Quality Management System | ISO 9000 | Six Sigma | Unit 4 Industrial Pharmacy 7th Semester — Transcript
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- 0:04हेलो एवरीवन कैसे हो आप सब लोग? आई होप कि
- 0:06आप सभी बहुत अच्छे होंगे। तो आज की वीडियो
- 0:09में हम लोग यहां पे बात करेंगे अपने
- 0:11इंडस्ट्रियल फार्मेसी की यूनिट नंबर फोर
- 0:13के बारे में जिसमें हम यहां पे यूनिट फोर
- 0:15को कंप्लीट कवर करेंगे। अब अगर हम यहां पे
- 0:17यूनिट फोर को देखें तो यूनिट थ्री की तरह
- 0:20ही यूनिट फोर भी हमारी एक बहुत लें्थी
- 0:22यूनिट होने वाली है जिसके अंदर हमारे बहुत
- 0:24सारे टॉपिक्स दे रखे हैं और इन सभी
- 0:27टॉपिक्स को हम यहां पे आज की इस सिंगल
- 0:28वीडियो में कवर करने वाले हैं। तो वीडियो
- 0:30थोड़ी सी लेंदी यहां पे हो सकती है। सभी
- 0:32टॉपिक्स का टाइम स्टैंप आपको वीडियो में
- 0:34देखने को मिल जाएगा। तो अगर आप लोगों को
- 0:36किसी टॉपिक वाइज देखना है तो वहां पे आप
- 0:38लोग जो है देख सकते हो उस हिसाब से। बाकी
- 0:40अगर हम लोग थोड़ा सा देखें तो यूनिट फोर
- 0:43हमारी होने वाली है क्वालिटी मैनेजमेंट
- 0:45सिस्टम्स के ऊपर। अब एक चीज सिंपली समझो
- 0:48यहां पे ना इस पूरे यूनिट फोर में हम लोग
- 0:50यही देखेंगे कि जो हमारा कोई भी
- 0:53फार्मासटिकल प्रोडक्ट होता है यानी कोई भी
- 0:55हमारी दवाएं होती हैं तो कैसे हम लोग यहां
- 0:58पे जब भी यहां पे जो कंपनी होती है
- 1:00मैन्युफैक्चरिंग कंपनी होती है तो वो कैसे
- 1:02यहां पे दवा की क्वालिटी को मेंटेन करके
- 1:04रखती है। उसके लिए कौन-कौन से तरीके होते
- 1:06हैं? कौन-कौन से सर्टिफिकेशंस होते हैं?
- 1:08उन सभी चीजों के बारे में ही हम लोग यहां
- 1:10पे इस पूरे यूनिट फोर में बहुत डिटेल में
- 1:13बात करेंगे। बाकी देखो अगर हम लोग यहां पे
- 1:15देखें कि कौन-कौन से यहां पे मेजर टॉपिक्स
- 1:17होने वाले हैं? तो पहला टॉपिक तो हम लोग
- 1:19इस क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम को ही
- 1:20पढ़ेंगे। अब ऑलदो अगर आप देखो तो ये पूरा
- 1:23ही इसी का पार्ट है। ठीक है? क्वालिटी
- 1:25मैनेजमेंट सिस्टम का मतलब ये है कि हमारे
- 1:27क्वालिटी को कैसे मैनेज करेंगे हम लोग
- 1:29इंडस्ट्री में और उसके क्या-क्या सिस्टम
- 1:30होंगे? लेकिन फिर भी हम लोग यहां पे इसको
- 1:32एज अ सेपरेट टॉपिक भी थोड़ा सा पढ़ेंगे
- 1:34जिसके अंदर ये सारी चीजें आ जाएंगी। तो एक
- 1:36टॉपिक ये हो गया। फिर दूसरा टॉपिक हमारा
- 1:38मतलब ये भी कौन कॉनंसेप्ट ऑफ क्वालिटी भी
- 1:40इसी के अंदर आ जाएगा। फिर दूसरा टॉपिक
- 1:41हमारा आ जाएगा टी क्यूएम टोटल क्वालिटी
- 1:44मैनेजमेंट। तीसरा टॉपिक हमारा आ जाएगा
- 1:46क्वालिटी बाय डिजाइन। ठीक है? तो ये हमारा
- 1:47तीसरा हो गया। देखते हैं कितने टॉपिक हैं।
- 1:49फिर हमारा फोर्थ टॉपिक आ जाता है बहुत
- 1:51इंपॉर्टेंट सिक्स सिग्मा कॉन्सेप्ट। फिर
- 1:53फिफ्थ टॉपिक आ जाता है आउट ऑफ
- 1:54स्पेसिफिकेशन। ठीक है? तो पांच टॉपिक ये
- 1:56हो गए। फिर हमारा सिक्स्थ नंबर का टॉपिक आ
- 1:58जाएगा चेंज कंट्रोल। फिर सेवंथ टॉपिक आ
- 2:00जाएगा आईएसओ 900। एट टॉपिक आ जाएगा आईएसओ
- 2:0414000 और सॉरी 9000 ही है। ठीक है? और फिर
- 2:07यहां पे नाइन टॉपिक आ जाएगा एनएबीएल और
- 2:1010थ टॉपिक आ जाएगा हमारा जीएलपी। यानी
- 2:12देखें तो हमारे टोटल यहां पे 10 टॉपिक
- 2:14होने वाले हैं। और इन 10ों टॉपिक को हम
- 2:16यहां पे एक-एक करके देखेंगे। बाकी इसकी जो
- 2:19भी नोट्स हैं वो आपको हमारे ऐप इमपरफेक्ट
- 2:22फार्मेसी पर देखने को मिल जाएगी।
- 2:23डिस्क्रिप्शन एंड कमेंट बॉक्स में लिंक
- 2:25अवेलेबल है। आप चेक आउट कर लेना। बाकी आप
- 2:28लोग कॉपी और पेन लेकर बैठ जाइए और हम लोग
- 2:30अपना आज का वीडियो स्टार्ट करते हैं।
- 2:41तो देखिए अगर हम यहां पे बात करें अपने
- 2:43क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम के बारे में तो
- 2:45बेसिकली हम लोग यहां पे यही देखेंगे कि जो
- 2:47भी हमारी इंडस्ट्रीज होती हैं तो वो
- 2:49इंडस्ट्री यहां पे कौन-कौन से प्रोसीजर्स
- 2:51को यहां पे फॉलो करती हैं, अप्लाई करती
- 2:53हैं ताकि जो भी हमारा प्रोडक्ट बन रहा है
- 2:55उसकी क्वालिटी, एफिकेंसी, सेफ्टी यहां पे
- 2:57मेंटेन रह सके। अब एक चीज आप लोग समझना
- 3:00यहां पे ना देखा जाए तो इसमें बहुत सारी
- 3:03चीजें ऐसी हैं कि बस उनको पढ़ना है समझ
- 3:06लेना है इसमें समझाने वाला ज्यादा कुछ है
- 3:07नहीं और अगर एक-एक लाइन को पढ़ के यहां पे
- 3:10ज्यादा समझाया तो ये वीडियो बहुत लें्थी
- 3:12हो जाएगी। इसलिए देखो जहां मुझे लगेगा कि
- 3:14चीजें एक्सप्लेन करनी है वहां मैं खुद ही
- 3:17कर दूंगा। ठीक है? और जहां थोड़ा सा लगेगा
- 3:19कि सिंपल-सिंपल है वहां पर आप लोग जो है
- 3:21ऐसे देख लेना। ठीक है? और कुछ पॉइंट्स को
- 3:23हम लोग यहां पे एक्सप्लेन कर देंगे। तो
- 3:25सबसे पहले क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम को
- 3:27अगर हम लोग देखें तो ये हमारा सिस्टम होता
- 3:28है। ठीक है? सेट ऑफ प्रोसीजर होता है,
- 3:30प्रोसीजर होती है जो कि डिजाइन करी जाती
- 3:32है ताकि जो एक ऑर्गेनाइजेशन है वो
- 3:33कंसिस्टेंटली ठीक है? ताकि एनश्योर किया
- 3:36जा सके कि जो भी हमारी कंपनी है,
- 3:37ऑर्गेनाइजेशन है, इंडस्ट्री है वो जो भी
- 3:39हमारा प्रोडक्ट बना रही है, ठीक है? वो
- 3:41यहां पे कस्टमर की सेटिस्फेक्शन को मीट
- 3:43करें और रेगुलेटरी रिक्वायरमेंट जैसे
- 3:45हमारी क्वालिटी के लिए भी बहुत सारे
- 3:46रिक्वायरमेंट्स होती हैं। ठीक है?
- 3:48रेगुलेटरी रिक्वायरमेंट्स होती हैं। तो
- 3:49उनको भी हमारा जो प्रोडक्ट है वो मीट करना
- 3:51चाहिए। अगर कोई भी इंडस्ट्री में प्रोडक्ट
- 3:53बन रहा है तो जो भी रेगुलेटरी
- 3:54रिक्वायरमेंट्स हैं उनके अकॉर्डिंग बने और
- 3:56जो कस्टमर है ठीक है उसको भी मीट करें कि
- 3:58जो कस्टमर जिस चीज के लिए बनाया जा रहा है
- 4:00उस सर्विस को भी वहां पे वो मीट करें। तो
- 4:02क्यूमएस हमारा क्या होता है? अब क्वालिटी
- 4:04मैनेजमेंट सिस्टम हमारा एक सेट ऑफ
- 4:05गाइडलाइंस होती है। सेट ऑफ प्रोसीजर होता
- 4:07है फार्मासटिकल इंडस्ट्री में जो कि हमारा
- 4:09क्या करता है? मेंटेन करता है क्वालिटी
- 4:10एंड सेफ्टी ऑफ़ प्रोडक्ट और उनकी सर्विस को
- 4:12भी। ठीक है? तो प्रोडक्ट को भी और जो
- 4:14प्रोडक्ट को देने की सर्विस है इन दोनों
- 4:16को ही मेंटेन करने का काम हमारा क्यूएमएस
- 4:18करता है। बाकी ये हमारा एक्ट होता है
- 4:20सुपरवाइजिंग ऑल द एक्टिविटीज रिक्वायर्ड
- 4:21फॉर मेंटेनिंग अ डिजायर्ड लेवल ऑफ
- 4:23क्वांटिटी। तो यहां पे वही चीज़ है कि जो
- 4:25भी एक्टिविटी हमारा एक प्रोडक्ट की
- 4:27क्वालिटी को मेंटेन करने के लिए जरूरी है
- 4:29उन सभी को सुपरवाइज करना। ठीक है? ये
- 4:31हमारा काम होता है क्वालिटी मैनेजमेंट
- 4:33सिस्टम का। अब अगर हम लोग थोड़ा सा यहां पे
- 4:35देखें अपने कांसेप्ट ऑफ क्वालिटी के बारे
- 4:37में। ठीक है? कि क्वालिटी को मतलब कैसे हम
- 4:40लोग डिफाइन कर सकते हैं? क्या होता है? है
- 4:41क्वालिटी से हमारा मतलब क्या है? तो जो
- 4:43हमारा यूएस एफडीए ठीक है? यूएस का जो
- 4:46हमारा रेगुलेटरी कह सकते हो अथॉरिटी है
- 4:48एफडीए तो उसके अकॉर्डिंग जो क्वालिटी है
- 4:51इट इज़ अ मेजर ऑफ़ प्रोडक्ट्स और सर्विस
- 4:53एबिलिटी टू सेटिस्फाई द कस्टमर्स डिमांड।
- 4:55तो यहां पे सिंपल सी बात है कि जो हमारा
- 4:57प्रोडक्ट है। ठीक है? तो वो कस्टमर की
- 5:00डिमांड पे कितना खरा उतर रहा है। कितनी
- 5:01अच्छे से कस्टमर की कस्टमर की डिमांड को
- 5:03फुलफिल कर रहा है। वही हमारा होता है
- 5:05क्वालिटी। ठीक है? तो एक प्रोडक्ट हमारी
- 5:07क्वालिटी वाला कब होगा? कि जिस चीज के लिए
- 5:09उसको बनाया गया है वो उसको बहुत अच्छे से
- 5:12यहां पे कह सकते हो पूरा कर सके। अब मान
- 5:14लो कोई अगर मान लो जो है बुखार की दवा है
- 5:16या फिर किसी भी चीज की दवा है तो वो दवा
- 5:19कितनी अच्छे से उस डिजीज को ट्रीट कर रही
- 5:21है इफेक्ट कर रही है तो वो हमारा होता है
- 5:23प्रोडक्ट की क्वालिटी। बाकी क्वालिटी इज़
- 5:25नॉट ओनली अबाउट प्रोडक्ट बीइंग डिफेक्ट
- 5:27फ्री बट आल्सो अबाउट फिटनेस फॉर यूज़। अब
- 5:29देखो यहां पे क्वालिटी का मतलब ये नहीं कि
- 5:31इस प्रोडक्ट में सिर्फ कोई डिफेक्ट नहीं
- 5:32है तो हम लोग बोल देंगे कि हां क्वालिटी
- 5:34बहुत अच्छी है। जैसे मान लो मान लो एक
- 5:36हमारी कोई दवा है। ठीक है? अब उस दवा में
- 5:38कोई डिफेक्ट नहीं है। उस दवा में जितना
- 5:40हमारा एपीआई होना चाहिए वो भी है। ठीक है?
- 5:42उसका उसका जितना भी क्वालिटी कंट्रोल हमने
- 5:44टेस्ट किया वो सारा बिल्कुल एकदम अपने
- 5:47पैरामीटर्स पे खरा उतरा। लेकिन फिर भी अगर
- 5:49वो दवा जिस चीज के लिए बनाई गई है अगर वह
- 5:51उस चीज के लिए काम ही ना कर पाए तो भी हम
- 5:53लोग यहां पे ये नहीं कह सकते की उस दवा की
- 5:55क्वालिटी बहुत अच्छी है। उस दवा की
- 5:56क्वालिटी कब अच्छी होगी? जब पहली बात तो
- 5:58वो डिफेक्ट फ्री हो ही। ठीक है? यह तो
- 6:00होना ही चाहिए। लेकिन उसके साथ-साथ जिस
- 6:02चीज़ के लिए वह दवा बनाई गई है, उसपे भी
- 6:04अपना वह बराबर इफेक्ट करे। तो तभी हम लोग
- 6:06बोलेंगे कि हां यह दवा बहुत अच्छी
- 6:08क्वालिटी की है। बाकी इनफार्मा क्वालिटी
- 6:10क्या होता है कि फार्मा में क्वालिटी का
- 6:11मतलब होता है कि जो ड्रग है ठीक है? वो
- 6:13हमारी सेफ हो, इफेक्टिव हो। ठीक है? और
- 6:16प्योर हो, कंसिस्टेंट थ्रू आउट इट्स सेल्फ
- 6:18लाइफ। तो जितने भी टाइम यहां पे उसकी
- 6:20सेल्फ लाइफ है, जैसे अगर एक दो एक साल तक
- 6:21की सेल्फ लाइफ है, दो साल तक यहां पे सेफ
- 6:23रहे। तो उस पूरे 2 साल तक उसका जो इफेक्ट
- 6:25है, उसकी जो सेफ्टी है, ठीक है? उसकी जो
- 6:27प्योरिटी है वो यहां पे चेंज नहीं होनी
- 6:29चाहिए। वो अपना सेम इफेक्ट शो करनी चाहिए
- 6:32थ्रूउ इट्स सेल्फ लाइफ। तब हम लोग बोलेंगे
- 6:34कि प्रोडक्ट की क्वालिटी बहुत अच्छी है।
- 6:36अब अगर हम लोग यहां पे इसके ऑब्जेक्टिव को
- 6:38देखें तो ऑब्जेक्टिव मतलब यही है कि इसका
- 6:40हमारा क्या मतलब है? ठीक है? कि क्यूएमएस
- 6:41हम लोग क्यों पढ़ रहे हैं? तो भाई सिंपल
- 6:44सी बात है कि ये हमारा इसमें हमारे कुछ
- 6:45ऐसे सेट ऑफ गाइडलाइंस होती हैं,
- 6:47प्रोसीजर्स होते हैं जिनको इंप्लीमेंट
- 6:48करके जो कंपनियां हैं, ठीक है? वो अपने
- 6:50प्रोडक्ट की क्वालिटी को यहां पे मेंटेन
- 6:52कर सकती हैं। जैसे इसमें हमारे कुछ
- 6:54प्रीडफाइंड स्टैंडर्ड्स होते हैं। जैसे
- 6:55हमारी कुछ सेट ऑफ गाइडलाइंस होती हैं पहले
- 6:57से ही कि हां जो प्रोडक्ट है वो इस
- 6:59गाइडलाइन के अकॉर्डिंग ही बनना चाहिए। इस
- 7:01रिक्वायरमेंट को फुलफिल करना चाहिए। तो
- 7:03अगर कोई भी इंडस्ट्री उन सभी चीजों को
- 7:05फॉलो करेगी तो जो प्रोडक्ट बनेगा जो दवा
- 7:07बनेगी उसकी क्वालिटी हमारी अच्छी रहेगी।
- 7:09उसके बाद भाई देखो हमारे रेगुलेटरी और
- 7:11इंडस्ट्री रिक्वायरमेंट्स भी होते हैं।
- 7:12जैसे अभी हम लोग बहुत डिटेल में पढ़ेंगे
- 7:14हमारा आईएसओ 9000 सर्टिफिकेट। ठीक है? तो
- 7:17ये हमारा सबसे इंपॉर्टेंट सर्टिफिकेट होता
- 7:18है क्वालिटी का। तो भाई उस वो हमारा कब
- 7:20मिलता है? एक इंडस्ट्री को आईएसओ का
- 7:22सर्टिफिकेट तभी मिलेगा जब वो सारी
- 7:24रेगुलेटरी रिक्वायरमेंट्स को फुलफिल
- 7:26करेगी। उसके बाद यहां पे एरर्स,
- 7:28डिफेक्ट्स, वेरिएशन। ठीक है? इन सबको यहां
- 7:30पे मिनिमाइज करता है कि कम से कम एरर हो।
- 7:32कम से कम उसमें वेरिएशंस हो। उसके बाद
- 7:34एफिशिएंसी। ठीक है? मतलब कि काम की
- 7:36एफिशिएंसी भी बढ़ती है। प्रोड
- 7:37प्रोडक्टिविटी भी बढ़ती है। थ्रू सिस्टम
- 7:39सिस्टमैटिक प्रोसीजर कंट्रोल एंड
- 7:41डॉक्यूमेंटेशन। क्योंकि यहां पे क्या होता
- 7:43है? जब यहां पे क्वालिटी का ध्यान रखा
- 7:44जाता है तो क्वालिटी में हमारी बहुत सारी
- 7:46चीजें आ जाती हैं। कि जो भी सिंगल सिंगल
- 7:48प्रोसेस है। ठीक है? वो भी हमारी
- 7:50सिस्टमैटिक वे में हो। तो जब ये सारी
- 7:52चीजें और हर चीज का डॉक्यूमेंटेशन हो। तो
- 7:53ये सारी चीजें जब होती है ना तो कंपनी की
- 7:56प्रोडक्टिविटी भी बढ़ती है। तो क्वालिटी
- 7:58पर ध्यान देने से क्या होता है? हर चीज
- 8:00में फायदा होता है। उसके बाद टू एनहांस
- 8:03कस्टमर सेटिस्फेक्शन। तो यहां पे देखो
- 8:04सिंपल सी बात है भाई अगर जब उसको यहां पे
- 8:06एक रिलायबल और इफेक्टिव प्रोडक्ट मिलता है
- 8:08तो उसकी सेटिस्फेक्शन बढ़ती है। उसके बाद
- 8:10कंटीन्यूअस इंप्रूवमेंट। तो क्वालिटी का
- 8:12मतलब ये होता है कि क्वालिटी का मतलब ये
- 8:14नहीं कि एक बार हमने देख लिया कि सारी
- 8:16चीजें सही है और उसके बाद हम लोग फिर
- 8:17दोबारा कभी ध्यान ही नहीं दे रहे।
- 8:19क्वालिटी का मतलब होता है कंटीन्यूअस। ठीक
- 8:21है? कंटीन्यूअस इंप्रूवमेंट। अगर हमारा जो
- 8:23प्रोडक्ट है ठीक है हमें कंटिन्यू ध्यान
- 8:25देना है कि उसको हम अच्छे से अच्छा और
- 8:27बेहतर बनाने की तरफ हमारा फोकस होना चाहिए
- 8:30और यहां पे क्लियर रोल्स और यहां पे देखो
- 8:32सब मेन बात क्या है कि एक इंडस्ट्री या एक
- 8:34कंपनी में बहुत सारे डिपार्टमेंट होते हैं
- 8:36जब हर डिपार्टमेंट साथ में मिलकर क्वालिटी
- 8:38पर फोकस करता है तभी हमारा फाइनल प्रोडक्ट
- 8:41में क्वालिटी देखने को मिलती है ठीक है तो
- 8:44सभी के जो रोल्स होते हैं रिस्पांसिबिलिटी
- 8:46होती है क्वालिटी के लिए ठीक है उनके लिए
- 8:48भी जो भी रियल रोल्स वगैरह हैं ठीक है वो
- 8:49मेंशन होते हैं क्लियरली और उसके बाद यहां
- 8:51पे ट्रेन ट्रेनिंग एंड स्किल। तो जो भी
- 8:53एंप्लाइजज़ हैं कंपनी के अंदर उनको यहां पे
- 8:55स्किल करना उनको ट्रेन करना क्वालिटी के
- 8:57लिए। ठीक है? कि वो जो भी क्वालिटी का
- 8:59स्टैंडर्ड है ठीक है? उसको मीट कर सकें।
- 9:00तो उसके लिए उन्हें ट्रेनिंग वगैरह देना।
- 9:02तो वो सारी चीजें भी हमारी क्यूएमएस के
- 9:03ऑब्जेक्टिव में आती हैं। उसके बाद टू
- 9:05इंश्योर कम्युनिकेशन एंड डॉक्यूमेंटेशन।
- 9:07तो यहां पे जो हमारा ऑर्गेनाइज़ेशन है तो
- 9:09ऑर्गेनाइजेशन में सभी जो भी एंप्लाइजज़ हैं
- 9:12सभी के बीच में एक प्रॉपर कम्युनिकेशन
- 9:14होना चाहिए। ये नहीं कि हमारा जो है किसी
- 9:16से कोई बात ही नहीं कर रहा है। सब
- 9:17अपना-अपना काम बस अपने-अपने तरीके से कर
- 9:19रहे हैं। सभी में एक प्रॉपर कम्युनिकेशन
- 9:21होनी चाहिए। प्रॉपर मीटिंग होनी चाहिए
- 9:22टाइम टाइम पे। तो ये सारी चीजें भी हमारा
- 9:24क्यूएमएस एनश्योर करता है। और उसके बाद एक
- 9:26कल्चर बिल्ड होता है। ठीक है? कि एक
- 9:27ऑर्गेनाइजेशन में एक कल्चर बिल्ड होता है
- 9:29कि हमें अपनी क्वालिटी को मेंटेन रखना ही
- 9:31है। क्योंकि इसी से हमारी कंपनी आगे ग्रो
- 9:33करेगी। तो ये सारी चीजें हमारी क्यूएमएस
- 9:35के ऑब्जेक्टिव में आ जाती हैं। अब उसके
- 9:37बाद अगर हम लोग यहां पे एलिमेंट्स को
- 9:39देखें तो एलिमेंट्स मतलब कि क्यूएमएस के
- 9:41कह सकते हो क्या-क्या एक एलिमेंट हो सकते
- 9:43हैं। तो यहां पे सबसे पहले आता है
- 9:44क्वालिटी पॉलिसी। तो इसका मतलब देखो
- 9:46क्वालिटी पॉलिसी का मतलब होता है कि जो
- 9:48पूरी ऑर्गेनाइजेशन है उसका ओवरऑल कमिटमेंट
- 9:51होता है ये कि हां हम अपनी ऑर्गेनाइजेशन
- 9:53में क्वालिटी को मेंटेन करके रखेंगे। उसके
- 9:55बाद क्वालिटी ऑब्जेक्टिव्स क्या होते हैं?
- 9:56तो ये एक गोल होता है। जैसे ऑर्गेनाइजेशन
- 9:58अपने कुछ गोल तैयार करती है कि हमें ये
- 10:00सारे गोल्स की तरफ जो है फॉलो करना है। इन
- 10:03गोल्स की तरफ हमें बढ़ना है ताकि हम अपनी
- 10:05डिजायर्ड क्वालिटी को अचीव कर सकें। उसके
- 10:07बाद एक हम लोग यहां पे डॉक्यूमेंट यहां पे
- 10:10क्या होता है? क्वालिटी मैनुअल होता है
- 10:11जिसमें यहां पे एक डॉक्यूमेंट होता है
- 10:13जहां पे सारी चीजें यहां पे मेंशन होती है
- 10:14कि किस तरीके से क्वालिटी को मेंटेन करना
- 10:16है। ठीक है? क्या-क्या प्रोसीजर्स फॉलो
- 10:17करने हैं। उसके बाद स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग
- 10:20प्रोसीजर। तो यहां पे क्या होता है? जैसे
- 10:22कोई भी प्रोसेस होती है जैसे मान लो
- 10:24मैन्युफैक्चरिंग हम लोग कर रहे हैं। तो
- 10:25मैन्युफैक्चरिंग में बहुत सारी प्रोसेस
- 10:26हैं। तो हर एक प्रोसेस को किस तरीके से
- 10:29करना है? उसका एक सिस्टमैटिक एक स्टेप बाय
- 10:31स्टेप इंस्ट्रक्शन होता है। स्टैंडर्ड
- 10:33ऑपरेटिंग प्रोसीजर के अंदर। एसओपी क्या
- 10:35होता है? एक रिटेन। ठीक है? एक रिटेन
- 10:37डॉक्यूमेंट होता है जिसके अंदर हर प्रोसेस
- 10:39को किस तरीके से सही से परफॉर्म करना है
- 10:41उसका एक स्टेप बाय स्टेप इंस्ट्रक्शन होता
- 10:43है तो वो हमारा इसमें मेंशन होता है। उसके
- 10:44बाद सभी का रिकॉर्ड्स एंड डॉक्यूमेंट को
- 10:46मेंटेन करना। ठीक है? वो हमारा इसके अंदर
- 10:48आ जाता है। उसके बाद इंटरनल ऑडिट देखो
- 10:50ऑडिट का मतलब होता है जांच परख करना। जैसे
- 10:53यहां पे क्या होता है जब भी आप लोग यहां
- 10:54पे कभी एग्जाम वगैरह देते हो तो वहां पे
- 10:56इंस्पेक्शन होता है। ठीक है? कभी-कभी
- 10:58कॉलेज में भी इंस्पेक्शन हो जाता है। तो
- 11:00वही होता है। इंस्पेक्शन मतलब कि जांच
- 11:01करना। ठीक है? परख करना कि कंपनी में क्या
- 11:04चल रहा है? कैसे चल रहा है? दवाएं कैसे बन
- 11:06रही हैं? तो वो भी हमारा रेगुलर टाइम टाइम
- 11:07पे होता रहना चाहिए ताकि क्यूएमएस की
- 11:09इफेक्टिवनेस को चेक किया जा सके। उसके बाद
- 11:11करेक्टिव एंड प्रिवेंटिव एक्शन। तो यहां
- 11:13पे देखो इसका मतलब क्या होता है? सीएपीए
- 11:15होता है। तो इसका मतलब होता है कि फॉर
- 11:17आइडेंटिफाइंग करेक्टिंग एंड प्रिवेंटिंग।
- 11:18तो अगर कोई भी इशू है तो सबसे पहले उसको
- 11:21आइडेंटिफाई करना। फिर यहां पे उसको करेक्ट
- 11:23करना। और यहां पे फ्यूचर में ध्यान देना
- 11:25कि वो दोबारा ना हो। ठीक है? उसको
- 11:26प्रिवेंट करना। तो ये हमारा करेक्टिव एंड
- 11:28प्रिवेंटिव एक्शन का मतलब हो जाता है। अब
- 11:31अगर हम लोग यहां पे थोड़ा सा देखें अपने
- 11:32आईएसओ 9001 को। अब देखो इसको हम लोग बहुत
- 11:35डिटेल में देखेंगे बट आप इतना समझो कि ये
- 11:36हमारा एक सर्टिफिकेट होता है। ठीक है?
- 11:38आईएसओ 9000 का सर्टिफिकेट होता है जिसको
- 11:40हम लोग बोलते हैं आईएसओ 901। अब इसको 2015
- 11:44क्यों बोलते हैं? क्योंकि ये इसका लेटेस्ट
- 11:45रिवीजन होता है। ठीक है? कि लेटेस्टली
- 11:47लेटेस्ट कब ये यहां पे रिवाइज हुआ है। तो
- 11:49यहां पे ये इसका ईयर मेंशन होता है। जैसे
- 11:51पहले यहां पे आप लोगों को याद हो तो बहुत
- 11:53पहले मेंशन होता था 901 टू 2008। तो इसका
- 11:58मतलब था कि उस टाइम उसका रिवीजन 2008 में
- 12:01हुआ था। लेकिन 2015 के बाद यहां पे ऐसे
- 12:03मेंशन होने लगा। तो इसको तो अभी बहुत
- 12:05डिटेल में देखेंगे बट अभी आप लोग सिंपली
- 12:06समझो कि यही ठीक है मतलब इंटरनेशनल
- 12:09सर्टिफिकेट होता है ये। क्या होता है?
- 12:11इंटर नेशनल सर्टिफिकेट होता है जो कि एक
- 12:14कंपनी को तब दिया जाता है जब वो अपनी
- 12:15क्वालिटी को बहुत अच्छे से मेंटेन करती
- 12:17है। तो ये सर्टिफिकेट हमारा क्या होता है?
