SATLUJ & Baby Do Die Do Movie Review — Transcript
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- 0:00हाय गाइज़, मैं हूं शांतनु और आज की वीडियो
- 0:01में मैं दो फिल्मों के बारे में बात
- 0:03करूंगा। पहली है एक फिल्म जिसको हमारे
- 0:05सेंसर बोर्ड ने एक बहुत ही लंबे अरसे तक
- 0:07जबरन जबरदस्ती रिलीज़ से रोक के रखा। पंजाब
- 0:1095 इस फिल्म का इनिशियल नाम था। सीबीएफसी
- 0:13ने इस फिल्म की रिलीज़ पर एक शर्त रखी कि
- 0:15इस फिल्म में पांच नहीं, 10 नहीं, 20
- 0:17नहीं, 50 नहीं, 120 कट्स लगाओ तभी हम इसको
- 0:20थिएट्रिकल रिलीज़ होने देंगे। फिल्म मेकर्स
- 0:22ने यह माना नहीं एंड हैट्स ऑफ टू देम टू
- 0:24स्टैंड देयर ग्राउंड एंड द थिएट्रिकल
- 0:26रिलीज़ ऑफ़ दिस फिल्म नेवर हैपेंड। लेकिन अब
- 0:28इस फिल्म का नाम बदल चुका है। इस फिल्म का
- 0:30नाम है सतलुज और ये फिल्म आई है जी5 पर।
- 0:36ये फिल्म पिछले 10 साल में आई वन ऑफ द
- 0:38मोस्टेंट फिल्म्स में से एक है और ऐसा
- 0:41क्यों मैं आगे वीडियो में अपने रिव्यु में
- 0:42आपको बताऊंगा। और सतलुज के साथ-साथ ही मैं
- 0:44एक और फिल्म की बात करूंगा इस वीडियो में
- 0:46और उस फिल्म का नाम है बेबी डू डायडू।
- 0:52इस फिल्म का ट्रेलर मुझे पर्सनली काफी
- 0:54इंटरेस्टिंग लगा था। लेकिन मैंने अब यह
- 0:56फिल्म देखी है। तो क्या यह फिल्म
- 0:57एंटरटेनिंग है? क्या यह फिल्म वो प्रॉमिस
- 0:59करती है जो इसका ट्रेलर हमें प्रॉमिस कर
- 1:01रहा था? आज इसी बारे में बात करेंगे।
- 1:03ऑनेस्टली सेइंग।
- 1:06[संगीत]
- 1:10तो पहले हम बात करेंगे फिल्म सतलुज की।
- 1:12एंड लेट मी स्टार्ट दिस रिव्यु बाय सेइंग
- 1:14दिस कि जब मैं यह फिल्म देख रहा था ना तो
- 1:16मुझे बहुत ज्यादा फ्रस्ट्रेशन हुई। और वो
- 1:18इसलिए क्योंकि यह फिल्म वास डेलीबेटली
- 1:20बीइंग केप्ट अवे फ्रॉम अस। लास्ट ईयर यह
- 1:22फिल्म पूरी दुनिया में रिलीज हो गई। लेकिन
- 1:24जिस जनता को ये फिल्म देखनी चाहिए हमारे
- 1:26देश की जनता है वो उनके लिए ये कभी
- 1:28थिएटर्स तक पहुंच ही नहीं पाई और अभी भी
- 1:30ये फिल्म डायरेक्ट टू ओटीटी रिलीज हुई है
- 1:32थिएटर्स तक इसको अभी भी पहुंचने नहीं दिया
- 1:35गया एक फिल्म में 120 कट्स मांगने का मतलब
- 1:38क्या है और बिल्कुल यही कर रहे हैं ये लोग
- 1:402024 की फिल्म संतोष के साथ भी मतलब सिंपल
- 1:43और बहुत ही सीधा सा है जब भी हमारे देश की
- 1:45पॉलिटिक्स या करप्शन के बारे में कोई भी
- 1:47फिल्म बात करती है उसको सीबीएफसी पे ही
- 1:49अटका दो वहां पे इतने कट्स डिमांड कर लो
- 1:52कि फिल्म मेकर्स खुद ही हाथ खड़ा खड़ा कर
- 1:53दें कि यार हमने ये फिल्म बनाई थी। तुमने
- 1:55आधी से ज्यादा तो चौप कर दी। अब हम इसको
- 1:57रिलीज़ करके क्या उखाड़ लेंगे? 3 साल लंबा
- 1:59बैटल लड़ा है इस फिल्म ने अपना रिलीज़
- 2:01देखने के लिए। आवाम से सच्चाई को छुपाने
- 2:03के लिए हमारे देश के एस्टैब्लिश्ड
- 2:05इंस्टीटशंस किस हद तक जा सकते हैं? किस हद
- 2:08तक उस सच्चाई को दिखाने वाले सिनेमा को
- 2:10रोक सकते हैं। उसके आगे ब्लॉकेड्स लगा
- 2:12सकते हैं। दिस फिल्म इज एन एग्जांपल ऑफ़
- 2:14दैट। पहले सवा5 से ज्यादा कट्स इन्होंने
- 2:16डिमांड करे। वो नहीं माने फिल्म मेकर्स तो
- 2:18इन्होंने कहा चलो अब 3 साल का तुमने बैटल
- 2:20लड़ लिया है। तो इसको ओटीटी पे डाल दो।
- 2:22लेकिन वहां भी कैसे डालो? असली नाम के साथ
