Radio Play - Malvikagnimitram by Kalidas । Episode #02 — Transcript
Full transcript
- 0:00यह आकाशवाणी है मालविका अग्निमित्र आज
- 0:05प्रस्तुत है महाकवि कालिदास के सुप्रसिद्ध
- 0:09संस्कृत नाटक मालविका अग्नि मित्रम का
- 0:13हिंदी रेडियो नाट्य रूपांतर तो सुनिए नाटक
- 0:17मालविका अग्निमित्र
- 0:21आज प्रस्तुत है इस नाटक की दूसरी और अंतिम
- 0:27कड़ी
- 0:28[संगीत]
- 0:38इन पुरुषों पर भूलकर भी कभी विश्वास नहीं
- 0:40करना
- 0:41चाहिए मैं अब तक आर्य पुत्र की प्रेमी
- 0:44बातों पर विश्वास करती
- 0:46रही मैं क्यों इनके प्रेम जाल में फसी
- 0:50महाराज महाराज कुछ तो बात बनाइए अरे रंगे
- 0:55हाथों पकड़ा गया चोर भी कह देता है कि मैं
- 0:59चोरी कर के लिए सेंध नहीं लगा रहा था मैं
- 1:02तो यह देखना चाहता था कि मैंने दीवार
- 1:05फोड़ने की विद्या ठीक ठीक सीख ली है या
- 1:08नहीं सुंदरी मालविका जैसी दासी से भला
- 1:13हमें क्या लेना देना तुम्हारे आने में देर
- 1:16हो रही थी इसलिए थोड़ा मन बहलाने के लिए
- 1:19हम यह आप सच कह रहे हैं मुझे यदि पता होता
- 1:24कि आर्य पुत्र को मन बहलाने के लिए यही
- 1:27वस्तु मिली है तो मैं अ भागन आती ही क्यों
- 1:31मेरे साथ छलना कीजिए महाराज वहां आड़ में
- 1:34खड़े होकर मैंने सब कुछ देखा और सुना है
- 1:39मुझसे निश्चय अपराध हुआ है रानी रावती
- 1:43मुझे क्षमा कर दो मैं तुम्हारे पांव पड़ता
- 1:45हूं यह मालविका के पैर नहीं है महाराज जो
- 1:49आपके मन की साथ पूरी कर देंगे ने पुर्णिका
- 1:52हम चले यहां से चलिए दे
- 1:57[संगीत]
- 2:01[प्रशंसा]
- 2:03[संगीत]
- 2:16महाराज महाराज अनर्थ हो गया महाराज अनर्थ
- 2:19क्या हुआ महारानी धारिणी ने मालविका और
- 2:23बकुला बलिका के पैरों में बेड़ियां डलवा
- 2:25करर उन दोनों को पाताल जैसी भंडार वाली
- 2:29काल कोठरी में बंद करवा दिया है
- 2:32ओ मेरे प्रेम की बात जानक ही सब किया गया
- 2:36होगा हमारे किस बैरी ने देवी धारणी को
- 2:40जाकर भड़काया छोटी रानी इरावती ने और
- 2:42किसने लगता है इरावती हमसे बहुत रुष्ट हो
- 2:45गई
- 2:47है ये तो बहुत बुरा हुआ कहो मित्र उन्हें
- 2:53छुड़ाने का कोई उपाय हो सकता है उपाय क्या
- 2:55होगा महाराज निचले भंडार की पहरेदार से
- 2:59महारानी धारिणी ने कह दिया है कि उन दोनों
- 3:02अभागिन को बिना उनकी अंगूठी देखे ना छोड़े
- 3:06महारानी की अंगूठी कैसे हाथ लगे मित्र कोई
- 3:09तो युक्ति लड़ा
- 3:12युक्ति
- 3:15युक्ति महाराज महारानी की किसी एक अंगूठी
- 3:20में नाग मुद्रा जड़ी है हां तो उपाय मिल
- 3:24गया सुनिए न महाराज कान में सुनिए
- 3:31अरे जियो मित्र बहुत बढ़िया उपाय सोचा है
- 3:33तुमने बस अब देर ना करो तो आप महारानी
- 3:36धरनी के पास जाइए वो इस समय भवन में
