Naik Larka Or Rani Jinzadi | Muhabbat Ki Sachi Khofnak Kahani — Transcript
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- 0:01बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम हमारे चैनल
- 0:03में खुशामद
- 0:05पढ़कर मैं मस्जिद से घर की तरफ जा रहा था
- 0:08जब अचानक मुझे अपने पीछे पायल छानकने की
- 0:11आवाज आई जैसे कोई दबे पाओ मेरे पीछे चल
- 0:14रहा था मैं एकदम पीछे पलटा था पीछे
- 0:17बिल्कुल सन्नाटा छाया हुआ था वैसे भी रात
- 0:20के 11 बाज रहे थे मेरी आदत थी ईशा की नमाज
- 0:24के बाद में डर तक कुरान माजिद की तिलावत
- 0:26करता राहत था फिर घर पर जाकर खाना खाता और
- 0:29सो जाता आज थोड़ी मामल से ज्यादा डर हो गई
- 0:32थी और रात के 12:00 बजे का टाइम था अपने
- 0:35पीछे यूं घुंघरू की आवाज सुनकर मैं जैसे
- 0:38हैरान सा था आज से पहले तो ऐसा कभी ना हुआ
- 0:41था फिर मैंने सर झुकाया और दोबारा चलने
- 0:44लगा एक बार फिर से पायल की छान छान की
- 0:47आवाज मेरे कानों में ए रही थी मैं फिर उन
- 0:50आवाजों से मजबूर होकर रुक गया
- 1:01था अपना दिल मजबूत करके उसे तरफ क्या और
- 1:06ऊपर की तरफ देखने लगा दरख्त पर कोई भी नजर
- 1:09नहीं ए रहा था लेकिन किसी की मौजूदगी कभी
- 1:12एहसास मुझे शिद्दत से हो रहा था फिर मैं
- 1:15दिल ही दिल में आईटीएल कुर्सी पढ़ने लगा
- 1:17और तेज तेज कदमों से घर की तरफ रावण हो
- 1:19गया मेरा नाम नूर मोहम्मद है पेशे से मैं
- 1:23एक मौलवी हूं मेरा ताल्लुक शुरू से ही एक
- 1:26दिनदार घराने से था| अब मैं इस्लामियत
- 1:28करने के बाद मुझे कोई सरकारी नौकरी तो ना
- 1:31मिली थी इसलिए मैंने अपने अब्बा के पैसे
- 1:34को ही अपना कर अपनी रोजी को बंदोबस्त किया
- 1:36हुआ था अब्बा भी एक मस्जिद के इमाम थे
- 1:39उनकी वफात के बाद गांव के लोगों के इसरार
- 1:42पर मैंने उसे मस्जिद में इमामत की जगह
- 1:45संभल ली थी लोग वैसे भी मेरे अब्बा की
- 1:48बड़ी इज्जत करते थे और उनके जान के बाद अब
- 1:51वह मुझे भी वैसे ही इज्जत दे रहे थे यूं
- 1:54तो मेरी जिंदगी में कोई खास परेशानी ना थी
- 1:56लेकिन फिर भी मुझे बहुत सी माली
- 1:59परेशानियां का सामना था मस्जिद की इमामत
- 2:03और मदरसे में मौलवी की हैसियत से मैं
- 2:05बच्चों को पड़ता था लेकिन फिर भी मेरी
- 2:07आमदनी कोई खास ना थी दो छोटी बहाने थी
- 2:11जिनकी मैट्रिक तक तालीम पुरी हो चुकी थी
- 2:13गोकी अम्मा अभी मुझे शादी करने का कहती थी
- 2:16लेकिन मैं उन्हें मुसलसल इनकार ही था वजह
- 2:19यह थी पहले मैं अपनी दोनों छोटी बहनों की
- 2:22शादी करना चाहता था अब्बा ने साड़ी जिंदगी
- 2:25मस्जिद की इमामत का कम किया था इसीलिए
- 2:28बदले में वह मेरे लिए कोई जायदाद या माल
- 2:31वगैरा छोड़कर तो ना गए थे जो मैं अच्छे
- 2:34तरीके से अपनी बहनों की शादी कर देता
- 2:36इसीलिए यही फिक्र मुझे दिन रात बेचैन रखती
- 2:40कितनी महंगाई के दूर में इतना पैसा कैसे
- 2:43लॉन्ग की मेरी बहाने इज्जत से अपने घर में
- 2:46रुखसत हो जाए कुछ भी था
- 2:49की बेटियों को अच्छा खास दहेज देखकर रुखसत
- 2:52करना पड़ता था वरना पुरी जिंदगी उनको अपने
- 2:56ससुराल में सर झुका कर रहना पड़ता जी गांव
- 2:59में हम रहते थे वहां हमारे कोई रिश्तेदार
- 3:02तो ना थे इसलिए मुझे अपनी सपनों की शादी
- 3:05किसी गैर बिरादरी में ही करनी पड़ती गांव
- 3:09में कई ऐसे इस्तेमाल
- 3:30देते थे लेकिन वह तन्हा घर चलने के लिए
- 3:33बहुत कम थी कभी-कभी सोचता था की यह सब कुछ
- 3:37छोड़-छाड़ कर मैं किसी शहर में जाकर बस
- 3:39जाता हूं ताकि वहां जाकर अच्छा खास कंकर
- 3:43करके हालात थोड़े बेहतर कर लो लेकिन फिर
- 3:46यह बात मैं सोच कर ही र जाता क्योंकि इस
- 3:49गांव को छोड़कर जाना मेरे लिए मुमकिन ना
- 3:52था एक वजह तो यह थी की यह मेरे अब्बा का
- 3:54अब आएगा उठा और इस गांव से हमारे बचपन की
- 3:58बहुत सी यादें जुड़ी हुई थी और दूसरी बात
- 4:01यह की अगर मैं कमाने के घर से शहर चला भी
- 4:04जाता
- 4:05पीछे मेरी बहनों और मां का ख्याल कौन रखना
- 4:07मेरी यही सोचते शहर जान का ख्याल मेरे दिल
- 4:10से निकाल देती और एक बार फिर से मैं अपना
- 4:13दिल मजबूत करके मस्जिद और मदरसे को
- 4:16संभालने में ग जाता आज भी मैं ईशा की नमाज
- 4:19के बाद अपने घर की तरफ जा रहा था जब
- 4:22रास्ते में मेरे साथ यह अजीबो गरीब वाक्य
- 4:24पेस आया था मैं हैरान था की आज मेरे साथ
- 4:28यह क्या हुआ है इतना लंबा चौड़ा नौजवान
- 4:31होकर भी मैं बच्चों की तरह डर गया था फिर
- 4:34मैं सोने लगा के हो सकता है यह सब मेरा
- 4:36वहां हो लेकिन दो दफा बहन कैसे हो सकता था
- 4:39मुझे साफ ऐसा महसूस हुआ था जैसे मेरे पीछे
- 4:43कोई चल रहा था फिर मैं घर पर पहुंचकर मुंह
- 4:46हाथ धोने लगा मेरी अम्मा मेरे लिए खाना
- 4:49निकाल रही थी वह बेचारी जब तक मैं घर ना
- 4:52जाता था सोई ही ना थी मेरी दोनों छोटी बहन
- 4:55सो गई थी अम्मा उम्र के साथ साथ जाइए
- 5:05मैं बहुत जल्दी
- 5:11उन्होंने हम तीनों बहन भाइयों की इतनी
- 5:14अच्छी तरीके से तबीयत की थी की गांव का
- 5:17एक-एक बांदा उनकी तारीफ करता था सोनी पे
- 5:20सुहाग यह बात थी की मैं शहर जाकर एक बड़ी
- 5:23यूनिवर्सिटी में पढ़ना था लेकिन फिर भी
- 5:26मेरे किरदार में कोई झोल ना था अब मैं
- 5:29इस्लामियत करने के बावजूद भी मेरे अंदर
- 5:31इतनी सादगी थी की कोई देख कर यह ना का
- 5:34सकता था की मैं इतना पढ़ा लिखा इंसान हूं
- 5:37मेरे चेहरे पर दाढ़ी भी बहुत सजती थी जब
- 5:40भी मैं अपनी सूरत आईने में देखा तो बेखदार
