YouTube2Text

OSHO - खुदको इतना बदलो, की लोग तुमसे मिलने को तरसे! | Osho Life Changing Speech #osho — Transcript

by DHYAN GURU · 3,320 words · 443 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00धीरे से बैठो। आंखें बंद करने की जल्दी मत
  2. 0:03करो। पहले [संगीत]
  3. 0:04अपने भीतर के शोर को सुनो। क्योंकि
  4. 0:07परिवर्तन बाहर से शुरू नहीं होता। वह वहीं
  5. 0:10से जन्म लेता [संगीत] है जहां तुम अपने आप
  6. 0:12से पहली बार सच बोलते हो। तुमने कभी गौर
  7. 0:16किया है? लोग तुम्हें तभी याद करते हैं जब
  8. 0:19उन्हें तुम्हारी जरूरत होती [संगीत] है।
  9. 0:20और जब जरूरत खत्म तो तुम भी खत्म। यह
  10. 0:24अपमान नहीं है। यह संकेत [संगीत] है।
  11. 0:26संकेत कि तुमने अभी तक खुद को इतना
  12. 0:30मूल्यवान नहीं बनाया कि [संगीत] तुम्हारी
  13. 0:32उपस्थिति ही आवश्यकता बन जाए। तुम भागते
  14. 0:35रहे लोगों के पीछे, [संगीत] स्वीकृति के
  15. 0:38पीछे, तारीफ के पीछे। लेकिन जिसने खुद को
  16. 0:43जान लिया। [संगीत] वह कभी किसी के पीछे
  17. 0:45नहीं भागता और तब लोग उसके पीछे आने लगते
  18. 0:49हैं। याद रखना दुनिया उसी के पास जाती है
  19. 0:53जो [संगीत] अपने पास होता है। तुम्हारी
  20. 0:56सबसे बड़ी कमी यह नहीं कि तुम में प्रतिभा
  21. 0:58कम [संगीत] है या अवसर कम है। तुम्हारी
  22. 1:01सबसे बड़ी कमी यह है कि तुम खुद को दूसरों
  23. 1:04की नजर से देखते हो। आज कोई तुम्हारी
  24. 1:06[संगीत] प्रशंसा करे तो तुम खुश। कल वही
  25. 1:10व्यक्ति अनदेखा करे तो तुम दुखी। तुम अपने
  26. 1:13जीवन के मालिक नहीं रहे। तुम दूसरों की
  27. 1:16प्रतिक्रिया के दास बन गए। और जो दास
  28. 1:18[संगीत] है उससे मिलने को कोई तरसता नहीं।
  29. 1:22लोग उसी से मिलना चाहते हैं [संगीत] जिसके
  30. 1:24पास शांति हो जिसके पास स्थिरता हो जिसके
  31. 1:28पास खुद का आकाश [संगीत] हो। अब एक प्रश्न
  32. 1:30पूछो अपने आप से अगर तुम्हें आज एकांत में
  33. 1:34रख दिया जाए। [संगीत] कोई मित्र नहीं, कोई
  34. 1:37बातचीत नहीं, कोई ध्यान भटकाने वाला नहीं।
  35. 1:40[संगीत] क्या तुम अपने साथ रह पाओगे या
  36. 1:42तुम खुद से ही भाग जाओगे? सच्चाई यही है।
  37. 1:46जिस [संगीत] व्यक्ति को खुद का साथ अच्छा
  38. 1:48लगने लगता है, दुनिया उसका साथ चाहने लगती
  39. 1:51है। परिवर्तन का पहला [संगीत] कदम लोगों
  40. 1:54को प्रभावित करना नहीं। खुद से प्रभावित
  41. 1:57होना है। आज [संगीत] से तुम एक छोटा
  42. 2:00प्रयोग करो। जब कोई तुम्हें अनदेखा करे तो
  43. 2:03प्रतिक्रिया मत देना। जब कोई तुम्हारी
  44. 2:06प्रशंसा करें [संगीत] तो भी प्रतिक्रिया
  45. 2:08मत देना। बस देखना धीरे-धीरे तुम पाओगे।
  46. 2:12तुम्हारे भीतर [संगीत]
  47. 2:13एक जगह बन रही है जहां ना अपमान पहुंचता
  48. 2:16है। ना सम्मान और वही जगह तुम्हारी असली
  49. 2:20[संगीत] ताकत है। लोग क्यों किसी के पास
  50. 2:23बार-बार जाते हैं क्योंकि उसके पास शब्द
  51. 2:26नहीं। ऊर्जा होती है और [संगीत] ऊर्जा
  52. 2:30शब्दों से नहीं जीवन से बनती है। तुमने
  53. 2:33बहुत कुछ सीखा। [संगीत]
  54. 2:34बहुत सुना, बहुत समझा लेकिन अभी तक जिया
  55. 2:38नहीं। [संगीत]
  56. 2:39ज्ञान जमा करने से व्यक्ति आकर्षक नहीं
