The Impossible Discovery Hiding Under Antarctica — Transcript
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- 0:00अच्छा ये दो मैप्स देखो। पहला है
- 0:02अंटार्कटिका का नॉर्मल मैप और दूसरा है
- 0:04राडार से बनाया गया मैप जिसमें
- 0:06वैज्ञानिकों को इसकी बर्फ के कई
- 0:08किलोमीटर्स नीचे 400 ऐसी अजीब चीजें मिली
- 0:11हैं जिनके बारे में कभी किसी ने सोचा तक
- 0:14नहीं था और एक ऐसी चीज जिस तक पहुंचना
- 0:16चांद पर कदम रखने जैसा है। लिटरली मैं कोई
- 0:19हाइप क्रिएट नहीं कर रहा हूं। कुछ ऐसा
- 0:20मिला है जो डायनासोर्स और हमारे सोलर
- 0:23सिस्टम में छिपी हुई एलियन लाइफ से जुड़ा
- 0:25है। एंड लिटरली इसके लिए 90ज में अमेरिका,
- 0:28रशिया और यूके के बीच में एक रेस शुरू हो
- 0:30गई थी। जिसमें तीनों कंट्रीज ने
- 0:32अंटार्कटिका की बर्फ में कई किलोमीटर गहरी
- 0:35ड्रिलिंग की ताकि वह इस बर्फ में छिपे
- 0:37रहस्य को खोलकर एक इतिहास रच सकें। और यह
- 0:40एक ऐसी ड्रिलिंग थी जिसमें दो देशों की
- 0:42बड़ी बुरी तरह से हार हुई और सिर्फ एक को
- 0:45जीत मिली। और उस देश ने अंटार्कटिका के इस
- 0:48डीप ड्रिलिंग में जो चीज खोज कर निकाली
- 0:50उसने पूरी इंसानियत के इतिहास और विज्ञान
- 0:52को बदल कर रख दिया। कुछ ऐसा पता चला है
- 0:55जिसके दम पर वैज्ञानिक यह बोल रहे हैं कि
- 0:57अब अंतरिक्ष में एलियन लाइफ को ढूंढा जा
- 0:59सकता है क्योंकि उनके होने के प्रूफ मिले
- 1:01हैं अंटार्कटिका में छिपी हुई इस लोकेशन
- 1:04पर। तो आखिर ऐसा क्या मिल गया है इन
- 1:05साइंटिस्टों को अंटार्कटिका में? और ऐसा
- 1:07क्या-क्या छिपा हुआ है अंटार्कटिका की इस
- 1:10बर्फ के नीचे जो हर कोई यहां पर ड्रिलिंग
- 1:12करना चाहता है। लेकिन अंटार्कटिका में
- 1:14ड्रिलिंग करना लगभग इंपॉसिबल है। बट आखिर
- 1:17ऐसा क्यों इतनी ज्यादा एडवांस टेक्नोलॉजी
- 1:19होने के बाद भी बर्फ में ड्रिलिंग करना
- 1:21लगभग इंपॉसिबल है? तो चलो आओ खोलते हैं
- 1:23अंटार्कटिका से जुड़े हर राज को आज के
- 1:26तगड़े और नॉलेजेबल वीडियो में।
- 1:40[संगीत]
- 1:48[संगीत]
- 1:4914 दिसंबर 1912 अंटार्कटिका टेंपरेचर है
- 1:53-30° और बर्फीली तेज हवाएं चल रही हैं।
- 1:56जिनके बीच सफेद बर्फ की चादर पर तीन आदमी
- 1:59आगे बढ़ रहे हैं। ये हैं एक्सप्लोरर डगलस
- 2:02मॉसन और उनके दो साथी न्नीस और मर्ड्स और
- 2:06ये तीनों यहां पर आए हैं अंटार्कटिका का
- 2:08नक्शा बनाने के लिए और यह अभी फिलहाल अपने
- 2:11बेस से करीब 500 कि.मी. दूर अंटार्कटिका
- 2:14की एक सुनसान जगह पर हैं। और इनमें नन्नीस
- 2:18जो है ना वो सबसे पीछे चल रहा है। क्योंकि
