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Revision of Modern Indian History for UPSC in 30 Minutes | SMART Revision | UPSC 2025 — Transcript

by UPSC Wallah · 5,674 words · 761 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00वेलकम टू पीडब्ल्यू ओनली आईएस। मॉडर्न
  2. 0:03हिस्ट्री सिर्फ पास को जानने की बात नहीं
  3. 0:06बल्कि यह वो कथा है जो हमें बताता है कि
  4. 0:08किस तरीके से कुछ फैसले, कुछ नीतियां, कुछ
  5. 0:12लोगों की खोखली सोच कैसे एक प्रोस्पेरस
  6. 0:15देश को सालों तक लूट सकता है, एक्सप्लाइट
  7. 0:18कर सकता है और सदियों के लिए पीछे धकेल
  8. 0:20सकता है।
  9. 0:24हम बात कर रहे हैं मॉडर्न इंडियन हिस्ट्री
  10. 0:25की जिसमें ब्रिटिशर्स ने अपने से 20 गुना
  11. 0:28ज्यादा बड़े देश पर 200 सालों से भी
  12. 0:30ज्यादा समय तक रूल किया। दोस्तों जब हम
  13. 0:33भारत के इतिहास में मॉडर्न इंडिया की बात
  14. 0:35करते हैं ना तो यह सिर्फ अंग्रेजों के आने
  15. 0:37और जाने की कहानी नहीं है बल्कि ये वो दौर
  16. 0:39है जहां पर रेजिस्टेंस रिफॉर्म और रिनेसा
  17. 0:42ये तीनों पैरेलल चलते हैं। यह वो दौर है
  18. 0:45जहां पर भारत जैसे प्रोस्पेरस देश को
  19. 0:47अंग्रेजों ने बाजार बना दिया। यह वो दौर
  20. 0:50है जहां पर हमें लैब समझ के हमारे ऊपर
  21. 0:52तरह-तरह के एक्सपेरिमेंट्स किए गए। यह वो
  22. 0:55दौर है जहां पर भारत को मात्र एक कॉलोनियल
  23. 0:58सब्जेक्ट बना के छोड़ दिया। और ये सिर्फ
  24. 1:01हमारे लूट की कहानी नहीं है कि हमें किस
  25. 1:03तरीके से लूटा गया। बल्कि ये इस बात की भी
  26. 1:05कहानी है कि किस तरीके से हमारे ट्रेडिशंस
  27. 1:08पे हमारे हमारे कल्चर पे हमारी थॉट के ऊपर
  28. 1:10भी अटैक किया गया। हमारी आइडेंटिटी के ऊपर
  29. 1:13भी अटैक किया गया। तो चलिए मॉडर्न
  30. 1:14हिस्ट्री के इस सफर में जिसमें ब्रिटिश
  31. 1:16कॉलोनिज्म के ऐसे तमाम आस्पेक्ट जैसे कि
  32. 1:19कैसे एक ट्रेडिंग कंपनी ट्रेडर से रूलर
  33. 1:21बनी। कैसे हमने इसके खिलाफ आवाज उठाई और
  34. 1:24कैसे भारत में उत्पन्न हुई नेशनलिस्ट
  35. 1:26फीलिंग की? ऐसे कई सारे सवाल हैं जिनको
  36. 1:30ढूंढना और एक्सप्लोर करना बहुत जरूरी है।
  37. 1:32और आज के इस वीडियो में इन्हीं सवालों को
  38. 1:34हम टेक अप करने वाले हैं। तो आइए इस सफर
  39. 1:36को शुरू करते हैं। मॉडर्न इंडियन हिस्ट्री
  40. 1:39को अच्छे से समझने के लिए हम मॉडर्न
  41. 1:40हिस्ट्री को पांच हिस्सों में डिवाइड कर
  42. 1:42सकते हैं। पहला अराइवल ऑफ यूरोपियंस,
  43. 1:45दूसरा रिव्ट ऑफ 1857, तीसरा मॉडर्न
  44. 1:48नेशनलिज्म एंड इंडियन नेशनल कांग्रेस,
  45. 1:50चौथा गांधियन एरा और पांचवा इंडिपेंडेंस
  46. 1:54एंड पार्टीशन ऑफ इंडिया। अब हम एक-एक करके
  47. 1:57इन सभी पार्ट्स को देखेंगे। हमने मेडिवल
  48. 1:59हिस्ट्री में देखा कि मुगल एपरर जहांगीर
  49. 2:01के कोर्ट में हॉकिंस और थॉमस रो जैसे
  50. 2:03ब्रिटिशर्स आए थे। लेकिन यह पहले
  51. 2:05यूरोपियंस नहीं थे जो इंडिया आए। मेडिवल
  52. 2:07पीरियड में भी इंडिया और यूरोप के बीच में
  53. 2:09अच्छे खासे ट्रेड रिलेशंस थे। जिसमें
  54. 2:11मेनली स्पाइसेस का ट्रेड होता था। इंडिया
  55. 2:13आने वाले यूरोपियंस में सबसे पहले थे
  56. 2:16पोर्चुगीज़। पोर्चुगीज़ और यूरोप से इंडिया
  57. 2:18आने वाले पहले ट्रेवलर थे वास्कोडगामा जो
  58. 2:21एक गुजराती ट्रेडर अब्दुल मजीद की हेल्प
  59. 2:23से 20 मई 1498 को इंडिया के कैलकिकट कोस्ट
  60. 2:28पर पहुंचे। वास्को गामा जब इंडिया से
  61. 2:30पोर्चुगल वापस गया तो जो ब्लैक पेपर लेकर
  62. 2:32गया था उस पर उसने 60 गुना प्रॉफिट कमाया।
  63. 2:36ईस्ट के साथ ट्रेड करने के लिए पोर्चुगीज़
  64. 2:38ने जो एंपायर इस्टैब्लिश किया उसको
  65. 2:40उन्होंने स्टाडो डा इंडिया का नाम दिया।
  66. 2:441503 में पोर्चुगीज़ ने कोचिन में अपनी
  67. 2:46पहली फैक्ट्री इस्टैब्लिश की। पोर्चुगीज़
  68. 2:49बहुत शेडी नेचर के थे। उनके ट्रेड पॉलिसी
  69. 2:52का सीक्रेट ट्रेड और डकैती एक मेजर पार्ट
  70. 2:55था। इसके साथ ही लगभग उसी समय सदर्न
  71. 2:57अमेरिका में उन्होंने ब्राजील को अपना
  72. 2:59कॉलोनी बना लिया और कुछ समय तक यहां ट्रेड
  73. 3:02करने के बाद उन्होंने अपना ध्यान सदर्न
  74. 3:04अमेरिकन कॉन्टिनेंट में लगाया। लेकिन हमें
  75. 3:06यह भी याद रखना होगा कि भारत की धरती पर
  76. 3:09सबसे लंबी समय तक रहने वाले यूरोपियंस
  77. 3:12पोर्चुगीज़ ही थे। जो 1961 एडी तक इंडिया
  78. 3:15के गोवा, दमन, द में शासन करते रहे।
  79. 3:19इनफैक्ट हमें तो उन्हें यहां से भगाने के
  80. 3:21लिए मिलिट्री ऑपरेशन ऑपरेशन विजय ल्च करना
  81. 3:23पड़ा। पोर्चुगीज़ के बाद आए थे डच। डच ईस्ट
  82. 3:27इंडिया कंपनी ने इंडिया से ट्रेड के लिए
  83. 3:29मसूलीपट्टनम में 1605 में अपनी पहली डच
  84. 3:32फैक्ट्री इस्टैब्लिश की। लेकिन यह भी
  85. 3:34इंडिया में कुछ खास कर नहीं सके और अपना
  86. 3:36ध्यान ईस्ट इंडीज यानी कि साउथ ईस्ट एशियन
  87. 3:39की कॉलोनीज़ पर दिया। डच के बाद ब्रिटिशर्स
  88. 3:42इंडिया आए और उन्होंने यहां पर वो कर
  89. 3:44दिखाया जो अभी तक कोई भी यूरोपियन पावर
  90. 3:46नहीं कर पाई थी। 1759 एडी में बैटल ऑफ
  91. 3:49बेदारा में ब्रिटिश डच से भिड़े और
  92. 3:52उन्होंने डच को हरा दिया और इंडियन ट्रेड
  93. 3:54से उन्हें पूरी तरीके से अलग कर दिया गया।
  94. 3:57लेकिन ऐसे कौन से कारण थे जिसकी वजह से
  95. 4:00ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी इंडिया में
