Notice The World Like Never Before — Transcript
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- 0:00यहां पे जो लिखा है क्या आप इसको गेस कर
- 0:02सकते हो?
- 0:06यू आर अ जीनियस, राइट? रॉन्ग। चलो कोई बात
- 0:11नहीं अगर यह मिस हो गया। क्योंकि आप खुद
- 0:12को तो एक जीनियस ही बोलोगे। अगर आपने यह
- 0:14नोटिस कर लिया कि मेरी टी-शर्ट का कलर बदल
- 0:17चुका है। इस चीज के पीछे काम करती है
- 0:19ह्यूमंस की एक सुपर पावर जिसे जो लोग
- 0:22कंट्रोल कर लेते हैं उन्हें हम कहते हैं
- 0:24डिटेक्टिव्स, एजेंट्स, साइकोलॉजिस्ट,
- 0:26मेंटलिस्ट, साइंटिस्ट, मैजिशियंस या
- 0:28मल्टीबिलिनियर्स। वो सुपर पावर जिसकी मदद
- 0:30से डोनाडो डवि ने मोनालिसा बनाई और
- 0:33चार्ल्स डार्विन ने थ्योरी ऑफ एवोल्यूशन
- 0:35वो जिससे न्यूटन को एक सेब में ग्रेविटी
- 0:37दिखी और ईलॉन मस्क को मार्स पर लाइफ। ये
- 0:40वही पावर है जिसने बचपन में हमें चलना,
- 0:42बोलना, चेहरा पहचानना, भाषा समझना, इमोशंस
- 0:46को फील करना सब कुछ सिखाया था। लेकिन
- 0:49अनफॉर्चूनेटली एज के साथ-साथ यह पावर
- 0:52दिमाग की किसी बेसमेंट में धंसती चली गई।
- 0:54इसके कम यूज़ से हमारी परफॉर्मेंस घटती है।
- 0:57करियर ग्रोथ रुकती है। मेंटल इश्यूज जैसे
- 0:59कि ओवरथिंकिंग, स्ट्रेस ये सब पैदा होते
- 1:02हैं। और सबसे इंपॉर्टेंट इसकी कमी हमें
- 1:05दुनिया के 99% ग्रुप में शामिल करती है।
- 1:07यह है ब्रेनस पावर ऑफ
- 1:10[संगीत]
- 1:16ऑब्जरवेशन। क्या हमारा ब्रेन सच में इतनी
- 1:19बारीकी से डिटेल्स ऑब्जर्व कर सकता है? और
- 1:22क्या हो अगर हम सच में शैलॉक की तरह चीजों
- 1:25को ऑब्जर्व कर पाए। कितनी आसान होगी हमारी
- 1:28लाइफ अगर हम अपने सारे सेंसेस को उनके फुल
- 1:31पोटेंशियल पर यूज कर पाए। इसका क्या
- 1:33इंपैक्ट होगा हमारे रिलेशंस, हमारे करियर
- 1:37और हमारी पर्सनालिटी पर। और क्या आपने यह
- 1:39नोटिस किया कि पिछले 2 मिनट में मेरी
- 1:42टीशर्ट का टेक्स्ट दो बार बदल चुका है।
- 1:45आने वाले 20 मिनट में मैं आपकी ब्रेन की
- 1:47मेमोरी, सेंसेस और अटेंशन को ऐसे ही पांच
- 1:51बार चैलेंज करने वाला हूं। हर चैलेंज के
- 1:53साथ आपकी ऑब्जरवेशन एक लेवल प्लस होती
- 1:56जाएगी। स्पेशली जो हमारा लास्ट चैलेंज है
- 1:58द रूम केस। जिसके बाद आपको यह समझ आएगा कि
- 2:01कैसे चीजों को ऑब्जर्व करने से आप वो देख
- 2:04सकते हो जो बाकी दुनिया आंखों से भी नहीं
- 2:06देख पाती। मैं आपको ना पूरे कॉन्फिडेंस से
- 2:09यह कह सकता हूं कि इंटरनेट पर आज तक आपने
- 2:12ऐसी प्रैक्टिकल वीडियो नहीं देखी होगी जो
- 2:14आपको एक जीनियस की तरह सोचना सिखाए।
- 2:16क्योंकि इस वीडियो में मैं आपको कोई फेस
- 2:18रीडिंग, बॉडी लैंग्वेज हैक्स एंड
- 2:20डिटेक्टिव टिप्स नहीं देने वाला। मैं आपको
- 2:22वो हिडन ब्रेन साइंस बताने वाला हूं जिसके
- 2:24पीछे मेरी और मेरी टीम की रिसर्च है। हमने
- 2:27तीन बुक्स पढ़ी हैं। हमने कई
- 2:29डॉक्यूमेंट्रीज देखी हैं। हमने कई
- 2:30साइकोलॉजिस्ट के पॉडकास्ट सुने। हमने कई
- 2:32रिसर्च पेपर्स पढ़े। सो दैट आप अपने ब्रेन
- 2:34के उन हिस्सों को अनलॉक कर पाओ जिससे आप
- 2:36भी प्रॉब्लम्स को झट से सॉल्व कर पाओ।
- 2:38रिलेशंस को परफेक्ट बना पाओ। अपने करियर
- 2:41में 10 एक्स ग्रो कर पाओ और अपनी लाइफ को
- 2:43मास्टर कर पाओ। याद रहे कि आपको अपना पूरा
- 2:46फोकस मेरे वर्ड्स, दिख रहे विजुअल्स और
- 2:48पैटर्न पर रखना है। क्योंकि अगर आपका
- 2:50अटेंशन टूटा तो शायद वीडियो की लास्ट लाइन
- 2:53पे आप मजबूर हो जाओ पूरी वीडियो दोबारा
- 2:55देखने के लिए। इसलिए बी फोकस्ड क्योंकि
- 2:57क्या रियलिटी है और क्या इल्लुजन यह बस
- 3:00ऑब्जर्व करने से समझ आएगा।
- 3:10अरे मैंने अपनी आंखों से उसे उस कार में
- 3:13बैठते हुए देखा
- 3:19[संगीत]
- 3:26है। सबसे पहले तो यह देखते हैं कि आपको
- 3:29अपनी ऑब्जरवेशन बढ़ाने की जरूरत है भी या
- 3:31नहीं।
- 3:33[संगीत]
- 3:36डॉक्टर लू द नर्स
- 3:39स्टेशन। तो सोचो तुम एक प्लेन उड़ा रहे हो
- 3:42जिसमें सिर्फ 20 लोग बैठे हैं और अचानक से
- 3:44प्लेन के एक इंजन में आग लग जाती है।
- 3:46प्लेन में सिर्फ 12 पैराशूट हैं जिसमें से
- 3:48छह लोग एक-एक पैराशूट लेकर कूद जाते हैं
- 3:50और उस बीच दो पैराशूट्स हवा से बाहर निकल
- 3:53जाते हैं। अब प्लेन में सिर्फ चार पैराशूट
- 3:55बचे हैं और 14 लोग। तो अब आप बताओ पायलट
- 3:58की एज कितनी होगी?
