Psychology of DISCIPLINED people decoded — Transcript
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- 0:00सुबह के सिर्फ 40 सेकंड इतना सा समय आपकी
- 0:03पूरी दिनचर्या तय कर सकता है। अलार्म बजता
- 0:06है। आपकी आंखें खुलती हैं। आप जानते हैं
- 0:08कि आज पढ़ना है, जिम जाना है, काम पूरा
- 0:11करना है। लेकिन तभी दिमाग में एक छोटा सा
- 0:14विचार आता है। बस 5 मिनट और हाथ फोन तक
- 0:18जाता है। अलार्म बंद होता है और कुछ ही
- 0:21सेकंड बाद आप दोबारा सो चुके होते हैं।
- 0:24फिर दोपहर में गिल्ट आता है। आप खुद से
- 0:27कहते हैं कल से पक्का। आप एक नया टाइम
- 0:30टेबल बनाते हैं, एक मोटिवेशनल वीडियो
- 0:32देखते हैं, नया रेजोल्यूशन लेते हैं और
- 0:34कुछ दिनों तक सब ठीक भी चलता है। लेकिन
- 0:37फिर वही पुरानी कहानी और आखिर में एक सवाल
- 0:41मेरे अंदर डिसिप्लिन क्यों नहीं है? शायद
- 0:44समस्या यह नहीं है कि आपके अंदर डिसिप्लिन
- 0:46कम है। शायद आपको डिसिप्लिन की साइकोलॉजी
- 0:49ही गलत समझाई गई है। क्योंकि हम अक्सर
- 0:51सोचते हैं कि डिसिप्लिंड इंसान वह है जो
- 0:54हर बार टेंप्टेशन से लड़ता है। जो खुद को
- 0:57फोर्स करता है। जो मोटिवेशन के बिना भी
- 1:00काम करता रहता है। लेकिन साइकोलॉजी की कुछ
- 1:03रिसर्च एक अलग तस्वीर दिखाती है। हाईली
- 1:06सेल्फ कंट्रोलोल्ड लोग हर समय खुद को
- 1:09रोकने के लिए लड़ते नहीं रहते। कई बार वे
- 1:11ऐसी सिचुएशंस ही कम पैदा करते हैं जहां
- 1:14उन्हें खुद को रोकना पड़े। मतलब डिसिप्लिन
- 1:17हमेशा लड़ाई जीतने का नाम नहीं है। कई बार
- 1:20डिसिप्लिन का मतलब है लड़ाई शुरू ही ना
- 1:22होने देना और आज हम समझेंगे कि ऐसा कैसे
- 1:26किया जाता है। एक आपका दिमाग मेहनत से
- 1:29नहीं मेहनत की एक्सपेक्टेशन से डरता है।
- 1:31सोचिए अगर मैं आपसे कहूं बस एक सेंटेंस
- 1:34लिखो। शायद आपको कोई प्रॉब्लम नहीं होगी।
- 1:36लेकिन अगर मैं कहूं आज पूरी 20 पेज
- 1:39असाइनमेंट खत्म करनी है। अचानक दिमाग भारी
- 1:42लगने लगता है। काम वही है। लेकिन रिएक्शन
- 1:45अलग है। क्यों? क्योंकि आपका ब्रेन सिर्फ
- 1:47काम को नहीं देखता। वह पहले अनुमान लगाता
- 1:50है कि उस काम के साथ कैसा अनुभव आने वाला
- 1:53है। अगर नोटबुक खोलते ही आपके दिमाग को
- 1:56याद आता है स्ट्रेस, बोरियत, सेल्फ डाउट
- 1:59और यह फीलिंग कि मैं बहुत पीछे हूं। तो
- 2:02आपका ब्रेन नेचुरली उस काम से दूर जाने की
- 2:05कोशिश करेगा और यही वजह है कि कभी-कभी फोन
- 2:08उठाना इतना आसान लगता है क्योंकि फोन
