Operation Meghdoot | How India Captured Siachen | Siachen History — Transcript
Full transcript
- 0:0013th अप्रैल 1984 यह वह दिन था जब भारत के
- 0:03वीड सैनिक ऑपरेशन मेघदूत को सफल करने के
- 0:06लिए बर्फ की मोटी चादर से ढकी सियाचिन की
- 0:09पहाड़ियों के लिए निकल पड़े थे यह एक ऐसा
- 0:11ऑपरेशन था जिसे भारत के जाबा सिपाहियों ने
- 0:14हजारों किलोमीटर्स की ऊंचाइयों पर
- 0:16एग्जीक्यूट किया था वह ऊंचाई जहां ना कोई
- 0:18इंसान ना कोई जानवर और ना कोई पेड़-पौधे
- 0:21पाए जाते थे सफेद चादरों में लिपटी बर्फ
- 0:24की पहाड़ियों से सूरज की रोशनी टकराने के
- 0:27कारण अगर ज्यादा देर तक बर्फ को देखा जाए
- 0:29तो आंखें खराब हो सकती थी यहां लड़ना तो
- 0:32दूर सांस लेना भी एक बड़ी बात थी ऊंचाई के
- 0:34कारण टेंपरेचर -70 डिग्री तक भी चला जाया
- 0:38करता था ठंड इतनी थी कि शरीर की हड्डियां
- 0:40भी गल जाए ऐसी कठोर और गंभीर परिस्थिति
- 0:43में भी भारत के वीर पीछे नहीं हटे और डटकर
- 0:46अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए आगे
- 0:48बढ़ते रहे ऑपरेशन को पूरा करने के लिए इस
- 0:51वक्त भारतीय सैनिकों के सामने दुश्मन तो
- 0:53नहीं था लेकिन दुश्मन के रूप में सियाचिन
- 0:55का डिफिकल्ट टेरेन और वहां की वेदर कंडीशन
- 0:58जरूर थी पर खुद पर विश्वास रखते हुए सैनिक
- 1:01आगे बढ़ते रहे इस ऑपरेशन के दौरान सभी
- 1:03सैनिकों को अलग-अलग टुकड़ियों में बांटा
- 1:05गया था जिससे वोह सियाचिन ग्लेशियर के
- 1:07साल्टोरो रिच की सभी हाईएस्ट पीक्स पर
- 1:10अपना कंट्रोल एस्टेब्लिश कर सके लेकिन तभी
- 1:12एक तूफान आता है जो इंसानों पर कोई तरस
- 1:15नहीं करता यह तूफान कोई ऐसा वैसा तूफान
- 1:17नहीं था बल्कि बर्फ का एक ऐसा तूफान था
- 1:20जिसने भारतीय सैनिकों को चारों तरफ से घेर
- 1:23लिया था इस तूफान के कारण इंडियन आर्मी का
- 1:25आर्मी हेड क्वार्टर से कनेक्शन टूट गया और
- 1:28भारतीय सैनिकों को बर्फ से होने वाली
- 1:30बीमारियों और परेशानियों ने घेर लिया ऐसे
- 1:33में भारतीय वीरों के पास दो रास्ते थे
- 1:35पहला या तो वह गिव अप कर वापस लौट जाए और
- 1:38दूसरा वह यही रहकर अपने देश की रक्षा के
- 1:40लिए अपने प्राण को न्योछावर कर दे लेकिन
- 1:43भारतीय वीरों ने दूसरा रास्ता चुना और
- 1:45सियाचिन पर अपने देश के नाम का झंडा हमेशा
- 1:48के लिए गाड़
- 1:52दिया भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के
- 1:55लिए सियाचिन इतना इंपॉर्टेंट क्यों है यह
- 1:57जानने से पहले आपको इस ग्लेशियर के बारे
- 1:59में जानना जरूरी है सियाचिन एक ऐसा
- 2:01ग्लेशियर है जो ट्रांस हिमालयन की ईस्टर्न
- 2:03काराकोरम रेंज में लोकेट करता है यह
- 2:06ग्लेशियर पॉइंट nj9842 के नॉर्थ ईस्ट में
- 2:09पड़ता है जहां इंडिया एंड पाकिस्तान के
- 2:11बीच लाइन ऑफ कंट्रोल खत्म होती है 76 किमी
- 2:14लंबा होने के कारण सियाचिन ग्लेशियर
- 2:17काराकोरम में लांगेस्ट और वर्ल्ड के नॉन
- 2:19पोलर एरियाज में सेकंड लांगेस्ट ग्लेशियर
- 2:21माना जाता है इस ग्लेशियर का नॉर्थ मोस्ट
- 2:24पॉइंट इंदिरा कॉल है जो कि सी लेवल से
- 2:26करीबन 911 फीट ऊंचा है इसका सबसे निचला
- 2:30हिस्सा भी 11000 फीट ऊंचा है और हाईएस्ट
- 2:33मैन पोस्ट की ऊंचाई 22000 फीट ऊंची है इन
- 2:37सबके अलावा सियाचिन ग्लेशियर को दुनिया के
- 2:39सबसे हाईएस्ट एंड कोल्डेस्ट बैटलफील्ड के
- 2:42रूप में जाना जाता है जो वेस्ट में
- 2:43साल्टोरो रिज और ईस्ट में काराकोरम पर्वत
- 2:46श्रृंखला से घिरा हुआ है सियाचिन भारत के
- 2:49लिए कई मायनों में जरूरी है इस लोकेशन की
- 2:51स्ट्रेटेजिक इंपॉर्टेंस को देखते हुए ही
- 2:53भारत ने ऑपरेशन मेघदूत को लॉन्च किया था
- 2:56अपनी ऊंचाई के कारण यह ग्लेशियर सेंट्रल
- 2:58एशिया में एक अहम भूमिका निभा भाता है
- 3:00लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच इस
- 3:02ग्लेशियर की इंपॉर्टेंस इसकी बाउंड्री के
- 3:04कारण ही है सियाचिन ग्लेशियर सेंट्रल
- 3:06एशिया को इंडियन सबकॉन्टिनेंट से अलग करता
- 3:08है वही इसके एक तरफ पाकिस्तान की सीमा है
- 3:11तो दूसरी तरफ चीन की जिस कारण अगर कभी भी
- 3:14पाकिस्तान सियाचिन पर कब्जा करता है तो