- 2:20इसे एक भारी स्लज अपने डॉग्स के साथ
- 2:22खींचनी पड़ रही है। जिन पर रखा है इन
- 2:24तीनों का खाना और इस जानलेवा माहौल में
- 2:27सर्वाइव करने के लिए टेंट और बाकी का
- 2:29जरूरी सामान। सब कुछ नॉर्मल चल रहा था।
- 2:32तभी अचानक से मौसन को मतलब इस टीम के लीडर
- 2:35को एक अजीब सी आवाज सुनाई देती है। जब
- 2:38उसने पीछे मुड़कर देखा तो उसकी सांसे रुक
- 2:41गई क्योंकि उनके पीछे ना स्लेज थी ना डॉग
- 2:44थे और उन दोनों को साथ लेकर चलने वाला निस
- 2:46भी कहीं दिखाई नहीं दे रहा था। मानो वो
- 2:49अचानक कहीं गायब हो गया। तभी मौसन की नजर
- 2:52पड़ी सफेद बर्फ पे बनी हुई एक डरावनी दरार
- 2:55पर जो करीब 100 फीट से भी ज्यादा गहरी लग
- 2:58रही थी। इसके अंदर था डरावना अंधेरा और
- 3:01सबसे बड़ी बात तो कुछ देर पहले तक यह लोग
- 3:04जब यहां से निकले थे तो यहां कोई दरार
- 3:06नहीं थी। इसका मतलब निम्न इस दरार के अंदर
- 3:09समा चुका था और पॉसिबबली नीचे जाकर ऊपर जा
- 3:12चुका था। जरा इमेजिन करो यह कितना डरावना
- 3:14है जिस जमीन को तुम सख्त और सॉलिड मानकर
- 3:17चल रहे हो। तुम्हारे वजन की वजह से उसमें
- 3:19दरार पड़ जाती है और तुम उसमें मौजूद
- 3:22सैकड़ों फीट गहरी खाई में अंधेरे में और
- 3:25ठंड में समा जाते हो और यहां तुम्हारी मदद
- 3:27कोई नहीं कर सकता। अब मौसन ने अपनी पूरी
- 3:30कोशिश करी उस अंधेरी खाई में उसने निस को
- 3:33कई बार आवाजें दी लेकिन कोई जवाब नहीं
- 3:36मिला। आई तो वहां नीचे से एक घायल कुत्ते
- 3:39की आवाज। अब यहां केवल नन्ही दरार में
- 3:41नहीं गिरा था। उसके साथ गिरी थी वो स्लेच
- 3:44जिसमें था सारा खाना, सारा जरूरी सामान।
- 3:47और उसके बिना यह लोग भी मर सकते थे बिना
- 3:50दरार में गिरे। लेकिन इस दरार में से
- 3:52स्लेच को निकालना इसमें उतरना या या फिर
- 3:55कुछ भी कर पाना ऑलमोस्ट इंपॉसिबल था। तो
- 3:57अब यह लोग बिना खाने के, बिना टेंट के,
- 4:00बिना किसी सामान के अंटार्कटिका की
- 4:02जानलेवा ठंड में अकेले खड़े हुए थे। अब यह
- 4:06लोग आगे बढ़ते रहे। शुरू में तो इन लोगों
- 4:08ने भूख से बचने के लिए अपने ही मौजूद कुछ
- 4:10कमजोर कुत्तों को मारकर खाया। लेकिन उनको
- 4:13एक बात नहीं पता थी कि कुत्ते के लीवर में
- 4:16इतना ज्यादा विटामिन ए होता है जो कि
- 4:18इंसान के लिए जहर बन जाता है। खैर ये बात
- 4:21तो किसी को भी मालूम नहीं होगी क्योंकि
- 4:23कुत्ता कौन ही खाता है? हां चाइना के
- 4:25लोगों को यह बात जरूर अच्छे से पता होगी।
- 4:26एनीवेज इस खाने की वजह से मतलब कुत्ते के
- 4:29मीट को खाने की वजह से जो जहर उनके शरीर
