The Hidden PROFIT Game Between High & Low | Mark Douglas Psychology — Transcript
Full transcript
- 0:00दोस्तों आज मैं आपसे एक ऐसा सच शेयर करने
- 0:03वाला हूं जो शायद आपकी पूरी ट्रेडिंग बदल
- 0:05सकता है क्योंकि मार्केट में पैसा
- 0:08इंडिकेटर से नहीं बनता न्यूज़ से नहीं
- 0:10बनता और ना ही किसी टेलीग्राम टिप से बनता
- 0:13है। प्रॉफिट बनता है सिर्फ एक चीज समझने
- 0:17से कि मार्केट हाई कहां बना रहा है और लो
- 0:20कहां बना रहा है। लेकिन प्रॉब्लम यह है
- 0:2390% ट्रेडर्स चार्ट को देखते हैं। पर
- 0:26मार्केट की भाषा को नहीं समझते और मार्केट
- 0:29कभी बोलकर नहीं बताता कि वह ऊपर जाएगा या
- 0:32नीचे। वह सिर्फ क्लूस [संगीत] देता है।
- 0:34हाई, लो, ब्रेकउ, फेक आउट, ट्रैप। और
- 0:40जिसने यह क्लूस पढ़ना सीख लिया, [संगीत]
- 0:42वह धीरे-धीरे मार्केट से पैसा निकालना
- 0:44शुरू कर देता है। लेकिन जिसने नहीं सीखा,
- 0:46वह हमेशा यही बोलता रह जाता है। यार, सब
- 0:50समझ आता है। बस प्रॉफिट नहीं होता और शायद
- 0:54कभी [संगीत] ना कभी आपने भी यह लाइन जरूर
- 0:57बोली होगी। मैंने भी बोली थी। बहुत बार
- 1:00बोली थी। क्योंकि एक समय ऐसा था जब मैं भी
- 1:03सिर्फ कैंडल देखता था। मार्केट नहीं हर
- 1:06ग्रीन कैंडल देखकर लगता था। बस अब तो
- 1:10मार्केट उड़ने वाला है और हर रेड कैंडल
- 1:12देखकर डर लगता था। अब सब खत्म लेकिन फिर
- 1:17एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने मेरी सोच बदल
- 1:20दी। उस दिन मैंने [संगीत] पहली बार समझा
- 1:22कि मार्केट ऊपर या नीचे नहीं चलता।
- 1:25मार्केट सिर्फ लिक्विडिटी खोजता है। जहां
- 1:28लोगों का लालच ज्यादा होता है, वहां
- 1:30मार्केट ट्रैप बनाता है। जहां लोगों का डर
- 1:32ज्यादा होता है, [संगीत] वहां मार्केट
- 1:34मौका देता है। और यही खेल हाई और लो के
- 1:37बीच चलता [संगीत] रहता है। लेकिन रुकिए,
- 1:40इस वीडियो में मैं आपको सिर्फ थ्योरी नहीं
- 1:42बताने वाला। मैं आपको वह साइकोलॉजी
- 1:44समझाऊंगा जो बड़े ट्रेडर्स इस्तेमाल करते
- 1:46हैं। मैं आपको बताऊंगा क्यों रिटेल ट्रेडर
- 1:49हमेशा टॉप पर बाय [संगीत] करता है और बॉटम
- 1:51पर सेल क्यों स्मार्ट मनी हमेशा उल्टा
- 1:54करता है। क्यों कुछ लोग चार्ट देखकर डर
- 1:56जाते हैं और कुछ लोग उसी चार्ट से करोड़ों
- 1:59बना लेते हैं। और सबसे जरूरी कैसे आप भी
- 2:03चार्ट को प्रेडिक्ट नहीं बल्कि रीड करना
- 2:06सीख सकते हैं। क्योंकि ट्रेडिंग
- 2:08प्रेडिक्शन का खेल नहीं है। ट्रेडिंग
- 2:11प्रोबेबिलिटी का खेल है। और जिसने
- 2:13प्रोबेबिलिटी समझ ली उसके लिए मार्केट
- 2:15कसीनो [संगीत] नहीं बिजनेस बन जाता है।
- 2:17लेकिन इसके लिए पहले आपको एक कहानी सुननी
- 2:20होगी। एक ऐसी कहानी जो शायद आपकी अपनी
- 2:23कहानी [संगीत] जैसी लगे। क्योंकि कुछ साल
- 2:25पहले मैं भी वही गलती कर रहा था जो आज
- 2:28लाखों ट्रेडर्स कर रहे हैं। सुबह उठता
- 2:30[संगीत]
- 2:31चार्ट खोलता, YouTube पर दो वीडियो देखता,
- 2:34Telegram पर सिग्नल देखता [संगीत] और फिर
- 2:37एंट्री ले लेता। कभी प्रॉफिट, कभी लॉस।
- 2:40लेकिन महीने के आखिर में रिजल्ट हमेशा एक
- 2:43ही होता। अकाउंट धीरे-धीरे [संगीत] खाली।
- 2:46और सबसे दर्दनाक बात पता है क्या थी? मुझे
- 2:49लगता था प्रॉब्लम मार्केट में है। कभी
- 2:52ऑपरेटर [संगीत] को गाली देता, कभी एफआईआई
- 2:55को, कभी मैनपुलेशन को। लेकिन असली
- 2:57प्रॉब्लम मेरे अंदर थी। मैं मार्केट को
- 3:00समझे बिना उससे पैसा निकालना चाहता था और
- 3:04मार्केट ऐसे लोगों को कभी पैसा नहीं देता।
- 3:07मार्केट पहले टेस्ट लेता है। वह आपका
- 3:09पेशेंस चेक करता है। आपका डिसिप्लिन चेक
- 3:12करता है। आपका फियर और ग्रीड चेक करता है।
- 3:15और जब तक आप हर इमोशन में स्टेबल नहीं
- 3:18रहते तब तक मार्केट आपको बार-बार हराता
- 3:20रहता है। फिर एक दिन मैंने एक बहुत अजीब
- 3:24चीज नोटिस की। मार्केट बार-बार वही पैटर्न
- 3:26बना रहा था। पहले हाई बनाता, फिर लोग
- 3:29एक्साइटेड होकर बाय करते। फिर अचानक डंप
- 3:32फिर लोग [संगीत] डर कर सेल करते और वहीं
- 3:34से मार्केट रिवर्स। शुरुआत में मुझे लगा
- 3:37[संगीत] यह कोइंसिडेंस है। लेकिन जब मैंने
- 3:39पुराने चार्ट्स देखे तो मेरा दिमाग हिल
- 3:42[संगीत] गया। हर जगह सेम स्टोरी। बस
- 3:45कैरेक्टर्स बदल जाते हैं। फियर, ग्रीड,
- 3:48फोमो, पैनिकिक। मार्केट इन्हीं इमोशंस पर
- 3:52चलता है। और तभी मुझे समझ आया कि ट्रेडिंग
- 3:55कैंडल्स का नहीं। ह्यूमन साइकोलॉजी का खेल
- 3:58है। [संगीत] चार्ट पर जो लाइन दिखती है,
- 4:00असल में वह इंसानों की इमोशन होती है। जब
- 4:03लोग लालची होते हैं, तो मार्केट [संगीत]
- 4:05ऊपर भागता है। जब लोग डरते हैं, तो
- 4:07मार्केट नीचे गिरता है। लेकिन स्मार्ट
- 4:10ट्रेडर इमोशन नहीं देखता। वो अपॉर्चुनिटी
- 4:13देखता है और यहीं से शुरू होता है हाई और
- 4:15लो का असली खेल। अब जरा इमेजिन कीजिए एक
- 4:18स्टॉक लगातार ऊपर जा रहा है। न्यूज़
- 4:21पॉजिटिव YouTube वाले बुलिश एक्सपर्ट्स
- 4:24टारगेट दे रहे हैं और अचानक आपको लगता है
- 4:28अगर अभी बाय नहीं किया तो मौका निकल
- 4:30जाएगा। यही वो [संगीत] मोमेंट है जहां
- 4:32ज्यादातर लोग फंसते हैं क्योंकि उन्हें
- 4:35लगता है हाई मतलब स्ट्रेंथ लेकिन कई बार
- 4:38हाई सिर्फ ट्रैप होता है। [संगीत] स्मार्ट
- 4:40मनी पहले प्राइस को ऊपर धकेलता है ताकि
- 4:43रिटेल ट्रेडर बाय करें। फिर जब सब लोग बाय
- 4:46कर लेते हैं, मार्केट क्वाइटली उल्टा घूम
- 4:48जाता है और रिटेल ट्रेडर सोचता रह जाता
- 4:51है। यार मेरे बाय करते ही मार्केट गिर
- 4:53क्यों गया? क्योंकि मार्केट आपके खिलाफ
- 4:55नहीं गया। आप बस लेट थे बहुत लेट। अब
- 4:58दूसरी तरफ देखिए जब मार्केट लगातार गिरता
- 5:01है। हर तरफ फियर होता है। न्यूज़ नेगेटिव।
- 5:06लोग पैनिकिक में पोर्टफोलियो लाल और उसी
- 5:08समय कुछ लोग चुपचाप बाय कर रहे होते हैं।
- 5:12क्यों? क्योंकि उन्हें पता होता है
- 5:14मार्केट हमेशा वीक लोगों से स्ट्रांग
- 5:17लोगों की तरफ पैसा ट्रांसफर करता है। जो
- 5:19डर जाता है वह लॉस बुक करता है। जो समझता
- 5:23है वह पोजीशन बिल्ड करता है और यही
- 5:25डिफरेंस एक गैंबलर और ट्रेडर में होता है।
- 5:29लेकिन कहानी अभी शुरू हुई है क्योंकि आगे
- 5:31मैं आपको वो सीक्रेट बताने वाला हूं जो
- 5:34शायद किसी ने इतने सिंपल तरीके से नहीं
- 5:36समझाया होगा। मार्केट में प्रॉफिट एंट्री
- 5:39से नहीं बनता। प्रॉफिट बनता है सही जगह पर
- 5:43लोगों की गलती पहचानने से। जहां क्राउड
- 5:45ज्यादा कॉन्फिडेंट होता है, वहीं अक्सर
- 5:48डेंजर छिपा होता है। और जहां क्राउड सबसे
- 5:50ज्यादा डरता है, वहीं कई बार सबसे बड़ा
- 5:53ओपोरर्चुनिटी छिपा होता है। लेकिन रुकिए।
- 5:56यहां एक बहुत बड़ा सवाल आता है। अगर इतना
- 5:59सिंपल है तो फिर ज्यादातर लोग लॉस क्यों
- 6:01करते हैं? आंसर बहुत दर्दनाक है। क्योंकि
- 6:05लोग सीखना नहीं चाहते। [संगीत] लोग
- 6:06शॉर्टकट चाहते हैं। सिग्नल इंडिकेटर मैजिक
- 6:10स्ट्रेटजी। लेकिन मार्केट में कोई मैजिक
- 6:12नहीं है। यहां सिर्फ साइकोलॉजी काम करती
- 6:15है। और जिसने खुद को कंट्रोल कर लिया
- 6:17[संगीत] उसने आधी ट्रेडिंग जीत ली। बाकी
- 6:20आधी चार्ट सिखा देता है। अब मैं आपको एक
- 6:23रियल सिचुएशन बताता हूं। एक ट्रेडर था हर
- 6:27बार वही गलती करता। मार्केट ऊपर जाता। वो
- 6:30लेट एंट्री लेता। मार्केट गिरता [संगीत]
- 6:33वो स्टॉप लॉस हिट। फिर वो रिवेंज ट्रेडिंग
- 6:35करता और अंत में पूरा अकाउंट खत्म। लेकिन
- 6:39सबसे शॉकिंग बात पता है उसकी स्ट्रेटजी
- 6:41खराब नहीं थी। उसकी टाइमिंग खराब नहीं थी।
- 6:44उसकी साइकोलॉजी खराब थी। वो हाई पर
- 6:46एक्साइटेड हो जाता था और लो पर डर जाता
- 6:48था। मतलब वो वही कर रहा था जो क्राउड
- 6:52[संगीत] करता है। और मार्केट क्राउड को
- 6:54रिवॉर्ड नहीं करता। मार्केट क्राउड को यूज़
- 6:56करता है। अब शायद आप सोच रहे होंगे तो
- 6:59क्या हमेशा लो पर बाय करें और हाई पर सेल?
