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Socialism in Europe and The Russian Revolution Class 9 (Animation) | Class 9 History Chapter 2 — Transcript

by Sunlike study · 5,415 words · 687 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00हेलो एवरीवन, मेरा नाम है राहुल रावत और
  2. 0:02आज हम एक ऐसे सफर पर निकलने जा रहे हैं जो
  3. 0:05हमें समय में पीछे ले जाएगा। एक ऐसे दौर
  4. 0:08में जब पूरी दुनिया खास करके यूरोप एक
  5. 0:11उबलता हुआ प्रेशर कुकर जैसा था। सोचिए एक
  6. 0:13ऐसी सोसाइटी जहां अमीर और गरीब के बीच में
  7. 0:16गहरी खाई थी। जहां मजदूर दिन के 14-4 घंटे
  8. 0:19फैक्ट्रीज के काले धुएं में काम करते थे।
  9. 0:22लेकिन उनकी मेहनत का फल उनकी जेब में नहीं
  10. 0:24बल्कि फैक्ट्री के मालिकों की तिजोरी में
  11. 0:26जाता था। जहां किसान सदियों से जमीन पर
  12. 0:29काम कर रहे थे, लेकिन वह जमीन उनकी नहीं
  13. 0:32थी। ऐसे में कुछ लोग उठते हैं नए आइडियाज
  14. 0:34के साथ एक नई बराबरी वाली सोसाइटी का सपना
  15. 0:37लेकर। यह कहानी है सोशल चेंज की। यह कहानी
  16. 0:40है उस सोच की जिसने दुनिया के नक्शे को
  17. 0:42हमेशा के लिए बदल दिया। तो चलिए पूरे फोकस
  18. 0:45के साथ शुरू करते हैं क्लास नाइंथ
  19. 0:46हिस्ट्री के चैप्टर नंबर टू को जिसका नाम
  20. 0:49है सोशलिज्म इन यूरोप एंड द रशियन
  21. 0:51रेवोल्यूशन। चैप्टर की शुरुआत होती है 19
  22. 0:54सेंचुरी से। यह वह समय था जब यूरोप की
  23. 0:56सोसाइटी में चेंजेस की लहर उड़ रही थी।
  24. 0:59जहां लोगों के बीच में नए-नए आइडियाज पनप
  25. 1:01रहे थे सोसाइटी में चेंजेस के लिए। इसी
  26. 1:03दौर को हम कहते हैं द एज ऑफ सोशल चेंज।
  27. 1:06देखो क्या हो रहा था। हमने लास्ट चैप्टर
  28. 1:08में फ्रांस रेवोल्यूशन के बारे में पढ़ा
  29. 1:10था। अब यह जो फ्रांस रेवोल्यूशन हुआ था,
  30. 1:12उसका इंपैक्ट केवल फ्रांस के ऊपर नहीं
  31. 1:14पढ़ा था बल्कि उसका इंपैक्ट पूरे के पूरे
  32. 1:16यूरोप पर पड़ा था। फ्रांस के रेवोल्यूशन
  33. 1:19को देखकर लोगों को यह लगने लगा था कि जब
  34. 1:21फ्रांस में लिबर्टी, इक्वलिटी, फर्टेनिटी
  35. 1:24जैसे आइडियाज को लेकर स्ट्रगल हो सकता है
  36. 1:26तो हम क्यों नहीं कर सकते? कहने का मतलब
  37. 1:28यह है कि फ्रांस रेवोल्यूशन को देखकर
  38. 1:31यूरोप में भी लिबर्टी, इक्वलिटी,
  39. 1:33फर्टेनिटी जैसे आइडियाज पॉपुलर होने लगे
  40. 1:36थे। जिस वजह से लोग अब सोसाइटी में चेंज
  41. 1:38चाह रहे थे। अब सोचिए एक समय था जब यूरोप
  42. 1:41में हर तरफ एक ही आवाज थी राजा के हुकुम
  43. 1:44की। मतलब राजा जो चाहेगा वही होता था।
  44. 1:46लेकिन फ्रांस रेवोल्यूशन के बाद लोगों के
  45. 1:48दिमाग में सवाल उठने लगे थे कि क्या राजा
  46. 1:51के पास एब्सोल्यूट पावर होना सही है? क्या
  47. 1:53सब लोगों को बराबर होना चाहिए? क्या समाज
  48. 1:56में बदलाव आना चाहिए? लोग कॉफी हाउसेस
  49. 1:58में, लाइब्रेरीज में, डिबेट्स में अक्सर
  50. 2:01यही बातें करते थे। तो इन्हीं सवालों के
  51. 2:03बीच में जन्म लेते हैं तीन तरह के लोग।
  52. 2:05पहले लिबरल्स, दूसरे रेडिकल्स और तीसरे
  53. 2:08कंजर्वेटिव्स। लिबरल्स वो लोग थे जो
  54. 2:10पर्सनल फ्रीडम चाहते थे। इनका मानना यह था
  55. 2:13कि हर व्यक्ति को सोच विचार करने की, अपने
  56. 2:15रिलीजन को चूज करने की, फॉलो करने की और
  57. 2:18बिजनेस करने की पूरी आजादी होनी चाहिए। पर
  58. 2:20इनका एक कैच था। यह यूनिवर्सल एडल्ट
  59. 2:23फ्रेंचाइसी के सपोर्ट में नहीं थे। मतलब
  60. 2:25यह कहते थे कि वोट डालने का अधिकार सिर्फ
  61. 2:27प्रॉपर्टी ओनर्स को होना चाहिए। यानी कि
  62. 2:30अमीर लोगों को वोट डालने का अधिकार मिलना
  63. 2:32चाहिए। बाकी जो गरीब लोग हैं बिना
  64. 2:34प्रॉपर्टी वाले उन्हें वोटिंग राइट्स नहीं
  65. 2:36मिलने चाहिए। साथ में महिलाओं को भी
  66. 2:38वोटिंग राइट्स नहीं मिलने चाहिए। मतलब
  67. 2:40लिबरल्स कह रहे थे कि वोट डालने का काम
  68. 2:42केवल समझदार लोगों का है और उनके हिसाब से
  69. 2:44समझदारी केवल अमीर लोगों के पास थी। दूसरे
  70. 2:47थे रेडिकल्स। रेडिकल्स लिबरल से दो कदम
  71. 2:50आगे थे। यह कहते थे कि अगर हमें
  72. 2:52डेमोक्रेसी चाहिए तो सबको वोटिंग राइट्स
  73. 2:54मिलना चाहिए। यह लोग ऐसी सोसाइटी का सपना
  74. 2:56देख रहे थे जिसमें सब लोगों का बराबरी का
  75. 2:58हक हो। चाहे वह अमीर हो या गरीब हो। सबको
  76. 3:02वोटिंग राइट्स मिले। तीसरे थे
  77. 3:04कंजर्वेटिव्स। कंजर्वेटिव वह लोग थे जो यह
  78. 3:06कहते थे कि जो चल रहा है सही चल रहा है।
  79. 3:09कहने का मतलब यह है कि यह राजा के सपोर्टर
  80. 3:11लोग थे। इन्हें चेंजेस पसंद नहीं थे। यह
  81. 3:13कहते थे कि पुराने जो इंस्टीटशंस हैं जैसे
  82. 3:16कि मोनार्की, चर्च यह सब इंपॉर्टेंट है।
  83. 3:18इसलिए यह पहले तो यही चाहते थे कि चेंजेस
  84. 3:20हो ही ना। लेकिन टाइम के साथ-साथ इन्होंने