- 12:19आईएसओ 901 से 2015। ठीक है? यह हमारा
- 12:23सर्टिफिकेट होता है जो कि किसी कंपनी को
- 12:25दिया जाता है। तो अगर किसी कंपनी को यह
- 12:26सर्टिफिकेट मिला हुआ है इसका मतलब कि उस
- 12:28कंपनी के जो प्रोडक्ट हैं उनकी क्वालिटी
- 12:31बहुत अच्छी है तभी उसको यहां पे ये
- 12:32सर्टिफिकेट मिलता है। तो ये हमारा एक
- 12:34सर्टिफिकेट होता है जो कि हमारा कह सकते
- 12:36हो हमारा शो करता है कि हां अगर ये
- 12:39सर्टिफिकेट है कंपनी के पास तो उसके
- 12:40प्रोडक्ट हमारे अच्छे ही होंगे। इट
- 12:43स्पेसिफाई रिक्वायरमेंट फॉर अ क्यूएमएस
- 12:44दैट ऑर्गेनाइजेशन कैन यूज़ टू डेवलप देयर
- 12:46ओन प्रोग्राम्स। ठीक है? तो यहां पे देखो
- 12:48इसके अंदर क्या होता है? जैसे आईएसओ 9000
- 12:50को अभी हम लोग देखेंगे तो इसके अंदर बहुत
- 12:51सारी गाइडलाइंस होती है जब उनको फॉलो कर
- 12:54लेती है कंपनी तभी यहां पे इसका
- 12:55सर्टिफिकेट जो है उसको दिया जाता है। तो
- 12:57इसको अभी बहुत डिटेल में देखेंगे। अभी आप
- 12:59लोगों को ज्यादा नहीं समझ में आ रहा होगा।
- 13:01बाकी अगर हम लोग यहां पे क्यूएमएस
- 13:02सर्टिफिकेशन की बात करें तो देखो वही चीज़
- 13:04आ जाती है कि क्यूएमएस सर्टिफिकेशन क्या
- 13:06होता है? एक हमारा फॉर्मल अप्रूवल होता है
- 13:08जो कि हमारा ग्रांट किया जाता है उन
- 13:09फार्मासटिकल कंपनी या फिर ऑर्गेनाइजेशन को
- 13:12जो कि शो करती हैं कि उन्होंने क्वालिटी
- 13:14मैनेजमेंट सिस्टम को यहां पे फॉलो किया
- 13:16हुआ है। ठीक है? उसको यहां पे फॉलो कर रहे
- 13:17हैं। उसके साथ कंप्लाई कर रहे हैं। तो
- 13:19उनको यहां पे कौन-कौन सा कह सकते हो सबसे
- 13:21जो फेमस होता है वो होता है वो होता है
- 13:22आईएसओ 901 का सर्टिफिकेट और इसके अलावा
- 13:25आईसीएस Q10। ठीक है? तो इसका भी
- 13:27सर्टिफिकेट यहां पे मिल सकता है। तो ये
- 13:29हमारे कुछ सर्टिफिकेट होते हैं जो कि
- 13:30हमारा क्यूएमएस सिस्टम को मेंटेन करने पर
- 13:33ऑर्गेनाइजेशन को दिए जाते हैं। अब अगर हम
- 13:35लोग इसके पर्पज की बात करें तो पर्पस इसका
- 13:37होता है कि हमारा जो भी ऑर्गेनाइजेशन के
- 13:39अंदर मैन्युफैक्चरिंग है, टेस्टिंग है,
- 13:40डिस्ट्रीब्यूशन प्रोसेस है। ठीक है? उसमें
- 13:42हमारी प्रोडक्ट की क्वालिटी यहां पे
- 13:43मेंटेन हो रही है। उसके बाद यहां पे
- 13:45कंफर्म देखो ये सर्टिफिकेट तभी मिलता है
- 13:47जब यहां पे सारे रेगुलेटरी और इंटरनेशनल
- 13:50स्टैंडर्ड के साथ यहां पे कंपनी कंप्लाई
- 13:52करती है। यानी कि उनके साथ कह सकते हो
- 13:53मेलभाव बना के चलती है। उनको फॉलो करती
- 13:55है। और उसके बाद जब कस्टमर कॉन्फिडेंस और
- 13:58ग्लोबल एक्सेप्टेंस तो यहां पे क्या होता
- 13:59है भाई जिस कंपनी को यहां पे क्यूएमएस
- 14:01मतलब कि आईएसओ 9000 का सर्टिफिकेट मिल गया
- 14:04तो फिर वहां पे उसको एक ग्लोबल रिकॉग्निशन
- 14:06मिल जाती है कि अब उस कंपनी का जो
- 14:08प्रोडक्ट होगा उसको कोई भी एक्सेप्ट करने
- 14:10को तैयार होता है क्योंकि उसको सर्टिफिकेट
- 14:11मिला होता है तो सभी लोग का भरोसा बढ़
- 14:13जाता है कि हां ठीक है इस कंपनी को ये आईo
- 14:169000 का सर्टिफिकेट मिला है इसका मतलब
- 14:17इसके प्रोडक्ट यहां पे अच्छे ही होंगे। अब
- 14:19बेनिफिट्स की बात करें तो बेनिफिट्स क्या
- 14:21होता है कि हमारा क्वालिटी सेफ्टी
- 14:22एफिकेंसी को इंश्योर करता है। रेगुलेटरी
- 14:24अप्रूवल्स को भी हमारा फैसिलिटेट करता है।
- 14:26तो भाई सिंपल सी बात है कि अगर आईएसओ 9000
- 14:29का सर्टिफिकेट किसी को मिला हुआ है तो
- 14:30उसको और भी जो भी रेगुलेटरी अप्रूवल्स
- 14:32होते हैं जैसे कुछ भी एक्स्ट्रा उसको मान
- 14:34लो कोई नई दवा के लिए आईएडी अप्रूवल चाहिए
- 14:36एनडीए अप्रूवल चाहिए तो वो सब उसको बहुत
- 14:38जल्दी मिल जाते हैं। उसके बाद ऑपरेशनल
- 14:40एफिशिएंसी। तो भाई देखिए यह सर्टिफिकेट
- 14:42उसी को मिलेगा जो जिसने अपनी कंपनी में
- 14:44क्वालिटी अच्छे से मेंटेन करके रखी हो। तो
- 14:46फिर जब क्वालिटी अच्छे से मेंटेन होती है
- 14:48तो एफिशिएंसी बढ़ती है। कंटीन्यूअस
- 14:49इंप्रूवमेंट प्रमोट होता है और यहां पे एक
- 14:52ट्रस्ट हमारा बिल्ड होता है हेल्थ केयर
- 14:54प्रोफेशनल और कस्टमर्स में। क्यों?
- 14:55क्योंकि उनको पता होता है कि हां इस कंपनी
- 14:57को अगर ये सर्टिफिकेट मिला हुआ है इसका
- 14:59मतलब इस कंपनी के प्रोडक्ट यहां पे अच्छे
- 15:01होंगे। तो यहां पे देखो हम लोग अगर अपने
- 15:03सिलेबस को अगेन देखें तो हमने क्या-क्या
- 15:04देखा? हमने क्वालिटी मैनेजमेंट को थोड़ा
- 15:06सा देखा और इसके सर्टिफिकेशन को देखा। अब
- 15:08हम लोग थोड़ा सा और हमने कांसेप्ट ऑफ
- 15:10क्वालिटी को भी देखा। ठीक है? क्वालिटी
- 15:11कांसेप्ट क्या है? इसका मतलब यही जो हमने
- 15:13डेफिनेशन देखी थी हमारा ये कांसेप्ट ऑफ
- 15:15क्वालिटी। तो ये सारी चीजें हमने देख ली
- 15:17हैं। और अब हम लोग यहां पे बात करते हैं
- 15:19अपने बहुत इंपॉर्टेंट टॉपिक के बारे में
- 15:21जो की हमारा हो जाता है टोटल क्वालिटी
- 15:23मैनेजमेंट। तो ये देखो यहां सभी से
- 15:25क्वेश्चन जो है हमें देखने को मिलता है।
- 15:26तो थोड़ा सा ध्यान से देखते रहना। बाकी
- 15:28देखो इसमें कुछ खास है नहीं समझाने वाला।
- 15:30जैसे टोटल क्वालिटी मैनेजमेंट का भी मतलब
- 15:32क्या हो गया? टोटल का मतलब हो गया होल
- 15:34यानी पूरा। और क्वालिटी मैनेजमेंट की पूरी
- 15:36मतलब कंपनी में हर एक चीज की क्वालिटी को
- 15:39मैनेज करना वही हमारा हो जाता है टोटल
- 15:41क्वालिटी मैनेजमेंट। देखो यहां पे टोटल
- 15:43क्वालिटी मैनेजमेंट का मतलब होता है कि
- 15:45सिर्फ यहां पे हमें प्रोडक्ट की क्वालिटी
- 15:47को मेंटेन नहीं करना है। बल्कि जो
- 15:48प्रोडक्ट है ठीक है? वो तो हमारा अच्छा
- 15:50होना ही चाहिए। उसके साथ-साथ जो हमारी
- 15:51सर्विस है, ठीक है? वो भी अच्छी होनी
- 15:53चाहिए। उसके साथ-साथ जो भी इक्विपमेंट्स
- 15:56हम लोग यूज़ कर रहे हैं वो भी अच्छे होने
- 15:57चाहिए। ओवरऑल कंपनी का एटमॉस्फेयर है वो
- 16:00भी अच्छा होना चाहिए। ठीक है? जो भी
- 16:01एंप्लॉय हैं उनके बीच का रिलेशन है वो भी
- 16:03अच्छा होना चाहिए। तो ये होता है टोटल
- 16:05क्वालिटी मैनेजमेंट कि हमारी कंपनी की
- 16:07टोटल क्वालिटी को मैनेज करना ठीक है उसको
- 16:09मेंटेन करना ये आ जाता है टीक्यूएम के
- 16:11अंदर तो यहां पे वही चीज है कि टोटल का
- 16:14मतलब हो जाता है मेड अप ऑफ होल और कंप्लीट
- 16:16और क्वालिटी का मतलब हो गया डिग्री ऑफ़
- 16:18एक्सीलेंस है ना या फिर सर्विस और
- 16:20मैनेजमेंट का मतलब क्या हो गया एक्ट आर्ट
- 16:22या फिर मैनर ऑफ़ हैंडलिंग कंट्रोलिंग
- 16:24डायरेक्टिंग ठीक है कि किस तरीके से हम
- 16:26लोग यहां पे क्वालिटी को कंट्रोल कर रहे
- 16:27हैंडल कर रहे हैं डायरेक्ट कर रहे हैं टी
- 16:29कैप क्या होता है टी कैप को हम लोग सिंपली
- 16:30डिफाइन कर सकते हैं आर्ट ऑफ़ मैनेजिंग द
- 16:32होल टू अचीव सक्सेस ठीक है? एक्सीलेंस
- 16:34यानी कि पूरी सिस्टम को यहां पे पूरे
- 16:37सिस्टम को मैनेज करना, पूरे सिस्टम की
- 16:39क्वालिटी को मेंटेन करना ताकि एक्सीलेंस
- 16:41को अचीव किया जा सके। यही होता है
- 16:42टीक्यूएम का मेन ऑब्जेक्टिव। और यही होता
- 16:44है टीक्यूएम। और टीक्यूएम क्या होता है?
- 16:46रिक्वायर्स दैट कंपनी मेंटेन द क्वालिटी
- 16:47स्टैंडर्ड इन ऑल एस्पेक्ट ऑफ इट्स बिज़नेस।
- 16:50दिस रिक्वायर्स एश्योरिंग दैट थिंग्स आर
- 16:52डन राइट द फर्स्ट टाइम एंड द डिफेक्ट एंड
- 16:54वेस्ट आर एलिमिनेट एलिमिनेटेड फ्रॉम
- 16:57ऑपरेशन। तो यहां पे वही चीज़ है कि जो भी
- 16:59जो भी सही चीज़ हैं, ठीक है? है वो सही
- 17:01टाइम पे इंप्लीमेंट करी जा रही है। पहली
- 17:02बात और अगर कोई डिफेक्ट है या फिर कोई
- 17:04वेस्ट है ठीक है तो उसको सही टाइम पे
- 17:06रिमूव कर दिया जा रहा है। एलिमिनेट कर
- 17:07दिया जा रहा है। ये सारी चीजें हमारा टीम
- 17:09जो है इंश्योर करता है। अब अगर हम लोग
- 17:11यहां पे इसके ऑब्जेक्टिव की बात करें तो
- 17:12ऑब्जेक्टिव क्या होता है कि कस्टमर
- 17:14सेटिस्फेक्शन को अचीव करना। भाई देखिए जब
- 17:16कंपनी का प्रोडक्ट अच्छी क्वालिटी का होगा
- 17:18तो कस्टमर सैटिस्फेक्शन अपने आप अचीव हो
- 17:20जाएगी। कंटीन्यूअस इंप्रूवमेंट को प्रमोट
- 17:22करना। ठीक है? सभी एंप्लॉय को यहां पे
- 17:23इन्वॉल्व करना। उसके बाद वेस्टेज को यहां
- 17:25पे रिड्यूस करना। डिफेक्ट को भी यहां पे
- 17:27रिमूव करना। उसके बाद एफिशिएंसी ऑफ़
- 17:29प्रोडक्टिविटी को बढ़ाना और लॉन्ग टर्म
- 17:31सक्सेस को मेंटेन करना थ्रू कंसिस्टेंट
- 17:33क्वालिटी। क्योंकि देखो क्वालिटी अच्छी
- 17:34होगी तो लॉन्ग टर्म यहां पे सक्सेस देखने
- 17:36को मिलेगी। अब प्रिंसिपल की बात करें तो
- 17:38टोटल क्वालिटी मैनेजमेंट हमारा एक सेट ऑफ
- 17:40कोर प्रिंसिपल पे बिल्ड होता है जो कि
- 17:41यहां पे ऑर्गेनाइजेशन को हेल्प करते हैं
- 17:43ताकि कंटिन्यू इंप्रूवमेंट और कस्टमर
- 17:45सैटिस्फेक्शन देखने को मिले। तो अगर हम
- 17:47लोग यहां पे देखें तो इस प्रिंसिपल के
- 17:48हमारे जो मेजर कोर एलिमेंट्स होते हैं। तो
- 17:50सबसे पहला हो जाता है फोकस ऑन कस्टमर। तो
- 17:52ये इसका सबसे पहला कोर एलिमेंट होता है
- 17:55हमारे प्रिंसिपल का। तो यहां पर देखो फोकस
- 17:57ऑन कस्टमर का मतलब क्या है भाई? सिंपल सी
- 17:59बात है कस्टमर ही तो हमारा सबसे एक कोई भी
- 18:03कंपनी है, कोई भी इंडस्ट्री है उसका मेन
- 18:05गोल मेन टारगेट क्या होता है? कस्टमर की
- 18:07नीड को फुलफिल करना। भाई कस्टमर ही उसका
- 18:10प्रोडक्ट लेंगे तभी कंपनी चलेगी। तो यहां
- 18:12पे क्या है? द मेन गोल ऑफ़ ट्यूक मी्स टू
- 18:14मीट और एक्सीड कस्टमर्स एक्सपेक्टेशन।
- 18:16यानी कि जो भी कस्टमर की एक्सपेक्टेशन है
- 18:17उस प्रोडक्ट को लेकर उन सभी को मीट करना।
- 18:20कस्टमर सेटिस्फेक्शन हमारा डिटरमाइन करती
- 18:22है प्रोडक्ट की क्वालिटी और बिज़नेस की
- 18:23सक्सेस को। अगर कस्टमर सेटिस्फाई रहेगा तो
- 18:25वो यहां पे क्या होगा? कंपनी से जुड़ा
- 18:27रहेगा। बार-बार उसके प्रोडक्ट को लेता
- 18:29रहेगा और कंपनी यहां पे सक्सेस करती
- 18:31रहेगी। बिज़नेस यहां पे सक्सेस होता रहेगा।
- 18:33रेगुलर फीडबैक हेल्प आइडेंटिफाई एरियाज
- 18:35फॉर इंप्लीमेंट। और यहां पे क्या है कि
- 18:37हमें कस्टमर का फीडबैक भी लेते रहना है कि
- 18:40अगर कोई कमी है। ठीक है? तो कस्टमर का
- 18:41फीडबैक हमें लेना है और उसको कंटिन्यू उस
- 18:43कमी को दूर करने की हमें कोशिश करती रहनी
- 18:45है। करते रहना है। तो ये हमारा हो जाता है
- 18:47फोकस ऑन कस्टमर। अब उसके बाद एंप्लॉय
- 18:49इन्वॉल्वमेंट का मतलब क्या है? भाई देखिए
- 18:51एक कंपनी के अंदर हमारे बहुत सारे एंप्लॉय
- 18:53होते हैं। बहुत सारे स्टॉक होते हैं। तो
- 18:55हमें उन सभी को जो है इनवॉल्व करके रखना
- 18:57है। ठीक है? कि हर एक एंप्लई हमारा
- 18:59क्वालिटी को मेंटेन करने के लिए
- 19:00रिस्पांसिबल होता है। हमें टीम वर्क को
- 19:02प्रमोट करना है। सभी को मोटिवेट करना है।
- 19:04ठीक है? और डिसीजन मेकिंग में अगर कंपनी
- 19:06का कोई भी बड़ा डिसीजन हम लोग यहां पे ले
- 19:08रहे हैं तो उसमें सभी का पार्टिसिपेशन
- 19:10हमें होना जरूरी है। ठीक है? सभी को बता
- 19:12के करना है। तो ये इससे क्या होता है?
- 19:13इससे उनको एक भरोसा होता है कि हां हम भी
- 19:15इस कंपनी के बहुत इंपॉर्टेंट पार्ट हैं।
- 19:17प्रॉपर ट्रेनिंग और हमें एमावरमेंट जो है
- 19:19प्रमोट करना है ताकि जो हमारे एंप्लई हैं
- 19:22ठीक है वो क्वालिटी गोल्स में अपना
- 19:23कंट्रीब्यूशन दे सकें। तो ये हमारा हो
- 19:25जाता है एंप्लई एनवायरमेंट।
- 19:27उसके बाद देखो प्रोसेस सेंटर। अब यहां पे
- 19:29क्या है कि जो क्वालिटी है ध्यान से
- 19:31समझना। जैसे क्वालिटी का मतलब ये नहीं कि
- 19:33जब हमारा प्रोडक्ट जो है बनके तैयार हो
- 19:36जाए। तब हम लोग यहां पे देखें कि प्रोडक्ट
- 19:37कितनी अच्छी क्वालिटी का है। बल्कि
- 19:39क्वालिटी का मतलब यह होता है कि जब
- 19:40प्रोडक्ट को हम लोग बना रहे हैं तो हर एक
- 19:42स्टेप में हमें उसकी क्वालिटी चेक करनी है
- 19:44कि हर एक मैन्युफैक्चरिंग के हर एक एक
- 19:46स्टेप में हमें देखना है कि कहीं यहां पे
- 19:48इस स्टेप में कुछ प्रॉब्लम तो नहीं होगी।
- 19:50कहीं इस स्टेप में इसमें जो है कुछ कम
- 19:52ज्यादा तो नहीं होगा। कहीं इसका टेंपरेचर
- 19:54तो नहीं ज़्यादा हो गया। कहीं इसका पीएच
- 19:55कुछ ऊपर नीचे तो नहीं हो गया। तो हमें हर
- 19:58एक मतलब प्रोसेस के हर एक स्टेप को चेक
- 20:01करना है। तो क्वालिटी इज अचीव्ड बाय
- 20:02इंप्रूविंग द प्रोसेस नॉट जस्ट चेकिंग द
- 20:04फाइनल प्रोडक्ट। ठीक है? तो हमें सिर्फ
- 20:06फाइनल प्रोडक्ट को नहीं बल्कि प्रोसेस को
- 20:09चेक करना है। ईच स्टेप इन प्रोडक्शन इज़
- 20:11मॉनिटर्ड एंड ऑप्टिमाइज टू प्रिवेंट एरर।
- 20:13ठीक है? तो वही चीज़ है कि हमारा सभी को
- 20:14ऑप्टिमाइज करना है। हर स्टेप को, हर स्टेप
- 20:16को मॉनिटर करना है, देखते रहना है। और एक
- 20:18कंट्रोल प्रोसेस हमारी इंश्योर करती है कि
- 20:20जो हमारा आउटपुट है यानी कि जो भी हमारा
- 20:22प्रोडक्ट है वो कंसिस्टेंट रहे और रिलायबल
- 20:24रहे। इंटीग्रेटेड सिस्टम। अब इंटीग्रेटेड
- 20:27सिस्टम का मतलब क्या है भाई? देखो सभी
- 20:29डिपार्टमेंट हालांकि एक कंपनी में हमारे
- 20:32बहुत सारे डिपार्टमेंट होते हैं। हमारा
- 20:33क्वालिटी कंट्रोल डिपार्टमेंट अलग होता
- 20:34है। प्रोडक्शन डिपार्टमेंट अलग होता है।
- 20:36ठीक है? क्वालिटी असोरेंस डिपार्टमेंट अलग
- 20:39होता है। एचआर अलग हो गया, मार्केटिंग अलग
- 20:40हो गया। लेकिन जब सभी डिपार्टमेंट मिलके
- 20:43साथ में काम करते हैं तब हमारा इंश्योर
- 20:46होता है कि जो हमारा प्रोडक्ट है उसकी
- 20:48क्वालिटी भी मेंटेन होगी और जो हमारा
- 20:50सर्विस है उसकी क्वालिटी भी यहां पे
- 20:52मेंटेन होगी। तो जब सभी एक सिस्टम बनके
- 20:54काम करते हैं तभी एक कंपनी यहां पे अच्छे
- 20:55से ग्रो करती है। उसकी उसके प्रोडक्ट में
- 20:57क्वालिटी यहां पे इंश्योर होती है।
- 21:00क्वालिटी एक सभी की रिस्पोंसिबिलिटी होती
- 21:01है। यहां पे एक सिंगल डिपार्टमेंट तक
- 21:03लिमिटेड नहीं होती है। और यहां पे
- 21:04कोआर्डिनेशन और कम्युनिकेशन को प्रमोट
- 21:06करता है अक्रॉस द ऑर्गेनाइजेशन और अगर हम
- 21:08लोग बात करें अपने फिफ्थ पॉइंट की तो
- 21:09हमारा आ जाता है स्ट्रेटेजिक एंड
- 21:11सिस्टेमिक अप्रोच। अब यहां पे देखो क्या
- 21:12है कि जब क्वालिटी को हम लोग यहां पे अपनी
- 21:15प्रोडक्ट्स में इंप्रूव कर रहे हैं या फिर
- 21:17इंश्योर कर रहे हैं तो वो हम लोग यहां पे
- 21:18ऐसे रैंडमली नहीं कर सकते कि हां रैंडमली
- 21:20हमने कुछ डिसाइड कर लिया कि हम लोग ऐसेसे
- 21:22करेंगे बल्कि वो एक स्ट्रेटजी बनानी होगी।
- 21:25ठीक है? कि एक स्ट्रेटेजिक अप्रोच होनी
- 21:27चाहिए कि हमने एक स्ट्रेटजी बनाई है। हमने
- 21:28एक सेट ऑफ़ गोल्स बनाएं और फिर उन गोल्स पे
- 21:31हमें खरा उतरने की कोशिश करनी है। ठीक है?
- 21:33क्वालिटी ऑब्जेक्टिव्स आर सेट
- 21:34इंप्लीमेंटेड एंड रिमूव रिव्यु
- 21:36सिस्टमैटिकली। ठीक है? तो सिस्टेटिक तरीके
- 21:38से हम लोग यहां पे क्वालिटी को रिव्यु
- 21:40करते हैं, सेट करते हैं, इंप्लीमेंट करते
- 21:41हैं। डिसीजन मेकिंग बेस्ड ऑन फैक्ट। तो
- 21:43यहां पे भी वही चीज़ आ जाती है कि हमें
- 21:45एजम्पशन के बेस पे कोई भी डिसीजन नहीं
- 21:47लेना है। बल्कि जो एक्यूरेट डाटा है,
- 21:48फैक्ट्स है और हमारे कुछ टूल्स होते हैं।
- 21:51ठीक है? हमारे जैसे स्टैटिस्टिकल टूल्स
- 21:53होते हैं जो कि हमारे कह सकते हो कुछ
- 21:55मैथमेटिकल टूल्स होते हैं। तो वहां पे
- 21:57पहले से ही सारी चीजें कैलकुलेट होती हैं।
- 21:58ठीक है? कि हां हमें पीएच को इतना रखना
- 22:01है, टेंपरेचर को इतना रखना है। तो ये सारी
- 22:03चीजें जब हमारे पास पहले से ही हमारा कह
- 22:05सकते हो सेट फॉर्म में होती हैं तो उनको
- 22:06फॉलो करते हुए हम लोग यहां पे क्वालिटी को
- 22:08अच्छे से मेंटेन करते हैं। डाटा ड्रिवन
- 22:10एक्शनंस इंप्रूव रिलायबिलिटी एंड रिड्यूस
- 22:12डिफेक्ट। तो वही चीज़ है कि हमारा डाटा हर
- 22:14एक चीज का डाटा हमारे पास होता है कि हां
- 22:16हम लोग अगर ये प्रोडक्ट बना रहे हैं। ठीक
- 22:18है? तो इसका ये डाटा है। हमें इसको इसी
- 22:20रेंज के इसी रेंज के अंदर बनाना है। इसमें
- 22:22हमें ये सारी चीजें एनश्योर करनी है। तो
- 22:24वो सारी चीज़ जब हम लोग करते हैं तब हमारा
- 22:25जो है क्वालिटी अच्छे से मेंटेन होती है।
- 22:27उसके बाद कम्युनिकेशन तो हमारा
- 22:29कम्युनिकेशन वही होता है कि हमारा यहां पे
- 22:30एक ओपन और इफेक्टिव कम्युनिकेशन भी हमें
- 22:32एनश्योर करना है। ठीक है? ताकि सभी के बीच
- 22:35में। यानी ऐसा यानी ऐसा नहीं होना चाहिए
- 22:37कि हर कोई अपना-अपना काम कर रहा है। बस
- 22:39सभी के बीच में एक प्रॉपर कम्युनिकेशन
- 22:40यहां पे मेंटेन रहना चाहिए। एक रेगुलर
- 22:42मीटिंग और फीडबैक हमें लेते रहना है अपने
- 22:45एंप्लाइजज़ का भी, स्टाफ का भी। और
- 22:46कंटीन्यूअस इंप्रूवमेंट तो यहां पे सिंपल
- 22:48सी बात है कि टीक्यूएम यहां पे क्या करता
- 22:50है? फोकस करता है कंटीन्यूअस इंप्रूवमेंट
- 22:52पे। ये नहीं कि हमने सिर्फ एक बार जो है
- 22:54इंप्रूव कर दिया उसके बाद हम ध्यान ही
- 22:55नहीं दे रहे। द एम इज टू रिड्यूस एरर्स
- 22:58इंप्रूव एफिशिएंसी एंड एनहांस कस्टमर
- 23:00सैटिस्फेक्शन। तो वही सारी चीजें हैं। अब
- 23:03अगर हम लोग यहां पे देखें कि जब हम लोग
- 23:04यहां पे टीक्यूएम के प्रिंसिपल्स को अपनी
- 23:06कंपनी के अंदर अप्लाई करते हैं तो हमें
- 23:08क्या-क्या बेनिफिट देखने को मिलता है। तो
- 23:10देखो सबसे पहले क्या होता है? जब TQF को
- 23:12हम लोग यहां पे फॉलो करते हैं तो हमारे
- 23:14प्रोडक्ट्स की यहां पे क्वालिटी इंप्रूव
- 23:16होती है। जब उसकी क्वालिटी इंप्रूव होगी
- 23:18तो क्या होगा? उसकी प्रोडक्टिविटी यहां पे
- 23:20बढ़ जाती है। क्यों? क्योंकि यहां पे देखो
- 23:22सबसे पहली बात है कि लेस रिजेक्ट होंगे।
- 23:23है ना? जैसे जब क्वालिटी सही होगी सारे
- 23:26प्रोडक्ट्स की तो हम उसको रिजेक्ट कम से
- 23:28कम करेंगे। जिसकी वजह से हमारा काम तेजी
- 23:30से होगा तो प्रोडक्टिविटी भी यहां पे
- 23:32बढ़ेगी। उसके बाद यहां पे क्या होगा कि
- 23:33कॉस्ट भी यहां पे कम लगेगा। क्योंकि यहां
- 23:35पे जो हमारा जो भी हमारा दवा है ठीक है?
