Unit-1। Modern Pharmaceutical Analytical Techniques M Pharm unit 1 Important Questions। 1st sem — Transcript
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- 0:00तो आज की जो वीडियो है ना इस वीडियो में
- 0:01हम देखने वाले हैं जो आपका सब्जेक्ट है
- 0:03यहां पर मॉडर्न फार्मासटिकल एनालिटिकल
- 0:05टेक्निक्स एमफाम फर्स्ट सेमेस्टर में
- 0:07उसकेेंट क्वेश्चन तो यहां पे जो सब्जेक्ट
- 0:09है आप सभी के लिए कॉमन होने वाला है। चाहे
- 0:11आप फार्मासिक से एमफॉर्म कर रहे हो चाहे
- 0:13फार्माकोलॉजी से चाहे फार्मासटिकल
- 0:15केमिस्ट्री से। तो यहां पे देखिए जो हमारे
- 0:17क्वेश्चंस रहेंगे वो एग्जाम ओरिएंटेड
- 0:19रहेंगे। देखिए अगर आपने कुछ भी नहीं पढ़ा
- 0:21है तब भी सारी चीजें आपको क्लियर होंगी और
- 0:23यहां पे इन सभी क्वेश्चंस को पढ़कर के आप
- 0:25यहां पे गारंटेड पास हो सकते हैं। तो यहां
- 0:28पे देखिए वीडियो को स्टार्ट करने से पहले
- 0:29जो पॉइंट्स हैं जो यहां पे मैंने लिख रखे
- 0:31हैं इनको ध्यान से सुन लीजिए। तो यहां पे
- 0:33देखिए सबसे पहला पॉइंट है कि जो क्वेश्चंस
- 0:35है वो इस तरीके से लिखे हैं ताकि जो आपका
- 0:37लेंथी सिलेबस है वो कम टाइम में कवर हो
- 0:38जाए। यहां पर शॉर्ट एंड लॉन्ग दोनों टाइप
- 0:40के क्वेश्चंस हैं। शॉर्ट टू मार्क्स और
- 0:42सेवन और 10 मार्क्स सभी जैसे आपके एग्जाम
- 0:44में पूछे जाते हैं। एंड यहां पर जो मोस्ट
- 0:47ऑफ द जो क्वेश्चंस है वो आपके प्रीवियस
- 0:48ईयर क्वेश्चंस बेसिस पे सेलेक्ट किए गए
- 0:50हैं। टोटल यहां पे 38 क्वेश्चंस हैं आपके
- 0:52सभी यूनिट से। यहां पे देखिए आपको मैं
- 0:55पहले सिलेबस दिखा देता हूं। इस सिलेबस में
- 0:58अगर आप देखोगे इस सब्जेक्ट के अंदर तो
- 1:01यहां पे आपको छह यूनिट्स मिलेंगी। जैसे कि
- 1:03यूनिट फर्स्ट जिसमें यूवी विजिबल
- 1:05स्पेक्ट्रोस्कोपी, आईआर स्पेक्ट्रोस्कोपी,
- 1:07स्पेक्ट्रोफ्लोरीमेट्री और ये सब दिया हुआ
- 1:09है। आगे आपको एनएमआर मिलेगा दूसरी यूनिट
- 1:11में। तीसरी यूनिट में मास
- 1:13स्पेक्ट्रोस्कोपी। चौथी यूनिट में यहां पे
- 1:14क्रोमेटोग्राफी देखने को मिलेगी। एंड आगे
- 1:17जो चैप्टर है या बोलेंगे यूनिट पांचवी
- 1:19यहां पे है इलेक्ट्रोफोरेसिस। एंड लास्ट
- 1:22में यहां पे पोटेंशियोमेट्री, थर्मल
- 1:24टेक्निक और इम्यूनोलॉजिकल एसिए। तो इस
- 1:26सब्जेक्ट में आपकी छह यूनिट होने वाली है।
- 1:28तो यहां पे जो हमेंट क्वेश्चंस कवर करेंगे
- 1:30वो यूनिट वाइज कवर करेंगे। मतलब छह यूनिट
- 1:33यानी कि छह वीडियो और इनके जो नोट्स वगैरह
- 1:36हैं या जो आगे की जो सभी पार्ट हैं या
- 1:38वीडियोस वगैरह हैं वो आपको फार्मेसी वाले
- 1:40ऐप पर मिलेंगी। आपने क्या करना है? सिंपली
- 1:41Play Store पे जाना है। सर्च करना है
- 1:43फार्मेसी वाला। ऐप को आपने इंस्टॉल कर
- 1:45लेना है। एंड लॉग इन रजिस्टर करने के बाद
- 1:47आपको वहां पे एमf का सेक्शन नजर आएगा। उस
- 1:49पर आपने क्लिक करना है। उसमें आपने अपनी
- 1:51स्ट्रीम पे सेलेक्ट करना है। फार्माकोलॉजी
- 1:53फार्माstिक्स। तो उस पर क्लिक करने के बाद
- 1:56आपका जो भी सेमेस्टर है उस पर जाएंगे
- 1:58फर्स्ट सेमेस्टर पर एंड उसमें सबसे ऊपर एक
- 2:00बैच मिलेगा एमफाम फर्स्ट सेमेस्टर कॉम्बो
- 2:02तो आप वहां पे जाकर के जॉइ कर सकते हैं।
- 2:04सारा कंटेंट मतलब नोट्स वगैरह वीडियोस
- 2:06वगैरह आगे के सभी वहां पे आपको मिल
- 2:08जाएंगे। तो आज की जो वीडियो है ना इसमें
- 2:10हम यूनिट फर्स्ट को कवर करने वाले हैं। तो
- 2:12ये देखिए पहले क्वेश्चंस हमने इस तरीके से
- 2:14सभी यूनिट्स के लिख लिए हैं। जैसे कि हम
- 2:15बी फॉर्म में लिखते थे सेम उसी तरीके से।
- 2:18तो यहां पे जो भी यूनिट फर्स्ट के
- 2:20क्वेश्चंस हैं अब हम सभी को कवर करेंगे।
- 2:22तो स्टार्टिंग करते हैं यूनिट फर्स्ट की।
- 2:24लेकिन उससे पहले गाइज़ मेरा नाम है सहद्दीन
- 2:25खान और आप देख रहे हैं अपना YouTube चैनल
- 2:27फार्मेसी वाला। तो यहां पर देखिए हम बात
- 2:30करते हैं यूनिट फर्स्ट की और यहां पे जो
- 2:31पहला क्वेश्चन आपका बनता है वो यही बनता
- 2:33है कि आखिर ये सब्जेक्ट क्या है? जैसे कि
- 2:36आपका जो सब्जेक्ट है यहां पे मॉडर्न
- 2:38फार्मासटिकल एनालिटिकल टेक्निक्स इसका
- 2:40क्या मतलब है और इसके अंदर जो टेक्निक्स
- 2:43हैं उनके बारे में आपने बताना है और
- 2:45उनकीेंस कि आपको यहां पे ये सब्जेक्ट
- 2:47क्यों ऐड किया गया एज ए एमफार्म स्टूडेंट
- 2:50चाहे फार्माकोलॉजी में चाहे फार्मासटिक्स
- 2:52में चाहे फार्मासटिकल केमिस्ट्री में आप
- 2:54इसको क्यों यहां पे पढ़ रहे हैं इस सवाल
- 2:56के जवाब आपको इस क्वेश्चंस के अंदर मिलेगा
- 2:59तो यहां पे है डिफाइन मॉडर्न फार्मासटिकल
- 3:01एनालिटिकल टेक्निक्स विद एग्जांपल एंड गिव
- 3:04देयरेंस शॉर्ट में टू मार्क्स में आपने
- 3:06कवर करना है। तो यहां पे देखिए हम
- 3:08स्टार्टिंग करते हैं सिंपली इसी टर्म से
- 3:10जो कि आपके सब्जेक्ट का नेम भी है। मॉडर्न
- 3:12फार्मासटिकल एनालिटिकल टेक्निक। देखिए
- 3:15हमारे समझाने का सिंपल तरीका है। जो भी
- 3:17टर्म है आप उसको एकदम सिंपल छोटे-छोटे
- 3:20वर्ड में तोड़िए। उनका मतलब निकालिए। बस
- 3:22उसी से सारी चीजें आपको क्लियर हो जाएंगी।
- 3:25जैसे मॉडर्न इसको हमने तोड़ा मॉडर्न प्लस
- 3:28फार्मेसिकल प्लस एनालिटिकल टेक्निक।
- 3:30मॉडर्न कहने का मतलब यानी कि आधुनिक। आप
- 3:32बोल सकते हैं इंग्लिश में लेटेस्ट और
- 3:34एडवांस्ड मेथड। ठीक है? फार्माटिकल कहने
- 3:37का मतलब होता है दवाइयों से रिलेटेड। बोले
- 3:40तो रिलेटेड टू मेडिसिन और ड्रग। जहां पे
- 3:42फार्मासटिकल टर्म आ जाती है मतलब कि
- 3:44दवाइयों से संबंधित बातें चल रही हैं।
- 3:46एनालिटिकल टेक्निक मतलब दोज़ टेक्निक्स
- 3:49व्हिच यूज्ड इन एनालिसिस। वो तकनीकी वो
- 3:53चीजें जो जांच करने के लिए एनालिसिस करने
- 3:56के लिए यूज की जाती हैं वो हमारी
- 3:57एनालिटिकल टेक्निक्स कही जाती हैं। अगर हम
- 4:00इन तीनों टर्म को अब मिला दें तो इसकी
- 4:03डेफिनेशन क्या निकल के आती है कि मॉडर्न
- 4:05फार्मासटिकल एनालिटिकल टेक्निक्स आर दोज़
- 4:08लेटेस्ट और एडवांस मेथड ऑफ एनालिसिस व्हिच
- 4:11आर यूज्ड टू एनालाइज द क्वालिटी द सेफ्टी
- 4:15एंड एफिकसी ऑफ़ मेडिसिन। मैंने इसकी
- 4:17डेफिनेशन नहीं पढ़ी। जस्ट वर्ड का जो मतलब
- 4:20निकला था उनको जोड़ दिया और आप अपने
- 4:22वर्डों में इसकी डेफिनेशन बना सकते हैं।
- 4:23यह बहुत ही सिंपल तरीका है। यह आपको थीसिस
- 4:25लिखने में भी मदद करेगा। ठीक है? तो
- 4:28सिंपली आपने कैसे डिफाइन करना है यहां पे?
- 4:30आपको यहां पे पूरी डेफिनेशन मिल जाएगी कि
- 4:32मॉडर्न फार्मासटिकल एनालिटिकल टेक्निक्स
- 4:35आर एडवांस्ड मेथड दैट आर यूज्ड इन द
- 4:38डिटेल्ड एग्जामिनेशन ऑफ ड्रग्स और
- 4:40मेडिसिंस टू इंश्योर देयर क्वालिटी,
- 4:43क्वांटिटी, एफिकसी एंड सेफ्टी। जो बात
- 4:45मैंने आपको बना करके बोली थी वही ऑलमोस्ट
- 4:48उसका निचोड़ इसमें लिखा हुआ है। तो ये है
- 4:50आपका सब्जेक्ट। आपका सब्जेक्ट है क्या कि
- 4:52आप इसमें ना जो आज के टाइम पे आधुनिक
- 4:55लेटेस्ट जो मेथड यूज़ किए जा रहे हैं
- 4:58दवाइयों की जांच करने के लिए। जैसे
- 5:01फार्माकोलॉजी की अगर हम बात करें तो हमको
- 5:03जो है मेनली जो फोकस करना होता है एडीएमई
- 5:06पे। यानी कि जो क्लीनिकल ट्रायल वगैरह
- 5:08चलते हैं, ड्रग अब्सॉर्ब होती है, ब्लड
- 5:10में पहुंचती है, उसका वहां पे एक तरीके से
- 5:13उसको डिस्ट्रीब्यूट किया जाता है,
- 5:14मेटाबोलाइज होती है, एक्सक्रिएट होती है।
- 5:16तो वहां पे हम देखते हैं कि ड्रग हमारे
- 5:19ब्लड में कितने अमाउंट में पहुंची। तो
- 5:21ब्लड का सैंपल ले हम उनकी क्वांटिटी वगैरह
- 5:23एनालाइज कर सकते हैं। वह कितने रेट से
- 5:26एलिमिनेट हो रही है? तो यूरिन के सैंपल से
- 5:28हम वो पता कर सकते हैं। उसके मेटाबॉलिज्म
- 5:30को हम पता कर सकते हैं। या फिर अगर
- 5:32फार्मास्टिक्स के पॉइंट ऑफ व्यू से देखें
- 5:34तो आप कोई भी डोसेज फॉर्म बना रहे हैं तो
- 5:36उसके लिए रॉ ड रॉ मटेरियल चाहिए होते हैं।
- 5:39ड्रग या आपके जो भी एक्सपेंट वगैरह है तो
- 5:42उनकी क्वालिटी चेक करने के लिए क्या वो
- 5:44सेफ है या नहीं? यह चेक करने के लिए। तो
- 5:46इन सभी के पॉइंट ऑफ व्यू से ये जो टॉपिक
- 5:49है या ये जो आपका सब्जेक्ट है वो काफी
- 5:51इंपॉर्टेंट हो जाता है। अभी चाहे आप
- 5:54फार्मेसिकल केमिस्ट्री के पॉइंट ऑफ व्यू
- 5:55से देख लें कि कोई भी अननोन सैंपल है उसकी
- 5:59स्ट्रक्चर आप कैसे पता करोगे? आपके पास
- 6:01कोई भी केमिकल दे दिया हमने कि भाई ये
- 6:03क्या केमिकल है? आप उसकी स्ट्रक्चर कैसे
- 6:05पता करोगे? आप उसकी क्वांटिटी कैसे पता
- 6:07करोगे? आप किसी भी केमिकल के अंदर
- 6:10प्यूरिटी या इंप्युरिटी कैसे पता करोगे?
- 6:12तो वो सारी जो चीजें हैं वो इस सब्जेक्ट
- 6:15से आप पता कर सकते हैं। उसी का नॉलेज या
- 6:17ज्ञान ये आपको देने वाला है। तो इसीलिए जो
- 6:20सब्जेक्ट है वो हर एक स्ट्रीम के लिए कॉमन
- 6:22है। समझ आया? अब यहां पे देखिए आगे जो
- 6:26चीजें हैं आपको सिंपली इन मॉडर्न
- 6:28फार्मासटिकल जो एनालिटिकल टेक्निक है उनके
- 6:30एग्जांपल आपने बताने हैं औरेंस भी बतानी
- 6:33है कि भाई आप इनको क्यों पढ़ रहे हैं। ठीक
- 6:36है? तो एग्जांपल में अगर मैं चाहता तो
- 6:38यहां पे बस दो चार एग्जांपल लिख देता। पर
- 6:40मैंने यहां पे पूरे सिलेबस का यहां पे
- 6:42शॉर्ट में यह बता दिया है कि आप यहां पे
- 6:44पढ़ने क्या जा रहे हैं। जैसे अगर मैं आपको
- 6:47यहां पे थोड़ा सिलेबस दिखाऊं यहां पे
- 6:49सिलेबस की स्टार्टिंग यूनिट फर्स्ट से
- 6:51होगी। यूनिट फर्स्ट में आप जो आपने बीफ के
- 6:53सेवंथ सेमेस्टर में आपने पढ़ी थी
- 6:55स्पेक्ट्रोस्कोपी वगैरह बस वहीं से
- 6:57स्टार्टिंग है। जैसे यूवी विजिबल
- 6:59स्पेक्ट्रोस्कोपी आईआर स्पेक्ट्रोस्कोपी
- 7:02स्पेक्ट्रोफ्लोरीमेट्री
- 7:04फ्लेम एमिशन स्पेक्ट्रोस्कोपी एटॉमिक
- 7:06अब्सॉर्प्शन स्पेक्ट्रोस्कोपी। आगे जो ऐड
- 7:09की गई है एमफाम लेवल पे वो है एनएमआर
- 7:11स्पेक्ट्रोस्कोपी और मास
- 7:13स्पेक्ट्रोस्कोपी।
- 7:14यह दो चैप्टर आपके लिए एकदम न्यू होने
- 7:16वाले हैं। तो ये जो है सारी क्या है?
- 7:18हमारी स्पेक्ट्रोस्कोपी टेक्निक है जो कि
- 7:21इनको ही हम क्या बोलते हैं? मॉडर्न मेथड
- 7:24ऑफ एनालिसिस। मतलब जांच करने के नए
- 7:27तकनीकें या नए तरीके। बस कौन-कौन से? ये
- 7:30एग्जांपल आपको याद हो जाने चाहिए। यूवी
- 7:32विज़िबल स्पेक्ट्रोस्कोपी, आईआर
- 7:34स्पेक्ट्रोस्कोपी,
- 7:35स्पेक्ट्रोफ्लोरीमेट्री, फ्लेम एमिशन
- 7:37स्पेक्ट्रोस्कोपी या एनएमआर हुआ या मास
- 7:39स्पेक्ट्रोस्कोपी हुई। समझ आया? अब यहां
- 7:42पे एग्जांपल देखो यही है कि हमारी जो
- 7:45मॉडर्न मेथड ऑफ एनालिसिस है ना टेक्निक्स
- 7:47हैं उनके एग्जांपल कुछ इस तरीके से हैं कि
- 7:49हमारे सिलेबस में कुछ स्पेक्ट्रोस्कोपी दी
- 7:51है तो स्पेक्ट्रोस्कोपी में भी ये वाली जो
- 7:53स्पेक्ट्रोस्कोपी है जैसे कि यूबी आईआर
- 7:55फ्लोरमेट्री फ्लेम एटॉमिक एनएमआर मास ये
- 7:58सारी की सारी हमारी स्पेक्ट्रोस्कोपी के
- 8:00एग्जांपल है। ऐसे ही आगे आप यूनिट्स में
- 8:02बढ़ोगे आपकी क्रोमेटोग्राफी यहां पे
- 8:04स्टार्ट हो जाती है। क्रोमेटोग्राफी आपकी
- 8:06यहां पे थर्ड यूनिट अह फोर्थ यूनिट से
- 8:08स्टार्ट होगी। ये नंबरिंग थोड़ी गलत है। तो
- 8:11आप इसको फोर्थ यूनिट मानिए। फोर्थ यूनिट
- 8:13में यहां पे क्रोमेटोग्राफी आपको मिलेगी।
- 8:15इसमें आपको टीएलसी, एचपीटीएलसी, आयरन
- 8:18एक्सचेंज, कॉलम क्रोमेटोग्राफी, गैस
- 8:20क्रोमेटोग्राफी ऐसे ही यहां पे आपको
- 8:23एचपीएलसी मिलेगी यहां पे और अल्ट्रा
- 8:25एचपीएलसी मिलेगी, एफिनिटी क्रोमेटोग्राफी
- 8:27मिलेगी, जेल क्रोमेटोग्राफी मिलेगी। ठीक
- 8:30है? सभी वही एग्जांपल आपको यहां पे मैंने
- 8:33ऐड कर दिए हैं ताकि आपको यह अंदाजा लग सके
- 8:36कि यहां पे जो सारी चीजें हैं वो किस
- 8:37तरीके से यहां पे आपने पढ़नी है। अब उसके
- 8:40बाद आप अगले चैप्टर पे या अगली यूनिट पे
- 8:42जाओगे तो वो वो आ जाएगी यहां पे आपकी
- 8:44इलेक्ट्रोफोरेसिस यानी कि
- 8:46इलेक्ट्रोफोरेसिस भी आपकी एक एनालिटिकल
- 8:48टेक्निक है। तो उसके भी कई टाइप आप ऑलरेडी
- 8:51बीफम सेवंथ सेमेस्टर में पढ़ चुके हैं।
- 8:52जैसे कि पेपर या जेल वगैरह वो आप पढ़ चुके
- 8:55थे। यहां पे और भी ऐड किए गए हैं जैसे कि
- 8:57कैपिलरी इलेक्ट्रोफोरेसिस, ज़ोन
- 8:58इलेक्ट्रोफोरेसिस, मूविंग बाउंड्री
- 9:00इलेक्ट्रोफोरेसिस, आइसोइलेक्टिक फोकसिंग
- 9:03और एक और इसमें न्यू टेक्नोलॉजी ऐड की गई
- 9:05है वो है एक्सरे क्रिस्टलोग्राफी।
- 9:08मतलब किसी भी क्रिस्टल पर आप एक्सरेज़
- 9:11डालेंगे और उसकी आप मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर
- 9:14यहां पे पता कर सकते हैं। तो ये सारे
- 9:16इलेक्ट्रोफोरेसिस के एग्जांपल हुए। आगे
- 9:18आपकी एक्स एक्सरे क्रिस्टोग्राफी होगी।
- 9:20फिर आगे आपकी पोटेंशियोमेट्री फिर थर्मल
- 9:23टेक्निक जैसे एक्सरे क्रिस्टोग्राफी फिर
- 9:26पोटेंशियोमेट्री फिर थर्मल टेक्निक जिनसे
- 9:28भी आप जो भी आपके जो कंपाउंड होंगे
- 9:31सैंपल्स होंगे उनकी फिजिकल प्रॉपर्टीज पता
- 9:33लगा पाएंगे एंड लास्ट में आपके
- 9:34इम्यूनोलॉजिकल ऐसे जो बायोकेमिकल टेस्ट
- 9:38होते हैं जहां पे एंटीजन और एंटीबॉडी में
- 9:40रिएक्शन होती है उसकी मदद से आप वहां पे
- 9:42उनकी क्वांटिटी वगैरह पता लगा पाएंगे जैसे
- 9:44किसी भी हॉर्मोन की या किसी एंजाइम की या
- 9:47प्रोटीन की वो आप इम्यूनोलॉजिकल ऐसे में
- 9:49पता लगा पाएंगे पाएंगे। कहने का मतलब
- 9:52ओवरऑल इसका निचोड़ यह निकलता है कि यहां पे
- 9:54जो भी आपकी टेक्निक दी गई है, जो सारे
- 9:57आपके एग्जांपल हैं, यह आपके नए तरीके हैं।
- 10:00एडवांस्ड मेथड हैं जो आप इनको पढ़ने जा
- 10:02रहे हैं। आप इनकी मदद से चाहे आप दवाओं का
- 10:05क्लीनिकल ट्रायल वगैरह करा रहे हो, चाहे
- 10:08आप न्यू मेडिसिन डोसेज फॉर्म बना रहे हो
- 10:10या किसी भी अननाउन सैंपल की कंसंट्रेशन या
- 10:13उसके स्ट्रक्चर वगैरह पता लगा रहे हो,
- 10:15उसकी मिक्सचर से अलग कर रहे हो या उसकी
- 10:18मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर पता लगा रहे हो। हर
- 10:20जगह आपको इनकी जरूरत पड़ेगी। चाहे आप
- 10:22फार्माकोलॉजी से हो, फार्मासिक से हो,
- 10:24फार्मासिकल केमिस्ट्री से हो,
- 10:26फार्माकोग्नोसी से हो, हर एक में ये
- 10:28इंपॉर्टेंट होने वाला है। समझ आया? तो ये
- 10:31जो है जस्ट ये क्वेश्चन नहीं है। ये पूरे
- 10:33सिलेबस का यहां पे आपको मैप है कि यहां पे
- 10:35आप क्या पढ़ने जा रहे हैं। ठीक है? अब आगे
- 10:38यहां पे इसकीेंस लिखी हुई है। अगर एक और
- 10:41चीज मैं यहां पे बीच में ऐड करना चाहूं कि
- 10:43हमने ना इनेंट क्वेश्चंस को ऐड मतलब कि
- 10:45स्टार्ट करने से पहले हर एक सब्जेक्ट की
- 10:47ना सिलेबस ओवरव्यू वीडियो बनाई है अब की
- 10:49बार एमफ के लिए कि यहां पे मतलब कि आपको
- 10:53सिलेबस पढ़ने से पहले ही ये पता चल जाएगा
- 10:56कि इस सिलेबस का मतलब क्या है? आप इसमें
- 10:59क्या-क्या पढ़ने वाले हैं? आप इनको क्यों
- 11:01पढ़ने वाले हैं? और इनका करियर में क्या
- 11:03रोल होने वाला है? तो आपने इस सब्जेक्ट की
- 11:05जो सिलेबस ओवरव्यू वीडियो है आप उसको जरूर
- 11:08से देख लेना। आप सिंपली सर्च करना YouTube
- 11:10पर कि मॉडर्न फार्मेसिकल एनालिटिकल
- 11:13टेक्निक सिलेबस ओवरव्यू वीडियो फार्मेसी
- 11:15वाला। आपको वो वीडियो मिल जाएगी जहां पे
- 11:17आपको ये अंदाजा लग जाएगा कि भाई इस
- 11:19सब्जेक्ट की क्या वैल्यू होने वाली है। आप
- 11:21इसमें क्या पढ़ेंगे, क्यों पढ़ेंगे, करियर
- 11:23में रोल क्या है। ठीक है? हर एक सब्जेक्ट
- 11:25की आप पहले ये ये वीडियो देख लोगे तो एकदम
- 11:28आपको मैप बन जाएगा दिमाग में कि अच्छा
- 11:30मेरे चार सब्जेक्ट हैं। चार सब्जेक्ट में
- 11:32ये सब्जेक्ट ये बताएगा, दूसरा ये बताएगा,
- 11:34तीसरा ये बताएगा, चौथा वो बताएगा। ठीक है?
