Tension Me Khush Rehne Ka Tarika | Mufti Tariq Masood — Transcript
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- 0:00तो मसायब हैं, मुसीबतें हैं, कुछ भी हो
- 0:04सकता है मुस्तकबिल में। अल्लाह बचाए फाज
- 0:06भी हो सकता है। किडनी फेल हो गया। मालदार
- 0:09थे, गरीब हो गए। घर में मोहब्बत थी,
- 0:12लड़ाईयां शुरू हो गई। बेरोजगार हो गए,
- 0:15सेहत तबाह हो गई,
- 0:18जानी दुश्मनियां पैदा हो गई। कुछ भी हो
- 0:20सकता है। और इस खुशफहमी में मत रहो कि आज
- 0:24अच्छी हालत में हो तो कल भी लाजमी अच्छी
- 0:26हालत में रहोगे। क्योंकि
- 0:30क्या तुमने किसी किताब में पढ़ा है कि हम
- 0:33तुम्हारे साथ अच्छा ही होता रहेगा
- 0:36या हमने या हमने कसमें उठाई हुई है तुमसे
- 0:40कसमें ली हुई है कयामत तक के लिए
- 0:44कि तुम अच्छे ही रहोगे अल्लाह फरमाते हैं
- 0:47ऐसा बोलो भाई नहीं है तो अच्छा यह तो बात
- 0:53आ गई तो एक छोटी सी बात यह भी कहता चलूं
- 0:55कि देखो इससे पता चलता है के गम गमों के
- 0:58साथ समझौता कर लेने की जरूरत है।
- 1:03यह जो हम यह चाहते हैं ना मेरी हर टेंशन
- 1:06दूर हो लाजमी।
- 1:08यह बात ही गलत है।
- 1:11अगर कोई आपको सुकून का यह नुस्खा बताए कि
- 1:15आपके सारे मसाइल ठीक हो जाए और ठीक करने
- 1:17में लगे रहे ताकि आपको सुकून मिले। ठीक
- 1:20करते करते जिंदगी तबाह हो जाएगी। मसाइल
- 1:23ठीक नहीं होंगे। इनहीं मसलों में ही खुश
- 1:26रहना है।
- 1:28समझ रहे हो कि नहीं समझ रहे? तो मसलों में
- 1:31खुश रहने के शरीयत ने बहुत से तरीके बताए
- 1:34हैं।
- 1:35एक तरीका क्या है? अपने से कमतर को देखा
- 1:39जाए।
- 1:41अपने से कमतर को। मेरे पास खवातीन कहती है
- 1:44मियां ऐसा मियां वैसा। मैंने कहा चर्स तो
- 1:46नहीं पीता मियां आपका। नहीं भाई चर्सी
- 1:49नहीं है। अल्लाह का शुक्र है चर्सी नहीं
- 1:51है। शुक्र अदा करो। चर्स नहीं पी रहा। ठीक
- 1:54है ना? मियां क्या होते हैं आजकल बहुत से
- 1:56बोलो ना चर्सी भी होते हैं भाई मियां टाइम
- 2:00नहीं देता वो भाई रात को तो घर में आ जाता
- 2:02है ना हां रात को आ जाता है बाकी सारा दिन
- 2:05दोस्तों में बैठा रहता है ऐसे ऐसे मियां
- 2:07भी हैं
- 2:09आवारा गर्दी में ही लगे रहते हैं रात भी
- 2:11घर में बेगम को टाइम बोलो ना नहीं देते तो
- 2:15अपने से कमतर को देखो ना मेरे मियां जो है
- 2:18ना वह खर्चा नहीं उठाते ओ भाई बुनियादी
- 2:21नान नफा मिल रहा है रोटी दोपहर का खाना
- 2:24रात का वो खातून कहती है नहीं सिर्फ यही
- 2:26थोड़ी होता है मुझे पता है यही नहीं होता
- 2:28लेकिन बहुत से यह भी नहीं कर रहे होते
- 2:31बहुत से यह भी नहीं कर रहे होते फिर औरतें
- 2:34तरसती है कि चलो आधा तुम कर लेना आधा राशन
- 2:37हम डाल लेंगे शादी तो कर लो ना कोई अच्छा
- 2:39मियां तो मिल जाए यह कम से कम पूरा खर्चा
- 2:42तो उठा रहा है अगर वह पूरा इतना नहीं दे
- 2:46रहा जितना आम लोग देते हैं गुजारा तो हो
- 2:48रहा है ना मियां का नाम तो लगा हुआ है
- 2:53सास के मसले बहुत घरों में
- 2:56सास यह करती है, सास वह करती है। तो मैं
- 2:58बताता हूं सासे तो इससे भी ज्यादा खतरनाक
- 3:00होती है। तो नबी अच्छा मर्द के बारे में
- 3:03भी ऐसा ही है। भाई बेगम यह नहीं करती वो
