रक्षाबंधन की वो कहानी जो कोई नहीं जानता | भगवान का सबसे बड़ा छल जिसने रक्षाबंधन को जन्म दिया — Transcript
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- 0:00क्या आपने कभी सोचा है कि वैुंठ के स्वामी
- 0:03सृष्टि के पालक भगवान विष्णु अपने ही धाम
- 0:07को छोड़कर एक असुर राजा के द्वारपाल क्यों
- 0:10बने? यह कहानी सिर्फ एक अवतार की नहीं। यह
- 0:13कहानी है एक वचन की, एक छल की और उस भक्ति
- 0:17की जिसने स्वयं भगवान को भी एक बंधन में
- 0:20बांध लिया था। यह कहानी उस रहस्य से शुरू
- 0:23होती है जब माता लक्ष्मी ने अपने ही पति
- 0:26को वैुंठ में नहीं पाया। वैुंठ जहां आनंद
- 0:29की धारा बहती थी। आज वहां महीनों से एक
- 0:32सन्नाटा पसरा था। ब्रह्मांड के स्वामी
- 0:35अपने सिंहासन पर नहीं थे। माता लक्ष्मी का
- 0:38हृदय व्याकुल था। उन्हें पता था कि उनके
- 0:41प्रभु कहां है। पर वो उन्हें वापस लाने
- 0:44में असमर्थ थी। देवर्षि नारद वीणा बजाते
- 0:47हुए प्रवेश करते हैं।
- 0:48नारायण
- 0:50नारायण माते आपके मुख पर यह चिंता की
- 0:54लकीरें त्रिलोक में सब कुशल तो है। प्रभु
- 0:57कहां है?
- 0:58प्रणाम देवर्षि
- 1:00क्या कुशल कहूं? जिनके होने से ही सब कुशल
- 1:05होता है वही यहां नहीं है। मेरे स्वामी
- 1:09मेरे नारायण पाताल लोक में है।
- 1:12पाताल लोक में पर क्यों माते? वहां तो
- 1:16असुर सम्राट बलि का शासन है। प्रभु वहां
- 1:18क्या कर रहे हैं?
- 1:20वही तो मेरे दुख का कारण है नारद। वो वो
- 1:24राजा बलि के द्वारपाल बने हुए हैं।
- 1:28क्या ये तो असंभव है। देवों के रक्षक एक
- 1:33असुर के प्रहरी यह कैसे हुआ माते? इस
- 1:36अनहोनी के पीछे की कथा क्या है?
- 1:40यह कथा शुरू होती है एक भक्त के अहंकार
- 1:43से। एक गुरु की चालाकी से और मेरे प्रभु
- 1:48के एक छल से।
- 1:50लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस छल में एक
- 1:53ऐसी वस्तु का प्रयोग हुआ था जो
- 1:55शुक्राचार्य की सबसे बड़ी गलती बन गई। वो
- 1:58वस्तु क्या थी? इसका जवाब हम वीडियो के
- 2:01अंत में आपसे पूछेंगे। तो कहानी को ध्यान
- 2:03से देखिएगा।
- 2:07यह कहानी उस समय की है जब धरती पर एक ऐसा
- 2:10राजा था जिसके दान के चर्चे देवलोक तक में
- 2:14थे। वो था प्रहलाद का पौत्र असुर सम्राट
- 2:18बलि बलि अपने दादा की तरह ही विष्णु भक्त
- 2:20था। पर उसकी भक्ति में एक सूक्ष्म अहंकार
- 2:23था।
- 2:24गुरुदेव मेरी तपस्या और मेरे दान ने मुझे
- 2:28इंद्र से भी महान बना दिया है। स्वर्ग पर
- 2:31मेरा अधिकार है। अब केवल एक अंतिम अश्वमेध
- 2:35यज्ञ शेष है। उसके पूर्ण होते ही मैं
- 2:39त्रिलोक का स्थाई स्वामी बन जाऊंगा। बलि
- 2:43तुम्हारी शक्ति असीमित है। इसमें कोई
- 2:46संदेह नहीं। पर याद रखना देवता छल करने
- 2:51में माहिर है और तुम्हारे दादा को स्वयं
- 2:54नारायण का वरदान प्राप्त था कि वो
