OCD ke lakshan, karan aur ilaaj ki puri jankari | अनचाहे विचारों के बार-बार आने की बीमारी को समझें — Transcript
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- 0:00ओसीडी या ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर य एक
- 0:04ऐसी मानसिक समस्या है जो कि काफी कॉमन है
- 0:07और बहुत सारे लोग इससे पीड़ित हैं परेशान
- 0:10है और इसके बारे में जानकारी ढूंढते रहते
- 0:13हैं तो इस वीडियो में ओसीडी के बारे में
- 0:16डिटेल में हम समझाएंगे ओसीडी क्या है
- 0:18लक्षण क्या है क्यों होती है इलाज क्या है
- 0:22क्या किया जा सकता है जिसको ओसीडी है इस
- 0:24सबके बारे में डिस्कशन करेंगे मेरा नाम
- 0:27डॉक्टर प्रवीण त्रिपाठी है मैं एक
- 0:28साइकेट्रिस्ट यानी कि मनोचिकित्सक
- 0:30ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर नाम में ही दो
- 0:33शब्द है ऑब्सेशन और कंपल्शन इनको यदि हम
- 0:37समझ ले तो हम ओसीडी के बारे में काफी कुछ
- 0:39समझ जाएंगे पहला शब्द ऑब्सेशन ऑब्सेशन
- 0:42होता क्या
- 0:43है एक ही प्रकार का विचार दिमाग में
- 0:46बार-बार आता है या फिर एक ही प्रकार की
- 0:48तस्वीर दिमाग में बार-बार आती है जैसे
- 0:50बहुत कॉमनली लोगों के मन में विचार बारबार
- 0:52आता है कि मेरे हाथ गंदे हैं मेरा शरीर
- 0:55गंदा हो गया है कुछ लोगों के मन में
- 0:57बार-बार कुछ इमेज आ सकती है जैसे मेरे
- 0:59पेशेंट के मन में बार-बार एक इमेज आती थी
- 1:02उनको दिखता था कि उनके जो पेरेंट्स हैं जो
- 1:05कि जिंदा हैं अभी स्वस्थ हैं वो जमीन पर
- 1:07लेटे हुए हैं और उनके ऊपर कफन पड़ा हुआ है
- 1:10अपने मरे हुए पेरेंट्स की तस्वीर आती थी
- 1:12जबकि पेरेंट्स जिंदा थे कुछ लोगों को
- 1:14विचार या फिर इमेज ना आके अर्ज आती हैं
- 1:17जैसे कि कुछ लोग को ऐसा लगता है जैसे मान
- 1:20लीजिए गाड़ी चला रहे हैं एकदम से मन में
- 1:22आएगा कि इस गाड़ी को ले आके पेड़ प ठोक दो
- 1:25या गाड़ी से किसी को मार दो वो ऐसा करना
- 1:28नहीं चाहते हैं लेकिन बार-बार ये अर्ज मन
- 1:30में आएगी तो एक विचार या एक तस्वीर या एक
- 1:34अर्ज मन में बार-बार आती है और ये ये जो
- 1:36विचार है या फिर ये जो इमेज है एक ऐसी
- 1:39इमेज है या विचार है जो कि इंसान को
- 1:41परेशान करता है उसका जो कंटेंट होता है वो
- 1:43ऐसा होता है जो इंसान को विचलित करता है
- 1:45परेशान करता है वो विचार जब मन में
- 1:47बार-बार आता है तो इंसान में थोड़ी घबराहट
- 1:49फीलिंग होती है उसको थोड़ा परेशान सा फील
- 1:51करता है वो व्यक्ति आमतौर पर यह समझता है
- 1:54कि जो विचार मेरे मन में आ रहा है ये
- 1:56बेकार का विचार है उसको रोकने का भी
- 1:58प्रयास करता है लेकिन उसमें वह असफल होता
- 2:01है और वह घबराहट बढ़ती जाती है तो मान
- 2:03लीजिए एक व्यक्ति है जिसके मन में विचार आ
- 2:05रहा है कि मेरे हाथ गंदे हैं मेरा शरीर
- 2:06गंदा है मैंने कुछ गंदा टच कर लिया और रोक
- 2:09रहा है नहीं रुक रहा है विचार बार-बार आ
- 2:11रहा है घबराहट हो रही है तो आखिरी में
- 2:13परेशान हो के व्यक्ति क्या करता है यह
- 2:15व्यक्ति बाथरूम में जाता है अपने हाथ धोता
- 2:17है और जब यह हाथ धोता है तो कुछ समय के
- 2:20लिए इसको आराम मिलता है लेकिन फिर यह पूरी
- 2:23साइकिल फिर से रिपीट होती है तो ये हाथ
- 2:25धोने की प्रक्रिया को हम बोलते हैं
- 2:26कंपल्शन तो जो विचार आया या फिर जो इमेज
- 2:29आई उसको हमने बोला ऑब्सेशन उसके बाद जो
- 2:33किया व्यक्ति ने उस घबराहट को कम करने के
- 2:35लिए उसको हमने बोला कंपल्शन तो यही
- 2:38ऑब्सेशन और कंपल्शन मिलके बनाते हैं
- 2:40ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर थोड़ा सा और
- 2:43डिटेल में समझते हैं
- 2:45इसको अब ये जो ऑब्सेशन और कंपल्शन है ये
- 2:50कई बार लोगों को लगता है कि यार कभी-कभी
- 2:52तो कुछ विचार किसी के भी मन में आते हैं
- 2:53और एकदम सही बात है कभी-कभी उल्टी पुल्टी
- 2:56बातें कभी सडन कुछ मन में आ जाना यह सबके
- 2:59मन में होता है लेकिन कब हम इसको बीमारी
- 3:01बोलते हैं कब हम इसको नॉर्मल बोलते हैं ये
- 3:04डिपेंड करता है कि इन सब चीजों में समय
- 3:06कितना व्यतीत हो रहा है आमतौर पे कहा जाता
- 3:08है कि यदि ऑब्सेशंस और कंपल्जंस में 24
- 3:11में से एक घंटे से ऊपर आपका लगता है और
- 3:14उसकी वजह से आप काफी परेशान हो जाते हैं
- 3:16डिस्ट्रेस हो जाते हैं और आपका जो नॉर्मल
- 3:18जीवन है चाहे अगर आप एक स्टूडेंट हो आपकी
- 3:21पढ़ाई अगर आप एक कुछ काम करते हैं नौकरी
- 3:24करते हैं तो आपका काम बिजनेस करते हैं तो
- 3:26आपका बिजनेस या फिर पारिवारिक जीवन पर अगर
- 3:28एक असर पड़ने लगता है तो हम बोलते हैं कि
- 3:31एक बीमारी
- 3:32है कुछ लोगों में जिनको ओसीडी है ऑब्सेसिव
- 3:37कंपल्सरी डिसऑर्डर है उनको इनसाइट बहुत
- 3:39अच्छी होती है इनसाइट मतलब वो आके बोलते
- 3:42हैं कि डॉक्टर साहब मेरे मन में विचार
- 3:44बार-बार आता है कि मेरे हाथ गंदे हैं
