श्री विद्या उपासना और रामायण की रहस्यमय कथाएँ | संजय मिश्रा के साथ देवदत्त पटनायक | Tilak Varta 🙏 — Transcript
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- 0:00हमारी संस्कृति हमारे संस्कार सदा रहे
- 0:03हमारे साथ सब्सक्राइब करें
- 0:07तिलक भूख को अगर समझ लिया तो सनातन समझ
- 0:10में आया हां क्योंकि सनातन का मतलब है भूख
- 0:13का ज्ञान सरल है इतना मुश्किल नहीं राम
- 0:16में कभी आक्रमण नहीं होता वो हमेशा शांति
- 0:18रहता है उनके चेहरे में कभी क्रूरता नहीं
- 0:20होगी कभी गुस्सा नहीं होगा क्योंकि वो
- 0:23सनातन के स्वरूप है ो मैं बड़ी-बड़ी बातें
- 0:25बोलता हूं तो लोग बहुत इंप्रेस हो जाते
- 0:27हैं लेकिन इंप्रेस नहीं करना है मुझे समझा
- 0:31बच्चे को भी समझ में आ जाए श्री विद्या
- 0:33उपासना और श्री विद्या है क्या जहां शिव
- 0:36और शक्ति का यूनियन होता है और श्री यंत्र
- 0:40इस यूनियन को एक ज्योमेटिक फॉर्म से समझा
- 0:43रहे हैं इससे उत्पत्ति क्या होती है दो
- 0:46चीज उत्पत्ति होती है लक्ष्मी की और
- 0:48सरस्वती की विद्या मुश्किल सरस्वती बहुत
- 0:51ही मुश्किल है वो सरस है सरस यानी कि
- 0:55फ्लोइंग है पानी जैसा है आपने इतना अध्ययन
- 0:57किया है सबसे प्राचीन पुराण है कौन सा
- 1:00वेदों में पुराण का उल्लेख नहीं
- 1:02है एक भी पुराण आप नहीं समझ पाओगे जब तक
- 1:05दूसरा नहीं पढ़ो देखिए शिवजी की कहानी
- 1:07क्या है वह कामां का है उन्होंने कामदेव
- 1:11को अपनी तीसरी आंख से जला दिया था भस्म कर
- 1:15दिया था और भभूत अपने शरीर पर उन्होंने
- 1:17लगा दिया श्री कृष्ण भी ना युद्ध रोक पाए
- 1:20ना अपने फैमिली को बचा पाए प्रवास तीर्थ
- 1:23में सब कुछ अपने आंखों के सामने द्वारका
- 1:25को देखा बर्बाद होते हुए
- 1:30[संगीत]
- 1:32नमस्कार मैं हूं संजय मिश्रा और आप देख
- 1:34रहे हैं तिलक पत्रिका तिलक पत्रिका के
- 1:36विशेष कार्यक्रम तिलक संवाद में आज हमारे
- 1:38विशेष अतिथि हैं जानेमाने अख्यान शास्त्री
- 1:41डॉक्टर देवदत्त पटनायक साहब आपका बहुत
- 1:44बहुत स्वागत है सर नमस्ते नमस्ते सर
- 1:46नमस्ते तो क्योंकि आपका शिव में बड़ा
- 1:49अध्ययन है तो सबसे पहले तो समझना है कि
- 1:52शिव तत्व है क्या लेकिन उससे ठीक पहले
- 1:55क्योंकि कहते हैं शक्ति के बिना शिव भी
- 1:58नहीं है हमको शक्ति के बारे में समझना है
- 2:02आपसे आपके शब्दों में श्री विद्या उपासना
- 2:05और श्री विद्या है क्या देखिए आपने बहुत
- 2:08बड़े-बड़े शब्द इस्तेमाल किए हैं शिव
- 2:11शक्ति श्री विद्या तो ये बहुत बड़े-बड़े
- 2:14शब्द है हमेशा सरलता से जाना चाहिए जब हम
- 2:18सनातन की बात करते हैं तो सरलता से शुरुआत
- 2:20हो एक अजीव वस्तु और जीव वस्तु में फर्क
- 2:24क्या है अजीव पत्थर होता है उसम जीव नहीं
- 2:27है वृक्ष पेड़ में जीव होता है तो अगर
- 2:32कहीं पर भी हरा भरा पेड़ दिख लिया तो आप
- 2:35पूछना है कि वो हम उसे जीवित क्यों कहते
- 2:38हैं हम इसलिए जीवित कहते हैं क्योंकि उसे
- 2:41भूख लगती है और क्योंकि उसे भूख लगती है
- 2:44उसके पत्ते निकल आते हैं और वह सूरज की
- 2:47तरफ जा रही है उसके य रूट्स निकलते हैं और
- 2:51वह कहीं पानी के तरफ जा रहे हैं तो इससे
- 2:55पता चलता है कि यह जीवित है कोई पशु को
- 2:58हमने देख लिया वह चरने जा रहा है या शिकार
- 3:02करने जा रहा है हम रोज सुबह उठते हैं हम
- 3:06तो लेटे रह सकते हैं लेकिन फिर याद रहता
- 3:08है कि घर का घर चलाना है इसलिए जॉब करना
- 3:11है बिजनेस करना है यानी कि जहां जीव होता
- 3:15है वहां भूख होती है यह याद रखना है जब हम
- 3:20आत्म ज्ञान कहते हैं यानी कि भूख का ज्ञान
- 3:24और भूख से ही सब कुछ चलता
- 3:27है तो भूख को मिटाने के लिए हमें भो भोग
- 3:33चाहिए तो भोग को हम शक्ति कहते लेकिन क्या
- 3:37हम भूख पर विजय प्राप्त कर सकते हैं उसे
- 3:41हम
- 3:42शिव तो शिव और शक्ति जब तक आप भूख नहीं
- 3:46समझोगे तब तक ना शिव समझ में आएगा ना
- 3:50शक्ति समझ में
- 3:51आएगा भूख किसके लिए होती है आप कहोगी कि
- 3:55मुझे जिंदगी में पैसे चाहिए पावर चाहिए
- 4:01फेम
- 4:02चाहिए ऐश्वर्य चाहिए यानी कि श्री
- 4:07चाहिए लेकिन दूसरे प्रकार का भूख होता है
- 4:11जिज्ञासा होती है मुझे ज्ञान चाहिए मुझे
- 4:13समझना है दुनिया चलती कैसे
- 4:15है दुनिया का यह विज्ञान का मतलब क्या है
- 4:19साइंस का मतलब क्या है दुनिया में तत्व
- 4:22क्या है एक क्यूरियोसिटी होती है हम
- 4:27इन्वेंशन करते हैं डिस्कवरी करते हैं
- 4:29टेक्नोलॉजी की तरफ जाते हैं यानी कि
- 4:31विद्या चाहिए तो भूख दो प्रकार के होते एक
- 4:34श्री के लिए एक विद्या के लिए लेकिन चाहिए
- 4:38हमें भोग व है शक्ति लेकिन अगर भूख से
- 4:42पूरी मुक्ति प्राप्त करनी है तो आपको शिव
- 4:44की तरफ जाना है बस य एक चीज भूख अगर समझ
- 4:48लिया तो सनातन समझ में आया हा क्योंकि
- 4:51सनातन का मतलब है भूख का ज्ञान तो भूख हुआ
- 4:54तो वो भोग की तरफ दौड़ता है तो वो भोगी बन
- 4:58गया वह भूख को मिटाना चाहता है तो वह योगी
- 5:01बन गया बस उतना ही सरल है इतना मुश्किल
- 5:05नहीं है श्री विद्या उपासना गोपनी क्यों
- 5:07होती है देखिए जब ज्ञान होता है तो ज्ञान
- 5:12दो प्रकार के होते हैं एक जिससे लोगों का
- 5:16उद्धार होता
- 5:17है और
- 5:20एक जो आपको बर्बाद कर सकता
- 5:24है जो क्या होता है जबी कोई भी शक्ति होती
- 5:27जो भी नॉलेज होता है देखिए घर में आपके घर
- 5:31में अगर मैं आपको सिखा दूं पेड़ पौधे में
- 5:35क्या ज्ञान है तो आप उसे औषधि भी बना सकते
- 5:38हैं जहर भी बना सकते दोनों का ज्ञान तो हर
- 5:42ज्ञान गुप्त होता है हम उसी को देते हैं
- 5:45ज्ञान जो इसे संभाल पाए और कुछ नहीं है
- 5:47उसम कि आप में वह क्षमता है उसे संभालने
- 5:51की कि नहीं जैसे अगर आप रामायण देखो तो
- 5:56रामायण में वेदाचार्य
- 5:58संस्कृत ज्ञानी कौन है बताइए बात ही सं
- 6:02संस्कृत के ज्ञानी है चारों वेद के ज्ञान
- 6:05है आयुर्वेद का ज्ञान है ज्योतिष शास्त्र
- 6:08का ज्ञान है कौन है यह पात्र रामायण में
- 6:11हनुमान जी रावण भूल गए अरे हां मतलब रावण
- 6:15तो महा ज्ञानी सही बात है लेकिन रावण के
- 6:19पास भी श्री विद्या है हनुमान के पास भी
- 6:22श्री विद्या है लेकिन एक खलनायक है और एक
- 6:26भगवान है दोनों में अंतर क्या हुआ
- 6:30दोनों के पास ज्ञान है दोनों संस्कृत
- 6:32जानते हैं दोनों वेद जानते हैं दोनों
- 6:35पुराण जानते हैं दोनों शास्त्र जानते हैं
- 6:38अंतर क्या हुआ दोनों में एक दुरुपयोग कर
- 6:41रहे हैं एक यह पूरी जो ज्ञान है व अपना
- 6:45भूख नहीं मिटा
- 6:46पाया उसका भूख जो है बढ़ता गया बढ़ता गया
- 6:50जब भूख बढ़ती है तो अहंकार निर्माण करता
- 6:53है जो भूख पर विजय प्राप्त करता है वो
- 6:56हनुमान की यात्रा करता है तो बस रामायण की
- 6:59कथा अगर सुने गौर से सुने यह लोग भूल जाते
- 7:03हैं कि संस्कृत बोलने वाले केवल दो है वहा
- 7:06एक हनुमान है जो वन में रहता है जो कुछ
- 7:10नहीं चाहता अगर हम पूछे कि हनुमान की
- 7:11महत्वाकांक्षा क्या है आपको कुछ
- 7:13महत्वाकांक्षा नहीं मिलेगी व सुखी है जंगल
- 7:17में वह चाहते तो सुग्रीव को भी पटक के
- 7:19किष्किंदा के राजा बन जाते रावण को पटक के
- 7:23रावण लंका के राजा बन सकते थे कुछ नहीं कर
- 7:26रहे वो सेनापति नहीं है कुछ नहीं बस वही
- 7:30पर साधारण रूप में लेकिन हम कहते हैं कि
- 7:33नवनिधि है उनके पास अष्ट सिद्धि है उनके
- 7:36पास लेन कर क्या रहे हैं जंगल में कदी वन
- 7:39में केला खा रहे हैं सुखी है कथा सुन रहे
- 7:43हैं कथा सुन रहे हैं तो वह है हनुमान तो
- 7:46जब लोग कहते हैं मैं श्री विद्या का ज्ञान
- 7:48करता तो हमेशा यह देखता हं यह रावण की तरफ
- 7:50जा रहा है हनुमान की तरफ जा रहा है
- 7:53ज्यादातर रावण की तरफ जा रहे है क्योंकि
- 7:56वह अहंकार इतनी मायावी है ऐसे आपको पकड़
- 7:59लेगा कि आप अपने आप को समझाने लग नहीं
