Truth of Manusmriti | Why Some People Hate Manusmriti — Transcript
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- 0:03मैं तुम्हें वो योग बताने जा रहा हूं जो
- 0:05बहुत समय से लुप्त है। परंतु सृष्टि के
- 0:08आरंभ में इसे मैंने ही सूर्य को दिया था
- 0:11और सूर्य से यह मनु को मिला और मनु से एक
- 0:13श्वाकु तक पहुंचा।
- 0:16गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं सृष्टि के
- 0:19आरंभ में गीता का यह ज्ञान मैंने सूर्य को
- 0:22दिया। सूर्य ने मनु को और मनु ने इ्वाकु
- 0:26को दिया।
- 0:30अर्थात मनुस्मृति श्रीमद् भगवत गीता का ही
- 0:34पूर्ववर्ती रूप है। गीता में जो बातें
- 0:38श्री कृष्ण और अर्जुन संवाद के रूप में
- 0:40हैं। लगभग वही बातें उनसे पहले मनु महाराज
- 0:44ने अपनी शासन संहिता में कही है।
- 0:50फिर वो कौन सी मनुस्मृति है जिसकी बहुत
- 0:53चर्चा होती रहती है।
- 0:57दावा किया जाता है कि उस मनुस्मृति ने
- 0:59मनुष्यों को जातियों में बांट दिया। उस
- 1:03मनुस्मृति में शूद्रों या कथित दलितों और
- 1:06महिलाओं के बारे में बहुत बुरी बातें लिखी
- 1:08हैं।
- 1:12जब बहुत सारे लोग एक ही बात कहते हैं तो
- 1:15अन्य बहुत सारे लोग बिना पढ़े ही मान लेते
- 1:18हैं कि अवश्य ऐसा ही कुछ लिखा गया होगा।
- 1:22इतने सारे लोग कह रहे हैं तो गलत थोड़े ही
- 1:25कहेंगे।
- 1:33धार्मिक परंपरा के अनुसार स्मृति ग्रंथ
- 1:36श्रुति अर्थात वेदों से निचले स्तर के
- 1:39होते हैं। स्मृति अर्थात जिन्हें स्मरण
- 1:42करके पीढ़ी दर पीढ़ी संजोया जा रहा हो। यह
- 1:47पुस्तक के रूप में नहीं होती थी।
- 1:50इस्लामी आक्रमण के कालखंड में स्मृतियों
- 1:53की परंपरा को संजोने वाले नहीं रहे।
- 1:56अधिकांश स्मृतियां धीरे-धीरे लुप्त होती
- 2:00गई। उनका केवल वही हिस्सा बचा जो कहीं
- 2:04उद्रित किया गया था। यह संयोग से किसी के
- 2:08पास पांडुलिपि के रूप में पड़ा था।
- 2:14दो दर्जन से अधिक स्मृतियों की चर्चा
- 2:17अलग-अलग स्थानों पर मिलती है। उदाहरण के
- 2:21लिए याज्ञवल्क्य स्मृति, अत्री स्मृति,
- 2:25कात्यायन स्मृति, पाराशर स्मृति और गौतम
- 2:29स्मृति।
- 2:30मनुस्मृति इनमें सबसे प्राचीन और प्रमुख
- 2:34है।
- 2:38हिंदू और जैन ग्रंथों के अनुसार स्वयंभू
- 2:41मनु के बाद कुल 14 मनु हुए हैं।
- 2:46हर मनवंतर में एक प्रथम पुरुष होता है
- 2:49जिसे मनु कहते हैं।
- 2:52वर्तमान में व्यवस्वत मनवंतर चल रहा है और
- 2:56व्यवस्वत मनु इसके प्रथम पुरुष हैं।
- 3:02अंग्रेजों द्वारा दावा किया जाता है कि
- 3:05मनुस्मृति ईसा से एक या दो शताब्दी पहले
- 3:08लिखी गई है। वास्तव में यह अनुमान ही गलत
- 3:12है। अंग्रेज इस बात को बचा नहीं पाते थे
- 3:15कि सनातन धर्म ईसाई मजहब से बहुत पुराना
- 3:19है। इसलिए उन्होंने हर भारतीय ग्रंथ को
- 3:23ईसा के आसपास का ही बताने का प्रयास किया
- 3:26है। पश्चिमी लेखनों को आधार बनाकर वामपंथी
- 3:30इतिहासकारों ने दावा करना आरंभ कर दिया कि
- 3:33ब्राह्मणों ने मनुस्मृति लिखी ताकि वे
- 3:37बौद्ध धर्म के बढ़ते प्रभाव को रोक सकें।
- 3:41यदि ऐसा होता तो क्या मनुस्मृति में बौद्ध
- 3:44मान्यताओं का कोई खंडन या संदर्भ नहीं
- 3:47मिलता?
