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Radio Play - Malvikagnimitram by Kalidas । Episode #02 — Transcript

by Akashvani AIR · 3,236 words · 448 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00यह आकाशवाणी है मालविका अग्निमित्र आज
  2. 0:05प्रस्तुत है महाकवि कालिदास के सुप्रसिद्ध
  3. 0:09संस्कृत नाटक मालविका अग्नि मित्रम का
  4. 0:13हिंदी रेडियो नाट्य रूपांतर तो सुनिए नाटक
  5. 0:17मालविका अग्निमित्र
  6. 0:21आज प्रस्तुत है इस नाटक की दूसरी और अंतिम
  7. 0:27कड़ी
  8. 0:28[संगीत]
  9. 0:38इन पुरुषों पर भूलकर भी कभी विश्वास नहीं
  10. 0:40करना
  11. 0:41चाहिए मैं अब तक आर्य पुत्र की प्रेमी
  12. 0:44बातों पर विश्वास करती
  13. 0:46रही मैं क्यों इनके प्रेम जाल में फसी
  14. 0:50महाराज महाराज कुछ तो बात बनाइए अरे रंगे
  15. 0:55हाथों पकड़ा गया चोर भी कह देता है कि मैं
  16. 0:59चोरी कर के लिए सेंध नहीं लगा रहा था मैं
  17. 1:02तो यह देखना चाहता था कि मैंने दीवार
  18. 1:05फोड़ने की विद्या ठीक ठीक सीख ली है या
  19. 1:08नहीं सुंदरी मालविका जैसी दासी से भला
  20. 1:13हमें क्या लेना देना तुम्हारे आने में देर
  21. 1:16हो रही थी इसलिए थोड़ा मन बहलाने के लिए
  22. 1:19हम यह आप सच कह रहे हैं मुझे यदि पता होता
  23. 1:24कि आर्य पुत्र को मन बहलाने के लिए यही
  24. 1:27वस्तु मिली है तो मैं अ भागन आती ही क्यों
  25. 1:31मेरे साथ छलना कीजिए महाराज वहां आड़ में
  26. 1:34खड़े होकर मैंने सब कुछ देखा और सुना है
  27. 1:39मुझसे निश्चय अपराध हुआ है रानी रावती
  28. 1:43मुझे क्षमा कर दो मैं तुम्हारे पांव पड़ता
  29. 1:45हूं यह मालविका के पैर नहीं है महाराज जो
  30. 1:49आपके मन की साथ पूरी कर देंगे ने पुर्णिका
  31. 1:52हम चले यहां से चलिए दे
  32. 1:57[संगीत]
  33. 2:01[प्रशंसा]
  34. 2:03[संगीत]
  35. 2:16महाराज महाराज अनर्थ हो गया महाराज अनर्थ
  36. 2:19क्या हुआ महारानी धारिणी ने मालविका और
  37. 2:23बकुला बलिका के पैरों में बेड़ियां डलवा
  38. 2:25करर उन दोनों को पाताल जैसी भंडार वाली
  39. 2:29काल कोठरी में बंद करवा दिया है
  40. 2:32ओ मेरे प्रेम की बात जानक ही सब किया गया
  41. 2:36होगा हमारे किस बैरी ने देवी धारणी को
  42. 2:40जाकर भड़काया छोटी रानी इरावती ने और
  43. 2:42किसने लगता है इरावती हमसे बहुत रुष्ट हो
  44. 2:45गई
  45. 2:47है ये तो बहुत बुरा हुआ कहो मित्र उन्हें
  46. 2:53छुड़ाने का कोई उपाय हो सकता है उपाय क्या
  47. 2:55होगा महाराज निचले भंडार की पहरेदार से
  48. 2:59महारानी धारिणी ने कह दिया है कि उन दोनों
  49. 3:02अभागिन को बिना उनकी अंगूठी देखे ना छोड़े
  50. 3:06महारानी की अंगूठी कैसे हाथ लगे मित्र कोई
  51. 3:09तो युक्ति लड़ा
  52. 3:12युक्ति
  53. 3:15युक्ति महाराज महारानी की किसी एक अंगूठी
  54. 3:20में नाग मुद्रा जड़ी है हां तो उपाय मिल
  55. 3:24गया सुनिए न महाराज कान में सुनिए
  56. 3:31अरे जियो मित्र बहुत बढ़िया उपाय सोचा है