- 7:03नहीं इतना सिंपल भी नहीं है क्योंकि हर
- 7:05हाई ट्रैप नहीं होता और हर लो
- 7:08अपोरर्चुनिटी नहीं होता। यहीं पर असली
- 7:10स्किल शुरू होती है। आपको समझना पड़ता है
- 7:13कि कौन सा हाई जेनुइन है और कौन सा सिर्फ
- 7:15लिक्विडिटी ट्रैप, कौन सा लो वीकनेस है और
- 7:18कौन सा एक्यूमुलेशन और इसके लिए आपको
- 7:21कैंडल्स नहीं कॉन्टेक्स्ट पढ़ना होगा।
- 7:23लेकिन प्रॉब्लम यह है अधिकतर लोग
- 7:25कॉन्टेक्स्ट नहीं देखते। उन्हें सिर्फ
- 7:27जल्दी पैसा चाहिए और जल्दी पैसा कमाने की
- 7:30यही जल्दबाजी उन्हें धीरे-धीरे मार्केट से
- 7:33बाहर कर देती है। मैंने भी यही [संगीत]
- 7:35किया था। कई रातें ऐसी थी जब मैं सो नहीं
- 7:38पाता था। चार्ट दिमाग में घूमता रहता था।
- 7:41लॉस रिकवर करने की टेंशन और सबसे बड़ा
- 7:44दर्द खुद पर गुस्सा क्योंकि अंदर से पता
- 7:47होता था गलती मार्केट की नहीं थी। गलती
- 7:50मेरी थी। लेकिन ईगो मानने नहीं देता था।
- 7:53और शायद आपने भी कभी ना कभी यह महसूस किया
- 7:56होगा। ट्रेडिंग का सबसे बड़ा बैटल चार्ट
- 7:59पर नहीं चलता। वह आपके दिमाग के अंदर चलता
- 8:02है। फियर कहता है एंट्री मत ले। ग्रीड
- 8:06कहता है थोड़ा और प्रॉफिट ईगो कहता है।
- 8:09स्टॉप लॉस मत मार। और यही तीन चीजें
- 8:13अकाउंट खत्म कर देती हैं। लेकिन जिस दिन
- 8:15मैंने हाई और लो को इमोशन की नजर से देखना
- 8:18शुरू किया उस दिन से सब बदलना शुरू हो
- 8:21गया। अब मैं कैंडल नहीं देखता था। मैं
- 8:23क्राउड देखता था। मैं यह देखने लगा कहां
- 8:27लोग लालची हो रहे हैं। कहां लोग डर रहे
- 8:29हैं, कहां लोग ट्रैप हो रहे हैं। और
- 8:32धीरे-धीरे चार्ट साफ दिखने लगा। क्योंकि
- 8:35सच यह है मार्केट कभी रैंडम नहीं चलता। हर
- 8:39मूव के पीछे साइकोलॉजी होती है। हर ब्रेकउ
- 8:41के पीछे इमोशन होती है। हर क्रैश के पीछे
- 8:44पैनिकिक होता है। और जिसने यह समझ लिया
- 8:46उसके लिए ट्रेडिंग आसान नहीं लेकिन क्लियर
- 8:49जरूर हो जाती है। अब अगले पार्ट में मैं
- 8:52आपको बताऊंगा कैसे स्मार्ट मनी हाई और लो
- 8:55का इस्तेमाल करके रिटेल ट्रेडर्स को ट्रैप
- 8:57करता है। कैसे फेक ब्रेकउ बनते हैं। क्यों
- 9:00लोग हमेशा गलत जगह एंट्री लेते हैं और
- 9:02कैसे आप मार्केट के शिकार नहीं बल्कि
- 9:04[संगीत] ऑब्जर्वर बन सकते हैं। क्योंकि
- 9:07याद रखिए मार्केट में सबसे ज्यादा पैसा की
- 9:10उन लोगों का जाता है जो जल्दी एक्साइटेड
- 9:12हो जाते हैं और सबसे ज्यादा पैसा उन लोगों
- 9:15के पास आता है जो पेशेंटली ऑब्जर्व करते
- 9:18हैं। तो तैयार रहिए क्योंकि अब शुरू होगा
- 9:21मार्केट साइकोलॉजी का असली खेल। एक सवाल
- 9:24पूछूं? क्या आपने कभी नोटिस किया है कि
- 9:27मार्केट हमेशा वही करता है [संगीत] जिसकी
- 9:29उम्मीद सबसे कम लोग करते हैं। जब सबको
- 9:32लगता है अब मार्केट ऊपर ही जाएगा। तभी
- 9:35अचानक क्रैश और जब सब डर [संगीत] कर बोलते
- 9:37हैं अब तो सब खत्म तभी अचानक रैली शुरू।
- 9:41पहले मुझे लगता था यह सिर्फ कोइंसिडेंस
- 9:43है। लेकिन फिर एक दिन मैंने अपने पुराने
- 9:47ट्रेड्स खोले एक-एक करके और जो मैंने देखा
- 9:50उसने मुझे अंदर तक हिला दिया। मेरे लगभग
- 9:53हर लॉस में एक चीज कॉमन थी। मैंने एंट्री
- 9:56वहीं ली थी जहां मुझे सबसे ज्यादा
- 9:58कॉन्फिडेंस था। हां, सबसे ज्यादा
- 10:00कॉन्फिडेंस और मार्केट इंसान को वहीं
- 10:03मारता है जहां उसे खुद पर सबसे ज्यादा
- 10:06भरोसा होता है। यही वजह है कि ट्रेडिंग
- 10:09सिर्फ स्ट्रेटजी का खेल नहीं है। यह ईगो
- 10:12का खेल है। और जिसने अपने ईगो को नहीं
- 10:14संभाला वो मार्केट में कभी टिक नहीं सकता।
- 10:17मुझे आज भी वो दिन याद है सुबह मार्केट
- 10:19गैप अप खुला था। [संगीत] हर तरफ बुलिश
- 10:22माहौल। YouTube पर लोग टारगेट दे रहे थे।
- 10:25Telegram पर लिखा था आज अपपर सर्किट वाला
- 10:28मूव आएगा और मैं पूरी कॉन्फिडेंस में था।
- 10:31दिल तेज धड़क रहा था। दिमाग बोल रहा था
- 10:34अगर अभी एंट्री नहीं ली तो बड़ा मौका निकल
- 10:37जाएगा और यही वो मोमेंट था जहां मार्केट
- 10:40ने मुझे ट्रैप किया। मैंने बाय किया और
- 10:42शुरुआती 5 मिनट में प्रॉफिट भी दिखा। इतना
- 10:45प्रॉफिट कि मुझे लगा आज तो गेम बदल जाएगा।
- 10:49लेकिन फिर अचानक एक रेड कैंडल आई। फिर
- 10:52दूसरी, फिर तीसरी और कुछ ही मिनटों में
- 10:55पूरा प्रॉफिट गायब। लेकिन असली दर्द
- 10:57प्रॉफिट जाने का नहीं था। असल दर्द था मैं
- 11:00एग्जिट नहीं कर पा रहा था। क्यों? क्योंकि
- 11:03मेरा ईगो बोल रहा था। थोड़ा वेट कर
- 11:05मार्केट वापस आएगा। लेकिन मार्केट वापस
- 11:08नहीं आया। वो और गिरता गया और मैं स्क्रीन
- 11:11को घूरता रह गया। उस दिन सिर्फ पैसा नहीं
- 11:14गया था। उस दिन मेरा ओवर कॉन्फिडेंस टूटा
- 11:17था और शायद हर ट्रेडर को एक ना एक दिन यह
- 11:21दर्द झेलना पड़ता है क्योंकि मार्केट पहले
- 11:24आपका कॉन्फिडेंस तोड़ता है फिर कैरेक्टर
- 11:27बनाता है लेकिन उस लॉस के बाद मैंने एक
- 11:30बहुत बड़ा सवाल खुद से पूछा अगर मैं इतना
- 11:33शोर था तो फिर मैं गलत कैसे हो गया और
- 11:36वहीं से शुरू हुई मेरी असली लर्निंग मैंने
- 11:39समझना शुरू किया कि मार्केट लॉजिक से नहीं
- 11:42लिक्विडिटी से चलता है जहां ज्यादा ज्यादा
- 11:45लोग एंट्री लेते हैं। मार्केट वहीं जाता
- 11:47है। क्यों? क्योंकि मार्केट को मूव करने
- 11:49के लिए फ्यूल चाहिए और रिटेल [संगीत]
- 11:52ट्रेडर की इमोशन वही फ्यूल होती है। अब
- 11:54जरा डीपली समझिए। जब कोई स्टॉक लगातार ऊपर
- 11:58जा रहा होता है तो क्या होता है?
