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NCERT Class 12 History Full Book One Shot |Complete Revision (All 15 Chapters)All Competitive Exams — Transcript

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  1. 0:00आप सभी का स्वागत है एआई एजुकेशन बोट चैनल
  2. 0:03पर। आज हम क्लास 12th एनसीईआरटी हिस्ट्री
  3. 0:06को पूरी तरह से एक ही वीडियो में कवर करने
  4. 0:08वाले हैं।
  5. 0:09यानी एक वीडियो और पूरा इतिहास साफ।
  6. 0:12हां बिलकुल। चलिए क्लास स्टार्ट करते हैं।
  7. 0:15लेकिन क्लास शुरू करने से पहले एक बात
  8. 0:18समझना बहुत जरूरी है। 12वीं की जो
  9. 0:21हिस्ट्री है वो एक किताब में नहीं है।
  10. 0:24सही कहा। उसे तीन अलग-अलग किताबों मतलब
  11. 0:27पार्ट्स में बांटा गया है और यह तीनों भाग
  12. 0:30भारत के तीन अलग-अलग कालखंडों या इरास को
  13. 0:33दिखाते हैं।
  14. 0:34पहला है भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग वन
  15. 0:37जो एंशिएंट इंडिया पर है। इसमें हम
  16. 0:39हड़प्पा सभ्यता, मौर्य काल और सांची स्तूप
  17. 0:42जैसे शुरुआती विकास के बारे में पढ़ते
  18. 0:44हैं।
  19. 0:45हम भारत की नीव।
  20. 0:47फिर आता है भाग टू मीडिएबल इंडिया। इसमें
  21. 0:50हम यात्रियों के नजरिए, भक्ति, सूफी
  22. 0:52परंपराएं, विजयनगर साम्राज्य और मुगल काल
  23. 0:55को देखते हैं।
  24. 0:56हां, यह वो दौर है जब भारत में बहुत सारे
  25. 0:59सांस्कृतिक बदलाव हो रहे थे।
  26. 1:00और आखिर में है भाग तीन मॉडर्न इंडिया।
  27. 1:04इसका पूरा फोकस उपनिवेशवाद, 1857 का
  28. 1:08विद्रोह, महात्मा गांधी और हमारे संविधान
  29. 1:11के निर्माण पर है।
  30. 1:13तो ये एक पूरा सफर है प्राचीन से आधुनिक
  31. 1:16भारत तक का।
  32. 1:17बिल्कुल। तो चलिए बिना किसी देरी के शुरू
  33. 1:19करते हैं यह शानदार सफर।
  34. 1:21आज हम एक ऐसी दुनिया में गोता लगाने वाले
  35. 1:23हैं जो आज से मतलब लगभग 4000 साल पहले
  36. 1:28मौजूद थी।
  37. 1:28हम
  38. 1:29एक ऐसी सभ्यता जिसके शहर मतलब पूरी तरह से
  39. 1:32प्लान किए हुए थे।
  40. 1:34बिल्कुल।
  41. 1:34जिनका व्यापार हजारों किलोमीटर दूर
  42. 1:37मेसोपोटामिया तक फैला था। लेकिन हम उनकी
  43. 1:40भाषा का एक शब्द भी नहीं पढ़ सकते। और यही
  44. 1:43यही तो सबसे बड़ा रहस्य है। हमारे पास
  45. 1:45उनकी कलाकृतियां हैं, उनके शहर हैं, लेकिन
  46. 1:47उनकी आवाज नहीं है।
  47. 1:48हां, आज हम एनसीआरटी की किताब और दूसरे
  48. 1:51स्रोतों के आधार पर हड़प्पा सभ्यता के
  49. 1:54इन्हीं रहस्यों की तह तक जाएंगे और समझने
  50. 1:57की कोशिश करेंगे कि यह लोग कौन थे? कैसे
  51. 2:01रहते थे? और वो सबसे बड़ा सवाल।
  52. 2:03कि आखिर वो गए कहां?
  53. 2:05आखिर वो गए कहां?
  54. 2:06चलिए तो शुरू करते हैं उन सुरागों से जो
  55. 2:09हमें सबसे पहले मिले। जब पुरातत्वविदों ने
  56. 2:12खुदाई शुरू की तो उन्हें सबसे अनोखी चीज
  57. 2:14मिली हड़प्पाई मोहर यानी उनकी स्टैंप
  58. 2:17सील्स।
  59. 2:18बिल्कुल ये मोहरे सेलखड़ी नाम के एक बहुत
  60. 2:21ही मुलायम पत्थर से बनी थी। मतलब इतना
  61. 2:23मुलायम कि उस पर आसानी से नक्काशी की जा
  62. 2:26सकती थी।
  63. 2:26अच्छा। हां
  64. 2:27और इन पर जानवरों के बहुत शानदार चित्र
  65. 2:29बने हैं। जैसे एक सींग वाला जानवर है, बैल
  66. 2:32है, हाथी है। लेकिन चित्रों के ऊपर कुछ
  67. 2:35चिन्ह भी हैं। यह उनकी लिपि है, उनकी
  68. 2:37लिखावट।
  69. 2:38और यही वो पहेली है जो आज तक कोई सुलझा
  70. 2:41नहीं पाया।
  71. 2:42क्यों?
  72. 2:42इसे पढ़ना इतना मुश्किल क्यों है?
  73. 2:44इसकी दो बड़ी वजह हैं। पहली तो यह कि हमें
  74. 2:46कोई भी लंबा लेख नहीं मिला है। ज्यादातर
  75. 2:49लिखावटें इन्हीं मोहरों पर हैं जिनमें
  76. 2:51मुश्किल से मतलब चार या पांच चिन्ह होते
  77. 2:53हैं।
  78. 2:53बस।
  79. 2:54हां, बस। और दूसरी वजह हमें कोई रोजेटा
  80. 2:57स्टोन जैसी चीज नहीं मिली है। यानी कोई
  81. 2:59ऐसा पत्थर जिस पर एक ही बात
  82. 3:01अच्छा मतलब एक बाइलिंगुअल टेक्स्ट जैसा
  83. 3:03कुछ नहीं मिला।
  84. 3:04हां बिल्कुल जिस पर एक ही बात हड़प्पाई
  85. 3:07लिपि और किसी जानी पहचानी भाषा दोनों में
  86. 3:10लिखी हो
  87. 3:10और बिना उसके इन चुनों का मतलब निकालना
  88. 3:13लगभग नामुमकिन है।
  89. 3:14तो ये मोहरे सिर्फ एक अनसुलझी पहेली ही
  90. 3:16नहीं है बल्कि ये इस बात का भी सबूत है कि
  91. 3:19यह एक बहुत ही संगठित समाज था। शायद इन
  92. 3:21मोहरों का इस्तेमाल व्यापार में होता था।
  93. 3:24सामान की पहचान के लिए।
  94. 3:26सही कहा। बिल्कुल। कल्पना कीजिए कि सामान
  95. 3:28से भरे एक थैले को रस्सी से बांधकर उस पर
  96. 3:31गीली मिट्टी लगाई जाती थी और फिर उस पर यह
  97. 3:34मोहर दबा दी जाती थी।
  98. 3:35हम्म।
  99. 3:36अगर सामान अपने ठिकाने पर मोहर के साथ सही
  100. 3:38सलामत पहुंचता, तो इसका मतलब था कि उसके
  101. 3:41साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है।
  102. 3:43तो यह एक तरह की टेंपर प्रूफ सीलिंग थी उस
  103. 3:46जमाने की।
  104. 3:46एक तरह से हां। यह तो सिर्फ एक छोटी सी
  105. 3:49मोहर की कहानी है। लेकिन जब पुरातत्वविदों
  106. 3:52ने और खुदाई की तो जमीन के नीचे से पूरे
  107. 3:55के पूरे शहर निकलने लगे और इनमें सबसे
  108. 3:58हैरान करने वाला था मोहनजोदाड़ो।
  109. 4:01मोहनजोदाड़ो सिर्फ एक शहर नहीं था। वो उस
  110. 4:04जमाने का एक महानगर था और उसकी प्लानिंग
  111. 4:07मतलब आज भी बड़े-बड़े अर्बन प्लानर्स को
  112. 4:09हैरान कर देती है।
  113. 4:10हम
  114. 4:11पूरा शहर दो हिस्सों में बंटा था। एक छोटा
  115. 4:14ऊंचा हिस्सा जिसे दुर्ग या सिटिडल कहते
  116. 4:17हैं और एक बड़ा निचला हिस्सा जिसे निचला
  117. 4:19शहर कहा जाता है।
  118. 4:20और कमाल की बात यह है कि ऐसा लगता है जैसे
  119. 4:23शहर को बसाने से पहले उसका पूरा नक्शा
  120. 4:26बनाया गया था। सड़कें और गलियां एक दूसरे
  121. 4:29को बिल्कुल सीधी काटती थी।
  122. 4:31हां, एक ग्रिड पैटर्न में।
  123. 4:33जैसे शतरंज के बिसात पर खाने बने होते
  124. 4:35हैं।
  125. 4:35बिल्कुल। और इससे भी ज्यादा एडवांस्ड बात
  126. 4:39यह है कि ऐसा लगता है कि उन्होंने पहले
  127. 4:41सड़कें और नालियां बनाई और फिर उनके
  128. 4:43किनारे घर बनाए।
  129. 4:44अच्छा।
  130. 4:45जरा सोचिए आज भी हमारे कई शहरों में पहले
  131. 4:48घर बन जाते हैं और सड़कें और नालियां बाद
  132. 4:50में बनती रहती हैं। वो लोग हमसे 4500 साल
  133. 4:54पहले ही योजना के महत्व को समझ चुके थे।
  134. 4:56और उनकी ईंट मुझे लगता है वो तो सबसे
  135. 4:58अविश्वसनीय चीजों में से एक है।
  136. 5:00हां वो भी।
  137. 5:01हर ईंट का आकार एक तय अनुपात में था।
  138. 5:04लंबाई ऊंचाई से चार गुना और चौड़ाई ऊंचाई
  139. 5:08से दो गुनी और यह अनुपात हड़प्पा से लेकर
  140. 5:11मोहनजोदड़ो तक मतलब सैकड़ों किलोमीटर दूर
  141. 5:13बसे शहरों में भी एक जैसा था।
  142. 5:15यह कोई छोटी बात नहीं है। यह इस ओर इशारा
  143. 5:18करता है कि या तो कोई एक मजबूत केंद्रीय
  144. 5:20सत्ता थी जो यह नियम लागू करवाती थी या
  145. 5:23फिर यह उनके समाज का एक साझा मानक था जिसे
  146. 5:26सब मानते थे। hm
  147. 5:28दोनों ही सूरतों में यह एक बेहद विकसित और
  148. 5:31संगठित समाज की निशानी है।
  149. 5:32चलिए अब इन प्लांट की हुई गलियों से
  150. 5:34गुजरते हुए उनके घरों के अंदर झांकते हैं।
  151. 5:37उनके घर कैसे होते थे?
  152. 5:39हड़प्पा के लोगों के लिए एकांतता मतलब
  153. 5:41प्राइवेसी बहुत जरूरी लगती है। ज्यादातर
  154. 5:44घरों के बीच में एक आंगन होता था और उसके
  155. 5:46चारों ओर कमरे बने होते थे।
  156. 5:48अच्छा।
  157. 5:48और जो ग्राउंड फ्लोर की दीवारें थी, उनमें
  158. 5:51कोई खिड़कियां नहीं होती थी। यहां तक कि
  159. 5:53मुख्य दरवाजे से आंगन भी सीधा नहीं दिखता
  160. 5:55था। यह तो बिल्कुल आज के घरों जैसा ही
  161. 5:57डिजाइन है।
  162. 5:58और मैंने पढ़ा है कि हर घर में अपना एक
  163. 6:00स्नानागार यानी बाथरूम होता था।
  164. 6:02हां। और वो भी ईंटों के फर्श वाला। उन
  165. 6:05स्नानागारों की नालियां घर की दीवार के
  166. 6:08जरिए बाहर सड़क की मुख्य नाली से जुड़ी
  167. 6:11होती थी।
  168. 6:11कमाल है। मोहनजोदाड़ों की जल निकास
  169. 6:14प्रणाली तो मतलब बेजोड़ थी। हर घर एक ढकी
  170. 6:18हुई नाली से जुड़ा था, जो सड़कों के नीचे
  171. 6:20बनी बड़ी नालियों में मिलती थी। और यह
  172. 6:22नालियां सफाई के लिए मैनहोल से भी ढकी
  173. 6:25होती थी।
  174. 6:25सोच कर यह अजीब लगता है कि जब दुनिया के
  175. 6:28कई हिस्सों में लोग ठीक से घर बनाना भी
  176. 6:30नहीं सीखे थे। यहां हमारे पूर्वज सीवर
  177. 6:33सिस्टम प्लान कर रहे थे। अच्छा अब उस ऊंचे
  178. 6:36टीले यानी दुर्ग की बात करते हैं। वहां
  179. 6:39क्या खास था?
  180. 6:40दुर्ग पर बनी इमारतें शायद सार्वजनिक
  181. 6:42इस्तेमाल के लिए थी। वहां एक विशाल गोदाम
  182. 6:44जैसी संरचना मिली है और सबसे प्रसिद्ध है
  183. 6:47विशाल स्नानागार। द ग्रेट बाथ।
  184. 6:49हम द ग्रेट बाथ। यह एक बड़ा आयताकार जलाशय
  185. 6:53है जिसके दोनों तरफ सीढ़ियां बनी थी और
  186. 6:55इसे वाटरप्रूफ बनाने के लिए जिप्सम के
  187. 6:57गारे का इस्तेमाल किया गया था।
  188. 6:58तो क्या यह एक तरह का स्विमिंग पूल था?
  189. 7:00शायद उससे कहीं ज्यादा ज्यादातर विद्वानों
  190. 7:04का मानना है कि इसका इस्तेमाल किसी खास
  191. 7:06धार्मिक अनुष्ठान के लिए होता था।
  192. 7:07अच्छा कोई रस्म वगैरह के लिए।
  193. 7:10हां, पानी और शुद्धिकरण का महत्व बाद के
  194. 7:13भारतीय धर्मों में भी बहुत ज्यादा रहा है।
  195. 7:15तो हो सकता है इसकी जड़े हमें हड़प्पा में
  196. 7:17ही मिल जाए। तो शहर इतने व्यवस्थित थे,
  197. 7:19लेकिन क्या समाज में भी सब बराबर थे? या
  198. 7:22वहां भी अमीर और गरीब का फर्क था?
  199. 7:25पुरातत्व वेद इसका पता कैसे लगाते हैं?
  200. 7:27इसके दो मुख्य तरीके हैं। पहला तो है
  201. 7:30कब्रों का अध्ययन।
  202. 7:31हम्म।
  203. 7:31हड़प्पा में ज्यादातर कब्रें साधारण
  204. 7:33गड्ढों में मिली है। कुछ में मिट्टी के
  205. 7:35बर्तन या छोटे-मोटे गहने मिले हैं। लेकिन
  206. 7:37मिस्र के पिरामिडों की तरह यहां कब्रों
  207. 7:39में बेशकीमती खजाना नहीं दफनाया जाता था।
  208. 7:42अच्छा।
  209. 7:42इससे लगता है कि वे लोग मरने के बाद की
  210. 7:44दुनिया के लिए कीमती चीजें देने में
  211. 7:46ज्यादा विश्वास नहीं करते और दूसरा तरीका
  212. 7:48क्या है?
  213. 7:48दूसरा तरीका है विलासिता की चीजों को
  214. 7:50खोजना। यानी ऐसी चीजें जो दुर्लभ हो,
  215. 7:53महंगी हो या जिन्हें बनाने में कोई खास
  216. 7:56तकनीक लगती हो।
  217. 7:56जैसे
  218. 7:57इसका एक बेहतरीन उदाहरण है फयांस। यह रेत,
  219. 8:00रंग और एक चिपचिपे पदार्थ को पका कर बनाया
  220. 8:02गया एक चमकीला पदार्थ था।
  221. 8:04फयांस?
  222. 8:05हां। जिससे छोटे बड़े बर्तन बनते थे।
  223. 8:07इन्हें बनाना बहुत मुश्किल था इसलिए ये
  224. 8:09कीमती माने जाते थे।
  225. 8:10और ये कीमती चीजें मिलती कहां थी?
  226. 8:12छोटी बस्तियों में ये ना के बराबर है।
  227. 8:14अच्छा। तो इससे साफ पता चलता है कि समाज
  228. 8:17में आर्थिक भिन्नताएं थी।
  229. 8:19बिल्कुल।
  230. 8:19इन चीजों को बनाने के लिए कच्चा माल तो
  231. 8:21चाहिए होता होगा। यह सब कहां से आता था?
  232. 8:24हड़प्पा एक अकेली बस्ती नहीं थी बल्कि एक
  233. 8:27विशाल नेटवर्क का केंद्र थी। तांबा आता था
  234. 8:30राजस्थान के खेत्रीय इलाके से तो सोना
  235. 8:33शायद दक्षिण भारत से।
  236. 8:34हम
  237. 8:35गुजरात के लोथल से सुंदर लाल रंग का
  238. 8:37कार्निलियन पत्थर आता था। जिससे बेहद
  239. 8:40खूबसूरत मनके या बीड्स बनाए जाते थे।
  240. 8:42चनहूदड़ो जैसी बस्तियां तो एक तरह की
  241. 8:45इंडस्ट्रियल टाउन थी जहां सिर्फ यही
  242. 8:47क्राफ्ट का काम होता था।
  243. 8:49और यह नेटवर्क सिर्फ भारत तक ही सीमित
  244. 8:51नहीं था। है ना?
  245. 8:52बिल्कुल नहीं। उनका व्यापार बहुत दूर तक
  246. 8:54फैला था। हमें पुरातात्विक सबूत मिले हैं
  247. 8:57कि वे ओमान से तांबा लाते थे।
  248. 8:59ओमान से।
  249. 9:00हां। ओमानी तांबे और हड़प्पाई कलाकृतियों
  250. 9:03दोनों में निकल धातु के अंश मिले हैं। जो
  251. 9:06किसी एक साझा स्रोत की ओर इशारा करते हैं।
  252. 9:08और मेसोपोटेमिया यानी आज के इराक से भी
  253. 9:11उनके संबंध थे। हां, मेसोपोटामिया के
  254. 9:13लेखों में मिलुआ नाम की जगह का जिक्र है।
  255. 9:16जहां से वे सोना, तांबा और कार्निलियन
  256. 9:18जैसे कीमती सामान मंगाते थे।
  257. 9:20[नाक से की जाने वाली आवाज़] ज्यादातर
  258. 9:21इतिहासकारों का मानना है कि मिलवा हड़प्पा
  259. 9:24क्षेत्र का ही प्राचीन नाम था।
  260. 9:25अच्छा। यहां तक कि मेसोपोटामिया में
  261. 9:27हड़प्पा की मोहरे भी मिली हैं। जिन पर
  262. 9:29जहाजों और नाव के चित्र बने हैं। यह उनके
  263. 9:32समुद्री व्यापार का पक्का सबूत है।
  264. 9:34तो हमारे पास एक उन्नत शहर नियोजन है। एक
  265. 9:37विशाल व्यापार नेटवर्क है। एक जटिल समाज
  266. 9:40है। लेकिन ये सब कुछ चला कौन रहा था? क्या
  267. 9:43वहां कोई राजा था?
  268. 9:44यह हड़प्पा सभ्यता का सबसे बड़ा सवाल है।
  269. 9:46हमें मिस्र या मेसोपोटामिया की तरह कोई
  270. 9:49भव्य महल या राजाओं की कब्रें नहीं मिली
  271. 9:51हैं।
  272. 9:51हम्म। इस पर पुरातत्व विधों में मतलब
  273. 9:53अलग-अलग राय है। कुछ मानते हैं कि यहां
  274. 9:56कोई शासक नहीं था और सब मिलकर फैसले लेते
  275. 9:58थे।
  276. 9:59लेकिन बिना किसी शासक के ईंटों का एक ही
  277. 10:02आकार, शहरों का एक जैसा नक्शा यह सब कैसे
  278. 10:05संभव है?
  279. 10:05यही दूसरा पक्ष कहता है। कुछ विद्वान
  280. 10:07मानते हैं कि यहां एक नहीं बल्कि कई शासक
  281. 10:10थे। हर बड़े शहर का अपना ही राजा होता था।
  282. 10:13अच्छा।
  283. 10:13और तीसरा मत यह है कि ये एक ही राज्य था
  284. 10:16जिसकी एक ही सत्ता थी जो शायद मोहनजोदड़ो
  285. 10:19से सब कुछ नियंत्रित करती थी। हम
  286. 10:21मोहनजोदड़ो से मिली एक पत्थर की मूर्ति को
  287. 10:23पुरोहित राजा यानी प्रीस्ट किंग कहा जाता
  288. 10:26है। लेकिन यह भी सिर्फ एक अंदाजा है। सच
  289. 10:29तो यह है कि हमें निश्चित रूप से कुछ नहीं
  290. 10:31पता।
  291. 10:32और फिर हम उस सबसे बड़े रहस्य पर आते हैं
  292. 10:34जिसके साथ हमने शुरुआत की थी। इस महान
  293. 10:37सभ्यता का अंत कैसे हुआ? यह लोग कहां चले
  294. 10:40गए?
  295. 10:41लगभग 1800 ईसा पूर्व के आसपास कुछ बड़ा
  296. 10:43बदलाव हुआ। मोहनजोदड़ो जैसे बड़े शहर
  297. 10:46वीरान होने लगे। लोगों ने गुजरात, हरियाणा
  298. 10:49और उत्तर प्रदेश के इलाकों में नई और छोटी
  299. 10:51बस्तियां बसानी शुरू कर दी।
  300. 10:52अच्छा।
  301. 10:53वो एकीकरण वाली चीजें जैसे मोहरे,
  302. 10:55मानकीकृत बाढ़ और वो खास लिपि सब
  303. 10:58धीरे-धीरे गायब हो गई।
  304. 11:00लेकिन हुआ क्या? क्या कोई बाढ़ आई थी या
  305. 11:02कोई हमला हुआ था?
  306. 11:04इसके पीछे कोई एक कारण नहीं है बल्कि कई
  307. 11:07सिद्धांत हैं। कुछ कहते हैं कि जलवायु
  308. 11:09परिवर्तन हुआ, मौसम सूखा हो गया और
  309. 11:11सरस्वती जैसी नदियां सूख गई। कुछ वनों की
  310. 11:14कटाई या भीषण बाढ़ को जिम्मेदार मानते
  311. 11:17हैं।
  312. 11:17हम कुछ विद्वान बाहरी आक्रमण की भी बात
  313. 11:20करते हैं। ज्यादातर संभावना यही है कि इन
  314. 11:22सभी कारणों ने मिलकर इस सभ्यता को पतन की
  315. 11:25ओर धकेल दिया।
  316. 11:26यह सोचना ही कितना अजीब है कि एक पूरी की
  317. 11:29पूरी शहरी सभ्यता वापस ग्रामीण जीवन की ओर
  318. 11:32लौट गई और फिर सदियों तक हम उन्हें भूल ही
  319. 11:34गए।
  320. 11:35हां, सदियों तक उनकी कहानी जमीन के नीचे
  321. 11:38दबी रही। जब अंग्रेज भारत में रेलवे लाइन
  322. 11:40बिछा रहे थे तो उन्हें हड़प्पा में पकी
  323. 11:42हुई ईंटों का खजाना मिला।
  324. 11:44अच्छा।
  325. 11:44और उन्होंने उसे रेलवे ट्रक के नीचे
  326. 11:47बिछाने के लिए इस्तेमाल कर लिया। बिना यह
  327. 11:49जाने कि वो क्या नष्ट कर रहे हैं।
  328. 11:51और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पहले
  329. 11:53डायरेक्टर जनरल एलेक्जेंडर कनिंघम
  330. 11:55हम
  331. 11:55वो भी हड़प्पा के महत्व को समझ नहीं पाए
  332. 11:58थे।
  333. 11:58वो इसे गंगा घाटी के प्राचीन शहरों से
  334. 12:01जोड़ने की कोशिश करते रहे हैं। असली खोज
  335. 12:03तो 1920 के दशक में हुई जब दयाराम साहनी
  336. 12:08और राखालदास बनर्जी जैसे भारतीय
  337. 12:10पुरातत्वविदों ने हड़प्पा और मोहनजोदड़ो
  338. 12:13में एक जैसी मोहरे खोजी।
  339. 12:15हम
  340. 12:15और फिर 1924 में तत्कालीन डायरेक्टर जनरल
  341. 12:18जॉन मार्शल ने पूरी दुनिया के सामने सिंधु
  342. 12:22घाटी में एक नई प्राचीन सभ्यता की खोज का
  343. 12:25ऐलान किया। इसने भारत के इतिहास को हजारों
  344. 12:28साल और पीछे धकेल दिया। तो हड़प्पा की
  345. 12:30कहानी हमें एक जरूरी बात सिखाती है। एक
  346. 12:34महान सभ्यता सिर्फ ईंटों और मोहरों का ढेर
  347. 12:38नहीं होती बल्कि वो उन सवालों का संग्रह
  348. 12:40भी है जो वो अपने पीछे छोड़ जाती है।
  349. 12:43बिल्कुल और शायद हमें इस पर भी सोचना
  350. 12:45चाहिए कि जो शहर इतने योजनाबद्ध तरीके से
  351. 12:48बनाए गए वो आखिर वीरान क्यों हो गए? क्या
  352. 12:51इसके पीछे पर्यावरण का असंतुलन था? क्या
  353. 12:54उनके संसाधन खत्म हो गए थे? हम्म।
  354. 12:56यह कुछ ऐसे सवाल हैं जो आज के दौर में जब
  355. 12:59हम अपने शहरों को और बड़ा और जटिल बना रहे
  356. 13:02हैं। हमारे लिए भी बहुत मायने रखते हैं।
  357. 13:04आज हम भारत के इतिहास के एक ऐसे दौर में
  358. 13:07उतर रहे हैं जो लगभग 1200 साल लंबा है।
  359. 13:11हम
  360. 13:12सोचिए 600 ईसा पूर्व से लेकर 600 ईसवी तक
  361. 13:15का समय।
  362. 13:16जी।
  363. 13:16यह वो दौर था जब छोटे-छोटे कबीले और
  364. 13:19बस्तियां वो मिलकर बड़े-बड़े राज्यों में
  365. 13:22बदल रही थी और फिर एक विशाल साम्राज्य
  366. 13:24में। बिल्कुल।
  367. 13:26तो आज की हमारी पड़ताल का विषय है राजा,
  368. 13:29किसान और नगर।
  369. 13:30नमस्ते। यह वाकई एक जबरदस्त बदलाव का दौर
  370. 13:33था। हड़प्पा सभ्यता के पतन के बाद एक लंबा
  371. 13:37अरसा गुजरा।
  372. 13:38हां।
  373. 13:38और फिर अचानक छठी शताब्दी ईसा पूर्व के
  374. 13:41आसपास इतिहास ने जैसे रफ्तार पकड़ ली।
  375. 13:43अच्छा।
  376. 13:44लोहे का इस्तेमाल बढ़ रहा था। सिक्के चलन
  377. 13:46में आ रहे थे। नए शहर बस रहे थे। और बौद्ध
  378. 13:49और जैन धर्म जैसे नए विचार समाज को एक नई
  379. 13:52दिशा दे रहे थे। तो हमारा मिशन है इन 1200
  380. 13:54सालों की कहानी को समझना। हम एनसीईआरटी की
  381. 13:57किताब को अपना आधार बना रहे हैं। लेकिन
  382. 13:59हमारा मकसद सिर्फ तथ्यों को दोहराना नहीं
  383. 14:01है। बल्कि यह जानना है कि इन बदलावों का
  384. 14:04मतलब क्या था?
  385. 14:05सही बात है।
  386. 14:05तो सवाल यह है कि इतने पुराने दौर के
  387. 14:08इतिहास के दरवाजे को इतिहासकारों ने खोला
  388. 14:11कैसे? इसकी चाबी कहां से मिली?
  389. 14:14इसकी चाबी मिली 1830 के दशक में और कहानी
  390. 14:18बड़ी दिलचस्प है।
  391. 14:19अच्छा। ईस्ट इंडिया कंपनी के एक अधिकारी
  392. 14:21थे जेम्स प्रिंसेप। उन्होंने दो बहुत
  393. 14:24पुरानी लिपियों ब्राह्मी और खरोष्ठी को
  394. 14:27पढ़ने में कामयाबी हासिल की।
  395. 14:29अरे वाह!
  396. 14:30यह एक बहुत बड़ी सफलता थी क्योंकि यह वो
  397. 14:33भाषाएं थी जो ये सदियों से कोई पढ़ नहीं
  398. 14:35पाया था।
  399. 14:35तो मतलब 2000 साल से भी ज्यादा पुरानी
  400. 14:39लिपियों को समझना यह तो किसी जासूसी कहानी
  401. 14:42जैसा लगता है।
  402. 14:43हां, एक तरह से वैसा ही था। तो आखिरकार
  403. 14:45प्रिंसेसप को उन खुदे हुए पत्थरों और
  404. 14:48सिक्कों पर मिला क्या?
  405. 14:49उन्हें ज्यादातर अभिलेखों पर एक ही उपाधि
  406. 14:51मिली पिया दस्सी।
  407. 14:53पिया दस्सी।
  408. 14:54इसका क्या मतलब हुआ?
  409. 14:55इसका मतलब होता है मनोहर मुखाकृति वाला या
  410. 14:58देखने में सुंदर।
  411. 15:00हम
  412. 15:00कुछ अभिलेखों पर राजा का नाम अशोक भी लिखा
  413. 15:03था और बौद्ध ग्रंथों से पता चला कि अशोक
  414. 15:06एक बहुत प्रसिद्ध मौर्य शासक थे।
  415. 15:09तो मतलब यह कड़ी जुड़ गई। जैसे ही यह कड़ी
  416. 15:12जुड़ी, भारत के शुरुआती राजनैतिक इतिहास
  417. 15:14की पूरी तस्वीर ही साफ होने लगी। हम
  418. 15:17यह खोज सिर्फ अक्षरों को पढ़ना नहीं था
  419. 15:19बल्कि एक पूरे भूले हुए युग को उसकी आवाज
  420. 15:22वापस देना था।
  421. 15:23तो प्रिंसेप की इस खोज ने एक तरह से ताला
  422. 15:26खोल दिया।
  423. 15:27बिल्कुल।
  424. 15:27जब इतिहासकारों ने इस ताले के पार झांका
  425. 15:30तो उन्हें छठी शताब्दी ईसा पूर्व का भारत
  426. 15:33कैसा दिखा?
  427. 15:34उन्हें एक ऐसा उपमहाद्वीप दिखा जो
  428. 15:36राजनैतिक रूप से कई टुकड़ों में बंटा हुआ
  429. 15:38था। हम
  430. 15:39बौद्ध और जैन धर्म के शुरुआती ग्रंथों में
  431. 15:4216 महाजनपदों का जिक्र मिलता है। हम
  432. 15:44यह उस दौर की सबसे बड़ी राजनीतिक इकाइयां
  433. 15:47थी।
  434. 15:47तो महाजनपद को हम आज के दौर के राज्यों या
  435. 15:51प्रांतों जैसा समझ सकते हैं।
  436. 15:52हां काफी हद तक।
  437. 15:53मतलब ये सिर्फ गांव या कबीले नहीं थे
  438. 15:56बल्कि संगठित राजनैतिक इकाइयां थी जिनकी
  439. 15:59अपनी राजधानियां, अपनी सेनाएं और अपनी कर
  440. 16:02प्रणाली थी।
  441. 16:03बिल्कुल सही। हम्
  442. 16:04वज्जी, मगध, कौशल, कुरु, पंचाल, गांधार,
  443. 16:09अवंती यह उस दौर के कुछ बड़े नाम थे।
  444. 16:12हम्।
  445. 16:12ज्यादातर महाजनपदों पर एक राजा का शासन
  446. 16:14था। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि कुछ राज्य
  447. 16:17ऐसे भी थे जिन्हें गण या संघ कहा जाता था।
  448. 16:201 मिनट रुकिए। यह गढ़ और संघ वाली बात
  449. 16:23बहुत दिलचस्प है। मतलब उस जमाने में भी एक
  450. 16:26तरह के गणतंत्र मौजूद थे।
  451. 16:28जी बिल्कुल।
  452. 16:29राजा के शासन और इस समूह के शासन में क्या
  453. 16:32बुनियादी फर्क था? यह बहुत बड़ा फर्क था।
  454. 16:34गण संघ में सत्ता किसी एक व्यक्ति के हाथ
  455. 16:37में नहीं बल्कि एक कह सकते हैं कि कुलीन
  456. 16:40समूह या परिषद के हाथ में होती थी।
  457. 16:42अच्छा।
  458. 16:42फैसले बहस और सहमति से लिए जाते थे। भगवान
  459. 16:45महावीर और भगवान बुद्ध दोनों ही ऐसे ही
  460. 16:48गणों से आते थे।
  461. 16:49अरे वाह।
  462. 16:49जो हमें बताता है कि उस समय यह व्यवस्था
  463. 16:51कितनी महत्वपूर्ण थी। हालांकि समय के साथ
  464. 16:54मगध जैसे केंद्रीयकृत राजतंत्र ज्यादा
  465. 16:57शक्तिशाली साबित हुए।
  466. 16:58ऐसा क्यों हुआ? गणतंत्र वाली व्यवस्था तो
  467. 17:01ज्यादा लोकतांत्रिक लगती है। फिर राजाओं
  468. 17:03वाले राज्य आगे कैसे निकल गए?
  469. 17:05देखिए इसकी मुख्य वजह थी फैसले लेने की
  470. 17:07रफ्तार और संसाधनों पर पूरा नियंत्रण।
  471. 17:10हम
  472. 17:10एक राजा तेजी से सेना खड़ी कर सकता था।
  473. 17:13हमले का आदेश दे सकता था और कर वसूल सकता
  474. 17:15था।
  475. 17:16सही बात है।
  476. 17:17गणसंघ में इन सब चीजों के लिए बहस करनी
  477. 17:19पड़ती थी। जिससे वे सैन्य रूप से थोड़े
  478. 17:21कमजोर पड़ जाते थे।
  479. 17:23और इसी दौड़ में एक महाजनपद बाकी सब पर
  480. 17:26भारी पड़ गया।
  481. 17:27जी।
  482. 17:27और वो था मगध। मगध
  483. 17:29तो इन 16 खिलाड़ियों में से मगध ही वो
  484. 17:32चैंपियन कैसे बना जो आखिर में सबको हराकर
  485. 17:35एक साम्राज्य की नीव रखेगा।
  486. 17:37मगध की सफलता के पीछे कोई एक कारण नहीं था
  487. 17:40बल्कि कई चीजों का एक बेहतरीन मेल था।
  488. 17:43अच्छा।
  489. 17:43पहली बात जमीन। यह इलाका गंगा के मैदान
  490. 17:47में था जो बहुत ज्यादा उपजाऊ था। यानी
  491. 17:50खेती से काफी आमदनी होती थी।
  492. 17:52ठीक है।
  493. 17:52दूसरा संसाधन। आज के झारखंड के इलाके में
  494. 17:56लोहे की खदानें थी जिससे मजबूत हथियार और
  495. 17:59औजार बनाना आसान था। तीसरा जंगली इलाकों
  496. 18:02में हाथी बहुतायत में थे।
  497. 18:03हाथी यह सुनने में थोड़ा अजीब लगता है।
  498. 18:07क्या वे सच में इतने प्रभावी थे? मेरा
  499. 18:09मतलब है आज के टैंकों की तरह।
  500. 18:11एक तरह से? हां। सोचिए सामने से आते
  501. 18:15हाथियों की एक दीवार किसी भी पैदल सेना का
  502. 18:18मनोबल तोड़ सकती थी। हम यह तो है।
  503. 18:20वे किलों के दरवाजे तोड़ने और दलदली
  504. 18:23इलाकों को पार करने में भी माहिर थे। यह
  505. 18:25मगध के लिए एक बहुत बड़ा सामरिक लाभ था।
  506. 18:28जो दूसरे महाजनपदों के पास नहीं था।
  507. 18:30सही।
  508. 18:31और आखिर में नदियां। गंगा और उसकी सहायक
  509. 18:34नदियां एक एक नेचुरल हाईवे की तरह थी।
  510. 18:37जिससे व्यापार और सेना की आवाजाही बहुत
  511. 18:40सस्ती और आसान हो गई थी।
  512. 18:42तो प्राकृतिक रूप से मगध के पास बहुत
  513. 18:44फायदे थे। लेकिन इसमें वहां के शासकों की
  514. 18:47भी तो कोई भूमिका रही होगी। बिल्कुल बौद्ध
  515. 18:50और जैन लेखकों के अनुसार बिंबिसार आजात
  516. 18:53शत्रु और महापद्मानंद जैसे शासक बहुत
  517. 18:56महत्वाकांक्षी और काबिल थे।
  518. 18:58हम
  519. 18:58उन्होंने इन प्राकृतिक फायदों का भरपूर
  520. 19:00इस्तेमाल किया। शुरू में राजधानी राजगृह
  521. 19:03थी जो पहाड़ों से घिरी एक सुरक्षित जगह
  522. 19:05थी।
  523. 19:06अच्छा।
  524. 19:06बाद में राजधानी को पाटलिपुत्र यानी आज के
  525. 19:09पटना ले जाया गया। जो नदियों के संगम पर
  526. 19:13एक रणनीतिक जगह थी। यह सारे फैसले मगध को
  527. 19:17अनस्टपेबल बना रहे थे।
  528. 19:19और इसी शक्ति का नतीजा था मौर्य साम्राज्य
  529. 19:21का उदय।
  530. 19:22जी। लगभग 321 ईसा पूर्व में चंद्रगुप्त
  531. 19:26मौर्य ने इस साम्राज्य की नींव रखी जो मगध
  532. 19:28से शुरू होकर अफगानिस्तान और बलूचिस्तान
  533. 19:31तक फैल गया।
  534. 19:32यानी भारतीय उपमहाद्वीप का पहला इतना
  535. 19:35विशाल साम्राज्य।
  536. 19:36जी हां। और उनके पोते अशोक ने कलिंग यानी
  537. 19:40आज के उड़ीसा को जीतकर इस साम्राज्य को
  538. 19:42अपने चरम पर पहुंचाया।
  539. 19:44मौर्य साम्राज्य के बारे में जानने के लिए
  540. 19:46हमारे पास स्रोत क्या-क्या हैं? जाहिर है
  541. 19:48अशोक के अभिलेख तो हैं ही जिनके बारे में
  542. 19:51हमने बात की।
  543. 19:51अभिलेख सबसे महत्वपूर्ण स्रोतों में से
  544. 19:53हैं। अशोक पहले ऐसे सम्राट थे जिन्होंने
  545. 19:56सीधे अपनी प्रजा से बात करने के लिए
  546. 19:58पत्थरों और स्तंभों पर संदेश खुदवाए।
  547. 20:01हम्म।
  548. 20:01लेकिन इसके अलावा भी बहुत कुछ है। हमें उस
  549. 20:04दौर की मूर्तियां मिली हैं। चंद्रगुप्त के
  550. 20:06दरबार में एक यूनानी राजदूत था मेगस्थनीज।
  551. 20:09मेगस्थनीज
  552. 20:10हां।
  553. 20:10उसने इंडिका नाम की किताब लिखी। हालांकि
  554. 20:13उसका मूल रूप तो नहीं मिला लेकिन बाद के
  555. 20:15लेखकों ने उसके अंशों का इस्तेमाल किया है
  556. 20:18और फिर एक और ग्रंथ है जिसका जिक्र करना
  557. 20:20बहुत जरूरी है।
  558. 20:21आप कौटिल्य के अर्थशास्त्र की बात कर रहे
  559. 20:24हैं।
  560. 20:24यह ग्रंथ हमें मौर्य प्रशासन के बारे में
  561. 20:27ऐसा क्या बताता है जो अशोक के अभिलेखों से
  562. 20:29पता नहीं चलता।
  563. 20:30अर्थशास्त्र एक बहुत ही अलग तस्वीर पेश
  564. 20:33करता है। अशोक के अभिलेखों में हमें धम,
  565. 20:35नैतिकता और शांति की बातें मिलती हैं।
  566. 20:38हां।
  567. 20:38वहीं अर्थशास्त्र शासन कला पर एक बहुत ही
  568. 20:41व्यवहारिक यहां तक कि कुछ हद तक कठोर
  569. 20:44ग्रंथ है।
  570. 20:45अच्छा।
  571. 20:45यह जासूसी कैसे की जाए, कर कैसे वसूला जाए
  572. 20:49और राज्य को किसी भी कीमत पर कैसे मजबूत
  573. 20:51बनाया जाए इस पर जोर देता है। यह हमें याद
  574. 20:54दिलाता है कि मौर्य साम्राज्य सिर्फ धम्म
  575. 20:57के आदर्शों पर नहीं बल्कि एक बहुत ही
  576. 20:59संगठित और सख्त प्रशासनिक मशीनरी पर भी
  577. 21:02चलता था।
  578. 21:02यानी दोनों को साथ में पड़ने पर ही हमें
  579. 21:04पूरी तस्वीर मिलती है।
  580. 21:05तो इस विशाल साम्राज्य का प्रशासन चलता
  581. 21:08कैसे था? राजधानी पाटलिपुत्र से लेकर दूर
  582. 21:11अफगानिस्तान तक सब कुछ एक जैसा तो नहीं हो
  583. 21:13सकता?
  584. 21:14बिल्कुल नहीं। साम्राज्य का नियंत्रण हर
  585. 21:16जगह एक जैसा नहीं था। राजधानी पाटलिपुत्र
  586. 21:19और चार प्रांतीय केंद्रों तक्षशिला,
  587. 21:22उज्जैनी, तोसली और सुवर्णगिरी पर सबसे
  588. 21:26मजबूत पकड़ थी।
  589. 21:27हम
  590. 21:28और इन केंद्रों को बहुत सोच समझकर चुना
  591. 21:31गया था। तक्षशिला और उज्जैनी लंबे
  592. 21:34व्यापारिक रास्तों पर थे। तो वहीं
  593. 21:36सुवर्णगिरी जिसका मतलब ही है सोने का
  594. 21:38पहाड़ कर्नाटक की सोने की खदानों के पास
  595. 21:41था।
  596. 21:42अच्छा
  597. 21:42इन केंद्रों के बीच आवाजाही के लिए जमीनी
  598. 21:45और नदी दोनों मार्गों का इस्तेमाल होता
  599. 21:47था।
  600. 21:48और इतने बड़े अलग-अलग संस्कृतियों वाले
  601. 21:50साम्राज्य को एक साथ जोड़े रखने के लिए
  602. 21:53अशोक ने क्या किया? क्या सिर्फ सेना का डर
  603. 21:56काफी था?
  604. 21:57नहीं। अशोक को यह एहसास हुआ कि सिर्फ
  605. 21:59सैन्य ताकत से इतने बड़े साम्राज्य को
  606. 22:02एकजुट नहीं रखा जा सकता। इसीलिए उन्होंने
  607. 22:05धम्म का प्रचार किया।
  608. 22:06धम्म
  609. 22:07यह कोई नया धर्म नहीं था बल्कि एक नैतिक
  610. 22:10संहिता थी। हम
  611. 22:11इसमें बड़ों का आदर, ब्राह्मणों और
  612. 22:14सन्यासियों को दान देना, दासों और सेवकों
  613. 22:17से अच्छा व्यवहार करना और दूसरे धर्मों का
  614. 22:20सम्मान करना शामिल था।
  615. 22:21तो एक तरह का सामाजिक गोंद था यह।
  616. 22:24हां, कह सकते हैं जो अलग-अलग मान्यताओं
  617. 22:27वाले लोगों को एक साम्राज्य के नागरिक के
  618. 22:29रूप में एक साथ बांधने की कोशिश थी। इसके
  619. 22:32प्रचार के लिए उन्होंने धम्म महामात नाम
  620. 22:35के विशेष अधिकारी भी नियुक्त किए।
  621. 22:37यह तो हुई राजाओं और साम्राज्य की बात।
  622. 22:40लेकिन इस दौर में एक आम इंसान की एक किसान
  623. 22:44की जिंदगी कैसी थी? क्या साम्राज्य की चमक
  624. 22:46उन तक पहुंच रही थी?
  625. 22:48ये एक बहुत जरूरी सवाल है। और इसका जवाब
  626. 22:51हमें अभिलेखों में नहीं बल्कि जातक कथाओं
  627. 22:54जैसी कहानियों में मिलता है।
  628. 22:55अच्छा। एक जातक कथा में एक बहुत ही
  629. 22:57दिलचस्प कहानी है। एक राजा भेष बदलकर अपनी
  630. 23:01प्रजा से यह जानने के लिए निकलता है कि वे
  631. 23:03उसके बारे में क्या सोचते हैं और वह यह
  632. 23:05सुनकर हैरान रह जाता है कि लोग उसे डाकू
  633. 23:08कहते हैं। वे शिकायत करते हैं कि दिन में
  634. 23:11राजा के कर अधिकारियों उन्हें लूटते हैं
  635. 23:13और रात में चोर।
  636. 23:14बाप रे।
  637. 23:16यह हमें बताता है कि राजा और प्रजा के बीच
  638. 23:18संबंध अक्सर तनावपूर्ण रहते थे और आम
  639. 23:21लोगों के लिए जीवन कितना कठिन था। तो
  640. 23:23जाहिर है कि किसान ज्यादा से ज्यादा ऊपर
  641. 23:25जुगाना चाहते होंगे ताकि कर चुकाने के बाद
  642. 23:28भी उनके पास कुछ बचे। इसके लिए क्या नए
  643. 23:31तरीके अपनाए जा रहे थे?
  644. 23:32दो बड़े बदलाव हुए। पहला था लोहे के फाल
  645. 23:35वाले हल का इस्तेमाल जिसने गंगा और कावेरी
  646. 23:38जैसी उपजाऊ घाटियों में खेती को बहुत आसान
  647. 23:40बना दिया।
  648. 23:41ठीक है।
  649. 23:42दूसरा और शायद ज्यादा महत्वपूर्ण था धान
  650. 23:45की रोपाई की तकनीक।
  651. 23:46अच्छा यह क्या थी? इसमें पहले बीज से पौधे
  652. 23:49तैयार किए जाते हैं और फिर उन्हें पानी से
  653. 23:51भरे खेतों में लगाया जाता है। इससे
  654. 23:53पैदावार में जबरदस्त उछाल आया। साथ ही
  655. 23:57सिंचाई के लिए कुएं, तालाब और नहरे भी
  656. 23:59बनाई गई।
  657. 24:00लेकिन क्या उत्पादन बढ़ने का फायदा समाज
  658. 24:02में सबको बराबर मिला?
  659. 24:04नहीं, ऐसा नहीं हुआ। समाज में असमानता
  660. 24:07बढ़ने लगी।
  661. 24:08हम
  662. 24:08हमें एक तरफ भूमिहीन खेतीहर मजदूर मिलते
  663. 24:11हैं तो दूसरी तरफ छोटे किसान और फिर
  664. 24:13बड़े-बड़े जमींदार।
  665. 24:15अच्छा। पाली भाषा के ग्रंथों में गहपति
  666. 24:18शब्द मिलता है जो घर का मुखिया होता था और
  667. 24:21जमीन पर उसका नियंत्रण होता था। गांव में
  668. 24:24बड़े जमींदार और ग्राम प्रधान अक्सर बहुत
  669. 24:27शक्तिशाली हो जाते थे और किसानों पर अपना
  670. 24:29दबदबा रखते थे।
  671. 24:30तो उत्पादन जरूर बढ़ा लेकिन उसके साथ-साथ
  672. 24:34ग्रामीण समाज में अमीर और गरीब का फर्क भी
  673. 24:37गहरा होता गया।
  674. 24:38बिल्कुल।
  675. 24:38और गांवों से बाहर शहरों में क्या हो रहा
  676. 24:41था? क्योंकि इस अध्याय का नाम राजा किसान
  677. 24:44और नगर है।
  678. 24:45छठी शताब्दी ईसा पूर्व से ही नए-नए शहर
  679. 24:48बसने लगे थे। इनमें से कई तो महाजनपदों की
  680. 24:52राजधानियां ही थी। जैसे पाटलिपुत्र,
  681. 24:54उज्जैनी और मथुरा। हम
  682. 24:57इन शहरों में शासक वर्ग और अमीर लोग रहते
  683. 25:00थे। हमें खुदाई में शानदार मिट्टी के
  684. 25:02बर्तन मिले हैं जिन्हें उत्तरी कृष्ण
  685. 25:04मार्जित पात्र कहते हैं जो शायद अमीर लोग
  686. 25:07इस्तेमाल करते थे।
  687. 25:08अच्छा। और इन शहरों से व्यापार भी खूब
  688. 25:11फलता फूलता था।
  689. 25:12यह व्यापार कहां-कहां तक फैला हुआ था?
  690. 25:14यह उपमहाद्वीप के भीतर भी था और बाहर भी।
  691. 25:17जमीनी रास्ते मध्य एशिया तक और समुद्री
  692. 25:20रास्ते रोमन साम्राज्य और दक्षिण पूर्व
  693. 25:22एशिया तक जाते थे।
  694. 25:24और इस लंबे व्यापार को सिक्कों ने बहुत
  695. 25:26आसान बना दिया होगा।
  696. 25:28बिल्कुल। चीजों के बदले चीजें देने की जगह
  697. 25:30अब सिक्कों से लेनदेन होने लगा।
  698. 25:32सिक्कों का जिक्र भी दिलचस्प है। क्या
  699. 25:34सिक्कों की अपनी कोई कहानी है? वे हमें उस
  700. 25:37दौर के बारे में क्या बताते हैं?
  701. 25:39बिल्कुल। सिक्के इतिहास के बहुत
  702. 25:41महत्वपूर्ण गवाह होते हैं। सबसे पुराने
  703. 25:43सिक्के आहत सिक्के या पंचमार्क्ड कॉइंस
  704. 25:46थे।
  705. 25:46पंचमार्क्ड
  706. 25:47जी। यह चांदी और तांबे के बने होते थे। उन
  707. 25:50पर बस कुछ निशान ठोक दिए जाते थे। किसी
  708. 25:53राजा का नाम नहीं होता था।
  709. 25:54हम
  710. 25:55शासकों के नाम और उनकी तस्वीर वाले पहले
  711. 25:57सिक्के हिंद यूनानी राजाओं ने जारी किए।
  712. 25:59यह एक बड़ा बदलाव था। अब सिक्का सिर्फ
  713. 26:02पैसा नहीं था बल्कि राजा की शक्ति का
  714. 26:04प्रतीक भी था। और सोने के सिक्कों की
  715. 26:06शुरुआत कब हुई?
  716. 26:07पहले सोने के सिक्के पहली शताब्दी ईवी में
  717. 26:09कुषाण राजाओं ने जारी किए जो वजन और आकार
  718. 26:12में रोमन सिक्कों जैसे ही थे।
  719. 26:14अच्छा इससे तो उस दौर के अंतरराष्ट्रीय
  720. 26:17व्यापार का अंदाजा लगता है।
  721. 26:18बिल्कुल और बाद में गुप्त शासकों ने तो
  722. 26:21कुछ सबसे बेहतरीन सोने के सिक्के जारी किए
  723. 26:23हैं। इन सिक्कों की मौजूदगी या कमी हमें
  724. 26:26किसी राज्य की आर्थिक सेहत के बारे में
  725. 26:28बहुत कुछ बताती है।
  726. 26:29तो हमने अभिलेखों, ग्रंथों, सिक्कों और
  727. 26:32पुरातात्विक सबूतों की बात की। यह सब
  728. 26:34मिलकर हमें उस दौर की एक तस्वीर देते हैं।
  729. 26:38लेकिन क्या इन स्रोतों की कोई सीमाएं हैं?
  730. 26:40क्या कोई ऐसी चीज है जो यह हमें नहीं बता
  731. 26:43पाते?
  732. 26:43बिल्कुल। और यह समझना बहुत जरूरी है।
  733. 26:46हम
  734. 26:46अभिलेखों की ही बात करें तो कई बार अक्षर
  735. 26:49इतने हल्के खुदे होते हैं कि उन्हें पढ़ना
  736. 26:52मुश्किल होता है या समय के साथ अभिलेख
  737. 26:54नष्ट हो जाते हैं।
  738. 26:55ठीक है। यह तो तकनीकी सीमा हुई।
  739. 26:57जी। लेकिन एक इससे भी बड़ी वैचारिक सीमा
  740. 27:00है। अभिलेख हमेशा उन्हीं लोगों के विचार
  741. 27:03बताते हैं जो उन्हें बनवाते थे। यानी राजा
  742. 27:06या कोई अमीर व्यक्ति।
  743. 27:07मतलब हमें सिर्फ एक तरफ की कहानी पता चलती
  744. 27:10है।
  745. 27:10ठीक यही बात है। अभिलेख हमें यह बताते हैं
  746. 27:13कि राजा अपनी प्रजा को क्या बताना चाहता
  747. 27:17था या वह अपनी उपलब्धियों को कैसे देखता
  748. 27:19था। हम्म।
  749. 27:20लेकिन एक आम किसान की जिंदगी की रोजमर्रा
  750. 27:23की खुशियां और परेशानियां, खेती की
  751. 27:25तकनीकें, महिलाओं का जीवन इन सब पर अभिलेख
  752. 27:29पूरी तरह से खामोश हैं।
  753. 27:30तो इन सबका क्या अर्थ निकाला जाए? इतिहास
  754. 27:34को समझने के लिए हमें इन आवाजों और
  755. 27:37खामोशियों दोनों को कैसे देखना चाहिए?