- 5:43मेरे मुंह से माशा अल्लाह निकलता था
- 5:45क्योंकि गोरी रंगत मुझे अपने अब्बा से
- 5:48मिली थी यूनिवर्सिटी में कितनी ही
- 5:50लड़कियां थी जो मुझे दोस्ती करने की को
- 5:53हां थी क्योंकि मेरी शराब फैट और पाकीजा
- 5:55किरदार के निसले लड़कियां एक दूसरे को
- 5:58देती थी खुदा गवाह था मैंने कभी किसी
- 6:01लड़की को आंख भर करना देखा था यूनिवर्सिटी
- 6:04में ऐसी जितना भी पद्धति थी
- 6:07लेकिन फिर भी मैं उनसे अखलाक के डेयर में
- 6:11रहकर बात करता था ऐसे ही एक लड़की शान से
- 6:14भी थी यूनिवर्सिटी की कोई भी लड़की मुझे
- 6:16बदतमीजी तक ना करती थी लेकिन शान से एक
- 6:20ऐसी लड़की थी जो मुझे निहायत अकड़ लहजे
- 6:22में बात करती थी वो अपने दोस्तों के साथ
- 6:25मिलकर मेरा मजाक उड़ती और यूनिवर्सिटी की
- 6:28लड़कियों को कहती की यह सिर्फ अपने शरीफ
- 6:30होने का दिखावा करता है जबकि हकीकत में यह
- 6:34लड़कियों से बात करने को भी तरसता है मुझे
- 6:37उसकी बटन से कोई गज ना थी मैं जानता था की
- 6:41वह एक बड़े बिजनेसमैन की बदतमीज बेटी है
- 6:43जिसे अपनी दौलत पर निहायत घमंड है
- 6:46लड़कियां
- 7:04मां देता है इतनी खूबसूरत दिखने के बावजूद
- 7:07भी वह मुझे इंतहाहै बुरी लगती थी जिसे
- 7:11अपनी जिंदगी गुजरते का कोई शोर ही ना था
- 7:13वो हमारे ही डिपार्मेंट की थी लेकिन मेरा
- 7:16और उसका आमना सामना कभी ना हुआ था वो जहां
- 7:20से भी गुर्जर रही होती तो मैं उससे कर कम
- 7:22पीछे है जाता था क्योंकि मैं जानता था की
- 7:25वो जैसे ही मुझमें पर नजर डालेगी तो कोई
- 7:28ना कोई तंज मेरी जाट पर जरूर करेगी इसीलिए
- 7:32मैं ज्यादातर उसके सामने आने से गुर्ज ही
- 7:34करता था फिर जब उसे यूनिवर्सिटी में मेरा
- 7:37आखिरी दिन था तो एक भयानक इन कषाफ मुझमें
- 7:41पर हुआ उसे दिन सारे स्टूडेंट को डिग्री
- 7:43मिली थी वह यूनिवर्सिटी में एक पूर्वक्कर
- 7:46तकरीर थी मैं भी आज अपनी डिग्री लेकर गांव
- 7:49लौट वाला था जब मैं उसे तकलीफ से लौट ही
- 7:52वाला था तो मेरे कानों में चंद लड़कियों
- 7:55की आवाज आई वो पर्दे के उसे पर खड़ी
- 8:04भक्ति इंसान है उसके पीछे तुम यूं रो रो
- 8:08कर आंसू भा रही हो तभी मुझे एक रोटी हुई
- 8:11आवाज आई मैं वो आवाज सुनकर हैरान था
- 8:14क्योंकि वह आवाज शान से की थी जो रोटी हुई
- 8:17अपनी दोस्त को का रही थी की तुम नहीं
- 8:19जानती हो एलिसा मैं नूर मोहम्मद को शुरू
- 8:22से ही बहुत पसंद करती हूं मैं जो उसका
- 8:25मजाक उड़ती थी वो सिर्फ ऊपर ऊपर से करती
- 8:27थी लेकिन हकीकत यह है की मैं उसे बेपनाह
- 8:31पसंद करने लगी थी और मेरी यह पसंद मोहब्बत
- 8:34में बादल जाएगी मुझे यूं मालूम ना था अब
- 8:38तुम ही बताओ की मैं क्या करूं डैडी तो कभी
- 8:41मा कर भी इस बात पर राजी ना होंगे की मैं
- 8:43गरीब देहाती को अपनी जिंदगी का हम सफर बना
- 8:46लो उन्हें के डर की वजह से मैं आज तक नूर
- 8:49मोहम्मद के सामने
- 8:54[संगीत]
- 8:55कोई खास पसंद नहीं करता वह तुमसे कभी भी
- 8:59शादी नहीं करेगा इसलिए बेहतर होगा की तुम
- 9:02अपने दिल से उसका ख्याल निकाल दो
- 9:04लेकिन शान से मुसलसल रो जा रही थी मैं इस
- 9:08इन केशव पर हैरान था और सोच भी नहीं सकता
- 9:11था की जो लड़की यूनिवर्सिटी में यूं मुझे
- 9:14अपनी नफरत का इजहार करती होगी वह अपने दिल
- 9:17में मेरे लिए इस कादर मोहब्बत बस कर बैठी
- 9:20होगी फिर जाते-जाते ही मेरे दिल में अचानक
- 9:23खयाल आया की मैं एक नजर उसे देखकर यहां से
- 9:26हमेशा के लिए चला जाता हूं वैसे भी वह
- 9:30कबीर जाति है उसका साथ पन मेरे लिए ना
- 9:33मुमकिन था भले ही वह इतनी खूबसूरत थी की
- 9:36चाहे जान के काबिल थी लेकिन मेरा उसे तक
- 9:40पहुंचाना नामुमकिन था मैं जैसे ही
- 9:43यूनिवर्सिटी से निकालने वाला था जब अचानक
- 9:45वह गेट पर खड़ी हुई मुझे नजर आई शायद वह
- 9:48मुझे देखने के लिए ही गेट के पास खड़ी थी
- 9:50आज उसकी आंखों में बेपनाह विरानी थी मेरी
- 9:54तरफ देखकर उसने नफरत का इजहार ना किया
- 9:57बल्कि वहां उदासी खड़ी हुई नजर ए रही थी
- 10:00और मेरा उसको यूं देखना ही मेरे लिए बड़ा
- 10:03साबित हुआ क्योंकि वह भी हमेशा हमेशा के
- 10:07लिए मेरे दिल में बस चुकी थी आज मुझे पता
- 10:10चला की मैं जिसे अपनी नफरत समझना था दरअसल
- 10:13वो नफरत ना थी बल्कि दिल के किसी कोनी में
- 10:16उसे चाहे जान की ख्वाहिश मेरे अंदर भी थी
- 10:19अब मैंने उसे आखरी नजर देखा और फिर सीधा
- 10:23अपने गांव लोट आया मेरे पास ना नौकरी थी
- 10:26और ना ही कोई खास हैसियत थी मुझे कोई हक
- 10:29ना था की मैं शान से जैसी खूबसूरत लड़की
- 10:32को अपने दिल में बस पता
- 10:34जो सब खयाल अपने जहां से झक कर अपने दिलों
- 10:38जान से गांव के लोगों की खिदमत में जूता
- 10:40हुआ था
- 10:41मदरसे में मेरा अच्छा खास नाम और पहचानती
- 10:44जब की मैं मस्जिद में नमाज की इमामत कर था
- 10:47लेकिन घर के हालात बादल दूर वैसे ही थे
- 10:51जैसे अब्बा छोड़कर गए थे शायद अब्बा के
- 10:54केमोन की बरकत थी जो वह मेरे यूनिवर्सिटी
- 10:56के सारे अखरा याद भी उठा रहे थे और अम्मा
- 10:59और बहनों का भी सर खर्चा पूरा कर रहे थे
- 11:01लेकिन मुझे पता नहीं यह सब क्यों नहीं रहा
- 11:05था कल को मैंने बहनों की शादी भी करनी थी
- 11:07इसीलिए मैं फिक्रमंद राहत
- 11:12है की नूर मोहम्मद हम तो इतने ज्यादा पढ़े
- 11:15लिखे नहीं हैं इसीलिए गांव में र रहे हैं
- 11:17तुम तो इतने पढ़े लिखे हो जाकर शहर में
- 11:21कोई सरकारी नौकरी के लिए क्यों नहीं
- 11:22आजमाते हो मैं उन्हें कहता की मेरे
