Pakistan & Climate Change Crisis Explained | Dr. Shafiq Kamboh on Floods, Heatwaves & Future Risks — Transcript
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- 0:00क्लाइमेट चेंज हमारा मसला है?
- 0:01बिल्कुल कोई शक नहीं है। क्लाइमेट चेंज जो
- 0:03है वो पूरी दुनिया का मसला है। सिर्फ
- 0:05पाकिस्तान का मसला है।
- 0:06गवर्नमेंट्स की प्रायोरिटीज है।
- 0:08गवर्नमेंट की प्रायोरिटीज मरते क्या ना
- 0:10करते है क्योंकि इवेंचुअली गवर्नमेंट को
- 0:13इसके ऊपर कुछ करना होगा। अदरवाइज तो तबाही
- 0:16तबाही है।
- 0:17हम कंट्रीब्यूटर हैं या इफेक्टेड हैं?
- 0:19हम बेसिकली अनफॉर्चूनेटली बहुत कम
- 0:21कंट्रीब्यूटर हैं। लेकिन हम सबसे बड़े
- 0:23इफेक्ट ही [संगीत] हैं इस क्लाइमेट चेंज
- 0:25के।
- 0:26अवेयरनेस है क्लाइमेट चेंज की। माज़ी के
- 0:28मुकाबले में आज से 10 साल पहले चले जाएं
- 0:30उसके मुकाबले में टू सम हाउ अब लोगों में
- 0:32थोड़ा-थोड़ा शूर पैदा हो रहा है।
- 0:34फ़ूड सिक्योरसिटी का मसला आ सकता है।
- 0:36फ़ूड सिक्योरिटी के इशू के ऊपर अब अपनी राय
- 0:38है। तो मेरे ख्याल में ये शायद इतना बड़ा
- 0:40इशू ना हो। पानी की कमी बहुत बड़ा इशू
- 0:43होगा।
- 0:43एसडीजी 2030 के लिए हम तैयार हैं क्लाइमेट
- 0:46के हवाले से।
- 0:47मेरे ख्याल में अभी बहुत काम करने की
- 0:49जरूरत है।
- 0:49अस्सलाम वालेकुम नाजरीन। बिहाइंड द
- 0:50इंपैक्ट के साथ मैं हूं मुस्तफा मलिक।
- 0:53बिहाइंड द इंपैक्ट का कांसेप्ट आपको अच्छी
- 0:55तरह याद हो गया होगा। ऐसे लोगों को
- 0:58बुलाना, ऐसे इदारों को बुलाना, ऐसे इदारों
- 1:00के बारे में बात करना, इंटरव्यूअस पर बात
- 1:03करना जो सोसाइटी में कोई ना कोई इंपैक्ट
- 1:05क्रिएट कर दे। वो इंपैक्ट सोशल भी हो सकता
- 1:08है, इकोनॉमिक भी हो सकता है, साइंटिफिक भी
- 1:11हो सकता है, रिलीजियस भी हो सकता है। किसी
- 1:14भी तरह का इंपैक्ट हो सकता है। इंपैक्ट जब
- 1:17सोसाइटी में क्रिएट होता है तो उसका लॉन्ग
- 1:19लास्टिंग एक इफेक्ट आता है सोसाइटी पे। तो
- 1:23इस सिलसिले में हम मुख्तलिफ लोगों को यहां
- 1:25बुलाते हैं। उनसे बात करते हैं। कॉज पर
- 1:27बात करते हैं। उनके काम पर बात करते हैं।
- 1:30इसी सिलसिले की एक कड़ी आज हम आपके साथ
- 1:33शेयर कर रहे हैं। आज हमारे पडकास्ट में
- 1:36तशरीफ रखते हैं डॉक्टर शफीक अहमद कंबोज
- 1:39साहब। डॉक्टर शफीक अहमद स्कूल ऑफ मीडिया
- 1:42स्टडीज पंजाब यूनिवर्सिटी में अपनी खिदमत
- 1:44सर अंजाम दे रहे हैं। आपने हाल अरसे में
- 1:48उनको एक नए रूप में देखा होगा।
- 1:51ताल्लुक तो उनका मीडिया से है। लेकिन वो
- 1:53बात कर रहे हैं क्लाइमेट की। वो बात कर
- 1:55रहे हैं मौसम की। वो बात कर रहे हैं साइंस
- 1:57की। वो बात कर सिर्फ बात नहीं कर रहे।
- 2:00कोशिश कर रहे हैं कि उस साइंस को आम बंदे
- 2:02तक कैसे पहुंचाए। डॉक्टर साहब आपसे पहला
- 2:05सवाल आप मीडिया पढ़ाते थे। बच्चों को
- 2:08पढ़ाते हैं, पढ़ा रहे हैं। आपने रिसर्च की
- 2:12जर्मनी से, क्लाइमेट चेंज पे, क्लाइमेट
- 2:15पे, वेदर पे। तो इस तरफ आने की आपका क्या
- 2:19इंटेंशनंस क्या था?
- 2:21मैं 2015 में जर्नी गया तो खैर उससे पहले
- 2:24मैं 2008 में नार्व भी गया था। तो मैंने
- 2:26देखा कि हमारे यहां पे जो मौजूआत हैं
- 2:29मीडिया के फ्रंट पे इबलाई जो मुख्तलिफ
- 2:31[संगीत] नशिस्ते हैं उसमें और उन मुालिक
- 2:34में उसमें बहुत बड़ा गैप था।
- 2:36यहां पे हम उन मौजुआत पे बिल्कुल गुफ्तगू
- 2:39भी नहीं करते थे। शायद हम सेंस भी नहीं
- 2:41सही।
- 2:41तो इन दोनों मेरे बाहर के जो टूअर्स थे
- 2:44उससे मैंने ये देखा कि उन मुालिक में बहस
- 2:46ही होती है।
- 2:47वहां पे माहौल और मौसम
- 2:50ये टॉप प्रायोरिटी पे हैं।
- 2:52तो इवेंचुअली फिर मैंने अपने वहां के स्टे
- 2:54[संगीत] में जो कुछ लर्न किया तो फिर मेरी
- 2:57ख्वाहिश थी कि मैं वापस आके अपने मुल्क
- 2:59में अपने लोगों को ये आगाह करने के लिए
- 3:01उनकी उनकी उनकी उनकी लिटरेसी को बढ़ाने के
- 3:03लिए जो मैं रोल प्ले कर सकता हूं। व्हाई
- 3:05शुडंट आई कंट्रीब्यूट ओवर। सर हमारे यहां
- 3:08वॉर एंड टेरर की बात होती है। वॉर ऑन
- 3:11एनिमीज़ की बात होती है। वॉर ऑन वेल्थ की
- 3:14बात होती है। वॉर ऑन
- 3:16क्लाइमेट क्यों नहीं होती है? वॉार ऑन
- 3:19वेदर क्यों नहीं होती?