  96. 4:02इतनी सक्सेसफुल रही? आइए समझते हैं। दरअसल
  97. 4:051599 में इंग्लैंड में मर्चेंट एडवेंचरर्स
  98. 4:08नाम का एक ग्रुप ने द गवर्नर एंड कंपनी ऑफ
  99. 4:11मर्चेंट्स ऑफ ट्रेडिंग इनू द ईस्ट इंडीज
  100. 4:14नाम की कंपनी का फाउंडेशन रखा। इसी कंपनी
  101. 4:17को आगे चलकर ईस्ट इंडिया कंपनी कहा गया।
  102. 4:19इंग्लैंड के किंग जेम्स वन का एंबेसडर
  103. 4:22कैप्टन हॉकिन 1608 में इंडिया पहुंचा।
  104. 4:25जहां वो 1609 में मुगल एपरर जहांगीर के
  105. 4:28कोर्ट में गया। 1613 में जहांगीर ने एक
  106. 4:31शाही फरमान इशू किया। जिसमें ब्रिटिशर्स
  107. 4:34को सूरत में फैक्ट्री लगाने की इजाजत दी
  108. 4:36गई। 1619 तक ईस्ट इंडिया कंपनी की
  109. 4:38फैक्ट्रीज अहमदाबाद, बरूच, बड़ौदा और आगरा
  110. 4:41में इस्टैब्लिश हो चुकी थी। ब्रिटिशर्स ने
  111. 4:44मद्रास में सेंट जॉर्ज फोर्ट बनाया और
  112. 4:461661 एडी में पोर्चुगीज़ प्रिंसेस कैथरीन
  113. 4:49ब्रिगांजा की मैरिज इंग्लैंड के चार्ल्स
  114. 4:52सेकंड से हुई। जिसमें बॉम्बे को डरी के
  115. 4:54रूप में ब्रिटिशर्स को दे दिया गया।
  116. 4:56चार्ल्स सेकंड ने बॉम्बे को 3 पाउंड्स पर
  117. 4:58ईयर के रेंट पर ईस्ट इंडिया कंपनी को दे
  118. 5:00दिया। मिड 17 सेंचुरी तक ईस्ट इंडिया
  119. 5:03कंपनी सिर्फ ट्रेड से प्रॉफिट कमा रही थी।
  120. 5:05लेकिन अब वो इंडिया के पॉलिटिकल अफेयर्स
  121. 5:08में भी इंटरेस्ट लेने लगी थी। जिसके
  122. 5:09कॉन्सक्वेंस तो होने ही थे। मुगल एपरर
  123. 5:12औरंगजेब ने 1686 में कंपनी के अगेंस्ट
  124. 5:14एक्शन लिया। लेकिन फरवरी 1690 में कंपनी
  125. 5:17के ऑफिसर जॉब चरनॉक के एफर्ट से कंपनी और
  126. 5:20मुगल एपरर के बीच में कॉम्प्रोमाइज हो
  127. 5:22गया। 1691 को जॉब चर्नॉक ने सूतानती की
  128. 5:25स्थापना की। फिर 16989 के बीच बंगाल के
  129. 5:28सूबेदार अजीमु ने कंपनी को सोदानाती,
  130. 5:31कालीकाता और गोविंदपुर की जिमी दे दी। इन
  131. 5:34तीनों गांव को मिलाकर ही जॉब चरनॉक
  132. 5:37नेलकाता की नींव रखी। मुगल एपरर औरंगजेब
  133. 5:40की 1707 में डेथ हो गई। उसके बाद लेटर
  134. 5:42मुगल्स की कमजोरी किसी से छुपी नहीं रही
  135. 5:44और कंपनी भी अब इसका फायदा उठाने के मूड
  136. 5:47में थी। ईस्ट इंडिया कंपनी की हिस्ट्री का
  137. 5:50एक सिग्निफिकेंट इवेंट हुआ 1717 एडी में।
  138. 5:53जब जॉन सुरमन की लीडरशिप में एडवर्ड
  139. 5:56स्टीफनसन विलियम हैमिल्टन जो कि एक सर्जन
  140. 5:59थे और ख्वाजा सहूदाद जो कि एक ट्रांसलेटर
  141. 6:02थे मुगल कोर्ट में फारुख सियार से मिले।
  142. 6:04विलियम हैमिल्टन ने फारुख सियार की
  143. 6:06ग्रोइंग स्वेलिंग की सर्जरी की और उन्हें
  144. 6:08एक पेनफुल बीमारी से छुटकारा दिलाया। अब
  145. 6:10इससे खुश होकर फारुख सियार ने कंपनी को एक
  146. 6:13चार्टर दिया। इस चार्टर के जरिए बंगाल में
  147. 6:16₹3000 पर एनम के बदले कंपनी को कस्टम
  148. 6:19ड्यूटी फ्री ट्रेडिंग की परमिशन मिल गई।
  149. 6:21इस चार्टर को इंडिया में ब्रिटिश रूल का
  150. 6:23मैग्नाल्टा कहा जाता है। यह फारुख सियार
  151. 6:26की एक बड़ी बेवकूफी भी मानी जाती है।
  152. 6:28क्योंकि आगे चलकर इसी की वजह से
  153. 6:30ब्रिटिशर्स ने बंगाल में विवाद खड़ा कर
  154. 6:32दिया। बाद में बंगाल के नवाब ने कंपनी के
  155. 6:35एक्टिविटीज को कंट्रोल करने की कोशिश की
  156. 6:37जिसका रिजल्ट था बैटल ऑफ प्लासी 1757।
  157. 6:41खैर, ब्रिटिशर्स के बाद फ्रेंच भी इंडिया
  158. 6:42में आए। लुईस 14 के फाइनेंस मिनिस्टर
  159. 6:44कोलबर्ट ने फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी की
  160. 6:47स्थापना की। इस कंपनी को स्टेट का
  161. 6:49प्रोटेक्शन भी था। 1667 एडी में फ्रांसिस
  162. 6:53कैरोन की लीडरशिप में फ्रेंच टीम इंडिया
  163. 6:55आई और 1668 में सूरत में अपनी पहली
  164. 6:58फैक्ट्री इस्टैब्लिश की। ब्रिटिश कंपनी की
  165. 7:01तरह फ्रेंच कंपनी भी सिर्फ ट्रेड के लिए
  166. 7:03बनी थी। लेकिन वो भी धीरे-धीरे पॉलिटिकल
  167. 7:05मामलों में उलझ गई। यूरोप में जो कंपनीज़
  168. 7:08एक दूसरे की कॉम्पिटिटर्स थी, अब इंडिया
  169. 7:10में भी एक दूसरे के सामने खड़ी हो गई थी।
  170. 7:13इंग्लिश और फ्रेंच के बीच लड़ी गई पहली
  171. 7:15बड़ी लड़ाई थी फर्स्ट कर्नाटक वॉर बिटवीन
  172. 7:171746 एंड 1748 जो यूरोप में चल रही
  173. 7:21ऑस्ट्रियन सक्सेशन वॉर का ही एक एक्सटेंशन
  174. 7:23था। इस वॉर के बाद ट्रीटी ऑफ़ एक्सलाल शपल
  175. 7:26के जरिए यूरोप में शांति हो गई और इंडिया
  176. 7:29में भी दोनों कंपनीज़ के बीच टेंपरेरी पीस
  177. 7:31इस्टैब्लिश हो गया। सेकंड कर्नाटिक वॉर
  178. 7:331749 टू 54 हुआ कर्नाटका की नवाबी को
  179. 7:37लेकर। चंदा साहब ने नवाबी के लिए
  180. 7:39डुप्लेक्स की मदद ली और मुजफ्फर जंग ने
  181. 7:42डेकेन की सूबेदारी के लिए भी फ्रेंचों का
  182. 7:44सपोर्ट लिया। अब ब्रिटिशर्स ने अनवरुद्दीन
  183. 7:46और नासिर जंग को सपोर्ट किया। इस वॉर में
  184. 7:49फ्रेंच जीत रहे थे। लेकिन तभी इंग्लैंड से
  185. 7:52मद्रास आया एक क्लर्क रॉबर्ट क्लाइ जिसने
  186. 7:55सिर्फ 500 सोल्जर्स के साथ आर्कट पर कब्जा
  187. 7:57कर दिया और फ्रेंच फोर्सेस को सरेंडर करने
  188. 8:00पर मजबूर कर दिया। फ्रांस में सीनियर
  189. 8:02ऑफिसर्स ने डुप्लेक्स की पॉलिसी को
  190. 8:03क्रिटिकली अपोज किया और उसे फ्रांस बुला
  191. 8:06दिया गया। यह फ्रेंच गवर्नमेंट की बहुत
  192. 8:08बड़ी बेवकूफी मानी जाती है क्योंकि
