Revision of Modern Indian History for UPSC in 30 Minutes | SMART Revision | UPSC 2025 — Transcript
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- 0:00वेलकम टू पीडब्ल्यू ओनली आईएस। मॉडर्न
- 0:03हिस्ट्री सिर्फ पास को जानने की बात नहीं
- 0:06बल्कि यह वो कथा है जो हमें बताता है कि
- 0:08किस तरीके से कुछ फैसले, कुछ नीतियां, कुछ
- 0:12लोगों की खोखली सोच कैसे एक प्रोस्पेरस
- 0:15देश को सालों तक लूट सकता है, एक्सप्लाइट
- 0:18कर सकता है और सदियों के लिए पीछे धकेल
- 0:20सकता है।
- 0:24हम बात कर रहे हैं मॉडर्न इंडियन हिस्ट्री
- 0:25की जिसमें ब्रिटिशर्स ने अपने से 20 गुना
- 0:28ज्यादा बड़े देश पर 200 सालों से भी
- 0:30ज्यादा समय तक रूल किया। दोस्तों जब हम
- 0:33भारत के इतिहास में मॉडर्न इंडिया की बात
- 0:35करते हैं ना तो यह सिर्फ अंग्रेजों के आने
- 0:37और जाने की कहानी नहीं है बल्कि ये वो दौर
- 0:39है जहां पर रेजिस्टेंस रिफॉर्म और रिनेसा
- 0:42ये तीनों पैरेलल चलते हैं। यह वो दौर है
- 0:45जहां पर भारत जैसे प्रोस्पेरस देश को
- 0:47अंग्रेजों ने बाजार बना दिया। यह वो दौर
- 0:50है जहां पर हमें लैब समझ के हमारे ऊपर
- 0:52तरह-तरह के एक्सपेरिमेंट्स किए गए। यह वो
- 0:55दौर है जहां पर भारत को मात्र एक कॉलोनियल
- 0:58सब्जेक्ट बना के छोड़ दिया। और ये सिर्फ
- 1:01हमारे लूट की कहानी नहीं है कि हमें किस
- 1:03तरीके से लूटा गया। बल्कि ये इस बात की भी
- 1:05कहानी है कि किस तरीके से हमारे ट्रेडिशंस
- 1:08पे हमारे हमारे कल्चर पे हमारी थॉट के ऊपर
- 1:10भी अटैक किया गया। हमारी आइडेंटिटी के ऊपर
- 1:13भी अटैक किया गया। तो चलिए मॉडर्न
- 1:14हिस्ट्री के इस सफर में जिसमें ब्रिटिश
- 1:16कॉलोनिज्म के ऐसे तमाम आस्पेक्ट जैसे कि
- 1:19कैसे एक ट्रेडिंग कंपनी ट्रेडर से रूलर
- 1:21बनी। कैसे हमने इसके खिलाफ आवाज उठाई और
- 1:24कैसे भारत में उत्पन्न हुई नेशनलिस्ट
- 1:26फीलिंग की? ऐसे कई सारे सवाल हैं जिनको
- 1:30ढूंढना और एक्सप्लोर करना बहुत जरूरी है।
- 1:32और आज के इस वीडियो में इन्हीं सवालों को
- 1:34हम टेक अप करने वाले हैं। तो आइए इस सफर
- 1:36को शुरू करते हैं। मॉडर्न इंडियन हिस्ट्री
- 1:39को अच्छे से समझने के लिए हम मॉडर्न
- 1:40हिस्ट्री को पांच हिस्सों में डिवाइड कर
- 1:42सकते हैं। पहला अराइवल ऑफ यूरोपियंस,
- 1:45दूसरा रिव्ट ऑफ 1857, तीसरा मॉडर्न
- 1:48नेशनलिज्म एंड इंडियन नेशनल कांग्रेस,
- 1:50चौथा गांधियन एरा और पांचवा इंडिपेंडेंस
- 1:54एंड पार्टीशन ऑफ इंडिया। अब हम एक-एक करके
- 1:57इन सभी पार्ट्स को देखेंगे। हमने मेडिवल
- 1:59हिस्ट्री में देखा कि मुगल एपरर जहांगीर
- 2:01के कोर्ट में हॉकिंस और थॉमस रो जैसे
- 2:03ब्रिटिशर्स आए थे। लेकिन यह पहले
- 2:05यूरोपियंस नहीं थे जो इंडिया आए। मेडिवल
- 2:07पीरियड में भी इंडिया और यूरोप के बीच में
- 2:09अच्छे खासे ट्रेड रिलेशंस थे। जिसमें
- 2:11मेनली स्पाइसेस का ट्रेड होता था। इंडिया
- 2:13आने वाले यूरोपियंस में सबसे पहले थे
- 2:16पोर्चुगीज़। पोर्चुगीज़ और यूरोप से इंडिया
- 2:18आने वाले पहले ट्रेवलर थे वास्कोडगामा जो
- 2:21एक गुजराती ट्रेडर अब्दुल मजीद की हेल्प
- 2:23से 20 मई 1498 को इंडिया के कैलकिकट कोस्ट
- 2:28पर पहुंचे। वास्को गामा जब इंडिया से
- 2:30पोर्चुगल वापस गया तो जो ब्लैक पेपर लेकर
- 2:32गया था उस पर उसने 60 गुना प्रॉफिट कमाया।
- 2:36ईस्ट के साथ ट्रेड करने के लिए पोर्चुगीज़
- 2:38ने जो एंपायर इस्टैब्लिश किया उसको
- 2:40उन्होंने स्टाडो डा इंडिया का नाम दिया।
- 2:441503 में पोर्चुगीज़ ने कोचिन में अपनी
- 2:46पहली फैक्ट्री इस्टैब्लिश की। पोर्चुगीज़
- 2:49बहुत शेडी नेचर के थे। उनके ट्रेड पॉलिसी
- 2:52का सीक्रेट ट्रेड और डकैती एक मेजर पार्ट
- 2:55था। इसके साथ ही लगभग उसी समय सदर्न
- 2:57अमेरिका में उन्होंने ब्राजील को अपना
- 2:59कॉलोनी बना लिया और कुछ समय तक यहां ट्रेड
- 3:02करने के बाद उन्होंने अपना ध्यान सदर्न
- 3:04अमेरिकन कॉन्टिनेंट में लगाया। लेकिन हमें
- 3:06यह भी याद रखना होगा कि भारत की धरती पर
- 3:09सबसे लंबी समय तक रहने वाले यूरोपियंस
- 3:12पोर्चुगीज़ ही थे। जो 1961 एडी तक इंडिया
- 3:15के गोवा, दमन, द में शासन करते रहे।
- 3:19इनफैक्ट हमें तो उन्हें यहां से भगाने के
- 3:21लिए मिलिट्री ऑपरेशन ऑपरेशन विजय ल्च करना
- 3:23पड़ा। पोर्चुगीज़ के बाद आए थे डच। डच ईस्ट
- 3:27इंडिया कंपनी ने इंडिया से ट्रेड के लिए
- 3:29मसूलीपट्टनम में 1605 में अपनी पहली डच
- 3:32फैक्ट्री इस्टैब्लिश की। लेकिन यह भी
- 3:34इंडिया में कुछ खास कर नहीं सके और अपना
- 3:36ध्यान ईस्ट इंडीज यानी कि साउथ ईस्ट एशियन
- 3:39की कॉलोनीज़ पर दिया। डच के बाद ब्रिटिशर्स
- 3:42इंडिया आए और उन्होंने यहां पर वो कर
- 3:44दिखाया जो अभी तक कोई भी यूरोपियन पावर
- 3:46नहीं कर पाई थी। 1759 एडी में बैटल ऑफ
- 3:49बेदारा में ब्रिटिश डच से भिड़े और
- 3:52उन्होंने डच को हरा दिया और इंडियन ट्रेड
- 3:54से उन्हें पूरी तरीके से अलग कर दिया गया।
- 3:57लेकिन ऐसे कौन से कारण थे जिसकी वजह से
- 4:00ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी इंडिया में
