YouTube2Text

My Begger Husband series Episode 201 to 250 — Transcript

by SK Hindi Novel · 112,002 words · 13,546 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00तो दोस्तों, कैसे हैं आप लोग? मुझे उम्मीद
  2. 0:02है कि आप सभी एकदम बढ़िया होंगे। तो एक
  3. 0:04बार फिर से स्वागत है आप सभी का हमारे
  4. 0:07ऑडियो स्टोरी वर्ल्ड में। आज की वीडियो
  5. 0:09होने वाली है बहुत ही जबरदस्त। क्योंकि आज
  6. 0:11हम लेकर आए हैं माय बीगर हस्बैंड की एक और
  7. 0:14धमाकेदार कहानी। और दोस्तों इस वीडियो में
  8. 0:17आपको देखने को मिलेंगे एपिसोड 2001 से
  9. 0:20लेकर एपिसोड 250 तक के ऐसे ऐसे जबरदस्त
  10. 0:24मोड़ जिन्हें देखकर आप भी सोच में पड़
  11. 0:27जाएंगे कि आखिर आगे क्या होने वाला है।
  12. 0:30कहानी में प्यार है, इमोशन है, ड्रामा है
  13. 0:33और साथ ही ऐसे ट्विस्ट हैं जो आपको वीडियो
  14. 0:36के आखिर तक बांधे रखेंगे। तो दोस्तों
  15. 0:40वीडियो को अंत तक जरूर देखना क्योंकि हो
  16. 0:43सकता है आपका सबसे पसंदीदा पार्ट भी इसी
  17. 0:45वीडियो में हो और हां वीडियो देखने के बाद
  18. 0:48कमेंट करके जरूर बताना कि आपको सबसे अच्छा
  19. 0:52कौन सा पार्ट लगा और अगर आपको हमारी ऐसी
  20. 0:55ऑडियो स्टोरीज पसंद आती हैं तो वीडियो को
  21. 0:58लाइक शेयर और चैनल को सब्सक्राइब करना
  22. 1:00बिल्कुल मत भूलना। तो चलिए दोस्तों बिना
  23. 1:03किसी देरी के शुरू करते हैं आज की यह
  24. 1:05धमाकेदार कहानी। सुबह शिप्रा की आंख खुली
  25. 1:08तो उसने देखा कि बेड का दूसरा हिस्सा खाली
  26. 1:11है। उसने सोचा कि शायद शौर्य पहले ही उठ
  27. 1:14गया होगा। वो उठी ही थी [संगीत] कि उसकी
  28. 1:16नजर सोफे पर पड़ी जहां शौर्य बेसुध सोया
  29. 1:20हुआ था। उसे देखकर वह वहीं ठहर गई। उसे
  30. 1:23याद आया कि जब वह सोई थी तब शौर्य [संगीत]
  31. 1:26उसके साथ बेड पर ही था। फिर वो कब और
  32. 1:28क्यों सोफे पर चला गया यह सोचकर उसे थोड़ा
  33. 1:31बुरा लगा और उसका मन उदास हो गया।
  34. 1:34[संगीत]
  35. 1:34अभी शिप्रा बेड पर बैठी यही सोच रही थी कि
  36. 1:37तभी उसने दरवाजे पर हल्की दस्तक [संगीत]
  37. 1:39सुनी। उसकी निगाह दरवाजे की तरफ घूम गई।
  38. 1:43उसने सोचा इतनी सुबह कौन [संगीत] आ गया।
  39. 1:45उसे एक पल को घबराहट भी हुई कि किसी को
  40. 1:48पता चल गया कि वो और शौर्य रात में
  41. 1:50[संगीत] एक कमरे में ही सोए थे तो वह क्या
  42. 1:53जवाब देगी। दरवाजे पर फिर से दस्तक हुई।
  43. 1:56[संगीत] लेकिन शौर्य पर इसका कोई असर नहीं
  44. 1:59पड़ा और वह वैसे ही गहरी नींद में सोता
  45. 2:01रहा। मजबूरन शिप्रा को उठना पड़ा। उसने
  46. 2:05अपना पहना हुआ गाउन ठीक किया और दरवाजे की
  47. 2:08ओर बढ़ गई। चलते-चलते उसने खुद को हिम्मत
  48. 2:11दी कि अगर कोई पूछ भी ले कि वो शौहर के
  49. 2:14कमरे में क्या [संगीत] कर रही है तो इसमें
  50. 2:16छिपाने जैसी कोई बात नहीं है। इसी बहाने
  51. 2:19वो अपने रिश्ते को भी सबके सामने स्वीकार
  52. 2:22कर लेगी। [संगीत] यह सोचकर उसे थोड़ा
  53. 2:24अच्छा महसूस हुआ। वो दरवाजे पर पहुंची और
  54. 2:27खोलने से पहले ही होल से बाहर झांक कर
  55. 2:30देखा तो सामने मेघना खड़ी दिखाई दी। उसका
  56. 2:33सारा डर हवा हो गया। उसने जल्दी से दरवाजा
  57. 2:37खोला। मुझे पता था तुम यहीं होगी। इसीलिए
  58. 2:41मैंने जैसे ही तुम्हारा कमरा खाली देखा,
  59. 2:43मैं यहां आ गई। मेघना कमरे के अंदर आती
  60. 2:46हुई बोली। शिप्रा ने फिर से दरवाजा बंद कर
  61. 2:50लिया। मेघना की नजर सोफे पर सोए हुए शौर्य
  62. 2:53पर पड़ी। तो तुमने बेचारे को सोफे पर सुला
  63. 2:56दिया। क्या यह सारी रात सोया नहीं है जो
  64. 2:59अभी तक ऐसे घोड़े बेचकर सो रहा है? मेघना
  65. 3:03कहते हुए बेड पर बैठ गई। मेघना ने बेड की
  66. 3:06स्थिति देखी तो उसकी नजर बीच में रखे कुशन
  67. 3:09पर पड़ी। उसने शिप्रा से पूछा। यह बेड पर
  68. 3:13कुशन की दीवार क्यों बनाई गई है? शिप्रा
  69. 3:16ने जवाब दिया। [संगीत] रात को श्रवण भी
  70. 3:19बेड पर ही सोया था। इसीलिए बीच में दीवार
  71. 3:21बना दी थी। पर पता नहीं कब सोफे पर चला
  72. 3:24गया। मेघना ने सिर पीटते हुए अपनी बात
  73. 3:28रखी। तो ऐसी थी तुम्हारी सुहागरात। बेड पर
  74. 3:32कुशन की दीवार। तभी तो बेचारा सोफे पर चला
  75. 3:36गया। आखिर कितना जुल्म सहता?
  76. 3:39शिप्रा ने आंखें दिखाते हुए उत्तर दिया।
  77. 3:42[संगीत]
  78. 3:42तुम कुछ ज्यादा ही नहीं बोल रही हो। तुम
  79. 3:45यहां करने क्या आई हो? मेघना ने अफसोस
  80. 3:48जताते हुए कहा अच्छा जी मैं तुम्हें
  81. 3:51छोड़कर नताशा के पास चली गई ताकि तुम्हारी
  82. 3:54कहानी कुछ आगे बढ़े और अब तुम मुझे ही आंख
  83. 3:57दिखा रही हो। वाह भलाई का तो जमाना ही
  84. 4:00नहीं रहा। शिप्रा ने शौर्य की ओर देखते
  85. 4:04हुए अपनी बात रखी। तुम कुछ भी बोले जा रही
  86. 4:07हो। श्रवण यहीं सो रहा है। वो अगर
  87. 4:10तुम्हारी बात सुनेगा तो क्या समझेगा?
  88. 4:13मेघरा ने बेपरवाही दिखाते हुए जवाब दिया।
  89. 4:16सुन ले मुझे क्या फर्क पड़ेगा।
  90. 4:19शिप्रा को मेघना की बात सुनकर चिंता हुई
  91. 4:22कि कहीं शौर्य [संगीत] उसकी बातें सुन ना
  92. 4:24ले और क्या सोचेगा? यह सोचकर शिप्रा ने
  93. 4:27मेघना से कहा चलो यहां से दूसरे कमरे में
  94. 4:30चलते हैं। यहां इसे सोने दो। मेघना ने
  95. 4:34आंखें नचाते हुए टिप्पणी की। ओहो अब तो
  96. 4:37बड़ी चिंता होने लगी है पतिदेव की। कहीं
  97. 4:40उनकी नींद में खलल ना पड़ जाए। शिप्रा को
  98. 4:44लगा अगर वह इस कमरे में रही तो मेघना ऐसे
  99. 4:46ही कुछ भी बोलती रहेगी। इसीलिए वह मेघना
  100. 4:49को खींचती हुई उस दूसरे कमरे में आ गई
  101. 4:52जिसे शौर्य ने उसके लिए तैयार किया था। उस
  102. 4:55दूसरे कमरे में आकर शिप्रा बेड पर लेट गई
  103. 4:58तो मेघना भी उसके पास ही बेड पर लेट गई।
  104. 5:01मेघना ने गंभीर स्वर में पूछा। अब साफ-साफ
  105. 5:05बता तुम दोनों के बीच में बात कुछ आगे
  106. 5:09बढ़ी?
  107. 5:10शिप्रा ने मासूमियत से अपनी बात रखी। बात
  108. 5:14आगे बढ़ी से तुम्हारा क्या मतलब है? हमारे
  109. 5:17[संगीत] बीच तो बातें हुई ही हैं। मेघरा
  110. 5:20ने अपनी बात स्पष्ट की। [संगीत]
  111. 5:22अरे मैं ऐसी वैसी बात के बारे में नहीं
  112. 5:24पूछ रही। मैं तुम्हारी पसंद नापसंद को
  113. 5:27लेकर बात आगे बढ़ी या नहीं उसके बारे में
  114. 5:30पूछ रही हूं। शिप्रा ने मेघना को झिड़कते
  115. 5:33हुए अपनी बात कही। तुम्हारी सोच कुछ
  116. 5:36ज्यादा ही लंबी उड़ान नहीं भर रही है। हम
  117. 5:39यह इतना आसान नहीं है कि तुमने कहा और हम
  118. 5:42जादू की तरह एक दूसरे के करीब आ जाएंगे।
  119. 5:46तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता। तुम कुत्ते की
  120. 5:49दुम हो। कितने [संगीत] भी समय नाली में रख
  121. 5:52लो टेढ़ी की टेढ़ी ही रहोगी। और अब तो मैं
  122. 5:55भी चाहती हूं कि तुम अपने दादाजी की बात
  123. 5:58मानकर शौर्य को तलाक दे ही दो। मेघना
  124. 6:01चिढ़कर बोली
  125. 6:03शिप्रा ने रूखे स्वर में स्पष्ट किया
  126. 6:07तुमको ज्यादा ही मेरी फिक्र करने की कोई
  127. 6:09जरूरत नहीं है। मैं खुद देख लूंगी कि मुझे
  128. 6:12श्रवण के साथ अपने रिश्ते को कैसे आगे
  129. 6:15बढ़ाना है। 1 घंटे बाद शिप्रा और मेघना
  130. 6:19हेवन रिसोर्ट से निकलकर मॉडल टाउन वाले घर
  131. 6:21पहुंच गई। शिप्रा को जल्दी तैयार होकर
  132. 6:24ऑफिस भी पहुंचना था। दूसरी तरफ आज शौर्य
  133. 6:28देर से सोकर उठा था। उसे रात की सारी घटना
  134. 6:31याद आई कि किस तरह उसने जागती आंखों से
  135. 6:33रात बिताई थी। [संगीत] उठने के बाद जब
  136. 6:36उसने कमरे में शिप्रा को ढूंढा तो वह वहां
  137. 6:38नहीं मिली। शौर्य जल्दी से शिप्रा के कमरे
  138. 6:41में गया लेकिन वो कमरा भी खाली था। दोनों
  139. 6:45कमरे खाली देखकर उसने तुरंत शिप्रा को कॉल
  140. 6:48लगाया। दूसरी तरफ से शिप्रा के फोन उठाते
  141. 6:52ही शौर्य ने पूछा। कहां हो तुम?
  142. 6:56शिप्रा ने अपनी मजबूरी बताई। मैं तो मॉडल
  143. 6:59टाउन वाले घर आ गई हूं। मुझे ऑफिस भी जाना
  144. 7:02है इसीलिए यहां आ गई। मेरे सारे कपड़े भी
  145. 7:04तो यहीं हैं।
  146. 7:06जाने से पहले बता तो देती।
  147. 7:09शौर्य कंसर्न दिखाते हुए बोला। शिप्रा ने
  148. 7:12जवाब दिया।
  149. 7:14तुम गहरी नींद में थे इसीलिए उठाना ठीक
  150. 7:17नहीं लगा।
  151. 7:18चलो ठीक है अपना ध्यान रखना। इतना कहकर
  152. 7:22शौर्य ने फोन काट दिया। अपने कमरे से
  153. 7:25तैयार होकर शौर्य रत्नाकर शेट्टी के पास
  154. 7:28पहुंचा। रत्नाकर शेट्टी समय का पाबंद आदमी
  155. 7:31था। उसने शूटिंग स्टार्ट कर दी थी। अगले 3
  156. 7:35दिन तक शूटिंग चलती रही। जिसमें मेघना के
  157. 7:38कॉस्मेटिक आइटम की शूटिंग भी पूरी हो गई।
  158. 7:41इस दौरान मेघना और शिप्रा शाम को हेवन
  159. 7:43रिसोर्ट में समय बिताकर एंजॉय करती थी।
  160. 7:46आखिरी दो दिनों में मेघना यूनिट के साथ ही
  161. 7:49रही क्योंकि उसकी शूटिंग वहीं चल रही थी।
  162. 7:52शूटिंग पूरी होने के बाद मेघना अपने घर
  163. 7:55लौट गई और शिप्रा अपने काम में व्यस्त
  164. 7:58[संगीत] हो गई। धीरे-धीरे फैब्रिक ट्रेंड
  165. 8:00पर उसका नियंत्रण भी मजबूत हो गया और उसने
  166. 8:04अपने अनुसार कुछ बदलाव किए। इसके साथ ही
  167. 8:07शिप्रा ने यूरोपीय देशों के टॉप अपेरल
  168. 8:10ब्रांड से संपर्क शुरू किया। बांग्लादेश
  169. 8:13से कच्चे माल की आपूर्ति बंद होने के कारण
  170. 8:16कंपनी को हो रहे नुकसान को देखते हुए
  171. 8:18[संगीत] उसने बिगbul के साथ एक बड़ा
  172. 8:20एग्रीमेंट किया। शौर्य ने जिंक कलेक्शन के
  173. 8:24मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का विस्तार कर दिया
  174. 8:26था और प्रमोशनल ऐड पहले ही तैयार हो चुका
  175. 8:29था। उसका प्लान जिंक कलेक्शन कैपेरल को
  176. 8:32बड़े स्तर पर यूरोपीय देशों में एक्सपोर्ट
  177. 8:34करने का था जिसके लिए उसने ऐड को
  178. 8:37इंटरनेशनल लेवल [संगीत] पर प्रमोट करने का
  179. 8:39प्लान बनाया। शौर्य समझ रहा था कि जैसे ही
  180. 8:42ऐड शुरू होगा डिमांड अचानक बढ़ जाएगी।
  181. 8:45[संगीत] इसीलिए पर्याप्त स्टॉक तैयार होना
  182. 8:48जरूरी था। इसी वजह से उसने पहले ही यूनिट
  183. 8:51का विस्तार कर दिया था। दूसरी तरफ हंसल
  184. 8:54मेहता ने दिनकर पोतदार और भूषण के सहयोग
  185. 8:57[संगीत] से बसंत कुंज में काफी जमीनें
  186. 9:00खरीद ली थी। और इधर रत्नाकर शेट्टी भी ऐड
  187. 9:03का शूट पूरा होने के बाद शौर्य की फिल्म
  188. 9:06निर्माण कंपनी के काम में पूरी तरह जुट
  189. 9:08गया था। कंपनी के रजिस्ट्रेशन के साथ ही
  190. 9:11उसने एक साथ पांच फिल्मों के [संगीत] लिए
  191. 9:13कहानी खोजने और गीत संगीत के लिए नए लोगों
  192. 9:16को ढूंढना शुरू कर दिया था। फिल्म के काम
  193. 9:20के संबंध में रत्नाकर शेट्टी ने शौर्य की
  194. 9:22मीटिंग मालिनी खुराना के साथ तय की थी।
  195. 9:26दरअसल कबीर शेखावत से विवाद के बाद उसके
  196. 9:29पिता रणधीर शेखावत ने इंडस्ट्री में शौर्य
  197. 9:32और नताशा के खिलाफ ऐसा माहौल बना दिया था,
  198. 9:34कि कोई भी उनके साथ काम [संगीत] ना करें।
  199. 9:37रणधीर शेखावत ने सुधाकर खुराना पर भी दबाव
  200. 9:41बनाया जिसके कारण मालिनी को मजबूरी में इस
  201. 9:44प्रोजेक्ट से पीछे हटना पड़ा क्योंकि
  202. 9:46स्टोरी का राइट मालिनी के पास था और
  203. 9:49रत्नाकर शेट्टी को भी स्टोरी बहुत पसंद थी
  204. 9:52इसीलिए वह चाहता था कि अगर मालिनी खुराना
  205. 9:54इस फिल्म पर आगे काम नहीं करती है तो कम
  206. 9:57से कम वो स्टोरी को उसके नाम कर दे ताकि
  207. 10:00वो उस पर काम कर सके।
  208. 10:03शौर्य समय पर होटल रीगिल पहुंचा जहां
  209. 10:05रत्नाकर शेट्टी और मालिनी पहले ही मौजूद
  210. 10:08थे। शौर्य मालिनी के सामने बैठते हुए बोला
  211. 10:12गुड मॉर्निंग मिस मालिनी। आप तो अपने काम
  212. 10:15के लिए मुझे तैयार करके भूल ही गई।
  213. 10:17[संगीत]
  214. 10:18अगर आपको फिल्म करनी ही नहीं थी तो मुझे
  215. 10:21यूं उम्मीद देने की क्या जरूरत थी? शौर्य
  216. 10:24की बात सुनकर मालिनी के चेहरे पर थोड़ी
  217. 10:27शर्मिंदगी झलकने लगी। उसने [संगीत] खेद
  218. 10:29व्यक्त करते हुए जवाब दिया।
  219. 10:33देखा जाए तो मैं तुम्हारी गुनहगार हूं।
  220. 10:35इसीलिए तुम्हारा ऐसा कहना जायज है। लेकिन
  221. 10:39यकीन करो मैं अपनी तरफ से इस फिल्म को
  222. 10:42करने के लिए पूरी तरह तैयार [संगीत]
  223. 10:43थी। पर आखिरी वक्त में पता नहीं कहां से
  224. 10:46रणधीर शेखावत ने मेरे पापा को डरा दिया कि
  225. 10:50अगर मैं तुम्हारे साथ यह फिल्म करूंगी तो
  226. 10:52रिलीज के लिए हॉल भी नहीं मिलेगा। मेरे
  227. 10:55पापा डर गए और उन्होंने मुझे तुम्हारे साथ
  228. 10:58काम करने से रोक दिया। मुझे तुम्हारे साथ
  229. 11:01यह [संगीत] फिल्म करनी थी। इसीलिए मैंने
  230. 11:03आगे इस पर कोई काम भी शुरू नहीं किया।
  231. 11:06जबकि इसके गाने पहले से बनकर तैयार हैं।
  232. 11:10शौर्य ने सीधे मुद्दे पर आते हुए अपनी बात
  233. 11:13रखी। चलो
  234. 11:14[संगीत]
  235. 11:14ठीक है। मैं आपकी इस परेशानी को समझता हूं
  236. 11:17कि आपके पिताजी रणधीर शेखावत के प्रेशर को
  237. 11:21झेल नहीं सके। इसीलिए मैं आपके सामने एक
  238. 11:24प्रपोजल रखता हूं। आपने अभी तक इस फिल्म
  239. 11:26के प्री प्रोडक्शन में जो भी खर्च किया
  240. 11:29है, उस पर 20% प्रॉफिट के साथ जो भी
  241. 11:32अमाउंट बनता है, वो मैं आपको दिलवा देता
  242. 11:35हूं और आप इस फिल्म के सारे राइट्स हमारे
  243. 11:37नाम कर दें ताकि हम इस [संगीत] फिल्म को
  244. 11:40पूरा कर सकें।
  245. 11:42शौर्य की बात सुनने के बाद मालिनी ने
  246. 11:45आश्चर्य से उसकी ओर देखा और पूछा।
  247. 11:49क्या तुम्हारे पास इतने पैसे हैं कि तुम
  248. 11:52इस फिल्म को पूरा कर पाओगे?
