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Quran Surah 2 Ayat 30 Surah Baqarah | Mufti Tariq Masood Quran Tafseer | Quran Ch 2 V 30 — Transcript

by Tafseer E Quran Ayat by Ayat · 1,269 words · 153 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00अल्लाह ताला ने सूर बकरा के शुरू में
  2. 0:03हमें मुनाफिकीन मोमिनीन की हालत बयान की
  3. 0:08फिर अल्लाह ताला ने बताया कि जो हिदायत
  4. 0:11हासिल करने वाले लोग हैं उन परे तो कुरान
  5. 0:13का असर होता है जो चाहते ही नहीं है वह
  6. 0:15कुरान में ऐब तलाश करते रहते हैं कि मक्खी
  7. 0:17की मिसाल क्यों दी मच्छर की मिसाल क्यों
  8. 0:19दी ठीक है ना फिर अल्लाह ने बताया कि तुम
  9. 0:21उस रब का इंकार कैसे करते हो जिसने
  10. 0:23तुम्हें बनाया यानी दलाल से तो अल्लाह ने
  11. 0:25साबित कर दिया है अब यह दुनिया में एक
  12. 0:28सबसे बड़ा मसला हमें से इस पर बात हुई है
  13. 0:31कि इंसानियत की इब्तिदा कैसे
  14. 0:33हुई जाहिर है यह मसला इंसान हल इसलिए नहीं
  15. 0:36कर सकता कि तारीख लिखने की इब्तिदा बहुत
  16. 0:40बाद में शुरू हुई है हिस्ट्री जो लिखी गई
  17. 0:43है वह तो बहुत बाद में है ना तो यह हमें
  18. 0:47अल्लाह के अलावा कोई बता सकता नहीं है तो
  19. 0:50अल्लाह ने हमें बताया है कि इंसानियत की
  20. 0:52जो इब्तिदा हुई है वह ऐसे ही इत्तेफाक से
  21. 0:55नहीं हो गई बल्कि रब ने बहुत एहतमाम के
  22. 0:59साथ इंसान को पैदा किया है क्योंकि यह
  23. 1:01मकसूद कायनात है इस कायनात से मकसद इंसान
  24. 1:04को पैदा करना था और उसको आजमाइश में डालना
  25. 1:07था तो मकसूद कायनात है तो इसका बड़े
  26. 1:11एहतमाम से इसको दुनिया में लाया गया है
  27. 1:13ऐसा ही नहीं लेया गया कि ऐसे ही जैसे बाज
  28. 1:16साइंस दन कहते हैं कि व पैदा हो गया बस तो
  29. 1:18यह बात हमें अल्लाह ही बता सकता है अल्लाह
  30. 1:20के अलावा कोई नहीं बता सकता तो अल्लाह
  31. 1:22फरमाते हैं इंसान के पैदाइश का की इबत
  32. 1:25यहां से हुई है कि अल्लाह ने बाकायदा जो
  33. 1:27आलम बाला में उसके साथ फरिश्ते हैं उनके
  34. 1:30सामने यह अपने इरादे को जाहिर किया पहले
  35. 1:32अल्लाह ताला ने ऐसे ही नहीं पैदा कर दिया
  36. 1:34बल्कि बताया कि मैं एक अजीब काम करने जा
  37. 1:36रहा हूं एक अपने एक इंसान को पैदा कर रहा
  38. 1:39हूं और इंसान को डिफाइन कैसे किया अपना
  39. 1:41जानशीन अपना
  40. 1:43खलीफा तो यह बड़ा जबरदस्त लकब इंसान को
  41. 1:47दिया गया है रका उस वक्त को याद करो यानी
  42. 1:50यह वक्त याद करने के काबिल है मामूली
  43. 1:52वाकया नहीं है जब तेरे रब ने फरिश्तों से
  44. 1:55कहा इनी जाल फ खलीफा मैं जमीन में क्या
  45. 1:58पैदा करना चाहता हूं अपना खलीफा थियस कहते
  46. 2:00हैं एक थियस की मैं तकरीर सुन रहा था क र
  47. 2:04इतनी बड़ी कायनात इतनी बड़ी यह वो उसमें
  48. 2:05इतना सा जर्रा जैसे जमीन है इसी पर सारे