- 23:38जो भी हमारी दवाएं हैं वो रिजेक्ट कम हो
- 23:40रही है तो हमारा कॉस्ट भी कम हो जाएगा।
- 23:41प्रॉफिट हमारा बढ़ जाएगा और इसकी वजह से
- 23:43क्या होगा? बिज़नेस की ग्रोथ होगी। कंपटीशन
- 23:46हमारा यहां पे बढ़ेगा। हम लोग यहां पे जो
- 23:48भी बड़ी-बड़ी कंपनियां है उनसे कंपटीट कर
- 23:49पाएंगे। जॉब्स भी ज्यादा से ज्यादा दे
- 23:51पाएंगे और यहां पे इन्वेस्टमेंट भी हमारे
- 23:53पास बढ़ेगी। क्योंकि जब क्वालिटी अच्छी
- 23:55होगी दवा की। ठीक है? तो उसको ज्यादा से
- 23:57ज्यादा लोग प्रेफर करेंगे या फिर जो भी
- 23:58हमारा प्रोडक्ट है ठीक है? उसको प्रेफर
- 24:00करेंगे। तो ये सारे हमारे कह सकते हो एक
- 24:02इफेक्ट हो जाते हैं हमारे टीकेएम को
- 24:04अप्लाई करने के।
- 24:05और बेनिफिट्स की बात करें तो देखो
- 24:07बेनिफिट्स भी थोड़ा बहुत वही आ जाता है कि
- 24:09हमारा जब टीएम को हम लोग फॉलो करते हैं तो
- 24:11क्या होता है? हमारे प्रोडक्ट की क्वालिटी
- 24:13यहां पे इंप्रूव होती है। रिलायबिलिटी
- 24:15यहां पे बढ़ जाती है। कस्टमर सेटिस्फेक्शन
- 24:17इंक्रीस होता है। उनकी लॉयल्टी बढ़ जाती
- 24:18है। वेस्ट यहां पे रिड्यूस होता है।
- 24:20डिफेक्ट कम से कम होते हैं। प्रोडक्शन
- 24:22कॉस्ट हमारा यहां पे कम हो जाता है।
- 24:24एनहांस हो जाती है हमारी एफिशिएंसी और
- 24:25प्रोडक्टिविटी और प्रमोट होता है एंप्लॉय
- 24:27एनवायरमेंट और टीम वर्क। रेगुलेटरी
- 24:29कंप्लायंस यानी कि जो भी रूल्स एंड
- 24:31रेगुलेशंस है हम उनको फॉलो करते हैं और
- 24:33ब्रांड इमेज यहां पर इंप्रूव होती है
- 24:34क्योंकि यहां पर क्वालिटी अच्छी होगी तो
- 24:36भाई लोग ज्यादा से ज्यादा लेंगे तो उनकी
- 24:37ब्रांड इमेज अच्छी होगी कस्टमर की लॉयल्टी
- 24:39बढ़ेगी मार्केट कॉम कॉम्पिटिटिवनेस भी
- 24:42बढ़ेगी है ना जो भी बड़े-बड़े ब्रांड्स
- 24:44हैं बड़े-बड़े इंडस्ट्रीज हैं उनसे
- 24:46कंपटीशन बढ़ पाए कंपटीशन बढ़ पाएगा और
- 24:49यहां पे लीड्स टू लॉन्ग टर्म सक्सेस एंड
- 24:51प्रॉफिटेबिलिटी तो यहां पे वही चीज है कि
- 24:53जब हम लोग यहां पे क्वालिटी को इंश्योर
- 24:54करते हैं तो हमें भले शॉर्ट टर्म में बहुत
- 24:57फायदा ना मिले लेकिन लॉन्ग टर्म में यहां
- 24:58पे एक बहुत ही नाम होता है कंपनी का। उसको
- 25:01लॉन्ग टर्म सक्सेस मिलती है और लॉन्ग टर्म
- 25:02प्रॉफिट जो है देखने को मिलता है। तो ये
- 25:05हो जाता है हमारा यहां पे टीक्यूएम और अब
- 25:07हम लोग यहां पे बात करते हैं अपने
- 25:09क्वालिटी बाय डिज़ाइन के बारे में। अब देखो
- 25:11एक चीज़ आप लोग समझो। जैसे लगभग ना आप
- 25:14देखोगे जितने भी टॉपिक हम लोग पढ़ने वाले
- 25:16हैं। सभी में आपको सिमिलर सिमिलर सी चीज़ें
- 25:18दिखेंगी। जैसे TQओ में आपने देखा सेम ही
- 25:21चीज़ थी। क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम में भी
- 25:22यही सारी चीज़ें दिख रही थी कि हमारा
- 25:24ब्रांड इमेज बढ़ेगी। कस्टमर रॉयल्टी बढ़ेगी।
- 25:26हमारा फोकस होगा कस्टमर को सेटिस्फाई करने
- 25:29में। तो वही सारी चीजें घूम फिर के आपको
- 25:31सभी में लिखनी है। ठीक है? तो अब क्वालिटी
- 25:33बाय डिजाइन में भी वही चीज है। बस हमें हर
- 25:35चीज का एक कोर कांसेप्ट समझ लेना है। जैसे
- 25:37टीक्यूएम का कोर कांसेप्ट क्या था कि सभी
- 25:39चीजों में क्वालिटी को इंश्योर करना। उसी
- 25:41तरीके से क्यूबीडी का कोर कांसेप्ट क्या
- 25:43है? क्यूबीडी का कोर कांसेप्ट ये है कि
- 25:46क्वालिटी हमें बाद में नहीं देखनी है। कि
- 25:48जब हमारा फाइनल जो प्रोडक्ट है वो रेडी हो
- 25:51गया तब हमें नहीं चेक करनी है क्वालिटी।
- 25:53बल्कि उसको बनाते समय उसको बनाने से पहले
- 25:56ही हमें क्वालिटी का ध्यान रखना है। यानी
- 25:57बनाने से पहले ही हमें प्लान करना है कि
- 25:59किस तरीके से हम उसको इस तरीके से किस
- 26:01तरीके से हम उसको बनाएं कि हमारी जो जो
- 26:03फाइनल प्रोडक्ट है ठीक है उसमें क्वालिटी
- 26:06हमारी ऑलरेडी हमें देखने को मिले। हमें
- 26:07बाद में उसको इंश्योर ना करना पड़े। बाद
- 26:09में हमें उसको जो है चेक ना करना पड़े कि
- 26:11हम लोग बाद में चेक कर रहे हैं और बाद में
- 26:13हमें कोई डिफेक्ट मिल रहा है। बल्कि उसको
- 26:14बनाते समय हर एक स्टेप पे ईच एंड एव्री
- 26:16स्टेप पे हम लोग क्वालिटी को चेक करते
- 26:18हैं। तो वो हो जाता है क्वालिटी बाय
- 26:19डिज़ाइन। तो क्वालिटी बाय डिज़ाइन हमारा
- 26:21सबसे पहली बात तो आईसीएस क्यूआइड की
- 26:22गाइडलाइंस मेंशन है। और यहां पे यह क्या
- 26:26स्टेट करता है? यह क्या बताता है कि
- 26:27क्वालिटी हमारा प्रोडक्ट में टेस्ट नहीं
- 26:29किया जा सकता बल्कि इट शुड बी बिल्ड इन।
- 26:31यानी कि वो उस प्रोडक्ट में हमें बिल्ड
- 26:33करना होता है। यानि उसको बनाते समय ही
- 26:35उसको बनाने से पहले ही हमें यहां पे
- 26:37क्वालिटी जो है अपने दिमाग में जो है
- 26:39ध्यान रखना होता है कि हमें क्वालिटी को
- 26:40मेंटेन करना है। तो हर एक प्रोसेस में हम
- 26:42लोग क्वालिटी को चेक करते हैं। तो यहां पे
- 26:43वही चीज है कि हमारा क्वालिटी को हमें
- 26:45फाइनल प्रोडक्ट में नहीं बल्कि हर एक
- 26:47स्टेप में हर एक प्रोसेस में चेक करना है।
- 26:49अब क्वालिटी बाय डिज़ाइन हमारा एक
- 26:50सिस्टेमैटिक, साइंटिफिक और रिस्क बेस्ड
- 26:52यानी कि देखो क्या होता है? रिस्क बेस्ड
- 26:54का मतलब है कि इसमें जो भी रिस्क आने वाले
- 26:56हैं। ठीक है? उसको हम लोग पहले से ही
- 26:58ध्यान रखते हैं कि जो भी रिस्क आ सकते हैं
- 27:00तो उनको हम पहले से ही ध्यान में रखते हैं
- 27:02और उनको दूर करने के बारे में प्लान करते
- 27:04हैं, आईडिया बनाते हैं। तो वो सारी चीजें
- 27:06हम लोग यहां पे ध्यान रखते हैं। एक एप्रोच
- 27:07होती है जो कि फार्मासटिकल डेवलपमेंट में
- 27:09की जाती है दैट इंश्योर प्रीडफाइंड
- 27:11प्रोडक्ट क्वालिटी बाय अंडरस्टैंडिंग द
- 27:12प्रोसेस एंड कंट्रोलिंग द वेरिएबल्स। तो
- 27:14वही चीज़ है कि हम लोग यहां पे जो भी
- 27:15प्रोसेस है, ठीक है? हर एक प्रोसेस को हर
- 27:17एक स्टेप को कंट्रोल करते हैं, समझते हैं
- 27:19और उसमें क्वालिटी को इंश्योर करते हैं।
- 27:21कॉन्सेप्ट क्या है? कॉन्सेप्ट हमारा वही
- 27:23चीज है कि हमारा जो प्रोडक्ट है, ठीक है?
- 27:26उसमें बिगनिंग यानी स्टार्टिंग से ही
- 27:27क्वालिटी जो है बिल्ड होनी चाहिए रेदर देन
- 27:29टेस्टिंग इट एट द एंड और बाकी ये हमारा
- 27:31एम्फेसाइज़ करता है कि क्वालिटी हमारी
- 27:33प्रोडक्ट में टेस्ट नहीं होती है बल्कि उस
- 27:35बल्कि उसी के अंदर बिल्ड होती है और यहां
- 27:37पे ये प्रोडक्ट की परफॉर्मेंस को यहां पे
- 27:40हमारे कुछ प्रोसेस पैरामीटर्स जैसे कि
- 27:42साइंटिफिक अंडरस्टैंडिंग के साथ यहां पे
- 27:44लिंक करता है और ऑब्जेक्टिव्स की बात करें
- 27:47तो यहां पे इंश्योर करता है कंसिस्टेंट
- 27:49प्रोडक्ट क्वालिटी एंड एफिकसी को और टू
- 27:52रिड्यूस वेरिएबलिटी इन मैन्युफैक्चरिंग।
- 27:53ठीक है? तो हमारा जो भी मैन्युफैक्चरिंग
- 27:55है तो उसमें हम लोग यहां पे ऐसा नहीं हो
- 27:57कि बार-बार हम लोग कुछ वेरिएबिलिटी कर रहे
- 27:59हैं उसमें चेंजज़ कर रहे हैं तो उसको भी
- 28:00हमें रिड्यूस कर वो भी रिड्यूस होता है।
- 28:02ठीक है? उसके बाद मिनिमाइज रिस्क ऑफ
- 28:04प्रोडक्ट फेलियर। ठीक है? तो भाई जब हम
- 28:06लोग यहां पे शुरुआत से ही ध्यान रखेंगे तो
- 28:09जो हमारा प्रोडक्ट हमारे लास्ट में तैयार
- 28:11देखने को मिलेगा। उसमें हमारा फेलियर होने
- 28:13के चांसेस कम से कम रहेंगे। उसके बाद यहां
- 28:15पे प्रोसेस की अंडरस्टैंडिंग भी यहां पे
- 28:17बढ़ेगी। कंट्रोल की और हमारा रेगुलेटरी
- 28:19फ्लेक्सिबिलिटी। तो सिंपल सी बात है जब हम
- 28:21लोग स्टार्टिंग से ही ध्यान रखेंगे हमारा
- 28:23जो फाइनल प्रोडक्ट है वो अच्छे से तैयार
- 28:25होगा तो हमारा वो सारी चीजें रेगुलेटरी
- 28:27गाइडलाइंस के अंदर ऑलरेडी आ जाएंगी तो
- 28:30हमें कोई भी प्रॉब्लम नहीं होगी अगर हमें
- 28:31कोई भी अप्रूवल चाहिए तो वो हमें बहुत ही
- 28:33फास्ट मिल जाएगा तो वो सारी चीजें हमारी
- 28:36यहां पे इंश्योर होती है।
- 28:40आई डोंट नो व्हाई बट प्रोडक्ट बोलते समय
- 28:42मुझे बहुत प्रॉब्लम हो रही है। मतलब बोला
- 28:45ही नहीं जा रहा है। यह प्रोडक्ट वर्ल्ड
- 28:47बार-बार बोलता है सर मुझे बहुत ज्यादा
- 28:49टाइम लेना पड़ रहा है। सो एलिमेंट्स अगर
- 28:51हम एलिमेंट्स ऑफ़ क्यूडी की बात करें तो
- 28:53क्यूडी के भी हमारे कुछ एलिमेंट्स होते
- 28:54हैं जिनका हमें जो है कह सकते हो जिन पे
- 28:56हमें फोकस करना होता है। तो इसमें हमारा आ
- 28:57जाता है क्यूटीपीपी सी क्यू सी क्यू
- 29:00एएपीएस। तो ये सारी चीजें क्या है? हम लोग
- 29:02इनको एक-एक करके देखते हैं। क्यूटीपीपी का
- 29:04मतलब होता है क्वालिटी टारगेट प्रोडक्ट
- 29:07प्रोफाइल। तो यहां पे देखो क्या होता है।
- 29:10यहां पे हमारा होता है कि जो भी हमारा
- 29:13टारगेट प्रोडक्ट है। ठीक है? उसको हमें
- 29:15कैसे यूज़ करना है? उसका यूज़ क्या है? उसकी
- 29:18सेफ्टी, एफिसी एंड क्वालिटी। ठीक है? उन
- 29:20सभी को हमें पहले से ही डिस्क्राइब करना
- 29:22होता है। जैसे कि एग्जांपल की बात करें जो
- 29:23टैबलेट है उसकी स्ट्रेंथ क्या है?
- 29:24डिसोल्यूशन रेट क्या है? स्टेबिलिटी क्या
- 29:26है? तो ये सारी चीज़ों को हमारा टारगेट
- 29:28करना हमारा क्यूटीबीपी के अंदर आ जाता है।
- 29:30उसके बाद हमारा आता है क्रिटिकल क्वालिटी
- 29:31एट्रिब्यूट्स। देखो क्रिटिकल क्वालिटी
- 29:33मतलब क्या है? कि हमारी कौन-कौन सी ऐसी
- 29:36चीजें हैं जो कि क्वालिटी के लिए बहुत
- 29:37ज्यादा जरूरी हैं। बहुत ज्यादा क्रिटिकल
- 29:39है। क्रिटिकल मतलब क्या? जरूरी। ठीक है?
- 29:41तो फिजिकल, केमिकल, बायोलॉजिकल और
- 29:43माइक्रोबायोलॉजिकल प्रॉपर्टीज दैट मस्ट बी
- 29:45विद इन लिमिट्स फॉर प्रोडक्ट क्वालिटी। तो
- 29:47कौन-कौन सी प्रॉपर्टीज हैं? ठीक है? जिनको
- 29:50हमें बहुत जरूरी है कि हम लोग उसको एक
- 29:52लिमिट के अंदर ही रखें। मतलब एक
- 29:54प्रीडफाइंड लिमिट हमारे पास ऑलरेडी होती
- 29:56है। उसी के अंदर हमें इन सारी चीजों को
- 29:58मेंटेन करना होता है। ऐसे की बात जैसे
- 30:00एग्जांपल की बात करें तो हमारा जो हमारा
- 30:02जो भी प्रोडक्ट है, ठीक है? उसका ऐसे मतलब
- 30:05उसको हम लोग जब टेस्ट कर रहे हैं, वेरीफाई
- 30:06कर रहे हैं तो हमें कैसे करना है। ठीक है?
- 30:08और उसको कौन ऐसे करते समय कौन-कौन सी
- 30:10चीजें हमारी ऊपर नीचे आ रही हैं। उसके बाद
- 30:12कंटेंट हमारा यूनिफॉर्म है कि नहीं है?
- 30:14हार्डनेस कैसी है? अगर टैबलेट है वो कितनी
- 30:16देर में डिसइीग्रेट हो रही है? तो ये सारी
- 30:18चीजें हमारी ध्यान रखनी है हमें कि लिमिट
- 30:19के अंदर ही हो। रिस्क असेसमेंट की बात
- 30:21करें तो इसमें हम लोग क्या करते हैं? पहले
- 30:22से ही जो भी रिस्क है उसका पता लगा लेते
- 30:24हैं। भाई क्वालिटी रिस्क मैनेजमेंट हम
- 30:26लोगों ने देखा हुआ है। तो उसमें हमने देखा
- 30:27हुआ था इस चीज को। अब इसमें हमारे कुछ
- 30:29टूल्स होते हैं एफएमए। तो इसको हमने
- 30:31डिस्कस किया हुआ है क्यूआरएम में। आई होप
- 30:33आपने पढ़ा होगा। नेक्स्ट हम लोग यहां पे
- 30:35बात करें अपने डिजाइन स्पेस के बारे में।
- 30:36देखो डिजाइन स्पेस क्या होता है? जैसे मान
- 30:39लो कोई दवा हम लोग बना रहे हैं तो उस दवा
- 30:42को बनाने बनाते समय हमें कितना टेंपरेचर
- 30:44रखना है वो एक फिक्स होता है। जैसे मान लो
- 30:46कोई हमारा मान लो कोई टेंपरेचर सेंसिटिव
- 30:49ड्रग है तो उसके लिए टेंपरेचर हम लोग
- 30:50थोड़ा सा कम रखेंगे। मान लो कोई हमारा
- 30:52नहीं है और हमें टेंपरेचर बढ़ाने की जरूरत
- 30:54है तो हम लोग टेंपरेचर थोड़ा सा बढ़ा के
- 30:56रखेंगे। मान लो कोई कोई भी हमारी दवा है
- 30:59उसको हम लोग मिक्स कर रहे हैं तो एक
- 31:00मिक्सिंग स्पीड भी होती है कि हम लोग यहां
- 31:02पे उसको कितने आरपीएम पे मिक्स कर रहे
- 31:04हैं। तो वो सारी चीजें यहां पे फिक्स होती
- 31:06हैं। ठीक है? किसी पर्टिकुलर दवा के लिए।
- 31:09तो जो हमारी एक फिक्स और प्रीडफाइंड रेंज
- 31:11है। ठीक है? जब उसी रेंज के अंदर हम लोग
- 31:13दवा को तैयार करते हैं। तो उसी को बोलते
- 31:15हैं हम लोग यहां पे डिज़ाइन स्पेस। डिज़ाइन
- 31:17स्पेस क्या है? मतलब कि कह सकते हो एक
- 31:19मल्टीडाइमेंशनल कॉम्बिनेशन होता है हमारे
- 31:21वेरिएबल्स का इनपुट मतलब जैसे कि हमारा
- 31:24फॉर्मूलेशन एंड प्रोसेस पैरामीटर्स का कि
- 31:26हमें जो फॉर्मुलेशन है ठीक है वो कितने
- 31:28पीएच पे तैयार करनी है क्या टेंपरेचर
- 31:30हमारा होना होना चाहिए जो है तैयार करते
- 31:32समय तो वो सारी चीजों का जो एक फिक्स्ड
- 31:34पैरामीटर होता है वो हमारा होता है डिजाइन
- 31:36स्पेस कि अगर हम लोग यहां पे इन सारे
- 31:38फिक्स्ड पैरामीटर्स के अंदर अपनी दवा को
- 31:39बनाएंगे तो हमारी दवा जो है अच्छे से
- 31:41तैयार होगी उसकी क्वालिटी यहां पे बरकरार
- 31:43रहेगी तो ये हो जाता है डिजाइन स्पेस मतलब
- 31:45कोई स्पेस नहीं है ऐसे समझो कोई जगह नहीं
- 31:47है डिजाइन स्पेस बल्कि एक फिक्स्ड
- 31:50पैराटर्स की रेंज होती है। एक रेंज होती
- 31:52है जो कि हमारी प्री डिटरमाइन होती है।
- 31:54उसी को हम लोग बोलते हैं डिज़ स्पेस।
- 31:55कंट्रोल स्ट्रेटजी की बात करें तो वही चीज़
- 31:57है कि हमारा जो डिज़ाइन स्पेस है, ठीक है?
- 31:59उसके अंदर जो भी हमारे पैराटर्स हैं उनको
- 32:01किस तरीके से कंट्रोल करना है, कैसे
- 32:02मॉनिटर करना है? तो वो हमारा हो गया
- 32:04कंट्रोल स्ट्रेटजी। जैसे कि हमारा रॉ
- 32:06मटेरियल की टेस्टिंग हो गया। एंड प्रोसेस
- 32:07कंट्रोल एंड प्रोडक्ट टेस्टिंग हो गया।
- 32:09उसके बाद प्रोसेस एनालिटिकल टेक्नोलॉजी।
- 32:11अब देखो ये भी क्या है? ये हमारा एक टूल
- 32:14है। ठीक है? कि मतलब ये क्या करता है? ये
- 32:16हमारे प्रोसेस को एनालाइज करता है जब वहां
- 32:18पे वो चल रही होती है। मतलब कि जो हमारा
- 32:21प्रोडक्ट है ठीक है उसको यहां पे कह सकते
- 32:22हो बीच के प्रोसेस में ही एनालाइज करता
- 32:24रहता है कि वहां पे उसकी क्वालिटी मेंटेन
- 32:26हो रही है। वर्किंग विद इन दिस स्पेस इट
- 32:28इज़ नॉट कंसीडर्ड अ चेंज बाय रेगुलेटरी
- 32:30एजेंसीज। अब इस लाइन को थोड़ा ध्यान से
- 32:33समझना। जैसे देखो ये टूल क्या करता है? जो
- 32:36हमारा प्रोडक्ट है। ठीक है? जब वो बन ही
- 32:38रहा होता है, जब वो मैन्युफैक्चर हो रहा
- 32:40होता है, उसी के बीच में उसको यहां पे
- 32:41क्या करता है? टेस्ट करता है। अब मान लो
- 32:43टेस्ट करते समय इसको लग रहा है कि कुछ
- 32:46यहां पे गड़बड़ है। जैसे मान लो टेस्ट करते
- 32:48समय इसको लग रहा है कि टेंपरेचर अगर 70°
- 32:50होना चाहिए। तो मान लो वो यहां पे ऑलरे
- 32:52मान लो वहां पे उसको लग रहा है कि
- 32:53टेंपरेचर 90° है। तो भाई ये क्या करेगा
- 32:55भाई इस 90° को कम करके 70 या फिर 80 पे
- 32:58लाने की कोशिश करेगा। तो यहां पे इसने
- 33:00क्या किया? यहां पे इसने बेसिकली टेंपरेचर
- 33:02को चेंज किया। अब यहां पे होता क्या है कि
- 33:04अगर नॉर्मली यहां पे हम लोग कोई भी चेंज
- 33:06करते हैं प्रोसीजर में मैन्युफैक्चरिंग
- 33:09में तो उसको हमें उसके लिए हमें अप्रूवल
- 33:11लेना पड़ता है रेगुलेटरी एजेंसीज से लेकिन
- 33:13जो हमारा प्रोसेस एनालिटिकल टेक्नोलॉजी
- 33:16होता है इसमें हम लोग क्या कर रहे हैं
- 33:17इसमें हम लोग ऐसा नहीं है कि हम लोग जो है
- 33:19पहले से ही चेंज कर रहे हैं बल्कि हम लोग
- 33:21बीच प्रोसेस में चेक करते हैं और बीच
- 33:23प्रोसेस में अगर कोई प्रॉब्लम हुई है तब
- 33:25हम लोग यहां पे उसको जेस करते हैं। तो इस
- 33:27चेंज से क्या होता है? इस चेंज से हमारा
- 33:29कोई भी मतलब कह सकते हो इस चेंज इस चेंज
- 33:31के लिए हमें कोई भी रेगुलेटरी अप्रूवल
- 33:32लेने की जरूरत नहीं पड़ती है। और ये हमारा
- 33:35एक रियल टाइम मॉनिटरिंग करता है। है ना?
- 33:36कि जब हमारा प्रोडक्ट यहां पे बन ही रहा
- 33:39होता है उसी टाइम उसको मॉनिटरिंग करता है।
- 33:40और प्रोडक्ट की क्वालिटी को यहां पे
- 33:42एनश्योर करता है और यहां पे विदाउट
- 33:44स्टॉपिंग द प्रोसेस। तो यहां पे बिना
- 33:46प्रोसेस को स्टॉप किए ये क्या करता है?
- 33:47बीच के प्रोसेस में ही अगर इसको कुछ लगता
- 33:49है कि कोई गड़बड़ है तो उसको यहां पे वो
- 33:51सही कर देता है। तो ये हमारा हो जाता है
- 33:53प्रोसेस एनालिटिकल टेक्नोलॉजी। और फिर
- 33:55हमारा कंटीन्यूअस इंप्रूवमेंट तो भाई वही
- 33:57चीज है कि हमारे हमें कंटिन्यू
- 33:58इंप्रूवमेंट मेंटेन करके रखना है। अब अगर
- 34:01हम लोग यहां पे देखें तो देखो अगर इन सारे
- 34:02एलिमेंट्स को हम लोग यहां पे अप्लाई एक
- 34:04साथ देखें कि कैसे हमें अप्लाई करना है।
- 34:06तो सबसे पहले हमें अपने क्वालिटी टारगेट
- 34:10प्रोडक्ट प्रोफाइल को हमें जो है कह सकते
- 34:11हो डिफाइन करना है कि हमें किस चीज किस
- 34:14चीज को हमें टारगेट करना है क्वालिटी के
- 34:15लिए। ठीक है? उसके बाद हमें यहां पे जो
- 34:17हमारे क्रिटिकल क्वालिटी एट्रिब्यूट्स हैं
- 34:19उनको आइडेंटिफाई करना है कि कौन-कौन से
- 34:20जरूरी एट्रिब्यूट्स हैं जिनको हमें चेक
- 34:22करना है। उसके बाद रिस्क असेसमेंट हमें
- 34:24परफॉर्म करना है। ठीक है? हमें देखना है
- 34:25कि किस चीज से रिस्क हो सकता है। उसके बाद
- 34:27हमें डिज़ाइन करना है और हमारा
- 34:28एक्सपेरिमेंट्स को कांटेक्ट करना है। उसके
- 34:30बाद हमें एक डिज़ाइन स्पेस को एस्टैब्लिश
- 34:32करना है। डिज़ाइन स्पेस मतलब हमें एक फिक्स
- 34:34रेंज को एस्टैब्लिश करना है। उसके बाद
- 34:35कंट्रोल स्ट्रेटजी को डेवलप करना है और
- 34:37कंटीन्यूअस इंप्रूवमेंट को हमें वैलिडेट
- 34:39और इंप्लीमेंट करना है। अब अगर हम लोग
- 34:41बेनिफिट्स की बात करें तो हमारे बेनिफिट्स
- 34:43क्या हो जाते हैं? जब हम लोग क्यूबडी को
- 34:45फॉलो करते हैं तो हमारी प्रोडक्ट की
- 34:46क्वालिटी यहां पे कंसिस्टेंट रहती है।
- 34:48प्रोसेस की अंडरस्टैंडिंग यहां पे इंप्रूव
- 34:50होती है। ठीक है? बैच फेलियर्स यहां पे कम
- 34:52होते हैं। क्योंकि भाई जब हमारा प्रोडक्ट
- 34:53अच्छा रहेगा तो हम लोग हमारा बैच क्यों
- 34:55फेल होगा? देखो बैच कभी-कभी फेल हो जाता
- 34:57है। अगर हमारा जो फाइनल प्रोडक्ट है हम
- 34:59लोग अगर उसकी क्वालिटी टेस्ट कर रहे हैं
- 35:01और अगर वो सही नहीं आती है। ठीक है? तो
- 35:02पूरा पूरा बैच कभी-कभी रिजेक्ट हो जाता
- 35:04है। तो वो नहीं होगा क्योंकि हमारा
- 35:06प्रोडक्ट हमारी क्वालिटी हम लोग पहले से
- 35:07ही टेस्ट कर रहे हैं। उसके बाद रेगुलेटरी
- 35:09फ्लेक्सिबिलिटी को भी प्रोवाइड करता है
- 35:11क्योंकि हमारा क्या होगा भाई? हमारा
- 35:12प्रोडक्ट अच्छा होगा तुम्हारी रेगुलेटरी
- 35:14अप्रूवल भी अच्छे से देखने को मिलेंगे।
- 35:15ठीक है? बहुत ईज़ली मिल जाएंगे। कॉस्ट
- 35:17बचेगा, डेवलपमेंट टाइम हमारा सेव होगा।
- 35:19इफेक्टिव रिस्क मैनेजमेंट हमारा इनेबल हो
- 35:21जाएगा। कंटीन्यूअस इंप्रूवमेंट सपोर्ट
- 35:22होगा और पेशेंट की सेफ्टी बढ़ेगी,
- 35:24रिलायबिलिटी बढ़ेगी। ठीक है? क्योंकि हमारा
- 35:26प्रोडक्ट अच्छी क्वालिटी का होगा। देखो
- 35:28सिंपल सी चीज़ है। सिंपली समझो ये सारी
- 35:31चीजें हमारी क्वालिटी से ही रिलेटेड है।
- 35:32हर बार हमें क्वालिटी को ही पढ़ना है। ठीक
- 35:34है? तो ये हमारा हो जाता है क्यूबीडी और
- 35:36अब हम लोग यहां पे बात करते हैं बहुत बहुत
- 35:38बहुत इंपॉर्टेंट टॉपिक के बारे में जो कि
- 35:40हमारा हो जाता है सिक्स सिग्मा कांसेप्ट।
- 35:42तो देखो बात करें हम लोग यहां पे सिक्स
- 35:44सिग्मा कांसेप्ट के बारे में तो देखो यहां
- 35:47पे हम लोग इसको किसके अंदर पढ़ रहे हैं?
- 35:49क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम के अंदर। यानी
- 35:51ये भी हमारा कुछ क्वालिटी से रिलेटेड ही
- 35:53होगा। तो हां यहां पे देखो ये हमारा एक
- 35:56ऐसा एप्रोच होता है। इसके अंदर हमारी ऐसे
- 35:58चीजें होती हैं जिनको अगर हम लोग यहां पे
- 36:01फॉलो करें तो जो हमारा प्रोडक्ट है उसमें
- 36:04डिफेक्ट के चांसेस बिल्कुल ना के बराबर हो
- 36:06जाते हैं। देखो इसका नाम सिक्स सिग्मा
- 36:08क्यों है वो सारी चीजें हम लोग देखेंगे।
- 36:10बट इतना आप लोग समझो कि ये हमारा एक ऐसा
- 36:12एप्रोच होता है कि अगर हम लोग इस एप्रोच
- 36:15को फॉलो करें। इसके अंदर जो भी चीजें हैं
- 36:17अगर हम लोग उसको फॉलो करें। मतलब कह सकते
- 36:18हो इसके अंदर कुछ रूल्स एंड रेगुलेशंस
- 36:20यहां पे मेंशन होते हैं। तो अगर हम उनको
- 36:22फॉलो करें तो हमारा जो प्रोडक्ट बनेगा
- 36:25उसमें डिफेक्ट के चांस बिल्कुल ना के
- 36:27बराबर हो जाते हैं। ये हमारा एक साइंटिफिक
- 36:30और डाटा ड्रिवन क्वालिटी मैनेजमेंट एप्रोच
- 36:31होता है। जिसका यूज़ हम लोग जो है
- 36:33मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस को इंप्रूव करने
- 36:35के लिए वेरिएशन को रिड्यूस करने के लिए और
- 36:37कंसिस्टेंट यानी प्रोडक्ट की क्वालिटी
- 36:39यहां पे कंसिस्टेंट बनी रहे। हर बार हमें
- 36:41सेम क्वालिटी का प्रोडक्ट हमें देखने को
- 36:43मिले। ये सारी चीजें हमारी हो जाती हैं।
- 36:45अगर सिक्स सिग्मा कासेप्ट को यहां पे
- 36:47अप्लाई किया जाता है। इट एम्स टू मेक द
- 36:49प्रोसेस ऑलमोस्ट एरर फ्री एंड अचीव हाई
- 36:51एफिशिएंसी इन फार्मासटिकल प्रोडक्शन। और
- 36:53इसका मेन फोकस यही होता है कि जो प्रोडक्ट
- 36:56है, ठीक है? उसमें एरर या फिर डिफेक्ट के
- 36:58चांसेस बिल्कुल ना के बराबर हो जाए। अब
- 37:00अगर हम लोग थोड़ा सा देखें कि इसकी
- 37:01हिस्ट्री क्या है? मतलब हिस्ट्री क्या है?
- 37:03कैसे यहां पे सिक्स सिग्मा देखने को मिला?
