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NAFS | Nafs-e-Ammara | Nafs-e-Lawwama | Nafs-e-Mutma'inna #IshaqueQureshi — Transcript

by Ishaque Qureshi · 3,662 words · 458 segments · language hi · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00अगर मैं आपसे पूछूं इस वक्त आपके अंदर कौन
  2. 0:02बोल रहा है? आप या कोई और? क्योंकि हर
  3. 0:05इंसान के अंदर एक ऐसी आवाज रहती है जो उसे
  4. 0:08उसी के खिलाफ खड़ा कर देती है। और जब तक
  5. 0:10आप उस आवाज की असल पहचान नहीं करते तब तक
  6. 0:13आप शायद कभी भी खुद को नहीं जान पाएंगे।
  7. 0:16सोचिए अगर आपका सबसे बड़ा दुश्मन कोई बाहर
  8. 0:19का इंसान नहीं बल्कि आपके अंदर बैठा हुआ
  9. 0:22हो। एक ऐसी ताकत जो हर रोज आपके फैसले
  10. 0:24बदलती है, आपकी सोच बदलती है और कभी-कभी
  11. 0:28आपकी पूरी जिंदगी का रुख बदल देती है।
  12. 0:30न्यूरोसाइंस कहती है कि आपके डिसीजंस
  13. 0:33ब्रेन के सर्किट्स बनाते हैं। साइकोलॉजी
  14. 0:35कहती है कि सबकॉन्शियस माइंड कंट्रोल करता
  15. 0:38है और फिलॉसफी कहती है कि यह डिजायर्स और
  16. 0:41रीजन की जंग है। सवाल सिर्फ इतना है क्या
  17. 0:44हमने कभी उसे समझने की कोशिश की? हर
  18. 0:47गुनाह, हर एडिक्शन, हर गुस्सा, हर हसद और
  19. 0:50हर वो फैसला जिसके बाद में अफसोस होता है,
  20. 0:53उसके पीछे एक ही ताकत का हाथ होता है।
  21. 0:56लेकिन अफसोस उस ताकत को आप देख नहीं सकते।
  22. 0:59आप सिर्फ उसके असरात महसूस करते हैं। चलिए
  23. 1:02एक एक्सपेरिमेंट करते हैं। अगले 10
  24. 1:04सेकंड्स के लिए किसी भी चीज के बारे में
  25. 1:06मत सोचिए। सिर्फ खामोश रहिए और देखिए कि
  26. 1:09कितनी आवाजें आपके अंदर उठती हैं। तो
  27. 1:12किसने उन्हें भेजा और कौन डिसाइड करता है
  28. 1:14कि उनमें से किस आवाज को आप फॉलो करेंगे।
  29. 1:17तो हिस्ट्री की हर सिविलाइजेशन ने एक ही
  30. 1:20सवाल का जवाब ढूंढने की कोशिश की है। मैं
  31. 1:22कौन हूं? लेकिन शायद इससे भी ज्यादा
  32. 1:25इंपॉर्टेंट सवाल यह है मेरे अंदर जो मुझे
  33. 1:28कंट्रोल कर रहा है वो कौन है? हर एंपायर
  34. 1:31गिरने से पहले अंदर से टूटता है। हर
  35. 1:34सोसाइटी बर्बाद होने से पहले अपनी
  36. 1:36वैल्यू्यूज हार देती है। और हर इंसान अपनी
  37. 1:39जिंदगी की सबसे बड़ी हार तब मानता है जब
  38. 1:41वो अपने ही नफ्स के सामने हार जाता है। तो
  39. 1:44यह वीडियो आपके बारे में है। आपके ब्रेन
  40. 1:47के बारे में नहीं आपके दिल के बारे में भी
  41. 1:49नहीं बल्कि उस इनविज़िबल फोर्स के बारे में
  42. 1:52है जो हर रोज आपके फैसलों को शेप देती है।
  43. 1:55साइंस ने इसे अलग नाम दिया। साइकोलॉजी ने
  44. 1:58अलग, प्लेटो ने अलग, फ्रॉयड ने अलग। लेकिन
  45. 2:01कुरान ने 1400 साल पहले सिर्फ इसकी पहचान
  46. 2:04ही नहीं बताई बल्कि इसे हराने का तरीका भी
  47. 2:06बताया। अगर आप इस एक कांसेप्ट को समझ गए
  48. 2:10तो मुमकिन है कि आप अपनी पूरी जिंदगी को