- 11:25दोस्तों सरकारी नौकरी मिलन इतना आसन नहीं
- 11:27है वह मेरी शक्ल पर दाढ़ी देख कर मुझे
- 11:30नौकरी नहीं देंगे लेकिन फिर भी मेरी अम्मा
- 11:33कहती के बेटा कोशिश करते रहो हो सकता है
- 11:48मेरे सर पर हाथ रख दिया मुझे खाने लगी की
- 11:52जो बेटा जाकर सो जो तुम्हें सुबह फजर में
- 11:55उठाना होता है नमाज पढ़ने के लिए फिर मैं
- 11:57मुस्कुरा कर अपने कमरे में ए गया मैं सोनी
- 12:00की कोशिश कर रहा था जब मुझे अपने साथ होने
- 12:03वाला सर वाक्य बताया मैं हैरान था की वह
- 12:07आवाजें कैसी थी सुना था की उसे तरफ जंगल
- 12:10में लागतो पर जिन भूतों का सैया है लेकिन
- 12:14मैं यह सोच भी नहीं सकता था की मेरे साथ
- 12:16भी कुछ ऐसा हो सकता है फिर मैं सोनी की
- 12:19कोशिश करने लगा रात का ना जान कौन सा था
- 12:23जब अचानक मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मेरी
- 12:26चारपाई के पास कोई खड़ा था मेरे ऊपर घनाउट
- 12:30की कैफियत तारी थी मैं समझा शायद अम्मा
- 12:32मुझे जागने के लिए आई है क्योंकि ठीक फजर
- 12:35के वक्त मुझे उठा दिया करती थी क्योंकि
- 12:38मुझे जाकर मस्जिद में इमामत करनी होती थी
- 12:40तभी मैंने अपनी मंडी मंडी आंखें खोल कर
- 12:43देखा मेरे सामने कोई लड़की खड़ी थी जो
- 12:47हंसते हुए मुझे देख रही थी मुझे नींद में
- 12:50कुछ समझ नहीं ए रहा था क्योंकि वह चेहरा
- 12:52अजनबी था तभी मैंने एकदम जोरदार झटका लिया
- 12:56क्योंकि वह चेहरा अचानक मेरी नजरों के
- 12:59सामने से गायब हो गया अब मैं पुरी तरह से
- 13:02नींद की कैफियत से आजाद था यह कैसा एहसास
- 13:05था वो कौन थी जो यूं मुझे हंसते हुए देख
- 13:08रही थी मैं हैरान परेशान चारों तरफ नजरे
- 13:12घुमा-घुमा कर देख रहा था कमरे में किसी की
- 13:15मौजूदगी का शिद्दत सहसास हो रहा था लेकिन
- 13:18नजर कोई भी नहीं ए रहा था कमरे का दरवाजा
- 13:21भी थोड़ा सा खुला हुआ था जैसे थोड़ा सा
- 13:24खोलकर कोई अंदर आया हो मुझे अच्छी तरह याद
- 13:27था मैं कमरे का दरवाजा बैंड करके सोया था
- 13:29यूं सड़क पर पायल की आवाजें और फिर कमरे
- 13:33में हंसने की आवाज है मैं इन सब बटन को
- 13:36महसूस करके सो नहीं का रहा था फिर मैंने
- 13:39टाइम देखा तो 3:00 बजाने वाले थे फजर होने
- 13:42में थोड़ा ही टाइम बच्चा था अब अगर मैं सो
- 13:44जाता तो नमाज के वक्त मेरी आंख ना खोल फिर
- 13:48मैं जगत रहा और फजर का वक्त हो गया आज
- 13:51मैंने सोच लिया था की जैसे ही सारे नमाजी
- 13:54मस्जिद से रुखसत हो जाएंगे तो मैं भी घर
- 13:56जल्दी चला जाऊंगा कल होने वाला अजीबो गरीब
- 13:59वाक्य मेरी याददाश्त मैं अभी तक महफूज था
- 14:02पूरा दिन मेरा की बहुत मसरूफ गजरा क्योंकि
- 14:06मद्रास से मैं दिन-ब-दिन बच्चों की तादाद
- 14:08बाढ़ रही थी लेकिन चूंकि मेरी कल वाले
- 14:11वाक्य की वजह से नींद पुरी ना हुई थी
- 14:13इसीलिए मैं अपना जहां बहुत भारी भारी
- 14:16महसूस कर रहा था लेकिन नमाज की इमामत
- 14:19करवाने में कभी नहीं करता था फिर जैसे ईशा
- 14:23की नमाज खत्म हुई मैं भी घर की तरफ रावण
- 14:26हो गया मस्जिद से घर का फैसला अच्छा खास
- 14:29था मेरे पास मोटरसाइकिल भी ना थी जो मैं 5
- 14:32मिनट में घर पहुंच जाता इसीलिए रोजाना
- 14:35पैदल ही आना मेरा मॉल था अभी भी मैं घर की
- 14:39तरफ ही जा रहा था जब कोई भागते हुए मुझे
- 14:41टकराया था वह चादर में लिपटी हुई कोई
- 14:44लड़की थी जो मुझे यूं अचानक से टकराई थी
- 14:47मैं वही रुक गया फिर नजर झुका कर उसे
- 14:51लड़की से खाने लगा मोहतरमा आप कौन है जो
- 14:54रातों पर फिर रही है वह लड़की रोटी हुए
- 15:00बस मजबूर लड़की हूं बहुत दूर से भाग कर
- 15:04यहां पोंचो कुछ लोग मेरे पीछे पड़े हैं जो
- 15:07मुझे कत्ल करना चाहते हैं खुदा के लिए
- 15:10मेरी उनसे जान छुड़ा दें मुझे कोई महफूज
- 15:13ठिकाना दे दें मौलवी साहब आपका मुझमें पर
- 15:15बहुत बड़ा एहसान होगा वो मेरे सामने हाथ
- 15:19जोड़ जोड़कर रो रही थी मैं उसकी बातें
- 15:21सुनकर हैरान था इस बीच सड़क पर इतनी
- 15:25अंधेरी रात को मैं उससे साड़ी तफसील नहीं
- 15:28पूछ सकता था इसीलिए मजबूरन उससे खाने लगा
- 15:31की अगर तुम्हारे पास कोई ठिकाना नहीं है
- 15:33तो तुम मेरे साथ मेरे घर चल शक्ति हो वहां
- 15:36तुम्हारी इज्जत और जान दोनों महफूज रहेंगे
- 15:39फिर वो लड़की मुझे खाने लगी की मौलवी साहब
- 15:41मुझे भी आपने शरीफ इंसान ग रहे हैं इसीलिए
- 15:45मुझे आपके साथ जान में कोई मुजाहिद का
- 15:47नहीं है अब वह मेरे पीछे पीछे ए रही थी और
- 15:51मैं बेबी से यह सोच रहा था की अगर गांव के
- 15:54लोगों ने मुझे यूं लड़की के साथ देख लिया
- 15:56तो हो ना जान मेरे बड़े में कोई गलत बात
- 15:59ना सोच ले क्योंकि कुछ भी था मैं एक मॉल
- 16:02भी था और अगर मौलवी होते इसलिए मैं ऐसे
- 16:05रात को लड़कियों के साथ आता जाता तो शायद
- 16:08कोई एन कोई इंसान मेरे बड़े में कोई गलत
- 16:10अंदाज़ ही लगा लेट फिर मैं तेज तेज चलने
- 16:14लगा और घर पहुंच गया मैं शुक्र अदा कर रहा
- 16:16था की रास्ते में किसी ने भी मुझे ना देखा
- 16:18था जैसे ही मैंने दरवाजा बजाया तो हसबैंड
- 16:21मामल अम्मा ने दरवाजा खोल जो मेरे इंतजार
- 16:24में बैठी थी लेकिन मेरे पीछे मौजूद एक
- 16:27लड़की को देखकर हैरान थी ये उनकी नजरे समझ
- 16:30कर मैं कुछ शर्मिंदा सा हो गया फिर अम्मा
- 16:33से खाने लगा की अम्मा यह लड़की किसी
- 16:34मजबूरी की कैफियत में मुखाल्ला है इसे एक
- 16:37महफूज की खाना चाहिए था इसे किसी के हाथों