  57. 3:33तुमने बस अब देर ना करो तो आप महारानी
  58. 3:36धरनी के पास जाइए वो इस समय भवन में
  59. 3:39दासिव राजिका जी से कथा सुनकर मन बहला रही
  60. 3:43है तो हमारे लिए वहा जाने का यह अच्छा
  61. 3:44अवसर है सुनो प्रतिहारी जय सेन को सब समझा
  62. 3:47दो अभी समझा देता हूं महाराज आप वहां
  63. 3:50पहुंच जय सेन इधर जी आर गौतम ध्यान से
  64. 3:53सुनो कान में जी
  65. 3:57[संगीत]
  66. 4:09जय हो आर्य पुत्र की जय हो विराजी महाराज
  67. 4:14आपकी विजय हो देव प्रणाम भगवती कहो देवी
  68. 4:18पांव की पीड़ा कुछ कम हुई आज तो कुछ कम है
  69. 4:22दे महाराज
  70. 4:24महाराज ये आर्य गौतम घबराया हुआ इधर चला
  71. 4:28रहा है हाथ का अंगूठा भी जने उसे बांध रखा
  72. 4:32है महाराज मुझे बचाइए मुझे बचाइए मुझे
  73. 4:36सांप ने काट लिया आपने काट लिया ओ ये तो
  74. 4:41बहुत बुरा हुआ प्रतिहारी जी महाराज शीघ्री
  75. 4:45वैद्य ध्रुव सिद्धी को बुलाकर लाओ जैसी
  76. 4:47देवती आ मित्र गौतम महाराज कहां घूम रहे
  77. 4:51थे जो सांप ने काट लिया महाराज मैं तो
  78. 4:53देवी का कुशल मंगल पूछने के लिए आने लगा
  79. 4:57सोचा भेंट के लिए दो चार फूल लेता चलू मैं
  80. 5:00प्रम दवन चला गया वहां फूल तोड़ने के लिए
  81. 5:04दाहिना हाथ बढ़ाया ही था कि कालसरी के
  82. 5:07सांप ने मुझे डस लिया ये देखिए ये देखिए
  83. 5:10अंगूठे पर उसके दांतों के चिन्ह
  84. 5:14आए मेरे ही कारण बेचारे ब्राह्मण के प्राण
  85. 5:17संकट में पड़े हैं घबराओ मत मित्र हो सकता
  86. 5:20है साप विषैला ना हो आए आए मेरा तो अंग
  87. 5:25अंग अकता जा रहा है सारे शरीर में विष
  88. 5:30फैलता जा रहा है इसकी तो दशा बिगड़ती जा
  89. 5:34रही है अरे कोई संभालो कोई है संभालो
  90. 5:38ब्राह्मण को अरे गौतम तनिक संभालिए धीरज
  91. 5:42से काम
  92. 5:45लीजिए महाराज महाराज मैं आपका बाल सका हूं
  93. 5:50इसी नाते मेरे मरने के बाद मेरी निपी मां
  94. 5:54की देखभाल अवश्य कीजिएगा अवश्य कीजिएगा ये
  95. 5:58क्या कह रहे हो मित्र अभी वैद आकर तुम्ह
  96. 6:01अच्छा कर देगा महाराज की जय महाराज वैद्य
  97. 6:05जी ने कहा है कि आर्य गौतम का उपचार उनके
  98. 6:08चिकित्सालय में हो सकेगा और जलघर विधान
  99. 6:10द्वारा किसी ऐसी वस्तु से विष उतारा जाएगा
  100. 6:14जिसमें नाग मुद्रा जड़ी क्या कोई ऐसी
  101. 6:16वस्तु मिल सकेगी नाग
  102. 6:19मुद्रा हा मेरी इस अंगूठी में नाग मुद्रा
  103. 6:23जड़ी हुई है ये ले जाओ काम हो जाने पर
  104. 6:26मुझे लौटा देना जय श्रीदवी की आज्ञा आइए
  105. 6:30आर्य गौतम देवी
  106. 6:32महारानी देवी कौन जाने मैं जिऊ या मरू
  107. 6:38सेवा करते हुए मुझसे तनिक कुछ भूल चूक हुई
  108. 6:41हो देवी तो वो क्षमा कीजिएगा क्षमा
  109. 6:45कीजिएगा भगवान करे तुम शीघ्र ही स्वस्थ हो
  110. 6:48जाओ और बहुत दिनों तक
  111. 6:51[संगीत]
  112. 6:56जियो जय सेन ये अंगूठी मुझे दो
  113. 7:00कुछ देर बाद मंत्री जी का बहाना करके