  85. 3:23भी कुछ चेंजेस एक्सेप्ट किए पर धीरे-धीरे।
  86. 3:25इन तीनों को आप सिंपल तरीके से ऐसे समझो
  87. 3:27कि लिबरल्स फ्रीडम चाहते थे लेकिन अमीरों
  88. 3:30के लिए। रेडिकल्स इक्वलिटी चाहते थे लेकिन
  89. 3:32सबके लिए। कंजर्वेटिव पुराना सिस्टम चाहते
  90. 3:35थे कि जो चल रहा है वही चलने दो। तो यह
  91. 3:37तीन तरह की आईडियोलॉजी के लोग उस समय
  92. 3:39यूरोप में उभर रहे थे और यूरोप की
  93. 3:41पॉलिटिक्स उस समय पर एक बैटल फील्ड बन गई
  94. 3:44थी। अब दोस्तों जब इंडस्ट्रियलाइजेशन आया
  95. 3:46मतलब जब मशीनों का युग शुरू हुआ तो सिर्फ
  96. 3:49मशीनें नहीं आई बल्कि साथ लाई एक नई
  97. 3:51दुनिया। पीज़ेंट जो फील्ड में हल चला रहे
  98. 3:54थे, क्राफ्ट्समैन जो हाथों से काम करते
  99. 3:56थे, सब लोग अपना काम छोड़कर फैक्ट्रीज की
  100. 3:58तरफ बढ़ने लगे। अब आदमी, औरत, बच्चे तीनों
  101. 4:01फैक्ट्रीज में जाकर काम करने लगे। मजदूरी
  102. 4:04करना अब एक नई जिंदगी बन गई थी। जरा सोच
  103. 4:06कर देखिए कि एक 8 साल का बच्चा भी मशीन के
  104. 4:09पास धुआं, ग्रीस और थकान के बीच जीवन सीख
  105. 4:12रहा था। जैसे-जैसे मशीन साइन फैक्ट्री
  106. 4:14सिस्टम डेवलप हुआ वैसे-वैसे इनकलिटी बढ़ती
  107. 4:17गई। फैक्ट्रीज के मालिक और अमीर बनते गए।
  108. 4:20काम करने वाले वर्कर्स उनकी हालत और खराब
  109. 4:23होती गई। मजदूर 12 14 घंटे काम करते थे।
  110. 4:26बिना सुरक्षा के, बिना अच्छे पैसों के।
  111. 4:29हालत यह हो गई थी कि जहां एक तरफ किंग्स
  112. 4:31और फैक्ट्री ओनर्स थे रसीले कपड़ों में और
  113. 4:34दूसरी तरफ मजदूर थे पसीने से भीगे हुए
  114. 4:36कपड़ों में। अब वर्कर्स क्या करते हैं?
  115. 4:38आवाज उठाते हैं। वह कहते हैं कि हमारे
  116. 4:41वर्किंग हावर्स को कम किया जाए। साथ में
  117. 4:43हमें भी वोटिंग राइट्स दिए जाए। उनका कहना
  118. 4:46था कि यार हम भी तो सिटीजंस हैं ना तो
  119. 4:48हमें भी तो अधिकार मिलना चाहिए। वर्कर्स
  120. 4:50अभी भी एक ही सवाल से जूझ रहे थे कि आखिर
  121. 4:53गरीब और अमीर के बीच में इतना फर्क क्यों
  122. 4:55है? जरा सोचिए फैक्ट्री किसी अमीर आदमी की
  123. 4:58है लेकिन काम तो मजदूर करते हैं ना फिर भी
  124. 5:01पैसा किसके पास जाता है? सिर्फ मालिक के
  125. 5:03पास। मजदूर का पसीना बहता है लेकिन
  126. 5:06प्रॉफिट का दरिया मालिक की जेब में गिरता
  127. 5:08है। इसलिए लोगों को लगने लगा था कि यह
  128. 5:10सिस्टम ही गलत है। ऐसे में एक नई सोच जन्म
  129. 5:13लेती है। एक नया आईडिया आता है जो कि था
  130. 5:15सोशलिज्म का। सोशलिज्म का आईडिया कहता था
  131. 5:19कि फैक्ट्री, लैंड और रिसोर्सेज पर सिर्फ
  132. 5:22एक व्यक्ति का अधिकार नहीं होना चाहिए।
  133. 5:24बल्कि जब सब मेहनत कर रहे हैं तो फल भी
  134. 5:27सबको मिलना चाहिए। तो यह जो सोशलिज्म का
  135. 5:29आईडिया था वो अब धीरे-धीरे यूरोप में फैल
  136. 5:31रहा था। चलो अब हम थोड़े कुछ फेमस थिंकर्स
  137. 5:34के बारे में बात करते हैं। ऐसे कई सारे
  138. 5:36थिंकर्स थे जिन्होंने वर्कर्स को काफी
  139. 5:38ज्यादा सपोर्ट किया था। जैसे कि रॉबर्ट
  140. 5:41ओवन इंग्लैंड के एक फैक्ट्री ओनर थे।
  141. 5:43लेकिन दिल से एक सोशलिस्ट थे। इन्होंने
  142. 5:45छोटी सी मॉडल सोसाइटी बनाई थी जहां वह
  143. 5:48वर्कर्स के लिए अच्छी वर्किंग कंडीशंस
  144. 5:50प्रोवाइड करते थे। ऐसे ही लुइस ब्लैंक जो
  145. 5:52कि फ्रांस के एक थिंकर थे उन्होंने भी यही
  146. 5:54कहा कि गवर्नमेंट अपने पैसों से ऐसे
  147. 5:57वर्कशॉप्स बनाएं जहां लोग मिलकर काम करें
  148. 6:00और प्रॉफिट आपस में बांट लें। इसी तरीके
  149. 6:02से दो बहुत ही फेमस थिंकर्स और थे कार्ल
  150. 6:05मार्क्स और फेडरिक एंगल। दोनों मिलकर 1948
  151. 6:08में एक बुक लिखते हैं द कम्युनिस्ट
  152. 6:10मैनिफेस्टो जिसमें वह बताते हैं कि दुनिया
  153. 6:13में हमेशा अमीर वर्सेस गरीब के बीच में एक
  154. 6:16क्लास स्ट्रगल होती रही है। मतलब गरीब और
  155. 6:18अमीर के बीच में हमेशा लड़ाई होती रही है
  156. 6:21और यह स्ट्रगल एक दिन रेवोल्यूशन का कारण
  157. 6:24बनेगी। यानी कि किसी दिन इसी गरीब और अमीर
  158. 6:26के भेदभाव के चक्कर में एक बहुत बड़ा
  159. 6:29रिवॉल्यूशन होगा। और ऐसा हुआ भी। दोस्तों,
  160. 6:3119 सेंचुरी के एंड तक आते-आते यूरोप के हर
  161. 6:34कोने में एक ही आईडिया पॉपुलर हो रहा था
  162. 6:37जो कि था सोशलिज्म का। यह सिर्फ एक
  163. 6:39फिलॉसफी नहीं रही थी। यह अब एक मूवमेंट बन
  164. 6:41गया था। चाहे फ्रांस हो या जर्मनी हो,
  165. 6:44चाहे ब्रिटेन हो, चाहे रशिया हो, बर्कर्स
  166. 6:46के बीच में एक नई उम्मीद जग चुकी थी।
  167. 6:48बर्कर्स को लगने लगा था कि सोशलिज्म के
  168. 6:50आने से उन्हें इक्वलिटी मिलेगी। धीरे-धीरे
  169. 6:53अलग-अलग कंट्रीज के सोशलिस्ट समझ गए कि
  170. 6:55अगर हम अलग-अलग लड़ेंगे तो सिस्टम कभी
  171. 6:57नहीं बदलेगा। हमें एकजुट होना होगा। तो