- 3:20एक्सजेक्टली वही मैं अगेन कह रहा हूं ना
- 3:22कौमों की अपनी प्रायोरिटीज होती हैं।
- 3:24हालांकि वो वो जंग अज़ीम फर्स्ट भी लड़ चुके
- 3:27हैं। दो भी लड़ चुके हैं। अब उन्होंने सीखा
- 3:29है वहां से। बहुत ज्यादा सीखा है। मैं एक
- 3:31इंपॉर्टेंट बात बताऊं क्योंकि वो बहुत
- 3:33साइंसी माशरे हैं।
- 3:34वो ये समझते हैं कि इंसानों को जिन चार
- 3:38बड़े खतरात का सामना हो सकता है। ये मैंने
- 3:42वहीं जाके लर्न किया। नंबर [संगीत] वन
- 3:43उनके ख्याल में सबसे बड़ा इंसानियत को
- 3:45अपने वजूद का जो यहां पे खतरा है वजूदी
- 3:47खतरा है वो क्लाइमेट चेंज की जनरेशन है।
- 3:49वो ये समझते हैं क्लाइमेट चेंज इवेंचुअली
- 3:51बाय द एंड ऑफ़ दिस सेंचुरी अगर हमने इसको
- 3:53ना रोका तो इस सहारे से इंसानी जिंदगी जो
- 3:56है वो माधूम हो जाएगी।
- 3:57दूसरा उनको खतरा है एटम एटमी जंग से
- 4:00न्यूक्लियर वेप्स वो कहते हैं न्यूक्स
- 4:02निकल आए हर साइड से तो फिर इंसान एक दूसरे
- 4:04को तबाह कर देंगे। बिल्कुल
- 4:06तीसरे नंबर पे उनको खतरा है कि कोई अनदेखा
- 4:09जो है फिजाई ऑब्जेक्ट वो फिजा पे कोई ना
- 4:13कोई आएगा और फिर वो इवेंचुअली जमीन से
- 4:15टकराएगा और फिर जमीन जो है वो मुकम्मल तौर
- 4:17पे तबाही खत्म हो जाएगी और इंसानियत यहां
- 4:20से खत्म हो जाएगी। चौथा जो उनको सबसे बड़ा
- 4:22खतरा है वो उनको खतरा हमेशा से रहता है के
- 4:25जलजले जो
- 4:27अर्थक्वेक्स तो इवेंचुअली इस तरह के मौजूत
- 4:30पे वहां बहुत ज्यादा बात होती है
- 4:32बहस होती है आवामी सतह पर भी और उसके
- 4:34साथ-साथ वहां के साइंटिस्ट भी और उसके साथ
- 4:36पॉलिसी में भी हमारे यहां अनफॉर्चुनेटली
- 4:38गुफ्तगू का जो मरकजो मेवर है ना वो
- 4:40पड़ोसियों के साथ लड़ाईयां और वो जंग और
- 4:43हम उसमें खोए हुए हैं। तो इन मौजूआत के
- 4:46लिए भी हमारे इतनी गुंजाइश नहीं। हमारा ये
- 4:47रवैया असल मौजुआ से नजर चुराने के मुरादि
- 4:51है।
- 4:52नहीं ये इशूज़ तो हैं
- 4:53सही। [संगीत]
- 4:53पड़ोसियों के साथ। अब मैं हम क्यों कहें
- 4:56कि जी ये हमने खुद की पाली हुई जंगे हैं।
- 4:59मेरे ख्याल में ये जितनी देर तक कोई थर्ड
- 5:01पार्टी कोई ताकतवर पार्टी हमारी मुसालहत
- 5:04दाएं बाएं नहीं करवाती।
- 5:06और हम इन इश्यूज से नहीं निकलते। उतनी देर
- 5:09तक जिन मौजूहात की मैंने बात की है ना
- 5:11शायद गुंजाइश ना निकले।
- 5:13अच्छा यहां ये भी है कि इस पे शायद बात भी
- 5:15नहीं करते। लोग इंसानी जानों की बात करते
- 5:17हैं। प्रॉपर्टी की जान इन जंगों से जो
- 5:20मौसम को नुकसान होता है।
- 5:21एक्सक्ट्ली वो भी एक हिस्सा है। जंग जब
- 5:23होगी तो इवेंचुअली अच्छा देखें जंग जब में
- 5:26जितना असला इस्तेमाल होता है नहीं उसकी तो
- 5:29तबाही है ही है। वो असला जहां तैयार होता
- 5:32है जिन इंडस्ट्री के अंदर वो बहुत हैवी
- 5:35एमिट करती है कार्बन। तो जो कार्बन जो कि
- 5:38सबसे बड़ी माहल दुश्मन एक्सजेक्टली माहौल
- 5:41दुश्मन जो बड़ी तरीन सबसे बड़ी गैस है
- 5:43कार्बन गैस है तो जो वेपन्स की तैयारी है
- 5:46वो सारी इंडस्ट्री वो बहुत बड़ी पोलटर
- 5:48इंडस्ट्री है तो उसके बाद उसके चलने के
- 5:51नतीजे में फिर माहौल फिजा और उसके साथ-साथ
- 5:54ग्रीन हाउस गैसेस या ज़रे जमीन पानी या
- 5:57जमीन के ऊपर जो फसलें हैं उनको जो नुकसान
- 6:00है वो सानवी और सालसी
- 6:02यानी आगाज़ भी तबाही
- 6:04तबाही
- 6:04और उसका एंड भी तबाही
- 6:05तबाही अच्छा डॉक्टर साहब हमारे यहां एक
- 6:08कांसेप्ट है आमतौर पे ना क्लाइमेट चेंज को
- 6:11समझा जाता है वेदर चेंज के साथ मिक्स कर
- 6:14दिया जाता है। वेदर चेंज होते हैं उनमें
- 6:16कोई ड्यूरेशन बढ़ जाता है। लोग इसको
- 6:18क्लाइमेट चेंज करते हैं। क्लाइमेट चेंज है
- 6:20क्या? देखिए क्लाइमेट चेंज ना वेदर जो है
- 6:23अब माइट बी पॉसिबल जैसे आज वेदर जो है वो
- 6:26गर्मी है रात को लेकिन प्रेडिक्शनंस है कि
- 6:29कल से शायद यहां पे जो है कोई एक मगरबी
- 6:31[संगीत] हवाओं का सिलसिला आएगा और फिर जो
- 6:34है कुछ एक दो दिन के लिए टेंपरेचर नीचे
- 6:36चला जाएगा आंधियां जखड़ आएंगे
- 6:38ये है वेदर
- 6:39जो मतलब लॉन्ग टर्म नहीं
- 6:41जो क्लाइमेट होता है वो लॉन्ग टर्म जो
- 6:43वेदर पैटर्न्स एक ख्ते के होते हैं तो
- 6:45पाकिस्तान में जो लॉन्ग टर्म हमने यहां
- 6:47चार मौसम ही सुने थे
- 6:48सही
- 6:49और वो भी हमने एक डिवीजन उनकी बड़ी जो है
- 6:52ना वो थी सिस्टमेटिक थी। पता था कि
- 6:55चार-चार महीने के हमारे यहां या तीन-ती
- 6:58महीने के चार मौसम होंगे। गर्मी होगी,
- 7:00सर्दी हो गई, बहार हो गई, बरसात हो गई। बट
- 7:02अब अनफॉर्चूनेटली क्या है? गर्मी 9 महीने
- 7:04तक चली गई।
- 7:05जी।
- 7:06ठीक है? और सर्दियां बहुत श्रिंक हो गई और
- 7:08बहार तो बिल्कुल गायब हो गई। तो ये जो
- 7:11डिफाइंड यहां के चार मौसम थे इनकी जो
- 7:14बेतरतीबी है ये पूरी दुनिया में हुई है।
- 7:16इस बेतरतीबी का नाम क्लाइमेट चेंज है।
- 7:18ये क्लाइमेट चेंज है।
- 7:20और आपने पहले भी मुझे बताया इससे सबसे
- 7:22ज्यादा इफेक्ट हो रहे हैं किसान।
- 7:24किसान
- 7:24हां जी। उसकी वजह ये है कि हमारे यहां जो
- 7:26पाकिस्तान की जो इकॉनमी है वो है [संगीत]
- 7:29एग्रीकल्चर।
- 7:30जी। तो इवेंचुअली क्लाइमेट चेंज के नतीजे
- 7:33में जो सबसे बड़ी यहां पर वर्क फोर्स है
- 7:36वो किसान है वो खेतों में काम करते हैं वो
- 7:39चाहे पहाड़ी इलाका है वो बारानी इलाका है
- 7:42वो खेत है वो जाएगा तो क्लाइमेट चेंज के
- 7:45नतीजे में होने वाली तबाया मसलन हीट वेव
- 7:48है उसका सामना भी किसान कर रहा है। अब इस
- 7:51ख्ते में क्लाइमेट चेंज के नतीजे में एक
- 7:53जो एक्सट्रीम वेदर इवेंट होता है लाइटनिंग
- 7:55जो बिजली गिरने के वाक्यात हैं उस बेचारे
- 7:58को उस वाक्यात को भी फेस करने के लिए
- 8:00बेचारा किसान रह गया हमारे पास फिर मौसमों
- 8:03की इस बेतरतीबी के नतीजे में किसान ने तो
- 8:06अपने यहां फसलें सीखी थी कई दहाइयों सालों
- 8:09से किस मौसम में कौन सी फसल लगानी है
- 8:12इवेंचुअली वो सारा मौसम अचानक उसको पता ही
- 8:14नहीं होता कि जनाब एक ऐसा गर्मियों में एक
- 8:18इतनी वो आ जाएगी ज्याला बारी की लहर आ
- 8:21जाएंगी जो माजी में अनप्रेसिटेड एंड
- 8:23अनहर्ड ऑफ थी यहां पे। सो इवेंचुअली किसान
- 8:26जो है वो अपनी जान, अपनी माल और हर हवाले
- 8:30से सबसे ज्यादा व्नरेबल ग्रुप जो है गैर
- 8:32महफूज इस सारे क्लाइमेट चेंज के सिनेरियो
- 8:34में वो किसान है।
- 8:35अच्छा ये जो क्लाइमेट चेंज है इसमें
- 8:37ह्यूमन फैक्टर के साथ
- 8:38है ये ह्यूमन फैक्टर। देखिए क्लाइमेट चेंज
- 8:41मैंने बेसिकली इंसानों [संगीत]
- 8:42ने इस ख्ते में पिछले डेढ़ पौने 200 सालों
- 8:45में बड़े पैमाने पे ऐसी गैसेस खारिज करने
- 8:48का अमल शुरू किया है जिनको हम ग्रीन हाउस
- 8:50गैसेस कहते हैं।
- 8:51वो ग्रीन हाउस गैसेस [संगीत] 150 साल पहले
- 8:54कहां थी थी यहां पे लेकिन एक खास मिकदार
- 8:57में थी। पिछले 150 सालों में जब से दुनिया
- 9:00में साइंस रेवोल्यूशन आया है,
- 9:01इंडस्ट्रियलाइजेशन हुई है, अर्बनाइजेशन
- 9:03हुई है, मॉडर्नाइजेशन हुई है तो इंसानों
- 9:05ने इन गैसों के अखराज में बेतहाशा इजाफा
- 9:08कर अच्छा डॉक्टर साहब यहीं पे ले मैन की
- 9:10बात हो रही थी। ले मैन के लिए ये ग्रीन
- 9:12हाउस गैसेस होती क्या है और इफेक्ट इसका
- 9:14क्या है?