- 8:01नहीं मैं कुछ बड़ा काम कर रहा हूं इसलिए
- 8:05बहुत जो गुरु जो होते हैं वह इतने अहंकार
- 8:07से बात करते हैं आजकल ट में बहुत गुरु बात
- 8:09करते हैं कि हमको गु गणता से घमंड आता है
- 8:15कि मेरे पास कुछ है जो तुम्हारे पास नहीं
- 8:17है मेरे पास वह मोती है मेरे पास व
- 8:19कोहीनूर है मेरे पास वह चीज ज्ञान है जो
- 8:22तुम्हारे पास नहीं है ये क्या होता है
- 8:24इससे एक असमानता आ जाती है कि मैं ज्ञानी
- 8:28तुम जानी यह जो असमानता है यह पदानुक्रम
- 8:33जो बनता है हायरा की बनता है यह अहंकार के
- 8:36चिन्ह तो कोई भी बातों में अगर आप देख लो
- 8:40कि यह आ रहा है कोई भी गुरु अपने आप को
- 8:43मठाधीश बनाकर ऊपर बैठने लगता है तो फिर
- 8:46रावण की याद रखनी चाहिए कि हनुमान अपनी
- 8:48पूंछ से उसके ऊपर बैठ
- 8:51गया मठाधीश मत बनो जो वेद का ज्ञान होता
- 8:56है वो नम्रता लाता है शांति लाता है जहा
- 8:59जाएगा शांति इसलिए हमेशा यज्ञ के पश्चात
- 9:02हम शांति शांति
- 9:03शांति जब शांति नहीं लाएगा व वेद नहीं है
- 9:08वह श्री विद्या नहीं है यह पूजा यह जो
- 9:12यंत्र होते हैं उनका काम केवल एक है जहां
- 9:16जाए समृद्धि लाएगी शांति लाएगी नहीं लाई
- 9:20तो रावण की तरफ आप जा रहे हो ना कि
- 9:24हनुमान आपने कहा हनुमान जी पूस से बता
- 9:28देते हैं और सिखा क्या शक्ति है एक तो
- 9:31हनुमान जी का जो स्वरूप हम पढ़ते आए हैं
- 9:34क्या वैसा ही हनुमान जी का स्वरूप था कि
- 9:36कुछ अलग था मतलब व सच में वानर स्वरूप थे
- 9:39या हमने पढ़ा पढ़ते पढ़ते और कहा गया कि
- 9:42वन में रहते थे व वानर है यह थोड़ा सा मैं
- 9:44आपसे समझना देखिए रामायण अभी हम जब कहते
- 9:48हैं कि रावण का 10 सर है 20 हाथ है क्या
- 9:52सेसे रूपक के हिसाब से ले या इसे यथार्थ
- 9:57माने तो य
- 9:59परर निर्भर है कुछ लोगों को रूपक पसंद है
- 10:02लेकिन अगर आप पिक्चर में बना दोगे तो
- 10:04अच्छा लगता है स्टाइल लगता है उसके
- 10:06बिल्कुल विपरीत हम क्या बताएंगे
- 10:09एक एक तरफ आपने एक रावण को जन्म दिया है
- 10:12जिसके 10 सर है 20 हाथ है पुष्पक विमान
- 10:15में बैठा है सोने की नगरी में बैठा है
- 10:18उसको विपरीत अगर आप मनुष्य दिखाएंगे तो
- 10:20राम जी तो खड़े हैं वहा पर लेकिन जब
- 10:22वाल्मीकि जी कथा लिख रहे हैं वह मनुष्य के
- 10:27जैसे लेकिन मनुष्य से से थोड़ा नीचा
- 10:30दिखाना एक ऐसे जंतु को दिखाना चाहते हैं
- 10:33लेकिन देखने में बिल्कुल पशु लगता
- 10:37है लेकिन ज्ञान देवता से ज्यादा
- 10:41है जैसे आप फिल्म इंडस्ट्री में हम एक
- 10:44पात्र बनाते हैं तो एक पात्र उन्होंने
- 10:46बनाया कि दिखता है बिल्कुल वानर जैसा इधर
- 10:49उधर कूद रहा है लेकिन जब मुंह खोलता है तो
- 10:53आपको लगता है बाप रे कौन है ये सब ज्ञान
- 10:56है उसके पास लेकिन एकदम
- 10:59मनुष्य से भी नीचे चला जा रहा है एकदम पशु
- 11:03की भांति व्यवहार कर रहा है लेकिन है नहीं
- 11:05पशु देखिए जब रावण शिवजी को लाना चाहते थे
- 11:10श्री लंका को बल
- 11:12जबरदस्ती लंका को उठा के तो शिवजी ने उसे
- 11:16कहा था कि एक दिन मैं स्वयं तुम्हारे यहां
- 11:20आऊंगा और तुम मेरा निरादर करोगे तो हनुमान
- 11:25जी आए लेकिन इसने क्या किया पूंछ जला दी
- 11:30तो भगवान जब स्वयं आते हैं तो अहंकार आपको
- 11:33अंधा बना देता है और आपको देखता नहीं है
- 11:36कि ईश्वर आए हैं और बिल्कुल शिवजी जैसा
- 11:39कोई ईगो नहीं कुछ नहीं फल चुराते हैं उसके
- 11:44आंगन से ना वो उसके जो गार्डन से तो कहता
- 11:48है कि तुमने रावण के आंगन से चोरी किया है
- 11:50फल तो बोलता है कि तुमने किसी दूसरे की
- 11:52पत्नी की चोरी किया वो बड़ा चोर है और
- 11:55मुझे चोर बोल रहे हो मैं तो पशु हूं पशु
- 11:58का चोर पशु चोर नहीं बन सकता तुमने यह
- 12:01दायरा बनाया है कि यह मेरा है तुम्हारा है
- 12:04तो संस्कृति शब्द में मेरा तेरा आता है
- 12:07प्रकृति में नहीं यह बड़ी बड़ी बातें हैं
- 12:10रामायण में सरल तरीके से बताया है
- 12:13वाल्मीकि जी ने इसलिए उसे पंचम वेद कहा
- 12:15जाता है तो लेकिन हम क्या करते हैं हम
- 12:17केवल वो ड्रामा देखते हैं एक्शन देखते हैं
- 12:19धनुष देखते हैं यह जो छोटी छोटी बातें
- 12:23होती है सूक्ष्म बातें होती है इसको कोई
- 12:26समझता नहीं जब वो रामायण का पाठ होता है
- 12:30तो लोगों को ड्रामा पसंद आता है ड्रामा
- 12:32थोड़ी ना समझना है रावण समझना है रावण का
- 12:35अर्थ क्या है वो रावण हमारी भीतर है
- 12:37हनुमान भी हमारे भीतर है राम जी भी हमारे
- 12:40भीतर है लक्ष्मण भी हमारे भीतर है
- 12:42किष्किंदा भी हमारे भीतर है पूरी कहानी जब
- 12:44समझते हैं तब जाके सनातन का ज्ञान आता है
- 12:48हर समय हर दशक में या सदी में जो उस समय
- 12:54के लोग रहे होंगे जागरूक लोग रहे होंगे
- 12:56हमेशा से श्री विद्या की उपासना चाहते
- 12:58होंगे क्योंकि उनको भोग चाहिए होगा और
- 13:01मुझे लगता है ये इस समय का सब वो टाइम है
- 13:04जब हर कोई चाहता है तो जो आज का जो आम
- 13:07व्यक्ति है क्या हर व्यक्ति विद्या की
- 13:09उपासना कर सकता है देखिए श्री विद्या का
- 13:13यंत्र ठीक से देखना है यहां पे त्रिकोण
- 13:17होता है
- 13:18हम उत्तर की दिशा में दक्षिण की दिशा में
- 13:21त्रिकोण होता है भूपर होता है वो तांत्रिक
- 13:25यंत्र होता है लेकिन ये क्या है जैसे एक
- 13:26सिग्नल होता है आजकल हम इमोजी भेजते हैं
- 13:28ना लोगों को
- 13:30यंत्र एक इमोजी है बस सनातन इमोजी इससे
- 13:34आपको समझ में आएगा एक पिक्चर देखने से अगर
- 13:36मुझे देवी दिखाना है तो मैं एक त्रिकोण
- 13:38बनाऊंगा दक्षिण की दिशा में अगर मुझे
- 13:41शिवजी दिखाना है तो मैं एक त्रिकोण
- 13:43बनाऊंगा उत्तर की दिशा में तो जैसे कैलाश
- 13:46पर्वत त्रिकोण है उत्तर की दिशा में जाता
- 13:48है ध्रुव के तारा की तरफ अगर आप पानी को
- 13:53ऐसे डालेंगे पानी एक ग्लास से अगर मैंने
- 13:55पानी डाला तो आप देखोगे त्रिकोण का आकार
- 13:56बन जाता है नीचे की तरफ जा रहा है
- 14:00तो यह सब यंत्र है अगर आपने विग्रह देखा
- 14:03विग्रह यानी कि मूर्ति देखी श्री यंत्र
- 14:06श्री विद्या की तो वह कामाक्षी देवी के
- 14:08रूप लेती है कामाक्ष्या रूप लेती है हाथ
- 14:11में क्या है उनके हाथ में एक धनुष है
- 14:16लेकिन यह शुगर केन से बनाया
- 14:20है तो शुगर केन को हिंदी में क्या बोलेंगे
- 14:23गन्ना गन्ने का गन्ने का वो होता है मराठी
- 14:27में इ बोलते है तो मुझे मराठी
- 14:30इवाक शब्द यहां से आता है तो इक्षु यानी
- 14:34कि गन्ना अच्छा गन्ने से वो शब्द आया था
- 14:37भारत में वो साउथ ईस्ट एशिया से इंडिया
- 14:39आया था और भारत में हम गन्ना बनाते थे तो
- 14:41इवाक को बहुत इंपोर्टेंस दिया गया मीठा
- 14:43निकलता है वहां से अभी व एक हाथ में गन्ना
- 14:47है दूसरे हाथ में फूल है और यह कामदेव के
- 14:51चिन्ह है तो देखिए शिवजी की कहानी क्या है
- 14:55वो कामात का है उन्होंने कामदेव को अपनी
- 14:59ससरी आंख से जला दिया था भस्म कर दिया था
- 15:02और भभूत अपने शरीर पर उन्होंने लगा दिया
- 15:05था और वह कैलाश पर्वत में चले जाते हैं और
- 15:09बैठ जाते हैं ध्यान करने त शक्ति आती है
- 15:13लेकिन उनके हाथ में वही चिन्ह है जो काम
- 15:16के साथ जोड़ा गया है गन्ना फूल
- 15:22और पैरेट होता है तो सुक तो सुक होगा तो
- 15:29तोता जो होता है तो वो पैरेट है यह तीन
- 15:31चिन्ह कामदेव के चिन्ह है वही चिन्ह को
- 15:36देवी अपनाती है और स्त्री के रूप में जाकर
- 15:39शिव के पास जाकर कहती है कि कामां तक बनने
- 15:43से भूख को मिटाने से आप दुनिया को बर्बाद
- 15:46कर दोगे क्योंकि जीव अजीव बन जाता है जीव
- 15:51के लिए भोग चाहिए आपको भोग की दुनिया में
- 15:55आना पड़ेगा और वह कामेश्वरी है और शिव जी
- 15:59को कामेश्वर बनाते हैं और उनका विवाह होता
- 16:02है इसलिए उसे कल्याण कहते हैं जहां शिव और
