Philosophy Matters | The Other Side of Education | Prof. Dr. Abdul Wahab Suri — Transcript
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- 0:00रहीम आप लोगों को आवाज साफ आ रही है?
- 0:03स्क्रीन शो हो रहा है?
- 0:06जी सर बिलकुल ठीक हो रहा है।
- 0:08ठीक है। अच्छा मसला ये था कि मैं जो है ये
- 0:11इस बात पर
- 0:14वो था कंफ्यूज था कि हमें एजुकेशन वाला जो
- 0:18है टॉपिक सेलेक्ट करना चाहिए या जस्टिस
- 0:21वाला। सही है? क्योंकि दोनों जो
- 0:23कांसेप्ट्स है ना दोनों टॉपिक्स जो है वो
- 0:25इंटरकनेक्टेड है। और अगर देखा जाए तो जो
- 0:29सिस्टम ऑफ जस्टिस है वो फंक्शन कर ही नहीं
- 0:32सकता विदाउट सिस्टम ऑफ एजुकेशन। तो आपने
- 0:34देखा होगा हिस्टोरिकली मैं आज जो है वो
- 0:39प्रेजेंटेशन तैयार है और जस्टिस वाली भी
- 0:42तैयार
- 0:46और ये कोशिश करेंगे के
- 0:50जिस तरह से वो स्लाइड बाय स्लाइड हमने
- 0:52फोकस किया है। ये भी हम स्लाइड बाय स्लाइड
- 0:55करें। आज जो है मैं आपको दोनों के ताल्लुक
- 0:58के बारे में बताऊंगा। फिर जो है हम जो है
- 1:01तकरीबन आधा घंटा डिस्कशन करेंगे कि आपके
- 1:04ख्याल में पहले मीन पे फोकस करना चाहिए या
- 1:08एंड पे फोकस करना चाहिए। मीन टू एंड एंड
- 1:10भी हो सकता है एंड टू मीन भी हो सकता है।
- 1:12दोनों पॉसिबिलिटीज है। आज का जो लेक्चर है
- 1:15वो मैं ये बताने की कोशिश करूंगा कि
- 1:18दुनिया में कोई भी सिस्टम ऑफ एजुकेशन जो
- 1:21है वो
- 1:23डिवइड ऑफ सिस्टम ऑफ़ जस्टिस फंक्शनल हो
- 1:28नहीं सकता। फंक्शनल नहीं होता। सही है।
- 1:31जैसे हमारे यहां आत तौर पे लोगों ने ये
- 1:34प्रोपेगेंडा किया हुआ है। खासतौर पे जो
- 1:37इंटेलेक्चुअल्स टीवी वगैरह पे बैठे हुए
- 1:39वफाबाजी कर रहे हैं। वो ये के इल्म जो है
- 1:42वो फला है। इल्म जो है वो
- 1:47मोमिन की खोई हुई मीरा से है। जहां से
- 1:51मिले वहां से ले लो। वो इल्म के बारे में,
- 1:53वो नॉलेज के बारे में, एजुकेशन नॉलेज नहीं
- 1:57होती। एजुकेशन कुछ और चीज है। तो हम जाहिर
- 2:02है कि ये हम पहले भी बहुत डिस्कशन कर चुके
- 2:04हैं। लेकिन इस ग्रुप के साथ जो हमारी
- 2:06डिस्कशन है उसमें हमने ये नहीं किया है।
- 2:10लेकिन ये कि हमने ये बहुत एस्टैब्लिश्ड
- 2:13यानी के
- 2:15पोजीशन है। फलसफे के अंदर जो फलसफे पढ़े
- 2:19हुए लोग हैं कि नॉलेज और एजुकेशन में फर्क
- 2:23है। तो हम इसे भी वाज़ कर लेंगे। लेकिन जो
- 2:25चीज इंपॉर्टेंट है वो ये है कि जो परसूट
- 2:28ऑफ नॉलेज और पर्सूट ऑफ एजुकेशन जो है वो
- 2:31सिनोनिमस टर्म नहीं है और ये जो
- 2:36सिनोनिमिटी इस्टैब्लिश की हुई है लोगों ने
- 2:40वो बुनियादी तौर पर कन्फ्यूजन है एक
- 2:45फिलोसोफिकल कन्फ्यूजन है और अगर आप देखें
- 2:49दुनिया में जितने बड़े पॉलिटिकल थरिस्ट है
- 2:54उनकी पिटिकल थरी अगर आप थिंकर्स को ले
- 2:57लेते हैं जैसे आप प्लेटो को ले ले तो
- 3:01प्लेटो की जो थरी ऑफ़ जस्टिस है वो मीनिंग
- 3:07लेस हो जाती है अगर आप उसकी थ्यरी ऑफ़
- 3:10एजुकेशन थ्यरी ऑफ़ एजुकेशन मीनिंगलेस है
- 3:13अगर आप उसकी थ्यरी ऑफ़ जस्टिस को
- 3:15अंडरस्टैंड नहीं करते। यानी कि दोनों में
- 3:18एक खास किस्म का र है। इसी और दूसरी जो
- 3:24चीज है वो ये कि कोई भी सिस्टम ऑफ जस्टिस
- 3:27जो भी होता है उसके ऊपर जब भी लोग बात कर
- 3:30रहे होते हैं तो उसके साथ-साथ फिर वो
- 3:32इकोनॉमिक स्ट्रक्चर के ऊपर भी आ जाते हैं।
- 3:34खासतौर पे वो पॉलिटिकल थिरिस्ट जो के
- 3:38जिन्हें हम मॉडर्न पॉलिटिकल थरिस्ट कहते
- 3:41हैं। उनमें से एक भी बड़ा आप पॉलिटिकल
- 3:43थिरिस्ट ऐसा नहीं देखेंगे जो के अह सिस्टम
- 3:47ऑफ जस्टिस की बात कर रहा है या प्रिंसिपल
- 3:49ऑफ जस्टिस की बात कर रहा है या मैकेनिज्म
- 3:51ऑफ जस्टिस की बात कर रहा है। लेकिन उसके
- 3:54साथ-साथ वो इकोनॉमिक स्ट्रक्चर के बारे
- 3:58में बात ना करे ऐसा नहीं होगा। और यानी कि
- 4:02ये दोनों तीनों सिस्टम जो है एजुकेशन
- 4:06इकोनमिक और सिस्टम
- 4:10ये इंटीग्रेटेड है। लिहाजा आप जब किसी भी
- 4:16सिस्टम ऑफ एजुकेशन को अंडरस्टैंड करते हैं
- 4:20तो उसका एक मकसद ये होता है कि आप ये
- 4:23देखें कि किस किस्म का ह्यूमन के सिस्टम
- 4:26ऑफ जस्टिस के लिए आपको करना वो ह्यूमन
- 4:30रिसोर्स आप जनरेट करना चाह रहे हैं। तो
- 4:33इसका मतलब यह हुआ कि
- 4:36यानी के अगर आप हिस्ट्री ऑफ आइडियाज को
- 4:40देखें तो सिस्टम ऑफ एजुकेशन और सिस्टम ऑफ
- 4:44जस्टिस इनके दरमियान एक खास किस्म का
- 4:47ताल्लुक आपको नजर आएगा। इसी तरीके से
- 4:50सिस्टम ऑफ जस्टिस और सिस्टम ऑफ
- 4:54ट्रांजैक्शन ऑफ गुड एंड सर्विसेस
- 4:57और ट्रां और यानी कि समाधान में
- 5:01ट्रांजैक्शन ऑफ़ कैपिटल और कंसंट्रेशन ऑफ
- 5:04कैपिटल एंड द प्रोडक्शन और
- 5:08मेकिंग ऑफ द कैपिटल इनका आपस में ऑर्गेनिक
- 5:11रिलेशनशिप है। लिहाजा हम एजुकेशन सिस्टम
- 5:16को इस कॉन्टेक्स्ट में देखने की कोशिश कर
- 5:19रहे हैं के सिस्टम्स ऑफ़ नॉलेज के साथ उसका
- 5:23क्या रिलेशनशिप है? सिस्टम ऑफ़ जस्टिस के
- 5:26साथ उसका क्या रिलेशनशिप है? सिस्टम ऑफ़
- 5:29ट्रांजैक्शंस ऑफ गुड्स एंड सर्विसेस एंड
- 5:32फाइनेंस के साथ उसका क्या रिलेशनशिप है?
- 5:35लिहाजा ये कोई एजुकेशन थ्यरी पे हम बात
- 5:38नहीं कर रहे। एजुकेशन थ्यरी अस्यूम करती
- 5:41है कुछ फंडामेंटल नोशंस ऑफ जस्टिस को और
- 5:46एक खास किस्म के जो नोशन ऑफ जस्टिस है उसी
- 5:50की प्रमोशन के लिए या उसी की सस्टेनेंस के
- 5:53लिए या उसी की आर्टिकुलेशन के लिए और सबसे
- 5:56इंपॉर्टेंट चीज उसकी नेचुरलाइजेशन के लिए
- 6:00इस्तेमाल होता है सिस्टम ऑफ एजुकेशन और जो
- 6:06बच्चे जो जाहिर है कि उस सिस्टम के अंदर
- 6:08जाके के आगे जाके उनको काम करना है उस
- 6:11सिस्टम ऑफ जस्टिस में उनको जहनी तौर पर
- 6:15तैयार करना उनको इस तरह से तैयार करना कि
- 6:19वो सर्व कर सके सिस्टम को और एक ऐसा
- 6:26सप्लाई ऑफ ह्यूमन इंटेलेक्ट अवेलेबल हो जो
- 6:30सिस्टम को प्रोटेक्ट भी करे और सिस्टम को
- 6:33ग्रो भी करे। लिहाजा
- 6:36आपको कोई भी सिस्टम ऑफ जस्टिस
- 6:39डिवइड ऑफ सिस्टम ऑफ एजुकेशन नहीं दिखाई
- 6:42देगा। सही है? अब आप यह सोचते होंगे कि
- 6:48मुसलमानों ने जो सिस्टम ऑफ जस्टिस
- 6:50एस्टैब्लिश किया उस सिस्टम ऑफ उसका सिस्टम
- 6:53ऑफ जस्टिस क्या है? सही है? ये एक
- 6:57इन्वेस्टिगेशन का
- 7:00डोमेन है। उसको आप ओपन कर सकते हैं। इसी
- 7:02तरीके से अ जो है वो हम सब कॉन्टिनेंट में
- 7:07रह रहे हैं। हिंदुस्तान में रह रहे हैं।
- 7:09तो यहां पर हिंदुस्तान के जो लोग थे
- 7:13उन्होंने कौन से सिस्टम्स ऑफ़ जस्टिस
- 7:15एस्टैब्लिश किए और उन्होंने किस किस्म के
- 7:17सिस्टम्स ऑफ़ एजुकेशन। तो ये एक पूरा
- 7:20रिसर्च का डोमेन है। आपकी मर्जी है। आप
- 7:22इसको खोदे इसको एक्सकवेट करें। एनालाइज
- 7:25करें, अंडरस्टैंड करें, क्रिटिकली इवैलुएट
- 7:29करें। ये आप लोगों की मर्जी है। लेकिन जो
- 7:31इंपॉर्टेंट चीज है वो यह के इस वक्त जिस
- 7:35दुनिया में हम रह रहे हैं। यह दुनिया जो
- 7:37है वो मॉडर्न इंस्टीटश से चल रही है। यानी
- 7:41कि ये जो वर्ल्ड है अगर फर्ज किया कि इसकी
- 7:46सिस्टमिक अंडरस्टैंडिंग आपको करनी है तो
- 7:50आपको मॉडर्न इनलाइटनमेंट वैल्यूस के साथ
- 7:52ही
- 7:54इसको जोड़ के अंडरस्टैंड करने की कोशिश
- 7:57करनी चाहिए। और इसी मॉडर्न
- 8:01सिस्टमिक
- 8:04ऑर्डर के अंदर जो दूसरे कमटिंग नोशंस है
- 8:09मिसाल के तौर पे जो प्री मॉडर्न
- 8:12कनेक्टिविटीज है या प्री मॉडर्न वैल्यू
- 8:15सिस्टम है या प्री मॉडर्न
- 8:19सिस्टम्स ऑफ़ नॉलेज है वो अपनी यानी कि
- 8:23सर्वाइवल की जंगे लड़ रहे हैं। और हकीकत ये
- 8:26है कि रोजाना की बुनियाद पर उनको सामना
- 8:30करना पड़ता है उस
- 8:33लेजिटसी का जो कि रिक्वायर्ड होती है
- 8:36डोमिनेंट डिस्कोर्स के के अंदर
- 8:39पार्टिसिपेट करने के लिए। लिहाजा आप देखें
- 8:42कि प्री मॉडर्न सिस्टम्स ऑफ नॉलेज या प्री
- 8:45मॉडर्न वैल्यू स्ट्रक्चर या प्री मॉडर्न
- 8:49जो है वो
- 8:52ट्रांजैक्शंस ऑफ गुड एंड सर्विसेस
- 8:55इन
- 8:57प्री मॉडर्न कलेक्टिविटीज या प्री मॉडर्न
- 9:03स्ट्रक्चर्स ऑफ
- 9:06ट्रांजैक्शंस ऑफ़ गुड्स एंड सर्विसेस या
- 9:08प्री मॉडर्न वैल्यू स्ट्रक्चर्स को अपनी
- 9:11लेजिटिमेसी पेश करनी पड़ती है। अगर वो
- 9:15लेजिटिमिसी मॉडर्न ऑर्डर के साथ कंपैटिबल
- 9:18हो तो वो फ्लोरिश करती है। अगर वो मॉडर्न
- 9:21इंस्टीटश के साथ कंपैटिबल ना हो या ये के
- 9:26सपोर्टिव ना हो लेकिन बहरहाल वो उसको
- 9:28कंट्राडिक्ट भी ना कर रही हो तो भी मामला
- 9:31चलेगा। लेकिन अगर वो कंट्राडिक्ट कर रही
- 9:34है या रेिस्ट कर रही है तो फिर जो है फिर
- 9:38आप देखेंगे कि उनकी
- 9:41लीगल लेजिटिमेसी उसकी सोशल लेजिटिमेसी
- 9:44उसकी पिटिकल लेजिटिमेसी जो है वो
- 9:48सिस्टमिकली उसको परज किया जाता है। उसको
- 9:52क्रॉस किया जाता है। उसको
- 9:56मार्जिनलाइज किया जाता है। लिहाजा यह कहना
- 9:59कि कोई भी सिस्टम ऑफ़ जस्टिस या कोई भी
- 10:03इकोनॉमिक स्ट्रक्चर या कोई भी एजुकेशन
- 10:10मैकेनिज्म हर किस्म के वैल्यू स्ट्रक्चर
- 10:14या हर किस्म की जो है कनेक्टिविटी या हर
- 10:19किस्म की जो है अह