  172. 7:00सबने मिलकर एक इंटरनेशनल बॉडी बनाई जिसको
  173. 7:02बोला गया सेकंड इंटरनेशनल। एक ऐसी
  174. 7:05इंटरनेशनल बॉडी जहां सोशलिस्ट लोगों के
  175. 7:07आइडियाज एक्सचेंज होते थे, स्ट्रेटजीस
  176. 7:09बनती थी और रिवॉल्यूशन की प्लानिंग होती
  177. 7:12थी ताकि सोशलिज्म को बढ़ावा मिल सके। यह
  178. 7:14इस बॉडी के जरिए डिमांड रखते थे कि
  179. 7:16वर्कर्स के लिए लेस वर्किंग हावर्स होने
  180. 7:18चाहिए और उन्हें भी वोट डालने का अधिकार
  181. 7:21होना चाहिए। इसी तरीके से 1900 के आसपास
  182. 7:24सोशलिज्म केवल एक आईडिया नहीं बचा था
  183. 7:26बल्कि यह पॉलिटिकल पावर्स की तरफ बढ़ने
  184. 7:28लगा था। कई देशों के अंदर भी इसको लेकर
  185. 7:31एसोसिएशंस पार्टीज बनने लगी थी। जैसे कि
  186. 7:34जर्मनी में पार्टी बनी सोशल डेमोक्रेटिक
  187. 7:36पार्टी, ब्रिटेन में लेबर पार्टी, फ्रांस
  188. 7:39में सोशलिस्ट पार्टी। यह वो पल था जब पहली
  189. 7:42बार सोशलिज्म के आईडिया ने पॉलिटिक्स में
  190. 7:44कदम रखा था। बरकास कह रहे थे कि हमें
  191. 7:46सिर्फ नारा नहीं चाहिए। हमें कुर्सी
  192. 7:48चाहिए, डिसीजन मेकिंग का हक चाहिए। लेकिन
  193. 7:51हां, यह भी सच है कि 1914 तक किसी भी
  194. 7:53यूरोपियन देश में सोशलिस्ट की सरकार नहीं
  195. 7:56बनी। लोग सपोर्ट कर रहे थे, रैलीज हो रही
  196. 7:59थी, आइडियाज फैल रहे थे। लेकिन पावर अभी
  197. 8:02भी राजाओं के पास थी, इंडस्ट्रियलिस्ट के
  198. 8:04पास थी और कैपिटलिस्ट लोगों के पास ही थी।
  199. 8:07सोशलिज्म अभी भी एक सफर था मंजिल नहीं।
  200. 8:10लेकिन दोस्तों, एक ऐसी कंट्री थी जहां यह
  201. 8:12सोच रियलिटी में बदलती है जिसका नाम है
  202. 8:15रशिया। रशिया में आगे जाकर राजा को हटाकर
  203. 8:18वास्तव में एक सोशलिस्ट गवर्नमेंट बनती
  204. 8:20है। अब यह कैसे बनती है? क्या है पूरी
  205. 8:23कहानी? आइए जानते हैं। सेकंड टॉपिक है
  206. 8:26हमारा द रशियन रेवोल्यूशन। अब हम आ गए हैं
  207. 8:29अपनी कहानी के सबसे क्रूशियल हिस्से पर
  208. 8:31रशिया पर। द रशियन एंपायर इन 1914। रशिया
  209. 8:35एक बहुत बड़ा एंपायर था और उसमें
  210. 8:37ऑटोक्रेसी रूल था। यानी कि पूरी पावर एक
  211. 8:40ही आदमी के पास थी और वह था ज़ार निकोलस
  212. 8:43सेकंड। यह सिर्फ एक किंग नहीं था। यह एक
  213. 8:45एब्सोल्यूट मोनार्क था। मतलब राजा ने जो
  214. 8:48कह दिया वही होना था। कोई पार्लियामेंट
  215. 8:51नहीं थी। कोई कोर्ट नहीं था और ना ही कोई
  216. 8:53उसके अगेंस्ट जा सकता था। रशिया के अंदर
  217. 8:55अलग-अलग रिलीजन फॉलो किए जाते थे। लेकिन
  218. 8:58सबसे ज्यादा लोग रशियन ऑर्थोडॉक्स
  219. 9:01क्रिश्चियनिटी को मानते थे। लेकिन इसके
  220. 9:03अलावा भी कैथोलिक्स, प्रोटेस्टेंट्स,
  221. 9:05मुस्लिम्स, बुद्धिस्ट यह रिलीजंस भी देखने
  222. 9:08को मिलते थे। लेकिन नोट करने वाली बात यह
  223. 9:10है कि सबसे ज्यादा लोग रशियन ऑर्थोडॉक्स
  224. 9:12क्रिश्चियनिटी को मानते थे। रशिया उस समय
  225. 9:15एक एग्रीकल्चर इकॉनमी थी। यानी कि
  226. 9:17ज्यादातर लोग किसान थे यानी कि लगभग 85%
  227. 9:20लेकिन उनके पास जमीनें नहीं थी। सारी
  228. 9:22जमीनों के मालिक लैंड लॉर्ड्स या नोबल
  229. 9:25फैमिलीज़ थे। और जो किसान थे, वह तो सिर्फ
  230. 9:27उनके लिए काम करते थे। अब एक आयरन ही देखो
  231. 9:30कि इतने लोग खेती करते थे, लेकिन फिर भी
  232. 9:33देश में खाने की कमी थी। लोग भूख और गरीबी
  233. 9:35से पीड़ित थे। अब हम देखते हैं
  234. 9:37इंडस्ट्रियलाइजेशन के दौर को। तो 1890 के
  235. 9:40दौरान रशिया में जब इंडस्ट्रियलाइजेशन
  236. 9:42शुरू हुआ तो इससे रशिया के ऊपर ज्यादा
  237. 9:44फर्क नहीं पड़ा। रशिया अभी भी एग्रीकल्चर
  238. 9:46इकॉनमी पर ही टिका हुआ था।
  239. 9:48इंडस्ट्रियलाइजेशन हो तो रहा था पर वह
  240. 9:50बहुत ही स्लो प्रोसेस में हो रहा था। इतने
  241. 9:53बड़े एंपायर में केवल दो ही ऐसे शहर थे
  242. 9:55जहां फैक्ट्रीज इस्टैब्लिश्ड थी। पहला था
  243. 9:58सेंट पीटर्सबर्ग और दूसरा था मॉस्को।
  244. 10:00लेकिन दोस्तों क्या लगता है आपको कि इन
  245. 10:02फैक्ट्रीज के सेटअप होने से सबसे ज्यादा
  246. 10:04फायदा किसने उठाया? केवल फैक्ट्री ओनर्स
  247. 10:07ने। और नुकसान किसका हुआ? केवल वर्कर्स
  248. 10:10का। वर्कर्स 12 14 घंटे की शिफ्ट्स में
  249. 10:12काम करते थे और वह भी अनसेफ कंडीशंस में।
  250. 10:15इन्हें ना ही प्रोटेक्शन मिलता था और ना
  251. 10:17ही अच्छी वेजेस मिलती थी। और जब वर्कर्स
  252. 10:20अपने अधिकार की मांग करते थे या आवाज
  253. 10:22उठाते थे तो उन्हें जेल ले जाकर मार अलग
  254. 10:25से पड़ती थी। कहने का मतलब यह है कि एक
  255. 10:27तरफ फैक्ट्री वर्कर्स थे और दूसरी तरफ
  256. 10:29पीजेंट्स थे और दोनों की हालत खराब थी।
  257. 10:32पीजेंट्स को टैक्स देना पड़ता था। उनका
  258. 10:34एक्सप्लइटेशन होता था और उनकी आवाज को कोई
  259. 10:36नहीं सुनता था। यानी कि रशिया में बर्कर्स
