Psychology of people who never post on Social Media — Transcript
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- 0:00शादी का माहौल सोचिए। डीजे फुल वॉल्यूम पर
- 0:02बज रहा है और आधे लोग खाने से पहले अपनी
- 0:05प्लेट की फोटो शूट कर रहे हैं। प्लेट
- 0:07बेचारी सोच रही होगी भाई मुझे खाना है या
- 0:10लॉन्च करना है। हर तरफ सेल्फीज़, स्टोरीज
- 0:13और लोकेशन टैग्स। लेकिन उसी भीड़ में एक
- 0:15इंसान है। उसका फोन जेब में है। ना कोई
- 0:18स्टोरी ना अगले दिन बेस्ट नाइट एवर वाला
- 0:20कैप्शन। अगर आप उसकी प्रोफाइल खोलें तो
- 0:22लगेगा कि वह शादी में आया ही नहीं। जबकि
- 0:25सच यह है कि शायद पूरी शादी में वही सबसे
- 0:28ज्यादा वहां मौजूद था। आपकी फ्रेंड लिस्ट
- 0:31में भी एक ऐसा इंसान जरूर होगा जिसकी
- 0:33लास्ट पोस्ट 2019 की है और जिसके बारे में
- 0:36आपने कभी ना कभी सोचा होगा यह करता क्या
- 0:38है? जिंदा तो है ना? तो सवाल यह है क्या
- 0:41यह लोग शाय हैं? इनसिक्योर हैं या इन्हें
- 0:43वह बात समझ आ गई है जो हम लाइक्स और
- 0:45नोटिफिकेशंस के शोर में भूल चुके हैं। आज
- 0:48हम इसकी रियल साइकोलॉजी समझेंगे। छह कारण
- 0:50और आखिर में एक ऐसा सच जो इस पूरी बहस को
- 0:53पलट देता है। तो आखिर तक रुकिए क्योंकि
- 0:56सबसे जरूरी बात हमेशा आखिर में आती है।
- 0:59कारण एक वे पल को जीते हैं। दिखाते नहीं
- 1:02याद कीजिए। आखिरी बार आप किसी बहुत सुंदर
- 1:04जगह पर थे। पहाड़, समुंदर या छत से दिखता
- 1:07सनसेट। आपने सबसे पहले क्या किया? फोन
- 1:09निकाला। फिर सही एंगल ढूंढा। फिर तीन
- 1:12फोटो, एक वीडियो और फिर कैप्शन पर एक मिनी
- 1:14बोर्ड मीटिंग। जब तक सही सॉन्ग मिला,
- 1:17सनसेट खत्म हो चुका था। यही वह चीज है जो
- 1:19साइकोलॉजी बताती है। जब हम किसी
- 1:21एक्सपीरियंस को प्रेजेंट करने में लग जाते
- 1:23हैं तो हमारा अटेंशन उस पल से हटकर उसकी
- 1:26प्रेजेंटेशन पर चला जाता है। जिस पल को
- 1:29जीने गए थे उसी को हम देख नहीं पाते।
- 1:31कंपोस्ट करने वाले लोग इस चीज को पहचान
- 1:33चुके हैं। उनके लिए खाना स्वाद है। कंटेंट
- 1:36नहीं। ट्रिप एक मेमोरी है। अनाउंसमेंट
- 1:38नहीं। वे फोटो ले सकते हैं। पर हर मेमोरी
- 1:40को ऑडियंस के लिए पैकेजिंग में नहीं
- 1:42लपेटते। लेकिन यह तो सिर्फ पहली परत है।
- 1:44दूसरा कारण थोड़ा ज्यादा पर्सनल है। कारण
- 1:47दो उन्हें अपनी खुशी के लिए तालियां नहीं
- 1:49चाहिए पोस्ट डालने के बाद कि वह पहले 10
- 1:51मिनट याद हैं? कितने लाइक्स आए? किसने
- 1:54स्टोरी देखी? उसने देखी पर रिएक्ट क्यों
- 1:56नहीं किया? और जिसने 3 महीने से बात नहीं
- 1:59की वो अचानक फायर इमोजी क्यों भेज रहा है?