- 10:24ट्रांजैक्शंस ऑफ गुड एंड सर्विसेस के वो
- 10:28इनकपोरेट करेगी यानी कि वो
- 10:33ऑल इंक्लूसिव होंगी। तो ये बिल्कुल सही
- 10:36तसवुर नहीं है। मैं ऐसा समझता हूं। सही
- 10:39है। हो सकता है कि बिल्कुल गलत हो जो मैं
- 10:42आपको बता रहा हूं। ये बिल्कुल गलत हो और
- 10:44यही हो के
- 10:47ऑल इंक्लूसिव सिस्टम्स हो दुनिया में। अह
- 10:51और मेरी अंडरस्टैंडिंग ठीक है ना हो। हो
- 10:55लेकिन ये के मैं जो ये
- 10:58एस अ पिटिकल थरिस्ट मैं आपको जो समझाने की
- 11:01कोशिश कर रहा हूं वो ये के
- 11:05फैसिलिटेट करता है मॉडर्न एजुकेशन सिस्टम
- 11:08मॉडर्न
- 11:11सिस्टम ऑफ जस्टिस के साथ। अब आप ये सवाल
- 11:15जरूर उठा सकते हैं और आपको उठाना भी चाहिए
- 11:18कि भाई मॉडर्निटी जैसे हमारे ही उस्ताद
- 11:22हमारे डॉक्टर जावेद अकबर अंसारी के ही
- 11:25उस्ताद के बहुत सारे ऐसे
- 11:28लोग हैं जिन्होंने डॉक्टर साहब से पढ़ा
- 11:29वगैरह और उसके बाद उन्होंने ये बताया जो
- 11:32जो आजकल जो बात वो कर रहे हैं बहुत
- 11:38कुत के साथ कि भाई मॉडेनिटी कोई एक चीज का
- 11:41नाम नहीं है। ठीक है? तो ये आपने सुना
- 11:44होगा उड़तीउती बात आपके कानों में भी
- 11:46इंशा्लाह पढ़ी होगी कि भाई मॉडर्निटी के
- 11:49बारे में ये जो लोग हैं इनका ये
- 11:51अंडरस्टैंडिंग के मॉडेनिटी कोई एक
- 11:54कनेक्टिविटी का नाम है और कोई ऑर्गेनिक
- 11:57होल है और उस ऑर्गेनिक होल के की वही
- 12:02इंटरप्रिटेशन है जो ये बेवकूफ लोग कर रहे
- 12:04होते हैं। ये सही बात नहीं है। बल्कि
- 12:06मॉडर्निटी के बहुत सारी मैनिफेस्टेशन है।
- 12:09उसके बहुत सारे शेड्स और कलर्स है और उसकी
- 12:12बहुत सारी मैनिफेस्टेशंस है और ये उन सबको
- 12:16एक ही डंडे से हाकने की जो इन लोगों की
- 12:19कोशिश है वो एकेडेमिकली फ्लड है या
- 12:22एकेडेमिकली ठीक नहीं है। तो ये बिल्कुल
- 12:25सही बात है कि मॉडेनिटी के बहुत सारे शेड
- 12:28है। लेकिन याद रखें कि मॉडेनिटी एक
- 12:32कॉम्प्रहेंसिव
- 12:35सिस्टम ऑफ़ थॉट है। और उस कॉम्प्रहेंसिव
- 12:38सिस्टम ऑफ थॉट की कुछ ऐसी अनशेकेबल
- 12:42फाउंडेशंस मौजूद है जिनको हम आइडेंटिफाई
- 12:46करने की कोशिश करते हैं और जाहिर है कि हम
- 12:48उसके ऊपर इंसिस्ट करते हैं। हो सकता है कि
- 12:51वो गलत हो। हमारी अंडरस्टैंडिंग गलत हो या
- 12:54हमारे उस्ताद की अंडरस्टैंडिंग गलत हो। ये
- 12:57बिलकुल मुमकिन है। लेकिन ये कि हम पूरी
- 12:59कोशिश करते हैं कि हम उस पोजीशन को
- 13:03जस्टिफाई करें और रीइंफोर्स करते रहे। आगे
- 13:06अगर फज़ किया के मॉडेनिटी के वो खूबसूरत और
- 13:10कलर्स जो दूसरे भाई अब आइडेंटिफाई कर रहे
- 13:13हैं और इस व्यू को मायोपिक व्यू समझते हैं
- 13:18मॉडेनिटी का तो ठीक है वो मॉडेनिटी में
- 13:20अपना हिस्सा तलाश कर ले सही है लेकिन ये
- 13:23के जो ये बात कि भाई मुर्निटी की बहुत
- 13:27सारी मैनिफेस्टेशन है तो ये सही बात है कि
- 13:29मॉडेनिटी के अंदर कई
- 13:33जो है वो
- 13:35सिस्टम्स ऑफ एजुकेशन फंक्शनल है साइड बाय
- 13:39साइड और इसी तरीके से मॉडर्निटी के अंदर
- 13:42भी कई सिस्टम्स ऑफ जस्टिस जो है वो
- 13:45फंक्शनल है साइड बाय साइड लेकिन वो अपनी
- 13:51जेनेसिस के अंदर अपनी फाउंडेशन के अंदर
- 13:54कुछ ऐसी वैल्यूस रखते हैं जो कि उनके जो
- 13:58बाहमी डिफरेंसेस है उनमें कोई सब्सटेंटिव
- 14:03क्वालिटेटिव फाउंडेशन
- 14:05डिफरेंस पैदा नहीं करते। ये हम इस पर कायम
- 14:08है और हम ये समझते हैं कि वो जो डिफरेंसेस
- 14:12है उनके वो
- 14:16क्वालिटेटिव
- 14:20लेवल के ऊपर उनमें कोई सब्सटेंटिव फर्क
- 14:24नहीं है। यानी कि जब आप उसकी रूट कॉज को
- 14:26तलाश कर लेंगे तो आपको नजर आ जाएगा कि
- 14:30डिफरेंट
- 14:32रूट से वो पहुंचने की कोशिश एक ही
- 14:36ऑब्जेक्टिव की तरफ करते हैं। और अगर फर्ज
- 14:40किया कि हम आज की डिस्कशन के बाद ये तय कर
- 14:44लेते हैं कि भाई हम लोगों को पहले सिस्टम
- 14:46ऑफ जस्टिस को देखना चाहिए। तो हम मॉडर्न
- 14:50सिस्टम्स ऑफ जस्टिस को जब देखेंगे तो
- 14:53उसमें हम कई सिस्टम्स ऑफ जस्टिस जो है वह
- 14:56देखने की कोशिश करेंगे। लिबरल कसेप्शन ऑफ
- 14:59जस्टिस देखेंगे। लिबर्टेरियन कंसेप्शन ऑफ़
- 15:03जस्टिस देखेंगे। सोशलिस्ट कंसेप्शन ऑफ़
- 15:05जस्टिस देखेंगे। अपना
- 15:10नेशनलिस्ट कंसेप्शन ऑफ़ जस्टिस देखेंगे।
- 15:13फास्टिस्ट कंसेप्शन ऑफ़ जस्टिस देखेंगे।
- 15:16फेमिनिस्ट कंसेप्शन ऑफ़ जस्टिस देखेंगे।
- 15:18अनार्किक कंसेप्शन ऑफ जस्टिस देखेंगे। तो
- 15:22ये जो तमाम कसेप्शन और जस्टिस हम देखेंगे
- 15:25वो एक दूसरे से डिफरेंट है। जैसे कि हमारे
- 15:28भाई आजकल ये
- 15:30अपना बता रहे हैं लोगों को तबलीग कर रहे
- 15:33हैं कि भाई वो मुलिनिटी कोई एक चीज नहीं
- 15:36है बल्कि उसकी कई मैनिफेस्टेशन है।
- 15:40यह तो एक बच्चा भी जो मुर्निटी के ऊपर कोई
- 15:42किताब पढ़ता है तो वह यह बता सकता है कि
- 15:44हां भाई मुर्निटी में बड़ी डवर्सिटी है और
- 15:47आपकी मर्जी है कि आप इसको पिक करें या
- 15:50इसको पिक करें या इसको पिक करें। लेकिन ये
- 15:52कि उन वो तमाम जो डिफरेंसेस है वो रिड्यूस
- 15:55होकर जिस फ्रेमवर्क के अंदर चले जाते हैं
- 15:58उस फ्रेमवर्क को या उस फाउंडेशन को
- 16:02एक्सप्लेन करने की कोशिश करते रहे हैं।
- 16:04पिछले
- 16:06हमारे जो उस्ताद है 50 साल से करने की
- 16:08कोशिश कर रहे हैं। हम लोग जो है वो 25-25
- 16:11साल से ये कोशिश कर रहे हैं। तो बुनियादी
- 16:13तौर पर वो जो डिफरेंस है वो आइडेंटिफाई
- 16:16करते हैं। वो कोई सब्सटेंटिव डिफरेंस नहीं
- 16:18है। और हम उस डिफरेंस को एक सूडो डिफरेंस
- 16:23या फ़ जो है वह डिसए्रीमेंट कहते हैं। जैसे
- 16:28एक ही खानदान के अंदर मुख्तलिफ़ रिश्ते
- 16:31होते हैं और मुख्तलिफ़ रिश्तों के नतीजे
- 16:33में मुख्तलिफ़ मुखासत होती है और मुख्तलिफ़
- 16:36मुखासमतों के मुख्तलिफ़ नताइज़ निकलते हैं।
- 16:38लेकिन बहरहाल वो एक ही फैमिली के झगड़े
- 16:42होते हैं। तो बिल्कुल ये जो डिफरेंसेस
- 16:44मैंने आपको बताए या डिफरेंट सिस्टम्स ऑफ
- 16:46जस्टिस मैंने आपको बताए इन सिस्टम्स ऑफ
- 16:50जस्टिस को सीरियसली
- 16:52इनकी डिटेल के साथ इनके बड़े थिंकर्स के
- 16:56कॉन्टेक्स्ट में हम एक्सप्लेन करने की
- 16:59कोशिश करेंगे और जब ये हम सिस्टम्स ऑफ
- 17:02जस्टिस पढ़ लेंगे उसके बाद फिर हम सिस्टम
- 17:05ऑफ एजुकेशन पे जाएंगे। एक यह तरीका हो
- 17:10सकता है। मैंने जो पढ़ा वो इसी तरह पढ़ा है।
- 17:14यानी के मैंने पहले सिस्टम्स ऑफ जस्टिस
- 17:16पढ़े। सिस्टम्स ऑफ जस्टिस अंडरस्टैंड करने
- 17:19के बाद दूसरे सिस्टम्स को जब जैसे एजुकेशन
- 17:22सिस्टम को या हेल्थ केयर सिस्टम को या
- 17:27इकोनॉमिक सिस्टम को मैंने जब अंडरस्टैंड
- 17:30किया तो प्रायोरिटी जो है वो अ पिटिकल थरी
- 17:38की रही।
- 17:40लेकिन यह के बहुत सारे लोग जो फर्ज किया
- 17:43है कि कोई आप में से है कोई ऐसा स्टूडेंट
- 17:46जो जो कि एजुकेशन में काम कर रहा है और वो
- 17:49एजुकेशन स्ट्रक्चर के बारे में उसकी
- 17:51अंडरस्टैंडिंग मेरे से ज्यादा बेहतर हो
- 17:53क्योंकि उसने ज्यादा इन डेप्थ एनालिसिस
- 17:55किया हुआ हो इन्हीं सिस्टम्स का तो ये
- 17:58मुमकिन है कि वो ये कहे कि नहीं पहले जो
- 18:00है सिस्टम ऑफ एजुकेशन को अंडरस्टैंड करना
- 18:03चाहिए और सिस्टम ऑफ एजुकेशन को अंडरस्टैंड
- 18:06करने से पहले आपको सिस्टम ऑफ
- 18:09नॉलेज को अंडरस्टैंड करना चाहिए। यानी कि
- 18:11एपिस्टमोलॉजी को अंडरस्टैंड करना चाहिए।
- 18:14और एपिस्टमोलॉजी को जब आप अंडरस्टैंड कर
- 18:17लेंगे तो आपके लिए मुमकिन हो जाएगा कि आप
- 18:20एजुकेशन सिस्टम को प्रॉपर्ली सब्सटेंटिवली
- 18:24क्रॉस एग्जामिन कर सके। यह जो प्रेजेंटेशन
- 18:27अभी आपके सामने खुली हुई है, यह प्राइमरली
- 18:32इस कॉन्टेक्स्ट में ही बनी हुई है कि
- 18:34सिस्टम के लिए एजुकेशन स्ट्रक्चर क्या रोल
- 18:37प्ले करता है। अभी जाहिर है कि इसके इस ये
- 18:42क्योंकि एक ऐसी प्रेजेंटेशन थी जो सिर्फ
- 18:45एजुकेशनिस्टों के लिए थी और वो भी वो लोग
- 18:49जो कि कैरम डेवलप वगैरह करने की कोशिश
- 18:53करते हैं और नॉलेज और एजुकेशन को कंफ्यूज
- 18:55करते हैं उनके लिए ये बनाई गई प्रेजेंटेशन
- 18:58थी। अगर फर्ज किया कि हम ये तय कर लेते
- 19:00हैं कि नहीं पहले हमें सिस्टम ऑफ जस्टिस
- 19:02को पहले अंडरस्टैंड करना चाहिए और सिस्टम
- 19:05ऑफ जस्टिस के बाद फिर हमें आना चाहिए
- 19:11एजुकेशन मॉडल के ऊपर तो हम ये कर सकते
- 19:15हैं। या फिर यह के पहले आप यह वाली
- 19:18प्रेजेंटेशन हम देख लें और इस प्रेजेंटेशन
- 19:22के नतीजे में आपकी यह ख्वाहिश कि भाई यह
- 19:26तो या तो ये कि यह आदमी जो है वो बकवास
- 19:30बाजी कर रहा है या झूठ बोल रहा है या
- 19:34जो है वो इंटेलेक्चुअल लीप्स ले रहा है।
- 19:38या तो यह इंप्रेशन आए या फिर यह इंप्रेशन
- 19:41आए कि यार यह तो अंडरस्टैंड नहीं हो सकता
- 19:44जब तक कि यह ना पता चले कि लिबरल्स में और
- 19:47लिबर्टेरियंस में क्या फर्क है और
- 19:50सोशलिस्टों में और नेशनलिस्टों में क्या
- 19:54फर्क है और एथनोसेंट्रिक नेशनलिज्म में और
- 19:58कॉस्मोफॉल नेशनलिज्म में क्या फर्क है?