  260. 10:39भी परेशान थे और पीज़ेंट्स भी। कहने का
  261. 10:41मतलब यह है कि रशिया में एक कहावत बन चुकी
  262. 10:43थी कि जिंदा तो है पर जिंदगी कहां है? जार
  263. 10:46निकोलस सेकंड जो कि उनका राजा था वो सिर्फ
  264. 10:49एक पॉलिटिकल रूलर नहीं था बल्कि वह एक
  265. 10:51डिवाइन अथॉरिटी माना जाता था। रशियन
  266. 10:53ऑर्थोडॉक्स चर्च उसकी पावर को भगवान से
  267. 10:56मिली हुई पावर बताते थे। इस वजह से जार के
  268. 10:59खिलाफ बोलना भगवान के खिलाफ बोलने जैसा
  269. 11:01समझा जाता था। लेकिन दोस्तों जब लोगों की
  270. 11:03आवाज दबाई गई तो वह चुप नहीं बैठे। चुपचाप
  271. 11:06आइडियाज पनपने लगे। अंडरग्राउंड ग्रुप्स
  272. 11:09बनने लगे। कुछ लोग कॉन्स्टिट्यूशनल
  273. 11:11मोनार्की चाहते थे तो कुछ लोग डेमोक्रेसी
  274. 11:13चाहते थे। कहने का मतलब यह है कि अब लोग
  275. 11:16किसी भी कीमत पर चेंज चाहते थे। लेकिन
  276. 11:18स्ट्रगल इतना आसान नहीं था। क्योंकि 1914
  277. 11:21से पहले रशिया में आप किसी भी पार्टी के
  278. 11:23सपोर्टर नहीं बन सकते थे। क्योंकि पार्टीज
  279. 11:26होना ही उस समय पर इललीगल माना जाता था।
  280. 11:28अरे पार्टी तो छोड़ो। कोई ग्रुप भी बनाना
  281. 11:30इललीगल माना जाता था। कहने का मतलब यह था
  282. 11:33कि जो भी जार के खिलाफ बात करता वह
  283. 11:35राजद्रोही माना जाता था। लेकिन दोस्तों
  284. 11:38फिर भी 1898 में कुछ सोचने वाले दिमाग,
  285. 11:41कुछ आईडियोलॉजी वाले लोगों ने चुपके से एक
  286. 11:43नई पार्टी बनाई जिसका नाम था रशियन सोशल
  287. 11:47डेमोक्रेटिक वर्कर्स पार्टी। यह पार्टी
  288. 11:49मेनली वर्कर्स के स्ट्रगल को सपोर्ट करने
  289. 11:51के लिए बनाई गई थी। यह लोग कार्ल मार्क्स
  290. 11:53की आईडियोलॉजी से काफी ज्यादा इंस्पायर
  291. 11:55थे। इनका मानना यह था कि रशिया में
  292. 11:57वर्कर्स की सरकार बन सकती है। लेकिन एक
  293. 12:00बात याद रखना कि यह पार्टी अभी अंडर
  294. 12:02ग्राउंड थी। जैसे मानो एक सीक्रेट मिशन चल
  295. 12:04रहा हो। इस पार्टी का मानना यह था कि केवल
  296. 12:07वर्कर्स ही रिवॉल्यूशन लेकर आएंगे।
  297. 12:09क्योंकि जो किसान थे वह एकजुट नहीं थे।
  298. 12:11कुछ बड़े जमींदार थे तो कुछ गरीब थे। ऐसे
  299. 12:14में सब एक जैसा नहीं सोचते थे। पीजेंट्स
  300. 12:17काफी बिखरे हुए थे। इसलिए यह पार्टी कहती
  301. 12:19थी कि रिवॉल्यूशन के असली हीरो होंगे
  302. 12:21बर्कर क्लास। तो यह मेनली वर्कर्स को ही
  303. 12:23ध्यान में रखकर बनाई गई थी। इसलिए इसका
  304. 12:26प्रेजेंस भी शहरों में ज्यादा देखने को
  305. 12:28मिल रहा था। लेकिन ठीक 2 साल बाद 1900 में
  306. 12:31एक दूसरी पार्टी उभरती है जिसका नाम था
  307. 12:34सोशल रिवोल्यूशनरी पार्टी। इसका मेन फोकस
  308. 12:37था पीजेंट्स के ऊपर। उन्होंने कहा कि जो
  309. 12:39जमीन आज नोब्स के पास है वह किसानों को
  310. 12:42मिलनी चाहिए। उनका स्लोगन था कि जमीन उनको
  311. 12:44मिलनी चाहिए जो उसे जोतते हैं। अब चूंकि
  312. 12:46यह किसानों के लिए काम करती थी इसलिए इसका
  313. 12:49प्रेजेंस भी सबसे ज्यादा रूरल एरिया में
  314. 12:51था। अब दोस्तों जो वर्कस पार्टी बनी थी
  315. 12:53यानी कि रशियन सोशल डेमोक्रेटिक लेबर
  316. 12:55पार्टी वह ज्यादा टाइम तक मिलजुलकर काम
  317. 12:58नहीं कर पाती है। बल्कि यह पार्टी 1903
  318. 13:01में दो हिस्सों में बंट जाती है। एक ग्रुप
  319. 13:03था मेनसेविक्स का और दूसरा ग्रुप था
  320. 13:06बुलसेविक्स का। मेनसेविक चाहते थे कि
  321. 13:08बदलाव ग्रेजुअल हो। डेमोक्रेसी के जरिए
  322. 13:10हो। मतलब यह थोड़े ठंडे मिजाज के लोग थे।
  323. 13:13सबको शामिल करो। डेमोक्रेसी के रूल्स को
  324. 13:15फॉलो करो। जब सब रेडी हो जाए तब
  325. 13:18रेवोल्यूशन लाना। लेकिन बुलसेविक कहते थे
  326. 13:20कि तेजी से रिवोल्यूशन लाओ। यह डिस्कशन
  327. 13:22वगैरह हम बाद में कर लेंगे। देखो इसे आप
  328. 13:24ऐसे याद रख सकते हो कि मेनसेविक मन से
  329. 13:27सोचते थे और बुलसेविक थोड़े बोल्ड थे। बुल
  330. 13:29की तरह सोचते थे। यानी कि थोड़े गुस्से
  331. 13:32रेडिकल टाइप के लोग थे। मेनसेविक को लीड
  332. 13:34कर रहे थे वह थे जूलियस स्मार्टब और
  333. 13:36बुलसेविक को जो लीड कर रहे थे वह थे
  334. 13:38लादिमर लेनिन। यह नाम याद रखना क्योंकि यह
  335. 13:41इस चैप्टर में मेन कैरेक्टर हैं और इनका
  336. 13:43नाम काफी ज्यादा गूंजने वाला है। अब
  337. 13:45मेनसेविक चाहते थे कि उनकी पार्टी सबके
  338. 13:47लिए ओपन हो। कोई भी जॉइ करें और हमारे साथ
  339. 13:50स्ट्रगल का हिस्सा बने। लेकिन बुलसेविक
  340. 13:52चाहते थे कि उनकी पार्टी डिसिप्लिंड हो
  341. 13:54ताकि सीरियस और चुनिंदा लोग ही उनकी
  342. 13:57पार्टी को जॉइ कर पाए। अब आते हैं 1904
  343. 14:00में। 1904 एक ऐसा साल था जहां रशिया के
  344. 14:03वर्कर्स की जिंदगी और भी ज्यादा खराब हो
  345. 14:05गई थी। लोग गुस्से में थे। फूड शॉर्टेजेस,
