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NCERT | CBSE | RBSE | Class - 12 | इतिहास। आधुनिक भारत का इतिहास। भाग- 3 — Transcript

by Ekaksha · 4,102 words · 492 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:01तो जैसा कि बच्चों हमने पिछली दो कक्षाओं
  2. 0:03में कक्षा 12 के इतिहास विषय की तीसरी
  3. 0:07पाठ्य पुस्तक जिसमें मुख्यतः आधुनिक भारत
  4. 0:09का इतिहास है उसकी पिछली दो कक्षाओं में
  5. 0:12पहले पाठ को पढ़ा है जिसका नाम है
  6. 0:14उपनिवेशवाद और देहात उस पाठ में हमने जो
  7. 0:18उपनिवेश शासन थी उसके द्वारा बंगाल में जो
  8. 0:20नई भू राजस्व व्यवस्था लागू की गई
  9. 0:22जमींदारी व्यवस्था स्थापित की गई तो उसके
  10. 0:24दौरान हमने बंगाल की जमीदारी व्यवस्था के
  11. 0:26बारे में समझा फिर हमने राजमहल की
  12. 0:28पहाड़ियों की यात्रा के दौरान संथाल और
  13. 0:30पहाड़िया लोगों से भी मुलाकात की उसके बाद
  14. 0:33हम दक्कन की ओर आगे बढ़े थे और दक्कन में
  15. 0:35जो नई भू राजस्व व्यवस्था लागू की गई थी
  16. 0:38जिसका नाम था रैयतवाड़ी बंदोबस्त उसको भी
  17. 0:40समझा था और इस तरह से दक्कन में जो दक्कन
  18. 0:43दंगा आयोग के द्वारा जो किसानों के शोषण
  19. 0:46की एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी उसके
  20. 0:47बारे में भी हमने उस कक्षा के दूसरी कक्षा
  21. 0:50के एंड में पढ़ा था तो आज हम उसी पाठ के
  22. 0:53हम प्रश्नोत्तरी सीरीज करने जा रहे हैं तो
  23. 0:56देखिए बच्चों पहला प्रश्न कि ग्रामीण
  24. 0:59बंगाल के बहुत से इलाकों में जोत दार एक
  25. 1:01ताकतवर हस्ती क्यों था तो जोत दार हमने
  26. 1:04समझा था पहली कक्षा में कि जोत दार क्या
  27. 1:07होते थे तो जोत दार होते थे कि रैयत रैयत
  28. 1:10किसानों को ही कहते हैं और कुछ रैयत जो
  29. 1:13अमीर होते हैं जो बाकी रय तों की सहायता
  30. 1:16भी करते हैं आर्थिक रूप से उनकी फसलें
  31. 1:17खरीदते हैं व साहूकार का काम भी करते हैं
  32. 1:19सूद पे देना पैसे वगैरह यह काम भी तो अमीर
  33. 1:23रैयत जो होते थे उन्हें ही क्या कहते थे
  34. 1:25जोत दार कहते थे तो देखिए क्या व्यवस्था
  35. 1:28होती थी सबसे पहले कंपनी होती थी जो ईस्ट
  36. 1:30इंडिया कंपनी थी ठीक है उसके नीचे कौन
  37. 1:33होते थे जमींदार वह जमींदार एक मध्यस्थ
  38. 1:36वर्ग बनाया था उन्होंने और उसके बाद होते
  39. 1:38थे रैयत और रैयत में भी कुछ जो अमीर रैयत
  40. 1:42होते थे उन्हें क्या कहते हैं जोत दार
  41. 1:44लिखा हुआ है यह अमीर रैयत होते थे कौन जोत
  42. 1:48दार तो देखो ऐसी व्यवस्था थी कि जमीदार को
  43. 1:51लगान देते थे रैयत और जमींदार फिर उस लगान
  44. 1:54को कहां पहुंचाता था अपना कुछ हिस्सा रख
  45. 1:56के कंपनी के पास या उस समय उपनिवेश सरकार
  46. 2:00जो अंग्रेजों की सरकार थी उसके पास यह
  47. 2:01लगान पहुंचाया जाता था तो देखिए जो जतद
  48. 2:05हैं यह रय तों में से ही रय तों से इनका
  49. 2:08लेनदेन होता था लेते भी थे पैसे समय आने
  50. 2:10पर देते भी थे मतलब उनको जब जरूरत होती थी
  51. 2:13उनकी फसलें खरीदते थे बदले में पैसे देते
  52. 2:15थे तो ये होते थे जतद तो अमीर रैयत तो समझ
  53. 2:19रहे हो ना आप कि सूबेदार तो नगरों में
  54. 2:22रहते थे शहरों में रहते थे अपनी रैयत से
  55. 2:25दूर किसानों से दूर जबकि जो जतद होते थे
  56. 2:28वोह कुछ अमीर होते थे और वो रैयत के पास
  57. 2:31ही होते थे इसलिए रैयत के साथ ज्यादा
  58. 2:34अच्छे संबंध घनिष्ठ संबंध जमींदार के
  59. 2:37बनेंगे या जतद के बनेंगे निश्चित है जतद