- 20:01अनार्किज्म जो है क्या वो भी कोई सिस्टम
- 20:03ऑफ जस्टिस प्रिज्यूम करता है या फेमिनिज्म
- 20:06जो है वो किस किस्म का सिस्टम ऑफ़ जस्टिस
- 20:09प्रज्यूम करता है या क्या फेमिनिज्म लिबरल
- 20:12नहीं होते क्या लिबरल फेमिनिस्ट नहीं होते
- 20:16क्या फेमिनिस्ट और लिबरल होना एक ही बात
- 20:18होती है क्या फेमिनिज्म एक ही तरह का है
- 20:20तो जाहिर है कि ये एक पूरा डोमेन है जाहिर
- 20:23है कि
- 20:25ये डिपेंड करता है कि आप आपका क्या
- 20:29ख्याल है इस सिलसिले में तो
- 20:33जो तमीद है वो यही है के
- 20:38जो भी बड़ा पॉलिटिकल थरिस्ट होगा वो अपनी
- 20:40पिटिकल थरी को खासतौर पे जैसे प्लेटो की
- 20:43सतह का कोई आदमी है या एरिस्टोटलल की सतह
- 20:46का आदमी है या
- 20:52जॉन डवी के सतह का या जॉन स्टवरर्ट मिल की
- 20:57सतह का आदमी है तो आप देखेंगे कि वो तीनों
- 21:01चीजों को किसी ना किसी लेवल पर इंगेज करने
- 21:05की कोशिश कर रहे होंगे। तो हम इनको
- 21:10एनालाइज कर सकते हैं, अंडरस्टैंड कर सकते
- 21:12हैं। और ये भी आप लोगों को पता चल जाएगा
- 21:16के कि मॉडर्निटी जो है
- 21:20के अंदर ये डिफरेंसेस रखने के बावजूद किस
- 21:23तरीके से ये सारे के सारे किसी ना किसी
- 21:26लेवल पर मॉडर्निटी या इनलाइटनमेंट वैल्यूस
- 21:29के ही जानशी अफकार हैं। और अगर आप
- 21:33इनलाइटनमेंट पे अटैक करते हैं तो आपको इन
- 21:36सबकी दुश्मनी से
- 21:39का सामना करना पड़ेगा। यानी कि आप देख ले
- 21:42के हमारी जो बात है वो सुनने के बाद वो
- 21:46नेशनलिस्ट जो होते हैं खासतौर पे जो
- 21:50एथनोसेंट्रिक नेशनलिस्ट है जो जबान की
- 21:54बुनियाद पर डिफरेंसेस को या आइडेंटिटी को
- 21:58रेग्नाइज करते हैं उनके उनके लिए हमारी जो
- 22:02पोजीशन है वो तकलीफ दे होती है। इसी तरीके
- 22:06से फेमिनिस्टों के लिए भी तकलीफ दे होती
- 22:08है। लिबरल्स के लिए भी तकलीफ दे होती है।
- 22:10अनार्किस्टों के लिए भी तकलीफ दे होती है।
- 22:13तो अगर हम अटैक कर रहे हैं इनलाइटनमेंट
- 22:17वैल्यूस के ऊपर तो इनको तकलीफ होने का
- 22:20मतलब ये है कि जड़ सबकी जो है वो वहीं से
- 22:25निकल रही है। तो हम लोगों को यह इनके पास
- 22:28इसके अलावा कोई और
- 22:31एतराज नहीं होता कि यह तो फिर इसका मतलब
- 22:34है कि ये तो तहजीब के खिलाफ है और तमदुन
- 22:38के खिलाफ है। तो इसका मतलब ये हुआ कि इनका
- 22:42जो तहजीब का तसवुर है या तमद्दुन का तसवुर
- 22:45है यादार का तसवुर है। जिस तरबियतगाह से
- 22:50इन्होंने ये सब कुछ हासिल किया है। उस
- 22:53तरबियतगाह के अकार को इन्होंने क्रिटिकली
- 22:56इवैलुएट नहीं किया। वो तो इनकी
- 22:58स्केमेटाइजेशन या प्रोसेस में इंटीग्रेट
- 23:00हो गया है। इनके जेनेटिक कोड के अंदर
- 23:02इंटीग्रेट हो गया है। लिहाजा अब इनकी जो
- 23:07जो सोचने समझने की कैटेगरीज है वो अस्यूम
- 23:13करती है उस चीज को कि भ ये तो नॉन
- 23:16कंटेस्टेबल बात है। अगर फज़िया के उन
- 23:19कैटेगरीज को ही आप क्वेश्चन करते हैं
- 23:22जिनके जरिए ये अंडरस्टैंड करते हैं तो फिर
- 23:24तो इनके लिए आपकी बात बिल्कुल बेमायने हो
- 23:27जाएगी। आप लोगों के सामने इस ये गुफ्तगू
- 23:31रखने का क्या बुनियादी मकसद है? आप लोगों
- 23:33के बारे में हमारा ऐसा ख्याल है। हो सकता
- 23:37है बिल्कुल गलत हो। आपके बारे में ऐसा
- 23:40ख्याल है वो भी इसलिए कि आप लोग रशीद के
- 23:44पास आए हुए हो और रशीद के
- 23:46कांटेक्ट में हो कि आप लोगों के ख्याल में
- 23:51सोचने और तमदुन की जो कैटेगरीज है वो कहीं
- 23:55और से आ रही है। प्री इनलाइटनमेंट है वो।
- 23:58यानी के ना वो प्री इनलाइटनमेंट है ना वो
- 24:01पोस्ट इनलाइटनमेंट है बल्कि वो अल्लाह और
- 24:04उसके रसूल की तरफ से आ रही है। और वो
- 24:08तारीख के अंदर मुकयद नहीं है बल्कि वो
- 24:12आपको एक ऐसा पैमाना प्रोवाइड करती है जो
- 24:15किसी भी तारीख दौर के अंदर आपकी रहनुमाई
- 24:18करने के लिए शाफी और काफी है। जिस तरीके
- 24:22से उन्होंने हुजूर ससल्लम के दुनिया से
- 24:24तशरीफ़ ले जाने के बाद सहाबा के तशरीफ़ ले
- 24:28जाने के बाद जो लोग पैदा हुए उनकी रहनुमाई
- 24:31की और उनको इस काबिल बनाया कि वो अपने
- 24:34सामने खड़े होने वाले जो
- 24:38यानी के ग्रीक्स या रोमंस
- 24:41जो इंटेलेक्चुअल ट्रेडिशन है उनको
- 24:44अंडरस्टैंड करते उसको इवैलुएट करते और फिर
- 24:48उसको कसौटी पे परखने की कोशिश करते और फिर
- 24:52उस कसौटी की परखने के बाद उसको बताते कि
- 24:56इसके अंदर क्या ऐसी चीज है जो के
- 24:59एक्सेप्टेबल नहीं है वगैरह वगैरह तो आप
- 25:03लोगों को ये बताने का मकसद सिर्फ ये है कि
- 25:05ये भी हमारी असमशन ही है ये हो सकता है
- 25:07बिल्कुल असमशन गलत हो लेकिन ये असमशन है।
- 25:11तो जो इंपॉर्टेंट चीज है जो आप लोगों को
- 25:13समझनी चाहिए वो ये है के
- 25:18जिस सिस्टम ऑफ जस्टिस को फिलहाल हम आपके
- 25:21सामने पेश करने की कोशिश करेंगे वो
- 25:24मोस्टली जो है वो मॉडर्न इनलाइटनमेंट
- 25:27डिस्कोर्स से इमर्ज होने वाले सिस्टम्स ऑफ़
- 25:29जस्टिस ही है। मोस्ट इनलाइटनमेंट जो नोशंस
- 25:34ऑफ़ जस्टिस जो इस वक्त अब डिवप हो रहे हैं
- 25:37जैसे शजक और
- 25:40जो डिडस या
- 25:47ग्रेव वगैरह के तो इन इनको भी हम देख सकते
- 25:51हैं। लेकिन फिलहाल जो है हम सिर्फ अपने आप
- 25:54को महदूद रखेंगे मॉडर्न
- 25:58सिस्टम्स ऑफ जस्टिस के साथ।
- 26:02इसी तरीके से जो एजुकेशन को हम देखेंगे तो
- 26:05उसमें भी हम वही क्रिटिक इस्तेमाल करेंगे
- 26:10जो कि
- 26:13मॉडर्न एजुकेशन सिस्टम के वो एस्पेक्ट जो
- 26:17कि बजाहिर आपको इमसिपेटरी लग रहे हो यानी
- 26:20के आजादी में बढ़ावा देने के तसवुरात लग
- 26:25रहे हो लेकिन हकीकतन वो बुनियादी तौर पर
- 26:29कंट्रोल के ही अल्टरनेटिव
- 26:32अपेटस है या अल्टरनेटिव मैकेनिज्म्स है तो
- 26:36वो हम बताने की कोशिश करेंगे। तो अभी आज
- 26:39जो है वैसे तो आप लोगों ने माशा्लाह पिछले
- 26:42जो पूरी यानी कि वो थी उसमें आप लोगों ने
- 26:46कोई गुफ्तगू नहीं की और
- 26:49ज्यादा बात नहीं की और इस तरह आप लोग
- 26:53पार्टिसिपेट करते थे क्वेश्चंस के में जिस
- 26:57तरह अपनी बहन का रिश्ता लेने
- 27:01लेने आने बहन का रिश्ता जो लोग लेने आते
- 27:04हैं तो घर के जो भाई होते हैं वो उनको घर
- 27:07वाले बोल देते हैं बेटा ज्यादा ट नहीं
- 27:09करना चुप करके बैठे रहना तो वो जिस तरह
- 27:11गुफ्तगू में शरीक होते हैं बिल्कुल उस तरह
- 27:13आप लोग शरीक हो जाते हैं तो मैं ये चाहता
- 27:16हूं कि आप लोग उसके बारे में डिस्कशन करें
- 27:19ओपन डिस्कशन करें एनालिसिस करें
- 27:22हमें भी पता चले कि आप लोग के की क्या जो
- 27:26है वो फ्रीक्वेंसी किस लेवल की है तो ताकि
- 27:29हमारे हमारे लिए फैसला करना मेरे और रशीद
- 27:31के लिए फैसला करना आसान होता है। तो आप
- 27:34लोग जो है वो मैं
- 27:39बात की क्या आप लोगों को बात समझ में आई
- 27:43और अगर समझ में आई तो आपके साथ में क्या
- 27:46क्या बेहतर रहेगा?
- 27:47सही है। सही है दानिया बात है।
- 27:51सलाम वालेकुम सर।
- 27:57अच्छा सर पहले तो ये कि वो मेरे केस में
- 27:59तो आपकी असमशन ठीक है। मैं तो अल्लाह और
- 28:01अल्लाह के नबी का मानने वाला हूं।
- 28:03एनलाइटनमेंट मेरे लिए तो कुफ का निजाम है।
- 28:06बहाल
- 28:08बाकी भाइयों का भी मैं यही अस्यूम करता
- 28:10हूं कि यू नो दे थिंक लाइक दैट। अच्छा
- 28:12मेरे जेहन में ये बात आ रही थी कि वैसे तो
- 28:15आप हमारे उस्ताद हैं। जैसे बेहतर समझे
- 28:18लेकिन आपको सुन के हमारे जो उस्ताद है
- 28:21डॉक्टर रशीद अशद साहब वो जो थोड़ा बहुत
- 28:24फलसफा पढ़ा है उससे यही समझ में आया कि हम
- 28:26तो ये मानते हैं कि पहले मेटाफिजिक्स एंड
- 28:28लेटर पिस्टमोलॉजी
- 28:30और
- 28:32अगर हम पहले एपिस्टेमोलॉजी को ले आएंगे तो
- 28:34फिर शायद यू नो यू नो वी विल बी स्टक इनू
- 28:37दैट एपिस्टेमिक फैलेसी और शायद उससे बाहर
- 28:40ना आ सके तो शायद मेरे ख्याल से बेहतर
- 28:42अप्रोच यही होगी कि पहले हम जस्टिस को
- 28:45देखें उसके बाद फिर हम उसके जो मीन्स है
- 28:48उसको देखें तो मेरे दिल में ये बात आती है
- 28:53बाकी भाइयों का
- 28:54दानियाल के सवाल का जवाब देो दानियाल ठीक
- 28:57है दानियाल पहले ये बहुत इंपॉर्टेंट बात
- 29:00है और ये तुम्हें ये कन्फ्यूजन भी मैं
- 29:02क्लियर कर दूं कि इसमें जो
- 29:05हम किसी को कहते हैं कि भाई इस प्रोसेस को
- 29:08हम जो है मॉडर्न सिस्टम्स ऑफ जस्टिस को हम
- 29:12इवैलुएट करने जाएंगे तो एकेडेमिकली या
- 29:17टेक्निकली हम
- 29:19इनवॉल्व हो जाते हैं उस फैलेसी की तरह जो
- 29:24दानियाल कह रहा है क्योंकि मॉडर्निटी ये
- 29:27मॉडर्निटी का ही
- 29:30की अप्रोच थी कि एपिस्टमोलॉजी प्रायर होती
- 29:33है मेटाफिजिक्स से और ग्रेजुअली
- 29:36मेटाफिजिक्स जो है वो
- 29:40एपिस्टोमोलॉजिकली इलिमिनेट हो गई
- 29:45एस अ सिस्टम ऑफ नॉलेज के लिहाजा जब हम
- 29:49कहेंगे कि हम सिस्टम ऑफ एजुकेशन को या
- 29:52सिस्टम ऑफ जस्टिस को देखेंगे मॉडर्न
- 29:55पर्सेक्टिव से तो हम
- 29:59ये जितने भी लोगों को पढ़ेंगे वो सारे के
- 30:02सारे एपिस्टोमोलॉजी को प्रायर समझते हैं
- 30:06मेटाफिजिक्स के एपिस्टोमोलॉजी को प्रायर
- 30:08समझते हैं मेटाफिजिक्स के और
- 30:12जो एजुकेशन सिस्टम सिस्टम्स को हम देखेंगे
- 30:14जाम सिस्टम ऑफ नॉलेज को भी उसमें भी
- 30:17एपिस्टमोलॉजी प्रायर होगी मेटाफिजिक्स के
- 30:20सही है तो जब हम मॉडनिटी को अप्रोच करते
- 30:23हैं बुनियादी तौर पर चाहे वो सिस्टम ऑफ
- 30:27एजुकेशन की बुनियाद पर हो सिस्टम ऑफ नॉलेज
- 30:31की बुनियाद पर हो या सिस्टम ऑफ इकोनमिक
- 30:34ट्रांजैक्शन की बुनियाद पर हो तीनों
- 30:36सूरतों में उसका नतीजा यही निकलता है कि
- 30:40लाशूरी तौर पर हम जो है वो यह कुबूल कर
- 30:44लेते हैं कि एपिस्टमोलॉजी प्रायर होती है
- 30:47मेटाफिजिक्स के और फिर आगे चलते चलते जैसे
- 30:50जैसे वो हम आगे के थिंकर्स पढ़ते चले जाते
- 30:53हैं हमें ये पता चलता चला जाता है कि
- 30:55माबाद तबिया तो इनफ
- 30:59अपनी कोई एपिसमोलॉजिकल
- 31:02बेसिस रखती नहीं है बल्कि वो तो
- 31:04प्रोजेक्शंस होती है या एक खास किस्म की
- 31:08जैसे कांट एक टर्म इस्तेमाल करता है
- 31:10मेटाफिजिकल इंपल्स होती है वो एक इंपल्सिव
- 31:14चीज है। तो
- 31:17हम हम जो जो लोग हैं यानी के जिन लोगों ने
- 31:21मुरलिटी को इस तरह से देखा है वो लोग आपको
- 31:25बार-बार याद दिलाते रहेंगे। चाहे वो
- 31:27सिस्टम ऑफ एजुकेशन पढ़ा रहे हो या पढ़ रहे
- 31:30हो या सिस्टम ऑफ जस्टिस पढ़ रहे हो या
- 31:33पढ़ा रहे हो। हम मुस्तकिल आपको याद दिलाते
- 31:35रहेंगे कि देखिए इसके पीछे मेटाफिजिक्स ये
- 31:38है। देखिए इसके पीछे मेटाफिजिक्स ये है।
- 31:40इसके पीछे मैटा फिजिक्स ये है। जो आपको
- 31:42वहां पे टेक्स्ट में दिखाई नहीं दे रही
- 31:44होगी। उसके लिए हम फिर एक्सकवेट करते हैं।
- 31:47रूट कॉज का तलाश करते हैं और फिर हम वहां
- 31:49पे जाकर उसको हिट करने की कोशिश करते हैं।
- 31:53जिसकी वजह से वो थ्रेड जो है वो थोड़ा सा
- 31:55ब्लीक हो जाता है या ब्लर हो जाता है और
- 31:58जो जो लोग जिनके दिल जो है वो उम्मीदों और
- 32:03आरजुओं से भरे हुए होते हैं और मॉडर्निटी
- 32:06की जो चकाचौंध होती है उनको फीरा कर रही
- 32:08होती है। उनको वह जो सिल्वर लाइन है वह
- 32:11दिखाई नहीं देती और फिर वह हम पर अटैक कर
- 32:13देते हैं। तो मैं तो यह बता रहा हूं कि हम
- 32:18जो है वो चाहे
- 32:20मॉडर्न एजुकेशन सिस्टम्स को देखें या
- 32:23मॉडर्न सिस्टम्स ऑफ जस्टिस को देखें।
- 32:26दोनों के अंदर
- 32:28कोलनरी है प्रायोरिटी ऑफ़ एपिस्टोमोलॉजी
- 32:31ओवर मेटाफिजिक्स एंड इन
- 32:40इन इट्स
- 32:42दैट देयर इज नो स्पेस ऑफ मेटाफिजिक्स
- 32:45लेफ्ट एट ऑल इन दिस सिस्टम ऑफ़ एजुकेशन एज
- 32:48वेल एज इन दिस सिस्टम ऑफ़ नॉलेज सिस्टम ऑफ़
- 32:52जस्टिस। ठीक है दानिया? तो हमें ये जो
- 32:56फैलेसी है कि एपिस्टमोलॉजी की प्रायोरिटी
- 33:00होगी
- 33:02मेटाफिजिक्स पे इसी इसी यानी के
- 33:07फैलेसी के साथ आगे चलना पड़ेगा। ठीक है?
