STORY OF PROPHET YUSUF (A.S) in Urdu/Hindi| RAMSHA SULTAN @ramshasultankhan #prophetstories #islam — Transcript
Full transcript
- 0:00अस्सलाम वालेकुम मेरा नाम
- 0:06रमशास्त्री
- 0:12स्टोरी है कि खुद अल्लाह ने इसकी तारीफ
- 0:15करी है अगर आपको प्रॉफिट सीरीज में
- 0:17इंटरेस्ट है तो प्लीज मेरे चैनल को
- 0:18सब्सक्राइब कर लीजिए चलिए शुरू करते हैं
- 0:21विद द रियल लाइफ स्टोरी ऑफ प्रॉफिट यूसुफ
- 0:24अल सलाम
- 0:31कुरान में सूर यूसुफ में अल्लाह ने यूसुफ
- 0:33अल सलाम का वाकया बयान किया है यूसुफ अल
- 0:37सलाम बच्चे थे जब उन्होंने अपने बाप याकूब
- 0:39अल सलाम से जिक्र किया अब्बा मैंने 11
- 0:43सितारों और सूरज चांद को ख्वाब में देखा
- 0:46है कि वह सब मुझे सजदा कर रहे हैं याकूब
- 0:49अल सलाम ने फरमाया कि मेरे बेटे अपने इस
- 0:53ख्वाब का जिक्र अपने भाइयों से ना करना
- 0:56ऐसा ना हो कि वह तुम्हारे साथ कोई फरेब कर
- 1:00शैतान तो इंसान का खुला दुश्मन है याकूब
- 1:03अल सलाम को इल्म हो गया था कि अल्लाह ताला
- 1:06यूसुफ अल सलाम को नबूवत और सरदारी बख्श वह
- 1:10यह भी जानते थे कि यूसुफ अल सलाम के भाई
- 1:13उनसे हसद करते हैं इसलिए उन्होंने इस
- 1:16ख्वाब को पोशीदा रखने को कहा यूसुफ अल
- 1:19सलाम के 11 भाई थे बिन्यामीन उनके सगे भाई
- 1:23थे जो एक ही मां से पैदा हुए थे बाकी भाई
- 1:27दूसरी मांओं से पैदा हुए थे बिन मीन यूसुफ
- 1:30अल सलाम से छोटे थे और वह उनसे हसद नहीं
- 1:34करते थे बाकी भाई यूसुफ अल सलाम से काफी
- 1:37बड़े थे और वह सब यूसुफ अल सलाम से चलते
- 1:40थे यूसुफ अल सलाम बहुत छोटे थे जब उनकी
- 1:44मां की वफात हो गई थी इसीलिए याकूब अल
- 1:47सलाम बिन मां के छोटे बच्चों को ज्यादा
- 1:49शफकत देते थे यह देखकर बाकी भाई उनसे जलते
- 1:53थे याकूब अल सलाम को यूसुफ अल सलाम और बिन
- 1:57यामीन से ज्यादा मोहब्बत थी यूसुफ अ सलाम
- 2:00के भाइयों ने आपस में दरयाफ्त किया कि
- 2:03हमारे बाप यूसुफ और उसके भाई से ज्यादा
- 2:06मोहब्बत क्यों करते हैं जबकि हम तो एक
- 2:08ताकतवर जमात हैं उनकी हसद और जलन इतनी बढ़
- 2:12गई कि उन्होंने आपस में मशवरा किया और
- 2:15यूसुफ अल सलाम को कत्ल करने का मंसूबा बना
- 2:18लिया उन्होंने कहा यूसुफ को तो मार ही
- 2:21डालो या किसी ना मालूम जगह फेंक आओ ताकि
- 2:25हमारे वालिद का रुख सिर्फ हमारी तरफ हो
- 2:28जाए बाद में हम तौबा कर लेंगे उनमें से एक
- 2:31भाई लावी ने कहा यूसुफ को कत्ल तो मत करो
- 2:35बल्कि इसे किसी कुएं में डाल आओ कि इसे
- 2:38कोई आता जाता काफिला उठा ले जाए सब इस बात
- 2:42पर राजी हो गए फिर सारे भाई मिलकर अपने
- 2:45बाप याकूब अलैहि सलाम के पास गए और बोले
- 2:48आखिर आप यूसुफ के बारे में हम पर ऐतबार
- 2:51क्यों नहीं करते हम तो उसके खैर खुआ हैं
- 2:54कल आप यूसुफ को हमारे साथ भेज दीजिए कि
- 2:57खूब खाए पिए और खेले और इसकी हिफाजत के हम
- 3:01जिम्मेदार हैं याकूब नबी ने फरमाया इसे
- 3:04तुम्हारा ले जाना मुझे फिक्र में रखेगा और
- 3:07मुझे यह भी डर लगा रहेगा कि इसे कहीं
- 3:10भेड़िया ना खा जाए उन्होंने जवाब दिया हम
- 3:13जैसी जोरावर जमात की मौजूदगी में भी अगर
- 3:16इसे भेड़िया खा जाए तो हम तो बिल्कुल निकम
- 3:19मेंे हुए बेटों के बार-बार इसरार पर याकूब
- 3:22अल सलाम यूसुफ अल सलाम को अपने भाइयों के
- 3:26साथ भेजने पर रजामंद हो गए अगले दिन सारे
- 3:29भा यूसुफ अलैहि सलाम को लेकर चल दिए
- 3:32रास्ते में उन्होंने यूसुफ अलैहि सलाम को
- 3:35खूब मारा पीटा और फिर एक कुएं में फेंक
- 3:38दिया यूसुफ अल सलाम कुएं में एक पत्थर पर
