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Prathna II प्रार्थना-Dada Babani Sahib Ji-Hindi-Satsang -9 — Transcript

by All Shabads & Satsangs · 8,325 words · 1,169 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00राग
  2. 0:02बिलावल एक को सतगुरु
  3. 0:07प्रसाद निप कनया के
  4. 0:15कारण एक भया भेख
  5. 0:23[संगीत]
  6. 0:25धारी
  7. 0:28कामथ
  8. 0:33रथ
  9. 0:35वाकी
  10. 0:37पैज
  11. 0:41[संगीत]
  12. 0:43सवारी यह
  13. 0:46वाणी ग्रंथ साहिब से
  14. 0:48है
  15. 0:51और एक महात्मा हुआ है जिसको सदना का साई
  16. 0:55कहते हैं या सदना कहते हैं उसकी वाणी
  17. 1:00और प्रार्थना की
  18. 1:03वाणी प्रार्थना
  19. 1:07को विनय कहते हैं पुकार कहते हैं अरदास
  20. 1:11कहते हैं प्रेयर कहते हैं मुसलमान इसको
  21. 1:15दुआ कहते
  22. 1:19हैं ये
  23. 1:22एक ऐसी चीज
  24. 1:24है जिसके बारे
  25. 1:27में हमको विचार करना
  26. 1:30लाजमी
  27. 1:32है जब कोई इंसान इस दुनिया के
  28. 1:38अंदर किसी तकलीफ में है किसी आपदा में है
  29. 1:44किसी कष्ट
  30. 1:45में या उसको किस चीज की जरूरत
  31. 1:49है मोहताज
  32. 1:54है या और कोई ऐसी समस्या है या सिचुएशन है
  33. 1:59जहां वो
  34. 2:01अपने बल से अपनी कोशिश से अपने परिश्रम से
  35. 2:07नहीं पहुंच
  36. 2:10पाया उसने
  37. 2:13हारा तब उसके हृदय
  38. 2:17से एक पुकार निकलती
  39. 2:22है एक विनय निकलती है एक नती निकलती है एक
  40. 2:28अरदास निकलती है
  41. 2:31और वह अरदास किसको करता
  42. 2:34है कोई गरीब नौकर है तो सेठ को
  43. 2:40करेगा कोई बीमार है तो डॉक्टर को
  44. 2:46करेगा कोई नौकरी करने वाला है तो अपने
  45. 2:49हाकम को
  46. 2:52करेगा गरीब है तो साहूकार को
  47. 2:56पड़ेगा इस तरह से इस दु के अंदर जो जो
  48. 3:01बड़ा है उसको छोटा अपनी तकलीफ अपनी मोहताज
  49. 3:07अपनी मांग पेश रखता
  50. 3:10है जब देखता है कि वहां भी कुछ नहीं
  51. 3:15बनता तब उनके हृदय
  52. 3:18से उनके अंतर से एक पुकार निकलती
  53. 3:24है परमात्मा को निकलती है या किसी देवता
  54. 3:27को निकलती है या किसी अपने इष्ट को करता
  55. 3:31है सर्वव्यापक परमात्मा को करता है हरि को
  56. 3:35करता है गोविंद को करता है कि प्रभु मेरा
  57. 3:39यह काम हो जावे मेरी यह तकलीफ दूर हो जावे
  58. 3:43मेरी यह बीमारी ठीक हो जावे तो इस चीज को
  59. 3:48प्रार्थना कहा जाता
  60. 3:51है गुरु नानक साहिब जी
  61. 3:53महाराज और बाकी संतों की जितनी वाणी
  62. 3:58है उसमें एक वाणी तो है चेतावनी
  63. 4:02की यानी हमको वो चेतावनी देते हैं कि
  64. 4:06प्यारा तेरी जिंदगी जा रही
  65. 4:09है मौत नजदीक आ रहा
  66. 4:12है तू कुछ
  67. 4:15कर एक उनकी प्रार्थना ऐसी होती है जिसमें
  68. 4:19बताते हैं कि अंदर का राज क्या
  69. 4:22है एक ऐसी उनकी वाणी होती है जिसमें हमको
  70. 4:27सावधान करते
  71. 4:28हैं
  72. 4:31तो एक ऐसी वाणी है जो प्रार्थना की
  73. 4:38वाणी तो यह
  74. 4:42प्रार्थना है क्या इट द क्राई ऑफ एन एंग ट
  75. 4:48सोल इन द कंडीशन ऑफ डिस्ट्रेस एंड
  76. 4:53वांट टू द पावर ग्रेटर एंड फुलर देन सेल्फ
  77. 5:00फॉर
  78. 5:01कंफर्ट
  79. 5:05सोलेस अंदर से जब एक पुकार निकलती
  80. 5:09है और अपने से बड़े को करता है उस शक्ति
  81. 5:13को करता है पावर को करता
  82. 5:15है उसको प्रार्थना कहा जाता है अब यह
  83. 5:19प्रार्थना आलमगीर है माना सब करते
  84. 5:24हैं कोई दुनिया में ऐसा बंदा इंसान
  85. 5:30मनुष्य नहीं
  86. 5:32होगा जिसने कभी प्रार्थना नहीं की
  87. 5:39होगी सब करते हैं और प्रार्थना करना अच्छी
  88. 5:44बात है बुरी बात नहीं है जब हम प्रार्थना
  89. 5:49करते हैं उस परमात्मा को हरि को गोविंद को
  90. 5:53वाहगुरु अकाल पुर्ख को जब हम प्रार्थना
  91. 5:55करते
  92. 5:56हैं उस वक्त कम से कम हमारे हृदय में किस
  93. 6:03हद तक एकाग्रता होती
  94. 6:07है और किस हद तक तो हम अपने आप को मोहताज
  95. 6:14समझते हैं हेल्पलेस समझते हैं हम समझते
  96. 6:18हैं कि हम कुछ नहीं कर
  97. 6:20पाएंगे इस वास्ते दाता तू हमारा काम करो
  98. 6:25और किस हद तक हमारा विश्वास भी काम करता
  99. 6:28है कि कोई ऐसी शक्ति ऐसा
  100. 6:33पावर इस संसार में है जो दुखियों का आवाज
  101. 6:38सुनता
  102. 6:39है जो पापियों का भी आवाज सुनता
  103. 6:44है जो हमारा अपना
  104. 6:47है जो हमारे कष्ट की दवा हमको दे सकता
  105. 6:52है उस वक्त
  106. 6:56इंसान थोड़ा बहुत डिवाइन है थोड़ा बहुत
  107. 7:00डिवाइन हो जाता
  108. 7:02है माना
  109. 7:05ईश्वरीय उनकी भावनाएं हो जाती है आम तरह
  110. 7:09से हमारी भावनाए ईश्वरीय नहीं है मायावी
  111. 7:14है दुनिया की बात सोचता है दुनिया की बात
  112. 7:17करता है दुनिया के वचन बोलता है गुण अवगुण
  113. 7:21निंदा गिल्ला चुगली पर पचार धन कैसे
  114. 7:25इकट्ठे करना फलाना खूबसूरत है फलाने
  115. 7:28खूबसूरत हैय कैसे हासिल करना वो कैसे
  116. 7:31हासिल करना उसका मुकाबला कैसे करना कल यह
  117. 7:34काम है परसों यह काम है परसों यह काम है
  118. 7:37यानी हमारे हृदय में मायावी दुन संसारी
  119. 7:44मटेरियल
  120. 7:45अथूल जड़ इन चीजों का ही मन हम मन हमारा
  121. 7:50माहौल बना के एटमॉस्फियर बना के उसमें
  122. 7:53रहता है यहां तक कि हमारे को जब नींद है
  123. 7:55तब सपना भी इन चीजों का है तो जब हम उस
  124. 7:59परमात्मा के दरवाजे पर अदास करते हैं उस
  125. 8:03वक्त हमारा कुछ थोड़े ही टाइम के लिए
  126. 8:06भावनाए ईश्वरीय हो जाती है डिवाइन हो जाती
  127. 8:12अब दूसरी बात यह है कि प्रार्थना किसको
  128. 8:15करना चाहिए और क्यों करना
  129. 8:18चाहिए प्रार्थना कभी भी किसी बंदे को नहीं
  130. 8:21करना चाहिए कि इंसान को नहीं
  131. 8:24कर एक छोटी सी कहानी है अकबर बादशा एक दफा
  132. 8:30किसी जंगल में चला गया रास्ता भूल
  133. 8:33के वहां उसको बड़ी भूख भी लगी प्यास भी
  134. 8:36लगी एक किसान था उसने उसको रोटी भी खिलाई
  135. 8:40और दही और छाछ भी
  136. 8:43पिलाई अकबर बड़ा खुश हुआ और उसको कहा कि
  137. 8:47तुम्हारे को कभी कोई काम होवे तो मेरे पास
  138. 8:50आ जाना बोले तुम्हारे पास मैं आऊं तू राजा
  139. 8:54मैं एक गरीब
  140. 8:56किसान तो मैं कैसे आ सकता हूं बोले यह
  141. 8:59मुंदरी मेरी है रिंग है यह देता हूं यह
  142. 9:01दिखा के आया तो अकबर के पास व वक्त पर कोई
  143. 9:05तकलीफ थी तो चला
  144. 9:08गया अंदर सीधा जो उसकी प्रार्थना की दुआ
  145. 9:12की रूम थी कोटी थी या वहां देखता है कि
  146. 9:16अकबर खुद हाथ ऐसे करते हुए उस परमात्मा को
  147. 9:20रब को दुआ कर रहा है यानी प्रार्थना कर
  148. 9:23रहा है अरदास कर रहा है और वो सुन भी रहा
  149. 9:27है माना जो किसान
  150. 9:29वो कुछ कुछ लोग प्रार्थना मन में करते हैं
  151. 9:32कुछ मुंह में करते हैं कुछ आस्था करते हैं
  152. 9:34कुछ जोर से करते हैं तो उसने सुना कि वह
  153. 9:37कह रहा है हे खुदा मेरी रहत को खुश रखना
  154. 9:42बरसात
  155. 9:43देना धन होवे आसूद गी होवे खुशी होवे कोई
  156. 9:48साथ वाला हमला ना करे तो व किसान ने अपने
  157. 9:52कदम वापस ले वापस चला गया उसके दिल में
  158. 9:55ख्याल आया कि यह राजा काहे का है ये खुद
  159. 9:59मांगता है रब
  160. 10:01से ये खुद मंगता
  161. 10:04है तो मंगते से मैं कौन मंगते से क्यों
  162. 10:08मांगू जिससे वो मंगता है वह मेरी भी मंग
  163. 10:11मांग पूरी कर सकता
  164. 10:13है इस वास्ते वो वापस आके घर में अपनी
