चुनाव आयोग ने SC में हलफनामा दिया, मोदी-शाह हो गए एक्सपोज! । Article 19 India — Transcript
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- 0:07नमस्कार, मैं हूं आपके साथ मुबशरा परवीन
- 0:10और आप देख रहे हैं आर्टिकल 19 इंडिया। एक
- 0:13तरफ तो देश भर में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ
- 0:15हल्ला बोल मचा पड़ा है। देश के कोने-कोने
- 0:19से लोग सड़कों पर उतरकर ज्ञानेश कुमार के
- 0:21खिलाफ वोट चोरी और एसआईआर की आड़ में हुई
- 0:24गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगा रहे हैं।
- 0:27पूरा विपक्ष ज्ञानेश कुमार पर वोट चोरी का
- 0:30खुला आरोप लगा रहा है। सारे सबूतों के
- 0:33साथ। उधर मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा
- 0:35पहुंचा है। लेकिन ना तो मोदी सरकार पर कोई
- 0:38असर हो रहा है और ना ही खुद चुनाव आयोग
- 0:41आरोपों को सीरियस ले रहा है। इस बीच
- 0:43सुप्रीम कोर्ट में जब मामले पर सुनवाई हुई
- 0:46तो भारत निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट
- 0:48में अपना पक्ष रखा। बकायदा हलफनामा दाखिल
- 0:52करते हुए चुनाव आयोग ने मुख्य चुनाव
- 0:54आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगे तमाम वोट
- 0:56चोरी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया
- 0:59और ना सिर्फ खारिज किया बल्कि कहा कि
- 1:02मतदाता सूची के एसआईआर से जुड़े तीनों
- 1:05आदेश सर्वसम्मति से लिए गए थे। इसके साथ
- 1:08ही इलेक्शन कमीशन ने विवादित फॉर्म सिक्स
- 1:11में बदलाव के आरोपों पर भी सफाई दी है। तो
- 1:14चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कुछ
- 1:16कहा है उस पर बात करेंगे। लेकिन उससे पहले
- 1:18उसके पीछे की असल कहानी को और उठते सवालों
- 1:21को सुन लीजिए। समझ लीजिए क्योंकि चुनाव
- 1:23आयोग की सर्वसम्मति वाली दलील के पीछे की
- 1:26कहानी इतनी भी सीधी नहीं है जितनी हलफनामे
- 1:29के पन्नों पर दिखाई जा रही है। सवाल यह है
- 1:32साहब कि अगर सब कुछ इतना ही पारदर्शी और
- 1:35ऑल इज वेल था तो फिर फॉर्म सिक्स के साथ
- 1:38चोरी छिपे वो अतिरिक्त एसआईआर घोषणापत्र
- 1:41जोड़ने की नौबत क्यों आई? जिस पर पूरे
- 1:44विपक्ष का सीधा आरोप है कि मतदाता सूची को
- 1:47शुद्ध करने के नाम पर असल में विपक्ष के
- 1:49वोट बैंक को साफ करने की एक सोची समझी
- 1:52क्रोनोलॉजी इसकी आड़ में चलाई गई और जब
- 1:55मामला देश की सबसे बड़ी अदालत की दहलीज पर
- 1:58पहुंच गया तो चुनाव आयोग ने आननफानन में
- 2:0021 अक्टूबर को ऑनलाइन पोर्टल से उस
- 2:03विवादित घोषणापत्र को गायब क्यों कर दिया?