- 4:04अब अगर बिना दोबारा सुने आपके दिमाग में
- 4:06जवाब आ गया तो कांग्रेट्स। आपकी ऑब्जरवेशन
- 4:08स्किल बाकियों से अच्छी है। और अगर अभी भी
- 4:10पायलट की एज कैलकुलेट कर रहे हो तो सवाल
- 4:12को एक बार दोबारा सुनो जवाब वही है। इसे
- 4:15ही कहते हैं ऑब्जरवेशन स्किल या फिर मैं
- 4:17कहूं डिटेल कैप्चरिंग। कुछ पॉइंट्स को
- 4:19थ्रूआउट द वीडियो मैं इस पर्ल में डालता
- 4:20रहूंगा जिससे समराइज करने में हमें हेल्प
- 4:22होगी। तो दुनिया में जो थर्ड हाईएस्ट
- 4:25आईक्यू रखने वाली है मैरलिन वास सेवा उनका
- 4:28कहना है कि टू एक्वायर नॉलेज वन मस्ट
- 4:30स्टडी बट टू एक्वायर विज़डम वन मस्ट
- 4:33ऑब्जर्व। और यहां ऑब्जरवेशन का विज़डम से
- 4:36क्या लेना देना है यह मैं आपको समझाता हूं
- 4:37एक नाम से सफीन हसन। आप में से कई लोग
- 4:40इन्हें जानते होंगे। ये है इंडिया के
- 4:42यंगेस्ट आईपीएस ऑफिसर जिन्होंने सिर्फ 22
- 4:44की ऐज में अपने पहले अटेम्प्ट में ही
- 4:46यूपीएससी क्रैक कर दिया। सोचो जिस एग्जाम
- 4:49के लिए लोग सालों साल लगे रहते हैं सफिन
- 4:51ने वो एक साल की तैयारी में निकाल दिया वो
- 4:54भी बीटेक करने के बाद। पर ऐसा कैसे पॉसिबल
- 4:56है कि एक बीटेक एस्पिरेंट इतने अच्छे
- 4:58मार्क्स से यूपीएससी निकाल देता है वो भी
- 5:01पहली बार में। तो इसका जवाब खुद आप उनके
- 5:03मुंह से सुनो। तो पीपल से कि सर एक साल की
- 5:05मेहनत में आपने एग्जाम क्लियर कर दिया।
- 5:07यस। टेबल और चेयर पे बैठ के करने वाली
- 5:09मेहनत एक साल की थी। लेकिन उसके पीछे की
- 5:11मेंटल प्रिपरेशन कितनी पुरानी थी? क्योंकि
- 5:14जब वो कॉलेज में थे तब 4 साल का वक्त
- 5:16उन्होंने यूपीएससी क्रैक कर चुके ऑफिसर्स,
- 5:18लास्ट एस्पिरेंट्स के इंटरव्यूज, उनके
- 5:20एक्सपीरियंसेस, उनकी कमियों को ऑब्जर्व
- 5:22करने में बिताया। और सिर्फ इतना ही नहीं
- 5:24बल्कि उस टाइम जब बहुत लोग सोशल मीडिया
- 5:25में खाली टाइम बिता रहे थे तब सफीन एनजीओस
- 5:28में स्लम बच्चों के साथ नजर आते थे। उसका
- 5:30कारण है क्योंकि मुझे पता था कि फ्यूचर
- 5:32में यही काम करना है। क्यों ना अभी से
- 5:34उसकी ट्रेनिंग ले लूं। इनफैक्ट इस
- 5:37ऑब्जरवेशन ने उन्हें सिर्फ एग्जाम्स में
- 5:39नहीं बल्कि इंटरव्यू में सबसे ज्यादा मदद
- 5:41की क्योंकि इंटरव्यू डेट से जस्ट एक महीने
- 5:43पहले वो बुरी तरह बीमार पड़ गए थे और लगभग
- 5:46पूरे 1 महीने हॉस्पिटल में एडमिट रहने के
- 5:48बाद बिना किसी प्रिपरेशन के डायरेक्ट
- 5:51सिर्फ अपने इतने सालों की ऑब्जरर्वेशनल
- 5:53स्टडी के बिहाफ पर इंटरव्यू देने पहुंचे
- 5:56और सोचो क्या उन्होंने ना सिर्फ इंटरव्यू
- 5:58क्रैक किया बल्कि इंडिया में सेकंड
- 6:00हाईएस्ट मार्क्स क्रॉस किए।
- 6:03अब यह तो बहुत छोटा एग्जांपल था कि
- 6:05ऑब्जरवेशन पावर का यूज करके आप क्या-क्या
- 6:07कर सकते हो। क्योंकि अगर हम हिस्ट्री में
- 6:09थोड़ा सा भी झांक कर देखें तो पता चलेगा
- 6:11कि आज तक जितने भी इन्वेंशंस हुए हैं वो
- 6:14सिर्फ ह्यूमंस की ऑब्जरवेशन स्किल्स का
- 6:16रिजल्ट
- 6:17है। अब जरूरी तो नहीं है कि आपको
- 6:20साइंटिस्ट ही बनना हो। पर इन्वेंशन से
- 6:22यहां मेरा मतलब है आईडिया जनरेशन। क्योंकि
- 6:24चाहे Zomato हो या Ola Uber ऑनलाइन शादी
- 6:27कराने का आईडिया हो या फिर शादी के बाद
- 6:29होटल बुक कराने का। कौन सा स्टॉक सालों
- 6:32बाद लाखों दे सकता है और कौन सा YouTube
- 6:34आईडिया करोड़ों ये हर चीज इन लोगों ने
- 6:37अपनी ऑब्जरवेशन से ही हैक करी थी। अब ऐसा
- 6:39तो नहीं है कि आप ऑब्जरवेशन में एकदम जीरो
- 6:41हो। इनफैक्ट आप अपनी डेली लाइफ में
- 6:43काउंटलेस ऑब्जरवेशंस करते हो। जैसे किसी
- 6:45के फेशियल एक्सप्रेशनंस देखकर हम समझ जाते
- 6:48हैं कि उसका मूड कैसा है। और ये हमने कभी
- 6:50किसी किताब से नहीं सीखा। जब हम आंखें बंद
- 6:52करते हैं या अंधेरे में होते हैं, खाते
- 6:53समय हमारा हाथ बिल्कुल सही डायरेक्शन में
- 6:55पहुंचता है। दूर अंधेरे में किसी के चलने
- 6:57की आवाज से हम समझ जाते हैं कि कौन आ रहा
- 6:59है। इनफैक्ट बाइक की आवाज सुनकर हम पहचान
- 7:03लेते हैं कि यह मेरी बाइक है। मदर्स वो
- 7:05अपने बच्चों की हरकतें देखकर बता देती है
- 7:07कि उनको क्या दिक्कत है। इनफैक्ट जिसे हम
- 7:10कॉमन सेंस कह देते हैं वो एक्चुअली में