  165. 10:16प्रार्थना
  166. 10:18की तो इंसान इंसान को क्या दे सकता है खुद
  167. 10:24वो मुफलिस
  168. 10:26है तो वो जो रब वो हरी जो वाह गुरु अकाल
  169. 10:30पुर्ख सबका दाता है जिसके भंडार भड़े हुए
  170. 10:34हैं वाणी कहती है ग्रंथ साहब की साचिया
  171. 10:38मेरिया साहिबा क्या नहीं घर
  172. 10:42तेरे घर तो तेरे सब कुछ है जिसन देवे सोजन
  173. 10:48पावे हे प्रभु तेरे को क्या कमी है हे
  174. 10:51वाहगुरु तेरे पास क्या कमी
  175. 10:54है सब तेरे घर में सब कुछ है लेकिन जिसन
  176. 10:59तू देना चाहता है उसको देता
  177. 11:03है तो इस वास्ते उस साहिब के घर में कोई
  178. 11:07कमी नहीं है और अगर हमारी प्रार्थना हृदय
  179. 11:10से निकलनी भी चाहिए तो वह उस हड़ को
  180. 11:14गोविंद को वाहगुरु को ही हमारी प्रार्थना
  181. 11:17होनी
  182. 11:19चाहिए और क्यों करना
  183. 11:22चाहिए जब हमको किस चीज की लोड़
  184. 11:27है अगर दुनिया की लोड़
  185. 11:30है तो प्रार्थना करनी नहीं चाहिए लोग कहते
  186. 11:35हैं भाई हम प्रार्थना तो बहुत करते हैं
  187. 11:38लेकिन हमारी प्रार्थना सुनता कौन
  188. 11:43है अब इसमें एक राज
  189. 11:47है परमात्मा को अगर हम सही नमूने से
  190. 11:51प्रार्थना
  191. 11:52करें सही नमूना किसको कहते हैं कि वो
  192. 11:56प्रार्थना हमारी दिल से निकले
  193. 11:59इट
  194. 12:00श कम
  195. 12:02फोर्थ आउट ऑफ अवर होल बींग आउट ऑफ अवर
  196. 12:07हार्ट आउट ऑफ अवर
  197. 12:10सोल और जब हम प्रार्थना करें तब हम मह हो
  198. 12:16जाए मह होने का क्या मतलब है
  199. 12:20एसशन मनता हो लवलीन हो जावे इसको होश भी
  200. 12:25नहीं होवे कि क्या
  201. 12:26है उस रब को नाज समझे हड़ी को आजर नाजर
  202. 12:32समझे और उससे मांगे
  203. 12:37क्या अगर हम दुनिया की चीजें मांगते हैं
  204. 12:40तो व अगर वह मुनासिब समझते हैं तो देते
  205. 12:45हैं मगर अगर वह मुनासिब नहीं समझते तो
  206. 12:48नहीं
  207. 12:50देते व हमको नहीं मालूम इस वास्ते हम कहते
  208. 12:54हैं कि हमारी प्रार्थना मंजूर नहीं होती
  209. 12:57है एक गरीब कहता
  210. 13:00है हे मालक सच्चा पाशा हमारा जमीदार बड़ा
  211. 13:05जालिम
  212. 13:06है
  213. 13:09उसने मेरे लड़के को चाबुक से मारा
  214. 13:14है और ऐसा कुछ होवे इसकी सत्या नाश हो
  215. 13:19जाए तो यह प्रार्थना परमात्मा नहीं
  216. 13:24मानेगा ऐसे दुश्मनी वैर लेना किसी का
  217. 13:29नुकसान करना किसी की बुराई करना किसी का
  218. 13:33बुरा सोचना और इस किस्म की प्रार्थना
  219. 13:36मालिक मंजूर नहीं
  220. 13:39करता क्योंकि मालिक हम सबका पिता
  221. 13:45है अगर हिंदू का पिता है तो मुसलमान का भी
  222. 13:48पिता है सिख का भी पिता है यहूदी का भी
  223. 13:52पिता है गरीब का भी पिता है अमीर का भी
  224. 13:55पिता है खूबसूरत का भी पिता है काले का भी
  225. 13:58भी पिता है गोरे का भी पिता है उसके बच्चे
  226. 14:01हैं हम सब और सबको एक जैसा प्यार करता
  227. 14:05है इस वास्ते वह हमारी कोई ऐसी बुरी मांग
  228. 14:10पूरी नहीं
  229. 14:11करता लेकिन जब देखता है कि यह मेरे
  230. 14:15से आला चीज मांग रहा
  231. 14:18है एक आदमी है वह परमात्मा वो कहता है कि
  232. 14:22हे
  233. 14:25दाता मैं आपसे पता नहीं क्या मांगू आप
  234. 14:30मुझे वो दे दो जो मेरे लिए अच्छा
  235. 14:34है हमको पता नहीं है कोई आदमी पुत्र
  236. 14:38मांगे तो क्या पता कि वह पुत्र ही बड़ा
  237. 14:42होकर उसको मारे और
  238. 14:45पीटे लड़की मांगे उसको क्या पता के वो
  239. 14:48लड़की उसके कुछ दुखों का कारण बन
  240. 14:50जावे धन मांगे तो उस धन से उसको क्या पता
  241. 14:54कि किसनी मुसीबतें और चिंता और फिक्र ये
  242. 14:57सब आ जाते हैं
  243. 14:59उसको क्या पता हमको पता
  244. 15:02नहीं कि हमारे लिए अच्छी चीज क्या है नेक
  245. 15:06चीज क्या है हमारा भला किस चीज में
  246. 15:10है यह हमको नहीं पता ये परमात्मा को पता
  247. 15:15है तो आदर्श प्रार्थना ये है प्रभु को
  248. 15:19कहना कि हे साहिब हे प्रभु हे वाह गुरु
  249. 15:24मैं कोई चीज दुनिया से नहीं मांगता दुनिया
  250. 15:27की चीज कोई नहीं मांगता
  251. 15:29कबीर साहब जी महाराज अपने वाणी में कहते
  252. 15:31हैं क्या मांगू कुछ रन
  253. 15:35रहाई देखत नैन चल जग जाई कहते प्रभु मैं
  254. 15:41क्या अरदास करूं आपको क्या पुकारू जब मैं
  255. 15:44अपने आंखों से देखता हूं कि दुनिया में सब
  256. 15:46चीज जा रही
  257. 15:48है सब चीज नाशवान है सब आदमी मरते जाते
  258. 15:53हैं सुखी भी मरते हैं दुखी भी मरते हैं
  259. 15:55औलाद भी खत्म होता है खुद आदमी खत्म हो
  260. 15:57जाता है
  261. 16:00इस वास्ते मैं आपसे क्या
  262. 16:02मांगूं तो जो समझदार आदमी
  263. 16:05है और समझदार किस सेंस में दुनिया में
  264. 16:08अकलमंद लोग बहुत
  265. 16:10हैं लेकिन सच्ची अकल मंदी जो है वो थोड़ी
  266. 16:15हो बहुत जुज भी होते
  267. 16:18है वो कहते हैं
  268. 16:20प्रभु मुझे नहीं मालूम मेरे लिए क्या
  269. 16:23अच्छा
  270. 16:24है यू आर ऑल वाइज तू सबसे स्याना है
  271. 16:29सबसे अकलमंद है सब कुछ जानता है तू आगे का
  272. 16:34भी जानता है तू पीछे का भी जानता है तू
  273. 16:36मौजूद है काभी
  274. 16:37जानता जो मेरे लिए आप ठीक समझते
  275. 16:42हैं जिससे मैं आपको जल्दी पहुंच पाऊ जिससे
  276. 16:47मेरे हृदय में आप सदा याद रहे जिससे मेरे
  277. 16:51हृदय से दुनिया की बातें निकल जावे दुनिया
  278. 16:54का शौक निकल जावे धन का शौक निकल जावे
  279. 16:57स्त्री का शौक मान शन का शौक जिससे निकल
  280. 17:00जावे प्रभु वो मुझे दे दो मैं कुछ आपसे
  281. 17:05नहीं
  282. 17:06मांगता यह
  283. 17:08प्रार्थना जब हम भजन बैठते हैं कभी कभी
  284. 17:12कहीं कहीं हम रुक जाते हैं सरत आगे चलती
  285. 17:16नहीं बड़ा दर्द होता
  286. 17:18है उस वक्त यह मन कहता है कि
  287. 17:22उठो मगर यह प्रभु को प्रार्थना करता है कि
  288. 17:25हे सतगुरु सच्चा
  289. 17:27पातशाह हम कमजोर
  290. 17:31निर्बल गुनाहों से भड़े हुए भजन में बैठे
  291. 17:35हैं आपकी दया लेके आपका आसरा लेके आपकी
  292. 17:38टेक लेके भजन बैठे आपके आसरे अब यहां यह
  293. 17:43रुकावट है तेरे बगैर कौन उतारे कौन इस
  294. 17:47हमारी रुकावट को दूर
  295. 17:49करेगा और यह चिल्लाता है और रोता है और जब
  296. 17:53इंसान सच्चा रोता
  297. 17:55है तो प्रभु जो है वो भी रोता
  298. 18:00है रोता है का क्या मतलब है उसको भी दुख
  299. 18:03होता
  300. 18:04है और अगर वह कोई भाषा समझता है कोई बोली
  301. 18:09समझता है वह संस्कृत हिंदी पारसी अरबी
  302. 18:13अंग्रेजी अमेरिकन और यह नहीं
  303. 18:17समझता उनकी तो एक भाषा
  304. 18:20है
  305. 18:23आंसू जब इंसान के आंखों से आंसू आती है तब
  306. 18:28उसका तखत हिल जाता
  307. 18:30है वो रोना नहीं सहता है रोना नहीं
  308. 18:34सह बड़ महाराज जी को जब चिठियां लिखी जाती
  309. 18:39थी तो महाराज जी
  310. 18:42सुनते अपने सेक्रेटरी को कहते हैं तू पढ़ो
  311. 18:45वो
  312. 18:47पढ़ते अगर चिट्ठी के अंदर ऐसी बात
  313. 18:53है के संतों की दया का सागर उठ पड़ता है
  314. 19:00माना उसमें लहर आ जाती
  315. 19:03है और महाराज जी उस आदमी ने जिसने लिखा है
  316. 19:08अपना दुख चाहे स्त्री हो चाहे पुरुष हो
  317. 19:11चाहे गरीब हो चाहे अमीर हो जब उसने अपना
  318. 19:15दुख ऐसा लिखा है और वह सच्चा है और उसके