  60. 2:40के बनेंगे तो जतद एक ताकतवर हस्ती हो गई
  61. 2:43थी उस बंगाल की उस समय की ग्रामीण
  62. 2:45व्यवस्था में तो उसके क्या-क्या कारण थे
  63. 2:47एक हमने देखा कि रैयत से घनिष्ठ संबंध
  64. 2:50होते थे ठीक है समय आने पर रैयत की मदत भी
  65. 2:54करते थे और बहुत सारी रैयत तो ऐसे होती थी
  66. 2:56जिनके पास खुद की जमीन नहीं होती थी तो वो
  67. 2:59जोत दारो की जमीन किराए पर लेकर ही खेती
  68. 3:01करती थी और वह अपने आप को हमेशा के लिए उस
  69. 3:04जतद को ही अपना अन्नदाता मानते थे तो
  70. 3:07देखते हैं इसमें बंगाल के बहुत से इलाकों
  71. 3:10में जतद एक ताकतवर हस्ती निम्नलिखित
  72. 3:12कारणों से था पहला लिखा है कि जोत दार के
  73. 3:16रय तों के साथ घनिष्ठ संबंध होते थे जोत
  74. 3:19दार जमीदारों की तरह जमीनों से दूर शहरों
  75. 3:22में नहीं रहते थे बल्कि गांव में रहते थे
  76. 3:25और गांव के गरीब ग्रामीणों जो किसान है
  77. 3:28रैयत हैं गरीब ग्रामीणों से का के काफी
  78. 3:32बड़े वर्ग पर सीधा नियंत्रण रखते थे ये
  79. 3:35लोग तो पहला कारण है कि वो जमीदार के
  80. 3:38मुकाबले भी ताकतवर होते थे कई जगह तो जोत
  81. 3:40दार क्यों होते थे पहला पढ़ा हमने जोत
  82. 3:44दारो ने बड़े-बड़े भूखंड प्राप्त कर लिए
  83. 3:46थे खूब सारी जमीनें खरीद ली थी कैसे खरीद
  84. 3:48ली थी कि जब किसान होता था रैयत होता था
  85. 3:52उसे जब पैसे की जरूरत होती थी तो सूबेदार
  86. 3:55साहब तो शहर में रहते थे वो अमीर लोगों के
  87. 3:57पास जाते थे जो अमीर रैयत थी व कौन थे जतद
  88. 4:00तो सीधी बात है कि रैयत किसके पास जाएंगे
  89. 4:02पैसों की जरूरत होगी तो जतद के पास जतद
  90. 4:05उनको पैसे दे देता था ऋण पे जब वह ऋण नहीं
  91. 4:09चुका पाते थे तो कई बार उनकी जमीन भी खरीद
  92. 4:11लेता था तो इस तरह उन्होंने बहुत
  93. 4:13बड़े-बड़े भूखंड प्राप्त कर लिए थे अगला
  94. 4:16पॉइंट देखते हैं जोत दार अपनी जमीन का
  95. 4:19बहुत बड़ा भाग बटाईदार
  96. 4:22बटाईदार के माध्यम से जितवा थे और यह
  97. 4:25बटाईदार एक तरह से एक तरह से जोत दार के
  98. 4:29अधीन होते थे तो यह कौन हो गए बटाईदार वह
  99. 4:32किसान जिनकी खुद की जमीन नहीं होती थी वह
  100. 4:35बटाई पर लेते थे जोतेदार की जमीन तो उनसे
  101. 4:38निश्चित है घनिष्ट संबंध हो जाएंगे जोत
  102. 4:40दार की जमीन पर वह खेती करेंगे तो अगला
  103. 4:43पॉइंट है कि जोत दार के इशारों पर रैयत
  104. 4:46जमीदार का लगान समय पर नहीं जमा करवाते थे
  105. 4:50तो देखिए यह बहुत इंपॉर्टेंट पॉइंट है यह
  106. 4:52भी हमने देखा था कि जमीदार साहब को समय पर
  107. 4:57लगान देना पड़ता था कंपनी को अगर वह समय
  108. 4:59पर लगान नहीं जमा कराता था तो पढ़ा था कि
  109. 5:01सूर्यास्त कानून के तहत उसकी जमींदारी
  110. 5:04नीलाम कर दी जाती थी अब जमींदार क्यों
  111. 5:06नहीं दे पाता था लगान समय पर इसके हमने कई
  112. 5:09सारे कारण पढ़े थे उसमें कई बार तो ऐसा
  113. 5:11होता था कि जोत दार जमीदार के विरोधी हो
  114. 5:14जाते थे और जतद रय तों को कह देते थे कि
  115. 5:18समय पर लगान मत दो दो महीने चार महीने लेट
  116. 5:22कर दो तो जमीदार फिर समय पर आगे नहीं
  117. 5:24पहुंचा पाएगा उसे रतो से नहीं मिला तो आगे
  118. 5:27कैसे पहुंचाएगा और उसकी जमीदारी इस कारण
  119. 5:29भी निलाम हो जाती थी तो यह सब कारण है कि
  120. 5:32जतद एक ताकतवर हस्ती बन गई थी बंगाल की उस
  121. 5:35समय की व्यवस्था में तो उम्मीद है आपको
  122. 5:37समझ में आया होगा पहले प्रश्न का उत्तर
  123. 5:40अगला प्रश्न देखते हैं हम आइए आगे बढ़ते