- 7:12हमारी ऑब्जरवेशनल स्किल ही तो है। पर
- 7:15प्रॉब्लम यह है कि हम इस स्किल को
- 7:16कॉन्शियसली यूज़ नहीं कर पाते। जैसे जो लोग
- 7:18मेट्रो सिटीज में रहते हैं वो बहुत बार
- 7:20एस्केलेटर्स यूज करते होंगे। पर शायद किसी
- 7:22ने ऑब्जर्व किया हो कि उसके हैंड रेल्स की
- 7:25स्पीड हमेशा स्टेयर्स की स्पीड से थोड़ी
- 7:27तेज होती है। या फिर नॉर्मल सड़कों पर
- 7:30चलते हुए यह नोट कर पाना कि ज्यादातर
- 7:32ट्रैश पिंस सड़कों के किनारे, टर्न्स,
- 7:35किसी स्टॉप या किसी डिसीजन मेकिंग पॉइंट
- 7:37पर ही रखे होते हैं। इनफैक्ट एक बहुत
- 7:39बेसिक सी डिटेल बताता हूं। बस स्टॉप्स या
- 7:41सभी मेट्रो स्टेशनंस पर जो बैठने के
- 7:43बेंचेस होते हैं वो ज्यादातर कर्वड्ड शेप
- 7:45में ही होते हैं। सो दैट वहां पर कोई सो
- 7:47ना जाए। अब इस चीज को प्रॉपर्ली समझने के
- 7:49लिए ना मैं आपको एक हाइपोथेटिकल एग्जांपल
- 7:51देता हूं। ध्यान से सुनना। सोचो आपको मौका
- 7:53मिले शाहरुख खान के साथ एक हफ्ता रहने का।
- 7:55हाय एवरीबॉडी। तो इन सात दिनों में आप
- 7:58क्या करोगे? आप बहुत सारी चीजें ऑब्जर्व
- 8:00करोगे। वो कैसे बोलते हैं? कैसे रिएक्ट
- 8:02करते हैं? क्या पहनते हैं? कौन से
- 8:04प्रोडक्ट यूज़ करते हैं? रूटीन क्या है
- 8:05उनका? हर चीज जानने की कोशिश करोगे। पर
- 8:08क्या आपको पता है जिस दोस्त के साथ आप
- 8:11सालों से हो उसका फेवरेट शू ब्रांड कौन सा
- 8:13है? भाई बता भाई भाई भाई मेरा भाई बता यह
- 8:17होती है कॉन्शियस ऑब्जरवेशन जो कुछ लोगों
- 8:19को स्मार्ट बनाती है जो लोग डेली अपनी
- 8:22लाइफ में कॉन्शियसली अपने ब्रेन को
- 8:24डिटेल्स ऑब्जर्व करने पे मजबूर करते हैं
- 8:26क्योंकि वो ये जानते हैं कि ब्रेन
- 8:28ऑब्जरवेशन को थॉट क्लाउड से ऊपर रखता है।
- 8:31इस लाइन को अभी के लिए मैं यहां पर पिन कर
- 8:33देता हूं क्योंकि अभी यह समझ नहीं आएगी
- 8:35लेकिन जैसे-जैसे हम वीडियो में आगे
- 8:37बढ़ेंगे यह पॉइंट हम वापस लेके आएंगे
- 8:39क्योंकि इससे पहले यह जानना बहुत जरूरी है
- 8:41कि क्या हम जो कुछ भी आंखों से देखते हैं
- 8:44उस सबको ऑब्जर्व कर भी सकते हैं या नहीं।
- 8:46क्योंकि मान लो अगर आपने कॉन्शियसली
- 8:48दुनिया को ऑब्जर्व करना शुरू भी कर दिया
- 8:49तो आखिर क्या-क्या और कितना ऑब्जर्व
- 8:51करोगे। एक दिन में हमारे सामने हजारों
- 8:54चीजें लाखों आवाजें और पता नहीं कितनी
- 8:55स्मेल्स आकर गुजरती हैं। ऐसे में आप
- 8:58किस-किस पर कितना ध्यान दे सकते हो। और एक
- 9:01बार अगर हम साइंटिफिकली डाटा को देखें, तो
- 9:03ब्रेन अपने सारे सेंसेस का यूज करके हर
- 9:05सेकंड लगभग 11 मिलियन पीसेस ऑफ डेटा
- 9:08कलेक्ट कर रहा होता है। लेकिन इसमें से
- 9:09सिर्फ 40 को ही वो रियल टाइम में प्रोसेस
- 9:12कर पाता है। मतलब आपके सेंसेस से आ रही
- 9:14इंफॉर्मेशन का आप सिर्फ
- 9:170.003% ही सच में कलेक्ट कर पाते हो। जैसे
- 9:20इतनी देर से आप मुझे देख तो रहे हो पर
- 9:22क्या आपको याद है कि कितनी और कौन-कौन सी
- 9:25चीजें अब फ्रेम में नहीं है? यह याद रखना
- 9:27इंपॉसिबल है क्योंकि आप देख तो सब कुछ रहे
- 9:30हो पर ऑब्जर्व सिर्फ मेरी बातों को कर रहे
- 9:32थे। यानी हमारे ब्रेन की कैपेसिटी भले ही
- 9:34अनलिमिटेड हो पर उसमें इनपुट डालने वाले
- 9:37दरवाजे लिमिटेड होते हैं। तो कैसे ऑब्जर्व
- 9:40करना है यह जानने से पहले यह समझना बहुत
- 9:42जरूरी है कि कितना और क्या ऑब्जर्व करना
- 9:45है।
- 9:50[संगीत]
- 9:54इस चैलेंज को देखो जिसका नाम है डबल टच
- 9:56गेम। इसमें आपको समझ आएगा कि देखने और
- 9:59ऑब्जर्व करने में डिफरेंस क्या होता है।
- 10:01इसमें कोई दो प्लेयर्स रोप को घुमाएंगे और
- 10:04बाकी लोग बस उसमें से जंप करके निकलते
- 10:06जाएंगे। टेस्ट बहुत सिंपल है। आपको बस इन
- 10:09ग्रीन गर्ल्स को ऑब्जर्व करना है कि आखिर
- 10:11इन्होंने कितनी बार रोप जंप करी। तो रेडी
- 10:14है? स्टार्ट करते हैं।
- 10:32[संगीत]
- 10:49तो आपने कितने जंप्स गिने? 38 अगर हां तो
- 10:52कांग्रेट्स आपका जवाब सही है। पर क्या
- 10:55आपने इन जंप्स के सिवाय कुछ और भी नोटिस
- 10:57किया? शायद एक बड़ा सा चिकन। अब काफी
- 11:00लोगों ने यह मिस किया होगा। बट मे बी आप
- 11:02में से कई लोग ज्यादा स्मार्ट होंगे।
- 11:04उन्हें यह दिख गया होगा। पर क्या आपको याद
- 11:06है पीछे दिख रही वॉल का कलर क्या था?
