Unit-1 Educational Studies UGC NET Education Paper-2 Updated Marathons | Concept + Unit Wise PYQs — Transcript
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- 0:00हेलो नमस्कार वेलकम टू इनकलकेट लर्निंग
- 0:02अपडेटेड मैराथंस में आपका स्वागत है। जी
- 0:05यूजीसी नेट पेपर टू एजुकेशन सब्जेक्ट की
- 0:08ये मैराथोंस हैं। हर एक पेपर में वैसे तो
- 0:11सेम पैटर्न होता है कि पेपर वन में आपकी
- 0:1310 यूनिट हैं और वो 10 की 10 यूनिट सभी के
- 0:16लिए सेम है। पेपर टू आपका सब्जेक्ट
- 0:18स्पेसिफिक है। यूनिट उसमें भी 10 ही हैं।
- 0:21ठीक है? पेपर वन में से आपके क्वेश्चंस
- 0:23आते हैं कितने? 50 नंबर दो नंबर के हिसाब
- 0:26से 100 मार्क्स का क्वेश्चंस हो गए सारे
- 0:28के सारे। ठीक है? 10 वाला जो है मतलब ये
- 0:31पेपर टू जो होगा आपका जो भी सब्जेक्ट हो
- 0:33उसमें क्वेश्चंस आते हैं 100 यानी कि 200
- 0:36नंबर का क्वेश्चंस हो गए। यानी कि आपका
- 0:38टोटल 300 मार्क्स का पेपर होता है। जी।
- 0:40आपको टारगेट करना है कि आप मिनिमम 200
- 0:43प्लस बल्कि अब तो 210 प्लस 210 प्लस आप
- 0:47लेके आओगे तो आप थोड़ा सा सोच सकते हो कि
- 0:49जेआरएफ हो जाएगा। ठीक है? ये मैं एजुकेशन
- 0:52सब्जेक्ट की कट ऑफ के बारे में बता रही
- 0:53हूं। हमें अब बहुत वाइड सिलेबस है 10
- 0:56यूनिट का। ऑब्वियस सी बात है। तो उस
- 0:58यूनिट्स का उन सारी यूनिट्स को कई बार कवर
- 1:01कर पाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए ये
- 1:03मैराथनंस हैं ताकि आपको डिटेल्ड वीडियो
- 1:06में भी जाने की जरूरत ना पड़े और बेयर
- 1:08मिनिमम आप ये चीजें कर लो। सो ये मिनिमम
- 1:10और मैक्सिमम दोनों रहेंगे आपके लिए। पेपर
- 1:13वन के लिए ऑलरेडी 10 अपडेटेड मैराथों्स
- 1:16मैं लास्ट साइकिल में यानी कि अभी हम जून
- 1:182026 के लिए पढ़ रहे हैं। तो मैं दिसंबर
- 1:20के टाइम पे वो अपडेटेड मैराथों्स डाल चुकी
- 1:23हूं। वो आपके लिए मोर दैन इनफ है। आप वो
- 1:25कवर कर सकते हो। 10 की 10 मैराथन आपका 40
- 1:28प्लस स्कोरर्स जरूर बनेगा अगर आपने अच्छे
- 1:30से फॉलो किया है तो। ओके? अब और सारी की
- 1:32सारी क्लासेस इंकलकेट लर्निंग पे बिल्कुल
- 1:34एब्सोलुटली फ्री हैं। आप सारी क्लासेस देख
- 1:36के खुद के नोट्स बना सकते हो। ओके? अगर आप
- 1:38नोट्स नहीं बनाना चाहते हो बाय एनी विच
- 1:41रीज़न तो आप जो है इनकी पीडीएफ्स ले सकते
- 1:44हो। वो ऑब्वियसली पेड होगी। ठीक है? सो जो
- 1:46जिनके पास टाइम है, जो स्टूडेंट्स हैं
- 1:48प्लीज मेक योर ओन नोट्स। अपने नोट्स से
- 1:50बढ़कर कुछ नहीं होता। अब ये 10 यूनिट्स की
- 1:52अपडेटेड मैराथोंस आने वाली हैं। ये पहली
- 1:55मैराथन है जिसमें आपका स्वागत है।
- 1:57एजुकेशनल स्टडीज यानी यूनिट वन है। जी।
- 2:00ऐसे-ऐसे करके हम 10 की 10 यूनिट्स कवर
- 2:02करेंगे। कोशिश रहेगी जितनी जल्दी कवर हो
- 2:05पाए। जैसे ही मेरी मैराथन कंप्लीट होगी
- 2:07मैं रिकॉर्ड करूंगी और डाल दूंगी। ये
- 2:09प्रोसीजर रहता है। ओके? सो कोशिश रहेगी
- 2:11जल्दी से जल्दी आए। मैं भी अपनी तरफ से
- 2:13बेस्ट ट्राई करूंगी। आप भी अपनी तरफ से
- 2:15अच्छे से पढ़िए। नोट्स बनाइए और अपना बेस्ट
- 2:18दीजिए। ठीक है? इस मैराथन में जो है आपको
- 2:20पहले कांसेप्ट देखने को मिलेगा सब टॉपिक
- 2:22वाइज टॉपिक इन द सेंस क्योंकि एक्सपीरियंस
- 2:26है मुझे इतना अब कंपैरेटिवली अब तो पांच
- 2:28साल हो गए हैं पढ़ाते हुए सो इतना
- 2:29एक्सपीरियंस तो है कि किस कांसेप्ट से किस
- 2:31तरीके के क्वेश्चन आते हैं। सो आपको
- 2:33अननेसेसरी चीजें आपको इस मैराथन में देखने
- 2:36को नहीं मिलेंगी। कोई अननेसेसरी प्रमोशन
- 2:38भी देखने को नहीं मिलेगा किसी भी चीज का।
- 2:40क्योंकि अपनी तो सारी वीडियोस वैसे भी
- 2:42फ्री हैं। मैं किसी और चीज का भी प्रमोशन
- 2:44नहीं करती हूं। ओके? सो अब इस मैराथन में
- 2:46आपको कांसेप्ट्स उसके साथ-साथ प्रीवियस
- 2:48ईयर क्वेश्चंस आपको कई बार इशू होता है कि
- 2:50यूनिट वाइज़ पीवाईक्यूस कहां से करें? ओके?
- 2:53सो मैंने 2018 यानी कि जुलाई में जो पेपर
- 2:56हुआ था जून जुलाई में 2018 में तब से लेके
- 3:00जितने भी पेपर हुए हैं एजुकेशन के उन सब
- 3:03में से नेट के पेपरों की बात कर रही हूं।
- 3:05उन सब में से यूनिट वाइज़ क्वेश्चंस सॉर्ट
- 3:08कर दिए हैं। हर एक पेपर के जैसे 100
- 3:10क्वेश्चन है मान लो ये 90 क्वेश्चन हैं।
- 3:11कई बार 10 का मैराथन आ जाता है। 10
- 3:13क्वेश्चन का सॉरी कंप्रहेंशन आ जाता है।
- 3:16तो जो भी क्वेश्चंस हैं वो हर एक क्वेश्चन
- 3:18आपकी इन टोटल 10 क्लासेस में कंप्लीट हो
- 3:20जाएगा। ओके? सो इट्स लाइक आपको अलग से
- 3:23प्रीवियस ईयर क्वेश्चंस भी करने की जरूरत
- 3:25अब नहीं पड़ेगी इन मैराथोंस के बाद।
- 3:27क्योंकि अभी जून 2026 की साइकिल के लिए
- 3:30यही मैराथनस आपके लिए मोर दन इनफ है। बस
- 3:33यही भगवान है। ऐसा मान के चलो। ओके? मैं
- 3:35अपनी तरफ से बहुत अच्छा करवाने की कोशिश
- 3:37कर रही हूं। आप भी करना। ओके? सो 10
- 3:39यूनिट्स हैं। जी। पहली यूनिट आपका स्वागत
- 3:41है। वेलकम टू इंकलकेट लर्निंग एंड दिस इज़
- 3:43प्रेजेंटेड बाय मी रवीना। ओके? सो ये
- 3:46फर्स्ट यूनिट में चार पार्ट हैं। ये पहला
- 3:48पार्ट है जिसको हम कवर करेंगे। ये चीज
- 3:50मैंने सिर्फ इसलिए डाली है कि ये 17
- 3:53क्वेश्चन पेपर्स से छांट के यूनिट वाइज
- 3:56मैंने क्वेश्चंस अरेंज किए हैं। तो वो 10
- 3:59की 10 यूनिट्स में आपको इन क्वेश्चन
- 4:00पेपर्स जो हैं उनसे सारे क्वेश्चंस कवर हो
- 4:03जाएंगे। ओके? एक बार पेपर रद्द भी हुआ था।
- 4:06देखो ये मैंने लिखा भी है कि इट वा इट गॉट
- 4:08कैंसल्ड। सो इसके बाद ये हुआ था। तो मैंने
- 4:11सारे पेपर्स इंक्लूड किए हैं। ओके? अपना
- 4:13लेवल बेस्ट ट्राई करते हुए। ओके जी। अब हम
- 4:16पहले ये जो यूनिट है हमारी यूनिट का
- 4:18फर्स्ट पार्ट चार पार्ट हैं ऐसे एक में
- 4:20इन्होंने इंडियन स्कूल्स ऑफ फिलॉसफी की
- 4:22बात की है। बी पार्ट में इन्होंने
- 4:24वेस्टर्न स्कूल्स ऑफ फिलॉसोफी की बात की
- 4:27है। सी पार्ट में थोड़ी सोशियोलॉजी की बात
- 4:29की है और डी पार्ट में इन्होंने एजुकेशनल
- 4:32थिंकर्स की और नेशनल वैल्यूस की बात की
- 4:34है। ये ब्रॉड है पहली यूनिट का सिलेबस।
- 4:38यूनिट वाइज स्पेसिफिक नहीं होता कि किस
- 4:40यूनिट से कितने क्वेश्चन आएंगे। टेक्निकली
- 4:42तो बराबर-बराबर बटे हुए होने चाहिए। बट
- 4:45जैसे 2018 के टाइम पे होता था ना जून मतलब
- 4:48ये देखो ये वाला जो पेपर है इन पेपरों में
- 4:50आपको देखने को मतलब मैंने जब अरेंज की
- 4:52चीजें तो मुझे देखने को मिला कि वहां पे
- 4:54फिर भी कई बार ये होता था कि यूनिट नंबर
- 4:57थ्री से ज्यादा आ गए यूनिट नंबर वन से
- 4:58ज्यादा क्वेश्चंस आ गए लेकिन अब ऐसा नहीं
- 5:01है। अब आप कोई भी यूनिट छोड़ने का रिस्क
- 5:04नहीं उठा सकते हो अगर आप जीआरएफ के लिए
- 5:06टारगेट कर रहे हो। आपको 10 की 10 यूनिट्स
- 5:08करनी है। जितना मैं करवाऊं उतना भी आप कर
- 5:11लेंगे तो आपका जीआरएफ कहीं नहीं गया है।
- 5:13ओके? सो जो जो इंपॉर्टेंट है जो जो चीजें
- 5:15ऑलदो मैंने सारे टॉपिक्स जो भी आपके
- 5:18सिलेबस में मेंशन है सबको थोड़ा-थोड़ा टच
- 5:20करने की कोशिश करूंगी लेकिन ज्यादा
- 5:22इंपॉर्टेंट चीजें जो है उस टॉपिक से वो
- 5:24आपको देखने को मिलेंगी। तो ये रिवीजन के
- 5:26लिए भी हैं ये मैराथनंस और यही मैराथनस आप
- 5:29अगर स्टार्टिंग से भी तैयारी कर रहे हो तो
- 5:31भी हैं। ठीक है? सो मैं कोशिश करूंगी कि
- 5:33बेसिक टू एडवांस किस तरीके का क्वेश्चन
- 5:34आता है? क्या चीजें होती हैं मैं सारा
- 5:36आपको बता पाऊं। ओके? तो पहले हम क्वेश्चंस
- 5:38करें, पहले हम कांसेप्ट करेंगे। फिर हम
- 5:40क्वेश्चंस करेंगे। इन सबका टोटल मिला के
- 5:42189 क्वेश्चंस जो हैं वो आपको इस मैराथन
- 5:46में देखने को मिलेंगे। बट उससे पहले हम
- 5:47कांसेप्ट्स को कवर करेंगे। आप कोशिश करना
- 5:50ये देखना कि कांसेप्ट पढ़ने के बाद कि
- 5:52आपसे पीवाईक्यूस सॉल्व हो रहे हैं जो हम
- 5:54इसी क्लास में सॉल्व करेंगे। ओके? चलिए
- 5:56जी। अब देखो इंडियन स्कूल्स ऑफ फिलॉसोफी
- 5:59है, वेस्टर्न स्कूल्स ऑफ़ फिलॉसफी है। तो
- 6:01हमें फिलॉसोफी के बारे में बेसिक आईडिया
- 6:03होना चाहिए। सो फिलॉसोफी से रिलेटेड आपको
- 6:05ये पता होना चाहिए कि उसका मतलब क्या है।
- 6:08ओके? सो फिलॉसोफी ग्रीक वर्ड से आया है।
- 6:10ये बात याद रख लो क्योंकि ये क्वेश्चन
- 6:12पहले आता था। आजकल नहीं आता है कि कौन से
- 6:14वर्ड से आया है फिलॉसफी बट पता नहीं चलता
- 6:16सडनली कोई क्वेश्चन पॉप अप हो जाए। तो
- 6:19ग्रीक वर्ड से आया है भाई फिलो प्लस
- 6:22सोफिया। सो फिलो मतलब लव और सोफिया मतलब
- 6:25विज़डम। यानी आप विज़डम की सर्च में हैं।
- 6:28विज़डम को प्यार करते हैं। ठीक है? लव फॉर
- 6:30विज़डम लगा लो। लव ऑफ़ विज़डम लगा लो। या फिर
- 6:33आप लगा लो कि आप जो है ट्रुथ की सर्च में
- 6:35हो। ओके? इसीलिए इसका लिटरल मीनिंग जब आप
- 6:38देखोगे फिलॉसोफी का तो वो निकल के आता है
- 6:40कि फिलॉसोफर जो है वो कॉन्स्टेंटली लगातार
- 6:44हर जगह सच की ट्रुथ की सर्च में आपको
- 6:47दिखाओ दिख देखने को मिलेगा। सो वो
- 6:50फिलॉसोफर होता है जो हमेशा सच की तलाश में
- 6:52होता है। ओके? देन लेटिन वर्ड से आया है
- 6:55जी एजुकेशन क्योंकि हमें फिलॉसोफिकल
- 6:57एजुकेशन या एजुकेशन ऑफ़ फिलॉसोफी पढ़नी है।
- 7:00ठीक है? ठीक है? तो लेटिन वर्ड एजुकेटम
- 7:02देखो बहुत सारे वर्ड्स हैं जैसे एड्यूसियर
- 7:04है, एडुकेयर है, एडुसियर है, एडुकेटम है।
- 7:07ये सारे ही वर्ड्स जहां से एजुकेशन निकला
- 7:10है वो लेटिन वर्ड्स हैं। जहां से फिलॉसफी
- 7:12निकला है वो आपका ग्रीक वर्ड है। ठीक है
- 7:15जी? मतलब वही है एजुकेशन का कि अपना
- 7:17बेस्ट। बच्चे के अंदर से बेस्ट बाहर
- 7:19निकालना। टू ड्रॉ आउट, टू लीड आउट, टू
- 7:21ब्रिंग अप। ठीक है? या टू ड्वेल। तो सारी
- 7:24चीजें अपना बेस्ट जब आप देने की कोशिश
- 7:26करते हो बच्चे का बेस्ट बाहर निकालने की
- 7:28कोशिश करते हो दैट इज़ एजुकेशन। ओके? अब
- 7:30एडमम जॉन एडमम्स जो हैं उन्होंने एजुकेशन
- 7:33को बायपोलर प्रोसेस बोला है। बाय मतलब दो।
- 7:37पोलर मतलब पोल यानी दो पोल जिसमें एक टीचर
- 7:39होगा, एक स्टूडेंट होगा। तो दो पोल हैं।
- 7:41उसको ये एजुकेशन को एक्सप्लेन करते हैं
- 7:44ओवरऑल। जॉन डूई जो है इसी में दो की जगह
- 7:47तीन पोल इंट्रोड्यूस करते हैं कि भ एक पोल
- 7:50टीचर है एक पोल बच्चा है और एक जो है आपका
- 7:52क्या रहेगा आप चाहे सोसाइटी लगा लो चाहे
- 7:56करिकुलम लगा लो तो एक एनवायरमेंटल फैक्टर
- 7:58भी रहेगा सोशल फैक्टर जिसको जॉन डूई ने
- 8:01इंक्लूड करने की जो है वो जरूरत समझी और
- 8:05इंक्लूड किया जॉन डूई को हम जब वेस्टर्न
- 8:07फिलॉसफीज़ पढ़ेंगे तो हम प्रगमेटिज्म में भी
- 8:10पढ़ेंगे प्रगमेटिज्म में प्रगमेटिज्म की
- 8:13फिलॉसफी और जॉन डूई ने ही उन्हीं को ही
- 8:16रिलेट किया जाता है प्रोग्रेसिविज्म वर्ड
- 8:19से। ठीक है? प्रोग्रेसिविज्म।
- 8:22ओके? तो वो भी हम आगे डिस्कस करेंगे। सो
- 8:24जॉन डूई इंपॉर्टेंट नाम है ये। अब देखो
- 8:27तीसरा पिलर ये सोसाइटी को एनवायरमेंट को
- 8:29इंक्लूड करते हैं। तो इन्होंने स्कूल को
- 8:31यानी ये सोसाइटी कोेंस दे रहे हैं ना। तो
- 8:33स्कूल यानी एजुकेशन स्कूल को अह मिनिएचर
- 8:37सोसाइटी भी बोला है। मिनिएचर सोसाइटी। ये
- 8:40चीजें आगे आएंगी। बट मैं थोड़ा सा एक आपको
- 8:42बेस बनाने की कोशिश कर रही हूं कि यहां से
- 8:45भी आपको आईडिया रहे कि इस इन स्लाइड्स में
- 8:48हर एक चीज इंपॉर्टेंट है। ओके? कोई भी चीज
- 8:50रैंडमली नहीं डाली गई है। ओके? स्पेंसर ने
- 8:53बोला कि ट्रू एजुकेशन तभी प्रैक्टिकल बन
- 8:56पाएगी तब जब फिलॉसफी उसकी ट्रू हो। यानी
- 8:59एजुकेशन और फिलॉसफी हैंड इन हैंड चलेंगे।
- 9:02साथ-साथ चलेंगे। एक दूसरे को कॉम्प्लीमेंट
- 9:04करेंगे। अगर फिलॉसफी थ्योरिटिकल पोर्शन
- 9:07है। सो एजुकेशन उसका प्रैक्टिकल आस्पेक्ट
- 9:10है। ओके? सो ट्रू एजुकेशन तभी प्रैक्टिकल
- 9:13हो पाएगी जब उसके पीछे एक बैकअप जो है वो
- 9:16ट्रू फिलॉसफी होगी। ये बात स्पेंसर ने
- 9:18बोली। स्पेंसर ने बहुत सारा काम किया। उस
- 9:20काम में से हैं। सोशल स्टैटिक्स देन स्टडी
- 9:24ऑफ सोशियोलॉजी, प्रिंसिपल्स ऑफ
- 9:26सोशियोलॉजी, मैन वर्सेस द स्टेट। ये बातें
- 9:28स्पेंसर ने की हैं। इंपॉर्टेंट हैं। नाम
- 9:31से पूछ ली जाती हैं कई बार। ओके? सो जॉन
- 9:34एडमम ने क्या बोला? जी एक तो बोला बायपोलर
- 9:36प्रोसेस है। दूसरा बोला कि एजुकेशन जो है
- 9:38वो डायनेमिक साइड है फिलॉसोफी की। ओके?
- 9:42यानी कि एजुकेशन प्रैक्टिकल आस्पेक्ट है
- 9:45और फिलॉसफी जो है वो क्या है आपका?
- 9:47थ्योरिटिकल आस्पेक्ट है। तो डायनेमिक साइड
- 9:49बोल दिया यानी प्रैक्टिकल आस्पेक्ट यानी
- 9:51चेंज होती रहेगी। ठीक है? रोस जो है
- 9:54उन्होंने भी बोला। उन्होंने बोला कि
- 9:55फिलॉसफी और एजुकेशन एक ही सिक्के के दो
- 9:58पहलू हैं। टू साइड्स ऑफ़ द सेम कॉइन। तो वो
- 10:01चीज आपको पता हो। ये ये चीज कई बार
- 10:03एग्जजेक्टली नाम लेके पूछ ली जाती हैं।
- 10:05अगर बहुत ईजी क्वेश्चन आना हो तो। अगर हम
- 10:07फिलॉसफी और एजुकेशन की बात करें तो
- 10:09ऑब्वियसली मैंने बोला कि हैंड इन हैंड
- 10:11चलेंगे। इंटरडिपेंडेंट है। इंटरकनेक्टेड
- 10:13हैं। एक दूसरे के साथ ही चलेंगी चीजें
- 10:15बिना फिलॉसोफी के एजुकेशन और बिना एजुकेशन
- 10:17के फिलॉसफी। बिकॉज़ अगर एक थ्योरिटिकल
- 10:19फिलॉसोफिकल पार्ट नहीं होगा तो आप
- 10:21प्रैक्टिकल एप्लीकेशन किस चीज की दिखाओगे?
- 10:23और प्रैक्टिकल एप्लीकेशन अगर नहीं हो रही
- 10:25है सिर्फ थ्योरी है उसका भी कोई पॉइंट
- 10:27नहीं है। तो दोनों ही जो है वो साथ की साथ
- 10:29चलेंगे आगे। ओके? ये ब्रांचेस ऑफ फिलॉसोफी
- 10:32आपको ओवरऑल होता है ना कई बार ब्रांचेस ऑफ़
- 10:34फिलॉसफी को लेके काफी कंफ्यूजन देखने को
- 10:37मिलता है। ओके? सो मैं आपको एक चीज बता
- 10:39देती हूं कि कई जगह पे आपको दिखेगा कि भ
- 10:41एपिस्टोमोलॉजी, मेटाफिजिक्स, एग्जियोलॉजी,
- 10:44फिलॉसफी ऑफ़ साइंस, फिलॉसफीज़ ऑफ़ सोशल
- 10:46साइंस, सिमेंटिक्स इनमें डिवाइड किया हुआ
- 10:48है बहुत जगह पे। ओके? ये स्लाइड मैंने
- 10:50पहले जो रिवीज़ मैराथन थी उसमें भी डाल रखी
- 10:53थी। सो ये बेसिक्स हैं। यहां से बस आपको
- 10:55ये आईडिया हो जाए कि अगर मेटाफिजिक्स के
- 10:58पार्ट्स की बात आ रही है तो कॉस्मोगोनी,
- 11:00कॉस्मोलॉजी, ऑंटोलॉजी, फिलॉसोफी ऑफ़ सेल्फ
- 11:02और स्कैटोलॉजी। ये वर्ड्स आपको पता हो कि
- 11:05अच्छा ये मेटाफिजिक्स से रिलेटेड हैं।
- 11:08अदरवाइज इनका ब्रॉड मीनिंग क्या रहेगा?
- 11:10एपिस्टेमोलॉजी जो है वो नॉलेज की सर्च की
- 11:12बात करती है। ठीक है? कि नॉलेज स्टडी मतलब
- 11:15नॉलेज वर्ड आप याद रख सकते हो। तो स्टडी
- 11:17ऑफ़ नॉलेज लगा लो या सर्च ऑफ़ नॉलेज लगा लो
- 11:20या जिस प्रोसेस के थ्रू आप चीजों को
- 11:22सीखोगे आपको चीजें आएंगी वो सारा प्रोसेस
- 11:26एपिस्टोमोलॉजी में इंक्लूडेड रहेगा। ओके?
- 11:29यानी किस तरीके से आप सीख रहे हो? कैसे
- 11:31सीख रहे हो? सो क्या मैं ये बोल सकती हूं
- 11:33कि मेथड्स जो हम यूज़ करते हैं, स्ट्रेटजी
- 11:36जो हम यूज़ करते हैं एजुकेशन में, पढ़ाने
- 11:38में वो सारी की सारी वो प्रोसेस ही तो है।
- 11:40उसके थ्रू आप जान रहे हो। राइट? तो वो
- 11:42एपिस्टोमोलॉजी में आ जाएगा। ओके? देन बात
- 11:45आती है मेटाफिजिक्स की। कि मेटाफिजिक्स को
- 11:47एक वर्ड से रिलेट किया जाता है। दैट इज
- 11:49रियलिटी। सो ये तो बेसिक है कि अगर नॉलेज
- 11:52वर्ड आए तो आपको एपिस्टोमोलॉजी ध्यान हो।
- 11:54रियलिटी वर्ड आए तो आपको मेटाफिजिक्स
- 11:56ध्यान हो। और अगर वैल्यूस वर्ड आए तो आपको
- 11:59एग्जियोलॉजी ध्यान हो। ओके? सो ये तीन
- 12:02चीजें हैं। कई बार इसको थ्योरी ऑफ़ नॉलेज
- 12:04एपिस्टेमोलॉजी को, थ्योरी ऑफ़ रियलिटी,
- 12:06मेटाफिजिक्स को और थ्योरी ऑफ़ वैल्यू जो है
- 12:09वो एग्जियोलॉजी को बोल दिया जाता है। ओके?
- 12:12बाकी ये इसके जो पार्ट हैं उसकी अगर हम
- 12:14बात करें कॉस्मोगोनी में ये पूछे नहीं
- 12:17जाते हैं बट ऑनटोलॉजी कई बार पूछ लिया
- 12:20जाता है। बस आपको ये पता हो कि ये सारे के
- 12:22सारे जो पार्ट्स हैं कॉस्मोगोनी
- 12:24कॉस्मोलॉजी ऑनटोलॉजी स्केटोलॉजी फिलॉसोफी
- 12:26ऑफ़ सेल्फ ये सारे के सारे मेटाफिजिक्स के
- 12:29अंदर इंक्लूडेड रहेंगे। ओके? मेटाफिजिक्स
- 12:32में हम किस तरीके की चीजें पढ़ते हैं? किस
- 12:34तरीके के क्वेश्चंस पूछते हैं? वो सारी की
- 12:36सारी चीजें अभी आगे आएंगी जो मैं आपको
- 12:38डिटेल में बताऊंगी। ओके? उसके बाद बात आती
- 12:40है एग्जियोलॉजी जिसमें हम वैल्यू सिस्टम
- 12:43वैल्यूस की बात करते हैं। सो थ्योरी ऑफ़
- 12:45वैल्यूस भी बोला जाता है इसको। इसमें भी
- 12:47ये ब्रांचेस हैं। कोई फिक्स्ड नहीं है
- 12:50क्योंकि बहुत सारी इग्नू के इग्नू के ही
- 12:52मटेरियल में मान लो एंथ्रोपोलॉजी के बोल
- 12:55कहीं मेंशन कर रखा है या कहीं फिलॉसफी
- 12:57मेंशन कर रखा है। कहीं एजुकेशनल फिलॉसोफी
- 12:59मेंशन कर रखा है। सो कई बार अलग-अलग तरीके
- 13:02से चीजों को एक्सप्लेन करने की कोशिश की
- 13:04गई है। ओके? बट आपको आईडिया हो कि अगर
- 13:07एस्थेटिक, एथिक्स, लॉजिक की बात आ रही है
- 13:10क्योंकि ये जो तीन चीजें हैं ना
- 13:11एपिस्टोमोलॉजी, मेटाफिजिक्स और
- 13:13एग्जियोलॉजी ये तो बहुत बेसिक है। ये
- 13:15ब्रांचेस तीन तो हैं ही। मतलब उसके अलावा
- 13:18और धीरे-धीरे ब्रांचेस बनती रहे वो अलग
- 13:20बात है। लेकिन ये तीन तो है ही। तो ये तीन
- 13:22का मतलब आपको पता होना चाहिए। जी। ओके?
- 13:24ओके। उसके बाद है फिलॉसफी ऑफ़ साइंसेस,
- 13:26फिलॉसोफी ऑफ़ सोशल साइंसेस या फिर सिमेंटिक
- 13:29सिमेंटिक्स जो है वो कंसर्न रहेगा मीनिंग
- 13:31से कि डिफरेंट-डिफरेंट वर्ड्स को
- 13:33डिफरेंट-डिफरेंट लैंग्वेजज़ में अलग तरीके
- 13:35से पर्स्यू किया जाता है। वो चीज़ यहां पे
- 13:38मेंशन है। ओके? सो ओवरऑल ये क्वेश्चंस ये
- 13:41मैंने पीवाईक्यूस से निकाला है ओवर द
- 13:43पीरियड ऑफ़ टाइम जो हमने ओवर ऑल द ईयर ऑफ़
- 13:46पीवाईक्यूस देखे हैं तो उससे हमें ये समझ
- 13:48आता है कि जब एम्स ऑफ एजुकेशन की बात आई
- 13:51जहां पे आप वैल्यू सिस्टम की बात करोगे तो
- 13:53वो एग्जियोलॉजी के अंदर आएगा। देन आप
- 13:56एपिस्टेमोलॉजी की बात कर रहे हो तो मेथड्स
- 13:58स्ट्रेटजीस किस तरीके से आप प्रोसेस मतलब
- 14:01उस पूरे प्रोसेस की जब बात आ गई कि नॉलेज
- 14:03आपको कैसे मिलेगी वो आपका एपिस्टोमोलॉजी
- 14:06में आ गया। ऑब्जेक्टिव्स आपकी रियलिटी शो
- 14:08करेंगे कि क्या आप अचीव करना चाहते हो। सो
- 14:11वो मेटाफिजिक्स में आ जाएगा। जी। ओके?
- 14:14ओवरऑल अगर हम एकेडमिक डिसिप्लिन के हिसाब
- 14:16से देखें तो ये छह ब्रांचेस जो है वो
- 14:19एक्सप्लेन की जाती हैं। मेटाफिजिक्स,
- 14:21एपिस्टमोलॉजी, एथिक्स, लॉजिक,
- 14:24एंथ्रोपोलॉजी और आपका एस्थेटिक। तो इन छह
- 14:27की छह को मैं एक बार आपको ब्रॉड तरीके से
- 14:29बता देती हूं। मेटाफिजिक्स को थ्योरी ऑफ़
- 14:32रियलिटी, एपिस्टेमोलॉजी को थ्योरी ऑफ़
- 14:34नॉलेज और एग्जियोलॉजी को थ्यरी ऑफ़ वैल्यूस
- 14:37भी बोला जाता है। ये बहुत बेसिक है। आपको
- 14:40पता होना चाहिए। पहली बात है मेटाफिजिक्स।
- 14:42देखो आपको चीजें यही याद रखनी है। अब
- 14:45इन्हीं चीजों को आपके दिमाग में बिठाने के
- 14:47लिए थोड़ी सी और एक्सप्लेनेशन आ जाती है
- 14:49कि कैसे आपको समझाया जाए। ओके? सो
- 14:52मेटाफिजिक्स में हमें ये समझ आ गया नेचर
- 14:54ऑफ रियलिटी की बात हो रही है। ओके?
- 14:56इंक्लूडिंग कैसे क्वेश्चंस? रियलिटी क्या
- 14:59है? क्या कॉमन कैरेक्टरिस्टिक्स हैं या
- 15:01एसेंस है जो जिसको हम रियल बोलते हैं कि भ
- 15:04ये रियल है। ओके? तो जिसको हम अल्टीमेट
- 15:07रियलिटी बोलते हैं। रियल रियल चीज बोलते
- 15:09हैं। सो या गॉड सोल कॉन्शियसनेस ये रियल
- 15:13है नहीं है? है तो क्यों है? किस तरीके की
- 15:16चीजें रियल है। सो उस रियलिटी के अराउंड
- 15:19आपको सारे क्वेश्चंस घूमते हुए नजर आएंगे।
- 15:22ओके? तो आपको रटने की जरूरत नहीं है। आपको
- 15:24बस नेचर ऑफ़ रियलिटी वर्ड ध्यान होना
- 15:26चाहिए। ओके? मेटाफिजिक्स को हार्ट या फिर
- 15:29क्राउनिंग पॉइंट भी बोला जाता है फिलॉसोफी
- 15:32का। ये क्वेश्चन पूछा जा सकता है। आज तक
- 15:34नहीं पूछा गया है कि हार्ट या क्राउनिंग
- 15:36पॉइंट किसको बोला गया? क्योंकि आजकल कई
- 15:38बार होता है कि इग्नू के मटेरियल से
- 15:40डायरेक्ट उठ के डिट्टो लाइन आपके
- 15:42क्वेश्चंस में पूछ ली जाती है। ओके? देन
- 15:44मेटाफिजिक्स को हम डिफाइन कैसे करेंगे? जो
- 15:47अल्टीमेट कॉज, अल्टीमेट रियलिटी, मोस्ट
- 15:50यूनिवर्सल प्रिंसिपल्स ऑफ रियलिटी को
- 15:52समझने की कोशिश करें वो सारी चीजें
- 15:55मेटाफिजिक्स में आ जाएंगी। ओके? सो ये
- 15:58रियलिटी को अल्टीमेट कारण क्या है उस
- 16:01रियलिटी का? प्रिसाइज़ तरीके से आप उसको
- 16:03समझ पाओ। उन सारी चीजों से रिलेटेड है ये।
- 16:07ओके? मेटाफिजिक्स जो है फाउंडेशनल साइंस
- 16:10है जो कि सारी रियलिटी को समझने की कोशिश
- 16:13कर रही है। तो आप देख पा रहे होंगे कि इस
- 16:14पूरी स्लाइड में मैं आपको चीजें सेम समझा
- 16:17रही हूं कि भ रियलिटी की बात हो रही है बट
- 16:19अलग-अलग तरीके से चीजें आ रही है सामने।
- 16:22ओके? सो क्या रियलिटी है? क्या चीजें हैं?
- 16:25कौन चीज एग्जिस्ट करती है? क्या अल्टीमेट
- 16:27कारण है उसके एग्जिस्टेंस का? तो वो सारी
- 16:30चीजें मेटाफिजिक्स में हम स्टडी करते हैं।
- 16:33देन बात आती है एपिस्टोमोलॉजी की।
- 16:35एपिस्टोलॉजी में हम नेचर ऑफ नॉलेज की बात
- 16:38करते हैं। हम इसमें ये देखेंगे कि मीन
- 16:40क्या था? ओरिजिन क्या था? वैलिडेड वैलिड
- 16:43है या नहीं वो चीज। ठीक है? क्या हम सब
- 16:46कुछ जान सकते हैं? कैसे जान सकते हैं?
- 16:47क्या लिमिट्स हैं? ठीक है? तो वो सारी
- 16:50चीजें जो आप जानना चाहते हो नॉलेज। तो वो
- 16:54सारी चीजें इसके अंदर आ जाएंगी
- 16:55एपिस्टेमोलॉजी में। ओके? जो एपिस्टेमोलॉजी
- 16:58वर्ड है वो ग्रीक वर्ड एपिस्टेम से आया
- 17:01है। ठीक है? एपिस्टेम मतलब नॉलेज और लोगस
- 17:04मतलब साइंटिफिक या सिस्टेटिक तरीके से
- 17:06उसको पढ़ना। तो वही चीज हम पढ़ रहे हैं।
- 17:08स्टडी ऑफ़ नॉलेज सेम या थ्यरी ऑफ़ नॉलेज बोल
- 17:12लो। जैसे हमने मेटाफिजिक्स को थ्योरी ऑफ़
- 17:14रियलिटी बोला था। यहां पे सारी चीजें
- 17:16नॉलेज के अराउंड रिवॉल्व करेंगी। सो अगर
- 17:19कॉन्सेप्चुअल क्वेश्चन आता है। सो बी
- 17:21स्मार्ट कि कैसे आप रिलेट कर पाओ चीजों
- 17:24को। ओके? ये जो टर्म है ये सबसे पहले 1954
- 17:28में जेएफ फेरियर ने यूज की ये क्वेश्चन
- 17:30नहीं पूछा गया है बट पूछा जा सकता है।
- 17:33ओके? तो इन्होंने क्या किया?
- 17:34एपिस्टोमोलॉजी और ऑनटोलॉजी में क्योंकि
- 17:36ऑनटोलॉजी में ऊपर मैंने आपको बताया था कि
- 17:38हम अल्टीमेट रियलिटी की बात करते हैं। बट
- 17:40अगर हम अल्टीमेट कारण ओरिजिन जानने की
- 17:43कोशिश कर रहे हैं वही हम यहां कर रहे हैं।
- 17:45तो इन्होंने बहुत सटीक तरीके से ऑनंटोलॉजी
- 17:48और एपिस्टोमोलॉजी में डिफरेंस जो है वो
- 17:50बताया था। ओके? एपिस्टोमोलॉजी जो है वो एक
- 17:53डिस्टिंक्ट साइंस है। अगर रीसेंट
- 17:55डेवलपमेंट की बात करें। ठीक है? अ
- 17:57बिगिनिंग इन द मॉडर्न पीरियड ऑफ़ फिलॉसोफी
- 17:59विद डेस्क्रेट्स एंड गेनिंग प्रोमिनेंस
- 18:02विद द कंटेंपरेरी फिलॉसफर हसल। तो इनके
- 18:05टाइम पे ये चीजों के डिस्कशन हुआ। चीजें
- 18:08और पॉपुलराइज हुई। बात बढ़ी आगे। ओके? सो
- 18:10ये ब्रांच ऑफ़ फिलॉसफी जो किससे किससे डील
- 18:14करेगी? प्रॉब्लम ऑफ़ नॉलेज। ठीक है? सो
- 18:16इन्वेस्टिगेट उसका ओरिजिन। नॉलेज कहां से
- 18:19आई? स्ट्रक्चर मेथड्स। वैलिडिटी ऑफ़ नॉलेज।
- 18:22सो ये वर्ड्स आपको पता होना चाहिए। जैसे
- 18:24एक बार पूछा गया था। नेट में नहीं पूछा
- 18:26गया। बाकी किसी और स्टेट एग्जाम में पूछा
- 18:28गया था कि जो मेथड्स हैं जो आप जिस तरीके
- 18:31से आप पढ़ाते हो वो किसके अंडर आएंगे? तो
- 18:33वो एपिस्टोमोलॉजी में आएंगे। जो मैंने
- 18:35आपको ऊपर भी बताया था कि एम्स की बात हो
- 18:37तो एग्जियोलॉजी पे जाइए। ऑब्जेक्टिव्स की
- 18:39बात हो तो मेटाफिजिक्स पे जाइए और मेथड्स
- 18:41की बात हो तो एपिस्टोमोलॉजी पे जाइए। ठीक
- 18:44है? ग्रेट।
- 18:46एक वर्ड होता है एपिस्टोमोलॉजी के
- 18:48सिनोनिमस क्राइटेरियोलॉजी।
- 18:50ओके? ये ग्रीक वर्ड क्राइटेरिया से आया
- 18:53है। क्राइटेरिया या रूल लगा लो जिसका मतलब
- 18:56कि होता है ना कि आप नॉलेज की बात कर रहे
- 18:58हो जब तो क्या चीज सही है, क्या गलत है?
- 19:00तो एक रूल के साथ आगे बढ़ना। ओके? तो इसको
- 19:02कई बार ये आपका नोसियोलॉजी भी बोला जाता
- 19:06है जो कि नोसिस डिनोसिस वर्ड से आया है
- 19:08जिसका मतलब है नॉलेज इन अ क्वाइट जनरल
- 19:11सेंस। सो आपको बस थोड़ा आईडिया हो कि
- 19:13एपिस्टोमोलॉजी, क्राइटेरियोलॉजी,
- 19:16नोसियोलॉजी, नोसियोलॉजी, गिनोसियोलॉजी। सो
- 19:19ये सारे वर्ड्स जो है वो एक तरीके से
- 19:21सिनोनिम की तरह यूज़ किए जाते हैं। ओके? अब
- 19:24जब हम इसकी बात कर रहे हैं तो देखो मैंने
- 19:25बोला आपको मेथड्स मेथड्स पे फोकस किया
- 19:28यहां पे। ओरिजिन, स्ट्रक्चर, मेथड,
- 19:30वैलिडिटी इन चार चीजों पे फोकस किया। सो
- 19:32ओवरऑल हम ह्यूमन नॉलेज को ही तो स्टडी कर
- 19:34रहे हैं। कैसे वो चीज़ हमें मिली? किस मेथड
- 19:36से मिली? ओके? सो ह्यूमन नॉलेज बहुत
- 19:39कॉम्प्लेक्स प्रोसेस माना गया। और बहुत
- 19:41सारी एक्टिविटीज़ इसमें इन्वॉल्व होती हैं
- 19:42कि आप देख के भी सीखते हो, सुन के, सूंघ
- 19:45के। ये तो सेंसेस के थ्रू वाली चीजें
- 19:46होगी। देन इंक्वायर करके इमेजिन करके समझ
- 19:49के कंसीव करके चीजों को रिफ्लेक्ट करके
- 19:52इंट्यूशन से आपके अंदर से आवाज आए जो
- 19:55इंट्यूशन जज करके ठीक है तो बहुत सारे
- 19:57तरीके होते हैं जिसके थ्रू हम नॉलेज को
- 20:00एक्वायर करते हैं लेकिन उनमें से तीन मेन
- 20:03एक्टिविटीज हैं एक है एक्सपीरियंस करना अब
- 20:05एक्सपीरियंस आपको सुन के देख के स्मेल
- 20:07कैसे भी हो सकता है राइट फिर उसको समझना
- 20:10और फिर उसको जज करना ठीक है यानी उसके ऊपर
- 20:13रिफ्लेक्ट बैक करना सो ये तीन तरीके तीन
- 20:16ये एक तरीके से ये स्ट्रक्चर माना जाता है
- 20:18कि कैसे आपको नॉलेज गेन होगी। आप
- 20:21एक्सपीरियंस करोगे। उसको समझने की कोशिश
- 20:24करोगे और फिर आप उसको जज करोगे रिफ्लेक्ट
- 20:27बैक करके उस पे सोच के एविडेंस के साथ तो
- 20:29चीजों से सपोर्ट करके फिर आप उसको जज
- 20:32करोगे। ओके? सो ये तीनों चीजें आपकी
- 20:33एपिस्टोमोलॉजी में आएंगी। जी। तीसरा है
- 20:36हमने छह की बात की थी। पहला हमने
- 20:38मेटाफिजिक्स बोला। दूसरा हमने
- 20:39एपिस्टोमोलॉजी बोला। देन हम एथिक्स पे आए।
- 20:41ठीक है? सो एथिक्स वर्ड जो है वो ग्रीक
- 20:44वर्ड इथोस से आया है। आपको पता है क्या
- 20:46चीज सही है क्या गलत है। वो कंडक्ट जिसकी
- 20:49जिसके थ्रू आप चीजें आगे बढ़ रहे हो चल
- 20:51रहे हो तो इसको मोरल फिलॉसोफी भी बोला
- 20:54जाता है। ये जो बेसिक प्रिंसिपल्स हैं या
- 20:56स्टैंडर्ड्स हैं कि आप जो भी काम कर रहे
- 20:58हो द ह्यूमन कंडक्ट उसके क्या स्टैंडर्ड्स
- 21:01हैं? किस बेसिस पे आप कर रहे हो। आपके
- 21:03अकॉर्डिंग किस बेसिस पे क्या चीज सही है
- 21:05और क्या चीज गलत है। ओके? तो ये सारी
- 21:08चीजें आपकी एथिक्स के अंदर आ जाती हैं।
- 21:10एथिक्स को साइंस ऑफ मोराल्स भी बोला जाता
- 21:13है। और दैट ब्रांच ऑफ फिलॉसफी जिसको कंस
- 21:17जो कंसर्न है ह्यूमन कैरेक्टर और कंडक्ट
- 21:20से। इसी में ही यहां पे कई बार क्योंकि वो
- 21:22होता है ना ह्यूमन बीइंग्स डोंट लिव एंड
- 21:24एक्ट एट रैंडम। आप कुछ पैटर्न्स के साथ
- 21:27चलते हो। जो चीजें ऑलरेडी होती आ रही हैं
- 21:29ट्रेडिशनली जो फोक एंड मोर्स चलते आ रहे
- 21:32हैं। मोर्स क्या रहेंगे? मोर्स लेटिन वर्ड
- 21:35से आया है लैटिन वर्ड से। इसका मतलब कस्टम
- 21:37और मैनर्स हैं। सो जो चीजें पहले से चली आ
- 21:40रही हैं आप उन्हीं को ही फिर सही मानने लग
- 21:43जाते हो। ओके? तो वो आपके एथिक्स में आपके
- 21:45मोरल फिलॉसोफी में ऐड हो जाती हैं। सो एक
- 21:48तरीके से आप रैंडमली नहीं करते हो बट जो
- 21:50चीजें ऑलरेडी चली आ रही हैं आप उनको
- 21:51अडॉप्ट कर रहे हो हिस्टोरिकली, कल्चरली।
- 21:54सो बहुत सारे फैक्टर्स हैं जो आपके एथिकल
- 21:57फिलॉसफी, इमोरल फिलॉसोफी को अफेक्ट
- 21:59करेंगे। ओके? सो ये मोरल्स की साइंस है।
- 22:01आप बोल सकते हो जो कि ह्यूमन कैरेक्टर और
- 22:04कंडक्ट से कंसर्नड है। उससे रिलेटेड है।
- 22:07ओके? एथिक्स को साइंस ऑफ़ व्हाट मैन ओट टू
- 22:10डू क्या करना चाहिए? सो एक आइडियल सिचुएशन
- 22:13में क्या चीज होनी चाहिए वो चीज एक्सप्लेन
- 22:16करता है एथिक्स। ओके? इन शॉर्ट आपको जो
- 22:19याद रखना है दैट इज़ एथिक्स एक
- 22:21कैटेगोरिकली, नॉर्मेटिव, प्रैक्टिकल और
- 22:24साइंस है। ओके? तो ये वर्ड्स यहां पे
- 22:26कंबाइन हो गए। कैटेगोरिकली नॉर्मेटिव
- 22:29प्रैक्टिकल साइंस जो है उसको हम एथिक्स
- 22:32बोलते हैं। ओके देन चौथे नंबर पे आता है
- 22:34जी लॉजिक। लॉजिक इंडक्टिव भी हो सकता है,
- 22:37डिडक्टिव भी हो सकता है। अगर आपने पेपर वन
- 22:39की थोड़ी तैयारी की हो तो लॉजिकल रीजनिंग
- 22:41मैंने बहुत अच्छे से एक्सप्लेन किया था
- 22:43मैराथों्स में। आप वो देख सकते हैं। वहां
- 22:45से चीजें और बेटर तरीके से रिलेट कर सकते
- 22:47हैं। सो लॉजिक डिडक्टिव और इंडक्टिव आपको
- 22:50पता है मैंने आपको बताया था डिडक्टिव में
- 22:52डी आता है। डिडक्टिव में जनरल टू
- 22:54पर्टिकुलर जाती हैं चीजें और इंडक्टिव में
- 22:57जब आप किसी पर्टिकुलर चीज से कोई जनरल
- 22:59कंक्लूजन निकालते हो। फॉर एग्जांपल हर एक
- 23:02मैन जो है वो मर्टल है। हर एक हर किसी को
- 23:05मौत आनी है। सोक्रेटीज़ जो है वो भी एक मैन
- 23:08है। इसलिए सोक्रेटीज़ भी मर्टल है। सो आप
- 23:11एव्री हर किसी से शुरू हुए यानी एक जनरल
- 23:14स्टेटमेंट से आपने चीज शुरू की थी और
- 23:16लास्ट में आपने सोक्रेटीज़ के लिए एक
- 23:18स्टेटमेंट बना दी। यानी एक पर्टिकुलर
- 23:21स्टेटमेंट तक आप पहुंच गए। सो ये डिडक्टिव
- 23:24रीजनिंग हो गई। डिडक्टिव लॉजिक डिडक्शन वो
- 23:27हो गया। जब आप पर्टिकुलर टू जनरल जाते हो
- 23:30कि दिस मैन इज़ मोटल। दैट मैन इज़ मोटल।
- 23:33यानी ये भी मोटल है, वो भी मर्टल है,
- 23:35फलाना भी मोटल है। इसलिए हम बोल रहे हैं
- 23:37कि ऑल मैन आर मर्टल। सो आपने पर्टिकुलर
- 23:40एग्जांपल्स इंस्टेंसेस देखे और उसके बाद
- 23:42आप एक कंक्लूजन पे पहुंचे। सो आपने क्या
- 23:45कर दिया? पर्टिकुलर से जनरलाइज कर दी
- 23:47चीजें। सो ये इंडक्शन हो गया। ओके? सो डिड
- 23:50ये आपको समझ आ गया जनरल टू पर्टिकुलर
- 23:52पर्टिकुलर टू जनरल की बात हो रही है। सो
- 23:54डिडक्शन डी डी से आगे आएगा। जी। तो
- 23:56अल्फाबेटिकली ये ध्यान रख सकते हो। डीजी
- 23:58वाला। अदरवाइज़ डीजीपी आईपीजी डीजीपी याद
- 24:02रखोगे। सो जनरल टू प्रैक्टिकल है। उससे
- 24:04उल्टा आपका इंडक्टिव में आ जाएगा। ठीक है
- 24:06जी? सो ये दो तरीके की लॉजिकल रीजनिंग है।
- 24:09डिडक्टिव रीजनिंग जो है वो प्योर रीजनिंग
- 24:11है। जबकि इंडक्शन जो है वो रिककोर्स टू
- 24:14एक्सपीरियंस एंड ऑब्जरवेशन है। इड्शन में
- 24:17आपने जो जो एक्सपीरियंस किया है जो जो
- 24:18ऑब्जर्व किया है उसको आपने एक जनरल
- 24:21स्टेटमेंट में डाल दिया। डिडक्शन में
- 24:22प्योरली रीजनिंग आपको यहां पे दिख रही है।
- 24:25ओके? देन आता है जी फिलॉसोफिकल
- 24:28एंथ्रोपोलॉजी यानी पांचवा पॉइंट आपका।
- 24:31ओके? सो जो फिलॉसोफिकल लैंग्वेज में अगर
- 24:33हम बात करें तो फिलॉसोफिकल एंथ्रोलॉजी जो
- 24:36है वो अभी कुछ एक टाइम से ये वर्ड सामने
- 24:38आया है। रेनी डिस्क्रेट्स की होता है ना
- 24:41इन्होंने इस बारे में काफी बात की है।
- 24:44एंथ्रोपोलॉजी में हम ह्यूमंस की स्टडी
- 24:46करते हैं। ठीक है? सो एंथ्रोपोस यानी मैन
- 24:48और नाउन है लोगस यानी साइंस। तो ये ग्रीक
- 24:51वर्ड से आए हैं। फिलॉसोफिकल एंथ्रोपोलॉजी
- 24:54जो है वो एक रिफ्लेक्शन है कि मैन एज ही
- 24:57इज़ उसका ओरिजिन क्या है? मैन का नेचर क्या
- 25:00है? है मैन की इन लाइफ का मतलब डेस्टिनी
- 25:02का मतलब क्या है? सो मैन से रिलेटेड
- 25:04ह्यूमन बीइंग से रिलेटेड हैं सारी बातें।
- 25:06तो जब आप एंथ्रोपोलॉजी एक स्ट्रीम की तरह
- 25:09भी आता है अलग से जैसे अपना ये एजुकेशन है
- 25:12वैसे एंथ्रोपोलॉजी भी है। जैसे सोशियोलॉजी
- 25:14होता है, साइकोलॉजी होता है तो वैसे ही
- 25:16एंथ्रोपोलॉजी जहां पे आप ह्यूमन बीइंग्स
- 25:18की स्टडी करते हो। एंड कांत जो हैं
- 25:20उन्होंने सबसे पहले ये टर्म यूज़ की थी।
- 25:22पूछी जा सकती है। ओके? तो सिस्टमैटिकली
- 25:26ऑर्डर्ड डॉक्ट्राइन ऑफ़ द नॉलेज ऑफ़ मैन। सो
- 25:30ओवरऑल फोकस यहां पे इंसान पे है कि मैं
- 25:32क्या हूं, क्यों हूं, मेरा पर्पस क्या है?
- 25:34सो ह्यूमन बीइंग से रिलेटेड है सारी
- 25:37चीजें। देन आता है जी एग्जियोलॉजी वेरी
- 25:39इंपॉर्टेंट नेचर ऑफ़ वैल्यूज़ जिसमें आप
- 25:41वैल्यू सिस्टम की बात करते हो। सही गलत की
- 25:43बात करते हो। मोरालिटी, इम्मोरालिटी,
- 25:46राइट, रोंग, गुडनेस, बैडनेस उनकी बात करते
- 25:49हो। ओके? सो, इसमें एक अह ब्रांच आ जाती
- 25:51है आपकी। जब आप ब्यूटी की बात कर रहे हो,
- 25:54वैल्यू ऑफ़ ब्यूटी, तो आपकी एस्थेटिक
- 25:56ब्रांच के अंदर आ जाएगी। यह बात आपको पता
- 25:58होनी चाहिए। ठीक है? जैसे आप ट्रू और
- 26:00फॉल्स की बात कर रहे हो तो वो डोमेन ऑफ
- 26:02लॉजिक में आ जाएगा। अगर आप अच्छे बुरे की
- 26:04बात करते हो तो डोमेन ऑफ़ एथिक्स में आ
- 26:06जाएगा। सो एग्जियोलॉजी में मैंने आपको तीन
- 26:08डोमेन बताई थी ऊपर कि आपका लॉजिक, एथ
- 26:11एथिक्स, लॉजिक और एस्थेटिक। ठीक है? तो ये
- 26:14तीनों चीजें आपको पता होनी चाहिए कि इनका
- 26:16मतलब क्या है। एस्थेटिक्स की अगर हम बात
- 26:18करें तो ये ग्रीक वर्ड से आया है। जी
- 26:20परसेप्शन कि होता है ना कि एस्थेट आपका
- 26:23क्या परसेप्शन है किसी पर्टिकुलर चीज को
- 26:25लेके। ये जो टर्म है ये सबसे पहले
- 26:27एलेक्जेंडर बर्म गार्डन ने यूज की इन हिज
- 26:30वर्क एस्थेटिका। तो आपसे पूछा जा सकता है
- 26:32कि एस्थेटिका वर्क किसका है? किसने ये काम
- 26:36किया है? ओके। सो जो प्लेटो की अच्छा ये
- 26:38दो तीन चीजें यहां से देखने को मिलती हैं
- 26:40कि अलेग्जेंडर बम गार्टन जो हैं उन्होंने
- 26:43एस्थेटिका वर्क है उनका। ये किसने लिखी
- 26:46है? तो उन्होंने लिखी है। रिपब्लिक प्लेटो
- 26:48ने लिखी है और पोएटिक्स जो है वो
- 26:50एरिस्टोटल ने लिखी है। ये सारी चीजें
- 26:52फिलॉसफी के अराउंड रिवॉल्व करती हैं। और
- 26:54इन्होंने काफी चीजें जो है वो फिलॉसोफी
- 26:56में की भी हैं। कंट्रीब्यूशन रहा है। हम
- 26:59आगे जाके जब वेस्टर्न फिलॉसोफी की बात
- 27:00करेंगे। हम आइडियलिज्म रियलिज्म की बात
- 27:02करेंगे तब हम प्लेटो और एरिस्टोटल की बात
- 27:05करेंगे। ओके? तो बट एरिस्टोटलल की
- 27:06पोएटिक्स और प्लेटो की रिपब्लिक और
- 27:09एलेक्जेंडर बर्मगार्टन की एस्थेटिका। ये
- 27:12आपको पता होने चाहिए। ओके? प्लेटो आर्ग्यू
- 27:14करते हैं आर्ट जो है वो इमिटेशन है और
- 27:17प्लेटो जो है वो सेट कर सेट अ प्रेसिडेंट
- 27:20दैट मेनी फिलॉसोफर फॉलो इन सच व्यू एज
- 27:23आर्ट एक एक्सप्रेशन आर्ट को एक विश
- 27:25फुलफिलमेंट इस तरीके से भी लिया जाता है।
- 27:28सो आर्ट को इमिटेशन की तरह किसने बोला है?
- 27:31प्लेटो ने बोला है। ओके जी। सो
- 27:33एग्जियोलॉजी में हम थ्योरी ऑफ़ वैल्यू नेचर
- 27:35ऑफ़ वैल्यू स्टडी बात करते हैं वैल्यू
- 27:37सिस्टम की। बहुत सारी फिलॉसोफीस हैं। ये
- 27:39मैंने बेसिक बता दिया फिलॉसफी का,
- 27:41फिलॉसोफी की ब्रांचेस का। वेस्टर्न और
- 27:43इंडियन फिलॉसफी ये है मेजरली जो हमें
- 27:46पढ़नी है। हमें दोनों ही पढ़नी है
- 27:48वेस्टर्न और इंडियन। इंडियन में कई बार
- 27:50फर्दर जो है वो क्लासिफिकेशन बन जाती है।
- 27:53ऑर्थोडॉक्स और अनऑर्थोडॉक्स की।
- 27:55ऑर्थोडॉक्स जो वेदाज़ में भगवान में बिलीव
- 27:57रखते हैं वो आस्तिक स्कूल है ये। और
- 28:00अनऑर्थोडॉक्स जो बिलीव नहीं करते वेदास की
- 28:03अथॉरिटी में इनको नास्तिक स्कूल बोला जाता
- 28:06है। आस्तिक में ये छह स्कूल्स आते हैं। कई
- 28:08बार षड दर्शन के नाम से भी इनको बोला जाता
- 28:12है। षड दर्शन। ओके? देन अन ऑर्थोडॉक्स की
- 28:15बात करें उसमें मेजरली ये तीन आते हैं।
- 28:17चरक फिलॉसफी, जैन फिलॉसोफी और बुद्धिस्ट
- 28:20फिलॉसफी। हम इन सबको डिटेल में पढ़ेंगे।
- 28:22लेकिन उससे पहले क्योंकि ये यूनिट में जो
- 28:25पहला पार्ट है हमारा इंडियन फिलॉसोफीस का
- 28:27है। तो हम इंडियन फिलॉसोफी के कुछ फीचर्स
- 28:30बेसिक फीचर्स की बात कर लेते हैं जहां से
- 28:32क्वेश्चन आ जाता है कई बार। ओके? सो
- 28:34इंडियन फिलॉसोफी हमारा मतलब ये होता है
- 28:36इससे कि भ जो इंडियन सोॉइल पे धरती पे
- 28:39भारतीय धरती पे जो जो फिलॉसोफिकल सिस्टम्स
- 28:42बने हैं उगसे हैं यहां पे। ठीक है? जिनकी
- 28:45उपज हुई है यहां तो वो इंडियन फिलॉसोफी
- 28:47में आएंगे। कई बार आप कंफ्यूज कर जाते हो।
- 28:50कुछ एक स्कॉलर्स इसको बोलते भी हैं कि
- 28:52इंडियन फिलॉसफी का मतलब है आप हिंदू
- 28:54फिलॉसोफी की बात कर रहे हो। व्हिच इज़ नॉट
- 28:56राइट। बिकॉज़ हमने चरक, जैनिज्म और आपका
- 28:59बुद्धिज्म की भी बात की जो अनऑर्थोडॉक्स
- 29:01स्कूल्स हैं बट वो भी इंडियन फिलॉसफी में
- 29:04ही आते हैं। लेकिन वो हिंदू फिलॉसोफी में
- 29:06नहीं आते हैं। ओके? सो ये बात आपको समझनी
- 29:09चाहिए कि जब फिलॉसोफी की बात हो रही है तो
- 29:11इंडियन फिलॉसोफी को डेज़िग्नेट किया जाता
- 29:14है दर्शन की तरह। जैसे मैंने षट दर्शन की
- 29:16बात की थी। तो दर्शन का एक्चुअल मीनिंग
- 29:19होता है इंट्यूटिव विज़न। दर्शन। किस तरीके
- 29:22से आप किसी चीज को देख रहे हो, पर्सव कर
- 29:24रहे हो। सो फिलॉसफी को फिलॉसफी से
- 29:27नियरेस्ट इक्विवेलेंट टर्म जो रिलेट की
- 29:29जाती है दैट इज़ दर्शन। ओके? और इंडियन
- 29:33फिलॉसफी जो है उसमें सुप्रीम गोल जो है
- 29:35लाइफ का कि आप क्या करना चाहते हो? लाइफ
- 29:38ह्यूमन लाइफ अगर मिली है आपको तो आप
- 29:40क्या-क्या करोगे? वो किस टर्म के अंडर आते
- 29:42हैं? पुरुषार्थ टर्म के अंडर आते हैं।
- 29:44इनफैक्ट एंथ्रोपोलॉजी में एक थ्योरी भी
- 29:46है। ये थ्योरी ऑफ़ पुरुषार्थ। यानी ह्यूमन
- 29:49बीइंग पैदा किस लिए हुआ है? क्या काम करने
- 29:51के लिए हुआ है? क्या पर्पस है? क्या गोल
- 29:54है उसकी लाइफ में? तो चार गोल्स की बात
- 29:56करते हैं जो हम अभी करेंगे बात इन स्पेशल
- 29:58फीचर्स के बाद। सो थ्योरी ऑफ़ पुरुषार्थ।
- 30:01तो पुरुषार्थ वर्ड आए तो आपको पता होना
- 30:03चाहिए कि अच्छा सुप्रीम गोल्स की बात हो
- 30:05रही है कि ह्यूमन लाइफ आपको मिली है तो आप
- 30:07क्या काम करोगे? तो इसके अंदर हम कई चार
- 30:10चीजें पढ़ते हैं वैसे तो बट यहां पे देखो
- 30:12वेल्थ, सेंशियस, एंजॉयमेंट यानी काम। ठीक
- 30:15है? इनको हम लोअर वैल्यूस मानते हैं और
- 30:18वेल्थ को अर्थ बोलते हैं। अभी लिखेंगे हम
- 30:20आगे आएगा थ्योरी ऑफ़ पुरुषार्थ में। और
- 30:22धर्म और राइटियसनेस यानी ठीक करना चीजें।
- 30:25सही चीजें। धर्म आपकी ड्यूटी क्या है?
- 30:27राइट चीजें करना। सो वो जो है आपकी हायर
- 30:30वैल्यू में आ जाएगी। और ऑब्वियसली सबसे
- 30:32हाईएस्ट वैल्यू मोक्ष को माना गया है। तो
- 30:35चार वैल्यूज़ हैं जी जिनको हम पुरुषार्थ
- 30:37बोलते हैं कि आप धरती पे आए क्यों हैं
- 30:39उसके लिए। ओके? अब स्पेशल फीचर्स की बात
- 30:42करें तो ऑलमोस्ट सारे स्कूल्स जो हैं वो
- 30:44अल्टीमेट गोल मोक्ष को लिबरेशन को ही
- 30:47मानते हैं। ठीक है? बट जैसे पुरानाज़ हैं
- 30:50वो लाइफ आफ्टर डेथ जो हैं उसको भी पॉइंट
- 30:53आउट करते हैं कि लाइफ आफ्टर डेथ में है
- 30:55स्वर्ग या नर्क वाली चीज आएगी। बट
- 30:58इंटेलेक्चुअली हम मानते हैं कि एक पॉइंट
- 31:00पे आपको ये जो बर्थ और डेथ की साइकिल है
- 31:03उससे जब आप ऊपर उठ जाओगे तो मोक्ष की
- 31:05प्राप्ति आपको हो जाएगी लिबरेट हो जाओगे
- 31:07तो ये सारी फिलॉसोफीस इसके बारे में बात
- 31:10करती है ओके जैसे हम बुद्धिज्म की बात
- 31:12करेंगे वो इंडियन फिलॉसोफी है वो भी
- 31:14निर्वाणा की बात करती है जैनिज्म भी
- 31:16लिबरेशन की बात करते हैं। हिंदू फिलॉसोफीस
- 31:18भी सारी की सारी वेदांता वगैरह की जब हम
- 31:21बात करेंगे तो वो सारी भी बात अल्टीमेटली
- 31:23किसकी कर रही है? मोक्ष प्राप्ति की बात
- 31:25कर रही हैं। तो मोक्ष और लिबरेशन अल्टीमेट
- 31:28ऐ माना जाता है जब हम इंडियन फिलॉसोफीज़ की
- 31:30बात करते हैं। ओके? इंडियन फिलॉसफीज़ जो है
- 31:33वो एक्सपेक्ट करती हैं द सीकर्स आफ्टर टू
- 31:36ट्रुथ एंड रिलीज़ टू लीड अ लाइफ ऑफ़
- 31:38रनोसिएशन। सो वो आफ्टर वाली चीज़ कि आप वो
- 31:42सारे के सारे थॉट्स जो है वो इस पे मानते
- 31:44हैं कि सफरिंग जो है वो होगी आपको। सफरिंग
- 31:47जो है उसी की वजह से फिर आप जो है मोक्ष
- 31:50की प्राप्ति के लिए आगे बढ़ोगे। सो ये चीज
- 31:52आपको आगे करते हुए जाना पड़ेगा। सो लाइफ ऑफ़
- 31:55अटैचमेंट आप जब अटैच होके रहते हो चाहे
- 31:58चीजों से ये तो आप अपनी डेली लाइफ में भी
- 32:00ऑब्जर्व कर सकते हो। जब आप चीजों से अटैच
- 32:02होने लग जाते हो। मान लो आपने गाड़ी ली है
- 32:04या मान लो छोटा बच्चा है साइकिल नहीं ली
- 32:06है या बाइक या स्कूटी नहीं ली है और उस पे
- 32:08स्क्रैच लग गया। किसी ने मांग ली तो जब आप
- 32:11अटैच हो के रहते हो उससे तो आपको बहुत
- 32:13हर्ट होता है कि यार मेरी स्कूटी लेके गया
- 32:16था और उसने तोड़फोड़ कर दी या ऐसे डब डब्बे
- 32:19की तरह हिल रही है अब वो। राइट? सो वो
- 32:21डिपेंड करता है। तो लाइफ जब अटैचमेंट के
- 32:24साथ आपने चीजें कर ली जब आप अटैच हो गए
- 32:26किसी भी चीज से चाहे वो ट्रेडिशन हो चाहे
- 32:29वो आपकी जॉब हो। किसी भी चीज से जब आप
- 32:31अटैच हो गए सो वो चीज आपको जो है वो
- 32:34सफरिंग की तरफ लेके जाएगी। लेकिन जो लाइफ
- 32:37ऑफ डिटचमेंट है वो आपको इटरनल सोलेस और जो
- 32:41होता है ना संतुष्टि, सैटिस्फैक्शन वो
- 32:43आपको कौन लेके जाएगा? जब आप लाइफ ऑफ़
- 32:45डिटचमेंट जो है वो जिओगे। सो ये लाइफ ऑफ
- 32:48अटैचमेंट, डिटचमेंट, सफरिंग इसकी बात भी
- 32:50सारी फिलॉसोफीस करती हैं। ओके? देन
- 32:53कमेंसमेंट ऑफ इंडियन फिलॉसफी किस पे बेस्ड
- 32:55है? सफरिंग्स पे बेस्ड है क्योंकि तो
- 32:58इसलिए कई बार क्योंकि हम सफरिंग्स की बात
- 33:00कर रहे हैं कि ये तो होएगा झेलना पड़ेगा।
- 33:02देन जाके आप जो है इल्यूमिनेसिएशन आपको
- 33:05मिलेगा, लिबरेशन मिलेगा। सो वो सारी चीजें
- 33:08देखते हुए कई बार जो क्रिटिसिज्म करते हैं
- 33:10इंडियन फिलॉसफीज़ का वो बोलते हैं कि
- 33:12भैसिमिस्टिक
- 33:13है, निराशावादी हैं चीजें। लेकिन अगर आप
- 33:16ओवरऑल देखोगे तो पैसिमिज्म से शुरू हो रही
- 33:19है चीजें लेकिन एक ऑप्टिमिज्म की तरफ आपको
- 33:22लेके जा रही हैं क्योंकि हम उस उन ये जो
- 33:25सफरिंग है इससे कैसे निजात पाई जाए उसकी
- 33:28भी बात करते हैं। सो हम ऑप्टिमिज्म की
- 33:30यानी निराशावादी नहीं हम आशावादी की भी
- 33:32बात करते हैं आशावाद की और उसके बाद हम
- 33:35इटरनल प्रगमेटिज्म कैसे मिलेगा? आप आपको
- 33:38लिबरेशन कैसे मिलेगा? उसकी भी बात करते
- 33:41हैं। सो जो क्रिटिसाइज करते हैं वो
- 33:43पैसिमिस्ट बोलते हैं हमें इंडियन
- 33:45फिलॉसोफर्स या इंडियन फिलॉसोफी को। लेकिन
- 33:47अगर आप इंडियन थिंकिंग देखोगे तो इट
- 33:50स्टार्ट्स विद पैसिमिज्म पाससेस थ्रू
- 33:52ऑप्टिमिज्म एंड देन कल कलमिनेट्स इन इटरनल
- 33:56प्रगमेटिज्म।
- 33:57ठीक है जी। इसी में फर्दर क्योंकि ये
- 33:59बोलते हैं इंडियन फिलॉसफर्स या फिलॉसोफी
- 34:01जो है वो तीनों चीजों को सीरियसली लेती
- 34:04हैं कि सत्य यानी आपका एग्जिस्टेंस,
- 34:06ट्रुथ। ठीक है? कॉन्शियसनेस और फिर
- 34:08एवरलास्टिंग हैप्पीनेस। सो ये प्लेजर की
- 34:11भी बात करते हैं, पेन की भी बात करते हैं।
- 34:13सब चीजों की बात कर रहे हैं। सो ये तीन
- 34:15वर्ड सत, चित्त, आनंद। तो सत मतलब
- 34:18एग्जिस्टेंस व्हिच इज़ ट्रुथ एंड सित यानी
- 34:21कि आपका सतचित बोलते हैं इसको। वैसे तो
- 34:23सत, चित, आनंद। तो चित मतलब कॉन्शियसनेस
- 34:26आपकी और आनंद मतलब हैप्पीनेस, एवरलास्टिंग
- 34:28हैप्पीनेस। सो ये तीनों चीजों की बात जो
- 34:30है वो इंडियन फिलॉसोफीस में की जाती है।
- 34:32फोर्थ और फिफ्थ पॉइंट स्लाइड हट वो नहीं
- 34:35लगा एनिमेशन बट इट्स ओके। तो देखो फोर्थ
- 34:38में हम बात कर रहे हैं कि जो हायरार्की है
- 34:40उसमें ये चार तरीके की चीजों की बात कर
- 34:42रहे हैं एज पर ऑर्थोडॉक्स फिलॉसोफी। तो जो
- 34:44अनऑर्थोडॉक्स फिलॉसोफीस हैं या जिस कई बार
- 34:46हम इनको हेट्रोडॉक्स फिलॉसोफीस भी बोल
- 34:49देते हैं जो आपकी चरक, जैनिज्म और
- 34:51बुद्धिज्म की फिलॉसोफी हैं। सो इसमें
- 34:54मेजरली चार चीजों की बात हो रही है। जी
- 34:56काम जो हमने ऊपर बात की थी सेंशियस प्लेजर
- 34:59की तो वो लोएस्ट वैल्यू है। अर्थ यानी
- 35:02वेल्थ वो आपकी लोअर वैल्यू है। धर्म या
- 35:04राइटिश राइट राइट वाली चीजें वो आपकी हायर
- 35:08वैल्यू है और मोक्ष आपकी हाईएस्ट वैल्यू
- 35:10में आएगी। ये मतलब आपको पता होना चाहिए कि
- 35:12जब हायर वैल्यू बोल रहे हो, लोअर वैल्यू
- 35:14बोल रहे हो उसका मतलब क्या है या किसको आप
- 35:16बोल रहे हो। लेकिन जब हम थ्योरी ऑफ़
- 35:19पुरुषार्थ पढ़ेंगे उसमें ये कंटिन्यूटी में
- 35:21सीक्वेंस में आएंगी कि भ पहला गोल ये है
- 35:24लाइफ का। दूसरा ये है, तीसरा ये है, चौथा
- 35:26ये है। सो वो चारों उस सीक्वेंस में याद
- 35:29रखेंगे हम। आप इस सीक्वेंस में याद नहीं
- 35:31रखेंगे। ठीक है? देन है जी हर एक जो
- 35:35फिलॉसफी है इंडियन फिलॉसफी वो लिबरेशन की
- 35:37बात करती है। तो कुछ थिंकर्स जो हैं वो
- 35:40जीवन मुक्ति को एडवोकेट करती हैं यानी आगे
- 35:42बढ़ाना चाहती हैं। जीवन मुक्ति मतलब जीवन
- 35:45रहते रहते ही लिबरेशन। सो लिबरेशन वाइल
- 35:48अलाइव तो आप जिंदा हो बट मुक्ति मिल गई।
- 35:50ऐसे वाला और विदेह मुक्ति मतलब आपका जब
- 35:53बॉडी और सोल ही अलग हो गए। डिसइीग्रेट हो
- 35:56गए। तो मरने के बाद की जो मुक्ति मिल रही
- 35:58है उस लिबरेशन को विदेह मुक्ति बोला जा
- 36:01रहा है। तो आपको ये मतलब पता होना चाहिए।
- 36:03ओके? और साल्वेशन तो साइलेंट फीचर रहा ही
- 36:05है इंडियन फिलॉसफी का क्योंकि साल्वेशन की
- 36:08तरफ जब आप आगे बढ़ते हो उसी वही एक
- 36:10ऑप्टिमिज्म आपके अंदर लेके आता है और एक
- 36:13आप लाइफ को एक ब्राइटर साइड की तरह देखने
- 36:15लग जाते हो। ठीक है? देन है जी दूसरा
- 36:17इंपॉर्टेंट कैरेक्टरिस्टिक है लॉ ऑफ़
- 36:19कर्मा। जैसे हमने लॉ ये पुरुषार्थ की
- 36:22थ्योरी भी बात की ऊपर अभी डिटेल में भी
- 36:24करेंगे। ऐसे ही कर्म की भी थ्योरी है। सो
- 36:27चाहे ये आपका बुद्धिज्म जैनिज्म हो, चाहे
- 36:29आपकी ऑर्थोडॉक्स फिलॉसफीस हो वो सारे के
- 36:32सारे कर्मों पे बिलीफ रखते हैं कि जैसा आप
- 36:34बोगे वैसा ही आप काटोगे। ओके? तो इनफैक्ट
- 36:38थोड़ा और डिटेल में अगर हम जाएं तो इसमें
- 36:41कर्म की जो बात आती है तो कर्म में क्या आ
- 36:43जाता है कि जो इसमें तीन तरीके के कर्म
- 36:46है। एक है संचित कर्म देन आपका ये आपका
- 36:49प्रारबद्ध कर्म। अगर मैं प्रोनाउंस गलत कर
- 36:52रही हूं तो मुझे माफ़ कीजिएगा। और एक है
- 36:54आगमिक कर्म। ठीक है? तो ये तीनों कर्म का
- 36:56मतलब आपको पता होना चाहिए। इसीलिए मैंने
- 36:58इनको थोड़ा सा बोल्ड रखा है। ओके? तो
- 37:01समझने के लिए आप ये समझिए कि जो कर्म आप
- 37:04मतलब ना जिसकी वजह से आप दोबारा जन्म ले
- 37:06रहे हो या पिछले जन्म में कुछ हुआ हो तो
- 37:09वो जो सारे ओवरऑल टोटल कर्मों की बात कर
- 37:12रहे हैं वो हैं संचित कर्म। ओके? जिन
- 37:14कर्मों का फल हमें ऑलरेडी मिलना शुरू हो
- 37:17गया है, चाहे हमने पहले अच्छे कर्म किए
- 37:19हो, बुरे कर्म किए हो, लेकिन जिनका कर्म
- 37:21हम अभी भोग रहे हैं, दैट इज प्रारबद्ध
- 37:24कर्म। ओके? और तीसरा है आगमिक कर्म यानी
- 37:27आगे आने वाले कर्म जो हमारे बिहेवियर की
- 37:30वजह से आगे अब और चीजें होएंगी।
- 37:33फ्यूचरिस्टिक जो चीजें होने वाली हैं।
- 37:36ओके? सो ये तीन कर्म है। जी। इवन दोज़
- 37:39सिस्टम्स जो एक्सेप्ट नहीं करते गॉड को।
- 37:41जैसे हमने बात की इसकी बुद्धिज्म की या
- 37:44जैनिज्म तो गॉड को मानता है लेकिन वो
- 37:46जिन्ना से नीचे रखता है जो हम अभी आगे
- 37:47देखेंगे। जिन्ना से नहीं अ आपके सॉरी सॉरी
- 37:51सॉरी तीर्थंकरों से नीचे रखता है। जिन्ना
- 37:53तो इस्लाम में आ गया। ठीक है? सो गॉड में
- 37:56जो मानते हैं नहीं मानते सब लोग
- 37:58डॉक्ट्राइन ऑफ़ कर्मा में जरूर मानते हैं।
- 38:01ठीक है? सो अब ये तीन चीजें जो हैं इनको
- 38:03आप समझने की कोशिश करो कि इसको एक एरो ऑफ़
- 38:06थ्योरी एरो एरो एनालॉजी से हम समझते हैं।
- 38:09ठीक है? तो संचित कर्म मतलब मान लो आप जो
- 38:11है निशाना लगा रहे हो कुछ ओके एक तो है जो
- 38:14तीर आपने कमान पे तान रखा है ठीक है एक जो
- 38:18तीर निकल के निशाने पे लग चुका है और एक
- 38:20जो तीर और मेरी पीछे रखे हुए हैं जिनके
- 38:23थ्रू मुझे आगे निशाना लगाना है तीन तरीके
- 38:26हुए ना तो जो ऑलरेडी लग चुका है निशाने पे
- 38:29वो है जी प्रारबद्ध यानी अब वो रोका नहीं
- 38:32जा सकता आपने जो कर्म करने थे पहले कर
- 38:34चुके हो उनका फल अभी मिलेगा ठीक है चाहे
- 38:38इस जन्म में मिले चाहे चाहे अगले जन्म में
- 38:40मिले या जो इस जन्म में मिल रहा है वो
- 38:42पिछले जन्मों का मिल रहा हो व्हाटएवर इट
- 38:44इज़ सो उसको हम प्रारबद्ध कर्म बोल रहे हैं
- 38:46कि ये ये वो तीर है जो कमान से निकल के लग
- 38:50चुका है निशाने पे आप रोक नहीं सकते इसको
- 38:53ओके संचित जो है वो जो लाइन में लगे हुए
- 38:56एरो है और आगामी कर्म जो आप अभी कर्म कर
- 38:59रहे हो मतलब आपने एम लगा रखा है तो जो
- 39:02चीजें अभी आप कर रहे हो वो आगामी कर्म
- 39:05आपके आगे के लिए दिखेंगी चीजें और संचित
- 39:07कर्म मतलब ओवर वो टोटल जो आपके एरोस हैं
- 39:10वो सारे के सारे संचित में आ गए। तो संचित
- 39:13कर्म जो है वो टोटल एक्यूमुलेटेड
- 39:15अनरिडीम्ड कार्मिक डेप्ट जो आपके ऊपर है।
- 39:19ठीक है? यानी इन चीजों का फल अभी आपको
- 39:21मिला नहीं है। कुछ बचा भी हुआ है।
- 39:23प्रारबद्ध कम ये स्पेसिफिक है। ये वो
- 39:25पोर्शन है जो आप करेंटली लाइफ टाइम में
- 39:27एक्सपीरियंस कर रहे हो। संचित टोटल है।
- 39:30प्रारबद एक सबसेट हो गया और आगामी जो है
- 39:33वो की सेट हो गया। की कांसेप्ट हो गया जो
- 39:36कि करंट जो एक्शंस हैं, थॉट्स हैं जो आप
- 39:38कर रहे हो प्रेजेंट लाइफ में उनका जो
- 39:40फ्यूचर में आपको रिजल्ट देखने को मिलेगा।
- 39:43ठीक है? समझ आई है चीज? सो ये तीनों कर्म
- 39:46आपको पता होने चाहिए। जी रिलीजन की भीेंस
- 39:48है। ठीक है? तो एक इंपॉर्टेंट ब्रांच है
- 39:50फिलॉसफी की। इंडियन थॉट्स की जब हम बात
- 39:52करें ऑन पार विद वेस्टर्न फिलॉसफी। इंडियन
- 39:55फिलॉसोफी जो है वो डीपली पॉलिटिकल
- 39:57आइडियोलॉजीस, सोशल डॉक्ट्राइन,
- 39:58लिंग्विस्टिक एनालिसिस। तो इन सारी चीजों
- 40:01से डील करती है। ओके? सो ये ओवरऑल जो है
- 40:04हमने स्पेशल फीचर्स की बात कर ली। अब हम
- 40:06बात करेंगे भाई जो थ्यरीज़ मैंने आपको बताई
- 40:09तो चार थ्यरीज़ की हम बात करेंगे। ठीक है?
- 40:11यूजुअली ये हिंदू फिलॉसफी के अंडर आ जाते
- 40:14हैं। बट हमें हिंदू से लेना देना नहीं है।
- 40:16हमें लेना देना है कि हमें मतलब पता होना
- 40:18चाहिए कि भ जब पुरुषार्थ थ्यरी की बात हो
- 40:20रही है, कर्मा थ्योरी की बात हो रही है,
- 40:22ऋण थ्योरी की बात हो रही है, तो इनका मतलब
- 40:24क्या है? ओके? तो पुरुषार्थ में मैंने
- 40:26आपको बताया था कि जो वैल्यूस हैं, वैल्यू
- 40:28एस्क्राइब्ड टू ह्यूमन एक्शन एंड बिहेवियर
- 40:31कि आपका मोटो क्या है? क्यों आप जिंदगी
- 40:34में आए हो? सो पुरुषार्थ एक कंपोजिट वर्ड
- 40:37है। संस्कृत टर्म है। पुरुष और अर्थ।
- 40:39पुरुष मतलब ह्यूमन बीइंग और अर्थ मतलब उन
- 40:41ह्यूमन बीइंग की लाइफ का मतलब क्या है?
- 40:43ऑब्जेक्टिव ऑफ़ लाइफ। सो एंटाइम
- 40:45एटाइमोलॉजिकली अगर हम देखें तो पुरुषार्थ
- 40:48का मतलब हो गया मीनिंग ऑफ़ ह्यूमन लाइफ।
- 40:51यानी आपका क्या उद्देश्य है इस जिंदगी में
- 40:54आने का? तो वो उद्देश्य की बात हम
- 40:56पुरुषार्थ में करते हैं। सो चार मेजर गोल
- 40:59हैं जी। चार कारण हैं। चार चीजों के लिए
- 41:01हम धरती पे आए हैं। धर्म के लिए, अर्थ के
- 41:04लिए, काम के लिए और मोक्ष के लिए। ओके? सो
- 41:08इनहेरेंट कॉन्फ्लिक्ट आपको देखने को
- 41:10मिलेगा। किसके अंदर? अर्थ यानी आपकी वेल्थ
- 41:14और आपका जो है वो काम या प्लेज़र वाली जो
- 41:16फीलिंग है उसके अंदर। ठीक है? रनसिएशन ऑफ
- 41:20वेल्थ एंड प्लेज़र फॉर द सेक ऑफ स्पिरिचुअल
- 41:22लिबरेशन। सो लास्ट में जाके आप मोक्ष की
- 41:25बात करते हो। ओके? सो जब कॉन्फ्लिक्ट आता
- 41:27है इन केस ऑफ़ कॉन्फ्लिक्ट धर्म जो है वो
- 41:29ज्यादा इंपॉर्टेंट हो जाता है एज कंपेयर
- 41:32टू अर्थ और काम। इसलिए धर्म सबसे ऊपर रहता
- 41:36है। तो जब आप कंटिन्यूटी की बात करते हो
- 41:38सो कंफ्यूज नहीं होना है। फोकस ये है
- 41:41हमारा कि हम धर्म की सबसे पहले बात करते
- 41:43हैं। क्योंकि इस बार अपने क्वेश्चन आया था
- 41:46ये लेकिन इसको वो कर दिया था। क्या बोलते
- 41:48हैं? इस बार नहीं मतलब जून अभी कौन सा
- 41:51पेपर हुआ? दिसंबर हुआ है ना? तो जून वाले
- 41:53पेपर में आया था ये क्वेश्चन। धर्म, अर्थ,
- 41:55काम और मोक्ष कि इनको सीक्वेंस में लगाइए।
- 41:58तो ये है जी सीक्वेंस 1 2 3 4 क्योंकि
- 42:00फर्स्ट एंड फोरमोस्ट गोल है ह्यूमन लाइफ
- 42:03का धर्म यानी जो चीजें आपके बस बस में हैं
- 42:06जिस चीज के लिए आप हो वो आप सही तरीके से
- 42:09करो अपनी ड्यूटी सही तरीके से करो दूसरा
- 42:12गोल है आपका अर्थ पैसा कमाना वेल्थ तो
- 42:15इसमें करियर स्किल वेल्थ प्रोस्पेरिटी
- 42:18सारी चीजें आ जाती हैं। तो वो है
- 42:20प्रिंसिपल ऑफ धर्म। सो अर्थ सॉरी ये है
- 42:24प्रिंसिपल ऑफ आपका क्या बोलते हैं? अ अर्थ
- 42:27जिसमें आप पैसा कमा रहे हो। ठीक है? तो
- 42:28धर्म मतलब चीजों को सही रखना। आप चीजों को
- 42:31सही रखोगे। इट्स लाइक अर्थ को मेंटेन करने
- 42:33के लिए पहले धर्म करना जरूरी है। सो अर्थ
- 42:36इज़ एसेंशियल फॉर द मेंटेनेंस ऑफ़ धर्म इन द
- 42:39सोसाइटी। सो जब पैसा होगा तभी आप चीजें
- 42:42सही कर पाओगे। ऐसा लगा लो या ओवरऑल ये
- 42:44सारी चीजें एक दूसरे पे डिपेंडेंट हैं। सो
- 42:47अर्थ बहुत जरूरी है अगर आप धर्म सोसाइटी
- 42:49में मेंटेन करके रखना चाह रहे हो। धर्म का
- 42:51मतलब आप रिलीजन से मत लगा के चलना। धर्म
- 42:54का मतलब टू होल्ड टुगेदर टू प्रिजर्व
- 42:57चीजों को सही करना। अह धर्म ही जरूरी है
- 43:00सोसाइटी में सोशल ऑर्डर और स्टेबिलिटी को
- 43:03मेंटेन करने के लिए, चीजों को सही करने के
- 43:05लिए, डिसिप्लिन मेंटेन करने के लिए। सो वो
- 43:08चीजें सही करने वाला जो है वो धर्म में
- 43:10आएगा। पैसा कमाने वाला अर्थ में आ जाएगा।
- 43:13वेल्थ और काम मतलब यह तीसरा गोल है कि
- 43:16आपकी जो बॉडीली डिज़ायर्स हैं, प्लेज़र है,
- 43:18लव है, उसके प्रति ग्रेटिफिकेशन होना।
- 43:22ओके? सो वो सारी चीजें इसके अंदर आ
- 43:24जाएंगी। कई बार प्लेजर या काम को जो है हम
- 43:26सिर्फ सेंशुअलिटी से ही रिलेट करते हैं।
- 43:29बट सिर्फ वहां तक सीमित नहीं है ये। इट इज़
- 43:32एंजॉयंग द वर्ल्डली प्लेज़र। सो आप चीजों
- 43:35को देख रहे हो। बहुत सुंदर पहाड़ देखने गए
- 43:37हो आप नदियां देखने गए हो। सो वो सारी
- 43:40चीजें भी एक तरीके से प्लेजर हैं। तो
- 43:42प्लेजर को स सिर्फ सेंशुअल प्लेजर से आप
- 43:45अटैच नहीं करेंगे। ओके? तो आप जो देख रहे
- 43:48हो, अच्छी चीजें सुन रहे हो, अच्छा खाना
- 43:50खा रहे हो, वो सारे प्लेजर ही हो रहे हैं।
- 43:53जो आप पांच सेंस ऑर्गन के थ्रू चीजें फील
- 43:55कर रहे हो वो काम में आ गया। ओके? ये
- 43:58तीसरा गोल है ह्यूमन लाइफ का। चौथा गोल
- 44:00अल्टीमेट गोल आपका मोक्ष हो जाएगा। सो
- 44:03आपको ये तो इस सीक्वेंस में भी पता हो।
- 44:05ऊपर जो हमने हायर वैल्यू, लोअर वैल्यू,
- 44:07हाईएस्ट वैल्यू की बात की थी वो भी पता
- 44:09हो। हाईएस्ट मोक्ष हो गया। धर्म जो है वो
- 44:12हायर वैल्यू हो गई। काम जो है वो लोएस्ट
- 44:15और अर्थ जो है वो लोअर वैल्यू हो गई। ठीक
- 44:17है जी? सो ये चीजें आपको पता हो। मोस्ट
- 44:19इंपॉर्टेंट पुरुषार्थ जो है वो मोक्ष को
- 44:22बोला जाता है। इन चारों को हम पुरुषार्थ
- 44:25ही बोलते हैं। यानी पुरुष का क्या अर्थ
- 44:28है? पुरुष की पुरुष जब जिंदगी में आ गया
- 44:31है तो पुरुष मतलब सिर्फ मेल काउंटर पार्ट
- 44:33की नहीं बात हो रही। ह्यूमन बीइंग की बात
- 44:34हो रही है। सो पुरुष और अर्थ यानी
- 44:36ऑब्जेक्टिव ऑफ ह्यूमन लाइफ। सो ये चार
- 44:39ऑब्जेक्टिव हैं। ठीक है? देन बात आती है
- 44:42थ्यरी ऑफ़ आश्रम। सो आश्रम जो है वो आपका
- 44:45संस्कृत वर्ड श्रम से आया है। यानी मींस
- 44:48एग्जर्ट वनसेल्फ। सो वो होता है ना कि एक
- 44:50आप एक टेंपरेरी स्टेज की आश्रम इज़ लाइक अ
- 44:53टेंपरेरी स्टेज कि आप आपके चार आश्रम है
- 44:56लाइफ में। तो इन चार आश्रमों की बात हिंदू
- 44:58फिलॉसोफी में होती है। ब्रह्मचारी आश्रम
- 45:02तो पहला आश्रम जिसमें थ्रेड सेरेमनी होगी।
- 45:04उपनयन सेरेमनी। उपनयन सेरेमनी हिंदूज में
- 45:07होती है जो कि कितने ऐज पे होती है वो आप
- 45:10मुझे बताना। ठीक है? ये मैंने कई बार
- 45:12करवाया हुआ है। तो अगर आप पहली बार भी देख
- 45:14रहे हो तो आप मुझे बस देख के ये बताना
- 45:16क्योंकि मैंने सबसे पहली वीडियो ही वैदिक
- 45:18फिलॉसफी पे डाली थी। ठीक है? वैदिक
- 45:20स्कूल्स पे वैदिक एजुकेशन पे चैनल पे जो
- 45:23डाली थी। ठीक है? तो आप ओल्डेस्ट वीडियो
- 45:24देखोगे तो वो भी देखना कभी। ठीक है? सो
- 45:26उपनयन सेरेमनी सैक्रेड थ्रेड सेरेमनी होती
- 45:29है। यहां से चीजें शुरू होती हैं। ठीक है?