  114. 7:02महाराज को बाहर बुला लाना और फिर यथाशीघ्र
  115. 7:05उन्हें चोर मार्ग से प्रम दवन पहुंचा देगा
  116. 7:08जो
  117. 7:14[संगीत]
  118. 7:22आया
  119. 7:24कौन आर्य
  120. 7:26गौतम आज आप निचले भंडार में कैसे आए
  121. 7:30यह देखो महारानी की
  122. 7:32अंगूठी हां अंगूठी तो उन्हीं की है तो
  123. 7:36तुरंत मालविका और बकला बलिका को अपनी उस
  124. 7:39काल कोठरी से मुक्त करो ओ यहां कितना
  125. 7:43अंधेरा है ठहरी मैं अभी मशाल जलाती हूं और
  126. 7:47उन दोनों को बंधन मुक्त करती हूं परंतु
  127. 7:51मैं सोच रही हूं कि इतने सेवकों के रहते
  128. 7:55देवी ने आपको ही क्यों भेजा देवी ने मुझको
  129. 7:58क्यों भेजा देवी ने क्यों भेजा अरे जो
  130. 8:01शियों ने कहा है कि आजकल महाराज के ग्रह
  131. 8:04कुछ ठीक नहीं है इसलिए सब बंदियों को
  132. 8:06तुरंत मुक्त किया जाए देवी ने तुरंत मुझे
  133. 8:09बुलाया और कहा कि ठीक है मैं उन दोनों को
  134. 8:13अभी छोड़े देती हूं हां छोड़ो शीघ्र
  135. 8:22छोड़ो आप धन्य है आर्य गौतम परंतु आपने यह
  136. 8:26खेल खेला कैसे ये मैं फिर बताऊंगा लालिका
  137. 8:30इस समय तुम मालविका को चोर मार्ग से
  138. 8:33समुद्र गृह में ले जाकर प्रतीक्षा करो मैं
  139. 8:36मैं महाराज को रया अच्छा
  140. 8:43[संगीत]
  141. 8:49रे सखी मालविका महाराज को प्रणाम करो
  142. 8:54महाराज
  143. 8:56प्रणाम अरे य तो समद में लगा हुआ महाराज
  144. 9:00का चित्र है अच्छा सखी तुम भी मुझे बना
  145. 9:04रही हो बनाना कैसा चित्र में भी तो महाराज
  146. 9:09ही है सखी बकुला
  147. 9:12बलिका उस दिन खबरा में महाराज को अच्छी
  148. 9:17तरह नहीं देख पाई थी अब चित्र में महाराज
  149. 9:21को जी भर के देख लेती
  150. 9:24हूं क्यों सखी यह कौन स्त्री है की और
  151. 9:29महाराज मुंह घुमाकर बड़ी प्रेम भरे चितवन
  152. 9:32से देख रहे हैं यह छोटी रानी इरावती है
  153. 9:37ओ महाराज का प्रेम सब रानियों पर एक सा
  154. 9:41नहीं जान पड़ता देखो ना सबकी ओर से ध्यान
  155. 9:45हटाकर वे केवल देवी इरावती का ही मुख
  156. 9:48निहार रही हैं महाराज देवी इरावती का मुख
  157. 9:51क्यों ना निहारे यही तो महाराज को सबसे
  158. 9:55अधिक प्यारी है तो फिर मैं क्यों प्रेम
  159. 9:59अपनी देह जलाऊ सुंदरी माल के स्वामी की जय
  160. 10:03हो अरे अरे महाराज ऊपर खिड़की से सब कुछ
  161. 10:09देख सुन रहे थे
  162. 10:12प्रिय चित्र में चित्रकार द्वारा चित्रित
  163. 10:16हमारी मुख मुद्रा को देखकर तुम हमसे रूठ
  164. 10:19गए तुम्हारे य अनन्य दास तो तुम्हारे
  165. 10:22सामने खड़ा है तो क्या मैं सचमुच स्वामी
  166. 10:26से रूट गई थी
  167. 10:29स्वामी की जय हो
  168. 10:33प्रिय अरे आप कहते कहते रुक क्यों गए
  169. 10:37महाराज क्या बताऊं मित्र व द्वितीय सुंदरी
  170. 10:41मालविका को सामने पाकर भी अपनी आंखों पर
  171. 10:45भरोसा नहीं हो रहा है क्यों क्योंकि यह