  193. 8:09डुप्लेक्स के बाद इंडिया में फ्रेंचों के
  194. 8:12पास कोई भी ढंग का लीडर नहीं बचा था। और
  195. 8:15फिर आई थर्ड कर्नाटिक वॉर 1756 टू63। इसका
  196. 8:19इमीडिएट रीजन था रॉबर्ट क्लाइव और एडमिरल
  197. 8:22वाटसन द्वारा चंद्रनगर पर कब्जा। इस बार
  198. 8:25ब्रिटिश और फ्रेंच के बीच एक डिसाइसिव वॉर
  199. 8:27हुई। बैटल ऑफ वडी वॉश। इस बैटल में
  200. 8:29ब्रिटिश फोर्सेस को आयरकूट ने लीड किया।
  201. 8:32फ्रेंच ये बैटल हार गए। 16 जनवरी 1761 को
  202. 8:36पोंडीचेरी भी ब्रिटिशर्स के कब्जे में आ
  203. 8:38गया। इस प्रकार इंडिया में सभी यूरोपियन
  204. 8:41कंपनीज में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी
  205. 8:43सबसे ज्यादा ताकतवर बन गई। वास्तव में
  206. 8:46ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की श्रेष्ठता
  207. 8:48का एक मुख्य कारण था 1757 में बैटल ऑफ
  208. 8:51प्लासी में उनकी जीत और उस जीत के बाद
  209. 8:54उन्हें मिला खजाना। यह युद्ध हुआ था बंगाल
  210. 8:57के नवाब सिराजुद्दौला और ईस्ट इंडिया
  211. 8:59कंपनी के बीच जिसे रॉबर्ट क्लाइव ने साजिश
  212. 9:01करके जीता था। रॉबर्ट क्लाइव बंगाल का
  213. 9:04फर्स्ट गवर्नर बना। उसके बाद आने वाले
  214. 9:06गवर्नर थे वारेन हेस्टिंग्स, लॉर्ड
  215. 9:08कन्वलिस, लॉर्ड विलजसली और बाद में लॉर्ड
  216. 9:10विलियम बेंटिक जो 1833 में इंडिया का पहला
  217. 9:14गवर्नर जनरल बना था। बैटल ऑफ प्लासी के
  218. 9:16बाद से ही इंडिया के लोगों का इकोनॉमिक
  219. 9:18एक्सप्लॉयटेशन शुरू हो गया था। इसके
  220. 9:21साथ-साथ ब्रिटिश गवर्नमेंट ने इंडिया के
  221. 9:23धर्म और रीति-रिवाजों में भी दखल देना
  222. 9:25शुरू कर दिया था। इन सभी कारणों से 1757
  223. 9:28के बाद छोटे-छोटे रिवॉर्ड्स ब्रिटिशर्स के
  224. 9:30अगेंस्ट होते रहे। जैसे कि बंगाल का
  225. 9:33सन्यासी रिबेलियन, महाराष्ट्र का रमोसी
  226. 9:35रिपोर्ट, संथल रिव्ट और 1857 का सेपॉय
  227. 9:38रिवॉर्ट।
  228. 9:40यह सभी रिवोट उन पॉलिसीज के विरोध में थे
  229. 9:42जो ब्रिटिशर्स ने बैटल ऑफ प्लासी और बैटल
  230. 9:44ऑफ बक्सर के बाद लागू की थी। लॉर्ड डलहौजी
  231. 9:471848 से 56 के बीच में थे। उनके समय
  232. 9:50इंडियंस के लिबर्टी, कल्चर और रिलीजन पर
  233. 9:53भी प्रहार किया गया। उसने डॉक्ट्रिन ऑफ
  234. 9:55लैब्स के तहत सतारा, जयपुर, सभलपुर, बागत,
  235. 9:58उदयपुर, झांसी, नागपुर जैसे राज्यों को
  236. 10:01ब्रिटिश एंपायर में मिला दिया। ब्रिटिशर्स
  237. 10:03ने इवन लॉयल अवध को भी मैल एडमिनिस्ट्रेशन
  238. 10:06के नाम पर ब्रिटिश इंडिया में मिला दिया
  239. 10:08था। इसने इंडियंस के दिल में यह दर्ज कर
  240. 10:11दिया कि ब्रिटिश किसी का सगा नहीं होता।
  241. 10:14झांसी और अवध के लोगों में क्रोध भड़क
  242. 10:16गया। यह सब गुस्सा प्लासी के 100 साल बाद
  243. 10:181857 में खुलकर सामने आ गया। 1857 की
  244. 10:22क्रांति के इमीडिएट कॉजेस में सबसे ज्यादा
  245. 10:24चर्चा में था काऊ और पिग फैट में लपेटा
  246. 10:27हुआ कार्ट्रज। एनफील्ड राइफल से फायर करने
  247. 10:30के लिए इस कार्ट्रज को दांतों से खोलना
  248. 10:32पड़ता था जो हिंदू और मुस्लिम दोनों के
  249. 10:34लिए धार्मिक रूप से अपमानजनक था। क्योंकि
  250. 10:36काऊ हिंदुओं के लिए पवित्र होती है और पिग
  251. 10:39मुसलमानों के लिए नापाक। सबसे पहली घटना
  252. 10:42हुई 29th मार्च 1857 को बैरकपुर कैंट में।
  253. 10:45जहां 34 इनफेंट्री के सोल्जर मंगल पांडे
  254. 10:48ने कैट्रिज यूज करने से इंकार किया और
  255. 10:51अपने सीनियर ऑफिसर लेफ्टिनेंट बाग और जनरल
  256. 10:54हेयरसे को गोली मार दी। यह सभी वजह बनी
  257. 10:57सेपॉई मूटनी का कारण जो ऑफिशियली शुरू हुई
  258. 11:0010 मई 1857 को मेरठ कंटोनमेंट के सोल्जर्स
  259. 11:03के द्वारा। इन्होंने कार्ट्रेज यूज़ करने
  260. 11:06से इंकार किया और फिर 11 मई की सुबह ये
  261. 11:08लोग दिल्ली पहुंचे। जहां उन्होंने बहादुर
  262. 11:10शाह जफर को अपना बादशाह घोषित कर दिया। यह
  263. 11:13विद्रोह धीरे-धीरे नॉर्थ इंडिया में फैल
  264. 11:15गया। कानपुर में 5 जून 1857 को विद्रोह
  265. 11:18हुआ जिसमें नाना साहेब ने लीडरशिप दी।
  266. 11:20नाना साहब पेशवा बाजीराव सेकंड के दत्तक
  267. 11:22पुत्र थे और उनकी मदद की तात्या टोपे ने।
  268. 11:25लखनऊ में 4 जून 1857 को बेगम हजरत महल ने
  269. 11:28अपने पुत्र बृजिस कादिर को नवाब घोषित
  270. 11:31किया। झांसी में रानी लक्ष्मीबाई ने नीता
  271. 11:33से लड़ाई की और जनरल हग्रोस के साथ युद्ध
  272. 11:35में वीरगति को प्राप्त हुई। इतना तेजी से
  273. 11:38रिवॉर्ड का फैलना एकदम से नहीं हुआ था। कई
  274. 11:41हिस्टोरियंस कहते हैं कि यह वर्षों की
  275. 11:43यात्रा और प्लानिंग का नतीजा था। कुछ
  276. 11:45हिस्टोरियंस के मुताबिक अजीमुल्ला खान ने
  277. 11:47बिठनूर यानी कि कानपुर में नाना साहब के
  278. 11:50साथ मिलकर रिवॉर्ड की प्लानिंग बनाई थी और
  279. 11:5231 मई 1857 को क्रांति का दिन फिक्स किया
  280. 11:55गया था। क्रांति के सिंबल के रूप में लोटस
  281. 11:59फ्लावर और रोटी का इस्तेमाल किया गया। यह
  282. 12:01क्रांति नॉर्थ इंडिया में बड़े स्तर पर तो
  283. 12:03फैली लेकिन प्लानिंग और लीडरशिप की कमी के
  284. 12:06कारण ब्रिटिश ऑफिसर्स ने इसे दबा दिया। इस
  285. 12:08रिवॉर्ड की लीडरशिप के बारे में जॉन
  286. 12:10लॉरेंस ने कहा था अगर इनमें से एक भी लीडर
  287. 12:13में एबिलिटी होती तो हम हमेशा के लिए हार
  288. 12:16जाते। बहादुर शाह सफर जो कि 82 वर्षीय