- 3:39दासिव राजिका जी से कथा सुनकर मन बहला रही
- 3:43है तो हमारे लिए वहा जाने का यह अच्छा
- 3:44अवसर है सुनो प्रतिहारी जय सेन को सब समझा
- 3:47दो अभी समझा देता हूं महाराज आप वहां
- 3:50पहुंच जय सेन इधर जी आर गौतम ध्यान से
- 3:53सुनो कान में जी
- 3:57[संगीत]
- 4:09जय हो आर्य पुत्र की जय हो विराजी महाराज
- 4:14आपकी विजय हो देव प्रणाम भगवती कहो देवी
- 4:18पांव की पीड़ा कुछ कम हुई आज तो कुछ कम है
- 4:22दे महाराज
- 4:24महाराज ये आर्य गौतम घबराया हुआ इधर चला
- 4:28रहा है हाथ का अंगूठा भी जने उसे बांध रखा
- 4:32है महाराज मुझे बचाइए मुझे बचाइए मुझे
- 4:36सांप ने काट लिया आपने काट लिया ओ ये तो
- 4:41बहुत बुरा हुआ प्रतिहारी जी महाराज शीघ्री
- 4:45वैद्य ध्रुव सिद्धी को बुलाकर लाओ जैसी
- 4:47देवती आ मित्र गौतम महाराज कहां घूम रहे
- 4:51थे जो सांप ने काट लिया महाराज मैं तो
- 4:53देवी का कुशल मंगल पूछने के लिए आने लगा
- 4:57सोचा भेंट के लिए दो चार फूल लेता चलू मैं
- 5:00प्रम दवन चला गया वहां फूल तोड़ने के लिए
- 5:04दाहिना हाथ बढ़ाया ही था कि कालसरी के
- 5:07सांप ने मुझे डस लिया ये देखिए ये देखिए
- 5:10अंगूठे पर उसके दांतों के चिन्ह
- 5:14आए मेरे ही कारण बेचारे ब्राह्मण के प्राण
- 5:17संकट में पड़े हैं घबराओ मत मित्र हो सकता
- 5:20है साप विषैला ना हो आए आए मेरा तो अंग
- 5:25अंग अकता जा रहा है सारे शरीर में विष
- 5:30फैलता जा रहा है इसकी तो दशा बिगड़ती जा
- 5:34रही है अरे कोई संभालो कोई है संभालो
- 5:38ब्राह्मण को अरे गौतम तनिक संभालिए धीरज
- 5:42से काम
- 5:45लीजिए महाराज महाराज मैं आपका बाल सका हूं
- 5:50इसी नाते मेरे मरने के बाद मेरी निपी मां
- 5:54की देखभाल अवश्य कीजिएगा अवश्य कीजिएगा ये
- 5:58क्या कह रहे हो मित्र अभी वैद आकर तुम्ह
- 6:01अच्छा कर देगा महाराज की जय महाराज वैद्य
- 6:05जी ने कहा है कि आर्य गौतम का उपचार उनके
- 6:08चिकित्सालय में हो सकेगा और जलघर विधान
- 6:10द्वारा किसी ऐसी वस्तु से विष उतारा जाएगा
- 6:14जिसमें नाग मुद्रा जड़ी क्या कोई ऐसी
- 6:16वस्तु मिल सकेगी नाग
- 6:19मुद्रा हा मेरी इस अंगूठी में नाग मुद्रा
- 6:23जड़ी हुई है ये ले जाओ काम हो जाने पर
- 6:26मुझे लौटा देना जय श्रीदवी की आज्ञा आइए
- 6:30आर्य गौतम देवी
- 6:32महारानी देवी कौन जाने मैं जिऊ या मरू
- 6:38सेवा करते हुए मुझसे तनिक कुछ भूल चूक हुई
- 6:41हो देवी तो वो क्षमा कीजिएगा क्षमा
- 6:45कीजिएगा भगवान करे तुम शीघ्र ही स्वस्थ हो
- 6:48जाओ और बहुत दिनों तक
- 6:51[संगीत]
- 6:56जियो जय सेन ये अंगूठी मुझे दो
- 7:00कुछ देर बाद मंत्री जी का बहाना करके
- 7:02महाराज को बाहर बुला लाना और फिर यथाशीघ्र
- 7:05उन्हें चोर मार्ग से प्रम दवन पहुंचा देगा