  172. 10:48मृगनैनी देखते ही देखते ओजल हो जाती
  173. 10:52है सखी मालविका तुमने महाराज को बहुत कष्ट
  174. 10:57दिया है अब कुछ ऐ सा जतन करो कि ये तुम पर
  175. 11:01भरोसा करने लगे सखी मुझा भागन की तो
  176. 11:05महाराज से स्वप्न में भी कभी भेट नहीं
  177. 11:08हुई महाराज इसका उत्तर तो आप ही दे सकते
  178. 11:13हैं उत्तर क्या है दे बकला बलिका तुम्हारी
  179. 11:17सखी से हम अपनी कोई सेवा नहीं कराना
  180. 11:20चाहते हम तो प्रेम की अग्नि को साक्षी
  181. 11:24बनाकर इनकी सेवा के लिए अपने को समर्पित
  182. 11:28करना चाहते हैं
  183. 11:30बकुला वाली का उधर देख उस नए अशोक के
  184. 11:33पत्तों को हिरण चरे जा रहा है इसे भगा दे
  185. 11:38हा चलिए
  186. 11:40आ महाराज घबराइए नहीं मैं समुद्र गृह के
  187. 11:45द्वार पर पहरा दूंगा मित्र
  188. 11:50[संगीत]
  189. 12:10देवी देवी यह देखिए आर्य गौतम सांड की तरह
  190. 12:16समुद्र ग्रह के द्वार पर बैठे बैठे सो रहे
  191. 12:19हैं बेचारे की कैसी दशा है लगता है विष का
  192. 12:24विकार अभी पूरी तरह दूर नहीं
  193. 12:28हुआ किंतु इनके चेहरे पर जो प्रसन्नता झलक
  194. 12:31रही है उससे तो ऐसा नहीं लगता
  195. 12:37कि
  196. 12:40मालविका देवी मालविका सुना
  197. 12:45स्वामीनी यह गौतम पेट तो भरता है आपके दिए
  198. 12:49लड्डुओं से और स्वप्न में नाम रट रहा है
  199. 12:52मालविका का
  200. 12:54मालविका तुम छोटी रानी रावती से भी ऊंचा
  201. 13:00स्थान
  202. 13:03पाओ ये कृतन बामन ठहरी ठहरी दे तनिक ठहरी
  203. 13:09आइए हम दोनों उधर खंभे की ओट में छिप जाते
  204. 13:13हैं और वहां से मैं इस दर पोक बामन पर य
  205. 13:18लकड़ी फेंक
  206. 13:23हूं साप महाराज महाराज बताइए आपका सछ सा आ
  207. 13:29अरे डरो मत मित्र मैं आ रहा हूं महाराज
  208. 13:31रुकिए उधर ना जाइए
  209. 13:36अच्छा तो ये बात
  210. 13:39है समुद्र ग्री में महाराज और मालवी
  211. 13:46का अरे ये तो लकड़ी है मैं तो समझा कि
  212. 13:52केथकी के कांटों से सांप के दांतों के
  213. 13:56चिन्ह बनाकर मैंने सांप पर जो कलंक लगाया
  214. 13:59था उसी का दंड देने के लिए सचमुच का सांप
  215. 14:03आ गया मैं तो मैं तो बेकार डर मित्र कहां
  216. 14:08है सा महाराज आगे ना जाइए वहां एक कुटिल
  217. 14:11सांप छिपा बैठा है महाराज रुकिए कहिए दिन
  218. 14:16में मिलने वाले इस प्रेमी जोड़े की मन की
  219. 14:19साथ पूरी हुई या नहीं कौन देवी रावती सखी
  220. 14:24बकुला वालिका ये कैसा अनर्थ बकुला वालिका
  221. 14:29तुझे बधाई है दूति के रूप में तूने इन
  222. 14:32दोनों को मिलाने का जो संकल्प किया था वो
  223. 14:35आज पूरा हो
  224. 14:36गया परंतु मैं पूछती हूं तुम दोनों को
  225. 14:40बंदी गृह से छुड़वाया किसने निपुणिका जी त
  226. 14:43महारानी धारणी के पास जा और उनसे पूछ यह
  227. 14:46सब कैसे हुआ जो आज्ञा
  228. 14:48दे यह तो सब गड़बड़ घोटाला हो गया पिंजरे
  229. 14:53से छूटा हुआ कबूतर बिल्ली के सामने आगे