- 3:48मनुस्मृति में बुद्ध का नाम तक नहीं है।
- 3:54मनुस्मृति बौद्ध ही नहीं रामायण और
- 3:57महाभारत से भी पहले का ग्रंथ है।
- 4:01लगभग 5000 वर्ष पहले लिखी गई महाभारत में
- 4:05कई स्थानों पर महाराजा मनु और उनकी संहिता
- 4:09की चर्चा है। इसी प्रकार वाल्मीकि रामायण
- 4:13में भी मनु का नाम आता है।
- 4:17बौद्ध ग्रंथों में भी मनुस्मृति से
- 4:20प्रेरणा ली गई है।
- 4:22इनमें सबसे उल्लेखनीय है वगारू द्वारा
- 4:25लिखित ग्रंथ मनु धर्म सत्तम।
- 4:29बर्मा के बौद्ध राजा वगारू ने इसे 13वीं
- 4:32शताब्दी में लिखा था। इसमें मनुस्मृति के
- 4:36सभी अध्यायों को तत्कालीन समाज के अनुरूप
- 4:40ढालकर लिखा गया है।
- 4:49वर्ष 1757 में प्लासी युद्ध के बाद
- 4:52अंग्रेजों ने भारत के बड़े हिस्से को
- 4:54नियंत्रण में ले लिया। लगभग 30-40 वर्ष
- 4:58उन्हें अपनी शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने
- 5:02में लगे।
- 5:04यही वह समय था जब अंग्रेजों ने भारतीय
- 5:06समाज को समझने का प्रयास आरंभ किया।
- 5:10भारतीयों पर शासन करने के लिए यह आवश्यक
- 5:13भी था।
- 5:15मुसलमान और ईसाई तो अपनीपनी किताब और
- 5:18मजहबी कानून से चलते हैं। लेकिन हिंदुओं
- 5:21की कोई एक पुस्तक, कोई एक पूजा पद्धति या
- 5:25कोई एक पोप नहीं। अब्राहमिक मजहबों के लिए
- 5:30यह व्यवस्था समझ से परे थी। जहां उत्तर
- 5:34में अलग परंपराएं हैं। दक्षिण में अलग।
- 5:37एक ही गांव या कई बार एक ही परिवार में
- 5:41लोग अलग-अलग देवी देवताओं की पूजा करते
- 5:44हैं। फिर भी सारे स्वयं को हिंदू कहते
- 5:47हैं। सूर्य, धरती, नदियां, पर्वत सभी के
- 5:52लिए पूज्य हैं। लेकिन पूजा का सबका अपना
- 5:56तरीका है। कुछ हिंदुओं के लिए विवाह जन्म
- 6:00जन्मांतर का संबंध है। तो कुछ समुदाय ऐसे
- 6:03भी हैं जहां जब इच्छा हो विवाह समाप्त
- 6:06करने की सुविधा थी। विवाह के लिए हर
- 6:09क्षेत्र की अपनी परंपरा थी। लेकिन सभी
- 6:12समुदायों में अलग-अलग नामों से सप्तपदी की
- 6:16परंपरा थी। समाज कानूनी और गैरकानूनी से
- 6:20अधिक नैतिकता और अनैतिकता के पैमाने पर
- 6:24चलता था।
- 6:27भारतीय समाज की यह विविधता अंग्रेजों के
- 6:31लिए एक ऐसी पहेली थी जिसे सुलझाना आवश्यक
- 6:34था ताकि एक लीगल कोर्ट बन सके जिसके आधार
- 6:40पर उनकी कोर्ट कचहरी काम कर सके।
- 6:43अंग्रेजों के आगे समस्या थी कि हिंदू समाज
- 6:46में वेद, उपनिषद, रामायण और महाभारत जैसी
- 6:50जो पुस्तकें पवित्र मानी जाती हैं उनमें
- 6:54व्यक्ति की आत्म उन्नति से जुड़ी बातें
- 6:56हैं। ना कि कुछ ऐसा जिसे कानून बताकर लागू
- 7:00कराया जा सके।
- 7:04अंग्रेज जानते थे कि यदि वे कोई एक
- 7:07प्रणाली लागू भी कर देंगे तो सभी लोग उसे
- 7:10स्वीकार नहीं करेंगे।
- 7:13ऐसे रिकॉर्ड मिलते हैं कि अंग्रेजों ने तब
- 7:15कई बड़े विद्वानों से संपर्क करके सहायता
- 7:18मांगी। इसी क्रम में उन्हें मनुस्मृति के
- 7:21बारे में पता चला।
- 7:25अंग्रेजों को बताया गया कि प्राचीन भारत
- 7:27में राजा मनु ने अपनी शासन व्यवस्था की
- 7:30संहिता बनाई थी। जिसे मनुस्मृति कहते हैं।
- 7:36इसमें परिवार व्यवस्था, [संगीत] समाज के
- 7:38वर्गीकरण, जन्म से मृत्यु तक, व्यक्ति के
- 7:42सभी संस्कार, महायज्ञ, भोजन के नियम, राजा
- 7:46के कर्तव्य, शासन व्यवस्था, पाप की
- 7:50श्रेणियां, तीर्थ यात्रा से लेकर अंतिम
- 7:53संस्कार तक के बारे में एक व्यवस्था दी गई
- 7:56है।
- 8:00अंग्रेज समझ गए कि मनुस्मृति को भारत के
- 8:03अधिकांश क्षेत्रों पर लागू करना आसान होगा
- 8:07क्योंकि किसी के पास इसका कोई प्रमाणिक
- 8:10ग्रंथ नहीं। इसलिए मनचाहा बदलाव आसान
- 8:14होगा। मनुस्मृति सबसे प्राचीन है और सभी
- 8:18हिंदू मानते हैं कि मानव सभ्यता का आरंभ
- 8:21मनु से हुआ था। इसलिए इसे सब पर थोपना सरल
- 8:26होगा।
- 8:29मनुस्मृति के संकलन और अनुवाद का कार्य
- 8:32विलियम जों्स नाम के अंग्रेज अफसर को
- 8:34सौंपा गया।