- 3:42गिरे और वह उस पर बैठ गए यूसुफ अल सलाम को
- 3:45यह यकीन नहीं आ रहा था कि उनके भाइयों ने
- 3:48उनके साथ ऐसा क्यों किया अल्लाह ताला ने
- 3:51उस अंधेरे कुएं में यूसुफ अल सलाम पर वही
- 3:54भेजी और उन्हें दिलासा दिया कि बहुत जल्द
- 3:58वह इस कुएं से निकल जाएंगे यूसुफ अल सलाम
- 4:01को कुएं में डालने के बाद वह सब रोते हुए
- 4:04अपने बाप के पास पहुंचे और कहने लगे अब्बा
- 4:08जी हम तो आपस में दौड़ में लग गए और यूसुफ
- 4:11को हमने सामान के पास छोड़ा था बस उसे
- 4:14भेड़िया खा गया आप हमारी बात नहीं मानेंगे
- 4:17पर हम सच्चे हैं सबूत के तौर पर वह यूसुफ
- 4:21अलैहि सलाम के कुर्ते पर झूठ मूठ का खून
- 4:24लगा लाए थे जो उन्होंने अपने बाप को
- 4:26दिखाया याकूब अलैहि सलाम ने फरमाया यह सच
- 4:30नहीं है बल्कि तुमने अपनी तरफ से बात बना
- 4:33ली है बस सब्र ही बेहतर है और तुम्हारी
- 4:36बनाई हुई बातों पर अल्लाह से ही मदद तलब
- 4:39की जा सकती है याकूब अल सलाम ने फरमाया
- 4:42भला बताओ वह कैसा भेड़िया था जो मेरे बेटे
- 4:45को तो खा गया पर उसके कुर्ते को बिल्कुल
- 4:48नहीं फाड़ बार-बार पूछने पर भी भाइयों ने
- 4:52सच नहीं बताया सफर करता हुआ एक काफिला आया
- 4:55और उन्होंने पानी के लिए एक शख्स को भेजा
- 4:59उसने अपना डोल कुएं में लटका दिया यूसुफ
- 5:02अलैहि सलाम उस डोल में बैठ गए उन्होंने जब
- 5:05डोल निकाला तो उसमें एक खूबसूरत लड़का आया
- 5:09वह खुश हो गए क्योंकि उस जमाने में
- 5:12गुलामों की तिजारत होती थी वह काफिला
- 5:15यूसुफ अल सलाम को अपने साथ मिस्र ले गया
- 5:18और उन्हें एक मामूली कीमत पर गुलाम के तौर
- 5:21पर बेच दिया अजज मिस्र ने इस खूबसूरत
- 5:25बच्चे को खरीदा और अपनी बीवी जुलैखा को
- 5:28तोहफे में पेश किया और फरमाया कि इसे बहुत
- 5:31इज्जत और एहतराम के साथ रखो बहुत मुमकिन
- 5:34है कि यह हमें फायदा पहुंचाए या हम इसे
- 5:38बेटा ही बना लें इस तरह यूसुफ अलैहि सलाम
- 5:41अजज मिस्र के यहां पले बड़े अजज मिस्र ने
- 5:44यूसुफ अलैहि सलाम को बेटों की तरह रखा जब
- 5:47यूसुफ अलैहि सलाम बड़े हुए तो उन्हें शाही
- 5:50महल की देखभाल दे दी गई अल्लाह ने मिस्र
- 5:53की सरजमीन में यूसुफ अलैहि सलाम के कदम
- 5:56जमा दिए और उन्हें इल्म से नवाजा जब यूसुफ
- 6:00अलैहि सलाम जवान हुए तो जवानी के साथ उनके
- 6:03हुस्न में भी इजाफा हुआ हुस्ने यूसुफ वाकई
- 6:07बेमिसाल था यूसुफ अलैहि सलाम इस दुनिया के
- 6:11सबसे खूबसूरत शख्स थे अल्लाह ने खूबसूरती
- 6:14को दो हिस्सों में बांटा आधा हुस्न इस
- 6:17पूरी दुनिया की तमाम मखलूक में तकसीम करा
- 6:21और बाकी आधा हुस्न सिर्फ यूसुफ अलैहि सलाम
- 6:24को ही दे दिया सुभान अल्लाह यह है हुस्ने
- 6:28यूसुफ अजज मिस्र की बीवी जुलेखा यूसुफ अल
- 6:32सलाम के हुसन को देखकर फिदा हो गई और उसने
- 6:35यूसुफ अल सलाम के साथ बदका का इरादा किया
- 6:38फिर उसने अपने महल में यूसुफ अल सलाम को
- 6:41बहलाना फुसलाना शुरू कर दिया एक रात
- 6:44जुलेखा ने यूसुफ अलैहि सलाम को सारे
- 6:47दरवाजे बंद करके कहा आइए यूसुफ मैंने यह
- 6:50जेबो जीनत आपके लिए की है यूसुफ अल सलाम
- 6:54ने कहा अल्लाह की पनाह यह नामुमकिन है मैं
- 6:57ऐसा नहीं कर सकता क्या मैं अपने मालिक की
- 7:00बीवी के साथ बदका करूं जिसने मुझे अपने
- 7:03बेटों की तरह पाला यह बहुत बड़ा जुल्म है
- 7:06जब जुलैखा जिद्द करने लगी तो यूसुफ अल
- 7:09सलाम वहां से भागे जुलेखा उनके पीछे भागी
- 7:13और दोनों दरवाजे की तरफ दौड़े जुलेखा ने
- 7:16यूसुफ अल सलाम का कुर्ता पीछे से खींच कर
- 7:19फाड़ दिया दरवाजे के पास ही अजज मिस्र
