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श्री विद्या उपासना और रामायण की रहस्यमय कथाएँ | संजय मिश्रा के साथ देवदत्त पटनायक | Tilak Varta 🙏 — Transcript

by Tilak · 9,841 words · 1,220 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00हमारी संस्कृति हमारे संस्कार सदा रहे
  2. 0:03हमारे साथ सब्सक्राइब करें
  3. 0:07तिलक भूख को अगर समझ लिया तो सनातन समझ
  4. 0:10में आया हां क्योंकि सनातन का मतलब है भूख
  5. 0:13का ज्ञान सरल है इतना मुश्किल नहीं राम
  6. 0:16में कभी आक्रमण नहीं होता वो हमेशा शांति
  7. 0:18रहता है उनके चेहरे में कभी क्रूरता नहीं
  8. 0:20होगी कभी गुस्सा नहीं होगा क्योंकि वो
  9. 0:23सनातन के स्वरूप है ो मैं बड़ी-बड़ी बातें
  10. 0:25बोलता हूं तो लोग बहुत इंप्रेस हो जाते
  11. 0:27हैं लेकिन इंप्रेस नहीं करना है मुझे समझा
  12. 0:31बच्चे को भी समझ में आ जाए श्री विद्या
  13. 0:33उपासना और श्री विद्या है क्या जहां शिव
  14. 0:36और शक्ति का यूनियन होता है और श्री यंत्र
  15. 0:40इस यूनियन को एक ज्योमेटिक फॉर्म से समझा
  16. 0:43रहे हैं इससे उत्पत्ति क्या होती है दो
  17. 0:46चीज उत्पत्ति होती है लक्ष्मी की और
  18. 0:48सरस्वती की विद्या मुश्किल सरस्वती बहुत
  19. 0:51ही मुश्किल है वो सरस है सरस यानी कि
  20. 0:55फ्लोइंग है पानी जैसा है आपने इतना अध्ययन
  21. 0:57किया है सबसे प्राचीन पुराण है कौन सा
  22. 1:00वेदों में पुराण का उल्लेख नहीं
  23. 1:02है एक भी पुराण आप नहीं समझ पाओगे जब तक
  24. 1:05दूसरा नहीं पढ़ो देखिए शिवजी की कहानी
  25. 1:07क्या है वह कामां का है उन्होंने कामदेव
  26. 1:11को अपनी तीसरी आंख से जला दिया था भस्म कर
  27. 1:15दिया था और भभूत अपने शरीर पर उन्होंने
  28. 1:17लगा दिया श्री कृष्ण भी ना युद्ध रोक पाए
  29. 1:20ना अपने फैमिली को बचा पाए प्रवास तीर्थ
  30. 1:23में सब कुछ अपने आंखों के सामने द्वारका
  31. 1:25को देखा बर्बाद होते हुए
  32. 1:30[संगीत]
  33. 1:32नमस्कार मैं हूं संजय मिश्रा और आप देख
  34. 1:34रहे हैं तिलक पत्रिका तिलक पत्रिका के
  35. 1:36विशेष कार्यक्रम तिलक संवाद में आज हमारे
  36. 1:38विशेष अतिथि हैं जानेमाने अख्यान शास्त्री
  37. 1:41डॉक्टर देवदत्त पटनायक साहब आपका बहुत
  38. 1:44बहुत स्वागत है सर नमस्ते नमस्ते सर
  39. 1:46नमस्ते तो क्योंकि आपका शिव में बड़ा
  40. 1:49अध्ययन है तो सबसे पहले तो समझना है कि
  41. 1:52शिव तत्व है क्या लेकिन उससे ठीक पहले
  42. 1:55क्योंकि कहते हैं शक्ति के बिना शिव भी
  43. 1:58नहीं है हमको शक्ति के बारे में समझना है
  44. 2:02आपसे आपके शब्दों में श्री विद्या उपासना
  45. 2:05और श्री विद्या है क्या देखिए आपने बहुत
  46. 2:08बड़े-बड़े शब्द इस्तेमाल किए हैं शिव
  47. 2:11शक्ति श्री विद्या तो ये बहुत बड़े-बड़े
  48. 2:14शब्द है हमेशा सरलता से जाना चाहिए जब हम
  49. 2:18सनातन की बात करते हैं तो सरलता से शुरुआत
  50. 2:20हो एक अजीव वस्तु और जीव वस्तु में फर्क
  51. 2:24क्या है अजीव पत्थर होता है उसम जीव नहीं
  52. 2:27है वृक्ष पेड़ में जीव होता है तो अगर
  53. 2:32कहीं पर भी हरा भरा पेड़ दिख लिया तो आप
  54. 2:35पूछना है कि वो हम उसे जीवित क्यों कहते
  55. 2:38हैं हम इसलिए जीवित कहते हैं क्योंकि उसे
  56. 2:41भूख लगती है और क्योंकि उसे भूख लगती है
  57. 2:44उसके पत्ते निकल आते हैं और वह सूरज की
  58. 2:47तरफ जा रही है उसके य रूट्स निकलते हैं और
  59. 2:51वह कहीं पानी के तरफ जा रहे हैं तो इससे
  60. 2:55पता चलता है कि यह जीवित है कोई पशु को
  61. 2:58हमने देख लिया वह चरने जा रहा है या शिकार
  62. 3:02करने जा रहा है हम रोज सुबह उठते हैं हम
  63. 3:06तो लेटे रह सकते हैं लेकिन फिर याद रहता
  64. 3:08है कि घर का घर चलाना है इसलिए जॉब करना
  65. 3:11है बिजनेस करना है यानी कि जहां जीव होता
  66. 3:15है वहां भूख होती है यह याद रखना है जब हम
  67. 3:20आत्म ज्ञान कहते हैं यानी कि भूख का ज्ञान
  68. 3:24और भूख से ही सब कुछ चलता
  69. 3:27है तो भूख को मिटाने के लिए हमें भो भोग
  70. 3:33चाहिए तो भोग को हम शक्ति कहते लेकिन क्या
  71. 3:37हम भूख पर विजय प्राप्त कर सकते हैं उसे
  72. 3:41हम
  73. 3:42शिव तो शिव और शक्ति जब तक आप भूख नहीं
  74. 3:46समझोगे तब तक ना शिव समझ में आएगा ना
  75. 3:50शक्ति समझ में
  76. 3:51आएगा भूख किसके लिए होती है आप कहोगी कि
  77. 3:55मुझे जिंदगी में पैसे चाहिए पावर चाहिए
  78. 4:01फेम
  79. 4:02चाहिए ऐश्वर्य चाहिए यानी कि श्री
  80. 4:07चाहिए लेकिन दूसरे प्रकार का भूख होता है
  81. 4:11जिज्ञासा होती है मुझे ज्ञान चाहिए मुझे
  82. 4:13समझना है दुनिया चलती कैसे
  83. 4:15है दुनिया का यह विज्ञान का मतलब क्या है
  84. 4:19साइंस का मतलब क्या है दुनिया में तत्व
  85. 4:22क्या है एक क्यूरियोसिटी होती है हम
  86. 4:27इन्वेंशन करते हैं डिस्कवरी करते हैं
  87. 4:29टेक्नोलॉजी की तरफ जाते हैं यानी कि
  88. 4:31विद्या चाहिए तो भूख दो प्रकार के होते एक
  89. 4:34श्री के लिए एक विद्या के लिए लेकिन चाहिए
  90. 4:38हमें भोग व है शक्ति लेकिन अगर भूख से
  91. 4:42पूरी मुक्ति प्राप्त करनी है तो आपको शिव
  92. 4:44की तरफ जाना है बस य एक चीज भूख अगर समझ
  93. 4:48लिया तो सनातन समझ में आया हा क्योंकि
  94. 4:51सनातन का मतलब है भूख का ज्ञान तो भूख हुआ
  95. 4:54तो वो भोग की तरफ दौड़ता है तो वो भोगी बन
  96. 4:58गया वह भूख को मिटाना चाहता है तो वह योगी
  97. 5:01बन गया बस उतना ही सरल है इतना मुश्किल
  98. 5:05नहीं है श्री विद्या उपासना गोपनी क्यों
  99. 5:07होती है देखिए जब ज्ञान होता है तो ज्ञान
  100. 5:12दो प्रकार के होते हैं एक जिससे लोगों का
  101. 5:16उद्धार होता
  102. 5:17है और
  103. 5:20एक जो आपको बर्बाद कर सकता
  104. 5:24है जो क्या होता है जबी कोई भी शक्ति होती
  105. 5:27जो भी नॉलेज होता है देखिए घर में आपके घर
  106. 5:31में अगर मैं आपको सिखा दूं पेड़ पौधे में
  107. 5:35क्या ज्ञान है तो आप उसे औषधि भी बना सकते
  108. 5:38हैं जहर भी बना सकते दोनों का ज्ञान तो हर
  109. 5:42ज्ञान गुप्त होता है हम उसी को देते हैं
  110. 5:45ज्ञान जो इसे संभाल पाए और कुछ नहीं है
  111. 5:47उसम कि आप में वह क्षमता है उसे संभालने
  112. 5:51की कि नहीं जैसे अगर आप रामायण देखो तो
  113. 5:56रामायण में वेदाचार्य
  114. 5:58संस्कृत ज्ञानी कौन है बताइए बात ही सं
  115. 6:02संस्कृत के ज्ञानी है चारों वेद के ज्ञान
  116. 6:05है आयुर्वेद का ज्ञान है ज्योतिष शास्त्र
  117. 6:08का ज्ञान है कौन है यह पात्र रामायण में
  118. 6:11हनुमान जी रावण भूल गए अरे हां मतलब रावण
  119. 6:15तो महा ज्ञानी सही बात है लेकिन रावण के
  120. 6:19पास भी श्री विद्या है हनुमान के पास भी
  121. 6:22श्री विद्या है लेकिन एक खलनायक है और एक
  122. 6:26भगवान है दोनों में अंतर क्या हुआ
  123. 6:30दोनों के पास ज्ञान है दोनों संस्कृत
  124. 6:32जानते हैं दोनों वेद जानते हैं दोनों
  125. 6:35पुराण जानते हैं दोनों शास्त्र जानते हैं
  126. 6:38अंतर क्या हुआ दोनों में एक दुरुपयोग कर
  127. 6:41रहे हैं एक यह पूरी जो ज्ञान है व अपना
  128. 6:45भूख नहीं मिटा
  129. 6:46पाया उसका भूख जो है बढ़ता गया बढ़ता गया
  130. 6:50जब भूख बढ़ती है तो अहंकार निर्माण करता
  131. 6:53है जो भूख पर विजय प्राप्त करता है वो
  132. 6:56हनुमान की यात्रा करता है तो बस रामायण की
  133. 6:59कथा अगर सुने गौर से सुने यह लोग भूल जाते
  134. 7:03हैं कि संस्कृत बोलने वाले केवल दो है वहा
  135. 7:06एक हनुमान है जो वन में रहता है जो कुछ
  136. 7:10नहीं चाहता अगर हम पूछे कि हनुमान की
  137. 7:11महत्वाकांक्षा क्या है आपको कुछ
  138. 7:13महत्वाकांक्षा नहीं मिलेगी व सुखी है जंगल
  139. 7:17में वह चाहते तो सुग्रीव को भी पटक के
  140. 7:19किष्किंदा के राजा बन जाते रावण को पटक के
  141. 7:23रावण लंका के राजा बन सकते थे कुछ नहीं कर
  142. 7:26रहे वो सेनापति नहीं है कुछ नहीं बस वही
  143. 7:30पर साधारण रूप में लेकिन हम कहते हैं कि
  144. 7:33नवनिधि है उनके पास अष्ट सिद्धि है उनके
  145. 7:36पास लेन कर क्या रहे हैं जंगल में कदी वन
  146. 7:39में केला खा रहे हैं सुखी है कथा सुन रहे
  147. 7:43हैं कथा सुन रहे हैं तो वह है हनुमान तो
  148. 7:46जब लोग कहते हैं मैं श्री विद्या का ज्ञान
  149. 7:48करता तो हमेशा यह देखता हं यह रावण की तरफ
  150. 7:50जा रहा है हनुमान की तरफ जा रहा है
  151. 7:53ज्यादातर रावण की तरफ जा रहे है क्योंकि
  152. 7:56वह अहंकार इतनी मायावी है ऐसे आपको पकड़
  153. 7:59लेगा कि आप अपने आप को समझाने लग नहीं
  154. 8:01नहीं मैं कुछ बड़ा काम कर रहा हूं इसलिए