- 9:14ग्रीन हाउस गैसेस और नॉन ग्रीन हाउस
- 9:16गैसेस। इस कुर्रा अर में ये जो कुर्रा
- 9:19हवाई है इसमें ये दो तरह की गैस है
- 9:21स्फीयर जो है
- 9:22जो एटमॉस्फियर
- 9:24इसके अंदर अगर आप देखेंगे तो हमारे यहां
- 9:26जो नॉन ग्रीन हाउस गैसेस है नाइट्रोजन हो
- 9:28गई ऑक्सीजन हो गई और उसके मुकाबले में जो
- 9:31ग्रीन हाउस गैसेस है वो कार्बन डाइऑक्साइड
- 9:33है नाइट्रस ऑक्साइड है [संगीत] मीथेन है
- 9:35ये जो ग्रीन हाउस गैसेस है ये दूसरी नॉन
- 9:38ग्रीन हाउस गैसेस से इसलिए मुख्तलिफ है कि
- 9:40ये हरारत को अपने अंदर [संगीत] कैद कर
- 9:43लेता है।
- 9:44ठीक है? सूरज की रोशनी जब हमारे पास आती
- 9:46है तो वो हमें दो चीजें देती है। एक तो
- 9:48हमें देखना विज़ और साथ वो हरारत
- 9:50अल्ट्रावायलेट रेज के नतीजे में। तो ये
- 9:52गैसेस के मॉलिक्यूल सूरज की रोशनी में से
- 9:55आने वाली जो हरारत है उसको अपने अंदर कैद
- 9:57कर
- 9:58ठीक है? अब
- 10:00यहां पे हरारत की जरूरत तो है क्योंकि
- 10:02हमने यहां पे जिंदगी को वजूद रख देना है।
- 10:04तो अल्लाह ताला ने कुदरती इस माहौल के
- 10:07अंदर पैदा की हुई जी
- 10:09लेकिन पिछले 150 सालों से फिर इंसानों ने
- 10:12अपने एक्शन के नतीजे में जब हमने बड़े
- 10:14पैमाने पे [संगीत] इंडस्ट्री ट्रांसपोर्ट
- 10:16का पहिया चलाने के लिए ज़रे जमीन फासल
- 10:18फील्स को निकाल के बस बर्न किया है कंबस्ट
- 10:22किया है इसको इंडस्ट्री ट्रांसपोर्ट के
- 10:24अंदर तो कार्बन गैस निकली
- 10:26फिर हमने बहुत सारी ऐसी प्रैक्टिससेस शुरू
- 10:29कर दी इंसानों ने अपनी आबादी बढ़ाई तो फिर
- 10:31हमने फसलों के ऊपर जो है सिंथेटिक
- 10:33फर्टिलाइजर जो हम छिड़कते हैं उसमें से
- 10:35नाइट्रस ऑक्साइड निकलती है फिर इंसानों का
- 10:37पेट पालने के लिए हमने चावल काश किए। चावल
- 10:39का खेत जो है वो मीथेन गैस खारिज करता है।
- 10:42जानवर हमने गाय भैंस जो पालते हैं वो अपने
- 10:45हर हर एक्शन के नतीजे में मीथेन गैस खारिज
- 10:47करती है। इस कमरे को ठंडा करने के लिए जो
- 10:50आपने एयर कंडीशनर लगाया हुआ है ये सीएफसी
- 10:52क्लोरोफ्लोरोकार्ब्स गैस खारिज कर रहा है
- 10:54जो कि अपने अंदर हरारत कोर कैद करने की
- 10:57सलाहियत है। तो ये ह्यूमन एक्शन ह्यूमन
- 10:59एक्शन मतलब ये कि कुदरती तौर पर एक मुकररा
- 11:03तादाद में ग्रीन हाउस इफेक्ट गैसेस थी।
- 11:06लेकिन हमने उन्हें बढ़ा दिया, मल्टीप्लाई
- 11:08कर दिया।
- 11:08मल्टीप्लाई तो छोड़ दें। हमने इनफिनिटी
- 11:11लेवल पे ले गए ना। इतनी मतलब इतनी
- 11:13कैपेसिटी नहीं थी सियारे की। अब कुर्रा
- 11:15हवाई में ग्रीन हाउस गैसेस किस बड़े
- 11:17पैमाने पे हैं कि वो सूरज की रोशनी और
- 11:20हरारत किस जो जिन रेज के जरिए से आती है
- 11:23उसमें से मेजर पार्ट ऑफ द हरारत जो है
- 11:26उसको अपने अंदर कैद कर लेती है। माजी में
- 11:27क्या था जब ये साइंटिफिक रेवोल्यूशन नहीं
- 11:29आया था। [संगीत] 30% अब्सॉर्ब होती थी।
- 11:3270% जो है वो वापस चली जाती थी। अब क्या
- 11:34होता है हरारत? अब ज्यादातर हरारत कैप्चर
- 11:37हो जाती है और बहुत कम वापस जाती है।
- 11:40अच्छा ये बताइए ये जो मेन फैक्टर या मेजर
- 11:43फैक्टर कौन से हैं जो क्लाइमेट चेंज की
- 11:45वजह बनती है?
- 11:46देखिए वही अगेन जो हमने फॉसिल फ्यूल्स
- 11:49यानी तेल, गैस, कोयला।
- 11:52सही। इनका जो बढ़ता हुआ इस्तेमाल है सबसे
- 11:55मेन कंट्रीब्यूटर ये तीनों फॉसिल फ्यूल जो
- 11:58हमने जमीन में से निकाले जब साइंटिफिक
- 12:00रेवोल्यूशन आया ना तो इंसानों ने तवानाई
- 12:03एनर्जी पैदा करने के लिए तीनों निकाले
- 12:05ये इनको हम जहां पर भी इस्तेमाल करेंगे
- 12:08तो ये इवेंचुअली कार्बन डाइऑक्साइड बड़े
- 12:10पैमाने पे खाते
- 12:11सही है
- 12:12तो सबसे ज्यादा हमें जिसको कंट्रोल करने
- 12:14की जरूरत है वो कार्बन एमिटर्स [संगीत]
- 12:16यानी इनको जरूरत है फॉसिल फ्यूल्स के
- 12:18इस्तेमाल को कम से कम करने की
- 12:20मतलब कार्बन फुटप्रिंट इसी से हम जी कम कर
- 12:23सकते हैं ना तो हमें अपने कार्बन
- 12:24फुटप्रिंट को कम करने के लिए इनकी बजाय
- 12:27इनके जो अल्टरनेटिव सोर्सेस ऑफ़ एनर्जी है
- 12:30रिन्यूएबल एनर्जी सोर्सेस हमें उसके ऊपर
- 12:32जाना होगा। साथ ही साथ इन ग्रीन हाउस
- 12:34कार्बन डाइऑक्साइड को जजब करने का जो
- 12:37बुनियादी कारकुन है वो हमारे माहौल के
- 12:40अंदर अल्लाह ताला ने कुदरती तौर पे दरख्त
- 12:42लगाया पैदा किया हुआ है।
- 12:43दरख्त जो है वो बड़े पैमाने पे कार्बन
- 12:45डाइऑक्साइड को अपने अंदर जजब करके अपने
- 12:47अंदर जखीरा कर लेता है।
- 12:48तो हमारे यहां अनफॉर्चूनेटली हम दरख्त
- 12:50नहीं लगाते। फिर दूसरी जो सबसे बड़ा मसला
- 12:53है जिसप हम बात नहीं करते वो है दरख्त
- 12:55काटना। जब आप दरख्त काट देते हैं ना तो
- 12:58उसके अंदर कैद सारी कार्बन हो रही है वो
- 13:01दोबारा हवा में शामिल हो जाती है जो उसने
- 13:03कैद की हुई थी वो दोबारा से हरत को अपने
- 13:05अंदर जजब करने लग जाती है
- 13:07तो दरख्त लगाएं हम लगाने की बजाय जो लगे
- 13:10हुए हैं वो भी काट देते हैं तो वो जजब
- 13:12करने की बजाय कार्बन सिंक्स बनने की बजाय
- 13:14वो अपनी कार्बन डाइऑक्साइड दोबारा हवा में
- 13:16खारिज कर देते हैं। दूसरा फैक्टर एक
- 13:18प्लास्टिक भी तो सर प्लास्टिक का इस्तेमाल
- 13:20प्लास्टिक का इस्तेमाल जो है उसके
- 13:22क्लाइमेट चेंज में इस हद तक उसके असरात
- 13:25हैं कि कोई शक नहीं है कि प्लास्टिक की
- 13:28प्रोडक्शन जो है वो बड़े पैमाने पे कार्बन
- 13:30गैसेस के अखराज का बायस बनती है।
- 13:32प्लास्टिक का एक दूसरा नुकसान जो है वो
- 13:34एनवायरमेंटल है।
- 13:37ठीक है? जब वो प्लास्टिक जो है वोकि आसानी
- 13:40के साथ डीकंपोज नहीं होता तो वो फिर माहौल
- 13:43को अदरवाइज जगहजगह पे वो जमीन की
- 13:45फर्टिलिटी को कम कर रहा है। वो सीवरेज
- 13:47पाइप लाइन जो है उनको ब्लॉक कर रहा है। और
- 13:50साथ ही साथ ये है कि वो
- 13:52माइक्रोप्लास्टिक्स जो है वो तमाम
- 13:54जानदारों के जिस्म के अंदर पानी के अंदर
- 13:56हर जगह पे जाके तो इंसानी सेहत को बुरे
- 13:59तरीके से और बड़े पैमाने पर
- 14:01हम ये कह सकते हैं कि जो एनवायरमेंटल
- 14:02फैक्टर है मुख्तलिफ चीजों का ये आगे चलके
- 14:04क्लाइमेट चेंज में भी बदल सकता है। देखिए
