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Philosophy Matters | The Other Side of Education | Prof. Dr. Abdul Wahab Suri — Transcript

by Ghazzali Forum · 11,816 words · 1,555 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00रहीम आप लोगों को आवाज साफ आ रही है?
  2. 0:03स्क्रीन शो हो रहा है?
  3. 0:06जी सर बिलकुल ठीक हो रहा है।
  4. 0:08ठीक है। अच्छा मसला ये था कि मैं जो है ये
  5. 0:11इस बात पर
  6. 0:14वो था कंफ्यूज था कि हमें एजुकेशन वाला जो
  7. 0:18है टॉपिक सेलेक्ट करना चाहिए या जस्टिस
  8. 0:21वाला। सही है? क्योंकि दोनों जो
  9. 0:23कांसेप्ट्स है ना दोनों टॉपिक्स जो है वो
  10. 0:25इंटरकनेक्टेड है। और अगर देखा जाए तो जो
  11. 0:29सिस्टम ऑफ जस्टिस है वो फंक्शन कर ही नहीं
  12. 0:32सकता विदाउट सिस्टम ऑफ एजुकेशन। तो आपने
  13. 0:34देखा होगा हिस्टोरिकली मैं आज जो है वो
  14. 0:39प्रेजेंटेशन तैयार है और जस्टिस वाली भी
  15. 0:42तैयार
  16. 0:46और ये कोशिश करेंगे के
  17. 0:50जिस तरह से वो स्लाइड बाय स्लाइड हमने
  18. 0:52फोकस किया है। ये भी हम स्लाइड बाय स्लाइड
  19. 0:55करें। आज जो है मैं आपको दोनों के ताल्लुक
  20. 0:58के बारे में बताऊंगा। फिर जो है हम जो है
  21. 1:01तकरीबन आधा घंटा डिस्कशन करेंगे कि आपके
  22. 1:04ख्याल में पहले मीन पे फोकस करना चाहिए या
  23. 1:08एंड पे फोकस करना चाहिए। मीन टू एंड एंड
  24. 1:10भी हो सकता है एंड टू मीन भी हो सकता है।
  25. 1:12दोनों पॉसिबिलिटीज है। आज का जो लेक्चर है
  26. 1:15वो मैं ये बताने की कोशिश करूंगा कि
  27. 1:18दुनिया में कोई भी सिस्टम ऑफ एजुकेशन जो
  28. 1:21है वो
  29. 1:23डिवइड ऑफ सिस्टम ऑफ़ जस्टिस फंक्शनल हो
  30. 1:28नहीं सकता। फंक्शनल नहीं होता। सही है।
  31. 1:31जैसे हमारे यहां आत तौर पे लोगों ने ये
  32. 1:34प्रोपेगेंडा किया हुआ है। खासतौर पे जो
  33. 1:37इंटेलेक्चुअल्स टीवी वगैरह पे बैठे हुए
  34. 1:39वफाबाजी कर रहे हैं। वो ये के इल्म जो है
  35. 1:42वो फला है। इल्म जो है वो
  36. 1:47मोमिन की खोई हुई मीरा से है। जहां से
  37. 1:51मिले वहां से ले लो। वो इल्म के बारे में,
  38. 1:53वो नॉलेज के बारे में, एजुकेशन नॉलेज नहीं
  39. 1:57होती। एजुकेशन कुछ और चीज है। तो हम जाहिर
  40. 2:02है कि ये हम पहले भी बहुत डिस्कशन कर चुके
  41. 2:04हैं। लेकिन इस ग्रुप के साथ जो हमारी
  42. 2:06डिस्कशन है उसमें हमने ये नहीं किया है।
  43. 2:10लेकिन ये कि हमने ये बहुत एस्टैब्लिश्ड
  44. 2:13यानी के
  45. 2:15पोजीशन है। फलसफे के अंदर जो फलसफे पढ़े
  46. 2:19हुए लोग हैं कि नॉलेज और एजुकेशन में फर्क
  47. 2:23है। तो हम इसे भी वाज़ कर लेंगे। लेकिन जो
  48. 2:25चीज इंपॉर्टेंट है वो ये है कि जो परसूट
  49. 2:28ऑफ नॉलेज और पर्सूट ऑफ एजुकेशन जो है वो
  50. 2:31सिनोनिमस टर्म नहीं है और ये जो
  51. 2:36सिनोनिमिटी इस्टैब्लिश की हुई है लोगों ने
  52. 2:40वो बुनियादी तौर पर कन्फ्यूजन है एक
  53. 2:45फिलोसोफिकल कन्फ्यूजन है और अगर आप देखें
  54. 2:49दुनिया में जितने बड़े पॉलिटिकल थरिस्ट है
  55. 2:54उनकी पिटिकल थरी अगर आप थिंकर्स को ले
  56. 2:57लेते हैं जैसे आप प्लेटो को ले ले तो
  57. 3:01प्लेटो की जो थरी ऑफ़ जस्टिस है वो मीनिंग
  58. 3:07लेस हो जाती है अगर आप उसकी थ्यरी ऑफ़
  59. 3:10एजुकेशन थ्यरी ऑफ़ एजुकेशन मीनिंगलेस है
  60. 3:13अगर आप उसकी थ्यरी ऑफ़ जस्टिस को
  61. 3:15अंडरस्टैंड नहीं करते। यानी कि दोनों में
  62. 3:18एक खास किस्म का र है। इसी और दूसरी जो
  63. 3:24चीज है वो ये कि कोई भी सिस्टम ऑफ जस्टिस
  64. 3:27जो भी होता है उसके ऊपर जब भी लोग बात कर
  65. 3:30रहे होते हैं तो उसके साथ-साथ फिर वो
  66. 3:32इकोनॉमिक स्ट्रक्चर के ऊपर भी आ जाते हैं।
  67. 3:34खासतौर पे वो पॉलिटिकल थिरिस्ट जो के
  68. 3:38जिन्हें हम मॉडर्न पॉलिटिकल थरिस्ट कहते
  69. 3:41हैं। उनमें से एक भी बड़ा आप पॉलिटिकल
  70. 3:43थिरिस्ट ऐसा नहीं देखेंगे जो के अह सिस्टम
  71. 3:47ऑफ जस्टिस की बात कर रहा है या प्रिंसिपल
  72. 3:49ऑफ जस्टिस की बात कर रहा है या मैकेनिज्म
  73. 3:51ऑफ जस्टिस की बात कर रहा है। लेकिन उसके
  74. 3:54साथ-साथ वो इकोनॉमिक स्ट्रक्चर के बारे
  75. 3:58में बात ना करे ऐसा नहीं होगा। और यानी कि
  76. 4:02ये दोनों तीनों सिस्टम जो है एजुकेशन
  77. 4:06इकोनमिक और सिस्टम
  78. 4:10ये इंटीग्रेटेड है। लिहाजा आप जब किसी भी
  79. 4:16सिस्टम ऑफ एजुकेशन को अंडरस्टैंड करते हैं
  80. 4:20तो उसका एक मकसद ये होता है कि आप ये
  81. 4:23देखें कि किस किस्म का ह्यूमन के सिस्टम
  82. 4:26ऑफ जस्टिस के लिए आपको करना वो ह्यूमन
  83. 4:30रिसोर्स आप जनरेट करना चाह रहे हैं। तो
  84. 4:33इसका मतलब यह हुआ कि
  85. 4:36यानी के अगर आप हिस्ट्री ऑफ आइडियाज को
  86. 4:40देखें तो सिस्टम ऑफ एजुकेशन और सिस्टम ऑफ
  87. 4:44जस्टिस इनके दरमियान एक खास किस्म का
  88. 4:47ताल्लुक आपको नजर आएगा। इसी तरीके से
  89. 4:50सिस्टम ऑफ जस्टिस और सिस्टम ऑफ
  90. 4:54ट्रांजैक्शन ऑफ गुड एंड सर्विसेस
  91. 4:57और ट्रां और यानी कि समाधान में
  92. 5:01ट्रांजैक्शन ऑफ़ कैपिटल और कंसंट्रेशन ऑफ
  93. 5:04कैपिटल एंड द प्रोडक्शन और
  94. 5:08मेकिंग ऑफ द कैपिटल इनका आपस में ऑर्गेनिक
  95. 5:11रिलेशनशिप है। लिहाजा हम एजुकेशन सिस्टम
  96. 5:16को इस कॉन्टेक्स्ट में देखने की कोशिश कर
  97. 5:19रहे हैं के सिस्टम्स ऑफ़ नॉलेज के साथ उसका
  98. 5:23क्या रिलेशनशिप है? सिस्टम ऑफ़ जस्टिस के
  99. 5:26साथ उसका क्या रिलेशनशिप है? सिस्टम ऑफ़
  100. 5:29ट्रांजैक्शंस ऑफ गुड्स एंड सर्विसेस एंड
  101. 5:32फाइनेंस के साथ उसका क्या रिलेशनशिप है?
  102. 5:35लिहाजा ये कोई एजुकेशन थ्यरी पे हम बात
  103. 5:38नहीं कर रहे। एजुकेशन थ्यरी अस्यूम करती
  104. 5:41है कुछ फंडामेंटल नोशंस ऑफ जस्टिस को और
  105. 5:46एक खास किस्म के जो नोशन ऑफ जस्टिस है उसी
  106. 5:50की प्रमोशन के लिए या उसी की सस्टेनेंस के
  107. 5:53लिए या उसी की आर्टिकुलेशन के लिए और सबसे
  108. 5:56इंपॉर्टेंट चीज उसकी नेचुरलाइजेशन के लिए
  109. 6:00इस्तेमाल होता है सिस्टम ऑफ एजुकेशन और जो
  110. 6:06बच्चे जो जाहिर है कि उस सिस्टम के अंदर
  111. 6:08जाके के आगे जाके उनको काम करना है उस
  112. 6:11सिस्टम ऑफ जस्टिस में उनको जहनी तौर पर
  113. 6:15तैयार करना उनको इस तरह से तैयार करना कि
  114. 6:19वो सर्व कर सके सिस्टम को और एक ऐसा
  115. 6:26सप्लाई ऑफ ह्यूमन इंटेलेक्ट अवेलेबल हो जो
  116. 6:30सिस्टम को प्रोटेक्ट भी करे और सिस्टम को
  117. 6:33ग्रो भी करे। लिहाजा
  118. 6:36आपको कोई भी सिस्टम ऑफ जस्टिस
  119. 6:39डिवइड ऑफ सिस्टम ऑफ एजुकेशन नहीं दिखाई
  120. 6:42देगा। सही है? अब आप यह सोचते होंगे कि
  121. 6:48मुसलमानों ने जो सिस्टम ऑफ जस्टिस
  122. 6:50एस्टैब्लिश किया उस सिस्टम ऑफ उसका सिस्टम
  123. 6:53ऑफ जस्टिस क्या है? सही है? ये एक
  124. 6:57इन्वेस्टिगेशन का
  125. 7:00डोमेन है। उसको आप ओपन कर सकते हैं। इसी
  126. 7:02तरीके से अ जो है वो हम सब कॉन्टिनेंट में
  127. 7:07रह रहे हैं। हिंदुस्तान में रह रहे हैं।
  128. 7:09तो यहां पर हिंदुस्तान के जो लोग थे
  129. 7:13उन्होंने कौन से सिस्टम्स ऑफ़ जस्टिस
  130. 7:15एस्टैब्लिश किए और उन्होंने किस किस्म के
  131. 7:17सिस्टम्स ऑफ़ एजुकेशन। तो ये एक पूरा
  132. 7:20रिसर्च का डोमेन है। आपकी मर्जी है। आप
  133. 7:22इसको खोदे इसको एक्सकवेट करें। एनालाइज
  134. 7:25करें, अंडरस्टैंड करें, क्रिटिकली इवैलुएट
  135. 7:29करें। ये आप लोगों की मर्जी है। लेकिन जो
  136. 7:31इंपॉर्टेंट चीज है वो यह के इस वक्त जिस
  137. 7:35दुनिया में हम रह रहे हैं। यह दुनिया जो
  138. 7:37है वो मॉडर्न इंस्टीटश से चल रही है। यानी
  139. 7:41कि ये जो वर्ल्ड है अगर फर्ज किया कि इसकी
  140. 7:46सिस्टमिक अंडरस्टैंडिंग आपको करनी है तो
  141. 7:50आपको मॉडर्न इनलाइटनमेंट वैल्यूस के साथ
  142. 7:52ही
  143. 7:54इसको जोड़ के अंडरस्टैंड करने की कोशिश
  144. 7:57करनी चाहिए। और इसी मॉडर्न
  145. 8:01सिस्टमिक
  146. 8:04ऑर्डर के अंदर जो दूसरे कमटिंग नोशंस है
  147. 8:09मिसाल के तौर पे जो प्री मॉडर्न
  148. 8:12कनेक्टिविटीज है या प्री मॉडर्न वैल्यू
  149. 8:15सिस्टम है या प्री मॉडर्न
  150. 8:19सिस्टम्स ऑफ़ नॉलेज है वो अपनी यानी कि
  151. 8:23सर्वाइवल की जंगे लड़ रहे हैं। और हकीकत ये
  152. 8:26है कि रोजाना की बुनियाद पर उनको सामना
  153. 8:30करना पड़ता है उस
  154. 8:33लेजिटसी का जो कि रिक्वायर्ड होती है
  155. 8:36डोमिनेंट डिस्कोर्स के के अंदर
  156. 8:39पार्टिसिपेट करने के लिए। लिहाजा आप देखें
  157. 8:42कि प्री मॉडर्न सिस्टम्स ऑफ नॉलेज या प्री
  158. 8:45मॉडर्न वैल्यू स्ट्रक्चर या प्री मॉडर्न
  159. 8:49जो है वो
  160. 8:52ट्रांजैक्शंस ऑफ गुड एंड सर्विसेस
  161. 8:55इन
  162. 8:57प्री मॉडर्न कलेक्टिविटीज या प्री मॉडर्न
  163. 9:03स्ट्रक्चर्स ऑफ
  164. 9:06ट्रांजैक्शंस ऑफ़ गुड्स एंड सर्विसेस या
  165. 9:08प्री मॉडर्न वैल्यू स्ट्रक्चर्स को अपनी
  166. 9:11लेजिटिमेसी पेश करनी पड़ती है। अगर वो
  167. 9:15लेजिटिमिसी मॉडर्न ऑर्डर के साथ कंपैटिबल
  168. 9:18हो तो वो फ्लोरिश करती है। अगर वो मॉडर्न
  169. 9:21इंस्टीटश के साथ कंपैटिबल ना हो या ये के
  170. 9:26सपोर्टिव ना हो लेकिन बहरहाल वो उसको
  171. 9:28कंट्राडिक्ट भी ना कर रही हो तो भी मामला
  172. 9:31चलेगा। लेकिन अगर वो कंट्राडिक्ट कर रही
  173. 9:34है या रेिस्ट कर रही है तो फिर जो है फिर
  174. 9:38आप देखेंगे कि उनकी
  175. 9:41लीगल लेजिटिमेसी उसकी सोशल लेजिटिमेसी
  176. 9:44उसकी पिटिकल लेजिटिमेसी जो है वो
  177. 9:48सिस्टमिकली उसको परज किया जाता है। उसको
  178. 9:52क्रॉस किया जाता है। उसको
  179. 9:56मार्जिनलाइज किया जाता है। लिहाजा यह कहना
  180. 9:59कि कोई भी सिस्टम ऑफ़ जस्टिस या कोई भी
  181. 10:03इकोनॉमिक स्ट्रक्चर या कोई भी एजुकेशन
  182. 10:10मैकेनिज्म हर किस्म के वैल्यू स्ट्रक्चर
  183. 10:14या हर किस्म की जो है कनेक्टिविटी या हर
  184. 10:19किस्म की जो है अह