- 3:46लेकिन मुझे पता है कि मेरे हाथ गंदे नहीं
- 3:48है और मैं जाक बारबार हाथ धो लेता हूं
- 3:50मुझे यह भी पता होता है कि मुझे हाथ धोने
- 3:52की जरूरत नहीं है लेकिन मैं रोक नहीं पाता
- 3:54बट मुझे पता है सब बेकार की बातें हैं यह
- 3:56होता है गुड इनसाइट कि आपको पता है कि
- 3:58आपको क्या हो रहा है कुछ कुछ लोगों को
- 4:00धीरे-धीरे करके या कई बार शुरुआत से ही यह
- 4:03पता लगना भी बंद हो जाता है कि वह जो कर
- 4:05रहे हैं वह गलत है या फिर वह अनावश्यक है
- 4:07उस केस में हम बोलते हैं पुअर इनसाइट या
- 4:09फिर एब्सेंट
- 4:11इनसाइट अब जरा बात करते हैं कि किस प्रकार
- 4:14के विचार लोगों के मन में आते हैं सबसे
- 4:16कॉमन जो आता है उसको हम बोलते हैं कंटेम
- 4:19या क्लीनिंग ऑब्सेसिव ऑब्सेशंस ऑफ कंटेम
- 4:22फॉलो बाय कंपल्जंस ऑफ क्लीनिंग तो इसमें
- 4:25होता क्या है व्यक्ति के मन में ऐसा कुछ
- 4:27आएगा कि गंदगी लगी हुई है कुछ लोगों को
- 4:29लगेगा कि मेरे हाथ गंदे हैं कुछ लोगों को
- 4:31लगेगा कि धूल लग गई मेरे हाथ में कुछ
- 4:33लोगों को लगेगा जैसे कि अ फील मैटर या
- 4:37पेशाब या फिर टॉयलेट उनके हाथ में टच हो
- 4:40गया है कुछ लोगों को लगेगा कि किसी और
- 4:42व्यक्ति का खून तो नहीं लग गया कुछ लोगों
- 4:44को लगेगा कि कुछ गंदगी कीचड़ तो नहीं लगी
- 4:46मेरे हाथ में इस प्रकार के विचार उनके मन
- 4:48में आते हैं अच्छा इंटरेस्टिंग चीज ये है
- 4:50कि कई बार जैसे मेरे ही एक पेशेंट थे उनको
- 4:53क्या होता था कि उनको दूर से भी अगर कोई
- 4:55डॉग दिख जाता था कोई कुत्ता दिख जाता था
- 4:57तो उनको लगता था कि उसने मुझे टच कर दिया
- 4:59और मेरा शरीर गंदा हो गया अब उनको ये पता
- 5:01है कि उसने टच किया नहीं है लेकिन फिर भी
- 5:03लग रहा है कि मैं गंदा हो गया हूं तो
- 5:06आमतौर पे टॉयलेट जाने के बाद सुबह वॉशरूम
- 5:09जाने के बाद या कभी भी वॉशरूम जाने के बाद
- 5:10इन लोगों को लगता है कि ये बहुत गंदे हो
- 5:12गए हैं और बहुत परेशान हो जाते हैं तो जब
- 5:16इस प्रकार के विचार मन में आते हैं तो साथ
- 5:17में एक और बात ये भी आती है कि मुझे कुछ
- 5:20हो ना जाए या तो ये मन में आता है कि मेरी
- 5:23वजह से मेरे हाथ गंदे हैं मेरा शरीर गंदा
- 5:25है मुझे कुछ बीमारी ना हो जाए या फिर कई
- 5:27बार ये भी आता है कि मेरी वजह से कोई
- 5:28परिवार वाले में कुछ बीमारी ना हो जाए
- 5:30क्योंकि मेरे शरीर में गंदगी आ गई है और
- 5:34इनको ऐसा फील भी होता रहता है कि यह
- 5:35अनक्लीन है यह साफ नहीं है अब जब इस
- 5:38प्रकार के बेचारे उन्हे बार-बार आएंगे मन
- 5:40को परेशान करेंगे घबराहट बढ़ेगी तो फाइनली
- 5:42ये क्या करते हैं ये जाके अपने हाथ धो
- 5:45लेते हैं अब अक्सर लोग पेशेंट्स बताते हैं
- 5:47कि वो जब हाथ धोना शुरू करते हैं तो हाथ
- 5:50धोने के बाद भी उनको सेटिस्फेक्शन नहीं
- 5:52मिलता वो एक बार धोते हैं दो बार धोते हैं
- 5:54बट कई बार सेटिस्फेक्शन नहीं मिलता वो तब
- 5:56तक थ धोते रहते हैं जब तक उनको फील ना हो
- 5:59जाए कि अब वो ठीक है अब उनको फील होना 10
- 6:02मिनट बाद के भी हो सकता है आधे घंटे बाद
- 6:05भी हो सकता है कई बार क्या होता है ये लोग
- 6:07पेशेंट जाते हैं टॉयलेट टॉयलेट जाने के
- 6:09बाद इनको लगता है कि ये गंदे हो गए और फिर
- 6:11इनको हर बार नहाना पड़ता है हर बार जब ये
- 6:13वॉशरूम यूज करते हैं टॉयलेट जाते हैं या
- 6:15फिर यूरिनेशन के लिए आते हैं इनको हर बार
- 6:17नहाना पड़ता है क्योंकि इनको फील होता है
- 6:19गंदे हो गए हैं कुछ पेशेंट्स यहां तक करते
- 6:21हैं कि वो अपने कपड़े पूरे बदलते हैं कुछ
- 6:24पेशेंट्स ये भी करते हैं कि वो कपड़े तो
- 6:25बदलते ही हैं लेकिन वो कपड़े भी किसी और
- 6:28को नहीं धोने देते क्योंकि उनको लगता कोई
- 6:29और धोए तो साफ नहीं होंगे वो खुद अपने हाथ
- 6:32से कपड़े धोते हैं और अपने हाथ से ही
- 6:34सुखाते हैं किसी को टच भी नहीं करने देते
- 6:36तो कंपल्शन किसी भी लेवल तक जा सकता
- 6:39है और जैसे कि मैंने बोला जरूरी नहीं कि
- 6:43इनका हाथ किसी गंदगी पर लगे अगर ये कई बार
- 6:46दूर से भी निकल गए तो भी इनके मन में आ
- 6:48जाएगा कि इनके हाथ गंदे हो गए हैं कुछ लोग
- 6:50बोलते हैं कि वो जा रहे थे और जो कूड़ा
- 6:52उठाने वाले लोग होते हैं जो कूड़ा उठा रहे
- 6:53होते हैं उनके पास से गुजर गए तो इनको
- 6:55लगने लगा कि मेरा शरीर गंदा हो गया जाके
- 6:57पूरा घर पे ध साफ किया कुछ लोगों को होता
- 7:01है कि मान लो कोई मेहमान आ गया और मेहमान
- 7:03आके किसी बिस्तर प बैठ गया या सोफे प बैठ
- 7:06गया उस परे कुछ चादर बिछी हुई है तो वो
- 7:09पूरी की पूरी चादर धोई जाएगी पूरा जमीन
- 7:11धोई जाएगी उस मेहमान ने जो जो दरवाजे छुए
- 7:14उसको धुआ जाएगा तो यह खुद भी बहुत परेशान
- 7:18होते हैं और परिवार वाले भी बहुत परेशान
- 7:19होते हैं कि पूरे दिन भर ये सफाई चलती
- 7:21रहती है और अवॉइडेंस रहता है ये बहुत सारी