- 11:37तो ये आप जरूर से यहां पे कर लेना। अब आगे
- 11:39जो यहां पे हम देख रहे हैं तो इंपॉर्टेंट
- 11:42ये जो टेक्निक्स अभी आप अभी आपको मैंने
- 11:44एग्जांपल बताई इतनी सारी जो आपके सिलेबस
- 11:46में है उसकी इंपोर्टेंस क्या है? शॉर्ट
- 11:48में यहां पे लिखिए। तो यहां पे देखिए आपका
- 11:50वही लिखा है कि मॉडर्न फार्मेसिकल
- 11:52एनालिटिकल टेक्निक्स प्लेज़ेंट रोल इन यहां
- 11:55पे पॉइंट दिए हुए हैं। तो इनका रोल
- 11:57कहां-कहां पर है? लिखा है पहला इन
- 11:59क्वालिटी कंट्रोल। क्वालिटी को कंट्रोल
- 12:01करने के लिए जैसे कि लिखा है टू इंश्योर द
- 12:03प्योरिटी, सेफ्टी एंड एफिकसी ऑफ़ ड्रग। अभी
- 12:06हमने इन सभी के एग्जांपल देखे। जैसे कि
- 12:08स्पेक्ट्रोस्कोपी, क्रोमेटोग्राफी,
- 12:10इलेक्ट्रोफोरेसिस, एक्सक्रिस्टोग्राफी।
- 12:12इनका यूज़ कहां पे हो रहा है? इनका यूज़ हो
- 12:14रहा है हमारी जो दवाइयां हैं उनकी
- 12:16प्यूरिटी और सेफ्टी और एफिकसी को यह
- 12:19इंश्योर करना कि यह स्टैंडर्ड लेवल के
- 12:21अकॉर्डिंग है। ठीक है? इनसे किसी को
- 12:24नुकसान नहीं होगा। यह एकदम सेफ रहेंगे और
- 12:26इफेक्टिव भी रहेंगे। तो यह इंश्योर करना
- 12:28इनका मेन इंपॉर्टेंट काम है। दूसरा इन
- 12:31ड्रग डेवलपमेंट किसी भी दवाई को डोसेज
- 12:36फॉर्म को बनाने के लिए लिखा है कि इन
- 12:37आइडेंटिफिकेशन एक तो अननोन सैंपल को
- 12:39आइडेंटिफाई करने में। दूसरा क्वांटिफिकेशन
- 12:42ऑफ रॉ मटेरियल जो भी रॉ मटेरियल चाहिए
- 12:44होते हैं उनको क्वांटिफाई करने के लिए साथ
- 12:47के साथ जैसे डोसेस हम बनाते हैं
- 12:49फार्मासिस्टिक्स के अंदर तो एपीआई या जो
- 12:51भी एक्सपेंट वगैरह होते हैं उनको एनालाइज
- 12:54करना उनके डोज़ वगैरह या उनको क्वांटिटी
- 12:56वगैरह को पता लगाना फॉर्मुलेशन तैयार करना
- 12:59उसमें ये काफी इंपॉर्टेंट रोल निभाते हैं।
- 13:01आगे है रेगुलेटरी कंप्लायंस टू मीट
- 13:04इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स जैसे कि एफडीए,
- 13:06सीडीएससी और WHO यानी कि हमारी कंपनी में
- 13:10जो भी दवाइयां बन रही हैं वो स्टैंडर्ड
- 13:13लेवल से मीट करें। जैसे एफडीए की जो
- 13:15रेगुलेशंस हैं या आपके इंडिया के अंदर
- 13:18हमारे इंडिया के अंदर सीडीएसओ है तो उसके
- 13:20जो भी रेगुलेशंस हैं जो भी उसके
- 13:22स्टैंडर्ड्स हैं उनको मीट करें तो वो आप
- 13:25सारा डाटा इन्हीं के अकॉर्डिंग पता लगा
- 13:27पाएंगे और भेज भी पाएंगे उनके लिए। ठीक
- 13:29है? आगे है प्रोवाइड डाटा फॉर ड्रग
- 13:31अप्रूवल। ड्रग अप्रूवल के भी लिए भी डेटा
- 13:33प्रोवाइड करती हैं सारी टेक्निक्स। लास्ट
- 13:36में यहां पे एक और पॉइंट है वो है स्किल
- 13:37डेवलपमेंट। जैसे कि टू हेल्प स्टूडेंट इन
- 13:40ऑपरेटिंग एडवांस इंस्ट्रूमेंट एंड
- 13:41इंटरप्रेटिंग एनालिटिकल डेटा एक्यूरेटली।
- 13:44आप जो स्टूडेंट हैं जो इस सिलेबस में जो
- 13:46भी इंस्ट्रूमेंट पढ़ रहे हैं कोई भी जो
- 13:49टेक्निक पढ़ रहे हैं आप यहां पे उनकी
- 13:51चीजें समझ रहे हैं कि आखिर वो किस
- 13:52प्रिंसिपल पे काम करती है कैसे काम करती
- 13:54है उनकी वर्किंग वगैरह है ना उनका डेटा
- 13:57कैसे इंटरप्रिटेट करते हैं वो सब चीजें आप
- 14:00यहां पे जान रहे हैं। तो कहने का मतलब
- 14:01यहां पे स्किल विद डेवलपमेंट स्किल का
- 14:03डेवलपमेंट हो रहा है। आप आगे चलके किसी भी
- 14:05फार्मा इंडस्ट्री में या लैब के अंदर
- 14:07इन्हीं इंस्ट्रूमेंट का यूज़ करोगे। तो यह
- 14:10जो सब्जेक्ट है आपका मॉडर्न फार्मासटिकल
- 14:12एनालिटिकल टेक्निक आपको समझ आया होगा कि
- 14:14ये क्या है। इसके जो टेक्निक्स के
- 14:17एग्जांपल जो कि बिल्कुल भी याद करने की
- 14:19आपको जरूरत नहीं पड़ेगी। जो सिलेबस में है
- 14:20वही आपके एग्जांपल हैं और उनकीेंस अभी
- 14:23हमने जानी है। तो यह एक तरीके से पूरे
- 14:26सब्जेक्ट का हमने इंट्रो देख लिया है। अभी
- 14:29हमारी यूनिट फर्स्ट यहां पे हम जो देख रहे
- 14:31हैं तो इसमें जो देखेंगे तो बात करें सबसे
- 14:33पहले यूबी विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी आएगी
- 14:36जो आप ऑलरेडी बीफम के सेवंथ सेमेस्टर में
- 14:38जो सब्जेक्ट है इंस्ट्रूमेंटल मेथड ऑफ
- 14:40एनालिसिस उसमें पढ़ करके आ रहे हैं। आगे
- 14:43आईआर स्पेक्ट्रोस्कोपी वो भी पढ़ रखी है।
- 14:45स्पेक्ट्रोफ्लोरीमेट्री जिसको नॉर्मली
- 14:47फ्लोरीमेट्री बोलते थे। तो वो भी आप पढ़
- 14:49करके आ रहे हैं। आगे फ्लेम एमिशन
- 14:52स्पेक्ट्रोस्कोपी एंड एटॉमिक अब्सॉर्प्शन
- 14:54स्पेक्ट्रोस्कोपी आप इनको भी यहां पे पढ़
- 14:56करके आ रहे हैं। कहने का मतलब है यहां पे
- 14:58कोई भी चीज नई है जो यूनिट फर्स्ट में
- 15:00आपको नया ऐड किया गया हो। जो पुरानी जो
- 15:02चीजें हैं वो आपने बस यहां पे रिकॉल करनी
- 15:05है या रिवाइज करनी है। बस हम यहां पे
- 15:07एमफाम के लेवल्स उनको देखने वाले हैं। तो
- 15:09मैं मान के चलूंगा कि आपको यहां पे
- 15:11स्पेक्टोस्कोपी का बेसिक्स यहां पे तो आते
- 15:13होंगे। अगर नहीं भी आते हैं तो डोंट वरी
- 15:16मैं एकदम जीरो से ही स्टार्ट करने जा रहा
- 15:18हूं। ठीक है? तो अभी हम यहां पे
- 15:20स्पेक्ट्रोस्कोपियों को समझने से पहले जो
- 15:23टेक्निक्स यहां पे दे रखी हैं उनके बेसिक
- 15:25से जान लेते हैं कि आखिर जनरली
- 15:27स्पेक्ट्रोस्कोपी क्या होती है? वो कैसे
- 15:29काम करती हैं? तो यहां पे देखिए हम बात
- 15:32करते हैं स्पेक्ट्रोस्कोपी की। तो सिंपली
- 15:34यहां पे जो हेडिंग है उसको हम यहां पे
- 15:35ब्रेक कर दिया है। स्पेक्ट्रो प्लस
- 15:37स्कोपी। स्पेक्ट्रो का मतलब होता है
- 15:39स्पेक्ट्रम ऑफ लाइट। ठीक है? और इसी को हम
- 15:42बोलते हैं इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन। तो
- 15:45सिंपली स्पेक्ट्रो का मतलब है कि लाइट या
- 15:47बोले तो ईएमआर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक
- 15:50रेडिएशन। लाइट को ही हम यहां पे
- 15:52इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन भी बोलते हैं।
- 15:54एंड स्कोपी का मतलब यहां पे टू डिटरमाइन
- 15:56और एग्जाम मतलब पता लगाना या जांचना। कहने
- 16:00का मतलब है कोई भी अननोन सैंपल है उसकी
- 16:02कंसंट्रेशन उसकी क्वालिटी उसकी सेफ्टी
- 16:06एफिकसी या उसकी केमिकल स्ट्रक्चर इन सभी
- 16:09चीजों को एक लाइट की मदद से या
- 16:12इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन की मदद से पता
- 16:14लगाना बस वही कहा जाता है
- 16:16स्पेक्ट्रोस्कोपी
- 16:18समझ आया अभी आपको बेसिक तो चीजें पुरानी
- 16:20याद आ रही होंगी बी फार्मा में कि आपने
- 16:22क्या-क्या पढ़ा था स्पेक्ट्रोस्कोपी में
- 16:24बस वही यहां पे डेफिनेशन आपने दोबारा से
- 16:26पढ़नी है कि स्पेक्ट्रोस्कोपी इज द मॉडर्न
- 16:29मेथड ऑफ़ एनालिसिस इन व्हिच बी एनालाइज द
- 16:32स्ट्रक्चर, कंपोज़शन, कंसंट्रेशन और अदर
- 16:34प्रॉपर्टीज ऑफ़ अननोन सैंपल ऑफ ड्रग बाय
- 16:37यूजिंग लाइट और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक
- 16:39रेडिएशन। कि स्पेक्ट्रोस्कोपी हमारे
- 16:41मॉडर्न मेथड है क्योंकि मॉडर्न मेथड ऑफ
- 16:43एनालिसिस इसी टेक्निक्स में इस सब्जेक्ट
- 16:45में हम पढ़ रहे हैं। तो जिसकी मदद से हम
- 16:48किसी भी अननोन सैंपल जो ड्रग का सैंपल हो
- 16:51रॉ मटेरियल किसी का भी सैंपल हो उसके
- 16:53स्ट्रक्चर उसका कंपोजीशन उसकी कंसंट्रेशन
- 16:56और प्रॉपर्टीज को हम यहां पे पता लगा सकते
- 16:58हैं। किसकी मदद से? लाइट की मदद से। या
- 17:01उसी को हम इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन भी
- 17:03बोलते हैं। समझ आ गया क्या है यहां पे
- 17:05स्पेक्ट्रोस्कोपी? आगे यहां पर लिखा है कि
- 17:07इट बेस्ड ऑन अबजॉर्प्शन एंड एमिशन ऑफ लाइट
- 17:10और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन। जो
- 17:12स्पेक्ट्रोस्कोपी जो टेक्निक्स होती है या
- 17:14तो वह लाइट के अब्सॉर्प्शन पर बेस्ड होती
- 17:16है या फिर लाइट के एमिशन पर। आपने बीफा
- 17:18में पढ़ा होगा कुछ टेक्निक्स लाइट को
- 17:19एब्सॉर्ब करके क्वांटिटी या फिर उनकी
- 17:22कंसंट्रेशन वगैरह पता लगाती थी। कुछ एमिशन
- 17:24से पता लगाती थी। ठीक है? अभी हम इनके
- 17:27इनके बारे में डिटेल में देखेंगे। आगे
- 17:29यहां पे देखिए हमने ईएमआर को बता रखा है।
- 17:31ईएमआर यानी कि लाइट। लाइट हमारा एक टाइप
- 17:34का रेडिएशन ही है जिसको हम यहां पे
- 17:35इलेक्ट्रो मैग्नेटिक रेडिएशन बोलते हैं।
- 17:38इसका नेम ही ऐसे बना है इलेक्ट्रो प्लस
- 17:41मैग्नेटिक कि ईएमआर या कहें तो लाइट एक
- 17:44टाइप का रेडिएशन है जिसमें इलेक्ट्रिक और
- 17:46मैग्नेटिक फील्ड दोनों साथ-साथ चलते हैं।
- 17:48और ये वेव की फॉर्म में होता है। वेव यानी
- 17:51कि तरंग की फॉर्म में। तो यहां पे लिखा है
- 17:53कि ईएमआर इज ए फॉर्म ऑफ एनर्जी दैट ट्रेवल
- 17:56थ्रू स्पेस इन फॉर्म ऑफ वेव। इलेक्ट्रिक
- 17:59फील्ड और मैग्नेटिक फील्ड दोनों यहां पे
- 18:01होते हैं। तो लाइट या कहें तो ईएमआर क्या
- 18:04है? एक टाइप की एनर्जी है जिसमें फोटों्स
- 18:06होते हैं। एनर्जी बंडल ऑफ एनर्जी। ठीक है?
- 18:09तो लाइट जस्ट हम बोल रहे हैं इसका मतलब
- 18:11जस्ट ये नहीं कि रोशनी ही आपको मिल रही है
- 18:13बल्कि वो एक टाइप की एनर्जी है जो कि वेव
- 18:16की फॉर्म में चल रही है। अब उसी एनर्जी को
- 18:19जब हम किसी सैंपल पर डालेंगे तो वो सैंपल
- 18:21उसको या तो एब्सॉर्ब करके हायर स्टेट में
- 18:23जाएगा और फिर वापस जब लोअर स्टेट में आएगा
- 18:26तो वो एमिशन भी वहां पे करेगा। तो ये
- 18:28बेसिक चीजें आपने पढ़ रखी हैं। वही जो
- 18:30चीजें मैंने यहां पे अच्छे से दिखा रखी
- 18:32है। आप इस बेसिक डायग्राम से समझ लीजिए कि
- 18:35जैसे ये जो स्पेक्ट्रोस्कोपी कैसे काम
- 18:37करेगी यहां पे लाइट ये सोर्स है जहां पे
- 18:40ईएमआर या रेडिएशन वगैरह निकलेगा। ये निकल
- 18:43कर के तरंगे जो ये वेव की फॉर्म में चलता
- 18:46है ईएमआर या लाइट वो किसी भी सैंपल जिसकी
- 18:49आपने जांच करनी है एनालिसिस करनी है उसके
- 18:51आर-पार वो निकाला जाएगा। अब ये जो सैंपल
- 18:54है उन्हीं लाइट को या उन्हीं तरंगों को जो
- 18:57क्या है एक टाइप की एनर्जी है उनको
- 18:59एब्जॉर्ब कर गया। एब्जॉर्ब करके उसके जो
- 19:02इलेक्ट्रॉन्स है वो लोअर या ग्राउंड स्टेट
- 19:04से हायर स्टेट में चले जाएंगे। ठीक है? तो
- 19:07कितना यहां पे लाइट या कितनी एनर्जी
- 19:09एब्जॉर्ब हुई। अब जितने ज्यादा यहां पे
- 19:11मॉलिक्यूल या पार्टिकल्स होंगे उतनी
- 19:13ज्यादा एनर्जी एब्सॉर्ब होगी। तो आप ये
- 19:14पता लगा पाएंगे कि यहां पे उनकी कितनी
- 19:16क्वांटिटी है। सैंपल के अंदर कितनी मात्रा
- 19:18में वो मौजूद है। ठीक वैसे ही एमिशन पे
- 19:22काम करते हैं कि जो मॉलिक्यूल जिस लाइट को
- 19:23या एनर्जी को अब्सॉर्ब करे हैं वो हायर
- 19:26स्टेट से वापस ग्राउंड स्टेट पर भी आते
- 19:28हैं। वो हमेशा तो वहां पे नहीं बैठे
- 19:30रहेंगे हायर स्टेट पे। वो वापस जब ग्राउंड
- 19:32स्टेट पे आते हैं तो वो लाइट को एमिट करते
- 19:34हैं। बाहर तरंगों को निकालते हैं। तो
- 19:36कितना एमिशन वहां पे हो रहा है। उसकी मदद
- 19:39से भी यहां पे पता लगा पाएंगे कि कौन सा
- 19:41यहां पे कंपाउंड है और इसकी क्या
- 19:42क्वांटिटी है। यह जस्ट मैं बेसिक बता रहा
- 19:45हूं क्योंकि आपने बीफ में चीजें पढ़ रखी
- 19:47हैं। ठीक है? तो आगे यहां पर यही लिख रखा
- 19:50है कि जो स्पेक्ट्रोस्कोपी है वो ब्रॉडली
- 19:52दो टाइप में क्लासिफाई की गई है।
- 19:55एब्जॉर्प्शन स्पेक्ट्रोस्कोपी मतलब जो
- 19:57एब्जॉर्प्शन पर बेस्ड होती है लाइट के
- 19:59एब्सॉर्प्शन पर। दूसरी एमिशन
- 20:00स्पेक्ट्रोस्कोपी जो एमिशन पर बेस्ड होती
- 20:03है। अब इनके एग्जांपल्स आपने जरूर से
- 20:05ध्यान रखने हैं कि कौन सी कैटेगरी में कौन
- 20:07सा आता है। जैसे लिखा है कि एब्जॉर्प्शन
- 20:09स्पेक्ट्रोस्कोपी में इट इज़ बेस्ड ऑन द
- 20:11मेज़मेंट ऑफ एब्जॉर्प्शन ऑफ़
- 20:13इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन और लाइट। कि
- 20:16अब्सॉर्प्शन स्पेक्ट्रोस्कोपी ईएमआर या
- 20:18लाइट के एब्जॉर्प्शन के मेज़मेंट पर बेस्ड
- 20:21होती है कि कितना एब्जॉर्प्शन हुआ। उसको
- 20:23मेजर करके आप पता लगाओगे। दूसरा आपका यहां
- 20:25पे है जिसके एग्जांपल की बात करें जैसे कि
- 20:28यूवी विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी वो
- 20:30अब्सॉर्प्शन ऑफ लाइट इसी पर बेस्ड है।
- 20:32आईआर भी अब्सॉर्प्शन पर बेस्ड है। एटॉमिक
- 20:34अबजॉर्प्शन स्पेक्ट्रोस्कोपी अब्जॉर्प्शन
- 20:36पर ही बेस्ड है। इसके तो नेम में भी आ रहा
- 20:38है अबजॉर्प्शन। एंड यहां पे है न्यू आपका
- 20:40जो है यहां पे न्यूक्लियर मैग्नेटिक
- 20:42रेजोनेंस। शॉर्ट में एनएमआर
- 20:44स्पेक्ट्रोस्कोपी बोलते हैं। तो ये भी
- 20:45एब्जॉर्प्शन पर बेस्ड है। ठीक है? तो यहां
- 20:49पे सिलेबस मैं आपको साथ के साथ बताऊं। ये
- 20:51चीज बहुत इंपॉर्टेंट है याद करने वाली कि
- 20:53यूवी विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी अब्सॉर्प्शन
- 20:55पर बेस्ड है। ये भी अबजॉर्प्शन पर बेस्ड
- 20:57है। यहां पे आस अबजॉर्प्शन पर बेस्ड है।
- 21:00एनएमआर आपका एब्सॉर्प्शन पर बेस्ड है।
- 21:02दूसरा है यहां पे एमिशन स्पेक्ट्रोस्कोपी
- 21:05मतलब कि वो स्पेक्ट्रोस्कोपी जहां पे जो
- 21:08आप जो लाइट के एमिशन पर बेस्ड होती है।
- 21:10लिखा है कि इट बेस्ड ऑन द मेज़रमेंट ऑफ
- 21:12एमिशन ऑफ़ इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन और
- 21:14लाइट। इसमें सिर्फ दो आती हैं।
- 21:17फ्लोरमेट्री या इसको
- 21:19स्पेक्ट्रोफ्लोरीमेट्री बोलते हैं। दूसरा
- 21:21है फ्लेम एमिशन स्पेक्ट्रोस्कोपी। इसके
- 21:23नेम में आ रहा है एमिशन स्पेक्ट्रोस्कोपी।
- 21:26तो यहां पे आपको सिलेबस में दिखा दें। ये
- 21:29आपका स्पेक्ट्रोफ्लोरीमेट्री।
- 21:31दूसरा फ्लेम एमिशन स्पेक्ट्रोस्कोपी। ये
- 21:34एमिशन पर बेस्ड है। अब आपका एक और
- 21:36स्पेक्ट्रोस्कोपी यहां पे बचा है वो है
- 21:38मास स्पेक्ट्रोस्कोपी। ये एक्चुअली में
- 21:40इसका नेम यहां पे जोड़ दिया है
- 21:42स्पेक्ट्रोस्कोपी। पर ये एक्चुअली में
- 21:44स्पेक्ट्रोस्कोपी नहीं है। क्योंकि अभी
- 21:47मैं आपको आगे चल के बताऊंगा। थोड़ा यहां
- 21:49भी बता देता हूं। देखिए ये जो मास
- 21:52स्पेक्ट्रोस्कोपी है ये स्पेक्ट्रोस्कोपी
- 21:54नहीं है बल्कि मास स्पेक्ट्रोमेट्री है।
- 21:57यहां पे अभी हमने एक कांसेप्ट समझा कि
- 21:59स्पेक्ट्रोस्कोपी हम किसको बोलते हैं? कि
- 22:02जहां पे लाइट या स्पेक्ट्रम की मदद से
- 22:04किसी भी सैंपल की कंसंट्रेशन, क्वांटिटी
- 22:06या सैंपल की जांच करते हैं। किसकी मदद से?
- 22:08लाइट या ईएमआर की मदद से। पर मास
- 22:11स्पेक्ट्रोमेट्री में यहां पर ईएमआर या
- 22:14लाइट का यूज होता ही नहीं है। जब यूज़ होता
- 22:16ही नहीं है तो मतलब ये स्पेक्ट्रोस्कोपी
- 22:18की कैटेगरी में नहीं आती है। यहां पे ये
- 22:20पीसीआई ने नाम जरूर दे दिया है मास
- 22:22स्पेक्ट्रोस्कोपी पर ये स्पेक्ट्रोमेट्री
- 22:25है मास स्पेक्ट्रोमेट्री। ठीक है? तो यहां
- 22:28पे बस ये ध्यान रखना है कि इसमें दो ही
- 22:30एग्जांपल है। तीसरा एग्जांपल मास
- 22:32स्पेक्ट्रोस्कोपी इन दोनों में नहीं आता
- 22:34है। ठीक है? अब यहां पे हम थोड़ा अच्छे से
- 22:37बात कर लेते हैं कि लाइट क्या है? लाइट जो
- 22:40अभी हमने जाना इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन
- 22:42है तो लिखा है इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन
- 22:45इज अ फॉर्म ऑफ एनर्जी दैट ट्रेवल्स थ्रू
- 22:48स्पेस इन फॉर्म ऑफ वेव जो रोशनी आपके घरों
- 22:52तक आती है आपकी आंखों तक आती है या अभी जो
- 22:54आप अपने फोन में देख रहे हैं तो ये क्या
- 22:56है एक टाइप की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन
- 22:59है जो कि एक फॉर्म है एनर्जी की जो कि
- 23:02किसी भी स्पेस में किसी भी मीडियम में वो
- 23:04ट्रैवल करती है वेव की फॉर्म में तरंगों
- 23:06की फॉर्म में जैसे यहां पे मैंने दिखा रखा
- 23:09है।
- 23:10जैसे आप देखोगे यह जो लाइट है या ईएमआर है
- 23:14यह इस तरीके से इलेक्ट्रिक फील्ड और
- 23:16मैग्नेटिक फील्ड ये दोनों कंसिस्ट करते
- 23:18हैं। ये ऑस्केलेट या बोल तो कंपन करते
- 23:20रहते हैं दोनों फील्ड। जैसे ये आप रेड कलर
- 23:23में देखोगे कुछ इस तरीके से। यह आपका
- 23:26इलेक्ट्रिक फील्ड है। और इसके अगर आप यहां
- 23:29पर परपेंडिकुलर देखोगे यह कुछ इस तरीके से
- 23:32यह आपका यहां पर मैग्नेटिक फील्ड है। ये
- 23:34दोनों इस तरीके से ऑस्लेट करते हैं किसी
- 23:37भी मीडियम में और ये वेव की फॉर्म में
- 23:40चलते हैं। समझ आया आपको? यहां पे मैं इन
- 23:43दोनों को आपको अलग-अलग करके भी यहां पे
- 23:45दिखा देता हूं ताकि आपको एकदम और अच्छे से
- 23:47समझ आ जाए। जैसे
- 23:50यहां पे आप इस फोन में देखिए अगर आपको
- 23:52चीजें नजर आए। इलेक्ट्रिक फील्ड जैसे कि
- 23:55आपको यहां पर नजर आ रहा है। इलेक्ट्रिक
- 23:57फील्ड कुछ इस तरीके से आपका होता है। ठीक
- 24:00है? और मैग्नेटिक फील्ड जो है इसके
- 24:02परपेंडिकुलर कुछ इस तरीके से ये होता है।
- 24:05ठीक है? दिख रहा है आपको यहां पे? तो ये
- 24:07आपकी जो लाइट है कुछ इसी तरीके से दोनों
- 24:10जो फील्ड है वो एक साथ चलते हैं एक वेव की
- 24:12फॉर्म में। और यह आपका लाइट या
- 24:14इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन कहा जाता है।
- 24:16तो इसी को हम किसी भी सैंपल पर डालते हैं
- 24:19और उसकी एनालिसिस करते हैं। अब यहां पे
- 24:22दो-तीन पॉइंट और लिखे हैं जो आप देख रहे
- 24:24हैं वही चीजें हैं कि जो ईएमआर है लिखा है
- 24:27कि इट कंसिस्ट इट कंसिस्ट ऑफ ऑस्किलेटिंग
- 24:30इलेक्ट्रिक एंड मैग्नेटिक फील्ड्स दैट
- 24:32स्प्रेड थ्रू ए वैक्यूम और मीडियम। कि
- 24:35ईएमआर में क्या होता है? कंपन करते हुए
- 24:37इलेक्ट्रिक और मैग्नेटिक फील्ड होते हैं
- 24:38जो कि किसी भी वैक्यूम या मीडियम में
- 24:40फैलते हैं एक वेव की फॉर्म में।
- 24:42इट आल्सो कंटेन फोटों्स। इसमें फोटन होते
- 24:46हैं बंडल ऑफ एनर्जी जो किसी भी सैंपल पर
- 24:49डलते हैं वो वहां पे सैंपल उनको अब्सॉर्ब
- 24:52करता है। ठीक है? अगर हम बात करें यहां पे
- 24:55ईएमआर की लाइट की या वेव की वो अलग-अलग
- 24:58हैं। जैसे कि गामा रेज, एक्स रेज,
- 25:01अल्ट्रावायलेट रेज, विज़िबल लाइट,
- 25:04इंफ्रारेड लाइट या रडार वेव, माइक्रोवेव,
- 25:07टेलीविज़ वेव, रेडियो वेव। ये सभी के सभी
- 25:10जो है क्या आपके इलेक्ट्रोमैग्नेटिक
- 25:12रेडिएशन है। अभी जस्ट हम जो लाइट की बात
- 25:15करते हैं जस्ट आपको लगता है जो हम चीजों
- 25:17को देख रहे हैं सिर्फ हम उनकी बात कर रहे
- 25:19हैं। उसको हम यहां पे जस्ट विजिबल लाइट
- 25:22बोलते हैं। विजिबल लाइट के अलावा भी बहुत
- 25:24सारे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन हैं।
- 25:26जैसे गामा रेज, अल्ट्रावायलेट रेज,
- 25:28इंफ्रारेड लाइट, रडार वेव, माइक्रोवेव। यह
- 25:31भी क्या है? एक टाइप के
- 25:32इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन है। सेम ऐसे
- 25:34ही जैसे जिस लाइट की मदद से आप देखते हैं
- 25:37विज़िबल लाइट की तरह।
- 25:39ठीक है? जब भी हम बात करें ईएमआर जस्ट
- 25:41विजिबल लाइट की ही बात नहीं हो रही है। इन
- 25:43सभी की बात यहां पर हो रही है। ठीक है?
