NO BAKWAAS - Financially Free बनने का पूरा प्लान - Tim Ferris — Transcript
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- 0:03इस बुक का सबटाइटल है स्केप 95 लिव
- 0:05एनीवेयर एंड जॉइ द न्यू रिच मतलब 95 की
- 0:08नौकरी से बाहर निकलो दुनिया में कहीं से
- 0:10भी काम करो और भाई नए अमीर बन जाओ सुनने
- 0:13में कैसा लगता है बहुत अमेजिंग लगता है
- 0:15लेकिन थोड़ा सा स्कैम भी लगता है क्योंकि
- 0:17अगर सिर्फ हफ्ते में 4 घंटे काम करके अमीर
- 0:19बनना पॉसिबल होता है तो भाई हर दूसरा आदमी
- 0:21गोवा में लैपटॉप लेकर बैठा होता है कि
- 0:23नहीं तो क्या इस बुक का प्रॉमिस झूठा है
- 0:26बिल्कुल नहीं क्या ये पॉसिबल है बिल्कुल
- 0:28पॉसिबल है लेकिन लेकिन क्या इस वीडियो को
- 0:30देखने वाले ज्यादातर लोग अगले 6 महीनों
- 0:32में 4 घंटे काम करके फाइनेंशियली फ्री हो
- 0:34जाएंगे? बिल्कुल नहीं होंगे। और यहीं पर
- 0:37लोग गलती करते हैं। वो इस बात को लेकर
- 0:39कहते हैं कि यार देखो ये सब किताबी बातें
- 0:41हैं। ये सब स्कैम है। पर जरा सोचो क्या
- 0:43तुम अपने रिस्पांस के मालिक बन सकते हो?
- 0:45मान लो कि सुबह उठते ही तुम्हारी फेवरेट
- 0:46शर्ट पर चाय गिर गई। और फिर नीचे उतर कर
- 0:49देखते हो कि भाई तुम्हारी गाड़ी में हवा
- 0:50ही नहीं है। क्या तुम फिर भी अपने
- 0:52रिस्पांस को कंट्रोल करके खुश रह सकते हो?
- 0:54बिल्कुल रह सकते हो। लेकिन क्या ज्यादातर
- 0:56लोग ऐसा कर पाएंगे? नहीं कर पाएंगे। देखिए
- 0:59किसी चीज का मुश्किल होना और किसी चीज का
- 1:01झूठा होना दोनों अलग-अलग बातें हैं। माउंट
- 1:03एवरेस्ट पर चढ़ना पॉसिबल है लेकिन
- 1:05ज्यादातर लोग नहीं चढ़ पाएंगे। इसका मतलब
- 1:07माउंट एवरेस्ट स्कैम नहीं हो गया। उसी तरह
- 1:09अपनी इनकम को अपने टाइम से अलग करना
- 1:11पॉसिबल है। दुनिया में कहीं से भी बैठकर
- 1:13काम करना पॉसिबल है। अपना काम दूसरों से
- 1:15करवाना पॉसिबल है। लेकिन इसके लिए सिर्फ
- 1:17मोटिवेशन नहीं स्किल्स, सिस्टम्स और कई
- 1:19बार सालों का फेलियर चाहिए। और यही वो बात
- 1:21है जो यह बुक बहुत अच्छे से बताती भी है
- 1:23और कुछ जगह बहुत आसान बनाकर भी दिखाती है।
- 1:26तो इस वीडियो में हम ब्लाइंडली बुक की
- 1:27तारीफ नहीं करेंगे। हम समझेंगे कि इसके
- 1:29आइडियाज में सच क्या है? ओवर प्रॉमिस क्या
- 1:31है और एक आम इंसान [संगीत] इसे कैसे अपनी
- 1:33लाइफ में अप्लाई कर सकता है। इससे पहले एक
- 1:35बहुत सिंपल मैं सवाल आपसे करना चाहता हूं।
- 1:37मान लो कि मैं आपको बताता हूं कि मैं साल