- 4:31में फैला उसकी वजह से जो मर्ड्स था मतलब
- 4:34निस के साथ एक और जो साथी था ना वो पागल
- 4:37हो गया और कुछ ही दिनों के बाद पागलपन की
- 4:39वजह से वह भी ऊपर चला गया। 8 जनवरी 1913
- 4:43को मर्ड्स के जाने के बाद इस बर्फी
- 4:45रेगिस्तान में मौसम बिल्कुल अकेला था।
- 4:54उसके पैरों के तलवों की चमड़ी उतर चुकी
- 4:57थी। पूरी स्किन अलग हो गई थी। उसका हाल भी
- 5:00मरने जैसा था। उसने अपनी चमड़ी को वापस
- 5:02अपने पैरों में पहना। फिर मोजे पहने, जूते
- 5:05पहने और बर्फ में चलता रहा क्योंकि वह हार
- 5:07नहीं मानना चाहता था। मतलब ये लाइन बोलते
- 5:10समय मैंने जो सीन इमेजिन किया ना मुझे खुद
- 5:12गुदगुदी सी हो गई अंदर घुसबम्स से आ गए कि
- 5:15मतलब चमड़ी उतर गई और उसको वापस पहन लिया
- 5:19और इसी हाल में वो 160 कि.मी. चला बर्फ
- 5:23में और जब वो वापस अपने बेस पर पहुंचा ना
- 5:26तो उसकी इतनी बुरी हालत हो गई थी कि उसकी
- 5:28खुद की टीम के लोग उसे नहीं पहचान पा रहे
- 5:30थे। अब यहां पर मौसन किसी तरह बच गया।
- 5:33लेकिन उसे इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा
- 5:35नहीं था कि अंटार्कटिका की जिस जानलेवा
- 5:38नीची छिपी दुनिया ने उसके दोस्त नि्नीस को
- 5:40निगल लिया था जिसकी वजह से उसके दूसरे
- 5:42दोस्त मर्ड्स की जान गई थी और वो खुद
- 5:45मरते-मरते बचा था उस अंटार्कटिका की वजह
- 5:48से और उसकी गहराइयों में छिपी मिस्टीरियस
- 5:50एलियन वर्ल्ड तक पहुंचने की रेस की वजह से
- 5:53दुनिया के तीन ताकतवर देश एक दूसरे के
- 5:56आमने-सामने खड़े होने वाले हैं। तो बात है
- 5:591960 की। साइंटिस्टों ने अंटार्कटिका के
- 6:02ऊपर ऐसे प्लेेंस उड़ाए जिनमें एक स्पेशल
- 6:04राडार लगा था और यह राडार ना बड़ा खास था।
- 6:07यह बर्फ के आर-पार देख सकता था। जब इस
- 6:10राडार से मिले डाटा के बेस पर एक पिक्चर
- 6:12बनाई गई तब साइंटिस्टों को पता चला कि
- 6:14अंटार्कटिका की जो बर्फ की सीधी सपाट लेयर
- 6:17है ना उसके नीचे सीधी सपाट जमीन बिल्कुल
- 6:19नहीं है। यहां पर तो बर्फ के नीचे पहाड़
- 6:22छिपे हुए थे जो हिमालयंस के बेल्ट जितने
- 6:24बड़े हैं। एक खाई है जो अमेरिका के ग्रैंड
- 6:27कैनियन से भी गहरी है और कुछ जगह तो राडार
- 6:29का सिग्नल बिल्कुल ही अलग था। यह सिग्नल
- 6:32दिखा रहे थे एकदम फ्लैट स्मूथ शीशे जैसी
- 6:35चिकनी सतह। ऐसा लग रहा था जैसे किसी
- 6:38लिक्विड की सतह से राडार के सिग्नल्स टकरा
- 6:41रहे हो। लेकिन अंटार्कटिका की जमी हुई
- 6:43बर्फ में माइनस टेंपरेचर में 4 कि.मी.
- 6:46नीचे आखिर लिक्विड जैसा क्या हो सकता है?