- 4:02इतनी सक्सेसफुल रही? आइए समझते हैं। दरअसल
- 4:051599 में इंग्लैंड में मर्चेंट एडवेंचरर्स
- 4:08नाम का एक ग्रुप ने द गवर्नर एंड कंपनी ऑफ
- 4:11मर्चेंट्स ऑफ ट्रेडिंग इनू द ईस्ट इंडीज
- 4:14नाम की कंपनी का फाउंडेशन रखा। इसी कंपनी
- 4:17को आगे चलकर ईस्ट इंडिया कंपनी कहा गया।
- 4:19इंग्लैंड के किंग जेम्स वन का एंबेसडर
- 4:22कैप्टन हॉकिन 1608 में इंडिया पहुंचा।
- 4:25जहां वो 1609 में मुगल एपरर जहांगीर के
- 4:28कोर्ट में गया। 1613 में जहांगीर ने एक
- 4:31शाही फरमान इशू किया। जिसमें ब्रिटिशर्स
- 4:34को सूरत में फैक्ट्री लगाने की इजाजत दी
- 4:36गई। 1619 तक ईस्ट इंडिया कंपनी की
- 4:38फैक्ट्रीज अहमदाबाद, बरूच, बड़ौदा और आगरा
- 4:41में इस्टैब्लिश हो चुकी थी। ब्रिटिशर्स ने
- 4:44मद्रास में सेंट जॉर्ज फोर्ट बनाया और
- 4:461661 एडी में पोर्चुगीज़ प्रिंसेस कैथरीन
- 4:49ब्रिगांजा की मैरिज इंग्लैंड के चार्ल्स
- 4:52सेकंड से हुई। जिसमें बॉम्बे को डरी के
- 4:54रूप में ब्रिटिशर्स को दे दिया गया।
- 4:56चार्ल्स सेकंड ने बॉम्बे को 3 पाउंड्स पर
- 4:58ईयर के रेंट पर ईस्ट इंडिया कंपनी को दे
- 5:00दिया। मिड 17 सेंचुरी तक ईस्ट इंडिया
- 5:03कंपनी सिर्फ ट्रेड से प्रॉफिट कमा रही थी।
- 5:05लेकिन अब वो इंडिया के पॉलिटिकल अफेयर्स
- 5:08में भी इंटरेस्ट लेने लगी थी। जिसके
- 5:09कॉन्सक्वेंस तो होने ही थे। मुगल एपरर
- 5:12औरंगजेब ने 1686 में कंपनी के अगेंस्ट
- 5:14एक्शन लिया। लेकिन फरवरी 1690 में कंपनी
- 5:17के ऑफिसर जॉब चरनॉक के एफर्ट से कंपनी और
- 5:20मुगल एपरर के बीच में कॉम्प्रोमाइज हो
- 5:22गया। 1691 को जॉब चर्नॉक ने सूतानती की
- 5:25स्थापना की। फिर 16989 के बीच बंगाल के
- 5:28सूबेदार अजीमु ने कंपनी को सोदानाती,
- 5:31कालीकाता और गोविंदपुर की जिमी दे दी। इन
- 5:34तीनों गांव को मिलाकर ही जॉब चरनॉक
- 5:37नेलकाता की नींव रखी। मुगल एपरर औरंगजेब
- 5:40की 1707 में डेथ हो गई। उसके बाद लेटर
- 5:42मुगल्स की कमजोरी किसी से छुपी नहीं रही
- 5:44और कंपनी भी अब इसका फायदा उठाने के मूड
- 5:47में थी। ईस्ट इंडिया कंपनी की हिस्ट्री का
- 5:50एक सिग्निफिकेंट इवेंट हुआ 1717 एडी में।
- 5:53जब जॉन सुरमन की लीडरशिप में एडवर्ड
- 5:56स्टीफनसन विलियम हैमिल्टन जो कि एक सर्जन
- 5:59थे और ख्वाजा सहूदाद जो कि एक ट्रांसलेटर
- 6:02थे मुगल कोर्ट में फारुख सियार से मिले।
- 6:04विलियम हैमिल्टन ने फारुख सियार की
- 6:06ग्रोइंग स्वेलिंग की सर्जरी की और उन्हें
- 6:08एक पेनफुल बीमारी से छुटकारा दिलाया। अब
- 6:10इससे खुश होकर फारुख सियार ने कंपनी को एक
- 6:13चार्टर दिया। इस चार्टर के जरिए बंगाल में
- 6:16₹3000 पर एनम के बदले कंपनी को कस्टम
- 6:19ड्यूटी फ्री ट्रेडिंग की परमिशन मिल गई।
- 6:21इस चार्टर को इंडिया में ब्रिटिश रूल का
- 6:23मैग्नाल्टा कहा जाता है। यह फारुख सियार
- 6:26की एक बड़ी बेवकूफी भी मानी जाती है।
- 6:28क्योंकि आगे चलकर इसी की वजह से
- 6:30ब्रिटिशर्स ने बंगाल में विवाद खड़ा कर
- 6:32दिया। बाद में बंगाल के नवाब ने कंपनी के
- 6:35एक्टिविटीज को कंट्रोल करने की कोशिश की
- 6:37जिसका रिजल्ट था बैटल ऑफ प्लासी 1757।
- 6:41खैर, ब्रिटिशर्स के बाद फ्रेंच भी इंडिया
- 6:42में आए। लुईस 14 के फाइनेंस मिनिस्टर
- 6:44कोलबर्ट ने फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी की
- 6:47स्थापना की। इस कंपनी को स्टेट का
- 6:49प्रोटेक्शन भी था। 1667 एडी में फ्रांसिस
- 6:53कैरोन की लीडरशिप में फ्रेंच टीम इंडिया
- 6:55आई और 1668 में सूरत में अपनी पहली
- 6:58फैक्ट्री इस्टैब्लिश की। ब्रिटिश कंपनी की
- 7:01तरह फ्रेंच कंपनी भी सिर्फ ट्रेड के लिए
- 7:03बनी थी। लेकिन वो भी धीरे-धीरे पॉलिटिकल
- 7:05मामलों में उलझ गई। यूरोप में जो कंपनीज़
- 7:08एक दूसरे की कॉम्पिटिटर्स थी, अब इंडिया
- 7:10में भी एक दूसरे के सामने खड़ी हो गई थी।
- 7:13इंग्लिश और फ्रेंच के बीच लड़ी गई पहली
- 7:15बड़ी लड़ाई थी फर्स्ट कर्नाटक वॉर बिटवीन
- 7:171746 एंड 1748 जो यूरोप में चल रही
- 7:21ऑस्ट्रियन सक्सेशन वॉर का ही एक एक्सटेंशन
- 7:23था। इस वॉर के बाद ट्रीटी ऑफ़ एक्सलाल शपल
- 7:26के जरिए यूरोप में शांति हो गई और इंडिया
- 7:29में भी दोनों कंपनीज़ के बीच टेंपरेरी पीस
- 7:31इस्टैब्लिश हो गया। सेकंड कर्नाटिक वॉर
- 7:331749 टू 54 हुआ कर्नाटका की नवाबी को
- 7:37लेकर। चंदा साहब ने नवाबी के लिए
- 7:39डुप्लेक्स की मदद ली और मुजफ्फर जंग ने
- 7:42डेकेन की सूबेदारी के लिए भी फ्रेंचों का
- 7:44सपोर्ट लिया। अब ब्रिटिशर्स ने अनवरुद्दीन
- 7:46और नासिर जंग को सपोर्ट किया। इस वॉर में
- 7:49फ्रेंच जीत रहे थे। लेकिन तभी इंग्लैंड से
- 7:52मद्रास आया एक क्लर्क रॉबर्ट क्लाइ जिसने
- 7:55सिर्फ 500 सोल्जर्स के साथ आर्कट पर कब्जा
- 7:57कर दिया और फ्रेंच फोर्सेस को सरेंडर करने
- 8:00पर मजबूर कर दिया। फ्रांस में सीनियर
- 8:02ऑफिसर्स ने डुप्लेक्स की पॉलिसी को
- 8:03क्रिटिकली अपोज किया और उसे फ्रांस बुला
- 8:06दिया गया। यह फ्रेंच गवर्नमेंट की बहुत
- 8:08बड़ी बेवकूफी मानी जाती है क्योंकि