- 3:16पाकिस्तान को चीन से सीधी कनेक्टिविटी मिल
- 3:18जाएगी और साथ ही लद्दाख रीजन एंड ले
- 3:21श्रीनगर हाईवे पर पाकिस्तान की
- 3:23स्ट्रेटेजिक निगरानी भी बढ़ जाएगी जिस
- 3:25कारण भारत के लिए एक सीरियस थ्रेट पैदा हो
- 3:27जाएगा जिसका एक एग्जांपल हमें कार गिल वॉर
- 3:30के दौरान देखने को मिला था जब पाकिस्तानी
- 3:32सैनिकों ने घुसपैठ कर कारगिल के कई
- 3:34स्ट्रेटेजिक पीक्स को कैप्चर कर लिया था
- 3:37जनवरी 2020 में देन आर्मी चीफ जनरल मनोज
- 3:40मुकुंद नरवणे ने सियाचिन को वह प्लेस
- 3:43बताया था जहां से चीन और पाकिस्तान की
- 3:45मिली भगत से भारत को सबसे अधिक खतरा था
- 3:48ईस्टर्न लद्दाख में चीन के साथ 2020 के
- 3:50क्लैशेस और लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर
- 3:53जारी तनाव ने सियाचिन के इंपॉर्टेंस को और
- 3:55अधिक जटिल बना दिया है सियाचिन ग्लेशियर
- 3:58पाकिस्तान और चाइना के बीच भारत के लिए एक
- 4:00स्ट्रांग बैरियर के रूप में खड़ा है जिस
- 4:02कारण दोनों ही देश भारत के साथ वॉर के
- 4:04दौरान बैकल श फील कर सकते हैं साल्टोरो
- 4:07रिज पाकिस्तान और चाइना के बीच एक डिवीजन
- 4:10के रूप में काम करता है और पाकिस्तान
- 4:12ऑक्यूपाइड कश्मीर को चीन के साथ सीधे
- 4:14जुड़ने से रोकता है इसी कारण साल्टोरो रिच
- 4:17की ज्योग्राफिक इंपॉर्टेंस को देखते हुए
- 4:19भारत ने 1984 में उनकी सभी ऊंची चोटियों
- 4:22पर अपना कब्जा कर लिया था सियाचिन
- 4:24ग्लेशियर और साल्टोरो रिच की पहाड़ियों पर
- 4:26कब्जा करने के कारण भारत आसानी से
- 4:28पाकिस्तान और चाइना के एरिया पर 24 घंटे
- 4:31नजर रख सकता है यानी फ्यूचर में अगर कभी
- 4:33भी इन दोनों देशों में से कोई भी देश भारत
- 4:36की ओर मार्च करता है तो भारत पहले से ही
- 4:38अलर्ट हो जाएगा इसके अलावा सियाचिन
- 4:40ग्लेशियर को इंडियन सबकॉन्टिनेंट का सिंगल
- 4:43लार्जेस्ट सोर्स ऑफ फ्रेश वाटर भी माना
- 4:45जाता है यहीं से नुब्रा रिवर निकलती है और
- 4:47आगे चलकर इंडस रिवर में मिल जाती है इंडस
- 4:50रिवर पाकिस्तान के पंजाब प्लेंस के लिए एक
- 4:52इंपॉर्टेंट वाटर सोर्स है जो वहां के
- 4:54एरियाज को इरिगेट करने के लिए काफी जरूरी
- 4:57है भारत और पाकिस्तान के बीच इस रिवर को
- 4:59लेकर एक ट्रीटी भी है जिसे इंडस वाटर्स
- 5:02ट्रीटी के नाम से जाना जाता है अगर भारत
- 5:04और पाकिस्तान के बीच निकलने वाली इस रिवर
- 5:06के सोर्स पर भारत का कब्जा होगा तो आने
- 5:09वाले समय में किसी भी वॉर की सिचुएशन में
- 5:11भारत अपनी शर्तों को पाकिस्तान के सामने
- 5:14रख सकता है नॉलेज के साथ-साथ अगर आपको
- 5:16अपने बिजनेस को भी उड़ान देनी हो तो ओडू
- 5:18डेफिनेटली आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन है
- 5:20क्योंकि बिजनेस चलाना कोई आसान काम नहीं
- 5:22है यहां आपको मार्केटिंग कस्टमर्स और
- 5:25इन्वेंटरी को मैनेज करने के साथ-साथ
- 5:26इन्वॉइसिंग अकाउंटिंग और ऑर्डर ट्रैकिंग
- 5:29ऐसे तमाम काम करने होते हैं जिसमें आपका
- 5:31कीमती समय और अच्छा खासा पैसा लगता है
- 5:34क्योंकि इन सब के लिए आपको अलग-अलग सर्विस
- 5:36प्रोवाइडर्स की जरूरत पड़ती है और यहां ू
- 5:38आपके बिजनेस के डेली ऑपरेशन को आसान करने
- 5:41और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में मदद कर सकता
- 5:43है ू एक बिजनेस मैनेजमेंट प्लेटफार्म है
- 5:45जहां आपको 70 प्लस एप्स मिलेंगी जो डेली
- 5:48बेसिस पर आपके बिजनेस के हर एक एस्पेक्ट
- 5:50को मैनेज करने में आपकी मदद करेगा यहां पर
- 5:53आप सीआरएम सेल्स इन्वॉइसिंग अकाउंटिंग और
- 5:56प्रोजेक्ट मैनेजमेंट से लेकर ह्यूमन
- 5:58रिसोर्स और इन्वेंटरी मैनेजमेंट तक कर
- 6:00सकते हैं साथ ही यहां आप खुद से अपनी
- 6:02वेबसाइट भी बना सकते हैं यही नहीं स्ट्रेट
- 6:04फॉरवर्ड u य की वजह से इसकी एप्लीकेशंस को
- 6:07कोई भी आसानी से यूज कर सकता है वो भी
- 6:09बिना किसी टेक्निकल नॉलेज के ू के किसी भी
- 6:12एक एप्लीकेशन को आप लाइफ टाइम फ्री में
- 6:13यूज कर सकते हैं वो भी अनलिमिटेड यूजर्स
- 6:16होस्टिंग और सपोर्ट के साथ इसके साथ आप
- 6:19अपने पूरे बिजनेस को बस एक ही प्लेटफॉर्म
- 6:21से चला सकते हैं चाहे आप एक इंडिविजुअल हो