- 45:32सो वो चीज आपको पता होनी चाहिए कि अच्छा
- 45:35ये जो है ये कहां अच्छा ब्रह्मचर्य की जब
- 45:37हम बात कर रहे हैं तो सेलिब्रेट रहते हो
- 45:39आप तब तक शूद्रास जो हैं जो अनटचेबल्स हैं
- 45:42उनको अलाउड नहीं है एजुकेशन ग्रहण करना
- 45:45ट्रेडिशनली ओके तो ये उस टाइम गुरुकुल
- 45:48सिस्टम के टाइम की बात हो रही है ओके सो
- 45:50चीफ ड्यूटी क्या है इंडिविजुअल की एजुकेशन
- 45:52को सीख करना और वेदाज़ को समझना बाकी
- 45:55ड्यूटीज़ क्या है गुरु के घर पे ही रह रहे
- 45:57हो सेलिबसी प्रैक्टिस कर रहे हो दैट मींस
- 46:00यू आर नॉट सेक्सुअली एक्टिव फॉल फॉलोइंग
- 46:02लाइफ ऑफ ऑस्टेरिटी एंड सर्विस। सो आप जाके
- 46:05भिक्षा मांग रहे हो, लोगों के लिए अपनी
- 46:08जिंदगी दे रहे हो। तो ये 25 साल की उम्र
- 46:10तक रहेगा। ओके? सो ये 25 साल तक रहेगा।
- 46:14यूजुअली छह मैं बता देती हूं। चलो। उपनयन
- 46:17सेरेमनी छह साल पे शुरू होती है
- 46:19ब्राह्मणों की। ठीक है? देन आठ साल पे
- 46:21आपकी क्षत्रियों की। अह छह आठ और 12 है आई
- 46:24थिंक 12 पे वैश्यों की शुरू होती है। तो
- 46:26हमने चार वर्ण पड़े हैं। नहीं पता हो तो
- 46:29मैं अभी बता देती हूं। एक है ब्राह्मण,
- 46:32दूसरा है क्षत्रिय, तीसरा है वैश्य और
- 46:35चौथा है शूद्र। शूद्रों को अलाउड नहीं है
- 46:37तो उनकी उपनयन सेरेमनी होएगी ही नहीं।
- 46:39पहली सबसे पहले ब्राह्मणस की होएगी छ साल
- 46:42की उम्र में, क्षत्रियों की होएगी आठ साल
- 46:44की उम्र में और 12 साल की उम्र में होएगी
- 46:47वैश्य की। ठीक है? सो वैश्य मतलब जो क्या
- 46:49करते थे? ट्रेड करते थे। क्षत्रिय मतलब जो
- 46:52जंग लड़ने जाते थे। ब्राह्मण मतलब जो
- 46:54एजुकेशन सिस्टम में थे, टीचर्स थे, जिनको
- 46:57बहुत नॉलेज थी वो लोग। ओके? तो ये 6 8 12
- 47:00आप याद रखेंगे हर एक वेद को के अंदरस्ट्री
- 47:04हासिल करने का टाइम होता था 12 साल ओके
- 47:06यानी जब देखो ये सबसे पहले एडमिट हुए हैं
- 47:09ना तो ऑब्वियसली ये ज्यादास्ट
- 47:12हासिल
- 47:14ये ज्यादा वेदों पेस्ट हासिल कर पाएंगे।
- 47:17ओके? सो ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य एक
- 47:20वेद को कंप्लीटस्ट हासिल करने में 12 साल
- 47:22लग रहे हैं। तो आप एक वेद तो कम से कम
- 47:24सीखोगे। जैसे अभी 12वीं तक की शिक्षा होती
- 47:26है। ठीक है? सो 25 साल तक आपका ब्रह्मचारी
- 47:29आश्रम चल रहा है। जी देन गृहस्थ आश्रम आ
- 47:32जाएगा। घर बसाने वाली सिचुएशन। अब 25 से
- 47:3550 साल तक ये घर बसाने वाली चीज चलेगी। घर
- 47:38कब बसेगा? जब शादी हो जाएगी। सो मैरिज
- 47:40सेरेमनी जो है वो इसके अंदर आ जाएगा। सो
- 47:43आफ्टर ब्रह्मचारी आश्रम दूसरी स्टेज शुरू
- 47:45हो जाएगी इमीडिएटली। दैट इज़ गृहस्थ आश्रम।
- 47:48ओके? देन तीसरे क्योंकि ये इस इस गृहस्थ
- 47:51आश्रम का मतलब है कि आप मेन फोकस अब अर्थ
- 47:53पे और काम पे दोगे यानी अपने प्लेजर पे
- 47:57एंजॉयमेंट पे और पैसे कमाने पे उस पे मेन
- 48:00फोकस है इन 25 साल में 50 साल तक। देन है
- 48:02जी वनप्रस्थ आश्रम जो 50 के बाद शुरू होगा
- 48:0575 तक जाएगा। ठीक है? तो 25-25 साल की लगा
- 48:08लो आप चारों। 100 साल की उम्र हम एवरेज
- 48:11लेके चल रहे हैं यहां। ठीक है? वनप्रस्थ
- 48:13आश्रम में जो है वो तीसरा फज़ है। 50 साल
- 48:16की उम्र पे शुरू होगा। इंडिविजुअल अपनी
- 48:19रिस्पांसिबिलिटीज जो है हाउसहोल्ड की वो
- 48:21अपने बच्चों को ट्रांसफर कर देते हैं,
- 48:23सौंप देते हैं। ठीक है? और अब उनका टाइम आ
- 48:25जाता है जी भगवान का नाम लेने का। ठीक है?
- 48:28सो इफ अ पर्सन डाइस ड्यूरिंग दिस आश्रम
- 48:31उनकी सोल को मोक्ष मिलेगा ऐसा माना जाता
- 48:34है। ओके? क्योंकि आपने सारी
- 48:35रिस्पांसिबिलिटीज़ जो हैं उनसे पार पा ली
- 48:38है। देन सन्यास आश्रम है जी 75 साल के
- 48:41बाद। अब आप अपने वर्ल्डली टाई से सारी
- 48:44चीजों से सबसे दूर हो के अब मोक्ष
- 48:46मेडिटेशन वो वाली स्थिति जो है वो आ गई
- 48:49है। ओके? सो इस पे कोई भी नॉट ओनली सोशल
- 48:52इन इट्स इंप्लिकेशन बट ये एम्फसाइज करता
- 48:55है कि रनसिएशन हो। यानी कि आपका सन्यास और
- 48:59वनप्रस्थ आश्रम में हम कोशिश करते हैं कि
- 49:01आप मेडिटेट करें। भगवान को याद करें ताकि
- 49:04आपको मोक्ष प्राप्ति हो। ओके? तो ये चारों
- 49:06आश्रम भी पता हो आपको। देन थ्योरी ऑफ़
- 49:08कर्मा है। कर्म की थ्योरी का तो हमें समझ
- 49:10आ ही रहा है कि जो आपने किया है वो
- 49:13भुगतोगे। जो आपने बोया है वो काटोगे। तो
- 49:16यही बेसिक प्रिंसिपल है। तो कॉज एंड
- 49:17इफेक्ट वाली चीज जो है वो आपको थ्योरी ऑफ़
- 49:20कर्मा में नजर आएगी कि एक्चुअल में जो
- 49:22आपने चीजें की हैं वही आपको जो इट्स लाइक
- 49:25वही कि सारी चीजों को रिबर्थ दोबारा से
- 49:28पुनर्जन्म, साल्वेशन वो सारी चीजें हम
- 49:30कनेक्ट करके चलते हैं। ओवरऑल आपको बस इतना
- 49:33पता होना चाहिए कि जो अनकॉन्शियस
- 49:35इनवोलंटरी या अनइटेंशनल एक्शन है वो कर्म
- 49:38का पार्ट नहीं होंगे। सो इट्स लाइक
- 49:40इंटेंशनली आप किसी का बुरा मत कीजिए।
- 49:42इंटेंशनली आप कोई गलत काम मत कीजिए। कई
- 49:45बार कुछ चीजें अनइटेंशनली हो जाती हैं वो
- 49:48आपके कर्म में इंक्लूडेड नहीं होंगी। ओके?
- 49:52तो चाहे मेंटल हो, फिजिकल हो, वर्बल हो बट
- 49:55जो भी चीजें जो भी इंटेंशनल एक्शन आप ले
- 49:58रहे हो मान लो आप किसी का बुरा कर नहीं
- 50:00रहे हो लेकिन बुरा सोच रहे हो तो वो भी
- 50:02आपके कर्म में इंक्लूड होगा। बिकॉज़ आप
- 50:04इंटेंशनली सोच रहे हो। ओके? सो मेंटल,
- 50:07वर्बल, फिजिकल ये सारे तरीके से जो भी आप
- 50:10इंटेंशनल एक्शन कर रहे हो वो सारे कर्म
- 50:12में आएंगे। सो कर्म जो आपने किया है उसका
- 50:15फल तो आपको भुगतना पड़ेगा। यानी जो कॉज है
- 50:18उसका एक इफेक्ट तो आपको देखने को मिलेगा।
- 50:20तो इन नटशेल जो भी अच्छे या बुरे एकशंस आप
- 50:23कर रहे हो ओवर द पीरियड ऑफ़ टाइम ओवर द ईयर
- 50:26ऑफ़ लाइफ योर लाइफ तो वो सारे के सारे
- 50:28एक्यूमुलेट होते जाएंगे और फिर आपको उनका
- 50:31फल जो है वो देखने को मिलेगा। सो थ्योरी
- 50:34ऑफ़ कर्मा। कर्मा में दो तरीके के कर्म है।
- 50:36सकाम कर्म निष्काम कर्म। सकाम कर्म में आप
- 50:39रिजल्ट माइंड में लेके चल रहे हो कि आप
- 50:41किसी का अच्छा भी कर रहे हो तो क्यों कर
- 50:43रहे हो वो वाली चीज बट आपका निष्काम कर्म
- 50:46है कि डिटच्ड इनवॉल्वमेंट यानी जो आप काम
- 50:49कर रहे हो वो डिटच होके कर रहे हो आपको
- 50:51अगले इंसान से कोई फायदे नुकसान वाली चीज
- 50:54दिमाग में नहीं है। ओके? तो वो निष्काम
- 50:56कर्म है। यानी रिजल्ट से डिजायरेबल आउटकम
- 51:00से डिटच होके यानी वही सेल्फलेस वर्क वाली
- 51:04चीज़ आ गई। तो आप जो है स्वार्थ निस्वार्थ
- 51:07भाव से जब आप काम कर्म कर रहे हो तो
- 51:09निष्काम कर्म और किसी थोड़े स्वार्थ के
- 51:11साथ थोड़े रिजल्ट के को दिमाग में रखते
- 51:14हुए कि डिजायर्ड आउटकम क्या होगा उसको
- 51:16दिमाग में रखते हुए आप कर रहे हो तो वो
- 51:18आपका सकाम कर्म हो जाएगा। ठीक है जी। अब
- 51:21धरती में आए हैं तो कुछ ना कुछ बोझ तो
- 51:23चढ़ेगा सिर पे ऋण चढ़ेगा। तो वो जो ऋण है
- 51:26कि आपके थ्रूउ द लाइफ स्पैन आपका जो आपके
- 51:29सिर पे जो ऋण है डे है वो जो चढ़ रखा है
- 51:32वो तीन लोगों का बेसिकली माना जाता है। एक
- 51:34देव ऋण। ठीक है? तो ये सतपथ ब्राह्मण जो
- 51:37है वो तीन टाइप के ऋण की बात करते हैं।
- 51:40देव ऋण मतलब जो भगवान का कर्ज आपके ऊपर
- 51:42है। पितृ ऋण जो आपके एनसेेस्टर्स और
- 51:45पूर्वजों का ऋण आपके ऊपर है। और ऋषि ऋण
- 51:48यानी कि जो आपके गुरु और टीचर्स का आपके
- 51:51ऊपर ऋण है। जैसे एकलव्य ने जो है वो अपना
- 51:54थंब सैक्रिफाइस कर दिया था गुरु
- 51:56द्रोणाचार्य ने जब वो डिमांड की गुरु
- 51:59दक्षिणा। सो वो एक तरीके से ऋण उतारने
- 52:01वाले ऑलदो उतर नहीं सकता बट वो ऋण उतारने
- 52:03वाली चीज है कि आपका आपके ऊपर गुरु का डेट
- 52:06था क्योंकि उसने आपको नॉलेज और विज़डम
- 52:08प्रोवाइड की है तो वो ऋषि ऋण हो गया। ओके?
- 52:11कई बार आप धरती पे रह रहे हो तो ऑब्वियसली
- 52:13मनुष्य भी आपस में है तो मनुष्य ऋण भी
- 52:16बोला जाता है एक और ऋण। ठीक है? तो जो डेट
- 52:19आपके फॉलो बीइंग्स के लिए आपके आपका ऋण है
- 52:23आपके ऊपर। सो वो सारी चीजें ये आप फिर
- 52:25चैरिटी फिलेंथ्रोफी इन चीजों में इंक्लूड
- 52:28हो के सोसाइटी को पेबैक करके सोसाइटी के
- 52:30वेलफेयर के लिए काम करके सो वो सारी चीजें
- 52:33मनुष्य ऋण आप उतार सकते हो या उसकी कोशिश
- 52:36कर सकते हो। ओके? तभी बोलते हैं ना जैसे
- 52:38इसमें क्या नाम है? दान तो हर एक धर्म में
- 52:42ही है। बट जब हम गुरुद्वारे की बात करते
- 52:44हैं तो वहां पे गुरु वाणी या वो जो चीजें
- 52:47मैंने पढ़ी नहीं है बट मुझे बेसिक जस्ट
- 52:49पता है कि 10% ऑफ योर इनकम जो है वो वहां
- 52:52जाना चाहिए। तो आप वो एक तरीके से पे यू
- 52:54आर पेइंग बैक टू द सोसाइटी। जो मनुष्य ऋण
- 52:57आपके ऊपर है वो आप थोड़ा सा कम करने की
- 53:00कोशिश कर रहे हो। ओके? सो ये कांसेप्ट ऑफ
- 53:03ऋण हो गया। ये चार कांसेप्ट्स आपको अच्छे
- 53:05से पता होने चाहिए। अब हम इंडियन स्कूल्स
- 53:07ऑफ फिलॉसोफी की बात करेंगे। हम इसमें ऑन
- 53:10फिल सारी फिलॉसोफीस को मैं टच करूंगी। बट
- 53:13उतना टच करूंगी जितना आपको समझ भी आ जाए
- 53:15बेसिक से एडवांस तक और आपके क्वेश्चंस भी
- 53:18सॉल्व हो जाएं। सबसे पहले हम बात करेंगे
- 53:20न्याय फिलॉसोफी की। न्याय वर्ड से ही आपको
- 53:23समझ आ रहा होगा कि रीजनिंग की बात हो रही
- 53:26है। न्याय प्रोवाइड करना, जस्टिस प्रोवाइड
- 53:28करना, लॉजिकली प्रॉपर आर्गुमेंट्स के साथ
- 53:31आगे बढ़ना उसकी बात हो रही है। राइट? सो
- 53:33न्याय आपको पहले तो यह पता हो कि सेज गौतम
- 53:36जो हैं उन्होंने फाउंड किया है। ये फाउंडर
- 53:38हैं वो। इसको अक्षपद के नाम से भी जाना
- 53:40जाता है। तो अक्षपद की बात हो तो भी आपकी
- 53:42न्याय फिलॉसफी ही आप मान के चलो। न्याय
- 53:45मतलब करेक्ट थिंकिंग, प्रॉपर आर्गुमेंट,
- 53:47वैलिड रीजनिंग, एक प्रैक्टिशनर जो है या
- 53:50बिलीवर ऑफ रियलिज्म जो कि रियलिटी की
- 53:53ट्रुथ में रियलिटी के जानने के लिए आप आगे
- 53:56बढ़ रहे हो। ठीक है? सो वो वो चीज न्याय
- 53:58में आएगी। अब न्यायिक फिलॉसफी को कई और
- 54:00नामों से भी जाना जाता है। जैसे
- 54:02तर्कशास्त्र यानी तर्क देना, रीजनिंग
- 54:04देना, प्रमाण शास्त्र, प्रमाण देना, एक
- 54:07लॉजिक देना, एविडेंस देना। ठीक है? हेतु
- 54:10विद्या कारणों का पता करना तो साइंस ऑफ
- 54:12कॉज वाद विवाद वाद विद्या लगा लो ठीक है
- 54:15तो वो वाद विवाद की स्थिति जो हम डिबेट
- 54:17में बात करते हैं देन अनविक्षी तो ये
- 54:20क्रिटिकल स्टडी साइंस ऑफ क्रिटिकल स्टडी
- 54:23सो ओवरऑल जो आप बात कर रहे हो न्याय से
- 54:26रिलेटेड है वर्ड पे जाइए उसी से चीजें
- 54:28रिलेट हो जाएंगी ओके दो टाइप की नॉलेज की
- 54:31ये बात करते हैं कि भ वैलिड नॉलेज होती है
- 54:33इनवैलिड नॉलेज होती है ये वैलिड नॉलेज
- 54:36किसको बोलते हैं ये वैलिड बोलते हैं किसको
- 54:39चार तरीके के सोर्सेस से जो नॉलेज आपको
- 54:41मिली है आपको परसेप्शन के थ्रू नॉलेज मिली
- 54:43है। इनका डिटेल जो है परसेप्शन, इनफ्रेंस,
- 54:46वर्बल टेस्टिमनी, कंपैरिजन ये हम पेपर वन
- 54:49की लॉजिकल रीजनिंग में भी पढ़ते हैं बहुत
- 54:52डिटेल में। ओके? सो मेनली हम छह सोर्सेस
- 54:55के साथ आगे बढ़ते हैं। उन छह में से ये इन
- 54:57चार को जो है वो वैलिड सोर्स मानते हैं कि
- 55:00अगर आपने इन तरीकों से इन चार तरीकों से
- 55:03नॉलेज गेन की है तो वो वैलिड है आपकी
- 55:06नॉलेज। अदरवाइज वो इनवैलिड है। ओके? तो
- 55:08परसेप्शन यानी जो पर्सव करके देन इनफरेंस
- 55:12अनुमान लगा के वर्बल टेस्टिमनी किसी ने
- 55:14कुछ बोले हैं शब्द जैसे गुरु ब्रह्मा के
- 55:17शब्द हो किसी के भी शब्द हो तो वो वो शब्द
- 55:20वो वर्बल टेस्टिमनी और कंपैरिजन कंपेयर
- 55:22करके जो आप चीजें सीख रहे हो। तो वो
- 55:25सोर्सेस जो हैं ये चारों सोर्सेस वैलिड
- 55:27हैं। ओके? इसके अलावा सारे इनवैलिड है
- 55:30जिसमें याद रखना, डाउट होना, एरर, तर्क ये
- 55:33सारी चीजें तर्क वैसे टेक्निकली लॉजिक में
- 55:36आना चाहिए बट ये तर्क वर्ड जो है वो इसी
- 55:39के अंदर आप ध्यान रखो बिकॉज़ ये पीवाईक्यू
- 55:41में एक बार आया हुआ है कि इनवैलिड नॉलेज।
- 55:43तो बाकी सारी चीजें इनवैलिड में जाएंगी।
- 55:45सिर्फ ये चार चीजें वैलिड में आएंगी।
- 55:48सेल्फ और लिबरेशन की बात करें तो ये बोलते
- 55:50हैं बहुत सारे सेल्फ एकिस्ट करते हैं
- 55:52यूनिवर्स में। कोई एक सेल्फ नहीं है। सो
- 55:54इनमरेबल यानी कोई नंबर ही नहीं है सेल्फ
- 55:58का जो एग्ज़िस्ट करते हैं। बहुत नंबर है।
- 56:00ठीक है? सेल्फ जो है जिसमें कॉन्शियसनेस
- 56:02रहेगी। आप ट्रैप्ड हो लॉ ऑफ़ कर्मा के
- 56:05थ्रू। तो लॉ ऑफ़ कर्मा मोस्टली सारी इंडियन
- 56:06फिलॉसफीज़ मानती हैं। तो सफरिंग पेन ये
- 56:09ऑब्वियस फिनोमिना है जिनको आप झे, चीजें
- 56:12देखोगे और फिर लिबरेशन की फॉर्म में आगे
- 56:14बढ़ोगे। लिबरेशन कब होगी? जब सेशन ऑफ
- 56:17कार्मिक चैन यानी जो कर्मों की चैन कर्मों
- 56:21का इनफ्लक्स चलता आ रहा है उससे जब निजात
- 56:24पाओगे जब डिटच्ड हो जाओगे बॉडी और सेंस
- 56:27ऑर्गन से सेल्फ आपका डिटच हो जाएगा सोल
- 56:30आपकी डिटच हो जाएगी तब आपको लिबरेशन
- 56:32मिलेगा भगवान एक ही है इनफाइनाइट है इटरनल
- 56:36है सब जगह प्रेजेंट है वही क्रिएटर है वही
- 56:39सस्टेनर है और वही डिस्ट्र डिस्ट्रयर है
- 56:42ओके सो ये चीजें आपको पता होनी चाहिए
- 56:44वर्ल्ड जो है वो चार इटर्न जनरल एलिमेंट
- 56:47से मिलके बना है। कौन से हैं वो चार
- 56:49एलिमेंट्स? स्पेस, टाइम, माइंड और सोल। सो
- 56:53गॉड जो है वो फर्स्ट एफिशिएंट कॉज है
- 56:57यूनिवर्सल फोर्सेस का। तो उसको हम क्रिएटर
- 56:59मान के चलते हैं। गॉड किसको बोल रहे हैं?
- 57:02जिसमें छह परफेक्शन है वही गॉड है।
- 57:05इनफाइनाइट ग्लोरी है। एब्सोल्यूट सोवनिटी
- 57:08है। यानी प्रभु सत्व होता है ना प्रभु
- 57:10सत्ता खुद मतलब सोवरन है। इंडिपेंडेंट
- 57:13वाली चीज़ अनक्वालिफाइड वर्चू है। सुप्रीम
- 57:16ब्यूटी एस्थेटिक है। परफेक्ट नॉलेज है
- 57:19उनके पास और वो कंप्लीटली डिटच्ड है सारी
- 57:23चीजों से। सो ये छह क्वालिटीज़ गॉड की
- 57:25इन्होंने बताई हैं। दीज़ सिक्स परफेक्शन हु
- 57:28सो एवर हैज़ इज़ गॉड। ओके? थ्योरी ऑफ़ कॉजेशन
- 57:32में ये बात करते हैं। यानी कारण क्या है
- 57:34चीजों का? सो ये कारण बताते हैं
- 57:36असत्कार्यवाद या फिर आरंभवाद। सो दो
- 57:39थ्योरी होती हैं। जी एक सत्कार्यवाद की
- 57:42थ्योरी एक असतकार्यवाद की थ्योरी। ओके?
- 57:45मैं समझा देती हूं। सत्कार्य दो थ्योरी
- 57:47हैं। थ्योरी ऑफ़ कोज़िशन। इंडियन फिलॉसोफी
- 57:50की जब हम बात करें। एक थ्योरी है
- 57:52सत्कार्यवाद की। एस से सत्कार्यवाद, एस से
- 57:54सांख्य फिलॉसोफी। सो सांख्य फिलॉसफी जो है
- 57:57वो इस थ्योरी को मानती है। न्याय फिलॉसोफी
- 58:00असत्कार्यवाद की थ्योरी को मानती है।
- 58:03न्याय फिलॉसोफी असतकार्यवाद या आरंभवाद
- 58:06आपको आरंभ मतलब चीजों की शुरुआत है। जो
- 58:09इफेक्ट है डजंट एग्ज़िस्ट इन कॉज़। लेकिन
- 58:13यहां पे सांख्य फिलॉसोफी वाले बोल रहे हैं
- 58:15कि प्री एग्ज़िस्टेंस है इफ़ेक्ट में। सो
- 58:17इफेक्ट और कॉज़। कॉज़ मतलब कारण। इफेक्ट
- 58:20मतलब जो हमें इफेक्ट देखने को मिला है उस
- 58:22वजह से जो रिजल्ट देखने को मिला है। जैसे
- 58:25दूध से दही बनाई। बहुत बेसिक एग्जांपल है
- 58:27आपको समझ आ जाना चाहिए। अगर मैंने दूध से
- 58:30दही बनाई है। सत्कार्यवाद वाले बोल रहे
- 58:33हैं कि इट्स नॉट द रियल बिगिनिंग। दूध में
- 58:35दही ऑलरेडी एकज़िस्ट करती थी। इट्स लाइक
- 58:38हमें नहीं पता था। तो ये रियल या नई
- 58:41क्रिएशन नहीं है। यानी जो दूध से दही बनी
- 58:44है। दही आपका रिजल्ट हो गया। दूध आपका
- 58:47कारण हो गया। का कॉज हो गया। तो जो आपका
- 58:49इफेक्ट है यानी दही है वो प्री एग्जिस्ट
- 58:52करता था दूध में। समझ आई ये चीज? ये
- 58:55सत्कार्यवाद वाले बोल रहे हैं। तो वो
- 58:57ऑलरेडी एग्ज़िस्ट करता था। चूंकि हमें
- 58:59चीजें अब मिली हैं तो वो परिणाम वो रिजल्ट
- 59:02हमें देखने को मिल रहा है। तो इस थ्योरी
- 59:04को परिणामवाद की थ्योरी भी बोलते हैं। सो
- 59:07इफेक्ट जो है इज़ मैनिफेस्टेशन ऑफ़ कोर्स।
- 59:10ना कि उसके मतलब कोई नई चीज नहीं है। जैसे
- 59:14अब आप दूध से दही ऑलरेडी बन सकती थी तभी
- 59:17तो आप बना पाए ना। आप तेल से थोड़ी दही
- 59:19बना दोगे। तेल से तो सीड और जो सीड है
- 59:23उनसे ही तेल निकलेगा ना। दूध से तो तेल
- 59:26नहीं निकाल सकते ना। तो ऑलरेडी एग्जिस्ट
- 59:29करता है जो रिजल्ट है वो किस में? कारण
- 59:32में। तो इफेक्ट जो है वो कॉज में एग्ज़िस्ट
- 59:34करता है। सत्कार्यवाद।
- 59:36परिणामवाद ये परिणाम देखने को मिल रहा है।
- 59:39लेकिन सेम एग्जांपल में न्याय थ्योरी बोल
- 59:42रही है कि दूध से जो दही बनी है वो नई
- 59:45क्रिएशन है। नई चीज की शुरुआत है। आरंभवाद
- 59:49है। दूध में दही पहले से एकिस्ट नहीं करती
- 59:52थी। सो इफेक्ट जो है डजंट एक्सिस्ट इन
- 59:55कोज़। ये बात स असतकार्यवाद वाले बोल रहे
- 59:58हैं। ठीक है। नाक बेची होने लग गई। हम तो
- 1:00:02ये न्याय थ्यरी बोल रही है। जी। ठीक है।
- 1:00:05सो आपको असत्कार्यवाद सत्कार्यवाद दोनों
- 1:00:07का पता होना चाहिए। सांख्य फिलॉसफी
- 1:00:08सत्कार्यवाद की थ्योरी को फॉलो कर रही है
- 1:00:10और न्याय फिलॉसफी और वैशिष्ट्य फिलॉसफी जो
- 1:00:13है वो आपकी आरंभवाद या असत्कार्यवाद की
- 1:00:16थ्योरी को फॉलो करते हैं। ओके जब बात आती
- 1:00:19है वैशिष्ट फिलॉसफी की फाउंडर कन्नड़ बट
- 1:00:23अकॉर्डिंग टू सम इनके फाउंडर जो है वो
- 1:00:25उल्लूक हैं। तो कई बार इसको अलुक्या
- 1:00:28फिलॉसफी भी बोला जाता है। ओके? वैशिष्ट
- 1:00:31फिलॉसफी में ये विशेष जो है वो उसका मतलब
- 1:00:34है पर्टिकुलर विशेष। ठीक है? स्पेशल। सो
- 1:00:37दिस इस सिस्टम में सात कैटेगरी सात पदार्थ
- 1:00:40आपको देखने को मिलते हैं। आपको रटने की
- 1:00:43जरूरत नहीं है क्योंकि ये एक्सप्लसिटली
- 1:00:45आपके सिलेबस में वैशिष्ट्य फिलॉसफी मेंशन
- 1:00:47नहीं है। तो जितना मैं बताऊं उतना आपके
- 1:00:49लिए मोर दैन इनफ रहेगा। ओके? क्योंकि आपके
- 1:00:52मेंशन वेदांता, सांख्य, योग और आपका
- 1:00:55बुद्धिज्म, जैनिज्म ये मेंशन है पांच और
- 1:00:58इस्लाम फिलॉसफी। सो जो मेंशन है उनको
- 1:01:01थोड़ा और डिटेल में करेंगे। लेकिन जो
- 1:01:02मेंशन नहीं है उनको भी करना जरूरी है। सो
- 1:01:04कन्नड़ जो जो फाउंडर हैं इसके वो पहली छह
- 1:01:07कैटेगरीज को मेंशन करते हैं। तो सात
- 1:01:09कैटेगरीज की बात हुई है। पहली छह कैटेगरीज
- 1:01:11उन्होंने दी। लास्ट का नाम जो है अभाव रख
- 1:01:14दिया। यानी सातवीं जो है वो अभाव कमी एक
- 1:01:16तरीके से। ठीक है? इनकी जो मेटाफिजिक्स है
- 1:01:19वो प्लूरलिस्टिक है। यानी बहुत सारी
- 1:01:21रियलिटी एग्जिस्ट करती हैं। हमने
- 1:01:23मेटाफिजिक्स में रियलिटी की ही तो बात की
- 1:01:25है ना? तो वैशिष्ट्य फिलॉसफी में आपकी
- 1:01:28प्लूरलिस्टिक फिलॉसफी आपको ये देखने को
- 1:01:30मिलेगी। दो प्रमाणास जैसे प्रमाणास मतलब
- 1:01:33सोर्स ऑफ नॉलेज। जैसे हमने ऊपर बात की थी
- 1:01:35चार वैलिड सोर्स ऑफ नॉलेज हैं। तो वो चार
- 1:01:38कौन-कौन से थे? आपका परसेप्शन, इनफेंस,
- 1:01:40वर्बल टेस्टिमनी और आपका क्या था?
- 1:01:42कंपैरिजन, उपमान। लेकिन वैशिष्ट्य जो है
- 1:01:45वो सिर्फ परसेप्शन और इनफेंस को ही वैलिड
- 1:01:48सोर्स ऑफ नॉलेज मानती है। ओके? ये है वो
- 1:01:51सात कैटेगरीज। सब्सटांस यानी द्रव्य नो
- 1:01:54सब्सटांस हैं इसमें। ठीक है? अर्थ, वाटर,
- 1:01:57फायर, एयर, ईथर जिनको हम पंचभूताज़ बोलते
- 1:02:00हैं। ओके? देन आपका टाइम, स्पेस, सेल्फ और
- 1:02:03माइंड बाद में इंक्लूड हो गया। क्वालिटी
- 1:02:05यानी गुण। 24 क्वालिटीज़ होती हैं। आपको
- 1:02:08रटने की जरूरत नहीं है। कौन सी 24 है?
- 1:02:10एक्शन यानी कर्म। पांच तरीके के एक्शन की
- 1:02:13बात हुई है। अपवर्ड मोशन, डाउनवर्ड मोशन,
- 1:02:16कॉन्ट्रैक्शन, एक्सपेंशन और गमन। सम
- 1:02:19सामान्य जो है जनरली तीन व्यूज जो हैं वो
- 1:02:22यहां होंगे। एक नॉमिनलिज्म,
- 1:02:23कॉनसेप्चुअलिज्म और रियलिज्म।
- 1:02:25पर्टिकुलरिटी यानी विशेष की बात हो रही
- 1:02:28है। इनहेरेंस समवय की बात हो रही है। नॉन
- 1:02:31एग्जिस्टेंस जो हमने सातवां डाला वो है
- 1:02:33अभाव। तो दो तरीके के अभाव हैं। ये वाला
- 1:02:36क्वेश्चन जो है वो उस पेपर में जरूर आता
- 1:02:38है पेपर वन में। ओके? तो ये आपका है जी
- 1:02:41आपका समस क्या था? समसग्र भाव और आपका ये
- 1:02:46अनोन्य भाव और संस्कार भाव। ठीक है? सो ये
- 1:02:49जो दूसरे वाला है अनोन्य जिसको हम
- 1:02:51म्यूचुअल नॉन एग्जिस्टेंस बोल रहे हैं। सो
- 1:02:55जो म्यूचुअल नॉन एग्जिस्टेंस है वो आपको
- 1:02:57पता होना चाहिए कि पोर्ट जो है वो कपड़ा
- 1:02:59नहीं है। कपड़ा जो है वो पोर्ट नहीं है।
- 1:03:01राइट? सो ये फोन जो है वो बुक नहीं है।
- 1:03:03बुक जो है वो फोन नहीं है। सो वो
- 1:03:05म्यूचुअली नॉन एग्जिस्टेंस है चीजों की।
- 1:03:08ओके? सो वो अनोन्य भाव हो गया। जो आपका ये
- 1:03:11सं ये आपका संस्कार भाव है इसमें तीन सब
- 1:03:14डिवीजंस हैं। एक है प्राग अभाव, एक है
- 1:03:16धनुष भाव और एक है आपका अत्यंत भाव।
- 1:03:18अत्यंत मतलब बिल्कुल एब्सोल्यूट। तो
- 1:03:20एब्सोल्यूट नॉन एग्ज़िस्टेंस। एक
- 1:03:22सब्सिकुएंट नॉन एग्ज़िस्टेंस है और एक है
- 1:03:24एंटीिसिडेंट। तो आपको एटलीस्ट ये टाइप्स
- 1:03:27पता हो कि किसके कौन से टाइप हैं। ओके?
- 1:03:29सिस्टम जो है ये वैशिष्क वाला असतकार्यवाद
- 1:03:32जैसे न्याय फिलॉसफी असतकार्यवाद को मानती
- 1:03:34है। ये भी असतकार्यवाद की फिलॉसफी में
- 1:03:36मानते हैं। ये भी मेंशन करते हैं गॉड ही
- 1:03:39सब कुछ है। ही इज़ द कॉज़ ऑफ़ क्रिएशन। ही इज़
- 1:03:42रिस्पांसिबल फॉर एट अ मूवमेंट्स। बॉन्डेज
- 1:03:45और लिबरेशन पे ये बोल रहे हैं बॉन्डेज।
- 1:03:47इग्नोरेंस की वजह से जो बंधन में आप बंधे
- 1:03:49हुए हो वो इग्नोरेंस की वजह से हो। और अगर
- 1:03:51आपको नॉलेज हासिल हो गई तो लिबरेट हो
- 1:03:54जाओगे आप। और एक लिबरेटेड सोल जो है वो
- 1:03:57सारी सफरिंग्स और सारी एंजॉयमेंट सबसे दूर
- 1:04:00रहते हैं। समभाव में रहते हो आप। ओके? सो
- 1:04:02इट इज़ प्योर। हेंस इट इज़ अनवारेड।
- 1:04:06देन बात आती है जी सांख्य फिलॉसफी की।
- 1:04:09वेरी इंपॉर्टेंट ओल्डेस्ट स्कूल ऑफ़
- 1:04:11फिलॉसोफीस को माना जाता है। कपिल जो हैं
- 1:04:13उनको माना जाता है। उन्होंने सांख्य सूत्र
- 1:04:15लिखे हैं। साईं साईं उस उसी को हम सांख्य
- 1:04:18फिलॉसफी बोलते हैं। कई बार सांख्य लिखा
- 1:04:21मिलता है। कई जगह सामख्य लिखा मिलता है।
- 1:04:23सो आप वो देख लीजिएगा। दोनों ही सेम ही
- 1:04:25चीज़ है। सांख्य करिका करके जो है वो ईश्वर
- 1:04:28कृष्णा ने लिखी है। गीता के अकॉर्डिंग
- 1:04:30सांख्य और योग फिलॉसफी जो है वो एक दूसरे
- 1:04:33का थ्योरिटिकल और प्रैक्टिकल आस्पेक्ट
- 1:04:35हैं। यानी सेम सिस्टम है। सांख्य फिलॉसोफी
- 1:04:38थ्योरिटिकल आस्पेक्ट एक्सप्लेन कर रही है
- 1:04:40और योग फिलॉसफी उसका प्रैक्टिकल आस्पेक्ट
- 1:04:42समझा रही है। ओके? जैसे हमने ऊपर बोला कि
- 1:04:45वैशिष्ट्य जो है वो प्लूरलिस्टिक फिलॉसफी
- 1:04:48है। तो सांख्य को हम ड्यूललिस्टिक
- 1:04:49रियलिज्म की तरह ले चलते हैं। यानी दो
- 1:04:52रियलिटी हैं। एक है पुरुष, एक है प्रकृति।
- 1:04:55सो पुरुष और प्रकृति से मिलके फिर सारी
- 1:04:58चीजें बनती हैं। तो जो होता है ना कि ये
- 1:05:01इवोल्यूशन को एक टेलियोलॉजिकल प्रोसेस या
- 1:05:03पर्पसिव साइक्लिक प्रोसेस मानते हैं। सर्ज
- 1:05:06और प्रलय यानी इवोल्यूशन हुआ। धीरे-धीरे
- 1:05:09सर्ज हुआ फिर प्रलय आ गई। सब खराब हो गया।
- 1:05:11डिॉल्व हो गया। सो डिसोल्यूशन फिर वापस से
- 1:05:14चीजें शुरू होंगी। तो वो सर्ज और प्रलय की
- 1:05:16स्थिति चलती रहेगी हमेशा। वो चीज इन्होंने
- 1:05:19बोली। इसीलिए ये टेलियोलॉजिकल पर्पसिव
- 1:05:22साइक्लिक प्रोसेस इसको बोलते हैं
- 1:05:24इवोल्यूशन को। पुरुष और प्रकृति से मिलके
- 1:05:27ही बहुत सारे एलिमेंट्स बनते हैं। टोटल 25
- 1:05:31मेटाफिजिकल कैरेक्टर्स या एलिमेंट्स की ये
- 1:05:34बात करते हैं। ओके? पुरुष जो हैं ना किसी
- 1:05:37चीज का कारण है ना इफेक्ट है। ओके? सेल्फ
- 1:05:40है ये। सब्जेक्टिव है, इनक्टिव है, प्योर
- 1:05:43कॉन्शियसनेस का सेंटर है। एब्सोल्यूट और
- 1:05:46इंडिपेंडेंट है। बहुत सारे पुरुष भी हो
- 1:05:49सकते हैं। ये बात आपको पता होनी चाहिए।
- 1:05:51प्रकृति इटरनल है, अनकॉन्शियस है बट
- 1:05:54एक्टिव है। इट इज़ रिस्पांसिबल फॉर फर्दर
- 1:05:58क्रिएशन। तो ये सिर्फ कारण है। यानी हर
- 1:06:01चीज का कारण प्रकृति है। सो कॉज ओनली ये
- 1:06:04सिर्फ कॉज है। ओके? पुरुष जो है ना कॉज है
- 1:06:07ना इफेक्ट है। अब बहुत सारे मेटाफिजिकल
- 1:06:10कैटेगरीज हम पढ़ेंगे जो कॉज हैं इफेक्ट है
- 1:06:13क्या है उनको हम डिटेल में डिस्कस करेंगे।
- 1:06:15त्रिगुणात्मक वर्ड आपको पता होना चाहिए।
- 1:06:18तीन गुणों से मिलकर बना है। ह्यूमन बॉडी
- 1:06:21भी सत्व, रजस और तमस। इन तीनों की बराबरी
- 1:06:25जो है वो किसी में ज्यादा, किसी में कम
- 1:06:27देखने को मिलेगी। किसी में रजस गुण ज्यादा
- 1:06:29होगा, किसी में सत्वगुण ज्यादा होगा। किसी
- 1:06:31में तमस ज्यादा होगा। तो उस बेसिस पे
- 1:06:33ह्यूमन पर्सनालिटी डिसाइड होती है। ओके?
- 1:06:36सो इक्विलिब्रियम ऑफ़ थ्री गुणाज़ सोर्स ऑफ़
- 1:06:39ऑल मटेरियल एग्ज़िस्टेंस। तो सोर्स कौन है?
- 1:06:42कारण कौन है? प्रकृति है। ओके? सांख्य
- 1:06:45फिलॉसफी के सत्व, रजस, तमस। ये गुण इनको
- 1:06:49कलर से भी रिलेट किया जाता है। सत्व मतलब
- 1:06:52वाइट, रजस मतलब रेड और तमस मतलब ब्लैक।
- 1:06:56ओके? ओके ये इनकी कैरेक्टरिस्टिक है वाइट
- 1:06:57है तो वाइट जैसी ही बिल्कुल पीसफुल अच्छी
- 1:07:00कैरेक्टरिस्टिक है पॉज फाइननेस लाइटनेस
- 1:07:03इलुमिनेशन जॉय रेड लाल जो होता है ना आजकल
- 1:07:07एक ऐड भी तो आती है Google की कि वो बच्चा
- 1:07:10अंधा है और उसका उसका फादर जो है वो एआई
- 1:07:13मोड या जैेमिनी मोड से पूछता है कि माय सन
- 1:07:16कैन नॉट सी हाउ डू आई एक्सप्लेन कलर्स टू
- 1:07:19हिम। सो उस टाइम पे व्हेन दे एक्सप्लेन
- 1:07:21रेड। सो रेड इज़ द कलर फॉर पैशन
- 1:07:24एक्साइटमेंट। सो वो चीज यहां पे शो की गई
- 1:07:27थी हीट। ठीक है? तो वो डायनामिज्म,
- 1:07:29एक्टिविटी, एक्साइटेशन, पेन उसका कलर रेड
- 1:07:32है। ऐसे ही ब्लैक ब्लैक इज द कलर ऑफ़
- 1:07:34हैवीनेस, लेज़नेस, ड्राउज़नेस,
- 1:07:37ऑब्स्ट्रैक्शन, डार्कनेस, इनर्शिया। तो ये
- 1:07:40सारी उल्टी चीजें तमस में है। सारी अच्छी
- 1:07:42चीजें सत्व में हैं। और रजस जो है उसमें
- 1:07:45थोड़ा सा बैलेंस्ड चीजें आपको नजर आ रही
- 1:07:47हैं। ओके जी। सांख्य फिलॉसफी सत्कार्यवाद
- 1:07:50की थ्योरी को फॉलो करती है जिसको
- 1:07:52परिणामवाद भी बोलते हैं जो मैंने अभी-अभी
- 1:07:54ऊपर एक्सप्लेन की थी आपको। ओके? ये तीन
- 1:07:56सोर्स अभी तक हमने किस-किस की बात की?
- 1:07:58हमने न्याय फिलॉसोफी की बात की और हमने
- 1:08:01वैशिष्ट्य फिलॉसोफी की बात की। हमने यहां
- 1:08:03बोला कि सिर्फ परसेप्शन और इनफरेंस दो ही
- 1:08:06वैलिड सोर्स हैं। न्याय में हमने बोला
- 1:08:08परसेप्शन है, इनफेंस है, वर्बल टेस्टिमनी
- 1:08:11है और आपका कंपैरिजन है। चार वैलिड सोर्स
- 1:08:15हैं। यहां पे हम बोल रहे हैं ये आपका जो
- 1:08:18है तीन वैलिड सोर्स हैं। परसेप्शन, इनफेंस
- 1:08:21और वर्बल टेस्टिमनी। तो ये सांख के
- 1:08:23फिलॉसोफी के जो है वो तीन वैलिड सोर्स ऑफ
- 1:08:26नॉलेज हैं। ओके? प्रमाता कौन होगा? का वो
- 1:08:29सब्जेक्ट वो नोअर यानी आप कुछ जानना चाह
- 1:08:31रहे हो तो आप प्रमाता हो। आप जिसके बारे
- 1:08:33में जानना चाह रहे हो दैट ऑब्जेक्ट दैट इज
- 1:08:36ब्रह्म्य और जो वैलिड सोर्स ऑफ नॉलेज है
- 1:08:38जिसके थ्रू जानना चाह रहे हो वो प्रमाण
- 1:08:41है। तो अब वो आप परसेप्शन से भी जान सकते
- 1:08:43हो इनफेंस से भी जान सकते हो। वर्बल
- 1:08:45टेस्टिमनी से भी जान सकते हो। ओके? ये 25
- 1:08:49मेटाफिजिकल कैटेगरीज हैं। जी। हमने बोला
- 1:08:52कि पुरुष और प्रकृति से मिलके ही सारी
- 1:08:54चीजें बनी है। टेक्निकली पुरुष से नहीं
- 1:08:57बनी है क्योंकि ना हम उसको कोज मानते हैं
- 1:08:59ना हम उसको इफेक्ट मानते हैं। सो हम बोल
- 1:09:02सकते हैं कि प्रकृति से ही सारी चीजें बन
- 1:09:04रही हैं। प्रकृति से आगे बना मे महत महत
- 1:09:07से अहंकार। अहंकार में फिर सत्व, रजस और
- 1:09:10तमस के हिसाब से पांच पांचवा जो है मनस हो
- 1:09:13गया। पांच सेंस ऑर्गन हो गए। पांच मोटर
- 1:09:15ऑर्गन हो गए। तमस में पांच सटल एसेंस हो
- 1:09:18गए और पांच ग्रॉस बॉडीज हो गई। ये इसका
- 1:09:21डिटेल्ड चार्ट है जो आपको अच्छे से पता
- 1:09:24होना चाहिए। महत चूंकि प्रकृति से बना है।
- 1:09:26प्रकृति तो हर एक चीज का ही कारण है। तो
- 1:09:29महत्व को फर्स्ट प्रोडक्ट ऑफ इवोल्यूशन भी
- 1:09:32बोला जाता है। देन बना अहंकार अहंकार में
- 1:09:35सत्व अहंकार रजस अहंकार तमस अहंकार। सत्व
- 1:09:39में एक मनस आपका मन। देन आपकी जो
- 1:09:41इंद्रियां हैं जिनको हम चाहे
- 1:09:43ज्ञानेंद्रियां बोल लो, ज्ञानेंद्रियां
- 1:09:44बोल लो, इंद्रियाज ऑफ कॉग्निशन बोल लो। तो
- 1:09:47ये हमारे पांच सेंस ऑर्गन्स की बात हो रही
- 1:09:50है। नोज, इयर, आइज, स्किन और आपका टंग।
- 1:09:53ओके? देन है आपका इंद्रियाज़ ऑफ एक्शन
- 1:09:56जिससे आप काम करते हो, मुंह से खाना खा
- 1:09:58रहे हो, हाथ से काम कर रहे हो, फीट से काम
- 1:10:00कर रहे हो, एनस से एक्सक्रीट कर रहे हो और
- 1:10:03ऑर्गन ऑफ़ जनरेशन से आप रिप्रोड्यूस कर पा
- 1:10:06रहे हो। सो ये चीजें आपकी किसमें आ गई? जी
- 1:10:09पांच की पांच इंद्रियाज़ ऑफ़ एक्शन या
- 1:10:11कर्मेंद्रियां जो कर्म कर रही हैं। ओके?
- 1:10:14देन है आपका तमस अहंकार जिसमें हम ये जो
- 1:10:18पांच एलिमेंट्स हैं एयर फायर जो हमने ऊपर
- 1:10:21बोला स ये देखो ये रहा ये क्या है ग्रॉस
- 1:10:25बॉडीज महाभूतास सल एसेंसेस तो ये महाभूत
- 1:10:29ये सल एसेंसेस है जी तो ये ग्रॉस बॉडीज हो
- 1:10:31गई अपनी ठीक है सो आपका एयर फायर अक्ष
- 1:10:34वाटर और पृथ्वी यानी वायु अग्नि ईथर जल और
- 1:10:38आपका धरती सटल एसेंस में आ गया शब्द यानी
- 1:10:41साउंड स्पर्श यानी टच रूप यानी फॉर्म रास
- 1:10:44यानी टेस्ट और आपका गंध यानी स्मेल। तो ये
- 1:10:47आपके सटल एसेंसेस या तंत्राज इनको बोलते
- 1:10:50हैं। ओके? सो ये आपको पता होने चाहिए। ये
- 1:10:5325 के 25 जो है वो कई बार पूछ लिए जाते
- 1:10:56हैं। ओके? कैसे पूछे जाते हैं? बोल देंगे
- 1:10:58कि आपका इनमें से कौन सा जो है वो आपका
- 1:11:02क्या बोलते हैं? कारण है। कॉज है। जैसे
- 1:11:04मान हमने बोला पुरुष जो है ना कारण है ना
- 1:11:06इफेक्ट है। प्रकृति कारण है। प्रकृति से
- 1:11:08महत्व बना है। महत से अहंकार। यानी महक जो
- 1:11:11है वो कारण भी है और इफेक्ट भी है। जब
- 1:11:13प्रकृति ने बनाया तो ये इफेक्ट है। इससे
- 1:11:15अहंकार बना तो ये कॉज हो गया। ऐसे ही
- 1:11:18अहंकार से फर्दर बन रही है चीजें तो
- 1:11:20अहंकार भी कॉज एंड इफेक्ट दोनों हो गया।
- 1:11:22ठीक है? तो वो चीजें आपको पता होनी चाहिए।
- 1:11:24और वो चीजें हैं ये। यहां से आता है आपका
- 1:11:27क्वेश्चन।
- 1:11:28प्रकृति जो है हर चीज का कारण है। तो इट
- 1:11:31इज़ कॉज ओनली। ओके? इफेक्ट में क्या आया?
- 1:11:33पांच सेंस ऑर्गन, पांच मोटर ऑर्गन, मन और
- 1:11:36आपके पांच के पांच ग्रॉस बॉडीज। तो ये
- 1:11:39सारी चीजें ये आपकी ग्रॉस बॉडी ये मन
- 1:11:42वगैरह ये सारी चीजें क्या है जी आपका
- 1:11:44इफेक्ट है सिर्फ बोथ कॉज एंड इफेक्ट महत
- 1:11:47अहंकार और आपके सटल एसेंसेस पुरुष जो है
- 1:11:50ना आपका कौर कारण है ना आपका इफेक्ट है
- 1:11:53ओके देन बात आती है योग फिलॉसोफी की जिसको
- 1:11:56प्रैक्टिकल आस्पेक्ट बोला जाता है सांख्य
- 1:11:58फिलॉसोफी का फाउंडर पतंजलि है ठीक है अह
- 1:12:02ये बोलते हैं कि सांख्य में हमने ऊपर बोला
- 1:12:04था कि पुरुष बहुत सारे हो सकते हैं बट योग
- 1:12:08फिलॉसफी प्रैक्टिकली एक्सेप्ट करती है कि
- 1:12:10सिर्फ एक ही पुरुष की एग्जिस्टेंस पॉसिबल
- 1:12:13है। सो एग्ज़िस्टेंस ऑफ़ ओनली वन पुरुष। ठीक
- 1:12:15है? योग जो है वो वेल डिफाइंड है बाय
- 1:12:18फाउंडर पतंजलि। योगसूत्राज़ लिखे हैं। जैसे
- 1:12:21वहां पे सांख्यकारिका की बात की थी। यहां
- 1:12:23पे योग सूत्राज़ हैं। ओके? योगसूत्राज़ को
- 1:12:26चार पार्ट्स में डिवाइड किया गया। चार
- 1:12:28पदों में डिवाइड किया गया है। समाधि पद,
- 1:12:31साधना पद, विभूति पद, कैवल्य पद। ओके?
- 1:12:34समाधि पद में इंट्रोडक्शन है। नेचर और
- 1:12:37मेथड्स ऑफ योगा एक्सप्लेन किए गए हैं। और
- 1:12:40आपका साधना पद में कारण सफरिंग का क्या
- 1:12:43कारण है? कैसे उससे निजात पाओगे? विभूति
- 1:12:46पद जो है वो प्रोसेस की बात करता है कि
- 1:12:49कैसे आप सुपरानॉर्मल पावर्स अचीव कर सकते
- 1:12:52हो योग की हेल्प से। केवल्य पद बात करता
- 1:12:56है कि लिबरेशन कैसे मिलेगा? नेचर क्या है
- 1:12:59लिबरेशन का? लिबरेशन का प्रोसेस क्या है?
- 1:13:02कैसे पहुंचेंगे वहां तक? सो लिबरेशन का एक
- 1:13:04मेजर तरीका है कि आपको अष्टांग योग के
- 1:13:07बारे में पता हो। यानी एट फोल्ड पाथ योगा।
- 1:13:11सो वो जो एट फोल्ड योगा है वो पता होना
- 1:13:14चाहिए। पतंजलि ने योगसूत्राज लिखे।
- 1:13:16योगसूत्राज़ एक फर्स्ट और फोरमोस्ट
- 1:13:19सिस्टेटिक अथॉरिटेटिव रिप्रेजेंटेशन मानी
- 1:13:22जाती है। थ्योरिटिकल और प्रैक्टिकल हर
- 1:13:25आस्पेक्ट योगा का ये एक्सप्लेन करती है
- 1:13:27योगसूत्रस।
- 1:13:29ये योग फिलॉसफी के आठ फोल्ड योग हैं। जी।
- 1:13:32एट फोल्ड योग, अष्टांग योग। पहले हम यम
- 1:13:35आपको एक तो यह आठ के आठ याद होने चाहिए।
- 1:13:37यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार,
- 1:13:40धारणा, ध्यान, समाधि। सो, यह आपको आठ एज़
- 1:13:44इट इज़ याद होने चाहिए। आपसे पूछे जाते हैं
- 1:13:47कौन सा अष्टांग योग का पार्ट नहीं है या
- 1:13:50कौन सा है। ओके? यम यानी कंट्रोल। कंट्रोल
- 1:13:54ओवर योर बॉडी, माइंड, स्पीच। तो आप अहिंसा
- 1:13:57नहीं करोगे, सच बोलोगे, सत्य, चोरी नहीं
- 1:14:01करोगे। ब्रह्मचर्य फॉलो करोगे और अपरिग्रह
- 1:14:03यानी कि नॉन पोज़ेशन। आप जो है वर्ल्डली
- 1:14:06डिजायर से दूर रहोगे। ठीक है? नियम आपके
- 1:14:10रूल्स रूल्स फॉर पज़ेसिंग गुड कंडक्ट। आप
- 1:14:13क्लीन रखोगे खुद को शौच संतोष कंटेंटमेंट
- 1:14:17सेटिस्फेक्शन जितना भी है आपके पास तप
- 1:14:20पावर ऑफ टॉलरेंस स्वाध्याय स्टडी करना
- 1:14:23रिलीजियस स्क्रिप्चर्स को और ईश्वर
- 1:14:25परिनिधान यानी भगवान को याद करोगे। दूसरा
- 1:14:28हो गया। इन दोनों में ये पांचप एलिमेंट्स
- 1:14:31हैं जो आपको पता हो। आसन एडवांस्ड स्टेज
- 1:14:34है योगा की। कई बार हम योगा का मतलब ही
- 1:14:38आसन या पोश्चर से लेके चलते हैं। बट योगा
- 1:14:42में ये आठों चीजें आती हैं। यम, नियम,
- 1:14:45आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा,
- 1:14:47ध्यान, समाधि। ठीक है? सो जो नियम है वो
- 1:14:50हमने देख लिए पांच। आसन में एडवांस्ड
- 1:14:52स्टेज ऑफ योगा, पोश्चर्स आ जाएंगे।
- 1:14:55प्राणायाम में आप जो ब्रीदीिंग कंट्रोल
- 1:14:57करते हो वो आ जाएगा। आप करते हो ना
- 1:15:00प्राणायाम सांस ली थोड़ी देर रोकी फिर
- 1:15:03छोड़ दी वो चीजें तो जितनी देर में सांस
- 1:15:06ली उससे आधी देर रोको और फिर उससे उतनी
- 1:15:09देर में छोड़ो। जैसे मैंने सांस लेने में
- 1:15:11मान लो तीन सेकंड लगाए।
- 1:15:15अब मैं डेढ़ दो सेकंड तक सांस रोकूंगी और
- 1:15:18फिर मैं धीरे-धीरे तीन-चार सेकंड में ही
- 1:15:20छोडूंगी। ओके? तो जितना टाइम आपने इन्हेल
- 1:15:23करने में लगाया दैट इज पूरक कुंभक जो आप
- 1:15:26रिटेन कर रहे हो और रेका यानी कि जो आपने
- 1:15:29छोड़ा है एक्सेल किया है ब्रीथिंग को ओके
- 1:15:31प्रत्याहार या टर्निंग इनवर्ड यानी जो
- 1:15:34पैशन है आपका ऑब्जेक्ट्स या मटेरियल
- 1:15:37डिजायर्स के लिए उसको कंट्रोल करना तो
- 1:15:40टर्निंग इनवर्ड आप अपने अंदर टर्न हो गए
- 1:15:42हो टेक्निकली और आप कोई भी चीज जो है वो
- 1:15:45नहीं लेना चाह रहे हो आपका पैशन अब
- 1:15:46कंट्रोल में है ओके सो वो प्रत्याहार
- 1:15:49रहेगा देन धारणा यानी यानी धारणा मतलब
- 1:15:52एक-एक जगह पे आपका निशाना बनाना। मेडिटेट
- 1:15:55करते टाइम स्टार्टिंग में बहुत मुश्किल
- 1:15:56होता है ना। सो आप एक ऑब्जेक्ट पे फोकस कर
- 1:15:59लो। ओके? ध्यान में एक स्टेप आगे आ गया कि
- 1:16:02एक पर्सन जो है वो ऑब्जेक्ट पे लंबे टाइम
- 1:16:04तक कंसंट्रेट कर पा रहा है। तो वो ध्यान
- 1:16:07में आ गया। समाधि में आ जाएगा कि आप बहुत
- 1:16:09परफेक्ट हो गए हो मेडिटेशन में और आप जो
- 1:16:13है वो मतलब ध्यान बहुत टाइम तक लगा सकते
- 1:16:15हो। ऐसा। ओके? तो जो पहली फाइव स्टेजेस
- 1:16:18हैं यानी यम, नियम, आसन, प्राणायाम,
- 1:16:21प्रत्याहार। ये एक्सटर्नल तरीके हैं। और
- 1:16:25लास्ट के जो तीन चीजें हैं धारणा, ध्यान,
- 1:16:27समाधि। ये इंटरनल तरीके हैं। मेडिटेशन
- 1:16:31वाले जो हैं वो इंटरनल बाकी सारे
- 1:16:33एक्सटर्नल क्या करने के लिए? लिबरेशन को
- 1:16:35अचीव करने के लिए। ठीक है? अब ह्यूमन
- 1:16:38बीइंग सफर तो करता है क्योंकि मॉडिफिकेशन
- 1:16:41ऑफ चित्त। यानी बहुत सारे जिसको हम क्लेश
- 1:16:44बोलते हैं तो वो क्लेश इसमें मेंशन किए गए
- 1:16:46हैं पांच तरीके के। अविद्या यानी
- 1:16:48इग्नोरेंस, अस्मिता यानी ईगोइज़्म, राग
- 1:16:51यानी अटैचमेंट, द्वेष यानी गुस्सा और
- 1:16:54अभिनिवेश यानी कि लंबे टाइम तक होता है ना
- 1:16:57बहुत लंबा जीने की या जीने की इच्छा होना
- 1:16:59या डर होना मौत का। तो वो चीजें अभिनिवेश
- 1:17:02में आ जाएंगी। ओके? सो ये पांच क्लेश जो
- 1:17:05है वो मेंशन है योग फिलॉसोफी में जो आपको
- 1:17:07पता हो। अब हम बात करेंगे वेदांत फिलॉसोफी
- 1:17:10की। ओके? सो भद्रयाना सिस्टेमेटाइज्ड द
- 1:17:13वास्ट फिलॉसोफिकल बिलीफ जो उपनिषद
- 1:17:15जिन्होंने वेदांत सूत्र लिखे। सो ऊपर हमने
- 1:17:18बात की थी अह क्या क्या बात की थी? सांख्य
- 1:17:21सूत्र की बात की थी और आपके योग सूत्र की
- 1:17:23बात की थी। तो ऐसे ही ये वेदांत सूत्र
- 1:17:26हैं। सो वेदांत सूत्र को ब्रह्मसूत्र भी
- 1:17:28बोला जाता है। और इनको होता है ना
- 1:17:30अनकंडीशनल सेल्फ की तरह चीजें मेंशन है
- 1:17:32यहां। और यहां पे इसको सारिका सूत्र भी
- 1:17:35बोला जाता है। ओके? ये क्लासिफिकेशन है।
- 1:17:37वेदांता स्कूल में बहुत सारे स्कूल्स हैं,
- 1:17:39प्रोपोनेंट्स हैं। अलग-अलग तरीके मतलब ना
- 1:17:41कुछ-कुछ मॉडिफिकेशंस के साथ चीजों को
- 1:17:43अडप्ट किया गया है। सो अद्वैत वेदांता
- 1:17:46विशिष्ट वेदांत द्वैत द्वैत अद्वैत शुद्ध
- 1:17:49अद्वैत और च अच चिंत भेदभेद। ओके? चैतन्य
- 1:17:54ने जो दिया है। सो ये नाम आप ध्यान रख
- 1:17:56सकते हो किसने कौन सा जो है वो वेदांता
- 1:17:59स्कूल क्लासिफाई किया है या दिया है। ओके।
- 1:18:02अब मेजरली जो हम बात करते हैं हम बात करते
- 1:18:05हैं ये अद्वैत वेदांता की जो आदि
- 1:18:08शंकराचार्य ने दिया है। ओके? सो क्योंकि
- 1:18:10ये ज्यादा एक्सेप्टेड है। सो मेटाफिजिक्स
- 1:18:12ये बोलते हैं एक ही रियलिटी है। एकम सत्य
- 1:18:16ठीक है? प्रस्थान त्रयाई। प्रस्थान त्रयाई
- 1:18:19किसको बोला जाता है? तीन चीजें यानी
- 1:18:21उपनिषद, भगवत गीता और ब्रह्मसूत्र। इन
- 1:18:24तीनों चीजों को आप मिला रहे हो तो इस
- 1:18:26सोर्स को हम प्रस्थन त्रयाई बोल रहे हैं।
- 1:18:28प्रस्थन्न त्रयाई तीन चीजें। ओके? तो ये
- 1:18:31आपको पता हो ब्रह्मा ही अल्टीमेट रियलिटी
- 1:18:33है। वर्ल्ड रियल है ही नहीं। सब मोह माया
- 1:18:36है। नॉलेज को दो तरीके से क्लासिफाई किया
- 1:18:38गया है। पराविद्या अपराविद्या। परविद्या
- 1:18:41मतलब स्पिरिचुअल नॉलेज और अप्रविद्या मतलब
- 1:18:43वर्ल्डली नॉलेज। ओके? नॉलेज जो है उसको आप
- 1:18:47सुनके सोच के मनन चिंतन करके और प्रैक्टिस
- 1:18:51करके निधि दयासना। तो ये तीन चीजों के
- 1:18:54थ्रू आप नॉलेज एक्वायर कर सकते हो। ओके?
- 1:18:56साधना चतुष्या करके एक वर्ड आता है। यानी
- 1:19:00चार अल्टीमेट तरीके चार फोर मीन्स ऑफ
- 1:19:03प्रैक्टिस। तो वो क्या है? एक तो
- 1:19:05डिस्क्रिमिनेशन फॉलो करना एक नॉन अटैचमेंट
- 1:19:08छह वर्च्यूस जिसको शत संपत भी बोला जाता
- 1:19:12है और लोंगिंग। ठीक है? तो ये चार चीजें
- 1:19:15हैं जो आपको पता होंगी। वेदांत फिलॉसफी जो
- 1:19:18है वो छह के छह जो सोर्सेज हैं नॉलेज के
- 1:19:21उनको वैलिडेट करती है। जैसे हमने ऊपर ऊपर
- 1:19:24पढ़ा था कि कौन सा कितने सोर्सेस को
- 1:19:26वैलिडेट करता है। ये छह के छह को वैलिडेट
- 1:19:29करते हैं। ओके? एकनॉलेज टू फॉर्म ऑफ
- 1:19:32ब्रह्मा। एक निराकार विद निर्गुण और साकार
- 1:19:35विद सगुण। तो दो फॉर्म ऑफ ब्रह्मा ये
- 1:19:37मानते हैं। ओके? अह वेद फिर वेदांत
- 1:19:40फिलॉसफी में पंचकोष का कांसेप्ट आता है।
- 1:19:42जी। सो तैत्रीय उपनिषद में मेंशन है ये
- 1:19:46पंचकोश जो वेदांत फिलॉसोफी के अंडर आते
- 1:19:49हैं। ये बोलते हैं कि जो मन है आत्मा है
- 1:19:51उसके बाहर जो है वो पांच लेयर्स हैं। ओके?
- 1:19:54तो जो सबसे बाहर वाली लेयर है वो है बाहरी
- 1:19:58फूड लेयर फिजिकल लेयर जिसको अन्न माया कोष
- 1:20:01बोलेंगे। उसके अंदर जो लेयर है वो प्राण
- 1:20:04माया कोष उसके अंदर मनोमाया कोष फिर
- 1:20:06विज्ञान माया विजनन माया भी बोल देते हैं
- 1:20:08कई बार। देन आनंद माया कोष। ओके। तो ये जो
- 1:20:12लेयरिंग है ये आपको इसी सीक्वेंस में पता
- 1:20:14हो। आपको अंदर से बाहर बाहर से अंदर भी
- 1:20:17पता हो कि अगर मैं यह बोल रही हूं कि भई
- 1:20:19ये आत्मा है आत्मन।
- 1:20:22ठीक है? सो ये जो है सबसे पास जो है इसकी
- 1:20:25वो आनंद माया कोष हो गई। उसके बाद विजनन
- 1:20:28माया कोष देन आपका मनोमाया। ये प्राण माया
- 1:20:32और सबसे बाहर वाली आपकी फूड शीत यानी अन्न
- 1:20:34माया। सो यहां से हमें समझ आ रहा है कि ये
- 1:20:37कंक्रीट बॉडी की और अर्थ की बात। अच्छा
- 1:20:39इसके जो प्रिंसिपल एलिमेंट हैं वो भी आपने
- 1:20:41याद रखने हैं। सो सबसे बाहरी है ये अर्थ
- 1:20:44देन वाटर देन फायर देन एयर और सबसे अंदर
- 1:20:48वाला अक्ष।
- 1:20:50ओके? तो ये आपको पता हो कि ये कॉन्क्रीट
- 1:20:52बॉडी की बात हो रही है। ये बॉडी बिटवीन
- 1:20:55सटल एंड कॉन्क्रीट बॉडी। देन ये सटल बॉडी,
- 1:20:58ये कॉजलल बॉडी और ये एब्सोल्यूट कॉजलल
- 1:21:00बॉडी। ओके? जो पहली वाली है लेयर वो
- 1:21:03फिजिकल बॉडी से बिलोंग करती है। बाकी जो
- 1:21:06शीत हैं वो एस्ट्रल बॉडी से बिलोंग करती
- 1:21:08हैं। सो ये जितनी भी इनेशन है बहुत
- 1:21:11इंपॉर्टेंट है। ब्लिसफुल शीथ,
- 1:21:13इंटेलेक्चुअल शीत, मेंटल शीत, वाइटल शीथ,
- 1:21:16फूड शीथ इस तरीके से भी इनको जाना जाता
- 1:21:19है। ब्लिस बॉडी, विज़डम बॉडी, मेंटल बॉडी,
- 1:21:22एनर्जी बॉडी और फिजिकल बॉडी के नाम से भी
- 1:21:24जाना जाता है। तो आप मैंने ओवरऑल सारी
- 1:21:26इनेशन इसी चार्ट में कंबाइन कर दी है। मोर
- 1:21:29देन इनफ है। पंचकोश से रिलेटेड कुछ भी आए
- 1:21:32आपका यहां से सॉल्व हो जाएगा। ओके जी देन
- 1:21:35है जी बुद्धिस्ट फिलॉसफी अपनी जैनिज्म की
- 1:21:38फिलॉसफी और आपकी चरक फिलॉसोफी और उसके बाद
- 1:21:40इस्लामिक फिलॉसफी। सो मैं कोशिश कर रही
- 1:21:43हूं कि मैं बहुत अच्छे से एक्सप्लेन कर
- 1:21:45पाऊं। स्लाइड्स आपकी बहुत ज्यादा नहीं है।
- 1:21:47ओवरऑल विद क्वेश्चंस आपकी इस यूनिट की
- 1:21:50स्लाइड्स आई थिंक 220 224 कुछ हैं। ठीक
- 1:21:53है? सो उतनी ही स्लाइड्स हैं। लेकिन मैं
- 1:21:55एक्सप्लेनेशन पे जोर इसलिए दे रही हूं कि
- 1:21:57अपडेटेड मैराथ्स हैं। कोई बच्चा
- 1:21:59स्टार्टिंग से भी देख रहा हो तो उसको सारी
- 1:22:01इंफॉर्मेशन पता हो। उसको समझ आ जाए चीजें।
- 1:22:03ओके? अब हम बात करेंगे बुद्धिस्ट फिलॉसफी
- 1:22:06की। बुद्धिस्ट फिलॉसफी में जो एंशिएंट
- 1:22:08बुद्धिस्ट टेक्स्ट हैं। ठीक है? जैसे
- 1:22:10गुरुकुल्स में तो टेक्स्ट होते नहीं थे।
- 1:22:12उसके बाद धीरे-धीरे करके वेद आए, चीजें
- 1:22:14आई। ठीक है? लिखा गया उनको। बट जो एंशिएंट
- 1:22:16बुद्धिस्ट टेक्स्ट है उनको अगुलतरा निकाय
- 1:22:19बोलते हैं। ठीक है? तो वो पूरा जो टेक्स्ट
- 1:22:21है उसको अलुतरा निकाय बोलते हैं।
- 1:22:22बुद्धिज्म से रिलेटेड है ये टर्म। ये बात
- 1:22:24याद रखिए। बुद्धिस्ट लिटरेचर को ओवरऑल तीन
- 1:22:27पार्ट्स में डिवाइड किया गया है। जिसको
- 1:22:29त्रिपितकास बोलते हैं। तो ये वर्ड ये
- 1:22:31मैंने जो हाईलाइट कर रखे हैं ना पूरी
- 1:22:33स्लाइड्स में आप उन पे फोकस कीजिए थोड़ा
- 1:22:35ना ताकि आपको एटलीस्ट इतना भी ध्यान हो कि
- 1:22:37अच्छा पंच इसकी पंचकोश की बात आ रही है तो
- 1:22:41वेदांत फिलॉसोफी से रिलेटेड है।
- 1:22:42त्रिपितकाज़ की बात आ रही है तो आपकी
- 1:22:44बुद्धिस्ट फिलॉसफी से रिलेटेड है। सो आपको
- 1:22:46ये ये पॉइंट्स पता उपनयन संस्कार की बात आ
- 1:22:49रही है तो वैदिक एजुकेशन या वेदांत की बात
- 1:22:51हो रही है। सो या गृहस्थ आश्रम ना वो
- 1:22:53ब्रह्मचारी आश्रम की बात हो रही है तो
- 1:22:56रिलेट करोगे ये वर्ड्स को फोकस में रखोगे
- 1:22:58तो चीजें याद हो जाएंगी। तो सूतपित्तिका
- 1:23:01विनय पित्तिका और अभिधाम पित्तिका।
- 1:23:03सूतवत्तिका में जो सर्मस जो उपदेश दिए हैं
- 1:23:06बुद्धा ने बेसिकली जो बुद्धिस्ट टीचिंग्स
- 1:23:08हैं वो इसमें मेंशन है। विनय पित्तिका की
- 1:23:11आप बात करोगे तो जितने भी रूल्स ऑफ कंडक्ट
- 1:23:13हैं जो मक्स और नंद से रिलेटेड हैं जो
- 1:23:16वहां पे भिक्षुक और भिक्षुनी हैं उनसे जो
- 1:23:19रिलेटेड हैं वो विनय पित्तिका में है।
- 1:23:21अभिधामपित्तिका में डिटेल्ड फिलॉसोफी है
- 1:23:24बुद्धिज्म से रिलेटेड। ओके? यह बात याद
- 1:23:26रखिए कि बुद्धिज्म कभी भी किसी भी चीज के
- 1:23:28बेसिस पे डिस्क्रिमिनेट नहीं करता है।
- 1:23:31जैसे हमने पहले बात की थी कि पहले टाइम पे
- 1:23:33शूद्रा को एजुकेशन अलाउड नहीं थी। उनका
- 1:23:36उपनयन संस्कार होता ही नहीं था। ठीक है?
- 1:23:38तो लेकिन और वहीं से ही ये बुद्धिज्म की
- 1:23:41फिलॉसफी जैनिज्म की फिलॉसफीज़ निकल के आती
- 1:23:44हैं। क्योंकि कुछ ना कुछ भेदभाव हो रहा है
- 1:23:46ना? तो कोई और नई चीज बनेगी जो भेदभाव
- 1:23:48नहीं कर रही है तो वो अट्रैक्ट करेगी
- 1:23:50लोगों को। राइट? सो वही चीज है यहां पे
- 1:23:52भी। बुद्धिज्म डज़ंट डिस्क्रिमिनेट। किस
- 1:23:54बेसिस पे? ना कास्ट, ना जेंडर। किसी भी
- 1:23:57बेसिस पे नहीं डिस्क्रिमिनेट कर रहा। वो
- 1:23:58एजुकेशन प्रोवाइड कर रहा है। ओके? दो मेजर
- 1:24:01रिचुअल्स आपको बुद्धिज्म में देखने को
- 1:24:03मिलेंगे। पब्जा और उपसंपदा। पब्जा जो है
- 1:24:07वो आठ साल की ऐज में शुरू हो रहा है। याद
- 1:24:09रखिए उपनयन छ साल की ऐज में शुरू हुआ था।
- 1:24:12आठ साल पे भी हो रहा था, 12 साल पे भी हो
- 1:24:14रहा था। ओके? यहां पे पब्जा जो है पब्जा
- 1:24:17इज सिमिलर टू उपनयन संस्कार। जैसे वहां
- 1:24:20सेक्रेड थ्रेड सेरेमनी थी। यहां पे भी
- 1:24:22मतलब वही है कि आप एजुकेशन को इनिशिएट कर
- 1:24:25रहे हो। ओके? तो ये पब्जा जो है वो आठ साल
- 1:24:28की उम्र में शुरू हो रहा है। पब्जा
- 1:24:29बुद्धिज्म में हो रहा है। उपनयन संस्कार
- 1:24:31वेदांता वैदिक फिलॉसफी में हो रहा है।
- 1:24:34उपसंपदा तो एक रिचुअल है जी पोस्ट एजुकेशन
- 1:24:37जो परमानेंट मेंबरशिप देगा संघ की उसको
- 1:24:40उपसंपदा बोल रहे हैं। इसको आप कई बार
- 1:24:42कॉन्वोकेशन सेरेमनी भी बोल सकते हो। ओके?