  249. 11:56आपने सही कहा कि मेरे पास इतने पैसे नहीं
  250. 11:58है। पर मेरे पास एक फाइनेंसर है जो मेरे
  251. 12:01लिए इस फिल्म को फाइनेंस कर सकता है। आप
  252. 12:04मिस्टर रत्नाकर शेट्टी से इस बारे में पूछ
  253. 12:06सकती हैं। यू उस फाइनेंसर से मिल चुके
  254. 12:09हैं।
  255. 12:10शौर्य रत्नाकर शेट्टी की ओर देखकर बोला
  256. 12:14मालिनी ने आश्चर्य से रत्नाकर शेट्टी की
  257. 12:17ओर देखा और पूछा
  258. 12:19मिस्टर शेट्टी आपने अभी तक मुझे यह नहीं
  259. 12:21बताया कि आपकी इस फिल्म को लेकर किसी
  260. 12:24फाइनेंसर से बात हुई है रत्नाकर शेट्टी ने
  261. 12:28सफाई दी और जब तक कुछ फाइनल नहीं होता तब
  262. 12:31तक उसके बारे में बात करना जल्दीबाजी होती
  263. 12:34है मिस मालिनी इसीलिए तो जब सब फाइनल हो
  264. 12:37गया उसके बाद ही मिस्टर श्रवण के साथ आपकी
  265. 12:40मीटिंग रखवाई है। मालिनी ने अपनी चिंता
  266. 12:44व्यक्त की। पर श्रवण मान लिया तुमने फिल्म
  267. 12:47कंप्लीट कर भी ली पर बाद में तो उसको
  268. 12:50रिलीज करने को लेकर प्रॉब्लम आएगी। तब
  269. 12:53क्या करोगे? क्योंकि रणधीर शेखावत इस
  270. 12:56इंडस्ट्री का बड़ा डिस्ट्रीब्यूटर है। कोई
  271. 12:59भी उसके खिलाफ जाने की हिम्मत नहीं करेगा।
  272. 13:02आप उसकी चिंता ना करें। समय आने पर वो भी
  273. 13:06मैनेज हो जाएगा।
  274. 13:08शौर्य ने मुस्कुराते हुए विश्वास के साथ
  275. 13:10जवाब दिया। [संगीत] मालिनी को शौर्य का
  276. 13:13कॉन्फिडेंस देखकर अचरज भी हुआ। वो सोचने
  277. 13:17लगी कि पहले तो [संगीत] यह फिल्म करने के
  278. 13:18लिए ही तैयार नहीं था और अब अपनी फिल्म के
  279. 13:21लिए फाइनेंसर भी ढूंढ लिया। आखिर इसका
  280. 13:24रीजन क्या है? यह सोचकर उसने शौर्य से
  281. 13:27पूछा।
  282. 13:29क्या मैं जान सकती हूं कि पहले तो तुम
  283. 13:31फिल्म करने को ही तैयार [संगीत] नहीं थे
  284. 13:33और अब खुद ही फाइनेंसर ढूंढ लाए।
  285. 13:37शौर्य ने सरकास्टिक अंदाज में अपनी बात
  286. 13:39रखी। समय आने पर तुम्हें इसका कारण भी समझ
  287. 13:43आ जाएगा।
  288. 13:45मालिनी ने संकोच भरे स्वर में सवाल किया।
  289. 13:49ठीक है [संगीत] मैं तुम्हें इस फिल्म के
  290. 13:51राइट देने को तैयार हूं। पर इस फिल्म में
  291. 13:54हीरोइन कौन होगी? अगर तुम तैयार हो तो
  292. 13:58मुझे किसी और हीरोइन की जरूरत नहीं है।
  293. 14:01शौर्य मालिनी की आंखों में देखते हुए
  294. 14:03बोला। शौर्य की बात सुनकर मालिनी की आंखों
  295. 14:07में चमक आ गई। वो खुश होते हुए अपनी बात
  296. 14:10रखती है। अगर तुम मुझे इस फिल्म में
  297. 14:13हीरोइन बनाने के लिए तैयार हो तो जो तुमने
  298. 14:16[संगीत] 20% प्रॉफिट देने की बात की थी वो
  299. 14:19मुझे नहीं चाहिए। तुम मुझे सिर्फ
  300. 14:21प्रीप्रोडक्शन में मेरी जो लागत लगी है
  301. 14:24वही दिलवा देना।
  302. 14:26तभी शौर्य के मोबाइल पर कॉल आने लगी। उसने
  303. 14:29नंबर देखा तो वो छगन का था। शौर्य ने सोचा
  304. 14:33कि इस समय छगन उसे क्यों फोन कर रहा है?
  305. 14:36फिर उसने कॉल उठा ली। दूसरी तरफ छगन की
  306. 14:40बात सुनकर शौर्य के चेहरे पर चिंता झलकने
  307. 14:42लगी और वो जल्दी में दिखाई देने लगा।
  308. 14:46[संगीत] टेबल से उठते हुए शौर्य ने
  309. 14:48रत्नाकर शेट्टी से कहा।
  310. 14:51मिस्टर शेट्टी आप बाकी की फॉर्मेलिटीज
  311. 14:52[संगीत] मिस मालिनी के साथ पूरी कर लीजिए।
  312. 14:55अभी मुझे कुछ अर्जेंट काम आ गया है।
  313. 14:58इसीलिए मुझे जाना होगा।
  314. 15:01तो क्या होगा आगे? आखिर ऐसा क्या कहा था
  315. 15:04छगन ने जो शौर्य के चेहरे पर परेशानी के
  316. 15:07भाव नजर आने लगे? शौर्य मालिनी से मिलकर
  317. 15:09उसकी फिल्म का प्री-प्रोडक्शन कॉस्ट उसे
  318. 15:11देने की बात करके फिल्म खुद प्रोड्यूस
  319. 15:14करने का ऑफर देता है। जिसे मालिनी
  320. 15:16एक्सेप्ट कर लेती है। तभी शौर्य के फोन पर
  321. 15:19छगन का कॉल आता है और वह जल्दीबाजी में
  322. 15:22वहां से निकल जाता है। शौर्य होटल से निकल
  323. 15:25कर अपनी कार में बैठ जाता है और शिप्रा को
  324. 15:28फोन लगा देता है। लेकिन उसका फोन नहीं
  325. 15:30लगता है। उसके माथे पर चिंता की लकीरें
  326. 15:33नजर आने लगी। उसने दोबारा छगन को फोन
  327. 15:36किया।
  328. 15:38तुमने किस जगह से शिप्रा को उठाने की बात
  329. 15:40की थी? छगन के फोन उठाने पर शौर्य ने उससे
  330. 15:44पूछा,
  331. 15:45बॉस धौली रोड से वहां का इलाका थोड़ा
  332. 15:48सुनसान है। उसी जगह से शिप्रा मैम को
  333. 15:51उठाया गया है।
  334. 15:52छगन ने जवाब दिया। अभी तुम क्या कर रहे
  335. 15:56हो? क्या तुम अभी वहां पहुंच सकते हो?
  336. 15:59शौर्य जल्दी में बोला।
  337. 16:01मैं अभी पहुंचता हूं बॉस। मुझे 10-15 मिनट
  338. 16:04लगेंगे।
  339. 16:06छगन ने कहा, शौर्य ने फोन काटा और मोबाइल
  340. 16:09में धौली रोड का लोकेशन लगाया और पूरी
  341. 16:12रफ्तार से अपनी कार को लोकेशन की तरफ
  342. 16:14बढ़ाया। गाड़ी हवा से बात कर रही थी।
  343. 16:17शौर्य का जबड़ा भिचा हुआ था। उसका माथा
  344. 16:20पसीने से लथपथ था। कुछ ही देर में उसकी
  345. 16:23कार धौली रोड पर थी। उसने नोटिस किया
  346. 16:26मार्केट खत्म होने के बाद आगे का एरिया
  347. 16:29खाली पड़ जाता है। वहां कोई आबादी नहीं
  348. 16:32थी। एक तराहे के पास शौर्य को शिप्रा की
  349. 16:35कार सड़क के किनारे पर खड़ी नजर आई। शौर्य
  350. 16:38ने कुछ दूर आगे जाकर अपनी गाड़ी को रोका
  351. 16:41और उससे बाहर आया। वो शिप्रा की कार के
  352. 16:44पास आया तो उसने देखा कि शिप्रा की कार
  353. 16:46सड़क पर तिरछी खड़ी है। उसका एक साइड का
  354. 16:50दरवाजा खुला हुआ था। सड़क पर आने जाने
  355. 16:53वाले बाइक सवार रुक-रुक कर इस लावारिस कार
  356. 16:56को देख रहे थे। शौर्य ने नोटिस किया कि
  357. 16:59जहां पर शिप्रा की कार खड़ी थी, वहां से
  358. 17:01कुछ ही दूर एक कच्चा रास्ता शहर से बाहर
  359. 17:04की तरफ जा रहा था। जो कि आगे जाकर एक जंगल
  360. 17:07से मिलता था। शौर्य खड़ा उस दिशा में देख
  361. 17:10रहा था। उसे विश्वास था कि जिसने भी
  362. 17:13शिप्रा को किडनैप किया है, वो उसे लेकर
  363. 17:15इसी दिशा में गया होगा। उसे समझ नहीं आ
  364. 17:19रहा था कि आखिर शिप्रा को किसने किडनैप
  365. 17:21किया होगा। उसके दिमाग में कई नाम घूम रहे
  366. 17:25थे। पर वो किसी को लेकर शोर नहीं था। सबसे
  367. 17:28बुरी बात यह थी कि शिप्रा का फोन भी
  368. 17:30स्विच्ड [संगीत] ऑफ था और अभी तक किसी का
  369. 17:32धमकी भरा कॉल भी नहीं आया था। जिससे शौर्य
  370. 17:35अंदाजा लगा सके कि शिप्रा को किसने किडनैप
  371. 17:38किया है। अभी शौर्य इसी उलझन में था कि
  372. 17:41तभी उसने अपने पास एक गाड़ी के रुकने की
  373. 17:44आवाज सुनी। उसने पलट कर देखा तो उस गाड़ी
  374. 17:47से छगन उतर रहा था। छगन उसके पास पहुंचा।
  375. 17:51तुम्हें कैसे पता चला कि शिप्रा किडनैप हो
  376. 17:53गई है? शौर्य ने छूटते ही सबसे पहला सवाल
  377. 17:57छगन से यही किया। शायद आपको वो लड़का याद
  378. 18:01हो जो पिछली बार विजय दीवान के कहने पर
  379. 18:04हमने आपको घेरा था और आपने हमारे एक लड़के
  380. 18:07को एक किक मारी थी। उसका नाम बजरंगी है।
  381. 18:10उसी से हमें खबर मिली थी। छगन ने जवाब
  382. 18:14दिया। शौर्य को याद आया कि कैसे उसने छगन
  383. 18:17के चेले को पिछली बार किक मारी थी। उसने
  384. 18:21परेशानी भरे स्वर में पूछा। लेकिन बजरंगी
  385. 18:24को कैसे पता चला? बॉस कुछ दिन पहले हमारे
  386. 18:28शहर में एक गैंग आया है। उसे यहां के कुछ
  387. 18:31लोकल लड़के अपने काम के लिए चाहिए थे।
  388. 18:34जिसके लिए उसने यहां के लोकल गुंडों को
  389. 18:36कांटेक्ट करना शुरू किया था। जिन लोगों को
  390. 18:39उसने अपना काम करने के लिए सेलेक्ट किया
  391. 18:41था, उसमें हमारा बजरंगी भी था। इस काम के
  392. 18:45लिए वह पैसे भी अच्छे दे रहा था। इसीलिए
  393. 18:48बजरंगी भी उसके साथ हो लिया। दूसरी बात यह
  394. 18:52थी कि किसी लड़के को पता नहीं था कि उससे
  395. 18:54वो लोग क्या काम लेने वाले हैं। पर पैसे
  396. 18:57अच्छे मिल रहे थे। इसीलिए उन लड़कों ने इस
  397. 19:00बारे में ज्यादा पूछताछ भी नहीं की। इतना
  398. 19:03तो सबकी समझ में आ रहा था कि किसी सही काम
  399. 19:06के लिए तो इतने पैसे नहीं मिलने वाले थे।
  400. 19:09जब आज शिप्रा मैम को यहां से किडनैप किया
  401. 19:11गया तो बजरंगी उनको देखते ही पहचान गया था
  402. 19:15कि वह आपकी वाइफ हैं। उस दिन आपके साथ
  403. 19:18उसने आपकी वाइफ को भी देखा था। बजरंगी को
  404. 19:21जैसे ही समझ में आया, उसने मुझे मैसेज
  405. 19:23करके यह बात बताई।
  406. 19:26छगन ने विस्तार से शौर्य को पूरी बात
  407. 19:28बताई।
  408. 19:30बात शौर्य को समझ में आई और उसे एक उम्मीद
  409. 19:32की किरण भी नजर आई। वो उम्मीद भरे स्वर
  410. 19:35में छगन से पूछा।
  411. 19:38इसका मतलब बजरंगी अभी भी उन किडनैपर्स के
  412. 19:41साथ है। उनके साथ ही होगा बॉस। मैंने
  413. 19:44जानबूझकर उसे फोन नहीं किया कि कहीं किसी
  414. 19:47को उसके ऊपर शक ना हो। मैंने पहले आपको
  415. 19:50बताना जरूरी समझा। छगन ने कहा
  416. 19:54तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया छगन जो तुमने
  417. 19:57मेरे लिए यह काम किया। मैं इस बात का
  418. 20:00ध्यान रखूंगा। पर अभी मुझे तुम्हारी और
  419. 20:02मदद की जरूरत है। शौर्य छगन का धन्यवाद
  420. 20:06करते हुए बोला। आप कैसी बात कर रहे हैं
  421. 20:09बॉस? मैंने आपको बॉस कहा है तो मैं आपको
  422. 20:12मानता भी हूं। आपके लिए कुछ भी कर सकता
  423. 20:15हूं। छगन ने आदर के साथ कहा, "क्या तुम उस
  424. 20:19आदमी को जानते हो जिसने अपने काम के लिए
  425. 20:22बजरंगी जैसे लड़कों को हायर किया था।"
  426. 20:26शौर्य ने बेचैनी से पूछा, "उसका नाम
  427. 20:30रुस्तम है, बॉस।" वो भानगढ़ से ताल्लुक
  428. 20:32रखता है। उसके बारे में कहा जाता है कि वो
  429. 20:35मार्शल आर्ट्स का बढ़िया लड़ाका है। उसके
  430. 20:38अपने गैंग में तीन-चार लोग ही हैं। जब उसे
  431. 20:41लड़कों की जरूरत होती है तो वो ऐसे ही
  432. 20:43जरूरत के हिसाब से लड़कों को पैसे देकर
  433. 20:46कुछ समय के लिए हायर कर लेता है और काम
  434. 20:49खत्म होने पर गायब हो जाता है।
  435. 20:53छगन रुस्तम के बारे में जो कुछ जानता था
  436. 20:56सब बता दिया। शौर्य को यह जानकर थोड़ी
  437. 20:58तसल्ली हुई कि अगर रुस्तम ने शिप्रा को
  438. 21:01किडनैप किया है तो जरूर वह किसी और के लिए
  439. 21:04किया होगा। इसीलिए अभी फौरन शिप्रा के लिए
  440. 21:07कोई खतरा नहीं होगा। रुस्तम जिसके लिए भी
  441. 21:10यह काम कर रहा होगा शिप्रा को उसे सौंपने
  442. 21:13में थोड़ा समय तो लगेगा। लेकिन अगर शौर्य
  443. 21:16ने जल्दी ही कुछ नहीं किया तो फिर शिप्रा
  444. 21:19के लिए खतरा हो सकता है। यह सोचकर शौर्य
  445. 21:22ने छगन से पूछा। क्या तुम अभी बजरंगी से
  446. 21:25पता कर सकते हो? कि वो लोग इस वक्त कहां
  447. 21:28हैं?
  448. 21:30क्या मैं उसे फोन करूं बॉस? इसमें बजरंगी
  449. 21:33के लिए कोई खतरा तो नहीं होगा। छगन शौर्य
  450. 21:36से इजाजत लेते हुए बोला। छगन की बात सुनकर
  451. 21:40शौर्य सोच में पड़ गया। कुछ सोचकर उसने
  452. 21:43कहा, "एक बार ट्राई करो।" अगर नहीं उठाता
  453. 21:46तो दोबारा मत करना।"
  454. 21:49छगन ने बजरंगी को फोन लगाया। पूरी रिंग
  455. 21:52जाने के बाद भी बजरंगी ने फोन नहीं उठाया।
  456. 21:56शौर्य ने दोबारा छगन को फोन करने से मना
  457. 21:58कर दिया। क्या उसने तुम्हें पहले बताया था
  458. 22:02कि वो शिप्रा को लेकर कहां जा रहा है?
  459. 22:05शौर्य कुछ सोचकर छगन से बोला, नहीं बॉस,
  460. 22:09मेरी उससे कोई बात नहीं हुई है। जिस समय
  461. 22:11उन लोगों ने शिप्रा मैम को किडनैप किया
  462. 22:14था, बजरंगी ने मुझे मैसेज करके यही बताया
  463. 22:16था। बात तो उसने की ही नहीं। छगन ने
  464. 22:20बताया,
  465. 22:22एक काम करो मुझे बजरंगी का नंबर दो।
  466. 22:26शौर्य ने अपना मोबाइल निकालते हुए कहा।
  467. 22:28छगन ने शौर्य को बजरंगी का नंबर दिया।
  468. 22:31नंबर नोट करने के बाद शौर्य किसी को फोन
  469. 22:34लगाने लगा। दूसरी तरफ एक एंबुलेंस एक
  470. 22:37कच्चे रास्ते पर तेजी से बढ़ती जा रही थी।
  471. 22:40एंबुलेंस के पीछे के हिस्से में शिप्रा
  472. 22:43डरी सहमी सी बैठी हुई थी। उसे समझ नहीं आ
  473. 22:46रहा था कि यह उसके साथ क्या हो रहा था।
  474. 22:49कुछ देर पहले वो अपने ऑफिस जा रही थी।
  475. 22:52अचानक ही उसे धौली रोड पर एक बाइक का
  476. 22:55एक्सीडेंट होता नजर आया। बीच रोड पर एक
  477. 22:57बाइक पलटी हुई थी और उसके नीचे एक शख्स
  478. 23:00दबा हुआ पड़ा था। शिप्रा ने यह देखा तो
  479. 23:03जल्दी से उसने बीच सड़क पर अपनी कार रोक
  480. 23:06दी और जल्दी से बाहर आकर उस बाइक के पास
  481. 23:09पहुंची। उसने बाइक उठाने की कोशिश की पर
  482. 23:12बाइक भारी होने के कारण उठा नहीं पा रही
  483. 23:15थी। उसी समय उसने सामने से [संगीत] एक
  484. 23:17एंबुलेंस को आते देखा। शिप्रा को बाइक के
  485. 23:20नीचे दबा शख्स बेहोश नजर आ रहा था।
  486. 23:23एंबुलेंस आकर शिप्रा के सामने रुकी और
  487. 23:26उसका पीछे का दरवाजा खुला। शिप्रा इंतजार
  488. 23:29करने लगी कि कोई अभी एंबुलेंस से स्ट्रेचर
  489. 23:31बाहर लाएगा। पर उसी समय उसने अपने पीछे एक
  490. 23:34आहट महसूस की। जैसे ही उसने पलट कर देखा
  491. 23:38तो उसे बाइक के नीचे दबा शख्स अपने पीछे
  492. 23:40खड़ा नजर आया। शिप्रा जब तक समझ पाती कि
  493. 23:44उसके साथ कोई धोखा हुआ है तब तक उस शख्स
  494. 23:47ने शिप्रा को पीछे से पकड़ लिया था। उसी
  495. 23:50समय दो शख्स एंबुलेंस से बाहर आए और
  496. 23:53शिप्रा के पैर पकड़ कर उसे उठा लिया और
  497. 23:56तीनों शख्स ने मिलकर शिप्रा को एंबुलेंस
  498. 23:59के पीछे के हिस्से में किसी बोरी की तरह
  499. 24:01फेंक दिया। शिप्रा को चोट तो लगी पर उस
  500. 24:04समय उसे किसी भी दर्द का एहसास नहीं हुआ।
  501. 24:07वो चिल्लाना चाहती थी कि तभी किसी ने पीछे
  502. 24:10से उसका मुंह दबा दिया और खूंखार लहजे में
  503. 24:13कहा अगर अपनी सलामती चाहती हो तो बिना कोई
  504. 24:17आवाज किए चुपचाप यहां पड़ी रहो। नहीं तो
  505. 24:21मुझे नहीं पता मेरे साथ के लड़के तुम्हारे
  506. 24:24साथ क्या हरकत करेंगे।
  507. 24:27जैसे ही शिप्रा ने यह सुना वो फ़ौरन खामोश
  508. 24:30हो गई। उसने डरे हुए स्वर में कहा
  509. 24:34कौन हो [संगीत] तुम लोग? और मुझे क्यों
  510. 24:37किडनैप किया है?
  511. 24:39तुम्हें तुम्हारे सभी सवालों का जवाब
  512. 24:42मिलेगा। पर अभी नहीं। सही समय पर तुमको सब
  513. 24:47कुछ पता चल जाएगा।
  514. 24:50उसी शख्स ने शांति से कहा शिप्रा की
  515. 24:53हिम्मत नहीं हुई कि वो दोबारा चिल्लाने
  516. 24:56[संगीत] की कोशिश करें। शिप्रा उस शख्स को
  517. 24:58देखकर इतना तो समझ गई कि यही शख्स इन सबका
  518. 25:02लीडर है। इसके अलावा एंबुलेंस के अंदर
  519. 25:05पांच लोग और भी थे। जबकि आगे ड्राइवर के
  520. 25:08साथ दो लोग और बैठे हुए थे। बजरंगी तुम
  521. 25:12बाहर जाकर राजा के साथ उसकी बाइक से
  522. 25:14एंबुलेंस के साथ चलोगे।
  523. 25:17तभी बाहर खड़े राजा ने बताया रुस्तम भाई
  524. 25:20इस लड़की की कार बीच रोड पर ही खड़ी है।
  525. 25:23हमें उसे पहले साइड करना पड़ेगा। तभी
  526. 25:26हमारी एंबुलेंस आगे जा पाएगी।
  527. 25:29रुस्तम ने अपने सामने बैठे उन दो लड़कों
  528. 25:31से कहा,
  529. 25:33"तुम दोनों यहां क्या तमाशा देख रहे हो?"