- 16:40अपनी जान का खतरा है इसीलिए मैं इसे अपने
- 16:42साथ लेकर आया हूं आप देख ले इसे अम्मा को
- 16:46यह कहकर मैं सीधा अपने कमरे में चला गया
- 16:48क्योंकि मुझे बहुत अजीब सा महसूस हो रहा
- 16:50था फिर खाना खाकर मैं सोनी की कोशिश करने
- 16:53लगा और यूं ही सोचते सोचते मुझे नींद ए गई
- 16:56अब वह लड़की हमारे साथ हमारे घर में ही र
- 16:59रही थी एक दिन अम्मा खाना लेकर आई तो
- 17:01मैंने अम्मा को कहा की अम्मा यह लड़की कौन
- 17:03है आखिर वीडियो बताया अपने बड़े में तो
- 17:06अम्मा मुझे खाने लगी की हां बेचारी बड़ी
- 17:08मुसीबत ज्यादा है कोई खानदानी दुश्मनी चल
- 17:11रही थी जब इसके पूरे खानदान को कत्ल कर
- 17:13दिया गया यह बेचारी बड़ी मुश्किल से अपनी
- 17:16जान बचाकर वहां से भाग निकली ना जान
- 17:19बेचारी ने किस-किस की मौत अच्छी होगी
- 17:21अम्मा ने जो भी उसके बड़े में बताया था
- 17:24उसे सुनकर मुझे भी बहुत अफसोस हुआ मैं
- 17:27सोने लगा की अगर यह मुस्तकिल यहां की
- 17:29मेहमान बन गई तो गांव के लोगों को क्या
- 17:32कहेंगे इसके बड़े में एक सुबह जब मैं फजर
- 17:35के वक्त था तो यह देख कर हैरान र गया जब
- 17:38वो लड़की जिसने अपना नाम मैहर बताया था वह
- 17:41मेरे कपड़े लिए सहन में खड़ी थी
- 17:43मुझे बहुत अजीब सा महसूस हुआ उसने मेरे
- 17:47कपड़े मुझे थमय और खाने लगी की आपकी अम्मा
- 17:49की नींद खराब ना हो इसीलिए मैंने आपके
- 17:51कपड़े निकाल दिए मुझे कुछ अच्छा एन ग रहा
- 17:54था उसकी काली रोशन आंखें मुझे देखें जा
- 17:57रही थी और मुझे बहुत अजीब ग रहा था फिर
- 18:00मैं उसे खाने लगा की मेरी वजह से आप अपने
- 18:03नींद ना खराब किया करें आप यह जहमत दोबारा
- 18:05ना कीजिएगा फिर अपने कपड़े लेकर मैं
- 18:08वॉशरूम में चला गया दिन भर दिन वो लड़की
- 18:11मैहर अम्मा और बहनों से खूब गुल मिल रही
- 18:13थी फिर एक दिन मेरी बहन खोल मुझे बताने
- 18:16लगी की भाई मैहर भी तो हमसे कुरान पाक पद
- 18:19रही है उसके मां-बाप ने उसे कुरान तक ना
- 18:22पटाया जिसकी वजह से यह दुनिया के इंसानों
- 18:24से बहुत पीछे र गई है लेकिन भाई मैहर का
- 18:27दिमाग बहुत अच्छा वह जल्दी-जल्दी कुरान
- 18:30पढ़ना सिख रही है मैं अपनी बहनों के मुंह
- 18:33से यह सब बातें सुनकर हैरान था मुझे हैरत
- 18:36हो रही थी की वह लड़की अच्छी खासी दिखती
- 18:38थी लेकिन उसने कुरान पाक की तालीम भी नाली
- 18:41हुई होगी यह मुझे बताना था
- 18:43वह मेरी बहनों और अम्मा के दिलों में अपनी
- 18:46अच्छी खासी जगह बना चुकी थी एक दिन मदरसे
- 18:49में बच्चों की पूर्वक्कर तकलीफ थी जिसमें
- 18:52जिन बच्चों ने नजर कुरान खत्म किया था
- 18:54उन्हें सनत देनी थी उसे तकरीर में मुझे
- 18:57अच्छी खासी डर हो गई रात के 12:00 बजाने
- 18:59वाले थे लेकिन मैं अभी तक घर ना पहुंच था
- 19:02तभी एक दोस्त ने मुझे कहा की मैं तुम्हें
- 19:04मोटरसाइकिल पर घर छोड़ देता हूं लेकिन
- 19:07मैंने उसे माना किया और मामल की तरह पैदल
- 19:10जान का ही फैसला किया अभी मैं अंदर रखना
- 19:12हूं के रास्ते से ही गुर्जर रहा था जी जगह
- 19:14के बड़े में मशहूर था की वहां एएसईबी रहते
- 19:17हैं तभी अचानक सड़क के दाएं तरफ के नीचे
- 19:20मुझे कोई खड़ा हुआ नजर आया मैं हैरान था
- 19:23की रात के इस पर भला वहां कौन खड़ा हो
- 19:25सकता है
- 19:27की वह एक लड़की थी तभी मैं उसे लड़की को
- 19:30आवाज दे नहीं वाला था जब अचानक वह मेरी
- 19:33तरफ पलटी मैं यह देख कर हैरान र गया की वह
- 19:36लड़की कोई और नहीं बल्कि मैहर थी मैंने एक
- 19:40नजर में उसे पहचान लिया था जैसे उसने मेरी
- 19:43तरफ नजर फिर देखते ही देखते वह दूर
- 19:46द्राक्टों की तरफ भगति हुई चली गई लेकिन
- 19:49मुझे उसे पर बेख्ताशा गुस्सा ए रहा था भला
- 19:52रात के 12:00 बजे के वक्त वो यहां जंगल
- 19:55में क्या कर रही थी मैं यूं ही गुस्से की
- 19:57कैफियत में मुकाला घर पहुंच तो अम्मा ने
- 20:00दरवाजा खोल फिर मैं अम्मा से खाने लगा की
- 20:02अम्मा क्या जरूर थी आपको उसे लड़की की
- 20:05हमदर्दी में मुकाला होने की भला ना जान वो
- 20:07किस करैक्टर के मलिक है आपको पता भी है की
- 20:10वो रात को इस पहाड़ सड़कों पर क्या लेती
- 20:13फिर रही है अम्मा मेरी ये बात सुनकर हैरान
- 20:16थी फिर वो मुझे खाने लगी की बेटा तुम्हें
- 20:18कोई गलतफहमी हुई होगी वह तो तुम्हारी बहन
- 20:21के कमरे में सो रही है अपनी अम्मा की बात
- 20:24सुनकर मैं हैरान था फिर अम्मा से खाने लगा
- 20:26की नहीं आप जाकर देखें पहले वो इस वक्त
- 20:29जंगल में आवारा गर्दी करती फिर रही है फिर
- 20:33अम्मा मेरे खाने पर मेरी बहनों के कमरे की
- 20:35तरफ से और पलट कर वापस ए गई फिर मुझे खाने
- 20:38लगी की लगता है तुम्हारा दिमाग बच्चों को
- 20:40पढ़कर अदा हो गया है देख लो अपनी आंखों से
- 20:44वो तो घर से निकली तक नहीं है बल्कि आराम
- 20:46से सो रही है बेखबर मैं अम्मा की बात
- 20:50सुनकर हैरान था मुझे अपने देखने पर कोई
- 20:53शबाना था मुझे अच्छी तरह याद था की वो
- 20:56लड़की मैहर ही थी क्योंकि जब उसने पलट कर
- 20:59देखा था तो मैंने उसका चेहरा देख लिया था
- 21:01और मुझे यू गौर से देखा हुआ देखकर वो आखिर
- 21:05जंगल में क्यों भाग गई थी फिर मैं अपने
- 21:07दिल की तसल्ली करने के लिए एक नजर मैहर को
- 21:10देखने गया वह हकीकथन वही सो रही थी फिर
- 21:13मैं यह सोचकर हैरान था की मैहर जैसी दिखने
- 21:17वाली वो लड़की आखिर कौन थी एक दिन जुम्मे
- 21:20का दिन था उसे दिन मदरसे से छुट्टी होती