- 3:06नहीं करती। यह नहीं करती। अबे फला की बेगम
- 3:08को जाके देख ठीक है फला को जाके देख। तू
- 3:13शुक्र अदा कर। एक साहब ने बड़े दीनदार थे।
- 3:16वह कह रहे यार मेरी बेगम जो है ना वह सही
- 3:18पर्दा नहीं करती है। मेरी बेगम जो है यह
- 3:20करती है। वह करती है। दीनदार नहीं है।
- 3:23तो मैंने कहा यार नमाज पढ़ती है। उसने कहा
- 3:25मैंने कहा मोटा मोटा पर्दा करती है। ऐसा
- 3:27तो नहीं बिल्कुल ही मॉडर्न और लड़की बनकर
- 3:30स्कर्ट पहन के जा रही हो। कह नहीं ऐसे
- 3:31मैंने कहा शुक्र करो भाई ऐसेसे लोग हैं।
- 3:34खुद दीनदार हैं। हाजी नमाजी बेगम साहिबा
- 3:37स्लीवलेस कपड़े पहन के बाजारों में घूमती
- 3:39हैं। तो शुक्र अदा करो। चलो वाजबी पर्दा
- 3:42तो है ना। कम से कम ज्यादा के चक्कर में
- 3:46बस गुजारा चलाओ। क्योंकि मसाइल है ना बड़ी
- 3:49मुसीबत से बचने के लिए छोटी मुसीबत को
- 3:52बर्दाश्त करना पड़ता है। अदगी के बाद बड़ी
- 3:54मुसीबत हैं। वह ज्यादा अटेंशन है वह
- 3:57क्योंकि याद रखो शैतान जो है ना यह बहुत
- 4:00बड़ी फिल्म है। आपको बता दूं मैं शैतान
- 4:02इतनी बड़ी फिल्म है ना कि मैंने दुनिया
- 4:05में शैतान से बड़ी फिल्म नहीं देखी। यह
- 4:07पता है क्या करता है? कमबख्त
- 4:10जब आप साथ रहोगे ना तो एक दूसरे की
- 4:12नेगेटिव चीजें लेकर आएगा सामने। जिस दिन
- 4:15आप में अलग हुई अलग हुई आप एक दूसरे की
- 4:17पॉजिटिव चीजें याद दिलाता है फिर यह
- 4:20जिन मियां बीवी में भी तलाक हुई है ना तो
- 4:23जब साथ रह रहे थे तो शौहर भी बीवी की
- 4:26नेगेटिव चीजों को औरत भी शौहर की नेगेटिव
- 4:29चीजों को नेगेटिव चीजों को ज्यादा देख रहे
- 4:31होते हैं यह भी नहीं करती यह भी नहीं करती
- 4:32वह कहती है यह भी नहीं करता वो भी नहीं
- 4:34करता जब तलाक होती है ना शैतान अलदगी फिर
- 4:38आदमी कहता है यार इसमें तो यह भी करती थी
- 4:40यह तो यह भी करती थी यह तो यह भी कहीं और
- 4:44शादी हो जाएगी ना फिर आप कहोगे यार पुरानी
- 4:46वाली कम से कम ऐसी कमबख तो नहीं थी
- 4:49उसमें इतना तो शूर था यार ठीक है तमीज से
- 4:52बात नहीं करती थी लेकिन यार इतना तो था कि
- 4:54अगर मैं चाय का बोलता तो चाय तो बना के दे
- 4:56देती थी यह शैतान है हालांकि अब शरीयत कह
- 5:00रही है पुरानी वाली को छोड़ो अब नई की
- 5:02खूबियां देखो लेकिन जब नई होगी ना तो
- 5:04पुरानी की खूबियां और नई की खामियां और वह
- 5:07जब कहीं और शादी करेगी तो नए वाले की
- 5:10खामियां पुराने वाले की खूबियां और बता भी
- 5:13रही होती है क्या आपसे शादी हो गई। आप जो
- 5:16है ना चलो जैसा भी था मेरा पुराना मियां
- 5:19कम से कम जब भी उसको मैंने बोला खरबूजे का
- 5:21उसने खरबूजा ला के मुझे दिया है।
- 5:24और अच्छे सब्जी अच्छी लाते थे वो इनको तो
- 5:28टमाटर खरीदने नहीं आते। यह शैतान इतनी
- 5:31बड़ी चीज है कि आपको क्या बताऊं। हर चीज
- 5:34में यह क्या लेके जाता है? नेगेटिव। तो
- 5:37आपने शैतान के उल्टा चलना शुरू कर दो तो
- 5:40हर चीज क्या हो जाएगी? पॉजिटिव हो जाएगी।
- 5:44तब वाले क्या खानदानी मिसाल देते हैं।
- 5:47[संगीत] यह गोरों के पास यह मोटिवेशन की
- 5:50चीजें आपको नहीं मिलेंग। देखो तबबलीगी
- 5:52जमात में कोई लंबा चौड़ा सिलेबस नहीं है
- 5:55कि कोई बड़ी जबरदस्त वर्कशॉप करवाई जाती