  124. 5:43हैं जमींदार लोग अपनी जमीदारी पर किस
  125. 5:46प्रकार नियंत्रण बनाए रखते थे ठीक है यह
  126. 5:49भी हमने पढ़ा था पाठ के दौरान कि किस तरह
  127. 5:51वह नियंत्रण नियंत्रण का मतलब क्या है कि
  128. 5:54जो जमींदार है फिर से बता देता हूं मैं एक
  129. 5:56बार एक है रैयत मतलब किसान
  130. 6:01यह किसको लगान देते
  131. 6:04थे जमीदार को जमीदारी व्यवस्था में और यह
  132. 6:08किसको पहुंचाता था कंपनी को ईस्ट इंडिया
  133. 6:10कंपनी या अगर सरकार कहे तो मतलब अंग्रेजी
  134. 6:13सरकार उनको यहां पर यह लगान पहुंचाता था
  135. 6:16कि रैयत जमींदार को लगान देता था और
  136. 6:18जमींदार उसका कितना प्रतिशत हिस्सा अपने
  137. 6:20पास रखता था 1/1 प्र हिस्सा अपने बा पास
  138. 6:24रखता था और बाकी का 9/10 हिस्सा किसके पास
  139. 6:28पहुंचा देता था कंपनी के पास तो यह
  140. 6:30व्यवस्था होती थी बाकी का लगान जमींदार
  141. 6:32किसको पहुंचा देगा कंपनी को अब प्रश्न
  142. 6:35क्या है प्रश्न यह है कि जमींदार अपनी
  143. 6:37जमींदारी पर नियंत्रण कैसे रखता था कैसे
  144. 6:39रखेगा दिक्कत क्या थी जमींदार के पास अगर
  145. 6:42यह लगान जमींदार समय पर नहीं पहुंचाएगा तो
  146. 6:45इसकी जमीदारी की नीलामी कर दी जाती थी
  147. 6:48सूर्यास्त कानून के तहत तो इस नीलामी से
  148. 6:51बचने के लिए उसने कौन से उपाय अपनाए थे
  149. 6:54वही क्या है कि किस प्रकार नियंत्रण बना
  150. 6:57के रखे थे तो अपन ने पढ़ा था ना पाठ के
  151. 6:59दौरान कि जमींदार ने अपनी जमीदारी की
  152. 7:01निलाम होने से बचाने के लिए कौन से उपाय
  153. 7:03अपनाए थे तो वो इसके उत्तर हैं तो देखते
  154. 7:05हैं जमींदार लोग अपनी जमीदार हों पर निम्न
  155. 7:09निम्न ढंग से नियंत्रण बनाए रखते थे फर्जी
  156. 7:11बिक्री की तकनीकी जिसमें आपकी पाठ्य
  157. 7:14पुस्तक में लिखी हुई है बर्दवान की एक
  158. 7:16कहानी तो यह क्या है यह बर्दवान की कहानी
  159. 7:19बर्दवान की कहानी यह है कि बर्दवान एक
  160. 7:22जागीर होती थी जमींदारी होती थी और वहां
  161. 7:25के जमीदार ने कई वर्षों तक समय पर लगान
  162. 7:28जमा नहीं कराया था और जब उसने समय पर लगान
  163. 7:31जमा नहीं कराया तो सूर्यास्त कानून के तहत
  164. 7:34उसकी जमीदारी की नीलामी की जाएगी अब जब
  165. 7:36नीलामी की बारी आई तो जो खरीददार आए उसमें
  166. 7:40बहुत सारे फर्जी खरीददार थे जो बर्दवान के
  167. 7:43सूबेदार ने ही अपनी तरफ से भेज दिए थे
  168. 7:46मतलब बर्दवान के जमीदार की जमीदारी नीलाम
  169. 7:49की जा रही है और खरीददार भी उसी के लोग
  170. 7:51हैं वह ऊंची बोली लगाकर अन्य खरीददारों के
  171. 7:54मुकाबले ऊंची बोली लगाकर उस जमीदारी को
  172. 7:57खरीद लेते थे उसी के लोग और फिर जितने
  173. 8:00पैसों में खरीदा उतने पैसे वह कंपनी को
  174. 8:02बहुत दिनों तक पहुंचाते ही नहीं थे तो
  175. 8:04कंपनी कहती थी ये नए खरीदार हैं यह भी
  176. 8:06नहीं पहुंचा रहे हैं पैसे नीलामी वाले तो
  177. 8:09फिर फिर से बोली लगाते हैं दोबारा बोली
  178. 8:11लगाई जाती थी फिर से वही नकली खरीददार तो
  179. 8:13इस तरह बार-बार बार-बार क्या हो गया फर्जी
  180. 8:16बिक्री की तकनीकी और थक हार कर बोली लगाने
  181. 8:20वाले अधिकारी थक जाते थे नए खरीददार भी
  182. 8:23वहां आना बंद कर देते थे और इस तरह वो
  183. 8:25जमीदारी बहुत ही सस्ते दामों पर बहुत ही
  184. 8:28नीची कीमतों पर वास किसको देनी पड़ी
  185. 8:30बर्दवान के जमींदार को ही देनी पड़ी तो इस
  186. 8:33तरह यह फर्जी बिक्री की तकनीकी बहुत सारे
  187. 8:35जमींदारों ने अपनाई अपनी जमीदारी पर