- 11:08साइकोलॉजी में इसे कहते हैं सेलेक्टिव
- 11:10अटेंशन। और जो मैंने आपके ब्रेन के साथ
- 11:12किया ना उसको कहते हैं फॉर्मेशन ऑफ ब्रेन
- 11:15एटिक्स। और यही है जो आपको मदद करेगा यह
- 11:18जानने में कि इतनी बड़ी दुनिया में आंखों
- 11:21के सामने से गुजरती इतनी सारी चीजों में
- 11:23से आपको क्या ऑब्जर्व करना है। जैसे आप इस
- 11:26पेड़ को जानते हो ये वो पेड़ है जिसके
- 11:28नीचे बैठकर न्यूटन को ग्रेविटी का आईडिया
- 11:30आया था। तो मान लो अगर न्यूटन की जगह इस
- 11:32पेड़ के नीचे कोई और बैठा होता। सेब गिरता
- 11:35तो क्या ऑब्जर्व करते? जनरली यही कि सेब
- 11:38नीचे गिरा और उसको उठाकर खा लो। सिंपल। और
- 11:40मान लो वहां पर कोई किसान बैठा है तो वही
- 11:42ऑब्जर्व करेगा कि यार सारे सेब जो है ना
- 11:44वो पक चुके हैं। अब इनको तोड़ सकते हैं।
- 11:46लेकिन इसकी जगह जो न्यूटन ने ऑब्जर्व किया
- 11:49उसने मॉडर्न फिजिक्स की हिस्ट्री बदल दी।
- 11:51और इसी को कहते हैं ब्रेन एटिक। क्या है
- 11:54ये ब्रेन एटिक? ब्रेन एटिक एक मेटाफेरिकल
- 11:57टर्म है जिसको शेलॉक होम्स के राइटर ने
- 11:59यूज़ किया था। इसका मतलब है कि ब्रेन
- 12:01एक्चुअली में एक एटिक है। मतलब एक खाली
- 12:03कमरे की तरह होता है जिसके अंदर हम अपने
- 12:06इंटरेस्ट, यूसेज और फायदे के अकॉर्डिंग
- 12:09फर्नीचर रख सकते हैं। एग्जांपल देता हूं
- 12:11कि मान लो मेरे घर में मैक्सिमम जो
- 12:12फर्नीचर है, फर्निशिंग है, जो थीम है वो
- 12:14ब्लू कलर का है। अब जब भी मैं फर्नीचर
- 12:17लेने जाऊंगा, तो मेरा ध्यान हमेशा ब्लू
- 12:19आइटम्स पे ही होगा। यानी ब्रेन एटिक आपका
- 12:21सबकॉन्शियस माइंड है। और जैसा आप उसको
- 12:24स्ट्रक्चर दे दोगे, उसी के हिसाब से आप
- 12:27उसके अंदर फर्नीचर लाओगे। मतलब उसी के
- 12:29हिसाब से आप डिटेल्स उसके अंदर डालोगे और
- 12:31यही मैंने आपके साथ इस गेम में किया। आपके
- 12:34ब्रेन को मैंने पूरी तरह से जप काउंटिंग
- 12:36में फंसाए रखा। जिसके चक्कर में कुछ लोगों
- 12:38ने चिकन मिस कर दिया और कुछ ने वॉल का
- 12:40कलर। और कुछ लोग जो यह सोच रहे होंगे कि
- 12:42उन्होंने दोनों चीजों को ऑब्जर्व कर लिया
- 12:44तो क्या किसी ने रोप हैंडलर्स को बदलते
- 12:47देखा? डेली लाइफ में कोई भी काम करते वक्त
- 12:49आपके सामने कई चीजें होती होंगी। पर आप
- 12:52क्या ऑब्जर्व कर पाते हो यह इस पर बहुत
- 12:54डिपेंड करेगा कि आपका ब्रेन एटिक किस तरह
- 12:56का है। आमतौर पर लोग अपने ब्रेन एटिक को
- 12:59अनकॉन्शियसली बनाते हैं। अपने प्रोफेशन या
- 13:01अपनी डेली वर्क के अकॉर्डिंग। फॉर
- 13:03एग्जांपल ऑफिस से आते वक्त अगर आप एक
- 13:05मोहल्ले से गुजर रहे हो तो आपके लिए नोटिस
- 13:07करना बहुत मुश्किल होगा कि रास्ते में कौन
- 13:09सी बाइक अभी आकर खड़ी हुई है और कौन सी
- 13:12काफी देर पहले से खड़ी है। लेकिन कोई
- 13:14स्मार्ट पुलिस ऑफिसर जो वहां जस्ट अभी आया
- 13:17है किसी का पीछा करते हुए वो तुरंत जान
- 13:19लेगा। तो चलो अब चेक करते हैं कि क्या आप
- 13:21अपने ब्रेन एटिक को सेट करना सीख सकते हैं
- 13:23या फिर
- 13:25[संगीत]
- 13:31नहीं। आपके सामने 15 आइटम्स की पिक्चर्स
- 13:34हैं। अपने ब्रेन एटिक को फॉर्म कीजिए
- 13:36सिर्फ ईटेबल आइटम स्टोर करने के लिए। यानी
- 13:39आपको सिर्फ ईटेबल आइटम्स ही याद रखने हैं
- 13:42और आपके पास है पूरे 15 सेकंड्स।
- 13:47[संगीत]
- 14:01टाइम अप। अब अगर ये टास्क मैंने किसी
- 14:03ग्रोसरी स्टोर वर्कर या ग्रोसरी सेल्स
- 14:05पर्सन को दिया होता तो वो आसानी से इनको
- 14:08याद रख लेता। पर आपको भी मैंने प्रिपेयर
- 14:10किया था तो आपको कितने ईटेबल आइटम याद
- 14:12रहे? पांच, सात या फिर आठ। आप में से
- 14:15ज्यादातर लोगों को पांच या छह आइटम्स याद
- 14:17रहे होंगे क्योंकि हमें पता भी हो ना क्या
- 14:20ऑब्जर्व करना है। तो हमारी शॉर्ट टर्म
- 14:21मेमोरी में जनरली सात आइटम्स ही स्टोर
- 14:23होती हैं। इसलिए आपने देखा होगा कि बहुत
- 14:25सारी जगहों पे सात नंबर के रेफरेंस में ही
- 14:27चीजें होती हैं। और मैंने एक इस पे रील भी
- 14:29बनाई थी जो लोगों को बहुत पसंद आई थी। आप
- 14:30इसको बाद में देख सकते हो। अब हो सकता है
- 14:32कि आप चीजों को बहुत अच्छे से ऑब्जर्व भी
- 14:34कर रहे हो लेकिन वीक शॉर्ट टर्म मेमोरी की
- 14:36वजह से आप चाहकर भी चीजों को याद नहीं रख
- 14:38पाते और यही रीजन बनता है बहुत लोगों में
- 14:40लैक ऑफ ऑब्जरवेशन का। ऐसा नहीं है टटिया।
- 14:43अरे टट्टे नहीं सट्टा यार सर। लेकिन क्या
- 14:45अब शॉर्ट टर्म मेमोरी बढ़ाना पॉसिबल है? तो
- 14:48ये तो आपको पता ही होगा कि ब्रेन के पास
- 14:50मेनली दो तरह की मेमोरी स्टोरेज होती है।