  230. 14:56रहा देवी इ दोनों को हमने ही बंदी ग्रह से
  231. 15:00छुड़वाया है जी देवी उत्सव के दिन अपने
  232. 15:02सेवकों को बंदी बनाना उचित नहीं देवी देवी
  233. 15:06क्या बात है नि पुर्णिका तू लौट आई जी
  234. 15:10रास्ते में ही मुझे निचले भंडार की
  235. 15:13पहरेदार मिल गई उसने बताया
  236. 15:15कि क्या कान में सुनिए
  237. 15:20देवी सखी बकुला वाले का हा देवी मुझे तो
  238. 15:24बहुत डर लग रहा है पता नहीं क्या होने
  239. 15:28वाला है
  240. 15:31अच्छा तो यह इस ब्राह्मण की करतूत है
  241. 15:35क्यों प्रेम नीति के मंत्री महोदय देवी
  242. 15:39यदि मैं नीति का ज्ञाता होता तो क्या
  243. 15:42महाराज को ऐसे फसने देता मैं सब समझती हूं
  244. 15:45मैं अभी महारानी धारणी के पास जाती हूं और
  245. 15:48उनसे पूरी बात
  246. 15:54[संगीत]
  247. 16:03सुनो सुनो सुनो सभी नगरवासियों
  248. 16:08एक आश्चर्य जनक समाचार सुनो महारानी के
  249. 16:13प्रिय सुनहले अशोक वृक्ष का दो हद पूरा
  250. 16:17हुए पांच रातें भी नहीं बीती कि उसम फूल आ
  251. 16:21गए अपने सुनहले अशोक के फूलने पर महारानी
  252. 16:27अत्यंत प्रसन्न है
  253. 16:29आज वे प्रम दवन में महाराज को बुलाकर
  254. 16:33सुनहले अशोक के फूलने का उत्सव
  255. 16:41बनाएंगी राज प्रसाद वासियों सुनो सुनो
  256. 16:47सुनो एक और हर्ष
  257. 16:50समाचार वीर सेन के सेनापति में महाराज की
  258. 16:54विजनी सेना ने विदर्भ पर विजय पाली है
  259. 17:00विदर्भ राज के चचेरे भाई और महाराज के
  260. 17:04मित्र माधव सेन बंदी गृह से मुक्त हो गए
  261. 17:09हैं माधव सेन ने भेट स्वरूप महाराज को
  262. 17:15बहुत से अनमोल रत्न हाथी घोड़े और उच्च
  263. 17:20कोटि के कलाकार सेवक भेजे हैं विदिशा पति
  264. 17:24विदर्भ विजेता महाराज अग्निमित्र की जय
  265. 17:28महाराज अग्निमित्र की
  266. 17:36जय विदेशा पति विदर्भ विजेता महाराज
  267. 17:40अग्निमित्र की जय महाराज अग्निमित्र की जय
  268. 17:45महाराज अग्नि मित्र की जय महाराज अग मित्र
  269. 17:48की जय महाराज अग मित्र की जय महाराज की
  270. 17:55[संगीत]
  271. 18:00कुल भूषण विप महाराज अग्निमित्र प्रम वन
  272. 18:04उत्सव में पधार रहे
  273. 18:07[प्रशंसा]
  274. 18:08[संगीत]
  275. 18:16हैं मित्र गौतम जी महाराज प्रम दवन में
  276. 18:20महारानी धारनी के पास मालविका भी है लगता
  277. 18:24है पृथ्वी के पीछे राजलक्ष्मी खड़ी है
  278. 18:28महाराज का कहना सर्वथा उचित है जय हो विधर
  279. 18:33विजेता आर्य पुत्र की जय हो
  280. 18:36देवी सुनहले अशोक के फूलने पर आपको बधाई
  281. 18:40विराज देव विदर्भ विजेता महाराज की जय हो
  282. 18:44प्रणाम भगवती आपके मन की साद पूरी हो आरे
  283. 18:49पुत्र फूलों से लदे सुनहले अशोक की शोभा
  284. 18:52ने आरि आपके लिए अशोक का ऐसा प्रेम गृह
  285. 18:57बना दिया गया है जहा देवी के हाथों अशोक
  286. 19:00का ऐसा आदर होना ही चाहिए क्योंकि यह वसंत