- 8:09डुप्लेक्स के बाद इंडिया में फ्रेंचों के
- 8:12पास कोई भी ढंग का लीडर नहीं बचा था। और
- 8:15फिर आई थर्ड कर्नाटिक वॉर 1756 टू63। इसका
- 8:19इमीडिएट रीजन था रॉबर्ट क्लाइव और एडमिरल
- 8:22वाटसन द्वारा चंद्रनगर पर कब्जा। इस बार
- 8:25ब्रिटिश और फ्रेंच के बीच एक डिसाइसिव वॉर
- 8:27हुई। बैटल ऑफ वडी वॉश। इस बैटल में
- 8:29ब्रिटिश फोर्सेस को आयरकूट ने लीड किया।
- 8:32फ्रेंच ये बैटल हार गए। 16 जनवरी 1761 को
- 8:36पोंडीचेरी भी ब्रिटिशर्स के कब्जे में आ
- 8:38गया। इस प्रकार इंडिया में सभी यूरोपियन
- 8:41कंपनीज में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी
- 8:43सबसे ज्यादा ताकतवर बन गई। वास्तव में
- 8:46ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की श्रेष्ठता
- 8:48का एक मुख्य कारण था 1757 में बैटल ऑफ
- 8:51प्लासी में उनकी जीत और उस जीत के बाद
- 8:54उन्हें मिला खजाना। यह युद्ध हुआ था बंगाल
- 8:57के नवाब सिराजुद्दौला और ईस्ट इंडिया
- 8:59कंपनी के बीच जिसे रॉबर्ट क्लाइव ने साजिश
- 9:01करके जीता था। रॉबर्ट क्लाइव बंगाल का
- 9:04फर्स्ट गवर्नर बना। उसके बाद आने वाले
- 9:06गवर्नर थे वारेन हेस्टिंग्स, लॉर्ड
- 9:08कन्वलिस, लॉर्ड विलजसली और बाद में लॉर्ड
- 9:10विलियम बेंटिक जो 1833 में इंडिया का पहला
- 9:14गवर्नर जनरल बना था। बैटल ऑफ प्लासी के
- 9:16बाद से ही इंडिया के लोगों का इकोनॉमिक
- 9:18एक्सप्लॉयटेशन शुरू हो गया था। इसके
- 9:21साथ-साथ ब्रिटिश गवर्नमेंट ने इंडिया के
- 9:23धर्म और रीति-रिवाजों में भी दखल देना
- 9:25शुरू कर दिया था। इन सभी कारणों से 1757
- 9:28के बाद छोटे-छोटे रिवॉर्ड्स ब्रिटिशर्स के
- 9:30अगेंस्ट होते रहे। जैसे कि बंगाल का
- 9:33सन्यासी रिबेलियन, महाराष्ट्र का रमोसी
- 9:35रिपोर्ट, संथल रिव्ट और 1857 का सेपॉय
- 9:38रिवॉर्ट।
- 9:40यह सभी रिवोट उन पॉलिसीज के विरोध में थे
- 9:42जो ब्रिटिशर्स ने बैटल ऑफ प्लासी और बैटल
- 9:44ऑफ बक्सर के बाद लागू की थी। लॉर्ड डलहौजी
- 9:471848 से 56 के बीच में थे। उनके समय
- 9:50इंडियंस के लिबर्टी, कल्चर और रिलीजन पर
- 9:53भी प्रहार किया गया। उसने डॉक्ट्रिन ऑफ
- 9:55लैब्स के तहत सतारा, जयपुर, सभलपुर, बागत,
- 9:58उदयपुर, झांसी, नागपुर जैसे राज्यों को
- 10:01ब्रिटिश एंपायर में मिला दिया। ब्रिटिशर्स
- 10:03ने इवन लॉयल अवध को भी मैल एडमिनिस्ट्रेशन
- 10:06के नाम पर ब्रिटिश इंडिया में मिला दिया
- 10:08था। इसने इंडियंस के दिल में यह दर्ज कर
- 10:11दिया कि ब्रिटिश किसी का सगा नहीं होता।
- 10:14झांसी और अवध के लोगों में क्रोध भड़क
- 10:16गया। यह सब गुस्सा प्लासी के 100 साल बाद
- 10:181857 में खुलकर सामने आ गया। 1857 की
- 10:22क्रांति के इमीडिएट कॉजेस में सबसे ज्यादा
- 10:24चर्चा में था काऊ और पिग फैट में लपेटा
- 10:27हुआ कार्ट्रज। एनफील्ड राइफल से फायर करने
- 10:30के लिए इस कार्ट्रज को दांतों से खोलना
- 10:32पड़ता था जो हिंदू और मुस्लिम दोनों के
- 10:34लिए धार्मिक रूप से अपमानजनक था। क्योंकि
- 10:36काऊ हिंदुओं के लिए पवित्र होती है और पिग
- 10:39मुसलमानों के लिए नापाक। सबसे पहली घटना
- 10:42हुई 29th मार्च 1857 को बैरकपुर कैंट में।
- 10:45जहां 34 इनफेंट्री के सोल्जर मंगल पांडे
- 10:48ने कैट्रिज यूज करने से इंकार किया और
- 10:51अपने सीनियर ऑफिसर लेफ्टिनेंट बाग और जनरल
- 10:54हेयरसे को गोली मार दी। यह सभी वजह बनी
- 10:57सेपॉई मूटनी का कारण जो ऑफिशियली शुरू हुई
- 11:0010 मई 1857 को मेरठ कंटोनमेंट के सोल्जर्स
- 11:03के द्वारा। इन्होंने कार्ट्रेज यूज़ करने
- 11:06से इंकार किया और फिर 11 मई की सुबह ये
- 11:08लोग दिल्ली पहुंचे। जहां उन्होंने बहादुर
- 11:10शाह जफर को अपना बादशाह घोषित कर दिया। यह
- 11:13विद्रोह धीरे-धीरे नॉर्थ इंडिया में फैल
- 11:15गया। कानपुर में 5 जून 1857 को विद्रोह
- 11:18हुआ जिसमें नाना साहेब ने लीडरशिप दी।
- 11:20नाना साहब पेशवा बाजीराव सेकंड के दत्तक
- 11:22पुत्र थे और उनकी मदद की तात्या टोपे ने।
- 11:25लखनऊ में 4 जून 1857 को बेगम हजरत महल ने
- 11:28अपने पुत्र बृजिस कादिर को नवाब घोषित
- 11:31किया। झांसी में रानी लक्ष्मीबाई ने नीता
- 11:33से लड़ाई की और जनरल हग्रोस के साथ युद्ध
- 11:35में वीरगति को प्राप्त हुई। इतना तेजी से
- 11:38रिवॉर्ड का फैलना एकदम से नहीं हुआ था। कई
- 11:41हिस्टोरियंस कहते हैं कि यह वर्षों की
- 11:43यात्रा और प्लानिंग का नतीजा था। कुछ
- 11:45हिस्टोरियंस के मुताबिक अजीमुल्ला खान ने
- 11:47बिठनूर यानी कि कानपुर में नाना साहब के
- 11:50साथ मिलकर रिवॉर्ड की प्लानिंग बनाई थी और
- 11:5231 मई 1857 को क्रांति का दिन फिक्स किया
- 11:55गया था। क्रांति के सिंबल के रूप में लोटस
- 11:59फ्लावर और रोटी का इस्तेमाल किया गया। यह
- 12:01क्रांति नॉर्थ इंडिया में बड़े स्तर पर तो
- 12:03फैली लेकिन प्लानिंग और लीडरशिप की कमी के
- 12:06कारण ब्रिटिश ऑफिसर्स ने इसे दबा दिया। इस
- 12:08रिवॉर्ड की लीडरशिप के बारे में जॉन
- 12:10लॉरेंस ने कहा था अगर इनमें से एक भी लीडर
- 12:13में एबिलिटी होती तो हम हमेशा के लिए हार
- 12:16जाते। बहादुर शाह सफर जो कि 82 वर्षीय