  319. 19:19दिल से निकला है तो संतों के हृदय में दया
  320. 19:25आ जाती है वो पहले ही दया के सागर है और
  321. 19:28दया दया का दरिया वो छोले मारता है लड़
  322. 19:33मारता और महाराज जी क्या करते एक मिनट ऐसे
  323. 19:39कर कहते हैं उसको लिखो सब ठीक हो जाएगा
  324. 19:43मालक बड़े मेहरबान है दयालु है सब ठीक हो
  325. 19:46जाएगा बेटी कोई फिक्र
  326. 19:49नहीं और चिट्ठी जाएगी चिठी से पहले वहा
  327. 19:53दया पहुंच जाती चिठी तो पोस्टमन कभी आ दिन
  328. 19:57पाच चार दिन को पहुंचती है ना मगर दया उस
  329. 20:01वक्त
  330. 20:02पहुंचा लेक्स वेलेक्स का काम नहीं
  331. 20:07है क्योंकि उनकी द संतों की जो जाल है वो
  332. 20:11हम नहीं समझ
  333. 20:13सकते तो
  334. 20:15अगर हमारी अरदास और हमारी नती और हमारी
  335. 20:21प्रार्थना
  336. 20:23होवे तो वह गुरु के पास इस वास्ते ही होवे
  337. 20:28जल्दी करो हम तुम्हारे पास जल्दी कैसे
  338. 20:33पहुंचे दुनिया हम कैसे भूले और आपको हम
  339. 20:37याद कैसे
  340. 20:39करें लेकिन कभी कभी हमको दुनिया में भी
  341. 20:43तकलीफ आ जाती है दुनिया के भी कई कष्ट आ
  342. 20:46जाते हैं दुनिया के बहुत प्रॉब्लम आ जाते
  343. 20:48हैं फिर भजन भी नहीं बनता
  344. 20:52है तभी भी हम किसको
  345. 20:55पुकारेंगे किसको पुकारेंगे
  346. 21:00तो भी हमको उसके दरवाजे पर ही जाना चाहिए
  347. 21:05और किसी के नहीं जिस सेवक को गुरु ने नाम
  348. 21:08बख है वह अगर पुकारे तो अपने सतगुरु को
  349. 21:13पुकारे और सतगुरु कहीं बाहर नहीं वो अंदर
  350. 21:16है और वह हमारे दुनिया के काम भी कर देता
  351. 21:20है लेकिन ये देखता है कि इसके इस काम करने
  352. 21:25से इसका बला भी होगा
  353. 21:28कुछ दुन भी भला होगा कुछ दन का भी भला
  354. 21:31होगा तो आशा पूरी करता है नहीं तो नहीं
  355. 21:34पूरी करता है कहता इसको यह दुख थोड़ा होवे
  356. 21:39क्योंकि दुख में आदमी पकता
  357. 21:43है कैसे पकता है जैसे हम दाल या खाना पना
  358. 21:47पकाते हैं ना अगर नहीं पकता है तो हम कहते
  359. 21:50हैं कच्चा
  360. 21:51है तो दुख इंसान को पका
  361. 21:55है इस वास्ते गुरु नानक साहिब जी महाराज
  362. 21:58कहते हैं दुख
  363. 21:59दारु सुख रोग
  364. 22:02भया दुख क्यों दारू
  365. 22:04है क्योंकि दुख में आदमी परमात्मा को याद
  366. 22:08करता है वाहगुरु को याद करता है और वो याद
  367. 22:12हृदय में अगर आ जावे सुखी आदमी क्या याद
  368. 22:15करेगा सुखी आदमी तो अपने ऐश में खाने में
  369. 22:18पीने में भोगों में मस्त रहता
  370. 22:21है भुल चुक से भी नहीं याद करेगा परमात्मा
  371. 22:25को लेकिन जब दुख आ जाता है तब याद करता
  372. 22:29तो इस वास्ते अगर सतगुरु समझते हैं कि
  373. 22:31फलाने को दुख ठीक है होवे इनको जरा ये
  374. 22:35पके तो दुख देते मां अगर बच्चे
  375. 22:40को जुकाम है गला खराब है टंस लाइटिस हो गई
  376. 22:45है वगैरा वगैरा और बच्चा आइसक्रीम मांगेगा
  377. 22:49तो मां देगी
  378. 22:51क्या नहीं देगी बच्चा खूब रोता है बच्चा
  379. 22:55समझता है मेरी मां बड़ी सखत है मम्मी ठीक
  380. 22:58नहीं
  381. 22:59है लेकिन मां को पता है कि इसका फायदा इस
  382. 23:03चीज में है इस वास्ते उसको दवाई देती है
  383. 23:07डॉक्टर की और वह दवाई करवी होएगी
  384. 23:10बच्चा नहीं पिएगा तो उसको हाथ बांध के
  385. 23:13मुंह में चमचा डाल के भी डाला जाता है
  386. 23:17लेकिन मां को पता है कि इस दवाई का इस
  387. 23:19करवा पन का फायदा है मेरा बच्चा सेहतमंद
  388. 23:23हो जाएगा तंदुरुस्त हो जाएगा खुश हो
  389. 23:26जाएगा तो इस वास्ते
  390. 23:30जब किसी को नाम मिला हुआ है सच्चे सतगुरु
  391. 23:35ने नाम की बिश की है उसके जिंदगी में दुख
  392. 23:38भी कभी आ जाए तो उसको यह सोचना चाहिए कि
  393. 23:42मेरे भले के लिए होगा प्रार्थना भली करें
  394. 23:45हम लेकिन वह प्रार्थना हमारी सुनते हैं कि
  395. 23:48नहीं सुनते हैं सुनते भी जरूर है लेकिन व
  396. 23:52हमारा काम हमारे मन के अनुसार करते हैं कि
  397. 23:54नहीं करते हैं व उसकी मर्जी है ठीक
  398. 23:58समझेंगे करेंगे ठीक नहीं समझेंगे नहीं
  399. 24:01करेंगे कभी-कभी वो प्रार्थना का काम हमारा
  400. 24:04एक हफ्ता बाद में हो जाता है हम समझते हैं
  401. 24:07कि इंस्टेंट होवे आज का आज क्यों नहीं हुआ
  402. 24:10अभी काभी क्यों नहीं हो गया नहीं तभी वह
  403. 24:14समझते हैं कि 10 दिन के बाद इसका काम
  404. 24:16करेंगे बली थोड़ा है रोवे प्रार्थना
  405. 24:19प्रार्थना करे सिमरन विनर करे हम तो सिमरन
  406. 24:22तभी करते हैं सिमरन वरना कौन स्मर करता है
  407. 24:25कोई शूरवीर स्मर करता है नहीं तो दुख में
  408. 24:28हम सिमरन
  409. 24:29करे दुख में सिमरन सब किया सुख में किया न
  410. 24:33याद कहता है बली करे 10 दिन 15 दिन ये
  411. 24:37सिमरण तो करे याद तो करे गुरु को हृदय में
  412. 24:39तो रखे फिर जाके उसका काम पूरा करते हैं
  413. 24:43लेकिन जो करते हैं वो सही है और वही ठीक
  414. 24:49है तो इस वास्ते हमको कभी उदास नहीं होना
  415. 24:53चाहिए लेकिन असल प्रार्थना ये है कि दाता
  416. 24:59बख्श
  417. 25:01बख दया कर बख हमारे को रास्ता दे हमारा
  418. 25:05काम आसान कर दे मेहर कर दे यह असल
  419. 25:11प्रार्थना तो प्रार्थना के कुछ किस्म होते
  420. 25:15हैं एक जुबान से हम करते हैं माना जुबानी
  421. 25:19प्रार्थना जैसे हम कहते हैं अपना सत्संग
  422. 25:24से पहले सत्संग के बाद में हम प्रार्थना
  423. 25:27करते हैं करू विनंती दुई कर जोरे अर्ज
  424. 25:31सुनो राधा स्वामी
  425. 25:33मोड़े अब इसकी आदत जब बन जाती है तो यह
  426. 25:37प्रार्थना मैकेनिकल है हम यह पाछ हजार
  427. 25:41जितने आदमी यहां बैठते हैं तो कुछ लोगों
  428. 25:44का फकत मुस चलता है ख्याल कहीं और है
  429. 25:48क्योंकि आदत पड़ गई तो हमारी प्रार्थना है
  430. 25:51वह हृदय से नहीं
  431. 25:53निकलती अपनाने अपने अंतर से नहीं निकलती
  432. 25:56है मैकेनिक हो गई है बस जुबान कहती जाती
  433. 25:59है कहती जाती कभी कभी कुछ लोग उसका जो सुर
  434. 26:03है जो मधुरता है उससे खुश हो जाते हैं
  435. 26:06लेकिन ख्याल कहीं और है बैठा यहां है
  436. 26:09प्रार्थना क्या है प्रभु सच्चे पादशाह
  437. 26:12मालक हरि गोविंद मैं दोनों हाथ जोड़ता हूं
  438. 26:16आपके हाजरी
  439. 26:18में वो फीलिंग से और भावना से उसकी हाजरी
  440. 26:23महसूस करके कि मालक हर जगह मौजूद है और
  441. 26:27सुन
  442. 26:29वो भावना से और इंटेंस फीलिंग से हम
  443. 26:34प्रार्थना कर नहीं पाते हैं इस वास्ते
  444. 26:38बंदोबस्त करने वालों ने यह सोचा कि एक
  445. 26:41कहे बाकी सब सुने और मन अपना लगाने की
  446. 26:45कोशिश
  447. 26:46करो तो ये जो है यह प्रार्थना कोरस
  448. 26:49प्रार्थना है मास
  449. 26:51प्रेयर इसका फायदा ज्यादा नहीं जो जो
  450. 26:56इंडिविजुअल्स
  451. 26:57कुछ खास इंसान चाहे पुरुष चाहे स्त्रियां
  452. 27:01चाहे बहने चाहे बेटियां उनका मन लगता है
  453. 27:04जरूर मैं उनको नमस्कार करता हूं वो इस
  454. 27:08भावना से प्रार्थना करते हैं उसको याद
  455. 27:10करके के हाथ जोड़ के प्रभु आपकी हाजरी में
  456. 27:13बैठे हुए करू विनंती दुई कर जोड़ी अर्ज
  457. 27:17सुनो राधा
  458. 27:19स्वामी व फीलिंग से करना पहली चीज यह है
  459. 27:24कि भावना और फीलिंग जब हम मुह से जुबान से
  460. 27:28कहते हैं तब मुंह चलता है ख्याल कहीं और