- 1:39के ₹6 लाख कमाता हूं और मेरा दोस्त रोहन
- 1:41साल के ₹30 लाख कमाता है। अब बताओ हम
- 1:43दोनों में से अमीर कौन है? आप कहोगे कि
- 1:45भाई जाहिर सी बात है रोहन अमीर है। वो
- 1:47मुझसे पांच गुना ज्यादा कमाता है। लेकिन
- 1:49रुको अगर मैं तुम्हें कहूं कि यार रोहन
- 1:51हफ्ते में 80 घंटे काम करता है और मैं
- 1:53सिर्फ 10 घंटे काम करता हूं। अब कैलकुलेशन
- 1:56बदल गया ना? रोहन ₹30 लाख कमाता तो है
- 1:58लेकिन वो सुबह रोज जल्दी उठता है, ऑफिस
- 2:00जाता है, ट्रैफिक में फंसता है, मीटिंग्स
- 2:02करता है, रात को थका हुआ घर लौटता है और
- 2:04वीकेंड पे भी ईमेल्स चेक करता रहता है।
- 2:06दूसरी तरफ मैं हूं भाई। मैं ₹ लाख कमाता
- 2:09हूं। लेकिन मेरे पास पूरा हफ्ता लगभग खाली
- 2:11[संगीत] है। अब बताओ कौन ज्यादा अमीर है?
- 2:13शायद अब भी आपको कहोगे कि यार रोहन ही
- 2:15अमीर है। ठीक है यार। अब एक और इंफॉर्मेशन
- 2:17इसमें जोड़ते हैं। रोहन बोर में रहता है।
- 2:19उसकी ₹80,000 ईएमआई है। ₹00 कार और
- 2:22पेट्रोल में जाते हैं। बच्चों की फीस,
- 2:24इंश्योरेंस, सोसाइटी चार्जेस बाकी सारे
- 2:26खर्चे अलग। ₹ लाख की इनकम में से उसके पास
- 2:29साल के आखिर में बहुत कम बचता है। दूसरी
- 2:31तरफ मेरा काम ऑनलाइन है। मैं किसी छोटे
- 2:33शहर में रह सकता हूं। मेरे खर्चे कम है।
- 2:35मुझे रोज ऑफिस नहीं जाना है। मैं जब चाहूं
- 2:37अपने परिवार के साथ समय बिता सकता हूं।
- 2:39मैं ट्रैवल भी कर सकता हूं। अब बताओ अब
- 2:41कौन ज्यादा अमीर है? यही इस किताब का पहला
- 2:44बड़ा आईडिया है। एब्सोल्यूट [संगीत]
- 2:45इनकम और रिलेटिव इनकम में फर्क।
- 2:47एब्सोल्यूट इनकम का मतलब है आप टोटल कितना
- 2:49कमाते हो। रिलेटिव इनकम का मतलब है कि आप
- 2:52कितना कमाते हो, कितने समय में कमाते हो
- 2:54और उस इनकम से आपको कितनी फ्रीडम मिलती
- 2:56है। अब इस बात को थोड़ा ज्यादा क्लियर
- 2:57करने के लिए एक अजीब सा एग्जांपल लेते
- 2:59हैं। मान लो कि मैं तुम्हें ऑफर देता हूं
- 3:00कि यार मेरे शहर औरंगाबाद में आ जाओ। मैं
- 3:02तुम्हें हर महीने ₹1 करोड़ दूंगा। आप खुश
- 3:04हो जाओगे। लेकिन यार औरंगाबाद आने के बाद
- 3:06तुम्हें पता चलता है कि एक कप चाय की कीमत
- 3:08₹20 लाख है। रमेश बाबू एक प्लेट पोहा ₹40
- 3:11लाख का है। एक रूम का रेंट ₹3 करोड़ महीना
- 3:14है। अब क्या आप अमीर हो? नहीं हो। कागज पर
- 3:18आपकी इनकम बहुत बड़ी है लेकिन रियलिटी में
- 3:21आपकी परचेसिंग पावर बहुत छोटी है। इसलिए
- 3:23सिर्फ सैलरी देखना गलत है। आपकी असली