- 25:46आगे जो बेसिक चीजें हैं जो आपने जाननी है
- 25:48कि वेवलेंथ क्या है? फ्रीक्वेंसी क्या है?
- 25:51फोटन एनर्जी क्या है? ये चीजें आपने जाननी
- 25:54है। वेवलेंथ। वेव यानी कि तरंग। लेंथ बोले
- 25:58तो लंबाई। किसी भी तरंग की लंबाई। किसी भी
- 26:01वेव की लंबाई को हम यहां पे वेवलेंथ बोलते
- 26:03हैं। जैसे यहां पे जो वेव है जैसे आप
- 26:06देखोगे ये आपका मैग्नेटिक फील्ड है। इसका
- 26:08मैग्नेटिक फील्ड में जो वेव है इसका पीक
- 26:10एक यहां है। यहां से यह वेव चली ऐसे करती
- 26:13करती और यहीं पर यह पहुंच गई एकदम उसी के
- 26:16बराबर ऊंचाई पर। तो इसी एक साइकिल को पूरा
- 26:20करने के लिए या एक वेव पूरी जो कंप्लीट
- 26:23होती है जहां ये टू नियरेस्ट पीक के बीच
- 26:26की जो दूरी है उसी को हम वेवलेंथ बोलते
- 26:29हैं। वेव की लंबाई बोलते हैं। सपोज़ करो
- 26:32अगर ये टेढ़ी नहीं होती। आप इसके दोनों
- 26:34छोरों को पकड़ते अगर इनको ऐसे खींचोगे तो
- 26:36जो खींचने के बाद जो लंबाई बनेगी उसको माप
- 26:39दो मीटर में नैनोमीटर में किलोमीटर में बस
- 26:42वही क्या है वेव की लेंथ है समझने के लिए
- 26:45एकदम सिंपल है यहां पे दूसरा यहां पे
- 26:48फ्रीक्वेंसी
- 26:49डेफिनेशन देखिए यहां पे लिखी हुई है इट इज
- 26:51द डिस्टेंस बिटवीन टू नियरेस्ट पीक ऑफ वेव
- 26:54वेव की दो नियरेस्ट पीक के बीच की दूरी
- 26:57जैसे ये दो नियरेस्ट पीक है उनके बीच की
- 27:00दूरी वेवलेंथ कही जाती है। ठीक है? इसको
- 27:04जैसे कि ये लंबाई है। इसको आप किस में
- 27:05मेजर करोगे? मीटर में, नैनोमीटर में या
- 27:08सेंटीमीटर में या किलोमीटर में? ठीक है?
- 27:10इसको हम लैम्ब्डा से रिप्रेजेंट करते हैं।
- 27:12ये ध्यान रखना। आगे यहां पे फ्रीक्वेंसी।
- 27:15फ्रीक्वेंसी को हम हिंदी में बोलते हैं
- 27:18यहां पे बारंबारता। कोई भी चीज जब बार-बार
- 27:21बार-बार आती है उसको हम फ्रीक्वेंसी या
- 27:23आवृत्ति भी उसको हम हिंदी में बोलते हैं।
- 27:25इसको हम न्यू से रिप्रेजेंट करते हैं। इट
- 27:27इज डिफाइंड एज एज नंबर ऑफ वेव साइकिल
- 27:31कंप्लीट्स इन 1 सेकंड या पर यूनिट टाइम।
- 27:34जैसे हमारी हमने सपोज़ करो एक टाइम फिक्स
- 27:37कर दिया एक यूनिट या 1 सेकंड। तो 1 सेकंड
- 27:40के अंदर कितनी वेव साइकिल कंप्लीट होती
- 27:42हैं। जैसे सपोज़ करो कुछ इस तरीके से। अब
- 27:48हम बात कर रहे हैं सपोज करो 1 मिनट या फिर
- 27:501 सेकंड कि 1 सेकंड में हमारी वेव यहां से
- 27:53चल रही है। ऐसे चलते-चलते चलते और यहां पे
- 27:57आके 1 सेकंड हो गई। अब 1 सेकंड में कितनी
- 27:59वेबसाइकिल कंप्लीट हुई? यहां से यहां से
- 28:02यहां एक वेब साइकिल यहां से यहां दो तीन।
- 28:04तो तीन वेब साइकिल ये 1 सेकंड में कंप्लीट
- 28:07करी तो इसकी फ्रीक्वेंसी यहां पे कितनी
- 28:09होगी? तीन होगी। समझ आया? तो फ्रीक्वेंसी
- 28:12कहने का मतलब है कि यहां पे जो लाइट है या
- 28:15जो वेव है वो कितनी तेजी से चल रही है आप
- 28:18वो पता लगा सकते हैं। इट इज डिफाइंड एज द
- 28:21नंबर ऑफ वेव साइकिल कंप्लीट इन वन यूनिट
- 28:23टाइम या 1 मिनट में कितनी वेव साइकिल
- 28:25कंप्लीट हो रही है या 1 सेकंड में कितनी
- 28:27वेव साइकिल कंप्लीट हो रही हैं। तो इसको
- 28:29हम यहां पे इसकी यूनिट है हर्ट्ज जिसको हम
- 28:32बोलते हैं वन साइकिल पर सेकंड।
- 28:35ठीक है? हर्ट्ज। तो ये आपने समझा कि
- 28:38वेवलेंथ क्या है? फ्रीक्वेंसी क्या है? अब
- 28:41एक चीज यहां पर बहुत इंपॉर्टेंट जो समझने
- 28:43वाली है। जैसे सपोज करो कि यह मैंने इस
- 28:47तरीके से यहां पर बनाई है। इस तरीके से
- 28:49लाइट चल रही है। दूसरी तरफ हमारी ये इस
- 28:54तरीके से।
- 28:56अब यहां पे आपको दो चीज देखने को मिलेंग
- 28:58या शायद आपको और अच्छे से मैं दूसरे पेज
- 29:01पे समझा देता हूं।
- 29:05ठीक है? इस तरीके से यह हमारी वेव है। एक
- 29:09इधर
- 29:15ये इस तरीके से ये हमने दो वेव यहां पे
- 29:18ड्रॉ कर दी। अब आप ऊपर वाली वेव को देखोगे
- 29:21तो उसकी जो वेवलेंथ है यहां से यहां ये
- 29:24लैम्ब्डा है।
- 29:26इसकी जो वेवलेंथ है वो काफी ज्यादा नहीं
- 29:28दिख रही आपको। ये ज्यादा है। और एक चीज
- 29:31आपको ये भी दिख रही है कि जब वेवलेंथ
- 29:33ज्यादा हो रही है ना तो इसकी फ्रीक्वेंसी
- 29:35कम हो जा रही है। जैसे यहां पे इसकी
- 29:37वेवलेंथ बहुत छोटी है। जस्ट यहां से यहां
- 29:40तक है। तो इसको देखेंगे जब वेवलेंथ यहां
- 29:42पे कम हो जा रही है तो फ्रीक्वेंसी यहां
- 29:44पे बहुत तेजी-तेजी से हो रही है।
- 29:45फ्रीक्वेंसी यहां पे बढ़ जा रही है। तो आप
- 29:47बोल सकते हैं कि लैम्ब्डा यानी कि वेवलेंथ
- 29:50एंड फ्रीक्वेंसी यानी कि न्यू एक दूसरे के
- 29:52अपोजिट है। यानी कि अगर वेवलेंथ बढ़ती है
- 29:55तो फ्रीक्वेंसी कम होती है। फ्रीक्वेंसी
- 29:57बढ़ती है तो यहां पे वेवलेंथ कम होती है।
- 29:59समझ गए? यह चीज आपने ध्यान रखनी है। आपको
- 30:02यह समझ आ गया? इसके बाद देखिए जो टर्म है
- 30:05यहां पे वो है फोटन एनर्जी। फोटन यानी कि
- 30:07एनर्जी के जो बंडल होते हैं जो कि वेव के
- 30:10फॉर्म में चलते हैं। तो फोटन एनर्जी कहने
- 30:13का मतलब है कि एक फोटन की कितनी एनर्जी है
- 30:16वही फोटन एनर्जी कही जाएगी। और ये फोटन
- 30:18एनर्जी जो होती है ना वो डिपेंड करती है
- 30:20कि उस फोटन की या वेव की फ्रीक्वेंसी
- 30:24कितनी है या वेवलेंथ कितनी है। अभी इन
- 30:26दोनों में रिलेशनशिप तीनों में रिलेशनशिप
- 30:28भी आपने जाननी है और वो काफी इंपॉर्टेंट
- 30:30है आपकी इस सारी यूबीएस विज़िबल
- 30:32स्पेक्ट्रोस्कोपी या आने वाली
- 30:33स्पेक्ट्रोस्कोपी में। तो यहां पे लिखा है
- 30:35कि फोटोन एनर्जी क्या है? इट इज द अमाउंट
- 30:37ऑफ एनर्जी व्हिच कैरीड बाय अ सिंगल फोटन।
- 30:40एक सिंगल फोटोन के द्वारा कितनी एनर्जी
- 30:42कैरी की जाती है? कितनी एनर्जी उसमें होती
- 30:44है? वही कही जाएगी फोटन एनर्जी। इसको हमने
- 30:48E से रिप्रेजेंट करते हैं। और यही जो
- 30:50एनर्जी होती है यानी कि E ये फोटन की जो
- 30:53एनर्जी होती है वो डिपेंड करती है कि उस
- 30:55फोटन की वेवलेंथ या फ्रीक्वेंसी कितनी है।
- 30:58जैसे यहां पे इन दो इनके बीच में एक
- 31:00फार्मूला भी है। जैसे अगर मैं बात करूं ये
- 31:05E बोले तो फोटोन एनर्जी इसको हम प्लैंक
- 31:07इक्वेशन भी बोलते हैं। तो प्लैंक इक्वेशन
- 31:09क्या है? कि E इज़ डायरेक्टली प्रपोशनल टू
- 31:12न्यू। ये जो V जैसा देख रहे हो ना ये न्यू
- 31:15है। न्यू यानी कि फ्रीक्वेंसी। आप बोल
- 31:18सकते हैं कि अगर हम बात करें अगर किसी भी
- 31:20वेव की अगर फ्रीक्वेंसी बढ़ती है तो उसकी
- 31:22एनर्जी भी बढ़ती है। एनर्जी बढ़ने से उसकी
- 31:25फ्रीक्वेंसी बढ़ती है। आप ये भी बोल सकते
- 31:27हैं। इज़ इज़ इक्वल्स टू लिखा है यहां पे।
- 31:31ये H जो है प्लैंक कांस्टेंट है। C यानी
- 31:33कि यहां पे स्पीड ऑफ लाइट एंड लैम्ब्डा
- 31:36बोले तो वही वेवलेंथ। तो एक फार्मूला रहता
- 31:39है कि स्पीड ऑफ लाइट यानी कि c = लैम्ब्डा
- 31:42* μ न्यू फ्रीक्वेंसी लैम्ब्डा वेवलेंथ और
- 31:45ये c स्पीड ऑफ लाइट। तो यहां पे देखिए अगर
- 31:48हम μ की जगह अगर यहां पे μ को इधर ले जाए
- 31:52तो c/ लैम्ब्डा आ जाएगा। तो μ की जगह जब
- 31:55हमने यहां पे c/ लैम्ब्डा रखा h यहां पे
- 31:57है ही है तो e = हो जाएगा यहां पे प्लैंक
- 32:02कांस्टेंट * c/ लैम्ब्डा यानी कि एनर्जी
- 32:05जो होती है किसी भी फोटन की वो लाइट की
- 32:07स्पीड के डायरेक्टली प्रपोर्शनल होती है।
- 32:09लेकिन यहां पे जो लैम्ब्डा है उसके
- 32:12इन्वर्सली प्रपोर्शनल होती है। यानी कि
- 32:15अगर वेवलेंथ बढ़ती है तो एनर्जी कम होगी
- 32:18किसी भी तरंग की और अगर एनर्जी बढ़ती है
- 32:20तो वेवलेंथ उसकी जरूर कम ही होगी। समझ आया
- 32:23आपको? यानी कि दोनों चीजें ये एक दूसरे के
- 32:26अपोजिट है। एनर्जी और वेवलेंथ भी। जैसे
- 32:29यहां पे E फॉर फोटन एनर्जी, H प्लैंक
- 32:31कांस्टेंट है। C स्पीड ऑफ लाइट है।
- 32:33लैम्ब्डा यहां पे फोटन की वेवलेंथ और न्यू
- 32:35जो है फोटन की फ्रीक्वेंसी।
- 32:37ठीक है? अब सिंपली इन्हीं में यही
- 32:39रिलेशनशिप यहां पे दे रखी है। जैसे कि
- 32:41लिखा है रिलेशनशिप बिटवीन वेवलेंथ,
- 32:43फ्रीक्वेंसी एंड फोटन एनर्जी। अभी हमने
- 32:46देखा कि फ्रीक्वेंसी जो है अगर बढ़ती है
- 32:48तो वेवलेंथ कम होती है। वेवलेंथ बढ़ती है
- 32:51तो फ्रीक्वेंसी कम होती है। यानी कि एक
- 32:53दूसरे के इन्वर्सली प्रोपोर्शनल है। तो
- 32:55यहां पे लिखा है कि फ्रीक्वेंसी इज
- 32:56इन्वर्सली प्रोपोर्शनल टू वेवलेंथ। जैसे
- 32:59फ्रीक्वेंसी बढ़ी तो वेवलेंथ कम हुई।
- 33:01वेवलेंथ बढ़ी तो फ्रीक्वेंसी कम हुई। ठीक
- 33:04है? आगे अभी हमने ये भी देखा जब फोटन
- 33:06एनर्जी का फार्मूला देखा कि फ्रीक्वेंसी
- 33:08डायरेक्टली प्रपोर्शनल होती है एनर्जी के।
- 33:11यहां पे e इज इक्व टू अ प्लैंक कांस्टेंट
- 33:14* न्यू यानी कि डायरेक्टली प्रपोर्शनल थी।
- 33:16तो अगर किसी भी वेव की एनर्जी बढ़ रही है
- 33:19मतलब कि उसकी फ्रीक्वेंसी भी बढ़ रही है।
- 33:21है ना? ये अगर कोई आदमी बहुत तेजी से भाग
- 33:24रहा है इसका मतलब उसमें एनर्जी ज्यादा है।
- 33:26बस इस चीज से ध्यान फ्रीक्वेंसी बोले तो
- 33:28तेज भागना, तेज दौड़ना। ठीक है? जो तेज
- 33:31आदमी दौड़ रहा है मतलब उसकी एनर्जी भी
- 33:33ज्यादा है। दूसरी तरफ वेवलेंथ इन्वर्सली
- 33:36प्रपोर्शनल होती है एनर्जी के। भाई किसी
- 33:39आदमी में अगर एनर्जी कम है तो वह तो स्लो
- 33:42स्लो चलेगा। यानी कि उसकी जो वेवलेंथ जैसे
- 33:45हमने यहां पर देखी जैसे कोई आदमी में
- 33:48एनर्जी कम है तो वो यहां पे स्लो स्लो
- 33:49चलेगा। किसी आदमी में बहुत ज्यादा एनर्जी
- 33:51वो तेज-तेज़ तेज़-तेज़ यहां पे भागेगा। तो
- 33:53एनर्जी अगर आप बढ़ाओगे तो यानी कि न्यू
- 33:58यानी कि फ्रीक्वेंसी भी यहां पे बढ़ती है।
- 34:01अगर एनर्जी यहां पे बढ़ेगी यानी कि यहां पे
- 34:05वेवलेंथ जरूर यहां पे कम ही होगी। क्योंकि
- 34:08वेवलेंथ इज़ इन्वर्सली प्रोपोर्शनल टू
- 34:10फ्रीक्वेंसी। ये इन तीनों में यहां पे
- 34:12रिलेशनशिप दे रखी है कि वेवलेंथ बढ़ी तो
- 34:15फ्रीक्वेंसी कम हुई और एनर्जी भी कम हुई।
- 34:17अगर वेवलेंथ यहां पे घटी तो फ्रीक्वेंसी
- 34:19भी बढ़ी और एनर्जी भी बढ़ी। ये चीज आपने
- 34:21दिमाग में बस बैठा लो कि वेवलेंथ बढ़ने से
- 34:24फ्रीक्वेंसी घटती है और एनर्जी भी घटती
- 34:26है। वेवलेंथ घटने से फ्रीक्वेंसी बढ़ती है
- 34:28और एनर्जी भी बढ़ती है। अभी इनके हम
- 34:30एग्जांपल से भी आपको चीजें समझाएंगे। ठीक
- 34:33है? अब यहां पे हमारा क्वेश्चन स्टार्ट
- 34:35होने वाला है कि एक्सप्लेन थ्योरी
- 34:37प्रिंसिपल इंस्ट्रूमेंटेशन एप्लीकेशन ऑफ
- 34:40यूवी विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी एंड
- 34:42एक्सप्लेन चॉइस ऑफ़ सॉल्वेंट और सॉल्वेंट
- 34:44का इफेक्ट ऑन यूवी विजिबल
- 34:45स्पेक्ट्रोस्कोपी। 10 मार्क्स में
- 34:46क्वेश्चन आते हैं। काफ़ी इंपॉर्टेंट है। पर
- 34:48उससे पहले और भी जो बेसिक चीज़ें हैं, वह
- 34:50आपने यहां पे समझ लेनी है।
- 34:53जैसे यहां पे ये इमेज शो कर रहा है। थोड़ा
- 34:58इसको यहां पे इतना रखते हैं। तो, यह
- 35:00इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम दिखा रखा
- 35:02है। देखिए, अभी हमने देखा
- 35:05इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन। उसमें कई
- 35:07सारे एग्जांपल हमने देखे थे। गामा रेज,
- 35:09एक्स रेज, अल्ट्रावायलेट रेज, विज़िबल
- 35:12लाइट, इंफ्रारेड, माइक्रोवेव, रेडियो वेव।
- 35:15अब इनकी हर एक की जो वेवलेंथ है, वेवलेंथ
- 35:18मैंने बताया था ना मतलब वेव की लंबाई और
- 35:20हर एक की जो फ्रीक्वेंसी है वो अलग-अलग
- 35:23है। जैसे यहां पे आपको ये तरंगद जैसी दिख
- 35:27रही होगी। इस तरीके से यह धीरे धीरे धीरे
- 35:30धीरे बड़ी भी होती जा रही है। आपको अगर
- 35:33थोड़ा भी समझ आया होगा तो आपको आईडिया लग
- 35:34रहा होगा कि यहां पे जो फ्रीक्वेंसी है वो
- 35:36बहुत ज्यादा है। वेवलेंथ कम है। धीरे
- 35:39धीरे-धीरे आगे हम जैसे बढ़ रहे हैं इसकी
- 35:41वेवलेंथ बढ़ती जा रही है। जैसा कि हम
- 35:43जानते हैं वेवलेंथ बढ़ती है तो
- 35:44फ्रीक्वेंसी यहां पे कम होती जा रही होगी।
- 35:46यानी कि यह रेडियो वेव की एनर्जी सबसे कम
- 35:49होगी क्योंकि यहां पे वेवलेंथ ज़्यादा है।
- 35:51गामा रेज़ की एनर्जी सबसे ज़्यादा होगी
- 35:53क्योंकि यहां पे उनकी फ्रीक्वेंसी ज्यादा
- 35:56है। बस वही चीज मैंने रेड कलर में यहां पे
- 35:58लिख दी है। आपको बाद में याद रहे इसलिए कि
- 36:01देखो यहां पे गामा रेज की यहां पे लो
- 36:03वेवलेंथ है। यहां की अगर आप दूरी नापोगे
- 36:06दो पीक के नियरेस्ट पीक के बीच की दूरी
- 36:08बहुत ही कम है। यहां पे देखोगे आगे चलके
- 36:10ये बढ़ती जा रही है। तो लो वेवलेंथ होने की
- 36:13वजह से एनर्जी यहां पे ज्यादा है। यानी कि
- 36:16फ्रीक्वेंसी यहां पे ज्यादा है। समझ गए?
- 36:18दूसरी तरफ यहां पे जो वेवलेंथ है बढ़ती जा
- 36:20रही है। इन दो नियरेस्ट पीक की दूरी बढ़
- 36:22गई है। यानी कि फ्रीक्वेंसी यहां पे कम
- 36:24होगी। फ्रीक्वेंसी कम होगी मतलब एनर्जी भी
- 36:27यहां पे कम होगी। ठीक है? अब यहां पे जो
- 36:30ईएमआर है इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन है
- 36:32उसमें कई टाइप की यहां पे वेव है। जैसे
- 36:35गामा रेज। गामा रेज की अगर हम बात करें तो
- 36:38उनकी जो वेवलेंथ है वह बहुत ही कम है।
- 36:420.0001
- 36:44नैन मीटर से 0.01 नैन मीटर ये बहुत ही कम
- 36:48इसकी वेवलेंथ है। हमने जान लिया कि
- 36:50वेवलेंथ कम है। मतलब कि भाई इनमें एनर्जी
- 36:53बहुत ज्यादा है। है ना? ये गामा रेज काफी
- 36:55ज्यादा एनर्जेटिक होती है। उसके बाद आती
- 36:57है एक्स रेज। एक्स रेज की अगर हम बात करें
- 37:00तो उनकी जो रेंज है वो 0.01 नैन मीटर से
- 37:0310 नैन मीटर के बीच में है। मतलब इनकी
- 37:06वेवलेंथ काफी कम है। एक तरीके से देखा जाए
- 37:08तो इनमें भी काफी ज्यादा एनर्जी होती है।
- 37:11फिर उसके बाद यहां पे आता है
- 37:13अल्ट्रावायलेट।
- 37:15अल्ट्रावायलेट। अल्ट्रावायलेट जो ये वेव
- 37:18होती हैं अगर हम उनकी बात करें तो ये आपको
- 37:21सनलाइट से मिल। देखो यहां पे इमेज ये भी
- 37:23दिखा रहा है कि ये चीजें आपको मिलती कहां
- 37:25से है। देखिए गामा रेज जो रेडियोएक्टिव जो
- 37:27सोर्सेज होते हैं जहां पे रेडिएशन होता है
- 37:29जैसे नॉर्मली बोलते हैं जो आपका जहां पे
- 37:33ये एटॉमिक बम्ब वगैरह बनते हैं या और भी
- 37:36चीजें बनती हैं तो वहां पे ये वाला गामा
- 37:38रेज ही निकलती है। उनमें काफी ज्यादा
- 37:40एनर्जी होती है। इसी वजह से बहुत ज्यादा
- 37:42घातक भी हमारे लिए होती हैं। एक्सरे जो हम
- 37:45यूज़ करते हैं मेडिकल एक्सरे जिसकी मदद से
- 37:47आप किसी भी आपके बॉडी के इंटरनल पार्ट की
- 37:49जांच करते हैं वो इन एक्सरेज़ की मदद से
- 37:51करते हैं। ठीक है? आगे बात करोगे
- 37:54अल्ट्रावायलेट जो रेज हैं वो आपको सनलाइट
- 37:57सूरज की लाइट से मिलती है। है ना? ऐसे आगे
- 37:59ही जो विज़िबल लाइट है वह आपको सनलाइट या
- 38:02बोले तो जो ट्यूबलाइट या और भी जो बल्ब है
- 38:04उनसे आपको मिलती है। आगे इंफ्रारेड जो
- 38:07इमेजिंग वगैरह हम जनरेट करते हैं। आगे
- 38:09माइक्रोवेव जो हम यूज़ करते हैं घरों में
- 38:11माइक्रोवेव खाना पकाने के लिए आगे आती है
- 38:14आपकी रेडियो वेव या एफएम वेव या टेलीविज़
- 38:18वेव वो सब आगे आएंगी। उनकी वेवलेंथ यहां
- 38:20पे बहुत ज्यादा होती है। अब समझने वाली
- 38:23बात यहां पे ये है कि देखो इनकी वेवलेंथ
- 38:25बहुत कम। इनकी वेवलेंथ थोड़ी बड़ी। इनकी
- 38:27वेवलेंथ और ज्यादा बढ़ी। तो यहां पे
- 38:29अल्ट्रावायलेट जो रीजन है अगर हम उसकी
- 38:31वेवलेंथ की बात करें तो वो नॉर्मली 200 से
- 38:34400 नैनोमीटर बोला जाता है। अगर आपने यूवी
- 38:36विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी पढ़ा हो तो यूवी
- 38:39जो रेंज है वो 200 से 400 होती है और
- 38:41विजिबल भी अगर उसमें जोड़ दे तो 200 से
- 38:43800 हम बोल देते हैं। ये मोटा-मोटा ऊपर से
- 38:46बोल देते हैं। पर अगर और अगर हम डिटेल में
- 38:49जाएं अगर हम एम्फ्रम लेवल से अगर इसको
- 38:50देखें तो यहां पे देखिए ये यूवी जो रीजन
- 38:54है उसके भी कई रीजन है। इसको भी कई सब
- 38:57रीजन में डिवाइड किया जाता है। एक है
- 38:58वैक्यूम रीजन जिसकी जो वेवलेंथ है वो 10
- 39:01नैनोमीटर जो एक्सरे जहां पे खत्म होती है
- 39:04वहीं से जस्ट स्टार्ट होती है 10 नैनोमीटर
- 39:06से 200 नैन मीटर। यह वैक्यूम हम इसलिए
- 39:09बोलते हैं कि अगर आपने इस वाली लाइट का
- 39:12अगर एक्सपेरिमेंट करना है या कुछ भी
- 39:15परफॉर्म करना है तो वैक्यूम में ही करता
- 39:17होगा। जहां पे कोई भी बाहर की गैस वगैरह
- 39:19मौजूद ना हो। यहां पे कुछ भी मौजूद ना हो
- 39:22उसको हम वैक्यूम बोलते हैं। क्योंकि ये जो
- 39:25अगर यूवी लाइट को बाहर इतनी रेंज वाली
- 39:28यानी कि 10 नैनोमीटर से 200 नैन मीटर की
- 39:30जो वेवलेंथ वाली जो आपकी यूवी लाइट है अगर
- 39:32उसको आप बाहर किसी भी एक्सपेरिमेंट में
- 39:34यूज़ करोगे तो बहुत ज्यादा एनर्जेटिक हो
- 39:36गई। एनर्जेटिक होने की वजह से क्योंकि
- 39:39इसकी वेवलेंथ यहां बहुत ही कम है। 10 से
- 39:40200 के बीच में बहुत ही कम मानी जाती है।
- 39:42काफी ज्यादा एनर्जी इसमें होगी। इसकी वजह
- 39:45से जो आसपास के जो एनवायरमेंट में जो भी
- 39:47चीजें हैं वो इसको इंटरफेयर करेंगी। तो
- 39:49इसको हम इसमें यूज़ ही नहीं करते हैं। तो
- 39:51हमको मोटा-मोटा जो बी फार्मा में बताया था
- 39:54वो ये बताया था कि यूवी विजिबल जो है वो
- 39:56200 से स्टार्ट होती है। वो 400 तक खत्म
- 39:59या 380 कहीं-कहीं बुक में 380 कहीं-कहीं
- 40:02400 तो वहां पे ये खत्म होती है। अब उसके
- 40:04भी तीन रीजन होते हैं। सी बी ए सी बोले तो
- 40:08यानी कि इसका ये थर्ड पार्ट है जिसमें 200
- 40:11से 280 तक दूसरा दूसरा इसका जो रेंज है
- 40:14मिड रेंज जिसको हम बोलते हैं। यह लोएस्ट
- 40:15रेंज है। मिड रेंज जो है वो 280 से 315
- 40:19एंड जो आपका नियरेस्ट रेंज है वो 315 से
- 40:22380 इस रेंज में होता है। तो अभी जो हम
- 40:26पढ़ेंगे यूबी विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी तो
- 40:29उसमें जो हम स्टार्ट करेंगे वो इस सी रीजन
- 40:32वाली जो यहां पे 200 नैनोमीटर है यहां से
- 40:34स्टार्ट करेंगे और ये आपका कहां तक जाएगा?