  461. 27:31चला जाता है इसका फायदा बहुत कम
  462. 27:34है दूसरी है खामोशी में हम प्रार्थना करते
  463. 27:38हैं
  464. 27:39एकाग्रता और उस खामोशी में हम गुनाह भी
  465. 27:42अपने कह देते हैं प्रभु पापी हो प्रभु चोर
  466. 27:46हो प्रभु नमक हराम आप खाना देते हैं इतना
  467. 27:50अच्छा खाना देते हैं ना देते हैं सब कुछ
  468. 27:53करते हैं लेकिन मैं नमक हराम मैं आपका शुक
  469. 27:57शक अदाई नहीं करता मेरे गुनाह बक्शना जैसा
  470. 28:01भी हूं तेरा बच्चा हूं तेरा बालक हूं
  471. 28:05एक्सेप्ट मी मा लॉर्ड एस आई हैम मेरे
  472. 28:09करतूत काले हैं गुनाह आंखें मेरी गुनहगार
  473. 28:13है काने मेरे गुनहगार है हाथ मेरे गुनहगार
  474. 28:16हैं मेरे पास कुछ नहीं आपको अर्पण करने के
  475. 28:19लिए मेरे पास बुराइयों के सवाय और कुछ है
  476. 28:23नहीं यह प्रार्थना खामोशी में होती है
  477. 28:28यह प्रार्थना शांति में होती है यह
  478. 28:31प्रार्थना साइलेंस में होती है तो ये
  479. 28:35प्रार्थना जो है यह प्रार्थना फायदा करती
  480. 28:39है सुनी भी जाती है और हमारा मालिक के साथ
  481. 28:44एक किस्म का कम्युनिकेशन हो जाता
  482. 28:48है दुनिया में कभी-कभी आंखों आंखों में
  483. 28:51कुछ लोगों का प्रेम हो जाता
  484. 28:53है जानते भी नहीं लेकिन आंख आंख को कह
  485. 28:57देती है माना उधर से कम्युनिकेशन शुरू हो
  486. 29:01जाती है दोस्ती हो जाती है प्रेम हो जाता
  487. 29:05है एक दूसरे को साक्षी मिल जाता है कि मैं
  488. 29:08आप मुझे पसंद है मैं आपको पसंद हूं आप ठीक
  489. 29:12है वो कहता आप ठीक है आप हमारे अपने जैसे
  490. 29:16लगते हैं वो कहता है आप भी हमारे अपने
  491. 29:18जैसे लगते हैं ये फकत आंखों से
  492. 29:22कम्युनिकेशन हो जाती है ऐसे जब हम अंदर से
  493. 29:26और खामोशी में प्रार्थना करते हैं तब
  494. 29:30प्रभु के साथ हरि के साथ सतगुरु के साथ
  495. 29:33हमारी कम्युनिकेशन शुरू हो जाता और हृदय
  496. 29:37साफ हो जाता है पव पवित्र होने लगता है
  497. 29:41उसकी याद करके
  498. 29:43कर और फिर उस सेवक का और सिख का
  499. 29:48नाता एक दूसरे को नजदीक आते हैं हालांकि
  500. 29:51प्रभु तो नजदीक है ही लेकिन हम दूर है वो
  501. 29:55इंसान महसूस करता है कि मैं उसके नजदीक
  502. 29:58आता और फिर उसको अंदर सतगुरु बताते हैं तू
  503. 30:02यह फलाना काम करता है यह खोटा है यह बुढा
  504. 30:05है यह मत करना इसका परिणाम खराब होगा मैं
  505. 30:09तुमको सावधान करता हूं फिर भी इंसान अपनी
  506. 30:13कमजोरी में करता है यह बुराइयां और खराबी
  507. 30:16कोई कोई संभालता है मगर यह जो खामोशी की
  508. 30:20प्रार्थना है ये उस तक पहुंचती
  509. 30:25है मगर उस प्रार्थना के सिवाय एक और
  510. 30:29प्रार्थना जो प्रार्थना जिसको हम कहते हैं
  511. 30:32मिस्टिकल
  512. 30:34प्रेयर यानी हमारी मेडिटेशन यानी
  513. 30:37भजन यानी
  514. 30:39सिमरन वो अच्छे से अच्छी
  515. 30:42प्राथना और वो रब जरूर सुनता है और उससे
  516. 30:46हड़ी खुश होता है तो परमात्मा खुश होता है
  517. 30:50जब कोई भी इंसान भजन बैठता
  518. 30:53है तब मालिक खुश हो बाबा जी महाराज ने
  519. 30:57परमार्थी पत्रों में लिखा है पाच मिनट के
  520. 31:00लिए भी जब एक
  521. 31:02सत्संगी सिमरन भजन करके शब्द को सुनता है
  522. 31:06तो सचखंड के अंदर उसकी हाजरी लग जाती है
  523. 31:10आप समझो बेल बजा यहां से बटन दबाया वहां
  524. 31:13बेल बजा इलेक्ट्रिक का बेल होता है ना इधर
  525. 31:16से लगाते हैं तो रसोई घर से नौकर को आवाज
  526. 31:19आती है कि भाई सेठ बोलता है कि
  527. 31:23आओ ऐसे यहां जब इंसान शब्द में बैठ
  528. 31:27शब्द को सुनता है उस सच्चे नाम को सुनना
  529. 31:31कोशिश करता है कोई फिक्र नहीं दूर से आवाज
  530. 31:34आती होवे तो कोई फिक्र नहीं है मगर बैठा
  531. 31:37तो है ना उस साहिब के हाजरी में आप अगर
  532. 31:40किसी नौकर को कहो कि तू इधर खड़ा रहो कोई
  533. 31:43काम ही ऐसा है आप उसको कहोगे तू यहां खड़ा
  534. 31:49रहो उसकी तो वेजेस हो गई ना
  535. 31:52ड्यू आप चाहे उसे घमेला उठवा हो आप चाहे
  536. 31:56उसे जारू करवाओ आप चाहे उसको कहो कि यहां
  537. 31:59त खड़ा
  538. 32:00रहो उसने तो अपनी ड्यूटी की ना उसने तो
  539. 32:04हुकम माना ना उसको भी उसका कंपनसेशन
  540. 32:08मिलेगा मजदूरी
  541. 32:09मिलेगी तो जो इंसान भजन में बैठता है चाहे
  542. 32:13मन लगे चाहे ना लगे उसको भी मजदूरी
  543. 32:18मिलेगी चाहे जो ज्यादा चढ़ेगा ऊपर उसकी
  544. 32:20मजदूरी ज्यादा होती है लेकिन मजदूरी
  545. 32:23मिलेगी बेगार नहीं जाएगा तो वो मिस्टिकल
  546. 32:27प्रेयर या मेडिटेशन
  547. 32:30है उसमें जब यह बैठता है उससे रब सबसे
  548. 32:34ज्यादा राजी होता है रब कहता है इस दुनिया
  549. 32:37वालों में जो करोड़ों अनंत है इनमें देखो
  550. 32:40कुछ है मेरा प्यारा जो मेरी याद में बैठा
  551. 32:43हुआ है कोई तो
  552. 32:45है करोड़ों करोड़ों करोड़ों जीव
  553. 32:49है भजन करने वाले कितने हरि को हरि के याद
  554. 32:55के लिए बैठने वाले कितने
  555. 32:58तो हरि खुश होता है रीता है गुरु का खुश
  556. 33:03होना है बाड़ी सत्पुरुष निज कृपा धड़ी तो
  557. 33:08अगर उनको खुश करना है मालिक को खुश करना
  558. 33:11है तो उसकी याद कर और अगर हम उनको प्यार
  559. 33:14करते हैं तो उसके हृदय में हमारे लिए
  560. 33:16प्यार पहले ही है क्योंकि वह पिता है हम
  561. 33:20खोए हुए बच्चे हैं हम खोई ही औलाद है एक
  562. 33:25बटक भटक जावे कोई बच्चा भटक जावे माना खो
  563. 33:29जावे तो बाप निकलता
  564. 33:32है उसको तलाश करने
  565. 33:35के क्योंकि आखिर मेरी औलाद है मेरे से
  566. 33:39पैदा हुआ है ये मेरा अपना है इस वास्ते
  567. 33:43बाप उसकी तलाश में इस वास्ते गुरु अर्जन
  568. 33:46साहिब जी महाराज वाणी में कहते हैं जिन
  569. 33:49तुम भेजे तिन बुलाए सुख सहज सेती घर आए
  570. 33:54जियो जिन्होंने तुमको भेजा है वो खुद आता
  571. 33:58है तलाश भी वो करता है तो जब यह भजन में
  572. 34:02बैठता है मेडिटेशन में बैठता है अभ्यास
  573. 34:05में बैठता है साधना में बैठता है उस वक्त
  574. 34:09सतगुरु खुश होता है
  575. 34:12ड़ी अच्छा फिर प्रार्थना के फल क्या होते
  576. 34:15हैं जब हम प्रार्थना करते हैं तो उसके फल
  577. 34:19क्या होते हैं पहला ही पहला फल य ता है कि
  578. 34:22हमको अपने अवगुणों का पता लगता है एक बात
  579. 34:28दूसरी बात क्योंकि हमारे अंदर सफाई होने
  580. 34:30लगती है आप महाराज जी से कोई भी सवाल पूछो
  581. 34:34किताबें पढ़ो क्वेश्चन आंसर पढ़ो या
  582. 34:38लेटर्स पढ़ो तो महाराज जी से लोग पूछते
  583. 34:41हैं हजूर इसका क्या बोलते हैं मेडिटेशन
  584. 34:44हजूर इस बात का क्या करें बोलेंगे
  585. 34:46मेडिटेशन इसका क्या करें बोलेंगे भजन करो
  586. 34:49इसका लोग कहते हैं क्या हर बात में खाली
  587. 34:52भजन भजन करते हैं भजन ही तो सब कुछ
  588. 34:55है भजन ही से सब कुछ होता है भजन से यह
  589. 35:00इंसान गंदे बंदे से खुदा बनता
  590. 35:03है यह भजन ही है जिनको जो मालिक को प्यारा
  591. 35:07लगता है तो इस वास्ते इस भजन से हमारे
  592. 35:12अंदर निर्मलता आती है सफाई आती है फिर वह
  593. 35:16काम जो हम बुढे बुढे काम करते
  594. 35:19थे बगैर किसी डर
  595. 35:22से उस काम का विचार करने से भी हम र जाते
  596. 35:28हैं क्योंकि अंदर शुद्धता आ गई निर्मलता आ