- 7:25ऐसी जगहों प जाते ही नहीं है जहां पे
- 7:27गंदगी के कुछ चांस है जैसे कई बार हमारे
- 7:29क्लीनिक में पेशेंट आते हैं तो आके बैठते
- 7:31हैं लेकिन लेकिन टेबल पर हाथ नहीं रखते कि
- 7:34टेबल गंदा होगा कई बार दरवाजों को नहीं
- 7:36छूते कि दरवाजे गंदे होंगे या कई बार किसी
- 7:38और से बोलते हैं कि तुम दरवाजा खोलो और
- 7:40फिर वो अंदर घुसते हैं लोगों से हाथ नहीं
- 7:42मिलाते तो पूरा का पूरा जो व्यक्ति है और
- 7:46उसका जो परिवार है व पूरा का पूरा इसी में
- 7:48फंस के रह जाता है कि क्या गंदा है और
- 7:50क्या धोना है तो यह होता है कंटेम और
- 7:53क्लीनिंग एक दूसरा होता है इसको हम बोलते
- 7:55हैं पैथोलॉजिकल डाउट और चेकिंग इन लोगों
- 7:58को मन में शक आता रहता है कि इनकी वजह से
- 8:00कहीं कुछ गड़बड़ ना हो जाए जैसे ये दरवाजा
- 8:03बंद करेंगे और इनको लगेगा कि दरवाजा बंद
- 8:05ठीक से हुआ नहीं और फिर उनको डर लगेगा कि
- 8:08दरवाजा बंद नहीं हुआ तो कहीं कहीं रात में
- 8:09कोई घुस ना जाए या फिर गैस है गैस बंद
- 8:12करेंगे तो मन में आएगा कि गैस शायद बंद
- 8:14नहीं हुई कहीं रात में गैस ना फैल जाए आग
- 8:17ना लग
- 8:17जाए मैंने एक पेशेंट देखे थे वो क्या
- 8:20बोलते थे कि वह जब ईमेल टाइप करते थे तो
- 8:22उनको ईमेल टाइप करने के बाद लगता था कि
- 8:24कहीं उन्होंने ईमेल में कुछ गलत टाइप तो
- 8:26नहीं कर दिया उनको लगता था कि कुछ गलत
- 8:28टाइप करके कुछ गलत बात लिख के अपने बॉस को
- 8:30भेज देंगे उनको निकाल दिया जाएगा तो इनको
- 8:32डाउट होता रहता है और डाउट होता है तो ये
- 8:34लोग बारबार चेकिंग करते हैं दरवाजे को
- 8:37बारबार चेक करेंगे कि बंद है कि नहीं है
- 8:39एक बार नहीं बार-बार करेंगे कई बार अपने
- 8:43परिवार वालों को बोलेंगे कि आप चेक करिए
- 8:45गैस है तो गैस को बारबार चेक करेंगे अपने
- 8:48परिवार वालों को बोलेंगे कि गैस चेक करिए
- 8:50जो पेशेंट थे जिनको लगता था कि उन्होंने
- 8:52कुछ मेल गलत तो नहीं टाइप कर दिया वो एक
- 8:54मेल को ही इतनी बार चेक करते थे कि वो
- 8:56उनका काम आगे बढ़ ही नहीं पाता था मेरे एक
- 8:59पेशेंट ऐसे थे उनको एग्जामिनेशन का फॉर्म
- 9:01जब भरना होता था तो उनको लगता था कि
- 9:03एग्जामिनेशन के फॉर्म को भरने में कुछ
- 9:04गलती कर देंगे तो फॉर्म भर ही नहीं पाते
- 9:06थे वो एक ही फॉर्म को चेक करते रहते थे
- 9:08बारबार चेक करते थे तो यह है चेकिंग जो कि
- 9:13इसमें कंपल्शन होती है और ऐसे कई सारी
- 9:16चीजों को अवॉइड किया जाता है जहां पर इस
- 9:18प्रकार के विचार मन में आ सकते हैं कुछ
- 9:21लोगों के मन में गलत विचार आते हैं
- 9:23सेक्सुअल सेक्स संबंधित तो बड़े परेशान
- 9:28होते हैं पेशेंट बेचारे बहुत दुखी हो के
- 9:30पेशेंट्स आते हैं और कई बार इनको बताने
- 9:32में भी बहुत शर्म आती है डॉक्टर को कि
- 9:33इनको हो क्या रहा है क्योंकि उनके मन में
- 9:35चल रहा होता है कि यार ये कितने खराब लोग
- 9:36हैं कि इनको गलत विचार आ रहे हैं तो कुछ
- 9:38पेशेंट्स को अपने परिवार वालों के लिए गलत
- 9:40विचार आ जाते हैं मदर के लिए सिस्टर के
- 9:42लिए कजन के लिए गलत विचार आ जाते हैं अबे
- 9:45चाहते नहीं है ये मन से खराब इंसान नहीं
- 9:47है ऐसा नहीं कि गलत लोग हैं बहुत दुखी है
- 9:50इस बात से कि गलत विचार क्यों आ रहे हैं
- 9:52लेकिन विचार आ रहे हैं परिवार वालों के
- 9:53लिए आ रहे हैं और जब ये परिवार वालों के
- 9:55लिए गलत विचार आते हैं तो इनको बड़ी आत्म
- 9:57गलानी होती है बड़ी गिल्ट फील होता है
- 9:58बड़ा खराब महसूस करते हैं लेकिन है तो
- 10:01बीमारी आप रोकने का प्रयास करते हैं बट वो
- 10:03और आता है कुछ लोग अग्रेशन का विचार आता
- 10:06है अग्रेशन के विचार में उनको ऐसे मन में
- 10:09आता है कि किसी को मार दूं या फिर किसी का
- 10:13नुकसान कर दूं इस प्रकार के विचार आते हैं
- 10:16इनको डर लगता रहता है कि इनसे कुछ गलत ना
- 10:18हो जाए इनसे कुछ गलत ना हो जाए कई बार
- 10:20इनको लगता है कि इनसे पहले कभी कुछ गलत तो
- 10:22नहीं हो गया और वो उसको भी चेक करते रहते
- 10:25हैं लोगों से पूछते रहते हैं कि मैंने कुछ
- 10:26गलत तो नहीं कर दिया मैंने कुछ गलत तो
- 10:28नहीं बोल दिया मैंने कुछ गलत हरकत तो नहीं
- 10:30कर
- 10:31दी कुछ लोगों को चीजें एकदम ठीक से चाहिए
- 10:35होती हैं चीजें सब कुछ सिमिट्रिकली सब कुछ
- 10:38एक एक अलाइन होना चाहिए अगर समान पड़ा है
- 10:41टेबल पे तो एकदम एक तरीके से व्यवस्थित
- 10:43तरीके से पड़ा हो जब तक इनको वो ठीक तरीके
- 10:46से ल पड़ा हुआ नहीं दिखता तब तक ये नॉर्मल
- 10:48फील नहीं कर पाते परेशान रह जाते हैं
- 10:51चीजें परफेक्टली चाहिए तो ये चीजों को बस
- 10:53ठीक करते रहते हैं बार-बार थोड़ा सा हिला
- 10:55देंगे थोड़ा सा मूव कर देंगे जब तक इनको
- 10:58अंदर से फीलिंग ना आ जाए कि अब सब ठीक है
- 11:00तब तक ये मन को शांत नहीं कर
- 11:02पाते कुछ लोग को अपने शरीर को लेके होते