- 2:02देखिए क्या हुआ। एक पर्सनल पल धीरे-धीरे
- 2:05नंबर्स और रिएक्शंस का खेल बन गया। कुछ
- 2:07लोग अपनी अचीवमेंट की वैल्यू इन नंबर्स से
- 2:09तय नहीं करते। नई जॉब लगी तो घर वालों और
- 2:12क्लोज दोस्तों को बताया। गोल पूरा हुआ तो
- 2:15चुपचाप सेलिब्रेट किया। इसे साइकोलॉजी में
- 2:17इंटरनल वैलिडेशन कहते हैं। यानी अपनी वर्थ
- 2:20को अपने स्टैंडर्ड से नापना दूसरों की
- 2:22रिएक्शन से नहीं। उनका सवाल लोग क्या
- 2:25सोचेंगे? नहीं होता। उनका सवाल होता है
- 2:28क्या मैं सच में खुश हूं? अब एक बात साफ
- 2:30कर दूं। पोस्ट करने वाला हर इंसान अटेंशन
- 2:32सीकर नहीं होता। खुशी शेयर करना बिल्कुल
- 2:34नॉर्मल है। फर्क पोस्ट करने में नहीं
- 2:37डिपेंडेंस में है। अगर लाइक्स कम आते ही
- 2:39आपकी अचीवमेंट छोटी लगने लगे तो समझ लीजिए
- 2:42आपकी खुशी का रिमोट कंट्रोल किसी और के
- 2:45हाथ में है। और तीसरा कारण इसे लोग अक्सर
- 2:48गलत समझते हैं। कारण तीन प्राइवेसी उनके
- 2:51लिए सीक्रेसी नहीं बाउंड्री है। आप अपने
- 2:54घर की चाबी हर जान पहचान वाले को नहीं
- 2:56देते। है ना? तो अपनी लाइफ के हर कमरे की
- 2:59चाबी हर फॉलोअर को क्यों दें? शादी में जो
- 3:01आंटी पूछती हैं, बेटा आजकल क्या चल रहा
- 3:04है? सैलरी कितनी है? मार्क्स कितने आए?
- 3:07सोचिए वही आंटी अगर आपकी हर पोस्ट, हर
- 3:10लोकेशन और हर प्रॉब्लम की लाइव फीड देख
- 3:13रही हो। कुछ लोगों को यह बिल्कुल पसंद
- 3:15नहीं। वे कहां हैं, किसके साथ हैं या किस
- 3:18दौर से गुजर रहे हैं, यह पब्लिक
- 3:19इंफॉर्मेशन नहीं है। ध्यान दीजिए, वे
- 3:22साइलेंट इसलिए नहीं है कि उनकी लाइफ में
- 3:24कुछ हो नहीं रहा। वे साइलेंट इसलिए हैं
- 3:27क्योंकि वे खुद तय करते हैं कि किसे कितना
- 3:30एक्सेस मिलेगा और इंटरनेट पर डाली गई चीज
- 3:32को लोग सेव कर सकते हैं, जज कर सकते हैं
- 3:35या पूरी तरह गलत समझ सकते हैं। उनके लिए
- 3:38प्राइवेसी डर नहीं है। वह अपनी पीस बचाने
- 3:40का तरीका है। कारण चार उन्होंने कंपैरिजन
- 3:43का जाल पहचान लिया। सोशल मीडिया पर क्या
- 3:46दिखता है? प्रमोशन दिखता है, रिजेक्शन
- 3:48नहीं, वेकेशन दिखती है। उसके पीछे की
- 3:51ईएमआई नहीं, हैप्पी कपल दिखता है। रात की
- 3:54वह बहस नहीं। और हम क्या करते हैं? अपनी
- 3:56मंडे सुबह की बिना फिल्टर वाली लाइफ को
- 3:58किसी और की एडिटेड हाईलाइट रील से कंपेयर
- 4:01कर देते हैं। नतीजा अपनी जिंदगी बोरिंग
- 4:04लगने लगती है। जबकि दिक्कत आपकी लाइफ में
- 4:06नहीं थी। दिक्कत उस कंपैरिजन में थी। कुछ
