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The Slave Sahabi.... — Transcript

by The Kohistani · 3,934 words · 525 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00एक गुलाम सहाबी
  2. 0:03जिसका मालिक
  3. 0:05उस पर सख्त जुल्म किया करता था।
  4. 0:09[प्रशंसा]
  5. 0:10लेकिन इस सख्त जुल्म में भी वो सबी सिर्फ
  6. 0:13एक ही बात किया करते गॉड
  7. 0:17गॉड
  8. 0:18हजरत बिलाल रजो
  9. 0:20इलाहा इल्लल्लाह
  10. 0:24ये बात हम सबको पता है कि हजरत बिलाल रज
  11. 0:26अल्लाह अनो बचपन से मक्का के एक आदमी के
  12. 0:29गुलाम थे लेकिन ऐसा हमेशा से नहीं था
  13. 0:33बल्कि एक जमाना ऐसा था कि हजरत बिलाल के
  14. 0:37खानदान का अफ्रीका पर राज था।
  15. 0:44जहां हजरत बिलाल के खानदान की हुकूमत
  16. 0:47इथियोपिया से यमन तक फैली हुई थी। और हजरत
  17. 0:51बिलाल की मां इस एंपायर की एक प्रिंसेस
  18. 0:54थी।
  19. 0:55बिलाल रदी अल्लाह ताला अनूस मदर वाज़
  20. 0:58एनबिसनियन प्रिंसेस।
  21. 1:00लेकिन अचानक एक दिन इसी खानदान के एक आदमी
  22. 1:02ने अपने बादशाह के खिलाफ बगावत कर दी।
  23. 1:07और यमन को हबशा से तोड़ दिया। और इस आदमी
  24. 1:12का नाम था अब्राहम।
  25. 1:15जैसे ही अब्राह अरब का सबसे ताकतवर बादशाह
  26. 1:18बन गया। उसने देखा कि हर साल पूरे अरब के
  27. 1:22लोग हज करने के लिए काबा की तरफ जाते हैं।
  28. 1:26और इसी हज की वजह से मक्का अरब का एक बहुत
  29. 1:30ही रिच और अमीर इलाका बन चुका था।
  30. 1:33यह देखकर अब्राह के ज़हन में एक बहुत ही
  31. 1:35स्टूपिड आईडिया आया और उसने अपने कैपिटल
  32. 1:37यमन में भी एक बहुत बड़ा चर्च बनाया ताकि
  33. 1:41अरब के लोग काबा को छोड़कर अब्राह के चर्च
  34. 1:44की तरफ आए। लेकिन ऑफ कोर्स अरब में कोई भी
  35. 1:47अब्राह के इस चर्च की तरफ नहीं आए और सब
  36. 1:51दोबारा उसी पुराने काबा की तरफ जाते रहे।
  37. 1:55यह देखकर अब्राह को गुस्सा आया और उसने 60
  38. 1:58हजार की फौज जमा करके काबा को गिराने के
  39. 2:00लिए मक्का पर हमला कर दिया।
  40. 2:05अब्राह की इसी फौज में बिलाल रज अल्लाह
  41. 2:08अनो की मां प्रिंसेस हमा भी थी। अब्राह ने
  42. 2:13अपनी पूरी ताकत से हाथियों के साथ मक्का
  43. 2:16पर हमला किया। लेकिन वी ऑल नो वो यह जंग
  44. 2:20एक मिरेकल से हार गए।
  45. 2:25जिसका जिक्र कुरान में
  46. 2:29रब असहा
  47. 2:34अब्राह तो इस जंग में मर गया लेकिन मक्का
  48. 2:37के लोगों ने हजरत बिलाल रज अल्लाह अनहु की
  49. 2:39मां को अपना कैदी बना लिया और मक्का के
  50. 2:42बाजार में हबशा की शहजादी को एक गुलाम की
  51. 2:46तरह बेच दिया गया और इन्हें खरीदने वाला
  52. 2:49मक्का का सबसे जालिम आदमी उमैया बिन खलफ
  53. 2:53था।
  54. 2:56उसी साल जिस साल अब्राहम मारा गया और हजरत
  55. 3:00बिलाल की मां गुलाम बनी। मक्का में अल्लाह
  56. 3:03के आखिरी नबी
  57. 3:05मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पैदा
  58. 3:07हुए।
  59. 3:09उमैया बिन खलफ ने अपने गुलाम हमामा की
  60. 3:12शादी मक्का के एक और गुलाम से कराई। और आप
  61. 3:15सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के 10 साल बाद
  62. 3:18मक्का में बिलाल रज अल्लाह अनू पैदा हुए।
  63. 3:21अब मक्का का कानून यह था कि गुलाम तो
  64. 3:24गुलाम होगा ही लेकिन गुलामों के बच्चे भी
  65. 3:27ऑटोमेटिकली अपने मास्टर्स के हमेशा गुलाम
  66. 3:30रहेंगे। बल्कि ये कानून आज से 100 साल
  67. 3:33पहले तक अमेरिका के वाइट लोगों ने अपने