  597. 35:32गई पाकीजा आ गई जब सफाई आ जाती है तब हम
  598. 35:38समझने लगते हैं कि दुनिया फानी है दुनिया
  599. 35:42कूर है वक्त जा रहा है दिन जा रहे हैं
  600. 35:46घंटे जा रहे हैं अरे कुछ करो अरे कुछ करो
  601. 35:50यह हमारे शुद्धता से सफाई से होता है और
  602. 35:53दूसरा इसको ये अवेयरनेस आती है कि मैं
  603. 35:55हेल्पलेस हूं अरे मैं तो बेचारा हूं अरे
  604. 35:59मैं तो कुछ भी नहीं हूं अरे मैं तो कुछ कर
  605. 36:02ही नहीं सकता
  606. 36:04हं इस दुनिया के आम आदमी तो बोलता है मैं
  607. 36:07करता हूं यह मैंने किया है यह कारखाना
  608. 36:11मैंने खोला है यह किताब मैंने लिखा है यह
  609. 36:14काम मैं करता हूं मैं के सिवाय कुछ है ही
  610. 36:17नहीं गुरु नानक साहब जी महाराज कहते हैं
  611. 36:20हो में बिख पाय जगत उपाया शब्द वस बिख जा
  612. 36:27कहते हमम रूपी जहर डाल के इस दुनिया को
  613. 36:30बनाया गया इस वास्ते और लंगड़ा भी होएगा
  614. 36:35ना जिसको बाह नहीं होगी और टांगे नहीं
  615. 36:37होगी वो भी बोलेगा
  616. 36:40मैं ये नहीं है यह नहीं है यह तो मेरे में
  617. 36:43गुण है कि
  618. 36:45नहीं यह मैं चली जाती य भजन करने से जा
  619. 36:49तभी ये कहता है मैं तो कुछ भी नहीं मैं तो
  620. 36:52बिचारा हूं प्रभु मैं तो अवगुणों की काण ह
  621. 36:56जेते सागर नीर भरे हैं तेते अवगुण हमारे
  622. 37:00दुनियादारी कहता है कि मैं अवगुण से बड़ा
  623. 37:03हुआ हूं वो तो कहता है मैं बड़ा गुणवान
  624. 37:05हूं टैलेंटेड
  625. 37:08हूं इसको अपनी इंपरफेक्शन नेस हेल्पलेसनेस
  626. 37:12उसकी अवेयरनेस आती है कि मैं कुछ भी हूं
  627. 37:15मैं तो एक खाकी बंदा हूं मैं तो एक मुट्ठी
  628. 37:19हूं मट्टी
  629. 37:21की ये इंसान महसूस करता है जब ये भजन करता
  630. 37:25है सिमरन करता
  631. 37:27फिर इसके अंदर आजिज आ जाती है नम्रता आ
  632. 37:31जाती है अनक सारी आ जाती है ह्यूमिडिटी आ
  633. 37:34जाती हलीम हो जाता है भजन से होता है और
  634. 37:38अलावा उसके क्या है गुनाह अपना बोलने से
  635. 37:41वो डरता नहीं हम आम तरह से अपने गुनाह
  636. 37:45छुपा के रखना चाहते हैं अपने गुण खूब
  637. 37:49बताते हैं मैं ऐसा हूं मैं ऐसा हूं कोई
  638. 37:52वीर सूर वर निकलेगा जो बोलेगा कि भाई मैं
  639. 37:55तो बड़ा कामी
  640. 37:58भाई मेरे को तो काम बहुत सता भाई मैं तो
  641. 38:01बड़ा लोभी हूं मैं तो माया के रंग में
  642. 38:04रंगा हुआ मेरे अंदर यह बुरी आदत है मेरे
  643. 38:08अंदर यह खराबी है यह भजन करने वाला कह
  644. 38:12सकता है दूसरे का काम नहीं है दूसरा तो
  645. 38:14खाली अपनी गुण बताएगा सफाया बताएगा अपने
  646. 38:19अच्छी अच्छी बातें
  647. 38:21बताएगा भजन करने वाला निम्रता रखेगा
  648. 38:24बोलेगा मेरे पास कुछ और है ही नहीं सवा इस
  649. 38:27चीजों को और फैक्ट यही है कि हमारे पास
  650. 38:30कुछ है नहीं अगर शोभा बखी है तो उस रब
  651. 38:35ने अगर अमीरी बखी है तो उस हरि
  652. 38:39ने अगर तंदुरुस्ती बखी है तो उस परमेश्वर
  653. 38:43ने जो कुछ हमको बक्शा हुआ है अच्छा उस
  654. 38:46साहिब ने बख हुआ है हमारे को अहंकार किस
  655. 38:50चीज का ईगो किस चीज का ईगो उस चीज का होवे
  656. 38:53जो हमारी अपनी होवे सब बिश उन की है इस
  657. 38:57वास्ते जब चाहता है छीन लेता
  658. 38:59है जब चाहे छीन लेता है आदमी बेचारा हो
  659. 39:03जाता है इस वास्ते लेकिन यह एहसास ये
  660. 39:08अवेयरनेस ये
  661. 39:10रिलाइजेशन इस सिख को तब आती है जब यह भजन
  662. 39:14करता है मालिक को याद करता है तो उनको ही
  663. 39:19परमात्मा की हाजरी महसूस होती है हम क्या
  664. 39:23महसूस करते हैं गालियां देना निंदा करनी
  665. 39:27बुराई करनी चुगली करनी बद नजर से दुनिया
  666. 39:30को
  667. 39:31देखना मगर जो भजन करने वाला है वह महसूस
  668. 39:34करता है साहब बैठा है सब देखता
  669. 39:39है तो ये चीजें भजन करने से हमारे अंदर आ
  670. 39:43जाती है
  671. 39:45तो अब विषय तो बड़ी है इस वास्ते में वाणी
  672. 39:50लेता हूं यह प्रार्थना के अंदर प्रार्थना
  673. 39:53है यह वाणी महात्मा सदना कहता है आप कहिए
  674. 39:58निप कन्या के
  675. 40:05कारण एक पया पे
  676. 40:14तारी का
  677. 40:18मरथी
  678. 40:23स्वारथ
  679. 40:25वाकी
  680. 40:30सवारी अब महात्मा सदना परमात्मा को पुकार
  681. 40:36करता है कि है
  682. 40:38प्रभु एक आदमी
  683. 40:43था जो आदमी कामी था और स्वारथ था उस आदमी
  684. 40:50ने किसी ढंग से किसी राजा के लड़की से
  685. 40:54शादी किया
  686. 40:57और उसने बख किया
  687. 41:00था विष्णु भगवान
  688. 41:03का ऐसे पापी और गुनहगार को अभी आपने लाज
  689. 41:10रखी आप इस वास्ते मेरी भी ला
  690. 41:14जड़ अब इसके पीछे कहानी है यह वाणी ग्रंथ
  691. 41:17साहब की
  692. 41:18है एक दफे का जिक्र क राजा था उस राजा को
  693. 41:24एक बहुत सुंदर कन्या
  694. 41:27थी भोली भाली
  695. 41:30थी वो विष्णु भगवान
  696. 41:34की परस्तिश करती थी माना आराधना करती थी
  697. 41:37पूजा करती
  698. 41:39थी जैसे मीरा को ख्याल आया ना कि मैंने तो
  699. 41:42कृष्ण से शादी
  700. 41:44की ऐसे उसने यह सोचा शादी करूंगी तो मैं
  701. 41:49विष्णु से कर भगवान से कर ऐसा उसने अपने
  702. 41:53अंदर में संकल्प
  703. 41:55रखा एक दफ वो बालकनी पर खड़ी
  704. 41:58थी तो वहां
  705. 42:01एक सोना चांदी बनाने वाला जो कारीगर होता
  706. 42:04है माना गोल्ड
  707. 42:07स्मिथ यंग था जवान था वह गुजरा उसने
  708. 42:11बालकनी में देखा कि यह तो अप्सरा है राजा
  709. 42:15राजा की लड़की है लेकिन बहुत ही कुछ
  710. 42:18निराली इसकी
  711. 42:20खूबसूरती उसने अपने हृदय में फैसला किया
  712. 42:23शादी तो इससे
  713. 42:25करो
  714. 42:26मां को जाकर बोला कि मां शादी करनी है तो
  715. 42:30इस राजा के कन्या से करनी है नहीं तो नहीं
  716. 42:33कर मां उसको बोलती है कहां तू एक मामूली
  717. 42:37कामड़ और कहां राजा की कन्या तू कैसे उससे
  718. 42:40शादी करेगा बोलते नहीं तोरण होगा करूंगा
  719. 42:45इससे
  720. 42:46तो उस मां को पता
  721. 42:50था कि यह लड़की के हृदय में यह खवाहिश थी
  722. 42:55कि क्योंकि वोह राजाही घर के जेवर वेवर
  723. 42:58बना बनाते थे तो उनको मालूम था कि यह
  724. 43:01लड़की कहती है कि शादी करूंगी तो भगवान से
  725. 43:07कर अब इस लड़के का यह खश थी के करूंगा तो
  726. 43:10इससे करूंगा तो इसने अपने हृदय के अंदर एक
  727. 43:14बात बना ली अभी व चतुर्भुज भगवान यानी चार
  728. 43:18बाहों वाला भगवान अभी वो कारीगर तो था
  729. 43:22उसने क्या किया कि ऐसा अपना विष्णु जैसा
  730. 43:24रूप बनाया बाहे बनाई ड्रेस ब्रेस सब जैसा
  731. 43:29भगवान पहनता है विष्णु ऐसी बनाई और एक रात
  732. 43:34जबक चांदनी थी यानी पूरी रोशनी नहीं होती
  733. 43:37एक रात उसके महल के ऊपर चढ़ गया और महल
  734. 43:41में जब वह कन्या खड़ी थी तो यह उसके दीवार
  735. 43:45पर चार बाहो से आकर खड़ा
  736. 43:47हु और चांदनी थी और वो लड़की भोली थी उसने
  737. 43:52देखा कि चार बाहो वाला है खूबसूरत है मुख
  738. 43:55उसका ने का है सब उसकी
  739. 43:58ड्रेस उसने सोचा कि मेरी अंदर की ख्वाहिश
  740. 44:01पूरी हो गई उसने आके दंडवत की वो उसको
  741. 44:05कहता है
  742. 44:06कन्या तुमने हर वक्त हृदय में मेरे को याद
  743. 44:10किया
  744. 44:11है इस वास्ते मैं आया हूं और तुम्हारा
  745. 44:15हमारा मिलाप हो जाएगा और इसके बाद मैं आज