- 12:19वृद्ध थे उन्होंने 20 सितंबर 1857 को
- 12:22लेफ्टिनेंट विलियम हटसन के सामने हुमायूं
- 12:24स्टॉम में सरेंडर कर दिया। हटसन ने बहादुर
- 12:27शाह के दोनों बेटों को उनके सामने ही गोली
- 12:29मार दी और उनके सर को दिल्ली के दरवाजे पर
- 12:31लटका दिया। बहादुर शाह जफर को रंगून भेज
- 12:34दिया गया जहां उनकी मौत हो गई। उनकी कब्र
- 12:37पर लिखे शब्द थे कितना है बदनसीब जफर दफन
- 12:41के लिए दो गज जमीन भी ना मिली कुएं यार
- 12:43में यहां कुए यार का मतलब है कि अपनी
- 12:46जन्मभूमि में अपनी होमलैंड में बेगम हजरत
- 12:49महल भी अंत में हार गई और नेपाल चली गई
- 12:52आरा के कुंवर सिंह ने भी वीफा से लड़ाई की
- 12:54लेकिन युद्ध में घायल होने के बाद उनकी भी
- 12:56डेथ हो गई। फैजाबाद में थे मौलवी अहमद
- 12:58उल्लाह। उन्होंने विद्रोह की अगुवाई की
- 13:01लेकिन उन्हें भी 5 जून 1858 को शहीद कर
- 13:03दिया गया। यह रिवोल्ट तो दबा दिया गया
- 13:06लेकिन इसका अपना ऐतिहासिक महत्व बस आप इस
- 13:08बात से समझ सकते हैं कि वीर सावरकर ने इसे
- 13:11द फर्स्ट वॉर ऑफ इंडियन इंडिपेंडेंस का
- 13:14नाम दिया। अब बात करते हैं कि 1857 के
- 13:16रिवॉर्ड के रिजल्ट के बारे में। रिवॉर्ड
- 13:19सक्सेसफुल तो नहीं हुआ लेकिन यह जरूर
- 13:21साबित कर दिया कि ईस्ट इंडिया कंपनी का
- 13:23राज इंडियंस के लिए अत्याचारी और
- 13:25एक्सप्लॉयटेटिव है। इसके बाद ब्रिटिश
- 13:27गवर्नमेंट ने अपनी पॉलिसी में बड़ा बदलाव
- 13:29किया। ईस्ट इंडिया कंपनी का रूल खत्म कर
- 13:31दिया गया और इंडिया का गवर्नेंस
- 13:34डायरेक्टली ब्रिटिश क्राउन के अंडर में आ
- 13:36गया। अब इंडिया पूर्ण रूप से ब्रिटेन के
- 13:39कंट्रोल में था। ब्रिटिशर्स का यह सफर एक
- 13:42ऐसा सफर था जो उन्होंने ट्रेड से शुरू
- 13:44किया था। लेकिन धीरे-धीरे वह राजनीति और
- 13:46शासन तक पहुंच गए। इंडिया में इनके पहले
- 13:48भी फॉरेन इनवेडर्स आए थे। लेकिन सभी
- 13:51इनवेडर्स ने इंडियन कल्चर को अडॉप्ट कर
- 13:53लिया था और यहीं के हो गए थे। पर
- 13:55ब्रिटिशर्स सिर्फ लूट खसूट के लिए आए थे।
- 13:58वो इंडिया की वेल्थ ब्रिटेन भेज रहे थे
- 14:00जिसे हम कहते हैं ड्रेन ऑफ वेल्थ।
- 14:02उन्होंने अपना कल्चर इंडियंस पर थोपना भी
- 14:04शुरू कर दिया। इंडिया में उस समय साइंस,
- 14:07टेक्नोलॉजी, रिलीजन और नॉलेज इन सब का
- 14:09लेवल बहुत नीचे जा चुका था। जबकि यूरोप
- 14:12में यह पीरियड रिलेसा यानी पुनर्जागरण का
- 14:14था। ऐसे समय में कुछ बंगाली
- 14:16इंटेलेक्चुअल्स जो वेस्टर्न एजुकेशन से
- 14:18परिचित थे, उन्होंने इंडिया में फैली हुई
- 14:21बुराइयों को दूर करने की कोशिश की। इन
- 14:23इंटेलेक्चुअल्स में सबसे प्रमुख नाम आता
- 14:24है राजा राममोहन रॉय का। जिन्हें कहा जाता
- 14:27है फादर ऑफ मॉडर्न इंडिया। राजा राममोहन
- 14:30रॉय का जन्म हुआ था 22 मई 1772 को बंगाल
- 14:33के हुगली डिस्ट्रिक्ट के राधागर गांव में।
- 14:35उन्हें कई भाषाओं में प्रवीणता थी। वो
- 14:37इंग्लिश, फ्रेंच, लैटिन, ग्रीक और हब्रू
- 14:39जैसे लैंग्वेज को फ्लुएंटली रिकवर बोल
- 14:42सकते थे। रिलीजियस रिफॉर्म के लिए
- 14:44उन्होंने वेदों के आधार पर मूर्ति पूजा को
- 14:46गलत साबित किया और अंधविश्वासों को दूर
- 14:48करने के लिए आत्मसभा का गठन किया। फिर
- 14:501829 में उन्होंने ब्रह्मो समाज की
- 14:52स्थापना की जो एक सोशल रिलीजियस रिफॉर्म
- 14:54मूवमेंट था। उन्होंने इंडियंस को अधिकाधिक
- 14:57फ्रीडम देने की मांग की और वेस्टर्न
- 14:58एजुकेशन का समर्थन किया। वहीं वेस्टर्न
- 15:01इंडिया में भी कुछ समाज सुधारक उठे जैसे
- 15:03महादेव गोविंद रानाडे और डॉ. आत्माराम
- 15:06पांडुरंग। इन दोनों ने 1867 में बॉम्बे
- 15:09में प्रार्थना समाज की स्थापना की। रानाडे
- 15:11ने वुमेन एजुकेशन को प्रमोट किया। चाइल्ड
- 15:14मैरिज और वुमेन डिपेंडेंसी के विरुद्ध
- 15:15आवाज उठाई। विडो मैरिज को समर्थन किया और
- 15:18डीके करवे के सपोर्ट से 1867 में विधवा
- 15:21आश्रम संघ की स्थापना की। अब तक जितने भी
- 15:24सोशल रिफॉर्मर्स आए उनमें से एक और महान
- 15:26व्यक्ति थे स्वामी दयानंद सरस्वती जिन्हें
- 15:28पहले स्वामी पूर्णानंद ने यह नाम दिया था।
- 15:31स्वामी दयानंद सरस्वती ने 10 अप्रैल 1875
- 15:34को बॉम्बे में आर्य समाज की स्थापना की।
- 15:36उनका कहना था कि आर्यन सुपीरियर हैं और
- 15:38वेदाज़ में ईश्वरीय ज्ञान है और भारत की
- 15:41भूमि एक होली लैंड है। आर्य समाज का
- 15:43उद्देश्य था वैदिक रिलजन को उसके प्योर
- 15:46फॉर्म में स्थापित करना और वेस्टर्न कल्चर
- 15:48के इन्फ्लुएंस को कम करना। उन्होंने अपने
- 15:50लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वेदों की
- 15:52ओर लौट चलो का स्लोगन दिया और 1868 में
- 15:55उन्होंने पाखंड खंडनी पताका यानी फ्लैग
- 15:58दैट डिमोलिशस हिपोक्रेसी लहराया। अब हम
- 16:00बात करते हैं एक ऐसे व्यक्ति की जिन्होंने
- 16:02केवल इंडिया बल्कि पूरे विश्व को यह बताया
- 16:05कि इंडिया का कल्चर और रिलीजन दुनिया का
- 16:07सबसे पुराना और श्रेष्ठ है। उनका नाम था