- 2:10खोलना आपके ब्रेन के लिए इंस्टेंटली
- 2:13प्रेडिक्टेबल रिवॉर्ड है लेकिन किताब
- 2:15खोलना वह एफर्ट प्रेडिक्ट करती है। इसलिए
- 2:18असली समस्या हमेशा लेजीनेस नहीं होती। कई
- 2:22बार समस्या होती है प्रेडिक्शन। आपके
- 2:24दिमाग ने सीख लिया है कि कुछ चीजों का
- 2:27मतलब रिवॉर्ड है और कुछ चीजों का मतलब
- 2:30डिसकंफर्ट। लेकिन अच्छी खबर यह है कि
- 2:32प्रेडिकशंस बदली जा सकती हैं। दो
- 2:35डिसिप्लिन जन्म से नहीं आता। इसे कंडीशन
- 2:38किया जा सकता है। एक इंटरेस्टिंग
- 2:40साइकोलॉजिकल आईडिया है लर्नड
- 2:42इंडस्ट्रियसनेस। इसका बेसिक आईडिया यह है
- 2:45कि एफर्ट सिर्फ एक डिसीजन नहीं है। एफर्ट
- 2:49एक सेंसेशन भी है। जब आप कोई डिफिकल्ट काम
- 2:52करते हैं तो शरीर और दिमाग उस एफर्ट को
- 2:55महसूस करते हैं। थकान, हैवीनेस, बोर्डम और
- 2:59कभी-कभी रेजिस्टेंस। लेकिन अगर बार-बार
- 3:02एफर्ट के बाद रिवॉर्ड मिलता रहे तो आपका
- 3:05ब्रेन धीरे-धीरे एफर्ट को रिवॉर्ड के साथ
- 3:07एसोसिएट करना सीख सकता है। यानी शुरुआत
- 3:10में एफर्ट बराबर दर्द लेकिन एसोसिएशन
- 3:13बदलने के बाद एफर्ट बराबर कुछ अच्छा आने
- 3:16वाला है और यहीं डिसिप्लिन की असली गेम
- 3:18शुरू होती है। क्योंकि कुछ लोग नेचुरली
- 3:21मेहनती पैदा नहीं हुए। हो सकता है उनके
- 3:23दिमाग ने बस कई सालों में यह एसोसिएशन सीख
- 3:26लिया हो कि काम करने के बाद अच्छा महसूस
- 3:29होता है। जबकि आपने शायद उल्टा सीखा हो।
- 3:32काम मतलब स्ट्रेस, काम मतलब प्रेशर, काम
- 3:36मतलब क्रिटिसिज्म। और अगर हर बार यही हुआ
- 3:40तो आपका ब्रेन मेहनत से प्यार क्यों
- 3:42करेगा? डोपामाइन। आपको रिवॉर्ड के बाद
- 3:45नहीं उससे पहले भी पुश करता है। हम अक्सर
- 3:48सुनते हैं डोपामाइन रिवॉर्ड केमिकल है।
- 3:51लेकिन कहानी इससे थोड़ी ज्यादा
- 3:53इंटरेस्टिंग है। जब ब्रेन सीखता है कि कोई
- 3:56चीज रिवॉर्ड आने का संकेत है तो डोपामिन
- 3:59रिस्पांस धीरे-धीरे उस रिवॉर्ड से पहले
- 4:01आने वाले सिग्नल से जुड़ सकता है। यानी
- 4:04रिवॉर्ड से ज्यादा इंपॉर्टेंट हो सकता है
- 4:06रिवॉर्ड का प्रेडिक्शन। इसीलिए आपका फोन
- 4:09आपके हाथ में आने से पहले ही आपको अच्छा
- 4:12महसूस करा सकता है। नोटिफिकेशन दिखी। फोन
- 4:16उठाया, ऐप खोली। ब्रेन पहले से जानता है।
- 4:19यहां कुछ इंटरेस्टिंग मिल सकता है। अब
- 4:22अपने स्टडी टेबल के बारे में सोचिए। अगर
- 4:24आपका ब्रेन स्टडी टेबल को देखकर सोचता है,
- 4:27अब मुश्किल चैप्टर पढ़ना पड़ेगा। तो वह