  57. 2:42बनता। जीवन [संगीत] जीने से बनता है। आज
  58. 2:44से एक आदत बदलो। बात कम, अनुभव ज्यादा,
  59. 2:48[संगीत] शिकायत कम, ध्यान ज्यादा, दूसरों
  60. 2:52को समझाने की कोशिश कम, खुद को समझने की
  61. 2:55कोशिश [संगीत] ज्यादा, धीरे-धीरे तुम
  62. 2:58पाओगे। तुम्हारे चेहरे पर एक अलग शांति आ
  63. 3:01रही है और लोग पूछेंगे तुम बदले बदले
  64. 3:04क्यों लग रहे हो तब भी मत बताना क्योंकि
  65. 3:07जो समझाना पड़े वह [संगीत] परिवर्तन नहीं
  66. 3:10जो दिख जाए वह परिवर्तन है याद रखना
  67. 3:14महत्वपूर्ण व्यक्ति बनने की कोशिश मत करो
  68. 3:17गहरा व्यक्ति बनो महत्वपूर्ण व्यक्ति को
  69. 3:20लोग याद रखते हैं गहरे व्यक्ति को लोग
  70. 3:23खोजते हैं और एक [संगीत] दिन ऐसा आएगा तुम
  71. 3:26कहीं बैठोगे चुप और लोग खुद पास आकर
  72. 3:29बैठेंगे बात करने नहीं सिर्फ रहने क्योंकि
  73. 3:33तुमने अपने भीतर एक घर बना लिया होगा। अब
  74. 3:36एक और बात समझो [संगीत] तुम्हारी आदत रही
  75. 3:39है हर संबंध में खुद को साबित करने की।
  76. 3:42तुम कोशिश करते रहे [संगीत] कि सामने वाला
  77. 3:45तुम्हें खास माने। लेकिन जो खुद को खास
  78. 3:48मान ले उसे किसी प्रमाण [संगीत] की जरूरत
  79. 3:50नहीं रहती। आज से किसी को प्रभावित करने
  80. 3:54के लिए [संगीत] मत जियो। अपने अनुभव को
  81. 3:56सच्चा करने के लिए जियो। सुबह उठो तो
  82. 3:59जल्दी मत उठो। पहले [संगीत] महसूस करो।
  83. 4:02तुम जीवित हो। चलो तो जल्दी मत चलो। पहले
  84. 4:06महसूस करो। तुम चल रहे हो। [संगीत] खाओ तो
  85. 4:09जल्दी मत खाओ। पहले महसूस करो। तुम स्वाद
  86. 4:13ले रहे हो। धीरे-धीरे तुम्हारा जीवन गहरा
  87. 4:16होने लगेगा। और गहराई ही आकर्षण [संगीत]
  88. 4:18है। ऊपरी व्यक्ति मनोरंजन देता है। गहरा
  89. 4:22व्यक्ति सुकून देता है। मनोरंजन लोग भूल
  90. 4:25जाते [संगीत] हैं। सुकून लोग खोजते हैं।
  91. 4:28अब समझो क्यों लोग कुछ लोगों से बार-बार
  92. 4:31मिलना चाहते हैं। वे उनसे बात करने नहीं।
  93. 4:34अपने [संगीत] मन को शांत करने जाते हैं।
  94. 4:37तुम भी वैसे बन सकते हो। पर उसके लिए खुद
  95. 4:40को बदलना नहीं। खुद को हटाना होगा।
  96. 4:42[संगीत] जो नकली है उसे हटाओ। दिखावा
  97. 4:46हटाओ, जल्दी हटाओ, तुलना हटाओ। और एक दिन
  98. 4:51तुम देखोगे तुम्हारे भीतर एक सरल [संगीत]
  99. 4:53व्यक्ति बचा है और वही सबसे आकर्षक है
  100. 4:56क्योंकि सरलता दुर्लभ है। आज दुनिया में
  101. 4:59सब जटिल हो रहे हैं। जो [संगीत] सरल हो
  102. 5:02गया वह अनमोल हो गया। अब से तुम्हारी
  103. 5:05सफलता यह नहीं होगी कि कितने [संगीत] लोग
  104. 5:08तुम्हें जानते हैं। तुम्हारी सफलता यह
  105. 5:11होगी कि जो जानते हैं [संगीत] वे तुम्हें
  106. 5:13खोना ना चाहे। धीरे-धीरे लोग तुमसे मिलने
  107. 5:17को बहाने ढूंढेंगे और तुम्हें समझ भी नहीं
  108. 5:21आएगा। तुमने ऐसा क्या किया? तुमने [संगीत]
  109. 5:23कुछ किया नहीं होगा। तुमने सिर्फ होना सीख
  110. 5:26लिया होगा। यही परिवर्तन है [संगीत] जब
  111. 5:29व्यक्ति करना छोड़ होना शुरू करता है। तभी
  112. 5:32उसका प्रभाव जन्म लेता है। [संगीत] थोड़ी
  113. 5:34देर चुप रहो। अपने हृदय की धड़कन सुनो।
  114. 5:38यही तुम्हारा पहला मित्र है। जिस दिन