- 5:57हो। हैं कि जिसमें जनाब कोई मोटिवेशनल
- 6:02स्पीकर जिन्होंने यूरोप से डिग्रियां ली
- 6:04हो लोगों को गाइड करने की और वह जनाब आके
- 6:08बड़ी खानदानी किस्म के होटल बुक करा के
- 6:10बड़ा प्रोफेशनल स्टाइल में लोगों को समझा
- 6:12रहा हो और उसके तजुर्ब हो ऐसा कुछ भी नहीं
- 6:15है। लेकिन मोटिवेशन ऐसी खानदानी मिलती है
- 6:20कि एक आदमी साल की जमात में अमीर बनके
- 6:23मैनेजर बनके जाता है बगैर तनख्वाह के। एक
- 6:27साल मुख्तलिफ कौमों के मुख्तलिफ डिजाइन के
- 6:30मुख्तलिफ उमरे उम्र के लोगों को मैनेज
- 6:34करके उनमें लड़ाई ना होने देना और पूरे
- 6:37साल के बाद वह वापस तमीज से घर आ जाता है।
- 6:41चार आदमियों को आप जरा तीन दिन के लिए
- 6:43बिठा दो। फड्डा ना हो तो मेरा नाम बदल
- 6:46देना। चाहे कितने ही पढ़े लिखे हो खाने पे
- 6:49अलग फड्डा होगा उनका। आज यह पकेगा वो
- 6:52कहेगा यह नहीं पकेगा। अब तू ऑर्डर ही चला
- 6:54होता है लाजमी होगा यह तो इसलिए नहीं होता
- 6:57कि जब फड्डे का टाइम आता है तो हम जुदा हो
- 6:59जाते हैं ना बैठे गटर के ढक्कन पे दो चार
- 7:02गपशप लगाई बात की फड्डा होने से पहले ही
- 7:05क्या हो जाते हैं अलग तीन चार दिन किसी के
- 7:08साथ रहो एक हदफ हो तो आप देखो छोटी-छोटी
- 7:13बातों पर झगड़े शुरू हो जाएंगे आपके
- 7:15छोटी-छोटी बातों खाने पर झगड़े शुरू हो
- 7:18जाएंगे बहुत देखे हमने
- 7:20एक साल की जमात होगी पैदल जमात त होगी
- 7:23गर्मियां होंगी गांव देहातों में लाखोंपति
- 7:27अमेरिका से आया हुआ आदमी बलचिस्तान के
- 7:29पसमांदा इलाके में टूटे फूटी मस्जिद में
- 7:32कयाम किया हुआ होगा उसने उसने लोटे से
- 7:35इस्तिंजा कर रहा होगा वो टिश्यू से फिर भी
- 7:38बेहतर है बहाल लोटे से क्या कर रहा होगा
- 7:41कर रहा होगा तो यह मोटिवेशन कहां से मिलती
- 7:44है उनको भाई इसमें क्या अल्फाज हैं दो दो
- 7:48चार छोटे-छोटे लफ्ज हैं जो इस्लाम ने दिए
- 7:51हैं और वह याद किए हुए हैं इस्लाम ने क्या
- 7:53कहा है भाई बदगुमानी मत करो मुबत सोचो यह
- 7:58कहा है ना सबी ने अ किया या रसूल अल्लाह
- 8:02एक सबी ने देखा ना आपकी क्या नेकी है कि
- 8:04नबी ने आपको दुनिया में जन्नत की बारत दी
- 8:06उन्होंने कहा कुछ भी नहीं रात को सबसे दिल
- 8:08साफ करके सोता हूं रात को सोता हूं तो
- 8:11क्या करता हूं दिल साफ के भाई जिसने उल्टी
- 8:14बात की उसको सीधा कर लेता हूं यही होता है
- 8:16ना कि वह यह जो कह रहा था यह यह गलत मतलब
- 8:18नहीं इसका सही मतलब भी लिया जा सकता है वो
- 8:20फला जो मुझ पर गुस्सा हुआ तो असल में हसद
- 8:23की वजह से नहीं उसके दिल में मेरी इस्लाह
- 8:25का जज्बा बहुत ज्यादा है। इसलिए वह
- 8:27एक्साइटेड हो गया। समझ रहे हैं कि नहीं
- 8:30समझ रहे हैं? दिल साफ करके सोना यह बहुत
- 8:34बड़ी नेकी है। तो वह कितना जबरदस्त लफज़
- 8:38तबली वाले बोलते हैं। पॉजिटिव कोशिश करते
- 8:41हैं ना आप सोचो कि भाई बड़े का अदब इसलिए
- 8:44किया जाए कि उसकी नेकियां आपसे ज्यादा है।
- 8:48उसकी जिंदगी ज्यादा है तो उसको ज्यादा
- 8:51नेकियों का टाइम मिला है। तो गालिब यही है
- 8:53कि नेकियां उसने आपसे ज्यादा की।
- 8:56छोटे पर शफकत यह सोच के की जाए कि उसके
- 8:59गुनाह आपसे कम है। क्या हटो बच्चों मिसाल
- 9:04है या नहीं?