- 21:22थी मैं उसे वक्त घर पर ही मौजूद था जब मैं
- 21:25एक अखबार उठाकर चली आई मुझे खाने लगी की
- 21:28मौलवी साहब आप इस नौकरी के लिए कोशिश करें
- 21:31आपको जरूर कामयाबी होगी मैं उसके हाथ से
- 21:34अखबार लेकर देखने लगा वह जी नौकरी का का
- 21:37रही थी उसमें कॉलेज के लिए एक लेक्चर की
- 21:40जरूर थी वह कोई सरकारी कॉलेज ना था फिर
- 21:43मैंने बात सुनकर सर हिल दिया और नौकरी के
- 21:46लिए अप्लाई करने का सोचा अब मैं जल्द से
- 21:49जल्द यह कोशिश कर रहा था की मेरी बहनों का
- 21:51किसी अच्छी जगह पर रिश्ता ग जाए ताकि
- 21:54उन्हें बायजात तरीके से रुक सकता हूं
- 21:56अब्बा के जान के बाद यह जिम्मेदारी मेरे
- 21:59सर पर थी अम्मा की आंखों में फिक्र दे कर
- 22:02मैं भी परेशान रहने लगा था रहा उसे लड़की
- 22:06मैहर का सवाल तो वो मेरी जिम्मेदारी
- 22:08हरगिज़ ना थी बल्कि एक ना एक दिन उसने इस
- 22:11घर से चले ही जाना था फिर खुदा का करना
- 22:14ऐसा हुआ की इसी गांव के रहने वाले एक मौज
- 22:17से शख्स के घर से मेरी बहन के लिए रिश्ता
- 22:19आया लड़का फौजी में था और निहायत अच्छा घर
- 22:23आना था रिश्ता इतना अच्छा था की मेरा दिल
- 22:25जा रहा था की मैं फौरन हां करती लेकिन
- 22:28उन्हें शादी की बहुत जल्दी थी वह दो-तीन
- 22:31महीने के अंदर अंदर शादी करना छह रहे थे
- 22:33क्योंकि लड़का छुट्टियां पर वापस घर ए रहा
- 22:36था अब मैं फिक्रमण भी था क्योंकि घर के
- 22:39हालात ऐसे थे की मैं सादगी से तो अपनी बहन
- 22:42को रुखसत कर सकता था
- 22:43है लेकिन उसका जहाज बनाने के लिए मुझे
- 22:46अच्छी खासी राकामदार कैट दी और मैं अपनी
- 22:49बहन को कम से कम इतना जहर देना चाहता था
- 22:52जिससे वह अपने आगे की जिंदगी आराम से बसर
- 22:54कर सके अम्मा मेरे पास आई वह भी मुझे का
- 22:58रहे थे की खुला के लिए रिश्ता आया हुआ है
- 23:00रिश्ता निहायत मुनासिब है अगर ज्यादा डर
- 23:03कर दी तो ऐसा ना हो की उनका इरादा बादल
- 23:06जाए तब मैंने अम्मा को कहा की आप परेशान
- 23:08मत हो अल्लाह बेहतरीन वसीला बनाने वाला है
- 23:11वह कुछ ना कुछ सबक तो पैदा कर ही देगा फिर
- 23:15मैंने अल्लाह का नाम लेकर उन्हें हां करती
- 23:17सिर्फ 2 महीने के अंदर अंदर शादी करना थी
- 23:21और मुझे सब तैयारी भी देखनी थी अब मैं दिन
- 23:24रात परेशान रहने लगा जिंदगी में कभी किसी
- 23:28से कर्ज भी ना लिया था और अब कर्ज लेते
- 23:31हुए भी किसी से शर्म बहुत ए रही थी एक दिन
- 23:34जब मैं फजर में उठा तो दारा से टोपी
- 23:36निकालना के लिए मैंने दराज खोल यह देख कर
- 23:39मैं हैरान र गया
- 23:43कंगन रखें हुए थे उनकी चमक से ऐसा ग रहा
- 23:47था जैसे वह का ले सोनी से बने हुए थे मैं
- 23:50उन्हें देखकर हैरान था इतने कीमती कंगन वह
- 23:53भी मेरी दराज में मुझे हैरत ना होती तो
- 23:56क्या होता यह कंगन आखिर किसके थे और किसने
- 24:00रखें थे मुझे कुछ समझ नहीं ए रही थी फिर
- 24:03जैसे मेरे दिमाग को झटका लगा ये कंगन
- 24:06मैंने कहानी देख रखें थे यह कंगन तो मैंने
- 24:09मैहर के हाथों में देखें थे जब वो उसे
- 24:12सड़क पर मुझे मिली थी हां लेकिन उसे दिन
- 24:14के बाद यह कंगन उसके हाथों में नजर ना आए
- 24:16थे तो क्या यह कंगन मेरी मजबूरी देखते हुए
- 24:20मैहर ने मेरी दराज में रखें थे मैंने सोच
- 24:23लिया की इन कंगनों के बड़े में जरूर उससे
- 24:25बात करूंगा आखिर वह कंगन उसने यहां क्यों
- 24:27रखें थे मैं हालात से परेशान जरूर था
- 24:30लेकिन यह नहीं चाहता था की मैं किसी का
- 24:33एहसान लेकर अपनी बहन की शादी करूं जो भी
- 24:36था मुझे उसे वक्त पैसों की सख्त जरूर थी
- 24:38और वक्त बहुत कम था मेरे पास यही सोच कर
- 24:42मैंने उसे दिन मैहर को अपने प्यास बुलाया
- 24:44और उसे खाने लगा की तुमने इतने कीमती कंगन
- 24:47मेरे हवाले कर दिए मुझे पता है की तुमने
- 24:50मुझे परेशान देखा है और हमारे घर की
- 24:52मजबूरी को समझा है मैं तुम्हारा एहसानमंद
- 24:55हूं लेकिन तुम अपने कंगन वापस ले शक्ति हो
- 24:58अल्लाह ताला जरूर कोई और सबक बना देगा तो
- 25:02वो मुझे खाने लगी की नूर मोहम्मद साहब
- 25:04आपने अपने घर में रखकर मेरे ऊपर भी तो
- 25:07एहसान किया है यह मत समझिएगा की मैं आपका
- 25:10एहसान चुकाने की कोशिश कर रही हूं बल्कि
- 25:12यह मेरी तरफ से छोटा सा एक गिफ्ट है आप
- 25:16इसे बीच कर अच्छे खेस पैसे हासिल करके
- 25:19उसकी शादी अच्छी तरीके से कर दीजिएगा और
- 25:22इसी ने मेरी खुशी है यह कहकर वह कमरे से
- 25:25चली गई मैं उसकी सोच पर हैरान था फिर मैं
- 25:29दिल में सोने लगा के वक्त आने पर उसका यह
- 25:31एहसान में उतार कर रहूंगा जब मैंने वह
- 25:34सोनी के कंगन बेचे तो वह मेरी सोच से भी
- 25:37ज्यादा अच्छी कीमत पर बाइक है
- 25:42मैंने उसकी नदी पर कोई फजूल खर्ची ना की
- 25:45थी हां लेकिन अपनी बहन के लिए एक मुनासिब
- 25:48सजा हे दे कर उसे रुखसत जरूर किया था जो
- 25:51की तकरीबन हर एक भाई की ख्वाहिश होती है
- 25:53अब सिर्फ एक बहन बीम्स मेरी जिम्मेदारी र
- 25:56गई थी और मेरी ख्वाहिश थी के वक्त आने पर
- 25:59उसकी जिम्मेदारी से भी सुबह-दोष हो जो एक
- 26:02दिन में मैहर से खाने लगा की आखिर तुम
- 26:04अपने घर का पता वगैरा क्यों नहीं बताती हो
- 26:06मैं वहां जाकर साड़ी सूरते हल्का अंदाज़
- 26:09लगा लूंगा ताकि तुम्हें अपने घर जान में
- 26:11कोई परेशानी ना हो वह मेरी बात सुनकर
- 26:14नाराज नजर आने लगी और मुझे खाने लगी नूर
- 26:18मोहम्मद साहब लगता है आप मेरे यहां रहने
- 26:20से बहुत टांग है आपको मेरे लिए परेशान