- 14:52एक होती है शॉर्ट टर्म और दूसरी लॉन्ग
- 14:54टर्म। शार्ट टर्म यानी लिमिटेड मेमोरी
- 14:56मतलब आपके ब्रेन का रैम और वहीं लॉन्ग
- 14:59टर्म जो हिपोकैंपस में स्टोर होता है।
- 15:01मतलब जो अनलिमिटेड है जिसकी कोई लिमिट
- 15:03नहीं है। अब आपके पास दो ऑप्शन्स हैं। एक
- 15:06अपनी शार्ट टर्म मेमोरी को बढ़ा लिया जाए।
- 15:07जो एक्चुअली में पॉसिबल है बेटर एक्सरसाइज
- 15:09करके, हेल्दी डाइट लेके, 8 घंटे की नींद
- 15:12लेके, मेडिटेशन करके, स्ट्रेस फ्री ब्रेन
- 15:14और सबसेेंट प्रैक्टिस। आप जो बोल रहे हैं
- 15:17वो बहस के लिए, सुनने के लिए अच्छा है।
- 15:19लेकिन प्रैक्टिकल नहीं है। बेशक इसके लिए
- 15:21दूसरा तरीका पॉसिबल है। डेटा को
- 15:23डायरेक्टली शॉर्ट टर्म से लॉन्ग टर्म में
- 15:26ट्रांसफर कर देना। देखो ये सबको पता है कि
- 15:28आप कोई भी चीज जब रिपीट में करते हो ब्रेन
- 15:31के सामने वो बार-बार जब आती है तो वो याद
- 15:33हो जाती है।
- 15:39या फिर यूं बोलूं कि हिपोकस में स्टोर हो
- 15:42जाती है। पर क्या आपको उस मूवी की कहानी
- 15:44याद है जो आपने लास्ट टाइम थिएटर में देखी
- 15:47[प्रशंसा]
- 15:49थी? बिल्कुल याद होगी। चाहे आपने उसको
- 15:52रिपीट पे नहीं भी देखा था। इसी साइंस पे
- 15:54काम करती है मेमोरी पैलेस टेक्निक या फिर
- 15:58लोसा टेक्निक जिसे खुद शेरॉक को यूज करते
- 16:01दिखाया गया। व्हाई? आई नीड टू गेट टू माय
- 16:03माइंड पैलेस। और लगभग 556 बीसी में ग्रीक
- 16:06और रोमन लोग भी इसको यूज़ करते थे। इसको
- 16:08अगर मैं एक लाइन में समझाऊं तो आपका ब्रेन
- 16:11पॉइंट डिटेल्स की जगह वायर डिटेल्स को
- 16:14आसानी से याद रख पाता है। पॉइंट डिटेल
- 16:17वायर डिटेल कॉम्प्लेक्स हो गया। बहुत
- 16:19सिंपल वर्ड में बोलूं? कहानी और वही कहानी
- 16:22हर जगह चलती है। हमारा ब्रेन न्यूरॉन से
- 16:25भरा पड़ा है। यूं कहूं कि उलझे तारों से
- 16:27जो लगातार कनेक्शंस बनाते रहते हैं। इसलिए
- 16:30चीजों को याद रखने के लिए उन्हें कनेक्ट
- 16:32करना बहुत जरूरी है। यानी कुछ एक कहानी के
- 16:34तौर पर चीजों को याद रखना। वो भी रैंडम
- 16:37कहानी से नहीं बल्कि किसी नोन लोकेशन पर
- 16:39बनी हुई कहानी। जैसे आपका घर, ऑफिस या फिर
- 16:43बगल वाली चाय की तपड़ी। और अब अगर मुझे उस
- 16:45ग्रोसरी लिस्ट में से ईटेबल आइटम्स को याद
- 16:47करना हो तो मैं उन्हें अपने घर के किचन
- 16:50में प्लेस करता जाऊंगा वो भी एक अजीब सी
- 16:52कहानी के साथ। जैसे मैंने टेबल पर देखा तो
- 16:54कुछ बंद पिज़्ज़ा के ऊपर कूद रहे थे। जिसे
- 16:56देखकर मुझे भूख लग गई और जैसे ही मैं अंदर
- 16:58गया तो वहां अंडों की बारिश होने लगी और
- 17:00आगे बढ़ते ही जमीन पर फैले घी पर पैर रखते
- 17:03ही मैं फिसल गया और जब फ्रिज खोला तो
- 17:05उसमें ब्रेड पर आराम करते एप्पल मुझे
- 17:07घोरने लगे। लेकिन इससे पहले कि कुछ करता
- 17:09मेरी वाइफ मार्केट से मेरे लिए कोल्ड कॉफी
- 17:11और बर्गर्स ले आई। कोई सेंस है इस बात की?
- 17:14अब अगर इस वीडियो के एंड होने के बाद भी
- 17:17इन आइटम्स को याद करने की कोशिश करोगे तो
- 17:19बहुत चांसेस आपको मैक्सिमम आइटम्स याद
- 17:21रहेगी। इनफैक्ट ये स्टोरी आपको और ज्यादा
- 17:23याद रहेगी अगर सोचते टाइम आप इस विजुअल की
- 17:26जगह अपने घर की किचन को दिमाग में रखोगे।
- 17:29तो अब आपको पता है कि क्या ऑब्जर्व करना
- 17:31है और कितना ऑब्जर्व करना है। शायद अभी भी
- 17:33आप इन प्रैक्टिससेस को अपनी लाइफ में
- 17:35इंप्लीमेंट नहीं कर पाओगे। वीडियो देखने
- 17:36के कुछ टाइम बाद ये सभी
- 17:39प्रैक्टिससेस और उसका रीजन है
- 17:42ब्रेन ऑब्जरवेशन को थॉट क्लाउड से ऊपर
- 17:45रखता
- 17:46है। याद है मैंने कहा था कि सभी सुपर
- 17:49स्मार्ट लोग कॉन्शियसली ऑब्जर्व इसलिए कर
- 17:51पाते हैं क्योंकि वो इस फैक्ट को जानते
- 17:53हैं। तो आप चाहो तो वीडियो स्किप करके
- 17:56सीधा डायरेक्ट चैप्टर फोर पे जा सकते हो।
- 17:57हाउ टू ऑब्जर्व। वहां से स्टेप्स जान सकते
- 18:00हो। लेकिन जैसे डिस्ट्रैक्शन पहले से पता
- 18:02होने पर काम को हम और एफिशिएंटली कर पाते
- 18:05हैं। वैसे ही अगर थॉट क्लाउड कहां और कैसे
- 18:08अफेक्ट करता है यह पता हो ना तो आप अपनी
- 18:11ऑब्जरवेशन को और शार्प कर सकते हो। तो अब
- 18:13जो मेरे साथ हैं वो चल रहे हैं वहां जहां
- 18:16मेरी आपकी और इन सब लोगों की ऑब्जरवेशन
- 18:19स्किल्स एक लेवल पर थी। यानी कि बचपन।
- 18:23[संगीत]
- 18:27कभी सोचा है कि बचपन में जब हमें बोलना या
- 18:30लैंग्वेज समझना नहीं आता था तो हम सोचते
- 18:32क्या थे? हमारे दिमाग में थॉट्स कैसे आते
- 18:35थे? आते भी थे कि नहीं आते थे? तो टोनी के
- 18:38जाविस की तरह हम सबके दिमाग में एक पर्सनल