- 6:24स्टार्टअप हो या कोई मिड साइज बिजनेस हो ड
- 6:26हर किसी के लिए एक एक्सीलेंट चॉइस है
- 6:28ज्यादा जानकारी के लिए डिस्क्रिप्शन में
- 6:30दिए हुए लिंक को विजिट करें देखा जाए तो
- 6:33आजादी के कई सालों बाद तक भी सियाचिन पर
- 6:36किसी भी देश का कब्जा नहीं था इस एरिया की
- 6:38हार्श एंड एक्सट्रीम वेदर कंडीशंस को
- 6:40देखते हुए कभी किसी देश को लगा भी नहीं कि
- 6:43सी लेवल से हजारों किलोमीटर की ऊंचाई पर
- 6:45सैनिक भेजने की जरूरत है लेकिन उम्मीद से
- 6:48परे पाकिस्तान ने कुछ ऐसे कदम उठाए जिसे
- 6:50देखते हुए भारत ने ऑपरेशन मेग दूत को
- 6:53लॉन्च किया
- 6:56था सियाचिन डिस्प्यूट का बैकग्राउंड भी
- 6:58इसकी लोकेशन की स्ट्रेटेजिक इंपॉर्टेंस को
- 7:01देखते हुए ही हुआ पाकिस्तान इस एरिया की
- 7:03इंपॉर्टेंस को काफी अच्छे से समझता था और
- 7:05इसी कारण उसने इस एरिया को अपना बनाना
- 7:07चाहा लेकिन तभी बीच में भारत आ खड़ा हुआ
- 7:10दरअसल हुआ यूं था कि आजादी के बाद भारत और
- 7:13पाकिस्तान के बीच जब पहला वॉर हुआ तो
- 7:15युद्ध पर विराम लगाते हुए दोनों देशों के
- 7:17बीच 1949 में कराची एग्रीमेंट साइन किया
- 7:21गया इस एग्रीमेंट के हिसाब से दोनों देशों
- 7:23के रिप्रेजेंटेटिव्स ने जम्मू एंड कश्मीर
- 7:25के मैप्स पर साउथ में मानवर से लेकर नॉर्थ
- 7:28में खोर तक एक सीज फायर लाइन तय की जिसके
- 7:31हिसाब से दोनों देशों की एग्जैक्ट
- 7:33बाउंड्री तय की गई लेकिन बाउंड्री बनाते
- 7:35समय दोनों ही देशों ने अंग्रेजों की तरह
- 7:37सियाचिन वाले एरिया को इग्नोर कर दिया
- 7:39जिसका कारण वहां का एक्सट्रीम वेदर
- 7:41कंडीशंस एंड डिफिकल्ट टेरेन ही था हालांकि
- 7:44इसके बाद 1965 में एक बार फिर
- 7:46इंडिया-पाकिस्तान वॉर हुआ इस बार भी एक
- 7:49एग्रीमेंट साइन हुआ जिसे ताशकंद एग्रीमेंट
- 7:51के नाम से जाना जाता है इस एग्रीमेंट को
- 7:53प्राइम मिनिस्टर लाल बहादुर शास्त्री एंड
- 7:56पाकिस्तान प्रेसिडेंट अयूब खान ने साइन
- 7:58किया था जिसके हिसाब बब से सीज फायर लाइन
- 8:00को लाइन ऑफ कंट्रोल का नाम मिला और
- 8:02सियाचिन वाले एरिया को नो मैनस लैंड का
- 8:05नाम मिला इसके बाद एक बार फिर भारत और
- 8:07पाकिस्तान के बीच 1971 में वॉर होती है
- 8:10जिसके बाद 2 जुलाई 1972 को दोनों देशों के
- 8:14बीच एक पीस ट्रीटी साइन की जाती है जिसे
- 8:16शिमला एग्रीमेंट के नाम से जाना जाता है
- 8:18इस एग्रीमेंट के हिसाब से दोनों देशों ने
- 8:21नॉर्थ में एनजे 9842 पॉ तक अपनी बाउंड्री
- 8:24को एक्सेप्ट किया और उसके बाद वाले एरिया
- 8:26यानी सियाचिन ग्लेशियर को किसी भी देश के
- 8:29मैप में लोकेट नहीं किया गया और इन्हें
- 8:31अनमार्क्ड छोड़ दिया गया हालांकि इस वक्त
- 8:33भारत 1947 के जम्मू एंड कश्मीर एक्सेशन
- 8:36एग्रीमेंट और 1949 के कराची एग्रीमेंट के
- 8:40आधार पर सियाचिन वाले एरिया पर अपना दावा
- 8:42करता है जो एनजे 9842 से आगे सीज फायर
- 8:45लाइन को नॉर्थ वर्ड्स टू द ग्लेशियर्स तक
- 8:48डिफाइन करता है दूसरी ओर पाकिस्तान
- 8:50साल्टोरो रिज से आगे और सियाचिन से आगे के
- 8:53एरिया को अपना क्लेम करने के लिए इसको
- 8:55अपने हिसाब से इंटरप्रेट करते हुए बताता
- 8:57है कि सियाचिन से नॉर्थ ईस्ट वट्स तक उसका
- 9:00एरिया है इस बीच पाकिस्तान कई बार इस बात
- 9:02का दावा करता रहा कि उसकी बाउंड्री लाइन
- 9:05केवल पॉइंट ए ज 9842 पर ही खत्म नहीं होती
- 9:08बल्कि नॉर्थ में काराकोरम पास तक जाती है
- 9:11जो चाइना की बाउंड्री पर पड़ता है पर भारत
- 9:13इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं था
- 9:15भारत का मानना था कि सियाचिन वाला एरिया
- 9:17वेकेंट है और वहां किसी का कब्जा नहीं है
- 9:20और पाकिस्तान की बाउंड्री केवल साल्टोरो
- 9:22रिच तक ही है इस डिस्प्यूट को कई सालों तक
- 9:25नहीं सुलझाया गया लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ
- 9:27जिसने भारत को शौक कर दिया
- 9:32दरअसल पाकिस्तान हमेशा से सियाचिन वाले
- 9:35एरिया को अपना बनाना चाहता था और इसके लिए
- 9:37पाकिस्तान ने अपने दावों में विश्वसनीयता
- 9:39जोड़ने के लिए सियाचिन के
- 9:41अनक्लेमद का हिस्सा बनाने का एक सुनहरा
- 9:44मौका देखा जिसके तहत 1970 और 1980 के दशक