- 2:57तुम्हारे वंश का विनाश नहीं करेंगे।
- 3:00लेकिन वो छल से तुम्हें रोक सकते हैं।
- 3:04मुझे किसी अनिष्ट की आशंका हो रही है। आप
- 3:07व्यर्थ चिंता करते हैं गुरुदेव। अगर स्वयं
- 3:10नारायण भी मेरे सामने याचक बनकर आ जाए तो
- 3:14मैं उन्हें भी खाली हाथ नहीं लौटाऊंगा।
- 3:17मेरा वचन ही मेरा धर्म है। यज्ञ की तैयारी
- 3:20शुरू कीजिए।
- 3:21बलि जब वो विशाल यज्ञ कर रहा था। उसी समय
- 3:24दरबार में एक छोटा सा ब्राह्मण आया वामन
- 3:27जो कि विष्णु का पांचवा अवतार था।
- 3:29महाराज एक अद्भुत ब्राह्मण कुमार आपसे
- 3:32भिक्षा लेने आए हैं। उनका तेज देखकर लगता
- 3:35है जैसे स्वयं सूर्य धरती पर उतर आए हो।
- 3:38मेरे यज्ञ के समय आया याचक यह तो मेरा
- 3:41सौभाग्य है। उसे सम्मान के साथ अंदर लाओ।
- 3:45वामन रूपी विष्णु धीरे-धीरे चलकर बलि के
- 3:48सिंहासन के पास आते हैं। उनकी शांत आंखों
- 3:51में ब्रह्मांड की गहराई है। उनके एक हाथ
- 3:54में छाता था और दूसरे में पीतल से बना एक
- 3:57छोटा चमकता हुआ कमंडल। हे ब्राह्मण कुमार
- 4:02आपका इस यज्ञ में स्वागत है। मैं प्रहलाद
- 4:05का पौत्र दानवीर बलि आपका अभिनंदन करता
- 4:08हूं। मांगिए आपको क्या चाहिए? सोना,
- 4:13चांदी, गांव, हाथी, घोड़े आज आप जो
- 4:16मांगेंगे वो आपको मिलेगा। राजन, मैं एक
- 4:20साधारण ब्राह्मण हूं। मुझे धन दौलत का कोई
- 4:23लोभ नहीं। मुझे तो बस अपनी साधना के लिए
- 4:27तीन पग भूमि चाहिए जिसे मैं अपने इन छोटे
- 4:30पैरों से नाप सकूं।
- 4:32तीन पग [संगीत] भूमि और वो भी इन नन्हे
- 4:35पैरों से। हे बालक तुम तो मेरे दान का
- 4:38उपहास कर रहे हो। मैं तुम्हें पूरी पृथ्वी
- 4:41दान कर सकता हूं। कुछ ऐसा मांगो जो राजा
- 4:44बलि की शान के लायक हो।
- 4:46राजन संतोष में ही सच्चा सुख है। अधिक की
- 4:50लालसा तो कभी समाप्त नहीं होती। मुझे केवल
- 4:52तीन पग भूमि ही चाहिए। अब अपने वचन से
- 4:55पीछे मत हटिए। बलि रुक जाओ। मेरी बात
- 4:59मानो। यह कोई साधारण बालक नहीं है। यह
- 5:03स्वयं विष्णु है। छल करने आए हैं। यह
- 5:07तुम्हारा सब कुछ छीन लेंगे। इन्हें कुछ भी
- 5:10दान करने का संकल्प मत लो। गुरुदेव अगर यह
- 5:14स्वयं भगवान विष्णु है तो यह मेरा सबसे
- 5:17बड़ा सौभाग्य है कि आज भगवान मुझसे मांगने
- 5:20आए हैं और वचन देकर पीछे हटना यह बलि का
- 5:24धर्म नहीं।
- 5:25जब बलि के संकल्प लेने का समय आया तो
- 5:28शुक्राचार्य ने सोचा
- 5:29अरे यह बलि तो वचन [संगीत] दे बैठा। अब सब
- 5:32खत्म हो जाएगा। रोकना होगा इसे। हां, मैं
- 5:35जल के इस पत्र [संगीत] में छिप जाता हूं।
- 5:37अगर जल बाहर नहीं निकलेगा तो इसका संकल्प
- 5:40[संगीत] पूरा नहीं होगा। मुझे ही रोकना
- 5:43होगा इसे।
- 5:44शुक्राचार्य ने अपनी माया से सूक्ष्म
- 5:46[संगीत] रूप धरा और जल पात्र की नली में
- 5:48जाकर बैठ गए ताकि जल बाहर ना आ सके।
- 5:57अरे जल क्यों नहीं निकल रहा?