- 1:24:45चार नोबल ट्रुथ हैं जी जिसको आर्य सचानी
- 1:24:48बोलते हैं बुद्धिज्म में ये चार नोबल
- 1:24:50ट्रुथ एट फोल्ड एट नोबल पाथ जो एट फोल्ड
- 1:24:54पाथ है ये दोनों आपको पता होने चाहिए बहुत
- 1:24:56इंपॉर्टेंट है चार नोबल ट्रुथ पहला है जी
- 1:24:58ट्रुथ ऑफ सफरिंग मिजरी दुख यानी सब अगर आप
- 1:25:01जिंदगी में आए हो तो दुख तो आएगा ही हमेशा
- 1:25:04रहेगा ठीक है अब आपको लग रहा है जेआरएफ
- 1:25:07क्लियर हो जाएगा तो दुख दर्द खत्म हो
- 1:25:09जाएंगे नहीं चीजें और आगे बढ़ेंगी आपका
- 1:25:12नौकरी लग जाएगी तो फिर आपका जॉइनिंग की
- 1:25:14रिटेंशन बढ़ेगी। जॉइनिंग हो जाएगी तो आगे
- 1:25:16प्रमोशन की टेंशन होगी। तो दुख हमेशा रहने
- 1:25:19वाला है जिंदगी में। ओके? ट्रुथ ऑफ कॉज ऑफ़
- 1:25:22सफरिंग। सो जब सफरिंग है सो हमेशा उसका
- 1:25:26कुछ ना कुछ कारण होगा। ठीक है? तो समुदाय
- 1:25:29यानी कारण। कॉज ऑफ सफरिंग। सो वो भी एक सच
- 1:25:32है कि अगर पहला बात है कि सफरिंग रहेगी।
- 1:25:34दूसरी बात है कि कारण भी रहेगा। तीसरी बात
- 1:25:37है कि हम इस कारण को रिमूव कर सकते हैं जब
- 1:25:39कारण है तो। राइट? यानी एक प्रॉब्लम है।
- 1:25:42उसका हमें पता है क्या प्रॉब्लम का कारण
- 1:25:44है। उस कारण का जब कारण पता चल गया तो हम
- 1:25:47उसको निरोध कर सकते हैं ना। हटा सकते हैं।
- 1:25:49अब उसको हटाएंगे कैसे? अष्टांगिका मार्ग
- 1:25:52से। एट फोल्ड पाथ से। ठीक है? तो ये चारों
- 1:25:55चीजें आपको पता होनी चाहिए। अब अष्टांगिका
- 1:25:57मार्ग क्या है? ये है कि आपको सम्यक
- 1:26:00दृष्टि ये हिंदी में भी याद रखने हैं।
- 1:26:02इंग्लिश में भी याद रखने हैं। कई बार
- 1:26:04हिंदी में भी सीक्वेंस में पूछ लिए जाते
- 1:26:05हैं। ओके? तो राइट फेथ और राइट व्यू
- 1:26:09साम्यक दृष्टि यानी आपको नजरिया ठीक रखना
- 1:26:12है। राइट रिजोल्व आपका संकल्प आपकी
- 1:26:14एस्पिरेशन सही होनी चाहिए। राइट स्पीच वाक
- 1:26:17वो सही होना चाहिए। राइट कंडक्ट आपका क्रम
- 1:26:20सही होना चाहिए। लाइवलीहुड अजीवा वो सही
- 1:26:23होना चाहिए। आपका राइट एफर्ट हो, राइट
- 1:26:25अवेयरनेस हो, राइट कंसंट्रेशन हो। तो ये
- 1:26:27आठों राइट अगर हो गए तो आप जो है वो निरोध
- 1:26:31मतलब होता है ना कि निरोध तो है लेकिन
- 1:26:33उसको निरोध मिलेगा कैसे? सो वो पॉसिबल है
- 1:26:36विद द हेल्प ऑफ दीज़ एट फोल्ड पाथ। ओके? अब
- 1:26:39इसमें ये जो एट फोल्ड पाथ है इसमें जो
- 1:26:42पहला दूसरा है वो मेजरली किससे रिलेट कर
- 1:26:44रहा है? दैट इज़ रिलेटेड टू कॉन्शियसनेस
- 1:26:47एंड नॉलेज। ओके? सो प्रजन्ना और प्रज्ञा
- 1:26:50स्कंध बोलते हैं इसको। तीसरा, चौथा,
- 1:26:52पांचवा जो है राइट, स्पीच, कंडक्ट और
- 1:26:54लाइवलीहुड। ये सही चीजें करने पे मोरल
- 1:26:57तरीके से जीने पे फोकस कर रहे हैं। इसको
- 1:26:59शिला या शील स्कंध भी बोलते हैं। छठा,
- 1:27:02सातवां आठवां राइट एफर्ट, राइट अवेयरनेस
- 1:27:05और राइट कंसंट्रेशन। ये मेडिटेशन और
- 1:27:08कंटेंप्लेशन से रिलेटेड है। तो इनको समाधि
- 1:27:10या समाधि स्कंध भी बोलते हैं। सो आपको ये
- 1:27:13पता होना चाहिए। ये चीज पूछी जाती है कि
- 1:27:15शील स्कंध में कौन सा आएगा? प्रज्ञा स्कंध
- 1:27:18में कौन सा आएगा? समाधि स्कंध में कौन सा
- 1:27:19आएगा? ओके? अब बुद्धिज्म से रिलेटेड कुछ
- 1:27:22डॉक्टराइंस हैं। सो डॉक्टराइन ऑफ 12 लिंक
- 1:27:25चेन ऑफ डिपेंडेंट ओरिजिनेशन या प्रतीतया
- 1:27:28समुत्पदा भी बोलते हैं या लॉ ऑफ 12 कोज भी
- 1:27:32बोलते हैं। ओके? सो ये कारणों की बात हो
- 1:27:35रही है यहां पे। ओके? सो एवरीथिंग इन दिस
- 1:27:37वर्ल्ड इज़ डायनेमिक। चेंज होता रहेगा वो।
- 1:27:40ठीक है? उसके ऊपर फोकस है। मिडिल पाथ पे
- 1:27:42फोकस रखने को बोला है इन्होंने। यानी
- 1:27:45एक्सट्रीम नेगेटिव एक्सट्रीम और पॉजिटिव
- 1:27:48एक्सट्रीम इन दोनों के बीच का। जैसे
- 1:27:50प्रिंसिपल ऑफ एटर्निटी हम शाश्वतवाद बोल
- 1:27:52रहे हैं। प्रिंसिपल ऑफ एनहिलेशन हम
- 1:27:55उच्छेदवाद बोल रहे हैं। सो इन दोनों के
- 1:27:57बीच की बात हो रही है कि आप एक्सट्रिमिटीज
- 1:28:00को अवॉइड करो। ठीक है? इसीलिए कई बार
- 1:28:02बोलते हैं ना गुस्से में रिएक्ट नहीं करना
- 1:28:03चाहिए। क्योंकि बहुत गुस्से में और बहुत
- 1:28:05इमोशनली अगर आप रो धो रहे हो तो इन दोनों
- 1:28:08एक्सट्रीम सिचुएशन में आप एक्सट्रीम फैसले
- 1:28:10लेते हो। राइट? कुछ ना कुछ बीच का रास्ता
- 1:28:12मिडिल रास्ता भी निकल सकता है। आपको वो
- 1:28:15शांति से बैठ के सोचना पड़ेगा। डॉक्ट्राइन
- 1:28:18ऑफ़ कर्मा में ये भी बिलीव करते हैं कि सब
- 1:28:20कुछ हमारे कर्मकांडों की वजह से ही हो रहा
- 1:28:22है। डॉक्ट्राइन ऑफ़ मोमेंटरीनेस,
- 1:28:24डॉक्ट्राइन ऑफ़ इमपरमानेंस यानी हर एक चीज
- 1:28:26मोमेंट्री है। कोई भी चीज परमानेंट नहीं
- 1:28:29है। क्षणिक वाद क्षण हर एक क्षण बदल जाता
- 1:28:32है। आप आज नौकरी लग गए, यू आर हैप्पी एट
- 1:28:35दैट मोमेंट। इन दैट मोमेंट यू आर हैप्पी
- 1:28:38ना? उसके बाद और चीजें शुरू हो जाएंगी।
- 1:28:40आपने वो चीज अचीव कर ली है। सो एवरीथिंग
- 1:28:43इज टेंपरेरी। अगर आप किसी का कोई मम्मी
- 1:28:45गुस्सा कर रही है, पापा गुस्सा कर रहे
- 1:28:47हैं, जस्ट कीप क्वाइट एट दैट टाइम। वो चीज
- 1:28:49मोमेंट है वो निकल जाएगा। ठीक है? आप
- 1:28:51परेशान हो। जस्ट कीप क्वाइट ताकि वो चीजें
- 1:28:54थोड़ी सी आप सिंक इन करोगे तो चीजें होंगी
- 1:28:56सही से। ठीक है? मैंने एक वेब सीरीज देखी
- 1:28:59थी। ऑलदो वो मैं प्रमोट नहीं कर रही हूं
- 1:29:01क्योंकि उसमें भी वलेंस वगैरह तो है ही बट
- 1:29:04आजकल हर चीज में हो रहा है। आर्या। ठीक
- 1:29:06है? सुष्मिता सेन की। सो उसमें जो
- 1:29:08सुष्मिता सेन का कैरेक्टर है ना मतलब कोई
- 1:29:10भी बड़ी से बड़ी चीज भी उसको हिट करती है।
- 1:29:13कोई बड़ी से बड़ा भी धक्का लगता है ना
- 1:29:15उसके फेस पे दिखता है कि वो एक सेकंड के
- 1:29:17लिए रुक जाती है। सिंक इन करती है। उसको
- 1:29:20अंदर डालने की कोशिश करती है उस
- 1:29:23इंफॉर्मेशन को कि अच्छा ठीक है ये हो गया
- 1:29:25है। राइट? चाहे उसको अपने बच्चों से
- 1:29:27रिलेटेड कोई बात पता चल रही है, चाहे कोई
- 1:29:29और चीज पता चल रही है। ओके? सो हर एक चीज
- 1:29:32को वो सिंक इन करती है। सो वहां से ये चीज
- 1:29:34समझ आती है कि एवरीथिंग इज मोमेंटरी।
- 1:29:36चीजें टेंपरेरी है। कोई भी चीज परमानेंट
- 1:29:38नहीं है। ना कोई इंसान परमानेंट है ना आप
- 1:29:41परमानेंट हो तो चीजें बदलेंगी। ओके? सो
- 1:29:44मोमेंटरीनेस इमपरमानेंस की जो क्षणिकवाद
- 1:29:46की थ्योरी है। ये बुद्धिज्म की बात
- 1:29:48बुद्धिज्म बात करता है। इस थ्योरी की ये
- 1:29:50बात याद रखिए। थ्योरी ऑफ़ नॉन सोल,
- 1:29:52डॉक्ट्राइन ऑफ़ अनत्ता या आत्मन। सो ये
- 1:29:55बुद्धिज्म जो है वो रिजेक्ट करता है। इस
- 1:29:57आइडिया ऑफ़ सोल, इटरनल सोल। क्योंकि हर चीज
- 1:30:00में मोमेंट्री है तो कोई भी चीज इटरनल या
- 1:30:03हमेशा रहने वाली है ही नहीं। चाहे वो सोल
- 1:30:05ही क्यों ना हो। ओके? देन बात आती है जी
- 1:30:08जैनिज्म की। जैनिज्म में वर्धमान महावीर
- 1:30:10सबसे ज्यादा जाने जाते हैं क्योंकि ये
- 1:30:12लास्ट तीर्थंकर रहे हैं। ठीक है? सो
- 1:30:15तीर्थंकर वो होते थे जो ब्रिज मेकर्स जो
- 1:30:17आपको चीजें समझाएंगे थोड़ा सा होता है ना
- 1:30:20पार लगा देंगे नैया को। वो वाली चीज है।
- 1:30:23ठीक है? सो जैन कंसीडर करते हैं कि रिलीजन
- 1:30:25जो है वो इटरनल है, इंपैरिशेबल है। जैसे
- 1:30:27पेरिशेबल आइटम्स जो थोड़ी देर में मतलब
- 1:30:30बिगड़ सकते हैं। जैसे हम अगर मैं लिटरली
- 1:30:32प्रैक्टिकल आस्पेक्ट में बोलूं तो जो ये
- 1:30:34अपने फल सब्जियां हैं इनको हम पेरिशेबल
- 1:30:37आइटम में इंक्लूड करते हैं। राइट? बट
- 1:30:39रिलीजन इंपैरिशेबल है तीर्थंकरों की बात
- 1:30:42हो रही है। यहां तीर्थ मतलब होली ब्रिज
- 1:30:44पीपल लोगों के लिए। ठीक है? तो बर्थ,
- 1:30:46मिज़री और डेथ। तो इनके बीच में जो एक लिंक
- 1:30:50बन रहा है वो लिंक तीर्थंकर बनाएंगे। 24
- 1:30:53तीर्थंकर रहे हैं। पहले तीर्थंकर ऋषभ थे
- 1:30:56और लास्ट जो है वो महावीर हैं। टेक्निकली
- 1:30:58जो जैन फिलॉसोफी को प्रमोट कर रहे हैं
- 1:31:00उनको आप तीर्थंकर बोल लो। मतलब प्रमोट तो
- 1:31:03आजकल सब लोग करते हैं। तो आप उनको तो नहीं
- 1:31:04बोल सकते तीर्थंकर। तो जो बहुत होता है ना
- 1:31:07इन्फ्लुएंशियल लोग रहे हैं जिन्होंने
- 1:31:10चीजों को बहुत आगे तक बढ़ाया है। ओके? तो
- 1:31:12जैन जो है उनको तो 24 के 24 नामों का उनकी
- 1:31:15डिटेल्स का भी पता होगा। ओके? सो ये कास्ट
- 1:31:18सिस्टम को कंडेम नहीं करते। जी। यानी
- 1:31:20बुद्धिज्म जो है वो कास्ट सिस्टम को हटा
- 1:31:22देता है बिल्कुल ही। ठीक है? ये बोल रहे
- 1:31:24हैं कि आपका जन्म एक पर्टिकुलर कास्ट में
- 1:31:26इसलिए हुआ है कि पिछले जन्मों के कुछ कारण
- 1:31:28कुछ आपके काम ऐसे रहे हैं। तो पिछले
- 1:31:30जन्मों के काम कर्म उनकी वजह से आपको इस
- 1:31:34जन्म में पाप का भागीदार या खुशी जो भी
- 1:31:36मिल रहा है वो इस वजह से मिल रहा है। तो
- 1:31:38ये कास्ट सिस्टम को कंडेम नहीं करते।
- 1:31:40बुद्धिज्म बिल्कुल सरे से नकार देता है
- 1:31:43कास्ट सिस्टम को भी और गॉड को भी। ये
- 1:31:45कास्ट सिस्टम को नकार नहीं रहे हैं। गॉड
- 1:31:47के एकिस्टेंस को मान रहे हैं। रिकॉग्नाइज
- 1:31:49कर रहे हैं। लेकिन ये जो तीर्थंकर हैं
- 1:31:51जिन्ना हां जिन्ना ही था ना हां इनको
- 1:31:53जिन्ना भी बोलते हैं। जी। सो जिन्ना और
- 1:31:55तीर्थंकर इनसे नीचे रख रहे हैं। ठीक है?
- 1:31:57कि पहले ऊपर हमारे लिए टेक्निकली आप ये
- 1:32:00मान लो कि जिन्ना और तीर्थंकर इनके लिए
- 1:32:02भ्रम भगवान हैं। जो एक्चुअल भगवान है वो
- 1:32:05नीचे रखते हैं ये उसको। ओके? इनकी जो
- 1:32:07लिटरेचर है उसको अगम्स बोलेंगे। जैसे
- 1:32:09अगुलतरा निकाया बोला था बुद्धिज्म में।
- 1:32:11अल्टीमेट गोल जो है एजुकेशन का जैनिज्म
- 1:32:13में वो है कैरेक्टर डेवलपमेंट का और
- 1:32:15फाइनली तो लिबरेशन क्योंकि मोस्टली इंडियन
- 1:32:17फिलॉसफीज़ लिबरेशन मोक्ष के ऊपर ही फोकस कर
- 1:32:20रही हैं। ओके? जैनिज्म के अकॉर्डिंग पाथ
- 1:32:22टू लिबरेशन है जी त्रिरत्न और पंचमहाव्रत।
- 1:32:26सो पंच देखो वर्ड्स आ गए ना पंचमहाव्रत,
- 1:32:29त्रिरत्न देन हमने ऊपर बात की थी एट फोल्ड
- 1:32:32पाथ। योगा में बात की थी अष्टांग योग। तो
- 1:32:35ये चीजें आपको पता हो कि कौन सा वर्ड
- 1:32:37किससे रिलेटेड है। त्रिरत्न थ्री ज्वेल्स
- 1:32:40को भी बोलते हैं। ठीक है? ये मेजरली एक और
- 1:32:42प्रिंसिपल है कि नॉन वायलेंस पे, सेल्फ
- 1:32:44कंट्रोल पे, सोल कर्मा इन सब चीजों की बात
- 1:32:46ये करते हैं। ओके? सो ये है जी मेन चीज
- 1:32:49पंच महाव्रत और त्रिरत। त्रिरत्न मतलब
- 1:32:51थ्री ज्वेल्स तीन रतन ओके तो रत्नातराया
- 1:32:54भी बोलते हैं इसको तो जैसे वहां पे हमने
- 1:32:57आठ आठ चीजों की बात की थी कि भ राइट
- 1:32:59रिजॉल्व हो राइट दृष्ट साम्यक दृष्टि और
- 1:33:02वो बात की थी तो यहां पे चार तीन ही चीजें
- 1:33:04हैं साम्यक दर्शन साम्यक जनन और साम्यक जो
- 1:33:07है ज्ञान बोल लो चाहे इसको साम्य क्योंकि
- 1:33:09नॉलेज है तो राइट कंडक्ट साम्यक चरित्र
- 1:33:12ओके तो ये तीन चीजें हैं जिनको त्रिरत्न
- 1:33:14बोल रहे हैं ये चीजें हैं जी पंच महाव्रत
- 1:33:17सो आप देखेंगे कि ये जो पांच वचन हैं। पंच
- 1:33:20महाव्रत हैं। ये कहीं ना कहीं आपके यम से
- 1:33:24फोकस कर रहे हैं। जो हमने अष्टांग योग योग
- 1:33:28फिलॉसोफी में बात की थी। तो सेम वही हैं।
- 1:33:30अहिंसा है, असत्य है, असत्यहः देन आपका ये
- 1:33:33ब्रह्मचर्य है और अपरिग्रह है। तो ये वही
- 1:33:36चीजें हैं। बट इनको जैन फिलॉसोफी में पंच
- 1:33:39महाव्रत के नाम से जाना जा रहा है।
- 1:33:41रत्नत्रया थ्री ज्वेल्स के नाम से जाना जा
- 1:33:43रहा है। वहां पे अलग यम के नाम से जाना जा
- 1:33:45रहा था। ओके? देन ये सैयदवाद की थ्योरी पे
- 1:33:48फोकस करते हैं। जी तो सैयदवाद की थ्योरी
- 1:33:51या जैन थ्योरी ऑफ़ जजमेंट या डॉक्ट्राइन ऑफ
- 1:33:53रिलेटिविटी नॉलेज एंड जजमेंट ये चीजें ये
- 1:33:56सैयदवाद का कांसेप्ट जैन फिलॉसफी से रिलेट
- 1:33:59करता है। ये बोलते हैं कि डिसाइपल कैन नॉट
- 1:34:02अटेन डेफिनेटिव नॉलेज। क्योंकि ट्रुथ और
- 1:34:04नॉलेज जो हैं उनके बहुत सारे चेहरे हैं।
- 1:34:06मल्टीफेसिटेड और रिलेटिव होता है। मेरा सच
- 1:34:09आपके लिए गलत हो सकता है। झूठ हो सकता है।
- 1:34:11आपका सच मेरे लिए झूठ हो सकता है। ओके? तो
- 1:34:14सच, झूठ, सही, गलत ये सारी चीजें रिलेटिव
- 1:34:17हैं। जैसे मोटा पतला होता है। आप किसको
- 1:34:19मोटा बोल रहे हो? किसको पतला बोल रहे हो?
- 1:34:21कई लोग मुझे पतला बोल देंगे। लेकिन वो
- 1:34:23किससे? रेफरेंस पॉइंट क्या है? आप हो सकता
- 1:34:26है मैं किसी इंसान से पतली हूं, किसी
- 1:34:28इंसान से मोटी हूं। राइट? सो वो रिलेटिव
- 1:34:30हैं चीजें। सो, ये रिलेटिविटी सैयदवाद की
- 1:34:33बात करते हैं। ये अनेकांतवाद की बात करते
- 1:34:36हैं कि प्लूरलिस्टिक हैं चीजें। कोई भी एक
- 1:34:38रियलिटी नहीं है। आप एक इंसान को हेल्दी
- 1:34:40या मोटा पतला नहीं बोल सकते। चीजें
- 1:34:43रिलेटिव हैं। सो वो रिलेटिविटी की थ्योरी
- 1:34:45की ये बात करते हैं। जैसे वहां पे
- 1:34:47मोमेंटरीनेस इंपपरनेंस की थ्योरी बहुत
- 1:34:49फेमस है। बुद्धिज्म में जैनिज्म में आपकी
- 1:34:52सैयदवाद अनेकांतवादी ये दोनों थ्यरीज़ बहुत
- 1:34:55फेमस है। ओके? जैन फिलॉसफी जो है वो नॉलेज
- 1:34:58को क्लासिफाई करती है मीडिएट नॉलेज और
- 1:35:00इमीडिएट नॉलेज में। ठीक है? मीडिएट नॉलेज
- 1:35:03जब सेंस ऑर्गन्स का इंटरवेंशन है। जब आप
- 1:35:05नॉलेज अटेन कर रहे हो सेंस ऑर्गन की हेल्प
- 1:35:08से। अपरोक्ष ये परोक्ष था। ये अप्रोक्ष
- 1:35:11है। इमीडिएट नॉलेज मतलब कोई सेंस ऑर्गन का
- 1:35:14इंटरवेंशन नहीं है। ओके? इसमें तीन
- 1:35:16एक्स्ट्रा सेंसरी परसेप्शन की बात होती
- 1:35:19है। जैसे यहां मति और श्रुति है। यहां पे
- 1:35:22अवधि, मनप्राय और कैवल्य है। कैवल्य मतलब
- 1:35:25ओमनीसेंस। कैवल्य को आप जो है अल्टीमेट
- 1:35:28रियलिटी वो होता है ना कि आपको अटेन करना
- 1:35:30है कैवल्य। वो भी बोल सकते हो। ये
- 1:35:32सीक्वेंस आपको याद रखनी है। मति जन श्रुति
- 1:35:35जनन अवधि जन्यन, मनप्राय जनन और आपका
- 1:35:37कैवल्य। सो ये चीजें आपको पता होनी चाहिए।
- 1:35:39देखो मनप्राय में टेलीपैथी से रिलेट कर
- 1:35:42रहे हो आप। सो ये वर्ड्स आपको ध्यान
- 1:35:44रहेंगे तो आप कॉनंसेप्चुअल लेवल पे रिलेट
- 1:35:46कर पाओगे कि कहां पे किस चीज की बात हो
- 1:35:49रही है। ओके देन बात आती है जी जैन
- 1:35:51फिलॉसोफी में मॉक और नन जो है वो
- 1:35:53स्ट्रिक्टली पंच महाव्रत से अियर करेंगे।
- 1:35:57लेकिन जो ऑर्डिनरी लोग हैं जो मॉक और नन
- 1:36:00नहीं बने हैं। वो 12 जो है वो उस 12 वचनों
- 1:36:05को फॉलो करेंगे। ओके? सो ये है जी छह
- 1:36:07इटरनल सब्सटेंस हैं। इसमें सोल है और नॉन
- 1:36:10सोल है यानी जीवा और अजीवा। उसके बाद आपका
- 1:36:13स्विच अजीवा में पांच चीजें हैं। अक्ष,
- 1:36:15पुद्गाला, धर्म, अधर्म और टाइम। एक बार
- 1:36:18पूछा गया था पुद्गाला किससे रिलेट करता
- 1:36:21है? सो वर्ड्स बस आपको वर्ड्स भी ध्यान
- 1:36:23होंगे कि अच्छा जैन फिलॉसोफी में पुद्गाला
- 1:36:25पढ़ा है जिसको मैटर को बोलते हैं। तो स्पेस
- 1:36:27को अक्ष, मैटर को पुद्गाला, मीडियम ऑफ
- 1:36:30मोशन को धर्म, मीडियम ऑफ रेस्ट को अधर्म
- 1:36:32और मैटर को हम टाइम बोलते हैं। ठीक है जी?
- 1:36:35फोर फोल्ड ऑर्डर ऑफ फॉलोअर्स हैं बाय
- 1:36:38महावीरा। सो ऑर्डर ऑफ साधु मोंक के लिए
- 1:36:41अलग ऑर्डर है। मोंक और नन मोंक को साधु
- 1:36:44साध्वी। और जो नॉर्मल मैन है ऑर्डिनरी मैन
- 1:36:47जो जैनिज्म फॉलो करते हैं उनको श्रवक और
- 1:36:49वुमेन जो है उनको श्रविका। तो ये जो चार
- 1:36:52लोग हैं इनमें से साधु और साध्वी पंच
- 1:36:55महाव्रताज़ को फॉलो करेंगे। जो ऊपर
- 1:36:57अल्टीमेट पांच चीजें हमने पढ़ी हैं। श्रवक
- 1:36:59और श्रविका 12 वचनों को फॉलो करेंगे। ओके?
- 1:37:02जब जैनिज्म की बात आती है तो दिगंबरा
- 1:37:04श्वेतांबरा दो जो है वो आपको मिलेंगे।
- 1:37:07इनफैक्ट जैन मैंने कहीं तो अभी रिसेंटली
- 1:37:09देखा। मेरा ध्यान पहले कभी नहीं गया था।
- 1:37:11पास में ही है ये। बट वो बात करते हैं जैन
- 1:37:15मंदिर दिगंबर यानी दिगंबर फिलॉसफी को फॉलो
- 1:37:19करता हुआ वो है वहां पे। ओके? सो वो
- 1:37:21दिगंबर स्काई क्लैड भी बोलते हैं।
- 1:37:23श्वेतांबर वाइट क्लैड। श्वेतांबर मतलब ये
- 1:37:26वाइट कपड़े पहनते हुए आपको नजर आएंगे।
- 1:37:28दिगंबर कपड़े ही नहीं पहनते हैं। ठीक है?
- 1:37:30तो ये बोलते हैं कि भ वाइट कपड़े वेयर
- 1:37:32सिंपल वाइट क्लोथ्स। सो ये ऑोजिट फिलॉसफी
- 1:37:35है इनकी दिगंबर से। ये बोल रहे हैं कि
- 1:37:37नंगे रहने की जरूरत नहीं है। दिगंबर बोल
- 1:37:39रहे हैं कि भ ये नेकेडनेस जो है उसको एक
- 1:37:42प्रूफ या साइन कंसीडर किया जाता है कि
- 1:37:45आपने पाप से निजात पा ली है। कॉन्क्वेस्ट
- 1:37:47ओवर सीन। ओके? सो मक्स को जो है वो नेक्ड
- 1:37:50यहां रहना पड़ेगा। वुमेन को नेक्ड होने की
- 1:37:52जरूरत नहीं है। सो दे कैन नॉट गेट
- 1:37:55एनलाइटनमेंट लाइक मैन। क्योंकि अगर नेक्ड
- 1:37:57वो हो पाती। सो वो होता है ना कि अगर वो
- 1:37:59भी नेक्ड हो पाती तो वो जो है वो भी अटेन
- 1:38:02कर लेंगी। तो जो नेक्ड है नंगा है वही
- 1:38:04अटेन कर पाएगा लिबरेशन। ओके? ये बोल रहे
- 1:38:07हैं भ मैन और वुमेन दोनों को एनलाइटनमेंट
- 1:38:09मिलेगा बट किसी को भी नंगे रहने की जरूरत
- 1:38:12नहीं। वाइट कपड़े पहनने की जरूरत है। ओके?
- 1:38:14सो ये जो श्वेतांबर है ये नदन और वेस्टर्न
- 1:38:17इंडिया में ज्यादा फेमस है उस तरफ। और
- 1:38:20दिगंबर जो है वो आपका सदर्न इंडिया और
- 1:38:22इन्होंने पैटर्न है जिनको सेंट्रल इंडिया
- 1:38:24के राजाओं से मिली थी उस टाइम। ये सात
- 1:38:27तत्वों की बात करते हैं। जीव अजीव देखो
- 1:38:29हमने ऊपर बात की थी ना इनकी ये 1 2 3 4 5
- 1:38:326 7 इनकी बात की थी तो ये बोल रहे हैं जीव
- 1:38:35अजीव अशरा बंद समश्वरा निर्जरा मोक्ष ओके
- 1:38:40ये नौ तत्वों की बात करते हैं श्वेतांबर
- 1:38:42वाले तो ये पाप और पुण्य ये सात थे आठ और
- 1:38:45नौ पाप और पुण्य इन्होंने इंक्लूड कर लिया
- 1:38:47सो ये पाप और पुण्य की भी बात करते हैं
- 1:38:50ओके चरक फिलॉसफी क्योंकि हमारे सिलेबस में
- 1:38:53भी नहीं है ज्यादा आती भी नहीं है तो
- 1:38:54जितना मैं बता रही हूं उतना मोर दैन इनफ
- 1:38:56रहेगा चरक या लोकाया याता भी बोलते हैं
- 1:38:59इसको। ठीक है? सो इंडियन मटेरियलिस्टिक
- 1:39:01स्कूल ऑफ़ फिलॉसफी है। चरक के पीछे इसका
- 1:39:04नाम पड़ा है। फाउंडर हैं वो इसके। ये बोलते
- 1:39:06हैं कि भ सेंसरी बेस्ड अंडरस्टैंडिंग यानी
- 1:39:10ये सिर्फ परसेप्शन यानी प्रत्यक्ष को
- 1:39:13प्रमाण की जरूरत नहीं होती ना। तो
- 1:39:14प्रत्यक्ष यानी परसेप्शन को ही एक वैलिड
- 1:39:17सोर्स ऑफ़ नॉलेज मानते हैं। ठीक है? चरक जो
- 1:39:19है वो कंसीडर करते हैं काम या सेंशियस
- 1:39:22प्लेज़र जो है दैट इज द ओनली ह्यूमन
- 1:39:25वैल्यू। हमने पुरुषार्थ की बात की थी।
- 1:39:27हमने चार चीजों की बात की थी। तो उन चार
- 1:39:29में से सिर्फ ये एक को ही कंसीडर कर रहे
- 1:39:31हैं काम को। जबकि जो अर्थ यानी जो वेल्थ
- 1:39:34है उस वो एक तरीका रहेगा इन चीजों को अचीव
- 1:39:37करने के लिए। बट अल्टीमेटली हम काम ही
- 1:39:40अचीव करना चाह रहे हैं। ये इनका कहना है।
- 1:39:42ओके जी। ये फिलॉसफी फंडामेंटली रिजेक्ट
- 1:39:45करती है जो भी हिंदूइज़्म में हमने पढ़ा कि
- 1:39:47भ जन्म लाइफ के बाद क्या होगा? कर्म
- 1:39:50लिबरेशन इन सारी चीजों को ये मानते ही
- 1:39:52नहीं है। ओके? तो ये मेजरली एम्फेसाइज
- 1:39:55करते हैं। जो भी चीजें आप ऑब्जर्व कर रहे
- 1:39:56हो, देख रहे हो स्कैप्टिसिज्म वाला जो
- 1:39:59अप्रोच है आपका देख के शक करना, चीजें
- 1:40:02समझना वो सारी चीजें जो है परसेप्शन के
- 1:40:04थ्रू तो ये परसेप्शन को ही एक वैलिड सोर्स
- 1:40:07ऑफ़ नॉलेज मानते हैं। ओके? देन बात आती है
- 1:40:09जी इस्लामिक फिलॉसफी वेरी इंपॉर्टेंट।
- 1:40:12आजकल काफी क्वेश्चंस आ जाते हैं इससे।
- 1:40:14इस्लामिक एजुकेशन जो है उसको पनिकंड
- 1:40:18इस्लाम भी बोलते हैं। देखो यहां पे कुछ
- 1:40:20प्रोनंसिएशन अगर गड़बड़ हो तो मुझे माफ़
- 1:40:22करना। बिकॉज़ मैंने कहीं मैंने सिर्फ वो
- 1:40:24होता है ना थ्योरिटिकल नॉलेज है मुझे इसकी
- 1:40:26जितना मुझे किताबों में मिला है। उसके
- 1:40:28अलावा ना मेरा कोई मुस्लिम दोस्त है या
- 1:40:31मुझे आसपास मैं नहीं रही हूं कहीं भी कि
- 1:40:33मैं इन वर्ड्स को अच्छे से शायद प्रोनाउंस
- 1:40:35कर पाऊं। सो अगर मेरी प्रोनंसिएशन यहां
- 1:40:37गड़बड़ हो सो आई एम रियली सॉरी फॉर दैट।
- 1:40:39बट मैं आपको चीजें समझा दूंगी कि यहां से
- 1:40:42ऐसे क्वेश्चन आ सकता है तो वो आपको पता
- 1:40:44होना चाहिए। ओके? सबको पता है प्राइमरी
- 1:40:47सोर्स जो है वो कुरान होता है इस्लाम में।
- 1:40:49ठीक है? तो प्राइमरी सोर्स टू नो अबाउट
- 1:40:51इस्लाम और उसकी फिलॉसफी एक तो कुरान है
- 1:40:53दूसरा है सुनना यानी जो नोन प्रैक्टिससेस
- 1:40:56हैं प्रॉफेट मोहम्मद की उसको सुनना बोल
- 1:40:58रहे हैं। इज़्मा यानी कंसेंससेस कयास यानी
- 1:41:01एनालॉजी। एनालॉजी के थ्रू आप सीख रहे हो।
- 1:41:04जैसे वेदांत फिलॉसोफी में उपनयन सेरेमनी
- 1:41:07करी थी। बुद्धिस्ट फिलॉसफी में पब्जा की
- 1:41:09थी। वैसे ही यहां पे होता है बिस्मिल्लाह।
- 1:41:12और सबसे अर्ली हो जाता है। आप देखोगे 4
- 1:41:14साल चार महीने चार दिन पे ये एक रिचुअल
- 1:41:18परफॉर्म किया जाता है जिसको बिस्मिल्लाह
- 1:41:20बोलते हैं। जी। ठीक है? सो ये इनिशिएशन ऑफ
- 1:41:22एजुकेशन से रिलेटेड है इस्लाम में। मकतबाज़
- 1:41:26और मदरसाज जो हैं वो रिलीजियस एजुकेशन
- 1:41:28इंपार्ट करने के सेंटर्स हैं। जैसे
- 1:41:30नॉर्मली स्कूल्स होते हैं।
- 1:41:33इनको नॉर्मली मस्जिद से अटैच करके देखा
- 1:41:36जाता है। मकतबा जो है वो प्लेस होता है
- 1:41:39जहां पे नॉर्मल बचपन की जो पढ़ाई है,
- 1:41:41रीडिंग राइटिंग सिखाई जा रही है। और मदरसा
- 1:41:43जहां पे लेक्चर्स डिलीवर हो रहे हैं।
- 1:41:45सॉर्ट ऑफ़ हायर एजुकेशन। ओके? मकतबाज़ जो है
- 1:41:47वो एलिममेंट्री एजुकेशन के हैं। मदरसाज़ जो
- 1:41:50है वो सेकेंडरी और हायर एजुकेशन के लिए
- 1:41:52होते हैं। ओके?
- 1:41:57मैं एक बार चेक करती हूं। कहीं
- 1:42:00आवाज ना गूंजने लग गई हो। ठीक है जी। आई
- 1:42:03थिंक ठीक है आवाज अब तक तो ठीक है। मुझे
- 1:42:05लगा कई बार ऐसे खांसी या कुछ गले में हो
- 1:42:07जाता है ना तो उससे उससे भी एक रीज़न हो
- 1:42:09सकता है। कई बार आवाज गूंजने लग जाती है।
- 1:42:11जिसकी वजह से मैं रिकॉर्ड करती रहती हूं
- 1:42:13और वो गड़बड़ हो जाती है फिर। बट ठीक है
- 1:42:15आवाज़। ओके? चलो। तो मद्र मकतबाज़ जो है वो
- 1:42:17एलिमेंट्री एजुकेशन के लिए हैं। मदरसाज़ जो
- 1:42:19है वो सेकेंडरी और हायर एजुकेशन के लिए
- 1:42:21हैं। जैन जय फिर है जी। खलीफतुल्लाह
- 1:42:24फिलर्द
- 1:42:26फी अलर्द ओके सो ये रिप्रेजेंट करता है ये
- 1:42:29जो कांसेप्ट ऑफ बिकमिंग अल्लाहज़
- 1:42:30रिप्रेजेंटेटिव यानी आप जो हैं भगवान जो
- 1:42:34अल्लाह जो है उसके रिप्रेजेंटेटिव वो धरती
- 1:42:37पे कुरान बोलती है कि कोई गॉड नहीं है बट
- 1:42:39गॉड और मोहम्मद जो है वो मैसेंजर हैं गॉड
- 1:42:43के। ओके? देन है आपका कुरान टीचेस अस
- 1:42:47अबाउट द वननेस ऑफ़ गॉड। तो एक ही भगवान है
- 1:42:49दैट इज़ अल्लाह। ठीक है? वन गॉड की ये बात
- 1:42:51करते हैं। एंड एजुकेशनल प्रैक्टिस कंबाइन
- 1:42:54द नॉलेज ऑफ़ स्किल अलोंग विद द नॉलेज ऑफ़ वन
- 1:42:57गॉड। तो ये गॉड की रिलीजियस नॉलेज वगैरह
- 1:42:59सब साथ में प्रोवाइड करते हैं। इस्लामिक
- 1:43:01ट्रेडिशन जो है एजुकेशन पे स्ट्रेस देता
- 1:43:04है। इंकल्केशन ऑफ़ ह्यूमिलिटी, नोबिलिटी,
- 1:43:06देन मोरल वैल्यूज़, पीसफुल कोएज़िस्टेंस,
- 1:43:09ट्रुथफुलनेस। सो सारी चीजों की सारी
- 1:43:11अच्छी-अच्छी चीजें हैं। चाहे कोई भी धर्म
- 1:43:13या कोई भी चीज हो। यहां पे भी वही अच्छी
- 1:43:15चीजों पे फोकस है। ओके? देन तीनचार वर्ड
- 1:43:18हैं जी। ठीक है? तालीम, तरबियत, तरबिया,
- 1:43:22तादीब। ये सारे वर्ड्स जो हैं वो एजुकेशन,
- 1:43:26अपब्रिंगिंग, डिसिप्लिन इन्हीं चीजों से
- 1:43:28रिलेट करते हुए हैं। और ये एजुकेशन से
- 1:43:30रिलेट करते हुए ही वर्ड्स हैं। ओके? एक
- 1:43:33बार क्वेश्चन आया हुआ है रिसेंटली कि
- 1:43:35इनमें से कौन सा जो है वो एजुकेशन से
- 1:43:37रिलेट नहीं करता? तो वो था त तिजरथ। ठीक
- 1:43:39है? तो तिजरथ मतलब एक प्लेस ऑफ़ ट्रेड या
- 1:43:42कॉमर्स या मार्केट, बिनेस सेंटर आप जिसको
- 1:43:44बोलो। सो दिस इज़ नॉट रिलेटेड टू एजुकेशन।
- 1:43:46बाकी चारों वर्ड जो ऊपर है वो एजुकेशन से
- 1:43:49रिलेटेड है। ओके? अब बिलीफ इन द डे ऑफ़
- 1:43:52जजमेंट एंड गुड डीड्स। उसमें बिलीफ रखते
- 1:43:54हैं ये लोग। ये फिलॉसफी इस्लामिक फिलॉसफर
- 1:43:57जो है वो क्लासिफाई करते हैं यूनिवर्सल
- 1:43:59एक्सप्रेशन को पांच टाइप्स में जो हम अभी
- 1:44:02आगे पढ़ेंगे भी। जीनस, स्पीशीज़, डिफरेंस,
- 1:44:04प्रॉपर्टी एंड कॉमन एक्सीडेंट। जीनस,
- 1:44:07स्पीशीज़ और डिफरेंस को ये ज्यादाेंस देते
- 1:44:09हैं। प्रॉपर्टी और कॉमन एक्सीडेंट जो है
- 1:44:11वो एक्सीडेंटल हैं। ओके? मकतबाज में जो
- 1:44:14मेथड ऑफ टीचिंग रहेगा रिसाइटेशन ऑफ कुरान
- 1:44:17रहेगा। ठीक है? और मदरसाज में जो है वह
- 1:44:20टीचर डायरेक्ट या इनडायरेक्ट इंस्ट्रक्शंस
- 1:44:22बच्चों को दे सकता है। इसमें सेल्फ स्टडी
- 1:44:24भी इंक्लूडेड रहेगी। कुरान शरीफ जो है वो
- 1:44:27तीन मेथड्स बताता है नॉलेज अटेन करने के।
- 1:44:30एक है अह इल्मुल याकीन यानी सिमिलर टू
- 1:44:34कयास यानी कयास लगाना। एनालॉजी गेस करना।
- 1:44:37ठीक है? देन है एनुल याकीन यानी विजुअल
- 1:44:40परसेप्शन। और तीसरा है आपका हकुल याकिन
- 1:44:43यानी टैक्टाइल परसेप्शन। ओके? शॉर्ट में
- 1:44:46हम देखें तो रेसाइटेशन, कलेक्टिव
- 1:44:48रिपीटेशन, ओरल मॉनिटोरियल मॉनिटोरियल
- 1:44:50सिस्टम रहता है जिसके अंदर आप जैसे मान लो
- 1:44:52मैं 10वीं क्लास में पढ़ रही हूं तो मैं
- 1:44:54पांचवी क्लास के बच्चों को पढ़ा दूं। तो
- 1:44:56वो है वहां से हेल्प लेना। ठीक है? सो वो
- 1:44:58मॉनिटोरियल रहता है। पीियर ट्यूटरिंग टाइप
- 1:45:01का आप चीज लगा लो इसमें। देन है आपका
- 1:45:04पीियर तो साथ वाले को बोल देते हैं ना। सो
- 1:45:07आपके सीनियर्स पढ़ा रहे हैं सॉर्ट ऑफ।
- 1:45:09ओके? रीडिंग, राइटिंग, एक्सपीरियंशियल
- 1:45:11लर्निंग, इंडिपेंडेंट स्टडी। तो ये सारे
- 1:45:13मेथड्स जो हैं वो इस्लामिक एजुकेशन में
- 1:45:14यूज़ किए जाते हैं। एजुकेशनल प्रैक्टिससेस
- 1:45:17को कंबाइन किया जा रहा है अलोंग विद द
- 1:45:19नॉलेज ऑफ़ वन गॉड। ये चीज जो है वो वन की
- 1:45:23क्योंकि उसमें भी तो हम एक ही की बात कर
- 1:45:25रहे हैं ना। ब्रह्मा की बात कर रहे हैं।
- 1:45:26तो ये भेद-अभेद वेदांता में बात की जाती
- 1:45:29है। तो ये दोनों चीजें भेद-अभेद वाली से
- 1:45:32रिलेट करते हैं। तो पैरेलली चलती है। ये
- 1:45:33पीवाईक्यू बहुत पुराने क्वेश्चंस में आया
- 1:45:36हुआ है। ठीक है जी? तो इस्लाम में इस्लाम
- 1:45:39हम मानते हैं जो कुरान में मेंशन है वही
- 1:45:41है। थियोसेंट्रिक है क्योंकि ये एक ही
- 1:45:43ट्रू ओनली ट्रू रियलिटी की बात करते हैं
- 1:45:45और वो ट्रू रियलिटी गॉड है। गॉड ही
- 1:45:48अल्टीमेट रियलिटी है। वही अल्टीमेट बीइंग
- 1:45:50है। वही अल्टीमेट ओनली ट्रू रियलिटी है।
- 1:45:53ओनली। ओके? एवरीथिंग एल्स जो है वो उसकी
- 1:45:56विल के ऊपर ही चलेगा। गॉड जो है अकॉर्डिंग
- 1:45:59टू इस्लामिक स्क्रिप्चर वो एब्सोल्यूट
- 1:46:01रियल है। यानी अल हक है। सो वो एब्सोल्यूट
- 1:46:04रियल है। रियलिटी है। ठीक है? वो कोई
- 1:46:06प्रोजेक्शन नहीं है कि इंसान के दिमाग की
- 1:46:09उपज हो ऐसा कुछ नहीं है। एब्सोल्यूट रियल
- 1:46:11माना गया है। ना ही उसको इल्यूजन माना गया
- 1:46:14है ना ही कुछ और माना गया है। ओके देन ही
- 1:46:17इज़ इटरर्नली लिविंग ट्रांजेंडिंग द
- 1:46:20लिमिटेशंस जो भी हम देखते हैं। सो वो
- 1:46:22इटरनल है मतलब है लेकिन एग्ज़िस्ट करता है।
- 1:46:25रियल है। ओके? सो एग्जैक्ट नेचर तो नहीं
- 1:46:28पता है गॉड का बट बिय्ड कॉम्प्रिहेंशन है।
- 1:46:30आप उसको कॉम्प्रिहेंड नहीं कर पाओगे।
- 1:46:32इस्लामिक कॉनंसेप्ट ऑफ नॉलेज फंडामेंटल और
- 1:46:35लिबरल व्यूज दोनों की बात करता है।
- 1:46:37फंडामेंटल व्यूज जो है वो नॉलेज ऑफ
- 1:46:39रियलिटी इन इस्लामिक स्क्रिप्चर्स यानी
- 1:46:41कुना कुरान सुनना इन सब से रिलेटेड जो
- 1:46:44चीजें हैं उनसे रिलेटेड है। और लिबरल व्यू
- 1:46:46जो है वो रियलिटी जो फिजिकल यूनिवर्सल
- 1:46:49वर्ल्ड में चीजें एक्ज़िस्ट करती हैं। उस
- 1:46:51बेसिस पे जो व्यू है वो लिबरल व्यू है।
- 1:46:54ओके? ये है वो पांच टाइप्स जो हम पांच
- 1:46:57प्रिडिकबल्स भी बोलते हैं। तो एक
- 1:46:59हायरार्की सी बना देते हैं ये। कैसे कि
- 1:47:02जीनस है। जीनस मतलब जो कॉमन नेचर है। ठीक
- 1:47:05है? जैसे एनिमलिटी तो सभी ह्यूमन बीइंग
- 1:47:07हो, डॉग हो, कैट हो, हम उनको एनिमल ही बोल
- 1:47:10रहे हैं ना? राइट? तो वो जीनस हो गया। फिर
- 1:47:12हम स्पीशीज़ में जाते हैं। जैसे ह्यूमन
- 1:47:14बीइंग एक स्पीशीज़ आ गई और ह्यूमन बीइंग
- 1:47:15में फिर जॉन है, जॉर्ज है, रवीना है, कोई
- 1:47:18है सब लोग आ गए। ओके? देन डिफरेंस है कि
- 1:47:21आप जो है डिफरेंशिएट कर पाओ बिटवीन द
- 1:47:23मेंबर्स ऑफ़ जीनस। ओके? सो वो एक रैशनलिटी
- 1:47:27के साथ आएगा कि ह्यूमन जो है वो एनिमल
- 1:47:29स्पीशीज से अलग है। दो अलग स्पीशीज हैं।
- 1:47:31सो वो डिफरेंस होना। ओके? ये जो तीन
- 1:47:34यूनिवर्सल एसेंशियल्स हैं ये मेन चीज हैं।
- 1:47:37अदरवाइज इसके अलावा जैसे ये प्रॉपर्टी और
- 1:47:40कॉमन वाली चीजें हैं ये एक्सीडेंटल हैं।
- 1:47:43यानी ये तीन चीजें तो होती है। आपको समझनी
- 1:47:46पड़ेंगी। ये तीन ये दो चीजें हमने
- 1:47:48एक्सीडेंटली समझी हैं। राइट? जैसे ह्यूमन
- 1:47:51बीइंग है तो वो हंस सकते हैं, रो सकते
- 1:47:53हैं। सो ये उनकी जो प्रॉपर्टी है ये
- 1:47:55एक्सीडेंटली हमें पता चल गई है। ओके? जो
- 1:47:58कि कॉमन है। देन कॉमन एक्सीडेंट जो है वो
- 1:48:01क्या है कि मान लो क्रो है और क्रो काला
- 1:48:05ही होता है। तो ये इनसेपरेबल मैनर में जो
- 1:48:07चीज यूनिवर्सली अटैच हो गई। ओके? जैसे
- 1:48:10ब्लैक फॉर ह्यूमन बीइंग्स या
- 1:48:12इनसेपरेबिलिटी ऑफ़ द कॉमन एक्सीडेंट।
- 1:48:14हाउएवर इज़ द ओनली इन एकज़िस्टेंस। सो ये
- 1:48:16इनसेपरेबल चीज जो है ना कि आप अटैच कर रहे
- 1:48:19हो क्वालिटी टू मोर देन वन यूनिवर्सल। सो
- 1:48:22वो चीज यहां पे कॉमन एक्सीडेंट में आ
- 1:48:24जाएगी। इसलिए कॉमन एक्सीडेंट और प्रॉपर्टी
- 1:48:26जो हैं ये एक्सीडेंटल प्रॉपर्टीज हैं जो
- 1:48:29हमें मिल गई हैं बाय चांस। अदरवाइज ऐसा
- 1:48:31कुछ था नहीं पर्टिकुलर। बट जीनस, स्पीशीज़
- 1:48:34और डिफरेंस जो हैं वो यूनिवर्स ये जो तीन
- 1:48:36यूनिवर्सल्स हैं ये एसेंशियल हैं किसी भी
- 1:48:38चीज के लिए। ओके जी। ये देखो जी। एजुकेशनल
- 1:48:42प्रोग्रेशन देखो इसमें ना कई बार ये कालिम
- 1:48:45और फाजिल में ऐसे हो जाता है कि फाजिल जो
- 1:48:47है वो अंडर ग्रेजुएट को बोल रहे हैं।
- 1:48:49कालिम जो है वो पोस्ट ग्रेजुएट को। लेकिन
- 1:48:51ये जो मैंने इंफॉर्मेशन मेंशन की है ये
- 1:48:53यूपी में जो मदरसाज के बोर्ड्स वगैरह होते
- 1:48:56हैं वहां से प्रॉपर इंफॉर्मेशन है ये।
- 1:48:59ओके? सो मुंशी मौलवी सेकेंडरी लेवल पे जो
- 1:49:02हैं यानी जिसने 10वीं पास कर ली हो,
- 1:49:04मैट्रिक कर ली हो, वो मुंशी और मौलवी
- 1:49:06इक्विवेलेंट डिग्री। ओके? आलिम जो है वो
- 1:49:09इक्विवेलेंट टू 12th माना जा रहा है। काल
- 1:49:11कामिल जो है वो ग्रेजुएशन और फाजिल जो है
- 1:49:14वो पोस्ट ग्रेजुएशन। ओके? सो ये चीजें
- 1:49:16आपको पता हो। अब एक लैंडमार्क रूलिंग आई
- 1:49:192024 में सुप्रीम कोर्ट ने क्लेरिफाई किया
- 1:49:22जो मदरसा से क्वालीफाई करते हैं यानी
- 1:49:25जिसने आलिम, कामिल, फाजिल ये जो डिग्री
- 1:49:27हासिल की है सो कॉल्ड इनके ऊपर एक लीगल
- 1:49:30स्टेटस जो है उन्होंने दिया। उन्होंने
- 1:49:32बोला कि भई वर्डिक्ट क्या निकला? आलिम ठीक
- 1:49:35है। यानी 12वीं तक की पढ़ाई मदरसा में ठीक
- 1:49:38है। ओके है। हम इक्विवेलेंट मानेंगे और
- 1:49:41बाद में जो है आप उसको डाल सकते हो बच्चे
- 1:49:43को कहीं किसी और ग्रेजुएशन के कोर्स में।
- 1:49:46बट जो कामिल और फाजिल हैं उनको स्ट्रक
- 1:49:49डाउन कर दिया। यानी ये दोनों चीजें
- 1:49:51इक्विवेलेंट नहीं मानी जाएंगी ग्रेजुएशन
- 1:49:53पोस्ट ग्रेजुएशन के। क्योंकि ये
- 1:49:55अनकॉन्स्टिट्यूशनल बोला इनको। ठीक है? और
- 1:49:58इनको कॉन्फ्लिक्ट में भी बोला किसके
- 1:50:00कॉन्फ्लिक्ट में? जो आपका यूजीसी के थ्रू
- 1:50:03चीजें आती हैं। यूजीसी एक्ट के
- 1:50:04कॉन्फ्लिक्ट में बोला। ओके? तो इसलिए
- 1:50:06जुरिसडिक्शन ये निकल के आती है कि हायर
- 1:50:08एजुकेशन स्टैंडर्ड्स जो हैं दे फॉल अंडर
- 1:50:11यूनियन लिस्ट। यानी स्टेट लेवल मदरसा
- 1:50:14बोर्ड जो है वो डिग्री ग्रांट नहीं कर
- 1:50:16सकते। ओके? सो ये जुरिसडिक्शन थी कि अगर
- 1:50:20हायर एजुकेशन जो हायर एजुकेशन के
- 1:50:22स्टैंडर्ड्स यूनियन लिस्ट में आते हैं
- 1:50:24जबकि जो 12th तक के जो चीजें हैं सेकेंडरी
- 1:50:27एजुकेशन सीनियर सेकेंडरी एजुकेशन वो आपकी
- 1:50:30आती है कॉनकरेंट लिस्ट में तो स्टेट बोर्ड
- 1:50:32के अंडर जो चीजें हो रही हैं वो चल जाएंगी
- 1:50:34बट पोस्ट ग्रेजुएशन वाले कोर्सर्सेस जो
- 1:50:37हैं वो यूजीसी के अंडर ही चलेंगे वो
- 1:50:39मदरसाज़ के अंडर नहीं चलेंगे ओके तो ये चीज
- 1:50:43आपको पता हो आपको ये मतलब पता हो ये भी
- 1:50:45पूछा गया था कि इसको सीक्वेंस में लगाओ तो
- 1:50:48मुंशी मौलवी या आलिम कामिल ये सीक्वेंस
- 1:50:51आपको पता होनी चाहिए। ओके जी। देन आपके
- 1:50:54सिलेबस में स्वामी दयानंद सरस्वती का नाम
- 1:50:56मेंशन है। जी। सो इनके बारे में मेजर
- 1:50:58चीजें देख लेते हैं। अदरवाइज इनसे
- 1:51:00क्वेश्चन आता नहीं है मोस्टली। फाउंडर हैं
- 1:51:02ये आर्य समाज के। ये बैक टू वेदाज़ की बात
- 1:51:05करते हैं। वैदिक एजुकेशन को प्रमोट किया।
- 1:51:07इन्होंने डीएवी स्कूल्स खोल के। तो डीएवी
- 1:51:10स्कूल पहला 1886 में लाहौर में खुला था।
- 1:51:12दयानंद एंग्लो वैदिक स्कूल्स। इन्होंने
- 1:51:14सत्यार्थ प्रकाश लिखी। लाइट ऑफ ट्रुथ देन
- 1:51:18आपका संस्कार विधि और ऋग्वेद भाष्यम ये
- 1:51:21इनकी लिखा लिखी हुई चीजें हैं। मोनोथिस्ट
- 1:51:24पे ये बिलीव करते हैं। कोई आइडियल वरशिप
- 1:51:26जो है ये नहीं मानते हैं कि एक ही है
- 1:51:29एकिस्ट करता है बट फॉर्मलेस गोल्ड है। सो
- 1:51:31आइडियल या मूर्ति पूजा में ये बिलीव नहीं
- 1:51:33करते हैं। परोपकारिणी सभा जो है वो उसके
- 1:51:36भी ये फाउंडर हैं और ये बिलीव करते हैं
- 1:51:39चक्रधिपत्या यानी कॉनंसेप्ट ऑफ वन
- 1:51:42गवर्नमेंट थ्रूउ द वर्ल्ड। ये क्वेश्चन
- 1:51:45पूछा जा सकता है। अभी तक नहीं पूछा है।
- 1:51:47ओके? तो ये स्वामी दयानंद सरस्वती हैं। आप
- 1:51:50और इंफॉर्मेशन इनसे रिलेटेड कुछ मिले तो
- 1:51:52आप इसी स्लाइड में यहां ऐड कर सकते हो। जो
- 1:51:54बच्चे नोट्स ले आप नोट्स बना रहे हो। सो
- 1:51:56बाकी जरूरत नहीं है इससे क्वेश्चंस जो हैं
- 1:51:58वो नहीं आते हैं कभी। ओवरऑल हमने फर्स्ट
- 1:52:02पार्ट जो पढ़ा उसमें ऑर्थोडॉक्स स्कूल्स
- 1:52:04अनऑर्थोडॉक्स स्कूल्स पढ़े। ये उनके मेजर
- 1:52:06प्रोपाउ प्रोपोनेंट हैं। फाउंडर लगा लो या
- 1:52:09चीफ प्रोपोनेंट लगा लो। तो ये नाम आपको
- 1:52:11पता होने चाहिए। देन ये इंडियन स्कूल्स जो
- 1:52:13हमने पढ़े ये वैलिड सोर्स ऑफ नॉलेज जिसको
- 1:52:15हम प्रमाण बोल रहे थे कि चरक जो है वो
- 1:52:18सिर्फ परसेप्शन यानी एक में ही बिलीव करते
- 1:52:20हैं। वैशिष्ट बुद्धिज्म ये दोनों के दोनों
- 1:52:22जो है वो दो सोर्सेस में बिलीव करते हैं।
- 1:52:24परसेप्शन और इनफेरेंस योग, सांख्य और
- 1:52:27जैनिज्म ये तीन में परसेप्शन, इनफरेंस और
- 1:52:30वर्बल टेस्टिमोनी। न्याय वाले जो है वो
- 1:52:33चार में जिसमें कंपैरिजन भी आ गया। और जो
- 1:52:35वैदिक फिलॉसफी या वेदांता वाले हैं वो छह
- 1:52:37के छह प्रमाण में बिलीव करते हैं। उनको
- 1:52:40वैलिड सोर्स ऑफ नॉलेज बोलते हैं। ठीक है
- 1:52:42जी। अब बात आती है हमारी नेक्स्ट पार्ट की
- 1:52:45यानी बी पार्ट की जिसमें हम वेस्टर्न
- 1:52:48स्कूल्स ऑफ थॉट की बात करेंगे। अभी तक
- 1:52:49हमने इंडियन स्कूल्स ऑफ फिलॉसफी पढ़ लिया
- 1:52:52है। इतनी इनेशन आपके लिए मोर देन इनफ है।
- 1:52:55ओके? वेस्टर्न स्कूल्स में हमें स्पेशली
- 1:52:57मेंशन है। आइडियलिज्म, रियलिज्म,
- 1:52:59नेचुरलिज्म, प्रगमेटिज्म, मार्क्सिज्म और
- 1:53:00एकिस्टेंशियलिज्म। छह चीजें मेंशन हैं। हम
- 1:53:03सात आठ आठ नौ चीजें करेंगे। बट जो आपके
- 1:53:06एग्जाम पर्सपेक्टिव से इंपॉर्टेंट है।
- 1:53:08बहुत शॉर्ट में इनको समझाने की कोशिश
- 1:53:11करूंगी क्योंकि इनके लिए आप जितनी थ्योरी
- 1:53:13यूज़ करोगे उतनी ही कम पड़ेगी। तो आपको मेन
- 1:53:15जस्ट समझना है कि क्या कहना चाह रहे हैं।
- 1:53:17ओके? आइडियलिज्म आइडियाज पे फोकस है।
- 1:53:20माइंड और थॉट जो है वही रियल है और कुछ भी
- 1:53:23रियल नहीं है। ओके? तो जो प्लेटो हैं वो
- 1:53:26क्या है? जी फादर ऑफ़ आइडियलिज्म है। उनकी
- 1:53:28एक फेमस बुक है। द रिपब्लिक। पूछी जाती है
- 1:53:31किसने लिखी है। ओके? माइंड और थॉट ही रियल
- 1:53:34है। उसके अलावा कोई भी चीज़ रियल नहीं है।
- 1:53:37वर्ल्ड जो है माइंड और आइडियाज़ का वही
- 1:53:39परमानेंट, रेगुलर और ऑर्डरली है।
- 1:53:41आइडियलिस्ट आउटलुक जो है वो स्पिरिचुअल
- 1:53:44आउटलुक है। अल्टीमेट रियलिटी आपको
- 1:53:46स्पिरिचुअलिटी में दिखेगी। यानी ये
- 1:53:48एग्जिस्टेंस ऑफ गॉड में बिलीव करते हैं।
- 1:53:50यूनिवर्स गॉड ने ही बनाया है। इटरनल
- 1:53:53स्पिरिचुअल वैल्यूस जो है वो कभी चेंज
- 1:53:56नहीं होती है। वो एब्सोल्यूट हैं। और वो
- 1:53:58वैल्यूज़ हैं जी ट्रुथ, ब्यूटी, गुडनेस। सो
- 1:54:00ट्रुथ, गुडनेस, ब्यूटी यानी सत्यम, शिवम,
- 1:54:03सुंदरम। सो ये तीन इटरनल वैल्यूज़ हैं। यही
- 1:54:06मेन प्रोपोन मेन मेन फाउंडेशन है
- 1:54:08आइडियलिस्ट करिकुलम की। स्पिरिचुअल लॉज़ जो
- 1:54:11हैं वो यूनिवर्सल हैं। आप चेंज नहीं कर
- 1:54:13सकते। आइडियल है चीजें। ओके? देन एम ऑफ़
- 1:54:16एजुकेशन अकॉर्डिंग टू आइडियलिज्म वो सेल्फ
- 1:54:19रियलाइजेशन है। टीचर की पोजीशन बहुत हाई
- 1:54:22लेवल पे है। टीचर ही गाइड करेगा, डायरेक्ट
- 1:54:24करेगा। सिचुएशन को कंट्रोल करेगा। सब
- 1:54:26चीजें टीचर करेगा। ओके? सोक्रेटीज़,
- 1:54:29प्लेटो, डेस्क्रेट, स्पिंजो, बकले,
- 1:54:32महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद, श्री और
- 1:54:34ओबिंदो ये सारे आइडियलिज्म की फिलॉसोफी
- 1:54:36में बिलीव रखते हैं। ठीक है जी। देन
- 1:54:39रियलिज्म इसके एग्जैक्ट ऑोजिट अरिस्टोटल
- 1:54:42जो है वो फादर ऑफ रियलिज्म है। अकॉर्डिंग
- 1:54:44टू बटलर रियलिज्म एक कॉमन एक्सेप्टेंस है
- 1:54:47कि जैसा संसार है वैसे उसको एक्सेप्ट करना
- 1:54:50जैसे हमें दिख रहा है। ओके? व्यूज द
- 1:54:53वर्ल्ड इन टर्म्स ऑफ़ ऑब्जेक्ट एंड मैटर।
- 1:54:56जैसे वो सिर्फ माइंड की फिनोमिना में देख
- 1:54:58रहे थे। ये जैसा फिनोमिनल वर्ल्ड हमें दिख
- 1:55:01रहा है उसको ही ट्रू मानते हैं। सेंसेस जो
- 1:55:03है वो गेटवे हैं नॉलेज के। रेगुलैरिटी है
- 1:55:06ऑब्जेक्टिव वर्ल्ड में। रियलिज्म
- 1:55:09ट्रांसडेंटलिज्म को एक्सेप्ट नहीं करता।
- 1:55:11यानी बिय्ड जैसे हमने बोला ना बियों्ड
- 1:55:14आइडियाज कुछ नहीं है वाली सिचुएशन की
- 1:55:15आइडियाज ही हैं जो हैं। यहां पे ये बोल
- 1:55:18रहे हैं बियों्ड जैसा कुछ नहीं है। जो दिख
- 1:55:19रहा है वही है। ओके? मेन एम्फेसिस है
- 1:55:22प्रेजेंट और प्रैक्टिकल लाइफ ऑफ मैन
- 1:55:24बीइंग। तो ह्यूमन बीइंग की प्रेजेंट और
- 1:55:25प्रैक्टिकल लाइफ पे ये फोकस कर रहे हैं।
- 1:55:28सो दिस अपील्स फॉर एक साइंटिफिक
- 1:55:30स्टैंडर्डाइज्ड डिस्टिंक्ट डिसिप्लिन
- 1:55:33बेस्ड करिकुलम आपको यहां देखने को मिलता
- 1:55:35है। ओके? सब्जेक्ट एरिया अप्रोच पे फोकस
- 1:55:38करते हैं। लर्नर्स को डे टू डे लाइफ में
- 1:55:40कैसे डील करना है? बेसिक नीड्स कैसे पूरी
- 1:55:43करनी है? उन चीजों से रिलेटेड ये फोकस
- 1:55:45करते हैं। वो चीजें समझाने पे, सिखाने पे।
- 1:55:48टीचर जो है वो बच्चे को रियलिटी से रूबरू
- 1:55:51करवाएगा। टीचर साइंटिफिक नॉलेज, साइंटिफिक
- 1:55:54टेंपरामेंट बच्चे में डालेगा ताकि एक
- 1:55:56अच्छे इजी और इफेक्टिव वे में डालेगा।
- 1:55:58एक्यूरेट इनेशन जो है वो बच्चों में
- 1:56:01इंपार्ट करेगा। ओके? सो जॉन लॉक अह मेनली
- 1:56:05कॉमनस ये बर्ट रशल फ्रांसिस बैकन ये नाम
- 1:56:09अक्सर पूछ लिए जाते हैं हरबर्ट स्पेंसर कि
- 1:56:12ये किससे रिलेटेड हैं? तो ये रियलिज्म से
- 1:56:14रिलेटेड हैं। तो दीज़ आर रियलिस्ट्स जो
- 1:56:16हमने ऊपर पढ़े थे। दीज़ आर आइडियलिस्ट। ओके?
- 1:56:19देन तीन तरीके चार तरीके के रियलिज्म की
- 1:56:22बात होती है। उसमें किसका नाम आता है?
- 1:56:23जैसे एरिस्टोटेलियन में एररिस्टोटलल का।
- 1:56:25रिलीजियस रियलिज्म में थॉमस एक्वेनस का जो
- 1:56:28आगे जाके पेरिनियलिज्म बनता है। एक नई
- 1:56:31फिलॉसफी बनती है। ओके? इसीलिए
- 1:56:33पेरिनियलिज्म पढ़ेंगे। तो थॉमस एक्वेनस को
- 1:56:36हम फादर भी बोलते हैं पेरिनियलिज्म का।
- 1:56:39ह्यूमनिस्टिक रियलिज्म। देन मॉडर्न
- 1:56:41रियलिज्म। तो आप ये नाम ध्यान रख सकते हो
- 1:56:43बस। ओके जी। देन है प्रगमेटिज़्म। सो फादर
- 1:56:46ऑफ़ प्रैग्मिज़्म। चार्ल्स एंडर्स स्पियर्स
- 1:56:48को बोलते हैं। प्रग्मा मतलब रियलिटी। आप
- 1:56:51यहां पे लर्निंग बाय डूइंग पे फोकस कर रहे
- 1:56:54हो। सिखाने पे फोकस कर रहे हो।
- 1:56:55प्रगमेटिज्म सोसाइटी के करीब रखना चाह रहा
- 1:56:58है बच्चों को। सोसाइटी से दूर नहीं करना
- 1:57:01चाह रहा है। जैसे नेचुरलिज्म नेचर के करीब
- 1:57:03और सोसाइटी से दूर रखेगा बच्चों को।
- 1:57:05प्रगमेटिज्म सोसाइटी के पास रखेगा।
- 1:57:08क्योंकि सोसाइटी से ही हम सीखते हैं और
- 1:57:10हमसे ही सोसाइटी बनती है। ओके? यहां पे
- 1:57:13मेन नाम जो है वो जॉन डूई का देखने को
- 1:57:15मिलता है। रियलिटी लाइज़ इन द प्रोसेस इट
- 1:57:18इज़ स्टिल इन मेकिंग। सो कोई भी रेडीमेड
- 1:57:21चीजें नहीं है। रियलिटी चेंजिंग प्रोसेस
- 1:57:23में है। बनती रहती है। चेंज होती हैं
- 1:57:25चीजें। प्रगमेटिज्म बिलीव करता है गॉड
- 1:57:28एग्जिस्टेंस में। लेकिन एक एक्सटेंट तक।
- 1:57:30ओके? यूनिवर्स जो है वो मैन ने क्रिएट
- 1:57:33किया है। सारी चीजें मैन ने बनाई है।
- 1:57:35आसपास चीजें चेंजबल हैं। क्योंकि हमने
- 1:57:37बनाई है। तो टाइम, प्लेस, सरकमस्टेंस के
- 1:57:40हिसाब से चीजें बदलेंगी। कोई भी चीज
- 1:57:42यूनिवर्सल नहीं है। ओके? रिकॉग्नाइज़ज़
- 1:57:45आइडियल्स एंड बिलीव्स एक्सपेरिमेंट्स के
- 1:57:47बेस पे यानी करके देखो। वो एक्सपीरियंस
- 1:57:49करो उस बेस पे। सो आउटलुक जो है वो इनका
- 1:57:52सोशल होगा क्योंकि सोसाइटी को ही ये बेस
- 1:57:55मान के चलते हैं। हम सोसाइटी से अलग नहीं
- 1:57:57करेंगे बच्चे को क्योंकि अल्टीमेटली उसने
- 1:57:59सोसाइटी में ही रहना है। ओके? मेन एम क्या
- 1:58:02है एजुकेशन का? कि ये डायनेमिक है नेचर
- 1:58:05में मेन एम कि चीजें चेंज होती हैं यहां
- 1:58:08पे। लर्नर्स जो है वो हैंड्स ऑन
- 1:58:10एक्टिविटी, ऑब्जरवेशन, लर्निंग बाय डूइंग
- 1:58:12एक्टिविटी मेथड इनसे सीखते हैं। ओके? मेन
- 1:58:15नाम चार्ल्स एंडर्स स्पियर्स, विलियम
- 1:58:17जेम्स और जॉन डूई। तीन नाम बहुत फेमस हैं।
- 1:58:20एजुकेशन को ट्राईपोलर प्रोसेस जॉन डूई ने
- 1:58:22बोला था। मैंने आपको समझाया था पहली
- 1:58:24स्लाइड में। जॉन डूई जो है उनके एजुकेशनल
- 1:58:27फिलॉसफी जो है उसको कई बार
- 1:58:29एक्सपेरिमेंटलिज्म, फंक्शनलिज्म,
- 1:58:31इंस्ट्रूमेंटलिज्म, प्रो ऑपरेशनलिज्म,
- 1:58:34प्रैक्टिकलिज्म, प्रगमेटिज्म,
- 1:58:36प्रोग्रेसिविज़्म तो वो भी बोला जाता है।
- 1:58:39ओके? जॉन डई ने एक बुक लिखी है। बहुत फेमस
- 1:58:41है। डेमोक्रेसी एंड एजुकेशन पूछ ली जाती
- 1:58:43है। प्रेयर्स जो है वो आप एंप्टी स्टमक
- 1:58:46नहीं ऑफर कर सकते। ठीक है? तो वो जो ये
- 1:58:48आइडियल चीजें हैं कि पहले भगवान का नाम लो
- 1:58:51फिर वो वाली चीज आप खाली पेट भजन भी नहीं
- 1:58:53होता। भूखे पेट भजन ना होए। ठीक है? सो वो
- 1:58:56वो वो चीज की फिलॉसोफी जो है वो
- 1:58:58प्रगमेटिज्म में आपको देखने को मिलती है।
- 1:59:00नेचुरलिज्म प्रगमेटिज्म से उल्टा है। ठीक
- 1:59:03है? सो देखो हमने पढ़ा आइडियलिज्म। आइडियाज
- 1:59:05पे, माइंड पे, रियल थॉट, ट्रुथ, ब्यूटी,
- 1:59:08गुडनेस, सत्यम, शिवम सुंदरम उन पे फोकस
- 1:59:10है। ओके? आई आइडियल चीजें हैं थोड़ी सी।
- 1:59:13रियलिज्म इसके ऑोजिट था। साइंटिफिक चीजों
- 1:59:15पे फोकस कर रहा है। और जो चीजें हैं
- 1:59:18एग्जैक्टली उन पे फोकस कर रहा है। ओके?
- 1:59:20प्रगमेटिज्म में सोसाइटी पे फोकस है कहीं
- 1:59:22ना कहीं लेकिन लर्निंग बाय डूइंग पे फोकस
- 1:59:24है कि अपना करके सीखो। नेचुरलिज्म थोड़ा
- 1:59:27सा एक्सट्रीम चला गया। ये सोसाइटी को करीब
- 1:59:29ही नहीं आने देना चाह रहा। ये बोल रहे हैं
- 1:59:31नेचर अलोन इज़ द एंटायर रियलिटी और नेचर
- 1:59:34रेडीमेड है। जैसे हमने ऊपर बोला
- 1:59:36प्रेग्नेंटिज्म में कि चीजें बन रही हैं।
- 1:59:38प्रोसेस में है। बट यहां पे सारा फोकस ही
- 1:59:40नेचर पे है। जीन, जैकिस, रोस रूसो जो हैं
- 1:59:44वो इसके फादर माने जाते हैं। रूसो ने बहुत
- 1:59:46प्रमोट की है सारी चीजें। ठीक है? तो यह
- 1:59:48बोलते हैं कि कोई मैटर और कॉन्शियसनेस में
- 1:59:50क्लियर कट डिफरेंस नहीं है। फिजिकल नेचुरल
- 1:59:53लॉज़ जो हैं वो सारे यूनिवर्सल हैं। यह
- 1:59:55नेचर को ही बेस मान रहे हैं। फॉलो द नेचर
- 1:59:58का स्लोगन फॉलो करते हैं। वैल्यू सोल गॉड
- 2:00:01इन चीजों में बिलीव नहीं करते हैं।
- 2:00:03ऑटोनॉमस डेवलपमेंट पे फोकस करते हैं।
- 2:00:05इंडिविजुअलिटी पे फोकस करते हैं। ठीक है?
- 2:00:08ये भी सेल्फ एक्सप्रेशन पे फोकस कर रही
- 2:00:10हैं। नेचर ही टीचर है। तो रूसो ने तो ये
- 2:00:12भी बोल दिया कि जितनी भी चीजें नेचर के जब
- 2:00:15तक हाथ में थी तब तक चीजें अच्छी हैं।
- 2:00:18जैसे ही वो इंसान के हाथ में आती है उनका
- 2:00:20कवाड़ा हो जाता है और डीजनरेट होती हैं
- 2:00:22वो। ठीक है? तो डिस्ट्रॉय कर देता है
- 2:00:24इंसान उसको। तो सेम है कि छोटे बच्चे भी
- 2:00:27जब तक नेचर के करीब रहेंगे वो सीखेंगे।
- 2:00:29जैसे ही सोसाइटी में आने लगेंगे तो वो
- 2:00:32डेटरट होने लग जाएंगे। ओके? नेचुरलिस्ट भी
- 2:00:34कोई फिक्स्ड करिकुलम को फॉलो नहीं करते
- 2:00:37हैं। ये नेगेटिव एजुकेशन की बात करते हैं।
- 2:00:39ये क्वेश्चन बहुत बार पूछा जाता है। रूसो
- 2:00:41ने नेगेटिव एजुकेशन टर्म दी है। नेगेटिव
- 2:00:44एजुकेशन की बात की है। नेगेटिव एजुकेशन जो
- 2:00:46है वो टीचर की अथॉरिटी को डिसमिस कर रही
- 2:00:50है और बच्चे को अलाउ कर रही है कि वो उसका
- 2:00:53जो नेसेंट माइंड है नया-नया बिल्कुल फूल
- 2:00:56जैसा माइंड उसको नेचर में छोड़ो। वो अपने
- 2:00:58आप चीजें करके सीख जाएगा। ओके? इसमें एक
- 2:01:01बेस्ट एग्जांपल आता है उनकी एमील नाम की
- 2:01:03बुक है। सो एमील में एमील एक कैरेक्टर है
- 2:01:06और वो एमील को बोलते हैं कि वो उसमें ले
- 2:01:09उसमें सो रहा है। मान लो ठंड है और उसने
- 2:01:11खिड़की तोड़ दी। तो अब वो जो खिड़की तोड़ी
- 2:01:13है उसको टूटी हुई खिड़की वाले रूम में ही
- 2:01:15सोने दो। जब उसको ठंड लगेगी तो वो सीख
- 2:01:17जाएगा। सो इट्स लाइक यू आर लर्निंग फ्रॉम
- 2:01:19योर कॉन्सीक्वेंसेस व्हिच इज एक्सट्रीम।
- 2:01:22ठीक है? क्योंकि कई बार होता है कि आप आग
- 2:01:25लगानी नहीं है। ये सीखने के लिए पहले आग
- 2:01:27थोड़ी लगा के देखोगे। राइट? सो वो थोड़ा सा
- 2:01:29एक्सट्रीम है। अदरवाइज ये नेचर पे ही फोकस
- 2:01:32कर रहे हैं। कॉन्सिक्वेंसेस से सीखने पे
- 2:01:34फोकस कर रहे हैं। नेगेटिव एजुकेशन को
- 2:01:36प्रमोट करते हैं। नेगेटिव एजुकेशन इज़
- 2:01:38सॉर्ट ऑफ दूर जो जो सोसाइटी से दूर है
- 2:01:41उसको ये नेगेटिव एजुकेशन बोल रहे हैं।
- 2:01:44ऑपोज़ करते हैं ये बुकिश नॉलेज को। सेल्फ
- 2:01:47लर्निंग सेंट्रल पोजीशन है बच्चे की और
- 2:01:49स्पेंसर मैकडगल डारमिन लेमार्क रूसो टीपी
- 2:01:53नन ये जो है नेचुरलिज्म की बात करते हैं
- 2:01:55अलग-अलग टाइप के जैसे एटॉमिक नेचुरलिज्म
- 2:01:58में हम एपिकरस और डेमोक्रेटस को याद
- 2:02:01रखेंगे ये चीफ प्रोपोनेंट्स हैं और ये
- 2:02:03बोलते हैं कि एटॉमिक एटॉमिक नेचुरलिज्म
- 2:02:05मतलब जो आपका नेचर है जो एट वो छोटे-छोटे
- 2:02:08पार्ट्स से मिलके बना हुआ है। ओके? देन
- 2:02:11साइंटिफिक नेचुरलिज्म में फिजिकल और
- 2:02:13बायोलॉजिकल आ जाता है। फिजिकल में मेजरेंस
- 2:02:16एक्सटर्नल मटेरियल वर्ल्ड को दी है और
- 2:02:18बायोलॉजिकल में डार्विन की थ्योरी कोेंस
- 2:02:20दी है कि एडप्ट करोगे आप एनवायरमेंट के
- 2:02:22अकॉर्डिंग एडप्ट करोगे, स्ट्रगल करोगे। जो
- 2:02:24स्ट्रगल करके फिट हो गया सर्वाइवल ऑफ द
- 2:02:27फिटेस्ट वो बचेगा। अदरवाइज़ आप सर्वाइव
- 2:02:29नहीं कर पाओगे। मैकेनिकल नेचुरलिज्म
- 2:02:32हरबर्ट स्पेंसर ने दिया है। ये वर्ड याद
- 2:02:34रखिए। उनके अकॉर्डिंग एक बड़ी मशीन है।
- 2:02:37पूरा जो ब्रह्मांड है और उसमें हम
- 2:02:39छोटे-छोटे पुरजे हैं जो सारे मिलके काम कर
- 2:02:41रहे हैं। ओके ऐसे ही एक वर्ड हिस्टोरिकल
- 2:02:44नेचुरलिज्म भी आता है। सो आपको एटलीस्ट
- 2:02:46वर्ड्स पता हो कि अच्छा ये नेचुरलिज्म में
- 2:02:48आते हैं। ओके जी एमील बुक का ध्यान रखना।
- 2:02:52देन है जी एग्ज़िस्टेंशियलिज्म। सो दो नाम
- 2:02:54आते हैं यहां पे वैसे तो बट फाउंडर या
- 2:02:56मॉडर्न जो है एग्ज़िस्टेंशियलिज्म में
- 2:02:59सोरेन किरगार्ड को ही बोला जाता है। ठीक
- 2:03:01है? कि ये फाउंडर हैं और ये अह मॉडर्न
- 2:03:03एकिस्टेंशियलिज्म ये 19थ सेंचुरी में
- 2:03:06फाउंडर माने जाते हैं। उसके बाद 20थ
- 2:03:08सेंचुरी में जीन पोल सर्टे भी काफी फेमस
- 2:03:10हैं। ओके? तो बाकी ये निश और मार्टिन जो
- 2:03:13है इनके नाम भी एकिस्टेंशियलिस्ट की तरह
- 2:03:15ही देखे जाते हैं। ओके?
- 2:03:17एग्ज़िस्टेंशियलिज्म फोकस करता है
- 2:03:18एग्ज़िस्टेंस पे। ठीक है? कि एग्ज़िस्टेंस
- 2:03:21पहले देन एसेंस। सो एग्ज़िस्टेंस प्रसीड्स
- 2:03:25एसेंस। यानी एसेंस से पहले अगर मैं बोलती
- 2:03:28एकिस्टेंस प्रोसीड प्रोसीड मतलब उसके बाद
- 2:03:31प्रसीड मतलब पहले तो एग्ज़िस्टेंस पहले देन
- 2:03:34एसेंस फोकस सेल्फ के ऊपर है।ेंस ऑफ़
- 2:03:36सब्जेक्टिविटी है। मैन की फ्रीडम उसकी
- 2:03:39सेल्फ वो सारी चीजों पे फोकस है कि मैन
- 2:03:42हमेशा कॉन्फ्लिक्ट में ही नजर आएगा आसपास
- 2:03:44के रिलेशंस से। ठीक है? तो ये जेपी साटे
- 2:03:47ने ये बात बोली। ये आइडियलिज्म,
- 2:03:49नेचुरलिज्म, साइंटिफिक कल्चर इन सबकी इन
- 2:03:51सबको क्रिटिसाइज करते हैं। ये इनर और
- 2:03:53इमीडिएट रियलाइजेशन पे फोकस करते हैं।
- 2:03:56ओके? एजुकेशन एक प्रोसेस है जो
- 2:03:58कॉन्शियसनेस डेवलप करेगा फ्रीडम। सो
- 2:04:00फ्रीडम टू चूज़ के बारे में, आपकी चॉइससेस
- 2:04:03के बारे में। तो ये कैरेक्टर फॉर्मेशन पे,
- 2:04:05सेल्फ रियलाइज़ेशन पे फोकस करेगा। चाइल्ड
- 2:04:07सेंटर्ड हैं चीजें। फुल फ्रीडम देते हैं
- 2:04:09ये बच्चे को। मैन इज़ नथिंग बट जो आप अपने
- 2:04:12आप को बनाते हो, आप वही बनते हो। चाइल्ड
- 2:04:14इज़ इंटीग्रल पार्ट ऑफ़ अल्टीमेट यूनिवर्स।
- 2:04:17बोथ पेन एंड प्लेजर जो है वो इंसान की
- 2:04:19वेल्थ है और उसी से ही आप सीखोगे तो दे आर
- 2:04:22गुड टीचर्स। ओके? कुछ एक थीम्स भी हैं
- 2:04:25एक्सिस्टेंशियलिज्म में जैसे एकिस्टेंस,
- 2:04:27इंडिविजुअलिटी, सब्जेक्टिविटी, फ्रीडम,
- 2:04:29डिसीजन ये चीजें आपको एकिस्टेंशियलिज्म
- 2:04:32में नजर आती हैं। ओके? पेरिनियलिज्म जैसे
- 2:04:35मैंने आपको कहा था कि रिलीजियस रियलिज्म
- 2:04:39वहां से जो है हम थॉमस एक्वेनस हमने पढ़ा
- 2:04:41था और मैंने आपको कहा था कि ये आगे जाके
- 2:04:43पेरिनियलिज्म की नई फिलॉसोफी बनाते हैं।
- 2:04:45सो पेरिनियल इज़ लाइक एवरलास्टिंग। सो एक
- 2:04:48पेरिनियल फ्लावर आप देखेंगे। ठीक है? दैट
- 2:04:50कम्स अप ईयर आफ्टर ईयर। यानी वो हर बार
- 2:04:52आएगा। ओके? सो पेरिनियलिज्म इज़ लाइक जो
- 2:04:55मेरे पड़दाओं ने पढ़ा वही मैं पढूं वही मेरे
- 2:04:58बच्चे पढ़ें। सो चीजें चेंज नहीं होनी
- 2:05:00चाहिए। एवरलास्टिंग होनी चाहिए। एजुकेशन
- 2:05:03की भी ये ऐसे ही बात करते हैं। ओरिजिनली
- 2:05:05ये रिलीजियस था नेचर में। इसीलिए रिलीजियस
- 2:05:07रियलिज्म से निकल के आया है। थॉमस
- 2:05:09एक्वनिस्ट जो हैं उनको फादर ऑफ़ पेरिनलिज्म
- 2:05:12बोला जाता है। ये बोलते हैं कि जो नॉलेज
- 2:05:15है वो टाइमलेस है कि नॉलेज चेंज नहीं होती
- 2:05:18है। नॉलेज जो मेरे दादाओं ने ली, मैंने
- 2:05:20ली, वही मेरे बच्चे ली। वो चीज होनी
- 2:05:22चाहिए। ओके? सब्जेक्ट सेंटर्ड फिलॉसफी पे
- 2:05:24फोकस कर रहे हैं। लर्निंग विदाउट एजुकेशन
- 2:05:27का ये आईडिया है। स्टैंड फॉर द आईडिया। इट
- 2:05:29प्रमोट्स लाइफ लॉन्ग लर्निंग। और एक
- 2:05:31एजुकेशन सिस्टम जो कांस्टेंटली इवॉल्व हो
- 2:05:34रहा हो लेकिन चीजें वैसे ही सेम हो। ओके?
- 2:05:37पैरेनलिस्ट एजुकेशन टीचर सेंटर्ड है
- 2:05:39टेक्निकली। पैरेंलिस्ट एजुकेशन जो है वो
- 2:05:41प्रोवाइड करती है चिल्ड्रन को। रेलेवेंट
- 2:05:43स्किल्स जो आज की हैं विल बी रेलेवेंट इन
- 2:05:45द फ्यूचर आल्सो। ओके? तो वो हमेशा
- 2:05:48रेलेवेंट रहने वाली चीजों की बात कर रहे
- 2:05:50हैं। ये फोकस करते हैं। एजुकेशन शुड बी द
- 2:05:52आईडिया दैट हैव लास्टेड ओवर सेंचुरीज़। तो
- 2:05:54वो एजुकेशन होनी चाहिए। सो कॉनस्टेंट
- 2:05:56करिकुलम, क्लासिकल सब्जेक्ट्स, लिटरली
- 2:05:58एनालिसिस के ऊपर फोकस करते हैं। तो
- 2:06:00स्टूडेंट्स वही सीखेंगे जो उनके ग्रैंड
- 2:06:02पेरेंट्स ने सीखा है। ओके? ये मेन-मेन नाम
- 2:06:05है जी हर्टचिन का, एडलर का, म्टेन का। सो
- 2:06:08ये एजुकेशनल लीडर्स हैं पेरिनलिज्म के
- 2:06:10फील्ड में। बट सेंट थॉमस एक्वस का आप नाम
- 2:06:13याद रखो। मार्क्सिज्म की जो फिलॉसफी है वो
- 2:06:16फोकस सोसाइटी पे करती है टेक्निकली। ठीक
- 2:06:18है? सो एजुकेशन ये व्यू एक एजुकेशन को एक
- 2:06:21टूल की तरह देखते हैं कि कैसे हम सोशल
- 2:06:23ट्रांसफॉर्मेशन इससे कर सकते हैं। ओके?
- 2:06:26कार्ल मार्क्स जो है वो फादर ऑफ़
- 2:06:28मार्क्सिज्म है। बहुत फेमस हैं।
- 2:06:30मार्क्सिज्म सिर्फ एक फिलॉसफी नहीं है। ये
- 2:06:32क्लास कॉन्फ्लिक्ट, क्लास स्ट्रगल,
- 2:06:34वायलेंट रेवोल्यूशन इन सारी चीजों को
- 2:06:36एक्सप्लेन करती है। ठीक है? तो ये
- 2:06:38ह्यूमनिज्म और फ्रीडम की फिलॉसफी है। एक
- 2:06:41तरीके से एजुकेशन को एक सोशल ग्रोथ और
- 2:06:43इकोनॉमिक प्रोडक्शन के लिए तरीका देखा
- 2:06:45जाता है कि एजुकेशन की वजह से ये चीजें हो
- 2:06:48पाएंगी। सो यहां पे दो क्लासेस आपको देखने
- 2:06:50को मिलेंगी। एक ओनर वाली क्लास और एक आपकी
- 2:06:53जो वर्किंग क्लास है वो। ठीक है? तो ओनर
- 2:06:56वाली क्लास जो है वो आगे बढ़ती हुई दिखती
- 2:06:58है सोसाइटी में। वर्किंग क्लास पीछे छूटती
- 2:07:01हुई दिखती है। तो इसलिए इन्होंने इनका ये
- 2:07:03मानना है कि वर्किंग क्लास ऊपर होनी चाहिए
- 2:07:06और सो जो गवर्नमेंट है वो अपने जो है वो
- 2:07:09चीजों को मेंटेन रखें। सो ये गवर्नमेंट
- 2:07:11इकॉनमी पे ज्यादा फोकस करते हैं। ओके? ये
- 2:07:14बेसिक टेनेट्स हैं जी मार्क्सिज्म के।
- 2:07:16डायलेक्टिकल मटेरलिज्म, हिस्टोरिकल,
- 2:07:18थ्योरी ऑफ़ सरप्लस वैल्यूज़। सो एक बार इनके
- 2:07:20बारे में थोड़ा-थोड़ा देख लेते हैं। ठीक है?
- 2:07:23तो अ मेन पॉइंट्स अगर हम देखें तो
- 2:07:25साइंटिफिक मेथोडोडोलॉजी या फिलॉसोफिकल
- 2:07:28बैकबोन है डइलेक्टिकल ये मटेरियलिज्म की।
- 2:07:32ठीक है? सो ये रियलिटी को एक मटेरियल की
- 2:07:34तरह लेके चलते हैं। रियलिटी इज़ मटेरियल और
- 2:07:37वो रेोलशंस ऑफ़ इंटरनल कंट्राडिक्शन से जो
- 2:07:40है वो प्रोग्रेस होगी उसकी। ओके? तो
- 2:07:42थीसिस, एंटीथीसिस और सिंथेसिस। तो इन तीन
- 2:07:45चीजों की बात करते हैं। आते नहीं है ये
- 2:07:47एग्जाम में। बस आपको यह वर्ड्स पता हो कि
- 2:07:50डइलेक्टिकल मटेरियलिज्म, हिस्टोरिकल
- 2:07:52मटेरियलिज्म, थ्योरी ऑफ़ सरप्लस वैल्यू,
- 2:07:54क्लास स्ट्रगल, रिवॉल्यूशन, डिक्टेटरशिप
- 2:07:57ऑफ़ प्रोलिटेरियट। सो ये सारी चीजें कहां
- 2:08:00से रिलेट कर रही हैं? मार्क्सिज्म से।
- 2:08:02यूजुअली क्या होता है कि जैसे हमने बोला
- 2:08:04क्लास स्ट्रगल। सो ये बोर्गियस हैं और
- 2:08:06प्रोलिटेरिएट हैं। प्रोलिटेरिएट यानी
- 2:08:08वर्कर्स और ये ओनर। इनके बीच में हमेशा
- 2:08:11कॉन्फ्लिक्ट चलता रहेगा। तो वो स्ट्रगल
- 2:08:13चलता रहेगा। एक कॉन्फ्लिक्ट जो चल रहा है।
- 2:08:15ओके? जो भी सरप्लस अमाउंट कमाया गया है वो
- 2:08:18प्रॉफिट की तरह कैपिटलिस्ट रख लेते हैं।
- 2:08:21वेजेस को नहीं बढ़ाते। वर्कर्स तक नहीं
- 2:08:24पहुंचने देते उसको। सो थ्योरी ऑफ़ सरप्लस
- 2:08:26वैल्यू। हिस्टोरिकल मटेरियलिज्म एप्लीकेशन
- 2:08:29है ये डइलेक्टिकल मटेरियलिज्म की। इट
- 2:08:32असर्ट्स दैट इकोनॉमिक बेस डिटरमाइंस द
- 2:08:35सुपर नेचर ऑफ़ सोसाइटी। यानी जिसके हाथ में
- 2:08:38पैसा पावर है वही सारी चीजें कंट्रोल करता
- 2:08:41है। ठीक है? रिवॉल्यूशन होगा क्योंकि
- 2:08:43वर्कर्स रिवॉल्यूशन लाएंगे क्योंकि
- 2:08:46स्ट्रगल चल रही है, कॉन्फ्लिक्ट चल रहा है
- 2:08:48तो कोई तो जीतेगा। सो ये बात करते हैं कि
- 2:08:50वो तो चलती रहेंगी चीजें और उसकी वजह से
- 2:08:52ही रिवॉल्यूशन आता है कि एक पॉइंट आएगा कि
- 2:08:55एकदम से प्रोलिटेरियट जो हैं उनकी
- 2:08:58डिक्टेटरशिप आ जाएगी और ओनर्स जो हैं वो
- 2:09:01दब जाएंगे। सो डिक्टेटरशिप ऑफ
- 2:09:03प्रोलिटेरियट यानी सोशलिस्ट स्टेट की बात
- 2:09:05हो रही है कि जो रिवॉल्यूशन चल रहा है
- 2:09:07जहां वर्किंग क्लास जो हैं वो स्टेट
- 2:09:10पावर्स को यूज करें और स्टेट ऊपर हो जाए
- 2:09:13रादर देन जो ओनर्स हैं ओके तो कैपिटलिस्ट
- 2:09:15को ये दबाना चाह रहे हैं ये जो फिलॉसफी है
- 2:09:18ओके देन कम्युनिज्म थ्योरी ऑफ़ एलिनेशन
- 2:09:21एंटोनियो ग्रमसी एंटोनियो ग्रमसी ने
- 2:09:24कल्चरल हेगिममेनी जो है वो इंट्रोड्यूस की
- 2:09:26इसका मतलब वही है कि कल्चरली डायवर्स
- 2:09:29सोसाइटी में जो डोमिनेंस है एक रूलिंग
- 2:09:32क्लास की वो आपको दिखेगी कि वो मैनपुलेट
- 2:09:35कर रहे हैं कल्चर को बिलीफ को वैल्यू
- 2:09:37सिस्टम को। सो वो चेंज करते हुए कल्चरल
- 2:09:39हेगिमनी इस कांसेप्ट को बोलते हैं जो
- 2:09:41एंटोनियो ग्रामसी ने दिया है। ठीक है?