- 33:10लेकिन ये कि मैं जब तक हूं मैं ये पढ़ा
- 33:12रहा हूं तो मैं तुम्हें और रशीद भी अपने
- 33:15अपने हिसाब से अगर डिस्कशन में शरीक होगा
- 33:18तो आपको याद दिलाता रहेगा के ये देख इसके
- 33:22पीछे जो बुनियादी तौर पर मेटाफिजिकल
- 33:24असेंशन है वो ये है। तो हम ये कोशिश करते
- 33:28रहेंगे। आपको याद दिलाते रहेंगे। यह जो था
- 33:32यह प्रॉब्लम क्लासिकल सिस्टम्स में नहीं
- 33:35आपको दिखाई देगा। जैसे प्लेटो के पास आपको
- 33:38दिखाई नहीं देता। क्यों? क्योंकि उनके पास
- 33:40मेटाफिजिक्स प्रायर थी एपिस्टोमोलॉजी से।
- 33:43इसी तरीके से क्रिश्चियन सिस्टम ऑफ़
- 33:46एजुकेशन जो है या क्रिश्चियन सिस्टम ऑफ़
- 33:50जस्टिस जो है उसके अंदर मेटाफिजिक्स को
- 33:53प्रायोरिटी होगी एपिस्टोमोलॉजी के ऊपर।
- 33:55इसी तरीके से अगर आप बेबिलोनियन
- 33:58सिस्टम ऑफ़ एजुकेशन देखेंगे तो बेबिलोनियन
- 34:02सिस्टम ऑफ़ एजुकेशन के अंदर मेटाफिजिक्स को
- 34:06प्रायोरिटी है। इसी तरीके से मैं पूरे
- 34:10यकीन के साथ तो नहीं कह सकता लेकिन ये कि
- 34:13अगर आप हिंदू
- 34:15ट्रेडिशन को या इंडियन एपिस्टमोलॉजिकल
- 34:19ट्रेडिशन को देखेंगे तो वहां पर भी
- 34:22मेटाफिजिक्स यकीनन प्रायर होगी। मैं पूरे
- 34:25मैं उससे नहीं कह सकता क्योंकि मैं उसको
- 34:27बहुत अच्छी तरह नहीं पढ़ा लेकिन ये कि जिन
- 34:29लोगों को थोड़ा बहुत हमने पढ़ा है उसमें
- 34:32हमें बड़ा ऑब्वियस दिखाई देता है कि इनकी
- 34:35मेटाफिजिक्स जो है वो इनकी एपिस्टेमोलॉजी
- 34:38को गाइड करती है और एपिस्टमोलॉजी जो है वो
- 34:44इंडिपेंडेंट नहीं है मेटाफिजिक्स से। ठीक
- 34:46है जी। अब आप अगर दानियाल को कोई बात करनी
- 34:50है तो कर सकता है। नहीं तो फिर तैयब बात
- 34:53करेगा। नहीं सर मैं तो आई एम फाइन तैब भाई
- 34:56अगर कुछ पूछना चाहते हैं तो
- 34:57ठीक है तैयब तुम दोनों की आवाजें बिल्कुल
- 35:00एक जैसी है तैयब की और मुझे तो लग रहा है
- 35:03तैयब ही दो तरह की आईडीज से बैठा हुआ है
- 35:07बात कर रहा है
- 35:08सर मैं आपको अपनी शक्ल दिखा देता हूं
- 35:09[हंसी]
- 35:10नहीं नहीं
- 35:12मजाक कर बिल्कुल तैयब जैसी आवाज है चलो
- 35:16जी अस्सलाम वालेकुम नवाब भाई कैसे हैं आप
- 35:19खैरियत से हैं अच्छा सर उसमें अ ये है
- 35:22आपने आपने जिस तरह अभी दानियाल भाई के
- 35:24सवाल के जवाब में बड़ी डिटेल से आपने
- 35:26बताया हमने आपसे ही खालिद भाई से डॉक्टर
- 35:28इमनान साहब से हमने ये चीज सीखी है के जो
- 35:31रिवायती जो एक सिस्टम है उसके अंदर जाहिर
- 35:35है जो मेटाफिजिक्स है इट कम्स फर्स्ट एंड
- 35:37देन जो एपिस्टेमोलॉजी है वो इसी से डिराइव
- 35:40होती है। उसमें आपने माशा्लाह बड़ी डिटेल
- 35:42से अब दोबारा इसको जो है वो इबोरेट भी कर
- 35:44दिया। मेरा ख्याल है दानियल भाई और मैं जो
- 35:47पूछना चाह रहे हैं वो ये है कि हम पहले
- 35:49सिस्टम्स को डिस्कस करेंगे इन डिटेल
- 35:51मुख्तल जो सिस्टम्स है पहले हम उनको
- 35:53देखेंगे या हम डायरेक्टली जो है वो
- 35:55एजुकेशन पे हम बात करेंगे मैं भी थोड़ा सा
- 35:58असल में इसमें इंटरेस्टेड हूं कि आप इस
- 35:59हवाले से बताएं कि हमारा जो मेथड है उसको
- 36:02मतलब किस तरह से हम ले चलेंगे जो मेरा
- 36:05अपना भी एक जो जो है वो ये है कि मतलब मैं
- 36:08चाहूंगा कि आप पहले सिस्टम को जरा इन
- 36:10डिटेल थोड़ा डिस्कस कीजिएगा फिर उसके एक
- 36:13आउटकम जो है मुख्तलिफ जैसे एजुकेशन सिस्टम
- 36:15है जैसे वो है मतलब उसको फिर अगर आप बात
- 36:17करें तो मेरे ख्याल में ज्यादा एक
- 36:19कॉम्प्रहेंसिव भी होगा अगरचे वो थोड़ा
- 36:21टाइम टेकिंग होगा।
- 36:24ये वाली जो प्रेजेंटेशन है इसमें हमने
- 36:27सिस्टम्स को एक्सप्लेन किया है। सिस्टम को
- 36:29एक्सप्लेन किया है और सिस्टम की जो
- 36:34ऑब्जेक्टिव है उसको भी थोड़ा बहुत यानी कि
- 36:37क्रिटिकली इवैलुएट करने की कोशिश की हुई
- 36:40है। यानी के
- 36:46जैसे
- 36:49सही है। यानी के सिस्टम क्या होता है और
- 36:54सिस्टम के अंदर लेकिन अगर आप देखें के जब
- 36:58भी हम सिस्टम को डिफाइन करने की कोशिश
- 37:00करेंगे तो
- 37:03उसके साथ कुछ वैल्यूस जो है वो इंटीग्रेट
- 37:06कर जाएगी। क्योंकि सिस्टम एक ऐसे ऑर्डर को
- 37:11आइडेंटिफाई करने की कोशिश करेगा जो कि
- 37:15रिपीट हो सके। यानी कि जब हम कहते हैं ना
- 37:17कि भाई ये हमने एक सिस्टम बना दिया है।
- 37:20हेल्थ केयर का सिस्टम बना दिया है। ये
- 37:22हमने जो है एजुकेशन सिस्टम बना दिया है।
- 37:25ये हमने इकोनमिक सिस्टम बना दिया है। तो
- 37:29इसका मतलब ये होता है कि उसके पीछे खास
- 37:32किस्म का
- 37:35एक खास किस्म की एक्सेप्ट
- 37:39एक्सपेक्टेशंस एक खास किस्म की
- 37:41प्रोजेक्शंस और ये खास किस्म की
- 37:43प्रेडिक्टबिलिटी
- 37:45को हम इंश्योर कर देते हैं। अगर फर्ज किया
- 37:47कि सिस्टम मौजूद नहीं होगा तो आप
- 37:49प्रोजेक्शंस नहीं बना पाएंगे।
- 37:51प्रेडिक्शनंस नहीं कर पाएंगे।
- 37:54एक्सपेक्टेशन आपकी जो होगी मैच नहीं करेगी
- 37:57तो आपके लिए स्मूथ फंक्शन
- 38:00स्मूथली फंक्शन करना मुमकिन नहीं होगा। तो
- 38:04ये तो चाहे हम सिस्टम ऑफ जस्टिस देखें या
- 38:08हम सिस्टम ऑफ एजुकेशन देखें। सिस्टम को तो
- 38:11हम पहले एक्सप्लेन करेंगे ही। जैसे इस
- 38:14वाले में भी किया हुआ है और जो जैसे मैंने
- 38:19पता नहीं आप लोगों को दिखाई दे रहा है
- 38:21स्क्रीन के ऊपर या नहीं कि सिस्टम क्या है
- 38:24लेकिन फिर जैसे ही हम सिस्टम के ऊपर जाते
- 38:26हैं तो फिर उसके साथ कुछ और चीजें जुड़
- 38:29जाती है और वो कुछ चीजें जो है वो अस्यूम
- 38:34करती है कि आपको जो है वो पता चल जाए पता
- 38:40होगा क्या कि
- 38:42जस्टिस क्या होता है और ऑर्डर क्या होता
- 38:45है और वगैरह वगैरह तो ये वाला जो
- 38:48प्रेजेंटेशन है पहले आपको सिस्टम को ही
- 38:51एक्सप्लेन करने की कोशिश करेंगे लेकिन
- 38:54सिस्टम को डिफाइन करने की कोशिश करेंगे इन
- 38:57टर्म्स ऑफ़ एजुकेशन इन टर्म्स ऑफ़ एजुकेशन
- 39:00तो ये कोई ये इतनी कोई बड़ी बात नहीं है कि
- 39:04हम पहले सिस्टम इन इटसेल्फ को एक्सप्लेन
- 39:06कर ले
- 39:08चाहे हम एजुकेशन सिस्टम को करें चाहे हम
- 39:12सिस्टम ऑफ और जस्टिस को करें। सिस्टम को
- 39:14तो हम अंडरस्टैंड करेंगे ही। वो हमने
- 39:17बनाया हुआ भी है और यह आपको नजर में भी आ
- 39:20रहा होगा कि ये प्रेजेंटेशन पहले से तक के
- 39:24जो क्वेश्चन है उसको भी लेकिन
- 39:28सिस्टम के साथ जो है पावर का कासेप्ट
- 39:31एसोसिएटेड होता है और डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ़
- 39:34पावर का भी तो फिर वो हम हमें उन चीजों को
- 39:38देखना पड़ता है और जो हम देखेंगे तो ये तो
- 39:43कोई ये दोनों सूरतों में हम करेंगे।
- 39:50आप में से जाहिर है कि कोई बच्चा तो नहीं
- 39:53है ना सब समझदार बड़े लोग है ना तो ये
- 39:59ऐसे लोगों के लिए ही है जो अच्छी खासी
- 40:02अंडरस्टैंडिंग रखते हैं और सिस्टम्स के
- 40:05अंदर काम भी कर रहे हैं। लिहाजा उनके लिए
- 40:08ये चीजें वो जो प्रैक्टिस कर रहे हैं वो
- 40:10उनके लिए एविडेंट होती चली जाएगी।
- 40:19लेकिन यह सवाल इसका फैसला कि भाई पहले हम
- 40:22एजुकेशन को देखें या पहले हम जो है
- 40:26वो
- 40:28सिस्टम ऑफ जस्टिस को देखें। ये फैसला आप
- 40:32लोगों ने करना है।
- 40:36अब आपको ये है ना जैसे दानियाल ने और अपना
- 40:41तैयब ने अपनी बात कर ली। इस तरह जितने भी
- 40:44लोग है ना वो अपनी बात करें और घबराए नहीं
- 40:47और अगर फर्ज गया कि उनको लगता है कि भाई
- 40:49ये रिकॉर्डिंग हो रही है फिर मेरी चमपू जी
- 40:51की बात पे हसेंगे ये भी थोड़ा शैतान आदमी
- 40:54ने मजाक ना उड़ाए मेरा तो मैं आप लोगों से
- 40:57कहता हूं कि मैं जो है कोई नहीं मजाक नहीं
- 41:00उड़ाऊंगा किसी का और से कह के हम जो है वो
- 41:04रिकॉर्डिंग भी रुकवा देते हैं। रिकॉर्डिंग
- 41:06भी बंद कर देते हैं। आपकी जो भी पॉइंट ऑफ
- 41:08व्यू होगा उसके नजर में कोई आपका मजाक मैं
- 41:11जरा पानी पी के सलाम
- 41:12वालेकुम
- 41:15वालेकुम सलाम वकार
- 41:19अच्छा सर ऐसा है कि मेरा इस पूरे टॉपिक्स
- 41:24या सिस्टम यामोलॉजी और इस तरह की चीजों के
- 41:28बारे में बहुत कम इल्म है और मैं पहली दफा
- 41:32आपके साथ शामिल हो रहा हूं। पहले एक
- 41:36जमान साहब का एक था पेज वहां पर आप कुछ
- 41:39पढ़ाते होते थे वहां पर था आपके साथ लेकिन
- 41:42वो काफी पुरानी बात है तो इसलिए मैं तो
- 41:46अभी पहले सीखने के फेज में हूं थोड़ा
- 41:49समझूंगा उसके बाद आपसे कुछ डिस्कस करूंगा
- 41:52इंशा्लाह
- 41:56देखो वकार मसला ये है के
- 42:01इंसान की जिंदगी को जो डायरेक्ट
- 42:03डायरेक्टली पहले हिट कर रहा होता है ना
- 42:05फर्ज करो कि तुम कहीं जा रहे हो और
- 42:09तुम्हारे सफर में हो तुम सही है और सफर
- 42:13में तुमने जूती पहनी हुई है और जूती जूता
- 42:17जो पहना हुआ है उसके अंदर कोई कील है ठीक
- 42:21है अब वो कील जो है वो चुभ चुने पैर डालते
- 42:25ही चुबी पैर डालते ही तुम्हारे कील पैर
- 42:27में चुबी और उनको यार मसला यह है कि अभी
- 42:30तो भाई मैं सफर शुरू कर चुका हूं अब चुभ
- 42:32रही है तो चुबने
- 42:34तो चुभ रही है तो चुभने दो तो
- 42:39तुम सफर कैसे करोगे वो तो चुभ रही है जब
- 42:42हम लोग एनसीसी करते थे पता नहीं तुम लोगों
- 42:44ने की या नहीं की तो हम जब एनसीसी शुरू
- 42:47हुई हमारी इस कॉलेज के अंदर तो हमें पहले
- 42:50दिन जो लेक्चर दिया वो सोल्जर था वो आया
- 42:53और उसने बताया कि देखो जो सोल्जर जो होता
- 42:55है उसको जो चलना होता है बहुत और सोल्जर
- 42:58के जो पंजे होते हैं ना वो उसकी जिंदगी की
- 43:01जमानत देते
- 43:03सोल्जर के जो पंजे हैं, पैर जिन पर वो चल
- 43:06रहा है अगर वो खराब हो गए तो वो 10
- 43:09किलोमीटर कैसे चलेगा? अच्छा और सोल्जर के
- 43:14चलने के लिए उसके जूते बड़े इंपॉर्टेंट
- 43:16होते हैं। तो जूते के अंदर अगर लगा कोई
- 43:20जख्म या जूता सही नहीं है, जूता छोटा है
- 43:23या जूता बड़ा है तो वो क्या करेगा कि वो
- 43:26आपको पैर में छाला डाल देगा। छाला डाल
- 43:28देगा
- 43:30और आपको तो सामान भी उठाना है और आगे भी
- 43:34बढ़ना है और चलना भी है। तो वो जो है वो
- 43:38छाला जो है वो 1 किलोमीटर चलने के बाद आप
- 43:42बर्दाश्त भी कर रहे हो वो उसको जख्म बना
- 43:44देगा। जख्म बना देने के नतीजे में वो खाल
- 43:47फाड़ देगा आपकी। और जब आप 10 किलोमीटर चल
- 43:49के वहां पहुंचोगे तो आप बेकार हो चुके
- 43:52होंगे। आप ना कौम के काम के होगे, ना फौज
- 43:55के काम के होगे, ना मुल्क के किसी के काम
- 43:58के नहीं होंगे। क्योंकि आपने जूते पर
- 44:00तवज्जो नहीं।
- 44:02तो वो कहते हैं भाई जूता इंतहाई
- 44:05इंपॉर्टेंट होता है। इसी तरह जब आप कोई
- 44:08ख्याल सीखने जाते हो, कोई अंडरस्टैंडिंग
- 44:11सीखने जाते हो, कोई सिस्टम, कोई कोई भी
- 44:15चीज जब आप अंडरस्टैंड करने जाते हो तो उस
- 44:18अंडरस्टैंडिंग के दौरान कोई ऐसा कासेप्ट,
- 44:22कोई ऐसा आइडिया या कोई कोई ऐसी चीज होती
- 44:26है जो आपको चूक जाती है फौरन से। यानी कि
- 44:29आपके ज़हन में वो एक कचोके की तरह चुभना
- 44:32शुरू। इसी तरीके आपके दिल में फांस की तरह
- 44:35चुभना शुरू। जब तक आप उसे निकालोगे नहीं
- 44:38ना भाई आप उस परसूट ऑफ नॉलेज में आगे सफर
- 44:42नहीं कर सकोगे। अगर उसी फांस के साथ आप
- 44:44आगे चले। आपने कहा चलो चलो यार मुझे चुभ
- 44:47रही है बात कोई बात नहीं। दूसरों को तो
- 44:49नहीं चुभ रही ना। तो वो फांस जो है वो
- 44:52आपके लिए आपकी अंडरस्टैंडिंग को करप्ट कर
- 44:55देगी। तो
- 44:58यानी के जब आप किसी भी सिस्टम ऑफ थॉट को
- 45:00अंडरस्टैंड करने की कोशिश करें। मैं पढ़ा
- 45:02हूं कोई भी पढ़ाए आप खुद पढ़ो।
- 45:06जी
- 45:07फांस आपके जेहन में नहीं होनी चाहिए। जैसे
- 45:10मेरे जेहन में ये फांस नहीं है कि मजहब से
- 45:14जान नहीं छुड़ाई तो क्या होगा?