  115. 5:40[संगीत] तुम इसके साथ सहज हो गए, उस दिन
  116. 5:43दुनिया तुम्हारे साथ सहज हो जाएगी। अब बस
  117. 5:47शांत बैठो। कुछ बदलने [संगीत] की जल्दी मत
  118. 5:49करो। परिवर्तन शुरू हो चुका है। यह भीतर
  119. 5:52जड़ पकड़ रहा है और धीरे-धीरे तुम्हारी
  120. 5:56उपस्थिति ही तुम्हारी पहचान [संगीत] बन
  121. 5:58जाएगी। लोग तुम्हें सुनने नहीं महसूस करने
  122. 6:01आएंगे [संगीत] और तब तुम्हें पता चलेगा।
  123. 6:04तुम सच में बदल गए। यह बदलाव शोर नहीं
  124. 6:07करता। बस जीवन को सुगंधित कर देता है
  125. 6:10[संगीत] और यह सुगंध दूर तक जाती है। यही
  126. 6:13कारण है कुछ लोगों से मिलने की इच्छा कभी
  127. 6:16खत्म नहीं होती क्योंकि वे व्यक्ति नहीं
  128. 6:19अनुभव बन जाते हैं। [संगीत] अब तुम भी उसी
  129. 6:21दिशा में चल पड़े हो। धीरे स्थिर शांत।
  130. 6:25[संगीत] अब पहली बार तुम्हें पता चलेगा।
  131. 6:28भागना थकाता है। रुकना नहीं। तुम पहले हर
  132. 6:31जगह पहुंच जाना चाहते [संगीत] थे। कहीं
  133. 6:33देर ना हो जाए, कहीं कोई आगे ना निकल जाए।
  134. 6:37पर अब तुम देखोगे जिसे सच में पहुंचना
  135. 6:40होता है, वह भीतर पहुंचता है। [संगीत]
  136. 6:42बाहर तो सिर्फ जगह बदलती है। याद है कितनी
  137. 6:46बार [संगीत] तुमने सिर्फ इसलिए बात की कि
  138. 6:48सामने वाला नाराज ना हो जाए। दिल नहीं था
  139. 6:52पर शब्द थे और आज शब्द कम हो रहे हैं। दिल
  140. 6:56वापस आ रहा है। पहले [संगीत] तुम हर
  141. 6:59रिश्ते को बचाने में लगे थे। अब तुम खुद
  142. 7:02को बचाने लगे हो। और अजीब बात जितना तुम
  143. 7:05खुद को बचाओगे उतने [संगीत] ही सच्चे
  144. 7:08रिश्ते बचेंगे। क्योंकि झूठे रिश्ते
  145. 7:11तुम्हारी मजबूरी से चलते [संगीत] थे।
  146. 7:13सच्चे रिश्ते तुम्हारी उपस्थिति से
  147. 7:15चलेंगे। अब एक दिन ऐसा आएगा तुम किसी से
  148. 7:18मिलोगे। पहले की तरह कोशिश नहीं करोगे।
  149. 7:20[संगीत]
  150. 7:21प्रभावित करने की, बुद्धिमान दिखने की,
  151. 7:25दिलचस्प बनने की, तुम बस [संगीत] रहोगे और
  152. 7:28सामने वाला असहज हो जाएगा। क्योंकि वह
  153. 7:31अभिनय कर रहा होगा और तुम नहीं धीरे-धीरे
  154. 7:35वह भी अभिनय छोड़ देगा। यहीं [संगीत] से
  155. 7:38जुड़ाव जन्म लेता है। जब दो लोग बात नहीं
  156. 7:41सच्चाई साझा करते हैं। अब तुम पाओगे कुछ
  157. 7:45लोग तुम्हारे जीवन से कम हो रहे [संगीत]
  158. 7:47हैं। पहले डर लगता था अब हल्कापन लगेगा।
  159. 7:50तुम समझोगे भीड़ कम हुई है पर जगह खाली
  160. 7:54नहीं हुई। उस खाली जगह में तुम खुद आ गए
  161. 7:58हो। और यही सबसे बड़ा परिवर्तन है। अब
  162. 8:01तुम्हें हर समय कुछ करते [संगीत] रहने की
  163. 8:03जरूरत नहीं लगेगी। पहले खाली समय आते ही
  164. 8:06तुम बेचैन हो जाते थे। कुछ सुनना, कुछ
  165. 8:10देखना, कुछ बोलना [संगीत]
  166. 8:12अब तुम बैठ सकोगे। खिड़की के पास या छत पर
  167. 8:16या सड़क किनारे और बिना [संगीत] कारण ठीक
  168. 8:19महसूस करोगे। यही वह क्षण है जब व्यक्ति
  169. 8:23दूसरों के लिए आकर्षक बनता है। क्योंकि जो
  170. 8:26खुद से [संगीत] नहीं भागता उससे मिलकर कोई
  171. 8:28भी भागना नहीं चाहता। अब तुम्हारी आदत
  172. 8:31बदलेगी। [संगीत]
  173. 8:32कोई तुम्हें अनदेखा करेगा। तुम तुरंत खुद