- 18:41असिस्टेंट होता है जिसको हम इनर वॉइस या
- 18:43फिर मन कहते हैं जो लगातार हमसे हमारी
- 18:46लैंग्वेज में ही बात करता रहता है।
- 18:49रिप्लेसमेंट फॉर
- 18:51अब जैसे मेरे और आपके दिमाग में जो आवाज
- 18:54है वो बाय डिफॉल्ट हिंदी में या फिर हमारी
- 18:56मदद टंग में होगी। पर अगर कोई साउथ में
- 18:58रहता है तो उसके दिमाग में जो इनर वॉइस है
- 19:01वो तमिल, तेलुगु या कन्नड़ में होगी। उसके
- 19:04थॉट्स, ख्याल, सही और गलत की आवाज उसी
- 19:06लैंग्वेज में होगी जिस लैंग्वेज को वो
- 19:08बोलता होगा। जब होता है पर बच्चों का क्या
- 19:13जिन्हें कोई लैंग्वेज ही नहीं आती। बच्चों
- 19:15के दिमाग में भी एक इनर वॉइस होती है। पर
- 19:18वो वर्ड्स की नहीं बल्कि सेंसेस की फॉर्म
- 19:20में होती है। एक्चुअली में बच्चे चीजों को
- 19:22समझने और जानने के लिए पूरी तरह से
- 19:24डिपेंडेंट होते हैं अपनी सेंसेस पर। जिससे
- 19:26वो बाहरी दुनिया को ऑब्जर्व करते हैं कि
- 19:29कोई कैसे चल रहा है, कैसे बोल रहा है।
- 19:31यहां तक कि कोई नॉन लिविंग चीज भी कैसे
- 19:33दिख रही है। इसलिए आपने यह देखा होगा कि
- 19:35बच्चे वही करने लग जाते हैं जो वो देखते
- 19:37हैं या सुनते हैं बिना सोचे कि वो सही है
- 19:40या गलत। और इस सेंसेशनल डेटा गैदरिंग को
- 19:43ही कहते हैं प्योर ऑब्जरवेशन।
- 19:46क्योंकि बर्थ के 3 से 4 महीने के बाद ही
- 19:49आपका ब्रेन चीजें ऑब्जर्व करना शुरू कर
- 19:51देता है और इतनी स्पीड से कि हर सेकंड में
- 19:541 मिलियन से ज्यादा न्यूरॉन्स बन रहे होते
- 19:56हैं। जिसका रिजल्ट सिर्फ एक साल में ही
- 20:00ब्रेन का साइज डबल हो जाता है। इनफैक्ट उस
- 20:02वक्त हम बिना लैंग्वेज और थॉट प्रोसेसिंग
- 20:05के भी दुनिया की चीजों को इतनी तेजी से
- 20:07सीख रहे होते हैं कि 5 साल तक हमारा ब्रेन
- 20:10लगभग 90% डेवलप हो चुका होता है। हालांकि
- 20:13ब्रेन के बढ़ने की कोई लिमिट नहीं है पर
- 20:1590% का मतलब है कि जितना ब्रेन हमारी पूरी
- 20:18लाइफ में डिवेलप होता है उसका 90% 5 साल
- 20:21में हो चुका होता है। इनफैक्ट सिर्फ 5 साल
- 20:23ही नहीं बल्कि उसके कई साल बाद भी बच्चों
- 20:25को वो चीजें जानने में मजा आता है जो किसी
- 20:27और को नहीं। फॉर एग्जांपल फ्रिज की लाइट
- 20:29एक्जेक्टली कब बंद हो रही है इसको चेक
- 20:31करना। वो प्लेन के जाने के बाद आसमान में
- 20:33जो बादल बना है उसको देखना। लाइट स्विच को
- 20:36एक्साक्ट बीच में करके यह चेक करना कि
- 20:38क्या लाइट जलेगी या नहीं। टीवी के रिमोट
- 20:41को अलग-अलग डायरेक्शन से टेस्ट करना कि
- 20:43कहां से चलेगा और कहां से नहीं। वी आर
- 20:46बोर्न
- 20:47ऑब्जर्वरर्स। बट अब क्या इसका मतलब यह है
- 20:50कि जैसे-जैसे टाइम के साथ-साथ हमें लॉजिकल
- 20:52थिंकिंग या क्रिटिकल थॉट्स मिलते हैं,
- 20:54वैसे-वैसे हमारी ऑब्जरवेशन वीक होने लग
- 20:57जाती है। क्या जितना हम दुनिया के रूल्स
- 21:00और नॉर्म्स को जानते हैं, उतना ही खुद से
- 21:03चीजें जानने की कोशिश कम करने लग जाती है।
- 21:06या फिर यूं बोलूं कि थॉट्स ही हैं
- 21:08ऑब्जरवेशनल ब्लॉकेज। तो इसका जवाब आपको
- 21:11मिलेगा हमारे नेक्स्ट चैलेंज
- 21:14[संगीत]
- 21:18में। आने वाले 5 सेकंड्स में मैं हाथों से
- 21:21जितने नंबर्स आपको दिखाऊंगा आपको बस
- 21:23उन्हें काउंट करना है। तैयार है? पूरे
- 21:25फोकस के साथ देखना। मैं और मेरे चार दोस्त
- 21:28पिछले 6 दिन से तुम्हें सुबह जल्दी 5:00
- 21:31बजे उठने की जगह लेट 10:00 बजे उठने की
- 21:34आदत डालने के लिए कह रहे हैं। लेकिन
- 21:36तुम्हारे दोनों कानों में मेरी बात जा ही
- 21:38नहीं रही। तो आपने कितने नंबर्स गिने? अगर
- 21:40तो जवाब पांच है तो कमाल है। आप बिल्कुल
- 21:42सही हो। लेकिन क्या कुछ मिस कर गए? एक बार
- 21:46दोबारा सुनो बिना विजुअल्स के। मैं और
- 21:48मेरे चार दोस्त पिछले 6 दिन से तुम्हें
- 21:51सुबह जल्दी 5:00 बजे उठने की जगह लेट।
- 21:5510:00 बजे उठने की आदत डालने के लिए कह
- 21:57रहे हैं। लेकिन तुम्हारे दोनों कानों में
- 21:59मेरी बात जा ही नहीं रही। आपने यह ध्यान
- 22:01ही नहीं दिया कि मैंने 5:00 बजे उठने को
- 22:03गलत, और 10:00 बजे उठने को सही बताया था।
- 22:06साइकोलॉजी में इसे मैकगर्ग इफेक्ट कहते
- 22:08हैं। जब विजुअल और वोकल इनेशन का मिसमैच
- 22:11ब्रेन में कंफ्यूजन क्रिएट कर देता है।
- 22:13लेकिन इस एग्जांपल का सीधा मतलब यह था कि
- 22:15नंबर काउंटिंग और विजुअल कंफ्यूजन में
- 22:18आपके थॉट्स इतने ज्यादा बिजी और इनवॉल्व
- 22:20हो गए कि आप बहुत बेसिक सी डिटेल को भी
- 22:22ऑब्जर्व नहीं कर पाए। और इसी को कहते हैं
- 22:25थॉट क्लाउड। यानी ब्रेन में बहुत सारे
- 22:28थॉट्स का वो ट्रैफिक जो ऑब्जरवेशन स्किल