  188. 8:38नियंत्रण बनाए रखने के लिए और अपनी
  189. 8:40जमीदारी नीलाम होने से बचाने के लिए अगला
  190. 8:43देखते हैं नए जमींदार को जमीन का कब्जा
  191. 8:46नहीं देते थे पुराना जमींदार है जब उसकी
  192. 8:49जमीन की नीलामी होगी तो नए जमींदार जब
  193. 8:51वहां पर किसी ने खरीद ली अब वो वहां का
  194. 8:53नया जमीदार है खरीददार जो है उसको कब्जा
  195. 8:56लेना होता था कागजों में तो हो गई कि भाई
  196. 8:58ये अब से जमींदार यह होगा यहां का नया
  197. 9:00जमींदार लेकिन जब वह कब्जा लेना आता था तो
  198. 9:03पुराने जमींदार का वहां पर दबदबा होता था
  199. 9:06किसान भी उसकी बात मानते थे अक्सर उसके
  200. 9:08पास उसके पास लठ हैतो की एक टोली होती थी
  201. 9:11उनको भेजकर वह नए खरीददार के लोगों को पीट
  202. 9:13पीट के भगा देता था तो कब्जा लेने में
  203. 9:16बड़ी दिक्कत आती थी लठे तों की मदद से नए
  204. 9:19खरीददार के लोगों को मार पीट कर भगा देते
  205. 9:22थे यह भी एक निलामी से बचने का तरीका
  206. 9:24उन्होंने अपनाया था आगे बात करें रैयत
  207. 9:28पुराने जमींदार के प्रति इतने वफादार होते
  208. 9:30थे कि वह अपने नए खरीददार को तो जमीन में
  209. 9:33भी नहीं घुसने देते थे कई बार किसान लोग
  210. 9:35भी तो यह भी एक तरीका था आगे बात करते हैं
  211. 9:39कि नए जमींदार के लोगों को जमीन में घुसने
  212. 9:43ही नहीं देते थे और वह अपने आप को पुराने
  213. 9:45जमींदार से जुड़ा हुआ महसूस करते थे तो यह
  214. 9:49सारे पॉइंट क्या है प्रश्न जो था अपना
  215. 9:51उसके उत्तर की जमींदारी जमींदार अपनी
  216. 9:54जमींदारी पर किस प्रकार नियंत्रण बनाकर
  217. 9:56रखते थे अगला प्रश्न पहाड़िया लोगों ने
  218. 10:00बाहरी लोगों के आगमन पर कैसी प्रतिक्रिया
  219. 10:04दर्शाई पहाड़िया लोग कौन थे तो देखो हमने
  220. 10:07जो अपना अध्याय पढ़ा है उसके अध्याय के
  221. 10:11दूसरे भाग में मतलब दूसरी कक्षा में हमने
  222. 10:13देखा था यात्रा की थी पहाड़ी क्षेत्र में
  223. 10:16हम गए थे वहां पर रहने वाले आदिवासी
  224. 10:19पहाड़िया लोग और संथाल लोगों से हमने
  225. 10:21मुलाकात की थी ठीक है तो वो पहाड़ियां कौन
  226. 10:24सी थी बताइए
  227. 10:28बच्चों
  228. 10:30राजमहल की पहाड़ियां जो कि आज के झारखंड
  229. 10:33जिले में है वहां पर पहाड़ी लोग रहते थे
  230. 10:36उनको क्या कहते थे पहाड़िया तो बस उनके
  231. 10:38बारे में पूछा गया है कि बाहरी लोग जब
  232. 10:41वहां पर आए उस क्षेत्र में घुस आए उनके
  233. 10:44क्षेत्र में तो उनकी प्रतिक्रिया किस
  234. 10:46प्रकार थी क्यों घुसाए दूसरे लोग वह भी
  235. 10:48हमने समझा था अपने अध्ययन के दौरान कैसे
  236. 10:51घुसाए थे कि एक जमींदार है इतनी बड़ी उसकी
  237. 10:55जमीदारी है इतना क्षेत्र है मान लो और बीच
  238. 10:57में यह कुछ पहाड़ी क्षेत्र है जहां पर कुछ
  239. 11:00भी पैदा नहीं होता बाकी क्षेत्र में कुछ
  240. 11:03फसल पैदा होती है खेत है तो खेती होती है
  241. 11:06इसलिए जमींदार को लगान प्राप्त होता है और
  242. 11:09जमींदार को लगान प्राप्त होगा उसमें से
  243. 11:11बहुत सारा हिस्सा किसको जाएगा कंपनी को
  244. 11:13लेकिन इन पहाड़ी क्षेत्रों में पहाड़िया
  245. 11:15लोग रहते हैं यह स्थानांतरित कृषि करते
  246. 11:18हैं जिसे झूम कृषि भी कहते हैं और वह किसी
  247. 11:21प्रकार का लगान भी नहीं देते मतलब इतना
  248. 11:23क्षेत्र जो जमींदारी का पहाड़ी क्षेत्र है
  249. 11:26उससे किसी प्रकार का राजस्व प्राप्त नहीं
  250. 11:29हो रा ठीक है तो यह क्या करते थे जमीदार
  251. 11:32कि इन क्षेत्रों को जंगलों को काट काट कर
