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Mystery of Konark Sun Temple || The Real History — Transcript

by Divya Katha · 5,051 words · 651 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00साल था 1903 बंगाल के लेफ्टिनेंट गवर्नर
  2. 0:04जे ए बर्डल अपनी टीम के साथ उड़ीसा के
  3. 0:07[संगीत] कोणार्क सूर्य मंदिर पहुंचे। यह
  4. 0:09कोई साधारण दौरा नहीं था क्योंकि उस दिन
  5. 0:12उन्होंने मंदिर के अंदर कुछ ऐसा [संगीत]
  6. 0:13देखा जिसके बाद उन्होंने मंदिर के गर्भ
  7. 0:17गृह को रेत और बालू से पूरी तरह भर देने
  8. 0:20का आदेश दे दिया और साथ ही [संगीत] इस 800
  9. 0:23साल से भी अधिक पुराने मंदिर को हमेशा के
  10. 0:25लिए बंद करने का भी निर्देश जारी किया। आज
  11. 0:29लगभग 123 साल [संगीत] बीत चुके हैं। लेकिन
  12. 0:32सवाल आज भी वही है कि आखिर गर्भगृह के
  13. 0:35अंदर ऐसा कौन सा खौफनाक [संगीत] मंजर या
  14. 0:38गहरा राज था जिसे दुनिया से छुपाना इतना
  15. 0:41जरूरी था। आज कोणार्क को हम खंडहर कहते
  16. 0:44हैं। पर कभी यही मंदिर समुद्र में सफर
  17. 0:47करने वाले नाविकों के लिए एक डरावना संकेत
  18. 0:50था। जो भी नाव इस मंदिर के पास से गुजरती
  19. 0:53वह या तो रास्ता भटक जाती थी या फिर
  20. 0:56समुद्र में डूब जाती थी। इसी कारण
  21. 0:58पुर्तगाली नाविकों [संगीत] ने इस मंदिर को
  22. 1:00ब्लैक पगोड़ा का नाम दिया था। आखिर ऐसा
  23. 1:03क्या था कोणार्क में जो बड़े-बड़े नावों
  24. 1:05को भी डूबा दे।
  25. 1:10उड़ीसा में समुद्र तट के पास [संगीत] बसा
  26. 1:13यह कोणार्क मंदिर 800 साल से भी ज्यादा
  27. 1:16पुराना बताया जाता है। यह मंदिर भारत की
  28. 1:19अद्भुत वास्तुकला का प्रमाण है कि कैसे आज
  29. 1:23से [संगीत] 800 साल पहले जब ना तो सीमेंट
  30. 1:26का आविष्कार हुआ था और ना ही कन जैसी
  31. 1:29मशीनें तब कैसे हमारे [संगीत] पूर्वजों ने
  32. 1:31अत्याधुनिक आयरन लॉक सिस्टम का उपयोग कर
  33. 1:35इस अकल्पनीय ढांचे को खड़ा किया और आखिर
  34. 1:38वो कौन सी तकनीक [संगीत] थी जिसने भगवान
  35. 1:41सूर्य की अष्ट धातु की मूर्ति बिना किसी
  36. 1:44आधार के हवा में तैरती रहती थी और क्या
  37. 1:47हुआ जब इस [संगीत] मंदिर के निर्माण के
  38. 1:49दौरान एक 12 साल के बच्चे ने अपनी जान दे
  39. 1:52दी और कौन था जिसने [संगीत] इस मंदिर को
  40. 1:54बनवाया? यह मंदिर अपने समय से कहीं आगे
  41. 1:57था। सूर्यदेव के रथ के आकार का बना यह
  42. 2:00मंदिर [संगीत] आज भी लोगों को हैरान कर
  43. 2:02देता है। इस रथ के पहिए आज भी बिना किसी
  44. 2:05घड़ी के सटीक समय बता देते हैं। आखिर यह
  45. 2:08सब कैसे संभव है? आखिर हमारे पूर्वजों के
  46. 2:12पास ऐसी कौन [संगीत] सी तकनीक थी जिसे आज
  47. 2:14भुला दिया गया है? और सबसे बड़ा सवाल कि
  48. 2:17आखिर ऐसा क्या हुआ कि इतना भव्य मंदिर
  49. 2:20[संगीत] खंडहर बन गया? क्या यह उस 12 साल
  50. 2:23के बच्चे का श्राप था या आक्रमणकारियों की
  51. 2:26साजिश? तो आज के इस वीडियो में हम जानेंगे
  52. 2:29[संगीत] उड़ीसा के कोनार्क सूर्य मंदिर के
  53. 2:31निर्माण की कहानी कि कैसे यह [संगीत]
  54. 2:34मंदिर बना। साथ ही जानेंगे इसकी अद्भुत
  55. 2:36तकनीकों के बारे में जो आज भी वैज्ञानिकों
  56. 2:39को हैरान कर देती हैं। लेकिन उससे पहले
  57. 2:42अगर आपको वीडियो अच्छी लग रही है तो इसे
  58. 2:45एक लाइक जरूर करें।
  59. 2:57[संगीत]
  60. 3:17[संगीत]
  61. 3:18कोणार्क की भव्यता को समझने के लिए हमें
  62. 3:20इतिहास के पन्नों [संगीत] से भी पीछे
  63. 3:23द्वापर युग के उस कालखंड में जाना जाना
  64. 3:25होगा। जहां इस मंदिर की नींव एक राजा
  65. 3:28कीत्वाकांक्षा [संगीत] से नहीं बल्कि एक
  66. 3:30पुत्र के पश्चाताप से पड़ी थी। यह कहानी
  67. 3:33है भगवान श्री कृष्ण और जामवती के पुत्र
  68. 3:36सांप की जो अपनी अकल्पनीय सुंदरता और
  69. 3:40आकर्षक व्यक्तित्व के लिए पूरे आर्यावर्त
  70. 3:42में प्रसिद्ध थे। लेकिन यही सुंदरता उनके
  71. 3:46अहंकार का कारण बन गई और वे अक्सर रेशियों
  72. 3:49और बड़ों का उपहास उडाया करते थे। पौराणिक
  73. 3:52ग्रंथों विशेषकर साम पुराण और भविष्य
  74. 3:56पुराण के अनुसार देवर्षि नारद साम [संगीत]
  75. 3:59के इस व्यवहार से क्षुब्ध थे और उन्होंने
  76. 4:01उन्हें सबक सिखाने की एक योजना बनाई। नारद
  77. 4:04[संगीत] ने साम को बहलाकर उस सरोवर के पास
  78. 4:07भेज दिया जहां उनकी सौतेली माताएं यानी कि
  79. 4:10श्री कृष्ण की अन्य रानियां स्नान कर रही
  80. 4:13थी। जब भगवान श्री कृष्ण ने अपने पुत्र को
  81. 4:15वहां देखा तो वे क्रोध से भर गए। उन्होंने
  82. 4:18इसे एक अक्षम्य अपराध माना और सांप को
  83. 4:21कुष्ठ रोग का भीषण श्राप दे दिया। क्षण भर