- 7:22दोनों को मिल गए जुलेखा चौक गई और अपनी
- 7:25बात से पलट गई कहने लगी जो शख्स आपकी बी
- 7:29बीवी के साथ बुराई का इरादा करें उसकी सजा
- 7:32यही है कि उसे कैद कर दिया जाए और कोई
- 7:35दर्दनाक अजाब दिया जाए यूसुफ अल सलाम ने
- 7:38कहा मैं गुनहगार नहीं बल्कि य ही मुझे
- 7:42बहला फुसला रही थी कबीले के एक शख्स ने
- 7:45मशवरा दिया कि अगर यूसुफ का कुर्ता आगे से
- 7:48फटा हुआ हो तो जुलेखा सच्ची है और यूसुफ
- 7:52झूठ बोल रहा है पर अगर कुर्ता पीछे से फटा
- 7:55हो तो यूसुफ सच्चा है और जुलेखा झूठ बोल
- 7:58रही है जब अजीज मिस्र ने देखा कि यूसुफ अल
- 8:02सलाम का कुर्ता पीछे से फटा हुआ है तो वह
- 8:05बोल उठे यह तो औरतों की चालबाजी है बेशक
- 8:09तुम्हारी चालबाजी बहुत बड़ी है उन्होंने
- 8:12यूसुफ अल सलाम से कहा यूसुफ इस बात को
- 8:15जाने दो और जुलेखा तुम अपने गुनाहों की
- 8:18तौबा करो अजज मिस्र ने इस बात को दबाने की
- 8:22कोशिश की और यूसुफ अल सलाम को अपने घर में
- 8:25ही रहने दिया लेकिन फिर यह बात शहर भर में
- 8:28फैल गई
- 8:29औरतें तरह-तरह की बातें करने लगी लोग
- 8:32जुलेखा को ताने देने लगे कि अजीज मिस्र की
- 8:36बीवी अपने जवान गुलाम को बहलाने फुसला में
- 8:39लगी रहती है जब जुलैखा तक यह बातें पहुंची
- 8:43तो उसने सबके लिए एक दावत का इंतजाम किया
- 8:46और सब औरतों को बुलाया सबके सामने फल रखे
- 8:50गए और सबको एक छुरी दी गई फिर जुलेखा ने
- 8:54यूसुफ अल सलाम को हुकम दिया कि सबके सामने
- 8:57मजलिस में पेश हो जब शहर भर की औरतों ने
- 9:01यूसुफ अलैहि सलाम को देखा तो उनके हुस्न
- 9:04को देखकर इतना खो गई कि फलों की बजाय छुरी
- 9:07से अपने हाथों को ही काट लिया और उन्हें
- 9:10पता भी नहीं लगा और वह सब बोल उठी यह
- 9:13इंसान तो हरगिज नहीं यह तो कोई फरिश्ता है
- 9:17उस वक्त जुलेखा ने कहा तो यह है वह जिसके
- 9:21लिए तुम सब मुझे ताने दे रहे थे इसके बाद
- 9:24शहर की सारी अमीर औरतें यूसुफ अलैहि सलाम
- 9:27की आशिक हो गई और हर एक की ख्वाहिश थी कि
- 9:31यूसुफ अलैहि सलाम उनसे मोहब्बत करें
- 9:34उन्होंने हर तरीका इख्तियार किया कि वह
- 9:36किसी तरह यूसुफ अलैहि सलाम के साथ बेहयाई
- 9:39कर लें यूसुफ अलैहि सलाम ने इस सबसे
- 9:42परेशान होकर अल्लाह से दुआ की ऐ मेरे
- 9:45परवरदिगार जिस बात की तरफ यह औरतें मुझे
- 9:48बुला रही हैं इससे तो मुझे जेलखाना पसंद
- 9:51है मुझे इनके फरेब से दूर कर दे शहर भर
- 9:55में यह बात फैलती चली गई तब जुलेखा अपने
- 9:58शौहर के पास गई और कहा अब क्या किया जाए
- 10:02मामला बहुत फैल गया है इस बात को दबाने के
- 10:05लिए कुछ करना चाहिए अजीज मिस्र ने अपनी और
- 10:08अपनी बीवी की इज्जत बचाने के लिए यूसुफ अल
- 10:11सलाम को कैद खाने में डलवाने का फैसला
- 10:14किया फिर यूसुफ अलैहि सलाम पर बदका की
- 10:17तोहमत लगाकर उन्हें कैद खाने में डलवा
- 10:20दिया गया कैद खाने के लोग जान चुके थे कि
- 10:23यूसुफ अल सलाम बहुत नेक हैं उस जेल में दो
- 10:27लोगों ने ख्वाब देखे और उन ख्वाब की ताबीर
- 10:30के लिए वह यूसुफ अलैहि सलाम के पास आए
- 10:33उनमें से एक ने कहा कि मैंने अपने आप को
- 10:36ख्वाब में शराब निकालते हुए देखा है और
- 10:39दूसरे ने कहा कि मैंने अपने आप को देखा है
- 10:42कि मैं अपने सर पर रोटियां उठाए हुए हूं
- 10:44जिसे परिंदे खा रहे हैं हम चाहते हैं कि
- 10:48आप हमें इन ख्वाबों की ताबीर बताएं यूसुफ
- 10:51अलैहि सलाम ने सोचा कि यह दीन की दावत
- 10:54देने का बेहतरीन मौका है उन्होंने सबको एक
- 10:57अल्लाह की इबादत करने की दावत दी फिर
- 11:00उन्होंने फरमाया मैं तुम्हें यह भी बता