- 2:24नहीं पंजाब 95 इसका नाम था। नाम चेंज करा
- 2:27के सतलुज करा दिया। और 100 बातों की एक
- 2:29बात है इस फिल्म को रोके जाने का एक
- 2:31मोटा-मोटा रीज़न यह था बिहाइंड द क्लोज
- 2:32डोर्स कि सम हाउ इसको लेबल कर दो कि ये
- 2:35फिल्म ख़स्तानी प्रोपोगेंडा को पेल्ट करती
- 2:37है। जबकि इन रियलिटी ये फिल्म दिखाती है
- 2:39वन ऑफ द मोस्ट होरेंडस जेनोसाइट्स दैट
- 2:42इंडिया हैज़ एंड पंजाब हैज़ एवर सीन पोस्ट
- 2:45इंडिपेंडेंस। यह फिल्म जो कहानी बताती है
- 2:47वह पंजाब के बाहर आज भी आधे से ज्यादा
- 2:50हिंदुस्तान के लोगों को पता ही नहीं है।
- 2:52ईयर 1984 में जो हुआ उसके बाद पंजाब में
- 2:54पुलिस को अल्टीमेट पावर दे दी गई कि आप
- 2:56किसी को भी किसी भी सस्पिशन के बेसिस पर
- 2:59धबोच सकते हो। पुलिस को यह पावर मिल गई कि
- 3:01भैया राह चलते बंदे को वो उठा के लेकर जा
- 3:04सकते हैं और लिटरली उसको मार सकते हैं।
- 3:06जस्ट ऑन द सस्पेशन कि भैया यह एक टेररिस्ट
- 3:08हो सकता है।
- 3:09जहां एक तरफ पुलिस फ़ मिलिटेंसी हटाने में
- 3:11लगी हुई थी। वहीं दूसरी तरफ कुछ पुलिस
- 3:14वाले इस मौके का पूरा फायदा उठा रहे थे।
- 3:16अब लॉ के द्वारा करा गया यह पूरा का पूरा
- 3:18अनलॉफुल मोर्चा इस मोर्चे में कुछ संदिग्ध
- 3:21लोग पकड़े तो गए लेकिन मारा कौन गया?
- 3:2325,000 25,000 वो सिख जो अपने घर से अपनी
- 3:27रोजमर्रा की जिंदगी जीते हुए निकले तो थे
- 3:30वापस आने के लिए लेकिन कभी घर लौटे नहीं।
- 3:32पुलिस के नाम वापस ले ले वरना यहीं गाड़
- 3:35दूंगा जिंदा।
- 3:37उन 25,000 लाशों के हिसाब के हिसाब से।
- 3:3925,000 से ज्यादा लाशों को लावारिस घोषित
- 3:42करके जला दिया गया और सिविलियन ही नहीं इस
- 3:44मोर्चे में पुलिस वाले 2000 पुलिस वाले तक
- 3:47मारे गए जिन्होंने कहा कि भैया हम इस
- 3:49कुकर्म में साथ नहीं देंगे आपका तो
- 3:52इन्होंने अपने बंदों को ही बलि चढ़ा दी।
- 3:54कोई स्पॉइलर नहीं दे रहा हूं मैं आपको
- 3:55फिल्म का। मैं आपको ये इसलिए बता रहा हूं
- 3:57ताकि जो फ्रस्ट्रेशन मैं फील कर रहा हूं।
- 3:59आप भी वही फ्रस्ट्रेशन फील करो मेरे शब्द
- 4:01सुनके और जाके यह फिल्म देखो क्योंकि इसको
- 4:03देखना बहुत जरूरी है। जितना हम इसको
- 4:05देखेंगे उतना ही तेज तमाचा उतना ही हार्ड
- 4:08स्लैप लगेगा सीबीएफसी जैसी बॉडी के मुंह
- 4:10पे। लगभग पौने घंटे लंबा रन टाइम है इस
- 4:12फिल्म का लेकिन मजाल है एक बार भी। आप अगर
- 4:15बैठ गए इसको देखने तो उठ जाओ। स्टार्टिंग
- 4:17से लेके लास्ट तक ये फिल्म आपको एक दो
- 4:19इमोशन फील नहीं कराएगी। यह फिल्म आपको एक
- 4:21रोलर कोस्टर राइड पे ले जाएगी इमोशन। ये
- 4:23फिल्म एंटरटेनमेंट नहीं है। ये फिल्म
- 4:25एजुकेशन है। ये हमारे देश के एक स्टेट की
- 4:27हिस्ट्री का वो पन्ना है जो हमारे देश के
- 4:29करप्ट पॉलिटिशंस हमारे को पढ़ने देना नहीं
- 4:31चाहते। हर मिनट इस फिल्म का आपको ये बात
- 4:33रियलाइज कराएगा कि हमारे देश में इंसानी
- 4:35जान की कोई कीमत ही नहीं। बूढ़े मां-बाप
- 4:37जिनका बेटा घर से ये बोल के निकला था कि
- 4:39मैं शाम को आ जाऊंगा 7 आठ साल से मिला ही
- 4:41नहीं। छोटे-छोटे बच्चों के सामने पुलिस
- 4:43वाले उनके बाप को उठा के ले गए घर से और
- 4:45वो ये बोल के गए कि अभी आ जाएगा लेकिन कभी
- 4:47नहीं आया। बच्चा आज भी अपने बाप का इंतजार
- 4:49कर रहा है।
