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surah aal e imran with urdu translation by fateh muhammad jalandhari | trending quran tilawat — Transcript

by QURAN360 · 8,008 words · 922 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00शुरू अल्लाह का नाम लेकर जो बड़ा मेहरबान
  2. 0:04निहायत रहम वाला है अलिफ लाम मीम अल्लाह
  3. 0:09जो माबूद बरहक है उसके सिवा कोई इबादत के
  4. 0:12लायक नहीं जिंदा है सबको थामने वाला उसने
  5. 0:16ऐ नबी तुम पर सच्ची किताब नाजिल की जो
  6. 0:19पहली आसमानी किताबों की तस्दीक करती है और
  7. 0:22उसी ने तौरा और इंजील नाजिल की थी यह दो
  8. 0:25किताबें उसने पहले नाजिल की थी लोगों की
  9. 0:28हिदायत के लिए और और फिर कुरान जो हक और
  10. 0:31बातिल को अलग-अलग कर देने वाला है नाजिल
  11. 0:34किया जो लोग अल्लाह की आयतों का इंकार
  12. 0:37करते हैं उनको सख्त अजाब होगा और अल्लाह
  13. 0:40जबरदस्त है बदला लेने वाला है अल्लाह ऐसा
  14. 0:44खबीर और बसीर है कि कोई चीज उससे पोशीदा
  15. 0:48नहीं ना जमीन में और ना आसमान में वही तो
  16. 0:51है जो मां के पेट में जैसी चाहता है
  17. 0:54तुम्हारी सूरतें बनाता है उस गालिब हिकमत
  18. 0:57वाले के सिवा कोई इबादत के लायक नहीं ऐ
  19. 1:01पैगंबर वही तो है जिसने तुम पर यह किताब
  20. 1:04नाजिल की जिसकी बाज आयतें मोहकम हैं और
  21. 1:07वही असले किताब है और बाज दूसरी मुत शबे
  22. 1:10हैं तो जिन लोगों के दिलों में कजी है वह
  23. 1:14मुत शबे हात का इतबा करते हैं ताकि फित
  24. 1:16बरपा करें और मुराद असली का पता लगाएं
  25. 1:20हालांकि मुराद असली अल्लाह के सिवा कोई
  26. 1:23नहीं जानता और जो लोग इल्म में गहरी नजर
  27. 1:27रखते हैं वह यह कहते हैं कि हम उन पर ईमान
  28. 1:30लाए यह सब आयात हमारे परवरदिगार की तरफ से
  29. 1:33हैं और नसीहत तो अकलमंद ही कबूल करते हैं
  30. 1:37ऐ परवरदिगार जब तूने हमें हिदायत बख्शी है
  31. 1:41तो उसके बाद हमारे दिलों में कजी ना पैदा
  32. 1:43कर दीजो और हमें अपने हा से रहमत अता फरमा
  33. 1:47तू तो बड़ा अता फरमाने वाला है ऐ
  34. 1:49परवरदिगार तू उस रोज जिसके आने में कुछ भी
  35. 1:53शक नहीं सब लोगों को अपने हुजूर में जमा
  36. 1:55कर लेगा बेशक अल्लाह खिलाफ वादा नहीं करता
  37. 1:59जो जो लोग काफिर हुए उस दिन ना तो उनका
  38. 2:02माल ही अल्लाह के अजाब से उनको बचा सकेगा
  39. 2:04और ना उनकी औलाद ही कुछ काम आएगी और यह
  40. 2:08लोग आत शे जहन्नम का ईधन होंगे इनका हाल
  41. 2:12भी फिर नियों और इनसे पहले लोगों का स
  42. 2:15होगा जिन्होंने हमारी आयतों की तकज की थी
  43. 2:18तो अल्लाह ने उनको उनके गुनाहों के सबब
  44. 2:20अजाब में पकड़ लिया था और अल्लाह सख्त
  45. 2:24अजाब करने वाला है ऐ पैगंबर काफिरों से कह
  46. 2:28दो कि तुम दुनिया में भी अन करब मगलू हो
  47. 2:30जाओगे और आखिरत में जहन्नम की तरफ इकट्ठा
  48. 2:34किए जाओगे और वह बुरी जगह है तुम्हारे लिए
  49. 2:37दो गिरोहों में जो जंगे बद्र के दिन आपस
  50. 2:40में भेड़ गए कुदरत इलाही की अजीम शन
  51. 2:43निशानी थी एक गिरोह मुसलमानों का था वह
  52. 2:47अल्लाह की राह में लड़ रहा था और दूसरा
  53. 2:49गिरह काफिरों का था वह उनको अपनी आंखों से
  54. 2:52अपने से दुगना मुशाहिद कर रहा था और
  55. 2:55अल्लाह अपनी नुसरत से जिसको चाहता है मदद
  56. 2:58देता है जो अहले बसरत हैं उनके लिए इस वाक
  57. 3:02में बड़ी इबरत है लोगों को उनकी ख्वाहिशों
  58. 3:05की चीजें यानी औरतें और बेटे और सोने और
  59. 3:08चांदी के बड़े-बड़े ढेर और निशान लगे हुए
  60. 3:11घोड़े और मवेशी और खेती बड़ी जीनत दार
  61. 3:15मालूम होती हैं मगर यह सब दुनिया ही की
  62. 3:18जिंदगी के सामान हैं और अल्लाह के पास
  63. 3:21बहुत अच्छा ठिकाना है ऐ पैगंबर इनसे कहो
  64. 3:25कि भला मैं तुमको ऐसी चीज बताऊं जो इन
  65. 3:27चीजों से कहीं अच्छी हो सुनो जो लोग परहेज
  66. 3:31गार हैं उनके लिए अल्लाह के यहां बागत
  67. 3:34बहिश्त हैं जिनके नीचे नहरें बह रही हैं
  68. 3:37उनमें वह हमेशा रहेंगे और पाकीजा बीवियां
  69. 3:40हैं और सबसे बढ़कर अल्लाह की खुशनूर और
  70. 3:44अल्लाह अपने सब बंदों को देख रहा है जो
  71. 3:47अल्लाह से इल्तजा करते हैं कि ऐ परवरदिगार
  72. 3:49हम ईमान ले आए सो हमको हमारे गुनाह माफ
  73. 3:53फरमा और हमको दोजख के अजाब से महफूज रख यह
  74. 3:57वो लोग हैं जो मुश्किलात में सब्र करते और
  75. 4:00सच बोलते और इबादत में लगे रहते और नेकी
  76. 4:04में खर्च करते और औकात सहर में गुनाहों की
  77. 4:08मुफी मांगा करते हैं अल्लाह तो इस बात की
  78. 4:11गवाही देता है कि उसके सिवा कोई माबूद
  79. 4:14नहीं इस हाल में कि वह इंसाफ का हाकिम है
  80. 4:18और फरिश्ते और इल्म वाले भी गवाही देते
  81. 4:20हैं कि उस गालिब हिकमत वाले के सिवा कोई
  82. 4:24लायक इबादत नहीं दन तो अल्लाह के नजदीक
  83. 4:27इस्लाम ही है और अह किताब ने जो इस दीन से
  84. 4:30इख्तिलाफ किया तो इल्म हासिल होने के बाद
  85. 4:33आपस की जिद से किया और जो शख्स अल्लाह की
  86. 4:37आयतों को ना माने तो अल्लाह जल्द हिसाब
  87. 4:40लेने वाला है ऐ पैगंबर पस अगर यह लोग
  88. 4:44तुमसे झगड़ने लगे तो कहना कि मैं और मेरे
  89. 4:46पैर तो अल्लाह के फरमाबरदार हो चुके और
  90. 4:50अहले किताब और अनपढ़ लोगों से कहो कि क्या
  91. 4:53तुम भी अल्लाह के फरमाबरदार बनते और
  92. 4:55इस्लाम लाते हो पस अगर यह लोग इस्लाम ले
  93. 4:59आए तो बेशक हिदायत पा ले और अगर तुम्हारा
  94. 5:02कहा ना माने तो तुम्हारा काम सिर्फ अल्लाह
  95. 5:06का पैगाम पहुंचा देना है और अल्लाह अपने
  96. 5:09बंदों को देख रहा है जो लोग अल्लाह की
  97. 5:13आयतों को नहीं मानते और अंबिया को नाहक
  98. 5:15कत्ल करते रहे हैं और जो इंसाफ करने का
  99. 5:18हुक्म देते हैं उन्हें भी मार डालते हैं
  100. 5:20उनको दुख देने वाले अजाब की खुशखबरी सुना
  101. 5:23दो ये ऐसे लोग हैं जिनके आमाल दुनिया और
  102. 5:27आखिरत दोनों में बर्बाद हैं और इनका कोई
  103. 5:30मददगार नहीं होगा भला तुमने उन लोगों को
  104. 5:33नहीं देखा जिनको किताब यानी तौरा से
  105. 5:35हिस्सा दिया गया और वह इस किताब उल्लाह
  106. 5:39यानी कुरान की तरफ बुलाए जाते हैं ताकि यह
  107. 5:42उनके तनाज आत का उनमें फैसला कर दे तो एक
  108. 5:45फरीक उनमें से फिर जाता है और मुंह फेर
  109. 5:48लेता है यह इसलिए कि यह इस बात के कायल है
  110. 5:51कि दोजख की आग हमें चंद रोज के सिवा छू ही
  111. 5:55नहीं सकेगी और जो कुछ यह दीन के बारे में
  112. 5:57बहता बांधते रहे हैं उसने इनको धोखे में
  113. 6:01डाल रखा है तो उस वक्त क्या हाल होगा जब
  114. 6:05हम इनको जमा करेंगे यानी उस रोज जिसके आने
  115. 6:08में कुछ भी शक नहीं और हर नफ्स अपने आमाल
  116. 6:11का पूरा पूरा बदला पाएगा और उन पर जुल्म