- 14:06दोनों अलग डोमेनस हैं।
- 14:08क्लाइमेट चेंज जो है उसका ताल्लुक ग्रीन
- 14:11हाउस गैसेस से है।
- 14:12जबकि जो एनवायरमेंटल इशज़ हैं वो जरा और
- 14:15नयत के हैं। वो ये हवा या पोलशन ये हवा की
- 14:19आलूदगी है। एनवायरमेंटल
- 14:21सॉलिड पोलशन हो गई
- 14:22या हवा की
- 14:23इंडस्ट्रियल वेस्ट हो गया। ये हवा की
- 14:25आलूदगी देख ना हमारी जिस हवा में मैं और
- 14:28आप सांस ले रहे हैं
- 14:29होना तो ये चाहिए कि इसके अंदर ना डस्ट हो
- 14:32इसके अंदर ना कार्बन हो ना इसके अंदर सूट
- 14:35हो इसके अंदर कोई ना इसके अंदर टॉक्सिक
- 14:37मेटल्स हो बट अनफॉर्चूनेटली जिस ख्ते में
- 14:40हम रह रहे हैं इसमें इंसानों ने अपने
- 14:42एक्शन के नतीजे में ये जो पार्टिकुलेट
- 14:44मैटर है ये जिनजिन चीजों के मैंने आपको
- 14:47नाम बताए हैं ये बड़े पैमाने पे खारिज कर
- 14:48दिए हैं जिसके नतीजे में हवा का मार यहां
- 14:51पे बहुत ज्यादा गैर आलूदा रहता है
- 14:53आलूदा रहता है तो कहने का मतलब मतलब ये है
- 14:54कि पाकिस्तान को सिर्फ क्लाइमेट चेंज से
- 14:56ही खतरात नहीं है। ये जो माहौलियाती इस
- 14:58तरह की तबाहया है। पानी की आलूदगी, हवा की
- 15:01आलूदगी, शोर की आलूदगी, लाइट पोलशन इन
- 15:04तमाम इश्यूज का भी हम बड़े पैमाने पे यहां
- 15:06पे फेस कर रहे हैं। और इनके रिप्रकशंस
- 15:09अच्छा अबकि मगरब ने ये चीजें ठीक की हुई
- 15:11है। पानी की आलूदगी भी, हवा की आलूदगी भी,
- 15:13शोर की आलूदगी भी, रोशनी की आलूदगी भी।
- 15:16लिहाजा जो इंटरनेशनल सारी डिस्कशन है,
- 15:19नैरेटिव्स है वो सारे क्लाइमेट चेंज के
- 15:21घूम रहे हैं।
- 15:22जबकि मैं यहां पे यही कहता हूं कि
- 15:24पाकिस्तान के अंदर सिर्फ क्लाइमेट चेंज की
- 15:25बात ना करें।
- 15:26क्लाइमेट चेंज में भी मैं जाती तौर पे
- 15:28मुझसे लोग डिसए्री कर सकते हैं। मैं
- 15:30पाकिस्तान की ग्रीन हाउस गैसेस की एमिशंस
- 15:33को कम करने के हक में नहीं हूं।
- 15:34सही है।
- 15:35क्यों कम करें भाई? हम पहले ही लेस देन 1%
- 15:37खारिज करते हैं। हमने खारिज कर दी तो हमने
- 15:40इंडस्ट्री कहां से लगानी है? अच्छा
- 15:41ये जो 150 सालों से ग्रीन हाउस गैसेस
- 15:44खारिज की है ना ये सारी अमेरिका और यूरोप
- 15:46ने की है।
- 15:47यहीं पे सर सवाल है कि पाकिस्तान
- 15:48कंट्रीब्यूटर नहीं है।
- 15:50फिर ये सबसे ज्यादा मुतासिर क्यों है?
- 15:52इफेक्ट ही क्यों है?
- 15:53देखिए वो इसकी एक ज्योग्राफिकल लोकेशन ऐसी
- 15:55है कि क्लाइमेट चेंज के नतीजे में जो ये
- 15:57[संगीत] सारे मतलब हम एक तो इक्वेटरल
- 16:00इक्वेटर के नजदीक हैं। हमारे यहां गर्मी
- 16:02ज्यादा पड़ती थी। अब वो इसकी वजह से
- 16:05मल्टीप्लाई हो गई है तो बहुत ज्यादा है।
- 16:07फिर पाकिस्तान जो है हिमालिया के बिल्कुल
- 16:09कदमों के ऊपर पड़ा हुआ है। हमारी स्लोप इस
- 16:11तरह से
- 16:12तो ऊपर से बड़ी तेजी के साथ थर्ड पोल पिघल
- 16:15रहा है।
- 16:17जी थर्ड पोल दुनिया में दो पोल हमने समझ
- 16:19नर्थ और साउथ हमारे ऊपर थर्ड पोल है।
- 16:21हजारों ग्लेशियर्स हैं हमारे ऊपर ये
- 16:23कराकरम हिंदुकश और हिमालिया में।
- 16:26वो वहां पे टेंपरेचर उन हिमालिया की
- 16:29तराइयों में। वो 8 से 9 डिग्री सेंटीग्रेड
- 16:32आज से 50 साल पहले से बढ़ चुका है। वो
- 16:35तेजी से ग्लेशियर की जो है पिघल के नीचे
- 16:38लेकक्स बनके वो फटती है। इस साल अभी भी
- 16:41पाकिस्तान में इस वक्त आने वाले एक दो
- 16:43हफ्तों के अंदर दर्जनों लेकक्स फटने वाली
- 16:45है।
- 16:45तो वो जो पानी है वो सारा पानी आके फिर
- 16:48नीचे तबायां मचाता है। आबादियों को बर्बाद
- 16:51करता है। दरियाओं में आता है और वो मीठा
- 16:53पानी जो आहिस्ताआहिस्ता आके जिसने हमारी
- 16:55जमीनों को आबाद करना था वो सैलाबों की
- 16:57सूरत में जाके समुंदर। साहब ये जो बढ़ते
- 16:59हर साल सैलाब आते हैं ये भी क्लाइमेट चेंज
- 17:01का है।
- 17:01बिल्कुल जी
- 17:02इंडिकेटर है।
- 17:03इंडिकेटर है। तो पाकिस्तान में ये इसलिए
- 17:04ज्यादा है कि एक तो हम हिमालिया के
- 17:06बिल्कुल उस स्लोप पे बैठे हैं। उसके
- 17:09बिल्कुल कदमों में बैठे हैं। दूसरा हम
- 17:11इक्वेटर के नजदीक हैं। तो हमारे यहां मौसम
- 17:14जो है वो बहुत ज्यादा। तीसरी जो सबसे बड़ी
- 17:16वजह है हमारे यहां हम एक डेवलपिंग कंट्री
- 17:18है। हमारे पास इतने रिसोर्सेज नहीं है कि
- 17:20हम क्लाइमेट चेंज के नतीजे में होने
- 17:22[संगीत] वाली तबायों के साथ साइंटिफिक
- 17:25अंदाज के साथ नब आजमा हो सके। लड़ सके।
- 17:27अमेरिका यूरोप के पास इतने रिसोर्सेज हैं
- 17:30कि उनके यहां बड़े-बड़े हरीिकेंस आते हैं।
- 17:32बड़े-बड़े वहां पे टोरनाडो आते हैं।
- 17:34आते हैं। आपने ये देखी ना लॉस एंजिस हेल
- 17:37फायर्स दर्जनों हेलीकॉप्टर आ गए। सैकड़ों
- 17:40वहां पे जनाब वो आ गई एंबुलेंस
- 17:44और हजारों की तादाद में हजारों की तादाद
- 17:46में फायर फाइटर्स आ गए। हमारे यहां भी
- 17:48देखिए कोटली सिया में आग लगी हुई है।
- 17:50दीर्घ के जंगलात में आग लगी हुई है।
- 17:52में आग लगी है।
- 17:53सर जमलात को आग एक बड़ा क्लाइमेट चेंज का
- 17:55असर ये है कि बुश फायर्स उसके इवेंट्स बढ़
- 17:58गए हैं।
- 17:58पहले हम सुनते थे उधर ऑस्ट्रेलिया में
- 18:00होती है या
- 18:01अब हमारे यहां होने लगता है।
- 18:02हमारे यहां होने
- 18:03वजह ये है कि क्लाइमेट चेंज
- 18:05बढ़ गया है।
- 18:05टेंपरेचर बढ़ने और फिर बारिशें बेतरतीबी
- 18:08है। पहले दो-ती दिन अगर गर्मी पड़ती थी
- 18:10बारिश हो जाती थी। हर चीज वेट हो जाती थी।
- 18:13अब क्या है? महीने बारिश नहीं होती। तो वो
- 18:16दरख्तों के ऊपर से गिरने वाले पत्ते वो
- 18:19इतना ईंधन प्रोवाइड कर देते हैं आग को
- 18:21जंगल के अंदर कि वो आग फिर बाकी जंगल की
- 18:23आग की तरफ जाती है।
- 18:24अच्छा डॉक्टर साहब आपने जैसे बात की
- 18:26जर्मनी आप रहे नार्व आप रहे और आपने
- 18:29क्लाइमेट चेंज को और उन लोगों के इदारों
- 18:31को और उनके काम को देखा उसका अगर कंपेयर
- 18:34करें पाकिस्तान पाकिस्तान में कैपेसिटी
- 18:37बिल्डिंग है इस हवाले से। देखिए हमें मेरे
- 18:39ख्याल में सबसे पहली बात तो ये है कि मैं
- 18:40अगेन वही जिस मकतबा फिक्र से मेरा ताल्लुक
- 18:43है मैं समझता हूं कि हमें अपने ग्रीन हाउस