- 40:38780 या 800 इसको कई बार हम बोलते हैं बुक
- 40:41में जहां पे आपके विज़िबल लाइट की मतलब कि
- 40:43रेंज खत्म होती है। ठीक है? आगे आप देखोगे
- 40:46विजिबल लाइट जिनकी मदद से हम देख पाते हैं
- 40:49या जिसकी जिस रोशनी की मदद से हम देखते
- 40:51हैं चीजों को उसमें यहां पे सात रंग होते
- 40:53हैं। आपको पता है स्पेक्ट्रम इसी को बोलते
- 40:55हैं रेनबो जो बनता है ये सात कलर के
- 40:59अलग-अलग यहां पे वेवलेंथ होती है। हम इतना
- 41:02ऊपर से मोटा-मोटा ध्यान रखते हैं कि 400
- 41:03नैनोमीटर से स्टार्ट होती है। 800
- 41:05नैनोमीटर पे खत्म होती है। आगे और अगर
- 41:08वेवलेंथ अगर आप बढ़ाते हैं। देखो ऊपर आप
- 41:10देख रहे हो लगातार वेवलेंथ बढ़ती जा रही
- 41:12है। आप ऊपर वेवलेंथ बढ़ाते हैं तो यहां पे
- 41:14इंफ़्रारेड रीज़न आता है। इंफ़्रारेड इंफ़्रा
- 41:18का मतलब होता है नीचे। रेड बोले तो रेड
- 41:22कलर के नीचे। एक्चुअली में क्या है कि ये
- 41:24चीज़ ऊपर हैं। ये चीज़ नीचे होती जा रही
- 41:27हैं। तो इंफ्रारेड बोले तो यहां पे रेड
- 41:29कलर है विज़िबल लाइट में। तो उसको हम यहां
- 41:31पे बोलते हैं कि भाई रेड कलर के नीचे का
- 41:33जो रीजन है वह इंफ्रारेड रीजन है। उसकी जो
- 41:35वेवलेंथ है वह 800 नैनोमीटर से स्टार्ट
- 41:37होती है और यहां पे 10 लाख नैन मीटर तक
- 41:41जाती है। या इसी को 10 लाख नैनोमीटर को आप
- 41:44यहां पे 1 मि.मी. भी बोल सकते हैं। फिर
- 41:47आपका 1 मि.मी. से आगे आपकी माइक्रोवेव
- 41:49वाला यह रीजन है। वह स्टार्ट होता है।
- 41:53ठीक है? जो यहां पे सेंटीमीटर से मि.मी.
- 41:56के बीच एक 1 सें.मी. से 1 मि.मी. के बीच
- 41:58में जाता है। ठीक है? ठीक है? यहां पे
- 42:00आपको दिख रहा है 1 मि.मी. से स्टार्ट
- 42:01होगा। ये आगे तक जाएगा। फिर रेडियो वेव की
- 42:03और भी वेवलेंथ जाती है। किलोमीटर तक भी
- 42:05जाती है। तो इस तरीके से है। तो अब यहां
- 42:08पे चीजें समझने वाली बात ये है कि यहां पे
- 42:11हर एक स्पेक्ट्रोस्कोपी में एक अलग टाइप
- 42:13की रेंज या अलग अलग वेवलेंथ या
- 42:16फ्रीक्वेंसी की जो ईएमआर है, लाइट है वो
- 42:18यूज़ की जाएगी। जैसे पहली जो हमारी
- 42:21स्टार्टिंग होगी यूवी विज़िबल
- 42:23स्पेक्ट्रोस्कोपी से। जैसे कि मैं सिलेबस
- 42:25में आपको समझा देता हूं।
- 42:28पहली जो हमारी स्टार्टिंग होगी यूवी
- 42:30विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी से उसकी जो
- 42:32वेवलेंथ जिसकी यूवी यानी कि अल्ट्रावायलेट
- 42:35प्लस विजिबल तो 200 नैनमीटर से 800
- 42:38नैनोमीटर की जो वेवलेंथ वाली लाइट है वो
- 42:41यहां पे यूज़ की जाएगी किसी भी सैंपल की
- 42:42एनालिसिस करने के लिए। ठीक है? अब दूसरी
- 42:45जो आपकी यहां पे होगी वो है आईआर
- 42:47स्पेक्ट्रोस्कोपी यानी कि इंफ्रारेड
- 42:49स्पेक्ट्रोस्कोपी। इसके अंदर जो लाइट यूज
- 42:51की जाएगी जिसका जो ईएमआर जो होगा वो सॉरी
- 42:53जिसका जो वेवलेंथ जो होगी वो 800 नैनमीटर
- 42:56से 1 मि.मी. के बीच में होगी। आगे जो है
- 42:59आपका यहां पे स्पेक्ट्रोफ्लोरीमेट्री।
- 43:01स्पेक्ट्रोफ्लोरीमेट्री में भी जो यहां पे
- 43:03वेवलेंथ जो यूज़ की जाती है वो यूवी विज़िबल
- 43:06लाइट वाली ही यूज़ की जाती है। यानी कि 200
- 43:07नैनोमीटर से 800 नैनोमीटर के बीच में। ठीक
- 43:10है? इसके बाद यहां पे फ्लेम एमिशन
- 43:13स्पेक्ट्रोस्कोपी और एटॉमिक अबजॉर्प्शन
- 43:15स्पेक्ट्रोस्कोपी ये अलग कांसेप्ट पे काम
- 43:17करते हैं। ये एक स्पेसिफिक वेवलेंथ की
- 43:20लाइट निकालते हैं। जिस भी मेटल्स की आपने
- 43:22जांच करनी है। ठीक है? ये इस तरीके से
- 43:25यहां पे है। बाकी जो आपका एनएमआर
- 43:27स्पेक्ट्रोस्कोपी जो होगी, एनएमआर
- 43:28स्पेक्ट्रोस्कोपी में हम यहां पे रेडियो
- 43:30वेव का यूज़ करते हैं। ध्यान रखना जैसे अभी
- 43:33हम यूवी विज़िबल का यूज़ कर रहे थे।
- 43:35इंफ्रारेड का यूज़ कर रहे ऐसे ही जो आपका
- 43:37एनएमआर जो होगा उसमें हम रेडियो वेव का
- 43:40यूज़ करेंगे। उसकी मदद से किसी भी सैंपल की
- 43:42एग्जैक्ट आप स्ट्रक्चर पता कर पाएंगे। ठीक
- 43:45है? लास्ट में है मास स्पेक्ट्रोस्कोपी।
- 43:48मैंने आपको बताया था कि मास
- 43:49स्पेक्ट्रोस्कोपी बस यहां पे
- 43:51स्पेक्ट्रोस्कोपी जोड़ दिया। पर एक्चुअली
- 43:53में यहां पे यह इस लाइट का यूज़ ही नहीं
- 43:55करता है। तो यूज़ नहीं करता है। मतलब कि
- 43:57स्पेक्ट्रोस्कोपी नहीं इसको
- 43:58स्पेक्ट्रोमेट्री बोलते हैं। यह किसी भी
- 44:01सैंपल में जो भी कंपाउंड है उसके ना मास
- 44:04को मॉलिक्यूलर मास को आप इसकी मदद से पता
- 44:06कर पाएंगे। पर ये अलग कांसेप्ट पे काम
- 44:08करता है। लाइट की मदद से नहीं पता कर
- 44:11पाएंगे। समझ आ गया? ये जो स्पेक्ट्रम है
- 44:14इसको समझना बहुत जरूरी है। ये जो बेसिक
- 44:16चीजें हैं इनको याद करना बहुत जरूरी है।
- 44:18ठीक है? बाकी यहां पे एक और चीज मैं भूल
- 44:20गया कि जो इनफ्रारेड जो रीजन है ना उसके
- 44:22भी ये तीन रीजन होते हैं। नियर मिड फार
- 44:25उनकी वैल्यू यहां पे रेंज लिखी हुई है।
- 44:28ठीक है? अब आगे देखिए एक और चीज मैंने
- 44:30बहुत अच्छे से यहां पर लगा रखी है अगर
- 44:32आपको समझ आ जाए तो देखो इंफ्रारेड रीजन यह
- 44:36इस तरफ को अल्ट्रावायलेट रीजन जो हमारी
- 44:38विज़िबल लाइट के आसपास रहते हैं तो हमारी
- 44:41जो आंखों को देखते हैं वो इतनी ही वेवलेंथ
- 44:43वाली लाइट या बोल सकते हैं
- 44:45इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन जिसकी वेवलेंथ
- 44:47लाइट 400 से 700 कहीं-कहीं 700 लेके पर
- 44:50एक्चुअली में ये आप इसको 800 मानिए 400 से
- 44:53800 की वेवलेंथ की लाइट को यहां पे ये
- 44:55हमारी आंखें मतलब कि देख पाती हैं यह हमको
- 44:59चीजें इसी इसी की मदद से दिखाई देती हैं।
- 45:02समझ आया? ये चीजें बहुत जरूरी है बेसिक
- 45:04समझने के लिए। आई होप ये आपको अभी तक यहां
- 45:06पे समझ आ गया होगा। अब इसके बाद देखिए
- 45:10फाइनली हमारे ये क्वेश्चन यहां पे स्टार्ट
- 45:11होता है। जो मेन क्वेश्चन है वो है
- 45:13क्वेश्चन नंबर टू। एक्सप्लेन थ्योरी या
- 45:16प्रिंसिपल कॉमा इंस्ट्रूमेंटेशन एंड
- 45:18एप्लीकेशनेशंस ऑफ यूवी विजिबल
- 45:20स्पेक्ट्रोस्कोपी एंड एक्सप्लेन चॉइस ऑफ
- 45:23सॉल्वेंट एंड सॉल्वेंट इफेक्ट ऑन यूवी
- 45:25विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी जो कि लॉन्ग में
- 45:2710 मार्क्स में क्वेश्चन बनता है। अब ये
- 45:29जो क्वेश्चन है ना ये क्वेश्चन नहीं है
- 45:30बल्कि समझ लो तीन क्वेश्चंस एक साथ ही कवर
- 45:33होंगे आपके। तो ये क्वेश्चन तीन तरीके से
- 45:35कैसे आएगा? जैसे एक क्वेश्चन बनता है कि
- 45:37एक्सप्लेन थ्योरी इंस्ट्रूमेंटेशन एंड
- 45:39एप्लीकेशन ऑफ यूवी विजिबल
- 45:40स्पेक्ट्रोस्कोपी। दूसरा क्वेश्चन बनता है
- 45:43कि एक्सप्लेन प्रिंसिपल इंस्ट्रूमेंटेशन
- 45:45एंड एप्लीकेशन ऑफ यूवी विजिबल
- 45:46स्पेक्ट्रोस्कोपी एंड एक्सप्लेन चॉइस ऑफ
- 45:48सॉल्वेंट एंड सॉल्वेंट इफेक्ट ऑन यूवी
- 45:50विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी दो तरीके से
- 45:53तीसरा क्वेश्चन ये अलग से भी आ जाता है कि
- 45:55एक्सप्लेन द चॉइस ऑफ़ सॉल्वेंट इन यूवी
- 45:57विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी एंड सॉल्वेंट
- 45:59इफेक्ट ऑन यूवी विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी।
- 46:02तो एक क्वेश्चन में आपके तीन क्वेश्चंस
- 46:03यहां पे कवर होने वाले हैं। तो ये
- 46:04क्वेश्चन थोड़ा लें्थी भी होने वाला है।
- 46:06ठीक है? समझते हैं ये चीज यूवीज़िबल
- 46:08स्पेक्ट्रोस्कोपी ऑलरेडी पढ़ रखे हैं। तो
- 46:10ज्यादा इसमें समझाने की जरूरत मेरे को
- 46:12नहीं पड़ेगी। सिंपली हम वर्ड को ब्रेक
- 46:14करते हैं। यूबी प्लस विज़िबल
- 46:16स्पेक्ट्रोस्कोपी। यूबी विज़िबल प्लस
- 46:19स्पेक्ट्रोस्कोपी वर्ड को ब्रेक कर दिया।
- 46:21यूबी यानी कि अल्ट्रावायलेट एंड विज़िबल
- 46:24बोले तो विज़िबल लाइट। तो यहां पे मैंने
- 46:26उनकी वेवलेंथ लिख दी है ये स्पेसिफाई करने
- 46:28के लिए कि यहां पे जो लाइट या ईएमआर जो
- 46:31यूज़ किया जाएगा वो 200 नैन मीटर से 800
- 46:34नैनोमीटर की जो वेवलेंथ की लाइट है वो यूज़
- 46:36की जाएगी। यूवी विज़िबल तभी यह बन रहा है।
- 46:39समझ आ रहा है ना आपको? यहां पे 200 से
- 46:42सीधा 800 इतनी वेवलेंथ की ये लाइट यूज़ की
- 46:44जाएगी। ओके? स्पेक्ट्रोस्कोपी आप जानते ही
- 46:47हैं कि किसी भी लाइट या ईएमआर की मदद से
- 46:49किसी भी अननोन सिंबल की एनालिसिस करना वो
- 46:52स्पेक्ट्रोस्कोपी है। अब सिंपली आप डिफाइन
- 46:54कर सकते हैं कि अल्ट्रावायलेट विज़िबल
- 46:56स्पेक्ट्रोस्कोपी इज़ अ मेथड ऑफ़
- 46:58क्वांटिटेटिव और क्वालिटेटिव एनालिसिस इन
- 47:01व्हिच क्वांटिटी ऑफ़ एनी सैंपल डिटरमाइंड
- 47:04बाय यूजिंग अल्ट्रावायलेट एंड विज़िबल
- 47:06लाइन। कि जो यूबी विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी
- 47:08है एक क्वालिटेटिव या क्वांटिटेटिव
- 47:10एनालिसिस है। इसमें आप किसी सैंपल की
- 47:12क्वालिटी को भी पता करेंगे। जैसे कि उसमें
- 47:15क्रोमोफोर कौन-कौन से हैं या क्रोमोफोर है
- 47:18कि नहीं? उसमें सिंगल बॉन्ड है या डबल
- 47:20बॉन्ड है वो भी आप पता कर पाएंगे। दूसरा
- 47:22कि जो भी अननोन सैंपल है उसकी कंसंट्रेशन
- 47:25कितनी है? क्वांटिटी कितनी है? वो भी पता
- 47:27कर पाएंगे। किसकी मदद से? एक लाइट की मदद
- 47:30से। जिसकी जो वेवलेंथ है वो 200 नैनोमीटर
- 47:33से 800 नैन मीटर के बीच में होगी। जिसको
- 47:35हम यूवी विज़िबल लाइट बोलेंगे। समझ आया? अब
- 47:38यहां पे हम इसकी रियल इमेज मैं आपको दिखा
- 47:41देता हूं कि कैसी होती है आपकी यूवी
- 47:43विज़िबल स्पेक्ट्रोस्कोपी।
- 47:46यह यूवी विज़िबल स्पेक्ट्रोफोटोमीटर बोला
- 47:48जाता है। कुछ इस तरीके से यह पूरे इसकी
- 47:51रियल इमेज है। यहां से इसको हम इस तरीके
- 47:54से खोल देते हैं। खोलने के बाद यहां पे एक
- 47:56सैंपल रखने की जगह बनी होती है। सैंपल जो
- 47:58क्यूबेट में रखा जाता है वो। बाकी उसका
- 48:01सेटअप कुछ इस तरीके से है। जैसे यहां पे
- 48:05सबसे पहले लाइट का सोर्स है। मतलब लाइट
- 48:07जहां से आगी आएगी। जैसे लाइट आपको कौन सी
- 48:10चाहिएगी? वो लाइट जहां पे जो लाइट की जो
- 48:13वेवलेंथ निकल रही हो एटलीस्ट 200 नैनोमीटर
- 48:15से 800 नैनोमीटर के बीच में। तो सोर्स
- 48:17लाइट यहां से निकलेगी। फिर आपको यहां पे
- 48:19फिल्टर वगैरह होंगे। यानी कि मोनोक्रोमेटर
- 48:21में जो आता है आपने इतना पढ़ा होगा। मैं
- 48:23बीफम के लेवल से आपको इतनी चीजें बता रहा
- 48:26हूं। तो मोनोक्रोमीटर में वो लाइट आएगी।
- 48:28मोनक्रोमीटर कोई स्पेसिफिक वेवलेंथ की
- 48:30लाइट को आगे पास करेगा जो सैंपल तक
- 48:33पहुंचेगी सैंपल कंपार्टमेंट में सैंपल से
- 48:35वो आर-पार होगी और वो जाएगी डिटक्टर के
- 48:38पास उसके बाद में सारी चीजों को एनालाइज
- 48:40किया जाएगा। ठीक है? अभी यहां पे ये इसके
- 48:44प्रिंसिपल की हम बात करेंगे। सारी चीजें
- 48:46देखेंगे। थोड़ा सा मैं आपको इसकी इमेज
- 48:48यहां पे थोड़ा समझा देता हूं। जैसे अभी हम
- 48:51यहां पे बात कर रहे यह जो यूवी विज़िबल
- 48:53स्पेक्ट्रोस्कोपी है कुछ इस तरीके से यहां
- 48:55से ओपन होती है। यह क्यूबेट में सैंपल भर
- 48:57के यहां पे रख दिया जाता है। और यह इस
- 49:00तरीके से पूरा सेटअप है इसके अंदर कि
- 49:02सैंपल है सैंपल जहां पे लाइट को पहुंचाना
- 49:05है। तो सबसे पहले यहां पे लाइट सोर्स है।
- 49:07लाइट सोर्स से लाइट निकलेगी। लाइट कुछ इस
- 49:09तरीके से निकली। निकलने के बाद प्रिज़्म जो
- 49:12होता है जैसे कि ये लाइट सोर्स है। लाइट
- 49:14यहां से निकली। प्रिज़्म जो है प्रिज़्म कई
- 49:17कलर्स में सेवन कलर्स में उसको यहां से
- 49:20डिवाइड कर देगा। फिर आगे चल के स्लिट लगी
- 49:23होती है या वेवलेंथ सेक्टर जिसको हम बोलते
- 49:25हैं वो एक पर्टिकुलर वेवलेंथ की लाइट को
- 49:27आगे जाने देगा। जैसे कि केवल रेड कलर यहां
- 49:29से जा रहा है। यानी कि जो वेवलेंथ है वो
- 49:31700 से 800 के बीच की वाली आगे को पास की
- 49:34जा रही है। तो यहां से वेवलेंथ सेक्टर यह
- 49:36सैंपल पे जाकर के गिरेगी। जो एक सिलेक्टेड
- 49:39लाइट है सैंपल से आरपार होगी। आरपार होने
- 49:42के बाद में वह जो है डिटक्टर के पास
- 49:43जाएगी। डिटक्टर यहां पर है और डिटक्टर यह
- 49:46सारी चीजें डिटेक्ट करके सारी इनेशन आपको
- 49:48स्क्रीन पे दिखाएगा। समझ आया? अब यह जो
- 49:52चीज है, मैं आपको एक एनिमेटेड वीडियो में
- 49:54यहां पर दिखाना चाह रहा हूं। यह मैं एक
- 49:56फोन में दिखाऊंगा अपने दूसरे में। और यह
- 49:58जो है किसी दूसरे चैनल की एनिमेटेड वीडियो
- 50:00है। शायद यह फॉरेन का कोई चैनल है। लेकिन
- 50:03मेरा समझाने का पर्पस यहां पे बस यह है कि
- 50:05आपको एकदम प्रैक्टिकली चीजें यहां पे समझ
- 50:08आ जाए। जैसे कि यहां पे कुछ इस तरीके से
- 50:11है। सॉरी इधर थोड़ा लाइट इस तरीके से पड़
- 50:14रहा है। अब शायद आपको दिख रहा होगा। ठीक
- 50:15है? मैं यहां पे इसको चालू करता हूं। जैसे
- 50:18यहां पे ये सोर्स ऑफ लाइट है। लाइट यहां
- 50:21से निकली। कुछ इस तरीके से आई। ठीक है?
- 50:24यहां पे प्रिज्म लगा होगा। प्रिज़्म जिससे
- 50:26टकराएगी वह यह कई सारे कलर्स में लाइट को
- 50:29ये बांट देगा। आगे चलके ये वही
- 50:31मोनोक्रोमेटर की जो स्लिट है जो या बोल
- 50:34सकते हैं एक लाइट को सेलेक्ट करती है। उस
- 50:36लाइट उस लाइट को वो जाने देगी। एक
- 50:39पर्टिकुलर जैसे कि ये ग्रीन कलर की लाइट
- 50:41गई है कुछ इस तरीके से और ये दो जगह जाके
- 50:43डिवाइड हो गई है। आपने यूवी विजिबल में
- 50:46पढ़ा होगा कि दो बीम वाली भी यूवी विजिबल
- 50:48स्पेक्ट्रोस्कोपी होती है। दो बीम वाली तो
- 50:52यहां पे वही है टू बीम यूवी विजिबल
- 50:54स्पेक्ट्रोस्कोपी एक तरफ सैंपल लिखा रखा
- 50:56होता है और एक तरफ यहां पे आपका स्टैंडर्ड
- 51:00रखा होता है या कोई ब्लैंक भी रखा होता है
- 51:03जिसमें जस्ट वाटर वगैरह भी रहता है। तो
- 51:06यहां पे एक जो ये वीम जो आया है एक सैंपल
- 51:08से हो के जाएगा। एक किससे हो के जाएगा?
