The Secret Difference Between 5 Forms of Business Organisation 🤫 | Class 11 Business Studies — Transcript
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- 0:01हेलो क्लास 11th इस वीडियो के अंदर हम लोग
- 0:04डिस्कस करेंगे जो शॉर्ट ट्रिक है आपके
- 0:07पांचों फॉर्म्स ऑफ बिजनेस ऑर्गेनाइजेशन
- 0:09की। सबसे पहले बिनेस क्या होता है?
- 0:12प्रोडक्शन एंड प्रोक्योरमेंट ऑफ गुड्स एंड
- 0:15सर्विज। मतलब या तो गुड्स और सर्विज को
- 0:18प्रोड्यूस करना और उसको आगे बेचना।
- 0:21प्रोडक्शन हो गया। या फिर प्रोक्योरमेंट
- 0:24करना एंड आगे बेचना। प्रोक्योरमेंट का
- 0:26मतलब कहीं से वो गुड्स एंड सर्विज उठाए।
- 0:29आगे अपना प्रॉफिट मार्जिन ऐड करा और फिर
- 0:32आगे उसको क्या कर दिया? सेल। गुड्स के केस
- 0:34में तो आपको पता है कि यार एक रिटेलर है।
- 0:36वो होलसेलर से उठाता है फिर आगे कस्टमर को
- 0:38बेचता है। सर्विज के केस में बेटा इसको
- 0:41ड्रॉप सर्विसिंग कहते हैं। आपने बहुत सारा
- 0:43ये सोशल मीडिया पे सुना होगा पैसे कमाने
- 0:45का तरीका ड्रॉपशिपिंग। ये जो सर्विज वाला
- 0:48काम होता है ना कि किसी से कोई सर्विस
- 0:50करवाई, अपना प्रॉफिट मार्जिन ऐड करा, अपने
- 0:52नाम से आगे सेल कर दी। उसको ड्रॉप
- 0:54सर्विसिंग कहते हैं। अब बिजनेस करने के
- 0:57पांच तरीके होते हैं। पांच मेजर तरीके
- 0:59हैं। सोल प्रोपराइटरशिप, पार्टनरशिप,
- 1:02जॉइंट हिंदू फैमिली बिज़नेस, कोऑपरेटिव
- 1:04सोसाइटी एंड जॉइंट स्टॉक कंपनी। अब ये जो
- 1:07पांचों फॉर्म्स ऑफ़ बिज़नेस है, एक बार
- 1:09शॉर्ट में पहले इनके बारे में पढ़ते हैं।
- 1:11उसके बाद ये डिफरेंस डिस्कस करेंगे। सोल
- 1:14प्रोपराइटरशिप कोई ऐसा फॉर्म ऑफ़ बिज़नेस
- 1:16होता है जहां पर एक अकेला इंडिविजुअल
- 1:19अकेला जिम्मेवार होता है पूरे बिज़नेस को
- 1:21चलाने के लिए। सारे प्रॉफिट्स उसके, सारे
- 1:23लॉसेस उसके, सारी मैनेजमेंट उसकी, फुल
- 1:26सीक्रेसी रहेगी, कोई बातें इधर-उधर नहीं
- 1:28होंगी। ठीक है? ये वाला बिज़नेस सोल
- 1:30प्रोपराइटरशिप रहता है। पार्टनरशिप जहां
- 1:32दो और तीन पार्टनर्स मिलके कोई बिज़नेस कर
- 1:34रहे हैं। ज्यादा भी हो सकते हैं। यूजुअली
- 1:36तीन चार पार्टनर्स होते हैं जो मिलकर एक
- 1:39बिज़नेस को कंडक्ट करते हैं। एचयूएफ जो
- 1:41यहां पे लिखा हुआ है, इसकी फुल फॉर्म होती
- 1:43है हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली। यानी जॉइंट
- 1:46हिंदू फैमिली बिज़नेस। जहां पर एक प्रॉपर
- 1:48खानदानी बिजनेस चल रहा है। उसके अंदर
- 1:50दादाजी, ताया जी, पापा जी, चाचा जी आगे
- 1:53उनके बच्चे बूचे सारा बिजनेस चला रहे हैं।
- 1:55ग्रैंड बिज़नेस फैमिली के पूरे फैमिली
- 1:57फैमिली बिज़नेस में इन्वॉल्वड हैं। वो
- 1:59एचयूएफ होता है। कोऑपरेटिव सोसाइटी जहां
- 2:03पर एक एसोसिएशन बना ली है लोगों ने और वो
- 2:05मिलके बिज़नेस कर रहे हैं। सुनने में अजीब
- 2:08लगता है भाई साहब हमारे इंडिया के दो मेजर
- 2:10बिनेसेस कोऑपरेटिव सोसाइटी से चले हैं जो
- 2:13बहुत दो फेमस है। एक तो अमूल दूध पीता है
- 2:16इंडिया। आपने सुना होगा अमूल ओरिजिनली
- 2:18कोऑपरेटिव सोसाइटी के रूप में इनकरपोरेट
- 2:21हुआ था रजिस्टर हुआ था और दूसरा जो
- 2:24हिंदुस्तान का पापड़ पूरे वर्ल्ड में
- 2:25बिकता है लिज्जत पापड़ आपने नाम सुना होगा
- 2:28वो एक कोऑपरेटिव सोसाइटी के रूप में फॉर्म
- 2:30हुआ था एंड द लास्ट वन इज़ कंपनी जो एक
- 2:32जॉइंट स्टॉक कंपनी होती है सबसे
- 2:34कॉम्प्लेक्स फॉर्म ऑफ़ बिज़नेस। इस वीडियो
- 2:36का आप पे क्या बेनिफिट रहेगा? ये पांचों
- 2:39फॉर्म्स आपने इस चैप्टर में पढ़े होंगे
- 2:41डिटेल में। इनके मेरिट्स, इनके
- 2:43डीममेरिट्स, इनके फीचर्स, फायदा नुकसान जो
- 2:46सब भी था वो सारे के सारे इस एक वीडियो के
- 2:49अंदर आपको मिल जाएंगे इसके डिफरेंस के
- 2:51अंदर। तो जब भी आप कभी इसको अपने एग्जाम्स
- 2:53के लिए पढ़ेंगे, पहली बार पढ़ रहे हो या
- 2:55रिवाइज़ कर रहे हो दिस इज़ ऑल व्हाट यू नीड।
- 2:58अब देखो सबसे पहले सोल प्रोपराइटरशिप की
- 3:01यार फॉर्मेशन जो होती है वो काफी इजी होती
- 3:04है। सोल प्रोपराइटरशिप की क्या भाई?