- 3:26वेल्थ तीन चीजों से बनती है कि आप कितना
- 3:28कमाते हो, उसे कमाने में कितना समय लगाते
- 3:30हो और उस पैसे से आपको कितनी चॉइस मिलती
- 3:32है? लेकिन अब असली सवाल आता है अगर टाइम
- 3:35और लोकेशन, फ्रीडम इतनी अच्छी चीज है तो
- 3:37इसे हासिल कैसे किया जाए? टीम फेरिस इसका
- 3:40जवाब एक शब्द में देते हैं। ऑटोमेशन आपको
- 3:43ऐसा काम या बिजनेस बनाना है जो हर रुपए के
- 3:45लिए आपके फिजिकल टाइम पर डिपेंड ना करे।
- 3:48सिंपल भाषा में कहें तो अगर आप सिर्फ 1
- 3:49घंटे काम करते हो और उसी 1 घंटे से आपको
- 3:52पैसे मिलते हैं तो आपकी इनकम आपके टाइम से
- 3:55बंधी हुई है। जैसे कि Twitter वो 1 घंटे
- 3:57पढ़ाएगा तभी उस 1 घंटे की फीस उसे मिलेगी।
- 3:59लेकिन अगर वही Twitter एक रिकॉर्डेड कोर्स
- 4:01बनाता है तो वह एक बार रिकॉर्ड करके उसे
- 4:0310000 या 10,000 लोगों को बेच सकता है। अब
- 4:06सुनने में आसान लगता है। बस एक प्रोडक्ट
- 4:08बनाओ, ऑनलाइन बेचो और बीच पर जाकर बैठ
- 4:10जाओ। लेकिन यहीं पर यह मिसलीडिंग हो सकता
- 4:13है। क्योंकि प्रोडक्ट बनाना आसान है।
- 4:15लेकिन ऐसा प्रोडक्ट बनाना जो लोग खरीदें
- 4:17यह मुश्किल है। YouTube चैनल शुरू करना
- 4:19आसान है। ऐसा चैनल बनाना जिसे लोग देखना
- 4:22चाहें यह मुश्किल है। वेबसाइट बनाना तो
- 4:24आसान है मेरे भाई। वेबसाइट पर ट्रैफिक
- 4:27लाना मुश्किल है। ऑनलाइन कोर्स रिकॉर्ड
- 4:29करना आसान है। लेकिन लोगों को भरोसा
- 4:30दिलाना कि वह आपका कोर्स खरीदें। यह
- 4:33मुश्किल है। जब कोई एक्सपीरियंस्ड आदमी
- 4:35कहता है कि आप 6 महीने में ऑनलाइन इनकम
- 4:37बना सकते हो तो वो हो सकता है कि झूठ ना
- 4:39बोल रहा हो। लेकिन वो अपने 10 साल के
- 4:41एक्सपीरियंस को भूल रहा है। उसे पता है कि
- 4:43थंबनेल्स कैसे बनता है। उसे पता है कि
- 4:44ऑडियंस क्या चाहती है। उसे पता है कि
- 4:46प्रोडक्ट कैसे पोजीशन किया जाता है। उसे
- 4:48पता है कि कौन सा आईडिया बिकेगा, कौन सा
- 4:50नहीं बिकेगा। एक बिगिनर को यह सब नहीं पता
- 4:53होता तो जो काम एक्सपर्ट 6 महीने में हो
- 4:55सकता है कर ले तो भाई बिगिनर को शायद दो
- 4:56या 3 [संगीत] साल लग सकते हैं। लेकिन यहां
- 4:58एक बहुत इंपॉर्टेंट सवाल है। अगर आपको 3
- 5:01साल लग भी गए तो अल्टरनेटिव क्या है? कई
- 5:03लोग कहेंगे कि यार मैंने एक साल YouTube
- 5:05पर काम किया। चैनल नहीं चला। हमारा एक साल
- 5:07वेस्ट हो गया। लेकिन क्या वो एक साल सच
- 5:09में वेस्ट हुआ? उसने स्क्रिप्ट राइटिंग