  289. 12:19वृद्ध थे उन्होंने 20 सितंबर 1857 को
  290. 12:22लेफ्टिनेंट विलियम हटसन के सामने हुमायूं
  291. 12:24स्टॉम में सरेंडर कर दिया। हटसन ने बहादुर
  292. 12:27शाह के दोनों बेटों को उनके सामने ही गोली
  293. 12:29मार दी और उनके सर को दिल्ली के दरवाजे पर
  294. 12:31लटका दिया। बहादुर शाह जफर को रंगून भेज
  295. 12:34दिया गया जहां उनकी मौत हो गई। उनकी कब्र
  296. 12:37पर लिखे शब्द थे कितना है बदनसीब जफर दफन
  297. 12:41के लिए दो गज जमीन भी ना मिली कुएं यार
  298. 12:43में यहां कुए यार का मतलब है कि अपनी
  299. 12:46जन्मभूमि में अपनी होमलैंड में बेगम हजरत
  300. 12:49महल भी अंत में हार गई और नेपाल चली गई
  301. 12:52आरा के कुंवर सिंह ने भी वीफा से लड़ाई की
  302. 12:54लेकिन युद्ध में घायल होने के बाद उनकी भी
  303. 12:56डेथ हो गई। फैजाबाद में थे मौलवी अहमद
  304. 12:58उल्लाह। उन्होंने विद्रोह की अगुवाई की
  305. 13:01लेकिन उन्हें भी 5 जून 1858 को शहीद कर
  306. 13:03दिया गया। यह रिवोल्ट तो दबा दिया गया
  307. 13:06लेकिन इसका अपना ऐतिहासिक महत्व बस आप इस
  308. 13:08बात से समझ सकते हैं कि वीर सावरकर ने इसे
  309. 13:11द फर्स्ट वॉर ऑफ इंडियन इंडिपेंडेंस का
  310. 13:14नाम दिया। अब बात करते हैं कि 1857 के
  311. 13:16रिवॉर्ड के रिजल्ट के बारे में। रिवॉर्ड
  312. 13:19सक्सेसफुल तो नहीं हुआ लेकिन यह जरूर
  313. 13:21साबित कर दिया कि ईस्ट इंडिया कंपनी का
  314. 13:23राज इंडियंस के लिए अत्याचारी और
  315. 13:25एक्सप्लॉयटेटिव है। इसके बाद ब्रिटिश
  316. 13:27गवर्नमेंट ने अपनी पॉलिसी में बड़ा बदलाव
  317. 13:29किया। ईस्ट इंडिया कंपनी का रूल खत्म कर
  318. 13:31दिया गया और इंडिया का गवर्नेंस
  319. 13:34डायरेक्टली ब्रिटिश क्राउन के अंडर में आ
  320. 13:36गया। अब इंडिया पूर्ण रूप से ब्रिटेन के
  321. 13:39कंट्रोल में था। ब्रिटिशर्स का यह सफर एक
  322. 13:42ऐसा सफर था जो उन्होंने ट्रेड से शुरू
  323. 13:44किया था। लेकिन धीरे-धीरे वह राजनीति और
  324. 13:46शासन तक पहुंच गए। इंडिया में इनके पहले
  325. 13:48भी फॉरेन इनवेडर्स आए थे। लेकिन सभी
  326. 13:51इनवेडर्स ने इंडियन कल्चर को अडॉप्ट कर
  327. 13:53लिया था और यहीं के हो गए थे। पर
  328. 13:55ब्रिटिशर्स सिर्फ लूट खसूट के लिए आए थे।
  329. 13:58वो इंडिया की वेल्थ ब्रिटेन भेज रहे थे
  330. 14:00जिसे हम कहते हैं ड्रेन ऑफ वेल्थ।
  331. 14:02उन्होंने अपना कल्चर इंडियंस पर थोपना भी
  332. 14:04शुरू कर दिया। इंडिया में उस समय साइंस,
  333. 14:07टेक्नोलॉजी, रिलीजन और नॉलेज इन सब का
  334. 14:09लेवल बहुत नीचे जा चुका था। जबकि यूरोप
  335. 14:12में यह पीरियड रिलेसा यानी पुनर्जागरण का
  336. 14:14था। ऐसे समय में कुछ बंगाली
  337. 14:16इंटेलेक्चुअल्स जो वेस्टर्न एजुकेशन से
  338. 14:18परिचित थे, उन्होंने इंडिया में फैली हुई
  339. 14:21बुराइयों को दूर करने की कोशिश की। इन
  340. 14:23इंटेलेक्चुअल्स में सबसे प्रमुख नाम आता
  341. 14:24है राजा राममोहन रॉय का। जिन्हें कहा जाता
  342. 14:27है फादर ऑफ मॉडर्न इंडिया। राजा राममोहन
  343. 14:30रॉय का जन्म हुआ था 22 मई 1772 को बंगाल
  344. 14:33के हुगली डिस्ट्रिक्ट के राधागर गांव में।
  345. 14:35उन्हें कई भाषाओं में प्रवीणता थी। वो
  346. 14:37इंग्लिश, फ्रेंच, लैटिन, ग्रीक और हब्रू
  347. 14:39जैसे लैंग्वेज को फ्लुएंटली रिकवर बोल
  348. 14:42सकते थे। रिलीजियस रिफॉर्म के लिए
  349. 14:44उन्होंने वेदों के आधार पर मूर्ति पूजा को
  350. 14:46गलत साबित किया और अंधविश्वासों को दूर
  351. 14:48करने के लिए आत्मसभा का गठन किया। फिर
  352. 14:501829 में उन्होंने ब्रह्मो समाज की
  353. 14:52स्थापना की जो एक सोशल रिलीजियस रिफॉर्म
  354. 14:54मूवमेंट था। उन्होंने इंडियंस को अधिकाधिक
  355. 14:57फ्रीडम देने की मांग की और वेस्टर्न
  356. 14:58एजुकेशन का समर्थन किया। वहीं वेस्टर्न
  357. 15:01इंडिया में भी कुछ समाज सुधारक उठे जैसे
  358. 15:03महादेव गोविंद रानाडे और डॉ. आत्माराम
  359. 15:06पांडुरंग। इन दोनों ने 1867 में बॉम्बे
  360. 15:09में प्रार्थना समाज की स्थापना की। रानाडे
  361. 15:11ने वुमेन एजुकेशन को प्रमोट किया। चाइल्ड
  362. 15:14मैरिज और वुमेन डिपेंडेंसी के विरुद्ध
  363. 15:15आवाज उठाई। विडो मैरिज को समर्थन किया और
  364. 15:18डीके करवे के सपोर्ट से 1867 में विधवा
  365. 15:21आश्रम संघ की स्थापना की। अब तक जितने भी
  366. 15:24सोशल रिफॉर्मर्स आए उनमें से एक और महान
  367. 15:26व्यक्ति थे स्वामी दयानंद सरस्वती जिन्हें
  368. 15:28पहले स्वामी पूर्णानंद ने यह नाम दिया था।
  369. 15:31स्वामी दयानंद सरस्वती ने 10 अप्रैल 1875
  370. 15:34को बॉम्बे में आर्य समाज की स्थापना की।
  371. 15:36उनका कहना था कि आर्यन सुपीरियर हैं और
  372. 15:38वेदाज़ में ईश्वरीय ज्ञान है और भारत की
  373. 15:41भूमि एक होली लैंड है। आर्य समाज का
  374. 15:43उद्देश्य था वैदिक रिलजन को उसके प्योर
  375. 15:46फॉर्म में स्थापित करना और वेस्टर्न कल्चर
  376. 15:48के इन्फ्लुएंस को कम करना। उन्होंने अपने
  377. 15:50लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वेदों की
  378. 15:52ओर लौट चलो का स्लोगन दिया और 1868 में
  379. 15:55उन्होंने पाखंड खंडनी पताका यानी फ्लैग
  380. 15:58दैट डिमोलिशस हिपोक्रेसी लहराया। अब हम
  381. 16:00बात करते हैं एक ऐसे व्यक्ति की जिन्होंने
  382. 16:02केवल इंडिया बल्कि पूरे विश्व को यह बताया
  383. 16:05कि इंडिया का कल्चर और रिलीजन दुनिया का
  384. 16:07सबसे पुराना और श्रेष्ठ है। उनका नाम था