- 37:05तो सबसे पहली बात सबसे पहली बार इस इस
- 37:07सिक्स सिग्मा को है हमारा Motorola। जी
- 37:09हां वही Motorola जो हमारे आजकल मोबाइल
- 37:12में देखने को मिलता है। ठीक है? तो इसी
- 37:14Moto कंपनी ने यहां पे सबसे पहले इसको
- 37:15इन्वेंट किया था। इस Moto में 1986 में
- 37:18यहां पे बिल स्मिथ थे जिन्होंने इसको पहली
- 37:20बार इंट्रोड्यूस किया था। और बाकी यहां पे
- 37:23इन्होंने क्या किया था? मतलब जब इन्होंने
- 37:24यहां पे अपनी कंपनी में सिक्स सिग्मा को
- 37:26फॉलो किया। तो यहां पे अपनी क्वालिटी को
- 37:28इन्होंने इंप्रूव किया बाय रिड्यूसिंग
- 37:29मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट्स एंड प्रोसेस
- 37:31वैलिडेशन। और उसके बाद यहां पे ये ये जो
- 37:34सिक्स सिग्मा कॉन्सेप्ट है ये और फेमस कब
- 37:35हुआ? जो जनरल इलेक्ट्रिक हमारी कंपनी थी।
- 37:38ठीक है? मतलब तो उसके जो सीईओ हैं जैक
- 37:40वेल्स तो उन्होंने यहां पे इसको अपनी
- 37:42कंपनी में अप्लाई किया 1995 में जिसकी वजह
- 37:45से ये और ज्यादा वाइड स्प्रेड हुआ और 2000
- 37:48तक आते-आते ये ग्लोबल स्टैंडर्ड बन गया।
- 37:50मतलब फिर इसके अंदर जो भी चीजें मेंशन थी
- 37:52उसको यहां पे ग्लोबल स्टैंडर्ड मान लिया
- 37:54गया कि अगर इसको फॉलो करे कोई भी कंपनी तो
- 37:56उसके कंपनी में डिफेक्ट के चांस बिल्कुल
- 37:58ना के बराबर हो जाते हैं। सिक्स सिग्मा इज़
- 38:00अ डाटा ड्रिवन प्रोसेस इंप्लीमेंटेशन मेथड
- 38:03दैट यूज स्टैटिस्टिकल टूल। तो यहां पे
- 38:05हमारे कह सकते हो कुछ स्टैटिस्टिकल टूल्स
- 38:07होते हैं। देखो स्टैटिस्टिक्स क्या होता
- 38:09है? हमारा मैथ से रिलेटेड एक ब्रांच है।
- 38:11तो वहां पे एक मैथमेटिकल ऑलरेडी हमारे कह
- 38:14सकते हो प्रीडिफाइंड टूल्स होते हैं। ठीक
- 38:16है? एक फिक्स एप्रोचेस होती हैं। तो उनको
- 38:19अगर यहां पे फॉलो किया जाए तो वहां पे
- 38:21क्या होता है? फिर यहां पे टारगेट ऑफ नो
- 38:23मोर देन 3.4 इफेक्ट्स पर मिलियन यानी कि
- 38:2610 लाख 10 लाख अगर प्रोडक्ट आप लोग के
- 38:30तैयार हो रहे हैं। ठीक है? फिर कंपनी के
- 38:32तो उसमें मैक्सिमम तीन से चार प्रोडक्ट ही
- 38:36खराब होंगे। ठीक है? यानी वैसे तो 3.4 है
- 38:38बट 3.4 का मतलब यहां पे मान लो कि या तो
- 38:41तीन या तो चार। ठीक है? मतलब एक तीन से
- 38:43चार के बीच में ही प्रोडक्ट खराब होंगे।
- 38:45बाकी सारे बिल्कुल सही होंगे। तो यहां पे
- 38:48ये हमारा हो जाता है सिक्स सिग्मा
- 38:49कॉन्सेप्ट। अब अगर हम लोग यहां पे बात
- 38:51करें इसके प्रिंसिपल के बारे में। तो इसका
- 38:53प्रिंसिपल क्या होता है कि भाई सबसे इसके
- 38:55भी हमारे कुछ बेसिक प्रिंसिपल होते हैं।
- 38:56जैसे कि हमारा सबसे पहला आता है कस्टमर
- 38:58सेंट्रिक इंप्रूवमेंट। तो भाई सिक्स
- 39:01सिग्मा का भी हमारा फोकस होता है। भाई
- 39:02पूरे क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम का ही
- 39:04हमारा फोकस क्या है कि कस्टमर की नीड को
- 39:06मीट किया जाए। एनश्योर किया जाए प्रोडक्ट
- 39:09की क्वालिटी को और सेटिस्फाई किया जाए
- 39:10हमारे एंड यूजर को। देखो कस्टमर बहुत से
- 39:14हो सकते हैं। जैसे एक इंडस्ट्री के लिए
- 39:16कस्टमर कौन है? एक इंडस्ट्री के लिए
- 39:18कस्टमर वो भी है जो यहां पे मेडिकल शॉप
- 39:21में दवा को ले रहा है। और कस्टमर वो भी है
- 39:23जो मेडिकल से दवा को ले रहा है। आप समझ
- 39:25रहे हो? जैसे मेडिकल वाला भी तो इंडस्ट्री
- 39:28के लिए कस्टमर ही है। लेकिन एंड यूजर कौन
- 39:30है? एंड यूजर वो है। एंड यूजर है हमारा
- 39:32पेशेंट। ठीक है? तो एंड यूजर हमारा
- 39:34सेटिस्फाई होना चाहिए दवा से। क्योंकि दवा
- 39:36का यूज़ एंड यूजर करेगा। भाई इंडस्ट्री से
- 39:39दवा हमारा होलसेल वाले भी लेते हैं।
- 39:42होलसेल से दवा हमारे रिटेल सेल वाले
- 39:44लेंगे। तो वो भी तो कस्टमर हुए। लेकिन
- 39:46उनको दवा यूज़ नहीं करनी है। वो यहां पे
- 39:48बिज़नेस करने के लिए ले रहे हैं। एंड यूजर
- 39:50कौन है? एंड यूजर हमारा पेशेंट है। तो
- 39:52पेशेंट को दवा सेटिस्फाई करनी चाहिए।
- 39:54कंटीन्यूअस प्रोसेस इंप्रूवमेंट की बात
- 39:56करें तो यहां पे क्या होता है देखो
- 39:57कंटीन्यूअस प्रोसेस इंप्रूवमेंट का मतलब
- 39:59भी वही चीज रहती है कि हमारा जो प्रोसेस
- 40:02है ठीक है उसमें कंटिन्यू इंप्रूवमेंट
- 40:04हमें देखने को मिले वेरिएशन मतलब देखो
- 40:06चेंजेस यहां पे कम से कम होने चाहिए है ना
- 40:08बार-बार ये नहीं कि हम लोग यहां पे
- 40:09प्रोसेस में चेंजेस करते जा रहे हैं और
- 40:12इसकी वजह से एक कंसिस्टेंट ऑफ प्रोडक्टेबल
- 40:14प्रोडक्ट क्वालिटी हमें देखने को मिलती
- 40:16है। अ एलिमिनेटिंग वेस्ट तो वही चीज है कि
- 40:19अगर अगर कोई अननेसेसरी स्टेप है। ठीक है?
- 40:22अननेसेसरी मटेरियल है या फिर किसी चीज में
- 40:24अननेसेसरी टाइम लग रहा है जो कि वैल्यू को
- 40:27ऐड नहीं कर रहा है तो उसको हमें रिमूव कर
- 40:29देना है। एमावरिंग एंप्लाइजज़ तो यहां पे
- 40:32टीम वर्क को इनकरेज करता है जिसकी वजह से
- 40:34सभी एंप्लई यहां पे प्रॉब्लम सॉल्विंग में
- 40:36अपना रोल प्ले करते हैं और क्वालिटी
- 40:38इंप्रूव होती है। और कंट्रोलिंग द
- 40:41प्रोसेस। तो यहां पे डाटा और कंट्रोल
- 40:43मेथड्स को यूज करके हम लोग जो है एक
- 40:45स्टेबल और एफिसेंट ऑपरेशन को इन्वॉल्व
- 40:47करते हैं। अब अगर हम लोग देखें कि इसको
- 40:49सिक्स सिग्मा क्यों बोलते हैं? देखो यहां
- 40:51पे सिग्मा के कुछ लेवल्स डिफाइन किए गए
- 40:53हैं। ठीक है? हमारा 1 2 3 4 5 6 तो सिक्स
- 40:57सिग्मा तब बोला जाएगा जब यहां पे देखो
- 40:59सिक्स सिग्मा का मतलब क्या होता है कि 10
- 41:01मिलियन में ठीक है? 10 मिलियन में सिर्फ
- 41:033.4 डिफेक्ट होंगे। तो अगर हमारा सिक्स
- 41:06सिग्मा को पूरी तरीके से अप्लाई कर लिया
- 41:08गया। तो यहां पे जो डिफेक्ट है वो 3.4 हो
- 41:11जाएगा पर 10 मिलियन के अंदर। लेकिन अगर
- 41:14यहां पे मान लो थोड़ा सा कम है। मान लो
- 41:15सिक्स सिग्मा उतना अच्छे से नहीं फॉलो
- 41:17हुआ। तो यहां पे सिग्मा के लेवल्स भी हैं।
- 41:19जैसे अगर किसी कंपनी ने मान लो फाइव
- 41:21सिग्मा को फॉलो कर रही है तो उसका जो
- 41:23यील्ड होगा यील्ड क्या है? यील्ड मतलब कि
- 41:25प्रोडक्ट। ठीक है? तो उसका आउटपुट कितना
- 41:27अच्छा होगा? तो यहां पे देखो अगर सिक्स
- 41:29सिग्मा है तो यील्ड होगा 99.99%
- 41:32क्योंकि भाई 10 लाख में सिर्फ 3.4
- 41:35प्रोडक्ट उसके खराब हो रहे हैं। बाकी सारे
- 41:37सही है। अब अगर फाइव सिग्मा लेवल है कंपनी
- 41:39का तो उसके मान लो 10 लाख में 233 खराब
- 41:42होंगे। अगर फोर सिग्मा लेवल है तो 10 लाख
- 41:44में लगभग 6210 प्रोडक्ट जो है खराब देखने
- 41:48को मिलेंगे। अगर थ्री सिग्मा लेवल है
- 41:50कंपनी का तो हमारा लगभग 6687
- 41:54प्रोडक्ट यहां पे कंपनी के खराब देखने को
- 41:56मिलेंगे। और अगर यहां पे टू सिग्मा लेवल
- 41:58है तो ये ले बढ़ जाएगा यहां पे 3 लाख जो है
- 42:028338
- 42:04प्रोडक्ट से यानी कि 10 लाख में 3 लाख से
- 42:06ज्यादा प्रोडक्ट यहां पे कंपनी के खराब हो
- 42:09जाएंगे और अगर किसी कंपनी का लेवल सिग्मा
- 42:11जो है एक ही है तो भाई 10 लाख में से 6
- 42:14लाख से ज्यादा यानी लगभग 7 लाख प्रोडक्ट
- 42:16उसके खराब ही हो जाएंगे तो भाई उसकी यील्ड
- 42:18कितनी होगी जब 7 लाख खराब हो गए तो उसका
- 42:20बचा कितना भाई 3 ही लाख तो बचा तो 10 में
- 42:22से 3 लाख कितना 30% यानी फिर उसको जो है
- 42:25यील्ड सिर्फ 30% की देखने देखने को मिली
- 42:26तो यहां पे तो कंपनी घाटे में ही चली
- 42:28जाएगी। तो एटलीस्ट एट लीस्ट जो है थ्री
- 42:31सिग्मा लेवल तक तो मेंटेन करना ही चाहिए
- 42:32हर कंपनी को। बाकी जो एक कंपनी का फोकस
- 42:35होता है वो होता है सिक्स सिग्मा का। तो
- 42:36ये हो जाता है सिक्स सिग्मा कॉनंसेप्ट। और
- 42:39बाकी अगर हम लोग यहां पे बात करें कि
- 42:41सिक्स सिग्मा को किस तरीके से यहां पे
- 42:42अप्लाई किया जाता है? तो भाई देखो अप्लाई
- 42:44करने के इसके दो एप्रोचेस होते हैं। एक
- 42:46होता है डीमैक एप्रोच एक होता है डीममेट।
- 42:49देखो वैसे तो डीएमएआईसी बोलेंगे। ठीक है?
- 42:51क्योंकि इसका फुल फॉर्म होगा। तो एक होता
- 42:53है डीएमए आईसी एप्रोच एक होता है डीएमए
- 42:56डीबी एप्रोच। अब ऐसे समझो दोनों ही
- 42:57अलग-अलग चीज के लिए होते हैं। जैसे डीएमए
- 42:59आईसी एप्रोच तब फॉलो करी जाती है जब यहां
- 43:02पे कोई एग्जिस्टिंग प्रोडक्ट बन रहा है।
- 43:04जैसे मान लो कोई प्रोडक्ट ऑलरेडी बन रहा
- 43:06है और उसमें कोई प्रॉब्लम है तो उस
- 43:08प्रॉब्लम को एड्रेस करने के लिए उसको
- 43:10इंप्रूव करने के लिए हम लोग इस एप्रोच को
- 43:12फॉलो करेंगे। और अगर जो प्रॉब्लम है ठीक
- 43:14है? वो यहां पे मतलब जो प्रोडक्ट है ठीक
- 43:17है? वो नया है। हम लोग कोई नया प्रोडक्ट
- 43:20यहां पे बनाने जा रहे हैं और हमें इंश्योर
- 43:22करना है कि उसकी क्वालिटी यहां पे मेंटेन
- 43:23हो। तब हम लोग यहां पे इस दूसरे वाले
- 43:25एप्रोच को फॉलो करते हैं। तो सबसे पहले
- 43:27हमने पहली वाली को देखते हैं। तो ये हो
- 43:29जाता है डीएमएआईसी। तो डीएमएआईसी का मतलब
- 43:31होता है डिफाइन एनालाइज मेजर इंप्रूव
- 43:34कंट्रोल। देखो हर एक लाइन से स्टेप है।
- 43:36सबसे पहले प्रॉब्लम को डिफाइन करेंगे। फिर
- 43:38उसको एनालाइज करेंगे। फिर मेजर करेंगे।
- 43:40फिर प्रॉब्लम को इंप्रूव करेंगे। फिर
- 43:42कंट्रोल करेंगे। तो ये सारी चीजें हम लोग
- 43:44कब करेंगे? जब हमारा एक एग्जिस्टिंग
- 43:46प्रोसेस होगी। यानी कि कोई प्रोडक्ट है।
- 43:48ठीक है? उसके लिए हमारे पास एक एकिस्टिंग
- 43:50प्रोसेस है। और उसमें अगर कोई इंप्रूवमेंट
- 43:51चाहिए, ऑप्टिमाइजेशन चाहिए, तब हम लोग इस
- 43:53एप्रोच का यूज़ करते हैं। तो इसमें हमारे
- 43:55फॉलोइंग फेजेस होते हैं। सबसे पहले देखते
- 43:57हैं। सबसे पहला आता है डिफाइन। तो डिफाइन
- 43:59मतलब कि प्रॉब्लम को आईडेंटिफाई करना। ठीक
- 44:01है? अ जो हमारा प्रोजेक्ट का गोल है, ठीक
- 44:04है? कस्टमर की रिक्वायरमेंट है। तो इन
- 44:06सारी चीजों को सबसे पहले आईडेंटिफाई कर
- 44:07दें कि भाई, कस्टमर की क्या रिक्वायरमेंट
- 44:09है? और प्रॉब्लम क्या है? और उसके बाद
- 44:11यहां पे हमारा जो प्रोजेक्ट है, ठीक है?
- 44:13तो कितनी प्रॉब्लम है, कितनी बड़ी प्रॉब्लम
- 44:15है? तो कितना बड़ा कह सकते हो जितनी बड़ी
- 44:17प्रॉब्लम उतना बड़ा हमें प्रोजेक्ट तैयार
- 44:18करना पड़ेगा। तो उसका स्कोप क्या है?
- 44:19ऑब्जेक्टिव क्या है? तो ये सारी चीजें
- 44:20हमारे डिफाइन में आ जाती हैं। फिर हमारा
- 44:22आता है मेजर। तो मेजर में हम लोग क्या
- 44:24करेंगे? कलेक्ट डाटा ऑन करंट प्रोसेस
- 44:26परफॉर्मेंस। तो यहां पे हम लोग देखेंगे कि
- 44:28जो हमारी करंट प्रोसेस है। ठीक है? तो
- 44:29उसका क्या डाटा है। ठीक है? कि वो कितनी
- 44:31खराब है। उसकी वजह से हमारा डिफेक्ट कितना
- 44:33आ रहा है। जैसे अभी मान लो हम लोग यहां पे
- 44:35देखेंगे कि 10 लाख में से कितने प्रोडक्ट
- 44:37हमारे खराब देखने को मिल रहे हैं इस
- 44:39प्रोसेस की वजह से। और इस प्रोसेस में
- 44:41कौन-कौन से की परफॉर्मेंस इंडिकेटर हैं
- 44:43जिनकी वजह से यहां पे चीजें बहुत अच्छी
- 44:45हैं या फिर बहुत ही खराब हैं। तो इन सभी
- 44:47चीजों को हम लोग मेजर करेंगे। फिर हम लोग
- 44:49एनालाइज एनालाइज में हम लोग क्या करेंगे?
- 44:50एनालाइज में हम लोग देखेंगे कि भाई क्या
- 44:52है? उसका रूट कॉज क्या है? ठीक है? और रूट
- 44:54कॉज अगर है तो हम लोग यहां पे कुछ
- 44:56स्टैटिस्टिक्स टूल्स का यूज करेंगे ताकि
- 44:58हम लोग कॉज इफेक्ट रिलेशनशिप को डिटरमाइन
- 45:00कर सकें। किस चीज की वजह से क्या इफेक्ट
- 45:02देखने को मिल रहा है। ठीक है? तो ये हम
- 45:04लोग एनालाइज करेंगे। और एनालाइज करने के
- 45:06बाद हम लोग इंप्रूव करेंगे। इंप्रूव करने
- 45:07के लिए क्या करेंगे? हम लोग जो है
- 45:08सॉल्यूशन को डेवलप करेंगे। भाई सॉल्यूशन
- 45:10हम लोग बनाएंगे। ठीक है? सॉल्यूशन मतलब कि
- 45:13वो सॉल्यूशन सिरप वाला नहीं बल्कि
- 45:15सॉल्यूशन मतलब कि समाधान। तो हम लोग यहां
- 45:17पे डेवलप करेंगे सॉल्यूशन को उसको टेस्ट
- 45:20करेंगे। उसको यहां पे अप्लाई करेंगे। ठीक
- 45:22है? और देखेंगे कि क्या वो एलिमिनेट कर पा
- 45:24रहा है जो भी प्रॉब्लम है उसको और अगर अगर
- 45:27कर पा रहा है तो हम लोग यहां पे रूट
- 45:28प्रोसेस चेंजेस में इंप्लीमेंट कर देंगे।
- 45:30ठीक है? अपने प्रोसेस में और कंट्रोल
- 45:31कंट्रोल करने के बाद कंट्रोल का मतलब क्या
- 45:33है? कि हम लोगों ने जब हमारे सॉल्यूशन को
- 45:35इंप्लीमेंट किया तो हम लोग उसको मॉनिटर कर
- 45:37रहे हैं कि वो कितनी अच्छे से यहां पे
- 45:39अपना इफेक्ट शो कर रहा है। और ये हमारा
- 45:41सस्टेंड रिजल्ट यहां पे इंश्योर करता है
- 45:43यूजिंग कंट्रोल चार्ट या फिर एसओपीस। मतलब
- 45:46एसओपीस मतलब वही स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग
- 45:47प्रोसीजर्स। अब डीएमए डीबी की बात करें तो
- 45:50यहां पे होता है डिफाइन मेजर एनालाइज्ड
- 45:52डिज़ाइन वेरीफाई। तो यहां पे इसका यूज़ हम
- 45:54लोग तब करते हैं जब कोई नया प्रोडक्ट होता
- 45:56है या फिर कोई नई प्रोसेस होती है। अब
- 45:58इसमें भी देखो वही सारी चीजें। सबसे पहले
- 46:00हम लोग यहां पे डिफाइन करेंगे कि हमारा जो
- 46:02नया प्रोजेक्ट है उसका गोल क्या है? ठीक
- 46:04है? और कस्टमर की नीड क्या है? बिज़नेस की
- 46:06स्ट्रेटजी क्या है? फिर मेजर मेजर करेंगे
- 46:08कि हमारी क्रिटिकल टू क्वालिटी है। मतलब
- 46:10कि क्वालिटी के लिए कौन-कौन सी चीजें बहुत
- 46:12ही क्रिटिकल है। बहुत ही जरूरी हैं। उसको
- 46:14आइडेंटिफाई करेंगे। कस्टमर की
- 46:16एक्सपेक्टेशन को देखेंगे। फिर जो भी
- 46:17रेलेवेंट डाटा हमारे पास है उसको हम लोग
- 46:19इकट्ठा करेंगे, गैदर करेंगे, एनालाइज़
- 46:21करेंगे। यानी कि अब हम लोग यहां पे डिज़ाइन
- 46:23अब हम लोग यहां पे क्या करेंगे हमें एक
- 46:24नया प्रोडक्ट जो है डिज़ाइन करना है। तो हम
- 46:27लोग सबसे पहले कोई एक नहीं बल्कि दो-तीन
- 46:29डिज़ाइन को तैयार करेंगे कि हम लोग किस-किस
- 46:30तरीके से डिज़ाइन कर सकते हैं। तो दो-तीन
- 46:33अल्टरनेटिव डिज़ाइन को तैयार करेंगे। और उस
- 46:35उस दो तीन में से जो सबसे बेस्ट होगी। फिर
- 46:37हम लोग यहां पे उसको जो है सेलेक्ट करेंगे
- 46:39बेस्ड ऑन परफॉर्मेंस एंड रिस्क एनालिसिस।
- 46:41और उसके बाद फाइनली हम लोग यहां पे करेंगे
- 46:43डिज़ाइन। तो यहां पे सब हम लोगों ने एक
- 46:45बेस्ट डिज़ाइन को चूज़ कर लिया। तो हम लोग
- 46:47यहां पे एक डिटेल प्रोसेस या फिर प्रोडक्ट
- 46:50डिज़ाइन को वही क्रिएट करेंगे। मतलब कि यही
- 46:51जो डिज़ाइन हमने फॉलो करी है, चूज़ करी है,
- 46:53ठीक है? उसको और अच्छे से ऑप्टिमाइज़
- 46:55करेंगे। ताकि वो हमारी सिक्स सिग्मा
- 46:57परफॉरमेंस लेवल को मेंटेन कर सके। और
- 46:59वेरीफाई करने के लिए हम लोग क्या करेंगे?
- 47:00कि जो भी डिज़ाइन है, ठीक है? उसको हम लोग
- 47:02अगेन टेस्ट करेंगे, अगेन वैलिडेट करेंगे
- 47:04और जब हमारा बिल्कुल फाइनल हो जाएगा तो हम
- 47:06लोग यहां पे प्रोसेस को इम्प्लीमेंट कर
- 47:08देंगे और फुल स्केल प्रोडक्शन को हैंड ओवर
- 47:10कर देंगे। तो ये हमारा हो जाता है डीएमएबी
- 47:12प्रिंसिपल। तो यहां पे देखो ये दोनों
- 47:14हमारे एप्रोचेस हो जाते हैं सिक्स सिग्मा
- 47:15के। और अगर हम लोग फाइनली बात करें इसके
- 47:18एप्लीकेशन की या फिर इसके बेनिफिट्स की तो
- 47:20भाई सिक्स सिग्मा को फॉलो करने के बाद
- 47:22क्या होता है? प्रोसेस की कंसिस्टेंसी
- 47:23इंप्रूव होती है। मैन्युफैक्चरिंग इफेक्ट
- 47:25कम से कम हो जाते हैं। रेगुलेटरी
- 47:26कंप्लायंस बढ़ जाता है। क्यों? देखो ये
- 47:28सारी चीजें क्यों? क्यों? क्योंकि
- 47:30प्रोडक्ट की क्वालिटी यहां पे बहुत अच्छी
- 47:33हो जाती है। ठीक है? इसका रीज़न सारा यही
- 47:35है। प्रोडक्ट की यील्ड बढ़ जाती है। क्यों
- 47:37बढ़ जाती है? क्योंकि क्वालिटी अच्छी हो
- 47:38गई है। प्रोडक्शन कॉस्ट कम हो जाता है।
- 47:40क्यों अच्छा हो जाता है? क्योंकि क्वालिटी
- 47:41बढ़ गई है। जब क्वालिटी बढ़ गई तो हमारा
- 47:43बैच रिजेक्ट नहीं होगा। तो लोअर प्रोडक्शन
- 47:45कॉस्ट यहां पे कम से कम हो जाएगा। ठीक है?
- 47:48स्पीड अप। ठीक है? तो यहां पे भाई
- 47:51प्रोडक्ट का यहां पे डेवलपमेंट भी यहां पे
- 47:52बढ़ेगा। क्योंकि हमारी हम लोग जब क्वालिटी
- 47:54को मेंटेन करेंगे तो यहां पे भी वही चीज़
- 47:56है कि जब हमारा कोई बैच रिजेक्ट नहीं
- 47:57होगा। ठीक है? हमारी सारी चीजें स्मूथली
- 47:59अच्छी चलती रहेंगी तो हमारा डेवलपमेंट भी
- 48:01यहां पे स्पीड अप हो जाएगा। कस्टमर का
- 48:03सेटिस्फेक्शन बढ़ जाएगा। मिनिमाइज हो
- 48:05जाएगा वेस्ट और ठीक है? ठीक है? रिवर्क
- 48:07यानी कि दोबारा से कोई काम नहीं करना
- 48:08पड़ेगा क्योंकि हमारा एक ही बार में सारा
- 48:10काम अच्छे से होता रहेगा और कंटीन्यूअस
- 48:12इंप्रूवमेंट यहां पे प्रमोट होता रहेगा।
- 48:14ठीक है? जैसे भाई एक बार में सिक्स सिग्मा
- 48:16नहीं अचीव होता है। जैसे धीरे-धीरे करके
- 48:19पहले थ्री सिग्मा, फोर सिग्मा, फाइव
- 48:22सिग्मा फिर धीरे-धीरे करके यहां पे कंपनी
- 48:23सिक्स सिग्मा लेवल को अचीव करती है। तो ये
- 48:26हो जाता है सिक्स सिग्मा कांसेप्ट। और अब
- 48:29हम लोग यहां पे बात करते हैं अपने आउट ऑफ
- 48:31स्पेसिफिकेशन के बारे में। देखो अगर इसको
- 48:33बहुत सिंपली समझे ना बहुत सिंपली तो इतना
- 48:36समझो बहुत सिंपल है जैसे मान लो मान लो
- 48:39कोई दवा हमने तैयार करी ठीक है ये हमारी
- 48:41हमारी डोजेज फॉर्म हमने प्रिपेयर करी अब
- 48:44इस डोजेज फॉर्म में पहले से ही हमारे पास
- 48:46एक लिमिट है कि इस डोजेज फॉर्म का में जो
- 48:48हमारा एपीआई है वो लगभग 500 एमg होना
- 48:51चाहिए ठीक है यानी जो हमारा ड्रग का
- 48:53कंटेंट है वो हमारा 500 mg होना चाहिए अब
- 48:56चलो प्लस माइनस 10% हमारा अलाउड होता है
- 48:58जैसे 500 एमg है तो मान लो चलो अगर मान लो
- 49:01490 भी तो भी हम लोग एक्सेप्ट कर लेंगे।
- 49:03या फिर 500 है तो 510 भी मान लो निकल आया
- 49:06जब हम लोगों ने इसको एनालाइज किया तो भी
- 49:09एक बार को हम लोग एक्सेप्ट कर लेंगे।
- 49:11लेकिन मान लो जो हमारी फाइनल दवा तैयार
- 49:13हुई उसमें एपीआई होना चाहिए था 500 एमg और
- 49:17निकल रहा है यहां पे 350 एमg अब बताइए
- 49:20क्या इस दवा को हम एक्सेप्ट कर सकते हैं?
- 49:22या फिर मान लो 500 एमg और निकल रहा है
- 49:24यहां पे हम कह रहे हैं चलो 450 एमजी भी
- 49:26निकल रहा है तब भी तब भी यहां पे बिल्कुल
- 49:27अनएक्सेप्टेबल हो जाएगी। तो देखो आउट ऑफ
- 49:30स्पेसिफिकेशन का क्या मतलब है कि जो पहले
- 49:32से एक स्पेसिफाइड लिमिट है किसी प्रोडक्ट
- 49:35को लेकर कि उसमें डोजे उसकी उसमें जो है
- 49:38एपीआई इतना होना चाहिए उसका वेट इतना होना
- 49:40चाहिए उसका डिसइीग्रेशन टाइम इतना होना
- 49:42चाहिए जैसे मान लो कोई टैबलेट हमने बनाया
- 49:44उसका डिसइीग्रेशन टाइम पहले से डिफाइंड है
- 49:4730 मिनट और फिर यहां पे हम लोग जब चेक कर
- 49:49रहे हैं इनविट्रो कंडीशन में तो हमें
- 49:51देखने को मिल रहा है कि भाई यह तो 1 घंटे
- 49:53में भी डिसॉल्व नहीं हो रही डिसइीग्रेट ही
- 49:55नहीं हो रही है तो फिर उसका एक्शन कब आएगा
- 49:57यानी देखो एक जो प्रीडफाइंड लिमिट्स होती
- 50:00हैं चीजों के लिए अगर प्रोडक्ट जो है उनसे
- 50:02बहुत ही ज्यादा बाहर निकल जाए तो हम लोग
- 50:05उसको बोलते हैं मतलब बहुत ज्यादा क्या
- 50:06उससे बाहर ही निकल जाए तो हम लोग बोलते
- 50:08हैं उसको आउट ऑफ स्पेसिफिकेशन यानी जो
- 50:10पहले से एक स्पेसिफाइड लिमिट्स हैं। ठीक
- 50:12है? जब प्रोडक्ट यहां पे उनके अंदर आता ही
- 50:15नहीं है। उनको क्रॉस कर जाता है। तो उसको
- 50:17हम लोग बोलते हैं आउट ऑफ स्पेसिफिकेशन।
- 50:19यानी यहां पे अगर हम लोग देखें तो आउट ऑफ
- 50:21स्पेसिफिकेशन रिफर्ड टू एनी टेस्ट रिजल्ट
- 50:23दैट डज़ नॉट मीट द प्रीडिटरमाइंड
- 50:26एक्सेप्टेंस क्राइटेरिया मतलब कि भाई वो
- 50:28एक्सेप्टेंस क्राइटेरिया को मैच ही नहीं
- 50:30कर रहा है। उसको उसको एक्सेप्ट ही नहीं कर
- 50:32सकते हम लोग और स्पेसिफिकेशन ऑफ अ
- 50:35प्रोडक्ट रॉ मटेरियल और इंटरमीडिएट एज
- 50:38डिफाइंड इन द अप्रूव्ड डॉक्यूमेंट। तो वही
- 50:40चीज है कि जो भी हमारे पास जो भी हमारे
- 50:42आईपी बीपी वीएसपी होते हैं उसमें पहले से
- 50:44ही हमारी चीजें डिटरमाइन होती हैं। अगर
- 50:46कोई प्रोडक्ट यहां पे उसको मीट ही नहीं
- 50:48करेगा तो हम लोग उसको एक्सेप्ट नहीं
- 50:49करेंगे। अब अगर हम लोग यहां पे कॉजेस की
- 50:52बात करें कि भाई क्या-क्या इसके रीज़न हो
- 50:54सकते हैं? तो हो सकता है एनालिटिकल या फिर
- 50:56टेस्टिंग एरर हो सकता है। इंस्ट्रूमेंटेशन
- 50:58मास फंक्शन यानी कि हो सकता है कि जो
- 50:59इंस्ट्रूमेंट हम लोग यूज़ कर रहे हैं उसमें
- 51:00कुछ प्रॉब्लम हो गई हो। सैंपलिंग एरर देखो
- 51:03एक चीज़ आप लोग समझो। आउट ऑफ स्पेसिफिकेशन
- 51:06में कब पता चलेगा? जब हम लोग यहां पे
- 51:07क्वालिटी कंट्रोल टेस्ट परफॉर्म करेंगे।
- 51:10ठीक है? क्वालिटी कंट्रोल टेस्ट का मतलब
- 51:12क्या है? क्वालिटी कंट्रोल टेस्ट हम लोग
- 51:14यहां पे अपने फाइनल प्रोडक्ट के अंदर
- 51:16परफॉर्म करते हैं। जैसे अगर आप लोगों को
- 51:18याद हो आपने टैबलेट पढ़ा था, आपने कैप्सूल
- 51:20पढ़ा था। तो उन सभी में लास्ट में हम लोग
- 51:23क्वालिटी कंट्रोल टेस्ट कर रहे थे। जिसमें
- 51:24हम लोग कंटेंट यूनिफॉर्मिटी चेक कर रहे
- 51:26थे, डिसइीग्रेशन टाइम चेक कर रहे थे,
- 51:28डिसोल्यूशन टाइम चेक कर रहे थे। तो वो
- 51:30सारी चीजें हम लोग कब चेक कर रहे थे? जब
- 51:31हमारी फाइनल दवा तैयार हो जा रही थी। तो
- 51:34अब एक चीज समझो। जैसे मान लो मान लो एक
- 51:37बैच में एक बार में मान लो 1000 दवाएं
- 51:391000 टेबलेट मैन्युफैक्चर हुई ध्यान से
- 51:41समझना ठीक है अब भाई क्या हम लोग यहां पे
- 51:45इस पूरे के पूरे 1000 टेबलेट का क्वालिटी
- 51:47कंट्रोल टेस्ट करेंगे ऐसा थोड़ी करेंगे हम
- 51:49लोग हम लोग क्या करेंगे इस 1000 जैसे एक
- 51:51बैच में जो 1000 टेबलेट बनी है इस 1000
- 51:53में से हम लोग 10 टेबलेट ले लेंगे ठीक है
- 51:55अब इस 10 टेबलेट का ही तो हम लोग यहां पे
- 51:57क्या करेंगे हम लोग क्वालिटी कंट्रोल
- 51:59टेस्ट परफॉर्म करेंगे इस 10 टेबलेट को ही
- 52:01हम लोग चेक करेंगे कि इसमें कंटेंट
- 52:02यूनिफॉर्मिटी कैसी है ठीक है और तो इन 10
- 52:05टेबलेट के बेसिस पे ही हम लोग इस 1000
- 52:07टेबलेट को डिफाइन करेंगे। समझना ध्यान से।
- 52:09तो ये जो 10 टेबलेट हमने लिया है ये क्या
- 52:11है? ये इस ये हमारे इस बैच का सैंपल है।
- 52:13जैसे एक बैच में जितनी भी दवा बनी उसका हम
- 52:16लोग एक सैंपल लेते हैं और इस सैंपल को हम
- 52:18लोग यहां पे टेस्ट करते हैं। समझ रहे हो
- 52:19बात को? कि सैंपल के हम लोग क्वालिटी
- 52:21कंट्रोल टेस्ट परफॉर्म करते हैं। अब एक
- 52:23चीज़ समझो, ध्यान से समझना। मान लो जो 1000
- 52:26टेबलेट हमारी बनी है। ठीक है? इसमें से
- 52:28मान लो कि हमारी ज्यादातर टैबलेट बहुत ही
- 52:31खराब बनी है। ऐसे समझना। लेकिन मान लो कोई
- 52:34इस 1000 में से मान लेते हैं कि कोई 50 या
- 52:37100 टेबलेट ऐसी हैं जो कि हो सकता है बहुत
- 52:39अच्छी हो और मान लेते हैं कि इसमें से 900
- 52:41टेबलेट ऐसी हैं जो बिल्कुल बेकार है। मतलब
- 52:43लगभग 900 टैबलेट ऐसी हैं जिनके अंदर मान
- 52:46लो कि हमारा जो एपीआई का कंटेंट है वो 300
- 52:49एमजी चला गया है और जबकि होना चाहिए था
- 52:51500 और जो 50 से 100 टेबलेट है हां इनमें
- 52:54हमारा एपीआई कंटेंट जो है मान लो कि वही
- 52:56लगभग 495 से 500 के बीच में ही है। मतलब
- 52:59ये 50 से 100 टैबलेट बहुत सही बनी है इसके
- 53:01अंदर। लेकिन 900 टैबलेट हमारी बड़ी खराब
- 53:03बनी है। अब आप एक बात बताओ क्या ये 50 और
- 53:06100 टैबलेट जो अच्छी बनी है इसके बेसिस पे
- 53:08हम लोग यहां पे इस 900 टैबलेट को एक्सेप्ट
- 53:10कर लेंगे? नहीं करेंगे। लेकिन भाई जब हम
- 53:12लोग यहां पे सैंपल लेते हैं तो हम लोग
- 53:13सैंपल रैंडमली ही तो लेते हैं। मान लो इस
- 53:151000 टेबलेट का जो हम लोग सैंपल ले रहे
- 53:17हैं। अब कहीं गलती से अगर हमारे पास ठीक
- 53:20है ये 50 से 100 टेबलेट ही आ गई। ध्यान से
- 53:22समझना। ठीक है? कि हम लोग जब सैंपल की
- 53:24टेस्टिंग करने वाले हैं तो हम लोग रैंडमली
- 53:25कुछ हमने मान लो 10 टेबलेट उठाई। अब इस 10
- 53:28टेबलेट में अगर मान लो हमारी नौ से 10 नौ
- 53:31टेबलेट इस इस वाले की आ गई। ठीक है? इस
- 53:33वाले की तो भाई इस वाले में तो सारी चीजें
- 53:35सही है। लेकिन बाकी बची 900 में है उसमें
- 53:37तो सब खराब है। लेकिन हम लोगों ने जो दवा
- 53:39निकाली सैंपल के लिए जो 10 टेबलेट हमने
- 53:41सैंपल के लिए लिया वो हमने अच्छे वाले में
- 53:43से ले लिया। तो अब क्या होगा? अब जब हम
- 53:45लोग क्वालिटी कंट्रोल टेस्ट परफॉर्म
- 53:46करेंगे तो सब कुछ सही आएगा और हमें क्या
- 53:48लगेगा? हमें लगेगा कि अरे हमारा प्रोडक्ट
- 53:51तो यहां पे बहुत अच्छा बना है। लेकिन
- 53:53एक्चुअल में क्या है? एक्चुअल में तो वो
- 53:54जो पूरा प्रोडक्ट है वो खराब है। ठीक है?
