Vande Mataram पर कानून का असली मकसद क्या, Jana Gana Mana के बराबर क्यों रखा गया? | Saurabh Dwivedi — Transcript
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- 0:00देवियों और सज्जनों, 15 अगस्त आने वाला
- 0:02है। नए सिरे से आपको सड़कों पर तिरंगा नजर
- 0:06आएगा और कम से कम उस एक दिन हमारी कानों
- 0:10में देशभक्ति के फिल्मी गाने गूंजेंगे।
- 0:14झंडा फहराया जाएगा और फिर 16 अगस्त के रोज
- 0:18से हम सब अपने-अपने दबंद में लग जाएंगे।
- 0:21देशभक्ति को 26 जनवरी तक का इंतजार करना
- 0:26होगा।
- 0:27लेकिन वो सारे लोग जो रोजाना अपना कर्तव्य
- 0:31निभाते हैं, जो रोजाना अपने हिस्से की
- 0:34ईमानदारी करते हैं बिना उसका ढोल पीटे वो
- 0:37365 दिन देशभक्ति करते हैं। पर सवाल यह है
- 0:41कि अभी तो भाषणों का मौसम आने में कुछ रोज
- 0:44बाकी हैं। तो यह एंकर महोदय आपको भाषण
- 0:47क्यों दे रहे हैं? दरअसल देश में एक नया
- 0:50कानून बन गया है [गला साफ़ करने की आवाज़]
- 0:52राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के दस्तखत से
- 0:54और उसके पहले जैसा हमारे देश में कानून
- 0:57बनने का विधान है। लोकसभा और राज्यसभा में
- 1:00भी उसे पारित किया गया। कैबिनेट, फिर
- 1:03लोकसभा और राज्यसभा और इसके बाद से वंदे
- 1:06मातरम का कानूनी तौर पर वही दर्जा हो गया
- 1:09है जो जन गण मन का है। और इसीलिए इस बार
- 1:1315 अगस्त को लाल किले की प्राचर से जब
- 1:16तिरंगा फहराया जाएगा, तो वहां से वंदे
- 1:19मातरम भी गूंजेगा पहली मर्तबा। द
- 1:22प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर
- 1:25अमेंडमेंट बिल 20 26 ये कानून है। और ये
- 1:29कानून क्या कहता है? पहले जो कानून था
- 1:31उसमें सिर्फ राष्ट्रगान यानी जन गण मन को
- 1:34गाने से रोकने या उसमें बाधा डालने पर सजा
- 1:37का प्रावधान था। 3 साल की जेल या जुर्माना
- 1:40वंदे मातरम के पास ये कानूनी ढाल नहीं थी।
- 1:42लेकिन नए अमेंडमेंट ने वंदे मातरम को वही
- 1:44कानूनी सुरक्षा दी है। यानी अब अगर कोई
- 1:47वंदे मातरम के गायन में अड़ंगा डालता है
- 1:49तो उसे भी सीधे जेल की हवा खानी पड़ेगी।
- 1:53लेकिन सवाल सिर्फ एक कानून का नहीं है।
- 1:55सवाल उस राजनीति का है जो इस कानून के
- 1:57पीछे सांस ले रही है। पिछले साल संसद के
- 2:00शीतकालीन सत्र में जब इस पर बहस शुरू हुई
- 2:02तो संघ परिवार और बीजेपी समेत सत्ता पक्ष
- 2:04का पूरा जोर इस बात पर था कि वंदे मातरम
- 2:07को हर हाल में जन गण मन के बिल्कुल बराबर
- 2:09लाकर खड़ा किया जाए। और इसे लेकर उन्होंने
- 2:13विपक्ष को और उसके कथित धर्मनिरपेक्षता के
- 2:16सिद्धांत को भी कटघरे में खड़ा किया था।
- 2:18तब सवाल यह भी पूछा गया कि सत्ता पक्ष
- 2:20वंदे मातरम पर इतना फोकस क्यों कर रहा है?