  746. 44:19तुमको चत्र भुज होकर दिखाता हूं यानी चार
  747. 44:22बाहो वाला हो दिखाता हूं उसके बाद में मैं
  748. 44:26तुमको रवाजी इंसान की तरह से ही
  749. 44:29रहूंगा मगर मैं हूं भगवान
  750. 44:35विष्णु लड़की गई पिता को बताया और उनकी
  751. 44:39शादी वादी
  752. 44:41हो अब वह राजा कहने लगा कि मेरा जवाई
  753. 44:46भगवान है खुद तो ऐ में गुजारने
  754. 44:50लगा वैसे फौज बज जितनी थी उनकी तरफ उसकी
  755. 44:54कोई तज्जा नहीं तो साथ वाला कोई राजा था
  756. 44:58उसने देखा कि इनकी फौज भी कमजोर हो गई है
  757. 45:01यह बड़ा अयाशी हो गया राजा और अपनी फौज
  758. 45:04लेकर उसके ऊपर हमला करने को
  759. 45:06आया राजा को बताया गया कि यह उनकी फौज आ
  760. 45:10रही है राजा कहता है मेरे को क्या फिक्र
  761. 45:12है मेरा जवाई खुद भगवान है इनकी फौज मुझे
  762. 45:17क्या
  763. 45:17करेगी आखिर में इस शहर के दीवार तक उसकी
  764. 45:22फौज आ
  765. 45:24गई सलज
  766. 45:26कहते हैं महाराज आंखें खोलनी चाहिए
  767. 45:29होशियार होना चाहिए कहते हैं जाओ मेरी
  768. 45:32लड़की को कहो तो उसने वो अपने पति भगवान
  769. 45:36को
  770. 45:37बोलेगी अब फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं
  771. 45:40वह भागे लड़की के पास लड़की गई अपने शौहर
  772. 45:43के पास पति के पास उसको कहने लगे महाराज
  773. 45:46इस तरह से हमला हो रहा है हम नाश हो
  774. 45:48जाएंगे और आप दया
  775. 45:51कर उन्होंने कहा तू कोई फिक्र ना कर सब
  776. 45:54ठीक हो जाएगा और आप एक कमरे के अंदर चला
  777. 45:58गया और कमरा बंद कर दिया अंदर रूम बंद कर
  778. 46:01दी और उसने उस वक्त परमात्मा को प्रार्थना
  779. 46:07की कि है
  780. 46:10प्रभु मैं हूं
  781. 46:13गुनहगार मैंने बड़ा छल कपट किया है इस
  782. 46:16कन्या से जोक बहुत बहुत पवित्र है और भोली
  783. 46:22है मैंने तेरा नाम रखवाया मैंने तेरी
  784. 46:26ड्रेस पहनी मैं चतुर्भुज बना और तुम्हारे
  785. 46:30से कोई बात छुपी हुई नहीं है अब आप सहायता
  786. 46:33करो मेरे को अपना तो कोई फिक्र है नहीं
  787. 46:38लेकिन जब कुछ भी नहीं होगा यह राजा हार
  788. 46:41जाएगा मैं गिरफ्तार होऊंगा वह मेरी औरत को
  789. 46:44ले जाएंगे उस वक्त सारी दुनिया का विश्वास
  790. 46:48तेरे से निकल जाएगा कि भगवान
  791. 46:51झूठा भगवान कमजोर इसका कोई भरो विश्वास
  792. 46:56करना ही नहीं चाहिए प्रभु मेरे लिए नहीं
  793. 47:00तू अपनी लाज
  794. 47:02रख मेरी बात सुन मैं तो एक नाचीज हूं तू
  795. 47:06दया कर तू कृपा करके य मेरी वाणी सुन ले
  796. 47:11और उसने बड़ी ऐसी ही यानी आंसू बहाते
  797. 47:15बहाते बहाते भगवान का भी तखत हिल
  798. 47:20गया और कुछ ऐसा हुआ मैं कहानी में ज्यादा
  799. 47:24नहीं जाऊंगा कुछ ऐसा ही बना कि उस बादशा
  800. 47:27को होश आ गई कि मैं तो बगैर
  801. 47:32किसी कारण के अपने पड़ोसी राजा के ऊपर
  802. 47:37मैंने हमला किया है इसका कोई फायदा नहीं
  803. 47:40फिजूल खून रेजी होगी हजारे हजार आदमी मेरे
  804. 47:43मरेंगे हजार आदमी इसके मरेंगे और इस
  805. 47:46वास्ते चलो वापस इससे दोस्ती कायम रखनी है
  806. 47:50और हमला ट गए विष्णु ने लेकिन उसको
  807. 47:54प्रार्थना में ने जब आवाज दी कि मैं
  808. 47:56तुम्हारा काम करूंगा ऐसे प्रण लिया था कि
  809. 47:59इसके बाद तू मेरे भजन में ही मशगूल
  810. 48:03रहेगा और सब काम छोड़ दे
  811. 48:07खैर अब यहां महात्मा
  812. 48:11सदना परमात्मा को कहता है कि हे प्रभु
  813. 48:16नर्प कन्या राजा की कन्या के
  814. 48:19कारण जो कि एक बेख दारी था भगवान का छल
  815. 48:24कपट से जो इसने काम किया
  816. 48:26कामा रथी जिसकी काम की वासना थी क्योंकि
  817. 48:30वह लड़की
  818. 48:32सुंदर स्वारथ अपने मतलब से इसने तेरा
  819. 48:36स्वांग बनाया तेरा सांग धारा वाकी पैज
  820. 48:41सवारी कहते आपने उसकी भी लाज रखी
  821. 48:45प्रभु मेरे मुझ गरीब की लाज रखो मुझ गरीब
  822. 48:49का तू हाल देखो और सुनो और कृपा करो और
  823. 48:53मेरी लाज
  824. 48:57का
  825. 48:59मर्थी
  826. 49:01[संगीत]
  827. 49:04स्वार्थी वा की
  828. 49:08पैज
  829. 49:13सवारी तव गुण कहा जगत
  830. 49:21गुरा जो कर्म ना
  831. 49:29कहते हे जगत के गुरु हे वाहगुरु सारी
  832. 49:32सृष्टि का मालक तुम्हारा कौन सा परोपकार
  833. 49:37हुआ जगत का गुरु अरे संसार स सारे संसार
  834. 49:41का मालक प्रभु वागड़ तुम्हारा कौन सा
  835. 49:44परोपकार हुआ
  836. 49:47अगर तू इंसान तुम्हारी शरण में आके उनके
  837. 49:53कर्म नाश नहीं होते हैं
  838. 49:56तू कैसा जगत का गुरु है तू कैसा जगत का
  839. 49:58पिता है कि जो आदमी तुम्हारी शरण लेता है
  840. 50:02उसके पिछले जन्मों के पाप गुनाह नाश नहीं
  841. 50:06होते कर्म नाश नहीं होते हैं तो आप किस
  842. 50:10फायदा आपका क्या फायदा है आपका उपकार कौन
  843. 50:13सा है आपकी मेहरबानी कौन सी
  844. 50:15है हा आ स गुण
  845. 50:20क जगत
  846. 50:24गुरा
  847. 50:27जो कर्म ना
  848. 50:32नास सिंह शरण कत
  849. 50:39जाइ जो जमुक
  850. 50:46ग्रास फरमाते हैं एक इंसान जब शेर की शरण
  851. 50:52लेता
  852. 50:53है कहते हैं सिंग शरण कत जाइए कहते जाने
  853. 50:57का फायदा क्या अगर शेर की शरण कोई लेवे तो
  854. 51:03एक उसको गीदड़ जकल जिसको कहते हैं गीदर
  855. 51:08जानवरों में बड़ा कमजोर और डरपोक जानवर
  856. 51:10होता है उसको गदर कहते हैं आदमी भी अगर
  857. 51:14डरपोक होता है कहते वो गदर है गदर
  858. 51:17है कहते हैं एक शेर की शरण में जाने का
  859. 51:22फायदा क्या अगर उस शेर के होते हुए एक
  860. 51:28गीदर खाने को
  861. 51:29आवे यानी परमात्मा को एक किस्म की वो
  862. 51:32ललकार करता
  863. 51:34है उसको जगाता है कहते हैं तू शेर है
  864. 51:39तुमसे बड़ा और कौन तुमसे बलवान और कम
  865. 51:43तुमसे समरथ और कम हमने तेरी शेर ली है यह
  866. 51:47काल यह मन जो के गीदर है फिर भी यह हमको
  867. 51:52खाता
  868. 51:52है हमारे से बुराइयां कराता
  869. 51:55हमारे से यह सब जितने पाप और गुनाह कर रहे
  870. 51:58हैं कहते यह गीतर करवाता है जिसको हम काल
  871. 52:02कहे मन कहे नेगेटिव पावर क शैतान कहे इलीस
  872. 52:06कहे सैटन
  873. 52:07कहे कहते हैं तू समरथ शेरों का शेर साहिबो
  874. 52:12का साहिब शहनशाह उनकी हमने शरण ली है और
  875. 52:17हमको यह गीदर जो है वह परेशान और हैरान कर
  876. 52:20रहा है कहता है तुम्हारा शेर होने का
  877. 52:22फायदा
  878. 52:23क्या देखिए ये जो जो भगवान के भक्त होते
  879. 52:26हैं ना संत होते हैं ये कभी कभी बड़ा लाड
  880. 52:29करते हैं परमात्मा से लाड करते हैं ये लाड
  881. 52:33है महात्मा का आगे सिंह शरण कत
  882. 52:42जाई जो जमुक
  883. 52:49ग्रासा एक बूंद जल
  884. 52:54करने
  885. 52:57त्रिक दुख
  886. 53:03पाव प्राण गए
  887. 53:06सागर
  888. 53:09मिले
  889. 53:11न काम ना
  890. 53:15आवे कहते चातक
  891. 53:19पंछी हमेशा मालिक को प्रार्थना करता है कि
  892. 53:22दाता बरसात बरसाओ क्योंकि वह दरिया का
  893. 53:26पानी नहीं पीता है कुए का पानी नहीं पीता
  894. 53:28है समुंद्र का पानी नहीं पीता है तलाव का
  895. 53:31पानी नहीं पीता फकत बरसात का पानी प इस
  896. 53:34वास्ते पिया पिया पिया पिया पिया करता
  897. 53:38रहता
  898. 53:39है तो कहते हैं एक बूंद जल काने कहते हैं
  899. 53:43वो एक बूंद अगर पीता है बा मना खत्म फिर