  155. 8:05बहुत जो गुरु जो होते हैं वह इतने अहंकार
  156. 8:07से बात करते हैं आजकल ट में बहुत गुरु बात
  157. 8:09करते हैं कि हमको गु गणता से घमंड आता है
  158. 8:15कि मेरे पास कुछ है जो तुम्हारे पास नहीं
  159. 8:17है मेरे पास वह मोती है मेरे पास व
  160. 8:19कोहीनूर है मेरे पास वह चीज ज्ञान है जो
  161. 8:22तुम्हारे पास नहीं है ये क्या होता है
  162. 8:24इससे एक असमानता आ जाती है कि मैं ज्ञानी
  163. 8:28तुम जानी यह जो असमानता है यह पदानुक्रम
  164. 8:33जो बनता है हायरा की बनता है यह अहंकार के
  165. 8:36चिन्ह तो कोई भी बातों में अगर आप देख लो
  166. 8:40कि यह आ रहा है कोई भी गुरु अपने आप को
  167. 8:43मठाधीश बनाकर ऊपर बैठने लगता है तो फिर
  168. 8:46रावण की याद रखनी चाहिए कि हनुमान अपनी
  169. 8:48पूंछ से उसके ऊपर बैठ
  170. 8:51गया मठाधीश मत बनो जो वेद का ज्ञान होता
  171. 8:56है वो नम्रता लाता है शांति लाता है जहा
  172. 8:59जाएगा शांति इसलिए हमेशा यज्ञ के पश्चात
  173. 9:02हम शांति शांति
  174. 9:03शांति जब शांति नहीं लाएगा व वेद नहीं है
  175. 9:08वह श्री विद्या नहीं है यह पूजा यह जो
  176. 9:12यंत्र होते हैं उनका काम केवल एक है जहां
  177. 9:16जाए समृद्धि लाएगी शांति लाएगी नहीं लाई
  178. 9:20तो रावण की तरफ आप जा रहे हो ना कि
  179. 9:24हनुमान आपने कहा हनुमान जी पूस से बता
  180. 9:28देते हैं और सिखा क्या शक्ति है एक तो
  181. 9:31हनुमान जी का जो स्वरूप हम पढ़ते आए हैं
  182. 9:34क्या वैसा ही हनुमान जी का स्वरूप था कि
  183. 9:36कुछ अलग था मतलब व सच में वानर स्वरूप थे
  184. 9:39या हमने पढ़ा पढ़ते पढ़ते और कहा गया कि
  185. 9:42वन में रहते थे व वानर है यह थोड़ा सा मैं
  186. 9:44आपसे समझना देखिए रामायण अभी हम जब कहते
  187. 9:48हैं कि रावण का 10 सर है 20 हाथ है क्या
  188. 9:52सेसे रूपक के हिसाब से ले या इसे यथार्थ
  189. 9:57माने तो य
  190. 9:59परर निर्भर है कुछ लोगों को रूपक पसंद है
  191. 10:02लेकिन अगर आप पिक्चर में बना दोगे तो
  192. 10:04अच्छा लगता है स्टाइल लगता है उसके
  193. 10:06बिल्कुल विपरीत हम क्या बताएंगे
  194. 10:09एक एक तरफ आपने एक रावण को जन्म दिया है
  195. 10:12जिसके 10 सर है 20 हाथ है पुष्पक विमान
  196. 10:15में बैठा है सोने की नगरी में बैठा है
  197. 10:18उसको विपरीत अगर आप मनुष्य दिखाएंगे तो
  198. 10:20राम जी तो खड़े हैं वहा पर लेकिन जब
  199. 10:22वाल्मीकि जी कथा लिख रहे हैं वह मनुष्य के
  200. 10:27जैसे लेकिन मनुष्य से से थोड़ा नीचा
  201. 10:30दिखाना एक ऐसे जंतु को दिखाना चाहते हैं
  202. 10:33लेकिन देखने में बिल्कुल पशु लगता
  203. 10:37है लेकिन ज्ञान देवता से ज्यादा
  204. 10:41है जैसे आप फिल्म इंडस्ट्री में हम एक
  205. 10:44पात्र बनाते हैं तो एक पात्र उन्होंने
  206. 10:46बनाया कि दिखता है बिल्कुल वानर जैसा इधर
  207. 10:49उधर कूद रहा है लेकिन जब मुंह खोलता है तो
  208. 10:53आपको लगता है बाप रे कौन है ये सब ज्ञान
  209. 10:56है उसके पास लेकिन एकदम
  210. 10:59मनुष्य से भी नीचे चला जा रहा है एकदम पशु
  211. 11:03की भांति व्यवहार कर रहा है लेकिन है नहीं
  212. 11:05पशु देखिए जब रावण शिवजी को लाना चाहते थे
  213. 11:10श्री लंका को बल
  214. 11:12जबरदस्ती लंका को उठा के तो शिवजी ने उसे
  215. 11:16कहा था कि एक दिन मैं स्वयं तुम्हारे यहां
  216. 11:20आऊंगा और तुम मेरा निरादर करोगे तो हनुमान
  217. 11:25जी आए लेकिन इसने क्या किया पूंछ जला दी
  218. 11:30तो भगवान जब स्वयं आते हैं तो अहंकार आपको
  219. 11:33अंधा बना देता है और आपको देखता नहीं है
  220. 11:36कि ईश्वर आए हैं और बिल्कुल शिवजी जैसा
  221. 11:39कोई ईगो नहीं कुछ नहीं फल चुराते हैं उसके
  222. 11:44आंगन से ना वो उसके जो गार्डन से तो कहता
  223. 11:48है कि तुमने रावण के आंगन से चोरी किया है
  224. 11:50फल तो बोलता है कि तुमने किसी दूसरे की
  225. 11:52पत्नी की चोरी किया वो बड़ा चोर है और
  226. 11:55मुझे चोर बोल रहे हो मैं तो पशु हूं पशु
  227. 11:58का चोर पशु चोर नहीं बन सकता तुमने यह
  228. 12:01दायरा बनाया है कि यह मेरा है तुम्हारा है
  229. 12:04तो संस्कृति शब्द में मेरा तेरा आता है
  230. 12:07प्रकृति में नहीं यह बड़ी बड़ी बातें हैं
  231. 12:10रामायण में सरल तरीके से बताया है
  232. 12:13वाल्मीकि जी ने इसलिए उसे पंचम वेद कहा
  233. 12:15जाता है तो लेकिन हम क्या करते हैं हम
  234. 12:17केवल वो ड्रामा देखते हैं एक्शन देखते हैं
  235. 12:19धनुष देखते हैं यह जो छोटी छोटी बातें
  236. 12:23होती है सूक्ष्म बातें होती है इसको कोई
  237. 12:26समझता नहीं जब वो रामायण का पाठ होता है
  238. 12:30तो लोगों को ड्रामा पसंद आता है ड्रामा
  239. 12:32थोड़ी ना समझना है रावण समझना है रावण का
  240. 12:35अर्थ क्या है वो रावण हमारी भीतर है
  241. 12:37हनुमान भी हमारे भीतर है राम जी भी हमारे
  242. 12:40भीतर है लक्ष्मण भी हमारे भीतर है
  243. 12:42किष्किंदा भी हमारे भीतर है पूरी कहानी जब
  244. 12:44समझते हैं तब जाके सनातन का ज्ञान आता है
  245. 12:48हर समय हर दशक में या सदी में जो उस समय
  246. 12:54के लोग रहे होंगे जागरूक लोग रहे होंगे
  247. 12:56हमेशा से श्री विद्या की उपासना चाहते
  248. 12:58होंगे क्योंकि उनको भोग चाहिए होगा और
  249. 13:01मुझे लगता है ये इस समय का सब वो टाइम है
  250. 13:04जब हर कोई चाहता है तो जो आज का जो आम
  251. 13:07व्यक्ति है क्या हर व्यक्ति विद्या की
  252. 13:09उपासना कर सकता है देखिए श्री विद्या का
  253. 13:13यंत्र ठीक से देखना है यहां पे त्रिकोण
  254. 13:17होता है
  255. 13:18हम उत्तर की दिशा में दक्षिण की दिशा में
  256. 13:21त्रिकोण होता है भूपर होता है वो तांत्रिक
  257. 13:25यंत्र होता है लेकिन ये क्या है जैसे एक
  258. 13:26सिग्नल होता है आजकल हम इमोजी भेजते हैं
  259. 13:28ना लोगों को
  260. 13:30यंत्र एक इमोजी है बस सनातन इमोजी इससे
  261. 13:34आपको समझ में आएगा एक पिक्चर देखने से अगर
  262. 13:36मुझे देवी दिखाना है तो मैं एक त्रिकोण
  263. 13:38बनाऊंगा दक्षिण की दिशा में अगर मुझे
  264. 13:41शिवजी दिखाना है तो मैं एक त्रिकोण
  265. 13:43बनाऊंगा उत्तर की दिशा में तो जैसे कैलाश
  266. 13:46पर्वत त्रिकोण है उत्तर की दिशा में जाता
  267. 13:48है ध्रुव के तारा की तरफ अगर आप पानी को
  268. 13:53ऐसे डालेंगे पानी एक ग्लास से अगर मैंने
  269. 13:55पानी डाला तो आप देखोगे त्रिकोण का आकार
  270. 13:56बन जाता है नीचे की तरफ जा रहा है
  271. 14:00तो यह सब यंत्र है अगर आपने विग्रह देखा
  272. 14:03विग्रह यानी कि मूर्ति देखी श्री यंत्र
  273. 14:06श्री विद्या की तो वह कामाक्षी देवी के
  274. 14:08रूप लेती है कामाक्ष्या रूप लेती है हाथ
  275. 14:11में क्या है उनके हाथ में एक धनुष है
  276. 14:16लेकिन यह शुगर केन से बनाया
  277. 14:20है तो शुगर केन को हिंदी में क्या बोलेंगे
  278. 14:23गन्ना गन्ने का गन्ने का वो होता है मराठी
  279. 14:27में इ बोलते है तो मुझे मराठी
  280. 14:30इवाक शब्द यहां से आता है तो इक्षु यानी
  281. 14:34कि गन्ना अच्छा गन्ने से वो शब्द आया था
  282. 14:37भारत में वो साउथ ईस्ट एशिया से इंडिया
  283. 14:39आया था और भारत में हम गन्ना बनाते थे तो
  284. 14:41इवाक को बहुत इंपोर्टेंस दिया गया मीठा
  285. 14:43निकलता है वहां से अभी व एक हाथ में गन्ना
  286. 14:47है दूसरे हाथ में फूल है और यह कामदेव के
  287. 14:51चिन्ह है तो देखिए शिवजी की कहानी क्या है
  288. 14:55वो कामात का है उन्होंने कामदेव को अपनी
  289. 14:59ससरी आंख से जला दिया था भस्म कर दिया था
  290. 15:02और भभूत अपने शरीर पर उन्होंने लगा दिया
  291. 15:05था और वह कैलाश पर्वत में चले जाते हैं और
  292. 15:09बैठ जाते हैं ध्यान करने त शक्ति आती है
  293. 15:13लेकिन उनके हाथ में वही चिन्ह है जो काम
  294. 15:16के साथ जोड़ा गया है गन्ना फूल
  295. 15:22और पैरेट होता है तो सुक तो सुक होगा तो
  296. 15:29तोता जो होता है तो वो पैरेट है यह तीन
  297. 15:31चिन्ह कामदेव के चिन्ह है वही चिन्ह को
  298. 15:36देवी अपनाती है और स्त्री के रूप में जाकर
  299. 15:39शिव के पास जाकर कहती है कि कामां तक बनने
  300. 15:43से भूख को मिटाने से आप दुनिया को बर्बाद
  301. 15:46कर दोगे क्योंकि जीव अजीव बन जाता है जीव
  302. 15:51के लिए भोग चाहिए आपको भोग की दुनिया में
  303. 15:55आना पड़ेगा और वह कामेश्वरी है और शिव जी
  304. 15:59को कामेश्वर बनाते हैं और उनका विवाह होता
  305. 16:02है इसलिए उसे कल्याण कहते हैं जहां शिव और
  306. 16:07शक्ति का यूनियन होता है और श्री यंत्र इस
  307. 16:11यूनियन को एक ज्योमेट्री फॉर्म से समझा