- 12:00धीरे-धीरे लोग एक्साइटेड होने लगते हैं।
- 12:02फिर लोग दूसरों को देखकर बाय करते हैं।
- 12:05फिर फोमो शुरू होता है। और फिर एक पॉइंट
- 12:08ऐसा आता है जहां ऑलमोस्ट हर कोई बुलिश हो
- 12:12जाता है और ठीक वहीं स्मार्ट मनी एग्जिट
- 12:15करना शुरू करता है क्योंकि उन्हें पता है
- 12:18अब खरीदने वाले खत्म हो चुके हैं। अब
- 12:20मार्केट को ऊपर ले जाने वाला कौन बचा? कोई
- 12:23नहीं। और तभी प्राइस गिरना शुरू होता है।
- 12:26मतलब जिस जगह रिटेल ट्रेडर को सबसे ज्यादा
- 12:29सेफ्टी महसूस होती है, असल में वही सबसे
- 12:32डेंजरस जगह होती है। यही कारण है कि
- 12:35मार्केट में भीड़ के साथ चलना आसान है।
- 12:38लेकिन प्रॉफिट कमाना मुश्किल। अब दूसरी
- 12:40तरफ देखिए जब मार्केट गिरता है लोग
- 12:43पैनिकिक करने लगते हैं। पोर्टफोलियो
- 12:45[संगीत] देखकर डर लगता है। न्यूज़ चैनल्स
- 12:47डर बेचते हैं। एक्सपर्ट्स बोलते हैं अभी
- 12:51और गिरावट आएगी और तभी स्मार्ट मनी
- 12:55धीरे-धीरे बाय करना शुरू करता है। क्योंकि
- 12:58उन्हें [संगीत] पता है फियर हमेशा
- 12:59ओपोरर्चुनिटी पैदा करता है। लेकिन रिटेल
- 13:02ट्रेडर उस समय बाय नहीं कर पाता। क्यों?
- 13:05क्योंकि इंसान का दिमाग सेफ्टी चाहता है
- 13:07और मार्केट में सेफ्टी अक्सर सबसे बड़ा
- 13:10इल्लुजन होती है। अब यहां ध्यान से सुनिए।
- 13:12यह पूरी ट्रेडिंग की सबसे पावरफुल बात है।
- 13:15मार्केट आपको वहीं फंसाता है जहां आपको
- 13:18लगता है अब मैं समझ गया। और यही वजह है कि
- 13:21थोड़ी सक्सेस के बाद अधिकतर ट्रेडर्स अपना
- 13:24अकाउंट उड़ा देते हैं। क्योंकि शुरुआत में
- 13:27प्रॉफिट स्किल से नहीं लक से आता है।
- 13:31लेकिन ट्रेडर उसे स्किल समझ बैठता है। फिर
- 13:33पोजीशन साइज बढ़ाता है। रिस्क बढ़ाता है।
- 13:36कॉन्फिडेंस ओवर कॉन्फिडेंस बन जाता है। और
- 13:39फिर एक ट्रेड पूरा गेम खत्म। मैंने ऐसे
- 13:44ट्रेडर्स देखे हैं जो 6 महीने प्रॉफिट में
- 13:46थे। लेकिन सिर्फ एक महीने [संगीत] में सब
- 13:48कुछ वापस मार्केट को दे दिया क्योंकि
- 13:51उन्हें लगा था अब वह मार्केट को समझ चुके
- 13:53हैं। लेकिन सच यह है कोई भी इंसान मार्केट
- 13:57को पूरी तरह नहीं समझ सकता। हम सिर्फ
- 13:59प्रोबेबिलिटी समझ सकते हैं और जिस दिन आप
- 14:02यह एक्सेप्ट कर लेते हैं उस दिन आपका डर
- 14:05कम होने लगता है। क्योंकि फिर आप हर ट्रेड
- 14:08को लाइफ और डेथ [संगीत] नहीं मानते। अब
- 14:10सुनिए यहीं पर हाई और लो का असली सीक्रेट
- 14:13छिपा है। हाई सिर्फ प्राइस नहीं होता।
- 14:16[संगीत] हाई मतलब क्राउड का ग्रीड। लो
- 14:19सिर्फ प्राइस नहीं होता। लो मतलब क्राउड
- 14:22का फियर और स्मार्ट ट्रेडर। प्राइस नहीं
- 14:25बढ़ता। वो इमोशन बढ़ता है। अब इमेजिन
- 14:29कीजिए एक स्टॉक नया हाई बना रहा है। हर
- 14:32तरफ सेलिब्रेशन। लोग स्क्रीनशॉट डाल रहे
- 14:34हैं। बाय एंड होल्ड टारगेट मूड। अब तो
- 14:38रॉकेट बनेगा। लेकिन उसी समय कुछ प्रोफेशनल
- 14:42ट्रेडर्स क्वाइटली एग्जिट कर रहे होते
- 14:44हैं। क्यों? क्योंकि उन्हें पता है जब
- 14:47क्राउड बहुत ज्यादा एक्साइटेड हो जाए तो
- 14:50रिस्क बढ़ [संगीत] जाता है। अब इसका मतलब
- 14:52यह नहीं कि हर हाई पर सेल करना है। नहीं
- 14:56बल्कि आपको यह समझना है कि उस हाई के पीछे
- 14:58इमोशन क्या है? क्या वहां रियल स्ट्रेंथ
- 15:01है या सिर्फ हाइप। क्या वहां जेन्युइन
- 15:04बाइंग है या सिर्फ फोमो? और यही डिफरेंस
- 15:07एक एमचर और प्रोफेशनल ट्रेडर में होता है।
- 15:10एमेचर ट्रेडर कैंडल देखता है। प्रोफेशनल
- 15:13ट्रेडर बिहेवियर देखता है। अब शायद आप समझ
- 15:16रहे होंगे क्यों ट्रेडिंग इतनी मुश्किल
- 15:18लगती है? क्योंकि यहां आपका मुकाबला
- 15:21मार्केट से नहीं खुद की इमोशन से होता है
- 15:25और इमोशन हर इंसान को गलत डिसीजन लेने पर
- 15:28मजबूर करती है। फियर आपको जल्दी एग्जिट
- 15:31कराता है। ग्रीड आपको देर तक होल्ड कराता
- 15:34है। ईगो आपको स्टॉप लॉस नहीं लगाने देता
- 15:37और रिवेंज [संगीत] आपका पूरा अकाउंट खा
- 15:40जाता है। यही चार चीजें अधिकतर ट्रेडर्स
- 15:43को खत्म कर देती हैं। लेकिन जो इंसान इन
- 15:46चारों को कंट्रोल करना सीख लेता है उसके
- 15:49लिए मार्केट बदलने लगता है। धीरे-धीरे उसे
- 15:51साफ दिखने लगता है। कहां ट्रैप बन रहा है,
- 15:54कहां क्राउड फंस रहा है, कहां लिक्विडिटी
- 15:57हंट हो रही है और तभी ट्रेडिंग गैंबलिंग
- 16:00नहीं लगती। वो एक साइकोलॉजिकल गेम लगने
- 16:03लगती है। अब यहां मैं आपको एक ऐसी बात
- 16:05बताने वाला हूं जो शायद आपकी पूरी सोच बदल
- 16:08दे। मार्केट का काम आपको पैसा देना नहीं
- 16:11है। मार्केट का काम है वीक ट्रेडर्स से
- 16:14पैसा लेकर पेशेंट ट्रेडर्स को देना। और
- 16:16वीक कौन है जो जल्दी एक्साइटेड हो जाए। जो
- 16:19[संगीत] जल्दी डर जाए जो बिना प्लान के
- 16:21ट्रेड ले जो हर कैंडल पर इमोशनली रिएक्ट
- 16:24करे और स्ट्रांग कौन है जो वेट कर सके जो
- 16:28ऑब्जर्व कर सके जो एक्सेप्ट कर सके कि मैं
- 16:31गलत हो सकता हूं। यही लाइन एक ट्रेडर की
- 16:35जिंदगी बदल देती है। क्योंकि जिस दिन आप
- 16:38गलत होने से डरना छोड़ देते हैं, उस दिन
- 16:40आप सीखना शुरू करते हैं और लर्निंग
- 16:43प्रॉफिट से ज्यादा पावरफुल होती है।
- 16:46क्योंकि प्रॉफिट कभी भी वापस जा सकता है।
- 16:49लेकिन सही अंडरस्टैंडिंग पूरी जिंदगी पैसा
- 16:51बनाती है। अब अगले पार्ट [संगीत] में मैं
- 16:54आपको बताऊंगा कैसे स्मार्ट मनी फेक
- 16:57ब्रेकआउट बनाकर रिटेल ट्रेडर्स को ट्रैप
- 17:00करता है। [संगीत] कैसे बड़े प्लेयर्स
- 17:01स्टॉप लॉस हंट करते हैं? क्यों मार्केट
- 17:04हमेशा आपकी एंट्री के बाद रिवर्स होता हुआ
- 17:06लगता है? और कैसे आप पहली बार चार्ट को
- 17:08साफ देखना शुरू करेंगे? लेकिन उससे पहले
- 17:11अगर आप सच में ट्रेडिंग सीखना चाहते हैं