- 6:49बट 1990 तक सेटेलाइट्स, रेडार और
- 6:51अर्थक्वेक रीडिंग इन सारे डाटास ने मिलकर
- 6:53कंफर्म कर दिया कि सच में अंटार्कटिका की
- 6:56बर्फ के नीचे पानी है। और सिर्फ एक जगह
- 6:58नहीं 400 से ज्यादा ऐसे स्पॉट्स मिले।
- 7:00मतलब 400 सीक्रेट लेकक्स। और इनमें एक लेक
- 7:04सबसे ज्यादा बड़ी और सबसे ज्यादा अलग थी
- 7:07जिसका नाम था लेक वास्तोक। अब तुम बोलोगे
- 7:10गौरव भाई इस लेक का या इस पानी मिलने का
- 7:13एलियन लाइफ से क्या संबंध है? और क्या
- 7:15दुनिया के तीन बड़े देश इस मामूली सी लेक
- 7:18के चक्कर में आपस में रेस कर रहे थे? तो
- 7:20ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। यह जो लेक है ना
- 7:22यह डेढ़ करोड़ साल से बर्फ के नीचे छिपी
- 7:25हुई है। और सबसे खास बात यह है कि इसका जो
- 7:27पानी है ना वो जमता नहीं है। और यह
- 7:30चमत्कार कैसे होता है? आओ समझते हैं।
- 7:32बेसिकली यह जो लेकक्स है ना इनके ऊपर है
- 7:34बर्फ की मोटी चादर जो धरती के अंदर की
- 7:37गर्मी को बाहर नहीं निकलने देती। साथ ही
- 7:39इस मोटी बर्फ की चादर की वजह से इन लेकक्स
- 7:42के ऊपर रहता है नॉर्मल एटमॉस्फियर से कई
- 7:45गुना ज्यादा प्रेशर जिसकी वजह से इन
- 7:47लेकक्स में मौजूद पानी जम ही नहीं पाता और
- 7:50माइनस में टेंपरेचर होते हुए भी यह पानी
- 7:53लिक्विड फॉर्म में रहता है। इन शॉर्ट नीचे
- 7:55अंधेरे में ठंड में बिना सूरज के एक पूरा
- 7:58समुंदर मौजूद है पानी का। तो आखिर यह
- 8:00लिक्विड वाला समंदर जो है इतना खास क्यों
- 8:03है? इसलिए खास है क्योंकि यह डेढ़ करोड़
- 8:05साल पुराना है और यहां पर मौजूद होंगे कुछ
- 8:08जीव क्योंकि जहां पानी है वहां जीवन है और
- 8:11डेढ़ करोड़ सालों में अंधेरे में माइनस
- 8:13टेंपरेचर पर लिक्विड में रहने वाले जीव
- 8:16किस तरह से इवॉल्व हो गए होंगे या कहूं तो
- 8:19किस तरह के जीवों में वो बदल गए होंगे।
- 8:21साइंटिस्ट यह जानने में बहुत इंटरेस्टेड
- 8:23थे क्योंकि इसी से हमें ऐसे ग्रहों पर
- 8:25मौजूद जीवन की खोज करने में सफलता मिल
- 8:28सकती थी जहां पर बहुत ज्यादा ठंड रहती है
- 8:30और इस राज का पर्दाफाश करने का एक ही
- 8:33तरीका था ड्रिल करो बर्फ की दीवार को
- 8:35तोड़ो और अंदर चले जाओ लेकिन ये कहने
- 8:38सुनने में जितना सिंपल है उतना ही ज्यादा
- 8:40मुश्किलें करने में है क्योंकि अगर
- 8:42ड्रिलिंग के दौरान ऊपर वाली दुनिया का
- 8:45यहां से हम आते हैं एक भी बैक्टीरिया अगर
- 8:47इस डेढ़ करोड़ साल पुरानी लेक में चला गया
- 8:50तो यहां का पूरा पूरा इकोसिस्टम बर्बाद हो
- 8:52जाएगा, खत्म हो जाएगा। मतलब यहां से एक भी
- 8:55कण गंदगी का नीचे नहीं जाना चाहिए लेक
- 8:58में। फिर भी खुदाई करनी है, ड्रिलिंग करनी
- 9:00है। दिस साउंड्स इंपॉसिबल। लेकिन तीन बड़े
- 9:02देश ये काम करने के पीछे पागल थे। रशिया
- 9:05ने कहा वो ड्रिल करेगा 4 कि.मी. गहरी सबसे
- 9:07बड़ी लेक वस्तुक में। ब्रिटेन ड्रिल करेगा
- 9:093 कि.मी. नीचे मौजूद लेक एल्सवर्थ में और
- 9:12अमेरिका ड्रिल करेगा 800 मीटर नीचे मौजूद
- 9:15सबसे कम गहराई पर मौजूद लेक विलंस में।
- 9:18तीन देश, तीन लेकक्स, अलग-अलग गहराइयां।
- 9:20तो आखिर इस रेस में कौन जीता? इन तीनों
- 9:23देशों को खुदाई करने के बाद हाथ क्या लगा?