- 9:06भाई वो हम हम पता है क्या कह रहे होते
- 9:09हैं? यह छोटा है। इसको क्या पता मेरी
- 9:11नमाज़ें भी इससे ज्यादा। मेरी जकातें भी
- 9:13इससे ज्यादा। यह तो बच्चा है कल का। अभी
- 9:16तो इसने कोई कुर्बानी दी नहीं है। मैंने
- 9:19मां-बाप की खिदमत भी इससे ज्यादा की।
- 9:24और बड़े के बारे में सोचते हैं कि जो
- 9:26बदमाशियां मैं कर रहा हूं वह इसने मुझसे
- 9:29ज्यादा ही की होंगी। ठीक है ना? जो
- 9:32बुराइयां मुझ में है इसकी उम्र 10 साल
- 9:34बड़ी है तो 10 साल इसके गुनाह मुझसे
- 9:37ज्यादा है। तो अकल के लिहाज से तो बात ठीक
- 9:40है। लेकिन जब यह ठीक है तो वह भी तो ठीक
- 9:42है ना कि नेकियां ज्यादा की होंगी इसने।
- 9:45तो इस्लाम कहता है कि दूसरों के मामलात
- 9:48में आपने क्या सोचना है? पॉजिटिव। उसकी
- 9:51नेकियों की तरफ तवज्जो और अपनी खामियों की
- 9:55तरफ तवज्जो। कि मेरी बुराइयां इसकी
- 9:59बुराइयों से ज्यादा हैं और उसकी नेकियां
- 10:03मेरी नेकियों से ज्यादा है। इसका पता है
- 10:06फायदा क्या होता है? इंसान टेंशन लेस हो
- 10:09जाता है।
- 10:10वरना चिढ़ता रहता है बिला वजह ना। आधे
- 10:13मसले तो इसी वजह से पैदा हो रहे हैं लोगों
- 10:15से नफरत की वजह से। यह इतना बुरा, यह इतना
- 10:17बुरा, यह ऐसा क्यों, यह वैसा क्यों? उसी
- 10:20से टेंशन में आ रहा होता है। तो अपने आप
- 10:22को इतना नेक समझने की जरूरत है ही नहीं।
- 10:27कहते हैं कि इज्जत ऐसी चीज है जिसके हुसूल
- 10:29की कोशिश जिसने की है ना उसको नहीं मिली
- 10:31कभी भी। जिसने कोशिश नहीं की उसको बहुत
- 10:34मिल जाती है। तो एक तरीका तो यह बताया गया
- 10:39कि सोचो क्या पॉजिटिव। दूसरा तरीका बताया
- 10:43कि अपने से कमतर को देखो
- 10:47के जो आप को पैसे नहीं है आपके पास तो उन
- 10:52लोगों को देखो जिनके पास इतने भी नहीं है
- 10:55एक साहब का फोन आया 5 साल से बेरोजगार हूं
- 10:57घर में भी सला बाहर भी सलावत टेंशन में
- 11:00मैंने कहा भाईजान घर तो है ना चलो सलावाते
- 11:04सुनने को मिल रही है लेकिन घर वालों ने
- 11:05निकाला तो नहीं ना छत तो है ना ये जो
- 11:07फुटपाथों पर पड़े हुए हैं ना इनके पास रात
- 11:10गुजारने के यह छत मुयसर नहीं है। मैंने
- 11:14कहा घर में नाश्ता भी मिल रहा है। दोपहर
- 11:16खाना भी मिल रहा है। सलवाते सुनाने के बाद
- 11:18मिल रहा है लेकिन मिल रहा है ना। ठीक है।
- 11:22और सलवाते बाप दादा की तरफ से मिल रही है
- 11:24ना। कोई यह थोड़ी कि पड़ोसी सुना रहे हैं।
- 11:26वह तो अपने लोग हैं।
- 11:29तो इसलिए मैं लोगों से दो बातें लाजमी
- 11:31कहता हूं कि हस्पतालों में बीमारों को
- 11:33जाकर देखा करो। जो खतरनाक बीमार पड़े हुए
- 11:37हैं ना कोई फॉलेज में नजर आएगा कोई
- 11:40डायलिसिस पर होगा कोई क्या अजीब अजीब आपको
- 11:42बीमार नजर आएंगे दूसरा ईदी सेंटर के
- 11:46मुर्दा खाने चक्कर लगा लो आज
- 11:50इसलिए कह रहा हूं कि फिर अगले हफ्ते तक
- 11:51भूल जाओगे यहां से जब बयान के लिए जाओ ना
- 11:54बयान से फारग हो तो ईदी सेंटर के
- 11:56मुर्दाखाने को जरा टच करते हुए जाना
- 12:00कब्रिस्तान में तो असल में इसलिएत नहीं हो
- 12:02रही वो मुर्दा तो नीचे चला गया ना हजरत तो
- 12:04आ नहीं रहा। जब आप ईदी सेंटर के मुर्दा
- 12:07खानों में जाओगे तो बड़े-बड़े फंटर आपको
- 12:10बर्फ की सिलों पर लेटे हुए नजर आएंगे।
- 12:13बड़ी उम्मीदें थी हम यह करेंगे हम यूं
- 12:16करेंगे ऐसा करेंगे। फिलहाल बहरिया टाउन
- 12:18में तीन प्लॉट तो ले लिए एक और हो जाए।
