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Press In India | Modern History of India | State PSC, SSC, Railway & All Exams — Transcript

by Shubham Gupta Academy · 8,446 words · 1,118 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:12नमस्कार साथियों कैसे हैं आप सभी लोग?
  2. 0:15उम्मीद करता हूं आप सब लोग बहुत अच्छे
  3. 0:18होंगे और आप सभी की पढ़ाई बहुत अच्छे ढंग
  4. 0:20से आगे बढ़ रही होगी। दोस्तों, एक बार फिर
  5. 0:23से आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत है आधुनिक
  6. 0:26भारतीय इतिहास की इस सीरीज में मॉडर्न
  7. 0:29इंडियन हिस्ट्री की सीरीज में। फर्स्ट ऑफ
  8. 0:31ऑल थैंक यू सो मच कि आपने इस सीरीज को
  9. 0:33इतना पसंद किया है। आपको यह सीरीज बहुत
  10. 0:36पसंद आई है। पसंद से भी ज्यादा इंपॉर्टेंट
  11. 0:38यह है कि एग्जाम में आपकी मदद कर रही है।
  12. 0:41आप जो भी पेपर निकालते हैं, जो भी आप
  13. 0:43कमेंट करते हैं, उससे मुझे बहुत मोटिवेशन
  14. 0:46मिला है कि मैं आगे और भी बढ़िया सीरीज
  15. 0:49आपके लिए लेकर के आऊं और ट्रस्ट मी एक
  16. 0:52बहुत अच्छे प्रोजेक्ट पर मैं काम भी कर
  17. 0:54रहा हूं जो जल्दी ही आपके सामने मैं लेकर
  18. 0:56के आऊंगा। मोस्ट प्रोबेबबली विद इन अ मंथ
  19. 0:59जो आपकी अगेन बहुत मदद करेगा आने वाली
  20. 1:02परीक्षाओं को निकालने में। सो थैंक यू सो
  21. 1:04मच एंड कीप वाचिंग, कीप लविंग द सीरीज और
  22. 1:07जो भी आपके फीडबैक हैं वो आप लगातार देते
  23. 1:10रहिए। आज का जो टॉपिक है ना वो बहुत
  24. 1:13ज्यादा कंसेप्चुअल है नहीं। बहुत छोटा सा
  25. 1:16टॉपिक है और मैं आपसे यह कहूं कि इसमें
  26. 1:19मेरा काम बहुत कम है। मेरा काम बस तथ्यों
  27. 1:21को एक जगह पर लाना है। इस टॉपिक में आपकी
  28. 1:25मेहनत बहुत ज्यादा है। भारत में प्रेस का
  29. 1:28विकास डेवलपमेंट ऑफ प्रेस इन इंडिया। यहां
  30. 1:32हम मुख्य रूप से दो टॉपिक के बारे में बात
  31. 1:35करते हैं। एक तो भारत में कौन से समाचार
  32. 1:38पत्र आए? वो कहां से शुरू किए गए और उनको
  33. 1:41चलाने वाले लोग कौन से थे? और दूसरा हम
  34. 1:44बात करते हैं कि भारत में अलग-अलग समय पर
  35. 1:48जो अलग-अलग प्रेस अधिनियम लाए गए उनमें
  36. 1:51क्या योगदान दिया गया और हमेशा की तरह
  37. 1:54आखिर में हम कुछ वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को
  38. 1:56लगाएंगे। कुछ एमसीक्यूस को हम सॉल्व कर
  39. 1:59रहे होंगे प्यारे साथियों। ठीक है? एक
  40. 2:01जानकारी और कि हमारा जीके जीएस का बैच
  41. 2:04हमारा इंडियन पिटी इंडियन ज्योग्राफी का
  42. 2:06बैच हमारी एप्लीकेशन शुभम गुप्ता एकडमी पर
  43. 2:09चल रहा है। तो एक बार आप जरूर जाकर के
  44. 2:11देखें। डिस्क्रिप्शन में आपको लिंक भी मिल
  45. 2:13जाएगी। ठीक है? तो आइए एक बार हम चर्चा कर
  46. 2:16लें कि आखिर इसमें कौन-कौन से टॉपिक दिए
  47. 2:19गए हैं जिनके बारे में हमें बात करनी है।
  48. 2:21तो सबसे पहले हमें पृष्ठभूमि पढ़ना है। एक
  49. 2:24बैकग्राउंड पढ़ना है। पृष्ठभूमि के बाद
  50. 2:26हमें मुख्य समाचार पत्रों की बात करनी है
  51. 2:29कि कौन सा न्यूज़ पेपर कहां से निकाला
  52. 2:31जाता था। कौन सा व्यक्ति उसका संपादक था।
  53. 2:35फिर हम बात करेंगे कुछ समाचार एजेंसियों
  54. 2:38के बारे में। इसके बाद हमें कुछ किताबों
  55. 2:40की बात करनी है। फिर हमें अधिनियमों की
  56. 2:43बात करनी है और आखिर में हमें प्रभाव के
  57. 2:46बारे में डिस्कशन करना है। देखो मेरा रोल
  58. 2:50एक्चुअल में सिर्फ इस टॉपिक को समझाने में
  59. 2:52है कि अधिनियम कहां पर है। बाकी पूरा रोल
  60. 2:55आपका है। पर फिर भी एक बार हम सारे
  61. 2:58अखबारों के नाम पढ़ेंगे कि कौन-कौन से
  62. 3:00न्यूज़पेपर लाए गए। पहले एक छोटा सा
  63. 3:03बैकग्राउंड समझते हैं। अखबार बहुत जरूरी
  64. 3:06होते हैं। न्यूज़पेपर बहुत जरूरी होते
  65. 3:09हैं। क्योंकि अखबार अपनी बात को ज्यादा
  66. 3:12लोगों तक पहुंचाने का एक बहुत अच्छा
  67. 3:14माध्यम है। आज तो हमारे पास सोशल मीडिया
  68. 3:17और इंटरनेट है पर लंबे समय तक हमारे पास
  69. 3:19अखबार ही संचार का सबसे बड़ा माध्यम रहा
  70. 3:23है। न्यूज़ पेपर ही कम्युनिकेशन का सबसे
  71. 3:26बड़ा मीडियम रहा है। और न्यूज़ पेपर के
  72. 3:29माध्यम से ही हमारे राष्ट्रीय आंदोलन के
  73. 3:32जो नेता हैं, हमने कई नेताओं के बारे में
  74. 3:34बात की है। चाहे उसमें हमने चर्चा की हो
  75. 3:37महात्मा गांधी की। बाल गंगाधर तिलक जो
  76. 3:40मराठा और केसरी चराया करते थे। समाज
  77. 3:43सुधारकों में अभी हम राजा राममोहन राय की
  78. 3:45बात करेंगे। सभी ने अखबारों का सहारा
  79. 3:48लिया। सभी ने न्यूज़पेपर और किताबों का
  80. 3:50सहारा लिया अपनी बातों को दूसरों तक
  81. 3:53पहुंचाने में। देखो शुरुआत से तो भारत में
  82. 3:56अखबार थे नहीं। अगर हम बहुत पुराने समय पर
  83. 3:59चले जाएं तो हमारे पास पांडुलिपियां होती
  84. 4:01थी। पांडुलिपि का सीधा सा मतलब है जो भी
  85. 4:04हमने हाथों से लिखा है वो पांडुलिपि
  86. 4:07कहलाता है। कोई भी चीज जो आज अगर अपनी
  87. 4:09कॉपी आप हाथ से लिख रहे हो तो वो
  88. 4:11पांडुलिपि कहलाती है। पुराने समय में
  89. 4:14हमारे पास ताड़ पत्र पाम ट्री की लीफ्स
  90. 4:18होती थी। उनके ऊपर हम लिखते थे। उन्हें
  91. 4:21ताम्र पत्र या ताड़ पत्र कहा जाता था। फिर
  92. 4:24हमारे पास भोज पत्र होता था। हिमालय में
  93. 4:27हमने ज्योग्राफी में पढ़ा है। हिमालय में
  94. 4:30भुज नाम का एक पेड़ पाया जाता है। इंग्लिश
  95. 4:32में बर्च ट्री बोलते हैं। उसकी छाल के ऊपर
  96. 4:36हम लिखा करते थे। ऐसे ही चर्म पत्र होता
  97. 4:39था। खाल या चमड़े के ऊपर लिखा करते थे।
  98. 4:42फिर कपड़े के ऊपर लिखा गया। फिर कागज के
  99. 4:44ऊपर लिखा गया। कागज तो आ गया लेकिन
  100. 4:47प्रिंटिंग अभी भी नहीं आई थी। 1550 के बाद
  101. 4:52पुर्तगालियों के द्वारा भारत में
  102. 4:54प्रिंटिंग की शुरुआत की गई। गोवा में
  103. 4:56उन्होंने प्रिंटिंग मशीन लगाई थी और यहां
  104. 4:59से भारत में मुद्रण अर्थात प्रिंटिंग की
  105. 5:02शुरुआत हुई और फिर यह धीरे-धीरे आगे बढ़ती
  106. 5:04चली गई और किताबें और अखबार हमारी दैनिक
  107. 5:07जीवन का हिस्सा बनने लगे। हमारे डे टू डे
  108. 5:10की लाइफ का हिस्सा बनने लगे। न्यूज़पेपर
  109. 5:13का रोल क्या है? वो भी हम जानेंगे। बहुत
  110. 5:15बड़ा महत्व है अपने विचारों को एक स्थान
  111. 5:19से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में। तो आइए
  112. 5:21जानते हैं कि इसकी शुरुआत कैसे हुई। इसमें
  113. 5:24मैक्सिमम बातें मैं पीपीटी से ही समझाऊंगा
  114. 5:26क्योंकि जैसा मैंने बताया ये पूरा एक
  115. 5:28फ़क्चुअल टॉपिक है। तो हम पीपीटी से ही
  116. 5:30चीजों को समझने की कोशिश करेंगे। पहला
  117. 5:34भारत में जो पहली प्रिंटिंग प्रेस है वो
  118. 5:361556 में 1556 में पुर्तगालियों के द्वारा
  119. 5:41गोवा में स्थापित की गई थी। यह हमने अपनी
  120. 5:44पहली या दूसरी क्लास में डिस्कस किया था
  121. 5:46कि पुर्तगालियों का भारत पर क्या प्रभाव
  122. 5:49पड़ा? जो पोर्चुगीज हैं इंडिया उनका
  123. 5:52इंडिया पर क्या इफेक्ट पड़ा ये हमने अपनी
  124. 5:54शुरुआत की क्लास में भी डिस्कस किया था।
  125. 5:57इसके बाद जो पहली किताब पब्लिश की गई जो
  126. 6:00पहली बुक पब्लिश की गई वो 1557 में की गई
  127. 6:04और गोवा के जो पादरी हैं उन्होंने भारत की
  128. 6:07पहली किताब छापी थी और नाम था डॉक्ट्रिन
  129. 6:10ऑफ क्रिश्चियन या डॉक्ट्रिन ऑफ जीसस चर्च
  130. 6:14इस प्रकार की किताब उन्होंने छापी थी। तो
  131. 6:17दुनिया की जो पहली भारत की जो पहली किताब
  132. 6:20है वो गोवा में पादरियों के द्वारा
  133. 6:22क्योंकि उन्हीं ने ही भारत की पहली
  134. 6:24प्रिंटिंग प्रेस लगाई थी तो उनके द्वारा
  135. 6:27यह पहली किताब निकाली गई। अब धीरे-धीरे
  136. 6:30प्रिंटिंग प्रेस भारत के अलग-अलग हिस्सों
  137. 6:33में पहुंचेंगी और 1684 में 1684 में ईस्ट
  138. 6:38इंडिया कंपनी ने बॉम्बे में अपनी
  139. 6:41प्रिंटिंग प्रेस स्थापित की थी। 1684 में
  140. 6:45ईस्ट इंडिया कंपनी ने बॉम्बे में अपनी
  141. 6:48पहली प्रिंटिंग प्रेस लगाई थी या अपनी
  142. 6:50पहली ऑफिशियल प्रिंटिंग प्रेस लगाई थी।
  143. 6:53उनके लिए भी बहुत जरूरी था। डॉक्यूमेंट को
  144. 6:56पब्लिश करना है और भी बहुत सारी चीजें
  145. 6:58हैं। इसके बाद आप देखें कि 1776 में 1776
  146. 7:04में कंपनी के ही एक कर्मचारी बोल्टस ने एक
  147. 7:08समाचार पत्र निकालने की योजना बनाई। लेकिन
  148. 7:12कंपनी ने उनको मना कर दिया। ना सिर्फ मना
  149. 7:15कर दिया बल्कि उनसे कहा कि आप भारत नहीं
  150. 7:18रह सकते। आप इंडिया में नहीं रह सकते।
  151. 7:21इसके बाद दोस्तों जनवरी 1780 में जनवरी
  152. 7:261780 में अंततः एक अंग्रेज जेम्स ऑगस्टस
  153. 7:31हिक्की। यह सवाल पूछा जाता है। एक अंग्रेज
  154. 7:34जेम्स ऑगस्ट हिक्की ने द बंगाल गजट जिसे
  155. 7:39कोलकाता जनरल एडवाइजर भी कहा जाता है
  156. 7:43प्रकाशित किया और यह भारत का पहला समाचार
  157. 7:47पत्र था। यह इंडिया का पहला न्यूज़ पेपर
  158. 7:50था। तो देखो कहानी कहां से शुरू हुई है?