  174. 8:34में कमी नहीं खोजोगे। कोई तुम्हारी तारीफ
  175. 8:37करेगा। तुम तुरंत [संगीत] उससे जुड़ नहीं
  176. 8:39जाओगे। तुम स्थिर रहोगे और स्थिर व्यक्ति
  177. 8:43लोगों के लिए सहारा बन जाता है। धीरे-धीरे
  178. 8:46लोग तुम्हें अपनी बातें बताने लगेंगे।
  179. 8:48[संगीत]
  180. 8:48बिना पूछे तुम सोचोगे मैंने ऐसा क्या
  181. 8:52किया? तुमने कुछ नहीं किया। तुमने बस
  182. 8:55सुनना सीख लिया। आज [संगीत] हर कोई बोलना
  183. 8:57चाहता है। सुनने वाला दुर्लभ है और दुर्लभ
  184. 9:00के पास लोग लौटते हैं। अब एक दिन कोई
  185. 9:03तुम्हें अपनी तकलीफ बताएगा। [संगीत] पहले
  186. 9:06तुम सलाह देते। अब तुम उपस्थिति दोगे और
  187. 9:09उसे राहत मिलेगी। [संगीत]
  188. 9:11क्योंकि दर्द समाधान से कम। समझ से शांत
  189. 9:15होता है। तुम बदल रहे हो। तुम्हारी आंखों
  190. 9:18में जल्दी नहीं रही। तुम्हारे [संगीत]
  191. 9:20शब्दों में दबाव नहीं रहा। तुम अब किसी को
  192. 9:22मनाने की कोशिश नहीं करते। जो तुम्हारे
  193. 9:25साथ रहना चाहे [संगीत] रहे जो जाना चाहे
  194. 9:29जाए और इसी स्वतंत्रता में आकर्षण है।
  195. 9:32बंधन से लोग दूर भागते [संगीत] हैं।
  196. 9:34स्वीकृति की ओर लौटते हैं। अब तुम्हारे
  197. 9:37अंदर एक और परिवर्तन होगा। तुम तुलना
  198. 9:39भूलने लगोगे। [संगीत] दूसरे की सफलता
  199. 9:42देखकर बेचैनी नहीं होगी। दूसरे की खुशी
  200. 9:45देखकर कमी नहीं लगेगी। [संगीत]
  201. 9:47तुम्हें लगेगा हर जीवन अपनी दिशा में चल
  202. 9:50रहा है और तुम्हारा जीवन तुम्हारी दिशा
  203. 9:53में इस समझ [संगीत] के बाद प्रतिस्पर्धा
  204. 9:56खत्म। शांति शुरू अब तुम पाओगे। तुम्हारी
  205. 10:00मुस्कान धीमी हो गई है। पर गहरी पहले हंसी
  206. 10:04आवाज थी। अब अनुभव है। पहले तुम माहौल
  207. 10:08बदलना चाहते थे। [संगीत] अब तुम माहौल बन
  208. 10:10जाते हो। जहां बैठते हो वहां बातों की गति
  209. 10:14कम [संगीत] हो जाती है। लोग सहज हो जाते
  210. 10:16हैं। कोई कारण नहीं। बस तुम्हारी [संगीत]
  211. 10:19उपस्थिति यही वह बिंदु है जहां लोग मिलने
  212. 10:22को तरसते हैं। [संगीत] उन्हें तुम्हारी
  213. 10:24बातें याद नहीं रहती। पर तुम्हारे साथ का
  214. 10:27अनुभव याद रहता है [संगीत] और मन अनुभव को
  215. 10:30खोजता है। शब्दों को नहीं। अब तुम जानोगे
  216. 10:34आकर्षक बनने की कोशिश [संगीत]
  217. 10:36आकर्षण को मार देती है और सहज होना उसे
  218. 10:39जन्म देता है। तुम जितना [संगीत] सामान्य
  219. 10:42होते जाओगे उतने असामान्य लगोगे क्योंकि
  220. 10:45दुनिया प्रयास में है [संगीत] और तुम
  221. 10:47विश्राम में अब कोई पूछेगा तुम इतने शांत
  222. 10:51कैसे तुम उत्तर नहीं दे पाओगे [संगीत]
  223. 10:54क्योंकि तुमने सीखा नहीं छोड़ा है जल्दी
  224. 10:57छोड़ी तुलना छोड़ी प्रभाव छोड़ दिया और जो
  225. 11:00छोड़ देता है वही भर जाता है। धीरे-धीरे
  226. 11:04[संगीत]
  227. 11:04तुम्हारा नाम नहीं तुम्हारा एहसास याद रखा
  228. 11:08जाएगा। [संगीत] लोग कहेंगे उसके पास बैठकर
  229. 11:11अच्छा लगता है। यही सबसे बड़ी पहचान है।
  230. 11:14तुम्हें जानने वाले कम होंगे। पर सच में
  231. 11:17जानने वाले होंगे और [संगीत] एक दिन तुम
  232. 11:20महसूस करोगे। अब तुम किसी को पकड़ना नहीं