- 16:07शक्ति का यूनियन होता है और श्री यंत्र इस
- 16:11यूनियन को एक ज्योमेट्री फॉर्म से समझा
- 16:14रहे हैं वही यूनियन को इससे उत्पत्ति क्या
- 16:17होती है दो चीज उत्पत्ति होती है लक्ष्मी
- 16:20की और सरस्वती की लक्ष्मी को हम श्री
- 16:22कहेंगे सरस्वती को हम विद्या कहेंगे तो
- 16:25इसका उपासना किसके लिए कि ज्ञान भी हो और
- 16:29धन भी हर आदमी को धन चाहिए ज्ञान कितने
- 16:33लोगों को चाहिए बताइए ज्ञान कोई नहीं
- 16:37इग्राम देखते हैं लोग देखते हैं उनको
- 16:39टीआरपी रेटिंग चाहिए ज्ञान की बातें किसी
- 16:42को नहीं सुनना है सबको धन चाहिए धन चाहिए
- 16:45टाइम पास चाहिए एंटरटेनमेंट भोग की वस्तु
- 16:48चाहिए हम कभी ज्ञान को भोग नहीं समझते नाच
- 16:52गाना पसंद है लेकिन वो जो कथा के अंदर जो
- 16:58रहस्य होता है यह सीखने की कोई इच्छा नहीं
- 17:02मैं कितने फिल्म इंडस्ट्री में तो मुझे
- 17:03बुलाते रहते हैं हमको सीरियल बनाना है
- 17:05रामायण के ऊपर लेकिन ज्यादातर खर्चा किस
- 17:08पर होगा सीजीआई के ऊपर कि वो तीर्थ मैं
- 17:10बोल रहा हूं डायलॉग ठीक नहीं है सर इससे
- 17:13टीआरपी रेटिंग नहीं
- 17:15चलेगा तो उनको धन से मतलब है तो मैं हमेशा
- 17:18कहता हूं लोगों को कि टीवी वाले रामायण मत
- 17:21देखो ठीक है अभी जो फेमस रामानंद सागर की
- 17:24रामायण है वहां पर अगर आप ध्यान देखे वहां
- 17:27पर तुलसीदास जी के दोहे बताए गए हैं उससे
- 17:31हमें प्यारा जब हम बोल रहे हैं ना वो क्या
- 17:34मंगल भवन तो ये लाइन किसने लिखा है
- 17:37तुलसीदास जी ने हम उससे प्रेरित हो रहे
- 17:41हैं तो वो 400 500 साल पहले लिखी गई भक्ति
- 17:45से लिखी गई जो काव्य है उससे हम प्रेरित
- 17:48हो रहे हैं आजकल लेखकों को बहुत मुश्किल
- 17:50होता है क्योंकि वो प्रोडक्शन हाउस का
- 17:52डिमांड होता है कि हिट चलनी चाहिए हीरो
- 17:55बनना चाहिए हमें लॉर्ड ऑफ द रिंग्स बनाना
- 17:57है हमें हैरी पॉटर बनाना है ज्ञान विद्या
- 18:00कौन सोच रहा है श्री सोच रहे हैं विद्या
- 18:03अगर होगी तो शांत करेगा उत्तेजित नहीं
- 18:06करेगा अगर उत्तेजित नहीं करेगा तो फिर
- 18:08बॉक्स ऑफिस कैसे चलेगी बॉक्स ऑफिस हमको तो
- 18:11योद्धा
- 18:13चाहिए तो हम राम को भी आक्रमक रूप में
- 18:16दिखाएंगे राम में कभी आक्रमण नहीं होता व
- 18:19हमेशा शांति रहता है उनके चेहरे में कभी
- 18:21क्रूरता नहीं होगी कभी गुस्सा नहीं होगा
- 18:25क्योंकि व सनातन के स्वरूप है जो भगवान के
- 18:28स्वरूप वो कभी गुस्सा क्यों आएगा वो सब
- 18:30बच्चों के साथ डील कर रहे हैं क्या बात है
- 18:32महाशक्तिशाली लेकिन शांत चूंकि
- 18:35महाशक्तिशाली इसलिए
- 18:38शांत जो शक्तिशाली के चेहरे में आक्रमण
- 18:41आएगा वोह थोड़ी ना शक्तिशाली है वो तो
- 18:45मूर्ख है इसलिए असुरों का चेहरा हमेशा
- 18:48गुस्सा में भरा होता है देवताओं के चेहरे
- 18:51में हमेशा शांत होता है आप एलिफेंटा केव्स
- 18:54में जाइए वहां पर रुद्र रूप देखेंगे शिव
- 18:57जी का बड़ा रुद्र रूप का मूर्ति है और हाथ
- 18:59में ऐसे हाथ करके ललिता रूप में अपनी
- 19:02पत्नी को कंफर्ट कर रहे हैं टेंशन मत लो
- 19:05यह मेरा
- 19:07लीला यह जैसे थिएटर में नाच आप हीरो विलन
- 19:11का रोल करते हो लेकिन सचमुच में गुस्सा
- 19:12थोड़ी ना आता है आप थिएटर में किसी को मार
- 19:15रहे हो बॉक्सिंग कर रहे हो लेकिन अंदर तो
- 19:17शांत है ना वो तो एक्टिंग है तो भगवान भी
- 19:19एक्टिंग कर रहे हैं ताकि बच्चे समझ
- 19:23जाए तो वो जब राम रावण से बात कर रहे हैं
- 19:26तो रावण तो बच्चा है वो शिवजी को भी नहीं
- 19:29पहचान पाता है तो राम एक बच्चे से डील कर
- 19:33रहे हैं हमने उसे बहुत बड़ा माना है अभी
- 19:36यह सब बातें हमारी टीवी सीरियल में बता
- 19:39नहीं सकते देखिए राम लीला कर रहे हैं
- 19:43अवतरित हुए हैं ताकि रावण का उद्धार हो
- 19:47अहल्या का उद्धार हो शी गौतम ऋषि अपनी
- 19:51पत्नी को क्षमा नहीं कर सक रहे राम बोल
- 19:54रहे अरे छोटी छोटी बातों में इतनी बड़ी
- 19:56गुस्सा क्षमा करो लोगों को
- 19:59को क्षमा नहीं करोगे तो
- 20:02तुम दुनिया कैसे
- 20:04चलाओगे राम राज्य बनाते हैं लोगों को
- 20:08लेकिन लोग क्या करते हैं सीता के चरित्र
- 20:10को लेकर बात करते हैं देखो तुमको श्री
- 20:12दिया गया है राम राज्य दिया गया है
- 20:15तुम्हें सुखी गेटट्यूब होना चाहिए ना
- 20:17कृतज्ञता होनी चाहिए कृतज्ञता नहीं है तुम
- 20:21राजा की पत्नी के ऊपर बातें कर रहे हो
- 20:25मनुष्य ऐसा है क्योंकि विद्या नहीं है
- 20:27केवल हम श्री के पीछे भाग रहे अगर
- 20:30कृतज्ञता होती तो वह राम सियाराम को देखकर
- 20:34सुखी रहते राम राज्य में लेकिन लेही
- 20:36उन्होंने भी राम और सीता को सेपरेट कर
- 20:40दिया तो यह सब बातें सनातन वाल्मीकि जी
- 20:44बोल नहीं रहे बोल रहे समझने वाले को इशारा
- 20:46काफी मैं कथा
- 20:48बताऊंगा कथा का विश्लेषण हम नहीं करेंगे
- 20:52आख्यान होगा भाष्य नहीं भाष्य आपको करना
- 20:57है तो तो ये सब जो बातें है क्योंकि मैं
- 21:01आख्यान शास्त्री में ये बहुत ही सरल है
- 21:03इतना मुश्किल नहीं है उसका अनुभव करना
- 21:06उससे जीना मुश्किल है बहुत मुश्किल है
- 21:09छोटी हमें भी गुस्सा आ जाता है फिर हम
- 21:11सोचते हैं क्यों गुस्सा कर रहे हो लेकिन
- 21:15हम थोड़ी ना भगवान है हम मनुष्य है गलती
- 21:18हो जाती है और पूरी जिंदगी हम वो गलती
- 21:21करते रहते हैं कि शायद ये श्री यंत्र करने
- 21:24से शांत हो जाएंगे विद्या आएगी लेकिन हम
- 21:26श्री यंत्र ज्यादातर श्री के लिए कर
- 21:29विद्या के लिए नहीं कर विद्या मुश्किल है
- 21:32सरस्वती बहुत ही मुश्किल है वह सरस है सरस
- 21:36यानी कि फ्लोइंग है पानी जैसा है पानी को
- 21:39आप हाथ में नहीं रख सकते बहती
- 21:42रहती तो श्री विद्या में विद्या की तरफ
- 21:45ध्यान देना है जब श्री और श शिव और शक्ति
- 21:47जुड़ते हैं यानी कि पुरुष और प्रकृति साथ
- 21:51में आते हैं तो फिर हमें योग और यह सब य
- 21:55मैं बड़ी बड़ी बातें बोलता हूं तो लोग
- 21:57बहुत इंप्रेस हो जाते लेकिन नहीं करना है
- 21:59मुझे समझाना है बच्चे को भी समझ में आ
- 22:02जाएगा देखो भूख लगती है तो तुम्हें खाना
- 22:06चाहिए अगर तुम खाते रहोगे खाते रहोगे खाते
- 22:09रहोगे तो तुम बकासुर बन जाओगे और अगर आप
- 22:13इग्राम खोलो तो कितने बकासुर दिखते हैं धन
- 22:16धन्य संपत्ति से लदे हुए बकासुर ही बकासुर
- 22:21मनुष्य रूपी
- 22:24बकास लेकिन हम उन्हें नहीं देखते देखो
- 22:28कितना भूख है मिटती नहीं है मिटती नहीं है
- 22:30और चाहिए और लाइक्स और ट्रेंड हो रहा है
- 22:34कि नहीं टॉपिक वो जो हमारे भीतर की जो भूख
- 22:38है अगर आप शिवजी से पूछे तो शिवजी एक बार
- 22:41बकासुर उसके पास आया तो कि मुझे भूख लगी
- 22:43है तो खा लो सब कुछ खा देते है उसके बाद
- 22:45कहते मुझे और खाना है अपने आप को खा लो तो
- 22:48अपने आप को खा लेता है बचता केवल सर है तो
- 22:51जितने भी मंदिर है हमारे भारतवर्ष में आप
- 22:54देखोगे एक सर इसको कीर्ति मुख कहते हैं वो
- 22:57बकासुर है जो अपने शरीर भी खा चुका है और
- 23:00भगवान बोल रहे देखो यही होगा अगर तुम भूख
- 23:02की राह में चलते
- 23:04रहोगे भोग और योग योग उसे बांध के रखता है
- 23:09भैया
- 23:10शांति संतोष कभी ना कभी तो जिंदगी में
- 23:13संतोष
- 23:15लाओ श्री विद्या भूख के लिए यंत्र है या
- 23:19संतोष के लिए यंत्र है यह पूछना है एक
- 23:22महत्वाकांक्षा की रास्ता है और एक संतोष
- 23:26कब आप बोलोगे कि नहीं बस बस जैसे खाना जब
- 23:29परोसा जाता है अब कब बोलोगे नहीं और नहीं
- 23:31चाहिए या खाते रहोगे खाते रहोगे खाते
- 23:34रहोगे यही हो रहा है
- 23:37आजकल आज का जो मानव है आज जो लोग हैं क्या
- 23:41वह बिना किसी गुरु
- 23:43के श्री विद्या की उपासना कर सकते हैं कि
- 23:46गुरु परम आवश्यक है नहीं गुरु आवश्यक नहीं
- 23:51यह सब पहले जमाने में किताब नहीं