- 3:06ऑलमोस्ट कंपनी को छोड़ के सबकी ही फॉर्मेशन
- 3:09इजी है। कोऑपरेटिव सोसाइटी की थोड़ी सी
- 3:11फॉर्मेलिटीज़ ज़्यादा होती है तो उनके केस
- 3:13में हम मॉडरेट लिख देंगे। सोल प्रोपराइटर
- 3:16वाले बिज़नेस को फॉर्म करना ईज़ है। ऐज़ सच
- 3:18फ़ॉर्मेलिटीज़ की ज़्यादा ज़रूरत नहीं होती।
- 3:20आप अपनी सिंपल रैंडमली आप कल को अपनी कोई
- 3:22नॉर्मल सी अगर लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं
- 3:24है तो अपनी कोई नॉर्मल सी आप दुकान खोलो।
- 3:27रैंडमली कौन आपको पूछ रहा है? कौन आपको कह
- 3:29रहा है कि आपने ये क्यों करा? वो क्यों
- 3:31करा? आप रैंडमली आप पे बजट नहीं है। आप
- 3:33किराए पे एक दुकान लो। उस पे अपना नाम
- 3:35लिखवा लो और अपना शेडर उठा के मुरत करके
- 3:38बैठ जाओ। मुहूर्त नहीं भी करोगे तो भी
- 3:40क्या फर्क पड़ रहा है? ईजीली आपकी सोल
- 3:42प्रोपराइटरशिप वाला बिजनेस फॉर्म हो जाता
- 3:44है। पार्टनरशिप की फॉर्मेशन भी इजी है
- 3:46क्योंकि इसको रजिस्टर कराना ना कंपलसरी
- 3:49नहीं होता। हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली की तो
- 3:52बहुत इजी होती है भाई फॉर्मेशन। कोऑपरेटिव
- 3:55सोसाइटी के केस में मैंने मॉडरेट लिखा है
- 3:56यानी मीडियम। रीज़न क्या है बेटा इसका?
- 3:59कोऑपरेटिव सोसाइटी के अंदर ना थोड़ी सी
- 4:01फॉर्मेलिटी करनी पड़ती है और सबसे
- 4:04डिफिकल्ट
- 4:05फॉरमेशन जो है वो कंपनी की ही होती है।
- 4:08आपके पास आपके सिलेबस में 11th क्लास के
- 4:11सिलेबस में अलग से टॉपिक है फॉरमेशन ऑफ़ अ
- 4:14कंपनी जहां पर वो स्टेजेस आती है प्रमोशन
- 4:16ऑफ़ अ कंपनी इनकॉर्पोरेशन ऑफ़ अ कंपनी ब्ल
- 4:18ब्ल ब्ल कैपिटल सब्सक्रिप्शन कमेंसमेंट वो
- 4:21सब चीज़ सबसे कॉम्प्लेक्स कंपनी को फॉर्म
- 4:23करना होता है। बाकी सबका सिंपल पॉइंट याद
- 4:25रखना। सोल प्रोपराइटरशिप ईजी, पार्टनरशिप
- 4:28ईजी, हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली ईजी,
- 4:30कोऑपरेटिव सोसाइटी की थोड़ी एवरेज सी और
- 4:33सबसे कॉम्प्लेक्स कंपनी थी। सेकंड पॉइंट आ
- 4:36जाता है एक्ट। बेटा एज सच कोई फेमस एक्ट
- 4:38सोल प्रोपराइटरशिप के लिए नहीं है।
- 4:41पार्टनरशिप के लिए इंडिया में लागू होती
- 4:43है इंडियन पार्टनरशिप एक्ट 1932।
- 4:47हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली की कोई पर्टिकुलर
- 4:50एक्ट नहीं है। इसको गवर्न करता है हिंदू
- 4:52लॉ। ये भाई बार-बार ये इतना कोई हम वो
- 4:55कास्टिज्म नहीं खेल रहे यहां पर। ये इतना
- 4:57हिंदू हिंदू क्यों आ रहे हैं यहां पर?
