  345. 14:51तुम्हें इतना प्यार देना चाहता हूं जितना
  346. 14:54तुम्हें कभी किसी ने ना दिया हो। खैर चलो
  347. 14:57बताओ ये वाला टॉपिक समझ आया या मैं
  348. 15:00समझाऊं?
  349. 15:01सिया ने अपनी कॉपी आगे सरका दी। यह वाला
  350. 15:04फार्मूला और इकोनॉमिक्स मॉडल मुझे बहुत
  351. 15:05उलझा रहा है। बार-बार आंकड़े गलत हो रहे
  352. 15:08हैं। अथर्व ने पेन उठाया और सिया के ठीक
  353. 15:12करीब खिसकाया। उसका कंधा सिया के कंधे से
  354. 15:15छू रहा था।
  355. 15:16देखो इसे ऐसे समझो। जब देश में मांग बढ़ती
  356. 15:20है तो उत्पादन को सहारा देना पड़ता है।
  357. 15:22ठीक वैसे ही जैसे जब तुम्हारी हिम्मत
  358. 15:24डगमगाए तो तुम्हें इस अथर्व का सहारा लेना
  359. 15:27है। समझी?
  360. 15:29सिया ने अपनी आंखें उठाई। दोनों की नजरें
  361. 15:32मिली। टेबल लैंप की रोशनी में अथर्व की
  362. 15:34आंखों में सिर्फ और सिर्फ सिया के लिए
  363. 15:36बेइंतहा मोहब्बत थी। हे भगवान क्या कोई
  364. 15:40इंसान किसी से इतना प्यार कर सकता है? इस
  365. 15:43दुनिया ने मुझे सिर्फ सफेद कफ़न और
  366. 15:45तिरस्कार दिया था। पर इस शख्स ने मुझे
  367. 15:47अपनी सांसों का ताज बना दिया।
  368. 15:52अथर्व अगर मैं परीक्षा पास नहीं कर पाई तो
  369. 15:55अगर मांझ के ताने सच हो गए तो अथर्व ने
  370. 15:59पेन रख दिया और सिया के दोनों हाथों को
  371. 16:01अपनी हथेलियों में थाम लिया। उसने सिया की
  372. 16:03गलाई को चूमा।
  373. 16:04अगर तुम हार भी गई ना तो भी मेरी नजरों
  374. 16:07में तुम सबसे बड़ी विजेता रहोगी। पर तुम
  375. 16:10हारोगी नहीं सिया क्योंकि [संगीत]
  376. 16:11तुम्हारी रगों में तुम्हारी अपनी मेहनत और
  377. 16:14राहुल का वो अधूरा सपना दौड़ रहा है और
  378. 16:16सबसे बढ़कर तुम्हारे इस पति की जान
  379. 16:19तुम्हारे इस हौसले में बसती है।
  380. 16:21सिया की आंखों से एक बूंद आंसू छलक कर
  381. 16:23अथर्व के हाथ पर गिर पड़ा। सिया ने अपना
  382. 16:26माथा अथर्व के सीने से टिका दिया। अथर्व
  383. 16:28ने धीरे से उसके सर पर हाथ रख दिया। उस
  384. 16:31शांत अंधेरी रात में उन दोनों के बीच कोई
  385. 16:34जिस्मानी चाहत नहीं थी। सिर्फ दो रूहों का
  386. 16:36एक पवित्र अटूट संगम था। सुबह के 4:00 बजे
  387. 16:40हवेली का गलियारा। कमरे में सिया
  388. 16:42पढ़ते-पढ़ते टेबल पर ही सर रखकर सो गई थी।
  389. 16:45अथर्व ने बड़े आहिस्ता से उसे गोद में
  390. 16:48उठाया और बिस्तर पर लेटा दिया। उसने सिया
  391. 16:50के ऊपर चादर ओढ़ाई। अथर्व ने सिया के माथे
  392. 16:53पर हल्का सा किस किया। फिर अथर्व चुपचाप
  393. 16:56पानी लेने के लिए कमरे से बाहर निकला।
  394. 16:59गलियारे में अंधेरा था। तभी उसने देखा कि
  395. 17:01तान्या के कमरे का दरवाजा थोड़ा खुला था
  396. 17:04और अंदर से फुसफुसाहट की आवाज आ रही थी।
  397. 17:06अथर्व के कदम ठिटक गए। वो दीवार से सटकर
  398. 17:09खड़ा हो गया। तानिया किसी से फोन पर बात
  399. 17:12कर रही थी। हां, काम बिल्कुल पक्का होना
  400. 17:15चाहिए। यूनिवर्सिटी के हेड क्लर्क को
  401. 17:17मैंने 500 कैश भिजवा दिए हैं। जिस दिन
  402. 17:20सिया का एडमिट कार्ड और रोल नंबर लिस्ट
  403. 17:22में आए, उसका फॉर्म गायब हो जाना चाहिए।
  404. 17:24वो परीक्षा हॉल तक पहुंचनी नहीं चाहिए।
  405. 17:27अथर्व का खून खौल उठा। उसकी मुट्ठियां
  406. 17:29इतनी जोर से भिच गई कि उंगलियों के पोर
  407. 17:31सफेद पड़ गए।
  408. 17:35एक बार उसका एग्जाम छूटा फिर मैं और आंटी
  409. 17:37मिलकर इस घर से उसे कुत्ते की तरह
  410. 17:39दुत्दकार कर निकालेंगे। फिर अथर्व सिर्फ
  411. 17:42मेरा होगा। अथर्व ने बाहर खड़े होकर अपने
  412. 17:45दांत पीसे। उसकी आंखों में एक खूंखार चमक
  413. 17:48आ गई।
  414. 17:49तान्या तुमने एक बार फिर आंख से खेलने की
  415. 17:52कोशिश की है। अब तक तुमने सिर्फ मेरा
  416. 17:55प्यार देखा था। अब तुम देखोगी कि अपनी
  417. 17:57पत्नी के सपने को बचाने के लिए अथर्व
  418. 18:00सिंघानिया किस हद तक गिर सकता है और किस
  419. 18:02हद तक उठ सकता है।
  420. 18:04अथर्व मुड़ा और सीधे अपने पिता दक्षराज के
  421. 18:07कमरे की तरफ पड़ गया। तानिया को नहीं पता
  422. 18:09था कि उसकी बातें अथर्व सुन चुका था। सुबह
  423. 18:13के ठीक 7:00 बज रहे थे। सिंघानिया हवेली
  424. 18:15की स्टडी रूम में दक्षराज सिंघानिया गंभीर
  425. 18:18मुद्रा में अपनी मेज पर बैठे थे। तभी कमरे
  426. 18:20का दरवाजा झटके से खुला और अथर्व अंदर
  427. 18:23दाखिल हुआ। उसके चेहरे की नसें गुस्से से
  428. 18:25खींची हुई थी और आंखें अंगारों जैसी लाल
  429. 18:28थी।
  430. 18:29अथर्व इतनी सुबह-सुबह तुम्हारे चेहरे पर
  431. 18:31ये बवंडर कैसा है? पापा बर्दाश्त की हद
  432. 18:35पार हो चुकी है। तान्या ने अपनी घटिया
  433. 18:37चालों की सारी सीमाएं लांग दी है। साफ-साफ
  434. 18:40कहो क्या हुआ है? यूनिवर्सिटी के हेड
  435. 18:43क्लर्क को ₹50,000 नगद दिए गए हैं पापा।
  436. 18:47किस लिए? ताकि सिया का फाइनल एडमिट कार्ड
  437. 18:50और रोल नंबर लिस्ट से गायब कर दिया जाए।
  438. 18:52क्या कह रहे हो तुम? एक बच्ची के भविष्य
  439. 18:55के साथ इतना घिनौना खिलवाड़ और वो भी
  440. 18:58हमारे कॉलेज में। हां पापा, आज दोपहर ठीक
  441. 19:0112:00 बजे फाइनल वेरिफिकेशन लिस्ट नोटिस
  442. 19:04बोर्ड पर चिपकगनी है। अगर आज सिया का नाम
  443. 19:06उस लिस्ट में नहीं आया तो उसका पूरा साल
  444. 19:09बर्बाद हो जाएगा। राहुल को दिया हुआ वचन,
  445. 19:11उसकी रात दिन की मेहनत सब मिट्टी में मिल
  446. 19:13जाएगी। और तुम्हें यह बात कैसे पता चली?