  233. 11:23चाहते [संगीत] और कोई तुम्हें खोना नहीं
  234. 11:25चाहता। यही वह बिंदु है जहां संबंध भार
  235. 11:29नहीं रहते।
  236. 11:30[संगीत]
  237. 11:30सांस बन जाते हैं। पहले तुम रिश्तों को
  238. 11:33संभालते थे। अब रिश्ते खुद संभालते हैं।
  239. 11:36पहले तुम्हें याद दिलाना पड़ता था। अब
  240. 11:38[संगीत] लोग खुद याद करते हैं। क्योंकि
  241. 11:40पहले तुम उपलब्ध थे। अब तुम मूल्यवान हो।
  242. 11:44फर्क बहुत छूटा है पर असर [संगीत] बहुत
  243. 11:46गहरा। उपलब्ध चीज उपयोग होती है। मूल्यवान
  244. 11:50चीज संभाली जाती है। तुमने [संगीत] खुद को
  245. 11:52संभालना शुरू किया। दुनिया ने तुम्हें
  246. 11:54संभालना शुरू किया। अब देखना तुम्हारी
  247. 11:57बातों [संगीत] की संख्या कम होगी पर वजन
  248. 12:00बढ़ेगा। तुम पहले समझाने की कोशिश [संगीत]
  249. 12:03करते थे। अब समझने लगोगे और जिस दिन तुम
  250. 12:06समझने लगते हो [संगीत] उस दिन लोग खुलने
  251. 12:09लगते हैं। कई लोग तुम्हारे पास आएंगे सलाह
  252. 12:12लेने नहीं। सिर्फ बैठने क्योंकि उन्हें
  253. 12:15लगेगा यहां कोई जल्दी नहीं। [संगीत]
  254. 12:18तुम्हारे पास बैठकर उन्हें खुद से मिलने
  255. 12:20का मौका मिलेगा। यही असली [संगीत] आकर्षण
  256. 12:23है। चेहरा नहीं, शब्द नहीं, ऊर्जा। ऊर्जा
  257. 12:27वहां बनती है [संगीत] जहां व्यक्ति भागना
  258. 12:30छोड़ देता है। अब तुम नोटिस करोगे पहले
  259. 12:33[संगीत] तुम्हें समय कम लगता था। अब समय
  260. 12:35फैल गया है। एक ही शाम लंबी लगेगी। एक ही
  261. 12:39बातचीत गहरी लगेगी क्योंकि तुम उपस्थित
  262. 12:42हो। पहले तुम हर जगह थे [संगीत] पर कहीं
  263. 12:45नहीं थे। अब तुम एक जगह हो पूरी तरह और जो
  264. 12:49व्यक्ति पूरी तरह होता है उसके साथ
  265. 12:51अधूरापन [संगीत] टिकता नहीं। धीरे-धीरे
  266. 12:55लोग तुम्हारे सामने अभिनय भूल [संगीत]
  267. 12:57जाएंगे। कोई अपनी कमजोरी बताएगा। कोई अपना
  268. 13:01डर और तुम्हें आश्चर्य [संगीत] होगा। लोग
  269. 13:04तुम्हें इतना क्यों बताने लगे? क्योंकि
  270. 13:06तुम अब जज नहीं [संगीत] करते। जो जज नहीं
  271. 13:09करता वही भरोसेमंद बनता है। अब तुम्हें भी
  272. 13:13समझ आएगा तुम पहले क्यों थक जाते थे। तुम
  273. 13:16हर समय भूमिका निभाते थे। [संगीत] कभी
  274. 13:18मजबूत कभी मजाकिया कभी समझदार। अब कोई
  275. 13:23भूमिका नहीं। और बिना [संगीत] भूमिका के
  276. 13:26ऊर्जा बचती है। तुम कम सोकर भी हल्के
  277. 13:29उठोगे। कम बोलकर भी जुड़े रहोगे। यही
  278. 13:32संकेत है। भीतर व्यवस्था बन रही [संगीत]
  279. 13:34है। अब एक और बदलाव आएगा। तुम्हें हर
  280. 13:38प्रश्न का उत्तर देने की जल्दी नहीं होगी।
  281. 13:40[संगीत] कई बार तुम कहोगे पता नहीं और
  282. 13:43पहली बार तुम्हें छोटा नहीं सच्चा लगेगा।
  283. 13:47सच छोटा नहीं करता। झूठ थकाता है। अब तुम
  284. 13:51थकोगे कम क्योंकि तुम बन [संगीत] नहीं
  285. 13:53रहे। हो रहे हो। लोग तुम्हें समझदार
  286. 13:56कहेंगे। तुम जानोगे तुम सिर्फ शांत हुए हो
  287. 14:00और शांति सबसे [संगीत] गहरी बुद्धिमत्ता
  288. 14:03है। अब कोई तुम्हें अनदेखा करे तो भी भीतर
  289. 14:06हलचल नहीं। कोई [संगीत] तुम्हें खोजे तो
  290. 14:09भी भीतर घमंड नहीं। दोनों स्थितियां गुजर