- 5:11सीखी, एडिटिंग सीखी, कम्युनिकेशन सीखा,
- 5:14ऑडियंस साइकोलॉजी समझी, मार्केटिंग सीखी,
- 5:16कैमरा कॉन्फिडेंस आया। उसका चैनल फेल हुआ।
- 5:18हो सकता है भाई। लेकिन वो इंसान वही नहीं
- 5:21रहा जो एक साल पहले था। अब मान लो कि
- 5:23दूसरी कोशिश भी फेल हो गई, 2 साल चले गए।
- 5:26तीसरी कोशिश में उसे सक्सेस मिल गई तो
- 5:28क्या 3 साल ज्यादा हैं? नहीं है ज्यादा।
- 5:30क्योंकि अल्टरनेटिव हो सकता है कि यार 40
- 5:32साल तक आपको किसी की गुलामी करना पड़े। यह
- 5:35बुक फेलियर को खत्म करने की बात नहीं
- 5:36करती। यह फेलियर की कीमत को अलग तरीके से
- 5:39देखने की बात करती है। अब बुक का अगला
- 5:41बड़ा आईडिया है एलिमिनेशन। टिमफेरिस कहते
- 5:43हैं कि प्रोडक्टिव होने का मतलब ज्यादा
- 5:45काम करना नहीं है। प्रोडक्टिव होने का
- 5:47मतलब है सही काम करना। लेकिन बहुत बार हम
- 5:49बिजी होते हैं लेकिन इफेक्टिव नहीं होते।
- 5:51मान लो कि एक दुकानदार है सुबह से रात तक
- 5:53दुकान पर बैठा रहता है। वह कहता है कि और
- 5:55मैं रोज 12 घंटे काम करता हूं। लेकिन उन
- 5:5712 घंटों में से 8 घंटे वो कस्टमर्स का
- 5:59इंतजार करता है। 2 घंटे फोन चलाता है। 1
- 6:02घंटे ऐसे प्रोडक्ट्स अरेंज करता है
- 6:04जिन्हें कोई खरीदता ही नहीं है। और सिर्फ
- 6:061 घंटे में सच में रेवेन्यू बनाने वाला वो
- 6:08काम करता है। टेक्निकली वो 12 घंटे काम कर
- 6:10रहा है। लेकिन रिजल्ट देने वाला काम सिर्फ
- 6:121 घंटे का है। यही जगह है जहां 80-20
- 6:14प्रिंसिपल आता है। इस प्रिंसिपल के
- 6:16अकॉर्डिंग आपके लगभग 20% एफर्ट्स 80%
- 6:19रिजल्ट क्रिएट करते हैं। आपके 20%
- 6:22कस्टमर्स 80% रेवेन्यू ला सकते हैं। आपके
- 6:2420% वीडियोस 80% व्यूज ला सकती हैं। आपके
- 6:2820% काम 80% प्रोग्रेस करा सकते हैं। और
- 6:31सवाल यह नहीं है कि मैं ज्यादा मेहनत कैसे
- 6:33करूं? सवाल यह है कि मेरी कौन सी मेहनत सच
- 6:35में रिजल्ट दे रही है? मान लो कि एक
- 6:37कंटेंट क्रिएटर हर वीडियो के लिए यही सब
- 6:40करता है। 10 प्लेटफॉर्म्स पर लिंक डालता
- 6:42है। टैग्स पर 3 घंटे लगाता है।
- 6:43डिस्क्रिप्शन बार-बार बदलता है। हर छोटे
- 6:45एनालिटिक्स नंबर को देखता है। लेकिन उसके
- 6:4790% व्यूज सिर्फ YouTube रिकमेंडेशन
- 6:50[संगीत] से आते हैं। तो बाकी सब काम गलत
- 6:52नहीं है। लेकिन क्या वो उसके टाइम का सबसे
- 6:54अच्छा इस्तेमाल कर रहा है? शायद नहीं। अब
- 6:56सोचो अगर वो उन सारे लो रिजल्ट कामों को
- 6:58हटा देता है और अपना समय सिर्फ इन चीजों