  159. 7:531556 में भारत में पुर्तगाली प्रिंटिंग
  160. 7:56प्रेस लेकर के आते हैं। 1557 में भारत में
  161. 8:00पुर्तगाली पहली किताब पब्लिश करते हैं।
  162. 8:031684 में ईस्ट इंडिया कंपनी बॉम्बे में
  163. 8:06प्रिंटिंग प्रेस लगाती है। 1776 में एक
  164. 8:10अंग्रेज व्टस नाम का कोशिश करता है
  165. 8:13न्यूज़पेपर निकालने की पर कंपनी मना कर
  166. 8:16देती है। अंततः 1780 में जेम्स ऑगस्ट
  167. 8:20हिक्की द बंगाल गजेट को पब्लिश करता है।
  168. 8:23और द बंगाल गजट भारत का पहला अखबार था
  169. 8:28जिसका नाम एक और था कोलकाता जनरल
  170. 8:32एडवाइज़री। पर आपको पता है यह न्यूज़ पेपर
  171. 8:35भी बंद कर दिया जाता है। यह अखबार भी
  172. 8:38अंग्रेजों ने बंद कर दिया। क्योंकि जेम्स
  173. 8:41ऑगस्ट हिक्की एक खुले विचारों वाला
  174. 8:43व्यक्ति था। उसके लिए सही-सही और गलत गलत
  175. 8:47हुआ करता था। तो उसने वारेन हेस्टिंग की
  176. 8:50आलोचना की। आप जान पाइए कि ये वो समय आ
  177. 8:53चुका है जब वारेन हेस्टिंग बंगाल का पहला
  178. 8:56गवर्नर जनरल बन चुका है। रेगुलेटिंग
  179. 8:59अधिनियम के द्वारा 1773 का जो रेगुलेटिंग
  180. 9:02अधिनियम आया उसे बंगाल का पहला गवर्नर
  181. 9:04जनरल बना दिया गया है। लंबे समय तक 178485
  182. 9:08तक वो भारत में रहता है और भारत में रहकर
  183. 9:11के उसने हमेशा अच्छे काम नहीं किए।
  184. 9:14ठीक है? नंद कुमार के ब्राह्मण की हत्या
  185. 9:16का मामला हुआ। यह सारे मामले उस पर चलाए
  186. 9:18गए। यह सारे मामले उसके ऊपर चलाए गए। आगे
  187. 9:21हम गवर्नर जनरल वाली क्लास में ये सारे
  188. 9:24टॉपिक देखेंगे। बहुत डिटेल में हम इनके
  189. 9:26बारे में बात करेंगे। जब हम गवर्नर जनरल
  190. 9:28के बारे में पढ़ेंगे कि हां ये सारी
  191. 9:30समस्याएं रही हैं। ये सारी प्रॉब्लम्स रही
  192. 9:33हैं। क्लियर? तो ये बात आपको याद रखना है।
  193. 9:37जेम्स ऑगस्ट हिक्की ने द बंगाल गजेट का
  194. 9:40प्रकाशन किया। ठीक? परंतु कंपनी की आलोचना
  195. 9:44के कारण 23 मार्च 1782 को वारेन होस्टिंग
  196. 9:48ने यह न्यूज़पेपर बंद करवा दिया। तो दो
  197. 9:51साल ही ये अखबार चल पाया। फिर भारतीयों ने
  198. 9:54जो पहला अखबार निकाला था उसका नाम उसका
  199. 9:57नाम भी बंगाल गजट ही था और ये गंगाधर
  200. 10:00भट्टाचार्य ने निकाला था और इसे यह
  201. 10:03अंग्रेजी भाषा में निकाला गया था। इंग्लिश
  202. 10:06में निकाला गया था। फिर भारतीय भाषाओं में
  203. 10:09मार्शमैन के संपादन में बंगाली मासिक
  204. 10:13पत्रिका दिग्दर्शन प्रकाशित हुई और
  205. 10:16मार्शमैन ने ही समाचार दर्पण का प्रकाशन
  206. 10:19शुरू किया जो बंगाली भाषा का पहला
  207. 10:22साप्ताहिक समाचार पत्र था जो बंगाली भाषा
  208. 10:26का पहला साप्ताहिक समाचार पत्र था तो ऐसे
  209. 10:29भारत में न्यूज़पेपर की कहानी आगे बढ़ती
  210. 10:32है अखबारों की कहानी आगे बढ़ती है अब यहां
  211. 10:35से हमें टॉपिक को जो रटने वाली बात है
  212. 10:38हालांकि कोशिश करेंगे कि जहां पर कोई
  213. 10:40कहानी मैं आपको बता बता सकता हूं वो मैं
  214. 10:42आपको जरूर बता दूं। तो देखिए जैसा हमने
  215. 10:45डिस्कस किया कि बंगाल गजट यह अंग्रेजी
  216. 10:48भाषा में आया था। 1780 में कोलकाता से
  217. 10:52प्रकाशित किया गया और यह जेम्स ऑगस्ट
  218. 10:56हिक्की ने प्रकाशित किया था। यह भारत का
  219. 11:00पहला समाचार पत्र था जो साप्ताहिक तौर पर
  220. 11:03आता था जो वीकली तौर पर आता था। इसी तरीके
  221. 11:07से अंग्रेजी में कोलकाता गजट का भी
  222. 11:11प्रकाशन शुरू हुआ और कुछ समय के बाद इस पर
  223. 11:15भी प्रतिबंध लगा दिए गए। अंग्रेजी भाषा
  224. 11:18में बॉम्बे हेरोल्ड नाम का न्यूज़ पेपर
  225. 11:21आया। 1789
  226. 11:23में यह बॉम्बे से पब्लिश होता था और इसे
  227. 11:27विलियम आर्नोट के द्वारा पब्लिश किया जाता
  228. 11:30था। 1791 में इसका नाम बदल करके बॉम्बे
  229. 11:36गजट कर दिया। तो भारत का पहला अखबार जो है
  230. 11:40बंगाल गजट को माना जाता है जो अंग्रेजी
  231. 11:43भाषा में कोलकाता से जेम्स ऑगस्ट हिक्की
  232. 11:47ने प्रकाशित किया था। लेकिन प्यारे
  233. 11:49साथियों आपको याद रखना है बॉम्बे का जो
  234. 11:51पहला अखबार है वह बॉम्बे हेराल्ड को माना
  235. 11:55जाता है जो 1789 में विलियम आर्नोट ने
  236. 11:59प्रकाशित किया था और बाद में इसका नाम बदल
  237. 12:02करके बॉम्बे गजट कर दिया गया था। ठीक है?
  238. 12:05फिर एक और अखबार है इंडिया हेरोल्ड। यह
  239. 12:09मद्रास में प्रकाशित किया गया विलियम
  240. 12:12हेमफरी के द्वारा। इसी के बाद बंगाल गजट।
  241. 12:16बंगाल गजट यह भी अंग्रेजी भाषा का था। यह
  242. 12:201816 में कोलकाता में गंगाधर भट्टाचार्य
  243. 12:24के द्वारा प्रकाशित किया गया और किसी
  244. 12:27भारतीय के द्वारा निकाला गया यह पहला
  245. 12:30अखबार था। किसी भारतीय के द्वारा निकाला
  246. 12:33गया यह पहला अखबार था। अंग्रेजी भाषा में
  247. 12:36ही निकाला था। किसी स्थानीय या भारतीय
  248. 12:39भाषा में नहीं निकाला था। पर गंगाधर
  249. 12:41भट्टाचार्य ने अंग्रेजी भाषा में बंगाल
  250. 12:44गजट की शुरुआत की। एक बंगाल गजट वो जेम्स
  251. 12:48ऑगस्ट हिक्की ने अंग्रेजी में निकाला था
  252. 12:51पर वो अंग्रेज थे। ये जो बंगाल गजट है ये
  253. 12:54गंगाधर भट्टाचार्य ने निकाला है। कोलकाता
  254. 12:58से निकाला है प्यारे साथियों अंग्रेजी
  255. 13:00में। फिर संवाद कोमुदी ये बंगाली भाषा में
  256. 13:05राजा राममोहन राय के द्वारा निकाला गया और
  257. 13:08राजा राममोहन राय के तीन प्रमुख अखबार थे।
  258. 13:11संवाद कोमुदी, मिरातुल अखबार जो फारसी
  259. 13:15भाषा में और बंगदूत। ये तीन बहुत फेमस
  260. 13:19उनके अखबार रहे। संवाद कोमुदी, मिरातुल
  261. 13:23अखबार और बंगदूत। इनकी चर्चा हम अगले
  262. 13:26लेक्चर में भी करेंगे। अगले लेक्चर में भी
  263. 13:28हम इनके बारे में बात करेंगे। मिरातुल
  264. 13:31अखबार फारसी भाषा में आता था। संवाद
  265. 13:35कोमुदी जो बहुत ज्यादा प्रसिद्ध अखबार था
  266. 13:38वो बंगाली में आता था। और इन्हीं तीन
  267. 13:40अखबारों के माध्यम से उन्होंने समाज सुधार
  268. 13:44की अपील की। उन्होंने सोशल रिफॉर्म के
  269. 13:47बारे में बात की। समाज सुधार की अपील की।
  270. 13:50सोशल रिफॉर्म के बारे में बात की। तो क्या
  271. 13:53याद रखेंगे कि राजा राममोहन राय के तीन
  272. 13:56प्रमुख अखबार हैं। संवाद कोमुदी, बंगाली,
  273. 13:59मिरातुल अखबार फारसी और बंगदूत। ये तीन
  274. 14:03इनके प्रमुख अखबार हैं। इसके बाद बॉम्बे
  275. 14:07समाचार जो बॉम्बे समाचार नाम का अखबार है,
  276. 14:11ये फरदुंजी मार्जान के द्वारा गुजराती
  277. 14:16भाषा में निकाला गया था। उदंत उदंत
  278. 14:19मार्तंड उदंत मार्तंड ये हिंदी भाषा में
  279. 14:24जुगल किशोर शुक्ल के द्वारा कोलकाता से
  280. 14:29निकाला गया और यह भारत का पहला हिंदी
  281. 14:32समाचार पत्र है। यह इंडिया का पहला हिंदी
  282. 14:36न्यूज़ पेपर है। यह भारत का पहला हिंदी
  283. 14:40समाचार पत्र है। यह इंडिया का पहला हिंदी
  284. 14:43न्यूज़ पेपर था। उदंत मार्टंड किसने
  285. 14:47निकाला था? प्रकाशक का नाम पूछा जाता है।
  286. 14:50जुगल किशोर शुक्ल कब निकाला था? 1826
  287. 14:54कोलकाता। फिर द बॉम्बे टाइम्स। द बॉम्बे
  288. 14:58टाइम्स बहुत ही फेमस। ये जे ई ब्रेनन के
  289. 15:01द्वारा निकाला गया। 1861 में यही अखबार द
  290. 15:06टाइम्स ऑफ इंडिया बना। ये सरकार का समर्थक
  291. 15:09था बहुत बड़ा और इसके संपादक रॉबर्ट नाइट
  292. 15:12थे। यह अखबार क्योंकि सरकार का समर्थक था
  293. 15:15इसलिए कभी भी इसको कोई भी दिक्कत का सामना
  294. 15:18नहीं करना पड़ा। ठीक है? फिर है रफ्त
  295. 15:21गोफ्तार। जो रफ्त गोफ्तार है यह दादा भाई
  296. 15:25नौरोजी के द्वारा निकाला गया अखबार है।
  297. 15:30हिंदू पेट्रियाट यह अंग्रेजी भाषा का
  298. 15:33अखबार है जिसे मधुसूदन राय ने शुरू किया
  299. 15:36था। लेकिन गिरीश चंद्र घोष और हरीश चंद्र
  300. 15:40मुखर्जी इसके प्रमुख संपादक रहे। हरीश
  301. 15:43चंद्र मुखर्जी को भारतीय पत्रकारिता का
  302. 15:47राजकुमार कहा जाता है। इन्होंने ही हिंदू
  303. 15:50पेट्रियाार्ड में नील विद्रोह का वर्णन
  304. 15:53किया था और किसानों के पक्ष में लेख लिखे
  305. 15:56थे। 1857 की क्रांति के प्रति इन्होंने
  306. 15:59संतुलित रुख अपनाया था कि जहां इन्होंने