- 9:27[संगीत]
- 9:331970 में सोवियत साइंटिस्ट ने अंटार्कटिका
- 9:36के बीचों-बीच एक जगह ड्रिलिंग शुरू की,
- 9:38जिसका नाम था वॉस्टोक स्टेशन। उस वक्त
- 9:40उन्हें लेक के बारे में कुछ ज्यादा पता
- 9:42नहीं था। तो बस वो बर्फ के अंदर से सैंपल
- 9:45निकाल रहे थे यह जानने के लिए कि हजारों
- 9:47साल पहले धरती का मौसम कैसा था। सब कुछ
- 9:50बिल्कुल ठीक चल रहा था। ड्रिल नीचे जा रही
- 9:52थी और बर्फ के सैंपल्स लगातार ऊपर आ रहे
- 9:55थे। 1000 मीटर, 2000 मीटर, 3000 मीटर साल
- 9:59दर साल ड्रिल नीचे जाती रही। और फिर 1990
- 10:02में जब सेटेलाइट डाटा से लेक वॉस्टोक की
- 10:04खोज हुई तो साइंटिस्टों को एक चौंकाने
- 10:06वाली बात पता चली कि रशिया की ड्रिल पहले
- 10:08से 3100 मीटर गहरी जा चुकी है। जिससे केवल
- 10:12130 मीटर नीचे ही थी लेक वॉस्टोक। इसका
- 10:14मतलब था कि वो लोग इतना ज्यादा करीब थे कि
- 10:17कि वो बस थोड़ा सा और पुश करते तो ड्रिल
- 10:19करोड़ों साल से बंद उस लेक के अंदर होती।
- 10:22लेकिन तभी अचानक सब कुछ रोक दिया गया। यह
- 10:25सब इसलिए रोका गया क्योंकि एक बड़ी
- 10:27प्रॉब्लम आ गई थी। सोवियत यूनियन जब ड्रिल
- 10:29कर रहा था तो उनका जो गड्ढा होता था ना
- 10:31उसमें वापस बर्फ भर जाती थी। तो उस बर्फ
- 10:33को रोकने के लिए उन्होंने एक सलूशन
- 10:35निकाला। वो वहां पर एक लिक्विड डालने लगे
- 10:37जो जमता नहीं था। केरोसिन और फ्रेयन का
- 10:40मिक्सचर। अब सीधे-सीधे बोले तो यह था जेट
- 10:42फ्यूल। और यह कोई छोटा-मोटा अमाउंट नहीं
- 10:45था। यह था करीब 60 टन जेट फ्यूल लिक्विड
- 10:48फॉर्म में। अब सोचो जैसे ही ड्रिल करके वो
- 10:50मशीन मतलब ड्रिल मशीन लेक के अंदर जाती है
- 10:53वो पूरा लिक्विड लेक के अंदर चला जाता और
- 10:56150 साल पुराने इकोसिस्टम की वाट लग जाती
- 10:59है। लोग सोच रहे थे कि एक भी बैक्टीरिया
- 11:01लेक में नहीं जाना चाहिए और यहां पर 60 टन
- 11:04जेट फ्यूल चला जाता है उस लेक में। तो
- 11:05दुनिया भर के साइंटिस्टों ने रशिया को कहा
- 11:08कि भैया रुक जाओ तुम्हारा यह तरीका
- 11:09बिल्कुल भी सही नहीं है। एंड लिटरली इस
- 11:12चीज के ऊपर 10 साल तक बहस चली। कितना
- 11:15फालतू टाइम होता है ना लोगों के पास।
- 11:17रशिया के अपने तर्क थे। वह कह रहा था कि
- 11:19भाई यह जो केरोसिन है हमारे लिक्विड में
- 11:21यह पानी से हल्का होता है। यह ऊपर आ
- 11:23जाएगा। लेकिन बाकी साइंटिस्टों का कहना था
- 11:25कि यह जो फ्यूल है यह ऐसी लेक में नहीं
- 11:28जाना चाहिए। लेकिन रशिया ने किसी की नहीं
- 11:30सुनी। फाइनली 2012 में उसने बोला कि मैं
- 11:33तो भाई छेद करने वाला हूं और उन्होंने
- 11:36ड्रिल को पुश कर दिया। ड्रिल ने लेक की