- 2:23क्या इसलिए कि संघ परिवार के सांस्कृतिक
- 2:25राष्ट्रवाद के नैरेटिव में यह फिट बैठता
- 2:27है? कई [नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 2:28आलोचकों ने कहा कि मुस्लिम समुदाय की
- 2:30ऐतिहासिक आपत्तियों को क्यों दरकिनार किया
- 2:33जा रहा है? ये आपत्तियां जिनका आधार है कि
- 2:36इस्लाम एक ईश्वरवाद को मानता है जहां
- 2:38मूर्तियों की जगह नहीं और वंदे मातरम के
- 2:41विस्तृत गायन में मातृभूमि की कल्पना एक
- 2:44देवी के रूप में की गई है जहां उसकी पूजा
- 2:46की जाती है दुर्गा के तौर पर। इस तरह से
- 2:49यह गाना इस्लाम की मान्यताओं से टकराता है
- 2:51और फिर इसका संबंध बंकिम चंद्र चटर्जी के
- 2:54उपन्यास से भी है जो आलोचकों की नजर में
- 2:57विवादित है। उपन्यास का नाम आनंद मठ जो
- 2:59आजादी के आंदोलन के समय भी और आज भी
- 3:02मुस्लिम समुदाय के एक हिस्से की आशंकाओं
- 3:06को बल देता है। इस वीडियो में हम विस्तार
- 3:09से वंदे मातरम का और जन- गण मन का इतिहास
- 3:13समझेंगे और चूंकि देश की सरकार तिरंगा
- 3:16यात्राएं निकाल रही है तो तिरंगे का
- 3:18इतिहास भी समझेंगे। हम इन सवालों के जवाब
- 3:21जानने की कोशिश करेंगे कि बंकिम चंद्र
- 3:23चटर्जी ने ओरिजिनल वंदे मातरम में क्या
- 3:26लिखा था? मूर्ति पूजा के खुद विरोधी रहे
- 3:28चटर्जी ने दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का
- 3:31रेफरेंस क्यों दिया? जिस गीत को खुद
- 3:33गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर ने गाया
- 3:35उन्होंने ही बाद में इसके कुछ स्टैंजा
- 3:37हटाने की वकालत क्यों की? मुस्लिम समुदाय
- 3:40की आपत्तियों पर क्या बहस हुई? अगर नेहरू
- 3:43ने कथित रूप से जिन्ना के आगे घुटने टेक
- 3:45दिए तो संविधान सभा ने जन गण मन को ही
- 3:47राष्ट्रगान क्यों माना? और इसके साथ-साथ
- 3:49वंदे मातरम का जिक्र क्यों हुआ? तिरंगा
- 3:52यात्राओं के नए सीजन के संदर्भ में हम
- 3:54राष्ट्रीय ध्वज के इतिहास का भी रुख
- 3:55करेंगे। एक देश को एक समाज को झंडा आखिर
- 3:58क्यों चाहिए होता है? नमस्कार, मेरा नाम
- 4:01सौरभ द्विवेदी है। यह इंडियन एक्सप्रेस
- 4:03हिंदी है। हमने बहुत सारे सवाल पूछे। अब
- 4:06जवाबों की बारी और इसके लिए सबसे पहले
- 4:08चलते हैं 1870 के भारत में। दरअसल 1857 के
- 4:12विद्रोह के बाद अंग्रेज खौफ में थे।
- 4:13उन्हें समझ आ गया कि हिंदू मुस्लिम एकता
- 4:16उनके साम्राज्य की कब्र खोद सकती है।
- 4:18इसलिए फूट डालो और राज करो की मशीनरी फुल
- 4:21स्पीड में काम करने लगती है। इन्हीं
- 4:25अंग्रेजों का एक भारतीय डिप्टी कलेक्टर
- 4:27बंगाल में तैनात था। उनका नाम था बंकिम
- 4:30चंद चटर्जी वही बंकिम चंद जिन्हें
- 4:32अंग्रेजों ने खुश होकर राय बहादुर का तमगा
- 4:36भी दिया था। सरकारी नौकरी करते हुए भी
- 4:38बंकिम के भीतर का राष्ट्रवादी जाग रहा था।
- 4:411872 से 1875 के बीच उन्होंने एक गीत रचा।
- 4:45शीर्षक वंदे मातरम। मां की वंदना। इसके
- 4:48शुरुआती दो स्टैंजा इस दौरान लिखे गए।
- 4:511875 को इसकी रचना का बरस माना जाता है।
- 4:54इसलिए पिछले साल संसद के शीतकालीन सत्र
- 4:57में इसकी 150वीं वर्षगांठ भी धूमधाम से और
- 5:02जोरदार राजनीतिक बहसों के बीच मनाई गई। जो
- 5:05शुरुआती दो स्टैंजा है वंदे मातरम के
- 5:07उसमें कोई आपत्ति किसी को नहीं दिखी।
- 5:09इसमें बंगाल की उस उपजाऊ मिट्टी की तस्वीर
- 5:12थी जो फल फूल देती है। शश श्याम लाम जिसके
- 5:16पास 7 करोड़ सपूत हैं। 7 करोड़ क्यों?