- 9:47में पाकिस्तान ने अपनी ओर से माउंटेनियर्स
- 9:50के लिए माउंटेनियरिंग एक्सपीडिशंस को शुरू
- 9:52कर दिया और अपनी साइड से सियाचिन रीजन के
- 9:54कई पीक्स को क्लाइम करने की परमिशन देने
- 9:57लगा पाकिस्तान के इस एक्शन को देखकर भारत
- 9:59अलर्ट हो गया क्योंकि अगर अनऑथराइज्ड
- 10:01एरिया में पाकिस्तान माउंटेनियर्स को
- 10:03क्लाइम करने की परमिशन देता रहा तो
- 10:05ऑटोमेटिक वो एरिया पाकिस्तान के पोजीशन
- 10:07में आने लगता भारत ने पाकिस्तान की इस
- 10:10हरकत का जवाब देते हुए 1978 में एक
- 10:12स्ट्रांग मिलिट्री माउंटेनियरिंग
- 10:14एक्सपेडिन को प्लान किया जिसके तहत भारत
- 10:16ने सियाचिन ग्लेशियर के ईस्ट और वेस्ट
- 10:19साइड में सीरीज ऑफ पीक्स को क्लाइम करवाना
- 10:21शुरू कर दिया इस माउंटेनियरिंग एक्सपीडिशन
- 10:23को संभालने की जिम्मेदारी कर्नल नरेंद्र
- 10:26बुल कुमार को दी गई जो इंडियन आर्मी के एक
- 10:28वेल नोन माउ टेनियर थे इस एक्सपेडिन के
- 10:30दौरान साल्टोरो कांगी इंदिरा कॉल और अपसरा
- 10:33सस कांग्रा पीक्स को क्लाइम किया गया था
- 10:36साथ ही अब इंडियन आर्मी सियाचिन के एरियाज
- 10:38में अपने माउंटेनियर्स को लॉन्ग रेंज
- 10:40पेट्रोल्स करने के लिए भी भेजने लगी लेकिन
- 10:42तभी कर्नल नरेंद्र ने एक मैप में कुछ ऐसा
- 10:45नोटिस किया जिसके बाद केवल एक्सपेडिन और
- 10:48पेट्रोलिंग से ही काम नहीं चलने वाला था
- 10:50और अब भारत को कठोर कदम उठाने का समय आ
- 10:52गया था दरअसल 1977 में कुछ जर्मन
- 10:55माउंटेनियर्स भारत से साल्टोरो रेंज को
- 10:58क्लाइम करने के लिए परमिशन लेने के लिए आए
- 11:00थे साल्टोरो रेंज को क्लाइम करने का
- 11:02रास्ता पाकिस्तान की ओर से आसान था लेकिन
- 11:04भारत की ओर से काफी कठिन हालांकि फिर भी
- 11:07अपने क्लाइम को एक नया चैलेंज देने के लिए
- 11:09इन माउंटेनियर्स ने भारत की ओर से चढ़ने
- 11:11का रास्ता चुना था पर परमिशन देने के लिए
- 11:14जब इन माउंटेनियर्स की कर्नल नरेंद्र से
- 11:16मुलाकात हुई तो कर्नल नरेंद्र ने जर्मन के
- 11:18पास मौजूद मैप में बहुत बड़ी गलती देखी
- 11:21जर्मन के पास जो मैप था उसमें सियाचिन
- 11:24ग्लेशियर को पाकिस्तान का पार्ट बताया गया
- 11:26था यह देखकर कर्नल नरेंद्र चौकन ने हो गए
- 11:28और उन्होंने ने बात की गंभीरता को समझते
- 11:30हुए मैप को जर्मन से खरीद लिया इसके बाद
- 11:33कर्नल नरेंद्र ने देर ना करते हुए फौरन
- 11:36लूटने जनरल एमएल छिब्बर को पाकिस्तान के
- 11:38इस नापाक कदम के बारे में आगाह किया लूटने
- 11:41जनरल एमएल छिब्बर और कुछ बड़े अधिकारियों
- 11:43ने सभी पुराने मैप्स को स्टडी किया जिसके
- 11:46बाद भारत को समझ आ गया कि मैप पर लाइंस
- 11:48कलर ड्रॉ की गई है और पिछले 15 सालों से
- 11:51सियाचिन को पाकिस्तान का पार्ट दिखाया जा
- 11:53रहा है यह जानने के बाद मिलिट्री हेड
- 11:55क्वार्टर्स में हड़कंप मच गया था सभी सोच
- 11:57में पड़े थे कि पाकिस्तान का का अगला कदम
- 11:59क्या होने वाला है तभी इंटेलिजेंस एजेंसीज
- 12:02ने आर्मी को पाकिस्तान के ऑपरेशन अबाबील
- 12:04के बारे में बताया यह ऑपरेशन सियाचिन के
- 12:06एरिया पर कब्जा करने के लिए लॉन्च किया
- 12:08जाना था इस ऑपरेशन को ध्यान में रखते हुए
- 12:10इंडियन आर्मी भी सियाचिन पर अपना कंट्रोल
- 12:17टैब्लिक्स को एक सुझाव दिया उन्होंने
- 12:20सियाचिन रीजन में भारत की एक परमानेंट
- 12:22पोस्ट बनाने की बात कही सभी को कर्नल
- 12:25नरेंद्र का यह आईडिया काफी पसंद आया और
- 12:27इसी कारण कर्नल नरेंद्र को को सेवियर ऑफ
- 12:30सियाचिन के नाम से सम्मानित किया
- 12:34गया अब भारत सियाचिन वाले रीजन को अपने
- 12:37कंट्रोल में लाने के लिए प्लानिंग करने
- 12:39लगा सबसे पहले सियाचिन को कैप्चर करने का
- 12:41आइडिया आर्मी हेड क्वार्टर्स में डिस्कस
- 12:43किया गया बेशक सियाचिन को कैप्चर करना
- 12:45आसान नहीं था लेकिन भारत किसी भी हाल में
- 12:48सियाचिन रीजन को पाकिस्तान के हाथों में
- 12:50नहीं सौंप सकता था जिस कारण देन चीफ ऑफ
- 12:52आर्मी स्टाफ अरुण वैद्य कैबिनेट कमिटी ऑन
- 12:55सिक्योरिटी और इंदिरा गांधी ने सियाचिन
- 12:57में एक ऑपरेशन को कंडक्ट करने की परमिशन