- 8:37विलियम जों्स ईसवी सन 1746 में पैदा हुआ
- 8:41था। 1783 में वह भारत आया।
- 8:46बंगाल के नादिया जिले में रहने वाले पंडित
- 8:48रामलोचन से उसने संस्कृत सीखी।
- 8:53वर्ष 1784 में विलियम जों्स ने मनुस्मृति
- 8:57का अनुवाद शुरू कर दिया।
- 9:01यानी 1 साल से भी कम समय में संस्कृत सीख
- 9:04ली और 38 वर्ष की आयु में अनुवाद आरंभ कर
- 9:07दिया।
- 9:09विलियम जों्स की पुस्तक 1794 में छपी और
- 9:13उसी साल 47 वर्ष की आयु में उसकी मृत्यु
- 9:17भी हो गई।
- 9:20आप समझ सकते हैं कि कुछ महीनों में
- 9:22संस्कृत सीखकर उसके सबसे जटिल ग्रंथ को
- 9:26कोई कैसे अनुवाद कर सकता है। वो भी एक
- 9:29विदेशी जो पुस्तक के धार्मिक और सामाजिक
- 9:32संदर्भों से पूरी तरह से अनजान है। जो
- 9:35तथाकथित मनुस्मृति छपी उसका नाम था
- 9:39इंस्टट्यूट्स ऑफ हिंदू लॉ और द ऑर्डिनेंस
- 9:43ऑफ मनु।
- 9:48विलियम जों्स इस पुस्तक में दावा करता है
- 9:50कि उसे कोलकाता में मनुस्मृति की
- 9:52पांडुलिपि मिली। वास्तव में यह भी मूल पाठ
- 9:56नहीं बल्कि कुल्लुक भट्ट नाम के एक
- 9:59विद्वान की टिप्पणियां थी। विलियम जों्स
- 10:03ने उन्हीं का अनुवाद किया। यह पुस्तक
- 10:06कानून की किसी किताब की शैली में लिखी गई
- 10:09है। इसमें कहीं भी संस्कृत के मूल श्लोक
- 10:12नहीं दिए गए हैं। जिससे पता चल सके कि
- 10:15अनुवाद की गुणवत्ता क्या है?
- 10:20विलियम जों्स की नियत क्या थी? इसका सबूत
- 10:23वर्ष 1784 में ईस्ट इंडिया कंपनी के
- 10:27गवर्नर वारेन हेस्टिंग्स को लिखा उसका
- 10:30पत्र है। इसमें वह कहता है हिंदुस्तान में
- 10:34ईसाई मत के प्रसार में कई दुखद बाधाएं
- 10:36हैं। रोमन चर्च या किसी अन्य चर्च का कोई
- 10:40मिशन हिंदुओं का धर्मांतरण कभी नहीं करा
- 10:43सकेगा।
- 10:45इतनी बड़ी क्रांति करने का एकमात्र उपाय
- 10:48यही है कि संस्कृत ग्रंथों का अनुवाद किया
- 10:51जाए। एक दिव्य आत्मा अर्थात पैगंबर के रूप
- 10:55में जीसस के आगमन को उनके भविष्यवाणियों
- 10:58के ग्रंथ में जोड़ा जाए और इसे चुपचाप उन
- 11:03लोगों के बीच फैलाया जाए जो पढ़े लिखे हो।
- 11:08एशियाटिक रिसर्च वॉल्यूम वन के पृष्ठ
- 11:11संख्या 234 पर यह पत्र छपा हुआ है। यह
- 11:15वर्ष 1788 में प्रकाशित हुआ था।
- 11:20बाद में भविष्य पुराण ग्रंथ में कुछ ऐसे
- 11:22श्लोक डलवाए गए जिनमें ईसा मसीह के आगमन
- 11:26की चर्चा की गई है।
- 11:28विलियम जों्स की मनुस्मृति और उसके इस
- 11:31पत्र के पीडीएफ का लिंक हमने YouTube के
- 11:34डिस्क्रिप्शन में दे दिया है।
- 11:38मनुस्मृति में असली मिलावट का श्रेय ईस्ट
- 11:41इंडिया कंपनी के अफसर जॉन जॉर्ज बुलर को
- 11:44दिया जाना चाहिए। उसी की देखरेख में ईस्वी
- 11:47वर्ष 1813 में पहली बार मनुस्मृति एक
- 11:51ग्रंथ के रूप में कोलकाता के एक प्रिंटिंग
- 11:54प्रेस में छपी। इसमें कुल 12 अध्याय और
- 11:582694 श्लोक थे। साथ में कुल्लुक भट्ट की
- 12:03टिप्पणियां भी थी।
- 12:05मनुस्मृति में शूद्रों और स्त्रियों को
- 12:07लेकर जो आपत्तिजनक श्लोक उत किए जाते हैं,
- 12:11उन सब का मूल स्रोत यही पुस्तक बन गई।
- 12:17कई भारतीय विद्वानों ने इस तथाकथित
- 12:20मनुस्मृति पर आपत्ति जताई। इनमें सबसे
- 12:23प्रमुख थे महर्षि दयानंद सरस्वती।
- 12:27उन्होंने लिखा है कि मैं मनुस्मृति केवल
- 12:30उन भागों में विश्वास करता हूं जो बाद में
- 12:33जोड़े नहीं गए हैं तथा जो वेदों की मूल
- 12:36भावना के अनुरूप हैं।
- 12:42अंग्रेजों द्वारा लिखवाई गई मनुस्मृति ही
- 12:44देश विदेश के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई
- 12:46जाने लगी।
- 12:49हजार साल की गुलामी के कारण [संगीत]
- 12:51भारतीय समाज का ताना-बाना पहले ही बिखर
- 12:53चुका था।
- 12:55जातिवाद और छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयां
- 12:59हर ओर फैली थी। सब ने मान लिया कि इन सारी
- 13:03समस्या की जड़ मनुस्मृति है।
- 13:08यही कारण था कि 25 दिसंबर 1927 को जब डॉ.