- 16:10स्वामी विवेकानंद। वो रामकृष्ण परमहंस के
- 16:12शिष्य थे। 1893 में स्वामी विवेकानंद ने
- 16:15अमेरिका के शिकागो में आयोजित फर्स्ट
- 16:17वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ रिलिजेंस में
- 16:19इंडिया को रिप्रेजेंट किया। उनकी स्पीच के
- 16:21बारे में न्यूयॉर्क हेराल्ड न्यूज़पेपर ने
- 16:23लिखा उन्हें सुनने के बाद हमें महसूस होता
- 16:25है कि ऐसे ज्ञान से संपन्न देश में अपने
- 16:28धर्म प्रचारक भेजना कितना मूर्खतापूर्ण
- 16:31कार्य था। इसी समय इंडिया के कई
- 16:33इंस्टीट्यूशन भी उठने लगे थे। उनमें से एक
- 16:35था बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी जिसका गठन
- 16:371916 में मदन मोहन मालवीय के प्रयास से
- 16:40हुआ था। चलिए अब कुछ और रिफॉर्म्स की बात
- 16:42करते हैं। 1857 के रिवोल्ट में मुस्लिम्स
- 16:45ने ज्यादा पार्टिसिपेशन दिखाया था। जिसके
- 16:47बाद ब्रिटिश गवर्नमेंट ने मुस्लिम्स से
- 16:48दूर रहना शुरू कर दिया। इसी वजह से
- 16:50मुस्लिम्स का इकोनॉमिक और सोशल स्टेटस
- 16:52गिरने लगा। इस सिचुएशन को सुधारने के लिए
- 16:54आए सर सैयद अहमद खान। उन्होंने इस्लाम में
- 16:57रिफॉर्म्स की कोशिश की और मुस्लिम्स को
- 16:59मॉडर्न एजुकेशन की तरफ अग्रसर किया। सर
- 17:01सैयद अहमद खान ने मुस्लिम्स को मॉडर्न
- 17:03एजुकेशन देने के लिए 1875 में मोहम्मदन
- 17:06एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना की जो
- 17:09बाद में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के
- 17:11रूप में विकसित हुआ। वो वेस्टर्न साइंस और
- 17:13फिलॉसफी के सपोर्टर थे और उन्होंने हिंदू
- 17:15मुस्लिम यूनिटी पर भी जोर दिया। पर अब बात
- 17:17करते हैं नेशनलिज्म के सर्च की। 19
- 17:19सेंचुरी के अंत तक इंडिया में नेशनल
- 17:21कॉन्शियसनेस जग चुकी थी। इसका मुख्य
- 17:24केंद्र था बंगाल क्योंकि वहां सबसे पहले
- 17:27मॉडर्न एजुकेशन और प्रिंट कल्चर का प्रभाव
- 17:29पड़ा था। लेकिन इसी बंगाल को तोड़ने की
- 17:32कोशिश की लॉर्ड कर्जन ने। 20 जुलाई 1905
- 17:34को उसने पार्टीशन ऑफ बंगाल का अनाउंसमेंट
- 17:36किया जो 16 अक्टूबर 1905 से लागू हुआ।
- 17:39पार्टीशन में हिंदू मुस्लिम पॉपुलेशन के
- 17:41बेस पर किया गया था। इसका लोगों ने पुरजोर
- 17:44विरोध किया। हिंदू और मुस्लिम ने एक दूसरे
- 17:46के हाथ में राखी बांधकर एकता के संदेश
- 17:48दिए। पूरे बंगाल ही नहीं बल्कि पूरे देश
- 17:50में 16 अक्टूबर को शोक दिवस के रूप में
- 17:52मनाया गया। साथ ही पूरे देश में स्वदेशी
- 17:54मूवमेंट भी चलाया गया। इसी दौरान 30
- 17:57दिसंबर 1906 को ढाका में मुस्लिम लीग की
- 18:00स्थापना हुई जिसका प्रस्ताव दिया था नवाब
- 18:02सलीमुल्लाह ने। 1907 तक इंडियन नेशनल
- 18:05कांग्रेस के अंदर भी लिबरल्स यानी कि नरम
- 18:07दल और एक्सट्रीमिस्ट यानी कि गरम दल के
- 18:10बीच में जो मतभेद थे वह तेजी से बढ़ने लगे
- 18:12थे। 1907 का सूरत सेशन में प्रेसिडेंट के
- 18:15चुनाव को लेकर कांग्रेस में फूट पड़ गई और
- 18:17उसके बाद 1909 में ब्रिटिश इंडियन
- 18:19गवर्नमेंट ने एक रिफॉर्म लाई जिसे कहते
- 18:22हैं मोले मिंटो रिफॉर्म्स जिसमें
- 18:24मुस्लिम्स को सेपरेट इलेक्ट्रोरेट्स दिया
- 18:26गया। इसका मतलब मुस्लिम्स सिर्फ मुस्लिम
- 18:29कैंडिडेट्स को वोट देंगे। यह हिंदू
- 18:31मुस्लिम यूनिटी के बीच और दूरी बनाने की
- 18:33साजिश थी जिसे कम्युनल इलेक्टोरेट्स के
- 18:35नाम से जाना जाता है। जैसा कि उम्मीद थी
- 18:37इसका पूरा देश में पुरजोर विरोध भी हुआ।
- 18:40बाद में ब्रिटिशर्स ने इसे ध्यान से हटाने
- 18:41के लिए और स्वदेशी मूवमेंट का प्रेशर में
- 18:44दिसंबर 1911 में पार्टीशन ऑफ बंगाल को
- 18:46कैंसिल कर दिया। तब तक 1914 भी आ गया और
- 18:49दुनिया में फर्स्ट वर्ल्ड वॉर शुरू हो
- 18:51गया। कांग्रेस के लिबरल लीडर्स ने ब्रिटिश
- 18:53गवर्नमेंट को सपोर्ट करने का डिसीजन लिया।
- 18:55उन्हें उम्मीद थी कि ब्रिटिश लोग उसके
- 18:57बदले स्वराज या फिर होम रूल की उनकी मांग
- 18:59मान लेंगे। इसी दौरान 1916 से लखनऊ सेशन
- 19:02में मॉडरेट्स और एक्सट्रीमिस्ट एक बार फिर
- 19:05से एक हो गए। इसी सेशन में कांग्रेस और
- 19:07मुस्लिम लीग के बीच भी एक समझौता हुआ जिसे
- 19:09लखनऊ पैक्ट के नाम से जाना जाता है। उधर
- 19:12होम रूल की डिमांड को जोर शोर से उठाने के
- 19:14लिए एनी बेसेंट और बाल गंगाधर तिलक ने
- 19:17इंडिया के अलग-अलग पार्ट्स में होम रूल
- 19:19लीग्स की स्थापना करना शुरू कर दिया था।
- 19:21लेकिन इन सब एफर्ट्स के बावजूद भी 1919
- 19:24में ब्रिटिश इंडियन गवर्नमेंट ने जो
- 19:26मॉनटेक चेम्सफोर्ड रिफॉर्म्स लागू कर दिया
- 19:29जिसमें होम रूल का कोई भी जिक्र तक नहीं
- 19:31था और ना ही भारत को सेल्फ गवर्नमेंट देने
- 19:34की बात की गई थी। इससे कांग्रेस के लीडर्स
- 19:36में इतनी निराशा हुई कि बाल गंगाधर तिलक
- 19:39ने इन रिफॉर्म्स को बिना सूरज के सवेरा
- 19:42यानी अ मॉर्निंग विदाउट डॉन तक कह डाला।
- 19:45खैर, इसी समय भारत की पॉलिटिक्स में