- 11:38सतह तोड़ दी। अब ये जो लेक का पानी है ये
- 11:401.5 करोड़ साल से बर्फ के नीचे दबा था।
- 11:43पूरे प्रेशर में था यह और 4 कि.मी. मोटी
- 11:45बर्फ की दीवार के नीचे। जैसे ही छेद हुआ
- 11:48पानी प्रेशर से इतना तेजी से रिलीज हुआ कि
- 11:51उससे पहले उसके ऊपर जो केरोसिन था ना वो
- 11:54बाहर आ गया। एकदम हाई स्पीड फव्वारे की
- 11:56तरह और करीब 30 से 40 मीटर तक एक इरप्शन
- 11:59की तरह शूट हुआ यह केरोसन। जेट फ्यूल
- 12:02चारों तरफ बर्फ पर फैल गया। सब खुश हो गए
- 12:04कि भाई हमने बहुत बड़ा काम कर दिया है।
- 12:06लेकिन यहां पर कहानी खत्म नहीं होती। यहीं
- 12:08से तो पूरा रायता फैला। अब जब रशिया ने इस
- 12:11पानी के मतलब जो पानी फव्वारे की तरह बाहर
- 12:13निकला था ना इसके सैंपल लिए लैब में भेजे
- 12:15खूब खुशियां मनाई कि हमें एक नया
- 12:17बैक्टीरिया मिल गया है। कुछ नई खोज हो गई
- 12:19है। बाद में पता चला वो बैक्टीरिया
- 12:21केरोसिन में ही था। मतलब इनके जितने सैंपल
- 12:23थे ना वो सब कंटैमिनेटेड हो गए थे। इनका
- 12:25तरीका एक्चुअली में गलत था। इनको जो रोका
- 12:27जा रहा था ना सही रीज़न से रोका जा रहा था।
- 12:29तो इनकी मतलब रशिया वालों की सारी मेहनत
- 12:32पे, दशकों की मेहनत पे, इतना पैसा खर्च
- 12:34किया, इतनी टेक्नोलॉजी लगाई, सब गुड़ गोबर
- 12:36हो गया। लेकिन इनसे भी ज्यादा दुख भरी
- 12:38कहानी तो ब्रिटेन वालों की है। ब्रिटेन
- 12:40वालों ने प्लानिंग में 16 साल लगाए और $
- 12:43मिलियन का बजट। उन्होंने की हॉट वाटर
- 12:46ड्रिलिंग। मतलब गर्म पानी डालेंगे हम
- 12:47केरोसिन की जगह और उस पानी को भी हम
- 12:49बढ़िया पूरा क्लीन करेंगे। फिल्टर फिल्टर
- 12:52कर देंगे ताकि एक भी बैक्टीरिया सैंपल को
- 12:54कंटैमिनेट ना करें। मतलब ये था रशिया से
- 12:56100 गुना साफ तरीका। अब प्लान यह था कि दो
- 12:59होल्स बनाओ। बर्फ में पहला होल 300 मीटर
- 13:01तक ले जाओ। वहां पानी का एक पॉकेट बनाओ।
- 13:04फिर दूसरा मेन होल बनाओ। वहां पर भी 300
- 13:06मीटर पर उसको पॉकेट से जोड़ो। इस कनेक्शन
- 13:08से पानी ऊपर नीचे घूमता रहेगा और फिर मेन
- 13:11होल को 3 कि.मी. तक ले जाकर लेक में
- 13:13घुसाओ। तो 16 साल पुराना यह प्लान बड़ा
- 13:15सोच समझ कर बनाया गया था। ब्रिटेन वाले
- 13:17खुश थे कि भाई हम तो इस बार जंग जीत
- 13:19लेंगे। लेकिन कहते हैं ना अंटार्कटिका को
- 13:21किसी के प्लान की कोई परवाह नहीं होती।
- 13:23दिसंबर 2012 को ब्रिटिश टीम अंटार्कटिका
- 13:25पहुंची। काम शुरू हुआ। पहला होल 300 मीटर
- 13:27तक हो गया। पॉकेट बनी। दूसरा मेन होल 300
- 13:30मीटर तक हो गया। अब बस एक काम बचा था
- 13:32दोनों होल्स को 300 मीटर की गहराई पर आपस