- 53:56तो आगे चल के क्या होगा? जब हम लोग यहां
- 53:58पे आगे देखेंगे तो हमारी दवा खराब होगी।
- 54:00तो उस खराब होने का रीज़न क्या था? कि हम
- 54:02लोग सैंपल ही गलत ले लिया। हमने सैंपल में
- 54:04अच्छी-अच्छी चीजों को सेलेक्ट कर लिया।
- 54:06जबकि ज्यादातर चीजें उसमें खराब थी जो कि
- 54:08हमारे पास आई ही नहीं। मैन्युफैक्चरिंग और
- 54:11प्रोसेस रिलेटेड। ठीक है? तो
- 54:12मैन्युफैक्चरिंग या फिर प्रोसेस में कुछ
- 54:13हमारे चेंजेस हो गया, डेविएशन हो गया। और
- 54:15एनवायरमेंट मान लो जो आसपास का एनवायरमेंट
- 54:18है उसमें ही हमारा कुछ कंटैमिनेशन हो गया,
- 54:20स्टेरलाइजेशन अच्छे से नहीं मेंटेन हुआ।
- 54:22तो यह सारी चीजें हमें देखने को मिलती है।
- 54:24अब अगर हम लोग यहां पर बात करते हैं फेजेस
- 54:26ऑफ ओएस इन्वेस्टिगेशन के बारे में तो देखो
- 54:29यहां पर हम लोग देखेंगे कि अगर हमारा कोई
- 54:32प्रोडक्ट आउट ऑफ स्पेसिफिकेशन गया है तो
- 54:34वो क्यों गया है? उसके क्या-क्या रीज़न हो
- 54:36सकते हैं? ठीक है? वो चीजें हम लोग यहां
- 54:38पे कैसे इन्वेस्टिगेट करते हैं? उसको हम
- 54:40लोग देखेंगे। तो देखो इसको हम लोग यहां पे
- 54:42दो फेस में इन्वेस्टिगेट करते हैं। तो
- 54:44थोड़ा सा इसको हम लोग यहां पे थ्योरी नहीं
- 54:45बल्कि यहां पे चार्ट से समझते हैं। ज्यादा
- 54:48बेटर हमें समझ में आएगा। देखो फेज वन क्या
- 54:50होता है? फज़ वन कह सकते हो पहला स्टेप
- 54:52होता है और फज़ टू हमारा दूसरा स्टेप होता
- 54:54है। अगर फज़ वन में ही हमें पता चल गया कि
- 54:56कोई प्रॉब्लम है तो हम लोग यहां पे उसको
- 54:58कह सकते हो सॉल्यूशन हम लोग उसको सॉल्व
- 55:00करने की कोशिश करते हैं। और अगर सॉल्व हो
- 55:02जाती है तो वहीं पे हमारा क्या होता है?
- 55:03वहीं पे हमारा प्रोडक्ट जो है हमें हम लोग
- 55:05रिलीज़ कर देते हैं। लेकिन अगर फेज वन में
- 55:08हमें पता चलता है कि कोई प्रॉब्लम नहीं
- 55:09सही हो रही है या फिर कोई प्रॉब्लम मिल ही
- 55:11नहीं रही है। देखो दो चीज़ें हो सकती है।
- 55:13या तो कोई प्रॉब्लम मिले ही ना और या तो
- 55:14कोई प्रॉब्लम मिले लेकिन वो सही ना हो तो
- 55:16फिर हम लोग यहां पे फेज टू की
- 55:17इन्वेस्टिगेशन करते है। थोड़ा समझना। जैसे
- 55:20फज़ वन में हम लोग क्या करते हैं? सबसे
- 55:21पहले हम लोग ये चेक करते हैं कि कोई
- 55:23एनालिसिस में कोई एरर तो नहीं रह गई है।
- 55:25तो अगर कोई एनालिटिकल एरर है। ठीक है? तो
- 55:27हम लोग यहां पे क्या करते हैं कि हम लोग
- 55:29अपने सैंपल की रीअनालिसिस करते हैं। उसको
- 55:31दोबारा से एनालाइज़ करते हैं। और अगर
- 55:33दोबारा से एनालाइज़ करने पर जो हमारा
- 55:35प्रोडक्ट है। ठीक है? वो स्पेसिफिकेशन के
- 55:37अंडर में आ जाता है। यानी कि जो रिजल्ट है
- 55:40वो विद इन स्पेसिफिकेशन आ जाते हैं। तो हम
- 55:42लोग यहां पे प्रोडक्ट को रिलीज़ कर देते
- 55:44हैं। तो यहां पे देखो क्या हुआ? यहां पे
- 55:46बेसिकली हमने फज़ वन में ही अपनी एनालिसिस
- 55:48एरर को चेक किया और यहां पे हमें कोई एरर
- 55:50दिखी। हमने उसको दोबारा से एनालाइज़ किया।
- 55:51और दोबारा से एनालाइज़ करने पे क्या हुआ?
- 55:53हमें पता चल गया कि हां पहली बार में जो
- 55:55एनालिसिस हुई थी उसमें थोड़ी बहुत एरर थी।
- 55:57दूसरी बार की एनालिसिस में हमने सेम सैंपल
- 55:59को एनालाइज़ किया। ठीक है? और जो भी चीजें
- 56:01थी वो हमारी दोबारा से रिजल्ट में आ गई।
- 56:03तो हमारा प्रोडक्ट हमने रिलीज़ कर दिया।
- 56:05यानी बेसिकली जो प्रोडक्ट जो है आउट ऑफ
- 56:07स्पेसिफिकेशन गया था। ठीक है? तो प्रोडक्ट
- 56:09खराब नहीं था बल्कि एनालिसिस में ही कोई
- 56:11गड़बड़ हो गई थी। तो वहां पे प्रोडक्ट हमारा
- 56:14सही था। तो हमने उसको रिलीज़ कर दिया।
- 56:16लेकिन अगर मान लो हमने जो है चेक किया
- 56:18जैसे हमने कोई लैबोरेटरी एरर और कैलकुलेशन
- 56:20चेक किया और वहां पे हमने दोबारा से उसको
- 56:22जो है रेक्टिफाई किया। रेक्टिफाई मतलब उसी
- 56:24चीज को दोबारा से चेक किया। ठीक है? और
- 56:26उसके बावजूद भी बावजूद भी हमारा जो
- 56:29प्रोडक्ट का रिजल्ट है वो आउट ऑफ
- 56:30स्पेसिफिकेशन आ रहा है। ठीक है? तो हम लोग
- 56:32यहां पे दो फज़ टू की इन्वेस्टिगेशन
- 56:33स्टार्ट कर देते हैं। यानी फज़ वन में हमने
- 56:36जो है कैलकुलेशन या फिर लैबोरेटरी एरर को
- 56:38चेक किया। उसको दोबारा से रेक्टिफाई किया।
- 56:40लेकिन जो रिजल्ट है वो फिर भी यहां पे आउट
- 56:42ऑफ स्पेसिफिकेशन हमें देखने को मिला। तो
- 56:43हमने फेज टू की इन्वेस्टिगेशन स्टार्ट कर
- 56:45दी। या फिर ऐसा भी हो सकता है कि हमें फेज
- 56:47वन में हमने जो भी दोनों चीजें चेक करी।
- 56:49ठीक है? वहां पे हमें कोई एरर देखने को
- 56:51नहीं मिली। यानी हम लोगों ने जब देखा कि
- 56:53कोई एनालिसिस में कोई एरर तो नहीं है तो
- 56:54नहीं थी। लैबोरेटरी में कोई एरर नहीं तो
- 56:56नहीं है। नहीं थी। तो हम लोग यहां पे फज़
- 56:58टू की इन्वेस्टिगेशन स्टार्ट कर देते हैं।
- 57:00अब फज़ टू में देखो हम लोग क्या करते हैं।
- 57:02ये हमारा फाइनल असाइनेबल यानी यहां पे हम
- 57:04लोग मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट को चेक करते
- 57:06हैं। तो यहां पे देखो हम लोग क्या-क्या
- 57:07देखते हैं कि फज़ टू इन्वेस्टिगेशन को अगर
- 57:11हम लोग देखें
- 57:13तो फेज टू के इन्वेस्टिगेशन के लिए तो
- 57:15देखो सबसे पहले हम लोग क्या करते हैं कि
- 57:16सबसे पहले हम लोग यहां पर एप्लीकेशन फाइल
- 57:18करते हैं। ठीक है? तो एप्लीकेशन को हम लोग
- 57:20यहां पर रिव्यू करते हैं और फिर हम लोग
- 57:21यहां पे रूट कॉस्ट को आइडेंटिफाई करते
- 57:23हैं। और अगर हमारा जो है कोई रूट कॉस्ट
- 57:25मिलता है। रूट कॉस्ट का मतलब क्या है?
- 57:26देखो रूट कॉस्ट का मतलब है कि मान लो कि
- 57:29हमारा जो प्रोडक्ट है। ठीक है? उसके उसके
- 57:33रॉ मटेरियल में ही हमें कोई प्रॉब्लम दिख
- 57:35गई। तो भाई अगर रॉ मटेरियल ही खराब है तो
- 57:37हमारा फाइनल प्रोडक्ट कैसे अच्छा बनेगा?
- 57:40तो फिर उस पूरे बैच को ही हम लोग रिजेक्ट
- 57:42कर देते हैं। ठीक है? और हम लोग यहां पे
- 57:43इन्वेस्टिगेशन एंड करेक्ट कह सकते हो
- 57:46इन्वेस्टिगेशन एंड करेक्शन को अप्लाई करते
- 57:48हैं कि हम लोग इन्वेस्टिगेट करेंगे कि ऐसा
- 57:50क्यों हुआ? रॉ मटेरियल क्यों खराब था? और
- 57:52फिर उसको दोबारा से आगे से सही करने की
- 57:54कोशिश करेंगे। और उसके बाद सेकंड में हम
- 57:56लोग यहां पे अप्लाई करते हैं एडिशनल
- 57:58लैबोरेटरी टेस्टिंग। तो इसमें हम लोग क्या
- 58:00करते हैं कि हम लोग सैंपल की री एअलिसिस
- 58:01करते हैं। ठीक है? एक सेकंड एनालिस्ट
- 58:03एनालिस्ट से इन डुप्लीकेट यानी देखो ध्यान
- 58:05से समझना। सबसे पहले तो हम लोग क्या करते
- 58:07हैं? सैंपल को रीअनालाइज़ करते हैं कि एक
- 58:10दूसरे से मतलब पहले जिसने किया था उससे
- 58:11नहीं बल्कि दूसरे एनालिस एनालिस्ट
- 58:13एनालिस्ट से हम लोग यहां पे एनालिसिस
- 58:15करवाते हैं। इन डुप्लीकेट इन डुप्लीकेट का
- 58:17मतलब है यहां पे दो बार यानी सैंपल के
- 58:19एनालिसिस हम लोग किसी दूसरे एनालिस्ट से
- 58:21दो बार कराते हैं। और अगर जो रिजल्ट है
- 58:24ठीक है? वो यहां पे स्पेस स्पेसिफिकेशंस
- 58:26के अंदर आ जाता है। तो इसका मतलब पहले
- 58:28वाला जो एनालिस्ट था उसने कुछ गड़बड़ करी
- 58:30थी। तो हम लोग यहां पे प्रोडक्ट को रिलीज़
- 58:33कर देते हैं। क्योंकि प्रोडक्ट में कोई
- 58:35खराबी नहीं बल्कि एनालिस्ट एनालिस्ट ने ही
- 58:37कुछ गड़बड़ कर दी थी। तो यहां पे रिलीज़
- 58:39करने के बाद भी हालांकि हम लोग जो है
- 58:41इन्वेस्टिगेशन और करेक्टिव एक्शन को
- 58:42अप्लाई करते हैं। मतलब कि हम लोग
- 58:43इन्वेस्टिगेशन करते हैं कि क्यों क्यों
- 58:45हमारी पहली बार गड़बड़ हुई थी एनालिस्ट ने
- 58:47ऐसे क्या मिस्टेक करी थी और अगर हुई थी तो
- 58:49हम लोग यहां पे दोबारा से ना हो इसलिए
- 58:51उसको करेक्टिव एक्शन भी अप्लाई करते हैं।
- 58:53और यहां पे हम लोग क्या कर सकते हैं कि
- 58:54रिसेंपलिंग यानी कि जो हम लोग सैंपल चेक
- 58:57करते हैं। ठीक है? तो हम लोग दोबारा से
- 58:58सैंपल लेंगे। ठीक है? और उस सैंपल को मतलब
- 59:01देखो यहां पे हम लोग क्या किया? यहां पे
- 59:03हम लोग सेम सैंपल को ही एनालाइज कर रहे
- 59:04हैं और यहां पे हम लोग क्या करेंगे कि जो
- 59:06हमारा बैच है तो उस बैच में जो पहले हमने
- 59:08सैंपल लिया था उसकी बजाय हम लोग एक दूसरा
- 59:10सैंपल लेंगे और इस दूसरे सैंपल को दूसरे
- 59:12एनालिस्ट से दो बार चेक कराएंगे यानी यहां
- 59:14पे हम लोग सेम सैंपल को दो बार करा रहे
- 59:17हैं दूसरे एनालिस्ट से यहां पे हम लोग
- 59:18दूसरा सैंपल लेंगे और अगर यहां पे दूसरे
- 59:21सैंपल का रिजल्ट भी अगर हमारा स्पेसिफाइड
- 59:23लिमिट से आउट आया तो भाई इसका मतलब क्या
- 59:25है इसका मतलब कि हमारा प्रोडक्ट बिल्कुल
- 59:27भी अच्छा नहीं हो सकता क्योंकि पहला सैंपल
- 59:29भी फेल हुआ दूसरा सैंपल भी फेल हुआ और फेल
- 59:31कब हुआ जब दूसरे एनालिस्ट ने एनालिस्ट ने
- 59:33दो बार चेक किया। तो यहां पे हमारा
- 59:35प्रोडक्ट बिल्कुल रिजेक्ट हो जाता है और
- 59:37पूरा बैच यहां पे रिजेक्ट कर दिया जाता
- 59:39है। ठीक है? और इन्वेस्ट इन्वेस्टिगेशन और
- 59:41करेक्टिव एक्शन यहां पे अप्लाई किया जाता
- 59:43है। तो यहां पे देखो जो इन्वेस्टिगेशन और
- 59:45करेक्टिव एक्शन था। तो बेसिकली इसी को हम
- 59:47लोग यहां पे करेक्टिव एंड प्रिवेंटिव
- 59:48एक्शन भी बोल सकते हैं। तो इसमें देखो
- 59:50होता क्या है? करेक्टिव एंड प्रिवेंटिव
- 59:52एक्शन इज़ अ सिस्टमैटिक एप्रोच यूज्ड टू
- 59:54आइडेंटिफाई इन्वेस्टिगेट एंड एलिमिनेट द
- 59:55रूट रूट कॉज। ठीक है? तो इसको हम लोग यहां
- 59:57पे अप्लाई करते हैं ताकि जो रूट कॉज है कि
- 59:59एक्चुअल में किस वजह से प्रॉब्लम आ रही है
- 1:00:01और किस वजह से हमारा प्रोडक्ट जो है आउट
- 1:00:04ऑफ स्पेसिफिकेशन जा रहा है। तो उसको सबसे
- 1:00:05पहले तो हम लोग करेक्ट करते हैं और फिर
- 1:00:07यहां पे प्रिवेंट करते हैं ताकि उसका
- 1:00:08फ्यूचर में होने का चांस बिल्कुल कम हो
- 1:00:10जाए। अब अगर हम लोग देखें कि इसमें
- 1:00:12क्या-क्या स्टेप्स होते हैं सीएपीए मतलब
- 1:00:14करेक्टिव एंड प्रिवेंटिव एक्शन में। तो
- 1:00:15सबसे पहले हम लोग आइडेंटिफाई करते हैं जो
- 1:00:17भी हमारा डेविएशन है, जो भी हमारा चेंज
- 1:00:19है, इशू है। फिर उसको इन्वेस्टिगेट करते
- 1:00:20हैं। रूट कॉज को फाइंड करते हैं। करेक्टिव
- 1:00:22एक्शन यानी कि इस रूट कॉज को सही करने के
- 1:00:24लिए जो भी एक्शन है, उसको इंप्लीमेंट करते
- 1:00:26हैं। ठीक है? और उसके बाद आगे ना हो। आगे
- 1:00:28ये चीज दोबारा ना हो उसके लिए प्रिवेंटिव
- 1:00:30एक्शन को भी प्लान करते हैं। और फिर हम
- 1:00:31लोग देखते हैं कि इफेक्टिवनेस कितनी है।
- 1:00:33ठीक है? तो इफेक्टिवनेस को भी हम लोग यहां
- 1:00:35पे मॉनिटर करते हैं। बाकी देखो जो हमने
- 1:00:37फेज वन और फज़ थ्री देखा था। तो उसका
- 1:00:38थ्योरी भी अगर हम लोग थोड़ा सा देख लें। तो
- 1:00:40फेज़ टू में हम लोग क्या करते हैं? इसमें
- 1:00:42हम लोग जो है मैन्युफैक्चरिंग या फिर कोई
- 1:00:44असाइनेबल कॉस्ट को फाइंड करने की कोशिश
- 1:00:46करते हैं। ठीक है? और बाकी ये फर्दर दो
- 1:00:48फेज में होता है। पहला होता है रिव्य्यू
- 1:00:49ऑफ प्रोडक्शन। तो यहां पे हम लोग
- 1:00:50मैन्युफैक्चरिंग रिकॉर्ड, बैच शीट प्रोसेस
- 1:00:52पैरामीटर्स को चेक करते हैं। अगर कोई रूट
- 1:00:54कॉस्ट आईडेंटिफाई होता है। ठीक है? कि
- 1:00:56कहीं मैन्युफैक्चरिंग में, बैच शीट में या
- 1:00:58फिर प्रोसेस पैरामीटर्स में ही कोई
- 1:00:59प्रॉब्लम अगर हमें दिखती है, तो हम लोग
- 1:01:01बैच को रिजेक्ट कर देते हैं। और सीएपीए को
- 1:01:03अप्लाई करते हैं। और दूसरे फेज में हम लोग
- 1:01:04क्या करते हैं कि हम लोग यहां पे अपने
- 1:01:06एडिशनल लैबोरेटरी टेस्टिंग को परफॉर्म
- 1:01:08करते हैं। यानी यहां पे देखो यह पहला वाला
- 1:01:10हो गया। यह दूसरा वाला हो गया। ठीक तो
- 1:01:11एडिशनल में हम लोग क्या करते हैं कि
- 1:01:13रीटेस्टिंग को परफॉर्म करते हैं।
- 1:01:15रीअनालाइज़ करते हैं सेकंड एनालिस्ट से।
- 1:01:17अगर हमारा सारी चीजें स्पेसिफिकेशन के
- 1:01:18अंदर आ जाती है तो बैच को रिलीज़ कर देते
- 1:01:20हैं। ठीक है? तो ये हमारा रिलीज़ हो गया।
- 1:01:22लेकिन अगर यहां पे हमारा रिजल्ट स्टिल आउट
- 1:01:24ऑफ लिमिट आता है तो बैच को रिजेक्ट कर
- 1:01:26दिया जाता है और इन्वेस्टिगेटिव और
- 1:01:27करेक्टिव एक्शन यहां पे फॉलो किया जाता
- 1:01:29है। तो ये हो जाता है हमारा यहां पे आउट
- 1:01:31ऑफ स्पेसिफिकेशन। और अब हम लोग यहां पे
- 1:01:34बात करते हैं अपने चेंज कंट्रोल इन
- 1:01:36इंडस्ट्रियल फार्मेसी के बारे में। अब
- 1:01:38देखो इसको भी अगर आप लोग देखो तो वैसे तो
- 1:01:40बहुत सिंपल ही है। जैसे देखो चेंज कंट्रोल
- 1:01:42अगर हम लोग नाम से ही देखें तो क्या होता
- 1:01:44है कि टाइम टाइम पर हमें कभी-कभी जो है
- 1:01:47अपनी मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस में जैसे
- 1:01:49इंडस्ट्री इंडस्ट्री में क्या होता है कि
- 1:01:50टाइम टाइम पे कुछ चेंजेस करने की जरूरत
- 1:01:52पड़ती रहती है। हो सकता है
- 1:01:53मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस में कोई चेंज हो।
- 1:01:55हो सकता है कि कोई इंस्ट्रूमेंट चेंज करना
- 1:01:58पड़े। है ना? या फिर हो सकता है कि जो है
- 1:02:00जगह भी कभी-कभी चेंज करनी पड़ जाती है। तो
- 1:02:03यहां पे देखो अगर अगर कोई भी चेंज किया जा
- 1:02:06रहा है तो उस चेंज पर यहां पे जो
- 1:02:08रेगुलेटरी अथॉरिटीज हैं उनका एक कंट्रोल
- 1:02:09होना चाहिए। तो कैसे रेगुलेटरी अथॉरिटीज
- 1:02:12यहां पे चेंज को कंट्रोल करती हैं उसी को
- 1:02:13हम लोग यहां पे देखने वाले हैं। देखो इसका
- 1:02:15सिंपल सा मतलब ये है कि भाई अगर आप
- 1:02:17इंडस्ट्री में कोई भी चेंज परफॉर्म कर रहे
- 1:02:19हैं चाहे वो छोटा से छोटा हो या बड़ा से
- 1:02:21बड़ा हो। उसको यहां पे रेगुलेटरी अथॉरिटी
- 1:02:23को इन्फॉर्म करना ही होता है। ठीक है? ये
- 1:02:25हमारा रूल्स एंड रेगुलेशंस में मेंशन होता
- 1:02:27है। गाइडलाइंस मेंशन होता है कि जैसे मान
- 1:02:29लो आपने अप्रूवल ले लिया। ठीक है? किसी
- 1:02:31चीज के लिए। अब अप्रूवल मिलने के बाद अगर
- 1:02:33आपने अपने इंस्ट्रूमेंट में कोई चेंज
- 1:02:35किया, साइट में कोई चेंज किया,
- 1:02:36मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस में कोई चेंज
- 1:02:37किया तो उसको रेगुलेटरी अथॉरिटी को
- 1:02:39इन्फॉर्म करना होता है कि चेंज क्यों हुआ
- 1:02:41है? किस लिए किया गया है। ठीक है? और चेंज
- 1:02:43वैलिड है कि नहीं है, जस्टिफाइड है कि
- 1:02:45नहीं है। तो इन सारी चीजों के लिए हमारा
- 1:02:46चेंज कंट्रोल सिस्टम होता है। तो ये हमारा
- 1:02:48फॉर्मल सिस्टम होता है जो कि
- 1:02:49मैन्युफैक्चरिंग फार्मासटिकल
- 1:02:50मैन्युफैक्चरिंग में अप्लाई होता है ताकि
- 1:02:52जो भी चेंजेस मेड किए जा रहे हैं। ठीक है?
- 1:02:54वो हमारा यहां पे प्रॉपर्ली इवैलुएट हो।
- 1:02:57ठीक है? कि प्रॉपर्ली उनका इवैल्यूएशन हो
- 1:02:58कि चेंज क्यों परफॉर्म किया गया है और सही
- 1:03:00है कि नहीं है। ये चेंज होना चाहिए कि
- 1:03:02नहीं होना चाहिए। डॉक्यूमेंट किया जाए
- 1:03:03उसको रिटन फॉर्म में डॉक्यूमेंट किया जाए
- 1:03:05और यहां पे उसका अप्रूवल लेना है। ठीक है?
- 1:03:06मतलब कोई भी चेंज अप्लाई करने से पहले
- 1:03:08उसका अप्रूवल लेना होता है रेगुलेटरी
- 1:03:10अथॉरिटीज़ से। और ये हमारा की एलिमेंट होता
- 1:03:12है गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेस का,
- 1:03:14क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम का। पर्पस की
- 1:03:16हम लोग बात करें तो सब भाई पर्पस क्या है
- 1:03:18कि हमारा अगर कोई भी चेंज कर रहे हैं तो
- 1:03:20चेंज कर रहे हैं। ठीक है? तो उस चेंज को
- 1:03:22पहले इवैलुएट करना है कि चेंज हम लोग करें
- 1:03:24कि नहीं करें उसके लिए अप्रूवल लेना होता
- 1:03:25है। तो चेंज अगर सही होगा ठीक है तो
- 1:03:27अप्रूवल मिल जाएगा और अगर अप्रूवल मिल गया
- 1:03:29तो उस चेंज से क्या होगा हमारी प्रोडक्ट
- 1:03:31की क्वालिटी सेफ्टी और एफिकसी मेंटेन
- 1:03:33रहेगी। मतलब देखो चेंज ऐसा होना चाहिए
- 1:03:35जिससे प्रोडक्ट प्रोडक्ट की क्वालिटी पे
- 1:03:36कोई फर्क ना पड़े। ये चीज़ हमारा ध्यान
- 1:03:38रखता है। रेगुलेटरी अथॉरिटीज़ के साथ
- 1:03:40कंप्लायंस मेंटेन रहेगा। ठीक है? उनके
- 1:03:42उनको फॉलो करते हुए गाइडलाइंस यहां पे
- 1:03:43मेंटेन रहेगी। तो अप्रूवल जो है अप्रूवल
- 1:03:46में कोई प्रॉब्लम नहीं होगी। ट्रेसेबिलिटी
- 1:03:48यहां पे देखो कि जो भी चेंज है। ठीक है?
- 1:03:50तो चेंज को ट्रेस किया जा सके कि कहां
- 1:03:52चेंज किया गया है, क्यों चेंज किया गया
- 1:03:54है, उसका एक रिकॉर्ड हो और अकाउंटेबिलिटी
- 1:03:56कि अगर इस चेंज से कोई भी प्रॉब्लम हुई
- 1:03:58आगे चलके तो अकाउंटेबिलिटी लेने वाला भी
- 1:04:00कोई हो कि हां कोई जिम्मेदारी लेने वाला
- 1:04:02हो और टू प्रोवाइड अनइटेंडेड
- 1:04:04कॉन्सिक्वेंसेस अराइजिंग फ्रॉम अनकंट्रोल।
- 1:04:06और कभी-कभी क्या होता है कि मान लो कोई
- 1:04:08अगर चेंज पर कोई कंट्रोल ही ना हो। देखो
- 1:04:10चेंज पर अगर कोई कंट्रोल होगा ही नहीं तो
- 1:04:12तो क्या होगा? हो सकता है कंपनी वाले कुछ
- 1:04:14भी चेंजज़ कर दें। हो सकता है वो अपनी दवा
- 1:04:15की क्वालिटी खराब कर दें। तो वहां पे क्या
- 1:04:17होगा? कॉन्सिक्वेंसेस अराइज़ होंगे। तो इन
- 1:04:20सारी चीजों पर कंट्रोल पाने के लिए हमारी
- 1:04:22चेंज कंट्रोल पॉलिसी हमें देखने को मिलती
- 1:04:23है। अब फंक्शन की बात करें तो मेन फंक्शन
- 1:04:25होता है कि जो भी चेंजेस हैं तो पहली बात
- 1:04:28कि जो जो चेंजेस हुए हैं उनका
- 1:04:29आइडेंटिफिकेशन कि क्या-क्या चेंजेस हुए
- 1:04:31हैं। फिर उनका रिव्यु करना। ठीक है? कि
- 1:04:33सही है कि नहीं है, क्यों हुए हैं।
- 1:04:35अप्रूवल देना कि हां चलो मिलेगा कि नहीं
- 1:04:37मिलेगा। और उसके बाद वैलिडेट करना कि ये
- 1:04:39जो चेंज है, ठीक है? कहीं कहीं ये
- 1:04:41प्रोडक्ट की क्वालिटी, रेगुलेटरी और
- 1:04:43जीएमपी रिक्वायरमेंट्स के साथ कोई
- 1:04:44छेड़छाड़ तो नहीं कर रहे हैं। और उसके बाद
- 1:04:46यहां पे चेंज की एनालिसिस करना और मॉनिटर
- 1:04:48करना कि इस चेंज से क्या इंपैक्ट हुआ है।
- 1:04:50क्या मतलब क्या बदलाव हुआ है इस चेंज से?