- 17:14सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं तो इस वीडियो को
- 17:17अभी लाइक कर दीजिए। क्योंकि जब आप लाइक
- 17:19करते हैं तो मुझे समझ आता है कि आप उन
- 17:22लोगों में से हैं जो सिर्फ सपना नहीं
- 17:24देखते बल्कि खुद को बदलने के लिए तैयार
- 17:27हैं। और अगर आप चाहते हैं [संगीत] कि मैं
- 17:29इस सीरीज का अगला पार्ट जल्दी लाऊं तो
- 17:31कमेंट में लिखिए मैं मार्केट को रीड करना
- 17:34सीख रहा हूं। क्योंकि याद रखिए [संगीत]
- 17:36जिस दिन आपने मार्केट की भाषा समझ ली उस
- 17:39दिन से चार्ट डराना बंद कर देगा। सच बताऊं
- 17:42मार्केट में सबसे खतरनाक चीज क्रैश नहीं
- 17:45होती। सबसे खतरनाक चीज होती है फेक होप।
- 17:48क्योंकि क्रैश आपको डराता है लेकिन फेक
- 17:51होप आपको धीरे-धीरे खत्म करती है और
- 17:54मार्केट यही खेल खेलता है। वह पहले आपको
- 17:57भरोसा दिलाता है। [संगीत] फिर उसी भरोसे
- 17:59को आपके खिलाफ इस्तेमाल करता है। और इस
- 18:02खेल का सबसे बड़ा हथियार है फेक ब्रेकउ।
- 18:05[संगीत]
- 18:06हां, वही ब्रेकउ जिसे देखकर लोग एक्साइटेड
- 18:10हो जाते हैं। वही कैंडल [संगीत] जिसे
- 18:12देखकर YouTube पर वीडियो बनने लगते हैं।
- 18:15वही मोमेंट जहां रिटेल ट्रेडर सोचता है।
- 18:18बस अब तो स्टॉक उड़ जाएगा। लेकिन रियलिटी
- 18:22अक्सर वहीं से गिरावट शुरू होती है। और
- 18:25अगर आपने इस ट्रैप को समझ लिया तो बिलीव
- 18:28कीजिए आपकी पूरी ट्रेडिंग बदल सकती है।
- 18:31क्योंकि मार्केट में पैसा सिर्फ सही
- 18:33एंट्री से नहीं बनता। पैसा गलत जगह एंट्री
- 18:36लेने से बचने में बनता है। और यह बात मुझे
- 18:38बहुत देर से समझ आई। मुझे आज भी याद है।
- 18:41एक स्टॉक कई दिनों से रेजिस्टेंस के नीचे
- 18:44घूम रहा था। बार-बार ऊपर जाता फिर वापस
- 18:48गिर जाता। पूरा मार्केट उस ब्रेकआउट का
- 18:51वेट कर रहा था। Telegram चैनल्स अलर्ट दे
- 18:53रहे थे। Twitter पर लोग [संगीत] बोल रहे
- 18:55थे बस ब्रेकआउट आते ही रॉकेट और मैं भी
- 19:00उसी क्राउड का हिस्सा बन चुका था। मैं
- 19:03लगातार चार्ट देख रहा था। दिल में
- 19:05एक्साइटमेंट, दिमाग में सिर्फ प्रॉफिट और
- 19:08फिर वो मोमेंट आया। एक बड़ी ग्रीन [संगीत]
- 19:10कैंडल, रेजिस्टेंस ब्रेक, वॉल्यूम हाई और
- 19:14उसी सेकंड मैंने बाय कर लिया। उस समय मुझे
- 19:18लगा अब तो स्मार्ट एंट्री ली है। लेकिन
- 19:21सिर्फ 10 मिनट बाद [संगीत] प्राइस रुक
- 19:23गया। फिर धीरे-धीरे नीचे आने लगा और अचानक
- 19:27तेज रेड कैंडल फिर पैनिकिक सेलिंग और कुछ
- 19:30ही देर में पूरा ब्रेकउ फेल। लेकिन जानते
- 19:34हो सबसे दर्दनाक चीज क्या थी? लॉस नहीं।
- 19:38दर्द यह था [संगीत] कि मैं बिल्कुल वहीं
- 19:40फंसा जहां लाखों रिटेल ट्रेडर्स फंसते
- 19:42हैं। और उस दिन पहली बार मैंने [संगीत]
- 19:44खुद से पूछा अगर इतना परफेक्ट ब्रेकआउट था
- 19:47तो फेल क्यों हुआ? और वहीं से मुझे
- 19:50मार्केट का सबसे डेंजरस सीक्रेट समझ आया।
- 19:52हर [संगीत] ब्रेकउ रियल नहीं होता। कुछ
- 19:55ब्रेकआउट सिर्फ ट्रैप होते हैं। स्मार्ट
- 19:58मनी जानता है रिटेल ट्रेडर्स कहां एंट्री
- 20:00लेते हैं। उन्हें पता है लोग रेजिस्टेंस
- 20:03ब्रेक होते ही बाय करेंगे। [संगीत] तो वो
- 20:05क्या करते हैं? पहले प्राइस को ऊपर पुश
- 20:07करते हैं। रिटेल ट्रेडर्स एक्साइटेड होकर
- 20:09बाय करते हैं। लिक्विडिटी मिल जाती है और
- 20:12फिर स्मार्ट मनी क्वाइटली सेल करके निकल
- 20:14जाता है और मार्केट रिवर्स। मतलब जो कैंडल
- 20:18आपको ओपोरर्चुनिटी लग रही थी असल में वह
- 20:21एग्जिट लिक्विडिटी थी। अब यहां डीपली
- 20:23समझिए मार्केट का सबसे बड़ा खेल क्या है?
- 20:26इमोशन जब तक लोग इमोशनली रिएक्ट करते
- 20:30रहेंगे मार्केट उन्हें ट्रैप करता रहेगा
- 20:33और फेक ब्रेकउ इमोशन ट्रिगर करने का सबसे
- 20:36पावरफुल तरीका है क्योंकि इंसान ब्रेकउ
- 20:39देखकर कंट्रोल खो देता है। उसे लगता है
- 20:43अगर अभी नहीं [संगीत] घुसे तो मौका निकल
- 20:45जाएगा। यही फोमो रिटेल ट्रेडर का सबसे
- 20:48बड़ा दुश्मन है। अब जरा सोचिए अगर कोई
- 20:51स्टॉक लंबे समय से रेंज में है तो सबकी
- 20:54नजर कहां होगी? ब्रेकउ पर। मतलब हर कोई
- 20:58उसी जगह बाय करने का वेट कर रहा है और
- 21:00जहां भीड़ खड़ी होती है मार्केट वहीं
- 21:03ट्रैप बनाता है क्योंकि मार्केट को मूव
- 21:05करने के लिए ऑर्डर्स चाहिए और रिटेल
- 21:08ट्रेडर के ऑर्डर्स स्मार्ट मनी के लिए
- 21:10फ्यूल होते हैं। यही कारण है कि अक्सर
- 21:13रियल मूव तभी शुरू होता है जब फेक मूव
- 21:17खत्म हो जाता है। लेकिन यहां सबसे बड़ा
- 21:20सवाल आता है तो रियल ब्रेकउ [संगीत]
- 21:22पहचाने कैसे? आंसर बहुत सिंपल है लेकिन
- 21:25आसान नहीं। रियल ब्रेकउ में सिर्फ प्राइस
- 21:28नहीं भागता, बिहेवियर बदलता है, इमोशन
- 21:31नहीं, स्ट्रक्चर बदलता है लेकिन रिटेल
- 21:34ट्रेडर स्ट्रक्चर नहीं देखता। वो सिर्फ
- 21:36कैंडल देखता है और यही गलती उसे बार-बार
- 21:39नुकसान कराती है। अब सुनिए, यहीं पर हाई
- 21:42और लो का असली कनेक्शन आता है। फेक
- 21:45ब्रेकआउट अक्सर हाई के आसपास बनता है।
- 21:47क्यों? क्योंकि वहीं सबसे ज्यादा ग्रीड
- 21:49होती है और फेक ब्रेकडाउन अक्सर लो के
- 21:52आसपास [संगीत] बनता है। क्यों? क्योंकि
- 21:54वहीं सबसे ज्यादा फियर होता है। मतलब
- 21:57मार्केट वहीं ट्रैप बनाता है जहां क्राउड
- 22:00इमोशनली वीक हो। अब मैं आपको एक और चीज
- 22:02बताता हूं जो शायद आपने खुद नोटिस की
- 22:05होगी। कई बार ऐसा होता है आप एंट्री लेते
- 22:08हैं और मार्केट तुरंत रिवर्स। लेकिन जैसे
- 22:11ही आप स्टॉप लॉस हिट करके बाहर निकलते
- 22:13हैं, मार्केट वापस आपके डायरेक्शन में चला
- 22:15जाता है और तब लगता है यार मार्केट मेरे
- 22:18खिलाफ ही चलता है। लेकिन सच क्या है?