  117. 6:15नहीं किया जाएगा कहो कि ऐ अल्लाह ऐ
  118. 6:18बादशाही के मालिक तू जिसको चाहे बादशाही
  119. 6:21बख्शे और जिससे चाहे बादशाही छीन ले और
  120. 6:25जिसको चाहे इज्जत दे और जिसे चाहे जलील
  121. 6:28करे हर तरह की भलाई तेरे ही हाथ है और
  122. 6:32बेशक तू हर चीज पर कादिर है तू ही रात को
  123. 6:36दिन में दाखिल करता और तू ही दिन को रात
  124. 6:39में दाखिल करता है तू ही बेजान से जानदार
  125. 6:42पैदा करता है और तू ही जानदार से बेजान
  126. 6:45पैदा करता है और तू ही जिसको चाहता है
  127. 6:49बेहिसाब रिजक बख्ता है मोमिनो को चाहिए कि
  128. 6:52मोमिनो के सिवा काफिरों को दोस्त ना बनाए
  129. 6:55और जो ऐसा करेगा उससे अल्लाह का कुछ अहद
  130. 6:57नहीं हां अगर इस तरीक से तुम उनके शर से
  131. 7:00बचाओ की सूरत पैदा करो तो मु जायका नहीं
  132. 7:03और अल्लाह तुमको अपने गजब से डराता है और
  133. 7:06अल्लाह ही की तरफ तुमको लौट कर जाना है ऐ
  134. 7:09पैगंबर लोगों से कह दो कि कोई बात तुम
  135. 7:12अपने दिलों में मखी रखो या उसे जाहिर करो
  136. 7:14अल्लाह उसको जानता है और जो कुछ आसमानों
  137. 7:18में और जो कुछ जमीन में है उसको सबकी खबर
  138. 7:20है और वह हर चीज पर कादिर है जिस दिन हर
  139. 7:24शख्स अपनी की हुई नेकी को मौजूद पा लेगा
  140. 7:27और अपनी बुराई को भी देख लेगा तो आरजू
  141. 7:29करेगा कि ऐ काश उसमें और उस बुराई में दूर
  142. 7:33की मुसाफत हो जाती और अल्लाह तुमको अपने
  143. 7:36गजब से डराता है और अल्लाह अपने बंदों पर
  144. 7:39निहायत मेहरबान है ऐ पैगंबर लोगों से कह
  145. 7:43दो कि अगर तुम अल्लाह को दोस्त रखते हो तो
  146. 7:45मेरी पैरवी करो अल्लाह भी तुम्हें दोस्त
  147. 7:47रखेगा और तुम्हारे गुनाह माफ कर देगा और
  148. 7:51अल्लाह बख्शने वाला है मेहरबान है कह दो
  149. 7:54कि अल्लाह और उसके रसूल का हुक्म मानो पस
  150. 7:57अगर वह ना माने तो अल्लाह भी काफिरों को
  151. 7:59दोस्त नहीं रखता अल्लाह ने आदम और नूह और
  152. 8:03खानदान इब्राहीम और खानदान इमरान को तमाम
  153. 8:06जहान के लोगों में से मुंतखाब फरमाया था
  154. 8:09उनमें से बाज बाज की औलाद थे और अल्लाह
  155. 8:12सुनने वाला है जानने वाला है वो वक्त याद
  156. 8:16करने के लायक है जब इमरान की बीवी ने कहा
  157. 8:18कि ऐ परवरदिगार जो बच्चा मेरे पेट में है
  158. 8:21मैं इसको तेरी नजर करती हूं इसे दुनिया के
  159. 8:24कामों से आजाद रखूंगी तू इसे मेरी तरफ से
  160. 8:27कबूल फरमा तू तो सुनने वाला है जानने वाला
  161. 8:29है फिर जब उनके यहां बच्चा पैदा हुआ तो
  162. 8:32कहने लगी कि परवरदिगार मेरे तो लड़की हुई
  163. 8:35है जबकि अल्लाह खूब जानता था जो उनके यहां
  164. 8:37विलादत हुई थी और ना होता लड़का मानंद इस
  165. 8:41लड़की के और कहने लगी मैंने इसका नाम
  166. 8:44मरियम रखा है और मैं इसको और इसकी औलाद को
  167. 8:47शैतान मरदूड से तेरी पनाह में दे दी हूं
  168. 8:50तो उसके परवरदिगार ने उसको पसंदी दगी के
  169. 8:52साथ कुबूल फरमाया और उसे अच्छी तरह परवरिश
  170. 8:55किया और जकरिया को उसका कफील बनाया करिया
  171. 8:59जब कभी इबादत गाह में उसके पास जाते तो
  172. 9:02उसके पास खाना पाते यह कैफियत देखकर एक
  173. 9:05दिन मरियम से पूछने लगे कि मरियम यह खाना
  174. 9:08तुम्हारे पास कहां से आता है वो बोली कि
  175. 9:11अल्लाह के यहां से आता है बेशक अल्लाह
  176. 9:13जिसे चाहता है बेहिसाब रिजक देता है उस
  177. 9:17वक्त जकरिया ने अपने परवरदिगार को पुकारा
  178. 9:19अर्ज की कि परवरदिगार मुझे अपनी तरफ से
  179. 9:22औलाद सालेह अता फरमा तू बेशक दुआ सुनने
  180. 9:25वाला है चुनांचे व अभी इबादत गाह में खड़े
  181. 9:28नमाज ही पढ़ रहे थे कि फरिश्तों ने आवाज
  182. 9:30दी कि जकरिया अल्लाह तुम्हें हिया की
  183. 9:33बशारत देता है जो कलेम उल्लाह यानी ईसा की
  184. 9:37तस्दीक करेंगे और सरदार होंगे और औरतों से
  185. 9:40रगत ना रखने वाले और एक पैगंबर यानी नेक
  186. 9:44उकार में होंगे जकरिया ने कहा ऐ परवरदिगार
  187. 9:47मेरे यहां लड़का क्यों कर पैदा होगा कि
  188. 9:50मैं तो बुड्ढा हो गया हूं और मेरी बीवी
  189. 9:52बांझ है फरमाया इसी तरह अल्लाह जो चाहता
  190. 9:56है करता है जकरिया ने कहा कि परवरदिगार
  191. 9:59मेरे लिए कोई निशानी मुकर्रर फरमा दे
  192. 10:01फरमाया तुम्हारी निशानी यह है कि तुम
  193. 10:04लोगों से तीन दिन इशारे के सिवा बात ना कर
  194. 10:07सकोगे तो उन दिनों में अपने परवरदिगार की
  195. 10:10कसरत से याद और सुबह शाम उसकी तस्बीह करना
  196. 10:14और जब फरिश्तों ने मरियम से कहा कि मरियम
  197. 10:17अल्लाह ने तुमको बरगुजार किया है और
  198. 10:19तुम्हें पाक बनाया है और दुनिया जहान की
  199. 10:22औरतों में से तुमको मुंतखाब किया है ऐ
  200. 10:25मरियम अपने परवरदिगार की फरमाबरदार करना
  201. 10:28और सजदा करना और रुकू करने वालों के साथ
  202. 10:31रुकू करना ऐ नबी यह बातें अखबार गैब में
  203. 10:35से हैं जो हम तुम्हारे पास भेजते हैं और
  204. 10:38जब वोह लोग अपने कलम बतौर कुरा डाल रहे थे
  205. 10:41कि मरियम का कफील कौन बने तो तुम उनके पास
  206. 10:44नहीं थे और ना उस वक्त ही उनके पास थे जब
  207. 10:47वह आपस में झगड़ रहे थे वो वक्त भी याद
  208. 10:50करने के लायक है जब फरिश्तों ने मरियम से
  209. 10:52कहा कि मरियम अल्लाह तुमको अपनी तरफ से एक
  210. 10:55कलमे की बशारत देता है जिसका नाम मसीह और
  211. 10:59और मशहूर ईसा इब्ने मरियम होगा और जो
  212. 11:02दुनिया और आखिरत में आबरू मंद और मुकर्रम
  213. 11:05में से होगा और मां की गोद में और बड़ी
  214. 11:08उम्र का होकर दोनों हाल तों में लोगों से
  215. 11:11यसा गुफ्तगू करेगा और नेकू कारों में होगा
  216. 11:14मरियम ने कहा कि परवरदिगार मेरे यहां
  217. 11:17बच्चा क्यों कर होगा कि किसी इंसान ने
  218. 11:19मुझे हाथ तक तो लगाया नहीं फरमाया कि
  219. 11:21अल्लाह इसी तरह जो चाहता है पैदा करता है
  220. 11:25जब वह कोई काम करना चाहता है तो इरशाद
  221. 11:28फरमा देता है कि हो जा तो वो हो जाता है
  222. 11:32और वो उसे किताब और हिकमत और तौरा और
  223. 11:34इंजील का इल्म अता करेगा और ईसा बनी
  224. 11:37इसराइल की तरफ पैगंबर होकर जाएंगे और
  225. 11:40कहेंगे कि मैं तुम्हारे पास तुम्हारे
  226. 11:42परवरदिगार की तरफ से निशानी लेकर आया हूं
  227. 11:45वो यह कि तुम्हारे सामने मिट्टी से परिंदे
  228. 11:47की सूरत बनाता हूं फिर उसमें फूंक मारता
  229. 11:50हूं तो वह अल्लाह के हुक्म से सचमुच
  230. 11:52परिंदा हो जाता है और पैदाइशी अंधे और अबर
  231. 11:56को तंदुरुस्त कर देता हूं और अल्लाह के
  232. 11:59हुक्म से मुर्दों को जिंदा कर देता हूं और
  233. 12:01जो कुछ तुम खा कर आते हो और जो अपने घरों