- 7:08जो
- 7:14[संगीत]
- 7:22आया
- 7:24कौन आर्य
- 7:26गौतम आज आप निचले भंडार में कैसे आए
- 7:30यह देखो महारानी की
- 7:32अंगूठी हां अंगूठी तो उन्हीं की है तो
- 7:36तुरंत मालविका और बकला बलिका को अपनी उस
- 7:39काल कोठरी से मुक्त करो ओ यहां कितना
- 7:43अंधेरा है ठहरी मैं अभी मशाल जलाती हूं और
- 7:47उन दोनों को बंधन मुक्त करती हूं परंतु
- 7:51मैं सोच रही हूं कि इतने सेवकों के रहते
- 7:55देवी ने आपको ही क्यों भेजा देवी ने मुझको
- 7:58क्यों भेजा देवी ने क्यों भेजा अरे जो
- 8:01शियों ने कहा है कि आजकल महाराज के ग्रह
- 8:04कुछ ठीक नहीं है इसलिए सब बंदियों को
- 8:06तुरंत मुक्त किया जाए देवी ने तुरंत मुझे
- 8:09बुलाया और कहा कि ठीक है मैं उन दोनों को
- 8:13अभी छोड़े देती हूं हां छोड़ो शीघ्र
- 8:22छोड़ो आप धन्य है आर्य गौतम परंतु आपने यह
- 8:26खेल खेला कैसे ये मैं फिर बताऊंगा लालिका
- 8:30इस समय तुम मालविका को चोर मार्ग से
- 8:33समुद्र गृह में ले जाकर प्रतीक्षा करो मैं
- 8:36मैं महाराज को रया अच्छा
- 8:43[संगीत]
- 8:49रे सखी मालविका महाराज को प्रणाम करो
- 8:54महाराज
- 8:56प्रणाम अरे य तो समद में लगा हुआ महाराज
- 9:00का चित्र है अच्छा सखी तुम भी मुझे बना
- 9:04रही हो बनाना कैसा चित्र में भी तो महाराज
- 9:09ही है सखी बकुला
- 9:12बलिका उस दिन खबरा में महाराज को अच्छी
- 9:17तरह नहीं देख पाई थी अब चित्र में महाराज
- 9:21को जी भर के देख लेती
- 9:24हूं क्यों सखी यह कौन स्त्री है की और
- 9:29महाराज मुंह घुमाकर बड़ी प्रेम भरे चितवन
- 9:32से देख रहे हैं यह छोटी रानी इरावती है
- 9:37ओ महाराज का प्रेम सब रानियों पर एक सा
- 9:41नहीं जान पड़ता देखो ना सबकी ओर से ध्यान
- 9:45हटाकर वे केवल देवी इरावती का ही मुख
- 9:48निहार रही हैं महाराज देवी इरावती का मुख
- 9:51क्यों ना निहारे यही तो महाराज को सबसे
- 9:55अधिक प्यारी है तो फिर मैं क्यों प्रेम
- 9:59अपनी देह जलाऊ सुंदरी माल के स्वामी की जय
- 10:03हो अरे अरे महाराज ऊपर खिड़की से सब कुछ
- 10:09देख सुन रहे थे
- 10:12प्रिय चित्र में चित्रकार द्वारा चित्रित
- 10:16हमारी मुख मुद्रा को देखकर तुम हमसे रूठ
- 10:19गए तुम्हारे य अनन्य दास तो तुम्हारे
- 10:22सामने खड़ा है तो क्या मैं सचमुच स्वामी
- 10:26से रूट गई थी
- 10:29स्वामी की जय हो
- 10:33प्रिय अरे आप कहते कहते रुक क्यों गए
- 10:37महाराज क्या बताऊं मित्र व द्वितीय सुंदरी
- 10:41मालविका को सामने पाकर भी अपनी आंखों पर
- 10:45भरोसा नहीं हो रहा है क्यों क्योंकि यह
- 10:48मृगनैनी देखते ही देखते ओजल हो जाती
- 10:52है सखी मालविका तुमने महाराज को बहुत कष्ट
- 10:57दिया है अब कुछ ऐ सा जतन करो कि ये तुम पर