  346. 14:08अनइंप्लॉयमेंट और इनजस्टिस ने लोगों को
  347. 14:10सड़कों पर ला दिया था। महंगाई लगातार बढ़
  348. 14:13रही थी, लेकिन सैलरी कम थी। ऊपर से रशिया
  349. 14:16जापान से बोर भी लड़ रहा था। कहने का मतलब
  350. 14:18यह है कि रशिया की इकॉनमी हर तरीके से
  351. 14:20डाउन हो रही थी। तो दोस्तों, जैसा कि हमने
  352. 14:22देखा कि 1904 तक रशिया एक उबलता हुआ
  353. 14:25प्रेशर कुकर जैसा बन चुका था। गरीबी,
  354. 14:28भुखमरी और जार का अत्याचार सब कुछ हद-पार
  355. 14:31हो रहा था। और तब होता है एक ऐसा हादसा जो
  356. 14:34रशिया के इतिहास को हमेशा के लिए बदल देता
  357. 14:36है। इमेजिन कीजिए 22 जनवरी 1905 की सुबह
  358. 14:40सेंट पीटरबर्ग्स की सड़कों पर बर्फ जमी
  359. 14:42हुई है। हजारों की भीड़ जिसमें औरतें,
  360. 14:45बच्चे, मजदूर शामिल हैं। शांति से ज़ार के
  361. 14:48विंटर पैलेस की तरफ बढ़ रहे हैं। उनके
  362. 14:50हाथों में कोई हथियार नहीं है बल्कि ज़ार
  363. 14:53की तस्वीरें हैं और एक पिटीशन है, एक अपील
  364. 14:55है। यह लोग एक प्रीस्ट फादर गैप के
  365. 14:58नेतृत्व में इकट्ठे हुए थे। उनकी मांगे
  366. 15:01बहुत सिंपल थी कि हमारे काम के घंटे 8
  367. 15:03घंटे करो। हमें बेहतर मजदूरी दो और हमें
  368. 15:07भी वोट देने का अधिकार दो। वह अपने लिटिल
  369. 15:09फादर यानी कि ज़ार से यानी कि अपने राजा से
  370. 15:12मदद मांगने आए थे। उन्हें लगता था कि ज़ार
  371. 15:14उनकी पुकार जरूर सुनेगा। लेकिन दोस्तों,
  372. 15:17जवाब में उन्हें क्या मिला? मदद नहीं
  373. 15:19गोलियां। ज़ार के सिपाहियों ने उस शांत
  374. 15:21भीड़ पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
  375. 15:24सड़कें खून से लाल हो गई। 100 से ज्यादा
  376. 15:26लोग मारे गए और तीन से ज्यादा लोग घायल हो
  377. 15:29गए। रशिया के इतिहास में यह दिन ब्लडी
  378. 15:32संडे के नाम से जाना जाता है। यह गोलियां
  379. 15:34सिर्फ उन लोगों के सीने में नहीं लगी थी।
  380. 15:36यह गोलियां जार पर लोगों के विश्वास पर
  381. 15:39लगी थी। जिस राजा को वह भगवान मानते थे,
  382. 15:42आज उसी ने उन पर गोलियां बरसा दी थी।
  383. 15:44ब्लडी संडे की खबर जैसे ही पूरे रशिया में
  384. 15:46फैली, आग लग गई। शहरों में स्ट्र्राइक्स
  385. 15:49होने लगी, यूनिवर्सिटीज बंद हो गई।
  386. 15:51स्टूडेंट ने प्रोटेस्ट करना शुरू कर दिया।
  387. 15:54लॉयर्स, डॉक्टर्स, इंजीनियर्स सबने मिलकर
  388. 15:56यूनियंस ऑफ यूनियंस बना ली और एक
  389. 15:58कॉन्स्टिट्यूशन की मांग करने लगे। यह था
  390. 16:011905 का रेवोल्यूशन। ज़ार निकोलस सेकंड हाफ
  391. 16:05दबाव में आ गया था। उसको समझ में आ गया था
  392. 16:07कि अब सिर्फ डंडे से काम नहीं चलेगा। तो,
  393. 16:09उसने एक मास्टर स्ट्रोक प्लान चला। उसने
  394. 16:12लोगों से कहा कि ठीक है, ठीक है, शांत हो
  395. 16:13जाओ। मैं तुम्हारे लिए एक पार्लियामेंट
  396. 16:16बनाऊंगा। इसी पार्लियामेंट का नाम था डमा।
  397. 16:18लोगों को लगा कि चलो देर से ही सही। लेकिन
  398. 16:21ज़ार ने हमारी सुन ली। अब हमारे
  399. 16:22रिप्रेजेंटेटिव्स भी डिसीजन लेंगे। लेकिन
  400. 16:25ज़ार के दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था।
  401. 16:27पहली डमा सिर्फ 75 दिन ही चली। जैसे ही
  402. 16:30उसने ज़ार की पावर पर सवाल उठाया ज़ार ने
  403. 16:33उसे डिॉल्व कर दिया। दूसरी डमा 3 महीने
  404. 16:35बाद बनी लेकिन उसे भी भगा दिया। ज़ार को
  405. 16:38ऐसी डूमा चाहिए थी जो उसकी हां में हां
  406. 16:40मिलाए। तो उसने वोटिंग लॉज़ ही चेंज कर
  407. 16:42दिए। उसने ऐसा सिस्टम कर दिया कि डमा में
  408. 16:45सिर्फ अमीर लैंड लॉर्ड्स और कंजर्वेटिव्स
  409. 16:47ही चुनकर आए। लिबरल्स और रेडिकल्स को बाहर
  410. 16:49ही कर दिया जाए। तो कहने का मतलब यह है कि
  411. 16:52रशिया में पार्लियामेंट तो थी लेकिन असली
  412. 16:54पावर अभी भी किसके हाथ में थी? बिल्कुल
  413. 16:56सही जार के हाथ में। रेवोल्यूशन शांत तो
  414. 16:59हो गया था पर आग अभी भी अंदर ही अंदर सुलग
  415. 17:02रही थी। अब कहानी में आता है एक और बड़ा
  416. 17:05ट्विस्ट द फर्स्ट वर्ल्ड वॉर 1914।
  417. 17:08शुरू-शुर में तो पूरा रशिया ज़ार के पीछे
  418. 17:10खड़ा हो गया कि लोगों को लगा कि चलो हमारा
  419. 17:13राजा वॉर लड़ रहा है। तो चलो राजा को
  420. 17:15सपोर्ट करते हैं। लोगों में देशभक्ति की
  421. 17:17लहर दौड़ गई। लेकिन यह जोश बहुत ही जल्दी
  422. 17:19ठंडा पड़ गया क्योंकि यह वॉर रशिया के लिए
  423. 17:22एक भयानक सपना साबित हुआ। एक बार सोच के
  424. 17:24देखिए कि रशियन सोल्जर्स जिनके पास ना ही
  425. 17:27ढंग के हथियार हैं ना ही पूरे कपड़े हैं।
  426. 17:29एक तरफ जर्मन और ऑस्ट्रियन आर्मी है जो
  427. 17:31मशीन गन से लैस है और दूसरी तरफ रशियन
  428. 17:34आर्मी है जो बस अपनी हिम्मत के सहारे लड़
  429. 17:36रही है। रशिया यह जंग बुरी तरीके से हार