  234. 12:04में जमा कर रखते हो सब तुमको बता देता हूं
  235. 12:07अगर तुम साहिबे ईमान हो तो इन बातों में
  236. 12:09तुम्हारे लिए निशानी है और मुझसे पहले जो
  237. 12:12तौरा नाजिल हुई थी उसकी तस्दीक भी करता
  238. 12:15हूं और मैं इसलिए भी आया हूं कि बाज चीजें
  239. 12:18जो तुम पर हराम थी उनको तुम्हारे लिए हलाल
  240. 12:20कर दूं और मैं तो तुम्हारे परवरदिगार की
  241. 12:23तरफ से निशानी लेकर आया हूं तो अल्लाह से
  242. 12:26डरो और मेरा कहा मानो कुछ शक नहीं कि
  243. 12:29अल्लाह ही मेरा और तुम्हारा परवरदिगार है
  244. 12:31तो उसी की इबादत करो यही सीधा रास्ता है
  245. 12:35फिर जब ईसा ने उनकी तरफ से इंकार और
  246. 12:38नाफरमानी ही देखी तो कहने लगे कि कोई है
  247. 12:40जो अल्लाह का तरफदार और मेरा मददगार हो
  248. 12:43हवारी बोले कि हम अल्लाह के तरफदार और
  249. 12:46आपके मददगार हैं हम अल्लाह पर ईमान लाए और
  250. 12:49आप गवाह रहे कि हम फरमाबरदार हैं ऐ
  251. 12:53परवरदिगार जो किताब तूने नाजिल फरमाई है
  252. 12:56हम उस पर ईमान ले आए और तेरे पैगंबर के
  253. 12:58मुतबललिस्ट
  254. 13:28रखूंगा फिर तुम सब मेरे पास लौट कर आओगे
  255. 13:32तो जिन बातों में तुम इख्तिलाफ करते रहे
  256. 13:34उस दिन तुम में उनका फैसला कर दूंगा अब जो
  257. 13:38काफिर हुए उनको दुनिया और आखिरत दोनों में
  258. 13:41सख्त अजाब दूंगा और उनका कोई मददगार ना
  259. 13:44होगा और जो लोग ईमान लाए और अमल नेक करते
  260. 13:48रहे उनको अल्लाह पूरा पूरा सिला देगा और
  261. 13:51अल्लाह जालिमों को दोस्त नहीं रखता ऐ नबी
  262. 13:55यह हम तुमको अल्लाह की आयतें और हिकमत भरी
  263. 13:57नसीहत पढ़ पढ़कर सुनाते हैं ईसा का हाल
  264. 14:01अल्लाह के नजदीक आदम का सा है कि उसने
  265. 14:03पहले मिट्टी से उनको बनाया फिर फरमाया कि
  266. 14:06बाश इंसान हो जा तो वो वैसे ही हो गए यह
  267. 14:10बात तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक है
  268. 14:13तो तुम हरगिज शक करने वालों में ना होना
  269. 14:16फिर अगर यह लोग ईसा के बारे में तुमसे
  270. 14:18झगड़ा करें उसके बाद कि तुमको हकीकत मालूम
  271. 14:21हो ही चुकी है तो उनसे कहना क्या आओ हम
  272. 14:24अपने बेटों और बेटियों को बुलाएं तुम अपने
  273. 14:27बेटों और बेटियों को बुलाओ और हम खुद भी
  274. 14:29आएं और तुम खुद भी आओ फिर दोनों फरीक
  275. 14:32अल्लाह से दुआ और इल्तजा करें इस तरह
  276. 14:35झूठों पर अल्लाह की लानत भेजें यह तमाम
  277. 14:38बयानात सही हैं और अल्लाह के सिवा कोई
  278. 14:40माबूद नहीं और बेशक अल्लाह गालिब है
  279. 14:44साहिबे हिकमत है पस अगर यह लोग फिर जाएं
  280. 14:47तो अल्लाह मुफ सिदों को खूब जानता है कह
  281. 14:51दो कि ऐ अहले किताब जो बात हमारे और
  282. 14:53तुम्हारे दोनों के दरमियान यसा तस्लीम की
  283. 14:56गई है उसकी तरफ आओ वो यह कि अल्लाह के
  284. 14:59सिवा हम किसी की इबादत ना करें और उसके
  285. 15:02साथ किसी चीज को शरीक ना बनाएं और हम में
  286. 15:05कोई किसी को अल्लाह के सिवा अपना कारसाज
  287. 15:07ना समझे फिर अगर यह लोग इस बात को ना माने
  288. 15:10तो इनसे कह दो कि तुम गवा रहो कि हम
  289. 15:13अल्लाह के फरमाबरदार हैं ऐ अहले किताब तुम
  290. 15:17इब्राहीम के बारे में क्यों झगड़ते हो
  291. 15:20हालांकि तौरा और इंजील उनके बाद उतरी हैं
  292. 15:23और वह पहले हो चुके तो क्या तुम अकल नहीं
  293. 15:26रखते देखो ऐ ऐसी बात में तो तुमने झगड़ा
  294. 15:30किया ही था जिसका तुम्हें कुछ इल्म था भी
  295. 15:32मगर ऐसी बात में क्यों झगड़ते हो जिसका
  296. 15:34तुमको कुछ भी इल्म नहीं और अल्लाह जानता
  297. 15:38है और तुम नहीं जानते इब्राहिम ना तो
  298. 15:40यहूदी थे और ना ईसाई बल्कि सबसे बे
  299. 15:43ताल्लुक होकर एक अल्लाह के हो रहे थे और
  300. 15:47उसी के फरमाबरदार थे और मुशरिक में ना थे
  301. 15:50इब्राहीम से ज्यादा कुर्ब रखने वाले तो
  302. 15:52वोह लोग हैं जो उनकी पैरवी करते रहे और यह
  303. 15:55पैगंबर आखिर जमा सल्लल्लाहु अल वसल्लम और
  304. 15:59वो लोग जो ईमान लाए हैं और अल्लाह मोमिनो
  305. 16:03का कारसाज है ऐ अहले इस्लाम बाजे अहले
  306. 16:07किताब इस बात की ख्वाहिश रखते हैं कि किसी
  307. 16:09तरह तुमको गुमराह कर दें हालांकि यह तुमको
  308. 16:12क्या गुमराह करेंगे अपने आप को ही गुमराह
  309. 16:15कर रहे हैं और नहीं जानते ऐ अहले किताब
  310. 16:18तुम अल्लाह की आयतों से क्यों इंकार करते
  311. 16:20हो और तुम तौरा को मानते तो हो ऐ अहले
  312. 16:24किताब तुम सच को झूठ के साथ खलत मलत क्यों
  313. 16:27करते हो और हक को क्यों छुपाते हो जबकि
  314. 16:30तुम जानते भी हो और अहले किताब का एक
  315. 16:32गिरोह अपने आदमियों से कहता है कि जो
  316. 16:35किताब मोमिनो पर नाजिल हुई है उस पर दिन
  317. 16:38के शुरू में तो ईमान ले आया करो और उसके
  318. 16:40आखिर में इंकार कर दिया करो ताकि वह
  319. 16:42इस्लाम से बर्गस्ता हो जाए और अपने दीन के
  320. 16:45पैर के सिवा किसी और की बात का यकीन ना कर
  321. 16:48लेना ऐ पैगंबर कह दो कि हिदायत तो अल्लाह
  322. 16:52ही की हिदायत है वह यह भी कहते हैं यह भी
  323. 16:56ना मानना कि जो चीज तुमको मिली है वैसे
  324. 16:58किसी और को भी मिल सकती है वरना वह तुम पर
  325. 17:01तुम्हारे रब के रूबरू हुज्जत कायम कर
  326. 17:03देंगे पैगंबर कह दो कि बुजुर्ग अल्लाह ही
  327. 17:08के हाथ में है वह जिसे चाहता है देता है
  328. 17:11और अल्लाह कुशाई वाला है इल्म वाला है वह
  329. 17:15अपनी रहमत से जिसको चाहता है खास कर लेता
  330. 17:17है और अल्लाह बड़े फजल का मालिक है और
  331. 17:21अहले किताब में से कोई तो ऐसा है कि अगर
  332. 17:24तुम उसके पास दीनार का ढेर अमानत रख दो तो
  333. 17:27तुमको फौरन वापस दे दे और कोई इस तरह का
  334. 17:31है कि अगर उसके पास एक दीनार भी अमानत रखो
  335. 17:34तो जब तक उसके सर पर हर वक्त खड़े ना रहो
  336. 17:37तुम्हें दे ही नहीं यह इसलिए कि वह कहते
  337. 17:40हैं कि उम्म के बारे में हमसे मुजा नहीं
  338. 17:42होगा यह अल्लाह पर महज झूठ बोलते हैं और
  339. 17:46इस बात को जानते भी हैं हां क्यों नहीं जो
  340. 17:50शख्स अपने इकरार को पूरा करे और परहेज गार
  341. 17:53बना रहे तो अल्लाह भी परहेज गारों को
  342. 17:55दोस्त रखता है जो लोग अल्लाह के इकरार और
  343. 17:59अपनी कसमों को बेच डालते हैं और उनके ववज
  344. 18:02थोड़ी सी कीमत हासिल करते हैं उनका आखिरत
  345. 18:05में कुछ हिस्सा नहीं उनसे अल्लाह ना तो
  346. 18:07कलाम करेगा और ना कयामत के रोज उनकी तरफ
  347. 18:10देखेगा और ना उनको पाक करेगा और उनको दुख
  348. 18:15देने वाला अजाब होगा और इन अहले किताब में
  349. 18:18बाज ऐसे हैं कि किताब यानी तौरा को जबान