- 26:22होने की जरूर नहीं है एक दिन मैं खुद यह
- 26:25घर छोड़कर चली जाऊंगी क्योंकि मुझे पता है
- 26:28की मेरा यह ठिकाना आरती है और एक ना एक
- 26:31दिन मुझे यहां से जाना होगा उसकी यह बात
- 26:34सुनकर मैं दिल ही दिल में शर्मिंदा सा हो
- 26:36गया बेशक हमदर्दी के चक्कर में मैंने उसके
- 26:38दिल को दुख दिया था फिर मैं उसे खाने लगा
- 26:41की तुम मुझे गलत समझ रही हो मेरा ऐसा कोई
- 26:44मकसद नहीं था तुम जब तक इस घर में रहना
- 26:47चाहती हो रहो मुझे तुम्हारे यहां होने से
- 26:49कोई परेशानी नहीं है फिर मैंने उसके बड़े
- 26:52में कुछ भी पता लगाने से गुर्ज ही किया
- 26:55जिंदगी अब फर सुकून गुर्जर रही थी खुला
- 26:58अपनी शादी के बाद अपनी जिंदगी नहायत अच्छी
- 27:00बसर कर रही थी फिर एक दिन वो हुआ जिसकी
- 27:04मुझे उम्मीद नहीं थी जब वो लड़की मैहर
- 27:06अम्मा या मुझे बिना बताए घर छोड़कर चले गए
- 27:09अम्मा और बिसमावस के जान से उदास थे और
- 27:13अम्मा सोने लगी की देखो हमने उसे लड़की को
- 27:16इतने दिन रखा लेकिन वह हमें बता करना ए गई
- 27:19की कहां जा रही है मैं भी उसके यू गायब
- 27:21होने से हैरान था काफी दिन तक अम्मा उसके
- 27:24जान से उदास रही मैं भी सोच रहा था की
- 27:27उसका खानदान तो पूरा कत्ल हो गया था तो
- 27:30आखिर वह कहां गई होगी फिर एक दिन मेरे लिए
- 27:33बाहर साबित हुआ क्योंकि जब एक सरकारी
- 27:35नौकरी का जी पर मैंने काफी दिन पहले
- 27:38दरखास्त दी थी वह नौकरी की दरख्वास्त मेरी
- 27:41काबुल कर ली गई और इस नौकरी लेटर मेरी
- 27:44दहलीज पर आया था कॉलेज में किसी लेक्चर की
- 27:47नौकरी थी जिसके लिए मुझे बुलाया गया था
- 27:49अम्मा बेटा आशा खुश थी और मैं भी खुश था
- 27:52इतने सालों की कोशिश करने के बाद आखिरकार
- 27:56मुझे एक सरकारी नौकरी मिल गई थी अब मुझे
- 27:59इस नौकरी की वजह से शहर जाना था लेकिन मैं
- 28:02इस बात पर भी फिक्रमण था की अम्मा और
- 28:04बीम्स मेरे यूं जान के बाद अकेली कैसे
- 28:07रहेगी अम्मा मुझे हौसला देने लगी और खाने
- 28:10लगी की हमारी वजह से तुम अपनी नौकरी
- 28:12हरगिज़ ना गवाना अगर मुनासिब नौकरी हुई तो
- 28:16हम भी शहर में ही शिफ्ट हो जाएंगे
- 28:17तुम्हारे साथ अब मैं अम्मा की डॉन दुआएं
- 28:20लेट शहर रुखसत हो गया शहर जाकर मेरी नौकरी
- 28:24पक्की हो गई थी तनख्वाह भी अच्छी खासी थी
- 28:27और इस नौकरी के साथ मुझे एक गाड़ी भी दी
- 28:29गई थी अब मैं बेतहाशा खुश था और अम्मा को
- 28:33जल्द जल्द जाकर यह खुशखबरी सुनाना चाहता
- 28:36था फिर जैसे ही मुझे पहले तनख्वाह मिली
- 28:38मैं फौरन गांव रावण हो गया घर पहुंच कर
- 28:42मैंने पुरी तनख्वाह के हाथ पर रखती जिसे
- 28:45देखकर वह बहुत खुश थी फिर मैंने अम्मा को
- 28:48कहा की आप और बीम्स मेरे साथ शहर चलें
- 28:50अम्मा गांव जान से ज्यादा खुश ना थी लेकिन
- 28:54मैंने अम्मा को राजी कर लिया था यू उसे
- 28:57गांव में आज हमारी आखरी रात थी मैंने
- 28:59मस्जिद जाकर गांव के लोगों से मुलाकात की
- 29:01गांव के सभी लोग मेरे यूं गांव छोड़ने पर
- 29:04बहुत अफसोड़ा थे और मुझे का रहे थे की जी
- 29:07तरह आपके वालिद साहब को गांव के लोग आज तक
- 29:10भूल ना पे इस तरह आपकी इज्जत भी हमारे
- 29:13दिलों में ऐसे ही हमेशा कायम रहेगी बेशक
- 29:17वह गांव छोड़ने से मैं भी बहुत उदास था
- 29:19लेकिन मैं सोच रहा था की मेरी अच्छी नौकरी
- 29:22ग चुकी थी इसलिए मेरे ख्वाहिश थी की अम्मा
- 29:25के साथ जाकर मैं जल्द ही उमरा भी अदा कर
- 29:28सबसे मिलते मुझे काफी डर हो चुकी थी अब
- 29:33मैं रात के 11:00 अपने घर की तरफ राव दवा
- 29:35था तभी रास्ते में मुझे दफटन के पास एक
- 29:39सैया सा खड़ा नजर आया दूर से वो सैया ग
- 29:42रहा था लेकिन जैसे-जैसे मैं करीब गया तो
- 29:45मैं हैरान र गया की वहां पर एक लड़की खड़ी
- 29:47थी जो मुकम्मल नकाब में थी उसकी आंखें
- 29:51मुझे अच्छी अच्छी थी ग रही थी फिर मैंने
- 29:54उसे नकाब में भी पहचान लिया क्योंकि वो
- 29:56लड़की मैहर थी जो एक तरफ के नीचे खामोशी
- 30:00से खड़ी थी मैं उसे देखकर हैरान था फिर
- 30:03मैं उसे खाने लगा की तुम यूं बिना बताए
- 30:06कहां गायब हो गई थी और अभी तक भटकती फिर
- 30:09रही हो जब तुम्हारे पास कोई ठिकाना नहीं
- 30:11था रहने को तो तुम्हें क्या जरूर थी घर से
- 30:14जान की मेरे सवाल पर वह खाने लगी की मौलवी
- 30:17साहब मैंने तो पहले ही आपको बता दिया था
- 30:19की मेरा यहां राज ठिकाना है अब मैं अपने
- 30:22असली ठिकाने पर पहुंच चुकी हूं मैं उसकी
- 30:25बात पर हैरान था फिर उसे खाने लगा की कहां
- 30:28है तुम्हारा ठिकाना क्या दूसरे गांव से
- 30:31तुम्हारा ताल्लुक था मेरी बात सुनकर वह
- 30:33मुस्कुराने लगी और मुझे खाने लगी की नहीं
- 30:36नूर मोहम्मद साहब मेरा ताल्लुक आपकी
- 30:39दुनिया से ही नहीं है बल्कि
- 30:42उसके बाद सुनकर मैं हैरान था फिर दो कम
- 30:46उससे पीछे है गया मुझे यूं डरते देख कर वो
- 30:49खाने लगी की मौलवी साहब मुझे डरने की कोई
- 30:51जरूर नहीं है मैं आपको कोई नुकसान पहचाने
- 30:54की नित से आपके सामने नहीं आई हूं और ना
- 30:57ही पहले मैं आपकी जिंदगी में किसी बुरे
- 30:59मकसद से आई थी बल्कि मेरा एक निक मकसद था
- 31:02जिसके लिए मैंने आपका इंतखाब किया था
- 31:05दरअसल मेरा ताल्लुक एक हिंदू जन्नत के
- 31:08काबिले सा था लेकिन मुझे अपने हिंदू जन्नत
- 31:11के काबिले का रस्मों रिवाज निहायत ना
- 31:14पसंदीदा लगता था क्योंकि वह अपने मकसद को
- 31:17हासिल करने के लिए किसी का कत्ल और गलत