  430. 17:39रहा था। 1917 तक आते-आते 7 मिलियन यानी कि
  431. 17:4370 लाख से ज्यादा रशियन लोग या तो मारे जा
  432. 17:46चुके थे या घायल हो चुके थे। जब रशियन
  433. 17:49आर्मी पीछे हटती थी तो वह दुश्मन के लिए
  434. 17:51कुछ नहीं छोड़ना चाहती थी। इसलिए वह अपने
  435. 17:53ही देश की फसलें और इमारतों को तबाह कर
  436. 17:55देती थी। इससे रशिया के अंदर 3 मिलियन से
  437. 17:58ज्यादा लोग रिफ्यूजी बन गए थे। देश के
  438. 18:00अंदर हालात और भी खराब थे। ज्यादातर
  439. 18:03स्किल्ड वर्कर्स को जंग में भेज दिया गया
  440. 18:04था। जिससे फैक्ट्रीज में प्रोडक्शन ठप पड़
  441. 18:07गया था। रेलवे लाइंस टूट गई थी। फूड
  442. 18:10ग्रेंस की सारी सप्लाई आर्मी के लिए जा
  443. 18:12रही थी। शहरों में रोटी के लिए दंगे हो
  444. 18:14रहे थे। लोगों को लगता था कि लोग रशिया को
  445. 18:16बर्बाद कर रहे हैं। लोगों का गुस्सा अब
  446. 18:18सिर्फ जार पर नहीं था बल्कि उसकी जर्मन
  447. 18:20ओरिजन वाइफ जरीना एलेग्जेंड्रा के ऊपर भी
  448. 18:23था और उसके सलाहकार एक फेस सन्यासी
  449. 18:26राजपूतिन पर भी फूट रहा था। लोगों को लगता
  450. 18:29था कि यह तीनों ही रशिया को बर्बाद करने
  451. 18:31पर तुले हुए हैं। तो दोस्तों कंडीशन क्या
  452. 18:34थी कि सिपाही जंग में मर रहे हैं। किसान
  453. 18:36की जमीनें छीन गई हैं। मजदूर भूख से मर
  454. 18:39रहे हैं और राजा आराम से अपने महल में
  455. 18:41बैठा हुआ है। प्रेशर कुकर की सीटी अब बजने
  456. 18:43ही वाली थी। रशिया एक और रेवोल्यूशन के
  457. 18:46दरवाजे पर खड़ा था जो कि था फेब
  458. 18:48रिवॉल्यूशन। तो अब यह फेवर रिवॉल्यूशन
  459. 18:50कैसे होता है? चलो अब यह जानते हैं।
  460. 18:55द फरी रिवॉल्यूशन 1970। अब हम आ गए हैं
  461. 18:58कहानी के उस मोड़ पर जहां सब कुछ बदल जाता
  462. 19:01है। जगह है पेट्रोग्रेड। हां, वही सेंट
  463. 19:04पीटरबक्स जिसका नाम वर्ल्ड वॉर फर्स्ट के
  464. 19:06दौरान बदल दिया गया था और महीना है फरवरी
  465. 19:09का। सर्दी का मौसम है। शहर में फूड
  466. 19:11शॉर्टेजेस अपनी चरम सीमा पर है। 22 फरवरी
  467. 19:15को एक फैक्ट्री में ताला लग जाता है। अब
  468. 19:17आप सोच के देखो कि अगर फैक्ट्री में ताला
  469. 19:19लग गया तो बेचारे मजदूरों के पास काम नहीं
  470. 19:21होगा। अब काम नहीं होगा तो वह क्या
  471. 19:23करेंगे? हड़ताल करेंगे। तो वह हड़ताल करने
  472. 19:25लगते हैं। अगले दिन इस फैक्ट्री के
  473. 19:27वर्कर्स के सपोर्ट में 50 और फैक्ट्रीज के
  474. 19:30मजदूर भी इस हड़ताल में शामिल हो जाते
  475. 19:32हैं। और इस बार इस मूवमेंट को लीड करती
  476. 19:34हैं औरतें। 23 फरवरी का दिन था यानी कि
  477. 19:37इंटरनेशनल वुमस डे था। हजारों औरतें
  478. 19:39सड़कों पर उतर आती हैं। उनके हाथों में
  479. 19:42बैनर थे जिन पर लिखा हुआ था हमें रोटी दो।
  480. 19:45यह सिर्फ रोटी की लड़ाई नहीं थी। यह लड़ाई
  481. 19:47थी बेहतर मजदूरी की, बेहतर शासन की।
  482. 19:50धीरे-धीरे यह प्रोटेस्ट पूरे शहर में फैल
  483. 19:52गया। तो यह सब देखकर सरकार ने कर्फ्यू लगा
  484. 19:55दिया। लेकिन लोग फिर भी नहीं माने। 25
  485. 19:58फरवरी को सार ने पुलिस को और सेना को
  486. 20:00आर्डर दिया कि जाओ प्रोटेस्टर्स पर
  487. 20:02गोलियां चलाओ। कुछ रेजीमेंट्स ने आर्डर
  488. 20:04माना लेकिन ज्यादातर सिपाहियों ने साफ मना
  489. 20:07कर दिया। उन्होंने कहा कि यह हमारे ही
  490. 20:09भाई-बहन हैं। हम इन पर गोलियां नहीं
  491. 20:11चलाएंगे। और फिर वो हुआ जिसका ज़ार को सबसे
  492. 20:14ज्यादा डर था। सिपाही भी वर्कर्स के साथ
  493. 20:16मिल गए और उन्होंने अपने ही ऑफिसर्स को
  494. 20:18गोली मार दी और रिवॉल्यूशन को ज्वॉइ कर
  495. 20:21लिया। जिस सेना के दम पर जार राज कर रहा
  496. 20:23था आज वही सेना उसके खिलाफ खड़ी थी। शाम
  497. 20:26तक सिपाहियों और वर्कर्स ने मिलकर एक
  498. 20:28सोवियत बनाई या हम काउंसिल भी कह सकते हैं
  499. 20:31जो कि थी पेट्रोगेट सोवियत। ज़ार को समझ
  500. 20:34में आ गया था कि अब सब खेल खत्म हो चुका
  501. 20:36है। और उसके जो मिलिट्री कमांडर्स थे
  502. 20:38उन्होंने सलाह दी कि भैया गद्दी छोड़
  503. 20:40दीजिए महाराज। और 2 मार्च को ज़ार निकोलस
  504. 20:43सेकंड ने गद्दी छोड़ दी। रशिया से 300 साल
  505. 20:46पुराना रेमनोव का शासन खत्म हो गया। एक
  506. 20:50बिना लीडर के बना हुआ ग्रुप बिना किसी
  507. 20:53प्लानिंग के जनता के गुस्सा से पैदा हुआ
  508. 20:55यह रिवॉल्यूशन कामयाब हो गया। इसी को हम
  509. 20:58कहते हैं द फेवर रेवोल्यूशन। अब देखो आगे
  510. 21:01क्या होता है? ज़ार तो चला गया लेकिन अब
  511. 21:03सबसे बड़ा सवाल यह था कि अब देश कौन
  512. 21:05चलाएगा? यहां कहानी में एक नया ट्विस्ट
  513. 21:08आता है। रशिया में एक नहीं बल्कि दो-दो
  514. 21:10पावर सेंटर्स बन जाते हैं। पहली थी द
  515. 21:13प्रोविजनल गवर्नमेंट। इसे डमा के लीडर्स,
  516. 21:15लैंड लॉर्ड्स और इंडस्ट्रियलिस्ट ने मिलकर