  68. 3:36ब्लैक गुलामों के लिए भी बनाया था। इसीलिए
  69. 3:39हजरत बिलाल रज अल्लाह अनू भी बिल्कुल एक
  70. 3:41आम गुलाम की तरह मक्का में बड़े हुए।
  71. 3:45लेकिन हजरत बिलाल और बाकी सारे गुलामों
  72. 3:47में एक बहुत बड़ा फर्क था। बाकी सारे
  73. 3:50गुलामों के मां-बाप भी गुलाम थे। लेकिन
  74. 3:52हजरत बिलाल की मां किसी जमाने में एक
  75. 3:55प्रिंसेस रह चुकी थी। इसीलिए हजरत बिलाल
  76. 3:58की जिंदगी को देखकर लगता है कि उनकी मां
  77. 4:00ने उनकी तरबियत एक गुलाम की तरह नहीं
  78. 4:02बल्कि एक शहजादे की तरह की थी। जब हजरत
  79. 4:06बिलाल की उम्र 30 साल हुई। उन्हीं के शहर
  80. 4:08मक्का में रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि
  81. 4:10वसल्लम पर कुरान की पहली वही नाजिल हुई।
  82. 4:14रीड
  83. 4:15जिसके बाद आप सल्ला अलह वसल्लम
  84. 4:16आहिस्ताआहिस्ता मक्का के लोगों को इस्लाम
  85. 4:19की तरफ बुलाने लगे। लेकिन ये देखकर मक्का
  86. 4:22के सारे सरदार आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
  87. 4:25के खिलाफ हो गए। और आप सल्लल्लाहु अलैहि
  88. 4:28वसल्लम को बदनाम करने के लिए मक्का के
  89. 4:30सरदार उन पर झूठे इल्जाम लगाने लगे। हजरत
  90. 4:33बिलाल का मास्टर उमैया भी हर वक्त आप
  91. 4:36सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के खिलाफ बोलता
  92. 4:38रहता था। लेकिन जब भी वो किसी से आप सल्ला
  93. 4:40अलह वसल्लम के बारे में बातें करता था वो
  94. 4:42सब कुछ हजरत बिलाल छुप कर सुन लेते
  95. 4:44थेरीदरा
  96. 4:47और वो सोचने लगे कि ये तो जो भी मोहम्मद
  97. 4:49कह रहा है बिल्कुल ठीक कह रहा है तो फिर
  98. 4:52आखिर क्यों मक्का के सरदार उनसे नफरत कर
  99. 4:55रहे हैं यहां से आहिस्ता-आहिस्ता हजरत
  100. 4:58बिलाल के दिल में आप सल्लल्लाहु अलैहि
  101. 5:00वसल्लम की मोहब्बत बढ़ने लगी।
  102. 5:02आहिस्ता-आहिस्ता मक्का में मुसलमान बढ़ने
  103. 5:04लगे और आखिर इतने बढ़ गए कि अब मक्का के
  104. 5:06सरदार इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकते थे।
  105. 5:08तो उन्होंने इस्लाम को और फैलने से रोकने
  106. 5:11के लिए नए मुसलमानों पर जुल्म करने लगे।
  107. 5:15स्पेशली कमजोर मुसलमानों पर एक दिन हजरत
  108. 5:19बिलाल का मास्टर उमैया बिन खलफ मक्का में
  109. 5:22किसी से आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के
  110. 5:24बारे में बहस कर रहा था।
  111. 5:27तो अचानक सामने से उस सरदार ने उमैया से
  112. 5:30कहा कि तुम इतनी बड़ी-बड़ी बातें तो कर
  113. 5:32रहे हो लेकिन खुद तुम्हारा फेवरेट गुलाम
  114. 5:34बिलाल मोहम्मद के साथ मिल चुका है।
  115. 5:38जिस पर मक्का के सारे सरदार उमैया पर
  116. 5:40हंसने लगे। यह सुनकर उमैया को बहुत गुस्सा
  117. 5:43आया।
  118. 5:44क्योंकि बिलाल उसका सबसे बेस्ट गुलाम था
  119. 5:48और वो बिलाल पर इतना ट्रस्ट करता था कि
  120. 5:51उसने बिलाल को उस कमरे की चाबी भी दी थी
  121. 5:54जिसमें उसने अपने खुदाओं के बुत रखे हुए
  122. 5:56थे और अब उसी बिलाल ने उमैया का सारा
  123. 6:00ट्रस्ट तोड़ दिया था तो जब मक्का के बीच
  124. 6:03में सारे सरदार उमैया पर हंस रहे थे ये
  125. 6:07देखकर उमैया गुस्से से पागल हो गई
  126. 6:10बिलाल
  127. 6:12अगले ही दिन उसने बिलाल को पकड़ लड़कर उसे
  128. 6:14टॉर्चर करना शुरू किया। उसने हजरत बिलाल
  129. 6:17को कोड़े मारे और जब कोड़ों से उसका दिल
  130. 6:20नहीं भरा उसने हजरत बिलाल को स्टील का