  49. 2:12एक नए नजरिए से देखना शुरू कर दें। जब भी
  50. 2:15आप कोई बड़ा या छोटा फैसला लेने वाले होते
  51. 2:17हैं तो अचानक आपके अंदर से दो बिल्कुल
  52. 2:20मुख्तलिफ आवाजें आती हैं। एक तरफ से एक
  53. 2:22ठहरी हुई सब्र वाली आवाज आती है जो कहती
  54. 2:25है यह गलत है ऐसा मत करो इसका अंजाम बुरा
  55. 2:28होगा और ठीक उसी वक्त एक तेज और हावी होने
  56. 2:32वाली आवाज उस पर दबाव [संगीत] डालती है कि
  57. 2:34कुछ नहीं होता बस एक बार कर ले आज जी ले
  58. 2:37कल किसने देखा है तो यह दो आवाजें कोई वहम
  59. 2:40नहीं है। यह इंसानी वजूद की सबसे बड़ी
  60. 2:43हकीकत है। हम सब जानते हैं कि हमारे लिए
  61. 2:46सही क्या है। लेकिन फिर भी एक ऐसी अनजानी
  62. 2:48कशिश होती है जो हमें गलत की तरफ खींचती
  63. 2:51है। आखिर यह दूसरी आवाज कहां से आती है जो
  64. 2:54हमें हमारे ही खिलाफ भड़काती है। दुनिया
  65. 2:56का हर इंसान चाहे वो किसी भी मजहब, कल्चर
  66. 2:59या बैकग्राउंड से ताल्लुक रखता हो रोजाना
  67. 3:02इस इनर कॉन्फ्लिक्ट से गुजरता है। साइंस
  68. 3:04कहती है कि यह हमारे ब्रेन के दो अलग-अलग
  69. 3:07हिस्सों की आपस की लड़ाई है। एक तरफ हमारा
  70. 3:09एमिगडला है जो इंसान के बेसिक डिजायर्स,
  71. 3:12सर्वाइवल इंस्टिंग्स और इमोशंस को कंट्रोल
  72. 3:15करता है और दूसरी तरफ प्रेफरेंटल
  73. 3:18कॉर्टेक्स है जो लॉजिक, फ्यूचर, प्लानिंग
  74. 3:20और हमारे कंट्रोल का सेंटर है। जब भी आपकी
  75. 3:23बेसिक डिजायर यानी ख्वाहिश और आपका लॉजिक
  76. 3:27जब आपस में टकराते हैं तो आपका दिमाग एक
  77. 3:29जंग का मैदान बन जाता है। दूसरी तरफ
  78. 3:32साइकोलॉजी की फील्ड इसे अलग-अलग नजरिए से
  79. 3:35देखती है। सदियों से फिलॉसोफर्स और मॉडर्न
  80. 3:38साइको एनालिसिस इस इनविज़िबल फोर्स को
  81. 3:40डिफाइन करने में लगे रहे। सिगमन फ्रॉयड
  82. 3:43जैसे एक्सपर्ट इसे सबकॉन्शियस माइंड,
  83. 3:45आईडी, ईगो और सुपर ईगो का नाम देते हैं।
  84. 3:49वह कहते हैं कि हमारे अंदर एक ऐसी हिडन
  85. 3:51फोर्स है जो हमेशा आउट ऑफ कंट्रोल होना
  86. 3:54चाहती है। लेकिन साइंस और फिलॉसफी सिर्फ
  87. 3:56इस बीमारी या स्ट्रक्चर का नाम बता सकती
  88. 3:59है। वो इसका मुकम्मल फ्रेमवर्क और इसे
  89. 4:01कंट्रोल करने का अल्टीमेट स्पिरिचुअल
  90. 4:04सॉल्यूशन नहीं दे सकती। लेकिन अगर हम 1400
  91. 4:07साल पीछे जाएं तो इस्लामिक स्पिरिचुअलिटी
  92. 4:10और कुरान ने इस अंदर की आवाज, इस हिडन
  93. 4:12फोर्स और इस अंदर की जंग को एक बहुत ही
  94. 4:15गहरा और अल्टीमेट फ्रेमवर्क दिया है।
  95. 4:18इस्लाम इस चीज को सिर्फ एक बायोलॉजिकल
  96. 4:20फंक्शन नहीं बल्कि इंसानियत की रूहानियत
  97. 4:23का सबसे बड़ा इम्तिहान बताता है। और
  98. 4:25इस्लाम ने इस हावी होने वाली ताकत को एक
  99. 4:27नाम दिया है
  100. 4:32नफ्स। तो सवाल यह पैदा होता है कि क्या
  101. 4:35हमारा नफ्स ही हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है?