  756. 27:40इसका अर्थ यह है कि इतिहासकार को एक जासूस
  757. 27:42की तरह काम करना पड़ता है।
  758. 27:44हम
  759. 27:44उसे हर स्रोत पर सवाल उठाना पड़ता है। उसे
  760. 27:47यह समझना होता है कि जो लिखा गया है वो
  761. 27:49क्यों लिखा गया है और किसके लिए लिखा गया
  762. 27:51है
  763. 27:51और जो नहीं लिखा गया है
  764. 27:53और जो नहीं लिखा गया है वो क्यों नहीं
  765. 27:54लिखा गया। अभिलेख हमें शासकों की दुनिया
  766. 27:57की झलक देते हैं। लेकिन आम जनता की दुनिया
  767. 27:59को समझने के लिए हमें कथाओं, लोक कथाओं और
  768. 28:03पुरातात्विक अवशेषों जैसे दूसरे सुरागों
  769. 28:05को जोड़ना पड़ता है।
  770. 28:06पूरी कहानी कभी भी किसी एक स्रोत में नहीं
  771. 28:09मिलती।
  772. 28:09यह एक बहुत ही दिलचस्प विरोधाभास है। अशोक
  773. 28:13अपने अभिलेखों में कलिंग युद्ध के बाद
  774. 28:16अपनी पीड़ा और पश्चाताप की बात करते हैं।
  775. 28:19जी। यह इतिहास के सबसे शक्तिशाली स्रोतों
  776. 28:22में से एक है। लेकिन उन्हीं अभिलेखों में
  777. 28:24हमें उन लाखों लोगों की पीड़ा के बारे में
  778. 28:27एक शब्द भी नहीं मिलता जो उस युद्ध में
  779. 28:30मारे गए या बेघर हुए।
  780. 28:32यही इतिहास की सबसे बड़ी चुनौती है। यह
  781. 28:34हमें याद दिलाता है कि इतिहास अक्सर
  782. 28:36विजेताओं या शक्तिशाली लोगों की कलम से
  783. 28:38लिखा जाता है।
  784. 28:39हम
  785. 28:39उनकी आवाज पत्थरों पर हमेशा के लिए खुद
  786. 28:41जाती है। लेकिन उन लोगों की आवाजें जिनके
  787. 28:44पास लिखने के लिए पत्थर या स्तंभ नहीं थे।
  788. 28:46अक्सर समय के धूल में खो जाती हैं।
  789. 28:49तो आज की इस चर्चा के बाद सोचने के लिए एक
  790. 28:51बात यह भी है कि हमें इतिहास में लिखे हुए
  791. 28:54शब्दों के साथ-साथ उन खामोशियों को भी
  792. 28:57पढ़ना सीखना होगा। शायद उन लोगों की कहानी
  793. 29:00जो अपनी कहानी खुद नहीं लिख सके ही ज्यादा
  794. 29:04बड़ी और ज्यादा मानवीय कहानी है।
  795. 29:06बिल्कुल। हमें हमेशा यह पूछना चाहिए कि
  796. 29:09किसकी कहानी हमें सुनाई जा रही है और
  797. 29:11किसकी कहानी अनकही रह गई है।
  798. 29:14राजा, किसान और नगर अध्याय पर हमारी यह
  799. 29:18गहन चर्चा समाप्त हुई।
  800. 29:22हमारे आज के सोर्सेज हमें एक बहुत ही
  801. 29:25दिलचस्प सवाल की तरफ ले जाते हैं।
  802. 29:27हम
  803. 29:28एक तरफ है प्राचीन भारत के वो ग्रंथ जो
  804. 29:31समाज के लिए एकदम सटीक नियम कानून बनाते
  805. 29:33हैं।
  806. 29:34बिल्कुल।
  807. 29:34शादी कैसे होगी? जायदाद किसे मिलेगी,
  808. 29:37किसका दर्जा ऊंचा होगा और किसका नीचा? और
  809. 29:40दूसरी तरफ है उस समय की असली दुनिया।
  810. 29:42जो इन नियमों से बिल्कुल अलग कहीं ज्यादा
  811. 29:45उलझी हुई और अपनी धुन में चलती थी।
  812. 29:48हां।
  813. 29:49बिल्कुल। ये एक तरह की खींचतान है। मतलब
  814. 29:51आदर्श और वास्तविकता के बीच।
  815. 29:53सही।
  816. 29:54और इस खींचतान को समझने के लिए हमारे पास
  817. 29:56सबसे बड़ा और मजेदार सोर्स है महाभारत।
  818. 29:58हम्म। हम्म।
  819. 29:59ये सिर्फ कौरवों और पांडवों की लड़ाई की
  820. 30:01कहानी नहीं है।
  821. 30:02बल्कि ये उस दौर के समाज का एक आईना है।
  822. 30:04अच्छा।
  823. 30:05जिसमें नियमों को लेकर चल रही जद्दोजहद
  824. 30:07साफ दिखती है।
  825. 30:08तो आज हम इसी पर गहरी नजर डालेंगे। हम ये
  826. 30:11समझने की कोशिश करेंगे कि ये नियम आखिर थे
  827. 30:14क्या?
  828. 30:14इन्हें किसने बनाया और असल जिंदगी में लोग
  829. 30:18इन्हें कितना मानते थे।
  830. 30:19बिल्कुल। चलिए शुरुआत महाभारत से ही करते
  831. 30:22हैं। हमें बताया गया है कि 1919 में वीएस
  832. 30:26सुथकर नाम के एक विद्वान ने एक बहुत बड़ा
  833. 30:29प्रोजेक्ट शुरू किया था महाभारत का
  834. 30:32क्रिटिकल एडिशन तैयार करने का।
  835. 30:34हां।
  836. 30:34ये था क्या और इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
  837. 30:37ये एक बहुत ही आप कह सकती हैं एंबिशियस
  838. 30:40प्रोजेक्ट था। सोचिए भारत के अलग-अलग
  839. 30:43कोनों से
  840. 30:43कहां-कहां से? कश्मीर से ले के तक संस्कृत
  841. 30:46में लिखी महाभारत की सैकड़ों हाथ से लिखी
  842. 30:49पांडुलिपियां यानी मैनुस्क्रिप्ट्स इकट्ठा
  843. 30:52की गई।
  844. 30:52अच्छा
  845. 30:53मकसद यह था कि इन सब में जो श्लोक कॉमन है
  846. 30:56उन्हें एक जगह इकट्ठा किया जाए।
  847. 30:58और जो अलग है
  848. 30:59और जो रीजनल वेरिएशंस हैं उन्हें फुटनोट्स
  849. 31:01में डाल लिया जाए। इस काम को पूरा होने
  850. 31:03में 47 साल लग गए।
  851. 31:0547 साल तो इससे पता क्या चला? क्या पूरे
  852. 31:08देश में एक ही महाभारत की कहानी चल रही
  853. 31:10फैसिनेटिंग बात यही है। एक तरफ तो यह दिखा
  854. 31:13कि कहानी का जो कोर स्ट्रक्चर था वो लगभग
  855. 31:16पूरे उपमहाद्वीप में एक जैसा था।
  856. 31:18हम्म।
  857. 31:19लेकिन साथ ही हजारों छोटे-छोटे अंतर भी
  858. 31:21सामने आए।
  859. 31:22अच्छा।
  860. 31:22और ये अंतर दिखाते हैं कि महाभारत कोई
  861. 31:25पत्थर की लकीर नहीं थी। यह एक डायनेमिक
  862. 31:28यानी एक जीवंत ग्रंथ था।
  863. 31:30जीवंत ग्रंथ मतलब
  864. 31:32मतलब जब यह कहानी एक जगह से दूसरी जगह
  865. 31:34जाती थी तो लोग उसमें अपनी स्थानीय
  866. 31:36मान्यताएं, अपनी कहानियां जोड़ देते थे।
  867. 31:39यह ग्रंथ लोगों के साथ सांस ले रहा था,
  868. 31:41बदल रहा था।
  869. 31:42ओके। तो इसे ऐसे समझते हैं महाभारत सिर्फ
  870. 31:46एक कहानी नहीं बल्कि एक तरह का सोशल
  871. 31:49डॉक्यूमेंट है जो हमें उस समय के समाज के
  872. 31:52बारे में बताता है।
  873. 31:53बिल्कुल।
  874. 31:54और इस कहानी के केंद्र में है एक परिवार
  875. 31:56का झगड़ा सत्ता और संपत्ति को लेकर।
  876. 31:59सही।
  877. 31:59यहीं से शायद हमें उस समय के पारिवारिक
  878. 32:02नियमों के बारे में कुछ पता चलता है।
  879. 32:03बिल्कुल सही। महाभारत की पूरी लड़ाई
  880. 32:06पितृवंशिकता या पैट्रिलिनी के आदर्श पर
  881. 32:09टिकी है।
  882. 32:09पितृ वंशिकता
  883. 32:10हां यह एक बहुत सीधा सा नियम था। पिता के
  884. 32:13बाद उसकी संपत्ति और पद पर उसके बेटों का
  885. 32:16हक होगा और फिर उनके बेटों का तो वंश
  886. 32:18पुरुषों के नाम से ही आगे बढ़ेगा।
  887. 32:20इसीलिए हस्तिनापुर के सिंहासन के लिए
  888. 32:23कौरवों और पांडवों में युद्ध हुआ।
  889. 32:25एग्जैक्टली क्योंकि दोनों ही खुद को
  890. 32:27सिंहासन का असली वारिस मानते थे।
  891. 32:29लेकिन यह तो राजघरानों की बात हुई। क्या
  892. 32:32आम परिवारों में भी यही सिस्टम था?
  893. 32:34ज्यादातर मामलों में हां, यही आदर्श था।
  894. 32:37ग्रंथों में परिवार के लिए कुल शब्द का
  895. 32:39इस्तेमाल होता था और रिश्तेदारों के बड़े
  896. 32:41समूह के लिए जाति का।
  897. 32:43पितृंशिकता का आदर्श इतना मजबूत था कि जिन
  898. 32:46राजाओं के बेटे नहीं होते थे, वे बहुत
  899. 32:49चिंतित हो जाते थे। हालांकि कभी-कभी भाई
  900. 32:52या दूसरे रिश्तेदार भी राजा बन जाते थे।
  901. 32:54लेकिन पहली प्राथमिकता हमेशा बेटे को ही
  902. 32:56दी जाती थी।
  903. 32:57हां, पहली प्राथमिकता बेटे की ही थी। यह
  904. 32:59एग्जाम्स के लिए जरूरी है।
  905. 33:01तो अगर वंश बेटों से जलना है तो यह तय
  906. 33:04करना बहुत जरूरी हो जाता होगा कि शादी
  907. 33:06कैसे हो ताकि वंश की शुद्धता बनी रहे।
  908. 33:09यहीं पर शादी के नियम कानून आते होंगे।
  909. 33:12बिल्कुल। धर्मसूत्र और धर्मशास्त्र जैसे
  910. 33:14ग्रंथों में ब्राह्मणों ने शादी के लिए
  911. 33:16बड़े डिटेल्ड नियम बनाए। सबसे अच्छा तरीका
  912. 33:19माना जाता था बहिर्विवाह यानी एग्जोगैमी।
  913. 33:22इसका मतलब था अपने गोत्र से बाहर शादी
  914. 33:24करना।
  915. 33:25हां, गोत्र से बाहर इसे उत्तम माना जाता
  916. 33:28था। गोत्र यह तो आज के बहुत सुनने में आता
  917. 33:31है। इसका कांसेप्ट क्या था?
  918. 33:33देखिए लगभग हजार ईसा पूर्व के बाद
  919. 33:36ब्राह्मणों ने लोगों को गोत्रों में
  920. 33:38बांटना शुरू किया। हर गोत्र का नाम एक
  921. 33:41वैदिक ऋषि के नाम पर होता था।
  922. 33:43अच्छा।
  923. 33:43और माना जाता था कि उस गोत्र के सभी सदस्य
  924. 33:47उसी ऋषि के वंशज हैं। तो नियम यह बनाया
  925. 33:49गया कि एक ही गोत्र के लोग आपस में शादी
  926. 33:52नहीं कर सकते। और एक और नियम था ना
  927. 33:54हां कि शादी के बाद औरत को अपने पिता का
  928. 33:57गोत्र छोड़कर पति का गोत्र अपनाना होता
  929. 34:00था।
  930. 34:00यह तो बड़ा सख्त नियम लगता है। क्या सब
  931. 34:02लोग इसे मानते थे? यहां भी हमें नियम बनाम
  932. 34:05असलियत वाली खींचतान दिखती है।
  933. 34:07बिल्कुल दिखती है और इसका सबसे अच्छा
  934. 34:09उदाहरण सातवाहन राजाओं से मिलता है।
  935. 34:11जो दक्कन के इलाके में राज करते थे।
  936. 34:13हां, उनके नामों को अगर हम देखें तो पता
  937. 34:15चलता है कि उन्होंने इन नियमों को पूरी
  938. 34:17तरह नहीं माना। कई सातवाहन रानियों ने
  939. 34:20शादी के बाद भी अपने पिता का ही गोत्र
  940. 34:23बनाए रखा। पति का नहीं अपनाया।
  941. 34:25यह तो ब्राह्मणों के बनाए नियमों के
  942. 34:27बिल्कुल खिलाफ हुआ।
  943. 34:28हां। और इससे भी ज्यादा दिलचस्प बात यह है
  944. 34:30कि कुछ सातवाहन राजाओं ने तो अंतर्विवाह
  945. 34:33यानी एंडोगैमी का पालन किया।
  946. 34:34मतलब?
  947. 34:35मतलब अपने ही कुल या गोत्र के अंदर शादी
  948. 34:38की जो कि नियमों के सख्त खिलाफ था।
  949. 34:40अच्छा।
  950. 34:41और एक और बात उनके कई राजाओं का नाम उनकी
  951. 34:43मां के नाम से जुड़े हैं।
  952. 34:45अच्छा। तो इसका मतलब यह हुआ कि सातवाहन
  953. 34:47समाज में माताएं बहुत महत्वपूर्ण थी। क्या
  954. 34:50यह समाज मातृंशिक था? मतलब जहां वंश मां
  955. 34:53के नाम से चलता हो?
  956. 34:54ये एक बहुत जरूरी सवाल है। मां का सम्मान
  957. 34:56तो बहुत था लेकिन सत्ता का उत्तराधिकार
  958. 34:58पितृवंशिक ही था।
  959. 34:59मतलब सिंहासन पिता के बाद बेटे को ही
  960. 35:02मिलता था। बेटी को नहीं।
  961. 35:03बिल्कुल। तो सातवाहन एक परफेक्ट एग्जांपल
  962. 35:06है जो दिखाते हैं कि जमीनी हकीकत कितनी
  963. 35:08कॉम्प्लिकेटेड थी। वे ब्राह्मणों के कुछ
  964. 35:10नियम मानते थे, कुछ नहीं मानते थे और अपने
  965. 35:12समाज में मां को बहुत ऊंचा दर्जा भी देते
  966. 35:15थे।
  967. 35:15और शादी के दूसरे तरीकों के बारे में क्या
  968. 35:18जैसे महाभारत में द्रोपदी के पांच पति थे।
  969. 35:21यह तो किसी भी नियम में फिट नहीं बैठता।
  970. 35:23वो बहुपति प्रथा या पॉली एंड्री का उदाहरण
  971. 35:26है। और यह वाकई में बहुत रेयर और
  972. 35:28कंट्रोवर्शियल था।
  973. 35:30महाभारत में भी इस पर बहुत बहस होती है कि
  974. 35:32यह धर्म के अनुसार है या नहीं। इससे पता
  975. 35:35चलता है कि समाज में ऐसी प्रथाएं मौजूद
  976. 35:37थी। भले ही धर्मशास्त्र लिखने वाले
  977. 35:39ब्राह्मण उन्हें पसंद ना करते हो
  978. 35:42और बहुपत्नी प्रथा
  979. 35:43हां बहुपत्नी प्रथा पॉलीजीनी यानी एक
  980. 35:46पुरुष की कई पत्नियां होना राजाओं और अमीर
  981. 35:49लोगों में काफी आम था।
  982. 35:50हम
  983. 35:51धर्मशास्त्रों में तो शादी के आठ प्रकार
  984. 35:53बताए गए हैं। जिनमें से पहले चार को अच्छा
  985. 35:56और बाकी को निंदित माना गया है। इसमें
  986. 35:58कन्यादान एक महत्वपूर्ण कर्तव्य था। ये
  987. 36:00एग्जाम्स के लिए जरूरी है।
  988. 36:02तो एक तरफ परिवार और शादी के नियम है जो
  989. 36:04काफी उलझे हुए हैं। लेकिन समाज को बांटने
  990. 36:07का एक और बड़ा सिस्टम था वर्ण व्यवस्था।
  991. 36:11क्या यह भी उतनी ही फ्लेक्सिबल थी?
  992. 36:12धर्मसूत्रों और धर्म शास्त्रों के हिसाब
  993. 36:15से तो बिल्कुल नहीं। उन्होंने समाज को चार
  994. 36:17वर्णों में बांटा और इसे एक दैय व्यवस्था
  995. 36:20बताया।
  996. 36:20देय व्यवस्था
  997. 36:22मतलब इसे भगवान ने बनाया है और इसे बदला
  998. 36:24नहीं किया जा सकता। यह जन्म पर आधारित थी।
  999. 36:27चार वर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और
  1000. 36:30शूद्र।
  1001. 36:31सही। सबसे ऊपर ब्राह्मण जिनका काम पढ़ना,
  1002. 36:34पढ़ाना और यज्ञ करना था। फिर क्षत्रिय जो
  1003. 36:37शासक और योद्धा थे। तीसरे नंबर पर वैश्य
  1004. 36:41जो किसान, व्यापारी और पशुपालक थे और सबसे
  1005. 36:44नीचे शूद्र।
  1006. 36:45जिनका काम सिर्फ ऊपर के तीन वर्णों की
  1007. 36:47सेवा करना था।
  1008. 36:48बिल्कुल।
  1009. 36:49यह तो समाज का एक बहुत ही साफ-सुथरा एकदम
  1010. 36:51रिजिड ढांचा लगता है। लेकिन क्या असल में
  1011. 36:54ऐसा था? क्या सारे राजा क्षत्रिय ही होते
  1012. 36:57थे?
  1013. 36:57यहां पर कहानी और भी इंटरेस्टिंग हो जाती
  1014. 36:59है। बिल्कुल नहीं।
  1015. 37:01नहीं।
  1016. 37:01इतिहास ऐसे राजाओं से भरा पड़ा है जो
  1017. 37:04क्षत्रिय नहीं थे। मौर्य वंश को ही लीजिए।
  1018. 37:06हम
  1019. 37:06बौद्ध ग्रंथ तो कहते हैं कि वो क्षत्रिय
  1020. 37:09थे। लेकिन ब्राह्मण ग्रंथ उन्हें निम्न
  1021. 37:11कुल का मानते हैं।
  1022. 37:12अच्छा।
  1023. 37:13मध्यशिया से आए शक शासकों को ब्राह्मण
  1024. 37:16म्लेच यानी बर्बर और बाहरी मानते थे।
  1025. 37:19लेकिन उन्होंने भी यहां शासन किया।
  1026. 37:20और सातवाहन राजा
  1027. 37:22सातवाहन राजा खुद को ब्राह्मण बताते थे।
  1028. 37:24जबकि राजा का काम तो क्षत्रिय का माना
  1029. 37:26जाता है।
  1030. 37:26तो इसका मतलब यह हुआ कि राजा बनने के लिए
  1031. 37:29क्षत्रिय कुल में जन्म लेना जरूरी नहीं
  1032. 37:31था।
  1033. 37:31जरूरी नहीं था। ज्यादा जरूरी था समर्थन और
  1034. 37:34संसाधन जुटाना। जो भी व्यक्ति पावर और
  1035. 37:37रिसोर्सेज इकट्ठा कर सकता था वो राजा बन
  1036. 37:40सकता था। चाहे वो किसी भी वर्ण में पैदा
  1037. 37:41हुआ हो।
  1038. 37:42तो यह इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि
  1039. 37:44ग्रंथों में लिखा आदर्श अपनी जगह था और
  1040. 37:47राजनीतिक हकीकत अपनी जगह।
  1041. 37:49बिल्कुल। यह एग्जाम्स के लिए जरूरी है।
  1042. 37:51वर्ण व्यवस्था के अलावा जाति का भी जिक्र
  1043. 37:53आता है। इन दोनों में क्या फर्क था?
  1044. 37:56यह एक बहुत जरूरी फर्क है। वर्ण सिर्फ चार
  1045. 37:58थे लेकिन जातियां बहुत सारी थी।
  1046. 38:00अच्छा।
  1047. 38:01जातियां भी जन्म पर आधारित थी। लेकिन इनकी
  1048. 38:04कोई निश्चित संख्या नहीं थी। जब भी
  1049. 38:06अर्थव्यवस्था में कोई नया काम करने वाला
  1050. 38:08समूह आता।
  1051. 38:09जैसे
  1052. 38:10जैसे कोई खास तरह के कारीगर या कोई समुदाय
  1053. 38:13जो वर्ण व्यवस्था में फिट नहीं होता तो
  1054. 38:15उन्हें एक अलग जाति का दर्जा दे दिया जाता
  1055. 38:17था। जैसे जंगल में रहने वाले निषाद।
  1056. 38:20तो क्या जातियां भी वर्णों की तरह एकदम
  1057. 38:24फिक्स थी? क्या कोई अपना पेशा नहीं बदल
  1058. 38:27सकता था?
  1059. 38:27इसमें भी हमें फ्लेक्सिबिलिटी दिखती है।
  1060. 38:29इसका एक बहुत अच्छा उदाहरण मंदसौर जो मध्य
  1061. 38:32प्रदेश में है। वहां से मिले एक अभिलेख
  1062. 38:34में है।
  1063. 38:35हम्म।
  1064. 38:35यह रेशम के बुनकरों की एक श्रेणी का
  1065. 38:37अभिलेख है। वे मूल रूप से गुजरात के रहने
  1066. 38:39वाले थे और बाद में मंदसौर आ गए।
  1067. 38:42और वहां आकर
  1068. 38:43वहां आकर उनमें से कुछ ने अपना पुराना
  1069. 38:45पेशा छोड़ दिया और दूसरे काम करने लगे। यह
  1070. 38:47सोशल मोबिलिटी यानी सामाजिक गतिशीलता को
  1071. 38:50दिखाता है।
  1072. 38:51लेकिन इस पूरी व्यवस्था के बाहर भी तो कुछ
  1073. 38:54लोग थे जिन्हें अस्पृश्य या अनटचेबल कहा
  1074. 38:57जाता था। उनकी स्थिति कैसी थी?
  1075. 39:00उनकी स्थिति बहुत ही दयनीय थी। ब्राह्मण
  1076. 39:03कुछ कामों को दूषित मानते थे। जैसे शवों
  1077. 39:06को संभालना।
  1078. 39:07हम
  1079. 39:08इन कामों को करने वालों को चांडाल कहा
  1080. 39:10जाता था। और उन्हें वर्ण व्यवस्था से बाहर
  1081. 39:13सबसे निचले पायदान पर रखा जाता था।
  1082. 39:16मनुस्मृति में उनके लिए बहुत कठोर नियम
  1083. 39:18लिखे गए हैं।
  1084. 39:19जैसे कि
  1085. 39:20जैसे कि उन्हें गांव के बाहर रहना होगा।
  1086. 39:22वे फेंके हुए बर्तनों का ही इस्तेमाल कर
  1087. 39:24सकते थे। वे मृतकों के कपड़े और लोहे के
  1088. 39:27आभूषण पहनते थे।
  1089. 39:28मतलब समाज से बिल्कुल अलग थलग।
  1090. 39:30हां। यहां तक कि पांचवी सदी में जब चीनी
  1091. 39:33बौद्ध भिक्षु फाशियन भारत आए तो उन्होंने
  1092. 39:36लिखा कि इन लोगों को सड़क पर चलते हुए करल
  1093. 39:39बजानी पड़ती थी।
  1094. 39:40करताल? क्यों?
  1095. 39:42ताकि दूसरे लोग उन्हें देखने के दोष से बच
  1096. 39:45जाए। यह सामाजिक भेदभाव का सबसे क्रूर रूप
  1097. 39:48था। यह एग्जाम्स के लिए भी जरूरी है।
  1098. 39:50यह सुनना ही कितना भयानक है। यह नियम
  1099. 39:52संपत्ति के अधिकार पर भी लागू होते होंगे।
  1100. 39:55बिल्कुल।
  1101. 39:55जायदाद का बंटवारा कैसे होता था? क्या
  1102. 39:58औरतों का कोई हक था?
  1103. 39:59मनुस्मृति के अनुसार पिता की संपत्ति का
  1104. 40:01बंटवारा उनकी मृत्यु के बाद सभी बेटों में
  1105. 40:04बराबर होता था।
  1106. 40:05बेटों में।
  1107. 40:06हां। हालांकि कहीं-कहीं ज्येष्ठ पुत्र को
  1108. 40:09एक विशेष हिस्सा देने की बात भी है।
  1109. 40:11स्त्रियां पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी
  1110. 40:13की मांग नहीं कर सकती मतलब उन्हें कुछ
  1111. 40:15नहीं मिलता था।
  1112. 40:16उन्हें शादी के वक्त जो उपहार मिलते थे उन
  1113. 40:18पर उनका अधिकार होता था। इसे स्त्री धन
  1114. 40:21कहा जाता था।
  1115. 40:22अच्छा स्त्री धन
  1116. 40:23इस संपत्ति को उनकी संतान विरासत में पा
  1117. 40:25सकती थी और इस पर उनके पति का कोई हक नहीं
  1118. 40:28होता था।
  1119. 40:29हम
  1120. 40:30लेकिन जाहिर है संपत्ति पर अधिकार भी वर्ण
  1121. 40:32से जुड़ा था। शूद्रों के पास तो संपत्ति
  1122. 40:35जमा करने के मौके ही बहुत कम थे।
  1123. 40:37जबकि राजा और ब्राह्मण अक्सर सबसे धनी
  1124. 40:39होते थे।
  1125. 40:40हां। हालांकि बौद्ध धर्म जैसी परंपराओं ने
  1126. 40:42जन्म पर आधारित इस भेदभाव का कड़ा विरोध
  1127. 40:45किया था।
  1128. 40:45तो हम घूम फिर कर फिर वहीं आ गए। नियम और
  1129. 40:48उन नियमों को चुनौती देती हकीकत।
  1130. 40:50बिल्कुल।
  1131. 40:51अब अगर हम महाभारत को इन सब चीजों की
  1132. 40:53रोशनी में देखें यह पितुवंशिकता, वर्ण
  1133. 40:56व्यवस्था, संपत्ति के झगड़े तो
  1134. 40:59इतिहासकारों के लिए यह ग्रंथ और भी ज्यादा
  1135. 41:01महत्वपूर्ण हो जाता है।
  1136. 41:03हां बिल्कुल।
  1137. 41:03वे इसका विश्लेषण कैसे करते हैं? इसके
  1138. 41:06लेखक कौन थे? यह बहुत दिलचस्प सवाल है।
  1139. 41:08परंपरागत रूप से तो वेदव्यास को इसका
  1140. 41:10रचयिता माना जाता है।
  1141. 41:11लेकिन
  1142. 41:12लेकिन ज्यादातर इतिहासकार मानते हैं कि
  1143. 41:14इसकी मूल कहानी की रचना भाट सारथियों ने
  1144. 41:16की थी। जिन्हें सूत कहा जाता था।
  1145. 41:18सूत
  1146. 41:19हां यह सूत लोग योद्धाओं के साथ युद्ध के
  1147. 41:21मैदान में जाते थे और उनकी जीत और बहादुरी
  1148. 41:24की कविताएं रचते थे। यह कविताएं मौखिक रूप
  1149. 41:26से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जाती रही।
  1150. 41:28तो फिर ब्राह्मणों का रोल कब आया? लगभग
  1151. 41:30पांचवी सदी ईसा पूर्व से जब कुरु और
  1152. 41:32पांचाल जैसे राज्य मजबूत होने लगे तब
  1153. 41:35ब्राह्मणों ने इस कथा को लिखना शुरू किया
  1154. 41:37और इस पर अपना अधिकार जमा लिया।
  1155. 41:38अच्छा।
  1156. 41:39उन्होंने इसमें सामाजिक नियम, उपदेश और
  1157. 41:41धर्म की बातें जोड़ दी।
  1158. 41:42इसीलिए महाभारत के दो हिस्से माने जाते
  1159. 41:44हैं। है ना?
  1160. 41:45हां। इतिहासकार इसके कंटेंट को दो हिस्सों
  1161. 41:48में बांटते हैं। एक है आख्यान यानी
  1162. 41:50कहानियों वाला हिस्सा और दूसरा है
  1163. 41:52उपदेशात्मक।
  1164. 41:53उपदेशात्मक मतलब जिसमें सोशल नॉर्म्स और
  1165. 41:56शिक्षा दी गई हो।
  1166. 41:57बिल्कुल। जिसका सबसे अच्छा उदाहरण भगवत
  1167. 42:00गीता है और यह लिखने की प्रक्रिया लगभग
  1168. 42:021000 साल तक चलती रही।
  1169. 42:041000 साल तो यह ग्रंथ एक सिंगल ऑथर की
  1170. 42:07रचना नहीं बल्कि कई पीढ़ियों का मिलाजुला
  1171. 42:10काम है।
  1172. 42:10सही पकड़ा।
  1173. 42:11यह तो कमाल की बात है। लेकिन क्या हमें
  1174. 42:14जमीन पर मतलब पुरातत्व या आर्कियोलॉजी से
  1175. 42:18भी कुछ सबूत मिलते हैं। महाभारत में
  1176. 42:20हस्तिनापुर जैसे भव्य शहर का जिक्र है।
  1177. 42:22हम्म।
  1178. 42:23क्या वो सच में मौजूद था?
  1179. 42:25यहां पर कहानी एक और दिलचस्प मोड़ लेती
  1180. 42:27है। पुरातत्ववेत्ता बीबी लाल ने मेरठ के
  1181. 42:30पास हस्तिनापुर नाम के एक गांव में खुदाई
  1182. 42:32की।
  1183. 42:32अच्छा तो क्या मिला वहां?
  1184. 42:34उन्हें वहां आबादी के कई स्तर मिले।
  1185. 42:36जिनमें से एक स्तर उस काल का हो सकता है
  1186. 42:39जिसकी चर्चा महाभारत में है।
  1187. 42:40तो क्या उन्हें वहां बड़े-बड़े महल मिले?
  1188. 42:42नहीं। उन्हें वहां कच्ची मिट्टी की
  1189. 42:44दीवारें और सरकंडे के बने घर मिले।
  1190. 42:47क्या?
  1191. 42:47घरों की बनावट बहुत साधारण थी। यह महाभारत
  1192. 42:51में बताए गए हस्तिनापुर के भव्य और आलीशान
  1193. 42:54चित्रण से बिल्कुल भी मेल नहीं खाता।
  1194. 42:56एक मिनट। तो आप यह कह रहे हैं कि जिस भव्य
  1195. 42:59राजधानी के लिए इतनी बड़ी लड़ाई लड़ी गई
  1196. 43:01वह असल में शायद एक साधारण सा गांव था।
  1197. 43:04पुरातात्विक सबूत तो यही इशारा करते हैं।
  1198. 43:07यह दिखाता है कि साहित्यिक वर्णन और जमीनी
  1199. 43:09हकीकत में कितना बड़ा अंतर हो सकता है।
  1200. 43:12हो सकता है कि कहानी का काव्यात्मक वर्णन
  1201. 43:14बहुत बढ़ा चढ़ाकर किया गया हो।
  1202. 43:16बिल्कुल। यह फिर से वही बात साबित करता
  1203. 43:18है। ग्रंथों में लिखे आदर्श और जमीन पर
  1204. 43:21मौजूद वास्तविकता के बीच का फासला। तो
  1205. 43:24इसका मतलब यह है कि महाभारत को एक लिटरल
  1206. 43:27हिस्ट्री बुक की तरह नहीं पढ़ा जा सकता।
  1207. 43:29नहीं पढ़ा जा सकता। यह एक कहानी है, एक
  1208. 43:32महाकाव्य है जो हमें उस समय के समाज की
  1209. 43:35चिंताओं, उसके आदर्शों और उसकी सच्चाइयों
  1210. 43:38की एक झलक देता है।
  1211. 43:40और यह एक गतिशील ग्रंथ है। पीके से समझा
  1212. 43:43और उसकी पुनर्व्याख्या की। और यह सिलसिला
  1213. 43:46आज भी जारी है। हम
  1214. 43:47यह हमें सिखाता है कि इतिहास सिर्फ तथ्यों
  1215. 43:49का संग्रह नहीं है बल्कि इस बात की भी
  1216. 43:52पड़ताल है कि समाज अपने नियम कैसे बनाता
  1217. 43:54है। उन पर कैसे सवाल उठाता है और समय के
  1218. 43:57साथ कैसे बदलता है।
  1219. 43:59अध्याय तीन बंधुत्व, जाति तथा वर्ग समाप्त
  1220. 44:04हुआ।
  1221. 44:07हम एनसीआरटी इतिहास की किताब के बहुत ही
  1222. 44:10दिलचस्प अध्याय में उतर रहे हैं।
  1223. 44:12हां। हां
  1224. 44:12विचारक, विश्वास और इमारतें।
  1225. 44:15हां।
  1226. 44:15ये अध्याय हमें 1000 साल के लंबे सफर पर
  1227. 44:18ले जाता है। करीब 600 ईसा पूर्व से 600
  1228. 44:21ईसवी तक।
  1229. 44:22बिल्कुल। और यह वो दौर था जब भारत में आप
  1230. 44:25कह सकते हैं विचारों का एक तूफान सा आ गया
  1231. 44:28था।
  1232. 44:28हां। यह सिर्फ राजाओं और साम्राज्यों का
  1233. 44:31इतिहास नहीं है।
  1234. 44:32नहीं बिल्कुल नहीं। यह समझने की कोशिश है
  1235. 44:34कि उस जमाने के लोग खासकर बुद्ध और महावीर
  1236. 44:38जैसे महान विचारक जिंदगी को दुनिया को
  1237. 44:41कैसे देखते थे।
  1238. 44:42और उनके ये गहरे विचार सिर्फ मतलब किताबों
  1239. 44:44में नहीं है?
  1240. 44:45नहीं वो पत्थर की इमारतों और मूर्तियों
  1241. 44:47में भी जिंदा है।
  1242. 44:48और इन सबको समझने के लिए हमारे पास एक
  1243. 44:50शानदार गाइड है सांची का स्तूप।
  1244. 44:52हां, हम इसी स्तूप के इर्द-गिर्द घूमते
  1245. 44:55हुए उस दौर के विश्वासों और उनकी कला को
  1246. 44:57समझने की कोशिश करेंगे। तो चलिए इस
  1247. 45:00वैचारिक क्रांति के दौर में चलते हैं जहां
  1248. 45:03सोच को पत्थर में ढाला जा रहा था। [हंसी]
  1249. 45:07तो शुरुआत सांची से ही करते हैं।
  1250. 45:08हम एक बात मुझे हमेशा हैरान करती है।
  1251. 45:11क्या?
  1252. 45:12कि सांची का स्तूप आज भी इतनी अच्छी हालत
  1253. 45:14में खड़ा है, जबकि उसी दौर का अमरावती का
  1254. 45:18स्तूप लगभग खत्म हो चुका है।
  1255. 45:20ऐसा क्यों?
  1256. 45:21क्या सांची की सिर्फ किस्मत अच्छी थी? हम
  1257. 45:23किस्मत तो थी लेकिन साथ में कुछ लोगों की
  1258. 45:26सूझ-बूझ और दूरदृष्टि भी थी।
  1259. 45:29अच्छा
  1260. 45:29देखिए 19वीं सदी में यूरोप के लोगों में
  1261. 45:33भारतीय कलाकृतियों को अपने देश ले जाने की
  1262. 45:36एक होड़ सी लगी थी। फ्रांसीसी और अंग्रेज
  1263. 45:39दोनों की नजर सांची के सबसे खूबसूरत
  1264. 45:42पूर्वी तोरण द्वार पर थी।
  1265. 45:43ओहो
  1266. 45:44दोनों ने उसे अपने म्यूजियम में ले जाने
  1267. 45:46की इजाजत मांगी। मतलब अगर इजाजत मिल जाती
  1268. 45:49तो आज सांची का वो मशहूर गेटवे शायद लंदन
  1269. 45:52या पेरिस में होता।
  1270. 45:53हां बिल्कुल हो सकता था।
  1271. 45:55तो फिर यह बचा कैसे? ये तो यह तो कमाल की
  1272. 45:58बात है।
  1273. 45:58इसका पूरा श्रेय देखिए भोपाल की दो बेगमों
  1274. 46:01को जाता है। शाहजहां बेगम और उनकी
  1275. 46:04उत्तराधिकारी सुल्तानजहां बेगम।
  1276. 46:06उन्होंने क्या किया?
  1277. 46:07उन्होंने बहुत ही क्या कहते हैं?
  1278. 46:10चतुरकूटनीतिक रास्ता निकाला। उन्होंने
  1279. 46:13यूरोपियों को असली तोरण द्वार की हूबहू
  1280. 46:16नकल यानी प्लास्टर से बनी प्रतिकृतियां
  1281. 46:18प्लास्टर कास्ट कॉपीज देकर मना लिया।
  1282. 46:21अरे वाह!
  1283. 46:21और वो उन प्रतियों से इतने खुश हो गए कि
  1284. 46:24उन्होंने असली को ले जाने की जिद ही छोड़
  1285. 46:26दी।
  1286. 46:26ये तो किसी भी राष्ट्रीय संरक्षण नीति से
  1287. 46:28बेहतर काम था। मतलब एक चालाक और समझदारी
  1288. 46:31भरे फैसले ने हमारी एक अनमोल धरोहर को बचा
  1289. 46:33लिया।
  1290. 46:33बिल्कुल। यह स्थानीय नेतृत्व का एक
  1291. 46:36बेहतरीन उदाहरण है। इन बेगमों ने सिर्फ
  1292. 46:38इसे बचाया ही नहीं बल्कि इसके रखरखाव और
  1293. 46:40यहां एक म्यूजियम और गेस्ट हाउस बनाने के
  1294. 46:42लिए पैसा भी दिया।
  1295. 46:43और अमरावती के साथ ऐसा कोई नहीं था।
  1296. 46:45कोई नहीं था। इसलिए उसकी कलाकृतियां और
  1297. 46:48पत्थर देश-विदेश के अलग-अलग म्यूजियम में
  1298. 46:50पहुंच गए और वह जगह वीरान हो गई।
  1299. 46:52तो अब उस दौर की पृष्ठभूमि पर आते हैं
  1300. 46:55जहां यह नए विचार पनप रहे थे। बुद्ध और
  1301. 46:57महावीर के आने से पहले का माहौल कैसा था?
  1302. 47:00लोग क्या सोचते थे? किस पर विश्वास करते
  1303. 47:02थे?
  1304. 47:02देखिए ईसा पूर्व पहली सहस्राब्दी जिसे हम
  1305. 47:06फर्स्ट मिलेनियम बीसीई भी कहते हैं।
  1306. 47:09वो वो पूरी दुनिया में एक वैचारिक
  1307. 47:12उथल-पुथल का दौर था।
  1308. 47:14अच्छा। हां
  1309. 47:14भारत में इससे पहले वैदिक परंपरा थी जिसका
  1310. 47:18आधार ऋग्वेद जैसे ग्रंथ थे। इसमें इंद्र,
  1311. 47:22अग्नि, सोम जैसे देवताओं की पूजा होती थी
  1312. 47:24और और यज्ञों का बहुत महत्व था।
  1313. 47:27यज्ञ मतलब सैक्रिफाइसेस
  1314. 47:29यज्ञ बहुत बड़े पैमाने पर होते थे। जिनमें
  1315. 47:31जानवरों की बलि भी दी जाती थी।
  1316. 47:33ये बहुत खर्चीले और जटिल कर्मकांड थे।
  1317. 47:37तो क्या इन्हीं जटिल कर्मकांडों के खिलाफ
  1318. 47:39एक प्रतिक्रिया के तौर पर नए विचार सामने
  1319. 47:41आए? मतलब लोग कुछ नया क्यों खोज रहे थे?
  1320. 47:44आप सही कह रहे हैं। एक तबका था जो इन
  1321. 47:47यज्ञों के औचित्य पर सवाल उठा रहा था।
  1322. 47:49गंगा घाटी के इलाके में खासकर उपनिषदों
  1323. 47:52में हमें इस नई सोच की झलक मिलती है।
  1324. 47:55उपनिषद
  1325. 47:55हां। विचारक अब बाहरी कर्मकांडों से हटकर
  1326. 47:59कुछ गहरे सवालों में उलझे थे। जीवन का
  1327. 48:02असली मतलब क्या है? मरने के बाद क्या होता
  1328. 48:04है? क्या पुनर्जन्म होता है? यह सवाल किसी
  1329. 48:07यज्ञ से हल नहीं हो सकते थे। और इन सवालों
  1330. 48:11पर चर्चा कहां होती थी? कोई खास जगह?
  1331. 48:13यह चर्चाएं अक्सर कुटागारशाला में होती
  1332. 48:16थी।
  1333. 48:17कुटागारशाला?
  1334. 48:18हां, यह एक तरह की झोपड़ी होती थी जिसकी
  1335. 48:21छत नुकीली होती थी। यहां अलग-अलग
  1336. 48:23विचारधाराओं के दार्शनिक और विचारक रुकते
  1337. 48:26थे और घंटों तक बहस करते थे।
  1338. 48:28बड़ा खुला माहौल रहा होगा।
  1339. 48:30बहुत। अगर कोई किसी को अपनी दलीलों से हरा
  1340. 48:33देता था, तो वह अपने अनुयायियों के साथ
  1341. 48:36उसका शिष्य बन जाता था। इसी बौद्धिक माहौल
  1342. 48:39में जैन और बौद्ध धर्म जैसी परंपराओं का
  1343. 48:42उदय हुआ।
  1344. 48:43चलिए तो पहले जैन धर्म की बात करते हैं।
  1345. 48:45महावीर तो 24वें तीर्थंकर थे। है ना?
  1346. 48:48जी हां।
  1347. 48:49इसका मतलब यह परंपरा उनसे भी बहुत पुरानी
  1348. 48:51थी।
  1349. 48:52जी हां। जैन परंपरा मानती है कि महावीर से
  1350. 48:55पहले 23 तीर्थंकर हो चुके थे। तीर्थंकर का
  1351. 48:59मतलब है वह गुरु जो लोगों को जीवन मृत्यु
  1352. 49:02के चक्र यानी संसार रूपी नदी के पार ले
  1353. 49:05जाते हैं। महावीर ने सिर्फ पहले से मौजूद
  1354. 49:08विचारों को एक व्यवस्थित रूप दिया।
  1355. 49:11तो जैन दर्शन का सबसे
  1356. 49:14केंद्रीय विचार क्या है? मतलब ऐसी क्या
  1357. 49:17चीज है जो उसे बाकी सबसे अलग करती है?
  1358. 49:19उसका सबसे अनूठा और आप कह सकते हैं
  1359. 49:22बुनियादी सिद्धांत यह है कि कि पूरी
  1360. 49:25दुनिया प्राणवान है।
  1361. 49:26प्राणवान मतलब हर चीज में जीवन है।
  1362. 49:29हां हर चीज में सिर्फ इंसान और जानवर ही
  1363. 49:32नहीं बल्कि पत्थर, चट्टान यहां तक कि पानी
  1364. 49:36में भी जीवन होता है। यह एक बहुत गहरी सोच
  1365. 49:39है।
  1366. 49:40और इसी सोच से उनका सबसे महत्वपूर्ण
  1367. 49:41सिद्धांत निकलता है अहिंसा।
  1368. 49:43बिल्कुल नॉन वायलेंस। किसी भी जीव को चोट
  1369. 49:46ना पहुंचाना। इसका मतलब जैन धर्म में
  1370. 49:48अहिंसा सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है।
  1371. 49:50नहीं बिल्कुल नहीं। यह पेड़-पौधों,
  1372. 49:52कीड़े-मकोड़ों तक फैली हुई है। इसी वजह से
  1373. 49:55जैन साधु साध्वी बहुत कठोर नियमों का पालन
  1374. 49:59करते हैं ताकि अनजाने में भी किसी छोटे से
  1375. 50:02छोटे जीव की हत्या ना हो।
  1376. 50:03समझ गया।
  1377. 50:04वे मानते हैं कि जन्म और पुनर्जन्म का जो
  1378. 50:07चक्र है, वह हमारे कर्मों से चलता है। और
  1379. 50:10इस कर्म के बंधन से छुटकारा पाने का एक ही
  1380. 50:13रास्ता है त्याग और तपस्या। तो क्या मोक्ष
  1381. 50:16के लिए संसार छोड़ना जरूरी है?
  1382. 50:18हां, जैन मान्यता के अनुसार कर्म के चक्र
  1383. 50:21से पूरी तरह मुक्ति तभी मिलती है जब
  1384. 50:23व्यक्ति संसार का त्याग कर दे। इसीलिए
  1385. 50:26विहारों में रहना मतलब एक सन्यासी का जीवन
  1386. 50:28जीना अनिवार्य माना गया।
  1387. 50:30और इसके लिए कुछ व्रत भी लेने पड़ते हां,
  1388. 50:32पांच व्रत हत्या ना करना, चोरी ना करना,
  1389. 50:36झूठ ना बोलना, ब्रह्मचर्य का पालन करना और
  1390. 50:39धन का संग्रह ना करना जिसे अपरिग्रह कहते
  1391. 50:42हैं।
  1392. 50:43तो एक तरफ जैन धर्म का यह कठोर तपस्या का
  1393. 50:46मार्ग था। लेकिन इसी दौर में एक और विचारक
  1394. 50:49थे जो जीवन के दुखों का एक अलग समाधान
  1395. 50:52सुझा रहे थे। सिद्धार्थ गौतम जो बाद में
  1396. 50:54बुद्ध बने।
  1397. 50:55सही। और उनकी कहानी बिल्कुल अलग है। वे एक
  1398. 50:58राजकुमार थे जिन्हें दुनिया के हर सुख में
  1399. 51:01पाला गया था। हां बिल्कुल।
  1400. 51:02लेकिन एक दिन शहर में घूमते हुए उन्होंने
  1401. 51:05चार चीजें देखी। एक बूढ़ा आदमी, एक बीमार
  1402. 51:07आदमी, एक लाश और एक एक खुशहाल सन्यासी।
  1403. 51:11और इन दृश्यों ने उन्हें हिला कर रख दिया।
  1404. 51:13बिल्कुल उन्हें एहसास हुआ कि सुख और जवानी
  1405. 51:16तो अस्थाई है। असली सच तो बुढ़ापा, बीमारी
  1406. 51:19और मौत है। और यहीं से उनकी खोज शुरू हुई।
  1407. 51:22उन्होंने महल छोड़ दिया।
  1408. 51:23हां, सच की तलाश में निकल पड़े। उन्होंने
  1409. 51:26बहुत कठोर तपस्या की। शरीर को बहुत कष्ट
  1410. 51:30दिया लेकिन उन्हें जवाब नहीं मिला।
  1411. 51:32आखिरकार बिहार के बोधगया में एक पीपल के
  1412. 51:36पेड़ के नीचे ध्यान करते हुए उन्हें ज्ञान
  1413. 51:38प्राप्त हुआ और तब वे बुद्धा कहलाए।
  1414. 51:41यानी द एनलाइट वन
  1415. 51:43हां जिसे ज्ञान मिल गया हो।
  1416. 51:45तो ज्ञान प्राप्त करने के बाद उनकी मुख्य
  1417. 51:48शिक्षा क्या थी? उन्होंने दुनिया को दुखों
  1418. 51:50से निकलने का क्या रास्ता दिखाया? बुद्ध
  1419. 51:52ने जो रास्ता दिखाया, वह जैन धर्म की कठोर
  1420. 51:54तपस्या और आम दुनिया की सुख सुविधाओं में
  1421. 51:57डूबने के बीच का रास्ता था।
  1422. 52:00इसे मध्यम मार्ग या मिडिल पाथ कहा गया।
  1423. 52:04उनका कहना था कि दुनिया लगातार बदल रही
  1424. 52:07है। यहां कुछ भी स्थाई नहीं है। इसलिए
  1425. 52:10किसी भी चीज से बहुत ज्यादा जुड़ाव ही दुख
  1426. 52:13का कारण है।
  1427. 52:13और उन्होंने आत्मा के बारे में भी कुछ कहा
  1428. 52:15था।
  1429. 52:15हां। उन्होंने कहा कि यहां कोई स्थाई
  1430. 52:18आत्मा नहीं है। सब कुछ अनित्य और अनात्म
  1431. 52:22है।
  1432. 52:22यह अनात्म की बात तो उस समय की आत्मा
  1433. 52:24परमात्मा की अवधारणाओं से बहुत अलग रही
  1434. 52:26होगी। है ना?
  1435. 52:26बहुत अलग और क्रांतिकारी थी। बुद्ध ने
  1436. 52:30ईश्वर के होने या ना होने के सवाल को भी
  1437. 52:33अप्रसंगिक माना।
  1438. 52:34अच्छा।
  1439. 52:34उनका कहना था कि यह समाज इंसानों ने बनाया
  1440. 52:37है। ईश्वर ने नहीं। इसलिए दुनिया को बेहतर
  1441. 52:40बनाने की जिम्मेदारी भी इंसानों की है।
  1442. 52:43यह तो बहुत बड़ी बात है।
  1443. 52:44उनकी सबसे बड़ी शिक्षा उनके आखिरी शब्दों
  1444. 52:46में छिपी है। जब उन्होंने अपने शिष्यों से
  1445. 52:49कहा तुम सब अपने लिए खुद ही रोशनी बनो
  1446. 52:52क्योंकि तुम्हें खुद ही अपनी मुक्ति का
  1447. 52:54रास्ता ढूंढना है।
  1448. 52:56किसी पुजारी या भगवान पर निर्भर होने के
  1449. 52:58बजाय उन्होंने जिम्मेदारी व्यक्ति के अपने
  1450. 53:00कंधों पर डाल दी।
  1451. 53:02यही उनकी शिक्षा का सार था आत्मज्ञान और
  1452. 53:05विवेक। बुद्ध ने अपनी शिक्षाओं को फैलाने
  1453. 53:07के लिए संघ की स्थापना की। इसमें कौन लोग
  1454. 53:10शामिल हुए और यह कैसे काम करता था?
  1455. 53:12बुद्ध ने धम्म के शिक्षकों का एक संगठन
  1456. 53:15बनाया जिसे संघ या संघा कहा गया। इसमें
  1457. 53:19भिकु और भिकुनिया रहते थे। वो बहुत सादा
  1458. 53:22जीवन जीते थे और भिक्षा पर निर्भर रहते
  1459. 53:25थे।
  1460. 53:25और इसमें कोई भी शामिल हो सकता था।
  1461. 53:27हां, यही इसकी सबसे खास बात थी। संघ में
  1462. 53:31हर किसी के लिए दरवाजे खुले थे। राजा हो
  1463. 53:34या गरीब ऊंची जाति का हो या नीची जाति का
  1464. 53:38दास हो या शिल्पती संघ में आने के बाद सब
  1465. 53:41बराबर हो जाते थे। उनकी पुरानी पहचान मिट
  1466. 53:45जाती थी।
  1467. 53:45यह तो उस जमाने के हिसाब से एक बहुत बड़ी
  1468. 53:48सामाजिक क्रांति रही होगी।
  1469. 53:49निश्चित रूप से यह एक तरह का वैकल्पिक
  1470. 53:52समाज था। जहां योग्यता जन्म से नहीं बल्कि
  1471. 53:56आचरण से तय होती थी।
  1472. 53:57एक सवाल मन में आता है। क्या महिलाओं को
  1473. 54:00भी संघ में आने की अनुमति थी? देखिए यह एक
  1474. 54:02दिलचस्प बात है। शुरू में बुद्ध महिलाओं
  1475. 54:06को संघ में शामिल करने के पक्ष में नहीं
  1476. 54:08थे।
  1477. 54:08अच्छा ऐसा क्यों?