- 23:54थ मौखिक परंपरा थी तो ज्ञान के लिए आपको
- 23:58किसी मनुष्य के पास जाना पड़ता था कोई
- 24:01मनुष्य जिसको ज्ञानी है आप उसके पास जाओगे
- 24:03वो आपके गुरु बन गए
- 24:06आजकल
- 24:07किताबें तो मनुष्य की आवश्यकता
- 24:10नहीं लेकिन किताब समझना को किसने लिखा है
- 24:14इसके लिए हम थोड़ा ट्यूटोरियल जाते हैं
- 24:16कोच के पास जाते हैं वीडियोस देखते हैं
- 24:18अलग-अलग माध्यम है पहले जमाने में माध्यम
- 24:21नहीं थे इसलिए हम मेले में जाते थे कि
- 24:25बहुत स्कॉलर्स बैठे हुए हैं उनकी बात
- 24:26सुनेंगे मौखिक परंपरा की अलग है हम लिखित
- 24:29परंपरा की दुनिया में लेकिन यह हमेशा याद
- 24:32रखना चाहिए जो आदि गुरु है उनका नाम
- 24:36दत्तात्रेय है जो नाथ नवनाथ चरित्र अगर
- 24:39पढ़े तो सबसे बड़े गुरु जो है अत्रे और
- 24:42अनसूया के पुत्र दत्तात्रय है और उनकी जो
- 24:46कहानी अवधूत गता तो वह छोटी छोटी चीजों
- 24:50में उनको ज्ञान मिलता है अग्नि से मुझे यह
- 24:52ज्ञान मिला पानी से मुझे यह ज्ञान मिला
- 24:55पेड़ से मुझे यह ज्ञान
- 24:57मिला पहाड़ से यह ज्ञान मिला है यानी कि
- 25:00चारों तरफ गुरु बैठे
- 25:02हुए कोई काम कर रही है तो उसके जो चूड़िया
- 25:06है उसके आवाज से उसको ज्ञान मिल जाता
- 25:09है कोई नाच रही है तो
- 25:12उसके जो पायल की खनखन से उनको ज्ञान मिल
- 25:15जाता है कोई तीर चलाता है व तीर की आवाज
- 25:18से उनको ज्ञान मिल जाता है अवधूत य भागवत
- 25:21पुराण में है अवधूत गता तो आप पढ़ लीजिए
- 25:23उसमें वो बोलते ज्ञान तो पेड़ों में है
- 25:26पशु में है पक्षी में है
- 25:28भेड़ में है भेड़िए में है तो ज्ञान
- 25:31प्रकृति में है जिसका जिज्ञासा होता है
- 25:35उसे ज्ञान मिल जाएगा लोगों में प्यास नहीं
- 25:39है प्यास नहीं है तो उसे पानी देने से
- 25:42क्या फायदा अगर आप पढ़ते नहीं हो मैं आपको
- 25:44किताब दे दूं तो क्या फायदा लोग कहते हैं
- 25:47कि हम गुरु जी के पास बैठेंगे लेकिन व
- 25:49गुरु की बात नहीं सुनते वह केवल बोलते हम
- 25:52आपके आपका पास बैठ के हमें अच्छा लगता है
- 25:55गुरु की बात कोई नहीं सुन रहा है उसे समझ
- 25:58नहीं रहा
- 26:00है ज्ञान का मतलब है कि अपने आप को
- 26:03स्वतंत्रता बनाना स्वतंत्र बनाना कि आप
- 26:07किसी के ऊपर अटैच नहीं हो डिपेंडेबल नहीं
- 26:10हो कि वही चीज एक नशा बन जाए गुरु भी नशा
- 26:13बन जाते हैं धीरे धीरे गुरु के बिना हम जी
- 26:16नहीं सकते यानी कि गुरु को आपने अफीम बना
- 26:19दिया कि नहीं गुरु नहीं होंगे तो मैं
- 26:21तड़पता हूं तो फ अफीम बन गया गुरु का काम
- 26:24यह नहीं है गुरु आपको स्वतंत्रता देता है
- 26:27तुमके रास्ते में चल स कोई टेंशन नहीं
- 26:31है डर नहीं होगा भूख को आप मैनेज कर पाओगे
- 26:35भय को मैनेज कर पाओगे यह दो चीज लाइफ में
- 26:37एक तो भूख मैंने बात की ज्यादा दूसरा भय
- 26:39होता है डर लगता है ना जिंदगी में कि कोई
- 26:43मुझे पेड़ों में देखिए पेड़ों में तो एक
- 26:46पत्ता होता है भूख के लिए लेकिन कांटे भी
- 26:48होते अपने बचाव के लिए हमारे में भी क
- 26:51काटे हैं बचाव के
- 26:52लिए तो गुरु यह आपको दिखाता है दर्शन
- 26:56कराता है कि देखो तुम्हारे में यह भूख है
- 26:58तुम्हारे में ये भय है और क्या तुम दूसरों
- 27:00में ये भय और भूख देख रहे हो क्या तुम
- 27:03दर्शन करते हो हम दूसरों का दर्शन नहीं
- 27:07करते हम केवल स्वयं दर्शन करते हैं ो
- 27:10मंदिर में जाकर लोग कहते हैं कि भगवान का
- 27:12दर्शन करो वह जाकर वहां पर हम क्या करते
- 27:14हैं आंखें बंद कर लेते ध्यान
- 27:18करते भीतर का भय और भूख एक होता है सामने
- 27:22वाले का भूख और भय भी होता है और शिव
- 27:25शक्ति की बात आप करते हो तो शक्ति शिव से
- 27:28कहती है कि आपने अपने भूख के ऊपर विजय
- 27:33प्राप्त कर ली बाकी संसार के बारे में
- 27:36आपने नहीं सोचा भूत प्रेत पिशाच जो घूम
- 27:39रहे हैं तड़प रहे हैं उनके लिए आप क्या कर
- 27:42रहे हैं तब शिव जी कहते हैं कि यह तो आपने
- 27:47जो बताया वोह इंपॉर्टेंट बात है शक्ति शिव
- 27:50से कहती है कि आपने भूख के ऊपर विजय
- 27:52प्राप्त कर ली लेकिन आपके चारों तरफ जो
- 27:55भूत पिशाच बैठे हुए हैं उनको जो भूख लग
- 27:58रही है उनके बारे में आप सोच नहीं रहे हो
- 28:01तब जाक शिव जी कहते हैं कि हा मुझे कैलास
- 28:04पर्वत से काशी आना पड़ेगा क्योंकि भूत
- 28:06प्रेत वहां रहते हैं तो भगवान स्वयं ऊपर
- 28:09से नीचे आ रहे हैं विवाह कर रहे हैं
- 28:13दांपत्य जीवन स्वीकार कर रहे हैं विवाह का
- 28:16मतलब क्या है लोगों से मिलना दूसरों का
- 28:19दर्शन करना ना कि विवाह करना यह एक रूपक
- 28:22है कि भगवान भी दूसरों का दर्शन कर रहे
- 28:26हैं विवाह का मतलब है जब हम दुनिया का
- 28:29दर्शन करते हैं ना कि अहंकार में अपनी ही
- 28:33दर्शन करके अपनी बारे में सोचते रहते हैं
- 28:36यह पूरी दूसरी दुनिया है जब आप दूसरों के
- 28:39बारे में सोचते हो उनको भूख लग रही है
- 28:41उन्हें भूख लग जैसे एक मां अपने बच्चे के
- 28:44बारे में सोचती है वैसे ही पूरी दुनिया के
- 28:46बारे में जब हम सोचने लगते हैं इसे विवाह
- 28:48कहते हैं आ एकदम नई परिभाषा है आपने बहुत
- 28:52सारी रामायण पढ़ी होगी जब आप बहुत सारी
- 28:55रामायण पढ़ रहे हैं तो क्या सभी रामायण
- 28:57में कहीं ना कहीं राम और सीता के बीच
- 29:00संबंध विच्छेद किया है किया गया है कि ये
- 29:04कहीं मैनिपुलेट किया गया है देखिए जब कोई
- 29:08खाना हजम नहीं होता त उस खाने को हम
- 29:12जहरीला बोलते हैं प्रॉब्लम पाचन शक्ति में
- 29:16है खाने में नहीं कहानी तो है क्या आप
- 29:21उसका पाचन कर सकते हो व बात अलग है सब में
- 29:25पाचन शक्ति नहीं हो
- 29:28रामायण की कथा राम की कथा है शुरुआत से
- 29:32अंत तक यानी कि जब से उनका जन्म होता है
- 29:36और मृत्यु पर्यंत सरयु नदी में वह जाते
- 29:39हैं तब तक यानी कि वह स्वर्ग से आते हैं
- 29:43यज्ञ से उनका जन्म होता है कौशल्या के
- 29:45गर्भ से निकलते हैं यानी कि मृत्यु लोक
- 29:47में प्रवेश करते हैं श्री नारायण लेकिन
- 29:50मृत्यु लोक से जाने के लिए वह सरयु नदी से
- 29:53जाते निकलते हैं तो यह है रामायण लास्ट
- 29:57में सीता उनके साथ नहीं है वह अकेले
- 30:00हैं महाभारत में भागवत कथा में श्री कृष्ण
- 30:04भी अवतरित होते हैं नारायण वैकुंठ से धरती
- 30:09पर पधार हैं देवकी के गर्भ से यशोदा के घर
- 30:12में जाते हैं फिर पूरी घटना मधुबन द्वारका
- 30:17मथुरा सब होते होते कुरुक्षेत्र के बाद
- 30:20प्रवास तीर्थ में
- 30:22अकेले वो वापस वैकुंठ जाते हैं अकेले तब
- 30:28उनके बगल में ना रुक्मिणी होती है ना राधा
- 30:31होती है वह अकेले जाते हैं राम भी अकेले
- 30:34आए और अकेले गए कृष्ण भी अकेले आए और गए
- 30:40यानी कि जिंदगी में हमें भगवान को भी
- 30:42अकेला रहना पड़ता है हम और आपको भी अकेले
- 30:46मृत्यु समय कोई हमारे साथ नहीं
- 30:49होगा रामायण वियोग की कहानी है शुरुआत में
- 30:54कहानी किसकी है वाल्मीकि जी की वो फेमस
- 30:56कथा है कि याद एक पक्षी को मारता है और
- 31:00पक्षी एक मादा नर को मारता है और मादा
- 31:04रोने लगती है आपको नहीं कता रामायण की
- 31:06शुरुआत ऐसे होती है कि नर एक नर और मादा
- 31:09दो पक्षी होते हैं एक व्याध तीर चलाता है
- 31:12एक पक्षी मरता है दूसरी पक्षी रोती रहती
- 31:15है रोती रहती है आई थिंक ये जो है ये
- 31:20विलाप है ये वाल्मीकि जी देखते हैं और
- 31:23कहते हैं और वो गुस्से में एक श्राप बोल
- 31:26देते हैं व्याध को
- 31:28और वह श्राप श्लोक का रूप लेता है क्योंकि
- 31:30शोक से श्लोक निकलता है कि तुमने कर क्या
- 31:33दिया तुमने बुरा काम किया है तुमने नर और
- 31:36मादा को तुमने वियोग लाया है इनका संभोग
- 31:39हो रहा था तुमने वियोग किया है तुम्हें
- 31:41श्रापित में देता हूं तो व्याध कहता है कि