- 11:04हैं ऑब्सेशंस उनके मन में शरीर को लेक आता
- 11:07है कहीं ये बीमारी तो नहीं हो गई कहीं वो
- 11:09बीमारी तो नहीं हो गई कहीं एचआईवी एड्स तो
- 11:12नहीं हो गया कहीं कैंसर तो नहीं हो गया लद
- 11:15ये वाला जो विचार है बाकी बीमारियां एक और
- 11:17बीमारी होती है जिसको हम बोलते हैं इलनेस
- 11:19एंजाइटी डिसऑर्डर उसमें भी आता है लेकिन
- 11:21ये ओसीडी में भी आ सकता है रिलीजियस ओसीडी
- 11:23रिलीजियस ऑब्सेशन भगवान के लिए अल्लाह के
- 11:26लिए क्राइस्ट के लिए जिस धर्म का व्यक्ति
- 11:28है उसको गलत विचार आते हैं भगवान के बारे
- 11:32में गलत बातें की भगवान को नुकसान कर दिया
- 11:35कुछ लोगों को इस प्रकार के विचार आते हैं
- 11:37कि जो मूर्ति है उस परे कुछ गलत चीज कर दी
- 11:41फोटो पर गलत चीज कर दी मंदिर के सामने से
- 11:44गुजरे तो गलत गया भगवान के लिए मस्जिद के
- 11:46सामने से गुजरे तो अल्लाह के बारे में कुछ
- 11:48गलत विचार आ गया यह जो चीजें मन में आती
- 11:50है इन लोगों के इससे बहुत परेशान हो जाते
- 11:51हैं क्योंकि इनको लगता है कि मैं कितना
- 11:53खराब इंसान हूं कि ऊपर वाले के बारे में
- 11:55भी खराब विचार आ रहे हैं तो फिर जब ऐसे
- 11:57विचार आते हैं तो कंपलशन क्या होता होती
- 11:59है खराब विचार आया और फिर मन में पूजा
- 12:02करनी शुरू कर दी मन में हनुमान चालीसा
- 12:04पढ़नी शुरू कर दी या फिर मन में जो
- 12:07भी जो होता है कुरान में जो लिखा होता है
- 12:09वो पढ़ना शुरू कर दिया तो गलत विचार आया
- 12:13फिर उसकी माफी इस प्रकार से की इनमें से
- 12:15ऐसे कई लोग होते हैं जो कि फिर ऐसा कर
- 12:17लेते हैं कि सामने मंदिर के सामने जाना ही
- 12:19ना पड़े या मस्जिद के सामने जाना ही ना
- 12:21पड़े मेरे एक पेशेंट थे वो क्या करते थे
- 12:23जैसे हमारे देश में कैलेंडर प बहुत भगवान
- 12:26की फोटोज होती हैं मूर्तियां होती हैं तो
- 12:28यह करते थे कि घर में कोई मूर्ति नहीं
- 12:29होनी चाहिए कोई कैलेंडर नहीं होना चाहिए
- 12:32और पूरी कोशिश करते थे कि सामने कुछ दिख
- 12:34ना जाए क्योंकि कुछ दिख गया कुछ गलत विचार
- 12:36आ गया तो बहुत खराब लगता था इनको यह
- 12:39रिलीजस ओसीडी होता है अब ओसीडी एक बहुत
- 12:42कॉमन बीमारी है लगभग दो से 3 पर लोगों में
- 12:45पाई जाती है तो आप समझ लीजिए मान लीजिए
- 12:48मान लीजिए एक बड़ा शहर हैसे दिल्ली जिसमें
- 12:50एक करोड़ लोग रहते हैं तो लगभग दो लाख
- 12:53लोगों को ओसीडी होगा जोक बहुत बड़ा नंबर
- 12:55है तो ओसीडी ऐसा नहीं है कि बहुत कोई
- 12:59अनकॉमन बीमारी है ओसीडी बहुत कॉमन बीमारी
- 13:02है दुख की बात ये है कि लोग ओसीडी को गलत
- 13:05तरीके से यूज कर लेते हैं जिन जो लोग को
- 13:08साफ साफ सफाई पसंद है वो कभी बड़े खुश
- 13:10होकर बोलते हैं कि मुझे तो ओसीडी है
- 13:11तुम्हें भी ओसीडी है क्या बट उनको ये समझ
- 13:14नहीं आता कि ओसीडी बहुत खराब बीमारी है
- 13:16जिसको होती है उसी को समझ आता है कि उसको
- 13:18क्या हो रहा है एक और चीज है साथ वाले
- 13:21नहीं पहचान पाते या साथ वाले समझ नहीं
- 13:23पाते वो बोलते हैं यार मत करो ना तुम
- 13:25बारबार हाथ धो रहे हो मत धो तुम्हारे तो
- 13:27हाथ में है उनको समझ नहीं पाता है परिवार
- 13:29वालों को या दोस्तों को कि इंसान के मन
- 13:31में चल क्या रहा है तो एक ऐसी बीमारी है
- 13:33जो जिसको होती है उसी को समझ आती है या
- 13:36फिर डॉक्टर को समझ आती है आसपास वाले लोग
- 13:38समझ नहीं पाते उस चीज
- 13:40को जो स्टडीज होती है कम्युनिटी में उसमें
- 13:43पाया गया कि औरतों में ज्यादा पाई जाती है
- 13:45पुरुषों की तुलना में ओसीडी के पेशेंट में
- 13:48डिप्रेशन के लक्षण आमतौर पर पाए जाते हैं
- 13:51लगभग तीन चौथाई पेशेंट जिनको ओसीडी है
- 13:55उनको लाइफ में कभी ना कभी डिप्रेशन के
- 13:57लक्षण आते हैं और ओसीडी डिप्रेशन अपने आप
- 14:00में एक एक सिग्निफिकेंट बीमारी हो जाती है
- 14:02क्योंकि एक तो आपका समय में निकल रहा है
- 14:04बेकार के विचारों में और धीरे-धीरे करके
- 14:06आप उदास भी है आपका काम करने का भी मन
- 14:08नहीं कर रहा आपको नींद भी नहीं आ रही है
- 14:10आपको कई बार गलत विचार आ रहे हैं अपने आप
- 14:13को नुकसान पहुंचाने वाले विचार आ रहे हैं
- 14:14तो ये सब डिप्रेशन के लक्षण होते
- 14:16हैं ओसीडी आमतौर पर लंबी चलने वाली बीमारी
- 14:21है पहले एक समय था जब माना जाता था कि
- 14:23ओसीडी ठीक ही नहीं हो सकती लेकिन बाद में
- 14:26पाएगा कि ये जो नकारात्मक सोच है ये ठीक
- 14:28नहीं है है लगभग
- 14:3043 से 76 प्र तक लगभग 3 चौथाई लोग तक या
- 14:35तो पूरी तरीके से ठीक हो जाते हैं या फिर
- 14:37उनमें काफी हद तक इंप्रूवमेंट आ जाता
- 14:39है
- 14:41लेकिन ऐसा पाया गया है कि यदि व्यक्ति को
- 14:44बीमारी है और वह लंबे समय तक इलाज नहीं
- 14:47करवा रहे अपना बिना इलाज के बीमारी चले जा
- 14:49रही है चले जा रही है तो फिर बाद में