- 1:04:52अब अगर हम लोग टाइप्स की बात करें तो भाई
- 1:04:54देखो तीन टाइप के चेंजेस हो सकते हैं। एक
- 1:04:56होता है मेजर चेंज। तो इस मेजर चेंज को तो
- 1:04:58इन्फॉर्म करना बहुत ही जरूरी होता है और
- 1:05:00ये प्रोडक्ट की क्वालिटी, सेफ्टी, एफिगसी
- 1:05:03और रेगुलेटरी फीलिंग को अफेक्ट कर सकता
- 1:05:05है। ठीक है? कर सकता है। कर करेगा। जरूरी
- 1:05:07नहीं है। एग्जांपल्स की बात करें तो जैसे
- 1:05:09मान लो फॉर्मुलेशन में कोई चेंज होना,
- 1:05:11मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस में कोई चेंज
- 1:05:12होना, स्टलाइजेशन के भी डिफरेंट-डिफरेंट
- 1:05:14मेथड होते हैं। पहले मान लो कोई दूसरा
- 1:05:16मेथड था बाद में कोई दूसरा मेथड अपना
- 1:05:17लेना। तो ये सारे हमारे मेजर चेंजेस आ
- 1:05:19जाते हैं। तो इसके लिए प्रीयर यानी कि
- 1:05:21पहले ही हमें एक रेगुलेटरी अप्रूवल चाहिए
- 1:05:24होते हैं। चेंज हम लोग अपने आप से नहीं
- 1:05:26करेंगे। बल्कि पहले जब अप्रूवल मिलेगा
- 1:05:28चेंज के लिए एप्लीकेशन फाइल करेंगे।
- 1:05:29अप्रूवल मिलेगा तब चेंज को अप्लाई करेंगे।
- 1:05:32फिर दूसरा हमारा आ जाता है माइनर चेंजज़।
- 1:05:33तो हूं। देखो माइनर चेंजज़ में क्या होता
- 1:05:35है कि एक लिमिटेड इंपैक्ट होता है। कुछ
- 1:05:36खास फर्क नहीं पड़ता है प्रोडक्ट की
- 1:05:39क्वालिटी पे। एग्जांपल की बात करें तो
- 1:05:40चेंज इन सप्लायर ऑफ़ नॉन क्रिटिकल मटेरियल।
- 1:05:43जैसे मान लो भाई जो नॉन क्रिटिकल जैसे जो
- 1:05:46बहुत जरूरी नहीं है। ठीक है? और या फिर
- 1:05:47कुछ माइनर इक्विपमेंट में कोई अपडेट कर
- 1:05:49दिया गया। तो ये सारे क्या है कि अब
- 1:05:51सप्लायर में कोई चेंज हो रहा है जैसे भाई
- 1:05:53जरूरी रॉ मटेरियल के सप्लायर में चेंज हो
- 1:05:55रहा है तो वहां पर हमें मेंशन करना होता
- 1:05:57है लेकिन कोई कुछ हमारे ऐसी भी चीजें होती
- 1:05:59हैं जो कि उतनी जरूरी नहीं होती है तो
- 1:06:02उनमें अगर मान लो उनके सप्लायर में कोई
- 1:06:03चेंज हो रहा है तो वो सारा इतना मतलब
- 1:06:05माइनर चेंजेस होते हैं और इसको यहां पे
- 1:06:07इंटरनली मतलब कि कंपनी के इंटर अंदर ही जो
- 1:06:10है मैनेज किया जा सकता है एक मीटिंग वगैरह
- 1:06:13को बुला के कि हां ये चेंज होना चाहिए कि
- 1:06:15नहीं होना चाहिए और एडमिनिस्ट्रेटिव
- 1:06:17चेंजेस में क्या होता है कि भाई देखो
- 1:06:18एडमिनिस्ट्रेटिव चेंज में जैसे कि कंपनी
- 1:06:20के डॉक्यूमेंटेशन में कोई चेंज हो गया।
- 1:06:22मान लो कंपनी का एक हेल्पलाइन नंबर है।
- 1:06:24ठीक है? अब अगर उस हेल्पलाइन नंबर में मान
- 1:06:26लो उसने कोई चेंज कर दिया। मान लो कंपनी
- 1:06:28ने अपने नाम में कोई चेंज किया। अपनी
- 1:06:30ब्रांडिंग में कोई चेंज किया तो उससे
- 1:06:32प्रोडक्ट की क्वालिटी पे तो कोई फर्क
- 1:06:33पड़ेगा नहीं। तो ये भी हमारा जो है ज्यादा
- 1:06:35अफेक्ट नहीं करता है प्रोडक्ट की क्वालिटी
- 1:06:37को डायरेक्टली। ठीक है? तो ये हमारा
- 1:06:39एडमिनिस्ट्रेटिव चेंजेस हो गए। अब अगर हम
- 1:06:42लोग यहां पर बात करें एरिया ऑफ चेंज के
- 1:06:43बारे में कि कौन-कौन से एरिया में चेंज
- 1:06:45देखने को मिल सकता है। तो भाई देखिए
- 1:06:47मैन्युफैक्चरिंग एरिया में हो सकता है। अब
- 1:06:48मैन्युफैक्चरिंग में कहां-कहां रॉ मटेरियल
- 1:06:50हो सकता है चेंज हो जाए। इक्विपमेंट हो
- 1:06:52गया, प्रोसेस पैरामीटर्स हो गए, टेस्टिंग,
- 1:06:54वैलिडेशन प्रोसीजर, पैकेजिंग मटेरियल,
- 1:06:56क्लीनिंग प्रोसेस इन सभी में चेंज हो सकता
- 1:06:58है। क्वालिटी कंट्रोल एंड क्वालिटी
- 1:06:59असोरेंस की बात करें तो जो क्वालिटी
- 1:07:01टेस्टिंग पैरामीटर्स हैं, इसमें चेंज हो
- 1:07:02सकता है। सैंपलिंग साइज। ठीक है? तो सैंपल
- 1:07:04का साइज मान लो 1000 टेबलेट्स पे हो सकता
- 1:07:07है डस्ट टैबलेट था पहले तो मान लो पांच ही
- 1:07:09कर दिया किसी ने। ठीक है? या फिर या फिर
- 1:07:11या फिर 20 कर दिया, बढ़ा दिया। ठीक है? तो
- 1:07:13इसमें चेंजेस हो सकते हैं। वैलिडेशन
- 1:07:15प्रोसेस में चेंजेस हो सकते हैं। रॉ
- 1:07:17मटेरियल इंटरमीडिएट्स और फाइनल प्रोडक्ट
- 1:07:20की स्पेसिफिकेशन यानी कि स्पेसिफिकेशन
- 1:07:22क्या होता है? कि जैसे जो पहले से ही
- 1:07:24फिक्स होता है। जैसे मान लो एक
- 1:07:26स्पेसिफिकेशन है कि रॉ मटेरियल हमारा 98%
- 1:07:29बिल्कुल वेट बाय वॉल्यूम बिल्कुल पे प्योर
- 1:07:32होना चाहिए। अब मान लो उसको चेंज करके 97
- 1:07:34कर दिया, 96 कर दिया या फिर 99 कर दिया।
- 1:07:37तो ये हमारा स्पेसिफिकेशन के साथ चेंजेस
- 1:07:40हो गए। ठीक है? डॉक्यूमेंटेशन में कोई
- 1:07:42चेंजेस हो गए। एसओपीस जो कि हमारा हर
- 1:07:44प्रोसीजर का एक फिक्स एसओपी होता है। अगर
- 1:07:47उसमें कोई चेंजेस हो सकते हैं। ठीक है? तो
- 1:07:48ये सारे हमारे एरिया ऑफ़ चेंज हैं कि
- 1:07:50कहां-कहां चेंज हो सकता है।
- 1:07:52मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस में हमारा चेंज
- 1:07:54हो सकता है। ठीक है? एडिशन हो सकता है या
- 1:07:55फिर जो है एलिमिनेशन हो सकता है। रॉ
- 1:07:57मटेरियल में हमारा चेंज हो सकता है। ठीक
- 1:07:58है? कि हमारा जो है कोई रॉ मटेरियल में
- 1:08:00कोई और चीज़ ऐड हो गई या फिर कोई जरूरी चीज़
- 1:08:02छूट भी सकती है। ओमिशन हो गया।
- 1:08:04स्पेसिफिकेशन हो गया रॉ मटेरियल का। तो
- 1:08:06यहां पे भी वही हो गया कि स्पेसिफाइड
- 1:08:07लिमिट में कोई चेंजेस हो सकते हैं।
- 1:08:09क्वांटिटेटिव एस्पेक्ट हो गया। ठीक है? कि
- 1:08:11रॉ मटेरियल की क्वांटिटी में भी चेंज हो
- 1:08:12सकता है कि पहले इतना लिया जा रहा था, बाद
- 1:08:14में कम कर दिया, ज्यादा कर दिया।
- 1:08:16मैन्युफैक्चरिंग कंडीशन, स्टोरेज कंडीशन,
- 1:08:18टेस्टिंग, वैलिडेशन प्रोसीजर इन सब में भी
- 1:08:20चेंजज़ हो सकते हैं। और इसके अलावा
- 1:08:22इंजीनियरिंग की बात करें तो हमारा
- 1:08:23इक्विपमेंट जो इक्विपमेंट हम लोग यूज़ कर
- 1:08:25रहे हैं, उसमें चेंजेस हो सकते हैं। ठीक
- 1:08:26है? वैलिडेशन जो इक्विपमेंट को वैलिडेट
- 1:08:29करने के जो मेथड्स होते हैं, उसमें भी
- 1:08:30चेंजेस हो सकते हैं। इक्विपमेंट का हो
- 1:08:32सकता है कोई पार्ट चेंज हो जाए। वर्किंग
- 1:08:33या फिर डिज़ाइन लेआउट चेंज हो जाए।
- 1:08:34सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और चेंज इन एनी
- 1:08:36प्रोग्राम। ठीक है? तो जो सॉफ्टवेयर
- 1:08:38प्रोग्राम्स होते हैं वहां पे भी चेंजेस
- 1:08:39हो सकते हैं। तो देखो ये था हमारा एरिया
- 1:08:42ऑफ़ चेंज कि कहां-कहां चेंज परफॉर्म किए जा
- 1:08:44सकते हैं। अब अगर बेनिफिट्स की बात करें
- 1:08:46चेंज कंट्रोल की कि भाई अगर जो चेंज है तो
- 1:08:48उस पे हमारा जो कंट्रोल होता है रेगुलेटरी
- 1:08:50अथॉरिटी का उसके बेनिफिट्स क्या-क्या हैं?
- 1:08:51तो भाई देखो जब जब चेंज पे कंट्रोल होता
- 1:08:55है रेगुलेटरी अथॉरिटी का तो कोई भी चेंज
- 1:08:57हो रहा है तो उसको पहले वो इवैलुएट करेंगे
- 1:08:58और फिर ही उसका अप्रूवल देंगे जिससे
- 1:09:00प्रोडक्ट की क्वालिटी यहां पे कंसिस्टेंट
- 1:09:03बनी रहेगी।
- 1:09:04है ना? क्योंकि अगर प्रोडक्ट की क्वालिटी
- 1:09:07पर उस चेंज से कोई इफेक्ट होगा तो उसको
- 1:09:09अप्रूवल मिलेगा ही नहीं। तो यहां पर एक कह
- 1:09:11सकते हो प्रोडक्ट की क्वालिटी यहां पे
- 1:09:13कंसिस्टेंट मेंटेन रहती है। अनऑथराइज़्ड
- 1:09:15चेंज यहां पे प्रिवेंट होते हैं। भाई देखो
- 1:09:17जो चेंज होने वाला होगा उसी का अप्रूवल
- 1:09:19मिलेगा। जीएमपी यहां पे मेंटेन रहता है।
- 1:09:21रेगुलेटरी कंप्लायंस मेंटेन रहता है। ठीक
- 1:09:22है? रिस्क हमारा यहां पे आइडेंटिफाई हो
- 1:09:24जाता है। कंट्रोल हो जाता है। देखो रिस्क
- 1:09:26मतलब चेंज हम लोग क्यों करेंगे? चेंज हम
- 1:09:28लोग तब करेंगे जब हमें दिख रहा है कि जो
- 1:09:29ऑलरेडी जो चीजें चल रही है उसकी वजह से
- 1:09:31कोई प्रॉब्लम हो सकती है। तो अगर कोई
- 1:09:33जरूरी चेंज है तो भाई वो जरूरी भी है
- 1:09:35होना। उसके बाद प्रोसेस की रिलायबिलिटी और
- 1:09:37सेफ्टी यहां पे इंप्रूव होती है और प्रॉपर
- 1:09:39डॉक्यूमेंटेशन और ट्रेसेबिलिटी। तो वही
- 1:09:41चीज़ है कि हमारा जो भी चेंज है उसको हम
- 1:09:43लोग यहां पे ट्रेस कर सकते हैं कि कहां
- 1:09:44हुआ, क्यों हुआ, कैसे हुआ, उसकी वजह से
- 1:09:46क्या इफ़ेक्ट हुआ। तो ये सारी चीजें हमें
- 1:09:48यहां पे चेंज कंट्रोल के बेनिफिट में
- 1:09:49देखने को मिलती है। तो ये था हमारा यहां
- 1:09:52पे चेंज कंट्रोल। और अब हम लोग यहां पे
- 1:09:54बात करते हैं अपने बहुत बहुत ज्यादा
- 1:09:56इंपॉर्टेंट टॉपिक के बारे में जो कि हमारा
- 1:09:58हो जाता है आईएसओ 9000 तो बात करें हम लोग
- 1:10:01यहां पे आईएसओ 9000 के बारे में अब देखो
- 1:10:04आईएसओ क्या होता है आईएसओ होता है हमारा
- 1:10:06यहां पे इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर
- 1:10:08स्टैंडर्डाइजेशन
- 1:10:09अब यहां पे देखो ये आईएसओ अपने बहुत
- 1:10:11अलग-अलग फील्ड में सर्टिफिकेट देती है
- 1:10:13जैसे ये जो 9000 का सर्टिफिकेट है ये
- 1:10:15आईएसओ देती है क्वालिटी के फील्ड में इसी
- 1:10:18तरीके से एक होता है आईएसओ 14000 का
- 1:10:20सर्टिफिकेट ये हमारा आईएसओ देती है
- 1:10:22एनवायरमेंटल फील्ड के सर्टिफिकेट में। ठीक
- 1:10:23है? मतलब एनवायरमेंटल फील्ड में। तो अभी
- 1:10:26आईएसओ 14,000 को भी देखेंगे। बट अभी
- 1:10:28फिलहाल के लिए हम लोग उस 9000 की बात करते
- 1:10:30हैं। तो सिंपली समझो आईएसओ 9000 हमारा वो
- 1:10:33सर्टिफिकेट है जो कि आईएसओ उन कंपनी या
- 1:10:36फिर उन इंडस्ट्री को प्रोवाइड करता है जो
- 1:10:38कि अपने प्रोडक्ट की क्वालिटी को बहुत
- 1:10:40अच्छे से मेंटेन करके रखती हैं। जो सारे
- 1:10:42रूल्स एंड रेगुलेशंस फॉलो करती हैं
- 1:10:44क्वालिटी को मेंटेन करने के लिए। उनको
- 1:10:46यहां पे आईएसओ 9000 का सर्टिफिकेट मिलता
- 1:10:48है। तो यहां पे देखो सबसे पहली बात अगर हम
- 1:10:51लोग बात करें। तो ये सर्टिफिकेट के लिए
- 1:10:53यहां पे क्या होता है कि इसके अंदर हमारी
- 1:10:54कुछ गाइडलाइंस होती है, रिक्वायरमेंट्स
- 1:10:56होती हैं। जब इन गाइडलाइंस और
- 1:10:57रिक्वायरमेंट को हमारा कोई कंपनी फिल कर
- 1:10:59लेती है तो उसको यहां पे सर्टिफिकेट मिलता
- 1:11:00है। अब एक चीज समझो जो आईएसओ 9000 का
- 1:11:03सर्टिफिकेट है ये आएo 9000 के फॉर्म में
- 1:11:06नहीं मिलता है बल्कि सर्टिफिकेट इसका
- 1:11:07मिलता है आईएसओ 901 के फॉर्म में। अब यहां
- 1:11:10पे देखो ये आईएसओ 901 के बाद में भी यहां
- 1:11:12पे कुछ हमारे नंबर्स मेंशन होते हैं। जैसे
- 1:11:14कि अभी के लिए जो लेटेस्ट चल रहा है वो है
- 1:11:16हमारा 2015। अब यहां पे 2015 का मतलब है
- 1:11:19कि इसका जो रिवीजन है लेटेस्ट वो 2015 में
- 1:11:22हुआ था। जैसे इससे 2015 से पहले जो
- 1:11:24सर्टिफिकेट था वो यहां पे 901 टू 208 इस
- 1:11:28तरीके से इशू होता था। क्योंकि इससे पहले
- 1:11:30इसका रिवीजन 2008 में हुआ था। तो सिंपली
- 1:11:33समझो जो सर्टिफिकेट है वो 901 के फॉर्म
- 1:11:36में मिलता है। लेकिन जो गाइडलाइंस हैं और
- 1:11:38जो सारी चीजें हैं और जो ये सारा मतलब कह
- 1:11:41सकते हो एक आईएसओ 9000 का सारी चीजें हैं
- 1:11:43वो हमारी इसके अंदर आती हैं। मतलब अभी हम
- 1:11:45लोग देखेंगे ये हमारा एक फैमिली ऑफिस
- 1:11:47स्टैंडर्ड है जिसके अंदर हमारा बहुत सारे
- 1:11:49होते हैं। 90001 होता है 9004 भी होता है।
- 1:11:51तो उसको हम लोग देखेंगे। बाकी देखो मेन
- 1:11:53चीज वही है कि हमारा गाइडलाइंस और
- 1:11:55रिक्वायरमेंट जो है कह सकते हो प्रोवाइड
- 1:11:56करता है। इनको फुलफिल करने पे इसका
- 1:11:58सर्टिफिकेट दिया जाता है। और इंडस्ट्रियल
- 1:11:59फार्मेसी में हमारा प्रिंसिपल्स हैं जिनको
- 1:12:01अप्लाई करके यहां पे फार्मासटिकल प्रोडक्ट
- 1:12:03को यहां पे कंसिस्टेंटली जो है क्वालिटी
- 1:12:05सेफ्टी और एफिकसी के साथ मैन्युफैक्चर
- 1:12:07किया जा सकता है। अब अगर हम लोग यहां पे
- 1:12:09इसके ऑब्जेक्टिव्स की बात करें तो यहां पे
- 1:12:11देखो आईएसओ 9000 का ऑब्जेक्टिव क्या होता
- 1:12:13है कि जो भी प्रोडक्ट है ठीक है उसकी
- 1:12:16क्वालिटी मेंटेन हो क्योंकि तभी यहां पे
- 1:12:17इसका सर्टिफिकेट मिलेगा। कस्टमर
- 1:12:19सेटिस्फेक्शन इंप्रूव होती है अगर इसका
- 1:12:20सर्टिफिकेट मिला होता है। देखो इसका
- 1:12:22सर्टिफिकेट उन्हीं को मिलेगा जिनकी
- 1:12:23क्वालिटी बहुत अच्छी होगी। तो ऑलरेडी उनके
- 1:12:25अंदर ये सारी चीजें हो ही जाएंगी। है ना?
- 1:12:27क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम उनका बहुत
- 1:12:28अच्छा होगा। उन कंपनीज़ का उनके अंदर
- 1:12:30कंटीन्यूअस इंप्रूवमेंट देखने को मिलेगा।
- 1:12:32जो भी कंपनियां हैं वो रेगुलेटरी
- 1:12:34रिक्वायरमेंट के साथ यहां पे कंप्लाई
- 1:12:35करेंगी और उसके अलावा यहां पे एविडेंस
- 1:12:37बेस्ड डिसीजन मेकिंग। तो ये सारी चीजें जब
- 1:12:40होती है तो हमारा आईएसओ 9000 का
- 1:12:41सर्टिफिकेट मिलता है। अब देखो ये सारी
- 1:12:43चीजें क्या होती है? आईएसओ की गाइडलाइंस
- 1:12:45में मेंशन होती हैं। ठीक है? मतलब इसी
- 1:12:479000 ये जो देखो ये 9000 क्या है? एक 9000
- 1:12:50अब हम लोग यहां पे देखें तो आप लोग समझोगे
- 1:12:52थोड़ा समझना इस चीज को कि एक फैमिली ऑफ
- 1:12:54स्टैंडर्ड है। फैमिली ऑफ स्टैंडर्ड का
- 1:12:56मतलब ये नहीं कि इसके अंदर हमारे बहुत
- 1:12:57सारे कह सकते हो स्टैंडर्ड मिलते हैं।
- 1:12:59अच्छा यहां पे देखो ये 9000 नहीं बल्कि ये
- 1:13:029001 है वन। ठीक है? यही तो है एक्चुअली।
- 1:13:04तो इसी का हमें सर्टिफिकेट देखने को मिलता
- 1:13:06है। थोड़ा ध्यान से इसको आप नोट्स में भी
- 1:13:08सही कर लेना। अगर आप नोट्स पढ़ रहे हो तो
- 1:13:11ये 9001 है। नोट्स ऑलरेडी अपलोड हो चुके
- 1:13:13हैं तो थोड़ा आप देख लेना। ये 9001 है।
- 1:13:16बहुत इंपॉर्टेंट है। इसको ध्यान से समझना।
- 1:13:17देखो इसके अंदर हमारे कह सकते हो आज के
- 1:13:19दिन में करेंटली यहां पे चार स्टैंडर्ड
- 1:13:21देखने को मिलते हैं। अब कहीं-कहीं अगर आप
- 1:13:23लोग देखोगे तो आप लोग को ये इस तरीके से
- 1:13:25दिख रहा होगा। 9001 2 34 दिख रहा होगा। वो
- 1:13:28ओल्ड है। ठीक है? वो ओल्डर सिस्टम था। अभी
- 1:13:30उसके बारे में बात करेंगे। आज के दिन में
- 1:13:32जो लेटेस्ट सिस्टम है वो हमारा इस तरीके
- 1:13:34से हमें देखने को मिल रहा है। जहां पे
- 1:13:35हमें आईएसओ के अंदर जो है एक हमारा आईएसओ
- 1:13:389000 देखने को मिलता है। फिर हमें 90001
- 1:13:41फिर हमें 94 और उसके अलावा उसके बाद हमें
- 1:13:44देखने को मिलता है 1901। ठीक है? तो ये
- 1:13:46आईएसओ 9000 के चार कह सकते हो फैमिली है
- 1:13:49स्टैंडर्ड की। अब इसमें ध्यान से समझना जो
- 1:13:529000 है इसके अंदर क्या होता है? इसके
- 1:13:54अंदर हमारा क्यूएमएस मतलब कि क्वालिटी
- 1:13:56मैनेजमेंट सिस्टम यानी एक कंपनी कैसे अपने
- 1:13:58अंदर इंडस्ट्री कैसे अपने प्रोडक्ट्स की
- 1:14:01क्वालिटी को मेंटेन करेगी। तो जो भी
- 1:14:02क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम के प्रिंसिपल्स
- 1:14:04होते हैं तो उनकी उनके रिलेटेड जो भी
- 1:14:06टर्म्स होते हैं उनकी वोकैबलरी वोकैबलरी
- 1:14:09का मतलब क्या है कि जैसे मान लो एक एक
- 1:14:11हमारा कह सकते हो एक कह सकते हो मान लो एक
- 1:14:14गाइडलाइन मेंशन है। अब उस गाइडलाइंस में
- 1:14:16हमारे बहुत सारे वर्ड हैं। तो उन सभी
- 1:14:17वर्ड्स की जो मीनिंग वगैरह होती है कि
- 1:14:19उनका क्या मतलब है? वो सारा हमारा यहां पे
- 1:14:21मेंशन होता है। ठीक है? इसमें फंडामेंटल्स
- 1:14:23होते हैं। पहली बात कि आईएसओ 9000 का क्या
- 1:14:26फंडामेंटल है? क्या इसका ऐ है? ठीक है? और
- 1:14:28उसके बाद यहां पे जो हमारे वर्ड्स यूज़ हुए
- 1:14:31हैं इस आईएसओ 9000 में उन सभी की उन सभी
- 1:14:34का जो मीनिंग होता है वो इसके अंदर मेंशन
- 1:14:35होता है। अब अगर देखो इसके बारे में बात
- 1:14:37कर इसके बारे में बात कर रहे हैं। 904 की
- 1:14:40बात करें तो इसके अंदर हमारी गाइडलाइंस
- 1:14:42मेंशन होती हैं ताकि जो है क्यूएमएस को
- 1:14:44कैसे यहां पे एक्सेस किया जा सके कि कैसे
- 1:14:46क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम को मेंटेन किया
- 1:14:48जा सके। और न 1901 में क्या होता है कि
- 1:14:51हमारा ऑडिटिंग मैनेजमेंट सिस्टम की
- 1:14:53गाइडलाइंस मेंशन होती है कि अगर मान लो
- 1:14:55इंस्पेक्शन वगैरह होता है। ठीक है? तो
- 1:14:57इंस्पेक्शन को कैसे मैनेज करना है तो वो
- 1:14:59सारी चीजों की गाइडलाइंस हमारी यहां पे
- 1:15:01मेंशन होती है। अब ये जो 9001 है देखो
- 1:15:03यहां पे यही होता है। यही होता है हमारा
- 1:15:05सर्टिफाइड स्टैंडर्ड। यानी कि इसी का
- 1:15:07सर्टिफिकेट हमें जो है देखने को मिलता है
- 1:15:10क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम के अंदर। तो आप
- 1:15:13इतना समझो कि आईएसओ 9000 अगर किसी को मिला
- 1:15:15हुआ है तो इसका मतलब ये है कि जो
- 1:15:17सर्टिफिकेशन है वो 9001 का मिलता है। ठीक
- 1:15:20है? और बाकी जो बाकी तीन है ठीक है? इनके
- 1:15:22अंदर हमारी गाइडलाइंस वगैरह मेंशन होती है
- 1:15:24अलग-अलग चीजों के लिए और सारी क्वालिटी से
- 1:15:26रिलेटेड ही होंगी। थोड़ा सा इसको समझना
- 1:15:28जरूरी है। ठीक है? कुछ लोगों को समझ ही
- 1:15:29नहीं आता है। आई होप कि आप लोगों को समझ
- 1:15:31में आ रहा होगा। अब देखो अगर हम लोग इसकी
- 1:15:33हिस्ट्री को देखें तो भाई जो आईएसओ 9000
- 1:15:35था सबसे पहले इसको यहां पे 1987 में
- 1:15:37ओरिजिनली पब्लिश किया गया आईएसओ के थ्रू।
- 1:15:39उसके बाद इसमें रिवीजन देखो कब का हुआ।
- 1:15:411994 में इसमें पहला रिवीजन हुआ। 2000 में
- 1:15:44दूसरा रिवीज़ हुआ। अब देखो 2000 से पहले जो
- 1:15:47आईएसओ का फैमिली था वह हमारा इस तरीके से
- 1:15:49था। आईएसओ 9000, 9001, 92, 93। ठीक है? और
- 1:15:5494 भी शायद था। लेकिन 2000 बाद के बाद
- 1:15:57क्या हुआ कि इन तीनों को ही मिला के हमारा
- 1:15:5994 में कन्वर्ट कर दिया गया। ठीक है?
- 1:16:0394 में कन्वर्ट कर दिया गया। 208 में देखो
- 1:16:06क्या हुआ? 208 में हमारा जो है तीसरा
- 1:16:08रिवीजन देखने को मिला। यहां पे क्लेरिटी
- 1:16:10और कंपैटिबिलिटी हमारी मेंटेन करेगी आईएसओ
- 1:16:1314000 के साथ। अब यहां पे ध्यान से समझना।
- 1:16:15देखो एक होता है आईएसओ 9000। ठीक है?