- 31:45देखो मैं अपना धर्म कर रहा हूं मैं व्याध
- 31:48हूं मेरे बच्चे भूखे मर जाएंगे मेरा खाना
- 31:51है यह पक्षी मैंने पक्षी को मारा है तो
- 31:53मेरे बच्चों से मुझे आशीर्वाद मिलेगा और
- 31:56इस दूसरे से मुझे श्राप मिलेगा तो हर
- 31:59कार्य में कोई ना कोई
- 32:01हमें आशीर्वाद देता है और कोई ना कोई हमें
- 32:05श्राप देता है आप भी हमने शाप दे दिया
- 32:07आपको लगता है मैंने बुरा काम किया है
- 32:09लेकिन बच्चों के दृष्टिकोण से देखो मैंने
- 32:11तो उनके लिए खाना लाया तो रामायण की कथा
- 32:14इससे शुरू होती कि जिंदगी में धर्म और
- 32:17धर्म संकट की बातें कि आप एक काम करते हो
- 32:20लेकिन उससे कुछ और परिणाम निकलता है अच्छे
- 32:23भी परिणाम होते हैं बुरे भी परिणाम होते
- 32:25और यह वियोग की कथा रामायण में होती कि
- 32:28राम साथ आते हैं और फिर उनका वियोग होता
- 32:31है कई कई कहते कि तुम जंगल जाओ फिर वो
- 32:35जंगल जाते हैं वहां पर रावण उनका वियोग
- 32:37करता है फिर वो वापस लौटते हैं फिर
- 32:40अयोध्या नगरी भी उनका वियोग करता है तो
- 32:43वियोग वियोग वियोग हो रहा है राम की
- 32:45जिंदगी में की भगवान को भी वियोग का अनुभव
- 32:47करना पड़ता जो उनकी सबसे प्रिय है उनसे
- 32:51दूर कैसे दुनिया उनको भगातील नहीं रहने दे
- 32:56राम और सीता का वियोग रामायण में केवल
- 32:59वियोग की कथा होती
- 33:01है सुयोग है वियोग है सुयोग है वियोग है
- 33:06तो स्वयंवर में सुयोग हुआ फिर कई कई ने
- 33:09वियोग किया फिर वो जंगल में वापस सुयोग
- 33:12हुआ फिर रावण ने वियोग किया फिर हनुमान और
- 33:16सबकी मदद से वापस सुयोग हुआ फिर अयोध्या
- 33:19नगरी की बातों से
- 33:21वियोग तो ये है कहानी क्या बात है बहुत ही
- 33:25खूबसूरत तो एक तो प्रसन्न करना देवी को
- 33:31शिव को और देवी में कौन सी देवी को सबसे
- 33:33ज्यादा आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है
- 33:36और जब देवी पूजा की जाती है तो श्रीयंत्र
- 33:39जरूरी है कि विग्रह से किया जा सकता और आज
- 33:41के समय में खास तौर से देखिए अगर ज्ञान हो
- 33:45तो ना विग्रह चाहिए ना यंत्र
- 33:48चाहिए यह तो सगुनी चीज है ज्ञान निर्गुण
- 33:52होता है तो सगुण में अटकना नहीं चाहिए
- 33:56निर्गुण में जाना चाहिए
- 33:58सगुण केवल माध्यम है जैसे किताबों में हम
- 34:00टेक्स्ट लिखते हैं लेकिन ज्ञान थोड़ी ना
- 34:03लेखन में होता है उसके अंदर जो अर्थ होता
- 34:05है अर्थ हमेशा निर्गुण होता है शब्द सगुण
- 34:09होता है तो ये शब्द है यंत्र विग्रह तो जो
- 34:13करना है जिसको जिसके मर्जी से करना है वो
- 34:15शोशा के लिए अच्छा है कुछ भी नहीं होगा तो
- 34:20भी भगवान प्रकट होते हैं ये जबरदस्ती का
- 34:22कंफ्यूजन है लोगों में देख येभी टाइम पास
- 34:25के लिए लोग सब कुछ करते हैं इतना कुछ
- 34:27मुश्किल नहीं है
- 34:28यात्रा के लिए गुरु अगर आपने एक्सप्लेन
- 34:30किया धीरे धीरे इससे मुक्ति प्राप्त करना
- 34:33सबसे बड़ी बात कि चिन्ह से प्रतिबिंब
- 34:37प्रतिमाओं से मुक्ति प्राप्त करना बचपन
- 34:41में कैसे बच्चों को खिलौना चाहिए खिलौने
- 34:44से व खेलते हैं धीरे धीरे बढ़ते हैं लेकिन
- 34:46अगर अगर एक बुढ़ा भी खिलौने से खेलने लगे
- 34:49तो हम बोलेंगे कुछ विचित्र है बड़ा नहीं
- 34:51हुआ है कि एक दिन खिलौना छोड़ना पड़ता है
- 34:54एक दिन स्कूल छोड़ना पड़ता है सब कुछ
- 34:56छोड़ना पड़ता है ही एक दिन यंत्र छोड़ना
- 34:59पड़ता है विग्रह छोड़ना पड़ता है तीर्थ
- 35:02यात्रा में यह सब छोड़ना देखिए जोड़ना
- 35:05छोड़ना जोड़ना छोड़ना जिंदगी यही है तो जब
- 35:09तक हम त्याग नहीं
- 35:12करेंगे तब तक ग्रोथ नहीं होगा वृद्धि नहीं
- 35:15होगी तो शिवजी योग की बात यानी कि त्याग
- 35:19की बात होती है और उसको बैलेंस करने के
- 35:21लिए देखिए ठीक है आपको नहीं चाहिए लेकिन
- 35:23दूसरों को चाहिए तो आपने पैसे कमा लिए
- 35:25बोले नहीं मुझे और कमाना नहीं मैं संतोष
- 35:27हूं लेकिन दुनिया को भी कमाना है तो ठीक
- 35:30है मैं बिजनेस करता हूं लेकिन ताकि लोगों
- 35:32में आमदनी बढ़े मुझे नहीं चाहिए तो फिर एक
- 35:36ये अलग दृष्टिकोण होता है तो ये जो जैसे
- 35:39देवियां जो होती है उन्हें योगिनी कहा
- 35:41जाता है अगर देवी की पूजा करें बिना शिव
- 35:44जीी के या बिना विष्णु के तो अगर योगिनी
- 35:47आपके घर में आई तो वो आपको तकलीफ देगी
- 35:50क्योंकि यानी कि श्री बिना विद्या विद्या
- 35:54का मतलब है आपको हरि हर का ज्ञान आना सबसे
- 35:58बड़ा ज्ञान हरि हर का ज्ञान होता है और
- 36:00सबसे बड़ा विद्या व है कि अहंकार को काबू
- 36:04में कैसे रखना चाहिए कि बकासुर आपको पागल
- 36:07ना कर दे जब देवी आएगी व आपको नशे जैसा
- 36:10नशा होता है आप एक पहली बार लिया तो अच्छा
- 36:13लगा दूसरी बार लि फिरर और चाहिए और चाहिए
- 36:15फिर जिंदगी को बर्बाद कर देता
- 36:18है देवियां जो हो 64 देवियां होती व अलग
- 36:21अलग प्रकार के
- 36:23नशे इसलिए उन्हें भयानक रूप दिया जाता है
- 36:25जंगल में रखे जाते हैं अगर आप 64 योगिनी
- 36:29के मंदिर देखो तो घर हमेशा गांव के बाहर
- 36:30रखा जाता है जब तक उनके बीच में आप
- 36:33शिवलिंग नहीं रखोगे तब तक वो बहुत ही
- 36:35भयानक रूप होता है तब उसे बांधा जाता है
- 36:38क्योंकि शिव त्यागी है तो भोग की वस्तु
- 36:42त्याग के साथ हम जोड़ते हैं हमेशा जैसे आप
- 36:46खाना में खट्टा मीठा होता है ज्यादा खट्टा
- 36:48खाओगे तो प्रॉब्लम हो जाएगा ज्यादा मीठा
- 36:50खाओगे तो प्रॉब्लम हो जाएगा शिव और शक्ति
- 36:52ऐसी एक भूख के लिए भोग और एक भूख से
- 36:57मुक्ति
- 36:58क्या चाहिए जिंदगी में इसका आप बोलो केवल
- 37:01मुक्ति लेकिन बच्चे को तो मुक्ति नहीं बोल
- 37:03सक खाना देना पड़ेगा तो कब मुक्ति लोगे
- 37:07किस समय मुक्ति लोगे तो वह बातें हैं जब
- 37:11मुक्ति तुम लेते हो उसके बाद लेकिन दूसरों
- 37:13के लिए भक देना पड़ेगा ना तो जैसे
- 37:15अन्नपूर्णा जो काशी में अन्नपूर्णा है वह
- 37:18खाना पकाती है उनका भंडारा है लेकिन उनके
- 37:21पति नहीं खाते हैं उनको तो भूख नहीं लगती
- 37:23वो तपस्वी है तो खाना किसके लिए पका रही
- 37:25है भक्तो के लिए पका रही ताकि एक दिन वह
- 37:29शिवजी
- 37:31बने लेकिन वो कह रहे हैं कि नहीं हम
- 37:33बकासुर आप खाते देते रहो देते रहो देते
- 37:36रहो देते रहो बकासुर हम रहेंगे तो योगिनी
- 37:41जी बोलते हैं ठीक है खाते रहो एक दिन अपने
- 37:43बच्चों को भी खाओगे एक दिन अपने हाथ पैर
- 37:45भी खाओगे और तुम्हारा सर हम लटकाए रुंड
- 37:48माल
- 37:49में तो देवी का रुंड माल जो होता है वो
- 37:53ठीक है परोस रहूंगी क्योंकि यह नशा है नशा
- 37:57तुम नहीं छूटो शिवजी बचा पाएंगे लेकिन
- 38:01हमें श्री चाहिए विद्या नहीं चाहिए शक्ति
- 38:04चाहिए शिव नहीं चाहिए मैं देख रहा हूं
- 38:07आपकी बातचीत में आप बारबार काशी चले जाते
- 38:09हैं बनारस तो मुझे एक तो समझाइए जब भी शिव
- 38:13की बात होगी काशी जाना बहुत महत्त्वपूर्ण
- 38:15हो जाता है क्योंकि उनकी कथाएं उनकी
- 38:17कहानियां और उनके बारे में वहां से बात
- 38:20शुरू होती है तो आपके शब्दों में
- 38:23बनारस देखिए बनारस एक विचार है स्थल नहीं
- 38:28लोग स्थल से अन सगुण निर्गुण की बात आ गई
- 38:31हम सगुण में स्थल को इंपॉर्टेंस देते हैं
- 38:36काशी एक विचार है दक्षिण भारत में भी काशी
- 38:38होता है आप जहां जाओ काशी होगा काशी कहीं
- 38:43जगह का नाम नहीं है जैसे कैलाश भी कहीं
- 38:46जगह नहीं है चाइना में है काश वो तो एक
- 38:49सगुण रूपी है देखिए अगर आप कैलाश पर्वत
- 38:52में जाओ तो वह पत्थर से बना हुआ है और
- 38:55उसके ऊपर बर्फ है यहां पर वनस्पति नहीं उ
- 38:58य पेड़ होते हैं ना पौधे होते कुछ नहीं
- 39:00होता काशी की तरफ आ जाओ गंगा घाटी चारों
- 39:04तरफ हरियाली खेत
- 39:07है तो यहां पर भोजन है भोग है यहां पर
- 39:11बाजार है स्मशान भूमि है वहां पर तवाफ