- 12:21तारिक रोड की दो चार दुकानें भी हो जाए।
- 12:22जरा आबाद इलाका है। और दूसरी शादी भी हो
- 12:25जाए। मुफ्ती साहब के बहुत सारे हमने
- 12:27बयानात सुन लिए और फिर एक सर दबाएगी दूसरे
- 12:32दूसरी पांव दबाएगी। ठीक है ना? एक साहब
- 12:35मुझे कहने लगे मैं दूसरी शादी का सोच रहा
- 12:37हूं क्योंकि मेरे घर में बेगम जो है ना वह
- 12:39कामकाज करती है। मेरी खिदमत तो कपड़ेपड़े
- 12:42इस तरह नहीं होते। तो एक और आ जाएगी तो
- 12:43उसका काम क्या हो जाएगा? हल्का हो जाएगा।
- 12:46वह इस तरह कर देगी। यह घर के मैंने कहा
- 12:49मेरा ख्याल है कोई मिरी से आया हुआ आदमी
- 12:51है भाई तू। जमीन में लोग इस तरह की बातें
- 12:55नॉर्मल आदमी इस तरह की बातें नहीं करता।
- 12:58से आया हुआ होगा कहीं से। इसको पता ही
- 13:00नहीं जमीन में। मैंने कहा तू करके तो देख।
- 13:05कह एक रोटी पकाएगी दूसरी सालन पकाएगी।
- 13:09मैंने कहा एक रोटी से जिस बेलन से रोटी
- 13:11पकाती है ना। एक उस बेलन से तेरा सर
- 13:14धुनेगी और दूसरी जिस चमचे से खाना पकाती
- 13:17है उस चमचे से वो चमचा तेरे सर पर चलाएगी।
- 13:20तो आप कहते हो या तो कभी तरगीब देते हो
- 13:23कभी डराते हो।
- 13:26तो मैं तरगीब देता हूं मगर इस नियत से
- 13:28नहीं कि एक पाव दबाएगी तो एक खाना पकाए यह
- 13:30नहीं होगा
- 13:32दोनों को होटल से खिलाना पड़े लाके कि तुम
- 13:34चुप करके बैठ जाओ लड़ो नहीं खुदा का
- 13:36वास्ता खाना मैं पकाऊंगा तो यह सब चीजें
- 13:39यह सोच के करने का कहता हूं मैं तो खैर
- 13:45तो दो दो चीजें और भी बहुत सारी चीजें
- 13:48इसमें बुनियादी चीज क्या है बीमारों को
- 13:50देखो माजूरों को देखो मैं एक वाक्या
- 13:54सुनाया मैंने मैंने पिछले हफ्ते पता नहीं
- 13:55याद नहीं मुझे सुनाया या नहीं सुनाया।
- 13:59अभी मैं एक सफर था मेरा इस्लामाबाद में तो
- 14:01वहां हमारे एक जानने वाले मिले। उन्होंने
- 14:04वहां इस्लामाबाद में एक बहुत बड़े ताजिर
- 14:06हैं। बहुत बहुत बड़े ताजिर हैं। करोड़ों
- 14:08रुपए का बिजनेस है उनका। उनका वाकया
- 14:11सुनाया कि जवानी में उस आदमी की आंखों की
- 14:14बिनाई चली गई।
- 14:17कोई बीमारी हुई है बस एकदम बिनाई चली। हो
- 14:19जाता है बा दफा। का कोई ऐसा अटैक हो जाता
- 14:21है। वो बेचारा इलाज करा करा के थक गया।
- 14:24उसकी बीनाई वापस नहीं आई। तो उन्होंने
- 14:28बताया कि वो एक दिन नीचे ना इस्लामाबाद
- 14:31में वो बंगला है उसका जहां वो रहता है।
- 14:34नीचे एक शकरकंदी बेचने वाले नहीं होते।
- 14:37कंधे पर रुमाल है। शकरकंदी बेच रहे।
- 14:39शकरकंदी नहीं सॉरी। यह जो भुट्टा बेच रहे
- 14:42होते हैं ना दाने मकई के दाने। मकई के
- 14:45दाने बेच रहा था।
- 14:47कह रहे उसने अपने दोस्त से कहा इस मकई के
- 14:49जो दाने बेच रहा है ना आवाज आई ना उसकी तो
- 14:52इसको जाकर बोलो कि यह जब इन इस्लामाबाद के
- 14:56बंगलों में घूमता होगा एहसास कमतरी का
- 14:59शिकार होता होगा कि यार मेरी एक रे मकई के
- 15:02दाने और मैं क्या कितनी एक उस पर एक ₹ बचा
- 15:07लेता होगा ज्यादा से ज्यादा हैं भाई तो
- 15:10मैं गरीब आदमी हूं और यह कितने बड़े-बड़े
- 15:12लोग हैं जिनके बड़े खूबसूरत बंगले और मैं
- 15:15ऐसा गरीब तो इसने जिसकी आंखों की बिनाई
- 15:18चली गई ना इसने कहा अपने दोस्त से कि इसको
- 15:21जाकर बताओ
- 15:22कि तू मेरी तू अपनी आंखें मुझे दे दे और
- 15:26मेरा बंगला ले ले और यह भुट्टे की रे
- 15:30किसको पकड़ा दे मुझे पकड़ा दे। मैं इस पर
- 15:32राजी हूं। यानी अगर यह कुदरत में मुमकिन