  131. 6:22आर्मर पहनाकर
  132. 6:25उन्हें सारा दिन धूप में फेंक दिया।
  133. 6:29मतलब सऊदी के डेजर्ट की सख्त धूप
  134. 6:33जहां आज भी 50 डिग्री से ज्यादा गर्मी
  135. 6:37होती है।
  136. 6:38यह स्टील गार्मर इस सख्त धूप से गर्म होकर
  137. 6:42हजरत बिलाल के स्किन को जला देता था।
  138. 6:46और जब इन सजाओं से उमैया बोर हो जाता था
  139. 6:49तो वह हजरत बिलाल को मक्का के आवारा
  140. 6:52लड़कों के हवाले कर देता था।
  141. 6:55और वो लड़के हजरत बिलाल के हाथ और पैर
  142. 6:57बांधकर
  143. 7:00मक्का की गलियों में घसीटते थे।
  144. 7:04लेकिन उमैया का दिल इस सब से भी नहीं भरा।
  145. 7:06उसने हजरत बिलाल को सख्त धूप में रेत पर
  146. 7:09लेटाया और उनके सीने पर एक बहुत बड़ा
  147. 7:13पत्थर रखा और हजरत बिलाल से कहा
  148. 7:16कहो कि मेरा खुदा लात और रोजा है।
  149. 7:20लेकिन हजरत बिलाल फिर भी सिर्फ एक ही बात
  150. 7:23कहते जा रहे थे। आहद
  151. 7:26आद
  152. 7:27जिससे उमैया को और भी गुस्सा आया और उसने
  153. 7:29हजरत बिलाल के ऊपर एक दूसरा बड़ा पत्थर
  154. 7:32रखा।
  155. 7:34और बिलाल से फिर कहा कहो कि मेरा खुदा लात
  156. 7:38और रोजा है।
  157. 7:40लेकिन हजरत बिलाल ने नहीं कहा और उमैया ने
  158. 7:42उन पर तीसरा बड़ा पत्थर भी रखा और हजरत
  159. 7:45बिलाल रज अल्लाह अनो बेहोश हो गए।
  160. 7:49अब जब हजरत बिलाल पर यह सब जुल्म हो रहा
  161. 7:51था। एक दिन अचानक अबू बकर रज अल्लाह अनो
  162. 7:54हजरत बिलाल के मास्टर उमैया के पास गए। और
  163. 7:58उससे कहा कि बिलाल पर थोड़ा तो रहम करो।
  164. 8:01कब तक उस पर इसी तरह जुल्म करते रहोगे? तो
  165. 8:04उमैया ने गुस्से से अबू बकर रज़ला अनहु को
  166. 8:07कहा कि अगर तुम्हें इतना ही इस बिलाल पर
  167. 8:09रहम आ रहा है तो फिर तुम इसे मुझसे खरीद
  168. 8:12क्यों नहीं लेते? तो अबू बकर रज़ला अनू ने
  169. 8:15उमैया को देखा और कहा बोलो क्या कीमत
  170. 8:18चाहिए तुम्हें बिलाल की? उस वक्त अबू बकर
  171. 8:22रज़ अल्लाह अनहु का मक्का में बहुत बड़ा
  172. 8:24बिजनेस था। और अबू बकर रजला अनहु को पता
  173. 8:27था कि यह उमैया जो भी कीमत बोले मैं उसे
  174. 8:30अदा करने के लिए तैयार हूं। यह सुनकर
  175. 8:33उमैया ने कहा अच्छा तो ऐसी बात है उमैया
  176. 8:36ने जानबूझकर बिलाल की कीमत बाकी गुलामों
  177. 8:40से बहुत ऊपर लगाई ताकि ये कीमत सुनकर अबू
  178. 8:43बकर पीछे हट जाए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अबू
  179. 8:47बकर रज़ अल्लाह अनहु ने बिलाल को उमैया की
  180. 8:49मुंह मांगी कीमत पर खरीद लिया।
  181. 8:53जैसे ही हजरत अबू बकर ने उमैया को सारे
  182. 8:56पैसे दे दिए। उमैया ने हंसकर उनसे कहा कि
  183. 8:59इस बिलाल के लिए अगर तुम मुझे बहुत कम
  184. 9:01पैसे भी दे देते तो मैं इसे बेच देता।
  185. 9:04लेकिन अबू बकर रज़ अल्लाह अनहो ने उन्हें
  186. 9:05जवाब दिया कि अगर बिलाल के लिए तुम मुझसे
  187. 9:08100 दीनार भी मांगते तो मैं बगैर सोचे
  188. 9:10तुम्हें दे देता।
  189. 9:14और हजरत बिलाल को खरीदते ही अबू बकर रज़
  190. 9:17अल्लाह अनो ने उन्हें आजाद कर दिया।
  191. 9:20हजरत बिलाल पैदा होने से अब तक मक्का में
  192. 9:23एक गुलाम थे। लेकिन अब आजाद होने के बाद
  193. 9:26बिलाल रजला अनू पहली बार एक आजाद इंसान की
  194. 9:29तरह मुसलमानों की मीटिंग्स में आप
  195. 9:32सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ बैठने