- 7:00पर लगाता है। बेटर टॉपिक, बेटर टाइटल,
- 7:03बेटर थंबनेल और बेटर फर्स्ट 30 सेकंड्स।
- 7:05हो सकता है कि उसका काम आधा हो जाए और
- 7:07रिजल्ट डबल हो जाए। यही एलिमिनेशन है।
- 7:09लेकिन एलिमिनेशन का मतलब आलस नहीं है।
- 7:12इसका मतलब है कि हर उस काम को हटा देना जो
- 7:14इंपॉर्टेंट दिखाई तो देता है लेकिन है
- 7:15नहीं। कई बार हम ऐसे काम सिर्फ इसलिए करते
- 7:17हैं क्योंकि वो हमें बिजी फील करवाते हैं।
- 7:19ईमेल चेक करना आसान है। नए स्ट्रेटजी
- 7:21बनाना मुश्किल है। डेस्क साफ करना आसान
- 7:24है। सेल्स कॉल करना मुश्किल है। लोगो
- 7:26बदलना तो आसान है भाई। लेकिन कस्टमर से
- 7:27पूछते हैं कि प्रोडक्ट क्यों नहीं खरीद
- 7:29रहा? यह मुश्किल है। इसीलिए हमारा दिमाग
- 7:31इजी वर्क को चुनता है और उसे
- 7:33प्रोडक्टिविटी का नाम दे देता है। अब यहां
- 7:35पर यह किताब एक डेंजरस लेकिन पावरफुल सवाल
- 7:37पूछती है। अगर आपको हार्ट अटैक हो जाए और
- 7:39डॉक्टर कहे कि अब आप दिन में सिर्फ 2 घंटे
- 7:42काम कर सकते हैं तो आप कौन सा काम करेंगे
- 7:44बताओ जरा। अचानक बहुत सारी चीजें
- 7:46इंपॉर्टेंट नहीं रह जाएंगी आपके लिए। फिर
- 7:48दूसरा सवाल है अगर आपको सिर्फ 2 महीने काम
- 7:50करना हो और बाकी का साल काम करने की
- 7:52परमिशन ना हो तो आप किस चीज पर फोकस
- 7:54करोगे? यह सवाल एक्सट्रीम है। लेकिन
- 7:56एक्सट्रीम सवाल अक्सर प्रायोरिटी साफ कर
- 7:59देते हैं। तब अगला बड़ा आईडिया है
- 8:01आउटसोर्सिंग। मतलब वो काम किसी और से
- 8:03करवाना जो आपके लिए लो वैल्यू है। लेकिन
- 8:05किसी दूसरे व्यक्ति के लिए एक अच्छी
- 8:07अपॉर्चुनिटी हो सकती है। ये सुनते ही बहुत
- 8:09लोग कहते हैं कि यार मैं खुद कर सकता हूं।
- 8:11यार बिल्कुल कर सकते हो। सवाल यह नहीं है
- 8:13कि आप कर सकते हो या नहीं कर सकते हो।
- 8:15सवाल यह है कि क्या आपको करना चाहिए? मान
- 8:18लो कि एक बिजनेस ओनर पूरा संडे अपनी दुकान
- 8:20पेंट करता है ताकि पेंटर के ₹2000 बच जाए।
- 8:23शाम को वो भाई प्राउडली कहता है कि मैंने
- 8:25₹2000 बचा लिए। लेकिन क्या उसने सच में
- 8:27बचाए? अगर उसी दिन वो 10 कस्टमर्स को कॉल
- 8:30करके ₹00 का बिजनेस ला सकता था तो उसने
- 8:32₹2000 नहीं बचाए बल्कि उसने ₹18,000 गवा
- 8:34दिए। हर काम की कॉस्ट सिर्फ पैसे में नहीं
- 8:37होती। अपॉर्चुनिटी में भी होती है। आप 1
- 8:39घंटे में जो काम कर रहे हो उस 1 घंटे में
- 8:41दूसरा कौन सा बेहतर काम कर सकते थे। इसी
- 8:43को अपॉर्चुनिटी कॉस्ट कहते हैं। लेकिन
- 8:45यहां आउटसोर्सिंग को लेकर एक जरूरी