  308. 16:14रहे हैं वही यूनियन को इससे उत्पत्ति क्या
  309. 16:17होती है दो चीज उत्पत्ति होती है लक्ष्मी
  310. 16:20की और सरस्वती की लक्ष्मी को हम श्री
  311. 16:22कहेंगे सरस्वती को हम विद्या कहेंगे तो
  312. 16:25इसका उपासना किसके लिए कि ज्ञान भी हो और
  313. 16:29धन भी हर आदमी को धन चाहिए ज्ञान कितने
  314. 16:33लोगों को चाहिए बताइए ज्ञान कोई नहीं
  315. 16:37इग्राम देखते हैं लोग देखते हैं उनको
  316. 16:39टीआरपी रेटिंग चाहिए ज्ञान की बातें किसी
  317. 16:42को नहीं सुनना है सबको धन चाहिए धन चाहिए
  318. 16:45टाइम पास चाहिए एंटरटेनमेंट भोग की वस्तु
  319. 16:48चाहिए हम कभी ज्ञान को भोग नहीं समझते नाच
  320. 16:52गाना पसंद है लेकिन वो जो कथा के अंदर जो
  321. 16:58रहस्य होता है यह सीखने की कोई इच्छा नहीं
  322. 17:02मैं कितने फिल्म इंडस्ट्री में तो मुझे
  323. 17:03बुलाते रहते हैं हमको सीरियल बनाना है
  324. 17:05रामायण के ऊपर लेकिन ज्यादातर खर्चा किस
  325. 17:08पर होगा सीजीआई के ऊपर कि वो तीर्थ मैं
  326. 17:10बोल रहा हूं डायलॉग ठीक नहीं है सर इससे
  327. 17:13टीआरपी रेटिंग नहीं
  328. 17:15चलेगा तो उनको धन से मतलब है तो मैं हमेशा
  329. 17:18कहता हूं लोगों को कि टीवी वाले रामायण मत
  330. 17:21देखो ठीक है अभी जो फेमस रामानंद सागर की
  331. 17:24रामायण है वहां पर अगर आप ध्यान देखे वहां
  332. 17:27पर तुलसीदास जी के दोहे बताए गए हैं उससे
  333. 17:31हमें प्यारा जब हम बोल रहे हैं ना वो क्या
  334. 17:34मंगल भवन तो ये लाइन किसने लिखा है
  335. 17:37तुलसीदास जी ने हम उससे प्रेरित हो रहे
  336. 17:41हैं तो वो 400 500 साल पहले लिखी गई भक्ति
  337. 17:45से लिखी गई जो काव्य है उससे हम प्रेरित
  338. 17:48हो रहे हैं आजकल लेखकों को बहुत मुश्किल
  339. 17:50होता है क्योंकि वो प्रोडक्शन हाउस का
  340. 17:52डिमांड होता है कि हिट चलनी चाहिए हीरो
  341. 17:55बनना चाहिए हमें लॉर्ड ऑफ द रिंग्स बनाना
  342. 17:57है हमें हैरी पॉटर बनाना है ज्ञान विद्या
  343. 18:00कौन सोच रहा है श्री सोच रहे हैं विद्या
  344. 18:03अगर होगी तो शांत करेगा उत्तेजित नहीं
  345. 18:06करेगा अगर उत्तेजित नहीं करेगा तो फिर
  346. 18:08बॉक्स ऑफिस कैसे चलेगी बॉक्स ऑफिस हमको तो
  347. 18:11योद्धा
  348. 18:13चाहिए तो हम राम को भी आक्रमक रूप में
  349. 18:16दिखाएंगे राम में कभी आक्रमण नहीं होता व
  350. 18:19हमेशा शांति रहता है उनके चेहरे में कभी
  351. 18:21क्रूरता नहीं होगी कभी गुस्सा नहीं होगा
  352. 18:25क्योंकि व सनातन के स्वरूप है जो भगवान के
  353. 18:28स्वरूप वो कभी गुस्सा क्यों आएगा वो सब
  354. 18:30बच्चों के साथ डील कर रहे हैं क्या बात है
  355. 18:32महाशक्तिशाली लेकिन शांत चूंकि
  356. 18:35महाशक्तिशाली इसलिए
  357. 18:38शांत जो शक्तिशाली के चेहरे में आक्रमण
  358. 18:41आएगा वोह थोड़ी ना शक्तिशाली है वो तो
  359. 18:45मूर्ख है इसलिए असुरों का चेहरा हमेशा
  360. 18:48गुस्सा में भरा होता है देवताओं के चेहरे
  361. 18:51में हमेशा शांत होता है आप एलिफेंटा केव्स
  362. 18:54में जाइए वहां पर रुद्र रूप देखेंगे शिव
  363. 18:57जी का बड़ा रुद्र रूप का मूर्ति है और हाथ
  364. 18:59में ऐसे हाथ करके ललिता रूप में अपनी
  365. 19:02पत्नी को कंफर्ट कर रहे हैं टेंशन मत लो
  366. 19:05यह मेरा
  367. 19:07लीला यह जैसे थिएटर में नाच आप हीरो विलन
  368. 19:11का रोल करते हो लेकिन सचमुच में गुस्सा
  369. 19:12थोड़ी ना आता है आप थिएटर में किसी को मार
  370. 19:15रहे हो बॉक्सिंग कर रहे हो लेकिन अंदर तो
  371. 19:17शांत है ना वो तो एक्टिंग है तो भगवान भी
  372. 19:19एक्टिंग कर रहे हैं ताकि बच्चे समझ
  373. 19:23जाए तो वो जब राम रावण से बात कर रहे हैं
  374. 19:26तो रावण तो बच्चा है वो शिवजी को भी नहीं
  375. 19:29पहचान पाता है तो राम एक बच्चे से डील कर
  376. 19:33रहे हैं हमने उसे बहुत बड़ा माना है अभी
  377. 19:36यह सब बातें हमारी टीवी सीरियल में बता
  378. 19:39नहीं सकते देखिए राम लीला कर रहे हैं
  379. 19:43अवतरित हुए हैं ताकि रावण का उद्धार हो
  380. 19:47अहल्या का उद्धार हो शी गौतम ऋषि अपनी
  381. 19:51पत्नी को क्षमा नहीं कर सक रहे राम बोल
  382. 19:54रहे अरे छोटी छोटी बातों में इतनी बड़ी
  383. 19:56गुस्सा क्षमा करो लोगों को
  384. 19:59को क्षमा नहीं करोगे तो
  385. 20:02तुम दुनिया कैसे
  386. 20:04चलाओगे राम राज्य बनाते हैं लोगों को
  387. 20:08लेकिन लोग क्या करते हैं सीता के चरित्र
  388. 20:10को लेकर बात करते हैं देखो तुमको श्री
  389. 20:12दिया गया है राम राज्य दिया गया है
  390. 20:15तुम्हें सुखी गेटट्यूब होना चाहिए ना
  391. 20:17कृतज्ञता होनी चाहिए कृतज्ञता नहीं है तुम
  392. 20:21राजा की पत्नी के ऊपर बातें कर रहे हो
  393. 20:25मनुष्य ऐसा है क्योंकि विद्या नहीं है
  394. 20:27केवल हम श्री के पीछे भाग रहे अगर
  395. 20:30कृतज्ञता होती तो वह राम सियाराम को देखकर
  396. 20:34सुखी रहते राम राज्य में लेकिन लेही
  397. 20:36उन्होंने भी राम और सीता को सेपरेट कर
  398. 20:40दिया तो यह सब बातें सनातन वाल्मीकि जी
  399. 20:44बोल नहीं रहे बोल रहे समझने वाले को इशारा
  400. 20:46काफी मैं कथा
  401. 20:48बताऊंगा कथा का विश्लेषण हम नहीं करेंगे
  402. 20:52आख्यान होगा भाष्य नहीं भाष्य आपको करना
  403. 20:57है तो तो ये सब जो बातें है क्योंकि मैं
  404. 21:01आख्यान शास्त्री में ये बहुत ही सरल है
  405. 21:03इतना मुश्किल नहीं है उसका अनुभव करना
  406. 21:06उससे जीना मुश्किल है बहुत मुश्किल है
  407. 21:09छोटी हमें भी गुस्सा आ जाता है फिर हम
  408. 21:11सोचते हैं क्यों गुस्सा कर रहे हो लेकिन
  409. 21:15हम थोड़ी ना भगवान है हम मनुष्य है गलती
  410. 21:18हो जाती है और पूरी जिंदगी हम वो गलती
  411. 21:21करते रहते हैं कि शायद ये श्री यंत्र करने
  412. 21:24से शांत हो जाएंगे विद्या आएगी लेकिन हम
  413. 21:26श्री यंत्र ज्यादातर श्री के लिए कर
  414. 21:29विद्या के लिए नहीं कर विद्या मुश्किल है
  415. 21:32सरस्वती बहुत ही मुश्किल है वह सरस है सरस
  416. 21:36यानी कि फ्लोइंग है पानी जैसा है पानी को
  417. 21:39आप हाथ में नहीं रख सकते बहती
  418. 21:42रहती तो श्री विद्या में विद्या की तरफ
  419. 21:45ध्यान देना है जब श्री और श शिव और शक्ति
  420. 21:47जुड़ते हैं यानी कि पुरुष और प्रकृति साथ
  421. 21:51में आते हैं तो फिर हमें योग और यह सब य
  422. 21:55मैं बड़ी बड़ी बातें बोलता हूं तो लोग
  423. 21:57बहुत इंप्रेस हो जाते लेकिन नहीं करना है
  424. 21:59मुझे समझाना है बच्चे को भी समझ में आ
  425. 22:02जाएगा देखो भूख लगती है तो तुम्हें खाना
  426. 22:06चाहिए अगर तुम खाते रहोगे खाते रहोगे खाते
  427. 22:09रहोगे तो तुम बकासुर बन जाओगे और अगर आप
  428. 22:13इग्राम खोलो तो कितने बकासुर दिखते हैं धन
  429. 22:16धन्य संपत्ति से लदे हुए बकासुर ही बकासुर
  430. 22:21मनुष्य रूपी
  431. 22:24बकास लेकिन हम उन्हें नहीं देखते देखो
  432. 22:28कितना भूख है मिटती नहीं है मिटती नहीं है
  433. 22:30और चाहिए और लाइक्स और ट्रेंड हो रहा है
  434. 22:34कि नहीं टॉपिक वो जो हमारे भीतर की जो भूख
  435. 22:38है अगर आप शिवजी से पूछे तो शिवजी एक बार
  436. 22:41बकासुर उसके पास आया तो कि मुझे भूख लगी
  437. 22:43है तो खा लो सब कुछ खा देते है उसके बाद
  438. 22:45कहते मुझे और खाना है अपने आप को खा लो तो
  439. 22:48अपने आप को खा लेता है बचता केवल सर है तो
  440. 22:51जितने भी मंदिर है हमारे भारतवर्ष में आप
  441. 22:54देखोगे एक सर इसको कीर्ति मुख कहते हैं वो
  442. 22:57बकासुर है जो अपने शरीर भी खा चुका है और
  443. 23:00भगवान बोल रहे देखो यही होगा अगर तुम भूख
  444. 23:02की राह में चलते
  445. 23:04रहोगे भोग और योग योग उसे बांध के रखता है
  446. 23:09भैया
  447. 23:10शांति संतोष कभी ना कभी तो जिंदगी में
  448. 23:13संतोष
  449. 23:15लाओ श्री विद्या भूख के लिए यंत्र है या
  450. 23:19संतोष के लिए यंत्र है यह पूछना है एक
  451. 23:22महत्वाकांक्षा की रास्ता है और एक संतोष
  452. 23:26कब आप बोलोगे कि नहीं बस बस जैसे खाना जब
  453. 23:29परोसा जाता है अब कब बोलोगे नहीं और नहीं
  454. 23:31चाहिए या खाते रहोगे खाते रहोगे खाते
  455. 23:34रहोगे यही हो रहा है
  456. 23:37आजकल आज का जो मानव है आज जो लोग हैं क्या
  457. 23:41वह बिना किसी गुरु
  458. 23:43के श्री विद्या की उपासना कर सकते हैं कि
  459. 23:46गुरु परम आवश्यक है नहीं गुरु आवश्यक नहीं
  460. 23:51यह सब पहले जमाने में किताब नहीं
  461. 23:54थ मौखिक परंपरा थी तो ज्ञान के लिए आपको
  462. 23:58किसी मनुष्य के पास जाना पड़ता था कोई