- 22:30को वीक बना देता
- 22:33है। तो अब इसका सॉल्यूशन क्या है? हम बेशक
- 22:36थॉट्स को आने से रोक नहीं सकते बट थॉट्स
- 22:38कब आए ये जरूर कंट्रोल कर सकते हैं।
- 22:41क्योंकि हमारा ब्रेन दुनिया की कोई भी
- 22:43इंफॉर्मेशन सिर्फ अपने सेंसेस के थ्रू ही
- 22:45लेता है। जिसको कहते हैं ऑब्जर्व करना। और
- 22:48वही इंफॉर्मेशन ब्रेन में जाकर प्रोसेस
- 22:50होती है जिसको हम कहते हैं थॉट्स। इन दो
- 22:53प्रोसेस के बाद ही आप कोई इमोशन फील करते
- 22:56हो या फिर कोई एक्शन लेते हो। मतलब आपकी
- 22:59लाइफ में लिया कोई भी डिसीजन इस पहले
- 23:01स्टेप से ही स्टार्ट होता है। और इसी से
- 23:04हमारी ये लाइन प्रूव होती है कि हमारा
- 23:06ब्रेन ऑब्जरवेशन को थॉट क्लाउड से ऊपर
- 23:09रखता है। पहले ऑब्जरर्वेशन आती है और उस
- 23:11हिसाब से हमारे थॉट्स आते हैं। और यही
- 23:14कारण है कि जिनकी ऑब्जरवेशन पावर अच्छी
- 23:16होती है। वही लोग लाइफ में एक्सट्रीम अचीव
- 23:18कर पाते हैं। इमोशनली ज्यादा खुश रह पाते
- 23:21हैं और सेटिस्फेक्टरी लाइफ जी पाते
- 23:23[संगीत]
- 23:26हैं। अब आपको यह तो पता है कि ऑब्जरवेशन
- 23:29वो पहला काम है जो दुनिया से इंटरेक्ट
- 23:31करने वक्त आप करते हो। लेकिन अब कुछ भी
- 23:33देखते वक्त आप यह कैसे डिसाइड करोगे कि
- 23:36मुझे ऑब्जरवेशन करनी है और उस पे थिंकिंग
- 23:38करनी है। तो अब इस सवाल का जवाब आपको
- 23:41मिलेगा हमारे लास्ट चैप्टर में हाउ टू
- 23:44ऑब्जर्व।
- 23:48[संगीत]
- 23:53अब आ गया हमारा लास्ट चैलेंज द रूम केस।
- 23:56जहां पर आप अपनी डेली लाइफ की चीजों को
- 23:58कैसे ऑब्जर्व करने वाले हो यह सीखोगे वो
- 24:00भी खुद ऑब्जर्व करते हुए। सोचो आप इस रूम
- 24:03के कॉर्नर में बैठे हो और आने वाले 5
- 24:05सेकंड में यहां क्या-क्या हो रहा है, आपको
- 24:07बस यह ऑब्ज़र्व करना है। बहुत सिंपल है।
- 24:09स्टार्ट करते हैं।
- 24:11[संगीत]
- 24:15भाई कहा है ना तुझसे यार कितना टाइम हो
- 24:17गया और कितना टाइम लेगा तू देख दो।
- 24:20ओ
- 24:28यार। तो आपने क्या-क्या डिटेल्स ऑब्जर्व
- 24:31की? सबसे पहले तो एक इतना तेज बजता फोन
- 24:33जिसका कोई जवाब नहीं दे रहा। एक बंदा
- 24:36जिससे फोन पर बात करते-करते कॉफी गिर गई।
- 24:39दूसरा बंदा जो बैठकर मैगजीीन पढ़ रहा था
- 24:42और तीसरा जो घड़ी सही करने में लगा था।
- 24:44क्या इसके अलावा कुछ और नोटिस किया? नहीं।
- 24:47कोई बात नहीं क्योंकि इस बार आप कर लोगे।
- 24:49हमारी आंखें ब्रेन के 90% डाटा कलेक्शन का
- 24:52कारण होती हैं। तो चलो पहले इन्हें बंद
- 24:54करते हैं और बिना इनके इस सीन को देखते
- 24:57हैं। मतलब सुनते हैं। भाई कहा है ना तुमसे
- 24:59यार कितना टाइम हो गया और कितना टाइम देगा
- 25:01तू देख दो।
- 25:03ओ
- 25:05क्या इस बार आपको फोन, पेज फ्लिपिंग,
- 25:07दूसरे बंदे की आवाज के अलावा किसी चिड़िया
- 25:10के चाचाने की आवाज भी सुनाई पड़ी। यही
- 25:12हमारा पहला पॉइंट सेंसेशनल डाटा गैदरिंग
- 25:15हमारे सेंसेस। हर वक्त हमारे सभी सेंसेस
- 25:18काम कर रहे होते हैं और ब्रेन को बाहरी
- 25:20दुनिया की इंफॉर्मेशन दे रहे होते हैं। पर
- 25:22कई बार एक सेंस की किसी एक जगह
- 25:24इनवॉल्वमेंट ज्यादा होने की वजह से बाकी
- 25:27सेंसेस की एफिशिएंसी कम हो जाती है। जैसे
- 25:29हमारे उस पुराने चैलेंज में आप विजुअली
- 25:31इतना ज्यादा एंगेज हो गए थे कि कानों से
- 25:34बात सुनते हुए भी समझ नहीं पाए थे। और
- 25:36वैसे तो आपने कई जगह सुना होगा कि सेंसेस
- 25:38को कंट्रोल करने के लिए या फिर हमारे
- 25:39शास्त्रों में हिंदूइज़्म में भी कहा जाता
- 25:41है कि इंद्रियों को कंट्रोल करने के लिए
- 25:43मेडिटेशन करो।
- 25:46बट बहुत लोग लाइफ बिजी है, टाइम नहीं है
- 25:48या फिर इंटरेस्ट नहीं है, उनको मुश्किल
- 25:50लगता है। तो यह वाला मेथड ट्राई करो। यह
- 25:52बहुत ही आसान है। कभी भी कर सकते हो, कहीं
- 25:54भी कर सकते हो। सिंपल है। कुछ मिनट निकालो
- 25:57और सिर्फ पांच चीजें अपनी आंखों से
- 25:59ऑब्जर्व करो। उसके बाद चार चीजें आप यहीं
- 26:02बैठे टच कर सकते हो। तीन आवाें जो आंखें
- 26:06बंद करके आप सुनो। दो फ्रेगेंसेस, ऐसी
- 26:09फ्रेगेंसेस जिनमें आप डिफरेंशिएट कर सकते
- 26:11हो। और एक ऐसी चीज जिसको आप टेस्ट कर सकते
- 26:15हो। लेकिन कोशिश करो हर रोज डिफरेंट हो।
- 26:18सेंसेस को कंट्रोल करने के साथ-साथ आप
- 26:20अपनी डिटेल कैप्चरिंग की एबिलिटी को भी
- 26:23मल्टीप्लाई कर पाओगे। बट वेट क्या उस रूम
- 26:26में आपने कुछ और भी ऑब्जर्व किया था? इस
- 26:29बार सिर्फ सामने दिख रहे टेक्स्ट पर ध्यान
- 26:32रखना। क्या कुशन पे लिखे हुए वर्ड्स के
- 26:35स्पेलिंग्स में आपको कुछ गड़बड़ दिखेगी?