  291. 14:12जाएंगी। [संगीत] तुम रहोगे। यही स्थिरता
  292. 14:15लोगों को सुरक्षित महसूस कराती [संगीत]
  293. 14:17है। आज हर कोई बदल रहा है। हर पल इसलिए मन
  294. 14:21डरता है। पर जो व्यक्ति [संगीत] स्थिर हो
  295. 14:24उसके पास मन टिकता है। तुम वही बन रहे हो।
  296. 14:27अब तुम्हारे आने से [संगीत] बातचीत की
  297. 14:30रफ्तार धीमी होगी। लोग धीरे बोलेंगे।
  298. 14:33उन्हें [संगीत] पता भी नहीं चलेगा। पर वे
  299. 14:35तुम्हारी लय में आ जाएंगे और लय मिलना
  300. 14:39[संगीत] जुड़ाव की शुरुआत है। अब तुम्हें
  301. 14:41किसी को रोकना नहीं पड़ेगा। जो तुम्हारी
  302. 14:43गति में सहज वह रहेगा जो नहीं वह स्वयं
  303. 14:48चला जाएगा और पहली बार जाने वालों के लिए
  304. 14:52मन में शिकायत [संगीत] नहीं उठेगी क्योंकि
  305. 14:54अब तुम समझोगे हर व्यक्ति अपनी अवस्था से
  306. 14:57चलता [संगीत] है। कोई तुम्हें छोड़ नहीं
  307. 14:59रहा। वह बस अपनी दिशा में जा रहा है। यह
  308. 15:02समझ हृदय को हल्का कर देती है। अब [संगीत]
  309. 15:05तुम किसी से मिलोगे तो परिणाम नहीं
  310. 15:08देखोगे। तुम क्षण देखोगे। क्षण पूरा
  311. 15:11[संगीत] हुआ। मिलन पूरा कोई वादा नहीं,
  312. 15:14कोई बोझ नहीं और ऐसे मिलन याद बनते हैं।
  313. 15:18लोग सालों बाद भी याद करेंगे। [संगीत]
  314. 15:20क्या बात हुई? यह नहीं कैसा लगा? यह
  315. 15:24तुम्हारा जीवन [संगीत] अब घटना नहीं।
  316. 15:27अनुभव बनने लगा है। और अनुभव मन को
  317. 15:30बार-बार खींचता है। [संगीत] यहीं से
  318. 15:33तुम्हारी उपस्थिति चाही जाने लगती है।
  319. 15:35तुमने किसी को बुलाया नहीं। फिर भी
  320. 15:37[संगीत] लोग आए क्योंकि अब तुम चाह नहीं
  321. 15:40रहे। बस हो रहे हो। होना सबसे गहरी
  322. 15:43[संगीत] पुकार है। जो सुन ले वह लौटता
  323. 15:47रहता है। अब तुम बैठोगे शांत [संगीत]
  324. 15:50और भीतर कोई कमी नहीं बोलेगी। सब ठीक है।
  325. 15:53बस यही एहसास तुम्हारे [संगीत] चारों ओर
  326. 15:56फैलने लगेगा। और जो भी उस दायरे में आएगा
  327. 16:00थोड़ी देर रुकना चाहेगा। बिना कारण, बिना
  328. 16:03सवाल सिर्फ रहने के लिए [संगीत] यहीं से
  329. 16:06समझ शुरू होती है। लोग तुम्हें इसलिए नहीं
  330. 16:09खोजते कि [संगीत] तुम उन्हें हंसाते हो।
  331. 16:12यह समझदार बातें करते हो। लोग तुम्हें
  332. 16:15इसलिए खोजते [संगीत] हैं क्योंकि तुम्हारे
  333. 16:17पास आकर उन्हें खुद से भागना नहीं पड़ता।
  334. 16:21याद करो [संगीत] कितनी बार तुम किसी से
  335. 16:23मिले और मिलकर भी थक गए। बातें हुई, हंसी
  336. 16:28हुई, [संगीत] फिर भी लौट कर खालीपन रहा और
  337. 16:30कभी कोई चुपचाप साथ बैठा, कुछ खास [संगीत]
  338. 16:34नहीं हुआ। फिर भी मन भरा रहा। फर्क शब्दों
  339. 16:37का नहीं था। व्यक्ति की अवस्था का था। अब
  340. 16:40तुम उस अवस्था में प्रवेश कर रहे हो। पहले
  341. 16:44तो मिलने जाते थे। अब लोग मिलने का अवसर
  342. 16:47ढूंढेंगे। [संगीत]
  343. 16:48क्योंकि पहले तुम अपेक्षा लेकर जाते थे।
  344. 16:51अब तुम स्थान लेकर जाओगे। स्थान जहां
  345. 16:54दूसरा व्यक्ति बिना डर खुद हो [संगीत]
  346. 16:57सके। आज हर कोई सुधारना चाहता है। कोई
  347. 17:00स्वीकार नहीं करता। [संगीत] जो स्वीकार