  350. 18:21मरोड़ मरोड़ कर पढ़ते हैं ताकि तुम समझो
  351. 18:23कि जो कुछ वो पढ़ते हैं किताब में से है
  352. 18:26हालांकि वोह किताब में से नहीं होता और
  353. 18:28कहते हैं कि वह अल्लाह की तरफ से नाजिल
  354. 18:30हुआ है हालांकि वह अल्लाह की तरफ से नहीं
  355. 18:33होता और अल्लाह पर झूठ बोलते हैं और यह
  356. 18:36बात जानते भी हैं किसी आदमी को शाया नहीं
  357. 18:40कि अल्लाह उसे किताब और हुकूमत और नबूवत
  358. 18:42अता फरमाए फिर वह लोगों से कहे कि अल्लाह
  359. 18:44को छोड़कर मेरे बंदे हो जाओ बल्कि उसको यह
  360. 18:48कहना चाहिए कि अहले किताब तुम रब्बानी हो
  361. 18:51जाओ क्योंकि तुम किताब की तालीम भी देते
  362. 18:54हो और क्योंकि पढ़ते पढ़ाते रहते हो और
  363. 18:57उसको यह भी नहीं नहीं कहना चाहिए कि तुम
  364. 18:59फरिश्तों और पैगंबरों को माबूद बना लो भला
  365. 19:03जब तुम मुसलमान हो चुके तो क्या वह
  366. 19:05तुम्हें काफिर होने को कहेगा और जब अल्लाह
  367. 19:08ने पैगंबरों से अहद लिया कि जब मैं तुमको
  368. 19:10किताब और दाना अता करूं फिर तुम्हारे पास
  369. 19:12कोई पैगंबर आए जो तुम्हारी किताब की
  370. 19:14तस्दीक करें तो तुम्हें जरूर उस पर ईमान
  371. 19:17लाना होगा और जरूर उसकी मदद करनी होगी और
  372. 19:20अहद लेने के बाद पूछा कि भला तुमने इकरार
  373. 19:22किया और इस इकरार पर मेरा जिम्मा लिया
  374. 19:25यानी मुझे जामिन ठहराया उन्होंने कहा हां
  375. 19:29हमने इकरार किया फरमाया कि तुम इस अहद
  376. 19:32पैमान के गवाह रहो और मैं भी तुम्हारे साथ
  377. 19:34गवाह हूं अब जो लोग इसके बाद फिर जाएं तो
  378. 19:37वही बद किरदार हैं फिर क्या यह काफिर
  379. 19:40अल्लाह के दीन के सिवा किसी और दीन के
  380. 19:42तालिब हैं हालाके सब अहले आसमान और जमीन
  381. 19:46खुशी या नाखुशी से अल्लाह के फरमाबरदार
  382. 19:49हैं और उसी की तरफ लौट कर जाने वाले हैं
  383. 19:53कहो कि हम अल्लाह पर ईमान लाए और जो किताब
  384. 19:56हम पर नाजिल हुई और जो सही इब्राहीम और
  385. 19:59इस्माइल और इसहाक और याकूब और उनकी औलाद
  386. 20:02पर उतरे और जो किताबें मूसा और ईसा और
  387. 20:05दूसरे अंबिया को परवरदिगार की तरफ से मिली
  388. 20:08सब पर ईमान लाए हम इन पैगंबरों में से
  389. 20:11किसी में कुछ फर्क नहीं करते और हम उसी
  390. 20:14अल्लाह के फरमाबरदार हैं और जो शख्स
  391. 20:17इस्लाम के सिवा किसी और दीन का तालिब होगा
  392. 20:20वह उससे हरगिज कबूल नहीं किया जाएगा और
  393. 20:23ऐसा शख्स आखिरत में नुकसान उठाने वालों
  394. 20:25में होगा अल्लाह ऐसे लोगों को क्यों कर
  395. 20:28हिदायत दे जो ईमान लाने के बाद काफिर हो
  396. 20:31गए और पहले इस बात की गवाही दे चुके कि यह
  397. 20:34पैगंबर बरहक है और उनके पास दलाल भी आ गए
  398. 20:38और अल्लाह बे इंसाफ को हिदायत नहीं देता
  399. 20:42इन लोगों की सजा यह है कि इन पर अल्लाह की
  400. 20:45और फरिश्तों की और इंसानों की सबकी लानत
  401. 20:48है हमेशा इस लानत में गिरफ्तार रहेंगे
  402. 20:52इनसे ना तो अजाब हल्का किया जाएगा और ना
  403. 20:54इन्हें मोलत दी जाएगी हां जिन्होंने इसके
  404. 20:57बाद तौबा की और अपनी हालत दुरुस्त कर ली
  405. 21:00तो अल्लाह बख्शने वाला मेहरबान है जो लोग
  406. 21:03ईमान लाने के बाद काफिर हो गए फिर कुफ्र
  407. 21:05में बढ़ते गए ऐसों की तौबा हरगिज कबूल
  408. 21:08नहीं होगी और ये लोग गुमराह है जो लोग
  409. 21:12काफिर हुए और कुफ्र ही की हालत में मर गए
  410. 21:14वो अगर नजात हासिल करनी चाहे और बदले में
  411. 21:18जमीन भर सोना दें तो हरगिज कबूल नहीं किया
  412. 21:21जाएगा इन लोगों को दुख देने वाला अजाब
  413. 21:24होगा और इनका कोई मददगार नहीं होगा मोमिनो
  414. 21:28जब तक तुम उन चीजों में से जो तुम्हें
  415. 21:30अजीज हैं अल्लाह की राह में खर्च ना करोगे
  416. 21:33कभी नेकी हासिल ना कर सकोगे और जो चीज तुम
  417. 21:36खर्च करोगे अल्लाह उसको जानता है बनी
  418. 21:39इसराइल के लिए तौरा के नाजिल होने से पहले
  419. 21:42खाने की तमाम चीजें हलाल थी बजज उनके जो
  420. 21:45याकूब ने खुद अपने ऊपर हराम कर ली थी कह
  421. 21:48दो कि अगर सच्चे हो तो तौरा लाओ और उसे
  422. 21:51पढ़ो यानी दलील पेश करो अब जो उसके बाद भी
  423. 21:54अल्लाह पर झूठे इफ्त करें तो ऐसे लोग ही
  424. 21:57बे इंसाफ हैं कह दो कि अल्लाह ने सच फरमा
  425. 22:00दिया पस दीन इब्राहिम की पैरवी करो जो
  426. 22:03सबसे बे ताल्लुक होकर एक अल्लाह के हो रहे
  427. 22:06थे और मुशरिक में से ना थे सबसे पहला घर
  428. 22:10जो लोगों की इबादत करने के लिए मुकर्रर
  429. 22:12किया गया था वही है जो मक्के में है
  430. 22:22बाबकॉक
  431. 22:25इस मुबारक घर में दाखिल हुआ उसने अमन पा
  432. 22:29लिया और लोगों पर अल्लाह का हक यानी फर्ज
  433. 22:32है कि जो इस घर तक जाने का मखदू रखे वह
  434. 22:36इसका हज करे और जो इस हुक्म की तामील ना
  435. 22:38करेगा तो अल्लाह भी अहले आलम से बे नियाज
  436. 22:41है कहो कि अहले किताब तुम अल्लाह की आयतों
  437. 22:46से क्यों कुफ्र करते हो जबकि अल्लाह
  438. 22:48तुम्हारे सब आमाल से बाख है कहो कि अहले
  439. 22:51किताब तुम मोमिनो को अल्लाह के रास्ते से
  440. 22:54क्यों रोकते हो और बावजूद कि तुम उससे
  441. 22:56वाकिफ हो उसमें कज निकालते हो और अल्लाह
  442. 22:59तुम्हारे करतूतों से बेखबर नहीं मोमिनो
  443. 23:03अगर तुम अहले किताब के किसी फरीक का कहा
  444. 23:06मान लोगे तो वह तुम्हें ईमान लाने के बाद
  445. 23:08काफिर बना देंगे और तुम क्यों कर कुफ्र
  446. 23:11करोगे जबक तुमको अल्लाह की आयतें पढ़
  447. 23:13पढ़कर सुनाई जाती हैं और तुम में उसके
  448. 23:16पैगंबर मौजूद हैं और जिसने अल्लाह की
  449. 23:19रस्सी को मजबूत पकड़ लिया वह सीधे रस्ते
  450. 23:22लग गया मोमिनो अल्लाह से डरो जैसा कि उससे
  451. 23:25डरने का हक है और मरना तो मुसलमान ही मरना
  452. 23:29और सब मिलकर अल्लाह की हिदायत की रस्सी को
  453. 23:31मजबूत पकड़े रहना और फिरके फिरके ना हो
  454. 23:34जाना और अपने ऊपर अल्लाह की उस मेहरबानी
  455. 23:37को याद रखना जब तुम एक दूसरे के दुश्मन थे
  456. 23:39तो उसने तुम्हारे दिलों में उल्फत डाल दी
  457. 23:42और तुम उसकी मेहरबानी से भाई-भाई हो गए और
  458. 23:45तुम आग के गढ़े के किनारे तक पहुंच चुके
  459. 23:48थे तो उसने तुमको उससे बचा लिया इस तरह
  460. 23:51अल्लाह तुमको अपनी आयतें खोल खोल कर
  461. 23:53सुनाता है ताकि तुम राहे रास्त पर रहो और
  462. 23:56तुम में एक जमात ऐसी होनी चाहिए जो लोगों
  463. 23:59को नेकी की तरफ बुलाए और अच्छे काम करने
  464. 24:01का हुक्म दे और बुरे कामों से मना करे यही
  465. 24:04लोग हैं जो कामयाब हैं और उन लोगों की तरह
  466. 24:07ना होना जो मुत फ्रिक हो गए और साफ एह काम