  102. 4:37या अगर हम अपनी मेहनत और समझ से इस पर
  103. 4:40कंट्रोल कर लें तो यह हमारी सबसे बड़ी
  104. 4:42ताकत बन सकता है। आखिर नफ्स की इन तीन
  105. 4:45अलग-अलग स्टेजेस यानी नफ्स अमारा, नफ्स
  106. 4:48लवामा और नफ्स-ए मुतम्ना का असल मतलब क्या
  107. 4:52है? अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह व
  108. 4:55बरकातहू। इंसान के अंदर चल रही इस
  109. 4:57अजीबोगरीब जंग के रियल मीनिंग को समझने के
  110. 5:00लिए हमें सबसे पहले रिलीजन से थोड़ा हटकर
  111. 5:03अपनी बायोलॉजी और न्यूरो साइंस की तरफ
  112. 5:05देखना होगा। मॉडर्न साइंस हमें बताती है
  113. 5:07कि इंसान का दिमाग कोई एक सिंगल सिंपल
  114. 5:10यूनिट नहीं है। यह हिस्ट्री और एवोल्यूशन
  115. 5:12की बहुत सी अलग-अलग लेयर से मिलकर बना है।
  116. 5:15दिमाग का जो सबसे अंदरूनी हिस्सा है जिसे
  117. 5:17आम जबान में रिप्टेलियन ब्रेन या एमगडाला
  118. 5:20कहा जाता है, उसकी जिम्मेदारी सिर्फ और
  119. 5:22सिर्फ सर्वाइवल है। वह प्योरली इंस्टेंट
  120. 5:25ग्रेटिफिकेशन यानी तुरंत मिलने वाले मजे
  121. 5:28और सेटिस्फेक्शन पर काम करता है। उसे इस
  122. 5:30बात का कोई मतलब नहीं क्या सही है और क्या
  123. 5:33गलत। जब उसे भूख लगती है तो उसे खाना
  124. 5:36चाहिए। जब उसे गुस्सा आता है तो उसे बदला
  125. 5:38लेना होता है। यह हिस्सा लॉजिक नहीं
  126. 5:40समझता। कॉन्सिक्वेंसेस नहीं देखता। इसे बस
  127. 5:43अपनी ख्वाहिश हर हाल में पूरी करनी होती
  128. 5:46है। अगर हम इसे साइंटिफिक लैंग्वेज से
  129. 5:48हटकर देखें तो दरअसल यही हमारा बायोलॉजिकल
  130. 5:51नफ्स है। लेकिन इंसान सिर्फ जानवर तो नहीं
  131. 5:54है। फिर आता है दिमाग का वो हिस्सा जो
  132. 5:57हमें इस जमीन पर मौजूद बाकी तमाम क्रिएशन
  133. 6:00से बिल्कुल अलग और सुपीरियर बनाता है।
  134. 6:02हमारा प्रेफरेंटल कॉर्टेक्स। यह हमारे
  135. 6:05दिमाग के आगे का हिस्सा है जो मोरालिटी,
  136. 6:08एथिक्स, फ्यूचर प्लानिंग और सही गलत की
  137. 6:10पहचान करता है। तो जब आपका वह अंदरूनी
  138. 6:13रेप्टेलियन ब्रेंस आपसे कहता है कि मुझे
  139. 6:16गुस्सा आ रहा है सामने वाले के एक रख दो
  140. 6:18या मुझे वह चीज बस चाहिए चाहे उसे पाने का
  141. 6:21तरीका बिल्कुल गलत क्यों ना हो। तो ऐसे
  142. 6:23वक्त में यह प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स एक
  143. 6:26मजबूत ब्रेक का काम करता है। यह रोकते हुए
  144. 6:28कहता है, नहीं, इसके नतीजे, इसके
  145. 6:31कॉन्सिक्वेंसेस बुरे होंगे। यह तुम्हारे
  146. 6:34उसूलों के खिलाफ है। अब लॉजिकली जरा ठंडे
  147. 6:36दिमाग से सोचिए। अगर इंसान सिर्फ और सिर्फ
  148. 6:39एक फिजिकल बॉडी का नाम है तो एक ही जिस्म
  149. 6:43के अंदर से यह दो बिल्कुल अलग आवाजें कहां
  150. 6:46से आ रही हैं? यह ड्यूल नेचर यह आपस का
  151. 6:49कॉन्फ्लिक्ट खुद इस बात का सबसे बड़ा सबूत
  152. 6:51है कि हमारे वजूद के अंदर एक प्रिमिटिव
  153. 6:54वाइल्ड ड्राइव है जो हमेशा एक्टिव और आउट
  154. 6:57ऑफ कंट्रोल होने की कोशिश में रहता है और
  155. 6:59यही नफ्स की सबसे बेसिक और इनिशियल
  156. 7:02डेफिनेशन है लेकिन ये डिबेट सिर्फ आज की
  157. 7:05मॉडर्न साइंस तक लिमिटेड नहीं है। सदियों
  158. 7:07से इस दुनिया के बड़े-बड़े स्कॉलर्स और
  159. 7:10थिंकर्स इस कांसेप्ट से टकराते रहे हैं।
  160. 7:12एंशिएंट ग्रीस की हिस्ट्री में जाएं तो
  161. 7:14वहां का मशहूर फिलॉसोफर प्लेटो इस इंसानी