  185. 10:24ट्रांजैक्शंस ऑफ गुड एंड सर्विसेस के वो
  186. 10:28इनकपोरेट करेगी यानी कि वो
  187. 10:33ऑल इंक्लूसिव होंगी। तो ये बिल्कुल सही
  188. 10:36तसवुर नहीं है। मैं ऐसा समझता हूं। सही
  189. 10:39है। हो सकता है कि बिल्कुल गलत हो जो मैं
  190. 10:42आपको बता रहा हूं। ये बिल्कुल गलत हो और
  191. 10:44यही हो के
  192. 10:47ऑल इंक्लूसिव सिस्टम्स हो दुनिया में। अह
  193. 10:51और मेरी अंडरस्टैंडिंग ठीक है ना हो। हो
  194. 10:55लेकिन ये के मैं जो ये
  195. 10:58एस अ पिटिकल थरिस्ट मैं आपको जो समझाने की
  196. 11:01कोशिश कर रहा हूं वो ये के
  197. 11:05फैसिलिटेट करता है मॉडर्न एजुकेशन सिस्टम
  198. 11:08मॉडर्न
  199. 11:11सिस्टम ऑफ जस्टिस के साथ। अब आप ये सवाल
  200. 11:15जरूर उठा सकते हैं और आपको उठाना भी चाहिए
  201. 11:18कि भाई मॉडर्निटी जैसे हमारे ही उस्ताद
  202. 11:22हमारे डॉक्टर जावेद अकबर अंसारी के ही
  203. 11:25उस्ताद के बहुत सारे ऐसे
  204. 11:28लोग हैं जिन्होंने डॉक्टर साहब से पढ़ा
  205. 11:29वगैरह और उसके बाद उन्होंने ये बताया जो
  206. 11:32जो आजकल जो बात वो कर रहे हैं बहुत
  207. 11:38कुत के साथ कि भाई मॉडेनिटी कोई एक चीज का
  208. 11:41नाम नहीं है। ठीक है? तो ये आपने सुना
  209. 11:44होगा उड़तीउती बात आपके कानों में भी
  210. 11:46इंशा्लाह पढ़ी होगी कि भाई मॉडर्निटी के
  211. 11:49बारे में ये जो लोग हैं इनका ये
  212. 11:51अंडरस्टैंडिंग के मॉडेनिटी कोई एक
  213. 11:54कनेक्टिविटी का नाम है और कोई ऑर्गेनिक
  214. 11:57होल है और उस ऑर्गेनिक होल के की वही
  215. 12:02इंटरप्रिटेशन है जो ये बेवकूफ लोग कर रहे
  216. 12:04होते हैं। ये सही बात नहीं है। बल्कि
  217. 12:06मॉडर्निटी के बहुत सारी मैनिफेस्टेशन है।
  218. 12:09उसके बहुत सारे शेड्स और कलर्स है और उसकी
  219. 12:12बहुत सारी मैनिफेस्टेशंस है और ये उन सबको
  220. 12:16एक ही डंडे से हाकने की जो इन लोगों की
  221. 12:19कोशिश है वो एकेडेमिकली फ्लड है या
  222. 12:22एकेडेमिकली ठीक नहीं है। तो ये बिल्कुल
  223. 12:25सही बात है कि मॉडेनिटी के बहुत सारे शेड
  224. 12:28है। लेकिन याद रखें कि मॉडेनिटी एक
  225. 12:32कॉम्प्रहेंसिव
  226. 12:35सिस्टम ऑफ़ थॉट है। और उस कॉम्प्रहेंसिव
  227. 12:38सिस्टम ऑफ थॉट की कुछ ऐसी अनशेकेबल
  228. 12:42फाउंडेशंस मौजूद है जिनको हम आइडेंटिफाई
  229. 12:46करने की कोशिश करते हैं और जाहिर है कि हम
  230. 12:48उसके ऊपर इंसिस्ट करते हैं। हो सकता है कि
  231. 12:51वो गलत हो। हमारी अंडरस्टैंडिंग गलत हो या
  232. 12:54हमारे उस्ताद की अंडरस्टैंडिंग गलत हो। ये
  233. 12:57बिलकुल मुमकिन है। लेकिन ये कि हम पूरी
  234. 12:59कोशिश करते हैं कि हम उस पोजीशन को
  235. 13:03जस्टिफाई करें और रीइंफोर्स करते रहे। आगे
  236. 13:06अगर फज़ किया के मॉडेनिटी के वो खूबसूरत और
  237. 13:10कलर्स जो दूसरे भाई अब आइडेंटिफाई कर रहे
  238. 13:13हैं और इस व्यू को मायोपिक व्यू समझते हैं
  239. 13:18मॉडेनिटी का तो ठीक है वो मॉडेनिटी में
  240. 13:20अपना हिस्सा तलाश कर ले सही है लेकिन ये
  241. 13:23के जो ये बात कि भाई मुर्निटी की बहुत
  242. 13:27सारी मैनिफेस्टेशन है तो ये सही बात है कि
  243. 13:29मॉडेनिटी के अंदर कई
  244. 13:33जो है वो
  245. 13:35सिस्टम्स ऑफ एजुकेशन फंक्शनल है साइड बाय
  246. 13:39साइड और इसी तरीके से मॉडर्निटी के अंदर
  247. 13:42भी कई सिस्टम्स ऑफ जस्टिस जो है वो
  248. 13:45फंक्शनल है साइड बाय साइड लेकिन वो अपनी
  249. 13:51जेनेसिस के अंदर अपनी फाउंडेशन के अंदर
  250. 13:54कुछ ऐसी वैल्यूस रखते हैं जो कि उनके जो
  251. 13:58बाहमी डिफरेंसेस है उनमें कोई सब्सटेंटिव
  252. 14:03क्वालिटेटिव फाउंडेशन
  253. 14:05डिफरेंस पैदा नहीं करते। ये हम इस पर कायम
  254. 14:08है और हम ये समझते हैं कि वो जो डिफरेंसेस
  255. 14:12है उनके वो
  256. 14:16क्वालिटेटिव
  257. 14:20लेवल के ऊपर उनमें कोई सब्सटेंटिव फर्क
  258. 14:24नहीं है। यानी कि जब आप उसकी रूट कॉज को
  259. 14:26तलाश कर लेंगे तो आपको नजर आ जाएगा कि
  260. 14:30डिफरेंट
  261. 14:32रूट से वो पहुंचने की कोशिश एक ही
  262. 14:36ऑब्जेक्टिव की तरफ करते हैं। और अगर फर्ज
  263. 14:40किया कि हम आज की डिस्कशन के बाद ये तय कर
  264. 14:44लेते हैं कि भाई हम लोगों को पहले सिस्टम
  265. 14:46ऑफ जस्टिस को देखना चाहिए। तो हम मॉडर्न
  266. 14:50सिस्टम्स ऑफ जस्टिस को जब देखेंगे तो
  267. 14:53उसमें हम कई सिस्टम्स ऑफ जस्टिस जो है वह
  268. 14:56देखने की कोशिश करेंगे। लिबरल कसेप्शन ऑफ
  269. 14:59जस्टिस देखेंगे। लिबर्टेरियन कंसेप्शन ऑफ़
  270. 15:03जस्टिस देखेंगे। सोशलिस्ट कंसेप्शन ऑफ़
  271. 15:05जस्टिस देखेंगे। अपना
  272. 15:10नेशनलिस्ट कंसेप्शन ऑफ़ जस्टिस देखेंगे।
  273. 15:13फास्टिस्ट कंसेप्शन ऑफ़ जस्टिस देखेंगे।
  274. 15:16फेमिनिस्ट कंसेप्शन ऑफ़ जस्टिस देखेंगे।
  275. 15:18अनार्किक कंसेप्शन ऑफ जस्टिस देखेंगे। तो
  276. 15:22ये जो तमाम कसेप्शन और जस्टिस हम देखेंगे
  277. 15:25वो एक दूसरे से डिफरेंट है। जैसे कि हमारे
  278. 15:28भाई आजकल ये
  279. 15:30अपना बता रहे हैं लोगों को तबलीग कर रहे
  280. 15:33हैं कि भाई वो मुलिनिटी कोई एक चीज नहीं
  281. 15:36है बल्कि उसकी कई मैनिफेस्टेशन है।
  282. 15:40यह तो एक बच्चा भी जो मुर्निटी के ऊपर कोई
  283. 15:42किताब पढ़ता है तो वह यह बता सकता है कि
  284. 15:44हां भाई मुर्निटी में बड़ी डवर्सिटी है और
  285. 15:47आपकी मर्जी है कि आप इसको पिक करें या
  286. 15:50इसको पिक करें या इसको पिक करें। लेकिन ये
  287. 15:52कि उन वो तमाम जो डिफरेंसेस है वो रिड्यूस
  288. 15:55होकर जिस फ्रेमवर्क के अंदर चले जाते हैं
  289. 15:58उस फ्रेमवर्क को या उस फाउंडेशन को
  290. 16:02एक्सप्लेन करने की कोशिश करते रहे हैं।
  291. 16:04पिछले
  292. 16:06हमारे जो उस्ताद है 50 साल से करने की
  293. 16:08कोशिश कर रहे हैं। हम लोग जो है वो 25-25
  294. 16:11साल से ये कोशिश कर रहे हैं। तो बुनियादी
  295. 16:13तौर पर वो जो डिफरेंस है वो आइडेंटिफाई
  296. 16:16करते हैं। वो कोई सब्सटेंटिव डिफरेंस नहीं
  297. 16:18है। और हम उस डिफरेंस को एक सूडो डिफरेंस
  298. 16:23या फ़ जो है वह डिसए्रीमेंट कहते हैं। जैसे
  299. 16:28एक ही खानदान के अंदर मुख्तलिफ़ रिश्ते
  300. 16:31होते हैं और मुख्तलिफ़ रिश्तों के नतीजे
  301. 16:33में मुख्तलिफ़ मुखासत होती है और मुख्तलिफ़
  302. 16:36मुखासमतों के मुख्तलिफ़ नताइज़ निकलते हैं।
  303. 16:38लेकिन बहरहाल वो एक ही फैमिली के झगड़े
  304. 16:42होते हैं। तो बिल्कुल ये जो डिफरेंसेस
  305. 16:44मैंने आपको बताए या डिफरेंट सिस्टम्स ऑफ
  306. 16:46जस्टिस मैंने आपको बताए इन सिस्टम्स ऑफ
  307. 16:50जस्टिस को सीरियसली
  308. 16:52इनकी डिटेल के साथ इनके बड़े थिंकर्स के
  309. 16:56कॉन्टेक्स्ट में हम एक्सप्लेन करने की
  310. 16:59कोशिश करेंगे और जब ये हम सिस्टम्स ऑफ
  311. 17:02जस्टिस पढ़ लेंगे उसके बाद फिर हम सिस्टम
  312. 17:05ऑफ एजुकेशन पे जाएंगे। एक यह तरीका हो
  313. 17:10सकता है। मैंने जो पढ़ा वो इसी तरह पढ़ा है।
  314. 17:14यानी के मैंने पहले सिस्टम्स ऑफ जस्टिस
  315. 17:16पढ़े। सिस्टम्स ऑफ जस्टिस अंडरस्टैंड करने
  316. 17:19के बाद दूसरे सिस्टम्स को जब जैसे एजुकेशन
  317. 17:22सिस्टम को या हेल्थ केयर सिस्टम को या
  318. 17:27इकोनॉमिक सिस्टम को मैंने जब अंडरस्टैंड
  319. 17:30किया तो प्रायोरिटी जो है वो अ पिटिकल थरी
  320. 17:38की रही।
  321. 17:40लेकिन यह के बहुत सारे लोग जो फर्ज किया
  322. 17:43है कि कोई आप में से है कोई ऐसा स्टूडेंट
  323. 17:46जो जो कि एजुकेशन में काम कर रहा है और वो
  324. 17:49एजुकेशन स्ट्रक्चर के बारे में उसकी
  325. 17:51अंडरस्टैंडिंग मेरे से ज्यादा बेहतर हो
  326. 17:53क्योंकि उसने ज्यादा इन डेप्थ एनालिसिस
  327. 17:55किया हुआ हो इन्हीं सिस्टम्स का तो ये
  328. 17:58मुमकिन है कि वो ये कहे कि नहीं पहले जो
  329. 18:00है सिस्टम ऑफ एजुकेशन को अंडरस्टैंड करना
  330. 18:03चाहिए और सिस्टम ऑफ एजुकेशन को अंडरस्टैंड
  331. 18:06करने से पहले आपको सिस्टम ऑफ
  332. 18:09नॉलेज को अंडरस्टैंड करना चाहिए। यानी कि
  333. 18:11एपिस्टमोलॉजी को अंडरस्टैंड करना चाहिए।
  334. 18:14और एपिस्टमोलॉजी को जब आप अंडरस्टैंड कर
  335. 18:17लेंगे तो आपके लिए मुमकिन हो जाएगा कि आप
  336. 18:20एजुकेशन सिस्टम को प्रॉपर्ली सब्सटेंटिवली
  337. 18:24क्रॉस एग्जामिन कर सके। यह जो प्रेजेंटेशन
  338. 18:27अभी आपके सामने खुली हुई है, यह प्राइमरली
  339. 18:32इस कॉन्टेक्स्ट में ही बनी हुई है कि
  340. 18:34सिस्टम के लिए एजुकेशन स्ट्रक्चर क्या रोल
  341. 18:37प्ले करता है। अभी जाहिर है कि इसके इस ये
  342. 18:42क्योंकि एक ऐसी प्रेजेंटेशन थी जो सिर्फ
  343. 18:45एजुकेशनिस्टों के लिए थी और वो भी वो लोग
  344. 18:49जो कि कैरम डेवलप वगैरह करने की कोशिश
  345. 18:53करते हैं और नॉलेज और एजुकेशन को कंफ्यूज
  346. 18:55करते हैं उनके लिए ये बनाई गई प्रेजेंटेशन
  347. 18:58थी। अगर फर्ज किया कि हम ये तय कर लेते
  348. 19:00हैं कि नहीं पहले हमें सिस्टम ऑफ जस्टिस
  349. 19:02को पहले अंडरस्टैंड करना चाहिए और सिस्टम
  350. 19:05ऑफ जस्टिस के बाद फिर हमें आना चाहिए
  351. 19:11एजुकेशन मॉडल के ऊपर तो हम ये कर सकते
  352. 19:15हैं। या फिर यह के पहले आप यह वाली
  353. 19:18प्रेजेंटेशन हम देख लें और इस प्रेजेंटेशन
  354. 19:22के नतीजे में आपकी यह ख्वाहिश कि भाई यह
  355. 19:26तो या तो ये कि यह आदमी जो है वो बकवास
  356. 19:30बाजी कर रहा है या झूठ बोल रहा है या
  357. 19:34जो है वो इंटेलेक्चुअल लीप्स ले रहा है।
  358. 19:38या तो यह इंप्रेशन आए या फिर यह इंप्रेशन
  359. 19:41आए कि यार यह तो अंडरस्टैंड नहीं हो सकता
  360. 19:44जब तक कि यह ना पता चले कि लिबरल्स में और
  361. 19:47लिबर्टेरियंस में क्या फर्क है और
  362. 19:50सोशलिस्टों में और नेशनलिस्टों में क्या
  363. 19:54फर्क है और एथनोसेंट्रिक नेशनलिज्म में और
  364. 19:58कॉस्मोफॉल नेशनलिज्म में क्या फर्क है?