- 15:34है
- 15:36बहुत मुश्किल है बात समझाना।
- 15:40यानी उसको बताया कि इसको सबक दिलाओ कि
- 15:43एहसास कमतरी का शिकार होने की तुझे जरूरत
- 15:46नहीं है। तू मुझसे ज्यादा मालदार है।
- 15:50मैं अपनी पूरी दौलत बेचने के लिए तैयार
- 15:53हूं। अगर मुझे कहीं से बिनाई मेरी वापस
- 15:56लौट आए।
- 15:58यानी अगर कुदरत मुझे यह ऑप्शन दे कि भाई
- 16:00तू इस मकई बेचने वाले की जगह रे में सदाएं
- 16:04लगा रहा है। धोती पहन के और फटे पुराने
- 16:06कपड़े पहन के घूम रहा है। हम तुझे इसकी
- 16:09जगह ले आते हैं लेकिन आंखें मिल जाएंगी और
- 16:11इसको बंगले में लाकर बिठा देते हैं। लेकिन
- 16:13आंखें इससे छीन लेंगे। तो सेठ ने कहा कि
- 16:17इसको बोलो कि मैं इस पर राजी हूं।
- 16:20लेकिन तू इस पर राजी नहीं होगा। तो इसलिए
- 16:24अल्लाह ने तुझे मुझसे ज्यादा नेमतें दी
- 16:27हैं। तो भाई शुक्र करना सीखो। अल्लाह के
- 16:30बंदो आज नाशुक्री बहुत हो रही है। हमारे
- 16:33हजरत मुफ्ती रशीद अहमद साहब रहला ताला
- 16:36बहुत दफा यह वाकया सुना है। बस मुख्तसर
- 16:38बताऊंगा। 60 साल की उम्र तक इंतहाई गुर्बत
- 16:42में वक्त गुजारा उन्होंने। इंतहाई गुरबत
- 16:45और दारुल उलूम कोरंगी के शेखुल हदीस थे जो
- 16:48सबसे बड़ा ओदा होता है। जो लोग आज
- 16:51मौलवियों को सुबह शाम बुरा भला कहते हैं
- 16:53ना इन अकाबिर ने इन मौलवियों ने इस तरह
- 16:56पेट काट के दीन को बचाया है। समझ रहे हो?
- 17:01पेट काट काट के इतने बड़े-बड़े ओदों पर भी
- 17:03तनख्वाएं नहीं है। ऐसे पेट काट के दीन को
- 17:07बचाया है।
- 17:09तो हजरत फरमाते हैं कि हमारे पास सुबह
- 17:13नाश्ते में अंडा खरीदने के पैसे नहीं होते
- 17:16थे। रोजाना दाल एक दिन एक मेहमान ने कहा
- 17:20कि आपके जब भी आओ दाल ही पकी हुई होती है।
- 17:22हजरत फरमाते हमने तो कभी सोचा भी नहीं था
- 17:24रोजाना दाल खाते हैं। उसने कहा कि रोज दाल
- 17:27पकी हुई होती है। तो हजरत ने फरमाया मैंने
- 17:30कहा हलाल इतना ही मिलता है। हलाल क्या है?
- 17:34इतना ही मिलता है। तो हजरत फरमाते हैं
- 17:38उसके बताने से हमें ख्याल आया कि वाकई हम
- 17:41इतने दिनों से दाल खा रहे हैं। आप कह सकते
- 17:44हैं वह गरीब घर में पैदा हुए होंगे। ऐसा
- 17:46नहीं है। हमारे हजरत इंडिया का जो पंजाब
- 17:49है ना लुधियाना उसके जो चौधरी घराना होता
- 17:53है ना बड़े वडेरे उन घरों में पैदा हुए
- 17:55थे। वालिद साहब ठीक-ठाक मालदार थे। गांव
- 17:59के जो होते हैं ना बड़े वरे मदरसे में आने
- 18:02के बाद क्या हो गए क्योंकि मदरसे में तो
- 18:05कोई सोर्स ऑफ इनकम ही नहीं इतनी छोटी छोटी
- 18:07तनख्वाएं मदरसे अब तो फिर भी थोड़ी सी
- 18:10बेहतर हुई है वरना अभी भी मदरसे के टीचरों
- 18:12की तनख्वाएं बेचारों की ऐसे ही होती है
- 18:14इसलिए मदरसे के उलमा के साथ ताुन किया
- 18:16करें समझ रहे हो कि नहीं समझ रहे लोग
- 18:20देखते हैं बालमा को लैंड करो जरिए वो उनको
- 18:22देख के लोगों को धोखा आता है वो समझते हैं
- 18:24सारे ऐसे ही होते होंगे जरूरी थोड़ी है
- 18:25सारे वो तो बेचारे चंद एक को अल्लाह माल
- 18:27दे देता है बेचारे ज्यादातर तो गरीबी होते
- 18:30हैं और मांगते नहीं किसी से तो यह आवाम की
- 18:32जिम्मेदारी है कि वह उनके साथ ताबुन करें
- 18:35ताकि वह दीन के काम दिल जमी के साथ कर सके
- 18:38लेकिन वह मांगते नहीं किसी से और जो मांग
- 18:41रहे होते हैं वह सही वो आलिम जो भीख मांग
- 18:44रहे होते हैं ना लोगों से कभी उससे वो फिर
- 18:45वह आलिम नहीं होगा उसकी तहकीक करो तो