- 8:47रियलिटी चेक है। किसी और को काम देने का
- 8:49मतलब यह नहीं है कि आपका काम तुरंत कम हो
- 8:52जाएगा। शुरुआत में तो आपका काम और बढ़
- 8:54सकता है। आपको इंसान ढूंढना होगा। उसे
- 8:56समझाना होगा। गलतियां करेक्ट करनी होंगी।
- 8:59इंस्ट्रक्शंस बनाने होंगे। डेडलाइन तय
- 9:01करनी होगी। क्वालिटी चेक करना होगा। कई
- 9:03बार वो काम खराब करेगा। कई बार देर करेगा।
- 9:05कई बार बीच में छोड़ देगा। और तब आप
- 9:07सोचोगे कि यार इससे अच्छा तो मैं खुद ही
- 9:09कर लेता। लेकिन आउटसोर्सिंग का पहला गोल
- 9:12टाइम बचाना है ही नहीं। पहला गोल है
- 9:14सिस्टम बनाना। पहली बार आपको 5 घंटे
- 9:17लगेंगे किसी को सिखाने में। दूसरी बार 3
- 9:19घंटे। तीसरी बार आप एक वीडियो बना दोगे।
- 9:21चौथी बार एक चेक लिस्ट बनाओगे। फिर वही
- 9:23काम आपके बिना हो सकता है। यही फर्क है
- 9:25काम करने में और सिस्टम [संगीत] बनाने
- 9:27में। जो आदमी हर काम खुद करता है, वह
- 9:29मेहनती हो सकता है, लेकिन उसका बिजनेस
- 9:31हमेशा उसके साइज के जितना ही रहेगा। जो
- 9:33आदमी सिस्टम्स बनाता है, उसका काम उसके
- 9:34बिना भी बढ़ सकता है। अब एक और इंपॉर्टेंट
- 9:36आईडिया ऑटोमेशन और आउटसोर्सिंग से पहले एक
- 9:39गलती लोग करते हैं। वो खराब प्रोसेस को
- 9:41ऑटोमेट कर देते हैं। मान लो कि आप रोज एक
- 9:44रिपोर्ट बनाते हो जिससे कोई पढ़ता ही नहीं
- 9:46है। फिर आप सॉफ्टवेयर खरीदकर उस रिपोर्ट
- 9:47को ऑटोमेटिकली बनाने लगते हो। क्या आपने
- 9:50टाइम बचाया? बिल्कुल बचा है भाई। लेकिन एक
- 9:52बेकार काम को आपने तेज कर दिया। इसीलिए
- 9:54सही ऑर्डर है। पहले एलिमिनेट करो, फिर
- 9:56सिंपलीफाई करो, फिर ऑटोमेट करो और आखिर
- 9:59में आउटसोर्स करो। पहले पूछो कि यह काम
- 10:02करना जरूरी है? अगर हां, तो फिर पूछो कि
- 10:04क्या इसे आसान बनाया जा सकता है? फिर पूछो
- 10:06कि क्या टेक्नोलॉजी इसे कर सकती है? और
- 10:08आखिर में क्या कोई दूसरा इंसान इसे कर
- 10:10सकता है? यही सीक्वेंस बहुत लोग भूल जाते
- 10:12हैं। अब किताब का एक और फेमस आईडिया है
- 10:15मिनी रिटायरमेंट्स। आम लाइफ प्लान क्या
- 10:17होता है कि पहले 40 साल काम करो, पैसे जमा
- 10:20करो, फिर 60 या 65 की एज में रिटायर होकर
- 10:22लाइफ एंजॉय करो। टिम फेरिस पूछते हैं, आप
- 10:24सारी फ्रीडम लाइफ के आखिर के लिए क्यों
- 10:26बचा रहे हो? क्या गारंटी है कि उस उम्र
- 10:28में आपकी हेल्थ होगी, एनर्जी होगी, आपके
- 10:30दोस्त अवेलेबल होंगे। आपकी इच्छाएं वही