- 22:21मार्केट आपके खिलाफ नहीं है। आप बस क्राउड
- 22:23के साथ खड़े थे और मार्केट भीड़ को पहले
- 22:26शेक आउट करता है। क्योंकि बड़े मूव्स वीक
- 22:28हैंड्स को बाहर निकाल कर ही आते हैं। यही
- 22:31वजह है कि प्रोफेशनल ट्रेडर्स जल्दी
- 22:33एक्साइटेड नहीं होते। वह वेट करते हैं,
- 22:36ऑब्जर्व करते हैं, कन्फर्मेशन के पीछे
- 22:38नहीं भागते बल्कि बिहेवियर समझते हैं। अब
- 22:42यहां एक बहुत इंपॉर्टेंट बात समझिए।
- 22:44ट्रेडिंग का मतलब हर मूव पकड़ना [संगीत]
- 22:47नहीं है। ट्रेडिंग का मतलब है सिर्फ हाई
- 22:49प्रोबेबिलिटी मूव पकड़ना। लेकिन रिटेल
- 22:52ट्रेडर क्या करता है? हर कैंडल पर
- 22:54रिएक्शन, हर ब्रेकउ पर एंट्री, हर न्यूज़
- 22:57पर एक्साइटमेंट और धीरे-धीरे इमोशन उसका
- 23:01सिस्टम बन जाती है। यही कारण है कि
- 23:04ज्यादातर लोग ट्रेडिंग को स्ट्रेस समझते
- 23:06हैं क्योंकि वह ट्रेडिंग नहीं कर रहे। वो
- 23:08इमोशनल गैंबलिंग कर रहे हैं। अब मैं आपको
- 23:11एक छोटा सा सीन इमेजिन करवाता हूं। रात के
- 23:1411:00 बजे हैं। आप चार्ट देख रहे हैं। एक
- 23:17स्टॉक तेजी से ऊपर भाग रहा है। सोशल
- 23:19मीडिया पर लोग प्रॉफिट स्क्रीनशॉट डाल रहे
- 23:21हैं। आपका दिल बोलता है सब कमा [संगीत]
- 23:24रहे हैं। मैं पीछे क्यों रहूं और उसी
- 23:27इमोशन में आप एंट्री ले लेते हैं। अब
- 23:30बताइए यह डिसीजन लॉजिक से आया या इमोशन
- 23:33से? यही फर्क विनर और लूजर में होता है।
- 23:37विनर ट्रेडर इमोशन महसूस करता है। [संगीत]
- 23:40लेकिन उसके हिसाब से डिसीजन नहीं लेता।
- 23:42लूजर ट्रेडर इमोशन के हिसाब से डिसीजन
- 23:45लेता है और मार्केट इमोशनली वीक लोगों को
- 23:49सबसे पहले खत्म करता है। लेकिन अब शायद
- 23:52आपके दिमाग में एक सवाल चल रहा होगा अगर
- 23:55हर जगह ट्रैप है तो प्रॉफिट बनेगा कैसे?
- 23:58यहीं पर गेम बदलता है। प्रॉफिट प्रेडिक्शन
- 24:01से नहीं बनेगा। प्रॉफिट बनेगा पेशेंस से।
- 24:04जब आप हर मूव में जंप करना छोड़ देंगे।
- 24:07तभी आपको साफ दिखेगा कहां असली
- 24:10ओपोरर्चुनिटी है क्योंकि मार्केट हमेशा
- 24:12जल्दी करने वालों को सजा देता है और वेट
- 24:15करने वालों को रिवॉर्ड। याद रखिए सबसे
- 24:18पावरफुल ट्रेडर वो नहीं जो सबसे ज्यादा
- 24:21ट्रेड लेता है। सबसे पावरफुल ट्रेडर वो है
- 24:24जो सही समय का इंतजार कर सकता है और यही
- 24:27स्किल रिटेल ट्रेडर को [संगीत] प्रोफेशनल
- 24:29बनाती है। अब अगले पार्ट में मैं आपको
- 24:32बताऊंगा कैसे स्मार्ट मनी आपके स्टॉप लॉस
- 24:35को हंट करता है। क्यों मार्केट ठीक उसी
- 24:37लेवल तक जाता है जहां आपका स्टॉप लॉस लगा
- 24:40होता है। कैसे लिक्विडिटी हंट होती है और
- 24:43कैसे बड़े प्लेयर्स फियर का इस्तेमाल करके
- 24:45[संगीत] मार्केट को मूव करते हैं। लेकिन
- 24:48उससे पहले अगर आप यहां तक देख रहे हैं तो
- 24:51एक बात क्लियर है आप सिर्फ पैसा कमाना
- 24:53नहीं चाहते। आप सच में मार्केट को समझना
- 24:56चाहते हैं। इस वीडियो को उन लोगों तक जरूर
- 24:58शेयर कीजिए जो हर ब्रेकउ पर फंस जाते हैं।
- 25:01क्योंकि शायद उनकी सबसे बड़ी प्रॉब्लम
- 25:03स्ट्रेटजी नहीं इमोशन है। क्या आपने कभी
- 25:07महसूस किया है कि मार्केट को आपके स्टॉप
- 25:09लॉस का पता होता है। आप जैसे ही स्टॉप लॉस
- 25:12लगाते हो प्राइस सीधे वहीं आता है। आपको
- 25:15बाहर निकालता है और फिर उसी डायरेक्शन में
- 25:18भाग जाता है। और उस समय [संगीत] ऐसा लगता
- 25:21है जैसे कोई आपको देख रहा था। जैसे
- 25:23मार्केट ने पर्सनल बदला लिया हो। लेकिन सच
- 25:27इससे भी ज्यादा खतरनाक है। मार्केट आपको
- 25:29नहीं देखता। मार्केट क्राउड को देखता है
- 25:32और क्राउड [संगीत] लगभग हमेशा एक जैसी जगह
- 25:36पर स्टॉप लॉस लगाता है। यही वजह है कि
- 25:39स्मार्ट मनी को पहले से पता होता है
- 25:41लिक्विडिटी कहां रखी हुई है और ट्रेडिंग
- 25:44का सबसे डार्क गेम यहीं से शुरू होता है।
- 25:48लिक्विडिटी हंट। लेकिन इसे समझने के लिए
- 25:51पहले आपको एक सीन इमेजिन करना होगा। सुबह
- 25:54के 9:20 [संगीत]
- 25:55मार्केट ओपन हुआ है। एक स्टॉक लगातार ऊपर
- 25:58जा रहा है। हर कैंडल ग्रीन Twitter पर लोग
- 26:02बोल रहे हैं स्ट्रांग मोमेंटम [संगीत]
- 26:04YouTube वाले बोल रहे हैं। अब तो नया हाई
- 26:07पक्का और हजारों रिटेल ट्रेडर्स उसी स्टॉक
- 26:10में एंट्री लेने लगते हैं। लेकिन एंट्री
- 26:13लेते समय हर कोई एक काम जरूर करता है।
- 26:15स्टॉप लॉस। किसी ने प्रीवियस लो के नीचे
- 26:18लगाया, किसी ने सपोर्ट [संगीत] के नीचे,
- 26:20किसी ने राउंड नंबर के नीचे। मतलब
- 26:23धीरे-धीरे एक ही जगह हजारों स्टॉप लॉस जमा
- 26:27हो जाते हैं। अब सोचिए अगर आप स्मार्ट मनी
- 26:30होते तो आपको सबसे ज्यादा लिक्विडिटी कहां
- 26:32मिलती? वहीं जहां सबके स्टॉप लॉस पड़े हैं
- 26:36और तभी अचानक मार्केट नीचे गिरता है। तेज
- 26:40रेड कैंडल पैनिकिक रिटेल ट्रेडर डर जाता
- 26:43है। स्टॉप लॉस हिट और जैसे ही भीड़ बाहर
- 26:46निकलती है मार्केट वापस ऊपर नई रैली शुरू।
- 26:50और रिटेल ट्रेडर स्क्रीन देखकर सिर्फ एक
- 26:52ही चीज बोलता है यार मेरे निकलते ही
- 26:56मार्केट ऊपर क्यों चला गया? क्योंकि आपका
- 26:59स्टॉप लॉस किसी और का ओपोरर्चुनिटी था।
- 27:02यही है मार्केट का असली खेल। मार्केट मूव
- 27:05तभी करता है जब उसे ऑर्डर्स मिलते हैं। और
- 27:08सबसे ज्यादा ऑर्डर्स कहां मिलते हैं? जहां
- 27:10फियर जमा हो। अब यहां ध्यान से सुनिए।
- 27:14बहुत लोग सोचते हैं स्मार्ट मनी सिर्फ
- 27:16[संगीत] बाय और सेल करता है। नहीं।
- 27:19स्मार्ट मनी इमोशन को कंट्रोल करता है। वह
- 27:22जानता है। रिटेल ट्रेडर कहां एक्साइटेड
- 27:25होगा। कहां डरेगा, कहां पैनिकिक करेगा और
- 27:29मार्केट को उसी हिसाब से चलाया जाता है।
- 27:32अब मैं आपको वह चीज बताता हूं जो शायद
- 27:34आपकी पूरी ट्रेडिंग बदल दे। स्टॉप लॉस गलत
- 27:37नहीं है। ब्लाइंड स्टॉप लॉस गलत है
- 27:40क्योंकि ज्यादातर लोग स्टॉप लॉस लॉजिक से
- 27:42नहीं फियर से लगाते हैं। उन्हें बस लॉस से
- 27:45बचना होता है। लेकिन मार्केट फियर को सूंघ
- 27:49लेता है और जहां फियर होता है वहीं
- 27:52लिक्विडिटी होती है। अब सोचिए अगर पूरा
- 27:55क्राउड एक ही लेवल के नीचे स्टॉप लॉस लगाए
- 27:58बैठा है तो वहां क्या रखा है? ऑर्डर्स।
- 28:01बहुत सारे ऑर्डर्स और बड़े प्लेयर्स को
- 28:03मूव चाहिए, लिक्विडिटी चाहिए तो वह क्या
- 28:06करेंगे? प्राइस को वहीं तक धकेलेंगे। भीड़
- 28:09का स्टॉप लॉस ट्रिगर होगा। सेलिंग प्रेशर
- 28:11आएगा और उसी सेलिंग को दसें स्मार्ट मनी