  307. 16:02दोनों पक्षों की बात रखी थी। दोनों ही
  308. 16:05पक्षों के बारे में इन्होंने लिखा था। एक
  309. 16:08मिनट दीजिएगा दोस्तों।
  310. 16:18ठीक है? तो ये याद रखेंगे। रास्त गोफ्तार
  311. 16:21दादा भाई नौरोजी हिंदू पेट्रियाट अंग्रेजी
  312. 16:25भाषा में मधुसूदन राय गिरीश चंद्र घोष
  313. 16:29हरीश चंद्र मुखर्जी हरिश्चंद्र मुखर्जी को
  314. 16:32जैसा हमने कहा कि इन्हें भारतीय
  315. 16:35पत्रकारिता का राजकुमार कहा जाता है। नील
  316. 16:39विद्रोह किसानों के पक्ष में लेख लिखे गए
  317. 16:42और 1857 का विद्रोह इसमें एक संतुलित रुख
  318. 16:45अपनाया था जब हिंदू पेट्रिया ने उसके बारे
  319. 16:49में लिखा था। इसके बाद कुछ और अखबार हैं
  320. 16:51सोम प्रकाश। ये बंगाली भाषा का अखबार बहुत
  321. 16:55ही फेमस अखबार सोम प्रकाश जो कि बंगाली
  322. 16:59भाषा में लिखा गया था। सोम प्रकाश जो है
  323. 17:02ये इसके प्रकाशक ईश्वरचंद विद्यासागर थे।
  324. 17:06सोम प्रकाश के जो जो सोम प्रकाश है इसके
  325. 17:09जो प्रकाशक थे वो ईश्वरचंद विद्यासागर थे।
  326. 17:13ये बंगाल का राजनीतिक अखबार माना जाता है।
  327. 17:16ये पॉलिटिकल अखबार था। अलीगढ़ गजट अलीगढ़
  328. 17:21गजट सर सैयद अहमद खान का अखबार था। अमृत
  329. 17:26बाजार ये बंगाली भाषा में मोतीलाल और
  330. 17:30शिशिर घोष के द्वारा शुरू किया गया था और
  331. 17:331878
  332. 17:35के वर्नाकुलर प्रेस एक्ट से बचने के लिए
  333. 17:39अंग्रेजी में कन्वर्ट हो गया। दो अखबारों
  334. 17:42की कहानी सुनना। देखो सोम प्रकाश जो ईश्वर
  335. 17:46चंद्र विद्यासागर का अखबार था। यह
  336. 17:48पॉलिटिकल भी था, सोशल भी था क्योंकि ईश्वर
  337. 17:51चंद्र विद्यासागर का बहुत बड़ा योगदान
  338. 17:54विधवा पुनर्विवाह अधिनियम के लिए भी माना
  339. 17:57जाता है। अलीगढ़ गजट जो है यह सर सैयद
  340. 18:00अहमद खान का अखबार था और इस अखबार का
  341. 18:04उद्देश्य दो था। एक तो मुसलमानों को
  342. 18:06पश्चिमी शिक्षा के लिए प्रेरित करना।
  343. 18:08दूसरा एक समय के बाद सर सैयद अहमद खान यह
  344. 18:12मानने लगे थे कि अंग्रेजों का शासन ही
  345. 18:15मुसलमानों के लिए अच्छा है। इसलिए
  346. 18:17मुसलमानों को अंग्रेजों की बात माननी
  347. 18:19चाहिए और इस अखबार के थ्रू कहीं ना कहीं
  348. 18:22वो यह बात अपने समर्थकों के बीच में रखते
  349. 18:25थे। फिर तीसरा है अमृत बाजार। ये तो जरूर
  350. 18:29आपको याद रखना है। वैसे जितने भी अखबार
  351. 18:31हैं उसमें से अधिकांश याद रहने चाहिए।
  352. 18:33अमृत बाजार यह बंगाली भाषा में शुरू हुआ
  353. 18:36एक अखबार था। अमृत बाजार की बात यह है कि
  354. 18:39जब 1878 में अभी हम बात करेंगे कि 1878
  355. 18:44में एक वर्नाकुलर प्रेस एक्ट आएगा।
  356. 18:47वर्नाकुलर मतलब होता है स्थानीय भाषा लोकल
  357. 18:50लैंग्वेज। तो वर्नाकुलर प्रेस एक्ट जब
  358. 18:53आएगा तो वो कहेगा कि जितने भी लोकल
  359. 18:55लैंग्वेज के अखबार हैं उन्हें बंद कर दिया
  360. 18:58जाएगा। या उन पर इतने प्रतिबंध लगा दिए
  361. 19:01जाएंगे कि वह अच्छे से अपना काम नहीं कर
  362. 19:03पाएंगे। तो अमृत बाजार पत्रिका रातोंरात
  363. 19:06बंगाली से अंग्रेजी में कन्वर्ट हो गई थी।
  364. 19:09तो यह प्रश्न पूछा जाता है कि किस समाचार
  365. 19:12पत्र ने वर्नाकुलर प्रेस एक्ट से बचने के
  366. 19:16लिए अपनी भाषा अंग्रेजी कर ली थी? तो अमृत
  367. 19:19बाजार पत्रिका जो कि बंगाली में आती थी।
  368. 19:22उन्होंने अपनी भाषा अंग्रेजी कर ली थी।
  369. 19:26फिर द हिंदू आज भी चलता है। बहुत प्रसिद्ध
  370. 19:29अखबार है। मद्रास से इसका प्रकाशन शुरू
  371. 19:31हुआ था। जी एस अय्यर ठीक है मद्रास से
  372. 19:34प्रकाशन शुरू हुआ था केसरी और मराठा केसरी
  373. 19:38मराठी भाषा में था और मराठा अंग्रेजी भाषा
  374. 19:42में था बाल गंगाधर तिलक देखिए केसरी से
  375. 19:46प्रोफेसर केलकर जुड़े हुए थे और मराठा से
  376. 19:51आकर जुड़े हुए थे। तो ये दो चीजों को आपको
  377. 19:54याद रखना है कि बाल गंगाधर तिलक के साथ
  378. 19:57केलकर साहब केसरी के प्रकाशन से जुड़े थे
  379. 20:00और बाल गंगाधर तिलक जी के साथ आकर जो है
  380. 20:04वो मराठा के प्रकाशन से जुड़े हुए थे। तो
  381. 20:07यहां उदंत मार्टंड ये हिंदी का अखबार है।
  382. 20:10जुगल किशोर शुक्ल
  383. 20:13इसके अलावा रास्त गोफ्तार दादा भाई नौरोजी
  384. 20:17हिंदू पेट्रिया मधुसूदन राय गिरीश चंद्र
  385. 20:21घोष और हरीश चंद्र मुखर्जी जिन्हें भारतीय
  386. 20:25पत्रकारिता का राजकुमार कहते हैं। सोम
  387. 20:28प्रकाश बंगाली भाषा में ईश्वर चंद्र
  388. 20:30विद्यासागर अलीगढ़ गजट सर सैयद अहमद खान
  389. 20:35अमृत बाजार बंगाली में मोतीलाल और शिशिर
  390. 20:39घोष यही वो अखबार है जो वर्नाकुलर प्रेस
  391. 20:42एक्ट से बचने के लिए भाषा बदल लेता है
  392. 20:44केसरी और मराठा बाल गंगाधर तिलक केसरी
  393. 20:48मराठी में मराठा अंग्रेजी में और इससे
  394. 20:51पहले हमने क्या डिस्कस किया था सर इससे
  395. 20:53पहले हमने राजा राममोहन राय के तीन अखबार
  396. 20:56पढ़े संवाद बाद कोमुदी मिररातुल अखबार और
  397. 21:00बंगदूत गंगाधर भट्टाचार्य बंगाल गजट
  398. 21:03अंग्रेजी में भारतीय द्वारा पहला अखबार और
  399. 21:06भारत का पहला अखबार था बंगाल गजट जो कि
  400. 21:09जेम्स ऑगस्ट हिक्की के द्वारा लाया गया
  401. 21:12था। अखबार बहुत सारे हैं। आप प्लीज बुरा
  402. 21:16मत मानना। कमेंट करके कुछ भी गुस्सा मत
  403. 21:20करना। पर ये मेरी मजबूरी है कि ऐसे
  404. 21:22फेक्चुअल टॉपिक में हमारे हाथ बहुत बंधे
  405. 21:24रहते हैं और लगभग हर एक अखबार से सवाल
  406. 21:27पूछा गया है। तो मुझे बहुत से अखबारों का
  407. 21:29नाम यहां पर रखना पड़ा है प्यारे साथियों।
  408. 21:32ठीक है? आइए एक बार देख लेते हैं। फिर एक
  409. 21:34अखबार है इंडिया। इंडिया जो अखबार है
  410. 21:38इंडिया को पब्लिश किया था दादा भाई नौरोजी
  411. 21:41ने और ये लंदन में ये पब्लिश किया करते थे
  412. 21:44लंदन में। देखो हमने डिस्कस किया था कि
  413. 21:47ब्रिटिश
  414. 21:48भारत में सॉरी जो
  415. 21:52कांग्रेस है इंडियन नेशनल कांग्रेस
  416. 21:54इन्होंने अपनी ओवरसीज कमेटी भी बनाई थी।
  417. 21:57तो ब्रिटेन में इनकी कमेटी हुआ करती थी।
  418. 22:00विलियम बैडर वर्न वगैरह जुड़े हुए थे।
  419. 22:02हमने डिस्कस किया था। तो वहीं पर दादा भाई
  420. 22:05नौरोजी जो है वो इसी ओवरसीज कमेटी की तरफ
  421. 22:08से यह अखबार पब्लिश किया करते थे। नाम था
  422. 22:10इंडिया। संध्या एक बहुत प्रसिद्ध अखबार
  423. 22:14रहा। संध्या और यह जो संध्या है यह हम
  424. 22:17जानते हैं क्रांतिकारी विचारधारा का अखबार
  425. 22:20था। इसे ब्रह्मा बांधव उपाध्याय पब्लिश
  426. 22:23करते थे। ये तो हमने पढ़ा भी था कि संध्या
  427. 22:26और युगांतर ये भारत के प्रमुख क्रांतिकारी
  428. 22:30अखबार हैं। ये इंडिया के मेजर
  429. 22:32रेवोल्यूशनरी न्यूज़पेपर थे। संध्या और
  430. 22:35वहीं युगांतर। तो संध्या का जो प्रकाशन है
  431. 22:38यह ब्रह्मा बांधव उपाध्याय किया करते थे।
  432. 22:42प्रताप हिंदी का एक बहुत फेमस न्यूज़ पेपर
  433. 22:45जिसे गणेश शंकर विद्यार्थी पब्लिश करते
  434. 22:48थे। आज भी गणेश शंकर विद्यार्थी के नाम पर
  435. 22:52पत्रकारिता के अवार्ड दिए जाते हैं। और
  436. 22:54कानपुर में इन्होंने कानपुर में जो
  437. 22:58बिजोलिया किसान आंदोलन हुआ था। उसके बारे
  438. 23:02में प्रताप में बहुत सारी बातें लिखी थी।
  439. 23:05तो बिजोलिया आंदोलन जैसे नील आंदोलन में
  440. 23:09हिंदू पेट्रियाट नाम के अखबार का रोल है।
  441. 23:11जहां हरीश चंद्र मुखर्जी को पत्रकारिता का
  442. 23:15राजकुमार हमने कहा है। ठीक उसी तरह से
  443. 23:17प्यारे साथियों प्रताप जो कि हिंदी भाषा
  444. 23:20का अखबार है। गणेश शंकर विद्यार्थी
  445. 23:23उन्होंने बिजोलिया आंदोलन को बहुत प्रेरणा
  446. 23:26दिलाई थी। फिर आता है गदर। गदर के बारे
  447. 23:30में तो हमने पढ़ा था कि गदर और रेशवा यह
  448. 23:32सैन फ्रांसिस्को अमेरिका से निकलने वाले
  449. 23:35अखबार थे। गदर पार्टी इनको निकालती थी और
  450. 23:39लाला हरदयाल इसमें मुख्य भूमिका निभाते
  451. 23:42थे। भवानी मंदिर भवानी मंदिर बारिंद्र
  452. 23:46कुमार घोष ये भी एक क्रांतिकारी अखबार था।
  453. 23:50वंदे मातरम अरविंद घोष यह भी
  454. 23:53क्रांतिकारियों का अखबार था। ठीक है?