  252. 11:35काट काट कर इनमें कृषि भूमि में बदल देते
  253. 11:37थे तो पहाड़िया लोग जिस क्षेत्र में रहते
  254. 11:40थे जंगल और पहाड़ियों में इनका क्षेत्र
  255. 11:42सुकरता गया अब इनका सुकड़ेवा तो निश्चित
  256. 11:44है कि मैदान में रहने वाले लोगों से इनके
  257. 11:46झगड़े होंगे ठीक है तो वह पूछ रहे हैं
  258. 11:49इसमें कि कैसी प्रतिक्रिया थी पहाड़ी
  259. 11:51लोगों की जब उनके क्षेत्र में बहरी लोग
  260. 11:53घुस रहे थे तो देखो सबसे पहले पहाड़ी
  261. 11:56लोगों को पहाड़िया कहा जाता था और यह कहां
  262. 11:58रह ते थे राज महल की पहाड़ियों के
  263. 12:01इर्दगिर्द अब यह वहां पर कैसी खेती करते
  264. 12:04थे झूम कृषि जिसे स्थानांतरित कृषि भी
  265. 12:06कहते थे तो पहाड़ी क्षेत्रों में करते थे
  266. 12:08तो पहाड़ी क्षेत्र पथरीली होती है हल तो
  267. 12:10चलेगा नहीं वहां पर तो ये कुदाल से खेती
  268. 12:13करते थे उनमें खुदाई करते थे कुदाल से
  269. 12:16इसलिए इनका प्रतीक भी क्या बन गया कुदाल
  270. 12:19यह झूम खेती करते थे और जंगल की उपज से ही
  271. 12:23गुर गुजर बसर करते थे कुछ खेती भी करते थे
  272. 12:26जंगल में शिकार भी करते थे और बहुत सारे
  273. 12:29फल वगैरह जंगल से प्राप्त करते थे बस उनसे
  274. 12:32ही इनका जीवन चलता था आगे बात करते हैं
  275. 12:35सरकार ने जैसे-जैसे कृषि को बढ़ाया जंगल
  276. 12:38सिकुड़ते गए और मैदानी लोगों व पहाड़ी
  277. 12:41लोगों के बीच झगड़े बढ़ते गए मैदानी लोग
  278. 12:44और पहाड़िया लोगों के बीच झगड़े बढ़ते गए
  279. 12:48ठीक है मैदानों में रहने वाले जमीदारों को
  280. 12:50अक्सर इन पहाड़ी मुखिया हों को नियमित रूप
  281. 12:53से खिराज देकर इनसे शांति खरीदनी पड़ती थी
  282. 12:57ठीक है जंगली लोग थे थोड़े बर्बर थे इसलिए
  283. 13:00मैदानी लोगों पर ये अचानक से हमले करते थे
  284. 13:02पहाड़ी और जंगल से निकल के और जो जमींदार
  285. 13:04है वो उनकी रक्षा के लिए अपने क्षेत्र में
  286. 13:08शांति बनी रहे जमींदार के क्षेत्र में
  287. 13:10इसलिए कई बार इनको खिराज पहुंचाता था कि
  288. 13:13ये लो तुम हम तुम्हें पैसे पहुंचाते
  289. 13:15रहेंगे तुम्हें यहां आकर लूटमार करने की
  290. 13:17जरूरत नहीं थी तो इस तरह शांति खरीदनी
  291. 13:20पड़ती थी खिराज देकर आगे देखें कि इसी
  292. 13:23प्रकार व्यापारी लोग भी जब इन रास्तों से
  293. 13:26गुजरते थे जो पहाड़िया लोगों के नियंत्रण
  294. 13:28में थे थे इन रास्तों से गुजरते थे या
  295. 13:31इनका इस्तेमाल करते थे तो उनकी अनुमति से
  296. 13:33ही इस्तेमाल करते थे और साथ ही में क्या
  297. 13:36देना पड़ता था उनको पथक समझ गए कि
  298. 13:39व्यापारी लोग भी जब उन पहाड़ी रास्तों से
  299. 13:41गुजरते थे जिन रास्तों पर किनका नियंत्रण
  300. 13:44था पहाड़िया लोगों का तो व्यापारी लोग भी
  301. 13:47उन्हें कर चुकाते थे उस रास्ते से गुजरने
  302. 13:49के लिए पथ कर देते थे फिर उनको सुरक्षित
  303. 13:52गुजरने दिया जाता था और साथ ही में
  304. 13:54पहाड़िया लोग ये गारंटी भी देते थे कि अगर
  305. 13:56आपने पथ कर चुका दिया तो फिर आपको कोई
  306. 13:59परेशान नहीं करेगा पूरी जंगली रास्ते में
  307. 14:01सुरक्षा की भी जिम्मेदारी देते थे ठीक है
  308. 14:04तो देखिए आगे बढ़ते हैं अगला प्रश्न संथाल
  309. 14:08ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह क्यों
  310. 14:11किया
  311. 14:12संथाल याद आया कुछ संथाल कौन था संथाल
  312. 14:16विद्रोह का नेता सिद्धू मांझी है ना उनका
  313. 14:19प्रतीक क्या था हल क्योंकि वह मुख्य रूप