- 5:59वामन सब समझ रहे थे। तभी वामन मुस्कुराए
- 6:03और उन्होंने सूखी नुकीली कुश घास का एक
- 6:06तिनका उठाया और मुस्कुराते हुए उसे पात्र
- 6:09की नली में डाल दिया। बलि ने अपना संकल्प
- 6:11पूरा किया और जैसे ही यह शब्द उसके मुख से
- 6:14निकले इतिहास ने एक नया मोड़ लिया। उस
- 6:18छोटे से ब्राह्मण बालक का शरीर अब पूरे
- 6:21ब्रह्मांड में फैल रहा था। वो वामन नहीं
- 6:24अब त्रिविक्रम थे। उन्होंने अपना पहला कदम
- 6:27उठाया और एक ही पग में समस्त भूलोक नप
- 6:30गया। उन्होंने अपना दूसरा कदम उठाया और
- 6:33दूसरे पग में संपूर्ण देवलोक और ब्रह्मलोक
- 6:36तक नप गया। विराट भगवान विष्णु बलि की ओर
- 6:40देखते हैं।
- 6:40बलि तुम्हारे दान [संगीत] के अनुसार दो
- 6:43पगों में मैंने पृथ्वी और स्वर्ग नाप लिए।
- 6:46अब बताओ अपना वचन पूरा करने के लिए मैं
- 6:50तीसरा पग कहां रखूं?
- 6:52बलि के चेहरे से अहंकार का नकाब उतर चुका
- 6:55था। वो घुटनों के बल बैठ गया और हाथ जोड़
- 6:58लिए।
- 6:58प्रभु आपने मुझसे मेरा राज्य छीना। मेरा
- 7:02स्वर्ग छीना। पर आप मेरी भक्ति नहीं छीन
- 7:05सकते। यह शरीर नश्वर है। अगर कुछ बचता है
- 7:08तो वह है मेरा अहंकार। प्रभु तीसरा पग
- 7:12[संगीत] मेरे इस अहंकार से भरे मस्तक पर
- 7:15रखिए और मुझे मुक्त कर दीजिए।
- 7:17नारायण की भक्ति [संगीत] तभी पूर्ण होती
- 7:20है जब उसमें प्रेम हो और स्मरण भी। अगर इस
- 7:24कथा ने आपके मन में भक्ति की एक लौ जगा दी
- 7:27हो [संगीत] तो वीडियो को लाइक जरूर करें
- 7:30और कमेंट्स में केवल नारायण नारायण ही
- 7:32नहीं बल्कि एक छोटा सा संदेश भी छोड़
- 7:35जाइए। शायद यह संदेश नारायण [संगीत] के
- 7:38चरणों तक पहुंच जाए।
- 7:39प्रभु आपने मुझे सब कुछ दिया लोक यश और
- 7:44कृपा। लेकिन मैं अब आपके दर्शन कैसे
- 7:47करूंगा? मैं चाहता हूं कि मैं हर दिन आपके
- 7:50दर्शन कर सकूं। कृपया मुझे इस एक आशीर्वाद
- 7:53से वंचित ना करें।
- 7:54हे बलि तुम्हारी यह विनती भी स्वीकार है।
- 7:57मैं स्वयं सुतल लोक में निवास करूंगा
- 8:00तुम्हारे द्वारपाल [संगीत] के रूप में
- 8:02जिससे तुम रोज मेरे दर्शन कर सको।
- 8:05और इस तरह एक भक्त के वचन ने स्वयं भगवान
- 8:09को भी बांध लिया। तो तो क्या मेरे स्वामी
- 8:13को वापस लाने का कोई मार्ग ही नहीं है
- 8:15देवर्षि? क्या वो हमेशा के लिए एक प्रहरी
- 8:18बने रहेंगे? मार्ग है माते। हर बंधन को
- 8:20काटने [संगीत] का एक सूत्र होता है। पर
- 8:22इसके लिए आपको उस राजा के पास जाना होगा
- 8:25जिसने आपके पति को बंदी बनाया है। पर एक
- 8:27देवी के रूप में नहीं बल्कि एक बहन
- 8:30[संगीत] के रूप में।