- 4:29नेचुरली एस्केप ढूंढेगा। इसका मतलब यह
- 4:32नहीं कि आपका ब्रेन खराब है। वह वही कर
- 4:34रहा है जो आपने उसे बार-बार सिखाया है। और
- 4:37अगर आपने उसे फोन के साथ रिवॉर्ड और किताब
- 4:40के साथ पनिशमेंट एसोसिएट करना सिखाया है
- 4:42तो गेस कीजिए वह किस तरफ जाएगा। इसलिए
- 4:46डिसिप्लिन बनाने के लिए सिर्फ खुद पर
- 4:48प्रेशर डालना काफी नहीं है। आपको अपने
- 4:50ब्रेन की एसोसिएशन बदलनी होगी और इसके लिए
- 4:52पांच तरीके हैं। पहला तरीका रिजल्ट को
- 4:56नहीं एफर्ट को रिवॉर्ड करो। सबसे बड़ी
- 4:59गलती यह है कि हम खुद को सिर्फ रिजल्ट
- 5:01मिलने पर रिवॉर्ड करते हैं। अगर आज पांच
- 5:04चैप्टर्स खत्म किए तभी मैं खुश हूं। अगर
- 5:07वजन कम हुआ तभी मैं सेटिस्फाइड हूं। अगर
- 5:10अच्छे मार्क्स आए तभी मेरी मेहनत
- 5:12सक्सेसफुल है। प्रॉब्लम यह है कि रिजल्ट
- 5:15आने में समय लगता है और कई बार रिजल्ट
- 5:18पूरी तरह आपके कंट्रोल में भी नहीं होता।
- 5:20इसीलिए शुरुआत में रिवॉर्ड को रिजल्ट से
- 5:22हटाकर एफर्ट पर लगाओ। आज आपने सिर्फ 30
- 5:25मिनट पढ़ा। बस आपने शो अप किया। उस एफर्ट
- 5:29को एकनॉलेज करो। एक छोटा टिक लगाओ।
- 5:31कैलेंडर पर मार्क करो। खुद से कहो मैंने
- 5:34आज भी काम किया। आप परफॉर्मेंस को रिवॉर्ड
- 5:37नहीं कर रहे। आप अपने ब्रेन को सिखा रहे
- 5:39हैं। काम करना इटसेल्फ इज अ विन। दूसरा
- 5:42तरीका रिवॉर्ड को काम के डोरवे पर रखो। यह
- 5:45थोड़ा इंटरेस्टिंग है। अगर कोई चीज आपको
- 5:48जेनुइनली पसंद है तो उसे उस एक्टिविटी के
- 5:51साथ जोड़ दो जिसे आप अवॉइड करते हैं। मान
- 5:54लीजिए आपको म्यूजिक सुनना पसंद है। लेकिन
- 5:57आप वर्कआउट करना पसंद नहीं करते तो एक रूल
- 5:59बनाइए। वह प्लेलिस्ट सिर्फ वर्कआउट के
- 6:02दौरान बजेगी या आपको कोई पॉडकास्ट पसंद है
- 6:05तो उसे सिर्फ वॉकिंग या वर्कआउट के दौरान
- 6:07सुनिए। या कोई स्पेशल कॉफी पसंद है तो उसे
- 6:10सिर्फ स्टडी टेबल पर बैठने के बाद पीजिए।
- 6:12इससे धीरे-धीरे ब्रेन में एसोसिएशन बन
- 6:15सकती है। यह अनकंफर्टेबल काम बराबर कुछ
- 6:18अच्छा। लेकिन एक कंडीशन है रिवॉर्ड
- 6:20एक्सक्लूसिव होना चाहिए। अगर वही चीज आप
- 6:23पूरे दिन इस्तेमाल करते रहेंगे तो ब्रेन
- 6:25के लिए उसका कनेक्शन कमजोर हो जाएगा।
- 6:28तीसरा तरीका काम की एंट्री इतनी छोटी करो
- 6:31कि मना करना बेवकूफी लगे। यह सबसे
- 6:33प्रैक्टिकल तरीका है। हम अक्सर गोल देखकर
- 6:36ही डर जाते हैं। आज 4 घंटे पढ़ना है। आज
- 6:39पूरा चैप्टर खत्म करना है। आज 10 कि.मी.