  463. 24:01मनुष्य जिसको ज्ञानी है आप उसके पास जाओगे
  464. 24:03वो आपके गुरु बन गए
  465. 24:06आजकल
  466. 24:07किताबें तो मनुष्य की आवश्यकता
  467. 24:10नहीं लेकिन किताब समझना को किसने लिखा है
  468. 24:14इसके लिए हम थोड़ा ट्यूटोरियल जाते हैं
  469. 24:16कोच के पास जाते हैं वीडियोस देखते हैं
  470. 24:18अलग-अलग माध्यम है पहले जमाने में माध्यम
  471. 24:21नहीं थे इसलिए हम मेले में जाते थे कि
  472. 24:25बहुत स्कॉलर्स बैठे हुए हैं उनकी बात
  473. 24:26सुनेंगे मौखिक परंपरा की अलग है हम लिखित
  474. 24:29परंपरा की दुनिया में लेकिन यह हमेशा याद
  475. 24:32रखना चाहिए जो आदि गुरु है उनका नाम
  476. 24:36दत्तात्रेय है जो नाथ नवनाथ चरित्र अगर
  477. 24:39पढ़े तो सबसे बड़े गुरु जो है अत्रे और
  478. 24:42अनसूया के पुत्र दत्तात्रय है और उनकी जो
  479. 24:46कहानी अवधूत गता तो वह छोटी छोटी चीजों
  480. 24:50में उनको ज्ञान मिलता है अग्नि से मुझे यह
  481. 24:52ज्ञान मिला पानी से मुझे यह ज्ञान मिला
  482. 24:55पेड़ से मुझे यह ज्ञान
  483. 24:57मिला पहाड़ से यह ज्ञान मिला है यानी कि
  484. 25:00चारों तरफ गुरु बैठे
  485. 25:02हुए कोई काम कर रही है तो उसके जो चूड़िया
  486. 25:06है उसके आवाज से उसको ज्ञान मिल जाता
  487. 25:09है कोई नाच रही है तो
  488. 25:12उसके जो पायल की खनखन से उनको ज्ञान मिल
  489. 25:15जाता है कोई तीर चलाता है व तीर की आवाज
  490. 25:18से उनको ज्ञान मिल जाता है अवधूत य भागवत
  491. 25:21पुराण में है अवधूत गता तो आप पढ़ लीजिए
  492. 25:23उसमें वो बोलते ज्ञान तो पेड़ों में है
  493. 25:26पशु में है पक्षी में है
  494. 25:28भेड़ में है भेड़िए में है तो ज्ञान
  495. 25:31प्रकृति में है जिसका जिज्ञासा होता है
  496. 25:35उसे ज्ञान मिल जाएगा लोगों में प्यास नहीं
  497. 25:39है प्यास नहीं है तो उसे पानी देने से
  498. 25:42क्या फायदा अगर आप पढ़ते नहीं हो मैं आपको
  499. 25:44किताब दे दूं तो क्या फायदा लोग कहते हैं
  500. 25:47कि हम गुरु जी के पास बैठेंगे लेकिन व
  501. 25:49गुरु की बात नहीं सुनते वह केवल बोलते हम
  502. 25:52आपके आपका पास बैठ के हमें अच्छा लगता है
  503. 25:55गुरु की बात कोई नहीं सुन रहा है उसे समझ
  504. 25:58नहीं रहा
  505. 26:00है ज्ञान का मतलब है कि अपने आप को
  506. 26:03स्वतंत्रता बनाना स्वतंत्र बनाना कि आप
  507. 26:07किसी के ऊपर अटैच नहीं हो डिपेंडेबल नहीं
  508. 26:10हो कि वही चीज एक नशा बन जाए गुरु भी नशा
  509. 26:13बन जाते हैं धीरे धीरे गुरु के बिना हम जी
  510. 26:16नहीं सकते यानी कि गुरु को आपने अफीम बना
  511. 26:19दिया कि नहीं गुरु नहीं होंगे तो मैं
  512. 26:21तड़पता हूं तो फ अफीम बन गया गुरु का काम
  513. 26:24यह नहीं है गुरु आपको स्वतंत्रता देता है
  514. 26:27तुमके रास्ते में चल स कोई टेंशन नहीं
  515. 26:31है डर नहीं होगा भूख को आप मैनेज कर पाओगे
  516. 26:35भय को मैनेज कर पाओगे यह दो चीज लाइफ में
  517. 26:37एक तो भूख मैंने बात की ज्यादा दूसरा भय
  518. 26:39होता है डर लगता है ना जिंदगी में कि कोई
  519. 26:43मुझे पेड़ों में देखिए पेड़ों में तो एक
  520. 26:46पत्ता होता है भूख के लिए लेकिन कांटे भी
  521. 26:48होते अपने बचाव के लिए हमारे में भी क
  522. 26:51काटे हैं बचाव के
  523. 26:52लिए तो गुरु यह आपको दिखाता है दर्शन
  524. 26:56कराता है कि देखो तुम्हारे में यह भूख है
  525. 26:58तुम्हारे में ये भय है और क्या तुम दूसरों
  526. 27:00में ये भय और भूख देख रहे हो क्या तुम
  527. 27:03दर्शन करते हो हम दूसरों का दर्शन नहीं
  528. 27:07करते हम केवल स्वयं दर्शन करते हैं ो
  529. 27:10मंदिर में जाकर लोग कहते हैं कि भगवान का
  530. 27:12दर्शन करो वह जाकर वहां पर हम क्या करते
  531. 27:14हैं आंखें बंद कर लेते ध्यान
  532. 27:18करते भीतर का भय और भूख एक होता है सामने
  533. 27:22वाले का भूख और भय भी होता है और शिव
  534. 27:25शक्ति की बात आप करते हो तो शक्ति शिव से
  535. 27:28कहती है कि आपने अपने भूख के ऊपर विजय
  536. 27:33प्राप्त कर ली बाकी संसार के बारे में
  537. 27:36आपने नहीं सोचा भूत प्रेत पिशाच जो घूम
  538. 27:39रहे हैं तड़प रहे हैं उनके लिए आप क्या कर
  539. 27:42रहे हैं तब शिव जी कहते हैं कि यह तो आपने
  540. 27:47जो बताया वोह इंपॉर्टेंट बात है शक्ति शिव
  541. 27:50से कहती है कि आपने भूख के ऊपर विजय
  542. 27:52प्राप्त कर ली लेकिन आपके चारों तरफ जो
  543. 27:55भूत पिशाच बैठे हुए हैं उनको जो भूख लग
  544. 27:58रही है उनके बारे में आप सोच नहीं रहे हो
  545. 28:01तब जाक शिव जी कहते हैं कि हा मुझे कैलास
  546. 28:04पर्वत से काशी आना पड़ेगा क्योंकि भूत
  547. 28:06प्रेत वहां रहते हैं तो भगवान स्वयं ऊपर
  548. 28:09से नीचे आ रहे हैं विवाह कर रहे हैं
  549. 28:13दांपत्य जीवन स्वीकार कर रहे हैं विवाह का
  550. 28:16मतलब क्या है लोगों से मिलना दूसरों का
  551. 28:19दर्शन करना ना कि विवाह करना यह एक रूपक
  552. 28:22है कि भगवान भी दूसरों का दर्शन कर रहे
  553. 28:26हैं विवाह का मतलब है जब हम दुनिया का
  554. 28:29दर्शन करते हैं ना कि अहंकार में अपनी ही
  555. 28:33दर्शन करके अपनी बारे में सोचते रहते हैं
  556. 28:36यह पूरी दूसरी दुनिया है जब आप दूसरों के
  557. 28:39बारे में सोचते हो उनको भूख लग रही है
  558. 28:41उन्हें भूख लग जैसे एक मां अपने बच्चे के
  559. 28:44बारे में सोचती है वैसे ही पूरी दुनिया के
  560. 28:46बारे में जब हम सोचने लगते हैं इसे विवाह
  561. 28:48कहते हैं आ एकदम नई परिभाषा है आपने बहुत
  562. 28:52सारी रामायण पढ़ी होगी जब आप बहुत सारी
  563. 28:55रामायण पढ़ रहे हैं तो क्या सभी रामायण
  564. 28:57में कहीं ना कहीं राम और सीता के बीच
  565. 29:00संबंध विच्छेद किया है किया गया है कि ये
  566. 29:04कहीं मैनिपुलेट किया गया है देखिए जब कोई
  567. 29:08खाना हजम नहीं होता त उस खाने को हम
  568. 29:12जहरीला बोलते हैं प्रॉब्लम पाचन शक्ति में
  569. 29:16है खाने में नहीं कहानी तो है क्या आप
  570. 29:21उसका पाचन कर सकते हो व बात अलग है सब में
  571. 29:25पाचन शक्ति नहीं हो
  572. 29:28रामायण की कथा राम की कथा है शुरुआत से
  573. 29:32अंत तक यानी कि जब से उनका जन्म होता है
  574. 29:36और मृत्यु पर्यंत सरयु नदी में वह जाते
  575. 29:39हैं तब तक यानी कि वह स्वर्ग से आते हैं
  576. 29:43यज्ञ से उनका जन्म होता है कौशल्या के
  577. 29:45गर्भ से निकलते हैं यानी कि मृत्यु लोक
  578. 29:47में प्रवेश करते हैं श्री नारायण लेकिन
  579. 29:50मृत्यु लोक से जाने के लिए वह सरयु नदी से
  580. 29:53जाते निकलते हैं तो यह है रामायण लास्ट
  581. 29:57में सीता उनके साथ नहीं है वह अकेले
  582. 30:00हैं महाभारत में भागवत कथा में श्री कृष्ण
  583. 30:04भी अवतरित होते हैं नारायण वैकुंठ से धरती
  584. 30:09पर पधार हैं देवकी के गर्भ से यशोदा के घर
  585. 30:12में जाते हैं फिर पूरी घटना मधुबन द्वारका
  586. 30:17मथुरा सब होते होते कुरुक्षेत्र के बाद
  587. 30:20प्रवास तीर्थ में
  588. 30:22अकेले वो वापस वैकुंठ जाते हैं अकेले तब
  589. 30:28उनके बगल में ना रुक्मिणी होती है ना राधा
  590. 30:31होती है वह अकेले जाते हैं राम भी अकेले
  591. 30:34आए और अकेले गए कृष्ण भी अकेले आए और गए
  592. 30:40यानी कि जिंदगी में हमें भगवान को भी
  593. 30:42अकेला रहना पड़ता है हम और आपको भी अकेले
  594. 30:46मृत्यु समय कोई हमारे साथ नहीं
  595. 30:49होगा रामायण वियोग की कहानी है शुरुआत में
  596. 30:54कहानी किसकी है वाल्मीकि जी की वो फेमस
  597. 30:56कथा है कि याद एक पक्षी को मारता है और
  598. 31:00पक्षी एक मादा नर को मारता है और मादा
  599. 31:04रोने लगती है आपको नहीं कता रामायण की
  600. 31:06शुरुआत ऐसे होती है कि नर एक नर और मादा
  601. 31:09दो पक्षी होते हैं एक व्याध तीर चलाता है
  602. 31:12एक पक्षी मरता है दूसरी पक्षी रोती रहती
  603. 31:15है रोती रहती है आई थिंक ये जो है ये
  604. 31:20विलाप है ये वाल्मीकि जी देखते हैं और
  605. 31:23कहते हैं और वो गुस्से में एक श्राप बोल
  606. 31:26देते हैं व्याध को
  607. 31:28और वह श्राप श्लोक का रूप लेता है क्योंकि
  608. 31:30शोक से श्लोक निकलता है कि तुमने कर क्या
  609. 31:33दिया तुमने बुरा काम किया है तुमने नर और
  610. 31:36मादा को तुमने वियोग लाया है इनका संभोग
  611. 31:39हो रहा था तुमने वियोग किया है तुम्हें
  612. 31:41श्रापित में देता हूं तो व्याध कहता है कि
  613. 31:45देखो मैं अपना धर्म कर रहा हूं मैं व्याध
  614. 31:48हूं मेरे बच्चे भूखे मर जाएंगे मेरा खाना
  615. 31:51है यह पक्षी मैंने पक्षी को मारा है तो