- 28:14क्वाइटली अब्सॉर्ब करेगा। मतलब रिटेल
- 28:17ट्रेडर पैनिकिक में बेच रहा होता है और
- 28:19स्मार्ट मनी उसी फियर को खरीद रहा होता
- 28:21है। यही कारण है कि मार्केट अक्सर वही
- 28:24करता है जो इमोशनली इंपॉसिबल लगता है। जब
- 28:27आपको लगता है अब मार्केट और नहीं गिर सकता
- 28:30तभी सबसे बड़ा डंप और जब लगता है अब
- 28:33रिकवरी इंपॉसिबल है तभी वायलेंट रैली।
- 28:37क्यों? क्योंकि मार्केट लॉजिक से नहीं
- 28:39इमोशंस से लोगों को हराता है। [संगीत] अब
- 28:41एक मोमेंट के लिए अपने पुराने ट्रेड्स याद
- 28:44कीजिए। कितनी बार ऐसा हुआ है? आपने
- 28:46परफेक्ट एंट्री ली। लेकिन छोटा सा स्टॉप
- 28:49लॉस लगाया और बस उसी लेवल तक प्राइस
- 28:51[संगीत] आया। आपको बाहर निकाला। फिर
- 28:53रिवर्स बार-बार। इतनी बार कि धीरे-धीरे
- 28:57आपको खुद पर शक होने लगा और यही मोमेंट
- 29:00सबसे डेंजरस होता है। क्योंकि जब ट्रेडर
- 29:02खुद पर भरोसा खो देता है तब वह सिस्टम
- 29:05छोड़ देता है। फिर वो हर कैंडल पर ट्रेड
- 29:08लेने लगता है। हर सिग्नल के पीछे भागता
- 29:10है। हर लॉस रिकवर करना चाहता है और वहीं
- 29:13से ट्रेडिंग खत्म नहीं होती। ट्रेडर खत्म
- 29:17होने लगता है। मुझे याद है एक समय ऐसा
- 29:20[संगीत] था जब मैं हर स्टॉप लॉस के बाद
- 29:22फ्रस्ट्रेट हो जाता था। लगता था बस थोड़ा
- 29:26और होल्ड कर लेता तो प्रॉफिट हो जाता। फिर
- 29:29धीरे-धीरे मैंने स्टॉप लॉस हटाना शुरू कर
- 29:31दिया और बिलीव कीजिए यही मेरी सबसे बड़ी
- 29:34गलती थी क्योंकि बिना स्टॉप लॉस का ट्रेडर
- 29:37सीट बेल्ट के बिना गाड़ी चलाने जैसा होता
- 29:39है। कुछ समय तक सब ठीक लगता है लेकिन एक
- 29:42एक्सीडेंट [संगीत]
- 29:43सब खत्म कर देता है और मार्केट में एक
- 29:46बड़ा लॉस सिर्फ पैसा नहीं लेता। वह आपका
- 29:49कॉन्फिडेंस भी ले जाता है। आपकी क्लेरिटी
- 29:51भी, आपकी डिसिप्लिन भी। फिर इंसान ट्रेड
- 29:54नहीं करता। वह सिर्फ पैसा वापस पाने की
- 29:57कोशिश करता है। और यही रिवेंज ट्रेडिंग
- 30:00सबसे ज्यादा अकाउंट्स खत्म करती है। लेकिन
- 30:02फिर एक दिन मुझे एक बात समझ आई। प्रोफेशनल
- 30:06ट्रेडर्स का फोकस लॉस अवॉइड करने पर नहीं
- 30:09होता। उनका फोकस होता है कंट्रोलोल्ड लॉस।
- 30:13क्योंकि उन्हें पता है लॉस गेम का हिस्सा
- 30:16है। कोई भी ट्रेडर हर ट्रेड नहीं जीत सकता
- 30:19लेकिन वीक ट्रेडर [संगीत] लॉस से डरता है
- 30:21और फियर उसे गलत डिसीजन लेने पर मजबूर
- 30:24करता है। अब यहां सबसे पावरफुल बात समझिए।
- 30:27मार्केट आपको लॉस से नहीं हराता। आपका
- 30:30इमोशन आपको हराता है। दो ट्रेडर्स एक ही
- 30:33चार्ट देखते हैं। एक पैनिक करता है। दूसरा
- 30:35ऑब्जर्व। एक जल्दी एग्जिट करता है, दूसरा
- 30:38कॉन्टेक्स्ट समझता है। [संगीत] एक इमोशनली
- 30:40रिएक्ट करता है, दूसरा पेशेंटली रिसोंड
- 30:44करता है। और यही छोटा सा फर्क लॉन्ग टर्म
- 30:47में करोड़ों का फर्क बन जाता है। अब जरा
- 30:50हाई और लो को फिर से याद कीजिए। हाइपर
- 30:52[संगीत] ग्रीड, लो परफियर और बीच में
- 30:55लिक्विडिटी यानी इमोशन का खेल। यही वजह है
- 31:00कि बड़े मूव्स अक्सर वहीं से शुरू होते
- 31:02हैं जहां रिटेल ट्रेडर हार मान चुका होता
- 31:05है। क्योंकि जब फियर पीक पर पहुंचता है
- 31:08तभी स्मार्ट मनी सबसे ज्यादा एक्टिव होता
- 31:10है। लेकिन रिटेल ट्रेडर उस समय एंट्री
- 31:13नहीं ले पाता। क्यों? क्योंकि उसका दिमाग
- 31:15सेफ्टी खोज रहा होता है। और मार्केट में
- 31:18परफेक्ट सेफ्टी कभी नहीं मिलती। यही
- 31:21रियलिटी है। ट्रेडिंग में क्लेरिटी
- 31:23[संगीत] मिल सकती है। लेकिन सर्टेनिटी
- 31:25नहीं। और जिस दिन आप सर्टेनिटी ढूंढना
- 31:27छोड़ देते हैं उस दिन आप मैच्योर ट्रेडर
- 31:30बनना शुरू करते हैं। अब सोचिए अगर मार्केट
- 31:33सच में आसान होता तो क्या इतने लोग लॉस
- 31:36करते? नहीं। मार्केट मुश्किल इसलिए नहीं
- 31:39है क्योंकि स्ट्रेटजी कॉम्प्लेक्स है।
- 31:41मार्केट मुश्किल इसलिए है क्योंकि इंसान
- 31:43अपनी इमोशन कंट्रोल नहीं कर पाता। फियर,
- 31:46ग्रीड, होप, रिवेंज। यही चार चीजें चार्ट
- 31:51को धुंधला बना देती है। लेकिन जिसने इमोशन
- 31:54के पीछे छिपी लिक्विडिटी देख ली उसके लिए
- 31:56मार्केट पहली बार क्लियर दिखने लगता है।
- 31:59अब अगले पार्ट में मैं आपको बताऊंगा कैसे
- 32:02स्मार्ट मनी फॉल्स फियर बनाकर रिटेल
- 32:05ट्रेडर्स को बॉटम पर सेल करवाता है। क्यों
- 32:07स्ट्रांग कैंडल हमेशा स्ट्रांग मूव नहीं
- 32:10होती और कैसे बड़े प्लेयर्स धीरे-धीरे
- 32:12पोजीशन बिल्ड करते हैं बिना क्राउड को पता
- 32:14चले। क्योंकि असली पैसा नॉइज़ में नहीं
- 32:17बनता। असली पैसा साइलेंस में बनता है।
- 32:21मार्केट में सबसे खतरनाक आवाज कौन सी है?
- 32:24[संगीत] जानते हो? न्यूज़ नहीं, चार्ट
- 32:26नहीं, दूसरों की राय नहीं, सबसे खतरनाक
- 32:29आवाज होती है आपके अपने दिमाग की। क्योंकि
- 32:32जब मार्केट तेजी से गिरता है तो बाहर से
- 32:35ज्यादा अंदर शोर शुरू होता है। सेल कर दे
- 32:39सब खत्म हो जाएगा। इस बार रिकवरी नहीं
- 32:42आएगी। और यही वह मोमेंट होता है जहां
- 32:45स्मार्ट मनी क्वाइटली पोजीशन बिल्ड कर रहा
- 32:47होता है। हां, जब रिटेल ट्रेडर डर कर भाग
- 32:51रहा होता है तभी बड़े प्लेयर्स धीरे-धीरे
- 32:54खरीद रहे होते हैं। लेकिन प्रॉब्लम यह है
- 32:56रिटेल ट्रेडर को एक्यूमुलेशन दिखता
- 32:58[संगीत] ही नहीं क्योंकि उसे हमेशा स्पीड
- 33:00चाहिए। तेज कैंडल, तेज प्रॉफिट, तेज मूव
- 33:04लेकिन असली पैसा धीरे बनता है। साइलेंस
- 33:08में बनता है। और यही बात मुझे बहुत देर से
- 33:11समझ आई। मुझे आज भी वह फेज याद है।
- 33:14[संगीत] पूरा मार्केट गिर रहा था। हर तरफ
- 33:16नेगेटिविटी। YouTube पर क्रैश के
- 33:19थंबनेल्स, एक्सपर्ट्स डर बेच रहे थे।
- 33:22न्यूज़ चैनल्स पैनिकिक फैला रहे थे और मैं
- 33:25हर रेड कैंडल देखकर और डर रहा था।
- 33:28पोर्टफोलियो खोलने से डर लगता था। हर सुबह
- 33:31ऐसा लगता आज शायद और बड़ा लॉस होगा। और
- 33:34इसी फियर में [संगीत] मैंने अपनी पोजीशन
- 33:36एग्जिट कर दी। उस समय मुझे लगा मैंने
- 33:39स्मार्ट डिसीजन लिया। लेकिन कुछ दिनों बाद
- 33:42मार्केट धीरे-धीरे स्टेबलाइज होने लगा।
- 33:44फिर अचानक एक स्ट्रांग रैली और वही
- 33:48स्टॉक्स जिन्हें मैंने फियर में बेचा था
- 33:50ऊपर भागने लगे। उस दिन सिर्फ पैसा नहीं
- 33:53गया। उस दिन मुझे अपनी सबसे बड़ी कमजोरी
- 33:55दिखी। मैं प्राइस देख रहा था लेकिन
- 33:58बिहेवियर नहीं। मैं नॉइज़ सुन रहा था।
- 34:01लेकिन रियलिटी नहीं। और रियलिटी क्या थी?