  517. 21:17बनाया था। यह एक ऑफिशियल सरकार थी जो
  518. 21:20चाहती थी कि रशिया में एक ऐसी डेमोक्रेसी
  519. 21:22आए कि जहां प्रॉपर्टी ओइंग क्लास यानी कि
  520. 21:24रईस लोगों का बोलबाला हो। और दूसरी थी
  521. 21:26पेट्रोगेट सोवियत जो कि हाल ही में बनी थी
  522. 21:29वर्कर्स और सोल्जर्स ने जिसे मिलकर बनाया
  523. 21:31था। तो फिलहाल असली पावर इनके पास ही थी
  524. 21:34क्योंकि सेना और मजदूर इनकी सुनते थे और
  525. 21:36यह लोग रेडिकल चेंजेस चाहते थे यानी कि
  526. 21:38जल्दी से बदलाव चाहते थे। सोचिए एक ही देश
  527. 21:41में दो-दो सरकारें बन चुकी थी। एक के पास
  528. 21:43ऑफिशियल टाइटल था लेकिन दूसरे के पास
  529. 21:46पब्लिक का सपोर्ट था। दोनों के बीच में
  530. 21:48लगातार खींचातानी चलती रहती थी। इसी बीच
  531. 21:51कहानी में एंट्री होती है हमारे उस हीरो
  532. 21:53की जिसका नाम हमने पहले सुना था लादीमार
  533. 21:56लेनिन की। लेनिन जो बुलसेविक के लीडर थे
  534. 21:59अभी तक देश से बाहर एग्जाइल में थे। जैसे
  535. 22:02ही उन्हें ज़ार के हटने की खबर मिली वह
  536. 22:04तुरंत रशिया से वापस आ गए। अप्रैल 1917
  537. 22:07में जब वो पेट्रोगेट पहुंचे तो उन्होंने
  538. 22:09आते ही बुल्सेविक पार्टी को एक नया
  539. 22:11डायरेक्शन दिया। उन्होंने तीन जबरदस्त
  540. 22:13नारे दिए जिसे अप्रैल थीसिस के नाम से
  541. 22:16जाना जाता है। पहला जंग खत्म करो। दूसरा
  542. 22:20सारी जमीनें किसानों को दो और तीसरा सारे
  543. 22:23बैंक्स को नेशनलाइज करो। लेनिन ने साफ-साफ
  544. 22:26कह दिया था कि यह प्रोविजनल गवर्नमेंट के
  545. 22:28साथ काम करने का वक्त नहीं है। यह वक्त है
  546. 22:30पावर को अपने हाथ में लेने का। अब एक और
  547. 22:32रेवोल्यूशन होगा एक सोशलिस्ट रेवोल्यूशन।
  548. 22:35उसका सिंपल सा स्लोगन था पीस, लैंड एंड
  549. 22:38ब्रेड। शांति, जमीन और रोटी। यह स्लोगन
  550. 22:42रशिया के जनता के दिलों में उतर गया
  551. 22:44क्योंकि यही वह चीजें थी जिनके लिए लोग
  552. 22:46तरस रहे थे।
  553. 22:49द रेवोल्यूशन ऑफ अक्टूबर 1917 गर्मियों तक
  554. 22:53लेनिन और उसकी पार्टी बुलसेविक का
  555. 22:55इन्फ्लुएंस तेजी से बढ़ने लगा था।
  556. 22:57प्रोविजनल गवर्नमेंट लोगों की उम्मीदें
  557. 22:59पूरी नहीं कर पा रही थी। वह अभी भी वर्ल्ड
  558. 23:01वॉर फर्स्ट ही लड़ रही थी और लोगों का
  559. 23:03सब्र जवाब दे रहा था। लेन को लगा कि यही
  560. 23:06सही मौका है। उन्होंने पेट्रोगेट सोवियत
  561. 23:08और बुलसेविक पार्टी को पावर हाथ में लेने
  562. 23:11के लिए राजी कर लिया। 24 अक्टूबर 1917 रात
  563. 23:15का अंधेरा है। बुलसेविक सपोर्टर्स चुपचाप
  564. 23:17बिना कोई शोर किए शहर कीेंट बिल्डिंग्स पर
  565. 23:20कब्जा करना शुरू कर देते हैं। टेलीफोन
  566. 23:23एक्सचेंज, रेलवे स्टेशंस, गवर्नमेंट
  567. 23:25ऑफिसिसेस सब उनके कंट्रोल में आ जाते हैं।
  568. 23:27प्रोविजनल गवर्नमेंट के मिनिस्टर विंटर
  569. 23:29पैलेस में छुपे बैठे हैं और फिर अरोरा नाम
  570. 23:32का एक जहाज विंटर पैलेस पर एक ब्लैंक शॉट
  571. 23:34फायर करता है। एक सिग्नल के तौर पर और
  572. 23:37बुलसेविक के फाइटर्स पैलेस में घुस जाते
  573. 23:39हैं और सारे मिनिस्टर्स को अरेस्ट कर लेते
  574. 23:42हैं। बिना ज्यादा खून खराबे के एक ही दिन
  575. 23:44में बुलसेविक्स पावर में आ गई। इसे कहते
  576. 23:47हैं अक्टूबर रिवॉल्यूशन। रशिया अब दुनिया
  577. 23:50का पहला कम्युनिस्ट स्टेट बनने की राह पर
  578. 23:52था।
  579. 23:55पावर में आते ही लेनिन ने तेजी से फैसले
  580. 23:57लेने शुरू कर दिए। लेनिन ने सबसे पहला
  581. 24:00फैसला लिया। उन्होंने वर्ल्ड वॉर फर्स्ट
  582. 24:02से रशिया को अलग करने का ऐलान किया। मार्च
  583. 24:051918 में उन्होंने जर्मनी के साथ ट्रीटी
  584. 24:07ऑफ ब्रेस्ट लेटो बीएसके साइन की और जंग से
  585. 24:10बाहर हो गए। दूसरा ज्यादातर इंडस्ट्रीज और
  586. 24:13बैंक्स को नेशनलाइज कर दिया गया। यानी कि
  587. 24:15अब वह सरकार की प्रॉपर्टी थे। तीसरा
  588. 24:18जमींदारी खत्म कर दी गई और सारी जमीनें
  589. 24:20किसानों को बांट दी गई। और चौथा रशिया एक
  590. 24:23वन पार्टी स्टेट बन गया जिसे अब
  591. 24:25कम्युनिस्ट पार्टी के नाम से जाना जाता
  592. 24:27था। सीक्रेट पुलिस बनाई गई जो पार्टी के
  593. 24:30खिलाफ बोलने वालों को सजा देती थी। कहने
  594. 24:32का मतलब यह है कि अब थोड़ा फ्रीडम भी छीनी
  595. 24:36जा रही थी। लेकिन लेनिन ने वाकई में काफी
  596. 24:38अच्छे चेंजेस कर दिए थे ऑलरेडी।
  597. 24:43द सिविल वॉर 1918 1920 लेकिन दोस्तों
  598. 24:47कहानी अभी खत्म नहीं हुई थी। जैसे ही
  599. 24:49बुलसेविक्स ने पावर अपने हाथ में ली उनके
  600. 24:52दुश्मन भी एकजुट हो गए। एक तरफ थे रेड्स
  601. 24:55जिन्हें हम बुलसेविक्स कहते हैं और दूसरे
  602. 24:57तरफ थे वाइट्स जिन्हें एंटी बुलसेविक्स कह