- 4:50वो कभी वापस नहीं आए। और कहां जाए ये
- 4:53लाचार घर वाले? कहां जाए? कहां जाके
- 4:55खटखटाए, कहां जाके गुहार लगाएं कि हमारी
- 4:57मदद कर दो। हमारा आदमी घूम गया है। हमारा
- 4:59बच्चा घूम गया है। हमारे को ढूंढ के दो।
- 5:01क्योंकि साले वही है असली कल्पेट्स। वही
- 5:03कर रहे हैं शोषण। वो कहते हैं ना प्रशासन
- 5:05और पुलिस से बड़ा कोई बदमाश नहीं है। यह
- 5:07फिल्म आपको वो दिखाती है। इस फिल्म के
- 5:09डायरेक्टर हनी त्रिहान ने लिटरली इस फिल्म
- 5:11के हर फ्रेम में वो दर्द कैप्चर किया है
- 5:13जो उस टाइम उन लोगों ने देखा होगा।
- 5:15स्क्रीन से निकल के वो दुख आपको अपने दिल
- 5:18में चुभेगा। इस फिल्म में इतना जबरदस्त
- 5:20इमोशनल क्वेश्चन है।
- 5:21अमृतसर जिले के सिर्फ तीन श्मशानों में
- 5:23हमें 2000 से भी ज्यादा नाम ऐसे मिले हैं
- 5:25जिनके सामने लावारिस लिखा है।
- 5:26फिल्म में कहीं पर भी टिपिकल बॉलीवुड या
- 5:28ट्रीटमेंट नहीं है। पूरी कहानी में कहीं
- 5:30भी आपके अंदर से जबरदस्ती इमोशन को सक
- 5:33करने की कोशिश नहीं करी जाती। वो इमोशंस
- 5:35आपकी आंखें अपने आप भर आएंगी। इतनी रूटेड
- 5:38फिल्म मेकिंग है ये। ये कहानी ये सच्चाई
- 5:40ही इतनी ज्यादा दर्दनाक है कि इस फिल्म को
- 5:42कहीं पर ओवर द टॉप होने की जरूरत ही नहीं
- 5:45पड़ी। बस ये कहानी बतानी थी और इमोशंस
- 5:47बहेंगे। अब्सोलुटली आउटस्टैंडिंग जॉब बाय
- 5:50डायरेक्टर हनी त्रिहान। दिलजीत की वन ऑफ द
- 5:52बेस्ट परफॉर्मेंससेस ऑफ हिस करियर है इस
- 5:54फिल्म में। लेट जसवंत सिंह खालरा जो इस
- 5:56पूरी की पूरी मुहिम के अगेंस्ट खड़े हुए
- 5:58थे वो इकलौते बंदे थे उनका जो रोल निभाया
- 6:01है दिलजीत ने एब्सोलुटली डिर्विंग ऑफ अ
- 6:04नेशनल अवार्ड।
- 6:05हम एंटी पुलिस या एंटी गवर्नमेंट नहीं है
- 6:07बल्कि सिर्फ उन चंद लोगों के खिलाफ है
- 6:09जिन्होंने अपनी तरक्कियों के लिए इंसानियत
- 6:10की सारी हदों को पार कर दिया है।
- 6:12फिल्म में एक शॉट है। उस शॉट में दिलजीत
- 6:14के साथ क्या होता है यह मैं आपको नहीं
- 6:15बताऊंगा क्योंकि वो स्पॉइलर हो जाएगा।
- 6:17लेकिन मैं आपको यह जरूर बता सकता हूं कि
- 6:18उस शॉट को मैं अगले 10-15 दिन तक तो नहीं
- 6:21भूल सकता। दिस मैन हैज़ आउट डन हिमसेल्फ।
- 6:24अब्सोलुटली आउट डन हिमसेल्फ इन दिस फिल्म।
- 6:26पूरे सिस्टम के अगेंस्ट निडर होकर खड़े हो
- 6:28जाना। वो भी अकेले। यह जानते हुए कि जिसके
- 6:30अगेंस्ट वो खड़े हैं वो बिल्कुल ही छुट्टे
- 6:33सांड हैं। वो आके तुम्हारे को मार देंगे
- 6:35और किसी की कोई भी सुनवाई नहीं होगी। उनके
- 6:37दो बच्चे थे छोटे-छोटे। उनकी एक बीवी थी।
- 6:39यह सारे के सारे ट्रेड्स जसवंत सिंह खालरा
- 6:42के दिलजीत ने कहीं ना कहीं बैठ के बहुत
- 6:44क्लोजली किन्नी टेप्स पे देखे होंगे। ने
- 6:46कहीं ना कहीं तो देखा होगा बिकॉज़ द बॉडी
- 6:47लैंग्वेज दैट ही कैरीज इन द फिल्म इज
- 6:49फैबुलस। दिलजीत का कैरेक्टर फिल्म में
- 6:51कहीं भी रोता नहीं है। लेकिन जहां पे वो
- 6:53रोता है बहुत ही लिमिटेड शॉट्स हैं। आप
- 6:55उनके साथ रहोगे। दिलजीत की इस फिल्म में
- 6:56परफॉर्मेंस उन कुछ चुनिंदा एक्टर्स की
- 6:58परफॉर्मेंससेस में से है जो आपको यह
- 7:00दिखाती है कि भैया एक एक्टर अगर कंप्लीटली
- 7:03सरेंडर कर दे डायरेक्टर को और वो अच्छा
- 7:05एक्टर हो तो जो स्क्रीन पे दिखता है ना वो