  530. 25:35गाड़ी से बाहर जाकर जल्दी से इस लड़की की
  531. 25:38कार को साइड करो। एंबुलेंस के अंदर बैठे
  532. 25:41दोनों शख्स बाहर आ गए और राजा बजरंगी की
  533. 25:44मदद करने लगा। उन्होंने गाड़ी को धक्का
  534. 25:47देकर साइड में कर दिया। राजा और बजरंगी
  535. 25:50बाहर ही खड़े रहे क्योंकि उन दोनों को
  536. 25:52बाइक से जाना था। जबकि बाकी बदमाश
  537. 25:55एंबुलेंस के अंदर चले गए। ड्राइवर ने
  538. 25:58एंबुलेंस आगे बढ़ा दी। राजा ने अपनी बाइक
  539. 26:00उठाई और बजरंगी के बैठने के बाद बाइक को
  540. 26:03एंबुलेंस के पीछे लगा दिया। कुछ ही दूर
  541. 26:06जाने के बाद एंबुलेंस एक कच्ची सड़क पर
  542. 26:08उतर गई और आगे बढ़ गई। कुछ देर आगे जाने
  543. 26:12के बाद शिप्रा ने हिम्मत करके कहा
  544. 26:16कौन हो तुम लोग? और मुझे क्यों किडनैप
  545. 26:19किया है? तुम नहीं जानते इसका नतीजा
  546. 26:22तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा। अभी भी
  547. 26:25वक्त है। मैं कहती हूं मुझे छोड़ दो तो
  548. 26:28शायद मैं तुम लोगों के खिलाफ कोई कदम नहीं
  549. 26:31उठाऊंगी।
  550. 26:32मेरा अच्छा सोचने के लिए तुम्हारा
  551. 26:34बहुत-बहुत धन्यवाद मैडम। पर अभी यहां
  552. 26:38तुम्हारी कोई भी बात मानी नहीं जाएगी। और
  553. 26:41तुम्हारे लिए यही अच्छा होगा कि तुम
  554. 26:44चुपचाप अच्छी बच्ची की तरह बिना कोई
  555. 26:47हंगामा किए बैठी रहो। तो शायद हम तुम्हारे
  556. 26:50साथ अच्छे से पेश आएंगे।
  557. 26:54रुस्तम ने शराफत से कहा, "रुस्तम ऐसे बात
  558. 26:57कर रहा था कि लग ही नहीं रहा था कि वो अभी
  559. 27:00किसी को किडनैप करके ले जा रहा है।" तुम
  560. 27:03ऐसे ही चुपचाप हमारा सहयोग करती रहोगी तो
  561. 27:06तुम्हें हमारी वजह से कोई तकलीफ नहीं
  562. 27:09होगी।
  563. 27:10रुस्तम शिप्रा को शांत बैठे देखकर बोला
  564. 27:14रुस्तम को शराफत से बात करते देखकर शिप्रा
  565. 27:17ने फिर से हिम्मत की और बोली देखो अगर तुम
  566. 27:21यह सब पैसों के लिए कर रहे हो तो मैं
  567. 27:23तुमसे वादा करती हूं कि जितने पैसे
  568. 27:25तुम्हें मुझे किडनैप करने के लिए मिल रहे
  569. 27:28हैं मैं तुम्हें उससे ज्यादा पैसे दूंगी।
  570. 27:31बस तुम मुझे छोड़ दो।
  571. 27:34मैंने तुम्हारे बारे में सही सुना था कि
  572. 27:36तुम अपने दिमाग से काम करती हो। किडनैप
  573. 27:40होने के बाद भी तुम इस कोशिश में लगी हुई
  574. 27:42हो कि तुम मुझसे मांडवाली कर सको पर कोई
  575. 27:46फायदा नहीं। अगर इस बार तुम ठीक-ठाक वापस
  576. 27:50चली जाती हो तो अगली बार मैं तुम्हें मौका
  577. 27:53जरूर दूंगा।
  578. 27:55रुस्तम ने मुस्कुराते हुए कहा।
  579. 27:58पर यह तो बता दो कि मुझे किसके कहने पर
  580. 28:01तुमने किडनैप किया है। शिप्रा अभी भी हार
  581. 28:04नहीं मान रही थी। रुस्तम उपहास उड़ाने
  582. 28:07वाले अंदाज में बोला तुम कितनी भी कोशिश
  583. 28:10कर लो पर कोई फायदा नहीं। तुम्हें हमसे
  584. 28:14कुछ भी पता नहीं चलेगा।
  585. 28:17तो क्या होगा आगे? किसके कहने पर रुस्तम
  586. 28:20ने शिप्रा को किडनैप किया है। क्या शौर्य
  587. 28:23समय पर शिप्रा को बचा पाएगा? कांता प्रसाद
  588. 28:26को कॉल किया। अभी वह कुछ बोलता उससे पहले
  589. 28:29कांता प्रसाद की आवाज आई।
  590. 28:31अच्छा हुआ जो तुमने फोन कर लिया। मैं अभी
  591. 28:34तुम्हें ही कॉल करने वाला था। अभी तक
  592. 28:36शिप्रा ऑफिस नहीं आई है। मैं कॉल लगा रहा
  593. 28:39हूं तो उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ आ रहा है।
  594. 28:43कांता प्रसाद जी शिप्रा किडनैप हो गई है।
  595. 28:45मैंने आपको उसी के लिए फोन किया है। शौर्य
  596. 28:48निराश स्वर में बोला
  597. 28:51क्या कहा शिप्रा किडनैप हो गई? इस शहर में
  598. 28:55आखिर किसकी इतनी हिम्मत हो गई कि उसने
  599. 28:57शिप्रा बेटी का अपहरण करने की जुर्रत की।
  600. 29:00यह खबर सुनकर पहले तो कांता प्रसाद जी
  601. 29:02हैरान रह गए। लेकिन अगले ही पल उनके स्वर
  602. 29:05में गुस्सा साफ झलकने लगा। कांता प्रसाद
  603. 29:08जी मुझे आपकी थोड़ी मदद चाहिए। अभी तक
  604. 29:10हमें नहीं पता कि यह काम किसने किया है।
  605. 29:13अगर आप मेरी मदद करें तो मैं जल्दी ही पता
  606. 29:15लगा लूंगा कि इसके पीछे [संगीत] कौन है।
  607. 29:18शौर्य ने बेचैनी से करवट बदलते हुए कहा,
  608. 29:21"कैसी बातें कर रहे हो शौर्य बेटे? यह भी
  609. 29:24कोई कहने की बात है। जिसने भी शिप्रा बेटी
  610. 29:26का किडनैप किया है, मैं उसे ढूंढ कर
  611. 29:29रहूंगा और ऐसी सजा दूंगा कि वो दोबारा कभी
  612. 29:32शिप्रा बेटी की तरफ नजर उठाने की हिम्मत
  613. 29:35भी नहीं करेगा।
  614. 29:37कांता प्रसाद जी की बूढ़ी आवाज [संगीत]
  615. 29:39में अचानक ऐसी गर्जना गूंज उठी। मानो कोई
  616. 29:41शेर दहाड़ रहा हो। उन्होंने आगे शौर्य से
  617. 29:44पूछा।
  618. 29:45किस तरह की मदद चाहिए शौर्य बेटे?
  619. 29:48शौर्य ने कांता प्रसाद जी को फोन करने का
  620. 29:50उद्देश्य स्पष्ट किया। कांता प्रसाद जी
  621. 29:53जिसने भी शिप्रा का अपहरण किया है उसके
  622. 29:55गिरोह में एक लड़का है जिसका नाम बजरंगी
  623. 29:58है। मैं अभी आपको उसका मोबाइल नंबर भेज
  624. 30:00रहा हूं। मुझे पता लगवाना है कि इस समय वो
  625. 30:02मोबाइल कहां एक्टिव है और उसकी लोकेशन
  626. 30:05क्या है। क्या आप यह काम कर पाएंगे?
  627. 30:08तुम उसका नंबर भेजो। मैं अभी पता लगाकर
  628. 30:11तुम्हें बताता हूं कि इस समय वो कहां है।
  629. 30:14कांता प्रसाद जी ने पूरे विश्वास के साथ
  630. 30:16जवाब दिया। शौर्य ने बजरंगी का नंबर कांता
  631. 30:20प्रसाद जी को भेज दिया। [संगीत] अब वो
  632. 30:22धौली रोड पर ही कांता प्रसाद जी की तरफ से
  633. 30:24क्या जवाब आता है, उसका इंतजार करने लगा।
  634. 30:27यह जो थोड़ी देर शौर्य को इंतजार करना पड़
  635. 30:30रहा था, यह एक-ए मिनट शौर्य को एक-ए
  636. 30:32[संगीत] घंटे के समान लग रहा था। लगभग 10
  637. 30:35मिनट के बाद शौर्य के पास कांता प्रसाद जी
  638. 30:37का फोन आया। क्या हुआ कांता प्रसाद जी?
  639. 30:40कुछ पता चला कि बजरंगी अभी किस जगह पर है?
  640. 30:43शौर्य बेसब्र होकर बोला। कांता प्रसाद जी
  641. 30:46ने जवाब दिया,
  642. 30:47हां, पता तो चल गया है पर वो एक जगह पर
  643. 30:50स्थिर नहीं है। वो भी नीलगिरी फॉरेस्ट के
  644. 30:52अंदर की तरफ ही बढ़ता जा रहा है।
  645. 30:55शौर्य उस रास्ते की तरफ देखने लगा जो एक
  646. 30:57कच्ची सड़क शहर को छोड़कर जंगल की तरफ जा
  647. 31:00रहा था। उसका शक सही निकला। जिन लोगों ने
  648. 31:02भी शिप्रा को किडनैप किया है, वो लोग उसे
  649. 31:05लेकर जंगल में ही गए हैं। कांता प्रसाद जी
  650. 31:07ने शौर्य को भरोसा दिलाया।
  651. 31:10तुम इस समय कहां हो? मैं तुरंत कुछ लोगों
  652. 31:12को तुम्हारी मदद के लिए भेजता हूं।
  653. 31:15कमिश्नर रोहित सरजना भी पुलिस टीम को लेकर
  654. 31:17शिप्रा की तलाश में जुट रहे हैं। शौर्य ने
  655. 31:20कांता प्रसाद जी से रिक्वेस्ट की। [संगीत]
  656. 31:23मेरे पास इंतजार करने का समय नहीं है
  657. 31:25कांता प्रसाद जी। मैं इस वक्त धौली रोड पर
  658. 31:27हूं। जहां शिप्रा [संगीत] की लावारिस कार
  659. 31:29मिली है। मैं अभी जंगल में जा रहा हूं। आप
  660. 31:32बस कमिश्नर साहब से कह दीजिए कि बजरंगी की
  661. 31:34लाइव लोकेशन मुझे भेजते रहें।
  662. 31:36तुम ऐसा मत करो शौर्य। यह खतरनाक हो सकता
  663. 31:39है। मैं जल्दी ही कुछ लोगों को तुम्हारी
  664. 31:42मदद को भेजता हूं। यह जंगल वैसे भी खतरनाक
  665. 31:45है।
  666. 31:46कांता प्रसाद जी ने शौर्य को रोकने की जिद
  667. 31:48की। पर शौर्य कहां मानने वाला था। जब
  668. 31:51कांता प्रसाद जी को यकीन हो गया कि शौर्य
  669. 31:53उनकी बात नहीं मानेगा तो उन्होंने कमिश्नर
  670. 31:56रोहित सरदाना को शौर्य का नंबर दे दिया और
  671. 31:58उनसे कहा कि बजरंगी की वर्तमान लोकेशन की
  672. 32:01हर जानकारी तुरंत शौर्य तक पहुंचाते रहें।
  673. 32:04कुछ ही पलों बाद शौर्य के मोबाइल पर एक
  674. 32:06अनजान नंबर से कॉल आई। उसने फोन उठाया तो
  675. 32:09दूसरी तरफ कमिश्नर रोहित सरदाना थे। रोहित
  676. 32:11सरदाना ने बिना किसी भूमिका के पूछा।
  677. 32:14तुम शौर्य बोल रहे हो?
  678. 32:16शौर्य ने जवाब दिया। हां मैं शौर्य ही बोल
  679. 32:19रहा हूं। कमिश्नर ने शौर्य को समझाने की
  680. 32:22कोशिश की।
  681. 32:23लड़के तुम क्यों जिद पर अड़े हो जंगल में
  682. 32:25अकेले जाने को? थोड़ा इंतजार कर लो। तो
  683. 32:27मैं एक पुलिस टीम को तुम्हारी मदद करने को
  684. 32:30भेजता हूं।
  685. 32:31सॉरी कमिश्नर साहब। मैं यहां हाथ पर हाथ
  686. 32:33धरे इंतजार नहीं कर सकता। आप बस मुझे
  687. 32:36बजरंगी की लोकेशन लगातार बताते रहिए। यही
  688. 32:38मेरे लिए सबसे बड़ी मदद होगी। शौर्य के
  689. 32:42स्वर से साफ था कि वह अपना फैसला बदलने
  690. 32:44वाला नहीं था।
  691. 32:46ठीक है जब तुम किसी की बात मानने को तैयार
  692. 32:48नहीं हो तो अगर तुम्हारे साथ कुछ भी गलत
  693. 32:50होता है। उसकी जिम्मेदारी तुम्हारी अपनी
  694. 32:52होगी।
  695. 32:53कमिश्नर हार मानते हुए बोला। इसके बाद एक
  696. 32:57पुलिस अधिकारी ने शौर्य से संपर्क किया और
  697. 32:59बताया कि बजरंगी इस समय उससे लगभग 22
  698. 33:02कि.मी. दूर [संगीत] नीलगिरी जंगल के
  699. 33:03अंदरूनी हिस्से में है। वहां एक पहाड़ी
  700. 33:06तलहटी के पास एक विशाल झील भी मौजूद थी।
  701. 33:09शौर्य ने छगन की तरफ देखा और पूछा, क्या
  702. 33:12तुम मेरे साथ चलोगे? छगन तुरंत तैयार हो
  703. 33:15गया। आप कैसी बात करते हो बॉस? यह भी कोई
  704. 33:18कहने की बात है। शौर्य ने वार्न किया। सोच
  705. 33:22लो वहां तुम मेरे कारण खतरे में पड़ सकते
  706. 33:24हो। आपको बॉस माना है तो फिर इन छोटी-मोटी
  707. 33:27बातों से मैं घबराने वाला नहीं हूं। छगन
  708. 33:30ने स्पष्ट इरादों के साथ जवाब दिया तो फिर
  709. 33:34अपनी गाड़ी जंगल के अंदर ले चलो। इतना
  710. 33:36कहकर शौर्य छगन की गाड़ी में जाकर बैठ
  711. 33:39गया। छगन की गाड़ी बड़ी और मजबूत थी।
  712. 33:42इसीलिए जंगल के उबड़ खाबड़ रास्तों पर
  713. 33:44चलाने के लिए बिल्कुल
  714. 33:45[संगीत]
  715. 33:45ठीक थी। छगन सावधानी से कच्चे रास्ते पर
  716. 33:47गाड़ी चलाता रहा। दूसरी तरफ फोन पर मौजूद
  717. 33:50पुलिसकर्मी लगातार शौर्य को रास्ता बताता
  718. 33:53जा रहा था। पुलिस ने दोनों मोबाइल नंबर
  719. 33:55ट्रैक पर रखे थे। जिससे बजरंगी और शौर्य
  720. 33:57के बीच की दूरी का पता चल रहा था। करीब 1
  721. 34:00घंटे बाद रास्ता इतना खराब हो गया कि
  722. 34:03गाड़ी आगे नहीं जा सकती थी। तब शौर्य ने
  723. 34:05फोन पर पूछा। अब बजरंगी मुझसे कितनी दूरी
  724. 34:08पर है? पुलिस वाले ने जवाब दिया।
  725. 34:12लगभग 2.5 कि.मी. के करीब।
  726. 34:15पुलिस वाले ने चेतावनी देते हुए कहा। आगे
  727. 34:18सिग्नल कभी भी खत्म हो सकता है। इसलिए हर
  728. 34:21कदम सोच समझ कर उठाना। कमिश्नर साहब ने भी
  729. 34:24एक पुलिस टीम इस तरफ भेज दी है। चाहो तो
  730. 34:28यहीं रुक कर उनका इंतजार कर सकते हो। आगे
  731. 34:31फैसला तुम्हारा है।
  732. 34:33शौर्य ने पुलिस वाले को अपना इरादा स्पष्ट
  733. 34:35कर दिया। अगर ऐसी बात है तो फिर मेरा साथी
  734. 34:39यहीं पर पुलिस का इंतजार करेगा। बाकी मैं
  735. 34:42आगे जा रहा हूं। मैं जब यहां तक आ गया तो
  736. 34:45अब हाथ पर हाथ धरे पुलिस के आने का इंतजार
  737. 34:47नहीं कर सकता। पुलिस वाले ने समझाया
  738. 34:51ठीक है फैसला तुम्हारा है। यहां से सीधे
  739. 34:54पूरब की ओर करीब 2.5 किलोमीटर आगे बढ़ो।
  740. 34:57बजरंगी वहीं है और काफी देर से उसकी
  741. 34:59लोकेशन नहीं बदली है। अगर वहां जाओ तो
  742. 35:02बहुत संभल कर जाना।
  743. 35:05ठीक है मैं आपकी बात का ध्यान रखूंगा।
  744. 35:07शौर्य बोला
  745. 35:08एक बात और बजरंगी का मोबाइल बार-बार
  746. 35:11नेटवर्क से बाहर जा रहा है। [संगीत] शायद
  747. 35:13वो ऐसी जगह पर है जहां नेटवर्क की दिक्कत
  748. 35:16है। इसीलिए आगे बहुत सावधानी से बढ़ना।
  749. 35:19इतना कहकर पुलिस वाले ने शौर्य को सतर्क
  750. 35:21रहने की सलाह दी। वैसे तुम्हारा नाम क्या
  751. 35:26है दोस्त? मैं इतनी देर से तुमसे बात कर
  752. 35:28रहा हूं। पर मुझे तुम्हारा नाम नहीं पता
  753. 35:30है। शौर्य झिझकते हुए उस पुलिस वाले से
  754. 35:33नाम पूछा। पुलिस वाले ने अपना नाम बताया।
  755. 35:38राजेश गुप्ता। राजेश गुप्ता नाम है मेरा।
  756. 35:41शौर्य ने राजेश का धन्यवाद करते हुए कहा।
  757. 35:44धन्यवाद मिस्टर राजेश। आपने मेरा सही
  758. 35:47मार्गदर्शन किया। इसके लिए मैं आपका आभारी
  759. 35:50रहूंगा। राजेश गुप्ता ने फिर से शौर्य को
  760. 35:53समझाने की कोशिश की।
  761. 35:55शौर्य तुम्हारी हिम्मत की दाद देनी
  762. 35:57पड़ेगी। लेकिन मैं फिर कहूंगा अगर तुम
  763. 35:59थोड़ी देर और रुक जाते तो पुलिस भी पहुंच
  764. 36:02जाती और खतरा काफी कम हो जाता।
  765. 36:05शौर्य ने शांत स्वर में कहा राजेश तुम
  766. 36:08अपनी जगह सही हो। पुलिस के आने से शायद
  767. 36:10मेरा खतरा कम हो जाता लेकिन शिप्रा का
  768. 36:13खतरा बढ़ जाता। पुलिस को देखकर बदमाश घबरा
  769. 36:16सकते हैं और शिप्रा के साथ कुछ भी कर सकते
  770. 36:18हैं। मैं ऐसा जोखिम लेना नहीं चाहता।
  771. 36:22राजेश ने अपनी चिंता जाहिर की। मानता हूं
  772. 36:25तुम्हारी बात सही हो सकती है लेकिन तुम
  773. 36:28खुद को भी खतरे में डाल रहे हो।
  774. 36:30तुम मेरे लिए चिंतित हो। मेरी चिंता मत
  775. 36:32करो। मैं बहुत सख्त जान हूं। इतनी आसानी
  776. 36:35से किसी के हाथ आने वाला नहीं हूं। शौर्य
  777. 36:38मुस्कुराते हुए बोला राजेश ने शौर्य का
  778. 36:41हौसला बढ़ाया।
  779. 36:43अगर ऐसा है तो मेरी शुभकामनाएं तुम्हारे
  780. 36:45साथ हैं। जाओ कामयाब होकर लौटना। राजेश
  781. 36:49गुप्ता से बात खत्म करने के बाद शौर्य छगन
  782. 36:52की ओर पलटा और बोला छगन अब यहां से मुझे
  783. 36:55अकेले जाना होगा या फिर एकद घंटे यहीं
  784. 36:58इंतजार कर लो। मुझे उम्मीद है तब तक पुलिस
  785. 37:00भी यहां पहुंच जाएगी। छगन ने साथ चलने की
  786. 37:03जिद की। आप कैसी बात कर रहे हो बॉस? मैं
  787. 37:07आपको यहां से अकेले कैसे जाने दे सकता
  788. 37:09हूं? मैं भी आपके साथ चलूंगा। आप मुझे
  789. 37:12इतना कमजोर कैसे समझ सकते हैं? शौर्य ने
  790. 37:15छगन को अपना फैसला सुनाया। नहीं छगन मैं
  791. 37:18यहां से तुम्हें अपने साथ नहीं ले जा
  792. 37:20सकता। अगर तुम्हें मेरा साथ देना है तो
  793. 37:22तुम यहीं रुक कर पुलिस का इंतजार करो।
  794. 37:24पुलिस के आने के बाद उसके साथ ही तुम भी
  795. 37:27बजरंगी की लोकेशन पर आ जाना। छगन समझ गया
  796. 37:30कि शौर्य उसकी बात नहीं मानने वाला है।
  797. 37:33इसीलिए उसने यहीं रहकर पुलिस का इंतजार
  798. 37:35करने का सोचा। शौर्य ने खिड़की से बाहर
  799. 37:38देखा। आसपास कई बंदर थे। जबकि कुछ दूरी पर
  800. 37:42हिरण और सांभर भी दिखाई दे रहे थे। माहौल
  801. 37:45देखकर वो समझ गया कि यह इलाका खतरनाक
  802. 37:47जंगली जानवरों से भरा हो सकता है। जैसे ही
  803. 37:50वह गाड़ी से उतरने लगा, छगन ने कैबिनेट से
  804. 37:53एक चाकू निकालकर उसकी ओर बढ़ाया। इसे अपने
  805. 37:56साथ रख लीजिए बॉस। जंगल है। पता नहीं कब
  806. 38:00किस जंगली जानवर से सामना हो जाए। शौर्य
  807. 38:02ने छगन से चाकू लिया और गाड़ी से उतर गया।
  808. 38:05उसने बंदरों की ओर ध्यान नहीं दिया और
  809. 38:07राजेश गुप्ता के बताए रास्ते पर आगे बढ़
  810. 38:10गया। कुछ ही देर में छगन और उसकी गाड़ी
  811. 38:13[संगीत] उसकी नजरों से ओझल हो गए। करीब
  812. 38:151.5 कि.मी. चलने के बाद उसे एक झील दिखाई
  813. 38:18दी। जहां कई जंगली जानवर पानी पी रहे थे।
  814. 38:20वो सावधानी से झील के किनारे आगे बढ़ता
  815. 38:23रहा। तभी सामने पहाड़ी से गिरता झरना और
  816. 38:26ऊंची घास दिखाई दी। जिससे आगे का रास्ता
  817. 38:28साफ नहीं दिख रहा था। इसीलिए वह दाई ओर
  818. 38:31खुले इलाके की तरफ बढ़ गया। वहां एक विशाल
  819. 38:33बरगद के पेड़ के नीचे खड़ी एंबुलेंस देखकर
  820. 38:36वो रुक गया। चारों ओर नजर दौड़ाने पर कोई
  821. 38:39दिखाई नहीं दिया तो वो घास की आड़ लेकर
  822. 38:42धीरे-धीरे एंबुलेंस की ओर बढ़ने लगा।
  823. 38:44दूसरी तरफ शिप्रा गुफा के एक कोने में जूट
  824. 38:47की बोरी पर बैठी थी। [संगीत] उसके सामने
  825. 38:50कुछ दूरी पर चार बदमाश बेडोल पर आराम कर
  826. 38:52रहे थे। गुफा के बीच से पानी का एक
  827. 38:55स्त्रोत बह रहा था और एक तरफ पांच तंबू
  828. 38:58लगे हुए थे। तभी बाहर से बजरंगी चलता हुआ
  829. 39:00गुफा के अंदर आया। चारों बदमाशों में से
  830. 39:03एक ने बजरंगी से कहा, क्या बात है बजरंगी?