- 8:31माता लक्ष्मी की आंखों में एक नई आशा की
- 8:34किरण चमक उठती है। माता लक्ष्मी ने एक
- 8:37साधारण स्त्री का वेश धरा और निकल पड़ी
- 8:40अपने स्वामी को वापस लाने।
- 8:42देवी आप कौन है? और इस तरह विलाप क्यों कर
- 8:45रही है? राजन मैं बहुत अभागिन हूं। आज
- 8:50रक्षा का पवित्र दिन है। पर मेरा कोई भाई
- 8:53नहीं है जिसकी कलाई पर मैं यह राखी बांध
- 8:57सकूं।
- 8:58बहन आज से मुझे अपना भाई समझो। लाओ मेरी
- 9:02कलाई पर यह रक्षासूत्र [संगीत] बांधो।
- 9:05इसके पश्चात माता लक्ष्मी ने रेशम के
- 9:08धागों से बनी एक सुंदर राखी राजा बलि की
- 9:10कलाई पर बांध दी।
- 9:12बहन मांगो उपहार में क्या चाहिए? मैं
- 9:16तुम्हारी हर परेशानी दूर करूंगा।
- 9:19भैया मुझे मेरा पति लौटा दीजिए।
- 9:23यह कैसी लीला है प्रभु? जिनके मैं पाताल
- 9:28के द्वार पर प्रतिदिन दर्शन करता हूं।
- 9:31जिन्हें एक भक्त की तरह निहारता हूं। आज
- 9:34उन्हीं के लिए एक बहन बनकर आप मेरे समक्ष
- 9:37खड़ी हैं। मेरा धर्म क्या कहता है? एक
- 9:41भक्त का समर्पण या एक भाई [संगीत] का वचन।
- 9:44एक पल की खामोशी के बाद बलि के चेहरे पर
- 9:47एक शांत मुस्कान आती है और वह हाथ जोड़
- 9:50लेते हैं।
- 9:51नहीं राजा बलि हार सकता है पर एक भाई
- 9:54नहीं। माते आपने मुझे भाई बनाकर धन्य कर
- 9:58दिया। आपका पति आपका है। आप प्रभु को अपने
- 10:02साथ ले जा सकती हैं। राजा बलि आज श्रावण
- 10:06मास की यह [संगीत] पूर्णिमा इतिहास में
- 10:09रक्षाबंधन के नाम से जानी जाएगी। यह
- 10:13त्यौहार [संगीत]
- 10:14भाई-बहन के पवित्र प्रेम और वचन का प्रतीक
- 10:17बनेगा।
- 10:18तो दोस्तों, आपने पूरी कहानी सुनी। अब समय
- 10:21है आपकी याददाश्त को परखने का। देखते हैं
- 10:24कितने [संगीत] लोगों ने ध्यान से सुना।
- 10:25प्रश्न शुक्राचार्य को अंधा करने के लिए
- 10:28भगवान वामन ने जल पात्र में किस वस्तु का
- 10:30प्रयोग किया था? ए अपनी उंगली, बी एक
- 10:34पत्थर, सी कुछ घास का तिनका, डी एक स्वर्ण
- 10:39शलाका। सही उत्तर नीचे कमेंट करें और बनिए
- 10:43क्विज चैंपियन। हो सकता है अगली कथा में
- 10:46लिया जाए आपका नाम। जैसे हनुमान जी राम जी
- 10:49की मदद करते थे, वैसे ही आप भी हमारी मदद
- 10:52कर सकते हो। अगर आप चाहते हो कि हम हिंदू
- 10:54धर्म की प्यारी परंपरा और कहानियों को और
- 10:57भी लोगों तक पहुंचाएं तो बस उन ₹30 महीने
- 11:00के देकर हमारे साथी बन जाओ। आपकी सहायता
- 11:03से हम और भी अच्छी एनिमेशन वीडियो
- 11:05बनाएंगे। ज्वाइन [संगीत] करें और निश्चित
- 11:08करें कि आपका सहयोग सही दिशा में धर्म का
- 11:10प्रचार कर रहा
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