- 1:16:18जिसको हम लोग अभी पढ़ रहे हैं। तो ये
- 1:16:20हमारा क्वालिटी के लिए दिया जाता है। और
- 1:16:22एक सर्टिफिकेट हमारा और भी होता है आईएसओ
- 1:16:2414,000। ये हमारा तब दिया जाता है जो
- 1:16:27कंपनी है जब वो एटमॉस्फियर को ध्यान में
- 1:16:30रखते हुए अपने प्रोडक्ट्स की
- 1:16:31मैन्युफैक्चरिंग करती है। यानी कि जब वो
- 1:16:33यहां पे यह भी ध्यान रखती है कि उसकी जो
- 1:16:34प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग है उससे
- 1:16:36एनवायरमेंट को बहुत ज्यादा नुकसान ना हो।
- 1:16:38यानी कि इको फ्रेंडली प्रोडक्ट्स होने
- 1:16:40चाहिए कंपनी के। तब यहां पे उसको मिलता है
- 1:16:42आईएसओ 14,000 का सर्टिफिकेट। तो एक अच्छी
- 1:16:44कंपनी कब मानी जाएगी? एक अच्छी कंपनी तब
- 1:16:47मानी जाएगी जब वो यहां पे अपने प्रोडक्ट
- 1:16:49की क्वालिटी को भी मेंटेन करे और साथ ही
- 1:16:51साथ एनवायरमेंट का भी ध्यान रखें। तो अगर
- 1:16:53कोई कंपनी एनवायरमेंट का भी ध्यान रखती है
- 1:16:55तो उसको यहां पे आईएसओ 14000 का
- 1:16:57सर्टिफिकेट मिलता है। अब जैसे आईएसओ 9000
- 1:16:59का सर्टिफिकेट यहां पे 90001 के फॉर्म में
- 1:17:02मिलता है उसी तरीके से 14000 का
- 1:17:04सर्टिफिकेट भी 1401 के फॉर्म में देखने को
- 1:17:07मिलता है। तो यहां पे देखो 208 में यहां
- 1:17:10पे ये बताया गया कि भाई देखो हमें कंपनी
- 1:17:13में क्या करना है कि प्रोडक्ट की क्वालिटी
- 1:17:15को तो मेंटेन करना ही है लेकिन उसके
- 1:17:17साथ-साथ एनवायरमेंट के साथ भी कह सकते हो
- 1:17:19कंप्ले करके चलना है। कंप्लायंस बनाकर
- 1:17:21चलना है।
- 1:17:23अब अगर हम लोग यहां पर 2015 की बात करें
- 1:17:25तो यहां पर हमारा जो सबसे लेटेस्ट रिवीजन
- 1:17:27है वो देखने को मिला। जहां पर इंट्रोड्यूस
- 1:17:29किया गया रिस्क बेस्ड थिंकिंग। देखो रिस्क
- 1:17:31बेस की रिस्क को ध्यान में रखते हुए हमें
- 1:17:33जो है प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग करनी
- 1:17:35है। जो भी रिस्क यहां पे आ सकते हैं उसको
- 1:17:37पहले से ही इवैलुएट कर लेना है और उनको
- 1:17:39पहले से ही सही करने की कोशिश करनी है और
- 1:17:41लीडरशिप पे भी फोकस किया गया है कि एक
- 1:17:42प्रॉपर लीडर होना चाहिए। अब आईएसओ 19000
- 1:17:45की बात करें तो आज के दिन में हमें इसके
- 1:17:47अंदर जो है 9000 900014 और 1901 ये सारे
- 1:17:51हमारी देखने को मिलते हैं जिनको हमने
- 1:17:53ऑलरेडी देखा। अब अगर हम लोग यहां पे आईएसओ
- 1:17:569000 के प्रिंसिपल्स की बात करें तो यहां
- 1:17:59पे देखो जो हमारा आईएसओ 9000 का प्रिंसिपल
- 1:18:01है तो उसके हमारे कुछ कोर कह सकते हो
- 1:18:04एलिमेंट्स होते हैं। जैसे कि पहला हो गया
- 1:18:05कस्टमर फोकस लीडरशिप एंगेजमेंट ऑफ पीपल
- 1:18:07प्रोसेस अप्रोच। तो ये सारे हैं। इनको
- 1:18:09एक-एक करके देखते हैं। देखो सिंपल है। वही
- 1:18:11सारी चीजें हैं। कस्टमर फोकस। कस्टमर फोकस
- 1:18:14का मतलब क्या है? कि भाई हमें कस्टमर को
- 1:18:15ध्यान में रखना है। है ना? उसके उसको
- 1:18:17सेटिस्फाई करने के लिए अपने प्रोडक्ट्स को
- 1:18:19बनाना है। लीडरशिप। तो यहां पे लीडरशिप पे
- 1:18:22भी आईएसओ में बहुत फोकस किया गया है कि एक
- 1:18:23प्रॉपर लीडरशिप होनी चाहिए जो सभी को साथ
- 1:18:26में लेके चले। है ना? ऐसा नहीं हो कि वो
- 1:18:28अपने ही फैसले को लेके चल रहा है। दूसरों
- 1:18:29की सुन ही नहीं रहा है कंपनी के अंदर। सभी
- 1:18:31एंप्लॉय एम एंप्लाइजस की जो है
- 1:18:33इन्वॉल्वमेंट होनी चाहिए किसी भी बड़े
- 1:18:35फैसले में। एंगेजमेंट ऑफ पीपल की बात करें
- 1:18:37तो यहां पे वही चीज है कि हर हर एक एंप्लई
- 1:18:40की इन्वॉल्वमेंट होनी चाहिए। सभी को
- 1:18:41मोटिवेट करते रहना चाहिए। सभी की एक
- 1:18:43प्रॉपर रिस्पांसिबिलिटी होनी चाहिए। है
- 1:18:44ना? और सभी का जो है हमारा कंट्रीब्यूशन
- 1:18:47होना चाहिए इंप्रूवमेंट ऑफ प्रोडक्ट की
- 1:18:48क्वालिटी में। प्रोसेस अप्रोच की बात करें
- 1:18:51तो यहां पे वही चीज आ जाती है कि हमें
- 1:18:53फाइनल प्रोडक्ट की क्वालिटी नहीं बल्कि हर
- 1:18:56एक प्रोसेस हर एक स्टेप में क्वालिटी को
- 1:18:58मेंटेन करते हुए चलना है ताकि जो हमारा
- 1:19:00फाइनल प्रोडक्ट है वो हमें जो है बिल्कुल
- 1:19:02वैसा ही देखने को मिले जैसा हम चाहते हैं।
- 1:19:04यानी कि डिजायर्ड आउटकम हमें देखने को
- 1:19:06मिले। इंप्रूवमेंट की बात करें तो यहां पे
- 1:19:08देखो वही चीज़ है कि कंटीन्यूअस
- 1:19:09इंप्रूवमेंट हमें मेंटेन करके रहना है।
- 1:19:11हमें कोशिश करनी है कि हम जा हम जो है हर
- 1:19:14दिन इंप्रूव करते रहें। बेसिकली सिक्स
- 1:19:16सिग्मा सिक्स सिग्मा को हमें अचीव करने की
- 1:19:18कोशिश करते रहनी है। और बाकी यहां पर
- 1:19:20इनोवेशन और अप्टेशन को भी यहां पर इनकरेज
- 1:19:23करता है। और उसके बाद देखो एविडेंस बेस्ड
- 1:19:25डिसीजन मेकिंग तो यहां पे भी वही चीज़ आ
- 1:19:27जाती है कि मतलब ऐसा नहीं है कि एजम्पशन
- 1:19:29के बेस पे डिसीजन ले लेना है। जो एविडेंस
- 1:19:31है प्रॉपर डाटा जिसका अवेलेबल है। ठीक है?
- 1:19:34साइंटिफिक हो वैसा ही डिसीजन हमें लेना है
- 1:19:36किसी भी इंपॉर्टेंट फैसले में। और रिलेशन
- 1:19:38रिलेशन मैनेजमेंट की बात करें तो हमें जो
- 1:19:40भी सप्लायर है, कस्टमर है, स्टेक होल्डर
- 1:19:42है उन सभी के साथ एक गुड रिलेशनशिप मेंटेन
- 1:19:44करके रहना है क्योंकि ये हमारा सक्सेस और
- 1:19:46वैल्यू क्रिएशन को सपोर्ट करता है। अब
- 1:19:49यहां पे अगर हम बुक बेनिफिट्स की बात करें
- 1:19:51तो कि कि अगर कोई कंपनी यहां पे आईएसओ
- 1:19:539000 के प्रिंसिपल्स को अप्लाई करती है
- 1:19:55अपनी कंपनी में और अगर किसी कंपनी को यहां
- 1:19:57पे इसका सर्टिफिकेट मिल जाता है तो उसको
- 1:19:58क्या-क्या बेनिफिट मिलेंगे? तो सबसे पहला
- 1:20:00तो भाई देखो उसकी प्रोडक्ट की क्वालिटी
- 1:20:02बहुत ही कंसिस्टेंट हो जाएगी। है ना? ना
- 1:20:04जीएमपी से कंपयंस बढ़ जाएगा और यहां पे
- 1:20:06प्रोसेस का स्टैंडर्डाइजेशन यहां पे
- 1:20:07प्रमोट होगा। स्टैंडर्ड स्टैंडर्डाइजेशन
- 1:20:10का मतलब क्या है? कि एक जो फिक्स
- 1:20:12स्टैंडर्ड है उसी के अकॉर्डिंग सारी चीजें
- 1:20:14हो। उसके बाद डॉक्यूमेंटेशन यहां पे
- 1:20:16एनहांस होगा। ट्रेसेबिलिटी यहां पे बढ़ेगी।
- 1:20:18ठीक है? कि जो भी चेंजेस हुए हैं या फिर
- 1:20:20कोई भी अगर चीजें होती है तो उसको ट्रेस
- 1:20:22किया जा सकता है। और यहां पे रेगुलेटरी
- 1:20:24इंस्पेक्शन भी यहां पे ऐड होगा। है कि
- 1:20:26टाइम टाइम पे एक रेगुलेटरी इंस्पेक्शन
- 1:20:27होता रहता है ताकि देखा जा सके कि जो
- 1:20:29सर्टिफिकेट दिया गया है तो कंपनी उसके
- 1:20:31अकॉर्डिंग चल रही है कि नहीं चल रही है।
- 1:20:33ऐसा तो नहीं है कि सिर्फ एक टाइम उसको
- 1:20:34सर्टिफिकेट मिल गया फिर बाद में उसने कुछ
- 1:20:36गड़बड़ कर दी। तो यहां पे प्रॉपर
- 1:20:37इंस्पेक्शन होता रहता है जो हमारा आईएसओ
- 1:20:39की टीम है उसके थ्रू। उसके बाद यहां पे
- 1:20:41क्वालिटी ओरिएंटेड ऑर्गेनाइजेशनल कल्चर
- 1:20:44यहां पे इनकरेज होता है कि पूरे
- 1:20:45ऑर्गेनाइजेशन में क्वालिटी का कल्चर
- 1:20:47इंप्रूव होता है कि क्वालिटी बना के ही
- 1:20:48रखनी है। एक फ्रेमवर्क यहां पे कंटीनुअल
- 1:20:51इंप्रूवमेंट यानी कि एक कंटिन्यू
- 1:20:52इंप्रूवमेंट हमें देखने को मिलता है। और
- 1:20:54उसके बाद यहां पे देखो इंटरनेशनल मार्केट
- 1:20:56का भी इंटरनेशनल मार्केट में भी इसका
- 1:20:58फैसिलिटी बढ़ जाती है। क्योंकि क्योंकि
- 1:21:00भाई यहां पे क्या है? आईएसओ 9000 एक
- 1:21:02ग्लोबल रिकॉग्नाइज्ड सर्टिफिकेशन है। तो
- 1:21:04अगर इसका सर्टिफिकेशन सर्टिफिकेशन किसी
- 1:21:06कंपनी को मिल गया तो वहां पे क्या होगा?
- 1:21:08वहां पे उसके जो प्रोडक्ट्स हैं वो
- 1:21:10इंटरनेशनल मार्केट में भी यहां पे
- 1:21:12रिकॉग्नाइज किए जाएंगे। तो ये हमारा
- 1:21:13बेनिफिट हो जाता है आईएसओ 9000 का। और अब
- 1:21:16हम लोग यहां पे बात करते हैं अपने आईएसओ
- 1:21:1714,000 के बारे में। अब देखो आईएसओ 14,000
- 1:21:20की बात करें तो यहां पे ये भी हमारा एक
- 1:21:21सीरीज ऑफ़ इंटरनेशनल स्टैंडर्ड है जो कि
- 1:21:24हमारा आईएसओ ने डेवलप किया एनवायरमेंटल
- 1:21:26मैनेजमेंट सिस्टम को फोकस करते हुए। यानी
- 1:21:28यहां पे देखो दी स्टैंडर्ड हेल्प
- 1:21:30ऑर्गेनाइजेशन मिनिमाइज नेगेटिव
- 1:21:32एनवायरमेंटल इंपैक्ट फ्रॉम देयर ऑपरेशन।
- 1:21:34यानी यहां पे यह सर्टिफिकेट तब मिलता है
- 1:21:36जब यहां पे कोई कंपनी ऐसा काम करती है
- 1:21:38जिससे एनवायरमेंट को भी कोई नुकसान ना हो।
- 1:21:40उसके प्रोडक्ट की क्वालिटी भी मेंटेन हो।
- 1:21:42इंडस्ट्रियल फार्मेसी में आइसो 14000
- 1:21:44हमारा एक स्ट्रक्चर अप्रोच प्रोवाइड करता
- 1:21:45है कि कैसे यहां पे वेस्ट का डिस्पोजल
- 1:21:47होना चाहिए। एनर्जी को कैसे कंज्यूम करना
- 1:21:49है। ठीक है? केमिकल को कैसे हैंडल करना
- 1:21:51है, पोलशन को कैसे कंट्रोल करना है।
- 1:21:52व्हाइल मेंटेनिंग हाई स्टैंडर्ड ऑफ़
- 1:21:54क्वालिटी। यानी कि हमें प्रोडक्ट्स में
- 1:21:56क्वालिटी के साथ-साथ कैसे एनवायरमेंट का
- 1:21:58भी ध्यान रखना है। उसके रिगार्डिंग जो भी
- 1:22:00गाइडलाइंस होती हैं वो आईएसओ 14,000 के
- 1:22:02अंदर मेंशन होती है। और अगर उन गाइडलाइंस
- 1:22:04को कंपनी फॉलो करती है तो यहां पे आईएसओ
- 1:22:06140001 का सर्टिफिकेट उसे देखने को मिलता
- 1:22:09है। अब अगर हम लोग यहां पे इसके
- 1:22:10ऑब्जेक्टिव्स की बात करें तो यहां पे वही
- 1:22:12चीज़ है कि एनवायरमेंटल पोलशन को कंट्रोल
- 1:22:14करना। ठीक है? नेशनल और इंटरनेशनल
- 1:22:16एनवायरमेंट रेगुलेशन के साथ कंप्ल्लाई
- 1:22:17करना। उसके बाद यहां पे नेचुरल रिसोर्सेज
- 1:22:19का एफिशिएंट यूज़ करना। हज़ार्डियस यानी कि
- 1:22:22जो बहुत ही हार्मफुल केमिकल है उनका यहां
- 1:22:24पे कह सकते हो कंटैमिनेशन यानी उनसे होने
- 1:22:27वाले जो भी प्रदूषण है नुकसान है उनको
- 1:22:29रोकना कम करना और उसके बाद यहां पे देखो
- 1:22:33जो कॉर्पोरेट एनवायरमेंटल रिस्पांसिबिलिटी
- 1:22:35है। ठीक है? उसको डेमोंस्ट्रेट करना कि
- 1:22:37भाई जो भी कॉर्पोरेट है उसकी एनवायरमेंट
- 1:22:39के प्रति भी रिस्पोंसिबिलिटी है। यानी ऐसा
- 1:22:41नहीं कर सकते हो कि आप कुछ भी प्रोडक्ट
- 1:22:42बनाए जा रहे हो जिससे एनवायरमेंट को बहुत
- 1:22:44ज्यादा हार्म हो और उसके बाद एनवायरमेंटल
- 1:22:46मैनेजमेंट सिस्टम को पूरे क्यूएमएस के साथ
- 1:22:48यहां पे इंटीग्रेट करना कि हमें क्वालिटी
- 1:22:50मैनेजमेंट सिस्टम के साथ-साथ एनवायरमेंटल
- 1:22:52मैनेजमेंट सिस्टम को भी ध्यान में रखते
- 1:22:54हुए चलना है। तो इन दोनों को ही ध्यान में
- 1:22:55रखते हुए यहां पे ऑब्जेक्ट आईएसओ 14,000
- 1:22:58को जो है सबसे पहले डेवलप किया गया और फिर
- 1:23:00यहां पे जो कंपनी इसको फॉलो करती है उसका
- 1:23:02सर्टिफिकेट इसको दिया गया। अब देखो अगर हम
- 1:23:04लोग यहां पे इस आईएसओ 14000 के फैमिली ऑफ़
- 1:23:06स्टैंडर्ड्स की बात करें तो भाई इसके अंदर
- 1:23:08तो हमें बहुत सारे कह सकते हो स्टैंडर्ड
- 1:23:10देखने को मिलते हैं। जैसे सबसे पहला हमारा
- 1:23:12आ जाता है आईएसओ 140001 तो ये हमारा सबसे
- 1:23:15मेन होता है। यानी यही हमारा कह सकते हो
- 1:23:17इसी का सर्टिफिकेट कंपनी को मिलता है जब
- 1:23:19वो एनवायरमेंट की गाइडलाइंस को मेंटेन
- 1:23:22करके रखती हैं। तो सर्टिफिकेट अगर किसी को
- 1:23:24मिला हुआ है एसओ 14000 का तो वो कैसे
- 1:23:25मिलता है? वो मिलता है 140001 का। तो यहां
- 1:23:28पे भी इसका जो लेटेस्ट रिवीज़न है वह 2015
- 1:23:31में देखने को मिला और इसमें एक अमेंडमेंट
- 1:23:33भी आया था 201 2024 के अंदर और उसके बाद
- 1:23:36अगर हम लोग यहां पे बात करें तो भाई देखो
- 1:23:38इसके बाद हमारा 144 5 6 15 20 24 25 31 तो
- 1:23:43इस तरीके से फिर इसके बहुत सारे स्टैंडर्ड
- 1:23:44हमें देखने को मिलते हैं। अब अगर आप लोग
- 1:23:46यहां पे देखोगे ना तो कहीं-कहीं आप लोग को
- 1:23:49इसके अलावा कुछ और स्टैंडर्ड भी देखने को
- 1:23:51मिलेंगे। बट ये मुझे थोड़ा सा सही लगा जो
- 1:23:53कि दो तीन जगह मुझे कॉमन देखने को मिला।
- 1:23:55तो यहां पे इतना मैं हमने इंक्लूड कर लिया
- 1:23:57है। अब यहां पे क्या आप लोग को ये सभी लिख
- 1:23:59के आना है? नहीं आप लोग इसमें से दो चार
- 1:24:01लिख देना। ठीक है? उसके बाद लिख देना कि
- 1:24:03एटसेट्रा तो इतना ही क्या ही आप याद
- 1:24:05करोगे। तो अगर हम लोग यहां पे फिर भी
- 1:24:07थोड़ा सा देखें कि हर एक चीज क्या बताना
- 1:24:09चाह रहे हैं। तो देखो 14001 तो सबसे पहली
- 1:24:11बात यही हमारा होता है एनवायरमेंटल
- 1:24:13मैनेजमेंट सिस्टम के रिक्वायरमेंट विद
- 1:24:15गाइडेंस। ठीक है? तो इसी का सर्टिफिकेट
- 1:24:16मिलता है और इसी में सारी गाइडेंस होती
- 1:24:18हैं। उसके बाद 144 में हमारा जनरल
- 1:24:20गाइडलाइंस होती है इंप्लीमेंटेशन कि अगर
- 1:24:23हमें जो है आईएसओ 140001 को इंप्लीमेंट
- 1:24:26करना है अपने अंदर तो कैसे उसकी क्या-क्या
- 1:24:28जनरल गाइडलाइंस होती है वो इसके अंदर
- 1:24:30मेंशन होती हैं। उसके बाद यहां पे 145 में
- 1:24:32क्या होता है? गाइडलाइंस फॉर फ्लेक्सिबल
- 1:24:34अप्रोच टू फेस्ड। तो मान लो एक बार में
- 1:24:36अगर कोई कंपनी एक बार में जो है
- 1:24:38एनवायरमेंट मैनेजमेंट सिस्टम को
- 1:24:40इंप्लीमेंट नहीं कर पा रही है तो अगर वो
- 1:24:42डिफरेंट-डिफरेंट फेस में करे तो जो फेस्ड
- 1:24:44इंप्लीमेंटेशन है उसकी गाइडलाइंस हमारी
- 1:24:46इसके अंदर मेंशन होती हैं। उसके बाद देखो
- 1:24:48यहां पे अब अब यहां पे सिक्स वाले की बात
- 1:24:50करें तो सिक्स में क्या होता है हमारा
- 1:24:52इनकर्पोरेटिंग तो अगर कोई इको फ्रेंडली
- 1:24:54यहां पे प्रोडक्ट बनाने हैं इको डिज़ाइन
- 1:24:56इको डिडन का मतलब जो इको फ्रेंडली डिज़
- 1:24:58होती हैं प्रोडक्ट्स होते हैं तो उसके
- 1:25:00रिगार्डिंग जो गाइडलाइंस है वो इसके अंदर
- 1:25:01होती हैं। फिर 15 की बात करें, तो इसके
- 1:25:03अंदर हमारा एनवायरनमेंटल असेसमेंट ऑफ़। तो,
- 1:25:05यहां पे देखो, जो भी साइट्स ऑफ़
- 1:25:07ऑर्गेनाइज़ेशन है, यानी जो मैन्युफ़ैक्चरिंग
- 1:25:09साइट है, कंपनी जहां पे लोकेटेड है, तो
- 1:25:11उसका जो असेसमेंट होता है कि भाई वह किस
- 1:25:14जगह पे है, ठीक है? उससे एनवायरमेंट को
- 1:25:15कितना नुकसान हो रहा है। तो, उसका जो
- 1:25:17असेसमेंट होता है, वह यहां पे 14 2015
- 1:25:19मेंशन होता है। कि कैसे असेसमेंट कैसे
- 1:25:22हमें इंस्पेक्ट करना है साइट्स को। है ना?
- 1:25:24मतलब कि बेसिकली जो भी अथॉरिटीज होती हैं
- 1:25:27आईएसओ की तो उनको कैसे एक्सेस एक्सेस करना
- 1:25:29है साइट्स को। तो वो वो यहां पे इसके अंदर
- 1:25:32मेंशन होता है। 1420 की बात करें तो यहां
- 1:25:34पे हमारा एनवायरमेंटल लेबल्स। तो यहां पे
- 1:25:36क्या होता है कि जैसे कुछ-कुछ कंपनियां
- 1:25:38क्या होती है जब वो बहुत अच्छे प्रोडक्ट
- 1:25:40बनाते हैं मतलब कह सकते हो अच्छे क्या ऐसे
- 1:25:42प्रोडक्ट बनाते हैं जो कि एनवायरमेंट को
- 1:25:44ज्यादा हार्म नहीं करते हैं तो वो अपने
- 1:25:46प्रोडक्ट्स में यहां पे कुछ एनवायरमेंटल
- 1:25:47लेबल्स को चिपका देते हैं कि इको
- 1:25:49फ्रेंडली। तो वो जो लेबल्स वगैरह होते हैं
- 1:25:51डिक्लेरेशंस होते हैं वो उनकी जनरल
- 1:25:53प्रिंसिपल्स वगैरह इसमें मेंशन होते हैं।
- 1:25:54फिर यहां पे देखो फिर हमारा आता है टाइप
- 1:25:56वन एनवायरमेंटल लेबलिंग। तो ये हमारा कह
- 1:25:58सकते हो एनवायरमेंटल लेबलिंग यहां पे भी
- 1:26:00है। तो ये हमारी टाइप वन होती है। ठीक है?
- 1:26:02इसके भी हमारे टाइप्स होते हैं। तो इनके
- 1:26:03प्रिंसिपल एंड प्रोसीजर्स यहां पे इसमें
- 1:26:0624 में मेंशन होते हैं। 25 की बात करें तो
- 1:26:08इसके अंदर हमारा टाइप थ्री एनवायरमेंटल
- 1:26:11डिक्लेरेशंस होता है। मतलब कि जो हमारी
- 1:26:13कंपनी है वो एनवायरमेंट को किस तरीके से
- 1:26:15कह सकते हो हार्म कर रही है या फिर कितना
- 1:26:17नहीं हार्म कर रही हो। उसका जो डिक्लेरेशन
- 1:26:19होता है वह यहां पे इसके अंदर होता है।
- 1:26:21उसके बाद 1431 की बात करें तो इसमें हमारा
- 1:26:25एक प्रोडक्ट का लाइफ़ साइकिल असेसमेंट होता
- 1:26:27है। मतलब देखो मान लो एक प्रोडक्ट है। ठीक
- 1:26:29है? तो वो बनने से लेकर ठीक है? मतलब अपने
- 1:26:32रॉ मटेरियल से से लेकर और फाइनल प्रोडक्ट
- 1:26:36डेवलपमेंट तक उसने एनवायरमेंट को कितना
- 1:26:38हार्म किया। ठीक है? या फिर कितनी गैस को
- 1:26:41इमिट करी या फिर कितना उसने एनवायरमेंट को
- 1:26:44अफेक्ट किया। तो उसके जो प्रिंसिपल्स एंड
- 1:26:46फ्रेमवर्क होते हैं वो इसके अंदर होते हैं
- 1:26:48और उसके बाद इसी का जो रिक्वायरमेंट और
- 1:26:50गाइडलाइंस होते हैं कि भाई कितना होना
- 1:26:52चाहिए, कितना मैक्स होना चाहिए वो यहां पे
- 1:26:54इसके अंदर मेंशन होता है किसमें? 14044
- 1:26:56में। फिर 046 की बात करें तो हमारा यहां
- 1:26:59पे इसमें वाटर फुटप्रिंट। तो एक प्रोडक्ट
- 1:27:02यहां पे अपने पूरे लाइफ साइकिल में कितना
- 1:27:04वाटर कंज्यूम कर रहा है। ठीक है? उसके
- 1:27:05क्या प्रिंसिपल्स होते हैं? रिक्वायरमेंट
- 1:27:06होते हैं, गाइडलाइंस होती हैं वो यहां पे
- 1:27:08इसके अंदर होती हैं। फिर 50 की बात करें
- 1:27:10तो 50 में हमारा एनवायरमेंटल मैनेजमेंट।
- 1:27:12तो यहां पे देखो इस पूरे गाइडलाइंस की जो
- 1:27:14वोकैबलरी होती है कि इसमें कौन-कौन से
- 1:27:16वर्ड्स यूज़ किए गए उनका क्या मतलब है वो
- 1:27:18यहां पे इसके अंदर मेंशन होता है। फिर
- 1:27:20हमारा 063 आता है तो इसके अंदर हमारा कह
- 1:27:22सकते हो एनवायरमेंटल कम्युनिकेशन यानी कि
- 1:27:25कैसे कैसे अपने जो एक कंपनी है ठीक है तो
- 1:27:28कैसे अपने एंप्लाइजज़ को यहां पे
- 1:27:29एनवायरमेंट के बारे में बताना है। कैसे
- 1:27:31उनसे कम्युनिकेट करना है उसकी जो
- 1:27:33गाइडलाइंस और एग्जांपल्स हैं वो यहां पे
- 1:27:34इसके अंदर होते हैं। फिर देखो एक होता है
- 1:27:36ग्रीन हाउस गैस। तो देखो ग्रीन हाउस गैस
- 1:27:38क्या होता जो हमारा CO2, मेथेन वगैरह होती
- 1:27:40हैं, इनको हम लोग ग्रीन हाउस गैसेज़ बोलते
- 1:27:42हैं। तो जो हमारा कोई प्रोडक्ट है, ठीक
- 1:27:45है? वो कितना CO2 और मेथेन को इमिट कर रहा
- 1:27:48है अपने पूरे लाइफ साइकिल में। तो वो
- 1:27:50हमारा ग्रीन हाउस गैसेज में आ जाता है। तो
- 1:27:52इसका जो कह सकते हो क्वांटिफिकेशन होता
- 1:27:54है, रिपोर्टिंग होती है वो यहां पे इसमें
- 1:27:5664 में मेंशन होती है। और जो प्रोजेक्ट
- 1:27:58लेवल यानी कि हर एक जैसे क्या होता है कि
- 1:28:01एक कंपनी में बहुत सारे प्रोजेक्ट होते
- 1:28:02हैं। तो पर प्रोजेक्ट में कितना ग्रीन
- 1:28:04हाउस गैस इमिट हुआ। ठीक है? और या फिर
- 1:28:06कितना उसमें रिडक्शन हो पा रहा है। कितना
- 1:28:08कम होता जा रहा है टाइम टाइम पे। तो उसका
- 1:28:11जो उसकी जो गाइडलाइंस होती है वो यहां पे
- 1:28:1364 में मेंशन होती है। फिर यहां पे देखो
- 1:28:1564 के ही हमारे जो है देखो 64 के ही हमारे
- 1:28:18यहां पे तीन पार्ट है। 1 2 3 और उसके बाद
- 1:28:21यहां पे थर्ड पार्ट में क्या मेंशन होता
- 1:28:22है? हमारा वेरिफिकेशन या फिर वैलिडेशन
- 1:28:24होता है। ठीक है? गाइडेंस का और उसके बाद
- 1:28:2667 में क्या होता है कि हमारा प्रोडक्ट
- 1:28:28प्रोडक्ट का कार्बन तो कितना कार्बन इसने
- 1:28:30यहां पे इमिट किया उसका जो यहां पे
- 1:28:31फुटप्रिंट होता है वो यहां पे इसमें हमारे
- 1:28:3367 में मेंशन होता है। तो ये हमारी कुछ
- 1:28:36गाइडलाइंस हो जाती है। अब मैंने आपको बता
- 1:28:38दिया सारी चीजें। बाकी इतना आप लोगों से
- 1:28:40इतना डिटेल में पूछा नहीं जाएगा। आप लिख
- 1:28:42देना दो चार जो भी आपको अच्छा लगे।
- 1:28:45अब अगर हम लोग यहां पर इसके कुछ की
- 1:28:47प्रिंसिपल्स की बात करें तो यहां पर देखो
- 1:28:48क्या होता है कि हमारा सबसे पहले तो
- 1:28:50एनवायरमेंटल पॉलिसी कमिटमेंट की डिफाइनिंग
- 1:28:53द ऑर्गेनाइजेशन इंटेंट कि कैसे मतलब कि
- 1:28:55यहां पे होता है कि ऑर्गेनाइजेशन यहां पे
- 1:28:57अपना इंटेंट बताती है कि कैसे वो
- 1:28:59एनवायरमेंट को प्रोटेक्ट करेंगी। है ना?
- 1:29:01उसके बाद प्रिवेंशन ओवर करेक्शन। तो यहां
- 1:29:03पे इंपॉर्टेंट चीज क्या है? कि प्रिवेंशन
- 1:29:05को हमें ज्यादा प्रायोरिटी देनी है
- 1:29:07करेक्शन से। प्रिवेंशन का मतलब क्या है?