  196. 9:34लगे। हजरत बिलाल और बाकी गुलामों को आप
  197. 9:37सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की महफिलों में
  198. 9:39बिल्कुल आम लोगों की तरह ट्रीट किया जाता
  199. 9:42था।
  200. 9:43और इन गुलामों को इतनी इज्जत मिलते देखकर
  201. 9:46मक्का के सरदार अंदर से जल रहे थे। यहां
  202. 9:50तक कि एक दिन उन्होंने आप सल्ला अलह
  203. 9:52वसल्लम से कहा कि अब हम आपसे तभी मिलेंगे
  204. 9:55जब आप इन काले और कमतर गुलामों को अपने आप
  205. 9:58से दूर रखेंगे। लेकिन मक्का वालों की इसी
  206. 10:01रेसिज्म और गुरूर को तोड़ने के लिए कुरान
  207. 10:04की सूर काफ की आयात नाजिल हुई।
  208. 10:07ऐ मोहम्मद अपने आप को इन्हीं लोगों के साथ
  209. 10:10रखना जो हर वक्त सुबह शाम अपने रब को
  210. 10:14पुकारते हैं। खबरदार तेरी निगाहें इनसे ना
  211. 10:18हटने पाए और देख उसका कहना ना मानना जिसका
  212. 10:22दिल हमने अपनी याद से रोक दिया है। इसीलिए
  213. 10:26आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम भी मक्का के
  214. 10:28सरदारों से ज्यादा इन कमजोर मुसलमानों को
  215. 10:31इज्जत दिया करते थे। आहिस्ताआहिस्ता मक्का
  216. 10:34वालों का जुल्म और भी बढ़ता गया और अब वो
  217. 10:36सिर्फ कमजोर मुसलमानों पर नहीं थे बल्कि
  218. 10:39इवन रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलह वसल्लम को भी
  219. 10:41मारने की प्लानिंग करने लगे तो अब मक्का
  220. 10:44में रहना और इंपॉसिबल था और आप सल्लल्लाहु
  221. 10:47अलैहि वसल्लम के हुक्म से मुसलमान मक्का
  222. 10:49को छोड़कर मदीना की तरफ हिजरत करने लगे और
  223. 10:53हजरत बिलाल भी मक्का को छोड़कर मदीना
  224. 10:56पहुंचे।
  225. 10:57जैसे ही मुसलमान मदीना पहुंचे, मुसलमानों
  226. 11:00ने सबसे पहला काम यह किया कि उन्होंने आप
  227. 11:02सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हुक्म से
  228. 11:04मदीना में मस्जिद-ए-नबवी बनाई।
  229. 11:10जैसे ही मस्जिद कंप्लीट हुई यहां पर एक
  230. 11:12बहुत बड़ा मसला था कि अब मदीना के नए
  231. 11:14मुसलमानों को हर दिन पांच वक्त की नमाज के
  232. 11:17लिए कैसे बुलाया जाएगा?
  233. 11:19अल्लाहहु अकबर। कुछ लोगों ने कहा हम यहां
  234. 11:21एक आग जलाकर लोगों को नमाज के लिए बुलाते
  235. 11:24हैं। कुछ लोगों ने कहा नहीं हम
  236. 11:27क्रिश्चियंस की तरह बेल बजाकर लोगों को
  237. 11:29बुलाते हैं। और जब मुसलमान इन्हीं
  238. 11:32डिस्कशंस में थे अचानक उनके पास एक सहाबी
  239. 11:34आए और आप सल्ला अलैहि वसल्लम को अपना
  240. 11:36ख्वाब बताया कि मैंने कल रात एक ख्वाब
  241. 11:39देखा। जिसमें एक शख्स घंटी बजाकर लोगों को
  242. 11:43बुला रहा था। मैं ख्वाब में इस शख्स के
  243. 11:45पास गया और मैंने उसे कहा यह घंटी मुझे
  244. 11:47बेच।
  245. 11:49उसने मुझसे पूछा तुम इस घंटी का क्या
  246. 11:51करोगे? तो मैंने उस आदमी से कहा कि मैं यह
  247. 11:54घंटी बजाकर लोगों को नमाज के लिए
  248. 11:56बुलाऊंगा। लेकिन उस आदमी ने मुझे कहा नहीं
  249. 11:58क्या मैं तुम्हें इससे भी अच्छा तरीका ना
  250. 12:00बताऊं? और फिर उस आदमी ने मुझे यह वर्ड
  251. 12:02सिखाए।
  252. 12:06इस आदमी का ख्वाब सुनकर साथ बैठे उमर रज़
  253. 12:09अल्लाह अनू ने भी कहा कि मैंने भी सेम
  254. 12:11ख्वाब देखा है। अब यह तो जाहिर था कि यह
  255. 12:15ख्वाब अल्लाह की तरफ से था। लेकिन अब
  256. 12:17क्वेश्चन यह था इन सारे सहाबा में कौन
  257. 12:19इस्लाम की पहली अजान देगा?