  84. 4:24में ही सांप का वो कंचन जैसा शरीर विकृत
  85. 4:27हो गया। अंग शून्य पड़ने लगे और पूरा शरीर
  86. 4:30[संगीत] कष्टदायक फोड़ों से भर गया।
  87. 4:32अत्यधिक पीड़ा और ग्लानी में डूबे सांप जब
  88. 4:35अपने पिता के चरणों में गिरे और अपनी
  89. 4:38निर्दोषता की गुहार लगाई तब श्री कृष्ण को
  90. 4:41नारद की युक्ति का पता चला। क्योंकि श्राप
  91. 4:44वापस नहीं लिया जा सकता था [संगीत] इसलिए
  92. 4:46उन्होंने शाम को सूर्यदेव की शरण में जाने
  93. 4:49की सलाह दी क्योंकि केवल सूर्य ही
  94. 4:51आरोग्यता [संगीत] के देवता और समस्त त्वचा
  95. 4:54रोगों के निवारक माने जाते हैं। महर्षि
  96. 4:57कटक के मार्गदर्शन में सामने ओसा के
  97. 5:00समुद्र तट पर स्थित मित्रवण को अपनी
  98. 5:03तपस्थली चुना। जहां चंद्रभागा नदी का
  99. 5:06पवित्र संगम समुद्र से होता था। यहां शुरू
  100. 5:09हुआ साम का 12 वर्षों का वह कठिन संघर्ष
  101. 5:12जिसने उनके अस्तित्व को बदल कर रख दिया।
  102. 5:15अन्न जल का त्याग कर भीषण गर्मी और
  103. 5:18तूफानों के बीच सामने शाख द्वीपी विधि से
  104. 5:21[संगीत] सूर्य की कठोर आराधना की। उनकी
  105. 5:24तपस्या की तीव्रता इतनी अधिक थी कि अंततः
  106. 5:28[संगीत] सूर्य देव स्वयं प्रकट हुए और
  107. 5:30उन्हें रोग मुक्त होने का वरदान दिया।
  108. 5:33वरदान प्राप्त होते ही जैसे ही सामने ने
  109. 5:35चंद्रभागा के पवित्र जल में स्नान किया
  110. 5:38उनका शरीर पुनः पहले जैसा कांतिवान और
  111. 5:41स्वस्थ हो गया। कृतज्ञता के भाव से भरकर
  112. 5:45साम ने उसी स्थान पर सूर्यदेव का एक भव्य
  113. 5:47मंदिर बनवाने का संकल्प लिया। लोक कथाओं
  114. 5:50के अनुसार स्नान के दौरान साम को नदी की
  115. 5:53धारा में सूर्यदेव की एक अद्भुत मूर्ति
  116. 5:55मिली। उन्होंने इसी मूर्ति को वहां
  117. 5:58स्थापित किया जिसे आज हम कोणार्क के
  118. 6:00[संगीत] नाम से जानते हैं। जहां कोण का
  119. 6:03अर्थ है दिशा या कोना और अर्क का अर्थ है
  120. 6:06सूर्य। इस प्रकार [संगीत] कोणार्क मात्र
  121. 6:09एक स्थापत्य नहीं बल्कि सांप की भक्ति और
  122. 6:12सूर्य की उपचारात्मक शक्ति का एक जीवित
  123. 6:14प्रमाण बन गया। यही कारण है कि आज भी माघ,
  124. 6:18शुक्ल सप्तमी या शाम, दशमी के दिन हजारों
  125. 6:21श्रद्धालु चंद्रभागा में डुबकी लगाकर उस
  126. 6:24प्राचीन परंपरा को जीवित रखते हैं। लेकिन
  127. 6:27यह कहानी हमें हमारे धर्म ग्रंथों [संगीत]
  128. 6:29में मिलती है। पर इतिहास में इसका निर्माण
  129. 6:33गंग वंश से जोड़ा जाता है। [संगीत] यह वही
  130. 6:35वंश है जिसने जगन्नाथ मंदिर का भी निर्माण
  131. 6:38किया था। तो चलिए [संगीत] अब जानते हैं
  132. 6:41कोणार्क सूर्य मंदिर का असली इतिहास और
  133. 6:44असली रहस्य।
  134. 6:52समय के साथ ओसा का यह स्थान प्रसिद्ध होने
  135. 6:54लगा। दूसरी शताब्दी ईस्वी [संगीत] में
  136. 6:57ग्रीक भूगोलवेता क्लोडियस टॉलेमी यहां आए
  137. 7:00थे और उन्होंने इस स्थान [संगीत] को
  138. 7:02कन्नागरा के नाम से एक प्रसिद्ध बंदरगाह
  139. 7:05बताया। उनके बाद सातवीं शताब्दी ईवी में
  140. 7:09चीनी यात्री हुन सांग यहां आए और उन्होंने
  141. 7:12यहां कई भव्य और ऊंची इमारतों का वर्णन
  142. 7:15किया जहां विभिन्न धर्मों के लोग रहते थे।
  143. 7:18लेकिन इसका असली इतिहास तो 13वीं शताब्दी
  144. 7:21में शुरू होता है। 13वीं शताब्दी आते-आते
  145. 7:25यह क्षेत्र समुद्री व्यापार, बंदरगाह
  146. 7:28गतिविधियों और सीमा संघर्षों सबका केंद्र
  147. 7:31बन [संगीत] चुका था और इस समय गंगवंश यहां
  148. 7:34शासन कर रहा था। इतिहासकारों और पुरातत्व
  149. 7:38विदों के अनुसार [संगीत] जिस मंदिर को आज
  150. 7:40हम देख रहे हैं, वह सूर्यदेव की आराधना का
  151. 7:43चौथा और सबसे विशाल स्वरूप है। इस अद्भुत
  152. 7:46संरचना का निर्माण पूर्वी गंग वंश के
  153. 7:49प्रतापी राजा लांगलू नरसिंह देव प्रथम के
  154. 7:53शासनकाल में हुआ था। ऐतिहासिक दस्तावेजों
  155. 7:56खासकर केंदू ताम्रपत्र शिलालेख के अनुसार
  156. 7:59इस मंदिर का निर्माण कार्य 1238 ईसवी से
  157. 8:031264 ईसवी के बीच [संगीत] संपन्न हुआ था।
  158. 8:06लेकिन इस महापरियो के पीछे एक अत्यंत
  159. 8:10भावनात्मक और धार्मिक प्रेरणा [संगीत]
  160. 8:12जुड़ी थी। और वह प्रेरणा थी राजमाता
  161. 8:15कस्तूरी देवी की एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक
  162. 8:18प्रसंग के अनुसार राजमाता ने अपने पुत्र
  163. 8:21नरसिंह देव को याद दिलाया था कि उनके
  164. 8:24पूर्वजों ने जिस [संगीत] तरह पूरी में
  165. 8:26भगवान जगन्नाथ का विश्व प्रसिद्ध मंदिर
  166. 8:28बनवाया जो आज भी करोड़ों लोगों की आस्था
  167. 8:31का केंद्र है। उन्होंने आग्रह किया कि