  603. 25:00सकते हैं जो सोशलिस्ट के खिलाफ थे और
  604. 25:02लिबरल्स के खिलाफ थे और तीसरे थे ग्रीस जो
  605. 25:05सोशलिस्ट रेवोल्यूशनरी थे जो पीजेंट्स के
  606. 25:07लिए लड़ रहे थे। अब क्या होने वाला था इन
  607. 25:09तीनों के बीच में सिविल वॉर होने वाला था
  608. 25:12क्योंकि इन तीनों की आपस में बन नहीं रही
  609. 25:14थी। अब दोस्तों मेनली यह सिविल वॉर रेड और
  610. 25:16वाइट्स के बीच में ही लड़ा गया था क्योंकि
  611. 25:18दोनों एक दूसरे के खिलाफ थे। वाइट्स को
  612. 25:20फ्रांस, ब्रिटेन, अमेरिका और जापान जैसी
  613. 25:23विदेशी ताकतों का सपोर्ट मिल रहा था
  614. 25:25क्योंकि वह रशिया में सोशलिज्म के विचार
  615. 25:28से डरते थे। तो यह जो सारे देश थे वह
  616. 25:30वाइट्स को सपोर्ट कर रहे थे क्योंकि
  617. 25:31उन्हें डर था बुलसेविक से क्योंकि
  618. 25:33बुलसेविक सोशलिज्म को प्रमोट कर रहे थे और
  619. 25:36उन्हें डर था कि अगर बुलसेविक इसी तरीके
  620. 25:38से सोशलिज्म को बढ़ावा देंगे तो कहीं उनके
  621. 25:40देश में भी सोशलिज्म ना आ जाए। इसलिए वह
  622. 25:43वाइट्स को सपोर्ट कर रहे थे ताकि वह
  623. 25:44बुलसेविक्स को हरा दें। और अगले 3 साल तक
  624. 25:47रशिया में एक भयानक सिविल वॉर चलता है। इस
  625. 25:50दौरान लाखों लोग मारे गए थे। लूटपाट और
  626. 25:52भुखमरी ने देश को तोड़ कर रख दिया था।
  627. 25:54लेकिन आखिर में जीत बुलसेविक्स की होती
  628. 25:56है। क्यों? क्योंकि उनके पास एक क्लियर
  629. 25:59विज़न था। वह जमीन को लेकर किसानों का
  630. 26:01सपोर्ट जीत चुके थे और उनके लीडर थे लेनिन
  631. 26:04और ट्रटस्की जिन्होंने बेहतरीन लीडरशिप
  632. 26:06दिखाई थी।
  633. 26:081922 तक आते-आते ज्यादातर पुराना रशियन
  634. 26:11एंपायर पूरा का पूरा बुलसेबिक्स के
  635. 26:14कंट्रोल में आ गया था और उन्होंने इसे नया
  636. 26:16नाम दिया यूएसएसआर यूनियन ऑफ सोवियत
  637. 26:19सोशलिस्ट रिपब्लिक। सिविल वॉर के बाद
  638. 26:22उन्होंने एक सोशलिस्ट सोसाइटी बनाने का
  639. 26:24काम शुरू किया। लेकिन अब लेनिन लीडर नहीं
  640. 26:27रहे थे। लेन के बाद अब एक नया लीडर बनता
  641. 26:29है जिसका नाम था जोसेफ स्टेलिन। अब
  642. 26:32स्टेलिन की लीडरशिप में एक सेंट्रलाइज्ड
  643. 26:34प्लानिंग सिस्टम लाया गया। सरकार डिसाइड
  644. 26:36करती थी कि देश में क्या बनेगा और कैसे
  645. 26:38बनेगा। इसके लिए फाइव ईयर प्लान शुरू किए
  646. 26:41गए। सरकार ने खेतीबाड़ी पर भी पूरा
  647. 26:43कंट्रोल कर लिया। उन्होंने कलेक्टिवाइजेशन
  648. 26:46की पॉलिसी शुरू की जिसमें किसानों से उनकी
  649. 26:48जमीनें छीनकर बड़े-बड़े कलेक्टिव फार्म्स
  650. 26:51कुलहोज बनाए गए। जहां सबको मिलकर काम करना
  651. 26:54होता था और जो भी प्रॉफिट होता था, वह सब
  652. 26:56में बांट दिया जाता था। बहुत से किसानों
  653. 26:58ने इसका विरोध किया। उन्होंने अपने जानवर
  654. 27:00मार दिए और फसलें जला दी। जवाब में जोसेफ
  655. 27:03स्टेलिन ने बेहद क्रूरता दिखाई। जो भी
  656. 27:05विरोध करता उसे या तो मार दिया जाता था या
  657. 27:08तो लेबर कैंप में भेज दिया जाता था। इस
  658. 27:10दौरान 1930 में एक भयानक अकाल पड़ा जिसमें
  659. 27:14लाखों लोग मारे गए थे।
  660. 27:18द ग्लोबल इन्फ्लुएंस एंड लेगेसी। तो
  661. 27:20दोस्तों इस पूरे सफर का नतीजा क्या निकला?
  662. 27:23रशियन रेवोल्यूशन सिर्फ रशिया की कहानी
  663. 27:25नहीं है। इसने पूरी दुनिया को हिला दिया।
  664. 27:28दुनिया भर में कम्युनिस्ट पार्टीज बनने
  665. 27:30लगी। इसने कॉलोनियल देशों को जैसे कि
  666. 27:32हमारा देश इंडिया जो उस समय पर अंग्रेजों
  667. 27:35का गुलाम था और हमारे जो फ्रीडम फाइटर्स
  668. 27:38थे उनको इंस्पिरेशन दी। इसने कैपिटलिज्म
  669. 27:40और सोशलिज्म की एक नई ग्लोबल लड़ाई को
  670. 27:43जन्म दिया। लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी
  671. 27:45था। भले ही यूएसएसआर ने पिछड़े हुए रशिया
  672. 27:48को एक ग्लोबल सुपर पावर बना दिया था।
  673. 27:50गरीबों को रोटी दी थी। एजुकेशन दी थी।
  674. 27:53लेकिन यह सब एक भारी कीमत पर हुआ था।
  675. 27:55फ्रीडम ऑफ स्पीच, डेमोक्रेसी और इंसानी
  676. 27:58अधिकारों को कुचला गया था। तो यह थी कहानी
  677. 28:00सोशलिज्म इन यूरोप एंड द रशियन रेवोल्यूशन
  678. 28:03की। एक ऐसी कहानी है जो हमें बताती है कि
  679. 28:06कैसे बदलाव के सपने जब हकीकत में बदलते
  680. 28:08हैं तो वह उम्मीद और दुख दोनों ला सकते
  681. 28:10हैं। यह कहानी है आजादी की, बराबरी की और
  682. 28:14उसके लिए चुकाई गई कीमत की। उम्मीद है
  683. 28:16आपको यह एक्सप्लेनेशन पसंद आया होगा। अगर
  684. 28:18आपको यह वीडियो पसंद आई तो आप इसे लाइक कर
  685. 28:20सकते हो, चैनल को सब्सक्राइब भी कर सकते
  686. 28:22हो। बाकी मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में।
  687. 28:24तब तक के लिए टेक केयर। बाय बाय।

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