- 18:45गैसेस को कम करने की जरूरत नहीं है। गुरबत
- 18:47है यहां पे। हमें इंडस्ट्री लगानी है।
- 18:49हमें हमारी अब जिम्मेदारियां भी क्या है।
- 18:51जिम्मेदारियां ये है कि क्लाइमेट चेंज के
- 18:52नतीजे में जो होने वाली तबाही है ना उनसे
- 18:55अपने आप को बचाने के लिए हमने कुछ
- 18:58जिम्मेदारियों का मुजायरा करना है।
- 18:59[संगीत]
- 19:00मुझे पता है मैं हीट वेव्स के पीरियड में
- 19:02रह रहा हूं तो मुझे बाहर जाने से पहले
- 19:03पानी पी के जाना चाहिए। साथ पानी लेके
- 19:05जाना चाहिए। मुझे पता है बाहर मैं जाऊंगा
- 19:07तूफान जखड़ आने वाला है। मैंने ऐप डाउनलोड
- 19:10की हुई है। मेरी जिम्मेदारी है कि मैं
- 19:12बाहर जाने से पहले देख लूं कि कहीं कोई
- 19:14इतना ज्यादा स्टंग तो नहीं है कि मेरी
- 19:16गाड़ी को या मेरी जान को नुकसान।
- 19:17अंब्रेला नहीं लेते।
- 19:18अंब्रेला छोड़े आप सर उसको छोड़े हम। अब
- 19:21तो ऐसे ओले गिरते हैं, गोरिल्ला हिल्स
- 19:23गिरते हैं कि गाड़ियां तबाह हो जाती हैं।
- 19:25तो हम अगर थोड़ी देर के लिए घर स्टे कर
- 19:27जाए और उसको गुजरने दें तूफान को थोड़ा सा
- 19:30थोड़ा सा तो हम अपने को
- 19:31मतलब हमें पेशेंस नहीं है और हम सिस्टेटिक
- 19:34नहीं है।
- 19:34सिस्टेटिक नहीं है। साइंटिफिक अंदाज में
- 19:36नहीं सोचते। और तीसरी जो सबसे बड़ी जो चीज
- 19:38है घर बनाते हुए हम कभी ये नहीं सोचते कि
- 19:40यार ये तो मैं दरिया के बेड के ऊपर घर
- 19:42बनाए जा रहा हूं। 10 साल से अगर दरिया
- 19:44नहीं आया तो इसका क्या मतलब है कि क्या
- 19:46दरिया वहां नहीं आएगा? पिछले साल हमने
- 19:48लाहौर और उसके गिर्दोनवा में देखा या नदी
- 19:50नालों में नर्दर्न एरियाज में जहां लेकक्स
- 19:52फट रही हैं। लोग नालों को एक्सपेंड करने
- 19:54की बजाय स्क्वीज़ किए जा रहे हैं। फिर वो
- 19:56नदी नाले जो है वो उसके अंदर बड़े पैमाने
- 19:59पे जब पानी आता है तो फिर लोग जो है वो
- 20:01तबाहियों का सामना करते हैं। तो हमारी
- 20:03जिम्मेदारियां हैं। अपनी जिम्मेदारियां
- 20:04हुकूमती जिम्मेदारियां अपनी जगह पे रही।
- 20:07लेकिन बतौर हर फर्द के
- 20:09हम अच्छा सर आपने घर की बात की जब हम घर
- 20:11बनाते हैं बिल्डिंग बनाते हैं इतना ज्यादा
- 20:13शीशा और सरिया इस्तेमाल करते हैं हम देखें
- 20:16एक गर्म ख्ते में रहते हैं क्लाइमेट चेंज
- 20:18के नतीजे में वैसे ही गर्मी यहां पे बढ़
- 20:20चुकी है अनफॉर्चूनेटली हमें अपने घरों को
- 20:24ब्लैक गाड़ियों को ब्लैक करने का वो एक
- 20:27चाह है और वो है कि मैं हैरान रह जाता हूं
- 20:30स्टाइल की तरफ जाता है
- 20:31ये जो अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट है ना यहां
- 20:34पे शहरों में क्यों गर्मी फील होती है आप
- 20:36देहातीती साइड पे चले जाए सब के नीचे चले
- 20:38जाए वहां पे आप में चले जाए वजह ये है कि
- 20:41हमने जब बिल्डिंग जो खड़ी की है उनकी छतें
- 20:43काली कर देते हैं सामने टाइलें काले रंग
- 20:45की लगा लेते हैं गाड़ियां काले रंग की
- 20:47रखते हैं पूरे शहर की सड़कें ब्लैक टॉप कर
- 20:49दी है वो सारी की सारी
- 20:50बिल्डिंग में शीशे लगा
- 20:51शीशे लगा देते हैं ब्लैक सो इवेंचुअली अब
- 20:54हमें अपनी जो मॉडर्न हाउसिंग है उसको भी
- 20:57क्लाइमेट चेंज के तनाजुर में मद्देनजर रख
- 21:00के मैं मैं यूरोप में जाके हैरान होता था
- 21:02कि सारे लोग घरों की छतें सफेद क्यों किए
- 21:04जा रहे हैं
- 21:04और हमारे यहां काली हमारे यहां खाली किए
- 21:06जाते हैं। वो कहते हैं कि सूरज की रोशनी
- 21:07जो है वो उससे रिफ्लेक्ट हो के ये एक
- 21:10अंडरस्टुड बात है। रिफ्लेक्ट होती है।
- 21:12रिफ्लेक्ट होती है। तो वो तो इतने परेशान
- 21:13है। वो देखें वो मैं जब अपने यहां
- 21:16पाकिस्तान में दिखाता था ना कि हमारे पास
- 21:17ग्लेशियर्स हैं तो वो कहता है यार आपके
- 21:19यहां कम्युनिटी कितनी इको डिस्ट्रक्टिव है
- 21:22कि ये ग्लेशियर्स बर्फ के ऊपर कैसे चल रही
- 21:24है। वो अपने ग्लेशियर्स बचाते हैं। वो
- 21:26कहते हैं कि जमीन को सफेदे की जरूरत है
- 21:28सफेद होने की। जितने ग्लेशियर्स पिघल रहे
- 21:31हैं नीचे से नीला पानी काली जो जमीन निकल
- 21:34रही है ये सूरज की रोशनी को मजीद अपने
- 21:36अंदर ड्रॉप करती जा रही है
- 21:38तो आपके लोग जो है वो ग्लेशियर्स के ऊपर
- 21:40फिर रहे हैं गाड़ियां फिर रही है
- 21:42पहले इतना ज्यादा हीट वाले एरिया में रह
- 21:45रहे हैं
- 21:46अच्छा इंडिविजुअल की रिस्पसिबिलिटी की बात
- 21:48है मैं पिछले दिनों एक आर्टिकल पढ़ रहा था
- 21:50उसमें था कि जो आप एक जींस बनती है ना
- 21:53इसमें 1000 गिलन पानी लगता है
- 21:55और 1000 गिलन पानी पता नहीं कितने अरसे तक
- 21:57एक बंदा पीता रहता है
- 21:58ऐसे ही ऐसे ही तो इस पे हम इतना पानी जाय
- 22:01कर देते हैं।
- 22:02अनफॉर्चूनेट है। देखिए अब मैं अगेन वही
- 22:04बात करूंगा कि अगर वो पानी इस्तेमाल हो भी
- 22:06गया है तो आप उस पानी को रिसाइकल करें और
- 22:09दोबारा से रीयूज करें। ठीक है? इंसानों की
- 22:11जरूरत है। उसने जींस और कपड़े तो पहनने
- 22:13हैं। लेकिन आप माहौल दोस्त प्रैक्टिससेस
- 22:15जो है उसको अडॉप्ट करें। सही। अब मसला ये
- 22:17है कि यूरोप का जो कंज्यूमर है वो एक और
- 22:20सोच का हामिल है। हमारे यहां सोच कुछ और
- 22:22तरह की है। हम तो पानी को मुफ्त का एक वो
- 22:25रिसोर्स समझ के बेतहाशा जाया करते हैं।
- 22:28यूरोपियन जब जीन भी खरीदने जाएगा ना
- 22:30पाकिस्तानी किसी ब्रांड की निशाद की भी तो
- 22:32वो देखेगा फरी तौर पे कि इसने इसकी
- 22:34एनवायरमेंट पॉलिसी में क्या कुछ लिखा है।
- 22:36वो पूरा वो पढ़ेगा उसका जो टैग है। उसके
- 22:38ऊपर लिखा होगा इन्होंने। हम जब वो माल
- 22:40भेजते हैं तो उस हम लिखते हैं कि पानी
- 22:42बचाने के लिए हमने क्या-क्या कुछ किया।
- 22:44उसको ट्रीट किया दोबारा। कैसे किया? लेकिन
- 22:47यहां पे हम कभी खरीदते हुए पढ़ते हैं और
- 22:49मैंने अपनी आंखों से देखा जर्मंस को कि वो
- 22:52उसको पढ़ने के बाद फैसला करते हैं कि
- 22:54किसने कितनी ज्यादा माहौल यानी एक जींस
- 22:58पाकिस्तान से आई है, एक म्यांमार से आई
- 22:59है, एक बांग्लादेश से आई है। तीनों के टैग
- 23:01पढ़ने के बाद देखेंगे किसकी ज्यादा माहौल
- 23:02दोस्तों?