  365. 20:01अनार्किज्म जो है क्या वो भी कोई सिस्टम
  366. 20:03ऑफ जस्टिस प्रिज्यूम करता है या फेमिनिज्म
  367. 20:06जो है वो किस किस्म का सिस्टम ऑफ़ जस्टिस
  368. 20:09प्रज्यूम करता है या क्या फेमिनिज्म लिबरल
  369. 20:12नहीं होते क्या लिबरल फेमिनिस्ट नहीं होते
  370. 20:16क्या फेमिनिस्ट और लिबरल होना एक ही बात
  371. 20:18होती है क्या फेमिनिज्म एक ही तरह का है
  372. 20:20तो जाहिर है कि ये एक पूरा डोमेन है जाहिर
  373. 20:23है कि
  374. 20:25ये डिपेंड करता है कि आप आपका क्या
  375. 20:29ख्याल है इस सिलसिले में तो
  376. 20:33जो तमीद है वो यही है के
  377. 20:38जो भी बड़ा पॉलिटिकल थरिस्ट होगा वो अपनी
  378. 20:40पिटिकल थरी को खासतौर पे जैसे प्लेटो की
  379. 20:43सतह का कोई आदमी है या एरिस्टोटलल की सतह
  380. 20:46का आदमी है या
  381. 20:52जॉन डवी के सतह का या जॉन स्टवरर्ट मिल की
  382. 20:57सतह का आदमी है तो आप देखेंगे कि वो तीनों
  383. 21:01चीजों को किसी ना किसी लेवल पर इंगेज करने
  384. 21:05की कोशिश कर रहे होंगे। तो हम इनको
  385. 21:10एनालाइज कर सकते हैं, अंडरस्टैंड कर सकते
  386. 21:12हैं। और ये भी आप लोगों को पता चल जाएगा
  387. 21:16के कि मॉडर्निटी जो है
  388. 21:20के अंदर ये डिफरेंसेस रखने के बावजूद किस
  389. 21:23तरीके से ये सारे के सारे किसी ना किसी
  390. 21:26लेवल पर मॉडर्निटी या इनलाइटनमेंट वैल्यूस
  391. 21:29के ही जानशी अफकार हैं। और अगर आप
  392. 21:33इनलाइटनमेंट पे अटैक करते हैं तो आपको इन
  393. 21:36सबकी दुश्मनी से
  394. 21:39का सामना करना पड़ेगा। यानी कि आप देख ले
  395. 21:42के हमारी जो बात है वो सुनने के बाद वो
  396. 21:46नेशनलिस्ट जो होते हैं खासतौर पे जो
  397. 21:50एथनोसेंट्रिक नेशनलिस्ट है जो जबान की
  398. 21:54बुनियाद पर डिफरेंसेस को या आइडेंटिटी को
  399. 21:58रेग्नाइज करते हैं उनके उनके लिए हमारी जो
  400. 22:02पोजीशन है वो तकलीफ दे होती है। इसी तरीके
  401. 22:06से फेमिनिस्टों के लिए भी तकलीफ दे होती
  402. 22:08है। लिबरल्स के लिए भी तकलीफ दे होती है।
  403. 22:10अनार्किस्टों के लिए भी तकलीफ दे होती है।
  404. 22:13तो अगर हम अटैक कर रहे हैं इनलाइटनमेंट
  405. 22:17वैल्यूस के ऊपर तो इनको तकलीफ होने का
  406. 22:20मतलब ये है कि जड़ सबकी जो है वो वहीं से
  407. 22:25निकल रही है। तो हम लोगों को यह इनके पास
  408. 22:28इसके अलावा कोई और
  409. 22:31एतराज नहीं होता कि यह तो फिर इसका मतलब
  410. 22:34है कि ये तो तहजीब के खिलाफ है और तमदुन
  411. 22:38के खिलाफ है। तो इसका मतलब ये हुआ कि इनका
  412. 22:42जो तहजीब का तसवुर है या तमद्दुन का तसवुर
  413. 22:45है यादार का तसवुर है। जिस तरबियतगाह से
  414. 22:50इन्होंने ये सब कुछ हासिल किया है। उस
  415. 22:53तरबियतगाह के अकार को इन्होंने क्रिटिकली
  416. 22:56इवैलुएट नहीं किया। वो तो इनकी
  417. 22:58स्केमेटाइजेशन या प्रोसेस में इंटीग्रेट
  418. 23:00हो गया है। इनके जेनेटिक कोड के अंदर
  419. 23:02इंटीग्रेट हो गया है। लिहाजा अब इनकी जो
  420. 23:07जो सोचने समझने की कैटेगरीज है वो अस्यूम
  421. 23:13करती है उस चीज को कि भ ये तो नॉन
  422. 23:16कंटेस्टेबल बात है। अगर फज़िया के उन
  423. 23:19कैटेगरीज को ही आप क्वेश्चन करते हैं
  424. 23:22जिनके जरिए ये अंडरस्टैंड करते हैं तो फिर
  425. 23:24तो इनके लिए आपकी बात बिल्कुल बेमायने हो
  426. 23:27जाएगी। आप लोगों के सामने इस ये गुफ्तगू
  427. 23:31रखने का क्या बुनियादी मकसद है? आप लोगों
  428. 23:33के बारे में हमारा ऐसा ख्याल है। हो सकता
  429. 23:37है बिल्कुल गलत हो। आपके बारे में ऐसा
  430. 23:40ख्याल है वो भी इसलिए कि आप लोग रशीद के
  431. 23:44पास आए हुए हो और रशीद के
  432. 23:46कांटेक्ट में हो कि आप लोगों के ख्याल में
  433. 23:51सोचने और तमदुन की जो कैटेगरीज है वो कहीं
  434. 23:55और से आ रही है। प्री इनलाइटनमेंट है वो।
  435. 23:58यानी के ना वो प्री इनलाइटनमेंट है ना वो
  436. 24:01पोस्ट इनलाइटनमेंट है बल्कि वो अल्लाह और
  437. 24:04उसके रसूल की तरफ से आ रही है। और वो
  438. 24:08तारीख के अंदर मुकयद नहीं है बल्कि वो
  439. 24:12आपको एक ऐसा पैमाना प्रोवाइड करती है जो
  440. 24:15किसी भी तारीख दौर के अंदर आपकी रहनुमाई
  441. 24:18करने के लिए शाफी और काफी है। जिस तरीके
  442. 24:22से उन्होंने हुजूर ससल्लम के दुनिया से
  443. 24:24तशरीफ़ ले जाने के बाद सहाबा के तशरीफ़ ले
  444. 24:28जाने के बाद जो लोग पैदा हुए उनकी रहनुमाई
  445. 24:31की और उनको इस काबिल बनाया कि वो अपने
  446. 24:34सामने खड़े होने वाले जो
  447. 24:38यानी के ग्रीक्स या रोमंस
  448. 24:41जो इंटेलेक्चुअल ट्रेडिशन है उनको
  449. 24:44अंडरस्टैंड करते उसको इवैलुएट करते और फिर
  450. 24:48उसको कसौटी पे परखने की कोशिश करते और फिर
  451. 24:52उस कसौटी की परखने के बाद उसको बताते कि
  452. 24:56इसके अंदर क्या ऐसी चीज है जो के
  453. 24:59एक्सेप्टेबल नहीं है वगैरह वगैरह तो आप
  454. 25:03लोगों को ये बताने का मकसद सिर्फ ये है कि
  455. 25:05ये भी हमारी असमशन ही है ये हो सकता है
  456. 25:07बिल्कुल असमशन गलत हो लेकिन ये असमशन है।
  457. 25:11तो जो इंपॉर्टेंट चीज है जो आप लोगों को
  458. 25:13समझनी चाहिए वो ये है के
  459. 25:18जिस सिस्टम ऑफ जस्टिस को फिलहाल हम आपके
  460. 25:21सामने पेश करने की कोशिश करेंगे वो
  461. 25:24मोस्टली जो है वो मॉडर्न इनलाइटनमेंट
  462. 25:27डिस्कोर्स से इमर्ज होने वाले सिस्टम्स ऑफ़
  463. 25:29जस्टिस ही है। मोस्ट इनलाइटनमेंट जो नोशंस
  464. 25:34ऑफ़ जस्टिस जो इस वक्त अब डिवप हो रहे हैं
  465. 25:37जैसे शजक और
  466. 25:40जो डिडस या
  467. 25:47ग्रेव वगैरह के तो इन इनको भी हम देख सकते
  468. 25:51हैं। लेकिन फिलहाल जो है हम सिर्फ अपने आप
  469. 25:54को महदूद रखेंगे मॉडर्न
  470. 25:58सिस्टम्स ऑफ जस्टिस के साथ।
  471. 26:02इसी तरीके से जो एजुकेशन को हम देखेंगे तो
  472. 26:05उसमें भी हम वही क्रिटिक इस्तेमाल करेंगे
  473. 26:10जो कि
  474. 26:13मॉडर्न एजुकेशन सिस्टम के वो एस्पेक्ट जो
  475. 26:17कि बजाहिर आपको इमसिपेटरी लग रहे हो यानी
  476. 26:20के आजादी में बढ़ावा देने के तसवुरात लग
  477. 26:25रहे हो लेकिन हकीकतन वो बुनियादी तौर पर
  478. 26:29कंट्रोल के ही अल्टरनेटिव
  479. 26:32अपेटस है या अल्टरनेटिव मैकेनिज्म्स है तो
  480. 26:36वो हम बताने की कोशिश करेंगे। तो अभी आज
  481. 26:39जो है वैसे तो आप लोगों ने माशा्लाह पिछले
  482. 26:42जो पूरी यानी कि वो थी उसमें आप लोगों ने
  483. 26:46कोई गुफ्तगू नहीं की और
  484. 26:49ज्यादा बात नहीं की और इस तरह आप लोग
  485. 26:53पार्टिसिपेट करते थे क्वेश्चंस के में जिस
  486. 26:57तरह अपनी बहन का रिश्ता लेने
  487. 27:01लेने आने बहन का रिश्ता जो लोग लेने आते
  488. 27:04हैं तो घर के जो भाई होते हैं वो उनको घर
  489. 27:07वाले बोल देते हैं बेटा ज्यादा ट नहीं
  490. 27:09करना चुप करके बैठे रहना तो वो जिस तरह
  491. 27:11गुफ्तगू में शरीक होते हैं बिल्कुल उस तरह
  492. 27:13आप लोग शरीक हो जाते हैं तो मैं ये चाहता
  493. 27:16हूं कि आप लोग उसके बारे में डिस्कशन करें
  494. 27:19ओपन डिस्कशन करें एनालिसिस करें
  495. 27:22हमें भी पता चले कि आप लोग के की क्या जो
  496. 27:26है वो फ्रीक्वेंसी किस लेवल की है तो ताकि
  497. 27:29हमारे हमारे लिए फैसला करना मेरे और रशीद
  498. 27:31के लिए फैसला करना आसान होता है। तो आप
  499. 27:34लोग जो है वो मैं
  500. 27:39बात की क्या आप लोगों को बात समझ में आई
  501. 27:43और अगर समझ में आई तो आपके साथ में क्या
  502. 27:46क्या बेहतर रहेगा?
  503. 27:47सही है। सही है दानिया बात है।
  504. 27:51सलाम वालेकुम सर।
  505. 27:57अच्छा सर पहले तो ये कि वो मेरे केस में
  506. 27:59तो आपकी असमशन ठीक है। मैं तो अल्लाह और
  507. 28:01अल्लाह के नबी का मानने वाला हूं।
  508. 28:03एनलाइटनमेंट मेरे लिए तो कुफ का निजाम है।
  509. 28:06बहाल
  510. 28:08बाकी भाइयों का भी मैं यही अस्यूम करता
  511. 28:10हूं कि यू नो दे थिंक लाइक दैट। अच्छा
  512. 28:12मेरे जेहन में ये बात आ रही थी कि वैसे तो
  513. 28:15आप हमारे उस्ताद हैं। जैसे बेहतर समझे
  514. 28:18लेकिन आपको सुन के हमारे जो उस्ताद है
  515. 28:21डॉक्टर रशीद अशद साहब वो जो थोड़ा बहुत
  516. 28:24फलसफा पढ़ा है उससे यही समझ में आया कि हम
  517. 28:26तो ये मानते हैं कि पहले मेटाफिजिक्स एंड
  518. 28:28लेटर पिस्टमोलॉजी
  519. 28:30और
  520. 28:32अगर हम पहले एपिस्टेमोलॉजी को ले आएंगे तो
  521. 28:34फिर शायद यू नो यू नो वी विल बी स्टक इनू
  522. 28:37दैट एपिस्टेमिक फैलेसी और शायद उससे बाहर
  523. 28:40ना आ सके तो शायद मेरे ख्याल से बेहतर
  524. 28:42अप्रोच यही होगी कि पहले हम जस्टिस को
  525. 28:45देखें उसके बाद फिर हम उसके जो मीन्स है
  526. 28:48उसको देखें तो मेरे दिल में ये बात आती है
  527. 28:53बाकी भाइयों का
  528. 28:54दानियाल के सवाल का जवाब देो दानियाल ठीक
  529. 28:57है दानियाल पहले ये बहुत इंपॉर्टेंट बात
  530. 29:00है और ये तुम्हें ये कन्फ्यूजन भी मैं
  531. 29:02क्लियर कर दूं कि इसमें जो
  532. 29:05हम किसी को कहते हैं कि भाई इस प्रोसेस को
  533. 29:08हम जो है मॉडर्न सिस्टम्स ऑफ जस्टिस को हम
  534. 29:12इवैलुएट करने जाएंगे तो एकेडेमिकली या
  535. 29:17टेक्निकली हम
  536. 29:19इनवॉल्व हो जाते हैं उस फैलेसी की तरह जो
  537. 29:24दानियाल कह रहा है क्योंकि मॉडर्निटी ये
  538. 29:27मॉडर्निटी का ही
  539. 29:30की अप्रोच थी कि एपिस्टमोलॉजी प्रायर होती
  540. 29:33है मेटाफिजिक्स से और ग्रेजुअली
  541. 29:36मेटाफिजिक्स जो है वो
  542. 29:40एपिस्टोमोलॉजिकली इलिमिनेट हो गई
  543. 29:45एस अ सिस्टम ऑफ नॉलेज के लिहाजा जब हम
  544. 29:49कहेंगे कि हम सिस्टम ऑफ एजुकेशन को या
  545. 29:52सिस्टम ऑफ जस्टिस को देखेंगे मॉडर्न
  546. 29:55पर्सेक्टिव से तो हम
  547. 29:59ये जितने भी लोगों को पढ़ेंगे वो सारे के
  548. 30:02सारे एपिस्टोमोलॉजी को प्रायर समझते हैं
  549. 30:06मेटाफिजिक्स के एपिस्टोमोलॉजी को प्रायर
  550. 30:08समझते हैं मेटाफिजिक्स के और
  551. 30:12जो एजुकेशन सिस्टम सिस्टम्स को हम देखेंगे
  552. 30:14जाम सिस्टम ऑफ नॉलेज को भी उसमें भी
  553. 30:17एपिस्टमोलॉजी प्रायर होगी मेटाफिजिक्स के
  554. 30:20सही है तो जब हम मॉडनिटी को अप्रोच करते
  555. 30:23हैं बुनियादी तौर पर चाहे वो सिस्टम ऑफ
  556. 30:27एजुकेशन की बुनियाद पर हो सिस्टम ऑफ नॉलेज
  557. 30:31की बुनियाद पर हो या सिस्टम ऑफ इकोनमिक
  558. 30:34ट्रांजैक्शन की बुनियाद पर हो तीनों
  559. 30:36सूरतों में उसका नतीजा यही निकलता है कि
  560. 30:40लाशूरी तौर पर हम जो है वो यह कुबूल कर
  561. 30:44लेते हैं कि एपिस्टमोलॉजी प्रायर होती है
  562. 30:47मेटाफिजिक्स के और फिर आगे चलते चलते जैसे
  563. 30:50जैसे वो हम आगे के थिंकर्स पढ़ते चले जाते
  564. 30:53हैं हमें ये पता चलता चला जाता है कि
  565. 30:55माबाद तबिया तो इनफ
  566. 30:59अपनी कोई एपिसमोलॉजिकल
  567. 31:02बेसिस रखती नहीं है बल्कि वो तो
  568. 31:04प्रोजेक्शंस होती है या एक खास किस्म की
  569. 31:08जैसे कांट एक टर्म इस्तेमाल करता है
  570. 31:10मेटाफिजिकल इंपल्स होती है वो एक इंपल्सिव
  571. 31:14चीज है। तो
  572. 31:17हम हम जो जो लोग हैं यानी के जिन लोगों ने
  573. 31:21मुरलिटी को इस तरह से देखा है वो लोग आपको
  574. 31:25बार-बार याद दिलाते रहेंगे। चाहे वो
  575. 31:27सिस्टम ऑफ एजुकेशन पढ़ा रहे हो या पढ़ रहे
  576. 31:30हो या सिस्टम ऑफ जस्टिस पढ़ रहे हो या
  577. 31:33पढ़ा रहे हो। हम मुस्तकिल आपको याद दिलाते
  578. 31:35रहेंगे कि देखिए इसके पीछे मेटाफिजिक्स ये
  579. 31:38है। देखिए इसके पीछे मेटाफिजिक्स ये है।
  580. 31:40इसके पीछे मैटा फिजिक्स ये है। जो आपको
  581. 31:42वहां पे टेक्स्ट में दिखाई नहीं दे रही
  582. 31:44होगी। उसके लिए हम फिर एक्सकवेट करते हैं।
  583. 31:47रूट कॉज का तलाश करते हैं और फिर हम वहां
  584. 31:49पे जाकर उसको हिट करने की कोशिश करते हैं।
  585. 31:53जिसकी वजह से वो थ्रेड जो है वो थोड़ा सा
  586. 31:55ब्लीक हो जाता है या ब्लर हो जाता है और
  587. 31:58जो जो लोग जिनके दिल जो है वो उम्मीदों और
  588. 32:03आरजुओं से भरे हुए होते हैं और मॉडर्निटी
  589. 32:06की जो चकाचौंध होती है उनको फीरा कर रही
  590. 32:08होती है। उनको वह जो सिल्वर लाइन है वह
  591. 32:11दिखाई नहीं देती और फिर वह हम पर अटैक कर
  592. 32:13देते हैं। तो मैं तो यह बता रहा हूं कि हम
  593. 32:18जो है वो चाहे
  594. 32:20मॉडर्न एजुकेशन सिस्टम्स को देखें या
  595. 32:23मॉडर्न सिस्टम्स ऑफ जस्टिस को देखें।
  596. 32:26दोनों के अंदर
  597. 32:28कोलनरी है प्रायोरिटी ऑफ़ एपिस्टोमोलॉजी
  598. 32:31ओवर मेटाफिजिक्स एंड इन
  599. 32:40इन इट्स
  600. 32:42दैट देयर इज नो स्पेस ऑफ मेटाफिजिक्स
  601. 32:45लेफ्ट एट ऑल इन दिस सिस्टम ऑफ़ एजुकेशन एज
  602. 32:48वेल एज इन दिस सिस्टम ऑफ़ नॉलेज सिस्टम ऑफ़
  603. 32:52जस्टिस। ठीक है दानिया? तो हमें ये जो
  604. 32:56फैलेसी है कि एपिस्टमोलॉजी की प्रायोरिटी
  605. 33:00होगी
  606. 33:02मेटाफिजिक्स पे इसी इसी यानी के
  607. 33:07फैलेसी के साथ आगे चलना पड़ेगा। ठीक है?