- 11:02सकता हूं कि आज तुम सबको कैद खाने में कौन
- 11:06सा खाना दिया जाएगा और यह इल्म मुझे मेरे
- 11:09रब ने दिया है फिर जो खाना यूसुफ अल सलाम
- 11:12ने बताया था वही खाना सबको दिया गया सब
- 11:16हैरत जदा थे और यूसुफ अलैहि सलाम पर उनका
- 11:19यकीन और बढ़ गया फिर यूसुफ अल सलाम ने
- 11:22उनके ख्वाब की ताबीर बताई कि तुम में से
- 11:25एक तो अपने बादशाह को शराब पिलाने पर
- 11:28मुकर्रर हो जाए
- 11:29लेकिन दूसरे को सूली पर चढ़ा दिया जाएगा
- 11:32और परिंदे उसका सर नोच नोच कर खाएंगे
- 11:35ताबीर सुनकर उनमें से एक कैदी कहने लगा कि
- 11:39मैंने तो यह ख्वाब देखा ही नहीं उस पर
- 11:42यूसुफ अल सलाम ने फरमाया यह अल्लाह का
- 11:45फैसला है और तब्दील नहीं हो सकता और उसमें
- 11:48से जो दूसरा था उससे यूसुफ अल सलाम ने
- 11:51फरमाया कि अपने बादशाह से मेरा जिक्र जरूर
- 11:54करना अल्लाह को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं
- 11:57आई कि अल्लाह की बजाय यूसुफ अलैहि सलाम ने
- 12:00बादशाह से सिफारिश लगवाना चाहि यूसुफ
- 12:03अलैहि सलाम को अपनी गलती का एहसास हुआ और
- 12:06उन्होंने अल्लाह से फौरन माफी मांगी
- 12:09अल्लाह ने उन्हें माफ कर दिया पर कैद खाने
- 12:12में उनकी सजा का वक्त बढ़ा दिया फिर जैसे
- 12:14ही यूसुफ अल सलाम ने ताबीर की थी वैसा ही
- 12:18हुआ उनमें से एक को फांसी की सजा दे दी गई
- 12:21और दूसरा बादशाह को शराब पिलाने पर
- 12:24मुकर्रर कर दिया गया लेकिन वह बादशाह से
- 12:27यूसुफ अलैहि सलाम का जिक्र कर भूल गया और
- 12:30इस तरह यूसुफ अलैहि सलाम कैद खाने में सात
- 12:34साल तक रहे किसी को यह खबर भी नहीं थी कि
- 12:37यूसुफ अल सलाम कैद खाने में हैं कोई उनकी
- 12:41सिफारिश लगाने वाला या कैद खाने से
- 12:44निकालने वाला नहीं था एक मुद्दत बाद मिस्र
- 12:47के बादशाह ने एक ख्वाब देखा बादशाह ने कहा
- 12:50मैंने ख्वाब में देखा है कि सात मोटी ताजी
- 12:54फरवा गाय हैं जिनको सात दुबली पतली लागर
- 12:57गाय खा रही हैं और सात बालियां हैं हरी
- 13:00हरी और दूसरी सात बिल्कुल खुश्क यह ख्वाब
- 13:04बादशाह को लगातार आता था और इस ख्वाब ने
- 13:07बादशाह को परेशान कर दिया बादशाह ने सारे
- 13:10दरबारियों और बड़े-बड़े पुजारियों को
- 13:13बुलाया मेरे इस ख्वाब की ताबीर बताओ अगर
- 13:16तुम ख्वाब की ताबीर बता सको तो शहर के
- 13:19नामी गिरामी पुजारियों ने ख्वाब की ताबीर
- 13:22करने की कोशिश करी पर वो कुछ भी ताबीर ना
- 13:25कर पाए और बादशाह से यह कह दिया यह तो
- 13:28परेशान करने वाला मामूली सा ख्वाब है फिर
- 13:31भी बादशाह को यह ख्वाब लगातार आते रहे फिर
- 13:35बादशाह को शराब पिलाने वाले कैदी को यूसुफ
- 13:38अलैहि सलाम याद आए कि वह ख्वाबों की ताबीर
- 13:41करते हैं उसने बादशाह को यूसुफ अल सलाम के
- 13:44बारे में बताया और कैद खाने जाने की इजाजत
- 13:47मांगी फिर वह कैद खाने गया और यूसुफ अल
- 13:51सलाम से मिलकर बादशाह के ख्वाब का जिक्र
- 13:54किया तब यूसुफ अल सलाम ने ख्वाब की ताबीर
- 13:57बताई कि अब जो सा साल आएंगे उसमें बहुत
- 14:01बारिश बरसाई जाएगी और फसल बहुत अच्छी होगी
- 14:05तुम 7 साल तक लगातार गेहूं बोया करना और
- 14:08फसल काटकर उसे बालियों यानी छिलकों समेत
- 14:11ही रहने देना इसके बाद 7 साल निहायत सख्त
- 14:15कहदे आएंगे तब तुम वह जखीरा किया हुआ
- 14:18गेहूं इस्तेमाल करना यूसुफ अल सलाम ने
- 14:21सिर्फ ख्वाब की ताबीर ही नहीं बताई बल्कि
- 14:25उसका इलाज भी बताया जब यह बात बादशाह को
- 14:28बताई गई ग तो उसने यूसुफ अलैहि सलाम को