- 45:17लेकिन जब आप मॉडर्न सिस्टम में जाते हैं
- 45:21वो आपको एपिस्टमोलॉजिकली कन्वेंस करता है
- 45:23कि भाई मजहब की फांस पहले निकाल के अलग रख
- 45:26दो। भाई मजहब की फांस मजहब आपको फांस लग
- 45:30रहा है या नहीं लग रहा। अगर जैसे मुझे
- 45:34नहीं लग रहा मजहब फास बल्कि मुझे मजहब
- 45:37अपना वजूद लग रहा है तो मेरे लिए तो
- 45:40प्रॉब्लम नहीं है भाई। मुझे कोई मसला नहीं
- 45:42है। तो मैं किसी भी एपिस्टमोलॉजी को पढूं
- 45:45या किसी भी मेटाफिजिक्स को पढूं क्योंकि
- 45:46मजहब को मैं फास समझता ही नहीं। मुझे वो
- 45:50कील लगता ही नहीं। मुझे वो चुभ नहीं रहा
- 45:53बल्कि मैं मेरा वजूद के अंदर वो पिनाह है।
- 45:57तो वो मेरा पार्ट ऑफ द बीइंग है तो मुझे
- 46:00मसला नहीं है। मुझे प्रॉब्लम नहीं है।
- 46:02लेकिन हो सकता है किसी भाई को हो
- 46:04प्रॉब्लम। इसी तरह किसी के लिए मजहब हो
- 46:07सकता है। किसी के लिए जो है जेंडर हो सकता
- 46:11है। किसी के लिए क्लास हो सकता है। किसी
- 46:14के लिए एथनिसिटी हो सकता है। किसी के लिए
- 46:18जो है ट्रेडिशन हो सकते हैं। किसी के लिए
- 46:23जो है वो
- 46:25क्या बोलते हैं? प्रोग्रेस हो सकता है।
- 46:28किसी के लिए प्लेजर हो सकता है। इस तरह हर
- 46:32इंसान की अलग-अलग फांसे हैं। फांसे
- 46:36अलग-अलग कीले हैं। तो वो ये बात नहीं हो
- 46:40रही कि कोई कम जानता है, कोई ज्यादा जानता
- 46:43है। डजंट मैटर लेकिन ये के मैं जो आप
- 46:47लोगों से बुलवा रहा हूं सिर्फ ये बुलवा
- 46:49रहा हूं कि मुझे फैसला करने में आसानी है।
- 46:55जी ठीक है सर
- 46:57ठीक है
- 47:19जी सलाम
- 47:21जी अस्सलाम वालेकुम सर
- 47:24वालेकुम सलाम
- 47:26सर जो मुझे अभी आपकी बात से समझ में आ रहा
- 47:29है वो यही है कि जैसे
- 47:32सिस्टम ऑफ एजुकेशन को समझने के लिए उसकी
- 47:34बेसिस यानी कि जो उसके फंडामेंटल
- 47:37प्रिंसिपल्स हैं और खास तौर पर उसके जो
- 47:40उसके पीछे जो उसका एक जस्टिस का कांसेप्ट
- 47:42है उसको समझना पहले जरूरी है। एंड देन
- 47:45आफ्टरवर्ड्स वी कैन अंडरस्टैंड द एजुकेशन
- 47:47एंड दिस सिस्टम्स ऑफ एजुकेशन। तो सर ये
- 47:50बिल्कुल सही बात है आप मतलब मुझे भी यही
- 47:53समझ में आ रही है कि हमें बेहतर है कि
- 47:54पहले हम सिस्टम्स ऑफ जस्टिस को पहले समझ
- 47:57लें। जैसे आप बता रहे हैं एंड देन उसके
- 48:00बेसिस के ऊपर एजुकेशन को सर।
- 48:03और सर एक और भी बात जैसे आपने एक बात अभी
- 48:06कही कि पोस्ट एनलाइटनमेंट
- 48:09जो थिंकर्स है यानी कि ये जो पोस्ट
- 48:12मॉडर्निटी के जो थिंकर्स है वो जिस तरीके
- 48:15की चीजों को एक्सप्लेन करते हैं फॉर
- 48:17एग्जांपल डलूस या जज
- 48:20वो फर्क लगता है नजर आता है कि थोड़ा बहुत
- 48:22डिफरेंट है। लेकिन ये कि अब डीप डाउन तो
- 48:25वो भी वही बात ही करते नजर आते हैं जो कि
- 48:28प्योर एनलाइटनमेंट थॉट के अंदर से निकलती
- 48:31आ रही है। कि बिल्कुल मतलब शायद ज्यादा
- 48:33पावरफुल और फोर्सफुली देन कांट और ह्यूम
- 48:37और लॉक
- 48:38वो ज्यादा फोर्सफुली और बयान कर रहे हैं
- 48:42कि शख्स या गिरोही आजादी को कैसे पाना है
- 48:47और उसके लिए क्या करना है बनिस्बत ये है
- 48:50कि जो कि मॉडर्निस्ट थिंकर थे तो
- 48:53वो तो वही काम कर रहे हैं जो कि
- 48:55एनलाइटनमेंट कर रही थी बल्कि शायद ज्यादा
- 48:57फोर्सफुली कर रहे हैं। जी बिल्कुल और अली
- 49:01भाई का जो अगर आप काम देखें तो अली भाई का
- 49:04शुरू का काम जो है जो वो यहां पे थे
- 49:07उन्होंने यही बताने की कोशिश की उसमें कोई
- 49:10फर्क नहीं है ऐसा सब्सटेंटिव फर्क नहीं है
- 49:13और
- 49:15पोस्ट मॉडर्निज्म जो है वो लिमिटेशंस
- 49:18आइडेंटिफाई कर रही है मॉडेनिटी की इस सेंस
- 49:21में कि क्यों वो
- 49:24हकीकी मायनों में इनलाइटेंडन नहीं हो पा
- 49:27रही और अपनी जो बाकियात थी इ्तमाईत इ्तमाई
- 49:31वाकियात से अपनी जान नहीं छुड़ा पाई और
- 49:35अखदार से अपनी जान नहीं छुड़ा पाई और
- 49:38यूनिवर्सलिटी से अपनी जान नहीं छुड़ा पाई
- 49:40जो के बुनियादी तौर पर एंटायर इनलाइटनमेंट
- 49:44कॉन्सिक्व्स जनरेट कर रही है। बिल्कुल सही
- 49:46बात है। ऐसा ही है और ये के
- 49:51पोस्ट मॉडर्निटी जो है वो बुनियादी तौर पर
- 49:54फिश विदाउट वाटर है मॉडेनिटी के बगैर।
- 49:57यानी कि ये जितने भी उस मॉडर्निस्ट आपको
- 50:00नजर आते हैं यहां चाहे पाकिस्तान के अंदर
- 50:03हो या पाकिस्तान से बाहर हो यानी कि तीसरी
- 50:06दुनिया के जो भाई है उनकी बात कर रहा हूं
- 50:08और जो मगरबी दुनिया में बैठे हुए हैं वो
- 50:11तो सारे मॉडर्न इंस्टीटश को उनके से ही
- 50:15बेनिफिट हो रहे है और इनकी जो स्टेट थ्यरी
- 50:18है या
- 50:23पनिशमेंट थ्यरी है और जो ऑर्डर सस्टेनेंस
- 50:27की जो मॉडल्स है उनके ऊपर सिवाय एतराज
- 50:30करने के उनके पास कोई अल्टरनेटिव अपेरेटस
- 50:32तो नहीं है मुरिटी के बगैर और ये तो हमने
- 50:35आंखें खोल के पोस्ट यानी के वॉर अगेंस्ट
- 50:39टेरर के दौरान हमने ये अपनी आंखों से देखा
- 50:42वॉर अगेंस्ट टेरर के अंदर तो हमने ये देखा
- 50:45कि सारे के सारे पोस्ट मॉडर्निस्ट की
- 50:47घिग्गी बन गई कि भ ये इस चैलेंज को अब हम
- 50:51कैसे देखेंगे और सारे के सारे सब सबसाइड
- 50:55हो गए तो तो ये बिल्कुल सही बात है। ऐसा
- 50:58ही है कि पोस्ट मॉडेनिटी जो है वो
- 51:02जो है कोई
- 51:06रियल अल्टरनेटिव ऑफ मॉडेनिटी या पेश नहीं
- 51:10करती और वो भी मॉडेनिटी को कजम कर कर ही
- 51:13उसको उसमें कुछ कली फुलने और नए लगा देती
- 51:16है और
- 51:19सही बात है ये। ठीक बिलकुल सही बात है जी
- 51:21सोेल
- 51:25हां सोेल
- 51:26अस्सलाम वालेकुम सर
- 51:27वालेकुम
- 51:29सर जहां तक अभी तक जो डिस्कशन हुई है मैं
- 51:31समझ रहा हूं कि हम सिस्टम ऑफ एजुकेशन और
- 51:33सिस्टम ऑफ जस्टिस के हवाले से बात करना
- 51:35चाह रहे हैं और उसमें प्रोटाइज करना चाह
- 51:38रहे हैं व्हिच इजेंट और उसमें हमने कुछ
- 51:41एरा फिक्स किया कि हम पोस्ट मॉडर्निज्म के
- 51:43हवाले से या मॉडर्निज्म के हवाले से के
- 51:46चलेंगे तो हम जो भी सिस्टम की बात कर रहे
- 51:50हैं सिस्टम ऑफ़ एजुकेशन हो या सिस्टम ऑफ
- 51:53जस्टिस हो या कोई और भी सिस्टम हो वो सारे
- 51:55के सारे सिस्टम किसी आइडियोलॉजी से ड्रिवन
- 51:58होते हैं।
- 51:59जी
- 52:00ठीक है? तो अगर हमने किस आइडियोलॉजी को
- 52:03पहले हमने डिसाइड करना होगा कि किस
- 52:05आइडियोलॉजी की हम बात कर रहे हैं और उस
- 52:07आइडियोलॉजी के तहत उसके आगे जो भी सिस्टम
- 52:11हम ले चलना चाहेंगे हमें उसकी बात करनी
- 52:13पड़ेगी
- 52:15और इसको हमको फोकस मतलब लिमिट नहीं करना
- 52:18चाहिए मॉडर्निज्म या पोस्ट मॉडर्निज्म के
- 52:21हवाले से
- 52:23जो मॉडर्निज्म है वो उसने मल्टीपल इडलॉजीस
- 52:28पैदा की जैसे के अगर आप सिस्टम ऑफ़ जस्टिस
- 52:31को देख ना तो हर पिटिकल सिस्टम ऑफ़ जस्टिस
- 52:35जो है वो एक खास किस्म के पिटिकल आइडियल
- 52:38के ऊपर खड़ा होता है और वो पिटिकल आइडियल
- 52:41उसकी आइडियोलॉजी को जनरेट करता है। मिसाल
- 52:45के तौर पे जैसे
- 52:49इ्तमाइयत पसंद जो मॉडर्निस्ट है वो ये
- 52:53कहते हैं कि फर्द अपनी इनफरादी हैसियत में
- 52:56अपनी सियासी वसीरत का इज़हार नहीं करता।
- 52:59बल्कि फर्द अपनी इ्तमाई हैसियत में अपनी
- 53:02सियासी एदाफ का
- 53:05करता है या तन करना चाहिए तो इसका मतलब ये
- 53:09होगा कि असल में जो उसकी इडलॉजिकल पोजीशन
- 53:12है वो एंटायर इंडिविजुअलिटी होती है बल्कि
- 53:16वो कलेक्टिविटी के साथ चलता है। अच्छा चलो
- 53:19अब आपने कह दिया जी तो यह तो मॉडर्न
- 53:22सिस्टम के अंदर
- 53:25एक ऐसी एडलॉजिकल फ्रेमवर्क हो सकता है जो
- 53:29कि कलेक्टिविटी को प्रायर समझता है
- 53:31इंडिविजुअलिटी पे तो दूसरा आदमी ये कह
- 53:36सकता है कि देखिए जो भी इंसान के सियासी
- 53:38एदाफ होते हैं उनकी सियासी तशकील नौ के
- 53:42लिए जो जद्दोजहद करता है वो तो फर्जी करता
- 53:45है इंडिविजुअल करता है एक इंसान करता है।
- 53:49लिहाजा कोई भी सियासी निजाम हो वो तो फर्द
- 53:54की सतह के ऊपर ही
- 53:57परखा और जाना और समझा जाना चाहिए। लिहाजा
- 54:02जो सियासी जद्दोजहद होगी या सियासी निजाम
- 54:06होना चाहिए वो फर्क की सतह पर जांचा और
- 54:10परख जाने के लायक होना चाहिए। तो ऐसे
- 54:15मॉडर्न एक्स जो सिस्टम होगा उसके अंदर जो
- 54:19भी इडलॉजिकल फाउंडेशन होगी वो
- 54:21इंडिविजुअलिज्म को सपोर्ट कर रही होगी। तो
- 54:24क्या आप ये कहेंगे कि दोनों की इडलॉजी में
- 54:27फर्क है? जी दोनों की इडलॉजिकल फाउंडेशन
- 54:29फर्क है। लेकिन दोनों रूट कर रहे हैं
- 54:32मॉडेनिटी या एनलाइटनमेंट के ही फाउंडेशंस
- 54:35के साथ। तो ये तो इडलॉजिकल डिफरेंसेस जो
- 54:40है यानी के सोशलिज्म एक अलग इडलॉजी है और
- 54:44फैशज्म एक अलग इडलॉजी है और नेशनलिज्म एक
- 54:48अलग इडलॉजी है और रेसिज्म एक अलग इडलॉजी
- 54:51है। लेकिन ये सब रिड्यूसेसबल है मॉडेनिटी
- 54:54के अंदर। यानी के अगर आप फको पढ़े तो वो
- 54:57बताएगा कि पिछले 200 साल के अंदर यूरोप के
- 55:00अंदर जितनी भी लड़ाईया हुई है वो सब
- 55:03ह्यूमनिज्म के नाम पर ही हुई है और ये
- 55:06सारी की सारी जो आइडियोलॉजीस थी वो
- 55:09ह्यूमनिस्ट इडलॉजी ही थी। पाकिस्तान के
- 55:12अंदर जो लोग थोड़ी बहुत सोशल साइंसेस वगरा
- 55:16पढ़कर या इधर उधर से उल्टे सीधे फलसफे के
- 55:20कोर्सेस पढ़ के जो ह्यूमनिज्म का तसवुर
- 55:24लेकर आ जाते हैं वो समझते हैं कि
- 55:26ह्यूमनिज्म का मतलब होता है सबकी खुशी में
- 55:28खुश होना और बसंते मनाना और नाच गाना करना
- 55:33और हर हर बात पे मोहब्बत करना और जब इसके