  287. 19:04लक्ष्मी के कहने पर नहीं देवी के प्रयत्न
  288. 19:07से फूल उठा है और हां देवी आज ब्राह्मणों
  289. 19:11को भी दान दक्षिणा दे दी गई है ना हां
  290. 19:14महाराज जब से कुमार वसुमित्र को पूज्य
  291. 19:17सेनापति जी यज्ञ के घोड़े का रक्षक बनाकर
  292. 19:20ले गए हैं तभी से उनके कुशल क्षेम के लिए
  293. 19:23मैं प्रतिदिन 400 स्वर्ण मुद्राएं योग्य
  294. 19:26ब्राह्मणों को दक्षिणा में दे रही हूं
  295. 19:28हमारा पुत्र चिरंजीवी हो महाराज की जय
  296. 19:32विदर्भ से जो कलाकार स्त्रियां भेट स्वरूप
  297. 19:34आई है यदि आज्ञा हो तो उन्हें सेवा में
  298. 19:37उपस्थित किया जाए ले आओ जैसी देव की
  299. 19:44आ महाराज की जय हो महारानी की जय
  300. 19:49हो आप लोग किस कला में निपुण है महाराज हम
  301. 19:55लोगों ने संगीत सीखा है लो देवी
  302. 19:59इनमें से जिसे चाहो अपने लिए चुन लो
  303. 20:02मालविका आज्ञा देवी देखो इनमें से कौन
  304. 20:07तुम्हारा साथ देने के लिए ठीक रहेगी अरे
  305. 20:10राजकुमारी आप यहां जय हो राजकुमारी की जय
  306. 20:14हो राजकुमारी की जय हो मालविका राजकुमारी
  307. 20:19हां महाराज यह हमारी राजकुमारी है कैसे
  308. 20:24महाराज आपकी विजय सेना ने विदर्भ के राजा
  309. 20:27को परास्त करके के जिन कुमार माधव सेन को
  310. 20:30बंदी ग्रह से छुड़ाया है यह उन्हीं की
  311. 20:33छोटी बहन मालविका जी हैं
  312. 20:37अरे तो क्या मालविका राजकुमारी है इसे इसे
  313. 20:43मैंने दासी
  314. 20:46बनाया चंदन से खड़ाऊ का काम लेकर मैंने
  315. 20:50कितना बड़ा पाप किया है ये इस रूप में य
  316. 20:53आई
  317. 20:54कैसे भाग्य के फेर से मैं मैं निवेदन करती
  318. 20:59हूं महाराज राजकुमार माधव सेन हम सब लोगों
  319. 21:03के साथ राजकुमारी जी को लेकर विदिशा आ रहे
  320. 21:06थे उनके मंत्री आर्य सुमति जी भी साथ थे
  321. 21:10रास्ते में राजकुमार माधव सेन को उनके
  322. 21:13चचेरे भाई विदर्भ राज ने पकड़कर बंदी बना
  323. 21:16लिया स्वामी भक्त मंत्री सुमती जी हमें
  324. 21:20पीछे छोड़कर राजकुमारी जी को वहां से
  325. 21:22सुरक्षित निकाल कर ले गए फिर क्या हुआ
  326. 21:26महाराज आगे का हाल तो मुझे भी नहीं मालूम
  327. 21:29आगे का हाल मैं अभागन बताती हूं महाराज
  328. 21:33भगवती आप
  329. 21:35राजकुमारी सन्यासिनी के विष में ये तो
  330. 21:38आर्या कौशिक जान पड़ती है हां वही है
  331. 21:42प्रणाम भगवती कल्याण हो
  332. 21:46भगवती क्या ये भी आपकी शिष्य है हां
  333. 21:49महाराज मैं अब पूरा वृतांत सुनाती हूं
  334. 21:53माधव सेन के मंत्री आर्य सुमति मेरे बड़े
  335. 21:56भाई थे अच्छा
  336. 22:00अब बात समझ में आने लगी माधव सेन ने आपसे
  337. 22:04अपनी बहन मालविका के विवाह की बात पक्की
  338. 22:06कर ली थी जब माधव सेन बंदी बना लिए गए तो
  339. 22:10मेरे भाई सुमति ने उनके संकल्प को पूरा
  340. 22:13करने का बीड़ा
  341. 22:15उठाया व्यापारियों का एक दल विदिशा की ओर