- 14:51रिजल्ट आना थोड़ा मुश्किल हो सकता है
- 14:53इसलिए बोला जाता है कि आपको जब भी लगे
- 14:55आपको ओडी के लक्षण आ रहे हैं कुछ हफ्तों
- 14:57से या महीनों से तो वेट मत करिए ट्रीटमेंट
- 15:00लीजिए ट्रीटमेंट लेंगे तो ट्रीटमेंट के
- 15:02असर आने की संभावना भी बढ़ जाती
- 15:04है ओसीडी होता क्यों है अब हमारा जो
- 15:09रिसर्च है जो साइंस है काफी हद तक आगे बढ़
- 15:12चुका है अब ऐसा पाया गया है कि दिमाग में
- 15:14एक ट्रैक्ट होता है दिमाग में एक एक आप
- 15:16मान लीजिए कि डिफरेंट डिफरेंट दिमाग के जो
- 15:19रीजंस है वो आपस में जुड़े हुए हैं जैसे
- 15:21मैं आपको एक फोटो दिखाता हूं ये देखिए ये
- 15:24आपका दिमाग है इसमें डिफरेंट डिफरेंट
- 15:26पार्ट्स दिखा रखे हैं तो एक ट्रैक होता है
- 15:29जो कि दिमाग से ऐसे मान लीजिए एक ऐसे एक
- 15:34ऐसे ट्रैक सा है एक एक घुमावदार सा
- 15:38ट्रैक्ट सा है जिसको हम बोलते हैं
- 15:40सीएसटीसी ट्रैक्ट क्योंकि शुरुआत होती है
- 15:43इसकी कॉर्टेक्स से और यह दिमाग के हिस्से
- 15:45में जाता है जिसको हम बोलते हैं स्ट्राइट
- 15:46म और वहां से दिमाग के एक और हिस्से में
- 15:48आता है जिसको बोलते हैं थैलेमस थैलेमस
- 15:50थोड़ा पीछे की तरफ होता है और फिर घूम के
- 15:52वहीं पर आ जाता है जहां से शुरुआत हुई तो
- 15:55एक तरीके से ओसीडी में इस ट्रैक्ट में
- 15:58विचार फस जाता
- 15:59विचार फस से गए और व बारबार घूम घूम के
- 16:02घूम घूम के एक ही विचार मन में बारबार आ
- 16:04रहा है यह है सीएसटीसी ट्रैक एक ओवर
- 16:07एक्टिव ट्रैक बन गया है इसको हम एक तरीके
- 16:10से ऐसे भी समझ सकते हैं कि मान लीजिए एक
- 16:12छनी होती है जो विचारों को बेकार के
- 16:15विचारों को छान देती है व छन्नी खराब हो
- 16:17गई है तो बेकार के जो विचार है वो घूमे जा
- 16:19रहे हैं घूमे जा रहे हैं बारबार दिमाग में
- 16:21आ रहे
- 16:23हैं ओसीडी का इलाज कैसे किया जाता है
- 16:26अच्छा ट्रैक के अलावा कई सारे न्यूरो
- 16:29ट्रांसमिट्स है जैसे सिरोट
- 16:33निन नरे
- 16:40एपिफ्रेनिक
- 16:48जो है इनके लेवल्स में भी इंबैलेंस है यह
- 16:52सोच लेना कि लेवल कम हो गया ज्यादा हो गया
- 16:54बहुत सिंपलीफाइड तरीका हो गया समझने का
- 16:57इसकी जगह हम बोलते हैं डिस रेगुलेशन
- 16:59रेगुलेट ठीक से नहीं हो रहा है लेकिन आपकी
- 17:01जो दवाइयां है वो आमतौर पर इन्ही केमिकल्स
- 17:03के ऊपर काम करती
- 17:06है विदेशों में वेस्टर्न पाश्चात्य जो
- 17:10सभ्यता है वेस्टर्न वर्ल्ड जो है वहां तक
- 17:12ओसीडी के पेशेंट्स को लगभग 10 साल लग जाते
- 17:15हैं ट्रीटमेंट लेने से पहले 10 साल तक
- 17:17बीमारी चलती रहती है उसके बाद जाकर वो
- 17:19ट्रीटमेंट लेकर आते हैं और बच्चों में
- 17:20लगभग दो तीन साल के बाद जाकर ट्रीटमेंट हो
- 17:23पाती है तो दिक्कत क्या है कि जितना लंबा
- 17:26समय लग रहा है ट्रीटमेंट लेने में उतनी
- 17:28ज्यादा बीमारी खराब होती चली जाती है
- 17:31ट्रीटमेंट क्या है दो चीजें हैं जो कि
- 17:34वर्ल्ड वाइड सबसे अच्छी मानी जाती हैं एक
- 17:37होती है आपकी काउंसलिंग जिसको मेडिकल भाषा
- 17:39में बोला जाता है सीबीटी कॉग्निटिव बेवल
- 17:41थेरेपी दूसरी होती है मेडिकेशंस जिनका काम
- 17:44है सिरोट निन के लेवल्स को दिमाग में
- 17:46बढ़ाना अब एक बात ध्यान रखिए ये जो
- 17:48मेडिकेशंस है ऐसा नहीं है कुछ आर्टिफिशियल
- 17:50सेरोटोनिन आपके दिमाग में डाल देती हैं आप
- 17:53ही के दिमाग का जो सेरोटोनिन है उसको वो
- 17:56खराब होने से रोकती हैं बेसिकली होता क्या
- 17:58है कि दिमाग में जो सेरोटोनिन बनता है वो
- 18:00रिलीज होता है और फिर जो दिमाग की सेल्स
- 18:03है उसको तोड़ देती हैं और खत्म कर देती
- 18:05हैं और फिर नया सेरोटोनिन आता है इन
- 18:07दवाइयों का काम क्या है वो जो सरोट बना
- 18:09हुआ है उसको टूटने से बचाना जिससे कि
- 18:12लेवल्स धीरे-धीरे बढ़ने लगते हैं जब
- 18:13लेवल्स बढ़ते हैं तो पाए गया कि सिमटम्स
- 18:15कम होते हैं तो सबसे अच्छा ट्रीटमेंट इन
- 18:19दोनों का माना जाता है कि एक दवाइयां
- 18:22इस्तेमाल की जाए और एक थेरेपी इस्तेमाल की
- 18:24जाए कुछ लोगों में जिनमें लक्षण काफी
- 18:26ज्यादा है उनमें ये बोला जाता है कि दोनों
- 18:29चीजों को साथ में इस्तेमाल करिए दवाइयों
- 18:31का भी इस्तेमाल करिए काउंसलिंग का भी
- 18:32इस्तेमाल करिए या फिर काउंसलिंग जो है
- 18:35जिसको हम ईआरपी बोलते हैं एक्सपोजर एंड
- 18:37रिस्पांस प्रिवेंशन उसमें मल्टीपल सेशंस
- 18:40होते हैं बोला जाता है कि हफ्ते में कम से
- 18:42कम एक सेशन करिए और कम से कम चार पांच
- 18:44महीने तक सेशन करिए अब ऐसे बहुत सारे लोग
- 18:46होते हैं जो सेशंस के लिए आ नहीं पाते या
- 18:48सेशंस को अफोर्ड नहीं कर पाते या फिर वो
- 18:51ऐसी जगह पर रहते हैं हां पर सेशंस होते
- 18:52नहीं है तो उन लोगों के लिए कई बार हम
- 18:54बोलते हैं कि आप दवाइयां का इस्तेमाल करिए
- 18:56दवाई खाना आसान है दवाई उतनी महंगी नहीं