- 26:39यह है फॉर्मेशन ऑफ ब्रेन एडिटिंग यानी
- 26:42अपने ब्रेन को एक तरह की डिटेल्स कैप्चर
- 26:44करने के लिए प्रिपेयर करना। आपको मैंने
- 26:46बोला वर्ड्स पर ध्यान देना। आपने वर्ड्स
- 26:48पे ध्यान दिया। ऐसे जब हम किसी से बात कर
- 26:51रहे होते हैं और अगर हमारा ध्यान आसपास के
- 26:53लोगों पर हुआ, आसपास की चीजों पर हुआ तो
- 26:54हम सामने वाले की बात को ढंग से सुन नहीं
- 26:56पाते क्योंकि हमने ब्रेन को उसको सुनने के
- 26:59लिए प्रिपेयर ही नहीं किया। और इसके लिए
- 27:01सबसे जरूरी है बिल्डिंग फोकस। मतलब जितना
- 27:04आपकी फोकस एबिलिटी अच्छी होगी उतना ही आप
- 27:08एक तरह की चीजों को नोटिस कर पाओगे।
- 27:10ऑब्वियसली इसके लिए मेडिटेशन से बेटर कोई
- 27:12टेक्निक नहीं है पर आप सेंसफुल मेडिटेशन
- 27:15कर सकते हो। मतलब 10 मिनट तक मेडिटेट कर
- 27:17रहे हो तो हर 2 मिनट तक अपना फोकस सिर्फ
- 27:20एक सेंस पे रखो। जैसे 2 मिनट सिर्फ
- 27:23ब्रीथिंग पे ध्यान दो। 2 मिनट सिर्फ एयर
- 27:25फ्लो। 2 मिनट अपनी क्लोथिंग, 2 मिनट टच
- 27:29क्या है? उस पे सेंस उस पे फोकस कर सकते
- 27:31हो। सेंसफुल मेडिटेशन आपकी हेल्प करेगी
- 27:33आपके फोकस को बढ़ाने में। और अगर आप ब्रेन
- 27:35एटिक की स्टोरेज कैपेसिटी बढ़ाना चाहते हो
- 27:37तो आपको प्रैक्टिस करनी चाहिए मेमोरी
- 27:39पैलेस टेक्निक यानी चीजों को किसी अजीब
- 27:42स्टोरी की फॉर्म में याद रखना। आपके फोकस
- 27:44और मेमोरी के बढ़ने के साथ घटेगी आपकी
- 27:47डिस्ट्रैक्शन। बट जो सबसे बड़ी
- 27:49डिस्ट्रैक्शन है थॉट क्लाउड। इसके लिए
- 27:51जरूरी है प्रेजेंस ऑफ माइंड। हमने थर्ड
- 27:54चैप्टर में देखा कि कैसे कुछ देखते टाइम
- 27:56उससे रिलेटेड थॉट्स हमें और ज्यादा
- 27:58डिटेल्स कैप्चर करने से रोक देते हैं। और
- 28:00कई स्टडीज बताती है कि हमें दिन में जितने
- 28:02थॉट्स आते हैं उनमें से 95% रिपीट और 75%
- 28:06नेगेटिव थॉट्स होते हैं। यानी मोस्ट ऑफ द
- 28:08टाइम हम आज और कल की यादों में भटकते रहते
- 28:11हैं। तो ऐसे में अगर आपको सामने दिख रही
- 28:14चीजों को ऑब्जर्व करना है तो प्रेजेंट में
- 28:16रहना बहुत इंपॉर्टेंट है। सो अब आप जब भी
- 28:19किसी ऐसी स्टेट ऑफ ओवरथिंकिंग में जाते हो
- 28:21तो ट्राई करो बॉक्स ब्रीदीिंग टेक्निक
- 28:24जिसमें आपको कोई पोश्चर या स्पेशल जगह
- 28:27बैठने की जरूरत नहीं है। बस करना क्या है?
- 28:29अपनी बैक बोन को स्ट्रेट रखना है। पहले
- 28:32चार की काउंटिंग तक इन्हेल करो। फिर उसको
- 28:35चार सेकंड्स के लिए होल्ड करो और फिर चार
- 28:38तक गिनते हुए एक्सेल करो और फिर वापस चार
- 28:41सेकंड के लिए होल्ड करो। सिर्फ तीन
- 28:44रेपेटेशन में यह आपके ब्रेन और बॉडी में
- 28:46ऑक्सीजन का फ्लो बढ़ा देता है। जिससे आप
- 28:49क्विकली प्रेजेंट मोमेंट में आ जाते
- 28:53हो। तो ये पांच प्रैक्टिससेस किसी भी
- 28:56नॉर्मल इंसान को एक एक्सट्रीम ऑब्जर्वर
- 28:59बना सकती हैं। क्योंकि इन प्रैक्टिससेस के
- 29:01रेगुलर यूज़ से आप इनडायरेक्टली वो
- 29:03प्रॉब्लम्स भी सॉल्व करने लग जाओगे जिनके
- 29:05बारे में शायद आपने इंटेंशनली सोचा भी
- 29:07नहीं होगा। जैसे कि एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम
- 29:09ओवरथिंकिंग, सेल्फ डाउट, क्रिएटिव
- 29:12ब्लॉकेजेस आने, सोशल एंग्जायटी होनी,
- 29:14डिस्ट्रैक्शंस सब लोग डिस्ट्रैक्टेड हैं।
- 29:16इन प्रैक्टिससेस से सॉल्व होगा। ह्यूमर
- 29:18नहीं है, इंप्रेशन नहीं बनता। लोगों से
- 29:20क्या बात करें समझ नहीं आता। थॉट फ्लो
- 29:21नहीं आता। थॉट कॉन्स्टिपेशन फील होती है।
- 29:23पर्सनालिटी वीक लगती है। और सबसे
- 29:25इंपॉर्टेंट अकेलापन फील होता है।
- 29:29लोनलीनेस। देखो, हम सबका मन हमसे बात करता
- 29:32है। लेकिन इन प्रैक्टिससेस से आप अपने मन
- 29:34से बात करना सीख जाओगे। और आप जितना ही
- 29:37अंदर से खुद को जानते हो ना दुनिया को
- 29:39पहचानना उतना आपके लिए आसान हो जाता है।
- 29:42एक बहुत पॉपुलर कोट था ग्रेट इंडियन
- 29:43फिलॉसफर जे कृष्णामूर्ति का ऑब्जर्व द
- 29:46ऑब्जर्वर। मतलब कैसे आप उसको देख सकते हो
- 29:50जो आपके अंदर बैठकर पूरी दुनिया को देख
- 29:52रहा
- 29:53है। पर इस कांसेप्ट पर कभी और बात करते
- 29:56हैं। अभी आप मुझे यह बताओ क्या आपने सच
- 29:58में इस वीडियो को देखा है या फिर ऑब्जर्व
- 30:01किया है। जैसे अगर आपको यह पता है कि
- 30:02वीडियो के स्टार्टिंग में मेरे हाथ में यह
- 30:05वॉच थी। कुछ देर बाद यह देन ये और अब ये।
- 30:09इनफैक्ट वॉच पकड़ पाना काफी मुश्किल होगा।
- 30:12लेकिन क्या आप पीछे रखी एक भी चीज को याद
- 30:15रख पाए? शायद नहीं। क्योंकि यह वो वॉल ही
- 30:17नहीं है जो वीडियो के स्टार्टिंग में थी।
- 30:21[प्रशंसा]
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This page contains the full transcript of Notice The World Like Never Before by Him-eesh Madaan, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 5,509 words across 716 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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