  831. 39:07तुम बार-बार बाहर क्यों जा रहे हो? आओ,
  832. 39:10तुम भी आराम से लेट जाओ। अब तो हमें
  833. 39:13दो-तीन दिन यहीं गुजारने हैं। तभी बजरंगी
  834. 39:16अपने हाथ में पानी की बोतलों का थैला लिए
  835. 39:18अंदर आया। थैला जमीन पर रखते हुए बोल उठा।
  836. 39:22अरे वो मैडम को प्यास लगी थी इसलिए
  837. 39:24एंबुलेंस से पानी की बोतलें लेने चला गया
  838. 39:26था। क्या बात है बजरंगी? इस मैडम के लिए
  839. 39:30तो तुम कुछ ज्यादा ही फिक्रमंद नजर आ रहे
  840. 39:32हो। कहीं कोई चक्कर तो नहीं? वो बदमाश
  841. 39:36मुस्कुराते हुए मजाक उड़ाने लगा। तभी एक
  842. 39:39तंबू का पर्दा हटाकर एक लड़की बाहर निकली।
  843. 39:42उसने सख्त लहजे में सबको चेतावनी दी।
  844. 39:45खबरदार अगर किसी ने भी इस बुलबुल पर गंदी
  845. 39:48नजर डालने की कोशिश की तो। हमें इसे सही
  846. 39:51सलामत उस आदमी के हवाले करना है जिसने
  847. 39:54हमें यह काम सौंपा है। इसीलिए कोई भी इसकी
  848. 39:57तरफ गलत निगाह उठाने की गलती मत करना। उस
  849. 40:00लड़की के पीछे-पीछे ही रुस्तम भी उस
  850. 40:02[संगीत] तंबू से बाहर आया। वो भी उन चारों
  851. 40:05लेटे बदमाश के पास आया और बोला
  852. 40:08तुम सब आराम करने में इतने ज्यादा लापरवाह
  853. 40:11मत हो जाना कि ये चिड़िया यहां से हुर्र
  854. 40:14हो जाए और तुम सबको पता भी ना चले। यह आप
  855. 40:17कैसी बात कर रहे हैं बॉस? अगर यह यहां से
  856. 40:20भागी भी तो अपनी मौत को ही बुलाएगी। जंगली
  857. 40:23जानवरों से भरे इस जंगल [संगीत] में यह
  858. 40:25कितनी देर जिंदा रह पाएगी? एक बदमाश हंसते
  859. 40:28हुए जवाब देने लगा। रुस्तम ने सबको सख्त
  860. 40:31लहजे में बताया। अरे बेवकूफ इसकी जान चली
  861. 40:35गई तो यह हमारे किसी काम की नहीं रहेगी।
  862. 40:38हमें इसे सही सलामत रखना है। तभी तक इसकी
  863. 40:40कीमत है। समझ गया बॉस? यह यहां से हिल भी
  864. 40:44नहीं पाएगी। आप चिंता मत करो। बजरंग एक
  865. 40:48पानी की बोतल शिप्रा की तरफ फेंकते हुए
  866. 40:49बोला। शिप्रा ने हड़बड़ाकर उस पानी की
  867. 40:52बोतल को लपकने की कोशिश की। जैसे तैसे
  868. 40:55उसने उस बोतल को पकड़ लिया और उस बोतल को
  869. 40:57खोलकर गटागट पानी पीने लगी। तो क्या होगा
  870. 41:01आगे? क्या शौर्य शिप्रा को यहां से सही
  871. 41:04सलामत छुड़ा पाएगा? कौन है यह रुस्तम? और
  872. 41:07किसके कहने पर इसने शिप्रा को क्रिटिस का
  873. 41:09इंतजार करने को बोलकर शौर्य शिप्रा का पता
  874. 41:12लगाने नीलगिरी जंगल के अंदर अकेले ही चला
  875. 41:14जाता है। वहीं रुस्तम अपने लड़कों से
  876. 41:17शिप्रा को हर हाल में उस गुफा में सही
  877. 41:19सलामत रखने का आर्डर देता है। शिप्रा
  878. 41:21हिम्मत करके उठी और उसने रुस्तम के सामने
  879. 41:24आकर पूछा क्या तुम मुझे बताओगे कि किसके
  880. 41:27कहने पर तुमने मुझे किडनैप [संगीत] किया
  881. 41:29है? मैं अभी भी कह रही हूं छोड़ दो मुझे।
  882. 41:32शायद तुमसे कोई गलती हो गई है। [संगीत]
  883. 41:35रुस्तम ने शिप्रा की बात को नजरअंदाज करते
  884. 41:37हुए अपने आदमियों से कहा, "तुम लोग देख
  885. 41:40क्या रहे हो? कोई बंद करो उस लड़की की
  886. 41:43जुबान। इसकी बकबक से मुझे अब इरिटेशन होने
  887. 41:45लगी है। शिपरा कुछ और भी बोलती पर रुस्तम
  888. 41:49की इस बात को सुनकर चुप रह गई। उसे लगा
  889. 41:51कहीं रुस्तम के गुंडे उससे बदतमीजी ना
  890. 41:54करने लगे। इसीलिए वो बिना किसी के बीच में
  891. 41:56आए अपनी जगह पर वापस चली गई। रुस्तम ने जब
  892. 41:59यह देखा कि शिप्रा खुद ही अपनी जगह पर चली
  893. 42:01गई तो उसने मुस्कुराते हुए कहा मैडम अगर
  894. 42:05ऐसे ही कायदे से रहोगी तो फायदे में
  895. 42:06रहोगी। किसी को तुम्हारे साथ जबरदस्ती
  896. 42:09करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। शिप्रा ने कुछ
  897. 42:13कहा तो नहीं पर वो एक टक रुस्तम को घूरती
  898. 42:15रही। क्या बात है बॉस? यह लड़की [संगीत]
  899. 42:18तो आपकी एक ही धमकी से लाइन पर आ गई। चार
  900. 42:22गुंडे जो एक साइड में लेटे हुए थे उनमें
  901. 42:24से एक [संगीत] बोला। तभी एक बदमाश अपनी
  902. 42:26जगह पर बैठकर बाई तरफ देखते हुए बोला भाई
  903. 42:30अब्दुल तुम्हारा खाना कब तक बनेगा? अब तो
  904. 42:33पेट में चूहे भी कूदने लगे हैं। थोड़ा
  905. 42:36सब्र कर लो बस 10 मिनट और। अब्दुल ने कहा
  906. 42:39जिसने गुफा के मुंह पर पत्थरों को जोड़कर
  907. 42:41एक चूल्हा बनाया था और उस पर एक बड़ी सी
  908. 42:44हांडी चढ़ी हुई थी। दूसरी तरफ शौर्य
  909. 42:47एंबुलेंस के पास पहुंचा। [संगीत] वो यह तो
  910. 42:49समझ गया कि इससे आगे एंबुलेंस को ले जाना
  911. 42:51मुमकिन नहीं था। इसीलिए यहां लाकर ही
  912. 42:53एंबुलेंस को रोक दिया गया। उसने देखा
  913. 42:56एंबुलेंस के साइड में ही एक बाइक भी खड़ी
  914. 42:59थी। शौर्य ने आसपास अपनी नजर दौड़ाई पर
  915. 43:02कोई भी उसे नजर नहीं आया। पर वो यह देखने
  916. 43:04के लिए आसपास का जायजा लेने लगा कि
  917. 43:06एंबुलेंस से उतर कर यह लोग किस तरफ गए
  918. 43:09होंगे। [संगीत] तो उसे सामने पहाड़ी की
  919. 43:11तरफ लोगों के आने जाने के पैरों के निशान
  920. 43:13दिखे। वो समझ गया कि शिप्रा को लेकर वो
  921. 43:16बदमाश उसी रास्ते पर आगे गए होंगे।
  922. 43:19बार-बार आने जाने से वहां रास्ते की एक
  923. 43:21पतली सी पट्टी बन गई थी। वहां की घास टूटी
  924. 43:24हुई थी। जिससे आसानी से अनुमान लगाया जा
  925. 43:27सकता था कि आने जाने के लिए लोग उसी
  926. 43:29[संगीत] रास्ते का इस्तेमाल कर रहे होंगे।
  927. 43:31शौर्य ने बिना कुछ सोचे समझे उसी रास्ते
  928. 43:34पर आगे बढ़ना शुरू कर दिया। कुछ आगे जाने
  929. 43:36के बाद ही शौर्य पहाड़ी के पास पहुंचा।
  930. 43:39आखिर वो झील के पास पहुंच ही गया। यह झील
  931. 43:42पहाड़ी से सटी हुई थी। शौर्य यह अनुमान
  932. 43:45लगाने की कोशिश कर रहा था कि यह बदमाश
  933. 43:47कहां पर छुपे हुए हो सकते हैं। तभी उसे
  934. 43:51आसमान की तरफ धुआं उठता दिखाई दिया। धुआं
  935. 43:53देखकर शौर्य के चेहरे पर खुशी झलकने लगी।
  936. 43:56अब उसके कदम उस दिशा में बढ़ गए। झील के
  937. 43:59किनारे की घास काफी बड़ी हो गई थी। जिसकी
  938. 44:02वजह से उसे सामने साफ-साफ दिखाई नहीं दे
  939. 44:04रहा था। कुछ आगे जाने पर पथरीली जमीन
  940. 44:07दिखाई देने लगी। जिसके आगे अब पेड़ों की
  941. 44:09संख्या कम हो गई थी। शौर्य को अब कुछ दूर
  942. 44:12तक देखना आसान हो गया था। उसने उस तरफ
  943. 44:15निगाह दौड़ाई जहां से धुआं उठता हुआ दिखाई
  944. 44:18दे रहा था। ध्यान से देखने पर पहाड़ की
  945. 44:21गुफा दिखाई देने लगी। शौर्य के शरीर में
  946. 44:24फुर्ती आ गई। अब वो तेजी से उस गुफा की
  947. 44:26तरफ बढ़ गया। गुफा के मुहाने पर पहुंचकर
  948. 44:29उसने पेड़ की ओठ से उस गुफा का जायजा
  949. 44:32लिया। उसे गुफा के मुंह पर ही एक अलाव
  950. 44:34जलता नजर आ गया। जिस पर एक बड़ी सी हांडी
  951. 44:37चढ़ी हुई थी [संगीत] और एक आदमी हाथ में
  952. 44:39बड़ी सी कड़ची लिए हुए खड़ा था। शौर्य
  953. 44:42होशियारी से उस आदमी की तरफ बढ़ा। उसने
  954. 44:45गुफा के अंदर से कुछ लोगों के बात करने की
  955. 44:47आवाजें भी सुनी। लेकिन अंदर कितने लोग हैं
  956. 44:50यह पता नहीं चल रहा था। शौर्य का पहला
  957. 44:53टारगेट अब्दुल था जो कि बाहर खाना बना रहा
  958. 44:55था। शौर्य धीरे-धीरे बिल्ली की तरह अब्दुल
  959. 44:58की तरफ बढ़ रहा था। उसके पैरों की कोई भी
  960. 45:01आहट सुनाई नहीं दे रही थी। वो अब्दुल के
  961. 45:04एकदम पीछे पहुंच गया तो किसी पत्ते पर
  962. 45:06उसका पैर पड़ने से एक हल्की सी आवाज हुई।
  963. 45:09उस आवाज को सुनकर अब्दुल अपने पीछे पलटा।
  964. 45:12जैसे ही उसकी नजर शौर्य पर पड़ी वो चीखने
  965. 45:15के लिए अपना मुंह खोलने ही वाला था कि
  966. 45:17शौर्य ने झपट कर उसका मुंह अपने हाथ से
  967. 45:19बंद कर दिया और अब्दुल को खींच कर अपने
  968. 45:22पंजे में कस लिया। अब्दुल पूरा जोर लगाता
  969. 45:25रहा कि वो अपने मुंह से शौर्य के पंजे को
  970. 45:27हटा सके। पर यह इतना आसान नहीं था। शौर्य
  971. 45:31ने अचानक अपने दूसरे हाथ का पंजा अब्दुल
  972. 45:33की गर्दन पर मारा और अब्दुल उसकी बाहों
  973. 45:35में ही बेहोश हो गया। शौर्य ने अब्दुल को
  974. 45:38ले जाकर एक किनारे धीरे से जमीन पर रख
  975. 45:40दिया और उठकर सावधानी से गुफा के अंदर बढ़
  976. 45:43गया। गुफा का मुंह बहुत बड़ा था। जिसके
  977. 45:46बीच से होते हुए पानी का एक स्त्रोत बाहर
  978. 45:48की तरफ आ रहा था। बीच-बीच में बड़े-बड़े
  979. 45:51पत्थर अपना सिर उठाए हुए थे। जिनकी ओठ में
  980. 45:54गुफा के अंदर जाना आसान था। शौर्य भी इन
  981. 45:57पत्थरों की ओठ लेता हुआ अंदर की तरफ बढ़ता
  982. 45:59जा रहा था। उसे ज्यादा अंदर नहीं जाना
  983. 46:02पड़ा जब उसे लोगों की आवाजें साफ-साफ
  984. 46:05सुनाई देनी शुरू हो गई थी। अब उससे कुछ ही
  985. 46:08आगे पानी के स्त्रोत के दोनों तरफ पत्थर
  986. 46:10समतल हो रखे थे। जिस पर लगे हुए तंबू अब
  987. 46:14शौर्य को साफ नजर आ रहे थे। पानी के
  988. 46:16स्त्रोत की दूसरी तरफ जमीन पर लेटे हुए
  989. 46:18चार लोग भी अब दिखने लगे थे। उन लोगों की
  990. 46:21बेपरवाही देखकर शौर्य समझ गया कि यह लोग
  991. 46:24बिल्कुल उम्मीद नहीं कर रहे थे कि कोई
  992. 46:26इनको ढूंढते हुए यहां तक भी आ सकता है।
  993. 46:28उसने शिप्रा की तलाश में अपनी नजर उस गुफा
  994. 46:31में घुमाई तो उसे एक तंबू के पीछे गुफा की
  995. 46:34दीवार से टेक लगाए हुए शिप्रा नजर आ गई।
  996. 46:37शिप्रा की हालत देखकर एक बार को शौर्य की
  997. 46:40आंखों में आग सी जलने लगी। लेकिन अगले ही
  998. 46:43पल उसने खुद को संभाला और धीरे से
  999. 46:45बुदबुदाया।
  1000. 46:46अगर तुम्हारी इस हालत का बदला इन लोगों से
  1001. 46:49मैंने नहीं लिया तो मेरा नाम भी शौर्य
  1002. 46:51राठौड़ नहीं।
  1003. 46:54शौर्य गुफा के अंदर जाने की प्लानिंग करने
  1004. 46:56लगा। शौर्य ने गौर किया कि जहां वो था
  1005. 46:59वहां गुफा की जमीन असमतल थी। इसीलिए वो
  1006. 47:02पानी के स्त्रोत की दूसरी तरफ गया। जिस
  1007. 47:04तरफ शिप्रा बैठी हुई थी [संगीत] और वह
  1008. 47:06जमीन पर लेट गया। अब कोई गुफा से बाहर
  1009. 47:09देखता भी तो आसानी से शौर्य उसे नजर नहीं
  1010. 47:11आने वाला था। अब शौर्य किसी सांप की तरह
  1011. 47:14[संगीत] जमीन पर रेंगता हुआ तंबू की ओर
  1012. 47:16बढ़ गया। क्योंकि लोग यहां इतने लापरवाह
  1013. 47:18थे कि किसी की सोच में भी यह नहीं था कि
  1014. 47:21कोई यहां आ सकता है। इसीलिए शौर्य के लिए
  1015. 47:23यह काम आसान हो गया था। वो रेंगता हुआ
  1016. 47:26तंबू के पीछे पहुंचा। उसने गौर किया कि वो
  1017. 47:28तंबू खाली था। शौर्य तंबू के पीछे खड़ा हो
  1018. 47:31गया और एक अंगड़ाई लेकर अपने शरीर को सीधा
  1019. 47:34किया। उसने शिप्रा की तरफ देखा। शिप्रा
  1020. 47:38गुफा की दीवार से सर टिकाए दूर कहीं शून्य
  1021. 47:40की तरफ देख रही थी। उसके चेहरे की सारी
  1022. 47:43रौनक इन कुछ ही घंटों में गायब हो गई थी।
  1023. 47:45शौर्य जो यह समझ रहा था कि वह सबकी नजरों
  1024. 47:48से बचता हुआ यहां तक आ गया है। अचानक उसकी
  1025. 47:51नजर शिप्रा के पीछे मौजूद बड़े से पत्थर
  1026. 47:53पर पड़ी जिसके ऊपर अधलेटी हालत में मौजूद
  1027. 47:57एक शख्स उसकी तरफ देख रहा था। शौर्य के
  1028. 48:00शरीर में सनसनी सी दौड़ गई। उसे लगा वो
  1029. 48:03उनकी नजर में आ गया है। इसीलिए उसे जो कुछ
  1030. 48:05भी करना है जल्दी करना है। यह सोचकर वो
  1031. 48:08शिप्रा की तरफ जाने की सोच ही रहा था कि
  1032. 48:10उसे इस बात से हैरानी हुई कि जब उस शख्स
  1033. 48:12ने उसे देख ही लिया है तो फिर अब तक शोर
  1034. 48:15क्यों नहीं मचाया। उसने दोबारा ध्यान से
  1035. 48:17उस शख्स की तरफ देखा तो अभी भी उसे अपनी
  1036. 48:20तरफ ही देखता पाया। उसके चेहरे पर हैरानी
  1037. 48:22के भाव थे लेकिन उसने शोर नहीं मचाया।
  1038. 48:25शौर्य समझ गया कि शायद यही बजरंगी है।
  1039. 48:29शौर्य ने उसकी तरफ देखकर उंगली से कुछ
  1040. 48:31इशारा करते हुए धीरे से फुसफुसाया। क्या
  1041. 48:34तुम बजरंगी हो? बजरंगी शौर्य का भाव समझ
  1042. 48:37गया और इशारों में ही उसकी बात का जवाब
  1043. 48:39हां में दिया। शौर्य को तसल्ली हुई। तभी
  1044. 48:43उन चारों लेटे हुए लड़कों में से एक
  1045. 48:44चिल्ला कर बोला। अरे क्या हुआ अब्दुल भाई?