- 13:12अंबेडकर ने मनुस्मृति दहन कार्यक्रम
- 13:14आयोजित किया तो उन्हें भारी जनसमर्थन
- 13:17मिला।
- 13:18धीरे-धीरे समाज इसे लेकर दो हिस्सों में
- 13:22बढ़ता चला गया। दुर्भाग्य से दोनों ही
- 13:25खेमों को नहीं पता था कि वे किस
- 13:28विभाजनकारी षड्यंत्र का शिकार बन चुके
- 13:30हैं।
- 13:33डॉक्टर अंबेडकर भी संभवत इस बात को समझ
- 13:36रहे थे। 24 फरवरी वर्ष 1949 को संविधान
- 13:41सभा में अपने भाषण में उन्होंने कहा 137
- 13:45स्मृति ग्रंथों में से याज्ञ वल्क्य और
- 13:49मनुस्मृति सबसे उच्च स्तर के हैं। मनु ने
- 13:53कहा है कि बेटियों को परिवार की विरासत
- 13:55में एक चौथाई भाग पाने का अधिकार है। हम
- 13:59केवल इस हिस्से को बढ़ा रहे हैं। ऐसा करके
- 14:02हम कुछ नया नहीं कर रहे।
- 14:08डॉक्टर अंबेडकर का यह कथन बाबा साहेब
- 14:11राइटिंग्स एंड स्पीचेस वॉल्यूम 14 में
- 14:14देखा जा सकता है। इसी के पेज संख्या 255
- 14:18पर उन्होंने कहा है कि महिलाओं [संगीत] के
- 14:21उत्तराधिकार के अधिकार पर यदि प्रवी
- 14:24काउंसिल ने प्रचलित रीति रिवाजों के बजाय
- 14:27मनुस्मृति का पालन किया होता तो हम अपनी
- 14:30बेटियों को बहुत पहले ही सशक्त बना चुके
- 14:33होते।
- 14:37मनुस्मृति के नौवें अध्याय का 117वां
- 14:40श्लोक कहता है कि भाइयों को अपने हिस्से
- 14:43का एक चौथाई बहनों को देना चाहिए। ऐसा
- 14:47नहीं करने वाले भाई पतित हैं।
- 14:52वर्ष 2005 में यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सस में
- 14:56संस्कृति और भारतीय धर्मों के प्रोफेसर
- 14:59पैट्रिक ओलिवेल ने मनुस्मृति पर अब तक का
- 15:02सबसे व्यापक अध्ययन प्रकाशित किया।
- 15:06जिसका नाम था मनुस कोड ऑफ लॉ अ क्रिटिकल
- 15:09एडिशन एंड ट्रांसलेशन ऑफ द मानव
- 15:12धर्मशास्त्र।
- 15:16पैट्रिक ओलिवेल ने मनुस्मृति की लगभग सभी
- 15:20पांडुलिपियों का अध्ययन किया। उन्होंने
- 15:23बताया कि भारत में हमें कुल लगभग 50 आंशिक
- 15:26प्राचीन पांडुलिपियां मिली। इनमें से कोई
- 15:30भी पूरी तरह एक दूसरे से मेल नहीं खाती
- 15:33थी।
- 15:37हरिद्वार के गुरुकुल कांगड़ी
- 15:38विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। डॉ.