- 14:31कैद से रिहा करने का हुकुम दिया लेकिन
- 14:34यूसुफ अलैहि सलाम ने इंकार कर दिया
- 14:36क्योंकि वो किसी एहसान के तहत रिहा नहीं
- 14:39होना चाहते थे बल्कि अपनी बेगुनाही साबित
- 14:42करना चाहते थे यूसुफ अल सलाम ने फरमाया
- 14:45अपने बादशाह से पूछो कि उन औरतों का हकीकी
- 14:49वाकया क्या है जिन्होंने अपने हाथ काट लिए
- 14:52थे
- 14:53कासदन बादशाह को यूसुफ अल सलाम का जवाब
- 14:57सुनाया बादशाह बहुत हैरान हुआ कि अगर किसी
- 15:00कैदी को सात साल कैद में रहने के बाद रिहा
- 15:04होने का मौका मिले तो कोई क्यों मना करेगा
- 15:07बादशाह ने उन सारी औरतों को इकट्ठा करवाया
- 15:10और उनसे उस वाक्य की सही हकीकत पूछी उन सब
- 15:14ने जवाब दिया कि हमने अपने-अपने तौर से
- 15:17यूसुफ को बहका की कोशिश की पर हमने उसमें
- 15:20कोई बुराई नहीं पाई जुलेखा ने भी अपने सच
- 15:23का इजहार किया कि उसी ने यूसुफ अल सलाम को
- 15:27बहका की कोशिश की थी इससे यूसुफ अल सलाम
- 15:30की बेगुनाही साबित हुई और बादशाह की नजर
- 15:33में यूसुफ अलैहि सलाम की इज्जत और बढ़ गई
- 15:36बादशाह ने फरमाया यूसुफ को मेरे पास लाओ
- 15:40कि मैं उन्हें अपने खास कामों के लिए
- 15:42मुकर्रर कर दूं जब यूसुफ अलसलाम बादशाह के
- 15:45पास पहुंचे तो बादशाह ने कहा आज से आप
- 15:49हमारे यहां बेहद इज्जतदार और अमानदारी
- 15:53अलैहि सलाम ने फरमाया आप मुझे मुल्क के
- 15:56खजानो पर मुकर्रर कर दीजिए मैं हिफाजत
- 15:59करने वाला और बाख हूं बादशाह ने यूसुफ अल
- 16:03सलाम को मुल्क का मुकम्मल इख्तियार दे
- 16:06दिया और एक वक्त ऐसा आया कि बादशाह को
- 16:09यूसुफ अल सलाम से ज्यादा भरोसेमंद और अजीज
- 16:13और कोई ना था इस तरह मुल्क के तमाम मामलात
- 16:16यूसुफ अलैहि सलाम के इख्तियार में आ गए और
- 16:19खैर और बरकत के सात साल शुरू हो गए यूसुफ
- 16:23अल सलाम ने उन सात साल खूब फसल उगाने का
- 16:26हुकुम दिया और एक खास तरीके से जखीरे को
- 16:29छिलकों समेत महफूज करवाया फिर कहदे सात
- 16:33साल शुरू हुए इस कहदी मिस्र को बल्कि
- 16:37फिलिस्तीन वगैरह के इलाकों को भी अपनी
- 16:40लपेट में ले लिया अब क्योंकि मिस्र बहुत
- 16:43खुशहाल था और यूसुफ अलैहि सलाम ने 7 साल
- 16:46गेहूं बचा कर रखा था इसलिए लोग मिस्र आने
- 16:50लगे फिलिस्तीन में भी कद की वजह से फसल
- 16:53होना बंद हो गई याकूब अलैहि सलाम और उनके
- 16:56बेटों तक भी कहत के असरात पहुंच गए उनके
- 16:59इलाके में ना फसल होती थी ना गल्ला मिलता
- 17:02था मिलता भी था तो बहुत महंगा वहां खबर
- 17:06पहुंची कि मिसर में पुरानी कीमत पर अनाज
- 17:08मिल रहा है इसलिए काफिले के काफिले
- 17:11फिलिस्तीन से मिस्र आने लगे यूसुफ अल सलाम
- 17:15पुरानी कीमत पर गल्ला जरूर देते थे पर
- 17:18उतना ही देते थे जितना एक इंसान के लिए
- 17:20काफी हो ताकि ताजिर लोग माल स्टॉक करके
- 17:24महंगी कीमत पर ना बेचे इसलिए गल्ला खरीदते
- 17:27वक्त सारे घर वालों को साथ लाना जरूरी
- 17:30होता था और इसी तरह यूसुफ अलैहि सलाम के
- 17:33सारे भाइयों ने मिस्र जाने का इरादा कर
- 17:35लिया ताकि अपने घर के लिए गेहूं ला सक जब
- 17:39यूसुफ अलैहि सलाम के भाई मिस्र आए तो
- 17:42यूसुफ अलैहि सलाम ने उन्हें पहचान लिया
- 17:44लेकिन उनके भाई उन्हें नहीं पहचान पाए
- 17:47क्योंकि वह यह तसव्वुर भी नहीं कर सकते थे
- 17:50कि जिस भाई को उन्होंने कुएं में फेंक
- 17:52दिया था वह आज मिस्र की सबसे अजीम शख्सियत
- 17:56बन चुका है यूसुफ अलसलाम लाम ने उनकी बहुत
- 18:00अच्छे से खातिर की और उनसे उनके बाप के
- 18:03बारे में पूछा फिर तफ्तीश के बहाने पूछा