  168. 8:34सूर्यदेव जिनके बिना पृथ्वी पर जीवन संभव
  169. 8:37नहीं है। उनके सम्मान में एक ऐसा अद्वितीय
  170. 8:39मंदिर बनाया जाए जो जगन्नाथ मंदिर की
  171. 8:42भव्यता को टक्कर दे सके और गंगवंश की
  172. 8:45शक्ति को पूरी दुनिया के सामने प्रदर्शित
  173. 8:47करें। माता के इसी संकल्प को पूरा करने के
  174. 8:50लिए राजा ने अपने राज्य के खजाने का एक
  175. 8:53बड़ा हिस्सा [संगीत] और 12 वर्षों का
  176. 8:56राजस्व इस मंदिर के निर्माण में लगा दिया।
  177. 8:59[संगीत] यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल
  178. 9:01नहीं बल्कि एक राजनैतिक घोषणा [संगीत] भी
  179. 9:04थी। क्योंकि नरसिंह देव प्रथम ने उस दौर
  180. 9:07में कई विदेशी आक्रमणकारियों को परास्त
  181. 9:09[संगीत] किया था और यह मंदिर उनकी उन
  182. 9:11विजयों का एक विजय स्तंभ माना जाता है।
  183. 9:14इतिहास के गलियारों में इस मंदिर [संगीत]
  184. 9:16की भव्यता का जिक्र सम्राट अकबर के दरबारी
  185. 9:20इतिहासकार अबुल फजल ने अपनी प्रसिद्ध
  186. 9:23पुस्तक आईने एअ अकबरी में भी किया है।
  187. 9:28580 ईसवी में जब अबुल फजल ने ओसा का दौरा
  188. 9:32किया तो वे इस मंदिर को देखकर दंग रह गए
  189. 9:34थे। उन्होंने लिखा था कि इस मंदिर की
  190. 9:37सुंदरता और इसके निर्माण की लागत का
  191. 9:40अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। उनके विवरण
  192. 9:42से यह भी स्पष्ट होता है कि 16वीं शताब्दी
  193. 9:45के अंत तक यह मंदिर सुरक्षित और पूजा
  194. 9:48[संगीत] अर्चना के लिए सक्रिय था।
  195. 9:50पुरातत्वविदों का मानना है कि मंदिर की
  196. 9:52नियम रखने के लिए [संगीत] समुद्र के पास
  197. 9:54की भूमि को विशेष रूप से तैयार किया गया
  198. 9:57था और चंद्रभागा नदी का मार्ग इस मंदिर के
  199. 10:00धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व को ध्यान में
  200. 10:02रखकर चुना गया था। लेकिन इस मंदिर का
  201. 10:04निर्माण इतना भी आसान नहीं था। 12 वर्षों
  202. 10:08का लंबा समय 1200 से ज्यादा कारीगर और एक
  203. 10:1212 साल के मासूम बच्चे की आहुति इस मंदिर
  204. 10:15को [संगीत] इसने सदैव के लिए अमर तो बना
  205. 10:17दिया। लेकिन एक श्राप के साथ। तो चलिए अब
  206. 10:21जानते हैं मंदिर के निर्माण की कहानी।
  207. 10:30जब राजा नरसिंह देव प्रथम ने इस अद्भुत
  208. 10:32मंदिर को बनाने का संकल्प लिया तो इस
  209. 10:35महास्वप्न को धरातल पर उतारने के लिए
  210. 10:37उन्होंने उस युग के सबसे महान और अनुभवी
  211. 10:40वास्तुकार विषु महाराणा को मुख्य शिल्पी
  212. 10:42[संगीत] नियुक्त किया। बिशु महाराणा के
  213. 10:44नेतृत्व में पूरे आर्यावर्त से चुनकर
  214. 10:47[संगीत] लगभग 1200 अत्यंत कुशल कारीगर लाए
  215. 10:50गए। ऐतिहासिक प्रमाणों [संगीत]
  216. 10:52और मदाला पंजी जैसे ग्रंथों के अनुसार इस
  217. 10:56भव्य मंदिर के निर्माण में कुल 12 वर्षों
  218. 10:59का लंबा समय लगा [संगीत] जो अनुमानतः 1238
  219. 11:02ईसवी से 1264 ईसवी [संगीत] के बीच का
  220. 11:05कालखंड था। इस परियोजना की विशालता का
  221. 11:08अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि
  222. 11:10राजा ने अपने राज्य के 12 वर्षों के
  223. 11:13संपूर्ण राजस्व के बराबर की भारी धनराशि
  224. 11:16[संगीत] इस एक मंदिर पर न्योछावर कर दी
  225. 11:19थी। इस मंदिर की असली ताकत इसकी नक्काशी
  226. 11:22के पीछे छिपी व प्राचीन [संगीत]
  227. 11:24इंजीनियरिंग थी जो आज के आधुनिक
  228. 11:26वैज्ञानिकों को भी सोचने पर [संगीत] मजबूर
  229. 11:28कर देती है। उस दौर में जब ना तो सीमेंट
  230. 11:32का आविष्कार हुआ था [संगीत] और ना ही कन
  231. 11:34जैसी मशीनें थी तब पत्थरों को जोड़ने के
  232. 11:37लिए एक अद्भुत आयरन लॉक [संगीत] सिस्टम का
  233. 11:39विकास किया गया था। कारीगरों ने विशाल
  234. 11:42बलुआ पत्थरों के बीच [संगीत] लोहे की मोटी
  235. 11:44पट्टियों और चादरों यानी कि आयरन प्लेट्स
  236. 11:48और क्लैंप्स का उपयोग किया था। इन लोहे की
  237. 11:50[संगीत] प्लेट्स को पत्थरों के खांचों में
  238. 11:52इस तरह फिट किया गया था कि वे एक दूसरे
  239. 11:55[संगीत] को मजबूती से जकड़ लें। जिसे आज
  240. 11:58हम आधुनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम कहते हैं। यह
  241. 12:01तकनीक ना केवल मंदिर को स्थिरता प्रदान
  242. 12:03करती थी बल्कि समुद्री [संगीत] तट की
  243. 12:05नमकीन हवाओं और भूकंप के झटों से भी इस
  244. 12:09ढांचे की रक्षा करती थी। विषु महाराणा की
  245. 12:12सूक्ष्म गणना [संगीत] इतनी सटीक थी कि
  246. 12:14मंदिर के हर हिस्से का भार पूरी तरह
  247. 12:17संतुलित था। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी
  248. 12:20कि इन लोहे की परतों [संगीत] का इस्तेमाल
  249. 12:22सिर्फ मजबूती के लिए ही नहीं बल्कि एक
  250. 12:25विशाल चुंबकीय क्षेत्र तैयार करने के लिए
  251. 12:28भी किया गया था। जो आगे चलकर भगवान सूर्य
  252. 12:31की मूर्ति को हवा में स्थिर रखने का आधार
  253. 12:33बनी। लेकिन उसको जानने से पहले हम यह जान
  254. 12:36लेते हैं कि क्यों एक 12 वर्ष के बालक ने
  255. 12:39मंदिर के निर्माण के लिए अपनी जान दी।
  256. 12:41माना जाता है कि जब मंदिर का निर्माण अपने
  257. 12:44अंतिम चरण में था तब एक ऐसी चुनौती सामने
  258. 12:48आई जिसने 1200 अनुभवी कारीगरों [संगीत] की
  259. 12:50नींद उड़ा दी थी। मंदिर का मुख्य ढांचा तो
  260. 12:53तैयार हो गया था लेकिन उसके शिखर पर कलश
  261. 12:56स्थापित नहीं हो पा रहा था। जिसे कुछ
  262. 12:59जगहों [संगीत] पर एक भारी 52 टन का चुंबक
  263. 13:02यानी कि मैग्नेट बताया जाता है जो इस
  264. 13:04मंदिर की मुख्य प्रतिभा थी। क्योंकि इसके
  265. 13:07बिना मंदिर अधूरी थी। कई प्रयासों के बाद
  266. 13:10भी जब कारीगर कलश [संगीत] को स्थिर करने
  267. 13:12में विफल रहे तो राजा नरसिंह देव प्रथम का
  268. 13:15धैर्य जवाब दे गया। उन्होंने मुख्य
  269. 13:18वास्तुकार बिशु महाराणा और उनकी टीम को यह
  270. 13:21कठोर चेतावनी दी कि यदि अगले दिन सूर्योदय
  271. 13:24से पहले [संगीत] शिखर पर कलश स्थापित नहीं
  272. 13:26हुआ तो सभी 1200 कारीगरों का सिर कलम कर
  273. 13:30दिया जाएगा। निर्माण स्थल पर मौत का
  274. 13:32सन्नाटा पसर [संगीत] गया था। क्योंकि
  275. 13:34सदियों पुरानी इंजीनियरिंग की समझ उस एक
  276. 13:37बिंदु पर आकर हार मान चुकी थी। ठीक उसी
  277. 13:40समय विषु महाराणा का 12 वर्षीय पुत्र
  278. 13:43धर्मपद जिसे धर्मपद भी कहा जाता है वहां
  279. 13:46पहुंचा जिसने जन्म के बाद से अपने पिता का
  280. 13:49चेहरा कभी नहीं देखा था। बालक धर्मपद अपनी
  281. 13:52मां से अनुमति लेकर अपने पिता [संगीत] से
  282. 13:54मिलने आया था। लेकिन वहां का माहौल देखकर
  283. 13:56वह दंग रह गया। जब उसे पता चला कि उसके
  284. 13:59[संगीत] पिता और 1200 कारीगरों की जान
  285. 14:02खतरे में है तो उसने अपनी असाधारण मेधा और
  286. 14:05इंजीनियरिंग सूझबूझ [संगीत] का परिचय
  287. 14:07दिया। धर्मपथ को पता था कि मंदिर के
  288. 14:09चुंबकीय क्षेत्र में तीसरे मैग्नेट को किस
  289. 14:12तरह संतुलित किया जाता है। पिता की अनुमति
  290. 14:14लेकर वह नन्हा बालक अंधेरी रात में मंदिर
  291. 14:18के विशाल शिखर पर चढ़ा और कुछ ही घंटों
  292. 14:21में उसने कलश को पूरी [संगीत] निपुणता के
  293. 14:23साथ स्थापित कर दिया। वो कार्य जिसे
  294. 14:26दिग्गज शिल्पकार 12 वर्षों में भी नहीं कर
  295. 14:28पाए थे। सुबह जब सूरज की [संगीत] पहली
  296. 14:30किरण ने मंदिर के शिखर को छुआ तो राजा और
  297. 14:34सभी कारीगर [संगीत] यह चमत्कार देखकर दंग
  298. 14:36रह गए। लेकिन यह जीत एक बड़े संकट की आहट
  299. 14:40भी थी। कारीगरों के बीच यह डर फैल गया कि
  300. 14:43जब राजा को पता चलेगा कि 1200 अनुभवी
  301. 14:46शिल्पकार जो नहीं [संगीत] कर सके वह एक 12
  302. 14:49साल के बालक ने कर दिखाया तो राजा उन सभी
  303. 14:52को अयोग्य मानकर दंडित कर सकता है। अपने
  304. 14:55पिता के सम्मान और 1200 कारीगरों की जान
  305. 14:58बचाने के लिए धर्मपद ने एक ऐसा फैसला लिया
  306. 15:01जिसे सुनकर आज भी आंखें नम हो जाती हैं।
  307. 15:04अपनी सफलता का जश्न मनाने [संगीत] के बजाय
  308. 15:07उस वीर बालक ने मंदिर के शिखर से
  309. 15:10चंद्रभागा [संगीत] नदी में छलांग लगा दी
  310. 15:12और अपने प्राणों की आहुति दे दी। लेकिन
  311. 15:15उसका बलिदान व्यर्थ नहीं गया। जिसे आज
  312. 15:18दुनिया [संगीत]
  313. 15:18डायमैग्नेटिक फील्ड कहती है उसे हमारे
  314. 15:21भारत में 800 साल पहले ही निर्माण कर दिया
  315. 15:24गया था। जो यहां की उड़ती हुई सूर्यदेव
  316. 15:26[संगीत] की मूर्ति का आधार शिला बनी। साथ
  317. 15:30ही सूर्यदेव के रथ के वो सात घोड़े जो
  318. 15:33महान वैज्ञानिक आइजक [संगीत] न्यूटन की
  319. 15:35थ्योरी को भी पहले से बताती है और साथ ही
  320. 15:38इन रथों पर लगे पहिए जो आज भी सटीक समय
  321. 15:42बता देते हैं जो हैरान करने वाला है। इस
  322. 15:45मंदिर के इन रहस्यों को जानकर आप भी चौंक
  323. 15:48जाएंगे। तो चलिए अब हम इन रहस्यों को
  324. 15:51जानते हैं। लेकिन उससे पहले अगर आपको
  325. 15:54वीडियो अच्छी लग रही है तो इसे अपने
  326. 15:56मित्रों और [संगीत] रिश्तेदारों को भी
  327. 15:58जरूर शेयर करें ताकि वे भी हमारे भारत के
  328. 16:00अद्भुत और रहस्यमई मंदिरों के बारे में
  329. 16:03जान सकें।
  330. 16:10कोनार्क का यह मंदिर केवल पत्थरों का एक