- 13:34में जोड़ना। मात्र 2 मीटर का फासला बचा
- 13:36हुआ था। लेकिन वो 2 मीटर कांटे नहीं कट
- 13:39रहे थे। टीम ने लगातार कोशिश की 10 घंटे,
- 13:4220 घंटे, 40 घंटे ना कोई सोया ना कोई
- 13:45रुका। 24 दिसंबर क्रिसमस की ईव तक आ गई।
- 13:48और जब किसी ने फ्यूल टैंक चेक किया, तो
- 13:49पता चला कि इन 40 घंटों में वह 2 मीटर की
- 13:52खुदाई करने के चक्कर में इतना ज्यादा
- 13:54फ्यूल जला दिया था इन लोगों ने कि अब अगर
- 13:56ये दोनों कमरों को जोड़ भी दे तो भी असली
- 13:59गहराई तक पहुंचने के लिए इनके पास फ्यूल
- 14:01ही नहीं बचा। मतलब इनका पूरा प्लान फेल हो
- 14:03गया और 25 दिसंबर 2012 को ब्रिटेन ने इस
- 14:06पूरे के पूरे मिशन को कैंसिल कर दिया।
- 14:09बोला कि भैया खो गया जो होना था अब वापस आ
- 14:11जाओ। $2 मिलियन 16 साल की प्लानिंग डूब गई
- 14:142 मीटर के गैप की वजह से और अमेरिका भी
- 14:16कोई कम नहीं था। इसका नाम था विज़ार्ड।
- 14:18इसमें 13 साइंटिस्ट थे। एक नासा की स्पेस
- 14:20साइंस प्रोग्राम की टीम शामिल थी। आठ
- 14:22अलग-अलग यूनिवर्सिटी से आए बड़े-बड़े
- 14:24साइंटिस्ट। इन सबका टारगेट एक था। वेस्ट
- 14:26अंटार्कटिका में 800 मीटर बर्फ के नीचे
- 14:28मौजूद इस लेक तक सबसे साफ तरीके से
- 14:30पहुंचना और बाकी देशों को दिखा देना कि
- 14:32अमेरिका इज बेस्ट। इसके लिए उन्होंने सबसे
- 14:35साफ तरीका निकाला। इन लोगों ने सफाई का वह
- 14:38लेवल मेंटेन किया जो नासा वाले करते थे।
- 14:40हर इक्विपमेंट को हाइड्रोजन पैरोक्साइड
- 14:42में साफ किया। सील्ड बैग में बंद किया।
- 14:44ड्रिलिंग का पानी कई फिल्टर से गुजारा।
- 14:46यूवी लाइट से हर बैक्टीरिया को मारा और
- 14:47फाइनली 21 दिसंबर 2013 को जो ड्रिलिंग
- 14:50शुरू हुई थी वो सक्सेसफुल हुई ड्रिल लेक
- 14:52के अंदर चला गया और अमेरिका वालों ने वो
- 14:55कर दिखाया जो बाकी दो देश नहीं कर पाए
- 14:57अंदर का नजारा एकदम अलग था दूसरी दुनिया
- 14:59जैसा साफ पानी कोई हलचल नहीं कोई रोशनी
- 15:02नहीं शायद करोड़ों साल से वहां कुछ हिला
- 15:04तक नहीं था और उसके बाद निकाला गया यहां
- 15:06से पानी का सैंपल जो कि दुनिया में पहली
- 15:08बार माइक्रोस्कोप के नीचे रखा गया जांच
- 15:11करने के लिए एक बिना कंटैमिनेट किया गया
- 15:13प्योर सैंपल और उस सैंपल में मिला कुछ
- 15:16जिंदा। एक बैक्टीरिया और आर्किया नाम से
- 15:19एक छोटा जीव। वो भी -0.5
- 15:22डिग्री में। अंधेरे में बाकी दुनिया से
- 15:24हजारों करोड़ों साल से कटा हुआ। और इस जीव
- 15:26के जिंदा मिलने का मतलब पता है क्या था कि
- 15:28बाकी के जो ग्रह हैं जहां पर माइनस में
- 15:30टेंपरेचर होता है वहां पर भी इस तरह से