- 11:01भरोसा करने लगे सखी मुझा भागन की तो
- 11:05महाराज से स्वप्न में भी कभी भेट नहीं
- 11:08हुई महाराज इसका उत्तर तो आप ही दे सकते
- 11:13हैं उत्तर क्या है दे बकला बलिका तुम्हारी
- 11:17सखी से हम अपनी कोई सेवा नहीं कराना
- 11:20चाहते हम तो प्रेम की अग्नि को साक्षी
- 11:24बनाकर इनकी सेवा के लिए अपने को समर्पित
- 11:28करना चाहते हैं
- 11:30बकुला वाली का उधर देख उस नए अशोक के
- 11:33पत्तों को हिरण चरे जा रहा है इसे भगा दे
- 11:38हा चलिए
- 11:40आ महाराज घबराइए नहीं मैं समुद्र गृह के
- 11:45द्वार पर पहरा दूंगा मित्र
- 11:50[संगीत]
- 12:10देवी देवी यह देखिए आर्य गौतम सांड की तरह
- 12:16समुद्र ग्रह के द्वार पर बैठे बैठे सो रहे
- 12:19हैं बेचारे की कैसी दशा है लगता है विष का
- 12:24विकार अभी पूरी तरह दूर नहीं
- 12:28हुआ किंतु इनके चेहरे पर जो प्रसन्नता झलक
- 12:31रही है उससे तो ऐसा नहीं लगता
- 12:37कि
- 12:40मालविका देवी मालविका सुना
- 12:45स्वामीनी यह गौतम पेट तो भरता है आपके दिए
- 12:49लड्डुओं से और स्वप्न में नाम रट रहा है
- 12:52मालविका का
- 12:54मालविका तुम छोटी रानी रावती से भी ऊंचा
- 13:00स्थान
- 13:03पाओ ये कृतन बामन ठहरी ठहरी दे तनिक ठहरी
- 13:09आइए हम दोनों उधर खंभे की ओट में छिप जाते
- 13:13हैं और वहां से मैं इस दर पोक बामन पर य
- 13:18लकड़ी फेंक
- 13:23हूं साप महाराज महाराज बताइए आपका सछ सा आ
- 13:29अरे डरो मत मित्र मैं आ रहा हूं महाराज
- 13:31रुकिए उधर ना जाइए
- 13:36अच्छा तो ये बात
- 13:39है समुद्र ग्री में महाराज और मालवी
- 13:46का अरे ये तो लकड़ी है मैं तो समझा कि
- 13:52केथकी के कांटों से सांप के दांतों के
- 13:56चिन्ह बनाकर मैंने सांप पर जो कलंक लगाया
- 13:59था उसी का दंड देने के लिए सचमुच का सांप
- 14:03आ गया मैं तो मैं तो बेकार डर मित्र कहां
- 14:08है सा महाराज आगे ना जाइए वहां एक कुटिल
- 14:11सांप छिपा बैठा है महाराज रुकिए कहिए दिन
- 14:16में मिलने वाले इस प्रेमी जोड़े की मन की
- 14:19साथ पूरी हुई या नहीं कौन देवी रावती सखी
- 14:24बकुला वालिका ये कैसा अनर्थ बकुला वालिका
- 14:29तुझे बधाई है दूति के रूप में तूने इन
- 14:32दोनों को मिलाने का जो संकल्प किया था वो
- 14:35आज पूरा हो
- 14:36गया परंतु मैं पूछती हूं तुम दोनों को
- 14:40बंदी गृह से छुड़वाया किसने निपुणिका जी त
- 14:43महारानी धारणी के पास जा और उनसे पूछ यह
- 14:46सब कैसे हुआ जो आज्ञा
- 14:48दे यह तो सब गड़बड़ घोटाला हो गया पिंजरे
- 14:53से छूटा हुआ कबूतर बिल्ली के सामने आगे
- 14:56रहा देवी इ दोनों को हमने ही बंदी ग्रह से
- 15:00छुड़वाया है जी देवी उत्सव के दिन अपने
- 15:02सेवकों को बंदी बनाना उचित नहीं देवी देवी
- 15:06क्या बात है नि पुर्णिका तू लौट आई जी