- 55:37बावजूद भी कोई मर जाए तो मोमबत्ती जला के
- 55:39खड़े हो जाना और ह्यूमन िस्ट होने का यह
- 55:42मतलब होता है। ये सही बात नहीं है भाई।
- 55:44इसका मतलब है कि हजरत को इत्तला नहीं है
- 55:46कि ह्यूमनिज्म के नाम पे दुनिया में क्या
- 55:48क्या हुआ है। तो जब हम ये सिस्टम ऑफ
- 55:51जस्टिस पढ़ेंगे तो हम ये बताएंगे कि इस
- 55:54सिस्टम ऑफ़ जस्टिस के पीछे पिटिकल आइडियल
- 55:56क्या है और उसके नतीजे में किस किस्म की
- 55:59पिटिकल इडलॉजी निकलेगी और वो पिटिकल
- 56:01इडलॉजी किस तरह से एक्सप्लिककेट करेगी। ये
- 56:05एक बड़ा प्रोजेक्ट है। ये इट विल टेक टाइम।
- 56:08बट वंस यू कंप्लीट ऑल ऑल ऑल दोस
- 56:15लेक्चर्स यू विल रियलाइज दैट नाउ यू आर
- 56:18मोर
- 56:21अह
- 56:23ग्रूम
- 56:25टू अंडरस्टैंड दी
- 56:28द मॉडर्न
- 56:30नोशन ऑफ मल्टीप्लसिटी दिस इज़ नॉट एक्चुअली
- 56:34मल्टीप्लीसिटी दे आर दे प्रज़्यूम अ
- 56:36कंपेटिटिव रिलेशनशिप विथ ईच अदर
- 56:38तो हम ये बताने की कोशिश करेंगे आपको
- 56:41सिस्टम ऑफ़ जस्टिस जब हम पढ़ेंगे तो जाहिर
- 56:43है कि उसमें इडलॉजी जो है वो आ जाएगी।
- 56:47उसको आइडियोलॉजी को हम एक्सप्लेन करेंगे
- 56:49और ये भी आपको बताएंगे कि इडलॉजी को
- 56:52इडलॉजिकल डिफरेंसेस को रिकंसाइल करने के
- 56:55क्या-क्या कोशिशें की गई। मिसाल के तौर पे
- 56:58नेशनलिस्टों ने किस तरह से रेसिस्टों के
- 57:00साथ मुसालहत कर ली। यानी कि पाकिस्तान के
- 57:04अंदर मुस्लिम नेशनलिज्म ने किस तरह से
- 57:08एथनोसेंट्रिक नेशनलिज्म के साथ मुसालियत
- 57:11की। जैसे पाकिस्तान बन रहा था तो
- 57:14पाकिस्तान बनने के लिए ये जो डिफरेंस था
- 57:17कि भाई कोई आदमी पंजाबी है या सिंधी है या
- 57:20बलोच है या पठान है ये जाहिर है कि ये
- 57:24एथनिसिटी है और इंसान की जबान इंसान का
- 57:28कल्चर इंसान की तारीख इंसान की जियोग्राफी
- 57:32ये मैटर करती है लेकिन ये के वो एथेनिक
- 57:37पर्टिकुलरिटी जो एक सिंधी को एक पंजाबी से
- 57:40और एक पंजाबी को एक बलोच से और एक बलोच को
- 57:43एक सिंधी से मुस करती है। तो
- 57:48और ये अलग-अलग एथेनिक इडलॉजीस या एथनिक
- 57:53अलग-अलग एथेनिक
- 57:56पर्टिकुलरिटीज रखने के बावजूद ये सब
- 57:58पाकिस्तान की जिद्दोजहद में शरीक हुए और
- 58:01इन्होंने कहा कि भाई हम सब मुसलमान है
- 58:04माशा अल्लाह। तो मुसलमान है तो फिर
- 58:10सियासी निजाम के लिए ये इस्लाम को बुनियाद
- 58:13क्यों नहीं बना रहे?
- 58:16पाकिस्तान बनाने के लिए बुनियाद बना रहे
- 58:18हैं लेकिन इस्लाम को बुनियाद नहीं बना
- 58:20रहे। बल्कि बुनियादी तौर पर ये लिबरल
- 58:23इडलॉजी या नेशनलिस्ट इडलॉजी या कुछ लोगों
- 58:28ने सोशलिस्ट इडलजी को प्रायोरिटाइज क्यों
- 58:32कर लिया? तो इसका मतलब है कि वो लोग जो
- 58:35मुसलमान अपने आप को कह रहे थे वो भी एक
- 58:39नेशनलिस्ट पोजीशन ही थी। यानी कि वो एक
- 58:42मुस्लिम नेशनलिज्म था। तो मुस्लिम
- 58:44नेशनलिज्म जो था वो कॉस्मोपॉलिटन लग रहा
- 58:48था उनको की भाई सब लोगों की एथेनिक
- 58:50प्रायोरिटीज को इस तरह रिकंसाइल कर कर एक
- 58:53मुल्क हासिल करने में उनको मदद दे दे।
- 58:55उसके बाद हम जो है अपनीपनी एथेनिक
- 58:57आइडेंटिटीज के साथ इस ऑटोनमी को सेलिब्रेट
- 59:00करेंगे। तो अ
- 59:03रिकंसिलिएशन पॉसिबल है एथेनोसेंट्रिक
- 59:07नेशनलिज्म में और मुस्लिम नेशनलिज्म में
- 59:11या
- 59:13पाकिस्तानी नेशनलिज्म में ये रिकंसाइलेबल
- 59:16है और ये यूरोप के अंदर भी आपने देखा के
- 59:20बर्तनानिया
- 59:22में जो है वो आरिश भी है और स्कॉटिश भी है
- 59:26और इंग्लिश भी है। लेकिन ग्रेट ब्रिटेन के
- 59:29अंदर स्कॉटिश, आरिश और इंग्लिश एक फेडरेशन
- 59:33के साथ फंक्शनल हो सकते हैं। लेकिन गोरे
- 59:36होने के बावजूद वो फ्रेंच के साथ अपने आप
- 59:38को मुवस करते हैं। डिफरशिएट करते हैं। गो
- 59:42के बहुत सारे उनके बादशाह जो थे वो फ्रेंच
- 59:45थे। तो बताने का मतलब ये है कि नेशनलिज्म
- 59:49जो है
- 59:51वो मुसालहत करता है। इसी तरीके से
- 59:54फैमिलिज्म भी मुसालहत करता है। इसी तरीके
- 59:57से सोशलिज्म भी मुसालत करता है। तो इनकी
- 1:00:01इडलॉजिकल डिफरेंसेस को हम अंडरस्टैंड
- 1:00:04करेंगे। ये अभी आपको हो सकता है कि जाहिर
- 1:00:06है के आपको ये बात मुश्किल लगे। लेकिन जब
- 1:00:09आप इस रिकॉर्डिंग को बार-बार सुनेंगे तो
- 1:00:11आपको ये बात समझ में आ जाएगी के
- 1:00:15जब आप सिस्टम्स ऑफ जस्टिस को बड़े कैमस पे
- 1:00:18फिलोसोफिकल कैनवस पे अंडरस्टैंड कर रहे
- 1:00:22होते हैं तो वो इलॉजिकल
- 1:00:25जो बफरकेशन है उसको भी एक्सप्लेन कर देता
- 1:00:28है और इडलॉजिकल कंपैटिबिलिटीज और
- 1:00:30कॉम्प्रोमाइज को भी एक्सप्लेन करता है।
- 1:00:33ठीक है
- 1:00:35जी
- 1:00:37जी जी आप बात करो पहले कला फिर दानियाल
- 1:00:41जी सर अभी इंक्लूसिविटी का जिक्र आप अभी
- 1:00:45कर रहे थे थोड़ी देर पहले ना ये इस्तलाह
- 1:00:47आजकल बड़ी इन चल रही है हम मुख्तलिफ यानी
- 1:00:51कि अब तो कायदे आजम की बर्थडे के ऊपर जो
- 1:00:54नीचे पफेट्स बन रहे हैं वो भी एक
- 1:00:55इंक्लूसिव पाकिस्तान और इस तरीके के
- 1:00:58स्लोग्स के साथ आ रहे हैं। अच्छा ये जो ये
- 1:01:01जो इंक्लूसिविटी है ये जो टर्म है ये अपने
- 1:01:04अंदर एक बड़ी
- 1:01:06एक खास एक पीछे कसेप्शन ऑफ़ जस्टिस को
- 1:01:09प्रज्यूम करके आ रही है। यानी कि ये
- 1:01:12इंक्लूसिविटी ऑब्वियसली हम सब चाहेंगे कि
- 1:01:14सब लोगों को इल्म मिले और सब इल्म हासिल
- 1:01:16करें। लेकिन इस खास इंक्लूसिविटी के पीछे
- 1:01:19खास कंसशन जस्टिस है। तो ये तो खुद अपने
- 1:01:23अंदर बड़ी फिर एक्सक्लूसिव
- 1:01:25इस्तला हुई। यानी कि ये एक खास
- 1:01:30भाई देखो दुनिया में जब भी कोई जब भी कोई
- 1:01:34सिस्टम डेवलप होता है वो जब दुनिया के
- 1:01:39सामने पेश किया जाता है तो इस तरह पेश
- 1:01:42किया जाता है कि क्या सब लोग इसका पार्ट
- 1:01:45बन सकते हैं या नहीं बन सकते
- 1:01:49सही है? जैसे ईसाइयत जब आई मिसाल मैं दे
- 1:01:53रहा हूं। तो ईसाइयत जब आई तो रोमन जो किंग
- 1:01:57होते थे वो पूरी दुनिया को फतह करने की
- 1:02:00कोशिश करते थे और आपको पता है अलेग्जेंडर
- 1:02:03ने ये कोशिश की और जो है सीज़ ने जूलियस
- 1:02:07सीज़ ने ये कोशिश की और मुख्तलिफ लोगों ने
- 1:02:10ये कोशिश की पूरी दुनिया को हम एक झंडे
- 1:02:13तले जमा कर ले जब वो पूरी दुनिया को फतह
- 1:02:16भी कर ले लेट सपोज के फतह कर नहीं कर पाए
- 1:02:19लेकिन चले कर लिया तो उसके बावजूद भी जो
- 1:02:23रोम कॉमन है वो तो नस्ल की बुनियाद पर
- 1:02:28हड्डी और खून की बुनियाद के ऊपर क्योंकि
- 1:02:31अपने अपनी पिटिकल लेजिटसी असर्ट करते थे
- 1:02:35तो अलेग्जेंडर द ग्रेट अपने आप को क्या
- 1:02:38कहता था? अलेग्जेंडर द ग्रेट क्या अपने आप
- 1:02:40को
- 1:02:42आलमी इंसान कहता था या रोमन कहता था? तो
- 1:02:46फर्ज करें कि वो आलमी समझ रहा है अपने
- 1:02:48आपको। यानी कि ग्लोबल ह्यूमैनिटी का
- 1:02:51रिप्रेजेंटेटिव समझ रहा है। और उसकी दलील
- 1:02:54क्या है कि भाई मैंने पूरी तमाम रियासतों
- 1:02:57को या तमाम तहजीबों को शिकस्त दे दी। तो
- 1:03:01इसके बावजूद के लोग उससे शिकस्त खा गए।
- 1:03:03शिकस्त खा जाने के बाद भी नस्लन तो वो
- 1:03:06अफ्रीकन ही रहेंगे ना। नस्लन वो इजिपशियन
- 1:03:09रहेंगे, पर्शियन रहेंगे, इंडियन रहेंगे,
- 1:03:16टर्क्स रहेंगे। तो तो फिर वो तो हमेशा जो
- 1:03:22है जींस या फ्लश या ब्लड जो है ये तो
- 1:03:27यूनिवर्सलिटी की बुनियाद नहीं बनता।
- 1:03:30लिहाजा रोमन जो थिंकर्स होते थे या रोमन
- 1:03:34जो फिलोसफर सॉरी रूलर्स होते थे उनके लिए
- 1:03:38हमेशा ये होता था कि हमेशा अदरनेस मौजूद
- 1:03:42रहेगी हमारे और दूसरों के दरमियान। इसका
- 1:03:45मतलब ये हुआ कि रेसिज्म की यूनिवर्सलिटी
- 1:03:48या एनोसेंट्रिसिटी की यूनिवर्सलिटी या
- 1:03:52नेशनलिज्म की यूनिवर्सलिटी या जो है
- 1:03:58वो रिवील हो जाएगी बिकॉज़ ऑफ़ द ऑफ़ द फ्लेश
- 1:04:03एंड द ब्लड एंड द कलर ऑफ द स्किन एंड द
- 1:04:06लैंग्वेज दे आर यूजिंग। इसको ओवरकम किया
- 1:04:10आकर ईसाइयत ने। और ईसाइयत ने आकर ये दावा
- 1:04:14किया कि देखो ये सब जो है ऑल आर इक्वल इन
- 1:04:18द आईज ऑफ द गॉड ऑल आर द चिल्ड्रन ऑफ द
- 1:04:20गॉड। सो इफ ऑल आर द चिल्ड्रन्स ऑफ़ द गॉड
- 1:04:23इट डजंट मेक एनी डिफरेंस वेदर यू आर रोमंस
- 1:04:26और यू आर अ बोथ और यू आर अ परशियन और यू
- 1:04:29आर एन इजिपशियन और यू आर इंडियन और
- 1:04:32अफ्रीकन व्हाटएवर दे दे कैन बी योर ब्रदर
- 1:04:37बिकॉज़ दे आर द क्रिएचर ऑफ़ द गॉड। तो आप
- 1:04:41अगर किंगडम ऑफ हेव्स इस्टैब्लिश करोगे तो
- 1:04:44आप इस दुनिया में सबके लिए एक ऐसी
- 1:04:47आइडेंटिटी ओपन तुम्हें करनी पड़ेगी जिसमें
- 1:04:51पार्टिसिपेट कर सकता है एक स्पेनिश भी उसी
- 1:04:55तरीके से जिस तरह से एक रोमन या एक
- 1:04:58इजिपशियन या एक बेबिलोनियन या एक पर्शियन
- 1:05:01या व्हाटएवर तो फिर आप यूनिवर्सलिटी की
- 1:05:05बात कर सकते हो तो ईसाइयत एक
- 1:05:08यूनिवर्सलिस्ट
- 1:05:10बनकर निकली। समझ में आई बात आपको? तो अगर
- 1:05:14फर्ज किया कि एक अच्छा यानी कि ईसाई है तो
- 1:05:17इससे फर्क नहीं पड़ता कि वो ईरानी है या
- 1:05:20तुरानी है या फ्रेंच है या जर्मन है या
- 1:05:23स्कॉटिश है या आरिश है। वो क्रिश्चियन है
- 1:05:26भाई। तो आपने देखा कि बहुत सारे होली रोमन
- 1:05:29एपरर जो थे वो कोई हंगरी का था तो कोई
- 1:05:33फ्रांस का था तो कोई बर्तनानिया का था। तो
- 1:05:36वो एक झंडे तले जमा क्यों होते थे?