  385. 16:10स्वामी विवेकानंद। वो रामकृष्ण परमहंस के
  386. 16:12शिष्य थे। 1893 में स्वामी विवेकानंद ने
  387. 16:15अमेरिका के शिकागो में आयोजित फर्स्ट
  388. 16:17वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ रिलिजेंस में
  389. 16:19इंडिया को रिप्रेजेंट किया। उनकी स्पीच के
  390. 16:21बारे में न्यूयॉर्क हेराल्ड न्यूज़पेपर ने
  391. 16:23लिखा उन्हें सुनने के बाद हमें महसूस होता
  392. 16:25है कि ऐसे ज्ञान से संपन्न देश में अपने
  393. 16:28धर्म प्रचारक भेजना कितना मूर्खतापूर्ण
  394. 16:31कार्य था। इसी समय इंडिया के कई
  395. 16:33इंस्टीट्यूशन भी उठने लगे थे। उनमें से एक
  396. 16:35था बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी जिसका गठन
  397. 16:371916 में मदन मोहन मालवीय के प्रयास से
  398. 16:40हुआ था। चलिए अब कुछ और रिफॉर्म्स की बात
  399. 16:42करते हैं। 1857 के रिवोल्ट में मुस्लिम्स
  400. 16:45ने ज्यादा पार्टिसिपेशन दिखाया था। जिसके
  401. 16:47बाद ब्रिटिश गवर्नमेंट ने मुस्लिम्स से
  402. 16:48दूर रहना शुरू कर दिया। इसी वजह से
  403. 16:50मुस्लिम्स का इकोनॉमिक और सोशल स्टेटस
  404. 16:52गिरने लगा। इस सिचुएशन को सुधारने के लिए
  405. 16:54आए सर सैयद अहमद खान। उन्होंने इस्लाम में
  406. 16:57रिफॉर्म्स की कोशिश की और मुस्लिम्स को
  407. 16:59मॉडर्न एजुकेशन की तरफ अग्रसर किया। सर
  408. 17:01सैयद अहमद खान ने मुस्लिम्स को मॉडर्न
  409. 17:03एजुकेशन देने के लिए 1875 में मोहम्मदन
  410. 17:06एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना की जो
  411. 17:09बाद में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के
  412. 17:11रूप में विकसित हुआ। वो वेस्टर्न साइंस और
  413. 17:13फिलॉसफी के सपोर्टर थे और उन्होंने हिंदू
  414. 17:15मुस्लिम यूनिटी पर भी जोर दिया। पर अब बात
  415. 17:17करते हैं नेशनलिज्म के सर्च की। 19
  416. 17:19सेंचुरी के अंत तक इंडिया में नेशनल
  417. 17:21कॉन्शियसनेस जग चुकी थी। इसका मुख्य
  418. 17:24केंद्र था बंगाल क्योंकि वहां सबसे पहले
  419. 17:27मॉडर्न एजुकेशन और प्रिंट कल्चर का प्रभाव
  420. 17:29पड़ा था। लेकिन इसी बंगाल को तोड़ने की
  421. 17:32कोशिश की लॉर्ड कर्जन ने। 20 जुलाई 1905
  422. 17:34को उसने पार्टीशन ऑफ बंगाल का अनाउंसमेंट
  423. 17:36किया जो 16 अक्टूबर 1905 से लागू हुआ।
  424. 17:39पार्टीशन में हिंदू मुस्लिम पॉपुलेशन के
  425. 17:41बेस पर किया गया था। इसका लोगों ने पुरजोर
  426. 17:44विरोध किया। हिंदू और मुस्लिम ने एक दूसरे
  427. 17:46के हाथ में राखी बांधकर एकता के संदेश
  428. 17:48दिए। पूरे बंगाल ही नहीं बल्कि पूरे देश
  429. 17:50में 16 अक्टूबर को शोक दिवस के रूप में
  430. 17:52मनाया गया। साथ ही पूरे देश में स्वदेशी
  431. 17:54मूवमेंट भी चलाया गया। इसी दौरान 30
  432. 17:57दिसंबर 1906 को ढाका में मुस्लिम लीग की
  433. 18:00स्थापना हुई जिसका प्रस्ताव दिया था नवाब
  434. 18:02सलीमुल्लाह ने। 1907 तक इंडियन नेशनल
  435. 18:05कांग्रेस के अंदर भी लिबरल्स यानी कि नरम
  436. 18:07दल और एक्सट्रीमिस्ट यानी कि गरम दल के
  437. 18:10बीच में जो मतभेद थे वह तेजी से बढ़ने लगे
  438. 18:12थे। 1907 का सूरत सेशन में प्रेसिडेंट के
  439. 18:15चुनाव को लेकर कांग्रेस में फूट पड़ गई और
  440. 18:17उसके बाद 1909 में ब्रिटिश इंडियन
  441. 18:19गवर्नमेंट ने एक रिफॉर्म लाई जिसे कहते
  442. 18:22हैं मोले मिंटो रिफॉर्म्स जिसमें
  443. 18:24मुस्लिम्स को सेपरेट इलेक्ट्रोरेट्स दिया
  444. 18:26गया। इसका मतलब मुस्लिम्स सिर्फ मुस्लिम
  445. 18:29कैंडिडेट्स को वोट देंगे। यह हिंदू
  446. 18:31मुस्लिम यूनिटी के बीच और दूरी बनाने की
  447. 18:33साजिश थी जिसे कम्युनल इलेक्टोरेट्स के
  448. 18:35नाम से जाना जाता है। जैसा कि उम्मीद थी
  449. 18:37इसका पूरा देश में पुरजोर विरोध भी हुआ।
  450. 18:40बाद में ब्रिटिशर्स ने इसे ध्यान से हटाने
  451. 18:41के लिए और स्वदेशी मूवमेंट का प्रेशर में
  452. 18:44दिसंबर 1911 में पार्टीशन ऑफ बंगाल को
  453. 18:46कैंसिल कर दिया। तब तक 1914 भी आ गया और
  454. 18:49दुनिया में फर्स्ट वर्ल्ड वॉर शुरू हो
  455. 18:51गया। कांग्रेस के लिबरल लीडर्स ने ब्रिटिश
  456. 18:53गवर्नमेंट को सपोर्ट करने का डिसीजन लिया।
  457. 18:55उन्हें उम्मीद थी कि ब्रिटिश लोग उसके
  458. 18:57बदले स्वराज या फिर होम रूल की उनकी मांग
  459. 18:59मान लेंगे। इसी दौरान 1916 से लखनऊ सेशन
  460. 19:02में मॉडरेट्स और एक्सट्रीमिस्ट एक बार फिर
  461. 19:05से एक हो गए। इसी सेशन में कांग्रेस और
  462. 19:07मुस्लिम लीग के बीच भी एक समझौता हुआ जिसे
  463. 19:09लखनऊ पैक्ट के नाम से जाना जाता है। उधर
  464. 19:12होम रूल की डिमांड को जोर शोर से उठाने के
  465. 19:14लिए एनी बेसेंट और बाल गंगाधर तिलक ने
  466. 19:17इंडिया के अलग-अलग पार्ट्स में होम रूल
  467. 19:19लीग्स की स्थापना करना शुरू कर दिया था।
  468. 19:21लेकिन इन सब एफर्ट्स के बावजूद भी 1919
  469. 19:24में ब्रिटिश इंडियन गवर्नमेंट ने जो
  470. 19:26मॉनटेक चेम्सफोर्ड रिफॉर्म्स लागू कर दिया
  471. 19:29जिसमें होम रूल का कोई भी जिक्र तक नहीं
  472. 19:31था और ना ही भारत को सेल्फ गवर्नमेंट देने
  473. 19:34की बात की गई थी। इससे कांग्रेस के लीडर्स
  474. 19:36में इतनी निराशा हुई कि बाल गंगाधर तिलक
  475. 19:39ने इन रिफॉर्म्स को बिना सूरज के सवेरा
  476. 19:42यानी अ मॉर्निंग विदाउट डॉन तक कह डाला।
  477. 19:45खैर, इसी समय भारत की पॉलिटिक्स में