- 2:07आपको बता दें जब पूरे देश में चुनाव आयोग
- 2:09और एसआईआर के खिलाफ सड़कों पर लोग उतरकर
- 2:12विरोध प्रदर्शन कर रहे थे तब चुनाव आयोग
- 2:14को यह महसूस हुआ कि इस घोषणापत्र को फॉर्म
- 2:17सिक्स के साथ एक ही विंडो में दिखाने के
- 2:20चलते एक गलत भ्रम पैदा हो रहा है कि वोट
- 2:24काटे जा रहे हैं। इसलिए फ़ॉर्म सिक्स को
- 2:26संशोधित कर दिया छुपते-छुपाते हुए और
- 2:28सुप्रीम कोर्ट में इस पर भी कह दिया कि
- 2:30फॉर्म सिक्स में बदलाव करने का अधिकार
- 2:33केवल केंद्र की मोदी सरकार के पास है।
- 2:36आयोग के पास नहीं। उसने मूल फॉर्म में कोई
- 2:39छेड़छाड़ नहीं की है। तो भाई अगर उसमें
- 2:41कुछ गलत नहीं था तो सुप्रीम कोर्ट की
- 2:43सुनवाई से ठीक पहले ही उसे हटाने की
- 2:45हड़बड़ी क्यों दिखाई गई? जब पूरा विपक्ष
- 2:48सड़क पर उतरकर चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा
- 2:50खोले बैठा था। जब देश का युवा सवाल कर रहा
- 2:53था। काकड़ी जनता पार्टी मुख्य चुनाव
- 2:55आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जुटने की
- 2:57कोशिश कर रही थी। जब युवा एजेंसी को
- 2:59दिल्ली के सड़कों पर घसीटा जा रहा था,
- 3:01महिलाओं को छेड़ा जा रहा था, बेटियों को
- 3:03पीटा जा रहा था। जब बच्चों पर लाठियां
- 3:06बांधी जा रही थी, जब वकीलों को डिटेन किया
- 3:08जा रहा था। तब क्यों चुनाव आयोग को समझ
- 3:11नहीं आया कि इससे लोगों को भ्रम पैदा हो
- 3:13रहा है, उस पर बात भी कर ली जाए। क्यों
- 3:16चुनाव आयोग को जरूरी नहीं लगा कि जब सारे
- 3:18फैसले तीनों ही चुनाव आयुक्तों की सहमति
- 3:20से लिए गए थे जिनमें कुछ भी गलत नहीं है।
- 3:23मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लग
- 3:25रहे गंभीर आरोप सच नहीं है तो तीनों ने एक
- 3:28प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की जहमत क्यों नहीं
- 3:31उठाई? क्यों एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके देश
- 3:34की जनता और विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं
- 3:36दिया जा सका। वो भी तब जब फैसलों पर सीईसी
- 3:39ज्ञानेश कुमार, कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू
- 3:41और विवेक जोशी तीनों की पूरी सहमति थी।
- 3:45कोर्ट में दाखिल एफिडेविफिट पर भी यानी कि
- 3:47हलफनामे पर भी तीनों के दस्तखत दिखाए गए
- 3:49हैं। यह तो वही बात हुई। मन में पाप, मुंह
- 3:51पर ताला जब सच है साथ तो कैसा पर्दा डाला?
- 3:55देखिए बात बिल्कुल साधारण सी नहीं है।
- 3:57चुनाव आयोग कोर्ट में कह रहा है कि मुख्य
- 3:59चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अकेले फैसले
- 4:02नहीं ले रहे थे। बल्कि दोनों चुनाव
- 4:05आयुक्तों की रजामंदी से यह सब कुछ कहानी
- 4:07जो चल रही थी पर्दे के पीछे वह की जा रही
- 4:10थी। यानी आयोग की नजर में फाइलों पर दर्ज
- 4:12उनके शुरुआती विरोध, आपत्तियां और तीखे
- 4:15नोट महज स्वस्थ लोकतांत्रिक चर्चा का
- 4:18हिस्सा थे और हैं क्योंकि लोग अभी भी वोट
- 4:20चोरी के खिलाफ सड़कों पर हैं। और सवाल भी
- 4:23जस का तस बना हुआ है कि बिहार से लेकर
- 4:25यूपी और बंगाल तक जिन लाखों अवैध मतदाताओं
- 4:27के नाम रातोंरात वोटर लिस्ट से गायब कर
- 4:30दिए गए उनकी वोट चोरी का हिसाब कौन देगा?
- 4:33किसके पास है? क्या चुनाव आयोग उसका भी
- 4:35हलफनामे में जवाब देगा? हलफनामे से उसका
- 4:38काम चल जाएगा? नहीं बनेगा क्योंकि यह
- 4:41लोकतंत्र और संविधान के राज वाला देश है।
- 4:43जहां जवाबदेही तो तय करनी पड़ेगी। किसी भी
- 4:46कीमत पर तय करनी पड़ेगी। जब सब कुछ इतने
- 4:50सिंपल और सीधे तरीके से है तो क्यों तीनों
- 4:52चुनाव आयुक्त सामने नहीं आ रहे? कहां
- 4:54छिपाया हुआ है तीनों चुनाव आयुक्तों को
- 4:56प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह
- 4:58ने? और क्यों खुद पीएम मोदी और अमित शाह
- 5:00इस मुद्दे पर खुलकर बात नहीं कर रहे हैं?