  608. 33:10लेकिन ये कि मैं जब तक हूं मैं ये पढ़ा
  609. 33:12रहा हूं तो मैं तुम्हें और रशीद भी अपने
  610. 33:15अपने हिसाब से अगर डिस्कशन में शरीक होगा
  611. 33:18तो आपको याद दिलाता रहेगा के ये देख इसके
  612. 33:22पीछे जो बुनियादी तौर पर मेटाफिजिकल
  613. 33:24असेंशन है वो ये है। तो हम ये कोशिश करते
  614. 33:28रहेंगे। आपको याद दिलाते रहेंगे। यह जो था
  615. 33:32यह प्रॉब्लम क्लासिकल सिस्टम्स में नहीं
  616. 33:35आपको दिखाई देगा। जैसे प्लेटो के पास आपको
  617. 33:38दिखाई नहीं देता। क्यों? क्योंकि उनके पास
  618. 33:40मेटाफिजिक्स प्रायर थी एपिस्टोमोलॉजी से।
  619. 33:43इसी तरीके से क्रिश्चियन सिस्टम ऑफ़
  620. 33:46एजुकेशन जो है या क्रिश्चियन सिस्टम ऑफ़
  621. 33:50जस्टिस जो है उसके अंदर मेटाफिजिक्स को
  622. 33:53प्रायोरिटी होगी एपिस्टोमोलॉजी के ऊपर।
  623. 33:55इसी तरीके से अगर आप बेबिलोनियन
  624. 33:58सिस्टम ऑफ़ एजुकेशन देखेंगे तो बेबिलोनियन
  625. 34:02सिस्टम ऑफ़ एजुकेशन के अंदर मेटाफिजिक्स को
  626. 34:06प्रायोरिटी है। इसी तरीके से मैं पूरे
  627. 34:10यकीन के साथ तो नहीं कह सकता लेकिन ये कि
  628. 34:13अगर आप हिंदू
  629. 34:15ट्रेडिशन को या इंडियन एपिस्टमोलॉजिकल
  630. 34:19ट्रेडिशन को देखेंगे तो वहां पर भी
  631. 34:22मेटाफिजिक्स यकीनन प्रायर होगी। मैं पूरे
  632. 34:25मैं उससे नहीं कह सकता क्योंकि मैं उसको
  633. 34:27बहुत अच्छी तरह नहीं पढ़ा लेकिन ये कि जिन
  634. 34:29लोगों को थोड़ा बहुत हमने पढ़ा है उसमें
  635. 34:32हमें बड़ा ऑब्वियस दिखाई देता है कि इनकी
  636. 34:35मेटाफिजिक्स जो है वो इनकी एपिस्टेमोलॉजी
  637. 34:38को गाइड करती है और एपिस्टमोलॉजी जो है वो
  638. 34:44इंडिपेंडेंट नहीं है मेटाफिजिक्स से। ठीक
  639. 34:46है जी। अब आप अगर दानियाल को कोई बात करनी
  640. 34:50है तो कर सकता है। नहीं तो फिर तैयब बात
  641. 34:53करेगा। नहीं सर मैं तो आई एम फाइन तैब भाई
  642. 34:56अगर कुछ पूछना चाहते हैं तो
  643. 34:57ठीक है तैयब तुम दोनों की आवाजें बिल्कुल
  644. 35:00एक जैसी है तैयब की और मुझे तो लग रहा है
  645. 35:03तैयब ही दो तरह की आईडीज से बैठा हुआ है
  646. 35:07बात कर रहा है
  647. 35:08सर मैं आपको अपनी शक्ल दिखा देता हूं
  648. 35:09[हंसी]
  649. 35:10नहीं नहीं
  650. 35:12मजाक कर बिल्कुल तैयब जैसी आवाज है चलो
  651. 35:16जी अस्सलाम वालेकुम नवाब भाई कैसे हैं आप
  652. 35:19खैरियत से हैं अच्छा सर उसमें अ ये है
  653. 35:22आपने आपने जिस तरह अभी दानियाल भाई के
  654. 35:24सवाल के जवाब में बड़ी डिटेल से आपने
  655. 35:26बताया हमने आपसे ही खालिद भाई से डॉक्टर
  656. 35:28इमनान साहब से हमने ये चीज सीखी है के जो
  657. 35:31रिवायती जो एक सिस्टम है उसके अंदर जाहिर
  658. 35:35है जो मेटाफिजिक्स है इट कम्स फर्स्ट एंड
  659. 35:37देन जो एपिस्टेमोलॉजी है वो इसी से डिराइव
  660. 35:40होती है। उसमें आपने माशा्लाह बड़ी डिटेल
  661. 35:42से अब दोबारा इसको जो है वो इबोरेट भी कर
  662. 35:44दिया। मेरा ख्याल है दानियल भाई और मैं जो
  663. 35:47पूछना चाह रहे हैं वो ये है कि हम पहले
  664. 35:49सिस्टम्स को डिस्कस करेंगे इन डिटेल
  665. 35:51मुख्तल जो सिस्टम्स है पहले हम उनको
  666. 35:53देखेंगे या हम डायरेक्टली जो है वो
  667. 35:55एजुकेशन पे हम बात करेंगे मैं भी थोड़ा सा
  668. 35:58असल में इसमें इंटरेस्टेड हूं कि आप इस
  669. 35:59हवाले से बताएं कि हमारा जो मेथड है उसको
  670. 36:02मतलब किस तरह से हम ले चलेंगे जो मेरा
  671. 36:05अपना भी एक जो जो है वो ये है कि मतलब मैं
  672. 36:08चाहूंगा कि आप पहले सिस्टम को जरा इन
  673. 36:10डिटेल थोड़ा डिस्कस कीजिएगा फिर उसके एक
  674. 36:13आउटकम जो है मुख्तलिफ जैसे एजुकेशन सिस्टम
  675. 36:15है जैसे वो है मतलब उसको फिर अगर आप बात
  676. 36:17करें तो मेरे ख्याल में ज्यादा एक
  677. 36:19कॉम्प्रहेंसिव भी होगा अगरचे वो थोड़ा
  678. 36:21टाइम टेकिंग होगा।
  679. 36:24ये वाली जो प्रेजेंटेशन है इसमें हमने
  680. 36:27सिस्टम्स को एक्सप्लेन किया है। सिस्टम को
  681. 36:29एक्सप्लेन किया है और सिस्टम की जो
  682. 36:34ऑब्जेक्टिव है उसको भी थोड़ा बहुत यानी कि
  683. 36:37क्रिटिकली इवैलुएट करने की कोशिश की हुई
  684. 36:40है। यानी के
  685. 36:46जैसे
  686. 36:49सही है। यानी के सिस्टम क्या होता है और
  687. 36:54सिस्टम के अंदर लेकिन अगर आप देखें के जब
  688. 36:58भी हम सिस्टम को डिफाइन करने की कोशिश
  689. 37:00करेंगे तो
  690. 37:03उसके साथ कुछ वैल्यूस जो है वो इंटीग्रेट
  691. 37:06कर जाएगी। क्योंकि सिस्टम एक ऐसे ऑर्डर को
  692. 37:11आइडेंटिफाई करने की कोशिश करेगा जो कि
  693. 37:15रिपीट हो सके। यानी कि जब हम कहते हैं ना
  694. 37:17कि भाई ये हमने एक सिस्टम बना दिया है।
  695. 37:20हेल्थ केयर का सिस्टम बना दिया है। ये
  696. 37:22हमने जो है एजुकेशन सिस्टम बना दिया है।
  697. 37:25ये हमने इकोनमिक सिस्टम बना दिया है। तो
  698. 37:29इसका मतलब ये होता है कि उसके पीछे खास
  699. 37:32किस्म का
  700. 37:35एक खास किस्म की एक्सेप्ट
  701. 37:39एक्सपेक्टेशंस एक खास किस्म की
  702. 37:41प्रोजेक्शंस और ये खास किस्म की
  703. 37:43प्रेडिक्टबिलिटी
  704. 37:45को हम इंश्योर कर देते हैं। अगर फर्ज किया
  705. 37:47कि सिस्टम मौजूद नहीं होगा तो आप
  706. 37:49प्रोजेक्शंस नहीं बना पाएंगे।
  707. 37:51प्रेडिक्शनंस नहीं कर पाएंगे।
  708. 37:54एक्सपेक्टेशन आपकी जो होगी मैच नहीं करेगी
  709. 37:57तो आपके लिए स्मूथ फंक्शन
  710. 38:00स्मूथली फंक्शन करना मुमकिन नहीं होगा। तो
  711. 38:04ये तो चाहे हम सिस्टम ऑफ जस्टिस देखें या
  712. 38:08हम सिस्टम ऑफ एजुकेशन देखें। सिस्टम को तो
  713. 38:11हम पहले एक्सप्लेन करेंगे ही। जैसे इस
  714. 38:14वाले में भी किया हुआ है और जो जैसे मैंने
  715. 38:19पता नहीं आप लोगों को दिखाई दे रहा है
  716. 38:21स्क्रीन के ऊपर या नहीं कि सिस्टम क्या है
  717. 38:24लेकिन फिर जैसे ही हम सिस्टम के ऊपर जाते
  718. 38:26हैं तो फिर उसके साथ कुछ और चीजें जुड़
  719. 38:29जाती है और वो कुछ चीजें जो है वो अस्यूम
  720. 38:34करती है कि आपको जो है वो पता चल जाए पता
  721. 38:40होगा क्या कि
  722. 38:42जस्टिस क्या होता है और ऑर्डर क्या होता
  723. 38:45है और वगैरह वगैरह तो ये वाला जो
  724. 38:48प्रेजेंटेशन है पहले आपको सिस्टम को ही
  725. 38:51एक्सप्लेन करने की कोशिश करेंगे लेकिन
  726. 38:54सिस्टम को डिफाइन करने की कोशिश करेंगे इन
  727. 38:57टर्म्स ऑफ़ एजुकेशन इन टर्म्स ऑफ़ एजुकेशन
  728. 39:00तो ये कोई ये इतनी कोई बड़ी बात नहीं है कि
  729. 39:04हम पहले सिस्टम इन इटसेल्फ को एक्सप्लेन
  730. 39:06कर ले
  731. 39:08चाहे हम एजुकेशन सिस्टम को करें चाहे हम
  732. 39:12सिस्टम ऑफ और जस्टिस को करें। सिस्टम को
  733. 39:14तो हम अंडरस्टैंड करेंगे ही। वो हमने
  734. 39:17बनाया हुआ भी है और यह आपको नजर में भी आ
  735. 39:20रहा होगा कि ये प्रेजेंटेशन पहले से तक के
  736. 39:24जो क्वेश्चन है उसको भी लेकिन
  737. 39:28सिस्टम के साथ जो है पावर का कासेप्ट
  738. 39:31एसोसिएटेड होता है और डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ़
  739. 39:34पावर का भी तो फिर वो हम हमें उन चीजों को
  740. 39:38देखना पड़ता है और जो हम देखेंगे तो ये तो
  741. 39:43कोई ये दोनों सूरतों में हम करेंगे।
  742. 39:50आप में से जाहिर है कि कोई बच्चा तो नहीं
  743. 39:53है ना सब समझदार बड़े लोग है ना तो ये
  744. 39:59ऐसे लोगों के लिए ही है जो अच्छी खासी
  745. 40:02अंडरस्टैंडिंग रखते हैं और सिस्टम्स के
  746. 40:05अंदर काम भी कर रहे हैं। लिहाजा उनके लिए
  747. 40:08ये चीजें वो जो प्रैक्टिस कर रहे हैं वो
  748. 40:10उनके लिए एविडेंट होती चली जाएगी।
  749. 40:19लेकिन यह सवाल इसका फैसला कि भाई पहले हम
  750. 40:22एजुकेशन को देखें या पहले हम जो है
  751. 40:26वो
  752. 40:28सिस्टम ऑफ जस्टिस को देखें। ये फैसला आप
  753. 40:32लोगों ने करना है।
  754. 40:36अब आपको ये है ना जैसे दानियाल ने और अपना
  755. 40:41तैयब ने अपनी बात कर ली। इस तरह जितने भी
  756. 40:44लोग है ना वो अपनी बात करें और घबराए नहीं
  757. 40:47और अगर फर्ज गया कि उनको लगता है कि भाई
  758. 40:49ये रिकॉर्डिंग हो रही है फिर मेरी चमपू जी
  759. 40:51की बात पे हसेंगे ये भी थोड़ा शैतान आदमी
  760. 40:54ने मजाक ना उड़ाए मेरा तो मैं आप लोगों से
  761. 40:57कहता हूं कि मैं जो है कोई नहीं मजाक नहीं
  762. 41:00उड़ाऊंगा किसी का और से कह के हम जो है वो
  763. 41:04रिकॉर्डिंग भी रुकवा देते हैं। रिकॉर्डिंग
  764. 41:06भी बंद कर देते हैं। आपकी जो भी पॉइंट ऑफ
  765. 41:08व्यू होगा उसके नजर में कोई आपका मजाक मैं
  766. 41:11जरा पानी पी के सलाम
  767. 41:12वालेकुम
  768. 41:15वालेकुम सलाम वकार
  769. 41:19अच्छा सर ऐसा है कि मेरा इस पूरे टॉपिक्स
  770. 41:24या सिस्टम यामोलॉजी और इस तरह की चीजों के
  771. 41:28बारे में बहुत कम इल्म है और मैं पहली दफा
  772. 41:32आपके साथ शामिल हो रहा हूं। पहले एक
  773. 41:36जमान साहब का एक था पेज वहां पर आप कुछ
  774. 41:39पढ़ाते होते थे वहां पर था आपके साथ लेकिन
  775. 41:42वो काफी पुरानी बात है तो इसलिए मैं तो
  776. 41:46अभी पहले सीखने के फेज में हूं थोड़ा
  777. 41:49समझूंगा उसके बाद आपसे कुछ डिस्कस करूंगा
  778. 41:52इंशा्लाह
  779. 41:56देखो वकार मसला ये है के
  780. 42:01इंसान की जिंदगी को जो डायरेक्ट
  781. 42:03डायरेक्टली पहले हिट कर रहा होता है ना
  782. 42:05फर्ज करो कि तुम कहीं जा रहे हो और
  783. 42:09तुम्हारे सफर में हो तुम सही है और सफर
  784. 42:13में तुमने जूती पहनी हुई है और जूती जूता
  785. 42:17जो पहना हुआ है उसके अंदर कोई कील है ठीक
  786. 42:21है अब वो कील जो है वो चुभ चुने पैर डालते
  787. 42:25ही चुबी पैर डालते ही तुम्हारे कील पैर
  788. 42:27में चुबी और उनको यार मसला यह है कि अभी
  789. 42:30तो भाई मैं सफर शुरू कर चुका हूं अब चुभ
  790. 42:32रही है तो चुबने
  791. 42:34तो चुभ रही है तो चुभने दो तो
  792. 42:39तुम सफर कैसे करोगे वो तो चुभ रही है जब
  793. 42:42हम लोग एनसीसी करते थे पता नहीं तुम लोगों
  794. 42:44ने की या नहीं की तो हम जब एनसीसी शुरू
  795. 42:47हुई हमारी इस कॉलेज के अंदर तो हमें पहले
  796. 42:50दिन जो लेक्चर दिया वो सोल्जर था वो आया
  797. 42:53और उसने बताया कि देखो जो सोल्जर जो होता
  798. 42:55है उसको जो चलना होता है बहुत और सोल्जर
  799. 42:58के जो पंजे होते हैं ना वो उसकी जिंदगी की
  800. 43:01जमानत देते
  801. 43:03सोल्जर के जो पंजे हैं, पैर जिन पर वो चल
  802. 43:06रहा है अगर वो खराब हो गए तो वो 10
  803. 43:09किलोमीटर कैसे चलेगा? अच्छा और सोल्जर के
  804. 43:14चलने के लिए उसके जूते बड़े इंपॉर्टेंट
  805. 43:16होते हैं। तो जूते के अंदर अगर लगा कोई
  806. 43:20जख्म या जूता सही नहीं है, जूता छोटा है
  807. 43:23या जूता बड़ा है तो वो क्या करेगा कि वो
  808. 43:26आपको पैर में छाला डाल देगा। छाला डाल
  809. 43:28देगा
  810. 43:30और आपको तो सामान भी उठाना है और आगे भी
  811. 43:34बढ़ना है और चलना भी है। तो वो जो है वो
  812. 43:38छाला जो है वो 1 किलोमीटर चलने के बाद आप
  813. 43:42बर्दाश्त भी कर रहे हो वो उसको जख्म बना
  814. 43:44देगा। जख्म बना देने के नतीजे में वो खाल
  815. 43:47फाड़ देगा आपकी। और जब आप 10 किलोमीटर चल
  816. 43:49के वहां पहुंचोगे तो आप बेकार हो चुके
  817. 43:52होंगे। आप ना कौम के काम के होगे, ना फौज
  818. 43:55के काम के होगे, ना मुल्क के किसी के काम
  819. 43:58के नहीं होंगे। क्योंकि आपने जूते पर
  820. 44:00तवज्जो नहीं।
  821. 44:02तो वो कहते हैं भाई जूता इंतहाई
  822. 44:05इंपॉर्टेंट होता है। इसी तरह जब आप कोई
  823. 44:08ख्याल सीखने जाते हो, कोई अंडरस्टैंडिंग
  824. 44:11सीखने जाते हो, कोई सिस्टम, कोई कोई भी
  825. 44:15चीज जब आप अंडरस्टैंड करने जाते हो तो उस
  826. 44:18अंडरस्टैंडिंग के दौरान कोई ऐसा कासेप्ट,
  827. 44:22कोई ऐसा आइडिया या कोई कोई ऐसी चीज होती
  828. 44:26है जो आपको चूक जाती है फौरन से। यानी कि
  829. 44:29आपके ज़हन में वो एक कचोके की तरह चुभना
  830. 44:32शुरू। इसी तरीके आपके दिल में फांस की तरह
  831. 44:35चुभना शुरू। जब तक आप उसे निकालोगे नहीं
  832. 44:38ना भाई आप उस परसूट ऑफ नॉलेज में आगे सफर
  833. 44:42नहीं कर सकोगे। अगर उसी फांस के साथ आप
  834. 44:44आगे चले। आपने कहा चलो चलो यार मुझे चुभ
  835. 44:47रही है बात कोई बात नहीं। दूसरों को तो
  836. 44:49नहीं चुभ रही ना। तो वो फांस जो है वो
  837. 44:52आपके लिए आपकी अंडरस्टैंडिंग को करप्ट कर
  838. 44:55देगी। तो
  839. 44:58यानी के जब आप किसी भी सिस्टम ऑफ थॉट को
  840. 45:00अंडरस्टैंड करने की कोशिश करें। मैं पढ़ा
  841. 45:02हूं कोई भी पढ़ाए आप खुद पढ़ो।
  842. 45:06जी
  843. 45:07फांस आपके जेहन में नहीं होनी चाहिए। जैसे
  844. 45:10मेरे जेहन में ये फांस नहीं है कि मजहब से
  845. 45:14जान नहीं छुड़ाई तो क्या होगा?