  447. 19:16मैंने खुद अपनी आंखों से तान्या को रात के
  448. 19:18अंधेरे में फोन पर क्लक से बातें करते
  449. 19:21सुना है। और सबसे भयानक बात जानते हैं
  450. 19:24क्या है पापा? इस पूरी गंदगी में मां का
  451. 19:26मुख समर्थन है। गायत्री अपने अहंकार में
  452. 19:29इतनी अंधी हो जाएगी मैंने कभी सोचा नहीं
  453. 19:32था। लेकिन अब और नहीं सिंघानिया ट्रस्ट के
  454. 19:35दम पर वो पूरी यूनिवर्सिटी चलती है। और
  455. 19:38किसी की इतनी मजाल नहीं कि मेरी बहू के हक
  456. 19:40पर डाका डाले। अब क्या करने वाले हैं
  457. 19:42पापा? तुम सिर्फ सिया को तैयार रहने के
  458. 19:44लिए कहो। बाकी का काम मेरा है। आज सिर्फ
  459. 19:48परीक्षा नहीं होगी। अथर्व आज इस हवेली में
  460. 19:50दूध का दूध और पानी का पानी होगा।
  461. 19:53सुबह के 10:00 बजे शर्मा निवास से जानकी
  462. 19:56देवी और आरोही भी सिंघानिया हवेली पहुंची
  463. 19:59हुई थी। क्योंकि आज सिया की अंतिम परीक्षा
  464. 20:01का दिन था। हवेली के मुख्य ड्राइंग रूम
  465. 20:03में गायत्री देवी और तान्या सोफे पर बैठी
  466. 20:05चाय की चुस्कियां ले रही थी। आंटी आप
  467. 20:09बिल्कुल फिक्र मत कीजिए। आज दोपहर के बाद
  468. 20:11वह सफेद साड़ी वाली हमेशा के लिए इस घर से
  469. 20:13अपना बोरिया बिस्तर बांध लेगी।
  470. 20:16सच कह रही है ना तान्या। कोई गड़बड़ तो
  471. 20:19नहीं होगी? दक्षराज जी और अथर्व उनके पीछे
  472. 20:22अंधे हो चुके हैं। अरे आंटी जब उसका नाम
  473. 20:26ही लिस्ट में नहीं होगा तो वह परीक्षा हॉल
  474. 20:28के अंदर कदम भी नहीं रख पाएगी और जब
  475. 20:30परीक्षा नहीं दे पाएगी तो काहे की
  476. 20:32प्रोफेसर काहे की डिग्री। तभी जानकी देवी
  477. 20:35हॉल में आई। उनके चेहरे पर बेचैनी थी।
  478. 20:38समधन जी सिया सुबह से कमरे में पूजा कर
  479. 20:42रही है। आज उसका इतना बड़ा दिन है। क्या
  480. 20:44आप उसे अपना आशीर्वाद नहीं देंगी?
  481. 20:47कैसा आशीर्वाद जानकी जी? जो लड़की हमारे
  482. 20:50खानदान के लिए बदनामी के अलावा कुछ नहीं
  483. 20:52लाई उसे मैं क्या आशीर्वाद दूं? बेहतर
  484. 20:55होगा कि अपनी बहू को संभालिए। बहुत हवा
  485. 20:57में उड़ रही है वो।
  486. 20:59भाभी हवा में नहीं उड़ रही आंटी जी।
  487. 21:01उन्होंने खून पसीना एक करके पढ़ाई की है।
  488. 21:03आप बस देखते जाइए। आज वो पूरे शहर का नाम
  489. 21:06रोशन करेंगी।
  490. 21:08[हंसी]
  491. 21:08ओो छोटी बहन बहुत घमंड है ना अपनी भाभी
  492. 21:11पर। 2 घंटे रुक जाओ। सारा घमंड आंसुओं में
  493. 21:14बह जाएगा। तभी सीढ़ियों से सिया नीचे
  494. 21:17उतरी। उसने हल्के नीले रंग की साड़ी पहन
  495. 21:19रखी थी। माथे पर सिंदूर की एक बारीक लाल
  496. 21:22रेखा थी। हाथ में पेन और किताबों की फाइल।
  497. 21:25अरे वाह। प्रोफेसर साहिबा तो सच में सजधज
  498. 21:28कर तैयार है। क्या बात है सिया? तुम्हें
  499. 21:31सच में लगता है कि तुम आज परीक्षा दे
  500. 21:33पाओगी। रास्ते से हट जाओ तानिया। मैंने
  501. 21:36अपनी मेहनत पर भरोसा किया है। किसी के
  502. 21:38टुकड़ों या साजिशों पर नहीं।
  503. 21:41सिया तान्या से तमीज से बात करो। यह तेरी
  504. 21:43नौकरानी नहीं है
  505. 21:46और मैं भी इस घर की गुलाम नहीं हूं मां
  506. 21:48जी। आज तक आपने मुझे जो ताने दिए मैंने सब
  507. 21:51सहे। पर आज मेरी शिक्षा और मेरे
  508. 21:53आत्मसम्मान का दिन है। आज मुझे कोई नहीं
  509. 21:55रोक सकता। रोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी
  510. 21:58डार्लिंग। कॉलेज के गेट पर तैनात गाड़ी
  511. 22:00तुम्हें धक्के देकर बाहर निकाल देंगे।
  512. 22:02देखना तुम।
  513. 22:04अगर तुम्हारे अंदर थोड़ी सी भी इंसानियत
  514. 22:06बची होती तान्या तो तुम समझ पाती कि किसी
  515. 22:09के सपनों को कुचलने का अंजाम क्या होता
  516. 22:11है। तभी हवेली का मुख्य दरवाजा जोर की
  517. 22:14आवाज के साथ खुला। दक्षराज सिंघानिया अपनी
  518. 22:17छड़ी पटकते हुए अंदर आए। उनके ठीक पीछे
  519. 22:19अथर्व था और उनके साथ शहर के पुलिस
  520. 22:21कमिश्नर दो महिला सिपाही यूनिवर्सिटी का
  521. 22:24हेड क्लर्क शर्मा हथकड़ियों में जकड़ा हुआ
  522. 22:27था। क्लर्क को इस हालत में देखकर तान्या
  523. 22:29के हाथ से चाय का कप छूटकर फर्श पर गिर
  524. 22:31पड़ा। कप के टुकड़े बिखर गए और गर्म चाय
  525. 22:34ताना की जूतों पर फैल गई।
  526. 22:36ये सब क्या है?
  527. 22:39दक्षराज जी पुलिस को घर के अंदर क्यों
  528. 22:41लेकर आए हैं आप? हमारे खानदान की क्या
  529. 22:43इज्जत रह जाएगी?
  530. 22:45अगर तुम्हें खानदान की इज्जत की परवाह
  531. 22:47होती गायत्री तो तुम्हें इस घर में एक
  532. 22:49मुजरिम को पनाह नहीं देती।
  533. 22:51अथर्व आगे बढ़ा और उसने क्लर्क की कॉलर
  534. 22:54पकड़ कर उसे सीधा तानिया के कदमों के
  535. 22:56सामने धकेल दिया।
  536. 22:57बोल शर्मा सबके सामने बोल। किसने दिए थे
  537. 23:01तुझे ₹00? किसने कहा था सिया का फॉर्म और
  538. 23:04एडमिट कार्ड फाड़ने के लिए?