  162. 7:17फितरत को बहुत ही खूबसूरत अंदाज में बयान
  163. 7:20करता है। उसने एक कांसेप्ट पेश किया जिसे
  164. 7:22द चेरियट एलोरी कहा जाता है। प्लेटो के
  165. 7:25मुताबिक इंसान का सोल यानी उसकी रूह एक
  166. 7:28चैरियट यानी एक बग्गी की तरह है जिसे दो
  167. 7:31ताकतवर घोड़े खींच रहे हैं। उनमें से एक
  168. 7:33घोड़ा बहुत नोबल काम और अच्छा है जो
  169. 7:36डिसिप्लिन को मानता है। लेकिन जो दूसरा
  170. 7:39घोड़ा है वो बहुत डार्क वाइल्ड और
  171. 7:41रिबेलियस यानी बागी है। वो अपनी मर्जी
  172. 7:44चलाना चाहता है। इन दोनों घोड़ों के बीच
  173. 7:47खड़ा जो सारथी है या ड्राइवर है वो इंसानी
  174. 7:50अकल है। उस ड्राइवर की पूरी जिंदगी का
  175. 7:53मकसद यही है कि वो उन दोनों घोड़ों को
  176. 7:55बैलेंस करके अपने सफर पर आगे बढ़े। अगर
  177. 7:58उसने उस वाइल्ड घोड़े जो हमारे डिजायर्स
  178. 8:01हमारे ख्वाहिशात को रिप्रेजेंट करता है
  179. 8:04उसको खुली [संगीत] छूट दे दी और वह बेकाबू
  180. 8:06हो गया तो वह चैरियट या बग्गी उस ड्राइवर
  181. 8:09समेत पूरी तरह तबाह हो जाएगी। इसी तरह अगर
  182. 8:12हम 19 सेंचुरी के आखिर और 20 सेंचुरी की
  183. 8:15शुरुआत में देखें तो मॉडर्न साइकोलॉजी के
  184. 8:18फादर सिगमन फ्रॉयड ने इसे और डिटेल में
  185. 8:21तीन हिस्सों में बांट दिया। आईडी या इड,
  186. 8:23ईगो और सुपर ईगो। फ्रॉयड के मुताबिक एडी
  187. 8:27या आईडी और कुछ नहीं बल्कि इंसान के अंदर
  188. 8:30छुपा हुआ एक ऐसा अंधा बच्चा है जो बस अपनी
  189. 8:33जिद पूरी करना चाहता है। यह सिर्फ एक ही
  190. 8:35लैंग्वेज बोलता है। मुझे अभी चाहिए बस
  191. 8:38चाहिए। यह इड या आईडी अंधा होता है। इसके
  192. 8:42अंदर किसी किस्म की मोरालिटी या एथिक्स
  193. 8:44नहीं होते। इसका काम सिर्फ इंस्टेंट
  194. 8:46प्लेजर ढूंढना और दर्द से बचना है। तो सच
  195. 8:49तो यह है कि फ्रॉयड ने जिसे इतनी रिसर्च
  196. 8:52के बाद इड या आईडी का नाम दिया। इस्लाम
  197. 8:54सदियों पहले उसे नफ्स-ए अमारा कह चुका था।
  198. 8:57वो नफ्स जो बुराई और नीच ख्वाहिशात की तरफ
  199. 9:01पूरी ताकत से धकेलता है। तो हमारा लॉजिक,
  200. 9:03हमारी बायोलॉजी, हिस्ट्री, हमारी
  201. 9:06साइकोलॉजी यह सब हमें सिर्फ एक ही पॉइंट
  202. 9:08पर लाकर खड़ा कर देते हैं। हर ब्रांच ऑफ
  203. 9:11नॉलेज इस बात की गवाही दे रही है कि हमारे
  204. 9:14अंदर एक एनिमलिस्टिक सेल्फ मौजूद है। जो
  205. 9:17हम पर हुक्मरानी करना चाहता है, रूल करना
  206. 9:20चाहता है। लेकिन यहां आकर फिलॉसफी और
  207. 9:22साइंस एक दीवार से टकरा जाते हैं। वो
  208. 9:25हमारे दिमाग की प्रॉब्लम तो आइडेंटिफाई कर
  209. 9:27लेते हैं। बीमारी और उसके सिम्टम्स तो बता
  210. 9:30देते हैं लेकिन इस अंदर के तूफान का कोई
  211. 9:32एब्सोल्यूट और मुकम्मल इलाज नहीं दे पाते।
  212. 9:35वो यह नहीं बता पाते कि इस एड या प्लेटो
  213. 9:38के वाइल्ड हॉर्स को या हमारे एग्मिडिला को
  214. 9:41स्पिरिचुअल लेवल पर परमानेंटली कैसे
  215. 9:44प्यूरिफाई किया जाए। और यहां से शुरू होता
  216. 9:47है वह डीप अल्टीमेट ब्लूप्रिंट जो 1400
  217. 9:50साल पहले पूरी इंसानियत के सामने रख दिया
  218. 9:53गया था। कुरान ने इस नफ्स का एक ऐसा
  219. 9:55साइकोलॉजिकल और स्पिरिचुअल डिसेक्शन किया
  220. 9:58है जो आज की मॉडर्न साइकोलॉजी की समझ से
  221. 10:01बहुत आगे की बात है। कुरान इंसान को एक