  1046. 48:48तुम कौन सी बीरबल की खिचड़ी बनाने लगे हो
  1047. 48:50जो बनने का नाम ही नहीं ले रही है लेकिन
  1048. 48:53बाहर से कोई आवाज नहीं आई। फिर एक दूसरा
  1049. 48:57लड़का भी चिल्लाया। अब कुछ बोलोगे भी
  1050. 48:59अब्दुल या हम खुद ही आकर देख लें। [संगीत]
  1051. 49:02फिर भी अब्दुल की तरफ से कोई जवाब नहीं
  1052. 49:04आया। अरे कहीं खाना बनाते बनाते अब्दुल सो
  1053. 49:08तो नहीं गया। तीसरे लड़के ने कहा। बाहर इस
  1054. 49:12तरह की बातें सुनकर रुस्तम अपने तंबू से
  1055. 49:15बाहर आया और उन चारों की ओर देखकर पूछने
  1056. 49:17लगा
  1057. 49:19क्या हो रहा है बाहर अब्दुल कुछ बोल क्यों
  1058. 49:22नहीं रहा पता नहीं बॉस चारों में से एक
  1059. 49:26बोला कोई बाहर जाकर देखो कहीं उसने दिन
  1060. 49:29में ही तो गांजा नहीं चढ़ा लिया रुस्तम ने
  1061. 49:32नाराजगी से कहा रुस्तम के पीछे वो लड़की
  1062. 49:35भी तंबू से बाहर निकली वो भी रुस्तम के
  1063. 49:37साथ खड़ी हो गई उसने एक नजर शिप्रा की ओर
  1064. 49:41देखा। फिर उन चारों की तरफ देखने लगी। उन
  1065. 49:43चारों में से एक उठा और तेजी से बाहर की
  1066. 49:46तरफ गया। बाहर जाकर उसने अब्दुल को एक तरफ
  1067. 49:49बेहोश देखा तो वहीं से चिल्लाया। बॉस
  1068. 49:52अब्दुल तो यहां बेहोश पड़ा है। बाहर से उस
  1069. 49:55शख्स की आवाज सुनकर जमीन पर लेटे तीनों
  1070. 49:58बदमाश खड़े हो गए। यह सुनकर रुस्तम भी
  1071. 50:00चौकन्ना नजर आने लगा। उसने उस लड़की की ओर
  1072. 50:03देखकर कहा, "काव्या, तुम यहीं रहकर इस
  1073. 50:06लड़की पर नजर रखो। मैं भी बाहर देखकर आता
  1074. 50:09हूं कि क्या हुआ है।
  1075. 50:10रुस्तम के साथ बाकी तीनों भी बाहर की तरफ
  1076. 50:13बढ़ने लगे। तभी रुस्तम ने पीछे बजरंगी की
  1077. 50:16ओर देखकर बोला, बजरंगी तुम यही काव्या के
  1078. 50:18साथ रुको। रुस्तम बाकी तीनों के साथ बाहर
  1079. 50:21चला गया। जब इतना कुछ हो रहा था, तब शौर्य
  1080. 50:24दूसरे तंबू से एकदम चिपक कर बैठ गया था।
  1081. 50:27किसी का ध्यान उसकी तरफ नहीं गया था।
  1082. 50:30चारों के बाहर जाने के बाद काव्या शिप्रा
  1083. 50:32की तरफ बढ़ी। शिप्रा भी यहां हो रही हलचल
  1084. 50:35को देखकर समझने की कोशिश करने लगी कि
  1085. 50:37[संगीत] यहां क्या चल रहा है। उसकी आंखों
  1086. 50:40में एक उम्मीद भी नजर आने लगी कि क्या कोई
  1087. 50:43उसे बचाने यहां आ गया है। काव्या ने
  1088. 50:46शिप्रा की आंखों की उम्मीद को देखा तो
  1089. 50:48उसका मजाक उड़ाते हुए बोली ज्यादा उम्मीद
  1090. 50:51लगाने का कोई फायदा नहीं है। इस घने जंगल
  1091. 50:54के बीच तुम्हें कोई बचाने नहीं आने वाला
  1092. 50:56है।
  1093. 50:58शौर्य ने जब देखा कि रुस्तम अपने साथियों
  1094. 51:00के साथ बाहर चला गया है तो वह काव्या की
  1095. 51:03ओर बढ़ा। दूसरी तरफ रुस्तम बाहर आया तो
  1096. 51:06देखा हांडी अभी भी आग पर चढ़ी हुई है और
  1097. 51:08उससे जलने की बदबू आ रही है। दो बदमाशों
  1098. 51:11ने बढ़कर कपड़े की मदद से उस हांडी को आग
  1099. 51:13से उतार कर अलग रखा। रुस्तम अब्दुल के पास
  1100. 51:16गया और उसकी नब्ज़ देखी। यह देखकर उसे
  1101. 51:19तसल्ली हुई कि नब्ज़ [संगीत] चल रही है।
  1102. 51:22शिवा जरा एक मग में पानी लेकर आना।
  1103. 51:26रुस्तम ने एक शख्स की ओर देखकर कहा, जल्दी
  1104. 51:29से शिवा ने एक मग उठाया और पानी के
  1105. 51:31स्त्रोत से मग भर कर ले आया। रुस्तम ने
  1106. 51:34उसके हाथ से मग लिया और अब्दुल के मुंह पर
  1107. 51:36पानी के छींटे मारे। कुछ ही पल में अब्दुल
  1108. 51:38चिल्लाता हुआ उठ बैठा। वो हैरानी से
  1109. 51:41रुस्तम और उसके आदमियों की ओर देखने लगा।
  1110. 51:43वो हैरान नजरों से चारों ओर देखता हुआ
  1111. 51:46बोला। वो शख्स कहां गया जिसने मुझे पकड़ा
  1112. 51:49था? रुस्तम की आंखें गोल हो गई। किसने
  1113. 51:53पकड़ा था तुम्हें? अब्दुल ने फिर रुस्तम
  1114. 51:56को बताया कि उसके साथ क्या हुआ था? रुस्तम
  1115. 51:59ने पूछा तुम यह कहना चाहते हो कि जिसने
  1116. 52:03तुम्हें बेहोश किया वो अकेला था। हां बॉस
  1117. 52:07मैंने तो एक ही आदमी को देखा था। कोई और
  1118. 52:09भी आसपास होगा तो उसका मुझे नहीं पता।
  1119. 52:12अब्दुल ने जवाब देते हुए कहा। रुस्तम अपनी
  1120. 52:15जगह पर खड़ा हो गया। वो गौर से अपने आसपास
  1121. 52:18का मुआयना करने लगा। उसके सारे लड़के भी
  1122. 52:21अब सतर्क नजर आने लगे थे।
  1123. 52:24अब हमारे लिए क्या आर्डर है बॉस? शिवा ने
  1124. 52:27सामने आते हुए पूछा। अब्दुल ने कुछ सोचते
  1125. 52:30हुए कहा, "कहीं ऐसा तो नहीं है कि जो भी
  1126. 52:33यहां आया था, उसका मकसद यह पता करना था कि
  1127. 52:36हम लोग कहां छुपे हैं। और अब वो बाकी
  1128. 52:39लोगों को भी यहां लाने के लिए चला गया
  1129. 52:41है।" रुस्तम ने शिवा की ओर देखकर कहा,
  1130. 52:45"पता नहीं कौन था और उसका मकसद क्या था।"
  1131. 52:48पर यह तो पक्का है कि अब यह जगह हमारे लिए
  1132. 52:50सेफ नहीं है। तुम जाओ और काव्या के साथ उस
  1133. 52:53लड़की को लेकर यहां आ जाओ।
  1134. 52:56अब यहां रुकना सेफ नहीं है। शिवा बिना कुछ
  1135. 53:00कहे फिर से गुफा के अंदर चला गया। तो क्या
  1136. 53:03होगा आगे? क्या होगा जब शौर्य और रुस्तम
  1137. 53:06का आमनासामना होगा। क्या शौर्य पता लगा
  1138. 53:09पाएगा कि शिप्रा को किडनैप करवाने के पीछे
  1139. 53:12किसका हाथ है? जा बात सुनकर शिप्रा के मन
  1140. 53:15में जो उम्मीद जागी थी वो पल भर में टूट
  1141. 53:17गई। लेकिन अगले ही क्षण उसने काव्या के
  1142. 53:19पीछे शौर्य का चेहरा देखा तो उसकी आंखें
  1143. 53:22आश्चर्य से फैल गई। काव्या भी यह देखकर
  1144. 53:25हैरान थी कि कुछ ही पल पहले शिप्रा की
  1145. 53:28आंखों में डर और परेशानी थी। वो अचानक
  1146. 53:30कैसे बदल गया। उसे कुछ अनहोनी का आभास हुआ
  1147. 53:33और उसने तुरंत पीछे मुड़कर देखा। लेकिन तब
  1148. 53:36तक देर हो चुकी थी। शौर्य का हाथ उसके
  1149. 53:38मुंह पर कस चुका था। उसने काव्या की गर्दन
  1150. 53:41के नीचे एक तेज झटका दिया और अगले ही पल
  1151. 53:44काव्या बेहोश होकर उसके हाथों में लटक गई।
  1152. 53:47शिप्रा शौर्य को वहां देखकर जितनी
  1153. 53:49आश्चर्यचकित थी उतना ही उसे उसके लिए डर
  1154. 53:52भी लग रहा था। तभी उसे याद आया कि उसके
  1155. 53:55पीछे एक और बदमाश भी मौजूद है। अगर वह शोर
  1156. 53:58मचाती तो बाकी लोग भी अंदर आ सकते थे। यह
  1157. 54:01सोचकर उसने घबराते हुए पीछे मुड़कर बजरंगी
  1158. 54:04की तरफ देखा। लेकिन उसे हैरानी हुई कि
  1159. 54:06बजरंगी शौर्य को देखने के बाद भी पूरी तरह
  1160. 54:09शांत खड़ा था। शिप्रा को समझ नहीं आया कि
  1161. 54:11बजरंगी ऐसा क्यों कर रहा है। शौर्य ने
  1162. 54:14शिप्रा के चेहरे पर उभरे इस भाव को भांप
  1163. 54:16लिया और उसे शांत करते हुए कहा, तुम्हें
  1164. 54:19घबराने की जरूरत नहीं है। अगर मैं यहां तक
  1165. 54:21पहुंच पाया हूं तो यह इस लड़के की वजह से
  1166. 54:23ही संभव हुआ है। जब शिप्रा को यह एहसास
  1167. 54:26हुआ कि अब वो सुरक्षित है तो उसके मन पर
  1168. 54:28छाया हुआ डर धीरे-धीरे खत्म होने लगा। वो
  1169. 54:31उस खौफ भरी मानसिक स्थिति से बाहर आई और
  1170. 54:34दौड़कर शौर्य के पास चली गई और उससे लिपट
  1171. 54:37गई। शौर्य उसकी हालत समझ रहा था। इसीलिए
  1172. 54:40उसने कुछ नहीं कहा। वो बस चुपचाप उसके सिर
  1173. 54:42पर हाथ फेरता रहा। उसे शांत करने की कोशिश
  1174. 54:45करता हुआ। तभी बजरंगी को एहसास हुआ कि कोई
  1175. 54:49गुफा के अंदर आ रहा है। वो तुरंत सतर्क हो
  1176. 54:51गया और शौर्य से बोला उस्ताद कोई अंदर आ
  1177. 54:55रहा है। शौर्य ने शिप्रा को अपने से अलग
  1178. 54:58किया और काव्या को उठाकर तंबू की आड़ में
  1179. 55:00चला गया। बजरंगी तुरंत शिप्रा के पीछे आकर
  1180. 55:04खड़ा हो गया। शिप्रा फिर से एक डरी हुई
  1181. 55:06लड़की की तरह नजर आने लगी। तभी सामने से
  1182. 55:09शिवा आता दिखाई दिया। वो बजरंगी और शिप्रा
  1183. 55:12के पास पहुंचा और बजरंगी से पूछा, "काव्या
  1184. 55:15मैडम कहां गई? बजरंगी ने कुछ नहीं कहा
  1185. 55:18लेकिन वो तंबू की तरफ देखने लगा। शिवा ने
  1186. 55:21उसके इशारे को समझ लिया और यही सोचा कि
  1187. 55:23बजरंगी उसे बता रहा है कि काव्या फिर से
  1188. 55:26तंबू में चली गई है। शिवा ने असंतोष और
  1189. 55:29झुंझुलाहट के साथ अपनी बात सामने रखी।
  1190. 55:32यहां बाहर लग रहा है कि किसी को हमारे इस
  1191. 55:34अड्डे के बारे में पता चल गया है। इसीलिए
  1192. 55:36उस्ताद अभी यहां से जाना चाहते हैं। और इस
  1193. 55:39भीम साहब को जब देखो तब आराम करने की ही
  1194. 55:41पड़ी रहती है। अभी उठाता हूं। शिवा तंबू
  1195. 55:45के पास पहुंचकर उसका पर्दा उठाकर अंदर
  1196. 55:47झांकने लगा। लेकिन तंबू के अंदर सब कुछ
  1197. 55:50खाली था। जैसे ही वह पीछे मुड़ा और बजरंगी
  1198. 55:53की तरफ देखा। उसने अपने सामने शौर्य को
  1199. 55:56खड़ा पाया। वो कुछ बोल पाता उससे पहले ही
  1200. 55:59शौर्य का तेज पंच उसके सिर पर पड़ा। उसकी
  1201. 56:02आंखों के सामने लाल पीले तारे घूमने लगे
  1202. 56:05और वो लड़खड़ा कर गिर पड़ा। शौर्य ने उसे
  1203. 56:08भी उठाकर काव्या के पास लिटा दिया। बजरंगी
  1204. 56:11की आंखों में शौर्य के लिए तारीफ के भाव आ
  1205. 56:14गए थे। उसने देखा था कि शौर्य के एक पंच
  1206. 56:17से ही शिवा ढेर हो गया था। शिप्रा ने
  1207. 56:20शौर्य को पहले अपने लिए आवाज उठाते तो
  1208. 56:22देखा था। लड़ते भी देखा था। पर इतनी आसानी
  1209. 56:25से बदमाशों को ठिकाने लगाते नहीं देखा था।
  1210. 56:27उसकी चुस्ती फुर्ती देखकर वो हैरान थी।
  1211. 56:30उसने तो सपने में भी कल्पना नहीं की थी कि
  1212. 56:32शौर्य उसको बचाने के लिए इस घने जंगल में
  1213. 56:35आ जाएगा। दूसरी तरफ रुस्तम ने जब देखा कि
  1214. 56:38शिवा को भी अंदर गए काफी समय हो गया है तो
  1215. 56:41वह परेशान होते हुए भिनभिनाया। अब यह भी
  1216. 56:44अंदर जाकर लटक गया। आखिर ये अंदर करने
  1217. 56:46क्या लगा है? तुम दोनों जाकर देखो। कहीं
  1218. 56:49वो लड़की फिर से कोई ड्रामा तो नहीं करने
  1219. 56:51लगी। रुस्तम ने दो और लोगों को अंदर जाने
  1220. 56:54को कहा। जैसे ही वो अंदर जाने लगे, उसने
  1221. 56:56दोबारा निर्देश दिया। अगर वो लड़की फिर से
  1222. 56:59कोई ड्रामा करे तो उसे घसीटते हुए बाहर ले
  1223. 57:02आना। दोनों बदमाशों ने सहमति जताई। जी
  1224. 57:05उस्ताद जब वे दोनों अंदर चले गए तो जो दो
  1225. 57:09लोग बाहर बचे थे उनके साथ रुस्तम बाहरी
  1226. 57:12निगरानी करने लगा। उसके चेहरे पर चिंता
  1227. 57:14साफ झलक रही थी। वो सोच में डूबा हुआ था
  1228. 57:17कि आखिर जिसने अब्दुल को बेहोश किया था
  1229. 57:20उसे इस जगह की जानकारी कैसे मिली और जब वो
  1230. 57:23यहां तक आया ही था तो फिर वापस क्यों चला
  1231. 57:25गया? अचानक उसके दिमाग में एक विचार आया।
  1232. 57:29क्या वो शख्स अभी भी गुफा के अंदर हो सकता
  1233. 57:32है? लेकिन उसने तुरंत ही अपनी सोच को खुद
  1234. 57:35ही खारिज कर दिया क्योंकि वो खुद कुछ ही
  1235. 57:37देर पहले सबके साथ गुफा से बाहर आया था।
  1236. 57:40अगर कोई और अंदर होता तो उसे जरूर पता चल
  1237. 57:43जाता। कहीं ऐसा तो नहीं कि उनके ही बीच
  1238. 57:45कोई गद्दार हो। यह सोच उसे और बेचैन करने
  1239. 57:49लगी। तभी उसे याद आया कि वे दोनों बदमाश
  1240. 57:52भी काफी देर पहले अंदर गए थे। लेकिन अभी
  1241. 57:54[संगीत] तक वापस नहीं आए थे। अब रुस्तम का
  1242. 57:58ध्यान पूरी तरह गुफा की ओर चला [संगीत]
  1243. 58:00गया। उसे यकीन होने लगा कि अंदर जरूर कुछ
  1244. 58:03गड़बड़ है। उसने सावधानी से अपने साथ खड़े
  1245. 58:06दोनों लोगों से कहा,
  1246. 58:08"तुम दोनों सावधान रहना। लगता है जिसने भी
  1247. 58:11अब्दुल को बेहोश किया था, वो गुफा के अंदर
  1248. 58:14ही है। हमसे कहीं ना कहीं चूक हुई है। हो
  1249. 58:18सकता है हमारे ही किसी साथी ने हमें धोखा
  1250. 58:20दिया हो।
  1251. 58:22रुस्तम के हाथ में पिस्तल नजर आने लगा। वो
  1252. 58:25सतर्कता के साथ गुफा के अंदर गया। उसने
  1253. 58:28चारों तरफ नजर दौड़ाई लेकिन उसे कुछ भी
  1254. 58:31दिखाई नहीं दिया। तंबू के अलावा पूरी गुफा
  1255. 58:34खाली लग रही थी। फिर भी उसका निशाना
  1256. 58:36लगातार तंबू की ओर तना हुआ था। उसने
  1257. 58:39चेतावनी देते हुए आवाज दी।
  1258. 58:42जो भी तंबू के पीछे छिपा है वो बाहर निकल
  1259. 58:45आए। नहीं तो मैं गोली चला दूंगा। रुस्तम
  1260. 58:49सधे कदमों से तंबू की तरफ बढ़ा। उसने
  1261. 58:52दो-तीन बार शिवा का नाम पुकारा पर कोई
  1262. 58:54जवाब नहीं मिला। रुस्तम के चेहरे पर
  1263. 58:57परेशानी साफ झलकने लगी। उसे समझ नहीं आ
  1264. 59:00रहा था कि सब लोग कहां चले गए। गुफा के
  1265. 59:03अंदर और आगे जाया तो जा सकता था लेकिन
  1266. 59:05जितना अंदर जाते अंधेरा और भी बढ़ जाता।
  1267. 59:09अंदर का रास्ता भी सकरा था और विषैले
  1268. 59:11जीवों का खतरा भी बना रहता था। तो फिर सब
  1269. 59:14गए कहां? उसने एक बार फिर काव्या का नाम
  1270. 59:17पुकारा। लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। रुस्तम
  1271. 59:21ने अब्दुल को आगे बढ़ने का इशारा किया और
  1272. 59:23कहा
  1273. 59:25तुम जाकर सारे तंबू में देखो। रुस्तम की
  1274. 59:28बात सुनकर अब्दुल हिचकिचाया।
  1275. 59:31रुस्तम ने अब्दुल को भरोसा दिलाते हुए
  1276. 59:33अपनी बात रखी। डरो मत। मैं यहां से ध्यान
  1277. 59:36रख रहा हूं। अगर कोई सामने आया तो उसकी
  1278. 59:39खोपड़ी में छेद होने में देर नहीं लगेगी।
  1279. 59:42कड़ची अब्दुल के हाथ में ही थी। वो पानी
  1280. 59:45के स्त्रोत को पार करके दूसरी तरफ पहुंच
  1281. 59:48गया। सावधानी से चलते हुए वो एक तंबू के
  1282. 59:51पास पहुंचा और उसमें झांक कर देखा। लेकिन
  1283. 59:53वो खाली था। फिर वो दूसरे तंबू के पास
  1284. 59:56गया। जैसे ही उसने अंदर झांका उसे काव्या
  1285. 59:59बेहोश पड़ी दिखाई दी। यह देखकर वो डर गया
  1286. 1:00:02और तुरंत पीछे हट गया। रुस्तम ने सहमे हुए
  1287. 1:00:06स्वर में पूछा।
  1288. 1:00:08क्या हुआ? कौन है अंदर? अब्दुल ने सहमे
  1289. 1:00:12हुए स्वर में जवाब दिया। उस्ताद अंदर
  1290. 1:00:14काव्या बेहोश पड़ी हुई है। अगले तंबू में
  1291. 1:00:18देखो। रुस्तम पानी के स्त्रोत के करीब आता
  1292. 1:00:21हुआ बोला। तभी एक पत्थर उड़ता हुआ आया और
  1293. 1:00:24रुस्तम के पिस्तल वाले हाथ से टकराया।
  1294. 1:00:26रुस्तम के हाथ से पिस्तल छूट कर दूर जाकर
  1295. 1:00:29गिरा। तभी पानी के बीच से शौर्य तेजी से
  1296. 1:00:32बाहर आया और रुस्तम पर झपटा। रुस्तम का
  1297. 1:00:35ध्यान इस समय अब्दुल की तरफ था। एक तो
  1298. 1:00:38पत्थर लगने से उसका हाथ पहले ही झनझना रहा
  1299. 1:00:40था। उस पर शौर्य ने अप्रत्याशित हमला
  1300. 1:00:43रुस्तम पर कर दिया। रुस्तम के सीने पर एक
  1301. 1:00:46जोर का किक लगा और वह सीधा जाकर गुफा की
  1302. 1:00:48दीवार से टकराया। पर जल्दी ही उसने खुद को
  1303. 1:00:51संभाल लिया। इस मौके का फायदा उठाकर
  1304. 1:00:54रुस्तम के साथ वाले शख्स ने शौर्य पर हमला
  1305. 1:00:56कर दिया। पर शौर्य पहले से ही इसके लिए
  1306. 1:00:59तैयार था। उसने घुमाकर एक किक उस शख्स के
  1307. 1:01:02सीने पर दिया। वो उड़ता हुआ दूर जाकर
  1308. 1:01:04गिरा। रुस्तम ने शौर्य को घूरते हुए तीखे
  1309. 1:01:08स्वर में टिप्पणी की। आखिर चूहा बिल से
  1310. 1:01:11बाहर आ ही गया।
  1311. 1:01:14अब चूहा कौन है और शेर कौन है यह भी पता
  1312. 1:01:17चल जाएगा। शौर्य ने ताना मारते हुए जवाब
  1313. 1:01:20दिया। तभी रुस्तम ने शौर्य पर एक
  1314. 1:01:23अप्रत्याशित हमला किया। शौर्य ने अपने
  1315. 1:01:25हाथों से उसके किक को रोका पर रुस्तम के
  1316. 1:01:28किक में इतनी पावर थी कि शौर्य तीन-चार
  1317. 1:01:30कदम पीछे खिसक गया। शौर्य को अंदाजा हो
  1318. 1:01:33गया कि रुस्तम कमजोर नहीं है। उसके एक किक
  1319. 1:01:36को रोकते ही उसे रुस्तम की ताकत का एहसास
  1320. 1:01:38हो गया। शौर्य को लगा कि उसे ज्यादा मौके
  1321. 1:01:41देना अपने लिए आफत मोल लेने जैसा है।
  1322. 1:01:44इसीलिए इस बार शौर्य ने खुद आगे बढ़कर
  1323. 1:01:46रुस्तम पर हमला किया। उसका किक सीधे
  1324. 1:01:48रुस्तम की छाती पर लगा जिससे दर्द की तेज
  1325. 1:01:51लहर उसके पूरे शरीर में दौड़ गई। इसी बीच
  1326. 1:01:54शौर्य ने झपट्टा मारकर रुस्तम का पिस्तल
  1327. 1:01:57उठा लिया और उसे अपने हाथ में लहराते हुए
  1328. 1:01:59रुस्तम को चेतावनी दी। अब अगर अपनी भलाई
  1329. 1:02:03चाहते हो तो बिना किसी हरकत के अपनी जगह
  1330. 1:02:05पर खड़े रहो।
  1331. 1:02:07रुस्तम के पास कोई चारा नहीं था। वो शौर्य
  1332. 1:02:10को घूरते हुए अपनी जगह पर खड़ा हो गया।
  1333. 1:02:13दूसरी तरफ अब्दुल टेंट के पास खड़ा इन
  1334. 1:02:15दोनों को ही देख रहा था। तभी अब्दुल के
  1335. 1:02:18पीछे से बजरंगी निकला और अब्दुल के गर्दन
  1336. 1:02:20पर एक जोर का हाथ का पंच लगाया। अब्दुल एक
  1337. 1:02:23बार फिर से बेहोश हो गया। दूसरी तरफ शौर्य
  1338. 1:02:27के हाथ में पहले से ही रुस्तम का रिवाल्वर
  1339. 1:02:29था। इसीलिए अब रुस्तम ज्यादा सोच नहीं पा
  1340. 1:02:32रहा था। शौर्य रुस्तम के पास पहुंचा और
  1341. 1:02:34अचानक रिवाल्वर के बट से उसके सिर पर
  1342. 1:02:37जोरदार वार कर दिया। रुस्तम लड़खड़ा कर
  1343. 1:02:40वहीं जमीन पर गिर पड़ा। रुस्तम के पीछे
  1344. 1:02:42खड़ा शख्स यह देखकर घबरा गया और अचानक
  1345. 1:02:45शौर्य के सामने घुटनों के बल बैठ गया।
  1346. 1:02:48लेकिन शौर्य ने उस पर कोई रहम नहीं किया।
  1347. 1:02:50वो उसके पास पहुंचा और उसके सिर पर एक तेज
  1348. 1:02:53पंच मार दिया। उस शख्स ने खुद को संभालने
  1349. 1:02:56की बहुत कोशिश की। लेकिन वो अपने आप को
  1350. 1:02:59बेहोश होने से नहीं रोक सका। अब यहां का
  1351. 1:03:02कंट्रोल पूरी तरह से शौर्य के हाथ में था।
  1352. 1:03:04बजरंगी और शिपरा भी एक अलग तंबू से बाहर
  1353. 1:03:07आए। शौर्य बजरंगी की ओर देखकर बोला,
  1354. 1:03:11क्या यहां रस्सी मिलेगी? अभी लाया बॉस।
  1355. 1:03:15इतना कहकर बजरंगी एक तंबू के अंदर गया और
  1356. 1:03:18वहां से एक रस्सी का बंडल लेकर बाहर आया।
  1357. 1:03:20शिप्रा ने बजरंगी को निर्देश दिया।
  1358. 1:03:23इन रस्सियों के टुकड़े करके तुम एक-एक
  1359. 1:03:26करके सबके हाथ पैर बांध दो।
  1360. 1:03:28बजरंगी ने तुरंत सबके हाथ पैर बांधना शुरू
  1361. 1:03:31किया। थोड़ी देर में ही सभी के हाथ पैर
  1362. 1:03:33बंध चुके थे। अब शौर्य गुफा के मुहाने पर
  1363. 1:03:36आया और अपना मोबाइल निकालकर छगन को फोन
  1364. 1:03:38करने लगा। छगन जैसे पहले से ही शौर्य के
  1365. 1:03:41फोन का इंतजार कर रहा था। फोन उठाते ही
  1366. 1:03:44उसने शौर्य से सवाल किया।
  1367. 1:03:46उस्ताद यहां पुलिस आ चुकी है। अब क्या
  1368. 1:03:49करना है?