  49. 2:08खुदा की कुदरत के नमूने इसी पर जानवर जबाह
  50. 2:10हो रहे हैं इसी पर यह क्या है यह तो तो वो
  51. 2:13भाई ये बेवकूफ वाली बात है अल्लाह की
  52. 2:16मर्जी कि इतनी सी जमीन जो जर्रे के बराबर
  53. 2:19भी नहीं है उसमें अल्लाह ने इंसान को पैदा
  54. 2:20किया जो चोंटी के बराबर भी नहीं है तो
  55. 2:23बॉडी के लिहाज से इंसान की फजीलत नहीं है
  56. 2:25इंसान को जो अल्लाह ने फजीलत दी है वोह
  57. 2:27दिमाग के तबार से दी है जिसका आगे त भी आ
  58. 2:30रहा है इसमें सलाहियत है सीखने की तो इस
  59. 2:33तबार से इंसान बहुत अजीम है अगर मादी तबार
  60. 2:37से देखें तो इंसान की कोई वैल्यू नहीं है
  61. 2:39जमीन की वैल्यू नहीं है इंसान की कहां से
  62. 2:41होगी इंसान तो जमीन पर एक क्यूटी से भी कम
  63. 2:44हैसियत रखता है तो अल्लाह फरमाते हैं जब
  64. 2:46तेरे रब ने फरिश्तों से कहा मैं जमीन पर
  65. 2:48बनाने वाला हूं अपना खलीफा खलीफा क्यों
  66. 2:50कहा खलीफा उसे कहते हैं जो नाइब हो जो काम
  67. 2:55करे असल
  68. 2:57के तो अल्लाह यह चाहते थे कि जमीन की
  69. 3:00अल्लाह ने सिलेक्शन की है क्योंकि हयात
  70. 3:02अल्लाह ने जमीन पर पैदा की है तो अल्लाह
  71. 3:04यह चाहते थे कि यहां एक ऐसी मखलूक हो जो
  72. 3:07मेरे अह कामात को
  73. 3:10नाफिया इसी से जिहाद की अहमियत भी साबित
  74. 3:13होती है इसी से इस्लामी हुकूमत की अहमियत
  75. 3:16भी साबित होती है यह जो लोग कहते हैं ना
  76. 3:18कि इस्लामी हुकूमत की क्या जरूरत है बस
  77. 3:20मजहबी आजादी होनी चाहिए जिसने जो चाहे
  78. 3:23इबादत करे हुकूमत लिबरल हो सेकुलर हो
  79. 3:25इसमें इसकी नफी है क्योंकि हुकूमत अल्लाह
  80. 3:29की नाइब होती जो अल्लाह के अकाम जमीन पर
  81. 3:32नाफिटी है तो निफास अलग चीज है और इफिरा
  82. 3:35दी तौर पर शरीयत के अकाम को फॉलो करना यह
  83. 3:39अलग चीज है तो इंसान की पैदाइश का
  84. 3:42बुनियादी मकसद सिर्फ यह नहीं है कि इंसान
  85. 3:44अल्लाह के अकाम को फॉलो करे बल्कि अल्लाह
  86. 3:46के अकाम को जमीन पर नाफिया जो होता ना वह
  87. 3:50नाफिया तो इंसान का लकब खलीफा है कि
  88. 3:53अल्लाह क्या क्योंकि अल्लाह भी नाफिया ना
  89. 3:55बादशाह है तो इंसान भी जमीन पर बादशाह
  90. 3:58बनेगा और बादशाह बन के क्या करेगा अल्लाह
  91. 4:01के अकाम को जमीन पर
  92. 4:04नाफिया तो वो नालायक कर रहा है ना जो ओहदा
  93. 4:07उसको दिया गया वो अपनी जिम्मेदारी पूरी
  94. 4:08नहीं कर रहा लेकिन असल इंसान का काम क्या
  95. 4:10है
  96. 4:12निफास कालू तो फरिश्तों ने कहा कि अल्लाह
  97. 4:16तू खलीफा बना रहा है इतना बड़ा उदा दे रहा
  98. 4:18है हमें तूने अपना जानशीन नहीं बनाया और
  99. 4:21जो सिफात तू इंसान की बयान कर रहा है उससे
  100. 4:23क्या लगता है कि जमीन में ऐसी मखलूक पैदा
  101. 4:25कर रहा है जो जमीन में फसाद मिचा और खून
  102. 4:28बहाए