  222. 10:03सिंगल रुकी हुई डायमेंशन में नहीं देखता।
  223. 10:06कुरान कहता है कि तुम्हारा नफ्स स्टैटिक
  224. 10:08नहीं है। यानी एक जगह रुका हुआ नहीं है।
  225. 10:11यह एक कंटीन्यूअस जर्नी है। एक जारी सफर
  226. 10:14है। और इस सफर में इस स्ट्रगल में इंसान
  227. 10:17तीन अलग-अलग स्टेजेस से गुजरता है। चलिए
  228. 10:20अब देखते हैं कि कुरान और सही हदीस इस
  229. 10:23नफ्स की रियलिटी और इसकी स्टेजेस को कैसे
  230. 10:26खोलकर हमारे सामने रखते हैं। अब तक साइंस
  231. 10:28और फिलॉसफी ने हमें बताया कि हमारे अंदर
  232. 10:30एक जंग चल रही है। लेकिन इस्लाम हमें
  233. 10:33सिर्फ जंग का एहसास नहीं दिलाता बल्कि उस
  234. 10:35जंग का एक मुकम्मल नक्शा देता है। कुरान
  235. 10:38इंसान के इस इनर सेल्फ यानी नफ्स को एक
  236. 10:41रुकी हुई पत्थर की तरह ठहरी हुई कोई चीज
  237. 10:44नहीं मानता बल्कि कुरान इसे एक ऐसी एंटिटी
  238. 10:47और एक ऐसी जिंदा ताकत मानता है जो वक्त और
  239. 10:50हालात के साथ इवॉल्व हो सकती है जो गिर भी
  240. 10:53सकती है और खड़ी भी हो सकती है। कुरान
  241. 10:55मजीद और इस्लामिक ट्रेडिशन में इस नफ्स को
  242. 10:58तीन अलग-अलग स्टेजेस या हालातों में
  243. 11:01डिस्क्राइब किया गया है। दुनिया का हर
  244. 11:03इंसान चाहे वो किसी भी लेवल पर हो अपनी
  245. 11:06जिंदगी के सफर में इन्हीं तीन स्टेजेस के
  246. 11:08आसपास घूमता रहता है। पहली स्टेज जिसका
  247. 11:11सामना हर इंसान को करना पड़ता है वो है
  248. 11:14नफ्स-ए अमारा। यानी द कमांडिंग सेल्फ। यह
  249. 11:17वह नफ्स है जिसका काम सिर्फ और सिर्फ
  250. 11:20इंसान को बुराई, फितने और गुनाह की तरफ
  251. 11:22हुकुम देना है। यहां लफ्ज अमारा पर गौर
  252. 11:25करना बहुत जरूरी है। हुकुम देने का मतलब
  253. 11:27यह नहीं है कि नफ्स आपसे प्यार से
  254. 11:29रिक्वेस्ट करता है या आपको कोई मशवरा देता
  255. 11:32है। नहीं, यह नफ्स आपको कमांड करता है या
  256. 11:35आपको फोर्स करता है। यह बिल्कुल फ्रॉयड के
  257. 11:38एड या आईडी की तरह अंधा और जिद्दी होता
  258. 11:41है। सूरह यूसुफ आयत 53 में अल्लाह सुभान
  259. 11:44ताला बहुत ही क्लियर लफ्जों में इरशाद
  260. 11:46फरमाते हैं। बेशक नफ्स-ए-अमारा तो बुराई
  261. 11:49का हुकुम देता है सिवाय उसके जिस पर मेरा
  262. 11:52रब रहम करे। यह आयत यूसुफ अली सलाम की
  263. 11:55जुबान से है और यह वह स्टेज है जहां इंसान
  264. 11:58अपनी बेसिक डिजायर्स और अपनी ख्वाहिशात का
  265. 12:00बिल्कुल गुलाम बन जाता है। ऐसा इंसान जब
  266. 12:03गुस्से में होता है तो वह तबाही [संगीत]
  267. 12:05मचाता है। जब उसे भूख या पैसों का लालच
  268. 12:07आता है तो वह हलाल और हराम, सही और गलत का
  269. 12:10फर्क भूल जाता है। जब नफ़्स-ए-अमारा आपके
  270. 12:13वजूद पर कंट्रोल कर लेता है तो इंसान अपनी
  271. 12:16अकल, अपनी स्पिरिचुअलिटी और अपने
  272. 12:19इंटेलेक्ट को एक तरफ रख देता है और उसका
  273. 12:21बर्ताव बिल्कुल एक जंगली जानवर की तरह हो
  274. 12:24जाता है। इस स्टेज पर नफ्स सवार होता है
  275. 12:27और इंसान उसकी सवारी। लेकिन अगर इंसान इस
  276. 12:30अंधेरे में थोड़ी सी फिक्र करे, अपने अंदर
  277. 12:33थोड़ी सी रोशनी पैदा करने की कोशिश करे,
  278. 12:35तो वह इस जंग की दूसरी और सबसे अहम स्टेज
  279. 12:38पर पहुंचता है। नफ्स-ए लवामा। लवामा लफ्ज
  280. 12:41का मतलब है मलामत करने वाला, टोकने वाला