- 51:10आपके स्टैंडर्ड से। आगे जाके ये जब सैंपल
- 51:14यहां पे रखे होते हैं तो उनसे आरपार हो के
- 51:16डिटक्टर के पास पहुंचेगा।
- 51:18जैसे कुछ इस तरीके से आपको दिखेगा। आगे
- 51:21जाके यह जो है दोनों जो है डिटक्टर के पास
- 51:25पहुंचेंगे। डिटक्टर जो है उन दोनों को
- 51:26एनालाइज करेगा और सारी चीजें जो है आपको
- 51:29यहां पे वो स्क्रीन पे दिखाएगा। अब यही जो
- 51:32प्रोसेस है एकदम सामने से इस वीडियो में
- 51:34दिखाई गई है कि सारी चीजें कैसे होती हैं।
- 51:37अभी जैसे यहां पे आपको सैंपलिंग करते हुए
- 51:39दिखाया जा रहा है। जैसे कि ये मशीन है।
- 51:40यहां पे उन्होंने अभी स्टैंडर्ड को रख
- 51:42दिया। जैसे कि यहां पे फिल कर दिया
- 51:44क्यूबेट में। एक जगह यहां पे और भी खाली
- 51:46है। यहां पे जिसकी एनालिसिस करनी है
- 51:48कंपेयर करके स्टैंडर्ड से। जैसे कि ये
- 51:50दूसरे क्यूबेट में भर रहे हैं। अभी
- 51:52उन्होंने यहां पे फिल करके दूसरी जगह इसको
- 51:55रख दिया। अब इसके बाद इसको बंद किया जाता
- 51:58है। सिंपली जो कंप्यूटर है उसमें यह
- 51:59कनेक्टेड रहती है। यहां पे अब आपने रेंज
- 52:01रखनी है कि कितनी वेवलेंथ की लाइट यहां से
- 52:04निकालनी है और कितनी देर तक यानी कि उसकी
- 52:07फ्रीक्वेंसी वगैरह सारी यहां पे सेट करनी
- 52:09है। उसके बाद में वहां से लाइट निकलेगी और
- 52:11इस तरीके से आपकी कंप्यूटर की स्क्रीन पर
- 52:14यह जो है एक स्पेक्ट्रम नजर आएगा। अब
- 52:16ध्यान रखना यह वेवलेंथ और अब्सॉर्बेंस के
- 52:19बीच में स्पेक्ट्रम है। जहां पर पिक सबसे
- 52:21ऊपर नजर आए। मतलब कि इस वेवलेंथ की लाइट
- 52:23यहां पे अब्सॉर्ब की जा रही है।
- 52:26ठीक है? अब इसी वेवलेंथ की लाइट से आप
- 52:28उसकी एनर्जी पता कर पाएंगे या फ्रीक्वेंसी
- 52:30जैसे यहां पर सबसे ज्यादा हुई है तो इस
- 52:32वेवलेंथ की लाइट यह पर्टिकुलर ये कलर के
- 52:34हिसाब से भी समझ आई तो ये दिखाने का मतलब
- 52:37ये था कि आपको एक्चुअली में ये समझ आई कि
- 52:39यूवी विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी कैसे चलाई
- 52:41जाती है या कैसे वो काम करती है। ये लिखी
- 52:44हुई चीजें कम दिमाग में घुसती है। सामने
- 52:46से वो चीज़ आपको जल्दी अच्छे से समझ आई
- 52:48होगी। अब यहां पर हम वही चीजें आपको यहां
- 52:51पर दिखाने जा रहे थे कि कुछ इस तरीके से
- 52:53यह होता है यूवी विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी।
- 52:56यहां पर यह इस तरीके से स्पेक्ट्रम बन
- 52:57करके आता है। अंदर का सेटअप कुछ इस तरीके
- 53:00से होता है। अब यहां पे प्रिंसिपल की बात
- 53:02कर लेते हैं। प्रिंसिपल वही है जो बी
- 53:03फॉर्म में आपने पढ़ा था। बियर एंड
- 53:05लैम्बर्ट्स लॉ। इस पे ही ये बेस्ड होती
- 53:07है। लिखा है यूपी विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी
- 53:10इज़ बेस्ड ऑन द बियर लैबर्ट्स लॉ। व्हिच
- 53:13स्टेट जो क्या कहता है? एज अब्जॉर्बेंस इज
- 53:16डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू द कंसंट्रेशन
- 53:18ऑफ द सैंपल एंड द पाथ लेंथ ऑफ द क्युबेड।
- 53:21कि जो भी लाइट आप दे रहे हैं यानी कि यूवी
- 53:24वििजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी में यूवी विजिबल
- 53:26रीजन की जो लाइट आप जो दे रहे हैं वो लाइट
- 53:29का कितना अमाउंट एब्जॉर्ब किया जा रहा है
- 53:31यानी कि एब्जॉर्बेंस जो होता है वो
- 53:33डायरेक्टली किसके प्रोपोर्शनल होता है कि
- 53:35सैंपल की कंसंट्रेशन कितनी है और जो
- 53:38क्यूबेट की जो लेंथ है जैसे कि ये जो आपकी
- 53:41क्यूबेट होती है ये जो क्यूबेट होती है
- 53:44उसकी जो लेंथ है वो 1 सें.मी. होती है। तो
- 53:46उसको 1 सें.मी. दूरी ट्रैवल करना पड़ता
- 53:49है। पाथ लेंथ 1 सें.मी. है तो उसके
- 53:53प्रपोर्शनल होती है दो चीज़ों के। तो, यहां
- 53:54पे लिखा है कि यह फ़ूला एब्जॉर्बेंस A
- 53:57इक्वल्स टू होता है एप्सॉन * C * Lon यहां
- 54:00पे मोलर एब्जॉर्बिटिविटी है जो कि एक
- 54:03फिक्स्ड वैल्यू होती है। C बोले तो
- 54:05कंसंट्रेशन ऑफ द सैंपल या ड्रग या जो भी
- 54:07एनालाइट एंड L बोले तो पाथ लेंथ कि लाइट
- 54:10आपका कितनी लेंथ को ट्रैवल कर रही है। तो
- 54:13एब्जॉर्बेंस मतलब कि जितनी ज्यादा
- 54:15कंसंट्रेशन होगी एब्सॉर्बेंस उतना ही
- 54:17ज्यादा होगा। उतनी ही ज्यादा लाइट
- 54:19एब्जॉर्ब होगी। पाथ लेंथ जितनी ज्यादा
- 54:21होगी एब्सॉर्बेंस उतना ही ज्यादा होगा। तो
- 54:23ये सिंपल फार्मूला आपको याद रखना है। ठीक
- 54:26है? ये है वियर एंड लंब्स लॉ। अब यहां पे
- 54:29देखिए आगे आपने जैसे कि कई बार प्रिंसिपल
- 54:31नहीं आता है तो थ्योरी आती है कि आखिर किस
- 54:34थ्योरी पे ये काम करती है यूवी विजिबल
- 54:36स्पेक्ट्रोस्कोपी। तो यहां पे लिखा है
- 54:38यूवी विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी इज बेस्ड ऑन
- 54:41इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिशन। कि यह
- 54:43इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिशन पर काम करती है कि
- 54:46व्हेन ए मॉलिक्यूल अब्सॉर्ब्स यूवी और
- 54:48विज़िबल लाइट द इलेक्ट्रॉन्स इन द
- 54:50मॉलिक्यूल गेट एक्साइटेड फ्रॉम ए लोअर
- 54:52एनर्जी लेवल टू ए हायर एनर्जी लेवल। कि ये
- 54:55किस प्रिंस किस थ्योरी पे काम करती है।
- 54:58उसको समझने के लिए मैं आपको ये बताता हूं।
- 55:01जैसे सपोज करो यह इस तरीके से यह ग्राउंड
- 55:06स्टेट है। यह आपकी हायर एनर्जी स्टेट है।
- 55:09सपोज़ करो कि यहां पे कोई सैंपल है। इस
- 55:12तरीके से इस क्यूबेट में यहां पे भरा हुआ
- 55:14है। आपने यहां पे एनर्जी दी। एनर्जी यानी
- 55:18कि लाइट। लाइट को ही हम एनर्जी बोल रहे
- 55:20हैं ना। क्योंकि हमने पढ़ा था उसमें फोटन
- 55:21होते हैं। उसमें एक पर्टिकुलर वेवलेंथ या
- 55:24पर्टिकुलर फ्रीक्वेंसी से उसकी एनर्जी
- 55:25डिसाइड होती है। तो आपने यहां पे uv और
- 55:28विज़िबल जो लाइट है वो यहां पे आपने आरपार
- 55:31कराई। अब ये इस थ्योरी पर बेस्ड है कि
- 55:34जैसे ही आप लाइट देते हैं, एनर्जी देते
- 55:36हैं तो ये जो एटम्स होते हैं या जो
- 55:38पार्टिकल्स यहां पे हैं तो अगर हम एक
- 55:40पर्टिकुलर एटम को देखें तो उनमें इस तरीके
- 55:43से ये सेटअप होता है कि उसका एक
- 55:45न्यूक्लियस होता है जिसमें न्यूट्रॉन और
- 55:47प्रोटॉन होते हैं। साइड में यहां पे इन
- 55:50ऑर्बिटल्स में इलेक्ट्रॉन ट्रैवल करते
- 55:52रहते हैं। ठीक है? 2 4 6 8 ठीक है? इस
- 55:57तरीके से एक सपोज़ करो कि एक बाहर हम दिखा
- 56:00देते हैं ये ऑर्बिट बाहर वाले ऑर्बिट में।
- 56:02तो सपोज़ करो कि आपने एनर्जी दी इस
- 56:04पर्टिकुलर मॉलिक्यूल को तो जैसे ही एनर्जी
- 56:07या लाइट उसके पास पहुंचेगी तो उसका जो
- 56:09ऑर्बिट जो बाहर वाला ऑर्बिट है उसमें जो
- 56:11इलेक्ट्रॉन है वो उस एनर्जी को पकड़ेगा या
- 56:14गेन करेगा अब्सॉर्ब करेगा वो ग्राउंड
- 56:17स्टेट से हायर स्टेट में चला जाएगा। सपोज़
- 56:19करो कि कोई एक आदमी है उसको अचानक से यहां
- 56:22पे 45 करोड़ मिल गए। भाई वो चार-प करोड़
- 56:25मिलते ही एक दिन में ही उसकी औकात बदल
- 56:28जाएगी। वो जमीन से एकदम ऊपर आसमान पे
- 56:31पहुंच जाएगा। है ना? उसके नए-नए खर्चे
- 56:33होंगे। वो अलग तरीके से उसको एक्सपेंड
- 56:34करेगा। नई लाइफ होगी। तो सेम यही है कि वो
- 56:37अभी तक तो शांत बैठे थे जो भी सारे
- 56:39पार्टिकल थे। अब जैसे ही उनको आपने एनर्जी
- 56:42दी, वो अपनी आपको उसको अचानक से रुपए
- 56:45मिले, एनर्जी मिली। वो अपनी लोअर स्टेट से
- 56:47एकदम हायर स्टेट में चला गया। बस इसी को
- 56:50हम बोलते हैं इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिशन। कि
- 56:53इलेक्ट्रॉन का ट्रांजिशन होना एक लोअर
- 56:56स्टेट से हायर स्टेट में चले जाना। तो यही
- 56:59अबजॉर्प्शन हो रहा है यहां पे लाइट को
- 57:01एब्जॉर्ब करके या कहें तो एनर्जी को
- 57:03एब्जॉर्ब करके ही ये सारी चीजें हो रही
- 57:06हैं। बस इसी थ्योरी पे ये बेस्ड है कौन?
- 57:08UV विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी। जैसे यहां पे
- 57:11वही चीज है कि जब एक मॉलिक्यूल UV या
- 57:13विज़िबल लाइट को अब्जॉर्ब करता है ना तो
- 57:15उसके जो इलेक्ट्रॉन हैं जो मॉलिक्यूल के
- 57:17इलेक्ट्रॉन है वो एक्साइटेड हो जाते हैं।
- 57:20वो लो एनर्जी लेवल से हायर एनर्जी लेवल
- 57:22में चले जाते हैं। तो ये यहां पे थ्योरी
- 57:24ऑफ UV विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी यहां पे
- 57:26बोली जाएगी। अब आगे की जो चीज है ना यहां
- 57:29पे ये ऑर्बिटल्स वगैरह को अगर आपने समझना
- 57:31है या फिर इस वाले ग्राफ को आपने समझना
- 57:33है। ये चीज आप पढ़ करके आ रहे हैं। वैसे
- 57:35बी फॉर्म में अगर आपने देखा हो ये
- 57:37इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिशन को यहां पे समझा
- 57:38गया है कि इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिशन अलग-अलग
- 57:40कंपाउंड में कितने टाइप का होता है। वो
- 57:42बॉन्ड के हिसाब से इलेक्ट्रॉन के हिसाब से
- 57:44होता है। तो उसको समझने से पहले मैं यहां
- 57:46पे एक चीज ऐड कर रहा हूं जो बी फार्म की
- 57:49ही है। पर वो जरूरी है बेस समझना कि
- 57:52इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिशन क्या है? वो कितने
- 57:55टाइप से होता है और कितनी एनर्जी जरूरत
- 57:58होती है एक पर्टिकुलर कंपाउंड के लिए। वो
- 58:00चीज आप समझ लीजिए। आपको आगे की चीजें बहुत
- 58:02ही इजी यहां पे समझ आ जाएंगी।
- 58:06बाकी आपने इसको ना वर्ड को ब्रेक करके भी
- 58:08समझ सकते हैं। जैसे कि मैंने यहां पे लिख
- 58:09रखा है इलेक्ट्रॉनिक प्लस ट्रांजिशन।
- 58:12सिंपली वर्ड को ब्रेक करना है। आपको चीजें
- 58:13क्लियर हो जाएंगी। इलेक्ट्रॉनिक का मतलब
- 58:15होता है इलेक्ट्रॉन। एंड ट्रांजिशन का
- 58:17क्या मतलब है? मूवमेंट फ्रॉम वन स्टेट टू
- 58:20अनदर स्टेट। मतलब एक जगह से या एक
- 58:22परिस्थिति से दूसरी परिस्थिति में जाना को
- 58:25ट्रांजिशन कहा जाता है। सिंपली कैसे
- 58:27डिफाइन करना है कि व्हेन ए मॉलिक्यूल
- 58:29अब्जॉर्ब्स लाइट कि जब भी कोई मॉलिक्यूल
- 58:32एब्जॉर्ब करता है लाइट को या कहें तो
- 58:34इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन को। सो देयर
- 58:36इलेक्ट्रॉन प्रमोटेड टू हायर एनर्जी स्टेट
- 58:39एंड दिस प्रोसेस कॉल्ड इलेक्ट्रॉनिक
- 58:41ट्रांजिशन। तो उसकी वजह से क्या होता है?
- 58:43के जो इलेक्ट्रॉन्स हैं वो हायर एनर्जी
- 58:46स्टेट में चले जाते हैं, प्रमोट हो जाते
- 58:48हैं। बस उनका यही मूव कर जाना क्या कहा
- 58:50जाएगा? इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिशन क्योंकि
- 58:52इलेक्ट्रॉन वहां पे मूव कर रहे हैं। ठीक
- 58:55है? मैं आपको इसको ना एग्जांपल से समझाता
- 58:57हूं। जैसे कि मैंने एग्जांपल लिया यहां पे
- 58:58सोडियम का। सोडियम एक एटम है। उसके पास
- 59:02इलेक्ट्रॉन्स हैं। ठीक है? अब वो
- 59:04इलेक्ट्रॉन्स को जब हम एनर्जी देंगे ना
- 59:05लाइट देंगे तो वो एक्साइटेड हो करके एक
- 59:08अपर लेवल के अपर एनर्जी लेवल की वो ना
- 59:10क्लास में चले जाएंगे या स्टेट में चले
- 59:12जाएंगे। वही वहां पे इलेक्ट्रॉनिक
- 59:13ट्रांजिशन कहा जाएगा। जैसे मैंने यहां पे
- 59:15जो दिखा रखा है ये थोड़ी सी केमिस्ट्री है
- 59:18जो आपने पुराने टाइम पे पढ़ी होगी 10थ 12th
- 59:20में। थोड़ा सा मैं आपको रिवाइज करा देता
- 59:22हूं। कि देखिए जो आपका जो सोडियम जो होता
- 59:25है उसका जो एटॉमिक नंबर है यानी कि जो
- 59:27परमाणु क्रमांक है वो कितना होता है? 11।
- 59:30तो अगर हम इसका इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन
- 59:32करें। तो देखिए पहली जो सेल है उसमें जो
- 59:35है आपका दो इलेक्ट्रॉन आते हैं। दूसरे में
- 59:37आठ। यानी कि दो और आठ 10 और बचा एक। तीसरे
- 59:41में आपका एक रहेगा। इस तरीके से
- 59:43इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन है जो कि मैंने
- 59:45इस तरीके से यहां पे दिखा रखा है कि
- 59:47सोडियम का न्यूक्लियस है जो नाभिक होता है
- 59:50जिसमें आपके प्रोटॉन और न्यूट्रॉन होते
- 59:52हैं। इलेक्ट्रॉन बाहर चक्कर लगा रहे होते
- 59:54हैं। तो ये वही ऑर्बिट सेल दिखा रखी है कि
- 59:57पहला जो है उसमें दो इलेक्ट्रॉन है एक और
- 59:59एक दो।
- 1:00:01दूसरे में आठ हैं। छह जो है इस पी सेल में
- 1:00:04है। आपने पढ़ा होगा कि यह हमारा एस यह
- 1:00:07हमारा जो है 1s यानी कि पहला s सबशेल होती
- 1:00:11हैं। आपने पढ़े होंगे ये s
- 1:00:14p और ये भी हमारा s तो यहां पे देखिए जो
- 1:00:17पहला जो s है उसमें दो इलेक्ट्रॉन दूसरे
- 1:00:19में यहां पे टोटल आठ होंगे आठ कैसे होंगे?
- 1:00:22छह पी सेल में होंगे सबशेल में और दो s
- 1:00:25में होंगे। है ना? फिर बाकी का बचेगा आपका
- 1:00:28एक जो कि आपका s में आएगा। ठीक है? थोड़ी
- 1:00:31सी पुरानी चीजें हैं। बस आपको ये रिकॉल
- 1:00:33करनी है या कहें तो आपको थोड़ा सा बस
- 1:00:34समझना है एडजस्ट करना है अगर क्लियर नहीं
- 1:00:37हो रहा है। कि पहले में दो इलेक्ट्रॉन
- 1:00:39इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन दूसरे में आठ और
- 1:00:41तीसरे में एक। अब देखिए जो बाहर के जो
- 1:00:44इलेक्ट्रॉन है अगर हम इसको एनर्जी दें
- 1:00:47कहें तो लाइट दें तो यह जो है अपनी इस s
- 1:00:51सबशेल को छोड़ करके ये जो है ना पी सेल
- 1:00:54में यहां पे चला जाता है। पी जो सबशेल है
- 1:00:56उसमें एक्साइटेड हो जाता है। कब? जब हम
- 1:00:58उसको एनर्जी दे रहे हैं। और ये वहां पे तब
- 1:01:01तक ठहरता है जब तक इसको एनर्जी मिल रही
- 1:01:03है। जब एनर्जी खत्म। तो ये वापस रेडिएशन
- 1:01:06को एमिट करता हुआ लाइट को निकालता हुआ
- 1:01:08वापस उसी स्टेट में आ जाएगा। तो ये क्या
- 1:01:11कहा जाएगा? इलेक्ट्रॉन का एक स्टेट से जो
- 1:01:14बाहरी जो इलेक्ट्रॉन है उसका एक स्टेट से
- 1:01:16दूसरे स्टेट में चला जाना जो कि हायर
- 1:01:18एनर्जी के है। बस यही है इलेक्ट्रॉनिक
- 1:01:20ट्रांजिशन। ठीक है? उसका मैंने यहां पे
- 1:01:23दिखा रखा है ये इलेक्ट्रॉनिक आपका
- 1:01:25कॉन्फ़िगरेशन कि पहले में 1s2 पहले s में
- 1:01:28दो इलेक्ट्रॉन दूसरे में दो इलेक्ट्रॉन
- 1:01:30तीसरे में यहां पे 2p6 एंड 3s1 इस तरीके
- 1:01:34से। बाकी यहां पे दिखाया हुआ है कि
- 1:01:36ग्राउंड स्टेट से वो एक्साइटेड स्टेट में
- 1:01:38जा रहा है। यानी कि यहां से इस वाले सेल
- 1:01:40में जा रहा है। वही इलेक्ट्रॉनिक
- 1:01:41ट्रांजिशन है। क्लियर समझ आया? अभी जो
- 1:01:44इलेक्ट्रॉनिक जो ट्रांजिशन है ये कितने
- 1:01:46टाइप का होता है वो आपने समझना है पर उससे
- 1:01:48भी पहले आपने ये समझना है कि ये जो
- 1:01:50इलेक्ट्रॉन्स है जो ये ट्रांजिस्ट कर रहे
- 1:01:53हैं मूव कर रहे हैं ये कितने टाइप के होते
- 1:01:55हैं। तो उनको हम समझेंगे बॉन्ड के बेसिस
- 1:01:57पे। तो लिखा है कि ऑन द बेसिस ऑफ बॉन्ड या
- 1:02:00ऑर्बिटल देयर आर थ्री टाइप्स ऑफ
- 1:02:02इलेक्ट्रॉन। इलेक्ट्रॉन तीन टाइप के यहां
- 1:02:04पर होते हैं। पहला है सिग्मा इलेक्ट्रॉन।
- 1:02:07ये सिग्मा का साइन है। ये पाई इलेक्ट्रॉन
- 1:02:10दूसरे होते हैं।
- 1:02:12और तीसरा यहां पे ये होता है वो है n
- 1:02:14इलेक्ट्रॉन यानि की नॉन बॉन्डिंग। ऐसे
- 1:02:16इलेक्ट्रॉन जिन्होंने बॉन्डिंग में कोई भी
- 1:02:19पार्टिसिपेशन नहीं किया है वो एकदम फ्री
- 1:02:21है। वो हमारे n इलेक्ट्रॉन कह जाएंगे। तो
- 1:02:24इनको समझना है। देखिए सबसे पहले आपका
- 1:02:25सिग्मा इलेक्ट्रॉन।
- 1:02:27ठीक है? सिग्मा इलेक्ट्रॉन यानी कि वो
- 1:02:30इलेक्ट्रॉन जो कि सिंगल या कहें तो
- 1:02:31सैचुरेटेड बॉन्ड में पाए जाते हैं। यानी
- 1:02:34कि जैसे आपका साइक्लोहेक्सेन है या फिर
- 1:02:37आपका यहां पे प्रोपेन है जिसमें केवल एक
- 1:02:39ही एक यहां पे बॉन्ड है। तो सिंगल बॉन्ड
- 1:02:41को हम क्या कहते हैं? सिग्मा बॉन्ड। तो हर
- 1:02:43एक बॉन्ड में यहां पे आपके दो इलेक्ट्रॉन
- 1:02:45हैं। तो सिग्मा इलेक्ट्रॉन प्रेजेंट इन
- 1:02:47सिंगल या कहें तो सैचुरेटेड बॉन्ड। जो
- 1:02:50सिंगल जो बॉन्ड होते हैं उनमें जो आपके
- 1:02:52इलेक्ट्रॉन प्रेजेंट होते हैं उनको हम
- 1:02:53बोलते हैं सिग्मा इलेक्ट्रॉन।
- 1:02:56ठीक? अब सेकंड जो है वो है आपके पाई
- 1:02:58इलेक्ट्रॉन। पाई इलेक्ट्रॉन लिखा है दिस
- 1:03:00इलेक्ट्रॉन प्रेजेंट इन डबल और ट्रिपल
- 1:03:02बॉन्ड। कि जो डबल और ट्रिपल जो बॉन्ड होते
- 1:03:05हैं जैसे कि यहां पे इथीन है यहां पे डबल
- 1:03:06बॉन्ड है। यहां पे बेंजीन में डबल बॉन्ड
- 1:03:08है और यहां पे मैंने एग्जांपल दिया नहीं
- 1:03:10है लेकिन थर्ड ट्रिपल बॉन्ड भी होता है।
- 1:03:13ठीक है? तो यहां पे आपका जो इथीन है अगर
- 1:03:15आप देखोगे तो उसमें एक यहां पे सिग्मा
- 1:03:17बॉन्ड है, एक यहां पे पाई बांड है। तो
- 1:03:20यहां पे जो इलेक्ट्रॉन सिग्मा इलेक्ट्रॉन
- 1:03:21कहे जाएंगे यहां के पाई इलेक्ट्रॉन कहे
- 1:03:23जाएंगे। ठीक? ऐसे जो ट्रिपल बॉन्ड होता है
- 1:03:25उसमें दो पाई होते हैं एक सिग्मा होता है।
- 1:03:28तो कहने का मतलब है कि कौन सा इलेक्ट्रॉन
- 1:03:30कहां पाया जाता है? अपनी ये चीज पहले
- 1:03:31समझनी है। तो सिग्मा इलेक्ट्रॉन कहां पाया
- 1:03:34जाता है? ओवरऑल कहें तो वो सिंगल बॉन्ड
- 1:03:36में यहां भी होता है और यहां भी होता है।
- 1:03:38पाई बॉन्ड केवल यहां पे डबल बॉन्ड में
- 1:03:40होता है। ठीक है? और ट्रिपल बॉन्ड में
- 1:03:42होता है। नेक्स्ट है आपका यहां पे नॉन
- 1:03:44बॉन्डिंग इलेक्ट्रॉन। यानी कि जो लोन पेयर
- 1:03:47जो मतलब की बॉन्डिंग में पार्टिसिपेट ही
- 1:03:50नहीं कर रहे। तो दीज़ आर लोन पेयर मीन नॉन
- 1:03:52बॉन्डिंग इलेक्ट्रॉन। जैसे कि यहां पे
- 1:03:53आपके ये हेट्रो एटम के पास रहते हैं
- 1:03:56ऑक्सीजन के पास, नाइट्रोजन के पास जो की
- 1:03:58पार्टिसिपेट नहीं कर रहे बांड बनाने में