- 4:58सिंपल सा रीज़न है भाई। ये वाला फॉर्म ऑफ़
- 5:00बिज़नेस सिर्फ इंडिया में एकिस्ट करता है।
- 5:03इसीलिए ये वाला बिज़नेस और दूसरी बात हिंदू
- 5:06अनडिवाइडेड फैमिली बिज़नेस करने के लिए आप
- 5:08हिंदू होने जरूरी हो। कोई और रिलीजन का
- 5:12बंदा इस वाले फॉर्म ऑफ़ बिज़नेस को नहीं ओपन
- 5:14कर सकता। कोऑपरेटिव सोसाइटी की एक्ट है
- 5:17कोऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट 1912 और कंपनीज़ की
- 5:20तो सबसे फेमस कंपनीज़ एक्ट 2013। ये बेटा
- 5:23आपको याद करना पड़ेगा। एक्ट बहुत जरूरी
- 5:25होती है। नेक्स्ट पॉइंट की तरफ चलते हैं
- 5:27फटाफट से। रजिस्ट्रेशन रजिस्टर कराना।
- 5:29लिखित में कहीं रजिस्टर कराना। सोल
- 5:31प्रोपराइटरशिप की कोई जरूरत नहीं है। तभी
- 5:33तो बोला भाई फॉरमेशन ईजी है। कोई जरूरत
- 5:36नहीं है। पार्टनरशिप की ऑप्शनल होती है।
- 5:38एक ना इसमें मैं पॉइंट लिख देता हूं। बहुत
- 5:40जरूरी। पार्टनरशिप को रजिस्टर कराना
- 5:43ऑप्शनल है बट हमेशा बेनिफिशियल रहता है
- 5:47बेटा। हमेशा बेनिफिशियल रहता है। पेपर में
- 5:50क्वेश्चन आ जाता है कि रजिस्ट्रेशन ऑफ़ अ
- 5:52पार्टनरशिप इज़ नॉट कंपलसरी ऑप्शनल है बट
- 5:56हमेशा फायदा दिलवाती है। क्योंकि अगर एक
- 5:58पार्टनरशिप फर्म अपने आप को रजिस्टर करा
- 6:00लेती है ना तो पार्टनर्स एक दूसरे पर केस
- 6:03कर सकते हैं। किसी थर्ड पार्टी पर केस कर
- 6:05सकते हैं। थर्ड पार्टी उन पर केस कर सकती
- 6:07है। अगर रजिस्ट्रेशन ही नहीं होगी तो
- 6:10प्रूफ क्या आपकी पार्टनरशिप का आप रैंडमली
- 6:12कल को जाके कह दो यह मेरा पार्टनर था जी
- 6:14वो वाला नहीं ठीक है बिनेस पार्टनर था तो
- 6:17इसके मैंने पैसे लेने देने हैं जो भी
- 6:19हिसाब किताब है तो पार्टनरशिप की
- 6:21रजिस्ट्रेशन कराना है तो ऑप्शनल करा लोगे
- 6:24तो आप ही का फायदा है हिंदू अनडिवाइडेड
- 6:26फैमिली की एज सच कोई रजिस्ट्रेशन करानी
- 6:28कंपलसरी नहीं होती कोऑपरेटिव सोसाइटी और
- 6:31पार्टनरशिप दोनों को रजिस्टर कराना
- 6:32कंपलसरी होता है। रीज़न बीइंग कंपनी तो
- 6:35देखो है ही सबसे कॉम्प्लेक्स फॉर्मेशन में
- 6:37तो इसको तो कराना ही कराना है। कोऑपरेटिव
- 6:39सोसाइटी का इसलिए भाई क्योंकि ज्यादातर
- 6:41कोऑपरेटिव सोसाइटीज ना यह सब दिखाती है कि
- 6:44यार हम ना वेलफेयर के पॉइंट ऑफ व्यू से
- 6:46हैं। हम भले के पॉइंट ऑफ व्यू से हैं। तो
- 6:47ये कहीं बेईमानी ना कर दे उस चक्करों में
- 6:50और इनको ना टैक्स एडवांटेजेस वगैरह भी
- 6:52मिलते हैं। तो ये कहीं मिसयूज़ ना कर ले
- 6:54इसलिए इनको रजिस्टर कराना कंपलसरी होता है
- 6:56कि कल को अगर कुछ 1921 बात हुई तो हम
- 6:59फटाफट से इंक्वायरी बिठा के उनके बिज़नेस
- 7:02पे रेड कंडक्ट करा सकते हैं। एंड ऑल।
- 7:05नेक्स्ट है भाई लायबिलिटी। बेटा लायबिलिटी
- 7:07वर्ड का मतलब होता है देनदारी।
- 7:10सोल प्रोपराइटर की लायबिलिटी अनलिमिटेड
- 7:12होती है। अनलिमिटेड का मतलब क्या होता है
- 7:15भाई? कि जितना पैसा आपने लगाया है ना
- 7:17मात्र आपकी देनदारी वहां तक सीमित नहीं
- 7:20है। अगर ज्यादा का लॉस हो गया आप अपना
- 7:22पर्सनल घर भी बेच सकते हो। बेचना पड़
- 7:24जाएगा आपको। आपके पर्सनल एसेट्स जो है ना
- 7:27जो बिनेस के नहीं भी है। आपके खुद के
- 7:29पर्सनल चीजें हैं वो सब भी आपको बेचनी पड़
- 7:32सकती है उस लॉस को चुकाने के लिए। सेम गोज़
- 7:34फॉर पार्टनरशिप। पार्टनरशिप में सिर्फ एक