  539. 23:06क्लर्क थरथर कांप रहा था। वो हाथ जोड़कर
  540. 23:08जमीन पर गिर पड़ा।
  541. 23:10माफ कर दीजिए बड़े साहब। मुझे बखश दीजिए।
  542. 23:14मुझसे बहुत बड़ा पाप हो गया। ये तान्या
  543. 23:17मैडम ने मुझे रात को फार्म हाउस पर बुलाया
  544. 23:19था। इन्होंने मुझे ₹500 कैश दिए और कहा कि
  545. 23:23सियार शर्मा का रोल नंबर मुख्य परीक्षा
  546. 23:26सूची से गायब कर दो। सब लोग हैरान हो गए।
  547. 23:29जानकी देवी ने अपनी छाती पर हाथ रख लिया।
  548. 23:32हे भगवान इतना बड़ा षड्यंत्र तुम्हें शर्म
  549. 23:36नहीं आई डायन। भाभी ने तुम्हारा क्या
  550. 23:38बिगाड़ा था? तुम इतनी कैसे गिर सकती हो?
  551. 23:42गायत्री का पूरा शरीर पसीने से भीग गया।
  552. 23:44उनकी आवाज लड़खड़ाने लगी। तान्या क्या यह
  553. 23:48सच है? तूने मुझसे कहा था कि तू सिर्फ
  554. 23:51सिया को डराना चाहती है। तूने सच में
  555. 23:54रिश्वत दी?
  556. 23:56हां। हां दी मैंने रिश्वत और बिल्कुल सही
  557. 23:59किया मैंने। यह औरत इसी लायक है। अथर्व
  558. 24:01मेरा है। सिर्फ मेरा। इस भिखारी मनहूस
  559. 24:04विधवा ने आकर मेरा सब कुछ छीन लिया। मैं
  560. 24:06इसे कैसे जीतने देती? मैं इसे सड़क पर
  561. 24:09लाकर छोड़ना चाहती थी। अथर्व की आंखें
  562. 24:12गुस्से से लाल हो चुकी थी। उसने अपनी
  563. 24:14मुट्ठियां भी ली।
  564. 24:15तुम्हारा कभी कुछ था ही नहीं। तान्या। जो
  565. 24:18औरत किसी के आंसुओं पर, किसी की बेबसी पर,
  566. 24:21अपनी खुशियों का महल बनाना चाहे वो सिर्फ
  567. 24:24एक घटिया इंसान हो सकती है। तुमने सिया के
  568. 24:26सफेद लिबास पर कालिक पोतनी चाही थी ना? आज
  569. 24:29कानून तुम्हारे चेहरे पर वो कालिक पोतेगा।
  570. 24:32तानिया रोते हुए अथर्व का हाथ पकड़ने की
  571. 24:34कोशिश करती है।
  572. 24:35अथर्व प्लीज मुझे बचा लो। मैं जेल नहीं
  573. 24:38जाना चाहती। मैंने सब कुछ तुम्हारे प्यार
  574. 24:40में किया। अथर्व सिर्फ तुम्हारे लिए।
  575. 24:42अथर्व ने झटके से अपना हाथ पीछे खींच
  576. 24:45लिया। जैसे किसी जहरीले कीड़े ने छू लिया
  577. 24:47हो।
  578. 24:48तुम्हारा यह गंदा पागलपन प्यार नहीं एक
  579. 24:50बीमारी है तान्या और इसकी दवा सिर्फ
  580. 24:53सलाखों के पीछे है। कमिश्नर साहब ले जाइए
  581. 24:56इसे।
  582. 24:57महिला सिपाहियों ने आगे बढ़कर तानिया की
  583. 24:59दोनों कलाइयों को कसकर पकड़ लिया। तानिया
  584. 25:02घसीटते हुए बाहर जाते वक्त चीखती रही।
  585. 25:04आंटी मुझे बचाइए। अथर्व मैं तुम्हें
  586. 25:08बर्बाद कर दूंगी। सिया तू कभी खुश नहीं
  587. 25:11रहेगी कभी नहीं। तानिया की चीखें बाहर
  588. 25:15पुलिस की जीप के सायरन में दब गई। हॉल में
  589. 25:18एक भयानक सन्नाटा पसर गया। गायत्री देवी
  590. 25:20अपनी जगह पर निढाल होकर सोफे पर गिर पड़ी।
  591. 25:23उनका घमंड, उनका अभिमान सब कुछ तान्या की
  592. 25:26इस घिनौनी करतूत के साथ ही जलकर खाक हो
  593. 25:28चुका था।
  594. 25:30देख लिया अपनी आंखों से गायत्री। जिस
  595. 25:32लड़की को तुम अपनी खानदानी बहू बनाना
  596. 25:35चाहती थी, उसकी असलियत जेल की कोठरी
  597. 25:38निकली। और जिस सिया को तुमने मनहूस कहकर
  598. 25:41रोज जलील किया वो आज भी खामोश खड़ी
  599. 25:44तुम्हारी आंखों के आंसू देख रही है।
  600. 25:46गायत्री ने नजरें झुका ली। आज उनके पास
  601. 25:49बोलने के लिए कोई शब्द नहीं बचा था। अथर्व
  602. 25:52धीरे-धीरे सिया के पास आया। उसने अपनी जीभ
  603. 25:54से एक लिफाफा निकाला और सिया के हाथों में
  604. 25:56रख दिया।
  605. 25:58यह रहा तुम्हारा ओरिजिनल रोल नंबर और
  606. 26:00एडमिट कार्ड। तुम्हारा नाम पूरे जिले की
  607. 26:03लिस्ट में सबसे ऊपर है सिया। कोई तुम्हारी
  608. 26:06मेहनत को नहीं छीन सकता। सिया ने उस
  609. 26:09लिफाफे को अपनी कांपती उंगलियों से छुआ।
  610. 26:11उसकी आंखों से आंसुओं की दो मोटी बूंदे
  611. 26:14लिफाफे पर टपक पड़ी। अथर्व अगर आज आप ना
  612. 26:18होते तो मेरा क्या होता? अथर्व सिया के
  613. 26:22दोनों आंसू अपनी उंगलियों से पोंछता है।
  614. 26:25अगर मैं ना होता तो भी तुम्हारा सच जीतता
  615. 26:27सिया। पर अब वक्त बातों का नहीं है। घड़ी
  616. 26:30देखो। 11:20 हो चुके हैं। बाहर गाड़ी
  617. 26:34तैयार है। आज तुम्हें साबित करना है कि एक
  618. 26:36औरत की हिम्मत क्या होती है।
  619. 26:38जानकी देवी ने आगे आकर सिया के सर पर हाथ
  620. 26:41रखा। जा मेरी बच्ची अपने पति राहुल का
  621. 26:45सपना और अपने इस पति अथर्व का मान दोनों
  622. 26:48जीत कर आ। दोपहर के ठीक 2:00 बजे परीक्षा
  623. 26:52केंद्र के बाहर। परीक्षा केंद्र के बाहर
  624. 26:54अथर्व, दक्षराज, जानकी देवी और आरोही खड़े
  625. 26:58इंतजार कर रहे थे। तभी परीक्षा का लंबा
  626. 27:00सायरन बजा। लोहे का बड़ा गेट खुला और
  627. 27:03परीक्षार्थियों की भीड़ बाहर आने लगी।
  628. 27:05भीड़ के बीच से सिया बाहर निकली। अथर्व
  629. 27:07तेजी से आगे बढ़ा।
  630. 27:09पेपर कैसा हुआ सिया? सारे सवाल बन गए।
  631. 27:12सिया ने धीरे से अपना सर उठाया। उसने
  632. 27:14अथर्व की आंखों में देखा और उसके चेहरे पर
  633. 27:16एक खिलखिलाती हुई मुस्कान बिखर गई। एक भी
  634. 27:20सवाल नहीं छूटा अथर्व। ऐसा लग रहा था मानो
  635. 27:22हर सवाल का जवाब मेरी उंगलियों पर पहले से
  636. 27:25लिखा था। मैंने अपना पूरा दिल उस उत्तर