- 15:10रास्ते में ही मुझे निचले भंडार की
- 15:13पहरेदार मिल गई उसने बताया
- 15:15कि क्या कान में सुनिए
- 15:20देवी सखी बकुला वाले का हा देवी मुझे तो
- 15:24बहुत डर लग रहा है पता नहीं क्या होने
- 15:28वाला है
- 15:31अच्छा तो यह इस ब्राह्मण की करतूत है
- 15:35क्यों प्रेम नीति के मंत्री महोदय देवी
- 15:39यदि मैं नीति का ज्ञाता होता तो क्या
- 15:42महाराज को ऐसे फसने देता मैं सब समझती हूं
- 15:45मैं अभी महारानी धारणी के पास जाती हूं और
- 15:48उनसे पूरी बात
- 15:54[संगीत]
- 16:03सुनो सुनो सुनो सभी नगरवासियों
- 16:08एक आश्चर्य जनक समाचार सुनो महारानी के
- 16:13प्रिय सुनहले अशोक वृक्ष का दो हद पूरा
- 16:17हुए पांच रातें भी नहीं बीती कि उसम फूल आ
- 16:21गए अपने सुनहले अशोक के फूलने पर महारानी
- 16:27अत्यंत प्रसन्न है
- 16:29आज वे प्रम दवन में महाराज को बुलाकर
- 16:33सुनहले अशोक के फूलने का उत्सव
- 16:41बनाएंगी राज प्रसाद वासियों सुनो सुनो
- 16:47सुनो एक और हर्ष
- 16:50समाचार वीर सेन के सेनापति में महाराज की
- 16:54विजनी सेना ने विदर्भ पर विजय पाली है
- 17:00विदर्भ राज के चचेरे भाई और महाराज के
- 17:04मित्र माधव सेन बंदी गृह से मुक्त हो गए
- 17:09हैं माधव सेन ने भेट स्वरूप महाराज को
- 17:15बहुत से अनमोल रत्न हाथी घोड़े और उच्च
- 17:20कोटि के कलाकार सेवक भेजे हैं विदिशा पति
- 17:24विदर्भ विजेता महाराज अग्निमित्र की जय
- 17:28महाराज अग्निमित्र की
- 17:36जय विदेशा पति विदर्भ विजेता महाराज
- 17:40अग्निमित्र की जय महाराज अग्निमित्र की जय
- 17:45महाराज अग्नि मित्र की जय महाराज अग मित्र
- 17:48की जय महाराज अग मित्र की जय महाराज की
- 17:55[संगीत]
- 18:00कुल भूषण विप महाराज अग्निमित्र प्रम वन
- 18:04उत्सव में पधार रहे
- 18:07[प्रशंसा]
- 18:08[संगीत]
- 18:16हैं मित्र गौतम जी महाराज प्रम दवन में
- 18:20महारानी धारनी के पास मालविका भी है लगता
- 18:24है पृथ्वी के पीछे राजलक्ष्मी खड़ी है
- 18:28महाराज का कहना सर्वथा उचित है जय हो विधर
- 18:33विजेता आर्य पुत्र की जय हो
- 18:36देवी सुनहले अशोक के फूलने पर आपको बधाई
- 18:40विराज देव विदर्भ विजेता महाराज की जय हो
- 18:44प्रणाम भगवती आपके मन की साद पूरी हो आरे
- 18:49पुत्र फूलों से लदे सुनहले अशोक की शोभा
- 18:52ने आरि आपके लिए अशोक का ऐसा प्रेम गृह
- 18:57बना दिया गया है जहा देवी के हाथों अशोक
- 19:00का ऐसा आदर होना ही चाहिए क्योंकि यह वसंत
- 19:04लक्ष्मी के कहने पर नहीं देवी के प्रयत्न
- 19:07से फूल उठा है और हां देवी आज ब्राह्मणों
- 19:11को भी दान दक्षिणा दे दी गई है ना हां
- 19:14महाराज जब से कुमार वसुमित्र को पूज्य
- 19:17सेनापति जी यज्ञ के घोड़े का रक्षक बनाकर