- 2:09:43बहुत इंपॉर्टेंट है ये कि मार्क्सिज्म की
- 2:09:45फिलॉसफी को ये एक्सपेंड करता है एक तरीके
- 2:09:48से। ओके? सो ये सिर्फ समझा रहे हैं कि जो
- 2:09:51डोमिनेंस आपको देखने को मिलती है डोमिनेंस
- 2:09:54एक कल्चरली डवर्स सोसाइटी की बाय रूलिंग
- 2:09:56क्लास। सो वो मैनपुलेट करेगी फिर क्योंकि
- 2:09:59कल्चरली डवर्स हैं चीजें। बट अगर आपको
- 2:10:01रूलिंग क्लास में आना है सो आप मैनपुलेट
- 2:10:04करना चाहोगे ताकि आप ही सत्ता में बने रहो
- 2:10:06उस तरीके से। ओके? कम्युनिज्म यानी एक
- 2:10:08क्लासलेस स्टेटलेस एक्सप्लइटेशन फ्री
- 2:10:11सोसाइटी जो है वो मेन गोल है किसका?
- 2:10:13मार्क्सिज्म का। थ्योरी ऑफ़ एलिनेशन। ये है
- 2:10:17जी कॉनंसेप्ट प्राइमरली फाउंड बाय मार्क्स
- 2:10:19अर्लियर राइटिंग्स। इट डिस्क्राइब्स कि
- 2:10:21कैसे कैपिटलिज्म जो है एस्ट्रेंजेस
- 2:10:24वर्कर्स फ्रॉम द प्रोडक्ट ऑफ देयर लेबर द
- 2:10:26प्रोसेस ऑफ प्रोडक्शन देयर फेलो ह्यूमंस
- 2:10:29एंड देयर ओन क्रिएटिव पोटेंशियल सो कैसे
- 2:10:32जो है वो कैपिटलिज्म इनको दूर कर रहा है
- 2:10:35इन चीजों से ठीक है सो वो चीजें हैं ये
- 2:10:37कल्चरल हेगिमनी का कांसेप्ट एंटोनियो
- 2:10:39ग्रमसी ने दिया है ये बात याद रखिएगा
- 2:10:42रिकंस्ट्रक्शनिज्म और सोशल
- 2:10:43रिकंस्ट्रक्शनिज्म ये थोड़ी सी स्टूडेंट
- 2:10:46सेंटर्ड हैं चीजें थियोडोर आपका ब्रामल्ड
- 2:10:50ठीक है? इन इनको फाउंडर या फादर बोला जाता
- 2:10:52है सोशल रिकंस्ट्रक्शनिज्म का। मेन चीज
- 2:10:55यही है कि सोसाइटी को ट्रांसफॉर्म किया जा
- 2:10:57सकता है एजुकेशन के थ्रू। ठीक है? एजुकेशन
- 2:11:00एंपावर करेगी बच्चों को और वो चेंजिंग
- 2:11:03एजेंट जो है वो एक तरीके से बनेंगे जो
- 2:11:06चीजों को एनालाइज करेंगे क्रिटिक इंप्रूव
- 2:11:08करेंगे सोसाइटी को क्रिटिकल थिंकिंग के
- 2:11:10थ्रू। सो कहीं ना कहीं एक्टिविज़्म वाली
- 2:11:12फिलॉसफी आपको यहां नजर आएगी। सो स्टूडेंट
- 2:11:14सेंटर्ड एजुकेशनल फिलॉसोफी है जो स्कूल को
- 2:11:17कैसे देखते हैं कि वो रिफॉर्म कर सकता है
- 2:11:19सोसाइटी को वो एक्टिवली एड्रेस कर सकता है
- 2:11:22जो सोसाइटल इशूज़ और प्रॉब्लम्स चल रही
- 2:11:25हैं। ओके? सो हम सिर्फ इतना चाह रहे हैं
- 2:11:27ये थॉट जो है ये एफसाइज कर रहा है एजुकेशन
- 2:11:30को एक तरीका बना के सोसाइटी को
- 2:11:32रिकंस्ट्रक्ट करने पे। तो सोशल प्रॉब्लम
- 2:11:34अप्रोच रहेगा। सोशल प्रॉब्लम्स पे फोकस
- 2:11:37रहेगा और उसी के बेसिस पे आप करिकुलम
- 2:11:40बनाओगे। उसी के बेसिस पे आपकी सारी चीजें
- 2:11:42चलेंगी। तो करिकुलम का फोकस आपका एग्जामिन
- 2:11:45करना होगा सोशल इकोनॉमिक प्रॉब्लम्स को और
- 2:11:48आपकी जो है इक्वलिटी इक्वल ओपॉर्चुनिटीज
- 2:11:51प्रोवाइड करने पे। ठीक है? एसेंशियलिज्म
- 2:11:54भी एक वर्ड आता है जो आजकल पूछ लिया जाता
- 2:11:56है। विलियम सी बागले जो है उनको कंसीडर
- 2:11:59किया जाता है फादर ऑफ एजुकेशनल
- 2:12:00एसेंशियलिज्म। ये एक टीचर सेंटर्ड फिलॉसफी
- 2:12:03है। तो जो बिल्कुल बेसिक पहले वाली चीजें
- 2:12:05चली आ रही हैं ट्रेडिशनली वो आप
- 2:12:07एसेंशियलिज्म से कनेक्ट करके देख सकते हो।
- 2:12:09ओके? सो विलियम सी बैगले नाम याद रख लो।
- 2:12:12बैक टू बेसिक्स की ये बात करते हैं कि
- 2:12:14जैसे पहले चलता आ रहा था। ठीक है? सो
- 2:12:16एजुकेशनल एसेंशियलिज्म से एसोसिएट करते
- 2:12:19हैं ये बैक टू बेसिक्स को कि कोर करिकुलम
- 2:12:22होना चाहिए। कोर चीजें होनी चाहिए। आप एक
- 2:12:24स्किल मास्टर करने पे फोकस करो। फैक्ट्स
- 2:12:26पे कॉनंसेप्ट्स पे फोकस करो। बैक टू बेसिक
- 2:12:29मूवमेंट पे फोकस करो। एक वर्ड आता है यहां
- 2:12:31कल्चरल लिटरेसी। ये वर्ड जो है वो ईडी
- 2:12:34हर्ष ने जो है इन्होंने कॉइन किया था।
- 2:12:36इन्होंने दी थी जो एफेसाइज़ करता है कि आप
- 2:12:39जो है बेसिक रीडिंग स्किल्स जो इंक्लूड हो
- 2:12:42रही हैं टू इंक्लूड वर्ल्ड वर्ल्ड नॉलेज
- 2:12:45आप उसको कॉम्प्रिहेंड करो बिय्ड जाओ। सो
- 2:12:47ट्रू कॉम्प्रिहेंशन जो है वो बिय्ड बेसिक
- 2:12:50रीडिंग स्किल जाएगा। ठीक है? सो वो कल्चर
- 2:12:53को भी इंक्लूड करेगा चीजों को इंटरप्रेट
- 2:12:55करने के लिए। सो कल्चरल लिटरेसी यानी आप
- 2:12:58जो है स्पेसिफिक सोसाइटी को, उसके
- 2:13:00ट्रेडिशंस को, उसके कल्चर को समझो वो चीज
- 2:13:03पे फोकस कर रहे हैं। ओके? प्रोग्रेसिविज्म
- 2:13:07मैंने बता दिया था आपको ऊपर जॉन डूई के
- 2:13:08नाम आता है यहां पे और प्रोग्रेस कर रहे
- 2:13:11हो आप एक तरीके से तो जॉन डूई से रिलेट
- 2:13:13करते हैं स्टूडेंट सेंटर्ड अप्रोच होगा
- 2:13:15डेमोक्रेटिक क्लासरूम्स एक्सपीरियंशियल
- 2:13:17लर्निंग सो बेटर ही चीजें होंगी यहां पे
- 2:13:20फोकस रहेगा कि फोस्टर करो सोशल इमोशनल
- 2:13:22इंटेलेक्चुअल ग्रोथ होलिस्टिक डेवलपमेंट
- 2:13:25उन चीजों के ऊपर हम बच्चे के फोकस करेंगे
- 2:13:27ये मेन कोर डिफरेंस है एसेंशियलिज्म जो है
- 2:13:30वो अथॉरिटी टीचर एक्सपर्ट होगा बच्चे
- 2:13:32प्रोसिव रोल में होंगे अब्सॉर्ब करेंगे
- 2:13:34चीजें कोर स्किल्स और नॉलेज प्रोवाइड करने
- 2:13:36पे फोकस है। प्रोग्रेसिविज़्म में स्टूडेंट
- 2:13:39के इंटरेस्ट पे फोकस है। उनको लाइफ
- 2:13:40स्किल्स प्रोवाइड करने पे फोकस है। टीचर
- 2:13:42फैसिलिटेटर रहेगा। बच्चे जो है वो एक्टिव
- 2:13:45प्रॉब्लम सॉल्व के रोल में रहेंगे।
- 2:13:46पेरिनेलिज्म एवरलास्टिंग ग्रेट आइडियाज के
- 2:13:49ऊपर फोकस कर रहा है। एक मेंटोर रहेगा
- 2:13:52यहां। बच्चे एनालिटिकल थिंकर की भूमिका
- 2:13:54में रहेंगे। एग्ज़िस्टेंशियलिज्म
- 2:13:55इंडिविजुअल सेल्फ डेफिनेशन पे फोकस कर रहा
- 2:13:58है। टीचर एक रिसोर्स पर्सन की तरह बिहेव
- 2:14:00करेगा। बाकी बच्चे जो है वो सेल्फ
- 2:14:02डायरेक्टेड रहेंगे। उनको फुल फ्रीडम यहां
- 2:14:04पे प्रोवाइड करवाई जाएगी। ठीक है जी। ये
- 2:14:07आपकी फिलॉसफीज़ हो गई। एक और वर्ड आता है
- 2:14:09आजकल एपीफिनोमिनलिज्म।
- 2:14:12ठीक है? सो ये एक थ्योरी है जो ये बोल रही
- 2:14:14है कि जो मेंटल इवेंट्स हैं ना वो बाय
- 2:14:17प्रोडक्ट हैं। फिजिकल प्रोसेससेस इन
- 2:14:19ब्रेन। तो ये फिजिकल प्रोसेससेस पे फिजिकल
- 2:14:22एक्टिविटी पे फोकस कर रहे हैं कि फिजिकल
- 2:14:25इवेंट्स की वजह से जो है वो मेंटल
- 2:14:27एक्सपीरियंसेस हो रहे हैं। ठीक है? तो जो
- 2:14:30ब्रेन एक्टिविटी है उसकी वजह से मेंटल
- 2:14:32एक्सपीरियंस हो रहे हैं। दीज़ मेंटल
- 2:14:34एक्सपीरियंसेस फिजिकल इवेंट को अफेक्ट
- 2:14:37नहीं कर रहे हैं। सो कंफ्यूजिंग लग सकता
- 2:14:39है बट अभी तक यही पूछा जाता है सिर्फ इतना
- 2:14:41ही कि एपीफिनोमिनलिज्म में क्या रहेगा? तो
- 2:14:44एपिफिनोमिनलिज्म में माइंड जो एजर्ट करता
- 2:14:48है मेंटल इवेंट्स वो बाय प्रोडक्ट हैं।
- 2:14:50एपिफिनोमिना है फिजिकल प्रोसेससेस इन द
- 2:14:53ब्रेन। सो ये फिजिकल प्रोसेससेस के ऊपर
- 2:14:56फोकस कर रहे हैं। ठीक है? सो मेन फोकस
- 2:14:58इनका उसी के ऊपर है। बस ये ध्यान रखो। देन
- 2:15:01आता है जी हमारा थर्ड पार्ट। सी पार्ट में
- 2:15:04हम बात करेंगे जी सोशियोलॉजी ऑफ़ एजुकेशन
- 2:15:07से रिलेटेड। बेसिकली ओवरऑल सोशियोलॉजी
- 2:15:09आसपास चीजें क्या होती हैं? टेक्निकली
- 2:15:11आपको ये तो पता ही है कि फैमिली, स्कूल,
- 2:15:13सोसाइटी ये सारे इंस्टीटशंस जो हैं वो एक
- 2:15:16तरीके से सोशल एजेंट का काम करते हैं। ठीक
- 2:15:19है? तो सोशल इंस्टीटशंस भी इनको बोला जाता
- 2:15:21है। सोशल मूवमेंट्स कैसे होते हैं? थ्यरीज़
- 2:15:24जो सोशल मूवमेंट से रिलेटेड है वो
- 2:15:26इन्होंने कुछ एक पर्टिकुलर थ्यरीज़ का नाम
- 2:15:28दिया है। हम इन्हीं तक स्टिक करेंगे ताकि
- 2:15:31क्योंकि इस इस पोर्शन से जितने क्वेश्चंस
- 2:15:33आते हैं वो इसी सिलेबस से आते हैं। इससे
- 2:15:36एक्स्ट्रा बहुत ज्यादा कुछ नहीं पूछा जाता
- 2:15:38है। ओके? तो सिंबॉलिक इंटरेक्शनिज्म,
- 2:15:40स्ट्रक्चरल फंक्शनलिज्म, कॉन्फ्लिक्ट
- 2:15:42थ्योरी इन सबको डिस्कस करेंगे। सबसे पहले
- 2:15:45पता हो हमें कि जब सोशियोलॉजी की बात आती
- 2:15:47है तो फादर ऑफ सोशियोलॉजी जो है वो ऑगस्ट
- 2:15:49कॉमटे को बोला जाता है। एंड इन्होंने
- 2:15:51पॉजिटिविज्म वाला अप्रोच जो है वो डेवलप
- 2:15:54किया था। ये सारी चीजों में पॉजिटिव
- 2:15:55आस्पेक्ट रखना उसके बारे में ज्यादा बात
- 2:15:57करते हैं। तो ऑगस्ट कॉमटे क्योंकि
- 2:15:59इन्होंने ये टर्म भी दी थी स्पेसिफिकली तो
- 2:16:02फादर ऑफ़ सोशियोलॉजी जो है इनको बोला जाता
- 2:16:04है। ये बात आप ध्यान रख सकते हो। ओके?
- 2:16:07दूसरा फादर ऑफ़ एजुकेशनल सोशियोलॉजी जो है
- 2:16:10या सोशियोलॉजी ऑफ़ एजुकेशन। कई बार एमिल
- 2:16:12डरकिम को वाइडली कंसीडर किया जाता है। तो
- 2:16:15आपको वाइडली आपको एमिल डरकिम का भी नाम
- 2:16:17याद हो और ऑगस्ट कॉमटे का भी। हो सकता है
- 2:16:19आपसे फादर ऑफ एजुकेशनल सोशियोलॉजी पूछे और
- 2:16:22एमिल डरकिम वहां पे ऑप्शन में ना हो तो आप
- 2:16:24ऑगस्ट कॉमटे के साथ ही जाएंगे। ठीक है? सो
- 2:16:26ये दो चार चीजें आपको पता होनी चाहिए। देन
- 2:16:28बात आती है सिंबॉलिक इंटरेक्शनिज्म।
- 2:16:31थ्योरी किसने दी है वो आपको पता हो।
- 2:16:33फाउंडर जो है वो जॉर्ज हरबर्ट मीड हैं।
- 2:16:36लेकिन ये जो टर्म जो दी है कांसेप्ट
- 2:16:38इन्होंने दिया है मीड ने। लेकिन हरबर्ट
- 2:16:40ब्लूमर ने जो है ये टर्म जो दी थी
- 2:16:43सिंबॉलिक इंटरेक्शनिज्म नाम से ही पता चल
- 2:16:46रहा है कि ये थ्योरी ये क्लेम करती है कि
- 2:16:48जो फैक्ट्स हैं वो किस पे बेस्ड हैं बेस्ड
- 2:16:50ऑन एंड डायरेक्टेड बाय सिंबल्स। ठीक है?
- 2:16:53तो आप सोसाइटी में जब इंटरेक्ट करते हो तो
- 2:16:56सोसाइटी में कुछ एक एक दूसरे से
- 2:16:58कम्युनिकेट करने के लिए क्योंकि
- 2:17:00कम्युनिकेट करते हो तभी सोसाइटी बनती है।
- 2:17:02लेकिन उसके लिए कुछ एक सिंबल्स होते हैं।
- 2:17:04उन सिंबल्स के कुछ एस्टैब्लिश्ड मीनिंग्स
- 2:17:06होते हैं। फिर आप अपना पॉइंट ऑफ व्यू
- 2:17:08डेवलप करते हो उन चीजों से रिलेटेड। फिर
- 2:17:10आप जो हैं वो मीनिंग एस्टैब्लिश हुआ। सबने
- 2:17:13अलग-अलग पॉइंट ऑफ व्यू डेवलप किया उससे
- 2:17:15रिलेटेड। और उनको फिर कम्युनिकेशन के लिए
- 2:17:17यूज़ किया गया सोसाइटी में। ठीक है? तो
- 2:17:20इंटरेक्शन के लिए कुछ सिंबल्स यूज़ करना।
- 2:17:24ओके? तो सिंबॉलिक इंटरेक्शनिज़्म इनवॉल्व्स
- 2:17:27सेवरल की कॉनंसेप्ट जो हेल्प करते हैं टू
- 2:17:30एक्सप्लेन हाउ इंडिविजुअल्स इंटरप्रेट एंड
- 2:17:33गिव मीनिंग टू देयर सोशल वर्ल्ड। सो आप
- 2:17:35कैसे एनवायरमेंट के बेसिस पे चीजों के
- 2:17:38मतलब निकालते हो। उनका एस्टैब्लिश्ड
- 2:17:40मीनिंग बनता है। आप उनको यूज़ करना शुरू
- 2:17:42करते हो एक सोसाइटी में। सो वो सिंबॉलिक
- 2:17:45इंटरेक्शनिज़्म है। ओके? देन बात आती है जी
- 2:17:48थ्योरी ऑफ़ स्ट्रक्चरल फंक्शनलिज्म। जब भी
- 2:17:50इस फंक्शनलिज्म की बात आएगी तो दो लोगों
- 2:17:52का नाम जरूर याद रखिएगा। एक है अपने दरखिम
- 2:17:55एमिल डरकिम और दूसरा नाम है अपना टालकोट
- 2:17:58पार्सल का। ओके? सो फाउंडर बोले जाते हैं
- 2:18:00जी ये फंक्शनलिस्ट थ्योरी के एमिलडरिम। ये
- 2:18:03आइडेंटिफाई करते हैं लेटेंट रोल ऑफ़
- 2:18:06एजुकेशन कि जब आप सोशल मेन स्ट्रीम में
- 2:18:09मोरल एजुकेशन में चीजों में बात करते हो।
- 2:18:11यानी जब आप सोशलाइज करते हो लोगों से
- 2:18:13सोसाइटी में तो एजुकेशन का बहुत बड़ा रोल
- 2:18:16होता है। तो जो लेटेंट रोल है छुपा हुआ
- 2:18:18रोल है एक तरीके से उसको आइडेंटिफाई करते
- 2:18:20हैं ये। ओके? एजुकेशन सिर्फ सोशल चेंज ही
- 2:18:23नहीं लाती बल्कि सोशल चेंज जो है उससे
- 2:18:26एजुकेशनल चेंज भी आते हैं। सो ये कंप्लीट
- 2:18:29स्ट्रक्चर है एक तरीके से। ओके? एक
- 2:18:31स्ट्रक्चर के थ्रू चीजें चल रही हैं। ओके?
- 2:18:34स्टडी ऑफ़ सोशियोलॉजी एमएल धरकिम ये
- 2:18:36इन्होंने लिखी है। देन एमएल धरकिम जो
- 2:18:39उन्होंने बोला कि जो पनिशमेंट आप देते हो
- 2:18:41क्राइम के लिए उसका मेन पर्पस ही ये है कि
- 2:18:44आप सोशली चीजों को रेगुलेट कर पाओ।
- 2:18:47पनिशमेंट जो है वो एक तरीके से सोशल
- 2:18:49सॉलिडेरिटी को अपहोल्ड करती है कि जो
- 2:18:52शेयरर्ड नॉर्म्स हैं, वैल्यूज़ हैं उनको आप
- 2:18:55एक्सेप्ट करो। वो सोशली अगर नहीं किया गया
- 2:18:57तो पनिशमेंट चीजें बहुत सारी चीजें हो
- 2:18:59जाती हैं। तो पर्पस जो है पनिशमेंट फॉर
- 2:19:02क्राइम वो सोशल रेगुलेशन को रिइंफोर्स
- 2:19:04करना है। ओके? इनका ये भी कहना था कि
- 2:19:07एजुकेशन जो है इज़ द इन्फ्लुएंस
- 2:19:09एक्सरसाइज्ड बाय एडल्ट जनरेशन ऑन दोज़ दैट
- 2:19:13आर नॉट येट रेडी फॉर सोशल लाइफ। सो ये
- 2:19:16बेसिक सी चीजें जो है वो इन्होंने बोली।
- 2:19:19ठीक है? इस डेफिनेशन से हमें ये समझ आ रहा
- 2:19:21है कि इट कंसिस्ट ऑफ एजुकेशन कंसिस्ट ऑफ
- 2:19:24मेथोडोलिकल मेथोडिकल सोशलाइजेशन ऑफ यंगर
- 2:19:27जनरेशन। तो जो एडल्ट जनरेशन सिखाती हैं
- 2:19:30सोसाइटी में बच्चों को या लोगों को कैसे
- 2:19:33रहना चाहिए तो वो सोसाइटी के तौर तरीके एक
- 2:19:36तरीके से उनको सिखाती हैं तो एक तरह
- 2:19:38एजुकेशन जो है वो काम करेगी मेथड
- 2:19:40मेथोडोलिकल मेथोडोलिकल मेथोडिकल हां मेथड
- 2:19:44है ना सो मेथोडोलिकल मैथ व्हाटएवर ठीक है
- 2:19:48कई बार जुबान पे ऐसा हो जाता है ना सो
- 2:19:50मेथोडिकल सोशलाइजेशन में हेल्प करती है ये
- 2:19:53ओके एज़ पर दिस थ्योरी ईच ऑफ़ अस कंसिस्ट ऑफ़
- 2:19:56टू बीइंग्स एक हमारा हमारा इंडिविजुअल
- 2:19:58बीइंग होता है। एक हमारा सोशल बीइंग होता
- 2:20:00है। ठीक है? एक हमारे इंडिविजुअल पॉइंट ऑफ
- 2:20:02व्यूज और चीजें हो सकती हैं। दूसरा जो
- 2:20:04सोसाइटी के हैं और हम सोसाइटी के सामने
- 2:20:07वैसे ही चीजों को पर्स्यू करते हैं। हो
- 2:20:09सकता है वो हमारी पर्सनालिटी का पार्ट ना
- 2:20:11हो। बट चकि हम एक रिलीजियस बिलीफ का पार्ट
- 2:20:14हैं। मोरल बिलीफ हमारे हैं। उनके बेसिस पे
- 2:20:17कुछ एक सर्टेन नॉर्म्स होंगे तो वो हम
- 2:20:20फॉलो करते हैं एज अ ग्रुप रादर देन चाहे
- 2:20:23वो हमारी पर्सनालिटी हो ना हो। तो वो सोशल
- 2:20:25बीइंग हो जाएगा। ठीक है जी। एमएल डरकिम के
- 2:20:28और भी बहुत सारे काम है। तो बट आपको काम
- 2:20:30का आईडिया होगा बस कि अच्छा ये थ्योरी ऑफ़
- 2:20:31सुसाइड, थ्योरी ऑफ़ सोशल फैक्ट, थ्योरी ऑफ़
- 2:20:34डिवीज़ ऑफ़ लेबर, थ्योरी ऑफ़ सोशल सॉलिडरिटी
- 2:20:36ये सारी थ्यरीज़ की बात एमल दरख्यम ने की
- 2:20:39है। ओके? देन बात आती है जी टैलकोट पार्सन
- 2:20:42की। टैलकोट पार्सन जो है वो सारे अप्रोचेस
- 2:20:45को रिजेक्ट कर देते हैं और अपना खुद का
- 2:20:47अप्रोच बनाते हैं। अप्रोच इन द सेंस
- 2:20:49सोसाइटी चलती कैसे है? ठीक है? तो एमल
- 2:20:52डरकिम ने तो बोला कि अच्छा इंडिविजुअल और
- 2:20:54सोशल दो दो बीइंग हैं। उस हिसाब से चीजें
- 2:20:57चलती हैं। और कैसे जो है एडल्ट जनरेशन
- 2:21:00यंगर जनरेशन को पास ऑन करती है चीजें।
- 2:21:03कैसे जो है वो ओवरऑल सोसाइटी का स्ट्रक्चर
- 2:21:05काम करता है। टालकोट पर्सन सारे अप्रोच को
- 2:21:08रिजेक्ट करते हैं। उन सारे अप्रोच में
- 2:21:10जैसे हमने बोला ऑगस्ट कॉमटी ने
- 2:21:11पॉजिटिविज़्म का अप्रोच दिया था। सो आप
- 2:21:13सारे ही पॉजिटिव आस्पेक्ट पे हो तो
- 2:21:15पॉजिटिविज़्म वाले में एरर का कोई स्कोप
- 2:21:18बचता ही नहीं है। ओके? यूटिलिटेरियन में
- 2:21:20एक्सटर्नल मोटिवेशनल फैक्टर्स पे बहुत
- 2:21:23ज्यादा स्ट्रेस है। आइडियलिस्ट में वैल्यू
- 2:21:26सिस्टम पे आइडियलिज्म पे बहुत ज्यादा
- 2:21:28स्ट्रेस्ड है। इसलिए उन्होंने अपना एक
- 2:21:30अप्रोच बनाया एक्शन अप्रोच थ्यरी। अब ये
- 2:21:33एक बेसिक अप्रोच जो है वो टलकोट पार्क
- 2:21:35पार्सन ने दिया। ओके? पार्सन ने एक और
- 2:21:38कांसेप्ट दिया जी एजीआईएल फ्रेमवर्क जिसकी
- 2:21:40फुल फॉर्म आपको पता हो एजीआईएल में। मतलब
- 2:21:43इट्स लाइक ये एनालाइज किया उन्होंने कि ये
- 2:21:46फंक्शनल रिक्वायरमेंट है किसी भी सोशल
- 2:21:48सिस्टम की। तो उसको देखते हुए उन्होंने
- 2:21:50एजीआईएल फ्रेमवर्क बनाया एजिल। तो एजिल
- 2:21:53में एडप्टेशन है, गोल अटेनमेंट है,
- 2:21:56इंटीग्रेशन है और लेटेंसी है। यानी एक
- 2:21:59पैटर्न जो है वो मेंटेन रहेगा। लेटेंट हो
- 2:22:01गई हैं चीजें। ओके? सो ये चार चीजें आपको
- 2:22:04पता हो। ये फुल फॉर्म आपको पता होनी
- 2:22:06चाहिए। ठीक है जी। देन बात आती है
- 2:22:08इकोनॉमिक थ्योरी की या इकोनॉमिक
- 2:22:10डेटरमिनिज्म की थ्योरी या कॉन्फ्लिक्ट
- 2:22:12थ्योरी। क्योंकि सोशियोलॉजी चल ही इस
- 2:22:15बेसिस पे रही है कि चीजें कॉन्फ्लिक्ट में
- 2:22:17हैं उनको रिजॉल्व करना। सोसाइटी चल कैसे
- 2:22:19रही है? आप सोचो ना। ठीक है? सोसाइटी में
- 2:22:21कुछ गोल्स आपको दे रखे हैं ना। जैसे हमने
- 2:22:23चार गोल्स की तो ऊपर ही बात की थी कि भ
- 2:22:25आपका जो है वो धर्म है। फिर आपके जो है
- 2:22:29अर्थ है, काम है फिर आपको मोक्ष मिलेगा।
- 2:22:32सो वो तो बहुत ब्रॉड है। उसके अलावा भी तो
- 2:22:34चीजें हैं ना छोटी-छोटी जिसकी वजह से
- 2:22:36सोसाइटी चल रही है। सो उनमें एक सेंट्रल
- 2:22:38फीचर्स जो है वो आपको प्रोसेस ऑफ
- 2:22:41इंटरेक्शन जिसको हम एक कॉन्फ्लिक्ट की तरह
- 2:22:43देखते हैं कि जब आप इंटरेक्ट करते हो
- 2:22:45चीजें तो सोशियोलॉजी एनालाइज करती है कि
- 2:22:48चीजें कॉन्फ्लिक्ट में हैं। ठीक है? सो
- 2:22:50कॉन्फ्लिक्ट थ्योरी अस्यूम करके चलती है
- 2:22:53कि सारी की सारी सोसाइटीज़ में चाहे पावर
- 2:22:55डिवीज़न बेसिस पे हो, चाहे रिसोर्स की
- 2:22:57इनकलिटी हो। बहुत सारे ऐसे बेसिस हैं जिस
- 2:23:00बेसिस पे कॉन्फ्लिक्ट चलता ही रहता है।
- 2:23:03ओके? पावर एज अ सेंट्रल फीचर ऑफ़ सोसाइटी
- 2:23:06रादर देन थिंकिंग ऑफ़ सोसाइटी एज़ हेल्ड
- 2:23:08टुगेदर बाय कलेक्टिव एग्रीमेंट कंसर्निंग
- 2:23:11अ कोहेसिव सेट ऑफ़ कल्चरल स्टैंडर्ड्स एज
- 2:23:14फंक्शनलिस्ट टू डू। तो फंक्शनलिस्ट ये मान
- 2:23:16के चलते हैं कि कुछ कलेक्टिव एग्रीमेंट्स
- 2:23:18हैं, चीजें हैं, कल्चरल स्टैंडर्ड्स हैं
- 2:23:20जो हमें जोड़ के चल रहे हैं। तभी हम हमारी
- 2:23:23सोसाइटी फंक्शन कर रही है। लेकिन
- 2:23:25कॉन्फ्लिक्ट थ्योरी या थ्योरी ऑफ़ इकोनॉमिक
- 2:23:27डिटरमिनिज्म जो है वो फोकस कर रही है कि
- 2:23:30पावर सेंट्रल फीचर है सोसाइटी का। और जब
- 2:23:32पावर ऑब्वियसली अगर पावर सेंट्रल फीचर है
- 2:23:35तो सबके पास तो नहीं हो सकती पावर। किसी
- 2:23:37के पास होगी, किसी के पास नहीं है तो एक
- 2:23:38कॉन्फ्लिक्ट देखने को मिलेगा आपको। राइट?
- 2:23:40सो कॉन्फ्लिक्ट थ्यरीज ये अस्यूम करके
- 2:23:43चलती हैं कि सारी सोसाइटी में जो
- 2:23:45स्ट्रक्चरल पावर डिवीजन है या रिसोर्स
- 2:23:47इनकलिटीज हैं उनमें कॉन्फ्लिक्टिंग
- 2:23:49इंटरेस्ट देखने को मिलते हैं। दो या दो से
- 2:23:52ज्यादा इंडिविजुअल्स जब वो पर्स्यू कर रहे
- 2:23:54हैं इनकंपैटिबल इंटरेस्ट तब वो रिलेशनशिप
- 2:23:57में कई बार हो सकता है उनके गोल्स
- 2:23:59इनकंपैटिबल ना हो लेकिन वो होस्टाइल फील
- 2:24:02कर रहे हो एक दूसरे के लिए तो तब
- 2:24:03कॉन्फ्लिक्ट हो सकता है या व्हेन देयर इज़
- 2:24:05अ कॉन्फ्लिक्ट इन द माइंड ऑफ़ एन
- 2:24:07इंडिविजुअल। ठीक है? कि वो पूरा का पूरा
- 2:24:09वैल्यू सिस्टम ही चेंज कर दे। वो वाला एक
- 2:24:11कॉन्फ्लिक्ट हो सकता है। ठीक है? इट सी्स
- 2:24:13टू एक्सप्लेन पॉलिटिकल और इकोनॉमिक
- 2:24:15इवेंट्स इन टर्म ऑफ़ ऑनगोइंग स्ट्रगल। सो
- 2:24:18फाइनाइट रिसोर्सेज हैं। उनके ऊपर स्ट्रगल
- 2:24:20चल रहा है। तो स्ट्रगल की वजह से फिर आपको
- 2:24:22कॉन्फ्लिक्ट देखने को मिलता है। कार्ल
- 2:24:24मार्क्स ने हमने मार्क्सिज्म की थ्योरी
- 2:24:26में पढ़ा। तो उन्होंने भी दो भी दो क्लास
- 2:24:29दो सोशल क्लासेस के बीच में जो है ये
- 2:24:31कॉन्फ्लिक्ट की बात की है। जिसमें हमने
- 2:24:33वर्किंग क्लास और आपका ओनर्स की बात की
- 2:24:36थी। ओके? सो प्रोलिटेरियट और ओनर्स की जो
- 2:24:38बात की थी सो वो कॉन्फ्लिक्ट ही देखने को
- 2:24:40मिलता है। उस वजह से चीजें चल रही होती
- 2:24:42हैं। ठीक है? सो कॉन्फ्लिक्ट थ्यरी ये मान
- 2:24:44के चल रही है कि सोसाइटी बहुत सारे
- 2:24:46ग्रुप्स से बनती है। जिनके कंपटिंग
- 2:24:49इंटरेस्ट भी हैं। सोशल चेंज जो है वो कब
- 2:24:52आएगा? जब ये कमटिंग इंटरेस्ट जो ये
- 2:24:53स्ट्रगल चल रहा है ये एक तरफ थोड़ा सा
- 2:24:56सेटल होगा। ओके? तो फोकस जो है सोशियोलॉजी
- 2:24:59का एजुकेशन सोशियोलॉजी ऑफ़ एजुकेशन का वो
- 2:25:02फोकस है जी क्लास कॉन्फ्लिक्ट रेोल्यूशन
- 2:25:04पे कि कैसे इस कॉन्फ्लिक्ट को ठीक किया
- 2:25:06जाए। ओके? सो कार्ल मार्क्स का जब आप काम
- 2:25:08देखेंगे तो उसमें तो कॉन्फ्लिक्ट थ्यरी
- 2:25:10बिल्कुल ऐसे रूट्स में नजर आ रही है जो
- 2:25:12हमने ऊपर भी डिस्कस किया था। ठीक है? सो
- 2:25:14अकॉर्डिंग टू कार्ल मार्क्स सोशल
- 2:25:16कॉन्फ्लिक्ट जो है वो इकोनॉमिक इनकलिटी की
- 2:25:19वजह से क्रिएट होता है। ओके? कि आप जो है
- 2:25:22एक मींस ऑफ़ प्रोडक्शन के ऊपर सारा कंट्रोल
- 2:25:24खुद ही चाह रहे हो। वर्कर्स को कुछ नहीं
- 2:25:26दे रहे हो। तो वो इकोनॉमिक लेवल पे जो इन
- 2:25:28हमने थ्योरी ऑफ़ सरप्लस वैल्यू की भी बात
- 2:25:30की थी। तो वो सरप्लस तो सारा का सारा
- 2:25:32ओनर्स ले जा रहे हैं ना प्रॉफिट के फॉर्म
- 2:25:34में वर्कर्स को तो कुछ नहीं मिल रहा। तो
- 2:25:36वो एक इकोनॉमिक लेवल पे जो इनकलिटी है उस
- 2:25:39वजह से जो है आपकी ये कॉन्फ्लिक्ट थ्योरी
- 2:25:42निकल के आ रही है। ओके जी। सो ये ओवरऑल
- 2:25:44इकोनॉमिक डिटरमिनिज्म या फिर कॉन्फ्लिक्ट
- 2:25:47थ्योरी का क कांसेप्ट आपको पता होना
- 2:25:49चाहिए। ओके। उसके बाद सोसाइटी की अगर हम
- 2:25:52बात करें तो सोसाइटी के बहुत सारे
- 2:25:54डेफिनेशंस हैं। जैसे ये ऑटवे ने बोला
- 2:25:56एजुकेशन फॉलोस सोशल चेंज। बालवि ने बोला
- 2:25:59कि सोसाइटी एक रिलेशन अमंग पर्सनल
- 2:26:01आइडियाज। देन ये ओकबर्न की डेफिनेशन है।
- 2:26:04जब वो टेक्नोलॉजिकल चेंज की बात कर रहे
- 2:26:06हैं। इवान एलएच ने डीस्कूलिंग सोसाइटी की
- 2:26:09बात की है। तो ये डीस्कूलिंग सोसाइटी का
- 2:26:12क्वेश्चन कई बार आ जाता है। ओके? सो डी
- 2:26:14स्कूलिंग का कांसेप्ट क्या बोलता है? तो
- 2:26:16स्कूल बाय नेचर हमें पता है कि टोटल क्लेम
- 2:26:19ऑन द टाइम एंड एनर्जी ऑफ़ इट्स
- 2:26:21पार्टिसिपेंट। ओके? तो वो क्लेम करते हैं।
- 2:26:23बट इन टर्न अगर हम टीचर को कस्टोडियन,
- 2:26:26प्रीचर और थेरेपिस्ट। ठीक है? उसके उसकी
- 2:26:30फॉर्म में अगर ले रहे हैं तो ओके? दिस इन
- 2:26:32टर्न मेक्स द टीचर। तो टीचर को कैसे लेके
- 2:26:35चल रहे हैं वो बताया। ओके? सोशल चेंज जो
- 2:26:38है इज़ नॉट अ सोशल फंक्शन ऑफ़ स्कूलिंग एज़
- 2:26:41पर डी स्कूलिंग कांसेप्ट। तो सोशल चेंज
- 2:26:44इसका स्कूलिंग का काम नहीं है। ओके? सो इन
- 2:26:47ईच ऑफ दीज़ थ्री रोल्स टीचर जो है वो
- 2:26:50बेससेस हिज अथॉरिटी ऑन डिफरेंट क्लेम। तो
- 2:26:53ये टीचर के तीन रोल जो है वो डी स्कूलिंग
- 2:26:55सोसाइटी में बताए गए हैं। एक कस्टोडियन की
- 2:26:58तरह दूसरा क्योंकि कस्टोडियन में ये डी
- 2:27:00स्कूलिंग का पर्सपेक्टिव है कि जो
- 2:27:02ट्रेडिशनल स्कूलिंग है वो सर्व करती है
- 2:27:04कस्टोडियल फंक्शन। ओके? सो प्रोवाइड्स अ
- 2:27:07सुपरवाइज्ड एनवायरमेंट फॉर चिल्ड्रन
- 2:27:09व्हाइल पेरेंट्स वर्क। तो बेसिकली
- 2:27:11कस्टोडियन का काम दे रखा है। डी स्कूलिंग
- 2:27:13का कांसेप्ट ये बोल रहा है कि ट्रेडिशनल
- 2:27:16तरीके से जो स्कूलिंग चल रही है उसमें
- 2:27:18सिर्फ जब पेरेंट एब्सेंट है उसकी एब्सेंस
- 2:27:22में ही तो टीचर काम कर रहा है ना। एक
- 2:27:24तरीके से पेरेंट्स की एब्सेंस में टीचर को
- 2:27:26कस्टडी मिली हुई है उसका देखभाल करने की।
- 2:27:29सो वो कस्टोडियन वाली बात जो है वो ये
- 2:27:31लेके आते हैं कि टीचर कस्टोडियन की तरह
- 2:27:34एक्ट करता है। ठीक है? डीस्कूलिंग
- 2:27:36पर्सपेक्टिव है ये। टीचर को वो मोरलिस्ट
- 2:27:39की तरह देखते हैं कि पेरेंट्स गॉड स्टेट
- 2:27:41का सब्सीट्यूट है एक तरीके से कि वो सही
- 2:27:43और गलत बताएगा इनडॉक्टिनेट करेगा उनको
- 2:27:46समझाएगा कि क्या-क्या चीजें हैं। सो वो
- 2:27:49लोकोपेरेंटिस्ट जो है वो रहेगा यानी
- 2:27:51पेरेंट्स की एब्सेंस में पेरेंट्स का काम
- 2:27:53करना। ओके? टीचर को एक थेरेपिस्ट भी बोला
- 2:27:56गया है जी। तो वो इट फील टीचर जो है
- 2:27:58थेरेपिस्ट की तरह जब फील्स ऑथोराइज्ड कि
- 2:28:01वो पर्सनल लाइफ में भी बच्चों की झांक
- 2:28:03सकता है। ओके? सो व्हेन दिस फंक्शन इज़
- 2:28:05एक्सरसाइज्ड बाय कस्टोडियन या प्रीचर इट
- 2:28:07मींस दैट ही पर्सुएड द पीपल टू सबमिट टू अ
- 2:28:11डोमेस्टिकेशन ऑफ़ हज़ विज़न। सो क्या सही है?
- 2:28:14वो उसकी नजर में जो सही है बच्चा भी वही
- 2:28:16सही मान ले। सो वो थेरेपिस्ट, मोरलिस्ट और
- 2:28:18कस्टोडियन की तरह टीचर को देखा जा रहा है।
- 2:28:21सोशल रोल सिलेक्शन की जब बात आएगी तो ये
- 2:28:23रिकॉग्नाइज़ करते हैं कि ट्रेडिशनल
- 2:28:25स्कूलिंग जो है वो क्या रोल प्ले कर रही
- 2:28:28है? वो इंडिविजुअल को सोशलाइज करवाने में
- 2:28:30हेल्प कर रही है। उनको सोसाइ स्पेसिफिक
- 2:28:32सोसाइटल रोल्स में डालने के ऊपर फोकस कर
- 2:28:36रहे हैं जो स्कूलिंग वाला है। सो ये
- 2:28:38डीस्कूलिंग का पर्सपेक्टिव है कि वो
- 2:28:40स्कूलिंग को कैसे देखते हैं। ओके? सो
- 2:28:43क्रिटिक क्या है? जी इट चैलेंज द रिजिड
- 2:28:45नेचर ऑफ़ दीज़ रोल्स कि ऐसा नहीं होना
- 2:28:47चाहिए। डीस्कूलिंग का पर्सपेक्टिव वाली
- 2:28:49चीज़। तो ये जो बिल्कुल ट्रेडिशनल चीजें
- 2:28:51चली आ रही हैं उसके ऑोजिट जो है वो
- 2:28:53डीस्कूलिंग का पर्सपेक्टिव बोलता है। अभी
- 2:28:55तक मेजरली सिर्फ यही पूछा जाता है कि डी
- 2:28:58स्कूलिंग सोसाइटी की बात किसने की? तो डी
- 2:29:00स्कूलिंग सोसाइटी का काम इवान इलिट्ट
- 2:29:05इंस्टीटशंस हैं। सबसे मेन चीज पे हम बात
- 2:29:07करेंगे फैमिली पे। ओके? सो फैमिली, स्कूल
- 2:29:09और सोसाइटी हमें सोसाइटी का ऑलरेडी पता
- 2:29:12है। स्कूल को हम मिनिएचर सोसाइटी बोल के
- 2:29:14चलते हैं। फैमिली में कई बार कुछ चीजें
- 2:29:16पूछ ली जाती हैं। अभी तक नहीं पूछी गई हैं
- 2:29:18बट पूछी जा सकती हैं। ओके? सो ओवरऑल अगर
- 2:29:20हम इंस्टीट्यूशन को देखें तो इंस्टीट्यूशन
- 2:29:22जो है वो सोशल है नेचर में क्योंकि
- 2:29:24कलेक्टिव एक्टिविटीज जो है वो लोगों की हो
- 2:29:26रही हैं। ओके? देन क्योंकि वो ओरल या रिटन
- 2:29:29कैसे भी ट्रेडिशंस हो बट उस हिसाब से
- 2:29:31कलेक्टिव एक्टिविटीज हो रही हैं। तो वो
- 2:29:33इंस्टीट्यूशन हो गया। ओके? बेसिक
- 2:29:35इंस्टीट्यूशन है, फैमिली है, रिलजन है,
- 2:29:37इकोनमी है, पॉलिटिकल इंस्टीटशंस जो हैं वो
- 2:29:39सारी सोसाइटी में एग्ज़िस्ट करते हैं। सारे
- 2:29:41इंटररिलेटेड हैं। ओके? एक स्टैंड सर्टेन
- 2:29:44स्टैंडर्डाइज प्रोसीजर्स होते हैं टू
- 2:29:46प्रिस्राइब द वे ऑफ़ डूइंग कि कैसे आप
- 2:29:48करोगे? तो वो चीजों को ऑर्डरली मैनर में
- 2:29:50चलाने के लिए ये इंस्टीटशंस काम करते हैं।
- 2:29:53ओके? उनके अपने सिंबल्स होते हैं। जैसे
- 2:29:55मैरिज रिंग या मंगलसूत्र हो गया, स्टार,
- 2:29:57मून, स्वास्तिक तो सबके अपने सिंबल्स कुछ
- 2:30:00इंस्टीटशंस लेके चलते हैं। ठीक है? सो
- 2:30:02नॉर्मली आप देखेंगे कि इंस्टीटशंस में सडन
- 2:30:05या रैपिड चेंज आपको देखने को नहीं मिलते।
- 2:30:07जब सरकमस्ट्ससेस डिमांड करते हैं तभी
- 2:30:10चेंजज़ आपको देखने को मिलते हैं और
- 2:30:11इंस्टीटशंस जो है वो रिलेटिवली परमानेंट
- 2:30:14ही कंसीडर किए जाते हैं। ओके? सो
- 2:30:16इंस्टीटशंस जो हैं वो सोशल ऑर्डर को
- 2:30:19प्रिजर्व करना, मेंटेन करना, उन चीजों को
- 2:30:21कंट्रोल करने में काम करते हैं। ओके?
- 2:30:23फंक्शनंस क्या हैं भाई सोशल इंस्टीटशंस
- 2:30:25के? तो ये सिग्निफिकेंट रोल प्ले करते हैं
- 2:30:28बेसिक नीड्स एक इंडिविजुअल की पूरा करने
- 2:30:30के लिए। ठीक है? सो ये रोल असाइन करते
- 2:30:33हैं, स्टेटस असाइन करते हैं इंडिविजुअल
- 2:30:35को। ये रिलेशनशिप रेगुलेट करते हैं।
- 2:30:38कभी-कभी हार्मफुल भी हो जाते हैं ये
- 2:30:40इंस्टीटश सिंस इंस्टीटशंस डोंट अंडरगो
- 2:30:43चेंज ईजीली एंड क्विकली तो वो ग्रोथ को भी
- 2:30:45हैंपर करते हैं। ठीक है? तो यह कई बार
- 2:30:48हार्मफुल भी हो सकते हैं। फैमिली की जब
- 2:30:50बात आएगी तो मैकाइवर ने फैमिली को एक
- 2:30:52ग्रुप की तरह डिफाइन किया बाय अ सेक्स
- 2:30:55रिलेशनशिप सफिशिएंटली प्रिसाइज़ एंड
- 2:30:58एंड्यूरिंग टू प्रोवाइड फॉर द प्रोक्रिएशन
- 2:31:01एंड अपब्रिंगिंग ऑफ़ चिल्ड्रन। सो ये
- 2:31:04फैमिली को एक ग्रुप की तरह देखते हैं और
- 2:31:05वो फैमिली जो है वो सेक्स रिलेशनशिप्स के
- 2:31:08थ्रू बनी हुई है। ओके? नेचर क्या है
- 2:31:10फैमिली का? यूनिवर्सल है नेचर में हर जगह
- 2:31:13होती है। सेंट्रल पोजीशन है सोसाइटी में।
- 2:31:15ठीक है? हमारे इंपल्ससेस ऑफ मीटिंग,
- 2:31:17प्रोक्रिएशन उन चीजों के ऊपर बेस्ड होती
- 2:31:20है। ठीक है? फैमिली स्मालेस्ट सोशल यूनिट
- 2:31:22है। एक तरीके से ये चीज पूछी जा सकती है।
- 2:31:24फैमिली एक्सरसाइज करती है मोस्ट फॉर्मेटिव
- 2:31:26इन्फ्लुएंस ओवर इट्स मेंबर्स। ठीक है? तो
- 2:31:28वो उनकी पर्सनालिटी को चीजों को शेप
- 2:31:30करेगी। बिकॉज़ फैमिली ही तो फर्स्ट स्कूल
- 2:31:32होती है एक तरीके से। राइट? सो फैमिली जो
- 2:31:35है वो न्यूक्लियस पोजीशन जो है उसने सोशल
- 2:31:37स्ट्रक्चर में ले ली है। तो सारा का सारा
- 2:31:39सोशल स्ट्रक्चर ही एक फैमिली यूनिट पे बना
- 2:31:42हुआ है। वो बेस है सोशल स्ट्रक्चर का।
- 2:31:45ओके? मेंबर्स जो हैं फैमिली के उनकी कुछ
- 2:31:47रिस्पांसिबिलिटीज़, कुछ ड्यूटीज़, कुछ
- 2:31:49ऑब्लिगेशंस होती हैं। अगर वह चलते रहेंगे
- 2:31:51तो कोऑर्डिनेशन अच्छा रहेगा। स्मूथ
- 2:31:53फंक्शनिंग चलती रहेगी। फैमिली जो है
- 2:31:55पिकुलियरली गाइडेड बाय सोशल कस्टम्स और
- 2:31:58कुछ लीगल रेगुलेशंस के थ्रू चीजें बनी हुई
- 2:32:01हैं कि आप जोड़ के रखते हो चीजों को। ठीक
- 2:32:03है? तो वो एक होता है ना कि सेफगार्ड की
- 2:32:05तरह बन रखा है। फैमिली जो है परमानेंट है
- 2:32:07नेचर में। फैमिली एक इंस्टीट्यूशन की तरह
- 2:32:09परमानेंट और यूनिवर्सल मानी जाती है। ओके?
- 2:32:12ये अलग-अलग लोगों ने अलग-अलग फंक्शनंस
- 2:32:15बताए हैं फैमिली के। ओके? तो ये फंक्शनंस
- 2:32:17हैं जी फैमिली के। जैसे किंसले डेविस जो
- 2:32:19है ये चार फंक्शन बताते हैं। कभी भी कोई
- 2:32:22भी फंक्शन पूछा जा सकता है रैंडमली। ओके?
- 2:32:24रिप्रोडक्शन, मेंटेनेंस, प्लेसमेंट,
- 2:32:26सोशलाइजेशन। ओगबर्न और निमकोफ जो है वो छह
- 2:32:29मेजर फंक्शनंस बताते हैं। अफेक्शनल,
- 2:32:31इकोनॉमिक, रिकक्रिएट करना, प्रो
- 2:32:33प्रोटेक्टिव, रिलीजियस और एजुकेशनल। ये छह
- 2:32:36फंक्शन हैं। मैकाइवर जो है वो दो ये पूछा
- 2:32:39जा सकता है कभी भी कि मैकाइवर जो है वो दो
- 2:32:42कैटेगरीज़ में क्लासिफाई कर रहे हैं।
- 2:32:43फंक्शनंस ऑफ़ फैमिली, एक एसेंशियल फंक्शन,
- 2:32:45एक नॉन एसेंशियल। एसेंशियल में बहुत जरूरी
- 2:32:48वाले हैं। जैसे स्टेबल सेटिस्फैक्शन ऑफ़
- 2:32:50सेक्स नीड्स, प्रोडक्शन एंड रियरिंग ऑफ़
- 2:32:53चिल्ड्रन और प्रोविज़न ऑफ़ होम। ओके? नॉन
- 2:32:55एसेंशियल में फिर वो बाकी सारी चीजें आ
- 2:32:57गई। रिलीजियस, एजुकेशन, इकोनॉमिक, हेल्थ
- 2:32:59और रिकक्रिएशन। ओके? तो आपको एसेंशियल,
- 2:33:02नॉन एसेंशियल का मतलब पता होना चाहिए। ठीक
- 2:33:04है? देन ये फॉर्म्स ऑफ फैमिली है अलग-अलग
- 2:33:07तरीके से अलग-अलग वे में जैसे जैसे यहां
- 2:33:10पे नेचर ऑफ रिलेशनशिप के बेसिस पे है
- 2:33:12कजुगल और कॉनसेंगुंट फैमिलीज़ ओके सो कजुगल
- 2:33:16फैमिली जो है वो मैरिज बेस्ड है और
- 2:33:18कॉनसेंगुंट फैमिली इज़ फॉर्म्ड थ्रू ब्लड
- 2:33:20रिलेशंस। सो पीपल हु आर मैरिड हैव टू
- 2:33:24फैमिलीज़ वन फैमिली जो ओरिएंटेशन है देन द
- 2:33:27एक फैमिली जिसमें वो बड़े पले बड़े हैं और
- 2:33:29चीजें हुई हैं जिसमें पेरेंट्स हैं। ओके?
- 2:33:31सो द अदर वन इज़ द फैमिली ऑफ़ प्रोक्रिएशन
- 2:33:34और द फैमिली दैट वन एस्टैब्लिश थ्रू
- 2:33:37मैरिजेस कंसिस्टिंग वनसेल्फ एंड वन स्पाउस
- 2:33:40और उनके बच्चे। सो वो जो आप मैरिज के थ्रू
- 2:33:42बना रहे हो वो कंजुगेल है। जो पहले आपकी
- 2:33:45फैमिली थी वो आपकी कनसेंगुन हो गई। ओके?
- 2:33:47ऐसे ही जॉइंट फैमिली, न्यूक्लियर फैमिली
- 2:33:49एक्सटेंडेड फैमिली होता है। ऐसे ही
- 2:33:50पेट्रिलिनियल मैट्रिलिनियल चीजें होती
- 2:33:53हैं। पेट्रिलिनियल में प्रॉपर्टी जो है
- 2:33:55मेल मेंबर्स को इन्हहेरिट हो रही है और
- 2:33:57मैट्रिलिनियल में फीमेल मेंबर्स को
- 2:33:59इन्हहेरिट हो रही है। मेजरली हमने
- 2:34:01पेट्रिलिनियल सोसाइटी देखी। मैट्रिलिनियल
- 2:34:03भी होती है नॉर्थ ईस्ट साइड पे। ओके?
- 2:34:05अथॉरिटी के बेसिस पे भी होता है।
- 2:34:06पेट्रियाकल जॉइंट फैमिली, मैट्रियाकल और
- 2:34:08एग्लिटेरियन। पेट्रियाकल में मेल काउंटर
- 2:34:11पार्ट डिसीजन ले रहा है। मैट्रियाकल में
- 2:34:13फीमेल और एगिटेरियन में दोनों इक्वल इक्वल
- 2:34:16डिसीजंस शेयर कर रही हैं। अथॉरिटी दोनों
- 2:34:18की है। ओके? फैमिली को रेजिडेंस बेसिस पे
- 2:34:21आप कहां रह रहे हो? जैसे पैट्रीकल। ठीक
- 2:34:23है? जैसे अभी जो हमारी सोसाइटी चल रही है
- 2:34:25वो पेट्रीकल है कि फीमेल काउंटर पार्ट मेल
- 2:34:28काउंटर पार्ट के घर पे जाके उनके साथ रह
- 2:34:30रही है। मैट्रलोकल में रहेगा कि हस्बैंड
- 2:34:32जिसको हम घर जमाई बोल देते हैं। वो अब
- 2:34:34वाइफ के पास आके रहे। सारे बच्चे वहीं
- 2:34:36रहेंगे। मम्मी के पास चीजें वो रहेंगी।
- 2:34:38नियो लोककल जब मैरिड कपल दोनों ही
- 2:34:41पेरेंट्स से दूर आगे-आगे सोसाइटी नियोकल
- 2:34:44हो रही है कि भ मैं जब अपना घर छोड़ के आ
- 2:34:46रही हूं तुम भी आओ तो दोनों एक घर छोड़ के
- 2:34:48एक अलग घर बना रहे हैं। ओके? तो जब मैरिड
- 2:34:50कपल्स दोनों में से किसी भी फैमिली या
- 2:34:52कम्युनिटी के साथ नहीं रह रहे हैं। अपने
- 2:34:54वर्क प्लेस पे या काम पे जहां पे भी हो वो
- 2:34:57अलग रह रहे हैं। दैट इज नियोकल। ओके?
- 2:34:59एवेंकुलेट ये थोड़ा सा डिफरेंट लगा मुझे जब
- 2:35:02मैरिड कपल से एक्सपेक्ट किया जाए कि वो
- 2:35:04मदर्स ब्रदर यानी मामा के पास जाके आप रह
- 2:35:07रहे हो। सो वो एक अंकल नेफ्यू लिंक जो है
- 2:35:10वो एक एसोसिएटेड न्यूक्लियर फैमिलीज़ को
- 2:35:13कनेक्ट कर रहा है ताकि एक सिंगल डोमेस्टिक
- 2:35:15ग्रुप बना रहे। इट वाज़ डिफरेंट फॉर मी
- 2:35:17आल्सो। ये चीज़ मुझे भी नहीं आईडिया थी।
- 2:35:19मुझे नहीं पता था। ठीक है जी। देन इवन
- 2:35:21इलिजच की हमने बात की थी ऊपर। तो इलिजच के
- 2:35:23व्यू मेडिकल एस्टैब्लिशमेंट पे भी हैं।
- 2:35:26जी। उन्होंने मेडिकल नेमिसिस द
- 2:35:28एक्सक्रोप्रिएशन ऑफ हेल्थ ये उन्होंने ये
- 2:35:32भी इनकी इक्वली रेडिकल जो है वो हमें
- 2:35:34देखने को मिलती है एंड बस आप इसका नाम
- 2:35:36ध्यान रख लो दैट विल बी मोर दैन इनफ ओके
- 2:35:39सो इन्होंने ये बोला इन्होंने एक होप यहां
- 2:35:42से मिलती है इनकी इस आईडिया से कि सारी की
- 2:35:45सारी सफरिंग्स जो है आप उनको अवॉइड कर
- 2:35:47सकते हो सब कुछ आपके दिमाग में ही होता है
- 2:35:49वाली चीज ओके देन है
- 2:35:54सफरिंग्स ठीक बोला ना मैंने
- 2:35:56हम ठीक है ओके देन है इवान इलिच जो है वो
- 2:36:01हाई इन डिमांड थे एज अ लेक्चरर टीचर
- 2:36:03पॉपुलर काफी थे वो ट्रू टू हिज कन्वेक्शंस
- 2:36:06ला हां ये यही चीज मैं ढूंढ रही थी ये
- 2:36:09वाली कि वो उनकी डेथ कैसे हुई थी ठीक है
- 2:36:11तो उन्होंने मेडिकल ट्रीटमेंट जो है वो
- 2:36:12रिफ्यूज कर दिया था ट्यूमर के लिए और
- 2:36:14अल्टीमेटली उनकी डेथ हो गई थी। सो ये
- 2:36:16मेडिकल नेमिसिस तो ये जो ये पैथोलॉजी वाला
- 2:36:19आईडिया है उसको ज्यादा कंसीडर करते नहीं
- 2:36:22थे। ओके प्राइमरी प्रोपोनेंट जो है सिस्टम
- 2:36:25थ्योरी के कई बार सिस्टम वर्ड आ जाता है
- 2:36:26तो सिस्टम थ्योरी के जो है वो लुडविक वन
- 2:36:29और ब्लैंफी हैं सही बोला ना हां ब्लैनफी
- 2:36:33बायोलॉजिस्ट हैं ये जिन्होंने इस थ्योरी
- 2:36:35को दिया सिस्टम्स थ्योरी ठीक है
- 2:36:37प्रोपोनेंट जो है सिस्टम थ्योरी के वो
- 2:36:39आपका नाम याद रख लो क्योंकि ये पूछ ली
- 2:36:41जाती है रैंडमली कि किसने दिया ओके डिटेल
- 2:36:44में जाने की जरूरत नहीं है ये क्रोनोलॉजी
- 2:36:45है जी अपने सोशियोलॉजिस्ट की कि
- 2:36:47कॉन्फ्लिक्ट थ्योरी की बात आएगी तो
- 2:36:49मार्क्स है फंक्शनलिज्म की बात आएगी तो
- 2:36:50दरखिम टालकोट पार पार्सन भी आप साथ में
- 2:36:52लिख सकते हो। कॉन्फ्लिक्ट थ्यरिस्ट जो हैं
- 2:36:55ये भी वेबर भी कॉन्फ्लिक्ट थ्यरिस्ट हैं।
- 2:36:57सिंबॉलिक इंटरेक्शनिज़्म में मीड और
- 2:36:59हर्बर्ट ब्लूमर की बात होती है। और ओपन
- 2:37:01सिस्टम थ्यरी जो है उसमें बर्ट लफी की बात
- 2:37:03होती है। ओके? देन बात आती है सोशल
- 2:37:06मूवमेंट थ्यरीज़ की। यानी सोशल मूवमेंट
- 2:37:08सोसाइटी के लेवल पे चीजें बहुत बड़े लेवल
- 2:37:11पे मूव हुई। क्यों हुई? कोई तो रीज़न रहा
- 2:37:13होगा रिलेटिव डेप्रिवेशन कि जब आप
- 2:37:15रिलेटिवली किसी से कंपेयर करके
- 2:37:17डिप्र्राइव्ड फील करो कि हाय मेरे पास ये
- 2:37:19नहीं है। ठीक है? उस वजह से तो जो
- 2:37:22एब्सोल्यूट डेप्रिवेशन है वो बहुत
- 2:37:24पोटेंशियली लाइफ थ्रेटनिंग सिचुएशन होती
- 2:37:26है। ठीक है? बट रिलेटिव डेप्रिवेशन जो है
- 2:37:28वो लैक ऑफ रिसोर्सेज की वजह से आप फील
- 2:37:30करते हो। ये एक रीज़न हो सकता है जिसकी वजह
- 2:37:34से सोशल मूवमेंट देखने को मिले। ओके?
- 2:37:36रिसोर्स मोबिलाइजेशन थ्योरी ये एक्सप्लेन
- 2:37:38करती है कि कैसे सोशल मूवमेंट्स बनते हैं
- 2:37:41जब आप रिसोर्सेज जो अवेलेबल हैं कुछ
- 2:37:44पर्टिकुलर ग्रुप्स के लिए वो चीजों पे
- 2:37:46फोकस कर रहे हो। सो इट व्यू सोशल मूवमेंट
- 2:37:48एज रैशन गोल ओरिएंटेड ऑर्गेनाइजेशंस दैट
- 2:37:52नीड टुगेदर द रिसोर्सेज ताकि वो अपने
- 2:37:54गोल्स अचीव कर पाएं। तो ये रिसोर्सेज जो
- 2:37:56है वो टेंजिबल या इनटेंजिबल दोनों हो सकते
- 2:37:59हैं। यहां से आपको ये समझ आ रहा है कि आप
- 2:38:00टेंजिबल और इनटेंजिबल रिसोर्सेज आपको मतलब
- 2:38:02पता होना चाहिए। ठीक है? जैसे नेटवर्क है
- 2:38:05या कल्चरल कमिटमेंट्स हैं तो वो इनटेंजिबल
- 2:38:07है बट मनी है, अदर फैसिलिटीज़ हैं जो
- 2:38:09फिजिकल लेवल पे हैं वो टेंजिबल रहेंगे।
- 2:38:11ओके? न्यू सोशल मूवमेंट थ्योरी जो किसी
- 2:38:14रैंडम नई चीज की वजह से कि जैसे एलपीजी
- 2:38:17रिफॉर्म्स हुए थे तो लिबरलाइजेशन,
- 2:38:19प्राइवेटाइजेशन, ग्लोबलाइजेशन इसकी वजह से
- 2:38:21जो चेंजेस एक आउटकम की तरह देखने को मिले
- 2:38:24वो न्यू सोशल मूवमेंट थ्योरी के अंडर आ
- 2:38:26जाते हैं। ओके? एक पीपीएम भी होती है जी
- 2:38:29पॉलिटिकल प्रोसेस थ्योरी जो आपके सिलेबस
- 2:38:31में है। ठीक है? कैसे चीजें प्रोसेस करती
- 2:38:33हैं। ओके? सो ये आर्ग्यू करते हैं कि सोशल
- 2:38:36मूवमेंट जो हैं वो एमर्ज होते हैं, सक्सीड
- 2:38:39होते हैं। किस बेसिस पे? कि उनको कितनी
- 2:38:41पॉलिटिकल अपॉर्चुनिटी मिली है, कितना
- 2:38:43मोबिलाइजेशन ऑफ रिसोर्सेज हो पाया है और
- 2:38:46कितना इफेक्टिव फ्रेमिंग हो पाई है
- 2:38:48इनजस्टिस की जो भेदभाव हो रहा था उसकी।
- 2:38:51ओके? रादर देन जस्ट शेयरर्ड ग्रेवेंसेस।
- 2:38:53बिकॉज़ कई बार जब हम ग्रुप की बात करते हैं
- 2:38:55और वो ग्रुप मिलके एक मूवमेंट क्रिएट करता
- 2:38:58है तो वो ग्रुप में हम मेन चीज बात करते
- 2:39:00हैं कि उनकी शेयरर्ड दिक्कतें हैं। सबकी
- 2:39:03सेम कॉमन प्रॉब्लम है। बट उस कॉमन
- 2:39:05प्रॉब्लम के अलावा भी आपको कई चीजें चाहिए
- 2:39:08होती हैं जिसमें मेन चीजें पॉलिटिकल
- 2:39:09अपॉर्चुनिटी कितनी है उस टाइम के लिए।
- 2:39:12मोबिलाइजेशन ऑफ रिसोर्सेज कितना है और
- 2:39:14इफेक्टिवली आप इनजस्टिस को फ्रेम कर पाए
- 2:39:16हो या नहीं कर पाए हो। ठीक है जी। सो
- 2:39:19पॉलिटिकल प्रोसेस थ्यरी इसको पॉलिटिकल
- 2:39:21अपॉर्चुनिटी थ्यरी भी बोला जाता है। डगल
- 2:39:23ये डगल्स डगल्स मैगडम ने दी है ये
- 2:39:27पॉलिटिकल प्रोसेस मॉडल इन्होंने ये वर्ड
- 2:39:29यूज़ किया 1982 में अपनी बुक में। ठीक है?
- 2:39:32सो ये उस टाइम पे भी इन्होंने यही मेन चीज
- 2:39:35बोली कि तीन चीजें ज्यादा जरूरी हैं। एक
- 2:39:37पॉलिटिकल अपॉर्चुनिटी उस चीज को सक्सीड
- 2:39:40करने के लिए। एक रिसोर्स मोबिलाइजेशन और
- 2:39:43दूसरा आपका फ्रेमिंग प्रोसेससेस जो हमने
- 2:39:45ऊपर अभी बात की। उसके अलावा तीन वाइटल
- 2:39:47कॉमोनेंट्स ये बोलते हैं जैसे इंसर्जेंट
- 2:39:50कॉन्शियसनेस यानी आप सारे किस वजह से
- 2:39:52इकट्ठा हो रहे हो। ओके? तो एक कलेक्टिव
- 2:39:55साइकोलॉजिकल पॉलिटिकल अवेकनिंग उनकी कि
- 2:39:58जहां पे जो मार्जिनलाइज्ड ग्रुप है वो
- 2:39:59रिकॉग्नाइज करें कि वो कैसे मिसट्रीट किए
- 2:40:02जा रहे हैं। क्या इनजस्टिस है? क्या चीजें
- 2:40:04हैं? सो वो चीजें आए। देन ऑर्गेनाइजेशन की
- 2:40:07स्ट्रेंथ कितनी है? कि कितने लोग मिलके
- 2:40:09मूवमेंट करना चाह रहे हैं। 30 लोगों से तो
- 2:40:11नहीं होगा ना। बड़े मास लेवल पे होनी
- 2:40:13चाहिए ना चीजें। प्लस उसी के साथ-साथ उस
- 2:40:16माहौल में पॉलिटिकल अपॉर्चुनिटी कितनी है।
- 2:40:18सो ये पॉलिटिकल प्रोसेस थ्यरी है जी कि
- 2:40:21कैसे चेंज आ सकता है। ओके सो ये ओवरऑल
- 2:40:24आपको पता होना चाहिए। देन कल्चर की कुछ एक
- 2:40:27कैरेक्टरिस्टिक होते हैं। कल्चर सोशल होता
- 2:40:28है। शेयरर्ड होता है। आप सीखते हो कल्चर
- 2:40:30को। जन्म से लेके नहीं पैदा हो रहे हो।
- 2:40:32डायनेमिक होता है। ट्रांसमिसिव होता है।
- 2:40:34ट्रांसफर कर सकते हो। ग्रेटिफाइंग होता
- 2:40:37है। सोसाइटी टू सोसाइटी वेरीरी करता है
- 2:40:39कल्चर। कंटीन्यूअस और क्यूमुलेटिव कल्चर
- 2:40:42आपको देखने को मिलता है। लिंटन जो है
- 2:40:45सोशियोलॉजिस्ट हैं वो कल्चर को कल्चर द
- 2:40:47सोशल हेरिटेज ऑफ़ मैन। ये बात लिंटन ने
- 2:40:50बोली है और ये ये इनका वर्क है जो आपको
- 2:40:53ध्यान रखना है। ओके जी। देन इन्फ्लुएंस ऑफ़
- 2:40:56कल्चर ऑन एजुकेशन। एजुकेशन पे क्या फर्क
- 2:40:58पड़ रहा है कल्चर का? सो कल्चर की वजह से
- 2:41:00ही आपके एम्स और आइडियाज वैसे ही डिसाइड
- 2:41:02होंगे। आपका करिकुलम वैसा बनेगा। आपकी
- 2:41:04टेक्स्ट बुक में वो चीजें दिखेंगी।
- 2:41:06क्योंकि सोसाइटी से ही तो रिफ्लेक्ट बैक
- 2:41:08कर रहे हो ना सारी चीजें। तो वो सारी
- 2:41:10चीजें आपके एजुकेशन सिस्टम में दिखेंगी।
- 2:41:12उल्टा भी पॉसिबल है क्योंकि एजुकेशन के
- 2:41:15थ्रू आप क्या कर रहे हो? ट्रांसमिट कर रहे
- 2:41:17हो। कल्चर को प्रिजर्व करके रख रहे हो।
- 2:41:19कंटिन्यूटी मेंटेन रख रहे हो। कोई कल्चर
- 2:41:21लैग है तो वो रिमूव हो रहा है और कल्चर
- 2:41:23डवप हो रहा है। तो ये सारी चीजें कल्चर का
- 2:41:26एजुकेशन पे एजुकेशन का कल्चर पे बहुत बड़ा
- 2:41:29रोल जो है वो रहता है। ओके? देन है जी
- 2:41:32हमारा लास्ट पार्ट लास्ट इस यूनिट का डी
- 2:41:35पार्ट। ठीक है? जिसमें हम मेजरली बात
- 2:41:37करेंगे किसकी? कि ये एजुकेशन और कल्चर
- 2:41:39मैंने ऊपर ही डाल दिया था। ठीक है?
- 2:41:40सोशलाइजेशन एंड एजुकेशन जो एजुकेशन और
- 2:41:42कल्चर था। सो ये आपका इस स्लाइड में आ गया
- 2:41:45है। जी। ओके? सो कंट्रीब्यूशन ऑफ़ थिंकर्स
- 2:41:47की हम बात करेंगे। मेनली जो थिंकर्स दे
- 2:41:49रखी हैं उनको तो डिस्कस करेंगे ही। कोई एक
- 2:41:52आधा और भी करेंगे एक्स्ट्रा में ही। एंड
- 2:41:53देन नेशनल वैल्यूज़ जो एंशुंड है इंडियन
- 2:41:56कॉन्स्टिट्यूशन में जो बेसिक चीजें आपको
- 2:41:58पता होनी चाहिए जहां से क्वेश्चंस आते हैं
- 2:42:00उनको डिस्कस करेंगे। ओके? सो ये भी मैं
- 2:42:02बहुत क्रिस्प रख रही हूं। जितनी
- 2:42:04इंफॉर्मेशन मैंने प्रोवाइड की है उसके
- 2:42:06अलावा अगर एक आधी कोई इंफॉर्मेशन होगी भी
- 2:42:08तो वो आपके पीवाईक्यूस के थ्रू कवर हो
- 2:42:10जाएगी। ओके? सो ये मिनिमम मैक्सिमम यही
- 2:42:12है। इतना कर लो बहुत रहेगा। स्वामी
- 2:42:15क्योंकि बहुत सारी चीजें समझने की बहुत
- 2:42:16सारी चीजें याद करने की हो जाती है। और ये
- 2:42:18तो एक ही यूनिट है। बहुत सारी यूनिट अभी
- 2:42:20करनी है हमने। ओके? सो स्वामी विवेकानंद
- 2:42:22की बात करते हैं। जी नेशनल यूथ डे उनके
- 2:42:25बर्थडे वाले दिन मनाया जाता है। ये
- 2:42:27एजुकेशन को मैन मेकिंग, लाइफ गिविंग और
- 2:42:29कैरेक्टर बिल्डिंग बोलते हैं। जीवा इज़
- 2:42:32शिवा बोलते हैं। यानी सर्विस टू मैन इज़
- 2:42:34सर्विस टू ह्यूमैनिटी। देन है आपका नेशनल
- 2:42:37इंटीग्रेशन की ये बात करते हैं कि नेशनल
- 2:42:39इंटीग्रेशन में इनटोलरेंस और सेक्रेटेरियल
- 2:42:42वायलेंस जो है वो एक बाधा बनते हैं। ओके?
- 2:42:45कंपेयर करते हैं ये ह्यूमन माइंड को मंकी
- 2:42:48से कि उछलता कूदता रहता है ना जैसे मंकी
- 2:42:50वैसे ही ह्यूमन माइंड होता है। दो मेजर
- 2:42:52इशूज़ हैं इंडिया में। एक है ट्रेंपलिंग ऑफ
- 2:42:55वुमेन और एक ग्राइंडिंग द पुअर थ्रू कास्ट
- 2:42:58रेस्ट्रिक्शन। तो वुमेन और पुअर को जो आप
- 2:43:00दबा के रखते हो वो मेजर दिक्कतें हैं
- 2:43:02इंडिया में। ओके? रामकृष्ण स्कूल जो है वो
- 2:43:05इन्होंने बनाया है। उस उससे रिलेट करते
- 2:43:07हैं ये। प्रैक्टिकल वेदांता, अद्वैत
- 2:43:10वेदांता, भारतम भारत ये इनके लिखे हुए काम
- 2:43:12हैं। ओके? स्वामी विवेकानंद जो है वो अपनी
- 2:43:15स्पीच जो शिकागो में उन्होंने दी थी उसके
- 2:43:17लिए फेमस हैं। उन्होंने यूनिवर्सल
- 2:43:19एक्सेप्टेंस जो है उस तरीके से
- 2:43:22कॉनसेप्चुअलाइज़ किया। ऑल रिलीजंस आर
- 2:43:24मेयरली पाथ टू सेम फ्रथ वन मस्ट ट्रांज़िट
- 2:43:27रिलीजियस डोगमा टू रियलाइज़ द अवेयरनेस ऑफ़
- 2:43:30ऑल। सो आपको सारी चीजें करने के लिए आपको
- 2:43:33रिलीजन से ऊपर उठना पड़ेगा। सारे रिलिजन एक
- 2:43:35ही पाथ आपको दिखा रहे हैं। बात वही है
- 2:43:37जाना सबने वहीं है। तो आप उससे थोड़ा सा
- 2:43:40ये जो ऑल रिलीजंस हैं वो एक तरीका है वहां
- 2:43:44तक पहुंचने का। ओके? व्हाट वी वांट ये ये
- 2:43:47स्टेटमेंट्स हैं जीन की जो पूछी जा सकती
- 2:43:49हैं। ठीक है? जैसे व्हाट वी वांट इन
- 2:43:51प्रोग्रेस इज़ प्रोग्रेस डेवलपमेंट
- 2:43:53रियलाइज़ेशन। कोई भी थ्यरीज़ एवर मेड ह्यूमन
- 2:43:56बीइंग हायर। उसने बनाई नहीं। नो थ्यरीज़
- 2:43:59एवर मेड ह्यूमन बीइंग हायर। नो अमाउंट ऑफ़
- 2:44:01बुक्स कैन हेल्प। तो लेट ह्यूमन बीइंग
- 2:44:03थिंक। तो उसको सोचने दो। वहां से चीजें
- 2:44:06शुरू होएंगी। वो वो रियल रियलाइजेशन वहां
- 2:44:08से शुरू होगी। ठीक है? नो नेशन इज़ ग्रेट
- 2:44:11और गुड बिकॉज़ पार्लियामेंट इनक्ट्स दिस और
- 2:44:14दैट। बट नेशन इसलिए अच्छे हैं क्योंकि
- 2:44:16वहां के लोग अच्छे हैं। ओके? एजुकेशन शुड
- 2:44:19बी मैन मेकिंग एंड सोसाइटी मेकिंग। ये
- 2:44:20वर्ड्स आप याद रखेंगे। एजुकेशन इज़ द
- 2:44:23मैनिफेस्टेशन ऑफ़ परफेक्शन जो ऑलरेडी एक
- 2:44:26इंसान में है। ओके? सो, यही चीजें पूछी
- 2:44:28जाती हैं मेजरली। इसके अलावा खास कुछ पूछा
- 2:44:30नहीं जाता है। सो आपको एटलीस्ट ये पता हो
- 2:44:32और कुछ नहीं तो आप उससे वो क्योंकि बहुत
- 2:44:35सारे थिंकर्स हैं। बहुत सारी फिलॉसोफीज़
- 2:44:37हैं। सो वो मैच द फॉलोविंग कई चीजें
- 2:44:40इंक्लूड करने की कोशिश करते हैं आपके
- 2:44:42क्वेश्चन में। सो एक पर्टिकुलर इंसान से
- 2:44:44रिलेटेड बहुत डिटेल में चीजें नहीं पूछी
- 2:44:46जाती। ओके? रविंद्र नाथ टैगोर तो रूसो की
- 2:44:48तरह जो हमने नेचुरलिज्म में पढ़े थे। टैगोर
- 2:44:51भी एक इंडिविजुअलिस्ट और नेचुरलिस्ट रहे
- 2:44:53हैं। ठीक है? इन्होंने बोला कि आई हैव
- 2:44:55फाउंड दैट लिटिल चिल्ड्रन लर्न मोर
- 2:44:57क्विकली एटीट्यूड ऑफ़ टीचर से रादर देन जो
- 2:45:00नॉलेज वो दे रहे हैं। तो आपका टीचर का
- 2:45:02एटीट्यूड, पंक्चुअलिटी, चीजें, पर्सनालिटी
- 2:45:05वो अगर वैसी रहेगी, अच्छी रहेगी तो बच्चे
- 2:45:07ऑटोमेटिकली सीख जाएंगे। ओके? ये जो कोटेड
- 2:45:10स्टेटमेंट्स हैं, ये पूछी गई हैं। कभी भी
- 2:45:12पूछी जा सकती हैं दोबारा भी। सो, टीचर कैन
- 2:45:15नेवर ट्रूली टीच अनलेस ही इज़ स्टिल
- 2:45:17लर्निंग हिमसेल्फ। सो एक लैंप जो है वो
- 2:45:20अगर खुद नहीं जल रहा तो दूसरे को फ्लेम
- 2:45:22नहीं दे सकता। ओके? सो टीचर को खुद जलना
- 2:45:26पड़ेगा, पढ़ना पड़ेगा, सीखना पड़ेगा तभी
- 2:45:28वो सिखा पाएगा। गॉड जो है दैट इज़ ग्रेट
- 2:45:30गिवर कैन ओपन द होल यूनिवर्स टू आवर गेज
- 2:45:34इन द नैरो स्पेस ऑफ़ अ सिंगल लैंड। गॉड ही
- 2:45:37सबसे बड़ा गिवर है। नेशनल एंथम इन्होंने
- 2:45:39लिखा। इंटरनेशनलाइज़
- 2:45:41इंटरनेशनलिज़्म की बात की। इंटरनेशनल
- 2:45:44ब्रदरहुड भाईचारे की इन्होंने बात की।
- 2:45:46फर्स्ट एशियन है ये जिनको नोबेल प्राइज
- 2:45:48मिला लिटरेचर में मिला 1913 में गीतांजलि
- 2:45:52इनका काम है उसके लिए मिला और इंग्लिश
- 2:45:54वर्जन के लिए मिला ओके ये इनके प्रमुख काम
- 2:45:57है जी जो आप ध्यान रख सकते हो दैट्स इट
- 2:46:00ठीक है देन है शांतिनिकेतन बहुत फेमस है
- 2:46:03जैसे रामकृष्णन परमहंस वाला स्कूल आप जो
- 2:46:05है स्वामी विवेकानंद से रिलेट करोगे वैसे
- 2:46:08शांतिनिकेतन आप रविंद्र नाथ टैगोर से
- 2:46:10रिलेट करोगे ठीक है पॉपुलरली नोन ऐ
- 2:46:12यूनिवर्सिटी टाउन ओके तो विश्व भारतीय
- 2:46:16यूनिवर्सिटी जो है आई थिंक मैं सही बोल
- 2:46:18रही हूं। वो यूनिवर्सिटी अब इनकी जगह पे
- 2:46:20है। ओके? सो रविंद्र नाथ टैगोर ने 1901
- 2:46:23में शांतिनिकेतन खोला। बहुत सारे बच्चे जो
- 2:46:25हैं वो नहीं वहां पे पढ़ने भी आते हैं। बट
- 2:46:27ये था कहां पे? ये कोलकाता में नॉर्थ ईस्ट
- 2:46:31नॉर्थवेस्ट ऑफ कोलकाता वहां पे 1008
- 2:46:35कि.मी. नॉर्थवेस्ट में है कोलकाता से।
- 2:46:38ओके? सो वहां पे बहुत बड़ी लैंड में मतलब
- 2:46:40नेचर के करीब जो है वो चीजें वहां शुरू की
- 2:46:42गई। स्टार्टिंग में तो इतने बच्चे भी नहीं
- 2:46:44थे बट स्टिल उन्होंने वो चीजें शुरू की
- 2:46:46आगे कंटिन्यू की तो वो एक बहुत बड़ी चीज
- 2:46:48आज बन रखी है। ओके विश्व भारती
- 2:46:51यूनिवर्सिटी ही आज की डेट में ऐसी
- 2:46:53यूनिवर्सिटी है पूरे इंडिया में जिनके
- 2:46:55चांसलर जो हैं वो आपके प्रेसिडेंट नहीं है
- 2:46:59प्राइम मिनिस्टर हैं। अदरवाइज सबके चांसलर
- 2:47:02जो हैं जो भी सेंट्रल यूनिवर्सिटीज वगैरह
- 2:47:04होती हैं उनके चांसलर प्रेसिडेंट होते हैं
- 2:47:07रादर देन पीएम। ओके? तो इकलौते इन्हीं के
- 2:47:09पीएम हैं। ऑब्वियसली नेचुरलिज्म पे फोकस
- 2:47:12कर रहे हैं। तो ये सेल्फ एक्टिविटी के
- 2:47:13थ्रू लर्निंग बाय डूइंग एक्सपीरियंशियल
- 2:47:15लर्निंग उनसे ज्यादा सिखा रहे हैं। ओके?
- 2:47:18देन है जी महात्मा गांधी। ठीक है? बहुत
- 2:47:20इंपॉर्टेंट हैं। लिटरेसी ना तो सिखाई जा
- 2:47:23सकती है ना एंड की जा सकती। तो लिटर
- 2:47:25लिटरेसी से चीजें शुरू भी नहीं हो रही है,
- 2:47:27एंड भी नहीं हो रही है। ठीक है? तो इज़
- 2:47:29नीदर द बिगिनिंग नॉर द एंड ऑफ़ द एजुकेशन।
- 2:47:31ओके? प्रिंसिपल आईडिया क्या है होल
- 2:47:33एजुकेशन का? कि बच्चों की बॉडी, माइंड और
- 2:47:37सोल। ठीक है? इन इनकी बेस्ट चीजें बाहर
- 2:47:40निकाली जाए थ्रू हैंडीक्राफ्ट। ठीक है? जो
- 2:47:42बच्चों को सिखाया जाएगा। वारदा एजुकेशन
- 2:47:44कमेटी सेंट्रल एडवाइज़री बोर्ड ऑफ़ एजुकेशन
- 2:47:47जिन्होंने रेकमेंड किया कि इंक्रीजिंग
- 2:47:50एक्सपेंडिचर ऑन एजुकेशन। सो इसके चेयर
- 2:47:53पर्सन जाकिर हुसैन थे। लेकिन वारदा
- 2:47:54एजुकेशन या वारदा स्कीम की बात आती है तो
- 2:47:56गांधी जी का नाम हमेशा ध्यान रखना है।
- 2:47:59ओके? बट अगर सिर्फ चेयर पर्सन पूछा जाता
- 2:48:01है तो आप जाकिर हुसैन पे जाएंगे। ओके?
- 2:48:03बारदा स्कीम ऑफ़ एजुकेशन ने एम किया टू
- 2:48:06डेवलप एन एक्टिविटी बेस्ड करिकुलम। ठीक
- 2:48:08है? जो एक्टिविटीज़ पे चीजों पे
- 2:48:10पार्टिसिपेशन पे फोकस करें। तीन
- 2:48:12इंटरकनेक्टेड सेंटर्स पे इन्होंने फोकस
- 2:48:14किया। एक फिजिकल एनवायरमेंट अच्छा, एक
- 2:48:15सोशल एनवायरमेंट और एक क्राफ्ट वर्क। ओके?