  846. 45:17लेकिन जब आप मॉडर्न सिस्टम में जाते हैं
  847. 45:21वो आपको एपिस्टमोलॉजिकली कन्वेंस करता है
  848. 45:23कि भाई मजहब की फांस पहले निकाल के अलग रख
  849. 45:26दो। भाई मजहब की फांस मजहब आपको फांस लग
  850. 45:30रहा है या नहीं लग रहा। अगर जैसे मुझे
  851. 45:34नहीं लग रहा मजहब फास बल्कि मुझे मजहब
  852. 45:37अपना वजूद लग रहा है तो मेरे लिए तो
  853. 45:40प्रॉब्लम नहीं है भाई। मुझे कोई मसला नहीं
  854. 45:42है। तो मैं किसी भी एपिस्टमोलॉजी को पढूं
  855. 45:45या किसी भी मेटाफिजिक्स को पढूं क्योंकि
  856. 45:46मजहब को मैं फास समझता ही नहीं। मुझे वो
  857. 45:50कील लगता ही नहीं। मुझे वो चुभ नहीं रहा
  858. 45:53बल्कि मैं मेरा वजूद के अंदर वो पिनाह है।
  859. 45:57तो वो मेरा पार्ट ऑफ द बीइंग है तो मुझे
  860. 46:00मसला नहीं है। मुझे प्रॉब्लम नहीं है।
  861. 46:02लेकिन हो सकता है किसी भाई को हो
  862. 46:04प्रॉब्लम। इसी तरह किसी के लिए मजहब हो
  863. 46:07सकता है। किसी के लिए जो है जेंडर हो सकता
  864. 46:11है। किसी के लिए क्लास हो सकता है। किसी
  865. 46:14के लिए एथनिसिटी हो सकता है। किसी के लिए
  866. 46:18जो है ट्रेडिशन हो सकते हैं। किसी के लिए
  867. 46:23जो है वो
  868. 46:25क्या बोलते हैं? प्रोग्रेस हो सकता है।
  869. 46:28किसी के लिए प्लेजर हो सकता है। इस तरह हर
  870. 46:32इंसान की अलग-अलग फांसे हैं। फांसे
  871. 46:36अलग-अलग कीले हैं। तो वो ये बात नहीं हो
  872. 46:40रही कि कोई कम जानता है, कोई ज्यादा जानता
  873. 46:43है। डजंट मैटर लेकिन ये के मैं जो आप
  874. 46:47लोगों से बुलवा रहा हूं सिर्फ ये बुलवा
  875. 46:49रहा हूं कि मुझे फैसला करने में आसानी है।
  876. 46:55जी ठीक है सर
  877. 46:57ठीक है
  878. 47:19जी सलाम
  879. 47:21जी अस्सलाम वालेकुम सर
  880. 47:24वालेकुम सलाम
  881. 47:26सर जो मुझे अभी आपकी बात से समझ में आ रहा
  882. 47:29है वो यही है कि जैसे
  883. 47:32सिस्टम ऑफ एजुकेशन को समझने के लिए उसकी
  884. 47:34बेसिस यानी कि जो उसके फंडामेंटल
  885. 47:37प्रिंसिपल्स हैं और खास तौर पर उसके जो
  886. 47:40उसके पीछे जो उसका एक जस्टिस का कांसेप्ट
  887. 47:42है उसको समझना पहले जरूरी है। एंड देन
  888. 47:45आफ्टरवर्ड्स वी कैन अंडरस्टैंड द एजुकेशन
  889. 47:47एंड दिस सिस्टम्स ऑफ एजुकेशन। तो सर ये
  890. 47:50बिल्कुल सही बात है आप मतलब मुझे भी यही
  891. 47:53समझ में आ रही है कि हमें बेहतर है कि
  892. 47:54पहले हम सिस्टम्स ऑफ जस्टिस को पहले समझ
  893. 47:57लें। जैसे आप बता रहे हैं एंड देन उसके
  894. 48:00बेसिस के ऊपर एजुकेशन को सर।
  895. 48:03और सर एक और भी बात जैसे आपने एक बात अभी
  896. 48:06कही कि पोस्ट एनलाइटनमेंट
  897. 48:09जो थिंकर्स है यानी कि ये जो पोस्ट
  898. 48:12मॉडर्निटी के जो थिंकर्स है वो जिस तरीके
  899. 48:15की चीजों को एक्सप्लेन करते हैं फॉर
  900. 48:17एग्जांपल डलूस या जज
  901. 48:20वो फर्क लगता है नजर आता है कि थोड़ा बहुत
  902. 48:22डिफरेंट है। लेकिन ये कि अब डीप डाउन तो
  903. 48:25वो भी वही बात ही करते नजर आते हैं जो कि
  904. 48:28प्योर एनलाइटनमेंट थॉट के अंदर से निकलती
  905. 48:31आ रही है। कि बिल्कुल मतलब शायद ज्यादा
  906. 48:33पावरफुल और फोर्सफुली देन कांट और ह्यूम
  907. 48:37और लॉक
  908. 48:38वो ज्यादा फोर्सफुली और बयान कर रहे हैं
  909. 48:42कि शख्स या गिरोही आजादी को कैसे पाना है
  910. 48:47और उसके लिए क्या करना है बनिस्बत ये है
  911. 48:50कि जो कि मॉडर्निस्ट थिंकर थे तो
  912. 48:53वो तो वही काम कर रहे हैं जो कि
  913. 48:55एनलाइटनमेंट कर रही थी बल्कि शायद ज्यादा
  914. 48:57फोर्सफुली कर रहे हैं। जी बिल्कुल और अली
  915. 49:01भाई का जो अगर आप काम देखें तो अली भाई का
  916. 49:04शुरू का काम जो है जो वो यहां पे थे
  917. 49:07उन्होंने यही बताने की कोशिश की उसमें कोई
  918. 49:10फर्क नहीं है ऐसा सब्सटेंटिव फर्क नहीं है
  919. 49:13और
  920. 49:15पोस्ट मॉडर्निज्म जो है वो लिमिटेशंस
  921. 49:18आइडेंटिफाई कर रही है मॉडेनिटी की इस सेंस
  922. 49:21में कि क्यों वो
  923. 49:24हकीकी मायनों में इनलाइटेंडन नहीं हो पा
  924. 49:27रही और अपनी जो बाकियात थी इ्तमाईत इ्तमाई
  925. 49:31वाकियात से अपनी जान नहीं छुड़ा पाई और
  926. 49:35अखदार से अपनी जान नहीं छुड़ा पाई और
  927. 49:38यूनिवर्सलिटी से अपनी जान नहीं छुड़ा पाई
  928. 49:40जो के बुनियादी तौर पर एंटायर इनलाइटनमेंट
  929. 49:44कॉन्सिक्व्स जनरेट कर रही है। बिल्कुल सही
  930. 49:46बात है। ऐसा ही है और ये के
  931. 49:51पोस्ट मॉडर्निटी जो है वो बुनियादी तौर पर
  932. 49:54फिश विदाउट वाटर है मॉडेनिटी के बगैर।
  933. 49:57यानी कि ये जितने भी उस मॉडर्निस्ट आपको
  934. 50:00नजर आते हैं यहां चाहे पाकिस्तान के अंदर
  935. 50:03हो या पाकिस्तान से बाहर हो यानी कि तीसरी
  936. 50:06दुनिया के जो भाई है उनकी बात कर रहा हूं
  937. 50:08और जो मगरबी दुनिया में बैठे हुए हैं वो
  938. 50:11तो सारे मॉडर्न इंस्टीटश को उनके से ही
  939. 50:15बेनिफिट हो रहे है और इनकी जो स्टेट थ्यरी
  940. 50:18है या
  941. 50:23पनिशमेंट थ्यरी है और जो ऑर्डर सस्टेनेंस
  942. 50:27की जो मॉडल्स है उनके ऊपर सिवाय एतराज
  943. 50:30करने के उनके पास कोई अल्टरनेटिव अपेरेटस
  944. 50:32तो नहीं है मुरिटी के बगैर और ये तो हमने
  945. 50:35आंखें खोल के पोस्ट यानी के वॉर अगेंस्ट
  946. 50:39टेरर के दौरान हमने ये अपनी आंखों से देखा
  947. 50:42वॉर अगेंस्ट टेरर के अंदर तो हमने ये देखा
  948. 50:45कि सारे के सारे पोस्ट मॉडर्निस्ट की
  949. 50:47घिग्गी बन गई कि भ ये इस चैलेंज को अब हम
  950. 50:51कैसे देखेंगे और सारे के सारे सब सबसाइड
  951. 50:55हो गए तो तो ये बिल्कुल सही बात है। ऐसा
  952. 50:58ही है कि पोस्ट मॉडेनिटी जो है वो
  953. 51:02जो है कोई
  954. 51:06रियल अल्टरनेटिव ऑफ मॉडेनिटी या पेश नहीं
  955. 51:10करती और वो भी मॉडेनिटी को कजम कर कर ही
  956. 51:13उसको उसमें कुछ कली फुलने और नए लगा देती
  957. 51:16है और
  958. 51:19सही बात है ये। ठीक बिलकुल सही बात है जी
  959. 51:21सोेल
  960. 51:25हां सोेल
  961. 51:26अस्सलाम वालेकुम सर
  962. 51:27वालेकुम
  963. 51:29सर जहां तक अभी तक जो डिस्कशन हुई है मैं
  964. 51:31समझ रहा हूं कि हम सिस्टम ऑफ एजुकेशन और
  965. 51:33सिस्टम ऑफ जस्टिस के हवाले से बात करना
  966. 51:35चाह रहे हैं और उसमें प्रोटाइज करना चाह
  967. 51:38रहे हैं व्हिच इजेंट और उसमें हमने कुछ
  968. 51:41एरा फिक्स किया कि हम पोस्ट मॉडर्निज्म के
  969. 51:43हवाले से या मॉडर्निज्म के हवाले से के
  970. 51:46चलेंगे तो हम जो भी सिस्टम की बात कर रहे
  971. 51:50हैं सिस्टम ऑफ़ एजुकेशन हो या सिस्टम ऑफ
  972. 51:53जस्टिस हो या कोई और भी सिस्टम हो वो सारे
  973. 51:55के सारे सिस्टम किसी आइडियोलॉजी से ड्रिवन
  974. 51:58होते हैं।
  975. 51:59जी
  976. 52:00ठीक है? तो अगर हमने किस आइडियोलॉजी को
  977. 52:03पहले हमने डिसाइड करना होगा कि किस
  978. 52:05आइडियोलॉजी की हम बात कर रहे हैं और उस
  979. 52:07आइडियोलॉजी के तहत उसके आगे जो भी सिस्टम
  980. 52:11हम ले चलना चाहेंगे हमें उसकी बात करनी
  981. 52:13पड़ेगी
  982. 52:15और इसको हमको फोकस मतलब लिमिट नहीं करना
  983. 52:18चाहिए मॉडर्निज्म या पोस्ट मॉडर्निज्म के
  984. 52:21हवाले से
  985. 52:23जो मॉडर्निज्म है वो उसने मल्टीपल इडलॉजीस
  986. 52:28पैदा की जैसे के अगर आप सिस्टम ऑफ़ जस्टिस
  987. 52:31को देख ना तो हर पिटिकल सिस्टम ऑफ़ जस्टिस
  988. 52:35जो है वो एक खास किस्म के पिटिकल आइडियल
  989. 52:38के ऊपर खड़ा होता है और वो पिटिकल आइडियल
  990. 52:41उसकी आइडियोलॉजी को जनरेट करता है। मिसाल
  991. 52:45के तौर पे जैसे
  992. 52:49इ्तमाइयत पसंद जो मॉडर्निस्ट है वो ये
  993. 52:53कहते हैं कि फर्द अपनी इनफरादी हैसियत में
  994. 52:56अपनी सियासी वसीरत का इज़हार नहीं करता।
  995. 52:59बल्कि फर्द अपनी इ्तमाई हैसियत में अपनी
  996. 53:02सियासी एदाफ का
  997. 53:05करता है या तन करना चाहिए तो इसका मतलब ये
  998. 53:09होगा कि असल में जो उसकी इडलॉजिकल पोजीशन
  999. 53:12है वो एंटायर इंडिविजुअलिटी होती है बल्कि
  1000. 53:16वो कलेक्टिविटी के साथ चलता है। अच्छा चलो
  1001. 53:19अब आपने कह दिया जी तो यह तो मॉडर्न
  1002. 53:22सिस्टम के अंदर
  1003. 53:25एक ऐसी एडलॉजिकल फ्रेमवर्क हो सकता है जो
  1004. 53:29कि कलेक्टिविटी को प्रायर समझता है
  1005. 53:31इंडिविजुअलिटी पे तो दूसरा आदमी ये कह
  1006. 53:36सकता है कि देखिए जो भी इंसान के सियासी
  1007. 53:38एदाफ होते हैं उनकी सियासी तशकील नौ के
  1008. 53:42लिए जो जद्दोजहद करता है वो तो फर्जी करता
  1009. 53:45है इंडिविजुअल करता है एक इंसान करता है।
  1010. 53:49लिहाजा कोई भी सियासी निजाम हो वो तो फर्द
  1011. 53:54की सतह के ऊपर ही
  1012. 53:57परखा और जाना और समझा जाना चाहिए। लिहाजा
  1013. 54:02जो सियासी जद्दोजहद होगी या सियासी निजाम
  1014. 54:06होना चाहिए वो फर्क की सतह पर जांचा और
  1015. 54:10परख जाने के लायक होना चाहिए। तो ऐसे
  1016. 54:15मॉडर्न एक्स जो सिस्टम होगा उसके अंदर जो
  1017. 54:19भी इडलॉजिकल फाउंडेशन होगी वो
  1018. 54:21इंडिविजुअलिज्म को सपोर्ट कर रही होगी। तो
  1019. 54:24क्या आप ये कहेंगे कि दोनों की इडलॉजी में
  1020. 54:27फर्क है? जी दोनों की इडलॉजिकल फाउंडेशन
  1021. 54:29फर्क है। लेकिन दोनों रूट कर रहे हैं
  1022. 54:32मॉडेनिटी या एनलाइटनमेंट के ही फाउंडेशंस
  1023. 54:35के साथ। तो ये तो इडलॉजिकल डिफरेंसेस जो
  1024. 54:40है यानी के सोशलिज्म एक अलग इडलॉजी है और
  1025. 54:44फैशज्म एक अलग इडलॉजी है और नेशनलिज्म एक
  1026. 54:48अलग इडलॉजी है और रेसिज्म एक अलग इडलॉजी
  1027. 54:51है। लेकिन ये सब रिड्यूसेसबल है मॉडेनिटी
  1028. 54:54के अंदर। यानी के अगर आप फको पढ़े तो वो
  1029. 54:57बताएगा कि पिछले 200 साल के अंदर यूरोप के
  1030. 55:00अंदर जितनी भी लड़ाईया हुई है वो सब
  1031. 55:03ह्यूमनिज्म के नाम पर ही हुई है और ये
  1032. 55:06सारी की सारी जो आइडियोलॉजीस थी वो
  1033. 55:09ह्यूमनिस्ट इडलॉजी ही थी। पाकिस्तान के
  1034. 55:12अंदर जो लोग थोड़ी बहुत सोशल साइंसेस वगरा
  1035. 55:16पढ़कर या इधर उधर से उल्टे सीधे फलसफे के
  1036. 55:20कोर्सेस पढ़ के जो ह्यूमनिज्म का तसवुर
  1037. 55:24लेकर आ जाते हैं वो समझते हैं कि
  1038. 55:26ह्यूमनिज्म का मतलब होता है सबकी खुशी में
  1039. 55:28खुश होना और बसंते मनाना और नाच गाना करना
  1040. 55:33और हर हर बात पे मोहब्बत करना और जब इसके
  1041. 55:37बावजूद भी कोई मर जाए तो मोमबत्ती जला के