- 5:02तो इसका जवाब यही है चोर की दाढ़ी में
- 5:06तिनका। मोदी एंड कंपनी के पापों का घड़ा
- 5:08अब भर चुका है। ऐसा हमारा नहीं लोगों का
- 5:11कहना है। जो अब यह समझ चुके हैं कि इनके
- 5:13प्रोपोगेंडा चलाने और देश की जनता के
- 5:16आंखों में धूल झोंकने का सिलसिला अब खत्म
- 5:19हो गया है। लोग यह जान चुके हैं कि वोट
- 5:21चोरी की सरकार वोट चोरी करके सत्ता में
- 5:24बैठी है। जनादेश से इनका कोई भी सरोकार
- 5:27नहीं है। चलिए तो अब एक नजर डाल लीजिए कि
- 5:29चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कुछ
- 5:31कहा है। इंडिया टुडे की जुड़ी अनीषा माथुर
- 5:34की एक रिपोर्ट के मुताबिक इलेक्शन कमीशन
- 5:36ऑफ इंडिया ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल
- 5:38किया है। यह हलफनामा उन याचिकाओं के जवाब
- 5:41में दाखिल किया गया है जिनमें एसआईआर की
- 5:43जांच कराने और सीसी ज्ञानेश कुमार की
- 5:46भूमिका को लेकर सवाल किए गए थे। आयोग का
- 5:49कहना है कि यह आरोप केवल एक न्यूज़
- 5:51रिपोर्ट के आधार पर लगाए गए हैं। इस
- 5:53हलफनामे को तीनों चुनाव आयुक्तों ने
- 5:55मंजूरी दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठा
- 5:57कि एसआईआर का फैसला किसने लिया है? तो
- 5:59चुनाव आयोग के मुताबिक जून 2025, अक्टूबर
- 6:032025 और मई 2026 में एसआईआर को लेकर जारी
- 6:06किए गए तीनों आदेश आयोग ने सर्वसमति से
- 6:09लिए थे। चुनाव आयोग ने फैसले लेने के
- 6:11प्रोसेस को भी समझाया। कहा कि फाइलों को
- 6:13मुख्य चुनाव आयुक्त के सामने रखने से पहले
- 6:16आमतौर पर दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा
- 6:18उनकी जांच की जाती है। जरूरी मामलों में
- 6:21मंजूरी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से ली जाती है
- 6:23और बाद में उसे फाइल पर दर्ज कर दिया जाता
- 6:26है। यहां गौर करिए कि एसआईआर के इन्हीं
- 6:28फैसलों पर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट
- 6:30में गंभीर खुलासे किए गए थे कि मुख्य
- 6:33चुनाव आयुक्त के अलावा दो चुनाव आयुक्तों
- 6:35संधू और जोशी ने आपत्ति दर्ज की थी कि
- 6:37उनकी बगैर मर्जी के यह तमाम फैसले एसआईआर
- 6:40को लेकर लिए गए थे। यहां उन्होंने यह भी
- 6:42बताया था कि तमाम फैसले ना केवल उनकी बगैर
- 6:45मर्जी के लिए गए थे बल्कि गैर संवैधानिक
- 6:47तरीके से लिए गए थे। यानी उन्होंने माना
- 6:49कि एसआईआर में गड़बड़ ही नहीं है। पूरा का
- 6:51पूरा गड़बड़ घोटाला एसआईआर है। जिसको
- 6:53संवैधानिक चोला लपेट कर ऐसे दिखाया गया कि
- 6:56मतदान के सबसे बड़े अधिकार की मोदी सरकार
- 6:58को बहुत फिक्र है और रक्षा इन्होंने ही की
- 7:00है। जबकि यहां तो पूरा मामला वोट चोरी का
- 7:03चल रहा था। खैर हलफनामे में एक और बात पर
- 7:06जोर दिया गया है। किसी फाइल पर चर्चा के
- 7:08दौरान सीईसी या चुनाव आयुक्त की टिप्पणी,
- 7:10सवाल या सुझाव को आयोग का फैसला नहीं माना
- 7:13जा सकता। बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त और
- 7:16अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम 2023 की धारा
- 7:1918 के तहत इसे औपचारिक फैसला नहीं माना जा
- 7:22सकता। आयोग ने साफ किया कि उसने ऐसी किसी
- 7:25चर्चा की कोई जानकारी मीडिया के साथ साझा
- 7:27नहीं की है। जो इंडियन एक्सप्रेस की
- 7:29रिपोर्ट में खुलासा हुआ था। इस दौरान आयोग
- 7:32ने 28 जुलाई के एक आदेश का भी जिक्र किया।
- 7:34उसके मुताबिक काम के बंटवारे से जुड़ा यह