- 2:48:18गांधी जी ने एक वीकली जर्नल शुरू की थी
- 2:48:201933 में यवदा जेल से हरिजन। सो उसमें
- 2:48:23उन्होंने कुछ चीजें पब्लिश की थी। वहां से
- 2:48:26जो है ये वारदा स्कीम का आईडिया निकल के
- 2:48:28आता है। ही क्रिएटेड थ्री पब्लिकेशंस
- 2:48:30हरिजन इंग्लिश में, हरिजन बंधु गुजराती
- 2:48:33में और हरिजन सेवक हिंदी में। ओके जी। देन
- 2:48:36मोहनदास करमचंद गांधी 1930 में टाइम्स
- 2:48:40मैगज़ीन के मैन ऑफ द ईयर रहे हैं। ये भी
- 2:48:42पूछा जा सकता है। मोहनदास करमचंद गांधी जो
- 2:48:44है वो पांच बार नोबेल पीस प्राइज के लिए
- 2:48:47नॉमिनेट भी हुए हैं। ये इनकी प्रमुख लिखी
- 2:48:50हुई चीजें हैं जो आपने ध्यान रखनी है।
- 2:48:52ओके? ये फिलॉसफी है जी महात्मा गांधी की
- 2:48:55कि डी एस पटेल के एम सॉरी एमएस डॉक्टर एम
- 2:48:58एस पटेल उनके शब्दों में अगर हम कहें तो
- 2:49:00गांधी की जो फिलॉसफी है वो सेटिंग में
- 2:49:03नेचुरलिस्टिक है। ठीक है? एम्स और
- 2:49:05ऑब्जेक्टिव्स में आइडियलिस्टिक है और मेथड
- 2:49:08जो तरीका जो है जिसमें आप एक्टिव लर्निंग
- 2:49:10बाय डूइंग की बात कर रहे हो वो प्रैगटिक
- 2:49:12है। ओके? सो सेटिंग नेचुरलिस्टिक सेटिंग
- 2:49:15हो आसपास। मेथड प्रगमेटिक हो और एम्स और
- 2:49:19ऑब्जेक्टिव्स आपके आइडियलिज्म वाले। ओके?
- 2:49:21तो जो बेसिक कांसेप्ट है बेसिक एजुकेशन
- 2:49:23का, नई तालीम का, बुनियादी शिक्षा का वो
- 2:49:26इन्होंने दिया। छ से 14 साल कई जगह पे
- 2:49:28आपको मेंशन मिलेगा 7 से 14 साल। ओके? तो
- 2:49:31वो फ्री एंड कंपलसरी एजुकेशन की इन्होंने
- 2:49:33बात की। इंटरेस्ट बेसिस पे लर्निंग होनी
- 2:49:35चाहिए। मदर टंग में होनी चाहिए। क्राफ्ट
- 2:49:37सेंटर्ड होनी चाहिए। ठीक है? ऐ क्या था?
- 2:49:39इस क्राफ्ट सेंटर्ड एजुकेशन का? ऐ था कि
- 2:49:42लेबर डिग्निटी ऑफ़ लेबर समझा पाएं। यूथ जो
- 2:49:45है वो नौकरी ढूंढने के लिए शहरों में कम
- 2:49:48जाए। ठीक है? है मीनिंग द मीटिंग द
- 2:49:50एक्सपेंसेस ऑफ़ टीचर्स सैलरीज़। यह भी
- 2:49:52विश्वास किया गया कि टीचर जो है वो सेल्फ
- 2:49:54सैक्रिफाइसिंग है और वह मोडेस्ट सैलरी में
- 2:49:57काम चला लेंगे। तो इन्हीं से सैलरीज़ निकल
- 2:50:00जाएंगी। एजुकेशन जो है वो सेल्फ
- 2:50:02सपोर्टिंग, सेल्फ सफिशिएंट होनी चाहिए।
- 2:50:04एक्टिविटी, क्राफ्ट सेंटर्ड, सोशल स्टडीज,
- 2:50:07ऑल अराउंड डेवलपमेंट ये सारी चीजों पे
- 2:50:09इन्होंने फोकस किया था। ओके? अल्टीमेट
- 2:50:11पर्पस जो था वो था प्रमोशन ऑफ़ ह्यूमन
- 2:50:14बीइंग। ओके? अल्टीमेट ऐ जो है एजुकेशन का
- 2:50:17वो है इंडिविजुअल को हेल्प करना और
- 2:50:19गेनफुली एंप्लॉयमेंट भी उसको मिले लाइफ
- 2:50:22में। ये भी ऐ है एजुकेशन का। ओके? सो
- 2:50:25गांधी जी ने पहला जो सत्याग्रह था वो ल्च
- 2:50:27कर दिया था जी कहां पे? 1906 में
- 2:50:30जोहसनबर्ग में। ओके? क्योंकि वहां पे
- 2:50:32एशियंस को रेस्ट्रिक्ट किया जा रहा था। उन
- 2:50:34पे रेस्ट्रिकशंस लगाई जा रही थी। देन मास
- 2:50:37मीटिंग्स करवाई उन्होंने वहां पे। सिविल
- 2:50:39डिसओबिडियंस जो है वह करवाया कि आप बात
- 2:50:41नहीं मानोगे सरकार की। ठीक है? शांति से
- 2:50:44तो वो चीज इन्होंने की। देन गांधी जो हैं
- 2:50:46उन्होंने इंप्रज़नमेंट भी बहुत बार बहुत
- 2:50:48बार जेल भी गए हैं वो। ठीक है? इंक्लूडिंग
- 2:50:50द फेमस व्कर सत्याग्रह जो 1913 में हुआ।
- 2:50:54देन इन्होंने फोनिक सेटलमेंट जो है वो
- 2:50:56डरबन में शुरू किया। बिकॉज़ टॉलस्टॉय फार्म
- 2:50:58यहां पे शुरू किया था। वो तो आप सबको याद
- 2:51:00रहता है। टॉलस्टॉय फार्म फिर भी याद रह
- 2:51:02जाता है। बट फोनिक सेटलमेंट भी है। ओके?
- 2:51:04सो वहां पे सारे लोग मिलके इकट्ठे रहेंगे
- 2:51:06ताकि हमें कोई दबा ना पाए। सो कम्युनिटी
- 2:51:09लिविंग एक्सपेरिमेंट था ये फोनिक सेटलमेंट
- 2:51:11डरबन में और उसके बाद 1910 में जो है
- 2:51:13टॉलस्टॉय फार्म जो हसनबर्ग के पास
- 2:51:15उन्होंने शुरू किया ताकि जितने भी नॉन
- 2:51:18वायलेंस के फॉलोअर्स हैं सत्याग्रहीस हैं
- 2:51:20वो वहां पे आके रह सकते हैं। ओके देन साउथ
- 2:51:24ये जो है साउथ अफ्रीकन नेटिव नेशनल
- 2:51:26कांग्रेस जो है वो 1912 में बनती है इनकी
- 2:51:28कोशिशों के बाद एंड इंडियन रिलीफ एक्ट जो
- 2:51:32है वो भी रिलीज़ किया जाता है पास किया
- 2:51:33जाता है साउथ अफ्रीकन गवर्नमेंट के द्वारा
- 2:51:361914 में। उसके बाद भारत आ जाते हैं। फिर
- 2:51:39भारत में चीजें शुरू हो रही हैं। 1908 के
- 2:51:41आसपास ही आ जाते हैं। भारत में तो आई थिंक
- 2:51:44या 1901 भारत कब आए थे वापस वो बताना
- 2:51:47मुझे। महात्मा गांधी की जो क्लासिफिकेशन
- 2:51:49है वैल्यूज़ की तो इसमें वो अहिंसा, सत्य,
- 2:51:52नॉन थ्राइविंग, प्योरिटी, देन अपरिग्रह,
- 2:51:56नॉन एक्विज़िटिवनेस। ठीक है? देन आपका यह
- 2:51:59अह फिजिकल वर्क, शारीरिक श्रम। ठीक है?
- 2:52:02शारीरिक श्रम। देन अह अस्वाद यानी कंट्रोल
- 2:52:05ऑफ़ अस्वाद। कंट्रोल ऑफ़ पैेट कि वह वाली
- 2:52:08चीज़ है कि ज़्यादा तीखा चीज़ वो नहीं खानी
- 2:52:11है। स्वाद पे ध्यान नहीं देना है। बस पेट
- 2:52:13भरने के लिए खाओ। फ़ियरफुलनेस ठीक है? सॉरी
- 2:52:16फियरलेसनेस फियरफुल बोल दिया मैंने। ठीक
- 2:52:18है? फियरलेसनेस देन लुकिंग अप एट ऑल
- 2:52:21रिलीजंस इक्वली। टोलरेशन होना चाहिए।
- 2:52:24इनटोलरेंस ना हो। असहिष्णु ना बने आप।
- 2:52:26देशभक्त हो, स्वदेशी हो, अबोलिशन हो
- 2:52:29अनटचेबिलिटी का। तो ये इनके वैल्यूज़ रही
- 2:52:32हैं। अगर हम क्लासिफाई करना चाहें तो ये
- 2:52:34इनका काम रहा है। जी मेजरली हिंद स्वराज
- 2:52:37इंडिया ऑफ़ माय ड्रीम माय एक्सपेरिमेंट विद
- 2:52:39ट्रुथ सबसे ज्यादा फेमस है। उसके बाद
- 2:52:41एथिकल रिलीजन भी फेमस है। ओके इंडियन
- 2:52:44ओपिनियन जो है वो भी इन्होंने एस्टैब्लिश
- 2:52:46किया था। एंड इंडियन ओपिनियन के फर्स्ट
- 2:52:48एडिटर जो है वो मनसुखलाल हीरालाल नज़र थे।
- 2:52:51देन यंग बुक। तो बुक के ऑथर लाला लाजपत
- 2:52:54राय हैं। उन्होंने ये बुक लिखी और बाद में
- 2:52:56फर्स्ट टाइम 1916 में पब्लिश हुई। यंग
- 2:52:59इंडिया जो है वो वीकली पेपर अगर बुक है तो
- 2:53:02लाला लाजपत राय कंफ्यूज नहीं होना है और
- 2:53:04यंग इंडिया अगर वीकली पेपर की बात हो रही
- 2:53:06है तो वो फिर जो है एम के गांधी ने पब्लिश
- 2:53:09किया था ठीक है इंग्लिश में श्री रोबिंदो
- 2:53:13मेजर चीज इंटीग्रल एजुकेशन ठीक है सो ये
- 2:53:16इनके बारे में बेसिक चीजें हैं कि
- 2:53:18इन्होंने बंगाल डेली युगांतर इंग्लिश डेली
- 2:53:20वंदे मातरम अपने रिवोल्यूशनरी आइडियाज को
- 2:53:22प्रमोट करने के लिए शुरू किए थे अरबिंदो
- 2:53:25की लाइफ की जो फिलॉसोफी है वो आइडियलिज्म
- 2:53:27रियलिज्म नेचुरलिज्म प्रैग्मिज़्म इन सब से
- 2:53:29मिक्स होके निकलती है एक फिलॉसोफी। ठीक
- 2:53:32है? तो ये नॉलेज, डिवोशन, वर्क एथिक्स
- 2:53:35इसकी वजह से इंसान एक सही रास्ते पे जा
- 2:53:37सकता है। लेकिन बट ये जो स्पिरिचुअलिटी की
- 2:53:40सिंथेसिस है, क्रिएटिवनेस है,
- 2:53:42इंटेलेक्चुअलिटी है वो बहुत जरूरी है एक
- 2:53:44साउंड पर्सनालिटी के लिए। तो ये चीजें भी
- 2:53:46होनी चाहिए। ओके? सो इनीड इफ एजुकेशन इज़
- 2:53:49टू हैव इट्स मैक्सिमम रिजल्ट इट मस्ट
- 2:53:51बिगेन इवन बिफोर बर्थ। तो बर्थ से भी पहले
- 2:53:54जैसे हम वो गर्भ शिक्षा देते हैं ना गर्भ
- 2:53:56में ही बच्चे को। सो वो वो वहां से चीजें
- 2:53:58शुरू होनी चाहिए कि बच्चे की सोल में वो
- 2:54:01चीजें बस जाएं। ऐसा ओके चीफ ऐम है एजुकेशन
- 2:54:04का जी शुड बी टू हेल्प द ग्रोइंग सोल टू
- 2:54:07ड्रॉ आउट दैट इट इन इटसेल्फ व्हिच इज़
- 2:54:10बेस्ट एंड मेक्स इट परफेक्ट फॉर अ नोबल
- 2:54:12यूज़ आर्या श्री अरविंदो आश्रम ये इन्होंने
- 2:54:15खोले हैं मीरा अंबिका फ्री प्रोग्रेस
- 2:54:18स्कूल जिसको मीरा अंबिका के नाम से जाना
- 2:54:20जाता है 1981 में इन्होंने खोला एंड अभी
- 2:54:23की अगर हम बात करें तो ये दिल्ली ब्रांच
- 2:54:25के अंडर आपको ये मिल जाएगा श्री अरविंदो
- 2:54:28आश्रम में ठीक है सो वहां पे कैंपस मिल
- 2:54:30जाएगा आपको ट्रू नॉलेज जो है ही इज़ नॉट
- 2:54:32अटेंड बाय थिंकिंग। यह वही है जो आप हो।
- 2:54:35ऐसा ही कुछ एक और ने भी बोला था पहले हमने
- 2:54:37जो बात की थी। देन है जी श्री अरविंदो ने
- 2:54:40इंटीग्रल एजुकेशन की बात की है।
- 2:54:42ह्यूमैनिटी एक है। इंडिविजुअलिटी इज़ वन
- 2:54:44होल। माइंड को सिक्स सेंस बोला है। माइंड
- 2:54:46के ऊपर इन्होंने काफी कुछ बोला है।
- 2:54:48इन्होंने स्ट्रोंगली आर्ग्यू किया कि एक
- 2:54:50नेशनल सिस्टम ऑफ़ एजुकेशन होना चाहिए।
- 2:54:52थ्यरी ऑफ़ इवोल्यूशन की जब ये बात करते
- 2:54:55हैं, तो ये मेजर दो प्रोसेससेस की बात
- 2:54:57करते हैं कि कैसे चीज़ इवॉल्व होती हैं
- 2:54:59रियलिटी को एक्सप्लेन करने के लिए। तो ये
- 2:55:01बोल रहे हैं कि एक प्रोसेस है प्रोसेस ऑफ़
- 2:55:03डाउनवर्ड मूवमेंट। ठीक है? इवॉल्यूशन हमने
- 2:55:05पढ़ा है कि अपवर्ड मूवमेंट। चीजें बढ़िया
- 2:55:07इवॉल्व हो रही है, बड़ी हो रही हैं। राइट?
- 2:55:09लेकिन वही चीज अगर उल्टी हम देखेंगे तो ये
- 2:55:11इनवॉल्यूशन है। ये वर्ड आपको पता हो। ओके?
- 2:55:14सो इवोल्यूशन प्रीसपोजेस इनवॉल्यूशन। यानी
- 2:55:19पहले से ही उसके अंदर वो चीज निहित है कि
- 2:55:21इवॉल्यूशन हो रहा है तो इवोल्यूशन भी
- 2:55:23होगा। ओके? सो इवोल्यूशनरी ग्रोथ जो है वो
- 2:55:25एक ट्रिपल प्रोसेस है जिसमें वाइडनिंग
- 2:55:28होगी, हाइटनिंग होगी और आपका इंटीग्रेशन
- 2:55:31होगा। ओके? तो जो प्रोसेस ऑफ़ वाइडनिंग है
- 2:55:34दैट इज़ स्कोप की आप बात कर रहे हो।
- 2:55:36प्रोसेस ऑफ़ हाइटनिंग में आप जो है डीपर
- 2:55:39लेवल पे वन स्टेप और ग्रेड टू अनदर हायर
- 2:55:42ग्रेड की बात कर रहे हो। और मोस्टेंट
- 2:55:44फैक्टर जो है वो इंटीग्रेशन रहेगा जिसमें
- 2:55:47सारी चीजें इंटीग्रेट करके। इसीलिए
- 2:55:48इंटीग्रल एजुकेशन की बात जो है वो अरविंदो
- 2:55:51के नाम पे आती है। ओके? इनकी बुक है लाइफ
- 2:55:54डिवाइन देन टू नेगेशन। ये काफी इंपॉर्टेंट
- 2:55:57बुक्स हैं। आप ध्यान रख सकते हो। ठीक है?
- 2:56:00ये जो लाइफ डिवाइन है इसमें इन्होंने बात
- 2:56:02की थी टू नेगेशंस की। तो दो ऑपोजिंग बट
- 2:56:06इक्वली लिमिटिंग पर्सपेक्टिव रियलिटी के।
- 2:56:09एक मटेरियलिस्टिक डिनाइयल है और एक
- 2:56:11एस्केटिक रिफ्यूज़ल है। ओके? सो दीज़
- 2:56:14नेगेशंस रिप्रेजेंट वन साइडेड व्यूज़ और
- 2:56:17इदर डिसमिस द स्पिरिचुअल वर्ल्ड या फिर
- 2:56:19फिजिकल वर्ल्ड को ही अनरियल बोल रहे हो।
- 2:56:21तो दो एक्सट्रीम साइड्स हैं। ये टू
- 2:56:23नेगेशंस की बात जो है वो अरबिंदो ने की
- 2:56:25है। अपनी बुक लाइफ डिवाइन में की है। ये
- 2:56:28बात याद रखेंगे आप। ओके? देन बात आती है
- 2:56:31जी माइंड के बारे में। तो ये बोल रहे हैं
- 2:56:33माइंड मस्ट बी परफेक्टली ट्रेंड टू द
- 2:56:34हाईएस्ट पॉसिबल लिमिट। ठीक है? अदरवाइज़
- 2:56:37एजुकेशन ऑफ़ वन चाइल्ड जो है वो इनकंप्लीट
- 2:56:39और वन साइडेड रह जाएगी। एजुकेशन जो है वो
- 2:56:43पावर्स ऑफ़ माइंड को बिल्ड करने पे फोकस
- 2:56:46करे, ऐ करे। ओके? दो क्वालिटीज़ हैं माइंड
- 2:56:48की। वेल डिसिप्लिंड, वेल स्ट्रक्चरर्ड
- 2:56:50माइंड और दूसरा रहेगा आपका
- 2:56:52इंडिविजुअलाइज्ड और वेल टेक्सचर्ड माइंड।
- 2:56:55ओके? तो माइंड की चार लेयर्स हैं। जी।
- 2:56:57पहली लेयर चित्त जो पैसिव मेमोरी चीजें
- 2:57:00स्टोर हो रही हैं। ऐसे वाला। ठीक है? हम
- 2:57:03ओके। दूसरी, तीसरी, चौथी। हां, अब ठीक है।
- 2:57:05ठीक है। दूसरी लेयर आपकी मनस है। प्रॉपर
- 2:57:08माइंड जो रिसीव करता है इमेजज़ को जो
- 2:57:10सेंसेस से आ रही हैं। परसेप्शन के थ्रू आ
- 2:57:12रही हैं मन। ठीक है? देन इंटेलेक्ट है जी।
- 2:57:15जो अरेंज और रिअरेंज करता रहेगा नॉलेज को।
- 2:57:18ठीक है? है कॉम्प्रिहेंसिव क्रिएटिव
- 2:57:20सिंथेटिक एनालिटिकल फैकल्टीज आपको
- 2:57:22दिखेंगी। फोर्थ लेयर है जी इंट्यूशन जो
- 2:57:25अंदर से ब्रिलियंट आइडियाज एकदम से आते
- 2:57:27हैं। तो ये बिगिनिंग है ऑफ हज़ हायर नॉलेज
- 2:57:30अगर इंट्यूशन वाले आइडियाज आ रहे हैं तो।
- 2:57:32ओके? तो ये चार लेयर्स हो गई। ये ऑर्डिनरी
- 2:57:34माइंड में भी तीन तरीके की। ये माइंड मैं
- 2:57:36इसलिए बता रही हूं क्योंकि कभी भी कुछ भी
- 2:57:38पूछ लेते हैं इनके माइंड से रिलेटेड ना।
- 2:57:40सो थिंकिंग माइंड, डायनेमिक माइंड,
- 2:57:42एक्सटर्नलाइजिंग माइंड। ये पता हो आपको।
- 2:57:44देन इनकी राइटिंग्स में डिफरेंट प्लेेंस
- 2:57:46हैं माइंड के। तो ये छह के छह इसी
- 2:57:48सीक्वेंस में पता हो। ऑर्डिनरी माइंड,
- 2:57:50हायर माइंड, इलुमिनेटेड माइंड, इंट्यूटिव,
- 2:57:52ओवर और सुपर माइंड। सो कई बार आप कंफ्यूज
- 2:57:55हो जाते हैं हायर आएगा, पहले, सुपर ऊपर
- 2:57:57आएगा, क्या आएगा? सो ये छह सीक्वेंस में
- 2:58:00आपको ये माइंड के डिफरेंट-डिफरेंट प्लेेंस
- 2:58:02पता होने चाहिए। ओके? चार टाइप के रूम की
- 2:58:04भी ये बात करते हैं। जब आप वेरियस
- 2:58:06एक्टिविटीज़ के लिए काम करते हो, तो रूम ऑफ़
- 2:58:08साइलेंस, कोलैबोरेट करना, कंसल्ट करना और
- 2:58:11फिर लेक्चरर रूम। ओके? लेक्चर रूम। यह
- 2:58:14इंपॉर्टेंट पब्लिकेशंस हैं। लाइफ डिवाइन
- 2:58:16सबसे ज्यादा फेमस है जिसमें यह दो नेगेशंस
- 2:58:18दो ऑोजिट चीजों की बात करते हैं। ओके?
- 2:58:20सावित्री बुक इन्होंने लिखी है।
- 2:58:22सावित्रीबाई फुले ने नहीं लिखी है। ये बात
- 2:58:24भी आपने ध्यान रखनी है। देन बात आती है जी
- 2:58:26जिद्दू कृष्ण मूर्ति की। ओके? तो जिद्दू
- 2:58:29कृष्णमूर्ति जो है वो एजुकेशन और
- 2:58:32सिग्निफिकेंस ऑफ़ लाइफ। ये इन्होंने लिखा
- 2:58:34है। द फर्स्ट एंड द लास्ट फ्रीडम इन्होंने
- 2:58:36लिखा है। ठीक है? फंक्शन जो है एजुकेशन का
- 2:58:39इज़ टू हेल्प यू फ्रॉम चाइल्डहुड ना कि
- 2:58:41इमिटेट करना बट बी योरसेल्फ ऑल द टाइम। ये
- 2:58:44काम है एजुकेशन का कि आपको आप बने रहने
- 2:58:48में मदद करें। ओके? आपको यह ना हो कि आप
- 2:58:51जो हैं कुछ और ही बन रहे हो। इमिटेट कर
- 2:58:54रहे हो किसी और को। ओके? ही बिलीव्ड दैट
- 2:58:56टीचिंग मींस शेयरिंग टुगेदर रियलाइजिंग द
- 2:58:59सेल्फ। तो आपको शेयर भी करना है, सेल्फ को
- 2:59:01भी रियलाइज़ करना है। लेकिन इमिटेट कॉपी
- 2:59:03नहीं करना है। ठीक है? एक पर्सन जो है वो
- 2:59:05हैप्पीली कब रह पाएगा? जब वो नॉन
- 2:59:07कॉम्पिटिटिव होगा। ऐसा इन्होंने कहा। सो
- 2:59:09ये बिलीव करते हैं कि बुक्स एक बहुत
- 2:59:11वैल्यूुएबल सोर्स हैं। आप उससे भी सीखोगे।
- 2:59:14आपके एक्सपीरियंसेस से भी सीखोगे लेकिन
- 2:59:16बुक से भी सीखते हो आप। ओके? फैक्ट्स
- 2:59:19मेमोराइजेशन पे ये बोलते हैं कि
- 2:59:20मेमोराइजिंग फैक्ट्स वाज़ नॉट द मोस्टेंट
- 2:59:23पार्ट ऑफ़ एजुकेशन। बट ये वन ऑफ़ द पार्ट है
- 2:59:26जिसकी जरूरत होती है। ठीक है? तो
- 2:59:28प्रिंसिपल्स तो आप उस उन फैक्ट्स के पीछे
- 2:59:30का प्रिंसिपल्स समझिए। फिर ध्यान में
- 2:59:32रखिए। ओके? डेवेलपिंग माइंड्स। तो ये
- 2:59:35बिलीव करते हैं कि एजुकेशन जो है वो माइंड
- 2:59:37डेवलपमेंट में हेल्प करे ना कि नॉलेज
- 2:59:39एक्यूमुलेशन में कि इकट्ठी कर ली नॉलेज।
- 2:59:42ओके? सो ये मेम ये ये पॉइंट्स इसलिए
- 2:59:44हाईलाइट किए गए हैं बिकॉज़ ये क्वेश्चंस आए
- 2:59:46हुए हैं। जहां पे हमें कंफ्यूजन हुआ था कि
- 2:59:48भ मेमोराइज़ थोड़ी करने को बोलेगा कोई। बट
- 2:59:51ये मेमोराइजिंग फैक्ट्स बुक्स से भी सीखना
- 2:59:53है। माइंड को भी डेवलप करना है। नेचुरल
- 2:59:55डायवर्सिटी को भी एंजॉय करना है। तो इन
- 2:59:58चीजों पे ये फोकस डालते हैं। ओके? देन
- 3:00:00पावलो फ्रायरे। पावलो फ्रायरे बहुत
- 3:00:02इंपॉर्टेंट है जी क्रिटिकल पेडागोजी के ये
- 3:00:04इनकी बुक्स हैं। जहां भी पेडागोजी ऑफ़ दिखे
- 3:00:07ऑफ़ ऑप्रेस्ड ऑफ़ लिबरेशन ऑफ़ फ्रीडम ऑफ़ द
- 3:00:10सिटी। ये सारी की सारी इन्होंने लिखी है।
- 3:00:12ओके? सो अपने रेडिकल आइडियाज़ के लिए ये
- 3:00:14जाने जाते हैं लर्निंग में, पेडागोजी में,
- 3:00:16नॉलेज में। इन्होंने सबसे पहले क्रिटिकल
- 3:00:18पेडागोजी टर्म दी। ही वाज़ इन्फ्लुएंस्ड
- 3:00:21बाय प्लेटो एंड मार्क्स। ये बैंकिंग मॉडल
- 3:00:23को क्रिटिसाइज़ करते हैं। बैंकिंग मॉडल
- 3:00:25क्या है? जो चलता आ रहा है जिसमें
- 3:00:27स्टूडेंट पैसिव है, खाली है, एंप्टी है,
- 3:00:29टीचर भरा हुआ है, नॉलेजेबल है, एक्टिव है,
- 3:00:31वही सारी इनेशन बच्चों के अंदर डालेगा,
- 3:00:33इंपार्ट करेगा। सो ये एक बैंकिंग मॉडल ऑफ़
- 3:00:36एजुकेशन है जिसके ये अगेंस्ट हैं। ये
- 3:00:38बच्चे को भी एक्टिवली इनवॉल्व करने पे
- 3:00:40फोकस करते हैं। तो इन्होंने प्रॉब्लम
- 3:00:42पॉजिंग एजुकेशन की बात की कि टीचर पहले
- 3:00:44प्रॉब्लमेटाइज करेगा। स्टूडेंट सॉल्यूशन
- 3:00:47देंगे और फिर दोनों मिलके जो हैं क्या
- 3:00:49बदलाव आ सकते हैं? कैसे इंप्लीमेंट कर
- 3:00:51सकते हो? उन पे डिस्कशन करेंगे। ओके?
- 3:00:54यह बोल रहे हैं कि यह जो ऑपरेस्ड हैं उनको
- 3:00:57अवेयर करना, कॉनश करना उनके ऊपर फोकस कर
- 3:01:02रहे हैं। ओके? सो ये कंसर्न है विद
- 3:01:04प्रैक्टिस व्हिच इनवॉल्व्स एनालिसिस,
- 3:01:06डिस्कशन और एक्शन टू चेंज द सिचुएशन। कि
- 3:01:10आपको सिचुएशन होता है ना भगवान भी उसी की
- 3:01:12मदद करेगा जो खुद की मदद करेगा। सो आपको
- 3:01:14पहले खुद की मदद करनी पड़ेगी। आप ऐसे दब
- 3:01:17के नहीं रह सकते हो। वो बात इन्होंने बोली
- 3:01:19और ये काम एजुकेशन ही कर सकती है उनको
- 3:01:21बड़ा बनाने का। निकालने का उस सिचुएशन से।
- 3:01:24देन है जी मैरी वस्टन क्राफ्ट। एजुकेशन जो
- 3:01:26है वो एसेंशियल एलिमेंट है फॉर द पीपल ऑफ़
- 3:01:29द सोसाइटी। यह बात इनका कहना है। ठीक है?
- 3:01:31ये मेजरली एम्फेसाइज़ करती हैं चिल्ड्रन
- 3:01:33यूथ और वुमेन की एजुकेशन के ऊपर। मेजरली
- 3:01:36गर्ल एजुकेशन पे, वुमेन एजुकेशन पे
- 3:01:38इन्होंने बहुत फोकस किया है। एंड इन्होंने
- 3:01:41पार्लियामेंट्री रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ वुमेन
- 3:01:43के बारे में भी बात की है। ओके? प्रोफेशनल
- 3:01:46करियर्स के लिए वुमेन को ट्रेन किया जाए।
- 3:01:48तो वुमेन एजुकेशन पे काफी कुछ इन्होंने
- 3:01:50बोला है। ओके? सो ये इनकी बुक्स हैं। मैरी
- 3:01:53एंड फिक्शन, मैरी एंड मैरी। विंडिकेशन ऑफ
- 3:01:56द राइट्स ऑफ़ मैन। कई बार ऑफ द राइट्स ऑफ़
- 3:01:59वुमेन भी देखने को मिल जाता है। तो
- 3:02:00विंडिकेशन वाली टर्म जहां आए वो इन्होंने
- 3:02:02ही लिखी है। ओके? नेलनोडिंग्स वेरीेंट।
- 3:02:06जहां भी केयर वर्ड आए आप नेलनोडिंग्स को
- 3:02:08जोड़ के देखिए। ठीक है? देन ये तो इनकी
- 3:02:11लिखी हुई बुक्स हैं। ओके? देन ये केयरिंग
- 3:02:14सिंपैथी केयरिंग फॉर एंड केयरिंग अबाउट पे
- 3:02:17फोकस करती हैं। केयरिंग फॉर किसके लिए
- 3:02:19केयर कर रहे हो? यानी रिक्वायर्स द
- 3:02:21एस्टैब्लिशमेंट ऑफ रिलेशन और केयरिंग
- 3:02:23अबाउट इज समथिंग मोर जनरल कि आई एम यू आर
- 3:02:26केयरिंग अबाउट चिल्ड्रन तो वो इन जनरल चीज
- 3:02:30है बट यू आर केयरिंग फॉर योर चाइल्ड वो
- 3:02:33आपकी पर्सनल चीज हो गई थोड़ी सी। ठीक है?
- 3:02:35तो ये दो कांसेप्ट जो है वो इन्होंने दिए
- 3:02:37हैं। होम प्राइमरी एजुकेटर की बात कर रहे
- 3:02:40हैं यह। यह बोल रहे हैं कि स्कूल शुड ऐज़
- 3:02:42फार ऐज़ पॉसिबल यूज़ द सॉर्ट ऑफ़ मेथड फाउंड
- 3:02:46इन बेस्ट होम्स टू एजुकेट। ठीक है? तो वो
- 3:02:49चीज़ आप एनालाइज़ करके बच्चों के अंदर
- 3:02:51इंक्लकेट करो। नेल नोडिंग ने ये आर्ग्यू
- 3:02:54किया दैट एजुकेशन फ्रॉम द केयर चार की
- 3:02:57कॉम्पोनेंट्स हैं। केयर पर्सपेक्टिव से आप
- 3:02:59देखोगे तो मॉडलिंग, डायलॉग, बातचीत,
- 3:03:01प्रैक्टिस एंड देन कंफर्मेशन। सो ये चारों
- 3:03:04के चारों स्टेप्स आपको पता हो। ओके?
- 3:03:06उन्होंने एजुकेशन को बोला कि इट्स अ
- 3:03:07कॉनस्टिलेशन ऑफ़ एनकाउंटर्स बोथ प्लंड एंड
- 3:03:10अनप्लैंड। तो एजुकेशन में सारी चीजें आ
- 3:03:12जाएंगी जो आपकी ग्रोथ को प्रमोट कर रही
- 3:03:13हैं। कैसे? नॉलेज एक्विजिशन से, स्किल
- 3:03:16एक्विजिशन से, अंडरस्टैंडिंग और
- 3:03:17एप्रिसिएशन से। ओके? सो कुछ-कुछ चीजें बस
- 3:03:20नेल नोडिंग्स और केयर का वर्ड याद रखिए।
- 3:03:22शी वाज़ शी आई थिंक कुछ टाइम पहले ही
- 3:03:25एक्सपायर हुई हैं। शी इज़ शी वाज़ द ग्रेट
- 3:03:27लेडी बट वो हमेशा केयर की बात कर रही हैं।
- 3:03:30ओके? सावित्रीबाई फुले आपको सब पता होना
- 3:03:34चाहिए इनके बारे में। ये बेसिक चीज़ हैं।
- 3:03:36बाकी हम पीवाईक्यूज़ के थ्रू भी कवर कर
- 3:03:38लेंगे। ओके? सो ये पोएटिस्ट भी हैं,
- 3:03:40एजुकेशनिस्ट भी हैं, सोशल रिफॉर्मर भी
- 3:03:42हैं। पॉलिटिकल आस्पेक्ट इनका कोई भी नहीं
- 3:03:44है। ओके? काव्या फुले इन्होंने लिखी है
- 3:03:47बुक पोएम्स का एक कॉम्बिनेशन है।
- 3:03:50ज्योतिराव की स्पीच। ज्योतिराव इनके
- 3:03:52हस्बैंड हैं। उनकी स्पीच जो एडिट की हैं
- 3:03:54सावित्रीबाई फुले ने। इन्होंने बहुत सारे
- 3:03:56लेटर्स लिखे ज्योतिराव को जब ये दूर रह
- 3:03:58रहे थे। भवानी काशी सुबोध रत्नाकर पोएम्स
- 3:04:01गो गेट एजुकेशन। तो ये सारे वर्ड्स
- 3:04:03सावित्रीबाई फुले से रिलेटेड हैं। लेकिन
- 3:04:05सावित्री नाम की बुक अरबिंदो ने लिखी है।
- 3:04:08बात याद रखना। ओके? वुमेन एजुकेशन पे बहुत
- 3:04:10ज्यादा काम किया। तो सबसे पहले अगर
- 3:04:11प्रायोरिटाइज कभी करना पड़े तो आप इनके
- 3:04:14वुमेन एजुकेशन वाले काम के लिए हाथ
- 3:04:15उठाएंगे। देन शेड्यूल्ड कास्ट के लिए भी
- 3:04:17इन्होंने काम किया है। फर्स्ट फीमेल टीचर
- 3:04:19भी इनको बोला जाता है। शी वाज़ सो
- 3:04:21डेडिकेटेड कि लोग इनके ऊपर जो है कचरा और
- 3:04:24पता नहीं कुछ-कुछ कीचड़-विचड़ फेंक देते
- 3:04:25हैं। तो ये एक साड़ी अपने पॉलिथीन में पैक
- 3:04:28करके ले जाती थी और स्कूल जाके साड़ी चेंज
- 3:04:30करके फिर ये बच्चों को पढ़ाती तो शी वाज़ सो
- 3:04:33डेडिकेटेड टुवर्ड्स हर वर्क। इनकी पढ़ाई
- 3:04:36इनका भी बाल हुआ हुआ था। लेकिन इनके
- 3:04:37हस्बैंड ने इनको पढ़ाया था और उसके बाद इन
- 3:04:40दोनों ने काफी अच्छा काम किया। ज्योतिबा
- 3:04:42फुले और उनकी वाइफ। ठीक है? सावित्रीबाई
- 3:04:44फुले उन्होंने पहला स्कूल भी शुरू किया
- 3:04:45भिड़ेवाड़ा में पुणे में। उन्होंने एक
- 3:04:48ब्राह्मण विडो से एक बच्चे को भी अडॉप
- 3:04:50किया। यशवंत राव जो बाद में जाके डॉक्टर
- 3:04:52बना। शी वाज़ द शी वाज़ दैट टाइप ऑफ़ लेडी जब
- 3:04:56उन्होंने अपने हस्बैंड की चिता को खुद आग
- 3:04:58दी थी। ठीक है? इनकलिटीज जो कास्टिज्म पे
- 3:05:01बेस्ड है उनके रिमूवल पे ये काम कर रही
- 3:05:03थी। तो ये सारे जो स्टिग्मा वाली चीजें
- 3:05:06हैं उन पे काम कर रही थी। पॉलिटिक्स से
- 3:05:08लेना देना नहीं है वो ध्यान रखो और फर्स्ट
- 3:05:10फीमेल टीचर इनको बोला जाता है। ओके?
- 3:05:14जोहान एमोस कॉमिनस ये आपके लिए एडिशनल
- 3:05:17इनेशन है जी जो आप खुद पढ़ सकते हो। ठीक
- 3:05:20है? एक चीज़ द ग्रेट डैक्टिक। सो ये बुक को
- 3:05:24होता है ना मैच द फॉलोइंग में कई बार पूछी
- 3:05:27गई है तो आपको बस ये आईडिया होना चाहिए
- 3:05:28बाकी आप इसकी रीडिंग ले लेना ओके एडिशनल
- 3:05:31इनेशन है ये ठीक है जॉन ये कॉमिनस की और
- 3:05:35इन्होंने जो है अलग-अलग छह वो स्टेजेस
- 3:05:38होती है ना इन्होंने सिक्स इयर्स ऑफ़
- 3:05:39स्कूलिंग जो है वो यहां पे मेंशन की थी
- 3:05:42क्योंकि बच्चे वो मदर के लैब से ही शुरू
- 3:05:43हो रही है चीजें तो बट उसके बाद क्या
- 3:05:45रहेंगी चीजें तो इनफेंसी के थ्रू देन
- 3:05:47सेंसेस के थ्रू सिखाना ठीक है एक ये भी
- 3:05:50इंपॉर्टेंट है फर्स्ट पिक्चर बुक जो है
- 3:05:52बच्चों के है वर्ल्ड इन पिक्चर वो भी काफी
- 3:05:54फेमस है जिसमें बर्ड्स और एनिमल्स की
- 3:05:56पिक्चर हैं ताकि बच्चे सीख पाएं बेटर
- 3:05:58तरीके से। ओके? देन जॉन डूई वेरी फेमस जो
- 3:06:01हमने ऊपर भी डिस्कस किए थे। ठीक है? सो
- 3:06:03जॉन डूई बहुत फेमस हैं। जी। अ प्रगमेटिस्ट
- 3:06:06हैं। प्रेग्मिज़्म में हमने इनको पढ़ा था।
- 3:06:08स्पेशलाइज़ स्कूल एक स्पेशलाइज़ सोशल
- 3:06:10इंस्टीट्यूशन और मिनिएचर सोसाइटी स्कूल को
- 3:06:12इन्होंने बोला है। ये ट्रेडिशनल सिस्टम जो
- 3:06:14स्ट्रिक्ट डिसिप्लिन का है उसके अगेंस्ट
- 3:06:16हैं। इन्होंने एक्सप्रेस किया कॉन्सेप्ट
- 3:06:18ऑफ़ टीचिंग को एक इक्वेशन के थ्रू। टीचिंग
- 3:06:21इज लर्निंग एज सेलिंग इज टू बाइंग। सो
- 3:06:24टीचिंग और लर्निंग ऐसे हैं जैसे खरीदना और
- 3:06:26बेचना। ऑलदो ये स्टेटमेंट इन जनरल बहुत
- 3:06:28गलत साउंड करता है। लेकिन ये स्टेटमेंट
- 3:06:30अगर किसने दिया पूछा जाए तो जॉन डूई ने
- 3:06:32दिया। ओके? स्कूल और सोसाइटी बीइंग थ्री
- 3:06:35लेक्चर्स ये जॉन डूई का पहला काम है। वर्क
- 3:06:38ऑफ लेंथ ऑन एजुकेशन। सो ये बहुत बड़ा
- 3:06:41अच्छा काम है इनका। देन डेमोक्रेसी एंड
- 3:06:43एजुकेशन भी इन्होंने लिखा है। ये मेन जो
- 3:06:45एम्स हैं एजुकेशन के वो बोलते हैं कि
- 3:06:47वैल्यू क्रिएट करनी है। मैक्सिमम ग्रोथ
- 3:06:49होनी चाहिए। सोशल एफिशिएंसी पे फोकस करना
- 3:06:51है। एक्सपेरिमेंटलिस्ट बनाना है। उसको
- 3:06:53लाइफ के लिए प्रिपेयर करना है। सो ये
- 3:06:55आउटलाइन भी करते हैं। ये तीन में डिवाइड
- 3:06:58करते हैं। एक प्ले पीरियड, स्पॉनटेनियस
- 3:07:00अटेंशन का पीरियड और आपका रिफ्लेक्टिव
- 3:07:02अटेंशन का पीरियड। तो ये एजुकेशन की स्कीम
- 3:07:04एक तरीके से इन्होंने दी थी। ठीक है? देन
- 3:07:07क्रिटिसिज्म भी बहुत मिला क्योंकि ये
- 3:07:10प्रेजेंट क्रिटिसिज्म अगर हम देखें इनके
- 3:07:12थॉट्स पे तो इन्होंने ये वाली बातें इनकी
- 3:07:15चीज़ समझ आती है कि ये लर्निंग बाय डूइंग
- 3:07:16डायरेक्ट एक्सपीरियंस इन चीजों पे फोकस
- 3:07:18करते हैं। ठीक है? तो एक्सपेरिमेंटल है
- 3:07:20सारी चीजें बट आप हर चीज को एक्सपेरिमेंट
- 3:07:22के साथ नहीं सीख सकते। इन्होंने ट्रुथ और
- 3:07:24वैल्यूस जो है उसकी इटरर्निटी क्योंकि
- 3:07:26इन्होंने बोला था ना हमने प्रगमेटिज्म में
- 3:07:28बात की थी चीजें चेंजिंग में है। कोई भी
- 3:07:30चीज़ इटरनल नहीं है। डायनेमिक है। ट्रुथ जो
- 3:07:33है वो मेकिंग में है। रियलिटी मेकिंग में
- 3:07:35है। तो ये ट्रुथ और वैल्यू की इटरनल चीज़
- 3:07:37को एक्सेप्ट नहीं कर रहे हैं।
- 3:07:39मटेरियलिस्टिक बायसनेस देखने को मिली। एम
- 3:07:41ऑफ़ एजुकेशन नहीं है क्योंकि ये डायनेमिक
- 3:07:43बोल रहे हैं। इंडिविजुअल डिफरेंसेस पे
- 3:07:45बहुत ज्यादा एम्फेसिस है। लिमिटेशन होती
- 3:07:48है लर्निंग बाय डूइंग कि आप हर एक चीज़
- 3:07:49लर्निंग बाय डूइंग से प्रैक्टिकल से नहीं
- 3:07:51करवा सकते। रिलीजियस एजुकेशन को इन्होंने
- 3:07:54नेगलेक्ट कर दिया। प्रोजेक्ट मेथड इन
- 3:07:56प्रैक्टिकल है बहुत जगह जो इन्होंने
- 3:07:58कंसीडर नहीं किया। टीचर के ऊपर बहुत बर्डन
- 3:08:00आ जाएगा। बिकॉज़ टीचर को सारी चीजें अरेंज
- 3:08:03करनी पड़ेंगी, देखनी पड़ेंगी। सो टीचर हैवली
- 3:08:05बर्डन हो जाएगा। अगर सब चीजें लर्निंग बाय
- 3:08:08डूइंग और प्रोजेक्ट मेथड से होंगी तो। ये
- 3:08:10प्रेजेंट पे तो फोकस कर रहे हैं बट ये
- 3:08:11फ्यूचर को नेगलेक्ट कर रहे हैं। ओके? और
- 3:08:14ये सिर्फ प्रैक्टिकलिज्म पे फोकस कर रहे
- 3:08:16हैं। वो भी कई जगह पे वही सेम जैसे
- 3:08:18प्रोजेक्ट मेथड भी प्रैक्टिकल हर जगह नहीं
- 3:08:21हो सकता। सेम लर्निंग बाय डूइंग। सो
- 3:08:23प्रैक्टिकिटी पे बहुत ज्यादा फोकस है जो
- 3:08:25कि कई बार पॉसिबल नहीं होता। ओके? रूसो
- 3:08:28अगेन बहुत फेमस हैं। रूसो की एमील बुक
- 3:08:31मैंने बताई भी थी आपको। को यह फादर ऑफ़
- 3:08:33फ्रेंच रिवोल्यूशन भी इनको बोला जाता है।
- 3:08:36ये तो इनका जो आईडिया है वो नेचुरल स्टेट,
- 3:08:38नेचुरल, नेचुरल मैन, नेचुरल सिविलाइज़ेशन,
- 3:08:41नेचुरलिस्ट उसके ऊपर फोकस कर रहे हैं ये।
- 3:08:43ठीक है? तो सोसाइटी आर्टिफिशियल है।
- 3:08:45अननेचुरल प्रोडक्ट है, फुल ऑफ़ एिल्स है।
- 3:08:48जब तक चीजें नेचर के हाथ में है, बढ़िया
- 3:08:50है। जैसे ही सोसाइटी के हाथ में जाएंगी,
- 3:08:52चीजें गड़बड़ा जाएंगी। दैट्स व्हाई ही टूक
- 3:08:55दैट वर्ड नेगेटिव एजुकेशन। ठीक है? एमील
- 3:09:00नाम की बुक है जिसमें इन्होंने पांच
- 3:09:01स्टेजेस में करिकुलम डिवाइड किया है।
- 3:09:04करिकुलम इनफेंसी के लिए, चाइल्डहुड के
- 3:09:05लिए, अलेसेंस के लिए, यूथ के लिए और वुमेन
- 3:09:07के लिए एक अलग से सेक्शन इन्होंने रखा है।
- 3:09:09इनकी जो बुक सोशल कॉन्ट्रैक्ट उन्होंने
- 3:09:12बोला कि मैन जो है वो फ्री पैदा हो रहे
- 3:09:14हैं। बट एवरीवेयर ही इज़ इन चेस। ठीक है?
- 3:09:17तो वो सोसाइटी में आके बंधनों में बंधे
- 3:09:19हैं ना। तो सोशल कॉन्ट्रैक्ट नाम की बुक
- 3:09:21में इन्होंने मेंशन किया। इनकी लास्ट बुक
- 3:09:23कंफेशन थी। ये बात आप याद रख सकते हो।
- 3:09:25ओके? एजुकेशन अगेन नेचर पे फोकस कर रहे
- 3:09:28हैं। नेचर के पास रहेंगे। बच्चा अपने आप
- 3:09:32सीख जाएगा। डिस्कवरी से ही चीजें सीखेंगे।
- 3:09:35देन आप उसको पनिशमेंट या रिवॉर्ड मत दो।
- 3:09:37वो नेचुरली सीखेंगे। ठीक है?
- 3:09:39कॉन्सिक्वेंसेस से सीखेंगे। वो सारी चीजों
- 3:09:41पे फोकस किया। कैरेक्टरिस्टिक्स क्या
- 3:09:43रहेंगी? क्योंकि इन्होंने नेगेटिव एजुकेशन
- 3:09:45का कांसेप्ट दिया है। तो नो पॉजिटिव
- 3:09:47एजुकेशन देन आपका कोई टाइम सेविंग नहीं हो
- 3:09:49रही है इसके अंदर। कोई बुक लर्निंग नहीं
- 3:09:52हो रही है। कोई हैबिट नहीं बनवाई जा रही
- 3:09:53है। कोई मोरल एजुकेशन नहीं दी जा रही है।
- 3:09:55कोई ट्रेडिशनल मेथड ऑफ टीचिंग जो है वो
- 3:09:57नहीं है। यहां कोई फॉर्मल डिसिप्लिन नहीं
- 3:10:00है। तो जो जो चीजें हम करते आए हैं वो
- 3:10:02एजुकेशन एक तरीके से पॉजिटिव है। और अब जो
- 3:10:06ये बात कर रहे हैं ये उससे उलट बात कर रहे
- 3:10:08हैं। तो ये ये वाली नेगेटिव एजुकेशन है
- 3:10:09जिसमें वो बैक टू नेचर बच्चे को सीखने दो।
- 3:10:12नेचुरल इंपल्ससेस से सीखने दो। उस चीज के
- 3:10:15ऊपर ज्यादा फोकस करते हैं। ठीक है जी।
- 3:10:19देन फदर अगर बात करें तो यह जो है इनकी
- 3:10:22फेमस राइटिंग्स हैं। इस फेमस राइटिंग में
- 3:10:24एमील और कंसर्निंग एजुकेशन यह तो याद हो
- 3:10:27ही आपको। उसके अलावा जो सोशल कॉन्ट्रैक्ट
- 3:10:29है, सोशल कनंफेशन है, सोशल कंफेशन नहीं
- 3:10:32कंफेशन ना? हां कंफेशन। तो ये बुक्स आप
- 3:10:34याद रख सकते हैं। ओके? देन है जी फ्रेडरच
- 3:10:38फ्रोबल। ठीक है? सो इनका हमारे सिलेबस में
- 3:10:41तो नहीं है ये बट मैंने थोड़ा सा मेंशन कर
- 3:10:44दिया है क्योंकि कई बार आ जाती हैं चीजें।
- 3:10:46ठीक है? फर्स्ट किंडरगार्टन की बात
- 3:10:48इन्होंने की, सेल्फ एक्टिविटी की बात
- 3:10:49इन्होंने की। ठीक है? फर्स्ट लॉ ऑफ़ दिस
- 3:10:51इंस्टीट्यूशन। तो सेल्फ एक्टिविटी ऑफ़
- 3:10:53माइंड कि बच्चे खुद सीखें, खेल के सीखें।
- 3:10:55प्ले एक प्यरेस्ट फॉर्म है। ठीक है?
- 3:10:57फ्रोबल का केजी सेंटर्ड जो किसके अराउंड
- 3:11:01है? तीन एलिमेंट्स के अराउंड कि वो करके
- 3:11:03सीखें। ठीक है? प्ले मटेरियल्स जो है वो
- 3:11:05दो टाइप के हैं। गिफ्ट या ऑक्यूपेशन। देन
- 3:11:07ऑक्यूपेशन में आपकी सीविंग, व्यूविंग ये
- 3:11:10सारी चीजें आ जाएंगी जिससे आपको ऑक्यूपेशन
- 3:11:12भी मिलेगा। ओके? देन है इनकी बुक है जी
- 3:11:15एजुकेशन ऑफ मैन वो आपने ध्यान रखनी है।
- 3:11:18ठीक है? ये इनकी और बाकी पब्लिकेशन भी है
- 3:11:20जो किंडरगार्टन के अराउंड बच्चों के
- 3:11:22अराउंड हैं वो आप ध्यान रख सकते हो। देन
- 3:11:24है हेनरीच पिस्टोलॉजी अगेन ये भी बहुत
- 3:11:27ज्यादा नहीं पूछे जाते हैं लेकिन इनकी बुक
- 3:11:29पूछी गई है। हाउ जर्ड टीचेस हर चिल्ड्रन।
- 3:11:32ये इनकी बुक है कि कैसे वो पढ़ाती हैं। सो
- 3:11:34एक मैनुअल इन्होंने मदर्स के लिए एक तरीके
- 3:11:36से लिखी। ठीक है? देन एम ऑफ़ एजुकेशन जो है
- 3:11:40इनके अकॉर्डिंग क्या था? हार्मोनस
- 3:11:42डेवलपमेंट ऑफ़ ऑल पावर्स। तो ये ओवरऑल
- 3:11:44होलिस्टिक डेवलपमेंट की बात कर रहे हैं।
- 3:11:45चाइल्ड सेंटर्ड एजुकेशन होनी चाहिए। रोल
- 3:11:48के मदर पे काफी एम्फसाइज़ जो है वो
- 3:11:50पेस्टोलॉजी ने किया है। गेम्स में भी किया
- 3:11:53है कि बच्चे खेल खेल में सीख जाएंगे।
- 3:11:55मारिया मॉन्टेसरी अगेन वेरी इंपॉर्टेंट।
- 3:11:57मारिया मॉनंटेसरी के तीन मेन प्रिंसिपल
- 3:11:59हैं। आजकल मेरे फील्ड में तो बहुत बार आता
- 3:12:01है। मे बी अभी बच्ची है मेरे तो उस वजह से
- 3:12:04मैं कुछ देखती होंगी ऐसा जिसकी वजह से
- 3:12:05मेरे रील्स में कई बार आता है कि बच्चे
- 3:12:09हमारी मॉनटेसरी
- 3:12:11टॉयज़ मॉनंटेसरी टॉयज़ करके जो एड्स आते
- 3:12:13हैं। ठीक है? तो रिस्पेक्ट फॉर चाइल्ड
- 3:12:15एनवायरमेंट प्रिपेयर करो। स्पेशल मटेरियल
- 3:12:18जो है वो यूज़ करो चीजों को बेटर करने के
- 3:12:20लिए। ओके? सो ये बच्चों को फ्रीडम देना
- 3:12:22चाह रहे हैं कि वो अपने आप एक्सप्लोर करें
- 3:12:24चीजों को। सो ये कलेक्टिव मेथड ऑफ़ टीचिंग
- 3:12:27के अगेंस्ट है। इंडिविजुअलिज्म पे
- 3:12:29इंडिविजुअल इंस्ट्रशंस पे थोड़ा सा ज्यादा
- 3:12:31फोकस करते हुए नज़र आएंगी। ठीक है? सेंसेस
- 3:12:33आर द गेटवेज़ ऑफ़ नॉलेज। इस पे फोकस किया।
- 3:12:35फर्स्ट सिक्स इयर्स जो है वो बहुत
- 3:12:37क्रूशियल पीरियड होता है। अह आप उनको
- 3:12:39बोलते है ना डेवलप्ड उन्होंने अपने खुद के
- 3:12:41एजुकेशनल मटेरियल्स डेवलप किए। टीचिंग
- 3:12:44मेथोडोलॉजीस डेवलप की जो इन इस इस
- 3:12:46आस्पेक्ट के ऊपर डेवलप की। ठीक है? देन
- 3:12:49बायपोलर ट्राइपोलर की बात मैंने आपको पहले
- 3:12:51भी बता दी थी। सो ट्राइपोलर में
- 3:12:53सोशियोलॉजिकल आस्पेक्ट पे ज्यादा फोकस है
- 3:12:55जो जॉन डूई ने किया है और बायपोलर में जो
- 3:12:57है वो सोशियोलॉजिकल आस्पेक्ट इंक्लूड नहीं
- 3:12:59किया है। तो ये जो बुक है एडम्स की
- 3:13:01इवोल्यूशन ऑफ एजुकेशनल थ्यरी उसमें बात की
- 3:13:03है बायपोलर प्रोसेस की और जॉन डूई का
- 3:13:06आस्पेक्ट जो है जो ट्राईपोलर प्रोसेस है
- 3:13:08वो एफेसाइज करता है सोशियोलॉजिकल व्यू
- 3:13:11पॉइंट पे। ठीक है जी। देन एक जॉन लॉक भी
- 3:13:13हैं जी। ये फिलॉसफर जो एक्सप्रेस करते हैं
- 3:13:16दैट आईडिया दैट सेंसेस आर नॉट ऑलवेज
- 3:13:18रिलायबल। ठीक है? सो दे ऑलवेज डिसीव ऑफन
- 3:13:21डिसीव्स अस विद सेंस इंप्रेशन समटाइ्स
- 3:13:25कॉन्फ्लिक्टिंग विद ईच अदर। तो ये जॉन लॉक
- 3:13:27का आईडिया है। बच्चे को आई थिंक ब्लैंक
- 3:13:29स्लेट भी जॉन लॉक ने ही बोला था। वो भी
- 3:13:31आपको पता ये क्रोनोलॉजी है जी। आई थिंक
- 3:13:35अभी रिसेंटली किसी तो ईयर में पूछी गई है
- 3:13:37कहीं तो। तो इसलिए मैंने ऐड कर दी है यहां
- 3:13:40पे। एक से लेके 11 ये आपके सिलेबस वाले ही
- 3:13:43लोग हैं जो 11 मेंशन है हमने। किए यहां पे
- 3:13:4615 16 हैं। बट यहां पे ये 11 की तो
- 3:13:48क्रोनोलॉजी आपको पता हो कि कौन से का जन्म
- 3:13:51कब हुआ था और कब जो है कब मत याद रखो
- 3:13:54सीक्वेंस याद रख लो कि कौन किसके बाद था।
- 3:13:57ओके?
- 3:13:59अब बात करेंगे हम नेशनल वैल्यूज़ की। ये
- 3:14:01हमारा कॉनसेप्चुअल लेवल पे लास्ट टॉपिक
- 3:14:03रहेगा। कुछ इंपॉर्टेंट चीजें, कुछ
- 3:14:05इंपॉर्टेंट आर्टिकल्स हमें यहां डिस्कस
- 3:14:07करने हैं। तो सबसे पहले हम शुरू करते हैं
- 3:14:09जो वर्ड्स यहां मेंशन हैं। जैसे सोशलिज्म
- 3:14:12है, सेकुलरिज्म है, जस्टिस है, लिबर्टी
- 3:14:14है, डेमोक्रेसी है। बहुत बेसिक से वर्ड
- 3:14:16हैं। बट इनसे रिलेटेड कई बार कुछ
- 3:14:18आर्टिकल्स, कुछ एक्ट्स वो पूछ लिए जाते
- 3:14:20हैं जो मैं आपको यहां पे बता दूंगी।
- 3:14:22सोशलिज्म तो मेजर कॉन्टेक्स्ट तो यही होता
- 3:14:24है कि जो इनकलिटीज़ हैं सोसाइटी के लेवल
- 3:14:27पे, सोशलिज़्म में हम उनको कम करने की बात
- 3:14:29करते हैं। चाहे वो वेल्थ के लेवल पे हो,
- 3:14:31स्टेटस के लेवल पे हो, अपॉर्चुनिटीज़ के
- 3:14:33लेवल पे हो। ठीक है? तो एक वेलफेयर स्टेट
- 3:14:35मॉडल के थ्रू हम सोशलिज्म में फोकस करें।
- 3:14:37जैसे मार्क्सिज्म में हम फोकस कर रहे हैं
- 3:14:40कि हमारा मेन ऐ जो है वो कम्युनिज्म की
- 3:14:42तरफ है। सारी चीजें सही हो। सबको इक्वल
- 3:14:45ओपोरर्चुनिटीज मिले। तो सॉर्ट ऑफ वही चीज
- 3:14:47यहां देखने को मिलेगी। उसके लिए एजुकेशनल
- 3:14:50लेवल पे अगर हम बात करें तो इक्वल
- 3:14:51अपॉर्चुनिटीज़ मिले। आरटीई एक्ट हम पढ़ेंगे
- 3:14:54नेक्स्ट क्लास में। ठीक है? आरटीई एक्ट के
- 3:14:56साथ। आरटीई एक्ट में पर्टिकुलरली 25%
- 3:14:58सीट्स जो है वो इकोनॉमिकली वीकर सेक्शंस
- 3:15:00के लिए रिजर्व हैं प्राइवेट स्कूल्स में।
- 3:15:03ओके? सो वो सारी चीजें इक्वलिटी लाने की
- 3:15:05कोशिश पे हैं। ओके? देन है सेकुलरिज्म।
- 3:15:08सेकुलरिज्म में सर्वधर्म सर्वधर्म समभाव
- 3:15:11यानी सब धर्मों को इक्वली रिस्पेक्ट देना।
- 3:15:14ठीक है? सो इस चीज के ऊपर ज्यादा फोकस
- 3:15:16होता है कि अगर मैं सेकुलर हूं दैट मींस
- 3:15:18मैं किसी एक पर्टिकुलर धर्म को नहीं फोकस
- 3:15:21कर रही हूं। मैं सबको इक्वल रिस्पेक्ट
- 3:15:23देती हूं। ओके? इसके लिए भी हमारे
- 3:15:25आर्टिकल्स हैं बहुत सारे। जैसे आर्टिकल 28
- 3:15:27जिसमें स्टेट फंडेड इंस्टीटशंस आर
- 3:15:30प्रोहिबिटेड फ्रॉम इंपार्टिंग रिलीजियस
- 3:15:32इंस्ट्रक्शंस। यानी जो स्टेट फंडेड है मान
- 3:15:35लो स्कूल है जो स्टेट फंडेड है या जो एडेड
- 3:15:38है स्टेट जो है कुछ एक स्कूल्स को कुछ
- 3:15:40पोर्शन एड देता है ना सो उनमें भी
- 3:15:43रिलीजियस इंस्ट्रक्शन आप नहीं दे सकते हो।
- 3:15:45ठीक है? तो वो चीजें यहां पे हैं इक्वलिटी
- 3:15:47लाने के लिए। आर्टिकल 30 जो है उसमें जो
- 3:15:49रिलीजियस और लिंग्विस्टिक माइनॉरिटीज हैं
- 3:15:51उनके पास राइट है कि वो अपने एजुकेशनल
- 3:15:54इंस्टीटशंस अलग से खोल सकते हैं। राइट? सो
- 3:15:56ये सारा फोकस सेकुलरिज्म पे रहेगा। इंडिया
- 3:15:58एक सेकुलर कंट्री है एज़ पर द
- 3:16:00कॉन्स्टिट्यूशन। सो कोई भी एक पर्टिकुलर
- 3:16:03धर्म को बढ़ावा देने के लिए हम कोई चीज
- 3:16:05नहीं करेंगे। स्पेसिफिकली एक को। ओके?
- 3:16:08सबको आप देने के लिए चीजें कर सकते हो।
- 3:16:10सबको बढ़ावा दे सकते हो। सबको अच्छा बोल
- 3:16:12सकते हो। बट किसी एक के लिए आप काम नहीं
- 3:16:14करोगे। वो ध्यान रखना है जस्टिस जब
- 3:16:17प्रएमबल आता है तो प्रियमबल में सोशल
- 3:16:19इकोनॉमिक और पॉलिटिकल जस्टिस की बात आती
- 3:16:21है। यानी तीन टाइप के जस्टिस का डिस्कशन
- 3:16:23होता है। ठीक है? तो जस्टिस मतलब इक्वलिटी
- 3:16:25की ही बात हो रही है एक तरीके से जिसमें
- 3:16:27डिस्क्रिमिनेशन ना हो। जस्टिस मतलब न्याय
- 3:16:29जहां डिस्क्रिमिनेशन नहीं है वहां न्याय
- 3:16:31हो ही जाएगा। राइट? तो ऐसे ही एक आर्टिकल
- 3:16:3346 का प्रोविज़ है जिसमें एजुकेशनल
- 3:16:36इंटरेस्ट जो एससीज़, एसटीज़ या अदर वीकर
- 3:16:38सेक्शन है वो प्रोटेक्ट करता है सोशल
- 3:16:41इनजस्टिस से। सो ये प्रमोट करता है
- 3:16:43एजुकेशनल इंटरेस्ट। इन इन सेक्शंस का। सो
- 3:16:46ये बात आर्टिकल 46 में मेंशन है। आपको
- 3:16:48आर्टिकल 46 भी ध्यान हो। ओके? लिबर्टी और
- 3:16:51फ्रीडम तो बहुत सारे हैं। हमारे पास
- 3:16:53आर्टिकल फ्रीडम के भी हैं। बहुत सारे
- 3:16:55आर्टिकल 19, 20, 21, 22 अ 22
- 3:17:00तक। ठीक है? तो ये आर्टिकल्स में फ्रीडम
- 3:17:03और लिबर्टी से ही रिलेटेड बातें हुई हैं।
- 3:17:05ठीक है? 19 में स्पेशली सारी फ्रीडम की
- 3:17:07बातें हैं। ठीक है? ऐसे ही आर्टिकल 29 जो
- 3:17:10है तो लिबर्टी जब बात करते हैं हम तो
- 3:17:12लिबर्टी ऑफ़ थॉट, एक्सप्रेशन, बिलीफ, फेथ
- 3:17:14एंड वरशिप। सो ये पांच तरीके की लिबर्टी
- 3:17:17की बात होती है। ये बात आपने ध्यान रखनी
- 3:17:18है। ठीक है जी? देन आपका आर्टिकल 29 है
- 3:17:21ये। ठीक है? इट आल्सो प्रोटेक्ट्स द राइट
- 3:17:23ऑफ सिटीज़ंस टू कंजर्व डिस्टिंक्ट
- 3:17:25लैंग्वेज, स्क्रिप्ट्स एंड कल्चरर्स। सो
- 3:17:28आर्टिकल 29 भी इंपॉर्टेंट है। देन
- 3:17:30डेमोक्रेसी वर्ड है हमारे पास। डेमोक्रेसी
- 3:17:32में क्या है? पार्टिसिपेशन है। ठीक है?
- 3:17:34सबसे डिस्कस की जा रही हैं चीजें। सो
- 3:17:36डेमोक्रेसी जो है वो पॉलिटिकल सिस्टम में
- 3:17:38की तरह भी में भी फंक्शन करती है और सोशल
- 3:17:40लेवल पे भी। ओके? ऐसे ही क्लास में भी हम
- 3:17:42कई बार बोलते हैं डेमोक्रेटिक होनी चाहिए
- 3:17:44चीजें। यानी बच्चों से डिस्कस करके चीजें
- 3:17:46होनी चाहिए। सो डेमोक्रेसी एनकरेज करती है
- 3:17:49डायलॉग को, शेयरर्ड डिसीजन मेकिंग को,
- 3:17:52लीडरशिप स्किल्स बच्चों के अंदर हम डेवलप
- 3:17:54कर पाएं। उन चीजों पे फोकस करती है
- 3:17:56डेमोक्रेसी। ओके? देन इक्वलिटी है जी।
- 3:17:59इक्वलिटी ऑब्वियसली इक्वल प्रोटेक्शन ऑफ़
- 3:18:01लॉ इक्वल अपॉर्चुनिटीज़ प्रोवाइड करना,
- 3:18:03डिस्क्रिमिनेटरी प्रैक्टिससेस रिमूव करना।
- 3:18:05सो ये आर्टिकल 14 और 15 में बेसिकली
- 3:18:08आर्टिकल 14, 15, 16, 17, 18 ये राइट टू
- 3:18:11इक्वलिटी के ही आर्टिकल्स हैं। जब हम
- 3:18:13फंडामेंटल राइट्स पढ़ते हैं। ओके? मैं अभी
- 3:18:15करवा दूंगी आपको। तो आर्टिकल 14, 15 में
- 3:18:17तो क्लियरली 14 इक्वलिटी बिफोर लॉ कि आप
- 3:18:20कानून की नजरों में सब बराबर हो। आर्टिकल
- 3:18:2215 बात करता है कि प्रहबि प्रोहिबिट करता
- 3:18:25है कि डिस्क्रिमिनेशन नहीं होना चाहिए।
- 3:18:26किस बेस पे? रिलीजन, रेस, कास्ट, सेक्स और
- 3:18:29प्लेस ऑफ़ बर्थ के बेस पे डिस्क्रिमिनेशन
- 3:18:31नहीं होना चाहिए। ऑलदो इसी आर्टिकल में
- 3:18:33फर्दर एक्सेप्शनंस भी हैं कि वुमेन के लिए
- 3:18:35आप रिजर्व कर सकते हो चीजें एससी एसटीज के
- 3:18:37लिए रिजर्व कर सकते हो। सो वो रिजर्वेशंस
- 3:18:40भी मेंशन है वो एक्सेप्शनंस हैं इसके कि
- 3:18:43कॉन्स्टिट्यूशनल प्रोविज़ंस जो हमें पता
- 3:18:45होने चाहिए जो हमें काम आएंगे जब हम
- 3:18:47क्वेश्चन सॉल्व करेंगे। ओके? सो आर्टिकल
- 3:18:4921 ए है जो बात करता है 45 में ही चीजें
- 3:18:52थी सिक्स छ से 14 साल की एजुकेशन फ्री एंड
- 3:18:55कंपलसरी वो आर्टिकल 21 ए में डाल दी अब
- 3:18:58हमने। ठीक है? है फंडामेंटल राइट बनाते
- 3:19:00हुए आर्टिकल और ये ए में कब डाली थी? 86
- 3:19:03कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट एक्ट के थ्रू
- 3:19:05डाली 2002 में। ठीक है? देन आर्टिकल 30 है
- 3:19:09जो माइनॉरिटीज के राइट को प्रोटेक्ट कर
- 3:19:11रहा है। आर्टिकल 350 ए है जो मदर टंग में
- 3:19:14प्राइमरी स्टेज पे मदर टंग में
- 3:19:15इंस्ट्रक्शंस फैसिलिटेट करने पे फोकस कर
- 3:19:18रहा है। आर्टिकल 51 ए के ठीक है? ठीक है?
- 3:19:20ये फंडामेंटल ड्यूटीज में आता है। तो
- 3:19:22फंडामेंटल ड्यूटी में 11वीं ड्यूटी जो कि
- 3:19:25इसी दौरान 86 कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट
- 3:19:27एक्ट के दौरान 2002 में इंट्रोड्यूस की गई
- 3:19:30थी कि छ से 14 साल की एजुकेशन फ्री होनी
- 3:19:32चाहिए। ये फ्री है। बट बच्चे पेरेंट्स की
- 3:19:35ड्यूटी है कि वो प्रोवाइड करवाएं। बच्चे
- 3:19:37को स्कूल तो भेजें कम से कम। ओके? देन
- 3:19:39लैंग्वेज से रिलेटेड कई बार क्वेश्चन आ
- 3:19:41जाते हैं। तो अपने पार्ट 17 में लैंग्वेजज़
- 3:19:44मेंशन है। आर्टिकल 343 से लेके 351 तक।
- 3:19:47ओके? कोई भी नेशनल लैंग्वेज नहीं है जी
- 3:19:49हमारी लेकिन आर्टिकल 351 हिंदी के प्रमोशन
- 3:19:53पे फोकस करता है। ओके? सो एज अ मीडियम ऑफ
- 3:19:56एक्सप्रेशन हमें हिंदी को प्रमोट करना है।
- 3:19:58ये बात आर्टिकल 351 में मेंशन है। अदरवाइज
- 3:20:01कोई भी नेशनल लैंग्वेज नहीं है हमारी।
- 3:20:04ओके? जैसे फादर ऑफ नेशन जो है वो ऑफिशियल
- 3:20:07नहीं है गांधी जी। ऐसे ही कोई ऑफिशियल
- 3:20:09लैंग्वेज नहीं है हमारी नेशनल लेवल पे।
- 3:20:11ओके? कि आर्टिकल 343 जो है वो हिंदी जो कि
- 3:20:15देवनागरी स्क्रिप्ट में लिखी हुई है उसको
- 3:20:16ऑफिशियल लैंग्वेज मानते हैं और इंग्लिश को
- 3:20:19एसोसिएट ऑफिशियल लैंग्वेज। ऑलदो ये
- 3:20:21इंग्लिश जो है वो 15 साल के लिए ही बोली
- 3:20:23थी लेकिन 1963 में हमने इसको परमानेंटली
- 3:20:26ही एसोसिएट ऑफिशियल लैंग्वेज बना दिया। सो
- 3:20:28ऑफिशियल लैंग्वेज है हिंदी नेशनल लैंग्वेज
- 3:20:31नहीं है और इंग्लिश जो है वो एसोसिएट
- 3:20:33ऑफिशियल लैंग्वेज है। ओके? 345 जो है वो
- 3:20:37बोलता है कि हर एक को हर एक स्टेट को
- 3:20:39लीगली राइट है कि वो एक या उससे ज्यादा
- 3:20:41लैंग्वेज जो बोली जाती है उनके स्टेट में
- 3:20:44उसको अलोंग विद हिंदी अपनी ऑफिशियल
- 3:20:46लैंग्वेज बना सकते हैं। मल्टीलिंग्वलिटी
- 3:20:49बहुत सारी लैंग्वेजज़ एक साथ बहुत सारी
- 3:20:51लैंग्वेजज़ जो है वो एक कल्चर में होना
- 3:20:54जैसे इंडियन जो है वो लिंग्विस्टिक
- 3:20:56हेरिटेज का पार्ट आपको दिखेगा
- 3:20:58मल्टीलिंगटी। सो कल्चर एटीट्यूड जो
- 3:21:00लैंग्वेज की तरफ है वो मल्टीलिंगुअल है
- 3:21:03हमारा तो हमारा कंट्री भी मल्टीलिंग्वल
- 3:21:05में काउंट होता है। ओके? ये वो स्टेट्स
- 3:21:07हैं जी और ये वो ऑफिशियल लैंग्वेज हैं जो
- 3:21:09इन्होंने अडॉप्ट की हैं। अभी तक नहीं आया
- 3:21:11है एज अ क्वेश्चन बट कभी भी आए आई डोंट नो
- 3:21:14आ भी जाए। ठीक है? पोंडीचेरी की ऑफिशियल
- 3:21:16लैंग्वेज तमिल है। दमनदीव, चंडीगढ़,
- 3:21:19अंडमान बाकी सारी यूनियन टेरिटरीज की
- 3:21:21लैंग्वेज जो सेंटर की लैंग्वेज है यानी
- 3:21:23हिंदी और एसोसिएट लैंग्वेज आपकी इंग्लिश
- 3:21:25हो जाएगी। ओके? बाकी जो अरुणाचल प्रदेश,
- 3:21:27मिजोरम, मेघालय हैं उन्होंने कोई ऑफिशियल
- 3:21:29लैंग्वेज अडॉप्ट नहीं की है। तो इंग्लिश
- 3:21:31ही यूज़ होती है यहां ऑफिशियल लैंग्वेज के
- 3:21:33तौर पे। ठीक है? देन तीन तरीके की
- 3:21:36कैटेगरीज़ हैं जी लैंग्वेज में जो पूछ ली
- 3:21:38जाती हैं। शेड्यूल्ड लैंग्वेज है, रीजनल
- 3:21:41लैंग्वेज है और क्लासिकल लैंग्वेज है जो
- 3:21:43हम डिस्कस करेंगे। ओके? शेड्यूल्ड में आठ
- 3:21:47एट्थ शेड्यूल में जो लैंग्वेजज़ मेंशन है।
- 3:21:49यानी हमारे पास 12 शेड्यूल हैं जो हम अभी
- 3:21:51देखेंगे भी। सो आठवें शेड्यूल में
- 3:21:53लैंग्वेज मेंशन है। 14 लैंग्वेज 1950 में
- 3:21:56मेंशन थी। उसके बाद एक 21वें अमेंडमेंट के
- 3:22:00दौरान हमने 1967 में सिंधी को ऐड किया।
- 3:22:02फिर कॉनकरी, मणिपुरी, नेपाली को हमने 1992
- 3:22:06में ऐड किया। बोरो, संथली, मैथिली, डोगरी
- 3:22:08को 2003 में टोटल मिला के अब 22 लैंग्वेजज़
- 3:22:12हैं जो शेड्यूल्ड लैंग्वेजज़ हैं। ओके?
- 3:22:14रीजनल लैंग्वेजज़ बहुत सारी हैं। आपको रटने
- 3:22:16की जरूरत नहीं है। रीजनल लैंग्वेजज़ तो
- 3:22:18इनफैक्ट 1652 मदर टंग है। ये बात भी
- 3:22:21लैंग्वेज सेंसेस में बोली गई थी जो 1961
- 3:22:23में हुआ था। ओके? सो दो लोगों के अगर सेम
- 3:22:26फैमिली में भी रह रहे हैं तो भी उनकी मदद
- 3:22:28टंग डिफरेंट हो सकती है। मान लो एक इंटर
- 3:22:30रिलजन मैरिज है या एक इंटर व्हाटएवर इंटर
- 3:22:34लैंग्वेज मैरिज ही लगा लो। कोई तमिल है,
- 3:22:36कोई जो है आपका हिंदी नॉर्थ इंडियन से
- 3:22:39शादी हो गई। तो उन दोनों लोग जो एक फैमिली
- 3:22:41है अब हस्बैंड वाइफ उनकी मदद टंग डिफरेंट
- 3:22:44है। ओके? तो सेम फैमिली में भी डिफरेंट
- 3:22:46मदर टंग हो सकती है। दिस इज़ अ पॉसिबिलिटी।
- 3:22:48क्लासिकल लैंग्वेजज़ जो बहुत पुराने टाइम
- 3:22:50से जिनके लिए एक लिटरेचर मिल रहा है। हमें
- 3:22:53तीन-तीन यहां पे ऑप्शंस हैं हमारे पास।
- 3:22:55तीन ये कंडीशंस पूरी होंगी। उसको क्लासिकल
- 3:22:58लैंग्वेज बोला जाएगा। जिसमें जिस लैंग्वेज
- 3:23:00की एक हिस्ट्री हो रिटन लिटरेचर की जैसे
- 3:23:03संस्कृत है मान लो। ठीक है? या तमिल है
- 3:23:05उसमें 1500 2000 साल पहले भी हमें चीजें
- 3:23:07मिल रही हैं। ठीक है? कोई एंशिएंट लिटरेचर
- 3:23:10या कोई बड़ी ऐप एक ऐसे लिखी गई हो उस
- 3:23:12लैंग्वेज में जो कि एक वैल्यूुएबल रिसोर्स
- 3:23:14की तरह काम करे। लैंग्वेज जो ओरिजिनल
- 3:23:16लिटरेसी ट्रेडिशन हो किसी लैंग्वेज से
- 3:23:19बोरो ना की गई हो। सो ये तीन आस्पेक्ट हैं
- 3:23:21जिसके बेसिस पे हम क्लासिकल लैंग्वेज
- 3:23:23डिसाइड करते हैं। 11 क्लासिकल लैंग्वेज
- 3:23:25हैं। छह ये पहले से थी। 2004 5 8 2013 और
- 3:23:302014 में इंट्रोड्यूस हुई। अब 2024 में
- 3:23:33मराठी, पाली, प्राकृत, आसामीज़ और बंगाली।
- 3:23:36ये पांच लैंग्वेजज़ जो है वो 204 में ऐड
- 3:23:38हुई। टोटल मिला के अब 11 क्लासिकल
- 3:23:41लैंग्वेजज़ हैं। ओके जी? ये पार्ट्स हैं
- 3:23:43हमारे इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन के। 1 2 3 4
- 3:23:455 ऐसे करके छह तक। फर्दर सातवां पार्ट
- 3:23:49ओमिट आउट कर दिया। 18 पार्ट हैं ये। ठीक
- 3:23:51है? तो ये 18 नहीं भाई ज्यादा है। 20 22
- 3:23:56ठीक है? 22 22 पार्ट्स दिखा रखे हैं हमने
- 3:23:59यहां ना।
- 3:24:01टोटल 18 होते हैं यूजली मैं देखती हूं जब
- 3:24:04ठीक है यहां मेंशन है तो गलत नहीं है यह
- 3:24:06मैंने ठीक ही डाला है। ठीक है ओके देन आते
- 3:24:09हैं जी फंडामेंटल राइट्स मैं आपको बेसिक
- 3:24:10आईडिया दे रही हूं फंडामेंटल राइट हमने
- 3:24:12यूएस कॉन्स्टिट्यूशन से अडॉप्ट किए हैं।
- 3:24:14डायरेक्टिव प्रिंसिपल्स हमने आइरिश
- 3:24:15कॉन्स्टिट्यूशन से अडॉप्ट किए हैं और आपका
- 3:24:17फंडामेंटल ड्यूटीज हमने सोवियत
- 3:24:19कॉन्स्टिट्यूशन से अडॉप्ट किए हैं।
- 3:24:20इनफैक्ट हमारा जो कॉन्स्टिट्यूशन है कई
- 3:24:21बार उसको बैग ऑफ बोरोइंग्स भी बोलते हैं।
- 3:24:24यानी हमने सारे कहीं से अडॉप्ट कर करके
- 3:24:26सबकी अच्छी चीजें अपने कॉन्स्टिट्यूशन में
- 3:24:28डाल दी। ओके? तो ये सात फंडामेंटल राइट्स
- 3:24:30हैं जिसके अंदर जिसके अंदर ये जो
- 3:24:32प्रॉपर्टी वाला राइट है ये ओमिट आउट कर
- 3:24:34दिया गया बाद में। ठीक है? सो राइट टू
- 3:24:36इक्वलिटी, फ्रीडम, अगेंस्ट एक्सप्लइटेशन,
- 3:24:39राइट टू फ्रीडम ऑफ़ रिलिजन, कल्चरल एंड
- 3:24:41एजुकेशनल राइट। सो ये सारे राइट हैं।
- 3:24:43प्रॉपर्टी वाला राइट 44 कॉन्स्टिट्यूशनल
- 3:24:45अमेंडमेंट एक्ट के थ्रू डिलीट कर दिया
- 3:24:47गया। इसको लीगल राइट बना दिया गया 12वें
- 3:24:49पार्ट में डाल के। ओके? तो हमारे पास
- 3:24:51टेक्निकली अब छह ही फंडामेंटल राइट हैं।
- 3:24:53ये मैंने पूरे राइट्स डाल दिए हैं। जी।
- 3:24:55एक-एक आर्टिकल जो बात करता है जैसे ये
- 3:24:57इक्वलिटी के हैं, फ्रीडम के हैं। देन आपका
- 3:25:00एक्सप्लइटेशन के अगेंस्ट हैं। देन राइट टू
- 3:25:02फ्रीडम ऑफ रिलीजन है। कल्चरल और एजुकेशनल
- 3:25:05राइट्स हैं। देन राइट्स टू
- 3:25:06कॉन्स्टिट्यूशनल रेमेडीज़ हैं। कुछ एक हैं
- 3:25:08जो फंडामेंटल राइट्स जो सिटीज़ंस को
- 3:25:11अवेलेबल हैं। फॉरेनर्स को नहीं है। कुछ एक
- 3:25:13हैं जो सिटीज़ंस, फॉरेनर्स सबको अवेलेबल
- 3:25:15हैं। सिटीज़ंस। ठीक है? तो ये आर्टिकल्स
- 3:25:18मैंने यहां मेंशन कर दिए हैं। ये आपके
- 3:25:20डीपीएसपीस हैं डायरेक्टिव प्रिंसिपल्स ऑफ
- 3:25:22स्टेट पॉलिसीज। यानी स्टेट जब भी कोई
- 3:25:25पॉलिसी बनाएगा इन चीजों का ध्यान रखिएगा।
- 3:25:27जो आर्टिकल 45 में मेंशन था हमने उसको हटा
- 3:25:30के आर्टिकल 21 एस ए ए इंसर्ट कर दिया और
- 3:25:34उसके अंदर हमने ये चीज बोल दी कि भ छ से
- 3:25:3714 साल के एजुकेशन का ध्यान रखो। ओके सो
- 3:25:39वो चीज थी। देन है आपका ओके ओके ओके ओके
- 3:25:45ये फंडा ये आपको याद रखने की जरूरत नहीं
- 3:25:47है बस बी आर अंबेडकर जो हैं वो नोवेल
- 3:25:50फीचर्स बोलते हैं इनको ठीक है ग्रनविले
- 3:25:53ऑस्टिन जो है वो कॉन्शियंस ऑफ
- 3:25:55कॉन्स्टिट्यूशन बोलते हैं इनको जो सबसे
- 3:25:57लेटेस्ट अमेंडमेंट के थ्रू डीपीएसपी ऐड की
- 3:26:00गई दैट इज़ 43 बी यानी प्रमोशन ऑफ
- 3:26:03कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ ओके तो 45 46 याद रखो
- 3:26:0644 में यूसीसी है यूनिफॉर्म सिविल कोड फॉर
- 3:26:09द सिटीजन देन देन ये फंडामेंटल राइट और
- 3:26:11डायरेक्टिव प्रिंसिपल में डिफरेंस मेंशन
- 3:26:13है। जी मैंने कर ही दिया यहां पे। अब मेजर
- 3:26:15तो यही है कि डायरेक्टिव प्रिंसिपल्स जो
- 3:26:17हैं वो पॉजिटिव हैं। सारे अच्छे आस्पेक्ट
- 3:26:19में लिखे गए हैं। फंडामेंटल राइट्स
- 3:26:21नेगेटिव है। वो प्रोहिबिट करते हैं कि
- 3:26:23सरकार ये नहीं करेगी, ये नहीं करेगी, ये
- 3:26:24शोषण नहीं होगा, ये नहीं होगा। जस्टिसिएबल
- 3:26:27है। आप सुप्रीम कोर्ट में डायरेक्ट जा
- 3:26:29सकते हो। अगर आपके फंडामेंटल राइट्स का
- 3:26:30वलेशन हो रहा है तो डायरेक्टिव
- 3:26:32प्रिंसिपल्स के लिए आप नहीं जा सकते। ठीक
- 3:26:33है? जो फंडामेंटल राइट्स हैं वो पर्सनल और
- 3:26:36इंडिविजुअलिस्टिक आस्पेक्ट को प्रमोट कर
- 3:26:38रहे हैं। डायरेक्टिव प्रिंसिपल्स सबकी बात
- 3:26:40कर रहे हैं तो सोसाइटेरियन और सोशलिस्ट
- 3:26:42आस्पेक्ट को फोकस कर रहे हैं। ये मेन-मेन
- 3:26:44पॉइंट्स हैं। ओके? ये फंडामेंटल राइट्स
- 3:26:46हैं जी जो कि 1976 में सरदार स्वर्ण सिंह
- 3:26:49कमेटी ने रेकमेंडेशंस दी थी कि भ
- 3:26:51फंडामेंटल ड्यूटीज भी होनी चाहिए जब
- 3:26:53फंडामेंटल राइट्स हैं। सो ये 11 फंडामेंटल
- 3:26:56ड्यूटीज हैं। ये 10 फंडामेंटल ड्यूटीज जो
- 3:26:58है वो 42 कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट एक्ट
- 3:27:01में ऐड की गई थी। और उसके बाद जो है बाकी
- 3:27:04ये जो लास्ट ड्यूटी है ये आपके 86
- 3:27:07कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट एक्ट से हमने
- 3:27:092002 में ऐड की है। ओके? यही था बेसिक
- 3:27:12सारा का सारा। ये शेड्यूल्स हैं आखिरी
- 3:27:14में। फर्स्ट शेड्यूल में सारी की सारी
- 3:27:16यूनियन, टेरिटरी, स्टेट सब मेंशन हैं।
- 3:27:19सेकंड शेड्यूल में आपके पास जो है वो ये
- 3:27:22प्रोविज़ंस, उनके अला एमॉरोमेंट्स और आपके
- 3:27:25अलाउंसेस, प्रिविलेजेस वो मेंशन हैं। थर्ड
- 3:27:27शेड्यूल ये आपको सारे शेड्यूल याद नहीं
- 3:27:29रखने चकि एट्थ शेड्यूल में हमारे पास
- 3:27:32लैंग्वेजज़ हैं। रिकॉग्नाइज़्ड लैंग्वेजज़ 22
- 3:27:34हैं टोटल। सो वो चीज़ इसलिए मैंने ये ऐड कर
- 3:27:37दिया। ठीक है? 11th और 12th शेड्यूल जो है
- 3:27:39वो डिसेंट्रलाइजेशन के लिए ऐड किए गए ताकि
- 3:27:42पावर एक जगह पे सिमट के ना रहे। पावर नीचे
- 3:27:45तक जो है वो डिस्ट्रीब्यूट हो जाए। ओके?