  455. 23:56विपिन चंद्र पॉल न्यू इंडिया विपिन चंद्र
  456. 23:59पॉल का न्यू इंडिया ये क्रांतिकारी अखबार
  457. 24:03थे तो जब भी आप बात करें भवानी मंदिर
  458. 24:06बारिंद्र कुमार घोष वंदे मातरम अरविंद घोष
  459. 24:10संध्या ब्रह्मा बांधव उपाध्याय विपिन
  460. 24:14चंद्र पालका न्यू इंडिया ये सब
  461. 24:16क्रांतिकारी विचारधारा के अखबार रहे हैं
  462. 24:19जिसमें एक बहुत बड़ा योग योगदान युगांतर
  463. 24:23का भी रहा है। ठीक है? इसके बाद अल हिलाल।
  464. 24:27अल हिलाल जो है ये उर्दू में अबुल कलाम
  465. 24:31आजाद पब्लिश किया करते थे। कॉमनवेल और
  466. 24:34न्यू इंडिया ये एनी बेसेंट के अखबार थे।
  467. 24:38ये हमने डिस्कस भी किया था। जब हमने
  468. 24:40होमरूल लीग आंदोलन की बात की थी। तो केसरी
  469. 24:44जो मराठी भाषा में आता है। मराठा जो
  470. 24:46अंग्रेजी भाषा में बाल गंगाधर तिलक के
  471. 24:49अखबार कॉमनवेल और न्यू इंडिया एनी बेसेंट
  472. 24:53के अखबार थे। एनी बेसेंट के अखबार थे। ठीक
  473. 24:57है? इसके बाद डॉन डॉन जो है ये मोहम्मद
  474. 25:00अली जिन्ना का अखबार था। मोहम्मद अली
  475. 25:03जिन्ना ये पूछा गया है एग्जाम में। स्वदेश
  476. 25:06वाहिनी ये केरल से अब्दुल कादर मौलवी
  477. 25:10निकाला करते थे। रामकृष्ण पिल्लई इसके
  478. 25:12बहुत फेमस एक संपादक हुए। तो इस स्लाइड
  479. 25:16में जो इंपॉर्टेंट है दो अखबार बहुत जरूरी
  480. 25:18हैं। एक तो कॉमनवल और न्यू इंडिया जो एनी
  481. 25:22बेसेंट के थे। वंदे मातरम अरविंद घोष का
  482. 25:26अखबार भवानी मंदिर बारिंद्र कुमार घोष का
  483. 25:30अखबार और संध्या ब्रह्मा बांधव उपाध्याय
  484. 25:34का अखबार ये इंपॉर्टेंट है। यहां से सवाल
  485. 25:37बने हुए हैं। यहां से क्वेश्चन गदर चकि हम
  486. 25:40डिस्कस कर चुके हैं। अल हिलाल ये अबुल
  487. 25:43कलाम आजाद का अखबार। फिर द लीडर। यह
  488. 25:48अंग्रेजी भाषा में प्रयागराज से मदन मोहन
  489. 25:52मालवीय पब्लिश करते थे। द लीडर प्रयागराज
  490. 25:55से मदन मोहन मालवीय पब्लिश करते थे। यंग
  491. 25:59इंडिया ये तो हम पढ़ चुके हैं। अहमदाबाद
  492. 26:02से महात्मा गांधी प्रकाशित करते थे। ये
  493. 26:06अंग्रेजी में था। बाद में उन्होंने
  494. 26:09गुजराती और हिंदी में नवजीवन का भी
  495. 26:12प्रकाशन किया था। यंग इंडिया तो अंग्रेजी
  496. 26:15में था। यंग इंडिया जो है वो इंग्लिश में
  497. 26:18था। बाद में उन्होंने नवजीवन की शुरुआत की
  498. 26:21थी जो गुजराती और हिंदी में प्रकाशित किए
  499. 26:24गए थे। हिंदुस्तान टाइम्स अंग्रेजी में के
  500. 26:28एम पणीकर बड़ा योगदान रहा के एम पणीकर
  501. 26:30साहब का मदन मोहन मालवीय जी ने बाद में
  502. 26:33इसे संभाला था। हरिजन यह पुणे से महात्मा
  503. 26:37गांधी ने शुरू किया था। नेशनल हेराल्ड यह
  504. 26:41अंग्रेजी में जवाहरलाल नेहरू ने शुरू किया
  505. 26:45था। कांग्रेस की आज भी चलता है नेशनल
  506. 26:47हेराल्ड तलवार एक अखबार था जो मैडम भीकाजी
  507. 26:52कामा ने शुरू किया था। फ्री हिंदुस्तान यह
  508. 26:56वैंकवर से तारकनाथ दास के द्वारा शुरू
  509. 27:00किया गया था। खुदाई खिदमतगार और दशरोजा यह
  510. 27:05खान अब्दुल गफ्फार खान पाश्तो भाषा में
  511. 27:08आता था। द सोशलिस्ट ये श्रीपाद अमृत डांगे
  512. 27:13बॉम्बे नवयुग ये मुजफ्फर अहमद कोलकाता
  513. 27:17इंकलाब गुलाम हुसैन लाहौर सर इस स्लाइड के
  514. 27:21मोस्टेंट पेपर कौन से हैं? मोस्टेंट में द
  515. 27:26लीडर मदन मोहन मालवीय इंग्लिश में यंग
  516. 27:29इंडिया इंग्लिश में महात्मा गांधी हरिजन
  517. 27:33महात्मा गांधी और नवजीवन महात्मा गांधी
  518. 27:37गुजराती और हिंदी भाषा में उसके अलावा
  519. 27:40नेशनल हेराल्ड जवाहरलाल नेहरू हिंदुस्तान
  520. 27:43टाइम्स के एम पणीकर बाद में मदन मोहन
  521. 27:46मालवीय फ्री हिंदुस्तान भी इंपॉर्टेंट है
  522. 27:49जो फ्री हिंदुस्तान पेपर है यह वैंकवर से
  523. 27:52तारकनाथ दास पब्लिश किया करते थे। ये
  524. 27:55इंपॉर्टेंट है। ये सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट
  525. 27:57है। ठीक है? फिर कामरेड कामरेड मोहम्मद
  526. 28:02अली जौहर का अखबार था। डॉन मोहम्मद अली
  527. 28:05जिन्ना का कामरेड मोहम्मद अली जौहर का
  528. 28:08अखबार। द पायनीर ये इलाहाबाद से जॉर्ज एलन
  529. 28:14पब्लिश करते थे। और इसी अखबार में
  530. 28:17रुडियार्ड किपल्लिंग ने भी काम किया था।
  531. 28:20रुडियार्ड किपलिंग ने द पाइनीर में काम
  532. 28:23किया था। जॉर्ज एलन इसे पब्लिश करते थे
  533. 28:26इलाहाबाद से। कौमी आवाज ये पूछा जा चुका
  534. 28:30है। कौमी आवाज पंडित जवाहरलाल नेहरू का
  535. 28:33अखबार था। जस्टिस भी पूछा जा चुका है। ये
  536. 28:37टी एम नायर का अखबार था। सुधारक गोपाल
  537. 28:42गणेश आकर। गोपाल गणेश आकर और इसी का
  538. 28:46अंग्रेजी वर्जन गोपाल कृष्ण गोखले निकालते
  539. 28:49थे। इंडियन मिरर मनमोहन घोष का अखबार था।
  540. 28:54इसी से देवेंद्रनाथ टैगोर और केशव चंद्र
  541. 28:57सेन जुड़े थे। बहिष्कृत भारत ये डॉक्टर
  542. 29:01भीमराव अंबेडकर जी का अखबार था। बाद में
  543. 29:04इन्होंने मूकनायक भी निकाला। मराठी भाषा
  544. 29:07मूकनायक मराठी भाषा। इंडिपेंडेंट ये
  545. 29:10मोतीलाल नेहरू का अखबार था। भारत मित्र
  546. 29:14छोटूलाल और दुर्गा प्रसाद मिश्र हिंदी में
  547. 29:17बालमकुंद गुप्त ठीक है ऐसे ही दोस्तों
  548. 29:21प्रजामित्र ये हम डिस्कस कर चुके हैं और
  549. 29:24एक है आज आज नाम का जो पेपर है ना यह
  550. 29:28बनारस से आता था शिव प्रसाद गुप्त और
  551. 29:31बाबूराव विष्णु शिव प्रसाद गुप्त और
  552. 29:35बाबूराव विष्णु हिंदी पत्रकारिता का काशी
  553. 29:38बोला जाता है इस अखबार को आज ठीक है तो ये
  554. 29:42कुछ प्रमुख प्रमुख अखबार थे। ये कुछ
  555. 29:43इंपॉर्टेंट न्यूज़ पेपर थे जो उस समय पर
  556. 29:46आए। इन प्रमुख में से भी हमने सबसे प्रमुख
  557. 29:49अखबार आपको याद करवा दिए हैं। जहां से
  558. 29:52ज्यादा सवाल पूछे गए हैं। आगे आप एमसीक्यू
  559. 29:55लगाएंगे तो और भी बढ़िया तरीके से चीजें
  560. 29:57क्लियर हो जाएंगी। ठीक है सर अखबारों की
  561. 30:00बात तो हो गई। कुछ किताबों की बात कर लेते
  562. 30:02हैं। देखो कुछ समाचार एजेंसी है जैसे
  563. 30:04रॉयटर यह लंदन की एजेंसी है। जो रॉयटर है
  564. 30:08यह लंदन की एजेंसी है। 1981 में बनाई गई
  565. 30:12थी। एसोसिएट प्रेस ऑफ इंडिया यह केसी रॉय
  566. 30:16ने बनाई थी। फ्री प्रेस न्यूज़ सर्विस ये
  567. 30:191927 में एस सदानानंद ने बनाई थी।
  568. 30:23यूनाइटेड प्रेस ऑफ इंडिया ये 1934 में
  569. 30:27बनाई गई थी। इसी तरह से कुछ किताबें हैं
  570. 30:29जिनके बारे में हमने पहले बात की है।
  571. 30:31पॉवर्टी एंड अनब्रिटिश रूल इन इंडिया दादा
  572. 30:35भाई नौरोजी की किताब जिसमें बहुत विस्तार
  573. 30:38से उन्होंने भारत में अंग्रेजों की
  574. 30:41नीतियों के बारे में चर्चा की। साथ में
  575. 30:43उन्होंने यह भी बताया कि कैसे भारत का
  576. 30:46पैसा ब्रिटेन की तरफ जा रहा है और इसके
  577. 30:49बदले में भारत को कुछ भी नहीं मिल रहा है।
  578. 30:51जिसे नाम दिया गया ड्रेन ऑफ वेल्थ। गीता
  579. 30:55रहस्य बाल गंगाधर तिलक की किताब मांडले जे
  580. 30:59आर्कटिक होम ऑफ द वेदास बाल गंगाधर तिलक
  581. 31:02जिस किताब में उन्होंने बताया ये भी हमने
  582. 31:05बहुत शुरू में डिस्कस किया था कि आर्यों
  583. 31:07की जो उत्पत्ति है जो आर्यों का ओरिजिन है
  584. 31:10वो आर्कटिक क्षेत्र से हुआ है। आर्कटिक