- 10:33होंगी। इसलिए वो कहते हैं कि रिटायरमेंट
- 10:35को लाइफ के आखिर में रखने के बजाय लाइफ के
- 10:37बीच-बीच में छोटे रिटायरमेंट्स लो। कुछ
- 10:39महीनों का ब्रेक लो, ट्रैवल करो, नई जगह
- 10:42रहो, कुछ नया सीखो, फैमिली के साथ समय
- 10:44बिताओ। यह आईडिया सुनने में बहुत अच्छा
- 10:46है। लेकिन हर व्यक्ति तुरंत जॉब छोड़कर
- 10:49थाईलैंड नहीं जा सकता। उसकी ईएमआई है।
- 10:51उसके बच्चे हैं, पेरेंट्स हैं,
- 10:52रिस्पांसिबिलिटीज हैं। तो क्या यह आईडिया
- 10:55सिर्फ अमीर लोगों के लिए है? बिल्कुल
- 10:57नहीं। मिनी रिटायरमेंट का मतलब हमेशा छ
- 10:59महीने यूरोप घूमना नहीं होता। इसका मतलब
- 11:02हो सकता है हर साल 15 दिन बिना काम के
- 11:04रहना। हर महीने वर्क लोड आधा करना। हर
- 11:07हफ्ते एक दिन ऐसा रखना जब कोई प्रोफेशनल
- 11:09काम ना हो। हर 3 महीने में तीन दिन अकेले
- 11:12किसी शांत जगह जाना या अपने करियर में ऐसा
- 11:14गैप बनाना जिसमें आप सिर्फ सोचो, सीखो और
- 11:18जिंदगी को देखो। मेन बात ट्रैवल करना नहीं
- 11:20है। मेन बात है आप अपनी लाइफ को सिर्फ
- 11:23वीकेंड और रिटायरमेंट तक सीमित ना रखो।
- 11:25क्योंकि बहुत से लोग मंडे से फ्राइडे तक
- 11:27जिंदा रहने का खर्च कमाते हैं और सिर्फ
- 11:29सैटरडे और संडे में सच में जीते। फिर संडे
- 11:32को शाम से एंजायटी शुरू हो जाती है कि यार
- 11:33कल मंडे है। मंडे से फिर वही साइकिल शुरू
- 11:36हो जाएगा। इस बुक का असली प्रॉमिस 4 घंटे
- 11:38काम करना नहीं है। असली प्रॉमिस है लाइफ
- 11:40को फिर से डिजाइन करना। लेकिन डिजाइन तभी
- 11:43होगा जब आपको पता हो कि आप क्या चाहते हो।
- 11:45बहुत से लोग कहते हैं कि मुझे फ्रीडम
- 11:47चाहिए। लेकिन फ्रीडम किस लिए है? अगर कल
- 11:49से आपको काम करने की जरूरत ना हो तो आप
- 11:51क्या करोगे? ट्रैवल करोगे क्या? फैमिली को
- 11:53टाइम दोगे, रीडिंग करोगे, बिजनेस करोगे,
- 11:55टीचिंग करोगे, राइडिंग करोगे? या सिर्फ
- 11:57फोन चलाओगे? यह सवाल थोड़ा अनकंफर्टेबल
- 12:00है। क्योंकि कई बार हम काम से नहीं खालीपन
- 12:02से डरते हैं। हम कहते हैं कि मैं जॉब
- 12:04छोड़ना चाहता हूं। लेकिन जॉब छोड़ने के
- 12:05बाद क्या बनना है यह नहीं जानते। इसीलिए
- 12:08फ्रीडम बिना पर्पस के कई बार बोर्डम बन
- 12:10जाती है। यह बुक लाइफस्टाइल डिजाइन की बात
- 12:12करती है। मतलब पहले डिसाइड करो कि तुम्हें
- 12:14किस तरह की लाइफ चाहिए और फिर उस लाइफ के
- 12:16अनुसार इनकम मॉडल बनाओ। ज्यादातर लोग
- 12:18उल्टा करते हैं। पहले करियर चुनते हैं फिर