  637. 27:27पुस्तिका में उड़ेल दिया। दक्षराज ने आगे
  638. 27:30बढ़कर सिया के सर पर हाथ रखा।
  639. 27:33मुझे तुम पर गर्व है बहू।
  640. 27:352 महीने बाद यूनिवर्सिटी आज का दिन पूरे
  641. 27:39शहर के लिए ऐतिहासिक था। पूरे राज्य की
  642. 27:42यूनिवर्सिटीज का जॉइंट कॉन्वोकेशन और
  643. 27:44अपॉइंटमेंट सेरेमनी आयोजित किया गया था।
  644. 27:47ऑडिटोरियम खचाखच भरा हुआ था। मंच पर
  645. 27:50यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर, [संगीत]
  646. 27:51एजुकेशन मिनिस्टर और डिस्टिंग्विश्ड
  647. 27:54गेस्ट्स बैठे थे। अथर्व, दक्षराज, जानकी
  648. 27:56देवी और रिहान पहली लाइन में बैठे थे। तभी
  649. 28:00लाउडस्पीकर पर वाइस चांसलर की आवाज गूंजी।
  650. 28:03देवियों और सज्जनों आज हमें यह बताते हुए
  651. 28:06बहुत गर्व हो रहा है कि इस साल की राज्य
  652. 28:09स्तरीय प्रोफेसर परीक्षा में पूरे राज्य
  653. 28:11में पहला स्थान हासिल किया है मिसेज सिया
  654. 28:15सिंघानिया ने। उन्होंने ना सिर्फ टॉप किया
  655. 28:19है बल्कि इकोनॉमिक्स में अब तक का सबसे
  656. 28:21बड़ा रिकॉर्ड बनाया है। उन्हें नेशनल पीजी
  657. 28:24कॉलेज का हेड ऑफ डिपार्टमेंट बनाया जाता
  658. 28:26है। पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से
  659. 28:29गूंज उठा। जानकी देवी ने अपनी साड़ी के
  660. 28:32पल्लू से खुशी के आंसू पोंछ लिए। सिया
  661. 28:35धीरे-धीरे मंच की सीढ़ियां चढ़ी। एजुकेशन
  662. 28:37मिनिस्टर ने आगे बढ़कर सिया के गले में
  663. 28:40गोल्ड मेडल पहनाया और उसके हाथ में
  664. 28:42जॉइनिंग लेटर दिया और माइक सिया के सामने
  665. 28:45कर दिया गया। मिस सिया हम चाहेंगे कि आज
  666. 28:49के इस खास मौके पर आप दो शब्द जरूर कहें।
  667. 28:52सिया ने कांपते हाथों से माइक पकड़ा। पूरे
  668. 28:54हॉल में एकदम सन्नाटा छा गया। सिया ने
  669. 28:57सामने देखा। पहली लाइन में उसकी सास जानकी
  670. 28:59देवी बैठी थी। साथ में ससुर दक्षराज जी और
  671. 29:03ठीक उनके बगल में अथर्व बैठा था। जिसकी
  672. 29:05आंखों में गर्व और प्यार के आंसू साफ बह
  673. 29:08रहे थे। आज जब मैं स्टेज पर खड़ी हूं तो
  674. 29:12मुझे वह दिन याद आ रहा है जब मेरी दुनिया
  675. 29:14उजड़ गई थी। मेरे हाथों की चूड़ियां तोड़
  676. 29:17दी गई थी और मुझे सफेद साड़ी पहना दी गई
  677. 29:20थी। समाज ने यह मान लिया था कि एक विधवा
  678. 29:22की जिंदगी बस रोने धोने और घर के एक कोने
  679. 29:25में घुटने के लिए ही बची है। हॉल में इतना
  680. 29:28सन्नाटा था कि सिर्फ सिया की आवाज गूंज
  681. 29:30रही थी। मेरे पहले पति राहुल ने मरते वक्त
  682. 29:33अपनी मां से कहा था कि वह मुझे पढ़ाएं और
  683. 29:36अपने पैरों पर खड़ा करें। मेरी सास जानकी
  684. 29:39देवी जी ने अपने बेटे के उस वादे को
  685. 29:41निभाने के लिए खुद सब कुछ झेला। लेकिन
  686. 29:45सिया की आवाज हल्की सी कांपी। उसने सीधे
  687. 29:48अधर्व की आंखों में देखा।
  688. 29:50लेकिन जब यह समाज मेरे सफेद कपड़ों पर
  689. 29:53सवाल उठा रहा था। मुझे मनहूस बोल रहा था।
  690. 29:56तब एक इंसान मेरे आगे दीवार बनकर खड़ा हो
  691. 29:58गया। अथर्व सिंघानिया।
  692. 30:01पूरे हॉल के लोग मुड़कर अथर्व को देखने
  693. 30:04लगे। अथर्व ने अपने होठ दबाए। उसकी आंखों
  694. 30:06से खुशी के आंसू टपक पड़े। अथर्व ने सिर्फ
  695. 30:10दुनिया के खिलाफ जाकर मेरी मांग में
  696. 30:12सिंदूर नहीं भरा था। उन्होंने मुझे मेरा
  697. 30:14खोया हुआ सम्मान वापस दिलाया। वह दिन भर
  698. 30:17अपने पापा का ऑफिस संभालते थे और रात-रात
  699. 30:20भर जागकर मुझे पढ़ाते थे। वो मेरे लिए चाय
  700. 30:23बनाते। मेरे नोट्स तैयार करवाते और जब
  701. 30:26मेरी हिम्मत टूटती तो कहते तुम कर सकती हो
  702. 30:29सिया आज अगर मैं इस मुकाम पर हूं तो यह
  703. 30:32मेरी अकेले की जीत नहीं है। यह जीत अथर्व
  704. 30:35के उस सच्चे और निस्वार्थ प्यार की है
  705. 30:37जिसने एक टूटी हुई लड़की को दोबारा जीना
  706. 30:39सिखाया। सिया ने अपने गले से वह सोने का
  707. 30:42मेडल निकाला। वो स्टेज की सीढ़ियों से
  708. 30:44नीचे उतर कर आई। वहां मौजूद बड़े-बड़े लोग
  709. 30:47और अफसर हैरान होकर उसे देखने लगे। सिया
  710. 30:50सीधे पहली लाइन में आई। उसने पहले अपनी
  711. 30:52सास जानकी देवी और ससुर दक्षराज जी के पैर
  712. 30:55छूकर आशीर्वाद लिया। फिर वह मुड़ी और सीधे
  713. 30:58अथर्व के सामने आकर खड़ी हो गई। सिया ने
  714. 31:00दोनों हाथों से वह गोल्ड मेडल अथर्व के
  715. 31:03गले में डाल दिया।
  716. 31:05यह मेडल मेरा नहीं। आपका है अथर्व। इस पर
  717. 31:09सिर्फ और सिर्फ आपका हक है। अथर्व ने आगे
  718. 31:12बढ़कर सिया के दोनों हाथ अपने हथेलियों
  719. 31:14में थाम लिए। उसने भरे हॉल की परवाह किए
  720. 31:17बिना झुककर सिया के माथे को चूम लिया।
  721. 31:20तुम्हारी ये खुशी और तुम्हारी ये मुस्कान
  722. 31:22मेरे लिए दुनिया की हर दौलत और मेडल से
  723. 31:25बड़ी है सिया। तुम जीत गई। और मैं जिंदगी
  724. 31:28भर तुम्हारे प्यार में हारने को तैयार
  725. 31:30हूं।
  726. 31:31पूरा हॉल में मौजूद सभी लोग खड़े होकर
  727. 31:34तालियां बजाने लगे। समारोह खत्म हो चुका
  728. 31:36था। शाम के वक्त जब अथर्व की गाड़ी
  729. 31:38सिंघानिया हवेली के बड़े गेट से अंदर