- 12:59दे दी इस ऑपरेशन के तहत इंडियन आर्मी
- 13:02साल्टोरो रिच की सभी जरूरी और ऊंची पीक्स
- 13:04को कैप्चर करने वाली थी प्लान की
- 13:06प्रिपरेशन शुरू करने से पहले भारत ने इस
- 13:08ऑपरेशन को ऑपरेशन मेघदूत का नाम दिया
- 13:11इंडियन आर्मी ने डिसाइड किया कि वो
- 13:13ग्लेशियर एरियाज में कुछ ट्रूप्स को
- 13:14डेप्लॉय करेंगे जो नदन लद्दाख रीजन और
- 13:17पैरामिलिट्री फोर्सेस से सेलेक्ट किए जाने
- 13:19थे इन ट्रूप्स में अधिकतर ट्रूप्स को 1982
- 13:22के अंटार्कटिका ट्रेनिंग एक्सपीडिशन में
- 13:25से चूज किया गया था क्योंकि इन ट्रूप्स को
- 13:27पहले से सियाचिन ग्लेशियर जैसी ठंड और
- 13:29टेरेन को झेलने की ट्रेनिंग मिली हुई थी
- 13:31हालांकि इसी दौरान 1983 में पाकिस्तानी
- 13:34जनरल्स ने भी अपने ट्रूप्स को सियाचिन
- 13:36ग्लेशियर के एरियाज में
- 13:40डिप्लॉयड कर सके पाकिस्तान को डर था कि
- 13:42भारत अपने पहले भेजे गए एक्सपेडिएंस का
- 13:45इस्तेमाल करके सियाचिन ग्लेशियर के की
- 13:47रेजेस एंड माउंटेन पासेस को आसानी से
- 13:49कैप्चर कर लेगा और इसलिए पाकिस्तान ने
- 13:51भारत से पहले ही अपने ट्रूप्स को ग्लेशियर
- 13:54पर भेजने का प्लान बनाना शुरू कर दिया
- 13:56हालांकि प्लान को सक्सेसफुल बनाने के लिए
- 13:58पहले पाकिस्तान ट्रूप्स को सियाचिन
- 14:00ग्लेशियर में इस्तेमाल होने वाले कपड़े और
- 14:02जूतों की जरूरत थी जिस कारण उन्होंने लंदन
- 14:05के सेम उसी सप्लायर के पास अपना ऑर्डर
- 14:07प्लेस कर दिया जो भारत को आर्कटिक वेदर
- 14:09गियर सप्लाई किया करता था सेम सप्लायर को
- 14:12ऑर्डर देने के कारण ही पाकिस्तान सियाचिन
- 14:14को कैप्चर करने में नाकाम हुआ क्योंकि जब
- 14:16भारत की ओर से लंडन के सप्लायर को सेम
- 14:18ऑर्डर दिया गया तो उन्होंने यह कहते हुए
- 14:20भारत का ऑर्डर लेने से मना कर दिया कि
- 14:22उनके पास पाकिस्तान की ओर से पहले से ही
- 14:25एक बड़ा ऑर्डर है जिस कारण वह अभी भारत को
- 14:27सप्लाई नहीं कर सकते इंडियन ये सुनकर
- 14:29चौकन्ना हो गई और उन्होंने अपने ऑपरेशन को
- 14:31और तेज कर दिया इस ऑपरेशन को लेकर कई
- 14:34पाकिस्तानी ऑफिसर्स ने हमेशा अपने बयान
- 14:36में कहा भी है कि वह केवल कुछ दिनों से
- 14:38सियाचिन की चढ़ाई करने में भारत से पीछे
- 14:41रह गए थे अब इंडियन आर्मी ने देर ना करते
- 14:43हुए 13th अप्रैल 1984 को ऑपरेशन मेघदूत को
- 14:47लॉन्च करने का प्लान बनाया इस ऑपरेशन को
- 14:49लूटने जनरल पीएन हून की लीडरशिप में किया
- 14:52जाना था इस ऑपरेशन के तहत साल्टोरो रिच पर
- 14:54कब्जा करने का काम 26 सेक्टर के कमांडर
- 14:57ब्रिगेडियर विजय चन्ना को दिया गया था
- 15:00जिन्हें 10th से 30th अप्रैल के बीच
- 15:02ऑपरेशन शुरू करने का काम सौंपा गया था
- 15:04कमांडर ब्रिगेडियर विजय चन्ना ने अपने
- 15:06ऑपरेशन को शुरू करने के लिए 13th अप्रैल
- 15:09का दिन चुना क्योंकि उस दिन बैसाखी का दिन
- 15:11था और पाकिस्तान कभी यह नहीं सोच सकता था
- 15:14कि भारत बैसाखी के दिन किसी ऑपरेशन को
- 15:16लॉन्च कर सकता है ऑपरेशन को कंडक्ट करने
- 15:18के लिए इसकी प्रिपरेशन ट्रूप्स एंड
- 15:20सप्लाइको एयरलिफ्ट करने के साथ शुरू हो गई
- 15:23सप्लाइको एयरलिफ्ट करने का काम इंडियन
- 15:25एयरफोर्स ने संभाला था इस ऑपरेशन को
- 15:27स्टार्ट करने से पहले सभी ट्रूप्स को कई
- 15:30हफ्तों की ट्रेनिंग प्रोवाइड की गई थी इस
- 15:32ट्रेनिंग में सभी ट्रूप्स को आइस क्राफ्ट
- 15:34स्नो क्राफ्ट सर्वाइवल फिजिकल फिटनेस और
- 15:37मेंटल रोब्स जैसी स्पेसिफिक चीजों की
- 15:39ट्रेनिंग मिली
- 15:42थी इस ऑपरेशन की लीडरशिप लूटने जनरल मनोहर
- 15:46लाल छिब्बर लूटने जनरल पीएन हून एंड मेजर
- 15:49जनरल शिव शर्मा को सौंपी गई ऑपरेशन मे एक
- 15:52दूत का प्राइमरी ऑब्जेक्टिव पाकिस्तानी
- 15:54आर्मी को सियाला एंड बिला फन ला को कैप्चर
- 15:57ना करने देने का था इस ऑपरेशन के तहत
- 15:59साल्टोरो रिच के फोर इंपॉर्टेंट पासेस को
- 16:02कैप्चर किया जाना था जिनमें सियाला बिला
- 16:04फोन ला ग्योंग ला एंड लंगला शामिल थे इन
- 16:08सभी पासेस को कैप्चर करने का मतलब था
- 16:10इंदिरा कॉल पर कंट्रोल जो सियाचिन का नदन