  103. 4:30यानी फरिश्तों को तराज हुआ अब तराज अल्लाह
  104. 4:33के सामने तो नहीं करना चाहिए ना लेकिन जब
  105. 4:35अल्लाह ताला खुद ही एक बात कह रहे हैं तो
  106. 4:36फिर जो जो इश्का त सामने आएंगे फरिश्ते
  107. 4:38करेंगे ना व इश्का तो फरिश्तों ने इश्का
  108. 4:41क्यों किया फरिश्तों को पता कैसे चला कि
  109. 4:43इंसान खून भागा पता ऐसे चला कि फरिश्ते
  110. 4:46देख रहे थे कि अल्लाह ने जमीन पर जानवर
  111. 4:48पैदा किए वह पहले से ही चले आ रहे थे और
  112. 4:50यह एक दूसरे की चीड़ फाड़ करते हैं खाते
  113. 4:52हैं एक दूसरे को मारते हैं क्यों मारते
  114. 4:54हैं इनमें ख्वाहिश है जानवरों
  115. 4:56में फरिश्ते एक दूसरे को मारते पीटते नहीं
  116. 4:59है में ख्वाहिश नहीं है तो ख्वाहिश की वजह
  117. 5:03से जब जानवर इतनी तबाही मि चाते हैं जबकि
  118. 5:06उनमें अकल नहीं है तो इंसान एक ऐसी मखलूक
  119. 5:08है कि इसमें है जमीन पे तो होगी वही सिफात
  120. 5:13इसकी जो किसकी है जानवरों की इससे जिन
  121. 5:16फरिश्तों को अंदाजा हुआ कि इनमें भी
  122. 5:18ख्वाहिश होंगी क्योंकि जमीन पर कोई ऐसी
  123. 5:19मखलूक हम देखते नहीं है जिनमें ख्वाहिश ना
  124. 5:22हो तो उनको अंदाजा हुआ ख्वाहिश हैं और
  125. 5:25दूसरा फरिश्तों का अंदाजा हुआ ये बहुत
  126. 5:26जहीन मखलूक है क्योंकि अल्लाह इसको अपना
  127. 5:28नाइब बना रहा है तो जब जहान भी हो ख्वाहिश
  128. 5:31भी हो तो फिर यह जानवरों की तरह नहीं
  129. 5:33लड़ेंगे बल्कि जानवरों से दो हाथ आगे
  130. 5:36निकलेंगे यानी फरिश्तों को पहले अंदाजा हो
  131. 5:38गया भाई यह खून बहाए तलवारें चलाएगा बम
  132. 5:41बनाएगा यह मारेगा एक दूसरे को एटम बम
  133. 5:43बनाएंगे यह मिसाइल बनाएंगे यह गौरी मिसाइल
  134. 5:46बदर मिसाइल और पता नहीं कौन-कौन से मिसाइल
  135. 5:49बना बना के एक दूसरे को कटेंगे ये क्योंकि
  136. 5:51यह लड़ाई में जानवरों से आगे निकल जाएगा
  137. 5:55क्यों जानवर के पास अकल नहीं है ना वो तो
  138. 5:57अपनी भूख खत्म वो खत्म लेकिन इंसान तो
  139. 5:59बहुत लड़ेगा आगे तो अल्लाह तू जमीन में
  140. 6:01फसाद मचाना चाह रहा है यानी इस तरह का
  141. 6:03फरिश्तों को सवाल पैदा हुआ कि ऐसी मखलूक
  142. 6:05पैदा कर रहा है और रहा इबादत का मसला
  143. 6:09वहम हम तेरी पाकी बयान करते हैं तेरी
  144. 6:12तस्बीह बयान करते हैं तेरी तकदीस बयान
  145. 6:14करते हैं तो इबादत के लिए तुझे क्या जरूरत
  146. 6:17है कि किसी और मखलूक को पैदा कर अल्लाह ने
  147. 6:20जवाब में फरमाया मैं वह कुछ जानता हूं जो
  148. 6:22तुम नहीं जानते क्या मतलब इंसान में कुछ
  149. 6:26ऐसी क्वालिटी होंगी जो तुम्हारे अंदर नहीं
  150. 6:29है उसकी डिटेल अल्लाह ने बयान नहीं की
  151. 6:32क्यों इसलिए कि वो उस वक्त बयान की जाती
  152. 6:35फरिश्तों की समझ में नहीं आती प्रैक्टिकली
  153. 6:36दिखाया गया उनको

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