  331. 16:13विशाल ढांचा नहीं है बल्कि यह सनातन धर्म
  332. 16:17के वेदों में वर्णित सूर्यदेव की उस
  333. 16:19कल्पना का भौतिक स्वरूप है जिसे राजा
  334. 16:22नरसिंह देव प्रथम ने [संगीत] कलिंग
  335. 16:25वास्तुकला शैली के शिखर पर पहुंचाया था।
  336. 16:28पूरे मंदिर को एक भव्य और विशाल रथ के
  337. 16:30आकार में डिजाइन किया गया है। इस रथ के
  338. 16:33आधार पर पत्थरों को काटकर 12 जोड़ी
  339. 16:35[संगीत] यानी कुल 24 पहिए बनाए गए हैं। यह
  340. 16:3824 पहिए साल के 12 महीनों के प्रतीक हैं
  341. 16:41और इनमें से प्रत्येक पहिया समय के चक्र
  342. 16:44को दर्शाता है। आश्चर्य की बात यह है कि
  343. 16:47यह केवल [संगीत] सजावटी पहहिए नहीं है
  344. 16:50बल्कि यह एक सटीक समय यंत्र की तरह काम
  345. 16:53करते हैं। हर पहिए में [संगीत] 16 तीलियां
  346. 16:56हैं। आठ बड़ी और आठ छोटी। इन तीलियों के
  347. 16:59बीच का अंतराल और उनकी छाया [संगीत] आज भी
  348. 17:02दिन के आठ प्रहर और 24 घंटों का सटीक
  349. 17:05विवरण दे सकती है। इन आठ बड़ी तीलियों
  350. 17:08[संगीत] के बीच 3 घंटे का गैप होता है जो
  351. 17:11इसे पूरा 24 घंटे का एक चक्र बनाती है।
  352. 17:14इसे एंटीक्लॉकवाइज [संगीत] पढ़ा जाता है।
  353. 17:16यानी कि अगर ऊपर की बड़ी तीली को 12 माने
  354. 17:19तो एंटीक्लॉकवाइज उसके पहले वाली छोटी
  355. 17:22तीली पर 1:30 बज रहे होंगे। साथ इन दोनों
  356. 17:25के गैप के बीच और भी छोटी-छोटी तीलियां
  357. 17:27हैं। और हर एक तीली 3 मिनट के अंतराल को
  358. 17:30दर्शाती [संगीत] है। यानी अगर कोई व्यक्ति
  359. 17:32इस रथ के पहिए के बीच में उंगली रखे तो वह
  360. 17:36उसकी परछाई को देखकर आराम [संगीत] से सटीक
  361. 17:38समय बता सकता है। इस दिव्य रथ को खींचने
  362. 17:41के लिए सामने की
  363. 17:42[संगीत]
  364. 17:42ओर सात शक्तिशाली घोड़े बनाए गए हैं। यह
  365. 17:45सात घोड़े सप्ताह के सात दिनों और खासकर
  366. 17:49सूर्य के प्रकाश में मौजूद सात [संगीत]
  367. 17:51रंगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यहां
  368. 17:53विज्ञान और इतिहास का एक बड़ा विरोधाभास
  369. 17:56सामने आता है। जहां आधुनिक विज्ञान मानता
  370. 17:58है कि आइज़क न्यूटन ने 1666 [संगीत]
  371. 18:01में प्रिज्म के जरिए रोशनी के सात रंगों
  372. 18:04की खोज की थी। [संगीत] वहीं 13वीं सदी में
  373. 18:07बना यह मंदिर चीख-चीख कर कह रहा है कि
  374. 18:10हमारे पूर्वज न्यूटन से 400 साल पहले ही
  375. 18:12इन वैज्ञानिक सत्यों [संगीत] से परिचित
  376. 18:14थे। मंदिर के मुख्य तीन भाग हैं। विमान
  377. 18:18यानी कि वह स्थान जहां मूर्ति रखी गई थी।
  378. 18:21जगमोहन यानी कि प्रार्थना हॉल और नट मंदिर
  379. 18:24यानी [संगीत] कि नृत्य का हॉल और माना
  380. 18:27जाता है कि विमान यानी कि मुख्य हॉल में
  381. 18:29सूर्यदेव की हवा में तैरती मूर्ति थी। तो
  382. 18:32आखिर इसका क्या रहस्य [संगीत] है? दरअसल
  383. 18:35प्राचीन भारतीय ग्रंथों और स्थानीय
  384. 18:37जनश्रतियों के अनुसार इस मंदिर के [संगीत]
  385. 18:40गर्भ गृह में स्थापित सूर्य देव की अष्ट
  386. 18:43धातु की विशाल मूर्ति बिना किसी आधार या
  387. 18:46स्टैंड के शून्य में लटकी रहती थी। यह कोई
  388. 18:49जादू नहीं बल्कि भौतिक विज्ञान यानी कि
  389. 18:52फिजिक्स [संगीत] का एक ऐसा अद्भुत चमत्कार
  390. 18:54था जिसे मैग्नेटिक लेविटेशन कहा जाता है।
  391. 18:57इस असंभव कार्य को अंजाम [संगीत] देने के
  392. 18:59लिए मंदिर के शिखर पर 52 टन का एक विशाल
  393. 19:03चुंबकीय पत्थर लगाया गया था। शिल्पकारों
  394. 19:06ने मंदिर के ऊपरी हिस्से में लगे उस
  395. 19:08महाचुंबक [संगीत] के साथ तालमेल बिाने के
  396. 19:11लिए नीचे की परतों में लोहे की भारी
  397. 19:13चादरें और पत्थरों को जोड़ने के लिए लोहे
  398. 19:16के क्लैंप्स का इस्तेमाल किया था। इन
  399. 19:18दोनों [संगीत] के बीच एक शक्तिशाली खिंचाव
  400. 19:20और संतुलन तैयार हुआ जिसे विज्ञान की भाषा
  401. 19:24में डायमैग्नेटिक फील्ड कहते हैं। मुख्य
  402. 19:27वास्तुकार [संगीत] बिशु महाराणा के 12
  403. 19:29वर्षीय पुत्र धर्मपद के बारे में कहा जाता
  404. 19:32है [संगीत] कि वह जानता था कि दो
  405. 19:34मैग्नेट्स से बनी इस फील्ड में किस तरह एक
  406. 19:38तीसरे मैग्नेट यानी अष्ट धातु की [संगीत]
  407. 19:40मूर्ति को संतुलित किया जाता है। मूर्ति
  408. 19:43को मंदिर के शिखर और आधार से बिल्कुल समान
  409. 19:46दूरी [संगीत] पर स्थापित किया गया था।
  410. 19:48जिससे वह गुरुत्वाकर्षण को मात देकर हवा
  411. 19:51में स्थिर हो गई थी। लेकिन इस मंदिर का
  412. 19:53स्वर्णकाल ज्यादा समय तक नहीं चला। 16वीं