  900. 53:46उसको प्यास नहीं कहते हैं एक बूंद जल काने
  901. 53:51चातक दुख पले कहते वेलिंग पुकार करता है
  902. 53:55तुमको प्रार्थना करता है कि दाता पानी
  903. 53:57बरसाओ पानी बरसाओ पानी बरसाओ कहते हैं
  904. 54:01अगर वो आपको प्रार्थना करते करते करते मर
  905. 54:05जावे उसके बाद आप इतनी बरसात करो कि सारी
  906. 54:09दुनिया पानी से डूब जावे कहता उसका फायदा
  907. 54:12क्या जब जिंदा है जब पुकारता है जब प्यासा
  908. 54:17है तब बरसात करो
  909. 54:20ना जब वो मर जाएगा फिर आप ज्यादा बरसात
  910. 54:24करेंगे सागर बन जाएगा उसका क्या
  911. 54:27फायदा यानी महात्मा का यह कहना है कि हे
  912. 54:31प्रभु हमको आपकी जरूरत दया की जरूरत हमको
  913. 54:35अब है मर जाएंगे उसके बाद दया करेंगे उसका
  914. 54:38फायदा
  915. 54:41क्या यानी उसको एक ललकार है उनको एक पुकार
  916. 54:45है कि हमको वक्त टाइमली हेल्प
  917. 54:49चाहिए वक्त पर हेल्प
  918. 54:52चाहिए एक ब जल
  919. 54:58करने
  920. 55:00त्रिक दुख
  921. 55:05पावा प्राण गए सागर
  922. 55:12में
  923. 55:13पुन
  924. 55:15कामना
  925. 55:19आवे प्राण जो थाक थिर नहीं
  926. 55:27कैसे
  927. 55:31बरमा कहते प्रभु अब मेरी आखरत आ गई है
  928. 55:35जिंदगी की आखरत आ गई है यह चोला पुराना हो
  929. 55:38गया है प्राण जो था केथर नहीं कहते और
  930. 55:41भरवासा नहीं जिंदगी का पता नहीं कल क्या
  931. 55:44होगा परसों क्या होगा एक मिनट का कोई
  932. 55:46भरवासा नहीं है प्राण जो था के फिर नहीं
  933. 55:50कैसे
  934. 55:51बऊ मैं अपने को संतोष कैसे
  935. 55:54द मैं अपने को धीरज कैसे देऊ मैं अपने को
  936. 55:57कंफर्ट कैसे देऊ अगर आप मेरे को वक्त पर
  937. 56:01हेल्प नहीं करेंगे बुढ़ापा आ गया है सांस
  938. 56:04सांस जा रहा है जिंदगी खत्म होने में लगी
  939. 56:07है कब आप दया
  940. 56:10करोगे वो नाम का प्रकाश हो जावे अंदर
  941. 56:14पर्दा खुल जावे आपका प्रेम और भक्ति हासिल
  942. 56:19हो जावे कहते हैं यह कब करो एक अभ्यासी है
  943. 56:23अभ्यासी की यह पुकार
  944. 56:25यह जो एक नमूना है कि अभ्यासी किस किस्म
  945. 56:29की पुकार करता है भक्त किस किस्म की
  946. 56:32परमात्मा को पुकार करता है दुनिया की बात
  947. 56:35नहीं मांगता है दुनिया का सामान नहीं
  948. 56:37मांगता है संसार का सामान नहीं मांगता वो
  949. 56:40बोलता है मेरे ऊपर दया करो तो मेरा काम
  950. 56:42बने पर्दा खुले और प्रभु आपका दीदार हो
  951. 56:46जावे इस वास्ते कहते हैं प्राण जो थाक थिर
  952. 56:50नहीं जिसका कोई भरोसा नहीं अभी चोला ये थक
  953. 56:53गया अभी हम किनारे पर बैठा है बिस्तरा गोल
  954. 56:57है कैसे बऊ अपने को कैसे संतोष देऊ कि अब
  955. 57:01आप दया करोगे करोगे करते करते करते मेरी
  956. 57:04जिंदगी की यह हालत बन
  957. 57:07गई कहते हैं आगे प्राण जो
  958. 57:12थाक थिर
  959. 57:15नहीं
  960. 57:17कैसे बर
  961. 57:21माओ
  962. 57:23बढ
  963. 57:25का
  964. 57:29मिले कहो कहा
  965. 57:34चढ़ाओ अब कहते हैं एक आदमी जब मरने लगे उस
  966. 57:38वास्ते उसके बाद में आप किश्ती भेजेंगे
  967. 57:41उसका क्या फायदा मैं तो डूब रहा
  968. 57:44हूं अभी मैं चाहता हूं कि आप मुझे किश्ती
  969. 57:48भेजो नाव भेजो वोट भेजो कुछ भेजो तो मैं
  970. 57:51बच जाऊं जब मैं डूब जाऊंगा उसके बाद आप
  971. 57:54किश्ती भेजेंगे उसका क्या
  972. 57:58फायदा इस वास्ते आप दया करो किश्ती भेजो
  973. 58:01तो इस भव सागर के इस संसार के भव सागर से
  974. 58:05मैं पार हो जाऊं जब मैं जिंदा
  975. 58:08हूं यानी संत मत की खूबी यह है कि संत मत
  976. 58:13यह नहीं कहता है कि मरने के बाद मुक्ति
  977. 58:17मिले मरने के बाद पता नहीं क्या होगा इसको
  978. 58:21मालूम है और यह तो एक प्रॉमिस है यह तो
  979. 58:24वायदा
  980. 58:26है सच्ची चीज तो यह है कि अब भी जब जीते
  981. 58:31डाय वाई
  982. 58:32लिविंग नानक ऐसा जोग
  983. 58:37कमाइए तो वह जोग यह है कि अब जब हम जीते
  984. 58:41हैं खाते हैं बीते हैं ठीक है तंदुरुस्त
  985. 58:45है तब हम भजन करें कमाई करें मेडिटेशन
  986. 58:49करें और मालिक को अंदर प्रकाश करें नहीं
  987. 58:52तो उधार है और लोग कहते
  988. 58:55फलाना आदमी मरा मगर कुछ बोल के नहीं गया
  989. 58:59फलाना सत्संगी मरा पर कुछ बोल के नहीं गया
  990. 59:02लेकिन उनको नहीं याद करते हैं जो मरने से
  991. 59:0510 दिन पहले 11 दिन पहले 12 दिन पहले आ
  992. 59:07दिन पहले एक महीना पहले भी बोल गए उनको यह
  993. 59:10भूल जाते अब
  994. 59:13सतगुरु जिसने पूरे सतगुरु ने किसी सेवक को
  995. 59:18नाम दिया है उसके पास मरने के वक्त जरूर
  996. 59:23आते हैं
  997. 59:25मैंने तो पहले अर्ज किया कि नाम देने के
  998. 59:28वक्त संत सतगुरु इधर बैठ जाते हैं इस
  999. 59:31वास्ते ग्रंथ साहिब की वाणी कहती है गुरु
  1000. 59:34तेरे संग सदा है
  1001. 59:36नाल अब अगर इंसान ने भजन ही नहीं किया
  1002. 59:41मेडिटेशन ही नहीं
  1003. 59:42की तो उसको वह अंदर जाके सहारा देते हैं
  1004. 59:49लेकिन बाहर बोलने की इजाजत नहीं दे अंदर
  1005. 59:53जाकर उसको सहारा मिलता है लेकिन आते जरूर
  1006. 59:56है बड़ महाराज जी कहते थे गुरु अगर मरने
  1007. 59:59के समय नहीं आ वाणी कहती है धर्म राय अब
  1008. 1:00:03क्या करेगो जब फाट सगलो लेखा संतन मो को
  1009. 1:00:09पूंजी सौपी पुतरिया मन का खा धर्म राय अब
  1010. 1:00:14क्या करेगो जब पाट सगलो
  1011. 1:00:18लिखा तो महाराज कहते थे अगर पूरा गुरु
  1012. 1:00:21होवे और मरने के समय सुख के नहीं आवे ऐसे
  1013. 1:00:25गुरु को दूरों ही सलाम
  1014. 1:00:27है गुरु की बड़ी बात तो यह है कि मरने के
  1015. 1:00:30समय सेवक की आके संभाल
  1016. 1:00:33करे लेकिन अगर सेवक भजन ही नहीं करे तो
  1017. 1:00:37महाराज जी बोलते मैं आऊ या ना आऊ मेरी
  1018. 1:00:39मर्जी है फिर सब लोग है सब लोग उदास हो
  1019. 1:00:43जाते थे सब लोग दुखी हो जाते थे ये महाराज
  1020. 1:00:46जी क्या कहते हैं कहते मैं आऊ या ना आऊ जो
  1021. 1:00:49भजन नहीं करते हैं उनके पास में आऊ या ना
  1022. 1:00:52आऊ मेरी मर्जी है
  1023. 1:00:55फिर सब लोग को जब दुखी देते थे देखते थे
  1024. 1:00:59कहते थे जरूर आएगा
  1025. 1:01:02सतगुरु अगर सतगुरु पूरा होवे सिख के मौत
  1026. 1:01:06के वक्त नावे उसको दूरों सलाम कर दे आते
  1027. 1:01:10हैं क्योंकि दयालु उनको मालूम है कि हमारे
  1028. 1:01:14जैसे कमजोर आदमी पापी और पतित और गुनहगार
  1029. 1:01:18आदमी उनको सब हमारी मालूम है जैसे मां बाप
  1030. 1:01:21को मालूम है कि इस बच्चे में क्या ताकत है
  1031. 1:01:23इस बच्चे में क्या ताकत है इसके गुण क्या
  1032. 1:01:26है इसके गुण क्या है असेसमेंट करके बैठता
  1033. 1:01:28है मां बाप इस तरह से वो असेसमेंट करके
  1034. 1:01:32बैठा हुआ है कि यह भजन करने वाले कौन है
  1035. 1:01:35तो आके और काल के मुख से बचा
  1036. 1:01:42लेते हमने कई
  1037. 1:01:45देखे हमारे यहां के प्रेसिडेंट साहब थे
  1038. 1:01:49राय साहब गुलव राय उन्होंने सात दिन पहले
  1039. 1:01:53बताया और और कई बातें हैं अपना टाइम नहीं
  1040. 1:01:56है तो ऐसे कई हमने सुना है और पर्सनल
  1041. 1:02:00तजुर्बा है कि वो आते
  1042. 1:02:04हैं इस वास्ते इस बात की कोई घबराने की
  1043. 1:02:08जरूरत नहीं है लेकिन ऐसा समझ के भजन भी
  1044. 1:02:11बंद नहीं करना
  1045. 1:02:14चाहिए भजन जरूर करना चाहिए नहीं तो उधार