- 15:41सुरेंद्र कुमार ने बहुत वैज्ञानिक तरीके
- 15:43से मनुस्मृति के श्लोकों का संकलन किया
- 15:46है। उनके अनुसार मनुस्मृति के 2685
- 15:51श्लोकों में से 10,214 ही मौलिक लगते हैं।
- 15:56बाकी 10,471
- 15:58बाद में जोड़े गए हैं। इनमें कई श्लोक
- 16:02मनुस्मृति की मूल मान्यता के विरुद्ध हैं।
- 16:05कई श्लोकों में क्रमबद्धता नहीं दिखती और
- 16:08उनमें आपस में ही विरोधाभास है।
- 16:15वर्तमान में मनुस्मृति पर शोध करने वाले
- 16:17भारतीय और विदेशी सभी विद्वानों ने माना
- 16:20है कि बाहर से श्लोक जोड़ने का अधिकांश
- 16:23काम 18वीं शताब्दी में हुआ। जब विलियम
- 16:26जों्स मनुस्मृति की पांडुलिपियों की खोज
- 16:30कर रहा था।
- 16:33अंग्रेजों द्वारा लिखवाई मनुस्मृति के
- 16:35आधार पर कुछ दावे किए जाते हैं। जैसे कि
- 16:38शूद्रों को संपत्ति का अधिकार नहीं।
- 16:42राजा को चाहिए कि वह उनकी संपत्ति छीनकर
- 16:45उन्हें निष्कासित कर दे।
- 16:49ब्राह्मणों की सेवा करना ही शूद्रों का
- 16:51मुख्य काम है।
- 16:54शूद्रों को राजा बनने का अधिकार नहीं।
- 16:58जिस देश का राजा शूद्र हो वहां ब्राह्मण
- 17:00निवास ना करें।
- 17:03कोई शूद्र यदि ब्राह्मण का तिरस्कार करें
- 17:06तो 10 अंगुल लंबी लोहे की छड़ उसके मुख
- 17:10में ठोक दें।
- 17:12कोई शूद्र ब्राह्मण पर हाथ उठाए तो उसका
- 17:15हाथ कटवा दें। लात मारे तो पैर कटवा दें।
- 17:21शूद्र ब्राह्मणों को धर्मोपदेश दें तो
- 17:23उनके मुंह और कान में गर्म तेल डलवा दें।
- 17:28वेद सुन ले तो कानों में पिघलता शीशा डलवा
- 17:32दें।
- 17:35आप स्वयं सोचिए कि क्या भारतीय समाज में
- 17:38कभी भी मनुष्य को ऐसे दंड देने का प्रचलन
- 17:42रहा है?
- 17:43भारतीय समाज ने अपना इतिहास केवल पुस्तकों
- 17:46में नहीं बल्कि पत्थर की मूर्तियों के रूप
- 17:49में भी संरक्षित किया है। यदि ऐसा ही होता
- 17:52तो क्या कहीं किसी के कान में शीशा डालने
- 17:55की मूर्ति नहीं मिलती?
- 17:5912वीं शताब्दी तक भारत आए किसी भी विदेशी
- 18:02यात्री ने अपने वृतांत में ऐसे किसी
- 18:05भेदभाव या दंड की चर्चा नहीं की है जैसी
- 18:09मनुस्मृति में बताई गई है।
- 18:12मेगस्थनीज ने तो अपनी पुस्तक इंडिका में
- 18:15आश्चर्य व्यक्त किया है कि भारत में कोई
- 18:18गुलाम नहीं होता। मनुष्यों के बीच कोई
- 18:21भेदभाव नहीं। स्त्रियां पुरुषों की तरह
- 18:24युद्ध कला सीखती हैं।
- 18:29प्राचीन भारत के सबसे शक्तिशाली राज्य मगध
- 18:32पर नंद वंश का शासन था जो कि शूद्र थे।
- 18:38पुराणों तथा विशाख दत्त के ग्रंथ मुद्रा
- 18:41राक्षस में नंद वंश का महिमागान भरा पड़ा
- 18:44है?
- 18:46नंद वंश के राजाओं को महापद्म उग्रसेन और
- 18:51सर्वक्षत्रांतक
- 18:52जैसे उपाधियों से किसने विभूषित किया है?
- 18:58एक ब्राह्मण चाणक्य ने नंद वंश का सर्वनाश
- 19:02किया था। लेकिन उनसे पहले वहीं के
- 19:05महामंत्री शक्तार ने विद्रोह आरंभ किया
- 19:08था।
- 19:09शकार जाति से शूद्र थे और चाणक्य के पिता
- 19:13चाणक्य के बचपन के मित्र थे। दोनों ने
- 19:16साथ-साथ में शस्त्र और शास्त्र की शिक्षा
- 19:19ली थी। चाणक्य की हत्या के बाद शकतार ने
- 19:23ही बालक चाणक्य को प्रेरित किया था कि वह
- 19:26अपने पिता का प्रतिशोध पूरा करें और
- 19:29चाणक्य ने विद्रोह के बाद किसी ब्राह्मण
- 19:32या क्षत्रिय को नहीं बल्कि योग्यता के
- 19:35आधार पर चंद्रगुप्त मौर्य को राजा बनाया।
- 19:39क्या चाणक्य को मनुस्मृति के श्लोकों के
- 19:42बारे में नहीं पता था?
- 19:45प्राचीन भारत में निषाद नंद मौर्य गुप्त
- 19:50अहीर जाट पाल गुर्जर पासी महिष्य चोल
- 19:56कुर्मी कहार राजभर चंद्रवंशी
- 20:00हायवंशी
- 20:02मराठा पांड्य जैसे ढेरों गौरवशाली राजवंश
- 20:05रहे हैं। इन सभी में महापुरुषों ने जन्म
- 20:08लिया जो पूरे हिंदू समाज में सम्मान की
- 20:12दृष्टि से देखे जाते हैं।
- 20:1614वीं शताब्दी में दक्षिण भारत में
- 20:18विजयनगरम साम्राज्य की स्थापना करने वाले
- 20:21हरिहर और बुक्का राय अहीर थे। उनके गुरु
- 20:26संत विद्यारण्य ब्राह्मण थे। उन्होंने
- 20:29मिलकर मध्य युग में एक ऐसा राज्य स्थापित
- 20:32किया जिसका वैभव आज भी आश्चर्यचकित करता
- 20:36है। क्या संत विद्या को मनुस्मृति के बारे
- 20:40में नहीं पता था?