  1478. 54:09शायद उन्हें डर था कि इससे संघ का अनुशासन
  1479. 54:12बिगड़ जाएगा लेकिन उनके सबसे प्रिय शिष्य
  1480. 54:15आनंद ने उन्हें बहुत समझाया।
  1481. 54:17आनंद के कहने पर माने वो।
  1482. 54:19हां, आनंद के कहने पर ही बुद्ध राजी हुए।
  1483. 54:22और संघ में शामिल होने वाली पहली महिला
  1484. 54:24उनकी अपनी उपमाता महाप्रजापति गौतमी थी।
  1485. 54:28और संघ में आने के बाद महिलाओं की क्या
  1486. 54:30भूमिका रही? कई महिलाएं बहुत बड़ी विदुषी
  1487. 54:33और उपदेशिकाएं बनी। उन्हें थ्यरी का दर्जा
  1488. 54:36दिया गया।
  1489. 54:37थरी।
  1490. 54:37हां। थरी का मतलब है ऐसी सम्मानित महिलाएं
  1491. 54:42जिन्होंने निर्वाण प्राप्त कर लिया हो।
  1492. 54:44उनकी लिखी हुई कविताएं आज भी बौद्ध
  1493. 54:47साहित्य का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
  1494. 54:49अब आते हैं उन इमारतों पर जिन्होंने इन
  1495. 54:51विश्वासों को सदियों तक जिंदा रखा। यानी
  1496. 54:53स्तूप। स्तूप बनाए क्यों जाते थे? इनका
  1497. 54:56क्या महत्व था? देखिए बौद्ध परंपरा में
  1498. 54:58कुछ जगहों को बहुत पवित्र माना जाता था।
  1499. 55:01जैसे लुंबिनी जहां बुद्ध का जन्म हुआ।
  1500. 55:04बोधग गया जहां उन्हें ज्ञान मिला।
  1501. 55:07सारनाथ और कुशीनगर?
  1502. 55:08हां। लेकिन धीरे-धीरे कुछ और जगहों को भी
  1503. 55:11पवित्र माना जाने लगा। यह वो जगहें थी
  1504. 55:14जहां बुद्ध के अवशेष जैसे उनकी अस्थियां
  1505. 55:17या उनके इस्तेमाल की चीजें एक टीले के
  1506. 55:20नीचे गाड़ दी गई थी। इन्हीं टीों को स्तूप
  1507. 55:23कहा गया।
  1508. 55:24अच्छा। तो अगर मैं आज से 2000 साल पहले
  1509. 55:27किसी स्तूप को देखने जाता तो मुझे क्या
  1510. 55:29नजर आता? आप मुझे उस अनुभव से रूबरू करा
  1511. 55:32सकती हैं?
  1512. 55:32जरूर। तो सोचिए सबसे पहले आपको दूर से एक
  1513. 55:36मिट्टी का विशाल अर्ध गोलाकार टीला दिखाई
  1514. 55:40देगा जिसे अंड कहते हैं।
  1515. 55:42अंड
  1516. 55:43हां। यह शांति का ब्रह्मांड का प्रतीक है।
  1517. 55:47जैसे ही आप पास पहुंचते आपको एक पत्थर की
  1518. 55:50बाढ़ यानी वेदिका मिलती। यह वेदिका पवित्र
  1519. 55:54जगह को आम दुनिया से अलग करती थी
  1520. 55:57और अंदर जाने के लिए
  1521. 55:58अंदर जाने के लिए चारों दिशाओं में
  1522. 56:00बड़े-बड़े खूबसूरती से सजे हुए दरवाजे
  1523. 56:03होते थे जिन्हें तोरण द्वार कहते हैं।
  1524. 56:07सांची के तोरण द्वार तो अपनी मूर्तिकला के
  1525. 56:09लिए मशहूर है।
  1526. 56:10हां वो तो है।
  1527. 56:11अंड के ठीक ऊपर एक चौकोर छज्जे जैसी बनावट
  1528. 56:15होती जिसे हरर्मिका कहते हैं। यह देवताओं
  1529. 56:18का निवास मानी जाती थी। और उसी हरर्मिका
  1530. 56:21के बीच से एक मस्त निकलता था जिसे यष्टि
  1531. 56:25कहते हैं। जिस पर सम्मान के प्रतीक के तौर
  1532. 56:28पर एक छतरी लगी होती थी।
  1533. 56:30और श्रद्धालु इसकी परिक्रमा करते थे।
  1534. 56:32बिल्कुल।
  1535. 56:33इन विशाल स्तूपों को बनाने के लिए पैसा
  1536. 56:35कहां से आता था? क्या यह सिर्फ राजा
  1537. 56:36महाराजा बनवाते थे?
  1538. 56:38इन्हें बनाने में राजाओं के साथ-साथ
  1539. 56:41व्यापारियों, शिल्पकारों और यहां तक के आम
  1540. 56:44स्त्री पुरुषों ने भी दान दिया था।
  1541. 56:46अच्छा। जैसे सांची के एक तोरण द्वार का
  1542. 56:50हिस्सा हाथी दांत का काम करने वाले
  1543. 56:52कारीगरों ने बनवाया था। यह एक तरह का
  1544. 56:55सामूहिक प्रोजेक्ट था।
  1545. 56:57इन स्तूपों पर जो मूर्तियां हैं वो क्या
  1546. 56:59दिखाती हैं? क्या उनमें बुद्ध की कहानियां
  1547. 57:02हैं? हां, उनमें बुद्ध के जीवन से जुड़ी
  1548. 57:05घटनाएं और जातक कथाएं हैं जो उनके पिछले
  1549. 57:08जन्मों की कहानियां हैं। लेकिन एक बहुत ही
  1550. 57:11रोचक बात है। शुरुआती कला में बुद्ध को
  1551. 57:14कभी भी इंसान के रूप में नहीं दिखाया गया।
  1552. 57:17क्या मतलब? बुद्ध की मूर्ति नहीं होती थी।
  1553. 57:20तो उन्हें कैसे दर्शाया जाता था?
  1554. 57:21प्रतीकों के जरिए, सिंबल्स के जरिए।
  1555. 57:24जैसे?
  1556. 57:24जैसे अगर उन्हें ध्यान करते हुए दिखाना
  1557. 57:27होता, तो एक खाली सिंहासन बना दिया जाता।
  1558. 57:31उनके पहले उपदेश को दिखाने के लिए एक चक्र
  1559. 57:34यानी पहिया बना होता था और उनके
  1560. 57:37महापरिनिबाण यानी निधन का प्रतीक खुद
  1561. 57:41स्तूप ही था।
  1562. 57:42यह तो बहुत दिलचस्प है।
  1563. 57:43शायद उस समय कलाकार उन्हें मानवीय रूप
  1564. 57:46देने में हिचकिचाते थे क्योंकि वे उन्हें
  1565. 57:48एक अलौकिक शक्ति मानते थे।
  1566. 57:50तो फिर बुद्ध की मूर्तियां बननी कब शुरू
  1567. 57:52हुई? क्योंकि पहले तो आप कह रही थी कि
  1568. 57:53उन्हें सिर्फ प्रतीकों से दिखाते थे।
  1569. 57:55बिल्कुल। यह बदलाव आया समय के साथ। बौद्ध
  1570. 57:59धर्म में एक नई धारा का विकास हुआ जिसे
  1571. 58:02महायान कहते हैं। इस नई सोच में बुद्ध को
  1572. 58:06एक उद्धारकर्ता एक मुक्तिदाता के रूप में
  1573. 58:09देखा जाने लगा। अब वे सिर्फ एक शिक्षक
  1574. 58:11नहीं थे बल्कि एक देवता समान थे।
  1575. 58:14और इसी के साथ बोधिसत्व की अवधारणा भी
  1576. 58:16सामने आई।
  1577. 58:17सही कहा।
  1578. 58:18यह बोधिसत्व कौन थे?
  1579. 58:19बोधिसत्व वे लोग थे जो ज्ञान प्राप्त करने
  1580. 58:22के बहुत करीब पहुंच चुके थे। लेकिन वे
  1581. 58:25निर्वाण प्राप्त नहीं करते थे।
  1582. 58:27क्यों? वे करुणा के कारण दुनिया में ही
  1583. 58:30रहकर दूसरे लोगों की मदद करने का फैसला
  1584. 58:32करते थे। यह बहुत ही दयालु और परोपकारी
  1585. 58:35विचार था। इसी महायान परंपरा में बुद्ध और
  1586. 58:38बोधिसत्वों की मूर्तियां बनाकर उनकी पूजा
  1587. 58:41शुरू हुई।
  1588. 58:42क्या ऐसा ही कोई बदलाव हिंदू धर्म में भी
  1589. 58:44आ रहा था?
  1590. 58:44हां बिल्कुल। उसी दौर में पौराणिक हिंदू
  1591. 58:48धर्म का भी उदय हो रहा था। इसमें विष्णु
  1592. 58:50को मानने वाले वैष्णव और शिव को मानने
  1593. 58:53वाले शिव यह दो प्रमुख धाराएं थी। और यहां
  1594. 58:56अवतारवाद का विचार बहुत लोकप्रिय हुआ।
  1595. 58:58बिल्कुल यह माना जाने लगा कि जब भी धरती
  1596. 59:01पर पाप बढ़ता है तो विष्णु दुनिया को
  1597. 59:04बचाने के लिए अलग-अलग अवतार लेते हैं। इन
  1598. 59:07अवतारों की कहानियां पुराणों में लिखी गई
  1599. 59:09और उनकी मूर्तियां बनाकर पूजा होने लगी।
  1600. 59:12तो अब मूर्तियां रखने के लिए पूजा की एक
  1601. 59:14नई जगह की जरूरत पड़ी होगी। क्या यहीं से
  1602. 59:17मंदिरों का विकास हुआ?
  1603. 59:18एकदम सही। अब देवी देवताओं की मूर्तियों
  1604. 59:21के लिए मंदिर बनाए जाने लगे। शुरू में
  1605. 59:23मंदिर एक छोटा चौकोर कमरा होता था, जिसे
  1606. 59:26गर्भ गृह कहते थे, जहां मूर्ति रखी जाती
  1607. 59:29थी।
  1608. 59:30और फिर धीरे-धीरे
  1609. 59:31फिर धीरे-धीरे गर्भ गृह के ऊपर एक ऊंचा
  1610. 59:34ढांचा बनने लगा जिसे हम शिखर कहते हैं।
  1611. 59:37मंदिरों में बड़े-बड़े हॉल और भव्य
  1612. 59:40दीवारें भी बनने लगी।
  1613. 59:41इसका कोई बेहतरीन उदाहरण?
  1614. 59:42महाराष्ट्र का कैलाशनाथ मंदिर। यह कोई ईंट
  1615. 59:45पत्थर से बना मंदिर नहीं है।
  1616. 59:47हां। यह एक पूरी की पूरी विशाल चट्टान को
  1617. 59:51ऊपर से नीचे की ओर तराश कर बनाया गया है।
  1618. 59:54यह उस दौर के कारीगरों के हुनर और उनकी
  1619. 59:58आस्था का एक ऐसा सबूत है जिसे देखकर आज भी
  1620. 1:00:02यकीन करना मुश्किल होता है।
  1621. 1:00:04तो इस पूरी चर्चा में हमने एक तरह से 1000
  1622. 1:00:06साल के सांस्कृतिक इतिहास का सफर तय किया
  1623. 1:00:08है।
  1624. 1:00:09हां।
  1625. 1:00:09हमने देखा कि कैसे यज्ञों की परंपरा पर
  1626. 1:00:11सवाल उठे और जीवन के अर्थ को लेकर नए
  1627. 1:00:13दर्शन पैदा हुए। जैन और बौद्ध धर्म ने
  1628. 1:00:16अहिंसा और मध्यम मार्ग जैसे विचार दिए
  1629. 1:00:18और हमने यह भी देखा कि यह विचार सिर्फ
  1630. 1:00:20किताबों तक सीमित नहीं रहे। इन्हें पत्थर
  1631. 1:00:22में उतारा गया। स्तूपों और मंदिरों की
  1632. 1:00:25शक्ल दी गई।
  1633. 1:00:26कला, वास्तुकला और विश्वास सब एक दूसरे
  1634. 1:00:29में घुल मिल गए।
  1635. 1:00:30बिल्कुल उन्हें अलग करना मुश्किल है।
  1636. 1:00:32ये सब जानने के बाद एक ख्याल मन में आता
  1637. 1:00:34है। सांची जैसी जो कुछ जगह बच गई हैं वे
  1638. 1:00:37तो उस दौर में जो कुछ भी बनाया गया होगा
  1639. 1:00:38उसका एक छोटा सा हिस्सा भर है। है ना?
  1640. 1:00:40हां बिल्कुल। ना जाने कितनी इमारतें,
  1641. 1:00:43कितनी मूर्तियां और कितनी कलाकृतियां समय
  1642. 1:00:46की वजह से या तोड़फोड़ के कारण हमेशा के
  1643. 1:00:49लिए नष्ट हो गई। हम जो भी जानते हैं उस
  1644. 1:00:51शानदार अतीत की बस एक झलक मात्र है।
  1645. 1:00:54अध्याय चार विचारक विश्वास और इमारतें
  1646. 1:00:58समाप्त हुआ।
  1647. 1:01:01आज हम समय में थोड़ा पीछे जा रहे हैं। उस
  1648. 1:01:04दौर में जब दुनिया आज जितनी जुड़ी हुई
  1649. 1:01:08नहीं थी। हम्
  1650. 1:01:09हम मध्यकालीन भारत को तीन बहुत ही अलग-अलग
  1651. 1:01:12लोगों की नजरों से देखने की कोशिश करेंगे।
  1652. 1:01:15हम्
  1653. 1:01:15मतलब वो लोग जो हज़ारों मील का सफर तय करके
  1654. 1:01:18यहां पहुंचे थे।
  1655. 1:01:19और ये तीनों नजरिए एक दूसरे से बहुत अलग
  1656. 1:01:21हैं।
  1657. 1:01:22हां। हमारे पास उज्बेकिस्तान से आए एक
  1658. 1:01:25विद्वान हैं।
  1659. 1:01:26मोरक्को से एक आप कह सकते हैं दिलेर
  1660. 1:01:29घुमक्कड़ और फ्रांस से एक आलोचक चिकित्सक।
  1661. 1:01:33बिल्कुल। और इस चर्चा का मकसद सिर्फ यह
  1662. 1:01:35जानना नहीं है कि उन्होंने क्या देखा
  1663. 1:01:37बल्कि यह समझना है कि किसी बाहरी व्यक्ति
  1664. 1:01:40की नजर हमें अपने ही समाज के बारे में
  1665. 1:01:42क्या नया सिखा सकती है।
  1666. 1:01:44सही बात है क्योंकि जब भी कोई यात्री कहीं
  1667. 1:01:46जाता है तो वह अपने साथ अपनी पूरी दुनिया
  1668. 1:01:49अपनी मान्यताएं सब कुछ लेकर आता है। है
  1669. 1:01:51ना?
  1670. 1:01:51हां। और आज हम इन्हीं तीन यात्रियों
  1671. 1:01:54अलबरूनी, इब्नबतूता और फ्रांसुआ बर्नियर
  1672. 1:01:57के वृतांतों से यह समझेंगे कि सदियों पहले
  1673. 1:02:00का भारत इन बाहरी लोगों को कैसा दिखता था।
  1674. 1:02:03तो चलिए सबसे पहले उस इंसान से शुरू करते
  1675. 1:02:06हैं जो भारत को समझने के लिए मतलब पूरी
  1676. 1:02:09तरह से किताबों और ज्ञान की दुनिया में
  1677. 1:02:11उतर गया। 11वीं सदी के अलबेरूनी। अलबरूनी
  1678. 1:02:15की कहानी ही अपने आप में असाधारण है। वो
  1679. 1:02:18आज के उज़्बेकिस्तान के ख्वारिज में 973
  1680. 1:02:21में पैदा हुए थे। और ख्वारिज्म उस समय
  1681. 1:02:23ज्ञान का एक बहुत बड़ा केंद्र था।
  1682. 1:02:25वो कई भाषाएं जानते थे। सीरियाई, फारसी,
  1683. 1:02:28हब्रू। लेकिन उनकी जिंदगी तब पूरी तरह बदल
  1684. 1:02:31गई जब 2017 में सुल्तान महमूद गजनवी ने
  1685. 1:02:35ख्वािज्म पर हमला किया।
  1686. 1:02:36और वह उन्हें अपने साथ गजनी ले गया एक
  1687. 1:02:39बंधक के तौर पर।
  1688. 1:02:40जी। और सोचिए एक बंधक के तौर पर गजनी
  1689. 1:02:43पहुंचना और वहां से भारत के प्रति इतनी
  1690. 1:02:46गहरी रुचि विकसित करना यह अपने आप में
  1691. 1:02:48कमाल है।
  1692. 1:02:49और भारत आने के बाद उन्होंने संस्कृत सीखी
  1693. 1:02:52जो उस जमाने में किसी बाहरी व्यक्ति के
  1694. 1:02:55लिए लगभग नामुमकिन ही माना जाता था।
  1695. 1:02:57बिल्कुल और यही उनकी खासियत थी। वो सिर्फ
  1696. 1:03:00एक यात्री नहीं थे। वो एक एक विद्वान थे
  1697. 1:03:03जो चीजों की तह तक जाना चाहते थे।
  1698. 1:03:05इसी कोशिश का नतीजा थी उनकी किताब किताबुल
  1699. 1:03:08हिंद।
  1700. 1:03:09हां। और यह कोई आम यात्रा वृतांत नहीं है।
  1701. 1:03:12यह तो भारत पर लिखा एक विश्वकोष जैसा है।
  1702. 1:03:15मतलब इसमें उन्होंने धर्म, दर्शन,
  1703. 1:03:17विज्ञान, रीति-रिवाज हर चीज को एक बहुत ही
  1704. 1:03:20व्यवस्थित तरीके से समझाया है।
  1705. 1:03:22उनका तरीका भी तो बहुत अनोखा था।
  1706. 1:03:24हां।
  1707. 1:03:24हर अध्याय एक सवाल से शुरू होता है। फिर
  1708. 1:03:27वो संस्कृत की परंपराओं के आधार पर उसका
  1709. 1:03:29वर्णन करते हैं और आखिर में
  1710. 1:03:31आखिर में उसकी तुलना दूसरी संस्कृतियों से
  1711. 1:03:34करते हैं।
  1712. 1:03:34यह तो आज के रिसर्च पेपर जैसा स्ट्रक्चर
  1713. 1:03:36है।
  1714. 1:03:36हां, वो अपने समय से बहुत आगे थे। लेकिन
  1715. 1:03:39उनके लिए यह सब आसान बिल्कुल नहीं था।
  1716. 1:03:41सबसे बड़ी चुनौती तो भाषा ही थी।
  1717. 1:03:44संस्कृत।
  1718. 1:03:45जी। उन्होंने खुद लिखा है कि संस्कृत
  1719. 1:03:48अरेबी और फारसी से इतनी अलग है कि एक भाषा
  1720. 1:03:51से दूसरी में अनुवाद करना बहुत ही मुश्किल
  1721. 1:03:53काम है।
  1722. 1:03:54तो इस दीवार को उन्होंने कैसे लांघा?
  1723. 1:03:56उन्होंने ब्राह्मण विद्वानों के साथ सालों
  1724. 1:03:58बिताए। उनसे सीखा और वेदों, पुराणों, भगवत
  1725. 1:04:01गीता और मनुस्मृति जैसे ग्रंथों का अध्ययन
  1726. 1:04:04किया। और इन्हीं ग्रंथों के आधार पर
  1727. 1:04:06उन्होंने भारतीय समाज की वर्ण व्यवस्था का
  1728. 1:04:09जिक्र किया। चार वर्ग ब्राह्मण, क्षत्रिय,
  1729. 1:04:13वैश्य और शूद्र।
  1730. 1:04:14हां, उन्होंने ग्रंथों में जो लिखा था उसे
  1731. 1:04:16जस का तस बयान कर दिया। लेकिन यहां एक
  1732. 1:04:19बहुत दिलचस्प बात सामने आती है। वो वर्ण
  1733. 1:04:22व्यवस्था के इस विवरण को तो स्वीकार करते
  1734. 1:04:24हैं लेकिन
  1735. 1:04:25लेकिन
  1736. 1:04:25लेकिन वो अपवित्रता यानी छुआछूत या जिसे
  1737. 1:04:29पोलशन कहते हैं उस धारणा को पूरी तरह से
  1738. 1:04:31खारिज कर देते हैं।
  1739. 1:04:32अरे वाह यह तो बहुत बड़ी बात है। उस जमाने
  1740. 1:04:36में इस तरह की सामाजिक मान्यता पर सवाल
  1741. 1:04:38उठाना उन्होंने इसका क्या तर्क दिया?
  1742. 1:04:40उनका तर्क पूरी तरह से वैज्ञानिक था।
  1743. 1:04:42उन्होंने कहा कि प्रकृति का नियम शुद्धि
  1744. 1:04:44का है। हर चीज जो अपवित्र होती है, वह
  1745. 1:04:47वापस पवित्र होने की कोशिश करती है और हो
  1746. 1:04:50भी जाती है।
  1747. 1:04:51उन्होंने उदाहरण दिया कि सूरज हवा को साफ
  1748. 1:04:54करता है और समुद्र का नमक पानी को गंदा
  1749. 1:04:56होने से बचाता है। उनका मानना था कि अगर
  1750. 1:04:59प्रकृति में ऐसा नहीं होता तो धरती पर
  1751. 1:05:01जीवन ही संभव नहीं होता।
  1752. 1:05:02मतलब अपवित्रता की यह धारणा प्रकृति के
  1753. 1:05:05नियमों के ही खिलाफ है।
  1754. 1:05:07बिल्कुल। तो [नाक से की जाने वाली आवाज़]
  1755. 1:05:08इससे पता चलता है कि वह सिर्फ एक नकलची
  1756. 1:05:10नहीं थे जो ग्रंथों को पढ़कर लिख रहे थे।
  1757. 1:05:13वो एक आलोचक विचारक थे।
  1758. 1:05:15तो अलबरूनी ने हमें भारत की एक एकेडेमिक
  1759. 1:05:18ग्रंथों पर आधारित तस्वीर दी। लेकिन क्या
  1760. 1:05:20होता है जब कोई ऐसा यात्री आए जिसे
  1761. 1:05:22किताबों से ज्यादा सड़कों और बाजारों में
  1762. 1:05:25दिलचस्पी हो।
  1763. 1:05:26तब कहानी में एंट्री होती है 14वीं सदी के
  1764. 1:05:28सबसे बड़े घुमक्कड़ इब्नबतूता की।
  1765. 1:05:31और क्या कहानी है उनकी?
  1766. 1:05:32हां। इब्नबतूता का मानना था कि असली ज्ञान
  1767. 1:05:36किताबों में नहीं बल्कि दुनिया को अपनी
  1768. 1:05:38आंखों से देखने में है और उन्होंने इसे
  1769. 1:05:40जिया भी है। मोरक्को के टज़ियर से निकलकर
  1770. 1:05:43उन्होंने लगभग पूरी इस्लामी दुनिया की
  1771. 1:05:45यात्रा की और 1333 में वो जमीनी रास्ते से
  1772. 1:05:49सिंध पहुंचे।
  1773. 1:05:50और दिल्ली पहुंचते ही तो उनकी किस्मत ही
  1774. 1:05:52चमक गई। दिल्ली के सुल्तान मोहम्मद बिन
  1775. 1:05:55तुगलक उनकी विध्वता से इतने प्रभावित हुए
  1776. 1:05:58कि उन्हें सीधे दिल्ली का काजी मतलब मुख्य
  1777. 1:06:00न्यायाधीश बना दिया।
  1778. 1:06:02जी। एक अजनबी यात्री के लिए यह किसी लॉटरी
  1779. 1:06:05लगने जैसा ही था।
  1780. 1:06:06लेकिन यह सफर इतना सीधा भी नहीं था है ना?
  1781. 1:06:08नहीं बिल्कुल नहीं। बाद में सुल्तान से
  1782. 1:06:10उनकी अनबन भी हुई। उन्हें जेल में भी डाल
  1783. 1:06:13दिया गया। लेकिन जब मामला सुलझा तो
  1784. 1:06:15सुल्तान ने उन्हें एक और बड़ी जिम्मेदारी
  1785. 1:06:17दी। चीन में मंगोल शासक के पास अपना दूत
  1786. 1:06:20बनाकर भेजा।
  1787. 1:06:20मतलब उनका जीवन किसी रोमांचक फिल्म की
  1788. 1:06:23स्क्रिप्ट जैसा था।
  1789. 1:06:24बिल्कुल। और इन सभी अनुभवों को उन्होंने
  1790. 1:06:27एक किताब में समेटा जिसे रेहला कहते हैं।
  1791. 1:06:30रेहला जिसका मतलब ही यात्रा होता है।
  1792. 1:06:33हां और यह किताब अलबरूनी की किताब से बहुत
  1793. 1:06:36अलग है। वो सैद्धांतिक बातों में नहीं
  1794. 1:06:38उलझते। वो उन चीजों के बारे में लिखते हैं
  1795. 1:06:41जो उन्हें हैरान करती हैं जो उनके लिए
  1796. 1:06:43नहीं है।
  1797. 1:06:43जैसे नारियल और पान। उनका नारियल का वर्णन
  1798. 1:06:46तो [नाक से की जाने वाली आवाज़] कमाल का
  1799. 1:06:48है।
  1800. 1:06:48हां। ऐसा लगता है जैसे उसने पहली बार कोई
  1801. 1:06:51एलियन फल देखा हो। वह लिखते हैं, इंसान का
  1802. 1:06:53सिल जिसमें दो आंखें और एक मुंह हो।
  1803. 1:06:55और पान के बारे में भी उन्होंने उतने ही
  1804. 1:06:57आश्चर्य से लिखा है कि यह एक ऐसी बेल है
  1805. 1:07:00जिसमें फल नहीं लगते, बस पत्तों के लिए
  1806. 1:07:03उगाई जाती है। यह छोटी-छोटी बातें ही उनके
  1807. 1:07:06वृतांत को इतना जीवंत बना देती हैं।
  1808. 1:07:08उन्होंने शहरों और बाजारों के बारे में भी
  1809. 1:07:11काफी कुछ लिखा है। वो बताते हैं कि शहर
  1810. 1:07:14बहुत घनी आबादी वाले और अमीर थे। दिल्ली
  1811. 1:07:17तो उन्हें एक विशाल महानगर लगा। और उनके
  1812. 1:07:20बाजारों का वर्णन पढ़कर लगता है कि वह
  1813. 1:07:22सिर्फ खरीदारी की जगह नहीं थी। वह सामाजिक
  1814. 1:07:25जीवन के केंद्र थे। वहां मस्जिदें और
  1815. 1:07:27मंदिर थे। संगीत और नृत्य के सार्वजनिक
  1816. 1:07:31प्रदर्शन होते थे। एक तरह से शहर की धड़कन
  1817. 1:07:33थे वो।
  1818. 1:07:34लेकिन जिस चीज ने मुझे सबसे ज्यादा हैरान
  1819. 1:07:37किया वो है उस जमाई की संचार प्रणाली मतलब
  1820. 1:07:40डाक व्यवस्था।
  1821. 1:07:42वो वाकई अविश्वसनीय थी। इब्नेबतूता खुद
  1822. 1:07:44चकित थे। वो लिखते हैं कि सिंध से दिल्ली
  1823. 1:07:47की यात्रा में जहां 50 दिन लगते थे
  1824. 1:07:50सुल्तान तक गुप्तचरों की खबरें सिर्फ 5
  1825. 1:07:52सात दिन में पहुंच जाती थी।
  1826. 1:07:54एक मिनट यह कैसे संभव था? उस जमाने में ना
  1827. 1:07:57टेलीफोंस थे ना इंटरनेट।
  1828. 1:07:59इसका जवाब है एक बेहद कुशल रिले सिस्टम।
  1829. 1:08:02दो तरह की डाक व्यवस्था थी। एक थी उलूक
  1830. 1:08:05यानी घोड़ों वाली डाक।
  1831. 1:08:06अच्छा।
  1832. 1:08:07हर चार मील पर चौकियां बनी थी। जहां ताजे
  1833. 1:08:10घोड़े तैयार रहते थे। एक घोड़सवार तेजी से
  1834. 1:08:13आता और अगले को संदेश थमा देता। ठीक है।
  1835. 1:08:15यह तो समझ में आता है। लेकिन इब्नबतूता तो
  1836. 1:08:18पैदल डाक व्यवस्था से ज्यादा प्रभावित थे।
  1837. 1:08:21हां। और वही असली कमाल था। उसे दावा कहते
  1838. 1:08:24थे। इसमें हर मील में तीन चौकियां होती
  1839. 1:08:27थी।
  1840. 1:08:27हर मील में तीन
  1841. 1:08:28जी। एक आदमी हाथ में एक लंबी छड़ी लेकर
  1842. 1:08:31जिस पर घंटियां बंधी होती थी, पूरी रफ्तार
  1843. 1:08:33से दौड़ता था। घंटियों की आवाज सुनकर अगली
  1844. 1:08:36चौकी का आदमी तैयार हो जाता। जैसे ही पहला
  1845. 1:08:38धावक पहुंचता, दूसरा तुरंत संदेश लेकर आगे
  1846. 1:08:41दौड़ पड़ता। तो, यह एक तरह की इंसानी रिले
  1847. 1:08:44रेस थी जो 24ों घंटे चलती रहती थी। और
  1848. 1:08:47इब्नबतूता कहते हैं कि यह घोड़ों से भी
  1849. 1:08:49तेज थी।
  1850. 1:08:50हां, क्योंकि हर धावक को बस एक छोटा सा
  1851. 1:08:52हिस्सा ही दौड़ना होता था जिससे वह अपनी
  1852. 1:08:54अधिकतम रफ्तार बनाए रख पाता था।
  1853. 1:08:56कमाल है। यह उस समय के संगठनात्मक कौशल का
  1854. 1:08:59एक बेहतरीन उदाहरण है।
  1855. 1:09:00बिल्कुल। तो हमारे पास अलबरूनी का
  1856. 1:09:03विद्वत्तापूर्ण नजरिया है और इब्नबतूता का
  1857. 1:09:06जमीनी अनुभव दोनों अपने-अपने तरीके से
  1858. 1:09:08भारत को उसी की शर्तों पर समझने की कोशिश
  1859. 1:09:11कर रहे थे।
  1860. 1:09:12लेकिन क्या होता है जब कोई यात्री यहां
  1861. 1:09:15सिर्फ जिज्ञासा से नहीं बल्कि एक
  1862. 1:09:17तुलनात्मक पैमाना लेकर आए।
  1863. 1:09:19तब आप 17वीं सदी में पहुंचते हैं और आपकी
  1864. 1:09:21मुलाकात होती है फ्रांसवा बर्नियर से।
  1865. 1:09:24फ्रांसवा बर्नियर
  1866. 1:09:25बर्नियर सिर्फ एक यात्री नहीं थे। वह
  1867. 1:09:27फ्रांस से आए एक डॉक्टर, राजनीतिक
  1868. 1:09:29दार्शनिक और इतिहासकार थे। वह 12 साल भारत
  1869. 1:09:32में रहे। मुगल दरबार से बहुत करीब से
  1870. 1:09:34जुड़े। पहले वह शाहजहां के बेटे दारा
  1871. 1:09:37शिकोह के चिकित्सक थे।
  1872. 1:09:38और उनकी खासियत यह थी कि वो भारत में जो
  1873. 1:09:41कुछ भी देखते उसकी तुलना सीधे यूरोप से
  1874. 1:09:44करते और ज्यादातर मामलों में नतीजा यूरोप
  1875. 1:09:47के पक्ष में ही होता था।
  1876. 1:09:49बिल्कुल। उनकी किताब ट्रैवल्स इन द मुगल
  1877. 1:09:51एंपायर इसी तुलना पर आधारित है और उनके
  1878. 1:09:54लिए भारत और यूरोप के बीच सबसे बड़ा और
  1879. 1:09:56बुनियादी अंतर था जमीन पर निजी मालिकाना
  1880. 1:09:59हक का ना होना।
  1881. 1:10:00यह उनके लिए एक जुनून जैसा लगता है। आखिर
  1882. 1:10:03एक चीज उनके लिए इतनी महत्वपूर्ण क्यों
  1883. 1:10:05थी?
  1884. 1:10:05क्योंकि 17वीं सदी के एक यूरोपीय के लिए
  1885. 1:10:08निजी संपत्ति ही सब कुछ थी। तरक्की, आजादी
  1886. 1:10:12और समृद्धि की जड़। जब उन्होंने मुगल भारत
  1887. 1:10:15को देखा और पाया कि सारी जमीन का मालिक
  1888. 1:10:18सैद्धांतिक रूप से बादशाह है
  1889. 1:10:20तो उन्हें इसमें सिर्फ एक अलग आर्थिक
  1890. 1:10:22व्यवस्था नहीं दिखी।
  1891. 1:10:23नहीं। उन्हें इसमें भारत के पिछड़ेपन,
  1892. 1:10:26किसानों के शोषण और तानाशाही की वजह नजर
  1893. 1:10:28आई।
  1894. 1:10:29तो उनके हिसाब से क्योंकि अमीरों को पता
  1895. 1:10:32था कि जमीन उनसे कभी भी छीनी जा सकती है।
  1896. 1:10:34इसलिए वह उस पर लंबे समय के लिए निवेश
  1897. 1:10:37नहीं करते थे। जिससे खेती बर्बाद हो रही
  1898. 1:10:40थी।
  1899. 1:10:40यही उनका तर्क था और यह सिर्फ एक यात्रा
  1900. 1:10:42वृतांत में लिखा गया विचार बनकर नहीं रह
  1901. 1:10:45गया। यह पश्चिम में बहुत बहुत प्रभावशाली
  1902. 1:10:47साबित हुआ।
  1903. 1:10:48कैसे? मतलब इसका क्या असर पड़ा?
  1904. 1:10:50मॉटिस्क्यू जैसे बड़े यूरोपीय विचारकों ने
  1905. 1:10:53बर्नियर के लेखन के आधार पर प्राच्य
  1906. 1:10:56निरंकुशता यानी ओरिएंटल डिस्पोटिज्म का
  1907. 1:10:58सिद्धांत कर दिया।
  1908. 1:10:59अच्छा। हां।
  1909. 1:11:00इस सिद्धांत ने पश्चिम में पूर्व की खासकर
  1910. 1:11:03भारत की एक ऐसी छवि बनाई जो सदियों तक
  1911. 1:11:07कायम रही। एक ऐसा देश जहां बादशाही सब कुछ
  1912. 1:11:10है। प्रजा का कोई अधिकार नहीं और समाज
  1913. 1:11:12ठहरा हुआ है।
  1914. 1:11:13मतलब एक यात्री का नजरिया इतिहास का रुख
  1915. 1:11:16मोड़ने वाली एक शक्तिशाली विचारधारा बन
  1916. 1:11:18गया।
  1917. 1:11:19हां। और बाद में इसी विचार का इस्तेमाल
  1918. 1:11:22औनिवेशिक शासन को सही ठहराने के लिए भी
  1919. 1:11:24किया गया कि यह लोग खुद पर शासन नहीं कर
  1920. 1:11:27सकते। इसलिए हमें इनकी मदद करनी होगी। यह
  1921. 1:11:29तो काफी गंभीर बात है। बर्नियर ने सामाजिक
  1922. 1:11:32रीति रिवाजों जैसे सती प्रथा के बारे में
  1923. 1:11:35भी लिखा है।
  1924. 1:11:36हां और उनका वर्णन बहुत मार्मिक और दिल
  1925. 1:11:39दहला देने वाला है। वो किसी विद्वान की
  1926. 1:11:41तरह इसका विश्लेषण नहीं करते बल्कि एक
  1927. 1:11:44चश्मदीद के तौर पर अपनी आंखों देखी भयावता
  1928. 1:11:47को बयान करते हैं।
  1929. 1:11:48उन्होंने एक युवा विधवा को जबरदस्ती चिता
  1930. 1:11:51पर धकेले जाने का बहुत ही ग्राफिक वर्णन
  1931. 1:11:54किया है। यह उनकी यूरोपीय सेंसिबिलिटीज के
  1932. 1:11:56लिए एक बहुत बड़ा सदमा था। तो अगर हम इन
  1933. 1:11:59तीनों को एक साथ देखें तो हमारे सामने
  1934. 1:12:01भारत की तीन बिल्कुल अलग-अलग तस्वीरें
  1935. 1:12:03उभरती हैं।
  1936. 1:12:04बिल्कुल। एक विद्वान जो ग्रंथों में
  1937. 1:12:06सच्चाई खोज रहा है। एक घुमक्कड़ जो सड़कों
  1938. 1:12:10पर जिंदगी को जी रहा है और एक दार्शनिक जो
  1939. 1:12:13हर चीज को अपने यूरोपीय पैमाने पर तौल रहा
  1940. 1:12:16है।
  1941. 1:12:16और यही इस पूरी चर्चा का सार है। किसी भी
  1942. 1:12:19यात्री का वृतांत हमें उस जगह के बारे में
  1943. 1:12:21जितना बताता है उतना ही खुद उस यात्री और
  1944. 1:12:24उसकी दुनिया के बारे में भी बताता है।
  1945. 1:12:26उनके पूर्वाग्रह, उनके सवाल, उनकी
  1946. 1:12:28हैरानियां यह सब कहानी का हिस्सा हैं।
  1947. 1:12:30सही बात है। अलबिरूनी का भारत ज्ञान और
  1948. 1:12:34दर्शन का देश है।
  1949. 1:12:35इब्नबतूटा का भारत चहल-पहल और अजूबों से
  1950. 1:12:38भरा है।
  1951. 1:12:38और बर्नियर का भारत यूरोप के मुकाबले एक
  1952. 1:12:42पिछड़ा और निरंकुश देश है।
  1953. 1:12:44और सच्चाई शायद इन तीनों के बीच कहीं है।
  1954. 1:12:46उनके वृतांतों को पढ़ते हुए हमें हमेशा यह
  1955. 1:12:50याद रखना चाहिए कि हम सिर्फ भारत को नहीं
  1956. 1:12:53बल्कि भारत को देखती हुई एक खास नजर को भी
  1957. 1:12:57देख रहे हैं।
  1958. 1:12:57बिल्कुल यह वृतांत इतिहास को समझने के लिए
  1959. 1:13:00अमूल्य हैं। लेकिन वे अपने आप में पूरा
  1960. 1:13:02इतिहास नहीं है। वे एक पहेली के कुछ जरूरी
  1961. 1:13:04टुकड़े हैं।
  1962. 1:13:05जिन्हें हमें दूसरे स्रोतों के साथ जोड़कर
  1963. 1:13:08देखना होगा ताकि एक ज्यादा मुकम्मल तस्वीर
  1964. 1:13:10बन सके।
  1965. 1:13:11जी।
  1966. 1:13:11यह सब सोचने पर मजबूर करता है। यह यात्री
  1967. 1:13:14अपनी कहानियों से दुनिया की भारत के बारे
  1968. 1:13:17में समझ को गढ़ रहे थे। यह मुझे एक सवाल
  1969. 1:13:19के साथ छोड़ जाता है जिस पर शायद हम सब
  1970. 1:13:22सोच सकते हैं आज की इस हाइपर कनेक्टेड
  1971. 1:13:25दुनिया में जहां हर कोई फोन पर अपनी कहानी
  1972. 1:13:28कह रहा है। आज के यात्री कौन है और वे
  1973. 1:13:31हमारी दुनिया की कौन सी कहानी सुना रहे
  1974. 1:13:33हैं?
  1975. 1:13:36आज हम एक नए अध्याय की गहन पड़ताल शुरू कर
  1976. 1:13:39रहे हैं। अध्याय का नाम है भक्ति सूफी
  1977. 1:13:42परंपराएं।
  1978. 1:13:43धार्मिक विश्वासों में बदलाव और श्रद्धा
  1979. 1:13:45ग्रंथ। इसका अर्थ है भक्ति सूफी ट्रेडिशंस
  1980. 1:13:50चेंजेस इन रिलीजियस बिलीव्स एंड डिवोशनल
  1981. 1:13:53टेक्स्ट्स।
  1982. 1:13:53तो मतलब इस चर्चा में हम लगभग आठवीं से
  1983. 1:13:5618वीं सदी तक यानी 1000 साल के दौरान जो
  1984. 1:13:59भी धार्मिक बदलाव हुए उन्हें समझने वाले
  1985. 1:14:02हैं।
  1986. 1:14:02बिल्कुल और यह एक बहुत ही दिलचस्प दौर था।
  1987. 1:14:05इस समय को समझने के लिए इतिहासकार कई तरह
  1988. 1:14:09के सोर्सेस का इस्तेमाल करते हैं।
  1989. 1:14:11जैसे उस समय की वास्तुकला मतलब
  1990. 1:14:12आर्किटेक्चर।
  1991. 1:14:13हां स्तूप, विहार, मंदिर, मस्जिदें और
  1992. 1:14:17इनसे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है संत कवियों
  1993. 1:14:20द्वारा रची गई कविताएं और सूफियों की लिखी
  1994. 1:14:23रचनाएं।
  1995. 1:14:24अच्छा। हमें यह समझना होगा कि यह दौर किसी
  1996. 1:14:27एक अकेले विश्वास का नहीं था बल्कि कई
  1997. 1:14:30धार्मिक विश्वासों और आचरणों का एक एक
  1998. 1:14:33मोजेक या मिश्रण था। इसमें हमें एकीकरण भी
  1999. 1:14:37दिखता है और टकराव भी।
  2000. 1:14:39ठीक है। तो चलिए इसे खोलते हैं। जब हम
  2001. 1:14:42एकीकरण या इंटीग्रेशन की बात करते हैं, तो
  2002. 1:14:45इसका क्या मतलब है? अच्छा। मतलब पुराणों
  2003. 1:14:48जैसी रचनाओं को सरल संस्कृत छंदों में
  2004. 1:14:50लिखा गया। जिन्हें महिलाएं और शूद्र
  2005. 1:14:54जिन्हें पहले वेद सुनने की अनुमति नहीं थी
  2006. 1:14:57वो भी सुन सकते थे।
  2007. 1:14:58और दूसरी प्रक्रिया क्या थी?
  2008. 1:14:59दूसरी प्रक्रिया थी ब्राह्मणों द्वारा
  2009. 1:15:01अन्य सामाजिक वर्गों की आस्थाओं और आचरणों
  2010. 1:15:04को स्वीकार करना।
  2011. 1:15:06मतलब वो उन्हें अपना रहे थे। उन्हें एक
  2012. 1:15:08नया रूप दे रहे थे।
  2013. 1:15:10इसका कोई उदाहरण दे सकती हैं?
  2014. 1:15:11हां। सबसे अच्छा उदाहरण है पूरी उड़ीसा का
  2015. 1:15:14जगन्नाथ पंत।
  2016. 1:15:15जगन्नाथ। हां जगन्नाथ जिसका शाब्दिक अर्थ
  2017. 1:15:18है संपूर्ण विश्व का स्वामी।
  2018. 1:15:21डेफिनेशन के तौर पर यह विष्णु का एक
  2019. 1:15:24स्वरूप है।
  2020. 1:15:25लेकिन इसमें खास क्या था?
  2021. 1:15:26खास बात ये थी कि यहां एक स्थानीय देवता
  2022. 1:15:29को विष्णु के रूप में प्रस्तुत किया गया।
  2023. 1:15:31यह दिखाता है कि कैसे एक स्थानीय लिटिल
  2024. 1:15:35ट्रेडिशन को एक बड़ी अखिल भारतीय ग्रेटर
  2025. 1:15:39का हिस्सा बनाया गया।
  2026. 1:15:40अच्छा। तो समाजशास्त्री इसे महान और लघु
  2027. 1:15:43परंपराओं के बीच का संवाद कहते हैं।
  2028. 1:15:45बिल्कुल। और हां, यह एग्जाम्स के लिए एक
  2029. 1:15:47जरूरी कांसेप्ट है। महान परंपरा शासकों और
  2030. 1:15:51पुरोहितों की और लघु परंपरा आम किसानों
  2031. 1:15:54की।
  2032. 1:15:54लेकिन जैसा आपने कहा हमेशा एकीकरण ही नहीं
  2033. 1:15:57होता था। टकराव भी थे।
  2034. 1:15:59हां, टकराव भी थे। वैदिक परंपरा से अलग
  2035. 1:16:02तांत्रिक पूजा पद्धति मतलब ट्रिक
  2036. 1:16:05प्रैक्टिसेस भी बहुत प्रचलित थी।
  2037. 1:16:07और इसमें क्या अलग था? इसमें महिलाएं और
  2038. 1:16:09पुरुष दोनों शामिल हो सकते थे और इसमें
  2039. 1:16:12कर्मकांडीय सत्ता और वर्णभेद की अवहेलना
  2040. 1:16:15की जाती थी। एक तरह से ये एस्टैब्लिश्ड
  2041. 1:16:17सिस्टम को चुनौती थी।
  2042. 1:16:19तो मतलब बौद्ध जैन और पौराणिक हिंदू मतों
  2043. 1:16:22के बीच भी ये संघर्ष होता था।
  2044. 1:16:24हां अक्सर होता था।
  2045. 1:16:25ठीक है। अब बात करते हैं भक्ति आंदोलन की।
  2046. 1:16:28इसकी शुरुआत तो दक्षिण भारत से हुई थी। है
  2047. 1:16:30ना?
  2048. 1:16:30बिल्कुल। लगभग छठी शताब्दी में तमिलनाडु
  2049. 1:16:33में दो प्रमुख संत कवियों के समूह उभरे।
  2050. 1:16:36अलवार और नैनार
  2051. 1:16:37सही अलवार जो विष्णु के भक्त थे और नैनार
  2052. 1:16:41जो शिव के भक्त थे
  2053. 1:16:42और यह क्या करते थे?
  2054. 1:16:43यह संत एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूम
  2055. 1:16:46में तमिल भाषा में मतलब लोगों की अपनी
  2056. 1:16:49भाषा में अपने भगवान की स्तुति में भजन
  2057. 1:16:52गाते थे।
  2058. 1:16:52क्या इन आंदोलनों में समाज के सभी वर्गों
  2059. 1:16:54के लोग शामिल थे?
  2060. 1:16:55हां। और यही इनकी सबसे बड़ी विशेषता थी।
  2061. 1:16:59इनमें ब्राह्मणों से लेकर शिल्पकार, किसान
  2062. 1:17:02और कई अस्पृश्य मानी जाने वाली जातियों के
  2063. 1:17:05लोग भी शामिल थे।
  2064. 1:17:06तो यह जाति प्रथा और ब्राह्मणों के
  2065. 1:17:09प्रभुत्व का खुला विरोध था।
  2066. 1:17:10बिल्कुल। और इसमें महिलाएं भी पीछे नहीं
  2067. 1:17:12थी। अंडाल जैसी स्त्री अलवार भक्त और
  2068. 1:17:15कराईकाल अमियार जैसी स्त्री नयानार भक्त
  2069. 1:17:18भी थी। वैसे ये दोनों नाम एग्जाम्स के
  2070. 1:17:21पॉइंट ऑफ व्यू से बहुत जरूरी हैं।
  2071. 1:17:22अच्छा तो उस समय के शासकों का उनका इन
  2072. 1:17:25संतों के प्रति क्या रवैया था। यह बहुत
  2073. 1:17:27दिलचस्प है। चोल सम्राटों ने इन संत
  2074. 1:17:30कवियों का समर्थन किया। उन्होंने चिदंबरम,
  2075. 1:17:32तंजावरुर जैसे विशाल शिव मंदिर बनवाए।
  2076. 1:17:35मतलब उन्होंने इस आंदोलन को अपना लिया।
  2077. 1:17:37हां। और उन्होंने नयनार संतों के भजनों का
  2078. 1:17:40एक संकलन भी करवाया जिसे तेवरम कहा जाता
  2079. 1:17:42है। यह भी एग्जाम्स के लिए एक महत्वपूर्ण
  2080. 1:17:45टर्म है।
  2081. 1:17:45ठीक है। प्रदक्षिण के बाद यह लहर कर्नाटक
  2082. 1:17:48पहुंची। वहां क्या हुआ? 12वीं शताब्दी में
  2083. 1:17:51कर्नाटक में एक नया आंदोलन उभरा जिसका
  2084. 1:17:54नेतृत्व बासवन्ना नाम के एक ब्राह्मण ने
  2085. 1:17:56किया।
  2086. 1:17:57बासवन्ना।
  2087. 1:17:58हां उनके अनुयाई वीर शैव यानी शिव के वीर
  2088. 1:18:02या लिंगायत यानी लिंग धारण करने वाले
  2089. 1:18:06कहलाए। डेफिनेशन के तौर पर यह शिव की
  2090. 1:18:09आराधना लिंग के रूप में करते हैं।
  2091. 1:18:11और इनकी विचारधारा क्या थी? इन्होंने जाति
  2092. 1:18:14की अवधारणा, पुनर्जन्म के सिद्धांत और
  2093. 1:18:17ब्राह्मणवादी कर्मकांडों का जोरदार विरोध
  2094. 1:18:21किया और तो और इन्होंने विधवा पुनर्विवाह
  2095. 1:18:24को भी मान्यता दी।
  2096. 1:18:26यह तो उस समय के हिसाब से बहुत
  2097. 1:18:27क्रांतिकारी था।
  2098. 1:18:28बहुत ज्यादा। और यह पॉइंट्स भी एग्जाम्स
  2099. 1:18:31के लिए जरूरी हैं।
  2100. 1:18:32ठीक है। तो इसी दौर में उपमहाद्वीप में एक
  2101. 1:18:35और बड़ा धार्मिक बदलाव आया। इस्लाम का
  2102. 1:18:37आगमन।
  2103. 1:18:38हां। सातवीं शताब्दी में अरब व्यापारी
  2104. 1:18:41समुद्र के रास्ते पश्चिमी भारत के
  2105. 1:18:42बंदरगाहों तक आए। फिर 711 ईसवी में
  2106. 1:18:46मोहम्मद बिन कासिम ने सिंध को जीता और
  2107. 1:18:49दिल्ली सल्तनत की स्थापना के बाद इस्लाम
  2108. 1:18:51का प्रभाव और तेजी से बढ़ा।
  2109. 1:18:53आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब था?
  2110. 1:18:55इस्लाम के मूल सिद्धांत क्या थे?
  2111. 1:18:57सिद्धांतिक रूप से इस्लाम के अनुयायियों
  2112. 1:19:01को पांच स्तंभों का पालन करना होता है।
  2113. 1:19:04अल्लाह एकमात्र ईश्वर है और पैगंबर
  2114. 1:19:07मोहम्मद उनके दूत हैं। दिन में पांच बार
  2115. 1:19:10नमाज, खैरात या जकात पाटना, रमजान के
  2116. 1:19:14महीने में रोजा रखना
  2117. 1:19:15और हज के लिए मक्का जाना।
  2118. 1:19:17बिल्कुल। लेकिन व्यवहार में इस्लाम ने भी
  2119. 1:19:20स्थानीय प्रथाओं का अपनाया।
  2120. 1:19:22इसका कोई उदाहरण? जैसे खोजा इस्माइली शिया
  2121. 1:19:25समुदाय के लोगों ने स्थानीय भाषा में
  2122. 1:19:28भक्ति गीत लिखे जिन्हें गिनान कहा जाता
  2123. 1:19:30था। यह बहुत जरूरी है कि उस समय हिंदू और
  2124. 1:19:34मुसलमान जैसे शब्द बहुत कम इस्तेमाल होते
  2125. 1:19:37थे।
  2126. 1:19:37अच्छा तो पहचान कैसे होती थी?
  2127. 1:19:40लोगों की पहचान अक्सर उनके जन्म स्थान से
  2128. 1:19:43होती थी। यहीं से बात और भी दिलचस्प हो
  2129. 1:19:45जाती है क्योंकि इस्लाम के अंदर ही एक
  2130. 1:19:48रहस्यवादी या मिस्टिकल धारा का विकास हुआ
  2131. 1:19:51जिसे हम सूफीवाद कहते हैं।
  2132. 1:19:53बिल्कुल सूफी लोग कुरान की अपनी व्याख्या
  2133. 1:19:56के आधार पर ईश्वर की उपासना पर जोर देते
  2134. 1:19:59थे। उन्होंने पैगंबर मोहम्मद को इंसान
  2135. 1:20:02कामिल बताते हुए उनका अनुसरण करने की सीख
  2136. 1:20:05दी।
  2137. 1:20:05और ये सूफी संत रहते कहां थे? इनका कोई
  2138. 1:20:08संगठन था?
  2139. 1:20:09हां। यहीं पर कुछ जरूरी टर्म्स आती हैं।
  2140. 1:20:11जैसे खानकाह जो सूफी संतों के रहने का
  2141. 1:20:14स्थान था। एक तरह का आश्रम
  2142. 1:20:17खानकाह। ठीक है?