  1369. 1:03:50शौर्य ने छगन से कहा। ऐसा करो तुम पुलिस
  1370. 1:03:53को लेकर सीधे चले आओ। लेडी इंस्पेक्टर ने
  1371. 1:03:56जैसे ही छगन को शौर्य से बात करते हुए
  1372. 1:03:58देखा, [संगीत] उसने उसके हाथ से मोबाइल
  1373. 1:04:00छीन लिया।
  1374. 1:04:01मिस्टर शौर्य, आप जहां है, वहीं रुक जाइए।
  1375. 1:04:04हम यहां आ [संगीत] गए हैं। हम जल्दी ही उन
  1376. 1:04:06लोगों को अपने कब्जे में ले लेंगे।
  1377. 1:04:08एक लेडी इंस्पेक्टर की आवाज शौर्य के
  1378. 1:04:10कानों में पड़ी। शौर्य ने फोन पर मौजूद
  1379. 1:04:13इंस्पेक्टर से कहा, माफ करना इंस्पेक्टर
  1380. 1:04:15साहिबा अब आपको ज्यादा कुछ करने की जरूरत
  1381. 1:04:18नहीं पड़ेगी क्योंकि हमने उन लोगों को
  1382. 1:04:20पहले ही अपने कब्जे में ले लिया है। आप
  1383. 1:04:23यहां आकर उन्हें गिरफ्तार करके अपने साथ
  1384. 1:04:25ले जा सकती हैं। लेडी इंस्पेक्टर की आंखें
  1385. 1:04:28आश्चर्य से फैल गई। उसने अपने साथ आए
  1386. 1:04:31पुलिस वालों को आदेश दिया। तुम लोग जल्दी
  1387. 1:04:34से आगे बढ़ो। कुछ देर बाद पुलिस की टीम उस
  1388. 1:04:37गुफा में पहुंच गई। [संगीत] सभी बदमाशों
  1389. 1:04:40को होश में लाया गया और उनके हाथों में
  1390. 1:04:42हथकड़ी डाल दी गई। इसके बाद उन्हें उसी
  1391. 1:04:44एंबुलेंस के जरिए शहर की ओर ले जाया गया।
  1392. 1:04:47अभी शौर्य को रुस्तम से बहुत सवाल जवाब
  1393. 1:04:49करने थे लेकिन इसके लिए यह जगह ठीक नहीं
  1394. 1:04:52थी। उसने इंस्पेक्टर से कहा इंस्पेक्टर
  1395. 1:04:56साहिबा आपसे अनुरोध है कि आप अभी इस खबर
  1396. 1:04:58को पब्लिक ना करें। जब तक हमें यह पता
  1397. 1:05:01नहीं चल जाता कि इस किडनैपिंग के पीछे
  1398. 1:05:03किसका हाथ है।
  1399. 1:05:06तो क्या होगा आगे? क्या शौर्य पता लगा
  1400. 1:05:08पाएगा कि इस किडनैपिंग के पीछे किसका हाथ
  1401. 1:05:11था या कोई नई साजिश बुनी के लड़कों को
  1402. 1:05:14अपने काबू में करने के बाद शौर्य छगन को
  1403. 1:05:16अपनी लोकेशन के बारे में बताता है और छगन
  1404. 1:05:19पुलिस को लेकर वहां पहुंच जाता है। शौर्य
  1405. 1:05:21लेडी इंस्पेक्टर से रुस्तम के पकड़े जाने
  1406. 1:05:23की बात को आमना करने की गुजारिश करता है
  1407. 1:05:26ताकि वह इस किडनैपिंग के मास्टरमाइंड का
  1408. 1:05:28पता लगा सके। पुलिस स्टेशन के टॉर्चर रूम
  1409. 1:05:31में रुस्तम एक चेयर पर बंधा हुआ था और
  1410. 1:05:33उसके सामने लेडी इंस्पेक्टर आशा सिन्हा
  1411. 1:05:36हाथ में एक डंडा लिए खड़ी थी। देखकर लग
  1412. 1:05:38रहा था कि इंस्पेक्टर आशा सिन्हा ने
  1413. 1:05:40रुस्तम की अच्छी खासी पिटाई की थी। रुस्तम
  1414. 1:05:43ने शुरुआत में ही बता दिया था कि उसको
  1415. 1:05:45सुपारी देने वाले का नाम विहान रायजादा
  1416. 1:05:48है। लेकिन फिर भी इंस्पेक्टर आशा सिन्हा
  1417. 1:05:50ने उसके बारे में और जानने के लिए उसकी
  1418. 1:05:52बहुत पिटाई की थी। रुस्तम की सुई एक बात
  1419. 1:05:55पर ही अटकी हुई थी कि उसको फोन करने वाले
  1420. 1:05:58का नाम विहान रायजादा है। इसके अलावा वह
  1421. 1:06:01उसके बारे में कुछ नहीं जानता है।
  1422. 1:06:03इंस्पेक्टर आशा के पास विहान के खिलाफ
  1423. 1:06:05सिर्फ रुस्तम के वर्बल बयान के अलावा और
  1424. 1:06:08कोई सबूत नहीं था। यहां तक कि उसके पास जो
  1425. 1:06:10कॉल आया था वो भी एक प्राइवेट नंबर से आया
  1426. 1:06:13था। दूसरी तरफ शौर्य शिप्रा को लेकर अपने
  1427. 1:06:16घर पहुंचा और उसे घर पर ही रहने को कहा।
  1428. 1:06:19साथ ही उसको यह भी हिदायत दी कि अभी एक-द
  1429. 1:06:22दिन वो घर से बाहर ना निकले। जब तक उसको
  1430. 1:06:24किडनैप करने के पीछे [संगीत] किसका प्लान
  1431. 1:06:26था यह पता नहीं चल जाता। लोगों को खबर
  1432. 1:06:29नहीं लगनी चाहिए कि वह छूट गई है। शिप्रा
  1433. 1:06:32भावहीन चेहरे के साथ शौर्य की बात सुनती
  1434. 1:06:35रही। जब से वह रुस्तम की गिरफ्त से छूट कर
  1435. 1:06:37आई थी, उसने ज्यादा बात नहीं की थी।
  1436. 1:06:40[संगीत] उसके दिमाग में बहुत कुछ चल रहा
  1437. 1:06:42था। जिस वजह से वो ट्रॉमा में थी। रुस्तम
  1438. 1:06:45के पुलिस कस्टडी में जाने के बाद भी वो
  1439. 1:06:47[संगीत] पूरी तरह से इससे बाहर नहीं आई
  1440. 1:06:49थी। मॉडल टाउन आने के बाद उसकी आंखों की
  1441. 1:06:51उदासी [संगीत]
  1442. 1:06:52कुछ कम जरूर हुई थी।
  1443. 1:06:54शौर्य जैसे ही वापस जाने के लिए पलटने
  1444. 1:06:57वाला था, शिप्रा तेजी से शौर्य के सीने से
  1445. 1:06:59लिपट गई। शौर्य समझ नहीं पाया [संगीत] कि
  1446. 1:07:02यह अचानक शिप्रा को क्या हुआ। उसने महसूस
  1447. 1:07:05किया कि उसके सीने पर शर्ट का एक हिस्सा
  1448. 1:07:07शिप्रा [संगीत] के आंसुओं से गीला हो गया
  1449. 1:07:09है। शौर्य शिप्रा की हालत को समझ पा रहा
  1450. 1:07:12था। शिप्रा ने पहली बार ऐसी किसी सिचुएशन
  1451. 1:07:15का सामना किया था। इसीलिए सदमे से बाहर
  1452. 1:07:18आने में उसे थोड़ा समय तो लगेगा ही। शौर्य
  1453. 1:07:21ने शिप्रा के माथे को अपने हाथों से
  1454. 1:07:23सहलाते हुए कहा, सब ठीक है। तुम चिंता मत
  1455. 1:07:27करो। जिसने [संगीत] भी यह हरकत की है, वो
  1456. 1:07:29बचने वाला नहीं है। शौर्य शिप्रा को अपने
  1457. 1:07:33इतना करीब पाकर राहत महसूस कर रहा था।
  1458. 1:07:36उसके दिल में अपनेपन का सैलाब सा उठा।
  1459. 1:07:38उसने मन ही मन निश्चय किया कि [संगीत] जब
  1460. 1:07:40तक उसके आंसुओं की एक-एक बूंद का बदला
  1461. 1:07:42नहीं ले लेगा, तब तक चैन से नहीं बैठेगा।
  1462. 1:07:45शिप्रा ने जब शौर्य के हाथ को अपने सर पर
  1463. 1:07:48महसूस किया तो शिप्रा को एहसास हुआ कि
  1464. 1:07:50[संगीत] वो किस हालत में है। वो अपनी
  1465. 1:07:52भावनाओं को कंट्रोल कर शौर्य से अलग हुई।
  1466. 1:07:56ठीक है। तुम अपना ध्यान रखो। [संगीत] मैं
  1467. 1:07:59थोड़ी देर में आता हूं। शौर्य इतना बोलकर
  1468. 1:08:02वापस जाने के लिए मुड़ा। [संगीत]
  1469. 1:08:04कहां जा रहे हो? शिप्रा ने शंकित भाव से
  1470. 1:08:07पूछा। शौर्य ने पलट कर शिप्रा को देखा और
  1471. 1:08:11कहा। मैं एक बार थाने जाकर देखता हूं कि
  1472. 1:08:14कुछ पता चल सके किस [संगीत] किडनैपिंग के
  1473. 1:08:16पीछे किसका हाथ है। इसके बाद शौर्य थाने
  1474. 1:08:19के लिए निकल गया। शौर्य थाने पहुंचा और
  1475. 1:08:22इंस्पेक्टर आशा [संगीत] सिन्हा को ढूंढते
  1476. 1:08:24हुए सीधा टॉर्चर रूम में पहुंचा। इस समय
  1477. 1:08:26इंस्पेक्टर आशा रुस्तम के पास से हटी ही
  1478. 1:08:29थी कि तभी उसे सामने से आता हुआ शौर्य
  1479. 1:08:31दिखाई दिया। हां तो मिस आशा कुछ पता चला
  1480. 1:08:34कि इसके कहने पर रुस्तम ने शिप्रा को
  1481. 1:08:36किडनैप किया था।
  1482. 1:08:38मिस्टर शौर्य इसका कांटा घूम फिर कर विहान
  1483. 1:08:41रायजादा के ऊपर ही ठहर जाता है। मैं इसके
  1484. 1:08:44वर्बल बयान पर विहान के खिलाफ कदम उठा तो
  1485. 1:08:46लूंगी पर उसको जेल में रखने के लिए यह
  1486. 1:08:49बयान काफी नहीं है। वैसे जो पेमेंट रुस्तम
  1487. 1:08:52को एडवांस में मिली थी। इसका कहना है कि
  1488. 1:08:54यह पैसा उसके अकाउंट में विहान के अकाउंट
  1489. 1:08:56से आया है। मैंने कांस्टेबल को बैंक भेजा
  1490. 1:08:59है ताकि वह उस अकाउंट की डिटेल्स निकाल
  1491. 1:09:01लाए। इंस्पेक्टर आशा ने शौर्य को जो भी
  1492. 1:09:04प्रोग्रेस हुई है उसका पूरा अपडेट दिया।
  1493. 1:09:07शौर्य को भी इंस्पेक्टर आशा की बात सही
  1494. 1:09:09लगी। वैसे शौर्य की नजर में भी विहान वो
  1495. 1:09:12शख्स हो सकता था जो यह करवा सकता था। उसे
  1496. 1:09:15भी रुस्तम की बात पर विश्वास हो रहा था।
  1497. 1:09:18उसने खुद ही विहान की खबर लेने की सोची।
  1498. 1:09:20उसने कांस्टेबल का इंतजार नहीं किया। उसने
  1499. 1:09:23इंस्पेक्टर आशा से कहा। मिस आशा जब आपका
  1500. 1:09:26कांस्टेबल बैंक से आ जाता है तो आप मुझे
  1501. 1:09:28खबर कर सकती हैं कि बैंक से क्या रिपोर्ट
  1502. 1:09:31आई है। इंस्पेक्टर आशा को इसमें कुछ गलत
  1503. 1:09:34नहीं लगा। इसीलिए उसने कहा ठीक है
  1504. 1:09:36कांस्टेबल के आने के बाद मैं आपको खबर कर
  1505. 1:09:38दूंगी।
  1506. 1:09:40आपसे एक बात और भी पूछनी थी। अभी तक
  1507. 1:09:43रुस्तम की गिरफ्तारी की खबर पब्लिक तो
  1508. 1:09:45नहीं हुई है। शौर्य ये जानने की उत्सुकता
  1509. 1:09:48में इंस्पेक्टर आशा की ओर देखते हुए बोला
  1510. 1:09:52अभी तक तो यह बात पब्लिक नहीं हुई है
  1511. 1:09:54लेकिन ज्यादा देर तक इस खबर को दबाकर नहीं
  1512. 1:09:56रख सकते। इंस्पेक्टर आशा ने अपनी मजबूरी
  1513. 1:09:59जताई।
  1514. 1:10:00ठीक है आप कोशिश कीजिए जितनी देर तक इस
  1515. 1:10:02खबर को दबा कर रख सकती हैं रखिए बात की
  1516. 1:10:06बाद में देखेंगे शौर्य ने इंस्पेक्टर आशा
  1517. 1:10:09से रिक्वेस्ट की उसके बाद कुछ और ध्यान
  1518. 1:10:11में आने पर उसने इंस्पेक्टर आशा से पूछा
  1519. 1:10:15आप इसके फोन पर नजर बनाए हुए तो है ना देर
  1520. 1:10:18सवेरे इसको काम देने वाला इसे फोन तो जरूर
  1521. 1:10:20करेगा अभी वो यह देखने की कोशिश कर रहा
  1522. 1:10:23होगा कि शिप्रा की किडनैपिंग से कोई
  1523. 1:10:25हंगामा तो नहीं हो रहा है जब वो निश्चिंत
  1524. 1:10:28हो जाएगा उसके बाद बाद ही वह फोन करेगा।
  1525. 1:10:31मिस्टर शौर्य आप बच्चे पढ़ाने का काम बंद
  1526. 1:10:33कीजिए। मैं समझती हूं कि आप कमिश्नर साहब
  1527. 1:10:36के करीबी हैं। पर इसका मतलब यह नहीं है कि
  1528. 1:10:38आप मुझे मेरा काम समझाएंगे। मुझे अच्छे से
  1529. 1:10:41पता है कि मुझे अपना काम कैसे करना है।
  1530. 1:10:45इंस्पेक्टर आशा ने नाराजगी जताते हुए कहा।
  1531. 1:10:48उसकी बात सुनकर शौर्य के चेहरे पर एक हंसी
  1532. 1:10:50आ गई। उसको तो मन किया कि वो उसको बोल दे
  1533. 1:10:54कि तभी तो उसने रुस्तम को थाली में परोस
  1534. 1:10:56कर उसके सामने रख दिया था। पर हकीकत में
  1535. 1:10:59उसने ऐसा कुछ कहा नहीं। इस समय वो
  1536. 1:11:02इंस्पेक्टर आशा से टकराने के मूड में नहीं
  1537. 1:11:04था। शौर्य थाने से निकल गया। बाहर आकर
  1538. 1:11:07उसने छगन को फोन किया।
  1539. 1:11:10अरे बॉस आप कहिए अब कैसे याद किया?