- 31:19करने से भी गुर्ज नहीं करते थे बल्कि अगर
- 31:23इसके बारात मैं किसी मुसलमान जन्नत को
- 31:25देखते तो ख्वाहिश करती के काश मैं एक
- 31:28हिंदू जन्नत के काबिले से होने के बजे एक
- 31:31मुसलमान जन्नत होती मेरी यही सोच मुझे
- 31:35मटका कर यहां ले आई थी मैंने सुन रखा था
- 31:37की जो इंसान होते हैं उनकी नित किसी को
- 31:40देखकर भी नहीं फिसलते का यहां पर वह मौलवी
- 31:43जो मस्जिद या मद्रास से बढ़ते
- 31:49को मैंने खबर भी ना होने दी थी की मैं
- 31:53उनसे अलग तलक एक रख पर अपनी जिंदगी गुर्जर
- 31:55रही हूं मैं इस तरह पर र रही थी जब मैंने
- 31:59आपको यहां से आते जाते देखा हां आपके
- 32:02कपड़ों से एक मसूर को खुशबू उठाती थी जो
- 32:05मुझे नेहयात मुदस्सिर करती थी मैं कई दिन
- 32:08तक उसे खुशबू के चेहरे असर रहती थी फिर
- 32:11मैंने सोचा की आपको आजमाया जाए की आखिर
- 32:14आपका इनाम कमजोर है या नहीं यूं ही कभी
- 32:17मैं आपके पीछे चला करती और कभी सोते हुए
- 32:19आपको टांग करती लेकिन मैं यह देख कर हैरान
- 32:23थी की आप मेरी हरकतों से परेशान ना होते
- 32:25थे और ना ही कुछ अजीबो गरीब महसूस करते
- 32:29बल्कि फौरन कुछ ना कुछ पढ़ना शुरू कर देते
- 32:32थे आपकी इतनी पूरा सर शख्सियत से मुतासिर
- 32:35होकर मैंने मुसलमान होने का फैसला किया और
- 32:39मैं इंसानी रूप धार कर आपके घर में ए गई
- 32:42यह सुनकर खुशी होगी की मैंने आपकी बहन खोल
- 32:45से कलम पढ़ लिया था आप लोगों को यह नहीं
- 32:48पता था की मेरा ताल्लुक एक हिंदू जन्नत के
- 32:50काबिले से था इसलिए मैंने आपकी बहन से कहा
- 32:53की मैं कुरान शरीफ पढ़ना चाहती हूं मेरी
- 32:56यह बात सुनकर वो निहायत खुश हुई फिर वो
- 32:59मुझे कुरान पाक पढ़ना सीखने लगी और काफी
- 33:02हद तक मैं उससे पढ़ना सिख चुकी थी मुझे
- 33:05उसे घर में रहते हुए काफी दिन हो गए थे
- 33:07लेकिन आपने एक दफा भी मेरे ऊपर कोई बुरी
- 33:11नजर ना डाली और आपके किरदार से मैं निहायत
- 33:14मुतासिर थी जब आपकी बहन की शादी होने वाली
- 33:17थी लेकिन आपके पास इतनी रकम ना थी की आप
- 33:20उसकी शादी कर सकते हैं इसलिए मैंने आपकी
- 33:23मदद का सोचा और वह निहायत कीमती कंगन जो
- 33:26मुझे तोहफे में अपने काबिले की जन्नत की
- 33:28तरफ से मिले थे वह मैंने आपको दे दिए
- 33:31जितने दिन मैं आप लोगों के घर पर रही आप
- 33:34लोगों ने मेरा भरपूर खयाल रखा मैं जी मकसद
- 33:37के लिए आपके घर में आई थी मेरा मकसद पूरा
- 33:40हो चुका था इसीलिए मैंने वहां से जान सोचा
- 33:43और फिर चुपचाप एक दिन किसी को भी बिना
- 33:46बताए मैं वहां से चली आई मैं वहां से
- 33:49निकाल तो आई थी लेकिन अब मैं सोच रही थी
- 33:52की अगर मैं वापस अपने कभी लिए की तरफ गई
- 33:54तो अगर उन्हें यह पता चल गया की मैं अपना
- 33:57धर्म बादल चुकी हूं तो शायद वो अपनी
- 33:59शैतानी तख्तो से मुझे मार ही डालें अपनी
- 34:03जान का खतरा महसूस करते हुए भी मैं अपने
- 34:05काबिले में चली गई किसी को यह मालूम ना था
- 34:08की मैं अपना हिंदू धर्म बदलकर मुसलमान
- 34:11जनजाति हो चुकी हूं जब कभी लेकर जन्नत ने
- 34:15मुझे देखा की मैं वापस अपने काबिले में ए
- 34:17चुकी हूं तो वह निहायत खुश थे मेरा खूब आओ
- 34:20भगत कर रहे थे लेकिन मैं बहुत खूब ज्यादा
- 34:23भी थी फिर दूसरे दिन उन्होंने मुझे अपने
- 34:26साथ पूजा करने के लिए बुलाया लेकिन मैंने
- 34:29उन्हें साफ माना कर दिया वह सब हैरान हो
- 34:32रहे थे की दामिनी हमारे साथ पूजा में
- 34:34क्यों नहीं शरीफ हो रही
- 34:36मैंने अपना दिल मजबूत किया और उन सब को
- 34:40बता दिया की अब मैं हिंदू नहीं रही
- 34:42बल्कि मुसलमान जन्नत से मुतासिर होकर मैं
- 34:45भी मुसलमान हो चुकी हूं यह सुना था की वह
- 34:48सारे शैतानी जन्नत आंख बागला हो गए और
- 34:52तलवारे निकाल कर मेरी तरफ लग के जब मैंने
- 34:55उन सबको अपने ऊपर हेवी देखा तो बड़ी
- 34:57मुश्किल से वहां से जान बचाकर भाग गई यूं
- 35:00ही भागते भागते जंगल में भटकती हुए मेरा
- 35:04सामना एक मुसलमान जन्नत से हुआ जब उसने
- 35:07मेरी बुरी हालात अच्छी तो मुझे पूछने लगा
- 35:09की क्या वजह है तुम इतनी परेशान नजर आई हो
- 35:13मैंने उसे सब कुछ बता दिया और मेरी साड़ी
- 35:16बातें सुनकर वह मेरी तारीफ करने लगा और
- 35:19मुझे खाने लगा की मैं भी एक मुसलमान जन्नत
- 35:21हूं और तुम्हें तहफ्फूस पर हम करना मेरा
- 35:25अमलीन फर्ज है तुम हमारे मुसलमान काबिले
- 35:28में शामिल होकर मुसलमान जनजाति बन शक्ति
- 35:30हो हम इतने ताकतवर हैं की वह हिंदू जन्नत
- 35:34तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकेंगे
- 35:37तुम हमारे पास बिल्कुल महफूज रहोगी उनकी
- 35:40यह बात सुनकर मैं निहायत खुश थी फिर मैं
- 35:43मुसलमान जन्नत के काबिले तक पहुंच गए
- 35:46जितना उनके बड़े में सुना था वह मेरी सोच
- 35:49से भी ज्यादा अच्छे थे उन लोगों का इबादत
- 35:52करने का तरीका कुरान पढ़ने का अंदाज मुझे
- 35:55बेहद पसंद था फिर मैं तुम्हारे बड़े में
- 35:58सोचती क्योंकि तुम भी बहुत निक तबीयत के
- 36:01मलिक थे तुम्हारे वजूद से उठने वाली खुशबू
- 36:04कई दिन तक मुझे अपने महसूस होती थी मुझे
- 36:08पता था की तुम किसी अच्छे रोजगार की तलाश
- 36:11में हो इसीलिए मैं जब भी इबादत करती तो
- 36:14तुम्हारे लिए कसूसी तोर पर दुआ करती थी और
- 36:17आज तुम्हें यूं कामयाब देखकर मैं बेहद खुश
- 36:20हूं मैं चाहती हूं की तुम्हें जिंदगी में
- 36:23वह सब कुछ मिले जो तुम्हारे हुआ है