  585. 31:13रीजन से हुआ है। इंडिया विंस फ्रीडम यह
  586. 31:17मौलाना आजाद की किताब थी। इंडिया विंस
  587. 31:20फ्रीडम डिस्कवरी ऑफ इंडिया जवाहरलाल नेहरू
  588. 31:25ग्लिमसेस ऑफ द वर्ल्ड हिस्ट्री जवाहरलाल
  589. 31:28नेहरू फिलॉसफी ऑफ द बॉम भगवती शरण बोहरा
  590. 31:32इंडिया डिवाइडेड राजेंद्र प्रसाद अनहैपी
  591. 31:36इंडिया लाला लाजपत राय द इंडियन स्ट्रगल
  592. 31:39सुभाष चंद्र बोस इन सभी पुस्तकों के बारे
  593. 31:42में हम बात कर चुके हैं। हर एक किताब के
  594. 31:45बारे में लगभग हमने बात की है। इंडिया
  595. 31:48विंस फ्रीडम मौलाना आजाद डिस्कवरी ऑफ़
  596. 31:51इंडिया ग्लिंसेस ऑफ़ द वर्ल्ड हिस्ट्री
  597. 31:54जवाहरलाल नेहरू फ़िलॉसफी ऑफ़ बम के बारे में
  598. 31:57बात की थी। चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह भी
  599. 32:01इसमें शामिल रहे। इंडिया डिवाइडेड
  600. 32:04राजेंद्र प्रसाद अनहै इंडिया लाला लाजपत
  601. 32:07राय की प्रसिद्ध किताब और द इंडियन
  602. 32:09स्ट्रगल सुभाष चंद्र बोस की किताब और भी
  603. 32:12किताबों की चर्चा हमने की थी जो सुभाष
  604. 32:14चंद्र बोस के द्वारा लिखी गई थी। इसी
  605. 32:17तरीके से कुछ प्रमुख किताबें और हैं। जैसे
  606. 32:20एन इंडियन पिल्गिम ये भी सुभाष चंद्र बोस
  607. 32:24की किताब है। बंकिम चंद्र चटर्जी की तीन
  608. 32:27किताबें हैं। आनंदमठ, दुर्गेश नंदनी और
  609. 32:31कपालकुंडला।
  610. 32:33आनंदमठ, दुर्गेश नंदनी और कपालकुंडला। यह
  611. 32:37बंकिम चंद्र चटर्जी की रचनाएं हैं।
  612. 32:40रविंद्रनाथ टैगोर ने गीतांजलि और गोरा की
  613. 32:43रचना की। महात्मा गांधी माय एक्सपेरिमेंट
  614. 32:48विद ट्रुथ माय अर्ली लाइफ और हिंद स्वराज
  615. 32:52अरविंद घोष लाइफ डिवाइन वि डी सावरकर 1857
  616. 32:58का स्वतंत्रता संग्राम बारिंद्र घोष भवानी
  617. 33:01मंदिर वैलेंटाइन शिरोल इंडिया अनरेस्ट
  618. 33:05जिसमें उन्होंने बाल गंगाधर तिलक को भारत
  619. 33:08में अशांति का जनक कहा बाल गंगाधर तिलक
  620. 33:10लंदन जाते हैं इन पर मानहानि का मुकदमा
  621. 33:13करने आर आरसी दत्त की एक प्रसिद्ध किताब
  622. 33:16है इकोनॉमिक हिस्ट्री ऑफ इंडिया।
  623. 33:18सुरेंद्रनाथ बनर्जी की ऑटोबायोग्राफी है अ
  624. 33:21नेशन इन मेकिंग। दो बार परीक्षा में पूछा
  625. 33:23जा चुका है। अ नेशन इन मेकिंग किसकी किताब
  626. 33:26थी? सुरेंद्रनाथ बनर्जी की। डिस्कस भी
  627. 33:28किया है हमने। द स्कोप ऑफ हैप्पीनेस विजय
  628. 33:31लक्ष्मी पंडित। ठीक है? बंदी जीवन सचिंद्र
  629. 33:36सानियाल बहुत प्रसिद्ध किताब
  630. 33:37क्रांतिकारियों के लिए बहुत बड़ा प्रेरणा
  631. 33:40स्त्रोत। सॉन्ग ऑफ इंडिया सरोजनी नायडू द
  632. 33:45एंशिएंट विज़डम एनी बेसेंट रिवीजन एंड सोशल
  633. 33:50रिफॉर्म एम जी राानाडे पाकिस्तान एंड द
  634. 33:53पार्टीशन ऑफ इंडिया बी आर अंबेडकर डॉ बी
  635. 33:56आर अंबेडकर जी की बहुत सारी किताबें हमने
  636. 33:58पॉलिटी की क्लासेस में जो किया है वह हमने
  637. 34:02डिस्कस किया है आई थिंक संविधान सभा की
  638. 34:04कक्षाओं में जो भी हमने डाली है उसमें भी
  639. 34:05हमने डिस्कस किया है बहुत डिटेल से
  640. 34:07सत्यार्थ प्रकाश दयानंद सरस्वती थी
  641. 34:10गुलामगिरी ज्योतिबा फुले और इंडियन
  642. 34:14पॉलिटिक्स डब्ल्यू सी बनर्जी इंडियन
  643. 34:17पॉलिटिक्स डब्ल्यू सी बनर्जी ये कुछ
  644. 34:19प्रमुख किताब हैं। ऐसे ही ये कुछ
  645. 34:21आत्मकथाएं हैं। जैसे सत्य के साथ मेरे
  646. 34:24प्रयोग महात्मा गांधी एन ऑटोबायोग्राफी
  647. 34:28जिसे हिंदी में मेरी कहानी के नाम से
  648. 34:31जवाहरलाल नेहरू सुभाष चंद्र बोस एन इंडियन
  649. 34:34पिल्गिम।
  650. 34:36ठीक है? इंडिया वंस फ्रीडम मौलाना अबुल
  651. 34:39कलाम आजाद डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद नाम ही
  652. 34:42है उसका आत्मकथा
  653. 34:44वि डी सावरकर मेरा आजीवन कारावास
  654. 34:48लाला लाजपत राय द स्टोरी ऑफ माय
  655. 34:51डिपोर्टेशन
  656. 34:54सुरेंद्रनाथ बनर्जी अ नेशन इन मेकिंग
  657. 34:57सरदार भगत सिंह मैं नास्तिक क्यों हूं मैं
  658. 35:01नास्तिक क्यों हूं ये प्रमुख पुस्तकें
  659. 35:04हैं। यह प्रमुख अखबार हैं। यह पूरा
  660. 35:07फ़क्चुअल डाटा था। प्यारे साथियों, जैसा
  661. 35:09मैंने बताया कि मेरा काम यहां कलेक्शन का
  662. 35:11ज्यादा था कि मैं सारी महत्वपूर्ण बातों
  663. 35:14को एक जगह कलेक्ट कर दूं ताकि आपको यह
  664. 35:17चीजें याद करने में आसानी हो। अब यहां से
  665. 35:20आपका दायित्व है कि कितनी बार आप इन्हें
  666. 35:22रिकॉल करते हैं। कितनी बार आप इतिहास की
  667. 35:25पुरानी चीजों को लिंक करते हैं और इन्हें
  668. 35:28याद रखने की कोशिश करते हैं। लेकिन अब बात
  669. 35:30कर लेते हैं एक ऐसे हिस्से की जिसमें
  670. 35:33फैक्ट तो है ही हैं लेकिन कुछ कंसेप्चुअल
  671. 35:36बातें भी हैं। और यह हैं भारत में लाए गए
  672. 35:39अलग-अलग अधिनियम।
  673. 35:41देखिए अंग्रेजों ने हमेशा से यह कोशिश की
  674. 35:45कि वो कैसे भी करके भारत की प्रेस को
  675. 35:48नियंत्रित कर लें।
  676. 35:50उन्हें ब्रिटेन में अपने एक्सपीरियंसेस से
  677. 35:54यह पता था कि अगर कोई व्यक्ति लिखना शुरू
  678. 35:57कर दे और सरकार के खिलाफ लिखना शुरू कर दे
  679. 36:00तो जनता धीरे-धीरे आक्रोशित होने लगती है।
  680. 36:03जनता में धीरे-धीरे जनता को पता चलने लगता
  681. 36:06है कि सही क्या है और गलत क्या है? और यह
  682. 36:10बात वह बहुत अच्छे से जानते थे कि यह बहुत
  683. 36:12जरूरी है कि जनता को यह पता चले कि सही
  684. 36:15क्या है, गलत क्या है। अगर अगर यह बात
  685. 36:18जनता को पता चली तो ब्रिटेन के खिलाफ
  686. 36:21माहौल बनने लगेगा। तो समय-समय पर वो
  687. 36:24अलग-अलग अधिनियम लेकर के आएंगे और प्रेस
  688. 36:27को नियंत्रित करने की कोशिश करेंगे। जो
  689. 36:30समाचार पत्र हैं उन पर नियंत्रण स्थापित
  690. 36:33करने की कोशिश करेंगे। एग्जांपल
  691. 36:371799 में 1799 में 1799 में जब वलेजली
  692. 36:44बंगाल का गवर्नर जनरल था तो उसने प्रेस
  693. 36:48नियंत्रण अधिनियम लागू किया था और प्रेस
  694. 36:52पर सेंसरशिप लागू की थी। इससे पहले भी
  695. 36:56बिना कानून बनाए
  696. 36:59बिना कानून बनाए भी जो बंगाल का पहला
  697. 37:03गवर्नर जनरल था वारेन हेस्टिंग उसने बंगाल
  698. 37:07गजट को बंद करवा दिया था। उससे पहले एक
  699. 37:10अखबार को पब्लिश ही नहीं होने दिया था। पर
  700. 37:13लॉर्ड वेलेजली ने प्रॉपर एक अधिनियम बनाया
  701. 37:16और प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी। सेंसरशिप का
  702. 37:20मतलब होता है कि आप कुछ भी नहीं छाप सकते।
  703. 37:23अपनी मर्जी से। बहुत सारे विषयों को छापने
  704. 37:26से पहले आपको सरकार की अनुमति लेनी
  705. 37:29पड़ेगी। आपको गवर्नमेंट का अप्रूवल लेना
  706. 37:32पड़ेगा। ठीक है? तो भारत पर शुरुआत से ही
  707. 37:36नियंत्रण लगा दिए गए। फिर 1823 में
  708. 37:39अनुग्ञप्ति नियम लाया गया। यह जॉन एडमम्स
  709. 37:43के समय पर लाया गया था और इसी के द्वारा
  710. 37:46राजा राममोहन राय का मिररात उल अखबार बंद
  711. 37:50हो गया था। फिर भारतीय प्रेस अधिनियम आया
  712. 37:541835 में। यह चार्ल्स मैटफ लेकर के आया
  713. 37:59था। चार्ल्स मैटकफ को भारतीय प्रेस का
  714. 38:03मुक्तिदाता कहा जाता है। चार्ल्स मैटकफ को
  715. 38:07भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता कहा जाता है।