- 4:09लोग इस इनविज़िबल रेस से बाहर निकल जाते
- 4:12हैं। उन्हें हर क्लासमेट की सैलरी, हर
- 4:14दोस्त की गो ट्रिप और हर रिलेशनशिप स्टेटस
- 4:17जानने की जरूरत नहीं लगती। वे अपने दिमाग
- 4:19को दिन भर रैंकिंग करने से बचाते हैं।
- 4:22जहां बहुत सारे लोग फोमो महसूस करते हैं।
- 4:24यानी फियर ऑफ मिसिंग आउट। वहां यह लोग
- 4:27चुनते हैं जोमो। जॉय ऑफ मिसिंग आउट। और सच
- 4:29कहें तो कभी-कभी कुछ ना जानना भी मेंटल
- 4:32पीस होता है। कारण पांच वे अपना अटेंशन
- 4:35बचा कर रखते हैं। एक नोटिफिकेशन सिर्फ 2
- 4:38सेकंड का काम। मैसेज खोला। फिर एक रील
- 4:41देखी। फिर दूसरी, फिर तीसरी। और 20 मिनट
- 4:44बाद आप फोन हाथ में पकड़े सोच रहे हैं
- 4:47मैंने इसे उठाया किस लिए था? अब सोचिए अगर
- 4:50इस चीज का बड़ा हिस्सा आपकी लाइफ से हट
- 4:52जाए तो क्या होगा? यह कोई जादू नहीं है।
- 4:54सोशल मीडिया से दूरी किसी को जीनियस नहीं
- 4:56बनाती। पर डिस्ट्रैक्शंस का सबसे बड़ा
- 4:58सोर्स जरूर कम कर देती है और जो समय बचता
- 5:01है उसमें कोई किताब पढ़ लेता है। कोई वॉक
- 5:03पर निकल जाता है और कोई बस चुपचाप बैठ
- 5:06जाता है। बिना ऑडियंस के एक्सिस्ट कर पाना
- 5:08आज के दौर में एक रेयर स्किल है। इन लोगों
- 5:11का हर हॉबी पर्सनल ब्रांड नहीं बनता और हर
- 5:14थॉट मोटिवेशनल कोट नहीं बनता। अब एक छोटा
- 5:17सा सवाल ईमानदारी से कमेंट में बताइए आज
- 5:20आपकी स्क्रीन टाइम कितनी रही? मैं किसी को
- 5:22जज नहीं करूंगा। बस देखना है कि हम सब
- 5:24कहां खड़े हैं? कारण छह उनके लिए डेप्थ
- 5:27क्वांटिटी से बड़ी है। Instagram से आपको
- 5:30पता है कि किसने नया फोन खरीदा और कौन किस
- 5:32कैफे गया। लेकिन आपका क्लोज दोस्त अंदर से
- 5:35परेशान क्यों है यह शायद आपको पता नहीं।
- 5:37फमिलियरिटी का मतलब क्लोजनेस नहीं होता।
- 5:40किसी के बारे में सब पता होना और किसी को
- 5:42सच में जानना दो अलग चीजें हैं। कंपोस्ट
- 5:45करने वाले लोग अपनी एनर्जी कुछ चुनिंदा
- 5:48रिश्तों में लगाते हैं। वे बर्थडे पर
- 5:50कोलाज नहीं बनाते। वे कॉल करते हैं। हां,
- 5:53फोन में यह फीचर आज भी है। उनका सर्कल
- 5:56छोटा हो सकता है। लेकिन उनके लोग उन्हें
- 5:58उनकी प्रोफाइल से नहीं उनके बिहेवियर से
- 6:00जानते हैं। हर साइलेंस कॉन्फिडेंस नहीं
- 6:03होता। अब वो बात जिसका मैंने वादा किया
- 6:05था। यह मान लेना बहुत आसान है कि जो इंसान
- 6:08पोस्ट नहीं करता वो बहुत सिक्योर और
- 6:10मिस्टीरियस होगा। लेकिन हर बार ऐसा नहीं
- 6:12होता। कुछ लोग जजमेंट से डरते हैं। कुछ