  616. 31:53मेरे बच्चों से मुझे आशीर्वाद मिलेगा और
  617. 31:56इस दूसरे से मुझे श्राप मिलेगा तो हर
  618. 31:59कार्य में कोई ना कोई
  619. 32:01हमें आशीर्वाद देता है और कोई ना कोई हमें
  620. 32:05श्राप देता है आप भी हमने शाप दे दिया
  621. 32:07आपको लगता है मैंने बुरा काम किया है
  622. 32:09लेकिन बच्चों के दृष्टिकोण से देखो मैंने
  623. 32:11तो उनके लिए खाना लाया तो रामायण की कथा
  624. 32:14इससे शुरू होती कि जिंदगी में धर्म और
  625. 32:17धर्म संकट की बातें कि आप एक काम करते हो
  626. 32:20लेकिन उससे कुछ और परिणाम निकलता है अच्छे
  627. 32:23भी परिणाम होते हैं बुरे भी परिणाम होते
  628. 32:25और यह वियोग की कथा रामायण में होती कि
  629. 32:28राम साथ आते हैं और फिर उनका वियोग होता
  630. 32:31है कई कई कहते कि तुम जंगल जाओ फिर वो
  631. 32:35जंगल जाते हैं वहां पर रावण उनका वियोग
  632. 32:37करता है फिर वो वापस लौटते हैं फिर
  633. 32:40अयोध्या नगरी भी उनका वियोग करता है तो
  634. 32:43वियोग वियोग वियोग हो रहा है राम की
  635. 32:45जिंदगी में की भगवान को भी वियोग का अनुभव
  636. 32:47करना पड़ता जो उनकी सबसे प्रिय है उनसे
  637. 32:51दूर कैसे दुनिया उनको भगातील नहीं रहने दे
  638. 32:56राम और सीता का वियोग रामायण में केवल
  639. 32:59वियोग की कथा होती
  640. 33:01है सुयोग है वियोग है सुयोग है वियोग है
  641. 33:06तो स्वयंवर में सुयोग हुआ फिर कई कई ने
  642. 33:09वियोग किया फिर वो जंगल में वापस सुयोग
  643. 33:12हुआ फिर रावण ने वियोग किया फिर हनुमान और
  644. 33:16सबकी मदद से वापस सुयोग हुआ फिर अयोध्या
  645. 33:19नगरी की बातों से
  646. 33:21वियोग तो ये है कहानी क्या बात है बहुत ही
  647. 33:25खूबसूरत तो एक तो प्रसन्न करना देवी को
  648. 33:31शिव को और देवी में कौन सी देवी को सबसे
  649. 33:33ज्यादा आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है
  650. 33:36और जब देवी पूजा की जाती है तो श्रीयंत्र
  651. 33:39जरूरी है कि विग्रह से किया जा सकता और आज
  652. 33:41के समय में खास तौर से देखिए अगर ज्ञान हो
  653. 33:45तो ना विग्रह चाहिए ना यंत्र
  654. 33:48चाहिए यह तो सगुनी चीज है ज्ञान निर्गुण
  655. 33:52होता है तो सगुण में अटकना नहीं चाहिए
  656. 33:56निर्गुण में जाना चाहिए
  657. 33:58सगुण केवल माध्यम है जैसे किताबों में हम
  658. 34:00टेक्स्ट लिखते हैं लेकिन ज्ञान थोड़ी ना
  659. 34:03लेखन में होता है उसके अंदर जो अर्थ होता
  660. 34:05है अर्थ हमेशा निर्गुण होता है शब्द सगुण
  661. 34:09होता है तो ये शब्द है यंत्र विग्रह तो जो
  662. 34:13करना है जिसको जिसके मर्जी से करना है वो
  663. 34:15शोशा के लिए अच्छा है कुछ भी नहीं होगा तो
  664. 34:20भी भगवान प्रकट होते हैं ये जबरदस्ती का
  665. 34:22कंफ्यूजन है लोगों में देख येभी टाइम पास
  666. 34:25के लिए लोग सब कुछ करते हैं इतना कुछ
  667. 34:27मुश्किल नहीं है
  668. 34:28यात्रा के लिए गुरु अगर आपने एक्सप्लेन
  669. 34:30किया धीरे धीरे इससे मुक्ति प्राप्त करना
  670. 34:33सबसे बड़ी बात कि चिन्ह से प्रतिबिंब
  671. 34:37प्रतिमाओं से मुक्ति प्राप्त करना बचपन
  672. 34:41में कैसे बच्चों को खिलौना चाहिए खिलौने
  673. 34:44से व खेलते हैं धीरे धीरे बढ़ते हैं लेकिन
  674. 34:46अगर अगर एक बुढ़ा भी खिलौने से खेलने लगे
  675. 34:49तो हम बोलेंगे कुछ विचित्र है बड़ा नहीं
  676. 34:51हुआ है कि एक दिन खिलौना छोड़ना पड़ता है
  677. 34:54एक दिन स्कूल छोड़ना पड़ता है सब कुछ
  678. 34:56छोड़ना पड़ता है ही एक दिन यंत्र छोड़ना
  679. 34:59पड़ता है विग्रह छोड़ना पड़ता है तीर्थ
  680. 35:02यात्रा में यह सब छोड़ना देखिए जोड़ना
  681. 35:05छोड़ना जोड़ना छोड़ना जिंदगी यही है तो जब
  682. 35:09तक हम त्याग नहीं
  683. 35:12करेंगे तब तक ग्रोथ नहीं होगा वृद्धि नहीं
  684. 35:15होगी तो शिवजी योग की बात यानी कि त्याग
  685. 35:19की बात होती है और उसको बैलेंस करने के
  686. 35:21लिए देखिए ठीक है आपको नहीं चाहिए लेकिन
  687. 35:23दूसरों को चाहिए तो आपने पैसे कमा लिए
  688. 35:25बोले नहीं मुझे और कमाना नहीं मैं संतोष
  689. 35:27हूं लेकिन दुनिया को भी कमाना है तो ठीक
  690. 35:30है मैं बिजनेस करता हूं लेकिन ताकि लोगों
  691. 35:32में आमदनी बढ़े मुझे नहीं चाहिए तो फिर एक
  692. 35:36ये अलग दृष्टिकोण होता है तो ये जो जैसे
  693. 35:39देवियां जो होती है उन्हें योगिनी कहा
  694. 35:41जाता है अगर देवी की पूजा करें बिना शिव
  695. 35:44जीी के या बिना विष्णु के तो अगर योगिनी
  696. 35:47आपके घर में आई तो वो आपको तकलीफ देगी
  697. 35:50क्योंकि यानी कि श्री बिना विद्या विद्या
  698. 35:54का मतलब है आपको हरि हर का ज्ञान आना सबसे
  699. 35:58बड़ा ज्ञान हरि हर का ज्ञान होता है और
  700. 36:00सबसे बड़ा विद्या व है कि अहंकार को काबू
  701. 36:04में कैसे रखना चाहिए कि बकासुर आपको पागल
  702. 36:07ना कर दे जब देवी आएगी व आपको नशे जैसा
  703. 36:10नशा होता है आप एक पहली बार लिया तो अच्छा
  704. 36:13लगा दूसरी बार लि फिरर और चाहिए और चाहिए
  705. 36:15फिर जिंदगी को बर्बाद कर देता
  706. 36:18है देवियां जो हो 64 देवियां होती व अलग
  707. 36:21अलग प्रकार के
  708. 36:23नशे इसलिए उन्हें भयानक रूप दिया जाता है
  709. 36:25जंगल में रखे जाते हैं अगर आप 64 योगिनी
  710. 36:29के मंदिर देखो तो घर हमेशा गांव के बाहर
  711. 36:30रखा जाता है जब तक उनके बीच में आप
  712. 36:33शिवलिंग नहीं रखोगे तब तक वो बहुत ही
  713. 36:35भयानक रूप होता है तब उसे बांधा जाता है
  714. 36:38क्योंकि शिव त्यागी है तो भोग की वस्तु
  715. 36:42त्याग के साथ हम जोड़ते हैं हमेशा जैसे आप
  716. 36:46खाना में खट्टा मीठा होता है ज्यादा खट्टा
  717. 36:48खाओगे तो प्रॉब्लम हो जाएगा ज्यादा मीठा
  718. 36:50खाओगे तो प्रॉब्लम हो जाएगा शिव और शक्ति
  719. 36:52ऐसी एक भूख के लिए भोग और एक भूख से
  720. 36:57मुक्ति
  721. 36:58क्या चाहिए जिंदगी में इसका आप बोलो केवल
  722. 37:01मुक्ति लेकिन बच्चे को तो मुक्ति नहीं बोल
  723. 37:03सक खाना देना पड़ेगा तो कब मुक्ति लोगे
  724. 37:07किस समय मुक्ति लोगे तो वह बातें हैं जब
  725. 37:11मुक्ति तुम लेते हो उसके बाद लेकिन दूसरों
  726. 37:13के लिए भक देना पड़ेगा ना तो जैसे
  727. 37:15अन्नपूर्णा जो काशी में अन्नपूर्णा है वह
  728. 37:18खाना पकाती है उनका भंडारा है लेकिन उनके
  729. 37:21पति नहीं खाते हैं उनको तो भूख नहीं लगती
  730. 37:23वो तपस्वी है तो खाना किसके लिए पका रही
  731. 37:25है भक्तो के लिए पका रही ताकि एक दिन वह
  732. 37:29शिवजी
  733. 37:31बने लेकिन वो कह रहे हैं कि नहीं हम
  734. 37:33बकासुर आप खाते देते रहो देते रहो देते
  735. 37:36रहो देते रहो बकासुर हम रहेंगे तो योगिनी
  736. 37:41जी बोलते हैं ठीक है खाते रहो एक दिन अपने
  737. 37:43बच्चों को भी खाओगे एक दिन अपने हाथ पैर
  738. 37:45भी खाओगे और तुम्हारा सर हम लटकाए रुंड
  739. 37:48माल
  740. 37:49में तो देवी का रुंड माल जो होता है वो
  741. 37:53ठीक है परोस रहूंगी क्योंकि यह नशा है नशा
  742. 37:57तुम नहीं छूटो शिवजी बचा पाएंगे लेकिन
  743. 38:01हमें श्री चाहिए विद्या नहीं चाहिए शक्ति
  744. 38:04चाहिए शिव नहीं चाहिए मैं देख रहा हूं
  745. 38:07आपकी बातचीत में आप बारबार काशी चले जाते
  746. 38:09हैं बनारस तो मुझे एक तो समझाइए जब भी शिव
  747. 38:13की बात होगी काशी जाना बहुत महत्त्वपूर्ण
  748. 38:15हो जाता है क्योंकि उनकी कथाएं उनकी
  749. 38:17कहानियां और उनके बारे में वहां से बात
  750. 38:20शुरू होती है तो आपके शब्दों में
  751. 38:23बनारस देखिए बनारस एक विचार है स्थल नहीं
  752. 38:28लोग स्थल से अन सगुण निर्गुण की बात आ गई
  753. 38:31हम सगुण में स्थल को इंपॉर्टेंस देते हैं
  754. 38:36काशी एक विचार है दक्षिण भारत में भी काशी
  755. 38:38होता है आप जहां जाओ काशी होगा काशी कहीं
  756. 38:43जगह का नाम नहीं है जैसे कैलाश भी कहीं
  757. 38:46जगह नहीं है चाइना में है काश वो तो एक
  758. 38:49सगुण रूपी है देखिए अगर आप कैलाश पर्वत
  759. 38:52में जाओ तो वह पत्थर से बना हुआ है और
  760. 38:55उसके ऊपर बर्फ है यहां पर वनस्पति नहीं उ
  761. 38:58य पेड़ होते हैं ना पौधे होते कुछ नहीं
  762. 39:00होता काशी की तरफ आ जाओ गंगा घाटी चारों
  763. 39:04तरफ हरियाली खेत
  764. 39:07है तो यहां पर भोजन है भोग है यहां पर
  765. 39:11बाजार है स्मशान भूमि है वहां पर तवाफ
  766. 39:15रहते थे गणिका रहती थी यहां पर कलाए होती
  767. 39:19थी राजा रहते थे युद्ध होता था यानी कि
  768. 39:22सांसारिक जीवन का प्रतीक है उ प्रतीक के