- 7:36माइनर की लायबिलिटी लिमिटेड होती है जो 18
- 7:39साल से कम है। वो वैसे ही नॉर्मली पार्टनर
- 7:41नहीं बनता। स्पेशल कंडीशंस में बनता है।
- 7:43और एक स्पेशली लिमिटेड पार्टनर जो होता है
- 7:46जो बोल के पार्टनरशिप में आया है कि मेरी
- 7:48लायबिलिटी लिमिटेड रहेगी। अदरवाइज बाकी
- 7:50जितने नॉर्मल पार्टनर्स होते हैं सबकी
- 7:52लायबिलिटी क्या रहती है? जी अनलिमिटेड
- 7:54रहती है। हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली में जो
- 7:57हेड ऑफ़ द फैमिली होता है ना मुखिया जिसको
- 7:59कर्ता बोला जाता है। कुर्ता नहीं कर्ता
- 8:02उसकी लायबिलिटी अनलिमिटेड होती है। बाकी
- 8:04जो बाकी मेंबर्स होते हैं। जैसे मान लो एक
- 8:06हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली है। वहां पर हेड
- 8:09हो गए दादाजी तो वो कर्ता कहलाएंगे। उसके
- 8:12अलावा जो बाकी लोग हैं ना चाचे ताई वगैरह
- 8:14वो लोग को पारसनर्स कहलाते हैं। पार्टनर
- 8:17वर्ड नहीं यूज़ करना। वर्ड क्या है? को
- 8:20पार्सनर्स। उनकी लायबिलिटी लिमिटेड होती
- 8:23है। सिर्फ जो फैमिली का मुखिया होता है ना
- 8:25हेड उसकी अनलिमिटेड लायबिलिटी है।
- 8:27कोऑपरेटिव सोसाइटी के अंदर मेंबर्स की
- 8:29लायबिलिटी लिमिटेड होती है। जितना
- 8:31उन्होंने पैसा लगा रखा है मैक्सिमम उनका
- 8:33उतना ही लॉस हो सकता है। सेम गोज़ फॉर
- 8:35कंपनी। कंपनी में भी लायबिलिटी लिमिटेड
- 8:37है। अगर फॉर एग्जांपल इतना आपको पता है ना
- 8:40कि जब हम किसी कंपनी के शेयर्स खरीदते हैं
- 8:42तो हम उसके उतने परसेंट के ओनर बन जाते
- 8:44हैं। तो अगर आज फॉर एग्जांपल मैं Reliance
- 8:47Industries में इन्वेस्ट करता हूं। मान लो
- 8:50मैंने उनका एक शेयर खरीदा बस हार्डली लगा
- 8:52लो 2000 की रेंज में चलता रहता है वो मान
- 8:54लो 202100 का उनका एक शेयर खरीदा तो मेरी
- 8:57मैक्सिमम लायबिलिटी ना वो 2021 ही होएगी
- 9:00अब Reliance Industries ₹ 2000 करोड़ प्लस
- 9:02हो या ₹2000 करोड़ माइनस हो मेरी मैक्सिमम
- 9:05लायबिलिटी वो ₹2000 की रहेगी और वो भी मैं
- 9:08भर चुका हूं भाई ठीक है वो भी ₹2000 में
- 9:10मैं भर चुका हूं ऐसा नहीं वो कहेंगे कि
- 9:12भाई हमारा लॉस हो गया तो आप अपने पर्सनल
- 9:15और पैसे दो एक्स्ट्रा पैसे दो ऐसा नहीं
- 9:16होगा इसके बाद मेंबर्स यार सोल प्रोपराइटर
- 9:20के तो नाम में ही आ गया। सोल मतलब अकेला
- 9:22वन जो तुम हो सिंगल तो क्या आएगा? वन।
- 9:26पार्टनरशिप के अंदर कम से कम दो पार्टनर्स
- 9:30होने चाहिए। मिनिमम टू मैक्सिमम 50। बाकी
- 9:35बेटा 50 है 50 तक जाते नहीं है। इतने
- 9:37पार्टनर तो फिर कोऑपरेटिव सोसाइटी ना खोल
- 9:39लो। यूजुअली जो देखा जाता है ना पार्टनर
- 9:41होते हैं दो तीन चार। हद मार गए पांच।
- 9:44उससे ज्यादा पार्टनर्स नहीं होते नॉर्मली।
- 9:47बट मैक्सिमम लिमिट 50 है। बेटा हिंदू
- 9:50अनडिवाइडेड फैमिली में तो कोई लिमिट नहीं
- 9:51है। जितना मर्जी आपका बड़ा परिवार हो। कोई
- 9:53दिक्कत नहीं। जॉइंट फैमिली का पार्ट है।
- 9:55कोई दिक्कत नहीं। कोपरेटिव सोसाइटी के
- 9:57अंदर ये ना बेटा यहां पर हल्का सा उल्टा
- 10:00लिखा गया है इस पॉइंट पे। ये कंपनी वाला
- 10:03इधर लिख दिया। कोऑपरेटिव वाला उधर। इसको
- 10:05करेक्ट कर देंगे अभी। ठीक है? यहां पर
- 10:07क्या है? जस्ट अ सेकंड।
- 10:10इसको अपडेट कर देते हैं। कोऑपरेटिव
- 10:13सोसाइटी के अंदर क्या होता है? कोपरेटिव
- 10:15सोसाइटी के अंदर