- 19:20ले गए हैं तभी से उनके कुशल क्षेम के लिए
- 19:23मैं प्रतिदिन 400 स्वर्ण मुद्राएं योग्य
- 19:26ब्राह्मणों को दक्षिणा में दे रही हूं
- 19:28हमारा पुत्र चिरंजीवी हो महाराज की जय
- 19:32विदर्भ से जो कलाकार स्त्रियां भेट स्वरूप
- 19:34आई है यदि आज्ञा हो तो उन्हें सेवा में
- 19:37उपस्थित किया जाए ले आओ जैसी देव की
- 19:44आ महाराज की जय हो महारानी की जय
- 19:49हो आप लोग किस कला में निपुण है महाराज हम
- 19:55लोगों ने संगीत सीखा है लो देवी
- 19:59इनमें से जिसे चाहो अपने लिए चुन लो
- 20:02मालविका आज्ञा देवी देखो इनमें से कौन
- 20:07तुम्हारा साथ देने के लिए ठीक रहेगी अरे
- 20:10राजकुमारी आप यहां जय हो राजकुमारी की जय
- 20:14हो राजकुमारी की जय हो मालविका राजकुमारी
- 20:19हां महाराज यह हमारी राजकुमारी है कैसे
- 20:24महाराज आपकी विजय सेना ने विदर्भ के राजा
- 20:27को परास्त करके के जिन कुमार माधव सेन को
- 20:30बंदी ग्रह से छुड़ाया है यह उन्हीं की
- 20:33छोटी बहन मालविका जी हैं
- 20:37अरे तो क्या मालविका राजकुमारी है इसे इसे
- 20:43मैंने दासी
- 20:46बनाया चंदन से खड़ाऊ का काम लेकर मैंने
- 20:50कितना बड़ा पाप किया है ये इस रूप में य
- 20:53आई
- 20:54कैसे भाग्य के फेर से मैं मैं निवेदन करती
- 20:59हूं महाराज राजकुमार माधव सेन हम सब लोगों
- 21:03के साथ राजकुमारी जी को लेकर विदिशा आ रहे
- 21:06थे उनके मंत्री आर्य सुमति जी भी साथ थे
- 21:10रास्ते में राजकुमार माधव सेन को उनके
- 21:13चचेरे भाई विदर्भ राज ने पकड़कर बंदी बना
- 21:16लिया स्वामी भक्त मंत्री सुमती जी हमें
- 21:20पीछे छोड़कर राजकुमारी जी को वहां से
- 21:22सुरक्षित निकाल कर ले गए फिर क्या हुआ
- 21:26महाराज आगे का हाल तो मुझे भी नहीं मालूम
- 21:29आगे का हाल मैं अभागन बताती हूं महाराज
- 21:33भगवती आप
- 21:35राजकुमारी सन्यासिनी के विष में ये तो
- 21:38आर्या कौशिक जान पड़ती है हां वही है
- 21:42प्रणाम भगवती कल्याण हो
- 21:46भगवती क्या ये भी आपकी शिष्य है हां
- 21:49महाराज मैं अब पूरा वृतांत सुनाती हूं
- 21:53माधव सेन के मंत्री आर्य सुमति मेरे बड़े
- 21:56भाई थे अच्छा
- 22:00अब बात समझ में आने लगी माधव सेन ने आपसे
- 22:04अपनी बहन मालविका के विवाह की बात पक्की
- 22:06कर ली थी जब माधव सेन बंदी बना लिए गए तो
- 22:10मेरे भाई सुमति ने उनके संकल्प को पूरा
- 22:13करने का बीड़ा
- 22:15उठाया व्यापारियों का एक दल विदिशा की ओर
- 22:18आ रहा था राजकुमारी मालविका को लेकर मेरे
- 22:21भाई उसी दल के साथ हो लिए रास्ते में घने
- 22:25जंगल के बीच डाकुओं ने हमारे दल को घेर
- 22:28लिया ओ हमारे सभी सश सैनिक डाकुओ के साथ
- 22:33लड़ते हुए घायल होकर गिर पड़े अंत में