- 20:43इसी प्रकार मैसूर का वाडियार राजवंश भी
- 20:46यादव हैं। पूरे भारत में ऐसे अनगिनत
- 20:50उदाहरण हैं।
- 20:54यदि किसी समाज के एक वर्ग के साथ भेदभाव
- 20:57हो रहे हो तो वह कभी ना कभी विद्रोह अवश्य
- 21:00करता है।
- 21:02भारत के हजारों वर्ष के इतिहास में
- 21:05जातियों के बीच युद्ध का एक भी उदाहरण
- 21:08नहीं मिलता है।
- 21:12स्वतंत्रता के समय जिन 565 रियासतों का
- 21:15विलय भारत में हुआ उनमें आधे से अधिक
- 21:18संख्या में उन जातियों के राजा थे जो आज
- 21:21स्वयं को शोषित साबित करने की होड़ में
- 21:24है।
- 21:26इस चक्कर में वे भूल गए कि वे कभी शासक
- 21:29थे। और जो ब्राह्मण सबका शोषण कर रहे थे
- 21:33उनके द्वारा शासित केवल 151 16 रियासतें
- 21:36थी वे भी छोटी-मोटी।
- 21:41आज जो हम प्राचीन मूर्ति कला, मंदिर और
- 21:44भवन निर्माण कला देखते हैं, वह सब कुछ
- 21:47प्रमुख रूप से उन्हीं समुदायों द्वारा
- 21:49सृजित है जो स्वयं को शूद्र बताते हैं।
- 21:54प्राचीन भारत में धातु और रसायन विज्ञान
- 21:57बहुत विकसित था। यह काम भी पारंपरिक रूप
- 22:01से लोहार जैसी जातियां करती थी।
- 22:05अधिकांश जातियां ऐसी जो किसी एक व्यापार
- 22:09कौशल को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाती थी।
- 22:14वे एक प्रकार से भारतीय अर्थव्यवस्था के
- 22:17इंजीनियर थे। उन्हीं के दम पर भारत सोने
- 22:21की चिड़िया कहलाया।
- 22:24क्या जिन जातियों के लोग राजा हो उन्होंने
- 22:27सर्वोत्कृष्ट मंदिर, महल और कलाकृतियां
- 22:30बनाई हो, उन पर ऐसे अमानवीय अत्याचार हो
- 22:34रहे थे? वो भी एक पुस्तक के आदेश पर। कौन
- 22:39समझदार व्यक्ति इस बात पर विश्वास करेगा?
- 22:44मनुस्मृति के अनुसार पशुपालन और कृषि करने
- 22:47वाले, सभी समुदाय वैश्य माने जाने चाहिए।
- 22:51उपनिषद भी ऐसा ही मानते हैं। लेकिन आज
- 22:55पशुपालन और खेती करने वाली जातियां ही
- 22:58स्वयं को शूद्र साबित करने की सबसे अधिक
- 23:00होड़ में है।
- 23:04जिस मनुस्मृति पर मनुष्यों को जातियों में
- 23:07बांटने का आरोप लगाया जाता है। उसी का एक
- 23:10श्लोक है जन्मना जायते शूद्र कर्मणा द्विज
- 23:14उच्चते।
- 23:15अर्थात जन्म से सभी शूद्र होते हैं। कर्म
- 23:19से ही वे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और
- 23:22शूद्र बनते हैं। हर व्यक्ति को अपने जीवन
- 23:26में ब्राह्मण बनने का प्रयास करना चाहिए।
- 23:32मनुस्मृति ही एक ही अपराध के लिए
- 23:35ब्राह्मणों को शूद्रों से 64 गुना अधिक
- 23:38दंड देने का प्रावधान करती है। तो क्या इस
- 23:41आधार पर मनुस्मृति को ब्राह्मण विरोधी कहा
- 23:45जाना चाहिए?