  314. 14:21से कृषक थे पहाड़िया लोग जब पहाड़िया जो
  315. 14:25लोग हमने अभी देखा पिछले क्वेश्चन में वो
  316. 14:27स्थानांतरित कृषि करते थे एक जह रहे कुछ
  317. 14:30दिन खेती की कुछ वर्ष फिर उसका उपजाऊ पन
  318. 14:32कम हो गया तो दूसरे जंगल में दूसरे जंगल
  319. 14:34की दूसरी जगह पर चले गए वहां जलाया जंगल
  320. 14:36को खेती की जबकि संथाल जो आदिवासी लोग थे
  321. 14:40यह स्थाई रूप से कृषि करते थे एक जगह बस
  322. 14:42करर खेती करते थे यह मुख्य रूप से कृषक थे
  323. 14:45अब इन्होंने विद्रोह क्यों किया क्या
  324. 14:47समस्या थी औपनिवेशिक शासन से इनकी क्या
  325. 14:50समस्या थी तो देखते हैं पहले संथाल को
  326. 14:52समझते हैं संथाल लोग मुख्यतः क्या थे कृषक
  327. 14:55थे रहते जंगल में थे लेकिन जंगल को साफ
  328. 14:57करके स्थाई रूप से कृषि करते थे संथाल की
  329. 15:00शक्ति का प्रतीक क्या है हल ठीक है मतलब
  330. 15:03यह पहाड़ी जमीन को बिल्कुल सही कर लेते थे
  331. 15:06और उनको खेत बना के जोतते थे तो यह हल का
  332. 15:09ज्यादा इस्तेमाल करते थे तो इनका प्रतीक
  333. 15:11है हल पहाड़िया लोग कुदाल का ज्यादा
  334. 15:13प्रयोग करते थे तो उनका प्रतीक क्या है
  335. 15:15कुदाल तो संथाल विद्रोह का प्रतीक भी क्या
  336. 15:18है हल आगे संथाल विद्रोह कब हुआ 1800 5556
  337. 15:24में संथाल विद्रोह हुआ याद रखना है यह भी
  338. 15:26कि 1857 में जो क्रांति हुई उससे बिल्कुल
  339. 15:29पहले एक बड़ा विद्रोह कौन सा हुआ संथाल
  340. 15:31विद्रोह आगे देखते हैं इनका नेता कौन था
  341. 15:34संथाल विद्रोह का सिद्धू मांझी अब संथाल
  342. 15:37ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध निम्नलिखित
  343. 15:39कारणों से विद्रोह किया समझते हैं हम कि
  344. 15:42इन्होंने क्यों विद्रोह किया निम्नलिखित
  345. 15:44कारणों से विद्रोह किया संथाल अपनी
  346. 15:48खानाबदोश जिंदगी को छोड़कर जंगल के
  347. 15:50अंदरूनी हिस्सों में एक जगह जाकर बस गए थे
  348. 15:54और बाजार के लिए कई तरह की वाणिज्यिक फसल
  349. 15:58खेती करने लगे थे और साथ ही व्यापारी और
  350. 16:01साहूकारों के साथ इनके संबंध भी थे लेनदेन
  351. 16:05करते थे किंतु संथाल ने जल्दी ही समझ लिया
  352. 16:08कि उन्होंने जिस भूमि पर खेती शुरू की है
  353. 16:11वह उनके हाथों से निकली जा रही है क्योंकि
  354. 16:15संथाल ने जिस जमीन को साफ करके खेती शुरू
  355. 16:18की थी उस पर सरकार ने भारी कर लगा दिए
  356. 16:22बहुत भारी कर लगा रही थी इतनी तो पैदा भी
  357. 16:26नहीं होती थी संथाल के पास कि उस कर को व
  358. 16:29चुका सके इसलिए संथाल उस कर को चुकाने के
  359. 16:32लिए पैसे ऋण लेते थे पैसे उधार लेते थे
  360. 16:35किनसे साहूकारों से और जब फिर वह
  361. 16:38साहूकारों के पैसे नहीं चुका पाते थे तो
  362. 16:40साहूकार इतना ज्यादा ब्याज लगाते थे कि
  363. 16:42ब्याज बढ़ता बढ़ता एक दिन फिर वह कह देते
  364. 16:45कि अब तुम्हारी जमीन ही हमको दे दो
  365. 16:47साहूकार लोग उनकी जमीनें छीन रहे थे जिस
  366. 16:50जंगल को संथाल ने साफ किया अपने रहने
  367. 16:54योग्य बनाया और खेती शुरू की अपनी मेहनत
  368. 16:57से उसी पर कर लगाया और फिर कर चुकाने के
  369. 17:00लिए ऋण लिया ऋण बढ़ गया तो ऋण देने वाले
  370. 17:03साहूकार ही उनसे वह जमीन छीन रहे थे तो
  371. 17:06संथाल लोग फिर विद्रोह कर देंगे देखते
  372. 17:10हैं साहूकार लोग ऊंची ब्याज दर लगा रहे थे
  373. 17:14और कर अदा न किए जाने की स्थिति में जमीन
  374. 17:18पर कब्जा कर रहे थे जमीदार लोग भी दामिन ए