- 3:27:48अब हम बात करेंगे क्वेश्चंस की। मम्मा
- 3:27:51कितनी देर हो गई हमें? कमर दुखने लग गई।
- 3:27:53मेरी गर्दन दुखने लग गई। ठीक है? अब हमारे
- 3:27:56189 क्वेश्चंस हैं। जी। चंकि मैंने
- 3:27:58कांसेप्ट बहुत अच्छे से करवाया है। सो जो
- 3:28:01चीज ऑलरेडी मैं कांसेप्ट में करवा चुकी
- 3:28:03हूं वो मैं यहां बहुत डिटेल में एक्सप्लेन
- 3:28:05नहीं करूंगी। ओके? कोई एक आधा क्वेश्चन
- 3:28:07होगा जो हमने कांसेप्ट में नहीं किया। सो
- 3:28:09फॉर श्योर हम यहां पे थोड़ी डिटेल उसकी
- 3:28:11डिस्कस करेंगे। ओके? सो पहला क्वेश्चन
- 3:28:13आपके सामने है। जी। आप पढ़िए और बताइए मुझे
- 3:28:15एजुकेशनल फिलॉसोफीज़ दे रखी हैं। करिकुलम
- 3:28:18किसके ऊपर फोकस कर रहा है इन एजुकेशनल
- 3:28:20फिलॉसोफीज़ में वो चीज आपसे पूछी गई है।
- 3:28:22पेरिनियलिज्म हमें पता है एवरलास्टिंग है।
- 3:28:25प्रोग्रेसिविज़्म प्रोग्रेस की बात करती
- 3:28:26है। एसेंशियलिज्म ट्रेडिशनल आस्पेक्ट की
- 3:28:29बात करती है। और रिकंस्ट्रक्शनिज़्म
- 3:28:31सोसाइटी में पर्टिकुलर अपॉर्चुनिटीज़ की
- 3:28:33बात करती है। इक्वलिटी की बात करती है। तो
- 3:28:35देखो ना रिकंस्ट्रक्शनिशनिज़्म में
- 3:28:37एग्जामिनेशन ऑफ़ सोशल इकोनॉमिक प्रॉब्लम्स
- 3:28:40एंड इक्वलिटी ऑफ़ एजुकेशनल अपॉर्चुनिटी।
- 3:28:43ठीक है? एसेंशियलिज्म जो है वो किसकी बात
- 3:28:45करेगा? अच्छा ये कांस्टेंट करिकुलम
- 3:28:47पेरिनियलिज्म में आएगा। ठीक है? तो पहले
- 3:28:49का सेकंड देन डी का फर्स्ट ये रहा आंसर
- 3:28:53आपका। ठीक है? आंसर आपका क्या हो गया?
- 3:28:55फोर्थ हो गया। जी। समझ आई ये चीज? बाकी
- 3:28:58सारी चीजें आपको समझ आ जानी चाहिए। देन
- 3:29:00पंचशील है, पंचकोष है, पंच महाभूताज़ हैं
- 3:29:03और पंच महाव्रत हैं। तो ये करवाए हैं
- 3:29:06मैंने आपको। पंच महाव्रत और आपका त्रिरतन
- 3:29:09ये तो हमने जैनिज्म में करे हैं। इतना भी
- 3:29:11याद होता तो आंसर तो आपका यहीं से आ गया
- 3:29:14टेक्निकली। अगर आपको फिर भी नहीं आया तो
- 3:29:16पंचकोष हमने उपनिषद या योगा में किए ना
- 3:29:19सॉरी वेदांता में किए हैं। सो ये आपका
- 3:29:21फर्स्ट आ जाता। ये लो फर्स्ट। ठीक है?
- 3:29:24यहां से अब पंचशील समझ आ गया कि अच्छा
- 3:29:26बुद्धिज्म की बात हो रही है और आपका ये
- 3:29:28पंच महाभूताज़ की बात हो रही है तो योगा
- 3:29:31योगा की बात हो रही है। ठीक है?
- 3:29:35हु अम्स द फॉलोइंग कैन बी एसोसिएटेड विद द
- 3:29:37फंक्शनलिस्ट पर्सपेक्टिव फंक्शनलिज्म की
- 3:29:39बात की है मैंने सबसे ऊपर नाम आपको दो नाम
- 3:29:42दिए थे एमिल डरकीम और टेलकोट पार्सन ठीक
- 3:29:44है टैलकोट पार्सन ने एजिल की भी बात की थी
- 3:29:47तो वो आ गए नाम दोनों के दोनों ठीक है दो
- 3:29:49स्टेटमेंट्स दी हुई हैं पाणिनि और चाणक्य
- 3:29:52ये यूनिवर्सिटीज से रिलेटेड है जो मैंने
- 3:29:55हायर एजुकेशन की जब क्लासेस ली हैं यानी
- 3:29:57आपकी जो 10थ मैराथन है पेपर वन के लिए
- 3:30:00उसमें ये ये एक्स्ट्रा इनेशन आपको वहां से
- 3:30:02कवर हो जाएगी तो मैंने यहां दोबारा दोबारा
- 3:30:04से नहीं डालिए बिकॉज़ ऑब्वियसली यू विल
- 3:30:06प्रिपेयर फॉर पेपर वन। ओके? सो असरशन है
- 3:30:08पाणिनि और चाणक्य मोस्ट फेमस प्रोडक्ट हैं
- 3:30:11नालंदा यूनिवर्सिटी के। नालंदा हैज़
- 3:30:13डिफाइंड प्रोसीजर ऑफ़ एडमिटिंग स्टूडेंट्स
- 3:30:15एंड हेड अ स्प्लैंडेड लाइब्रेरी। तो
- 3:30:18लाइब्रेरी तो बहुत अच्छी थी इनकी। सो ये
- 3:30:20पहला स्टेटमेंट गलत है जी। दूसरा सही है।
- 3:30:22ओके। पाणिनि और चाणक्य दोनों नालंदा से
- 3:30:25नहीं आते। चाणक्य तक्षशिला से आते हैं।
- 3:30:29पाणिनि
- 3:30:30बताना मुझे। ठीक है? तो आप ये ये आपका
- 3:30:33होमवर्क रहेगा कि आप पाणिनि और चाणक्य का
- 3:30:35बताएंगे। मैंने शॉर्ट वीडियो में भी कई
- 3:30:37बार डाला हुआ है। तो आपको पता होगा
- 3:30:39इस्लामिक एजुकेशन में डिग्री अवार्डेड टू
- 3:30:41वन हु हैज़ द स्पेशल नॉलेज इन रिलीजन इज़
- 3:30:44एंड टू दोज़ हु शोड एक्सीलेंस इन लॉजिक। सो
- 3:30:47जो रिलीजन में महारत हासिल कर रहे हैं और
- 3:30:50इसमें लॉजिक में तो वो दोनों क्या है? जी
- 3:30:52आलिम और फाजिल हैं। ठीक है? सो आलिम
- 3:30:55रिलीजन में आ गए और फाजिल जो है वो आपका
- 3:30:58लॉजिक। क्योंकि जैसे-जैसे आप पोस्ट
- 3:31:00ग्रेजुएशन की तरफ जाओगे लॉजिक आएगा और
- 3:31:03उससे पहले रिलीजन पे ज्यादा फोकस था।
- 3:31:06व्हिच ऑफ द फॉलोविंग इज़ नॉट वन ऑफ द पंच
- 3:31:08महाव्रत? तो पांच महाव्रतों की बात हमने
- 3:31:10की थी। अहिंसा ब्रह्मचर्य योगासना सत्य
- 3:31:14असत्य। तो देखो सत्य ब्रह्मचर्य अहिंसा ये
- 3:31:17तो थे। उसके अंदर योगासना नहीं था। जी।
- 3:31:19ओके। चलिए रोल ऑफ़ एजुकेशन है। पर्सपेक्टिव
- 3:31:23है। ट्रांसमिशन ऑफ़ सोसाइटी इज़ नोम एंड
- 3:31:25वैल्यू। जहां भी सोसाइटी की बात आ जाए
- 3:31:28वहां पे तो हम किस पे जा सकते हैं? हम
- 3:31:30मार्क्सिज्म पे जा सकते हैं। पर यहां पे
- 3:31:32ऑप्शन में ही नहीं है। मार्क्सिज्म तो कुछ
- 3:31:34और मिलेगा। तो देखो देखो टू ट्रांसमिट द
- 3:31:37जनरल रूलिंग क्लास आइडियोलॉजी। अच्छा ओके
- 3:31:40अह टू फ़स्टर ओवरऑल डेवलपमेंट एंड टू डेवलप
- 3:31:43टैलेंट्स टू द फुल फुलेस्ट। ठीक है? देन
- 3:31:46है यूनिफॉर्म स्टेट एजुकेशन वुड नॉट
- 3:31:48प्रोवाइड एवरीवन विद इक्वल चांस। सो क्या
- 3:31:51रहेगा इसका आंसर? बताइए। लिबरलिज्म की बात
- 3:31:54हो रही है तो आप ओवरऑल पर्सपेक्टिव पर तो
- 3:31:57यही बात करेंगे। बी का आना चाहिए। फोर्थ
- 3:32:00आंसर आपका फोर आएगा क्या? फोर आएगा। देखो
- 3:32:03एक से ही आपका सॉल्व हो गया। ठीक है? तो
- 3:32:06यहां से समझ आ गया कि भ ये तो ट्रांसमिशन
- 3:32:08की जो बात हो रही है ये फंक्शनलिस्ट
- 3:32:09पर्सपेक्टिव हो गया। फोस्टर की बात हो रही
- 3:32:12है। लिबरल पर्सपेक्टिव हो गया। रूलिंग
- 3:32:14क्लास जनरल रूलिंग क्लास आइडियोलॉजी की
- 3:32:16बात हो रही है। उसको ट्रांसमिट करना। तो
- 3:32:18रूलिंग क्लास आईडियोलॉजी की बात
- 3:32:20मारक्सिज्म ने की है। यूनिफॉर्म स्टेट
- 3:32:22एजुकेशन जो है वो आपको प्रोवाइड नहीं
- 3:32:24करेगी इक्वल चांसेस। तो यानी कल्चरल
- 3:32:26डेप्रिवेशन भी आपको देखने को मिलेगा। ठीक
- 3:32:29है? फोनिक्स फार्म और टॉलस्टॉय फार्म आएगा
- 3:32:32भाई ये एफ ए आर एम। ठीक है? तो टॉलस्टॉय
- 3:32:35तो याद ही है। फ़िक्स मैंने आज बता भी
- 3:32:37दिया। सो एम के गांधी आपका आंसर हो जाएगा।
- 3:32:39देखते ही होने चाहिए। आपने जितना कांसेप्ट
- 3:32:41मैंने बताया अगर याद हो गए हो तो देखते ही
- 3:32:43आंसर आना चाहिए। ओके? वैदिक स्टडी सेंटर्स
- 3:32:46घटिकास वर लोकेटेड ऑल ओवर द नॉर्थ इंडिया
- 3:32:49नहीं घटिकास जो है वो साउथ इंडिया में
- 3:32:51देखने को मिलते हैं। ये बात हम अ बात करते
- 3:32:54हैं जब हायर एजुकेशन में बात करते हैं।
- 3:32:56नालंदा एक बुद्धिस्ट सेंटर ऑफ़ लर्निंग है।
- 3:32:58नालंदा रिसीव्ड द रॉयल पैटर्ननेज़ ऑफ़ हिंदू
- 3:33:01गुप्त किंग एज़ वेल ऐज़ बुद्धिस्ट किंग
- 3:33:03दोनों से मिली है। उपनयन फॉर वुमेन हेल्ड
- 3:33:06एट सेम ऐज। देखो कहीं मेंशन नहीं है बट
- 3:33:09उपनयन सेम। मैन और वुमेन में उस टाइम पे
- 3:33:11फर्क नहीं बताया गया है। तो हम बोल सकते
- 3:33:13हैं सेम टाइम पे ही होएगा। ओके? हमने
- 3:33:16ब्राह्मण, वैश्य, क्षत्रिय इनके अलग-अलग
- 3:33:19टाइम पे देखे हैं उपनयन संस्कार। लेकिन
- 3:33:22मैन और वुमेन में कोई डिफरेंशिएशन नहीं
- 3:33:24है। द लर्न द डैश ऑफ़ लर्निंग इन वैदिक
- 3:33:26एजुकेशन इज़ डिमार्केटेड एज। ओके? नॉलेज ऑफ़
- 3:33:29लर्निंग या व्हाटएवर। ओके? श्रवण, मनन,
- 3:33:31अपरिग्रह और असत्यम। तो कौन सा इसमें सही
- 3:33:34रहेगा? पहला तो फॉर श्योर गलत है। अगर
- 3:33:36पहला गलत है तो आंसर मेरा बी, सी, डी आ
- 3:33:38गया।
- 3:33:40ठीक है? चलिए
- 3:33:43अरेंज द फॉलोवंग फाइव शीत। तो ऑफ
- 3:33:45कॉन्शियसनेस। तो हमने पांच शीत की बात की
- 3:33:47थी। प्राण माया, आनंद माया, अन्न माया,
- 3:33:49विजन माया, मनोमाया तो अन्न माया सबसे
- 3:33:52पहले था। ठीक है? क्रोनोलॉजिकल ऑर्डर में
- 3:33:54लगाना है। सो या तो सी सबसे पहले आएगा या
- 3:33:56लास्ट में आएगा। लास्ट में इन्होंने कहीं
- 3:33:58दे नहीं रखा है तो सबसे पहले आएगा। तो
- 3:34:00देखो सी। ठीक है? अन्न माया कोष फिजिकल
- 3:34:03शीत। ठीक है? अन्न के बाद क्या आएगा? सबसे
- 3:34:05अंदर आनंद आएगा तो सबसे लास्ट में बी
- 3:34:08आएगा। तो सबसे लास्ट में बी आएगा। यहीं से
- 3:34:10सॉल्व हो गया क्वेश्चन। ऐसे क्वेश्चन
- 3:34:11सॉल्व देखो नॉलेज मैं आपको ऑलरेडी दे चुकी
- 3:34:14हूं। आपको क्वेश्चंस के आंसर्स आते होंगे।
- 3:34:16आप खुद सॉल्व कर लोगे। बट किस-किस तरीके
- 3:34:18से सॉल्व किया जा सकता है वो आईडिया अब
- 3:34:20आपको क्वेश्चन सॉल्विंग में होगा। ओके? तो
- 3:34:22ये बात ध्यान रखिए कि आपको क्वेश्चंस तो
- 3:34:24अब आते हैं। मैं पढ़ के सॉल्व करके बताऊं
- 3:34:27वो नहीं है। अब मैं एक अलग तरीका कैसे
- 3:34:29सिखा सकती हूं आपको वो यहां पे काम करेगा।
- 3:34:32ओके? कि आप कैसे सॉल्व कर सकते हो कि भ
- 3:34:34मेरे को बेयर मिनिमम इनेशन याद है तो मैं
- 3:34:36कैसे सॉल्व करूं। ठीक है? ये जून 2025 के
- 3:34:40क्वेश्चंस आ गए जी। व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग
- 3:34:42स्टेटमेंट इज़ नॉट ट्रू अबाउट आइडियलिज़्म?
- 3:34:44तो इन द स्कीम ऑफ़ करिकुलम आइडियलिज़्म इज़
- 3:34:46नॉट प्रिपयर्ड टू गिव एनी पर्टिकुलर
- 3:34:48प्रेफरेंस टू एनी सब्जेक्ट? आइडियलिज़्म
- 3:34:50हैज़ टॉक्ड मोर ऑफ़ ऑब्जेक्टिव्स एंड एम्स
- 3:34:52ऑफ़ एजुकेशन लेस अबाउट डिवाइसेस मेथड्स एंड
- 3:34:55ऑर्गेनाइज़ेशंस। सब्जेक्ट्स व्हिच हैव अ
- 3:34:57फ्लेवर ऑफ़ पर्सनल ग्रेटनेस आर ग्रेटली
- 3:34:59एम्फसाइज़्ड बाय आइडियलिज़्म। आइडियलिज्म पे
- 3:35:02मच अटेंशन टू द प्रेजेंट एक्सपीरियंस ऑफ़
- 3:35:04चाइल्ड इन इट्स अप्रोच टू द प्रॉब्लम ऑफ
- 3:35:07करिकुलम। सो नॉट ट्रू पूछा है। यानी तीन
- 3:35:10चीजें आपको आइडियलिज्म के अराउंड रिवॉल्व
- 3:35:12करती हुई नजर आएंगी। एक चीज थोड़ी सी अलग
- 3:35:14नजर आएगी। ओके? तो स्कीम ऑफ़ करिकुलम में
- 3:35:17इट इज़ नॉट प्रिपयर्ड टू गिव एनी पर्टिकुलर
- 3:35:19प्रेफरेंस टू एनी सब्जेक्ट। ये कुछ
- 3:35:21सब्जेक्ट्स को प्रेफरेंस देते हैं वैसे बट
- 3:35:23ओवरऑल जो बेसिक पहले से चीजें चली आ रही
- 3:35:26हैं वही सब्जेक्ट्स रहेंगे। ओके? आंसर
- 3:35:29क्या होएगा? इसका फोर्थ होएगा। बिकॉज़
- 3:35:30एक्सपीरियंस की बात आ गई, प्रॉब्लम की बात
- 3:35:33आ गई तो अप्रोच टू द प्रॉब्लम ऑफ़ करिकुलम,
- 3:35:36चाइल्ड सेंटर्ड अप्रोच, एक्सपीरियंस वो
- 3:35:38सारी चीजें हम आइडियलिज्म में बात नहीं
- 3:35:40करते हैं। ओके? तो दिस इज़ नॉट ट्रू। बाकी
- 3:35:42सारी चीजें ट्रू हो जाएंगी कि इट इज़ नॉट
- 3:35:44प्रिपयर्ड टू गिव एनी पर्टिकुलर
- 3:35:45प्रेफरेंस। किसी एक को प्रेफरेंस नहीं दे
- 3:35:47रहे। बट जो बेसिक चीजें चली आ रही हैं वो
- 3:35:49आ रही हैं। एम्स ऑब्जेक्टिव्स पे ज्यादा
- 3:35:51फोकस है। हमने डिवाइड देखो यहां से आपको
- 3:35:53आइडियलिज्म की एडिशनल इनेशन मिल गई। जो
- 3:35:56अगर आप चाहो तो अपने नोट्स में ऐड कर सकते
- 3:35:58हो। ठीक है? ठीक है कि भ आइडियलिज्म
- 3:35:59ऑब्जेक्टिव्स और एम्स के बारे में ज्यादा
- 3:36:01बात करता है। डिवाइसेस मेथड ऑर्गेनाइजेशन
- 3:36:03की कम बात करता है। सब्जेक्ट्स जिनमें
- 3:36:06व्हिच हैव अ फ्लेवर ऑफ़ पर्सनल ग्रेटनेस वो
- 3:36:08ज्यादा एफसाइज किए जाते हैं। क्योंकि जैसे
- 3:36:11एम के गांधी वो वो लोग उनको ज्यादा
- 3:36:13आइडियाज को ज्यादा प्रमोट किया जाता है।
- 3:36:15ओके? व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग एजुकेशनल थिंकर
- 3:36:18एफसाइज़्ड ऑन केयर एथिक्स? केयर नेल
- 3:36:21नोडिंग्स एंड केयर गोज़ हैंड इन हैंड। ठीक
- 3:36:23है? ये तो सोचने की जरूरत नहीं पड़नी
- 3:36:25चाहिए कि पावलो फ्रायरे में क्रिटिकल
- 3:36:27पेडागोजी वालस्टन में वुमेन पे फोकस है।
- 3:36:29नेलन नोडिंग्स केयर पे फोकस करते हैं। तो
- 3:36:31केयर एथिक्स मतलब नेलन नोडिंग्स। ओके?
- 3:36:34अरेंज द फॉलोविंग फोर पोजीशंस ऑफ़ सोल
- 3:36:36फ्रॉम फर्स्ट टू फोर्थ। ये नई इनेशन है
- 3:36:39आपके लिए। सोल के चार पोजीशंस बता रखे
- 3:36:42हैं। जागृत, तुरिया, स्वप्न और प्रज्ञा।
- 3:36:45तो ये एडिशनल इनेशन है जो हम बात करेंगे।
- 3:36:48आंसर आपका फोर्थ रहेगा। सबसे पहले जागृत
- 3:36:51यानी वॉकिंग स्टेट यानी हम अवेयर हैं
- 3:36:53इसमें। ठीक है? स्वप्न ड्रीम स्टेट। हम
- 3:36:56कुछ ड्रीम लाइक सिनेरियोस सोते टाइम
- 3:36:58एक्सपीरियंस कर रहे हैं। प्रज्ञा हाईएस्ट
- 3:37:01स्टेट ऑफ़ कॉन्शियसनेस जिसमें इंट्यूशन,
- 3:37:04इंसाइट, विज़डम वो चीजें आती हैं। ओके?
- 3:37:07तुरैया अल्टीमेट स्टेट ऑफ़ कॉन्शियसनेस।
- 3:37:10ठीक है? सो बिय्ड इसमें वॉकिंग, ड्रीमिंग,
- 3:37:12डीप स्लीप कोई फर्क नहीं पड़ता। आपको सारी
- 3:37:15चीजें पता है। आप अल्टीमेट स्टेट में जा
- 3:37:16चुके हो। ओके? तुरिया। तो जागृत स्वप्न,
- 3:37:19प्रज्ञा और तुरिया ये ये सीक्वेंस आप याद
- 3:37:21रखेंगे। ओके जी। नेक्स्ट क्वेश्चन है
- 3:37:24धारणा, प्रत्याहार, ध्यान और समाधि जो हम
- 3:37:27ऑलरेडी कर चुके हैं। एट फोल्ड योगा के जो
- 3:37:30एट फोल्ड पाथ थे उसमें हमने किया था
- 3:37:31अष्टांग योग। ठीक है? सो समाधि सबसे लास्ट
- 3:37:34था जिसमें सब कुछ हो जाता है। ठीक है? सो,
- 3:37:36अब देखते हैं कि कैसे हम इस क्वेश्चन को
- 3:37:38सॉल्व कर सकते हैं। मुझे नहीं याद है कि
- 3:37:40क्या चीज़ क्योंकि चीजें भी तो नहीं आएंगी
- 3:37:42ना। ठीक है? टू कट द रिलेशनशिप ऑफ़ वेरियस
- 3:37:44सेंस ऑर्गन्स फ्रॉम द रिस्पेक्टिव
- 3:37:46सब्जेक्ट्स टू अप्लाई द माइंड टू सम
- 3:37:49इंटरनल सब्जेक्ट। ध्यान बिकम्स स्टेबल इन
- 3:37:52धेय एंड टू कंसंट्रेट अटेंशन ऑन अ
- 3:37:55पर्टिकुलर सब्जेक्ट ऑफ़ माइंड। देखो मुझे
- 3:37:57जितना ध्यान आ रहा है मुझे ये ध्यान आ रहा
- 3:37:59है कि मैंने आपको दो-तीन बार बोल के बताया
- 3:38:01था। तो मैंने कहा था कि यम नियम वहां से
- 3:38:04हम शुरू कर रहे थे। सो ध्या धारणा ध्यान
- 3:38:08समाधि। सो प्रत्याहार धारणा ध्यान समाधि।
- 3:38:11ये सीक्वेंस थी। यानी समाधि सबसे लास्ट
- 3:38:13है। धारणा, ध्यान और समाधि में हम किसी ना
- 3:38:16किसी चीज पे तो फोकस कर रहे हैं। धारणा
- 3:38:18में हमने फोकस किया था। ध्यान में हमारा
- 3:38:21फोकस एक पर्टिकुलर सब्जेक्ट पे था और जो
- 3:38:23अच्छे से आ गया था हमें और समाधि में तो
- 3:38:26सब कुछ ही हो गया था। आपको डीपली मेडिटेशन
- 3:38:28आ गया था। ओके? तो ये देखो ये जो तीन
- 3:38:31स्टेटमेंट्स हैं टू अप्लाई द माइंड ऑन सम
- 3:38:33इंटरनल सब्जेक्ट। ध्यान बिकम स्टेबल इन
- 3:38:35धेय और कंसंट्रेशन कंसंट्रेट अटेंशन ऑन अ
- 3:38:38पर्टिकुलर सब्जेक्ट ऑफ़ माइंड। ठीक है? सो
- 3:38:41मुझे यहां से ये समझ आ रहा है कि धारणा
- 3:38:43में क्या जाएगा बताओ हम ए वाला पार्ट है
- 3:38:47ना हमारा धारणा में जाएगा जी कि आप जो है
- 3:38:51एक इंटरनल सब्जेक्ट पे माइंड को अप्लाई कर
- 3:38:54रहे हो ठीक है ध्यान में जाएगा कि अब आपको
- 3:38:57कंसंट्रेशन आ गई है तो टू कंसंट्रेट
- 3:38:59अटेंशन ऑन अ पर्टिकुलर सब्जेक्ट ऑफ माइंड
- 3:39:01ठीक है और समाधि में ध्यान जो है वो
- 3:39:04स्टेबल हो गया है ओके अगर मुझे इतना भी
- 3:39:07आईडिया हो जाए कि समाधि में ध्यान स्टेबल
- 3:39:09हो गया है तो ध्यान के बाद ही है ना समाधि
- 3:39:12तो तो यहां पे जब ध्यान ही स्टेबल हो गया
- 3:39:14है तो समाधि में आ गए हो तो ऑप्शन थर्ड तो
- 3:39:17सिर्फ थर्ड से भी सॉल्व हो रहा है आपका
- 3:39:19आंसर तो ओके प्रत्याहार में फिर ये बच गया
- 3:39:22टूक एट द रिलेशनशिप ऑफ वेरियस सेंस
- 3:39:24ऑर्गन्स फ्रॉम द रिस्पेक्टिव सब्जेक्ट्स
- 3:39:26यानी टर्निंग इनवर्ड वाली चीज आ गई ओके
- 3:39:28आंसर आपका थर्ड आ गया ठीक है सो ये देखो
- 3:39:31यम नियम देन आसन प्राणायाम प्रत्याहार
- 3:39:35धारणा ध्यान समाधि और समाधि में भी
- 3:39:38कॉन्शियस समाधि जो है वो वो भी होती है और
- 3:39:40एक सुप्राकॉन्शियस भी होती है। तो ये आपका
- 3:39:43समप्रजनत और आपका असम प्रजननत्व। ठीक है?
- 3:39:46तो ये हाईएस्ट फॉर्म होती है समाधि की
- 3:39:48सुप्राक कॉन्शियस समाधि। ओके? तो पहली
- 3:39:51फाइव स्टेजेस योगा वो एक्सटर्नल मींस पे
- 3:39:53काम कर रही है और लास्ट थ्री इंटरनल मींस
- 3:39:55पे काम कर रही हैं। ये तो हमने किया था
- 3:39:56डिस्कस। ओके? देन है जी रविंद्र नाथ
- 3:39:59टैगोर, श्री अरविंदो, एम के गांधी, स्वामी
- 3:40:02विवेकानंद। तो ऐसा तो कोई नाम नहीं है जो
- 3:40:04आपको दिखना सुना ना हो। राइट? देन है। अब
- 3:40:06हम देखते हैं कि कौन सा किस पे फोकस करता
- 3:40:08है। क्योंकि एग्जैक्ट चीजें जो हमने पढ़ी
- 3:40:10वो नहीं आएंगी। हमें एनालाइज करना पड़ेगा।
- 3:40:12ओके? दिस एजुकेशन ऑ टू बी फॉर देम अ काइंड
- 3:40:15ऑफ़ इंश्योरेंस अगेंस्ट अनइंप्लॉयमेंट। यू
- 3:40:18कैन नॉट टीच अ चाइल्ड एनी मोर देन यू कैन
- 3:40:21ग्रो अ प्लांट। द प्लांट डेवलप्स इट्स ओन
- 3:40:23नेचर। तो खुद डेवलप होंगी। खुद होंगी
- 3:40:25चीजें। हर एक चाइल्ड एक इंक्वायरर,
- 3:40:28इन्वेस्टिगेटर, एनालाइजर है अपने आप में।
- 3:40:31ट ट्रू एजुकेशन कंसिस्ट इन नोइंग द यूज़ ऑफ़
- 3:40:34एनी यूज़फुल मटेरियल दैट हैज़ बीन कलेक्टेड
- 3:40:37टू नो इट्स रियल नेचर एंड टू बिल्ड अलोंग
- 3:40:40विद लाइफ अ रियल शेल्टर फॉर लाइफ। देखो
- 3:40:43अभी तो ये तो दिमाग के ऊपर से जा रही हैं।
- 3:40:45अब हम सॉल्व कैसे करेंगे इसको? हम सॉल्व
- 3:40:48करेंगे कि मुझे इतना आईडिया है कि गांधी
- 3:40:50जी जो हैं उन्होंने अनइंप्लॉयमेंट के
- 3:40:53अगेंस्ट जो है एजुकेशन को बोला था कि
- 3:40:55एजुकेशन एक क्राफ्ट बेस्ड एजुकेशन हो जो
- 3:40:57अनइंप्लॉयमेंट पे भी काम कर जाए। ओके? सो
- 3:41:00दिस एजुकेशन ऑड टू बी फॉर देम अ काइंड ऑफ़
- 3:41:03इंश्योरेंस अगेंस्ट अनइंप्लॉयमेंट। ये
- 3:41:06स्टेटमेंट साउंड कर रही है कि एमके गांधी
- 3:41:08पे जा सकती है। अब मैं एक बार देखती हूं
- 3:41:11कि अच्छा फर्स्ट वाले ऑप्शन में ये देखो
- 3:41:13पहले का थर्ड। अब क्या बाकी ऑप्शंस अलाइन
- 3:41:16हो रहे हैं? क्योंकि मुझे अभी भी नहीं पता
- 3:41:18सही और गलत। तो बट क्या अलाइन हो रहे हैं
- 3:41:20उनकी थ्योरिटी उनकी थिंकिंग के साथ वो
- 3:41:24हमें देखना है। ये बोल रहे हैं कि ये
- 3:41:25फोर्थ आएगा स्वामी विवेकानंद वाला। यू कैन
- 3:41:28नॉट टीच अ चाइल्ड एनी मोर देन यू कैन ग्रो
- 3:41:30अ प्लांट। सो प्लांट डेवलप्स इट्स ओन नेचर
- 3:41:32तो वो अपने आप डेवलप होगा। ओके? देन ये
- 3:41:35एव्री चाइल्ड इज़ अ इंक्वायरर। ये बात कौन
- 3:41:37बोल रहा है? श्रीो बोल रहे हैं। तभी हम
- 3:41:39इंटीग्रल एजुकेशन की बात करेंगे। ट्रू
- 3:41:41एजुकेशन जो है वो ये जानने में है कि यूज़
- 3:41:45ऑफ़ एनी यूज़फुल मटेरियल जिसको आप कलेक्ट
- 3:41:47करो टू नो इट्स रियल नेचर। सो ये आपका
- 3:41:50अलोंग विद रियल अलोंग विद लाइफ अ रियल
- 3:41:53शेल्टर फॉर लाइफ। रविंद्र नाथ टैगोर साउंड
- 3:41:56तो ठीक कर रही है सारी की सारी चीजें।
- 3:41:58आंसर आपका सेकंड आ जाएगा। राइट? कई बार
- 3:42:00आपको नहीं पता होता क्या पूछ रखा है। कोई
- 3:42:03ऐसे एग्जैक्ट स्टेटमेंट्स भी नहीं है जो
- 3:42:04आप रट्टे मारोगे। राइट? बट किसी-किसी की
- 3:42:07बेसिक फिलॉसफीज़ तो है ना कि गांधीवाली
- 3:42:09अनइंप्लॉयमेंट वाली बात से सॉल्व हो गया
- 3:42:11क्वेश्चन। ओके? चूज़ द करेक्ट स्टेटमेंट।
- 3:42:14फॉर्मल सिस्टम ऑफ़ स्कूलिंग इज़ बेस्ड ऑन द
- 3:42:16फिलॉसफीज़ ऑफ़ आइडियलिज़्म एंड रियलिज़्म।
- 3:42:19स्कूल्स फॉर्मल सोशल सिस्टम हैज़ हायरार्की
- 3:42:22ऑफ़ पोजीशंस अलोंग वि पीपल आर असाइन
- 3:42:25डिफरेंट रोल्स। रियलिज्म डज़ंट रेकमेंड द
- 3:42:28डेफिनेट करिकुलम। इनफॉर्मल एंड नॉन फॉर्मल
- 3:42:31एजुकेशन हैव देयर रूट्स इन प्रोग्रेसिव
- 3:42:34फिलॉसफी ऑफ़ एजुकेशन। आइडियलिज़्म बिलीव्स
- 3:42:38दैट नॉलेज कैन बी ऑब्टेंड विदाउट द हेल्प
- 3:42:41ऑफ़ टीचर। कब बोला आइडियलिज्म ने? ये तो
- 3:42:44फॉर श्योर गलत हो गया। आइडियलिज्म ने ऐसा
- 3:42:46कुछ नहीं बोला है। आइडियलिज्म तो टीचर को
- 3:42:48सर्वोपरि मान रहा है। ठीक है? टीचर ही आप
- 3:42:50में नॉलेज इंपार्ट करेगा। ये बात हमने
- 3:42:52पढ़ी है। सो ई अगर गलत हो गया तो ये दो
- 3:42:54ऑप्शन तो गलत हो गए। अब बचा ए बी डी और ए
- 3:42:57सी डी। यानी ए और डी तो ठीक है। क्या समझ
- 3:43:00आया कि फॉर्मल सिस्टम जो है स्कूलिंग का
- 3:43:02वो आइडियलिज्म रियलिज्म पे बेस्ड है। और
- 3:43:05डी क्या है? इनफॉर्मल वाला नॉन फॉर्मल
- 3:43:07वाला प्रोग्रेसिविज़्म की फिलॉसोफी पे
- 3:43:09बेस्ड है। अब दो चीजें बच गई बी और डी। एक
- 3:43:12बोल रहा है कि रियलिज्म डजंट रेकमेंड द
- 3:43:14डेफिनेट करिकुलम। और दूसरा बोल रहा है कि
- 3:43:16स्कूल का जो फॉर्मल सोशल सिस्टम है उसमें
- 3:43:19हायरार्की ऑफ़ पोजीशंस हैं अलोंग व्हिच
- 3:43:22पीपल आर असाइन डिफरेंट रोल्स।
- 3:43:26रियलिज्म करता है रेकमेंड डेफिनेट
- 3:43:28करिकुलम। डेफिनेट करिकुलम तो प्रगमेटिज़्म
- 3:43:31नहीं करता। रियलिज़्म तो करता ही है।
- 3:43:34ठीक है? सो डज़ंट रेकमेंड नहीं रेकमेंड्स।
- 3:43:37तो सी गलत हो गया ना? ए बी डी आ गया। ठीक
- 3:43:39बोला ना? हां। रियलिज्म तो करता है।
- 3:43:41प्रगमेटिज्म नहीं करता। नेचुरलिज्म भी
- 3:43:43नहीं करता कोई पर्टिकुलर फिक्स्ड करिकुलम।
- 3:43:45बट जब आइडियलिज्म रियलिज्म पे अगर फॉर्मल
- 3:43:48सिस्टम बेस्ड है और फॉर्मल सिस्टम में हम
- 3:43:50जो करिकुलम देख रहे हैं वो डेफिनेट है।
- 3:43:52समझ रहे हो? कैसे रिलेट करना है? ओके? सो
- 3:43:55आंसर आपका ए, बी और डी आ जाएगा। ठीक है?
- 3:43:58व्हिच ऑफ़ द फॉलोविंग इज़ नॉट रिलेटेड टू
- 3:44:00सोरेन किटगार्ड? सोरेन किटगार्ड हम
- 3:44:02एकिस्टेंशियलिज्म में पढ़ते हैं। ठीक है?
- 3:44:04ये क्वेश्चन टेक्निकली ड्रॉप्ड है। ठीक
- 3:44:07है? तो यानी कुछ ना कुछ स्टेटमेंट गड़बड़
- 3:44:09हुई होगी जिस वजह से शायद ये ड्रॉप किया
- 3:44:12गया हो। नॉट रिलेटेड तो कौन सी सही नहीं
- 3:44:15है। ठीक है? तो देखो टेक्निकली इसमें बहुत
- 3:44:17सारी सही हैं। ठीक है? जैसे
- 3:44:19एग्जिस्टेंशियल सेल्फ एक्सपीरियंस इज़
- 3:44:22नेसेसरी। तो आप फ्रीडम देते हो तो वो भी आ
- 3:44:24जाता है। तो ये भी ठीक ही लग रही है। नॉट
- 3:44:27रिलेटेड क्यों है? रिलेटेड तो है। ठीक है?
- 3:44:29देन आइडिया सेंटर्ड है। एंटायर यूनिवर्स
- 3:44:31इज़ ओनली एन आइडिया। ये तो आइडियलिज्म वाली
- 3:44:34चीज़ आ गई। तो बी तो हो सकता है ना भी हो।
- 3:44:36ठीक है? एग्ज़िस्टेंस ऑफ़ इंडिविजुअलिटी इज़
- 3:44:39रिलायबल एंड इट कम्स प्रायर टू थिंकिंग।
- 3:44:42एग्ज़िस्टेंस पहले आती है। बोल सकते हैं
- 3:44:44हम। ठीक है? एसेंस बाद में आती है तो सी
- 3:44:46भी ठीक लग रहा है। ठीक है? तो आंसर सिर्फ
- 3:44:49बी तो नहीं हो सकता ना? बट हमारे और बी बी
- 3:44:52और ई भी ई भी सब में है। सो ये क्वेश्चन
- 3:44:54ड्रॉप्ड था। तो हम सब्जेक्टिविटी की भी
- 3:44:56बात करते हैं। हम हम ऑब्जेक्टिविटी की भी
- 3:44:58बात करते हैं। हम मिक्स्ड बात करते हैं।
- 3:45:00फ्रीडम की भी बात करते हैं। तो वो आपको
- 3:45:02आईडिया हो बस। बट ये क्वेश्चन ड्रॉप्ड था।
- 3:45:05व्हिच ऑफ द फॉलोवंग स्टेटमेंट्स इज ट्रू
- 3:45:06अबाउट सांख्य फिलॉसफी? सो गया इज मैटर और
- 3:45:09प्रकृति व्यक्त इज कॉन्सिक्वेंस ऑफ़ कार्य
- 3:45:15कर्म कार्यकारण। ठीक है? अव्यक्त इज़ पुरुष
- 3:45:18और सांख्य एज़र्ट्स दैट एकज़िस्टेंस ऑफ़ गॉड
- 3:45:21कैन बी प्रूव्ड। तो आपसे सच वाली चीज़ पूछी
- 3:45:23है। ट्रू आपका सेकंड आएगा। ठीक है? यहां
- 3:45:26से अब आपको एक्स्ट्रा नॉलेज मिलेगी कि गया
- 3:45:28का मतलब मैटर नहीं होता। नॉलेज होता है
- 3:45:31अव्यक्त जिसको नहीं व्यक्त किया गया हो
- 3:45:34अनमैनिफेस्टेड अनडवलप्ड चीज़ ठीक है तो वो
- 3:45:37यहां पे अव्यक्त रेफर्स टू अनमैनिफेस्ट
- 3:45:40स्टेट ऑफ़ प्रकृति ओके सो ट्रू पूछा था ये
- 3:45:42भी गलत हो गया सांख्य एक ड्यूलिक फिलॉसफी
- 3:45:45है दो फंडामेंटल रियलिटीज़ है पुरुष और
- 3:45:47प्रकृति
- 3:45:49तो वो डज़ंट पोइज़ द एकज़िस्टेंस ऑफ़ गॉड। तो
- 3:45:52वो गॉड की तो एकज़िस्टेंस को मान ही नहीं
- 3:45:53रहे हैं। ऐसा कुछ बोला ही नहीं है
- 3:45:55उन्होंने। तो वो प्रूव क्या करेंगे? राइट?
- 3:45:57तो ये गलत हो गया। अव्यक्त इज पुरुष नहीं
- 3:46:00अव्यक्त इज प्रकृति ठीक है और गया इज मैटर
- 3:46:03और प्रकृति नहीं गया इज नॉलेज तो ये भी
- 3:46:06गलत हो गया ये ठीक है बस व्यक्त मतलब जो
- 3:46:08कॉन्सिक्वेंस है कार्यकारण का वो आपका
- 3:46:11व्यक्त है जो आ गया है सामने दिख गया है
- 3:46:14दिसंबर 2024 के क्वेश्चन शुरू हो रहे हैं
- 3:46:16जी 1848 में सावित्रीबाई फुले अलोंग विद
- 3:46:19हर हस्बैंड ज्योतिबा फुले एंड फातिमा शेख
- 3:46:23आई एम रियली सॉरी कई बार ऐसे होता है इसके
- 3:46:26बाद कहीं आवाज ना खराब हो जाए यहां पे
- 3:46:28साउंड सिस्टम में या ऐसे हो जाए कुछ ओके
- 3:46:32तो उन्होंने एक स्कूल ओपन किया स्कूल का
- 3:46:34नाम बताओ ओके जुबिदा स्कूल बाल गंधर्व
- 3:46:37विद्यालय फुले शिक्षण मंदिर और पुणे
- 3:46:40विद्यापीठ तो देखो टेक्निकली एज सच हमने
- 3:46:43कुछ डिटेल में जाके देखेंगे सो हमें नहीं
- 3:46:45पता चलेगा कि क्या था क्या नहीं था
- 3:46:47क्योंकि हो सकता है हमने पढ़ा भी ना हो बट
- 3:46:49जो सबसे सटीक बैठ रहा है वो फुले शिक्षण
- 3:46:51मंदिर है उसी के साथ जाएंगे ऑलदो कहीं ऐसा
- 3:46:54नाम मेंशन नहीं है क्योंकि भीड़ेवाड़ा में
- 3:46:56ये स्कूल ओपन ओपन हुआ था। तो कहीं नाम
- 3:46:59मेंशन नहीं है इसका। बट यहां पे ऑफिशियली
- 3:47:01एक क्वेश्चन मेंशन कर दिया। तो अब आप याद
- 3:47:04रख सकते हो कि इन्होंने जो स्कूल खोला था
- 3:47:06वो भू ये फुले शिक्षण मंदिर था।
- 3:47:09सावित्रीबाई इंडिया की फर्स्ट फीमेल टीचर
- 3:47:11हैं। फातिमा शेख चाहे सेकंड फीमेल टीचर
- 3:47:13बोल लो चाहे इंडिया की फर्स्ट मुस्लिम
- 3:47:15वुमेन टीचर बोल लो। तो इन्होंने साथ में
- 3:47:17मिलके जो है वो स्कूल खोला था तीनों ने
- 3:47:20मिलके। तात्या साहिब के भीड़ भीड़े नाम की
- 3:47:23जगह भीड़ेवाड़ा रेजिडेंस में। ओके? सो वो
- 3:47:25चीज आपको पता होनी चाहिए इनेशन। नालंदा
- 3:47:28यूनिवर्सिटी वाज़ फर्स्ट एस्टैब्लिश्ड
- 3:47:29ड्यूरिंग गुप्ता रिजीम। इट वाज़ अ नोन डैश
- 3:47:32सेंटर ऑफ़ लर्निंग। अभी-अभी ऊपर आया था कि
- 3:47:35ये बुद्धिस्ट सेंटर है लर्निंग का। तो वो
- 3:47:37तो ठीक था। बुद्धिस्ट सेंटर है। ओके?
- 3:47:39पीवाईक्यू से ही याद हो गई हमें चीज़।
- 3:47:41स्वामी विवेकानंद का पूछा है। उनकी जो
- 3:47:43फेमस स्पीच है शिकागो में उन्होंने
- 3:47:45कॉनसेप्चुअलाइज़ किया यूनिवर्सल
- 3:47:47एक्सेप्टेंस को। ओके? व्हिच ऑफ़ द फॉलोविंग
- 3:47:50स्टेटमेंट एनकैप्चुलेट हिज़ फिलॉसफी अबाउट
- 3:47:52रिलीजन एंड ह्यूमन? तो उन्होंने बोला था
- 3:47:54कि सारे रिलीजन तो सिर्फ पाथ है वहां तक
- 3:47:57जाने का। ठीक है? आपको रिलीजियस डोगमा से
- 3:48:00ऊपर उठ के चीजों को रियलाइज करना चाहिए।
- 3:48:01अवेयर होना चाहिए। तो ये स्टेटमेंट भी ठीक
- 3:48:04है। ठीक है?
- 3:48:06सेकंड ऑप्शन आ गया। अर्थपति, अभाव, उपमान
- 3:48:10और शब्द किसका क्या मतलब है? ठीक है? सो
- 3:48:13ये वो ये ये मतलब आपको स्पेसिफिकली तो समझ
- 3:48:17आता है लॉजिकल रीजनिंग से। जहां पे ये जो
- 3:48:19छह सोर्सेज की हमने अभी बात की थी ना कि
- 3:48:21फलाना जो है फिलॉसफी चार सोर्सेस को मान
- 3:48:24रही है। वैलिड सोर्स ऑफ नॉलेज फलानी छह को
- 3:48:26मान रही है। सो वो चीजें जो हमने बात की
- 3:48:28थी उसमें इनका मतलब पूछ लिया अब। तो अभाव
- 3:48:30मतलब कमी। ठीक है? अभाव में हमने कहा था
- 3:48:33चेयर इज़ नॉट अ टेबल। ऑब्वियसली ना टेबल
- 3:48:35चेयर है ना चेयर टेबल है। ओके? देन बाकी
- 3:48:38और क्या चीजें हो सकती हैं? कॉनशियल इज
- 3:48:41नॉट अ बोर्न अकॉर्डिंग टू वेदास। तो देखो
- 3:48:43वेदों ने बोली है ये बात। यानी ये शब्द हो
- 3:48:46गए। ओके? तो ये शब्द हो गए कि उनकी वेदों
- 3:48:50का वेद वेद एक शब्द होता है ना वर्बल
- 3:48:52टेस्टिमनी दे रहे हैं वेद तो उनकी बात तो
- 3:48:54हमें माननी पड़ेगी ऐसा ब्रह्मा ने कुछ
- 3:48:56बोला है वेद ने कुछ बोला है वो चीजें मान
- 3:48:58रहे हैं हम ओके देन है जी अ ओके इसका
- 3:49:01ऑप्शंस कहां है ये रहे ऑप्शंस तो डी का
- 3:49:03फर्स्ट
- 3:49:05डी का फर्स्ट यहां से समझ तो आ रहा है कि
- 3:49:07अभाव मतलब कमी दैट चेयर इज़ नॉट अ टेबल
- 3:49:10टेबल इज़ नॉट अ चेयर ओके तो ये यहां सेकंड
- 3:49:13जा सकता है बट एक बार के लिए रुकते हैं
- 3:49:16बाकी ऑप्शंस भी देख लेते हैं। ही डजंट ईट
- 3:49:18इन डे टाइम ही इज़ फैट ही ईट्स इन नाइट। ये
- 3:49:22आपने खुद से ही अनुपलब्ध होता है ना
- 3:49:24अर्थपति वाली चीज में चला गया ये कि आपने
- 3:49:26ये खुद से ही मान लिया कि अगर वो दिन में
- 3:49:29नहीं खा रहा तो आपने अस्यूम कर लिया तो
- 3:49:31अर्थपति में अजमशन होता है कि वो मोटा तो
- 3:49:33है ही। दिन में वो खाते हुए देखा नहीं तो
- 3:49:36रात में ही खाता होगा। तो वो चीज जो है वो
- 3:49:38अनुप इसमें अर्थपति में चली गई। ओके? देन
- 3:49:41दिस काऊ इज़ डिफरेंट फ्रॉम डोमेस्टिक काऊ
- 3:49:43मस्ट बी अ नीलगा। तो आपने कंपेयर किया है
- 3:49:45काऊ और डोमेस्टिक काऊ और नीलगाय को तो ये
- 3:49:47उपमान हो गया कंपैरिजन हो गया बस फिर तो
- 3:49:50ये अभाव हो गया ये भी ठीक है और ये भी ठीक
- 3:49:52है तो यानी कि आपका ऑप्शन नंबर चार ठीक है
- 3:49:55ठीक है तो वैलिड हो जाती है चीजें
- 3:49:56वैलिडेशन भी मिल जाती है आपको व्हिच ऑफ़ द
- 3:49:59फॉलोइंग वैल्यू इज़ मेंशेंड इन द प्रिएबल
- 3:50:01ऑफ़ कॉन्स्टिट्यूशन सो प्रएमबल में
- 3:50:02सेकुलरिज्म मेंशन है हमने बात की थी ठीक
- 3:50:05है तो डेमोक्रेट अच्छा एक बात बताना
- 3:50:08इंडिया को मैं बता देती हूं चलो सोशलिस्ट
- 3:50:12सोशलिस्ट
- 3:50:14सेुलर
- 3:50:18डेमोक्रेटिक
- 3:50:21रिपब्लिक
- 3:50:23ये वर्ड्स हैं कॉन्स्टिट्यूशन में मेंशन
- 3:50:25सोवरन
- 3:50:28एनआई सोवनिटी ठीक है तो सोवरन सोशलिस्ट
- 3:50:32सेकुलर डेमोक्रेटिक रिपब्लिक हैं हम। सो
- 3:50:35ये चारप वर्ड जो हैं ये आपको याद होने
- 3:50:37चाहिए। तो सेकुलरिज्म मेंशन है भाई आपके
- 3:50:39प्रिएबल में। एक बार प्रएमबल खोल के पढ़
- 3:50:41लेना कि प्रियमबल में क्या-क्या चीजें
- 3:50:43हैं। अरेंज द फॉलोवंग स्टेप्स ऑफ इनफेंस
- 3:50:45एज प्रोपाउंडेड बाय न्याय स्कूल ऑफ इंडियन
- 3:50:48फिलॉसफी। सो हमें अरे वो अरेंज की बजाय
- 3:50:51हमें क्या करना है? इनफरेंस एज
- 3:50:53प्रोपाउंडेड बाय न्याय स्कूल ऑफ़ फिलॉसोफी।
- 3:50:56अच्छा ओके। सो इनफरेंस मतलब आप जब
- 3:50:58कंक्लूजन निकालते हो, अनुमान लगाते हो
- 3:51:00किसी चीज का तो किस किस पोजीशन पे लगाते
- 3:51:02हो? ठीक है? सो आप पहले रीजनिंग करते हो,
- 3:51:05प्रपज़िशन देखते हो, एग्जांपल देखते हो,
- 3:51:07एप्लीकेशन देखते हो या कंक्लूजन निकालते
- 3:51:10हो। ठीक है? सो देखो लास्ट पार्ट सबका ही
- 3:51:12क्या है? कंक्लूजन है। जी। यहां से मुझे
- 3:51:14समझ आ गया कि ओके? लास्ट कंक्लूजन है। तो
- 3:51:16शुरुआत कहां से होएगी? शुरुआत ये बोल रहे
- 3:51:18हैं या तो सी से होएगी या ई से होएगी।
- 3:51:20यानी कि या तो एप्लीकेशन से होएगी या
- 3:51:22प्रपोज़िशन से होएगी। ऑब्वियसली प्रपज़िशन
- 3:51:24से होएगी। ठीक है? सो पहले प्रपज़िशन आएगा।
- 3:51:27ओके? प्रपोज़िशन के बाद क्या आएगा? जी?
- 3:51:29रीजनिंग आएगी उसकी। ये भी रीजनिंग सेम है
- 3:51:31दोनों के अंदर। ठीक है? अब रीजनिंग के बाद
- 3:51:34ये बोल रहे हैं कि एग्जांपल पहले आएगा कि
- 3:51:36एप्लीकेशन पार्ट पहले आएगा। ओके? सो अगर
- 3:51:39एग्जांपल पहले आएगा तो आंसर थर्ड हो गया।
- 3:51:41अगर आप एप्लीकेशन पार्ट पहले सोच रहे हो
- 3:51:43तो आपका सेकंड आंसर हो गया। तो आंसर आपका
- 3:51:45थर्ड हो गया जी। ओके? यानी पहले एग्जांपल
- 3:51:48देन एप्लीकेशन और फिर आप उसका कंक्लूजन
- 3:51:50निकालो। ओके? फोरफोल्ड वैल्यू्यूएशन ऑफ़
- 3:51:54इंडियन कल्चर व्हेन अरेंज्ड इन
- 3:51:55हायरार्किकल ऑर्डर कैन बी रिप्रेजेंटेड
- 3:51:57बाय फॉलोइंग क्रोनोलॉजी। सो, यह
- 3:51:59क्रोनोलॉजी क्या होनी जी यह धर्म, अर्थ,
- 3:52:02काम और मोक्ष यह आना था आंसर। लेकिन फिर
- 3:52:05इन्होंने आंसर कुछ और दे दिया था। और उसके
- 3:52:07बाद जो है इन्होंने क्या किया? ड्रॉप कर
- 3:52:09दिया ये क्वेश्चन। ओके? सो क्योंकि
- 3:52:12एग्जैक्ट क्रोनोलॉजी तो नहीं है। बट जैसे
- 3:52:13मैंने आपको थ्योरी ऑफ़ पुरुषार्थ पढ़ाई
- 3:52:16उसमें यही क्रोनोलॉजी बताई गई है कि पहला
- 3:52:18गोल जो है वो धर्म है। दूसरा गोल अर्थ है,
- 3:52:20तीसरा गोल काम है। और चौथा गोल आपका मोक्ष
- 3:52:23है लाइफ का। ओके? सो ये रहेगी एक तरीके से
- 3:52:26आपकी क्रोनोलॉजी। अकॉर्डिंग टू जैनिज्म।
- 3:52:29जैनिज्म में मोक्ष अटेन करने के लिए किन
- 3:52:31चीजों की जरूरत है? तो इनमें से तीन ही
- 3:52:33आंसर आएंगे। बिकॉज़ हमने त्रिरत्न थ्री
- 3:52:35ज्वेल्स की बात की थी। त्रिरत्ना ठीक है?
- 3:52:39तो दर्शन क्योंकि दृष्टि तो नहीं था।
- 3:52:41साम्यक दृष्टि तो अपना बुद्धिज्म में था।
- 3:52:44दर्शन चरित्र और ज्ञान ये बात की थी हमने।
- 3:52:47नॉलेज ज्ञान मैंने बोला था ना चलो नॉलेज
- 3:52:49है तो राइट नॉलेज राइट आपका परसेप्शन और
- 3:52:53आपका चरित्र राइट कंडक्ट। ठीक है? सो आपका
- 3:52:56ए
- 3:52:58ए, सी और डी है क्या आंसर में? फर्स्ट
- 3:53:00ऑप्शन।
- 3:53:02ठीक है? तो ये क्या था आपका? राइट नॉलेज,
- 3:53:04राइट कंडक्ट और राइट फेथ दर्शन।
- 3:53:08चलिए जी। व्हिच अमंग द फॉलोवंग थ्योरी
- 3:53:10अफर्म्स दैट इनकलिटी इज़ सोशली
- 3:53:13कंस्ट्रक्टेड एंड कैन बी इरेडिकेटेड। सो,
- 3:53:15सोशली जो चीज़ बनाई गई है, उसको आप
- 3:53:18इरेडिकेट कर सकते हो इनकलिटी को। ये बात
- 3:53:20किसने बोली है? रैशन चॉइस थ्यरी, थ्योरी
- 3:53:23ऑफ़ सिस्टम्स एनालिसिस, मार्क्सिज्म या
- 3:53:25कंजर्वेटिवज़्म। तो यानी सोशल लेवल पर
- 3:53:28इनकलिटी क्रिएट की गई है। सोशल लेवल पर वो
- 3:53:30क्लास और कास्ट चीजें क्रिएट की गई हैं।
- 3:53:33ओके? तो इसमें कहीं भी रैशन चॉइस की बात
- 3:53:35नहीं हो रही है। कोई सिस्टम एनालिसिस की
- 3:53:37बात नहीं हो रही है। कोई कंजर्विज्म की
- 3:53:38बात नहीं हो रही है। तो बात आपकी
- 3:53:40मार्क्सिज्म की हो रही है क्योंकि
- 3:53:41मार्क्सिज्म के अंदर ही आपको दो क्लासेस,
- 3:53:43क्लास कॉन्फ्लिक्ट वो चीजें देखने को मिल
- 3:53:45रही थी। राइट? तो ये मार्क्सिज्म आ जाएगा
- 3:53:48जी। अब है जी आपके जून 204 के क्वेश्चंस
- 3:53:50जो 22 अगस्त को पेपर हुआ है। स्कूलिंग
- 3:53:53रिप्रोड्यूसेस नॉर्म्स एंड वैल्यूज़।
- 3:53:55नॉर्म्स एंड वैल्यूज़ आर सिंपली एपी
- 3:53:57फिनोमिनल एक्सप्रेशन ऑफ़ रूलिंग क्लास। तो
- 3:53:59जब भी रूलिंग क्लास वर्ड आ गया तो आप कहां
- 3:54:02जाओगे? आप मार्क्सिज्म पे जाओगे और कुछ
- 3:54:03देखने की ही जरूरत नहीं है। आंसर
- 3:54:05मार्क्सिज्म हो जाएगा। कौन सी चीज़ सही है?
- 3:54:08ट्रू पूछी है स्टेटमेंट। बिस्मिल्लाह 4
- 3:54:10साल 4 महीने 4 दिन पे शुरू होता है। ठीक
- 3:54:12है जी। बिल्कुल ठीक है ये बात। पब्जा 8
- 3:54:14साल पे शुरू हो रहा है बुद्धिस्ट एजुकेशन
- 3:54:16में। ये बात भी ठीक है। उपसंपदा एक रिचुअल
- 3:54:19होता है। पोस्ट एजुकेशन फॉर परमानेंट
- 3:54:21मेंबरशिप ऑफ अ संघ। तो वही कॉन्वोकेशन
- 3:54:23जैसी बात हो गई। ये भी है। उपनयन जो है वो
- 3:54:278, 11, 12 और 15 साल पे होता है। नहीं।
- 3:54:31अरे क्या हो गया? रुको। तो ये तीन चीजें
- 3:54:34तो ठीक हैं। जी। ठीक है। सो उपसंपदा सॉरी।
- 3:54:37अरे यार हां तो ये तीन चीजें ठीक है आपकी।
- 3:54:42और ये आपका उपनयन संस्कार आठ छह। छह, आठ
- 3:54:46और 12 साल पे होता है। 11 और 15 पे नहीं
- 3:54:49होता। ठीक है? और ना ही शूद्रों का होता।
- 3:54:51शूद्रा तो इनका एक्सक्लूडेड है। बालाबी और
- 3:54:54जगादला वैदिक सेंटर नहीं बाला ये तो
- 3:54:57बालाबी और बालाबी वाला भी होता है।
- 3:55:00यूजुअली ये भी आता है। बट इन इस क्वेश्चन
- 3:55:02में बाला भी इन्होंने मेंशन किया। सो
- 3:55:04बालाबी जो है वो जगादला आपके उसके जाएंगे।
- 3:55:07बुद्धिस्ट बुद्धिस्ट एजुकेशन सेंटर
- 3:55:08जाएंगे। तो ये भी गलत हो गया। सो आपका ए
- 3:55:10बी सी सही है। जी ऑप्शन ए। ठीक है? व्हिच
- 3:55:14अमोंग्स द फॉलोवंग इज़ नॉट अ मार्क्सिस्ट
- 3:55:16थ्योरी ऑफ़ सोशियोलॉजी ऑफ़ एजुकेशन?
- 3:55:19सोशियोलॉजी ऑफ़ एजुकेशन में मार्क्सिस्ट
- 3:55:21थ्योरी की बात हो रही है। एमएल डरकियम,
- 3:55:23एलथ्थुसर और मार्क्सिस्ट थरिस्ट। तो कौन
- 3:55:28सा इनमें से मार्क्सिस्ट थ्यरिस्ट नहीं
- 3:55:30है। ओके? सो आंसर क्या आ जाएगा? जी आपका
- 3:55:32फर्स्ट आ जाएगा क्योंकि ये फंक्शनल
- 3:55:34थ्यरिस्ट हैं। ये स्ट्रक्चरल फंक्शनलिज्म
- 3:55:36की बात करते हैं। देन है इस्लामिक
- 3:55:38फिलॉसोफर डिवाइड नेचुरल और यूनिवर्सल
- 3:55:40मैनिफेस्टेशन इंटू फाइव टाइप्स। तो आपको
- 3:55:42सीक्वेंस में लगाने हैं। ये हमने किया था।
- 3:55:45हमने जीनस से शुरू किया था। जीनस यहां दे
- 3:55:47नहीं रखा। था तो हम लीनियर से शुरू
- 3:55:49करेंगे। लीनियज़ देन आपका स्पीशीज़ देन आपका
- 3:55:52डिफरेंस देन आपका प्रो प्रॉपर्टी आएगा
- 3:55:56वैसे तो ये और आपका कॉमन अकरेंसेस ये नहीं
- 3:56:00आना चाहिए। ई बी ई बी कहां है? ये रहा ई
- 3:56:03बी डी सी ए आंसर आपका सेकंड आ गया। पिक द
- 3:56:06इनकरेक्ट मैच। तो जो सबसे गलत है वो आपसे
- 3:56:09आपको चूज़ करना है। एजुकेशन एंड स्कूलिंग
- 3:56:11आर आइडियोलॉजिकल स्टेट अपेरेटिससेस। ये
- 3:56:14बात अलथुसर ने बोली कि एजुकेशन और
- 3:56:16स्कूलिंग दोनों ही स्टेट के साधन हैं। आप
- 3:56:19ऐसा लगा सकते हो। ठीक है? इंस्ट्रूमेंट
- 3:56:22लगा लो अपेरेटस को इंस्ट्रूमेंट भी बोल
- 3:56:24देते हैं। ओके? एजुकेशन इज़ फॉर कल्चरल एंड
- 3:56:26सोशल रिप्रोडक्शन। सो बहुत ने ये बोली बात
- 3:56:29स्कूल इज़ अ मिनिएचर सोसाइटी। पार्सन। तो
- 3:56:31देखो पार्सन ने भी मिनिएचर सोसाइटी या
- 3:56:34स्कूल को सोसाइटी से रिलेट किया है। बट
- 3:56:36एग्जैक्टली अगर हम देखें तो मिनिएचर
- 3:56:39सोसाइटी वर्ड जो है वो किसने यूज़ किया था?
- 3:56:41जॉन ड्यूई ने यूज़ किया था। तो ये एज सच
- 3:56:43गलत नहीं है लेकिन मतलब सही में ही जाएगा
- 3:56:46क्योंकि पार्सन ने भी कंसीडर किया है।
- 3:56:49ओके? एजुकेशन हेल्प्स द इंडिविजुअल टू
- 3:56:51ग्रो एंड अचीव हर पोटेंशियल्स नहीं। कार्ल
- 3:56:54मार्क्स ये बात नहीं बोलते हैं।
- 3:56:55मार्क्सिज्म तो बोलता है कि एजुकेशन तो
- 3:56:57स्टेट इंस्ट्रूमेंट है और वो मतलब होता है
- 3:57:00ना रूलिंग क्लास और वो उसमें डिवाइड कर
- 3:57:02देता है। सो पोटेंशियल ग्रो करना काम होना
- 3:57:05चाहिए। लेकिन ये काम है हो नहीं रहा है
- 3:57:06एजुकेशन का। सो ये गलत हो गया जी। एजुकेशन
- 3:57:09फॉर डेमोक्रेसी इज़ दिस एजुकेशन फ्रीड
- 3:57:12फ्रॉम द अथॉरिटेरियन रिलेशनशिप्स। ये बात
- 3:57:14भी ठीक है। तो सारी बातें ठीक है जी। आपको
- 3:57:16ध्यान रखनी है सारी। ये एक गलत हो गई। डी
- 3:57:19ओनली। ओके?
- 3:57:21ओके। डीस्कूलिंग, नॉन फॉर्मल एजुकेशन,
- 3:57:23फॉर्मल एजुकेशन, इनफॉर्मल एजुकेशन। ओके?
- 3:57:25हायरिकली स्ट्रक्चरर्ड क्रोनोलॉजिकली
- 3:57:28ग्रेडेड एजुकेशन सिस्टम है। यह फॉर्मल
- 3:57:31सिस्टम साउंड कर रहा है। ओके? अह देन है
- 3:57:34सेट ऑफ लर्निंग एक्सपीरियंसेस फ्री ऑफ़
- 3:57:37टाइम एंड स्पेस लिमिटेशन। सो फ्री ऑफ़ टाइम
- 3:57:39हो एक है लाइफ लॉन्ग प्रोसेस वेयर बाय
- 3:57:42एव्री इंडिविजुअल लर्न्स फॉर डेली
- 3:57:43एक्सपीरियंसेस ये आपकी इनफॉर्मल होगी और
- 3:57:46ये आपकी नॉन फॉर्मल होगी। ओके? और एजुकेशन
- 3:57:49आउट ऑफ कनफाइन ऑफ़ स्कूल फॉर डवर्स नीड्स
- 3:57:52एंड इंटरेस्ट। तो ये डी स्कूलिंग हो गया।
- 3:57:54यानी जो ट्रेडिशनल कांसेप्ट चला आ रहा है
- 3:57:56स्कूलिंग का उसको हटाना। तो आंसर आपका
- 3:57:59फोर्थ हो गया जी। ठीक है? अरेंज द फॉलोवंग
- 3:58:03थरिस्ट क्रोनोलॉजिकली फंक्शनलिस्ट ओपन
- 3:58:05सिस्टम थ्योरी देन आपका सिंबॉलिक
- 3:58:08इंटरेक्शनिस्ट कॉन्फ्लिक्ट थरिस्ट और
- 3:58:10कॉन्फ्लिक्ट थ्यरिस्ट ओके अह तो देखो
- 3:58:12मार्क्सिज्म पहले आया है। सो कॉन्फ्लिक्ट
- 3:58:15थ्यरिस्ट में मार्क्सिज्म सबसे पहले जाएगा
- 3:58:17फिर फंक्शनलिज्म निकल के आता है। ठीक है?
- 3:58:20सो आपको अगर इतना भी आईडिया होता
- 3:58:22फंक्शनलिज्म तो ये देखो देन आपका
- 3:58:24कॉन्फ्लिक्ट थ्यरिस्ट वेबर आ जाएंगे। देन
- 3:58:27आपका सिंबॉलिक इंटरेक्शनिज्म और लास्ट में
- 3:58:29आपका ओपन सिस्टम थ्योरी आ जाएगा। ओके जी।
- 3:58:32ओपन सिस्टम थ्योरी के बारे में थोड़ा सा
- 3:58:35मुझे आप जो है कमेंट करके जरूर बताइएगा कि
- 3:58:37ये होता क्या है? ओके एवरीबडी कैन लर्न ओज
- 3:58:41इट्स जेनेसिस टू। तो जब हर कोई सीख पा रहा
- 3:58:44है तो इसका जो है वो आप जो है किसको
- 3:58:46दायित्व या किसको किसकी वजह से आप सीख पा
- 3:58:49रहे हो? तो कॉलोनियलिज्म की वजह से नहीं
- 3:58:51मॉडर्निज्म की वजह से। ठीक है? ना कि
- 3:58:53पोस्ट मॉडर्निज्म या रिफॉर्मिज्म। सो
- 3:58:55मॉडर्निज्म की वजह से आज आप सारी चीजें
- 3:58:57सीख पा रहे हो जब हर कोई इंसान सीख सकता
- 3:59:00है। ओके? एकिस्टेंशियलिज्म, आइडियलिज्म,
- 3:59:02क्रिटिकल थिंकिंग, मार्क्सिज्म। रियलिटी
- 3:59:04इज़ अल्टीमेटली मेंटल। ओके? आइडियलिज़्म
- 3:59:07साउंड कर रहा है। एजुकेशन एज़ अ मीन ऑफ़
- 3:59:10प्रोलिटेरिएट एममेंसिपेशन। सो
- 3:59:12प्रोलिटेरियट वर्ड आते ही आपको
- 3:59:14मार्क्सिज्म पे जाना है। ठीक है? तो डी का
- 3:59:16सेकंड। तो यहां से ही आपके सेकंड और फोर्थ
- 3:59:19ऑप्शन तो कट आउट हो गए। ओके? एसेंस
- 3:59:21प्रसीड्स इन द नेचुरल वर्ल्ड। नेचुरल
- 3:59:24वर्ल्ड में एसेंस जो हैं दैट विल प्रसीड
- 3:59:27एग्ज़िस्टेंस। टेक्निकली होता है
- 3:59:28एग्ज़िस्टेंस प्रसीड एसेंस। बट एसेंस और
- 3:59:31एग्ज़िस्टेंस की अगर बात हो रही है तो हम
- 3:59:33किसके साथ जाएंगे? एग्ज़िस्टेंशियलिज्म के
- 3:59:35साथ जाएंगे जो कि यहां पे दोनों में ही
- 3:59:37है। ओके? देन है आपका ऑल एजुकेशन इज़
- 3:59:39कंसर्न विद रीज़ एंड लॉजिक। तो ये क्रिटिकल
- 3:59:42थिंकिंग हो गई ना? ये क्रिटिकल थिंकिंग हो
- 3:59:44गई। ये आपका रियलिटी वाला मेंटल मेंटल
- 3:59:47लेवल पे आइडियाज़ लेवल पे आ गई। तो
- 3:59:49आइडियलिज़्म आ गया। तो आंसर आपका फर्स्ट
- 3:59:51एंड फोर्थ आंसर आपका थर्ड हो गया। ठीक है?
- 3:59:55व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग स्टेटमेंट्स आर ट्रू
- 3:59:57एज़ पर फंक्शनलिस्ट पर्सपेक्टिव ऑन
- 3:59:59सोशियोलॉजी ऑफ़ एजुकेशन? मेजर फंक्शन ऑफ़
- 4:00:02एजुकेशन इज़ द ट्रांसमिशन ऑफ़ सोसाइटीज़
- 4:00:05नॉर्म्स एंड वैल्यूज़। तो ये मेजर फंक्शन
- 4:00:07है सोसाइट स्कूल का या एजुकेशन का। स्कूल
- 4:00:09सर्व्स ऐज़ अ फंक्शन दैट कैन नॉट बी
- 4:00:11प्रोवाइडेड इदर बाय फैमिली और पियर्स।
- 4:00:14आजकल तो डी वो होता है ना होम स्कूलिंग भी
- 4:00:17चल रहा है तो टेक्निकली स्कूल फैमिली और
- 4:00:19फैमिली वो चीजें भी प्रोवाइड कर रही है बट
- 4:00:22स्कूल वो फंक्शनंस देता है वो चीजें करता
- 4:00:24है जो सिर्फ फैमिली और पियर्स नहीं कर
- 4:00:27सकते ओके स्कूल इज़ अ फोकल सोशलाइजिंग
- 4:00:30एजेंसी ओके एजुकेशनल सिस्टम इज़ अ पार्ट ऑफ़
- 4:00:34सुपरस्ट्रक्चर एंड रिप्रोड्यूसेस रूलिंग
- 4:00:37आइडियोलॉजी ओके मास एजुकेशन बिगेन इन
- 4:00:40इंडस्ट्रियल सोसाइटी एंड इज़ एन
- 4:00:43एस्टैब्लिश्ड रिक्वायरमेंट ऑफ एन
- 4:00:45इंडस्ट्रियल सोसाइटी। हम इंडस्ट्रियल
- 4:00:48सोसाइटी में मास एजुकेशन शुरू होती है। अब
- 4:00:50देखो ऑप्शंस के हिसाब से अगर हम जाए तो
- 4:00:52तीन या चार ऑप्शन ही ठीक है। यानी एक तो
- 4:00:54फॉर श्योर गलत होने वाला है। ओके? सो हमसे
- 4:00:58पूछा है फंक्शनलिस्ट पर्सपेक्टिव। जब ये
- 4:01:01रूलिंग आईडियोलॉजी को आप रिप्रोड्यूस कर
- 4:01:03रहे हो तो ये तो आपकी मार्क्सिज्म वाली
- 4:01:06आईडियोलॉजी नहीं हो गई। सो डी तो नहीं आना
- 4:01:08चाहिए। अगर डी नहीं आएगा तो एक ही ऑप्शन
- 4:01:10बचा। फोर्थ। आंसर आपका फोर्थ आ जाएगा। ठीक
- 4:01:14है? कई बार क्या होता है ना आप
- 4:01:15स्टेटमेंट्स पढ़ते हो आपको सारी सही नजर
- 4:01:17आती है क्योंकि आपने कोई ना कोई कांसेप्ट
- 4:01:18तो पढ़ा है। बट आप ऑप्शन में आप क्वेश्चन
- 4:01:21के हिसाब से देखो हमसे फंक्शनलिस्ट
- 4:01:23पर्सपेक्टिव पूछा है जिसमें सोसाइटी जो है
- 4:01:26वो नॉर्म्स के हिसाब से चलेगी। एजुकेशन उन
- 4:01:28नॉर्म्स को वैल्यूस को आगे बढ़ाने का,
- 4:01:30कल्चर को आगे बढ़ाने का काम करेगी। स्कूल
- 4:01:32जो है वो वाला काम करेगा जो बाकी क्योंकि
- 4:01:34स्कूल भी तो एक सोशलाइजिंग एजेंसी है ना
- 4:01:36जो पीियर या फैमिली नहीं कर पा रहे वो काम
- 4:01:39स्कूल करेगा। अगर वो काम नहीं होता या वो
- 4:01:41फैमिली और पेअर कर लेते तो स्कूल को एक
- 4:01:43अलग से सोशलाइजिंग एजेंसी बनाने की जरूरत
- 4:01:45ही नहीं पड़ती। राइट? तो बाकी सारी चीजें
- 4:01:47ठीक है। ये आईडियोलॉजी वाली चीज़ रूलिंग
- 4:01:50आईडियोलॉजी मार्क्सिज्म की चीज है। पाली
- 4:01:53त्रिपितिका टेक्स्ट। तो यहां से एक और चीज़
- 4:01:55समझ आती है। देखो त्रिपितिका तो हमें पता
- 4:01:57है बुद्धिस्ट टेक्स्ट है। अब ये पाली
- 4:01:59लैंग्वेज में लिखा गया था। ये बात याद
- 4:02:01रखिए। ओके? अह पाली लैंग्वेज आपकी
- 4:02:04बुद्धिज्म से रिलेट करती है और प्राकृत
- 4:02:06लैंग्वेज आपकी जैनिज्म से रिलेट करती है।
- 4:02:08हिंदूइज़्म संस्कृत लैंग्वेज पे फोकस करता
- 4:02:11था। ओके? सो इसमें से पूछा है व्हिच
- 4:02:12अमोंग्स द फॉलोविंग इज़ नॉट अ
- 4:02:14त्रिपित्तिका। सो ज्ञानपित्तिका, विनय
- 4:02:16पित्तिका, सूत पित्तिका, धामपित्तिका। तो
- 4:02:18क्या रहेगा बताओ इसके अंदर? विनय
- 4:02:21पित्तिका, सूतपित्तिका, अभिधाम पित्तिका
- 4:02:23था ना? तो आंसर आपका क्या आ जाएगा जी?
- 4:02:25ज्ञानपित्तिका। यह नहीं है। ओके? तो मैंने
- 4:02:27करवाया था ये आपको ऊपर।
- 4:02:30इनकरेक्ट मैचेस बताइए। सेकुलरिज्म में
- 4:02:33जॉर्ज होलक सोशलिज्म मिल नेचुरल राइट्स
- 4:02:37में होब सोशल कॉन्ट्रैक्ट जॉन लॉक सोशल
- 4:02:41कॉन्ट्रैक्ट जॉन लॉक ने तो नहीं लिखा है।
- 4:02:43सोशल कॉन्ट्रैक्ट रूसो ने लिखा है। सो ये
- 4:02:45तो गलत हो गया। व्हेल ऑफ़ इग्नोरेंस रोल।
- 4:02:48सो यानी डी तो फॉर श्योर आएगा। अरे वाह ये
- 4:02:50लो डी आएगा तो आंसर ही आपका सी और डी हो
- 4:02:53गया। थर्ड। ठीक है? तो एक इनेशन तो आप
- 4:02:55देखो आपको सारी इनेशन नहीं पता थी। लेकिन
- 4:02:58आपको मैंने करवाया है ऊपर रूसो में कि यार
- 4:03:00एक तो आप इसका सोशल कॉन्टैक्ट याद रखो
- 4:03:02इनका एमील याद रखो और इनका कंफेशन याद
- 4:03:05रखो। ये तीन काम तो याद रखो जो रूसो ने
- 4:03:07लिखे हैं। राइट? सो इनकरेक्ट में जॉन लॉक
- 4:03:09ने तो नहीं लिखा। जॉन लॉक ने दो अलग चीजें
- 4:03:10लिखी है और जॉन लॉक ने ब्लैंक स्लेट बोला
- 4:03:12है। सो यहां से हमें समझ आता है अगर सी और
- 4:03:15डी गलत है सो आपको एडिशनल इनेशन क्या मिल
- 4:03:18गई कि सेकुलरिज्म जॉर्ज होलक सेकुलरिज्म
- 4:03:21से रिलेट करते हैं। मिल बैकुन जो है
- 4:03:23बैकुनिन जो है वो सोशलिज्म और वेल ऑफ़
- 4:03:25इग्नोरेंस जो है वो र्स तो तीन नई इनेशन
- 4:03:29आपके नोट्स में ऐड हो जाती है। जी ओके
- 4:03:31गांधी एस्टैब्लिश्ड टॉलस्टॉय फार्म विद द
- 4:03:34स्कूल ऑन कैंपस फॉर द कैंपेन ऑफ़
- 4:03:36सत्याग्रह। तो कहां था ये? तो फोनिक
- 4:03:38सेटलमेंट टॉलस्टॉय फार्म ये सारे के सारे
- 4:03:40कहां थे? जी साउथ अफ्रीका में थे। ठीक है?
- 4:03:43पिक द करेक्ट मैच। ओके? सिंबॉलिक
- 4:03:46इंटरेक्शनिज्म जॉर्ज मीड। तो हमने दो पढ़े
- 4:03:49थे। इसमें एक जॉर्ज हरबर्ट मीड और एक
- 4:03:50हरबर्ट ब्लूमर। तो ठीक है। अह स्ट्रक्चरल
- 4:03:53फंक्शनलिज्म में पार्सन। हां ये भी पढ़ा है
- 4:03:55हमने। स्ट्रक्चर फंक्शनलिज्म में हम डरकिम
- 4:03:57को और पार्सन को दोनों को पढ़ते हैं।
- 4:03:59रैशनलिज्म में जॉन लॉक, एंपेरसिज़्म में
- 4:04:02रेने और सोशलिज़्म में मार्क्स और एंगल्स।
- 4:04:04तो हमसे करेक्ट पूछा है तो फॉर श्योर ए और
- 4:04:06बी तो सही हैं। अगर ए और बी ही मुझे पता
- 4:04:09है मेरी इनेशन के हिसाब से तो भी मेरा
- 4:04:11आंसर ए, बी और ई आ गया। ठीक है? सो वो
- 4:04:14चीजें आपको देखनी है क्योंकि ए कहीं नहीं
- 4:04:16है और एक ही ऑप्शन में है और हमने ये पढ़ा
- 4:04:18है ऊपर सिंबॉलिक इंटरेक्शनिज़्म भी और
- 4:04:20स्ट्रक्चरल फंक्शनिज़्म। यहां से ये समझ
- 4:04:22आता है कि आपने जो चीज़ें पढ़ी है ना उनसे
- 4:04:25भी आपका क्वेश्चन सॉल्व हो जाएगा। ओके? द
- 4:04:28क्लास व्हिच इज डोमिनेंट मटेरियल फोर्स इन
- 4:04:30सोसाइटी इज़ एट द सेम टाइम इट्स डोमिनेंट
- 4:04:34इंटेलेक्चुअल फोर्स दे रूल एस थिंकर्स एज़
- 4:04:37प्रोड्यूसर्स ऑफ़ आइडियाज़ दैट गेट नोटिस्ड
- 4:04:39द अबव अंडरस्टैंडिंग कैन बी एसोसिएटेड विद
- 4:04:42तो आप इसको रैशनलिस्ट थ्योरी से जोड़ोगे
- 4:04:44प्रगमेटिस्ट से जोड़ोगे इंपेरिकल से या फिर
- 4:04:47मार्क्सिस्ट थ्यरी से तो आप क्या बोल रहे
- 4:04:49हो क्लास जो है वो एक डोमिनेंट मटेरियल फ़
- 4:04:52है सोसाइटी में एट द सेम टाइम इस इसका
- 4:04:55डोमिनेंट इंटेलेक्चुअल फोर्स भी है। ठीक
- 4:04:58है? तो वो थिंकर्स की तरह रूल करते हैं एज
- 4:05:01प्रोड्यूसर्स ऑफ़ आइडियाज़ दैट गेट नोटिस्ड।
- 4:05:04तो ये बात किससे रिलेट करती हुई नजर आ रही
- 4:05:07है आपको? तो आंसर आपका मार्क्सिज्म हो
- 4:05:09जाएगा। सोसाइटी की बात हो रही है। ओके?
- 4:05:12सीट आइडल नो मोर गो गेट एजुकेशन। गो गेट
- 4:05:14एजुकेशन देखते ही आपको समझ आ जाना चाहिए
- 4:05:17कि ज्योति सावित्रीबाई फुले की बात हो रही
- 4:05:19है। ओके? इन अरेबिक लैंग्वेज एंड इस्लामिक
- 4:05:23ट्रेडिशन एजुकेशन इज़ नोन बाय थ्री टर्म्स।
- 4:05:26तो इनमें से कौन सी टर्म एजुकेशन के लिए
- 4:05:28नहीं है? सो तालीम, अह तरबिया और तालीम ये
- 4:05:32एजुकेशन के लिए हैं। जी। तिजरत जो है वो
- 4:05:34आपकी किसके लिए? बिज़नेस के लिए जो हमने
- 4:05:36ऊपर भी पढ़ी थी। ओके? आइडियल सोसाइटी मॉडल।
- 4:05:40ओके? देखो हमने ग्रेट डक्टिक ये ग्रेट
- 4:05:43डैक्टिक की बात की थी। कॉम्युनस। मैंने
- 4:05:44आपको बोला था कि बाकी इनफेशन आप पढ़ लेना।
- 4:05:46बट ये एक चीज़ याद रखो। ठीक है? सो डी का
- 4:05:49फॉर श्योर सेकंड आएगा। यहां से ही आपके दो
- 4:05:51ऑप्शन कट आउट हो गए। ओके? देन है
- 4:05:53रिपब्लिक। रिपब्लिक हमें पता है प्लेटो।
- 4:05:55प्लेटो थे ना? हां, पहला प्लेटो। ठीक है?
- 4:05:58सो, रिपब्लिक प्लेटो आ गया। तो, आंसर आपका
- 4:06:00थर्ड आ गया। यहां से यह समझ आ गया कि
- 4:06:02यूटोपिया जो है वो आपका थॉमस मोर और सिटी
- 4:06:06ऑफ़ गॉड जो है वो आपका ऑगस्टाइन।
- 4:06:09ठीक है? अकॉर्डिंग टू तैत्रीय उपनिषद
- 4:06:11अरेंज द फॉलोविंग कोश गोइंग इनवर्ड। सो आप
- 4:06:15जब अरेंज करोगे तो यहां पे जो आएगा लास्ट
- 4:06:18में अंदर की तरफ यानी इनर इनर सबसे इनर
- 4:06:22मोस्ट शीत की बात हो रही है। तो सबसे इनर
- 4:06:24मोस्ट क्या है? है जी आपकी आनंद माया तो
- 4:06:26सबसे लास्ट में ए आएगा ठीक है सबसे पहले
- 4:06:29अन्नमाया आएगा तो आंसर आपका यहीं से आ गया
- 4:06:31आपको और कुछ देखने की भी जरूरत नहीं है
- 4:06:33फर्स्ट ऑप्शन ठीक है
- 4:06:36देन है जी सांख्य फिलॉसफी वेदांता जैनिज्म
- 4:06:38बुद्धिज्म दिनाग दिगनाग और पश्वनाथ कपिल
- 4:06:43और आदि शंकराचार्य तो हमने आदि शंकराचार्य
- 4:06:46तो पढ़े ही हैं वेदांता की बात है कपिल की
- 4:06:48भी हमने बात की है कपिल कपिल कपिल सांख्य
- 4:06:51में बात आती है कपिल की सो तीन और चार है
- 4:06:54क्या ऑप्शन? ये लो यहीं से सॉल्व हो गया।
- 4:06:56ठीक है? सो जैनिज्म जो है वो पार्श्वनाथ
- 4:06:59और बुद्धिज्म में दिगनाग। तो इन दोनों
- 4:07:01फिलॉसफर्स के नए नाम है। ये याद रखना
- 4:07:03क्योंकि हम यूजुअली बुद्धिज्म में बात
- 4:07:04करते हैं। आपके गौतम बुद्ध की और जैनिज्म
- 4:07:08में हम तीर्थंकरों की बात करते हैं जिसमें
- 4:07:09सबसे पहले ऋषभ थे और सबसे लास्ट महावीर
- 4:07:12जैन थे। तो अब आप पार्श्वनाथ का भी नाम
- 4:07:14याद रख सकते हो। ठीक है जी। सो दिगनाग जो
- 4:07:17है वो इंडियन बुद्धिस्ट स्कॉलर रहे हैं।
- 4:07:19फाउंडर ऑफ इंडियन लॉजिक दिग्नाग्स वर्क
- 4:07:23लेड द ग्राउंड वर्क फॉर द डेवलपमेंट ऑफ़
- 4:07:25डिडक्टिव लॉजिक इन इंडिया। तो फर्स्ट
- 4:07:27सिस्टम ऑफ़ इन्होंने फर्स्ट सिस्टम ऑफ़
- 4:07:29बुद्धिस्ट लॉजिक एंड एपिस्टोमोलॉजी क्रिएट
- 4:07:31किया। पार्श्वनाथ जो है वो 23 जो है वो
- 4:07:34तीर्थंकर थे। हमने 24 और फर्स्ट याद किया
- 4:07:36था। सो एटलीस्ट आप बाकी पूछा नहीं जाता
- 4:07:39इतनी डिटेल में। एक और ऐड हो गई इनफेशन।
- 4:07:41अब आप 24 के 24 तीर्थंकर याद करने बैठो वो
- 4:07:44तो समझदारी नहीं है। ओके? देन नेक्स्ट
- 4:07:472023 के क्वेश्चन शुरू हुए हैं। जी
- 4:07:48अकॉर्डिंग टू रियलिस्ट करिकुलम फॉलोज़ अ
- 4:07:50हायरार्किकल ऑर्डर विद द एब्स्ट्रैक्ट
- 4:07:52सब्जेक्ट्स एट द टॉप एंड ट्रांज़िशनरी
- 4:07:55सब्जेक्ट्स एट द बॉटम। सो रियलिस्ट जो हैं
- 4:07:58उनके अकॉर्डिंग अह हायरार्किकल ऑर्डर में
- 4:08:00एब्स्ट्रैक्ट सब्जेक्ट्स टॉप पे आते हैं
- 4:08:02और उसके नीचे ट्रांज़िटरी जो चेंज होते
- 4:08:04रहते हैं। ओके? अह देन है प्रगमेटिस्ट
- 4:08:06करिकुलम वुड फोकस ऑन एक्सपीरियंसेस एंड
- 4:08:09सब्जेक्ट्स दैट लैंड देमसेल्फ टू
- 4:08:11फिलॉसोफिकल डायलॉग एंड एक्ट ऑफ चॉइस
- 4:08:14मेकिंग। तो ये जो फिलॉसोफिकल डायलॉग वाली
- 4:08:17चीज़ आ गई ये थोड़ी सी फिट नहीं बैठ रही है
- 4:08:19जी। ठीक है प्रगमेटिज़्म में। तो आंसर आपका
- 4:08:21फर्स्ट सही है। दूसरा गलत हो गया। ओके? सो
- 4:08:24अब आप अपने रियलिज्म और प्रगमेटिज़्म के
- 4:08:26नोट्स में ये दो लाइनें ऐड कर सकते हो।
- 4:08:29ओके?