- 7:08कंप्लीटली लाइफ चेंजिंग हो सकता है। कैट
- 7:09और कोहरा में आपने एक साहब को देखा होगा।
- 7:11उनका नाम है सुविंदर सिंह विक्की। एंड
- 7:13हैंड्स डाउन दिस मैन इज वन ऑफ द फाइनेस्ट
- 7:16एक्टिंग टैलेंट्स इन आवर कंट्री। इनसे
- 7:18अच्छा पंजाब पुलिस का रोल कोई कर ही नहीं
- 7:21सकता। इन फिल्म में जो इन्होंने कैरेक्टर
- 7:22प्ले किया है उसके बारे में मैं आपको नहीं
- 7:24बताऊंगा। लेकिन शुरुआत से लेके आखिरी तक
- 7:27इतनी जबरदस्त परफॉर्मेंस है इनकी कि आपको
- 7:29लगेगा कि मैं स्क्रीन में घुस के इसका गला
- 7:30खुद घोट दूं। जिन्होंने अपनी तरक्कियों के
- 7:32लिए इंसानियत की सारी द वे दिस मैन
- 7:34पोट्रेस गुड एंड इविल ऑन द स्क्रीन इज
- 7:37इनसेन। धुरंधर में मेजर इकबाल के बाप का
- 7:39रोल प्ले किया था इन्होंने। उस फिल्म में
- 7:40नो डाउट इनकी बहुत ही बढ़िया परफॉर्मेंस
- 7:42लेकिन इस फिल्म में सतलुज में जब आप इनकी
- 7:44परफॉर्मेंस को देखोगे यू वुड बी लाइक
- 7:46व्हाट अ कमेंडेबल मैन ही इज। अर्जुन
- 7:48रामपाल की एक्टिंग परफॉर्मेंस इस फिल्म
- 7:50में सबसे बड़ा सरप्राइज़ लगेगा आपको। पूरी
- 7:52फिल्म में कहीं इस बंदे ने अपना कैरेक्टर
- 7:54नहीं छोड़ा। एक सरकारी बाबू की चाल ढाल
- 7:56कैसी होगी? उसका पहनावा कैसे होगा 90ज
- 7:58में? वो कैसे बात करेगा? कैसे धड़ दबोचेगा
- 8:00लोगों को? एवरीथिंग अर्जुन रामपाल हैज़ डन
- 8:03टू द टी।
- 8:04किस बात की कीमत चुका है पंजाब?
- 8:06फिल्म में एक और बड़ी ही आउटस्टैंडिंग और
- 8:08स्ट्राइकिंग परफॉर्मेंस है और वो
- 8:10परफॉर्मेंस है उनकी जो दिलजीत की वाइफ
- 8:12प्ले करती है फिल्म में और इनका नाम है
- 8:14गीतिका ओहिल्यायान थ्रू आउट द फिल्म ये
- 8:16औरत अपने पति के डिसीजन के साथ जिस तरह से
- 8:18खड़ी होती है ना बाय गॉड इट रिीडिफाइन
- 8:21फेमिनिज्म
- 8:22मैं इस देश की सुप्रीम कोर्ट और पंजाब
- 8:24सरकार से सीधे पूछती हूं कहां है जसवंत
- 8:27सिंह
- 8:28एंड गीतिका एज एन एक्ट्रेस प्लेइंग दिस
- 8:30रोल हैज़ डन सच एन आउटस्टैंडिंग जॉब ऑफ इट
- 8:32और यही नहीं वेटरन एक्टर कवलजीत सिंह सौरभ
- 8:35सचदेवा जगजीत संधू। लिटरली एवरीबॉडी इन द
- 8:37फिल्म हर किसी ने जिसको जो रोल दिया गया
- 8:40बहुत ही बेहतरीन तरीके से निभाया है
- 8:42उन्होंने। 90ज का फील इतना जबरदस्त है
- 8:44फिल्म में। अटेंशन टू डिटेल है। हर जगह पे
- 8:46गाड़ी का नंबर प्लेट क्या होगा? कौन सी
- 8:48गाड़ी होगी? कौन-कौन सी लोकेशनेशंस
- 8:49जिन्होंने जो एक्चुअल लोकेशनेशंस यूज़ करी
- 8:51है वो कितनी सही है? क्या कपड़े पहने
- 8:53जाएंगे? कैसे चश्मे लगाएंगे उस टाइम अगर
- 8:55जो चश्मा लगाता था? प्रोडक्शन डिजाइन जो
- 8:57करता है उसका काम होता है ये। एंड आई वांट
- 8:59टू गिव अ शाउट आउट टू गरिमा माथुर
- 9:01जिन्होंने यह काम किया है। केयू मोहन एंड
- 9:03डायरेक्टर ऑफ़ फोटोग्राफी ऑफ दिस फिल्म।
- 9:05क्या मूड सेट किया है? क्या शॉट्स बनाए
- 9:07हैं? क्या कलर पैेट्स यूज़ करे हैं।
- 9:09फैंटास्टिक। पहले तो ऐसे टॉपिक पे फिल्म
- 9:11बनाना और फिर उस फिल्म को अपने ही देश में
- 9:13जहां पे वो रिलीज होनी चाहिए थी, डिर्व
- 9:15करती थी एक रिलीज़ उसके लिए 3 साल तक एक
- 9:18लंबी लड़ाई लड़ना। इसके लिए आई वुड नॉट इवन
- 9:20होल्ड बैक। आई वुड जस्ट से कि तांबे के
- 9:22टट्टे होने चाहिए। इसलिए हैट्स ऑफ टू एन अ
- 9:25बिग शाउट आउट टू। द प्रोड्यूसर्स ऑफ दिस