- 6:14रिजेक्शन से। कुछ अपने लुक्स को लेकर
- 6:16अनकंफर्टेबल हैं। और कुछ को तो बस सोशल
- 6:19मीडिया इंटरेस्टिंग ही नहीं लगता। तो असली
- 6:21सवाल यह है क्या वह अपनी चॉइस से प्राइवेट
- 6:24है या डर की वजह से इनविज़िबल? ऑनलाइन कम
- 6:27दिखकर रियल लाइफ में खुलकर जीना एक हेल्थी
- 6:30बाउंड्री है। लेकिन रिजेक्शन के डर से
- 6:32लोगों से बचते रहना धीरे-धीरे एक
- 6:34प्रोटेक्टिव वॉल बन सकता है। बाहर से
- 6:36दोनों का बिहेवियर एक जैसा दिखता है। पर
- 6:39अंदर की साइकोलॉजी बिल्कुल अलग होती है।
- 6:41इसलिए ना सोशल मीडिया पर एक्टिव होना गलत
- 6:44है और ना ऑफलाइन रहना कोई सुपीरियरिटी बैज
- 6:46है। यह बस एक टूल है। सवाल सिर्फ इतना है।
- 6:49आप उसे यूज कर रहे हैं या वो आपकी
- 6:52आइडेंटिटी और आपके अटेंशन को यूज कर रहा
- 6:54है। अब एक छोटा सा टेस्ट कीजिए। पिछली बार
- 6:57जब आप किसी अच्छे पल में थे तो आपके दिमाग
- 7:00में पहला ख्याल क्या आया? वाह कितना अच्छा
- 7:03लग रहा है या यह तो स्टोरी में जाएगा।
- 7:06जवाब बस अपने आप को देना है। शायद जो लोग
- 7:09कभी पोस्ट नहीं करते वे हमें एक सिंपल बात
- 7:11याद दिलाते हैं। हर खुशी को पब्लिक होने
- 7:14की जरूरत नहीं। हर अचीवमेंट को अप्लॉज़
- 7:16नहीं चाहिए और हर खूबसूरत पल को प्रूफ
- 7:19करना जरूरी नहीं। जिंदगी की कुछ सबसे रियल
- 7:22चीजें तब होती हैं जब कैमरा बंद हो,
- 7:24नोटिफिकेशंस शांत हो और ऑडियंस गायब हो।
- 7:27तब सिर्फ आप होते हैं। वह पल होता है और
- 7:30उसे सच में जीने का मौका होता है। अगली
- 7:32बार किसी की खाली प्रोफाइल देखकर उसे
- 7:34बोरिंग मत समझिए। हो सकता है वह अपनी लाइफ
- 7:37छिपा नहीं रहा। उसे बस हर किसी के सामने
- 7:40डिस्प्ले करने की जरूरत नहीं लगती। और
- 7:42शायद जो इंसान ऑनलाइन सबसे कम दिखता है
- 7:45वही रियल लाइफ में सबसे ज्यादा अलाइव है।
- 7:48तो ईमानदारी से खुद से पूछिए। क्या आप
- 7:50सोशल मीडिया पर अपनी लाइफ शेयर कर रहे हैं
- 7:52या धीरे-धीरे सोशल मीडिया के लिए लाइफ
- 7:54जीने लगे हैं? अगर आपको इंसानी बिहेवियर
- 7:57के पीछे छिपी ऐसी साइकोलॉजी समझना पसंद है
- 7:59तो चैनल को सब्सक्राइब कीजिए क्योंकि यहां
- 8:02हम सिर्फ लोगों की पोस्ट्स नहीं देखते। हम
- 8:04उन पोस्ट्स के पीछे काम कर रहे दिमाग को
- 8:06डिकोड करते हैं। और कमेंट में बताइए आपकी
- 8:09फ्रेंड लिस्ट में वह कभी पोस्ट ना करने
- 8:12वाला इंसान कौन है? और देखिए उसका जवाब
- 8:14क्या आता है।
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