- 16:13मोस्ट पॉइंट है पाकिस्तान को रोकने के लिए
- 16:15इन सभी पासेस को कैप्चर करना काफी जरूरी
- 16:17था और इसी कारण भारत ने कड़ी ठंड में भी
- 16:20इन पासेस को कैप्चर करने के लिए अपनी जीजन
- 16:22लगा दी ऑपरेशन शुरू करने से पहले सभी
- 16:25ऑफिसर्स को उनका टास्क सौंपा गया जनरल
- 16:28पीएन हून ने ने नदन कमांड और 15 कॉप्स को
- 16:31साल्टोरो रिच पर तैनात किया था लद्दाख
- 16:33स्काउट्स और फोर कुमाऊं की भी एक टीम को
- 16:36एम ए यूनिट एयरफोर्स के चीता हेलीकॉप्टर्स
- 16:38के साथ तैनात किया गया कई चेन ऑफ कमांड्स
- 16:41बनाई गई लूटने कर्नल पुष्कर चंद को टास्क
- 16:43फोर्स कमांडर बनाया गया और उनके साथ थे
- 16:46कैप्टन संजय कुलकर्णी जो फोर्थ कुमाऊ से
- 16:49बिला फॉन ला तक के हेड थे मेजर ए के
- 16:51बहुगुणा लद्दाख स्काउट से सिया ला को हेड
- 16:54करने वाले थे और लूटने कर्नल डी के खन्ना
- 16:57ग्योंग ला में 19 को माऊ के साथ जाने वाले
- 17:00थे इस पूरे ऑपरेशन का मेन टारगेट इंदिरा
- 17:02कॉल था जो भारत के लिए सबसे जरूरी था
- 17:05ऑपरेशन के फर्स्ट फेज में 13 अप्रैल को
- 17:07सुबह 5:30 बजे सबसे पहले चीता हेलीकॉप्टर
- 17:10ने कैप्टन संजय कुलकर्णी और मेजर आर एस
- 17:12संधू के साथ बेस कैंप से बिला फन ला के
- 17:15लिए उड़ान भरी हालांकि बिला फन ला पहुंचने
- 17:18तक विजिबिलिटी काफी कम हो गई थी और
- 17:20टेंपरेचर भी काफी कम था लेकिन फिर भी
- 17:23हेलीकॉप्टर ने एक-एक करके पूरे 17 राउंड्स
- 17:26मारे और दिन तक सभी इंडियन ट्रूप्स को
- 17:28बिला फन ला तक पहुंचा दिया सभी उड़ान भरने
- 17:31वाली हेलीकॉप्टर्स में एयरफोर्स के आ 76
- 17:34ए1 an32 mi1 mi8 और चेतक हेलीकॉप्टर शामिल
- 17:40थे बिला फन ला पर सभी 27 ट्रूप्स के उतरने
- 17:43के केवल 3 घंटे के अंदर ही भारत के एक
- 17:45सैनिक को हाई एल्टीट्यूड पलमोनरी एडिमा से
- 17:48जूझना पड़ा हाई एल्टीट्यूड पलमोनरी एडिमा
- 17:50का शिकार हुआ यह सैनिक रेडियो ऑपरेटर था
- 17:53हालांकि बिला फन ला पर पहुंचने के बाद ही
- 17:55कैप्टन कुलकर्णी की टीम और बाहरी दुनिया
- 17:58में कोई संपर्क नहीं हो सका जिसका मेन
- 18:00कारण एक भयानक बर्फीला तूफान था पूरे तीन
- 18:03दिनों तक तूफान का सामना करने के बाद 16
- 18:06अप्रैल को भारतीय सैनिकों को कुछ मेडिसिंस
- 18:08और बाकी की सहायता भेजी जा सकी हालांकि तब
- 18:11तक एक सैनिक की
- 18:18हाइपोक्लोराइट बाइट की परेशानी देखी गई थी
- 18:20लेकिन फिर भी बर्फ और तूफान का सामना करते
- 18:23हुए 15 अप्रैल तक सभी सैनिकों ने बिला फन
- 18:26ला पर कुछ कैंप्स बना लिए थे इसके बाद 17
- 18:29अप्रैल को पांच चीता और दो mi8
- 18:31हेलीकॉप्टर्स ने सियाला के लिए पूरी 32
- 18:34उड़ाने भरी जिसके बाद फाइनली बिला फॉन ला
- 18:37और सिया ला की चोटियों पर भारत का तिरंगा
- 18:39लहराने लगा 17 अप्रैल तक लगभग 300 इंडियन
- 18:42ट्रूप्स ने सियाचिन ग्लेशियर के क्रिटिकल
- 18:45पीक्स एंड पासेस को कैप्चर कर लिया था वही
- 18:47लूटने कर्नल डी के खन्ना ने 19 कुमाऊ के
- 18:50साथ ग्योंग ला की ओर अपनी चढ़ाई शुरू कर
- 18:52दी थी इस चढ़ाई को धीरे गति से किया गया
- 18:55क्योंकि ग्योंग ला साल्टोरो रिच की सबसे
- 18:57ऊंची और खत नाक पीक थी इसे कैप्चर करना भी
- 19:00आसान नहीं था लेकिन अपने विश्वास और मेहनत
- 19:03के साथ सभी लगातार अपने गोल की ओर बढ़ते
- 19:05रहे चढ़ाई कर रहे सभी ट्रूप्स को लगा था
- 19:08कि वह जून के पहले हफ्ते तक ग्योंग ला को
- 19:10कैप्चर कर लेंगे लेकिन 17 अप्रैल को ही
- 19:13पाकिस्तानी आर्मी का भी सियाचिन पर चढ़ाई
- 19:15करने का समय था जिस कारण अब इंडियन आर्मी
- 19:18के ट्रूप्स उनकी नजरों में आने लगे थे
- 19:20वैसे पाकिस्तान को इंडियन आर्मी के बारे
- 19:22में रेडियो यूज करने के कारण पहले ही पता
- 19:24चल चुका था वो ऐसे कि जब भारत का एक जवान
- 19:27ठंड के कारण शहीद हो गया तो ट्रूप्स ने
- 19:29आर्मी हेड क्वार्टर से संपर्क करने के लिए
- 19:32रेडियो का इस्तेमाल किया था जिससे जवान की
- 19:34बॉडी को सही समय पर सम्मान सहित विदा कर
- 19:37दिया जाए सभी सैनिक जानते थे कि ऐसा करने
- 19:39से पाकिस्तान को उनकी भनक लग जाएगी लेकिन
- 19:42फिर भी उस वक्त उनके लिए जो जरूरी था