  1046. 1:02:17है हां आएंगे आएंगे कि नहीं
  1047. 1:02:21आएंगे ये मन में सवाल आता है ये यह जो
  1048. 1:02:24अविश्वास है यह जो कमजोरी है यह जो शक है
  1049. 1:02:28इसका इस वास्ते ये है कि हम भजन करते
  1050. 1:02:33नहीं लेकिन शक रखने की कोई जरूरत नहीं है
  1051. 1:02:38इस वास्ते ही बैठते हैं कि उसी वक्त आ
  1052. 1:02:41जाते हैं और हर वक्त नजर दारी भी करते हैं
  1053. 1:02:45लेकिन यह विषय मैं कभी और लेंगा इस वास्ते
  1054. 1:02:48पूरा भरोसा रखना चाहिए कि वो आएंगे लेकिन
  1055. 1:02:51उनको जो हमने वायदा दिया है कि भजन करेंगे
  1056. 1:02:55वो हमारा पार्ट ऑफ द एग्रीमेंट है और हमको
  1057. 1:02:58भजन करके खुद देखना चाहिए कि जो संत कहते
  1058. 1:03:01हैं यह सच है या नहीं जब आदमी भजन में
  1059. 1:03:04बैठे अगर वह ऐसा समझे कि मेरा शरीर सारा
  1060. 1:03:07सुनन हो गया इधर आ गया हूं बराबर है
  1061. 1:03:11महाराज जी ऐसा ही करते हैं फिर इधर आ गया
  1062. 1:03:14हूं फिर इधर आ गया हूं बराबर ऐसे ही कहते
  1063. 1:03:17हैं फिर इधर आ गया हूं कहेगा बराबर तो
  1064. 1:03:21इसका विश्वास हो जाता फिर अंदर लाइट के
  1065. 1:03:25झलक आ जावे प्रकाश आ जावे कहेगा भाई बात
  1066. 1:03:29सच है बाकी आगे भी सच ही होगा तो यह
  1067. 1:03:33तजुर्बा खुद करके देखना
  1068. 1:03:35चाहिए महाराज जी कहते हैं मैंने आपको कुछ
  1069. 1:03:38भी नहीं दिया
  1070. 1:03:40है सब कुछ आपके अंदर परमात्मा ने रखा है
  1071. 1:03:44मैं आपको रास्ता बताता हूं प्यारा अपने घर
  1072. 1:03:47बैठ के तुम इसको हासिल करो और तजुर्बा
  1073. 1:03:50कर तो इस वास्ते उनका तो प्रम पूरा ही
  1074. 1:03:54होगा लेकिन हमारा भी कोई ड्यूटी है हमारा
  1075. 1:03:57भी कोई फर्ज बनता है कि हम उसको याद करें
  1076. 1:04:00और सिमरण और भजन करें तो ये कहते हैं बूड
  1077. 1:04:05मुए नौका मिली कहो काहे को चटा कहते हैं
  1078. 1:04:09अगर डूब जाएंगे उस वक्त आप नौका भेजेंगे
  1079. 1:04:12आप बोट भेजेंगे आप किश्ती भेजेंगे वो
  1080. 1:04:15किश्ती किस काम की जब मैं डूब गया ये एक
  1081. 1:04:19रूह की पुकार है कि प्रभु जल्दी करो
  1082. 1:04:21दरवाजा खोलो दीदार करा दे
  1083. 1:04:25ये
  1084. 1:04:28पुकार का
  1085. 1:04:33मिले कहो कह
  1086. 1:04:39चढ़ाओ मैं नाही कछ हो
  1087. 1:04:46नहीं किछ
  1088. 1:04:49आना
  1089. 1:04:51मोरा कहते हैं प्रभु मैं कुछ नहीं देखिए
  1090. 1:04:56मैंने अर्ज किया जो भजन करने वाले हैं वह
  1091. 1:04:59क्या समझते हैं मैं
  1092. 1:05:02नाही कुछ ह नहीं ना मैं कुछ हूं ना मेरा
  1093. 1:05:08कुछ है कुछ आ है ना मोड़ा ना मेरे पास कुछ
  1094. 1:05:12है यह तीन चीज ना मैं कुछ हूं ना कुछ मेरा
  1095. 1:05:15है ना मेरे पास कुछ है यह अपने को खब
  1096. 1:05:20समझता है जीरो समझता है और यह जीरो
  1097. 1:05:24वाला सब कुछ होता है जब यह जीरो पर पहुंच
  1098. 1:05:28गया मेरे मेरे बजाय इसने तेरा तेरा करना
  1099. 1:05:31शुरू किया मैं मैं के बजाय तू तू करना
  1100. 1:05:34शुरू किया अभी गुरु नानक साहिब जी महाराज
  1101. 1:05:38रब रूप थे वह गुरु रूप थे उसकी बढ़ाई
  1102. 1:05:41दुनिया वालों को भी मालूम नहीं भजन वालों
  1103. 1:05:44को मालूम है कि गुरु नानक साहब कौन खुद
  1104. 1:05:47हरि थे ईश्वर
  1105. 1:05:49रूप वो जब मोदी खाने में नौकरी करते थे और
  1106. 1:05:53एक आया उसको आटा देना था आ एक एक धड़ी थी
  1107. 1:05:56तारा दू थी तो एक एक देने लगे एक दो तीन
  1108. 1:06:02चार पाच छ सात आन 10 11 12 13 उन्होने 13
  1109. 1:06:10कहा 14 कहा ही
  1110. 1:06:14नहीं वो 1ते 1 1 तेरा
  1111. 1:06:19तेरा क्योंकि वो रब रूप हो गए उसकी भजन
  1112. 1:06:24किया उसकी बंदगी की उसकी सेवा की सब कुछ
  1113. 1:06:27किया उसके रूप हो गए मालक रूप हो गए वो इस
  1114. 1:06:30वास्ते कहता है मेरा मुझ में कुछ नहीं जो
  1115. 1:06:34कुछ है सो तुझ तेरा तुझको सौंपते क्या
  1116. 1:06:38लागत है मुझ तो हमारे अंदर क्या है मेरा
  1117. 1:06:42मेरा मेरा मेरा और भजन करने के बाद यह हो
  1118. 1:06:47करता है तेरा तेरा तेरा प्रभु तेरा सब कुछ
  1119. 1:06:51तेरा मैं भी तेरा जो मेरे पास है वो भी
  1120. 1:06:54तेरा मेरे पास कुछ नहीं मैं कुछ नहीं मेरा
  1121. 1:06:57कुछ नहीं ये कह के आखिर में देखिए क्या
  1122. 1:07:00कहते हैं मैं नहीं कुछ हो
  1123. 1:07:07नहीं कुछ आ ना
  1124. 1:07:12मोरा अ सर लज्जा रख
  1125. 1:07:20लेयो
  1126. 1:07:21सदना जन तोरा
  1127. 1:07:25मेरा प्रभु तुम्हारे ऊपर कोई हक नहीं
  1128. 1:07:29मैंने कोई चंगा काम किया नहीं मैंने कोई
  1129. 1:07:31भला काम किया नहीं मैंने कोई नेक काम किया
  1130. 1:07:34नहीं इस वास्ते मेरा हक नहीं हक तो उसका
  1131. 1:07:36होता है जिसने तेरी बंदगी की हो तेरी
  1132. 1:07:39आराधना की हो जिसने तेरी पूजा की हो मैं
  1133. 1:07:42तो सारी उम्र माया की पूजा की है माया की
  1134. 1:07:45आराधना की है माया मांगी है इस वास्ते
  1135. 1:07:48मेरा आपके ऊपर कोई हक नहीं लेकिन क्योंकि
  1136. 1:07:51आप दया के सागर है मैं आपको जितना बड़ा आप
  1137. 1:07:56है जितनी जितना तेरा नाम है इतनी बख भी
  1138. 1:08:00मांगता हूं कि मेरा गुनाह बख ले मेरी लाज
  1139. 1:08:04रख कहते हैं अवसर लज्जा राख ले हो सदना जन
  1140. 1:08:09तोड़ एक्सेप्ट मी ओ लर्ड एज आई एम जैसा भी
  1141. 1:08:14हूं आखिर तेरा बचाई मेरे गुनाहों को नहीं
  1142. 1:08:17देखना तुम अपनी बड़ाई देखना अपना नाम
  1143. 1:08:20देखना तुमको कहते हैं सद बंद सदा मेहर ना
  1144. 1:08:24बखन मेहरवान मेरे को ब आखिर में नाई पाशाई
  1145. 1:08:30की प्रार्थना है जो हम सबसे लगती है क्या
  1146. 1:08:34है बल छुट गयो बंधन पड़े कुछु ना हो तो
  1147. 1:08:38उपाय प्रभु बल नहीं कमजोरी हो गई बल छुट
  1148. 1:08:44गए बंधन पड़े बंधन दुनिया के बहुत है कुछु
  1149. 1:08:48ना होता उपाय कहते कोई उपाय मेरे हाथ में
  1150. 1:08:51है नहीं कह नानक अब ओट हड़ गज य होए सहाय
  1151. 1:08:57कहते हैं हड़ तेरी ओट है तेरा आसरा है
  1152. 1:08:59तेरी टेक है जैसे गज सहाय हो गया था जैसे
  1153. 1:09:04हाथी को एक मगर आके लगा था उस वक्त हाथी
  1154. 1:09:09एक कमल का फूल दरया से लेने को गया था
  1155. 1:09:13परमात्मा के आगे भगवान के आगे अरदास रखने
  1156. 1:09:16के लिए जब हाथी पानी में अंदर गया उस वक्त
  1157. 1:09:19एक मगड़ आया क्रोकोडाइल जिसको कहते हैं उस
  1158. 1:09:22वक्त मगर ने हाथी के पांव में पकड़ा था उस
  1159. 1:09:27वक्त की बात है यानी ऐसा मिसाल देते हैं
  1160. 1:09:30कह नानक अब ओट हर गज यू होत सहाय जैसे
  1161. 1:09:36हाथी को आप सहायता की थी और उस मगर से
  1162. 1:09:39बचाया था ऐसे प्रभु हम इस दुनिया के माया
  1163. 1:09:43रूपी मगर से बचाओ और हमारी सहायता करो
  1164. 1:09:47हमको अभी किश्ती दे दो कि हम इसमें बैठ के
  1165. 1:09:50संसार सागर को पार कर ले सर लज्जा राख ले
  1166. 1:09:59हो
  1167. 1:10:00सदना जन
  1168. 1:10:05तोरा
  1169. 1:10:07रा

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This page contains the full transcript of Prathna II प्रार्थना-Dada Babani Sahib Ji-Hindi-Satsang -9 by All Shabads & Satsangs, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 8,325 words across 1,169 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

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