- 5:20क्योंकि 1871 की जनगणना के अनुसार बंगाल
- 5:23की आबादी 7 करोड़ थी। इसमें हिंदू और
- 5:26मुस्लिम दोनों शामिल थे। यहां एक तथ्य है
- 5:29जिस पर आपको ध्यान देना चाहिए। उस दौर में
- 5:32जब वंदे मातरम के दो स्टैंजा लिखे गए
- 5:34बंकिम चंद्र चटर्जी मूर्ति पूजा के घोर
- 5:37विरोधी थे। अपने जर्नल बंग दर्शन में
- 5:39उन्होंने साफ लिखा था कि मूर्ति पूजा
- 5:42विज्ञान विरोधी है। इससे ज्ञान का प्रसार
- 5:44रुकता है। इंसानी दिमाग कुंठित होता है।
- 5:47यूनानी दार्शनिकों और आर्य ऋषियों ने
- 5:50विज्ञान बढ़ाया और उनमें से कोई भी मूर्ति
- 5:53पूजक नहीं था। आर्य समाजियों का भी यही
- 5:56मानना होता है। अब सोचिए जो आदमी मूर्ति
- 5:59पूजा के सख्त खिलाफ था वो मातृभूमि को
- 6:02दुर्गा लक्ष्मी और सरस्वती का रूप क्यों
- 6:05देने लगा? और यहीं से अर्ली बंकिम और लेट
- 6:08बंकिम का एक ऐतिहासिक फर्क शुरू होता है।
- 6:111881 आते-आते बंकिम के विचार पलटते हैं।
- 6:14वह अपना मशहूर उपन्यास आनंद मठ लिखते हैं।
- 6:16सन्यासी विद्रोह पर आधारित और वंदे मातरम
- 6:19के उस पुराने गीत में नए पद जोड़ते हैं।
- 6:21नए गीत में देवी दुर्गा के अस्त्र-शस्त्र
- 6:24लक्ष्मी और सरस्वती की वंदना शामिल हो
- 6:27जाती है और यह आनंद मठ की जो कथा की
- 6:29पृष्ठभूमि है उससे भी मेल खाती है। फिर
- 6:321896 के कांग्रेस अधिवेशन में गुरु रवंद्र
- 6:35नाथ टैगोर इसे लयबद्ध करके गाते हैं और यह
- 6:38आजादी का सबसे बड़ा तराना बन जाता है। पर
- 6:41जैसे-जैसे यह गीत मशहूर होता है,
- 6:43वैसे-वैसे यह सांप्रदायिक राजनीति के भंवर
- 6:46में भी फंसने लगता है।
- 6:49कैसे? प्रसिद्ध इतिहासकार तनिका सरकार
- 6:52अपनी रिसर्च बर्थ ऑफ अ गॉडेस में लिखती है
- 6:54कि बंकिम की शुरुआती स्टैंजा खुद से की गई
- 6:56बातचीत थी। वो पब्लिक के लिए नहीं थे।
- 6:59लेकिन बाद में जब इसे आनंद मठ का हिस्सा
- 7:01बनाया गया तो यह परफॉर्मेटिव हो गया। आनंद
- 7:03मठ के कथानक के चलते इसे मुसलमान समस्या
- 7:06से जोड़कर देखा जाने लगा। लेकिन दूसरे
- 7:10इतिहासकार सभ्य सांची भट्टाचार्य वो क्या
- 7:13लिखते हैं कि शुरुआत के रैशनलिस्ट बंकिम
- 7:15बाग में फ्रेंच दार्शनिक ऑगस्टस कॉमट से
- 7:18प्रभावित होकर कंजर्वेटिव हो गए। कोमट का
- 7:21मानना था कि समाज को जगाने के लिए मूल
- 7:24संस्कृति का सहारा लेना होगा। और यहीं से
- 7:26वंदे मातरम एक हिंदू नेशनलिस्ट और उग्र
- 7:29नजरिया बकोर सभ्य सांची जुड़ गया। ये तो
- 7:33व्याख्याएं हुई विद्वानों की बात हुई। अब
- 7:35वापस से इतिहास की यात्रा पर चलते हैं।
- 7:37डिवाइड एंड रूल के तहत अंग्रेज 1905 में
- 7:39बंगाल का विभाजन करते हैं। बंग भंग कहा
- 7:42गया। इसकी प्रतिक्रिया में पूरा देश
- 7:44खासतौर पर बंगाल उभरता है। स्वदेशी आंदोलन
- 7:46का सबसे बड़ा वॉर क्राय बनता है। वंदे
- 7:48मातरम। बंग भंग के विरोध में जब आंदोलन
- 7:51होता है तो लोग एक दूसरे की कलाई पर राखी
- 7:53बांधते हैं, रक्षासूत्र बांधते हैं और
- 7:55टैगोर इस गीत को गाते हुए सड़कों पर मार्च
- 7:59करते हैं। जी वंदे मातरम बंगाल में रहने
- 8:01वाले हिंदू मुसलमानों की एकता का प्रतीक
- 8:04था। लेकिन अंग्रेजों ने जब इस गीत की ताकत
- 8:06देखी तो उन्होंने अपना पुराना कार्ड खेला
- 8:09सांप्रदायिक राजनीति का कार्ड। जी
- 8:11एग्रियसन जैसे ब्रिटिश अधिकारियों और