  348. 17:02करता है उसी के पास मन लौटता है। अब ध्यान
  349. 17:06देना तुम किसी से [संगीत] मिलोगे। वह देर
  350. 17:09से आएगा। पहले तुम भीतर शिकायत बनाते। अब
  351. 17:13तुम बस देखोगे [संगीत]
  352. 17:14और आश्चर्य तुम्हारा शांत रहना उसे अपराध
  353. 17:18बोध देगा। क्योंकि [संगीत] शांति आरोप से
  354. 17:21गहरी होती है। तुम कुछ कहोगे नहीं। फिर भी
  355. 17:24वह कहेगा माफ करना देर हो गई। यही [संगीत]
  356. 17:27परिवर्तन है। तुम शब्दों से नहीं। स्थिति
  357. 17:30से असर डालोगे। अब कोई अपनी गलती बताएगा।
  358. 17:33पहले तुम सलाह [संगीत] देते। अब तुम
  359. 17:36सुनोगे और वह हल्का हो जाएगा। क्योंकि उसे
  360. 17:40समाधान नहीं। स्थान चाहिए था। तुम वही
  361. 17:43बनते जा रहे हो। स्थान जहां व्यक्ति बिना
  362. 17:46डर गिर [संगीत] सके और जिसे गिरने की जगह
  363. 17:50मिल जाए वह बार-बार वहीं लौटता है। इसीलिए
  364. 17:54लोग मिलने को तरसते हैं। उन्हें [संगीत]
  365. 17:56व्यक्ति नहीं आराम चाहिए। अब तुम्हारी एक
  366. 17:59और आदत बदलेगी। [संगीत] तुम हर बातचीत को
  367. 18:02लंबा नहीं करोगे। कई बार तुम उठ जाओगे। जब
  368. 18:05मन पूरा हो पहले डर था। सामने वाला क्या
  369. 18:08सोचेगा? [संगीत] अब समझ है अधूरा खिंचाओ।
  370. 18:12पूरा मिलन खराब कर देता है। [संगीत] छोटा
  371. 18:15सच्चा मिलन लंबे झूठे साथ से गहरा होता
  372. 18:18है। धीरे-धीरे तुम्हारे मिलने दुर्लभ
  373. 18:21होंगे और दुर्लभता [संगीत]
  374. 18:23चाह पैदा करती है। तुम उपलब्ध नहीं
  375. 18:26उपस्थित रहोगे। [संगीत]
  376. 18:28दोनों में अंतर है। उपलब्ध व्यक्ति हर समय
  377. 18:31मिलता है। उपस्थित [संगीत] व्यक्ति मिलने
  378. 18:34पर पूरा मिलता है। लोग समय नहीं पूर्णता
  379. 18:37चाहते हैं। अब जब [संगीत] तुम किसी के साथ
  380. 18:39होगे तो बीच में देखने को कुछ नहीं
  381. 18:42खोजोगे। ना इधर ध्यान ना उधर। तुम वहीं
  382. 18:46रहोगे [संगीत] और सामने वाला पहली बार
  383. 18:49महसूस करेगा। कोई सच में सुन रहा है। यहीं
  384. 18:52से जुड़ाव गहराता है। तुमने कुछ किया
  385. 18:54नहीं। [संगीत] बस बंटना छोड़ा। जो बंटा
  386. 18:58नहीं वही पूरा [संगीत] मिला। अब धीरे-धीरे
  387. 19:01तुम्हारा नाम कम लिया जाएगा। पर तुम्हें
  388. 19:04याद ज्यादा किया जाएगा। [संगीत] क्योंकि
  389. 19:06याद शब्दों से नहीं अनुभव से बनती है। एक
  390. 19:10दिन [संगीत] कोई तुम्हें बिना कारण संदेश
  391. 19:12करेगा। कुछ खास नहीं लिखेगा। बस मन हुआ
  392. 19:16तुम समझ जाओगे। लोग तुम्हें याद नहीं कर
  393. 19:19रहे। वे उस शांति को याद कर रहे हैं जो
  394. 19:22तुम्हारे [संगीत] पास मिली थी। यही वह
  395. 19:25क्षण है जब व्यक्ति की उपस्थिति उसकी
  396. 19:28[संगीत] पहचान बन जाती है। अब तुम किसी को
  397. 19:31रोकते नहीं। फिर भी लोग रुकते हैं क्योंकि
  398. 19:33रोकना बंधन है और तुम्हारे पास अब बंधन
  399. 19:36नहीं सिर्फ [संगीत] सहजता है। सहजता जहां
  400. 19:40कोई भूमिका निभानी नहीं पड़ती। [संगीत] अब
  401. 19:43तुम्हारे साथ बैठने वाला अपने चेहरे से
  402. 19:46थकान उतार देगा। उसे लगेगा [संगीत]
  403. 19:49यहां कुछ बनना नहीं है और मन वहीं लौटना
  404. 19:52चाहता है जहां उसे कुछ बनना ना पड़े। यही