  716. 38:10क्योंकि 1799 में जो सेंसरशिप
  717. 38:14लॉर्ड वेलेजली ने शुरू की थी उसको 1835
  718. 38:18में चार्ल्स मैटफ ने खत्म किया था। इनके
  719. 38:21डिटेल में भी पढ़ेंगे। अभी बस मैं आपको एक
  720. 38:22आउटलाइन दे रहा हूं। इनको डिटेल में
  721. 38:24पढ़ेंगे तो परेशान मत होना। ध्यान से सुनना
  722. 38:26है अभी चीजों को। इसके बाद फिर से लॉर्ड
  723. 38:29कैनिंग के समय अनुगप्ति अधिनियम लाया गया
  724. 38:33और 1857 के विरोध की वजह से बहुत सारे
  725. 38:38प्रेस पर प्रतिबंध लगा दिए गए। फिर
  726. 38:41रजिस्ट्रेशन एक्ट आया। पंजीकरण अधिनियम
  727. 38:44आया 1867 का। जॉन लॉरेंस लेकर के आया था।
  728. 38:48इसने प्रेस पर नियंत्रण तो नहीं लगाया
  729. 38:51लेकिन प्रेस पर बहुत सारे नियम कानून कि
  730. 38:54कैसे प्रेस का रजिस्ट्रेशन होगा। ये सारे
  731. 38:57नियम कानून जरूर बना दिए। वर्नाकुलर प्रेस
  732. 39:01एक्ट आया 1878 का। ये सबसे खतरनाक एक्ट था
  733. 39:06वर्नाकुलर प्रेस एक्ट। यह लॉर्ड लिटन के
  734. 39:10द्वारा लाया गया था। और इस अधिनियम को द
  735. 39:13गेगिंग एक्ट कहा जाता है या मुंह बंद करने
  736. 39:18वाला कानून। इसने भारतीय भाषाओं के लगभग
  737. 39:22सभी समाचार पत्रों पर इतने कठोर प्रतिबंध
  738. 39:25लगा दिए कि वो लगभग खत्म हो गए थे।
  739. 39:28वर्नाकुलर प्रेस एक्ट सबसे खतरनाक अधिनियम
  740. 39:32माना जाता है जिसने प्रेस की स्वतंत्रता
  741. 39:35को खत्म कर दिया था जिसने प्रेस की
  742. 39:38इंडिपेंडेंस को खत्म कर दिया था। प्रेस की
  743. 39:40स्वतंत्रता को पूरी तरह खत्म कर दिया था।
  744. 39:43और पहला अखबार जो इसकी भेंट चढ़ा वो था
  745. 39:47सोम प्रकाश। ईश्वर चंद्र विद्यासागर
  746. 39:50बंगाली भाषा में। फिर 1809 में समाचार
  747. 39:54पत्र अधिनियम आया और क्रांतिकारी अखबारों
  748. 39:58को बैन कर दिया गया। फिर भारतीय प्रेस
  749. 40:01अधिनियम 1910 लाया गया। इसमें कहा गया कि
  750. 40:04अगर आप न्यूज़ पेपर पब्लिश करना चाहते हैं
  751. 40:07तो एक बहुत बड़ा सिक्योरिटी डिपॉजिट आपको
  752. 40:10करना पड़ेगा। ठीक है? मतलब पेपर खुले ही
  753. 40:13ना। भारतीय प्रेस अधिनियम 1931 में इरविन
  754. 40:16लेकर के आया। सविनय अवज्ञा आंदोलन को
  755. 40:19दबाने के लिए और फिर समाचार पत्र 1951 आया
  756. 40:23उचित प्रतिबंध के आधार पर लागू। ये हमारे
  757. 40:26काम का नहीं है। ये बाद में पढ़ेंगे। अब
  758. 40:28आइए इन अधिनियमों के बारे में एक-एक करके
  759. 40:31बात करते हैं। सबसे पहले प्रेस नियंत्रण
  760. 40:34अधिनियम 1799 का। ये लॉर्ड वेलेजली के समय
  761. 40:40पर आया था। ये लॉर्ड वेलेजली के समय पर
  762. 40:43आया था। प्रेस कंट्रोल एक्ट 1799
  763. 40:48अब इस अधिनियम में यह भारत का पहला प्रेस
  764. 40:51नियंत्रण कानून था। यह भारत का पहला प्रेस
  765. 40:55नियंत्रण कानून था। इसमें कहा गया कि जब
  766. 40:58भी कोई पेपर आएगा तो उसमें पब्लिशर,
  767. 41:02प्रिंटर और उसके ओनर का नाम स्पष्ट रूप से
  768. 41:06लिखना पड़ेगा। और प्रकाशन से पहले सभी
  769. 41:10सामग्री सरकार के सचिव के पास जांच के लिए
  770. 41:14भेजना पड़ेगा। लॉर्ड हेस्टिंग्स ने इस
  771. 41:18प्रीसेंसरशिप को खत्म किया था। देखो
  772. 41:21प्रीसेंसरशिप का मतलब है कि कोई भी चीज
  773. 41:24पब्लिश होने से पहले उसकी परमिशन लेना।
  774. 41:28यही प्रीसेंसरशिप कहलाता है। इसी को हम
  775. 41:31क्या बोलते हैं? प्रीसेंसरशिप बोलते हैं
  776. 41:33कि भाई कोई भी चीज पब्लिश करने से पहले
  777. 41:36उसकी इंफॉर्मेशन लेना इज कॉल्ड दी प्री
  778. 41:40सेंसरशिप।
  779. 41:41तो इसमें इतना खतरनाक प्रोविजन बनाया था
  780. 41:44वैलेजली ने कि अगर कोई भी चीज आप पब्लिश
  781. 41:47करोगे उसे पहले सरकार के पास भेजोगे। सचिव
  782. 41:51उसको चेक करेगा कि यह पब्लिश करना है या
  783. 41:53नहीं करना है। तो अगर आपसे सवाल पूछा जाए
  784. 41:56कि भारत का प्रथम प्रेस नियंत्रण कानून
  785. 41:59कौन सा था? तो आप जवाब दोगे प्रेस
  786. 42:02नियंत्रण अधिनियम
  787. 42:041799
  788. 42:06वेलेजली के समय यह आया था। फिर द
  789. 42:09लाइसेंसिंग रेगुलेशन एक्ट या इसी को
  790. 42:12अनुगप्ति नियम बोलते हैं। ये 1823 में जॉन
  791. 42:17एडम्स के समय पर लाया गया था। इसमें यह
  792. 42:20कहा गया कि मजिस्ट्रेट प्रेस को जब्त कर
  793. 42:24सकता है। मजिस्ट्रेट को यह पावर दे दी गई
  794. 42:26कि अगर मजिस्ट्रेट को लगता है कि यह प्रेस
  795. 42:29सरकार का ज्यादा विरोध कर रहा है तो वो
  796. 42:32प्रेस को जब्त कर सकता है। मतलब उसको सील
  797. 42:35कर सकता है। प्रेस की स्थापना के लिए
  798. 42:38लाइसेंस लेना जरूरी हो गया। राजा राममोहन
  799. 42:42राय को अपनी पत्रिका मिरात उल अखबार का
  800. 42:45प्रकाशन बंद करना पड़ा था। इसी वजह से फिर
  801. 42:49एक और एक्ट आया लिबरेशन ऑफ इंडियन प्रेस
  802. 42:53एक्ट या इसे मैकर्प अधिनियम भी कहा जाता
  803. 42:57है। यह एक्चुअल में इसका नाम था द प्रेस
  804. 43:00एक्ट 1835। हम इसे लिबरेशन ऑफ इंडियन
  805. 43:04प्रेस एक्ट या मैटक अधिनियम के नाम से
  806. 43:07जानते हैं। यह 1835 में गवर्नर जनरल
  807. 43:12चार्ल्स मैटकफ लेकर के आए थे। और इस
  808. 43:16अधिनियम की वजह से ही भारत में पत्रकारिता
  809. 43:19का विकास हो सका। इंडिया में जर्नलिज्म
  810. 43:23स्पेशली न्यूज़पेपर का डेवलपमेंट हो सका।
  811. 43:26चार्ल्स मैटकफ ने भारतीय प्रेस की जो
  812. 43:29बेड़ियां जो 1799 में लॉर्ड वेलेजली और
  813. 43:341823 में जॉन एडम्स ने लगाई थी उन
  814. 43:37बेड़ियों को तोड़ दिया और भारतीय प्रेस को
  815. 43:40स्वतंत्र किया। इसीलिए चार्ल्स मैटकफ को
  816. 43:44भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता कहा जाता है।
  817. 43:47लिबरेटर ऑफ इंडियन प्रेस कहा जाता है।
  818. 43:50पुराने प्रतिबंध खत्म कर दिए गए। प्रकाशक
  819. 43:54को केवल प्रकाशन के स्थान की सूचना देनी
  820. 43:57होगी। नाम प्रिंटर और ओनर के बता बारे में
  821. 44:00बताने की जरूरत नहीं है। और यह कानून 1857
  822. 44:04तक चलता रहा। और यही वह समय है जब भारत
  823. 44:08में बहुत तेजी से अखबारों की संख्या बढ़ी।
  824. 44:11इंडिया में बहुत तेजी से न्यूज़पेपर की
  825. 44:14संख्या बढ़ने लगी दोस्तों। ठीक? तो, यह
  826. 44:17बात आपको याद रखना है। इसके बाद आता है
  827. 44:20वर्नाकुलर प्रैक्स एक्ट। इसे मुंह बंद
  828. 44:23करने वाला कानून या गेगिंग एक्ट के नाम से
  829. 44:27भी जाना जाता है। यह 1878 में 1878 में
  830. 44:32लॉर्ड लिटन लेकर के आया था। 1878 में
  831. 44:36लॉर्ड लिटन इसे लेकर के आया था। लॉर्ड
  832. 44:39लिटन जहां चार्ल्स मैटकफ को भारतीय प्रेस
  833. 44:43का मुक्तिदाता कहा जाता है। वहीं लॉर्ड
  834. 44:46लिटन ने सारी चीजों को छीन लिया था। सभी
  835. 44:50चीजों को खत्म कर दिया था लिटन ने। तो ये
  836. 44:53एक्ट क्यों जाना जाता है? इसने भारतीय
  837. 44:56भाषा के समाचार पत्रों पर नियंत्रण लगाया।
  838. 45:00प्रकाशक और मुद्रक से एक बॉन्ड भरवाती थी
  839. 45:04सरकार और उसमें कहती थी कि यह सरकार के
  840. 45:07विरुद्ध कुछ भी नहीं लिखेंगे। यदि कोई
  841. 45:10अखबार सरकार के विरुद्ध कुछ भी लिखता तो
  842. 45:13उसकी जमानत राशि जप्त कर ली जाती और उसकी
  843. 45:16मशीनें भी जप्त कर ली जाती। मजिस्ट्रेट का
  844. 45:20फैसला अंतिम था। इसके खिलाफ किसी अदालत
  845. 45:24में अपील नहीं की जा सकती। इसलिए इसे
  846. 45:27गेगिंग एक्ट या गला घोटू कानून या मुंह
  847. 45:30बंद करने वाला अधिनियम कहा गया। ईश्वर