- 8:13वैलेंटाइन चिरोल जैसे पत्रकारों ने
- 8:15प्रचारित किया कि यह गाना तो सिर्फ
- 8:17हिंदुओं का है और इस्लाम के खिलाफ है।
- 8:20मुस्लिमों के भी एक कट्टरपंथी और इलीट
- 8:22वर्ग ने अपने राजनीतिक हितों को साधने के
- 8:24लिए इस नैरेटिव को आगे बढ़ाया और दूसरी
- 8:26तरफ हिंदू राष्ट्रवादियों का एक ग्रुप भी
- 8:29यही कर रहा था और यह प्लान कामयाब होता भी
- 8:32दिखा। मुस्लिम संगठन वंदे मातरम के खिलाफ
- 8:34पर्चे बांटने लगे। उधर उग्र हिंदू संगठनों
- 8:36ने इसे मस्जिदों के सामने जोर शोर से गाना
- 8:38शुरू कर दिया। दंगे हुए। विवाद इतना बढ़ा
- 8:41कि 1937 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी को
- 8:43दखल देना पड़ा। इस कमेटी में महात्मा
- 8:46गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई
- 8:49पटेल, सुभाष चंद्र बोस और मौलाना आजाद
- 8:52जैसे दिग्गज शामिल थे। तब नेहरू ने चिट्ठी
- 8:54लिखकर रविंद्र नाथ टैगोर से सलाह मांगी और
- 8:57टैगोर ने लिखा इस गीत को पूरे संदर्भ के
- 9:00साथ पढ़ने पर मुस्लिम समुदाय की आशंकाएं
- 9:02बढ़ सकती हैं। लेकिन इसके दो शुरुआती
- 9:05स्टैंजा काफी हैं। उन्हें आनंद मठ से
- 9:07जोड़ने की जरूरत नहीं है। पूरी कांग्रेस
- 9:12वर्किंग कमेटी ने टैगोर की बात मानी और तय
- 9:14हुआ कि वंदे मातरम के सिर्फ शुरुआती दो
- 9:16स्टैंजा ही गाए जाएंगे। लेकिन मोहम्मद अली
- 9:18जिन्ना कहां मानने वाले थे? मार्च 1938
- 9:21में जिन्ना नेहरू को खत लिखकर साफ कह दिया
- 9:23कि मुसलमान वंदे मातरम के इस कांट छांट
- 9:25वाले वर्जन को भी स्वीकार नहीं करेंगे। पर
- 9:29जिन्ना की मांगे नहीं मानी गई। इसके बाद
- 9:32भी आरोप लगते हैं कि नेहरू ने जिन्ना या
- 9:33मुसलमानों को खुश करने के लिए कट्टरपंथी
- 9:36वंदे मातरम के ऊपर जन गण मन को तरजीह दी।
- 9:39हालांकि फैक्ट्स कुछ और कहानी कहते हैं।
- 9:41इतिहासकार हैं रुद्रांशु मुखर्जी। उनकी एक
- 9:44बहुत शानदार किताब है सॉन्ग ऑफ इंडिया
- 9:47जिसमें WhatsApp यूनिवर्सिटी के
- 9:48दुष्प्रचार की तसल्ली बखश तरीके से
- 9:50धज्जियां उड़ाई गई हैं। मसलन नेहरू की इन
- 9:53दो चिट्ठियों पर नजर डालिए। पहली 21 मई
- 9:561948 का कैबिनेट नोट नेहरू ने लिखा एक
- 9:59नेशनल एंथम सिर्फ शब्दों का समुच्चय नहीं
- 10:02होता। इसमें संगीत होता है, लय और ताल
- 10:04होती है। इसे मिलिट्री परेड्स में भी
- 10:06बजाया जा सकता है। वंदे मातरम खूबसूरत है।
- 10:08भारत के इतिहास को समेटता है। लेकिन ऊपर
- 10:11की कसौटी पर जन गण मन खरा उतरता है। इसकी
- 10:14भाषा सुलभ है। इसलिए हर कोई इसे गा भी
- 10:18सकता है। दूसरी चिट्ठी बंगाल के पहले
- 10:20मुख्यमंत्री बीसी रॉय को लिखी गई। 15 जून
- 10:231948 को नेहरू ने पहले लेटर की सारी
- 10:25दलीलें लिखी और यह जोड़ा। वंदे मातरम
- 10:28स्वतंत्रता संघर्ष की तस्वीर पेश करता है।
- 10:30जबकि जन गण मन भविष्य की आने वाले भारत की
- 10:33बात करता है। इसलिए यह हमारा राष्ट्रगान
- 10:36होना चाहिए। रुद्रांशु मुखर्जी अपनी किताब
- 10:39में एक और खुलासा करते हैं। अक्सर
- 10:41दक्षिणपंत के लोग जन गण मन पर यह आरोप
- 10:43लगाते रहे कि यह गाना अंग्रेजों के राजा
- 10:46जॉर्ज पंचम के स्वागत में लिखा गया। लेकिन
- 10:48मुखर्जी की किताब के 34वें पन्ने के
- 10:50मुताबिक 1937 में टैगोर ने अपने करीबी