  281. 12:44यानी गिल्ट फील करने वाला। और यह स्टेज
  282. 12:47इतनी अजीम है कि सूरह कयामा आयत टू में
  283. 12:50खुद अल्लाह ताला ने इस नफ्स की कसम खाई
  284. 12:53है। अल्लाह ताला इरशाद फरमाते हैं और मैं
  285. 12:55कसम खाता हूं नफ्स-ए लवामा की यानी मलामत
  286. 12:58करने वाले नफ्स की। यह नफ्स लवामा हमारा
  287. 13:01कॉन्शस है। यह हमारे जमीर की आवाज है। यह
  288. 13:04वो स्टेज है जहां इंसान फरिश्ता नहीं
  289. 13:06बनता। आपसे गुनाह तो अभी भी होते हैं।
  290. 13:09आपसे गलती तो हो जाती है, लेकिन उस गलती
  291. 13:11के फौरन बाद आपको अफसोस, आपके अंदर बेचैनी
  292. 13:14हो जाती है। आपको नींद नहीं आती। एक ऐसी
  293. 13:17आवाज आपके अंदर से उठती है जो आपसे कड़े
  294. 13:19सवाल करती है। तूने यह क्यों किया? तुझे
  295. 13:22ऐसा नहीं करना चाहिए था। अल्लाह तुझसे
  296. 13:24नाराज हो जाएगा। तो यह जो गिल्ट है, यह जो
  297. 13:27अंदर का पछतावा है, रिग्रेट है, आज की
  298. 13:29दुनिया शायद इसे डिप्रेशन या ओवरथिंकिंग
  299. 13:31कह दे। लेकिन इस्लामिक स्पिरिचुअलिटी में
  300. 13:34यह एक बहुत बड़ी नेमत है क्योंकि जब तक
  301. 13:36आपको अपने गुनाह पर गिल्ट फील हो रहा है
  302. 13:39इसका सीधा मतलब है कि आपका दिल अभी भी
  303. 13:42कंप्लीटली मरा नहीं है। आपकी रूह जिंदा है
  304. 13:45और आप प्यूरिफिकेशन यानी तजिया की राह पर
  305. 13:48चलने के काबिल है। नफ्स लवामा एक ब्रिज है
  306. 13:50जो जानवर और एक कामिल इंसान के बीच का सफर
  307. 13:53तय करता है। और फिर इस तमाम कशमकश, पछतावे
  308. 13:56और लड़ाई के बाद आती है आखिरी और सबसे
  309. 13:59आला, सबसे हाईएस्ट स्टेज जिसे कुरान
  310. 14:02नफ्स-ए मुतमाइन्ना कहता है। द सोल एट पीस।
  311. 14:06यह वो स्टेज है जहां सारी जंग, सारी
  312. 14:08उलझने, सारी बगावतें हमेशा के लिए खत्म हो
  313. 14:11जाती हैं। यह वह लेवल है जहां अल्लाह की
  314. 14:14मर्जी और इंसान की ख्वाहिश दोनों मिलकर
  315. 14:16बिल्कुल एक हो जाते हैं। इस स्टेज पर
  316. 14:19पहुंचने के बाद इंसान को ना दुनिया की
  317. 14:21दौलत आने की खुशी पागल करती है और ना ही
  318. 14:24किसी अजीज चीज के छिन जाने का गम उसे तोड़
  319. 14:26पाता है। वह मुकम्मल तौर पर अल्लाह के
  320. 14:29सामने सरेंडर कर चुका होता है। उसका नफ्स
  321. 14:32अब बगावत नहीं करता बल्कि अपने रब के
  322. 14:34फैसलों पर मुतमाइन होता है, सेटिस्फाइड
  323. 14:37होता है। और इस सरेंडर का इनाम क्या होता
  324. 14:39है? जब ऐसी रूह मौत के वक्त इस दुनिया से
  325. 14:42रुखसत लेती है तो अल्लाह इस नफ्स को किसी
  326. 14:45फरिश्ते के जरिए नहीं बल्कि डायरेक्टली
  327. 14:48एड्रेस करते हुए इरशाद फरमाते हैं यात
  328. 14:51नफ्स मुतना इर इला रबी की राजत मज़िया ए
  329. 14:55इत्मीनान वाली जान या नफ्स लौट चल अपने रब
  330. 14:59की तरफ इस हाल में कि तू उससे राजी और वो
  331. 15:02तुझसे राजी लेकिन याद रखिए इस पीसफुल
  332. 15:05स्टेज इस नफ्स मुतमना तक पहुंचना कोई आसान
  333. 15:09काम नहीं है। यह कोई ओवरनाइट मिरेकल नहीं
  334. 15:11है। इसके लिए इंसान को एक बहुत बड़ी थका
  335. 15:14देने वाली मेहनत करनी पड़ती है। और इस
  336. 15:16मेहनत का जिक्र हमें सही हदीस में
  337. 15:18क्लियरली मिलता है। सुन तिरमिदी हदीस नंबर
  338. 15:211621 में प्रॉफेट मोहम्मद सल्लल्लाहहु
  339. 15:24अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया असल मुजाहिद