- 4:08:30अकॉर्डिंग व्हिच ऑफ द फॉलोइंग इज नॉट अ
- 4:08:32सोशल फंक्शन ऑफ स्कूलिंग एज अंडरस्टुड बाय
- 4:08:35द डी स्कूलिंग मूवमेंट? तो सोशल फंक्शन ऑफ
- 4:08:37स्कूलिंग क्या नहीं है? सो हमने किस-किस
- 4:08:40चीज की बात की? हमने कस्टोडियल केयर की
- 4:08:41बात की थी। सोशल रोल सिलेक्शन की बात की
- 4:08:43थी। इनडॉक्टिनेशन की बात की थी। सोशल चेंज
- 4:08:47जो है वो सोशल फंक्शन नहीं है स्कूलिंग
- 4:08:49का। ओके? ओके। दो स्टेटमेंट्स हैं। नई
- 4:08:52तालीम वाज़ सजेस्टेड बाय जाकिर हुसैन कमेटी
- 4:08:54एट वारदा। नई तालीम सजेस्टेड दैट ऑल
- 4:08:57एजुकेशन मस्ट बी इन इंग्लिश टू मेक
- 4:08:58इंडिपेंडेंट सिटीजन। नहीं इंग्लिश की तो
- 4:09:00बात ही नहीं हुई है। मदर टंग की बात हुई
- 4:09:02है। तो दूसरी स्टेटमेंट गलत हो गई। जाकिर
- 4:09:04हुसैन वाली बात सही है। पहली सही है। ओके।
- 4:09:07व्हिच ऑफ़ द फॉलोविंग आर आस्तिक स्कूल्स ऑफ़
- 4:09:09इंडियन फिलॉसफी? तो जैनिज्म, चरक और
- 4:09:12बुद्धिज्म ये आपके नास्तिक स्कूल हैं।
- 4:09:14सांख्य और न्याय आपके आस्तिक स्कूल हैं।
- 4:09:16आंसर आपका सी और डी हो जाएगा। ओके? ये तो
- 4:09:18ईजी लगने चाहिए आपके। आपको अब तो व्हिच ऑफ़
- 4:09:20द फॉलोविंग कैन बी एसोसिएटेड विद गांधी?
- 4:09:22साबरमती आश्रम साबरमती के संत तूने कर
- 4:09:25दिया कमाल। यहां से भी याद रख सकते हो।
- 4:09:27ठीक है? नई तालीम गीतांजलि के लिए वो हमने
- 4:09:31ऊपर पढ़ा भी है कि रविंद्र नाथ टैगोर को
- 4:09:32गीतांजलि के लिए नोबेल प्राइज मिला है। ये
- 4:09:34नहीं है। शांतिनिकेतन नहीं है। क्राफ्ट
- 4:09:37बेस्ड एजुकेशन है। सो ए बी और ई आपका आंसर
- 4:09:40हो जाएगा। ठीक है? अरेंज द फॉलोविंग इन
- 4:09:42क्रोनोलॉजिकल ऑर्डर पोस्ट मॉडर्निज्म,
- 4:09:44ट्रांसडेंटलिज्म, इंपेरिसिज्म, एनालिटिकल
- 4:09:47फिलॉसफी और रैशनलिज्म। आंसर आपका फोर्थ
- 4:09:50रहेगा जी। रैशनलिज्म आप जो है सबसे पहले
- 4:09:53लेके आएंगे रैशनलिज्म के बाद इंपेरसिज्म
- 4:09:55एक्सपेरी एक्सपीरियंस से। इंपेरिसिज्म के
- 4:09:58बाद आपका ट्रांसडेंटलिज्म यानी बियड दीज़
- 4:10:00थिंग्स और उसके बाद एनालिटिकल फिलॉसफी और
- 4:10:03लास्ट में पोस्ट मॉडर्निज्म। सो सबसे
- 4:10:05लास्ट अभी पोस्ट मॉडर्निज्म चल रहा है।
- 4:10:07ठीक है? ओके? गिवन बिलो टू स्टेटमेंट्स।
- 4:10:09बुद्धिज़्म एक नास्तिक स्कूल है। बिल्कुल
- 4:10:11सही बात है। आस्तिक नास्तिक इन इंडियन
- 4:10:12फिलॉसफी इज़ अबाउट फेथ इन वेदास। सही बात
- 4:10:15है ये। सो फेथ है तो आस्तिक है। नास्तिक
- 4:10:17है जब फेथ नहीं है। तो दोनों स्टेटमेंट
- 4:10:19सही है और करेक्ट एक्सप्लेनेशन है कि
- 4:10:21नास्तिक क्यों है? जब यूजुअली ना ये
- 4:10:23एक्सप्लेनेशन आप ये समझने की कोशिश करो कि
- 4:10:26करेक्ट एक्सप्लेनेशन कब आएगी कि वो
- 4:10:27स्टेटमेंट की रीजनिंग दे रखी हो। अब
- 4:10:30इन्होंने बोल दिया बुद्धिज्म नास्तिक है।
- 4:10:31पर नास्तिक का मतलब क्या है? क्यों है
- 4:10:33नास्तिक वो यहां पे इन्होंने वेदों के बेस
- 4:10:35पे बता दिया। तो इसलिए करेक्ट
- 4:10:36एक्सप्लेनेशन भी हो गई।
- 4:10:39बुक्स हैं जी ऑथर्स हैं ईजी बुक है तो डी
- 4:10:41स्कूलिंग सोसाइटी इवान इलिच पेडागोजी ऑफ़
- 4:10:44ओप्रेस पाउलो फ्राय देन आपका यह
- 4:10:47डेमोक्रेसी एंड एजुकेशन जॉन ड्यूई और आपका
- 4:10:50एजुकेशन एंड सोशल ऑर्डर बर्ट रेंडर रशल
- 4:10:52रशल वाली बुक आपको नहीं पता होगी बाकी
- 4:10:55तीनों तो हमने पढ़ रखी है तो ये वाली बुक
- 4:10:56भी एक नई चीज आपको पता चलती है ओके आंसर
- 4:10:59आपका फर्स्ट क्या है दो चार एक तीन व्हिच
- 4:11:02ऑफ़ द फॉलोवंग आर मेथड ऑफ़ नोइंग अकॉर्डिंग
- 4:11:05टू न्याय फिलॉसोफी नोइंग न्याय के
- 4:11:07अकॉर्डिंग तो न्याय फिलॉसोफी में हमने अगर
- 4:11:09आपको याद हो वो जो चार्ट किया है तो कितने
- 4:11:12टाइप के उनको ये देते हैं बढ़ावा। सो
- 4:11:14परसेप्शन, इन्फ्लुरेंस, अभाव, स्मृति और
- 4:11:17अर्थपति।
- 4:11:19परसेप्शन इन्फ्लुएंस तो है ही। राइट? तो
- 4:11:21आंसर आपका ए और बी आ गया। सो परसेप्शन
- 4:11:24इन्फ्लुएंस है। ये तो फॉर श्योर ही है।
- 4:11:26कंपैरिजन और वर्बल टेस्टिमनी जो यहां पे
- 4:11:28मेंशन ही नहीं था। ओके? तो आंसर आपका एंड
- 4:11:30बी ओनली आ गया। व्हिच ऑफ़ द फॉलोविंग आर
- 4:11:33एसोसिएटेड विद रूसो? तो दे देखो जी सोशल
- 4:11:35कॉन्ट्रैक्ट अमील नॉलेज इज़ बेस्ड ऑन रीज़न
- 4:11:39ऑल तो फॉर श्योर A और बी तो है ये लो ए और
- 4:11:42बी है तो ए बी सी आंसर आ गया ठीक है सो
- 4:11:45बैक टू नेचर मैन इज़ बोर्न एस स्लेव नहीं
- 4:11:47मैन फ्री बोर्न होता है ऐसा रूसो का कहना
- 4:11:50है नॉलेज इज़ बेस्ड ऑन रीज़ ओनली नहीं नॉलेज
- 4:11:52है और सारी चीजों को ये डायनेमिक मानते
- 4:11:55हुए नेचर के ऊपर छोड़ते हैं। वी आर कॉट इन
- 4:11:58नैरेटिव एंड मैटर नैरेटिव्स एंड दे स ऑन
- 4:12:00आवर जजमेंट्स। वी मस्ट बी इंक््र
- 4:12:03इंक्रड्यूलस टुवर्ड्स मेटा नैरेटिव्स। दिस
- 4:12:06सेंटेंस कैन बी एसोसिएटेड विद। सो हम
- 4:12:09नैरेटिव्स में बंधे हुए हैं नैरेटिव और
- 4:12:11मेटा नैरेटिव में। ठीक है? सो नैरेटिव के
- 4:12:13बारे में भी फर्दर और नैरेटिव बनाना। दैट
- 4:12:15इज़ मेटा नैरेटिव। ठीक है? सो ये बात
- 4:12:17आइडियलिज्म में है, स्ट्रक्चरलिज्म में
- 4:12:18है, पोस्ट मॉडर्निज़्म में है या रियलिज़्म
- 4:12:20में है। ये बात पोस्ट मॉडर्निज़्म में है।
- 4:12:23जी। ठीक है? क्योंकि हमने ऐसा कुछ भी
- 4:12:24आइडियलिज्म, रियलिज़्म इनमें नहीं पढ़ा है।
- 4:12:26सो कुछ नई चीज़ है ये पोस्ट मॉडर्निज़्म की
- 4:12:28बात हो गई। सो मेटा नैरेटिव एक क्रिटिकल
- 4:12:31थ्योरी है। पर्टिकुलरली इन पोस्ट
- 4:12:32मॉडर्निज्म इज़ अ नैरेटिव अबाउट नैरेटिव।
- 4:12:35मैंने बोला ना नैरेटिव के बारे में भी एक
- 4:12:36नैरेटिव बना देना। ठीक है? सो हिस्टोरिकल
- 4:12:39मीनिंग एक्सपीरियंस और नॉलेज जो एक
- 4:12:40सोसाइटी को लेजिटिमेटिंग ऑफर्स अ सोसाइटी
- 4:12:43लेजिटिमेटिंग थ्रू एंटीिसिपेटेड कंप्लीशन
- 4:12:45ऑफ़ मास्टर आइडिया। सो ये पोस्ट मॉडर्निज़्म
- 4:12:48का कांसेप्ट है। ये हिंदी में था जी। तो
- 4:12:50इसको भी देख लीजिए। शैक्षिक ज्ञान और
- 4:12:52वर्चस्व शिक्षा में बदलाव के सवाल। शिक्षा
- 4:12:55और जन आंदोलन और दिवा स्वप्न। सो ये आपको
- 4:12:58याद रखने पड़ेंगे किसने कौन सी बुक जो है
- 4:13:00वो लिखी है। ऑप्शन नंबर चार आपका सही होगा
- 4:13:04यानी कि शैक्षिक वैज्ञान शैक्षिक ज्ञान और
- 4:13:06वर्चस्व कृष्ण कुमार ने लिखी है। शिक्षा
- 4:13:09में बदलाव के सवाल जो है वो अनिल सदगोपाल
- 4:13:12ने शिक्षा और जन आंदोलन जो है वो साधना
- 4:13:15सक्सेना और दिवा स्वप्न जो है वो गिज्जू
- 4:13:18भाई बदेका। तो ये गिज्जू भाई बदेका वाला
- 4:13:20तो फॉर श्योर याद रख लेना।
- 4:13:22नेक्स्ट जून 2023 के क्वेश्चंस
- 4:13:24सावित्रीबाई फुले सावित्री फुले कैन नॉट
- 4:13:27बी कैरेक्टराइज्ड एस तो वो पोएटिस्ट थी
- 4:13:29एजुकेशनिस्ट थी सोशल रिफॉर्मर थी मैंने
- 4:13:31आपको बोला था कि वो पॉलिटिक्स से कहीं भी
- 4:13:33रिलेटेड नहीं थी ये बात जरूर याद रखना तो
- 4:13:36वो पॉलिटिकल एक्टिविस्ट नहीं थी भाई हु
- 4:13:39हैज़ मेड दिस स्टेटमेंट नो नेशन इज़ अ ग्रेट
- 4:13:42और गुड बिकॉज़ पार्लियामेंट इनक्ट दिस और
- 4:13:44दैट बट बिकॉज़ इट्स मैन आर ग्रेट एंड गुड।
- 4:13:47तो ये बात किसने बोली है? यह बात स्वामी
- 4:13:50विवेकानंद ने बोली है। ठीक है? अकॉर्डिंग
- 4:13:53टू सिद्धू कृष्णमूर्ति एजुकेशन मींस बुक
- 4:13:55से भी सीखना है। फैक्ट्स भी मेमोराइज करने
- 4:13:57हैं। माइंड्स को भी डेवलप करना है। नेचुरल
- 4:13:59डायवर्सिटी को भी एंजॉय करना है। अर्निंग
- 4:14:02एकेडमिक डिग्रीज़ एंड अवॉयडिंग रियलिटीज़।
- 4:14:04रियलिटी को अवॉइड करने की बात नहीं हुई
- 4:14:06है। आंसर ए, बी, सी, डी आ जाएगा। ओके?
- 4:14:10आइडियलिस्ट करिकुलम, एकज़िस्टेंशियलिस्ट
- 4:14:12करिकुलम, रियलिस्ट और प्रगमेटिस्ट। ओके?
- 4:14:15तो देखो यहां से कहां से शुरू करें? बेस्ड
- 4:14:17ऑन एक्सपीरियंस ऐज़ अ पार्टनर ऐज़ अह
- 4:14:20एक्सपीरियंस अ पार्टनर इज़ द पार्टनर।
- 4:14:23बेस्ड ऑन एक्सपीरियंसेस अ पार्टनर इज़ द अह
- 4:14:27टीचिंग लर्निंग प्रोसेस।
- 4:14:30पार्टनर थोड़ा सा डाउट क्रिएट कर रहा है
- 4:14:32मुझे कि यह स्टेटमेंट ठीक भी है नहीं। इज़
- 4:14:34बेस्ड ऑन बॉडी एंड माइंड अलोंग विथ वर्चूज़
- 4:14:36एंड इट्स इट इज़ अ इट अ रीडिंग,
- 4:14:38जिम्नास्टिक, म्यूजिक, पेंटिंग।
- 4:14:40आइडियलिज़्म है क्या? बॉडी और माइंड तो
- 4:14:42आइडियलिज़्म से रिलेट कर रहा है। अह शुड बी
- 4:14:45सो प्लंड दैट इट इंड्यूसेस द टीचर एंड
- 4:14:47स्टूडेंट टू थिंक क्रिटिकली ऐज़ टीचिंग मोर
- 4:14:50एक्सप्लोरेटरी देन एक्सप्लेनेटरी। सो ये
- 4:14:52तो रियलिज़्म की बात लग रही है। साउंड तो
- 4:14:54रियलिज़्म कर रहा है। हम ये यहां वन ये
- 4:14:58यहां टू बेस्ड ऑन एक्सपीरियंसेस।
- 4:15:00एक्सपीरियंसेस बेस पे ये लग रहा है। ब्रॉड
- 4:15:02आइडियाज़ कॉन्सप्ट फोकस ऑन एब्स्ट्रैक्ट
- 4:15:04सब्जेक्ट्स फॉललोड बाय मोरल एंड कल्चरल
- 4:15:06वैल्यूज़। कुछ साउंड कर रहा है क्या? ये
- 4:15:08स्टेटमेंट ठीक लग रही है कहीं पे क्या? 2
- 4:15:104 1 3 2 4 1 3 फोर्थ है क्या आंसर? फोर्थ
- 4:15:15है। ठीक है? सो आपको थोड़ा-थोड़ा आईडिया
- 4:15:17लगाना पड़ेगा ऐसे क्वेश्चंस में। चलिए हु
- 4:15:20अमोंग्स द फॉलोविंग एडवोकेटेड फॉर
- 4:15:22क्रिटिकल पेडागोजी? तो ये तो आपको आंख बंद
- 4:15:24करके पता होना चाहिए पाउल। ठीक है? फोर्थ
- 4:15:27रविंद्रनाथ टैगोर, महात्मा गांधी, स्वामी
- 4:15:29विवेकानंद, अरविंदो घोष कोई नाम ऐसा नहीं
- 4:15:32है जो सुना हुआ नाम हो। ओके? सो देखो
- 4:15:33करिकुलम शुड प्रमोट लैंग्वेजज़, साइंस,
- 4:15:36फिजिकल एजुकेशन फॉर अ स्पिरिचुअल ग्रोथ
- 4:15:38एंड डेवलपमेंट ऑफ़ प्रोस्पेरिटी। प्रमोट्स
- 4:15:40इंडिविजुअल क्रिएटिविटी, एनकरेज डायलॉग
- 4:15:43एंड अटेम्प्ट्स ऑल अराउंड डेवलपमेंट थ्रू
- 4:15:45योगा एंड स्पिरिचुअल एजुकेशन। करिकुलम इज़
- 4:15:47टू बी बेस्ड ऑन एक्टिविटी टू प्रमोट
- 4:15:49ओरिजिनलिटी एंड क्रिएटिविटी ऑफ़ थॉट्स बाय
- 4:15:51डिबेट्स एंड डिस्कशन फॉर इंटरकल्चरल एंड
- 4:15:53इंटर रेशियल अह यूनिटी। सजेस्टेड
- 4:15:57एक्टिविटी एंड क्राफ्ट सेंटर्ड क्राफ्ट
- 4:16:00क्राफ्ट क्राफ्ट क्राफ्ट। क्राफ्ट नाम आते
- 4:16:02ही गांधी जी के ऊपर चले जाना है। और यहां
- 4:16:04से भी आपका क्वेश्चन सिर्फ यहीं से सॉल्व
- 4:16:06हो गया। क्योंकि कई बार होता है रविंद्र
- 4:16:08नाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद अरविंद घोष
- 4:16:10सबने अच्छी-अच्छी बातें बोली तो आप कई बार
- 4:16:12कंफ्यूज हो जाते हो। ओके? सो वो चीज नहीं
- 4:16:14होनी चाहिए। तो उससे बचने के लिए आपके पास
- 4:16:17है कि आप कोई ऐसा चीज ढूंढो जो बहुत फॉर
- 4:16:19श्योर हो आप। तो क्राफ्ट सेंटर्ड महात्मा
- 4:16:21गांधी आंसर तो आपका यहीं से ही सेकंड आ
- 4:16:23गया। ठीक है? तो यहां से समझ आता है कि
- 4:16:26रवींद्र नाथ टैगोर किस तरीके। तो आप ये ये
- 4:16:28जो लाइंस हैं ये एग्जैक्टली आप नोट्स में
- 4:16:30ऐड कर सकते हो अपने कि करिकुलम इज़ इज़ टू
- 4:16:33बी बेस्ड ऑन एक्टिविटी ताकि वो
- 4:16:34ओरिजिनलिटी, क्रिएटिविटी, कल्चर,
- 4:16:37इंटररेशियल यूनिटी इन सबको सपोर्ट करें।
- 4:16:39ठीक है? क्योंकि इंटरनेशनलिज्म के भी बारे
- 4:16:41में बात की थी इन्होंने। देन है आपका
- 4:16:43स्वामी विवेकानंद। सो ये इंडिविजुअल
- 4:16:45क्रिएटिविटी को प्रमोट कर रहे हैं। तो
- 4:16:47योगा और स्पिरिचुअल एजुकेशन से रिलेट कर
- 4:16:49पाएंगे हम स्वामी विवेकानंद को। और
- 4:16:51अरबिंदो जो है वो सारी चीजों के इंटीग्रल
- 4:16:54एजुकेशन की बात करते हैं। इन द व्यू ऑफ़
- 4:16:57जिद्दू कृष्णमूर्ति अ पर्सन लिव्स
- 4:16:58हैप्पीली इफ अगर वो नॉन कॉम्पिटिटिव है।
- 4:17:01पहली लाइन बताई थी मैंने। ठीक है? चैलेंज
- 4:17:03को एक्सेप्ट करता है तो भी अच्छे से
- 4:17:05हैप्पीली जिएगा डेयरिंग और इंटेलिजेंट। बट
- 4:17:07ये कोई स्पेसिफिक चीज़ नहीं है। अगर वो नॉन
- 4:17:09कॉम्पिटिटिव है तो बेटर तरीके से वो
- 4:17:12ज्यादा सीख पाएगा। ओके? इन द बुक पेडागोजी
- 4:17:15ऑफ़ ऑप्रेस्ड इज़ अ डिस्टिंशन हैज़ बीन मेड
- 4:17:18बिटवीन ऑप्रेस्ड एंड ऑप्रेसर। ऑप्रेसर्स
- 4:17:22एंड ऑप्रेस जो ऑप्रेस हो रहा है और जो
- 4:17:23ऑप्रेस कर रहा है राइट
- 4:17:26रियलिज्म प्रगमेटिज्म नेचुरलिज्म
- 4:17:28आइडियलिज्म प्लेटो रविंद्र नाथ टैगोर
- 4:17:31एिस्टोटलल जॉन डुई तो रियलिज्म प्लेटो
- 4:17:34नहीं रियलिज्म एरिस्टोटलल आइडियलिज्म
- 4:17:37प्लेटो प्रगमेटिज्म जॉन डुई और नेचुरलिज्म
- 4:17:40रविंद्र नाथ टैगोर सो तीन चार दो एक ऑप्शन
- 4:17:42नंबर वन टीचर्स गांधी जी बिलीव्ड दैट
- 4:17:45टीचर्स आर टू बी सेल्फ सैक्रिफाइसिंग हां
- 4:17:48कि वो मोडेस्ट सैलरी में काम चला लें बॉयज
- 4:17:50एंड एंड गर्ल्स शुड नॉट बी टॉट टुगेदर।
- 4:17:52ऐसा कुछ नहीं बोला था इन्होंने। रीजनल
- 4:17:54लैंग्वेजज़ शुड बी द मीडियम ऑफ़
- 4:17:55इंस्ट्रक्शंस। हां, प्राइमरी, रीजनल
- 4:17:57लैंग्वेज, मदर, टंग टीचर्स मैनेज देयर
- 4:18:00लिविंग वि द मोडेस्ट सैलरीज़। हां,
- 4:18:02इंटरेस्ट इज़ टू बी द बेसिस ऑफ़ लर्निंग। ये
- 4:18:04बात भी सही है। तो, अपनी एक ही बात गलत है
- 4:18:06जी। बी तो ए, सी, डी, ई तो सही है। पर ऐसा
- 4:18:09कुछ ऑप्शन में नहीं दे रखा है। तो, हम
- 4:18:11किसके साथ जाएंगे? हमारा
- 4:18:14सेल्फ सैक्रिफाइसिंग होने चाहिए। देखो, बी
- 4:18:17नहीं है फॉर श्योर। और बी तो फॉर श्योर
- 4:18:19नहीं है। तो अगर मैं बी को कट करूं तो
- 4:18:21हमारे पास ए डी ई और सी डी ई बचा। यानी डी
- 4:18:24ई तो फॉर श्योर है ही। ओके? तो ए और सी
- 4:18:26में से हमें अगर सेलेक्ट करना है देखो
- 4:18:28उन्होंने हिंदी को बोला था। अगर रीजनल के
- 4:18:30ऊपर भी ना जाएं तो हिंदी या मदर टंग को
- 4:18:32स्पेशली बोला था मीडियम ऑफ लैंग्वेज जो है
- 4:18:34ना तो आंसर आपका ए डी ही आ जाएगा। ओके? सो
- 4:18:37रीजनल में उन्होंने हिंदी स्पेसिफाई किया
- 4:18:39था प्राइमरी लेवल पे या मदर टंग। सो रीजनल
- 4:18:42में बहुत सारी लैंग्वेज आ जाती है। मदर
- 4:18:44टंग ज्यादा बेटर वर्ड होगा शायद। ओके? तो
- 4:18:46यहां पे ऑप्शन में ए डीई ज्यादा बेटर
- 4:18:48साउंड कर रहा है। रिलेटिव डेबिवेशन
- 4:18:50थ्योरी, कॉन्फ्लिक्ट थ्योरी, स्ट्रक्चरल
- 4:18:51फंक्शनलिज्म और पॉलिटिकल थ्योरी। सो क्या
- 4:18:54चीज़ किससे रिलेट करती है? वो हमसे पूछा
- 4:18:56है। इट बिलीव्स दैट एम्स ऑफ़ एनी की एजेंसी
- 4:19:00सच ऐज़ एजुकेशन इज़ टू सोशलाइज़ द चाइल्ड एंड
- 4:19:04टीनएजर्स। स्ट्रक्चरल फंक्शनलिज़्म जैसा
- 4:19:07ज़्यादा साउंड कर रहा है। क्योंकि सोसाइटी
- 4:19:09की बात हो रही है। ठीक है? कैसे काम होएगा
- 4:19:12सोसाइटी में? इट क्लेरिफाई द मीनिंग ऑफ़
- 4:19:14कॉनसेप्ट सच ऐज़ फ्रीडम, इक्वलिटी, जस्टिस।
- 4:19:18पॉलिटिक्स से रिलेटेड बातें आ गई। ये
- 4:19:20पॉलिटिकल थ्यरी साउंड कर रही है। इट
- 4:19:22बिलीव्स दैट सोशल कॉन्फ्लिक्ट्स अराइज़
- 4:19:24व्हेन अ सोशल ग्रुप फील्स दैट इट वास ऑफ़
- 4:19:26देन अराउंड इट। यानी आप डिप्र्राइव्ड फील
- 4:19:29कर रहे हो। तो ये तो फॉर श्योर जो है वो
- 4:19:31रिलेटिव डेप्रिवेशन में जाएगा। दिस थ्यरी
- 4:19:33इज़ मोस्ट कॉमनली एसोसिएटेड विद
- 4:19:34मार्क्सिज्म। मार्क्सिज्म में कॉन्फ्लिक्ट
- 4:19:36थ्यरी। थ्योरी ऑफ़ इकोनमिक डेटमिनिज्म काफी
- 4:19:39रिलेट करती है। सो तीन चार और आपका दो तीन
- 4:19:44चार एक और दो। ऑप्शन नंबर वन जो है वो
- 4:19:46आपका सही हो जाएगा। ओके जी। पलो फ्राय्स
- 4:19:50फिलॉसफी ऑफ़ एजुकेशन इज़ कंसीडर्ड टू बी
- 4:19:53स्टेम्ड फ्रॉम। तो कहां से आई हुई लगती
- 4:19:55है? प्लेटो के आइडियाज़ से। मैंने आपको
- 4:19:57बताया था कि ये इन्फ्लुएंस्ड हैं इनके
- 4:20:00आइडियाज़ से। प्रो कॉलोनियल थिंकर्स, एंटी
- 4:20:02कॉलोनियल थिंकर्स, मॉडर्न मार्क्सिस्ट
- 4:20:05थिंकर्स एंड आपका एजुकेशन सिस्टम दैट
- 4:20:07सप्रेसेस द ऑप्रेसर। तो हां जो सप्रेस कर
- 4:20:10रहा है ऑप्रेसर को ये भी सही साउंड कर रहा
- 4:20:12है। लेकिन प्लेटो का आईडिया तो है फॉर
- 4:20:15श्योर जितना मुझे ध्यान आ रहा है। सो ए,
- 4:20:18बी, ए, सी, डी ए, सी और डी। तो आंसर आपका
- 4:20:22ए, सी, डी हो जाएगा। जी। ठीक है? सो बेटर
- 4:20:26इनमें से क्योंकि प्लेटो जो होता है ना
- 4:20:27इनमें से किसके अंदर रूट्स? ये तो बात
- 4:20:29इनकी जनरल बात ही हो गई कि एजुकेशन सिस्टम
- 4:20:32जो है वो सप्रेस करता है ऑप्रेसर
- 4:20:34ऑप्रेसर्स को नहीं ऑप्रेस्ड को ऑप्रेसर्स
- 4:20:36तो अ
- 4:20:38ऑप्रेसर और ऑप्रेस्ड है ना एक दबाता है सो
- 4:20:41वो ऑप्रेस्ड को सप्रेस कर रहा है जो
- 4:20:44क्योंकि सप्रेस करके ही आप ऑप्रेस्ड बना
- 4:20:46रहे हो ना ऑप्रेसर जो ऑपरेशन मतलब जो उसको
- 4:20:49सप्रेस कर रहा है वो बंदा है ना ऑप्रेसर
- 4:20:51तो जितना मैं समझ पा रही हूं। सो आंसर
- 4:20:53आपका ए, सी और डी हो जाएगा। जी। गिवन बिलो
- 4:20:56आर टू स्टेटमेंट्स इन जैन फिलॉसफी देयर इज़
- 4:20:58नो प्लेस टू अ यूनिवर्सल सोल और गॉड। तो
- 4:21:01देखो वो गॉड की एग्ज़िस्टेंस को तो मानते
- 4:21:03हैं लेकिन यूनिवर्सली एक ही एग्ज़िस्ट करता
- 4:21:06है। ऐसा कुछ इन्होंने बोला नहीं है। ठीक
- 4:21:08है? सो कोई प्लेस नहीं है यूनिवर्सल सोल
- 4:21:10या यूनिवर्सल गॉड का। क्योंकि अगर ऐसा कुछ
- 4:21:12हुआ तो इस ये एग्ज़िस्टेंस जो है वो मोरल
- 4:21:14रिस्पांसिबिलिटी और इंडिविजुअल एफर्ट्स को
- 4:21:17मीनिंगलेस बना देगी। क्योंकि आप एक उसी
- 4:21:19इंसान ही उसी के ऊपर डिपेंडेंट हो जाओगे।
- 4:21:21अगर यूनिवर्सल सोल या गॉड एक्सिस्ट करता
- 4:21:23होगा तो ठीक है जी ये दोनों चीजें और
- 4:21:25एक्सप्लेनेशन भी करेक्ट है। जिद्दु
- 4:21:27कृष्णमूर्ति बिलीव्ड दैट टीचिंग मींस
- 4:21:29गिविंग और रिसीविंग समथिंग स्टडिंग फर्स्ट
- 4:21:32एंड देन ट्रांसलेटिंग इंटू एक्शन शेयरिंग
- 4:21:34टुगेदर हेल्पिंग स्टूडेंट्स टू पास
- 4:21:36एग्जामिनेशन और रियलाइजिंग द सेल्फ। तो
- 4:21:39सेल्फ को रियलाइज़ करना। तो आंसर आपका
- 4:21:41फर्स्ट हो जाएगा जी सी और ई यानी शेयरिंग
- 4:21:44टुगेदर और रियलाइजिंग द सेल्फ। ओके? सो ये
- 4:21:47पास एग्जामिनेशन वाला तो फॉर श्योर नहीं
- 4:21:49आएगा। वो हटते ही ये दो ऑप्शन हट गए सी ई
- 4:21:52और ए बी सी तो सी और ई ज्यादा बेटर है
- 4:21:54रेदर देन बाकी ऑप्शंस ओके नेक्स्ट है जी
- 4:21:58व्हिच ऑफ़ द फॉलोवंग इंडियन स्कूल्स ऑफ़
- 4:22:00फिलॉसोफी आर डज़ नॉट रिजेक्ट वैदिक अथॉरिटी
- 4:22:03सो वैदिक अथॉरिटी को रिजेक्ट नहीं करते तो
- 4:22:06बुद्धा चरक और जैन तो रिजेक्ट करते हैं।
- 4:22:09आंसर आपका सांख्यिक फिलॉसफी हो गया। व्हिच
- 4:22:11ऑफ़ द फॉलोवंग डज़ नॉट बिलोंग टू द कॉन्सप्ट
- 4:22:14ऑफ़ सोशल मूवमेंट, रिलेटिव डेप्रिवेशन,
- 4:22:16थ्योरी, रिसोर्स मोबिलाइज़ेशन और पॉलिटिकल
- 4:22:18प्रोसेस? ये तो सिलेबस में ही है। ये तो
- 4:22:20वर्ड्स मैंने भी टच कर दिए। सो एक ही बचता
- 4:22:22है नॉर्मेटिव थ्योरी। नॉर्मेटिव थ्योरी जो
- 4:22:25है वो सोशल मूवमेंट से नहीं बिलोंग करती।
- 4:22:27ये जो है आपकी कम्युनिकेशन से बिलोंग करती
- 4:22:29हैं। ठीक है? तो ये चार प्रेस थ्यरीज़ हैं
- 4:22:32जो कि फ्रेड साइबर्ट और थियोडोर, पेटसन और
- 4:22:35बिलबर्न ने दी हैं सैक्रम। ठीक है? तो फोर
- 4:22:37थ्यरीज़ ऑफ़ प्रेस। फोर थ्यरीज़ ऑफ़ प्रेस और
- 4:22:40मीडिया में अथॉरिटेरियन, लिब्रिटेरियन,
- 4:22:41सोशल रिस्पांसिबिलिटी थ्यरी और सोवियत
- 4:22:43मीडिया थ्यरी आती हैं। ये चारों थ्यरी
- 4:22:46नॉर्मेटिव कहलाएंगी। और यह हमने वहां पे
- 4:22:48भी बात की है पेपर वन में। ओके?
- 4:22:52सेलेक्ट द करेक्ट फोर्थ, एथ्स एंड 12थ
- 4:22:54लिंक इन 12 लिंक्स ऑफ़ सफरिंग अकॉर्डिंग टू
- 4:22:57बुद्ध फिलॉसोफी। सो 12 लिंक हैं सफरिंग
- 4:22:59के। ठीक है? तो उन 12 में से आपसे पूछा है
- 4:23:02फोर्थ, एथ और 12थ लिंक जो है वो क्या
- 4:23:04रहेगा? ओके? सो ये आपको नहीं पता होगा।
- 4:23:07आंसर तो सेकंड है। ये चीज़ मैं बता देती
- 4:23:09हूं। ओके? सेलेक्ट द करेक्ट फोर्थ, एथ एंड
- 4:23:1212थ लिंक। तो ये आपके हैं चीजें माइंड
- 4:23:15बॉडी ऑर्गेनिज्म आपका क्रेविंग्स और
- 4:23:18सफरिंग ठीक है इन्होंने क्या किया आगे
- 4:23:22पीछे की है चीजें तो पहले माइंड बॉडी
- 4:23:24ऑर्गेनिज्म देन क्रेविंग और सफरिंग यही
- 4:23:27सिचुएशन में रहेंगे सारे के सारे अह ट्रुथ
- 4:23:29ऑफ़ सफरिंग ये है वो 12 लिंक्स ठीक है
- 4:23:32इग्नोरेंस कार्मिक फ़ेशन कॉन्शियसनेस नेम
- 4:23:35एंड फॉर्म सिक्स सोर्सेस कांटेक्ट फीलिंग
- 4:23:38क्रेविंग रेस्पिंग बिकमिंग बर्थ और लास्ट
- 4:23:40में एजिंग एंड डेथ ओके तो ये थोड़ी सी
- 4:23:42फ़क्चुअर इनफेशन है जो आप ध्यान रख सकते
- 4:23:44हो। एक ही बार पूछी गई है। मुश्किल है
- 4:23:46दोबारा पूछना बट पूछा जा सकता है। कोई
- 4:23:48भरोसा भी नहीं है। देन अच्छा ये भी था ये
- 4:23:51ट्रुथ ऑफ़ सफरिंग जो हमने चारों चीजें पढ़े
- 4:23:53इनमें से सेवंथ 11थ 12थ जो है वो ट्रुथ ऑफ़
- 4:23:55सफरिंग से रिलेट करता है। वन टू 8 नाइन 10
- 4:23:58ट्रुथ ऑफ़ सफरिंग ओरिजिन ऑफ़ सफरिंग से। ये
- 4:24:01ससेशन और आपका ये हमने पढ़ा था दुख निरोध
- 4:24:04मार्ग जो एट फोल्ड बाथ। तो ये ये चीज़ आप
- 4:24:06थोड़ी सी ध्यान रख सकते हो। स्पिंजो इज
- 4:24:09आइडेंटिफाइड विद द आइडियलिस्ट ट्रेडिशन
- 4:24:12बिकॉज़ तो स्पिंजो को आइडियलिज्म के साथ
- 4:24:14रिलेट किया जाता है। क्यों? सो ही
- 4:24:16इंसिस्टेड अपॉन फेमस कार्टिसन इनफरेंस। आई
- 4:24:19थिंक देयर फॉर आई एम यानी मैं सोचता हूं
- 4:24:21इसीलिए मैं हूं। ओके? इस वजह से या ही
- 4:24:24इंसिस्टेड दैट देयर इज़ एन अनचेंजिंग एंड
- 4:24:26अबाइडिंग एकज़िस्टेंस अनगिडिंग ऑल थिंग्स
- 4:24:30वन ऑफ़ द चीफ एट्रिब्यूट ऑफ़ व्हिच इज़ थॉट।
- 4:24:33तो ये थॉट से रिलेट करते हैं, आइडिया से
- 4:24:36रिलेट करते हैं। इस वजह से इनको
- 4:24:38आइडियलिज्म से रिलेट किया जाता है। ही
- 4:24:41इंसिस्टेड अपॉन द प्राइमसी ऑफ़ सेल्फ नहीं।
- 4:24:43ही इंसिस्टेड अपॉन द कॉनसेप्ट ऑफ़
- 4:24:45मोनार्ड्स। नहीं। ओके? तो आंसर आपका सेकंड
- 4:24:48रहेगा। स्पिंजोस थ्योरी ऑफ़ एट्रिब्यूट्स
- 4:24:50भी आप इसको बोल सकते हो। एंड फोकस इसका
- 4:24:53किस पे रहता है? स्पिंजो जो है वो मोनेस्ट
- 4:24:56है जो देखता है मेंटल एंड फिजिकल एज़ टू
- 4:24:58साइड ऑफ़ सेम पॉइंट। ओके? तो स्पिंजो का जो
- 4:25:01सिस्टम है वो सेंटर्ड ऑन द इनडेफिनेट
- 4:25:04इनफाइनाइट सिस्टम ना कि सेल्फ पे
- 4:25:06डिपेंडेंट हो। ठीक है? दूसरा कांसेप्ट ऑफ़
- 4:25:08मोनार्ड जो है वो हॉलमार्क है जी गोट
- 4:25:11फ्राइड विलहम लिबनिस्ट का। ये उनकी
- 4:25:13फिलॉसफी है ना कि स्पिंजो की फिलॉसफी।
- 4:25:16स्पिंजो जो है वो आर्ग्यू करते हैं कि एक
- 4:25:18ओनली वन सब्सटेंस है। जबकि लिबनिस्ट जो है
- 4:25:20वो आर्ग्यू करते हैं कि बहुत सारे
- 4:25:22सब्सटेंस हैं। बहुत सारे मोनार्ड्स।
- 4:25:23मोनार्ड्स मतलब सिंपल या नॉन इंटरेक्टिंग
- 4:25:25सब्सटेंसेस। तो बहुत सारे ऐसे सिंगल-सिंगल
- 4:25:28सब्सटेंसेस हैं। ओके? टू अंडरस्टैंड
- 4:25:30पॉलिटिक्स, रैशन चॉइस थ्योरी इज़ बेसिकली
- 4:25:34एक्सप्लेनिंग सोशल फ़िनोमिना एज़ एन आउटकम
- 4:25:36ऑफ़ इंडिविजुअल एक्शन दैट कैन अच्छा ये
- 4:25:39मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि रैशन चॉइस
- 4:25:42थ्योरी तो अगले उसमें आएगी ना सेकंड सेकंड
- 4:25:44यूनिट में आई थिंक। ओके? इन दिस
- 4:25:46कॉन्टेक्स्ट व्हिच ऑफ़ द फॉलोविंग इज़ नॉट द
- 4:25:48की एलिमेंट इन ऑल रैशन चॉइस एक्सप्लेनेशन?
- 4:25:50सो इंडिविजुअल प्रेफरेंस, बिलीफ़ ऑफ़ द
- 4:25:52सोसाइटी, इंडिविजुअल कॉन्स्टेंट,
- 4:25:53इंडिविजुअल बिलीफ़। तो जब भी रैशन चॉइस
- 4:25:56यानी लॉजिकली आप अपनी चॉइस के हिसाब से
- 4:25:58आगे बढ़ोगे। उसकी जब बात आती है तो उसके
- 4:26:00अंदर इंडिविजुअल की प्रेफरेंसेस,
- 4:26:02इंडिविजुअल कॉनंस्टेंट, इंडिविजुअल बिलीफ
- 4:26:03पे फोकस किया जाता है ना कि सोसाइटी के
- 4:26:05बिलीफ पे। ओके? सोसाइटी के बिलीफ पे फोकस
- 4:26:08करोगे उसके हिसाब से चलोगे तो वो रैशन
- 4:26:09चॉइस तो नहीं हुई ना। तो सेकंड ऑप्शन आपका
- 4:26:12गलत हो गया। जी। हु इज़ द राइटर ऑफ़ फेमस
- 4:26:14बुक, फाउंडेशंस ऑफ़ एजुकेशन, किलपैट्रिक,
- 4:26:17जॉन ड, टाइलर और कैसवेल? आंसर आपका
- 4:26:19किलपैट्रिक रहेगा। व्हिच ऑफ़ द फॉलोविंग
- 4:26:21पर्पस हैव बीन सर्व्ड बाय फैमिली एज़ अ
- 4:26:23सोशल इंस्टीट्यूशन? सोशलाइज़ करती है
- 4:26:26बच्चों को? बिल्कुल करती है। इट प्रोड्यूस
- 4:26:27इट प्रोवाइड्स प्रैक्टिकल एंड इमोशनल
- 4:26:29सपोर्ट अपने मेंबर्स को। बिल्कुल एक गोल
- 4:26:32एस्ट इट एस्टैब्लिशज़ अ गोल ऑफ़ सोशल
- 4:26:34इक्वलिटी। सोशल इंस्टीट्यूशन फैमिली की जब
- 4:26:37हम बात करते हैं तो वो सोशल इक्वलिटी कैसे
- 4:26:39लेके आएगी सिर्फ फैमिली? इट रेगुलेट्स द
- 4:26:41सेक्सुअल रिप्रोडक्शन। बिल्कुल। इट
- 4:26:43प्रोवाइड्स इट्स मेंबर्स विद सोशल
- 4:26:44आइडेंटिटी। तो वो सोशल आइडेंटिटी प्रोवाइड
- 4:26:47करती है अपने मेंबर्स को ना कि सोशल
- 4:26:48इक्वलिटी का कोई ऐसा गोल हो। ओके? हमारे
- 4:26:51पास ऑप्शन पांच में से चार ही सही हो सकते
- 4:26:53हैं। तो हम सी को हटाएंगे जी। हम ए, बी,
- 4:26:56डी, ई के साथ जाएंगे यानी ऑप्शन नंबर
- 4:26:58सेकंड। ओके? व्हिच ऑफ़ द फॉलोवंग
- 4:27:01स्टेटमेंट्स आर ट्रू? स्टडी ऑफ़ प्रॉब्लम
- 4:27:03ऑफ़ फ्रीडम कम्स अंडर मेटाफिजिक्स? स्टडी
- 4:27:06ऑफ़ इंपेरेसिज्म कम्स अंडर सिस्टेमोलॉजी।
- 4:27:09इंडक्शन मेथड फॉल्स अंडर द परव्यू ऑफ़
- 4:27:12लॉजिक। और अ प्रायरी नॉलेज फॉल्स अंडर
- 4:27:15एग्जियोलॉजी कांसेप्ट ऑफ गॉड फॉल्स अंडर
- 4:27:17एपिस्टमोलॉजी तो कौन सा इसमें से सही है?
- 4:27:20यहां से आपको नई चीजें भी पता चलेंगी।
- 4:27:22आंसर आपका ए बी सी सही है। जी यानी स्टडी
- 4:27:25ऑफ़ प्रॉब्लम ऑफ़ फ्रीडम जो है रियलिटी के
- 4:27:27बारे में जब आप बात कर रहे हो तो
- 4:27:29मेटाफिजिक्स एक्सपीरियंस की जब आप बात कर
- 4:27:31रहे हो करना चीजें सीखना मेथड तो वो आपका
- 4:27:34एपिस्टोमोलॉजी और इंडक्शन मेथड आपका लॉजिक
- 4:27:37में क्योंकि लॉजिक में इंडक्शन और डिडक्शन
- 4:27:39दो मेथड्स की हम बात करते हैं। ठीक है? सो
- 4:27:42ये दोनों चीजें जो है वो गलत होनी चाहिए।
- 4:27:45चूज़ द फॉलोइंग स्टेटमेंट्स आर ट्रू।
- 4:27:47सांख्य मींस फिलॉसफी ऑफ़ राइट नॉलेज सांख्य
- 4:27:51सामख्य ख्याति। ओके? अह सांख्य इज़ अ
- 4:27:54प्लुरलिस्टिक स्पिरिचुअलिज़्म एंड एन
- 4:27:56अनक्प्रोमाइजिंग डुअलिज़्म। डुअलिज़्म तो है
- 4:27:59ही ये। प्रकृति और उसकी बात करता है ये
- 4:28:01पुरुष की। राइट नॉलेज इज़ द नॉलेज ऑफ़
- 4:28:03एसोसिएशन ऑफ़ पुरुष विद द प्रकृति।
- 4:28:06शंकराचार्यज़ रिगार्ड सांख्य ऐज़ अ मेन
- 4:28:09कॉम्पोनेंट ऑफ़ वेदांता। व्यू ऑफ़ वेदांत
- 4:28:11सांख्य योग इज़ कॉल्ड प्राकृति आरंभवाद। तो
- 4:28:15व्यू ऑफ़ सांख्य योग आपसे पूछा है। सो ये
- 4:28:18आरंभवाद को फॉलो कर रहे हैं या फिर
- 4:28:20परिणामवाद को? तो सांख्य फिलॉसफी जो है वो
- 4:28:24प्री एक्जिस्टेंस को मानती है। तो
- 4:28:27परिणामवाद को फॉलो करते हैं। तो ई तो नहीं
- 4:28:29आना चाहिए। बचा ए बी डी और बी सी डी। ए बी
- 4:28:33डी और बी सी डी। डी तो यानी आएगा ही आएगा।
- 4:28:36ठीक है? ए बी और बी सी तो बी भी आएगा।
- 4:28:39प्लुरलिस्टिक है। मैंने बोला था
- 4:28:40ड्यूललिज्म। ठीक है? अब बचा आपका ए और सी।
- 4:28:45सो ए और सी में से अगर हम देखें तो सांख्य
- 4:28:48मींस सही चीज। सांख्य वैसे तो अंक से
- 4:28:51रिलेटेड था ये। ठीक है? सो फिलॉसफी ऑफ़
- 4:28:53राइट नॉलेज और राइट नॉलेज आप पुरुष और
- 4:28:56प्रकृति के एसोसिएशन को बोल रहे हो। सो
- 4:28:58राइट नॉलेज वाली चीज़ बेटर रहेगी। जी। ए,
- 4:29:01बी और डी आपका आंसर हो जाएगा। ओके? फाइंड
- 4:29:04द करेक्ट पेयर्स। रैशनलिस्ट, इंपेरेसिस्ट,
- 4:29:06एग्ज़िस्टेंशियलिस्ट, प्रगमेटिस्ट और
- 4:29:08आइडियलिस्ट। तो रैशनलिस्ट में क्या है?
- 4:29:10टीचर ऐज़ अ सोर्स ऑफ़ आइडियाज़, फैक्ट्स,
- 4:29:12इनेशन। इंपेरेसिस्ट में है टीचर को हम एक
- 4:29:15डेमोंस्ट्रेटर ऑफ़ प्रोसेस मान रहे हैं।
- 4:29:17एग्ज़िस्टेंशियलिज़्म में फैसिलिटेटर ऑफ़
- 4:29:19चॉइससेस मान रहे हैं। प्रगमेटिस्ट में हम
- 4:29:22टीचर को कंट्रोलर मान रहे हैं। नहीं, टीचर
- 4:29:24कंट्रोलर तो नहीं है। प्रगमेटिस्ट में फॉर
- 4:29:26श्योर और आइडियलिस्ट में फ्रेंड नहीं है।
- 4:29:28इतना पता है। ये उल्टा दे दिया। यहां
- 4:29:30फ्रेंड और यहां कंट्रोलर आप बोल सकते हैं।
- 4:29:32तो डी और ई तो फॉर श्योर गलत हो गया जी।
- 4:29:34ठीक है? सो अगर डी और ई गलत है तो आपके
- 4:29:36पास एक ही ऑप्शन बचा आपका ए, बी और सी।
- 4:29:40ओके? तो आंसर आपका फर्स्ट हो गया। ओके?
- 4:29:42एग्नोसिटिसिज्म।
- 4:29:44एग्नोस्टिटिसिज्म
- 4:29:46अ रैशनलिज्म, मेलरिज्म और आपका हेडोनिज़्म।
- 4:29:50ओके? सो, कंक्लूज़न एज़ टू द गुडनेस और एविल
- 4:29:54ऑफ़ एकज़िस्टेंस कैन नॉट बी मेड फ़ाइनल। द
- 4:29:57हाईएस्ट गुड इज़ प्लेज़र। ओके? द पोजीशन दैट
- 4:30:01कंक्लूसिव नॉलेज ऑफ़ अल्टीमेट रियलिटी इज़
- 4:30:05एन इंपॉसिबिलिटी। पोजीशन दैट रीज़ इज़ द चीफ
- 4:30:08सोर्स ऑफ़ नॉलेज। तो रीज़ को अगर आप चीफ
- 4:30:11सोर्स बोल रहे हो तो रैशनलिज्म में आएगा।
- 4:30:14है ना? और कुछ नहीं भी पता। तो रीजनिंग तो
- 4:30:17है ना रैशनलिज्म में। सो ये तो आंसर सेकंड
- 4:30:20आना चाहिए। उस हिसाब से अगर मुझे ये तीनों
- 4:30:22भी नहीं पता थे तो भी मेरा आंसर सेकंड आ
- 4:30:24रहा है। व्हिच इज़ राइट। ओके? तो अब मुझे
- 4:30:26ये पता होना चाहिए कि जब मैं हेडोनिज़्म की
- 4:30:28बात कर रही हूं। दैट मींस दिस इज़ द
- 4:30:30हाईएस्ट गुड इन हाईएस्ट गुड इज़ प्लेज़र।
- 4:30:33ठीक है? आप प्लेज़र पे फोकस कर रहे हो।
- 4:30:35मेलरिज्म में आप कंक्लूजन निकाल रहे हो।
- 4:30:37कंक्लूज़ंस एज़ टू द गुडनेस और एविल ऑफ़
- 4:30:40एकज़िस्टेंस कांट बी मेड फाइनल। और ये बचा
- 4:30:42हुआ आपका क्या हो गया? जी एग्नोस्टिसिज्म
- 4:30:44हो गया। नेक्स्ट क्वेश्चन है पेरिनलिज्म,
- 4:30:47एसेंशियलिज़्म, प्रोग्रेसिविज़्म,
- 4:30:48रिकंस्ट्रक्शनिशक्शनिज़्म। अच्छा एक और चीज
- 4:30:51जब भी आपको कभी कंफ्यूजन लगे कि पहले की
- 4:30:53कोई पुरानी वीडियो में अगर कोई आंसर कुछ
- 4:30:55अलग दे रखा है और अब की वीडियोस में कुछ
- 4:30:57अलग है तो ट्रस्ट अपडेटेड वीडियोस क्योंकि
- 4:31:00कई बार होता है क्योंकि मैं भी धीरे-धीरे
- 4:31:01ही सीखी हूं ना सारी चीजों को एक्सपीरियंस
- 4:31:03के साथ चीजें आती हैं। बेटर होती हैं। सो
- 4:31:06अगर पहले वाली किसी वीडियो में कोई चीज
- 4:31:08आपको ऊपर नीचे लगे। सो आप अपडेटेड वीडियो
- 4:31:10के हिसाब से ही जाइएगा। जैसे ये वाला
- 4:31:13क्वेश्चन मैंने रिचेक किया। जब मैंने
- 4:31:15पीवाईक्यूस करवाए होंगे तो यहां पे ये
- 4:31:17थर्ड ऑप्शन ही ऊपर नीचे हो रखा है। आंसर
- 4:31:20थर्ड ही था लेकिन वो पता नहीं टाइप करने
- 4:31:22में कुछ गड़बड़ हुआ है या क्या हुआ और
- 4:31:23मैंने भी शायद वहां ज्यादा एक्सप्लेन नहीं
- 4:31:25किया। बस बोल दी वो चीज। राइट? कि ये आंसर
- 4:31:27रहेगा। ओके? और कोई फिर आप कई बार
- 4:31:29क्वेश्चन भी नहीं उठाते बच्चे। सो पॉइंट
- 4:31:31ये है कि जब भी आपको डाउट लगे तो आप
- 4:31:33क्वेश्चन उठाया करिए। ठीक है? आप निर्जीव
- 4:31:36नहीं है, सजीव इंसान हैं। सो आप अपने
- 4:31:38लॉजिक के साथ जाके कोई इशू लगे तो आंसर
- 4:31:41बताया कीजिए कि मैम ये हो सकता है क्या?
- 4:31:43अगर मुझे लगा जब मैंने देखा या किसी बच्चे
- 4:31:46ने देखा तो कम से कम कोई बोले तो उस पे
- 4:31:48ओके बातचीत होगी उस पे। सो पेरिनियलिज्म,
- 4:31:51एसेंशियलिज्म, प्रोग्रेसिविज़्म,
- 4:31:52रिकंस्ट्रक्शनिज़्म, क्लासिकल सब्जेक्ट्स,
- 4:31:55लिटरी एनालिसिस, कॉन्स्टेंट करिकुलम। जब
- 4:31:57कॉन्स्टेंट करिकुलम आ गया तो पेरिनियलिज़्म
- 4:31:59ही रहेगा ना। ओके? एसेंशियलिज्म है तो
- 4:32:01एसेंशियल स्किल्स और एसेंशियल सब्जेक्ट्स
- 4:32:04जो है वो एसेंशियलिज्म में आ जाएंगे।
- 4:32:06स्टूडेंट्स के इंटरेस्ट की बात हो रही है
- 4:32:07तो प्रोग्रेसिविज़्म में आ जाएगा और सोशल
- 4:32:10साइंसेस सोसाइटी पे प्रेजेंट फ्यूचर सोशल
- 4:32:13इकोनॉमिक पॉलिटिकल प्रॉब्लम्स पे फोकस है
- 4:32:15तो रिकंस्ट्रक्शनिज्म आ जाएगा। ओके? तो
- 4:32:17आंसर आपका 1 4 2 3 आएगा जी। आई थिंक पहले
- 4:32:21जो पीवाईक्यूस करवाए हुए हैं उसमें 1 2 3
- 4:32:234 जा रखा है ये। ओके? सो वो एक दो तीन चार
- 4:32:26नहीं है। गड़बड़ है वो। एक चार तीन और दो
- 4:32:29आपका सही आंसर होगा। फ़र्स्ट फाइव अमोंग
- 4:32:32सेवन काइंड ऑफ़ कंडीशनल जजमेंट सप्त भंजन्य
- 4:32:36भजन अभंजन्य। ओके? तो सम ये सात कंडीशंस
- 4:32:40होती हैं। जैसे ये इन्होंने बोला है सम
- 4:32:42हाउ एस इज़ पी। सम हाउ एस इज़ नॉट पी। ठीक
- 4:32:46है? तो इज़ नॉट पी। एस इज़ इज़ नॉट इज़ पी और
- 4:32:50इज़ और इज़ नॉट। ठीक है? एस इज़ एंड इज़
- 4:32:54इनस्ट्रक्ट इनस्क्राइबल।
- 4:32:57और ये है इज डिस्क्राइबल। तो आंसर आपका
- 4:33:00इसके अंदर ए बी सी ई डी रहेगा। ठीक है? ये
- 4:33:03इसकी सिचुएशन रहेगी। और ये है चीजें। ओके?
- 4:33:06पहले में इज़ देन इज़ नॉट देन इज़ एंड इज़
- 4:33:09नॉट। ये किसी भी सिचुएशन है। जैसे ये कोई
- 4:33:11भी स्टेटमेंट हो सकती है। सम हाउ एस इज़
- 4:33:14पी। एस इज़ नॉट पी। एस इज़ पी एंड इज़ नॉट
- 4:33:18पी। एस इज़ इन एक्सप्रेसिबल। एस इज़ एंड एस
- 4:33:22इज़ पी एंड इज़ इन एक्सप्रेसिबल। एस इज़ नॉट
- 4:33:26पी एंड इज़ इनप्रेसिबल। तो ऐसे जाएंगे ये
- 4:33:29स्टेटमेंट्स। ओके? तो ये सात की सात
- 4:33:31स्टेटमेंट्स आप ध्यान रख सकते हो। एक ही
- 4:33:32बार आया है। ये इसके अलावा कभी पूछा नहीं
- 4:33:34गया है। सांख्य थ्योरी दैट कॉज़ेशन मींस अ
- 4:33:37रियल ट्रांसफ़ेशन ऑफ़ मटेरियल कॉज़ इंटू
- 4:33:40इफ़ेक्ट। इट लॉजिकली लीड्स टू द कॉन्सेप्ट
- 4:33:42ऑफ़ इवोल्यूशन एज़ द अल्टीमेट कॉज़ ऑफ़ वर्ल्ड
- 4:33:45ऑफ़ ऑब्जेक्ट। सेकंड टाइप ऑफ़ अल्टीमेट
- 4:33:47रियलिटी एडमिटेड बाइ सांख्या इज़ सेल्फ़।
- 4:33:49एग्ज़िस्टेंस ऑफ़ सेल्फ़ मस्ट बी एडमिटेड बाइ
- 4:33:52ऑल। सो, फ़र्स्ट स्टेटमेंट गलत है जी।
- 4:33:54दूसरे वाली सही है। ओके? सो कोज़ेशन मींस अ
- 4:33:56रियल ट्रांसफ़ेशन ऑफ़ मटेरियल कॉज़ इंटू
- 4:33:59इफ़ेक्ट। सो वो रियल मतलब वो ऑलरेडी
- 4:34:01एग्ज़िस्ट करता था। सो अल्टीमेट कॉज़ हम
- 4:34:03प्रकृति को ही मानते हैं। ओके? तो फर्स्ट
- 4:34:05स्टेटमेंट गलत हो गई। दूसरे वाली आपकी सही
- 4:34:08है। व्हिच ऑफ़ द फॉलोविंग इंडियन स्कूल ऑफ़
- 4:34:10फिलॉसोफी रिजेक्ट्स द वैदिक अथॉरिटी?
- 4:34:13सोसांख्य, न्याय, चरक, वैशिष्ट्य। तो चरक
- 4:34:15जो है वो रिजेक्ट करते हैं। तो आंसर आपका
- 4:34:17चरक हो गया। इसके अलावा 100 क्वेश्चंस और
- 4:34:21बच गए। 189 क्वेश्चंस हैं इस यूनिट में।
- 4:34:24व्हिच ऑफ़ द फॉलोविंग पर्सपेक्टिव
- 4:34:26एग्जामिनस हाउ फैमिली मेंबर्स एंड इंटिमेट
- 4:34:28कपल इंटरेक्ट ऑन अ डेली बेसिस एंड अराइव
- 4:34:31एट अ शेयर्ड अंडरस्टैंडिंग ऑफ़ देयर
- 4:34:33सिचुएशन? तो ये क्या हो रहा है? सो ये
- 4:34:36सोशल इंटरेक्शन थ्योरी पर्सपेक्टिव है। तो
- 4:34:39सोसाइटी कैसे इंटरेक्ट करती है वो
- 4:34:41पर्सपेक्टिव है। केयर एजुकेशन हैज़ बीन
- 4:34:43फोकस्ड बाय? तो केयर और नेल नोडिंग्स का
- 4:34:46बहुत ही जन्मोंज्मों पुराना नाता है। आपको
- 4:34:48याद होना चाहिए। व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग इज़
- 4:34:50नॉट एन इनपुट फंक्शन ऑफ़ स्ट्रक्चरल
- 4:34:52फंक्शनल एनालिसिस एज़ स्पेसिफाइड बाय
- 4:34:54गैब्रियल एलमेंट। ठीक है? तो नॉट एन इनपुट
- 4:34:57फंक्शन। तो ये इनपुट और इनपुट और आउटपुट
- 4:34:59दो फंक्शनंस की बात करते हैं। ठीक है?
- 4:35:01आंसर आपका सेकंड हो जाएगा जी। ये हैं
- 4:35:04गैब्रियल एलमेंट के इनपुट और आउटपुट
- 4:35:06फंक्शन जो आपको याद रखने हैं। ओके? आउटपुट
- 4:35:09में रूल मेकिंग, एप्लीकेशन, एडजुडिकेशन और
- 4:35:11ये पॉलिटिकल सोशलाइज़ेशन एंड रिक्रूटमेंट,
- 4:35:14इंटरेस्ट आर्टिकुलेशन, इंटरेस्ट एग्रीगेशन
- 4:35:16और आपका पॉलिटिकल कम्युनिकेशन। तो जो रूल
- 4:35:19एप्लीकेशन है दैट इज़ आउटपुट फंक्शन ना कि
- 4:35:21इनपुट फंक्शन। ओके? अ चाइल्ड फ्रॉम
- 4:35:23कल्चरली बैकवर्ड फैमिली बैकग्राउंड हैज़
- 4:35:25बीन एडमिटेड टू योर स्कूल एज़ अ स्कूल हेड।
- 4:35:28आप क्या करोगे? यू विल कीप हिम इन अ क्लास
- 4:35:30इन व्हिच देयर आर मेनी मोर स्टूडेंट्स
- 4:35:32फ्रॉम कल्चरली बैकवर्ड बैकग्राउंड। ऐसा तो
- 4:35:35नहीं होगा। आप सेम सब बच्चों को एक मतलब
- 4:35:37आप डायवर्सिटी को सेलिब्रेट कीजिए ना।
- 4:35:39आस्क अ टीचर टू नो मोर अबाउट द कल्चरल
- 4:35:41बैकग्राउंड ऑफ़ स्टूडेंट चाइल्ड। कीप हिम
- 4:35:44इन नॉर्मल क्लास बट विल मेक स्पेशल
- 4:35:46अरेंजमेंट्स। कीप हज़ स्पेशल नीड्स इन
- 4:35:48व्यू। ये बात बहुत अच्छी है। इसके बाद तो
- 4:35:50कुछ पढ़ने की भी जरूरत नहीं है। ओके? व्हिच
- 4:35:53ऑफ़ द फॉलोविंग स्टेटमेंट्स आर ट्रू। वेद
- 4:35:55इज़ नॉट द नेम ऑफ़ एनी पर्टिकुलर बुक। हिम्स
- 4:35:59जो हैं हम्स ऑफ़ ऋग्वेद आर कंपोज्ड इन द
- 4:36:01प्रेज़ ऑफ़ गॉड। वैदिक टीचिंग्स बिलोंग टू
- 4:36:04कर्म मार्ग। उपनिषद्स को हम वेदांता भी
- 4:36:06बोलते हैं। वेद का अंत। वेदांता इज़ लास्ट
- 4:36:09पार्ट ऑफ यजुर्वेद। वेदांता हर पार्ट का
- 4:36:11ही हर वेद का लास्ट पार्ट है टेक्निकली।
- 4:36:15ठीक है? तो आंसर आपका ए बी सी डी हो
- 4:36:17जाएगा। जी ई नहीं होगा। सिर्फ यजुर्वेद का
- 4:36:20नहीं है। सब वेदों का आखिरी पार्ट उपनिषद
- 4:36:23या वेदांता ही है। वेद का अंत। तो हर एक
- 4:36:26वेद में वेदांत आएगा ना। अंत आएगा। व्हिच
- 4:36:28ऑफ़ द फॉलोवंग स्टेटमेंट्स आर ट्रू इन
- 4:36:30रिलेशन टू वैल्यूज़। द टर्म वैल्यू
- 4:36:32डिराइव्ड फ्रॉम लेटिन वर्ड वेलरेरी।
- 4:36:34वैल्यू इज़ डिफ़ाइंड ऐज़ एन एंड्यूरिंग बिलीफ़
- 4:36:37दैट द वे थिंग्स शुड बी डन और अबाउट द
- 4:36:40नीड्स वि एंड्स वि डिज़ायर। इंडियन
- 4:36:42कॉन्स्टिट्यूशन क्लियरली इन इनिशिएट द
- 4:36:45वैल्यूज़ ऑफ़ जस्टिस, लिबर्टी, इक्विटी,
- 4:36:47इक्वलिटी, ब्रदरहुड, अ इक्विटी, इक्वलिटी
- 4:36:53ये इनमें से एक वर्ड नहीं है। दोनों ही
- 4:36:55नहीं है। आई थिंक रुको। जस्टिस लिबर्टी
- 4:36:58इक्व इक्वल अपॉर्चुनिटीज़ की बात करते हैं।
- 4:37:01हम इक्विटी नहीं है। जी। इक्विटी नहीं है।
- 4:37:04ठीक है। अ इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन के
- 4:37:06प्रएमबल को जब आप चेक करोगे। इक्वलिटी
- 4:37:08राइट टू इक्वलिटी तो है बट इक्विटी नहीं
- 4:37:11है। तो ये तो स्टेटमेंट गलत हो गई।
- 4:37:13पार्लियामेंट्री कमेटी 1999 में पांच कोर
- 4:37:16यूनिवर्सल वैल्यूस जो है वो उन्होंने
- 4:37:18आइडेंटिफाई की। वैल्यू कैन ओनली बी टोट एट
- 4:37:22स्कूल। तो ओनली तो गलत हो गया। तो देखो
- 4:37:23ओनली टोट वाली गलत हो गई। ये वाली गलत हो
- 4:37:26गई। तो ऑप्शन आपके दो ही ए, बी और डी ही
- 4:37:29ऑप्शन बचे। ठीक है? अब आपको ये पता होना
- 4:37:31चाहिए कि हां ठीक है ये पांच यूनिवर्सल
- 4:37:33वैल्यूज़ की बात हुई है पार्लियामेंट्री
- 4:37:35कमेटी में। और ये पांच वैल्यूज़ ट्रुथ,
- 4:37:37राइटियस, कंडक्ट, पीस, लव और नॉन वायलेंस।
- 4:37:41ओके? लेटिन वर्ड से आया है। ये भी याद
- 4:37:43रखना। आइडियलिज़्म, प्रेगमेटिज़्म,
- 4:37:45एक्सिस्टेंशियलिज़्म, रियलिज़्म हिज़
- 4:37:47डॉक्ट्राइन एम्फसाइज़ज़ दैट देयर इज़ देयर आर
- 4:37:49नो वैल्यूज़ आउटसाइड मैन। ओके? मैन के ऊपर
- 4:37:53फोकस है। तो, यह एगज़िस्टेंशियलिज़्म हो
- 4:37:55सकता है। अह व्यूज़ द वर्ल्ड इन टर्म्स ऑफ़
- 4:37:58ऑब्जेक्ट एंड मैटर। सो, ऑब्जेक्ट और मैटर
- 4:38:01में तो कौन देखता है? रियलिज़्म देखता है।
- 4:38:03वर्ल्ड ऑफ़ माइंड एंड आइडियाज़ इज़ परमानेंट,
- 4:38:06रेगुलरली, ऑर्डरली। ठीक है? द वैल्यू ऑफ़
- 4:38:08एन आइडिया लाइज़ इन इट्स एक्चुअल
- 4:38:10कॉन्सिक्वेंसेस। सो, ये प्रेगनेंट ये
- 4:38:12टेक्निकली कॉन्सिक्वेंसेस वाली चीज़ तो
- 4:38:14आपकी उसके अंदर आती है वैसे नेचुरलिज़्म
- 4:38:16में। ठीक है? बट सेम सेम सी ही है चीजें।
- 4:38:19सोसाइटी वाला आस्पेक्ट थोड़ा अलग है बस। सो
- 4:38:21ये तो ये साउंड कर रहा है जी। चार तीन एक
- 4:38:24और दो। है क्या ऐसा कुछ? सॉरी तीन चार एक
- 4:38:26और दो। तीन चार एक और दो। ऑप्शन नंबर टू।
- 4:38:30ओके।
- 4:38:33बुक है जी कृष्ण कुमार की बुक जो हिंदी
- 4:38:35में एक क्वेश्चन आया था सिंगल क्वेश्चन
- 4:38:37उसमें कृष्ण कुमार की बुक थी अगर आपको
- 4:38:39थोड़ा ध्यान हो तो ठीक है पावलो फ्रायरे
- 4:38:42की बुक की अगर आप बात करोगे डेमोक्रेसी
- 4:38:44एंड एजुकेशन जॉन डोई ने लिखी है फॉर श्योर
- 4:38:46सो दो ऑप्शंस तो आपके यहां से कट हो गए
- 4:38:48फर्स्ट और लास्ट ठीक है उसके अलावा अगर
- 4:38:50आपको कुछ समझ आए तो बढ़िया है नहीं समझ आए
- 4:38:53तो फिर डाउट है आपको लिख लेनी चाहिए ये
- 4:38:56बुक्स आंसर आपका थर्ड रहेगा तो यानी ये है
- 4:38:59पावलो फरी की पॉलिटिक्स ऑफ़ एजुकेशन देन
- 4:39:02आपका पॉलिटिक्स ये अगर कल्चर पावर लिबरेशन
- 4:39:05है तो पावलो की है। पॉलिटिक्स ऑफ़ एजुकेशन
- 4:39:07है तो आपकी सल्तमन की है। और पॉलिटिकल
- 4:39:10एजेंडा है तो आपकी कृष्ण कुमार है ना
- 4:39:13कृष्ण कुमार की है। पांच पाथ हैं जी
- 4:39:17लिबरेशन के बुद्ध फिलॉसोफी में। तो ये
- 4:39:19पांच ही दिए हैं। लास्ट फाइव पाथ हैं। ये
- 4:39:21टोटल तो आठ होते हैं। तो ये लास्ट फाइव को
- 4:39:23आपको क्या लगाना है? कंटिन्यूटी में लगाना
- 4:39:25है। ठीक है? तो आपको ये वही सीक्वेंस याद
- 4:39:28होनी चाहिए। आठ के आठ की सेम योग में याद
- 4:39:30होनी चाहिए उन आठों की। तो सों में आपको
- 4:39:32कुछ चीजें याद करने की है। आंसर आपका थर्ड
- 4:39:35हो जाएगा। देखना सही है कि नहीं है। ओके?
- 4:39:37व्हिच ऑफ़ द फॉलोवंग स्टेटमेंट्स ऑफ़
- 4:39:39डेस्क्रेट्स रिलेट हिम टू द डेवलपमेंट ऑफ़
- 4:39:41आइडियलिज़्म दैट द सेल्फ इज़ द मोस्ट
- 4:39:43इमीडिएट रियलिटी इन द एक्सपीरियंस ऑफ़ ईच
- 4:39:46वन ऑफ़ अस। और दैट द एकज़िस्टेंस ऑफ़ गॉड इज़
- 4:39:48एविडेंस्ड इन द एक्सपीरियंस ऑफ़ अस। बाय द
- 4:39:50फ़ैक्ट दैट वी हैव एन आइडिया ऑफ़ परफेक्ट
- 4:39:53बीइंग। सो आइडियलिज्म जो डिस्क्रेट का
- 4:39:55आईडिया है वो पूछा है। दोनों स्टेटमेंट
- 4:39:57सही है। गिवन बिलो आर टू स्टेटमेंट्स। द
- 4:39:59ईगो आइडियल्स इंक्लूड्स द रूल्स एंड
- 4:40:01स्टैंडर्ड्स फॉर गुड बिहेवियर्स कॉन्शियस
- 4:40:04इंक्लूड्स इनफेशन अबाउट थिंग्स दैट आर
- 4:40:06व्यूड एज़ बैड बाय पेरेंट्स एंड सोसाइटी।
- 4:40:08सो टेक्निकली ये क्वेश्चन वही मैंने ध्यान
- 4:40:10से नहीं देखा। ये थर्ड यूनिट में जाना
- 4:40:12चाहिए। ठीक है? क्योंकि फ्लूइड से रिलेटेड
- 4:40:14है। ये ईगो और कॉन्शियस का है। ईगो
- 4:40:16आइडियल्स जो है वो इद ईगो सुपर ईगो की हम
- 4:40:19बात करेंगे। इद ईगो सुपर ईगो। सो ये
- 4:40:22टेक्निकली थर्ड यूनिट का क्वेश्चन है।
- 4:40:24यानी एक क्वेश्चन हमने सेकंड यूनिट का डाल
- 4:40:25दिया गलती से और एक थर्ड का। बट ठीक है
- 4:40:27हमें तो क्वेश्चन कवर होने से मतलब है। वो
- 4:40:29तो सारे हो ही जाएंगे पीवाईक्यूस। सो ईगो
- 4:40:32जो है वो बैलेंस करके रखता है इस प्लेज़र
- 4:40:34प्रिंसिपल को और सुपर ईगो जो है वो मोरल
- 4:40:36प्रिंसिपल होता है जिसको कई बार पेरेंट्स
- 4:40:39और सोसाइटी जो है वो सही नहीं मानते। यानी
- 4:40:41एक्सट्रीम है सुपर ईगो। ओके? और ईद जो है
- 4:40:43वो दूसरी साइड में एक्सट्रीम है। ईगो जो
- 4:40:46है वो रूल्स और स्टैंडर्ड्स हैं जो अच्छे
- 4:40:47बिहेवियर के लिए बोले जाते हैं बैलेंस
- 4:40:49करने के लिए। तो स्टेटमेंट्स तो दोनों ठीक
- 4:40:51है ये बस ये यूनिट थर्ड की थी। ओके
- 4:40:54नेक्स्ट है जी हु अमोंग्स द फॉलोइंग इज़
- 4:40:56कंसीडर्ड ए फादर एफ ऑफ सोशियोलॉजी ऑगस्ट
- 4:40:59कॉमटे
- 4:41:01ठीक है अकॉर्डिंग टू सांख्य फिलॉसफी द
- 4:41:04माइंड और द इंटेलेक्ट इज़ ओके सांख्य
- 4:41:07फिलॉसफी के अकॉर्डिंग माइंड या इंटेलेक्ट
- 4:41:09क्या है? अनकॉन्शियस मटेरियल एंटिटी है।
- 4:41:11सबकॉन्शियस मटेरियल एंटिटी है या कॉन्शियस
- 4:41:13मटेरियल एंटिटी है या कॉन्शियसनेस और
- 4:41:16इंटेलेक्ट है? सो आंसर आपका फर्स्ट होएगा।
- 4:41:18ये अनकॉन्शियस मटेरियल एंटिटी है। जी।
- 4:41:21ओके। इन द कॉन्टेक्स्ट ऑफ़ पाथ मार्ग टू
- 4:41:23रीच अ स्टेट फ्री फ्रॉम मिज़री ऐज़ रेकमेंड
- 4:41:26रेकमेंडेड बाय बुद्धा। व्हिच ऑफ़ द
- 4:41:28फॉलोविंग इज़ नॉट अमोंग्स दोज़ एट स्टेप्स
- 4:41:30और रूल्स आल्सो कॉल्ड अष्टांगिका मार्ग।
- 4:41:33ऑप्शन ए राइट कंडक्ट, बी राइट एफर्ट, राइट
- 4:41:36नॉलेज, राइट स्पीच? तो, ये चार ऑप्शन है
- 4:41:39हमारे पास। हमसे पूछा क्या है? व्हिच ऑफ़ द
- 4:41:41फॉलोइंग इज़ नॉट अमोंग्स द एट स्टेप्स? तो
- 4:41:43उन आठ में से कौन सा नहीं है? सो आंसर
- 4:41:46आपका राइट नॉलेज आ जाएगा। ओके? तो कंडक्ट,
- 4:41:49एफर्ट, स्पीच ये सारे उसके अंदर हैं।
- 4:41:51व्हिच ऑफ़ द फॉलोविंग वाज़ नॉट द एम ऑफ़
- 4:41:53क्राफ्ट बेस्ड एजुकेशन रेकमेंडेड बाय
- 4:41:55महात्मा गांधी। ऑप्शन ए मीटिंग द
- 4:41:57एक्सपेंसेस ऑफ़ टीचर्स सैलरी, क्रिएशन ऑफ़
- 4:41:59स्पेशलाइज़्ड क्लास ऑफ़ क्राफ्ट्समैन,
- 4:42:02डिग्निटी ऑफ़ लेबर, मिनिमाइज़ेशन ऑफ़
- 4:42:04ड्रिफ्ट। तो, मिनिमाइजेशन ऑफ़ ड्रिफ्ट ऑफ़
- 4:42:06रूरल यूथ टू सिटीज़ इन सर्च ऑफ़ जॉब। ये तो
- 4:42:08था। ये तो ऐ था कि मिनिमाइज़। डिग्निटी ऑफ़
- 4:42:11लेबर हम उनको सिखा पाएं। ठीक है? सो
- 4:42:13स्पेशलाइज्ड क्लास ऑफ क्राफ्ट्समैन रेडी
- 4:42:16हो जाए या एक्सपेंसेस मीट हो जाए। तो आंसर
- 4:42:19बी है जी। ये कोई मोटिव नहीं था कि
- 4:42:21स्पेशलाइज्ड क्लास ऑफ़ क्राफ्ट्समैन हम
- 4:42:23रेडी करें। हमारा ये था कि मोडेस्ट सैलरी
- 4:42:25और टीचर्स की टीचर्स सेल्फ सैक्रिफाइसिंग
- 4:42:28हो। टीचर्स की सैलरीज़ का एक्सपेंस जो है
- 4:42:31इस क्राफ्ट बेस्ड एजुकेशन से ही निकल जाए।
- 4:42:34ओके? सो और डिग्निटी ऑफ़ लेबर हम सिखा पाए।
- 4:42:36यूथ जो है वो ज्यादा बाहर ना जाए काम करने
- 4:42:38के लिए। उनको यहीं काम मिल जाए। सो ऐसा
- 4:42:40कुछ नहीं था कि हम कुछ क्राफ्ट्समैन की
- 4:42:42स्पेशलाइज़्ड क्लास बनाना चाह रहे थे।
- 4:42:44बैंकिंग कांसेप्ट ऑफ़ एजुकेशन इज़ कॉइ बाय
- 4:42:47सोचने की भी जरूरत नहीं होनी चाहिए। पावलो
- 4:42:49आंसर है। व्हिच ऑफ़ द फॉलोविंग इज़ नॉट अ
- 4:42:51करेक्ट स्टेटमेंट विद रिगार्ड टू इंडियन
- 4:42:53फिलॉसोफी? इंडियन फिलॉसोफी डिनोट्स द
- 4:42:55फिलॉसफिकल स्पेकुलेशंस ऑफ़ एंशिएंट और
- 4:42:58मॉडर्न थिंकर्स? स्पेकुलेशंस ऑफ़ इंडियन
- 4:43:00थिंकर्स हु आर एसेंशियली हिंदू। एसेंशियली
- 4:43:03तो फॉर श्योर नहीं है। मैंने आपको बताया
- 4:43:04था कि इंडियन फिलॉसफी मतलब जो इंडियन सोइल
- 4:43:07पे बनी है टेक्निकली। ठीक है? सो
- 4:43:09स्पेककुलेशंस ऑफ़ इंडियन थिंकर्स, थिस्ट और
- 4:43:11एथिस्ट और इज़ मार्क्ड विद द डिवोशन टू द
- 4:43:14सर्च फॉर ट्रुथ। तो आंसर आपका क्या हो
- 4:43:16जाएगा? बी हो जाएगा। ठीक है? हमसे नॉट
- 4:43:19करेक्ट ही तो पूछा है ना? बाकी चीजें तो
- 4:43:21सही हो गई। नॉट करेक्ट बी। ठीक है? तो
- 4:43:23एसेंशियली हिंदूज़ हो ऐसा कोई जरूरी पॉइंट
- 4:43:25नहीं है। एरिस्टोटलल्स टीचिंग बिकम द
- 4:43:28फिलॉसोफिकल फाउंडेशन फॉर? तो एरिस्टोटल इज़
- 4:43:31द फादर ऑफ़ रियलिज़्म। प्लेटो आइडियलिज्म के
- 4:43:34फादर हैं। तो रियलिज्म का बेस बनी ना ये।
- 4:43:36व्हिच ऑफ़ द फॉलोविंग कॉन्स्टिट्यूशनल
- 4:43:38प्रोविज़न इज़ मेड टू एलिमिनेट
- 4:43:39डिस्क्रिमिनेशन ऑफ़ कास्ट, क्रेट, कलर इन
- 4:43:41एनी गवर्नमेंट एडेड स्कूल? सो गवर्नमेंट
- 4:43:44एडेड स्कूल की बात हो रही है। जी, आंसर
- 4:43:46आपका 29 आर्टिकल आएगा। ठीक है? मैंने आपको
- 4:43:48ऊपर बताया भी था। डेविस हैज़ कैरेक्टराइज़्ड
- 4:43:52व्हिच ऑफ़ द फॉलोविंग एज़ मेन सोशल फंक्शनंस
- 4:43:55ऑफ़ फैमिली? तो मेन सोशल फंक्शन कौन-कौन से
- 4:43:57हैं? वो आपसे पूछा है। रिप्रोडक्शन,
- 4:43:59मेंटेनेंस, प्लेसमेंट, सोशलाइज़ेशन ऑफ़ यंग
- 4:44:01वंस, मैरिंग द किड्स। तो आंसर आपका क्या आ
- 4:44:04जाएगा? ए, बी, सी, डी आ जाएगा। ठीक है?