  2143. 1:20:18और फिर आता है सिलसिला। सिलसिला मतलब एक
  2144. 1:20:21आध्यात्मिक परंपरा या चैन जो गुरु और
  2145. 1:20:24शिष्य को जोड़ती है और गुरु को शेख या पीर
  2146. 1:20:28कहा जाता था।
  2147. 1:20:29भारत में कौन सा सिलसिला सबसे ज्यादा
  2148. 1:20:30प्रभावशाली था?
  2149. 1:20:31चिश्ती सिलसिला। इसके प्रमुख संतों में
  2150. 1:20:34ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती जिनकी दरगाह
  2151. 1:20:37अजमेर में है।
  2152. 1:20:37और दिल्ली के निजामुद्दीन औलिया।
  2153. 1:20:39हां बिल्कुल। यह संत बहुत सादा जीवन जीते
  2154. 1:20:42थे और राजनीति से दूर रहते थे। लेकिन बिना
  2155. 1:20:46मांगे दिए गए दान को स्वीकार करते थे।
  2156. 1:20:48उनकी उपासना का मतलब पूजा का तरीका क्या
  2157. 1:20:51था?
  2158. 1:20:51उनकी उपासना के दो मुख्य अंग थे। जियारत
  2159. 1:20:55और कव्वाली।
  2160. 1:20:56अच्छा, जियारत से आपका क्या मतलब है?
  2161. 1:20:58ईश्वर का नाम जपने के लिए गाया जाने वाला
  2162. 1:21:00संगीत। और एक और जरूरी बात चिश्ती संतों
  2163. 1:21:04ने संवाद के लिए स्थानीय भाषा जैसे हिंदवी
  2164. 1:21:07का भी प्रयोग किया जिससे वे आम लोगों में
  2165. 1:21:10बहुत लोकप्रिय हुए।
  2166. 1:21:11तो अब उत्तर भारत में यह सारी अलग-अलग
  2167. 1:21:14परंपराएं आपस में मिल रही थी।
  2168. 1:21:15जी।
  2169. 1:21:16यहीं कबीर की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो
  2170. 1:21:18जाती है।
  2171. 1:21:18हां। कबीर जो 14वीं 15वीं शताब्दी के संत
  2172. 1:21:22थे वो निर्गुण भक्ति के एक प्रमुख संत थे।
  2173. 1:21:25निर्गुण भक्ति एक बार इसे भी समझा दीजिए।
  2174. 1:21:27निर्गुण भक्ति यानी निर्गुणा भक्ति का
  2175. 1:21:30मतलब है निराकार ईश्वर की उपासना। बिना
  2176. 1:21:33किसी मूर्ति या तस्वीर के।
  2177. 1:21:35अच्छा।
  2178. 1:21:36कबीर ने परम सत्य को अल्लाह, खुदा, हजरत,
  2179. 1:21:39पीर, राम ऐसे कई नामों से संबोधित किया।
  2180. 1:21:43उन्होंने हिंदू और इस्लाम दोनों धर्मों की
  2181. 1:21:46बाहरी पूजा पद्धतियों का खंडन किया।
  2182. 1:21:48उनकी रचनाएं कहां मिलती हैं? उनकी रचनाएं
  2183. 1:21:51कबीर बीजक, कबीर ग्रंथावली और आदि ग्रंथ
  2184. 1:21:55साहिब में संग्रहित है। और यह तीनों ही
  2185. 1:21:58नाम एग्जाम्स के लिए बहुत जरूरी हैं।
  2186. 1:22:01कबीर के बाद एक और महान संत हुए बाबा गुरु
  2187. 1:22:04नानक।
  2188. 1:22:04बाबा गुरु नानक 1469, 1539 का जन्म एक
  2189. 1:22:09हिंदू व्यापारी परिवार में हुआ था।
  2190. 1:22:11उन्होंने भी निर्गुण भक्ति का ही उपदेश
  2191. 1:22:14दिया। मतलब मूर्ति पूजा कर्मकांड और जाति
  2192. 1:22:17भेद का खंदन
  2193. 1:22:19बिल्कुल उनके उपदेश शब्द के रूप में गाए
  2194. 1:22:22जाते थे
  2195. 1:22:22और सिख परंपरा की शुरुआत यहीं से हुई।
  2196. 1:22:24हां गुरु नानक ने अपने शिष्य अंगद को अपना
  2197. 1:22:27उत्तराधिकारी चुना और यहीं से सिख परंपरा
  2198. 1:22:30की शुरुआत हुई। बाद में पांचवें गुरु
  2199. 1:22:33अर्जुन देव ने बाबा नानक और उनके चार
  2200. 1:22:36उत्तराधिकारियों बाबा फरीद, रविदास और
  2201. 1:22:40कबीर की वाणी को आदि ग्रंथ साहिब में
  2202. 1:22:43संकलित किया। यह तो बहुत बड़ी बात है।
  2203. 1:22:44बिल्कुल और बाद में 10वें गुरु गोविंद
  2204. 1:22:47सिंह ने इसे गुरु ग्रंथ साहिब का रूप
  2205. 1:22:49दिया। यह पूरी जर्नी एग्जाम्स के लिए बहुत
  2206. 1:22:52महत्वपूर्ण है।
  2207. 1:22:53इस दौर में मीराबाई का भी नाम आता है। वो
  2208. 1:22:55इनसे कैसे अलग थी?
  2209. 1:22:56मीराबाई जो लगभग पंडली 16वीं शताब्दी में
  2210. 1:22:59हुई। एक राजपूत राजकुमारी थी। वो सगुण
  2211. 1:23:02भक्ति की थी। मतलब उन्होंने कृष्ण को अपना
  2212. 1:23:05पति मानकर उनकी भक्ति में कई भजन रचे।
  2213. 1:23:08उन्होंने तो राजमहल का ऐश्वर्य भी त्याग
  2214. 1:23:10दिया था। हां, उन्होंने राजमहल के ऐश्वर्य
  2215. 1:23:13को त्याग कर एक सन्यासिनी का जीवन अपनाया।
  2216. 1:23:16यह अपने आप में एक बहुत बड़ा सामाजिक
  2217. 1:23:18विद्रोह था।
  2218. 1:23:18तो, हमने आज आठवीं से 18वीं सदी के एक
  2219. 1:23:20लंबे दौर को देखा। हमने दक्षिण के अलवार
  2220. 1:23:23और नैनार संतों से लेकर उत्तर भारत के
  2221. 1:23:25कबीर, नानक और मीराबाई तक की यात्रा की।
  2222. 1:23:28बिल्कुल। और इस पूरी चर्चा का सार यह है
  2223. 1:23:31कि भक्ति और सूफी परंपराओं ने धर्म को
  2224. 1:23:34संस्थागत ढांचों से निकालकर एक व्यक्तिगत
  2225. 1:23:37और भावनात्मक अनुभव बनाया।
  2226. 1:23:40इसने आम लोगों को अपनी भाषा में अपने
  2227. 1:23:43तरीके से ईश्वर से जुड़ने का रास्ता
  2228. 1:23:44दिखाया।
  2229. 1:23:45सही कहा। लेकिन यह एक महत्वपूर्ण सवाल भी
  2230. 1:23:48हमारे सामने छोड़ जाता है।
  2231. 1:23:49क्या?
  2232. 1:23:49वो यह कि इन संतों के उपदेश ज्यादातर
  2233. 1:23:54मौखिक थे। उन्हें लिखा तो बहुत बाद में
  2234. 1:23:56उनके अनुयायियों ने तो सोचने वाली बात यह
  2235. 1:24:00है कि जब किसी संत की मौखिक वाणी को लिखित
  2236. 1:24:04ग्रंथ का रूप दिया जाता है तो क्या उसके
  2237. 1:24:08मूल संदेश में कोई बदलाव आ जाता है?
  2238. 1:24:11मतलब एक मौखिक परंपरा को संगठित करने की
  2239. 1:24:13प्रक्रिया में क्या कुछ जोड़ा या हटाया
  2240. 1:24:15जाता होगा? बिल्कुल यह एक ऐसा सवाल है जिस
  2241. 1:24:18पर इतिहासकारों में आज भी बहस होती है।
  2242. 1:24:21भक्ति सूफी परंपराएं धार्मिक विश्वासों
  2243. 1:24:24में बदलाव और श्रद्धा ग्रंथ यह अध्याय
  2244. 1:24:27समाप्त हुआ।
  2245. 1:24:30आज हम एक एक ऐसे भूले-बिसरे साम्राज्य की
  2246. 1:24:33कहानी में उतर रहे हैं जिसका नाम ही था
  2247. 1:24:36जीत का शहर।
  2248. 1:24:37हम
  2249. 1:24:38एक ऐसी जगह जो अपने समय में शायद दुनिया
  2250. 1:24:41के सबसे शानदार शहरों में से एक थी। लेकिन
  2251. 1:24:43जिसका अंत इतिहास की सबसे विनाशकारी हार
  2252. 1:24:46में से एक के साथ हुआ। हम बात कर रहे हैं
  2253. 1:24:49विजयनगर साम्राज्य की।
  2254. 1:24:50बिल्कुल। और यह सिर्फ एक साम्राज्य की
  2255. 1:24:52कहानी नहीं है। यह कहानी है पत्थर की,
  2256. 1:24:55पानी की, कला और और युद्ध की।
  2257. 1:24:59सही। और इस बात की भी कि कैसे यादें
  2258. 1:25:02खंडरों के बीच भी एक पूरी सभ्यता को जिंदा
  2259. 1:25:05रख सकती हैं। हमारे पास जो स्रोत हैं वो
  2260. 1:25:08हमें लगभग 14वीं से 16वीं सदी के उस दौर
  2261. 1:25:11में ले जाते हैं।
  2262. 1:25:11तो चलिए इस भव्य शहर की परतों को एक-एक कर
  2263. 1:25:14खोलते हैं। विजयनगर यानी सिटी ऑफ
  2264. 1:25:17विक्ट्री। यह नाम यह नाम अपने आप में ही
  2265. 1:25:20कितना शक्तिशाली लगता है। पर आज दुनिया
  2266. 1:25:23इसे एक दूसरे नाम से जानती है। हम्पी
  2267. 1:25:25हां।
  2268. 1:25:26यह बदलाव कैसे हुआ? यह एक बहुत दिलचस्प
  2269. 1:25:29कहानी है। देखिए 1565 की एक लड़ाई के बाद
  2270. 1:25:32जब यह शहर लूटा गया, तबाह कर दिया गया तो
  2271. 1:25:35यह धीरे-धीरे वीरान होने लगा।
  2272. 1:25:37ओके।
  2273. 1:25:37पर वहां के जो लोग थे, उनकी यादों में यह
  2274. 1:25:40जिंदा रहा। उन्होंने इसे हम्पी कहना शुरू
  2275. 1:25:43कर दिया। जो वहां की स्थानीय मातृ देवी
  2276. 1:25:46पंपा देवी के नाम से आया था।
  2277. 1:25:48अच्छा। तो एक तरह से साम्राज्य का जो
  2278. 1:25:50राजनीतिक नाम था वह भले ही मिट गया पर
  2279. 1:25:54लोगों की आस्था ने शहर को एक नया एक अमर
  2280. 1:25:57नाम दे दिया।
  2281. 1:25:58और फिर सदियों बाद इन्हीं खंडरों से एक
  2282. 1:26:00अंग्रेज अफसर कर्नल कॉलिन मकजी ने इस खोए
  2283. 1:26:04हुए साम्राज्य को फिर से दुनिया के सामने
  2284. 1:26:06रखा।
  2285. 1:26:06हां, यह तो किसी खजाने की खोज कैसी कहानी
  2286. 1:26:09लगती है।
  2287. 1:26:09लगभग वैसा ही था। 1800 में जब मैकेंजी जो
  2288. 1:26:13ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए काम करते थे
  2289. 1:26:14वहां पहुंचे तो उन्होंने इन खंडरों की
  2290. 1:26:16भव्यता को पहचाना। वो एक इंजीनियर भी थे
  2291. 1:26:19और पुरावेद भी।
  2292. 1:26:20अच्छा दोनों
  2293. 1:26:20जी।
  2294. 1:26:21उन्होंने इसका पहला सर्वे मैप तैयार किया
  2295. 1:26:24और उनकी जो शुरुआती जानकारी थी वो स्थानीय
  2296. 1:26:27पुरोहितों की कहानियों और यादों पर आधारित
  2297. 1:26:31थी।
  2298. 1:26:31मतलब मौखिक परंपराओं का।
  2299. 1:26:32हां। यही मौखिक परंपराएं बाद में मिले
  2300. 1:26:36पुरातात्विक सबूतों और अभिलेखों के साथ
  2301. 1:26:39मिलकर विजयनगर की पूरी तस्वीर बनाने में
  2302. 1:26:42बहुत मददगार साबित हुई। यानी इतिहास को
  2303. 1:26:45फिर से जोड़ने के लिए हर तरह के धागों का
  2304. 1:26:48इस्तेमाल किया गया। लोगों की बातें, पत्थर
  2305. 1:26:50पर लिखे अक्षर और शायद विदेशी यात्रियों
  2306. 1:26:53के लिखे हुए सफरनामे भी।
  2307. 1:26:54बिल्कुल।
  2308. 1:26:55अब जरा इस साम्राज्य की नीव पर चलते हैं।
  2309. 1:26:57इसे शुरू किसने किया था?
  2310. 1:26:59इसकी स्थापना हुई 1336 में।
  2311. 1:27:02दो भाई थे हरिहर और बुक्का।
  2312. 1:27:04हरिहर और बुक्का।
  2313. 1:27:06जी। यह वो दौर था जब दक्कन में बहुत
  2314. 1:27:09राजनीतिक उथर-पुथर थी। और इसी माहौल में
  2315. 1:27:13उन्होंने तुंगभद्रा नदी के किनारे इस
  2316. 1:27:15साम्राज्य की नींव रखी।
  2317. 1:27:17दिलचस्प बात यह है कि इस साम्राज्य की
  2318. 1:27:19सीमाओं में अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले और
  2319. 1:27:22अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोग रहते
  2320. 1:27:25थे।
  2321. 1:27:25तो मतलब यह एक बहुत ही विविध एक
  2322. 1:27:27कॉस्मोपॉलिटन जगह रही होगी।
  2323. 1:27:29एकदम और जाहिर है एक बढ़ते हुए साम्राज्य
  2324. 1:27:31को अपने पड़ोसियों से लड़ना भी पड़ता
  2325. 1:27:33होगा।
  2326. 1:27:34हां बिल्कुल।
  2327. 1:27:34उनका संघर्ष लगातार चलता रहा। खासकर उत्तर
  2328. 1:27:38में दक्कन के सुल्तानों से और पूर्व में
  2329. 1:27:41उड़ीसा के गजपति शासकों के साथ
  2330. 1:27:43और यह लड़ाईयां यह सिर्फ जमीन के लिए थी?
  2331. 1:27:46नहीं, सिर्फ जमीन के लिए नहीं यह नदियों
  2332. 1:27:49के उपजाऊ डेल्टा और और जो विदेशी व्यापार
  2333. 1:27:52से आमदनी होती थी, उस पर कब्जे के लिए भी
  2334. 1:27:55थी।
  2335. 1:27:55लेकिन क्या लड़ाई का कोई फायदा भी हुआ है?
  2336. 1:27:57मेरा मतलब है विचारों के आदान-प्रदान के
  2337. 1:27:59लिहाज से?
  2338. 1:28:00यह बहुत महत्वपूर्ण बिंदु है। लड़ाई के
  2339. 1:28:02साथ-साथ विचारों और तकनीकों का भी लेनदेन
  2340. 1:28:05होता है।
  2341. 1:28:06अच्छा। विजयनगर के शासकों ने खासकर
  2342. 1:28:08वास्तुकला मतलब आर्किटेक्चर के क्षेत्र
  2343. 1:28:11में दक्खन की सल्तनतों से बहुत कुछ सीखा।
  2344. 1:28:14उन्होंने मेहराब यानी आर्च और गुंबद डोम
  2345. 1:28:18जो इस्लामिक स्थापत्य की पहचान है।
  2346. 1:28:19हां। उन विशेषताओं को न सिर्फ अपनाया
  2347. 1:28:22बल्कि उन्हें अपने मंदिरों और महलों की
  2348. 1:28:25डिजाइन में मिलाकर एक नया एक बहुत ही
  2349. 1:28:28अनूठा स्टाइल तैयार किया।
  2350. 1:28:29तो इस साम्राज्य पर कई राजवंशों ने राज
  2351. 1:28:33किया। संगम सालूव तुलुव यह सत्ता का बदलना
  2352. 1:28:38किसी अस्थिरता का संकेत था।
  2353. 1:28:40हम्
  2354. 1:28:40कुछ हद तक कह सकते हैं यह दोनों का मिश्रण
  2355. 1:28:42था। सत्ता परिवर्तन अक्सर अंदरूनी खींचतान
  2356. 1:28:45का नतीजा होता था। संगम वंश के बाद
  2357. 1:28:48सालूवाय और फिर तुलुव और तुलु वंश में ही
  2358. 1:28:51विजयनगर को अपना सबसे महान शासक मिला।
  2359. 1:28:54कृष्णदेव राय
  2360. 1:28:54हां कृष्णदेव राय
  2361. 1:28:56इनका नाम तो आज भी दक्षिण भारत में बहुत
  2362. 1:28:58सम्मान से लिया जाता है। इनका दौर विजयनगर
  2363. 1:29:00का स्वर्णकाल माना जाता है ना? बिलकुल।
  2364. 1:29:021509 से 1529 तक का उनका जो शासन काल था,
  2365. 1:29:06वह विस्तार और स्थायित्व का दौर था।
  2366. 1:29:09उन्होंने अपने सभी दुश्मनों को हराया।
  2367. 1:29:11चाहे वह उड़ीसा के शासक हो या बीजापुर के
  2368. 1:29:14सुल्तान
  2369. 1:29:14और उन्होंने तुंगभद्रा और कृष्णा नदियों
  2370. 1:29:17के बीच का वो बेहद उपजाऊ इलाका, रायचूर
  2371. 1:29:20दआब उस पर भी कब्जा किया।
  2372. 1:29:22लेकिन, वह सिर्फ एक योद्धा नहीं थे। उनके
  2373. 1:29:24राज में शांति और समृद्धि थी।
  2374. 1:29:26और उन्होंने निर्माण भी बहुत करवाया।
  2375. 1:29:28खासकर वो विशाल गोपुरम यह गोपुरम क्या थे
  2376. 1:29:31और इतने भव्य क्यों बनाए जाते थे?
  2377. 1:29:33गोपुरम का मतलब है राजकीय प्रवेश द्वार
  2378. 1:29:36मतलब मंदिरों के मुख्य गेट। कृष्णदेव राय
  2379. 1:29:39ने कई पुराने मंदिरों में भी नए और बहुत
  2380. 1:29:42ऊंचे गोपुरम बनवाए।
  2381. 1:29:43कितने ऊंचे?
  2382. 1:29:44इतने ऊंचे कि वह मंदिर के मुख्य शिखर से
  2383. 1:29:47भी ज्यादा नजर आते थे। यह एक तरह से राजा
  2384. 1:29:50की ताकत, उसकी धर्म परायणता और साम्राज्य
  2385. 1:29:53की समृद्धि का ऐलान करते थे। आप दूर से ही
  2386. 1:29:56इन गोपुरम को देखकर समझ सकते थे कि आप एक
  2387. 1:30:00शक्तिशाली साम्राज्य के इलाके में हैं।
  2388. 1:30:02वाह!
  2389. 1:30:02उन्होंने अपनी मां के नाम पर नगलापुरम नाम
  2390. 1:30:05का एक नया शहर भी बसाया था।
  2391. 1:30:07लेकिन फिर इतने महान राजा और इतने मजबूत
  2392. 1:30:10साम्राज्य का पतन कैसे हो गया? कृष्णदेव
  2393. 1:30:12राय की मृत्यु के बाद क्या हुआ?
  2394. 1:30:14उनकी मृत्यु के बाद ही साम्राज्य के अंदर
  2395. 1:30:16तनाव बढ़ने लगा। उनके जो उत्तराधिकारी थे,
  2396. 1:30:19वह उतने काबिल नहीं थे और उन्हें अपने ही
  2397. 1:30:22नायकों यानी सैन्य कमांडरों से चुनौती
  2398. 1:30:24मिलने लगी। अच्छा।
  2399. 1:30:25सत्ता धीरे-धीरे अरावेदुर राजवंश के हाथों
  2400. 1:30:28में चली गई और फिर आया साल 1565
  2401. 1:30:32तालीकोटा का युद्ध
  2402. 1:30:33यह है।
  2403. 1:30:33यह तो अविश्वसनीय लगता है। मतलब एक लड़ाई
  2404. 1:30:36ने 200 साल पुराने इतने भव्य साम्राज्य को
  2405. 1:30:40कुछ ही सालों में खंडर बना दिया।
  2406. 1:30:42हां, इसे राक्षसी तांगड़ी का युद्ध भी
  2407. 1:30:45कहते हैं। इसमें विजयनगर की सेना का सामना
  2408. 1:30:48बीजापुर, अहमदनगर और गोलकुंडा की संयुक्त
  2409. 1:30:51सेनाओं से हुआ। विजयनगर की बहुत बुरी तरह
  2410. 1:30:54हार हुई हम
  2411. 1:30:56और इसके बाद जो हुआ वो एक त्रासदी थी।
  2412. 1:30:59विजय सेनाओं ने राजधानी में घुसकर कई
  2413. 1:31:02महीनों तक लूटपाट की। इमारतों को तोड़ा,
  2414. 1:31:06आग लगा दी। वो शहर जो कभी जीत का शहर था
  2415. 1:31:10वो पूरी तरह वीरान हो गया।
  2416. 1:31:12यह सुनकर ही सेहरन होती है। चलिए अब
  2417. 1:31:14साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर आते
  2418. 1:31:16हैं। आपने नायकों का जिक्र किया था।
  2419. 1:31:19विजयनगर की एक खास राजनीतिक खोज अमरनायक
  2420. 1:31:22प्रणाली थी। यह क्या थी?
  2421. 1:31:24यह एक तरह की आप कह सकती हैं सैन्य
  2422. 1:31:27प्रशासनिक व्यवस्था थी। इसके कुछ तत्व
  2423. 1:31:30दिल्ली सल्तनत की इख्तता प्रणाली से
  2424. 1:31:33मिलते-जुलते थे। अमरनायक असल में सैनिक
  2425. 1:31:36कमांडर होते थे। जिन्हें राजा प्रशासन के
  2426. 1:31:39लिए कुछ इलाके दे देता था।
  2427. 1:31:41तो ये एक तरह के गवर्नर या सामंत हुए।
  2428. 1:31:44इनका काम क्या होता था? हां कह सकते हैं
  2429. 1:31:47वे अपने इलाके के किसानों, शिल्पकारों और
  2430. 1:31:50व्यापारियों से टैक्स वसूलते थे।
  2431. 1:31:53ओके।
  2432. 1:31:54इस टैक्स का एक हिस्सा वो अपने निजी खर्च
  2433. 1:31:57और अपनी सेना जिसमें घोड़े और हाथी होते
  2434. 1:32:00थे उसके रखरखाव के लिए रखते थे। और यही
  2435. 1:32:04सेना जरूरत पड़ने पर राजा के काम आती थी।
  2436. 1:32:07मतलब राजा को एक बड़ी स्थाई सेना रखने की
  2437. 1:32:09जरूरत नहीं थी। उसे यह नायक सेना मुहैया
  2438. 1:32:12कराते थे। पर राजा इन ताकतवर नायकों पर
  2439. 1:32:15नियंत्रण कैसे रखता था? कहीं वह खुद ही
  2440. 1:32:17बगावत ना कर दें।
  2441. 1:32:18बहुत अच्छा सवाल है। नियंत्रण के कई तरीके
  2442. 1:32:21थे। इन नायकों को साल में एक बार राजा को
  2443. 1:32:23कीमती भेंट देनी पड़ती थी और अपनी वफादारी
  2444. 1:32:26साबित करने के लिए दरबार में हाजिर होना
  2445. 1:32:29पड़ता था।
  2446. 1:32:30हम
  2447. 1:32:30साथ ही राजा समय-समय पर उनका एक इलाके से
  2448. 1:32:33दूसरे इलाके में तबादला भी करता रहता था।
  2449. 1:32:36ताकि वो किसी एक जगह पर बहुत ज्यादा
  2450. 1:32:37शक्तिशाली ना हो जाए।
  2451. 1:32:38बिल्कुल। लेकिन 17वीं शताब्दी आते-आते जब
  2452. 1:32:42केंद्रीय सत्ता कमजोर हुई, तो इनमें से कई
  2453. 1:32:45नायकों ने खुद को स्वतंत्र राजा घोषित कर
  2454. 1:32:47दिया। जिससे साम्राज्य का विघटन और तेज हो
  2455. 1:32:50गया।
  2456. 1:32:51तो यह एक ऐसी व्यवस्था थी जो साम्राज्य के
  2457. 1:32:53मजबूत होने पर तो काम करती थी, लेकिन
  2458. 1:32:56कमजोर होने पर उसी के टूटने का कारण बन
  2459. 1:32:59गई। चलिए अब उस शानदार शहर की बनावट पर
  2460. 1:33:02चलते हैं।
  2461. 1:33:02किसी भी शहर के लिए सबसे जरूरी चीज होती
  2462. 1:33:04है पानी। विजयनगर ने इसका इंतजाम कैसे
  2463. 1:33:07किया था? विजयनगर की जल प्रबंधन प्रणाली
  2464. 1:33:10उसकी सबसे बड़ी खूबियों में से एक थी। शहर
  2465. 1:33:13तुंगभद्रा नदी के किनारे एक प्राकृतिक
  2466. 1:33:15बेसिन में बसा था जिसके चारों ओर ग्रेनाइट
  2467. 1:33:18की पहाड़ियां थी।
  2468. 1:33:19तो यह एक चुनौती भी थी और एक मौका भी।
  2469. 1:33:22हां, मौका कैसे? क्योंकि इन पहाड़ियों से
  2470. 1:33:25कई छोटी-छोटी धाराएं निकल कर नदी में
  2471. 1:33:28मिलती थी। हम
  2472. 1:33:28तो विजयनगर के इंजीनियरों ने लगभग हर धारा
  2473. 1:33:32पर बांध बनाकर पानी को रोकने के लिए
  2474. 1:33:34अलग-अलग आकार के हौज या जलाशय बना दिए।
  2475. 1:33:37अच्छा।
  2476. 1:33:38इससे उन्हें साल भर पानी मिलता था। इनमें
  2477. 1:33:41सबसे मशहूर है कमलापुरम जलाशय। और एक
  2478. 1:33:44हिरिया नहर का भी जिक्र मिलता है। हां,
  2479. 1:33:46हिरिया नहर तो इंजीनियरिंग का एक चमत्कार
  2480. 1:33:48है। यह तुंगभद्रा नदी पर बने एक बांध से
  2481. 1:33:52पानी लेती थी और शहर के धार्मिक केंद्र और
  2482. 1:33:55शहरी केंद्र के बीच की घाटी को सींचती थी।
  2483. 1:33:58मतलब वो लोग पानी की हर बूंद की कीमत
  2484. 1:34:00समझते थे।
  2485. 1:34:01तो उन्होंने पानी का इतना शानदार इंतजाम
  2486. 1:34:03तो कर लिया। पर इतने अमीर शहर को दुश्मनों
  2487. 1:34:06से बचाने का क्या बंदोबस्त था?
  2488. 1:34:07सुरक्षा अभूतपूर्व थी। फारस से आए एक दूत
  2489. 1:34:12अब्दुल रजाक ने लिखा है कि शहर सात परतों
  2490. 1:34:16वाली किलेबंदी से घिरा था।
  2491. 1:34:17सात परतें?
  2492. 1:34:18जी। और सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि
  2493. 1:34:22इन दीवारों के अंदर सिर्फ शहर ही नहीं
  2494. 1:34:24बल्कि खेत और जंगल भी थे।
  2495. 1:34:26वाह, यह तो बहुत दूर की सोच है। मतलब
  2496. 1:34:29दुश्मन बाहर महीनों डेरा डाले बैठा रहे और
  2497. 1:34:32शहर के अंदर अपनी खेतीबाड़ी चल रही है।
  2498. 1:34:34हां, यह सिर्फ एक दीवार नहीं थी। यह एक
  2499. 1:34:37पूरा सर्वाइवर प्लान था। क्या ऐसा उस दौर
  2500. 1:34:39में आम था?
  2501. 1:34:40नहीं, बिल्कुल नहीं। यह एक असाधारण और
  2502. 1:34:43बहुत ही समझदारी भरी रणनीति थी। घेराबंदी
  2503. 1:34:47महीनों कभी-कभी सालों तक चलती थी। ऐसे में
  2504. 1:34:50दुश्मन का सबसे बड़ा हथियार होता है शहर
  2505. 1:34:53की रसद काट देना।
  2506. 1:34:54ताकि लोग भूख से हार मान लें।
  2507. 1:34:57सही। विजयनगर ने इस रणनीति को ही फेल कर
  2508. 1:35:00दिया। वो आत्मनिर्भर थे।
  2509. 1:35:02और यह दीवारें बनी कैसे थी? बिना गारे या
  2510. 1:35:05सीमेंट के। हां, पत्थर के टुकड़ों को
  2511. 1:35:07फन्नी के आकार में तराशा जाता था और
  2512. 1:35:10उन्हें एक दूसरे में ऐसे फंसाया जाता था
  2513. 1:35:13कि वह अपने वजन से ही टिके रहते थे। शहर
  2514. 1:35:16के प्रवेश द्वारों पर हमें इंडोइस
  2515. 1:35:18इस्लामिक शैली का प्रभाव भी दिखता है।
  2516. 1:35:21जहां मेहराब और गुंबद का इस्तेमाल किया
  2517. 1:35:23गया है।
  2518. 1:35:23अब शहर के दिल में चलते हैं राजकीय
  2519. 1:35:25केंद्र। यहां क्या-क्या था?
  2520. 1:35:27यह शहर के दक्षिण पश्चिमी हिस्से में था।
  2521. 1:35:30इसमें 60 से भी ज्यादा मंदिर थे जो दिखाता
  2522. 1:35:33है कि राजा के लिए धर्म और सत्ता आपस में
  2523. 1:35:37कितने जुड़े हुए थे
  2524. 1:35:38और इमारतें
  2525. 1:35:39यहां की सबसे प्रभावशाली संरचनाओं में से
  2526. 1:35:42दो हैं सभा मंडप और महानमी डिब्बा।
  2527. 1:35:45यह महानवमी डिब्बा नाम से तो लगता है कोई
  2528. 1:35:49त्यौहार मनाने की जगह होगी। पर इतनी विशाल
  2529. 1:35:51संरचना क्या यह सिर्फ धार्मिक कारणों से
  2530. 1:35:54थी या इसका कोई राजनीतिक महत्व भी था।
  2531. 1:35:56बिल्कुल। इसका राजनीतिक महत्व बहुत ज्यादा
  2532. 1:35:59था। यह सिर्फ एक मंच नहीं था। यह सत्ता का
  2533. 1:36:03रंगमंच था। यहां महानवमी यानी दशहरा का
  2534. 1:36:06त्यौहार मनाया जाता था। और इस 10 दिन के
  2535. 1:36:09उत्सव में राजा अपनी प्रजा और अपने नायकों
  2536. 1:36:13के सामने अपनी ताकत, अपनी दौलत और अपने
  2537. 1:36:16रुतबे का प्रदर्शन करता था।
  2538. 1:36:17किस तरह का प्रदर्शन? क्या होता था इन
  2539. 1:36:19कार्यक्रमों में?
  2540. 1:36:20इसमें धार्मिक अनुष्ठान होते थे। जैसे
  2541. 1:36:23मूर्ति पूजा, राज्य के घोड़े की पूजा,
  2542. 1:36:26जानवरों की बलि साथ ही नृत्य, कुश्ती और
  2543. 1:36:30भव्य शोभा यात्राएं निकलती थी।
  2544. 1:36:32अच्छा।
  2545. 1:36:32नायक राजा के लिए उपहार लाते थे और राजा
  2546. 1:36:35भी उन्हें सम्मानित करता था। त्यौहार के
  2547. 1:36:38आखिरी दिन राजा अपनी और अपने नायकों की
  2548. 1:36:41पूरी सेना का एक खुले मैदान में निरीक्षण
  2549. 1:36:43करता था।
  2550. 1:36:43तो यह एक तरह से सबको याद दिलाने का तरीका
  2551. 1:36:45था कि इस साम्राज्य का असली बॉस कौन है?
  2552. 1:36:48एकदम। इस केंद्र में कमल महल और हजार राम
  2553. 1:36:51मंदिर जैसी खूबसूरत इमारतें भी थी।
  2554. 1:36:53हां, कमल महल नाम तो बाद में अंग्रेजों ने
  2555. 1:36:56दिया शायद। इसकी मेहराबों की बनावट कमल की
  2556. 1:36:59पंखुड़ियों जैसी होने के कारण और हजार राम
  2557. 1:37:02मंदिर तो एक कलाकृति है। यह शायद शाही
  2558. 1:37:05परिवार का निजी मंदिर था जिसकी दीवारों पर
  2559. 1:37:08रामायण की पूरी कहानी पत्थर में उकेरी गई
  2560. 1:37:11है।
  2561. 1:37:12अद्भुत राजकीय केंद्र से अब हम चलते हैं
  2562. 1:37:15शहर के धार्मिक केंद्र की ओर। इसका चुनाव
  2563. 1:37:18तुंगभद्रा नदी के किनारे चट्टानी
  2564. 1:37:19पहाड़ियों के बीच क्यों किया गया?
  2565. 1:37:21इस जगह का चुनाव पौराणिक कथाओं से प्रेरित
  2566. 1:37:24था। स्थानीय मान्यता है कि यहीं पर रामायण
  2567. 1:37:27के बाली और सुग्रीव का वानर राज्य था।
  2568. 1:37:31ओ
  2569. 1:37:31और एक और कहानी यह है कि यहीं पर देवी
  2570. 1:37:34पंपा देवी ने भगवान शिव के एक रूप
  2571. 1:37:37विरुपाक्ष से विवाह करने के लिए तपस्या की
  2572. 1:37:40थी। और विरुपाक्ष विजयनगर साम्राज्य के
  2573. 1:37:43संरक्षक देवता भी थे। तो यह भूमि पहले से
  2574. 1:37:46ही पवित्र मानी जाती थी
  2575. 1:37:47और विजयनगर के शासकों ने इस विरासत को और
  2576. 1:37:50आगे बढ़ाया।
  2577. 1:37:51हां, उन्होंने यहां मंदिर निर्माण की
  2578. 1:37:53सदियों पुरानी परंपरा को नई ऊंचाइयों पर
  2579. 1:37:56पहुंचा दिया। उन्होंने विशाल गोपुरम और
  2580. 1:37:59स्तंभों वाले बड़े-बड़े सभागार जिन्हें
  2581. 1:38:01मंडप कहते हैं बनवाए।
  2582. 1:38:03जैसे कि विरुपाक्ष मंदिर और विट्ठल मंदिर।
  2583. 1:38:06हां, यह इसके सबसे अच्छे उदाहरण है।
  2584. 1:38:09कृष्णदेव राय ने अपने राज्यारोहण की याद
  2585. 1:38:11में विरुपाक्ष मंदिर में एक बहुत ही भव्य
  2586. 1:38:14मंडप बनवाया था।
  2587. 1:38:15और विट्ठल मंदिर सुना है वह बहुत अनूठा
  2588. 1:38:17है।
  2589. 1:38:18विट्ठल मंदिर वाकई में अद्भुत है। इसके
  2590. 1:38:20मुख्य देवता विट्ठल है जो महाराष्ट्र में
  2591. 1:38:23पूजे जाने वाले विष्णु का एक रूप है।
  2592. 1:38:26अच्छा। यह दिखाता है कि विजयनगर कैसे
  2593. 1:38:28अलग-अलग सांस्कृतिक परंपराओं को अपने में
  2594. 1:38:30समाहित कर रहा था। सही बात है। और इस
  2595. 1:38:32मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है पत्थर से
  2596. 1:38:35बना रथ जो असल में एक छोटा मंदिर है और
  2597. 1:38:38इसकी एक और विशेषता है रथ गलियां।
  2598. 1:38:40रथ गलियां?
  2599. 1:38:41हां, यह मंदिर के गोपुरम से निकलने वाली
  2600. 1:38:44चौड़ी सड़कें थी जिनके दोनों तरफ स्तंभों
  2601. 1:38:47वाले मंडप थे जहां व्यापारी अपनी दुकानें
  2602. 1:38:50लगाते थे। मतलब एक तरह से मंदिर और बाजार
  2603. 1:38:54का संगम था।
  2604. 1:38:55तो यह थी विजयनगर की कहानी। एक शहर जो जीत
  2605. 1:38:58के लिए बना जिसने पानी को साधा, पत्थरों
  2606. 1:39:01को कला में बदला और सत्ता को भव्य
  2607. 1:39:04प्रदर्शनों में ढाला। एक ऐसा साम्राज्य जो
  2608. 1:39:06अपनी बुलंदी पर एक मिसाल था और जिसका पतन
  2609. 1:39:10एक चेतावनी है।
  2610. 1:39:11हां, हमने देखा कि कैसे एक खोए हुए शहर को
  2611. 1:39:14यादों और विज्ञान ने मिलकर फिर से खोज
  2612. 1:39:17निकाला। कैसे शासकों ने धर्म, कला और
  2613. 1:39:20सैन्य शक्ति का इस्तेमाल कर एक विशाल
  2614. 1:39:22साम्राज्य खड़ा किया और कैसे एक हार ने सब
  2615. 1:39:25कुछ मलबे में बदल दिया। एक साम्राज्य की
  2616. 1:39:28राजधानी विजयनगर समाप्त हुआ।
  2617. 1:39:33तो आज हम एक तरह से जासूस बनने वाले हैं।
  2618. 1:39:36हां।
  2619. 1:39:37हमारी मंजिल है 16वीं और 17वीं सदी का
  2620. 1:39:40हिंदुस्तान और हमें समझना है एक आम किसान
  2621. 1:39:44की जिंदगी को।
  2622. 1:39:45अच्छा। लेकिन एक बहुत बड़ी मुश्किल है। उस
  2623. 1:39:48किसान ने अपने बारे में कोई चिट्ठी, कोई
  2624. 1:39:50डायरी, कुछ भी नहीं छोड़ा।
  2625. 1:39:52सही बात है।
  2626. 1:39:53हमारे पास सुराग के तौर पर हैं सिर्फ शाही
  2627. 1:39:56दस्तावेज, सरकारी खाते और जमींदारों के
  2628. 1:40:00कागजात। तो चलिए, आज इन्हीं सुरागों को
  2629. 1:40:03जोड़कर उस भूली बिसरी दुनिया की एक तस्वीर
  2630. 1:40:06बनाने की कोशिश करते हैं।
  2631. 1:40:07यह बहुत दिलचस्प शुरुआत है क्योंकि यही इस
  2632. 1:40:09पूरे विषय की सबसे बड़ी चुनौती है और सबसे
  2633. 1:40:12बड़ा रोमांच भी।
  2634. 1:40:13हां। हम उन लोगों की कहानी जानने की कोशिश
  2635. 1:40:16कर रहे हैं जिनकी आवाज आप कह सकते हैं
  2636. 1:40:18इतिहास के पन्नों में लगभग घूम है। हमें
  2637. 1:40:21उनकी दुनिया को उनके मालिकों और शासकों की
  2638. 1:40:23नजरों से देखना पड़ता है।
  2639. 1:40:25तो हमारा सबसे बड़ा सुराग क्या है? वो कौन
  2640. 1:40:28सा दस्तावेज है जिसे इतिहासकार बार-बार
  2641. 1:40:30देखते हैं।
  2642. 1:40:31वो है अबुल फजल की लिखी आईने-अबरी।
  2643. 1:40:34आईने-अबरी।
  2644. 1:40:35जी। यह अकबर के शासनकाल का एक विशाल
  2645. 1:40:38दस्तावेज है जिसमें साम्राज्य के प्रशासन,
  2646. 1:40:42समाज और सबसे जरूरी खेतीबाड़ी और लगान
  2647. 1:40:45व्यवस्था का ब्यौरा है। इसे मुगल
  2648. 1:40:47साम्राज्य का गजेटियर भी कह सकते हैं।
  2649. 1:40:50एक मिनट लेकिन ये तो एक दरबारी इतिहासकार
  2650. 1:40:53ने लिखी है। वो भी बादशाह के कहने पर।
  2651. 1:40:56हम्म।
  2652. 1:40:56तो क्या हम इस पर पूरी तरह भरोसा कर सकते
  2653. 1:40:58हैं? इसमें तो सब कुछ बहुत अच्छा अच्छा ही
  2654. 1:41:01लिखा होगा। है ना? हम्म।
  2655. 1:41:02कि साम्राज्य में सब कुछ व्यवस्थित है। सब
  2656. 1:41:05खुश हैं।
  2657. 1:41:05बिल्कुल सही सवाल और यही एक इतिहासकार का
  2658. 1:41:08पहला काम है। अपने स्रोत पर सवाल उठाना।
  2659. 1:41:11आईने-अबरी हमें ऊपर से नीचे का नजरिया
  2660. 1:41:14यानी अ टॉप डाउन पर्सपेक्टिव देती है।
  2661. 1:41:17ओके।
  2662. 1:41:17यह बताती है कि राज्य समाज को कैसे देखता
  2663. 1:41:20था और कैसे चलाना चाहता था। लेकिन इसके
  2664. 1:41:23अलावा हमारे पास गुजरात, महाराष्ट्र और
  2665. 1:41:26राजस्थान से मिले दूसरे दस्तावेज भी हैं।
  2666. 1:41:29अच्छा। जैसे सरकारी हुक्मनामे, जमीन के
  2667. 1:41:32सौदे, झगड़ों के रिकॉर्ड जो इस शाही
  2668. 1:41:35तस्वीर में कुछ और रंग भरते हैं। इन सबको
  2669. 1:41:38मिलाकर ही हम एक ज्यादा सच्ची तस्वीर के
  2670. 1:41:40करीब पहुंच सकते हैं।
  2671. 1:41:42ठीक है। तो इन दस्तावेजों में किसानों के
  2672. 1:41:46लिए क्या शब्द इस्तेमाल हुए हैं? क्या
  2673. 1:41:48किसान को किसान ही कहते थे?
  2674. 1:41:50आमतौर पर उनके लिए रयत या आसामी जैसे शब्द
  2675. 1:41:54मिलते हैं। और दिलचस्प बात यह है कि सारे
  2676. 1:41:56किसान एक जैसे नहीं थे।
  2677. 1:41:58अच्छा। मोटे तौर पर दो तरह के किसान थे।
  2678. 1:42:00ये तो बड़ी कमाल की बात है। मुझे तो लगता
  2679. 1:42:02था कि किसान मतलब किसान यह बंटवारा क्यों
  2680. 1:42:06था? क्या यह अमीर और गरीब किसान जैसा कुछ
  2681. 1:42:09था?
  2682. 1:42:09हां, आप इसे कुछ हद तक वैसा समझ सकती हैं।
  2683. 1:42:12पहले थे खुद काश्त।
  2684. 1:42:14खुद काश्त।
  2685. 1:42:15खुद यानी अपना। काश्त यानी खेती। यह वो
  2686. 1:42:18किसान थे जो उसी गांव में रहते थे जहां
  2687. 1:42:20उनकी जमीन थी और उस जमीन पर उनका मालिकाना
  2688. 1:42:23हक था। यह गांव के रसूखदार लोग और दूसरे
  2689. 1:42:26दूसरे थे पाही काश्त। यह वह किसान थे जो
  2690. 1:42:29दूसरे गांव से ठेके पर यानी कॉन्ट्रैक्ट
  2691. 1:42:31पर खेती करने आते थे।
  2692. 1:42:33तो यह एक तरह से उस जमाने के माइग्रेंट
  2693. 1:42:35वर्कर्स हुए
  2694. 1:42:36जो बेहतर मौकों या शायद किसी मजबूरी में
  2695. 1:42:39अपना गांव छोड़कर कहीं और खेती कर रहे थे।
  2696. 1:42:41बिल्कुल। अक्सर अकाल या भुखमरी जैसी
  2697. 1:42:44आपदाओं के बाद लोग पाई काश्त बन जाते थे।
  2698. 1:42:47जाहिर है गांव के समाज में उनका दर्जा खुद
  2699. 1:42:49काश्त किसानों जैसा नहीं था। तो हां गांव
  2700. 1:42:52के अंदर एक साफ सामाजिक और आर्थिक सीढ़ी
  2701. 1:42:55बनी हुई थी।
  2702. 1:42:55अब जरा खेतों की तरफ चलते हैं। उस दौर में
  2703. 1:42:58तकनीक कैसी थी? क्या बड़े-बड़े आविष्कार
  2704. 1:43:01हो रहे थे या सब कुछ मतलब सदियों पुराने
  2705. 1:43:04ढर्रे पर ही चल रहा था?
  2706. 1:43:05देखिए आज के जमाने जैसी मशीनी क्रांति तो
  2707. 1:43:08नहीं थी। लेकिन तकनीक स्थिर भी नहीं थी।
  2708. 1:43:11खेती का आधार था लकड़ी का हल जिसके आगे
  2709. 1:43:14लोहे की फाल लगी होती थी। और साथ में
  2710. 1:43:17बैलों की एक जोड़ी।
  2711. 1:43:18हां। मेहनत का काम था। हां बहुत। लेकिन
  2712. 1:43:21सिंचाई के मामले में काफी इंजीनियटी यानी
  2713. 1:43:24जुगाड़ और तकनीक का इस्तेमाल होता था।
  2714. 1:43:26जैसे कि
  2715. 1:43:27खेती बहुत हद तक मानसून पर निर्भर थी।
  2716. 1:43:30लेकिन जहां पानी की कमी थी, वहां इंसान ने
  2717. 1:43:32रास्ते निकाले। कुओं से पानी निकालने के
  2718. 1:43:35लिए राहत का इस्तेमाल होता था।
  2719. 1:43:36राहत
  2720. 1:43:37जिसे हम पर्शियन व्हील के नाम से भी जानते
  2721. 1:43:40हैं। और यह रहट उस जमाने की एक कमाल की
  2722. 1:43:42इंजीनियरिंग थी। सोचिए, बिना बिजली के
  2723. 1:43:46सिर्फ बैलों की ताकत से कुएं से लगातार
  2724. 1:43:48पानी खींचना। हां, इसने तो उन इलाकों की
  2725. 1:43:51पूरी तस्वीर बदल दी होगी जहां बारिश कम
  2726. 1:43:53होती थी।
  2727. 1:43:54बिल्कुल यही तकनीक तय करती थी कि साल में
  2728. 1:43:57एक फसल होगी या दो। राज्य भी नहरे खुदवाने
  2729. 1:44:00में दिलचस्पी लेता था।
  2730. 1:44:01और फसलों में कितनी वैरायटी थी? क्या
  2731. 1:44:03किसान बस अपनी जरूरत के लिए गेहूं चावल
  2732. 1:44:06उगाते थे?
  2733. 1:44:06नहीं नहीं। फसलों में बहुत जबरदस्त
  2734. 1:44:09विविधता थी। साल में दो मुख्य फसलें होती
  2735. 1:44:11थी। पतझड़ में खरीफ और बसंत में रबी।
  2736. 1:44:14ज्यादातर किसान साल में दो फसलें तो उगा
  2737. 1:44:16ही लेते थे।
  2738. 1:44:17ओके। लेकिन सबसे दिलचस्प बात है कुछ खास
  2739. 1:44:20फसलों की जिन्हें मुगल दस्तावेजों में
  2740. 1:44:23जिं्स ए कामिल कहा गया है।
  2741. 1:44:25जिं्स ए कामिल इसका मतलब क्या हुआ?
  2742. 1:44:27इसका शाब्दिक अर्थ है उत्तम फसलें या
  2743. 1:44:29परफेक्ट क्रॉप्स। यह वो फसलें थी जिन्हें
  2744. 1:44:32बेचकर अच्छा पैसा कमाया जा सकता था।
  2745. 1:44:34अच्छा तो जिनसे कामिल एक तरह से मुगल
  2746. 1:44:38सरकार की कैश काउस थी। वो फसलें जिन पर
  2747. 1:44:41सरकार ज्यादा टैक्स लगाकर अपनी तिजोरी
  2748. 1:44:44भरती थी।
  2749. 1:44:45एकदम सही पकड़ा आपने। जैसे कि कपास या
  2750. 1:44:48गन्ना।
  2751. 1:44:49कपास और गन्ना इसके बेहतरीन उदाहरण हैं।
  2752. 1:44:51मुगल राज्य किसानों को ऐसी फसलें उगाने के
  2753. 1:44:53लिए बढ़ावा भी देता था क्योंकि इससे राज्य
  2754. 1:44:55को नकद में ज्यादा राजस्व मिलता था।
  2755. 1:44:58हम
  2756. 1:44:58इसी दौर में एक और बड़ी मजेदार चीज हुई।
  2757. 1:45:01खाने की थाली में क्रांति आ गई।
  2758. 1:45:03वो कैसे?
  2759. 1:45:04इसी दौर में मक्का, टमाटर, आलू और मिर्च
  2760. 1:45:07जैसी फसलें नई दुनिया यानी अमेरिका से
  2761. 1:45:10भारत पहुंची।
  2762. 1:45:10क्या बात कर रही है?
  2763. 1:45:11हां। और तंबाकू भी पुर्तगालियों के जरिए
  2764. 1:45:14धक्कन आया और इतनी तेजी से फैला कि
  2765. 1:45:16जहांगीर को उस पर पाबंदी लगाने की सोचनी
  2766. 1:45:19पड़ी।
  2767. 1:45:19मतलब टमाटर, आलू और मिर्च यह सब भारत में
  2768. 1:45:22हमेशा से नहीं थे। तो मुगल काल से पहले
  2769. 1:45:25हमारी सब्जियों और करी का स्वाद कितना अलग
  2770. 1:45:28होता होगा यह सोचना भी मुश्किल है। है ना?
  2771. 1:45:31बिल्कुल। यह दिखाता है कि उस दौर का कृषि
  2772. 1:45:34समाज कितना डायनामिक और दुनिया से जुड़ा
  2773. 1:45:36हुआ था।
  2774. 1:45:36तो हमने खेतों की बात कर ली, फसलों की बात
  2775. 1:45:39कर ली। अब जरा गांव के अंदर चलते हैं। इन
  2776. 1:45:42खुदकाश्त और पाए काश्त किसानों का समाज
  2777. 1:45:45कैसा था? क्या वहां कोई व्यवस्था थी? कोई
  2778. 1:45:48कानून था?
  2779. 1:45:49हां। गांव अपने आप में एक छोटी सी दुनिया
  2780. 1:45:52थे। जाति व्यवस्था समाज का एक अहम आधार
  2781. 1:45:55थी।
  2782. 1:45:56ओके।
  2783. 1:45:56जो लोग खेती करते थे, वह कई जातियों से
  2784. 1:45:59आते थे। लेकिन खेतों में मजदूरी करने वाले
  2785. 1:46:02या दूसरे छोटे-मोटे सेवा वाले काम करने
  2786. 1:46:04वाले लोग अक्सर उन जातियों से होते थे,
  2787. 1:46:07जिन्हें नीची जाति समझा जाता था। हम उनके
  2788. 1:46:10साथ भेदभाव होता था।
  2789. 1:46:11हां। और वह सबसे गरीब तबके में आते थे।
  2790. 1:46:14और इन गांव में लड़ाई झगड़े या दूसरे मसले
  2791. 1:46:16कौन सुलझाता था? क्या कोई अदालत होती थी?
  2792. 1:46:19गांव की अपनी अदालत और सरकार होती थी जिसे
  2793. 1:46:22पंचायत कहते थे। पंचायत में गांव के बड़े
  2794. 1:46:25बुजुर्ग और सम्मानित लोग होते थे। आमतौर
  2795. 1:46:28पर खुद काशस्त वर्ग के।
  2796. 1:46:29अच्छा।
  2797. 1:46:30पंचायत का एक मुखिया होता था जिसे मुकद्दम
  2798. 1:46:33या मंडल कहा जाता था।
  2799. 1:46:34तो यह मुकद्दम आज के सरपंच जैसा हुआ।
  2800. 1:46:37काफी हद तक। उसका काम गांव में शांति बनाए
  2801. 1:46:40रखना, झगड़े सुलझाना और यह देखना था कि सब
  2802. 1:46:43अपनी जाति के नियमों का पालन करें।
  2803. 1:46:45तो पंचायत के पास पावर भी थी।
  2804. 1:46:47बड़ी ताकत थी। वह जुर्माना लगा सकती थी और
  2805. 1:46:50किसी को जाति या गांव से बाहर निकालने
  2806. 1:46:52जैसा सख्त दंड भी दे सकती थी। गांव के
  2807. 1:46:54साझा खर्चे का हिसाब किताब भी यही पंचायत
  2808. 1:46:57रखती थी।
  2809. 1:46:57इस पूरी कहानी में हमने पुरुषों की तो
  2810. 1:47:00बहुत बात की। खेतों में, पंचायतों में,
  2811. 1:47:03लेकिन इस कृषि समाज में महिलाओं की क्या
  2812. 1:47:06जगह थी? यह एक बहुत जरूरी सवाल है।
  2813. 1:47:09महिलाएं इस कृषि अर्थव्यवस्था की रीड थी।
  2814. 1:47:12हम
  2815. 1:47:12वह पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर
  2816. 1:47:14खेतों में काम करती थी। बुवाई से लेकर
  2817. 1:47:17निराई और कटाई तक। कुछ काम तो खासतौर पर
  2818. 1:47:21महिलाओं के ही जिम्मे थे। जैसे सूत काटना,
  2819. 1:47:24मिट्टी के बर्तन के लिए मिट्टी गूंथना या
  2820. 1:47:26कपड़ों पर कढ़ाई करना। उनके श्रम के बिना
  2821. 1:47:29यह पूरी व्यवस्था चल ही नहीं सकती थी।
  2822. 1:47:31लेकिन क्या काम में इस बराबरी का मतलब?