- 39:15रहते थे गणिका रहती थी यहां पर कलाए होती
- 39:19थी राजा रहते थे युद्ध होता था यानी कि
- 39:22सांसारिक जीवन का प्रतीक है उ प्रतीक के
- 39:26रूप में देखना
- 39:27यहां प्रतीक है ये सांसारिक जीवन का जहां
- 39:31पर शिवजी कोतवाल का काम कर रहे हैं जिसके
- 39:34पास कोई धन नहीं है वो दूसरों का धन
- 39:37प्रोटेक्ट कर रहे हैं कोतवाल का काम कर
- 39:40रहे कोई नहीं सोचता है शिवजी कोतवाली कर
- 39:43रहे हैं उनके पास क्या है वह तो भभूत लगा
- 39:45के घूम रहे हैं ना भूत के साथ लेकिन
- 39:48कोतवाली आपके क्योंकि आपको नशा है धन का
- 39:51और वो शिवजी अपनी पत्नी के साथ बैठकर पूरी
- 39:54रात हंस रहे हैं देखो ये नशे द हमारे चार
- 39:57तरफ नशेड़ी है धन की लालसा में हमारी तरफ
- 40:01देख रहे हैं एक दिन हमारा एक और रुंड माल
- 40:04लगेगा क्योंकि जो पढ़ाना चाहते हैं वो
- 40:07नहीं
- 40:09पढ़ेंगे वही चाहते हैं जो उनकी भूख मिटाने
- 40:12के दूसरों के बारे में सोच ही नहीं रहे
- 40:15परोस नहीं रहे खा रहे परोस जिंदगी में
- 40:20परोस मनुष्य ही एक प्राणी है जो परोस है
- 40:24पशु केवल अपने बच्चों को परोस है
- 40:27मनुष्य सब किसी सब को परोस सकता है
- 40:31अपॉर्चुनिटी बना सकता है तो यह जो बातें
- 40:33हैय सनातन की
- 40:35बात सबसे प्राचीन पुराण आपको कौन सा मतलब
- 40:39आपने इतना अध्ययन किया है सबसे प्राचीन
- 40:41पुराण है कौन सा क्या शिव पुराण है या
- 40:43उससे भी
- 40:46देखिए वेदों में पुराण का उल्लेख नहीं है
- 40:49नहीं उपनिषद के समय चांडोज उपनिषद में
- 40:52पहली बार पंचम वेद की बात होती है और वो
- 40:55पुराण इतिहास इतिहास पुराण शब्द इस्तेमाल
- 40:58करते साथ में लेकिन यह नहीं बोलते कौन सा
- 41:01इतिहास कौन सा पुराण क्योंकि इतिहास में
- 41:03मृत्युलोक की कहानी होती है और पुराण में
- 41:06देवलोक की कहानी बस इतना ही अंतर और कुछ
- 41:08नहीं तो इतिहास में रामायण महाभारत
- 41:11क्योंकि दोनों मृत्यु लोक में घटते हैं
- 41:13अयोध्या कुरुक्षेत्र और पुराण में तीन
- 41:16प्रकार के पुराण शिव पुराण विष्णु पुराण
- 41:19और ब्रह्म पुराण देवी पुराण बोल सकते हैं
- 41:23एक भी पुराण आप नहीं समझ पाओगे जब तक
- 41:25दूसरा नहीं पढ़ोगे वो जिगस पजल होता है ना
- 41:29एक जिगस पजल होता है अलग-अलग पीस होते हैं
- 41:31उसको जॉइन करना पड़ता है हर पीस एक दूसरे
- 41:34से कनेक्ट कनेक्टेड है तो शिव पुराण अगर
- 41:37आपको ब्रह्मा समझना है तो आपको देवी समझना
- 41:40पड़ेगा देवी समझना है तो आपको शिव समझना
- 41:43पड़ेगा शिव समझना है तो आपको विष्णु समझना
- 41:45पड़ेगा जब तक ये चार नहीं मिलेंगे ब्रह्मा
- 41:48विष्णु शिव एक तरफ और देवी एक तरफ तब तक
- 41:51आपको पुराण का ज्ञान नहीं मिलेगा लेकिन
- 41:53पुराण य अलौकिक है उसको धरती पर कैसे लेकर
- 41:56आए प्रैक्टिकल कैसे लगाएं तो रामायण
- 41:59महाभारत पढ़ना
- 42:00पड़ेगा तो जैसे वेद को समझने के लिए आपको
- 42:03तंत्र समझना पड़ेगा देखिए सब चीज कनेक्टेड
- 42:05है इंटरकनेक्टेड है अगर आपको बायोलॉजी
- 42:08पढ़ना है तो आपको जियोलॉजी भी पढ़ना
- 42:10पड़ेगा फिजिक्स पढ़ना है तो केमिस्ट्री आप
- 42:11जितने भी बड़े स्कॉलर हैं वो बोलेंगे कि
- 42:13देखो आप फिजिक्स पढ़ते-पढ़ते मुझे
- 42:16केमिस्ट्री पढ़ना पड़ता है मैथ्स पढ़ना
- 42:17पड़ता है अगर आप लिटरेचर पढ़ रहे हो तो
- 42:20धीरे-धीरे आप बोलोगे कि नहीं लिटरेचर के
- 42:22साथ मुझे मैथमेटिक्स भी पढ़ना पड़ेगा
- 42:25म्यूजिक भी पढ़ना पड़ेगा तो हर सब्जेक्ट
- 42:28जुड़ा हुआ है ये कौन सी सबसे पुरानी हमें
- 42:31पता नहीं कौन सी लिखित गई कौन सा पहला
- 42:35निकला कहते हैं कि व्यास जी ने आदि पुराण
- 42:37का निर्माण किया था लेकिन किसी को समझ में
- 42:39नहीं आया इसलिए उन्होंने फाड़ के अलग-अलग
- 42:41भाग में किसी को ब्रह्म पुराण दे दिया 18
- 42:44भाग बना दिए उसके अपने गुरुओ को शिष्यों
- 42:47को बांट दिया कि जाक ले लो जो जिसको जितना
- 42:49हजम होता है देते रहो लेकिन पूरा ज्ञान जब
- 42:52तक नहीं आएगा साथ में सुयोग होना है ये
- 42:55वियोग पहले करेंगे
- 42:5818 वियोग होता है फिर एक 18 से एक ही
- 43:01निकलेगा तो वैसे ही होता है यही जवाब
- 43:04उपनिषद में भी लागू है हमेशा जितने भी
- 43:07उपनिषद होंगे बात से घूम फिर के जब तक भूख
- 43:11नहीं समझोगे और किसका भूख मेरा भूख या
- 43:14तुम्हारा भूख देखिए भूख शब्द जब तक नहीं
- 43:17समझेंगे
- 43:19शुधा सनातन ज्ञान जीरो कुछ नहीं समझो ना
- 43:23भक्त समझोगे ना ज्ञान समझोगे कर्म योग
- 43:27यज्ञ कुछ नहीं समझोगे जब तक भूख का ज्ञान
- 43:31और फिर किसके भूख के बारे में बात कर रहे
- 43:34इसलिए मैंने जब शुरुआत की मैंने भूख से
- 43:36शुरुआत की जब तक भूख क्योंकि भूख से ही
- 43:42हम जीव और अजीव का तत्व समझ में आता है कि
- 43:46जीवन का अर्थ क्या है
- 43:48भूख जब तक वो नहीं समझ तो काम बोलते हैं
- 43:51कामाग्नि काम बोलते ही फिर लोग बहुत
- 43:54एक्साइटेड हो जाते हैं काम शास्त्र याद
- 43:56आता है लेकिन भोग की बात कर कि भोग जब
- 43:59होता है और उससे फिर वो एडिक्शन जाता है
- 44:01वो नशा आ जाता है और वो नशा में तुम फस
- 44:03जाओगे इसे हम ऋतु चक्र कहेंगे संसार
- 44:06कहेंगे बंधन
- 44:08कहेंगे अटक गए तो फिर शिव आते हैं ये सब
- 44:14बातें आपकी बातों से हर चीज एकदम सरल होता
- 44:17जा रहा है और मुझे लगता है मेरा अगला जो
- 44:20सवाल है वो भी आप बहुत सरलता से कह देंगी
- 44:21कि ऐसा है नहीं लेकिन सवाल है विष्णु
- 44:25भगवान की जब पूजा की जाती है तो बहुत नियम
- 44:27कानून है उनकी शुद्धता है उनके अलग नियम
- 44:30उपचार है और शिव सरल है जी शिव इतने सरल
- 44:34क्यों है और विष्णु इतने टफ क्यों है
- 44:37देखिए शिव की
- 44:39दुनिया व वो सन्यासी है वहां शुद्ध अशुद्ध
- 44:43की बातें
- 44:45नहीं विष्णु की दुनिया सांसारिक जीवन है
- 44:49यहां पर नियम
- 44:51कानून प्रॉपर्टी की बातें घर गृहस्ती की
- 44:55बातें देखिए रामायण और महाभारत दोनों में
- 45:00जमीन जायदाद जोरू वही बात होती है जर जमीन
- 45:02जोरू वही बात होती है रामायण महाभारत में
- 45:04शिव जी को कुछ फर्क नहीं पड़ता है बोले
- 45:07किसका वह तो जहर पीने वाले हैं वो दूध
- 45:10थोड़ी ना पीते वो जहर पीते हैं तो जो जहर
- 45:13पीता है उसे क्या समझ में आएगा दुनिया
- 45:14इसलिए हम उसे भोलेनाथ कहते
- 45:16हैं यह भोले का मतलब है कि वह आपके दायरों
- 45:21को नहीं
- 45:22समझते यह दायरा है यह पदानुक्रम है
- 45:27संस्कृति में दायरे होते
- 45:30हैं प्रकृति में ना दायरा होता है ना
- 45:33पदानुक्रम होता शिवजी प्रकृति से जुड़ और
- 45:38संस्कृति से विष्णु जुड़े इसलिए राजा के
- 45:40रूप में वह राम होते हैं और ग्वाला के रूप
- 45:43में कृष्ण यानी कि हमारे वर्ण व्यवस्था
- 45:47में भी आ जाते हैं ऊपर नीचे तो पूरी तरह
- 45:50से बोलते हैं कि देखो इसमें फसो मत ऐसे
- 45:53तुम्हें नशा देगा यह वर्ण व्यवस्था
- 45:57राजा बड़ा है राजा भी अकेला मरेगा ग्वाला
- 46:01भी अकेला मरेगा राजा भी वियोग में मरेगा
- 46:04वावाला भी वियोग में
- 46:06मरेगा तो यह मत सोचो कि राजा बनने से
- 46:09तुम्हें सुख मिलने वाला है और यह मत सोचो
- 46:11कि तुम सारथी बनने से सुख मिलेगा श्री
- 46:14कृष्ण भी युद्ध को नहीं रोक पाएंगे
- 46:17महाभारत का युद्ध श्री कृष्ण जितना पूरा
- 46:20विश्वरूप दिखाने से भी कुछ योग युद्ध नहीं
- 46:23रुका ना तो अपने आप को इतना बड़ा मत समझो
- 46:25कि तुम युद्ध रोक सको श्री कृष्ण भी ना
- 46:29युद्ध रोक पाए ना अपनी फैमिली को बचा पाए
- 46:32प्रवास तीर्थ में सब कुछ अपनी आंखों के
- 46:34सामने द्वारका को देखा बर्बाद होते
- 46:37हु राम ने राम राज्य का निर्माण किया उसी
- 46:41राज्य ने कहा कि आपके पत्नी का त्याग
- 46:44कीजिए यानी कि मृत्यु लोक की
- 46:48कहानी यह भगवान को भी भोगना पड़ता है ऐसी