  848. 45:34चंद्र विद्यासागर द्वारा प्रकाशित सोम
  849. 45:36प्रकाश यह अधिनियम पर लागू हुआ। हालांकि
  850. 45:39बंगाल पत्रिका अमृत बाजार अंग्रेजी में
  851. 45:42बदल गई। इसे 1882 में लॉर्ड रिपन ने खत्म
  852. 45:46किया था। पर यह चार साल भारतीय पत्रकारिता
  853. 45:50के लिए बहुत-बहुत बुरे रहे। जितने भी
  854. 45:54वर्नाकुलर मतलब भारतीय भाषा स्थानीय भाषा
  855. 45:58के अखबार उन पर यह लागू किया गया था।
  856. 46:01क्योंकि इस आदेश के खिलाफ आप अपील ही नहीं
  857. 46:06कर सकते थे कहीं इसलिए इसे मुंह बंद करने
  858. 46:09वाला कानून गेगिंग एक्ट कहा गया कि यह
  859. 46:12मुंह बंद करने वाला कानून है। इट इज अ
  860. 46:14गेगिंग एक्ट। इसलिए यह नाम दिया गया था।
  861. 46:18ठीक है? विद्यासागर जी के द्वारा जो सोम
  862. 46:20प्रकाश अखबार था वह बंद हुआ। लेकिन अमृत
  863. 46:23बाजार पत्रिका अभी डिस्कस किया था। वह
  864. 46:26रातोंरात अंग्रेजी में कन्वर्ट हो गई। फिर
  865. 46:311908 का न्यूज़पेपर या प्रेस एक्ट यह
  866. 46:35मिंटो सेकंड के समय पर आया था। युगांतर ये
  867. 46:38मुख्य रूप से क्रांतिकारी अखबारों के लिए
  868. 46:41लाया गया था। क्रांतिकारी अखबारों के लिए
  869. 46:44लाया गया था। युगांतर जो एक क्रांतिकारी
  870. 46:47अखबार था वो भी बंद हो गया। बाल गंगाधर
  871. 46:50तिलक पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया।
  872. 46:53किसी समाचार पत्र में छापी गई सामग्री
  873. 46:56हत्या या विस्फोटक अधिनियम के उल्लंघन के
  874. 47:00लिए अगर उपसाती थी तो उस प्रेस को तुरंत
  875. 47:02जब्त करने का आदेश दिया गया। तो ये वही
  876. 47:05समय है जब महाराष्ट्र में क्रांतिकारी
  877. 47:07गतिविधियां अपने तूल पर हैं। बाल गंगाधर
  878. 47:10तिलक इस बात को जस्टिफाई करेंगे कि जो
  879. 47:13हत्या जो हत्या
  880. 47:16की गई थी दामोदर बंधुओं के द्वारा। ठीक
  881. 47:19है? हमने डिस्कस किया था या फिर चापेकर
  882. 47:22बंधुओं के द्वारा वो जस्टिफाई है। तो इस
  883. 47:24वजह से उनके ऊपर भी कार्यवाही की जाएगी।
  884. 47:28ठीक है जी। तो ये आपको याद रखना है। यह
  885. 47:30प्रमुख अखबार रहे। यह प्रमुख अधिनियम रहे
  886. 47:33जहां से प्रश्न बनते हैं और यह उनकी
  887. 47:35भूमिका कि अखबारों की वजह से जन जागरूकता
  888. 47:39फैली। राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक हर
  889. 47:42प्रकार की जागरूकता। धन की निकासी का
  890. 47:45सिद्धांत लोगों के सामने आ सका। एकता का
  891. 47:49सूत्र भी बंधा। सामाजिक सुधार किए गए।
  892. 47:51सरकारी नीतियों का भी विरोध किया गया और
  893. 47:54क्रांतिकारी विचारों को भी आगे बढ़ाया
  894. 47:57गया। चलिए अब हम कुछ प्रश्नों की बात कर
  895. 47:59लेते हैं। कुछ क्वेश्चंस की बात कर लेते
  896. 48:02हैं और यह टॉपिक हम कंप्लीट करते हैं। तो
  897. 48:04यहां पर एक प्रश्न है कि भारत में
  898. 48:06प्रिंटिंग प्रेस किसने और कब शुरू की थी?
  899. 48:10तो भारत में जो प्रिंटिंग प्रेस है यह
  900. 48:12पुर्तगालियों के द्वारा शुरू की गई थी।
  901. 48:141556 में गोवा में। 1557 में इन्होंने
  902. 48:18अपनी पहली किताब भी छापी थी। पादियों के
  903. 48:21द्वारा यह लगाई गई थी।
  904. 48:23अगला सवाल देख लेते हैं। भारत का पहला
  905. 48:26समाचार पत्र कौन सा था? तो भारत का पहला
  906. 48:29समाचार पत्र बंगाल गजट था जो जेम्स ऑगस्ट
  907. 48:33हिक्की के द्वारा कोलकाता से पब्लिश किया
  908. 48:36गया था। यह 1780 में पब्लिश किया गया।
  909. 48:39हालांकि इसे 1782 में बंद भी करना पड़ा
  910. 48:43था। पायनीर भी एक प्रमुख अखबार रहा।
  911. 48:46रुडियार्ड किपल्लिंग ने इसमें काम किया
  912. 48:48था। हिंदुस्तान टाइम्स बहुत बाद में आया।
  913. 48:51के एम पणीकर और मदन मोहन मालवीय थे। संवाद
  914. 48:54कोमुदी बंगाली भाषा का एक प्रमुख अखबार
  915. 48:57रहा जो राजा राममोहन राय निकालते थे।
  916. 49:01अगला सवाल देख लेते हैं। निम्न में से
  917. 49:05किसने सर्वप्रथम प्रेस सेंसरशिप लागू की
  918. 49:09थी? किसने सबसे पहले प्रेस सेंसरशिप को
  919. 49:12लागू किया था? लॉर्ड वेलेजली ने इसको सबसे
  920. 49:15पहले लागू किया था। क्योंकि वेलेजली ने
  921. 49:181799 में ही एक नियम बनाया था। जेम्स
  922. 49:22एडम्स तो 1823 में नियम बनाया था। डलहौजी
  923. 49:26और हेस्टिंग्स बाद में बनाए थे। पर 1799
  924. 49:29में ही वैलेजली ने प्रीसेंसरशिप लागू कर
  925. 49:32दी थी कि जो भी आप छापोगे पहले आपको सरकार
  926. 49:36से पूछना पड़ेगा। फिर जो भी आप छाप रहे हो
  927. 49:39उसमें संपादक का नाम जिसने प्रिंट किया है
  928. 49:41उसका नाम जो ओनर है उसका नाम लिखना
  929. 49:44पड़ेगा। जेम्स एडम्स ने लाइसेंसिंग वगैरह
  930. 49:47कंपलसरी कर दिया था।
  931. 49:521878
  932. 49:54का वर्नाकुलर प्रेस एक्ट किसने रद्द किया
  933. 49:57था? तो यह लॉर्ड रिपन के द्वारा रद्द किया
  934. 50:00गया था। लिटन तो इसको लेकर के आया था। यह
  935. 50:03लॉर्ड लिटन लेकर के आया था। सोम प्रकाश
  936. 50:07सबसे पहले इसके द्वारा बंद हुआ था। और
  937. 50:10वहीं जो अमृत बाजार पत्रिका है वो
  938. 50:13रातोंरात कन्वर्ट हो गई थी अंग्रेजी में।
  939. 50:17इसमें यही था कि देखो एक तो आपको बहुत
  940. 50:19बड़ी मात्रा में पैसा जमा करना पड़ेगा।
  941. 50:22थोड़ा सा भी शक अगर आपके ऊपर हुआ तो सरकार
  942. 50:26आपकी जमानत राशि भी जब्त कर लेगी और प्रेस
  943. 50:28की मशीनें भी जब्त कर लेगी। तो जो स्थानीय
  944. 50:32भाषा के अखबार थे वह ऑलमोस्ट बंद हो गए।
  945. 50:34इस इस अधिनियम की वजह से। एक राजनीतिक
  946. 50:38अखबार था सोम प्रकाश। पहले तो सामाजिक था
  947. 50:41लेकिन बाद में राजनीतिक अखबार बन गया था
  948. 50:43ईश्वरचंद विद्यासागर। किसने वर्नाकुलर
  949. 50:47प्रेस एक्ट का प्रवर्तन किया था? लॉर्ड
  950. 50:49लिटन 1878 में लेकर के आया था वर्नाकुलर
  951. 50:53प्रेस एक्ट। अगला देख लेते हैं। नेक्स्ट
  952. 50:57क्या है? फारसी साप्ताहिक मिरातुल अखबार
  953. 51:01को प्रकाशित कौन करते थे? तो मिरातुल
  954. 51:04अखबार को राजा राममोहन राय प्रकाशित करते
  955. 51:07थे। लेकिन 1823
  956. 51:09में जब वो अधिनियम लेके आया जेम्स एडमम्स
  957. 51:12बहुत सारे प्रतिबंध लगा दिए गए भारत के
  958. 51:14अखबारों पर तो मिररात उल अखबार उस वजह से
  959. 51:17बंद हो गया था।
  960. 51:20सर सैयद अहमद खान जो है वो अलीगढ़ गजट का
  961. 51:23प्रकाशन करते थे।
  962. 51:27क्रांतिकारी काल की निम्नलिखित लोकप्रिय
  963. 51:30पत्रिकाओं में से कौन अनेक कारणों से
  964. 51:33कांग्रेस की आलोचना करती थी? बंगवासी,
  965. 51:37केसरी, काल और उपर्युक्त सभी। तो जवाब है
  966. 51:40इसका डी। बंगवासी भी कांग्रेस की आलोचना
  967. 51:43करती थी। केसरी क्योंकि वो रिफ्ट आ गया था
  968. 51:47और काल। देखो केसरी पूरी तरीके से
  969. 51:49क्रांतिकारी पत्रिका नहीं थी। बंगवासी काल
  970. 51:52संध्या
  971. 51:55युगांतर
  972. 51:56ये सब मुख्य रूप से क्रांतिकारी पत्रिकाएं
  973. 51:59थी।
  974. 52:01इंडियन ओपिनियन पत्रिका के प्रथम संपादक
  975. 52:04कौन थे? महात्मा गांधी, महादेव देसाई,
  976. 52:08मनसुख लाल नजर और अल्बर्ट वेस्ट। तो इसके
  977. 52:11पहले संस्था जो संपादक थे वो मनसुख लाल
  978. 52:15नजर थे। इंडियन ओपिनियन के। याद रखना ये
  979. 52:18बड़ा इंपॉर्टेंट है। बहुत इंपॉर्टेंट सवाल
  980. 52:20है। महात्मा गांधी द्वारा दक्षिण अफ्रीका
  981. 52:24में प्रकाशित समाचार पत्र का नाम क्या था?