- 4:44:06ठीक है? तो ओनली डेविस हैज़ कैरेक्टराइज़ द
- 4:44:07मेन सोशल फंक्शन। तो ये चार डिवीज़ंस
- 4:44:09उन्होंने किए हैं पहले चार। ओके? दीक्षा
- 4:44:12आरंभ क्वालिटी एनहांसमेंट प्रोग्राम और
- 4:44:14फैकल्टी डेवलपमेंट मैंडेट केयर। ओके? ये
- 4:44:17आई थिंक हमने क्वेश्चन फोर्थ यूनिट के डाल
- 4:44:19दिया। एक आधा क्वेश्चन ऐसा होता है जैसे
- 4:44:20दीक्षा आरंभ करके डाल दिया होगा मैंने
- 4:44:22क्योंकि दीक्षा का शुरू होना। जैसे उपनयन
- 4:44:25संस्कार है वो दीक्षा आरंभ ही हो गया एक
- 4:44:27तरीके से। हिंदूइज़्म में दीक्षा आरंभ बोल
- 4:44:29देते हैं। तो दीक्ष आरंभ इज़ लाइक इंडक्शन
- 4:44:30प्रोग्राम फॉर स्टूडेंट्स। ओके? जीवन
- 4:44:33कौशल। कौशल यानी स्किल्स। तो उनको स्किल
- 4:44:35प्रोवाइड करना गुरु दक्षता यानी गुरु का
- 4:44:38क्या होना उस प्रॉपर चीज में दक्ष होना तो
- 4:44:41यानी फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम ओके सो दो
- 4:44:45चार है ना और एक और तीन दो चार एक और तीन
- 4:44:49ये कंसर्टियम केयर आ जाएगा ये केयर एथिक्स
- 4:44:52सी ए आर ठीक है केयर सो आपका आंसर क्या हो
- 4:44:55जाएगा जी दो चार एक और तीन ऑप्शन नंबर वन
- 4:44:59ओके
- 4:45:01क्लासिकल लिबरल थ्योरी मार्क्सिस्ट
- 4:45:03सोशलिस्ट थ्योरी नेशनलिस्ट टोलेट टेररियंट
- 4:45:06थ्योरी और प्रोग्रेसिव लिबरल थ्योरी ओके
- 4:45:08ये वन टू थ्री लगना रह गया होगा इट्स ओके
- 4:45:11कई बार हो जाती हैं चीजें एफसिस ऑन
- 4:45:13इंडिविजुअलिज्म एंड जनरल वेलफेयर जनरल
- 4:45:16वेलफेयर ओके सुप्रीमेसी ऑफ़ स्टेट एफेसी
- 4:45:19अगर सुप्रीमेसी पे स्टेट के ऊपर फोकस है
- 4:45:22सो ये लग तो रहा है मार्क्सिज्म जैसा
- 4:45:24सोशलिज़्म जैसा प्रोपगेशन ऑफ़ सोशलिस्ट
- 4:45:26कंसेप्शन ऑफ़ द स्टेट प्रोपगेट्स दैट
- 4:45:29स्टूडेंट अह स्टेट इज़ अ प्रमोटर ऑफ़ सोशल
- 4:45:31वेलफ़ेयर एंड प्रमोटर ऑफ़ इंडिविजुअल
- 4:45:33राइट्स। तो कौन सा आपको लग रहा है? जहां
- 4:45:35पे ज्यादा लिबरल चीजें मिल रही हैं, वह
- 4:45:38प्रोग्रेसिव लिबरल थ्योरी हो जाएगा।
- 4:45:40सोशलिस्ट कंसेप्शन को प्रोपगेट किया जा
- 4:45:42रहा है। क्लासिकल लिबरल यानी थोड़ा सा
- 4:45:45लिबरल है बट पुराने टाइप का लिबरल है। एक
- 4:45:48नेशनलिस्ट टोटिटेरियन आंसर आपका फर्स्ट हो
- 4:45:51जाएगा। जी। यानी 1 3 2 4 क्लासिकल लिबरल
- 4:45:54में यही है। इंडिविजुअलिज्म और जनरल
- 4:45:55वेलफेयर पे फोकस है। मार्क्सिज्म सोशलिज्म
- 4:45:58में सोशलिस्ट कंसेप्शन को प्रमोट करने पे
- 4:46:01है। अह देन आपका नेशनल टोटलिटेरियन में
- 4:46:03सुप्रीमसी ऑफ़ स्टेट पे फोकस है। और
- 4:46:05प्रोग्रेसिव लिबरलिज्म में प्रमोटर ऑफ़
- 4:46:07सोशल वेलफेयर और प्रोटेक्टर ऑफ़ इंडिविजुअल
- 4:46:10राइट्स। अरेंज द फॉलोइंग इंडियन फिलॉसफ़र्स
- 4:46:12इन क्रोनोलॉजिकल ऑर्डर। ये मैंने आपको
- 4:46:14बताया था कि कई बार आजकल इनको भी
- 4:46:16क्रोनोलॉजी में पूछा जा रहा है। तो
- 4:46:18एटलीस्ट जो मैंने एक स्लाइड ऐड की है
- 4:46:20जिसमें आपके सिलेबस में जो जो थिंकर्स
- 4:46:23मेंशन है उनको ऐड किया गया है। तो आपको वो
- 4:46:25याद होने चाहिए। ठीक है? आंसर आपका थर्ड
- 4:46:28हो जाएगा जी डी बी ए सी।
- 4:46:31देन है जी जैन फिलॉसफी, चरक फिलॉसफी,
- 4:46:33न्याय फिलॉसफी और प्रभाकर परसेप्शन इज़ द
- 4:46:36ओनली वैलिड सोर्स ऑफ़ नॉलेज। तो ये जो
- 4:46:38प्रभाकर है ये आप वेदांता वाला ही मान के
- 4:46:41चलो। और प्रभाकर फिलॉसोफी में भी छह के छह
- 4:46:44जो हैं उनको हम मान के चलते हैं कि वो
- 4:46:45वैलिड सोर्स ऑफ नॉलेज हैं। ओके? सो चरक
- 4:46:48में हमें पता है सिर्फ परसेप्शन है। सो
- 4:46:50अगर आपको इतना भी ध्यान हो कि चरक में
- 4:46:52सिर्फ परसेप्शन है तो आंसर तो आपका यहीं
- 4:46:54से आ गया। ओके? थर्ड ऑप्शन। सो बाकी आपको
- 4:46:57एक बार पता होना चाहिए। मैंने करवाई है ये
- 4:46:58चीजें ऊपर। तो आई होप आपको याद रहे।
- 4:47:00फाइंडिंग सॉलशंस ऑफ़ प्रॉब्लम बाय सॉल्यूशन
- 4:47:04ऑफ़ प्रॉब्लम्स बाय क्रिएटिंग प्रॉपर
- 4:47:06एनवायरमेंट इन द मेन एसेंस ऑफ़ व्हिच
- 4:47:07फिलॉसफी। तो आप एक एनवायरमेंट बेटर
- 4:47:09एनवायरमेंट क्रिएट करने पे फोकस कर रहे
- 4:47:11हो। यह आपका बायोलॉजिकल प्रगमेटिज्म में आ
- 4:47:14जाएगा। गॉड द क्योंकि बायोलॉजिकल
- 4:47:16प्रैग्मिज़्म में हमने सर्वाइवल ऑफ़ द
- 4:47:18फिटनेस की बात की थी ना तो वो चीज़ है कि
- 4:47:20एक प्रॉपर एनवायरमेंट
- 4:47:22गॉड द ग्रेट गिवर कैन ओपन द होल यूनिवर्स
- 4:47:25टू आर गेज़ इन द नैरो स्पेस ऑफ़ अ सिंगल
- 4:47:28लैंड। तो ये बात भी मैंने आपको ऊपर नोट्स
- 4:47:30में करवाई थी। आंसर रविंद्र नाथ टैगोर हो
- 4:47:32जाएगा। डी स्कूलिंग सोसाइटी किसने लिखी
- 4:47:35है? इवान इलिजच ने लिखी है। ईज़िएस्ट
- 4:47:37क्वेश्चन एवर। और अब तो अब तो ईजी होना
- 4:47:39चाहिए ये। आइडियलिज्म एक्सिस्टेंशलिज्म
- 4:47:41प्रैग्मिटिज़्म नेचुरलिज़्म रिकॉग्नाइज़ज़
- 4:47:43आइडियल्स एंड बिलीव्स ऑन द बेसिस ऑफ़
- 4:47:44एक्सपेरिमेंट्स। प्रगमेटिज़्म सम कर रहा
- 4:47:47है। बाकी देखते हैं एक बार। देन है हां
- 4:47:51देखो ऑप्शंस में देखो। प्रगमेटिज़्म या
- 4:47:52आइडियलिज़्म। ऑब्वियसली प्रेगमेटिज़्म।
- 4:47:55ठीक है? देन है इनर और इमीडिएट
- 4:47:57रियलाइज़ेशन। यह आइडियलिज्म लग रहा है।
- 4:48:00रिकॉग्नाइज़ नो क्लियर कट डिफरेंस बिटवीन
- 4:48:02मैटर एंड कॉन्शियसनेस।
- 4:48:06नेचुरलिज्म।
- 4:48:07हम या एक्सिस्टेंशियलिज्म ट्रुथ ब्यूटी
- 4:48:10रुको भाई रुको रुको ट्रुथ ब्यूटी गुडनेस
- 4:48:13ट्रुथ ब्यूटी गुडनेस जहां भी आ जाए तो
- 4:48:14देखो यह तो फॉर शोर आइडियलिज्म है ये लो
- 4:48:17अब आएगा आंसर सही ठीक है क्योंकि ट्रुथ
- 4:48:19ब्यूटी गुडनेस की जहां बात आई वो
- 4:48:21आइडियलिज्म में ही बात हुई है तो ये
- 4:48:23ज्यादा स्ट्रांग ओपिनियन है फर्स्ट का
- 4:48:25थर्ड हो गया ये आपका एक्सपेरिमेंट्स वाला
- 4:48:27हो गया और आपका नो क्लियर कट बाउंड्रीज़ ये
- 4:48:29नेचुरलिज्म और इमीडिएट रियलाइज़ेशन आपका
- 4:48:32एकज़िस्टेंशियलिज्म ओके आंसर बी हु कॉइ द
- 4:48:36टर्म सोशल सोशियोलॉजिकल इमेजिनेशन। तो
- 4:48:39किसने ये टर्म जो है वो कॉइन की है? आंसर
- 4:48:41आपका राइट मींस आ जाएगा। एक आधे ऐसे
- 4:48:43क्वेश्चन जो थोड़े से अलग लीग से लेवल से
- 4:48:46लीग से हटके कुछ नए आते हैं। आप उनको
- 4:48:48ध्यान रखो। आप बार-बार पीवाईक्यूस देखोगे
- 4:48:50या बार-बार इन मैराथोंस को देखोगे आपको
- 4:48:51ऑटोमेटिकली याद हो जाएंगे क्वेश्चंस।
- 4:48:53अच्छा सोशियोलॉजिकल इमेजिनेशन होता क्या
- 4:48:56है? ये आप मुझे बताइएगा। व्हिच ऑफ़ द
- 4:48:58फॉलोइंग स्टेटमेंट्स आर ट्रू? अकॉर्डिंग
- 4:49:00टू सांख्य बोथ स्पिरिट एंड मैटर आर
- 4:49:02इनफाइनाइट एंड एक्सटर्नल? उपनिषद डिसिपल्स
- 4:49:05इग्नोरर्स एंड इग्नोरेंस एंड टेक्स द
- 4:49:08पर्सन डिजायरस ऑफ इमेंसिपेशन नियर गॉड एंड
- 4:49:13फ्रीज़ द बॉन्डेज ऑफ़ बर्थ एंड डेथ। केन इज़
- 4:49:16वन ऑफ़ द चीफ उपनिषद। शंकराचार्य हैज़
- 4:49:19सपोर्टेड भक्ति योग ऑफ़ गीता अकॉर्डिंग टू
- 4:49:21महायाना। अ मैन शुड स्ट्राइव फॉर हिज़ ओन
- 4:49:24इमसिपेशन। सो महान महायाना हिनायाना ये
- 4:49:28बुद्धिज्म के पार्ट हैं। जैसे दिगंबर और
- 4:49:30श्वेतांबर की बात की थी हमने जैनिज्म में।
- 4:49:32सो महायाना, हिनायाना जो है वो आपके
- 4:49:34बुद्धिज्म में आएंगे। ये बात आप ध्यान रख
- 4:49:36सकते हो। आंसर आपका ए, बी और सी आएगा। जी।
- 4:49:39ये ऑप्शंस ठीक हैं। बाकी दोनों ऑप्शंस गलत
- 4:49:42हैं। ओके? सो ये ध्यान रखना है। ये तीनों
- 4:49:44ऑप्शंस अब आप अपने नोट्स में ऐड कर लो।
- 4:49:47व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग आर की कॉम्पोनेंट्स ऑफ़
- 4:49:49केयर, मॉडल ऑफ़ नल नोडिंग्स? तो चार ऑप्शंस
- 4:49:51बताए थे मैंने। मॉडलिंग, डायलॉग,
- 4:49:54प्रैक्टिस, कन्फर्मेशन। यही थे। आई थिंक
- 4:49:56ऑप्शन नंबर ए। ठीक है? ओरिजिनलिटी नहीं
- 4:49:59है। महर्षि पतंजलि हैज़ स्पोकन अबाउट फाइव
- 4:50:02काइंड्स ऑफ़ चित्तवृत्ति और मेंटल
- 4:50:03प्रोसेससेस अरेंज देम सीक्वेंशियली। यानी
- 4:50:06ये पांचों ऑप्शन ठीक तो हैं बट इनको
- 4:50:07सीक्वेंस में लगाना है। अनेबल अस टू गेट
- 4:50:10ट्रू नॉलेज ऑफ़ थिंग्स रिमेंबेंस ऑफ़
- 4:50:12सब्जेक्ट रिटेन इन द मेमोरी। इन ड्रीम एंड
- 4:50:15ऑब्जेक्ट इज़ नॉट प्रेजेंट सीम्स टू बी
- 4:50:17प्रेजेंट। व्हिच डिपेंड्स ऑन वर्ड्स इन द
- 4:50:19एब्सेंस ऑफ़ कंसर्न ऑब्जेक्ट। फॉल्स नॉलेज
- 4:50:22दैट डज़ नॉट अलाउ वन टू गेट ट्रू पिक्चर ऑफ
- 4:50:25एनीथिंग और सिचुएशन। सो चित्तवृत्ति मेंटल
- 4:50:28प्रोसेससेस किस तरीके से चलते हैं? आंसर
- 4:50:31आपका बी रहेगा जी। सबसे पहले ए यानी आप
- 4:50:34गेट यू इनेबल दिस दीज़ प्रोसेससेस इनेबल अस
- 4:50:37टू गेट ट्रू थिंग्स। ट्रू नॉलेज। तो अच्छी
- 4:50:40सही चीज़ पता चलती है हमें इससे। देन फॉल्स
- 4:50:42नॉलेज जो है वो अलाउ ही नहीं करती। अह नॉट
- 4:50:46डज़ नॉट अलाउ वन टू गेट ट्रू पिक्चर। फॉल्स
- 4:50:48नॉलेज की वजह से आपको एग्जैक्ट आईडिया
- 4:50:50नहीं लग पाता सिचुएशन का। इन ड्रीम एन
- 4:50:52ऑब्जेक्ट इज़ नॉट प्रोजेक्ट। प्रोजेक्ट
- 4:50:54प्रेजेंट सीम्स टू बी प्रेजेंट। तो ड्रीम
- 4:50:56में ऐसा लग रहा है कि प्रेजेंट है बट वो
- 4:50:58प्रेजेंट नहीं है। व्हिच डिपेंड्स ऑन
- 4:51:01वर्ड्स इन द एब्सेंस ऑफ़ कंसर्नड ऑब्जेक्ट
- 4:51:03और लास्ट में रिमेंबेंस। ओके? सिंबॉलिक
- 4:51:06इंटरेक्शनिज़्म, स्ट्रक्चरलिज्म,
- 4:51:08फंक्शनलिज्म, कॉन्फ्लिक्ट थ्योरी, यूज़
- 4:51:09सिंबल्स एंड फेस टू फेस इंटरेक्शन। तो, यह
- 4:51:11तो सिंबॉलिक इंटरेक्शनिज़्म ही साउंड कर
- 4:51:13रहा है। एक्सेप्ट आस्पेक्ट्स ऑफ़ सोसाइटी
- 4:51:16एंड इट्स फंक्शनंस। यह फंक्शनंस
- 4:51:19फंक्शनलिज्म भी हो सकता है। कंपटीशन फॉर
- 4:51:20स्के्स रिसोर्सेज। तो यह आपका कॉन्फ्लिक्ट
- 4:51:23हो गया। जब आप रिसोर्सेज के लिए
- 4:51:25कॉन्फ्लिक्ट में आ रहे हो और ये आपका वन
- 4:51:27हो गया। सो वन और थ्री से आ रहा है क्या
- 4:51:28आंसर? आ तो रहा है। बाकी देखो
- 4:51:31स्ट्रक्चरलिज्म बोल रहा है ब्रेकिंग डाउन
- 4:51:33मेंटल प्रोसेससेस इंटू स्मॉल
- 4:51:34कॉम्पोनेंट्स। तो स्ट्रक्चर फॉर्म कर दिया
- 4:51:36और वो फंक्शनलिज्म हो गया। ऑप्शन नंबर ए।
- 4:51:38ओके?
- 4:51:40ओके। एजुकेशन ऑफ़ माइनॉरिटी इज़ इंस्ट्रक्शन
- 4:51:42इन मदर टंग एट प्राइमरी लैंग। प्राइमरी ये
- 4:51:45तो मैंने बताया था। ये ये तो बताया था।
- 4:51:47राइट टू एजुकेशन भी बताया था। आर्टिकल 21
- 4:51:49ए माइनॉरिटीज़ टू एस्टैब्लिश एजुकेशनल
- 4:51:52इंस्टीट्यूशन और एजुकेशन ऑफ़ माइनॉरिटीज़।
- 4:51:54दो अलग-अलग चीजें हैं। तो क्या इससे सॉल्व
- 4:51:56हो रहा है क्या पांच और एक से? पांच और एक
- 4:52:00पांच और एक नहीं भाई सॉल्व नहीं हो रहा
- 4:52:02इससे। तीन, चार या दो या तीन? तीन चार चार
- 4:52:05नहीं है जी। फॉर श्योर चार नहीं है। बिकॉज़
- 4:52:0729 और 30 में माइनॉरिटीज की और इनकी बात
- 4:52:10की है हमने। तो फोर्थ नहीं आएगा। यानी ये
- 4:52:12चार गलत है। तो आंसर हमारा डी हो गया। ठीक
- 4:52:15है? सो अब आपको याद होना चाहिए कि जब हम
- 4:52:18माइनॉरिटीज़ की एजुकेशन की बात कर रहे हैं
- 4:52:20तो वो आंसर आपका आर्टिकल 29 है। और जब आप
- 4:52:24एजुकेशनल इंस्टीटश एडमिनिस्टर कर सकते हो,
- 4:52:27एस्टैब्लिश कर सकते हो वो आपका आर्टिकल 30
- 4:52:30है।
- 4:52:31ओके? 2021 में पहुंच गए हम।
- 4:52:33स्ट्रेटिफिकेशन इन सोसाइटी इज़ बेस्ड ऑन।
- 4:52:35तो जो स्ट्रेटिफिकेशन होता है सोसाइटी में
- 4:52:37एक लेयरिंग जो बनती है सोसाइटी में वो
- 4:52:39पावर प्रॉपर्टी प्रेस्टीज कल्चर कास्ट
- 4:52:42क्लास एजुकेशन एजुकेशन के बेस पे तो फॉर
- 4:52:44श्योर नहीं बनती है मोटिवेशन मोबिलिटी
- 4:52:46मटेरियल पोज़ेशन नहीं तो ये चीजें बचती है
- 4:52:49पावर प्रॉपर्टी प्रेस्टीज
- 4:52:52ठीक है ये आपका सही आंसर होगा कास्ट बेसिस
- 4:52:55पे होती हैं बट क्लास बेसिस पे कुछ नहीं
- 4:52:57होता है ओके क्लास ही इनफैक्ट प्रॉपर्टी
- 4:53:00और पावर के बेस पे बनती है कर्म योग वुमेन
- 4:53:03एंड एल एथिकल एथिकल रिलजन मैंने आपको
- 4:53:05बताया था गांधी जी की है कि आप माय
- 4:53:08एक्सपेरिमेंट्स विद ट्रुथ के अलावा एथिकल
- 4:53:10रिलजन तो याद रखो एट लीस्ट ठीक है तो सी
- 4:53:12का तो फर्स्ट आएगा ओके दिस देन है आपका
- 4:53:15श्री अरविंदो नेलनोडिंग्स नेलनोडिंग्स
- 4:53:18नहीं है क्योंकि केयर की बात नहीं हुई है
- 4:53:20तो ये डी तो ये फोर्थ तो आएगा ही नहीं
- 4:53:22कहीं एक ही ऑप्शन बचता है हमारे पास कर्म
- 4:53:24योग जो है वो स्वामी विवेकानंद ने लिखी है
- 4:53:26वुमेन एंड एिल आपकी अच्छा रुको
- 4:53:31हां वुमेन एंड एल नेल नोडिंग्स ने लिखी है
- 4:53:33भाई ठीक ठीक है? वुमेन एंड एविल
- 4:53:35नेलनोडिंग्स ने लिखी है और योगा सिंथेसिस
- 4:53:38जो है वो आपके किसने लिखे हैं? श्री
- 4:53:40अरविंदो ने तो नेलनोडिंग्स ने लिखी है भाई
- 4:53:42वुमेन एंड एल याद आ गया मुझे। ओके? तो
- 4:53:44आंसर आपका क्या रहेगा? जी फर्स्ट रहेगा
- 4:53:48पावर एज़ अ सेंट्रल फीचर ऑफ़ सोसाइटी रादर
- 4:53:50देन थिंकिंग ऑफ़ सोसाइटी एज़ हेल्ड टुगेदर
- 4:53:53बाय कलेक्टिव एग्रीमेंट कंसर्न्स एज़
- 4:53:55फंक्शनलिस्ट डू एग्जैक्ट एग्जैक्ट सेम
- 4:53:58स्टेटमेंट मैंने आपको नोट्स में बताई थी
- 4:54:00और कॉन्फ्लिक्ट थ्यरी में बताई थी। ठीक
- 4:54:02है?
- 4:54:03माइंड इज मेयरली अ फंक्शन ऑफ द ब्रेन एंड
- 4:54:06ओवरटोन कंपेनिंग बॉडीली एक्टिविटी। इट इज़
- 4:54:09एन ऑन लुकर एट इवेंट्स नेवर इन्फ्लुएंसिंग
- 4:54:12देम बिलोंग्स टू। तो ये पैरेलिज्म,
- 4:54:14इंटरेक्शनिज़्म या एपिफिनोमिनलिज़्म या
- 4:54:16एब्सोल्यूटिज़्म। सो देखो ये बोल रहे हैं
- 4:54:18कि बॉडीली एक्टिव तो यानी फिजिकल
- 4:54:19प्रोसेससेस को तवज्जो दी जा रही है कि
- 4:54:22उन्हीं की वजह से मेंटल प्रोसेससेस होंगे।
- 4:54:24सो मेंटल प्रोसेससेस इन्फ्लुएंस नहीं
- 4:54:26करेंगे फिजिकल को। तो ये एपिफ़ेनोमिनलिज़्म
- 4:54:29आ गया। ओके? आइडियलिज्म, रियलिज्म,
- 4:54:32नेचुरलिज्म, प्रगमेटिज्म
- 4:54:34वर्ल्ड इज कैरेक्टराइज थ्रू आउट बाय
- 4:54:35प्रोसेस एंड चेंज। तो, यह तो प्रैग्मिज्म
- 4:54:38है। चेंज की बात कर रहे हो आप। कॉस्मोस इज़
- 4:54:40मेड अप ऑफ़ नंबर ऑफ़ एंटिटीज़ हैविंग वेरियस
- 4:54:42रिलेशंस टू वन अनदर एंड वेरियस क्वालिटीज़।
- 4:54:45सराउंडिंग वर्ल्ड विद इज़ स्पिरिचुअल।
- 4:54:49नेचर इन टर्म्स ऑफ़ प्रोसेस रादर देन इदर
- 4:54:51सब्सटेंस।
- 4:54:53ओके? सो, तीन, 2, 4, एक ऑप्शन नंबर एक।
- 4:54:58ओके? अरेंज द फॉलोवंग इन ऑर्डर अकॉर्डिंग
- 4:55:00टू एट लिम्स ऑफ़ योगा। सो हम यम से शुरू
- 4:55:04करते हैं। यम नियम अह आसन देन आपका यम
- 4:55:08नियम आसन प्राणाया यम नियम आसन प्राणायाम।
- 4:55:12हां ऐसे ही है। यम नियम आसन प्राणायाम
- 4:55:17प्रत्याहार ध्यान धारणा ध्यान और आपका
- 4:55:22समाधि। समाधि है नहीं यहां पे। तो आपका यम
- 4:55:25भी नहीं है। नियम से शुरू है। तो सबसे
- 4:55:27पहले नियम आएगा। ऑप्शन डी कट आउट हो गया।
- 4:55:29नियम के बाद आसन आएगा। ऑप्शन बी ये एक
- 4:55:32यहीं से आ गया आंसर। तो देन चेक कर लो।
- 4:55:34देन प्राणायाम आसन के बाद और फिर आपका
- 4:55:37प्रत्याहार है और फिर आपका ध्यान है। ठीक
- 4:55:40है जी? ऑप्शन नंबर टू। ओके? प्रएमबल ऑफ़
- 4:55:43आवर इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन हैज़ अ सीक्वेंस
- 4:55:45ऑफ़ जस्टिस, लिबर्टी, इक्वलिटी,
- 4:55:47फ्रेटरनिटी। सीक्वेंस पूछी है ना हमसे तो
- 4:55:50सीक्वेंस। ठीक है? तो जस्टिस सबसे पहले
- 4:55:52आता है जी। ऑप्शन नंबर ए दे रखा है। ठीक
- 4:55:54है? लिबर्टी इक्वलिटी फ्रेटरनिटी सबसे
- 4:55:57जस्टिस लिबर्टी इक्वलिटी फ्रेटरनिटी
- 4:56:00इक्विटी नहीं होता है। सो बी तो नहीं
- 4:56:02आएगा। बी नहीं आएगा तो एक ऑप्शन कट आउट।
- 4:56:05अब सीक्वेंस में लगानी पड़ेगी चीजें। सो
- 4:56:07जस्टिस लिबर्टी जस्टिस लिबर्टी इक्वलिटी
- 4:56:11और फ्रेटरनिटी भाईचारा सबसे लास्ट में। तो
- 4:56:13ए ई सी डी ऑप्शन नंबर ए। ठीक है?
- 4:56:17व्हाट वी वांट इज़ प्रोग्रेस डेवलपमेंट,
- 4:56:20रियलाइज़ेशन, नो थ्यरीज़? तो लेट ह्यूमन
- 4:56:22बीइंग थिंक। सो लेट ह्यूमन बीइंग थिंक की
- 4:56:24बात किसने की है? जी मैंने आपको बताया था
- 4:56:26स्वामी विवेकानंद ने। व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग
- 4:56:28स्टेटमेंट्स इज़ नॉट करेक्ट इन केस ऑफ़
- 4:56:30वॉलस्टन क्राफ्ट? अ इंग्लिश राइटर फिलॉसफर
- 4:56:33एडवोकेट ऑफ ह्यूमन राइट्स। ठीक है ये तो
- 4:56:35वस्टन क्राफ्ट इज़ रिगार्डेड एज वन ऑफ़ द
- 4:56:38फाउंडिंग फेमिनिस्ट फिलॉसफर। हां केयरिंग
- 4:56:41अ फेमिनिन अप्रोच टू एथिक्स केयर ये तो
- 4:56:43केयर मॉडल वाला हो गया ना। उनकी फर्स्ट
- 4:56:45सोल ऑथर्ड बुक ये तो नहीं है। मेजॉरिटी ऑफ़
- 4:56:48व्सन क्राफ्ट्स अर्ली प्रोडक्शन आर अबाउट
- 4:56:49एजुकेशन। ये ठीक है। थर्ड ऑप्शन गलत है
- 4:56:51जी। उनकी बुक है मैरी अफिक्शन। ठीक है? तो
- 4:56:55मैरी वस्टन क्राफ्ट। मैरी वस्टन क्राफ्ट
- 4:56:57है। तो मैरी नाम से है उनकी एक बुक।
- 4:56:59फर्स्ट एजुकेशन वाज़ बोट इनू कॉनकरेंट
- 4:57:02लिस्ट। सो एजुकेशन जो है ओरिजिनली जो है
- 4:57:05किसमें था भाई? स्टेट लिस्ट में था। ठीक
- 4:57:07है? स्टेट उसके ऊपर रूल्स बना सकता था। सो
- 4:57:10कॉन्स्टिट्यूशन में ओरिजिनली स्टेट लिस्ट
- 4:57:12में मेंशन था। बट 42 कॉन्स्टिट्यूशनल
- 4:57:15अमेंडमेंट एक्ट 1976 में हमने कॉन्करेंट
- 4:57:19लिस्ट में इसको ऐड कर दिया ताकि यूनियन भी
- 4:57:21इसके ऊपर काम कर पाए। प्राइमरी बिलीफ क्या
- 4:57:23है एसेंशियल एग्ज़िस्टेंशियलिज्म का?
- 4:57:26एग्ज़िस्टेंस प्रसीड्स एसेंस।
- 4:57:29है ना यही है प्राइमरी बिलीफ तो
- 4:57:33प्रपजीिशन दैट एक्सिस्टेंस प्रसीड्स एसेंस
- 4:57:35तो फ्रेंच में एल एकिस्टेंस प्रसीड एसेंस
- 4:57:39इज़ अ सेंट्रल क्लेम ऑफ़ एक्सिस्टेंशियलिज्म
- 4:57:42व्हिच ऑफ़ द फॉलोवंग फैक्टर्स रेजिस्ट सोशल
- 4:57:45चेंज सोशल चेंज नई चीजें अगर आएंगी तो
- 4:57:49फियर ऑफ़ न्यू थिंग्स ये रेजिस्ट करेगा ठीक
- 4:57:52है साइंटिफिक इन्वेंशन फिजिकल एनवायरमेंट
- 4:57:54डिग्री ऑफ़ आइसोलेशन सो आइसोलेशन
- 4:57:57फियर ऑफ़ न्यू न्यू थिंग्स ये चीजें सोशल
- 4:58:00चेंज को रेजिस्ट करेंगी। सो आंसर बी और ई
- 4:58:03तो आएगा ही आएगा। बी और ई अगर आएगा तो
- 4:58:06आंसर आपका ए, बी और ई हो गया भाई। ठीक है?
- 4:58:09सो कल्चरल इनर्शिया फियर ऑफ़ थिंग्स।
- 4:58:12कल्चरल इनर्शिया होता है कि आप वही पोजीशन
- 4:58:14में हो तो सेम पोजीशन में रहने की कोशिश
- 4:58:16करते हो। आप वो चीज़ चेंज नहीं करना चाहते।
- 4:58:18जैसे हम वो एग्जांपल देते हैं ना आप बस
- 4:58:19में खड़े हो अगर तो बस चल रही है, चल रही
- 4:58:21है। लेकिन जैसे ही वो ब्रेक मारेंगे आपकी
- 4:58:23बॉडी उसी पोजीशन में रहने की कोशिश करेगी।
- 4:58:26लेकिन आपके इट्स लाइक आपका वो आप वहीं पे
- 4:58:28ही खड़े हो बट वो ब्रेक लगने की वजह से आप
- 4:58:30आगे मूव कर रहे हो। ठीक है? सो वो कल्चरबल
- 4:58:33आप मूव करना नहीं चाहते हो, रेजिस्ट करते
- 4:58:35हो तो वो कल्चरल इनर्शिया आएगा। गिवन बिलो
- 4:58:38अर टू स्टेटमेंट्स। द एम ऑफ़ एजुकेशन इन
- 4:58:40एंशिएंट इंडिया वाज़ नॉट जस्ट द एक्विज़िशन
- 4:58:42ऑफ़ नॉलेज एज़ प्रिपरेशन फॉर लाइफ इन दिस
- 4:58:45वर्ल्ड और लाइफ बिय्ड स्कूलिंग बट फॉर द
- 4:58:47कंप्लीट रियलाइज़ेशन ऑफ़ सेल्फ। द एम ऑफ
- 4:58:51एजुकेशन शुड बी कॉग्निटिव डेवलपमेंट
- 4:58:53इक्विप्ड विद 21 सेंचुरी स्किल्स ओनली
- 4:58:56सेंचुरी स्किल्स तो ठीक है बट ओनली गलत हो
- 4:58:58गया यहां बाकी चीजें ठीक है ओके तो पहली
- 4:59:01ठीक है दूसरी गलत हो गई लेकिन ये ओनली की
- 4:59:03वजह से गलत हुई है ओके इन सांख्य फिलॉसफी
- 4:59:06इवोल्यूशन इज़ कंसीडर्ड टू बी अ टिलियोलॉजी
- 4:59:09हां इवोल्यूशन टिलियोलॉजिकल प्रोसेस है
- 4:59:11हमने बोला था नॉर्मेटिव टिलियोलॉजिकल
- 4:59:13साइक्लिक प्रोसेस परपसिव साइक्लिक प्रोसेस
- 4:59:17व्हिच स्कूल ऑफ़ वेस्टर्न फिलॉसफी एंडोस द
- 4:59:20फॉलोइंग मेटाफिजिकल असरशन। सिंस द
- 4:59:22यूनिवर्स एकज़िस्ट इंडिपेंडेंट ऑफ़ अस एंड
- 4:59:24इज़ गवर्नड बाय लॉज़ ओवर व्हिच वी हैव लिटिल
- 4:59:27कंट्रोल। इट इज़ नेसेसरी टू नो सर्टेन
- 4:59:30डेफिनेट थिंग्स अबाउट दिस यूनिवर्स इन
- 4:59:32ऑर्डर टू अडॉप्ट टू इट। सो हमें कुछ चीज़ें
- 4:59:35तो पता होनी चाहिए ना उसके बारे में ताकि
- 4:59:36हम उन चीज़ों के बारे में अडैप्ट कर सकें
- 4:59:39खुद को भी और उन चीज़ों को अडॉप्ट कर सकें।
- 4:59:41तो आंसर आपका रियलिज़्म रहेगा। रियलिस्टिक
- 4:59:43बातों की बात हो रही है। सावित्रीबाई फुले
- 4:59:45इज़ नोन फॉर हर कंट्रीब्यूशन इन व्हिच ऑफ़ द
- 4:59:47फॉलोविंग लिस्टेड एरियाज़? तो देखो पांच
- 4:59:49हैं। पांच में से दो ही ऑप्शन है यहां। सो
- 4:59:51मैंने आपको बताया था जब ऐसे कोई ऑप्शन आए
- 4:59:53तो सबसे पहले वुमेन एजुकेशन पे जाओ। तो
- 4:59:56वुमेन एजुकेशन फॉर श्योर रहेगा ऑप्शन में।
- 4:59:58अब देख लो ए डी आएगा या सी डी आएगा। सो
- 5:00:00ऑब्वियसली सी डी आएगा। पीस एजुकेशन जैसा
- 5:00:03कुछ नहीं बात की उन्होंने। उन्होंने
- 5:00:04शेड्यूल्ड कास्ट की एजुकेशन, वुमेन
- 5:00:06एजुकेशन इनकी बात की है। तो सी डी आपका
- 5:00:08आंसर हो जाएगा। कॉनसेप्ट ऑफ़ एजुकेशन व्हिच
- 5:00:12विल बी एसेंटेड टू बाय वेदांत फिलॉसफी आर
- 5:00:15अवेकनिंग ऑफ़ इंटेलिजेंस विद ऑल थ्री
- 5:00:17क्यूज़। आईक्यू ईक्यू सी एसक्यू सो
- 5:00:20इंटेलिजेंस कोशेंट इमोशनल कोशेंट
- 5:00:22स्पिरिचुअल कोशेंट वोकेशनलाइज़ेशन ऑफ़
- 5:00:24एजुकेशन इंक्लूसिव एजुकेशन रैप्टेरियन
- 5:00:26लीडरशिप मॉडल और एजुकेशन फॉर ऑल सो वेदांत
- 5:00:30फिलॉसोफी के टाइम की बात हो रही है सो
- 5:00:32आंसर आपका क्या आएगा जी ए सीई आएगा ठीक है
- 5:00:36सो इंक्लूसिव एजुकेशन एजुकेशन फॉर ऑल और
- 5:00:39अवेकनिंग ऑफ़ ऑल थ्री टाइप्स ऑफ़ क्यूज़ ओके
- 5:00:43आइडेंटिफाई फ्रॉम द फॉलोविंग लिस्ट दोज़
- 5:00:46फैक्टर्स दैट हेल्प हेल्प इन सोशल
- 5:00:48मोबिलिटी। एजुकेशन हेल्प करेगा सोशल
- 5:00:50मोबिलिटी में कि आप एक स्टेटस से दूसरे
- 5:00:53स्टेटस में एजुकेशन की वजह से पहुंच
- 5:00:55पाओगे। कास्ट में कोई सोशल मोबिलिटी नहीं
- 5:00:57होती। आप जो पैदा हुए हो वही रहेगी। आप
- 5:00:59इनफैक्ट इंटरकास्ट या इंटर रिलिजन मैरिज
- 5:01:01भी कर लोगे तो भी आपकी कास्ट सेम रहेगी।
- 5:01:03ऐसे वाला। हां जब आप धर्म ही चेंज कर लेते
- 5:01:06हो तो अलग बात है। बट विदिन अगर विदिन वन
- 5:01:09धर्म अगर आप बात कर रहे हो तो इंटरकास्ट
- 5:01:11मैरिज अगर आपने की है तो ऐसा नहीं है कि
- 5:01:13आपने जिस लड़के से शादी की तो आपकी कास्ट
- 5:01:15भी वो लड़के वाली ही कास्ट हो जाएगी। ठीक
- 5:01:17है? आपकी कास्ट वही रहेगी। वो बाय बर्थ
- 5:01:20है। ये बात सुप्रीम कोर्ट ने भी बोली
- 5:01:21बिकॉज़ एक ऐसा केस आया था कि एक लड़की ने
- 5:01:24जो जनरल थी आई थिंक और उसने एससी लड़के से
- 5:01:27शादी करके एससी का बेनिफिट उठाया। ठीक है?
- 5:01:30सो वो एससी का सर्टिफिकेट आपका नहीं बन
- 5:01:33सकता। था बिकॉज़ आपकी कास्ट बाय बर्थ होती
- 5:01:35है। ऐसा सुप्रीम कोर्ट ने बोला था। ठीक है
- 5:01:37जी। सो कास्ट के बेसिस पे फॉर श्योर नहीं
- 5:01:39हो सकता। तो बी ऑप्शन नहीं आएगा। यानी ये
- 5:01:41फर्स्ट ऑप्शन कट आउट हो गया। ए ऑप्शन फॉर
- 5:01:43श्योर आएगा तो सेकंड भी कट आउट हो गया। तो
- 5:01:45ए सी यानी इनकम के बेस पे, आपकी एजुकेशन
- 5:01:48के बेस पे और आपके ऑक्यूपेशन के बेस पे
- 5:01:51आपकी सोशल मोबिलिटी पॉसिबल है। आपकी सोशल
- 5:01:54मोबिलिटी रिलीजन या कास्ट के बेस पे
- 5:01:56पॉसिबल नहीं है। ओके?
- 5:01:59महात्मा गांधी, रविंद्र नाथ टैगोर,
- 5:02:00अरविंदो, स्वामी विवेकानंद लाइफ डिवाइन
- 5:02:03डिवाइन वाली स्पेलिंग आई थिंक यह आएगी।
- 5:02:04यहां भारतम भारत होम एंड द वर्ल्ड माय
- 5:02:07एक्सपेरिमेंट्स विद ट्रुथ। तो माय
- 5:02:08एक्सपेरिमेंट्स विद ट्रुथ से ही आपका
- 5:02:10क्वेश्चन सॉल्व हो गया। जी। ओके? कॉज़ ओनली
- 5:02:13इफ़ेक्ट ओनली बोथ कॉज़ एंड इफ़ेक्ट। नीदर कॉज़
- 5:02:15नॉर इफ़ेक्ट। तो, हमें पता है पुरुष ना
- 5:02:18कारण है ना इफ़ेक्ट है। सो, डी का आएगा जी
- 5:02:21फर्स्ट। लो यहीं से ही सॉल्व हो गया।
- 5:02:23प्रकृति जो है वो हर चीज का कारण है। वो
- 5:02:25कॉज ओनली है। फोर्थ लॉ फॉर रीशोर हो गया।
- 5:02:28ये तो दो दो ही बातें पता होनी चाहिए थी
- 5:02:30आपको। बाकी मैंने आपको करवाया था ऊपर।
- 5:02:32व्हिच ऑफ़ द फॉलोवंग फीचर्स एक्सप्लेन द
- 5:02:34कॉनसेप्ट ऑफ़ डिपेंडेंट ओरिजिनेशन इन
- 5:02:36बुद्धिस्ट फिलॉसफी। एवरीथिंग इन दिस
- 5:02:38वर्ल्ड इज़ कंडीशनल एंड रिलेटिव। कंडीशनल
- 5:02:42हां, डिपेंडेंट है चीज़। अह मोमेंट्री हैं।
- 5:02:44फ्रॉम द अल्टीमेट स्टैंड पॉइंट देयर इज़ नो
- 5:02:47डिफरेंस बिटवीन संसार और निर्वाण। ओके? अह
- 5:02:50ऑल एक्सपीर अपीयरेंसेस हैव रियल
- 5:02:53ओरिजिनेशन। अपीयरेंसेस आर नॉट डिवॉइड ऑफ़
- 5:02:55अल्टीमेट रियलिटी। ऑल अपीयरेंसेस यानी
- 5:02:57धर्म। बीइंग रिलेटिव हैव नो रियल ओरिजिन।
- 5:03:00सो डिपेंडेंट ओरिजिनेशन की थ्योरी है। ए,
- 5:03:03बी, ई ऑप्शंस आपके ठीक हैं। डिपेंडेंट है
- 5:03:06यानी कंडीशनल और रिलेटिव है चीज़ें। अह
- 5:03:08अल्टीमेट स्टैंड पॉइंट से अगर आप देखो तो
- 5:03:11कोई भी डिफरेंस नहीं है। चीजों में
- 5:03:13रिलेटिव हैं। ठीक है? देन आपका ए बी और डी
- 5:03:16नहीं ए बी ई ना? ई ऑल ए बी ई ठीक है एबी ई
- 5:03:21ऑल अपीयरेंसेस जो है वो रिलेटिव है उनका
- 5:03:24कोई रियल ओरिजिनेशन नहीं है इट्स लाइक
- 5:03:26मोटा पतला सो वो नहीं है चीजें डिपेंडेंट
- 5:03:28है एक दूसरे के ऊपर रिलेटिविटी ऑलदो
- 5:03:30एग्जैक्ट रिलेटिविटी सैयदवाद की बात करोगे
- 5:03:33आप तो वो आपकी बात है जैनिज्म फिलॉसोफी की
- 5:03:36बट जब बुद्धिज्म में डिपेंडेंट ओरिजिनेशन
- 5:03:38की बात करते हैं उसमें भी ये कंडीशनल और
- 5:03:40रिलेटिव बताते हैं चीजों को। इन एट फोल्ड
- 5:03:42पाथ गिवेन बाय बुद्धा व्हिच ऑफ़ द फॉलोविंग
- 5:03:44इज़ द बेसिस ऑफ़ राइट नॉलेज? तो देखो मैंने
- 5:03:47बताया था कि राइट रिजॉल्व नॉलेज तो वो जो
- 5:03:49चार ऑप्शंस बताए तीन बनाए थे मैंने कि
- 5:03:51फर्स्ट सेकंड मिलके थर्ड फोर्थ मिलके
- 5:03:54फिफ्थ में ऐसे करके तो वो चीजें हैं यहां
- 5:03:56राइट स्पीच एंड राइट एक्शन राइट एक्शन
- 5:03:58राइट लिविंग राइट थॉट राइट कंसंट्रेशन
- 5:04:00राइट फेथ और रिज़ॉल्व सो फेथ और रिज़ोल्व जो
- 5:04:03है वो मिलके राइट नॉलेज बनाते हैं। ठीक
- 5:04:05है? राइट नॉलेज एग्जैक्टली नहीं है आपके
- 5:04:07कोई ऑप्शन में अगर आप उन आठ को देखोगे बट
- 5:04:10इन दोनों को मिला के राइट नॉलेज बनेगा।
- 5:04:12प्रएमबल ऑफ द कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ़ इंडिया
- 5:04:15मेंशंस डिफरेंट टाइप्स ऑफ लिबर्टी। सो
- 5:04:17लिबर्टी की बात करते हैं। हां, व्हिच
- 5:04:19टाइप्स ऑफ लिबर्टी आउट ऑफ दीज़ हैव अ
- 5:04:21डायरेक्ट बियरिंग ऑन द प्रैक्टिशनर इन द
- 5:04:23फील्ड ऑफ़ एजुकेशन। सो लिबर्टी ऑफ़ बिलीफ,
- 5:04:26फेथ, थॉट, एक्सप्रेशन इनकी हम बात करते
- 5:04:28हैं। थॉट एक्सप लिबर्टी ऑफ़ बिलीफ, फेथ,
- 5:04:31थॉट, एक्सप्रेशन एंड वरशिप। ये पांच तरीके
- 5:04:33की लिबर्टी की हम बात करते हैं। सो थॉट,
- 5:04:35एक्सप्रेशन, बिलीफ या फेथ कौन सा एजुकेशन
- 5:04:38से रिलेट करेगा? सो आंसर आपका थॉट और
- 5:04:40एक्सप्रेशन आएगा। ओके? अकॉर्डिंग टू जैन
- 5:04:42फिलॉसोफी व्हेन बाय द पोज़ेशंस एंड
- 5:04:45प्रैक्टिस ऑफ़ राइट फेथ नॉलेज एंड कंडक्ट
- 5:04:47त्रिरत्न। ठीक है? द इनफ्लक्स ऑफ़ फ्रेश
- 5:04:49कार्मिक मैटर इज़ ब्लॉक्ड। सो अगर उसको
- 5:04:51ब्लॉक किया जा रहा है फ्रेश कार्मिक मैटर
- 5:04:53को। यानी आप सारी चीजें सही कर रहे हो। आप
- 5:04:55त्रिरत्न को फॉलो कर रहे हो थ्री ज्वेल्स
- 5:04:57को। सो वो फॉलो करते हुए आपकी जो कार्मिक
- 5:05:00चेन बनी हुई है उसमें और कर्मा का जो है
- 5:05:02चीज़ ऐड होने से रोकने का तरीका है कि आप
- 5:05:05त्रिरत्न को फॉलो करो। तो आप त्रिरत्न को
- 5:05:07फॉलो कर रहे हो तो आप स्टॉपेज यानी सनवर
- 5:05:10जो है वो वहां पे आ गया। ब्लॉक आ गया।
- 5:05:12ओके? ये है यहां पे आठ काइंड ऑफ़ कर्मों की
- 5:05:15बात करते हैं। यहां पे घटीकरम अघटीकरम।
- 5:05:18ठीक है? सो ये आपको पता होना चाहिए कि
- 5:05:20अच्छा घटीकरम अघटीकरम की बात जो है वो
- 5:05:22आपके जैन फिलॉसोफी में हुई है। देन अ
- 5:05:24नियरेस्ट कोष टू आत्मन अकॉर्डिंग टू
- 5:05:26वेदांत फिलॉसफी। तो आत्मा बीच में है।
- 5:05:28सबसे नियरेस्ट उसके आनंद माया कोष हो
- 5:05:30जाएगा। सबसे बाहर वाला अन्न माया कोष।
- 5:05:33ओके?
- 5:05:34इस्लामिक ट्रेडिशन इन एजुकेशन ले स्ट्रेस
- 5:05:37ऑन द इंकल्केशन ऑफ ह्यूमैलिटी ह्यूमिलिटी
- 5:05:40एंड नोबिलिटी यह क्वेश्चन भी आए हुए हैं
- 5:05:42और मैंने करवाया भी था ऊपर उसमें आपके
- 5:05:44ह्यूमिलिटी नोबिलिटी सोशल इक्वलिटी ये
- 5:05:46सारी इनेशन बताई थी महत द ग्रेट ईगो अह
- 5:05:50देन आपका माइंड और आपका सटल एसेंसेस यानी
- 5:05:53तंत्राज़ ओके सो ये यहां पे चीजें पूछी हैं
- 5:05:56आर नीदर द क्वालिटीज़ नॉर द डिफरेंशिया ऑफ़
- 5:05:59ग्रॉस एलिमेंट्स नॉर द फंक्शन कॉस्मिक इन
- 5:06:02नेचर फंक्शनंस एज़ साइकोलॉजिकल आस्पेक्ट ऑफ़
- 5:06:04नोइंग। अह इट इज़ द अह क्या बोलते हैं?
- 5:06:07प्रिंसिपल ऑफ़ इंडिविजुअल इंडिविजुअलाइज़ेशन
- 5:06:10अह एंड इट्स फंक्शन इज़ टू जनरेट सेल्फ
- 5:06:12सेंस। इट इज़ द सटल एंड सेंट्रल सेंस ऑर्गन
- 5:06:15व्हिच सिंथेसाइज़ेज़ सेंस डाटा इंटू
- 5:06:19डिटरमाइन डिटरमिनेट परसेप्शन।
- 5:06:23ओके? हमने बोला था पुरुष और प्रकृति है।
- 5:06:25प्रकृति सब चीजों का कारण है। महत सबसे
- 5:06:28पहले बनता है। फिर अहंकार आता है और
- 5:06:30अहंकार के बाद फिर हम बाकी एसेंसेस में
- 5:06:33जाते हैं। ठीक है? ये चीज की हमने बात की
- 5:06:35थी। हमने रजस रजस में कोई आता नहीं है।
- 5:06:39सत्व सत्व में हमने मनस और उसकी हां मनस
- 5:06:43की और सेंस ऑर्गन्स की बात की थी। राइट?
- 5:06:46सो कहां से क्या चीज मैच होती हुई लग रही
- 5:06:49है। सो कॉस्मिक नेचर आई थिंक ये फर्स्ट
- 5:06:51वाले का आएगा। ऑप्शन सी है क्या? सी है।
- 5:06:54तो महत जो है वो कॉस्मिक होता है नेचर
- 5:06:56में। ठीक है? ईगो की जब आप बात करोगे तो
- 5:06:59प्रिंसिपल ऑफ़ इंडिविजुअल यानी आप खुद पे
- 5:07:01सेल्फ सेंस जनरेट करना चाह रहे हो।
- 5:07:03इंडिविजुअल पे फोकस कर रहे हो अहंकार। ठीक
- 5:07:05है? फोर्थ ये आपका मनस माइंड जो है वो सल
- 5:07:08और सेंट्रल सेंस ऑर्गन वाली चीज़ आएगी। और
- 5:07:10सल एसेंसेस जो है वो ना क्वालिटीज़ हैं ना
- 5:07:13डिफरेंशिया है ना ही फंक्शनंस हैं।
- 5:07:16स्वामी विवेकानंद रविंद्र नाथ टैगोर को
- 5:07:18गीतांजलि के लिए पुरस्कार मिला था। तो
- 5:07:21यहीं से ही हमारा क्वेश्चन सॉल्व हो गया।
- 5:07:24माय एक्सपेरिमेंट विद ट्रुथ। फोर्थ ऑप्शन
- 5:07:26आपका कंफर्म करता है। इसको आंसर सी आ
- 5:07:28जाएगा। यानी जिद्दु कृष्णमूर्ति की फर्स्ट
- 5:07:30एंड लास्ट फ्रीडम और मॉडर्न इंडिया आपकी
- 5:07:33किसकी आ गई? स्वामी विवेकानंद की। ओके?
- 5:07:35व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग स्टेटमेंट्स
- 5:07:37कॉन्स्टिट्यूट क्रिटिकल पेडागोजी ऑफ़ पावलो
- 5:07:39ऑफ़ रे? टीचिंग इनहेरेंटली पॉलिटिकल होती
- 5:07:41है। टीचिंग इंप्ल्लाई एब्सेंस ऑफ़
- 5:07:43न्यूट्रलिटी ऑफ़ नॉलेज, प्रो
- 5:07:45एस्टैब्लिशमेंट, इशू ऑफ़ सोशल जस्टिस एंड
- 5:07:48डेमोक्रेसी आर इंटीग्रल पार्ट ऑफ़ टीचिंग।
- 5:07:51टीचिंग इज़ अ वे फ्रॉम सो अवे। टीचिंग इज़
- 5:07:53अवे फ्रॉम सोशल रियलिटी। सोशल लेवल पे कुछ
- 5:07:56और रियलिटी है। पढ़ा कुछ और रहे हो वो चीज़।
- 5:07:58तो ए बी डी की बात हो रही है यहां जी पहला
- 5:08:00ठीक है इनहेरेंट पॉलिट इनहेरेंटली
- 5:08:03पॉलिटिकल है एब्सेंस ऑफ़ न्यूट्रलिटी ऑफ़
- 5:08:05नॉलेज है और आपका इशूज़ जो है वो इसका
- 5:08:08इंटीग्रल पार्ट रहेंगे
- 5:08:10आइडियलिज्म रियलिज्म टर्मेटिटिज़्म
- 5:08:12एक्सिस्टेंशियलिज्म नॉलेज को इंपार्ट कर
- 5:08:14रहे हो टू बी अ रोल मॉडल टू बी एमुलेटेड
- 5:08:17रोल मॉडल की तो बात इसमें होती है वैसे
- 5:08:19फंक्शन टू फंक्शन एज अ कंसलटेंट इन
- 5:08:22प्रॉब्लम सिचुएशन प्रॉब्लमेटिक सिचुएशन है
- 5:08:24तो कंसलटेंट का काम तो प्रगमेटिज़्म वाले
- 5:08:26करते हैं टू असिस्ट टीच स्टूडेंट पर्सनली
- 5:08:28इज़ इन इन हिज़ और हर जर्नी टुवर्ड्स सेल्फ
- 5:08:31रियलाइज़ेशन।
- 5:08:33ओके? सो नॉलेज इंपार्ट करने का काम फिर
- 5:08:35यहां आएगा। सो तीन चार दो एक ऑप्शन नंबर
- 5:08:38बी। ठीक है? सोशलिज्म, सेकुलरिज्म,
- 5:08:41डेमोक्रेसी और रिपब्लिक स्टेट का कोई
- 5:08:43रिलीजन नहीं है। इट इज़ ना तो वो प्रो है
- 5:08:46रिलीजन के ना वो अगेंस्ट हैं। ये बात
- 5:08:47सेकुलरिज्म बोलता है। ठीक है? ये लो। यहीं
- 5:08:50से ही आपका ऑप्शन आंसर सॉल्व हो गया।
- 5:08:52सिस्टम इन व्हिच गवर्नमेंट इज़ इेड
- 5:08:54डेमोक्रेसी
- 5:08:55पॉलिटिकल आईडिया दैट ऑल पीपल आर इक्वल एंड
- 5:08:58रिसोर्सेज शुड बी इक्वली शेयरर्ड तो ये
- 5:09:00आपका सोशलिज्म नेशन दैट हैज़ एन इेड
- 5:09:03गवर्नमेंट और इेड लीडर वो रिपब्लिक होती
- 5:09:05है। तो हमारे यहां मैंने बोला था आपको
- 5:09:07सोवरन सोशलिस्ट सेकुलर डेमोक्रेटिक
- 5:09:10रिपब्लिक हैं हम। ठीक है? तो आंसर आपका
- 5:09:12फर्स्ट हो गया। इन टर्म्स ऑफ़ बुद्धिस्ट
- 5:09:15फिलॉसफी व्हिच ऑफ़ द फॉलोवंग इज़
- 5:09:17कंट्रीब्यूटिव टू राइट नॉलेज? प्रज्ञा।
- 5:09:19मैंने आपको बोला था प्रज्ञा। वो आपका
- 5:09:22समाधि और स्किल शील स्कंध तो प्रज्ञा
- 5:09:26स्कंध शील स्कंध वो मैंने आपको बात की थी
- 5:09:28तो प्रज्ञा सबसे पहले वाला था। राइट फेथ
- 5:09:30और राइट रिज़ॉल्व आपका आंसर हो जाएगा। हु
- 5:09:32डिफाइन डेमोक्रेसी एज़ अ फॉर्म ऑफ़
- 5:09:34गवर्नमेंट ऑफ़ पीपल फॉर द पीपल बाय द पीपल।
- 5:09:36तो ये अब्राहम लिंकन का बहुत फेमस कोर्ट
- 5:09:39है। बचपन में बहुत पढ़ा है हमने। हु अमंग द
- 5:09:41फॉलोविंग थिंकर्स प्रोपगेटेड द आईडिया ऑफ़
- 5:09:43एजुकेशन ऑफ़ द मोस्ट टैलेंटेड। सो आईडिया
- 5:09:45ऑफ़ एजुकेटेड ऑफ़ मोस्ट टैलेंटेड की बात
- 5:09:47प्लेटो ने की है। जी। उन्होंने बोला
- 5:09:49स्पेशलाइज्ड एजुकेशन होनी चाहिए जो
- 5:09:51इंटेलेक्चुअली गिफ्टेड यंग मैन और वुमेन
- 5:09:53है ताकि उनको और बेटर सिखाया जा सके। इन
- 5:09:56सांख्य द इक्विलिब्रियम ऑफ़ थ्री गुण इज़
- 5:09:58कॉल्ड तो तीन गुणों का बैलेंस जो है वो
- 5:10:01क्या रहेगा? पुरुष महत प्रकृति या सटल
- 5:10:05एसेंसेस। तो इक्विलिब्रियम प्रकृति। ठीक
- 5:10:07है? बैलेंस तीनों गुणों। प्रकृति के तीन
- 5:10:09गुण बताए थे हमने। ये सतगुण, रजस गुण, तमस
- 5:10:12गुण। उनको हमने सत को वाइट कलर से, रजस को
- 5:10:15रेड कलर से, तमस को ब्लैक कलर से रिलेट
- 5:10:16किया था और उनकी प्रॉपर्टीज भी की थी। इन
- 5:10:18व्हिच ऑफ़ द फॉलोवंग एरियाज़ इज़ द
- 5:10:20कंट्रीब्यूशन ऑफ़ सावित्रीबाई फुले हाईली
- 5:10:22अक्लेम्ड? तो सबसे ज्यादा काम उन्होंने
- 5:10:24वुमेन एजुकेशन के लिए किया। बाकियों के
- 5:10:26लिए भी किया है। जैसे शेड्यूल कास्ट के
- 5:10:28लिए बहुत काम किया है। पुअर को भी रिसेटल
- 5:10:30करने का काम किया है। उन्होंने किया है।
- 5:10:32बट सबसे ज्यादा कंट्रीब्यूशन वुमेन
- 5:10:34एजुकेशन में माना जाता है उनका। हु अमंग द
- 5:10:37फॉलोइंग इंडियन थिंकर्स हैज़ कंट्रीब्यूटेड
- 5:10:39टुवर्ड्स द इंटीग्रल एजुकेशन। इंटीग्रल
- 5:10:41इंटीग्रल वर्ल्ड दिखते ही अरबिंदों के साथ
- 5:10:44जाओ। व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग इज़ सेड टू बी द
- 5:10:46इमीडिएट नॉलेज इन जैन फिलॉसोफी? तो हमने
- 5:10:49इमीडिएट और मीडिएट नॉलेज की बात की थी
- 5:10:51परोक्ष और अपरोक्ष वाली। ठीक है? सो
- 5:10:53इमीडिएट नॉलेज में कौन सा आ जाएगा? जी
- 5:10:55आंसर डी आ जाएगा अवधि। तो हमने मति जनना,
- 5:10:59श्रुति जनना की बात की थी। वो आपका
- 5:11:00इमीडिएट नॉलेज में था। फिर हमने अवधि
- 5:11:03जनना, मनप्राय जनना और कैवल्य जनना की बात
- 5:11:06की थी। वो आपका इमीडिएट नॉलेज में था।
- 5:11:08फैमिली, स्कूल, प्लेयर ग्रुप और मास
- 5:11:10मीडिया अह प्रोवाइड्स अपॉर्चुनिटी फॉर
- 5:11:12अंडरस्टैंडिंग डेमोक्रेटिक प्रोसेस। ओके?
- 5:11:15अ सोर्स ऑफ़ पॉलिटिकल इनेशन एंड आल्सो एन
- 5:11:18इंस्ट्रूमेंट फॉर शेपिंग पॉलिटिकल वैल्यूज़
- 5:11:19एंड बिलीव्स। तो सोर्स ये सोर्स तो मीडिया
- 5:11:21ही लग रहा है। ठीक है? देखो यहां से तो
- 5:11:24आंसर ये सॉल्व हो जाता। बट क्या? बाकी ठीक
- 5:11:26है। पहले का थर्ड फैमिली को बोल रहे हैं
- 5:11:28परसेप्चुअल वैल्यूज़ दैट सपोर्ट अथॉरिटीज़।
- 5:11:31ओके? इन्फ्लुएंस टीनएजर्स लाइफस्टाइल एंड
- 5:11:33एटीट्यूड। ये तो पीियर ग्रुप ही करेगा ना।
- 5:11:36नहीं। सी का फोर्थ ना ठीक है और स्कूल जो
- 5:11:40है वह आपको अपॉर्चुनिटी प्रोवाइड करता है।
- 5:11:42ठीक है जी थर्ड सी सी ऑप्शन व्हिच ऑफ़ द
- 5:11:45फॉलोइंग स्टेटमेंट्स मोस्ट एप्रोप्रियटली
- 5:11:47डिस्क्राइब्स द कॉनसेप्ट ऑफ़ पॉलिटिकल
- 5:11:49मॉडर्नाइज़ेशन? पॉलिटिकल चेंजज़ आर नेसेसरी
- 5:11:52फॉर द अचीवमेंट्स ऑफ़ अ स्पेसिफिक
- 5:11:54ऑब्जेक्टिव। अ जनरल प्रोसेस ऑफ़ चेंज इन द
- 5:11:56पॉलिटिकल स्फीयर इज़ क्लोजली रिलेटेड टू
- 5:11:58अदर एरियाज़ ऑफ़ सोसाइटी। हमसे पूछा क्या
- 5:12:01है? हमसे मॉडर्न कॉनंसेप्ट ऑफ़ पॉलिटिकल
- 5:12:03मॉडर्नाइज़ेशन पूछा है। पॉलिटिकल सिस्टम्स
- 5:12:05कैपेसिटी टू सॉल्व प्रॉब्लम्स टू इनिशिएट
- 5:12:07न्यू पॉलिसीज़ एबिलिटी टू लर्न बेटर एंड
- 5:12:10हाउ टू परफॉर्म पॉलिटिकल फंक्शनंस। सो
- 5:12:13पॉलिटिकल चेंजज़ नेसेसरी हैं फॉर अचीवमेंट
- 5:12:16ऑफ़ स्पेसिफिक ऑब्जेक्टिव। जनरल प्रोसेस ऑफ़
- 5:12:18चेंज इन द पॉलिटिकल स्फीयर जो है वो
- 5:12:20क्लोजली रिलेटेड है। आंसर आपका बी आ
- 5:12:23जाएगा। जनरल प्रोसेस जो चेंज होता है ना
- 5:12:25वो सोसाइटी से रिलेटेड है। सोसाइटी चाहेगी
- 5:12:27तब चेंज दिखता है आपको। अदरवाइज़ नहीं
- 5:12:29दिखता। फोकस ऑफ कंसर्न ऑफ़ सोशियोलॉजी ऑफ़
- 5:12:32एजुकेशन द क्लासिकल अप्रोच हैज़ बीन ऑन। तो
- 5:12:35सोशियोलॉजी का अप्रोच कॉन्फ्लिक्ट क्लास
- 5:12:37कॉन्फ्लिक्ट को रिज़ॉल्व करने पे रहा है।
- 5:12:40ओके? फोकस ये मैंने आपको ऊपर भी बताया था
- 5:12:42नोट्स में। अ टीचर इज़ फेस्ड विद द
- 5:12:45प्रॉब्लम ऑफ़ चूज़िंग द एप्रोप्रियट टीचिंग
- 5:12:47मेथड फॉर द ट्रांजैक्शन ऑफ़ अ कोर्स
- 5:12:50कंटेंट। व्हिच ब्रांच ऑफ़ फिलॉसफी विल
- 5:12:52मोस्ट एप्रोप्रियटली डिस्क्राइब हिज़ और हर
- 5:12:55प्रेडिक प्रेडिकमेंट।
- 5:12:57टीचर इज़ फेस्ड विद द प्रॉब्लम ऑफ चूजिंग
- 5:12:59एप्रोप्रियट टीचिंग मेथड। टीचिंग मेथड की
- 5:13:02बात हो रही है ना। वह चूज़ नहीं कर पा रहा
- 5:13:03है तो एपिस्टेमोलॉजी में जाएगा ना टीचिंग
- 5:13:05मेथड। ठीक है? द प्रिंसिपल ऑफ़ चाइल्ड द
- 5:13:08स्कूल एजुकेशन इटसेल्फ आर शेप्ड लार्जली
- 5:13:10बाय सोशल एंड कल्चरल फोर्सेस बाय ये बात
- 5:13:13कौन कौन बोलता है ये? तो प्रिंसिपल ऑफ़
- 5:13:16चाइल्ड स्कूल एजुकेशन इटसेल्फ शेप्ड बाय
- 5:13:18सोसाइटी को सोसाइटी शेप करती है ना इन
- 5:13:21चीजों को। तो ये बात तो अपना
- 5:13:22रिकंस्ट्रक्शनिज्म बोलेगा ना। रियलिस्टिक
- 5:13:26एपिस्टोमोलॉजी विल प्लीड द केस ऑफ वि टाइप
- 5:13:29ऑफ नॉलेज। रियलिस्टिक एपिस्टोमोलॉजी जो है
- 5:13:32वो आपका पोस्टीरियर नॉलेज की बात करेगा।
- 5:13:35रियलिस्टिक वो यानी एक्सपीरियंस के बेस पे
- 5:13:38चीज़ है। प्रायोरी नॉलेज होती है कि आपको
- 5:13:39बिना किसी एक्सपीरियंस के पहले से कोई चीज़
- 5:13:41पता है। तो इंडिपेंडेंट ऑफ़ एक्सपीरियंस है
- 5:13:44तो प्रायोरी है। और अगर पोस्टीरियरी की
- 5:13:46बात हो रही है तो वो रियलिस्टिक
- 5:13:47एपिस्टोमोलॉजी हो गया। व्हिच ऑफ़ द
- 5:13:49फॉलोविंग स्टेटमेंट्स एक्सप्रेस द
- 5:13:51रिलेशनशिप बिटवीन एजुकेशन एंड फिलॉसफी?
- 5:13:55ओके? द ऑब्जेक्टिव एंड गोल्स ऑफ़ एजुकेशन
- 5:13:58हैव टू बी डिसाइडेड बाय आवर स्टैंड ऑन
- 5:14:01नेचर ऑफ़ मैन। लर्निंग इंप्ल्लाईज़ अ
- 5:14:04प्रोसेस ऑफ़ एक्वायरिंग एंड इंटरनलाइजिंग।
- 5:14:07एजुकेशन शुड बी इटसेल्फ शुड बी लाइफ
- 5:14:09इटसेल्फ रादर देन प्रिपरेशन फॉर लाइफ।
- 5:14:11हां, यह बात तो ठीक है। एजुकेशन अपने आप
- 5:14:13में ही लाइफ़ होनी चाहिए। ओके? अह सोशल
- 5:14:16चेंज इज़ इंटर एलिया कॉन्टिंजेंट ऑन
- 5:14:19एजुकेशन एंड टेक्नोलॉजी। स्कूल शुड एनकरेज
- 5:14:22कोपरेशन रादर देन कंपटीशन। ठीक है?
- 5:14:26पर्सनालिटी इज़ डायनेमिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ़
- 5:14:28साइकोफिजिकल कैरेक्टरिस्टिक्स? तो देखो
- 5:14:31मुझे फोर थर्ड और फिफ्थ तो ठीक लग रहे
- 5:14:33हैं। थर्ड और फिफ्थ है क्या कहीं? थर्ड और
- 5:14:35फिफ्थ तो एक ही ऑप्शन में है। सो ये तो
- 5:14:37फर्स्ट, थर्ड और फिफ्थ के साथ जाएंगे हम।
- 5:14:39ठीक है? व्हिच वन ऑफ द फॉलोविंग
- 5:14:42एकिस्टेंशियलिस्ट इज रिलेटेड टू द थीसिस
- 5:14:44दैट मैन इज पोटेंशियली ऑलवेज इन
- 5:14:46कॉन्फ्लिक्ट विद हज नेबर एंड ऑल सोशल
- 5:14:48रिलेशनशिप्स आर डूम्ड टू फ्रस्ट्रेशन। सो
- 5:14:51ये बात किसने बोली है? तो ये बात जेपी ने
- 5:14:53बोली है जेपी साटरी करवाई थी ऊपर। व्हिच
- 5:14:56ऑफ़ द अह कंटेंपररी एजुकेशनल थ्यरीज़ विल
- 5:15:00एंडोर्स द व्यू दैट ओनली टाइप ऑफ़
- 5:15:02एडजस्टमेंट टू व्हिच एजुकेशन शुड लीड इज़
- 5:15:05एडजस्टमेंट टू द ट्रुथ व्हिच इज़ यूनिवर्सल
- 5:15:08एंड अनचेंजिंग।
- 5:15:09तो यह कौन सी थ्यरी बोलती है यह बात कि
- 5:15:12ओनली टाइप ऑफ एडजस्टमेंट जो एजुकेशन में
- 5:15:14हो सकती है शुड लीड इज एडजस्टमेंट टू द
- 5:15:17ट्रुथ जो कि यूनिवर्सल और अनचेंजिंग है।
- 5:15:20सो यूनिवर्सल और अनचेंजिंग ट्रुथ की बात
- 5:15:22कौन करता है? सेम रहनी चाहिए। कॉन्स्टेंट
- 5:15:25रहनी चाहिए चीजें। तो पेरिनियलिज्म करता
- 5:15:27है ये बात। हु अमंग द फॉलोविंग इंडियन
- 5:15:31एजुकेटर्स थिंकर्स ड्रू हेवली फ्रॉम द
- 5:15:33फिलॉसफी ऑफ़ वेदांता। सो वेदांता वाली
- 5:15:36फिलॉसफी को देखते हुए बैक टू वेदास भी तो
- 5:15:38बात की स्वामी विवेकानंद बात करते हैं।
- 5:15:41प्रैक्टिकल वेदांता भी लिखी है इन्होंने।
- 5:15:43हमने पढ़ा था। एजुकेशन हेल्प्स इन द
- 5:15:45ग्रेजुअल ट्रांसफॉर्मेशन फ्रॉम लोएस्ट टू
- 5:15:47हाईएस्ट लेवल ऑफ़ कॉन्शियसनेस कॉल्ड
- 5:15:49इग्नोस्टिक बीइंग। तो ये बात किसने बोली
- 5:15:51है? अरविंदों ने बोली है भाई। ठीक है?
- 5:15:53ग्रेजुअल ट्रांसफॉर्मेशन की बात। द
- 5:15:55डिपार्टमेंट ऑफ़ एजुकेशन ऑफ़ स्टेट
- 5:15:57गवर्नमेंट इनवाइट्स प्रपोजल्स फ्रॉम
- 5:15:59डाइट्स फॉर इंक्लूज़।
- 5:16:02ओके? तो ये ये वाला क्वेश्चन आपका कहां से
- 5:16:04आ गया? ये वाला क्वेश्चन अगेन या तो आपके
- 5:16:06मॉडल्स में जाए या आपकी फोर्थ यूनिट में
- 5:16:08जाए। सो आई थिंक इसको मिला के तीसरा
- 5:16:10क्वेश्चन है ये जो हमने किसी और यूनिट का
- 5:16:12ऐड कर दिया है गलती से बट है पीवाईक्यू
- 5:16:14ही। सो वहां पे नहीं ऐड होगा ये ऑब्वियसली
- 5:16:17तो यहां पे कवर हो गया। ठीक है? सो ये
- 5:16:19क्या किया है आपने? अ डाइट से प्रपोजल
- 5:16:22मांगा है। तो ये अप्रोच को आप क्या
- 5:16:24बोलोगे? यानी आपने बॉटम टू अप की बात की
- 5:16:26है। सो ये क्या हो गया? जी
- 5:16:28एडमिनिस्ट्रेटिव मॉडल हो गया। ठीक है?
- 5:16:30यानी आप नीचे से चीजें मांग रहे हो और
- 5:16:32उसके बाद आप काम कर रहे हो तो
- 5:16:33एडमिनिस्ट्रेशन ऊपर से आप ऑर्डर दोगे तो
- 5:16:35वो मानेंगे एग्जैक्ट ओके अन्नमाया कोष
- 5:16:38आनंद माया कोष मनोमाया कोष प्राणमाया कोष
- 5:16:40अन्नमाया विघ्न माया और विज्ञान माया और
- 5:16:43आपका ये इंडिविजुअल सेल्फ चलो जी इट इज़
- 5:16:47मेड अप ऑफ़ फूड वी ईट तो अन्न माया बाहर की
- 5:16:49बात हो रही है। ये लो यहीं से ही सॉल्व हो
- 5:16:52गया। उसके आगे तो जाने की जरूरत नहीं
- 5:16:53पड़ी। आंसर वन। ओके? बट अगर मैं यहां पे
- 5:16:56बता रही हूं जैसे ऐसे सॉल्व हो गया तो आप
- 5:16:58चेक करो फिर कि बाकी सारे ऑप्शंस फिट बैठ
- 5:17:01रहे हैं कि नहीं बैठ रहे हैं। स्कूल शुड
- 5:17:03एक्टिवली फोस्टर द डेमोक्रेटिक स्पिरिट
- 5:17:05एंड अलाउ इट्स स्टूडेंट्स एज मच स्कोप एज़
- 5:17:08पॉसिबल फॉर गवर्निंग देमसेल्फ विल फाइंड
- 5:17:10फेवर फ्रॉम व्हिच स्कूल ऑफ़ फिलॉसफी। तो
- 5:17:13स्कूल को एक्टिवली स्कूल जो है वो
- 5:17:15एक्टिवली फ़स्टर करे डेमोक्रेटिक स्पिरिट
- 5:17:18बच्चों के अंदर। सो ये क्या हो रहा है? है
- 5:17:20जी ये पॉजिटिव रिलेटिविज़्म की बात है जो
- 5:17:22मोरल वैल्यूज़ जो है वो रिलेटिव हैं
- 5:17:24सोसाइटी और कल्चर को लेके। सो हमें
- 5:17:27डेमोक्रेटिक स्पिरिट जो है वो बच्चों के
- 5:17:29अंदर डालनी है। चाइल्ड स्कूल एजुकेशन
- 5:17:31इटसेल्फ आर लार्जली शेप्ड बाय सोशल एंड
- 5:17:35कल्चरल फोर्सेस वाज़ वन ऑफ़ द बेसिक
- 5:17:37प्रिंसिपल ऑफ़ व्हिच फिलॉसोफिकल थॉट। तो
- 5:17:40स्कूल ये सोसाइटी से रिलेट की बात हो रही
- 5:17:42है। रिकंस्ट्रक्शनिज़्म। अकॉर्डिंग टू द
- 5:17:44फिलॉसफी ऑफ़ रियलिज्म व्हिच कॉम्बिनेशन ऑफ़
- 5:17:46सब्जेक्ट इज़ मोस्ट एप्रोप्रियट फॉर
- 5:17:48इंक्लूजन इन करिकुलम। सो रियलिज्म की बात
- 5:17:50हो रही है जी। तो रियलिज्म में साइंस तो
- 5:17:53आएगा। तो साइंस मैथमेटिक्स लॉजिक चाइल्ड
- 5:17:55इज़ बोर्न लाइक अ ब्लैंक स्लेट जॉन लॉक।
- 5:17:59ठीक है? रिलेशनशिप बिटवीन एजुकेशन एंड होम
- 5:18:02इज़ बेस्ट इलस्ट्रेटेड थ्रू व्हिच ऑफ़ द
- 5:18:03फॉलोवंग फ्रेजेस? तो एजुकेशन और होम के
- 5:18:06बीच में अगर आप देखोगे। सो लोकोपेरेंटिस
- 5:18:08यानी ये डी स्कूलिंग का कांसेप्ट बोलता है
- 5:18:11लोकोपेरेंटिस की बात कि भ स्कूल जो है वो
- 5:18:14पेरेंट्स की एब्सेंस में पेरेंट बन जाता
- 5:18:17है ऐसे वाली चीज। ठीक है?
- 5:18:20चलिए इन द इंडियन सोशल सिस्टम एज़ इट
- 5:18:24ऑब्टेंस टुडे द गोल ऑफ़ इक्वलिटी एंड
- 5:18:26एक्सीलेंस विल नॉट बी व्यूड ऐज़ टू ऑपोज़िट
- 5:18:29पोल्स इन टर्म्स ऑफ़ हूज़ फिलॉसफी। तो ड्यू
- 5:18:32इज़ फ़िलॉसफी ऑफ़ स्कूल ऐज़ मिनिएचर सोसाइटी।
- 5:18:34क्या बोल रहे हैं ये? अह द गोल ऑफ़
- 5:18:36इक्वलिटी एंड एक्सीलेंस विल नॉट बी व्यूड
- 5:18:38ऐज़ टू अपोजिट पोल। ओके? अह गांधी की
- 5:18:41फिलॉसफी ऑफ़ बेसिक एजुकेशन, शंकराचार्य की
- 5:18:44वेदांतिक फिलॉसफी और मोहम्मद्स की
- 5:18:45इस्लामिक फिलॉसफी। सो आप दो अलग-अलग चीजों
- 5:18:48की तरह नहीं एक ही चीज़ की तरह उसको देख
- 5:18:50रहे हो। तो ये शंकराचार्य की फिलॉसफी
- 5:18:52बोलती है। आंसर सी रहेगा। ओके? ओके। लास्ट
- 5:18:54ये जुलाई 2018 के क्वेश्चन है। जी। आठ नौ
- 5:18:57क्वेश्चन आएंगे यहां। व्हिच ऑफ़ द फॉलोविंग
- 5:18:59रिफ्लेक्ट्स द स्टैंड्स टू बी टेकन बाय
- 5:19:02टीचर एडवोकेटिंग एकज़िस्टेंशियलिस्ट
- 5:19:04एजुकेशन? वैल्यूज़ सिखाई नहीं जा सकती। वो
- 5:19:06सब्जेक्टिव और पर्सनल होती हैं। अह
- 5:19:08एसेंशियल कॉन्टेक्स्चुअल बट ऑब्जेक्टिव भी
- 5:19:12होती हैं। आर डिराइव्ड फ्रॉम मार्केट
- 5:19:14फोर्सर्सेस। सो सिखा तो नहीं मतलब वो
- 5:19:16सब्जेक्टिव तो हमने पढ़ा है
- 5:19:18एकिस्टेंशियलिज्म में बट कॉन्टेक्स्चुअल
- 5:19:19भी होती हैं कहीं ना कहीं। तो वो
- 5:19:21कॉन्टेक्स्ट और सब्जेक्टिव कहीं ना कहीं
- 5:19:23मैच करेगा। बट ऑब्जेक्टिव तो हम नहीं मान
- 5:19:24के चलते। तो वैल्यूज़ आप सिखा नहीं सकते
- 5:19:27किसी को। वो सब्जेक्टिव होती हैं और
- 5:19:28पर्सनल होती हैं। अपने आप सीखेगा बच्चा।
- 5:19:31प्रेयर्स भूखे पेट भजन भी नहीं होता। यह
- 5:19:33बात किसने की थी? प्रेगमेटिज़्म में बात
- 5:19:35होती है इसकी। माया टेक्स अ कॉन्ट्ररी
- 5:19:38व्यू टू ब्रह्मा। माया क्रिएट्स एन
- 5:19:40इल्यूजनरी वर्ल्ड। सो वो इल्यूजन क्रिएट
- 5:19:43कर दिया। ये दोनों स्टेटमेंट ठीक है।
- 5:19:44करेक्ट एक्सप्लेनेशन नहीं है बस। बाकी ठीक
- 5:19:46है। ठीक है? ठीक है? तो ब्रह्मा एक
- 5:19:48मेटाफिजिकल कांसेप्ट है। माया जो है वो एक
- 5:19:51वर्ल्ड एज एन वो इल्यूजन की तरह उसको लेके
- 5:19:53चलती है। सो माया का कॉन्टरी व्यू है
- 5:19:56ब्रह्मा से रिलेटेड बट माया इल्यूजनरी
- 5:19:58वर्ल्ड भी बना रही है। सो करेक्ट
- 5:20:00एक्सप्लेनेशन नहीं है। बाकी दोनों
- 5:20:01स्टेटमेंट्स ठीक है। ठीक है? सो
- 5:20:03क्रेडिबिलिटी ऑफ़ माया बीइंग रियल और
- 5:20:05अनरियल इज़ नॉट फॉर श्योर। सेलेक्ट द
- 5:20:07करेक्ट कॉम्बिनेशन ऑफ़ कॉनसेप्ट्स। तो
- 5:20:10बुद्धिज़्म से रिलेट करने वाले। पब्जा है
- 5:20:12फॉर श्योर। ठीक है? पब्जा है। सैयदवाद
- 5:20:14अपना बुद्धिज्म से नहीं है। ये आपका
- 5:20:16सैयदवाद की थ्योरी जैनिज्म से रिलेट करती
- 5:20:18है। तो सिक्स्थ नहीं आएगा। देखो सिक्स्थ
- 5:20:20आएगा नहीं। थर्ड फॉर शोर आएगा। थर्ड फॉर
- 5:20:23शोर आएगा। यानी थर्ड तो बाकियों में दे ही
- 5:20:25रखा है। तो बचा क्या? अनेकांतवाद यानी
- 5:20:27प्लूरलिज्म। ठीक है? सो अनेकांतवाद की
- 5:20:30थ्योरी और सैयदवाद की थ्योरी। ये उसने
- 5:20:33नहीं दी है। क्या बोलते हैं? जैनिज्म में।
- 5:20:36सो फर्स्ट भी नहीं आना चाहिए उस हिसाब से।
- 5:20:39तो फर्स्ट और सिक्स्थ तो नहीं आना चाहिए
- 5:20:41और थर्ड फॉर श्योर आना चाहिए। तीन चार
- 5:20:43पांच या 2 3 5 नहीं 2 तीन चार दो तीन चार
- 5:20:48बोल रहे हैं ये दो तीन चार या तीन चार
- 5:20:50पांच ना। सो तीन तो फॉर श्योर है ही। सो
- 5:20:53स्वतंत्रिक संस्कार और पब्जाय आएंगे भाई।
- 5:20:56आंसर आपका तीन चार और पांच हो जाएगा। ओके?
- 5:20:59सो ये मैंने यहां पे एक्स्ट्रा इनेशन ऐड
- 5:21:01कर दी है। वो आप देख लो। अल्टीमेट पर्पस
- 5:21:04ऑफ़ गांधीियन एजुकेशन इज़ एक क्लासलेस
- 5:21:06सोसाइटी बनाना। ह्यूमन बीइंग अल्टीमेट
- 5:21:08रियल अल्टीमेट पर्पस है ह्यूमन बीइंग को
- 5:21:11प्रमोट करना। ठीक है? कॉज़ ओनली इफ़ेक्ट
- 5:21:15ओनली बोथ कॉज़ एंड इफ़ेक्ट। तो ये तो मतलब
- 5:21:16पुरुष ना कॉज़ है ना इफ़ेक्ट है। ये लो यहीं
- 5:21:20से ही सॉल्व हो गया। लो ये लो। ठीक है?
- 5:21:24श्री अरविंदोज़ आईडिया ऑफ़ सुपर माइंड
- 5:21:26इंप्लाइस दैट डार्विनिज़्म थ्योरी इज़
- 5:21:29रेलेवेंट। हेंस एजुकेशन कांट डू मच। टास्क
- 5:21:32ऑफ़ अ टीचर इज़ टू अपलिफ्ट द अवेकंड
- 5:21:34कॉन्शियसनेस। तो ये काम है टीचर का कि वो
- 5:21:37कॉन्शियसनेस जो है वो अभी मतलब अपलिफ्ट
- 5:21:39करें उन चीजों को। आंसर बी एजे अय्यर विटी
- 5:21:44जस्टिन बर्टलैंड रशेल बर्टलैंड रशेल का तो
- 5:21:48हमें पता है कि वो बात करते हैं रियलिज्म
- 5:21:50की। अह रियलिज़्म में भी कई चीज़ें इन्होंने
- 5:21:52आस्पेक्ट्स दे दिए हैं। और जी ई मुरे। सो,
- 5:21:54आप यह ध्यान रख लो भाई। पहले का दूसरा है
- 5:21:56अय्यर जो है वह लॉजिकल पॉज़िटिविज़्म पे
- 5:21:58फ़ोकस करते हैं। ये लिंग्विस्टिक एनालिसिस
- 5:22:01पे, बर्ट ट्रेंड रशल जो है वो लॉजिकल
- 5:22:03एटॉमि पे और मूरे जो हैं वो आपके
- 5:22:06नियोरियलिज्म पे। ओके?
- 5:22:09वेरिफिकेशन थ्यरी ऑफ अय्यर वो है वह यहां
- 5:22:12पर यहां समझ आ जाएगी आपको कि वह लॉजिकल
- 5:22:14पॉजिटिविज्म की बात करते हैं। यह कांसेप्ट
- 5:22:17ऑफ लिंग्विस्टिक कन्फ्यूजन की बात करते
- 5:22:19हैं और बर्ट ट्रेंड रशल लॉजिकल एटॉमिज्म
- 5:22:22की बात करते हैं। विज्ञान माया विजनन
- 5:22:24मायाकोष या फिर आपका मनोमाया कोष प्राण
- 5:22:27मायाकोष तो देखो प्राण अन्न अन्न मायाकोष
- 5:22:30सबसे बाहर वाला था जिसकी हम बात कर रहे थे
- 5:22:34वो कौन बाहर फिजिकल बॉडी की बात कर रहे थे
- 5:22:36ना हम फर्स्ट आएगा क्या इसका आंसर सी आएगा
- 5:22:40क्या सी है ठीक है सो ये आपको याद होने
- 5:22:43चाहिए भई मैंने तो फिलहाल के लिए तुक्का
- 5:22:45लगाया था कि मुझे जो इनेशन मैं बार-बार
- 5:22:47बोल के आपको समझाई है उस हिसाब से अदरवाइज
- 5:22:49आपको ये याद होनी चाहिए कि अर्थ वाटर फायर
- 5:22:52एयर अक्ष जो हमने हमने बात की थी। ओके
- 5:22:55लास्ट क्वेश्चन आई थिंक व्हिच ऑफ़ द
- 5:22:56फॉलोविंग विल नॉट बी एसेंटेड टू बाय
- 5:22:58इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन? सो लिबर्टी
- 5:23:00इक्वलिटी फॉर एटरर्निटी जस्टिस ये बात तो
- 5:23:02बोलते हैं। रिपब्लिक एंड डेमोक्रेटिक
- 5:23:05सोसाइटी है। रिलीजन गॉड साल्वेशन,
- 5:23:08रेशियलिज्म और आपका रीजनलिज्म, वसुदेव
- 5:23:11कुटुंबकम और यूनिवर्सल ब्रदरहुड की भी बात
- 5:23:14हम करते हैं। आंसर आपका थर्ड एंड फोर्थ ये
- 5:23:17गलत हो जाएगा। नॉट पूछा है। विल नॉट बी
- 5:23:19एसेंटेड। सो थर्ड एंड फोर्थ आपका आंसर हो
- 5:23:21जाएगा। बाकी सारे इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन
- 5:23:23के साथ में ही मिल रहे हैं। ओके? ये हो गई
- 5:23:26जी आपकी पहली यूनिट कंप्लीट। मैं उम्मीद
- 5:23:29कर रही हूं आपको कुछ अच्छे से समझ आया
- 5:23:31होगा। आपको अगर कहीं भी लगे कि पिछली
- 5:23:33क्लासेस में से किसी में और इस क्लास में
- 5:23:35कहीं कॉन्फ्लिक्ट है तो आप इस क्लास को
- 5:23:37फॉलो कीजिए क्योंकि ये न्यू अपडेटेड
- 5:23:39इनफार्मेशन है। मैं भी अलग तरीके से
- 5:23:41समझाती हूं क्योंकि एक्सपीरियंस के साथ
- 5:23:43आपका थोड़ा सा समझाने का तरीका या
- 5:23:45एक्सप्लेन करने का तरीका भी चेंज होता है
- 5:23:47धीरे-धीरे। राइट? सो मैं उम्मीद करती हूं
- 5:23:50मैंने अच्छे से आपको समझाया होगा। अगर
- 5:23:52आपको ये क्लास हेल्पफुल लगी हो सो प्लीज
- 5:23:54फीडबैक जरूर दीजिएगा। ठीक है? आपको समझ
- 5:23:57आया नहीं आया। सो फीडबैक इज़ नेसेसरी। सो
- 5:23:59कमेंट जरूर कीजिएगा। एक कमेंट में कुछ
- 5:24:02नहीं जाता आपका। मेरा भी कुछ नहीं जाता
- 5:24:04वैसे तो कि मेरे को कोई पैसे नहीं मिलने
- 5:24:05हैं आपके कमेंट से। बट एक मोटिवेशन मिलता
- 5:24:08है, एक चीज़ लगती है कि हां मैंने इट्स
- 5:24:10लाइक 10-12 दिन बाद ये वीडियो आ रही है।
- 5:24:12तो 10-12 दिन लगे हैं इस चीज को प्रिपेयर
- 5:24:14करने में, कंपाइल करने में, रिकॉर्ड करने
- 5:24:17में, टोटल ओवरऑल मिला के। सो, कोशिश
- 5:24:20कीजिएगा कि कमेंट करके जरूर बताएं समझ आया
- 5:24:22नहीं आया? नहीं आया तो क्या समझ नहीं आया?
- 5:24:25और क्या चीज़ अच्छी लगी आपको इस क्लास में।
- 5:24:28ठीक है? मिलते हैं सेकंड यूनिट के साथ।
- 5:24:29जैसे ही वो यूनिट कंप्लीट होगी, देखो, ये
- 5:24:31भी हो सकता है मैं छोटी-छोटी वीडियोस डाल
- 5:24:33दूं। बट मैं 10 कंपाइल करके 10 बढ़िया
- 5:24:35मैराथनस आपके लिए लाना चाह रही हूं। पहली
- 5:24:37मैराथन मैंने करवा दी है। आपका सेकंड
- 5:24:40मैराथन में स्वागत करेंगे अब। ठीक है? सो
- 5:24:42दिस वाज़ ऑल अबाउट टुडे। आई होप ये क्लास
- 5:24:44आपके लिए हेल्पफुल रही हो। थैंक यू सो मच
- 5:24:46फॉर वाचिंग। अगेन दिस इज़ मोर देन इनफ।
- 5:24:48आपको इससे ज्यादा इस यूनिट में कुछ और
- 5:24:50करने की जरूरत नहीं है। ओके? सो दिस वाज़
- 5:24:53ऑल अबाउट टुडे। थैंक यू सो मच फॉर वाचिंग।
- 5:24:54बी हैप्पी, कीप स्माइलिंग, सब्सक्राइब
- 5:24:56टिंकल केक लर्निंग बिकॉज़ इट इज़ अब्सोलुटली
- 5:24:57फ्री। टेक केयर। सी यू इन नेक्स्ट क्लास।
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