- 1:29:09कि होने से पहले ही बचा लेना। यानी हमें
- 1:29:11ये नहीं देखना है कि हमारा प्रोडक्ट बन
- 1:29:13गया। उसके बाद हम लोग डिसाइड करें कि अब
- 1:29:15ये हमारा कितना कम नुकसान करे। बल्कि बनने
- 1:29:18से पहले ही हमें यहां पे डिसाइड कर लेना
- 1:29:19है कि हम लोग किस तरीके से उसको
- 1:29:21मैन्युफैक्चर करें कि एनवायरमेंट को कम से
- 1:29:23कम नुकसान हो। उसके बाद कंप्लायंस विद
- 1:29:25रेगुलेशंस। तो यहां पे वही चीज है कि जो
- 1:29:27भी हमारे लॉज़ हैं, स्टैंडर्ड हैं उनके साथ
- 1:29:29कंप्लाई करना, उनके साथ उनके साथ मेलभाव
- 1:29:32बना के चलना है ना।
- 1:29:34और कंटीन्यूअस इंप्रूवमेंट तो वहां पर वही
- 1:29:36चीज है कि हमें कंटिन्यू इंप्रूव करना है
- 1:29:38कि हम कम से कम यहां पर एनवायरमेंट को
- 1:29:40नुकसान करें अपना प्रोडक्ट बिल्ड करते
- 1:29:43समय। स्टेक होल्डर तो यहां पे जो भी
- 1:29:45एंप्लाइजज़ हैं, सप्लायर्स हैं, कस्टमर्स
- 1:29:47हैं, कम्युनिटीज़ हैं उन सभी को यहां पे
- 1:29:49इनवॉल्व होना पड़ेगा एनवायरमेंट को बचाने
- 1:29:51के लिए। और डॉक्यूमेंटेशन एंड
- 1:29:53ट्रांसपेरेंसी की बात करें तो यहां पे एक
- 1:29:54मेंटेनिंग एक ट्रेसेबल और ऑडिटेबल
- 1:29:56एनवायरमेंटल रिकॉर्ड मेंटेन होना चाहिए कि
- 1:29:58किस प्रोडक्ट की वजह से कितना नुकसान हुआ
- 1:30:01या फिर कितना कम हुआ। ठीक है? कोई कितना
- 1:30:03गैस इमिट कर रहा है। तो वो सारी चीजें
- 1:30:05यहां पे एक डॉक्यूमेंटेड फॉर्म में होनी
- 1:30:07चाहिए। ऑब्जेक्टिव्स की बात करें तो भाई
- 1:30:09देखो ऑब्जेक्टिव क्या है कि हमारा वही चीज
- 1:30:11है कि एनवायरमेंटल परफॉर्मेंस हमारा
- 1:30:12इंप्रूव हो। ठीक है? पोल्यूशन रिड्यूस हो,
- 1:30:14वेस्ट रिड्यूस हो। ऑर्गेनाइजेशन यहां पे
- 1:30:16एनवायरमेंटल लॉज़ को फॉलो करें। ऑपरेशनल
- 1:30:18कॉस्ट यहां पे कम हो। ठीक है? एनर्जी और
- 1:30:21रिसोर्सेज को सेव करके। कंपनी की इमेज
- 1:30:24यहां पे एनहांस होगी। अगर उसको यहां पे
- 1:30:25इसका सर्टिफिकेट मिल जाएगा। सस्टेनेबल और
- 1:30:27इको फ्रेंडली प्रैक्टिससेस यहां पे प्रमोट
- 1:30:30हो। कंटीन्यूअस इंप्रूवमेंट हो।
- 1:30:32एनवायरमेंटल फील्ड में और उसके अलावा यहां
- 1:30:34पे इंटरनेशनल ट्रेड को भी सपोर्ट मिलता है
- 1:30:36क्योंकि ग्लोबल रिकॉग्निशन मिलती है। अगर
- 1:30:38किसी को आईएसओ 140001 का सर्टिफिकेट मिल
- 1:30:41जाता है तो उसको ग्लोबल रिकग्निशन मिल
- 1:30:43जाती है। तो ये हमारा हो जाता है आईएसओ
- 1:30:4514000 और अब हम लोग यहां पे बात करते हैं
- 1:30:47अपने एनएबीएल के बारे में। अब देखो
- 1:30:50एनएबीएल क्या होता है? एनएबीएल का फुल
- 1:30:51फॉर्म होता है नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड
- 1:30:54फॉर टेस्टिंग एंड कैलिबेशन लैबोरेटरीज।
- 1:30:57देखो सिंपल सी बात अगर हम लोग करें तो ये
- 1:30:59हमारी इंडिया की एक एजेंसी है मतलब ठीक है
- 1:31:02जो मतलब जो कि हमारा सर्टिफिकेट प्रोवाइड
- 1:31:05करती है लैबोरेटरीज को जो कि बहुत अच्छा
- 1:31:08परफॉर्म करती है मतलब ऐसी लैब्स जिनके
- 1:31:10टेस्ट रिजल्ट यहां पे बहुत अच्छे होते हैं
- 1:31:12उनको यहां पे एनएबीएल का सर्टिफिकेट
- 1:31:15सर्टिफिकेट जो है हमें देखने का
- 1:31:16सर्टिफिकेट मिल जाता है और अगर किसी लैब
- 1:31:18को एनएबीएल का सर्टिफिकेट मिला हुआ है
- 1:31:20इसका मतलब कि उस लैब की जो टेस्टिंग है और
- 1:31:23उस लैब के जो भी प्रोसीजर्स हैं वो बहुत
- 1:31:25ही हाई क्वालिटी के बहुत ही हाई हाई
- 1:31:26स्टैंडर्ड के हैं। तो ये एक ऑटोनॉमस बॉडी
- 1:31:28होती है अंडर द क्वालिटी काउंसिल ऑफ
- 1:31:30इंडिया दैट प्रोवाइड्स एक्र्रेडिटेशन। तो
- 1:31:32एक्रिडिटेशन का मतलब ये है कि कह सकते हो
- 1:31:34मान्यता प्राप्त करती है। है ना? मान्यता
- 1:31:36देती है। अपना अपना जो है सर्टिफिकेट देती
- 1:31:39है। टू लैबोरेटरीज परफॉर्मिंग टेस्टिंग
- 1:31:41कैलिबेशन एंड मेडिकल डायग्नोस्टिक इन
- 1:31:43इंडिया। एनईबीएल हमारा एक बहुत ही वाइटल
- 1:31:44रोल प्ले करता है। लैबोरेटरी अह दैट
- 1:31:47लैबोरेटरीज़ इनवॉल्वड इन फार्मासटिकल
- 1:31:49इंडस्ट्री कैलिबेशन ऑफ़ इक्विपमेंट एंड
- 1:31:50क्वालिटी कंट्रोल ऑपरेट इन अकॉर्डेंस विथ
- 1:31:52इंटरनेशनल स्टैंडर्ड ऑफ़ कंपटेंस एंड
- 1:31:54रिलायबिलिटीज़। देखो कॉम्पिटेंस का मतलब
- 1:31:56होता है क्षमता। ठीक है? तो सिंपल सी बात
- 1:31:58है कि जो इंटरनेशनल स्टैंडर्ड है एक एक
- 1:32:02हमारे इंटरनेशनल स्टैंडर्ड होता है
- 1:32:04लैबोरेटरीज का। ठीक है? कि जो टेस्टिंग है
- 1:32:06वो इस तरीके से होनी चाहिए। तो उन उसके
- 1:32:09साथ हमारी जो लैब्स हैं वो मिला के चल
- 1:32:11पाए। ठीक है? उन उनके अंदर हमारी लैब्स के
- 1:32:13अंदर वो क्षमता हो कि वो इस इंटरनेशनल
- 1:32:15स्टैंडर्ड को फॉलो कर पाएं। इसमें हमारा
- 1:32:17एनएबीएल बहुत ही इंपॉर्टेंट रोल प्ले करता
- 1:32:19है। भाई एनएबीएल उन्हीं को अपना
- 1:32:21एक्रिडिटेशन देता है जो यहां पे इंटरनेशनल
- 1:32:25स्टैंडर्ड को फॉलो कर पाती हैं।
- 1:32:27एक्रेडिटेशन बाय एनएबीएल सिग्निफाइज़ दैट
- 1:32:29लैबोरेटरीज़ टेक्निकली कंपिटेंट फॉलोज़
- 1:32:32वैलिडेटेड मेथड्स एंड प्रोड्यूसेस
- 1:32:35एक्यूरेट रिलायबल एंड ट्रेसेबल रिजल्ट। तो
- 1:32:37वही चीज़ है कि हमारा बहुत ही अच्छे रिजल्ट
- 1:32:39जो लैबोरेटरी प्रोड्यूस करती है उनको यहां
- 1:32:40पे एनएबीएल का एक्रेडिटेशन मिलता है। ठीक
- 1:32:44है?
- 1:32:45पहचान मिलती है। एनएबीएल की मान्यता मिलती
- 1:32:47है। ऐसे समझ लो सिंपल सी बात है।
- 1:32:49हिस्टोरिकल बैकग्राउंड की बात करें तो
- 1:32:50एनएबीएल को सबसे पहले 1988 में
- 1:32:52डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के
- 1:32:54थ्रू यहां पे इस्टैब्लिश किया गया था।
- 1:32:55लेकिन बाद में ये जो है हमारा यहां पे
- 1:32:58कॉन्स्टिटुएंट बोर्ड ऑफ क्वालिटी काउंसिल
- 1:33:00ऑफ इंडिया का एक पार्ट बन गया। यानी कि
- 1:33:01क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया का एक
- 1:33:03कॉन्स्टिट्यूएंट बोर्ड बन गया। एनएबीएल
- 1:33:05हमारा क्या हो गया? एनएबीएल हमारा एक
- 1:33:06सिग्नेटरी। अब यहां पे इंपॉर्टेंट चीज
- 1:33:07क्या कि जो एनएबीएल है ना इसका जो कह सकते
- 1:33:10हो साइन होता है या फिर कह सकते हो इसके
- 1:33:12जो संबंध होते हैं वो यहां पे इंटरनेशनल
- 1:33:16इंटरनेशनल हमारे कुछ रिकॉग्निशन से होते
- 1:33:18हैं। मतलब कि कुछ हमारी इंटरनेशनल एजेंसीज
- 1:33:20हैं उनके साथ यहां पे इसका एक साइन अप
- 1:33:22होता है। है ना? कि अगर यहां पे समझ लो
- 1:33:25किसी लैब को देखो एनएबीएल इंडिया की ही
- 1:33:27बॉडी है। लेकिन एनएबीएल का सर्टिफिकेट अगर
- 1:33:29किसी लैब को मिला तो फिर उस लैब को
- 1:33:31इंटरनेशनल इंटरनेशनल रिकॉग्निशन मिल जाता
- 1:33:34है ऑलरेडी। क्यों? क्योंकि एनएबीएल ऑलरेडी
- 1:33:36जो हमारी अह इंटरनेशनल एजेंसीज़ हैं उनके
- 1:33:39साथ यहां पे इसकी एक सिग्नेटरी सिग्नेटरी
- 1:33:41का मतलब होता है कि कह सकते हो इसके साथ
- 1:33:42एक कॉन्ट्रैक्ट है संबंध है कि हां मेरा
- 1:33:45रिजल्ट इतना एक्यूरेट है कि अगर मैंने
- 1:33:47किसी को सर्टिफिकेट दिया है तो फिर वो
- 1:33:49बहुत ही हाई क्वालिटी का होगा तो उसको एक
- 1:33:51इंटरनेशनल रिकॉग्निशन भी मिल ही जाता है।
- 1:33:53तो इसका जो सिग्नेटरी होता है वो कह सकते
- 1:33:55हो हमारा एशिया पेसिफिक एक्रेडेशन
- 1:33:57कॉपोरेशन के साथ होता है। इंटरनेशनल
- 1:33:59लैबोरेटरी एक्रिडिटेशन कॉपोरेशन के साथ
- 1:34:01होता है। और इसके अलावा देखो दीज़
- 1:34:03रिकग्निशन मेक एनएबीएल लैबोरेटरी रिजर्व
- 1:34:05ग्लोबली एक्सेप्टेड। तो इसकी वजह से क्या
- 1:34:07होता है कि जो भी एनएबीएल सर्टिफिकेट
- 1:34:10सर्टिफाइड लैब्स होती हैं उनके रिजल्ट्स
- 1:34:12यहां पे ग्लोबली एक्सेप्ट कर लिए जाते
- 1:34:14हैं। अब ऑब्जेक्टिव्स ऑफ एनएबीएल की बात
- 1:34:16करें तो यहां पे क्या होता है टू प्रोवाइड
- 1:34:18अ फॉर्मल रिकॉग्निशन सिस्टम। तो ये हमारा
- 1:34:20लैबोरेटरीज जो भी लैबोरेटरी हैं ठीक है?
- 1:34:22जो भी इंटरनेशनल स्टैंडर्ड को फॉलो कर पा
- 1:34:24रही हैं उनको यहां पे फॉर्मल रिकग्निशन
- 1:34:26प्रोवाइड करता है। उसके अलावा क्वालिटी
- 1:34:28अस्श्योरेंस और टेक्निकल कॉन्फिडेंस को
- 1:34:30यहां पे प्रमोट करता है। और देखो यहां पे
- 1:34:32जो भी लैबोरेटरीज को यहां पे एनएबीएल का
- 1:34:34सर्टिफिकेट मिला होता है। तो उनके जो
- 1:34:36रिजल्ट होते हैं पहली बात तो वो बहुत ही
- 1:34:38उनके अंदर जो डाटा इंटेग्रिटी होती है वो
- 1:34:40यहां पे इंश्योर होती है। मतलब कि उनका जो
- 1:34:42भी डाटा है वो यहां पे कह सकते हो बहुत ही
- 1:34:44दृढ़ होता है। बहुत ही सूटेबल होता है। और
- 1:34:46ट्रेबिलिटी तो यहां पे जो भी डाटा है उसको
- 1:34:48ट्रेस किया जा सकता है कि कहां से आया
- 1:34:49कैसे आया है। उसके बाद टू एनहांस
- 1:34:51एक्सेप्टेशन ऑफ इंडियन लैबोरेटरी डाटा।
- 1:34:54ठीक है? तो जो भी इंडियन लैब का डाटा है
- 1:34:55वो ग्लोबली भी यहां पे एक्सेप्ट किया जाता
- 1:34:57है। अगर वो एनएबीएल सर्टिफाइड होता है। और
- 1:34:59यहां पे रेगुलेटरी कंप्लायंस भी यहां पे
- 1:35:01फैसिलिटेट होता है जैसे कि हमारा
- 1:35:03फार्मासटिकल, फूड, एनवायरमेंट और हेल्थ
- 1:35:05केयर इंडस्ट्रीज। ठीक है? तो जो भी वही
- 1:35:08चीज़ है कि हमारा यहां पे जो भी लैब्स को
- 1:35:09यहां पे एनएबीएल का सर्टिफिकेट मिला होता
- 1:35:11है वो तभी मिलता है जब वो रेगुलेटरी
- 1:35:12कंप्लायंस को फॉलो करती हैं। ठीक है?
- 1:35:14रेगुलेटरी बॉडीज के साथ कंप्लाई करती हैं।
- 1:35:16अब बात करें हम लोग यहां पे एनएबीएल
- 1:35:18एक्रिडिटेशन प्रोसेस के बारे में। तो यानी
- 1:35:20कि एनएबीएल का एक्रेडिटेशन अगर किसी
- 1:35:23लैबोरेटरी को चाहिए तो वो कैसे मिलता है?
- 1:35:24क्या-क्या उसकी प्रोसेस होती है? तो सबसे
- 1:35:26पहले हमारी एक बॉडी होती है सीएबी। सीएबी
- 1:35:28का मतलब होता है कंफर्मिटी असेसमेंट बॉडी।
- 1:35:30तो देखो यहां पे जो लैबोरेटरीज होती है वो
- 1:35:32सबसे पहले इस बॉडी को एप्रोच करती है। ठीक
- 1:35:33है? और ये बॉडी एक इनिशियल टेस्टिंग
- 1:35:35परफॉर्म करती है और जब इसको लगता है कि
- 1:35:37हां इसको एप्लीकेशन मिल सकता है तो यहां
- 1:35:39पे ये ये बॉडी यहां पे एनएबीएल को
- 1:35:41एप्लीकेशन फाइल करती है। उसके बाद जो
- 1:35:43एनएबीएल सेक्रेट सेक्रेटरी होता है। ठीक
- 1:35:45है? सेक्रेटरी देखो ये सेक्रेटरी है। ठीक
- 1:35:48है? सेक्रेटरी होता है। थोड़ी बहुत
- 1:35:50स्पेलिंग मिस्टेक है ये चीज आप लोग थोड़ा
- 1:35:52सा देख लीजिएगा नोट्स में। ठीक है? सो सर
- 1:35:55को इतना पता नहीं रहता है। तो जो एनएबीएल
- 1:35:58सचिवालय होता है। सेक्रेटरी का मतलब होता
- 1:36:00है सचिवालय। वो यहां पे सबसे पहले यहां पे
- 1:36:02एप्लीकेशन को क्या करते हैं? स्क्रूटनी
- 1:36:04मतलब होता है जांच करना। ठीक है? सबसे
- 1:36:06पहले वो एप्लीकेशन की एकनॉलेज लेते हैं।
- 1:36:08ठीक है? उसके बाद उसको जांच परख करते हैं।
- 1:36:10और उसके बाद यहां पे देखते हैं कि जो
- 1:36:12क्वालिटी कंट्रोल है मतलब एप्लीकेशन में
- 1:36:14देखो सारी चीजें मेंशन होती है कि एन जो
- 1:36:16लैबोरेटरी है। ठीक है? वो किस तरीके से
- 1:36:18क्वालिटी कंट्रोल को फॉलो कर रही है। तो
- 1:36:20वहां पे वो चेक करती है कि क्वालिटी
- 1:36:21कंट्रोल यहां पे एडिक्वेट अमाउंट में फॉलो
- 1:36:23हो रहा है कि नहीं हो रहा है। ठीक है? है
- 1:36:24क्वालिटी कंट्रोल की एडिक्वसी है कि नहीं
- 1:36:26है तो होती है तो यहां पे फिर यहां पे जो
- 1:36:28एक लीड असेसर होता है असेसर मतलब कि जो
- 1:36:30जांच परख करने वाला होता है ठीक है जो कि
- 1:36:33जो भी हमारा जांचता वगैरह है वो उसमें जो
- 1:36:36लीड असेसर होता है वो एक प्री असेसमेंट
- 1:36:38करता है ठीक है मतलब कि वो एक इनिशियल
- 1:36:39जांच करता है लैबोरेटरी की और जब यहां पे
- 1:36:41प्री असेसमेंट सक्सेसफुल हो जाता है तो
- 1:36:43हमारा एक फाइनल जांच होता है पूरी टीम के
- 1:36:45थ्रू ठीक है पहले सिर्फ एक बंदा जाता है
- 1:36:47ठीक है जो कि उसमें एक्सपर्ट होता है और
- 1:36:49उसके बाद फिर पूरी टीम जाती है फाइनल
- 1:36:51असेसमेंट के लिए और जब फाइनल असेसमेंट भी
- 1:36:53यहां पे सक्सेसफुल हो जाता है। तो फिर
- 1:36:54असेसमेंट की यहां पे स्क्रूटनी स्क्रूटनी
- 1:36:56का मतलब होता है अगेन जांच। ठीक है? तो
- 1:36:58जांच होती है एनएबीएल सचिवालय के थ्रू और
- 1:37:01उसके बाद फाइनली यहां पे क्या होता है कि
- 1:37:02हमारा जो एक्रेडिटेशन कमेटी होती है ठीक
- 1:37:05है? उसको यहां पे रिकमेंडेशन जाता है
- 1:37:06एक्रेडिटेशन के लिए और अगर यहां पे सारी
- 1:37:09चीजें हो जाती हैं तो फाइनली यहां पे जो
- 1:37:10एनएबीएल का चेयरमैन है वो यहां पे अप्रूवल
- 1:37:12दे देता है और यहां पे एनएबीएल का
- 1:37:14सर्टिफिकेट जो है इशू हो जाता है एनएबीएल
- 1:37:16सचिवालय से। तो इस तरीके से यहां पे
- 1:37:18एनवीएल का जो है एकेशन देखने को मिलता है।
- 1:37:20और अगर हम लोग यहां पे इसके बेनिफिट्स की
- 1:37:22बात करें तो यहां पे ये एनश्योर करता है
- 1:37:24कि लैबोरेटरी हमारे इंटरनेशनल क्वालिटी
- 1:37:25स्टैंडर्ड को फॉलो करें। रिलायबिलिटी और
- 1:37:27एक्यूरेसी को यहां पे जो है इंक्रीस करता
- 1:37:29है। कस्टमर कॉन्फिडेंस को यहां पे बिल्ड
- 1:37:31करता है। नीड ऑफ रीिटेस्टिंग। ठीक है? तो
- 1:37:34भाई देखो जब एनएबीएल का कोई अगर टेस्ट हुआ
- 1:37:36है। ठीक है? तो वहां पे उसको दोबारा टेस्ट
- 1:37:38करने की जरूरत नहीं होती क्योंकि ऑलरेडी
- 1:37:39बहुत अच्छे से वो लोग टेस्ट करते हैं।
- 1:37:41नेशनल और इंटरनेशनल रिकॉग्निशन मिलता है।
- 1:37:43ओवरऑल लैबोरेटरी परफॉर्मेंस यहां पे
- 1:37:45इंप्रूव होती है और कंटीन्यूअस
- 1:37:46इंप्रूवमेंट यहां पे इंक्रीस होता है। तो
- 1:37:48ये हो गया हमारा एनएबीएल और फाइनली बात
- 1:37:50करते हैं अपने आज के लास्ट टॉपिक के बारे
- 1:37:51में जो कि हमारा हो जाता है गुड लैबोरेटरी
- 1:37:53प्रैक्टिससेस।
- 1:37:55देखो एनएबीएल क्या है? एनएबीएल हमारा वो
- 1:37:57सर्टिफिकेट है जो कि तब दिया जाता है जब
- 1:37:59कोई लैबोरेटरी बहुत अच्छा परफॉर्म करती
- 1:38:01है। और गुड लैबोरेटरी प्रैक्टिससेस के
- 1:38:03अंदर हमारे वो गाइडलाइंस होती हैं जो कि
- 1:38:04एक लैबोरेटरी को बहुत अच्छा काम करने के
- 1:38:06लिए कह सकते हो प्रेरित करती है या फिर कह
- 1:38:09सकते हो इसके अंदर ऐसी गाइडलाइंस होती हैं
- 1:38:11जिनको अगर एक लैबोरेटरी फॉलो करे तो वो
- 1:38:12बहुत अच्छे से चीजों को परफॉर्म करेगी। अब
- 1:38:15ऑलदो यहां पे देखा जाए तो ये बेसिकली यहां
- 1:38:17पे स्पेसिफिकली नॉन क्लीनिकल टेस्टिंग के
- 1:38:20लिए होता है। ठीक है? मतलब ऐसी लैबोरेटरी
- 1:38:22जिनको जो नॉन क्लीनिकल टेस्टिंग परफॉर्म
- 1:38:24कर रही है। थोड़ा ध्यान से समझना। नॉन
- 1:38:26कक्निकल का मतलब क्या है? जहां पे हम लोग
- 1:38:28ह्यूमंस की टेस्टिंग नहीं परफॉर्म करते
- 1:38:30हैं। और ये हम लोग कब करते हैं? जब भी हम
- 1:38:31लोग यहां पे कोई दवा की जांच परख करते हैं
- 1:38:33या फिर कोई न्यू न्यू ड्रग डेवलपमेंट जब
- 1:38:35हम लोग करते हैं तो कोई जब न्यू ड्रग
- 1:38:37डेवलप होती है तो थोड़ा ध्यान से समझना।
- 1:38:39सबसे पहले क्या होता है? इनिशियल स्टेज
- 1:38:41में सबसे पहले उसकी लैबोरेटरी में ही जांच
- 1:38:42परख करी जाती है। यानी लैबोरेटरी में ही
- 1:38:44देखा जाता है कि ये जो एक्टिव
- 1:38:45कॉन्स्टिटुएंट है। ठीक है? ये जो नई ड्रग
- 1:38:47है इसके अंदर कौन सा कह सकते हो कौन सी
- 1:38:50प्रॉपर्टी है? क्या-क्या इसका केमिकल और
- 1:38:52फिजिकल नेचर है और किस तरीके से यहां पे
- 1:38:54इनविट्रो टेस्टिंग में ये परफॉर्म कर रहा
- 1:38:56है। तो वो सारी चीजें हमारी लैबोरेटरी में
- 1:38:58लैबोरेटरीज में ही तो होती हैं। तो
- 1:39:00लैबोरेटरी जब यहां पे किसी नई ड्रग की नॉन
- 1:39:02क्लीनिकल टेस्टिंग कर रही हैं। तो उसको
- 1:39:04बहुत ही ध्यान से करें या फिर किस तरीके
- 1:39:06से बहुत अच्छे से परफॉर्म करें। तो उसके
- 1:39:08लिए हमारे गुड लैबोरेटरी प्रैक्टिससेस के
- 1:39:10प्रिंसिपल्स होते हैं जिनको यहां पे
- 1:39:12लैबोरेटरीज को फॉलो करना होता है। बाकी
- 1:39:14यहां पे ये सभी लैबोरेटरी फॉलो कर सकती
- 1:39:16हैं अपने रिजल्ट्स को बहुत अच्छा करने के
- 1:39:17लिए। तो यहां पे सेट ऑफ प्रिंसिपल्स और
- 1:39:19गाइडलाइंस होती हैं जो कि क्वालिटी,
- 1:39:20इंटीग्रिटी, रिलायबिलिटी और ट्रेिबिलिटी
- 1:39:22को एनश्योर करती हैं ऑफ दी डाटा जनरेटेड
- 1:39:25ड्यूरिंग नॉन कक्निकल लैबोरेटरी स्टडीज।
- 1:39:27जीएलपी हमारा एक फ्रेमवर्क प्रोवाइड करता
- 1:39:28है फॉर प्लानिंग, परफॉर्मिंग, मॉनिटरिंग,
- 1:39:30रिकॉर्डिंग, रिपोर्टिंग एंड अचीविंग
- 1:39:31लैबोरेटरी स्टडीज। ठीक है? स्पेशली दोज
- 1:39:34रिलेटेड टू रिलेटेड टू सेफ्टी टेस्टिंग ऑफ
- 1:39:37फार्मासटिकल केमिकल्स, कॉस्मेटिक्स एंड
- 1:39:39फूड एडिट। ठीक? फूड एडिटिव्स। तो यहां पर
- 1:39:41देखो जो भी केमिकल्स, कॉस्मेटिक्स हैं,
- 1:39:43फूड एडिटिव्स हैं उन सबकी जो भी हमारी
- 1:39:46कैसे उनको टेस्ट करना है उसके लिए जो
- 1:39:47प्लानिंग है, परफॉर्मेशन है, मॉनिटरिंग है
- 1:39:49और देखो ये अचीविंग में ही आर्चीविंग है।
- 1:39:52आर्ची मतलब कि देखो हमें हमें जो है
- 1:39:54लैबोरेटरी स्टडीज को सबसे पहले थोड़ा सा
- 1:39:56अर्चीव करके रखना होता है, छुपा के रखना
- 1:39:58होता है। है ना? उसको हमें फाइनल हमें
- 1:39:59सबके सामने ऐसे ओपन नहीं करना होता है जब
- 1:40:02तक कि हमें अप्रूवल ना मिले। ठीक है? जब
- 1:40:03तक हमें कह सकते हो आर्डर ना मिले
- 1:40:06लैबोरेटरीज को। क्योंकि यहां पे बेसिकली
- 1:40:08बात हो रही है एक न्यू ड्रग डेवलपमेंट की।
- 1:40:10तो यहां पे जो नई ड्रग है ठीक है? जब तक
- 1:40:12एक ऑफिशियल ऑर्डर नहीं मिलता है उसको
- 1:40:15थोड़ा सा अर्चीव करके रखा जाता है उसकी
- 1:40:17टेस्टिंग वगैरह को। जीएलपी हमारा इंश्योर
- 1:40:19करता है कि जो भी लैबोरेटरी डाटा है, ठीक
- 1:40:21है? वो यहां पे कह सकते हो
- 1:40:24रेगुलेटरी सबमिशन और कंट्रोल को फॉलो कर
- 1:40:26रहा है। है ना? वो एक्यूरेट है,
- 1:40:27रिप्रोड्यूसबल है और यहां पे एक्सेप्टेबल
- 1:40:28है रेगुलेटरी अथॉरिटीज़ के थ्रू।
- 1:40:30ऑब्जेक्टिव्स की बात करें तो यहां पे हाई
- 1:40:32क्वालिटी रिलायबिलिटी रिलायबल टेस्ट डाटा
- 1:40:34इंश्योर करता है। यूनिफॉर्मिटी
- 1:40:35कंसिस्टेंसी इंटीग्रिटी को यहां पे प्रमोट
- 1:40:37करता है। रेगुलेटरी एक्सेप्टेंस को
- 1:40:39फैसिलिटेट करता है। हमारा ट्रेिबिलिटी और
- 1:40:41अकाउंटेबिलिटी को एस्टैब्लिश करता है।
- 1:40:42उसके बाद हमारा फ्रॉड, डाटा,
- 1:40:43मैन्युपुलेशन, एरर्स इन सबको प्रिवेंट
- 1:40:45करता है। अब अगर हम लोग यहां पे इसके कुछ
- 1:40:47की प्रिंसिपल्स की बात करें, तो यहां पे
- 1:40:48देखो, यहां पे क्या होता है? मतलब जीएलपी
- 1:40:51के अंदर क्या प्रिंसिपल्स होते हैं? तो
- 1:40:52सबसे पहला आ जाता है ऑर्गेनाइजेशन एंड
- 1:40:54पर्सनल। तो यहां पे बोला जाता है ठीक है
- 1:40:56जीएलपी के अंदर कि जो भी ट्रेंड स्टाफ हैं
- 1:40:59वो ट्रेंड होने चाहिए क्वालिफाइड होने
- 1:41:00चाहिए और उनकी यहां पे डिफाइंड
- 1:41:02रिस्पांसिबिलिटी होनी चाहिए पूरे
- 1:41:04लैबोरेटरी में यहां पे एक क्वालिटी
- 1:41:06एश्योरेंस का माहौल होना चाहिए ठीक है
- 1:41:08मतलब कि इंडिपेंडेंट मॉनिटरिंग होनी चाहिए
- 1:41:09जो भी स्टडी यहां पे कंडक्ट हो रही है
- 1:41:11डाटा की एक्यूरेसी की जांच होनी चाहिए ठीक
- 1:41:13है उसके बाद यहां पे जो भी इक्विपमेंट्स
- 1:41:15है वो प्रॉपर्ली डिज़ाइन हो मेंटेन हो
- 1:41:16कैलिबेटेड हो और उसके बाद देखो टेस्ट और
- 1:41:18डिफरेंस आइटम प्रॉपर्ली कैरेक्टराइज़्ड हो
- 1:41:20स्ट हो डॉक्यूमेंटेड हो स्टैंडर्ड
- 1:41:22ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी कि देखो जो भी
- 1:41:23एक्टिविटी परफॉर्म करनी है। उसका एक उसका
- 1:41:25एक रिटन प्रोसीजर होता है एसओपी। तो एसओपी
- 1:41:27के अकॉर्डिंग ये सारी चीजें होनी चाहिए।
- 1:41:29स्टडी प्लान हमें पहले से ही बना के रखना
- 1:41:31है। ठीक है? अप्रूवल प्रोटोकॉल। उसके बाद
- 1:41:32रिकॉर्डिंग एंड रिपोर्टिंग। तो एक्यूरेट
- 1:41:34कंप्लीट और साइन रिकॉर्ड होना चाहिए। ठीक
- 1:41:36है? हमारा जो भी रिपोर्ट्स वगैरह है और
- 1:41:37आरसीविंग तो यहां पे वही चीज़ है कि हमें
- 1:41:39डाटा को सिक्योर सिक्योरली स्टोर करना है
- 1:41:41फ्यूचर रेफरेंस के लिए। बेनिफिट्स ऑफ़
- 1:41:43जीएलपी की बात करें तो हमारा रिलायबिलिटी
- 1:41:45रिप्रोप्रिटिबिलिटी हमारा इंश्योर करता
- 1:41:46है। उसके बाद क्वालिटी इंटेग्रिटी तो वही
- 1:41:48सारी चीजें। ठीक है? कॉन्फिडेंस बिल्ड
- 1:41:50करता है डाटा में और उसके बाद यहां पे
- 1:41:52इंटरनेशनल एक्सेप्टेंस को भी हेल्प करता
- 1:41:54है। रिड्यूस करता है एरर, फ्रॉड और डाटा
- 1:41:56मैनपुलेशन को और प्रॉपर डॉक्यूमेंटेशन और
- 1:41:58रिकॉर्ड कीपिंग को प्रमोट करता है। तो
- 1:42:00देखो यहां पे हमारा जो है यूनिट फोर
- 1:42:03कंप्लीट हो जाता है। और आई होप कि आप लोग
- 1:42:06को सारी चीजें समझ में आ गई होंगी। बाकी
- 1:42:07कोई डाउट है तो आप लोग कमेंट करके
- 1:42:08बताइएगा। और
- 1:42:11थोड़ा सा इस लेक्चर को रिकॉर्ड करते समय
- 1:42:13मुझे
- 1:42:15आई डोंट नो थोड़ी सी प्रॉब्लम हुई। बट आई
- 1:42:17होप आप लोगों ने समझा होगा। बाकी मिलते
- 1:42:19हैं नेक्स्ट वीडियो में।
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This page contains the full transcript of Quality Management System | ISO 9000 | Six Sigma | Unit 4 Industrial Pharmacy 7th Semester by Imperfect M Pharm , generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 23,578 words across 3,033 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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