  730. 31:40दाखिल हुई तो पूरा माहौल बदला हुआ था।
  731. 31:43गाड़ी से पहले दक्षराज जी उतरे। फिर जानकी
  732. 31:46देवी और आरोही। आखिर में अथर्व ने
  733. 31:48मुस्कुराते हुए सिया का हाथ पकड़ कर उसे
  734. 31:51गाड़ी से बाहर निकाला। सिया के हाथ में
  735. 31:53उसका गोल्ड मेडल और यूनिवर्सिटी का
  736. 31:55आधिकारिक नियुक्ति पत्र था।
  737. 31:58जैसे ही सबने हवेली के मुख्य दरवाजे की
  738. 32:00तरफ कदम बढ़ाए, सबके पैर अचानक ठिठक गए।
  739. 32:03हवेली की चौखट पर गायत्री सिंघानिया अकेली
  740. 32:06खड़ी थी। उनके हाथों में पूजा की एक बड़ी
  741. 32:08पीतल की थाली थी जिसमें जलता हुआ दिया,
  742. 32:10रोली, चावल और फूलों की माला सजी थी। उनके
  743. 32:13चेहरे से वह पुराना घमंड पूरी तरह गायब था
  744. 32:16और आंखों में पछतावे के गहरे आंसू झलक रहे
  745. 32:19थे। सिया ने डरकर अथर्व का हाथ थोड़ा कस
  746. 32:22लिया। उसे लगा शायद मां जी [संगीत] फिर
  747. 32:24कोई नया बखेड़ा खड़ा करेंगी। अथर्व ने आगे
  748. 32:27बढ़कर सख्त लेकिन दबी आवाज में कहा। मां
  749. 32:30अगर आप फिर से यहां कोई तमाशा करने के लिए
  750. 32:33खड़ी है तो प्लीज रास्ते से हट जाइए। आज
  751. 32:35मेरी पत्नी की जिंदगी का सबसे बड़ा दिन
  752. 32:38है। मैं कोई कड़वाहट नहीं चाहता।
  753. 32:40गायत्री ने कोई जवाब नहीं दिया। बस उनकी
  754. 32:43आंखों से दो मोटे-मोटे आंसू फिसल कर आरती
  755. 32:46की थाली में गिर पड़े। उन्होंने कांपते
  756. 32:48हाथों से थाली टेबल पर रखी और बिना एक पल
  757. 32:50गवाए सीधे आगे बढ़कर सिया के सामने अपने
  758. 32:53दोनों हाथ जोड़ लिए। मुझे माफ कर दे बहू।
  759. 32:56मुझे माफ कर दे मेरी बच्ची। हॉल में खड़े
  760. 33:00हर शख्स की सांसे जैसे थम गई। अथर्व,
  761. 33:02दक्षराज और जानकी देवी हैरान होकर गायत्री
  762. 33:05को देखने लगी। सिया घबरा गई। उसने फौरन
  763. 33:08आगे बढ़कर गायत्री के हाथ पकड़ लिए। मां
  764. 33:11जी, यह क्या कर रही आप? आप घर की बड़ी
  765. 33:14हैं। मेरे सामने हाथ मत जोड़िए। मुझे पाप
  766. 33:16लगेगा।
  767. 33:18नहीं सिया, पाप तो मुझसे हुआ है। मैंने उस
  768. 33:21घटिया तानिया की बातों में आकर अपने ही
  769. 33:24सोने जैसी बहू को कोयला समझ लिया। मैंने
  770. 33:27तेरे उस पवित्र सफेद लिबास को मनहूस कहा।
  771. 33:29जबकि असली मनहूसियत तो मेरे अपने दिमाग और
  772. 33:32अहंकार में थी। तूने मेरे बेटे की जान
  773. 33:34बचाई। तूने इस परिवार की मर्यादा रखी और
  774. 33:38मैंने बदले में तुझे सिर्फ जख्म और आंसू
  775. 33:40दिए। दक्षराज जी ने धीरे से आगे आकर
  776. 33:43गायत्री के कंधे पर हाथ रखा।
  777. 33:45देर से ही सही गायत्री। लेकिन आज तुम्हारी
  778. 33:48आंखों से वो झूठी शान का पर्दा हट गया। आज
  779. 33:51तुमने साबित कर दिया कि एक मां अपने
  780. 33:54बच्चों की खुशी के आगे झुकना जानती है।
  781. 33:57गायत्री ने आरती की थाली उठाई। उन्होंने
  782. 33:59बहुत प्यार और श्रद्धा से सिया की नजर
  783. 34:01उतारी। उसके माथे पर लाल रोली और अक्षत का
  784. 34:04तिलक लगाया और फिर अपने गले से खानदान का
  785. 34:07सबसे कीमती पुश्तैनी सोने का हार निकाला।
  786. 34:10गायत्री ने वो हार सिया के गले में पहना
  787. 34:12दिया। यह हार अब तक इस हवेली की मालकिन की
  788. 34:15पहचान था। आज यह हार और इस हवेली की हर एक
  789. 34:18चाबी तेरी है। प्रोफेसर सिया सिंघानिया तू
  790. 34:22सिर्फ मेरे बेटे की पत्नी नहीं इस घर की
  791. 34:25शान है। सिया की आंखों से भी खुशी के आंसू
  792. 34:28बह निकले। उसने झुककर गायत्री के पैर छुए।
  793. 34:31इस बार गायत्री पीछे नहीं हटी बल्कि
  794. 34:33उन्होंने झुककर सिया को अपनी छाती से लगा
  795. 34:35लिया। सास और बहू के इस मिलन ने बरसों की
  796. 34:38नफरत और दूरियों को एक ही पल में धो दिया।
  797. 34:41जबकि जानकी देवी आगे बढ़ी। उनके चेहरे पर
  798. 34:44एक सुकून भरी मुस्कान थी।
  799. 34:46समधन जी आज मेरी छाती चौड़ी हो गई। मेरे
  800. 34:50बेटे राहुल ने जो सपना देखा था आज वह पूरा
  801. 34:53हुआ और आपकी इस ममता ने मेरी बच्ची को
  802. 34:55उसका असली घर दे दिया।
  803. 34:58यह सब आपके संस्कारों की वजह से है। जानकी
  804. 35:00जी आपने बेटी नहीं एक साक्षात देवी को
  805. 35:03जन्म दिया है। आरोही ने ताली बजाते हुए
  806. 35:06माहौल को हल्का किया। अरे वाह अगर सास बहू
  807. 35:09का यह इमोशनल सीन खत्म हो गया हो तो क्या
  808. 35:11हम अपनी नई नवेली प्रोफेसर भाभी का मुंह
  809. 35:13मीठा करवा सकते हैं? पूरा हॉल हंसी के
  810. 35:16ठहाकों से गूंज उठा। रात के 11:00 बजे
  811. 35:19हवेली की छत पर आसमान में पूरा चांद चमक
  812. 35:22रहा था और ठंडी सुहानी हवा चल रही थी।
  813. 35:25हवेली के नीचे सब सो चुके थे। सिया छत की
  814. 35:28रेलिंग के सहारे खड़ी चांद को देख रही थी।
  815. 35:30उसके चेहरे पर गहरा रूहानी सुकून था। तभी
  816. 35:34पीछे से किसी ने धीरे से आकर उसके कंधों
  817. 35:36पर एक गर्म शॉल डाल दी। सिया ने पलट कर
  818. 35:39देखा। अथर्व हाथ में दो कप गर्म कॉफी ले
  819. 35:41खड़ा था। चेहरे पर वही जानी पहचानी
  820. 35:44मुस्कान थी।
  821. 35:45इतनी रात को अकेले यहां क्या सोच रही है
  822. 35:47प्रोफेसर साहिबा? क्या कल के पहले लेक्चर
  823. 35:50की तैयारी अभी से दिमाग में चल रही है?