- 9:27फिल्म रनी स्क्रू वाला अभिषेक चौबे एंड
- 9:29हनी त्रिहान हु इज़ आल्सो द डायरेक्टर ऑफ़
- 9:31दिस फिल्म। आल्सो हनी त्रिहान के साथ इस
- 9:33फिल्म को दो और लोगों ने लिखा है और उनका
- 9:35नाम है निरन भट्ट एंड मैत्रा उत्सव। वेरी
- 9:37वेल डन जॉब गाइस। वेरी वेल डन। दिल को
- 9:39सुकून मिलता है जब ऐसी फिल्में आती है।
- 9:41ऐसा लगता है कि भैया अभी भी थोड़ा तो
- 9:43दिमाग वाला थोड़ा तो अच्छा सिनेमा बाकी
- 9:45है। राख मैं वापस आऊंगा और फिर सतलुज ऐसी
- 9:48फिल्में आपको होप दिलाती है कि आजकल जो
- 9:50मसाला चप्पल छाप फिल्में चल रही हैं उनकी
- 9:53पीआर ओवरटेक कर लेती है हर चीज को और जो
- 9:56अच्छी डिर्विंग फिल्में होती है उनके बारे
- 9:57में बात नहीं हो पाती। ऐसी फिल्मों के
- 10:00बारे में बात होनी चाहिए। यह हमारी
- 10:01जिम्मेदारी बनती है। अब सतलुज के फिल्म
- 10:03मेकर्स ने अपनी जिम्मेदारी तो बहुत बढ़िया
- 10:05निभाली। अब हमारी जिम्मेदारी बनती है एज
- 10:07ऑडियंसेस कि थिएटर्स पे तो ये रिलीज हो
- 10:09नहीं पाई। तो ओटीटी पे अगर हुई है तो वहां
- 10:11पे जाओ इसको देखो। अपने परिवार के साथ
- 10:13जाकर बैठ के देखो। ये एक्चुअली में एक
- 10:15फैमिली एंटरटेनर है। वेलकम टू द जंगल जैसी
- 10:17गोबर छाप फिल्म कोई फैमिली एंटरटेनर नहीं
- 10:19है। दिस इज द फिल्म दैट यू शुड सीट एंड
- 10:22वॉच विद योर फैमिली। आई वुड स्ट्रांगली
- 10:23सजेस्ट इट टू यू गाइस दैट यू शुड, यू मस्ट
- 10:26टॉक अबाउट दिस फिल्म विद योर फ्रेंड्स।
- 10:28वर्ल्ड ऑफ़ माउथ से ऐसी फिल्मों को बहुत
- 10:30अट्रैक्शन मिलता है। मैं वापस आऊंगा एक
- 10:32बहुत ही रीसेंट एग्जांपल है। वो ग्लैडली
- 10:34थिएटर पे यह नहीं है। लेकिन ये Zee5 पे
- 10:36स्ट्रीम हो रही है। जाके चेक आउट करो। अगर
- 10:37इस फिल्म को उतना सपोर्ट नहीं मिलता जितना
- 10:39ये डिर्व करती है। अगर इस फिल्म की उतनी
- 10:41बात नहीं होती जितना ये डिर्व करती है देन
- 10:43अस एज ऑडियंसेस हैव फेल्ड। एंड यस व्हाट
- 10:46एन एब्सोलुटली टाइट स्लैप ऑन द फेस ऑफ़
- 10:48सीबीएफसीआई अबब्सोलुटली लव। अब बढ़ते हैं
- 10:51आगे और मैं आपको बताऊंगा बेबी डू डाई डू
- 10:53कैसी है। लेकिन आगे बढ़ने से पहले। लक्ष
- 10:55चौधरी के साथ मेरा पडकास्ट लाइव है। कल वो
- 10:57लाइव हुआ था। बहुत प्यार मिल रहा है। वहां
- 10:59पे जाके उसको चेक आउट करो। अगर आपने अभी
- 11:01तक नहीं देखा है। उसका थोड़ा सा टीज़ मैं
- 11:03आपको दिखाता हूं। उसके बाद रिव्यु शुरू
- 11:04करते हैं बेबी डू डायडू का। भाई मुझे तो
- 11:06इतना बड़ा होने तक मुझे यह नहीं पता था ये
- 11:08जो एडवर्टाइजमेंट आते हैं पैड यूज़ कहां
- 11:10कैसे होता है भाई मुझे बहुत बाद में पता
- 11:12चला।
- 11:12अब ये सैड रियलिटी ऑफर अपब्रिंगिंग है
- 11:14भाई। 16 17 साल की उम्र में आपको कोई
- 11:17दोस्त ने बताया तुझे पता लड़कियों को
- 11:19पीरियड्स भी हुए हैं ये पैड जो आते हैं
- 11:21स्टे फ्री के इसलिए आते हैं भाई।
- 11:24एक तो धोखा फील हो रहा है भाई। पूरी
- 11:26जिंदगी चल रहा था ये मेरे घर में। हैं? वो
- 11:28मेरे से ही छुपा है। मुझे नहीं पता। बीवी
- 11:30घूंघट लगा के झाड़ू बनाए लगाए घर पे वो
- 11:33बढ़िया है। मां के मां के पैर दबाए वो
- 11:34अच्छी लड़की है।
- 11:36आपको रिक्शा वाले फॉलो कर रहे हैं बहन।
- 11:39₹4000 का प्रोटीन खरीद लेंगे क्या वो?