- 10:53पुलिन बिहारी सेन को एक खत लिखा था।
- 10:55जिसमें उन्होंने गुस्सा जताते हुए कहा कि
- 10:58सरकार में ऊंचे पद पर बैठे मेरे एक दोस्त
- 11:00ने मुझसे विशेष रूप से सम्राट यानी जॉर्ज
- 11:02पंचम की प्रशंसा में एक गीत लिखने का
- 11:04अनुरोध किया था। मुझे इस अनुरोध पर
- 11:06आश्चर्य हुआ और यह आश्चर्य क्रोध से भरा
- 11:08था। इस अनुरोध के एक मजबूत विरोध के रूप
- 11:11में ही मैंने जन गण मन अधिनायक गीत में
- 11:14भारत के भाग्य विधाता की जीत की घोषणा की।
- 11:17यह मानवता के भाग्य का शाश्वत सारथी कोई
- 11:19जॉर्ज पंचम या छटा या और कोई जॉर्ज नहीं
- 11:23हो सकता है। यानी खुद टैगोर ने इस बेतुके
- 11:26आरोप को खारिज किया था। इतना ही हिंदी
- 11:27रुद्रांशु की किताब बताती है कि नेहरू से
- 11:30भी पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 2
- 11:32नवंबर 1942 को यूरोप में फ्री इंडिया
- 11:35सेंटर का उद्घाटन करते समय जन गण मन को ही
- 11:38राष्ट्रगान के रूप में चुना था। तो फिर इस
- 11:41पूरे नैरेटिव में नया क्या है? क्या वंदे
- 11:43मातरम को सच में जन गण मन के बराबर का
- 11:45दर्जा आज मिला? नहीं। संविधान सभा ने 24
- 11:48जनवरी 1950 को जब अपने आखिरी सत्र में
- 11:51हिस्सा लिया तो संविधान सभा के अध्यक्ष
- 11:54डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने साफ शब्दों में
- 11:56घोषणा की। उन्होंने कहा जन गण मन के नाम
- 11:59से जाने वाले शब्दों और संगीत से बनी रचना
- 12:01भारत का राष्ट्रगान है और वंदे मातरम गीत
- 12:04जिसने स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक
- 12:06भूमिका निभाई उसे जन गण मन के समान ही
- 12:09सम्मानित किया जाएगा और उसका दर्जा भी
- 12:11इसके समान ही होगा। शैल हैव इक्वल स्टेटस
- 12:15विद इट। सुन लिया आपने? शैल हैव इक्वल
- 12:18स्टेटस विद इट। यानी संविधान सभा ने 1950
- 12:21में ही दोनों को बिल्कुल बराबर का दर्जा
- 12:23दिया। दोनों का सम्मान एक जैसा था। तो फिर
- 12:26आज 2026 में क्या बदला? सिर्फ इतना कि
- 12:281971 के प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स द नेशनल
- 12:31ऑनर एक्ट में वंदे मातरम को भी अपमान से
- 12:34बचाने के लिए सजा का क्लॉक जो क्लॉज़ पहले
- 12:36नहीं था जो सिर्फ जन गण मन के लिए था। नए
- 12:39बिल ने [संगीत] वंदे मातरम पर भी इसे लागू
- 12:41कर दिया है। यानी अब वंदे मातरम को गाने
- 12:43से रोकने पर 3 साल की जेल होगी। बाकी इसको
- 12:46गाने का एक प्रोटोकॉल भी है। 3 मिनट 10
- 12:48सेकंड में इसे गाना होगा सावधान की मुद्रा
- 12:52में। अब बात करते हैं तिरंगे की। आजादी की
- 12:56लड़ाई से झारखंड के आंदोलन तक तिरंगा
- 12:58प्रतिरोध का प्रतीक बना है। साहित्य,
- 13:00सिनेमा, समाज में इसकी मौजूदगी आजादी के
- 13:02बाद से सनातन है। अब 9 अगस्त से 12 अगस्त
- 13:05तक हर घर तिरंगा अभियान चलाया जा रहा है।
- 13:07कश्मीर से कन्याकुमारी तक गुजरात से
- 13:09अरुणाचल तक देश को तिरंगामय बनाने के
- 13:11प्रयास होते हैं। फिर 15 अगस्त को तो
- 13:13तिरंगा फहराया ही जाता है। सरकारी आयोजन
- 13:16सरकारी आयोजन में भी तिरंगा है और सरकारी
- 13:18विरोध में भी तिरंगा है। मतलब तिरंगा ना
- 13:21तो पक्ष है ना विपक्ष है। तो इन तीन रंगों
- 13:23का हमारे आपके लिए आखिर क्या संदेश और
- 13:27क्या मतलब इसकी हिस्ट्री क्या है? किसी