  478. 19:47महात्मा गांधी की भी एंट्री हो रही थी। 9
  479. 19:49जनवरी 1915 को गांधी जी साउथ अफ्रीका से
  480. 19:52भारत वापस आए और कुछ समय तक उन्होंने पूरे
  481. 19:54कंट्री में ट्रैवल करके इंडिया में
  482. 19:56सिचुएशंस को ऑब्जर्व करना शुरू कर दिया।
  483. 19:58उस समय फर्स्ट वर्ल्ड वॉर चल रहा था और
  484. 20:00गांधी जी ने इस वॉर में ब्रिटिशर्स की मदद
  485. 20:02की थी। जिसके लिए ब्रिटिश गवर्नमेंट ने
  486. 20:04उन्हें कैसर-ए-ह हिंद के टाइटल से नवाजा
  487. 20:06था। देश के पॉलिटिक्स में पार्टिसिपेट
  488. 20:08करने के साथ ही 1917 से 1918 के बीच गांधी
  489. 20:11जी ने तीन आंदोलन की अगुवाई की। पहला था
  490. 20:14चंपारण सत्याग्रह जिसकी शुरुआत 1917 में
  491. 20:16हुई। इस सत्याग्रह के दौरान गांधी जी ने
  492. 20:19पहली बार देश में सत्याग्रह का प्रयोग
  493. 20:21किया। दूसरा था खेड़ा सत्याग्रह जिसमें
  494. 20:23गुजरात के किसानों के लिए ऑर्गेनाइज किया
  495. 20:25गया था और तीसरा था अहमदाबाद मिल स्ट्राइक
  496. 20:28जहां गांधी जी ने स्ट्राइक करके वहां के
  497. 20:30मिल वर्कर्स को 35% बोनस दिलवाया। ब्रिटिश
  498. 20:32इंडियन गवर्नमेंट के अगेंस्ट गांधी जी की
  499. 20:34ये छोटी-छोटी लेकिन इंपॉर्टेंट विक्ट्रीज
  500. 20:36ने इंडियंस को अंदर से बहुत मोटिवेट किया।
  501. 20:39लेकिन दूसरी तरफ इंडिया में खासकर इंडियन
  502. 20:42यूथ में रेवोल्यूशनरी टेंडेंसीज का भी
  503. 20:44स्केल बढ़ने लग रहा था। जाहिर सी बात थी
  504. 20:47कि ब्रिटिश इन सब एक्टिविटीज से डरने लग
  505. 20:49रही थी। और फिर इन्हीं एक्टिविटीज को
  506. 20:51रोकने के लिए ब्रिटिश गवर्नमेंट ने सिडनी
  507. 20:53रलेट की प्रेसिडेंटशिप में एक कमेटी बनाई
  508. 20:56जिसने एक भयंकर ड्रैकोनियन कानून रिकमेंड
  509. 20:59किया जिसे कहा गया रेलेट एक्ट। इसके तहत
  510. 21:02गवर्नमेंट किसी भी व्यक्ति को बिना
  511. 21:03ट्रायल, बिना अपील और बिना वकील के एक
  512. 21:06अनसर्टेन टाइम पीरियड के लिए जेल में रख
  513. 21:08सकती थी। गांधी जी ने इसका तीव्र विरोध
  514. 21:10किया और उसके खिलाफ सत्याग्रह की घोषणा कर
  515. 21:12दी। जगह-जगह प्रोटेस्ट होने लगे। गांधी जी
  516. 21:15को भी अरेस्ट कर लिया गया। इसी
  517. 21:17कॉन्टेक्स्ट में हुआ इंडिया के इतिहास का
  518. 21:19एक सबसे दर्दनाक इंसिडेंट। जालियांवाला
  519. 21:22बाग हत्याकांड। 13 अप्रैल 1919 बैसाखी के
  520. 21:25दिन अमृतसर के जालियांवाला बाग में लोग
  521. 21:27शांति से प्रोटेस्ट कर रहे थे। यह स्थान
  522. 21:29चारों तरफ से ऊंची दीवारों से घिरा हुआ था
  523. 21:32और अंदर जाने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता
  524. 21:33था। इसी रास्ते पर जनरल डायर अपनी
  525. 21:36मिलिट्री के साथ खड़ा हो गया और बिना किसी
  526. 21:38चेतावनी के फायरिंग का आर्डर दे दिया।
  527. 21:40जनरल डायर की बिना वार्निंग वाली फायरिंग
  528. 21:42में हजारों लोग मारे गए और कई घायल हुए।
  529. 21:45लोग भागने के लिए कहीं जा भी नहीं पाए
  530. 21:47क्योंकि एक ही रास्ता था और वहां भी आर्म
  531. 21:50सोल्जर्स खड़े थे। यह हत्याकांड सिर्फ
  532. 21:52पंजाब या अमृतसर तक सीमित नहीं रहा। पूरे
  533. 21:54भारत में गुस्सा फैल गया। रविंद्र नाथ
  534. 21:56टैगोर ने नाइट की उपाधि वापस कर दी और
  535. 21:58गांधी जी ने भी ब्रिटिश सरकार के खिलाफ
  536. 22:00नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट का ऐलान कर दिया। यह
  537. 22:03मूवमेंट एक पीसफुल मूवमेंट था जिसमें
  538. 22:05गवर्नमेंट स्कूल्स और कॉलेजेस का बॉयकॉट,
  539. 22:07फॉरेन कपड़ों का बहिष्कार, इंडियन
  540. 22:09इंस्टीट्यूशन और खादी के समर्थन और
  541. 22:11टाइटल्स जैसे कि सर और कैसर-ए-ह हिंद का
  542. 22:13बॉयकॉट शामिल था। लेकिन वो कहते हैं ना कि
  543. 22:16जैसा सोचा जाता है वैसा नहीं होता। तो नॉन
  544. 22:19कोऑपरेशन मूवमेंट के साथ भी कुछ ऐसा ही
  545. 22:20हुआ। दरअसल 1922 में यूनाइटेड प्रोविंस के
  546. 22:22चौरीचौरा में एक वायलेंट इंसिडेंट हो गया।
  547. 22:25यहां एक इंसिडेंट में एक वायलेंट मॉब ने
  548. 22:27पुलिस स्टेशन जला दिया। नॉन कोऑपरेशन में
  549. 22:30यह वायलस गांधी जी को मंजूर नहीं था और
  550. 22:32उन्होंने तुरंत इस मूवमेंट को रिटर्न कर
  551. 22:34दिया क्योंकि वह अहिंसा के पक्षधार थे तो
  552. 22:37इसलिए उन्होंने ऐसा फैसला लिया लेकिन यहां
  553. 22:40से इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल में एक नए
  554. 22:42चैप्टर की शुरुआत हुई मास बेस्ड नेशनलिज्म
  555. 22:45की और गांधी जी इसके सेंट्रल फिगर बनकर
  556. 22:48उभरे। दोस्तों महात्मा गांधी के साथ यहां
  557. 22:51एक और मास लीडर का इमरजेंस हो रहा था
  558. 22:53जिनका नाम था सुभाष चंद्र बोस। इस समय यह
  559. 22:56लंदन से इंडियन सिविल सर्विज का एग्जाम
  560. 22:58पास करके जस्ट अपने देश में उतरे ही थे कि
  561. 23:01देश की हालत देखकर उन्हें ब्रिटिश
  562. 23:03गवर्नमेंट की नौकरी करना मंजूर ना हुआ और
  563. 23:05उन्होंने सर्विस ज्वाइन करने से पहले ही
  564. 23:07सर्विस छोड़ दिया। उधर गांधी जी 1922 से
  565. 23:10लेकर 1930 तक पॉलिटिक्स में कुछ खास बिजी
  566. 23:12नहीं थे और उन्होंने अपना समय
  567. 23:14कंस्ट्रक्टिव प्रोग्राम्स में जैसे कि
  568. 23:16चरखा चलाना, देश के लोगों को समझाना इन
  569. 23:18जैसे कामों में लगाया। लेकिन फिर 1928 में
  570. 23:21पूरे देश में साइमन कमीशन का विरोध होना
  571. 23:23शुरू हो गया था। गांधी जी ने भी इसमें