- 6:42दौड़ना है। ब्रेन कहता है छोड़ कल करेंगे।
- 6:46अब गोल बदलो बस 2 मिनट पढूंगा। बस एक
- 6:49पैराग्राफ बस एक क्वेश्चन बस एक सेट। आपका
- 6:53टारगेट पूरा काम नहीं है। आपका टारगेट है
- 6:55काम शुरू करना। क्योंकि सबसे मुश्किल
- 6:58हिस्सा कई बार काम करना नहीं होता। सबसे
- 7:00मुश्किल हिस्सा होता है पहला कदम और वंस
- 7:04यू स्टार्ट रेजिस्टेंस अक्सर कम हो जाती
- 7:07है। और एक और इंपॉर्टेंट बात अगर आपने
- 7:09सिर्फ 2 मिनट किया और वहीं रुक गए तब भी
- 7:12वह फेलियर नहीं है। क्योंकि आपने अपने
- 7:15ब्रेन को एक नया सिग्नल दिया। मैं इस काम
- 7:18से भागता नहीं हूं। रेपिटेशन धीरे-धीरे
- 7:21ऑटोमेटिसिटी बनाने में मदद करती है। एक
- 7:23दिन मिस हो गया। कोई डिजास्टर नहीं। एक
- 7:26दिन की गलती से हैबिट खत्म नहीं होती। असल
- 7:29नुकसान तब होता है जब आप उस एक मिस को
- 7:31एक्सक्यूज बनाकर पूरी प्रोसेस छोड़ देते
- 7:34हैं। चौथा तरीका एनवायरमेंट को डिजाइन
- 7:36करो। अपने विल पावर को नहीं अब सबसे
- 7:39अनकंफर्टेबल ट्रुथ। अगर आपका फोन आपके
- 7:42सामने पड़ा है, उसमें Instagram खुला है,
- 7:44नोटिफिकेशंस आ रही हैं और आप खुद से कह
- 7:47रहे हैं, मैं इतना डिसिप्लिंड बनूंगा कि
- 7:49फोन नहीं उठाऊंगा। तो आप अननेसेसरी फाइट
- 7:52कर रहे हैं। फोन दूसरे कमरे में रख दो।
- 7:55नोटिफिकेशंस बंद कर दो। डिस्ट्रैक्टिंग
- 7:57एप्स हटाओ। रात में वर्कआउट के कपड़े पहले
- 8:00से निकाल कर रख दो। स्टडी टेबल साफ रखो।
- 8:02क्यों? क्योंकि जब आप काम होते हैं तब
- 8:05लिया गया एनवायरमेंटल डिसीजन आपके टायर्ड
- 8:08फ्यूचर सेल्फ को डिसीजन लेने से बचाता है।
- 8:10असल डिसिप्लिंड लोग हमेशा टेंप्टेशन के
- 8:13सामने स्ट्रांग नहीं होते। कई बार वे
- 8:15टेंप्टेशन को सामने आने ही नहीं देते। विल
- 8:17पावर को हीरो मत बनाओ। एनवायरमेंट को
- 8:19स्मार्ट बनाओ। पांचवा तरीका हर सेशन को
- 8:22फेलियर पर खत्म मत करो। यह छोटा लगता है,
- 8:25लेकिन पावरफुल है। मान लीजिए आपने 2 घंटे
- 8:28पढ़ाई की, लेकिन आखिरी 20 मिनट में आप
- 8:31फ्रस्ट्रेटेड हो गए। एक क्वेश्चन नहीं
- 8:33हुआ। आपने लैपटॉप बंद किया और सोचा आज भी
- 8:37कुछ नहीं हुआ। आपके ब्रेन के पास सेशन की
- 8:39आखिरी मेमोरी क्या रह गई? फेलियर। अगली
- 8:42बार जब आप उसी काम के सामने बैठेंगे, वही
- 8:45मेमोरी प्रेडिक्शन को इन्फ्लुएंस कर सकती