- 23:48दावा किया जाता है कि मनुस्मृति में
- 23:50महिलाओं को लेकर बहुत खराब बातें लिखी गई
- 23:53हैं। इसके अनुसार स्त्रियों को वेदों का
- 23:56अध्ययन नहीं करना चाहिए।
- 23:58सच यह है कि अकेले ऋग्वेद में लगभग 25
- 24:02विदुषियों द्वारा उच्चारित रचाएं हैं।
- 24:06महाभारत में द्रोपदी को हर जगह वेदों की
- 24:08ज्ञाता के रूप में बताया गया है। एक भी
- 24:11ऐसा उदाहरण नहीं मिलता कि किसी स्त्री को
- 24:14वेद अध्ययन से रोका गया हो।
- 24:19अंग्रेजों की मनुस्मृति के पांचव अध्याय
- 24:21के 148 वें श्लोक में कहा गया है कि
- 24:25स्त्री को विवाह से पहले अपने पिता और
- 24:28विवाह के पश्चात अपने पति के संरक्षण में
- 24:31रहना चाहिए। पति की मृत्यु के बाद उसका
- 24:34संरक्षक उसका बेटा होगा।
- 24:37आश्चर्य की बात है कि वही मनु महाराज
- 24:40दूसरे अध्याय के 145 वें श्लोक में मां के
- 24:44रूप में स्त्री को सर्वोच्च शिक्षक कहते
- 24:47हैं।
- 24:50मनुस्मृति में ही विवाह में स्त्री धन की
- 24:52परंपरा डाली। जो कि आज भी हिंदू विवाह का
- 24:56हिस्सा है।
- 24:58मनुस्मृति में ही महिलाओं को पिता की
- 25:00संपत्ति में हिस्सा देने की बात है।
- 25:04आधुनिक विश्व ने यह दोनों विचार मनुस्मृति
- 25:07से ही सीखे हैं। अब्राहमिक मजहबों में
- 25:10महिलाओं को कोई भी आर्थिक अधिकार नहीं है।
- 25:16मनुस्मृति कहती है कि परिवार के पुरुषों
- 25:18को अपनी कन्या, बहन, पत्नी, भाभी आदि से
- 25:23सदा मधुर वचन बोलने चाहिए। उन्हें अच्छे
- 25:27भोजन, वस्त्र, आभूषण आदि से प्रसन्न रखना
- 25:31चाहिए।
- 25:32जिस परिवार में स्त्री दुखी होती है, उसका
- 25:35नाश हो जाता है। और जिस परिवार में स्त्री
- 25:38प्रसन्न होती है, वह कुल सदा सर्वदा फलता
- 25:42फूलता है।
- 25:45मनु महाराज ने ही सबसे पहले कन्याओं के
- 25:48लिए घर की लक्ष्मी की उपमा दी।
- 25:51विवाह में दहेज की लेनदेन को मनुस्मृति
- 25:54में आसुरी विवाह कहा गया है। किसी स्त्री
- 25:58का अपहरण करने वाले के लिए मनुस्मृति
- 26:01मृत्युदंड का प्रावधान करती है।
- 26:06दावा किया जाता है कि मनुस्मृति में
- 26:08रजस्वला स्त्री अर्थात जिसके पीरियड्स चल
- 26:11रहे हो उसे देखना भी पुरुष के लिए वर्जित
- 26:14किया गया है। हो सकता है कि कहने का तरीका
- 26:18उस समय के समाज के अनुरूप हो। किंतु क्या
- 26:22रजस्वला स्त्री को कामकाज से आराम देना
- 26:24अच्छी बात नहीं है?
- 26:27आज कॉर्पोरेट सेक्टर में पीरियड्स हॉलिडे
- 26:30देने की मांग होती है। क्यों ना उसे भी
- 26:33महिलाओं का अपमान माना जाए।
- 26:37मनुस्मृति के तीसरे अध्याय का 56वा श्लोक
- 26:40है। यत्र नार्यस्त पूज्यंते रमंते तत्र
- 26:44देवता।
- 26:45मनु महाराज यदि महिलाओं के प्रति इतने
- 26:48पूर्वाग्रहित थे तो उन्हें देवताओं का
- 26:50स्थान क्यों दे दिया?
- 26:54भारत में भले ही मनुस्मृति को लेकर भ्रम
- 26:57फैलाए गए लेकिन कई विदेशी विद्वान
- 26:59मनुस्मृति को मानव सभ्यता की सबसे
- 27:02महत्वपूर्ण पुस्तकों में से एक मानते हैं।
- 27:06इनमें सबसे प्रमुख है जर्मन दार्शनिक
- 27:09फ्रेडरिक नीतशे जो लिखते हैं बाइबल को बंद
- 27:13करो और मनुस्मृति को खोलो। इसमें जीवन की
- 27:17पुष्टि है। जीवन में एक विजय सुखद अनुभूति
- 27:21है।
- 27:23मनुस्मृति हर मनुष्य को श्रेष्ठ बनने,
- 27:26पूर्णता प्राप्त करने और जीवन जीने की
- 27:29उच्चतम कला के लिए
- 27:32होना सिखाती है।
- 27:36यहां पर बताना आवश्यक है कि फ्रेडरिक नीचे
- 27:39ने विलियम जों्स या जॉर्ज बोहलर की
- 27:42मनुस्मृति नहीं बल्कि लुई जैकोट नामक
- 27:46फ्रांसीसी विद्वान द्वारा अनुवादित पुस्तक
- 27:48पढ़ी थी।
- 27:52प्रोफेसर पैट्रिक ओलवेल ने लिखा है कि
- 27:55मनुसहिता किसी भी प्राचीन मानव सभ्यता के
- 27:58सबसे महत्वपूर्ण जीवित ग्रंथों में से एक
- 28:01है। यह प्राचीन भारतीय जीवन का आश्चर्यजनक
- 28:05चित्र प्रस्तुत करता है।
- 28:08इसमें राजा से लेकर एक सामान्य व्यक्ति के
- 28:11अधिकारों और कर्तव्यों की चर्चा है। इनमें
- 28:15कई नियम है जिनकी आधुनिक विश्व में अभी
- 28:18कल्पना ही की जाती है।
- 28:23यहां एक और बात मन में आती है कि यदि
- 28:26मनुस्मृति इतनी खराब थी तो इतने सारे
- 28:29यूरोपीय विद्वान अलग-अलग भाषाओं में उसका
- 28:33अनुवाद करने में क्यों जुटे थे?