- 1:03:59उनको हम बोलेंगे नॉन बॉन्डिंग इलेक्ट्रॉन।
- 1:04:02और यहां पे देखिए आगे हम बात करते इनके
- 1:04:03एनर्जी लेवल के बारे में। तो देखिए जो
- 1:04:05सबसे पहले अगर हम बात करें जो आपका सिग्मा
- 1:04:07जो इलेक्ट्रॉन है उसके पास है ना सबसे कम
- 1:04:10एनर्जी रहती है। आपने ये याद रखना है कि
- 1:04:11सिग्मा इलेक्ट्रॉन के पास सबसे कम एनर्जी
- 1:04:13है और सबसे कम एनर्जी होने की वजह से वो
- 1:04:16सबसे ज्यादा स्टेबल रहता है। जैसे नॉर्मली
- 1:04:19अगर आपके पास रुपए नहीं है तो भाई आप
- 1:04:20फालतू का नहीं सोचेंगे घूमने फिरने का या
- 1:04:23रुपए खर्च करने का क्योंकि आप एकदम स्टेबल
- 1:04:26रहेंगे। ठीक है? तो उनके पास कम एनर्जी है
- 1:04:29तो वो सबसे ज्यादा स्टेबल है। दूसरे पे
- 1:04:31आते हैं आपके पाई इलेक्ट्रॉन। ऐसे
- 1:04:32इलेक्ट्रॉन जिनके पास जो है सिग्मा
- 1:04:34इलेक्ट्रॉन से ज्यादा एनर्जी है और उनके
- 1:04:36कंपेर में ये लेस स्टेबल है। लास्ट में
- 1:04:39आता है आपके नॉन बॉन्डिंग इलेक्ट्रॉन। वो
- 1:04:42इलेक्ट्रॉन जिनके पास काफी ज्यादा एनर्जी
- 1:04:44है क्योंकि उन्होंने बॉन्ड वगैरह बना ही
- 1:04:45नहीं रखा है और वो जहां मन चाहे घूम फिर
- 1:04:48सकते हैं। कहने का मतलब है वो अनस्टेबल
- 1:04:50है। अब आपने इन्हीं एनर्जी लेवल से या
- 1:04:53कहें तो आपने जो इलेक्ट्रॉन के टाइप देखे
- 1:04:55हैं उन्हीं के बेसिस पे आपने ये समझना है
- 1:04:57कि जो आपके इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिशन है वो
- 1:04:59कितने टाइप के होते हैं। ठीक है? तो सिंपल
- 1:05:01सी आपने यहां पे हेडिंग लगानी है कि
- 1:05:04टाइप्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिशन।
- 1:05:07तो यहां पे जो इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिशन है
- 1:05:09इलेक्ट्रॉन के ही बेसिस पर कई सारे टाइप
- 1:05:11के हैं जो यहां पे लिखे हुए हैं। मैं एकदम
- 1:05:13आपको इनको नहीं बताऊंगा कि भाई ये क्या है
- 1:05:15क्या नहीं है। सिंपल अभी मैं एक बार पढ़
- 1:05:18के बोल दूं कि सिग्मा टू सिग्मा स्टार
- 1:05:20ट्रांजिशन सिग्मा टू पाई स्टार
- 1:05:22ट्रांजैक्शन पाई टू सिग्मा स्टार ये स्टार
- 1:05:24लगा हुआ है ना तो इस तरीके से बोलते हैं।
- 1:05:26पाई टू पाई स्टार ट्रांजैक्शन। और अभी दो
- 1:05:29और है आपके यहां पे नॉन बॉन्डिंग टू
- 1:05:31सिग्मा स्टार एंड नॉन बॉन्डिंग टू पाई
- 1:05:33स्टार। ये अभी आपने जस्ट नहीं समझने है।
- 1:05:36अब मैं आपको एक एग्जांपल से सिंपल तरीके
- 1:05:38से समझाता हूं कि हमारे पास एक पैमाना है।
- 1:05:42जैसे ये सपोज़ करो ये इस तरीके से हमने एक
- 1:05:44एरो यहां पे काट दिया। ठीक है? इस पर हमने
- 1:05:47लिख दिया एनर्जी लेवल।
- 1:05:51एनर्जी कि अगर आप यहां से ऊपर को जाओगे ना
- 1:05:55तो एनर्जी का लेवल बढ़ेगा। तो अभी जो आपने
- 1:05:58समझा कि जो सिग्मा जो बांड होते हैं जो
- 1:06:00सिग्मा जो इलेक्ट्रॉन होते हैं उनके पास
- 1:06:02सबसे कम एनर्जी है तो वो सबसे नीचे होंगे।
- 1:06:06ठीक है? उसके ऊपर जो आएंगे वो यहां पे पाई
- 1:06:09आपके जो है पाई आएंगे। पाई इलेक्ट्रॉन फिर
- 1:06:12उसके ऊपर जो आएंगे यहां पे वो आपके नॉन
- 1:06:15बॉन्डिंग। यही तो चीज अभी मैंने आपको बताई
- 1:06:17थी। बस वही इस पैमाने से कि भाई देखो यहां
- 1:06:20पर है कम। इससे ऊपर जाओगे तो बढ़ता जा रहा
- 1:06:22है। ठीक है? इसको हम बोलते हैं सिग्मा
- 1:06:25बॉन्डिंग।
- 1:06:28यहां पे हम बोलते हैं इसको पाई बॉन्डिंग।
- 1:06:31ठीक है? इसको हम बोलते हैं नॉन बॉन्डिंग।
- 1:06:34ठीक है? क्योंकि ये जो है सबसे नीचे है।
- 1:06:37इनकी एनर्जी सबसे कम है। लगातार जैसे इसकी
- 1:06:39तो सबसे ही कम है। तो सबसे ज्यादा स्टेबल
- 1:06:41है। ये उससे कम स्टेबल है। ये और भी कम
- 1:06:43स्टेबल है। और ये जो है नॉर्मली ग्राउंड
- 1:06:46स्टेट इनको हम बोलते हैं। क्योंकि
- 1:06:48इलेक्ट्रॉन इन तीनों स्टेट में आपको
- 1:06:50नॉर्मली मिल जाएंगे। और इसको हम एक टर्म
- 1:06:52यूज़ करते हैं। होमो होमो का मतलब है। यानी
- 1:06:56कि हाईली ऑक्यूपाइड मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल
- 1:06:59यानी कि वो ऑर्बिट या वो ऑर्बिटल जो हली
- 1:07:02ऑक्यूपाइड है ज्यादातर वो घिरे हुए हैं तो
- 1:07:05उनको हम बोलते हैं होमो। ठीक है? इनकी फुल
- 1:07:08फॉर्म आपको मैं बताऊं। होमो का मतलब है कि
- 1:07:10हाइली ऑक्यूपाइड मॉलिक्यूल। अब ये हमारे
- 1:07:13जो इलेक्ट्रॉन है ना वो एकदम ग्राउंड
- 1:07:16स्टेट पर हैं। अब अगर हम इनको एनर्जी
- 1:07:19देंगे तो ये कहां जाएंगे? हायर स्टेट,
- 1:07:21एक्साइटेड स्टेट। तो यहां पे एनर्जी लेवल
- 1:07:24और बढ़ेगा। यानी कि यहां पे हमने दो और
- 1:07:26क्लास बनाई। एक यहां पे होगी हमारी सबसे
- 1:07:30नीचे जो है पाई
- 1:07:32एंटी बॉन्डिंग।
- 1:07:36इस पे इस तरीके से स्टार लगा होता है।
- 1:07:37इसको हम पाई स्टार भी बोलते हैं। एक है
- 1:07:40हमारी सिग्मा स्टार या सिग्मा एंटी
- 1:07:44बॉन्डिंग।
- 1:07:47ठीक है? आपको पता है कि जो सिग्मा
- 1:07:49बॉन्डिंग है वहां पे सिग्मा ही इलेक्ट्रॉन
- 1:07:50होंगे। जो पाई बॉन्डिंग है वहां पे पाई ही
- 1:07:52इलेक्ट्रॉन होंगे। जहां पे नॉन बॉन्डिंग
- 1:07:54है वहां पे नॉन बॉन्डिंग इलेक्ट्रॉन
- 1:07:56रहेंगे। अब आपने ये चीज़ समझनी है कि ये जो
- 1:07:59अभी ग्राउंड स्टेट पर है तीनों इलेक्ट्रॉन
- 1:08:02ये कौन-कौन सी क्लासेस में जा सकते है
- 1:08:04एनर्जी मिलने पर? देखो सबसे पहले हम समझते
- 1:08:06हैं सिग्मा। क्योंकि वो सबसे नीचे है। वो
- 1:08:10बहुत ज्यादा स्टेबल है। ठीक है? और ये
- 1:08:12हाइली ऑक्यूपाइड है। अगर मैं बात करूं तो
- 1:08:15सिग्मा जो अगर इलेक्ट्रॉन है अगर आपके पास
- 1:08:17सपोज वो सिग्मा इलेक्ट्रॉन है तो केबल और
- 1:08:20केबल वो एक्साइटेड होकर के सिग्मा एंटी
- 1:08:22बॉन्डिंग क्लास में ही जा सकता है। ठीक
- 1:08:25है? इन दोनों क्लासों को ना हम यहां पे
- 1:08:27ल्यूमो वॉइड बोलते हैं। जैसे कि नीचे
- 1:08:28वालों को होमो बोलते हैं ना। तो, इनको हम
- 1:08:31ल्यूमो बोलते हैं। लीस्ट अनऑक्युपाइड या
- 1:08:35कहें तो लो अनऑक्युपाइड मॉलिक्यूलर
- 1:08:37ऑर्बिटल कि यह ज़्यादातर ऑक्युपाई नहीं
- 1:08:39रहते हैं। बहुत ही कम घिरे रहते हैं। तभी
- 1:08:41थोड़े टाइम के लिए घिरते हैं जब एनर्जी का
- 1:08:43लेवल बढ़ता है। तो देखिए अगर यहां पे
- 1:08:46ट्रांजिशन अगर सिग्मा इलेक्ट्रॉन का हो।
- 1:08:47अगर सिग्मा इलेक्ट्रॉन को एनर्जी अगर हम
- 1:08:49दें तो वो जो है ना सिर्फ और सिर्फ सिग्मा
- 1:08:52एंटी बॉन्डिंग में देंगे। कहने का मतलब है
- 1:08:54यहां से अपनी रेस स्टार्ट करेंगे और सीधा
- 1:08:57यहां पे पहुंचेंगे।
- 1:08:59ठीक? अब आपको दिख रहा है कि भाई एकदम कोई
- 1:09:01बंदा जीरो लेवल से स्टार्ट कर रहा है और
- 1:09:03सबसे ऊपर की गद्दी पर जाकर बैठ रहा है।
- 1:09:05कितनी मेहनत लगेगी। मतलब सबसे ज्यादा
- 1:09:07एनर्जी जो है ना सबसे ज्यादा लाइट अपने
- 1:09:10इन्हीं को देनी पड़ेगी इन इलेक्ट्रॉन्स को
- 1:09:13तभी वो जो है एक्साइटेड होंगे। ठीक है? और
- 1:09:16इनका इस ग्राउंड स्टेट से इस वाली ग्राउंड
- 1:09:19हायर स्टेट में जाने को मूव करने को आप
- 1:09:22क्या बोलोगे? सिग्मा से उठा सिग्मा स्टार
- 1:09:25पे जाके बैठ गया। तो सिग्मा टू सिग्मा
- 1:09:27स्टार ट्रांजिशन। क्लियर हो गया? अब दूसरी
- 1:09:30तरफ देखोगे आप कहता है पाई। अगर आपके पाई
- 1:09:33बॉन्ड यानी कि डबल बांड या ट्रिपल बॉन्ड
- 1:09:35है तो वहां पे पाई इलेक्ट्रॉन रहेंगे। तो
- 1:09:37अगर आप पाई इलेक्ट्रॉन को एनर्जी देते हैं
- 1:09:39तो वो इलेक्ट्रॉन अपने पाई यहां से
- 1:09:41स्टार्ट हुआ इस क्लास से स्टार्ट हुआ
- 1:09:43सिर्फ और सिर्फ पाई एंटी बॉन्डिंग में ही
- 1:09:45जा सकता है। वो इससे ऊपर नहीं जा सकता।
- 1:09:48ठीक है? एकदम ये रूल है। आपने ध्यान रखना
- 1:09:50है। एज़ कंपेयर टू दिस। आप समझ सकते हैं कि
- 1:09:52भाई यहां पे एनर्जी इतनी खास नहीं देनी
- 1:09:55होगी। कोई यहां पे मिडिल क्लास का बंदा है
- 1:09:57या अपर मिडिल क्लास का है। वो और ज्यादा
- 1:09:59कमाई करके यहां पे हायर लेवल में पहुंच
- 1:10:01गया है। तो इतनी मेहनत नहीं लगी होगी। एज
- 1:10:04कंपेयर टू कि वो बहुत ही गरीब उठ करके
- 1:10:06यहां गद्दी पे जाके बैठा है। क्लियर हुआ?
- 1:10:08तो यहां पे अगर हम इस ट्रांजिशन को नाम
- 1:10:10देना चाहें तो भाई पाई से उठा पाई स्टार
- 1:10:13पे जा के बैठा। तो ये पाई टू पाई स्टार
- 1:10:16ट्रांजिशन। ठीक? अब आपका बचा यहां पे नॉन
- 1:10:20बॉन्डिंग वाला। नॉन बॉन्डिंग दोनों तरफ आ
- 1:10:22गया। मतलब वो किधर भी जा सकता है। अगर आप
- 1:10:24उसको कम एनर्जी देंगे तो वो यहां चला
- 1:10:26जाएगा। अगर आप इसको और भी ज्यादा एनर्जी
- 1:10:28दे देंगे तो वो यहां चला जाएगा। वो तो भाई
- 1:10:30फ्री बैठा है। उसको कुछ नहीं लेना देना
- 1:10:32कौन सी क्लास में जाना है। ठीक है? वो
- 1:10:34डिपेंड करता है कि आपके पास कितने रुपए
- 1:10:36मिल रहे हैं आप उसके बेसिस पे यहां पे
- 1:10:38ग्रो कर रहे हैं। तो यहां पे नॉन बॉन्डिंग
- 1:10:40को अगर मैं यहां पे अगर इस ट्रांजैक्शन का
- 1:10:41नाम दूं कि n जो है यहां पे था। कहां पे
- 1:10:45जाके बैठ गया? सिग्मा सॉरी पाई स्टार पे
- 1:10:47जाके बैठ गया। एक और दूसरा कि भाई n यहां
- 1:10:51पर था। कहां पर जाकर बैठ गया? यहां पर
- 1:10:53सिग्मा स्टार पे जाकर बैठ गया। ठीक है? इस
- 1:10:56तरीके से। तो अभी आप इन एरो से ये समझ
- 1:10:59सकते हैं कि भाई किस में कितनी ज्यादा
- 1:11:01एनर्जी देनी है अगर आपने इलेक्ट्रॉन का
- 1:11:03ट्रांजिशन कराना हो। ठीक है? और आपको एक
- 1:11:06और बहुत अच्छी चीज यहां पे क्लियर होगी।
- 1:11:08पहले मैं आपको यही चीज समझा दूं। अब आप
- 1:11:10इनको पढ़कर बताइए मेरे को क्लियर हुआ कि
- 1:11:13नहीं हुआ। सिग्मा σ2 अगर सिग्मा स्टार वो
- 1:11:16जा रहा है। आपको समझ आ गया होगा कि अच्छा
- 1:11:18ये बहुत ही कम एनर्जी वाला था और इतनी
- 1:11:21यहां पर जाकर के बैठा हायर पे जा के।
- 1:11:23दूसरा जो मैंने यहां पे लिख रखा है ना कि
- 1:11:25σ2 पाई स्टार पाई टू सिग्मा स्टार ये
- 1:11:27प्रैक्टिकली पॉसिबल ही नहीं है। तो मैंने
- 1:11:30इनको बताया ही नहीं है आपको। सिर्फ पहला
- 1:11:32बताया यहां पे चौथा बताया जो कि आपने यही
- 1:11:34पढ़ने हैं यही होते हैं एक्चुअल में। और
- 1:11:37दो और बताए नॉन बॉन्डिंग वाले। और उनको
- 1:11:39मैंने यहां पे वही अच्छे से दिखा रखा है।
- 1:11:42अब आपको ये समझने में ज्यादा दिक्कत नहीं
- 1:11:44होगी। हां, आपको क्लियर हो रहा होगा कि
- 1:11:46अच्छा ये होमो था हायर ऑक्युपाइड
- 1:11:47मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल। ये लोअर अनऑक्युपाइड
- 1:11:50मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल यानी कि कम ऑक्युपाई
- 1:11:52होते हैं ये ज्यादा ऑक्यूपाई रहते हैं
- 1:11:53स्टार्टिंग में। अब हम अगर सिग्मा
- 1:11:55इलेक्ट्रॉन को अगर एनर्जी दे रहे हैं तो
- 1:11:56वो सीधा का सीधा यहां पे जा के बैठेगा
- 1:11:58मतलब सबसे ज्यादा एनर्जी यहां पे लगेगी।
- 1:12:00पाई वाला पाई एंटी बॉन्डिंग में जाएगा और
- 1:12:02नॉन बॉन्डिंग वाला दोनों में जा सकता है।
- 1:12:04वो डिपेंड करेगा कि आप कितनी एनर्जी दे
- 1:12:06रहे हैं। ठीक है? ठीक है? तो इसके बेसिस
- 1:12:08पर आपको समझ आया कि आपने इलेक्ट्रॉन के
- 1:12:10बेसिस पर इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिशन के टाइप
- 1:12:12पता कर लिए। जो कि आपके कितने टाइप के है?
- 1:12:14चार टाइप के हैं। अब यहां पे वही टाइप की
- 1:12:17थोड़ी थोड़ी समरी लिखी हुई है और इनसे आपको
- 1:12:19एक बहुत ही अच्छी चीज़ समझ आएगी। आप यकीन
- 1:12:22करोगे की भाई यार ऐसा है। अच्छा ये सारा
- 1:12:24फंडा ऐसे चलता है। जैसे पहला है आपका।
- 1:12:27सिग्मा टू सिग्मा स्टार ट्रांजिशन किस में
- 1:12:30होगा? तो लिखा है दोस कंपाउंड व्हिच कंटेन
- 1:12:32ओनली सिंगल बॉन्ड अंडरगो सिग्मा टू सिग्मा
- 1:12:35स्टार ट्रांजिशन। भैया सिग्मा बॉन्ड कहां
- 1:12:37पे पाए जाते हैं? सिंगल बॉन्ड में। यहां
- 1:12:40पे सिंगल बॉन्ड में। तो ये सिग्मा टू
- 1:12:43सिग्मा स्टार ट्रांजिशन होगा कहां?
- 1:12:45ज्यादातर तो सैचुरेटेड में ही होगा सिंगल
- 1:12:48बॉन्ड में। तो लिखना है कि ये जो है ऐसे
- 1:12:50कंपाउंड्स में होते हैं जिनमें केवल और
- 1:12:52केवल सिंगल बॉन्ड या कहें तो केवल
- 1:12:54सैचुरेटेड रहते हैं वो। ठीक है? और लिखा
- 1:12:57है फॉर दिस ट्रांजिशन हाई एनर्जी
- 1:12:59रिक्वायर्ड मीन ओनली लो वेवलेंथ ईएमआर कैन
- 1:13:02एक्साइट देम। बहुत इंपॉर्टेंट बात मैंने
- 1:13:04यहां पे लिखी है कि अगर आप इस लेवल से
- 1:13:07जीरो लेवल से एकदम गद्दी पे जाके बैठना
- 1:13:09चाहते हैं भाई बहुत ज्यादा एनर्जी लगेगी।
- 1:13:11बहुत ज्यादा एनर्जी लगेगी मतलब आपको कम
- 1:13:14वेवलेंथ की लाइट की जरूरत पड़ेगी। अब
- 1:13:16देखिए उन फंडामेंटल्स पे आते हैं जो मैंने
- 1:13:18अभी आपको बताए थे। कि देखिए आपको बहुत
- 1:13:22ज्यादा एनर्जी की रिक्वायरमेंट है। ठीक
- 1:13:24है? तो आपने ऐसी लाइट को सेलेक्ट करना
- 1:13:27होगा जिसकी वेवलेंथ बहुत कम है। क्योंकि
- 1:13:30वेवलेंथ अगर कम होगी है ना? तो इसका मतलब
- 1:13:33है कि वहां पर एनर्जी उसके पास ज्यादा
- 1:13:35होगी। उसकी फ्रीक्वेंसी ऊपर चढ़ने की
- 1:13:37ज्यादा हो जाएगी। तेजी से वो वहां पर चढ़
- 1:13:39पाएगा। क्लियर हुआ? तो मैं अगर आपको बताऊं
- 1:13:43तो यहां पे मैंने लिख रखा है तो आपने जो
- 1:13:45है कम वेवलेंथ यानी कि 200 नैन मीटर से कम
- 1:13:49की वेवलेंथ को आपने यहां पे देना होगा।
- 1:13:51तभी जो है वो यहां पे मूव कर पाएंगे ये
- 1:13:54वाले इलेक्ट्रॉन। समझ आया? जैसे हमने यहां
- 1:13:57पे सेलेक्ट किया था कि भाई हमारी जो यूपी
- 1:13:59जो विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी है वो तो 200
- 1:14:02से ही स्टार्ट होती है और 800 पे खत्म
- 1:14:04होती है। कहने का मतलब है कि इन कंपाउंड
- 1:14:06की आप एनालिसिस कर ही नहीं सकते यूपी
- 1:14:08विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी से। क्योंकि इससे
- 1:14:11नीचे वाली जो है वो दूसरे के अंदर आ जाता
- 1:14:14है। समझ गए? तो कहने का मतलब है कि यहां
- 1:14:17पे जो कंपाउंड्स हैं जिनके ऊपर केवल सिंगल
- 1:14:20बॉन्ड यहां पे पाए जाते हैं उनको ज्यादा
- 1:14:22एनर्जी देनी है। इट मींस कि उनको लो
- 1:14:24वेवलेंथ की लाइट देनी है 200 नैनोमीटर से
- 1:14:27कम। तो यहां पे हम यूवी से यूवी विज़िबल से
- 1:14:29कर ही नहीं सकते। कितनी इंटरेस्टिंग चीज
- 1:14:31आपको यहां पे समझ आई कि भाई ऐसे यहां पे
- 1:14:33पूरा फंडा चल रहा है। इसमें एग्जांपल जैसे
- 1:14:36कि साइक्लोहेक्सेन सिंगल सिंगल बॉन्ड
- 1:14:38मिथेन में सारे सिंगल बॉन्ड, प्रोपेन में
- 1:14:40सारे सिंगल बॉन्ड मतलब इसमें ये वाला
- 1:14:42ट्रांजिशन होगा। ठीक? दूसरा है पाई टू पाई
- 1:14:45स्टार ट्रांजिशन। ऐसे कंपाउंड जिसमें डबल
- 1:14:47और ट्रिपल बॉन्ड है उन्हीं में तो पाए
- 1:14:49जाते हैं पाई इलेक्ट्रॉन।
- 1:14:51हमने दिखाए थे इथेन, बेंजी, इथीन, बेंजीन
- 1:14:54यहीं पे तो पाए जा रहे हैं। तो ये
- 1:14:56ट्रांजिशन उन्हीं कंपाउंड्स में होगा। तो
- 1:14:58दोज़ कंपाउंड व्हिच व्हिच हैव डबल या
- 1:15:00ट्रिपल बॉन्ड उनके अंदर ही पाई टू पाई
- 1:15:03स्टार ट्रांजिशन होता है। एग्जांपल एल्कीन
- 1:15:06है, डबल बॉन्ड वाले, एल्काइन है, ट्रिपल
- 1:15:07बॉन्ड वाले कार्बोनिल कंपाउंड है,
- 1:15:09नाइट्राइल इनमें ट्रिपल डबल सारे जो बॉन्ड
- 1:15:11हैं उनमें ये होता है। और हमने देखा था कि
- 1:15:14एज़ कंपेयर टू सिग्मा टू सिग्मा स्टार
- 1:15:16ट्रांजिशन इनके लिए तो भाई बहुत कम एनर्जी
- 1:15:18चाहिए। देखो पाई टू पाई स्टार में अगर
- 1:15:20जाना है तो यहां से स्टार्ट करके यहां
- 1:15:22पहुंचना है। तो इनको कम एनर्जी चाहिए।
- 1:15:24इट्स मींस कि ज्यादा वेवलेंथ की लाइट इनको
- 1:15:27चाहिए होगी। क्योंकि वेवलेंथ और एनर्जी
- 1:15:29दूसरे के अपोजिट है। ठीक है? फंडामेंटल्स
- 1:15:31में यही मैंने क्लियर करा था।
- 1:15:34तो यहां पर लिखा है कि इट रिक्वायर लेस
- 1:15:36एनर्जी एस कंपेयर टू सिग्मा टू सिग्मा
- 1:15:39स्टार ट्रांजिशन। मींस उनको अगर आपने लाइट
- 1:15:41देनी है तो वह 200 नैनोमीटर नैनोमीटर से
- 1:15:44ज्यादा की देनी होगी। मतलब आप इन कंपाउंड
- 1:15:46की एनालिसिस यूवी विज़िबल स्पेक्ट्रोस्कोपी
- 1:15:49से कर सकते हैं। क्लियर हुआ कि नहीं? तो
- 1:15:52ये है आपका पाई टू पाई स्टार ट्रांजिशन।
- 1:15:58नेक्स्ट आपका वो है नॉन बॉन्डिंग टू
- 1:16:01सिग्मा स्टार ट्रांजिशन। नॉन बॉन्डिंग
- 1:16:03मतलब उनके पास इलेक्ट्रॉन पेयर होगा नॉन
- 1:16:06बॉन्डिंग। ठीक है? और सिग्मा स्टार यानी
- 1:16:08कि इसमें सिंगल बॉन्ड रहेंगे। सिग्मा
- 1:16:11बॉन्ड कहां रहता है? सिंगल बॉन्ड में ना?
- 1:16:12तो लिखना है सैचुरेटेड कंपाउंड यानी कि
- 1:16:14सिंगल बॉन्ड कंपाउंड बट दे कंटेन लोन पेयर
- 1:16:17ऑफ इलेक्ट्रॉन लाइक आपके जो हेट्रो एटम है
- 1:16:21ऑक्सीजन नाइट्रोजन सल्फर ये रहते हैं और
- 1:16:23उनके पास एक नॉन बॉन्डिंग इलेक्ट्रॉन या
- 1:16:25दो नॉन बॉन्डिंग नॉन बॉन्डिंग इलेक्ट्रॉन
- 1:16:27रहते ही रहते हैं। जैसे आप एग्जांपल समझो
- 1:16:29इथेनॉल है। है इसमें सारे सिंगल बांड और
- 1:16:33इसके पास ऑक्सीजन के पास यहां पे क्या है?
- 1:16:35आपके लोन पेयर यानी कि नॉन बॉन्डिंग
- 1:16:37इलेक्ट्रॉन भी हैं। इथेन अमीन है। यहां पे
- 1:16:40सारे सिंगल बॉन्ड हैं और यहां पे क्या है
- 1:16:42आपका? लोन पेयर भी है। कहने का मतलब है कि
- 1:16:46ऐसे कंपाउंड में जो सिंगल बॉन्ड के हों और
- 1:16:48लोन पेयर भी हो तो उनमें जो ट्रांजिशन
- 1:16:50होगा नॉन बॉन्डिंग टू सिग्मा स्टार
- 1:16:52ट्रांजिशन होगा। अब इनकी कितनी एनर्जी है?