- 10:18लास्ट में ले लें इसका स्क्रीनशॉट। ठीक
- 10:20है? यह वाला पॉइंट आएगा कि नॉर्मली
- 10:23कोपरेटिव सोसाइटीज जो होती है उनके अंदर
- 10:2610 मेंबर्स होने चाहिए मिनिमम और मैक्सिमम
- 10:29इंफिनिटी का साइन लिमिट ही नहीं है। नो
- 10:30लिमिट लेकिन जो क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी
- 10:34होती है ना एक टाइप ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटी
- 10:36होती है। क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी।
- 10:39क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी।
- 10:42यहां पर बेटा मिनिमम 10 मैक्सिमम सिर्फ
- 10:45100 उससे ज्यादा नहीं। रीजन मैं बता देता
- 10:48हूं। क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी ना वो
- 10:51पैसे वाली होती है जिसके अंदर मेंबर्स
- 10:53पैसे वगैरह सेव करते हैं। एक दूसरे को लोन
- 10:55एंड ऑल भी देते हैं। तो बहुत ज्यादा
- 10:56मेंबर्स हो जाएंगे ना तो घपले के चांसेस
- 10:58बढ़ जाएंगे। इसलिए उसके अंदर इन्होंने
- 11:00मैक्सिमम लिमिट फिक्स कर दी है। और कंपनी
- 11:03का क्या है? कंपनी के अंदर भी सुन लो भाई।
- 11:08कंपनी के अंदर मिनिमम
- 11:11प्राइवेट कंपनी अगर आपकी है ना बेटा
- 11:13प्राइवेट कंपनी
- 11:15प्राइवेट कंपनी प्राइवेट कंपनी में
- 11:21मिनिमम दो मैक्सिमम 200 मेंबर्स हो सकते
- 11:25हैं और अगर आपकी पब्लिक कंपनी है मतलब आप
- 11:27आम जनता को भी शेयर्स बेच रहे हो तो
- 11:30मिनिमम आपके सात मेंबर्स होने चाहिए
- 11:33मैक्सिमम कोई लिमिट नहीं है भाई इंफिनिटी
- 11:36तक का चलेगा। ये वाला एक बार दोबारा समझ
- 11:38लेते हैं आखिरी दो पॉइंट्स क्योंकि वो
- 11:40थोड़ा इधर-उधर लिखा हुआ था। कोऑपरेटिव
- 11:42सोसाइटी नॉर्मली मिनिमम 10 मैक्सिमम कोई
- 11:44लिमिट नहीं है मेंबर्स की। लेकिन जो
- 11:46क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी होती है पैसे
- 11:48वाली जिनमें पैसों का हिसाब किताब होता
- 11:50है। मेंबर्स पैसे जोड़ते हैं पर मंथ और
- 11:52फिर अपने मेंबर्स को जरूरत पड़ने पर लोन
- 11:54वगैरह दे देते हैं। वहां पर मैक्सिमम नंबर
- 11:56ऑफ़ मेंबर्स 100 हो जाते हैं। ये असर्शन
- 11:59रीजन में आता है बेटा। जस्ट आर लगाया ना
- 12:01अभी और कंपनी का सिंपल है प्राइवेट कंपनी
- 12:03के मिनिमम दो मैक्सिमम 200 पब्लिक कंपनी
- 12:06का मिनिमम सात मैक्सिमम कोई लिमिट ही नहीं
- 12:08है
- 12:10सीक्रेसी मतलब आपकी बातें कितनी गुप्त
- 12:13रहेंगी बाहर नहीं निकलेंगी बेटा सोल
- 12:16प्रोपराइटरशिप में तो फुल सीक्रेसी है
- 12:18मैक्स मैक्सिमम सीक्रेसी अगर कोई फॉर्म ऑफ़
- 12:21बिज़नेस एंजॉय करता है ना तो वो सोल
- 12:23प्रोपराइटर है अकेला बंदा यार अपनी बात
- 12:25किसको बता देगा फुल सीक्रेसी रहेगी आपके
- 12:28सीक्रेट्स आउट नहीं होंगे पार्टनरशिप में
- 12:30मॉडरेट है यार। वो डिपेंड करता है भाई कि
- 12:32पार्टनर कौन है? क्योंकि कम पार्टनर्स
- 12:35होते तो सीक्रेसी रहती है। ऐसा भी नहीं
- 12:36मैं कहूंगा कि सीक्रेसी नहीं है। कम
- 12:38पार्टनर्स हैं। लेकिन भाई अगर वही पार्टनर
- 12:40आपका धोखेबाज निकला जैसे आपके वाला निकला
- 12:43था तो फिर तो गड़बड़ हो सकती है ना बेटा।
- 12:46अब एचयूएफ हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली। यहां
- 12:49पर ठीक-ठाक सीक्रेसी होती है क्योंकि
- 12:51फैमिली मेंबर्स होते हैं। एक्सेप्शन इज़