- 19:00पड़ती दवाई हर जगह अवेलेबल है लेकिन कुछ
- 19:02लोग बोलते हैं कि मुझे दवाई खानी नहीं है
- 19:04मुझे दवाई से डर लग रहा है और दवाई के
- 19:06साइड इफेक्ट के बारे में बात करेंगे उन
- 19:07लोगों बोलते हैं ठीक है आप काउंसलिंग कर
- 19:09लीजिए तो दवाई का इलाज भी ठीक है
- 19:12काउंसलिंग का इलाज भी ठीक है ज्यादा अच्छा
- 19:15इलाज दोनों को मिला के माना जाता है अक्सर
- 19:17डॉक्टर्स क्या करते हैं कि शुरुआत में
- 19:19दवाइयों से शुरुआत करते हैं क्योंकि कुछ
- 19:21आराम अगर पड़ जाए उसडी में तो फिर इंसान
- 19:24उस हालत में पहुंच जाता है जहां प वो
- 19:25काउंसलिंग में जो उसको सिखाया जा रहा है
- 19:26उसको कर पाए तो ये काउंसलिंग ऐसा ऐसा नहीं
- 19:29है कि आप बैठे एक थेरेपिस्ट के सामने
- 19:30उन्होंने आपको कुछ बोल दिया आपने सुन लिया
- 19:32आप ठीक हो गए ऐसा नहीं होता है थेरेपिस्ट
- 19:34आपको बताते हैं कि इन विचारों को कैसे
- 19:36हैंडल करना है घर पे जाके क्या करना है
- 19:38एक्सरसाइज करनी पड़ती है घर पे आपको
- 19:40होमवर्क मिलता है उसको फॉलो करना पड़ता है
- 19:42तो कई बार जब सिम्टम्स
- 19:44हालत में नहीं होता इंसान कि उन सब चीजों
- 19:46को फॉलो कर पाए तो उस टाइम पे दवाइयों के
- 19:49साथ शुरुआत कर ली जाती है जब थोड़ा
- 19:51दवाइयों का असर आ जाए लक्षण थोड़े कम हो
- 19:53जाएं इंसान इस काबिल हो जाए कि वो थेरेपी
- 19:55में जा सकता है तो उसको थेरेपी में शिफ्ट
- 19:57कर दिया जाता है और दवाइयां कम कम करके
- 19:59बंद करने का प्रयास किया जाता
- 20:01है एसएसआरआई सिलेक्टिव सेरोटोनिन रिटेक
- 20:06इन्हेबिटिंग रि एप्टिक इबेट ऐसी दवाइयां
- 20:09है जो कि आमतौर पर शुरू की जाती है कई
- 20:12प्रकार की दवाइयां है फ्लक्ट है फ्लक्स है
- 20:15सर्लिन है पेरोक्स है इस प्रकार की
- 20:17दवाइयां आमतौर पर अप्रूव की जाती है ये
- 20:19एफडीए अप्रूव्ड है जो अमेरिका में है
- 20:21एफडीए जो कि ट्रीटमेंट को अप्रूवल देता है
- 20:24उसने इनको अप्रूव कर रखा है आमतौर पर हम
- 20:26एक एसएसआरआई से इसलिए शुरू करते हैं
- 20:28क्योंकि इसके साइड इफेक्ट होने के चांसेस
- 20:29कम रहते हैं देखिए लोग ना मानसिक
- 20:32बीमारियों की जो दवाइयां है उससे डरते
- 20:33बहुत ज्यादा है कि कहीं कुछ हो ना जाए
- 20:36लेकिन आमतौर पर क्या पाए गया कि जब आप कोई
- 20:38नई दवाई शुरू करते हैं तो साइड इफेक्ट हो
- 20:40सकते हैं किस प्रकार के साइड इफेक्ट
- 20:41यूजुअली पेट के साइड इफेक्ट पेट में
- 20:43एसिडिटी हो गई या फिर कुछ लोगों को शुरुआत
- 20:45के तीन-चार दिन टॉयलेट ज्यादा जाना पड़ता
- 20:47है ऐसा नहीं है कि उनको लूज मोशन हो जाता
- 20:49है बट उनको दो-तीन बार टॉयलेट जाना पड़ता
- 20:51है कुछ लोगों को कॉन्स्टिपेशन भी हो सकता
- 20:54है बट ये सब चीजें सब में नहीं होती और
- 20:56मैनेज की जा सकती है कि खाना खाने के बाद
- 20:58आप दवाई खाइए लो डोज से शुरू करिए यह सब
- 21:01करके मैनेज हो जाती हैं लोगों को लगता है
- 21:03कि दिन भर नींद तो नहीं आती रहेगी आमतौर
- 21:05पर ऐसा नहीं होता य दवाइयां दी जाती है लो
- 21:07डोज में दी जाती है यदि किसी को नींद
- 21:08ज्यादा आ जाती है तो दवाई की डोज कम कर दी
- 21:10जाती है या दवाई चेंज कर दी जाती है तो
- 21:12ऐसे सारे जो दवाइयां है काफी काम काफी सेफ
- 21:15मानी जाती है शुरुआत में कोई साइड इफेक्ट
- 21:17नहीं होते मतलब शुरुआत में साइड इफेक्ट हो
- 21:20सकते हैं वो ऐसे खतरनाक नहीं होते उनको
- 21:22मैनेज किया आ सकता है लॉन्ग टर्म में दो
- 21:24टाइप के साइड इफेक्ट हो सकते हैं एक तो
- 21:26वेट गेन कुछ लोग का वजन बढ़ सक
- 21:29उसके लिए हम यह बोलते हैं कि देखिए इन
- 21:31दवाइयों से कई बार भूख बढ़ जाती है भूख
- 21:34बढ़ने पर आप क्या खा रहे हैं उस परे
- 21:36डिपेंड करेगा कि आपका वजन बढ़ेगा कि नहीं
- 21:37बढ़ेगा यदि आपको भूख लगती है और आप खूब
- 21:39सारा मीठा खाना शुरू कर दें खूब सारा तला
- 21:41हुआ खाना शुरू कर दें कोल्ड ड्रिंक पीना
- 21:43शुरू कर द तो वजन बढ़े आएगा बट अगर आपने
- 21:45डाइट पर कंट्रोल रखें ज्यादा सब सब्जिया
- 21:48ज्यादा
- 21:50खाए सैलेड ज्यादा खाए पानी ज्यादा पिए तो
- 21:52आपका वजन नहीं बढ़ेगा फिर भी यदि किसी का
- 21:55वजन बढ़ता है तो दवाई चेंज कर दी जाती है
- 21:57एक और समस्या आती है सेक्सुअल साइड
- 21:59इफेक्ट्स की लॉन्ग टर्म में कुछ लोगों को
- 22:01सेक्सुअल साइड इफेक्ट हो सकता है अब यह
- 22:03बड़ा इंटरेस्टिंग है कुछ लोगों को
- 22:05सेक्सुअल साइड इफेक्ट होता है साइड इफेक्ट
- 22:07क्या हो सकता है सेक्स की इच्छा कम हो
- 22:09जाना या फिर कुछ लोगों में पुरुषों में
- 22:11इरेक्शन में कमी होने लगना और कुछ लोगों
- 22:13में सेक्सुअल परफॉर्मेंस बढ़ जाती है
- 22:15क्योंकि ये दवाइयां टाइमिंग इंक्रीज कर
- 22:18देती है व्यक्ति का जो सेक्स का टाइमिंग
- 22:19होता है तो कुछ पेशेंट्स बोलते हैं कि