- 13:30राष्ट्र के मूल्य आकांक्षा और इतिहास का
- 13:32विजुअल नैरेटिव है झंडा। मनोविज्ञान में
- 13:34बहुत विचित्र बात है वो ये कि जटिल
- 13:36भावनाओं और दिमागी आईडिया को आसानी से
- 13:38समझाने में अगर इंसान सबसे ज्यादा किसी एक
- 13:41चीज पर भरोसा करता है तो वो है अमूर्त
- 13:42आकार। सुनने में अजीब लगेगा। लेकिन यही
- 13:45सच्चाई है। झंडा एक ऐसी ही सच्चाई है।
- 13:49सामूहिक पहचान, भावना या संवेदना को
- 13:52प्रस्तुत करने में भी झंडे जैसे प्रतीक
- 13:54प्रभावी माने जाते हैं। इतिहास गवाह है।
- 13:57व्यक्ति, कुल, कबीला, राज्य या राष्ट्र के
- 14:00गौरव का सामूहिक प्रतिनिधित्व झंडा करता
- 14:02है। एक निशान करता है। झंडे के महत्व को
- 14:05समझने के लिए आपको एक ऐसी जमीन पर ले चलता
- 14:08हूं जहां दर्शन, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र,
- 14:11राजनीति शास्त्र, साहित्य आदि इत्यादि एक
- 14:13जगह इकट्ठे होते हैं। इसे समझने के लिए
- 14:15खास प्रणाली है जिसे संकेत विज्ञान कहते
- 14:18हैं। अंग्रेजी में सिमियोटिक्स। ये
- 14:20सिमियोटिक्स क्या सिखाता है? इसे समझने के
- 14:22लिए तीन चीज लीजिए। कोई चित्र, उसे बुलाने
- 14:25के लिए बनाए गए नाम और उसके गुण। बिजली
- 14:28कौंधी होगी दिमाग में। लेकिन हमारी पूरी
- 14:30जिंदगी ऐसे ही बिजलियों से भरी पड़ी है।
- 14:32मां-पिता, भाई, बहन, दोस्त, दुश्मन,
- 14:34प्यार, नफरत, जेंसी ये सब नाम है। शब्द से
- 14:37बने हैं। लेकिन इन सबका एक अर्थ है। जैसे
- 14:39ही हम नाम लेते हैं वैसे ही वो अर्थ हमारे
- 14:41दिमाग को घेर लेता है। शब्द का पूरा
- 14:43इकोसिस्टम है। प्रोटोकॉल है। सब कुछ फिर
- 14:46उसी के मुताबिक चलने लगता है। ट्रेनिंग है
- 14:48तगड़ी। जरा सी चूक का मतलब भारी गड़बड़।
- 14:51विश्व के महान दार्शनिक। फरदंदे स्वसार।
- 14:55उन्होंने इस पूरे सिस्टम को बहुत मन लगाकर
- 14:57समझाया। उनके हिसाब से देखें तो पूरी
- 14:59दुनिया सिग्निफाइड यानी कि संकेतक और
- 15:02सिग्निफाइड यानी कि संकेतित और
- 15:04सिग्निफिकेशन यानी कि अर्थ निर्माण से बनी
- 15:06है और इनके बीच के रिश्ते समाज और
- 15:09संस्कृति के द्वारा तय किए जाते हैं। तो
- 15:12किसी राष्ट्र के इतिहास में झंडे का भी
- 15:15यही महत्व है। प्रसिद्ध समाजशास्त्री एमले
- 15:18दरखाइम की एक थ्यरी है। कलेक्टिव इफसेंस
- 15:21की यानी इंसानों को एकता के एहसास के लिए
- 15:23सामूहिक प्रतीक और चिन्ह की जरूरत होती
- 15:26है। राजनीति शास्त्र में एक शब्द इस्तेमाल
- 15:28होता है इमेजिन कम्युनिटी जिसके जनक हैं
- 15:30बेनेडिक एंडरसन। इसका अर्थ उनकी थ्योरी
- 15:33में एक ऐसा समाज या समूह जो एक दूसरे से
- 15:34अनजान है पर एक साथ है। इतना बड़ा देश,
- 15:37इतने लोग, इतनी भाषा संस्कृतियां एक दूसरे
- 15:39से परिचित नहीं पर आपस में जुड़े हैं। और
- 15:41उन्हें जोड़ने का काम करते हैं प्रतीक।
- 15:43विविधता में एकता, एकता में विविधता,
- 15:46भावनाओं का ऐसा जोड़ जो तोड़े से नहीं
- 15:48टूटता। दुनिया की यह सबसे चमत्कारी और
- 15:51ताकतवर गोंद है। सभ्यता और समाज की शुरुआत
- 15:54से आज तक झंडा संप्रभुता की पहचान है।
- 15:57देश, सेना, संगठन सबको एक इंस्टेंट
- 16:00आइडेंटिटी देता है। अदृश्य लोगों की
- 16:02भावना, इतिहास, भूगोल, संस्कृति का यह एक
- 16:05माइक्रोशिप है। युद्ध के मैदान में सेनाओं