  769. 39:26रूप में देखना
  770. 39:27यहां प्रतीक है ये सांसारिक जीवन का जहां
  771. 39:31पर शिवजी कोतवाल का काम कर रहे हैं जिसके
  772. 39:34पास कोई धन नहीं है वो दूसरों का धन
  773. 39:37प्रोटेक्ट कर रहे हैं कोतवाल का काम कर
  774. 39:40रहे कोई नहीं सोचता है शिवजी कोतवाली कर
  775. 39:43रहे हैं उनके पास क्या है वह तो भभूत लगा
  776. 39:45के घूम रहे हैं ना भूत के साथ लेकिन
  777. 39:48कोतवाली आपके क्योंकि आपको नशा है धन का
  778. 39:51और वो शिवजी अपनी पत्नी के साथ बैठकर पूरी
  779. 39:54रात हंस रहे हैं देखो ये नशे द हमारे चार
  780. 39:57तरफ नशेड़ी है धन की लालसा में हमारी तरफ
  781. 40:01देख रहे हैं एक दिन हमारा एक और रुंड माल
  782. 40:04लगेगा क्योंकि जो पढ़ाना चाहते हैं वो
  783. 40:07नहीं
  784. 40:09पढ़ेंगे वही चाहते हैं जो उनकी भूख मिटाने
  785. 40:12के दूसरों के बारे में सोच ही नहीं रहे
  786. 40:15परोस नहीं रहे खा रहे परोस जिंदगी में
  787. 40:20परोस मनुष्य ही एक प्राणी है जो परोस है
  788. 40:24पशु केवल अपने बच्चों को परोस है
  789. 40:27मनुष्य सब किसी सब को परोस सकता है
  790. 40:31अपॉर्चुनिटी बना सकता है तो यह जो बातें
  791. 40:33हैय सनातन की
  792. 40:35बात सबसे प्राचीन पुराण आपको कौन सा मतलब
  793. 40:39आपने इतना अध्ययन किया है सबसे प्राचीन
  794. 40:41पुराण है कौन सा क्या शिव पुराण है या
  795. 40:43उससे भी
  796. 40:46देखिए वेदों में पुराण का उल्लेख नहीं है
  797. 40:49नहीं उपनिषद के समय चांडोज उपनिषद में
  798. 40:52पहली बार पंचम वेद की बात होती है और वो
  799. 40:55पुराण इतिहास इतिहास पुराण शब्द इस्तेमाल
  800. 40:58करते साथ में लेकिन यह नहीं बोलते कौन सा
  801. 41:01इतिहास कौन सा पुराण क्योंकि इतिहास में
  802. 41:03मृत्युलोक की कहानी होती है और पुराण में
  803. 41:06देवलोक की कहानी बस इतना ही अंतर और कुछ
  804. 41:08नहीं तो इतिहास में रामायण महाभारत
  805. 41:11क्योंकि दोनों मृत्यु लोक में घटते हैं
  806. 41:13अयोध्या कुरुक्षेत्र और पुराण में तीन
  807. 41:16प्रकार के पुराण शिव पुराण विष्णु पुराण
  808. 41:19और ब्रह्म पुराण देवी पुराण बोल सकते हैं
  809. 41:23एक भी पुराण आप नहीं समझ पाओगे जब तक
  810. 41:25दूसरा नहीं पढ़ोगे वो जिगस पजल होता है ना
  811. 41:29एक जिगस पजल होता है अलग-अलग पीस होते हैं
  812. 41:31उसको जॉइन करना पड़ता है हर पीस एक दूसरे
  813. 41:34से कनेक्ट कनेक्टेड है तो शिव पुराण अगर
  814. 41:37आपको ब्रह्मा समझना है तो आपको देवी समझना
  815. 41:40पड़ेगा देवी समझना है तो आपको शिव समझना
  816. 41:43पड़ेगा शिव समझना है तो आपको विष्णु समझना
  817. 41:45पड़ेगा जब तक ये चार नहीं मिलेंगे ब्रह्मा
  818. 41:48विष्णु शिव एक तरफ और देवी एक तरफ तब तक
  819. 41:51आपको पुराण का ज्ञान नहीं मिलेगा लेकिन
  820. 41:53पुराण य अलौकिक है उसको धरती पर कैसे लेकर
  821. 41:56आए प्रैक्टिकल कैसे लगाएं तो रामायण
  822. 41:59महाभारत पढ़ना
  823. 42:00पड़ेगा तो जैसे वेद को समझने के लिए आपको
  824. 42:03तंत्र समझना पड़ेगा देखिए सब चीज कनेक्टेड
  825. 42:05है इंटरकनेक्टेड है अगर आपको बायोलॉजी
  826. 42:08पढ़ना है तो आपको जियोलॉजी भी पढ़ना
  827. 42:10पड़ेगा फिजिक्स पढ़ना है तो केमिस्ट्री आप
  828. 42:11जितने भी बड़े स्कॉलर हैं वो बोलेंगे कि
  829. 42:13देखो आप फिजिक्स पढ़ते-पढ़ते मुझे
  830. 42:16केमिस्ट्री पढ़ना पड़ता है मैथ्स पढ़ना
  831. 42:17पड़ता है अगर आप लिटरेचर पढ़ रहे हो तो
  832. 42:20धीरे-धीरे आप बोलोगे कि नहीं लिटरेचर के
  833. 42:22साथ मुझे मैथमेटिक्स भी पढ़ना पड़ेगा
  834. 42:25म्यूजिक भी पढ़ना पड़ेगा तो हर सब्जेक्ट
  835. 42:28जुड़ा हुआ है ये कौन सी सबसे पुरानी हमें
  836. 42:31पता नहीं कौन सी लिखित गई कौन सा पहला
  837. 42:35निकला कहते हैं कि व्यास जी ने आदि पुराण
  838. 42:37का निर्माण किया था लेकिन किसी को समझ में
  839. 42:39नहीं आया इसलिए उन्होंने फाड़ के अलग-अलग
  840. 42:41भाग में किसी को ब्रह्म पुराण दे दिया 18
  841. 42:44भाग बना दिए उसके अपने गुरुओ को शिष्यों
  842. 42:47को बांट दिया कि जाक ले लो जो जिसको जितना
  843. 42:49हजम होता है देते रहो लेकिन पूरा ज्ञान जब
  844. 42:52तक नहीं आएगा साथ में सुयोग होना है ये
  845. 42:55वियोग पहले करेंगे
  846. 42:5818 वियोग होता है फिर एक 18 से एक ही
  847. 43:01निकलेगा तो वैसे ही होता है यही जवाब
  848. 43:04उपनिषद में भी लागू है हमेशा जितने भी
  849. 43:07उपनिषद होंगे बात से घूम फिर के जब तक भूख
  850. 43:11नहीं समझोगे और किसका भूख मेरा भूख या
  851. 43:14तुम्हारा भूख देखिए भूख शब्द जब तक नहीं
  852. 43:17समझेंगे
  853. 43:19शुधा सनातन ज्ञान जीरो कुछ नहीं समझो ना
  854. 43:23भक्त समझोगे ना ज्ञान समझोगे कर्म योग
  855. 43:27यज्ञ कुछ नहीं समझोगे जब तक भूख का ज्ञान
  856. 43:31और फिर किसके भूख के बारे में बात कर रहे
  857. 43:34इसलिए मैंने जब शुरुआत की मैंने भूख से
  858. 43:36शुरुआत की जब तक भूख क्योंकि भूख से ही
  859. 43:42हम जीव और अजीव का तत्व समझ में आता है कि
  860. 43:46जीवन का अर्थ क्या है
  861. 43:48भूख जब तक वो नहीं समझ तो काम बोलते हैं
  862. 43:51कामाग्नि काम बोलते ही फिर लोग बहुत
  863. 43:54एक्साइटेड हो जाते हैं काम शास्त्र याद
  864. 43:56आता है लेकिन भोग की बात कर कि भोग जब
  865. 43:59होता है और उससे फिर वो एडिक्शन जाता है
  866. 44:01वो नशा आ जाता है और वो नशा में तुम फस
  867. 44:03जाओगे इसे हम ऋतु चक्र कहेंगे संसार
  868. 44:06कहेंगे बंधन
  869. 44:08कहेंगे अटक गए तो फिर शिव आते हैं ये सब
  870. 44:14बातें आपकी बातों से हर चीज एकदम सरल होता
  871. 44:17जा रहा है और मुझे लगता है मेरा अगला जो
  872. 44:20सवाल है वो भी आप बहुत सरलता से कह देंगी
  873. 44:21कि ऐसा है नहीं लेकिन सवाल है विष्णु
  874. 44:25भगवान की जब पूजा की जाती है तो बहुत नियम
  875. 44:27कानून है उनकी शुद्धता है उनके अलग नियम
  876. 44:30उपचार है और शिव सरल है जी शिव इतने सरल
  877. 44:34क्यों है और विष्णु इतने टफ क्यों है
  878. 44:37देखिए शिव की
  879. 44:39दुनिया व वो सन्यासी है वहां शुद्ध अशुद्ध
  880. 44:43की बातें
  881. 44:45नहीं विष्णु की दुनिया सांसारिक जीवन है
  882. 44:49यहां पर नियम
  883. 44:51कानून प्रॉपर्टी की बातें घर गृहस्ती की
  884. 44:55बातें देखिए रामायण और महाभारत दोनों में
  885. 45:00जमीन जायदाद जोरू वही बात होती है जर जमीन
  886. 45:02जोरू वही बात होती है रामायण महाभारत में
  887. 45:04शिव जी को कुछ फर्क नहीं पड़ता है बोले
  888. 45:07किसका वह तो जहर पीने वाले हैं वो दूध
  889. 45:10थोड़ी ना पीते वो जहर पीते हैं तो जो जहर
  890. 45:13पीता है उसे क्या समझ में आएगा दुनिया
  891. 45:14इसलिए हम उसे भोलेनाथ कहते
  892. 45:16हैं यह भोले का मतलब है कि वह आपके दायरों
  893. 45:21को नहीं
  894. 45:22समझते यह दायरा है यह पदानुक्रम है
  895. 45:27संस्कृति में दायरे होते
  896. 45:30हैं प्रकृति में ना दायरा होता है ना
  897. 45:33पदानुक्रम होता शिवजी प्रकृति से जुड़ और
  898. 45:38संस्कृति से विष्णु जुड़े इसलिए राजा के
  899. 45:40रूप में वह राम होते हैं और ग्वाला के रूप
  900. 45:43में कृष्ण यानी कि हमारे वर्ण व्यवस्था
  901. 45:47में भी आ जाते हैं ऊपर नीचे तो पूरी तरह
  902. 45:50से बोलते हैं कि देखो इसमें फसो मत ऐसे
  903. 45:53तुम्हें नशा देगा यह वर्ण व्यवस्था
  904. 45:57राजा बड़ा है राजा भी अकेला मरेगा ग्वाला
  905. 46:01भी अकेला मरेगा राजा भी वियोग में मरेगा
  906. 46:04वावाला भी वियोग में
  907. 46:06मरेगा तो यह मत सोचो कि राजा बनने से
  908. 46:09तुम्हें सुख मिलने वाला है और यह मत सोचो
  909. 46:11कि तुम सारथी बनने से सुख मिलेगा श्री
  910. 46:14कृष्ण भी युद्ध को नहीं रोक पाएंगे
  911. 46:17महाभारत का युद्ध श्री कृष्ण जितना पूरा
  912. 46:20विश्वरूप दिखाने से भी कुछ योग युद्ध नहीं
  913. 46:23रुका ना तो अपने आप को इतना बड़ा मत समझो
  914. 46:25कि तुम युद्ध रोक सको श्री कृष्ण भी ना
  915. 46:29युद्ध रोक पाए ना अपनी फैमिली को बचा पाए
  916. 46:32प्रवास तीर्थ में सब कुछ अपनी आंखों के
  917. 46:34सामने द्वारका को देखा बर्बाद होते
  918. 46:37हु राम ने राम राज्य का निर्माण किया उसी
  919. 46:41राज्य ने कहा कि आपके पत्नी का त्याग
  920. 46:44कीजिए यानी कि मृत्यु लोक की
  921. 46:48कहानी यह भगवान को भी भोगना पड़ता है ऐसी
  922. 46:53सनातन जिंदगी के बारे में सिंपल है और कुछ
  923. 46:57नहीं है ये है सिंपल उसका अनुभव करना
  924. 47:01मुश्किल स्वीकार करना हम लगते है कि नहीं