  340. 15:26वो है जो अल्लाह की इतात में अपने नफ्स से
  341. 15:29जिहाद करे, स्ट्रगल करे। तो इस हदीस का
  342. 15:31मतलब बहुत साफ है। हमारी सबसे बड़ी लड़ाई,
  343. 15:34हमारा सबसे बड़ा दुश्मन किसी बाहरी मैदान
  344. 15:37में नहीं। किसी दूसरे मुल्क में नहीं
  345. 15:39बैठा। हमारी असल लड़ाई उस ताकत से है जो
  346. 15:42हमारे ही सीने में हमारे ही दिमाग में
  347. 15:45हमारे ही वजूद का हिस्सा बनकर बैठी है। तो
  348. 15:48अब तक हमने नफ्स की बीमारी, उसकी
  349. 15:50साइकोलॉजी, उसकी स्टेजेस को बहुत गहराई से
  350. 15:52समझ लिया। लेकिन किसी भी रिसर्च का मकसद
  351. 15:55सिर्फ प्रॉब्लम को आइडेंटिफाई करना नहीं
  352. 15:57होता बल्कि उसका सॉल्यूशन ढूंढना भी होता
  353. 15:59है। सोचिए एक हीरा, एक डायमंड जब जमीन के
  354. 16:03अंदर होता है तो वह किसी चमकदार ज्वेलरी
  355. 16:05की तरह नजर नहीं आता। वह सिर्फ एक आम सा
  356. 16:08पत्थर लगता है। लेकिन जब उसे जमीन की
  357. 16:10गहराइयों से निकाला जाता है, फिर उसे काटा
  358. 16:13जाता है, घिसा जाता है, बार-बार तराशा
  359. 16:15जाता है, तब जाकर वही पत्थर दुनिया की
  360. 16:18सबसे कीमती चीजों में शामिल हो जाता है।
  361. 16:20इंसानी नफ्स भी कुछ ऐसा ही है। अगर उसे
  362. 16:23उसकी ख्वाहिशों के हवाले छोड़ दिया जाए तो
  363. 16:26वह अपनी असल कीमत कभी जाहिर नहीं करता।
  364. 16:29लेकिन जब उसे डिसिप्लिन, सब्र और अल्लाह
  365. 16:32की इतात के जरिए तराशा जाता है तो वही
  366. 16:35नफ्स इंसान को उस मकाम तक ले जाता है जहां
  367. 16:37अल्लाह उससे राजी हो जाता है। तो अब सबसे
  368. 16:40बड़ा और सबसे प्रैक्टिकल सवाल यह उठता है
  369. 16:42कि नफ्स को प्यूरिफाई [संगीत] कैसे करें?
  370. 16:45नफ्स को पाक कैसे करें? इस्लामिक स्कॉलर्स
  371. 16:48और मॉडर्न साइकोलॉजी जब एक जगह पर मिलती
  372. 16:50है, तो इस तजिया के इस प्यूरिफिकेशन के
  373. 16:53तीन मेजर और प्रैक्टिकल स्टेप सामने आते
  374. 16:56हैं, जिन्हें कोई भी इंसान आज से अभी से
  375. 16:59अपनी जिंदगी में अप्लाई कर सकता है। पहला
  376. 17:01स्टेप है सेल्फ अकाउंटेबिलिटी। यह स्टेप
  377. 17:04खुद से सवाल करने का है। हर रात सोने से
  378. 17:07पहले अपने बिस्तर पर लेट कर सिर्फ 5 मिनट
  379. 17:10के लिए अपने दिन भर का हिसाब लेना है।
  380. 17:12हजरत उमर रजि अल्लाह अन का बहुत मशहूर
  381. 17:15पावरफुल कोर्ट है। अपना हिसाब खुद कर लो
  382. 17:18इससे पहले कि कयामत के दिन तुम्हारा हिसाब
  383. 17:20लिया जाए। तो जब आप रात को खुद को एनालाइज
  384. 17:23करते हैं कि आज मैंने अपने छोटे भाई या
  385. 17:25बड़े भाई को गुस्से में क्या बोल दिया। आज
  386. 17:28मैंने ऑफिस में किसकी चुगली की, किसकी बैग
  387. 17:30बाइटिंग की या आज मैंने अकेले में कौन सा
  388. 17:32गुनाह किया। तब आप असल में क्या कर रहे
  389. 17:35होते हैं? साइंटिफिकली आप अपने ब्रेन के
  390. 17:38प्रेफरेंटल कॉर्टेक्स को दोबारा एक्टिव कर
  391. 17:40रहे होते हैं और वह एमगडला उस एनिमलिस्टिक
  392. 17:43ड्राइव को आहिस्ता-आहिस्ता कमजोर करना
  393. 17:45शुरू कर देता है। अकाउंटेबिलिटी आपको
  394. 17:48ऑटोमेटिक पायलट मोड से बाहर निकालकर
  395. 17:50दोबारा एक कॉन्शियस इंसान बनाता है। दूसरा
  396. 17:53स्टेप है अपोजिंग द डिजायर्स। नफ्स की
  397. 17:56सबसे बड़ी वीकनेस या ताकत यह है कि अगर आप
  398. 17:59इसकी हर छोटी बड़ी बात मानते रह तो यह और
  399. 18:02बड़ा और मगरूर होता जाएगा। इसे कंट्रोल