- 22:21सेक्सुअल प्रॉब्लम हो रही है कुछ पेशेंट्स
- 22:23बोलते हैं कि सेक्सुअल इंप्रूवमेंट हो गई
- 22:24है आमतौर पर दोनों ही केसेस में दवाई जब
- 22:27बंद की जाती है तो चीजें खत्म हो जाती है
- 22:29चली जाती है तो सेक्सुअल साइड इफेक्ट अब
- 22:32अब इसमें देखिए बड़ी इंपॉर्टेंट चीज है कि
- 22:33जिस व्यक्ति को ओसीडी के बहुत
- 22:35सिम्मन डिप्रेस्ड है जो वैसे ही नॉर्मल
- 22:38लाइफ भी नहीं जी पा रहा उस वो वो पेशेंट्स
- 22:40कई बार आके बोलते हैं कि सिर्फ सेक्सुअल
- 22:42साइड इफेक्ट कल को हुआ तो हुआ अभी ठीक तो
- 22:44हूं पहले मैं तो यह बात बता देना एक
- 22:47डॉक्टर का फर्ज होता है कि ये चीजें हो
- 22:48सकती हैं और यह बताना भी फर्ज है कि ये हर
- 22:51पेशेंट में होती नहीं है तो साइड इफेक्ट
- 22:53के डर से दवाई बंद करके बीमारी को झेलते
- 22:56रहना वो भी तो कोई बहुत अच्छी चीज नहीं है
- 22:58ओसीडी में दवाइयों का असर धीरे-धीरे आता
- 23:01है कई बार दो-तीन महीने लग जाते हैं पूरा
- 23:03असर आने में इसलिए हम बोलते हैं कि ओसीडी
- 23:05का यदि आप इलाज करवा रहे हैं तो थोड़ा
- 23:07संयम रखिए थोड़ा पेशेंस रखिए धीरे-धीरे
- 23:10करके इंप्रूवमेंट
- 23:12आएगा कुछ और दवाइयां भी है जैसे क्लोपिन
- 23:15करके दवाई होती है क्लोनल एक बहुत कॉमन
- 23:17ब्रांड है उनको भी यूज किया जा सकता है उस
- 23:19दवाई के अपने फायदे हैं अपने नुकसान है
- 23:22फायदे कुछ लोगों में ज्यादा अच्छा काम
- 23:24करती है नुकसान कुछ लोगों को मुंह सूखने
- 23:26का साइड इफेक्ट होता है या फिर कब्ज होने
- 23:28का साइड इफेक्ट होता है तो उनको बोला जाता
- 23:29है कि आप पानी ज्यादा पीजिए आप फल फ्रूट
- 23:32ज्यादा खाइए आप रफे ज्यादा
- 23:35खाइए काफी सारे पेशेंट्स में यदि पहली
- 23:37दवाई से पूरा इंप्रूवमेंट नहीं आया तो एक
- 23:39दवाई ऐड कर दी जाती है जिसको हम बोलते हैं
- 23:42डोपामिन रिसेप्टर
- 23:43एंटागनिस्ट और जैसे कि हमने पहले बोला था
- 23:46कि दवाइयों का और काउंसलिंग का ट्रीटमेंट
- 23:48यदि साथ में किया जाए तो रिजल्ट के आने की
- 23:50संभावना और बढ़ जाती
- 23:54है कई बार मरीज पेशेंट जो होते हैं वो
- 23:57दवाई ठीक से खाते नहीं है
- 23:59कुछ लोगों में क्या होता है कि उनकी
- 24:01बीमारी ही इस प्रकार की है उनको हर चीज से
- 24:04डर लग रहा है कि मुझे कुछ हो ना जाए तो
- 24:06उनको दवाई से भी डर लगता है कि इस दवाई से
- 24:07मुझे कोई साइड इफेक्ट ना हो जाए कई बार
- 24:10पेशेंट इस बात को मान ही नहीं पाते कि
- 24:11उनको कुछ मानसिक समस्या है वो इस बात को
- 24:13एक्सेप्ट ही नहीं कर पाते और वो यहां वहां
- 24:15बाबा के पास और यहां नेचुरल और क्या-क्या
- 24:19चीजों में फंसे रह जाते हैं समय बीतता चला
- 24:21जाता है बीमारी बढ़ती चली आती है डॉक्टर
- 24:23के पास नहीं पहुंच पाते कई बार डॉक्टर
- 24:25अवेलेबल ही नहीं होते और कई बार दवाइयां
- 24:28इतनी महंगी होती है दवाई सूट नहीं कर होती
- 24:30है उस वजह से भी दिक्कत हो सकती है
- 24:32काउंसलिंग जो है उसको जैसे मैंने बताया
- 24:34ईआरपी करके होता है और ऐसा बोला जाता है
- 24:37कि 13 से लेकर 20 तक वीकली सेशंस लीजिए कि
- 24:41हर हफ्ते में एक थेरेपी सेशन लीजिए यदि
- 24:43असर अच्छा नहीं आ रहा है तो बढ़ाना भी
- 24:45पड़ता है और असर अच्छा आ जाए तो कम कम
- 24:47करके बंद भी कर सकते
- 24:49हैं कई लोग बोलते हैं कि ओसीडी की दवाई एक
- 24:52बार शुरू हो गई तो बीमारी तो कभी बंद नहीं
- 24:54हो सकती ऐसा नहीं है जो अमेरिकन गाइडलाइंस
- 24:56है वो कहती हैं कि आप कम से कम एक से दो
- 24:59साल का ट्रीटमेंट करिए और उसके बाद आप
- 25:01दवाई की डोज 10 से 25 पर हर एक से दो
- 25:05महीने कम कर सकते
- 25:06हैं लेकिन यह करना बड़ा सावधानी से करना
- 25:10चाहिए जैसे कि आप देख पा रहे हैं 10 से 25
- 25:12पर एक से दो महीने में मतलब बहुत
- 25:14धीरे-धीरे धीरे धीरे करके दवाइयां बंद
- 25:16करनी चाहिए यदि जल्दी बाजी में दवाइयां
- 25:18बंद करने की कोशिश की जाती है तो बीमारी
- 25:20के वापस आने की संभावना बढे आती है कुछ
- 25:22लोगों में दवाइयां कम होकर बंद हो पाती
- 25:24हैं कुछ लोगों में दवाइयां कम हो पाती हैं
- 25:26और कुछ लोगों में मान लीजिए सिमम बहुत
- 25:28ज्यादा है तो दवाई चलती रह जाती है अब कुछ
- 25:31नए तरीके भी आ गए हैं ट्रीटमेंट के जैसे
- 25:33एक आरटीएमएस करके तरीका है जिसमें मैगनेट
- 25:36का इस्तेमाल करके दिमाग को दिमाग के कुछ
- 25:38एरियाज को
- 25:40स्टिमुलेटिंग
- 25:43है जो कि मैग्नेटिक थेरेपी से इंप्रूवमेंट
- 25:46ला सकती हैं पर देखिए ऐसा नहीं है कि
- 25:48मैग्नेट है महंगा है तो अच्छा रहेगा हमेशा
- 25:51काफी सारे पेशेंट्स में काफी सारे में
- 25:53क्या हर पेशेंट में आज भी यही गाइडलाइन
- 25:55सारी कहती हैं क्या पहले या तो मेडिकेशन
- 25:57से स्टार्ट करिए या फिर काउंसलिंग स्टार्ट
- 25:59करिए सो ये मोटा-मोटा ओसीडी के बारे में