  925. 47:04हम इस रावण जैसा ना मैं इसको चीट कर लूंगा
  926. 47:07लेकिन फिर शिवजी आते हैं आपके घर में सरल
  927. 47:09है ना आ गए आपके घर में
  928. 47:12हा आपने उनकी पूछ जला दी आपने उनकी पूछ
  929. 47:16जला दी क्या बात
  930. 47:18है ज्योतिर्लिंग को समझ लेते हैं एक तो
  931. 47:20इनका महत्व और सबसे पहला या पुराना
  932. 47:23ज्योतिर्लिंग कौन सा रहा होगा यदि आपने
  933. 47:25कहीं पढ़ा हो तो वो हमको समझाइए
  934. 47:27भौगोलिक दृष्टिकोण से अगर ज्योतिर्लिंग जो
  935. 47:30है हमारे 12 ज्योतिर्लिंग है उनका महत्व
  936. 47:33बता
  937. 47:34पाए तो ज्योतिर्लिंग की बातें ज्यादातर
  938. 47:37दखन में आती है जितने भी सबसे ज्यादा
  939. 47:40ज्योतिर्लिंग दखन दिशा में है उत्तर में
  940. 47:42सेवल काशी और कैलाश पर्वत बाकी देखिए
  941. 47:47महाकाल उज्जैन उसके बाद सब त्रंबकेश्वर
  942. 47:50घृष्णेश्वर सब दखन में आता है पहले
  943. 47:54आर्यवर्त उत्तर भारत में होता था
  944. 47:57फिर धीरे-धीरे आर्यवर्त नीचे की तरफ आने
  945. 47:59लगा तो लोगों ने यह संप्रदाय सब दक्षिण
  946. 48:02भारत में जमाने लगे तब हम देखते हैं कि यह
  947. 48:06ज्योतिर्लिंग की बातें लोग करने लगते हैं
  948. 48:09तो आप देखेंगे अगर आप भौगोलिक तरीके से
  949. 48:11देखे कहां है ज्योतिर महाराष्ट्र की तरफ
  950. 48:14ज्यादा होता है बहुत ज्यादा सबसे ज्यादा
  951. 48:16महाराष्ट्र में है गुजरात में कुछ है मध्य
  952. 48:18प्रदेश में कुछ है सबसे ज्यादा क्योंकि
  953. 48:21यहां पर चालुक्य का राज था यहां पर होला
  954. 48:25राजा थे तो जब यह नई संस्कृति नई विचार जब
  955. 48:30आने लगते हैं तो लोगों ने कहा कि स्वयंभू
  956. 48:33कहां है स्वयंभू यानी कि जो अपने ऊपर
  957. 48:35स्वयं जागृत होने वाले मूर्तियां कहां है
  958. 48:38तो जो तीर्थ यात्री थे जो ऋषि गण थे उनको
  959. 48:42पता उन्होंने ये स्पॉट्स आइडेंटिफिकेशन
  960. 48:48[संगीत]
  961. 48:57हज जगहों पर स्तूप बने हुए यानी कि बुध सब
  962. 49:00जगह है जब आप शक्ति की बात करेंगे तो
  963. 49:02कहेंगे कि शक्ति के जो शरीर के कई भाग
  964. 49:06बनके शक्ति पीठ जब शव लोग कहेंगे कि सब
  965. 49:09जगह वह स्वयंभू रूप में शिवजी आ गए 12
  966. 49:12हमें याद है है हजार वैसे ही विष्णु कहां
  967. 49:16थे तो यह धाम थे व यात्रा उन्होंने यहां
  968. 49:20की यहां पर वैकुंठ जैसे तिरुपति में
  969. 49:22जाएंगे तो क वैकुंठ आ गए य पर धरती पर तो
  970. 49:25हर जगह एक जगह को एक स्थल को हम वैकुंठ
  971. 49:30बना देते हैं तो विश्वास से ज्योतिर्लिंग
  972. 49:34बनता है ना कि ज्योतिर्लिंग विश्वास बनाता
  973. 49:37है जहां आपका विश्वास होगा वैसे ही अपने
  974. 49:40आप शिव प्रकट हो जाएंगे मार्कंडेय के लिए
  975. 49:44प्रकट हुए थे बिल्कुल तो मार्कंडेय
  976. 49:53[संगीत]
  977. 49:56मतलब ऊपर मानसरोवर मानसरोवर से एक और चीज
  978. 50:00पूछना था कि कहते हैं कि आठ मानसरोवर है
  979. 50:03ना हमारे य आठ ऐसा कुछ है लेकिन हमको
  980. 50:05सिर्फ एक मानसरोवर की बात होती है बाकी
  981. 50:07कहां है देखिए सनातन धर्म में हमेशा
  982. 50:10कहेंगे कि देखिए हजार पुराण है आपको केवल
  983. 50:1418 दिए गए हैं हजार वेद है आपको केवल चार
  984. 50:17दिए गए हैं हजार शिवलिंग है आपको केवल 12
  985. 50:20दिए गए हैं इसका यह मतलब है कि नम्रता रखो
  986. 50:24सब कुछ नहीं दिया जाएगा अनंत पुराणों में
  987. 50:28छिपा है सनातन
  988. 50:30सत्य आपको दिए हैं केवल
  989. 50:33दो वरुण के है नयन हजार इंद्र के 100 आपके
  990. 50:37मेरे केवल दो दो तो दो से जितना मिलेगा
  991. 50:40उससे संतुष्ट र तो ये कहने का एक टेक्निक
  992. 50:44है हर चीज में ऐसे बताएंगे कि देखो बहुत
  993. 50:47महाभारत इतना बड़ा था हमारे पास इतना ही
  994. 50:49महाभारत मिला है रामायण इतना बड़ा था
  995. 50:51हमारे पास इतना ही है वेद इतना बड़ा था
  996. 50:53हमरे पास इतना ही है ज्योतिर्लिंग इतने थे
  997. 50:56अभी इतने नहीं है यह बताने का तरीका है कि
  998. 50:59ज्ञान कभी समाप्त नहीं
  999. 51:01होता तो किताब अनंत होते हैं विचार एक ही
  1000. 51:05होता है घूम फिर के विचार एक चीज में आ
  1001. 51:09जाएगा वो पाना थोड़ा मुश्किल है अमरनाथ और
  1002. 51:13केदारनाथ इस पर आपका वक्तव्य
  1003. 51:17हिमालय पर्वत से पशुपत होता है तो पहाड़
  1004. 51:21में भगवान एकांत के लिए गए थे लेकिन अभी
  1005. 51:24तीर्थ यात्री उन्हें इतना तंग कर रहे हैं
  1006. 51:26देखिए शिवजी कहां क्यों गए थे अमरनाथ
  1007. 51:29एकांत के लिए क्यों गए केदारनाथ एकांत के
  1008. 51:32लिए तो पहले जमाने में वहां देवी देवता
  1009. 51:35एकांत के लिए जाते थे अभी तीर्थ यात्रा ने
  1010. 51:38इतनी भीड़ जैसे बंबई में भीड़ हो गई तो
  1011. 51:40अभी शिवजी पता नहीं कहां चले गए एकांत के
  1012. 51:42लिए मुझे बहुत बुरा लगता है देवताओं के
  1013. 51:45बारे में सोच के उन्हे एकांत कहीं नहीं
  1014. 51:47मिलता ब उन्ह वो गए एकांत में बैठ के
  1015. 51:52संवाद करने के लिए वार्तालाप करने के लिए
  1016. 51:55अभी वो तीर्थस्थल बन गया होटल्स बन गए
  1017. 51:57रास्ते बन गए पहले जमाने में मुश्किल से
  1018. 52:00एक दो यात्री पहुंच जाते थे बाकी तो मर
  1019. 52:03जाते थे रास्ते में जैसे पांडव गए थे
  1020. 52:05स्वर्ग की खोज करते करते सभी पांडव मर गए
  1021. 52:07रस्ते वैसे होता था पहले आजकल हेलीकॉप्टर
  1022. 52:11है प्लेन है ट्रेन है बुलेट ट्रेन
  1023. 52:14है हम समझते हैं कि टूरिजम से ज्ञान
  1024. 52:19मिलेगा टूरिजम से ज्ञान थोड़ी ना मिलता है
  1025. 52:23तो हम टूरिजम कर रहे हैं पिकनिक कर रहे
  1026. 52:25हैं भगवान तो सब जगह है ठीक है वो भी
  1027. 52:29चलेगा समय के साथ हमको लगता है कि अगर हम
  1028. 52:32सब ध्यान चले गए अपने आप से भगवान हमारे
  1029. 52:35भीतर प्रकट हो जाएंगे वो भी सही अच्छा
  1030. 52:39आपने भी यात्राए की होंगी कहीं पर ऐसा कोई
  1031. 52:41दिव्य अनुभव आपको हुआ हो और आपको ऐसा लगा
  1032. 52:44कि अगर मैं आपसे आज सवाल पूछ रहा हूं उस
  1033. 52:46अनुभव के बारे में और शेयर करना हो तो कौन
  1034. 52:49सा अनुभव कहां का आप शेयर करेंगे तो मैं
  1035. 52:53बेलगांव गया था और अभी अनुभव क्या बोले तो
  1036. 52:57एक रास्ता है तो वहां पर एक मंदिर
  1037. 53:00है सती में रेणुका मां के मंदिर है और
  1038. 53:04लोगों को ज्यादा पता नहीं है मैं उस
  1039. 53:06रास्ते में जा रहा था तो मैंने ड्राइवर से
  1040. 53:08जो बीच में फॉर नो रीजन मैंने पूछा यहां
  1041. 53:11सति कहीं पास में है तो उसने गाड़ी रोक दी
  1042. 53:15सर आपने अभी क्यों पूछा ऐसे नहीं जस्ट मन
  1043. 53:18में आया यह बात तो सर अगर मैं और 10 कदम
  1044. 53:21आगे जाता तो हाईवे में आपको 100 किलोमीटर
  1045. 53:24के बाद ही टर्न मिलता मिता अभी देखिए यह
  1046. 53:27जो टर्निंग है यह सौंधी वाला है हम मैंने
  1047. 53:29देखा भी नहीं वहां बोर्ड बोड़ कुछ नहीं था
  1048. 53:31हम तो फिर हम गए और मंदिर में बिल्कुल कोई
  1049. 53:34नहीं था दर्शन किया उसके बाद हजारों की
  1050. 53:37संख्या में लोग आ
  1051. 53:38गए अब इसे दिव्य बोलोगे या हम बोलेंगे कि
  1052. 53:42बुलावा आया
  1053. 53:43था मैंने सौन धती में दर्शन किया रेणुका
  1054. 53:47जी का और वह ना मेरी इष्ट देवता है मैंने
  1055. 53:49उसके बारे में पढ़ा है लेकिन बहुत ही उनकी
  1056. 53:53कहानी बहुत ही अलग कहानी है देसी परंपरा
  1057. 53:55से आती है मार्गी परंपरा में नहीं है य तो
  1058. 53:58यह देसी परंपरा की बातें लोगों को ज्यादा
  1059. 54:00पता नहीं है लोक परंपरा है उस उस बड़गांव
  1060. 54:04का स्थल पुराण है उड़ीसा के लोगों को कुछ
  1061. 54:07नहीं पता होगा इसके बारे में तो आई वास
  1062. 54:09क्वाइट
  1063. 54:10लकी गणेश जी के सिर की कथा क्या
  1064. 54:14है
  1065. 54:18देखिए शिव बैरागी है योगी है उन्हें
  1066. 54:22दुनिया से कोई लेना देना नहीं उ कुछ नहीं
  1067. 54:24करना शक्ति कहती कि देखो आपको दुनिया में
  1068. 54:28शामिल होना है पार्टिसिपेट करना है शिव जी
  1069. 54:31कहते मुझे क्यों करना है मेरे तो बच्चे
  1070. 54:33नहीं है मैं तो स्वयंभू मेरे पित्र नहीं
  1071. 54:37है तो मुझे बच्चों की आवश्यकता नहीं है
  1072. 54:40मुझे बच्चे नहीं चाहिए तो देवी अपने आप से
  1073. 54:43एक बच्चा का निर्माण करती है अपने शरीर से
  1074. 54:46जिसे विनायक नाम दिया जाता है बना नायक
  1075. 54:49जिसका जन्म हुआ है उसे विनायक कहते और उसे
  1076. 54:52घर अपने पास रख देती है शिव जी उसे देखते
  1077. 54:55हैं तो उ गुस्सा आ जाता है यह कौन है तो