- 36:26सब कुछ बता रही थी और मैं हैरत से खड़ा
- 36:30वहां उसकी बातें सुन रहा था मुझे यकीन
- 36:33नहीं ए रहा था की मेरे साथ यह सब कुछ हो
- 36:35चुका है फिर उसने मुझे विदाई तोर पर खुदा
- 36:38हाफिज कहा और वहां से गायब हो गई अब मैं
- 36:41हैरान सा घर वापस लोट रहा था बेशक हमारे
- 36:45हिंदू जन्नत भी होते हैं और मुसलमान भी यह
- 36:50अलग बात है की मुसलमान जन्नत कभी भी किसी
- 36:52को नुकसान नहीं पहुंचने लेकिन हिंदू जन्नत
- 36:55अपनी शैतानी तख्तो में इजाफा करने के लिए
- 36:58मुख्तलिफ हर ब्याजमाते हैं लेकिन जिनज़ादी
- 37:01मैहर मुसलमान बनकर बहुत अजीब मर्तबे पर
- 37:04पहुंच चुकी थी आज इस गांव में मेरी आखरी
- 37:07रात थी फिर मुझे हमेशा के लिए शहर में बस
- 37:10जाना था आज की रात मेरे ऊपर बहुत दिन का
- 37:13शफात हुए थे मैं सोच भी नहीं सकता था की
- 37:16वह जिन जाति मेरे हक में यूं दुआ भी करेगी
- 37:18फिर दूसरी सुबह में और बीम्स को लिए शहर
- 37:21रावण हो गया मेरी जिंदगी पर सखूं थी अम्मा
- 37:25का शहर में आकर दिल कुछ उदास था शायद वो
- 37:28इतने सालों से गांव में र रही थी तो इस
- 37:31वजह से शहर की जिंदगी को अपने में उन्हें
- 37:34दुश्वरी पेस ए रही थी लेकिन मैंने वहां से
- 37:37वादा किया की जैसे ही कॉलेज से छुट्टियां
- 37:39होगी तो हम दोनों उम्र करने चलेंगे लेकिन
- 37:42अम्मा छह रही थी की उम्र करने से पहले
- 37:44बीम्स की जिम्मेदारी अदा हो जाए तो फिर ही
- 37:47वो उम्र करने जाएगी अब मैं बीम्स की शादी
- 37:50शहर में करना चाहता था क्योंकि मैं सोच
- 37:53रहा था की एक बहन गांव में है तो दूसरी
- 37:55बहन शहर में भी हनी चाहिए ताकि आना जाना
- 37:58लगा रहे हाल के खाल को जब पता चला की हम
- 38:02शहर जा रहे हैं तो वह बहुत उदास थी यह
- 38:05सोचकर की मैं अब उससे मिलने के लिए कई-कई
- 38:07दिन बाद आया करूंगा लेकिन मैंने उसे
- 38:10तसल्ली दी और कहा की तुम उदास मत हो मैं
- 38:13तुमसे मिलने के लिए हर महीने आया करूंगा
- 38:36इकरार कर रहा था की अगले महीने हम उम्र
- 38:44अदा करने सऊदी अब पहुंचकर मैंने हयात खुश
- 38:48था की अल्लाह ने मेरी किस्मत में भी
- 38:50कामयाबी लिखी थी और आज मैं दिन और दुनिया
- 38:53दोनों को साथ लेकर चल रहा था बहुत जल्द ही
- 38:56अब उम्र की अदायगी करने के बाद लौटाए कुछ
- 39:00दोनों के बाद मेरे कॉलेज की तरफ से एक
- 39:01बहुत बड़ी दावत राखी गई जिसमें बड़े-बड़े
- 39:04लेक्चर और मुफकरीन को बुलाया गया था उसे
- 39:08दावत में शहर के बड़े बड़े बिजनेसमैन भी
- 39:10आए हुए थे अम्मा उसे दावत में जान से साफ
- 39:13इनकार कर रही थी लेकिन मेरे इसरार पर वह
- 39:16भी मेरे साथ चली है और फिर इस दावत में
- 39:20शरीफ थी तभी मेरी नजर अचानक उठी और खातून
- 39:24पर जाकर रुक गई वह खातून मुझे जानी पहचानी
- 39:27सी ग रही थी उसने मुकम्मल हिजाब लिया हुआ
- 39:30था लेकिन उसे जवाब में से खातून का पूरा
- 39:33चेहरा नजर ए रहा था जैसे ही वह पलटी तो यह
- 39:37देखकर चौक गया की वो कोई और नहीं बल्कि
- 39:40मेरे साथ यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली शान
- 39:42से ही थी मैं उसे यूं ही जवाब में देखकर
- 39:45तक गया भला कहां वो मॉडर्न सी लड़की और
- 39:48कहां ये हिजाब में लिपटी खातून बेशक वो
- 39:52बिल्कुल भी पहचाना नहीं जा रही थी इतने
- 39:54में उसकी नजर भी मुझमें पर पद चुकी थी अब
- 39:57वो मुझे गौर से देख रही थी शायद पहचान की
- 40:00कोशिश कर रही थी फिर वह धीरे से मेरे पास
- 40:03आई और मुझे खाने लगी की नूर मोहम्मद आप
- 40:06यहां मैंने आपको पहचान लिया है आपने मुझे
- 40:08पहचाना मैंने उसे देख कर कहा की क्यों
- 40:11नहीं शान से बीबी मैंने तो आपको देखते ही
- 40:14पहचान लिया था आपके अंदर यह तब्दीली देखकर
- 40:17मैं बहुत खुश हूं और हैरत ज्यादा भी फिर
- 40:20वह मेरी तरफ देख कर मुस्कुराए और मुझे
- 40:22खाने लगी की 3 साल पहले मैं डैडी के साथ
- 40:25उम्र भर गई थी तो बस वहां जाकर मेरा दिल
- 40:28अचानक बादल गया था और मैं अपनी कैफियत समझ
- 40:31नहीं का रही थी
- 40:32अजीबोगरीब कपड़े पहनना मुझे बड़ा लगे लगा
- 40:35फिर मैंने यह साड़ी बातें एक अलीमुद्दीन
- 40:38को बताएं तो वो मुझे खाने लगा की अल्लाह
- 40:41ने आपको हिदायत का रास्ता दिखाए है इसीलिए
- 40:44आप दिन की तरफ गांव जान हो रही है यह
- 40:47बातें सुनकर मैं बहुत खुश थी और जल्दी से
- 40:49मैंने मुकम्मल हिजाब लेना शुरू कर दिया
- 40:52मैं शान से के मुंह से ये साड़ी बातें
- 40:54सुनकर हैरान था बेशक अच्छी तब्दीली सबको
- 40:58ही अच्छी लगती है फिर मैंने उसे अपनी
- 41:00अम्मा से मिलवाया जब अम्मा ने उसे देखा तो
- 41:03उन्हें वो निहायत अच्छी लगी और वह घर आकर
- 41:06मुझे इसरार करने लगी की मैंने इस लड़की को
- 41:08तुम्हारी दुल्हन बनाना है जो मुझे उसे दिन
- 41:11दावत पर मिली थी फिर मैंने अम्मा के बेहद
- 41:14इसरार पर बड़ी मुश्किल से शानदार का पता
- 41:16निकाला और अम्मा को उसके घर रिश्ते के लिए
- 41:19भेज दिया इतना तो मैं जानता था की आज मेरी
- 41:22हैसियत इतनी थी किसान से के डैडी कभी भी
- 41:25मेरे रिश्ते से इनकार नहीं कर सकते
- 41:49नाजरीन अगर आपको आज की यह कहानी अच्छी लगी
- 41:52हो तो वीडियो को लाइक जरूर करें अगर आपको
- 41:55ऐसी दहशत नाक दिल को जकड़ देने वाली कहानी
- 41:58पसंद है तो ऐसी एक कहानी रोजाना सुनने के
- 42:01लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें इजाजत
- 42:04चाहते हैं अल्लाह हाफिज
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