  413. 19:56शताब्दी में काला पहाड़ द्वारा इसे नष्ट
  414. 19:59[संगीत] किया गया। और ऐसा क्या था यहां के
  415. 20:01बंदरगाह में जो यहां आते ही नाव [संगीत]
  416. 20:04रास्ता भटक जाते थे और क्यों अंग्रेजों ने
  417. 20:07इसे रेत में दबा दिया। जब मैं आपको इन सब
  418. 20:10की सच्चाई बताऊंगा [संगीत]
  419. 20:11तो आप भी चौंक जाएंगे कि आखिर ऐसा कैसे हो
  420. 20:14सकता है। तो चलिए अब इन चौंकाने वाले
  421. 20:17रहस्यों को जानते हैं जिन्हें इतिहास ने
  422. 20:19भुला दिया और दुनिया से छिपाया गया।
  423. 20:28कोणार्क की भव्यता और विज्ञान की अजय
  424. 20:31शक्ति पर ग्रहण तब लगा जब 16वीं शताब्दी
  425. 20:34में विदेशी आक्रमण की काली आंधी ओसा के तट
  426. 20:38तक पहुंची। इतिहासकारों और प्राचीन
  427. 20:41अभिलेखों के अनुसार मंदिर के पतन की सबसे
  428. 20:44विनाशकारी घटना बंगाल सल्तनत के सुल्तान
  429. 20:47सुलेमान खान करानी के जनरल काला पहाड़ के
  430. 20:51आक्रमण से जुड़ी है। साल 1568 के आसपास
  431. 20:55काला पहाड़ ने ओसा के कई प्रमुख मंदिरों
  432. 20:58को निशाना बनाया। जिनमें जगन्नाथ पुरी और
  433. 21:00कामाख्या देवी मंदिर के साथ-साथ कोणार्क
  434. 21:03का सूर्य मंदिर भी शामिल था। जगन्नाथ
  435. 21:06मंदिर के ऐतिहासिक वृतांत मदाला पंजी में
  436. 21:10इस हमले का रोंगटे खड़े [संगीत] कर देने
  437. 21:12वाला विवरण मिलता है। कहा जाता है कि काला
  438. 21:15पहाड़ मूल रूप से एक पवित्र वैष्णव
  439. 21:17[संगीत] ब्राह्मण था जिसका नाम राजीव लोचन
  440. 21:21रॉय या कालाचंद राय था। सुल्तान की बेटी
  441. 21:25गुलनाथ से प्रेम और उसे पाने के लिए
  442. 21:27इस्लाम स्वीकार करने के बाद वह हिंदू
  443. 21:29मंदिरों का कट्टर शत्रु बन गया था। जब
  444. 21:32काला पहाड़ की सेना ने कोणार्क मंदिर में
  445. 21:35प्रवेश किया तो वे वहां के अद्भुत दृश्य
  446. 21:38[संगीत] को देखकर दंग रह गए। मंदिर के
  447. 21:40गर्भ गृह में भगवान सूर्य की विशाल मूर्ति
  448. 21:44बिना किसी [संगीत] सहारे के हवा में तैर
  449. 21:46रही थी। काला पहाड़ ने मंदिर को तोड़ने की
  450. 21:49कोशिश की [संगीत] पर इसके अद्भुत आयरन,
  451. 21:51लॉक सिस्टम और गहन कारीगरी के चलते वह उसे
  452. 21:55पूरी तरह नहीं तोड़ पाया। फिर भी माना
  453. 21:58जाता है कि काला पहाड़ ने मंदिर को अच्छा
  454. 22:00खासा नुकसान पहुंचाया। [संगीत]
  455. 22:02लेकिन इतिहास के पन्नों में कोणार्क के
  456. 22:04पतन की कहानी केवल जमीनी आक्रमणों तक
  457. 22:07सीमित नहीं है। बल्कि इसका एक गहरा और
  458. 22:10रहस्यमई संबंध विशाल समुद्र और उन विदेशी
  459. 22:14नाविकों से भी है जो बंगाल की खाड़ी से
  460. 22:17होकर गुजरते थे। 16वीं और 17वीं शताब्दी
  461. 22:21के दौरान पुर्तगाली नाविकों और यूरोपीय
  462. 22:24व्यापारियों के बीच यह मंदिर ब्लैक पगोड़ा
  463. 22:27के नाम से कुख्यात हो गया था। लेकिन
  464. 22:29कोणार्क को काला या ब्लैक कहने के पीछे
  465. 22:32इसका गहरा रंग नहीं था। बल्कि वह डर था जो
  466. 22:35इस मंदिर से जुड़े चुंबकीय रहस्यों के
  467. 22:38कारण समुद्र में फैला हुआ था। जैसा कि
  468. 22:41मैंने आपको पहले बताया कि मंदिर के शिखर
  469. 22:44पर लगा 52 टन का विशाल चुंबकीय पत्थर लगा
  470. 22:48था जो इतना शक्तिशाली था कि उसका प्रभाव
  471. 22:51कई किलोमीटर दूर समुद्र तक महसूस किया
  472. 22:54जाता था। उस दौर के पुर्तगाली नाविकों के
  473. 22:57वृतांतों और समुद्री डायरियों में यह दर्ज
  474. 23:00है कि जब भी उनके जहाज कोणार्क के तट के
  475. 23:03पास से गुजरते थे तो उनके नेविगेशन कंपास
  476. 23:06अचानक काम करना बंद कर देते थे। कंपास की
  477. 23:09सुई चुंबकीय खिंचाव के कारण पागलों की तरह
  478. 23:12घूमने लगती थी। जिससे जहाज अपनी सही दिशा
  479. 23:15भटक जाते थे। इतना ही नहीं यह चुंबकीय बल
  480. 23:19जहाजों के लोहे के हिस्सों को अपनी ओर इस
  481. 23:22कदर खींचता था कि कई जहाज अनियंत्रित होकर
  482. 23:25तट की चट्टानों से टकरा जाते थे और
  483. 23:28दुर्घटनाग्रस्त होकर डूब जाते थे। समुद्री
  484. 23:31व्यापार में हो रहे इस भारी नुकसान और
  485. 23:34लगातार होते जहाज हादसों ने [संगीत]
  486. 23:37विदेशी व्यापारियों और नागरिकों के मन में
  487. 23:40इस मंदिर के प्रति एक खौफ पैदा कर दिया
  488. 23:43था। अपनी सुरक्षा और नेविगेशन सिस्टम को
  489. 23:46बचाने के लिए पुर्तगाली नाविकों ने एक
  490. 23:49दुस््साहसी कदम उठाने का फैसला किया।
  491. 23:52ऐतिहासिक दावों के अनुसार उन्होंने मंदिर
  492. 23:54पर धावा बोला और इसके शीर्ष पर लगे
  493. 23:57[संगीत] उस विनाशकारी शक्तिशाली चुंबक को
  494. 24:00निकाल लिया। उनका मानना था कि इस चुंबक को