- 34:04बिग प्लेयर्स पहले से तैयार थे। जब क्राउड
- 34:07पैनिकिक में बेच रहा था तब वह क्वाइटली
- 34:10खरीद रहे थे क्योंकि उन्हें पता था फियर
- 34:14हमेशा डिस्काउंट देता है। अब यहां डीपली
- 34:17समझिए स्मार्ट मनी कभी इमोशनली ट्रेड नहीं
- 34:20करता। वो धीरे-धीरे पोजीशन बिल्ड करता है।
- 34:23इतना धीरे कि क्राउड को पता भी नहीं चलता
- 34:26क्योंकि अगर वह एक साथ बाय करेंगे तो
- 34:29प्राइस तेजी से ऊपर भाग जाएगा और उन्हें
- 34:31चीप प्राइस नहीं मिलेगा। इसलिए वह क्या
- 34:34करते हैं? धीरे-धीरे खरीदते हैं। मार्केट
- 34:37को साइडवेज रखते हैं। कभी ऊपर पुश, कभी
- 34:40नीचे शेक आउट ताकि रिटेल ट्रेडर कंफ्यूज
- 34:42रहे और कंफ्यूज ट्रेडर कभी पैसा नहीं बना
- 34:46सकता। यही वजह है कि एक्यूमुलेशन फेस
- 34:49हमेशा बोरिंग लगता है। कोई एक्साइटमेंट
- 34:52नहीं, कोई रॉकेट मूव नहीं। बस साइडवेज
- 34:54मार्केट और रिटेल ट्रेडर वो ऐसे समय में
- 34:57इंटरेस्ट खो देता है। क्योंकि उसे एक्शन
- 34:59चाहिए। लेकिन प्रोफेशनल ट्रेडर वो इसी
- 35:01साइलेंस को ऑब्जर्व करता है क्योंकि उसे
- 35:04पता है सबसे बड़े मूव्स नॉइज़ से नहीं
- 35:07साइलेंस से शुरू होते हैं। अब एक बहुत
- 35:10इंपॉर्टेंट चीज समझिए। स्ट्रांग कैंडल
- 35:12हमेशा स्ट्रांग मार्केट नहीं होती और वीक
- 35:15कैंडल [संगीत] हमेशा वीकनेस नहीं होती।
- 35:18लेकिन रिटेल ट्रेडर यही गलती करता है। वह
- 35:20सिर्फ कैंडल देखकर डिसीजन लेता है। ग्रीन
- 35:24कैंडल देखी एक्साइटेड, रेड कैंडल देखी
- 35:27पैनिकिक और यही इमोशनल रिएक्शन उसे
- 35:30बार-बार गलत साइड पर खड़ा कर देती है। अब
- 35:33मैं आपको एक छोटा सा सीन इमेजिन करवाता
- 35:35हूं। [संगीत] एक स्टॉक कई दिनों से गिर
- 35:37रहा है। हर दिन नई रेड कैंडल लोग बोल रहे
- 35:41हैं यह स्टॉक खत्म। Twitter पर
- 35:43नेगेटिविटी, न्यूज़ खराब और तभी अचानक एक
- 35:48और बड़ी रेड कैंडल। [संगीत] अब रिटेल
- 35:50ट्रेडर क्या करेगा? पैनिकिक सेल क्योंकि
- 35:52उसे लगता है अब तो और क्रैश आएगा लेकिन
- 35:55उसी कैंडल में स्मार्ट मनी बाय कर रहा
- 35:58होता है। क्यों? क्योंकि उन्हें पता है अब
- 36:02फियर एक्सट्रीम पर है और जहां फियर
- 36:05एक्सट्रीम पर पहुंचता है वहीं अक्सर
- 36:07सेलिंग खत्म होने लगती है। मतलब जिस कैंडल
- 36:10को रिटेल ट्रेडर डिजास्टर समझ रहा है
- 36:13स्मार्ट मनी उसे अपॉर्चुनिटी की तरह देख
- 36:15रहा है। अब यहां हाई और लो का कनेक्शन फिर
- 36:18समझिए। हाई पर क्राउड ग्रेडी होता है। लो
- 36:22पर क्राउड [संगीत] फियरफुल। लेकिन स्मार्ट
- 36:23मनी वो क्राउड की इमोशन का ऑोजिट सोचता
- 36:26है। जब क्राउड लालची हो वो सावधान हो जाते
- 36:29हैं। [संगीत] जब क्राउड डर जाए वो अलर्ट
- 36:32हो जाते हैं। और यही रीजन है कि बड़े
- 36:34प्लेयर्स हमेशा क्राउड से पहले सोचते हैं।
- 36:36अब शायद आप समझ रहे होंगे क्यों ट्रेडिंग
- 36:39सिर्फ स्ट्रेटजी [संगीत] का खेल नहीं है।
- 36:41अगर सिर्फ स्ट्रेटजी होती तो हर इंसान
- 36:43YouTube देखकर करोड़पति बन जाता। लेकिन
- 36:46रियलिटी, सेम स्ट्रेटजी, डिफरेंट
- 36:48रिजल्ट्स। क्यों? क्योंकि फर्क स्ट्रेटजी
- 36:51में नहीं माइंडसेट में होता है। एक ट्रेडर
- 36:54लॉस देखकर टूट जाता है। दूसरा ट्रेडर लॉस
- 36:56देखकर सीखता है। एक ट्रेडर जल्दी अमीर
- 36:59बनना चाहता है। दूसरा ट्रेडर लॉन्ग टर्म
- 37:01सर्वाइव करना चाहता है और मार्केट
- 37:03सर्वाइवर्स को रिवॉर्ड [संगीत] करता है।
- 37:06अब सुनिए यहीं पर पेशेंस की असली पावर
- 37:09शुरू होती है। क्योंकि मार्केट हमेशा
- 37:11जल्दी करने वालों को पनिश करता है। आप
- 37:13जल्दी एंट्री लोगे, ट्रैप, जल्दी एग्जिट
- 37:16करोगे, मिस्ड मूव, जल्दी रिवेंज लोगे, बिग
- 37:20लॉस। और धीरे-धीरे आप समझने लगते हो कि
- 37:23ट्रेडिंग स्पीड का नहीं हर एक कंट्रोल का
- 37:25खेल है। लेकिन यह समझ जल्दी नहीं आती।
- 37:28इसमें टाइम लगता है, पेन लगता है, लॉस
- 37:31लगता है और [संगीत] शायद यही कारण है कि
- 37:34ज्यादातर लोग बीच में हार मान लेते हैं
- 37:37क्योंकि उन्हें लगता है ट्रेडिंग मेरे बस
- 37:40की बात नहीं लेकिन सच यह नहीं है। सच यह
- 37:43है उन्होंने अभी तक खुद को समझा ही नहीं।
- 37:46क्योंकि मार्केट आपको आपका असली चेहरा
- 37:49दिखाता है। अगर आप अंदर से इंपेशेंट हो तो
- 37:53ट्रेडिंग उसे और बड़ा कर देगी। अगर आप
- 37:56ग्रीडी हो तो ट्रेडिंग उसे एक्सपोज कर
- 37:58देगी। अगर आप फियरफुल हो तो ट्रेडिंग आपको
- 38:01बार-बार डराएगी। मतलब चार्ट सिर्फ प्राइस
- 38:05नहीं दिखाता। वह आपका कैरेक्टर भी दिखाता
- 38:08है और यही कारण है कि कुछ लोग सालों बाद
- 38:11भी प्रॉफिट नहीं बना पाते क्योंकि वह
- 38:13चार्ट बदलते रहते हैं लेकिन खुद को नहीं।
- 38:16अब जरा इमेजिन कीजिए। एक ट्रेडर है। वह हर
- 38:20दिन सिर्फ ट्रेड [संगीत] ढूंढता है। कोई
- 38:22सेटअप नहीं, कोई पेशेंस नहीं। बस कुछ करना
- 38:25है और दूसरी तरफ एक ट्रेडर सिर्फ ऑब्जर्व
- 38:29कर रहा है, वेट कर रहा है क्योंकि उसे पता
- 38:32है हर दिन पैसा बनाने के लिए नहीं होता।
- 38:35कुछ दिन सिर्फ सीखने के लिए होते हैं और
- 38:37यही डिसिप्लिन [संगीत]
- 38:38लॉन्ग टर्म में मैसिव डिफरेंस बनाता है।
- 38:41अब अगले पार्ट में मैं आपको बताऊंगा कैसे
- 38:45मार्केट होप का इस्तेमाल करके ट्रेडर्स को
- 38:47लंबे समय तक फंसाए [संगीत] रखता है। क्यों
- 38:50लोग लॉस वाले ट्रेड को छोड़ नहीं पाते?
- 38:52कैसे ईगो धीरे-धीरे अकाउंट डिस्ट्रॉय करता
- 38:55है और क्यों सबसे डेंजरस ट्रेडर वह होता
- 38:57है जो अपनी गलती मानने से डरता है।
- 39:00क्योंकि याद रखिए मार्केट आपको तभी तक
- 39:03हराता रहेगा जब तक आप सच देखने से बचते
- 39:06[संगीत] रहेंगे। एक आखिरी सवाल अगर
- 39:08मार्केट इतना दर्द देता है तो फिर लोग इसे
- 39:11छोड़ क्यों नहीं देते? [संगीत] क्यों
- 39:13लाखों लोग बार-बार लॉस खाने के बाद भी हर
- 39:16सुबह चार्ट खोलते हैं? क्यों कोई इंसान
- 39:18बार-बार टूटने [संगीत] के बाद भी फिर से
- 39:20कोशिश करता है? क्योंकि कहीं ना कहीं हर
- 39:23ट्रेडर को लगता है एक दिन मैं समझ जाऊंगा
- 39:26और सच बताऊं यही उम्मीद इस गेम की सबसे
- 39:29खूबसूरत और सबसे खतरनाक चीज है। क्योंकि
- 39:32होप इंसान को दो चीजें देती है। या तो
- 39:35स्ट्रेंथ या डिस्ट्रक्शन और ट्रेडिंग में
- 39:38यही होप सबसे ज्यादा लोगों को फंसाती है।
- 39:41विशेषकर तब जब ट्रेड लॉस में चला जाए।
- 39:44मुझे आज भी वह रात याद है। मैं स्क्रीन के
- 39:47सामने बैठा था। पूरा अकाउंट लाल था लेकिन
- 39:49मैं एग्जिट नहीं कर पा रहा था। क्यों?