- 22:37मेरे भैया आर्य सुमति ने भी अपने प्राण
- 22:40देकर अपने स्वामी का भार चुका दिया उस दुख
- 22:44के आघात से मैं तो मूर्चित हो गई जब मुझे
- 22:48चेतना आई तो राजकुमारी मालविका वह नहीं थी
- 22:52दुख संताप से टूटकर मैं सन्यासी नहीं बन
- 22:56गई और आपकी राजी में चली आई बाद में
- 23:01मालविका भी यहां दासी के रूप में आ गई
- 23:04ओ विपत्ति आने पर मनुष्य का कितना अनादर
- 23:07हो जाता है जो रानी कहलाने योग्य थी उससे
- 23:12दासी का काम लिया गया भगवती कौशिकी
- 23:16मालविका ऊंची राज घराने की कन्या है यह
- 23:19बात छिपाकर आपने अच्छा नहीं किया ऐसा ना
- 23:23कहिए महारानी मैंने सोच समझ कर ही इस
- 23:26रहस्य को इतने दिन छिपाए रखा
- 23:29जब इनके पिता जीवित थे तो एक साधु महात्मा
- 23:32ने इनके विषय में भविष्यवाणी की थी कि इस
- 23:35कन्या को एक वर्ष तक दासी बनकर रहना
- 23:38पड़ेगा उसके पश्चात इसका विवाह बड़े ही
- 23:41योग्य और प्रतापी पुरुष से
- 23:43होगा जब मैंने देखा कि वह भविष्यवाणी आपके
- 23:47चरणों की सेवा करते हुए पूरी हो रही है तो
- 23:50मैं मौन रही महाराज की जय हो कहो मंत्री व
- 23:55सब कुशल तो है
- 23:57महाराज मंत्री परिषद ने पूछा है कि जीते
- 24:00गए विदर्भ देश की कैसी व्यवस्था की जाए हम
- 24:04चाहते हैं कि विदर्भ देश यज्ञ सेन और माधव
- 24:07सेन में आधा आधा बांट दिया जाए दोनों भाई
- 24:11अलग-अलग वैसे सुख से राज करें जैसे सूर्य
- 24:14और चंद्रमा रात और दिन को आपस में बांटकर
- 24:17अलग-अलग चमकते हैं जैसी महाराज की आज्ञा
- 24:22महाराज की जय हो महाराज आपके पिता श्री
- 24:26पूज्य सेनापति पुष्य मित्र का ये पत्र आया
- 24:29है पिताजी का पत्र लाओ देखें लीजिए
- 24:33महाराज मेरा हृदय भी सुनने को छटपटा रहा
- 24:37है महाराज पढ़िए
- 24:40ना पिता श्री लिखते हैं अश्वमेध यज्ञ का
- 24:44संकल्प करके हमने जो अश्व स राज पुत्रों
- 24:47सहित कुमार वसुमित्र के संरक्षण में एक
- 24:51वर्ष की अवधि बांधकर छोड़ा था उसे सिंधु
- 24:54नदी के दक्षिणी तट पर यवनों ने पकड़ लिया
- 24:58फलता हमारी और शत्रु सेना में घोर युद्ध
- 25:02हुआ वीर वसुमित्र ने शत्रु सेना को परास्त
- 25:05करके हमारा अश्व छुड़ा लिया जैसे पौत्र
- 25:09अंशुमान द्वारा छुड़ाए गए अश्व से राजा
- 25:12सगर ने यज्ञ किया था वैसे ही अब हम अपने
- 25:16पौत्र द्वारा वापस लाए गए अश्व से यज्ञ कर
- 25:19रहे हैं अत तुम प्रसन्न चित हो वधु के साथ
- 25:24यज्ञ देखने के लिए तुरंत चले आओ महाराज
- 25:27महारानी पुत्र की विजय के लिए आपको बधाई
- 25:34बई देवी अब तक आप वीर पत्नियों की सिरमोर
- 25:38थी आज से आपको वीर माता होने का भी गौरव
- 25:42मिल गया
- 25:43भगवती मुझे प्रसन्नता है कि मेरा पुत्र