  824. 35:52सिया ने मुस्कुरा कर कॉफी का कप थाम लिया।
  825. 35:56नहीं अथर्व मैं बस उस सफर को याद कर रही
  826. 35:58थी। वो दिन जब मैं सफेद साड़ी में पहली
  827. 36:02बार कॉलेज आई थी। जब सब मुझ पर हंसते थे
  828. 36:05और आज का दिन जब सबने खड़े होकर मेरे लिए
  829. 36:08तालियां बजाई। ऐसा लगता है जैसे मैं कोई
  830. 36:10सपना देख रही हूं। अथर्व ने अपनी कॉफी
  831. 36:13साइड की मेज पर रखी और सिया के बिल्कुल
  832. 36:15करीब आ गया। उसने सिया की आंखों में गहराई
  833. 36:18से देखा।
  834. 36:19यह सपना नहीं है सिया। यह तुम्हारी मेहनत
  835. 36:22का फल है। और सच कहूं तो जब तुम उस स्टेज
  836. 36:26पर खड़ी होकर मेरे बारे में बोल रही थी
  837. 36:28ना। मुझे लगा कि मेरी पूरी जिंदगी सफल हो
  838. 36:31गई। उस दिन जब मैंने तुम्हारी मांग में
  839. 36:34पहली बार सिंदूर भरा था। वो शायद मेरा
  840. 36:37पागलपन था।
  841. 36:39लेकिन आज आज मेरी हर धड़कन सिर्फ तुम्हारे
  842. 36:42नाम से चलती है।
  843. 36:43सिया की पलकें झुक गई। उसने अपना सर अथर्व
  844. 36:46के सीने पर रख दिया। अथर्व अगर उस दिन आप
  845. 36:50उस अस्पताल के आईसीयू में या उस लाइब्रेरी
  846. 36:53में मेरे साथ खड़े ना होते तो यह सिया
  847. 36:55समाज के तानों के नीचे कब की दब कर मर
  848. 36:57चुकी [संगीत] होती। आपने मुझे सिर्फ प्यार
  849. 37:00नहीं दिया। आपने मुझे मेरा वजूद लौटाया
  850. 37:02है। अथर्व ने अपनी बाहें सिया के
  851. 37:05इर्द-गिर्द [संगीत]
  852. 37:06कस ली। उसने झुककर सिया के माथे पर किस
  853. 37:08किया और फिर सिया को प्यार से देखने लगा।
  854. 37:11और तुमने मुझे एक बिगड़े हुए रईस दादे से
  855. 37:13एक सच्चा इंसान बनाया है। सिया अब इस सफर
  856. 37:16में कभी कोई जुदाई नहीं होगी। कोई आंसू
  857. 37:19नहीं होगा।
  858. 37:20सिया ने मुस्कुराते हुए अपना हाथ अथर्व के
  859. 37:23हाथ में फंसा लिया। हां अथर्व अब सिर्फ
  860. 37:26प्यार होगा और एक नया सवेरा होगा। शर्मा
  861. 37:30[संगीत] निवास में आज सुबह से ही एक अलग
  862. 37:32सी चहल-पहल थी। जानकी देवी ने नहा धोकर घर
  863. 37:35के छोटे से मंदिर में दिया जलाया।
  864. 37:37उन्होंने अगरबत्ती घुमाई और दीवार पर टंगी
  865. 37:40अपने बेटे राहुल की तस्वीर के सामने हाथ
  866. 37:42जोड़कर खड़ी हो गई। तस्वीर में राहुल के
  867. 37:45चेहरे पर वही पुरानी शांत मुस्कान थी।
  868. 37:49राहुल बेटा देख आज अपनी इस अभागन मां को
  869. 37:54आज मेरी छाती गर्व से कितनी चौड़ी हो गई
  870. 37:56है। तू जब इस दुनिया से जा रहा था तो मेरा
  871. 37:59हाथ पकड़ कर जो सपना छोड़ गया था ना आज वो
  872. 38:02सपना पूरा हो गया बेटा। तेरी सियाब लाचार
  873. 38:05नहीं रही। वह पूरे राज्य की टॉपर बनकर आज
  874. 38:08कॉलेज में प्रोफेसर बनने जा रही है। और
  875. 38:11सबसे बड़ी बात उसे अथर्व जैसा सच्चा जीवन
  876. 38:14साथी मिल गया है। जिसने उसे सर का ताज बना
  877. 38:17दिया। तभी मंदिर के दरवाजे पर एक हल्की सी
  878. 38:20आहट हुई। जानकी देवी ने मुड़कर देखा उनकी
  879. 38:23दोनों बड़ी बेटियां प्रिया और श्वेता सर
  880. 38:25झुकाए चौखट पर खड़ी थी। दोनों के हाथों
  881. 38:28में नाश्ते की प्लेट थी। मां क्या सिया
  882. 38:31भाभी आज कॉलेज आएंगी? वो आज उनका कॉलेज
  883. 38:35में पहला दिन है ना? जानकी देवी ने अपनी
  884. 38:38बेटियों को देखा। हां, वह तैयार हो रही
  885. 38:41है। आज उसी कॉलेज में उसका पहला लेक्चर
  886. 38:44है। जहां कभी तुम दोनों उसके सफेद कपड़ों
  887. 38:46पर हंसती थी और उसे मनहूस कहती थी। श्वेता
  888. 38:50की आंखें भर आई। वो आगे बढ़ी और सीधे
  889. 38:52जानकी देवी के पैरों के पास फर्श पर बैठ
  890. 38:54गई। मां, हमें माफ कर दीजिए ना। हमने भाभी
  891. 38:58को बहुत सताया। जब भी वह किताबें खोलती
  892. 39:00थी, हम ताने मारते थे। उनके चरित्र पर
  893. 39:03बातें बनाते थे। लेकिन आज जब सुबह-सुबह
  894. 39:05अखबार में पहले पन्ने पर भाभी की तस्वीर
  895. 39:08देखी तो हमारे पास शर्म के मारे मुंह
  896. 39:10छुपाने की जगह नहीं बची है। हां मां हम तो
  897. 39:14बस अपनी दुनिया में मस्त थे। हमें लगता था
  898. 39:16कि भाई के जाने के बाद सिया भाभी हमारे
  899. 39:19लिए सिर्फ एक बोझ है। पर उन्होंने तो आज
  900. 39:21पूरे खानदान का नाम रोशन कर दिया। तभी
  901. 39:24बाहर सड़क पर गाड़ी के हॉर्न की आवाज
  902. 39:26गूंजी। गाड़ी का दरवाजा बंद होने की आवाज
  903. 39:28आई और अगले ही पल सिया घर के अंदर दाखिल
  904. 39:31हुई। उसके पीछे अथर्व था। सिया आज बहुत ही
  905. 39:34खूबसूरत लग रही थी। प्रिया और श्वेता झट
  906. 39:36से उठकर सिया के सामने आ गई। दोनों ने हाथ
  907. 39:39जोड़ लिए। भाभी हम जानते हैं कि हमने आपके
  908. 39:42साथ बहुत बुरा बर्ताव किया है। जब आपको
  909. 39:45हमारी सबसे ज्यादा जरूरत थी। हमने आपको
  910. 39:48रुलाया। हम इस लायक भी नहीं है कि आपसे
  911. 39:50माफी मांग सके। पर प्लीज हमें माफ कर
  912. 39:53दीजिए।
  913. 39:55हां भाभी हमें अपनी छोटी बहनें समझकर माफ
  914. 39:58कर दीजिए। सिया ने एक पल के लिए दोनों को
  915. 40:01देखा। उसके चेहरे पर कोई गुस्सा या
  916. 40:03कड़वाहट नहीं थी। उसने आगे बढ़कर दोनों के
  917. 40:05जुड़े हुए हाथ अपने हाथों में थाम लिए।
  918. 40:08दीदी श्वेता जो बीत गया उसे याद करके आज
  919. 40:12का दिन क्यों खराब करना? उस वक्त हालात
  920. 40:15ऐसे थे। शायद आप लोगों की सोच वैसी थी।
  921. 40:18लेकिन आप दोनों राहुल जी की बहनें हैं और