- 16:08की पहचान से इसकी शुरुआत हुई थी ताकि हम
- 16:10दुश्मन को मारे दोस्त को नहीं। वक्त गुजरा
- 16:13तो शांतिल में भी वही ध्वज गौरव का प्रतीक
- 16:15बना। जैसे-जैसे समय बदला, दुनिया करीब आई,
- 16:17पहचान का महत्व बढ़ा, झंडा महत्वपूर्ण हो
- 16:20गया। दो विश्व युद्ध के बीच अपनी आजादी की
- 16:22सबसे कठिन लड़ाई लड़ने वाले भारत ने भी
- 16:25झंडे में ही अपनी पहचान खोजी। 1906 भारत
- 16:30का पहला गैर सरकारी राष्ट्रीय ध्वज फहराया
- 16:32गया। जगह थी कोलकाता का पारसी बागान
- 16:34स्क्वायर। इसमें तीन हॉरिजॉन्टल पट्टियां
- 16:36थी। ऊपर हरा, बीच में पीला और नीचे लाल।
- 16:38हरी पट्टी में आठ अधखिले कमल थे और बीच
- 16:41में वंदे मातरम लिखा था। लाल पट्टी में
- 16:43सूरज और चांद सितारे बने थे। यहां से झंडे
- 16:46की यात्रा शुरू हुई। फिर 1907 में पहले
- 16:50पेरिस और फिर जर्मनी के स्टेटगार्ड शहर
- 16:52में ये यात्रा नजर आई। बीकाजी कामा अपने
- 16:55क्रांतिकारी साथियों के साथ झंडा फहराती
- 16:57हैं। तीन क्षैतिज पट्टियां। सबसे ऊपर की
- 16:58पट्टी में आठ अथले कमल की जगह सप्त ऋषि का
- 17:01प्रतीक सात तारे। 10 साल बाद 1917 में जब
- 17:04होमरूल आंदोलन शुरू हुआ तो एनी बेसेंट और
- 17:06लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने भी इसे
- 17:08फहराया। फर्क यह था कि इसमें पांच लाल और
- 17:11चार हरी पट्टियां थी। हॉरिजॉन्टल।
- 17:12सप्तृष्टि वाले सात तारे थे। लेकिन उनके
- 17:15ऊपर बाएं कोने में ब्रिटेन का यूनियन जैक
- 17:17और एक तरफ आधा चांद और तारा बना था। तो
- 17:19देखिए यह झंडा कैसे अपनी जन आकांक्षाओं,
- 17:22अपने वक्त और अपने वक्त की राजनीति का
- 17:24प्रतिनिधित्व कर रहा था। फिर 1921 में
- 17:26पिंगली वेंकैया ने झंडे का डिजाइन तैयार
- 17:28किया। इसमें दो रंग थे लाल और हरा जिसे
- 17:31हिंदू और मुस्लिम का प्रतीक बताया गया।
- 17:33विजयवाड़ा में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी
- 17:35के सम्मेलन में महात्मा गांधी को यह
- 17:37दिखाया गया। तो उन्होंने कहा बीच में सफेद
- 17:39पट्टी लगाओ उसमें चरखा बनाओ। सफेद इसलिए
- 17:42ताकि अन्य समुदायों और शांति को
- 17:43प्रतिनिधित्व मिले। चरखा आत्मनिर्भरता का
- 17:45प्रतीक बने। 10 साल बाद 1931 आते-आते
- 17:48राष्ट्र की पहचान और उसका ध्वज काफी
- 17:50क्लियर हो चुके थे। कराची में कांग्रेस का
- 17:52अधिवेशन था। तिरंगा फहराया गया। रंगों को
- 17:55धार्मिक पहचान से मुक्त किया गया। भगवा
- 17:57शौर्य का प्रतीक बना। चरखे के साथ सफेद,
- 18:00सत्य, शांति और प्रगति का प्रतीक बना और
- 18:02हरा विश्वास और समृद्धि का। इसके ठीक 16
- 18:05साल बाद 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने
- 18:08तिरंगे को राष्ट्रध्वज के रूप में स्वीकार
- 18:10किया। फर्क यह था कि चरखा हट गया। उसकी
- 18:12जगह धर्मचक्र को दी गई जिसका रंग नीला है।
- 18:1524 तीलियां हैं। इसे सम्राट अशोक के
- 18:17सारनाथ स्तंभ से लिया गया। चक्र को
- 18:19निरंतरता और गतिशीलता का प्रतीक बनाया
- 18:21गया। 24 तीलियां 24 घंटे का प्रतीक मानी
- 18:25जाती हैं। चरखी की जगह अशोक चक्र लगाने से
- 18:28गांधी जी दुखी बताए गए। उनका मानना था कि
- 18:31चरखा स्वावलंबन और श्रम का प्रतीक है। तब
- 18:33नेहरू ने समझाया कि चरखे की वजह से झंडा
