Naraz Shakhs Ko Manane Ka Powerful Wazifa | Narazgi Khatam Karne Ka Amal | Peer Iqbal Qureshi — Transcript
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- 0:00हर किस्म के रूहानी जिस्मानी मसाइल और
- 0:02वसाइफ के लिए पीर इकबाल कुरैशी चैनल को
- 0:05सब्सक्राइब करें।
- 0:10नमद वस्ली वस्ल्लम रसूलिल करीम अम्माबाद
- 0:15फउज बिल्ला शैतजीम बिस्मिल्लाह्रमाहीम
- 0:20आज मैं आपको ऐसा कुरानी अमल दूंगा कि अगर
- 0:23आप यह वजीफा करेंगे तो आपका हर भूला हुआ
- 0:27आपको याद करेगा। आपसे नाराज आपसे राजी हो
- 0:30जाएगा और जो आपसे दूर हो रहा है वह आपके
- 0:34करीब आ जाएगा और जो आपको नजरअंदाज कर रहा
- 0:37है वह आपसे मोहब्बत करने लगेगा। यह कुरानी
- 0:40अमल मैं ऐसे मर्द कलंदर की कब्र पे मौजूद
- 0:43हूं। वहां से दे रहा हूं जिसको बरसगीर का
- 0:46एक बहुत बड़े वली शहीद मिल्लत हजरत मौलाना
- 0:51सैयद अहमद शहीद रहमतुल्लाह अल का यह मकबरा
- 0:53है जो शाह वली उल्लाह रहमतुल्लाह अल के
- 0:56बेटे शाह अब्दुल अजीज रहमतुल्लाह अल के
- 0:58शगिर्द खास और खलीफा थे और शाह अब्दुल
- 1:01अजीज रहमतुल्लाह अल ने अपने भतीजे शाह
- 1:04इस्माइल शहीद रहमतुल्लाह अलों को इनका
- 1:07मरीद बनाया और यह बकायदा तौर पे पाकिस्तान
- 1:11का जो कयाम आया है वो मारज़ वजूद में इसमें
- 1:15इनका मेन किरदार है और यह तहरीक आजादी की
- 1:18असल बुनियाद इन्होंने रखी है। 1831 में यह
- 1:21सन लिखा हुआ है। यहां पे शहीद हुए हैं। और
- 1:24यह बकायदा तौर पे दिल्ली के जामिया मस्जिद
- 1:27के दरस देने वाले, बयान करने वाले, मरीदों
- 1:31की इतनी बड़ी तादाद थी इनकी कि जहां से यह
- 1:34गुजरते थे, एक बयान करते थे, हिंदू
- 1:36मुसलमान हो जाते थे। सिख मुसलमान हो जाते
- 1:39थे। और आपका चेहरा देख के कई लोग मुसलमान
- 1:42हुए। सैयद अम शहीद रहमतुल्लाह से बड़ा वली
- 1:45बरे सगीर में 300 साल में नहीं गुजरा। तो
- 1:48मैं आज उनकी कब्र पे एक तो अल्लाह से दुआ
- 1:51कर रहा हूं। अल्लाह इनकी तरह हमें शहादत
- 1:53भी दे और कुर्बे पैगंबर सल्ला वसल्लम और
- 1:56कुर्बे इलाही भी अता हो। और ये इतने बड़े
- 1:58वली की कब्र है जो दिल्ली से सिर्फ इसलिए
- 2:02कि मसाजिद की बेहुरमती और इस्लाम की
- 2:05बेहुरमती हो रही थी। यह जिहाद करते हुए
- 2:08बालाकोट यहां पहुंचे हैं और यहां शहीद हुए
- 2:11हैं और यहां इधर इनकी कब्र है बाजार के इस
- 2:14तरफ और परली तरफ जो है इनके शागिर्द और
- 2:17मुजाहिद मिल्लत शहीद हजरत शाह इस्माइल
- 2:20शहीद रहमतुल्लाह का मकबरा है। तो यहां पे
- 2:22और भी मुकद्दस लोगों की कब्रें हैं। यहां
- 2:25से आपको इसलिए यह वजीफा दे रहा हूं कि
- 2:27अल्लाह रब्बुल इज्जत ने जो है इस शहीद को
- 2:30बड़ी मकबूलियत दी है और इनको अल्लाह
- 2:32रब्बुल इज्जत ने महबूबियत भी अता की है और
- 2:35इनका सबसे बड़ा कमाल यह था कि ये जो है
- 2:39यहां तशरीफ लाए तो इनके साथ जो है
- 2:42इन्होंने पेशावर को और उसके बाद अकोड़ा
- 2:44खटक नौशहरा होते यह इलाका फतह किया। कढ़ी
- 2:48हबीबुल्ला और यहां बालाकोट पहुंचे। यहां
- 2:51कुछ लोगों की गद्दारी की वजह से अपने
- 2:53हमेशा कुछ गद्दार निकलते हैं। आपको शहीद