  1540. 1:11:13छगन ने फोन उठाते ही पूछा। मुझे 1 घंटे
  1541. 1:11:17में एक आदमी चाहिए। क्या तुम उसको उठाकर
  1542. 1:11:19ला सकते हो? शौर्य ने छगन से कहा। एक पल
  1543. 1:11:23को तो छगन सकपकाया। पर अगले ही पल उसने
  1544. 1:11:26तैयार होते हुए कहा
  1545. 1:11:28अब किसको उठाना है बॉस आप हुक्म कीजिए मैं
  1546. 1:11:31अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूंगा आपकी बात
  1547. 1:11:34की लाज रख सकूं
  1548. 1:11:36विहान रायजादा मुझे ये शख्स एक घंटे में
  1549. 1:11:39मेरे सामने चाहिए अब बताओ क्या तुम ये कर
  1550. 1:11:43पाओगे
  1551. 1:11:44शौर्य ने भावहीन स्वर में पूछा विहान का
  1552. 1:11:47नाम सुनकर छगन तुरंत बोला
  1553. 1:11:50ठीक है बॉस मैं अभी निकलता हूं और कोशिश
  1554. 1:11:52करता हूं जल्द से जल्द विहान रायजादा को
  1555. 1:11:55आपके सामने पेश कर सकूं।
  1556. 1:11:57छगन ने जवाब दिया तुम्हें जितने आदमियों
  1557. 1:12:00की जरूरत हो उतने आदमी अपने साथ ले जाओ और
  1558. 1:12:03इसके लिए जितने भी पैसे चाहिए वो मैं
  1559. 1:12:05तुम्हें दूंगा। शौर्य ने पैसों को लेकर
  1560. 1:12:08छगन को आश्वस्त किया।
  1561. 1:12:10ये आप कैसी बात कर रहे हैं बॉस? मैं आपसे
  1562. 1:12:13पैसे की बात कैसे कर सकता हूं?
  1563. 1:12:15छगन सकुचाते हुए बोला।
  1564. 1:12:18ठीक है तुम जितनी जल्दी हो सके इस काम को
  1565. 1:12:20करो। फिर मुझे खबर करो। शौर्य ने छगन को
  1566. 1:12:24आर्डर दिया। छगन से बात खत्म होने के बाद
  1567. 1:12:27शौर्य ने कांता प्रसाद को फोन किया।
  1568. 1:12:30हां शौर्य बाबा कहिए कैसे फोन किया?
  1569. 1:12:33शिप्रा बेटी तो ठीक है ना?
  1570. 1:12:35कांता प्रसाद जी ने सीधा सवाल किया। हां
  1571. 1:12:38कांता प्रसाद जी शिप्रा एकदम ठीक है। मुझे
  1572. 1:12:41फिर से आपकी मदद की जरूरत है। किसी दूसरे
  1573. 1:12:45काम के लिए। शौर्य ने फोन करने का कारण
  1574. 1:12:48बताते हुए कहा
  1575. 1:12:49कहिए शौर्य बाबा अब आपको मेरी क्या मदद
  1576. 1:12:52चाहिए?
  1577. 1:12:53कांता प्रसाद जी बोले [संगीत]
  1578. 1:12:55कांता प्रसाद जी मैं चाहता हूं कि आप
  1579. 1:12:57कमिश्नर को कन्विंस करें कि जब तक शिप्रा
  1580. 1:12:59को किडनैप कराने वाला असली गुनहगार पकड़ा
  1581. 1:13:02नहीं जाता तब तक रुस्तम की गिरफ्तारी की
  1582. 1:13:04बात आम ना हो सके। शौर्य को विश्वास नहीं
  1583. 1:13:08था कि इंस्पेक्टर आशा सिन्हा रुस्तम की
  1584. 1:13:10गिरफ्तारी की बात को ज्यादा देर तक दबाने
  1585. 1:13:12की कोशिश करेगी।
  1586. 1:13:14ठीक है। मैं इस बारे में कमिश्नर से बात
  1587. 1:13:16कर लूंगा।
  1588. 1:13:18कोई और भी काम है आपको?
  1589. 1:13:20कांता प्रसाद ने शौर्य को आश्वस्त किया।
  1590. 1:13:23[संगीत]
  1591. 1:13:24कांता प्रसाद जी क्या यह हो सकता है कि
  1592. 1:13:26रुस्तम का फोन मुझे मिल सके। अभी उसका फोन
  1593. 1:13:29पुलिस कस्टडी में है। शौर्य को विश्वास था
  1594. 1:13:32कि देर सवेरे रुस्तम को सुपारी देने वाला
  1595. 1:13:34रुस्तम को जरूर फोन करेगा।
  1596. 1:13:36मैं इस बारे में कमिश्नर से बात करने के
  1597. 1:13:39बाद ही बता पाऊंगा।
  1598. 1:13:40कांता प्रसाद जी ने जवाब दिया। एक बात और
  1599. 1:13:44कांता प्रसाद जी आबादी से दूर आपके जानने
  1600. 1:13:46[संगीत] में कोई ऐसा फ्लैट या घर है जहां
  1601. 1:13:49मैं अपने कुछ लोगों के साथ मीटिंग कर
  1602. 1:13:51सकूं। शौर्य को एक ऐसी जगह की तलाश थी
  1603. 1:13:54जहां वो विहान को उठाने के बाद उसकी खबर
  1604. 1:13:57ले सके।
  1605. 1:13:58कांता प्रसाद जी ने सोच भरे स्वर में कहा
  1606. 1:14:02जगह तो मिल जाएगी शौर्य बाबा पर वो आपकी
  1607. 1:14:05उम्मीद के मुताबिक होगी या नहीं यह कहना
  1608. 1:14:08मुश्किल है।
  1609. 1:14:10तभी शौर्य को ध्यान आया कि इसके लिए तो
  1610. 1:14:12बसंतपुर का ऑफिस भी यूज़ किया जा सकता है।
  1611. 1:14:15यह बात ध्यान में आते ही उसने कांता
  1612. 1:14:17प्रसाद से कहा। इस काम को रहने दीजिए
  1613. 1:14:20कांता प्रसाद जी। बाकी आप कमिश्नर से बात
  1614. 1:14:23करके देख लीजिएगा और जैसा भी जवाब आपको
  1615. 1:14:26कमिश्नर से मिलता है आप मुझे उसके बारे
  1616. 1:14:28में बता दीजिएगा।
  1617. 1:14:30ठीक है शौर्य बाबा जो भी अपडेट होता है
  1618. 1:14:33मैं आपको खबर करता हूं।
  1619. 1:14:35कांता प्रसाद जी ने जवाब दिया और उसके बाद
  1620. 1:14:37फोन काट दिया। शौर्य ने अब भूषण को फोन
  1621. 1:14:40किया और उसको बसंतपुर के ऑफिस की लोकेशन
  1622. 1:14:43भेजने को कहा। जो भूषण ने फौरन भेज दी।
  1623. 1:14:45बसंतपुर की लोकेशन आने के बाद शौर्य ने वो
  1624. 1:14:48छगन को फॉरवर्ड कर दी और साथ में यह नोट
  1625. 1:14:51भी लिख दिया कि काम होने के बाद इस लोकेशन
  1626. 1:14:53पर आना है। उसे पता था कि इतनी बात से छगन
  1627. 1:14:57समझ जाएगा कि उसे क्या करना है। शौर्य
  1628. 1:15:00अपनी गाड़ी में बैठा और बसंतपुर के ऑफिस
  1629. 1:15:03पहुंचा। शौर्य ने नोट किया कि कुछ ही
  1630. 1:15:05दिनों में ऑफिस का रंग रूप पूरा बदल गया
  1631. 1:15:07था। अभी यहां की देखरेख भूषण के जिम्मे ही
  1632. 1:15:10थी। भूषण को जब से यह पक्का हो गया कि इस
  1633. 1:15:14बार जनता पार्टी से इस एरिया का प्रत्याशी
  1634. 1:15:16वही होने वाला है तब से वह शौर्य का फैन
  1635. 1:15:18हो गया था। शौर्य [संगीत] के लिए वो कुछ
  1636. 1:15:20भी करने को तैयार रहता था। भूषण ने अपने
  1637. 1:15:23कुछ चेले चपाटे को भी इस ऑफिस के काम पर
  1638. 1:15:26लगा दिया था। शौर्य को ऑफिस में आता देखकर
  1639. 1:15:29भूषण तुरंत उसके सामने आकर खड़ा हो गया।
  1640. 1:15:32शौर्य ने जब देखा कि यहां भूषण के कुछ
  1641. 1:15:34चेले चपाटे भी मौजूद हैं तो उसने भूषण को
  1642. 1:15:36एक किनारे ले जाकर कहा। अभी यहां मेरे कुछ
  1643. 1:15:39लोग आने वाले हैं। क्या तुम आज के लिए
  1644. 1:15:42अपने चेले चपाटे को यहां से भेज सकते हो?
  1645. 1:15:44यह भी कोई पूछने की बात है सर। अब तो बस
  1646. 1:15:47हुक्म [संगीत] कीजिए। मैं अभी ऑफिस खाली
  1647. 1:15:49करवाता हूं। भूषण ने जवाब दिया। शौर्य
  1648. 1:15:53सीधा ऑफिस के अंदर पहुंचा और एक कुर्सी पर
  1649. 1:15:55बैठ गया। जबकि भूषण ने ऑफिस में मौजूद
  1650. 1:15:58सारे लोगों को घर भेज दिया और शौर्य के
  1651. 1:16:00पास आकर खड़ा हो गया। [संगीत] शौर्य ने
  1652. 1:16:03भूषण जी को अपने सामने खड़ा देखकर कहा।
  1653. 1:16:06अगर आप चाहते हैं मिस्टर भूषण तो आप भी घर
  1654. 1:16:09जा [संगीत] सकते हैं। नहीं सर अभी मैं यही
  1655. 1:16:12हूं। आप मेरी चिंता ना करें। भूषण ने
  1656. 1:16:16सम्मान के साथ कहा। तभी बाहर से कुछ कदमों
  1657. 1:16:19की आहट सुनाई दी। वो समझ गया कि शायद छगन
  1658. 1:16:22अपने आदमियों के साथ आ गया है। वो भूषण से
  1659. 1:16:25बोला। बाहर कुछ लोग आए हैं। उन्हें लेकर
  1660. 1:16:28अंदर आ जाओ।
  1661. 1:16:30भूषण जी बाहर गए और छगन और मगन को लेकर
  1662. 1:16:33अंदर आए। छगन-मगन के पीछे चल रहे उसके दो
  1663. 1:16:36चेलों ने अपने कंधों पर एक बोरी टांग रखी
  1664. 1:16:38थी। शौर्य के सामने पहुंचते ही छगन ने
  1665. 1:16:41अपने चेलों से बोरी को नीचे रखने को कहा
  1666. 1:16:44तो उसके चेले ने लापरवाही से उस बोरी को
  1667. 1:16:46जमीन पर पटक दिया। बोरी के नीचे गिरते ही
  1668. 1:16:49एक चीख सुनाई दी जो कि बोरी के अंदर बंद
  1669. 1:16:52व्यक्ति के मुंह से निकली थी। तो क्या
  1670. 1:16:55होगा आगे? क्या शौर्य पता लगा पाएगा कि
  1671. 1:16:57किडनैपिंग के पीछे विहान का क्या मकसद था?
  1672. 1:17:00क्या विहान सच्चाई कबूल करेगा? [संगीत]
  1673. 1:17:03जानने के लिए सुनतेरेलों ने बोरी को शौर्य
  1674. 1:17:05के सामने जमीन पर पटक दिया। तभी अंदर से
  1675. 1:17:09एक तेज चीख की आवाज गूंजी।
  1676. 1:17:11[कराहने की आवाज़] शौर्य कुर्सी पर बैठ
  1677. 1:17:13गया और उसने छगन से बोरी खोलने को कहा।
  1678. 1:17:16छगन के एक चेले ने आगे बढ़कर बोरी का मुंह
  1679. 1:17:19खोला तो अंदर से विहान रायजादा बाहर निकला
  1680. 1:17:22और गुस्से में छगन को गालियां देने लगा।
  1681. 1:17:26तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे इस तरह
  1682. 1:17:28जबरदस्ती उठाने की? क्या तुम मुझे इतनी
  1683. 1:17:31जल्दी भूल गए?
  1684. 1:17:33मेरे टुकड़ों पर पलने वाले आज तुमने मुझ
  1685. 1:17:36पर ही हाथ डालने की हिम्मत कर दी। मैं
  1686. 1:17:38तुम्हारा ऐसा हाल करूंगा कि तुम।
  1687. 1:17:42विन अभी आगे कुछ और बोल ही रहा था कि तभी
  1688. 1:17:45उसकी नजर सामने बैठे शौर्य पर पड़ी। शौर्य
  1689. 1:17:49को देखते ही वह बीच में ही चुप हो गया। वो
  1690. 1:17:52कभी शौर्य को देखता कभी छगन मगन को। अब
  1691. 1:17:56उसे समझ आ गया था कि उसे यहां इस तरह लाने
  1692. 1:17:59का काम शौर्य के इशारे पर ही हुआ है। उसके
  1693. 1:18:02चेहरे पर तनाव और बेचैनी साफ झलकने लगी।
  1694. 1:18:05वो कुछ पल के लिए असमंजस में खड़ा रहा
  1695. 1:18:08जैसे समझ नहीं पा रहा हो कि आगे क्या
  1696. 1:18:11करें। विहान ने शौर्य को घूरते हुए बोला
  1697. 1:18:15तो तुम हो इस सबके पीछे।
  1698. 1:18:18शौर्य ने विहान के चेहरे को गौर से देखते
  1699. 1:18:21हुए कहा तो तुमने क्या सोचा? तुम्हें इस
  1700. 1:18:25तरह से और कौन उठा सकता है? तुमने जो हरकत
  1701. 1:18:28की उसके बाद क्या तुम यह उम्मीद कर रहे थे
  1702. 1:18:31कि मैं यूं ही चुप बैठा रहूंगा।
  1703. 1:18:34विहान के चेहरे पर ऐसे एक्सप्रेशंस आए
  1704. 1:18:37जैसे उसे समझ नहीं आ रहा हो कि शौर्य क्या
  1705. 1:18:40कह रहा है? वो असमंजस भरे स्वर में बोला।
  1706. 1:18:44मैंने मैंने कौन सी हरकत कर दी? तुम किस
  1707. 1:18:48बारे में बात कर रहे हो? शौर्य ने आग
  1708. 1:18:51उगलते हुए अपनी बात रखी। तुम क्या समझ रहे
  1709. 1:18:55हो कि तुम ऐसे अनजान बन जाओगे और मैं
  1710. 1:18:57तुम्हारी बात पर विश्वास कर लूंगा।
  1711. 1:19:00तुम्हारा सारा भेद खुल चुका है। अब यूं
  1712. 1:19:03अनजान बनने का कोई फायदा नहीं। तुमने जो
  1713. 1:19:06हरकत की है अब उसे याद करके तुम्हें अफसोस
  1714. 1:19:09होगा कि तुमने ऐसा किया ही क्यों? आखिर
  1715. 1:19:12तुम किस बारे में बात कर रहे हो? मैंने
  1716. 1:19:15ऐसा क्या कर दिया है?
  1717. 1:19:18विहान के चेहरे पर ऐसे भाव थे जैसे वह
  1718. 1:19:21समझने की कोशिश कर रहा हो कि शौर्य किस
  1719. 1:19:23बारे में बात कर रहा है। विहान के चेहरे
  1720. 1:19:26के भाव देखकर शौर्य भी एक पल के लिए सोच
  1721. 1:19:29में पड़ गया कि कहीं वह कोई गलती तो नहीं
  1722. 1:19:32कर रहा है क्योंकि उसे विहान के चेहरे पर
  1723. 1:19:35जरा भी बनावटीपन नहीं दिख रहा था। शौर्य
  1724. 1:19:39ने उसे और परखने के लिए आगे अपनी बात रखी।
  1725. 1:19:44तुम शायद रुस्तम को भूल रहे हो। अब वो
  1726. 1:19:46पुलिस के कब्जे में है और उसने अपना गुनाह
  1727. 1:19:49कबूल भी कर लिया है कि तुमने ही उसे
  1728. 1:19:52सुपारी दी थी। तुम यह कैसी बात कर रहे हो?
  1729. 1:19:56मुझे तो कुछ भी समझ नहीं आ रहा है कि तुम
  1730. 1:19:59किस बारे में बात कर रहे हो और यह रुस्तम
  1731. 1:20:03कौन है? मैं किसी भी रुस्तम नाम के आदमी
  1732. 1:20:05को नहीं जानता और मैंने उसे कौन सी सुपारी
  1733. 1:20:09दी है? क्या तुम स्पष्ट करोगे कि तुम किस
  1734. 1:20:12बारे में बात कर रहे हो?
  1735. 1:20:15विहान को समझ नहीं आ रहा था कि वह शौर्य
  1736. 1:20:17को कैसे विश्वास दिलाए कि जो वह कह रहा है
  1737. 1:20:21उसके कुछ भी पल्ले नहीं पड़ रहा है। विहान
  1738. 1:20:24का रिएक्शन देखकर अब शौर्य को भी लगने लगा
  1739. 1:20:27था कि उससे कहीं ना कहीं कोई चूक हुई है।
  1740. 1:20:30[संगीत] उसने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए
  1741. 1:20:32आगे पूछा। क्या तुमने रुस्तम को शिप्रा को
  1742. 1:20:36किडनैप करने की सुपारी नहीं दी थी? सबसे
  1743. 1:20:39पहली बात मैं किसी भी रुस्तम नाम के आदमी
  1744. 1:20:42को नहीं जानता तो मैं उसे शिप्रा को
  1745. 1:20:45किडनैप करने की सुपारी कैसे दे सकता हूं
  1746. 1:20:48और तुमने ये कैसे सोच लिया कि मैंने ही
  1747. 1:20:50शिप्रा को किडनैप करने की सुपारी दी है
  1748. 1:20:54बोलते हुए विहान के चेहरे पर आश्चर्य के
  1749. 1:20:57भाव थे। अगर तुमने रुस्तम को शिप्रा को
  1750. 1:21:00किडनैप करने की सुपारी नहीं दी तो फिर
  1751. 1:21:03तुम्हारे अकाउंट से उसके अकाउंट में पैसे
  1752. 1:21:05कैसे ट्रांसफर हुए? इसका क्या जवाब दोगे
  1753. 1:21:09तुम?
  1754. 1:21:10शौर्य ने विहान की आंखों में देखते
  1755. 1:21:12[संगीत] हुए सवाल किया। जैसे वो यह परखना
  1756. 1:21:15चाहता हो कि विहान सच कह रहा है या झूठी
  1757. 1:21:18कहानी बना रहा है। अब मैं तुम्हें कैसे
  1758. 1:21:21विश्वास दिलाऊं कि मैंने किसी को भी पैसे
  1759. 1:21:24ट्रांसफर नहीं किए हैं। तुम्हें तो पता है
  1760. 1:21:27मेरी अभी पैसों वाली हालत कैसी है। विहान
  1761. 1:21:31ने सफाई दी और फिर आगे कहा। तुम्हारी वजह
  1762. 1:21:34से मेरी युविका के साथ होने वाली सगाई
  1763. 1:21:37पहले ही टूट चुकी है। मैं तुमसे गुस्सा भी
  1764. 1:21:40था और बदला भी लेना चाहता था। लेकिन गजराज
  1765. 1:21:43सोलंकी ने मुझे चेतावनी दी कि मैं
  1766. 1:21:45तुम्हारे खिलाफ कोई कदम ना उठाऊं। इसीलिए
  1767. 1:21:49मैंने तुमसे दूरी बना ली। और दूसरी बात
  1768. 1:21:53मुझे यह भी नहीं पता था कि जू ही केस में
  1769. 1:21:56मैं जेल से जिस वजह से बाहर आया वो
  1770. 1:21:58तुम्हारे केस वापस लेने की वजह से था। मैं
  1771. 1:22:01समझ रहा था कि इसमें गजराज सोलंकी का हाथ
  1772. 1:22:04है। [संगीत] लेकिन उस पार्टी वाली रात
  1773. 1:22:06मुझे पता चला कि वह भी तुम्हारी वजह से ही
  1774. 1:22:09बाहर आया है। तुम्हें क्या लगता है कि यह
  1775. 1:22:12सब जानने के बाद भी मैं तुम्हारे खिलाफ
  1776. 1:22:15जाने की हिम्मत कर सकता हूं।
  1777. 1:22:18शौर्य को विहान की बात तर्कसंगत तो लग रही
  1778. 1:22:21थी और वह सोचने को मजबूर था कि अगर विहान
  1779. 1:22:24ने यह नहीं किया तो फिर यह किसका काम है
  1780. 1:22:27और ऐसा कौन है जो विहान को फंसाना चाहता
  1781. 1:22:30है? उसने विहान से ही पूछा,
  1782. 1:22:34क्या तुम मुझे बताओगे कि आखिर ऐसा कौन
  1783. 1:22:36व्यक्ति हो सकता है जो तुम्हें इस मामले
  1784. 1:22:39में फंसाना चाहता हो? क्योंकि यह बात तो
  1785. 1:22:42पक्की है कि रुस्तम को जो पैसे ट्रांसफर
  1786. 1:22:44हुए हैं वो तुम्हारे ही अकाउंट से हुए
  1787. 1:22:47हैं। यह बात बोलते-बोलते शौर्य को अचानक
  1788. 1:22:50कुछ ध्यान आया। तो उसने अपना फोन निकाला
  1789. 1:22:53और इंस्पेक्टर आशा को फोन लगाया। दूसरी
  1790. 1:22:56तरफ से फोन उठने के बाद शौर्य ने पूछा
  1791. 1:23:00इंस्पेक्टर साहिबा क्या यह पता चला कि
  1792. 1:23:03रुस्तम को जो पैसे ट्रांसफर हुए थे वो किस
  1793. 1:23:05अकाउंट से हुए थे?