  2823. 1:47:34समाज में भी बराबरी था? खासकर जमीन और
  2824. 1:47:37संपत्ति के मामले में
  2825. 1:47:38दुर्भाग्य से नहीं समाज पितृवंशीय था यानी
  2826. 1:47:42पैट्रिलिनियल इसलिए जमीन का मालिकाना हक
  2827. 1:47:45पुरुषों के पास ही रहता था और विरासत पिता
  2828. 1:47:48से बेटे को मिलती थी
  2829. 1:47:49तो महिलाओं को कोई अधिकार नहीं था
  2830. 1:47:51बहुत कम हालांकि बंगाल जैसे कुछ इलाकों
  2831. 1:47:54में हमें ऐसी विधवा महिलाओं के उदाहरण
  2832. 1:47:56मिलते हैं जिन्हें जमींदारी विरासत में
  2833. 1:47:58मिली और उन्होंने उसे बेचा भी लेकिन यह
  2834. 1:48:01अपवाद थे नियम नहीं
  2835. 1:48:03तो उनकी हालत अच्छी नहीं थी नहीं समाज का
  2836. 1:48:06उन पर कड़ा नियंत्रण था और उन्हें कुपोषण
  2837. 1:48:09और बच्चे को जन्म देते समय होने वाली मौत
  2838. 1:48:12का खतरा भी ज्यादा झेलना पड़ता था।
  2839. 1:48:14तो गांव का समाज तो बहुत व्यवस्थित था।
  2840. 1:48:16पंचायतें थी, नियम कानून थे। लेकिन क्या
  2841. 1:48:19हर कोई इसी व्यवस्था का हिस्सा था? मतलब
  2842. 1:48:22उस समय भारत का एक बहुत बड़ा हिस्सा तो
  2843. 1:48:24जंगलों से ढका था। वहां कौन लोग रहते थे?
  2844. 1:48:27बिल्कुल। यह एक और दिलचस्प दुनिया है। उस
  2845. 1:48:30समय भारत का करीब 40% हिस्सा जंगलों,
  2846. 1:48:33झाड़ियों और पहाड़ों से ढका था। इन जंगलों
  2847. 1:48:36में रहने वाले लोगों के लिए फारसी
  2848. 1:48:38दस्तावेजों में जंगली जंगली शब्द का
  2849. 1:48:41इस्तेमाल होता है।
  2850. 1:48:42जंगली, आज तो इस शब्द का मतलब असभ्य या
  2851. 1:48:45अनसिविलाइज्ड निकाला जाता है। क्या तब भी
  2852. 1:48:48इसका यही मतलब था?
  2853. 1:48:49नहीं बिल्कुल नहीं। उस समय जंगली होने का
  2854. 1:48:52मतलब असभ्य होना नहीं था। इसका सीधा सा
  2855. 1:48:55मतलब था वो इंसान जिसका गुजारा जंगल के
  2856. 1:48:58उत्पादों, शिकार और स्थानांतरणीय खेती
  2857. 1:49:01यानी शिफ्टिंग एग्रीकल्चर पर निर्भर हो।
  2858. 1:49:03अच्छा।
  2859. 1:49:04यह लोग जंगल के मौसम के हिसाब से अपनी
  2860. 1:49:06जिंदगी जीते थे? बसंत में शहद और मोम
  2861. 1:49:09इकट्ठा करना, गर्मियों में मछली पकड़ना,
  2862. 1:49:11मानसून में खेती करना।
  2863. 1:49:12तो राज्य मतलब मुगल सरकार इन्हें कैसे
  2864. 1:49:15देखती थी? क्या वो उन्हें उनके हाल पर
  2865. 1:49:17छोड़ देती थी?
  2866. 1:49:18राज्य उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकता था।
  2867. 1:49:21जंगल से शहद, मोम और लाख जैसी कीमती चीजें
  2868. 1:49:24मिलती थी।
  2869. 1:49:25हम
  2870. 1:49:26और सेना के लिए सबसे जरूरी चीज हाथी भी
  2871. 1:49:28जंगलों से ही आते थे। लेकिन जंगल राज्य के
  2872. 1:49:32लिए एक सिरदर्द भी थे।
  2873. 1:49:33सिरदर्द क्यों?
  2874. 1:49:34यह वो वाइल्ड वैस था जहां अक्सर बागी और
  2875. 1:49:36विद्रोही शरण लेते थे। इसलिए राज्य के
  2876. 1:49:39हमेशा कोशिश रहती थी कि इन कबीलों पर किसी
  2877. 1:49:41तरह नियंत्रण रखा जाए। उन्हें अपनी सेना
  2878. 1:49:44में शामिल किया जाए या उनसे टैक्स वसूला
  2879. 1:49:46जाए। चलिए अब उस किरदार की बात करते हैं
  2880. 1:49:49जिसका नाम इस कहानी के शीर्षक में है
  2881. 1:49:52जमींदार। यह कौन लोग थे? क्या यह किसानों
  2882. 1:49:55के दोस्त थे या दुश्मन?
  2883. 1:49:57यह ग्रामीण समाज के सबसे ताकतवर लोग थे।
  2884. 1:50:01जमींदार वो वर्ग था जिसकी आमदनी खेती से
  2885. 1:50:04नहीं बल्कि जमीन पर उनके मालिकाना हक से
  2886. 1:50:07आती थी।
  2887. 1:50:07अच्छा तो वो खुद खेती नहीं करते थे।
  2888. 1:50:10नहीं। उनकी अपनी निजी जमीनें होती थी
  2889. 1:50:12जिन्हें मिल्कियत कहते थे। जिन पर मजदूर
  2890. 1:50:15काम करते थे। तो उनका असली काम क्या था?
  2891. 1:50:18उनका सबसे बड़ा काम था राज्य के लिए
  2892. 1:50:20किसानों से लगान वसूलना। इस सेवा के बदले
  2893. 1:50:23राज्य उन्हें मुआवजा देता था। लेकिन
  2894. 1:50:25जमींदारों की ताकत सिर्फ यहीं तक सीमित
  2895. 1:50:28नहीं थी।
  2896. 1:50:28और क्या था?
  2897. 1:50:29उनके पास अपनी छोटी-मोटी सेनाएं होती थी।
  2898. 1:50:32घुड़सवार, पैदल सिपाही और यहां तक कि छोटे
  2899. 1:50:34किले भी जिन्हें किलाचा कहा जाता था। इसी
  2900. 1:50:37सैन्य ताकत के दम पर वो ग्रामीण इलाकों पर
  2901. 1:50:40अपना दबदबा बनाए रखते थे। तो यह जमींदार
  2902. 1:50:43सरकार और किसान के बीच एक बिचौलिए की तरह
  2903. 1:50:45थे।
  2904. 1:50:46और [गला साफ़ करने की आवाज़] इसी से जुड़ा
  2905. 1:50:47है पूरा भू-राजस्व का सिस्टम।
  2906. 1:50:49यह काम कैसे करता था?
  2907. 1:50:51बिल्कुल। भू-राजस्व यानी लैंड रेवेन्यू
  2908. 1:50:54मुगल साम्राज्य की आर्थिक बुनियाद थी और
  2909. 1:50:56इसे इकट्ठा करने का एक बड़ा व्यवस्थित
  2910. 1:50:58तंत्र था जिसकी देखरेख दीवान का दफ्तर
  2911. 1:51:01करता था।
  2912. 1:51:02ओके।
  2913. 1:51:02इस प्रक्रिया में दो अहम शब्द हैं। जमा और
  2914. 1:51:06हासिल।
  2915. 1:51:06जमा और हासिल।
  2916. 1:51:08इनमें क्या फर्क था? जमा वो रकम थी जो
  2917. 1:51:10सरकार निर्धारित करती थी। अ काइंड ऑफ
  2918. 1:51:13असेस्ड अमाउंट और हासिल वो रकम थी जो असल
  2919. 1:51:16में वसूली जाती थी। दी एक्चुअल कलेक्टेड
  2920. 1:51:19अमाउंट।
  2921. 1:51:19तो यह हमेशा बराबर नहीं होते थे?
  2922. 1:51:22नहीं। कभी फसल खराब हो गई या कोई और
  2923. 1:51:24मुसीबत आ गई तो असल वसूली निर्धारित रकम
  2924. 1:51:26से कम रह जाती थी।
  2925. 1:51:28और इसी दौर में एक और बड़ी घटना हो रही
  2926. 1:51:31थी। पूरी दुनिया से चांदी भारत की तरफ
  2927. 1:51:34बहकर आ रही थी। इसका इस लगान व्यवस्था पर
  2928. 1:51:37क्या असर पड़ा? इसका बहुत गहरा असर पड़ा।
  2929. 1:51:40यूरोप के साथ व्यापार बढ़ने की वजह से
  2930. 1:51:42भारत में बड़े पैमाने पर चांदी आई। इससे
  2931. 1:51:45मुगल टसालों में सिक्कों की ढलाई बढ़ गई।
  2932. 1:51:48नतीजा यह हुआ कि अर्थव्यवस्था ज्यादा
  2933. 1:51:50मोनेटाइज्ड हो गई।
  2934. 1:51:52मतलब अब नकद में लेनदेन ज्यादा होने लगा।
  2935. 1:51:55हां, अब राज्य के लिए नकद में लगान वसूलना
  2936. 1:51:58और किसान के लिए नकद में लगान चुकाना
  2937. 1:52:01दोनों आसान हो गया। इसने भारतीय गांव को
  2938. 1:52:04पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था से जोड़
  2939. 1:52:06दिया। तो घूम फिर कर हम फिर वहीं आ गए
  2940. 1:52:08जहां से हमने शुरू किया था आईने-अबरी।
  2941. 1:52:12अब जबकि हम किसानों, पंचायतों, जमींदारों
  2942. 1:52:16और जंगलों की दुनिया को थोड़ा समझ चुके
  2943. 1:52:18हैं तो इस किताब को हम कैसे देखें? आईन
  2944. 1:52:21अकबरी अबुल फजल के एक और बड़े ग्रंथ
  2945. 1:52:24अकबरनामा का ही हिस्सा है। आइन को पांच
  2946. 1:52:27किताबों यानी दफ्तर में बांटा गया है।
  2947. 1:52:30पांच दफ्तर
  2948. 1:52:31संघ की बात करते हैं। इनमें से तीसरी
  2949. 1:52:34किताब मुल्क आबादी हमारे लिए सोने की खान
  2950. 1:52:37है।
  2951. 1:52:37मुल्क आबादी में ऐसा क्या खास है? इसमें
  2952. 1:52:40पूरे साम्राज्य के वित्तीय पहलू और जमीन
  2953. 1:52:43से मिलने वाले लगान की दरों का एक-एक सूबे
  2954. 1:52:46एक-एक परगने का हिसाब दिया गया है। यह उस
  2955. 1:52:49समय की कृषि दुनिया को समझने के लिए एक
  2956. 1:52:51बेजोड़ स्रोत है।
  2957. 1:52:52हम
  2958. 1:52:53यह हमें बताता है कि राज्य क्या-क्या
  2959. 1:52:55जानकारी इकट्ठा कर रहा था और किस चीज को
  2960. 1:52:57जरूरी समझता था।
  2961. 1:52:59लेकिन इसकी सीमाएं क्या हैं? जो सवाल
  2962. 1:53:01मैंने शुरू में उठाया था कि यह एक शाही
  2963. 1:53:04नजरिया है।
  2964. 1:53:05वही इसकी सबसे बड़ी सीमा है। पहली बात तो
  2965. 1:53:07यह कि इसमें दिए गए आंकड़ों को जोड़ने में
  2966. 1:53:10कई जगह इंसानी भूल हुई है। लेकिन ज्यादा
  2967. 1:53:12बड़ी बात यह है कि यह हमें सिर्फ केंद्र
  2968. 1:53:15का यानी दिल्ली और आगरा के सिंहासन का
  2969. 1:53:17नजरिया दिखाती है।
  2970. 1:53:18तो यह किसानों की आवाज नहीं है।
  2971. 1:53:20बिल्कुल नहीं। यह हमें यह नहीं बताती कि
  2972. 1:53:23एक आम किसान लगान के बोझ के बारे में क्या
  2973. 1:53:26सोचता था या एक पाहे कास्ट किसान अपनी
  2974. 1:53:29जिंदगी कैसे देखता था। उनकी खुशी, उनके
  2975. 1:53:31गम, उनकी शिकायतें यह सब आइन के पन्नों से
  2976. 1:53:34गायब हैं।
  2977. 1:53:34तो यह एक ऐसी तस्वीर है जिसमें रंग तो
  2978. 1:53:37बहुत है लेकिन आवाजें सिर्फ बादशाह और
  2979. 1:53:40उसके दरबारियों की हैं।
  2980. 1:53:42बिल्कुल। यह एक शानदार लेकिन अधूरी तस्वीर
  2981. 1:53:44है।
  2982. 1:53:45आज हमने शाही दस्तावेजों के जरिए एक ऐसी
  2983. 1:53:48दुनिया को समझने की कोशिश की जिसके लोगों
  2984. 1:53:50ने अपनी कोई कहानी नहीं छोड़ी। हमने देखा
  2985. 1:53:53कि गांव सिर्फ खेत नहीं थे बल्कि एक जटिल
  2986. 1:53:56समाज थे। जमींदार सिर्फ टैक्स वसूलने वाले
  2987. 1:53:59नहीं थे बल्कि अपनी ताकत के केंद्र थे।
  2988. 1:54:02हम
  2989. 1:54:03और मुगल साम्राज्य सिर्फ किलों और महलों
  2990. 1:54:05से नहीं बल्कि किसानों के पसीने से पैदा
  2991. 1:54:08हुए राजस्व से चलता था। हां
  2992. 1:54:10और यह सोचते हुए इस बातचीत को खत्म करना
  2993. 1:54:12शायद दिलचस्प होगा कि हमने यह पूरी कहानी
  2994. 1:54:14आईने-अबरी और सरकारी दस्तावेजों से बनाई।
  2995. 1:54:17हां।
  2996. 1:54:18अगर हमें कहीं से 17वीं शताब्दी के किसी
  2997. 1:54:20पाही काष्ट किसान की लिखी एक चिट्ठी मिल
  2998. 1:54:23जाती तो वो हमें इस दुनिया के बारे में
  2999. 1:54:25ऐसा क्या बता सकती थी जो ये बड़े-बड़े
  3000. 1:54:28ग्रंथ कभी नहीं बता पाए।
  3001. 1:54:32तो आज हम मुगल दरबार की दुनिया में उतरने
  3002. 1:54:35वाले हैं।
  3003. 1:54:36जी। हमारे पास जो स्रोत है वह एनसीईआरटी
  3004. 1:54:38के इतिहास की किताब से हैं। पर हम इसे
  3005. 1:54:41सिर्फ मतलब दोहराएंगे नहीं। हम इसके पीछे
  3006. 1:54:44के क्यों और कैसे को समझने की कोशिश
  3007. 1:54:46करेंगे। और पहली बात जो मुझे बहुत दिलचस्प
  3008. 1:54:49लगी वो ये है कि मुगल नाम
  3009. 1:54:52हां
  3010. 1:54:52जिसे हम और आप इस्तेमाल करते हैं वो असल
  3011. 1:54:54में उन्होंने खुद के लिए कभी इस्तेमाल ही
  3012. 1:54:56नहीं किया।
  3013. 1:54:56यह बिल्कुल सही बात है। यह एक बहुत बड़ा
  3014. 1:54:58मतलब मिथक कह सकते हैं।
  3015. 1:55:01अच्छा। मुगल नाम असल में मंगोल से निकला
  3016. 1:55:04है और मुगल शासक खुद को चंगेज़ खान के वंश
  3017. 1:55:07से जोड़े जाने पर ज्यादा गर्व महसूस नहीं
  3018. 1:55:10करते थे।
  3019. 1:55:10तो वो खुद को क्या कहते थे?
  3020. 1:55:12वे खुद को तैमूरी कहलाना पसंद करते थे।
  3021. 1:55:14तैमूरी
  3022. 1:55:15जी। क्योंकि वे पितृ पक्ष से तुर्क शासक
  3023. 1:55:18तैमूर के वंशज थे। तो एक तरह से उनका वंश
  3024. 1:55:21दो महान लेकिन बहुत अलग एशियाई योद्धा
  3025. 1:55:24परंपराओं का संगम था। तो इस साम्राज्य की
  3026. 1:55:27शुरुआत कैसे हुई? मतलब बाबर जो पहले मुगल
  3027. 1:55:30शासक थे उनकी कहानी क्या है?
  3028. 1:55:33देखिए बाबर की कहानी एक सर्वाइवर की कहानी
  3029. 1:55:36है। उन्हें मशिया में उनके दुश्मनों मतलब
  3030. 1:55:39उज़्बेको ने
  3031. 1:55:39हां उज़बेको ने
  3032. 1:55:40उन्होंने उनके घर से ही खदेड़ दिया था। कई
  3033. 1:55:43साल भटकने के बाद उन्होंने पहले काबुल में
  3034. 1:55:45अपनी सत्ता स्थापित की।
  3035. 1:55:46और फिर भारत आए।
  3036. 1:55:47जी। और फिर 1526 में दिल्ली के सुल्तान
  3037. 1:55:51इब्राहिम लोदी को हराकर भारत में एक नए
  3038. 1:55:54अध्याय की शुरुआत की। यह सिर्फ एक लड़ाई
  3039. 1:55:57नहीं थी। यह एक नए साम्राज्य की नींव थी।
  3040. 1:55:59और बाबर के बाद जो शासक आए उनका क्रम भी
  3041. 1:56:02बहुत दिलचस्प है। बाबर, फिर हुमायूं, फिर
  3042. 1:56:05अकबर, जहांगीर, शाहजहां और औरंगजेब।
  3043. 1:56:08जी।
  3044. 1:56:09लेकिन इन सब में अकबर को ही सबसे महान
  3045. 1:56:11क्यों माना जाता है? मतलब उन्होंने ऐसा
  3046. 1:56:13क्या अलग किया जो उनके दादा बाबर या
  3047. 1:56:16परपोते औरंगजेब ने नहीं किया।
  3048. 1:56:18ये बहुत अच्छा सवाल है। देखिए बाबर ने
  3049. 1:56:21साम्राज्य की नींव रखी। पर उसे असल में
  3050. 1:56:24मजबूत और एक भारतीय साम्राज्य का रूप अकबर
  3051. 1:56:26ने दिया।
  3052. 1:56:27अच्छा।
  3053. 1:56:27उन्होंने प्रशासन, धर्म और संस्कृति में
  3054. 1:56:30ऐसे प्रयोग किए जो उस समय के लिए मतलब
  3055. 1:56:33क्रांतिकारी थे। जहांगीर और शाहजहां ने उस
  3056. 1:56:36विरासत को आगे बढ़ाया। लेकिन औरंगजेब के
  3057. 1:56:38समय में वह नीतियां कुछ हद तक बदल गई। और
  3058. 1:56:41शायद इसीलिए
  3059. 1:56:42हां और शायद इसीलिए 1707 में उनकी मृत्यु
  3060. 1:56:46के बाद साम्राज्य का पतन भी तेजी से शुरू
  3061. 1:56:48हो गया।
  3062. 1:56:49तो अकबर की इस सोच को उनके शासन के तरीकों
  3063. 1:56:52को हम आज समझते कैसे हैं? यहीं पर शायद
  3064. 1:56:55इतिवृत्त या क्रॉनिकल्स की भूमिका आती है।
  3065. 1:56:58बिल्कुल।
  3066. 1:56:59यह क्या थे? क्या यह सिर्फ राजा की डायरी
  3067. 1:57:02जैसा कुछ थे?
  3068. 1:57:02उससे कहीं ज्यादा। यह इतिवृत्त या
  3069. 1:57:05क्रॉनिकल्स उस दौर के सबसे महत्वपूर्ण
  3070. 1:57:08दस्तावेज थे। यह सिर्फ घटनाओं का
  3071. 1:57:10लेखा-जोखा नहीं थे।
  3072. 1:57:11तो फिर क्या थे?
  3073. 1:57:12यह एक तरह से प्रोपेगेंडा और पीआर
  3074. 1:57:14मैनेजमेंट के टूल भी थे।
  3075. 1:57:16अच्छा।
  3076. 1:57:17इन्हें बहुत सावधानी से लिखवाया जाता था
  3077. 1:57:19ताकि यह साबित हो सके कि बादशाह का राज
  3078. 1:57:22करना ईश्वर की मर्जी है और जो भी उनका
  3079. 1:57:24विरोध करेगा, वह नाकाम होगा। यह आने वाली
  3080. 1:57:27पीढ़ियों के लिए एक तरह का ब्लूप्रिंट भी
  3081. 1:57:29थे।
  3082. 1:57:30और इन्हें लिखने के लिए फारसी भाषा को
  3083. 1:57:32चुना गया। जबकि मुगलों की अपनी मातृभाषा
  3084. 1:57:35तुर्की थी।
  3085. 1:57:36जी। यह सिर्फ भाषा का बदलाव था या इसके
  3086. 1:57:39पीछे कोई गहरी रणनीति थी?
  3087. 1:57:41यह एक बहुत बड़ा और सोचा समझा रणनीतिक
  3088. 1:57:44फैसला था।
  3089. 1:57:45वो कैसे?
  3090. 1:57:46उस समय मध्य और पश्चिम एशिया में फारसी,
  3091. 1:57:48संस्कृति, साहित्य और कूटनीति की भाषा थी।
  3092. 1:57:52जैसे आज के दौर में अंग्रेजी है।
  3093. 1:57:54अच्छा तो एक तरह से इंटरनेशनल लैंग्वेज।
  3094. 1:57:56बिल्कुल। फारसी को अपनाकर अकबर मुगल दरबार
  3095. 1:58:00को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच से जोड़ रहे
  3096. 1:58:02थे। इससे ईरान और मध्य एशिया से बेहतरीन
  3097. 1:58:05कवियों, विद्वानों और अधिकारियों को भारत
  3098. 1:58:08आने का न्योता मिला।
  3099. 1:58:09और इसने एक कॉमन भाषा भी दी होगी प्रशासन
  3100. 1:58:12के लिए।
  3101. 1:58:12सही कहा। इसने एक ऐसी प्रशासनिक भाषा भी
  3102. 1:58:15दी जो भारत की स्थानीय भाषाओं से तटस्थ
  3103. 1:58:18थी।
  3104. 1:58:18और इन इतिवृत्तों को बनाया कहा जाता था।
  3105. 1:58:21हमारे स्रोतों में किताबखाना का जिक्र है।
  3106. 1:58:25यह किसी आम लाइब्रेरी जैसा तो नहीं लगता?
  3107. 1:58:28बिल्कुल नहीं। किताबखाना को आप एक शाही
  3108. 1:58:30प्रोडक्शन हाउस या स्टूडियो समझिए।
  3109. 1:58:33प्रोडक्शन हाउस।
  3110. 1:58:34हां, यह एक शांत पुस्तकालय नहीं बल्कि एक
  3111. 1:58:36व्यस्त जगह थी। जहां पांडुलिपियां तैयार
  3112. 1:58:39होती थी। यहां कागज बनाने वाले सुलेखक
  3113. 1:58:42यानी कैलीग्राफर
  3114. 1:58:43जो हाथ से लिखते थे।
  3115. 1:58:45जी। और चित्रकार जो घटनाओं को तस्वीरों
  3116. 1:58:47में ढालते थे और जिल्द साज जो इन पन्नों
  3117. 1:58:50को एक खूबसूरत किताब की शक्ल देते थे। ये
  3118. 1:58:53सब एक साथ काम करते थे। एक-एक पांडुलिपि
  3119. 1:58:56एक कलाकृति होती थी। आपने चित्रकारों का
  3120. 1:58:58जिक्र किया तो यह इतिवृत्त सिर्फ शब्द
  3121. 1:59:01नहीं थे। इनमें तस्वीरें भी थी। यह मुगल
  3122. 1:59:04मिनिएचर पेंटिंग्स तो बहुत मशहूर है।
  3123. 1:59:07हां। लेकिन यहां एक दिलचस्प वैचारिक टकराव
  3124. 1:59:10भी था।
  3125. 1:59:10कैसा टकराव?
  3126. 1:59:11इस्लाम के कुछ रूढ़िवादी धर्म गुरु
  3127. 1:59:13जिन्हें उलेमा कहा जाता था। मानते थे कि
  3128. 1:59:16किसी भी जीवित चीज का चित्र बनाना
  3129. 1:59:18ईश्वर के काम में दखल देना है।
  3130. 1:59:20बिल्कुल। दखल देने जैसा है और यह इस्लाम
  3131. 1:59:23के खिलाफ है।
  3132. 1:59:24तो फिर बादशाहों ने खासकर अकबर ने इस
  3133. 1:59:27विरोध के बावजूद चित्रकला को इतना बढ़ावा
  3134. 1:59:30कैसे दिया?
  3135. 1:59:31यहीं पर अकबर की चतुराई दिखती है। उनके
  3136. 1:59:33दरबारी इतिहासकार अबुल फजल ने लिखा है कि
  3137. 1:59:36बादशाह का मानना था कि जब एक चित्रकार
  3138. 1:59:39किसी की तस्वीर बनाता है तो उसे यह गहरा
  3139. 1:59:42एहसास होता है कि वह सिर्फ बाहरी रूप बना
  3140. 1:59:45सकता है।
  3141. 1:59:46उसमें जान नहीं डाल सकता।
  3142. 1:59:47सही। जान डालने की शक्ति तो सिर्फ ईश्वर
  3143. 1:59:50के पास है। इस तरह उन्होंने चित्रकला को
  3144. 1:59:53ईश्वर की शक्ति को समझने का एक जरिया
  3145. 1:59:56बताकर इसे सही ठहराया।
  3146. 1:59:58कमाल है और ऐसे दो सबसे मशहूर इतिव्रत है
  3147. 2:00:01अकबरनामा और बादशाहनामा।
  3148. 2:00:03जी अकबरनामा जैसा नाम से ही जाहिर है।
  3149. 2:00:06अकबर के शासन का इतिहास है जिसे अबुल फजल
  3150. 2:00:09ने लिखा था। इसकी तीसरी जिल्द आईने-अबरी।
  3151. 2:00:12हां, उसके बारे में तो सुना है।
  3152. 2:00:14वह तो अपने आप में एक खजाना है। वह सिर्फ
  3153. 2:00:16इतिहास नहीं बल्कि अकबर के साम्राज्य का
  3154. 2:00:19पूरा प्रशासनिक, सामाजिक और भौगोलिक सर्वे
  3155. 2:00:22है।
  3156. 2:00:22और बादशाहनामा
  3157. 2:00:24बादशाहनामा जो शाहजहां के दौर का इतिहास
  3158. 2:00:26है। उसे अबुल फजल के ही एक शिष्य अब्दुल
  3159. 2:00:29हमीद लाहौरी ने लिखा था।
  3160. 2:00:30तो इन इतिव्रत्तों ने एक आदर्श राजा की
  3161. 2:00:33छवि बनाई। लेकिन इस आदर्श के पीछे की
  3162. 2:00:36विचारधारा क्या थी? वो कौन से विचार थे जो
  3163. 2:00:39इस विशाल साम्राज्य को एक साथ जोड़े हुए
  3164. 2:00:42थे?
  3165. 2:00:42इसका सबसे बड़ा आधार था एक विचार जिसे
  3166. 2:00:45फर्रे इजादी कहा गया।
  3167. 2:00:47फर्रे इजादी
  3168. 2:00:48जी जिसका मतलब है दैय प्रकाश। इस ईरानी
  3169. 2:00:51विचार के अनुसार राजा को अपनी शक्ति सीधे
  3170. 2:00:53ईश्वर से मिलती है। वह धरती पर ईश्वर का
  3171. 2:00:56प्रतिनिधि है। यह प्रकाश पीढ़ी दर पीढ़ी
  3172. 2:00:58हस्तांतरित होता था।
  3173. 2:00:59तो यह सिर्फ एक राजनैतिक विचार नहीं था।
  3174. 2:01:01नहीं बिल्कुल नहीं। यह राजा को एक
  3175. 2:01:03आध्यात्मिक गुरु का दर्जा भी देता था। और
  3176. 2:01:05इसी दैय शक्ति को जमीन पर उतारने के लिए
  3177. 2:01:08अकबर ने सुलह कुल की नीति अपनाई। इसका
  3178. 2:01:12शाब्दिक अर्थ है पूर्ण शांति।
  3179. 2:01:14जी।
  3180. 2:01:14यह सुनने में बहुत आदर्शवादी लगता है।
  3181. 2:01:17लेकिन इसका असली मतलब क्या था?
  3182. 2:01:19सुलह कुल अकबर की सबसे बड़ी राजनीतिक और
  3183. 2:01:23दार्शनिक देन थी। यह सिर्फ सहिष्णुता नहीं
  3184. 2:01:26थी बल्कि यह मानती थी कि राज्य का कर्तव्य
  3185. 2:01:29है कि वह सभी धर्मों को फलने फूलने का
  3186. 2:01:31मौका दे।
  3187. 2:01:32लेकिन एक शर्त पर
  3188. 2:01:34हां। बशर्त वे एक दूसरे से ना लड़े और
  3189. 2:01:37राज्य के खिलाफ ना जाएं। यह उस जमाने के
  3190. 2:01:39लिए क्रांतिकारी विचार था जब यूरोप में
  3191. 2:01:42धर्म के नाम पर युद्ध हो रहे थे।
  3192. 2:01:43तो अकबर समझ गए थे कि हिंदुस्तान पर राज
  3193. 2:01:46करने के लिए सबको साथ लेकर चलना ही
  3194. 2:01:49एकमात्र रास्ता है।
  3195. 2:01:51बिल्कुल।
  3196. 2:01:51और इस नीति को उन्होंने लागू कैसे किया?
  3197. 2:01:54मतलब जमीन पर कैसे उतारा?
  3198. 2:01:56उन्होंने दो बहुत बड़े कदम उठाए। 1563 में
  3199. 2:01:59उन्होंने तीर्थ यात्रा कर खत्म कर दिया।
  3200. 2:02:01अच्छा। और 1564 में जजिया को समाप्त कर
  3201. 2:02:04दिया। जजिया एक ऐसा टैक्स था जो सिर्फ गैर
  3202. 2:02:07मुस्लिम प्रजा को देना पड़ता था।
  3203. 2:02:09तो इन दोनों करों को हटाकर अकबर ने एक साफ
  3204. 2:02:12संदेश दिया।
  3205. 2:02:13जी एक साफ संदेश दिया कि उनका साम्राज्य
  3206. 2:02:16धर्म के आधार पर किसी से भेदभाव नहीं
  3207. 2:02:18करेगा। यह सुलह कुल की नीति का मतलब
  3208. 2:02:22व्यावहारिक रूप था।
  3209. 2:02:23अबुल फजल ने इसे एक सामाजिक अनुबंध या
  3210. 2:02:26सोशल कॉन्ट्रैक्ट का भी नाम दिया है।
  3211. 2:02:28हां। और यह भी अपने समय से बहुत आगे की
  3212. 2:02:31सोच थी। इस अनुबंध के अनुसार बादशाह अपनी
  3213. 2:02:34प्रजा की चार सबसे कीमती चीजों की रक्षा
  3214. 2:02:36करने का वादा करता है। जीवन यानी जान, धन
  3215. 2:02:40यानी माल, सम्मान यानी नामोस और धर्म यानी
  3216. 2:02:43दीन।
  3217. 2:02:44और बदले में
  3218. 2:02:45और इस सुरक्षा के बदले में प्रजा बादशाह
  3219. 2:02:48की आज्ञा का पालन करती है और टैक्स के रूप
  3220. 2:02:50में राज्य के संसाधनों में अपना हिस्सा
  3221. 2:02:52देती है। यह एक तरह का सौदा था जिसमें
  3222. 2:02:54दोनों पक्षों की जिम्मेदारियां तय थी। यह
  3223. 2:02:56तो हुई विचारधारा की बात। अब जरा उस जगह
  3224. 2:02:59चलते हैं जहां से यह सब नियंत्रित होता
  3225. 2:03:02था। मुगल राजधानी और दरबार।
  3226. 2:03:04जी।
  3227. 2:03:05यह राजधानियां भी बदलती रहीं। आगरा से
  3228. 2:03:07फतेहपुर सीकरी, फिर लाहौर और फिर
  3229. 2:03:10शाहजहानाबाद यानी दिल्ली।
  3230. 2:03:12राजधानियों का बदलना भी रणनीतिक होता था।
  3231. 2:03:14लेकिन राजधानी चाहे कोई भी हो, साम्राज्य
  3232. 2:03:16का दिल बादशाह का दरबारी होता था।
  3233. 2:03:18और दरबार का मतलब सिर्फ एक बैठक की जगह
  3234. 2:03:21नहीं।
  3235. 2:03:22नहीं। वो शक्ति का एक रंगमंच था। हर चीज
  3236. 2:03:25का अपना एक खास मतलब था।
  3237. 2:03:27[नाक से की जाने वाली आवाज़] बादशाह का
  3238. 2:03:28सिंहासन या तख्त केंद्र में होता था। कोई
  3239. 2:03:31व्यक्ति सिंहासन के कितने पास या दूर बैठा
  3240. 2:03:34है, इसी से दरबार में उसका रुतबा तय होता
  3241. 2:03:36था।
  3242. 2:03:36और अभिवादन के तरीके भी बहुत खास थे। जैसे
  3243. 2:03:40सिजदा करना या जमीन बोस यानी जमीन चूमना।
  3244. 2:03:43यह सब तरीके बादशाह की सर्वोच्चता को
  3245. 2:03:45स्थापित करने के लिए थे। यह जताने के लिए
  3246. 2:03:48कि बादशाह आम इंसान नहीं है।
  3247. 2:03:50और बादशाह की दिनचर्या
  3248. 2:03:51वो भी इसी शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा थी।
  3249. 2:03:53सुबह झरोखा दर्शन से दिन शुरू होता था।
  3250. 2:03:56जहां बादशाह अपनी प्रजा को दर्शन देते थे।
  3251. 2:03:58एक तरह का कनेक्शन बनाने के लिए।
  3252. 2:04:00हम यह राजा और प्रजा के बीच एक भरोसे का
  3253. 2:04:03रिश्ता बनाता था। इसके बाद दीवान-ए-आम में
  3254. 2:04:06आम लोगों की समस्याएं सुनी जाती थी और
  3255. 2:04:08दीवान खास में खास सलाहकारों के साथ
  3256. 2:04:10गोपनीय मंत्रणा होती थी।
  3257. 2:04:12दरबार के इस औपचारिक माहौल के पीछे एक और
  3258. 2:04:16दुनिया थी। शाही परिवार की, जिसे हरम कहा
  3259. 2:04:19जाता है।
  3260. 2:04:20पत्नियों के रहने की जगह नहीं थी। तो वहां
  3261. 2:04:22कौन-कौन रहता था?
  3262. 2:04:24इसमें बादशाह की मां, बहनें, बच्चे, अन्य
  3263. 2:04:27रिश्तेदार और उनकी सेवा करने वाली महिलाएं
  3264. 2:04:30और दास दासियां रहती थी। यह अपने आप में
  3265. 2:04:33एक छोटा सा शहर था जिसका अपना एक
  3266. 2:04:35पदानुक्रम और अपनी राजनीति थी।
  3267. 2:04:38और शाही परिवार की महिलाएं सिर्फ घरेलू
  3268. 2:04:40मामलों तक सीमित नहीं थी। उनका राजनीति और
  3269. 2:04:43प्रशासन में भी काफी दखल था।
  3270. 2:04:45बिल्कुल। जहां आरा और रोशन आरा जैसी
  3271. 2:04:48शाहजहां की बेटियों के पास बड़े-बड़े
  3272. 2:04:51मनसबदारों के बराबर की संपत्ति और शक्ति
  3273. 2:04:54थी।
  3274. 2:04:54अच्छा
  3275. 2:04:55जी वे वास्तुकला की संरक्षक थी। व्यापार
  3276. 2:04:58में निवेश करती थी और राजनीतिक फैसलों को
  3277. 2:05:00भी प्रभावित करती थी।
  3278. 2:05:02और गुलबदन बेगम को भी नहीं भूलना चाहिए।
  3279. 2:05:04हां बिल्कुल नहीं। उन्होंने हुमायूंनामा
  3280. 2:05:07लिखा। यह हमें मुगल हरम की दुनिया की एक
  3281. 2:05:09अंदरूनी और दुर्लभ झलक देता है। जो किसी
  3282. 2:05:12पुरुष दरबारी इतिहासकार के लिए लिखना संभव
  3283. 2:05:15नहीं था। तो यह विशाल साम्राज्य सिर्फ
  3284. 2:05:18बादशाह और उनके परिवार से तो नहीं चल सकता
  3285. 2:05:20था।
  3286. 2:05:21नहीं, इसके पीछे एक पूरी प्रशासनिक मशीनरी
  3287. 2:05:24होगी। यहीं पर अभिजात वर्ग या नोबिलिटी की
  3288. 2:05:27भूमिका आती है।
  3289. 2:05:28यह अभिजात वर्ग या नोबिलिटी साम्राज्य की
  3290. 2:05:31रीड की हड्डी थी। अकबर की एक और बड़ी
  3291. 2:05:33कामयाबी यह थी कि उन्होंने इस वर्ग को
  3292. 2:05:36किसी एक जातीय समूह तक सीमित नहीं रखा।
  3293. 2:05:39मतलब
  3294. 2:05:40यह एक गुलदस्ते की तरह था जिसमें ईरानी
  3295. 2:05:44तुरानी यानी मध्य एशियाई अफगान और भारतीय
  3296. 2:05:48मुसलमान तो थे ही।
  3297. 2:05:49साथ में राजपूत और मराठा भी।
  3298. 2:05:52जी साथ ही राजपूत और मराठा जैसे हिंदू
  3299. 2:05:55सरदारों को भी बड़े सम्मान के साथ शामिल
  3300. 2:05:57किया गया। इसका फायदा यह हुआ कि कोई एक
  3301. 2:06:00गुट इतना ताकतवर नहीं हो पाया कि वो
  3302. 2:06:02बादशाह को चुनौती दे सके।
  3303. 2:06:04और इस पूरे सिस्टम को चलाने के लिए
  3304. 2:06:06मनसबदानी प्रणाली बनाई गई। यह क्या थी?
  3305. 2:06:09इसे समझना थोड़ा मुश्किल लगता है।
  3306. 2:06:11इसे एक आधुनिक कॉर्पोरेट और मिलिट्री रैंक
  3307. 2:06:14के मिलेजुले रूप में समझिए।
  3308. 2:06:16अच्छा।
  3309. 2:06:16हर बड़े अधिकारी को एक मंसब यानी रैंक
  3310. 2:06:20दिया जाता था। इस रैंक के दो हिस्से थे।
  3311. 2:06:23जात और सवार।
  3312. 2:06:25जात और सवार जात आपकी सीनियोरिटी थी। जैसे
  3313. 2:06:29आज के समय में आप वाइस प्रेसिडेंट हैं या
  3314. 2:06:32जनरल मैनेजर। इससे आपकी तनख्वाह और दरबार
  3315. 2:06:35में आपकी हैसियत तय होती थी। और सवार
  3316. 2:06:38सवार आपकी ऑपरेशनल जिम्मेदारी थी। यानी
  3317. 2:06:42आपको लड़ाई के मैदान में कितने घुड़सवार
  3318. 2:06:44सैनिक लाने होंगे?
  3319. 2:06:45तो ऐसा हो सकता था कि किसी की जात ऊंची हो
  3320. 2:06:48पर सवार रैंक कम हो।
  3321. 2:06:50बिल्कुल। इसका मतलब वो एक महत्वपूर्ण
  3322. 2:06:52सलाहकार या ब्यूरोक्रेट है। लेकिन बड़ा
  3323. 2:06:55मिलिट्री कमांडर नहीं। यह एक बहुत ही
  3324. 2:06:57अनोखी और कारगर प्रणाली थी। जिसने नागरिक
  3325. 2:07:01और सैन्य प्रशासन को एक साथ जोड़ दिया और
  3326. 2:07:03एक वफादार अधिकारी वर्ग तैयार किया। और
  3327. 2:07:05केंद्र में कुछ बड़े अधिकारी थे जो इस
  3328. 2:07:08मशीनरी को चलाते थे जैसे मीर बख्शी और
  3329. 2:07:11दीवान-ए-आला।
  3330. 2:07:12हां, मीर बक्शी को आप रक्षा मंत्री और
  3331. 2:07:15सेना प्रमुख का मिलाजुला रूप समझ सकते
  3332. 2:07:17हैं। वही सेना की भर्ती, वेतन और खुफिया
  3333. 2:07:20जानकारी के लिए जिम्मेदार था।
  3334. 2:07:22और दीवाने-ए-आला
  3335. 2:07:23वो वित्त मंत्री था जो साम्राज्य की पूरी
  3336. 2:07:25अर्थव्यवस्था और टैक्स प्रणाली को देखता
  3337. 2:07:27था। इनके नीचे एक विशाल सूचना तंत्र था।
  3338. 2:07:31वाकया नवीस जैसे लेखक जो दरबार की हर
  3339. 2:07:33कार्यवाही को दर्ज करते थे। अंत में इस
  3340. 2:07:36साम्राज्य का बाहरी दुनिया से क्या रिश्ता
  3341. 2:07:38था? खासकर पश्चिम में ईरान के सफी शासकों
  3342. 2:07:41से।
  3343. 2:07:42मुगलों और ईरान के सफविवियों के बीच एक
  3344. 2:07:44सम्मानजनक लेकिन प्रतिस्पर्धी रिश्ता था।
  3345. 2:07:47प्रतिस्पर्धी क्यों?
  3346. 2:07:48दोनों के बीच अक्सर कंधार के किले को लेकर
  3347. 2:07:50तनाव रहता था। क्योंकि वह भारत और मध्य
  3348. 2:07:53एशिया के बीच व्यापार और सैन्य मार्ग पर
  3349. 2:07:55एक बहुत ही रणनीतिक जगह थी।
  3350. 2:07:57लेकिन रिश्ते बने हुए थे?
  3351. 2:07:59हां बिल्कुल। साथ ही दोनों दरबारों के बीच
  3352. 2:08:02राजदूतों और उपहारों का आना-जाना भी लगा
  3353. 2:08:04रहता था।
  3354. 2:08:05और इसी बाहरी दुनिया से जेसुएट मिशनरी
  3355. 2:08:08यानी ईसाई धर्म प्रचारक भी अकबर के दरबार
  3356. 2:08:11तक पहुंचे।
  3357. 2:08:11हां। और अकबर ने उनका खुले दिल से स्वागत
  3358. 2:08:14किया। वह हर धर्म के बारे में जानने को
  3359. 2:08:16उत्सुक थे।
  3360. 2:08:16और इसी वजह से उन्होंने इबादतखाना बनवाया।
  3361. 2:08:19जी। इसी उत्सुकता के कारण उन्होंने
  3362. 2:08:22फतेहपुर सीकरी में इबादतखाना या पूजा गृह
  3363. 2:08:25बनवाया। शुरुआत में यहां सिर्फ इस्लामी
  3364. 2:08:28विद्वानों के बीच बहस होती थी। लेकिन जल्द
  3365. 2:08:30ही अकबर उनकी आपसी लड़ाईयों से तंग आ गए।
  3366. 2:08:33तो उन्होंने क्या किया?
  3367. 2:08:34उन्होंने इबादतखाना के दरवाजे सभी धर्मों
  3368. 2:08:37के लिए खोल दिए।
  3369. 2:08:38सबके लिए?
  3370. 2:08:39हां। अब वहां हिंदू पंडित, जैन, मुनि,
  3371. 2:08:42पारसी धर्मगुरु और ईसाई पादरी भी आकर
  3372. 2:08:45अपने-अपने धर्म और दर्शन पर चर्चा करते
  3373. 2:08:47थे।
  3374. 2:08:48और इन बहसों का नतीजा क्या निकला? इन
  3375. 2:08:50बहसों को सुनकर ही अकबर इस नतीजे पर
  3376. 2:08:53पहुंचे कि हर धर्म में कुछ सच्चाई है।
  3377. 2:08:55लेकिन कट्टरता हमेशा विभाजन और नफरत पैदा
  3378. 2:08:58करती है।
  3379. 2:08:59और यहीं से सुलह एक कुल का विचार और मजबूत
  3380. 2:09:02हुआ।
  3381. 2:09:03बिल्कुल। यहीं से उनके सुलह एक कुल के
  3382. 2:09:05विचार को असली मजबूती मिली। यह एक शासक की
  3383. 2:09:08व्यक्तिगत आध्यात्मिक यात्रा थी जिसने
  3384. 2:09:10उसके साम्राज्य की सबसे महत्वपूर्ण नीति
  3385. 2:09:13को जन्म दिया। तो कुल मिलाकर मुगल
  3386. 2:09:15साम्राज्य सिर्फ सैन्य शक्ति पर नहीं
  3387. 2:09:18बल्कि एक गहरी विचारधारा, एक कुशल
  3388. 2:09:21प्रशासनिक मशीनरी और सबको साथ लेकर चलने
  3389. 2:09:25की एक असाधारण सोच पर टिका था।
  3390. 2:09:27बिल्कुल। उनकी सफलता का राज सिर्फ
  3391. 2:09:29लड़ाईयां जितना नहीं बल्कि एक ऐसी
  3392. 2:09:31व्यवस्था बनाना था जिसमें अलग-अलग
  3393. 2:09:34संस्कृतियों और धर्मों के लोग एक साथ रह
  3394. 2:09:36सकें और साम्राज्य की तरक्की में योगदान
  3395. 2:09:39दे सकें। उनके बनाए इतिवृत्त, उनकी कला और
  3396. 2:09:43उनकी इमारतें आज भी उसी महान विरासत की
  3397. 2:09:46कहानी कहती हैं।
  3398. 2:09:47आज की इस पूरी बातचीत के बाद एक सवाल
  3399. 2:09:50सोचने पर मजबूर करता है। सुलहे कुल जैसी
  3400. 2:09:54नीति जो 16वीं सदी में एक विशाल और विविध
  3401. 2:09:57साम्राज्य को चलाने के लिए बनाई गई थी।
  3402. 2:10:00क्या आज की दुनिया के लिए भी उतनी ही
  3403. 2:10:02प्रासंगिक है? इस पर विचार जरूर कीजिएगा।
  3404. 2:10:07एनसीआरटी इतिहास कक्षा 12वीं का 10वां
  3405. 2:10:10अध्याय है उपनिवेशवाद और देहात यानी
  3406. 2:10:13कॉलोनियलिज्म एंड द कंट्रीसाइड। आज हम इसी
  3407. 2:10:16पर बात करेंगे।
  3408. 2:10:17और यह अध्याय सिर्फ मतलब तारीखों और
  3409. 2:10:20घटनाओं का लेखाजोखा नहीं है।
  3410. 2:10:21नहीं।
  3411. 2:10:22यह एक कहानी है इस बात की कि अंग्रेजों के
  3412. 2:10:25बनाए गए आर्थिक सिस्टम भारत के गांव में
  3413. 2:10:28असल में कैसे काम करते थे? और अक्सर कैसे
  3414. 2:10:31वह यू नो बुरी तरह से फेल हो जाते थे। हां
  3415. 2:10:34और एक दिलचस्प बात जो बार-बार सामने आएगी
  3416. 2:10:36वो यह है कि हम यह सारा इतिहास अंग्रेजों
  3417. 2:10:38की ही लिखी रिपोर्टों से जान रहे हैं।
  3418. 2:10:40तो हमारा मिशन यह भी समझना होगा कि क्या
  3419. 2:10:42हम इन रिपोर्टों पर आंख बंद करके भरोसा कर
  3420. 2:10:45सकते हैं। चलिए शुरू करते हैं बंगाल से
  3421. 2:10:47जहां अंग्रेजों ने अपना शासन सबसे पहले
  3422. 2:10:49जमाया था।
  3423. 2:10:49बिल्कुल और इसकी शुरुआत एक बहुत ही जैसे
  3424. 2:10:52नाटक जैसे सीन से होती है। साल था 1797
  3425. 2:10:56जगह थी बर्दवान जो आज का बर्दवान है। वहां
  3426. 2:10:59एक बड़ी नीलामी हो रही थी। एक राजा की
  3427. 2:11:01पूरी जमींदारी नीलाम हो रही थी।
  3428. 2:11:03एक राजा की जमींदारी नीलाम हो रही थी।
  3429. 2:11:05मतलब यह नौबत क्यों आई?
  3430. 2:11:06यही तो कहानी की जय है। ईस्ट इंडिया कंपनी
  3431. 2:11:09ने एक नियम बनाया था कि हर जमींदार को एक
  3432. 2:11:13तय रकम यानी राजस्व सरकार को देना होगा।
  3433. 2:11:17ओके।
  3434. 2:11:17और जो भी जमींदार यह रकम चुका नहीं पाता
  3435. 2:11:20था, उसकी पूरी जायदाद नीलाम कर दी जाती
  3436. 2:11:23थी।
  3437. 2:11:23तो क्या इसका मतलब यह है कि जमींदार अपनी
  3438. 2:11:25पुश्तों की जमीनें ऐसी मतलब खो देते थे?
  3439. 2:11:28हमेशा नहीं। यहीं पर एक मजेदार मोड़ आता
  3440. 2:11:31था कहानी में।
  3441. 2:11:32अच्छा।
  3442. 2:11:33नीलामी में बोली लगाने वाले ज्यादातर लोग
  3443. 2:11:35वो जमींदार के अपने ही नौकर या एजेंट होते
  3444. 2:11:38थे।
  3445. 2:11:38अरे वाह।
  3446. 2:11:39वो जमीन खरीद लेते लेकिन पैसा कभी चुकाते
  3447. 2:11:42नहीं थे।
  3448. 2:11:43अच्छा।
  3449. 2:11:43यह तो सिस्टम के साथ ही खिलवाड़ हो गया।
  3450. 2:11:46इसे क्या कहते थे?
  3451. 2:11:47इसे बेनामी खरीद कहते थे। नाम किसी और का
  3452. 2:11:49पर मालिक वही पुराना जमींदार।
  3453. 2:11:51हम आपको पता है वर्धमान की उस नीलामी में
  3454. 2:11:5495% से ज्यादा बिक्री फर्जी थी। 95%
  3455. 2:11:59हां यह जमींदारों का अपने राज को बचाने का
  3456. 2:12:01एक तरीका था।
  3457. 2:12:02पर सवाल वही है इतने बड़े-बड़े जमींदार वो
  3458. 2:12:05पैसा चुका क्यों नहीं पा रहे थे?
  3459. 2:12:07इसकी जड़ में खा 1793 का इस्तमरारी
  3460. 2:12:10बंदोबस्त या जिसे हम परमानेंट सेटलमेंट
  3461. 2:12:14कहते हैं।
  3462. 2:12:14परमानेंट सेटलमेंट।
  3463. 2:12:15हां। इसे ऐसे समझिए कि कंपनी ने जमींदारों
  3464. 2:12:18से कहा देखो हमें हर साल तुमसे एक फिक्स्ड
  3465. 2:12:22रकम चाहिए। मान लो ₹100। ठीक है।
  3466. 2:12:25अब तुम्हारी खेती से ₹120 की कमाई हो या
  3467. 2:12:28200 की हमें 100 ही मिलेंगे। बाकी सब
  3468. 2:12:31तुम्हारा।
  3469. 2:12:32सुनने में तो जमींदार के लिए अच्छा लगता
  3470. 2:12:34है कि ज्यादा कमाई पर टैक्स नहीं बढ़ेगा।
  3471. 2:12:35हां लेकिन इसमें एक पेंच था। कंपनी ने यह
  3472. 2:12:39जो फिक्स्ड रकम थी ना
  3473. 2:12:41हम
  3474. 2:12:41वो इतनी ज्यादा रखी थी कि उसे चुकाना ही
  3475. 2:12:44लगभग नामुमकिन हो गया था।
  3476. 2:12:46अच्छा।
  3477. 2:12:46ऊपर से यह नियम तब आया जब खेती की पैदावार
  3478. 2:12:49की कीमतें बहुत कम थी। तो किसान जमींदार
  3479. 2:12:52को पैसे नहीं दे पाते थे और जमींदार आगे
  3480. 2:12:55कंपनी को
  3481. 2:12:56और अगर फसल खराब हो गई तब क्या होता था?