  572. 23:25पार्टिसिपेट किया और नेशनल पॉलिटिक्स में
  573. 23:27एक बार फिर से एक्टिव हो गए। 1929 का
  574. 23:30लाहौर सेशन में कांग्रेस ने कंप्लीट
  575. 23:32इंडिपेंडेंस यानी कि पूर्ण स्वराज को अपना
  576. 23:34गोल अनाउंस किया और गांधी जी को इसके लिए
  577. 23:36मूवमेंट ऑर्गेनाइज करने की जिम्मेदारी
  578. 23:38सौंपी। गांधी जी ने इसके लिए सिविल
  579. 23:40डिसबिडियंस मूवमेंट की घोषणा की। लेकिन
  580. 23:42इससे पहले उन्होंने ब्रिटिश गवर्नमेंट के
  581. 23:44अगेंस्ट दांडी मार्च की शुरुआत की जो कि
  582. 23:4712 मार्च 1930 से लेकर 6 अप्रैल 1930 तक
  583. 23:50चली। ब्रिटिश गवर्नमेंट नहीं चाहती थी कि
  584. 23:52इस समय कोई बड़ा नेशनल लेवल का कोई
  585. 23:54मूवमेंट हो और इसीलिए उन्होंने गांधी जी
  586. 23:57से समझौता किया जिसे हम गांधी इरविन पैक्ट
  587. 23:59कहते हैं। इसमें तीन चीजों पर सहमति बनी।
  588. 24:02पहला कांग्रेस सिविल डिसबिडनेस मूवमेंट को
  589. 24:05विड्रॉ करेगी। दूसरा ब्रिटिश पॉलिटिकल
  590. 24:07प्रिजनर्स को छोड़ेंगे और तीसरा सॉर्ट
  591. 24:10बनाने की छूट मिलेगी। और इसी पैक के तहत
  592. 24:12गांधी जी सेकंड राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में
  593. 24:14पार्टिसिपेट करने लंदन गए। लेकिन वहां कोई
  594. 24:17मेजर एग्रीमेंट नहीं हुआ। क्योंकि गांधी
  595. 24:18जी और कांग्रेस दलित और माइनॉरिटी
  596. 24:20इलेक्टोरेट्स को मानने के लिए राजी ही
  597. 24:22नहीं थे। लंदन से लौटने के बाद गांधी जी
  598. 24:25ने दोबारा से डिसमिनेस मूवमेंट स्टार्ट
  599. 24:26किया। लेकिन ब्रिटिश ने तुरंत उन्हें
  600. 24:28अरेस्ट कर दिया। इसी साल कम्युनल अवार्ड
  601. 24:30के थ्रू मुस्लिम्स के साथ-साथ सिखों,
  602. 24:33क्रिश्चियंस और दलितों को भी अलग
  603. 24:35इलेक्ट्रोरेट दिया गया। जिसके खिलाफ गांधी
  604. 24:37जी ने फास्ट एंड टू डेथ किया। इससे बचने
  605. 24:40के लिए डॉ. अंबेडकर से पूना पैक्ट हुआ
  606. 24:42जिसमें दलित को रिजर्व सीट्स तो मिली
  607. 24:45लेकिन अलग इलेक्ट्रोरेट नहीं मिला। 1934
  608. 24:48तक मूवमेंट वीक पड़ गया था और इसीलिए
  609. 24:50गांधी जी ने ऑफिशियली सिविल डिसोबिडिएंट्स
  610. 24:52मूवमेंट को विड्रॉ कर दिया। उसके बाद
  611. 24:53उन्होंने कांग्रेस से रिजाइन कर दिया
  612. 24:55लेकिन सोशल वर्क जारी रखा। उधर 1938 में
  613. 24:58कांग्रेस के हरपुरा सेशन में सुभाष बोस
  614. 25:00कांग्रेस के प्रेसिडेंट बने। लेकिन फिर
  615. 25:021939 के त्रिपुरी सेशन में उनका गांधी जी
  616. 25:05से कांग्रेस प्रेसिडेंट के इलेक्शन को
  617. 25:07लेकर खुला टकराव हो गया। वैसे तो गांधी जी
  618. 25:10के साथ उनकी अनबन कोई नई बात नहीं थी।
  619. 25:12लेकिन 1939 के त्रिपुरी सेशन में गांधी जी
  620. 25:15के इस बात से कि पता भी कि हार उनकी
  621. 25:18पर्सनल हार है से वह बहुत दुखी हुए और थक
  622. 25:21गए फाइनली बोस ने कांग्रेस छोड़ दिया और
  623. 25:23एक नया पॉलिटिकल पार्टी फॉरवर्ड ब्लॉक
  624. 25:25बनाया। ब्रिटिश उन पर नजर रखे हुए थे और
  625. 25:28साथ ही साथ इधर वर्ल्ड वॉर भी चालू हो गया
  626. 25:30था। बोस ने रूप बदलकर से निकलकर
  627. 25:33अफगानिस्तान पहुंचे। यूएसएसआर गए और फिर
  628. 25:36जर्मनी पहुंच गए। वहां उन्होंने हिटलर से
  629. 25:38मिलकर सपोर्ट मांगा। लेकिन हिटलर की नाजी
  630. 25:41पार्टी ने उन्हें सपोर्ट देने से मना कर
  631. 25:42दिया। लेकिन सुभाष बोस ने हार नहीं मानी
  632. 25:45और उन्होंने जापान से मदद मांगने का मन
  633. 25:46बना लिया। फिर वह जापान गए। जहां उनका
  634. 25:49असली मिशन स्टार्ट हुआ। वहां एकिस्टिंग
  635. 25:51इंडियन सोल्जर से मिलके बनाई गई इंडियन
  636. 25:54नेशनल आर्मी। इंडियन नेशनल आर्मी यानी
  637. 25:56आईएनए ने जापानीज फोर्सेस के साथ मिलकर
  638. 25:58ब्रिटिश फोर्सेस के खिलाफ इंफाल और कोहिमा
  639. 26:00में लड़ाई लड़ी। हालांकि मिलिट्री
  640. 26:02विक्ट्री नहीं मिली लेकिन मोरल विक्ट्री
  641. 26:05जबरदस्त थी। आईएनए ने मोरांग यानी मणिपुर
  642. 26:08में तिरंगा लहरा दिया। लेकिन नागासाकी और
  643. 26:10हिरोशिष्मा में एटॉमिक बम से अटैक होने के
  644. 26:12बाद जापान ने सरेंडर कर दिया जिसका
  645. 26:14इंपैक्ट आईए पर भी पड़ा और उन्हें भी
  646. 26:16ब्रिटिश फोर्सेस के सामने सरेंडर करना
  647. 26:18पड़ा। आईए के लीडर्स को अरेस्ट कर लिया
  648. 26:20गया और उनके अगेंस्ट रेडफोर्ड में सडिशन
  649. 26:23का मुकदमा चलाया गया। यह पूरे देश के लिए
  650. 26:25इमोशनली एक टिपिंग पॉइंट था। इससे पूरे
  651. 26:27भारत में इमोशनल एक्सप्लोजन हो गया।
  652. 26:29स्टूडेंट्स वर्कर्स इवन ब्रिटिश इंडियन
  653. 26:31आर्मी के जवान सभी इस सिमिलेशन के अगेंस्ट
  654. 26:33प्रोटेस्ट में उतर गए। इसी दौरान अगस्त
  655. 26:361945 को जब सुभाष बोस एक प्राइवेट प्लेन
  656. 26:38से तैवान जा रहे थे तो उनका वह प्लेन
  657. 26:40मिस्टीरियसली क्रैश हो गया और इस क्रैश
  658. 26:43में उनकी मौत हो गई। उधर नॉन कोऑपरेशन
  659. 26:45मूवमेंट के बाद इंडियन पॉलिटिक्स में एक
  660. 26:46नया मुद्दा उभर कर आया और वो मुद्दा था
  661. 26:48कम्युनलिज्म और एक सेपरेट मुस्लिम स्टेट
  662. 26:51की डिमांड। दरअसल 1933 से 1935 के बीच
  663. 26:54कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले एक
  664. 26:56स्टूडेंट चौधरी रहमत अली ने अपने एक प्लेट
  665. 26:59नाउ और नेवर में पहली बार पाकिस्तान टर्म
  666. 27:01का प्रयोग किया। और उनके इस नए टर्म के
  667. 27:04मुताबिक पी से पंजाब, ए से अफगानिया यानी