- 18:06कि क्या उनका कोई और भाई भी है भाइयों ने
- 18:09बताया कि उनका एक और भाई भी है बिन्यामीन
- 18:12जिसको उनके बाप अपने से दूर नहीं करते
- 18:16यूसुफ अल सलाम ने उन्हें उस साल की गंदम
- 18:18दे दी लेकिन यह शर्त रख दी कि अगले साल वह
- 18:21लोग बिन्यामीन को भी लाएं वरना उन्हें
- 18:24गंदम नहीं मिलेगी यह इसलिए क्योंकि यूसुफ
- 18:27अलैहि सलाम अपने सगे भाई बिन यामीन से
- 18:30मिलना चाहते थे फिर जिन पैसों से उन्होंने
- 18:33गेहूं खरीदा था यूसुफ अल सलाम ने अपने
- 18:36खिदमत दारो से कहा कि इनकी पूंजी इन्हीं
- 18:39के सामान में वापस रख दो यह इसलिए क्योंकि
- 18:42यूसुफ अल सलाम चाहते थे कि वह अगले साल
- 18:45जरूर आएं और मुमकिन है कि उनके पास दोबारा
- 18:48आने के लिए रकम ना हो और वह गंदम खरीदने
- 18:51ना आएं घर पहुंचने पर भाइयों ने याकूब अल
- 18:54सलाम से कहा कि आइंदा हमें गेहूं तभी
- 18:57मिलेगा जब ब यामीन को हम अपने साथ लेकर
- 19:00जाएंगे याकूब अलैहि सलाम ने उनकी बात
- 19:03मानने से इंकार कर दिया फिर जब उन्होंने
- 19:06अपना सामान खोला तो उसमें अपने पैसे मौजूद
- 19:10पाए यह देखकर उन्होंने याकूब अल सलाम को
- 19:13और मनाने की कोशिश की याकूब अल सलाम ने
- 19:16फरमाया मैं बिन यामीन को तुम्हारे साथ तब
- 19:19तक नहीं भेजूंगा जब तक तुम अल्लाह की कसम
- 19:22ना खाओ कि इसे अपने साथ वापस लेकर आओगे उन
- 19:26सब ने अल्लाह की कसम खा ली कि बिन यामीन
- 19:29को अपने साथ हिफाजत से रखेंगे अगले साल जब
- 19:32फिर से मिस्र जाने का वक्त आया तो याकूब
- 19:35अल सलाम ने अपने बेटों को नसीहत दी ऐ मेरे
- 19:38बच्चों तुम सब एक दरवाजे से मत जाना बल्कि
- 19:42अलग-अलग दरवाजों से दाखिल होना मतलब यह था
- 19:46कि तुम सब 11 नौजवान भाई हो तुम्हें साथ
- 19:50देखकर कोई हसद ना कर बैठे और तुम्हें नजर
- 19:53ना लग जाए नजर का लग जाना बरहक है जब सब
- 19:57भाई मिस्र पहुंच गए तो यूसुफ अलैहि सलाम
- 19:59ने उनकी फिर से खिदमत की और बिन यामीन को
- 20:03अकेले में बुलाकर उन्हें गले लगाया और
- 20:05उन्हें बताया कि वह उनके बड़े भाई यूसुफ
- 20:08हैं फिर यूसुफ अलैहि सलाम ने अपने भाई को
- 20:11अपने पास रोकने के लिए एक तरकीब लगाई
- 20:14उन्होंने अपने भाई के सामान में पानी पीने
- 20:17का प्याला रख दिया जब सब जाने लगे तो
- 20:20मिस्र के रखवालो ने उन्हें रोका और उनकी
- 20:23तलाशी ली यह कह के कि शाही प्याला गुम हो
- 20:26गया है भाइयों ने बोला अल्लाह की कसम हम
- 20:29चोर नहीं हैं उन्होंने कहा अच्छा चोर की
- 20:33क्या सजा है अगर तुम झूठे हो भाइयों ने
- 20:36जवाब दिया कि उसकी सजा यही है कि जिसका
- 20:40सामान चुराया गया हो चोर उसका गुलाम हो
- 20:43जाता है यूसुफ अल सलाम ने उनके सामान की
- 20:46तलाशी करवाई और बिन यामीन के सामान में
- 20:49शाही प्याला मिल गया भाइयों ने फौरन कहा
- 20:53कि अगर इसने चोरी की है तो कोई ताज्जुब की
- 20:56बात नहीं इसका भाई यस यूसुफ भी पहले चोरी
- 20:59कर चुका है यूसुफ अलैहि सलाम को इस बात का
- 21:02बहुत बुरा लगा कि इतने साल बाद भी उनके
- 21:06भाइयों का दिल उनके लिए जरा भी नरम नहीं
- 21:08हुआ यूसुफ अल सलाम ने इस बात को दिल में
- 21:12ही रख लिया और सिर्फ यह कहा कि आप लोग
- 21:16बहुत बुरे हो और जो कुछ आप बयान करते हो
- 21:19उसका अल्लाह ही गवाह है अब सारे भाई यूसुफ
- 21:22अलैहि सलाम की मिन्नतें करने लगे और बोले
- 21:25कि ऐ अजीज मिस्र इसके बाप बहुत जई उम्र के
- 21:29बूढ़े शख्स हैं आप इसकी जगह हम में से
- 21:32किसी को रख लीजिए यूसुफ अल सलाम ने फरमाया
- 21:36कि गुनहगार के सिवा हम किसी और को