  467. 24:10आने के बाद एक दूसरे से इख्तिलाफ करने लगे
  468. 24:14यह वो लोग हैं जिनको कयामत के दिन बड़ा
  469. 24:16अजाब होगा जिस दिन बहुत से मुंह सफेद
  470. 24:19होंगे और बहुत से सियाह तो जिन लोगों के
  471. 24:21मुंह सियाह होंगे उनसे अल्लाह फरमाए क्या
  472. 24:25तुम ईमान लाकर काफिर हो गए थे सो अब उस
  473. 24:28कुफ्र के बदले अजाब के मजे चखो और जिन
  474. 24:31लोगों के मुंह सफेद होंगे वह अल्लाह की
  475. 24:34रहमत के बागों में होंगे और उनमें हमेशा
  476. 24:36रहेंगे यह अल्लाह की आयतें हैं जो हम
  477. 24:39तुमको ठीक-ठीक पढ़कर सुनाते हैं और अल्लाह
  478. 24:42अहले आलम पर जुल्म नहीं करना चाहता और जो
  479. 24:45कुछ आसमानों में और जो कुछ जमीन में है सब
  480. 24:48अल्लाह ही का है और सब कामों का अंजाम
  481. 24:50अल्लाह ही की तरफ है मोमिनो तुम बेहतरीन
  482. 24:54उम्मत हो जिसे लोगों की हिदायत के लिए
  483. 24:56मैदान में लाया गया है कि तुम नेक काम
  484. 24:59करने को कहते हो और बुरे कामों से मना
  485. 25:01करते हो और अल्लाह पर ईमान रखते हो और अगर
  486. 25:04अहले किताब भी ईमान ले आते तो उनके लिए
  487. 25:07बहुत अच्छा होता उनमें ईमान लाने वाले भी
  488. 25:10हैं लेकिन थोड़े और अक्सर नाफरमान है यह
  489. 25:14तुम्हें खफ सी तकलीफ के सिवा कुछ नुकसान
  490. 25:16नहीं पहुंचा सकेंगे और अगर तुमसे लड़ेंगे
  491. 25:19तो पीठ फेर कर भाग जाएंगे फिर उनको मदद भी
  492. 25:22कहीं से नहीं मिलेगी ये जहां नजर आएंगे
  493. 25:25तुम देखोगे कि जिल्लत इनसे चिम रही है बजज
  494. 25:29इसके कि यह अल्लाह की पनाह में या मुसलमान
  495. 25:31लोगों की पनाह में आ जाए और यह लोग अल्लाह
  496. 25:35के गजब में गिरफ्तार हैं और नादी इनसे
  497. 25:38लिपट रही है यह इसलिए कि अल्लाह की आयतों
  498. 25:41से इंकार करते थे और उसके पैगंबरों को
  499. 25:44नाहक कत्ल कर देते थे यह इसलिए कि यह
  500. 25:47नाफरमानी किए जाते और हद से बढ़े जाते थे
  501. 25:51यह भी सब एक जैसे नहीं है इन अहले किताब
  502. 25:54में कुछ अच्छे लोग भी हैं जो रात के औकात
  503. 25:57में अल्लाह की आयतें पढ़ते और उसके आगे
  504. 25:59सजदे करते हैं वो अल्लाह पर और रोज आखिर
  505. 26:03पर ईमान रखते और अच्छे काम करने को कहते
  506. 26:06और बुरी बातों से मना करते और नेकियों पर
  507. 26:09लपकती हैं और यही लोग नेक उकार है और यह
  508. 26:13जिस तरह की नेकी करेंगे उसकी नाक दरी नहीं
  509. 26:16की जाएगी और अल्लाह परहेज गारों को खूब
  510. 26:19जानता है जो लोग काफिर हैं उनके माल और
  511. 26:23औलाद अल्लाह के मुकाबले में उनके हरगिज
  512. 26:25काम ना आएंगे और ये लोग अहले दोजख है कि
  513. 26:29हमेशा उसी में रहेंगे ये लोग जो माल
  514. 26:32दुनिया की जिंदगी में खर्च करते हैं उसकी
  515. 26:35मिसाल आंधी किसी है जिसमें सख्त सर्दी हो
  516. 26:38और वह ऐसे लोगों की खेती पर जो अपने आप पर
  517. 26:41जुल्म करते थे चले और उसे तबाह कर दे और
  518. 26:44अल्लाह ने उन पर कुछ जुल्म नहीं किया
  519. 26:47बल्कि यह खुद अपने ऊपर जुल्म कर रहे हैं
  520. 26:50मोमिनो किसी गैर मजहब के आदमी को अपना
  521. 26:53राजदार ना बनाना यह लोग तुम्हारी खराबी
  522. 26:56में किसी तरह की को ही नहीं करते और चाहते
  523. 26:59हैं कि जिस तरह हो तुम्हें तकलीफ पहुंचे
  524. 27:02इनकी जबान से तो दुश्मनी जाहिर हो ही चुकी
  525. 27:05है और जो कीने इनके सीनों में मखी है वह
  526. 27:08कहीं ज्यादा है अगर तुम अकल रखते हो तो
  527. 27:11हमने तुमको अपनी आयतें खोल खोल कर सुना दी
  528. 27:14है देखो तुम ऐसे साफ दिल लोग हो कि इन
  529. 27:18लोगों से दोस्ती रखते हो हालांकि यह तुमसे
  530. 27:21दोस्ती नहीं रखते और तुम सब किताबों पर
  531. 27:23ईमान रखते हो और यह तुम्हारी किताब को
  532. 27:25नहीं मानते और जब तुमसे मिलते हैं तो कहते
  533. 27:29हैं हम ईमान ले आए हैं और जब तन्हा होते
  534. 27:32हैं तो तुम पर गुस्से के सबब उंगलियां काट
  535. 27:35काट खाती हैं इनसे कह दो कि अपने गुस्से
  536. 27:38में मर जाओ अल्लाह तुम्हारे दिलों की
  537. 27:40बातों से खूब वाकिफ है अगर तुम्हें आसूद
  538. 27:44कीी हासिल हो तो इनको बुरी लगती है और अगर
  539. 27:46तुम्हें रंज पहुंचे तो खुश होते हैं और
  540. 27:49अगर तुम तकलीफों की बर्दाश्त और नाफरमानी
  541. 27:52से कनारा कशी करते रहोगे तो इनका फरेब
  542. 27:55तुम्हें कुछ भी नुकसान ना पहुंचा सकेगा यह
  543. 27:58जो कुछ करते हैं अल्लाह उसका अहाता किए
  544. 28:01हुए है और उस वक्त को याद करो जब तुम सुबह
  545. 28:05को अपने घर से रवाना होकर ईमान वालों को
  546. 28:07लड़ाई के लिए मोर्चों पर मौके ब मौके मुता
  547. 28:10करने लगे और अल्लाह सब कुछ सुनता है जानता
  548. 28:14है उस वक्त तुम में से दो जमां ने जी छोड़
  549. 28:17देना चाहा मगर अल्लाह उनका मददगार था और
  550. 28:21मोमिनो को तो अल्लाह ही पर भरोसा करना
  551. 28:24चाहिए और अल्लाह ने जंगे बद्र में भी
  552. 28:26तुम्हारी मदद की थी जबकि उस वक्त भी तुम
  553. 28:29बे सरो सामान थे पस अल्लाह की नाफरमानी से
  554. 28:32बचो ताकि शुक्र गुजार बन जाओ जब तुम
  555. 28:35मोमिनो से यह कहकर उनके दिल बढ़ा रहे थे
  556. 28:38कि क्या तुमको यह काफी नहीं कि तुम्हारा
  557. 28:40परवरदिगार 3000 फरिश्ते नाजिल करके
  558. 28:43तुम्हें मदद दे हां क्यों नहीं अगर तुम
  559. 28:47दिल को मजबूत रखो और नाफरमानी से बचते रहो
  560. 28:50और काफिर तुम पर जोश के साथ दफत हमला कर
  561. 28:54दें तो तुम्हारा परवरदिगार
  562. 28:565000 फरिश्ते जिन पर निशान होंगे तुम्हारी
  563. 29:00मदद को भेजेगा और उस मदद को तो अल्लाह ने
  564. 29:03तुम्हारे लिए जरिया बिशारतगंज
  565. 29:19मात को हलाक कर दे या उन्हें जलील मगलू कर
  566. 29:22दे कि नाकाम वापस जाए ऐ पैगंबर इस काम में
  567. 29:26तुम्हारा कुछ इख्तियार नहीं अब दो सूरतें
  568. 29:29हैं या अल्लाह उनके हाल पर मेहरबानी करे
  569. 29:33या उन्हें अजाब दे कि यह जालिम लोग हैं और
  570. 29:36जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ जमीन में
  571. 29:39है सब अल्लाह ही का है वह जिसे चाहे बख्श
  572. 29:42दे और जिसे चाहे अजाब करे और अल्लाह
  573. 29:46बख्शने वाला मेहरबान है ऐ ईमान वालों
  574. 29:50दुगना चौकन सूद ना खाओ और अल्लाह से डरो
  575. 29:54ताकि कामयाब हो जाओ और दोजख की आग से बचो
  576. 29:58जो काफिरों के लिए तैयार की गई है और
  577. 30:01अल्लाह और उसके रसूल की इता करो ताकि तुम
  578. 30:03पर रहमत की जाए और अपने परवरदिगार की बख्श
  579. 30:07और उस बहिश्त की तरफ लपको जिसका अर्ज
  580. 30:10आसमान और जमीन के बराबर है और जो परहेज
  581. 30:13गारों के लिए तैयार की गई है जो आसूद कीी
  582. 30:16और तंगी में अपना माल अल्लाह की राह में