- 2:56किया गया और आप जो है शहीद हो गए। और ये
- 2:59इसमें पूरा लिखा हुआ है। आपके वालिद साहब
- 3:01का नाम और पूरी हिस्ट्री ये लिखी हुई है।
- 3:03आप देख सकते हैं। तो इतने बड़े मर्दे
- 3:05कलंदर और अपने अकाबिर उम्मत के मुस्लि
- 3:09रहनुमा मुक्तदा हजरत सैयद अमर शहीद
- 3:12रहमतुल्लाह के मकबरे पर मैं आपको यह अमले
- 3:15खास कुरानी दूंगा के आपके लोग नाराज आपसे
- 3:19हो जाते हैं। कोई आपसे दूर हो जाता है जो
- 3:22आपसे ताल्लुक नहीं रखना चाहता बीवी नाराज
- 3:24हो जाती है खावंद नाराज हो जाता है औलाद
- 3:26बहन भाई कोई नाराज हो जाता है ऑफिस में
- 3:28कोई नाराज बिजनेस में कोई नाराज तो आप उसे
- 3:31कैसे राजी कर सकते हैं अल्लाह रब्बुल
- 3:34इज्जत भी कहता है कि मुझे राजी ऐसे करो
- 3:37अल्लाह ने हमें कुरान में फार्मूला बता
- 3:39दिया ये वो लोग हैं जिनकी कब्र है ये वो
- 3:43हैं जो अल्लाह को राजी करके गए और आज इनकी
- 3:46कब्र मजे खलायक बनी हुई है हम यहां अक्सर
- 3:49आते मैं जब भी आता हूं तो यहां जरूर
- 3:51हाजिरी देता हूं के इनकी कब्र पर जो है एक
- 3:55नूर है। एक बहुत बड़ी जो है अल्लाह रब्बुल
- 3:58इज्जत ने सुकून की कैफियत रखी है। और यहां
- 4:01आके एक इंसान को फील होता है कि यह वाकई
- 4:04कोई अल्लाह का वली है और ऐसा वली कि जो
- 4:07दुनिया से गए हैं आज भी उनकी करामात जारी
- 4:11और सारी हैं। हम औलिया की कब्रों पे जाना
- 4:14और वहां जाके अल्लाह से मांगना यह फर्क
- 4:16है। कब्र वाले से नहीं मांगते। अल्लाह से
- 4:19मांगते हैं और कब्र पे सजदा नहीं करते,
- 4:21रुकू नहीं करते, तवाफ़ नहीं करते। तो आपको
- 4:24यह बताना है विलियों की कब्रों पे जाएं
- 4:27लेकिन वहां पे चादरें ना चढ़ाएं। वहां जाकर
- 4:29रुकू सजदे ना करें। वहां जाकर जो है आप उस
- 4:33कब्र वाले से ना मांगे। यह भी मोहताज है
- 4:36अल्लाह का। हम भी मोहताज हैं अल्लाह के।
- 4:38हमारा दाता कोई नहीं है कब्र वाला। देने
- 4:40वाला नहीं है। हमें अल्लाह देता है। हम
- 4:42कब्र वाले की जिंदगी को देखते हैं कि वो
- 4:44किस वजह से वली बना। हम वही जिंदगी
- 4:47इख्तियार करें। आज उम्मत अगर सैयद अम शहीद
- 4:50रहमतुल्लाह अल की जिंदगी अपना ले जो आपने
- 4:53जिंदगी गुजारी है और जो आपने देखिए आज ये
- 4:57जिंदगी गुजार के कहां दिल्ली से यहां
- 4:59तशरीफ लाए दिल्ली की जामिया मस्जिद में
- 5:02दरस देने वाले दिल्ली के अंदर जो है दरस
- 5:06देकर लोगों को वाज़ नसीहत करने वाले और
- 5:09लाखों जिसके मरीद हो शगिर्द हो और वो यहां
- 5:13पे तशरीफ लाए और यहां आकर शहीद हो जाए तो
- 5:16ऐसे मर्दे हुर जो है ऐसे मर्दे कलंदर जो
- 5:20है इसकी कब्र पे हम आकर सिर्फ ये दुआ करते
- 5:22हैं अल्लाह हमें इन जैसा बना दे। तो आज
- 5:26आपको भी मैं सैयद अहमद शहीद रहमतुल्लाह अल
- 5:29का तारुफ कराया। आप हिस्ट्री इनकी पढ़ें।
- 5:33आपको हिस्ट्री में मिलेगा। कैसे हाजी
- 5:35इमदादुल्लाह मुहाजर मक्की रहमतुल्लाह अल
- 5:37इन्हीं के काफिले से यहां से गाजी बनके
- 5:40वापस गए थे। मौलाना कासिम नैनोतवी
- 5:42रहमतुल्लाह इसी के काफिले में आए थे। इनके
- 5:44शगर्दों के ताल्लुक रखते हैं। मौलाना रशीद
- 5:47गंगोई रहमतुल्लाह हाफिज जामिन शहीद