- 1:16:55आप ये भी देख सकते हैं। भाई इसके कंपेयर
- 1:16:57में अगर हम देखें तो इसमें ज्यादा एनर्जी
- 1:16:58की जरूरत है क्योंकि इसको और ऊपर तक चढ़ना
- 1:17:01है। ठीक है? तो यहां पर लिखा हुआ है कि
- 1:17:03सैचुरेटेड कंपाउंड या कहें तो सिंगल बॉन्ड
- 1:17:06कंपाउंड जो होते हैं इनको हाई एनर्जी की
- 1:17:09रिक्वायरमेंट होती है एज कंपेयर टू ये जो
- 1:17:12आपने पीछे देखा था पाई टू पाई स्टार वाला
- 1:17:14तो उनको आपने जो है 200 नैनोमीटर से कम की
- 1:17:17ही वेवलेंथ वाली लाइट को देना होगा। तो
- 1:17:19इसका मतलब है कि इनकी भी एनालिसिस आप युग
- 1:17:22विज़िबल से नहीं कर सकते। अब इसके बाद
- 1:17:24देखिए लास्ट में है देखिए वह है नॉन
- 1:17:26बॉन्डिंग टू पाई स्टार ट्रांजिशन कि ऐसे
- 1:17:29कंपाउंड जिसमें नॉन बॉन्डिंग इलेक्ट्रॉन
- 1:17:32हो और वहां पे पाई इलेक्ट्रॉन भी हो यानी
- 1:17:34कि डबल बॉन्ड हो और नॉन बॉन्डिंग हो तो
- 1:17:36उनमें ये होगा तो कंपाउंड व्हिच हैव डबल
- 1:17:38या ट्रिपल बॉन्ड एंड कंटेन लोन पेयर एटम
- 1:17:40सच एज नाइट्रोजन ऑक्सीजन सल्फर वही इस
- 1:17:43ट्रांजिशन को करते हैं। जैसे कि यहां पे
- 1:17:46लिखा हुआ है एग्जांपल में कि एसिट्डिहाइड
- 1:17:48है कि देखो यहां पे डबल बॉन्ड भी है और
- 1:17:50यहां पे लोन पेयर भी है। यहां पे आपका
- 1:17:52एसिटिक एसिड है। यहां पे डबल बॉन्ड भी है
- 1:17:54और आपका लोन पेयर भी है। तो ऐसे कंपाउंड
- 1:17:57अगर आप देखोगे उनके एनर्जी अगर आपको पता
- 1:17:59चले कि कितनी चाहिए तो उनको तो सबसे कम
- 1:18:01एनर्जी की जरूरत है। भाई उनको सिर्फ यहां
- 1:18:04से यहां पे पहुंचना है तो बहुत कम एनर्जी
- 1:18:06चाहिए। इट मींस कि उनको ज्यादा वेवलेंथ की
- 1:18:09लाइट को देना होगा। तो लिखा है इट
- 1:18:12ट्रांजिशन रिक्वायर मिनिमम या कहें तो
- 1:18:14लोएस्ट एनर्जी मीन हाई एनर्जी की वेवलेंथ
- 1:18:16यहां पे चाहिए होगी। यानी कि 200 नैनोमीटर
- 1:18:19से ज्यादा की वेवलेंथ। क्लियर हो गया? तो
- 1:18:22आपने जो है इस इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिशन से
- 1:18:24क्या चीज समझी? आपने ये समझा कि हम यूवी
- 1:18:27विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी से किस-किस की
- 1:18:29एनालिसिस कर सकते हैं। किसको कितनी एनर्जी
- 1:18:32की जरूरत होगी। कंपाउंड को हमने अलग-अलग
- 1:18:34कर दिया। ठीक है? तो ये है आपका
- 1:18:37इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिशन। अब इसको थोड़ा
- 1:18:39मैं आपको ऑर्डर और समझा देता हूं। जो आपने
- 1:18:42चीजें समझी उसका मैंने यहां पे ऑर्डर लिख
- 1:18:44रखा है कि एनर्जी का ऑर्डर कितना है कैसा
- 1:18:46है और वेवलेंथ का कैसा है कि अगर हम बात
- 1:18:49करें सिग्मा टू सिग्मा स्टार ट्रांजिशन
- 1:18:51यानी कि जो सबसे पहला आता है सिग्मा टू
- 1:18:53सिग्मा स्टार ट्रांजिशन इसमें सबसे ज्यादा
- 1:18:55एनर्जी की जरूरत पड़ता है तो यहां पे लिखा
- 1:18:57है हाई इधर लो तो नीचे को जाओगे तो लो
- 1:19:00होता जाएगा तो इनको सबसे ज्यादा एनर्जी
- 1:19:02चाहिए इट मींस कि लो वेवलेंथ चाहिए 200
- 1:19:05नैनोमीटर से कम की वेवलेंथ फिर है आपका
- 1:19:08नॉन बॉन्डिंग टू सिग्मा स्टार इनको जो है
- 1:19:12एज कंपेयर टू इनके कि उनको ज्यादा ही
- 1:19:14एनर्जी चाहिए। तो इट मींस कि उनको लो
- 1:19:16वेवलेंथ की लाइट यहां पे चाहिए होगी। फिर
- 1:19:18नीचे दो और आते हैं पाई टू पाई स्टार
- 1:19:21जिनकी एनर्जी कम चाहिए होती है। यानी कि
- 1:19:23ज्यादा वेवलेंथ की लाइट 200 नैनोमीटर से
- 1:19:25ज्यादा क्योंकि वेवलेंथ और एनर्जी एक
- 1:19:27दूसरे के अपोजिट है। फिर है सबसे नीचे वो
- 1:19:30है नॉन बॉन्डिंग टू पाई स्टार। जिसमें
- 1:19:32बहुत ही कम एनर्जी की जरूरत होती है। इट
- 1:19:34मींस यहां पे ज्यादा वेवलेंथ की लाइट की
- 1:19:36जरूरत पड़ेगी। इवन कि आपको आई आर की भी
- 1:19:39जरूरत यहां पे पड़ सकती है।
- 1:19:40तो यहां पे देखिए वही जो चीजें है वो लिखी
- 1:19:42हुई है कि यहां पे पांच ऑर्बिटल होते हैं।
- 1:19:44जैसे कि सिग्मा बॉन्डिंग ऑर्बिटल, पाई
- 1:19:46बॉन्डिंग ऑर्बिटल, नॉन बॉन्डिंग ऑर्बिटल,
- 1:19:48सिग्मा स्टार, पाई स्टार। तो ये देखिए वही
- 1:19:51चीजें जो अभी आप पढ़ के आ रहे हैं ना वही
- 1:19:52आपने शॉर्ट में लिखना है। देखिए आपको जब
- 1:19:54क्वेश्चन का आंसर करना है तो ये सिंपल
- 1:19:56यहां से स्टार्ट करना है कि ये यूपिजिबल
- 1:19:59स्पेक्ट्रोस्कोपी इलेक्ट्रॉन ट्रांजिशन पर
- 1:20:00बेस्ड होती है। ये इलेक्ट्रॉन ट्रांजिशन
- 1:20:02क्या है? इसमें इतने ऑर्बिटल होते हैं और
- 1:20:04ये वाला ग्राफ जो है ये जरूर से बनाना है।
- 1:20:07मैंने वहां पे वैसे आपको अच्छे से समझा
- 1:20:08दिया होगा कि यहां पे पाई टू पाई स्टार
- 1:20:10ट्रांजिशन में सबसे ज्यादा एनर्जी चाहिए
- 1:20:12क्योंकि भाई वो सबसे नीचे से उठ के सबसे
- 1:20:14ऊपर जा रहा है। है ना? कहने का मतलब है
- 1:20:17यहां पे वेवलेंथ कम चाहिए होगी। जैसे अभी
- 1:20:19हमने जो फंडा समझा था अगर मैं आपको अच्छे
- 1:20:21से बताऊं। जब हमने स्पेक्ट्रोस्कोपी का
- 1:20:24बेसिक समझा था। हमने जाना था कि जो एनर्जी
- 1:20:28जो है अगर एनर्जी ज्यादा चाहिए यानी कि
- 1:20:30वेवलेंथ वहां पे कम हो जाती है। वेवलेंथ
- 1:20:33वहां पे कम हो जाती है। ठीक है? अब ये है
- 1:20:36जैसे सिग्मा बॉन्डिंग बोले तो यानी कि जो
- 1:20:39सिंगल बॉन्ड में ये देखा जाता है सिंगल
- 1:20:41बॉन्ड जैसे कि इथेन है, मिथेन है इन सभी
- 1:20:43में अगर उनको हायर स्टेट में पहुंचाना है
- 1:20:46उनकी एनालिसिस आपने करनी है एक्साइट करके
- 1:20:48तो आपको वो वेवलेंथ की लाइट देनी पड़ेगी
- 1:20:51जिसमें ज्यादा एनर्जी हो। ज्यादा एनर्जी
- 1:20:54हो मतलब कि कम वेवलेंथ की लाइट देनी होगी।
- 1:20:56कम कहने का मतलब है 200 नैन मीटर से कम की
- 1:21:00रेंज में जाना होगा। जैसे यहां पर पूरा
- 1:21:02स्पेक्ट्रम है। जैसे अल्ट्रावायलेट 200
- 1:21:06उसके भी सब टाइप होते हैं। यहां से 200 से
- 1:21:09नीचे यानी कि 10 नैन मीटर से 200 नैन मीटर
- 1:21:12इसकी वेवलेंथ की रेंज यानी कि वैक्यूम
- 1:21:14यूवी वाली जो रेंज है उस पर आपने जाना
- 1:21:16होगा। तभी आप एनालिसिस कर पाएंगे किसकी?
- 1:21:19उन कंपाउंड की जिसमें सिंगल बॉन्ड होता है
- 1:21:21ये जो बोले तो सिग्मा टू सिग्मा स्टार
- 1:21:23ट्रांजिशन शो करते हैं। समझ आया? यानी कि
- 1:21:26आपको एक अलग ही कांसेप्ट बन गया कि अगर
- 1:21:29मैं मेरे को सिंगल बॉन्ड वाले कंपाउंड की
- 1:21:31एनालिसिस करनी है तो वो यूवी विजिबल
- 1:21:33स्पेक्ट्रोस्कोपी से तो नहीं हो सकती।
- 1:21:35ठीक? अब यूवी विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी से
- 1:21:37किनकी हो सकती है? तो वो है यहां पे पाई
- 1:21:40टू पाई स्टार ट्रांजिशन वाले। पाई टू पाई
- 1:21:42स्टार यानी कि पाई बोले तो पाई बॉन्ड यानी
- 1:21:45कि जिनमें डबल या ट्रिपल बॉन्ड होता है
- 1:21:47उनको कम एनर्जी चाहिए। कम एनर्जी चाहिए।
- 1:21:49यानी कि वेवलेंथ बढ़ेगी। वेवलेंथ जाएगी 200
- 1:21:52से ऊपर। 200, 300, 400, 500, 600, 700,
- 1:21:55800 होते हैं। तो उनकी एनालिसिस आप यहां
- 1:21:57पे अच्छे से कर पाएंगे। ठीक है? ऐसे ही
- 1:22:01अगर हम इस वाले को देखें नॉन बॉन्डिंग से
- 1:22:04सिग्मा स्टार। सिग्मा स्टार काफी हाई
- 1:22:06एनर्जी का लेवल होता है। तो इस ट्रांजिशन
- 1:22:09के लिए भी इससे ज्यादा एनर्जी इसको चाहिए
- 1:22:11होती है। क्योंकि इसको तो जस्ट पाई वाले
- 1:22:13में पहुंचना है। पर इसको जो है ना सिग्मा
- 1:22:15स्टार वाले पहुंचना है। इसमें सबसे ज्यादा
- 1:22:18लगेगी एनर्जी पर इसमें दूसरे नंबर पे सबसे
- 1:22:21ज्यादा लगेगी। तो इसको भी जो है लो
- 1:22:23वेवलेंथ की ही लाइट चाहिए होगी। मतलब कि
- 1:22:25200 नैन मीटर से नीचे ही आना होगा। जो कि
- 1:22:28यूवी विजिबल में ऐसा हम कर ही नहीं पाते
- 1:22:30हैं। अब आपका सवाल एक यहां पे ये उठ रहा
- 1:22:32होगा कि भाई वैसे तो यूवी विजिबल की रेंज
- 1:22:35जो है यहां से 10 नैन मीटर से 200 नैनो
- 1:22:38मतलब कि 10 नैन मीटर से स्टार्ट होती है
- 1:22:40और 400 तक जाती है। तो आपको मैं बता दूं
- 1:22:43कि 10 नैनोमीटर की लाइट से 200 नैनोमीटर
- 1:22:45की लाइट अगर हम बात करें तो उसकी जो
- 1:22:47वेवलेंथ है वो बहुत कम है। वेवलेंथ कम
- 1:22:49होने की वजह से उसकी एनर्जी ज्यादा है।
- 1:22:51एनर्जी ज्यादा होने की वजह से उसको जब हम
- 1:22:54परफॉर्म करते हैं तो एक वैक्यूम में करते
- 1:22:55हैं। वैक्यूम मतलब एकदम एनवायरमेंट
- 1:22:57क्लोज्ड रहता है। अगर बाहर हम करेंगे तो
- 1:23:00वहां पे जो बाहर की चीजें हैं, आपकी लाइट
- 1:23:02वगैरह या जो आपकी एनवायरमेंटल कंडीशन है,
- 1:23:04वही उसको अफेक्ट कर देगी। तो हम नॉर्मली
- 1:23:06अपवर्ड से समझे तो यूवी को हम स्टार्ट
- 1:23:09करते हैं यहां से 200 नैनोमीटर से 200 से
- 1:23:12400। उससे नीचे भी यूवी रीजन ही होता है।
- 1:23:15पर वो हम यूज़ में नहीं लेते हैं। उसको एक
- 1:23:17स्पेसिफिक कंडीशन में ही यूज किया जाता
- 1:23:19है। कौन सी कंडीशन? यहां पे वही जो अभी
- 1:23:22मैं आपको समझा रहा हूं। यहां पे जब ज्यादा
- 1:23:24लाइट की ज्यादा एनर्जी की जरूरत पड़े तो आप
- 1:23:26इसकी एनालिसिस कर सकते हैं यूवी विज़िबल
- 1:23:29स्पेक्ट्रोस्कोपी से इसकी आप स्प UV
- 1:23:32विज़िबल स्पेक्ट्रोस्कोपी से नहीं कर सकते
- 1:23:33इन दोनों की और आप इसकी भी कर सकते हैं
- 1:23:36भाई इसकी तो वेव यहां से यहां पहुंचाना है
- 1:23:38मतलब कि ज्यादा एनर्जी नहीं चाहिए मतलब कि
- 1:23:40कम एनर्जी चाहिए तो ज्यादा वेवलेंथ दे दो
- 1:23:42सिंपल सा कॉन्सेप्ट रखो तो आपके दिमाग में
- 1:23:45अब एक सवाल एकदम क्लियर हो गया होगा कि जो
- 1:23:47यूबी विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी की जो
- 1:23:49थ्योरी है वो ये कहती है कि इलेक्ट्रॉन को
- 1:23:52ट्रांजिशन करो करो उनको एनर्जी दो। वो
- 1:23:54हायर स्टेट में जाएंगे। एब्सॉर्ब करके
- 1:23:56लाइट को कितनी लाइट वो एब्सॉर्ब करे बस
- 1:23:58उसी से उनकी क्वांटिटी पता लगा दो। अब
- 1:24:00यहां पे जो है ये चीज में ध्यान देना है।
- 1:24:03पाई टू पाई स्टार ट्रांजिशन उन्हीं
- 1:24:04कंपाउंड में होता है जिसमें डबल या ट्रिपल
- 1:24:07बॉन्ड होता है। दूसरा नॉन बॉन्डिंग नॉन
- 1:24:10बॉन्डिंग टू सिग्मा स्टार ट्रांजिशन उनमें
- 1:24:12होता है जिसमें डबल या ट्रिपल बॉन्ड तो
- 1:24:15होता ही होता है। साथ के साथ नॉन बॉन्डिंग
- 1:24:17इलेक्ट्रॉन भी होते हैं। जो एक्स्ट्रा
- 1:24:18इलेक्ट्रॉन जिन्होंने बॉन्ड नहीं बना रखा।
- 1:24:20समझ गए? ये सारा फंडा है। तो आपके दिमाग
- 1:24:23में अब ये क्वेश्चन एकदम क्लियर हो गया
- 1:24:25होगा। एक यूज़ समझ आया होगा यूवी विजिबल
- 1:24:27स्पेक्ट्रोस्कोपी का कि आप ये पता कर सकते
- 1:24:29हैं कि किस कंपाउंड में डबल या ट्रिपल
- 1:24:31बॉन्ड है और किस में सिंगल बॉन्ड है। यानी
- 1:24:34कि कंजुगेशन और नॉन कंजुगेशन ये आप पता
- 1:24:36लगा सकते हैं। ठीक है? ये है आपका इसकी
- 1:24:39थ्योरी। आई होप आपने इस तरीके से समझ आया।
- 1:24:41आपको ऐसे ही इसको लिखना है। ठीक है? अब
- 1:24:44इंस्ट्रूमेंटेशन की बात करते हैं।
- 1:24:45वैसे-जैसे मैंने आपको वीडियो में दिखाया।
- 1:24:47आपको एकदम वो प्रैक्टिकली समझ आया होगा कि
- 1:24:49कैसे यह मशीन काम करेगी। तो जो
- 1:24:52इंस्ट्रूमेंट यूवी विजिबल
- 1:24:53स्पेक्ट्रोस्कोपी में यूज़ किया जाता है ना
- 1:24:55उसको हम यूवी विजिबल स्पेक्ट्रोफोटोमीटर
- 1:24:57बोलते हैं। अब इसके कई सारे पार्ट हैं जो
- 1:24:59कि बीफा में पढ़ के आ रहे हैं। जैसे लाइट
- 1:25:02सोर्स और एक पूरा वेवलेंथ सेक्टर। इसको हम
- 1:25:05बोलते हैं मोनोक्रोमेटर भी बोल देते हैं।
- 1:25:08फिर आता है सेल क्यूबेट सेल या क्यूबेट
- 1:25:11जिसमें सैंपल भरा जाता है। फिर डिटक्टर
- 1:25:13आता है। फिर रिकॉर्डर आता है। बस पांच
- 1:25:15चीजें हैं। इनके बारे में लिखना है। सोर्स
- 1:25:17ऑफ लाइट लाइन की जिससे आपको रेडिएशन
- 1:25:20मिलेगा। वेवलेंथ को जो सेलेक्ट करेगा
- 1:25:22सैंपल जिसमें भरा जाएगा जो डिटेक्ट करेगा
- 1:25:24और जो आपको रिकॉर्ड करके डिस्प्ले पे
- 1:25:26दिखाएगा। ये चीजें मैंने आपको बता ही दी
- 1:25:28हैं कि ये इस तरीके के सैंपल भरते हैं
- 1:25:30इसमें और ये पूरा फिनोमिना ऐसे होता है।
- 1:25:32ब्रडो भी मैंने आपको दिखा ही दिया है। अब
- 1:25:34पहले हम बात कर लेते हैं सोर्स ऑफ
- 1:25:36रेडिएशन। तो एक ऐसा सोर्स हो रेडिएशन का
- 1:25:39जो हमको इस वेवलेंथ की लाइट दे यानी कि
- 1:25:42200 नैनोमीटर से 800 नैनोमीटर की। तो उसके
- 1:25:45दो-तीन एग्जांपल आपने ध्यान रखने हैं। यही
- 1:25:47जो लाइट है हमारे उन्हीं जो इलेक्ट्रॉन जो
- 1:25:49बाहरी इलेक्ट्रॉन होते हैं बाहरी कक्षा
- 1:25:51में बाहरी ऑर्बिटल में उनको एक्साइट करती
- 1:25:53है वो हायर स्टेट में जाते हैं और हमारी
- 1:25:55सारी प्रोसेस स्टार्ट होती है। तो उसके
- 1:25:57लिए आपके आपके सामने अगर आपको स्पेशली
- 1:26:00यूवी रीजन की रेडिएशन चाहिए तो आपको
- 1:26:03ड्यूटेरियम लैंप का यूज़ करना होगा उसी
- 1:26:05मशीन के अंदर जिसकी जो रेंज है वो 200 से
- 1:26:09400 नैनोमीटर होती है। यह आपको इमेज भी
- 1:26:11नजर आ रही है। अगर आपको अ विज़िबल रीजन के
- 1:26:15अंदर के लिए जाना है, 400 नैनोमीटर से ऊपर
- 1:26:17की अगर आपको वेवलेंथ की लाइट चाहिए तो
- 1:26:18आपने टंगस्टन लैंप लगानी होगी उसी मशीन के
- 1:26:20अंदर। दिस लैंप इज़ यूज्ड फॉर विज़िबल रीज़न।
- 1:26:23अभी जो लेटेस्ट जो मशीनें आ रही है उनमें
- 1:26:25आप फिक्स्ड कर सकते हैं। मतलब कि जैसे
- 1:26:27कंप्यूटर पे आपने डेटा में डाला कि भाई
- 1:26:29मुझे इतने नैनोमीटर से इतने नैनोमीटर
- 1:26:31चाहिए। वो अपने आप ही वहां पे सेट कर देता
- 1:26:33है। तो वही लिखा है कि सम इंस्ट्रूमेंट
- 1:26:35यूज़ बोथ लैंप टुगेदर। वह दोनों लैंप को
- 1:26:37साथ में यूज़ करते हैं जो कि फुल वीयूबी
- 1:26:39विज़िबल रेंस को कवर करते हैं। यह दोनों एक
- 1:26:42साथ बस आपने वहां पे डाटा फ़ करना होता है
- 1:26:44कि भाई कंप्यूटर को एक आप एक डेट मतलब कि
- 1:26:46बोलते हैं एक कमांड देते हैं कि इतने
- 1:26:49नैनोमीटर से इतने नैनोमीटर की रेंज की
- 1:26:51लाइट मेरे को चाहिए। वो आपके सामने वहां
- 1:26:53पे होती है। ठीक है? आगे है आपका वेवलेंथ
- 1:26:56सेक्टर जो कि एक पर्टिकुलर वेवलेंथ को
- 1:26:58सेलेक्ट करता है। ये भी हमने देखा था एकदम
- 1:27:00फिनोमिना में कि जैसे यहां पे लाइट सोर्स
- 1:27:02निकला। यह अभी देखो येलो कलर की लाइट जा
- 1:27:05रही है। आगे चल के प्रिज्म पे पड़ेगी। ये
- 1:27:07सात कलर में डिवाइड होगी। उसमें से एक
- 1:27:09पर्टिकुलर एक कलर जैसे कि रेड या यहां पे
- 1:27:12ये ऑरेंज कलर आगे जा रहा है। तो इसी को
- 1:27:14बोलते हैं मोनोक्रोमेटर। तो यहां पे इस
- 1:27:17तरीके से आप देखोगे ये मोनोक्रोमेटर भी दो
- 1:27:20टाइप के होते हैं। प्रिज़्म वाला और
- 1:27:22ग्राफ्टिंग वाला। तो लिखा है कि इट
- 1:27:24सेलेक्ट सिंगल वेवलेंथ फ्रॉम द फुल
- 1:27:27स्पेक्ट्रम ऑफ़ लाइट। फुल स्पेक्ट्रम ऑफ
- 1:27:29लाइट से जो पूरा सात कलरों का जो
- 1:27:31स्पेक्ट्रम बन रहा है उससे एक पर्टिकुलर
- 1:27:33वेवलेंथ जैसे कि ब्लू कलर का या यहां पे
- 1:27:35येलो कलर का ग्रीन कलर का उसको ये सेलेक्ट
- 1:27:37करते हैं। मोनोक्रोमेटर मेड अप ऑफ मेड
- 1:27:40यूजिंग प्रिज्म और डिफ्रेक्शन ग्राफ्टिंग
- 1:27:43या तो वो ग्राफ्टिंग से बने होते हैं या
- 1:27:45प्रिज्म से। इट अलाउस ओनली द रिक्वायर्ड
- 1:27:48वेवलेंथ टू पास टुवर्ड द सैंपल। जो ज़रूरी
- 1:27:50वेवलेंथ होती है, यह केवल उसी को आगे जाने
- 1:27:53देते हैं। बाक़ी को रोक लेते हैं ताकि
- 1:27:55एब्सॉर्बेंस की जो मेज़रमेंट हो रही है
- 1:27:57एक्यूरेटली वो हो सके एक पर्टिकुलर
- 1:27:59वेवलेंथ पर। ठीक है? ये है आपका वेवलेंथ
- 1:28:01सेक्टर। आगे है आपका सैंपल होल्डर जिसको
- 1:28:05हम क्यूबवेट बोलते हैं। ये जो क्यूबवेट है
- 1:28:08अगर बात करें तो यही है जिसमें सैंपल हम
- 1:28:11भरते हैं। और लिखा है सिंपली इट होल्ड्स द
- 1:28:15लिक्विड सैंपल थ्रू विद अ सिलेक्टेड लाइट
- 1:28:18पाससेस। और अह यह यूवी रीजन के लिए
- 1:28:21क्वार्ड्स की बनी होती है। अगर आपने
- 1:28:23विज़िबल रीजन के लिए चाहिए तो वह ग्लास की
- 1:28:25बनी होती है। देखो अगर आपने जो वेवलेंथ है
- 1:28:28लाइट की अगर वो 400 से 800 नैन मीटर की
- 1:28:31अगर डालनी है ट्रांसपेरेंट आर-पार करानी
- 1:28:33है तो वो ग्लास वाला क्यूबइड लेना होगा।
- 1:28:36अगर 200 से 400 के बीच की बस पास करानी है
- 1:28:38तो आपने क्वार्ट्स का क्यूब जो बना है वो
- 1:28:40लेना होगा। ठीक है? अगर स्टैंडर्ड पाथ
- 1:28:43लेंथ की बात करें तो इसकी यूजली 1 सें.मी.
- 1:28:46होती है। देखो ये वाला जो हिस्सा है और
- 1:28:48इसके पीछे वाला हिस्सा है ना या ये वाला
- 1:28:51या इसके पीछे वाला ये ट्रांसपेरेंट रहता
- 1:28:53है एकदम और यहां से यहां तक की जो दूरी है
- 1:28:56इसी को बोलते हैं पाथ लेंथ वो 1 सें.मी.