- 8:47है। इसलिए कोशिश करो कि सेशन का एंडिंग
- 8:50छोटा लेकिन सक्सेसफुल हो। वर्कआउट में एक
- 8:53इजी सेट, स्टडी में एक आसान क्वेश्चन,
- 8:56राइटिंग में एक क्लीन सेंटेंस, फिर स्टॉप।
- 8:58आप अपने ब्रेन को आखिरी सिग्नल दे रहे
- 9:00हैं। हमने यह काम पूरा किया। यह कोई
- 9:03मैजिकल हैक नहीं है। लेकिन रिपीटेड
- 9:05एसोसिएशंस आपके बिहेवियर को शेप कर सकती
- 9:08हैं। और अब सबसे इंपॉर्टेंट बात इन सब का
- 9:11मतलब यह नहीं है कि डिसिप्लिन के बाद
- 9:13जिंदगी आसान हो जाएगी। नहीं, हार्ड चीजें
- 9:17हार्ड ही रहेंगी। सुबह उठना फिर भी
- 9:19मुश्किल होगा। वर्कआउट फिर भी थकाएगा,
- 9:21पढ़ाई फिर भी बोरिंग होगी। लेकिन
- 9:23धीरे-धीरे एक चीज बदल सकती है। आपके अंदर
- 9:26की नेगोशिएशन व 40 सेकंड आर्गुमेंट। उठूं
- 9:30या सो जाऊं, पढूं या फोन चलाऊं, वर्कआउट
- 9:34करूं या कल से शुरू करूं। यह आर्गुमेंट
- 9:37जितना कम होगा, उतना कम आपको डिसिप्लिन की
- 9:40जरूरत पड़ेगी। और शायद यही डिसिप्लिन की
- 9:42सबसे इंटरेस्टिंग डेफिनेशन है। खुद से रोज
- 9:45युद्ध करना नहीं बल्कि अपने ब्रेन को इस
- 9:48तरह ट्रेन करना कि सही काम करना धीरे-धीरे
- 9:51नॉर्मल लगने लगे। आपको मोटिवेशन का इंतजार
- 9:54नहीं करना। आपको खुद को हर दिन विलेन
- 9:57समझकर पनिश नहीं करना। आपको बस अपनी
- 9:59एसोसिएशंस बदलनी है। एफर्ट को रिवॉर्ड से
- 10:02जोड़ना है। काम की शुरुआत छोटी करनी है।
- 10:05एनवायरमेंट को अपने पक्ष में रखना है। और
- 10:08हर दिन अपने ब्रेन को एक नया एविडेंस देना
- 10:11है। मैं वह इंसान हूं जो शुरू करता है।
- 10:14क्योंकि आखिर में डिसिप्लिन कोई मैजिकल
- 10:16पर्सनालिटी ट्रेट नहीं है। यह बार-बार
- 10:18दोहराए गए एक्शंस का रिजल्ट है। आज आपका
- 10:22ब्रेन जिस चीज की तरफ ऑटोमेटिकली जाता है,
- 10:24वह भी कभी आपकी रिपीटेड चॉइससेस का रिजल्ट
- 10:27था। और अगर चॉइससेस बदली जा सकती है तो
- 10:29एसोसिएशंस भी बदली जा सकती हैं। तो अगली
- 10:32बार जब आप खुद से कहें मैं बहुत लेजी हूं।
- 10:35एक बार रुकिए। शायद सवाल यह नहीं है कि
- 10:38मेरे अंदर डिसिप्लिन क्यों नहीं है? सवाल
- 10:41यह है मैंने अपने ब्रेन को अब तक क्या
- 10:43सीखने दिया है? और फिर उसे दोबारा ट्रेन
- 10:46करना शुरू कीजिए। वीडियो अच्छी लगी हो तो
- 10:48लाइक करें और सब्सक्राइब करना ना भूलें।
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