- 15:32जीवन मौजूद हो सकता है। लेकिन आखिर ये जीव
- 15:35बिना सूरज के जिंदा कैसे थे? ये जीव सूरज
- 15:38से एनर्जी ले ही नहीं रहे थे। क्योंकि
- 15:40वहां तक सूरज की रोशनी पहुंच ही नहीं पाती
- 15:42जहां पर ये जीव मौजूद थे। वहां पर
- 15:44चट्टानों से निकलती थी मीथेन गैस और यह उस
- 15:46गैस का इस्तेमाल करते थे। यह उस गैस को
- 15:48खाकर एनर्जी बना रहे थे बिना सूरज, बिना
- 15:51ताजी हवा। बस गैस खाओ और जिंदा रहो। और
- 15:53वैज्ञानिकों ने जांच में पाया कि इन जीवों
- 15:56में से कई तो डायनासोर्स के टाइम से भी
- 15:58ज्यादा पुराने हैं। और उसके बाद इस रिसर्च
- 16:00से यह पता चला कि बर्फ के कई किलोमीटर
- 16:03नीचे यह सारी चीजें पहुंची कैसे? क्योंकि
- 16:05एक टाइम पर अंटार्कटिका हमेशा से बर्फ से
- 16:07ढका नहीं था। यहां पर नॉर्मल लाइफ चला
- 16:09करती थी। जंगल थे, पहाड़ थी, नदियां थी,
- 16:12जीवित लोग थे। मतलब जीव-जंतु थे। और अभी
- 16:14जो मिल रहा है ना वह उस पुरानी बची खुची
- 16:16दुनिया की निशानी है जो करोड़ों साल से
- 16:18अकेली जिंदा रहने की कोशिश कर रही है। और
- 16:21यहां से कहानी में आता है ट्विस्ट। कहानी
- 16:23यहां से चली जाती है जुपिटर के एक चांद
- 16:26यूरोपा और सैटर्न के एक चांद पर जिसका नाम
- 16:28है एन सैडलस। इन दोनों पर बर्फ की मोटी
- 16:31परत है और उसके नीचे है पानी का समंदर।
- 16:34बिल्कुल वैसा जैसा कि अंटार्कटिका के नीचे
- 16:36था। और नासा के साइंटिस्टों का कहना है कि
- 16:38विज़ार्ड ने जिस तरीके से साफ ड्रिलिंग
- 16:40बिना गंदगी के सैंपल निकाला था वही तरीका
- 16:42यूरोपा और एन सैडलस के बर्फ के चादर को
- 16:45तोड़ने के काम आएगा। मतलब यह जो कुछ भी
- 16:47हुआ था ना अंटार्कटिका में यह एक रिहर्सल
- 16:49था। और अब इन दोनों जगहों से मतलब यूरोपा
- 16:52से और एन एडलस से जीवन की खोज की जाएगी।
- 16:55सबसे अकेली जगह पर जिंदगी मिलने की
- 16:57संभावनाएं ढूंढी जाएंगी। और तुम खुद
- 16:59सोचोगे ये तो केवल एक लेक की कहानी ये
- 17:01अंटार्कटिका में ऐसी 400 लेकक्स हैं और इन
- 17:03400 लेकक्स में क्या-क्या छिपा मिल सकता
- 17:06है यह सच में सोचने पर मजबूर कर देने वाला
- 17:08है। तुम खुद सोच कर देखो ना जब सिर्फ एक
- 17:10लेक में इतना कुछ मिला तो बाकी लेक्स में
- 17:12क्या-क्या छिपा हो सकता है?
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This page contains the full transcript of The Impossible Discovery Hiding Under Antarctica by Gaurav Katare, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 3,393 words across 409 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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