- 1:28:59होती है। यही लंब्स वेयर लंब्स लॉ वाले जो
- 1:29:02फ़ूले में रखी जाती है। ठीक है? वो सब काम
- 1:29:05हमने अपने हाथ और दिमाग से नहीं करना। वो
- 1:29:06सब कंप्यूटर करता है। जस्ट यह आपने
- 1:29:08प्रिंसिपल समझने के लिए चीजों को याद रखना
- 1:29:10है।
- 1:29:12ठीक है? आगे आता है डिटक्टर। डिटक्टर जो
- 1:29:14है मतलब कि जो लाइट है कितनी अब्सॉर्ब हुई
- 1:29:18है। है ना? वह डिटेक्ट करता है और उस
- 1:29:21डिटेक्टेड लाइट से ही हम पता लगाते हैं कि
- 1:29:23भाई यहां पे कितनी क्वांटिटी है सैंपल की।
- 1:29:26इट कन्वर्ट्स द रिमेनिंग लाइट इंटू
- 1:29:28इलेक्ट्रिकल सिग्नल। कॉमन डिटक्टर जो यूज़
- 1:29:30होते हैं फोटो डायोड, फोटो मल्टीप्लाई
- 1:29:32ट्यूब यहां पे ये यूज़ किए जाते हैं।
- 1:29:33पीएमटी सबसे कॉमन है। हाईली सेंसिटिव यह
- 1:29:36होता है। देखिए सिंपल सा कांसेप्ट है। आप
- 1:29:38समझिए।
- 1:29:41जैसे हमने यहां पर लाइट दी। एक पर्टिकुलर
- 1:29:44यहां से हमारी लाइट आई सैंपल से। यहां पर
- 1:29:46इंसिडेंट लाइट है I नॉट। एक पर्टिकुलर
- 1:29:49इंटेंसिटी के साथ लाइट आई और वो एक
- 1:29:52पर्टिकुलर इंटेंसिटी के साथ बाहर निकली।
- 1:29:54है ना? तो कुछ अमाउंट ऑफ लाइट यहां पे
- 1:29:57एब्जॉर्ब हो गई है। अब डिटक्टर का काम
- 1:29:59सिर्फ ये है कि भाई हमने दी तो लाइट इतनी
- 1:30:02थी और हमारे पास इतनी पहुंची। तो बीच में
- 1:30:05जो गायब हुई यानी कि जो एब्जॉर्ब हुई वो
- 1:30:07कितनी एब्जॉर्ब हुई। अब जितना ज्यादा
- 1:30:09एब्जॉर्बेंस उतनी ही ज्यादा कंसंट्रेशन
- 1:30:11है। हमारा फार्मूला भी तो यही था।
- 1:30:12एब्सॉर्बेंस इज डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू
- 1:30:14कंसंट्रेशन एंड द पाथ लेंथ ऑफ द सैंपल। तो
- 1:30:18ये इसका फार्मूला है। ठीक है? तो इसी
- 1:30:21फार्मूले पे ये जो है डिटक्टर काम करता
- 1:30:23है।
- 1:30:25तो ये पीएमटी काफी सेंसिटिव होता है। जैसे
- 1:30:28कि पीएमटी ये मैंने दिखा रखा है। ये फोटो
- 1:30:30मल्टीप्लायर ट्यूब। जैसे इसमें एक फोटन या
- 1:30:33मिनिमम एक दो इलेक्ट्रॉन से भी आप पूरा
- 1:30:36डेटा यहां पे जनरेट कर सकते हैं। जैसे कि
- 1:30:38इनकमिंग फोटोन एक है। इसमें कई सारे
- 1:30:40डायनोड होते हैं। तो एक से दो, दो से चार,
- 1:30:42चार से 10, 10 से 15 बहुत सारे मल्टीपल बन
- 1:30:44जाते हैं। एक बहुत ही अच्छा आउटपुट यहां
- 1:30:47पे हमको मिलता है। ठीक? ये रियली में कुछ
- 1:30:50इस तरीके से दिखता है। ये सब कुछ फिट होता
- 1:30:52है उसी स्पेक्ट्रोफोटोमीटर छोटी सी मशीन
- 1:30:55के अंदर ही जो आपको हमने स्टार्टिंग में
- 1:30:58ही यहां पे दिखा दी थी। इस मशीन के अंदर
- 1:31:00ये सारा सेटअप होता है। ये सब चीजें अलग
- 1:31:02से नहीं खरीदनी होती है। ठीक? अब आगे यहां
- 1:31:05पे आपको मिलेगा रिकॉर्डर एंड डिस्प्ले। इट
- 1:31:07शोज़ द रिजल्ट एज ए वैल्यू और ए ग्राफ। कि
- 1:31:11एक ग्राफ के रूप में या वैल्यू के रूप में
- 1:31:13यह जो है आपको डेटा दिखाती है। आउटपुट इज़
- 1:31:16शोन एज एजॉर्बेंस और ट्रांसमिटेंस। जो
- 1:31:19वैल्यू होती है या आउटपुट जो होता है या
- 1:31:21तो अब्सॉर्बेंस दिखाया जाता है कि कितनी
- 1:31:22लाइट अब्सॉर्ब हुई है या यह दिखाया जाता
- 1:31:25है कि भाई कितनी लाइट अब्सॉर्ब नहीं हुई
- 1:31:27है। मतलब हमने यहां पे इतनी लाइट दी पर
- 1:31:30हमारे पास यहां पे इतनी लाइट पहुंच गई
- 1:31:32मतलब जो लाइट एब्जॉर्ब नहीं हुई है वो
- 1:31:34मेजर कर ली जाती है। तो हमें ये पता लग
- 1:31:35जाता है कि एब्जॉर्ब आखिर हुई कितनी है।
- 1:31:38ठीक है? तो ये दो तरीके हैं। सम
- 1:31:39इंस्ट्रूमेंट गिव अ ग्राफिकल स्पेक्ट्रम।
- 1:31:42कुछ इंस्ट्रूमेंट ग्राफ में देते हैं। कुछ
- 1:31:44जो मॉडर्न जो इंस्ट्रूमेंट है वह
- 1:31:46डायरेक्टली आपका डाटा ही देते हैं डिजिटल
- 1:31:48स्क्रीन पर। ठीक है? तो यह है आपका पूरा
- 1:31:50इंस्ट्रूमेंटेशन यूवी विजिबल
- 1:31:52स्पेक्ट्रोस्कोपी का। अब इसके हम
- 1:31:54एप्लीकेशन की बात कर लेते हैं कि आखिर
- 1:31:57इसका क्या काम है? कहां पे ये यूज़ होगी?
- 1:31:59तो पहला काम है क्वालिटेटिव एनालिसिस।
- 1:32:02क्वालिटी, क्वालिटेटिव से आप क्या समझते
- 1:32:04हैं? किसी भी कंपाउंड की क्वालिटी को पता
- 1:32:06करना। तो यूवी वििजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी
- 1:32:08से आप किसी भी कंपाउंड के अंदर क्रोमोफोर
- 1:32:11को पता लगा सकते हैं। क्रोमोफोर आप जानते
- 1:32:14हैं मतलब कि वो केमिकल या वो पर्टिकुलर
- 1:32:16ग्रुप ऑफ एटम जो कलर शो करता है किसी भी
- 1:32:20कंपाउंड में। कलर शो करने का मतलब है यही
- 1:32:22एक्चुअली में लाइट को एब्सॉर्ब करते हैं
- 1:32:24और वो हायर स्टेट में जाते हैं। इनहीं में
- 1:32:26वाइब्रेशन वगैरह भी होता है जो आप आईआर
- 1:32:28स्पेक्ट्रोस्कोपी में देखोगे। ठीक है? और
- 1:32:31आप कंजुगेटेड और नॉन कंजुगेटेड कंपाउंड को
- 1:32:34पता कर पाएंगे। आपको याद है जब अभी मैं
- 1:32:36आपको ये वाला ग्राफ समझा रहा था। आपको
- 1:32:38मैंने यहां पे एकदम टिक करके बताया था कि
- 1:32:41यहां पे आप सिंगल कम सिंगल बॉन्ड वाले
- 1:32:44नहीं कर पाएंगे। डबल बॉन्ड वाले कर पाएंगे
- 1:32:45और डबल बॉन्ड वाले विद नॉन बॉन्डिंग
- 1:32:47इलेक्ट्रॉन वाले भी कर पाएंगे। तो आपको
- 1:32:50अंतर समझ आया होगा कि कंजुगेटेड और नॉन
- 1:32:52कंजुगेटेड कंपाउंड भी इससे आइडेंटिफाई किए
- 1:32:55जा सकते हैं। किसकी मदद से? यूवी विजिबल
- 1:32:57स्पेक्ट्रोस्कोपी की मदद से। यह इसका
- 1:33:00क्वालिटेटिव एनालिसिस में रोल है।
- 1:33:02क्वांटिटेटिव मतलब क्वांटिटी पता करने में
- 1:33:04आप किसी भी ड्रग या फार्मुलेशन की
- 1:33:06कंसंट्रेशन को पता कर सकते हैं। है ना?
- 1:33:08उसमें जो इंप्युरिटी है उसको पता कर सकते
- 1:33:11हैं। आगे वही है प्यूरिटी टेस्टिंग कि इट
- 1:33:15इज यूज्ड टू डिटेक्ट इंप्युरिटीज और
- 1:33:17डिग्रेडेड प्रोडक्ट इन अ सैंपल। कि किसी
- 1:33:20भी सैंपल में डिग्रेडेड या बोले तो जो
- 1:33:22इंप्युरिटी है उन चीजों का पता कर सकते
- 1:33:25हैं। आगे है फार्मकोकाइनेटिक स्टडीज। अगर
- 1:33:28हम फार्माकोलॉजी के हिसाब से देखें तो
- 1:33:30फार्माकोइनेटिक स्टडी जैसे कि अबजॉर्प्शन,
- 1:33:33डिस्ट्रीब्यूशन और एलिमेशन इन सभी की
- 1:33:36स्टडी आप यूबी विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी से
- 1:33:38कर सकते हैं। अब सवाल आएगा कि ये कैसे
- 1:33:40करेंगे? जैसे सपोज़ करो किसी पर्टिकुलर
- 1:33:43पेशेंट को क्लीनिकल ट्रायल के दौरान आपने
- 1:33:45दवाई दी। वो दवाई अब्सॉर्ब हो के उसके
- 1:33:47ब्लड में जाएगी। अब आप उसके ब्लड का सैंपल
- 1:33:50लेंगे। उस ब्लड के सैंपल से पर्टिकुलरली
- 1:33:52अब आप यह देखेंगे कि इस ब्लड के सैंपल में
- 1:33:55कितना अमाउंट है ड्रग का। ड्रग की
- 1:33:57क्वांटिटी पता करेंगे किस में? ब्लड में।
- 1:33:59किसकी मदद से? यूवी विजिबल
- 1:34:01स्पेक्ट्रोस्कोपी की मदद से। ऐसे ही
- 1:34:03डिस्ट्रीब्यूशन कि भाई इस पर्टिकुलर ऑर्गन
- 1:34:06में कितनी ड्रग डिस्ट्रीब्यूट हुई है जैसे
- 1:34:08लीवर में या फिर किडनी में या फिर और भी
- 1:34:11जगह तो आप उसका भी डिस्ट्रीब्यूशन भी पता
- 1:34:14कर पाएंगे। एलिमिनेशन कितना हुआ है? यूरिन
- 1:34:16के सैंपल से आप पता कर पाएंगे। ठीक है?
- 1:34:19आगे है क्लोरीमेट्रिक ऐसे। इट इज़ यूज्ड टू
- 1:34:21एस्टिमेट प्रोटीन, डीएनए और एंजाइम इन
- 1:34:24बायोलॉजिकल सैंपल। जो भी और सैंपल होते
- 1:34:25हैं बायोलॉजिकल सैंपल जैसे कि आपका ब्लड
- 1:34:28या यूरिन या और भी चीजें उनमें आप प्रोटीन
- 1:34:32या डीएनए या एंजाइम वगैरह उनको भी फाइंड
- 1:34:34आउट कर पाएंगे इसकी मदद से। समझ आया? ये
- 1:34:37है आपका यूबी विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी कि
- 1:34:39वो कैसे काम करता है। उसकी मशीन हमने
- 1:34:41डिटेल में देखी। उसका पूरा प्रिंसिपल और
- 1:34:43सारे फंडामेंटल। अब यहां पे हमने ये भी
- 1:34:46बोला था कि एक क्वेश्चन अलग से ये भी आ
- 1:34:48जाता है कि चॉइस ऑफ सॉल्वेंट कि आखिर कौन
- 1:34:52सा सॉल्वेंट यूज किया जाएगा इस यूबी
- 1:34:55विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी में सैंपल को
- 1:34:57डिॉल्व करने के लिए। देखो सैंपल आपका हो
- 1:35:00सकता है सॉलिड फॉर्म में हो या लिक्विड
- 1:35:02फॉर्म में ही क्यों ना हो पर उसको अच्छे
- 1:35:03से डिॉल्व करना बहुत जरूरी है। सॉल्यूशन
- 1:35:06बनाना उसका जरूरी है। तो सॉल्यूशन जो है
- 1:35:08एक सॉल्वेंट में जब डिॉल्व करेगा सॉल्यूट
- 1:35:10को तभी बन पाएगा। तो चॉइस ऑफ सॉल्वेंट
- 1:35:12आखिर कौन सा सॉल्वेंट यूज करना है यूवी
- 1:35:14विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी में और उस
- 1:35:17सॉल्वेंट का क्या इफेक्ट पड़ता है यूवी
- 1:35:19विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी पे वो भी बताना
- 1:35:21है। ठीक है? अब ये जो क्वेश्चन है ये अगर
- 1:35:26बात करें तो हमने यहां से लिख रखा है
- 1:35:28चीजों को चॉइस ऑफ सॉल्वेंट। आपके दिमाग
- 1:35:31में एक सवाल ये क्लियर होना चाहिए कि हमको
- 1:35:34ऐसा सॉल्वेंट चाहिए जो खुद यूवी वििबल
- 1:35:37लाइट को एब्सॉर्ब ना करे। मतलब जैसे हमने
- 1:35:40अभी माना कि भाई जो ऊपर से अगर हम समझे तो
- 1:35:44200 नैन मीटर से 800 नैन मीटर के बीच में
- 1:35:48हमारी यहां पे यूवी विजिबल रीजन स्टार्ट
- 1:35:51होता है 200 से 800 ठीक अब ये पर्टिकुलर
- 1:35:55कोई हमारा क्यूबेट है। क्यूबेट में हमने
- 1:35:58सैंपल भर दिए सैंपल यानी कि एक सॉल्यूशन
- 1:36:01बना के इसमें आपका मेन सॉल्यूट जिसकी
- 1:36:04एनालिसिस करनी है वो भी है और सॉल्वेंट भी
- 1:36:07है। सपोज़ करो वाटर में आपने कोई पर्टिकुलर
- 1:36:10ड्रग को मिला करके रख दिया।
- 1:36:12ठीक? अब आपने यहां से यह लाइट सोर्स है।
- 1:36:16यहां से लाइट निकलेगी और लाइट इसके आर पर
- 1:36:18जानी है। अब आप तो ये चाहेंगे ना कि जो भी
- 1:36:22लाइट आप भेज रहे हैं वो आपके सॉल्यूट के
- 1:36:24द्वारा ही एब्जॉर्ब की जाए। अगर हो कि भाई
- 1:36:27आपका जो सॉल्वेंट है अगर वो भी लाइट को
- 1:36:28एब्सॉर्ब करने लग गया तो भाई आपका डाटा तो
- 1:36:31गलत हो जाएगा। मतलब आपके पास जो सॉल्वेंट
- 1:36:33आप जो सेलेक्ट करोगे ना ऐसा सॉल्वेंट
- 1:36:35सेलेक्ट करना है जो 200 नैन मीटर से 800
- 1:36:38नैनोमीटर की वेवलेंथ को अब्सॉर्ब खुद ना
- 1:36:41करे। अगर खुद कर दिया मतलब कि वो डेटा को
- 1:36:44खराब कर रहा है। तो हमें कौन सा सेलेक्ट
- 1:36:46करना चाहिए? 200 नैन मीटर से कम का। 200
- 1:36:49नैन मीटर से वेवलेंथ जिसकी कम वो अब्सॉर्ब
- 1:36:52करता है उसको हम सेलेक्ट करेंगे या 800
- 1:36:55नैनोमीटर से ज्यादा जो अब्जॉर्ब करता है
- 1:36:57उसको हम सेलेक्ट करेंगे। ठीक? कुछ हद तक
- 1:37:00चल जाता है। 210 भी यहां पे चल जाता है।
- 1:37:02210 नैनोमीटर क्योंकि एक दो हम यूज़ करते
- 1:37:05हैं जो 210 तक भी अब्सॉर्ब करते हैं। पर
- 1:37:0710 से थोड़ा फर्क नहीं पड़ता है। तो आपको
- 1:37:10मोटा-मोटा ये समझना है कि 200 नैनोमीटर से
- 1:37:13कम वेवलेंथ जो भी सॉल्वेंट अब्सॉर्ब करेगा
- 1:37:16हम उसको यूवी विज़िबल स्पेक्ट्रोस्कोपी में
- 1:37:19यूज़ करेंगे। क्यों यूज़ करेंगे? क्योंकि वो
- 1:37:21हमारे डेटा में इंटरफेयर नहीं करेगा। या
- 1:37:23फिर 800 नैनोमीटर से ऊपर वाला। सिंपल समझ
- 1:37:25आ गया। और दो चीज एक और चीज ये ध्यान रखनी
- 1:37:28है कि ऐसा सॉल्वेंट आपने यूज करना है जो
- 1:37:31इस सॉल्यूट को ना कंप्लीटली डिॉल्व करे
- 1:37:35कंप्लीटली डिॉल्व करे और इसकी इसके साथ
- 1:37:38रिएक्शन वगैरह ना करे इसको स्टेबल बना के
- 1:37:41रखे ऐसा वो होना चाहिए। ठीक है? तो चॉइस
- 1:37:43ऑफ सॉल्वेंट आपको थोड़ा-थोड़ा अंदाजा लग
- 1:37:45रहा हो कि कैसा सॉल्वेंट चाहिए। तो लिखा
- 1:37:47है कि चॉइस ऑफ़ सॉल्वेंट में एक गुड
- 1:37:49सॉल्वेंट मस्ट। एक अच्छा सॉल्वेंट कौन सा
- 1:37:51होगा? दैट नॉट एब्जॉर्ब इन द सेम रेंज ऐज़
- 1:37:55द सैंपल। वह उस रेंज की लाइट या ईएमआर को
- 1:37:58एब्सॉर्ब नहीं करेगा जिस जो सैंपल
- 1:38:01अब्सॉर्ब कर रहा है। ठीक? ओके? दूसरा है
- 1:38:04वी केमिकली इनर्ट। वो हमारे सैंपल के साथ
- 1:38:06रिएक्शन भी ना करता हो। वो केमिकली इनर्ट
- 1:38:09हो। तीसरा वो ट्रांसपेरेंट हो आपके यूवी
- 1:38:12विज़िबल रीजन के लिए या रेंज के लिए। सिंपल
- 1:38:15समझ आ गया। अब कॉमन सॉल्वेंट जो यूवी
- 1:38:18विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी में यूज किए जाते
- 1:38:20हैं वो है वाटर। वाटर जो है अगर मैं बात
- 1:38:22करूं तो यह शायद 190 नैन मीटर या 200
- 1:38:25नैनोमीटर से कम की ही वेवलेंथ को ये
- 1:38:28अब्सॉर्ब करता है। तो ये हमारे लिए मतलब
- 1:38:30कि ये मतलब कि एक तरीके से आप इसको यूज़ कर
- 1:38:34सकते हैं। हमारे लिए एलिजिबल है ये। दूसरा
- 1:38:36इथेनॉल और मिथेनॉल। इथेनॉल जो यूज़ ये करता
- 1:38:39है ये 210 नैनोमीटर की लाइट को अब्सॉर्ब
- 1:38:42करता है और ये 205 के करीब की नैनोमीटर की
- 1:38:45लाइट को अब्सॉर्ब करता है। तो यानी कि ये
- 1:38:47भी हमारे लिए एलिजिबल है। 10 पांच से कोई
- 1:38:49फर्क नहीं पड़ता। इतना ये यूज़ किए जाते
- 1:38:51हैं और ज्यादातर यही यूज़ किए जाते हैं।
- 1:38:53ठीक है? नेक्स्ट है हमारा साइक्लो हेक्सेन
- 1:38:55एंड हेक्सेन जो हमारे नॉन पोलर सॉल्वेंट
- 1:38:58है। ये भी 200 नैनोमीटर से कम की ही
- 1:39:01वेवलेंथ की लाइट को ये अब्सॉर्ब करते हैं।
- 1:39:03ठीक है? बाकी और भी जैसे आपकी कंपोनेंट
- 1:39:06में जैसे केमिकल हो जैसे कि बेंजीन हुआ या
- 1:39:09फिर आपका कोई एसीटोन वगैरह हुआ या और कोई
- 1:39:12हुए तो वो जो है ना एज अ सॉल्वेंट यूज़
- 1:39:15नहीं की जा सकते क्योंकि वो तो खुद ही
- 1:39:17उसकी वेवलेंथ की लाइट को अब्सॉर्ब करते
- 1:39:19हैं। तो हमारे दिमाग में ये ध्यान रहना
- 1:39:21चाहिए कि हमको ऐसा सॉल्वेंट यूज़ करना है
- 1:39:23जो कि यूवी विज़िबल रेंज की लाइट को
- 1:39:25अब्सॉर्ब ना करें। अब ये जो आपने सॉल्वेंट
- 1:39:28यूज़ करे ना इनका भी इफेक्ट पड़ता है किस
- 1:39:30पर? आपकी यूवी विज़िबल स्पेक्ट्रोस्कोपी
- 1:39:32पर। कैसे? तो देखिए एक कांसेप्ट ध्यान
- 1:39:35रखना है कि लाइक डिॉल्व लाइक कि आपने जो
- 1:39:38है पोलर कंपाउंड के लिए पोलर सॉल्वेंट
- 1:39:40सेलेक्ट करना होता है। नॉन पोलर के लिए
- 1:39:41नॉन पोलर सॉल्वेंट सेलेक्ट करना होता है।
- 1:39:43ठीक है? फिर भी यहां पे उनका कुछ इफेक्ट
- 1:39:45पड़ता है। जैसे कि सॉल्वेंट कैन अफेक्ट
- 1:39:47पोजीशन एंड इंटेंसिटी ऑफ़ एब्जॉर्प्शन पीक।
- 1:39:50कि सॉल्वेंट की वजह से कई बारी जो पोजीशन
- 1:39:54होती है अबजॉर्प्शन की या जो इंटेंसिटी
- 1:39:56होती है अबजॉर्प्शन की वो यहां पे कम या
- 1:39:58फिर ज्यादा हो जाती है। एग्जांपल जैसे कि
- 1:40:00पोलर सॉल्वेंट मे कॉज बैथोक्रोमिक शिफ्ट।
- 1:40:04जो पोलर सॉल्वेंट होते हैं। ठीक है? जो
- 1:40:07पोलर नेचर के होते हैं वो बैथोक्रोमिक
- 1:40:09शिफ्ट कॉज करते हैं। मतलब कोई भी कंपाउंड
- 1:40:12वो ज्यादा वेवलेंथ की लाइट को यहां पे
- 1:40:14एब्सॉर्ब करेगा। लगर जैसे कि आपने ये बी
- 1:40:17फॉर्म में पढ़ा होगा। जैसे कि मैं आपको
- 1:40:18दिखा दूं। कुछ इस तरीके से चीजें आपने
- 1:40:21पढ़ी होंगी। एक तरफ अब्सॉर्बेंस दूसरे
- 1:40:23यहां पर लैम्ड मैक्स वेवलेंथ। तो एक ब्लू
- 1:40:26शिफ्ट होती है, एक रेड शिफ्ट होती है, एक
- 1:40:28हाइपोक्रोमिक शिफ्ट होती है, एक हाइपो
- 1:40:30क्रोमिक शिफ्ट होती है। कि अगर जो है जैसे
- 1:40:33कि रेड यानी कि वेवलेंथ बढ़ रही है कि से
- 1:40:37सॉल्वेंट की वजह से कई बारी क्या होता है
- 1:40:39पोलर सॉल्वेंट की वजह से कि जो यह
- 1:40:41बैथोक्रोमिक शिफ्ट कॉज करते हैं कि
- 1:40:43कंपाउंड जो कम वेवलेंथ ही एब्सॉर्ब करता
- 1:40:46है वो ज्यादा वेवलेंथ की लाइट को एब्सॉर्ब
- 1:40:48करता है। देखो पैथोक्रोमिक शिफ्ट बोले तो
- 1:40:51टुवर्ड्स लगर वेवलेंथ इधर को वेवलेंथ बढ़
- 1:40:54रही है तो रेड शिफ्ट यानी कि लैम्ब्डा
- 1:40:56मैक्स यहां पे इनक्रीस हो जाता है। पोलर
- 1:40:59सॉल्वेंट ये कॉज कर देते हैं। ये इनका
- 1:41:01इफेक्ट है। दूसरा जो नॉन पोलर जो सॉल्वेंट
- 1:41:04है वो ब्लू शिफ्ट कॉज कर देते हैं।
- 1:41:05लैम्ब्डा मैक्स को कम कर देते हैं। इसको
- 1:41:07हम हिप्सोक्रोमिक शिफ्ट बोलते हैं। ब्लू
- 1:41:10शिफ्ट जिसको हम हिप्सोक्रोमिक शिफ्ट बोलते
- 1:41:12हैं। ये यानी कि शॉर्टर वेवलेंथ को ही
- 1:41:14हमारे कंपाउंड अब्सॉर्ब करते हैं। ये
- 1:41:17थोड़ा बहुत इफेक्ट पड़ता है किसका? पोलर
- 1:41:19और नॉन पोलर सॉल्वेंट का। ठीक है?
- 1:41:22एग्जांपल जैसे कि नॉन बॉन्डिंग टू पाई
- 1:41:25स्टार ट्रांजिशंस शिफ्ट टू लगर वेवलेंथ इन
- 1:41:28पोलर सॉल्वेंट ड्यू टू हाइड्रोजन बॉन्डिंग
- 1:41:31और डपोल इंटरेक्शन। कि हाइड्रोजन बॉन्डिंग
- 1:41:34या डपोल इंटरेक्शन की वजह से जो पोलर जो
- 1:41:36सॉल्वेंट होते हैं वो नॉन बॉन्डिंग टू पाई
- 1:41:39स्टार ट्रांजिशन को थोड़ा लॉन्ग वेवलेंथ
- 1:41:42में शिफ्ट कर देते हैं जिसको हम यहां पे
- 1:41:44बैथोक्रोमिक शिफ्ट इफेक्ट बोलते हैं या
- 1:41:46बीफ में पढ़ रखे हैं। बस थोड़ा सा आपने ये
- 1:41:48चीज़ ध्यान रखनी है। ठीक है? ये क्वेश्चन
- 1:41:51इस तरीके से हमने कवर करा है। आई होप ये
- 1:41:53लॉन्ग क्वेश्चन एक तरीके से सिर्फ एक ही
- 1:41:55क्वेश्चन नहीं था। ये तीन क्वेश्चंस थे जो
- 1:41:57हमने यहां पे ऑलमोस्ट कवर कर लिए हैं।
- 1:42:00ठीक है? तो ये था यूवी वििजिबल
- 1:42:02स्पेक्ट्रोस्कोपी पूरा उसका
- 1:42:04इंस्ट्रूमेंटेशन एप्लीकेशन पूरा डिटेल में
- 1:42:06हमने अच्छी तरीके से जाना है। इसके अलावा
- 1:42:08देखिए आगे के जो भी क्वेश्चंस हैं जैसे कि
- 1:42:10यहां पे जो क्वेश्चंस हैं ये जो सारा इनका
- 1:42:13जो सॉल्यूशन वीडियोस वगैरह नोट्स वगैरह ये
- 1:42:15सब आपको फार्मेसी वाला ऐप पर मिल जाएगा।
- 1:42:17ठीक है? आपने वहां पे जाकर के जॉइ कर लेना
- 1:42:19है। सारा कंटेंट आपको वहां पे मिल जाएगा।
- 1:42:21तो ये पूरे यूनिट को आप वहां पे जाकर के
- 1:42:24कवर कर सकते हैं। तो ये था यूनिट फर्स्ट।
- 1:42:26आई होप ये अच्छे से आपको समझ आया होगा। तो
- 1:42:29यही था आज के इस वीडियो में। बाकी फिर
- 1:42:30मिलते हैं किसी नेक्स्ट वीडियो में। तब तक
- 1:42:32के लिए बाय-बाय। थैंक यू।
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