- 1:05:39क्योंकि वो कहते थे कि हम सब ईसाई है। हम
- 1:05:42सब जो है किंगडम ऑफ हेव्स एस्टब्लिश कर और
- 1:05:45इस जंग के इ्तताम पर कुछ लोग जो है दुनिया
- 1:05:48को जन्नत बना देंगे और कुछ लोग आखिरत में
- 1:05:51जन्नत में पहुंच जाएंगे। इसी तरीके से
- 1:05:53इस्लाम लेकिन ये जो इनलाइटनमेंट के बाद जो
- 1:05:57नेशनलिज्म पैदा हुआ वो रिएक्शन था इसी
- 1:06:02इंक्लूसिविटी की तरफ। यानी के इस
- 1:06:04इंक्लूसिवनेस के ही तो खिलाफ वो था कि
- 1:06:07सबसे पहले चर्च ऑफ इंग्लैंड और चर्च ऑफ
- 1:06:10ऑस्ट्रिया अलग हो गया। उन्होंने कहा जी हम
- 1:06:12तो इंग्लिश है। उन्होंने कहा हम तो
- 1:06:14ऑस्ट्रियन है। उन्होंने कहा तो ठीक है वो
- 1:06:17क्रिश्चियन है लेकिन ये ऑस्ट्रियन और
- 1:06:19इंग्लिश और स्कॉटिश और आयरिश और फिर
- 1:06:21फ्रेंच एंड इस तरह से ये नेशनलिज्म पैदा
- 1:06:24हो गया। तो इस नेशनलिज्म को खत्म करने की
- 1:06:28कोशिशें इनलाइटनमेंट में भी हुई। जैसे
- 1:06:31नेपोलियन बोनापार्ट ने यूरोपियन आइडेंटिटी
- 1:06:34डेवप कर दी। हां, यूरोपियन यूनियन डेवलप
- 1:06:37कर दी। लेकिन जैसे ही बुरा वक्त आता है
- 1:06:39लोग ब्रेग्जिट लेके बाहर निकल जाते है।
- 1:06:41जैसे बर्तनानिया ने कहा साले इन कंगलों को
- 1:06:43सबको हमें पालना पड़ रहा है। तो ये फचेको
- 1:06:47सलवाकिया के बाद जो है जो यूरोपियन यूनियन
- 1:06:52मेंबर्स आए वो बेचारे गरीब लोग थे। वो के
- 1:06:54वो यूरोपियन थे लेकिन गरीब लोग थे और
- 1:06:57मखलूक हाल लोग थे। उनका बर्डन भी इनके ऊपर
- 1:07:00आया। तो इनका इनके लिए मसला पैदा होना।
- 1:07:03यूरोपियन यूनियन ने जो पार्लियामेंट डेवलप
- 1:07:05की उस पार्लियामेंट के अंदर ज्यादातर
- 1:07:07बुड्ढे थे और वो बुड्ढों की जो फाइनेंसिंग
- 1:07:10होती थी वो सारी की सारी फाइनेंसिंग जो थी
- 1:07:12वो नौजवान लोगों के कट्स लगा के होती थी।
- 1:07:15सबसे ज्यादा जिनके ऊपर कट्स लगते थे
- 1:07:18उन्होंने कहा भाई इन बुड्ढों को पालपाल के
- 1:07:21हम लोग तो मारे जाएंगे। तो उन्होंने अपनी
- 1:07:25इंक्लूसिविटी को
- 1:07:28एक्स्ट्रैक्ट कर दिया। एब्स्ट्रैक्ट कर
- 1:07:31दिया ह्यूमनिज्म के नाम पर और लिबरलिज्म
- 1:07:36के नाम पर। लेकिन सब्सटेंटिव प्लेन पर
- 1:07:39अपने आप को अलग कर लिया और अपने आप को अलग
- 1:07:41करके कहा कि जी हम तो ब्रेग्जिट ले रहे
- 1:07:44हैं। हम तो बाहर जा रहे थे। हम तो यूनियन
- 1:07:47के चक्कर में नहीं पड़ेंगे। बल्कि जब
- 1:07:49यूरोपियन यूनियन बन भी गई थी उस वक्त भी
- 1:07:51जो है शकिंग वीजा जो होता था वो बर्तानिया
- 1:07:55उस को एंटर नहीं होने देता था। तो इसका
- 1:07:57मतलब है कि इट मीन्स दैट ऑल आर इक्वल बट
- 1:08:00सम पीपल आर मोर इक्वल देन अदर्स। ठीक है?
- 1:08:03तो
- 1:08:06इंक्लूसिविटी का जो मसला है ये हमेशा
- 1:08:10दुनिया में जब भी कोई ताकतवर इडलॉजी यानी
- 1:08:14कि मॉडर्निटी अपने आप को ऑल इंक्लूसिव
- 1:08:17कहती है।
- 1:08:19और पोस्ट मॉडेर्निटी ये कहती है ये
- 1:08:21इंक्लूसिव नहीं है। हम बनाएंगे इसको मजीद
- 1:08:24इंक्लूसिव यू नो। तो इंक्लूसिविटी और
- 1:08:28हमारी जैसी जो कौमे है जो के जिसका सारा
- 1:08:32का सारा इंटेलिजेंशिया जो है वो
- 1:08:36जाहिर है के
- 1:08:40अब क्या बोले वो
- 1:08:43बिल्कुल यानी कि तीसरे दर्जे की जो पिटिकल
- 1:08:46थरीज है उनसे अपने अपने सिस्टमिक
- 1:08:52थरीज निकालता है तो उनके लिए तो ये कोई
- 1:08:57इतना नहीं है। उनका ये कहना है कि भाई
- 1:08:59हमने कौन सा इस पे अमल करना है? बोलने में
- 1:09:02क्या हर्ज है? तो जाहिर है कि यहां पर जब
- 1:09:05एक इंसान मजहब की बात करके कहे कि भाई
- 1:09:09हमने कौन सा इस पे अमल करना है? तो
- 1:09:15ले लो इस्लाम के नाम। तो वो इंक्लूसिवनेस
- 1:09:18का लफज़ भी इसी तरह इस्तेमाल करते हैं ताकि
- 1:09:21बेचारों को थोड़ी एक वो मिल जाए। क्या एक
- 1:09:26पोस्ट पोस्ट डॉक मिल जाए या किसी
- 1:09:30कॉन्फ्रेंस के अंदर आने जाने का तीन तीन
- 1:09:33दिन का टिकट मिल जाए कोई इतने यानी के वो
- 1:09:36मुझे नहीं लगता कि वो इतने यानी के मुखलिस
- 1:09:39है उस इंक्लूसिविटी के साथ और अभी तो
- 1:09:42इंक्लूसिविटी के का बहुत ही यानी कि बुरा
- 1:09:46बुरा टाइम चल रहा है। यानी के सबका
- 1:09:48माशा्लाह मु काला हो रहा है जो
- 1:09:50इंक्लूसिविटी वगैरह की बात करते थे के भाई
- 1:09:53ये जो है तो जब यूरोप जाते हैं मिसाल के
- 1:09:56तौर पे मैं आपको बता दू पाकिस्तान का
- 1:09:58जितना भी लिबरल आदमी हो जितनी भी लिबरल
- 1:10:01औरत हो या जितना भी लिबरल जो है वो
- 1:10:03ट्रांसजेंडर हो जब वो अमेरिका जाता है और
- 1:10:06यूरोप जाता है तो आजकल हालात ये है भाई के
- 1:10:09वो यहां पर चाहे दीन के का मजाक उड़ाता हो
- 1:10:14गालियां बकता हो मजाक बनाता
- 1:10:17लेकिन वहां पर जब वो जाता है तो वो उसको
- 1:10:19एक मुसलमान के तौर पर ही ट्रीट करते हैं।
- 1:10:23यानी कि कितनी यानी के ये इन लोगों की
- 1:10:26बदनसीबी है कि सब कुछ छोड़ दिया उसके
- 1:10:29बावजूद भी दुनिया इनको मुसलमान के तौर पर
- 1:10:32ही रेग्नाइज करती है और इनसे कहती है चलो
- 1:10:35भाई आप बताओ इस्लाम इसके बारे में क्या
- 1:10:37कहता है? अब इस्लाम का तो क नहीं पता इनको
- 1:10:40तो ये क्या बताएंगे? तो बजाय ये कि ये
- 1:10:42बेशर्म ये बोल दे कि भाई हमें तो इस्लाम
- 1:10:45के बारे में कुछ पता ही नहीं। हम तो
- 1:10:46इस्लाम से कोई मदद लेना ही नहीं चाहते।
- 1:10:49इस्लाम को तो हम एक पर्सनल चीज समझते हैं।
- 1:10:52हम तो आपसे सीखने आए। हम तो आपके चमचे
- 1:10:54हैं। हम तो आपको अपना आपके पट्ठे हैं। तो
- 1:10:59ये भी इस्लाम को समझाना शुरू कर देते हैं।
- 1:11:03सही है? हद ये है कि शाहरुख खान जैसे
- 1:11:06इंसान को भी वो मुसलमान समझते।
- 1:11:10हद तो ये है कि आमिर खान को भी वो लोग
- 1:11:13हिंदुस्तान में लोग मुसलमान कह रहे हैं।
- 1:11:15सही है ना? तो वो बेचारा बोल दे कि भाई
- 1:11:18मैं तो हूं ही नहीं मुसलमान। लेकिन वो भी
- 1:11:20इसको एक आइडेंटिटी के तौर पर ले
- 1:11:23इंक्लूसिविटी के नाम के ऊपर बिल्कुल दीन
- 1:11:28को त्याग देने के बावजूद भी
- 1:11:32मेंबर बन रहा है। तो जिसे हम आजकल
- 1:11:33इंक्लूसिविटी कह रहे हैं या समझ रहे हैं
- 1:11:37या समझा रहे हैं वो ये है कि आप जिस
- 1:11:40इडलॉजी पे है ना कहोगे ये इडलॉजी हक नहीं
- 1:11:44है। अगर आप ये बाबांगे दुखल कह देते हो तो
- 1:11:47कहते हां ये है इंक्लूसिव यानी कि अगर आप
- 1:11:50कहोगे जी मैं मर्द नहीं हूं मैं मर्द नहीं
- 1:11:54हूं तो फिर आप इंक्लूसिव हो अगर एक औरत कह
- 1:11:58दे भाई मैं औरत नहीं हूं तो फिर ये
- 1:12:00इंक्लूसिव हो गई अगर एक इंसान कहे मैं
- 1:12:02मुसलमान नहीं हूं फिर मैं इंक्लूसिव हो
- 1:12:04गया वो तो बहुत ही बाारी टाइप की जो सतह
- 1:12:08है जिसे पेश कर रहे है हां जो ड्यूस जिस
- 1:12:12किस्म की इंक्लूसिविटी की बात कर रहा है
- 1:12:15वो सीरियस लेने वाली बात है या जिस
- 1:12:20इंक्लूसिविटी की बात कर रहा है उसे सीरियस
- 1:12:22लेने की बात है और मैं पूरे यकीन के साथ
- 1:12:25आपको बता सकता हूं कि पाकिस्तान के अंदर
- 1:12:27जो लोग इंक्लूसिविटी की बात कर रहे हैं
- 1:12:29सियासी लोग और ये सियासी जमातों के जो
- 1:12:33थिंक टैंक के लोग हैं ये बिल्कुल इन्होंने
- 1:12:36नहीं पढ़ा। ये बिल्कुल पक्की बात है। ये
- 1:12:39मैं नहीं समझता कि इनकी ये ज्यादातर जो है
- 1:12:43इसके अंदर वो लॉयर टाइप के लोग हैं। लॉ
- 1:12:46वगैरह पढ़ा हुआ है इन्होंने और लॉ तो
- 1:12:49अस्यूम करता है सिस्टम ऑफ जस्टिस को
- 1:12:53इक्की दुककी कोई किताब इधर उधर से निकाल
- 1:12:55कर ये पढ़ लेते हैं। या फिर ये कि अब तो
- 1:12:58माशा्लाह चैट जीपीटी आ गया। पूछ लेते
- 1:13:00होंगे उससे कि भाई बता दो कि क्या उस दिन
- 1:13:03मैं देख रहा था कि एक मौलाना साहब थे वो
- 1:13:06चैट जीपीटी से क्वेश्चन कर रहे थे कि भाई
- 1:13:09ये बताएं कि अगर जुमे का दिन जो है वो
- 1:13:12इतवार को पड़ जाए तो जुमे की नमाज पढ़ी
- 1:13:15जाएगी या नहीं पढ़ी जाएगी तो बजाय ये कि
- 1:13:17चैट जीटीपी ये कहता मौलाना साहब ये समझा
- 1:13:21रहे थे कि चैट जीपीटी ये समझता कि भाई ये
- 1:13:26जुमा जो है वो इतवार को आ ही नहीं सकता
- 1:13:29इंटरेस्टिंग बात ये है कि चैट जीपीटी ये
- 1:13:31बता रहा था कि जुमे का दिन अगर इतवार को आ
- 1:13:34जाए तो जुमे की नमाज के क्या उसूल होंगे
- 1:13:37उसने बता दिए उसूल सही है तो इंशा्लाह
- 1:13:40इनको भी जब इंक्लूसिविटी के बारे में
- 1:13:42पूछेंगे ना जाके चैट जीपीटी पे तो वो कोई
- 1:13:45ना कोई इनको जवाब देगा और इंशा्लाह अल्लाह
- 1:13:47ने चाहा तो बिल्कुल गलत जवाब होगा ठीक है
- 1:13:50तो
- 1:13:51वो जो तलाक बात कर रहा है ये सही बात है
- 1:13:55आजकल इंक्लूसिविटी बहुत इन है लेकिन जाहिर
- 1:13:58है कि वो