  405. 19:55कारण है। कुछ [संगीत] लोग भीड़ में भी
  406. 19:57अकेले होते हैं और कुछ के पास कोई ना हो
  407. 20:01फिर भी कमी नहीं होती। [संगीत] तुम दूसरे
  408. 20:04वाले बन रहे हो। अब मिलने का अर्थ बदल
  409. 20:06जाएगा। पहले मिलना समय बिताना था। अब
  410. 20:10मिलना [संगीत] स्थिति साझा करना है।
  411. 20:13तुम्हारे पास आने वाला समय नहीं देखेगा।
  412. 20:17[संगीत] वह महसूस करेगा। क्षण रुक गया और
  413. 20:20जहां क्षण रुक जाए। मन वहीं बार-बार आता
  414. 20:23है। अब ध्यान रखना यह [संगीत] कोशिश से
  415. 20:26नहीं होगा। जैसे ही तुम चाहोगे। लोग मुझे
  416. 20:29चाहे वही पुरानी दौड़ लौट आएगी। [संगीत]
  417. 20:32तुम बस अपने भीतर साफ रहो। बिना दिखावे,
  418. 20:35बिना जल्दी फिर तुम्हें बुलाना नहीं
  419. 20:38पड़ेगा। [संगीत] तुम जहां होगे वहीं मिलने
  420. 20:41की इच्छा पैदा होगी। क्योंकि [संगीत]
  421. 20:43आकर्षण शब्दों से नहीं अवस्था से जन्म
  422. 20:47लेता है और अवस्था तब बदलती [संगीत] है जब
  423. 20:50व्यक्ति खुद को पकड़ना छोड़ देता है।
  424. 20:52तुमने धीरे-धीरे खुद को ढीला छोड़ा। अब
  425. 20:56जीवन तुम्हें थाम रहा है। [संगीत] अब
  426. 20:58तुम्हें कहीं पहुंचने की हड़बड़ी नहीं। और
  427. 21:00किसी को पकड़ कर रखने की मजबूरी नहीं।
  428. 21:02[संगीत] जो साथ है वह अपने मन से है। जो
  429. 21:07दूर है वह भी अपने मार्ग पर ठीक है। तुम
  430. 21:10बीच में शांत [संगीत] खड़े हो ना आगे खींच
  431. 21:13रहे। ना पीछे अटके सिर्फ देख रहे हो और
  432. 21:17देखना ही काफी है। [संगीत] आज पहली बार
  433. 21:20मिलना घटना नहीं रहा। अनुभव बन गया।
  434. 21:23[संगीत] कोई आए तो पूर्ण मिलो। कोई जाए तो
  435. 21:27हल्के रहो क्योंकि अब तुम जान गए हो।
  436. 21:30[संगीत] रिश्ते टिकते पकड़ से नहीं। स्थान
  437. 21:32से और तुमने भीतर जगह बना ली है।
  438. 21:36[संगीत]
  439. 21:36यही सुकून है। यही ठहराव, यही वह शांत
  440. 21:40एहसास जिसे शब्दों की जरूरत नहीं। बस इतना
  441. 21:44समझ लो [संगीत] अब तुम ठीक हो। और इतना
  442. 21:46ठीक कि किसी को साबित करने की जरूरत नहीं।
  443. 21:51[संगीत]

About this transcript

This page contains the full transcript of OSHO - खुदको इतना बदलो, की लोग तुमसे मिलने को तरसे! | Osho Life Changing Speech #osho by DHYAN GURU, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 3,320 words across 443 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

What you can do with it

Use the transcript to take notes, quote the speaker, build a study guide, generate a summary with ChatGPT or Claude via the YouTube Summary tool, or export it as a timed subtitle file with YouTube to SRT. You can also re-open it in the transcriber to translate the transcript into 100+ languages.

Free YouTube transcript tool

YouTube2Text is a free YouTube transcript generator — no signup, no daily limit. Paste any YouTube link and get the full transcript instantly, with timestamps, click-to-jump, translation to 100+ languages, AI prompts for ChatGPT, Claude, and Gemini, and exports to TXT, SRT, VTT, or Markdown.