  342. 22:18आ रहा था राजकुमारी मालविका को लेकर मेरे
  343. 22:21भाई उसी दल के साथ हो लिए रास्ते में घने
  344. 22:25जंगल के बीच डाकुओं ने हमारे दल को घेर
  345. 22:28लिया ओ हमारे सभी सश सैनिक डाकुओ के साथ
  346. 22:33लड़ते हुए घायल होकर गिर पड़े अंत में
  347. 22:37मेरे भैया आर्य सुमति ने भी अपने प्राण
  348. 22:40देकर अपने स्वामी का भार चुका दिया उस दुख
  349. 22:44के आघात से मैं तो मूर्चित हो गई जब मुझे
  350. 22:48चेतना आई तो राजकुमारी मालविका वह नहीं थी
  351. 22:52दुख संताप से टूटकर मैं सन्यासी नहीं बन
  352. 22:56गई और आपकी राजी में चली आई बाद में
  353. 23:01मालविका भी यहां दासी के रूप में आ गई
  354. 23:04ओ विपत्ति आने पर मनुष्य का कितना अनादर
  355. 23:07हो जाता है जो रानी कहलाने योग्य थी उससे
  356. 23:12दासी का काम लिया गया भगवती कौशिकी
  357. 23:16मालविका ऊंची राज घराने की कन्या है यह
  358. 23:19बात छिपाकर आपने अच्छा नहीं किया ऐसा ना
  359. 23:23कहिए महारानी मैंने सोच समझ कर ही इस
  360. 23:26रहस्य को इतने दिन छिपाए रखा
  361. 23:29जब इनके पिता जीवित थे तो एक साधु महात्मा
  362. 23:32ने इनके विषय में भविष्यवाणी की थी कि इस
  363. 23:35कन्या को एक वर्ष तक दासी बनकर रहना
  364. 23:38पड़ेगा उसके पश्चात इसका विवाह बड़े ही
  365. 23:41योग्य और प्रतापी पुरुष से
  366. 23:43होगा जब मैंने देखा कि वह भविष्यवाणी आपके
  367. 23:47चरणों की सेवा करते हुए पूरी हो रही है तो
  368. 23:50मैं मौन रही महाराज की जय हो कहो मंत्री व
  369. 23:55सब कुशल तो है
  370. 23:57महाराज मंत्री परिषद ने पूछा है कि जीते
  371. 24:00गए विदर्भ देश की कैसी व्यवस्था की जाए हम
  372. 24:04चाहते हैं कि विदर्भ देश यज्ञ सेन और माधव
  373. 24:07सेन में आधा आधा बांट दिया जाए दोनों भाई
  374. 24:11अलग-अलग वैसे सुख से राज करें जैसे सूर्य
  375. 24:14और चंद्रमा रात और दिन को आपस में बांटकर
  376. 24:17अलग-अलग चमकते हैं जैसी महाराज की आज्ञा
  377. 24:22महाराज की जय हो महाराज आपके पिता श्री
  378. 24:26पूज्य सेनापति पुष्य मित्र का ये पत्र आया
  379. 24:29है पिताजी का पत्र लाओ देखें लीजिए
  380. 24:33महाराज मेरा हृदय भी सुनने को छटपटा रहा
  381. 24:37है महाराज पढ़िए
  382. 24:40ना पिता श्री लिखते हैं अश्वमेध यज्ञ का
  383. 24:44संकल्प करके हमने जो अश्व स राज पुत्रों
  384. 24:47सहित कुमार वसुमित्र के संरक्षण में एक
  385. 24:51वर्ष की अवधि बांधकर छोड़ा था उसे सिंधु
  386. 24:54नदी के दक्षिणी तट पर यवनों ने पकड़ लिया
  387. 24:58फलता हमारी और शत्रु सेना में घोर युद्ध
  388. 25:02हुआ वीर वसुमित्र ने शत्रु सेना को परास्त
  389. 25:05करके हमारा अश्व छुड़ा लिया जैसे पौत्र
  390. 25:09अंशुमान द्वारा छुड़ाए गए अश्व से राजा
  391. 25:12सगर ने यज्ञ किया था वैसे ही अब हम अपने
  392. 25:16पौत्र द्वारा वापस लाए गए अश्व से यज्ञ कर
  393. 25:19रहे हैं अत तुम प्रसन्न चित हो वधु के साथ