  3482. 2:12:58तब भी कोई रियायत नहीं थी। रकम उतनी ही
  3483. 2:13:01देनी पड़ती थी।
  3484. 2:13:02अरे
  3485. 2:13:02और सबसे क्रूर थी सूर्यास्त विधि यानी
  3486. 2:13:06सनसेट लॉ।
  3487. 2:13:07सनसेट लॉ। यह क्या था?
  3488. 2:13:09सोचिए एक तय तारीख है और सूरज ढलने से
  3489. 2:13:13पहले अगर आपका पैसा कलेक्टर के दफ्तर नहीं
  3490. 2:13:16पहुंचा
  3491. 2:13:17तो
  3492. 2:13:17तो बस खेल खत्म। आपके पुश्तों की जमींदारी
  3493. 2:13:20नीलाम हो जाएगी। कोई सुनवाई नहीं, कोई
  3494. 2:13:23मोहलत नहीं।
  3495. 2:13:24वाह! मतलब एक तरफ तो जमींदार से पैसा भी
  3496. 2:13:26वसूल रहे हैं और दूसरी तरफ उसकी पूरी ताकत
  3497. 2:13:28ही छीन ली।
  3498. 2:13:29बिल्कुल। उनकी फौज भंग कर दी। टैक्स
  3499. 2:13:32वसूलने का अधिकार छीन लिया। कचहरी पर
  3500. 2:13:35कलेक्टर बिठा दिया। जमींदार को बस एक मतलब
  3501. 2:13:38ग्लोरिफाइड टैक्स कलेक्टर बनाकर छोड़ दिया
  3502. 2:13:41था।
  3503. 2:13:41वो अपने ही इलाके में कमजोर हो गया था। तो
  3504. 2:13:44अगर गांव में जमींदार कमजोर हो रहे थे तो
  3505. 2:13:47फिर उनकी जगह कौन ले रहा था? जाहिर है कोई
  3506. 2:13:49तो ताकतवर बन रहा होगा।
  3507. 2:13:50बिल्कुल। और गांव में जोतदारों का उदय हो
  3508. 2:13:54रहा था।
  3509. 2:13:54जोतदार
  3510. 2:13:55हां यह अमीर किसानों का एक वर्ग था जिनके
  3511. 2:13:59पास हजारों एकड़ जमीन होती थी और वो सिर्फ
  3512. 2:14:02खेती नहीं करते थे बल्कि गांव में व्यापार
  3513. 2:14:05और लेनदेन पर भी उन्हीं का कब्जा था।
  3514. 2:14:07और इन हजारों एकड़ जमीन पर खेती कौन करता
  3515. 2:14:09था?
  3516. 2:14:10उनकी जमीन पर खुद जोतदार खेती नहीं करते
  3517. 2:14:13थे। बल्कि बटाईदार करते थे।
  3518. 2:14:15बटाईदार मतलब जो फसल की बंटाई पर काम
  3519. 2:14:18करें।
  3520. 2:14:18एग्जैक्टली हल उनका मेहनत उनकी लेकिन फसल
  3521. 2:14:22कटने के बाद आधा हिस्सा सीधे जोतदार की
  3522. 2:14:25तिजोरी में।
  3523. 2:14:25तो गांव के अंदर असल शक्ति तो इन जोतदारों
  3524. 2:14:28के हाथ में आ गई थी।
  3525. 2:14:29हां। और वो इस शक्ति का इस्तेमाल जमींदार
  3526. 2:14:32के खिलाफ करते थे। वो जानबूझकर किसानों को
  3527. 2:14:35जमींदार का राजस्व चुकाने से रोकते थे।
  3528. 2:14:37अच्छा।
  3529. 2:14:38मकसद साफ था। जमींदार कंगाल हो, उसकी जमीन
  3530. 2:14:42नीलाम हो और उस जमीन को जोतदार खुद खरीद
  3531. 2:14:45ले।
  3532. 2:14:45यानी अंग्रेजों के बनाए एक सिस्टम ने गांव
  3533. 2:14:48के अंदर ही एक लड़ाई छेड़ दी थी पुराने
  3534. 2:14:49जमींदार और नए जोदार के बीच। कमाल है। पर
  3535. 2:14:52यह सब जानकारी हमें मिलती कहां से है?
  3536. 2:14:54इसका एक बहुत बड़ा स्रोत है पांचवी
  3537. 2:14:56रिपोर्ट। द फिफ्थ रिपोर्ट। ये 1813 में
  3538. 2:15:00ब्रिटिश संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट
  3539. 2:15:02थी।
  3540. 2:15:02फिफ्थ रिपोर्ट।
  3541. 2:15:03हां। इसमें भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी
  3542. 2:15:06कैसे काम कर रही है उसका पूरा कच्चा
  3543. 2:15:08चिट्ठा था। यह हजार पन्नों से भी मोटी
  3544. 2:15:11रिपोर्ट थी।
  3545. 2:15:12तो ये तो खजाना हुआ इतिहासकारों के लिए।
  3546. 2:15:14खजाना तो है लेकिन इसमें भी एक पेज है।
  3547. 2:15:17हमें इसे सावधानी से पढ़ना पड़ता है।
  3548. 2:15:20क्यों?
  3549. 2:15:20क्योंकि यह रिपोर्ट उन लोगों ने तैयार
  3550. 2:15:22करवाई थी जो ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ
  3551. 2:15:25थे। ब्रिटेन में कई लोग कंपनी के व्यापार
  3552. 2:15:28के एकाधिकार यानी मोनोपोली से यू नो जलते
  3553. 2:15:31थे। अच्छा वो चाहते थे कि कंपनी का राज
  3554. 2:15:33खत्म हो।
  3555. 2:15:34बिल्कुल। तो इस रिपोर्ट में कंपनी की
  3556. 2:15:36नाकामियों को बढ़ा चढ़ा कर दिखाया गया था।
  3557. 2:15:39मतलब ये रिपोर्ट खुद एक राजनीतिक हथियार
  3558. 2:15:41थी।
  3559. 2:15:41बिल्कुल।
  3560. 2:15:42यह सिर्फ सच नहीं बता रही थी बल्कि खास
  3561. 2:15:44तरह का सच गढ़ रही थी।
  3562. 2:15:45बिल्कुल। और यही इतिहासकारों के लिए सबसे
  3563. 2:15:48बड़ी चुनौती है। इन सरकारी दस्तावेजों को
  3564. 2:15:50सच की तरह नहीं बल्कि सबूत के एक टुकड़े
  3565. 2:15:54की तरह देखना पड़ता है। जिसे दूसरी
  3566. 2:15:56जानकारियों के साथ जोड़कर पूरी तस्वीर
  3567. 2:15:58बनानी पड़ती है।
  3568. 2:15:59तो बंगाल में हमने देखा कि कैसे अंग्रेजों
  3569. 2:16:01के बनाए सिस्टम ने पुराने जमींदारों और नए
  3570. 2:16:04जोतदारों के बीच एक लड़ाई छेड़ दी। लेकिन
  3571. 2:16:06यह कहानी उन इलाकों की थी जहां खेतीबाड़ी
  3572. 2:16:09पहले से हो रही थी। अब सवाल यह उठता है कि
  3573. 2:16:11अंग्रेजों ने उन लोगों के साथ क्या किया
  3574. 2:16:13जो जंगलों में रहते थे? इसके लिए हमें
  3575. 2:16:15राजमहल की पहाड़ियों का रुख करना होगा।
  3576. 2:16:18वहां पहाड़ियां लोग रहते थे।
  3577. 2:16:20पहाड़ियां
  3578. 2:16:21हां उनकी पूरी जिंदगी जंगल पर ही निर्भर
  3579. 2:16:24थी। वो शिकार करते थे। जंगल के फल फूल
  3580. 2:16:27इकट्ठा करते थे और झूम खेती करते थे।
  3581. 2:16:31झूम खेती ये क्या होती है?
  3582. 2:16:33इसमें मतलब जंगल के एक छोटे से हिस्से को
  3583. 2:16:35साफ करके वहां की झाड़ियों को जलाकर जमीन
  3584. 2:16:39तैयार की जाती है। राख से जमीन उपजाऊ हो
  3585. 2:16:42जाती है।
  3586. 2:16:43अच्छा। कुछ साल वहां खेती करने के बाद उस
  3587. 2:16:46जगह को खाली छोड़कर आगे बढ़ जाते हैं ताकि
  3588. 2:16:49जमीन अपनी ताकत वापस पा सके। वे खेती के
  3589. 2:16:52लिए फावड़े की तरह कुदाल हो का इस्तेमाल
  3590. 2:16:55करते थे। कुदाल ही उनकी पहचान थी।
  3591. 2:16:58और उनका मैदानी दुनिया से क्या रिश्ता था?
  3592. 2:17:00वो मैदानों में बसे गांवों पर अक्सर हमले
  3593. 2:17:03करते थे, और उनसे अपनी सुरक्षा के बदले एक
  3594. 2:17:06तरह का टैक्स यानी खिराज वसूलते थे। हम
  3595. 2:17:10व्यापारी भी उनके इलाके से गुजरने के लिए
  3596. 2:17:12उन्हें पैसे देते थे।
  3597. 2:17:13तो फिर कहानी में हल कहां से आया?
  3598. 2:17:15हल लेकर आए संथाल।
  3599. 2:17:17संथाल।
  3600. 2:17:18हां। अंग्रेज चाहते थे कि जंगल साफ हो और
  3601. 2:17:23स्थाई खेती का इलाका बढ़े। ताकि उन्हें और
  3602. 2:17:26ज्यादा राजस्व मिले। उन्होंने पहाड़ियां
  3603. 2:17:29लोगों को एक जगह बसकर खेती करने के लिए
  3604. 2:17:31कहा। लेकिन वह अपनी आजाद जिंदगी छोड़ने को
  3605. 2:17:34तैयार नहीं थे। तो फिर
  3606. 2:17:36तब अंग्रेजों की नजर संथालों पर पड़ी
  3607. 2:17:39और संथालों में उन्हें क्या खास दिखा?
  3608. 2:17:41संथाल मेहनती थे। वह जंगलों को साफ करके
  3609. 2:17:45हल चलाकर स्थाई खेती करने को तैयार थे।
  3610. 2:17:48अंग्रेजों को लगा कि यह आदर्श बाशिंदे
  3611. 2:17:51हैं।
  3612. 2:17:51अच्छा।
  3613. 2:17:52उन्होंने संथालों को राजमहल की पहाड़ियों
  3614. 2:17:55के निचले हिस्से में बसने के लिए जमीनें
  3615. 2:17:57दे दी।
  3616. 2:17:58तो अंग्रेजों ने संथालों का इस्तेमाल
  3617. 2:17:59पहाड़ियां लोगों को हटाने के लिए किया।
  3618. 2:18:01एक तरह से हां। 1832 तक सरकार ने एक बहुत
  3619. 2:18:06बड़े इलाके की घेराबंदी कर दी और उसे नाम
  3620. 2:18:09दिया दामिने कोह।
  3621. 2:18:11दामिनेको
  3622. 2:18:12हां उन्होंने कहा यह संथालों की जमीन है।
  3623. 2:18:15एक तरह से यह उनका अपना रिजर्व एरिया बन
  3624. 2:18:18गया।
  3625. 2:18:18और इसका नतीजा
  3626. 2:18:20इसका नतीजा यह हुआ कि पहाड़िया लोग और
  3627. 2:18:23पीछे पहाड़ों में सिमटने को मजबूर हो गए।
  3628. 2:18:26यह कुदाल पर हल की जीत थी।
  3629. 2:18:28तो अंग्रेजों ने संथालों को जमीन दी।
  3630. 2:18:31उन्हें बसाया। एक तरह से यह तो संथालों के
  3631. 2:18:34लिए फायदे का सौदा लग रहा है। उन्हें अपनी
  3632. 2:18:36जमीन मिल रही थी। फिर गड़बड़ कहां हुई?
  3633. 2:18:38गड़बड़ उस सिस्टम में ही छिपी थी। जमीन तो
  3634. 2:18:41मिली लेकिन उसके साथ आए भारी भरकम टैक्स,
  3635. 2:18:45साहूकार और जमींदार
  3636. 2:18:46हम
  3637. 2:18:47संथालों ने जिस जमीन को जंगल साफ करके
  3638. 2:18:50सोना बनाया था, वो धीरे-धीरे उनके हाथ से
  3639. 2:18:53रेत की तरह फिसलने लगी।
  3640. 2:18:55कैसे? सरकार का टैक्स इतना ज्यादा था कि
  3641. 2:18:58उसे चुकाने के लिए उन्हें साहूकारों से
  3642. 2:19:00कर्ज लेना पड़ता था और साहूकार जिन्हें वह
  3643. 2:19:03दिकु यानी बाहरी लोग कहते थे वो बहुत ऊंची
  3644. 2:19:06ब्याज दर वसूलते थे।
  3645. 2:19:08ओह!
  3646. 2:19:08कर्ज ना चुका पाने पर साहूकार उनकी जमीन
  3647. 2:19:11पर ही कब्जा कर लेते थे। संथालों को लगा
  3648. 2:19:14कि उनके साथ धोखा हुआ है।
  3649. 2:19:16और इसकी प्रतिक्रिया क्या हुई?
  3650. 2:19:1718556
  3651. 2:19:19में सिद्धू मांझी और कानू मांझी के
  3652. 2:19:22नेतृत्व में संथालों ने विद्रोह कर दिया।
  3653. 2:19:25संथाल विद्रोह।
  3654. 2:19:26हां, यह संथाल विद्रोह साहूकारों,
  3655. 2:19:28जमींदारों और अंग्रेजी राज तीनों के खिलाफ
  3656. 2:19:32था। वो अपना राज स्थापित करना चाहते थे।
  3657. 2:19:34इस विद्रोह को बहुत बेरहमी से कुचल दिया
  3658. 2:19:37गया। लेकिन इसने सरकार को एक सबक सिखाया।
  3659. 2:19:40इसके बाद सरकार ने संथाल परगना नाम से एक
  3660. 2:19:44अलग जिला बनाया और वहां कुछ खास कानून
  3661. 2:19:47लागू किए ताकि संथालों की जमीनों की रक्षा
  3662. 2:19:50की जा सके। यह एक तरह का डैमेज कंट्रोल
  3663. 2:19:52था। हमने बंगाल में जमींदार और जोरदार का
  3664. 2:19:55संघर्ष देखा और राजमहल की पहाड़ियों में
  3665. 2:19:58पहाड़ियां और संथाल का। अब भारत के
  3666. 2:20:00पश्चिमी हिस्से यानी बॉम्बे दक्कन की तरफ
  3667. 2:20:02चलते हैं। वहां क्या अलग हो रहा था?
  3668. 2:20:04वहां एक बिल्कुल नया संघर्ष सामने आया और
  3669. 2:20:07यह कहा किसानों और साहूकारों के बीच सीधा
  3670. 2:20:11टकराओ।
  3671. 2:20:11अच्छा।
  3672. 2:20:12इसकी शुरुआत 1875 में हुई जिसे दक्कन दंगा
  3673. 2:20:16कहते हैं। पुणे के पास सूपा नाम के एक
  3674. 2:20:19गांव से शुरू हुआ।
  3675. 2:20:20किसानों ने इस बार क्या किया? उन्होंने
  3676. 2:20:22साहूकारों के घरों पर हमला किया लेकिन
  3677. 2:20:24उनका मकसद लूटपाट नहीं था।
  3678. 2:20:27तो फिर क्या था?
  3679. 2:20:27वो साहूकारों के वही खाते, अकाउंट बुक्स
  3680. 2:20:30और ऋण पत्र, डेट बॉन्ड्स ढूंढ-ढूंढ कर जला
  3681. 2:20:33रहे थे।
  3682. 2:20:33वो सिर्फ कागज क्यों जला रहे थे? यह तो
  3683. 2:20:35बड़ा अजीब है।
  3684. 2:20:36अजीब नहीं बहुत सोचा समझा कदम था। वो उन
  3685. 2:20:40कागजों को जला रहे थे जो उनकी गुलामी का
  3686. 2:20:42सबूत थे।
  3687. 2:20:43अच्छा।
  3688. 2:20:44वो कर्ज के उस जाल को ही खत्म कर देना
  3689. 2:20:46चाहते थे जिसमें वो फंसे हुए थे। यह हिंसा
  3690. 2:20:49के साथ-साथ एक नैतिक विद्रोह भी था।
  3691. 2:20:52यहां राजस्व की व्यवस्था क्या बंगाल जैसी
  3692. 2:20:54थी?
  3693. 2:20:54नहीं। यहां रयतवाड़ी बंदोबस्त था। इस
  3694. 2:20:57सिस्टम में कंपनी जमींदार के बजाय सीधे
  3695. 2:21:00किसान यानी रयत से चुगती करती थी।
  3696. 2:21:03सीधे किसान से?
  3697. 2:21:04हां, हर खेत की मिट्टी और उपज का अंदाजा
  3698. 2:21:07लगाकर 30 साल के लिए राजस्व तय कर दिया
  3699. 2:21:10जाता था।
  3700. 2:21:11सुनने में तो यह व्यवस्था जमींदारी से
  3701. 2:21:12बेहतर लगती है। फिर विद्रोह क्यों हुआ?
  3702. 2:21:14कागज पर बेहतर थी, लेकिन जमीन पर नहीं।
  3703. 2:21:18यहां भी राजस्व की दर बहुत ज्यादा थी।
  3704. 2:21:21और जब फसलें खराब होती या बाजार में अनाज
  3705. 2:21:24का भाव गिर जाता तो किसानों के लिए इसे
  3706. 2:21:26चुकाना नामुमकिन हो जाता था। नतीजा उन्हें
  3707. 2:21:29फिर साहूकार के पास जाना पड़ता था।
  3708. 2:21:31मैंने सुना है कि इस कहानी में अमेरिका से
  3709. 2:21:33भी एक कनेक्शन जुड़ता है। कपास की कोई
  3710. 2:21:35भूमिका थी?
  3711. 2:21:36बहुत बड़ी भूमिका थी। 1861 में अमेरिका
  3712. 2:21:39में गृह युद्ध यानी अमेरिकन सिविल वॉर छड़
  3713. 2:21:42गया।
  3714. 2:21:42राइट? इससे हुआ यह कि ब्रिटेन की कपड़ा
  3715. 2:21:45मिलों को अमेरिका से आने वाली कपास मिलनी
  3716. 2:21:48बंद हो गई।
  3717. 2:21:49तो उन्होंने भारत की तरफ देखा होगा।
  3718. 2:21:51बिल्कुल। अचानक भारत के कपास की मांग
  3719. 2:21:53आसमान छू गई। दक्कन की काली मिट्टी कपास
  3720. 2:21:57के लिए बेहतरीन थी। साहूकारों ने किसानों
  3721. 2:22:00को कपास उगाने के लिए हाथों हाथ कर्ज देना
  3722. 2:22:03शुरू कर दिया।
  3723. 2:22:04हम तो यह तो किसानों के लिए अच्छा समय रहा
  3724. 2:22:06होगा।
  3725. 2:22:06हां, यह दक्कन के किसानों के लिए एक
  3726. 2:22:08सुनहरा दौर था। कपास की कीमतें दोगुनी
  3727. 2:22:11तिगनी हो गई। लेकिन यह ज्यादा दिन चला
  3728. 2:22:13नहीं होगा।
  3729. 2:22:14नहीं चला। 1865 में अमेरिकी गृह युद्ध
  3730. 2:22:17खत्म हो गया। ब्रिटेन ने वापस अमेरिका से
  3731. 2:22:20कपास खरीदना शुरू कर दिया और भारत से कपास
  3732. 2:22:23का निर्यात ठप हो गया
  3733. 2:22:24और कीमतें गिर गई।
  3734. 2:22:25कीमतों में भारी गिरावट आई। जिन साहूकारों
  3735. 2:22:28ने कल तक आसानी से कर्ज दिया था। अब वो
  3736. 2:22:31अपना पैसा ब्याज समेत वापस मांगने लगे।
  3737. 2:22:34किसान एक झटके में अर्श से फर्श पर आ गए।
  3738. 2:22:37इस कर्ज की जाल में एक कानूनी पेच भी था
  3739. 2:22:39ना। यह बहुत दिलचस्प है। 1859 में
  3740. 2:22:43अंग्रेजों ने एक परिसीमन कानून लिमिटेशन
  3741. 2:22:46लॉ बनाया।
  3742. 2:22:47लिमिटेशन लॉ।
  3743. 2:22:48इसके मुताबिक कोई भी कर्ज का दस्तावेज
  3744. 2:22:51सिर्फ 3 साल के लिए ही मान्य होगा। इसका
  3745. 2:22:54मकसद था कि ब्याज सालों साल बढ़ता ना जाए।
  3746. 2:22:57लेकिन साहूकारों ने इसका भी कोई तोड़
  3747. 2:22:59निकाल लिया होगा।
  3748. 2:22:59बिल्कुल। उन्होंने एक नई चालाकी शुरू की।
  3749. 2:23:02हर 3 साल बाद वो किसान को बुलाते और एक नए
  3750. 2:23:06दस्तावेज पर अंगूठा लगवा लेते।
  3751. 2:23:08अच्छा। इस नए दस्तावेज में पुराना मूलधन
  3752. 2:23:11और उस पर लगा सारा ब्याज दोनों को जोड़कर
  3753. 2:23:15नया मूलधन बना दिया जाता था।
  3754. 2:23:16अरे बाप रे।
  3755. 2:23:17किसान ज्यादातर अनपढ़ थे। उन्हें पता ही
  3756. 2:23:20नहीं चलता था कि वो किस जाल में फंस रहे
  3757. 2:23:22हैं। यह कानूनी धोखाधड़ी उनके गुस्से का
  3758. 2:23:25एक बहुत बड़ा कारण बनी।
  3759. 2:23:27तो फिर से एक विद्रोह और मुझे लगता है कि
  3760. 2:23:29इसके बाद फिर से एक सरकारी रिपोर्ट आई
  3761. 2:23:31होगी इसकी जांच के लिए।
  3762. 2:23:32आप बिल्कुल सही समझे। सरकार ने विद्रोह को
  3763. 2:23:35दबाने के लिए सेना भेजी लेकिन साथ ही
  3764. 2:23:37दक्कन दंगा आयोग डेक्कन राइट्स कमीशन का
  3765. 2:23:40गठन भी किया। इस आयोग को दंगों के कारणों
  3766. 2:23:43की जांच करने का काम सौंपा गया।
  3767. 2:23:45तो यह रिपोर्ट भी बंगाल की पांचवी रिपोर्ट
  3768. 2:23:47की तरह आई ही है। जानकारी का खजाना लेकिन
  3769. 2:23:49एक सरकारी नजरिए के साथ।
  3770. 2:23:51एकदम सही। इस आयोग ने बहुत मेहनत की।
  3771. 2:23:53गांव-गांव जाकर किसानों, साहूकारों,
  3772. 2:23:56गवाहों के बयान लिए, आंकड़े इकट्ठे किए।
  3773. 2:23:59यह रिपोर्ट आज हमारे लिए बहुत कीमती स्रोत
  3774. 2:24:02है। लेकिन इसका एक छुपा हुआ मकसद भी था।
  3775. 2:24:04वो क्या?
  3776. 2:24:05वो मकसद था यह साबित करना कि इन दंगों के
  3777. 2:24:08लिए सरकार की ऊंची राजस्व दरे नहीं बल्कि
  3778. 2:24:11लालची साहूकार जिम्मेदार थे।
  3779. 2:24:12अच्छा मतलब अपनी गलती नहीं माननी थी।
  3780. 2:24:14हां, यह औपनिवेशिक सरकार की अपनी छवि को
  3781. 2:24:17बचाने की एक कोशिश थी। वो यह दिखाना चाहते
  3782. 2:24:20थे कि समस्या सिस्टम में नहीं बल्कि कुछ
  3783. 2:24:22बुरे लोगों में है।
  3784. 2:24:24तो आज हमने देखा कि कैसे अंग्रेजों की
  3785. 2:24:26नीतियां चाहे वो बंगाल का परमानेंट
  3786. 2:24:28सेटलमेंट हो या मुंबई का रायतवारी कागज पर
  3787. 2:24:30कुछ और थी और जमीन पर कुछ और
  3788. 2:24:32हम
  3789. 2:24:32हर नीति का मकसद था ज्यादा से ज्यादा
  3790. 2:24:34राजस्व वसूलना लेकिन हर बार इसके कुछ ऐसे
  3791. 2:24:37नतीजे निकले जिनकी उन्होंने उम्मीद नहीं
  3792. 2:24:39की थी।
  3793. 2:24:39बिल्कुल हर नीति ने एक नए तरह का संघर्ष
  3794. 2:24:42पैदा किया। जमींदार बनाम जोतदार,
  3795. 2:24:45पहाड़ियां बनाम संथाल और किसान बनाम
  3796. 2:24:48साहूकार। यह अनरपेक्षित परिणामों की एक
  3797. 2:24:52पूरी श्रृंखला थी।
  3798. 2:24:53और जो बात सबसे ज्यादा सोचने पर मजबूर
  3799. 2:24:55करती है वो यह है कि यह सरकारी रिकॉर्ड्स
  3800. 2:24:58जिन पर आज हमारा इतिहास आधारित है, वह खुद
  3801. 2:25:01उस कहानी का एक हिस्सा थे जिसे वह बताने
  3802. 2:25:03का दावा करते हैं।
  3803. 2:25:04सही बात है।
  3804. 2:25:05वो सिर्फ सच्चाई नहीं बता रहे थे बल्कि एक
  3805. 2:25:07खास तरह की सच्चाई गढ़ रहे थे। यह हमें
  3806. 2:25:09सोचने पर मजबूर करता है कि कानूनी
  3807. 2:25:11दस्तावेजों की पंक्तियों के बीच और कितने
  3808. 2:25:13इतिहास छुपे होंगे।
  3809. 2:25:17तो आज हम जिनके सोर्सेस पर गौर करने जा
  3810. 2:25:20रहे हैं उनका विषय है 1857 का आंदोलन।
  3811. 2:25:24हमारे पास एनसीईआरटी का चैप्टर है
  3812. 2:25:26विद्रोही और राज 1857 का आंदोलन और उसके
  3813. 2:25:30व्याख्यान।
  3814. 2:25:31जी। यहां सिर्फ घटनाओं की एक लिस्ट नहीं
  3815. 2:25:33है बल्कि इस बात की भी पड़ताल है कि उस
  3816. 2:25:36दौर को अलग-अलग लोगों ने कैसे देखा और
  3817. 2:25:39कैसे पेश किया।
  3818. 2:25:41बिल्कुल इसका टाइटल ही बड़ा दिलचस्प है।
  3819. 2:25:43रेबल्स एंड द राज मतलब एक ही कहानी के दो
  3820. 2:25:46अलग-अलग किरदार। दो अलग नजरिए।
  3821. 2:25:48सही कहा। एक के लिए जो विद्रोही है वो
  3822. 2:25:51दूसरे के लिए शायद आजादी के सिपाही थे।
  3823. 2:25:54बिल्कुल हमारी कोशिश रहेगी कि हम इन दोनों
  3824. 2:25:56नजरियों को समझें और देखें कि यह ऐतिहासिक
  3825. 2:25:59दस्तावेजों में कैसे झलकता है।
  3826. 2:26:01चलिए फिर इस कहानी को शुरू से शुरू करते
  3827. 2:26:04हैं। 1857 की गर्मियों में आखिर ऐसा क्या
  3828. 2:26:08हुआ कि पूरे उत्तर भारत में एक आग सी लग
  3829. 2:26:11गई। इस विद्रोह का पैटर्न क्या था?
  3830. 2:26:15इसकी शुरुआत एक चिंगारी से हुई। 10 मई
  3831. 2:26:171857 को मेरठ छावनी में वहां सिपाहियों की
  3832. 2:26:21एक पैदल टुकड़ी मनी इन्फेंट्री ने विद्रोह
  3833. 2:26:24कर दिया।
  3834. 2:26:25अच्छा।
  3835. 2:26:25लेकिन यह सिर्फ उन तक सीमित नहीं रहा।
  3836. 2:26:27देखते ही देखते घुड़सवार फौज भी उनसे आ
  3837. 2:26:30मिली और फिर?
  3838. 2:26:31फिर यह आग पूरे शहर में फैल गई।
  3839. 2:26:33और उनका प्लान बिल्कुल साफ लगता है।
  3840. 2:26:35उन्होंने सबसे पहले उस जगह पर हमला किया
  3841. 2:26:38जहां अंग्रेजों के सारे हथियार और गोला,
  3842. 2:26:40बारूद रखे थे। मतलब उनका शस्त्रागार।
  3843. 2:26:42हां, आमरी।
  3844. 2:26:44पर, मतलब साफ था। पहले दुश्मन को निहत्ता
  3845. 2:26:46करो।
  3846. 2:26:47बिल्कुल।
  3847. 2:26:48हथियार कब्जाने के बाद उन्होंने अंग्रेज
  3848. 2:26:50अफसरों पर हमला किया। उनके बंगले जला दिए।
  3849. 2:26:53लेकिन यहां एक बात गौर करने वाली है।
  3850. 2:26:55क्या?
  3851. 2:26:55उनका गुस्सा सिर्फ अंग्रेजों पर नहीं था।
  3852. 2:26:57उन्होंने सरकारी इमारतें भी नहीं छोड़ी।
  3853. 2:27:00रिकॉर्ड दफ्तर, जेल, अदालत, डाकखाने,
  3854. 2:27:03सरकारी खजाने सबको जला दिया।
  3855. 2:27:05तो, यह सिर्फ मारकाट नहीं थी। यह एक तरह
  3856. 2:27:08का ऐलान था। यह हर उस चीज पर हमला था जो
  3857. 2:27:11ब्रिटिश शासन या फिरंगी राज की निशानी थी।
  3858. 2:27:15एकदम सही। रिकॉर्ड दफ्तर जलाकर वो शायद
  3859. 2:27:17अपने कर्जों और अंग्रेजों के बनाए कानूनों
  3860. 2:27:19के सबूत मिटा देना चाहते थे।
  3861. 2:27:21अच्छा।
  3862. 2:27:22और मेरठ में यह सब करने के बाद वो रुके
  3863. 2:27:24नहीं। अगली सुबह तक उनका एक जज था दिल्ली
  3864. 2:27:26के लाल किले के दरवाजे पर खड़ा था।
  3865. 2:27:28और उनका मकसद साफ था। वो मुगल सम्राट
  3866. 2:27:31बहादुर शाह जफर से मिलना चाहते थे।
  3867. 2:27:34हां, यह कमाल का स्ट्रेटेजिक मूव था।
  3868. 2:27:36लेकिन क्यों बहादुर शाह जफर उस वक्त तक तो
  3869. 2:27:39सिर्फ नाम के बादशाह रह गए थे। असली ताकत
  3870. 2:27:41तो अंग्रेजों के पास थी।
  3871. 2:27:43क्योंकि उन्हें एक चेहरे की एक प्रतीक की
  3872. 2:27:45जरूरत थी। बहादुर शाह जफर भले ही कमजोर थे
  3873. 2:27:48लेकिन वो उस मुगल सल्तनत के वारिस थे
  3874. 2:27:50जिसके नीचे हिंदुस्तान कभी एक था।
  3875. 2:27:52मतलब उनके नाम से इस विद्रोह को एक
  3876. 2:27:55लेजिटिमेसी मिल जाती।
  3877. 2:27:56बिल्कुल। यह सिर्फ सिपाहियों का गुस्सा ना
  3878. 2:27:58रहकर पूरे हिंदुस्तान की लड़ाई बन सकती
  3879. 2:28:00थी।
  3880. 2:28:01सुना है बादशाह पहले तैयार नहीं थे?
  3881. 2:28:03हां। वो हिचकिचाए। उन्हें अंग्रेजों की
  3882. 2:28:05ताकत का अंदाजा था। लेकिन जब विद्रोही
  3883. 2:28:07सिपारी किले के अंदर घुस आए और दिल्ली के
  3884. 2:28:10आम लोग भी उनके साथ जुड़ने लगे। सही कहा।
  3885. 2:28:12उनके पास उनकी बात मानने के अलावा कोई
  3886. 2:28:14चारा नहीं बचा। और उनके एक हां ने पूरा
  3887. 2:28:17मंजर बदल दिया। अब यह लड़ाई मुगल बादशाह
  3888. 2:28:21के झंडे तले लड़ी जा सकती थी।
  3889. 2:28:23और इस खबर का असर तो मतलब एक धमाके जैसा
  3890. 2:28:26हुआ होगा।
  3891. 2:28:27बिल्कुल। जैसे ही खबर फैली कि दिल्ली अब
  3892. 2:28:29विद्रोहियों के कब्जे में है और उन्हें
  3893. 2:28:31मुगल सम्राट का आशीर्वाद भी मिल गया है।
  3894. 2:28:34गंगा घाटी से लेकर मध्य भारत तक एक के बाद
  3895. 2:28:37एक छावनी में विद्रोह की आग भड़क उठी।
  3896. 2:28:39इससे एक बड़ा सवाल खड़ा होता है। जिस तेजी
  3897. 2:28:43से यह सब फैला क्या यह सिर्फ एक इत्तेफाक
  3898. 2:28:46था या इसके पीछे कोई प्लानिंग, कोई
  3899. 2:28:48कम्युनिकेशन चल रहा था?
  3900. 2:28:49इसके सबूत मिलते हैं। अलग-अलग छावनियों के
  3901. 2:28:51सिपाही आपस में बात कर रहे थे। एक उदाहरण
  3902. 2:28:54है कि जब सेवंथ अवध केवलरी ने नए कारतूस
  3903. 2:28:57इस्तेमाल करने से मना कर दिया तो उन्होंने
  3904. 2:29:0048 नेटिव इनफेंट्री को लिखा।
  3905. 2:29:02क्या लिखा?
  3906. 2:29:02उन्होंने लिखा कि हमने अपने धर्म के लिए
  3907. 2:29:05यह किया है और अब आपके हुक्म का इंतजार कर
  3908. 2:29:08रहे हैं। यह साफ इशारा है कि वह मिलकर कदम
  3909. 2:29:10उठा रहे थे।
  3910. 2:29:11मतलब छावनियों में रात को पंचायतें जुड़
  3911. 2:29:14रही थी। आगे क्या करना है इस पर बहस हो
  3912. 2:29:16रही थी और जब विद्रोह शुरू हुआ तो नेता भी
  3913. 2:29:19सामने आने लगे। और यहां एक दिलचस्प बात यह
  3914. 2:29:21है कि नेता हर तरह के थे। एक तरफ कानपुर
  3915. 2:29:23में नाना साहेब थे जो पेशवा बाजीराव 2 के
  3916. 2:29:26उत्तराधिकारी थे
  3917. 2:29:27और अपनी पेंशन और पदवी छीन जाने से नाराज
  3918. 2:29:30थे।
  3919. 2:29:30बिल्कुल झांसी में रानी लक्ष्मीबाई थी
  3920. 2:29:32जिनकी सल्तनत अंग्रेजों ने हड़प ली थी। तो
  3921. 2:29:35यह शाही लोग थे जिनकी लड़ाई अपनी इज्जत और
  3922. 2:29:37हक की थी।
  3923. 2:29:38लेकिन सभी नेता शाही खानदान से तो नहीं
  3924. 2:29:40थे।
  3925. 2:29:40सही बात। बिहार के आरा में कुंवर सिंह थे।
  3926. 2:29:44एक बुजुर्ग जमींदार। फैजाबाद में मौलवी
  3927. 2:29:46अहमदुल्लाह शाह जैसे धार्मिक नेता थे।
  3928. 2:29:48जिनको लग रहा था कि उनका धर्म खतरे में
  3929. 2:29:50है।
  3930. 2:29:50और फिर इन सबसे अलग उत्तर प्रदेश के बड़ौत
  3931. 2:29:53में शाहमल जैसे एक आम आदमी ने गांव वालों
  3932. 2:29:57को इकट्ठा करके अंग्रेजों से टक्कर ली।
  3933. 2:29:59हां। इससे साफ पता चलता है कि यह सिर्फ
  3934. 2:30:02राजाओं या सिपाहियों की लड़ाई नहीं थी।
  3935. 2:30:04इसमें हर तबके का गुस्सा, हर तरह की
  3936. 2:30:06परेशानी शामिल थी।
  3937. 2:30:08लेकिन इतना सारा गुस्सा एक साथ एक ही वक्त
  3938. 2:30:10पर कैसे फटा? मतलब इस आग को हवा किसने दी?
  3939. 2:30:14इसके पीछे चिंगारी का काम किया अफवाहों और
  3940. 2:30:17भविष्यवाणियों ने। खासकर जब लोगों के मन
  3941. 2:30:20में पहले से ही डर और शक हो तो अफवाहें
  3942. 2:30:23पेट्रोल की तरह काम करती हैं।
  3943. 2:30:24और सबसे बड़ी अफवाह थी उन चर्बी वाले
  3944. 2:30:26कारतूसों की।
  3945. 2:30:27जी, ग्रीस्ड कार्ट्रेजेस की।
  3946. 2:30:29यह खबर फैल गई थी कि जो नई एनफील्ड राइफल
  3947. 2:30:32आई है, उसके कारतूस पर गाय और सूअर की
  3948. 2:30:35चर्बी लगी है जिसे दांत से काटना पड़ता
  3949. 2:30:37है। यह हिंदू और मुसलमान दोनों सिपाहियों
  3950. 2:30:40के लिए उनका धर्म भ्रष्ट करने जैसा था।
  3951. 2:30:42अंग्रेज अफसर चीखते रह गए कि यह झूठ है
  3952. 2:30:45लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं मानी।
  3953. 2:30:46क्यों?
  3954. 2:30:47क्योंकि इसके पीछे एक ठोस वजह थी। लोगों
  3955. 2:30:49ने सोचा यह अंग्रेज हमारे धर्म के मामलों
  3956. 2:30:51में इतना दखल क्यों दे रहे हैं?
  3957. 2:30:53और बात सिर्फ कारतूस की नहीं थी।
  3958. 2:30:55अच्छा। उसी दौरान एक और अफवाह फैली कि
  3959. 2:30:58बाजार में बिकने वाले आटे में अंग्रेजों
  3960. 2:31:00ने गाय और सूअर की हड्डियों का चूरा मिलवा
  3961. 2:31:03दिया है। ओहो जब आप इन दोनों अफवाहों को
  3962. 2:31:06जोड़कर देखते हैं तब समझ आता है कि लोगों
  3963. 2:31:09को यह एक सूची समझी साजिश क्यों लगी होगी।
  3964. 2:31:12हां और फिर वो चपातियों वाली रहस्यमई घटना
  3965. 2:31:15गांव में रात को एक चौकीदार दूसरे गांव
  3966. 2:31:18में जाकर पांच चपातियां दे आता और कहता कि
  3967. 2:31:20आगे पांच और बनाकर बांट दो। इसका मतलब
  3968. 2:31:23क्या था? कोई नहीं जानता। पर इसने एक
  3969. 2:31:25अनजाने खतरे का माहौल जरूर बना दिया।
  3970. 2:31:28और इन सबके बीच एक पुरानी भविष्यवाणी भी
  3971. 2:31:30जोर पकड़ रही थी।
  3972. 2:31:31हां, कि प्लासी की लड़ाई के ठीक 100 साल
  3973. 2:31:34बाद यानी 23 जून 1857 को फिरंगी राज का
  3974. 2:31:38अंत हो जाएगा।
  3975. 2:31:39यह सब चीजें मिलकर लोगों को विद्रोह के
  3976. 2:31:41लिए तैयार कर रही थी।
  3977. 2:31:42लेकिन लोग इन अफवाहों पर इतना जल्दी
  3978. 2:31:44विश्वास क्यों कर रहे थे? जरूर अंग्रेजों
  3979. 2:31:47ने पहले कुछ ऐसा किया होगा जिससे लोगों का
  3980. 2:31:50उन पर से भरोसा उठ गया था।
  3981. 2:31:52बिल्कुल। 1820 के बाद से ब्रिटिश ने भारत
  3982. 2:31:55में तेजी से बदलाव लाने शुरू कर दिए थे।
  3983. 2:31:57उन्होंने सती प्रथा पर रोक लगाई। हिंदू
  3984. 2:32:00विधवाओं को दोबारा शादी करने का कानून
  3985. 2:32:02बनाया।
  3986. 2:32:02भले ही यह सुधार के काम थे, लेकिन बहुत से
  3987. 2:32:05भारतीयों को लगा कि अंग्रेज हमारे रीति
  3988. 2:32:08रिवाजों को खत्म करना चाहते हैं।
  3989. 2:32:10सही कहा। इसके साथ ही उन्होंने अंग्रेजी
  3990. 2:32:13स्कूल खोले। के क्रिश्चियन मिशनरीज को काम
  3991. 2:32:14करने की आजादी दी।
  3992. 2:32:15और जमीन और राज्यों को हड़पने की नीतियां
  3993. 2:32:18तो थी ही। सहायक संधि यानी सब्सिडियरी
  3994. 2:32:21अलायंस, विलय की नीति यानी डॉक्ट्रिन ऑफ
  3995. 2:32:24लैप्स।
  3996. 2:32:25बिल्कुल। इनके जरिए एक के बाद एक सतारा,
  3997. 2:32:28झांसी, नागपुर जैसी रियासतें अंग्रेजी
  3998. 2:32:31साम्राज्य में मिला ली गई। और इन सब
  3999. 2:32:33पॉलिसीज का सबसे बुरा और गहरा असर शायद
  4000. 2:32:36अवध पर पड़ा।
  4001. 2:32:37अवध?
  4002. 2:32:37हां। अवध की कहानी इस विद्रोह को समझने के
  4003. 2:32:40लिए बहुत जरूरी है क्योंकि वहां गुस्सा कई
  4004. 2:32:42सालों से उबल रहा था। गवर्नर जनरल लॉर्ड
  4005. 2:32:45डलहौजी ने तो 1851 में ही अवध के लिए कह
  4006. 2:32:48दिया था यह चेरी का फल एक दिन हमारे ही
  4007. 2:32:51मुंह में आ गिरेगा।
  4008. 2:32:52उन्होंने इसकी शुरुआत 1801 में ही कर दी
  4009. 2:32:55थी। जब अवध पर सहायक संधि थोप दी गई।
  4010. 2:32:58हां। सब्सिडरी अलायंस इसका मतलब था कि
  4011. 2:33:02नवाब अपनी सेना नहीं रख सकते थे। उनकी
  4012. 2:33:04सुरक्षा की जिम्मेदारी ब्रिटिश सेना की थी
  4013. 2:33:07जिसका सारा खर्चा नवाब को ही उठाना पड़ता
  4014. 2:33:10था।
  4015. 2:33:10यह एक मीठा जहर था जिसने अवध को अंदर से
  4016. 2:33:14खोखला कर दिया।
  4017. 2:33:15और आखिरकार 1856 में नवाब वाजिद अली शाह
  4018. 2:33:19पर कुशासन का इल्जाम लगाकर उन्हें गद्दी
  4019. 2:33:22से उतार दिया गया और कलकत्ता भेज दिया
  4020. 2:33:24गया।
  4021. 2:33:24अंग्रेजों ने कहा कि हम अवध की जनता को
  4022. 2:33:27नवाब के बुरे शासन से आजाद करा रहे हैं।
  4023. 2:33:30लेकिन हुआ इसका उल्टा। अवध के लोग अपने
  4024. 2:33:32नवाब से प्यार करते थे। उनके जाने का मातम
  4025. 2:33:35पूरे अवध ने मनाया। एक शख्स ने लिखा, शहर
  4026. 2:33:38से जान जा चुकी थी, जिस्म बेजान था।
  4027. 2:33:41और इसके बाद अंग्रेजों ने वहां के
  4028. 2:33:43ताल्लुकदारों पर भी हमला किया। यह
  4029. 2:33:45ताल्लुकदार कौन थे?
  4030. 2:33:46ताल्लुकदार वहां के बड़े जमींदार थे,
  4031. 2:33:48जिनकी पीढ़ियां उस जमीन पर राज करती आ रही
  4032. 2:33:51थी। उनके अपने किले थे। अपनी छोटी-मोटी
  4033. 2:33:54सेनाएं थी। वो उस इलाके के मालिक थे।
  4034. 2:33:56अच्छा।
  4035. 2:33:57अंग्रेजों ने आते ही उनकी ताकत खत्म करनी
  4036. 2:33:59शुरू कर दी। उनके किले तोड़ दिए। उनकी
  4037. 2:34:01सेनाएं भंग कर दी।
  4038. 2:34:03और फिर आया 1856 का एक मुश्त बंदोबस्त
  4039. 2:34:07यानी समरी सेटलमेंट।
  4040. 2:34:08हां, इस पॉलिसी के तहत उनकी जमीनें उनसे
  4041. 2:34:12छीन ली गई। सोच कर देखिए यह तालूकदारों के
  4042. 2:34:14लिए सिर्फ जमीन का नुकसान नहीं था। यह
  4043. 2:34:17उनकी इज्जत, उनकी पीढ़ियों की विरासत का
  4044. 2:34:19अपमान था।
  4045. 2:34:20मतलब जो लोग कल तक राजा थे, वो एक झटके
  4046. 2:34:24में बेजमीन हो गए।
  4047. 2:34:25बिल्कुल। यह सिर्फ एक फाइनेंशियल पॉलिसी
  4048. 2:34:28नहीं थी। यह एक सोशल अटैक था
  4049. 2:34:30और इसका असर सिपाहियों पर भी पड़ा होगा
  4050. 2:34:32क्योंकि सुना है बंगाल आर्मी में ज्यादातर
  4051. 2:34:35सिपाही अवध से ही आते थे।
  4052. 2:34:36बिल्कुल सही। इसीलिए अवध को बंगाल आर्मी
  4053. 2:34:40की पौधशाला यानी नर्सरी ऑफ द बंगाल आर्मी
  4054. 2:34:44कहा जाता था। हर किसान परिवार से कोई ना
  4055. 2:34:46कोई फौज में था।
  4056. 2:34:48तो जब उन्होंने देखा कि उनके गांव में
  4057. 2:34:50तालुकदार का अपमान हो रहा है। उनके
  4058. 2:34:52परिवारों पर लगान बढ़ता जा रहा है। तो
  4059. 2:34:54उनका गुस्सा भी बढ़ गया।
  4060. 2:34:56हां। अब सिपाही का गुस्सा और किसान का
  4061. 2:34:58गुस्सा एक हो चुका था।
  4062. 2:35:00इतना सब कुछ हो रहा था। हमले, अफवाहें,
  4063. 2:35:03संगठन मुझे यह जानने की उत्सुकता हो रही
  4064. 2:35:06है कि इन सबके पीछे उनका अंतिम लक्ष्य
  4065. 2:35:08क्या था? व्हाट वास द एंड गेम फॉर द
  4066. 2:35:11रेबल्स? आखिर वो चाहते क्या थे?
  4067. 2:35:13इसका जवाब हमें उन इश्तहारों या ऐलानों
  4068. 2:35:16में मिलता है जो विद्रोहियों ने जारी किए
  4069. 2:35:18थे। उनका सबसे पहला और सबसे जरूरी मकसद था
  4070. 2:35:21एकता।
  4071. 2:35:22यूनिटी।
  4072. 2:35:23जी। हर ऐलान में चाहे वह हिंदुओं के नाम
  4073. 2:35:26हो या मुसलमानों के जाति और धर्म से ऊपर
  4074. 2:35:29उठकर साथ आने की अपील की गई।
  4075. 2:35:31आजमगढ़ प्रोक्लेमेशन इसका एक बेहतरीन
  4076. 2:35:34उदाहरण है।
  4077. 2:35:35हां, 25 अगस्त 1857 को जारी हुए इस ऐलान
  4078. 2:35:38में समाज के हर तबके से वादा किया गया था।
  4079. 2:35:41जमींदारों से कहा गया कि उनकी जमीन उन्हें
  4080. 2:35:43वापस मिलेगी। व्यापारियों से कहा गया कि
  4081. 2:35:46उन्हें ब्रिटिश टैक्स से आजादी मिलेगी। और
  4082. 2:35:48सरकारी नौकरी करने वाले पंडितों और
  4083. 2:35:50मौलवियों से
  4084. 2:35:51उनसे कहा गया कि उनके धर्म और इज्जत की
  4085. 2:35:53रक्षा की जाएगी। यह सबको साथ लाने की एक
  4086. 2:35:56कोशिश थी।
  4087. 2:35:57तो वह अंग्रेजों को हटाकर उस पुरानी
  4088. 2:35:59दुनिया को वापस लाना चाहते थे जो
  4089. 2:36:02अंग्रेजों के आने से पहले थी। उनका विज़न
  4090. 2:36:05मतलब पिछले दौर से जुड़ा था।
  4091. 2:36:07बिल्कुल। उनके लिए मुगल साम्राज्य एकता का
  4092. 2:36:10प्रतीक था। एक ऐसा हिंदुस्तान जहां
  4093. 2:36:12अलग-अलग समुदाय एक साथ रहते थे। इसीलिए
  4094. 2:36:15उन्होंने बहादुर शाह जफर को अपना नेता
  4095. 2:36:18माना
  4096. 2:36:18और उन्होंने दिल्ली, लखनऊ और कानपुर में
  4097. 2:36:21अंग्रेजों के शासन के बदले अपना एक अलग
  4098. 2:36:24सिस्टम बनाने की कोशिश भी की थी।
  4099. 2:36:26हां बिल्कुल। पुराने मुगल दरबार की तरह
  4100. 2:36:28ओहदे बांटे, एडमिनिस्ट्रेशन खड़ा करने का
  4101. 2:36:30प्रयास किया।
  4102. 2:36:31लेकिन इतना बड़ा और फैला हुआ विद्रोह आखिर
  4103. 2:36:34दबा कैसे दिया गया? अंग्रेजों ने इस आग को
  4104. 2:36:37कैसे बुझाया?
  4105. 2:36:38शुरुआत में तो अंग्रेज बौखला गए थे। उनके
  4106. 2:36:40पास विद्रोहियों के मुकाबले सैनिक कम थे।
  4107. 2:36:43लेकिन उन्होंने इसे कुचलने के लिए अपनी
  4108. 2:36:45पूरी ताकत झोंक दी। सबसे पहले उन्होंने
  4109. 2:36:48कठोर कानून बनाए।
  4110. 2:36:49जैसे कि
  4111. 2:36:50मई और जून 1857 में पूरे उत्तर भारत में
  4112. 2:36:53मार्शल लॉ लगा दिया गया।
  4113. 2:36:55इसका क्या मतलब था आम लोगों के लिए?
  4114. 2:36:57इसका मतलब था कि अब मिलिट्री ऑफिसर भी
  4115. 2:36:59किसी भी हिंदुस्तानी पर सिर्फ शक के आधार
  4116. 2:37:02पर मुकदमा चला सकते थे और सजा दे सकते थे।
  4117. 2:37:05और सजा सिर्फ एक थी मौत। सारे कानूनी
  4118. 2:37:08प्रोसेस खत्म कर दिए गए।
  4119. 2:37:10और फिर सेना की कारवाई शुरू हुई।
  4120. 2:37:12हां। ब्रिटेन से नई फौज की टुकड़ियां
  4121. 2:37:14मंगवाई गई। उनका पहला लक्ष्य था दिल्ली पर
  4122. 2:37:17दोबारा कब्जा करना क्योंकि दिल्ली विद्रोह
  4123. 2:37:20का दिल बन चुका था।
  4124. 2:37:21तो उन्होंने दो तरफ से हमला किया।
  4125. 2:37:23जी एक फौज कोलकाता से आई दूसरी पंजाब से।
  4126. 2:37:27दिल्ली पर कब्जा करना आसान नहीं रहा होगा?
  4127. 2:37:30नहीं बिल्कुल नहीं। लंबी और खूनी लड़ाई के
  4128. 2:37:33बाद सितंबर 1857 में अंग्रेज दिल्ली पर
  4129. 2:37:37कब्जा कर पाए। लेकिन इसके बाद जो दमन का
  4130. 2:37:40दौर शुरू हुआ वो बेहद क्रूर था।
  4131. 2:37:43अंग्रेजों ने बदले की भावना से काम किया।
  4132. 2:37:45किस तरह की क्रूरता थी?