  922. 40:21इस नाते मेरी भी बहनें हैं। आज मैं अपनी
  923. 40:23जिंदगी का इतना बड़ा कदम उठाने जा रही
  924. 40:25हूं। मुझे आप दोनों का रोना नहीं बल्कि आप
  925. 40:28दोनों का प्यार और आशीर्वाद चाहिए। तभी
  926. 40:31कमरे से आरोही दौड़ते हुए बाहर आई और उसने
  927. 40:33पीछे से जिया को कस के गले लगा लिया। देखा
  928. 40:36मैंने कहा था ना मेरी भाभी का दिल समंदर
  929. 40:38से भी बड़ा है। अब यह रोना-धोना बंद करो
  930. 40:40सब।
  931. 40:42चलो भाभी देर हो रही है। आज पूरे कॉलेज के
  932. 40:44स्टूडेंट्स को देखना है कि प्रोफेसर सिया
  933. 40:46सिंघानिया क्या चीज है। अथर्व ने आगे
  934. 40:49बढ़कर जानकी देवी के पैर छुए।
  935. 40:52मां जी आशीर्वाद दीजिए। आज सिया को उसी
  936. 40:55जगह पर उसका हक दिलाने ले जा रहा हूं जहां
  937. 40:58कभी उसके आत्मसम्मान को तोड़ा गया था।
  938. 41:01जानकी दी ने इन दोनों के सर पर हाथ रखा और
  939. 41:04अथर्व की गाल को प्यार से धपथपाया। जीते
  940. 41:07रहो बच्चों। अथर्व बेटा मेरी बच्ची को
  941. 41:10तूने जो मुकाम दिया है भगवान करे दुनिया
  942. 41:13की हर खुशी तेरे कदमों में हो। सुबह के
  943. 41:159:00 बजे सेंट जेवियर्स कॉलेज का मुख्य
  944. 41:18द्वार कॉलेज के गेट पर। यह वही गेट था
  945. 41:22जहां कभी सिया जब सफेद साड़ी में आती थी
  946. 41:24तो लोग उस पर हंसते थे। तान्या और उसके
  947. 41:26दोस्त उस पर रंग फेंकते थे। लेकिन आज
  948. 41:29कॉलेज का पूरा कैंपस फूलों से सजा हुआ था।
  949. 41:32गेट से लेकर मुख्य बिल्डिंग तक रेड कारपेट
  950. 41:34बिछा था। प्रिंसिपल, प्रोफेसर वर्मा, पूरा
  951. 41:37स्टाफ और सैकड़ों छात्र-छात्राएं हाथों
  952. 41:40में गुलाब के फूल लिए दोनों तरफ कतार
  953. 41:42बनाकर खड़े थे। अथर्व की चमचमाती गाड़ी
  954. 41:44गेट पर आकर रुकी। अथर्व पहले उतरा। अथर्व
  955. 41:47ने आगे बढ़कर खुद गाड़ी का दरवाजा खोला और
  956. 41:50अपना हाथ आगे बढ़ाया। सिया ने मुस्कुराते
  957. 41:52हुए अपना हाथ अथर्व के हाथ में दिया और
  958. 41:54गाड़ी से बाहर कदम रखा। पूरा कॉलेज
  959. 41:57तालियों की जोरदार गड़गड़ाहट और नारों से
  960. 41:59गूंज उठा। वेलकम बैक प्रोफेसर सिया। वेलकम
  961. 42:02बैक प्रोफेसर सिया। प्राउड ऑफ यू मैम।
  962. 42:05प्राउड ऑफ यू मैम। सिया के कदम एक पल के
  963. 42:08लिए ठिटक गए। उसने चारों तरफ देखा। उसकी
  964. 42:10आंखों के सामने अचानक वो पुराना दिन घूम
  965. 42:13गया। जब वो इसी जमीन पर घुटनों के बल बैठी
  966. 42:15थी। उसकी सफेद साड़ी पर लाल काला रंग पड़ा
  967. 42:18था। उसके हाथ से किताबें छूट गई थी और
  968. 42:23चारों तरफ लूज़ पर ठहाके लगा रहे थे। सिया
  969. 42:25की आंखें भर आई। उसका हाथ हल्का सा कांपा।
  970. 42:29अथर्व ने फौरन उसकी हथेली को थोड़ा कसकर
  971. 42:32थामा। उसने सिया की तरफ देखा और एक
  972. 42:34मुस्कान दी।
  973. 42:36क्या हुआ प्रोफेसर साहिबा? कदम क्यों रुक
  974. 42:38गए? आज सर झुकाने का नहीं सिर उठाकर
  975. 42:41दुनिया के सामने चलने का दिन है। यह
  976. 42:43रास्ता तुम्हारी जीत का है सिया। चलो आगे
  977. 42:46बढ़ो।
  978. 42:47सिया ने अथर्व की आंखों में देखा। उसे लगा
  979. 42:50जैसे उसकी सारी कमजोरी खत्म हो गई हो।
  980. 42:52उसने एक गहरी सांस ली और मुस्कुरा दी।
  981. 42:55प्रोफेसर वर्मा बड़े से गुलदस्ते के साथ
  982. 42:57आगे बढ़े।
  983. 42:59वेलकम सिया। नहीं वेलकम प्रोफेसर सिया जब
  984. 43:03तुम पहली बार इस कॉलेज में सफेद साड़ी पहन
  985. 43:06कर आई थी तभी मुझे तुम्हारी आंखों में वह
  986. 43:08आग दिख गई थी। आज तुमने साबित कर दिया कि
  987. 43:11हालात चाहे कितने भी बुरे क्यों ना हो अगर
  988. 43:14इंसान के इरादे सच्चे हो तो अपनी तकदीर
  989. 43:18खुद बदल सकता है। खुद लिख सकता है।
  990. 43:21सिया ने झुककर प्रोफेसर वर्मा के पैर छुए।
  991. 43:24यह सब आपके मार्गदर्शन और हिम्मत देने की
  992. 43:26वजह से मुमकिन हुआ है सर। अगर आप उस दिन
  993. 43:29मुझे प्रोजेक्ट पार्टनर ना बनाती तो शायद
  994. 43:31मैं इतनी दूर तक ना पहुंच पाती।
  995. 43:34हमें गर्व है कि तुम आज हमारे डिपार्टमेंट
  996. 43:37की हेड बनकर आई हो।
  997. 43:41[हंसी]
  998. 43:42और इसका कुछ क्रेडिट इस लड़के को भी जाता
  999. 43:45है जिसने तुम्हारे लिए पूरे कॉलेज को सिर
  1000. 43:48पर उठा लिया था।
  1001. 43:50अथर्व ने मुस्कुरा कर हाथ जोड़ लिए। सुबह
  1002. 43:53के 10:00 बजे कॉलेज का मुख्य ऑडिटोरियम
  1003. 43:56छात्रों से भरा हुआ था। वहीं पहली पंक्ति
  1004. 43:59में खुद दक्षराज सिंघानिया अपनी छड़ी लिए
  1005. 44:01बैठे थे। उनके बगल में गायत्री सिंघानिया,
  1006. 44:04जानकी देवी, श्वेता और पिया, आरोही और
  1007. 44:07रिहान बैठे थे और ठीक बीच में अथर्व बैठा
  1008. 44:10था। जिसकी नजरें एक पल के लिए भी सिया से
  1009. 44:12नहीं हट रही थी। सिया माइक के सामने आकर
  1010. 44:14खड़ी हुई। नमस्कार। आज यहां खड़े होकर
  1011. 44:18मुझे आप सबको इकोनॉमिक्स पढ़ाना है। लेकिन
  1012. 44:20किताबें खोलने से पहले मैं आज आपको वह बात
  1013. 44:23बताना चाहती हूं जो किसी किताब में नहीं
  1014. 44:25लिखी होती। सभी लोग गौर से सुन रहे थे।
  1015. 44:28कुछ महीनों पहले इसी कॉलेज के गलियारों
  1016. 44:31में एक लड़की को इसीलिए बेइज्जत किया गया
  1017. 44:34था क्योंकि उसने अपने पति को खो दिया था।
  1018. 44:36उसने सफेद साड़ी पहन रखी थी। हमारे इस
  1019. 44:39समाज ने सदियों से यह मान लिया है कि अगर
  1020. 44:41किसी औरत का सुहाग छिन जाए तो उसका जीने