- 12:53ऑलवेज देयर कि भाई फैमिली में से कोई अलग
- 12:55होना चाह रहा है। उसने पूरे फैमिली की ऐसी
- 12:57तैसी कर दी। वो एक्सेप्शन हो सकती है बट
- 12:59नॉर्मली ठीक-ठाक सीक्रेसी रहती है क्योंकि
- 13:02है तो अपना परिवार ही ना कोऑपरेटिव
- 13:04कोपरेटिव सोसाइटी में थोड़ी कम सीक्रेसी
- 13:06है क्योंकि नंबर ऑफ मेंबर्स ज्यादा कोई ना
- 13:09कोई तो फिर हरकत कर ही देता है ना इधर-उधर
- 13:12और सबसे कम सीक्रेसी कंपनी में होती है
- 13:15भाई लीस्ट सीक्रेसी और अगर गलती से आपकी
- 13:18कंपनी पब्लिक है फिर तो भाई भूल जाओ
- 13:20मैक्सिमम लिमिट ही नहीं है इंफिनिटी तक के
- 13:22आपके मेंबर्स हैं ऊपर से पब्लिक कंपनी को
- 13:25तो अपनी काफी सारी रिपोर्ट्स काफी काफी
- 13:27सारी बातें पब्लिकली बतानी पड़ती है। अपनी
- 13:29बैलेंस शीट हर साल उन्हें पब्लिकली छापनी
- 13:32पड़ती है। प्रॉफिट लॉस क्या कमा रहे हैं?
- 13:34ये सब क्योंकि आम जनता ने इन्वेस्ट कर रखा
- 13:36होता है ना उनमें। इसलिए
- 13:38सूटेबिलिटी क्या रहती है भाई वो भी जान
- 13:40लेते हैं जरा। यार सोल प्रोपराइटरशिप वाला
- 13:42फॉर्म ऑफ़ बिज़नेस ना वहां सूटेबल रहता है।
- 13:44बेसिकली स्माल स्केल बिज़नेस के लिए।
- 13:46छोटा-मोटा आपका टेलरिंग का काम है। आपका
- 13:49फॉर एग्जांपल हेयर सेलूून है, ब्यूटी
- 13:51पार्लर है, स्वीट्स मेकिंग का काम है।
- 13:53छोटे-मोटे लेवल पर सूटेबल रहता है।
- 13:55पार्टनरशिप थोड़े मीडियम स्केल बिज़नेस के
- 13:57लिए कि आपका करने का पैसा थोड़ा काफी नहीं
- 13:59था। आपने दो-तीन लोगों ने मिलके
- 14:01कंट्रीब्यूट कर लिया। थोड़ा सा बड़ा बिज़नेस
- 14:03बना लिया। एचयूएफ स्मॉल या मीडियम स्केल
- 14:05बिज़नेस के लिए। कोऑपरेटिव सोसाइटी भी
- 14:08मीडियम स्केल्स के लिए। और कंपनी तो बेटा
- 14:10लार्ज स्केल के लिए क्योंकि इतना ज्यादा
- 14:12फाइनेंसियल रिसोर्स होता है ना कंपनी के
- 14:13पास। कंपनी पे सबसे ज्यादा फाइनेंसियल
- 14:16रिसोर्सेज होते हैं।
- 14:19और अगर आपकी पब्लिक कंपनी है, पब्लिक
- 14:21कंपनी का तो आपको पता है आम जनता को पैसे
- 14:23बेच के जितना मर्जी फंड रे कर लो। अगर
- 14:25आपकी थोड़ी गुडविल बन चुकी है तो तो सबसे
- 14:28ज्यादा लार्ज स्केल। अब जितने भी हमारे
- 14:30इंडिया में यार बड़े-बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट
- 14:32है, बिज़नेसमैन है, आप अंबानी की बात करो,
- 14:34Tata ग्रुप की बात करो, आप अडानी की बात
- 14:37करो। ये भी तो सोल प्रोपराइटरशिप खोल सकते
- 14:39थे, पार्टनरशिप खोल सकते थे। सबसे ज्यादा
- 14:42सेफ फॉर्म इन्होंने ओपन करा कंपनी। ठीक
- 14:44है? इसके बाद भाई अगला पॉइंट आता है
- 14:46कंटिन्यूटी का। कंटिन्यूटी कौन सा बिजनेस
- 14:50कितना कंटिन्यू करेगा? सबसे ज्यादा
- 14:52डीमैरिट यहां पर सोल प्रोपराइटर पे है
- 14:54भाई। सबसे अनस्टेबल एकिस्टेंस। अगर एक
- 14:56अकेला बिज़नेस मालिक है उसको कल को कुछ हो
- 14:59गया बिज़नेस बंद। शायद उसकी फैमिली चला ली।
- 15:02अगर फैमिली नहीं है या वो इंटरेस्टेड नहीं
- 15:04है तो वो बिज़नेस बंद। सोल प्रोपराइटर अगर
- 15:06कहीं चला गया बाहर आउट ऑफ कंट्री चला गया
- 15:08बिज़नेस बंद। पार्टनरशिप में मॉडरेट है।
- 15:11अगर पार्टनर रिटायर हो गया, डेथ हो गया,
- 15:13बाकी पार्टनर्स उसके बिना चलाए, ना चलाए,
- 15:16चला पाए कि ना चला पाए, तो मॉडरेट। एचयूएफ
- 15:20स्टेबल रहता है भाई। रीज़न क्या है इसका?