  258. 12:23तो आप सल्लाह वसल्लम ने उस सहाबी को हुक्म
  259. 12:26दिया कि जाओ और बिलाल को अपने ख्वाब के
  260. 12:28अल्फाज़ सिखाओ।
  261. 12:31क्योंकि बिलाल की आवाज बहुत ऊंची और
  262. 12:33खूबसूरत भी है। जिसके बाद हजरत बिलाल
  263. 12:37मस्जिद नबवी में खड़े हुए और इस्लाम की
  264. 12:40पहली अजान दी।
  265. 12:43अकबर
  266. 12:44आज पूरी दुनिया में ऐसा एक सेकंड भी नहीं
  267. 12:47गुजरता कि जब कहीं ना कहीं अजान दी जा रही
  268. 12:50हो।
  269. 12:51अकबर
  270. 12:54मदीना हिजरत करने के बाद मक्का से आने
  271. 12:56वाले सहाबा मदीना के लोगों को एक-एक जुल्म
  272. 13:00के बारे में बताते थे। जो मक्का के लोगों
  273. 13:03ने इन मुसलमानों पर किए थे। जिससे मदीना
  274. 13:06के अंसार का गुस्सा मक्का वालों के लिए
  275. 13:09बढ़ता जाता था। स्पेशली बिलाल रज अल्लाह
  276. 13:12अनू की स्टोरी सुनकर मदीना के जवान उमैया
  277. 13:15बिन खलफ से नफरत करने लगे और आखिर कुछ ही
  278. 13:19अरसे बाद उन्हें उमैया से बदला लेने का
  279. 13:21मौका मिला जंग बदर
  280. 13:27जिसमें 313 मुसलमानों की 1000 काफिरों से
  281. 13:31जंग
  282. 13:33और मुसलमान अपने से तीन गुना बड़ी फौज से
  283. 13:37ये जंग जीत गए जैसे ही जंग खत्म हजरत
  284. 13:41बिलाल का पुराना मास्टर उमैया बिन खल्फ भी
  285. 13:43कैदियों में पकड़ा गया। जैसे ही हजरत
  286. 13:46बिलाल ने उमैया को देखा, उन्होंने अपने
  287. 13:48मदीना के भाइयों से कहा कि वो रहा उमैया
  288. 13:51यह वही है जो मक्का में मुझ पर जुल्म किया
  289. 13:53करता था। आज या यह जिंदा रहेगा या मैं। और
  290. 13:57ये सारे सहाबा उमैया के पीछे भागने लगे।
  291. 14:01और उमैया भी इन्हें देखकर फुल स्पीड भागने
  292. 14:03लगे। अब यहां उमैया के बारे में कहा जाता
  293. 14:06है कि वो जालिम होने के साथ-साथ बहुत मोटा
  294. 14:08भी था। इसीलिए थोड़ी ही देर में हजरत
  295. 14:11बिलाल और उनके दोस्तों ने उमैया को घेर
  296. 14:13लिया। लेकिन यहां एक और सहाबी अब्दुल
  297. 14:16रहमान बिन औफ ने कहा कि उमैया हमारा कैदी
  298. 14:18है। इसे मत मारो। लेकिन हजरत बिलाल और
  299. 14:20उनके मदीना के भाइयों का उमैया पर इतना
  300. 14:23गुस्सा था कि उन्होंने उमैया को मार डाला।
  301. 14:27इस तरह हजरत बिलाल ने उमैया के सारे
  302. 14:29जुल्मों का बदला लिया। और इसके बाद हर जंग
  303. 14:33में ओह, खंदक, खैबर जैसी जंगों में भी
  304. 14:38हमेशा हजरत बिलाल आप सल्लल्लाहु अलैहि
  305. 14:41वसल्लम के साथ खड़े रहे। बल्कि आप
  306. 14:43सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हजरत बिलाल को
  307. 14:46अपना पर्सनल सेक्रेटरी भी बनाया।
  308. 14:49जो भी बंदा आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से
  309. 14:51मिलना चाहता था, वो पहले आकर हजरत बिलाल
  310. 14:54से पूछा करता था और हजरत बिलाल उन्हें आप
  311. 14:57सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिलवाते थे।
  312. 15:00आखिर मदीना में 8 साल रहने के बाद वो दिन
  313. 15:03आया जिसका सबको बेसब्री से इंतजार था। फतह
  314. 15:07मक्का
  315. 15:13ये वही थोड़े से मुसलमान थे जो इससे 8 साल
  316. 15:16पहले मक्का को छोड़कर खाली हाथ मदीना गए
  317. 15:19थे। लेकिन अब सिर्फ 8 साल बाद आप
  318. 15:22सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम 10,000 की फौज के
  319. 15:24साथ मक्का में दाखिल हुए।
  320. 15:29जैसे ही मक्का फतह हुई आप सल्लल्लाहु अलह
  321. 15:31वसल्लम ने बिलाल को अपने पास बुलाया और
  322. 15:33उनसे कहा जाओ और मक्का में पहली अजान दो।
  323. 15:37हजरत बिलाल सीधा काबा की छत पर चढ़े और छत
  324. 15:41पर खड़े होकर अपनी खूबसूरत आवाज में अजान
  325. 15:44देने लगे।
  326. 15:45ला इलाहा इल्ल्लाह।