  583. 30:19खर्च करते हैं और गुस्से को रोकते और
  584. 30:22लोगों के कुसूर माफ करते हैं और अल्लाह
  585. 30:25नेकू कारों को दोस्त रख है और वह कि जब
  586. 30:29कोई खुला गुनाह या अपने हक में कोई और
  587. 30:31बुराई कर बैठते हैं तो अल्लाह को याद करते
  588. 30:34और अपने गुनाहों की बख्श मांगते हैं और
  589. 30:37अल्लाह के सिवा गुनाह बख्श भी कौन सकता है
  590. 30:40और जानबूझकर अपने अफल पर अड़े नहीं रहते
  591. 30:44ऐसे ही लोगों का सिला उनके परवरदिगार की
  592. 30:46तरफ से बख्श और बाग हैं जिनके नीचे नहरें
  593. 30:50बह रही हैं और वह उनमें हमेशा बसते रहेंगे
  594. 30:54और अच्छे काम करने वालों का बदला बहुत
  595. 30:57बहुत अच्छा है तुम लोगों से पहले भी बहुत
  596. 30:59से वाकत गुजर चुके हैं तो तुम जमीन में
  597. 31:02सैर करके देख लो कि झुट वालों का कैसा
  598. 31:04अंजाम हुआ यह कुरान लोगों के लिए साफ
  599. 31:07पैगाम और अहले तकवा के लिए हिदायत और
  600. 31:10नसीहत है और बद दिल ना होना और ना गम करना
  601. 31:14अगर तुम सच्चे मोमिन हो तो तुम ही गालिब
  602. 31:17रहोगे अगर तुम्हें जखम शिकस्त लगा है तो
  603. 31:20इन लोगों को भी ऐसा जखम लग चुका है और यह
  604. 31:23अया में जमाना है कि हम इनको लोगों में
  605. 31:26बदलते र कहते हैं और इससे यह भी मकसूद था
  606. 31:29कि अल्लाह ईमान वालों को जुदा कर दे और
  607. 31:32तुम में से बाज को शहीद बनाए और अल्लाह बे
  608. 31:36इंसाफ को पसंद नहीं करता और यह भी मकसूद
  609. 31:39था कि अल्लाह ईमान वालों को पाक साफ बना
  610. 31:42दे और काफिरों को नाबूत कर दे क्या तुम यह
  611. 31:45समझते हो कि बे आजमाइश बहिश्त में जा
  612. 31:48दाखिल होगे हालांकि अभी अल्लाह ने तुम में
  613. 31:51से जिहाद करने वालों को तो अच्छी तरह
  614. 31:53मालूम किया ही नहीं और यह भी मकसूद है कि
  615. 31:56वह साबित कदम रहने वालों को मालूम करें और
  616. 31:59तुम मौत शहादत के आने से पहले उसकी तमन्ना
  617. 32:02किया करते थे सो तुमने उसको आंखों से देख
  618. 32:06लिया और मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वा
  619. 32:09वसल्लम एक पैगंबर ही तो हैं इनसे पहले भी
  620. 32:12बहुत से पैगंबर हो गुजरे हैं भला अगर यह
  621. 32:15मर जाएं या मारे जाएं तो तुम उल्टे पांव
  622. 32:18फिर जाओगे और जो उल्टे पांव फिर जाएगा तो
  623. 32:22अल्लाह का कुछ नुकसान नहीं कर सकेगा और
  624. 32:25अल्लाह शुक्र गुजार को बड़ा सवाब देगा और
  625. 32:29किसी शख्स में ताकत नहीं कि अल्लाह के
  626. 32:31हुक्म के बगैर मर जाए उसने मौत का वक्त
  627. 32:34मुकर्रर करके लिख रखा है और जो शख्स
  628. 32:37दुनिया में अपने आमाल का बदला चाहे उसको
  629. 32:40हम यहीं बदला दे देंगे और जो आखिरत में
  630. 32:42तालिब सवाब हो उसको वहां अजर अता करेंगे
  631. 32:46और हम शुक्रगुजार को अन करीब बहुत अच्छा
  632. 32:49सिला देंगे और बहुत से नबी हुए हैं जिनके
  633. 32:52साथ होकर अक्सर अहल उल्लाह दुश्मनों से
  634. 32:55लड़े हैं तो जो जो मुसीबतें उन पर अल्लाह
  635. 32:58की राह में वाक हुई उनके सबब उन्होंने ना
  636. 33:01तो हिम्मत हारी और ना बुजदिली की ना
  637. 33:04काफिरों से दबे और अल्लाह इस्तकलाल रखने
  638. 33:07वालों को दोस्त रखता है और इस हालत में
  639. 33:10उनके मुंह से कोई बात निकलती तो यही के
  640. 33:13परवरदिगार हमारे गुनाह और ज्यादति जो हम
  641. 33:17अपने कामों में करते रहे हैं माफ फरमा और
  642. 33:20हमको साबित कदम रख और काफिरों पर फता
  643. 33:23इनायत कर तो अल्लाह ने उनको दुनिया में भी
  644. 33:27बदला दिया और आखिरत में भी बहुत अच्छा
  645. 33:29बदला देगा और अल्लाह नेकू कारों को दोस्त
  646. 33:32रखता है मोमिनो अगर तुम काफिरों का कहा
  647. 33:36मान लोगे तो वोह तुमको उल्टे पांव फेर कर
  648. 33:39मुरत कर देंगे फिर तुम बड़े खसारे में पड़
  649. 33:42जाओगे यह तुम्हारे मददगार नहीं है बल्कि
  650. 33:46अल्लाह तुम्हारा मददगार है और वह सबसे
  651. 33:49बेहतर मददगार है हम अन करीब काफिरों के
  652. 33:52दिलों में रोब बिठा देंगे क्योंकि ये
  653. 33:55अल्लाह के साथ शिर्क करते हैं
  654. 33:57जिसकी उसने कोई भी दलील नाजिल नहीं की और
  655. 34:00इनका ठिकाना दोजख है वो जालिमों का बहुत
  656. 34:04बुरा ठिकाना है और अल्लाह ने तुमसे अपना
  657. 34:07वादा सच्चा कर दिया यानी उस वक्त जब कि
  658. 34:09तुम काफिरों को उसके हुक्म से कत्ल कर रहे
  659. 34:12थे यहां तक कि जो तुम चाहते थे अल्लाह ने
  660. 34:14तुमको दिखा दिया उसके बाद तुमने हिम्मत
  661. 34:18हार दी और पैगंबर के हुक्म की तामील में
  662. 34:20झगड़ा करने लगे और तुमने उसकी नाफरमानी की
  663. 34:24बाज तो तुम में से दुनिया के तलबगार थे और
  664. 34:27बाज आखिरत के तालिब उस वक्त अल्लाह ने
  665. 34:30तुमको उनके सामने से हटा दिया ताकि
  666. 34:33तुम्हारी आजमाइश करें और उसने तुम्हारा
  667. 34:36कुसूर माफ कर दिया और अल्लाह मोमिनो पर
  668. 34:39बड़ा फजल करने वाला है वो वक्त भी याद
  669. 34:42करने के लायक है जब तुम लोग दूर भागे जाते
  670. 34:45थे और किसी को पीछे फिर कर नहीं देखते थे
  671. 34:48और रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वा वसल्लम
  672. 34:51तुमको तुम्हारे पीछे खड़े बुला रहे थे तो
  673. 34:54अल्लाह ने तुमको गम पर गम पहुंचाया ताकि
  674. 34:57जो चीज तुम्हारे हाथ से जाती रही या जो
  675. 34:59मुसीबत तुम पर वाक हुई है उससे तुम गमगीन
  676. 35:02ना हो और अल्लाह तुम्हारे सब आमाल से
  677. 35:05खबरदार है फिर अल्लाह ने उस परेशानी के
  678. 35:08बाद तुम पर तसल्ली नाजिल फरमाई यानी नींद
  679. 35:12कि तुम में से एक जमात पर तारी हो गई और
  680. 35:15कुछ लोग जिनको जान के लाले पड़ रहे थे
  681. 35:18अल्लाह के बारे में नाहक अया में कुफ्र
  682. 35:20केसे गुमान करते थे और कहते थे भला हमारे
  683. 35:23इख्तियार की कुछ बात है तुम कह दो कि बेशक
  684. 35:28सब बातें अल्लाह ही के इख्तियार में है यह
  685. 35:31लोग बहुत सी बातें दिलों में मखी रखते हैं
  686. 35:34जो तुम पर जाहिर नहीं करते थे कहते थे कि
  687. 35:36हमारे बस की बात होती तो हम यहां कत्ल ही
  688. 35:39ना किए जाते कह दो कि अगर तुम अपने घरों
  689. 35:43में भी होते तो जिनकी तकदीर में मारा जाना
  690. 35:46लिखा था वह अपनी अपनी कत्ल काहों की तरफ
  691. 35:49जरूर निकल आते इससे गरज यह थी कि अल्लाह
  692. 35:53तुम्हारे सीनों की बातों को आजमाए और जो
  693. 35:55कुछ तुम्हारे दिल में है उसको साफ कर दे
  694. 35:59और अल्लाह दिलों की बातों से खूब वाकिफ है
  695. 36:03जो लोग तुम में से उहुद के दिन जब के
  696. 36:05मोमिन और काफिरों की दो जमात एक दूसरे से
  697. 36:08गुथ गई जंग से भाग गए तो उनके बाज अफल के