- 15:22सुनो भाई, यहां पर क्या है? हेड ऑफ़ द
- 15:24फैमिली दादाजी। अगर उनको कुछ हुआ, अगर मान
- 15:28लो उनकी डेथ हो गई, तो उसके बाद जो भी
- 15:30नेक्स्ट सीनियर होगा ना, वो कर्ता बन
- 15:32जाएगा। उसकी डेथ होगी तो उसका नेक्स्ट बन
- 15:34जाएगा। फैमिली कंटिन्यू रहेगी। अगर एक साथ
- 15:36रहेगी, यूनिटी से रहेगी, यह बिजनेस चलता
- 15:38रहेगा, स्टेबल रहता है। ठीक है? बस कर्ता
- 15:40ट्रांसफर होता रहता है कि जो भी सबसे
- 15:42सीनियर मोस्ट मेंबर होगा, दैट विल बी द
- 15:45कर्ता। कोऑपरेटिव सोसाइटी के अंदर स्टेबल
- 15:47रहती है। इतने सारे मेंबर हैं, प्रधान मर
- 15:49भी गया तो दूसरा कोई प्रधान बन जाएगा। और
- 15:51कंपनी की तो भाई मोस्ट स्टेबल। कंपनी में
- 15:54तो स्पेशली एक पॉइंट लिखा जाता है।
- 15:56परपेक्चुअल सक्सेशन। क्या प्रोनंसिएशन है?
- 15:59परपेक्चुअल सक्सेशन। मतलब क्या होता है?
- 16:02इसकी बेटा एक सिंपल सी फ्रेज़ है, राइम है।
- 16:05मैन मे कम एंड मैन मे गो। लोग आएंगे,
- 16:10लोग जाएंगे। बट द कंपनी गोज़ ऑन फॉर एवर।
- 16:14आपकी कंपनी नहीं रुकेगी। वो चलती रहेगी।
- 16:16एग्जांपल दो-ती साल पहले की बात है। रतन
- 16:20टाटा सर की डेथ हुई। वो उनकी कोई फैमिली
- 16:22एंड ऑल भी नहीं थी। ठीक है? अकेले थे।
- 16:24कंपनी चला रहे थे T ग्रुप पूरा T ग्रुप।
- 16:27उनकी डेथ हुई। बावजूद उसके कंपनी तो अभी
- 16:29भी चल रही है ना। यह होती है कंपनी कि भाई
- 16:33जो कंपनी का फाउंडर है मालिक है वह रहे ना
- 16:36रहे उसकी आगे फैमिली हो ना हो कंपनी नहीं
- 16:38रुकती कंपनी चलती रहती है उसके बोर्ड ऑफ
- 16:40डायरेक्टर से वो ऑपरेट होती है ठीक है जी
- 16:43आगे वाले पॉइंट्स
- 16:49इसके बाद आ जाता है भाई पॉइंट कैपिटल
- 16:51कंट्रीब्यूशन बेटा कैपिटल वर्ड का मतलब
- 16:53होता है द अमाउंट इन्वेस्टेड इन बिनेस
- 16:56जिसको नहीं पता अपने पास नोट कर लेना
- 16:58कैपिटल मींस द अमाउंट इन्वेस्टेड इन
- 17:01बिनेस। अब सोल प्रोपराइटरी यार कल बंदा है
- 17:04कितना ही पैसा ले आएगा। तो लिमिटेड
- 17:06फाइनेंस इसके पास अवेलेबल है। पार्टनरशिप
- 17:08में हम कह देते हैं थोड़ा मॉडरेट। दो-तीन
- 17:10लोग हैं थोड़ा पैसा इकट्ठा कर लेंगे।
- 17:12एचयूएफ में डिपेंड करता है आप पे
- 17:13एनसेेस्ट्रल वेल्थ कितनी है। ठीक है?
- 17:16एनसेेस्ट्रल वेल्थ खानदानी पैसा कितना है?