- 19:44उन्होंने वही किया भारतीय सैनिकों के इस
- 19:46एक्शन से जिस बात का डर था वही हुआ
- 19:49पाकिस्तान को उनकी मूवमेंट के बारे में
- 19:51पता चल गया था और उन्होंने साल्टोरो रिच
- 19:53के साथ बिला फॉन ला पर कब्जा करने के लिए
- 19:56एक फोर्स को तैयार किया इस फोर्स का नाम
- 19:58बुर्जिल फोर्स था जो ऑपरेशन अबाबील के तहत
- 20:01तैयार की गई थी पाकिस्तान ने हमला करने के
- 20:03लिए 23 जून का दिन चुना और सुबह के करीब
- 20:065:30 बजे के आसपास पाकिस्तान की ओर से
- 20:08भारतीय सेना पर हमला हुआ इस हमले की
- 20:11शुरुआत बिला फोन ला से हुई जहां कैप्टन
- 20:13कुलकर्णी अपनी फोर्स के साथ अपने पैर जमा
- 20:16चुके थे बिला फोन ला में अब तक भारत के कई
- 20:18कैंप्स थे जिनकी मदद से भारत ने यहां अपनी
- 20:21तेज नजर बनाई हुई थी निगरानी के लिए पास
- 20:23ही की एक चोटी पर घंटों के हिसाब से एक-एक
- 20:26सैनिक को तैनात किया जाता था जो आज पास के
- 20:29एरिया पर नजर रखता था जिस दिन पाकिस्तान
- 20:31भारत पर अटैक करता है उस दिन निगरानी की
- 20:33ड्यूटी पर लैंस नायक चंचल सिंह थे ड्यूटी
- 20:36के दौरान चंचल सिंह अचानक से बिला फॉन ला
- 20:39के नीचे पाकिस्तानी सोल्जर्स की हलचल को
- 20:41देखते हैं यह देखते ही वह फौरन संजय
- 20:43कुलकर्णी को दुश्मन के अटैक की खबर देते
- 20:46हैं खबर मिलते ही सभी भारतीय सैनिक
- 20:48अपनी-अपनी पोजीशंस लेकर दुश्मन का सामना
- 20:51करने के लिए तैयार हो गए लेकिन पाकिस्तान
- 20:53की फायरिंग काफी तेज और खतरनाक थी इस
- 20:55फायरिंग के दौरान ही एक पाकिस्तानी सोल्जर
- 20:58ला नायक चंचल सिंह पर गोली चला देता है
- 21:00गोली लगने के कारण चंचल सिंह की ऑन द
- 21:03स्पॉट मौत हो गई और वह शहीद हो गए अपने
- 21:05सैनिक को मरता देख भारतीयों का खून खोल
- 21:08गया और उन्होंने पाकिस्तान को धूल चटाने
- 21:10की ठान ली हमले में सबसे पहले एक भारतीय
- 21:12जवान ने उस पाकिस्तानी के सिर में गोली
- 21:14मारी जिसने लैंस नायक चंचल सिंह को गोली
- 21:17मारी थी कुछ समय के लिए सियाचिन जैसी हाइट
- 21:19पर भी गोलियां चलती रही लेकिन भारत ने इस
- 21:22हमले में पाकिस्तान को बुरी तरह हरा दिया
- 21:24इस हमले में पाकिस्तान के 26 सैनिक मारे
- 21:27गए और भारत का केवल एक यहां हारने के बाद
- 21:30भी पाकिस्तानी रुके नहीं और एक बार फिर
- 21:32जून में ही भारतीय सैनिकों पर हमला बोला
- 21:35पर इस हमले में भी पाकिस्तान को भारत की
- 21:37ओर से करारी हार का सामना करना पड़ा अगस्त
- 21:401984 में दो और हमले किए गए पर इन हमलों
- 21:43को भी भारतीय सैनिकों ने रौंद दिया और
- 21:46पाकिस्तान के 30 सैनिक मारे गए इन सभी के
- 21:48बीच 5700 मीटर की ऊंचाई पर ग्योंग ला पर
- 21:52भी कैप्टन डी के खन्ना और उनकी टीम ने जीत
- 21:54हासिल कर ली थी भारत के साल्टर रिच की
- 21:57चारों पीक्स यानी सियाला बिला फोन ला
- 22:00ग्योंग ला एंड चलु ला पर जीत हासिल कर ली
- 22:02थी और अब सियाचिन भारत का था सियाचिन पर
- 22:05अपना कंट्रोल स्टैब्स करना भारत के लिए
- 22:07आसान नहीं था यहां भारत के लिए सबसे बड़ी
- 22:10डिफिकल्टी दुश्मन नहीं बल्कि ठंड थी वह
- 22:12ठंड जो आपके और हमारे जैसे लोग तो कभी
- 22:14बर्दाश्त ही नहीं कर सकते पर अपने साहस और
- 22:17परिश्रम से इंडियन आर्मी ने सियाचिन पर
- 22:19अपने देश का नाम उजागर कर दिया इंडियन
- 22:22आर्मी ने जीत के कुछ समय बाद ही अपने सभी
- 22:24कैंप्स को परमानेंट पोस्ट में तब्दील कर
- 22:27दिया और लगातार यहां पर पहरा देने
- 22:31लगे ऑपरेशन मेघदूत भारतीय सेना और सियाचिन
- 22:35के हॉस्टाइल्स के बीच एक ऐसी जंग थी
- 22:38जिसमें दुश्मन की गोलियों से ज्यादा वेदर
- 22:40कंडीशंस और ठंड के मारे हमारे जवान शहीद
- 22:43हो गए इस ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान ने
- 22:45सियाचिन को कैप्चर करने के लिए कई
- 22:47अटेम्प्ट्स किए लेकिन भारतीय सैनिकों ने
- 22:49ऐसा होने नहीं दिया हालांकि अप्रैल 1986
- 22:52में पाकिस्तान आर्मी बिला फन ला के साउथ
- 22:55में सियाचिन ग्लेशियर की सबसे ऊंची चोटी
- 22:57पर कंट्रोल स्टैप प्लिश कर वहां मिलिट्री
- 22:59पोस्ट को सेट अप कर कायद पोस्ट बनाता है