  394. 25:24यज्ञ देखने के लिए तुरंत चले आओ महाराज
  395. 25:27महारानी पुत्र की विजय के लिए आपको बधाई
  396. 25:34बई देवी अब तक आप वीर पत्नियों की सिरमोर
  397. 25:38थी आज से आपको वीर माता होने का भी गौरव
  398. 25:42मिल गया
  399. 25:43भगवती मुझे प्रसन्नता है कि मेरा पुत्र
  400. 25:47पिता के समान ही पराक्रमी निकला आज हम
  401. 25:50बहुत प्रसन्न है मद गल्य महाराज जाओ यज्ञ
  402. 25:56सेन के साले सहित सभी ब मुक्त करा दो जय
  403. 26:00सेन आज्ञा देवी तुम सभी रानियों को हमारे
  404. 26:03पुत्र की विजय का समाचार दो और हां देवी
  405. 26:07इरावती से निवेदन कर देना कि अशोक के
  406. 26:10फूलने पर मालविका को मुंह मांगा पुरस्कार
  407. 26:13देने का मैंने जो वचन दिया था अब मैं वह
  408. 26:16पूरा करना चाहती हूं अतः वह कोई विग ना
  409. 26:20डाले जो आज्ञा देवी
  410. 26:23पाविका इधर आओ प्रस्तुत हूं
  411. 26:27देवी आर्य
  412. 26:29पुत्र आपने कुमार की विजय का हर्ष दायक
  413. 26:33समाचार सुनाया है उसके बदले में मेरी ओर
  414. 26:38से यह यह पुरस्कार स्वीकार
  415. 26:44कीजिए अरे आप लजा क्यों रहे हैं मालविका
  416. 26:50को ग्रंड कीजिए महाराज
  417. 26:56देवी देवी महाराज तो मात्र लोक व्यवहार
  418. 27:01दिखा रहे हैं महारानी आपकी उदारता देखकर
  419. 27:06मुझे तनिक भी अचरज नहीं हुआ क्योंकि आप
  420. 27:10पति को सच्चे हृदय से प्रेम करती हैं जैसे
  421. 27:14समुद्र में जाने वाली नदी अपने साथ अन्य
  422. 27:17नदियों का जल भी समुद्र में पहुंचा देती
  423. 27:19है वैसे ही आपने मालविका को स्वीकार किया
  424. 27:23है महारानी धारणी धन्य है रा धारनी की जय
  425. 27:30महारानी धारनी की जय देवी मालविका की जय
  426. 27:34देवी मालविका की जय विशा पति महाराज
  427. 27:37अग्निमित्र की जय विशा पति महाराज अगम की
  428. 27:41जय महाराज अगम की जय महाराज की
  429. 27:46जय ज
  430. 27:51[संगीत]
  431. 28:02मालविका अग्नि मित्रम अभी आप महाकवि
  432. 28:06कालिदास के सुप्रसिद्ध संस्कृत नाटक
  433. 28:10मालविका अग्नि मित्रम का यह हिंदी रेडियो
  434. 28:14नाट्य रूपांतर सुन रहे थे हिंदी अनुवादक
  435. 28:18थे सीताराम
  436. 28:20चतुर्वेदी रेडियो नाट्य रूपांतर श्री
  437. 28:23चिरंजीत ने
  438. 28:24किया नाटक के निर्देशक थ सुदर्शन कुमार
  439. 28:28संगीतकार थे सत्यदेव पवार और प्रस्तुतीकरण
  440. 28:33सहायक महफूज हसन नाटक में भाग लेने वाले
  441. 28:38कलाकार थे सर्वश्री अश्विनी कुमार मनोज
  442. 28:42भटनागर नीरज शर्मा वीना गौड़ विजय राजधान
  443. 28:47हर्ष बाला रश्म दर सरला टंडन कविता वैद
  444. 28:53योगेश कुमार जैन सुशील बैनर्जी सुरेश पंत
  445. 28:58मंगतराम और अर्चना गायिका थी श्रीमती
  446. 29:02उर्मिला नागर यह नाटक केंद्रीय नाटक एकांश
  447. 29:06द्वारा आकाशवाणी के दिल्ली केंद्र पर
  448. 29:09तैयार किया गया

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