- 17:19वो चीज़ फैमिली बिज़नेस है ना? कोऑपरेटिव
- 17:22सोसाइटी में मैं मानता हूं मेंबर ज्यादा
- 17:24है। बट फिर भी ना लिमिटेड ही लिखा जाता
- 17:26है। रीज़न क्या है भाई? कोऑपरेटिव सोसाइटी
- 17:29ना अक्सर सिर्फ कोई एक बंदे के पॉइंट ऑफ
- 17:31व्यू से नहीं खुलती। वो खोली जाती है थोड़ा
- 17:34ज्यादातर भले मेंबर्स के भले के पॉइंट ऑफ
- 17:36व्यू से। उनका एम ही ये होता है कि
- 17:38मेंबर्स का भला हो। अब ऐसे बिनेस में ना
- 17:40कोई बहुत अंधा पैसा नहीं लगा देगा वो
- 17:42अपना। वो सबके लिए है भाई। सारे मेंबर्स
- 17:44के भले के लिए है। तो ऐसा नहीं है कि वो
- 17:46भाई अपना सब कुछ ही जमीन जायदाद बेच के
- 17:48लगा देंगे। लिमिटेड ही इन्वेस्टमेंट होती
- 17:50है उसमें। मान लो फॉर एग्जांपल अगर 20
- 17:53मेंबर्स है भी कोपरेटिव सोसाइटी में ऊपर
- 17:55हम ₹-5000 जोड़ लेंगे। थोड़ा बहुत
- 17:57इन्वेस्ट कर लेंगे। ज्यादा नहीं। सबसे
- 17:59ज्यादा फाइनेंसियल रिसोर्सेज किस पे होते
- 18:01हैं? देखो लार्ज स्केल लिखा था ना कंपनी
- 18:03पे। ह्यूज फाइनेंशियल रिसोर्सेज होते हैं
- 18:05एक कंपनी पे। और बेटा कंपनी का ही दूसरा
- 18:08नाम होता है जॉइंट स्टॉक कंपनी। ठीक है?
- 18:10कंपनी को जॉइंट स्टॉक कंपनी भी बोला जाता
- 18:13है। क्योंकि कंपनी का सिंपल है भाई। कंपनी
- 18:16में इन्वेस्ट करने वाले बहुत लोग हैं। और
- 18:18सामने वाले इन्वेस्ट क्यों करते हैं? उनको
- 18:20हिस्सेदारी मिलती है। जो कंपनी का शेयर
- 18:22खरीदता है, जितने शेयर्स खरीदेगा, उसको उस
- 18:25हिसाब से परसेंटेज का हिस्सा मिलेगा। उस
- 18:27कंपनी में उसके प्रॉफिट्स पर उसको
- 18:28डिविडेंड मिलेगा, रिटर्न मिलेगा। वो चीज
- 18:31लास्ट वाला पॉइंट पढ़ते हैं।
- 18:34लास्ट पॉइंट है कंट्रोल एंड मैनेजमेंट।
- 18:37यार सोल प्रोपराइटर के अंदर कल्ला बंदा
- 18:39है। तो ये ओनर जो है यही सारे डिसीजंस को
- 18:43लेगा। पार्टनरशिप में पार्टनर्स डिसीजन
- 18:46लेंगे। जो भी पार्टनर्स हैं एचयूएफ के
- 18:48अंदर चलेगी उसकी जो मुखिया है दादा किसी
- 18:50की नहीं सुनता वो वाली बात है कर्ता किसी
- 18:53की नहीं सुनता वो अपनी मनमर्जी चलाएगा और
- 18:55वैसे भी भाई ये सब आपने ऑब्जर्व करा होगा
- 18:58कि ये जो जॉइंट फैमिलीज़ के अंदर जो सबसे
- 19:00सीनियर मोस्ट पर्सन है अगर उसकी गलती भी
- 19:03हो ना वो तो भी नहीं मानेगा क्योंकि उसके
- 19:05अंदर वो ईगो प्रॉब्लम है कि भाई हमसे बड़ा
- 19:07कौन हो गया भाई प्रधान हम ही है मेन है हम
- 19:09हेड ऑफ द फैमिली हमारी चलेगी वो चीज
- 19:13कोऑपरेटिव सोसाइटी में बेटा क्या होता है
- 19:15कुछ लोगों को ऑफिस बियरर्स बना दिया जाता
- 19:17है। ऑफिस बियरर्स
- 19:20ऑफिस बियरर्स जैसे कि भाई कोऑपरेटिव
- 19:22सोसाइटी जितने मर्जी लोग की हो वो एक बंदे
- 19:25को प्रेसिडेंट बना देंगे एक को सेक्रेटरी
- 19:27एक जो सारा पैसा मैनेज करेगा ट्रेजर ठीक
- 19:30है ऐसेसे पोस्ट्स डिस्ट्रीब्यूट कर देते
- 19:33हैं वो लोग मेन मैनेज करते हैं सारा
- 19:34कंट्रोल ठीक है बाकी मेंबर्स भी वोट करते
- 19:37हैं बट मेन इनका रोल रहता है और कंपनी के
- 19:39अंदर जो कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स
- 19:42होते हैं इनको कौन रखता है भाई जो कंपनी
- 19:45में इन्वेस्ट करने वाले लोग हैं ना कंपनी
- 19:47के शेयरहोल्डर्स र्स वो डिसाइड करते हैं
- 19:49कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स कौन होंगे
- 19:51और वो डायरेक्टर्स लोग जो हैं वो कंपनी को
- 19:54मैनेज करते हैं। तो बेटा इसका स्क्रीनशॉट
- 19:56जरूर ले लेना। ये वीडियो 20 मिनट की
- 19:58वीडियो आपके बहुत काम आएगी। पूरे चैप्टर
- 20:00का एक आपको क्विक रिव्यू दे देगी यह
- 20:02वीडियो। ठीक है भाई? दैट्स इट। अगर कोई
- 20:04डाउट होगा कमेंट सेक्शन में आप पूछ सकते
- 20:06हो एनी टाइम। थैंक यू।
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