- 23:03किसने पॉलिसी पे अमल किया?
- 23:04पॉलिसी पे अमल किया। तो वो महंगे वाली
- 23:05खरीद लेगा। इस वजह से कि वो उसको लगता है
- 23:07ये ज्यादा इको फ्रेंडली प्रैक्टिससेस से
- 23:09तैयार हुई है।
- 23:10अच्छा डॉक्टर साहब आपने बात की थी कि इससे
- 23:11ज्यादा इफेक्टेड है किसान। जी।
- 23:14अब हमारे यहां अनफॉर्चूनेटली
- 23:16ऐसी फसलें लगा देते हैं जो हमारे
- 23:18एनवायरमेंट के मुताबिक कंपैटिबल नहीं
- 23:20होती। जो पानी ज्यादा पीती हैं या दरख्त
- 23:23ऐसे जैसे सफेदे का दरख्त है हमारी इस फसल
- 23:26के लिए नहीं है। तो ये भी एक एजुकेट करने
- 23:28की जरूरत है।
- 23:29सिर्फ एजुकेट नहीं यहां रवयों में तब्दीली
- 23:31लाने की जरूरत है। हमारे यहां सबसे बड़ी
- 23:33जो माहौल दुश्मन फसल है मैं उस पे बात
- 23:35करूंगा।
- 23:36लेकिन आपके बहुत सारे लोग नाराज हो
- 23:38जाएंगे। चावल है।
- 23:39चावल चावल की फसल बड़े पैमाने पे मीथेन
- 23:42[संगीत] खारिज है।
- 23:42सही।
- 23:43ठीक है? बट अनफॉर्चूनेटली
- 23:44पानी की कंसशन भी ज्यादा है।
- 23:46बहुत ज्यादा पानी क्योंकि वो लगता ही पानी
- 23:48में है और कटता भी पानी में तकरीबन में
- 23:50है। लेकिन अनफॉर्चूनेटली यहां के किसान को
- 23:52आप समझा नहीं सकते। आप बात तो करें कि
- 23:54चावल की कोई अल्टरनेटिव हो। हो सकता है
- 23:56चावल के मुकाबले वो एोकाडो काश करे। यहां
- 23:58एोकाडो इतना ज्यादा पैसे कमा सकता है।
- 24:01लेकिन वो लाइफ लॉन्ग उसने एक प्रैक्टिस
- 24:03अपने बड़ों से सीखी है। वो छोड़ेगा नहीं।
- 24:05आप सोच के
- 24:06प्रैक्टिस बन गई है।
- 24:07प्रैक्टिस बन गई। हमारा किसान तो इतना
- 24:08राजी बजा है। मीथेन के अखराज की एक बड़ी
- 24:11सोर्स यहां पे गाय या भैंस है। लाइफस्ट आप
- 24:14अगर उसको सिर्फ यह कह देना कि यार अपनी
- 24:16गाय या भैंस को आप माहौल दोस्त कर लें।
- 24:20कैसे आप उसकी [संगीत] नस्ल को इंप्रूव
- 24:22करें कि वो कम खाए और ज्यादा दूध और वो दे
- 24:25और क्योंकि वो जब ब्रीड उसकी ब्रीड चेंज
- 24:28अच्छी करें। ताकि वो जो चारा खाने पे
- 24:32फर्मेंटेशन के नतीजे में बर्ब्स जो लेती
- 24:35है उससेन
- 24:38अगर उसने जो उसने जो उसने गोबर किया है
- 24:41उसको अगर हम बायोगैस प्लांट में डाल के और
- 24:44उसे बायोगैस तैयार करके अपने घर में फ्री
- 24:46ऑफ कॉस्ट हम गैस प्रोड्यूस कर सकते हैं।
- 24:48लेकिन अनफॉर्चूनेटली किसान को इन चीजों पे
- 24:50लाए कौन? क्योंकि वो बेसिकली वो राजी बजा
- 24:53है। उसको वो प्रैक्टिस जो वो अपनी नस्लों
- 24:56से करता आ रहा है उससे निकलने के लिए
- 24:57तैयार है।
- 24:57सर हमने तो सिंध के डेल्टा में सिंध के जो
- 25:00मैदान है वहां पे भी कमाद लगा दिया।
- 25:03गन्ना लगा दिया।
- 25:04पानी और एक्सजेक्टली वही कमाद हो गया। ये
- 25:07आपके पास चावल हो गया। ये तो इंतहाई
- 25:11ज्यादा वाटर जो है कंज्यूमिंग आपकी
- 25:13क्रॉप्स हैं। और फिर सेकंड सबसे बड़ी बात
- 25:16ये है कि हमने इनको रवयों में इतने इस
- 25:19तरीके से एंबेड कर दिया है। किसान इनके
- 25:22अल्टरनेटिव के लिए जाने के तैयार नहीं है।
- 25:24यहां पे हम क्यों नहीं ऑलिव्स लगाते? यहां
- 25:26पे क्यों नहीं हम ऐसी फसल जो हमें कई गुना
- 25:28ज्यादा पैसे दे। वो मैं एक रिपोर्ट पढ़
- 25:30रहा था कि उधर जो है बलचिस्तान में एक
- 25:32बंदे ने ऑलिव्स लगाए और उसके दुनिया भर
- 25:34में एक्सपोर्ट हो रहा है। एक्सपोर्ट हो
- 25:36रहा है।
- 25:36तो वो यकीन है ना वो एक इंडिविजुअल
- 25:37मतलब कन्वेंशनल कन्वेंशन से हटके जब हम
- 25:40कोई चीज इसके लिए हमें सोशल एंड बिहेवियरल
- 25:43चेंज कैंपेन लाने की जरूरत है और ये जो
- 25:45कम्युनिटीज है इनको अगर हम कायल कर लें तो
- 25:47हम बहुत सारी माहौल दुश्मन जो
- 25:49प्रैक्टिससेस हैं उससे भी निकल आएंगे और
- 25:51हम इवेंचुअली मुल्क के लिए रेवेन्यू भी
- 25:53देंगे।
- 25:53अच्छा सर आपका बेसिक ताल्लुक जो है मीडिया
- 25:56से। आप मीडिया के उस्ताद हैं। आप पीएचडी
- 25:58हैं।
- 25:59ये बताइए हमारा मीडिया क्लाइमेट चेंज के
- 26:01हवाले से
- 26:02देखिए इवेंचुअली मीडिया ने वही कुछ फॉलो
- 26:05करना होता [संगीत] है जो के मीडिया का
- 26:07एजेंडा सेट कर रहे हैं।
- 26:09सही
- 26:09ठीक है।
- 26:10हमारे एजेंडे में क्लाइमेट चेंज है।
- 26:11फिलहाल नहीं है। वजह यही है कि हुक्मरानों
- 26:14को उस पे आवाम की तरफ से किसी किस्म का
- 26:17प्रेशर नहीं है। उनको जिनका प्रेशर है वो
- 26:20मीडिया वो उन हुक्मरानों को वो उन्हीं का
- 26:23एजेंडा टोक करते हैं। मीडिया में भी हमें
- 26:25वो नजर आता है।
- 26:26उन्होंने इस वक्त ईरान वार इराक वार
- 26:28उन्होंने इस उनके ऊपर उसका प्रेशर वो
- 26:30करेंगे। आईएमएफ का प्रेशर होगा। तो आपको
- 26:32मीडिया नैरेटिव्स में भी वही इश्यूज नजर
- 26:34आएंगे जो हुक्मरानों के इशैरेटिव्स में तो
- 26:37अब कुछ थोड़ा सा पुश है इंटरनेशनल अदारों
- 26:39की तरफ से भी कि यार आप क्लाइमेट चेंज
- 26:41सर आपने बात की वहां के जो हीरो है वो