  1042. 55:39खड़े हो जाना और ह्यूमन िस्ट होने का यह
  1043. 55:42मतलब होता है। ये सही बात नहीं है भाई।
  1044. 55:44इसका मतलब है कि हजरत को इत्तला नहीं है
  1045. 55:46कि ह्यूमनिज्म के नाम पे दुनिया में क्या
  1046. 55:48क्या हुआ है। तो जब हम ये सिस्टम ऑफ
  1047. 55:51जस्टिस पढ़ेंगे तो हम ये बताएंगे कि इस
  1048. 55:54सिस्टम ऑफ़ जस्टिस के पीछे पिटिकल आइडियल
  1049. 55:56क्या है और उसके नतीजे में किस किस्म की
  1050. 55:59पिटिकल इडलॉजी निकलेगी और वो पिटिकल
  1051. 56:01इडलॉजी किस तरह से एक्सप्लिककेट करेगी। ये
  1052. 56:05एक बड़ा प्रोजेक्ट है। ये इट विल टेक टाइम।
  1053. 56:08बट वंस यू कंप्लीट ऑल ऑल ऑल दोस
  1054. 56:15लेक्चर्स यू विल रियलाइज दैट नाउ यू आर
  1055. 56:18मोर
  1056. 56:21अह
  1057. 56:23ग्रूम
  1058. 56:25टू अंडरस्टैंड दी
  1059. 56:28द मॉडर्न
  1060. 56:30नोशन ऑफ मल्टीप्लसिटी दिस इज़ नॉट एक्चुअली
  1061. 56:34मल्टीप्लीसिटी दे आर दे प्रज़्यूम अ
  1062. 56:36कंपेटिटिव रिलेशनशिप विथ ईच अदर
  1063. 56:38तो हम ये बताने की कोशिश करेंगे आपको
  1064. 56:41सिस्टम ऑफ़ जस्टिस जब हम पढ़ेंगे तो जाहिर
  1065. 56:43है कि उसमें इडलॉजी जो है वो आ जाएगी।
  1066. 56:47उसको आइडियोलॉजी को हम एक्सप्लेन करेंगे
  1067. 56:49और ये भी आपको बताएंगे कि इडलॉजी को
  1068. 56:52इडलॉजिकल डिफरेंसेस को रिकंसाइल करने के
  1069. 56:55क्या-क्या कोशिशें की गई। मिसाल के तौर पे
  1070. 56:58नेशनलिस्टों ने किस तरह से रेसिस्टों के
  1071. 57:00साथ मुसालहत कर ली। यानी कि पाकिस्तान के
  1072. 57:04अंदर मुस्लिम नेशनलिज्म ने किस तरह से
  1073. 57:08एथनोसेंट्रिक नेशनलिज्म के साथ मुसालियत
  1074. 57:11की। जैसे पाकिस्तान बन रहा था तो
  1075. 57:14पाकिस्तान बनने के लिए ये जो डिफरेंस था
  1076. 57:17कि भाई कोई आदमी पंजाबी है या सिंधी है या
  1077. 57:20बलोच है या पठान है ये जाहिर है कि ये
  1078. 57:24एथनिसिटी है और इंसान की जबान इंसान का
  1079. 57:28कल्चर इंसान की तारीख इंसान की जियोग्राफी
  1080. 57:32ये मैटर करती है लेकिन ये के वो एथेनिक
  1081. 57:37पर्टिकुलरिटी जो एक सिंधी को एक पंजाबी से
  1082. 57:40और एक पंजाबी को एक बलोच से और एक बलोच को
  1083. 57:43एक सिंधी से मुस करती है। तो
  1084. 57:48और ये अलग-अलग एथेनिक इडलॉजीस या एथनिक
  1085. 57:53अलग-अलग एथेनिक
  1086. 57:56पर्टिकुलरिटीज रखने के बावजूद ये सब
  1087. 57:58पाकिस्तान की जिद्दोजहद में शरीक हुए और
  1088. 58:01इन्होंने कहा कि भाई हम सब मुसलमान है
  1089. 58:04माशा अल्लाह। तो मुसलमान है तो फिर
  1090. 58:10सियासी निजाम के लिए ये इस्लाम को बुनियाद
  1091. 58:13क्यों नहीं बना रहे?
  1092. 58:16पाकिस्तान बनाने के लिए बुनियाद बना रहे
  1093. 58:18हैं लेकिन इस्लाम को बुनियाद नहीं बना
  1094. 58:20रहे। बल्कि बुनियादी तौर पर ये लिबरल
  1095. 58:23इडलॉजी या नेशनलिस्ट इडलॉजी या कुछ लोगों
  1096. 58:28ने सोशलिस्ट इडलजी को प्रायोरिटाइज क्यों
  1097. 58:32कर लिया? तो इसका मतलब है कि वो लोग जो
  1098. 58:35मुसलमान अपने आप को कह रहे थे वो भी एक
  1099. 58:39नेशनलिस्ट पोजीशन ही थी। यानी कि वो एक
  1100. 58:42मुस्लिम नेशनलिज्म था। तो मुस्लिम
  1101. 58:44नेशनलिज्म जो था वो कॉस्मोपॉलिटन लग रहा
  1102. 58:48था उनको की भाई सब लोगों की एथेनिक
  1103. 58:50प्रायोरिटीज को इस तरह रिकंसाइल कर कर एक
  1104. 58:53मुल्क हासिल करने में उनको मदद दे दे।
  1105. 58:55उसके बाद हम जो है अपनीपनी एथेनिक
  1106. 58:57आइडेंटिटीज के साथ इस ऑटोनमी को सेलिब्रेट
  1107. 59:00करेंगे। तो अ
  1108. 59:03रिकंसिलिएशन पॉसिबल है एथेनोसेंट्रिक
  1109. 59:07नेशनलिज्म में और मुस्लिम नेशनलिज्म में
  1110. 59:11या
  1111. 59:13पाकिस्तानी नेशनलिज्म में ये रिकंसाइलेबल
  1112. 59:16है और ये यूरोप के अंदर भी आपने देखा के
  1113. 59:20बर्तनानिया
  1114. 59:22में जो है वो आरिश भी है और स्कॉटिश भी है
  1115. 59:26और इंग्लिश भी है। लेकिन ग्रेट ब्रिटेन के
  1116. 59:29अंदर स्कॉटिश, आरिश और इंग्लिश एक फेडरेशन
  1117. 59:33के साथ फंक्शनल हो सकते हैं। लेकिन गोरे
  1118. 59:36होने के बावजूद वो फ्रेंच के साथ अपने आप
  1119. 59:38को मुवस करते हैं। डिफरशिएट करते हैं। गो
  1120. 59:42के बहुत सारे उनके बादशाह जो थे वो फ्रेंच
  1121. 59:45थे। तो बताने का मतलब ये है कि नेशनलिज्म
  1122. 59:49जो है
  1123. 59:51वो मुसालहत करता है। इसी तरीके से
  1124. 59:54फैमिलिज्म भी मुसालहत करता है। इसी तरीके
  1125. 59:57से सोशलिज्म भी मुसालत करता है। तो इनकी
  1126. 1:00:01इडलॉजिकल डिफरेंसेस को हम अंडरस्टैंड
  1127. 1:00:04करेंगे। ये अभी आपको हो सकता है कि जाहिर
  1128. 1:00:06है के आपको ये बात मुश्किल लगे। लेकिन जब
  1129. 1:00:09आप इस रिकॉर्डिंग को बार-बार सुनेंगे तो
  1130. 1:00:11आपको ये बात समझ में आ जाएगी के
  1131. 1:00:15जब आप सिस्टम्स ऑफ जस्टिस को बड़े कैमस पे
  1132. 1:00:18फिलोसोफिकल कैनवस पे अंडरस्टैंड कर रहे
  1133. 1:00:22होते हैं तो वो इलॉजिकल
  1134. 1:00:25जो बफरकेशन है उसको भी एक्सप्लेन कर देता
  1135. 1:00:28है और इडलॉजिकल कंपैटिबिलिटीज और
  1136. 1:00:30कॉम्प्रोमाइज को भी एक्सप्लेन करता है।
  1137. 1:00:33ठीक है
  1138. 1:00:35जी
  1139. 1:00:37जी जी आप बात करो पहले कला फिर दानियाल
  1140. 1:00:41जी सर अभी इंक्लूसिविटी का जिक्र आप अभी
  1141. 1:00:45कर रहे थे थोड़ी देर पहले ना ये इस्तलाह
  1142. 1:00:47आजकल बड़ी इन चल रही है हम मुख्तलिफ यानी
  1143. 1:00:51कि अब तो कायदे आजम की बर्थडे के ऊपर जो
  1144. 1:00:54नीचे पफेट्स बन रहे हैं वो भी एक
  1145. 1:00:55इंक्लूसिव पाकिस्तान और इस तरीके के
  1146. 1:00:58स्लोग्स के साथ आ रहे हैं। अच्छा ये जो ये
  1147. 1:01:01जो इंक्लूसिविटी है ये जो टर्म है ये अपने
  1148. 1:01:04अंदर एक बड़ी
  1149. 1:01:06एक खास एक पीछे कसेप्शन ऑफ़ जस्टिस को
  1150. 1:01:09प्रज्यूम करके आ रही है। यानी कि ये
  1151. 1:01:12इंक्लूसिविटी ऑब्वियसली हम सब चाहेंगे कि
  1152. 1:01:14सब लोगों को इल्म मिले और सब इल्म हासिल
  1153. 1:01:16करें। लेकिन इस खास इंक्लूसिविटी के पीछे
  1154. 1:01:19खास कंसशन जस्टिस है। तो ये तो खुद अपने
  1155. 1:01:23अंदर बड़ी फिर एक्सक्लूसिव
  1156. 1:01:25इस्तला हुई। यानी कि ये एक खास
  1157. 1:01:30भाई देखो दुनिया में जब भी कोई जब भी कोई
  1158. 1:01:34सिस्टम डेवलप होता है वो जब दुनिया के
  1159. 1:01:39सामने पेश किया जाता है तो इस तरह पेश
  1160. 1:01:42किया जाता है कि क्या सब लोग इसका पार्ट
  1161. 1:01:45बन सकते हैं या नहीं बन सकते
  1162. 1:01:49सही है? जैसे ईसाइयत जब आई मिसाल मैं दे
  1163. 1:01:53रहा हूं। तो ईसाइयत जब आई तो रोमन जो किंग
  1164. 1:01:57होते थे वो पूरी दुनिया को फतह करने की
  1165. 1:02:00कोशिश करते थे और आपको पता है अलेग्जेंडर
  1166. 1:02:03ने ये कोशिश की और जो है सीज़ ने जूलियस
  1167. 1:02:07सीज़ ने ये कोशिश की और मुख्तलिफ लोगों ने
  1168. 1:02:10ये कोशिश की पूरी दुनिया को हम एक झंडे
  1169. 1:02:13तले जमा कर ले जब वो पूरी दुनिया को फतह
  1170. 1:02:16भी कर ले लेट सपोज के फतह कर नहीं कर पाए
  1171. 1:02:19लेकिन चले कर लिया तो उसके बावजूद भी जो
  1172. 1:02:23रोम कॉमन है वो तो नस्ल की बुनियाद पर
  1173. 1:02:28हड्डी और खून की बुनियाद के ऊपर क्योंकि
  1174. 1:02:31अपने अपनी पिटिकल लेजिटसी असर्ट करते थे
  1175. 1:02:35तो अलेग्जेंडर द ग्रेट अपने आप को क्या
  1176. 1:02:38कहता था? अलेग्जेंडर द ग्रेट क्या अपने आप
  1177. 1:02:40को
  1178. 1:02:42आलमी इंसान कहता था या रोमन कहता था? तो
  1179. 1:02:46फर्ज करें कि वो आलमी समझ रहा है अपने
  1180. 1:02:48आपको। यानी कि ग्लोबल ह्यूमैनिटी का
  1181. 1:02:51रिप्रेजेंटेटिव समझ रहा है। और उसकी दलील
  1182. 1:02:54क्या है कि भाई मैंने पूरी तमाम रियासतों
  1183. 1:02:57को या तमाम तहजीबों को शिकस्त दे दी। तो
  1184. 1:03:01इसके बावजूद के लोग उससे शिकस्त खा गए।
  1185. 1:03:03शिकस्त खा जाने के बाद भी नस्लन तो वो
  1186. 1:03:06अफ्रीकन ही रहेंगे ना। नस्लन वो इजिपशियन
  1187. 1:03:09रहेंगे, पर्शियन रहेंगे, इंडियन रहेंगे,
  1188. 1:03:16टर्क्स रहेंगे। तो तो फिर वो तो हमेशा जो
  1189. 1:03:22है जींस या फ्लश या ब्लड जो है ये तो
  1190. 1:03:27यूनिवर्सलिटी की बुनियाद नहीं बनता।
  1191. 1:03:30लिहाजा रोमन जो थिंकर्स होते थे या रोमन
  1192. 1:03:34जो फिलोसफर सॉरी रूलर्स होते थे उनके लिए
  1193. 1:03:38हमेशा ये होता था कि हमेशा अदरनेस मौजूद
  1194. 1:03:42रहेगी हमारे और दूसरों के दरमियान। इसका
  1195. 1:03:45मतलब ये हुआ कि रेसिज्म की यूनिवर्सलिटी
  1196. 1:03:48या एनोसेंट्रिसिटी की यूनिवर्सलिटी या
  1197. 1:03:52नेशनलिज्म की यूनिवर्सलिटी या जो है
  1198. 1:03:58वो रिवील हो जाएगी बिकॉज़ ऑफ़ द ऑफ़ द फ्लेश
  1199. 1:04:03एंड द ब्लड एंड द कलर ऑफ द स्किन एंड द
  1200. 1:04:06लैंग्वेज दे आर यूजिंग। इसको ओवरकम किया
  1201. 1:04:10आकर ईसाइयत ने। और ईसाइयत ने आकर ये दावा
  1202. 1:04:14किया कि देखो ये सब जो है ऑल आर इक्वल इन
  1203. 1:04:18द आईज ऑफ द गॉड ऑल आर द चिल्ड्रन ऑफ द
  1204. 1:04:20गॉड। सो इफ ऑल आर द चिल्ड्रन्स ऑफ़ द गॉड
  1205. 1:04:23इट डजंट मेक एनी डिफरेंस वेदर यू आर रोमंस
  1206. 1:04:26और यू आर अ बोथ और यू आर अ परशियन और यू
  1207. 1:04:29आर एन इजिपशियन और यू आर इंडियन और
  1208. 1:04:32अफ्रीकन व्हाटएवर दे दे कैन बी योर ब्रदर
  1209. 1:04:37बिकॉज़ दे आर द क्रिएचर ऑफ़ द गॉड। तो आप
  1210. 1:04:41अगर किंगडम ऑफ हेव्स इस्टैब्लिश करोगे तो
  1211. 1:04:44आप इस दुनिया में सबके लिए एक ऐसी
  1212. 1:04:47आइडेंटिटी ओपन तुम्हें करनी पड़ेगी जिसमें
  1213. 1:04:51पार्टिसिपेट कर सकता है एक स्पेनिश भी उसी
  1214. 1:04:55तरीके से जिस तरह से एक रोमन या एक
  1215. 1:04:58इजिपशियन या एक बेबिलोनियन या एक पर्शियन
  1216. 1:05:01या व्हाटएवर तो फिर आप यूनिवर्सलिटी की
  1217. 1:05:05बात कर सकते हो तो ईसाइयत एक
  1218. 1:05:08यूनिवर्सलिस्ट
  1219. 1:05:10बनकर निकली। समझ में आई बात आपको? तो अगर
  1220. 1:05:14फर्ज किया कि एक अच्छा यानी कि ईसाई है तो
  1221. 1:05:17इससे फर्क नहीं पड़ता कि वो ईरानी है या
  1222. 1:05:20तुरानी है या फ्रेंच है या जर्मन है या
  1223. 1:05:23स्कॉटिश है या आरिश है। वो क्रिश्चियन है
  1224. 1:05:26भाई। तो आपने देखा कि बहुत सारे होली रोमन
  1225. 1:05:29एपरर जो थे वो कोई हंगरी का था तो कोई
  1226. 1:05:33फ्रांस का था तो कोई बर्तनानिया का था। तो
  1227. 1:05:36वो एक झंडे तले जमा क्यों होते थे?