  4133. 2:37:47विद्रोहियों को सार्वजनिक तौर पर फांसी दी
  4134. 2:37:49गई। उन्हें तोप के मुंह से बांधकर उड़ा
  4135. 2:37:51दिया गया। यह सिर्फ सजा नहीं थी। यह दहशत
  4136. 2:37:54फैलाने का एक तरीका था।
  4137. 2:37:56ताकि आगे से कोई ऐसी हिम्मत ना करें।
  4138. 2:37:58तस्वीरें बनाई गई जिसमें अंग्रेज अफसर
  4139. 2:38:01विद्रोहियों को पैरों तले रौंद रहे हैं।
  4140. 2:38:03गांव के गांव जला दिए गए। उनका मकसद सिर्फ
  4141. 2:38:06विद्रोह को दबाना नहीं था बल्कि उसे पूरी
  4142. 2:38:08तरह से कुचलना था।
  4143. 2:38:09तो इस तरह से यह लड़ाई मैदान में तो खत्म
  4144. 2:38:12हुई लेकिन एक और लड़ाई शुरू हुई। यादों
  4145. 2:38:15की, तस्वीरों की
  4146. 2:38:16बिल्कुल।
  4147. 2:38:17इस पूरी घटना को चित्रकारों ने, लेखकों ने
  4148. 2:38:20कैसे पेश किया।
  4149. 2:38:22यही इस चैप्टर का सबसे दिलचस्प हिस्सा है
  4150. 2:38:24कि कैसे इस विद्रोह की अलग-अलग तस्वीरें
  4151. 2:38:26बनाई गई। अंग्रेजों की तस्वीरों में एक
  4152. 2:38:28अलग कहानी है और भारतीयों की कल्पना में
  4153. 2:38:31बिल्कुल अलग। पहले अंग्रेजों की बात करते
  4154. 2:38:33हैं। उनके चित्रों में क्या दिखता था?
  4155. 2:38:36उनके चित्रों में कुछ खास थीम्स बार-बार
  4156. 2:38:38आते हैं। पहला ब्रिटिश नायकों का गुणगान।
  4157. 2:38:40कई पेंटिंग्स बनी जिसमें अंग्रेज अफसर
  4158. 2:38:43घिरे हुए अंग्रेजों को बचाते हुए दिखाए
  4159. 2:38:45गए।
  4160. 2:38:45जैसे रिलीफ ऑफ लखनऊ। हां, थॉमस जॉन्स बाकर
  4161. 2:38:48की रिलीफ ऑफ लखनऊ इसका बड़ा उदाहरण है।
  4162. 2:38:51इसमें ब्रिटिश सेना के कमांडर कैंबल
  4163. 2:38:53हैवलॉक और आउट्रम को हीरों की तरह दिखाया
  4164. 2:38:56गया है जो अपनी शक्ति से सब पर काबू पा
  4165. 2:38:58रहे हैं।
  4166. 2:38:58और एक थीम यह भी था कि विद्रोही बहुत
  4167. 2:39:00जालिम थे। खासकर अंग्रेज औरतों और बच्चों
  4168. 2:39:04के प्रति। हां जोसेफ नोएल पैटर्न की
  4169. 2:39:06पेंटिंग इन मेमोरियम इसका प्रतीक है।
  4170. 2:39:08इसमें मासूम अंग्रेज औरतें और बच्चे एक
  4171. 2:39:11घेरे में डरे सहमे बैठे हैं और उन्हें
  4172. 2:39:13देखकर लगता है कि विद्रोही उन पर अत्याचार
  4173. 2:39:15करने वाले हैं।
  4174. 2:39:16इन तस्वीरों का मकसद क्या था?
  4175. 2:39:18इनका मकसद ब्रिटिश जनता में गुस्सा और
  4176. 2:39:20बदले की भावना पैदा करना था ताकि अंग्रेज
  4177. 2:39:23सेना जो क्रूरता कर रही थी उसे आम जनता का
  4178. 2:39:25समर्थन मिले।
  4179. 2:39:26मतलब यह तस्वीरें एक तरह का प्रोपेगेंडा
  4180. 2:39:29थी।
  4181. 2:39:29बिल्कुल। पंच मैगजीन के कार्टूनस में तो
  4182. 2:39:31यह और साफ दिखता है। एक कार्टून में
  4183. 2:39:33ब्रिटिश शेर को एक भारतीय बाघ पर हमला
  4184. 2:39:35करते दिखाया गया है जो सीधे-सीधे बदले का
  4185. 2:39:37संदेश देता है।
  4186. 2:39:38और इसके बिल्कुल विपरीत भारतीय
  4187. 2:39:40राष्ट्रवादियों ने इस विद्रोह को कैसे याद
  4188. 2:39:42किया?
  4189. 2:39:43भारतीय राष्ट्रवादियों के लिए यह घटना
  4190. 2:39:45अंग्रेजी शासन के खिलाफ लड़ाई की सबसे
  4191. 2:39:47बड़ी मिसाल बन गई। इसे भारत का प्रथम
  4192. 2:39:50स्वतंत्रता संग्राम यानी फर्स्ट वॉर ऑफ
  4193. 2:39:52इंडिपेंडेंस का दर्जा दिया गया।
  4194. 2:39:54और इस नई कहानी के नायक और नायिकाएं भी नए
  4195. 2:39:57थे।
  4196. 2:39:57बिल्कुल। इस राष्ट्रवादी कल्पना में रानी
  4197. 2:40:00लक्ष्मीबाई वीरता का सबसे बड़ा प्रतीक बन
  4198. 2:40:03गई। उनकी छवि बनाई गई एक ऐसी वीरांगना जो
  4199. 2:40:06घोड़े पर सवार है। पीठ पर अपने बच्चे को
  4200. 2:40:09बांधे हाथ में तलवार लिए।
  4201. 2:40:11अपने देश की आजादी के लिए लड़ रही है।
  4202. 2:40:13जी। और इस छवि को अमर कर दिया सुभद्रा
  4203. 2:40:16कुमारी चौहान की कविता ने।
  4204. 2:40:17खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी
  4205. 2:40:20थी।
  4206. 2:40:20सही कहा। यह कविताएं, लोकगीत और तस्वीरें
  4207. 2:40:24इन सब ने मिलकर 1857 के नेताओं को हमारे
  4208. 2:40:27राष्ट्रीय नायकों के रूप में स्थापित कर
  4209. 2:40:29दिया। यह दिखाता है कि इतिहास सिर्फ वो
  4210. 2:40:32नहीं जो हुआ बल्कि वह भी है जिसे हम याद
  4211. 2:40:35रखना चुनते हैं।
  4212. 2:40:36विद्रोही ओहियाज 1857 का आंदोलन और उसके
  4213. 2:40:40व्याख्यान इस पर हमारी यह गहरी चर्चा
  4214. 2:40:43समाप्त हुई। हमने देखा कि कैसे अंग्रेजों
  4215. 2:40:46और भारतीयों ने इस विद्रोह को अलग-अलग
  4216. 2:40:48तरीके से पेश किया। जी और यह हमें एक बड़े
  4217. 2:40:52सवाल पर लाकर छोड़ता है। आज 150 साल से भी
  4218. 2:40:55ज्यादा समय बाद जब हम इस घटना के बारे में
  4219. 2:40:57सोचते हैं तो हमारे ज़हन में कौन सी तस्वीर
  4220. 2:41:00उभरती है? क्या वह अंग्रेजों की बनाई हुई
  4221. 2:41:02विद्रोहियों की तस्वीर है या
  4222. 2:41:03राष्ट्रवादियों की बनाई हुई स्वतंत्रता
  4223. 2:41:05सेनानियों की? और हमारी यह पसंद हमारे आज
  4224. 2:41:08के बारे में क्या बताती है?
  4225. 2:41:12तो आज हम एक बहुत ही दिलचस्प अध्याय शुरू
  4226. 2:41:16करने वाले हैं। अध्याय 12 औपनिवेशिक शहर।
  4227. 2:41:20हां औपनिवेशिक शहर मतलब वो शहर जो
  4228. 2:41:23अंग्रेजों के शासनकाल में विकसित हुए।
  4229. 2:41:26इसमें हम तीन मुख्य चीजों पर ध्यान देंगे।
  4230. 2:41:29नगरीकरण यानी अर्बनाइजेशन।
  4231. 2:41:31अर्बनाइजेशन। ठीक है?
  4232. 2:41:32फिर नगर योजना मतलब टाउन प्लानिंग और
  4233. 2:41:35स्थापत्य यानी आर्किटेक्चर। और इस अध्याय
  4234. 2:41:38में हम एनसीईआरटी के हिसाब से सभी जरूरी
  4235. 2:41:41पॉइंट्स को एक-एक करके समझेंगे। देखेंगे
  4236. 2:41:43कि मद्रास, कोलकाता और बंबई जैसे शहर यह
  4237. 2:41:46औपनिवेशिक भारत के सबसे अहम केंद्र कैसे
  4238. 2:41:50बन गए।
  4239. 2:41:50बिल्कुल। तो सबसे पहले यह समझते हैं कि
  4240. 2:41:53अंग्रेजों के आने से पहले यानी पूर्व
  4241. 2:41:56औपनिवेशिक काल में भारत के कस्बे और शहर
  4242. 2:41:59कैसे थे?
  4243. 2:41:59हां, यह जानना जरूरी है।
  4244. 2:42:01देखिए मुगल काल में जो शहर थे जैसे दिल्ली
  4245. 2:42:04या आगरा वो शाही सत्ता और समृद्धि के
  4246. 2:42:08केंद्र थे। इनकी पहचानी महलों, किलों और
  4247. 2:42:11बड़ी-बड़ी मस्जिदों से होती थी।
  4248. 2:42:13और दक्षिण भारत में
  4249. 2:42:14दक्षिण भारत में तस्वीर थोड़ी अलग थी।
  4250. 2:42:16वहां शहर अक्सर मंदिरों के आसपास विकसित
  4251. 2:42:19होते थे।
  4252. 2:42:19अच्छा यहां एक शब्द आता है किला बंद।
  4253. 2:42:23फर्टिफाइड।
  4254. 2:42:24इसका क्या मतलब है?
  4255. 2:42:25किला बंद का मतलब है वो शहर या बस्ती जो
  4256. 2:42:29सुरक्षा के लिए दीवारों से घिरी हो।
  4257. 2:42:31हम
  4258. 2:42:32यह पुराने शहरों की एक बहुत आम पहचान थी।
  4259. 2:42:34हम
  4260. 2:42:35और हां, यह एग्जाम्स के लिए एक जरूरी टर्म
  4261. 2:42:37है।
  4262. 2:42:38ठीक है। तो फिर 18वीं सदी में क्या हुआ?
  4263. 2:42:41जब मुगल साम्राज्य कमजोर होने लगा
  4264. 2:42:43तो जैसे-जैसे मुगल सत्ता कमजोर हुई,
  4265. 2:42:46पुराने शाही शहरों का पतन होने लगा और
  4266. 2:42:48उनकी जगह लखनऊ, हैदराबाद जैसे नए
  4267. 2:42:51क्षेत्रीय केंद्र उभर कर सामने आए।
  4268. 2:42:53और ठीक इसी समय यूरोपीय कंपनियां भी आ रही
  4269. 2:42:55थी।
  4270. 2:42:56एकदम सही। और उन्होंने अपने केंद्र
  4271. 2:42:58स्थापित किए जिससे मद्रास, कोलकाता और
  4272. 2:43:00मुंबई जैसे बंदरगाह शहर, पोर्ट सिटीज
  4273. 2:43:03उभरे। तो यह शहर बन तो गए लेकिन हमें इनके
  4274. 2:43:06बारे में पता कैसे चलता है? मतलब
  4275. 2:43:09औपनिवेशिक शहरों की पड़ताल कैसे की जाती
  4276. 2:43:11है?
  4277. 2:43:12देखिए अंग्रेज हर चीज का रिकॉर्ड रखने के
  4278. 2:43:14लिए जाने जाते थे।
  4279. 2:43:15हम्म।
  4280. 2:43:15उन्होंने शासन चलाने के लिए बहुत बड़े
  4281. 2:43:17पैमाने पर आंकड़े और रिकॉर्ड्स इकट्ठा
  4282. 2:43:19किए।
  4283. 2:43:20हम
  4284. 2:43:20शहरों के नक्शे बनाए, सर्वेक्षण किए और
  4285. 2:43:24सबसे जरूरी उन्होंने नियमित रूप से जनगणना
  4286. 2:43:27करवानी शुरू की।
  4287. 2:43:28जनगणना सेंसेस।
  4288. 2:43:29हां। द सेंसेस इसका मतलब है जनसंख्या की
  4289. 2:43:32आधिकारिक गिनती। एन ऑफिशियल काउंट ऑफ द
  4290. 2:43:35पपुलेशन।
  4291. 2:43:36और ये कब शुरू हुई?
  4292. 2:43:37भारत में पहली अखिल भारतीय जनगणना 1872
  4293. 2:43:41में हुई और फिर 1881 से यह हर 10 साल में
  4294. 2:43:44होने लगी। यह रिकॉर्ड्स शहरीकरण के
  4295. 2:43:46ट्रेंड्स को समझने के लिए बहुत जरूरी हैं।
  4296. 2:43:48और ये डेट भी एग्जाम्स के लिए जरूरी हैं।
  4297. 2:43:50तो इन आंकड़ों से क्या पता चला? क्या भारत
  4298. 2:43:53बहुत तेजी से शहरी बन रहा था?
  4299. 2:43:55नहीं, हैरानी की बात है कि ऐसा नहीं था।
  4300. 2:43:5719 सेंचुरी में शहरी आबादी का हिस्सा बहुत
  4301. 2:44:00धीरे-धीरे बढ़ा। लेकिन
  4302. 2:44:02लेकिन कोलकाता, बंबई और मद्रास जैसे शहर
  4303. 2:44:05हां, यह औपनिवेशिक शहर बहुत तेजी से बढ़
  4304. 2:44:07रहे थे। यह शहर भारत से कच्चा माल जैसे
  4305. 2:44:10कपास और नील इंग्लैंड भेजने के मुख्य
  4306. 2:44:12केंद्र बन गए थे। और 1853 में जब रेलवे आई
  4307. 2:44:15तो इस प्रक्रिया में और तेजी आ गई।
  4308. 2:44:17अच्छा, अब आते हैं इन शहरों की एक बहुत
  4309. 2:44:20खास बात पर। पृथक्करण, सेग्रगेशन। हां, ये
  4310. 2:44:24औपनिवेशिक शहरों की सबसे, आप कह सकते हैं
  4311. 2:44:27सबसे कड़वी सच्चाई थी। अंग्रेजों ने अपने
  4312. 2:44:30शहरों को साफ-साफ दो हिस्सों में बांट
  4313. 2:44:32दिया था।
  4314. 2:44:32दो हिस्से
  4315. 2:44:34कौन-कौन से?
  4316. 2:44:35पहला था वाइट टाउन, जहां सिर्फ यूरोपीय
  4317. 2:44:37लोग रहते थे और दूसरा था ब्लैक टाउन, जहां
  4318. 2:44:40भारतीय आबादी रहती थी।
  4319. 2:44:42और ये बंटवारा सिर्फ मतलब रहने की जगह का
  4320. 2:44:45नहीं था। इसके पीछे एक सोच थी।
  4321. 2:44:47बिल्कुल। यह नस्लीय श्रेष्ठ था। रेशल
  4322. 2:44:51सुपीरियरिटी की भावना पर आधारित था। वह
  4323. 2:44:53ब्लैक टाउन को ना सिर्फ भीड़भाड़ वाला और
  4324. 2:44:56गंदा मानते थे बल्कि उसे अराजकता और
  4325. 2:44:58बीमारी का केंद्र भी समझते थे।
  4326. 2:45:00यह पॉइंट एग्जाम्स के लिए बहुत-बहुत जरूरी
  4327. 2:45:03है। और इसी सोच ने शायद उन्हें हिल स्टेशन
  4328. 2:45:06बनाने के लिए भी प्रेरित किया होगा।
  4329. 2:45:08हां, हिल स्टेशन जैसे शिमला। इन्हें शुरू
  4330. 2:45:10में तो सेना को ठहराने और सीमा की निगरानी
  4331. 2:45:12के लिए बनाया गया था। लेकिन इनकी ठंडी
  4332. 2:45:15जलवायु यूरोप जैसी थी। तो यह अंग्रेजों के
  4333. 2:45:17लिए गर्मियों में एक आकर्षक जगह बन गई। एक
  4334. 2:45:20तरह का एस्केप।
  4335. 2:45:21हां। और यहां उन्होंने सेनेटोरियम भी
  4336. 2:45:23बनाए। सेनेटोरियम मतलब स्वास्थ्य लाभ के
  4337. 2:45:26लिए बनाए गए स्थान। यह बीमार सैनिकों के
  4338. 2:45:28लिए बहुत काम आते थे।
  4339. 2:45:30शहरों में सामाजिक जीवन भी तो बदल रहा
  4340. 2:45:32होगा।
  4341. 2:45:32बहुत बदल रहा था। ट्रम और बसें जैसे नए
  4342. 2:45:35परिवहन के साधन आए। पार्क, थिएटर और क्लब
  4343. 2:45:38जैसे सार्वजनिक स्थान बने। महिलाओं के लिए
  4344. 2:45:41शिक्षा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए।
  4345. 2:45:43हालांकि उन पर सामाजिक नियंत्रण भी मजबूत
  4346. 2:45:46था। चलिए अब बात करते हैं नगर नियोजन और
  4347. 2:45:49भवन निर्माण की। टाउन प्लानिंग एंड
  4348. 2:45:51आर्किटेक्चर। पहले मद्रास को देखते हैं।
  4349. 2:45:53मद्रास का जो केंद्र था वो था फोर्ट सेंट
  4350. 2:45:56जॉर्ज।
  4351. 2:45:56यह अंग्रेजों का किला था।
  4352. 2:45:58हां। और इसी किले के अंदर वाइट टाउन बसा
  4353. 2:46:01था। और किले के बाहर ब्लैक टाउन था जो
  4354. 2:46:03बिल्कुल एक पारंपरिक भारतीय शहर जैसा लगता
  4355. 2:46:06था।
  4356. 2:46:06अब कोलकाता की बात करते हैं। वहां तो 1757
  4357. 2:46:10के प्लासी के युद्ध के बाद सब कुछ बदल
  4358. 2:46:12गया।
  4359. 2:46:13बिल्कुल। उस युद्ध के बाद अंग्रेजों ने एक
  4360. 2:46:15नया किला बनाया फोर्ट विलियम और सुरक्षा
  4361. 2:46:18के लिए उन्होंने किले के चारों ओर एक बहुत
  4362. 2:46:20बड़ा खाली मैदान छोड़ दिया
  4363. 2:46:22जिसे मैदान कहते हैं।
  4364. 2:46:24हां मैदान जो आज भी कोलकाता का एक बहुत
  4365. 2:46:27प्रमुख स्थल है।
  4366. 2:46:28और कोलकाता की प्लानिंग के लिए क्या किया
  4367. 2:46:30गया?
  4368. 2:46:301803 में गवर्नर जनरल लॉर्ड वेलेसली ने
  4369. 2:46:34कोलकाता के नगर नियोजन पर बहुत जोर दिया।
  4370. 2:46:36इसके बाद एक लॉटरी कमेटी बनाई गई।
  4371. 2:46:39लॉटरी कमेटी यह कैसा नाम है? मजेदार बात
  4372. 2:46:42यह है कि इसका नाम इसलिए लॉटरी कमेटी था
  4373. 2:46:44क्योंकि शहर के विकास का पैसा पब्लिक
  4374. 2:46:47लॉटरी से इकट्ठा किया जाता था।
  4375. 2:46:49क्या बात है मतलब लोगों के लॉटरी के पैसे
  4376. 2:46:52से शहर बन रहा था।
  4377. 2:46:53हां। और इस कमेटी ने शहर का नक्शा बनाने,
  4378. 2:46:57सड़कें बनाने और भारतीय बस्तियों जिन्हें
  4379. 2:47:00बस्ती कहते थे उनको साफ करने का काम किया।
  4380. 2:47:02मकसद था शहर को स्वास्थ्य की दृष्टि से
  4381. 2:47:05बेहतर और शासन करने में आसान बनाना। यह
  4382. 2:47:08कमेटी एग्जाम्स के लिए जरूरी है।
  4383. 2:47:10चलिए अब बॉम्बे की तरफ चलते हैं। बॉम्बे
  4384. 2:47:12कपास के व्यापार का एक बहुत बड़ा केंद्र
  4385. 2:47:14था।
  4386. 2:47:15हां। और अंग्रेजों ने यहां अपनी शक्ति और
  4387. 2:47:17अधिकार को दिखाने के लिए बहुत भव्य
  4388. 2:47:20सार्वजनिक इमारतें बनवाई। इन इमारतों में
  4389. 2:47:22मुख्य रूप से तीन स्थापत्य शैलियों का
  4390. 2:47:25इस्तेमाल हुआ।
  4391. 2:47:26तीन शैलियां। अच्छा कौन-कौन सी?
  4392. 2:47:28पहली शैली थी नवशास्त्रीय
  4393. 2:47:30नियो क्लासिकल।
  4394. 2:47:31नियो क्लासिकल ये कैसी होती थी?
  4395. 2:47:34इसमें बड़े-बड़े स्तंभ होते थे। इसकी
  4396. 2:47:37प्रेरणा प्राचीन यूनान और रोम की इमारतों
  4397. 2:47:40से ली गई थी। जैसे मुंबई का टाउन हॉल
  4398. 2:47:43तो मतलब वह अपनी तुलना रोमन साम्राज्य से
  4399. 2:47:45कर रहे थे।
  4400. 2:47:46बिल्कुल यह शैली ब्रिटिश साम्राज्यवाद को
  4401. 2:47:49प्राचीन रोम के गौरव से जोड़ती थी।
  4402. 2:47:52और दूसरी शैली
  4403. 2:47:53दूसरी थी नवगोथिक नियोगथिक। इसकी खासियत
  4404. 2:47:57थी ऊंची उठी हुई छतें, नोकदार मेहराबें और
  4405. 2:48:01बहुत बारीक साज सज्जा। जैसे कि
  4406. 2:48:04जैसे बंबई विश्वविद्यालय, सचिवालय और उच्च
  4407. 2:48:07न्यायालय और इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है
  4408. 2:48:10विक्टोरिया टर्मिनस रेलवे स्टेशन। यह नाम
  4409. 2:48:14एग्जाम्स के लिए बहुत जरूरी है।
  4410. 2:48:15विक्टोरिया टर्मिनस जिसे आज छत्रपति
  4411. 2:48:18शिवाजी महाराज टर्मिनस कहते हैं।
  4412. 2:48:20हां वही। और तीसरी और सबसे दिलचस्प शैली
  4413. 2:48:23थी इंडोसारासेसैनिक।
  4414. 2:48:24इंडोसारसेसनिक यह तो नाम से ही मिश्रण लग
  4415. 2:48:27रहा है।
  4416. 2:48:28हां। यह भारतीय खासकर मुगल और यूरोपीय
  4417. 2:48:31शैलियों का मिश्रण था। इसमें गुंबद,
  4418. 2:48:34छतरियां, जालियां और मेहराब जैसे भारतीय
  4419. 2:48:38तत्व इस्तेमाल होते थे।
  4420. 2:48:39लेकिन ऐसा क्यों मतलब वो भारतीय शैली
  4421. 2:48:42क्यों अपना रहे थे?
  4422. 2:48:43इसका मकसद एक ऐसी शैली बनाना था जो दिखने
  4423. 2:48:45में भारतीय हो लेकिन स्वभाव में ब्रिटिश।
  4424. 2:48:48यह दिखाने के लिए कि वही भारत के असली
  4425. 2:48:51शासक हैं। बॉम्बे का गेटवे ऑफ इंडिया और
  4426. 2:48:53ताजमहल होटल इसके बेहतरीन उदाहरण हैं।
  4427. 2:48:56तो आखिर में यह इमारतें और ये स्थापत्य
  4428. 2:49:00शैलियां
  4429. 2:49:00ये हमें क्या बताती हैं?
  4430. 2:49:02ये सिर्फ इमारतें नहीं थी। यह शाही ताकत,
  4431. 2:49:05राष्ट्रवाद और धार्मिक गौरव के प्रतीक थी।
  4432. 2:49:09ये शासकों और शासितों के बीच के फर्क को
  4433. 2:49:12साफ दिखाती थी।
  4434. 2:49:13बिल्कुल। और भारतीयों पर अंग्रेजी शासन के
  4435. 2:49:16अधिकार और शक्ति का प्रभाव डालती थी।
  4436. 2:49:18तो यह थी कहानी औपनिवेशिक शहरों की।
  4437. 2:49:20नगरीकरण, नगर योजना, स्थापत्य यह अध्याय
  4438. 2:49:25समाप्त हुआ।
  4439. 2:49:28आज हमारे पास जो दस्तावेज हैं, वह हमें
  4440. 2:49:31भारत के इतिहास के एक ऐसे दौर में ले जा
  4441. 2:49:34रहे हैं, जिसने देश की किस्मत ही तय कर
  4442. 2:49:36दी। हम
  4443. 2:49:36यह एनसीईआरटी की 12वीं कक्षा के इतिहास की
  4444. 2:49:39किताब से जुड़े कुछ नोट्स और लेख हैं और
  4445. 2:49:42इनका केंद्र है महात्मा गांधी और
  4446. 2:49:44राष्ट्रीय आंदोलन।
  4447. 2:49:45हमारी आज की इस गहन चर्चा का मकसद सिर्फ
  4448. 2:49:48घटनाओं की एक लिस्ट बनाना नहीं है।
  4449. 2:49:50बल्कि ये समझना है कि 1915 में जब गांधी
  4450. 2:49:54भारत आए तो कैसे उन्होंने स्वतंत्रता
  4451. 2:49:56संग्राम का चेहरा मतलब हमेशा के लिए बदल
  4452. 2:49:59दिया।
  4453. 2:49:59हां। जो आंदोलन पहले कुछ पढ़े-लिखे लोगों
  4454. 2:50:02तक ही सीमित था, उसे उन्होंने करोड़ों
  4455. 2:50:04लोगों का आंदोलन कैसे बना दिया?
  4456. 2:50:06बस यही सवाल है।
  4457. 2:50:07तो चलिए इसी सवाल के साथ शुरू करते हैं।
  4458. 2:50:09गांधी जी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत
  4459. 2:50:12लौटते हैं। वहां वो नस्लभेदी सरकार के
  4460. 2:50:14खिलाफ अपने तरीकों को आजमा चुके थे।
  4461. 2:50:17हम्म।
  4462. 2:50:17पर भारत में उनकी असली शुरुआत कहां से
  4463. 2:50:20होती है?
  4464. 2:50:20देखिए उनकी जो पहली बड़ी सार्वजनिक
  4465. 2:50:22उपस्थिति थी और मेरे हिसाब से सबसे
  4466. 2:50:25धमाकेदार एंट्री वो फरवरी 1916 में हुई।
  4467. 2:50:28बनारस
  4468. 2:50:29हिंदू विश्वविद्यालय के उद्घाटन समारोह
  4469. 2:50:31में
  4470. 2:50:31हां बीएचयू के उद्घाटन में मंच पर देश के
  4471. 2:50:34बड़े-बड़े राजे महाराजे अमीर लोग
  4472. 2:50:37राष्ट्रवादी नेता सब मौजूद थे माहौल बहुत
  4473. 2:50:40भव्य था
  4474. 2:50:41और गांधी जी ने उस मौके का इस्तेमाल उन
  4475. 2:50:43सबकी आलोचना करने के लिए किया है ना
  4476. 2:50:45बिल्कुल उन्होंने अपने भाषण में सीधे-सीधे
  4477. 2:50:48वहां बैठे सजेधजे अमीर भारतीयों की तरफ
  4478. 2:50:50इशारा किया
  4479. 2:50:51अच्छा
  4480. 2:50:52उन्होंने कहा कि हम स्वराज की बात करते
  4481. 2:50:54हैं लेकिन भारत के करोड़ों गरीब किसान और
  4482. 2:50:56मजदूर वो तो इस चर्चा चर्चा से गायब हैं।
  4483. 2:50:59हम्म।
  4484. 2:50:59उन्होंने कहा भारत के लिए मुक्ति तब तक
  4485. 2:51:01संभव नहीं है जब तक आप खुद को इन अलंकरणों
  4486. 2:51:04से मुक्त नहीं कर लेते।
  4487. 2:51:05वाह मतलब पहले ही भाषण में उन्होंने यह
  4488. 2:51:08साफ कर दिया कि उनका राष्ट्रवाद ड्राइंग
  4489. 2:51:10रूम की बहसों वाला नहीं होगा।
  4490. 2:51:12हां बल्कि खेतों और फैक्ट्रियों से जुड़ा
  4491. 2:51:14होगा। यह एक बहुत ही साहसी कदम था।
  4492. 2:51:16बहुत ज्यादा। इसने उन्हें बाकी
  4493. 2:51:18राष्ट्रवादी नेताओं से बिल्कुल अलग खड़ा
  4494. 2:51:20कर दिया।
  4495. 2:51:21और इसके बाद उन्होंने अपनी बातों को अमल
  4496. 2:51:23में लाना शुरू किया। वह बड़े शहरों में
  4497. 2:51:25भाषण देने के बजाय भारत के असली मुद्दों
  4498. 2:51:27को पकड़ने लगे। 1917 में वह बिहार के
  4499. 2:51:30चंपारण पहुंचे।
  4500. 2:51:31चंपारण जहां नील की खेती करने वाले
  4501. 2:51:34किसानों पर बहुत अत्याचार हो रहा था।
  4502. 2:51:37हां, उन्हें अपनी जमीन के एक हिस्से पर
  4503. 2:51:39जबरन नील उगाना पड़ता था जिसे ब्रिटिश
  4504. 2:51:42बागान मालिक बहुत कम कीमत पर खरीदते थे।
  4505. 2:51:44अच्छा।
  4506. 2:51:45गांधी जी ने वहां जाकर किसानों की
  4507. 2:51:47समस्याओं को सुना। उनका पक्ष लिया और एक
  4508. 2:51:50शांतिपूर्ण विरोध का नेतृत्व किया। यह
  4509. 2:51:53उनका भारत में पहला सत्याग्रह था
  4510. 2:51:55और यहीं पर हमें उनके सबसे शक्तिशाली
  4511. 2:51:57हथियार सत्याग्रह को समझना होगा। यह सिर्फ
  4512. 2:52:01एक मतलब शांतिपूर्ण प्रदर्शन तो नहीं था
  4513. 2:52:03है ना?
  4514. 2:52:04नहीं बिल्कुल नहीं। सत्याग्रह का शाब्दिक
  4515. 2:52:06अर्थ है सत्य के लिए आग्रह। यह निष्क्रिय
  4516. 2:52:09प्रतिरोध नहीं बल्कि एक सक्रिय अहिंसक
  4517. 2:52:12अवज्ञा थी।
  4518. 2:52:13सक्रिय।
  4519. 2:52:14हां। इसका मूल विचार था कि आप अन्यायपूर्ण
  4520. 2:52:17कानून का शांति से उल्लंघन करें। उसके लिए
  4521. 2:52:19मिलने वाली सजा को स्वीकार करें और
  4522. 2:52:22ऐसा करके आप शासक की नैतिक सत्ता को
  4523. 2:52:25चुनौती देते हैं।
  4524. 2:52:26हां, आप उसे एक तरह से आईना दिखाते हैं।
  4525. 2:52:28मतलब यह एक किस्म का नैतिक युद्ध था।
  4526. 2:52:31और चंपारण में यह सफल रहा।
  4527. 2:52:33हां, सरकार को झुकना पड़ा और किसानों को
  4528. 2:52:35राहत मिली। इसके ठीक बाद 1918 में
  4529. 2:52:38उन्होंने गुजरात में दो और आंदोलन किए।
  4530. 2:52:40एक अहमदाबाद में कपड़ा मिल मजदूरों के लिए
  4531. 2:52:43और दूसरा खेड़ा में जहां फसल खराब होने के
  4532. 2:52:46बावजूद किसानों से लगान वसूला जा रहा था।
  4533. 2:52:48तो चंपारण, अहमदाबाद और खेड़ा यह गांधी जी
  4534. 2:52:52के प्रयोगशाला की तरह थे।
  4535. 2:52:54बिल्कुल। यहां उन्होंने अपने तरीकों को
  4536. 2:52:56आजमाया और यह साबित किया कि वो काम करते
  4537. 2:52:58हैं।
  4538. 2:52:58सही कहा। इन तीन स्थानीय जीतों ने गांधी
  4539. 2:53:01को गरीबों के नेता के रूप में स्थापित कर
  4540. 2:53:03दिया।
  4541. 2:53:04अब बड़ा सवाल यह था कि क्या यह तरीका पूरे
  4542. 2:53:06देश के स्तर पर ब्रिटिश साम्राज्य की पूरी
  4543. 2:53:08ताकत के खिलाफ काम कर सकता था?
  4544. 2:53:10और इसका मौका उन्हें जल्द ही मिला। 1919
  4545. 2:53:14के रेलेट एक्ट के साथ। हां, यह एक बहुत ही
  4546. 2:53:16दमनकारी कानून था। इसने ब्रिटिश सरकार को
  4547. 2:53:19सिर्फ शक के आधार पर
  4548. 2:53:20बिना कोई मुकदमा चलाए
  4549. 2:53:22किसी को भी गिरफ्तार करने और जेल में
  4550. 2:53:24डालने का अधिकार दे दिया। ना कोई अपील, ना
  4551. 2:53:26कोई दलील, ना कोई वकील।
  4552. 2:53:28मतलब नागरिक आजादी पर सीधा हमला।
  4553. 2:53:30बिल्कुल। गांधी जी ने इसके खिलाफ
  4554. 2:53:32देशव्यापी सत्याग्रह का आह्वान किया और
  4555. 2:53:35यहीं से असहयोग आंदोलन की नींव पड़ी।
  4556. 2:53:37रलेट सत्याग्रह पहला अखिल भारतीय आंदोलन
  4557. 2:53:40था, लेकिन पंजाब में इसका विरोध बहुत
  4558. 2:53:43तीव्र था। हां और सरकार ने इसे बर्बरता से
  4559. 2:53:46कुचलने का फैसला किया। इसी के चलते 13
  4560. 2:53:49अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग का वो
  4561. 2:53:52भयानक हत्याकांड हुआ।
  4562. 2:53:53उस घटना ने तो पूरे देश को हिला कर रख
  4563. 2:53:55दिया था
  4564. 2:53:56और इसने गांधी जी को और भी दृढ़ बना दिया
  4565. 2:53:58कि ब्रिटिश शासन शैतानी है और इसके साथ
  4566. 2:54:01असहयोग मतलब नॉन कोऑपरेशन ही एकमात्र
  4567. 2:54:04रास्ता है।
  4568. 2:54:05किसी भी तरह का सहयोग ना करना।
  4569. 2:54:08इसी बीच एक और बड़ा मुद्दा सामने आया
  4570. 2:54:10खिलाफत आंदोलन। यह आंदोलन तो तुर्की के
  4571. 2:54:12खलीफा के पद को बचाने के लिए था। इसका
  4572. 2:54:15भारत की आजादी से क्या लेना देना था?
  4573. 2:54:17यह गांधी जी की राजनीतिक दूरदर्शिता का
  4574. 2:54:20सबसे बड़ा उदाहरण है कह सकते हैं।
  4575. 2:54:21अच्छा।
  4576. 2:54:22पहले विश्व युद्ध में तुर्की हार गया था।
  4577. 2:54:25और ब्रिटिश तुर्की के सुल्तान जिन्हें
  4578. 2:54:28दुनिया भर के मुसलमान अपना खलीफा मानते
  4579. 2:54:30थे।
  4580. 2:54:31उनके पद को खत्म करने वाले थे।
  4581. 2:54:32हां।
  4582. 2:54:33और इससे भारतीय मुसलमान बहुत नाराज थे।
  4583. 2:54:36गांधी जी ने इसमें हिंदू मुस्लिम एकता का
  4584. 2:54:38एक सुनहरा मौका देखा। मतलब उन्होंने
  4585. 2:54:40असहयोग को खिलाफत के मुद्दे से जोड़ दिया।
  4586. 2:54:43हां और यह एक मास्टर स्ट्रोक था। इसने
  4587. 2:54:46लाखों मुसलमानों को स्वतंत्रता संग्राम
  4588. 2:54:48में शामिल कर लिया और आंदोलन को एक
  4589. 2:54:50जबरदस्त जनाधार दिया।
  4590. 2:54:52और आंदोलन का कार्यक्रम क्या था?
  4591. 2:54:54कार्यक्रम साफ था। छात्र स्कूल कॉलेज छोड़
  4592. 2:54:56दें, वकील अदालतें छोड़ दें, सरकारी
  4593. 2:54:58उपाधियां लौटा दी जाएं
  4594. 2:54:59और विदेशी कपड़ों का बहिष्कार हो।
  4595. 2:55:01हां। और लोगों ने ऐसा किया भी यह आंदोलन
  4596. 2:55:04जंगल की आग की तरह फैल गया। हम्म।
  4597. 2:55:06पर फरवरी 1922 में संयुक्त प्रांत के
  4598. 2:55:09चौरीचौरा नाम की जगह पर एक हिंसक घटना हो
  4599. 2:55:11गई।
  4600. 2:55:11प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने एक पुलिस थाने
  4601. 2:55:15में आग लगा दी थी।
  4602. 2:55:16हां, जिसमें कई पुलिसकर्मी मारे गए।
  4603. 2:55:18और गांधी जी जो अहिंसा को लेकर इतने सख्त
  4604. 2:55:21थे, उन्होंने इस एक घटना के कारण पूरा
  4605. 2:55:24आंदोलन वापस ले लिया। यह फैसला तो बहुत
  4606. 2:55:28विवादस्पद रहा होगा।
  4607. 2:55:29बहुत ज्यादा। जवाहरलाल नेहरू और सुभाष
  4608. 2:55:31चंद्र बोस जैसे कई बड़े नेता इस फैसले से
  4609. 2:55:33नाराज थे। उन्हें लगा होगा कि जब आंदोलन
  4610. 2:55:36अपने चरम पर था तब उसे वापस लेना एक
  4611. 2:55:39एक बहुत बड़ी गलती थी।
  4612. 2:55:40लेकिन गांधी जी के लिए साधन और साध्य
  4613. 2:55:42दोनों ही पवित्र होने चाहिए थे।
  4614. 2:55:44उनकी नजर में एक हिंसक आंदोलन से मिली
  4615. 2:55:47आजादी सच्ची आजादी नहीं हो सकती थी।
  4616. 2:55:50आंदोलन वापस लेने के बाद मार्च 1922 में
  4617. 2:55:54उन पर राजद्रोह का मुकदमा चला और उन्हें 6
  4618. 2:55:57साल की सजा हुई।
  4619. 2:55:58उस मुकदमे की एक बात बहुत दिलचस्प है। जज
  4620. 2:56:00ब्रूमफील्ड ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा,
  4621. 2:56:02क्या कहा? उन्होंने कहा, यह तथ्य है कि आप
  4622. 2:56:05लाखों देशवासियों की दृष्टि में एक महान
  4623. 2:56:07देशभक्त और नेता हैं। यहां तक कि राजनीति
  4624. 2:56:10में आपसे अलग मत रखने वाले लोग भी आपको एक
  4625. 2:56:12पवित्र जीवन वाले व्यक्ति के रूप में
  4626. 2:56:14देखते हैं।
  4627. 2:56:15वाह!
  4628. 2:56:15फिर भी उन्होंने कहा कि कानून के तहत
  4629. 2:56:17उन्हें सजा देना उनकी मजबूरी है। और जेल
  4630. 2:56:21से छूटने के बाद गांधी जी ने अपना ध्यान
  4631. 2:56:23रचनात्मक कार्यों पर लगाया। इसी दौरान वह
  4632. 2:56:26एक नेता से महात्मा बनने के सफर पर आगे
  4633. 2:56:28बढ़े।
  4634. 2:56:29और इसमें उनकी वेशभूषा का बहुत बड़ा हाथ
  4635. 2:56:31था। 1921 तक वह सूट बूट छोड़कर सिर्फ एक
  4636. 2:56:35धोती पहनने लगे थे।
  4637. 2:56:36यह सिर्फ कपड़े बदलना नहीं था। यह एक गहरा
  4638. 2:56:39राजनीतिक बयान था।
  4639. 2:56:41यह भारत के सबसे गरीब व्यक्ति के साथ खुद
  4640. 2:56:44को पहचानने का एक तरीका था। यह सादगी और
  4641. 2:56:46त्याग का प्रतीक बन गया।
  4642. 2:56:48और दूसरा प्रतीक था चरखा।
  4643. 2:56:50हां। चरखा तो मानो राष्ट्रवाद का इंजन बन
  4644. 2:56:52गया। वो सिर्फ सूत काटने की मशीन नहीं थी।
  4645. 2:56:55वो आत्मनिर्भरता का प्रतीक था। बिल्कुल कि
  4646. 2:56:58हम अपने कपड़े खुद बना सकते हैं। हमें
  4647. 2:57:01मैनचेस्टर की मिलों की जरूरत नहीं। यह
  4648. 2:57:03शारीरिक श्रम की गरिमा का प्रतीक था।
  4649. 2:57:05और अंग्रेजों की आर्थिक कमर तोड़ने का एक
  4650. 2:57:08जरिया भी था।
  4651. 2:57:09हां। गांधी जी ने आजादी की लड़ाई को एक
  4652. 2:57:13अमूर्त विचार से निकाल कर लोगों के दैनिक
  4653. 2:57:15जीवन का हिस्सा बना दिया। हर कोई चरखा
  4654. 2:57:18चलाकर इस लड़ाई में शामिल हो सकता था।
  4655. 2:57:20बिल्कुल। और ग्रामीण भारत में तो गांधी जी
  4656. 2:57:23की छवि, किसी चमत्कारी पुरुष, किसी गांधी
  4657. 2:57:26बाबा की बन गई थी। उनके बारे में तरह-तरह
  4658. 2:57:29की अफवाहएं फैलने लगी।
  4659. 2:57:30हां, जैसे कि जो लोग गांधी जी की आलोचना
  4660. 2:57:33करते हैं, उनके घर रहस्यमय तरीके से गिर
  4661. 2:57:36जाते हैं
  4662. 2:57:36या उनकी फसलें खराब हो जाती हैं।
  4663. 2:57:38हां। और जो उनके समर्थक हैं, उन पर दैय
  4664. 2:57:41कृपा होती है। यह अफवाहें दिखाती हैं कि
  4665. 2:57:43आम लोग उन्हें किस नजर से देखते थे। एक
  4666. 2:57:46रक्षक, एक संत। इन सब ने मिलकर गांधी को
  4667. 2:57:49एक जन नेता बना दिया और फिर कई सालों की
  4668. 2:57:52खामोशी के बाद 1928 में साइमन कमीशन के
  4669. 2:57:56विरोध के साथ राजनीति फिर गमा गई।
  4670. 2:57:59और दिसंबर 1929 में कांग्रेस का लाहौर
  4671. 2:58:02अधिवेशन हुआ। जहां जवाहरलाल नेहरू की
  4672. 2:58:05अध्यक्षता में पहली बार पूर्ण स्वराज यानी
  4673. 2:58:08कंप्लीट इंडिपेंडेंस का प्रस्ताव पास हुआ।
  4674. 2:58:11अब लक्ष्य सिर्फ ज्यादा अधिकार पाना नहीं
  4675. 2:58:14बल्कि पूरी आजादी था। बिल्कुल और तय हुआ
  4676. 2:58:18कि 26 जनवरी 1930 को पूरे देश में
  4677. 2:58:21स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा।
  4678. 2:58:23इसके बाद गांधी जी ने अपने अगले बड़े
  4679. 2:58:25आंदोलन सविनय अवज्ञा सिविल डिसओबिडियंस की
  4680. 2:58:29घोषणा की।
  4681. 2:58:30हां।
  4682. 2:58:30और इसकी शुरुआत हुई एक बहुत ही साधारण सी
  4683. 2:58:33चीज से नमक।
  4684. 2:58:34हां। और यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है कि
  4685. 2:58:37आखिर नमक ही क्यों? मुझे लगता है कि यह
  4686. 2:58:40गांधी जी की प्रतिभा का सबसे बड़ा उदाहरण
  4687. 2:58:42है। उन्होंने एक ऐसा मुद्दा उठाया जो देश
  4688. 2:58:46के हर इंसान, अमीर, गरीब, हिंदू मुसलमान
  4689. 2:58:49सबसे जुड़ा था।
  4690. 2:58:50बिल्कुल सही। नमक हर घर की जरूरत थी लेकिन
  4691. 2:58:53सरकार ने इसके बनाने और बेचने पर अपना
  4692. 2:58:55एकाधिकार अपनी मोनोपोली कर रखी थी और उस
  4693. 2:58:58पर टैक्स भी लगाया था।
  4694. 2:58:59यह औपनिवेशिक शासन का सबसे घृणित और लालची
  4695. 2:59:02चेहरा था। गांधी जी ने नमक कानून को जुल्म
  4696. 2:59:04का प्रतीक बनाया। और फिर शुरू हुई वह
  4697. 2:59:07ऐतिहासिक दांडी यात्रा। 12 मार्च 1930 को
  4698. 2:59:11गांधी जी ने साबरमती आश्रम से अपनी यात्रा
  4699. 2:59:14शुरू की।
  4700. 2:59:14यह सिर्फ एक यात्रा नहीं थी। यह एक
  4701. 2:59:17ब्रिलियंटली कोरियोग्राफ्ड पॉलिटिकल थिएटर
  4702. 2:59:20था।
  4703. 2:59:20हां।
  4704. 2:59:21गांधी जी 78 अनुयायियों के साथ निकले थे।
  4705. 2:59:24लेकिन जैसे-जैसे वो आगे बढ़ते गए, हजारों
  4706. 2:59:27लोग जुड़ते गए। पूरी दुनिया की मीडिया की
  4707. 2:59:29नजरें इस पर थी। 24 दिनों में 240 मील
  4708. 2:59:33चलकर 6 अप्रैल को वे दांडी पहुंचे।
  4709. 2:59:36हां।
  4710. 2:59:36और वहां उन्होंने बस एक मुट्ठी नमक उठाकर
  4711. 2:59:39ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दे दी।
  4712. 2:59:41हां। उन्होंने समुंदर के पानी से नमक
  4713. 2:59:43बनाकर कानून तोड़ा। यह एक छोटा सा काम था
  4714. 2:59:47लेकिन इसका सांकेतिक महत्व बहुत बड़ा था।
  4715. 2:59:49और इस एक घटना ने पूरे देश में सविनय
  4716. 2:59:52अवज्ञा की लहर पैदा कर दी।
  4717. 2:59:54हर जगह लोगों ने नमक कानून तोड़े, विदेशी
  4718. 2:59:56सामानों का बहिष्कार किया और टैक्स देना
  4719. 2:59:59बंद कर दिया। सरकार ने फिर दमन का रास्ता
  4720. 3:00:01अपनाया होगा।
  4721. 3:00:02हां, करीब 60 हजार लोगों को गिरफ्तार किया
  4722. 3:00:05गया। लेकिन आंदोलन इतना बड़ा था कि सरकार
  4723. 3:00:08को बातचीत की मेज पर आना ही पड़ा।
  4724. 3:00:10हम
  4725. 3:00:11जनवरी 1931 में गांधी जी को रिहा किया गया
  4726. 3:00:14और वायसराय इरविन के साथ एक समझौता हुआ
  4727. 3:00:16जिसे गांधी-इरविन समझौता कहते हैं।
  4728. 3:00:18इसके तहत आंदोलन वापस लिया गया और गांधी
  4729. 3:00:21जी दूसरे गोल में सम्मेलन राउंड टेबल
  4730. 3:00:25कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने के लिए लंदन
  4731. 3:00:27गए। पर वह सम्मेलन नाकाम रहा और फिर कई
  4732. 3:00:30सालों के बाद दूसरे विश्व युद्ध के दौरान
  4733. 3:00:331942 में क्रिप्स मिशन की विफलता के बाद
  4734. 3:00:36गांधी जी ने अपना अंतिम और सबसे बड़ा
  4735. 3:00:38आंदोलन छेड़ने का फैसला किया।
  4736. 3:00:40भारत छोड़ो आंदोलन क्विट इंडिया मूवमेंट।
  4737. 3:00:43हां, अगस्त 1942 में गांधी जी ने
  4738. 3:00:46अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा दिया और
  4739. 3:00:49भारतीयों से कहा करो या मरो। यह एक सीधी
  4740. 3:00:52और खुली चुनौती थी।
  4741. 3:00:54सरकार ने भी तुरंत जवाबी कार्रवाई की।
  4742. 3:00:56गांधी जी समेत सभी बड़े नेताओं को रात भर
  4743. 3:00:59में गिरफ्तार कर लिया गया।
  4744. 3:01:00सरकार को लगा कि नेताओं को गिरफ्तार करके
  4745. 3:01:02वे आंदोलन को कुचल देंगे।
  4746. 3:01:04लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। इस बार आंदोलन
  4747. 3:01:07खुद ब खुद आम लोगों और युवा कार्यकर्ताओं
  4748. 3:01:10ने संभाल लिया। यह एक लीडरलेस रिवोल्ट बन
  4749. 3:01:12गया।
  4750. 3:01:12और यह आंदोलन पिछले आंदोलनों से कहीं
  4751. 3:01:15ज्यादा हिंसक भी था।
  4752. 3:01:16हां, क्योंकि अब लोगों का सब्र जवाब दे
  4753. 3:01:18चुका था। कई जगहों पर हड़तालें हुई,
  4754. 3:01:21सरकारी इमारतों पर हमले हुए। सतारा और
  4755. 3:01:23मेदनीपुर जैसी जगहों पर तो लोगों ने अपनी
  4756. 3:01:26स्वतंत्र सरकारें भी बना ली थी।
  4757. 3:01:28हां, जिन्हें प्रति सरकार कहा जाता था। इस
  4758. 3:01:31आंदोलन ने ब्रिटिश शासन की नींव हिला कर
  4759. 3:01:33रख दी।
  4760. 3:01:34इसके बाद सत्ता के हस्तांतरण की प्रक्रिया
  4761. 3:01:36शुरू हुई। लेकिन यह बहुत दर्दनाक साबित
  4762. 3:01:39हुई क्योंकि आजादी के साथ-साथ विभाजन भी
  4763. 3:01:42आया।
  4764. 3:01:42यह गांधी जी के जीवन का सबसे दुखद दौर था।
  4765. 3:01:4515 अगस्त 1947 को जब दिल्ली में आजादी का
  4766. 3:01:48जश्न मनाया जा रहा था।
  4767. 3:01:49गांधी जी वहां नहीं थे।
  4768. 3:01:50वो कोलकाता में थे। जहां वो हिंदुओं और
  4769. 3:01:52मुसलमानों के बीच फैले दंगों की आग बुझाने
  4770. 3:01:54की कोशिश कर रहे थे।
  4771. 3:01:55वो आजादी जिसके लिए उन्होंने पूरी जिंदगी
  4772. 3:01:58लड़ाई की वो उन्हें इस रूप में मिली।
  4773. 3:02:01हां। और आजादी के बाद भी वो शांति स्थापना
  4774. 3:02:03के काम में लगे रहे। लेकिन 30 जनवरी 1948
  4775. 3:02:07को दिल्ली में एक प्रार्थना सभा में उनकी
  4776. 3:02:09हत्या कर दी गई। इस पूरी कहानी को सुनने
  4777. 3:02:11के बाद एक बात दिमाग में आती है। हम गांधी
  4778. 3:02:14को एक संत या महात्मा के रूप में देखते
  4779. 3:02:16हैं। लेकिन इन स्रोतों से यह साफ है कि वह
  4780. 3:02:18एक बहुत ही चतुर और रणनीतिक राजनीतिक नेता
  4781. 3:02:22भी थे।
  4782. 3:02:22बिल्कुल। उनकी धोती, उनका चरखा, उनका नमक
  4783. 3:02:26उठाना यह सब गहरे राजनीतिक प्रतीक थे।
  4784. 3:02:29हम्म।
  4785. 3:02:29वो जानते थे कि एक बड़े साम्राज्य से
  4786. 3:02:32लड़ने के लिए सिर्फ नैतिक बल काफी नहीं
  4787. 3:02:34है। आपको ऐसे प्रतीक चाहिए जो लोगों को
  4788. 3:02:37जोड़ सकें, उन्हें प्रेरित कर सकें। तो
  4789. 3:02:39शायद सोचने वाली बात यह है कि आज के दौर
  4790. 3:02:42में जब राजनीतिक संवाद इतना जटिल और अक्सर
  4791. 3:02:45विभाजनकारी हो गया है। क्या गांधी के
  4792. 3:02:48तरीकों से कुछ सीखा जा सकता है?