- 11:41एंड वी ग
- 11:48नाउ टू बी वैरी ऑनेस्ट। बेबी डू डाई डू का
- 11:50ट्रेलर मुझे बहुत प्रॉमिसिंग लगा था। मुझे
- 11:52लगा था कि कुछ ना कुछ नया तो जरूर देखने
- 11:54को मिलेगा। इस ट्रेलर एडिट बड़ा स्टाइलिश
- 11:56तरीके से किया हुआ था। और साथ ही कहानी
- 11:58होने वाली थी एक डेफ और म्यूट फीमेल अससिन
- 12:00की।
- 12:01यात्री कृपया ध्यान दें।
- 12:06अब कांसेप्ट वाइज ये है तो कुछ अलग ही तो
- 12:09मुझे लगा यार फिल्म भी बढ़िया ही होगी।
- 12:10नाउ ट्रुथ बी टोल्ड ये पूरा का पूरा
- 12:12कांसेप्ट ये पूरा का पूरा वर्ल्ड जो बनाती
- 12:14है ये फिल्म ये कहानी जो आपको बताती है ये
- 12:16ऑन पेपर बहुत बढ़िया लगती होगी। बिकॉज़ नो
- 12:18डाउट इट इज अ वेरी कूल कांसेप्ट। लेकिन
- 12:20मेरे हिसाब से मैं पर्सनली ये सोचता हूं
- 12:22कि ऐसे कांसेप्ट्स का जो कांसेप्ट बड़े
- 12:24हैवी होते हैं। ग्रेविटास है इस कांसेप्ट
- 12:26के अंदर। इनकी एग्जीक्यूशन उतनी ही
- 12:27मुश्किल हो जाती है। वो इसलिए क्योंकि एक
- 12:29डेफ और म्यूट कैरेक्टर आपने बना तो दिया
- 12:31है। अब आपको उसके पीओवी से दुनिया दिखानी
- 12:33है और उनका पीओवी बाकी सारे हम नॉर्मली
- 12:35एबल्ड लोगों के पर्सपेक्टिव से बहुत अलग
- 12:38होता है। और एग्जैक्टली यही उनके
- 12:39पर्सपेक्टिव से पूरी दुनिया को बनाना उन
- 12:42दुनिया को दिखाना वहां पे छोटी-छोटी
- 12:44डिटेल्स बहुत मैटर करती हैं। और
- 12:45एग्जैक्टली यही ये फिल्म यानी कि एट द
- 12:47एग्जीक्यूशन स्टेज ये फिल्म फेल होती है।
- 12:49द फिल्म स्टार्ट्स वेरी प्रॉमिसिंगली।
- 12:51पहले 30 से 40 मिनट आप स्टोरी में हुक्ड
- 12:53रहोगे। आपको जानना होगा कि आगे क्या होगा।
- 12:55लेकिन एज द स्टोरी प्रोग्रेससेस फर्दर
- 12:57अहेड ये क्लूलेस हो जाती है।
- 12:59घर गृहस्ती में उसको कोई इंटरेस्ट
- 13:01इंटरेस्ट नहीं है। हाथ से निकल गई है
- 13:03लड़की।
- 13:03फिल्म में बहुत अच्छे-अच्छे कैरेक्टर्स
- 13:05बनाए गए हैं। लेकिन ये कैरेक्टर फिल्म के
- 13:07पहले हाफ में बहुत बढ़िया लगते हैं। लेकिन
- 13:08सेकंड हाफ आते-आते इन कैरेक्टर्स को खुद
- 13:10ही नहीं पता ये क्या कर रहे हैं। छोटे
- 13:12मियां एक कैरेक्टर प्ले कर रहे हैं। फिल्म
- 13:13के अंदर बहुत ही बेहतरीन कैरेक्टर लगा
- 13:15मुझे वो। लेकिन उस कैरेक्टर को भी पूरा
- 13:16खोला ही नहीं। इन्होंने यूज़ ही नहीं
- 13:18किया। वो कैरेक्टर आपको अच्छा लगेगा लेकिन
- 13:19यादगार नहीं रहेगा। सिकंदर खेर का
- 13:21कैरेक्टर भी बहुत बढ़िया है। उनको क्वर्क
- 13:23भी दिया हुआ है जो कि मुझे पर्सनली बहुत
- 13:24अच्छा लगता है। जब राइटर्स और डायरेक्टर्स
- 13:26क्वर्क्स देते हैं सर्टेन कैरेक्टर्स को
- 13:28जो थोड़े से यादगार बन जाते हैं। लेकिन
- 13:30उनकी परफॉर्मेंस के बावजूद भी इट्स
- 13:31इंपैक्टलेस।
- 13:32बेबी किधर है?