- 12:20सैलरी आती है। फिर उस सैलरी के हिसाब से
- 12:22घर, कार, ईएमआई और लाइफस्टाइल बनाते हैं।
- 12:25और कुछ साल बाद वो लाइफस्टाइल एक गोल्डन
- 12:27केज बन जाती है। बहुत सुंदर सा पिंजरा,
- 12:29एसी वाला पिंजरा। लेकिन पिंजरा फिर भी
- 12:31पिंजरा ही रहता है भाई। अब इसका मतलब यह
- 12:33नहीं है कि नौकरी खराब है। नौकरी कई लोगों
- 12:36के लिए स्टेबिलिटी, ग्रोथ, आइडेंटिटी और
- 12:38मीनिंग देती है। समस्या नौकरी नहीं है।
- 12:41समस्या है तुम्हारी चॉइस का ना होना। अगर
- 12:43तुम नौकरी इसलिए कर रहे हो क्योंकि
- 12:45तुम्हें पसंद है तो यह फ्रीडम है। अगर तुम
- 12:47नौकरी इसलिए कर रहे हो क्योंकि एक महीने
- 12:48की सैलरी ना आए तो पूरा जीवन टूट जाएगा।
- 12:51तो यह है भाई पिंजरा। द फोर आवर वर्क वीक
- 12:54का गोल। हर किसी को एंटरप्रेन्योर बनाना
- 12:56नहीं होना चाहिए। गोल होना चाहिए पिंजरे
- 12:58से बाहर निकलना। कैसे? एक इमरजेंसी फंड
- 13:01बनाकर, एक एक्स्ट्रा स्किल सीखकर, एक साइड
- 13:04इनकम बनाकर, अपने खर्चे कम करके, एक ऐसा
- 13:06काम सीखकर जो लोकेशन इंडिपेंडेंट हो और
- 13:09धीरे-धीरे अपने टाइम पर कंट्रोल बढ़ाकर।
- 13:11आपको अगले महीने जॉब छोड़ने की जरूरत नहीं
- 13:13है। आपको अगले महीने अपने ऑप्शंस बढ़ाने
- 13:15की जरूरत है। यही इस बुक का सबसे
- 13:17प्रैक्टिकल वर्जन है। और आखिर में वापस
- 13:19उसी सवाल पर आते हैं कि क्या हफ्ते में 4
- 13:22घंटे काम करके पैसे कमाना पॉसिबल है?
- 13:24बिल्कुल पॉसिबल है। लेकिन, क्या हर इंसान
- 13:27यह वाली लाइफस्टाइल हासिल कर पाएगा? नहीं
- 13:29कर पाएगा। बिल्कुल वैसे ही जैसे ज्यादातर
- 13:31लोग अपने आसपास के नेगेटिव चीजों पर अपना
- 13:33रिस्पांस कंट्रोल नहीं कर पाते। शायद वह
- 13:35इससे भी मुश्किल काम है। यहां तक देख रहे
- 13:37हो तो वीडियो को लाइक जरूर करना।
- 13:39सब्सक्राइब नहीं किया तो सब्सक्राइब कर
- 13:40लेना। घंटी-वंटी नहीं दबाई तो दबा देना।
- 13:42यह बुक ऐप डाउनलोड कर लो जहां पर तुम 400
- 13:44से ज्यादा फ्री बुक समरी सुन सकते हो बिना
- 13:46किसी ऐड के हिंदी में। और जैसा कि मैंने
- 13:47वीडियो में बताया प्रोडक्ट बनाने के बारे
- 13:49में। यह Book ऐप मेरा प्रोडक्ट है और इस
- 13:51पर 500 से ज्यादा लोगों ने प्रीमियम प्लान
- 13:53खरीदा है और नियरली नियरली 8 से 9 लाख
- 13:57इसके डाउनलोड्स हैं। फाइनली यू गाइस आर
- 13:59अमेजिंग। कीप रीडिंग, कीप लर्निंग, कीप
- 14:01ड्राइंग। थैंक यू फॉर वाचिंग।
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