  1021. 44:44का, हंसने का, पढ़ने का और आगे बढ़ने का
  1022. 44:47हक भी खत्म हो जाता है। लोग उसे मनहूस
  1023. 44:49कहते हैं। अब शकुन मानते हैं। नीचे बैठी
  1024. 44:52गायत्री सिंघानिया ने अपनी नजरें झुका ली।
  1025. 44:55उनकी आंखों में पछतावे के आंसू भर आए।
  1026. 44:58मेरे पहले पति राहुल ने अपने अंतिम सांस
  1027. 45:00लेते हुए अपनी मां से सिर्फ एक ही वादा
  1028. 45:02लिया था कि वह मुझे पढ़ाएंगी
  1029. 45:05और काबिल बनाएंगी। मेरी सास जानकी देवी ने
  1030. 45:08समाज के हर ताने को सहकर मुझे यहां भेजा।
  1031. 45:12लेकिन इस सफर में जब दुनिया मेरे ऊपर
  1032. 45:13कीचड़ उछाल रही थी तब एक इंसान मेरे आगे
  1033. 45:17चट्टान बनकर खड़ा हो गया। सिया ने अपनी
  1034. 45:19नजरें सीधी पहली पंक्ति में बैठे अथर्व पर
  1035. 45:22टिका दी। वो इंसान थे अथर्व सिंघानिया।
  1036. 45:26अथर्व ने सिर्फ अपनी मां और दुनिया से
  1037. 45:28लड़कर मेरी मांग में सिंदूर नहीं भरा था।
  1038. 45:30उन्होंने मुझे वह दिया जो इस समाज ने
  1039. 45:33मुझसे छीन लिया था। मेरा आत्मसम्मान। जब
  1040. 45:36मैं रात को पढ़ते-पढ़ते रो पड़ती थी कि
  1041. 45:38मुझसे नहीं होगा। तब यह लड़का मेरे सामने
  1042. 45:43चाय का कप रखकर कहता था, तुम हार नहीं
  1043. 45:45सकती जिया क्योंकि तुम्हारी जीत में मेरी
  1044. 45:47जान बचती है। इन्होंने दिन भर ऑफिस में
  1045. 45:50काम किया और रात-रात भर जागकर मेरे साथ
  1046. 45:52किताबें पढ़ी। पूरे हॉल की नजरें अथर्व की
  1047. 45:55तरफ घूम गई। अथर्व की आंखों से लगातार
  1048. 45:57आंसू बह रहे थे। लेकिन उसके होठों पर
  1049. 46:00मुस्कान थी। आज मैं यहां जो कुछ भी हूं वह
  1050. 46:03सिर्फ मेरी मेहनत नहीं है। यह जीत राहुल
  1051. 46:05के उस सपने की है। मेरी सास के त्याग की
  1052. 46:08है और अथर्व के उस निस्वार्थ सच्चे प्यार
  1053. 46:11की है। जिसने एक टूटी हुई विधवा को आज इस
  1054. 46:13मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया। और आज इस मंच
  1055. 46:16से मैं हर उस इंसान से कहना चाहूंगी। किसी
  1056. 46:19औरत की पहचान उसके कपड़ों या उसके अकेलेपन
  1057. 46:21से मत कीजिए। अगर उसे मौका और सम्मान मिले
  1058. 46:24तो वह पूरी दुनिया को बदलने की ताकत रखती
  1059. 46:26है। सिया की बात खत्म होते ही पूरा
  1060. 46:29ऑडिटोरियम एक साथ खड़ा हो गया। छात्रों ने
  1061. 46:31हुटिंग की। प्रोफेसर्स ने खड़े होकर
  1062. 46:33तालियां बजाई। दक्षराज ने गर्व से अथर्व
  1063. 46:36की पीठ थपथपाई। सिया ने हाथ जोड़कर सबका
  1064. 46:39अभिवादन किया और स्टेज से नीचे उतर आई।
  1065. 46:42दोपहर के 12:00 बजे क्लास और मीटिंग्स के
  1066. 46:44बाद दोपहर में जब लाइब्रेरी खाली थी, सिया
  1067. 46:47चुपचाप सेंट्रल लाइब्रेरी के अंदर आई। वह
  1068. 46:49सीधे उसी कोने वाली पुरानी लकड़ी की टेबल
  1069. 46:51के पास जाकर खड़ी हो गई थी। यह वही टेबल
  1070. 46:54थी जहां कभी वह रोती थी। जहां अथर्व ने
  1071. 46:57आकर उसकी पानी की बोतल गिराकर उसके नोट्स
  1072. 46:59खराब कर दिए थे। सिया ने धीरे से उस टेबल
  1073. 47:03की लकड़ी को अपनी उंगलियों से छुआ। पुरानी
  1074. 47:05यादें उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान
  1075. 47:07ले आई। तभी पीछे से लाइब्रेरी का दरवाजा
  1076. 47:09खुला। अथर्व धीरे-धीरे चलता हुआ आया। वो
  1077. 47:12ठीक सिया के पीछे आकर रुक गया।
  1078. 47:15याद है यह जगह? प्रोफेसर साहिबा
  1079. 47:18सिया पलटी
  1080. 47:20यह जगह मैं अपनी आखिरी सांस तक नहीं भूल
  1081. 47:22सकती अथर्व इसी टेबल पर आपने मुझ पर कोल्ड
  1082. 47:25ड्रिंक गिराई थी मुझे ताने मारे थे और
  1083. 47:27पहली बार मुझसे पूछा था कि मैं हमेशा सफेद
  1084. 47:30साड़ी क्यों पहनती हूं अथर्व ने एक
  1085. 47:32मुस्कान दी लेकिन अगले ही पल उसकी आंखें
  1086. 47:34बहुत संजीदा हो गई। उसने सिया के दोनों
  1087. 47:37हाथों को अपनी हथेलियों में थाम लिया।
  1088. 47:40उस दिन मैं सिर्फ एक बिगड़ा हुआ घमंडी
  1089. 47:42लड़का था सिया। मुझे लगता था कि पैसे से
  1090. 47:45सब कुछ खरीदा जा सकता है। लेकिन उस दिन
  1091. 47:48तुम्हारी उस नफरत भरी आंखों ने और
  1092. 47:50तुम्हारे उस थप्पड़ ने मुझे यह सिखाया कि
  1093. 47:52आत्मसम्मान क्या होता है। तुमने मुझे बदल
  1094. 47:55दिया सिया तुमने एक बिगड़ैल अथर्व को एक
  1095. 47:58सच्चा इंसान बना दिया।
  1096. 48:00सिया की पलकें भीग गई और आपने मुझे जिंदगी
  1097. 48:04दी अथर्व। जब पूरी दुनिया मुझे सिर्फ एक
  1098. 48:06मनहूस विधवा समझकर छोड़ चुकी थी तब आपने
  1099. 48:09अपने परिवार, अपनी मां, समाज सबसे बगावत
  1100. 48:12करके मुझे अपना नाम दिया। मुझे नहीं पता
  1101. 48:15था कि प्यार में इतनी ताकत होती है।
  1102. 48:18तो फिर आज उसी टेबल के सामने यथर्व
  1103. 48:20सिंघानिया अपनी पूरी जिंदगी, अपनी हर
  1104. 48:23धड़कन, अपनी इस प्रोफेसर पत्नी के नाम
  1105. 48:26करता है। क्या मुझे ताम्र अपने दिल में
  1106. 48:29जगह दोगी सिया?
  1107. 48:31अथर्व ने अपनी बाहों को सिया के गिर्द कस
  1108. 48:34लिया।
  1109. 48:35तो दोस्तों, कैसी लगी आपको हमारी यह
  1110. 48:37कहानी? और हां, अगर आप भी चाहते हैं कि
  1111. 48:39अगली स्टोरी आपके और आपके पार्टनर के नाम
  1112. 48:42पर बने, तो एक प्यारा सा कमेंट और अपने
  1113. 48:44पार्टनर और अपना नाम कमेंट में जरूर
  1114. 48:46लिखें। मैं राइटर नाज आपके कमेंट का वेट
  1115. 48:49करूंगी। सब्सक्राइब टू लव सिटी।

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