  327. 15:49मक्का के सारे सरदार हैरान होकर बिलाल की
  328. 15:53तरफ देख रहे थे। क्योंकि अब भी उनमें से
  329. 15:55कुछ लोग एक ब्लैक गुलाम की इतनी इज्जत
  330. 15:59बर्दाश्त नहीं कर सकते थे। इसीलिए हजरत
  331. 16:01बिलाल को ऐसे देखकर अबू जहल के भाई ने कहा
  332. 16:06के अलावा और कोई नहीं मिला और मक्का के एक
  333. 16:09और आदमी ने कहा कि शुक्र है आज मेरा बाप
  334. 16:11मर गया। वरना इस गुलाम बिलाल को इतनी
  335. 16:16इज्जत मिलते देखकर उसने अभी मर जाना था।
  336. 16:20हजरत बिलाल की अजान के बाद आप सल्ला अलह
  337. 16:22वसल्लम ने ऐलान किया कि मक्का के सारे
  338. 16:25लोगों को माफ कर दिया जाए और किसी से भी
  339. 16:27किसी किस्म का बदला नहीं लिया जाएगा। इस
  340. 16:31ऐलान के बाद हजरत बिलाल रज अल्लाह एक बार
  341. 16:33अपने दोस्तों के साथ मक्का में खड़े थे कि
  342. 16:35अचानक सामने से मक्का के पुराने सरदार अबू
  343. 16:38सुफियान गुजरे। तो हजरत बिलाल ने अबू
  344. 16:41सुफियान से कहा कि अबू सुफियान तुम बहुत
  345. 16:43खुशकिस्मत आदमी हो कि अल्लाह की तलवार
  346. 16:46तुम्हारे गर्दन तक नहीं पहुंची। यह सुनकर
  347. 16:49अबू बकर रज़ अल्लाह अनहु ने हजरत बिलाल को
  348. 16:51ऐसी बातें करने से रोक दिया। लेकिन जब आप
  349. 16:54सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को इसका पता चला
  350. 16:55उन्होंने अबू बकर रहु से कहा कि अगर
  351. 16:57तुम्हारी इस बात से तुमने बिलाल को नाराज
  352. 17:00कर लिया है तो यह जान लो कि तुमने अल्लाह
  353. 17:02को भी नाराज कर लिया। ये सुनते ही हजरत
  354. 17:05अबू बकर सीधा बिलाल रज अनू के पास गए और
  355. 17:08उनसे अपनी की हुई बातों पर माफी मांगी।
  356. 17:12इसके अलावा एक दिन आप सल्ला अलह वसल्लम ने
  357. 17:14यह भी फरमाया कि मैंने बिलाल के कदमों की
  358. 17:17आवाज जन्नत में भी सुनी है। और पूरी
  359. 17:20दुनिया से रेसिज्म हमेशा के लिए खत्म करने
  360. 17:24के लिए आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने
  361. 17:25अपने खुदबे में कहा कि किसी गोरे को किसी
  362. 17:28काले पर और किसी काले को किसी गोरे पर कोई
  363. 17:31बरतरी नहीं। जिसके कुछ ही अरसे बाद आप
  364. 17:34सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बीमार पड़ गए। और
  365. 17:37आहिस्ता-आहिस्ता उनकी बीमारी बढ़ती गई।
  366. 17:41हजरत बिलाल आप सल्ला अलह वसल्लम को इस
  367. 17:43हालत में देखना बर्दाश्त नहीं कर सकते थे।
  368. 17:47हजरत बिलाल कहा करते थे कि काश मैं आप
  369. 17:49सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ये तकलीफ
  370. 17:51देखने से पहले ही मर जाता।
  371. 17:54और उसके कुछ ही अरसे बाद आप सल्लल्लाहु
  372. 17:56अलैहि वसल्लम दुनिया से चले गए।
  373. 18:00आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को दफनाने से
  374. 18:02पहले जब मदीना में नमाज का वक्त हुआ तो एज
  375. 18:05यूजुअल हजरत बिलाल अपनी ड्यूटी पूरी करने
  376. 18:08के लिए अजान देने खड़े हुए। लेकिन जैसे ही
  377. 18:10वह अजान देते हुए मोहम्मद के नाम तक
  378. 18:12पहुंचे। रसूल
  379. 18:14[संगीत]
  380. 18:17हजरत बिलाल रोने लगे और साथ ही पूरा मदीना
  381. 18:21रोने लगा और इस दिन के बाद हजरत बिलाल ने
  382. 18:24इरादा किया कि वो आज के बाद कभी भी अजान
  383. 18:27नहीं देंगे। आप सल्ला अलैहि वसल्लम के बाद
  384. 18:30अबू बकर रज़ अल्लाह अनहु मुसलमानों के पहले
  385. 18:33खलीफा बने। लेकिन हजरत बिलाल उनके दौर में
  386. 18:35जब भी मदीना में कहीं भी जाते थे उन्हें
  387. 18:37हर जगह आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की याद
  388. 18:40आती थी। तो वह एक दिन खलीफा अबू बकर रजला
  389. 18:42अनू के पास गए और उनसे कहा मुझे यहां से