- 21:38गिरफ्तार नहीं कर सकते यह नाइंसाफी होगी
- 21:42वो सब भाई बेहद परेशान हो गए और आपस में
- 21:46मशवरा करने लगे कि हम बिन यामीन को छोड़कर
- 21:49कैसे वापस जाएं हमने तो अपने बाप को कसम
- 21:52दी है उनमें से एक भाई लावी ने बोला कि
- 21:55पहले भी हम अपने बाप को यूसुफ के मुतालिक
- 21:58तकलीफ दे चुके हैं मुझ में हिम्मत नहीं कि
- 22:01इस बार भी उनका सामना करूं इसलिए मैं यहां
- 22:04से नहीं जाऊंगा तुम सब वापस चले जाओ जब
- 22:08सारे भाई फिलिस्तीन वापस पहुंचे तो बिन
- 22:11यामीन के वापस ना आने पर याकूब अलैहि सलाम
- 22:14बहुत रंजीदा हो गए यूसुफ अल सलाम को वह
- 22:17पहले ही खो चुके थे और अब एक और बेटे
- 22:20बिन्यामीन की जुदाई उनसे बरदाश नहीं हुई
- 22:23भाइयों ने उन्हें सारा वाकया बताया तो
- 22:26याकूब अल सलाम ने फरमाया के तुमने अपनी
- 22:29तरफ से कोई बात बना ली है जिस तरह पहले
- 22:33किया था बस अब सब्र ही बेहतर है बेशक
- 22:36अल्लाह इल्म और हिकमत वाला है याकूब अल
- 22:39सलाम यूसुफ अल सलाम की जुदाई में 40 साल
- 22:43तक रोते रहे वह बिन यामीन में यूसुफ अलैहि
- 22:46सलाम की झलक देखकर अपने आप को दिलासा देते
- 22:49थे पर जब बिन्यामीन भी उनसे छिन गया तो यह
- 22:53उनके सब्र का सबसे बड़ा इम्तिहान था यूसुफ
- 22:56अल सलाम की याद में रो-रोकर उनकी आंखें
- 22:59वैसे ही कमजोर हो गई थी लेकिन इस सदमे की
- 23:03वजह से वह इतना रोए कि उनकी बीनाई चली गई
- 23:07और उनकी आंखें सफेद हो गई बिन यामीन के ना
- 23:11आने पर उन्होंने बोला हाय यूसुफ यह सुनकर
- 23:14सारे भाई चिड़गा और बोले आप हमेशा यूसुफ
- 23:18को ही याद करते रहेंगे यहां तक कि आप जान
- 23:21ही दे देंगे इस पर याकूब अल सलाम ने
- 23:24फरमाया मैं तो अपने गम और तकलीफ का इजहार
- 23:28अल्लाह ही से करता हूं और अल्लाह ही की
- 23:31तरफ से वह बातें जानता हूं जो तुम नहीं
- 23:33जानते याकूब अल सलाम ने फरमाया मेरे
- 23:37बच्चों तुम मिस्र जाओ और अजज मिस्र से बात
- 23:40करो और अल्लाह की रहमत से ना उम्मीद मत
- 23:43होना वो सब फिर मिस्र पहुंचे और यूसुफ
- 23:47अलैहि सलाम से मिलकर कहने लगे ऐ अजज मिस्र
- 23:50हमें और हमारे खानदान को दुख पहुंचा है
- 23:53हमारे बाप बहुत बूढ़े हैं आप उनकी जफ उम्र
- 23:57पर रहम करिए और बिन यामीन को हमारे साथ
- 24:00वापस भेज दीजिए यूसुफ अल सलाम ने उनसे
- 24:04पूछा जानते भी हो कि तुमने यूसुफ के साथ
- 24:07क्या किया था भाइयों ने हैरान होकर पूछा
- 24:11क्या वाकई आप यूसुफ हैं उन्होंने जवाब
- 24:14दिया हां मैं यूसुफ हूं और यह मेरा भाई
- 24:18बिन्यामीन है अल्लाह ने हम पर फजल कम किया
- 24:22और जो भी सब्र करे तो अल्लाह किसी नेक
- 24:25शख्स का अजर जाया नहीं करता वह सब
- 24:28शर्मिंदा हो गए और बोले बेशक अल्लाह ने
- 24:31तुम्हें हम पर बरतरी दी है और यह भी
- 24:34बिल्कुल सच है कि हम खता का थे यूसुफ
- 24:37अलैहि सलाम इस मुकाम पे उन्हें सजा देकर
- 24:40उनसे बदला ले सकते थे पर यूसुफ अल सलाम ने
- 24:43उन्हें माफ कर दिया और फरमाया आज तुम पर
- 24:47कोई मलामत नहीं है अल्लाह तुम्हें बख्शे
- 24:50वह सब मेहरबान से बड़ा मेहरबान है मेरा यह
- 24:54कुर्ता ले जाओ और इसे मेरे वालिद के चेहरे
- 24:57पर डाल दो वह देखने लगे और अपने खानदान को
- 25:01मेरे पास ले आओ सारे भाई यूसुफ अल सलाम का
- 25:04कुर्ता लेकर फिलिस्तीन की तरफ चल दिए वह
- 25:07रास्ते में ही थे कि याकूब अल सलाम ने
- 25:10यूसुफ अल सलाम की खुशबू महसूस कर ली और
- 25:13कहने लगे मुझे यूसुफ की खुशबू आ रही है
- 25:17खानदान के सब लोग याकूब अल सलाम को दीवाना