  1078. 54:58पहली बार शिवजी जो इतने उदासीन है उनके
  1079. 55:01अंदर एक भावना जागृत होती है कि मेरी यह
  1080. 55:06शक्ति के बगल में कौन है कि वह मेरे साथ
  1081. 55:08बात नहीं करही उसके साथ बात कर रही है
  1082. 55:11भड़क के त्रिशूल से सर काट देते हैं फिर
  1083. 55:14वह विलाप करती है और उसे मनाने के लिए व
  1084. 55:18वहां हाथी का सर लगाते
  1085. 55:20हैं बात है कि जब हम देखते हैं गणेश जी की
  1086. 55:25मूर्ति उनके वजह से शिवजी में अलग-अलग
  1087. 55:29भावनाओं का उत्पत्ति हुआ क्योंकि उदासीन
  1088. 55:32जो थे एक बाबा जी थे उदासीन थे लेकिन इस
  1089. 55:37माध्यम से उनके अंदर की
  1090. 55:40जो फीलिंग थी उसे निकाला गया कि देवी ने
  1091. 55:46कहा कि यह जो पत्थर का भगवान है जो किसी
  1092. 55:50से बात नहीं करता उदासी इसके अंदर मैं भाव
  1093. 55:54कैसे जगाऊ रस भा
  1094. 55:57विचार कैसे उत्पत्ति करने के लिए रस
  1095. 56:01उत्पत्ति के लिए उन्होंने विनायक का
  1096. 56:04निर्माण किया इसलिए जब हम विनायक जी की
  1097. 56:07पूजा करते हैं व शिव के रस से उत्पन्न हुए
  1098. 56:12ईर्षा भाव आई गुस्सा आया करुणा आई जो हम
  1099. 56:17नवरस कहते हैं सभी रस फिर शांति रसाई की
  1100. 56:21सब शांत में बैठे ि जितने भी भाव क्रोध
  1101. 56:24आया करुणा आया ये सब भावनाओं से रा गणेश
  1102. 56:29जी का जन्म हुआ तो
  1103. 56:32उदासीन बन गए रस भरे आहा क्या बात है तो
  1104. 56:37यह है बात इसलिए गणेश जी हमेशा रस भरा
  1105. 56:40होता है हम गणेश जी की बात भी करते हैं तो
  1106. 56:44भावनाओं से भरे हुए हैं रस से भरे हुए हैं
  1107. 56:47फूल पत्ते लगाते हैं शिव जी के साथ कुछ
  1108. 56:50नहीं होता रुद्राक्ष बस भस
  1109. 56:54नीरस कुछ नहीं है वहां नीरस बिल्कुल ड्राई
  1110. 56:58बैरन कुछ नहीं है लेकिन एक बार शक्ति आ गई
  1111. 57:02तब जाके विनायक का जन्म
  1112. 57:07होता य योगी की जो दुनिया होती है श्रवण
  1113. 57:10की दुनिया से यह विपरीत दांपत्य की दुनिया
  1114. 57:14तो शिवजी योगी को भोगी बनाने का काम देवी
  1115. 57:17कर रही है शिव को शंकर बना रहे हैं शिव
  1116. 57:20उदासीन है शंकर हमेशा शक्ति के साथ रहेंगे
  1117. 57:24इसलिए मंदिर में भी शिव जी की जो शिवलिंग
  1118. 57:27होता है व हमेशा योनि के साथ होता है यानी
  1119. 57:29कि दोनों तत्व होंगे यानी कि आप अकेले
  1120. 57:33जिंदगी में कभी नहीं रह सकते इसका यह मतलब
  1121. 57:35नहीं कि मैन वुमन ऐसा नहीं है अकेले
  1122. 57:38उदासीन आप नहीं रह सकते दुनिया में आपको
  1123. 57:41हर पेड़ को दूसरे पेड़ों के साथ रहना
  1124. 57:43पड़ेगा आपको लोगों के साथ रहना पड़ेगा
  1125. 57:46दुनियादारी दुनिया से भाग नहीं सकते
  1126. 57:49आप तो क्योंकि आप काशी पहुंच गए और वहां
  1127. 57:52पर आपने बताया था कि माता अनपूर्ण के
  1128. 57:55स्वरूप में वहां पर जाती और मुझे ऐसा लगता
  1129. 57:57है कि अर्धनारेश्वर की जो कथा कहीं ना
  1130. 57:59कहीं इससे जुड़ी है तो मुझे वह कहानी
  1131. 58:02समझाकर बताकर पूरी कर दीजिए
  1132. 58:05बात अर्धनारेश्वर
  1133. 58:08हमेशा शिव के रूप होती है देवी का रूप
  1134. 58:12नहीं होता जब हम अर्धनारेश्वर कहते
  1135. 58:15हैं तो शिव ने आधा स्त्री रूप लिया
  1136. 58:19है देवी ने आधा पुरुष का रूप नहीं लिया
  1137. 58:25हैका मतलब क्या कि प्रकृति हमेशा
  1138. 58:30रहेगी विचार आते रहेंगे जाते रहेंगे ज्ञान
  1139. 58:34आता रहेगा जाता रहेगा प्रकृति हमेशा रहेगी
  1140. 58:37तो प्रकृति आधार
  1141. 58:39है और अगर हमें ज्ञान प्राप्ति करना है तो
  1142. 58:43प्रकृति को स्वीकार करना पड़ेगा सो जब
  1143. 58:46शिवजी शक्ति को स्वीकार करते हैं तभी जाक
  1144. 58:49पूर्ण
  1145. 58:50होते केवल अपने आप से पुरुष जैसे आपका मन
  1146. 58:55जब तक नहीं होगा मन
  1147. 58:59नहीं ऐसे नहीं कि दुनिया में ऐसे मन है जो
  1148. 59:02शरीर को ढूंढ रहे हैं जब शरीर होता है
  1149. 59:05पात्र के अंदर उसके अंदर मन होता है हम कह
  1150. 59:08सकते हैं कि शिवजी मन है और देवी शरीर है
  1151. 59:12और दोनों का जब जब जुड़ जाते हैं
  1152. 59:15अर्धनारेश्वर तो शरीर जब चला
  1153. 59:19जाएगा तो मन कहा गया शरीर के बिना मन नहीं
  1154. 59:25होगा उ से यह बात को समझाने के लिए सरल
  1155. 59:28तरीके से उन्होंने अर्धनारेश्वर का रूप
  1156. 59:30लिया है हमेशा याद रखना चाहिए कि हमेशा
  1157. 59:32शिव का रूप है शक्ति का रूप नहीं शक्ति
  1158. 59:36केव अर्ध शिव नहीं बनती है शिव अर्ध शक्ति
  1159. 59:40शक्ति को स्वीकार कर रहे जो उदासीन बाबा
  1160. 59:44पहाड़ के ऊपर बैठे हुए हैं व काशी आ रहे
  1161. 59:47हैं और देवी को विवाह करके स्वीकार करके
  1162. 59:50अर्धनारेश्वर बन रहे
  1163. 59:53हैं फिर एक दिन वो वापस चले जाएंगे पहाड़
  1164. 59:56के ऊपर वापस आएंगे वापस जाएंगे वियोग
  1165. 1:00:00सुयोग यही जिंदगी ये हर जगह वियोग सुयोग
  1166. 1:00:04हर जगह इसलिए इसे सनातन कहते हैं हर जगह
  1167. 1:00:06में वही मिलेगा घूम फिर के मैं वही बातों
  1168. 1:00:09के पास आप देखोगे मैं जितना भी अगर आप
  1169. 1:00:11रिव्यू करेंगे रिवाइंड करेंगे वही बातें
  1170. 1:00:13वापस आ रही है इसे इसलिए इसे सनातन कहा
  1171. 1:00:16जाता है हर चीज घूम फिर के वो वही उस सम
  1172. 1:00:20में आएगा जैसे सा रे ग म प धनी सा सम में
  1173. 1:00:25आ आहा तो सनातन ऐसे सम हमेशा बात सम में
  1174. 1:00:30आए तो मेरा सम होता है भूख वो है मेन
  1175. 1:00:34पॉइंट घूम फिर के वो नहीं समझोगे कुछ नहीं
  1176. 1:00:37सम तो शिव जी के त्रिपुंड तीन ऐसे एक तो
  1177. 1:00:42भस्म उनको भस्म प्रिय है क्यों ये जो
  1178. 1:00:45प्रतीक है वो भस्म के साथ क्यों जोड़ा
  1179. 1:00:47जाता है त्रिपुंड क्यों है त्रिशूल जो है
  1180. 1:00:50उसमें भी तीन वो है बेलपत्र जब चढ़ाते हैं
  1181. 1:00:53तो भी तीन भाग है उसके त्रिनेत्र है उनके
  1182. 1:00:56तो मुझे ये समझना था यह जो प्रतीक चिन्ह
  1183. 1:00:59है वो हमारे आज के समय से अगर इनको जोड़
  1184. 1:01:02के देखा जाए तो आज का जीवन दर्शन समझने के
  1185. 1:01:04लिए कनेक्ट कैसे किया जा सकता है देखिए
  1186. 1:01:08जिंदगी में ज्यादातर लोग हमेशा कहेंगे कि
  1187. 1:01:10सही है गलत है सही है गलत है शिव जी उसके
  1188. 1:01:14बीच में खड़े हैं ना कुछ सही है ना कुछ
  1189. 1:01:17गलत है समय के हिसाब से वही बात अमृत हो
  1190. 1:01:20सकता है समय के हिसाब से वही बात जहर हो
  1191. 1:01:23सकता है ध्यान से देखो
  1192. 1:01:26जज मत करो जजमेंट होता है ना ये बुरा आदमी
  1193. 1:01:29है इस समय में इस क्षण में यह बुरा है
  1194. 1:01:34हमेशा बुरा नहीं तो यह बात व त्रिपुंद्र
  1195. 1:01:38से दिखा रहे कि तीसरा दृष्टिकोण होता है
  1196. 1:01:41कि केवल वाद विवाद की दुनिया से निकल के
  1197. 1:01:44जब आप संवाद की तरफ जाओगे तो फिर तीन
  1198. 1:01:46निकलता है वाद विवाद
  1199. 1:01:51संवाद
  1200. 1:01:52वही क्योंकि हम तीसरी हमको हमेशा लगता है
  1201. 1:01:56लड़ाई में कि मैं सही हूं तुम गलत हो तो
  1202. 1:01:58शिव जी वहां आ के बोलते हैं कि तुम कई
  1203. 1:02:01दूसरे तरीके से देख सकते हैं कि तुम दोनों
  1204. 1:02:03गलत हो तुम दोनों सही हो या कोई सही नहीं
  1205. 1:02:06कोई गलत नहीं यह जो सोचने का तरीका है वह
  1206. 1:02:09शिव तत्व है सर सनातन आपका मतलब सबसे
  1207. 1:02:12फेवरेट विषय है और हम सनातन पर काम कर रहे
  1208. 1:02:15हैं तिलक सनातन पर काम करता है हम जिस तरह
  1209. 1:02:17के वीडियो वीडियो के द्वारा हम ये लोगों
  1210. 1:02:20को रोचक जानकारी दे रहे हैं एक तो तिलक
  1211. 1:02:23आपने जितना देखा समझा है हम कैसा काम कर
  1212. 1:02:26रहे हैं आपको कैसा लगता है नहीं आ थ सनातन
  1213. 1:02:28का ज्ञान दुनिया भर में पहुंचना चाहिए और
  1214. 1:02:31यह एक माध्यम है और यह माध्यम
  1215. 1:02:34से लोगों में रुचि जाएगी जागृत होगी
  1216. 1:02:38जिज्ञासा होगा और जब तक जिज्ञासा नहीं
  1217. 1:02:40होगी तब तक सरस्वती नहीं आएगी तो शायद
  1218. 1:02:43तिलक से लोगों के घर में सरस्वती आएगी यही
  1219. 1:02:46मेरी आच्छा है
  1220. 1:02:49[संगीत]

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This page contains the full transcript of श्री विद्या उपासना और रामायण की रहस्यमय कथाएँ | संजय मिश्रा के साथ देवदत्त पटनायक | Tilak Varta 🙏 by Tilak, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 9,841 words across 1,220 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

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