- 18:48हमारे दीनी मदारिस में बहुत से उलमा
- 18:50बेचारे दिन रात तदरीस में लगे हुए हैं कभी
- 18:54किसी के सामने अपनी हाजत पेश नहीं करते तो
- 18:56हमारे फरमाते हैं कि इन हालात में जब मेरे
- 19:00पास अंडा खरीदने के पैसे नहीं होते थे और
- 19:05मैं साल में एक मर्तबा अपने शेख की जियारत
- 19:09के लिए लाहौर जाया करता था।
- 19:12तो वो जो साल में एक मर्तबा उनकी खिदमत
- 19:15में जाते थे तो हर महीने तनख्वाह से
- 19:18थोड़े-थोड़े पैसे बचा के साल में एक
- 19:21मर्तबा इस काबिल होते थे कि बस या ट्रेन
- 19:23का किराया जमा हो जाता था। लेकिन आप देखो
- 19:27अहल्लाह की सोबत की अहमियत कितनी थी।
- 19:32क्योंकि अगर यह सोबत ना मिलती ना तो फिर
- 19:35गुर्बत में यह तवकुल नहीं होता।
- 19:39तो अपने शेख से मिलने के लिए जाया करते।
- 19:42हमारे यहां बुजुर्ग होते हैं। इसलिए हम
- 19:44बुजुर्गों की जियारत के भी कायल हैं। बाज
- 19:46लोगों के यहां बुजुर्ग का सेटअप ही नहीं
- 19:49है। बुजुर्गी का सिस्टम ही खत्म हो गया
- 19:51उनके यहां। तो जिनके यहां होता है उनके
- 19:54यहां यह सारे सेटअप होते हैं। ठीक है ना?
- 19:56कि अपने बुजुर्गों की जियारत भी करते हैं।
- 19:58बा लोगों ने हर बुजुर्ग में इतने कीड़े
- 20:00निकाल लिए कि माशरे से बुजुर्गों को क्या
- 20:02कर दिया है? बुजुर्गी माशरे से श हो गए
- 20:04हैं। ऐसा नहीं होता। हर दौर में बुजुर्ग
- 20:06होलसेल के हिसाब से रहेंगे। तो खैर तो
- 20:10हजरत फरमाया करते थे इस कंडीशन में
- 20:15मैं अपने आपको दुनिया का सबसे बड़ा सेठ
- 20:18समझता था।
- 20:21फरमाते हैं कि मैं यह हालात बयान करते हुए
- 20:23भी डर लग रहा है कि नाशुगरी ना हो जाए।
- 20:26फिर अल्लाह ने 60 साल की उम्र के बाद हजरत
- 20:28को बहुत पैसा दिया। फिर स्टाइल ही चेंज हो
- 20:31गया था हजरत का। भाई जब अल्लाह ने गरीब
- 20:33रखा है तो गरीबों की तरह जब पैसा आया तो
- 20:35फिर वह हदीसरा
- 20:41अल्लाह चाहते हैं कि जब अल्लाह ने किसी को
- 20:42नेमत दी हो। सही बुखारी की हदीस है कि एक
- 20:45सबी को देखा परागंदा हाल पूछा क्या
- 20:48तुम्हारे पास पैसा नहीं है? फरमाया हां तो
- 20:50फरमाया कि नजर क्यों नहीं आ रहा? तो अमीर
- 20:52आदमी की सवारी, अमीर आदमी का घर, अमीर
- 20:55आदमी का लिबास और अमीर आदमी की खुराक। इन
- 21:00चार चीजों से पैसा झलकना चाहिए। समझते हो
- 21:04कि नहीं समझते?
- 21:07अगर आपको अल्लाह ने खूब पैसा दिया है और
- 21:09Honda 50 रखी हुई है आपने और उस पर गैस
- 21:11लगवाई हुई है तो यह नेमत की नाकदरी है। यह
- 21:15सादगी नहीं है। अगर आपके पास ठीक-ठाक पैसा
- 21:20है और आप लंडे की पेंटें पहन के घूम रहे
- 21:24हो तो यह नेमत की नाशक। खाने के लिए आपके
- 21:29पास ठीक-ठाक पैसा है और आप अंडे वाला
- 21:32बर्गर तलाश करते हो। या तो पसंदी अंडे
- 21:35वाला हो तो एक अलग बात है। पैसा हो फिर भी
- 21:39अंडे वाला बर्गर खा रहे हो तो यह कनात
- 21:42नहीं है। यह सादगी नहीं है। यह कंजूसी है।
- 21:46कंजूसी।
- 21:47इट इज कॉल्ड कंजूसी।
- 21:52अगर आपके पास पैसा है
- 21:56और आप बेगम को भी हर वक्त कैलकुलेशन करके
- 22:00ना उसको हिसाब लेते रहते हो कि कितने अंडे
- 22:03खाए आज तूने बाज लोग ऐसे भी हैं कमबख्त
- 22:06बिल्कुल ही पागलों की तरह जिंदगी एक अज़ाब
- 22:09डाला हुआ है बच्चों को अपने
- 22:12एक खातून ने बताया कि मेरी सांस निगरानी
- 22:14कर रही है दो रोटी के बाद तीसरी का हिसाब
- 22:18होता है दो के बाद तीसरी पकना क्या है?