  1228. 1:05:39क्योंकि वो कहते थे कि हम सब ईसाई है। हम
  1229. 1:05:42सब जो है किंगडम ऑफ हेव्स एस्टब्लिश कर और
  1230. 1:05:45इस जंग के इ्तताम पर कुछ लोग जो है दुनिया
  1231. 1:05:48को जन्नत बना देंगे और कुछ लोग आखिरत में
  1232. 1:05:51जन्नत में पहुंच जाएंगे। इसी तरीके से
  1233. 1:05:53इस्लाम लेकिन ये जो इनलाइटनमेंट के बाद जो
  1234. 1:05:57नेशनलिज्म पैदा हुआ वो रिएक्शन था इसी
  1235. 1:06:02इंक्लूसिविटी की तरफ। यानी के इस
  1236. 1:06:04इंक्लूसिवनेस के ही तो खिलाफ वो था कि
  1237. 1:06:07सबसे पहले चर्च ऑफ इंग्लैंड और चर्च ऑफ
  1238. 1:06:10ऑस्ट्रिया अलग हो गया। उन्होंने कहा जी हम
  1239. 1:06:12तो इंग्लिश है। उन्होंने कहा हम तो
  1240. 1:06:14ऑस्ट्रियन है। उन्होंने कहा तो ठीक है वो
  1241. 1:06:17क्रिश्चियन है लेकिन ये ऑस्ट्रियन और
  1242. 1:06:19इंग्लिश और स्कॉटिश और आयरिश और फिर
  1243. 1:06:21फ्रेंच एंड इस तरह से ये नेशनलिज्म पैदा
  1244. 1:06:24हो गया। तो इस नेशनलिज्म को खत्म करने की
  1245. 1:06:28कोशिशें इनलाइटनमेंट में भी हुई। जैसे
  1246. 1:06:31नेपोलियन बोनापार्ट ने यूरोपियन आइडेंटिटी
  1247. 1:06:34डेवप कर दी। हां, यूरोपियन यूनियन डेवलप
  1248. 1:06:37कर दी। लेकिन जैसे ही बुरा वक्त आता है
  1249. 1:06:39लोग ब्रेग्जिट लेके बाहर निकल जाते है।
  1250. 1:06:41जैसे बर्तनानिया ने कहा साले इन कंगलों को
  1251. 1:06:43सबको हमें पालना पड़ रहा है। तो ये फचेको
  1252. 1:06:47सलवाकिया के बाद जो है जो यूरोपियन यूनियन
  1253. 1:06:52मेंबर्स आए वो बेचारे गरीब लोग थे। वो के
  1254. 1:06:54वो यूरोपियन थे लेकिन गरीब लोग थे और
  1255. 1:06:57मखलूक हाल लोग थे। उनका बर्डन भी इनके ऊपर
  1256. 1:07:00आया। तो इनका इनके लिए मसला पैदा होना।
  1257. 1:07:03यूरोपियन यूनियन ने जो पार्लियामेंट डेवलप
  1258. 1:07:05की उस पार्लियामेंट के अंदर ज्यादातर
  1259. 1:07:07बुड्ढे थे और वो बुड्ढों की जो फाइनेंसिंग
  1260. 1:07:10होती थी वो सारी की सारी फाइनेंसिंग जो थी
  1261. 1:07:12वो नौजवान लोगों के कट्स लगा के होती थी।
  1262. 1:07:15सबसे ज्यादा जिनके ऊपर कट्स लगते थे
  1263. 1:07:18उन्होंने कहा भाई इन बुड्ढों को पालपाल के
  1264. 1:07:21हम लोग तो मारे जाएंगे। तो उन्होंने अपनी
  1265. 1:07:25इंक्लूसिविटी को
  1266. 1:07:28एक्स्ट्रैक्ट कर दिया। एब्स्ट्रैक्ट कर
  1267. 1:07:31दिया ह्यूमनिज्म के नाम पर और लिबरलिज्म
  1268. 1:07:36के नाम पर। लेकिन सब्सटेंटिव प्लेन पर
  1269. 1:07:39अपने आप को अलग कर लिया और अपने आप को अलग
  1270. 1:07:41करके कहा कि जी हम तो ब्रेग्जिट ले रहे
  1271. 1:07:44हैं। हम तो बाहर जा रहे थे। हम तो यूनियन
  1272. 1:07:47के चक्कर में नहीं पड़ेंगे। बल्कि जब
  1273. 1:07:49यूरोपियन यूनियन बन भी गई थी उस वक्त भी
  1274. 1:07:51जो है शकिंग वीजा जो होता था वो बर्तानिया
  1275. 1:07:55उस को एंटर नहीं होने देता था। तो इसका
  1276. 1:07:57मतलब है कि इट मीन्स दैट ऑल आर इक्वल बट
  1277. 1:08:00सम पीपल आर मोर इक्वल देन अदर्स। ठीक है?
  1278. 1:08:03तो
  1279. 1:08:06इंक्लूसिविटी का जो मसला है ये हमेशा
  1280. 1:08:10दुनिया में जब भी कोई ताकतवर इडलॉजी यानी
  1281. 1:08:14कि मॉडर्निटी अपने आप को ऑल इंक्लूसिव
  1282. 1:08:17कहती है।
  1283. 1:08:19और पोस्ट मॉडेर्निटी ये कहती है ये
  1284. 1:08:21इंक्लूसिव नहीं है। हम बनाएंगे इसको मजीद
  1285. 1:08:24इंक्लूसिव यू नो। तो इंक्लूसिविटी और
  1286. 1:08:28हमारी जैसी जो कौमे है जो के जिसका सारा
  1287. 1:08:32का सारा इंटेलिजेंशिया जो है वो
  1288. 1:08:36जाहिर है के
  1289. 1:08:40अब क्या बोले वो
  1290. 1:08:43बिल्कुल यानी कि तीसरे दर्जे की जो पिटिकल
  1291. 1:08:46थरीज है उनसे अपने अपने सिस्टमिक
  1292. 1:08:52थरीज निकालता है तो उनके लिए तो ये कोई
  1293. 1:08:57इतना नहीं है। उनका ये कहना है कि भाई
  1294. 1:08:59हमने कौन सा इस पे अमल करना है? बोलने में
  1295. 1:09:02क्या हर्ज है? तो जाहिर है कि यहां पर जब
  1296. 1:09:05एक इंसान मजहब की बात करके कहे कि भाई
  1297. 1:09:09हमने कौन सा इस पे अमल करना है? तो
  1298. 1:09:15ले लो इस्लाम के नाम। तो वो इंक्लूसिवनेस
  1299. 1:09:18का लफज़ भी इसी तरह इस्तेमाल करते हैं ताकि
  1300. 1:09:21बेचारों को थोड़ी एक वो मिल जाए। क्या एक
  1301. 1:09:26पोस्ट पोस्ट डॉक मिल जाए या किसी
  1302. 1:09:30कॉन्फ्रेंस के अंदर आने जाने का तीन तीन
  1303. 1:09:33दिन का टिकट मिल जाए कोई इतने यानी के वो
  1304. 1:09:36मुझे नहीं लगता कि वो इतने यानी के मुखलिस
  1305. 1:09:39है उस इंक्लूसिविटी के साथ और अभी तो
  1306. 1:09:42इंक्लूसिविटी के का बहुत ही यानी कि बुरा
  1307. 1:09:46बुरा टाइम चल रहा है। यानी के सबका
  1308. 1:09:48माशा्लाह मु काला हो रहा है जो
  1309. 1:09:50इंक्लूसिविटी वगैरह की बात करते थे के भाई
  1310. 1:09:53ये जो है तो जब यूरोप जाते हैं मिसाल के
  1311. 1:09:56तौर पे मैं आपको बता दू पाकिस्तान का
  1312. 1:09:58जितना भी लिबरल आदमी हो जितनी भी लिबरल
  1313. 1:10:01औरत हो या जितना भी लिबरल जो है वो
  1314. 1:10:03ट्रांसजेंडर हो जब वो अमेरिका जाता है और
  1315. 1:10:06यूरोप जाता है तो आजकल हालात ये है भाई के
  1316. 1:10:09वो यहां पर चाहे दीन के का मजाक उड़ाता हो
  1317. 1:10:14गालियां बकता हो मजाक बनाता
  1318. 1:10:17लेकिन वहां पर जब वो जाता है तो वो उसको
  1319. 1:10:19एक मुसलमान के तौर पर ही ट्रीट करते हैं।
  1320. 1:10:23यानी कि कितनी यानी के ये इन लोगों की
  1321. 1:10:26बदनसीबी है कि सब कुछ छोड़ दिया उसके
  1322. 1:10:29बावजूद भी दुनिया इनको मुसलमान के तौर पर
  1323. 1:10:32ही रेग्नाइज करती है और इनसे कहती है चलो
  1324. 1:10:35भाई आप बताओ इस्लाम इसके बारे में क्या
  1325. 1:10:37कहता है? अब इस्लाम का तो क नहीं पता इनको
  1326. 1:10:40तो ये क्या बताएंगे? तो बजाय ये कि ये
  1327. 1:10:42बेशर्म ये बोल दे कि भाई हमें तो इस्लाम
  1328. 1:10:45के बारे में कुछ पता ही नहीं। हम तो
  1329. 1:10:46इस्लाम से कोई मदद लेना ही नहीं चाहते।
  1330. 1:10:49इस्लाम को तो हम एक पर्सनल चीज समझते हैं।
  1331. 1:10:52हम तो आपसे सीखने आए। हम तो आपके चमचे
  1332. 1:10:54हैं। हम तो आपको अपना आपके पट्ठे हैं। तो
  1333. 1:10:59ये भी इस्लाम को समझाना शुरू कर देते हैं।
  1334. 1:11:03सही है? हद ये है कि शाहरुख खान जैसे
  1335. 1:11:06इंसान को भी वो मुसलमान समझते।
  1336. 1:11:10हद तो ये है कि आमिर खान को भी वो लोग
  1337. 1:11:13हिंदुस्तान में लोग मुसलमान कह रहे हैं।
  1338. 1:11:15सही है ना? तो वो बेचारा बोल दे कि भाई
  1339. 1:11:18मैं तो हूं ही नहीं मुसलमान। लेकिन वो भी
  1340. 1:11:20इसको एक आइडेंटिटी के तौर पर ले
  1341. 1:11:23इंक्लूसिविटी के नाम के ऊपर बिल्कुल दीन
  1342. 1:11:28को त्याग देने के बावजूद भी
  1343. 1:11:32मेंबर बन रहा है। तो जिसे हम आजकल
  1344. 1:11:33इंक्लूसिविटी कह रहे हैं या समझ रहे हैं
  1345. 1:11:37या समझा रहे हैं वो ये है कि आप जिस
  1346. 1:11:40इडलॉजी पे है ना कहोगे ये इडलॉजी हक नहीं
  1347. 1:11:44है। अगर आप ये बाबांगे दुखल कह देते हो तो
  1348. 1:11:47कहते हां ये है इंक्लूसिव यानी कि अगर आप
  1349. 1:11:50कहोगे जी मैं मर्द नहीं हूं मैं मर्द नहीं
  1350. 1:11:54हूं तो फिर आप इंक्लूसिव हो अगर एक औरत कह
  1351. 1:11:58दे भाई मैं औरत नहीं हूं तो फिर ये
  1352. 1:12:00इंक्लूसिव हो गई अगर एक इंसान कहे मैं
  1353. 1:12:02मुसलमान नहीं हूं फिर मैं इंक्लूसिव हो
  1354. 1:12:04गया वो तो बहुत ही बाारी टाइप की जो सतह
  1355. 1:12:08है जिसे पेश कर रहे है हां जो ड्यूस जिस
  1356. 1:12:12किस्म की इंक्लूसिविटी की बात कर रहा है
  1357. 1:12:15वो सीरियस लेने वाली बात है या जिस
  1358. 1:12:20इंक्लूसिविटी की बात कर रहा है उसे सीरियस
  1359. 1:12:22लेने की बात है और मैं पूरे यकीन के साथ
  1360. 1:12:25आपको बता सकता हूं कि पाकिस्तान के अंदर
  1361. 1:12:27जो लोग इंक्लूसिविटी की बात कर रहे हैं
  1362. 1:12:29सियासी लोग और ये सियासी जमातों के जो
  1363. 1:12:33थिंक टैंक के लोग हैं ये बिल्कुल इन्होंने
  1364. 1:12:36नहीं पढ़ा। ये बिल्कुल पक्की बात है। ये
  1365. 1:12:39मैं नहीं समझता कि इनकी ये ज्यादातर जो है
  1366. 1:12:43इसके अंदर वो लॉयर टाइप के लोग हैं। लॉ
  1367. 1:12:46वगैरह पढ़ा हुआ है इन्होंने और लॉ तो
  1368. 1:12:49अस्यूम करता है सिस्टम ऑफ जस्टिस को
  1369. 1:12:53इक्की दुककी कोई किताब इधर उधर से निकाल
  1370. 1:12:55कर ये पढ़ लेते हैं। या फिर ये कि अब तो
  1371. 1:12:58माशा्लाह चैट जीपीटी आ गया। पूछ लेते
  1372. 1:13:00होंगे उससे कि भाई बता दो कि क्या उस दिन
  1373. 1:13:03मैं देख रहा था कि एक मौलाना साहब थे वो
  1374. 1:13:06चैट जीपीटी से क्वेश्चन कर रहे थे कि भाई
  1375. 1:13:09ये बताएं कि अगर जुमे का दिन जो है वो
  1376. 1:13:12इतवार को पड़ जाए तो जुमे की नमाज पढ़ी
  1377. 1:13:15जाएगी या नहीं पढ़ी जाएगी तो बजाय ये कि
  1378. 1:13:17चैट जीटीपी ये कहता मौलाना साहब ये समझा
  1379. 1:13:21रहे थे कि चैट जीपीटी ये समझता कि भाई ये
  1380. 1:13:26जुमा जो है वो इतवार को आ ही नहीं सकता
  1381. 1:13:29इंटरेस्टिंग बात ये है कि चैट जीपीटी ये
  1382. 1:13:31बता रहा था कि जुमे का दिन अगर इतवार को आ
  1383. 1:13:34जाए तो जुमे की नमाज के क्या उसूल होंगे
  1384. 1:13:37उसने बता दिए उसूल सही है तो इंशा्लाह
  1385. 1:13:40इनको भी जब इंक्लूसिविटी के बारे में
  1386. 1:13:42पूछेंगे ना जाके चैट जीपीटी पे तो वो कोई
  1387. 1:13:45ना कोई इनको जवाब देगा और इंशा्लाह अल्लाह
  1388. 1:13:47ने चाहा तो बिल्कुल गलत जवाब होगा ठीक है
  1389. 1:13:50तो
  1390. 1:13:51वो जो तलाक बात कर रहा है ये सही बात है
  1391. 1:13:55आजकल इंक्लूसिविटी बहुत इन है लेकिन जाहिर
  1392. 1:13:58है कि वो