- 23:02लेकिन पाकिस्तान की इस दुस्साहस के जवाब
- 23:04में भारतीय सेना ने जून 1987 में ऑपरेशन
- 23:07राजीव को लॉन्च किया और एक बार फिर
- 23:09पाकिस्तानी फोर्स को मार भगाया इस ऑपरेशन
- 23:12को लीड करने वाले नायब सूबेदार बाना सिंह
- 23:15के सम्मान में कायद पोस्ट का नाम बदलकर
- 23:17बाना टॉप कर दिया एक बार फिर 1987 में ही
- 23:20पाकिस्तानी आर्मी के ब्रिगेडियर जनरल
- 23:22परवेज मुशर्रफ ने कायद पोस्ट को दोबारा से
- 23:25अपने कब्जे में लेने के लिए ऑपरेशन कादत
- 23:28को लच किया लेकिन इस बार भी भारतीय
- 23:30सैनिकों ने ऑपरेशन वज्र शक्ति को लॉन्च
- 23:32किया और पाकिस्तान को मंकी खानी पड़ी
- 23:35मार्च 1989 में इंडियन आर्मी ने चुमे
- 23:37ग्लेशियर की ओर देखने वाली पाकिस्तानी
- 23:39पोस्ट को कैप्चर करने के लिए ऑपरेशन
- 23:41आईबक्स को लॉन्च किया था एक बार फिर 1992
- 23:44में इंडियन आर्मी ने चिलु में बहादुर
- 23:46पोस्ट की रक्षा के लिए ऑपरेशन त्रिशूल
- 23:49शक्ति को लॉन्च किया इस ऑपरेशन को लॉन्च
- 23:51करने का मकसद पाकिस्तानी असोल्ट टीम का
- 23:53हमला था बात यही नहीं रुकती बल्कि एक बार
- 23:56फिर 1995 में बैटल ऑफ त्याक्षी पोस्ट होती
- 23:59है जिसमें पाकिस्तान इस बार साल्टोरो
- 24:01डिफेंस लाइन के सदर्न बॉर्डर्स में पड़ने
- 24:03वाली त्याक्षी पोस्ट पर हमला करता है
- 24:06लेकिन इस बार भी जीत भारत की ही होती है
- 24:08इस पूरे ऑपरेशन के खत्म होने के बाद भी
- 24:10पाकिस्तान भारत को सियाचिन में हराने के
- 24:13लिए कई और कोशिशें करता है लेकिन उसे एक
- 24:15बार भी सफलता नहीं मिलती है हर बार भारत
- 24:18वीरों ने पाकिस्तानी आर्मी को मार भगाया
- 24:20ऑपरेशन मेघदूत के जरिए भारत ने पाकिस्तान
- 24:23द्वारा कब्जा किए गए एरिया को वापस से जीत
- 24:25लिया था जिसका रिजल्ट यह निकला कि आज के
- 24:27समय में सियाचिन ग्लेशियर के करीबन 76
- 24:31किमी एंड 2500 स्क्वा किमी एरिया को
- 24:34कंट्रोल करता है हालांकि पाकिस्तान ने
- 24:361999 में कारगिल वॉर को भी इसी उम्मीद में
- 24:39छेड़ा था कि शायद वह सियाचिन को भी कैप्चर
- 24:41कर सके लेकिन रिजल्ट तो आप सबको पता ही है
- 24:44इस वॉर में भी पाकिस्तान को मुंह की खानी
- 24:46पड़ी थी सियाचिन पर कंट्रोल बनाए रखना
- 24:48आसान नहीं है क्योंकि सियाचिन की रक्षा
- 24:50भारत के सैनिकों का बलिदान मांगती है जब
- 24:53से भारत ने यहां का कंट्रोल संभाला है तब
- 24:55से आज तक करीबन हज भारतीय जवानों ने या चन
- 24:58की रक्षा में अपने प्राण गवाए हैं यहां
- 25:01सैनिकों को कई परेशानियों का सामना करना
- 25:03पड़ता है जिसमें हाई विंड्स एल्टीट्यूड
- 25:05सिकनेस फ्रॉस्ट बाइट एंड टेंपरेचर शामिल
- 25:07है लेकिन अपने देश की सुरक्षा के लिए
- 25:09हमारे जवान हर चुनौती को झेलने के लिए
- 25:11तैयार है हम आशा करते हैं कि आपको हमारा
- 25:14यह वीडियो पसंद आया होगा आगे हम और भी ऐसे
- 25:16ही इंफॉर्मेशन वीडियोस आपके लिए लाते
- 25:18रहेंगे तब तक के लिए हमारा वीडियो लाइक कर
- 25:20दें और ऐसे ही इंटरेस्टिंग वीडियोस के लिए
- 25:22हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर
- 25:27लें i
About this transcript
This page contains the full transcript of Operation Meghdoot | How India Captured Siachen | Siachen History by Mighty Monk, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 4,808 words across 613 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
What you can do with it
Use the transcript to take notes, quote the speaker, build a study guide, generate a summary with ChatGPT or Claude via the YouTube Summary tool, or export it as a timed subtitle file with YouTube to SRT. You can also re-open it in the transcriber to choose a caption track available on the video.
Free YouTube transcript tool
YouTube2Text is a free YouTube transcript generator — no signup, no daily limit. Paste any YouTube link and get the full transcript instantly, with timestamps, click-to-jump, caption language selection, AI prompts for ChatGPT, Claude, and Gemini, and exports to TXT, SRT, VTT, or Markdown.