  400. 18:05करने का सिर्फ और सिर्फ एक ही तरीका है
  401. 18:08इसे नो बोलना सिखाना। आप देखिए इस्लाम में
  402. 18:11इसकी सबसे आला ट्रेनिंग का नाम रोजा है।
  403. 18:15फास्टिंग है। जब आप रोजे की हालत में भूख
  404. 18:18और प्यास से तड़प रहे होते हैं, लेकिन आप
  405. 18:20अपने घर में पड़े हलाल खाने को टच नहीं
  406. 18:23करते, तो आप असल में क्या कर रहे हैं? आप
  407. 18:25अपने ब्रेन की न्यूरोप्लास्टिसिटी को
  408. 18:27रिवायर कर रहे होते हैं। आप अपने नफ्स का
  409. 18:30कॉलर पकड़ कर उसे एक बड़ा मैसेज दे रहे
  410. 18:32होते हैं कि देख जब मैं अल्लाह के हुकुम
  411. 18:35से हलाल पानी का एक घूंट नहीं पी रहा हूं
  412. 18:38तो मैं उसकी नाफरमानी करके किसी हराम चीज
  413. 18:41की तरफ कैसे देख सकता हूं। तुम मेरे बॉस
  414. 18:43नहीं हो। मैं तुम्हारा बॉस हूं। यह
  415. 18:45अपोजिंग द डिजायर नफ्स की ज़िद की कमर तोड़
  416. 18:49देता है। और तीसरा और आखिरी स्टेप है
  417. 18:51कॉनस्टेंट स्ट्रगल। सही मुस्लिम की एक
  418. 18:54बहुत मशहूर हदीस 2806 में हजरत मोहम्मद
  419. 18:58सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया
  420. 19:00जन्नत को मुश्किलात यानी हार्डशिप और
  421. 19:02नापसंदीदा चीजों से घेर दिया गया है और
  422. 19:05जहन्नुम को ख्वाहिशात और डिजायर्स से तो
  423. 19:08याद रखिए नफ्स को आराम पसंद है। इसे
  424. 19:11तहज्जुद के लिए आधी रात में उठना फजर के
  425. 19:14लिए सुबह जल्दी उठना पसंद नहीं है। इसे
  426. 19:17अपनी ईगो को तोड़कर किसी से माफी मांगना
  427. 19:20पसंद नहीं है। जब आप अपने इस फिजिकल और
  428. 19:23इमोशनल कंफर्ट ज़ोन के खिलाफ एक कंटीन्यूअस
  429. 19:26फाइट करते हैं। जब आप अपने नफ्स को आराम
  430. 19:28की जगह मशक्कत में डालते हैं अल्लाह की
  431. 19:31रजा के लिए वही असली जिहाद है, स्ट्रगल
  432. 19:34है। यही वो स्ट्रगल है जो इंसान को जानवर
  433. 19:37से आला दर्जे तक पहुंचाती है। तो दोस्तों,
  434. 19:40इस दुनिया में इंसान की सबसे बड़ी फतेह,
  435. 19:42सबसे बड़ी विक्ट्री, किसी बड़े मुल्क को
  436. 19:45जीतना, हजारों लोगों का नेता बनना या
  437. 19:48करोड़ों रुपए कमाना नहीं है। ये सब बहुत
  438. 19:51छोटी चीजें हैं। इंसान की सबसे बड़ी जीत
  439. 19:54अपने आप को जीतना है। याद रखिए आपका नफ्स
  440. 19:57फंडामेंटली आपका दुश्मन नहीं है। यह
  441. 20:00बिल्कुल एक जंगली घोड़े की तरह है। अगर
  442. 20:02आपने अकाउंटेबिलिटी, अपोजिंग और स्ट्रगल
  443. 20:06के जरिए इसे ट्रेन कर लिया, इसकी लगाम
  444. 20:08अपने हाथ में पकड़ ली तो यह एक ऐसी
  445. 20:10जबरदस्त सवारी बनेगा जो आपको उन
  446. 20:13स्पिरिचुअल और बुलंदियों तक ले जाएगा,
  447. 20:15जहां दुनिया की कोई और सवारी नहीं ले जा
  448. 20:18सकती। लेकिन अगर आप थक गए, अगर आपने अपनी
  449. 20:21सस्ती ख्वाहिशात के चक्कर में इसकी लगाम
  450. 20:24छोड़ दी, तो यह जंगली घोड़ा आपको एक ऐसी
  451. 20:26गहरी खाई में गिरा देगा जहां से वापसी का
  452. 20:29रास्ता बहुत मुश्किल हो जाता है। तो जंग
  453. 20:32शुरू हो चुकी है। आवाजें दोनों तरफ से
  454. 20:34जोरों पर है। लेकिन आखिरी फैसला सिर्फ और
  455. 20:37सिर्फ आपका है कि आप किस आवाज को ताकतवर
  456. 20:40बनाते हैं। थैंक यू फॉर वाचिंग द वीडियो।
  457. 20:43अल्लाह हाफिज।
  458. 20:48[संगीत]

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