- 1:14:00यू समझ लो कि एक नई टर्म है जो
- 1:14:03इंटेलेक्चुअल औषों के हाथ में आई हुई है।
- 1:14:06सही है? तो जब हम इंशा्लाह ये चीजें
- 1:14:08पढ़ेंगे तो आप बहुत बेहतर पोजीशन में
- 1:14:10होंगे इनके इनके
- 1:14:14आर्गुमेंट्स को स्टैंड करने के भी और इनको
- 1:14:17अगर आप इंटेलेक्चुअली इंगेज करना चाहते हो
- 1:14:20तो उस वक्त भी दोनों सूरतों में आप इस
- 1:14:22काबिल हो जाओ।
- 1:14:25जी दानियाल लगभग अगर अभी भी आपको कोई बात
- 1:14:28पूछनी है तो आपको आपका हाथ जो है
- 1:14:31सर आपने अलम्दुल्लाह काफी चीजें एक्सप्लेन
- 1:14:33कर दी है और तला भाई का भी अच्छा पॉइंट था
- 1:14:36कि यू नो इंक्लूसिविटी को यू नो अगर इफ ही
- 1:14:39लुक इट विद इन द शेड ऑफ़ स्पेसिफिक
- 1:14:41मेटाफिजिक्स तो हमें पता लगता है कि कितना
- 1:14:43एक्सक्लूसिव है वो। बल मैं मेरे ज़हन में
- 1:14:46एक आजकल एक ऑब्जरवेशन है। मैंने कहा वो
- 1:14:48मैं आपके सामने रखता हूं और उस पर आपको
- 1:14:49ओपिनियन लेता हूं कि हमारे यहां अभी मुझे
- 1:14:52ऐसे लगता है कि एक स्पेसिफिक क्लास क्लास
- 1:14:54नॉट इन मार्क्सिस्ट सेंट आप कैसे मार्क्स
- 1:14:57सेंस में नहीं कह रहा। मैं कह रहा हूं कि
- 1:14:58एक ग्रुप ऑफ इंडिविजुअल है जो कि दीनदार
- 1:15:01है। दीन से मोहब्बत करता है और लेकिन मे
- 1:15:06बी बाहर से पढ़ कर आ गया। उसने क्रिटिकल
- 1:15:08थ्योरी पढ़ ली है। मिशल फको को पढ़ लिया है।
- 1:15:11अब मेरी जो अंडरस्टैंडिंग है कि क्रिटिकल
- 1:15:13थ्योरी और पोस्ट मॉडर्निज्म आई मीन आई मे
- 1:15:15यूज़ इट एज अ चार्जशीट अगेंस्ट मॉडर्निटी
- 1:15:18बट वो मेरी आईडियोलॉजिकल बेसिस नहीं है।
- 1:15:21तो उसकी वो चार्जशीट प्रेजेंट करने के बाद
- 1:15:24अब अगर मैं अपने कोई सशंस दूंगा तो वो तो
- 1:15:26मेरी आईडियोलॉजी से या मेरी मैटफिजिक्स से
- 1:15:28ही आएंगे या मेरी हिस्ट्री से ही आएंगे।
- 1:15:30लेकिन हमारे यहां ये जो एक मुसलमानों की
- 1:15:33क्लास जो कि दीनदार है बड़ी वो चार्जशीट
- 1:15:37सिर्फ यूज़ नहीं करती है बल्कि वो उसका अ
- 1:15:39सशन भी ले लेती है और वो वही एक्टिविस्ट
- 1:15:41बेस जो है ना वो सशन प्रोवाइड कर रही होती
- 1:15:44है। अब मुझे समझ नहीं आता कि उनसे बंदा
- 1:15:46कैसे डील करे।
- 1:15:48नहीं मैं बिल्कुल सही कह रहे हैं आप
- 1:15:51बिल्कुल सही कह रहे हैं और जब मैंने आप
- 1:15:53लोगों को पहले ये बताया
- 1:15:56यानी के मैं रशीद के साथ जब हमारी बात हुई
- 1:16:00थी तो हमने यही सोचा कि हमारे वो लोग जो
- 1:16:04कि इंटेलेक्चुअल प्रोसेस में है और उनकी
- 1:16:07इंगेजमेंट भी होती रहती है और इमीडिएट
- 1:16:09इंगेजमेंट होती है क्योंकि वो जाहिर है कि
- 1:16:12हमारे भाई बहने ही है जो हमारे इर्दगिर्द
- 1:16:14मौजूद है और वो भी कोई बुरे थोड़ी है वो
- 1:16:16भी अच्छाई की कोशिश कर रहे हैं और वो ये
- 1:16:19समझते हैं कि उनके रिफ्लेक्शन के नतीजे
- 1:16:21में माशरा पहले से बेहतर हो जाए। तो ऐसा
- 1:16:24थोड़ी है कि वो कोई दुश्मन है। तो उनके
- 1:16:26लिए क्या चीज ज्यादा जरूरी है? तो मैंने
- 1:16:28उनको ये ये सोच कर फिर मैंने ये फैसला
- 1:16:30किया कि भाई पहले जो है फलसफा पढ़ा कैसे
- 1:16:33जाए? तो बुनियादी तौर पर वो जिस तरह फलसफा
- 1:16:37पढ़ रहे हैं वो या तो एवोलशनरी मॉडल में
- 1:16:41पढ़ रहे हैं या फिर वो इशू बेस्ड मॉडल में
- 1:16:44पढ़ रहे हैं। तो तो जब वो इशू बेस्ड में
- 1:16:47पढ़ते तो फिर वो देखते हैं कि इन इश्यूज
- 1:16:50को रिोल्व करने के लिए कंटेंपरेरी वर्ल्ड
- 1:16:52में क्या स्ट्रेटजीस डेवलप हो रही है। और
- 1:16:57जो जैसे तल्हा ने बताया कि भाई
- 1:17:00इंक्लूसिविटी के लिए सबसे सेफ जगह क्या है
- 1:17:03कि भाई आप एनवायरमेंटलिस्ट बन जाओ और आप
- 1:17:06जो है बोलो कि भाई दरख्त लगाओ दरख्त और
- 1:17:09दरख्त लगाओ और प्लास्टिक उठाओ दरख्त उठाओ
- 1:17:13दरख्त लगाओ प्लास्टिक उठाओ ये ये आप करो
- 1:17:17और वाटर मैनेजमेंट करो और क्या कहते हैं
- 1:17:21कुएं खोदो तो जाहिर है कि अगर इस किस्म के
- 1:17:24एक्टिविज्म में कोई भाई जा रहा कि भाई वो
- 1:17:27चाहता है कि प्लास्टिक को की जो प्रोपरेशन
- 1:17:31है उसको कंटेन करने में कंट्रीब्यूट करे
- 1:17:33ग्रीन पीस मूवमेंट के साथ और जो है क्या
- 1:17:37बोलते हैं दरख्त लगाने के लिए चाहे वो
- 1:17:40पीटीआई वाले हो चाहे वो पीपल्स पार्टी
- 1:17:43वाले हो चाहे वो जमाते इस्लाम वाले हो
- 1:17:46चाहे वो कोई मुस्लिम लीग के लोग हो तो
- 1:17:50जाहिर है कि इसमें तो कोई बुरी बात नहीं
- 1:17:53है कि कौन कहेगा कि भाई प्लास्टिक बढ़ाओ
- 1:17:55तो इस्ला इस्लामिस्ट भी नहीं कहेगा। तो
- 1:17:58अगर इस किस्म की इंक्लूसिविटी के अंदर वो
- 1:18:01पार्टिसिपेट कर रहे हैं तो इसमें कोई हर्ज
- 1:18:03नहीं है। बिल्कुल करें। दरख्त लगाए
- 1:18:05प्लास्टिक को कम करें और अपना जो है
- 1:18:08दुनिया की लेकिन इसको एंडेड इटसेल्फ नहीं
- 1:18:13है। बुनियादी तौर पर तो जड़ के ऊपर अटैक
- 1:18:16करना होगा ना कि भ ये तो वन पॉइंट एजेंडा
- 1:18:19सॉलिडेरिटी मूवमेंट में आप प्रोड्यूस हो
- 1:18:21जाओगे। और ये तो 1986 से यूं समझ ले कि जब
- 1:18:25मैं
- 1:18:271986 में मैं होऊंगा लेट सपोज के सातवीं
- 1:18:31क्लास में उस जमाने से ये मूवमेंट चल रही
- 1:18:34है। सॉलिडेरिटी मूवमेंट जब मैं सातवीं
- 1:18:37क्लास में था तो ये तो ये कोई मसला नहीं
- 1:18:41है। मसला ये है कि उसकी रूट कॉज यही है
- 1:18:45कि भाई आप
- 1:18:50के
- 1:18:53आपके जो चैलेंज है वो यह नहीं है कि
- 1:18:57प्लास्टिक कैसे कम होगी। लेकिन अगर
- 1:19:00प्लास्टिक कम कर सकते हैं आप तो इसमें कोई
- 1:19:02हर्ज नहीं है। ये आपका चैलेंज नहीं है के
- 1:19:06एनवायरमेंटल कैटेस्टी हो रही है और दरख्त
- 1:19:09कट रहे हैं और दरख्त लगना चाहिए। तो
- 1:19:12अल्लाह के रसूल ने भी कहा है कि दरख्त
- 1:19:14लगाओ और दरख्त नहीं काटो और दरख्तों को
- 1:19:16नहीं चलाओ। तो इसमें कोई बुरी बात नहीं
- 1:19:19है। प्रॉब्लम ये है कि जब वो ये बताते हैं
- 1:19:22कि दीन की जो तफसीर हमने की थी पहली सदी
- 1:19:26के अंदर वो तफसीर ठीक नहीं थी। वो गलत थी।
- 1:19:32ये है असल में मसला। असल प्रॉब्लम यह है
- 1:19:36और जो आप हर्मिनोटिक्स के खासतौर पे जो
- 1:19:39फिलोसोफिकल हर्मिनोटिक्स है उसके मॉडल्स
- 1:19:43या गमर का मॉडल लेकर या श माखर का मॉडल
- 1:19:47लेकर या डती का रोमांटिसिज्म लेकर आप तसीर
- 1:19:51के मसाइल को हल करने की कोशिश करें और
- 1:19:54स्ट्रक्चरिज्म की असमशन के साथ आप नज़्म
- 1:19:59कुरान का तसवुर दे वगैरह वगैरह तो जाहिर
- 1:20:02है कि मैं तो आलिम नहीं हूं लेकिन कम से
- 1:20:05कम मैं यह तो बता ही सकता हूं इतना फलसफा
- 1:20:08पढ़ने के बाद कि हज़त ने जो सशन पेश किया
- 1:20:11है यह सशन जो था वेस्टर्न इंटेलेक्चुअल
- 1:20:14डिस्कोर्स में इस भाई ने दिया था और उसके
- 1:20:17ये नताज निकले ये तो कर ही सकता हूं मैं
- 1:20:20सही है ना और ये हम कर रहे हैं लेकिन ये
- 1:20:23के इसके नतीजे में ये कहना के ये लोग जो
- 1:20:27है वो हमारी हमारी इंटीग्रेशन को रेजिस्ट
- 1:20:32कर रहे हैं तो यह यह रवैया ठीक नहीं है और
- 1:20:37वह या तो एवोलशनरी कॉन्टेक्स्ट में देखते
- 1:20:40हैं फलसफे को और
- 1:20:43या फिर जो है वो इशू बेस्ड अप्रोच में
- 1:20:46देखते हैं। कुछ लोग एनालिटिकल कॉन्टेक्स्ट
- 1:20:48में भी आ रहे हैं। यानी कि आपके यहां जो
- 1:20:51है ज्यादा अच्छे लोग पढ़े लिखे लोग मौजूद
- 1:20:54हैं पंजाब में और जाहिर है कि ऑक्सफोर्ड
- 1:20:58बहुत सारे लोग गए हुए हैं। कैमब्रिज बहुत
- 1:21:00सारे लोग गए हुए हैं। वहां से पढ़ के आए
- 1:21:03हुए हैं। तो जाहिर है कि ना चाहते हुए भी
- 1:21:05एनालिटिकल ट्रेडिशन उनके कनसेप्चुअल
- 1:21:09कैटेगरीस को इनफ्लुएंस तो करता होगा ना और
- 1:21:12उसे वो ठीक भी समझते होंगे या उस उन
- 1:21:15स्पेक्टिकल्स के साथ चीजों को देखते होंगे
- 1:21:17तो हमारे लोग जो है वो उन्हें हल्के लगते
- 1:21:20होंगे तो हमें एक ऐसा जहीन जहन पैदा करना
- 1:21:25है जो बड़े कैनव्स के ऊपर उनको जाके इंगेज
- 1:21:28करे और उनको बताने की कोशिश करें।
- 1:21:32ठीक है भाई तो फिर मैंने आप लोगों की
- 1:21:34डिस्कशन सुनी अब मैं रशीद से भी डिस्कस
- 1:21:37करूंगा और फिर मैं फैसला करूंगा के मुझे
- 1:21:41पहले क्या करना चाहिए आपके लिए ज्यादा
- 1:21:43आसान कौन सा रहेगा ये मैं फैसला करूंगा
- 1:21:46इंशा्लाह ताला फिर रशीद आपको इनफॉर्म कर
- 1:21:49देंगे और जहां तक ये बात के दानियाल की या
- 1:21:54तैयब की के भाई हमें सिस्टम का तो पता
- 1:21:57होना ही चाहिए तो ये सिस्टम पे बात कर
- 1:22:01लेंगे बजाय ये एजुकेशन सिस्टम सिस्टम इन
- 1:22:03इटसेल्फ पे बात कर लेंगे और फिर जो है हम
- 1:22:08आगे चलेंगे।
- 1:22:10ठीक है।
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