  390. 18:44जाने की इजाजत दें। लेकिन खलीफा अबू बकर
  391. 18:46ने कहा कि नहीं तुम यहां मदीना में ही
  392. 18:49रहोगे। यह सुनकर हजरत बिलाल ने उनसे पूछा
  393. 18:52कि क्या आपने मुझे गुलामी से आजाद अपने
  394. 18:55लिए किया था या अल्लाह के लिए? अगर अपने
  395. 18:58लिए आपने मुझे आजाद किया था तो ठीक है।
  396. 19:00मैं कहीं नहीं जाऊंगा। लेकिन अगर आपने
  397. 19:02मुझे अल्लाह के लिए आजाद किया था तो मुझे
  398. 19:05मदीना से जाने से ना रोके। जिस पर खलीफा
  399. 19:08अबू बकर ने उन्हें जाने की इजाजत दी और
  400. 19:11हजरत बिलाल मदीना छोड़कर शाम की तरफ चले
  401. 19:14गए। हजरत अबू बकर के बाद मुसलमानों के नए
  402. 19:17खलीफा उमर बिन खत्ताब रज़ अल्लाह अनहु बने।
  403. 19:20जिन्होंने इस खिलाफत के साइज को डबल और
  404. 19:23ट्रिपल से भी ज्यादा कर दी। यहां तक कि
  405. 19:25यरमूक और कात्सिया जैसी जंग जीतने के बाद
  406. 19:31मुसलमानों ने पहली बार पैगंबरों के शहर
  407. 19:34जेरूसलम को फतह किया। और जेरूसलम फतह करने
  408. 19:38के फौरन बाद मुसलमानों ने सबसे पहले वहां
  409. 19:40एक मस्जिद बनाई मस्जिद अक्सा।
  410. 19:45जैसे ही ये मस्जिद कंप्लीट हुई। हजरत उमर
  411. 19:47ने बिलाल रज अल्लाह अनहु को अपने पास
  412. 19:49बुलाया और उनसे रिक्वेस्ट की कि बिल्कुल
  413. 19:51मदीना और मक्का की तरह जेरूसलम की पहली
  414. 19:54अजान भी आप ही दें। हजरत बिलाल ने इससे
  415. 19:57पहले अजान देना छोड़ दिया था। लेकिन अब
  416. 19:59खलीफा उमर की रिक्वेस्ट में हजरत बिलाल
  417. 20:01दोबारा खड़े हुए और जेरूसलम की पहली अजान।
  418. 20:05अल्लाहु अकबर। अल्लाहू अकबर। इस तरह
  419. 20:08इस्लाम की तीन होली सिटीज में मक्का,
  420. 20:11मदीना, जेरूसलम सबकी पहली अजान हजरत बिलाल
  421. 20:15रजहु ने दी थी।
  422. 20:18जहां आज तक हर दिन उसी तरह अजान दी जाती
  423. 20:21है।
  424. 20:29रजो मक्का के पुराने सरदारों के साथ खलीफा
  425. 20:33उमर से मिलने आए और उसी वक्त हजरत बिलाल
  426. 20:36भी कुछ पुराने गुलामों के साथ खलीफा उमर
  427. 20:39से मिलने आए तो हजरत उमर ने अपना
  428. 20:41सेक्रेटरी भेजा। हजरत बिलाल और उनके
  429. 20:43दोस्तों को अंदर आने की इजाजत दी और अबू
  430. 20:46सुफियान और उनके सरदारों को कहा कि आप
  431. 20:48इंतजार करें खलीफा बिजी है। यह देखकर अबू
  432. 20:52सुफियान रज अल्लाह अनहू को गुस्सा आया कि
  433. 20:54उमर इन पुराने गुलामों को हम सरदारों से
  434. 20:57ज्यादा इज्जत दे रहा है। लेकिन वहां बैठे
  435. 20:59एक शख्स ने अबू सुफियान से कहा कि अब
  436. 21:01गुस्सा करने का कोई फायदा नहीं है। इस्लाम
  437. 21:03इन गुलामों के लिए भी आया था और तुम
  438. 21:05सरदारों के लिए भी। लेकिन यह इस्लाम कबूल
  439. 21:08करके आज तुमसे आगे निकल गए और तुम सब पीछे
  440. 21:11रह गए हो।
  441. 21:14हजरत उमर बिलाल रज अल्लाह अनूह पर इतना
  442. 21:16ट्रस्ट करते थे कि उन्होंने हजरत बिलाल को
  443. 21:18खिलाफत की इंटेलिजेंस एजेंसी का मेंबर
  444. 21:21बनाया था। और हजरत बिलाल सारे जनरल्स की
  445. 21:25खबरें खलीफा उमर तक पहुंचाते रहते थे।
  446. 21:28यहां तक कि जब हजरत उमर ने अपने सबसे बड़े
  447. 21:31जनरल खालिद बिन वलीद को हटाने का फैसला
  448. 21:34किया। हजरत उमर के इस ऑर्डर को खालिद बिन
  449. 21:38वलीद तक हजरत बिलाल ने ही पहुंचाया था।
  450. 21:40मतलब हजरत बिलाल अपनी जिंदगी में मक्का के
  451. 21:43एक आम गुलाम से अब दुनिया की सबसे बड़ी
  452. 21:46खिलाफत के सबसे बड़े ऑफिसर्स में से एक
  453. 21:49थे। बल्कि वो बिलाल जिसे एक जमाने में
  454. 21:53मक्का में कोई देखता भी नहीं था। अब उनकी
  455. 21:55शादी दुनिया के सबसे अमीर आदमी
  456. 21:59अब्दुल रहमान बिन औफ रज़िल्ला अन्ह की बहन
  457. 22:02से हुई थी।