- 46:53सनातन जिंदगी के बारे में सिंपल है और कुछ
- 46:57नहीं है ये है सिंपल उसका अनुभव करना
- 47:01मुश्किल स्वीकार करना हम लगते है कि नहीं
- 47:04हम इस रावण जैसा ना मैं इसको चीट कर लूंगा
- 47:07लेकिन फिर शिवजी आते हैं आपके घर में सरल
- 47:09है ना आ गए आपके घर में
- 47:12हा आपने उनकी पूछ जला दी आपने उनकी पूछ
- 47:16जला दी क्या बात
- 47:18है ज्योतिर्लिंग को समझ लेते हैं एक तो
- 47:20इनका महत्व और सबसे पहला या पुराना
- 47:23ज्योतिर्लिंग कौन सा रहा होगा यदि आपने
- 47:25कहीं पढ़ा हो तो वो हमको समझाइए
- 47:27भौगोलिक दृष्टिकोण से अगर ज्योतिर्लिंग जो
- 47:30है हमारे 12 ज्योतिर्लिंग है उनका महत्व
- 47:33बता
- 47:34पाए तो ज्योतिर्लिंग की बातें ज्यादातर
- 47:37दखन में आती है जितने भी सबसे ज्यादा
- 47:40ज्योतिर्लिंग दखन दिशा में है उत्तर में
- 47:42सेवल काशी और कैलाश पर्वत बाकी देखिए
- 47:47महाकाल उज्जैन उसके बाद सब त्रंबकेश्वर
- 47:50घृष्णेश्वर सब दखन में आता है पहले
- 47:54आर्यवर्त उत्तर भारत में होता था
- 47:57फिर धीरे-धीरे आर्यवर्त नीचे की तरफ आने
- 47:59लगा तो लोगों ने यह संप्रदाय सब दक्षिण
- 48:02भारत में जमाने लगे तब हम देखते हैं कि यह
- 48:06ज्योतिर्लिंग की बातें लोग करने लगते हैं
- 48:09तो आप देखेंगे अगर आप भौगोलिक तरीके से
- 48:11देखे कहां है ज्योतिर महाराष्ट्र की तरफ
- 48:14ज्यादा होता है बहुत ज्यादा सबसे ज्यादा
- 48:16महाराष्ट्र में है गुजरात में कुछ है मध्य
- 48:18प्रदेश में कुछ है सबसे ज्यादा क्योंकि
- 48:21यहां पर चालुक्य का राज था यहां पर होला
- 48:25राजा थे तो जब यह नई संस्कृति नई विचार जब
- 48:30आने लगते हैं तो लोगों ने कहा कि स्वयंभू
- 48:33कहां है स्वयंभू यानी कि जो अपने ऊपर
- 48:35स्वयं जागृत होने वाले मूर्तियां कहां है
- 48:38तो जो तीर्थ यात्री थे जो ऋषि गण थे उनको
- 48:42पता उन्होंने ये स्पॉट्स आइडेंटिफिकेशन
- 48:48[संगीत]
- 48:57हज जगहों पर स्तूप बने हुए यानी कि बुध सब
- 49:00जगह है जब आप शक्ति की बात करेंगे तो
- 49:02कहेंगे कि शक्ति के जो शरीर के कई भाग
- 49:06बनके शक्ति पीठ जब शव लोग कहेंगे कि सब
- 49:09जगह वह स्वयंभू रूप में शिवजी आ गए 12
- 49:12हमें याद है है हजार वैसे ही विष्णु कहां
- 49:16थे तो यह धाम थे व यात्रा उन्होंने यहां
- 49:20की यहां पर वैकुंठ जैसे तिरुपति में
- 49:22जाएंगे तो क वैकुंठ आ गए य पर धरती पर तो
- 49:25हर जगह एक जगह को एक स्थल को हम वैकुंठ
- 49:30बना देते हैं तो विश्वास से ज्योतिर्लिंग
- 49:34बनता है ना कि ज्योतिर्लिंग विश्वास बनाता
- 49:37है जहां आपका विश्वास होगा वैसे ही अपने
- 49:40आप शिव प्रकट हो जाएंगे मार्कंडेय के लिए
- 49:44प्रकट हुए थे बिल्कुल तो मार्कंडेय
- 49:53[संगीत]
- 49:56मतलब ऊपर मानसरोवर मानसरोवर से एक और चीज
- 50:00पूछना था कि कहते हैं कि आठ मानसरोवर है
- 50:03ना हमारे य आठ ऐसा कुछ है लेकिन हमको
- 50:05सिर्फ एक मानसरोवर की बात होती है बाकी
- 50:07कहां है देखिए सनातन धर्म में हमेशा
- 50:10कहेंगे कि देखिए हजार पुराण है आपको केवल
- 50:1418 दिए गए हैं हजार वेद है आपको केवल चार
- 50:17दिए गए हैं हजार शिवलिंग है आपको केवल 12
- 50:20दिए गए हैं इसका यह मतलब है कि नम्रता रखो
- 50:24सब कुछ नहीं दिया जाएगा अनंत पुराणों में
- 50:28छिपा है सनातन
- 50:30सत्य आपको दिए हैं केवल
- 50:33दो वरुण के है नयन हजार इंद्र के 100 आपके
- 50:37मेरे केवल दो दो तो दो से जितना मिलेगा
- 50:40उससे संतुष्ट र तो ये कहने का एक टेक्निक
- 50:44है हर चीज में ऐसे बताएंगे कि देखो बहुत
- 50:47महाभारत इतना बड़ा था हमारे पास इतना ही
- 50:49महाभारत मिला है रामायण इतना बड़ा था
- 50:51हमारे पास इतना ही है वेद इतना बड़ा था
- 50:53हमरे पास इतना ही है ज्योतिर्लिंग इतने थे
- 50:56अभी इतने नहीं है यह बताने का तरीका है कि
- 50:59ज्ञान कभी समाप्त नहीं
- 51:01होता तो किताब अनंत होते हैं विचार एक ही
- 51:05होता है घूम फिर के विचार एक चीज में आ
- 51:09जाएगा वो पाना थोड़ा मुश्किल है अमरनाथ और
- 51:13केदारनाथ इस पर आपका वक्तव्य
- 51:17हिमालय पर्वत से पशुपत होता है तो पहाड़
- 51:21में भगवान एकांत के लिए गए थे लेकिन अभी
- 51:24तीर्थ यात्री उन्हें इतना तंग कर रहे हैं
- 51:26देखिए शिवजी कहां क्यों गए थे अमरनाथ
- 51:29एकांत के लिए क्यों गए केदारनाथ एकांत के
- 51:32लिए तो पहले जमाने में वहां देवी देवता
- 51:35एकांत के लिए जाते थे अभी तीर्थ यात्रा ने
- 51:38इतनी भीड़ जैसे बंबई में भीड़ हो गई तो
- 51:40अभी शिवजी पता नहीं कहां चले गए एकांत के
- 51:42लिए मुझे बहुत बुरा लगता है देवताओं के
- 51:45बारे में सोच के उन्हे एकांत कहीं नहीं
- 51:47मिलता ब उन्ह वो गए एकांत में बैठ के
- 51:52संवाद करने के लिए वार्तालाप करने के लिए
- 51:55अभी वो तीर्थस्थल बन गया होटल्स बन गए
- 51:57रास्ते बन गए पहले जमाने में मुश्किल से
- 52:00एक दो यात्री पहुंच जाते थे बाकी तो मर
- 52:03जाते थे रास्ते में जैसे पांडव गए थे
- 52:05स्वर्ग की खोज करते करते सभी पांडव मर गए
- 52:07रस्ते वैसे होता था पहले आजकल हेलीकॉप्टर
- 52:11है प्लेन है ट्रेन है बुलेट ट्रेन
- 52:14है हम समझते हैं कि टूरिजम से ज्ञान
- 52:19मिलेगा टूरिजम से ज्ञान थोड़ी ना मिलता है
- 52:23तो हम टूरिजम कर रहे हैं पिकनिक कर रहे
- 52:25हैं भगवान तो सब जगह है ठीक है वो भी
- 52:29चलेगा समय के साथ हमको लगता है कि अगर हम
- 52:32सब ध्यान चले गए अपने आप से भगवान हमारे
- 52:35भीतर प्रकट हो जाएंगे वो भी सही अच्छा
- 52:39आपने भी यात्राए की होंगी कहीं पर ऐसा कोई
- 52:41दिव्य अनुभव आपको हुआ हो और आपको ऐसा लगा
- 52:44कि अगर मैं आपसे आज सवाल पूछ रहा हूं उस
- 52:46अनुभव के बारे में और शेयर करना हो तो कौन
- 52:49सा अनुभव कहां का आप शेयर करेंगे तो मैं
- 52:53बेलगांव गया था और अभी अनुभव क्या बोले तो
- 52:57एक रास्ता है तो वहां पर एक मंदिर
- 53:00है सती में रेणुका मां के मंदिर है और
- 53:04लोगों को ज्यादा पता नहीं है मैं उस
- 53:06रास्ते में जा रहा था तो मैंने ड्राइवर से
- 53:08जो बीच में फॉर नो रीजन मैंने पूछा यहां
- 53:11सति कहीं पास में है तो उसने गाड़ी रोक दी
- 53:15सर आपने अभी क्यों पूछा ऐसे नहीं जस्ट मन
- 53:18में आया यह बात तो सर अगर मैं और 10 कदम
- 53:21आगे जाता तो हाईवे में आपको 100 किलोमीटर
- 53:24के बाद ही टर्न मिलता मिता अभी देखिए यह
- 53:27जो टर्निंग है यह सौंधी वाला है हम मैंने
- 53:29देखा भी नहीं वहां बोर्ड बोड़ कुछ नहीं था
- 53:31हम तो फिर हम गए और मंदिर में बिल्कुल कोई
- 53:34नहीं था दर्शन किया उसके बाद हजारों की
- 53:37संख्या में लोग आ
- 53:38गए अब इसे दिव्य बोलोगे या हम बोलेंगे कि
- 53:42बुलावा आया
- 53:43था मैंने सौन धती में दर्शन किया रेणुका
- 53:47जी का और वह ना मेरी इष्ट देवता है मैंने
- 53:49उसके बारे में पढ़ा है लेकिन बहुत ही उनकी
- 53:53कहानी बहुत ही अलग कहानी है देसी परंपरा
- 53:55से आती है मार्गी परंपरा में नहीं है य तो
- 53:58यह देसी परंपरा की बातें लोगों को ज्यादा
- 54:00पता नहीं है लोक परंपरा है उस उस बड़गांव
- 54:04का स्थल पुराण है उड़ीसा के लोगों को कुछ
- 54:07नहीं पता होगा इसके बारे में तो आई वास
- 54:09क्वाइट
- 54:10लकी गणेश जी के सिर की कथा क्या
- 54:14है
- 54:18देखिए शिव बैरागी है योगी है उन्हें
- 54:22दुनिया से कोई लेना देना नहीं उ कुछ नहीं
- 54:24करना शक्ति कहती कि देखो आपको दुनिया में
- 54:28शामिल होना है पार्टिसिपेट करना है शिव जी
- 54:31कहते मुझे क्यों करना है मेरे तो बच्चे
- 54:33नहीं है मैं तो स्वयंभू मेरे पित्र नहीं
- 54:37है तो मुझे बच्चों की आवश्यकता नहीं है
- 54:40मुझे बच्चे नहीं चाहिए तो देवी अपने आप से
- 54:43एक बच्चा का निर्माण करती है अपने शरीर से
- 54:46जिसे विनायक नाम दिया जाता है बना नायक
- 54:49जिसका जन्म हुआ है उसे विनायक कहते और उसे
- 54:52घर अपने पास रख देती है शिव जी उसे देखते