- 26:43ग्रेटर कमबा हमारे यहां टिकटटॉकर हैं।
- 26:47अनफॉर्चूनेट है कि हमने अपनी यूथ को ना
- 26:49बहुत ज्यादा [संगीत] एपिटिकल कर दिया है।
- 26:52मेरे ख्याल में ए पॉलिटिकल करें। ठीक है।
- 26:54अगर रियासत को अगर खतरा है नौजवानों के
- 26:56गुस्से से तो ठीक है आप करें पिटिकल लेकिन
- 26:59कुछ इशज़ पे तो उनको पिटिकल कर दें तभी तो
- 27:01ये चुपच चुप करके निकलते जा रहे हैं यहां
- 27:03से जब आप उनको बोलने सोचने का मौका ही
- 27:06नहीं दे रहे आप कम से कम क्लाइमेट चेंज के
- 27:08ऊपर ही उनको पिटिकल कर दें
- 27:09पोलिटिकल कर दें
- 27:10ग्रेटर थनेबर्ग जो है उसके फॉलोअर्स कौन
- 27:13है उसके फॉलोअर्स ऐसे जर्मन क्लाइमेट चेंज
- 27:16तो हमें अपने नौजवानों को कम से कम देखिए
- 27:19मैं एक चीज का हूं पाकिस्तानकि ग्रीन हाउस
- 27:22गैसेस खारिज बहुत कम करता है लेकिन सबसे
- 27:24ज्यादा इसके असरात को वो जो है फेस करता
- 27:26है। हमें पूरी दुनिया से हम हमारा एक बड़ा
- 27:28पुराना मुतालबा है कि नुकसान कर त नुकसान
- 27:31रहे हो परसी रहे या हम क्यों भरे ना आप
- 27:34पैसे दें तो कंपनसेशन
- 27:37कंपनसेशन करें उसके लिए हम एक गरीब जो
- 27:40मुल्क है ना हम जैसे जो लो मीटिंग कंट्रीज
- 27:42गरीब नहीं जो लो मीटिंग कंट्रीज हमारा एक
- 27:43लॉन्ग स्टैंडिंग डिमांड है पूरी दुनिया से
- 27:45के लॉस एंड डैमेज [संगीत] फंड एक फंड
- 27:48जिसमें वो मुल्क जो कंट्रीब्यूटर है
- 27:50ग्रीनोस गैसेस के उसके अंदर पैसे डालें अब
- 27:53ये जो मूवमेंट है इस इसको हम कहते हैं
- 27:55क्लाइमेट जस्टिस
- 27:56जस्टिस
- 27:57हम इसी पे अपने नौजवानों को तैयार कर ले
- 27:59और वो मैं कहता हूं यहां पे डिप्लोमेटिक
- 28:02इंक्लेव के बाहर चंद 100 नौजवानों को खड़ा
- 28:04करें और अमीर मुल्कों की एंबेसियों को
- 28:07मैसेज चला जाए कि यहां का नौजवान जो और
- 28:09हुकूमत इससे बहुत ज्यादा देखिए क्लाइमेट
- 28:13लॉस एंड डैमेज के नाम पे एक देने को
- 28:15दुनिया तैयार नहीं है। सिर्फ क्लाइमेट
- 28:16फाइनेंसिंग पे फिर कर्जे दिए जा रहे हैं।
- 28:18कर्जे दिए जा रहे हैं। यानी आपकी गाड़ी
- 28:20में आके किसी ने गाड़ी मारी है और आपका
- 28:22नुकसान हुआ है। आपका कोई उसमें कसूर नहीं
- 28:24है। ऐसा हमारा कसूर नहीं है। अब आप उससे
- 28:26यह तो नहीं ना कहेंगे कि आप मुझे कर्जा
- 28:28दें।
- 28:29आप उससे अपना हरर्जाना मांगेंगे ना। हमारे
- 28:31साथ हो ये रहा है कि हमारा क्लाइमेट चेंज
- 28:33में हिस्सा ही नहीं है।
- 28:34हम अपना मुकदमा पेश ही नहीं कर पा रहे।
- 28:35नहीं पेश
- 28:36मतलब जैसे आपने बात की क्लाइमेट जस्टिस की
- 28:38या बंदे को पता ही नहीं है कि हम मुतासिर
- 28:41हैं। हमें उसकी रेमिनेशन चाहिए। हमें उसका
- 28:42कंपनसेशन रेपोरेशन रेपोरेशन द ओनली सशन और
- 28:46देखिए हमारा यही मुकदमा अमीर मुल्क जो है
- 28:49वहां की यूथ थोड़ा उठा रही होती है ये हर
- 28:52साल जो एक बड़ा इकट्ठ होता है लीडरशिप का
- 28:55वो होता है सीओपी कॉन्फ्रेंस ऑफ़ पार्टीज
- 28:57नवंबर में हर साल होता है
- 28:58आप उसके बाहर जाए तो कॉप 30 कॉ बिल्कुल इस
- 29:01दफा कॉप 30 अब [संगीत] तुर्की में होगी तो
- 29:03हर साल लाखों की तादाद में जहां पे वो
- 29:06कॉन्फ्रेंस हो रही होती है पूरी दुनिया से
- 29:08एक्टिविस्ट क्लाइमेट एडवोकेट जर्नलिस्ट
- 29:10[संगीत]
- 29:11आए होते हैं और अनफॉर्चूनेटली हमारे यहां
- 29:14का जो चंद एक एलट किस्म की यूथ वहां पर
- 29:17जाती [संगीत] है वो वहां पर जाकर भी
- 29:19डीकार्बनाइजेशन की बात कर रही होती है और
- 29:21मैं हैरान होता हूं डीकार्बनाइजेशन की तो
- 29:23हमने बात नहीं करनी पाकिस्तान क्यों
- 29:25डीकार्बनाइज करे हमें तो जरूरत है अभी
- 29:27कार्बन एमिशंस की ताकि हमारा हम अपने
- 29:29चाइना ने अपने लोगों को कैसे गुरबत से
- 29:31निकाला है इंडस्ट्री लगाई है ना कार्बन
- 29:33फुटप्रिंट बढ़ाया है तो अब कार्बन
- 29:35फुटप्रिंट ये मुल्क जिन्होंने अपनी मशतों
- 29:38को इतना स्ट्रांग कर लिया है इनको अपने
- 29:39कार्बन फुटप्रिंट कम करने हैं और कार्बन
- 29:42बजट में सब हमें हिस्सा देना है। लेकिन
- 29:44अनफॉर्चूनेटली वहां पे हमारा नौजवान जो है
- 29:47वह डीकार्बनाइजेशन की बात कर रहा था
- 29:48क्योंकि उसका किसी ने एजेंडा ही सेट नहीं
- 29:50किया। हमें वहां पे बात करनी है क्लाइमेट
- 29:52जस्टिस की भाई मेरे हमारा हिस्सा ही नहीं
- 29:55है इस कार्बन फुटप्रिंट के अंदर। तो हम जो
- 29:58डीकार्बनाइजेशन क्यों करें? हमें जो हमारा
- 30:00नुकसान हुआ है। हमारे किसान का नुकसान हुआ
- 30:02है। आम आदमी का नुकसान हुआ है। हुकूमते
- 30:04क्या करती है? वो हमें कुछ नहीं देती। वो
- 30:06हमें उनसे पैसे लेने की बजाय वो हम पे
- 30:09टैक्सेस लगाते हैं। हमारे यहां
- 30:11हमारा किसान इसी वजह से नीचे जा रहा है।
- 30:13नीचे जा रहा है। सो इवेंचुअली आपकी हुकूमत
- 30:15जो है उसको पता है कि आवाम जो है उनको पता
- 30:18ही नहीं है क्लाइमेट जस्ट क्लाइमेट होता
- 30:20क्या है? क्लाइमेट चेंज क्या है? जस्टिस
- 30:22क्या है?