  375. 17:23कोहो के इलाके पर अपने नियंत्रण का दावा
  376. 17:26कर रहे थे अब देखो कोहो हमने पढ़ा था
  377. 17:30पिछली कक्षा में कि दामिन कोहो क्या था
  378. 17:33ब्रिटिश सरकार ने संथाल के रहने के लिए एक
  379. 17:36क्षेत्र चिन्हित किया था और उसी को क्या
  380. 17:39नाम दिया गया था दामिन ए कहो ठीक है देखिए
  381. 17:44आगे आगे बात करते हैं कि संथाल ने जिस
  382. 17:48जमीन को साफ करके खेती शुरू की थी उस पर
  383. 17:51सरकार भारी कर लगा रही थी कहां शुरू की थी
  384. 17:54खेती इनका क्षेत्र कौन सा था दामिन कोहो
  385. 17:58संथाल ने विद्रोह क्यों किया पढ़ रहे हैं
  386. 18:00हम पहला पॉइंट पढ़ा दूसरा साहूकार लोग
  387. 18:02बहुत ऊंची दर पर ब्याज लगा रहे थे कर्ज
  388. 18:05अदा कर्ज अदा न करने पर संथाल की जमीन पर
  389. 18:09वह कब्जा कर लेते थे अगला है संथाल लोग
  390. 18:13अपने लिए आदर्श संसार का निर्माण करना
  391. 18:15चाहते थे संथा लोग असम की तरफ से बंगाल
  392. 18:18में आए थे इसलिए कि उन्होंने एक ऐसा
  393. 18:21क्षेत्र चाहिए था जहां वह शांति से रह सके
  394. 18:23खेती कर सकें आदर्श संसार चाहिए था अब
  395. 18:26उन्हें आदर्श संसार यहां पर नहीं मिल था
  396. 18:29यहां पर भी राजस्व देना पड़ रहा है कर्ज
  397. 18:33लेना पड़ रहा है फिर वह कर्ज नहीं दे पा
  398. 18:35रहे हैं तो भूमि छीनी जा रही है उनकी
  399. 18:37तरह-तरह से उनको परेशान किया जा रहा है
  400. 18:39आदर्श राज प्राप्त करने के लिए हमें लड़ना
  401. 18:42होगा ऐसा संथाल ने महसूस किया तो फिर
  402. 18:45उन्होंने विद्रोह कर दिया तो आदर्श राज का
  403. 18:48निर्माण करना चाहते थे जहां उनका अपना
  404. 18:51शासन हो अतः वह ऐसा मानते थे कि जमीदारों
  405. 18:55साहूकारों तथा औपनिवेशिक राज के विरुद्ध
  406. 18:58विद्रोह करने का समय आ गया है ऐसा कौन
  407. 19:01मानते थे ऐसा संथाल लोग मानते थे ठीक है
  408. 19:05तो ये हमने पढ़ा कि संथाल के विद्रोह के
  409. 19:07क्या कारण थे क्यों उन्होंने विद्रोह किए
  410. 19:09अगला प्रश्न है दक्कन के रैयत ऋण दाताओं
  411. 19:13के प्रति क्रोध क्यों थे दक्कन हमने समझा
  412. 19:16था जो दक्षिण भारत का क्षेत्र
  413. 19:20है मुख्य रूप से बंबई और पुना के आसपास का
  414. 19:24क्षेत्र वहां के लोग वहां के ऋणदाता वहां
  415. 19:27के रैयत ऋण दाताओं से क्रुद्ध क्यों थे
  416. 19:31नाराज क्यों थे तो हमने पढ़ा था ना कि
  417. 19:33दक्कन में क्यों नाराज थे दक्कन में एक नई
  418. 19:35भू राजस्व व्यवस्था लागू की गई थी जैसे
  419. 19:38बंगाल में जमीदारी व्यवस्था थी वहां पर
  420. 19:40रैयतवाड़ी व्यवस्था थी क्योंकि लगान सीधा
  421. 19:44किससे निश्चित किया जाता था रैयत से और
  422. 19:47लगान इतना ऊंचा होता था कि जितना किसान
  423. 19:50पैदा करेगा उसका 50 प्र तो किसान को लगान
  424. 19:53में ही देना पड़ता था इतना लगान देने के
  425. 19:56लिए फिर वह साहूकार के पास जाता था पैसे
  426. 19:59उधार लेने और उस पैसे पर इतना ब्याज लगता
  427. 20:02था कि फिर वह ब्याज चुका ही नहीं पाता था
  428. 20:05हमने देखा था कि फिर उन किसानों ने
  429. 20:07विद्रोह किया तो फिर दक्कन दंगा आयोग
  430. 20:10दक्कन दंगा आयोग का गठन किया ब्रिटिश
  431. 20:13सरकार ने इसलिए कि किसान विद्रोह क्यों कर
  432. 20:15रहे हैं पता लगाओ तो फिर हमने पाठ के
  433. 20:18लास्ट में जो पढ़ी थी पिछली कक्षा उसमें
  434. 20:20देखा था कि दक्कन दंगा आयोग ने अपनी
  435. 20:22रिपोर्ट दी कि साहूकार किसानों पर इतना
  436. 20:24ब्याज लगा रहे हैं कि वह चुका ही नहीं