- 7:37आदेश प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अतिरिक्त
- 7:40सचिव ने जारी किया था। अगले ही दिन दोनों
- 7:42चुनाव आयुक्तों ने इस पर कैबिनेट सचिव को
- 7:44पत्र लिखा। आयोग ने कहा कि 30 जुलाई को
- 7:47दोनों आयुक्तों के संयुक्त निर्देश के बाद
- 7:49यह आदेश लागू नहीं हुआ। वोटर लिस्ट में
- 7:52नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले
- 7:53फॉर्म सिक्स पर भी आयोग ने सफाई दी है।
- 7:55एसीआई ने अदालत को बताया कि फॉर्म सिक्स
- 7:58में कोई बदलाव नहीं किया गया। यह केवल
- 8:00केंद्र सरकार के पास है। यानी कि मोदी जी
- 8:02के पास है। जबकि एसआई प्रक्रिया में
- 8:04इस्तेमाल होने वाला घोषणा पत्र एक अलग
- 8:07डॉक्यूमेंट होता है। इसके अलावा ईसीआई नेट
- 8:09सिस्टम की चिंताओं पर आयोग ने कहा कि
- 8:11निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी यानी कि ईआरओस
- 8:14के आदेश के बिना मतदाता सूची में किसी भी
- 8:17मतदाता का नाम ना तो जोड़ा जा सकता है और
- 8:19ना ही हटाया जा सकता है। बताया कि गोवा
- 8:22में 97 में से 88 वोटरों के नाम जोड़े जा
- 8:25चुके हैं। मतलब चुनाव आयोग की तरफ़ से पेश
- 8:28की गई इस कहानी को देखें, तो सब चंगा सी
- 8:30नज़र आता है। बेकार में ही लोग सड़कों पर
- 8:32उतरे हुए हैं। बेकार में ही तीनों चुनाव
- 8:34आयुक्तों को छिपा कर बिठाया हुआ है। बेकार
- 8:36में लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध
- 8:38प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है। बेकार
- 8:40में ही विपक्ष की वैल्यू को गिराकर मोदी
- 8:42जो है गोदी मीडिया उनके खिलाफ प्रोपेगेंडा
- 8:45चला रहे हैं और उनसे चलाने को कहा जा रहा
- 8:47है। बेकार में ही राहुल गांधी को 1 नवंबर
- 8:49को होने जा रही महा रैली से अह रोका जा
- 8:52रहा है। उनकी रैली को रोकने के लिए तमाम
- 8:54कवायद किए जा रहे हैं। सारे घोड़े खोल दिए
- 8:56गए हैं। बड़े-बड़े हथकंडे अपनाए जा रहे
- 8:57हैं। क्योंकि जब सब कुछ सही है और वह भी
- 9:00एक्सट्रीम लेवल पर देशभक्त हैं। सब कानून
- 9:02और संविधान के दायरे में हो ही रहा है। तो
- 9:05दिक्कत आखिरकार फिर है कहां पर? तो कुल
- 9:07मिलाकर कहानी का सार यह है कि मोदी सरकार
- 9:09भले ही कान में तेल डालकर बैठी हो। भले ही
- 9:12मोदी कंपनी को यह लग रहा हो कि चुनाव आयोग
- 9:14को आगे करके अपने मुखिया के बचाव में
- 9:16क्लीन चिट का हलफनामा बांटकर बचकर निकला
- 9:19जा सकता है। तो यह मोदी शाह की बहुत बड़ी
- 9:22भूल साबित होने वाली है। क्योंकि अब जो
- 9:24लड़ाई आगे शुरू होने वाली है लोकतंत्र को
- 9:26बचाने की वो मोदी शाह के सिंहासन को
- 9:29डेफिनेटली हिलाने नहीं बल्कि गिराने वाली
- 9:31है। इसलिए अब यह लोग फड़फड़ाने लगे हैं।
- 9:34यह लोग भले ही ऊपर से ऐसे दिखाएं कि इन पर
- 9:36कोई भी असर नहीं हो रहा है। सब इनके अंडर
- 9:38है तो यह गलतफहमी भी बहुत जल्द दूर होने
- 9:41वाली है। तो अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट
- 9:43पर है कि वह इस सर्वसम्मति का खेल के पीछे
- 9:45वाले छिपे असली चेहरे का पर्दाफाश कैसे
- 9:48करता है। इस वीडियो में इतना ही। आपको
- 9:50वीडियो कैसा लगा कमेंट सेक्शन में जरूर
- 9:51बताइएगा। वीडियो पसंद आया तो वीडियो को
- 9:53लाइक, शेयर और चैनल को सब्सक्राइब करके
- 9:55हमारी स्वतंत्र पत्रकारिता में सहयोग करें
- 9:57और ऐसी तमाम खबरों के लिए बने रहिए हमारे
- 9:59साथ आर्टिकल 9 इंडिया पर। नमस्कार।
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