- 39:52क्योंकि अंदर एक आवाज बार-बार बोल रही थी।
- 39:55थोड़ा वेट कर मार्केट वापस आएगा [संगीत]
- 39:58और यही सबसे बड़ा ट्रैप था। होप
- 40:00[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 40:01मैं लॉस नहीं देख रहा था। मैं सिर्फ अपने
- 40:03ईगो को बचाने की कोशिश कर रहा था क्योंकि
- 40:06एग्जिट करने का मतलब था यह मान लेना कि
- 40:08मैं गलत था और इंसान को सबसे ज्यादा दर्द
- 40:11लॉस से नहीं होता।
- 40:13[संगीत]
- 40:13गलत साबित होने से होता है। यही वजह है कि
- 40:16लोग छोटे प्रॉफिट जल्दी बुक कर लेते हैं।
- 40:19लेकिन बड़े लॉस को होल्ड करते रहते हैं।
- 40:21क्यों? क्योंकि प्रॉफिट खुशी देता है।
- 40:24लेकिन लॉस ईगो पर चोट करता है। और ईगो
- 40:28ट्रेडिंग का साइलेंट किलर है। यह
- 40:30धीरे-धीरे अकाउंट खत्म करता है बिना आवाज
- 40:33किए। पहले इंसान स्टॉप लॉस इग्नोर करता
- 40:36है। फिर एवरेजिंग। फिर रिवेंज ट्रेडिंग और
- 40:39फिर एक दिन पूरा अकाउंट खत्म। लेकिन बिलीव
- 40:44कीजिए अकाउंट खत्म होने से ज्यादा दर्दनाक
- 40:47चीज क्या होती है? खुद पर भरोसा टूट जाना।
- 40:50जब इंसान स्क्रीन के सामने बैठकर सोचता है
- 40:53शायद ट्रेडिंग मेरे बस की बात नहीं और
- 40:56शायद आपने भी कभी ना कभी यह महसूस किया
- 40:58होगा। लेकिन यहीं पर गेम बदलता है क्योंकि
- 41:01मार्केट आपको प्रॉफिट कमाने से पहले आपको
- 41:04खुद से मिलवाता है। वह आपका पेशेंस टेस्ट
- 41:07करता है। डिसिप्लिन टेस्ट करता है। इमोशन
- 41:10टेस्ट करता है और हर लॉस के पीछे एक लेसन
- 41:14छिपा होता है। लेकिन ज्यादातर लोग लेसन
- 41:16नहीं देखते। वो सिर्फ पेन देखते हैं और
- 41:19पेन से भागते रहते हैं। मैं भी भागा था।
- 41:22स्ट्रेटजी बदलता रहा। इंडिकेटर बदलता रहा,
- 41:25टाइम फ्रेम बदलता रहा। लेकिन रिजल्ट वही
- 41:28क्योंकि प्रॉब्लम चार्ट में नहीं थी।
- 41:31प्रॉब्लम मेरी सोच में थी। मैं मार्केट को
- 41:33कंट्रोल करना चाहता था। लेकिन मार्केट कभी
- 41:36किसी के कंट्रोल में नहीं आता। जिस दिन
- 41:39मैंने यह एक्सेप्ट किया। उसी दिन मेरी
- 41:41ट्रेडिंग बदलनी शुरू हुई। मैंने
- 41:43प्रेडिक्शन छोड़ दिया। मैंने 100% शोर
- 41:46होना छोड़ दिया। मैंने यह मान [संगीत]
- 41:48लिया कि मैं गलत हो सकता हूं। और बिलीव
- 41:51कीजिए यही एक्सेप्टेंस फ्रीडम देती है।
- 41:54क्योंकि तब आप हर ट्रेड से इमोशनली अटैच
- 41:57नहीं रहते। तब लॉस पर्सनल अटैक नहीं लगता।
- 42:00तब ट्रेडिंग स्ट्रेस नहीं लगती। फिर
- 42:02धीरे-धीरे आप मार्केट को अलग नजर से देखने
- 42:05लगते हो। अब आप कैंडल नहीं देखते। आप
- 42:07बिहेवियर [संगीत] देखते हो। अब आप नॉइज़
- 42:10नहीं सुनते। आप इंटेंशन समझते हो। अब आप
- 42:13जल्दी एक्साइटेड नहीं होते। जल्दी पैनिकिक
- 42:16नहीं करते। और वहीं से कंसिस्टेंसी शुरू
- 42:18होती है। अब जरा पीछे मुड़कर देखिए
- 42:21[संगीत] इस पूरी जर्नी में मार्केट
- 42:23बार-बार क्या कर रहा था। हाई पर ग्रीड, लो
- 42:26पर फियर, फेक ब्रेकउ, लिक्विडिटी हंट,
- 42:30स्टॉप लॉस ट्रैप, फॉल्स होप। पूरा गेम
- 42:33इमोशन के ऊपर बना हुआ है। और जिसने इमोशन
- 42:35को समझ लिया, उसने आधा मार्केट समझ लिया।
- 42:39लेकिन यहां सबसे पावरफुल बात यह है।
- 42:41मार्केट को जीतने का मतलब हर ट्रेड जीतना
- 42:44नहीं होता। मार्केट को जीतने का मतलब है
- 42:47खुद को हारने से रोकना। क्योंकि एक
- 42:49डिसिप्लिंड [संगीत] ट्रेडर धीरे-धीरे
- 42:51हमेशा सर्वाइव कर जाता है। लेकिन इमोशनल
- 42:55ट्रेडर चाहे कितना भी टैलेंटेड क्यों ना
- 42:57हो आखिर में टूट जाता है। अब मैं आपको एक
- 43:00ऐसी बात बताने वाला हूं जो शायद आपके अंदर
- 43:02हमेशा के लिए रह जाए। ट्रेडिंग में सक्सेस
- 43:04उस दिन शुरू नहीं होती जब आपका प्रॉफिट
- 43:07बढ़ता है। सक्सेस उस दिन शुरू होती है जब
- 43:10आपका पैनिकिक कम होने लगता है जब [संगीत]
- 43:12आप बिना इमोशन के लॉस एक्सेप्ट कर लेते
- 43:15हो। जब आप बिना फोमो के वेट कर लेते हो।
- 43:18जब आप बिना रिवेंज के स्क्रीन बंद कर देते
- 43:20हो। और यही छोटी-छोटी चीजें एक दिन आपको
- 43:23क्राउड से अलग बना देती हैं। क्योंकि
- 43:25क्राउड हमेशा जल्दी में होता है। जल्दी
- 43:28पैसा, जल्दी प्रॉफिट, जल्दी रिकवरी। लेकिन
- 43:32मार्केट धीरे चलने वालों को रिवॉर्ड करता
- 43:34है। अब शायद आप समझ गए होंगे प्रॉफिट का
- 43:37असली खेल इंडिकेटर में नहीं छिपा। प्रॉफिट
- 43:40का खेल हाई और लो में छिपा है। ग्रीड और
- 43:43फियर में छिपा है। पेशेंस और इमोशन के बीच
- 43:46छिपा है। और सबसे ज्यादा आपके डिसीजन में
- 43:49छिपा है। क्योंकि वही चार्ट एक इंसान का
- 43:52अकाउंट खत्म करता है। और वही चार्ट दूसरे
- 43:55इंसान को फाइनेंशियल फ्रीडम देता है।
- 43:57डिफरेंस सिर्फ इतना है। एक इमोशनली रिएक्ट
- 43:59[संगीत]
- 44:00करता है। दूसरा कालम होकर ऑब्जर्व करता
- 44:03है। और यही ऑब्जरवेशन धीरे-धीरे क्लेरिटी
- 44:06बनती है। क्लेरिटी से डिसिप्लिन,
- 44:08डिसिप्लिन से कंसिस्टेंसी और कंसिस्टेंसी
- 44:11से रियल वेल्थ। तो अगर आज की इस वीडियो से
- 44:14आपने सिर्फ एक चीज सीखी हो तो वो यह होनी
- 44:17चाहिए मार्केट को हराने की कोशिश मत करो।
- 44:20पहले खुद को समझो क्योंकि जिस दिन आपने
- 44:23खुद को जीत लिया उस दिन से मार्केट आपको
- 44:25डराना बंद कर देगा। और शायद उसी दिन से
- 44:29आपकी असली ट्रेडिंग जर्नी शुरू होगी। अगर
- 44:31इस वीडियो ने आपकी सोच बदल दी। अगर कहीं
- 44:34ना कहीं आपने खुद को इस कहानी में महसूस
- 44:36किया तो इस वीडियो को लाइक जरूर करिए
- 44:39क्योंकि आपका एक लाइक सिर्फ एल्गोरििदम को
- 44:41नहीं मुझे यह बताता है कि आप सिर्फ पैसा
- 44:44कमाने नहीं आए। आप सच में सीखना चाहते
- 44:47हैं। कमेंट में जरूर लिखिए। मैं इमोशन
- 44:51नहीं मार्केट को ऑब्जर्व करूंगा। और अगर
- 44:54आप चाहते हैं कि मैं ऐसी ही डीप ट्रेडिंग,
- 44:56साइकोलॉजी और रियल मार्केट ट्रुथ वाली
- 44:59वीडियोस लाता रहूं तो चैनल सब्सक्राइब कर
- 45:02लीजिए। क्योंकि यहां सिर्फ स्ट्रेटजी नहीं
- 45:04सोच बदलने वाली बातें होती हैं। मैं
- 45:07मिलूंगा आपसे अगली वीडियो में। तब तक
- 45:11चार्ट को मत देखिए। मार्केट को महसूस
- 45:13करिए।
About this transcript
This page contains the full transcript of The Hidden PROFIT Game Between High & Low | Mark Douglas Psychology by Cognitive Trader , generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 7,371 words across 971 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
What you can do with it
Use the transcript to take notes, quote the speaker, build a study guide, generate a summary with ChatGPT or Claude via the YouTube Summary tool, or export it as a timed subtitle file with YouTube to SRT. You can also re-open it in the transcriber to translate the transcript into 100+ languages.
Free YouTube transcript tool
YouTube2Text is a free YouTube transcript generator — no signup, no daily limit. Paste any YouTube link and get the full transcript instantly, with timestamps, click-to-jump, translation to 100+ languages, AI prompts for ChatGPT, Claude, and Gemini, and exports to TXT, SRT, VTT, or Markdown.