- 28:37मनुस्मृति के आधार पर एक गाली गढ़ी गई।
- 28:40मनुवादी
- 28:42हम स्वयं को मनुष्य कहते हैं क्योंकि हम
- 28:45सभी मनु की ही संताने हैं। इस प्रकार से
- 28:49भारतीयों के एक बहुत बड़े वर्ग ने अपने ही
- 28:52पूर्वज से पल्ला झाड़ लिया और उन्हें
- 28:54गालियां देनी आरंभ कर दी।
- 28:59मनुस्मृति हो या भारतीय परंपरा का कोई
- 29:02अन्य ग्रंथ। हम कभी भी अब्राहमिक मजहबों
- 29:05की तरह किताबी नहीं रहे। वेदों, उपनिषदों,
- 29:09पुराणों और महाकाव्यों को ही जोड़ दें तो
- 29:12सनातन धर्म की पुस्तकों की संख्या सैकड़ों
- 29:15में पहुंच जाती है। यह सभी हजारों वर्ष
- 29:18पहले लिखी गई। लेकिन इनमें से एक भी ऐसी
- 29:21पुस्तक नहीं है जो धरती को चपटा या सूरज
- 29:25को धरती का चक्कर काटने वाला बताती हो।
- 29:3110,000 वर्ष पहले लिखी मनुस्मृति में
- 29:34सृष्टि की उत्पत्ति और जीव जगत के बारे
- 29:36में जो बातें लिखी हैं, वह आधुनिक विज्ञान
- 29:39को अब जाकर पता चली है। जो लोग कहते हैं
- 29:44कि हमारे जीवन में मनुस्मृति कहां है? वे
- 29:47भूल जाते हैं [गला साफ़ करने की आवाज़] कि
- 29:49यह जो अपनी बहन हमें बहन दिखती है। दूसरों
- 29:52का धन दूसरे का धन दिखता है। वह मनुस्मृति
- 29:56का ही प्रभाव है। हम मननशील हैं ना कि
- 30:00पशु। यह मनुस्मृति का ही प्रभाव है।
- 30:04मनुस्मृति ही हमें अब्रमिक मजहबों से अलग
- 30:07बनाती है।
- 30:10एक प्रश्न पूछा जाता है कि हम कौन सी
- 30:13मनुस्मृति पढ़ें? इसका उत्तर बहुत कठिन
- 30:16है। सामान्य रूप से गीता प्रस की पुस्तकें
- 30:20प्रामाणिक मानी जाती हैं। लेकिन गीता प्रस
- 30:23की जो मनुस्मृति उपलब्ध है, उसमें उसका
- 30:25केवल दूसरा अध्याय ही है। इसमें आर्यावर्त
- 30:29की सीमाओं, [संगीत]
- 30:3116 संस्कारों और विद्या अध्ययन के नियमों
- 30:33की चर्चा है।
- 30:37गीता प्रेस के अतिरिक्त बहुत सारे
- 30:39प्रकाशनों ने मनुस्मृति और उस पर
- 30:41विद्वानों की टिप्पणियां छापी हैं।
- 30:45लेकिन इन सभी में लगभग वही श्लोक हैं जो
- 30:48अंग्रेजों ने छपवाए थे। ऐसा लगता है कि
- 30:51सबकी रुचि विवाद का लाभ उठाकर पुस्तक
- 30:54बेचने और पैसा बनाने में है। किसी को
- 30:58चिंता नहीं कि मनुस्मृति के नाम पर वो जो
- 31:00कूड़ा कचरा छाप रहे हैं उससे समाज में
- 31:03कैसा विष घुल रहा है। हालांकि कुछ
- 31:07प्रकाशकों ने उन श्लोकों को हटाया है जो
- 31:10वैदिक मान्यताओं के विपरीत है।
- 31:13YouTube पर इस वीडियो के डिस्क्रिप्शन में
- 31:15हमने गीता प्रेस की मनुस्मृति के पीडीएफ
- 31:17का लिंक दिया है। इसके अतिरिक्त डॉ.
- 31:20सुरेंद्र कुमार की विशुद्ध मनुस्मृति के
- 31:23पीडीएफ का लिंक भी दिया है।
- 31:27मनुस्मृति में मिलावट को हिंदू सभ्यता की
- 31:30सबसे बड़ी त्रासदी में से एक माना [संगीत]
- 31:32जाए तो गलत नहीं होगा।
- 31:35संभवतः सिंध में राजा दाहिर की हत्या।
- 31:39तराइन के दूसरे युद्ध में पृथ्वीराज चौहान
- 31:42की हार
- 31:44और अंग्रेज अफसर एओ ह्यूम द्वारा कांग्रेस
- 31:47पार्टी की स्थापना से भी बड़ी त्रासदी।
- 31:51हिंदू समाज पर एक ऐसे अपराध का बोध थोप
- 31:54दिया गया जो उसने कभी किया ही नहीं।
- 31:57[संगीत]
- 31:58इसी का परिणाम है कि आज हम आपस में ही
- 32:01संघर्षत हैं। जिनके पूर्वजों के बुद्धि,
- 32:05बल और कौशल से भारत कभी सोने की चिड़िया
- 32:09कहलाता था।
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