- 30:22और नुकसान जो ये हो रहा है इनमें तो इन
- 30:24बेचारों का हिस्सा ही कोई नहीं है।
- 30:26तो नुकसान जो है वो सारा हमारी जेब से
- 30:28पूरा हो रहा है। महंगाई की
- 30:30आखरी सवाल स्पेशली पाकिस्तान के हवाले से
- 30:33वे फॉरवर्ड क्या?
- 30:35वे फॉरवर्ड हमारे पास देखिए मैंने अगेन
- 30:37वही कहा है कि हमें [संगीत]
- 30:39इस वक्त कोई ग्रीन हाउस गैसेस के खात्मे
- 30:41की कोई बहुत ज्यादा बात नहीं करनी चाहिए।
- 30:44ठीक है? हमें अभी अपने लोगों को गुरबत से
- 30:46निकालना है। हमें इंडस्ट्री लगानी है। ठीक
- 30:48है? हमें इस पे बिल्कुल हां ये है कि हम
- 30:51अपनी इंडस्ट्रियल प्रैक्टिससेस को माहौल
- 30:52दोस्त कर लें।
- 30:53ठीक है? हम अपनी इंडस्ट्री के अंदर जितनी
- 30:55एनर्जी यूज़ होनी है उसको आप सारी
- 30:57पे रिन्यूएबल पे आ जाए। वो मैं उससे इंकार
- 30:59नहीं कर रहा। लेकिन आप बिल्कुल उसप
- 31:01डिफेंसिव ना हो। वे फॉरवर्ड ये है कि हमें
- 31:03क्लाइमेट जस्टिस के बयानों [संगीत] को
- 31:05वर्ल्ड वाइड बहुत ज्यादा प्रमोट करने की
- 31:07जरूरत है।
- 31:08मोमेंटम बनाना चाहिए।
- 31:08मोमेंटम बनाना चाहिए। हम सब लो अमिटिंग
- 31:10कंट्रीज को मिलजुल के हम कोशिश भी कर रहे
- 31:12हैं। लेकिन हमें इस हुकूमतों को लोटिंग
- 31:15कंट्रीज की हुकूमतों को अपना ये जो मुकदमा
- 31:18है आर्मी बिरादरी के सामने तो पेश करके
- 31:20देख लिया। वहां से तो कोई मुदावा नहीं हो
- 31:22रहा। अपनी यूथ के पास ले।
- 31:24यूथ के पास थू के पास पब्लिक पब्लिक
- 31:26एजेंडा पे
- 31:27चेंज एजेंट यूथ ही है ना?
- 31:29यूथ है ना सर? तो आप देखिए उनके मुल्कों
- 31:31के अंदर जो उनकी यूथ है वो इतनी हाईली
- 31:33पिटिसाइज्ड है वहां पे उनकी यूथ जो है वो
- 31:37मोनाजा की प्रिंटिंग के ऊपर काफी फेंक रही
- 31:39है।
- 31:40किस वजह से वो मोनालेजा की फेंकी ना तो
- 31:42पूरी दुनिया का एजेंडा बन गया। उनकी यूथ
- 31:44कह रही है कि देखें हम अपने सेनेटर्स की
- 31:48गाड़ियों के ऊपर फेंक रहे हैं। क्यों?
- 31:51इसलिए कि वो उनको मैसेज दे रहे हैं कि भाई
- 31:53तुम अपनी जी चुके हो बूढ़े। ये सियारा अब
- 31:56हमारा था। ये जो इंटर जनरेशनल इनजस्टिस है
- 32:00ना
- 32:01तुमने हमारे लिए छोड़ा क्या ये सियारा ये
- 32:03सारा तो खत्म हो रहा है
- 32:04कॉकरोच जनता पार्टी भी
- 32:05एक्सक्ट्ली इंडिया में कॉकरोच जनता पार्टी
- 32:07यूथ क्यों
- 32:09इसी का रिटेलिएशन है ना आपने आप जो
- 32:13सियासतदान है अनफॉर्चूनेटली दुनिया के
- 32:15सारे [संगीत] जो बड़े बूढ़े
- 32:17वो यूथ की जो रिक्वायरमेंट्स है
- 32:19यूथ का जो ज़हन है जो उनकी डिमांड्स है
- 32:21उनको समझने से बिल्कुल आ रही है।
- 32:23इवेंचुअली मुझे वही नजर आता है कि फ्यूचर
- 32:26में यहां पे पूरी दुनिया के अंदर सियासी
- 32:29अमल को तो हमने इतना ज्यादा इंजीनियर्ड कर
- 32:32दिया है कि उसमें हम पूरी दुनिया के अंदर
- 32:35आप मीडिया के जरिए से अदरवाइज नॉन स्टेट
- 32:37एक्टर्स के जरिए से आप इक्शंस के दिनों
- 32:39में हाईजैक करके एजेंडा जो है वो बिल्कुल
- 32:41चेंज कर
- 32:41यानी आप समझते हैं बूमर और जजी वाला मामला
- 32:44मामला है और ये आने वाले सालों में मुझे
- 32:46लगता है कि कहीं कोई दुनिया भर में बड़े
- 32:49ऐसे वाक्यात ना होना शुरू हो जाए कि ये
- 32:52बूमर और जजी जी जो है ये किसी के कंट्रोल
- 32:54में
- 32:55सही देख सरता है
- 32:58गैप है [संगीत] देखिए अभी तो मैं आपको
- 32:59इसलिए ये कह रहा हूं मैं किसी तनाज में
- 33:02बात
- 33:03अभी क्लाइमेट चेंज इंड्यूस्ड इवेंट्स जो
- 33:05है
- 33:06उनकी शिद्दत में इजाफा हो रहा है
- 33:08अनफॉर्चूनेटली दुनिया में लीडरशिप वो आ गई
- 33:10है जो क्लाइमेट चेंज डिनायर उसमें ट्र
- 33:13टाइप चीजें क्या है ये हम मानने को तैयार
- 33:15नहीं है
- 33:15ये मामला हमारे टरामेंट पे भी आता है ना
- 33:18हमारे बिहेवियर्स पे भी आता है ना
- 33:19फ्रस्ट्रेशन आती है
- 33:21फ्रस्ट्रेशन इवेंचुअली सर देखिए आज से 30
- 33:2340 साल के बाद एक जवान हो
- 33:25वो जब इतनी इस तरह के इवेंट्स में जी रहा
- 33:28हो
- 33:28कॉम्प्लिकेटेड होगा
- 33:29जो एक्सजेक्टली और जहां पे क्लाइमेट चेंज
- 33:33इतनी तेजी से अपनी तबाहियों के साथ अपनी
- 33:35हशर सामानियों के साथ यहां पे डर आएगी तो
- 33:39फिर इवेंचुअली वो सोचेगा तो सही ना कि ये
- 33:41हमें क्या दे
- 33:41क्या दे
- 33:43सो वो जो मेहरूमियां है वो इवेंचुअली मुझे
- 33:46फिर किसी बड़े उसका नजर आती है इंकलाब का
- 33:49या तब्दीली का
- 33:50डॉक्टर साहब थैंक यू वेरी मच आज आपने जो
- 33:53क्लाइमेट चेंज है, वेदर है, हमारा
- 33:55एनवायरमेंट है उस हवाले से एक से हासिल
- 33:58गुफ्तगू की और जो कि आम इंसान नहीं जानता
- 34:01है जो कि ले मैन को नहीं पता या आम पढ़े
- 34:03लिखे लोगों को भी नहीं पता कि ये क्लाइमेट
- 34:06चेंज है क्या? इसके मसाइल क्या है? इसकी
- 34:08वजूहात क्या है और हम क्या कर सकते हैं।
- 34:10नाजरीन बिहाइंड द इंपैक्ट में आज हमारे
- 34:12मेहमान थे डॉक्टर शफीक अहमद कंबोज साहब जो
- 34:16एनवायरमेंट
- 34:18स्पेशलिस्ट हैं प्रोफेसर हैं पंजाब
- 34:20यूनिवर्सिटी के मीडिया स्टडीज डिपार्टमेंट
- 34:22में उनके साथ हमारा जो आज का मामला था वो
- 34:26था क्लाइमेट चेंज के हवाले से। जो
- 34:28उन्होंने लास्ट बात की है ना कि इंकलाब
- 34:32सिर्फ सियासत के लिए नहीं हो सकता। इंकलाब
- 34:36सिर्फ मशत के लिए नहीं हो सकता। इंकलाब जो
- 34:39है वो आपके रहने की जगह जिसे हम घर कहते
- 34:42हैं जिसे दुनिया कहते हैं उसकी हालत बदलने
- 34:46के लिए भी हो सकता है। क्लाइमेट चेंज के
- 34:48हवाले से भी होता है। अपना ख्याल रखिएगा।
- 34:51अल्लाह हाफिज।
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