- 54:55हैं तो उ गुस्सा आ जाता है यह कौन है तो
- 54:58पहली बार शिवजी जो इतने उदासीन है उनके
- 55:01अंदर एक भावना जागृत होती है कि मेरी यह
- 55:06शक्ति के बगल में कौन है कि वह मेरे साथ
- 55:08बात नहीं करही उसके साथ बात कर रही है
- 55:11भड़क के त्रिशूल से सर काट देते हैं फिर
- 55:14वह विलाप करती है और उसे मनाने के लिए व
- 55:18वहां हाथी का सर लगाते
- 55:20हैं बात है कि जब हम देखते हैं गणेश जी की
- 55:25मूर्ति उनके वजह से शिवजी में अलग-अलग
- 55:29भावनाओं का उत्पत्ति हुआ क्योंकि उदासीन
- 55:32जो थे एक बाबा जी थे उदासीन थे लेकिन इस
- 55:37माध्यम से उनके अंदर की
- 55:40जो फीलिंग थी उसे निकाला गया कि देवी ने
- 55:46कहा कि यह जो पत्थर का भगवान है जो किसी
- 55:50से बात नहीं करता उदासी इसके अंदर मैं भाव
- 55:54कैसे जगाऊ रस भा
- 55:57विचार कैसे उत्पत्ति करने के लिए रस
- 56:01उत्पत्ति के लिए उन्होंने विनायक का
- 56:04निर्माण किया इसलिए जब हम विनायक जी की
- 56:07पूजा करते हैं व शिव के रस से उत्पन्न हुए
- 56:12ईर्षा भाव आई गुस्सा आया करुणा आई जो हम
- 56:17नवरस कहते हैं सभी रस फिर शांति रसाई की
- 56:21सब शांत में बैठे ि जितने भी भाव क्रोध
- 56:24आया करुणा आया ये सब भावनाओं से रा गणेश
- 56:29जी का जन्म हुआ तो
- 56:32उदासीन बन गए रस भरे आहा क्या बात है तो
- 56:37यह है बात इसलिए गणेश जी हमेशा रस भरा
- 56:40होता है हम गणेश जी की बात भी करते हैं तो
- 56:44भावनाओं से भरे हुए हैं रस से भरे हुए हैं
- 56:47फूल पत्ते लगाते हैं शिव जी के साथ कुछ
- 56:50नहीं होता रुद्राक्ष बस भस
- 56:54नीरस कुछ नहीं है वहां नीरस बिल्कुल ड्राई
- 56:58बैरन कुछ नहीं है लेकिन एक बार शक्ति आ गई
- 57:02तब जाके विनायक का जन्म
- 57:07होता य योगी की जो दुनिया होती है श्रवण
- 57:10की दुनिया से यह विपरीत दांपत्य की दुनिया
- 57:14तो शिवजी योगी को भोगी बनाने का काम देवी
- 57:17कर रही है शिव को शंकर बना रहे हैं शिव
- 57:20उदासीन है शंकर हमेशा शक्ति के साथ रहेंगे
- 57:24इसलिए मंदिर में भी शिव जी की जो शिवलिंग
- 57:27होता है व हमेशा योनि के साथ होता है यानी
- 57:29कि दोनों तत्व होंगे यानी कि आप अकेले
- 57:33जिंदगी में कभी नहीं रह सकते इसका यह मतलब
- 57:35नहीं कि मैन वुमन ऐसा नहीं है अकेले
- 57:38उदासीन आप नहीं रह सकते दुनिया में आपको
- 57:41हर पेड़ को दूसरे पेड़ों के साथ रहना
- 57:43पड़ेगा आपको लोगों के साथ रहना पड़ेगा
- 57:46दुनियादारी दुनिया से भाग नहीं सकते
- 57:49आप तो क्योंकि आप काशी पहुंच गए और वहां
- 57:52पर आपने बताया था कि माता अनपूर्ण के
- 57:55स्वरूप में वहां पर जाती और मुझे ऐसा लगता
- 57:57है कि अर्धनारेश्वर की जो कथा कहीं ना
- 57:59कहीं इससे जुड़ी है तो मुझे वह कहानी
- 58:02समझाकर बताकर पूरी कर दीजिए
- 58:05बात अर्धनारेश्वर
- 58:08हमेशा शिव के रूप होती है देवी का रूप
- 58:12नहीं होता जब हम अर्धनारेश्वर कहते
- 58:15हैं तो शिव ने आधा स्त्री रूप लिया
- 58:19है देवी ने आधा पुरुष का रूप नहीं लिया
- 58:25हैका मतलब क्या कि प्रकृति हमेशा
- 58:30रहेगी विचार आते रहेंगे जाते रहेंगे ज्ञान
- 58:34आता रहेगा जाता रहेगा प्रकृति हमेशा रहेगी
- 58:37तो प्रकृति आधार
- 58:39है और अगर हमें ज्ञान प्राप्ति करना है तो
- 58:43प्रकृति को स्वीकार करना पड़ेगा सो जब
- 58:46शिवजी शक्ति को स्वीकार करते हैं तभी जाक
- 58:49पूर्ण
- 58:50होते केवल अपने आप से पुरुष जैसे आपका मन
- 58:55जब तक नहीं होगा मन
- 58:59नहीं ऐसे नहीं कि दुनिया में ऐसे मन है जो
- 59:02शरीर को ढूंढ रहे हैं जब शरीर होता है
- 59:05पात्र के अंदर उसके अंदर मन होता है हम कह
- 59:08सकते हैं कि शिवजी मन है और देवी शरीर है
- 59:12और दोनों का जब जब जुड़ जाते हैं
- 59:15अर्धनारेश्वर तो शरीर जब चला
- 59:19जाएगा तो मन कहा गया शरीर के बिना मन नहीं
- 59:25होगा उ से यह बात को समझाने के लिए सरल
- 59:28तरीके से उन्होंने अर्धनारेश्वर का रूप
- 59:30लिया है हमेशा याद रखना चाहिए कि हमेशा
- 59:32शिव का रूप है शक्ति का रूप नहीं शक्ति
- 59:36केव अर्ध शिव नहीं बनती है शिव अर्ध शक्ति
- 59:40शक्ति को स्वीकार कर रहे जो उदासीन बाबा
- 59:44पहाड़ के ऊपर बैठे हुए हैं व काशी आ रहे
- 59:47हैं और देवी को विवाह करके स्वीकार करके
- 59:50अर्धनारेश्वर बन रहे
- 59:53हैं फिर एक दिन वो वापस चले जाएंगे पहाड़
- 59:56के ऊपर वापस आएंगे वापस जाएंगे वियोग
- 1:00:00सुयोग यही जिंदगी ये हर जगह वियोग सुयोग
- 1:00:04हर जगह इसलिए इसे सनातन कहते हैं हर जगह
- 1:00:06में वही मिलेगा घूम फिर के मैं वही बातों
- 1:00:09के पास आप देखोगे मैं जितना भी अगर आप
- 1:00:11रिव्यू करेंगे रिवाइंड करेंगे वही बातें
- 1:00:13वापस आ रही है इसे इसलिए इसे सनातन कहा
- 1:00:16जाता है हर चीज घूम फिर के वो वही उस सम
- 1:00:20में आएगा जैसे सा रे ग म प धनी सा सम में
- 1:00:25आ आहा तो सनातन ऐसे सम हमेशा बात सम में
- 1:00:30आए तो मेरा सम होता है भूख वो है मेन
- 1:00:34पॉइंट घूम फिर के वो नहीं समझोगे कुछ नहीं
- 1:00:37सम तो शिव जी के त्रिपुंड तीन ऐसे एक तो
- 1:00:42भस्म उनको भस्म प्रिय है क्यों ये जो
- 1:00:45प्रतीक है वो भस्म के साथ क्यों जोड़ा
- 1:00:47जाता है त्रिपुंड क्यों है त्रिशूल जो है
- 1:00:50उसमें भी तीन वो है बेलपत्र जब चढ़ाते हैं
- 1:00:53तो भी तीन भाग है उसके त्रिनेत्र है उनके
- 1:00:56तो मुझे ये समझना था यह जो प्रतीक चिन्ह
- 1:00:59है वो हमारे आज के समय से अगर इनको जोड़
- 1:01:02के देखा जाए तो आज का जीवन दर्शन समझने के
- 1:01:04लिए कनेक्ट कैसे किया जा सकता है देखिए
- 1:01:08जिंदगी में ज्यादातर लोग हमेशा कहेंगे कि
- 1:01:10सही है गलत है सही है गलत है शिव जी उसके
- 1:01:14बीच में खड़े हैं ना कुछ सही है ना कुछ
- 1:01:17गलत है समय के हिसाब से वही बात अमृत हो
- 1:01:20सकता है समय के हिसाब से वही बात जहर हो
- 1:01:23सकता है ध्यान से देखो
- 1:01:26जज मत करो जजमेंट होता है ना ये बुरा आदमी
- 1:01:29है इस समय में इस क्षण में यह बुरा है
- 1:01:34हमेशा बुरा नहीं तो यह बात व त्रिपुंद्र
- 1:01:38से दिखा रहे कि तीसरा दृष्टिकोण होता है
- 1:01:41कि केवल वाद विवाद की दुनिया से निकल के
- 1:01:44जब आप संवाद की तरफ जाओगे तो फिर तीन
- 1:01:46निकलता है वाद विवाद
- 1:01:51संवाद
- 1:01:52वही क्योंकि हम तीसरी हमको हमेशा लगता है
- 1:01:56लड़ाई में कि मैं सही हूं तुम गलत हो तो
- 1:01:58शिव जी वहां आ के बोलते हैं कि तुम कई
- 1:02:01दूसरे तरीके से देख सकते हैं कि तुम दोनों
- 1:02:03गलत हो तुम दोनों सही हो या कोई सही नहीं
- 1:02:06कोई गलत नहीं यह जो सोचने का तरीका है वह
- 1:02:09शिव तत्व है सर सनातन आपका मतलब सबसे
- 1:02:12फेवरेट विषय है और हम सनातन पर काम कर रहे
- 1:02:15हैं तिलक सनातन पर काम करता है हम जिस तरह
- 1:02:17के वीडियो वीडियो के द्वारा हम ये लोगों
- 1:02:20को रोचक जानकारी दे रहे हैं एक तो तिलक
- 1:02:23आपने जितना देखा समझा है हम कैसा काम कर
- 1:02:26रहे हैं आपको कैसा लगता है नहीं आ थ सनातन
- 1:02:28का ज्ञान दुनिया भर में पहुंचना चाहिए और
- 1:02:31यह एक माध्यम है और यह माध्यम
- 1:02:34से लोगों में रुचि जाएगी जागृत होगी
- 1:02:38जिज्ञासा होगा और जब तक जिज्ञासा नहीं
- 1:02:40होगी तब तक सरस्वती नहीं आएगी तो शायद
- 1:02:43तिलक से लोगों के घर में सरस्वती आएगी यही
- 1:02:46मेरी आच्छा है
- 1:02:49[संगीत]
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This page contains the full transcript of श्री विद्या उपासना और रामायण की रहस्यमय कथाएँ | संजय मिश्रा के साथ देवदत्त पटनायक | Tilak Varta 🙏 by Tilak, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 9,841 words across 1,220 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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