  982. 52:28दी इंडियन ओपिनियन नेशनल हेराल्ड द पाइनी
  983. 52:31लीडर नाम क्या था? दी इंडियन ओपिनियन। ये
  984. 52:34हमने पहले भी पढ़ा है जब हमने महात्मा
  985. 52:36गांधी के बारे में डिटेल से पढ़ा था कि
  986. 52:39महात्मा गांधी का क्या-क्या कंट्रीब्यूशन
  987. 52:41है? तो वहां पर हमने इस बारे में बात की
  988. 52:43थी। फिर आता है जी अगला निम्नलिखित में से
  989. 52:46किस भाषा में द इंडियन ओपिनियन नहीं छापा
  990. 52:49जाता था। देखो वो तमिल सॉरी उर्दू भाषा
  991. 52:53में नहीं छापा जाता था। उर्दू भाषा में
  992. 52:56नहीं छापा जाता था। अगला देख लेते हैं।
  993. 52:59हिंदी का पहला समाचार पत्र उदत्त मार्टंड
  994. 53:03कहां से प्रकाशित होता था? तो ये कोलकाता
  995. 53:06से ही प्रकाशित होता था। जुगल किशोर इसको
  996. 53:10पब्लिश किया करते थे। ठीक है? आगे जाकर के
  997. 53:13प्रताप भी एक प्रमुख अखबार हुआ। गणेश शंकर
  998. 53:16विद्यार्थी ने जो पब्लिश किया था नील
  999. 53:18आंदोलन का जमकर समर्थन करने वाले हिंदू
  1000. 53:22पेट्रिया के संपादक कौन थे? हरीश चंद्र
  1001. 53:25मुखर्जी। इन्हें भारतीय पत्रकारिता का
  1002. 53:28राजकुमार भी कहा जाता है। अगला देख लेते
  1003. 53:32हैं। नेक्स्ट क्वेश्चन क्या है? अंग्रेजी
  1004. 53:35साप्ताहिक वंदे मातरम के साथ निम्नलिखित
  1005. 53:38में से किसने अपने को संबद्ध किया? देखो
  1006. 53:41वंदे मातरम जो अखबार है वह अरविंद घोष का
  1007. 53:44अखबार था। मुख्य रूप से अरविंद घोष का
  1008. 53:47अखबार था और यह भी एक क्रांतिकारी प्रकृति
  1009. 53:52का अखबार था। स्वदेश वाहिनी के संस्थापक
  1010. 53:56कौन थे? डिस्कस किया था हमने। स्वदेश
  1011. 53:58वाहिनी केरल का एक प्रमुख अखबार था। और
  1012. 54:01स्वदेश वाहिनी के सबसे प्रसिद्ध जो
  1013. 54:04संस्थापक थे, वह रामकृष्ण पिल्ले। डिस्कस
  1014. 54:07भी किया था रामकृष्ण पिल्ले वो बहुत फेमस
  1015. 54:09उसके संपादक थे। अंग्रेजी पत्र
  1016. 54:12इंडिपेंडेंट किससे जुड़ा हुआ था? तो ये भी
  1017. 54:15हमने डिस्कस किया था कि इंडिपेंडेंट के जो
  1018. 54:18पब्लिशर थे वो मोतीलाल नेहरू जी थे।
  1019. 54:20मोतीलाल नेहरू जी इंडिपेंडेंट के पब्लिशर
  1020. 54:23थे। समाचार पत्र और भाषा को एक दूसरे के
  1021. 54:27साथ मिलाना है। भारतमित्र राष्ट्रमत
  1022. 54:32प्रजामित्र नायक बहुत मुश्किल है। हालांकि
  1023. 54:35अगर थोड़ा बहुत आपको प्रजामित्र भी अगर
  1024. 54:37याद आ गया। मान लो आपको प्रजामित्र गलती
  1025. 54:40से याद आ गया तब भी आप इसका जवाब ईजीली दे
  1026. 54:43सकते थे क्योंकि प्रजामित्र हमने डिस्कस
  1027. 54:45किया था कि ये जो है सर ये गुजराती भाषा
  1028. 54:49में आता था। तो सी का दो एक ही जगह पर है
  1029. 54:51तो जवाब सी हो जाएगा। ठीक है? बड़ा फेमस
  1030. 54:54पेपर था प्रजामित्र। अगला देख लेते हैं।
  1031. 54:58सूची एक को सूची दो के साथ मिलाना है।
  1032. 55:01दैनिक आज द लीडर द नेशनल। आसान है ये
  1033. 55:04क्योंकि हम जान पाए हैं कि द लीडर तो मदन
  1034. 55:08मोहन मालवीय का अखबार है। तो बी का थ्री।
  1035. 55:10अब ये आंसर तो नहीं हो सकता और यह भी नहीं
  1036. 55:14हो सकता। नेशनल हेराल्ड जवाहरलाल नेहरू से
  1037. 55:17जुड़ा था। तो सी का दो यहीं पर है तो जवाब
  1038. 55:19हो जाएगा ए। तो एलिमिनेशन मेथड ऐसे
  1039. 55:22प्रश्नों में अक्सर लग जाती है और कोई
  1040. 55:24बहुत बड़ी समस्या आपको जाएगी नहीं। कानपुर
  1041. 55:27से प्रकाशित किए गए किस समाचार पत्र के
  1042. 55:30माध्यम से विजय सिंह पथिक ने बिजोलिया
  1043. 55:34आंदोलन को समूचे भारत में चर्चा का विषय
  1044. 55:37बनाया था? तो किसान आंदोलन कानपुर में जो
  1045. 55:40बिजोलिया आंदोलन था ये प्रताप अखबार जो
  1046. 55:44गणेश शंकर विद्यार्थी से जुड़ा हुआ था
  1047. 55:47उसके द्वारा यह प्रसिद्ध हुआ था पूरे भारत
  1048. 55:50में निम्न में से किस समाचार पत्र से
  1049. 55:53महात्मा गांधी संबंधित नहीं थे किससे
  1050. 55:56महात्मा गांधी संबंधित नहीं थे यह प्रश्न
  1051. 55:59पूछा गया है यंग इंडिया इंडियन मिरर हरिजन
  1052. 56:04और इंडियन ओपिनियन देखिए इंडियन इंडियन
  1053. 56:08मिरर से यह संबंधित नहीं थे। बाकी अखबारों
  1054. 56:11से तो यह संबंधित रहे हैं। गांधी जी
  1055. 56:13द्वारा शुरू किया गया एक साप्ताहिक पत्र
  1056. 56:16हरिजन का पहला अंक 11 फरवरी 1933 को निम्न
  1057. 56:21शहरों में से कहां से प्रकाशित हुआ था? अब
  1058. 56:24हरिजन की जो शुरुआत है यह पुणे आज का जो
  1059. 56:29पुणे है वहां से यह शुरू हुआ था क्योंकि
  1060. 56:31उसी समय गांधी जी यवदा जेल में थे। यवदा
  1061. 56:34जेल भी पुणे में ही आती है। प्यारे
  1062. 56:36साथियों
  1063. 56:38मराठी पत्रिका बहिष्कृत भारत किसने शुरू
  1064. 56:42की थी? तो इसकी शुरुआत जो है वो डॉ. बी आर
  1065. 56:46अंबेडकर जी के द्वारा की गई थी। ठीक है?
  1066. 56:49वही सवाल आ गया दोबारा से। डॉ. बी आर
  1067. 56:52अंबेडकर बहिष्कृत भारत। बहिष्कृत भारत
  1068. 56:55जनरल किसने शुरू किया था? बाबा साहेब
  1069. 56:58अंबेडकर ने शुरू किया था। कौन सा एक जर्नल
  1070. 57:02अबुल कलाम आजाद के द्वारा शुरू किया गया
  1071. 57:05था? तो हमने डिस्कस किया था दोस्तों कि जो
  1072. 57:07अल हिलाल है यह अबुल कलाम आजाद के द्वारा
  1073. 57:11शुरू किया गया था। 1920 में लाहौर से लाला
  1074. 57:15लाजपत राय के द्वारा उर्दू का कौन सा
  1075. 57:18समाचार पत्र शुरू किया गया था? तो
  1076. 57:21उन्होंने वंदे मातरम की शुरुआत की थी।
  1077. 57:24वंदे मातरम। एक और सवाल देख लेते हैं। अब
  1078. 57:29हिंदू के प्रकाशक हमने देखा था कि जी
  1079. 57:31सुब्रमण्यम अय्यर थे। तो अब इसका जवाब हो
  1080. 57:34जाएगा डी। इसका जवाब क्या हो जाएगा? डी हो
  1081. 57:38जाएगा। आसान है कोई बहुत वैसा पेपर नहीं
  1082. 57:41है। लेकिन ये सुधारक अखबार भी याद रखना कि
  1083. 57:44जो सुधारक थे वो गोपाल कृष्ण गोखले। ये
  1084. 57:47याद रखिएगा। बड़ा इंपॉर्टेंट अखबार है।
  1085. 57:49मेक श्योर कि आप ये याद रखें। है ना? इसको
  1086. 57:51ऐड भी कर लेना। सुधारक जो है वह गोपाल
  1087. 57:54कृष्ण गोखले। ठीक है? याद रखेंगे इसको।
  1088. 57:58समाचार पत्र और संपादक के नाम को आपस में
  1089. 58:01जोड़ना है। काल, बंगाली। अब जैसे सोम
  1090. 58:05प्रकाश है तो सोम प्रकाश से
  1091. 58:09ऐसा नहीं दिया गया है। चलो कोई बात नहीं।
  1092. 58:11अब सुधारक हमने अभी डिस्कस किया कि गोपाल
  1093. 58:14कृष्ण गोखले। तो सी का दो-दो जगह पर है।
  1094. 58:17या तो जवाब होगा आपका ए या तो जवाब होगा
  1095. 58:20डी। अब बी का वन है। मतलब काल थे तो
  1096. 58:23सुरेंद्रनाथ बनर्जी जुड़ गए। अब एक है
  1097. 58:25बंगाली और एक है सोम प्रकाश। ठीक है? तो
  1098. 58:28ये आपको थोड़ा सा याद रखना पड़ेगा प्यारे
  1099. 58:30साथियों कि इसका जवाब होगा ए। इसका जवाब
  1100. 58:34क्या होगा? ए सॉरी बी का वन था।
  1101. 58:37बी का वन था। बंगाली से सुरेंद्रनाथ
  1102. 58:39बनर्जी। माफ़ कीजिएगा। बंगाली से कौन जुड़े
  1103. 58:42थे? ऐसा याद रखो। बंगाली से सुरेंद्रनाथ
  1104. 58:44बनर्जी। सुधारक से गोपाल कृष्ण गोखले। जो
  1105. 58:48काल है वो शिवराम महादेव पारंजय और जो सोम
  1106. 58:52प्रकाश है द्वारकाना विद्या भूषण। ठीक है?
  1107. 58:56तो ये आपके प्रमुख सवाल थे। ये कुछ
  1108. 58:58इंपॉर्टेंट क्वेश्चंस थे। इसी के साथ
  1109. 59:00हमारा यह लेक्चर कंप्लीट होता है। थोड़ा
  1110. 59:02सा फेक्चुअल लेक्चर है। थोड़ा नहीं थोड़ा
  1111. 59:04ज्यादा फ़क्चुअल लेक्चर है। तो इत्मीनान से
  1112. 59:06आपको रिवीजन करना है। बार-बार मैं आपसे एक
  1113. 59:09ही बात बोलते आया हूं जीएस पढ़ते समय कि
  1114. 59:12जीएस में इंपॉर्टेंट यह नहीं है। आप कितना
  1115. 59:14पढ़ रहे हैं। जीएस में इंपॉर्टेंट यह है
  1116. 59:17कि आप कितना याद रख रहे हैं। अपना ख्याल
  1117. 59:19रखिए। बहुत खुश रहिए। आगे बढ़ते रहिए। जय
  1118. 59:23हिंद जय भारत।

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