- 19:47महात्मा गांधी की भी एंट्री हो रही थी। 9
- 19:49जनवरी 1915 को गांधी जी साउथ अफ्रीका से
- 19:52भारत वापस आए और कुछ समय तक उन्होंने पूरे
- 19:54कंट्री में ट्रैवल करके इंडिया में
- 19:56सिचुएशंस को ऑब्जर्व करना शुरू कर दिया।
- 19:58उस समय फर्स्ट वर्ल्ड वॉर चल रहा था और
- 20:00गांधी जी ने इस वॉर में ब्रिटिशर्स की मदद
- 20:02की थी। जिसके लिए ब्रिटिश गवर्नमेंट ने
- 20:04उन्हें कैसर-ए-ह हिंद के टाइटल से नवाजा
- 20:06था। देश के पॉलिटिक्स में पार्टिसिपेट
- 20:08करने के साथ ही 1917 से 1918 के बीच गांधी
- 20:11जी ने तीन आंदोलन की अगुवाई की। पहला था
- 20:14चंपारण सत्याग्रह जिसकी शुरुआत 1917 में
- 20:16हुई। इस सत्याग्रह के दौरान गांधी जी ने
- 20:19पहली बार देश में सत्याग्रह का प्रयोग
- 20:21किया। दूसरा था खेड़ा सत्याग्रह जिसमें
- 20:23गुजरात के किसानों के लिए ऑर्गेनाइज किया
- 20:25गया था और तीसरा था अहमदाबाद मिल स्ट्राइक
- 20:28जहां गांधी जी ने स्ट्राइक करके वहां के
- 20:30मिल वर्कर्स को 35% बोनस दिलवाया। ब्रिटिश
- 20:32इंडियन गवर्नमेंट के अगेंस्ट गांधी जी की
- 20:34ये छोटी-छोटी लेकिन इंपॉर्टेंट विक्ट्रीज
- 20:36ने इंडियंस को अंदर से बहुत मोटिवेट किया।
- 20:39लेकिन दूसरी तरफ इंडिया में खासकर इंडियन
- 20:42यूथ में रेवोल्यूशनरी टेंडेंसीज का भी
- 20:44स्केल बढ़ने लग रहा था। जाहिर सी बात थी
- 20:47कि ब्रिटिश इन सब एक्टिविटीज से डरने लग
- 20:49रही थी। और फिर इन्हीं एक्टिविटीज को
- 20:51रोकने के लिए ब्रिटिश गवर्नमेंट ने सिडनी
- 20:53रलेट की प्रेसिडेंटशिप में एक कमेटी बनाई
- 20:56जिसने एक भयंकर ड्रैकोनियन कानून रिकमेंड
- 20:59किया जिसे कहा गया रेलेट एक्ट। इसके तहत
- 21:02गवर्नमेंट किसी भी व्यक्ति को बिना
- 21:03ट्रायल, बिना अपील और बिना वकील के एक
- 21:06अनसर्टेन टाइम पीरियड के लिए जेल में रख
- 21:08सकती थी। गांधी जी ने इसका तीव्र विरोध
- 21:10किया और उसके खिलाफ सत्याग्रह की घोषणा कर
- 21:12दी। जगह-जगह प्रोटेस्ट होने लगे। गांधी जी
- 21:15को भी अरेस्ट कर लिया गया। इसी
- 21:17कॉन्टेक्स्ट में हुआ इंडिया के इतिहास का
- 21:19एक सबसे दर्दनाक इंसिडेंट। जालियांवाला
- 21:22बाग हत्याकांड। 13 अप्रैल 1919 बैसाखी के
- 21:25दिन अमृतसर के जालियांवाला बाग में लोग
- 21:27शांति से प्रोटेस्ट कर रहे थे। यह स्थान
- 21:29चारों तरफ से ऊंची दीवारों से घिरा हुआ था
- 21:32और अंदर जाने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता
- 21:33था। इसी रास्ते पर जनरल डायर अपनी
- 21:36मिलिट्री के साथ खड़ा हो गया और बिना किसी
- 21:38चेतावनी के फायरिंग का आर्डर दे दिया।
- 21:40जनरल डायर की बिना वार्निंग वाली फायरिंग
- 21:42में हजारों लोग मारे गए और कई घायल हुए।
- 21:45लोग भागने के लिए कहीं जा भी नहीं पाए
- 21:47क्योंकि एक ही रास्ता था और वहां भी आर्म
- 21:50सोल्जर्स खड़े थे। यह हत्याकांड सिर्फ
- 21:52पंजाब या अमृतसर तक सीमित नहीं रहा। पूरे
- 21:54भारत में गुस्सा फैल गया। रविंद्र नाथ
- 21:56टैगोर ने नाइट की उपाधि वापस कर दी और
- 21:58गांधी जी ने भी ब्रिटिश सरकार के खिलाफ
- 22:00नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट का ऐलान कर दिया। यह
- 22:03मूवमेंट एक पीसफुल मूवमेंट था जिसमें
- 22:05गवर्नमेंट स्कूल्स और कॉलेजेस का बॉयकॉट,
- 22:07फॉरेन कपड़ों का बहिष्कार, इंडियन
- 22:09इंस्टीट्यूशन और खादी के समर्थन और
- 22:11टाइटल्स जैसे कि सर और कैसर-ए-ह हिंद का
- 22:13बॉयकॉट शामिल था। लेकिन वो कहते हैं ना कि
- 22:16जैसा सोचा जाता है वैसा नहीं होता। तो नॉन
- 22:19कोऑपरेशन मूवमेंट के साथ भी कुछ ऐसा ही
- 22:20हुआ। दरअसल 1922 में यूनाइटेड प्रोविंस के
- 22:22चौरीचौरा में एक वायलेंट इंसिडेंट हो गया।
- 22:25यहां एक इंसिडेंट में एक वायलेंट मॉब ने
- 22:27पुलिस स्टेशन जला दिया। नॉन कोऑपरेशन में
- 22:30यह वायलस गांधी जी को मंजूर नहीं था और
- 22:32उन्होंने तुरंत इस मूवमेंट को रिटर्न कर
- 22:34दिया क्योंकि वह अहिंसा के पक्षधार थे तो
- 22:37इसलिए उन्होंने ऐसा फैसला लिया लेकिन यहां
- 22:40से इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल में एक नए
- 22:42चैप्टर की शुरुआत हुई मास बेस्ड नेशनलिज्म
- 22:45की और गांधी जी इसके सेंट्रल फिगर बनकर
- 22:48उभरे। दोस्तों महात्मा गांधी के साथ यहां
- 22:51एक और मास लीडर का इमरजेंस हो रहा था
- 22:53जिनका नाम था सुभाष चंद्र बोस। इस समय यह
- 22:56लंदन से इंडियन सिविल सर्विज का एग्जाम
- 22:58पास करके जस्ट अपने देश में उतरे ही थे कि
- 23:01देश की हालत देखकर उन्हें ब्रिटिश
- 23:03गवर्नमेंट की नौकरी करना मंजूर ना हुआ और
- 23:05उन्होंने सर्विस ज्वाइन करने से पहले ही
- 23:07सर्विस छोड़ दिया। उधर गांधी जी 1922 से
- 23:10लेकर 1930 तक पॉलिटिक्स में कुछ खास बिजी
- 23:12नहीं थे और उन्होंने अपना समय
- 23:14कंस्ट्रक्टिव प्रोग्राम्स में जैसे कि
- 23:16चरखा चलाना, देश के लोगों को समझाना इन
- 23:18जैसे कामों में लगाया। लेकिन फिर 1928 में
- 23:21पूरे देश में साइमन कमीशन का विरोध होना
- 23:23शुरू हो गया था। गांधी जी ने भी इसमें