  1393. 1:14:00यू समझ लो कि एक नई टर्म है जो
  1394. 1:14:03इंटेलेक्चुअल औषों के हाथ में आई हुई है।
  1395. 1:14:06सही है? तो जब हम इंशा्लाह ये चीजें
  1396. 1:14:08पढ़ेंगे तो आप बहुत बेहतर पोजीशन में
  1397. 1:14:10होंगे इनके इनके
  1398. 1:14:14आर्गुमेंट्स को स्टैंड करने के भी और इनको
  1399. 1:14:17अगर आप इंटेलेक्चुअली इंगेज करना चाहते हो
  1400. 1:14:20तो उस वक्त भी दोनों सूरतों में आप इस
  1401. 1:14:22काबिल हो जाओ।
  1402. 1:14:25जी दानियाल लगभग अगर अभी भी आपको कोई बात
  1403. 1:14:28पूछनी है तो आपको आपका हाथ जो है
  1404. 1:14:31सर आपने अलम्दुल्लाह काफी चीजें एक्सप्लेन
  1405. 1:14:33कर दी है और तला भाई का भी अच्छा पॉइंट था
  1406. 1:14:36कि यू नो इंक्लूसिविटी को यू नो अगर इफ ही
  1407. 1:14:39लुक इट विद इन द शेड ऑफ़ स्पेसिफिक
  1408. 1:14:41मेटाफिजिक्स तो हमें पता लगता है कि कितना
  1409. 1:14:43एक्सक्लूसिव है वो। बल मैं मेरे ज़हन में
  1410. 1:14:46एक आजकल एक ऑब्जरवेशन है। मैंने कहा वो
  1411. 1:14:48मैं आपके सामने रखता हूं और उस पर आपको
  1412. 1:14:49ओपिनियन लेता हूं कि हमारे यहां अभी मुझे
  1413. 1:14:52ऐसे लगता है कि एक स्पेसिफिक क्लास क्लास
  1414. 1:14:54नॉट इन मार्क्सिस्ट सेंट आप कैसे मार्क्स
  1415. 1:14:57सेंस में नहीं कह रहा। मैं कह रहा हूं कि
  1416. 1:14:58एक ग्रुप ऑफ इंडिविजुअल है जो कि दीनदार
  1417. 1:15:01है। दीन से मोहब्बत करता है और लेकिन मे
  1418. 1:15:06बी बाहर से पढ़ कर आ गया। उसने क्रिटिकल
  1419. 1:15:08थ्योरी पढ़ ली है। मिशल फको को पढ़ लिया है।
  1420. 1:15:11अब मेरी जो अंडरस्टैंडिंग है कि क्रिटिकल
  1421. 1:15:13थ्योरी और पोस्ट मॉडर्निज्म आई मीन आई मे
  1422. 1:15:15यूज़ इट एज अ चार्जशीट अगेंस्ट मॉडर्निटी
  1423. 1:15:18बट वो मेरी आईडियोलॉजिकल बेसिस नहीं है।
  1424. 1:15:21तो उसकी वो चार्जशीट प्रेजेंट करने के बाद
  1425. 1:15:24अब अगर मैं अपने कोई सशंस दूंगा तो वो तो
  1426. 1:15:26मेरी आईडियोलॉजी से या मेरी मैटफिजिक्स से
  1427. 1:15:28ही आएंगे या मेरी हिस्ट्री से ही आएंगे।
  1428. 1:15:30लेकिन हमारे यहां ये जो एक मुसलमानों की
  1429. 1:15:33क्लास जो कि दीनदार है बड़ी वो चार्जशीट
  1430. 1:15:37सिर्फ यूज़ नहीं करती है बल्कि वो उसका अ
  1431. 1:15:39सशन भी ले लेती है और वो वही एक्टिविस्ट
  1432. 1:15:41बेस जो है ना वो सशन प्रोवाइड कर रही होती
  1433. 1:15:44है। अब मुझे समझ नहीं आता कि उनसे बंदा
  1434. 1:15:46कैसे डील करे।
  1435. 1:15:48नहीं मैं बिल्कुल सही कह रहे हैं आप
  1436. 1:15:51बिल्कुल सही कह रहे हैं और जब मैंने आप
  1437. 1:15:53लोगों को पहले ये बताया
  1438. 1:15:56यानी के मैं रशीद के साथ जब हमारी बात हुई
  1439. 1:16:00थी तो हमने यही सोचा कि हमारे वो लोग जो
  1440. 1:16:04कि इंटेलेक्चुअल प्रोसेस में है और उनकी
  1441. 1:16:07इंगेजमेंट भी होती रहती है और इमीडिएट
  1442. 1:16:09इंगेजमेंट होती है क्योंकि वो जाहिर है कि
  1443. 1:16:12हमारे भाई बहने ही है जो हमारे इर्दगिर्द
  1444. 1:16:14मौजूद है और वो भी कोई बुरे थोड़ी है वो
  1445. 1:16:16भी अच्छाई की कोशिश कर रहे हैं और वो ये
  1446. 1:16:19समझते हैं कि उनके रिफ्लेक्शन के नतीजे
  1447. 1:16:21में माशरा पहले से बेहतर हो जाए। तो ऐसा
  1448. 1:16:24थोड़ी है कि वो कोई दुश्मन है। तो उनके
  1449. 1:16:26लिए क्या चीज ज्यादा जरूरी है? तो मैंने
  1450. 1:16:28उनको ये ये सोच कर फिर मैंने ये फैसला
  1451. 1:16:30किया कि भाई पहले जो है फलसफा पढ़ा कैसे
  1452. 1:16:33जाए? तो बुनियादी तौर पर वो जिस तरह फलसफा
  1453. 1:16:37पढ़ रहे हैं वो या तो एवोलशनरी मॉडल में
  1454. 1:16:41पढ़ रहे हैं या फिर वो इशू बेस्ड मॉडल में
  1455. 1:16:44पढ़ रहे हैं। तो तो जब वो इशू बेस्ड में
  1456. 1:16:47पढ़ते तो फिर वो देखते हैं कि इन इश्यूज
  1457. 1:16:50को रिोल्व करने के लिए कंटेंपरेरी वर्ल्ड
  1458. 1:16:52में क्या स्ट्रेटजीस डेवलप हो रही है। और
  1459. 1:16:57जो जैसे तल्हा ने बताया कि भाई
  1460. 1:17:00इंक्लूसिविटी के लिए सबसे सेफ जगह क्या है
  1461. 1:17:03कि भाई आप एनवायरमेंटलिस्ट बन जाओ और आप
  1462. 1:17:06जो है बोलो कि भाई दरख्त लगाओ दरख्त और
  1463. 1:17:09दरख्त लगाओ और प्लास्टिक उठाओ दरख्त उठाओ
  1464. 1:17:13दरख्त लगाओ प्लास्टिक उठाओ ये ये आप करो
  1465. 1:17:17और वाटर मैनेजमेंट करो और क्या कहते हैं
  1466. 1:17:21कुएं खोदो तो जाहिर है कि अगर इस किस्म के
  1467. 1:17:24एक्टिविज्म में कोई भाई जा रहा कि भाई वो
  1468. 1:17:27चाहता है कि प्लास्टिक को की जो प्रोपरेशन
  1469. 1:17:31है उसको कंटेन करने में कंट्रीब्यूट करे
  1470. 1:17:33ग्रीन पीस मूवमेंट के साथ और जो है क्या
  1471. 1:17:37बोलते हैं दरख्त लगाने के लिए चाहे वो
  1472. 1:17:40पीटीआई वाले हो चाहे वो पीपल्स पार्टी
  1473. 1:17:43वाले हो चाहे वो जमाते इस्लाम वाले हो
  1474. 1:17:46चाहे वो कोई मुस्लिम लीग के लोग हो तो
  1475. 1:17:50जाहिर है कि इसमें तो कोई बुरी बात नहीं
  1476. 1:17:53है कि कौन कहेगा कि भाई प्लास्टिक बढ़ाओ
  1477. 1:17:55तो इस्ला इस्लामिस्ट भी नहीं कहेगा। तो
  1478. 1:17:58अगर इस किस्म की इंक्लूसिविटी के अंदर वो
  1479. 1:18:01पार्टिसिपेट कर रहे हैं तो इसमें कोई हर्ज
  1480. 1:18:03नहीं है। बिल्कुल करें। दरख्त लगाए
  1481. 1:18:05प्लास्टिक को कम करें और अपना जो है
  1482. 1:18:08दुनिया की लेकिन इसको एंडेड इटसेल्फ नहीं
  1483. 1:18:13है। बुनियादी तौर पर तो जड़ के ऊपर अटैक
  1484. 1:18:16करना होगा ना कि भ ये तो वन पॉइंट एजेंडा
  1485. 1:18:19सॉलिडेरिटी मूवमेंट में आप प्रोड्यूस हो
  1486. 1:18:21जाओगे। और ये तो 1986 से यूं समझ ले कि जब
  1487. 1:18:25मैं
  1488. 1:18:271986 में मैं होऊंगा लेट सपोज के सातवीं
  1489. 1:18:31क्लास में उस जमाने से ये मूवमेंट चल रही
  1490. 1:18:34है। सॉलिडेरिटी मूवमेंट जब मैं सातवीं
  1491. 1:18:37क्लास में था तो ये तो ये कोई मसला नहीं
  1492. 1:18:41है। मसला ये है कि उसकी रूट कॉज यही है
  1493. 1:18:45कि भाई आप
  1494. 1:18:50के
  1495. 1:18:53आपके जो चैलेंज है वो यह नहीं है कि
  1496. 1:18:57प्लास्टिक कैसे कम होगी। लेकिन अगर
  1497. 1:19:00प्लास्टिक कम कर सकते हैं आप तो इसमें कोई
  1498. 1:19:02हर्ज नहीं है। ये आपका चैलेंज नहीं है के
  1499. 1:19:06एनवायरमेंटल कैटेस्टी हो रही है और दरख्त
  1500. 1:19:09कट रहे हैं और दरख्त लगना चाहिए। तो
  1501. 1:19:12अल्लाह के रसूल ने भी कहा है कि दरख्त
  1502. 1:19:14लगाओ और दरख्त नहीं काटो और दरख्तों को
  1503. 1:19:16नहीं चलाओ। तो इसमें कोई बुरी बात नहीं
  1504. 1:19:19है। प्रॉब्लम ये है कि जब वो ये बताते हैं
  1505. 1:19:22कि दीन की जो तफसीर हमने की थी पहली सदी
  1506. 1:19:26के अंदर वो तफसीर ठीक नहीं थी। वो गलत थी।
  1507. 1:19:32ये है असल में मसला। असल प्रॉब्लम यह है
  1508. 1:19:36और जो आप हर्मिनोटिक्स के खासतौर पे जो
  1509. 1:19:39फिलोसोफिकल हर्मिनोटिक्स है उसके मॉडल्स
  1510. 1:19:43या गमर का मॉडल लेकर या श माखर का मॉडल
  1511. 1:19:47लेकर या डती का रोमांटिसिज्म लेकर आप तसीर
  1512. 1:19:51के मसाइल को हल करने की कोशिश करें और
  1513. 1:19:54स्ट्रक्चरिज्म की असमशन के साथ आप नज़्म
  1514. 1:19:59कुरान का तसवुर दे वगैरह वगैरह तो जाहिर
  1515. 1:20:02है कि मैं तो आलिम नहीं हूं लेकिन कम से
  1516. 1:20:05कम मैं यह तो बता ही सकता हूं इतना फलसफा
  1517. 1:20:08पढ़ने के बाद कि हज़त ने जो सशन पेश किया
  1518. 1:20:11है यह सशन जो था वेस्टर्न इंटेलेक्चुअल
  1519. 1:20:14डिस्कोर्स में इस भाई ने दिया था और उसके
  1520. 1:20:17ये नताज निकले ये तो कर ही सकता हूं मैं
  1521. 1:20:20सही है ना और ये हम कर रहे हैं लेकिन ये
  1522. 1:20:23के इसके नतीजे में ये कहना के ये लोग जो
  1523. 1:20:27है वो हमारी हमारी इंटीग्रेशन को रेजिस्ट
  1524. 1:20:32कर रहे हैं तो यह यह रवैया ठीक नहीं है और
  1525. 1:20:37वह या तो एवोलशनरी कॉन्टेक्स्ट में देखते
  1526. 1:20:40हैं फलसफे को और
  1527. 1:20:43या फिर जो है वो इशू बेस्ड अप्रोच में
  1528. 1:20:46देखते हैं। कुछ लोग एनालिटिकल कॉन्टेक्स्ट
  1529. 1:20:48में भी आ रहे हैं। यानी कि आपके यहां जो
  1530. 1:20:51है ज्यादा अच्छे लोग पढ़े लिखे लोग मौजूद
  1531. 1:20:54हैं पंजाब में और जाहिर है कि ऑक्सफोर्ड
  1532. 1:20:58बहुत सारे लोग गए हुए हैं। कैमब्रिज बहुत
  1533. 1:21:00सारे लोग गए हुए हैं। वहां से पढ़ के आए
  1534. 1:21:03हुए हैं। तो जाहिर है कि ना चाहते हुए भी
  1535. 1:21:05एनालिटिकल ट्रेडिशन उनके कनसेप्चुअल
  1536. 1:21:09कैटेगरीस को इनफ्लुएंस तो करता होगा ना और
  1537. 1:21:12उसे वो ठीक भी समझते होंगे या उस उन
  1538. 1:21:15स्पेक्टिकल्स के साथ चीजों को देखते होंगे
  1539. 1:21:17तो हमारे लोग जो है वो उन्हें हल्के लगते
  1540. 1:21:20होंगे तो हमें एक ऐसा जहीन जहन पैदा करना
  1541. 1:21:25है जो बड़े कैनव्स के ऊपर उनको जाके इंगेज
  1542. 1:21:28करे और उनको बताने की कोशिश करें।
  1543. 1:21:32ठीक है भाई तो फिर मैंने आप लोगों की
  1544. 1:21:34डिस्कशन सुनी अब मैं रशीद से भी डिस्कस
  1545. 1:21:37करूंगा और फिर मैं फैसला करूंगा के मुझे
  1546. 1:21:41पहले क्या करना चाहिए आपके लिए ज्यादा
  1547. 1:21:43आसान कौन सा रहेगा ये मैं फैसला करूंगा
  1548. 1:21:46इंशा्लाह ताला फिर रशीद आपको इनफॉर्म कर
  1549. 1:21:49देंगे और जहां तक ये बात के दानियाल की या
  1550. 1:21:54तैयब की के भाई हमें सिस्टम का तो पता
  1551. 1:21:57होना ही चाहिए तो ये सिस्टम पे बात कर
  1552. 1:22:01लेंगे बजाय ये एजुकेशन सिस्टम सिस्टम इन
  1553. 1:22:03इटसेल्फ पे बात कर लेंगे और फिर जो है हम
  1554. 1:22:08आगे चलेंगे।
  1555. 1:22:10ठीक है।

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