  698. 36:12सबब शैतान ने उनको फिसला दिया था और यकीनन
  699. 36:15अल्लाह ने उनका कुसूर मुआफ कर दिया बेशक
  700. 36:18अल्लाह बख्शने वाला है बुर् बार है मोमिनो
  701. 36:22उन लोगों जैसे ना होना जो कुफ्र करते हैं
  702. 36:25और उनके मुसलमान भाई जब अल्लाह की राह में
  703. 36:27सफर करें और मर जाएं या जिहाद को निकले और
  704. 36:31मारे जाएं तो उनकी निस्बत कहते हैं कि अगर
  705. 36:33वह हमारे पास रहते तो ना मरते और ना मारे
  706. 36:36जाते यह इसलिए कि अल्लाह उन लोगों के
  707. 36:40दिलों में अफसोस पैदा कर दे और जिंदगी और
  708. 36:43मौत तो अल्लाह ही देता है और अल्लाह
  709. 36:46तुम्हारे सब कामों को देख रहा है और अगर
  710. 36:49तुम अल्लाह के रास्ते में मारे जाओ या मर
  711. 36:52जाओ तो जो माल मता लोग जमा करते हैं उससे
  712. 36:56अल्लाह अल्लाह की बख्श और रहमत कहीं बेहतर
  713. 36:58है और अगर तुम मर जाओ या मारे जाओ तो
  714. 37:01अल्लाह के हुजूर में जरूर इकट्ठे किए
  715. 37:03जाओगे फिर ऐ नबी अल्लाह की मेहरबानी से
  716. 37:07तुम उन लोगों के लिए नर्म मिजाज वाके हुए
  717. 37:10हो और अगर तुम बदख और सख्त दिल होते तो यह
  718. 37:13तुम्हारे पास से भाग खड़े होते सो इनको
  719. 37:16माफ कर दो और इनके लिए अल्लाह से मगफिरत
  720. 37:19मांगो और अपने कामों में इनसे मशत लिया
  721. 37:22करो और जब किसी काम का पुख्ता इरादा कर लो
  722. 37:26तो अल्लाह पर भरोसा रखो बेशक अल्लाह भरोसा
  723. 37:29रखने वालों को दोस्त रखता है अगर अल्लाह
  724. 37:32तुम्हारा मददगार है तो तुम पर कोई गालिब
  725. 37:35नहीं आ सकता और अगर वो तुम्हें छोड़ दे तो
  726. 37:38फिर कौन है उसके बाद तुम्हारी मदद करे और
  727. 37:42मोमिन को तो चाहिए कि अल्लाह ही पर भरोसा
  728. 37:44रखें और कभी नहीं हो सकता कि कोई पैगंबर
  729. 37:48खयानत करे और खयानत करने वालों को कयामत
  730. 37:51के दिन खयानत की हुई चीज अल्लाह के रूबरू
  731. 37:54ला हाजिर करनी होगी फिर हर शख्स को उसके
  732. 37:58आमाल का पूरा पूरा बदला दिया जाएगा और
  733. 38:00उनके साथ बे इंसाफी नहीं की जाएगी भला जो
  734. 38:04शख्स अल्लाह की खुशनूर का ताबे हो वह उस
  735. 38:07शख्स की तरह हो सकता है जो अल्लाह की
  736. 38:09नाखुशी में गिरफ्तार हो और जिसका ठिकाना
  737. 38:12दोजख है और वह बुरा ठिकाना है सब लोगों के
  738. 38:16अल्लाह के यहां मुख्तलिफ दर्जे हैं और
  739. 38:19अल्लाह उनके सब आमाल देख रहा है अल्लाह ने
  740. 38:23मोमिन पर यकीनन एहसान किया है कि उनमें
  741. 38:25उन्हीं में से एक पैगंबर भेजे जो उनको
  742. 38:28अल्लाह की आयतें पढ़ पढ़ कर सुनाते और
  743. 38:30उनको पाक करते और उन्हें किताब हिकमत की
  744. 38:32तालीम देते हैं और पहले तो ये लोग खुली
  745. 38:35गुमराही में थे भला यह क्या बात है कि जब
  746. 38:37उहुद के दिन कुफर के हाथ से तुम पर मुसीबत
  747. 38:40वाके हुई हालांकि जंगे बद्र में उससे
  748. 38:43दुगनी मुसीबत तुम्हारे हाथ से उन पर पड़
  749. 38:45चुकी है तो तुम कहने लगे कि यह आफत हम पर
  750. 38:47कहां से आ पड़ी कह दो कि यह तुम्हारी ही
  751. 38:50हि शमत आमाल है कि तुमने पैगंबर के हुक्म
  752. 38:53के खिलाफ किया बेशक अल्लाह हर चीज पर
  753. 38:55कादिर है और जो मुसीबत तुम पर दोनों जमां
  754. 38:58के मुकाबले के दिन वाक हुई सो अल्लाह के
  755. 39:01हुक्म से वाक हुई और उससे यह मकसूद था कि
  756. 39:03अल्लाह मोमिन को अच्छी तरह मालूम कर ले और
  757. 39:06मुनाफिक को भी मालूम कर ले और जब उनसे कहा
  758. 39:09गया कि आओ अल्लाह के रास्ते में जंग करो
  759. 39:11या काफिरों के हमलों को रोको तो कहने लगे
  760. 39:14कि अगर हमको लड़ाई की खबर होती तो हम जरूर
  761. 39:17तुम्हारे साथ रहते यह उस दिन ईमान की
  762. 39:19निस्बत कुफ्र से ज्यादा करीब थे मुंह से
  763. 39:22वो बातें कहते हैं जो इनके दिल में नहीं
  764. 39:24है और जो कुछ ये छुपाते हैं अल्लाह उससे
  765. 39:27खूब वाकिफ है यह खुद तो जंग से बचकर बैठ
  766. 39:30ही रहे थे मगर जिन्होंने अल्लाह की राह
  767. 39:32में जाने कुर्बान कर दी अपने उन भाइयों के
  768. 39:35बारे में भी कहते हैं कि अगर हमारा कहा
  769. 39:37मानते तो कत्ल ना होते कह दो कि अगर सच्चे
  770. 39:40हो तो अपने ऊपर से मौत को टाल देना जो लोग
  771. 39:43अल्लाह की राह में मारे गए उनको मरे हुए
  772. 39:46ना समझना वह मरे हुए नहीं हैं बल्कि
  773. 39:49अल्लाह के नजदीक जिंदा हैं और उनको रिजक
  774. 39:52मिल रहा है जो कुछ अल्लाह ने उनको अपने
  775. 39:55फजल से बख्श रखा है है उसमें खुश हैं और
  776. 39:58जो लोग उनके पीछे रह गए और शहीद होकर
  777. 40:01उनमें शामिल नहीं हो सके उनकी निस्बत
  778. 40:03खुशियां मना रहे हैं कि कयामत के दिन उनको
  779. 40:06भी ना कुछ खौफ होगा और ना वो गम नाक होंगे
  780. 40:09और अल्लाह के नामात और फजल से खुश हो रहे
  781. 40:13हैं और इससे कि अल्लाह मोमिन का अजर जाया
  782. 40:16नहीं करता जिन्होंने बावजूद जख्म खाने के
  783. 40:19अल्लाह और रसूल के हुक्म को कबूल किया जो
  784. 40:22लोग उनमें नेक उकार और परहेज गार हैं उनके
  785. 40:25लिए बड़ा सवाब है जब उनसे लोगों ने आकर
  786. 40:28बयान किया कि कुफर ने तुम्हारे मुकाबले के
  787. 40:30लिए लश्कर कसीर जमा किया है तो उनसे डरो
  788. 40:33तो उनका ईमान और ज्यादा हो गया और कहने
  789. 40:36लगे हमको अल्लाह काफी है और वह बहुत अच्छा
  790. 40:40कारसाज है फिर वह अल्लाह की नेमतों और
  791. 40:43उसके फजल के साथ खुश खुर्रम वापस आए उनको
  792. 40:47किसी तरह का जरर ना पहुंचा और वह अल्लाह
  793. 40:50की खुशनूर के ताबे रहे और अल्लाह बड़े फजल
  794. 40:53का मालिक है यह खौफ दिलाने वाला तो शैतान
  795. 40:57है जो अपने दोस्तों से डराता है तो अगर
  796. 41:00तुम मोमिन हो तो उनसे मत डरना और मुझ ही
  797. 41:02से डरते रहना और जो लोग कुफ्र में जल्दी
  798. 41:05करते हैं उनकी वजह से गमगीन ना होना ये
  799. 41:08अल्लाह का कुछ नुकसान नहीं कर सकते अल्लाह
  800. 41:11चाहता है कि आखिरत में इनको कुछ हिस्सा ना
  801. 41:13दे और उनके लिए बड़ा अजाब तैयार है जिन
  802. 41:17लोगों ने ईमान के बदले कुफर खरीदा वह
  803. 41:19अल्लाह का कुछ नहीं बिगाड़ सकते और उनको
  804. 41:21दुख देने वाला अजाब होगा और काफिर लोग यह
  805. 41:25ना ख्याल करें कि हम जो उनको मोहलत दिए
  806. 41:27जाते हैं तो यह उनके हक में अच्छा है नहीं
  807. 41:31बल्कि हम उनको इसलिए मोहलत देते हैं कि और
  808. 41:34गुनाह कर ले आखिरकार उनको जलील करने वाला
  809. 41:37अजाब होगा लोगों जब तक अल्लाह नापाक को
  810. 41:42पाक से अलग ना कर देगा मोमिनो को इस हाल
  811. 41:45में जिसमें तुम हो हरगिज नहीं रहने देगा
  812. 41:48और अल्लाह तुमको गैब की बातों से भी मुतला