- 23:25पार्टिसिपेट किया और नेशनल पॉलिटिक्स में
- 23:27एक बार फिर से एक्टिव हो गए। 1929 का
- 23:30लाहौर सेशन में कांग्रेस ने कंप्लीट
- 23:32इंडिपेंडेंस यानी कि पूर्ण स्वराज को अपना
- 23:34गोल अनाउंस किया और गांधी जी को इसके लिए
- 23:36मूवमेंट ऑर्गेनाइज करने की जिम्मेदारी
- 23:38सौंपी। गांधी जी ने इसके लिए सिविल
- 23:40डिसबिडियंस मूवमेंट की घोषणा की। लेकिन
- 23:42इससे पहले उन्होंने ब्रिटिश गवर्नमेंट के
- 23:44अगेंस्ट दांडी मार्च की शुरुआत की जो कि
- 23:4712 मार्च 1930 से लेकर 6 अप्रैल 1930 तक
- 23:50चली। ब्रिटिश गवर्नमेंट नहीं चाहती थी कि
- 23:52इस समय कोई बड़ा नेशनल लेवल का कोई
- 23:54मूवमेंट हो और इसीलिए उन्होंने गांधी जी
- 23:57से समझौता किया जिसे हम गांधी इरविन पैक्ट
- 23:59कहते हैं। इसमें तीन चीजों पर सहमति बनी।
- 24:02पहला कांग्रेस सिविल डिसबिडनेस मूवमेंट को
- 24:05विड्रॉ करेगी। दूसरा ब्रिटिश पॉलिटिकल
- 24:07प्रिजनर्स को छोड़ेंगे और तीसरा सॉर्ट
- 24:10बनाने की छूट मिलेगी। और इसी पैक के तहत
- 24:12गांधी जी सेकंड राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में
- 24:14पार्टिसिपेट करने लंदन गए। लेकिन वहां कोई
- 24:17मेजर एग्रीमेंट नहीं हुआ। क्योंकि गांधी
- 24:18जी और कांग्रेस दलित और माइनॉरिटी
- 24:20इलेक्टोरेट्स को मानने के लिए राजी ही
- 24:22नहीं थे। लंदन से लौटने के बाद गांधी जी
- 24:25ने दोबारा से डिसमिनेस मूवमेंट स्टार्ट
- 24:26किया। लेकिन ब्रिटिश ने तुरंत उन्हें
- 24:28अरेस्ट कर दिया। इसी साल कम्युनल अवार्ड
- 24:30के थ्रू मुस्लिम्स के साथ-साथ सिखों,
- 24:33क्रिश्चियंस और दलितों को भी अलग
- 24:35इलेक्ट्रोरेट दिया गया। जिसके खिलाफ गांधी
- 24:37जी ने फास्ट एंड टू डेथ किया। इससे बचने
- 24:40के लिए डॉ. अंबेडकर से पूना पैक्ट हुआ
- 24:42जिसमें दलित को रिजर्व सीट्स तो मिली
- 24:45लेकिन अलग इलेक्ट्रोरेट नहीं मिला। 1934
- 24:48तक मूवमेंट वीक पड़ गया था और इसीलिए
- 24:50गांधी जी ने ऑफिशियली सिविल डिसोबिडिएंट्स
- 24:52मूवमेंट को विड्रॉ कर दिया। उसके बाद
- 24:53उन्होंने कांग्रेस से रिजाइन कर दिया
- 24:55लेकिन सोशल वर्क जारी रखा। उधर 1938 में
- 24:58कांग्रेस के हरपुरा सेशन में सुभाष बोस
- 25:00कांग्रेस के प्रेसिडेंट बने। लेकिन फिर
- 25:021939 के त्रिपुरी सेशन में उनका गांधी जी
- 25:05से कांग्रेस प्रेसिडेंट के इलेक्शन को
- 25:07लेकर खुला टकराव हो गया। वैसे तो गांधी जी
- 25:10के साथ उनकी अनबन कोई नई बात नहीं थी।
- 25:12लेकिन 1939 के त्रिपुरी सेशन में गांधी जी
- 25:15के इस बात से कि पता भी कि हार उनकी
- 25:18पर्सनल हार है से वह बहुत दुखी हुए और थक
- 25:21गए फाइनली बोस ने कांग्रेस छोड़ दिया और
- 25:23एक नया पॉलिटिकल पार्टी फॉरवर्ड ब्लॉक
- 25:25बनाया। ब्रिटिश उन पर नजर रखे हुए थे और
- 25:28साथ ही साथ इधर वर्ल्ड वॉर भी चालू हो गया
- 25:30था। बोस ने रूप बदलकर से निकलकर
- 25:33अफगानिस्तान पहुंचे। यूएसएसआर गए और फिर
- 25:36जर्मनी पहुंच गए। वहां उन्होंने हिटलर से
- 25:38मिलकर सपोर्ट मांगा। लेकिन हिटलर की नाजी
- 25:41पार्टी ने उन्हें सपोर्ट देने से मना कर
- 25:42दिया। लेकिन सुभाष बोस ने हार नहीं मानी
- 25:45और उन्होंने जापान से मदद मांगने का मन
- 25:46बना लिया। फिर वह जापान गए। जहां उनका
- 25:49असली मिशन स्टार्ट हुआ। वहां एकिस्टिंग
- 25:51इंडियन सोल्जर से मिलके बनाई गई इंडियन
- 25:54नेशनल आर्मी। इंडियन नेशनल आर्मी यानी
- 25:56आईएनए ने जापानीज फोर्सेस के साथ मिलकर
- 25:58ब्रिटिश फोर्सेस के खिलाफ इंफाल और कोहिमा
- 26:00में लड़ाई लड़ी। हालांकि मिलिट्री
- 26:02विक्ट्री नहीं मिली लेकिन मोरल विक्ट्री
- 26:05जबरदस्त थी। आईएनए ने मोरांग यानी मणिपुर
- 26:08में तिरंगा लहरा दिया। लेकिन नागासाकी और
- 26:10हिरोशिष्मा में एटॉमिक बम से अटैक होने के
- 26:12बाद जापान ने सरेंडर कर दिया जिसका
- 26:14इंपैक्ट आईए पर भी पड़ा और उन्हें भी
- 26:16ब्रिटिश फोर्सेस के सामने सरेंडर करना
- 26:18पड़ा। आईए के लीडर्स को अरेस्ट कर लिया
- 26:20गया और उनके अगेंस्ट रेडफोर्ड में सडिशन
- 26:23का मुकदमा चलाया गया। यह पूरे देश के लिए
- 26:25इमोशनली एक टिपिंग पॉइंट था। इससे पूरे
- 26:27भारत में इमोशनल एक्सप्लोजन हो गया।
- 26:29स्टूडेंट्स वर्कर्स इवन ब्रिटिश इंडियन
- 26:31आर्मी के जवान सभी इस सिमिलेशन के अगेंस्ट
- 26:33प्रोटेस्ट में उतर गए। इसी दौरान अगस्त
- 26:361945 को जब सुभाष बोस एक प्राइवेट प्लेन
- 26:38से तैवान जा रहे थे तो उनका वह प्लेन
- 26:40मिस्टीरियसली क्रैश हो गया और इस क्रैश
- 26:43में उनकी मौत हो गई। उधर नॉन कोऑपरेशन
- 26:45मूवमेंट के बाद इंडियन पॉलिटिक्स में एक
- 26:46नया मुद्दा उभर कर आया और वो मुद्दा था
- 26:48कम्युनलिज्म और एक सेपरेट मुस्लिम स्टेट
- 26:51की डिमांड। दरअसल 1933 से 1935 के बीच
- 26:54कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले एक
- 26:56स्टूडेंट चौधरी रहमत अली ने अपने एक प्लेट
- 26:59नाउ और नेवर में पहली बार पाकिस्तान टर्म
- 27:01का प्रयोग किया। और उनके इस नए टर्म के
- 27:04मुताबिक पी से पंजाब, ए से अफगानिया यानी