- 18:35दोनों तरफ से एक जैसा नहीं दिखता जबकि
- 18:38अशोक चक्र से एक समान रहता है। जवाहरलाल
- 18:40नेहरू और डॉ. राधाकृष्णन ने जोर देकर कहा
- 18:43कि तिरंगे में तीन रंगों का किसी धर्म और
- 18:46संप्रदाय से भी कोई रिश्ता नहीं। यह
- 18:47पंथनिरपेक्ष हैं। बिना विवाद के संविधान
- 18:50सभा में इसे स्वीकार किया गया। आजादी के
- 18:54बाद तिरंगे को लेकर जो सबसे बड़ा विवाद
- 18:56फिर सामने आया वो है राष्ट्रीय स्वयंसेवक
- 18:58संघ के लिए इसकी मान्यता। कांग्रेस हमेशा
- 19:00आरोप लगाती है कि संघ तिरंगे को मान्यता
- 19:02नहीं देता। वर्ष 2002 से पहले संघ
- 19:05मुख्यालय में तिरंगा नहीं फहराया जाता था।
- 19:07संघ इससे इंकार करता है। उसका कहना है कि
- 19:091925 में जब आरएसएस की स्थापना हुई तब
- 19:11संस्था ने जो ध्वज अपनाया उसका रंग भगवा
- 19:14था। जिसे वह सनातन का प्रतीक मानते हैं।
- 19:16जिसमें सभ्यता, संस्कृति, त्याग, शौर्य और
- 19:18सभ्यता का प्रवाह सम्मिलित है। दावा कि
- 19:211947 में संघ के मुख पत्र ऑर्गेनाइजर में
- 19:23कुछ संपादकीय लेख छपे। जिसमें राष्ट्रध्वज
- 19:26के लिए तिरंगे की जगह भगवा की वकालत की
- 19:28गई। संघ की ओर से अघोषित रूप में दावा
- 19:30किया गया कि तिरंगा के तीन रंग
- 19:32सांप्रदायिक संतुलन का प्रयास हैं।
- 19:34धार्मिक तुष्टीरण जिसका विरोध आरएसएस
- 19:36हमेशा से करता रहा। वो सदा विराट हिंदू
- 19:38पहचान का पक्षधर रहा है। यहां पर एक
- 19:42साहित्य का जिक्र करेंगे। राष्ट्रीय
- 19:43स्वयंसेवक संघ के दूसरे सर संचालक माधवराव
- 19:45सदाशिव राव गोलवलकर जिन्हें संघ में गुरु
- 19:48जी के नाम से जाना जाता है। उनकी किताब है
- 19:50बंच ऑफ थॉट्स। इसमें वो लिखते हैं प्राचीन
- 19:53राष्ट्र का एक ही ध्वज हो सकता है और वो
- 19:55है भगवा ध्वज। लेकिन अब स्थिति स्पष्ट है।
- 19:59मौजूदा संघ प्रमुख मोहन भागवत एक नहीं कई
- 20:02जगह और कई बार यह कहते सुने गए कि तिरंगे
- 20:04से विरोध नहीं है। बल्कि इसकी आन बान शान
- 20:07के लिए सबसे बड़ी कुर्बानी देने वालों की
- 20:08लिस्ट में संघ सबसे आगे है।
- 20:12जहांजहां इस ध्वज के सम्मान का प्रसंग आता
- 20:14है, हमारा स्वयंसेवक अपने प्राण भी देने
- 20:18के लिए अग्रपंक्ति में रहा है और रहते
- 20:22रहेगा।
- 20:2315 अगस्त 1992 में एक फिल्म रिलीज हुई थी।
- 20:25नाम था रोजा। मणरत्नम ने बनाई थी। भाषा
- 20:28तमिल थी। 1993 में हिंदी में भी आई। फिल्म
- 20:31एक दृश्य है जिसमें हीरो कश्मीर में है।
- 20:34आतंकवादी उसे अगवा करते हैं। उसके सामने
- 20:36तिरंगा जलाने की कोशिश करते हैं। जान की
- 20:39परवाह किए बिना हीरो तिरंगे पर लेट कर
- 20:41लुढ़कता है। आग बुझाता है तिरंगे को बचाने
- 20:44के लिए। बैकग्राउंड में गाना चलता है।
- 20:46उजड़े नहीं अपना चमन। टूटे नहीं अपना वतन।
- 20:50गुमराह ना कर दे कोई। बर्बाद ना कर दे
- 20:54कोई। मंदिर यहां, मस्जिद यहां, हिंदू
- 20:57यहां, मुस्लिम यहां मिलते रहें हम प्यार
- 21:00से यारा। सबसे प्यारा गुलिस्ता हमारा है।
- 21:04गाना पीके मिश्र का लिखा है। संगीत ए आर
- 21:07रहमान का है। बाकी वंदे मातरम और तिरंगा
- 21:10यात्राओं पर आपकी क्या राय है? कमेंट
- 21:13बॉक्स में जरूर बताएं। देखते रहे इंडियन
- 21:17एक्सप्रेस [संगीत] हिंदी।
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