  4793. 3:02:50हम
  4794. 3:02:51क्या आज भी नमक जैसे सरल लेकिन शक्तिशाली
  4795. 3:02:54प्रतीक ढूंढे जा सकते हैं जो लोगों को
  4796. 3:02:57बड़े मुद्दों के लिए एकजुट कर सकें। यह एक
  4797. 3:02:59बहुत ही प्रासंगिक सवाल है। गांधी जी
  4798. 3:03:01दिखाते हैं कि सबसे बड़े बदलाव की शुरुआत
  4799. 3:03:04अक्सर सबसे सरल कामों से होती है। बशर्ते
  4800. 3:03:07उसके पीछे एक बड़ा और सच्चा विचार हो।
  4801. 3:03:09महात्मा गांधी और राष्ट्रीय आंदोलन पर
  4802. 3:03:11हमारी यह चर्चा समाप्त हुई।
  4803. 3:03:16तो चलिए इस बार हम एक ऐसे विषय की गहराई
  4804. 3:03:19में उतरते हैं जिसके बारे में हम सब ने
  4805. 3:03:21सुना है लेकिन शायद पूरी तरह समझा नहीं
  4806. 3:03:24है। हम बात कर रहे हैं एनसीईआरटी के
  4807. 3:03:27अध्याय 14 विभाजन को समझना राजनीति,
  4808. 3:03:31स्मृति और अनुभव की।
  4809. 3:03:32बिल्कुल और ये तीन शब्द राजनीति, स्मृति
  4810. 3:03:35और अनुभव। यही इस पूरी चर्चा की आप कह
  4811. 3:03:39सकते हैं चाबी है।
  4812. 3:03:40हम सिर्फ ये नहीं देखेंगे कि 1947 में
  4813. 3:03:43क्या हुआ था।
  4814. 3:03:44बल्कि हम यह भी समझेंगे कि उसके पीछे की
  4815. 3:03:47पॉलिटिक्स क्या थी। लोगों की यादों ने उस
  4816. 3:03:49घटना को कैसे जिंदा रखा है और जमीन पर
  4817. 3:03:52मतलब आम इंसानों का अनुभव कैसा था।
  4818. 3:03:55सही कहा। तो मिशन साफ है। इन स्त्रोतों से
  4819. 3:03:58सिर्फ तथ्य नहीं बल्कि उनके पीछे की कहानी
  4820. 3:04:02और उनका असली मतलब निकालना। चलिए शुरू
  4821. 3:04:05करते हैं इस कहानी के सबसे मुश्किल सबसे
  4822. 3:04:08इंसानी पहलू से। जब हम पार्टीशन के बारे
  4823. 3:04:11में सोचते हैं तो अक्सर दिमाग में नेताओं
  4824. 3:04:14और नक्शों पर खींची गई लकीरों की तस्वीर
  4825. 3:04:17आती है।
  4826. 3:04:17जी।
  4827. 3:04:18लेकिन सच तो यह है कि यह एक भयानक मानव
  4828. 3:04:21त्रासदी थी। दिल्ली या लंदन में लिए गए
  4829. 3:04:23फैसलों की कीमत करोड़ों आम लोगों ने चुकाई
  4830. 3:04:26जो रातोंरात अपने ही घरों में शरणार्थी बन
  4831. 3:04:29गए।
  4832. 3:04:30हां। और इन अनुभवों को समझने के लिए
  4833. 3:04:33सरकारी फाइलें और रिपोर्टें काफी नहीं है।
  4834. 3:04:36इसीलिए इतिहासकार मौखिक इतिहास यानी ओरल
  4835. 3:04:40हिस्ट्री का सहारा लेते हैं।
  4836. 3:04:41ओरल हिस्ट्री
  4837. 3:04:42जी। इसका मतलब सिर्फ लोगों का इंटरव्यू
  4838. 3:04:45लेना नहीं है। इसका असली मकसद उन
  4839. 3:04:47खामोशियों को सुनना है जो किताबों में
  4840. 3:04:50दर्ज नहीं है।
  4841. 3:04:51खामोशियां यह तो काफी दिलचस्प है। कैसी
  4842. 3:04:53खामोशियां? वो खामोशियां जो बताती हैं कि
  4843. 3:04:55कैसे सदियों से साथ रह रहे पड़ोसियों ने
  4844. 3:04:58एक दूसरे पर हथियार उठा लिए। सरकारी
  4845. 3:05:01रिपोर्ट आपको बताएगी कि एक गांव में कितने
  4846. 3:05:03लोग मारे गए।
  4847. 3:05:04हां आंकड़े।
  4848. 3:05:05बिल्कुल। लेकिन मौखिक इतिहास आपको वो
  4849. 3:05:08कहानी सुनाएगा कि उस गांव के राम और रहमान
  4850. 3:05:11जो बचपन से साथ खेले थे, उनके बीच ऐसी
  4851. 3:05:13नफरत की दीवार कैसे खड़ी हो गई? यह उस
  4852. 3:05:16सामाजिक और मनोवैज्ञानिक टूट को समझाता
  4853. 3:05:18है।
  4854. 3:05:18सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
  4855. 3:05:20स्रोतों में एक शब्द का इस्तेमाल हुआ है
  4856. 3:05:23जो इसकी भयानकता को दिखाता है। महाध्वंस
  4857. 3:05:26होलोकॉस्ट। क्या इस शब्द का प्रयोग करना
  4858. 3:05:29ठीक है?
  4859. 3:05:30देखिए ये एक बहुत गंभीर सवाल है।
  4860. 3:05:32होलोकॉस्ट शब्द आमतौर पर नाजी जर्मनी
  4861. 3:05:34द्वारा यहूदियों के नरसंहार से जुड़ा है।
  4862. 3:05:37हां।
  4863. 3:05:37लेकिन कुछ विद्वान पार्टीशन की हिंसा के
  4864. 3:05:39लिए इसका इस्तेमाल इसलिए करते हैं ताकि वह
  4865. 3:05:41उसकी विशालता और क्रूरता को बयान कर सकें।
  4866. 3:05:44अनुमान के मुताबिक 2 से 5 लाख लोग मारे गए
  4867. 3:05:46और लगभग डेढ़ करोड़ लोग बेघर हुए।
  4868. 3:05:49डेढ़ करोड़।
  4869. 3:05:50जी। यह आजाद दुनिया के इतिहास का सबसे
  4870. 3:05:53बड़ा विस्थापन था। सरहदें इतनी अचानक और
  4871. 3:05:55बेदर्दी से खींची गई कि एक लेखक ने इसे
  4872. 3:05:58शैडो लाइंस कहा है। ऐसी लकीरें जो दिखती
  4873. 3:06:00नहीं थी, पर जिन्होंने जिंदगियां चीर कर
  4874. 3:06:02रख दी।
  4875. 3:06:03और इस नफरत की आग को भड़काने में रूढ़
  4876. 3:06:06छवियों, स्टीरियोटाइप्स का बहुत बड़ा हाथ
  4877. 3:06:08था। लेकिन यह स्टीरियोटाइप्स अचानक तो
  4878. 3:06:11पैदा नहीं हुए होंगे। इनके पीछे कोई
  4879. 3:06:13राजनैतिक या सामाजिक वजह भी काम कर रही
  4880. 3:06:15थी?
  4881. 3:06:16बिल्कुल। ये स्टीरियोटाइप्स हवा में नहीं
  4882. 3:06:18बने। दशकों से कुछ संगठन इनको बढ़ावा दे
  4883. 3:06:21रहे थे। एक तरफ यह धारणा बनाई जा रही थी
  4884. 3:06:24कि मुसलमान क्रूर, कट्टर और गंदे होते
  4885. 3:06:27हैं।
  4886. 3:06:27अच्छा। और दूसरी तरफ यह प्रचार था कि
  4887. 3:06:29हिंदू कायर, कंजूस और कमजोर हैं।
  4888. 3:06:32जब राजनीति में धर्म घुल जाता है तो ऐसी
  4889. 3:06:36गलत धारणाएं नफरत का हथियार बन जाती हैं।
  4890. 3:06:39और 1947 में इसी हथियार का इस्तेमाल हुआ।
  4891. 3:06:42तो चलिए इसी राजनीतिक पहलू को ही कुरेदते
  4892. 3:06:45हैं। यह देश को दो टुकड़ों में बांटने का
  4893. 3:06:47विचार आखिर शुरू कहां से हुआ? यह इतना
  4894. 3:06:50बड़ा कदम लगता है।
  4895. 3:06:51इसकी जड़े काफी गहरी हैं। सबसे पहले आता
  4896. 3:06:54है द्वराष्ट्र सिद्धांत। टू नेशन थ्योरी
  4897. 3:06:58यह विचार कि हिंदू और मुसलमान दो अलग कौमे
  4898. 3:07:02हैं जिनका साथ रहना नामुमकिन है।
  4899. 3:07:06लेकिन इस विचार को जमीन मिली 1909 में जब
  4900. 3:07:10अंग्रेजों ने पृथक निर्वाचिका सेपरेट
  4901. 3:07:13इलेक्टोरेट्स की व्यवस्था शुरू की।
  4902. 3:07:151 मिनट इसको थोड़ा साफ करते हैं। पृथक
  4903. 3:07:18निर्वाचिका का मतलब सिर्फ मुस्लिम
  4904. 3:07:20उम्मीदवारों के लिए सीटें रिजर्व करना
  4905. 3:07:21नहीं था। इससे कहीं ज्यादा कुछ था। है ना?
  4906. 3:07:24बहुत ज्यादा। इसका मतलब था कि मुस्लिम
  4907. 3:07:26सीटों पर खड़े उम्मीदवार को वोट भी सिर्फ
  4908. 3:07:29मुस्लिम लोग ही दे सकते थे।
  4909. 3:07:31अच्छा।
  4910. 3:07:32इस एक कानून ने भारतीय समाज में राजनीतिक
  4911. 3:07:35तौर पर एक दीवार खड़ी कर दी। अब नेताओं को
  4912. 3:07:38सबके वोट नहीं चाहिए थे। एक मुस्लिम नेता
  4913. 3:07:40को सिर्फ मुस्लिम वोट बैंक को खुश करना था
  4914. 3:07:42और एक हिंदू नेता को हिंदू वोट बैंक को।
  4915. 3:07:45इसने धर्म को राजनीति का केंद्र बना दिया।
  4916. 3:07:48और इसी माहौल में फिर यह संगठन भी बने
  4917. 3:07:51होंगे।
  4918. 3:07:51बिल्कुल। इसी माहौल में मुस्लिम लीग जो
  4919. 3:07:541906 में बनी और हिंदू महासभा जो 1915 में
  4920. 3:07:57बनी जैसे संगठनों को पनपने का मौका मिला।
  4921. 3:08:00इसके बावजूद स्रोतों में एक बहुत हैरान
  4922. 3:08:03करने वाली बात है। 1937 के प्रांतीय चुनाव
  4923. 3:08:07में मुस्लिम लीग का प्रदर्शन बेहद खराब
  4924. 3:08:09रहा था। तो सिर्फ 10 साल के अंदर वह
  4925. 3:08:12पाकिस्तान बनाने की स्थिति में कैसे पहुंच
  4926. 3:08:14गए?
  4927. 3:08:14यह एक टर्निंग पॉइंट था। 1937 के चुनाव
  4928. 3:08:17में मुस्लिम लीग को कुल मुस्लिम वोट का
  4929. 3:08:20सिर्फ 4.4% मिला।
  4930. 3:08:21सिर्फ 4.4%?
  4931. 3:08:23जी। उनके इस दावे की हवा निकल गई कि वो ही
  4932. 3:08:26मुसलमानों की एकमात्र प्रतिनिधि हैं।
  4933. 3:08:28कांग्रेस ने 11 में से सात प्रांतों में
  4934. 3:08:30सरकार बनाई। इस हार ने मुस्लिम लीग के
  4935. 3:08:32नेतृत्व को यह एहसास दिलाया कि एक आजाद
  4936. 3:08:35संयुक्त भारत में वो कभी सत्ता में नहीं आ
  4937. 3:08:37पाएंगे।
  4938. 3:08:38अच्छा, तो ये उनके लिए एक अस्तित्व का
  4939. 3:08:40संकट बन गया।
  4940. 3:08:42मतलब हार के डर ने उन्हें और कट्टर बना
  4941. 3:08:45दिया।
  4942. 3:08:46बिल्कुल। यहां से उनकी रणनीति पूरी तरह से
  4943. 3:08:48बदल गई। अब उनका फोकस कांग्रेस के साथ
  4944. 3:08:50सत्ता साझा करने पर नहीं बल्कि एक अलग देश
  4945. 3:08:53की मांग को मजबूत करने पर हो गया।
  4946. 3:08:55और फिर पाकिस्तान का प्रस्ताव आया।
  4947. 3:08:57जी। इसी सोच का नतीजा था 1940 का मशहूर
  4948. 3:09:00लाहौर प्रस्ताव, लाहौर रेज़ोल्यूशन। इससे
  4949. 3:09:02पहले 1933 के दौरान कैंब्रिज के एक
  4950. 3:09:05स्टूडेंट चौधरी रहमत अली ने पाकिस्तान नाम
  4951. 3:09:07का एक पैंट जारी किया था।
  4952. 3:09:09हां, मैंने पढ़ा है इसके बारे में। पर तब
  4953. 3:09:11उसे किसी ने गंभीरता से नहीं लिया था।
  4954. 3:09:13लेकिन 1940 तक हालात बदल चुके थे। लीग ने
  4955. 3:09:17अपने लाहौर अधिवेशन में भारत के उत्तर
  4956. 3:09:20पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों को मिलाकर
  4957. 3:09:22स्वतंत्र राज्य यानी इंडिपेंडेंट स्टेट्स
  4958. 3:09:25बनाने की मांग कर दी।
  4959. 3:09:27तो मांग मेज पर रख दी गई थी। क्या इसके
  4960. 3:09:30बाद संयुक्त भारत को बचाने की कोई आखिरी
  4961. 3:09:32गंभीर कोशिश हुई?
  4962. 3:09:33हां। आखिरी कोशिश 1946 में कैबिनेट मिशन
  4963. 3:09:37कैबिनेट मिशन के रूप में हुई। ब्रिटेन से
  4964. 3:09:40तीन कैबिनेट मंत्री आए। उन्होंने
  4965. 3:09:41पाकिस्तान की मांग को साफ खारिज कर दिया।
  4966. 3:09:44तो उन्होंने क्या प्रस्ताव रखा?
  4967. 3:09:45उन्होंने एक ऐसे संयुक्त भारत का फार्मूला
  4968. 3:09:48दिया जिसमें केंद्र कमजोर होता और
  4969. 3:09:50प्रांतों को बहुत ज्यादा अधिकार मिलते।
  4970. 3:09:52प्रांतों को तीन ग्रुप में बांटा जाना था।
  4971. 3:09:54शुरुआत में तो कांग्रेस और लीग दोनों इस
  4972. 3:09:56पर सहमत हो गए थे। फिर बात कहां बिगड़ी?
  4973. 3:09:59सिर्फ यह कहना कि इंटरप्रिटेशन पर मतभेद
  4974. 3:10:02था काफी नहीं लगता। असल मतभेद इसी बात पर
  4975. 3:10:05था कि प्रांतों के ग्रुप बनाना अनिवार्य
  4976. 3:10:07होगा या वैकल्पिक मतलब कंपलसरी होगा या
  4977. 3:10:10ऑप्शनल।
  4978. 3:10:11अच्छा।
  4979. 3:10:11मुस्लिम लीग का मानना था कि प्रांतों को
  4980. 3:10:13ग्रुप में शामिल होना ही पड़ेगा। वो इसमें
  4981. 3:10:16भविष्य के पाकिस्तान की नींव देख रहे थे।
  4982. 3:10:19दो मुस्लिम बहुल ग्रुप बन जाते।
  4983. 3:10:21और कांग्रेस
  4984. 3:10:22वहीं कांग्रेस को डर था कि इससे केंद्र
  4985. 3:10:24बेहद कमजोर हो जाएगा और देश टूट जाएगा। वो
  4986. 3:10:27चाहते थे कि प्रांतों के पास ग्रुप में
  4987. 3:10:30शामिल नल होने का विकल्प हो। इसी एक
  4988. 3:10:32व्याख्या पर पूरा प्लान आकर अटक गया।
  4989. 3:10:34तो संयुक्त भारत का आखिरी मौका एक शब्द की
  4990. 3:10:37व्याख्या पर कुर्बान हो गया और इसके बाद
  4991. 3:10:39जो हुआ वो शायद सबसे बड़ा टिपिंग पॉइंट
  4992. 3:10:42था।
  4993. 3:10:42हां। जब कैबिनेट मिशन फेल हो गया तो
  4994. 3:10:45मुस्लिम लीग ने अपनी मांग मनवाने के लिए
  4995. 3:10:47सड़कों पर उतरने का फैसला किया। उन्होंने
  4996. 3:10:4916 अगस्त 1946 को प्रत्यक्ष कारवाई दिवस
  4997. 3:10:53डायरेक्ट एक्शन डे का ऐलान किया।
  4998. 3:10:54और इसका नतीजा
  4999. 3:10:55उस दिन कोलकाता जिसे अब कोलकाता कहते हैं
  5000. 3:10:57में भयानक दंगे शुरू हो गए। जो कई दिनों
  5001. 3:11:00तक चले हजारों लोग मारे गए। कोलकाता की आग
  5002. 3:11:03देखते ही देखते पूरे देश में बिहार,
  5003. 3:11:06यूनाइटेड प्रोविंसेस और पंजाब तक फैल गई।
  5004. 3:11:09जब कोलकाता की सड़कों पर हिंसा का तांडव
  5005. 3:11:12हो रहा था और प्रशासन लगभग नाकाम हो चुका
  5006. 3:11:15था तब एक 77 साल का आदमी शांति की अपील
  5007. 3:11:20लेकर उन दंगाग्रस्त इलाकों में पैदल चल
  5008. 3:11:23रहा था। महात्मा गांधी
  5009. 3:11:24सही कहा। उन्हें उस दौर के वायसरॉय ने वन
  5010. 3:11:28मैन आर्मी कहा था।
  5011. 3:11:29अच्छा।
  5012. 3:11:29जब बड़े-बड़े नेता दिल्ली में सत्ता के
  5013. 3:11:31बंटवारे पर बहस कर रहे थे। गांधी बंगाल के
  5014. 3:11:34नवाखली के गांव में घूम रहे थे। लोगों के
  5015. 3:11:37आंसू पोंछ रहे थे।
  5016. 3:11:38हम
  5017. 3:11:39उन्होंने बिहार का दौरा किया। और दिल्ली
  5018. 3:11:41में शांति के लिए अनशन रखा। उनकी मौजूदगी
  5019. 3:11:45ने जहां भी वह गए, हिंसा की आग को कम करने
  5020. 3:11:48में बहुत बड़ी भूमिका निभाई।
  5021. 3:11:50हमने राजनीति और बड़े पैमाने पर हुई हिंसा
  5022. 3:11:52की बात की। लेकिन स्रोत इस कहानी के एक और
  5023. 3:11:56बेहद दर्दनाक पहलू पर रोशनी डालते हैं।
  5024. 3:11:58औरतों के अनुभव।
  5025. 3:12:00यह विभाजन का सबसे अंधेरा सच है। उस समय
  5026. 3:12:03औरत के शरीर को समुदाय की इज्जत का प्रतीक
  5027. 3:12:06माना जाता था।
  5028. 3:12:06अच्छा।
  5029. 3:12:07इसलिए एक समुदाय को नीचा दिखाने के लिए
  5030. 3:12:10उसकी औरतों को निशाना बनाया जाता था।
  5031. 3:12:13उनका अपहरण किया गया। उनके साथ बलात्कार
  5032. 3:12:16हुआ। उन्हें जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करने
  5033. 3:12:19पर मजबूर किया गया। और स्रोतों में
  5034. 3:12:21बरामदगी अभियान का जिक्र है। यह सुनने में
  5035. 3:12:24तो एक अच्छा कदम लगता है। लेकिन क्या सच
  5036. 3:12:27में ऐसा था?
  5037. 3:12:28यह बरामदगी भी अपने आप में एक और त्रासदी
  5038. 3:12:31थी।
  5039. 3:12:31हां।
  5040. 3:12:31भारत और पाकिस्तान दोनों सरकारों ने मिलकर
  5041. 3:12:34एक समझौता किया कि अपहरित औरतों को ढूंढकर
  5042. 3:12:37उनके मूल परिवारों को लौटाया जाएगा।
  5043. 3:12:39हम तो इसमें दिक्कत क्या थी?
  5044. 3:12:41कागज पर यह ठीक लगता है।
  5045. 3:12:43हम
  5046. 3:12:43लेकिन सोचिए जिस औरत को अगवा किया गया
  5047. 3:12:46उसने शायद एक नई जिंदगी शुरू कर ली हो।
  5048. 3:12:49हम्म।
  5049. 3:12:49उसके बच्चे हो गए हो। अब उसे जबरदस्ती
  5050. 3:12:52बचाकर उसके पुराने परिवार के पास लाया
  5051. 3:12:54गया। जहां कई बार उसके अपने ही परिवार ने
  5052. 3:12:57उसे अपित्र मानकर स्वीकार करने से इंकार
  5053. 3:13:00कर दिया।
  5054. 3:13:00ओह!
  5055. 3:13:01वो ना इधर की रही ना उधर की। यह उनके लिए
  5056. 3:13:04एक दूसरा विस्थापन था। एक दूसरा आघात
  5057. 3:13:07दूसरा ट्रोमा था।
  5058. 3:13:08यह सुनना ही कितना भयावह है। यह हमें यह
  5059. 3:13:11भी सोचने पर मजबूर करता है कि क्या विभाजन
  5060. 3:13:14का अनुभव हर जगह एक जैसा था। स्रोतों में
  5061. 3:13:18क्षेत्रीय विभिन्नताओं रीजनल वेरिएशंस का
  5062. 3:13:20जिक्र है।
  5063. 3:13:21यह बहुत महत्वपूर्ण बात है। हम पार्टीशन
  5064. 3:13:24को एक घटना की तरह देखते हैं। लेकिन पंजाब
  5065. 3:13:26का अनुभव बंगाल से बहुत अलग था।
  5066. 3:13:29कैसे?
  5067. 3:13:29पंजाब में हिंसा बहुत ज्यादा तेज और क्रूर
  5068. 3:13:33थी। वहां आबादी का लगभग पूरी तरह से
  5069. 3:13:35स्थानांतरण हुआ। मतलब पश्चिमी पंजाब से
  5070. 3:13:38लगभग सारे हिंदू और सिख पूर्वी पंजाब आ गए
  5071. 3:13:42और यहां से लगभग सारे मुसलमान उधर चले गए।
  5072. 3:13:45और बंगाल में
  5073. 3:13:46बंगाल में भी हिंसा हुई लेकिन वहां लोगों
  5074. 3:13:48का पलायन यानी माइग्रेशन इतना अचानक और
  5075. 3:13:52पूरा नहीं था। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे कई
  5076. 3:13:55सालों तक चलती रही।
  5077. 3:13:56अच्छा।
  5078. 3:13:57इसीलिए 1947 के बाद भी पश्चिम बंगाल में
  5079. 3:14:00एक बड़ी मुस्लिम अल्पसंख्यक आबादी बनी
  5080. 3:14:03रही। और पूर्वी पाकिस्तान जो अब
  5081. 3:14:05बांग्लादेश है में एक बड़ी हिंदू
  5082. 3:14:07अल्पसंख्यक आबादी। दोनों जगहों की राजनीति
  5083. 3:14:11समाज और यादें इस वजह से अलग-अलग हैं।
  5084. 3:14:13तो हमने देखा कि विभाजन कोई एक घटना नहीं
  5085. 3:14:16थी। यह एक ऐसी आंधी थी जो दशकों की
  5086. 3:14:19राजनीति से उठी जिसमें सामाजिक नफरत ने
  5087. 3:14:22हवा भरी और आखिर में इसने करोड़ों
  5088. 3:14:25जिंदगियों को उजाड़ दिया। यह एक कहानी है
  5089. 3:14:28फैसलों और उनके अंजामों की।
  5090. 3:14:30बिल्कुल। राजनीति ने सीमाएं खींची। लेकिन
  5091. 3:14:34इसका असली दर्द लोगों की यादों और उनके
  5092. 3:14:36अनुभवों में जिंदा है। यह समझना हमें
  5093. 3:14:39सिखाता है कि इतिहास सिर्फ तारीखों का खेल
  5094. 3:14:41नहीं बल्कि इंसानी जज्बातों और कहानियों
  5095. 3:14:44का समंदर है।
  5096. 3:14:45आज इस विषय की गहराई में उतर कर एक बात
  5097. 3:14:48साफ होती है। जब हम इतिहास को सिर्फ
  5098. 3:14:50राजनीतिक घटनाओं की एक श्रृंखला के रूप
  5099. 3:14:53में पढ़ते हैं, तो हम आघात और हिम्मत की
  5100. 3:14:55कितनी ही निजी कहानियों को नजरअंदाज कर
  5101. 3:14:58देते हैं। और यह सोचना जरूरी है कि एक
  5102. 3:15:00इतने गहरे ना भरे घाव पर बने देशों का
  5103. 3:15:03वर्तमान और भविष्य कैसा होता है?
  5104. 3:15:05अध्याय 14 विभाजन को समझना समाप्त हुआ।
  5105. 3:15:11आज हम भारतीय इतिहास के उस पन्ने को पलट
  5106. 3:15:13रहे हैं जहां जहां एक नए मुल्क की तकदीर
  5107. 3:15:16लिखी जा रही थी।
  5108. 3:15:17हम
  5109. 3:15:18हमारे आज के विश्लेषण का विषय है संविधान
  5110. 3:15:21का निर्माण एक नए युग की शुरुआत।
  5111. 3:15:24बिल्कुल। और हमारे पास जो स्रोत हैं, वह
  5112. 3:15:26एनसीआरटी की गहन सामग्री पर आधारित हैं।
  5113. 3:15:29हमारा मकसद है इस पूरी प्रक्रिया के पीछे
  5114. 3:15:31की बहसों और चुनौतियों को गहराई से समझना।
  5115. 3:15:34जी। जब हम 26 जनवरी 1950 को लागू हुए अपने
  5116. 3:15:39संविधान के बारे में सोचते हैं तो हमें
  5117. 3:15:41अक्सर बस एक दस्तावेज नजर आता है।
  5118. 3:15:44हां, एक किताब।
  5119. 3:15:45लेकिन यह सिर्फ एक किताब नहीं है। इसे
  5120. 3:15:48बनाने में आप देखिए दिसंबर 1946
  5121. 3:15:52से नवंबर 1949
  5122. 3:15:55मतलब लगभग 3 साल लगे।
  5123. 3:15:573 साल?
  5124. 3:15:58हां। और संविधान सभा की 165 दिनों तक बैठ
  5125. 3:16:02के चली। यह आंकड़े ही उस दौर की गंभीरता
  5126. 3:16:07को दिखाते हैं। जब भारत एक तरफ आजाद हो
  5127. 3:16:10रहा था, तो दूसरी तरफ बंटवारे का जख्म भी
  5128. 3:16:13झेल रहा था। और यही बात इस कहानी को इतना
  5129. 3:16:15नाटकीय बना देती है। मतलब एक तरफ उम्मीद
  5130. 3:16:18और दूसरी तरफ तबाही। चलिए सबसे पहले उसी
  5131. 3:16:21माहौल में चलते हैं जिसमें इस महान
  5132. 3:16:24दस्तावेज ने आकार लिया। तो 15 अगस्त 1947
  5133. 3:16:28को भारत आजाद हुआ।
  5134. 3:16:29जी।
  5135. 3:16:30लेकिन यह आजादी अपने साथ बंटवारे की एक
  5136. 3:16:32भयानक हिंसा लेकर आई। और इससे पहले का दौर
  5137. 3:16:35भी कुछ शांत तो था नहीं।
  5138. 3:16:37बिल्कुल नहीं। 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन
  5139. 3:16:40फिर 1946 में शाही भारतीय नौसेना का
  5140. 3:16:43विद्रोह और जगह-जगह होते हिंदू-मुस् दंगे
  5141. 3:16:46माहौल में एक अजीब सा तनाव था
  5142. 3:16:48और बंटवारे ने तो उस आग में घी का काम
  5143. 3:16:51किया। लाखों लोग बेघर हुए, मारे गए।
  5144. 3:16:54इंसानियत पर से भरोसा उठने लगा था।
  5145. 3:16:56हम
  5146. 3:16:57इसी माहौल के बीच दिल्ली में संविधान सभा
  5147. 3:17:00के सदस्य एक नए भारत का भविष्य लिखने के
  5148. 3:17:03लिए इकट्ठे हुए थे।
  5149. 3:17:04सोचकर भी अजीब लगता है।
  5150. 3:17:06बिल्कुल। 14 अगस्त 1947 की आधी रात को जब
  5151. 3:17:09जवाहरलाल नेहरू ने अपना वो मशहूर भाषण
  5152. 3:17:12ट्विस्ट विद डेस्टिनी
  5153. 3:17:13नियति से साक्षात्कार हां नियति से
  5154. 3:17:16साक्षात्कार दिया तो वह सिर्फ आजादी का
  5155. 3:17:18ऐलान नहीं कर रहे थे। वो उस अंधेरे में
  5156. 3:17:21उम्मीद की एक किरण जगा रहे थे। तो एक तरफ
  5157. 3:17:24इतनी हिंसा और नफरत का माहौल और दूसरी तरफ
  5158. 3:17:27एक एकजुट लोकतांत्रिक देश बनाने की
  5159. 3:17:30जिम्मेदारी यह तो लगभग नामुमकिन सा लगता
  5160. 3:17:32है।
  5161. 3:17:32लगता है।
  5162. 3:17:33और सिर्फ बंटवारा ही नहीं एक और बड़ी
  5163. 3:17:35चुनौती थी रियासतों की।
  5164. 3:17:37हां, यह एक बहुत बड़ा खतरा था। अंग्रेजों
  5165. 3:17:40ने लगभग 565 रियासतों को आजाद छोड़ दिया
  5166. 3:17:43था।
  5167. 3:17:44मतलब उन्हें विकल्प दे दिया।
  5168. 3:17:45जी कि वे चाहे तो भारत में मिले,
  5169. 3:17:47पाकिस्तान में या फिर आजाद रहें। यह तो
  5170. 3:17:50भारत के सैकड़ों टुकड़े हो जाने जैसा था।
  5171. 3:17:52तो इसे संभाला किसने?
  5172. 3:17:54यहां पर सरदार वल्लभ भाई पटेल ने पर्दे के
  5173. 3:17:56पीछे एक मास्टर रणनीतिकार की भूमिका
  5174. 3:17:59निभाई। उन्होंने बड़ी सूझबूझ और कहीं-कहीं
  5175. 3:18:03सख्ती से इन सभी रियासतों को भारत में
  5176. 3:18:05शामिल किया।
  5177. 3:18:06अच्छा।
  5178. 3:18:06तो आप समझ सकते हैं कि संविधान सभा के
  5179. 3:18:09सामने चुनौती सिर्फ कानून बनाने की नहीं
  5180. 3:18:12थी बल्कि एक बिखरते हुए देश को एक सूत्र
  5181. 3:18:14में पिरोने की थी। तो ऐसे टूटे हुए माहौल
  5182. 3:18:18में जो लोग एक साथ आए यानी हमारी संविधान
  5183. 3:18:21सभा वो खुद कितने एकजुट थे इन सदस्यों को
  5184. 3:18:24चुना कैसे गया था?
  5185. 3:18:25यह एक दिलचस्प सवाल है। देखिए इन सदस्यों
  5186. 3:18:29को सीधे जनता ने नहीं चुना था।
  5187. 3:18:31अच्छा।
  5188. 3:18:311945-46
  5189. 3:18:33में प्रांतीय चुनाव हुए थे और उन्हीं के
  5190. 3:18:36चुने हुए सदस्यों ने फिर संविधान सभा के
  5191. 3:18:38सदस्यों को चुना। तो यह एक तरह से
  5192. 3:18:41अप्रत्यक्ष चुनाव था। और मैंने पढ़ा है कि
  5193. 3:18:44इस सभा में कांग्रेस पार्टी का दबदबा था।
  5194. 3:18:46लगभग 82% सदस्य।
  5195. 3:18:48हां, यह सच है।
  5196. 3:18:50तो क्या इसका मतलब यह था कि संविधान पर
  5197. 3:18:52सिर्फ एक ही पार्टी की छाप पड़ने वाली थी?
  5198. 3:18:54ऊपर से देखने पर ऐसा लग सकता है। लेकिन
  5199. 3:18:57असल में कांग्रेस उस समय एक पार्टी से
  5200. 3:19:00ज्यादा एक आंदोलन थी।
  5201. 3:19:01एक आंदोलन?
  5202. 3:19:02आप यूं समझिए कि वो एक छाते की तरह थी।
  5203. 3:19:05जिसके नीचे हर विचारधारा के लोग थे। उसमें
  5204. 3:19:09समाजवादी भी थे तो जमींदारों के हिमायती
  5205. 3:19:11भी। सेकुलर सोच वाले भी थे तो परंपरावादी
  5206. 3:19:14भी।
  5207. 3:19:15तो बहसें पार्टी के अंदर ही होती थी।
  5208. 3:19:17बिल्कुल। इसलिए जब सभा में बहस होती थी तो
  5209. 3:19:20वह सिर्फ कांग्रेस बनाम अन्य नहीं होती थी
  5210. 3:19:23बल्कि कांग्रेस के भीतर की अलग-अलग आवाजों
  5211. 3:19:26के बीच होती थी। हां, यह बात सही है कि
  5212. 3:19:29शुरुआत में मुस्लिम लीग ने इसका बहिष्कार
  5213. 3:19:31किया जिससे एक दल का प्रभुत्व और ज्यादा
  5214. 3:19:34दिखा।
  5215. 3:19:35और इन सभी आवाजों के बीच कुछ चेहरे ऐसे थे
  5216. 3:19:37जो पूरी बहस को दिशा दे रहे थे। जैसे
  5217. 3:19:40नेहरू, पटेल और राजेंद्र प्रसाद इनका क्या
  5218. 3:19:43रोल था?
  5219. 3:19:44देखिए इन तीनों की तड़ी अद्भुत थी।
  5220. 3:19:46जवाहरलाल नेहरू एक आदर्शवादी थे। वह विज़न
  5221. 3:19:49देते थे। उन्होंने ही उद्देश्य प्रस्ताव
  5222. 3:19:52पेश किया जो एक तरह से संविधान की आत्मा
  5223. 3:19:55बना।
  5224. 3:19:55तो वो विज़न तय करते थे।
  5225. 3:19:57जी। दूसरी तरफ वल्लभ भाई पटेल जमीन से
  5226. 3:20:00जुड़े एक यथार्थवादी थे। जहां नेहरू
  5227. 3:20:03आदर्शों की बात करते वहीं पटेल उसे हकीकत
  5228. 3:20:06में कैसे बदला जाए इस पर काम करते। वो एक
  5229. 3:20:09प्रैक्टिकल इंजीनियर की तरह थे
  5230. 3:20:11और डॉ. राजेंद्र प्रसाद
  5231. 3:20:13वो एक कुशल संचालक थे। संविधान सभा के
  5232. 3:20:16अध्यक्ष के तौर पर उनका काम था इस विशाल
  5233. 3:20:19समूह को एक साथ लेकर चलना। वो सुनिश्चित
  5234. 3:20:22करते थे कि बह से भटके नहीं और हर किसी को
  5235. 3:20:25अपनी बात रखने का मौका मिले।
  5236. 3:20:27हम एक कप्तान की तरह
  5237. 3:20:29बिल्कुल।
  5238. 3:20:30और इस तगड़ी के अलावा एक नाम जो शायद सबसे
  5239. 3:20:33ज्यादा महत्वपूर्ण है वो है डॉक्टर बी आर
  5240. 3:20:35अंबेडकर का।
  5241. 3:20:36बिल्कुल। अगर नेहरू, पटेल और प्रसाद
  5242. 3:20:39संविधान के दिल, दिमाग और संयम थे तो डॉ.
  5243. 3:20:42अंबेडकर उसकी कलम और तर्क थे। वो प्रारूप
  5244. 3:20:46समिति यानी ड्राफ्टिंग कमिटी के अध्यक्ष
  5245. 3:20:48थे।
  5246. 3:20:49राइट।
  5247. 3:20:49संविधान का पूरा ढांचा तैयार करने, दुनिया
  5248. 3:20:52भर के संविधानों से सही चीजें चुनने और
  5249. 3:20:55फिर सभा के हर सवाल का तर्कपूर्ण जवाब
  5250. 3:20:58देने का जिम्मा उन्हीं पर था। उनका योगदान
  5251. 3:21:01असाधारण है।
  5252. 3:21:02तो चलिए इस उद्देश्य प्रस्ताव पर आते हैं।
  5253. 3:21:05यह सुनने में तो एक फॉर्मल डॉक्यूमेंट
  5254. 3:21:07लगता है। लेकिन क्या हम कह सकते हैं कि यह
  5255. 3:21:09संविधान की आत्मा की पहली झलक थी?
  5256. 3:21:11बिल्कुल। इसे आप संविधान का मिशन
  5257. 3:21:14स्टेटमेंट समझ सकते हैं। 13 दिसंबर 1946
  5258. 3:21:17को नेहरू ने इसके जरिए सिर्फ यह नहीं
  5259. 3:21:20बताया कि हम क्या कानून बनाएंगे। हम
  5260. 3:21:23बल्कि यह बताया कि हम एक देश के तौर पर
  5261. 3:21:26क्या बनना चाहते हैं। उन्होंने भारत को एक
  5262. 3:21:29स्वतंत्र संप्रभु गणराज्य यानी
  5263. 3:21:32इंडिपेंडेंट सोवरन रिपब्लिक घोषित किया।
  5264. 3:21:35संप्रभु यानी सोवरन। ये सुनने में बड़ा
  5265. 3:21:37भारी शब्द लगता है। आम भाषा में इसका मतलब
  5266. 3:21:40क्या हुआ?
  5267. 3:21:40देखिए इसका सीधा सा मतलब है कि अब भारत
  5268. 3:21:43अपने फैसले खुद लेगा। अपने आंतरिक और
  5269. 3:21:46बाहरी मामलों में वो किसी भी बाहरी ताकत
  5270. 3:21:48के अधीन नहीं होगा। और हां यह शब्द
  5271. 3:21:51संप्रभु या सोवरन एग्जाम्स के लिए भी बहुत
  5272. 3:21:54जरूरी है।
  5273. 3:21:54मतलब अब लंदन से कोई आदेश नहीं आएगा।
  5274. 3:21:57बिल्कुल इस प्रस्ताव में आगे नागरिकों को
  5275. 3:22:00न्याय, बराबरी और आजादी का भरोसा दिया
  5276. 3:22:02गया। और सबसे जरूरी बात अल्पसंख्यकों,
  5277. 3:22:06पिछड़े और आदिवासी इलाकों के लोगों के लिए
  5278. 3:22:09विशेष सुरक्षा, एडिक्वेट सेफ गार्ड्स का
  5279. 3:22:11वादा किया गया।
  5280. 3:22:12अपने भाषण में नेहरू ने एक बड़ी दिलचस्प
  5281. 3:22:14बात कही थी। उन्होंने कहा कि हम सिर्फ
  5282. 3:22:17दूसरों की नकल नहीं कर रहे हैं।
  5283. 3:22:19हां।
  5284. 3:22:19मतलब कॉट कॉपी पेस्ट नहीं बल्कि
  5285. 3:22:22इंस्पिरेशन एंड कस्टमाइजेशन का फार्मूला
  5286. 3:22:24अपना रहे हैं।
  5287. 3:22:25एकदम सही।
  5288. 3:22:26उनका कहना था कि हम अमेरिकी और फ्रांसीसी
  5289. 3:22:28क्रांति से सीखेंगे जरूर लेकिन अपने
  5290. 3:22:30संविधान को भारतीय मिट्टी और यहां के
  5291. 3:22:33लोगों के स्वभाव के हिसाब से ढालेंगे। वो
  5292. 3:22:36लोकतंत्र के पश्चिमी मॉडल को हूबहू भारत
  5293. 3:22:38पर थोपना नहीं चाहते थे। तो जब इस विज़न को
  5294. 3:22:41जमीन पर उतारने की बात आई यानी नागरिकों
  5295. 3:22:44के अधिकारों को तय करने की तो यकीनन सबसे
  5296. 3:22:47ज्यादा बहस हुई होगी।
  5297. 3:22:48हां बिल्कुल और इसमें सबसे बड़ा कांटा था
  5298. 3:22:51पृथक निर्वाचिका यानी सेपरेट इलेक्टोरेट्स
  5299. 3:22:54का मुद्दा।
  5300. 3:22:55हां, यह मुद्दा बहसों के केंद्र में था।
  5301. 3:22:58पृथक निर्वाचिका। यह शब्द एग्जाम्स के
  5302. 3:23:01लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है।
  5303. 3:23:02इसका मतलब था कि एक मुस्लिम उम्मीदवार के
  5304. 3:23:05लिए सिर्फ मुस्लिम वोटर ही वोट डाल सकते
  5305. 3:23:07थे। अरे यह तो एक ही देश के अंदर राजनीतिक
  5306. 3:23:10रूप से अलग-अलग द्वीप बनाने जैसा हुआ।
  5307. 3:23:12बिल्कुल इसीलिए ज्यादातर राष्ट्रवादी नेता
  5308. 3:23:15इसके खिलाफ थे। गोविंद वल्लभ पंत ने इसे
  5309. 3:23:19राष्ट्र के लिए एक जहर बताया।
  5310. 3:23:21जहर
  5311. 3:23:22जी सरदार पटेल ने तो साफ-साफ कहा अंग्रेज
  5312. 3:23:25तो चले गए मगर जातेजाते शरारत का बीज बो
  5313. 3:23:29गए हैं। उनका तर्क था कि यह व्यवस्था
  5314. 3:23:32अल्पसंख्यकों को हमेशा के लिए अलग-थलग कर
  5315. 3:23:35देगी। तो क्या सभा में सभी लोग इसके खिलाफ
  5316. 3:23:37थे या कुछ समर्थन में भी थे?
  5317. 3:23:39नहीं। कुछ मुस्लिम सदस्य इसके पक्ष में
  5318. 3:23:42थे। लेकिन बंटवारे की हकीकत देखने के बाद
  5319. 3:23:45ज्यादातर लोगों को समझ आ गया था कि यह
  5320. 3:23:48रास्ता देश को और तोड़ेगा।
  5321. 3:23:50हम
  5322. 3:23:50इसलिए सभा ने इस मांग को खारिज कर दिया।
  5323. 3:23:53लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि उन्होंने
  5324. 3:23:55अल्पसंख्यकों या दबे कुचले वर्गों की
  5325. 3:23:58चिंताओं को नजरअंदाज कर दिया।
  5326. 3:24:00तो फिर समाधान क्या निकला?
  5327. 3:24:01समाधान था सकारात्मक कार्यवाही का। सभा ने
  5328. 3:24:05दमित जातियों यानी डिप्रेस्ड कास्ट के लिए
  5329. 3:24:08विधायिका और सरकारी नौकरियों में आरक्षण
  5330. 3:24:10का प्रावधान किया जिसे रिजर्वेशन कहते
  5331. 3:24:13हैं।
  5332. 3:24:13एक ऐतिहासिक कदम
  5333. 3:24:15बिल्कुल इसके साथ ही छुआछूत अनटचेबिलिटी
  5334. 3:24:18को कानूनी तौर पर खत्म किया गया और
  5335. 3:24:21मंदिरों के दरवाजे सभी जातियों के लिए खोल
  5336. 3:24:24दिए गए। मतलब सभा ने अलगाव पैदा करने वाले
  5337. 3:24:27रास्ते को ठुकराकर सबको साथ लेकर चलने
  5338. 3:24:30वाले रास्ते को चुना।
  5339. 3:24:32और यह व्यक्तिगत अधिकार तभी सुरक्षित रह
  5340. 3:24:34सकते हैं जब सरकार की बनावट सही हो।
  5341. 3:24:36जी।
  5342. 3:24:37इसी से जुड़ा हुआ बड़ा सवाल भी था कि आखिर
  5343. 3:24:39भारत में शक्ति का केंद्र कहां होगा
  5344. 3:24:41दिल्ली में या राज्यों की राजधानियों में?
  5345. 3:24:43यह उस समय का सबसे बड़ा संरचनात्मक सवाल
  5346. 3:24:46था। इस गु्थी को सुलझाने के लिए संविधान
  5347. 3:24:49में तीन सूचियां बनाई गई।
  5348. 3:24:51हां, संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती
  5349. 3:24:53सूची। यह तीनों सूचियां यूनियन लिस्ट,
  5350. 3:24:56स्टेट लिस्ट और ककरेंट लिस्ट एग्जाम्स के
  5351. 3:24:58लिए बहुत जरूरी है।
  5352. 3:24:59बिल्कुल। संघ सूची में रक्षा, मुद्रा जैसे
  5353. 3:25:02विषय रखे गए जिन पर सिर्फ केंद्र कानून
  5354. 3:25:05बना सकता था। राज्य सूची में पुलिस, कृषि
  5355. 3:25:08जैसे स्थानीय विषय थे। और एक तीसरी थी
  5356. 3:25:11समवर्ती सूची, जिसमें शिक्षा, वन जैसे
  5357. 3:25:14विषय थे, जिन पर दोनों कानून बना सकते थे।
  5358. 3:25:17लेकिन एक सवाल मन में आता है। जिस
  5359. 3:25:20शक्तिशाली केंद्र सरकार यानी अंग्रेजों के
  5360. 3:25:24खिलाफ आजादी की इतनी लंबी लड़ाई लड़ी,
  5361. 3:25:27आजाद होते ही वैसी ही एक शक्तिशाली केंद्र
  5362. 3:25:30सरकार बनाने की वकालत क्यों?
  5363. 3:25:32यह बहुत ही जरूरी सवाल है। और इसका जवाब
  5364. 3:25:35एक शब्द में है। विभाजन।
  5365. 3:25:38विभाजन।
  5366. 3:25:38हां, नेताओं ने अपनी आंखों से देश को
  5367. 3:25:41टूटते और जलते देखा था। उन्हें डर था कि
  5368. 3:25:45अगर राज्यों को बहुत ज्यादा ताकत दे दी गई
  5369. 3:25:47तो देश फिर से बिखर सकता है। उस वक्त देश
  5370. 3:25:51की एकता किसी भी चीज से ज्यादा जरूरी थी।
  5371. 3:25:54इसीलिए नेहरू अंबेडकर जैसे नेताओं ने एक
  5372. 3:25:58शक्तिशाली केंद्र की पुरजोर वकालत की।
  5373. 3:26:01पर क्या सभी इस बात से सहमत है?
  5374. 3:26:03नहीं बिल्कुल नहीं। मद्रास के संधानम जैसे
  5375. 3:26:07सदस्यों ने चेतावनी दी कि एक जरूरत से
  5376. 3:26:09ज्यादा शक्तिशाली केंद्र राज्यों की सारी
  5377. 3:26:12ताकत खींच लेगा और उन्हें खोखला कर देगा।
  5378. 3:26:15तो बहस दोनों तरफ से मजबूत थी।
  5379. 3:26:17तो आखिर में क्या तय हुआ?
  5380. 3:26:19आखिरकार एक बीच का रास्ता अपनाया गया।
  5381. 3:26:22केंद्र को शक्तिशाली बनाया गया लेकिन
  5382. 3:26:24राज्यों को भी उनके अपने क्षेत्र में
  5383. 3:26:26महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए।
  5384. 3:26:28और अब उस मुद्दे पर आते हैं जिसने सभा में
  5385. 3:26:30शायद सबसे ज्यादा भावनात्मक चिंगारियां
  5386. 3:26:33पैदा की। राष्ट्र की भाषा यह सिर्फ एक
  5387. 3:26:35प्रशासनिक सवाल तो नहीं था?
  5388. 3:26:37बिल्कुल नहीं था। यह लोगों की पहचान से
  5389. 3:26:40जुड़ा था। बहुत ही संवेदनशील और विस्फोटक
  5390. 3:26:43मुद्दा था। कई सदस्य खासकर उत्तर भारत से
  5391. 3:26:47चाहते थे कि हिंदी को राष्ट्रभाषा का
  5392. 3:26:49दर्जा दिया जाए। आरवी धुलेकर ने तो यहां
  5393. 3:26:52तक कह दिया कि जिन्हें हिंदुस्तानी नहीं
  5394. 3:26:54आती उन्हें सभा में रहने का कोई हक नहीं
  5395. 3:26:57है।
  5396. 3:26:58यह तो बहुत ही तीखी बात कह दी। इस पर तो
  5397. 3:27:00हंगामा हो गया होगा।
  5398. 3:27:01जबरदस्त हंगामा हुआ। डॉ. राजेंद्र प्रसाद
  5399. 3:27:04को बीच बचाव करना पड़ा। मद्रास की सदस्य
  5400. 3:27:07श्रीमती जी दुर्गाबाई ने बहुत ही मजबूती
  5401. 3:27:10से इसका जवाब दिया। उन्होंने चेतावनी दी
  5402. 3:27:12कि दक्षिण में हिंदी का विरोध बहुत ज्यादा
  5403. 3:27:15है। उन्होंने महात्मा गांधी के विचार का
  5404. 3:27:17समर्थन किया जो हिंदुस्तानी को
  5405. 3:27:19राष्ट्रभाषा बनाना चाहते थे।
  5406. 3:27:21हिंदुस्तानी यह भी एक महत्वपूर्ण शब्द है।
  5407. 3:27:24इसका मतलब है हिंदी और उर्दू के मिश्रण से
  5408. 3:27:26बनी भाषा है ना।
  5409. 3:27:27जी जिसे आम लोग आसानी से समझते थे। गांधी
  5410. 3:27:31जी का मानना था कि यही वह भाषा है जो सबको
  5411. 3:27:34जोड़ सकती है। लेकिन तब तक राजनीति ने इन
  5412. 3:27:37दोनों भाषाओं को भी एक दूसरे से दूर कर
  5413. 3:27:39दिया था।
  5414. 3:27:40तो महीनों तक चलिए इस खींचतान का हल कैसे
  5415. 3:27:42निकला?
  5416. 3:27:43आखिरकार एक बहुत ही समझदारी भरा समझौता
  5417. 3:27:46हुआ। यह तय हुआ कि हिंदी भारत की
  5418. 3:27:49राष्ट्रभाषा यानी नेशनल लैंग्वेज नहीं
  5419. 3:27:52बल्कि राजभाषा यानी ऑफिशियल लैंग्वेज
  5420. 3:27:54होगी। अच्छा यह फर्क है।
  5421. 3:27:56जी यह बहुत बड़ा फर्क है। देवनागरी लिपि
  5422. 3:27:59में लिखी हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया
  5423. 3:28:01गया। पर साथ में यह भी तय हुआ कि अगले 15
  5424. 3:28:05सालों तक सरकारी कामकाज में अंग्रेजी का
  5425. 3:28:08इस्तेमाल भी जारी रहेगा और हर राज्य को
  5426. 3:28:11अपने काम के लिए अपनी क्षेत्रीय भाषा
  5427. 3:28:13चुनने का अधिकार होगा।
  5428. 3:28:15तो एक तरह से सबको कुछ ना कुछ मिला।
  5429. 3:28:17बिल्कुल। यह भारतीय लोकतंत्र की समझौता
  5430. 3:28:20करने की अद्भुत क्षमता का एक बेहतरीन
  5431. 3:28:22उदाहरण है।
  5432. 3:28:23तो इन तमाम असहमतियों, तूफानी बहसों और
  5433. 3:28:26आखिर में हुए समझौतों के बाद वो दस्तावेज
  5434. 3:28:29तैयार हुआ जिसे हम भारत का संविधान कहते
  5435. 3:28:32हैं।
  5436. 3:28:32जी।
  5437. 3:28:33इसने हर वयस्क नागरिक को वोट का अधिकार
  5438. 3:28:36दिया। जो उस समय के कई विकसित देशों में
  5439. 3:28:38भी नहीं था।
  5440. 3:28:39और इसने धर्मनिरपेक्षता और अल्पसंख्यकों
  5441. 3:28:42के अधिकारों को अपने मूल सिद्धांतों में
  5442. 3:28:45जगह दी। यह उस दौर के लिहाज से एक असाधारण
  5443. 3:28:49रूप से प्रगतिशील और साहसी दस्तावेज था।
  5444. 3:28:52यह उन सभी सदस्यों की दूरदर्शिता और मेहनत
  5445. 3:28:55का सबूत है।
  5446. 3:28:56बिल्कुल। और अंत में एक विचार जिस पर सोचा
  5447. 3:28:59जा सकता है। संविधान बनाने वालों ने अपने
  5448. 3:29:02समय की चुनौतियों का जवाब एक मजबूत, एकजुट
  5449. 3:29:06और समावेशी भारत की कल्पना के साथ दिया।
  5450. 3:29:08हम
  5451. 3:29:09आज 75 से ज्यादा वर्षों के बाद जब हम नई
  5452. 3:29:12चुनौतियों का सामना कर रहे हैं तो क्या
  5453. 3:29:14संविधान के वे मूल सिद्धांत जैसे
  5454. 3:29:16धर्मनिरपेक्षता,
  5455. 3:29:18संघवाद और व्यक्तिगत स्वतंत्रता आज भी
  5456. 3:29:21उतने ही प्रासंगिक हैं या फिर उन्हें आज
  5457. 3:29:23के भारत के संदर्भ में नए सिरे से समझने
  5458. 3:29:26और लागू करने की जरूरत है।
  5459. 3:29:28संविधान का निर्माण एक नए युग की शुरुआत
  5460. 3:29:32समाप्त हुआ।

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