- 26:02है अब देखिए एक आम व्यक्ति के तौर पे यदि
- 26:05मैं आपको एक सलाह देना चाहूं तो यह रहेगी
- 26:08कि ओसीडी की बीमारी जो है वो जीवन पे काफी
- 26:11खराब इंपैक्ट डाल सकती है लाइफ रुक सी
- 26:14जाती है लाइफ उसी चीजों में हाथ धोने में
- 26:16चेक करने में इन सब चीजों में अटक के रह
- 26:18जाती है और उसका असर ना सिर्फ आपके करियर
- 26:22पे पड़ता है बल्कि आपके परिवार पे भी
- 26:24पड़ता है आपके पारिवारिक रिश्तों पे भी
- 26:26पड़ता है आपकी पढ़ाई पे भी पड़ता है
- 26:28और यह अपने आप ठीक नहीं हो जाएगा सिर्फ
- 26:31अपने मन से सोचने से ठीक नहीं हो जाएगा
- 26:34हालांकि आपका जो मोटिवेशन है उसका भी रोल
- 26:37है अगर आप मोटिवेटेड है तभी रिजल्ट आएगा
- 26:40लेकिन आपको एक एक प्रैक्टिशनर से एक
- 26:43साइकेट्रिस्ट से एक थेरेपिस्ट से हेल्प
- 26:46लेनी बहुत जरूरी है साइड इफेक्ट के नाम पर
- 26:48लोग बहुत ज्यादा डरते हैं उतने साइड
- 26:50इफेक्ट देखे नहीं जाते है ना और मान लीजिए
- 26:53कुछ साइड इफेक्ट होता भी है तो उसको मैनेज
- 26:55किया जाएगा अब देखिए अब मैं इस कमरे में
- 26:57खड़ा हूं मैं ये वीडियो बना रहा हूं मेरे
- 26:59सिर के ऊपर एक लाइट जल रही है पीछे एक
- 27:01टीवी लगी हुई है अब होने को तो इसमें भी
- 27:03आग लग सकती है ऊपर भी आग लग सकती है भूकंप
- 27:05भी आ सकता है अब होने को तो कुछ भी हो
- 27:08सकता है तो क्या टीवी इस्तेमाल करना बंद
- 27:10कर दो या हम सब फोन इस्तेमाल करते हैं फोन
- 27:12में आग लग जाती है तो क्या हम फोन
- 27:14इस्तेमाल करना बंद कर दें हमें ये सोचना
- 27:17पड़ेगा ना कि किसी का कितना फायदा और
- 27:18कितना नुकसान है तो अगर मेडिकेशंस आप ले
- 27:20रहे हैं लो डोज से ले रहे हैं धीरे-धीरे
- 27:22चीजें बढ़ रही है साइड इफेक्ट अगर आपको
- 27:23नहीं हो रहे हैं तो फिर बिना बात के क्यों
- 27:25डरना और यदि कोई साइड इफेक्ट होता है पेट
- 27:27में जलन हो होती है कब्ज होता है तो उसको
- 27:29देखा जाएगा उसको ठीक किया जाएगा उसके लिए
- 27:31डोज चेंज की जाएगी या दवाई चेंज की जाएगी
- 27:33सिमिलरली काउंसलिंग भी एक अच्छा इलाज है
- 27:36यदि आप दवाई नहीं चाहते तो आप काउंसलिंग प
- 27:38जाइए काउंसलिंग को ट्राई कर लीजिए हो सकता
- 27:39है काउंसलिंग से ही फायदा हो जाए और यदि
- 27:41काउंसलिंग से फायदा नहीं होता है तो भी
- 27:43आपके मन में क्लेरिटी तो आएगी कि अब आपको
- 27:45करना क्या है तो देखिए ओसीडी की बीमारी
- 27:47होने का मतलब यह नहीं कि अब आप नॉर्मल
- 27:49जिंदगी नहीं जी सकते
- 27:58जो साइंस है जिसको कि पूरी दुनिया में
- 28:00माना जाता है उस परे ज्यादा में विश्वास
- 28:02करना चाहिए या फिर कोई एक व्यक्ति जो
- 28:28डॉक्टर को दिखाना है तो उनको दिखाइए अगर
- 28:29आपको प्राइवेट डॉक्टर पर विश्वास नहीं है
- 28:31तो सरकारी में दिखाइए अगर आपको लगता है
- 28:33सरकारी डॉक्टर आपको टाइम नहीं दे रहा तो
- 28:34प्राइवेट में दिखाइए अगर आपको दवाई से डर
- 28:36लग रहा है तो आप काउंसलिंग लीजिए अगर आपको
- 28:38काउंसलिंग में टाइम नहीं मिल तो दवाई
- 28:40लीजिए अगर आपको लगता है कि सब कुछ फार्मा
- 28:42ने जाल बिछा रखा है फार्मा कंपनीज ने तो
- 28:44जेनरिक दवाइया लीजिए बट कुछ तो करिए
- 28:47फाइनली आप सफर कर रहे हैं फाइनली आपकी
- 28:49जिंदगी रुकी हुई है तो फाइनली स्टेप आप ही
- 28:51को तो लेना पड़ेगा तो यदि आपको या आपके
- 28:55किसी जानकार को ओसीडी की समस्या है तो
- 28:57प्लीज ने जीवन के साल व्यर्थ मत करिए इन
- 29:00चीजों का इलाज है यह चीजें ठीक हो जाती
- 29:02हैं कुछ लोगों में पूरी ठीक हो जाती हैं
- 29:04कुछ लोगों में काफी हद तक ठीक हो जाती हैं
- 29:07जरूरत है एक स्टेप लेने की और एक डॉक्टर
- 29:09से मिलने की तो प्लीज यदि आपको ऐसी समस्या
- 29:12है तो आप जिस भी शहर में रहते हैं उसके
- 29:14नियरेस्ट साइकेट्रिस्ट से मिलिए उनकी टीम
- 29:17में आमतौर पर एक साइकोलॉजिस्ट भी होंगे और
- 29:19अपना इलाज शुरू करवाइए धन्यवाद शुक्रिया
- 29:22अगर आपको डिप्रेशन की समस्या है तो आप
- 29:24डॉक्टर प्रवीण त्रिपाठी से सीख सकते हैं
- 29:27कि डिप्रेशन के पेशेंट्स में काउंसलिंग
- 29:30कैसे की जाती है और उन टेक्निक्स को यूज
- 29:33करके डिप्रेशन से बाहर निकलने की जर्नी को
- 29:36शुरू कर सकते हैं स्क्रीन पर दिए कार्ड को
- 29:39क्लिक करें या फिर डिस्क्रिप्शन में दिए
- 29:42लिंक को क्लिक कर डॉक्टर प्रवीण त्रिपाठी
- 29:45के कोर्स में एनरोल करें
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This page contains the full transcript of OCD ke lakshan, karan aur ilaaj ki puri jankari | अनचाहे विचारों के बार-बार आने की बीमारी को समझें by Dr Praveen Tripathi Psychiatry, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 6,278 words across 744 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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