  813. 41:50नहीं करेगा अलबत्ता अल्लाह अपने पैगंबरों
  814. 41:53में से जिसे चाहता है मुंतखाब कर लेता है
  815. 41:56सो तुम अल्लाह पर और उसके रसूलों पर ईमान
  816. 41:59रखो और अगर ईमान पर कायम रहोगे और परहेज
  817. 42:02गारी करोगे तो तुमको अजरे अजम मिलेगा जो
  818. 42:05लोग माल में जो अल्लाह ने अपने फजल से
  819. 42:07उनको अता फरमाया है बुख करते हैं वह इस
  820. 42:10बुख को अपने हक में अच्छा ना समझे वह
  821. 42:13अच्छा नहीं बल्कि उनके लिए बुरा है वह जिस
  822. 42:16माल में बुख करते हैं कयामत के दिन उसका
  823. 42:18तौक बनाकर उनकी गर्दन में डाला जाएगा और
  824. 42:22आसमानों और जमीन का वारिस अल्लाह ही है और
  825. 42:26जो अमल तुम करते हो अल्लाह को मालूम है
  826. 42:29अल्लाह ने उन लोगों का कौल सुन लिया है जो
  827. 42:32कहते हैं कि अल्लाह फकीर है और हम मालदार
  828. 42:35हैं ये जो कुछ कहते हैं हम उसको लिख लेंगे
  829. 42:38और पैगंबरों को जो ये नाहक कत्ल करते रहे
  830. 42:41हैं उसको भी कलम बंद कर रखेंगे और कयामत
  831. 42:44के रोज कहेंगे कि सख्त जलन वाली आग के
  832. 42:47अजाब के मजे चकते रहो यह उन कामों की सजा
  833. 42:51है जो तुम्हारे हाथ आगे भेजते रहे हैं और
  834. 42:54अल्लाह तो बंदों पर
  835. 42:56जुल्म नहीं करता जो लोग कहते हैं कि
  836. 42:58अल्लाह ने हमें हुक्म भेजा कि जब तक कोई
  837. 43:00पैगंबर हमारे पास ऐसी नियाज लेकर ना आए
  838. 43:04जिसको आग आकर खा जाए तब तक हम उस पर ईमान
  839. 43:07ना लाएंगे ऐ पैगंबर उनसे कह दो कि मुझसे
  840. 43:11पहले कई पैगंबर तुम्हारे पास खुली हुई
  841. 43:13निशानियां लेकर आए और वह मोजा भी लाए जो
  842. 43:16तुम कहते हो तो अगर सच्चे हो तो तुमने
  843. 43:18उनको क्यों कत्ल किया फिर अगर यह लोग
  844. 43:21तुमको झुठला रहे हैं तो तुमसे पहले बहुत
  845. 43:24से पैगंबर खुली हुई निशानियां और सही फे
  846. 43:27और रोशन किताबें लेकर आ चुके हैं कि उनको
  847. 43:30भी झुट आया गया था हर शख्स को मौत का मजा
  848. 43:33चखना है और तुमको कयामत के दिन तुम्हारे
  849. 43:36आमाल का पूरा पूरा बदला दिया जाएगा तो जो
  850. 43:39शख्स दोजख से दूर रखा गया और बहिश्त में
  851. 43:42दाखिल किया गया वह मुराद को पहुंच गया और
  852. 43:45दुनिया की जिंदगी तो धोखे का सामान है ऐ
  853. 43:49अहले ईमान तुम्हारे माल और जान में
  854. 43:51तुम्हारी आजमाइश जरूर की जाएगी और तुम
  855. 43:54अहले किताब से और उन उन लोगों से जो
  856. 43:56मुशरिक हैं बहुत सी ईजा की बातें सुनोगे
  857. 43:59तो अगर सब्र और परहेज गारी करते रहोगे तो
  858. 44:02यह बड़ी हिम्मत के काम है और जब अल्लाह ने
  859. 44:06उन लोगों से जिनको किताब इनायत की गई थी
  860. 44:08इकरार लिया कि उसमें जो कुछ लिखा है उसे
  861. 44:11लोगों से साफ-साफ बयान करते रहना और उसकी
  862. 44:14किसी बात को ना छुपाना तो उन्होंने उसको
  863. 44:17पसे पुस्त फेंक दिया और उसके बदले थोड़ी
  864. 44:20सी कीमत हासिल की यह जो कुछ हासिल करते
  865. 44:23हैं बुरा है जो लोग अपने किए हुए कामों से
  866. 44:26खुश होते हैं और वह काम जो करते नहीं उनके
  867. 44:29लिए चाहते हैं कि उनकी तारीफ की जाए उनकी
  868. 44:32निस्बत ख्याल ना करना कि वह अजाब से
  869. 44:34छुटकारा पाएंगे और उन्हें दर्द देने वाला
  870. 44:37अजाब होगा और आसमानों और जमीन की बादशाही
  871. 44:42अल्लाह ही को है और अल्लाह हर चीज पर
  872. 44:45कादिर है बेशक आसमानों और जमीन की पैदाइश
  873. 44:49और रात और दिन के बदल बदल कर आने जाने में
  874. 44:52अकल वालों के लिए निशानियां हैं जो खड़े
  875. 44:55और बैठे और लेटे हर हाल में अल्लाह को याद
  876. 44:58करते और आसमान और जमीन की पैदाइश में गौर
  877. 45:01करते और कहते हैं कि ऐ परवरदिगार तूने इस
  878. 45:05कायनात को बे फायदा नहीं पैदा किया तू पाक
  879. 45:08है तू कयामत के दिन हमें दोजख के अजाब से
  880. 45:11बचा इयो ऐ परवरदिगार जिसको तूने दोजख में
  881. 45:14डाला उसे रुसवा किया और जालिमों का कोई
  882. 45:17मददगार नहीं होगा ऐ परवरदिगार हमने एक
  883. 45:20पुकारने वाले को सुना कि ईमान के लिए
  884. 45:22पुकार रहा था कि अपने परवरदिगार पर ईमान
  885. 45:25ला आओ तो हम ईमान ले आए सो ऐ परवरदिगार
  886. 45:28हमारे गुनाह माफ फरमा और हमारी बुराइयों
  887. 45:32को हमसे दूर कर दे और हमको दुनिया से नेक
  888. 45:35बंदों के साथ उठायो ऐ परवरदिगार तूने जिन
  889. 45:39जिन चीजों के हमसे अपने पैगंबरों के
  890. 45:41वास्ते से वादे किए हैं वह हमें अता फरमा
  891. 45:44और कयामत के दिन हमें रुसवा ना कीजो कुछ
  892. 45:48शक नहीं कि तू खिलाफ वादा नहीं करेगा तो
  893. 45:51उनके परवरदिगार ने उनकी दुआ कबूल कर ली और
  894. 45:54फरमाया कि मैं किसी अमल करने वाले के अमल
  895. 45:57को मर्द हो या औरत जाया नहीं करता तुम एक
  896. 46:01दूसरे के हम जिंस हो तो जो लोग मेरे लिए
  897. 46:03वतन छोड़ गए और अपने घरों से निकाले गए और
  898. 46:06सताए गए और लड़े और कत्ल किए गए मैं उनके
  899. 46:10गुनाह दूर कर दूंगा और उनको बहिश्त में
  900. 46:12दाखिल करूंगा जिनके नीचे नहरें बह रही हैं
  901. 46:16यह अल्लाह के यहां से बदला है और अल्लाह
  902. 46:19के यहां अच्छा बदला है ऐ पैगंबर काफिरों
  903. 46:23का शहरों में ठाट से घूमना तुम्हें धोका
  904. 46:26ना दे यह दुनिया का थोड़ा सा फायदा है फिर
  905. 46:29आखिरत में तो उनका ठिकाना दोजख है और वो
  906. 46:32बुरी जगह है लेकिन जो लोग अपने परवरदिगार
  907. 46:35से डरते रहे उनके लिए बाग हैं जिनके नीचे
  908. 46:38नहरें बह रही हैं और वो उनमें हमेशा
  909. 46:41रहेंगे यह अल्लाह के यहां से उनकी मेहमान
  910. 46:44है और जो कुछ अल्लाह के यहां है वो नेक
  911. 46:48उकार के लिए बहुत अच्छा है और बाज अहले
  912. 46:51किताब ऐसे भी हैं जो अल्लाह पर और उस
  913. 46:53किताब पर जो तुम पर नाजिल हुई और उस पर जो
  914. 46:56उन पर नाजिल हुई ईमान रखते हैं और अल्लाह
  915. 46:59के आगे आजिज करते हैं और अल्लाह की आयतों
  916. 47:02के बदले थोड़ी सी कीमत नहीं लेते यही लोग
  917. 47:05हैं जिनका सिला उनके परवरदिगार के हां
  918. 47:08तैयार है और अल्लाह जल्द हिसाब लेने वाला
  919. 47:11है ऐ अहले ईमान कुफर के मुकाबले में साबित
  920. 47:15कदम रहो और
  921. 47:18इस्तकाम्या मेंे रहो और अल्लाह से डरो
  922. 47:22ताकि मुराद हासिल करो

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This page contains the full transcript of surah aal e imran with urdu translation by fateh muhammad jalandhari | trending quran tilawat by QURAN360, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 8,008 words across 922 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

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