- 13:33वो भाग गई। वापस नहीं आएगी। तुम लोग के
- 13:35अंतिम संस्कार के लिए तो आएगी।
- 13:37फिल्म का रन टाइम 2 घंटे का है व्हिच इज
- 13:38एक्चुअली अ वेरी गुड डिसजन। क्योंकि लास्ट
- 13:40के 45 मिनट फिल्म के राइटर्स को खुद ही
- 13:42नहीं पता था इसको खत्म कैसे करें। कहानी
- 13:44में एक बहुत ही मोन्यूमेंटल ट्विस्ट है।
- 13:45आधे लोग उसको पहले ही प्रिडिक्ट कर लेंगे।
- 13:47और जो नहीं प्रिडिक्ट कर पाए जब वो रहस्य
- 13:49खुलेगा, जब वो थ्रिल खुलेगा, जब वो
- 13:51सीक्रेट रिवील होगा तो देन यू वुड बी लाइक
- 13:53कि फिर ये सीक्रेट बनाया ही क्यों था?
- 13:54फिल्म का बजट बहुत कम है। इसको स्क्रीन्स
- 13:56भी बहुत कम मिली हैं और साथ ही एडिटिंग
- 13:58शार्प है फिल्म की। इन्होंने स्टाइलाइज़
- 14:00अच्छा करा है फिल्म को लेकिन इनका दिमाग
- 14:01सारा स्टाइलाइज़ेशन में ही चला गया।
- 14:03इन्होंने लूप होल्स पे ध्यान नहीं दिया।
- 14:05धूल एक लूप होल के बाद दूसरा लूप होल है
- 14:07फिल्म के अंदर। सही बताऊं तो इस कांसेप्ट
- 14:08को इस कहानी को इस फिल्म को जो मेकर्स
- 14:10चाहिए थे ना वो राज और डीके के कैलिबर के
- 14:12होने चाहिए थे। इट्स नॉट अ बैड फिल्म। अगर
- 14:14आपको अपना टाइम खराब करना है, टाइम किल
- 14:16करना है तो आप यह देख सकते हैं। इट इज नॉट
- 14:18अ बैड टाइम किल फिल्म। लेकिन क्या यह
- 14:20फिल्म इंपैक्टफुल है? क्या इसकी कहानी
- 14:21आपको इंटरेस्ट करेगी? क्या इसकी कहानी
- 14:23आपको बहुत ही टाइम तक एंगेज और एंटाइज
- 14:25करके रहेगी? पर्सनली मेरे ओपिनियन में
- 14:27नहीं। हुमा कुरैशी की परफेंस अब्सोलुटली
- 14:29ठंडी है फिल्म के अंदर। दिस कैरेक्टर आउट
- 14:31एंड आउट डिमांडेड इंटेंसिटी।
- 14:35नाम नाम
- 14:37बच्ची।
- 14:38नाउ हुमा इज अ वेरी गुड एक्ट्रेस। एंड येट
- 14:40अगेन आई थिंक दैट दिस इज द डायरेक्टर्स
- 14:42फॉल्ट। अपना छोटा सा जो वर्ल्ड ये फिल्म
- 14:44बनाती है वो बहुत अच्छा है लेकिन इन्होंने
- 14:46प्लॉट होल्स पे ध्यान ही नहीं दिया। जैसे
- 14:48कि मैंने पहले भी कहा था एक प्लॉट हॉल के
- 14:50बाद दूसरा प्लॉट होल आ जाता है। अगर वो
- 14:52फिक्स हो जाता कहानी पे और ज्यादा ध्यान
- 14:53दिया जाता तो कम बजट होने के बावजूद भी इस
- 14:56फिल्म की कहानी बहुत इंपैक्टफुल हो सकती
- 14:58थी। अंधादून इज अ ग्रेट एग्जांपल ऑफ़ हाउ
- 15:00यू ट्रीट टॉपिक्स एंड कॉन्सेप्ट्स लाइक
- 15:01दिस। फिल्म की कहानी इतनी सारी चीजें करने
- 15:03की कोशिश करती है कि ये कोई भी एक चीज
- 15:05बहुत सटीक तरीके से नहीं कर पाती। आधे
- 15:08टाइम के बाद तो आपको लगने लगेगा कि ये एक
- 15:09कॉलेज प्रोजेक्ट ही है। इट्स अ ग्रेट
- 15:11अटेम्प्ट आई वुड गिव इट टू देम टू
- 15:12एक्सपेरिमेंट विद सच अ कांसेप्ट जो आज की
- 15:14मार्केट में बहुत सारे प्रोड्यूसर्स पैसा
- 15:16नहीं लगाएंगे जिस पर लेकिन उसका मतलब यह
- 15:17तो नहीं हो जाता कि एक सब स्टैंडर्ड फिल्म
- 15:19को अच्छा बोलने लग जाए। जस्ट बिकॉज़ एक
- 15:21फिल्म का बजट कम है और वो एक अल्फा जैसी
- 15:23धी पिठी फिल्म के साथ कमपीट कर रही है। डज
- 15:25नॉट मीन दैट फिल्म इज गुड एज वेल। द होल
- 15:27कांसेप्ट ऑफ अ डेफ एंड म्यूट असिन वाली
- 15:29चीज जब अनर्राइवल होगी ना स्टोरी में तो
- 15:31आप अपना सर पकड़ लोगे कि यार इसी चीज को
- 15:33देख के इससे इंटरेस्ट हो के मैं इसके अंदर
- 15:36आया था। नाउ वेयर हैज़ दिस गॉन?
- 15:38और मेरा छाता भी लेकर आओ।
- 15:39इस सब में छाता क्यों चाहिए तुझे?