  437. 20:27सकते इसीलिए यह विद्रोह कर रहे हैं ठीक है
  438. 20:30तो देखते
  439. 20:32हैं दक्कन के रयत ऋणदाता हों के प्रति
  440. 20:35निम्नलिखित कारणों से क्रुद्ध थे दक्कन
  441. 20:37में ऋण का स्रोत सूख गया था पहली बात समझे
  442. 20:41कि कपास पैदा होती थी दक्कन में ब्रिटेन
  443. 20:44को जब कपास की जरूरत थी तो दक्कन के
  444. 20:46किसानों ने दबा के कपास उपजा और उनको
  445. 20:49एडवांस में ऋण भी मिलते थे साहूकार कहता
  446. 20:51था कि कपास पैदा करो एक एकड़ में कपास
  447. 20:54पैदा करो 00 एडवांस ही ले जाओ अग्रिम ऋण
  448. 20:58मिल जा जाता था जब कपास बिकती थी तो वह ऋण
  449. 21:01चुक जाता था लेकिन जब कपास की कीमतें गिर
  450. 21:03गई तो फिर क्या हुआ कि ऋण देना उन लोगों
  451. 21:07ने बंद कर दिया साहूकारों ने ऋण का स्रोत
  452. 21:09सूख गया किसान कह रहे हैं कि जिस समय हमें
  453. 21:12ऋण की जरूरत है उस समय ये लोग हमें ऋण
  454. 21:14नहीं दे रहे तो किसानों ने अपने साथ
  455. 21:16अन्याय का अनुभव किया तो ऋण का स्रोत सूक
  456. 21:18गया और वहीं दूसरी ओर राजस्व की मांग भी
  457. 21:21बढ़ा दी गई रयत वाड़ी व्यवस्था में यह कहा
  458. 21:24गया था कि 30 साल बाद फिर से सर्वेक्षण
  459. 21:27करेंगे और फिर से लगान बढ़ा देंगे स्थाई
  460. 21:30बंदोबस्त में तो स्थाई कर दिया जाता था
  461. 21:32बंगाल में जबकि यहां पर हर 30 साल में
  462. 21:34बढ़ाया जाता था इसलिए दक्कन के किसान
  463. 21:37ज्यादा परेशान थे तो देखिए कंपनी उपज का
  464. 21:4150 प्र रैयत से ले लेती थी राजस्व के रूप
  465. 21:45में लगान के रूप में रैयत उस हालत में
  466. 21:48नहीं थे कि बढ़ी हुई मांग पूरी कर सके और
  467. 21:51इन सब कारणों से ही उन्होंने क्या किया था
  468. 21:53विद्रोह किया था देखो आगे 1832 के बाद तो
  469. 21:58क्या हुआ कि कृषि के उत्पादों की कीमतों
  470. 22:01में तेजी से गिरावट और
  471. 22:03आई खेत में जो पैदा करता था किसान वह अब
  472. 22:07उतनी कीमत बाजार में नहीं मिल रही थी और
  473. 22:09साथ में लगान बढ़ गया कैसे दे लगान किसान
  474. 22:12तो देखिए परिणाम स्वरूप किसानों की आय
  475. 22:16में और भी गिरावट आ गई और इसी दौरान अकाल
  476. 22:20और पड़ गया 1832 34 के वर्षों में देहाती
  477. 22:24इलाकों में दक्कन के देहाती इलाके अकाल की
  478. 22:27चपेट में आकर बर्बाद हो गए दक्कन का एक
  479. 22:30तिहाई पशुधन मर गया चारा नहीं मिला इतना
  480. 22:33भयंकर अकाल
  481. 22:35था ठीक है मौत के मुंह में चला गया और आधी
  482. 22:39मानव जनसंख्या भी काल का ग्रास बन गई और
  483. 22:43जो बचे उनके पास भी उस संकट का सामना करने
  484. 22:47के लिए खाद दन नहीं था ठीक है तो इन सब
  485. 22:51चीजों से दुखी होकर इन्होंने क्या किया
  486. 22:54विद्रोह किया ठीक है बच्चों तो हमने कितने
  487. 22:57प्रश्न कर लिए हैं हमने यहां पर पांच
  488. 23:00प्रश्नों के उत्तर देख लिए हैं ठीक है आगे
  489. 23:03की कक्षा में हम बाकी के प्रश्नों के
  490. 23:05उत्तरों को भी ऐसे ही समझेंगे और करेंगे
  491. 23:07उम्मीद आपको कक्षा अच्छी लगी होगी आपको सब
  492. 23:10कुछ समझ में आया होगा ठीक है धन्यवाद

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This page contains the full transcript of NCERT | CBSE | RBSE | Class - 12 | इतिहास। आधुनिक भारत का इतिहास। भाग- 3 by Ekaksha, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 4,102 words across 492 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

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