- 22:22मना है। अगर गुरबत है तो भाई फिर तो
- 22:24अल्लाह का बस यही फिर नेमत है अल्लाह की।
- 22:26यह शुक्र करो मिल तो रहा है। लेकिन पैसा
- 22:27दिया है तो हदीस में आता है अल्लाह यह
- 22:30चाहते हैं कि वह नेमत के असरात बोलो भाई
- 22:34नजर आए। हां फखर ना हो। गरीबों को नीचा
- 22:38दिखाने के लिए नहीं। कि वहां जाके कॉलर
- 22:40ऊंचर करके दिखा रहा है। मेरी घड़ी देखो
- 22:43मेरी भी घड़ी है। ठीक है ना? मेरा मेरा
- 22:46लिबास और मेरे पैसे ये नीचा नीच दिखाने के
- 22:49लिए तो यह तो हराम हो जाएगा। फख के लिए
- 22:50हराम है और इससे इतराए नहीं आदमी यह समझे
- 22:54अल्लाह की तरफ से भीख मिली हुई है। अच्छे
- 22:56कपड़े पहन लिए भाई अल्लाह ने अल्लाह ने
- 22:58दिया ना किसी को भिखारी को आप थ्री पीस
- 23:01फ्रूट टाई पहना दे और अच्छा अंडे वाले से
- 23:03हटा के जिंगर बर्गर खिला दे उसको पिज़्ज़ा
- 23:06खिला दे तो वह खाएगा शुक्र करके तवाजो
- 23:08पैदा होगी। फक्र नहीं करेगा। तो यह अल्लाह
- 23:10ने भीख में दिया हुआ है हमें। किसी को
- 23:12लैंड क्रोज़र दे दी। तो वो फक्र ना करे।
- 23:14बोले भाई अल्लाह ने मुझे दी है। मेरी अपनी
- 23:16थोड़ी है। इसको रक्षा दे दी। मुझे क्या दे
- 23:18दी? लैंड क्रोज़र दे दी। तो ना यह मेरी है
- 23:20ना यह उसका है तो फक्र किस बात का तो बस
- 23:23नेमत को एंजॉय तो करो गरीबों को कमतर ना
- 23:27समझे क्यों ना समझे हो सकता है भाई आखिरत
- 23:30में यह लैंड ग्रोज़ में हो और आपको रक्षा
- 23:31भीसर ना हो उल्टा मामला ना हो रहा हो तो
- 23:34मरते ही सब खत्म
- 23:38तो तो आखिरत है असल तो तो हमारे हजरत क्या
- 23:41करते थे गुरबत में इंतहाई गुरबत में हजरत
- 23:44फरमाते मैं यह नहीं समझता था कि मुझे सब्र
- 23:46का सवाब हासिल करना है ना ना फरमाए तो
- 23:49बड़ा खतरनाक हो जाएगा। जब कोई टेंशन में
- 23:51होता है तो हम कहते हैं सब्र करो सवाब
- 23:53मिलेगा। ऐसा ही होता है ना? तो हजरत
- 23:56फरमाते हैं उस गुरबत में मैं यह नहीं
- 23:58सोचता था कि मैं सब्र करूंगा तो सवाब
- 24:00मिलेगा। फरमाया ना मुझे तो लगता था अगर
- 24:02मैंने यह सोचा कि मैं सब्र करूंगा तो
- 24:04गुनाह मिलेगा। क्योंकि सब्र तो मुसीबतों
- 24:07पर होता है। तो अल्लाह ने मुझे मुसीबत में
- 24:09रखा भी नहीं तो सब्र किस बात का?
- 24:11तो फरमाते थे मैं यह सोचता था कि मेरे
- 24:14अल्लाह का इतना फजलल वह मेरा दो वक्त रोटी
- 24:17मुझे दे देता है। दो वक्त की रोटी मुझे
- 24:22बोलो भाई मिल जाती। फरमाते हैं मेरा घर भी
- 24:25जरा गरीब इलाके में था दूर थोड़ा लोगों से
- 24:28तो फरमाते मैं सोचता था बादशाह हमेशा
- 24:31पब्लिक से जरा हटके रहते हैं। स्टाइल है
- 24:34हमारा पब्लिक में नहीं रहेंगे। थोड़ा सा
- 24:37हटके मिजाज शाहाना है ना?
- 24:40लेकिन उस हालत में भी ऐसा शाहाना मिजाज
- 24:44ऐसे रहते थे लोग आकर कर्जा मांगा करते थे
- 24:46हजरत से वह समझते थे बहुत बड़ा स्टेट है
- 24:48कोई और हजरत को ग्रीनरी का शौक था पौधे
- 24:52लगाने का शौक था तो पौधे लगाने के बाद ना
- 24:56पानी देने के लिए वह नहीं खरीदने के पैसे
- 24:58नहीं थे वो नहीं पौधों को पानी देते वो
- 25:00क्या होता है फवारा होता है ना तो कहते
- 25:03हैं हमने फिर जुगाड़ करके कील ठोक ठोक के
- 25:06एक अपना घर में फवारा बनाया हुआ था ठीक है
- 25:08ना तो फिर जब अल्लाह ने पैसा दिया तो फिर
- 25:12हटो बच्चों।
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