- 5:49रहमतुल्लाह अल तो ये बाद में मदरसा देवबंद
- 5:52की बुनियाद इन्हीं के शागिर्दों ने रखी।
- 5:55ये शाह अब्दुल अजीज रहमतुल्लाह के शगिर्द
- 5:57थे और इनके आगे शगिर्द फिर मदरसा देवबंद
- 6:00की बुनियाद रखने वाले हैं। तो मैं इनकी
- 6:03कब्र पे आपको यह वजीफा दे रहा हूं। अल्लाह
- 6:05कुरान में कहता है के तुम चाहते हो अल्लाह
- 6:08तुम्हें याद करे भूले ना। तो फार्मूला समझ
- 6:11लो। फुरूनी अरकु वुली वला तकफुर तुम मुझे
- 6:18याद करो मैं तुम्हें याद करूंगा तुम मेरे
- 6:21शुक्रगुजार बनो कुफ्र ना करो नाशुक्री ना
- 6:24करो अल्लाह को आप जब याद करेंगे अल्लाह
- 6:26आपको याद करेगा कोई बंदा कहे जी अल्लाह
- 6:28मुझसे याद कर रहा है कैसे पता चले आपकी
- 6:31जुबान जब हिलेगी तस्बी पढ़ते हुए जिक्र
- 6:34करते हुए मैं आज अल्लाह के वली की कब्र पे
- 6:37अल्लाह की बात कर रहा हूं नबी सल्ला
- 6:39वसल्लम की बात कर रहा हूं तो अल्लाह मुझे
- 6:41मुझे याद कर रहा है। मुझे यकीन है क्योंकि
- 6:43कुरान कहता है फुरूनी अ कुरकुम तो आज मैं
- 6:47यहां आपको अल्लाह की याद बता रहा हूं।
- 6:50अल्लाह मुझे याद कर रहा है। तो आप अगर ये
- 6:52आयत पढ़ेंगे तो आयत बता रही है। जब आप
- 6:54चाहते हैं कि अल्लाह आपको याद करे तो फिर
- 6:57आप अल्लाह को याद करें तो अल्लाह आपको याद
- 6:59करना शुरू कर देगा। दूसरी बात यह है कि
- 7:02अल्लाह रब्बुल इज्जत इस आयत पर तासीर रखी
- 7:05है जो आपसे रूठ गया हो नाराज हो गया हो
- 7:07आपसे दूर हो गया हो कोई भी रिश्ता हो या
- 7:10कारोबार में या ऑफिस में जॉब में या मियां
- 7:14बीवी में नाराजगी हो गई हो तो मैं आज आपको
- 7:16वो इजाजत के साथ कुरानी अमल दे रहा हूं आप
- 7:19इस आयत करीमा को फुरनी
- 7:22अरकुम वुनी वला तकफुर 313 बार सात दिन पढ़
- 7:29के दुआ करें। इंशा्लाह जो नाराज हो गया
- 7:31राजी हो जाएगा। जो भाग गया है नाराज हो के
- 7:34चला गया है वो वापस आ जाएगा। जिसने आपसे
- 7:36ताल्लुक रिश्ता आपसे कारोबार जॉब का
- 7:40रिश्ता तोड़ दिया है वो वापस आएगा
- 7:42इंशा्लाह। और अल्लाह आपको अपनी याद की भी
- 7:45सहादत देगा, तौफीक देगा। तो सैयद अम शहीद
- 7:49रहमतुल्लाह के मकबरे पर मैं इजाजत के साथ
- 7:51आपको यह अमल दे रहा हूं। आप इस अमल को खुद
- 7:55भी करें और आप आगे सबको बताएं और अल्लाह
- 7:58के औलिया की तालीमात बताएं। औलिया की
- 8:00जिंदगी अपनानी चाहिए। खाली बयान नहीं करनी
- 8:03चाहिए। औलिया का खाली नाम नहीं लेना चाहिए
- 8:06बल्कि औलिया की जिंदगी समझनी चाहिए। हमारे
- 8:08ये बरस सगीर के विलियों में बड़ा नाम रखने
- 8:11वाले सैयद अहमद शहीद रहमतुल्लाह अल हैं।
- 8:14जिनको बालाकोट के मैदान में रात के वक्त
- 8:17तहज्जुद में सजदे की हालत में शहीद किया
- 8:19गया। और ये सुबह जिहाद करते थे। रात
- 8:22तहज्जुद पढ़ते थे। तो रात के वक्त शहीद
- 8:24हुए और आज जिनके मकबरा है ये और ये आयत
- 8:27करीमा फनी वुली व तक आप इसको पढ़े ज्यादा
- 8:32तादाद जाया दिन भी पढ़ सकते हैं जो गायब
- 8:34हो हाजिर हो हाजिर है तो पला भी दे दम
- 8:37करके गायब है तो दुआ कर ले तसवुर करके व
- 8:39आखिर दामला रब लाल
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