- 15:42लास्ट में एक ट्विस्ट है चंकी पांडे के
- 15:44कैरेक्टर के साथ। वो मेरे लिए थोड़ा सा
- 15:45अनप्रिडिक्टबल था। लेकिन मैंने जिनके साथ
- 15:47बैठ के फिल्म देखी उन्होंने पहले ही
- 15:49प्रिडिक्ट कर लिया था सम।
- 15:50हमारे धंधे में सिर्फ इनकमिंग।
- 15:53आउटगोइंग की सुविधा तो है ही नहीं।
- 15:55क्या ये फिल्म अल्फा से बढ़िया है? तो
- 15:56भैया गोबर से गधे के घू से तो हर चीज ही
- 15:59अच्छी होगी। उससे अगर कंपेयर करोगे तो हां
- 16:01भैया वहां अगर टाइम किल नहीं करना तो उससे
- 16:03बेटर यहां टाइम किल कर लो। कुछ भी पाथ
- 16:05ब्रेकिंग या ग्राउंड ब्रेकिंग या बहुत ही
- 16:07स्ट्रांग फीमेल लेड फिल्म नहीं है। ऐसा
- 16:09कुछ हुमा कुरैशी हैज़ डन मच मच बेटर ऐज़ एन
- 16:11एक्ट्रेस इन हर प्रीवियस फिल्म। एक चीज जो
- 16:14कहानी के साथ ये करना चाहते थे और मुझे
- 16:15बढ़िया लगी वो ये थी कि ये अपने किरदारों
- 16:18के साथ ना खेलना चाहते थे। ये अलग-अलग
- 16:19तरीके के किरदार बनाना चाहते थे जो
- 16:21इन्होंने बनाए भी। एक बाईसेक्सुअल
- 16:23कैरेक्टर है वो मियां बीवी होते हैं। उन
- 16:24दोनों में मैरिज ऑफ़ कन्वीनियंस होती है
- 16:26पति। बाईसेक्सुअल है तो उसका एक गे आर्क
- 16:29भी है साथ में। एक और भी बहुत सारे
- 16:30ऐसे-ऐसे कैरेक्टर्स हैं। बढ़िया चीजें हैं
- 16:32फिल्म के अंदर। लेकिन ये लिखाई है
- 16:34क्रिएटिव लेकिन पहुंचती कहीं नहीं। क्या
- 16:36ये फिल्म एक थिएटर वॉच है? थिएटर पे जाके
- 16:38ही मजा आएगा। एब्सोलुटली नॉट एब्सोल्यूटली
- 16:41नॉट ओटीटी का प्रोडक्ट है ये अगर ओटीटी पे
- 16:43आता तो इसको ज्यादा आई बॉल्स मिलती। अल्फा
- 16:45को थिएटर्स पे बॉक्स ऑफिस पे जो वेरी वेल
- 16:47डिर्व्ड हेट मिल रही है। क्या उसका फायदा
- 16:49इस फिल्म को होगा कलेक्शन वाइज? हां,
- 16:51थोड़ा बहुत होगा जरूर होगा। ओवरऑल ये
- 16:52फिल्म एक बहुत ही मेमोरेबल फिल्म बन सकती
- 16:54थी। इसके कैरेक्टर्स आपके साथ रहे थे जैसे
- 16:56राज एंड डीके के जो पीछे कुछ शोज़ आए थे
- 16:59गंज एंड गुलाब। वन ऑफ़ माय फेवरेट शोज़।
- 17:01उसकी बहुत तगड़ी वाइब मुझे यहां देखने को
- 17:02मिली। बस एग्जीक्यूशन भी वैसी देखने को
- 17:04मिल जाती तो मजा आ जाता। बट नन द लेस
- 17:06हैट्स ऑफ टू द प्रोड्यूसर्स यार कि
- 17:07उन्होंने इस कांसेप्ट पे अपना जेब से पैसा
- 17:09लगाया। उसको जितना प्रमोट कर पा रहे हैं
- 17:11वो बेचारे कर रहे हैं। ज्यादा स्क्रीन इस
- 17:12फिल्म को लाजमी सी बात है नहीं मिलेगी।
- 17:14कलेक्शन कुछ ज्यादा खास नहीं है। अगर आप
- 17:16अल्फा नहीं देखने जाना चाहते और थिएटर पे
- 17:18जाके कुछ देखना चाहते हैं तो मैं कहूंगा
- 17:20चले जाओ ओटीटी की भी वेट कर सकते हो। तो
- 17:22ये था मेरा रिव्यु ऑफ़ बोथ द फिल्म्स सतलुज
- 17:24एंड बेबी डू डायडू का। ऑनेस्टली सेइंग
- 17:26पडकास्ट फिर लक्ष चौधरी के साथ पडकास्ट
- 17:27लाइव है। अगर आपने नहीं देखा है जाके देख
- 17:29लेना डिस्क्रिप्शन बॉक्स में और साथ ही
- 17:31पिन कमेंट्स में मैं उसका कमेंट पिन कर
- 17:32दूंगा। तब तक के लिए अगली वीडियो में
- 17:34मिलते हैं मामिया लज़ानिया पप्पी। बाय-ब
- 17:37[संगीत]
- 17:42सया
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This page contains the full transcript of SATLUJ & Baby Do Die Do Movie Review by Shan Prasher, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 4,010 words across 517 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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