- 25:47पिता के समान ही पराक्रमी निकला आज हम
- 25:50बहुत प्रसन्न है मद गल्य महाराज जाओ यज्ञ
- 25:56सेन के साले सहित सभी ब मुक्त करा दो जय
- 26:00सेन आज्ञा देवी तुम सभी रानियों को हमारे
- 26:03पुत्र की विजय का समाचार दो और हां देवी
- 26:07इरावती से निवेदन कर देना कि अशोक के
- 26:10फूलने पर मालविका को मुंह मांगा पुरस्कार
- 26:13देने का मैंने जो वचन दिया था अब मैं वह
- 26:16पूरा करना चाहती हूं अतः वह कोई विग ना
- 26:20डाले जो आज्ञा देवी
- 26:23पाविका इधर आओ प्रस्तुत हूं
- 26:27देवी आर्य
- 26:29पुत्र आपने कुमार की विजय का हर्ष दायक
- 26:33समाचार सुनाया है उसके बदले में मेरी ओर
- 26:38से यह यह पुरस्कार स्वीकार
- 26:44कीजिए अरे आप लजा क्यों रहे हैं मालविका
- 26:50को ग्रंड कीजिए महाराज
- 26:56देवी देवी महाराज तो मात्र लोक व्यवहार
- 27:01दिखा रहे हैं महारानी आपकी उदारता देखकर
- 27:06मुझे तनिक भी अचरज नहीं हुआ क्योंकि आप
- 27:10पति को सच्चे हृदय से प्रेम करती हैं जैसे
- 27:14समुद्र में जाने वाली नदी अपने साथ अन्य
- 27:17नदियों का जल भी समुद्र में पहुंचा देती
- 27:19है वैसे ही आपने मालविका को स्वीकार किया
- 27:23है महारानी धारणी धन्य है रा धारनी की जय
- 27:30महारानी धारनी की जय देवी मालविका की जय
- 27:34देवी मालविका की जय विशा पति महाराज
- 27:37अग्निमित्र की जय विशा पति महाराज अगम की
- 27:41जय महाराज अगम की जय महाराज की
- 27:46जय ज
- 27:51[संगीत]
- 28:02मालविका अग्नि मित्रम अभी आप महाकवि
- 28:06कालिदास के सुप्रसिद्ध संस्कृत नाटक
- 28:10मालविका अग्नि मित्रम का यह हिंदी रेडियो
- 28:14नाट्य रूपांतर सुन रहे थे हिंदी अनुवादक
- 28:18थे सीताराम
- 28:20चतुर्वेदी रेडियो नाट्य रूपांतर श्री
- 28:23चिरंजीत ने
- 28:24किया नाटक के निर्देशक थ सुदर्शन कुमार
- 28:28संगीतकार थे सत्यदेव पवार और प्रस्तुतीकरण
- 28:33सहायक महफूज हसन नाटक में भाग लेने वाले
- 28:38कलाकार थे सर्वश्री अश्विनी कुमार मनोज
- 28:42भटनागर नीरज शर्मा वीना गौड़ विजय राजधान
- 28:47हर्ष बाला रश्म दर सरला टंडन कविता वैद
- 28:53योगेश कुमार जैन सुशील बैनर्जी सुरेश पंत
- 28:58मंगतराम और अर्चना गायिका थी श्रीमती
- 29:02उर्मिला नागर यह नाटक केंद्रीय नाटक एकांश
- 29:06द्वारा आकाशवाणी के दिल्ली केंद्र पर
- 29:09तैयार किया गया
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This page contains the full transcript of Radio Play - Malvikagnimitram by Kalidas । Episode #02 by Akashvani AIR, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 3,236 words across 448 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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