  495. 24:03हटा देने से समुद्र में उनके जहाज
  496. 24:05सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने इस चुंबक को
  497. 24:08अपने जहाज में लादकर अपने देश ले जाने की
  498. 24:10कोशिश की। लेकिन इस एक घटना ने कोनार्क के
  499. 24:14भविष्य को हमेशा के लिए बदल दिया। जैसे ही
  500. 24:16वह केंद्रीय चुंबकीय पत्थर हटाया गया।
  501. 24:19पूरे मंदिर की संरचना का संतुलन बिगड़
  502. 24:22गया। पत्थरों को थामे हुए आयरन लॉक सिस्टम
  503. 24:25ने अपनी पकड़ खो दी और देखते ही देखते वह
  504. 24:29भव्य ढांचा अपनी स्थिरता खोकर क्षतिग्रस्त
  505. 24:32होने लगा। जब मंदिर की संरचना कमजोर होने
  506. 24:36लगी और आक्रमणकारियों [संगीत] का खतरा बढ़
  507. 24:38गया। तब मंदिर की पवित्रता को बचाने के
  508. 24:41लिए वहां के पुजारियों ने एक साहसी कदम
  509. 24:43उठाया। विनाश से बचाने के लिए पुजारियों
  510. 24:46ने सूर्यदेव की मुख्य मूर्ति को मंदिर से
  511. 24:49निकाल लिया और कई वर्षों तक उसे रेत के
  512. 24:52नीचे छिपा कर रखा। जैसे ही मंदिर से मुख्य
  513. 24:55मूर्ति हटाई गई वहां श्रद्धालुओं और
  514. 24:57भक्तों का आना बंद हो गया। जिससे रखरखाव
  515. 25:00के अभाव में मंदिर धीरे-धीरे एक वीरान
  516. 25:03खंडहर में बदल गया। कालांतर में सुरक्षा
  517. 25:06की दृष्टि से इस दिव्य मूर्ति को पूरी ले
  518. 25:09जाया [संगीत] गया और वहां जगन्नाथ मंदिर
  519. 25:12के प्रांगण में स्थित इंद्र मंदिर में
  520. 25:14स्थापित [संगीत] कर दिया गया। हालांकि आज
  521. 25:16भी यह बहस का विषय है कि क्या नई दिल्ली
  522. 25:18[संगीत] के राष्ट्रीय संग्रहालय में रखी
  523. 25:20सूर्य प्रतिमा ही कोणार्क की असली मुख्य
  524. 25:23मूर्ति है। 18वीं शताब्दी के अंत तक सूर्य
  525. 25:27भगवान का यह भव्य धाम एक घने जंगल में
  526. 25:30तब्दील हो गया था। जहां दिन के उजाले में
  527. 25:32भी इंसान जाने से कतराते थे और यह उस
  528. 25:35गौरवशाली मंदिर का अंत था। पर फिर ब्रिटिश
  529. 25:38[संगीत] इंडिया में आए और उन्होंने इस
  530. 25:40खंडहर हो चुके कोणार्क मंदिर को खोज
  531. 25:42निकाला। पर फिर ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने
  532. 25:45फिर से बंद करने का निश्चय लिया और क्यों
  533. 25:48इस मंदिर को रेत और बालू से दबा दिया गया?
  534. 25:50तो चलिए अब इस रहस्य को भी जान लेते हैं।
  535. 25:59कई 100 सालों तक घने जंगलों में खंडहर की
  536. 26:02तरह पड़े रहने के बाद साल 1837 [संगीत]
  537. 26:05में एक स्कॉटिश इतिहासकार जेम्स फर्गुसन
  538. 26:09यहां आए। जिन्होंने अपनी खोज और अद्भुत
  539. 26:12रेखा चित्रों के जरिए इस भूले-बिसरे
  540. 26:15चमत्कार को फिर से दुनिया के नक्शे पर
  541. 26:17लाया। फिर आया साल 1903 एक ऐसा साल जिसने
  542. 26:21कोणार्क सूर्य मंदिर के भाग्य को अगले
  543. 26:24सवा5 सालों के लिए एक गहरे अंधकार और
  544. 26:27सन्नाटे में धकेल दिया। बंगाल के तत्कालीन
  545. 26:30लेफ्टिनेंट गवर्नर [संगीत] जिम ए बलन अपनी
  546. 26:33विशेषज्ञ टीम के साथ इस भव्य मंदिर का
  547. 26:36मुआयना करने पहुंचे थे। मंदिर की जजर हालत
  548. 26:39और गिरते हुए पत्थरों [संगीत] को देखकर
  549. 26:41उन्होंने एक ऐसा ऐतिहासिक और चौंकाने वाला
  550. 26:44फैसला लिया जिसने इतिहासकारों को आज भी
  551. 26:47सोचने [संगीत] पर मजबूर कर दिया है।
  552. 26:49उन्होंने आदेश दिया कि मंदिर के मुख्य सभा
  553. 26:52स्थल जिसे असेंबली हॉल यानी कि जगमोहन कहा
  554. 26:55जाता है। उसके चारों द्वारों को हमेशा के
  555. 26:58लिए पत्थर की दीवारों से सील कर दिया जाए
  556. 27:00और इसके भीतर के विशाल खाली हिस्से को
  557. 27:03लाखों टन रेत और बालू से पूरी तरह भर दिया
  558. 27:06जाए। माना जाता है कि उन्होंने मंदिर को
  559. 27:09टूटने से [संगीत] बचाने के लिए ऐसा किया।
  560. 27:11पर यह कोई साधारण मरम्मत का काम नहीं था।
  561. 27:13बल्कि एक चलती फिरती [संगीत] ऐतिहासिक
  562. 27:15संरचना को जीवित दफन करने जैसा फैसला था।
  563. 27:19सवाल आज भी बना हुआ है कि क्या यह निर्णय
  564. 27:22वाकई केवल मंदिर को गिरने से बचाने के लिए
  565. 27:25लिया गया था? या फिर [संगीत] गवर्नर ने उस
  566. 27:27अंधेरे के भीतर कुछ ऐसा देख लिया था जिससे
  567. 27:30वह भयभीत हो गए थे। इस फैसले के बाद शुरू
  568. 27:33हुई 120 [संगीत] से भी अधिक वर्षों की एक
  569. 27:36ऐसी लंबी खामोशी जिसने कोणार्क को भारत के
  570. 27:40सबसे रहस्यमई सील्ड मोन्यूमेंट्स की सूची
  571. 27:43में सबसे ऊपर खड़ा कर दिया। 1903 के बाद
  572. 27:46से आज तक दुनिया का कोई भी इंसान चाहे वह
  573. 27:50बड़ा वैज्ञानिक हो या इतिहासकार उस गर्भ
  574. 27:53गृह की चौखट को पार नहीं कर पाया है।
  575. 27:56पिछले 123 वर्षों से यह मंदिर अपने भीतर