  458. 22:03जिसके बाद आखिर हजरत बिलाल की जिंदगी की
  459. 22:06आखिरी अजान का दिन आया। जब हजरत बिलाल शाम
  460. 22:10में रह रहे थे। एक रात उन्होंने ख्वाब
  461. 22:13देखा जिसमें आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
  462. 22:15उनके पास आए और हजरत बिलाल से कहा कि
  463. 22:17बिलाल तुम्हें क्या हो गया है? तुम अब
  464. 22:19हमारे पास क्यों नहीं आते? जैसे ही हजरत
  465. 22:22बिलाल नींद से उठे। वो रोने लगे और सीधा
  466. 22:25मदीना की तरफ रवाना हुए।
  467. 22:28जैसे ही हजरत बिलाल मदीना पहुंचे, उनकी
  468. 22:30नजर रसूल्लाह सल्ला अलह वसल्लम के नवाजों
  469. 22:33हसन और हुसैन पर पड़ी। हजरत बिलाल ने इन
  470. 22:37दोनों को गले लगाया।
  471. 22:40हसन और हुसैन रज़ अल्लाह अनो ने हजरत बिलाल
  472. 22:42से रिक्वेस्ट की कि अब आप मदीना आ ही गए
  473. 22:44हैं। तो एक बार प्लीज आप सल्लल्लाहु अलैहि
  474. 22:47वसल्लम के दौर की याद दिलाने के लिए अजान
  475. 22:49दें। अब हजरत बिलाल अजान देना तो नहीं
  476. 22:52चाहते थे लेकिन वो आप सल्लल्लाहु अलैहि
  477. 22:54वसल्लम के नवासे हजरत हसन की फरमाइश नहीं
  478. 22:57झुकरा सकते थे और हजरत हसन तो दिखते भी
  479. 22:59बिल्कुल आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की
  480. 23:01तरह थे तो हजरत बिलाल कई सालों के बाद आगे
  481. 23:03बढ़े और मस्जिद नबवी में खड़े होकर जोर से
  482. 23:07अजान देने लगे
  483. 23:09अकबरहु
  484. 23:11जैसे ही हजरत बिलाल की आवाज मदीना की
  485. 23:14गलियों में फैली
  486. 23:16लोग उनकी आवाज सुनकर हैरान रह गए
  487. 23:22मदीना के बाजार में सब अपनी दुकानें खुली
  488. 23:24छोड़कर रसूल्लाह सल्ला अलह वसल्लम की
  489. 23:27मस्जिद की तरफ भागने लगे। इल्लाह
  490. 23:33और हजरत बिलाल की आवाज सुनकर सबको आप
  491. 23:36सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और उन सारे सहाबा
  492. 23:38की याद आ रही थी जो अब दुनिया से चले गए
  493. 23:40थे। लेकिन जैसे ही एक बार फिर हजरत बिलाल
  494. 23:44अजान में मुहाशत के नाम तक पहुंचे।
  495. 23:49हजरत बिलाल की आवाज बिल्कुल रुक गई
  496. 23:53और वो रोने लगे और उनके साथ पूरा मदीना भी
  497. 23:58जोर-जोर से रोने लगा। हजरत बिलाल ने
  498. 24:01दोबारा कोशिश की लेकिन फिर मोहम्मद के नाम
  499. 24:04तक पहुंच गए।
  500. 24:06उनकी आवाज रुक गई। और वो दोबारा रोने लगे।
  501. 24:11ये थी हजरत बिलाल की जिंदगी की आखिरी
  502. 24:14अजान।
  503. 24:16जिसके बाद वो वापस शाम गए और वहीं पर फौत
  504. 24:18हो गए
  505. 24:20जहां आज तक उनकी कब्र है। और कहा जाता है
  506. 24:24हजरत बिलाल की कोई भी औलाद नहीं थी।
  507. 24:29लेकिन हजरत बिलाल की वफात के बाद भी पूरी
  508. 24:32दुनिया के मुसलमान उन्हें याद करते थे।
  509. 24:35यहां तक कि अफ्रीका में हजरत बिलाल इतना
  510. 24:37फेमस हो चुके थे कि आने वाले अफ्रीका के
  511. 24:40हर मुसलमान बादशाह यह कोशिश करते थे कि
  512. 24:42किसी तरह वो अपना ताल्लुक हजरत बिलाल के
  513. 24:45साथ जोड़े। आज पूरी दुनिया जिस आदमी को
  514. 24:50इंसानों की तारीख का सबसे अमीर आदमी समझती
  515. 24:53है वो है मानसा मूसा।
  516. 24:56जिसकी दौलत आज 500 बिलियन बनती है। इवन
  517. 25:02ईलॉन मस्क से भी ज्यादा। डिस्क्राइबिंग
  518. 25:05वो मानसा मूसा भी अपने आप को हजरत बिलाल
  519. 25:08रज अल्लाह अनो की औलाद कहता था। अब ये सच
  520. 25:11है कि नहीं ये तो नहीं पता लेकिन यह बात
  521. 25:14क्लियर है कि वो बिलाल जो एक जमाने में
  522. 25:16मक्का का आम गुलाम था। आगे जाकर दुनिया का
  523. 25:19सबसे अमीर आदमी उसी बिलाल की औलाद होने पर
  524. 25:22फक्र करता था।
  525. 25:23सब्सक्राइब

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