- 25:20समझ रहे थे जब सारे भाई याकूब अल सलाम के
- 25:24पास वापस पहुंचे तो उन्हें सारा वाकया
- 25:27बताया और उनके चेहरे पर यूसुफ अल सलाम का
- 25:30कुर्ता डाला तो याकूब अल सलाम की बीनाई
- 25:33वापस आ गई और वह फिर से देखने लगे आखिरकार
- 25:37याकूब अल सलाम को यूसुफ अल सलाम के जिंदा
- 25:41होने की खबर सुनकर सुकून मिला और उन्हों
- 25:44ने फरमाया क्या मैं ना कहता था कि मैं
- 25:47अल्लाह की तरफ से वह बातें जानता हूं जो
- 25:49तुम नहीं जानते तब भाइयों ने कहा कि अब्बा
- 25:53जान आप अल्लाह से हमारे लिए गुनाहों की
- 25:56बख्श तलब कीजिए बेशक हम गुनहगार हैं इन
- 26:00भाइयों ने यूसुफ अल सलाम के कत्ल का इरादा
- 26:03करते वक्त यह बोला था कि हम बाद में तौबा
- 26:06कर लेंगे पर 40 साल तक वह तौबा नहीं कर
- 26:10पाए बेशक अल्लाह की इजाजत के बिना कोई
- 26:13तौबा भी नहीं कर सकता याकूब अल सलाम ने
- 26:16अपने बेटों के लिए अल्लाह से माफी तलब की
- 26:19फिर सारा खानदान फिलस्तीन छोड़कर मिस्र की
- 26:23तरफ रवाना हो गया आखिरकार याकूब अल सलाम
- 26:26अपने बेटे यूसुफ अल सलाम से 40 साल बाद
- 26:30मिले बेटे और बाप की इस कैफियत का तसव्वुर
- 26:34कीजिए कि क्या आलम होगा जब सारा घराना
- 26:38यूसुफ अल सलाम के पास पहुंच गया तो यूसुफ
- 26:42अल सलाम ने अपने मां-बाप को अपने पास जगाह
- 26:45दी और उन्हें तख्त पर बिठाया यूसुफ अल
- 26:48सलाम की यह शान देखकर सब यूसुफ अल सलाम के
- 26:52सामने सजदे में गिर गए तब यूसुफ अल सलाम
- 26:55ने फरमाया अब्बा यह मेरे बचपन के ख्वाब की
- 26:59ताबीर है मेरे रब ने उसे सच्चा कर दिखाया
- 27:03अल्लाह ने मुझ पर बहुत रहम किया और मुझे
- 27:06मुसीबतों से निकाला मेरा रब जो चाहे उसके
- 27:10लिए बेहतरीन तदबीर करने वाला है और वह
- 27:13बहुत इल्म और हिकमत वाला है ऐ मेरे
- 27:16परवरदिगार तूने मुझे हुकूमत अता फरमाई और
- 27:19मुझे ख्वाबों की ताबीर सिखाई ऐ आसमान और
- 27:23जमीन को पैदा करने वाले तू ही दुनिया और
- 27:26आखिरत में मेरा वली और साज है तू मुझे दीन
- 27:30की हालत में फौत कर और मुझे नेकों में
- 27:33शामिल कर
- 27:34[संगीत]
- 27:35दे तो यह था यूसुफ अल सलाम का बेहतरीन
- 27:39वाकया आप नेक्स्ट किस प्रॉफिट की स्टोरी
- 27:42को सुनना चाहते हैं प्लीज कमेंट करिए और
- 27:44अगर आपको प्रॉफिट सीरीज में इंटरेस्ट है
- 27:46तो प्लीज मेरे चैनल को सब्सक्राइब कर
- 27:48लीजिए दिस इज मी रम श सुल्तान साइनिंग
- 27:51[संगीत]
- 27:57ऑफ आ
About this transcript
This page contains the full transcript of STORY OF PROPHET YUSUF (A.S) in Urdu/Hindi| RAMSHA SULTAN @ramshasultankhan #prophetstories #islam by Ramsha Sultan, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 4,445 words across 521 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
What you can do with it
Use the transcript to take notes, quote the speaker, build a study guide, generate a summary with ChatGPT or Claude via the YouTube Summary tool, or export it as a timed subtitle file with YouTube to SRT. You can also re-open it in the transcriber to translate the transcript into 100+ languages.
Free YouTube transcript tool
YouTube2Text is a free YouTube transcript generator — no signup, no daily limit. Paste any YouTube link and get the full transcript instantly, with timestamps, click-to-jump, translation to 100+ languages, AI prompts for ChatGPT, Claude, and Gemini, and exports to TXT, SRT, VTT, or Markdown.