  576. 28:00के रहस्यों को रेत की परतों के नीचे दबाए
  577. 28:03हुए खड़ा है। लोग अक्सर पूछते हैं कि आखिर
  578. 28:06दुनिया की इतनी बड़ी और [संगीत] आधुनिक
  579. 28:08तकनीक होने के बावजूद क्या हम सवा5 साल
  580. 28:11में एक बार भी उस दरवाजे [संगीत] को खोलने
  581. 28:13की हिम्मत नहीं जुटा पाए? क्या यह महज एक
  582. 28:17तकनीकी रुकावट है? या फिर कोई ऐसा डर जो
  583. 28:20आज भी पुरातत्व विदों को अंदर जाने से
  584. 28:22रोकता है। लेकिन फिर आया साल 2022 भारत
  585. 28:27सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी
  586. 28:30कि एएसआई ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए
  587. 28:34इस मंदिर के गर्भ गृह से रेत निकालने और
  588. 28:37इसके बंद दरवाजों को खोलने की योजना बनाई।
  589. 28:40इस प्रोजेक्ट का [संगीत] मुख्य उद्देश्य
  590. 28:42मंदिर की आंतरिक संरचना की जांच करना और
  591. 28:45उन रहस्यों से [संगीत] पर्दा उठाना है जो
  592. 28:48सदियों से अंधेरे में दफन है। हालांकि यह
  593. 28:51कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण है क्योंकि रेत
  594. 28:54निकालने से मंदिर के संतुलन पर क्या
  595. 28:56प्रभाव पड़ेगा। यह आज भी शोध का विषय है।
  596. 29:00विशेषज्ञ उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही
  597. 29:02आधुनिक इंजीनियरिंग की मदद से हम उस गर्भ
  598. 29:05गृह के भीतर कदम रख पाएंगे जहां कभी
  599. 29:08सूर्यदेव की मूर्ति हवा में तैरा करती थी
  600. 29:11और आज भी [संगीत] इसकी रेत को हटाने का
  601. 29:13काम किया जा रहा है। यह काम धीरे-धीरे और
  602. 29:16सावधानी से किया जा रहा है। क्योंकि किसी
  603. 29:18को नहीं पता कि रेत को हटाने के [संगीत]
  604. 29:20बाद क्या होगा। लेकिन फिर आज के टाइम में
  605. 29:22यानी कि दिसंबर 2025 में एएसआई ने उसी बंद
  606. 29:27हिस्से के भीतर की स्थिति [संगीत] समझने
  607. 29:29और भविष्य में सुरक्षित तरीके से सैंड
  608. 29:32इवाकुएशन की दिशा में सबसे सेंसिटिव काम
  609. 29:34शुरू [संगीत] किया। यानी कि कोर ड्रिलिंग
  610. 29:37हिंदू स्टैंड टाइम्स के अनुसार एएसआई के
  611. 29:40सुपरिइटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट डीबी गणनायक
  612. 29:43ने बताया कि कोर ड्रिल का उद्देश्य दीवार
  613. 29:47की स्ट्रेंथ और थिकनेस समझना है ताकि उसी
  614. 29:50के आधार पर आगे स्ट्रक्चर को स्ट्रेंथन
  615. 29:53करने के स्टेप्स तय किए जा सकें।
  616. 29:55टेलीग्राफ की रिपोर्ट बताती है कि एएसआई
  617. 29:58ने आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर एक डिटेल्ड
  618. 30:02स्ट्रक्चरल असेसमेंट शुरू किया है। यानी
  619. 30:04रेत निकालने से पहले क्या निकालना [संगीत]
  620. 30:06सेफ है यह वैज्ञानिक तरीके से तय किया जा
  621. 30:09रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्टिंग
  622. 30:12इस [संगीत] रहस्य में एक और कंक्रीट डाटा
  623. 30:15जोड़ती है कि हाल की ड्रिलिंग में यह
  624. 30:17संकेत मिला कि जो सैंड कभी टॉप तक भरी हुई
  625. 30:20मानी जाती थी वह अब बैठकर लगभग 13.5
  626. 30:24मीटर नीचे सेटल हो चुकी है। कोणार्क का
  627. 30:27सूर्य मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल या
  628. 30:30प्रार्थना घर नहीं था। यह प्राचीन भारत का
  629. 30:33एक जीवंत विश्वविद्यालय और ज्ञान का
  630. 30:35इनसाइक्लोपीडिया था। जहां आज के मंदिरों
  631. 30:38में अक्सर केवल आस्था और व्यापार दिखाई
  632. 30:40देता है। वहीं 800 साल पहले बना यह मंदिर
  633. 30:44विज्ञान, खगोल [संगीत] शास्त्र, गणित और
  634. 30:46कला का एक ऐसा केंद्र था जहां हर धर्म और
  635. 30:50संप्रदाय के लोग आकर शिक्षित हो सकते थे।
  636. 30:52यह मंदिर हमारे पूर्वजों के उस उन्नत
  637. 30:55विज्ञान का प्रमाण है जो आज के दौर से
  638. 30:58कहीं आगे था। कोणार्क की यह दीवारें आज भी
  639. 31:01हमें पुकार रही हैं कि हम अपनी गौरवशाली
  640. 31:04विरासत को पहचाने और उस ज्ञान को फिर से
  641. 31:07जीवित करें जिसे समय की रेत ने ढंग दिया
  642. 31:10है। और अगर आपको इस मंदिर [संगीत] के
  643. 31:12रहस्यों और इतिहास ने चौंकाया है तो ओसा
  644. 31:15के जगन्नाथ मंदिर का रहस्य तो आपको हिला
  645. 31:17कर रख देगा। तो अगर आप जगन्नाथ मंदिर के
  646. 31:20बारे [संगीत] में भी जानना चाहते हैं तो
  647. 31:22हमारे चैनल पर जाकर यह वीडियो जरूर देखें
  648. 31:24और अगर आप इसी तरह के डॉक्यूमेंट्री
  649. 31:27वीडियो देखना चाहते हैं तो हमारे चैनल को
  650. 31:29सब्सक्राइब जरूर करें। बाकी इस वीडियो को
  651. 31:32अंत तक देखने के लिए आपका धन्यवाद।

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