  668. 27:06कि नॉर्थ वेस्ट इंटिया प्रोविंस, के से
  669. 27:08कश्मीर, एस से सिंध और तान से बलूचिस्तान
  670. 27:11था। 1937 के इलेक्शंस में मुस्लिम लीग की
  671. 27:14करारी हार हुई और जिन्ना ने कांग्रेस पर
  672. 27:16हिंदू राष्ट्र बनाने का आरोप लगाया। इस
  673. 27:18आरोप के पीछे एक मकसद था पाकिस्तान के लिए
  674. 27:21एक स्ट्रांग पब्लिक ओपिनियन बनाना। इसके
  675. 27:23बाद 22- 23 मार्च 1940 के मुस्लिम लीग
  676. 27:26सेशन में एक प्रपोजल पास हुआ जिसमें
  677. 27:27सेपरेट मुस्लिम स्टेट की मांग की गई जिसे
  678. 27:30हम कहते हैं लाहौर रेज़ोल्यूशन या
  679. 27:32पाकिस्तान रेज़ोल्यूशन। इस सेशन के
  680. 27:34प्रेसिडेंट थे स्वयं मोहम्मद अली जिन्ना।
  681. 27:36वहीं क्रिप्स मिशन 1942 ने भी
  682. 27:38इनडायरेक्टली पाकिस्तान की डिमांड को
  683. 27:40एक्सेप्ट कर लिया। इस प्रपोजल में कहा गया
  684. 27:42कि वॉर के बाद भारत को डोमिनियन स्टेटस
  685. 27:44दिया जाएगा और अगर कोई प्रोविंस चाहे तो
  686. 27:47अपना अलग कॉन्स्टिट्यूशन बना सकता है।
  687. 27:49क्रिप्स प्रपोजल के रिस्पांस में महात्मा
  688. 27:51गांधी ने इसे कहा कि यह एक पोस्ट डेटेड
  689. 27:54चेक है। वह भी एक बैंककरप्ट बैंक के नाम
  690. 27:56पे। ब्रिटिशर्स के यह प्रपोजल कांग्रेस ने
  691. 27:59रिजेक्ट कर दिए। तब गांधी जी ने क्विट
  692. 28:01इंडिया मूवमेंट का आवाह्वन किया। 14 जुलाई
  693. 28:041942 को वर्धा में कांग्रेस वर्किंग कमेटी
  694. 28:06की मीटिंग में यह प्रपोजल पास हो गया। और
  695. 28:09फिर 8 अगस्त 1942 को बॉम्बे के गोविलिया
  696. 28:12टैंक मैदान में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी
  697. 28:15के सेशन में इसे ऑफिशियली रेटिफाई किया
  698. 28:17गया। यहीं गांधी जी ने अपना प्रसिद्ध नारा
  699. 28:19दिया डू और डाई। इसके बाद ब्रिटिश
  700. 28:22गवर्नमेंट ने तुरंत इंडियन लीडर जिसमें
  701. 28:23गांधी जी, नेहरू जी और सरदार पटेल सभी
  702. 28:26शामिल थे। उन सबको अरेस्ट करवा दिया। देश
  703. 28:28भर में आंदोलन भड़क गया। रेल लाइन तोड़ना,
  704. 28:31डाकघर जलाना, टेलीग्राफ वायर काटना जैसे
  705. 28:33काम होने लगे। उधर बढ़ती वायलेंस के कारण
  706. 28:36ब्रिटिशर्स ने भी इस मूवमेंट को बहुत
  707. 28:38ब्रूटली क्रश किया। लेकिन साथ ही ब्रिटिश
  708. 28:40गवर्नमेंट को भी यह एहसास होने लगा था कि
  709. 28:42इंडिया में अब उनका राज ज्यादा दिन चलने
  710. 28:45वाला नहीं है। क्विट इंडिया मूवमेंट के
  711. 28:47तुरंत बाद 23 मार्च 1943 को मुस्लिम लीग
  712. 28:50ने पाकिस्तान डे मनाया और दिसंबर 1943 में
  713. 28:54जिन्ना ने ब्रिटिशर्स के लिए डिवाइड एंड
  714. 28:56क्विट का स्लोगन दिया। वहीं अक्टूबर 1943
  715. 28:59में लिदगो की जगह लॉर्ड वेवल नई इंडिया के
  716. 29:01नए वायसराॉय बने। उन्होंने सिचुएशन नॉर्मल
  717. 29:04करने की कोशिश की और कांग्रेस के लीडर को
  718. 29:06जेल से रिहा कर दिया। 14 जून 1945 को वेवल
  719. 29:09ने वेवल प्लान प्रपोज किया और शिमला में
  720. 29:11एक कॉन्फ्रेंस बुलाई। इस समय कांग्रेस के
  721. 29:14प्रेसिडेंट थे मौलाना अबुल कलाम आजाद।
  722. 29:16लेकिन इस कॉन्फ्रेंस में जिन्ना ने डिमांड
  723. 29:18किया कि मुस्लिम कम्युनिटी का
  724. 29:20रिप्रेजेंटेशन सिर्फ मुस्लिम लीग करे जो
  725. 29:23कांग्रेस को बिल्कुल मंजूर नहीं था। और
  726. 29:25ऐसा होता तो कांग्रेस के सभी मुस्लिम
  727. 29:27लीडर्स जैसे कि खान अब्दुल गफ्फार खान
  728. 29:29एग्जीक्यूटिव काउंसिल के बाहर हो जाते।
  729. 29:31इसी वजह से शिमला कॉन्फ्रेंस भी फेल हो
  730. 29:33गई। फरवरी 1946 में दूसरी तरफ रॉयल इंडियन
  731. 29:37नेवी ने भी रिवोट कर दिया। जिसमें सेलर्स
  732. 29:39ने फूड, डिस्क्रिमिनेशन और कंडीशंस को
  733. 29:41लेकर ब्रिटिशर्स के खिलाफ विद्रोह किया।
  734. 29:43ब्रिटिश गवर्नमेंट ने इस विद्रोह को दबाने
  735. 29:45के लिए एडमिरल गॉडफ्रे को भेजा। लेकिन
  736. 29:47सिचुएशन इतनी बिगड़ गई कि सरदार पटेल और
  737. 29:50जिन्ना को भी इंटरवीन करना पड़ा। इस
  738. 29:52इंसिडेंट ने ब्रिटिश को यह समझा दिया कि
  739. 29:54उनकी आर्म्ड फर्सेस भी अब लॉयल नहीं रही
  740. 29:56हैं। और इसी समय ब्रिटिश प्राइम मिनिस्टर
  741. 29:58क्रिमेंट एटले इन्होंने हाउस ऑफ कॉमर्स
  742. 30:01में कहा कि ब्रिटिश गवर्नमेंट विल
  743. 30:03ट्रांसफर पावर टू इंडियन हैंड्स नो लेटर
  744. 30:05देन जून 1948। यानी कि ब्रिटिश गवर्नमेंट
  745. 30:07जून 1948 से पहले ही इंडियंस को पावर
  746. 30:10ट्रांसफर कर देगी। लेकिन इंडिपेंडेंस से
  747. 30:12पहले इंडिया में हिंदू और मुस्लिम्स के
  748. 30:14बीच बढ़ती डिस्प्यूट को सॉल्व करना बहुत
  749. 30:16जरूरी था। इसके लिए ब्रिटिश गवर्नमेंट ने
  750. 30:18लॉर्ड माउंटबेटन को इंडिया का नया
  751. 30:19वायसराॉय बनाया। लॉर्ड माउंटबेटन ने थर्ड
  752. 30:22जून 1947 को एक प्रपोजल रखा। इस प्रपोजल
  753. 30:26के अनुसार भारत को दो हिस्सों में बांटा
  754. 30:28जाएगा इंडिया और पाकिस्तान। और पावर
  755. 30:30ट्रांसफर जून 1948 की बजाय जल्दी होगी।
  756. 30:34यानी कि 15 अगस्त 1947 को ही कर दी जाएगी।
  757. 30:36और इस तरीके से 15 अगस्त 1947 को हमारा
  758. 30:39देश 200 सालों की लंबी गुलामी के बाद
  759. 30:42ब्रिटिश कॉलोनियल रूल से आजाद हो गया।
  760. 30:45उम्मीद करता हूं कि आपको यह वीडियो पसंद
  761. 30:46आया होगा। मिलते हैं आपसे नेक्स्ट वीडियो

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