- 27:06कि नॉर्थ वेस्ट इंटिया प्रोविंस, के से
- 27:08कश्मीर, एस से सिंध और तान से बलूचिस्तान
- 27:11था। 1937 के इलेक्शंस में मुस्लिम लीग की
- 27:14करारी हार हुई और जिन्ना ने कांग्रेस पर
- 27:16हिंदू राष्ट्र बनाने का आरोप लगाया। इस
- 27:18आरोप के पीछे एक मकसद था पाकिस्तान के लिए
- 27:21एक स्ट्रांग पब्लिक ओपिनियन बनाना। इसके
- 27:23बाद 22- 23 मार्च 1940 के मुस्लिम लीग
- 27:26सेशन में एक प्रपोजल पास हुआ जिसमें
- 27:27सेपरेट मुस्लिम स्टेट की मांग की गई जिसे
- 27:30हम कहते हैं लाहौर रेज़ोल्यूशन या
- 27:32पाकिस्तान रेज़ोल्यूशन। इस सेशन के
- 27:34प्रेसिडेंट थे स्वयं मोहम्मद अली जिन्ना।
- 27:36वहीं क्रिप्स मिशन 1942 ने भी
- 27:38इनडायरेक्टली पाकिस्तान की डिमांड को
- 27:40एक्सेप्ट कर लिया। इस प्रपोजल में कहा गया
- 27:42कि वॉर के बाद भारत को डोमिनियन स्टेटस
- 27:44दिया जाएगा और अगर कोई प्रोविंस चाहे तो
- 27:47अपना अलग कॉन्स्टिट्यूशन बना सकता है।
- 27:49क्रिप्स प्रपोजल के रिस्पांस में महात्मा
- 27:51गांधी ने इसे कहा कि यह एक पोस्ट डेटेड
- 27:54चेक है। वह भी एक बैंककरप्ट बैंक के नाम
- 27:56पे। ब्रिटिशर्स के यह प्रपोजल कांग्रेस ने
- 27:59रिजेक्ट कर दिए। तब गांधी जी ने क्विट
- 28:01इंडिया मूवमेंट का आवाह्वन किया। 14 जुलाई
- 28:041942 को वर्धा में कांग्रेस वर्किंग कमेटी
- 28:06की मीटिंग में यह प्रपोजल पास हो गया। और
- 28:09फिर 8 अगस्त 1942 को बॉम्बे के गोविलिया
- 28:12टैंक मैदान में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी
- 28:15के सेशन में इसे ऑफिशियली रेटिफाई किया
- 28:17गया। यहीं गांधी जी ने अपना प्रसिद्ध नारा
- 28:19दिया डू और डाई। इसके बाद ब्रिटिश
- 28:22गवर्नमेंट ने तुरंत इंडियन लीडर जिसमें
- 28:23गांधी जी, नेहरू जी और सरदार पटेल सभी
- 28:26शामिल थे। उन सबको अरेस्ट करवा दिया। देश
- 28:28भर में आंदोलन भड़क गया। रेल लाइन तोड़ना,
- 28:31डाकघर जलाना, टेलीग्राफ वायर काटना जैसे
- 28:33काम होने लगे। उधर बढ़ती वायलेंस के कारण
- 28:36ब्रिटिशर्स ने भी इस मूवमेंट को बहुत
- 28:38ब्रूटली क्रश किया। लेकिन साथ ही ब्रिटिश
- 28:40गवर्नमेंट को भी यह एहसास होने लगा था कि
- 28:42इंडिया में अब उनका राज ज्यादा दिन चलने
- 28:45वाला नहीं है। क्विट इंडिया मूवमेंट के
- 28:47तुरंत बाद 23 मार्च 1943 को मुस्लिम लीग
- 28:50ने पाकिस्तान डे मनाया और दिसंबर 1943 में
- 28:54जिन्ना ने ब्रिटिशर्स के लिए डिवाइड एंड
- 28:56क्विट का स्लोगन दिया। वहीं अक्टूबर 1943
- 28:59में लिदगो की जगह लॉर्ड वेवल नई इंडिया के
- 29:01नए वायसराॉय बने। उन्होंने सिचुएशन नॉर्मल
- 29:04करने की कोशिश की और कांग्रेस के लीडर को
- 29:06जेल से रिहा कर दिया। 14 जून 1945 को वेवल
- 29:09ने वेवल प्लान प्रपोज किया और शिमला में
- 29:11एक कॉन्फ्रेंस बुलाई। इस समय कांग्रेस के
- 29:14प्रेसिडेंट थे मौलाना अबुल कलाम आजाद।
- 29:16लेकिन इस कॉन्फ्रेंस में जिन्ना ने डिमांड
- 29:18किया कि मुस्लिम कम्युनिटी का
- 29:20रिप्रेजेंटेशन सिर्फ मुस्लिम लीग करे जो
- 29:23कांग्रेस को बिल्कुल मंजूर नहीं था। और
- 29:25ऐसा होता तो कांग्रेस के सभी मुस्लिम
- 29:27लीडर्स जैसे कि खान अब्दुल गफ्फार खान
- 29:29एग्जीक्यूटिव काउंसिल के बाहर हो जाते।
- 29:31इसी वजह से शिमला कॉन्फ्रेंस भी फेल हो
- 29:33गई। फरवरी 1946 में दूसरी तरफ रॉयल इंडियन
- 29:37नेवी ने भी रिवोट कर दिया। जिसमें सेलर्स
- 29:39ने फूड, डिस्क्रिमिनेशन और कंडीशंस को
- 29:41लेकर ब्रिटिशर्स के खिलाफ विद्रोह किया।
- 29:43ब्रिटिश गवर्नमेंट ने इस विद्रोह को दबाने
- 29:45के लिए एडमिरल गॉडफ्रे को भेजा। लेकिन
- 29:47सिचुएशन इतनी बिगड़ गई कि सरदार पटेल और
- 29:50जिन्ना को भी इंटरवीन करना पड़ा। इस
- 29:52इंसिडेंट ने ब्रिटिश को यह समझा दिया कि
- 29:54उनकी आर्म्ड फर्सेस भी अब लॉयल नहीं रही
- 29:56हैं। और इसी समय ब्रिटिश प्राइम मिनिस्टर
- 29:58क्रिमेंट एटले इन्होंने हाउस ऑफ कॉमर्स
- 30:01में कहा कि ब्रिटिश गवर्नमेंट विल
- 30:03ट्रांसफर पावर टू इंडियन हैंड्स नो लेटर
- 30:05देन जून 1948। यानी कि ब्रिटिश गवर्नमेंट
- 30:07जून 1948 से पहले ही इंडियंस को पावर
- 30:10ट्रांसफर कर देगी। लेकिन इंडिपेंडेंस से
- 30:12पहले इंडिया में हिंदू और मुस्लिम्स के
- 30:14बीच बढ़ती डिस्प्यूट को सॉल्व करना बहुत
- 30:16जरूरी था। इसके लिए ब्रिटिश गवर्नमेंट ने
- 30:18लॉर्ड माउंटबेटन को इंडिया का नया
- 30:19वायसराॉय बनाया। लॉर्ड माउंटबेटन ने थर्ड
- 30:22जून 1947 को एक प्रपोजल रखा। इस प्रपोजल
- 30:26के अनुसार भारत को दो हिस्सों में बांटा
- 30:28जाएगा इंडिया और पाकिस्तान। और पावर
- 30:30ट्रांसफर जून 1948 की बजाय जल्दी होगी।
- 30:34यानी कि 15 अगस्त 1947 को ही कर दी जाएगी।
- 30:36और इस तरीके से 15 अगस्त 1947 को हमारा
- 30:39देश 200 सालों की लंबी गुलामी के बाद
- 30:42ब्रिटिश कॉलोनियल रूल से आजाद हो गया।
- 30:45उम्मीद करता हूं कि आपको यह वीडियो पसंद
- 30:46आया होगा। मिलते हैं आपसे नेक्स्ट वीडियो
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