  1794. 1:23:07शौर्य ने यह जानना चाहा। शौर्य की बात
  1795. 1:23:10सुनकर इंस्पेक्टर आशा का मन कुछ कसैला सा
  1796. 1:23:14हो गया। वो उससे बात नहीं करना चाहती थी।
  1797. 1:23:17[संगीत] लेकिन उसे पता था कि कमिश्नर का
  1798. 1:23:19शौर्य पर काफी स्नेह है। इसीलिए उसने बेमन
  1799. 1:23:22से जवाब दिया।
  1800. 1:23:25अगर तुम जानना ही चाहते हो तो यह जान लो
  1801. 1:23:27कि रुस्तम को जो पैसे ट्रांसफर हुए हैं वे
  1802. 1:23:30विहान रायजादा के नाम के अकाउंट से हुए
  1803. 1:23:33हैं। लेकिन मजेदार बात यह है कि वो अकाउंट
  1804. 1:23:37अभी एक सप्ताह पहले ही खुलवाया गया है।
  1805. 1:23:40वैसे मैं विहान रायजादा के खिलाफ वारंट
  1806. 1:23:43जारी करवाने की कोशिश कर रही हूं। जैसे ही
  1807. 1:23:46वारंट जारी होगा मैं उसे गिरफ्तार कर
  1808. 1:23:49लूंगी।
  1809. 1:23:51इंस्पेक्टर आशा के मुंह से सुनकर कि जिस
  1810. 1:23:53अकाउंट से रुस्तम को पैसे ट्रांसफर हुए
  1811. 1:23:56हैं, वह भी एक सप्ताह पहले ही विहान के
  1812. 1:23:58नाम से खुलवाया गया है। अब शौर्य को शक
  1813. 1:24:02होने लगा कि जरूर कोई है जो विहान पर शक
  1814. 1:24:05डालकर अपना फायदा उठाना चाहता है? उसने
  1815. 1:24:08फिर से विहान की ओर देखकर पूछा।
  1816. 1:24:12क्या तुमने अभी एक सप्ताह पहले अपने नाम
  1817. 1:24:15से कोई अकाउंट खुलवाया है?
  1818. 1:24:18शौर्य की बात सुनकर विहान ने मुंह बनाते
  1819. 1:24:20हुए कहा, मैंने अभी कोई नया अकाउंट अपने
  1820. 1:24:23नाम से नहीं खुलवाया। मुझे नहीं पता कौन
  1821. 1:24:27मुझे फंसाना चाहता है। शौर्य मुस्कुराते
  1822. 1:24:31हुए विहान को चेतावनी देने लगा। अब तुम यह
  1823. 1:24:34बोलकर इससे बच नहीं सकते। क्योंकि यह जो
  1824. 1:24:37भी शख्स है वो तुम्हारे करीब जरूर है। तभी
  1825. 1:24:41तो उसने तुम्हारे नाम से अकाउंट खुलवाया।
  1826. 1:24:43इसका मतलब उसके पास तुम्हारी पर्सनल आईडी
  1827. 1:24:46रही होगी। तभी उसने अकाउंट खोलकर उसे पैसे
  1828. 1:24:50ट्रांसफर किए।
  1829. 1:24:52अगर मैं तुम्हें पुलिस के हवाले कर दूंगा
  1830. 1:24:54तो तुम्हारे लिए यह साबित करना मुश्किल हो
  1831. 1:24:57जाएगा कि इसमें तुम्हारा कोई हाथ नहीं है।
  1832. 1:25:02उसने अपनी बात आगे बढ़ाई। वैसे तुम्हारी
  1833. 1:25:05जानकारी के लिए बता दूं कि पुलिस जल्द ही
  1834. 1:25:08तुम्हारे खिलाफ वारंट जारी करने [संगीत]
  1835. 1:25:10वाली है और हो सकता है कि कुछ ही समय में
  1836. 1:25:13तुम्हें गिरफ्तार करने के लिए ढूंढना शुरू
  1837. 1:25:15कर दें। इसीलिए तुम्हारे लिए बेहतर यही है
  1838. 1:25:19कि तुम मेरी मदद करो और बताओ कि किसने
  1839. 1:25:22तुम्हारे नाम का इस्तेमाल करके रुस्तम को
  1840. 1:25:25शिप्रा को किडनैप करने की सुपारी दी।
  1841. 1:25:29एक बात तुम समझ [संगीत] लो। तुम्हारी
  1842. 1:25:31बेगुनाही तभी साबित हो सकती है जब असली
  1843. 1:25:34गुनहगार सामने आए। अब तुम खुद सोच लो कि
  1844. 1:25:38तुम्हें जेल जाना है या मेरी मदद करनी है।
  1845. 1:25:41ताकि यह पता चल सके कि तुम्हारे नाम का
  1846. 1:25:44इस्तेमाल कर किसने शिप्रा को किडनैप करने
  1847. 1:25:46का प्लान बनाया है।
  1848. 1:25:49विहान सोच में पड़ गया। अचानक उसके दिमाग
  1849. 1:25:52में एक नाम आ गया। वो उम्मीद भरी आंखों से
  1850. 1:25:56शौर्य की ओर देखते हुए बोला,
  1851. 1:25:59वैसे एक और शख्स है जो शिप्रा को किडनैप
  1852. 1:26:02करवाने की कोशिश कर सकता है। लेकिन अगर
  1853. 1:26:05मैं उसका नाम लूंगा तो वो मेरा सबसे बड़ा
  1854. 1:26:08दुश्मन बन जाएगा। मुझे डर है कि वो मेरे
  1855. 1:26:12पीछे भी पड़ सकता है।
  1856. 1:26:14शौर्य ने विहान को सख्त लहजे में चेतावनी
  1857. 1:26:17दी। अब तुम इस बात से बच नहीं सकते।
  1858. 1:26:20तुम्हें उस शख्स का नाम लेना ही होगा। तभी
  1859. 1:26:23तुम इस गुनाह से बच पाओगे।
  1860. 1:26:26विहान ने कुछ सोचकर जवाब दिया,
  1861. 1:26:29तुम्हें एक बार रजत के बारे में भी सोचना
  1862. 1:26:32चाहिए क्योंकि वो भी बहुत समय से शिप्रा
  1863. 1:26:35के पीछे पड़ा हुआ है। और तुम्हारी जानकारी
  1864. 1:26:39के लिए बता दूं कि अभी कुछ समय पहले जो
  1865. 1:26:41मैंने शिप्रा से दोबारा शादी करने के लिए
  1866. 1:26:44दबाव बनाना शुरू किया था। उसके पीछे भी
  1867. 1:26:47[संगीत] उसी का हाथ था। उसी ने मुझे इस
  1868. 1:26:50काम के लिए आगे किया था। कि मैं इस तरह
  1869. 1:26:53तुम्हारी शादी तुड़वाने की कोशिश करूं। पर
  1870. 1:26:56वो प्लान कामयाब नहीं हो पाया। क्योंकि
  1871. 1:26:59शिप्रा ने तुमसे तलाक लेने से साफ-साफ मना
  1872. 1:27:02कर दिया था।
  1873. 1:27:04तो हो सकता है कि अब जाकर रजत ने [संगीत]
  1874. 1:27:07यह प्लान किया हो।
  1875. 1:27:10शौर्य के दिमाग में पहले से ही रजत का नाम
  1876. 1:27:13घूम रहा था। लेकिन उसे यह नहीं पता था कि
  1877. 1:27:16रजत पहले भी विहान को मोहरा बनाने की
  1878. 1:27:18कोशिश कर चुका है। अब जब उसे जानकारी मिली
  1879. 1:27:22कि रजत की मिलीभगत विहान से पहले भी रही
  1880. 1:27:25है तो उसे समझ आ गया कि इस बार भी रजत ने
  1881. 1:27:28विहान को ही बलि का बकरा बनाने का प्लान
  1882. 1:27:30किया है। अब शौर्य के सामने काफी चीजें
  1883. 1:27:34स्पष्ट हो चुकी थी।
  1884. 1:27:37अब उसे यह सोचना था कि वह किस तरह रजत को
  1885. 1:27:39सामने लाए। उसके दिमाग में एक योजना बनने
  1886. 1:27:43लगी थी। उसने तय कर लिया था कि अगर यह सब
  1887. 1:27:46रजत का किया धरा है तो इस बार वो उसे
  1888. 1:27:49छोड़ेगा नहीं। उसने मन ही मन ठान लिया कि
  1889. 1:27:52उसे क्या करना है। वो विहान की तरफ देखते
  1890. 1:27:56हुए बोला
  1891. 1:27:57अगर तुम सच में इस पछड़े से निकलना चाहते
  1892. 1:28:00हो तो मैं जो तुम्हें कहूंगा तुम्हें वो
  1893. 1:28:03करना पड़ेगा।
  1894. 1:28:05मेरी बात ध्यान से सुनो और बिना किसी गलती
  1895. 1:28:08के फॉलो करो। अगर तुमने सहयोग किया
  1896. 1:28:12शौर्य की बात सुनकर विहान के शरीर में
  1897. 1:28:15झुरझुरी सी दौड़ गई। उसने डरते हुए जवाब
  1898. 1:28:18दिया मैं मैं रजत के खिलाफ जाने के बारे
  1899. 1:28:22में सोच भी नहीं सकता। तुम नहीं जानते वो
  1900. 1:28:26कितना खतरनाक है। अगर उसे पता चल गया कि
  1901. 1:28:29उसे फंसाने के लिए मैं तुमसे मिला हुआ हूं
  1902. 1:28:32तो तो वो मुझे जिंदा नहीं छोड़ेगा।
  1903. 1:28:37शौर्य ने विहान को शांत होकर समझाया,
  1904. 1:28:41"मुझे तुम पर तरस आ रहा है कि जिसने
  1905. 1:28:43तुम्हें फंसाने की कोशिश की है, तुम अभी
  1906. 1:28:46भी उसी को बचाने की कोशिश कर रहे हो। तुम
  1907. 1:28:49यह समझ लो कि अगर रजत पकड़ में नहीं आया,
  1908. 1:28:53तो तुम्हारा जेल जाना पक्का है। क्योंकि
  1909. 1:28:55उसने जो प्लान रचा है, उसमें तुम ही फंस
  1910. 1:28:58रहे हो। अगर तुम इस काम में हमारी मदद
  1911. 1:29:01नहीं करते [संगीत] तो समझ लो कि मैं रजत
  1912. 1:29:05से बाद में उसके किए का बदला तो ले ही
  1913. 1:29:07लूंगा लेकिन अभी तुम शिप्रा को किडनैप
  1914. 1:29:10करने के जुर्म में जेल चले जाओगे क्योंकि
  1915. 1:29:13सारे सबूत तुम्हारे खिलाफ हैं और जहां तक
  1916. 1:29:16रुस्तम की बात है वो भी तुम्हारा ही नाम
  1917. 1:29:19ले रहा है कि तुमने उसे सुपारी दी है।
  1918. 1:29:23उसने अपनी बात आगे रखी।
  1919. 1:29:26अब तुम खुद फैसला कर लो कि तुम्हें क्या
  1920. 1:29:29[संगीत] करना है क्योंकि मैं तुम्हें अभी
  1921. 1:29:31पुलिस के हवाले करने वाला हूं। तुम पुलिस
  1922. 1:29:34के सामने चिल्लाते रहना कि तुमने कुछ नहीं
  1923. 1:29:37किया लेकिन कोई भी तुम पर विश्वास नहीं
  1924. 1:29:39करेगा। रास्ते भर तुम्हारे पास सोचने का
  1925. 1:29:43समय है कि तुम क्या चाहते हो। अगर तुम
  1926. 1:29:47मेरे प्लान पर चलते हो तो मैं तुम्हें
  1927. 1:29:49विश्वास दिला सकता हूं कि तुम्हारे ऊपर
  1928. 1:29:51कोई इल्जाम नहीं आएगा।
  1929. 1:29:54लेकिन अगर तुम मेरी बात नहीं मानते तो यह
  1930. 1:29:56तय है कि तुम शिप्रा को किडनैप करने के
  1931. 1:29:59जुर्म [संगीत] में जेल जाओगे और तुम्हें
  1932. 1:30:03कोई बचा नहीं पाएगा। तो क्या होगा आगे?
  1933. 1:30:06आखिर शौर्य ने क्या प्लान किया है रजत
  1934. 1:30:09[संगीत] की सच्चाई को बाहर लाने के लिए?
  1935. 1:30:10क्या विहान शौर्य की मदद करने को तैयार
  1936. 1:30:12होगा? को जब यह पता चलता है कि शिप्रा की
  1937. 1:30:15किडनैपिंग के पीछे रजत हो सकता है तो वो
  1938. 1:30:17विहान के सामने एक शर्त रखता है कि वो
  1939. 1:30:19शौर्य के प्लान में उसकी मदद करे [संगीत]
  1940. 1:30:22या फिर वो विहान को पुलिस के हवाले कर
  1941. 1:30:24देगा। शौर्य की बात सुनने के बाद विहान
  1942. 1:30:27समझ गया कि अब उसे हर हाल में शौर्य की
  1943. 1:30:29बात माननी पड़ेगी। नहीं तो उसे जेल जाने
  1944. 1:30:32के लिए तैयार रहना पड़ेगा। उसने हारकर
  1945. 1:30:34[संगीत]
  1946. 1:30:35शौर्य की बात मान ली। शौर्य विहान की
  1947. 1:30:38मंजूरी पाकर बोला, "यह तुमने अच्छा फैसला
  1948. 1:30:41किया।" विहान ने मन ही मन सोचा, "यह तो
  1949. 1:30:45मेरे साथ जबरदस्ती है। नहीं तो कौन
  1950. 1:30:47मुख्तार भाई से पंगा लेना चाहेगा?" लेकिन
  1951. 1:30:50अभी विहान को खुद को बचाना था। इसीलिए वो
  1952. 1:30:52शौर्य की बात मानने को तैयार हो गया।
  1953. 1:30:55शौर्य अपनी जगह पर खड़ा हुआ और उसने कहा,
  1954. 1:30:58तो फिर ठीक है। चलो पहले पुलिस स्टेशन
  1955. 1:31:01चलते हैं। वहीं मैं तुम्हें आगे का प्लान
  1956. 1:31:03भी बताऊंगा। अभी शौर्य ने इतना ही बोला था
  1957. 1:31:07कि तभी उस कमरे का दरवाजा खुला और धड़ाती
  1958. 1:31:10हुई मानसी मेहता उस कमरे में दाखिल हुई।
  1959. 1:31:13मानसी ने यहां कमरे में इतने सारे लोगों
  1960. 1:31:15को देखा तो उसने हैरान स्वर में पूछा
  1961. 1:31:19क्या हो रहा है यहां? शौर्य को उम्मीद
  1962. 1:31:22नहीं थी कि यूं अचानक यहां मानसी मेहता आ
  1963. 1:31:24जाएगी। उसे पता नहीं था कि हंसल मेहता ने
  1964. 1:31:27यहां के काम की जिम्मेदारी मानसी मेहता को
  1965. 1:31:29दे दी है। इसीलिए उसका यहां आना-जाना होता
  1966. 1:31:32रहता है। वो सोचने लगा कि वो मानसी को
  1967. 1:31:35क्या जवाब दे। जबकि शौर्य से होती हुई
  1968. 1:31:37मानसी की निगाह फर्श पर बैठे विहान
  1969. 1:31:39रायजादा पर पड़ी। उसकी बुरी हालत देखकर ही
  1970. 1:31:42वह समझ गई कि जरूर उसके साथ कोई जबरदस्ती
  1971. 1:31:45हो रही थी। उसे पहले से ही शौर्य पसंद
  1972. 1:31:48नहीं था और जब उसने यहां ऐसी हालत देखी
  1973. 1:31:50जिसमें लग रहा था कि वह जबरदस्ती विहान को
  1974. 1:31:53टॉर्चर कर रहा है तो वो रूखे स्वर में
  1975. 1:31:55शौर्य से बोली क्या तुम यहां के गुंडे हो
  1976. 1:31:59जो इसे यहां जमीन पर बैठा रखा है मैंने
  1977. 1:32:02सुना है तुमने पहले भी विजय की पिटाई
  1978. 1:32:04करवाई थी यहां तक कि उसका एक हाथ भी
  1979. 1:32:07तुड़वा दिया था और आज फिर मैं देख रही हूं
  1980. 1:32:09कि तुम यहां इस शख्स के साथ जबरदस्ती कर
  1981. 1:32:12रहे हो पता नहीं पापा ने तुम्हें इतनी ढील
  1982. 1:32:15क्यों दे रखी है और मुझे यह भी समझ नहीं आ
  1983. 1:32:17रहा कि तुम यहां इस ऑफिस में कर क्या रहे
  1984. 1:32:19हो। तुम्हारा यहां इस ऑफिस में क्या काम?
  1985. 1:32:23क्या तुम इस जगह को भी अपनी बदमाशी का
  1986. 1:32:25अड्डा बनाना चाहते हो? हां। अगर तुम्हारा
  1987. 1:32:29ऐसा कोई इरादा है तो यह समझ लो। यहां
  1988. 1:32:31तुम्हारी मनमर्जी नहीं चलने वाली। मानसी
  1989. 1:32:35के मन में जो भी आता गया वो शौर्य को
  1990. 1:32:37बोलती गई और शौर्य खामोशी से उसकी बात को
  1991. 1:32:40सुनता रहा। अगर उसे पहले से पता होता कि
  1992. 1:32:43हंसल मेहता ने यहां के काम की जिम्मेदारी
  1993. 1:32:46मानसी को ही दे दी है तो वह छगन-मगन से
  1994. 1:32:48विहान को यहां लाने के लिए नहीं कहता।
  1995. 1:32:51लेकिन अब कुछ नहीं किया जा सकता था।
  1996. 1:32:53इसीलिए उसने बात को संभालते हुए कहा।
  1997. 1:32:57ठीक है। आगे से मैं इस बात का ध्यान
  1998. 1:32:59रखूंगा। मैं यहां से सब लोगों को लेकर जा
  1999. 1:33:02रहा हूं। तुम्हारे लिए यही अच्छा होगा।
  2000. 1:33:05बाकी ध्यान रखना कि दोबारा यहां ऐसी कोई
  2001. 1:33:08हरकत ना होने पाए जो हमारी कंपनी की इमेज
  2002. 1:33:11खराब करने का काम करे। मानसी शौर्य को
  2003. 1:33:14चेतावनी देती हुई बोली शौर्य ने मानसी की
  2004. 1:33:17बात को नजरअंदाज किया और विहान की ओर
  2005. 1:33:20देखकर कहा चलो चलते हैं यहां से। शौर्य की
  2006. 1:33:25बात सुनने के बाद विहान उठा और शौर्य के
  2007. 1:33:27साथ बाहर की तरफ चल दिया। मानसी सबको जाते
  2008. 1:33:30हुए देखती रही। बसंतपुर से विहान को लेकर
  2009. 1:33:34शौर्य सीधा थाने पहुंचा। थाने में
  2010. 1:33:37इंस्पेक्टर आशा ने जब शौर्य के साथ विहान
  2011. 1:33:39को देखा तो उसने आश्चर्य से पूछा, तुम इसे
  2012. 1:33:43भी यहां ले आए। वैसे हम अभी इसको गिरफ्तार
  2013. 1:33:46करने के लिए निकलने ही वाले थे। मैं समझता
  2014. 1:33:49हूं कि आपका शक विहान के ऊपर ही जा रहा
  2015. 1:33:51होगा। यही इस किडनैपिंग का मास्टरमाइंड
  2016. 1:33:54है। पर मुझे लग रहा है कि हम कुछ जल्दबाजी
  2017. 1:33:57कर रहे हैं। इसीलिए असली मास्टरमाइंड को
  2018. 1:33:59पकड़ने के लिए हमने कुछ प्लान किया है।
  2019. 1:34:02अगर आपकी मदद मिल जाए तो हम जल्दी ही असली
  2020. 1:34:05मास्टरमाइंड को पकड़ लेंगे। शौर्य ने आशा
  2021. 1:34:08के सामने प्रस्ताव रखा। इंस्पेक्टर आशा को
  2022. 1:34:11शौर्य का उसके काम के बीच में दखल देना
  2023. 1:34:14पसंद नहीं आ रहा था। उसे लग रहा था कि
  2024. 1:34:17कमिश्नर इस लड़के पर कुछ ज्यादा ही
  2025. 1:34:18मेहरबान है। इसीलिए वह अभी तक शौर्य को
  2026. 1:34:21नजरअंदाज करती आ रही थी। पर अब उसे लग रहा
  2027. 1:34:24था कि सब कुछ विहान के अगेंस्ट है। सारे
  2028. 1:34:27सबूत भी उसके खिलाफ हैं। उसके बाद भी
  2029. 1:34:30शौर्य इसमें कोई पेंच निकालने की कोशिश कर
  2030. 1:34:32रहा है। आशा ने नाराजगी भरे स्वर में
  2031. 1:34:35शौर्य से कहा। मिस्टर शौर्य आप इस केस को
  2032. 1:34:38कुछ ज्यादा ही पेचीदा बनाने की कोशिश कर
  2033. 1:34:40रहे हैं। जबकि यह केस पानी की तरह एकदम
  2034. 1:34:43साफ है। विहान ने रुस्तम को शिप्रा को
  2035. 1:34:46किडनैप करने की सुपारी दी थी और उसको जो
  2036. 1:34:48पैसे ट्रांसफर हुए थे वो भी उसके अकाउंट
  2037. 1:34:51से ही हुए थे। इसके सारे सबूत हमारे पास
  2038. 1:34:54मौजूद हैं। उसके बाद भी आप इसमें कुछ पेच
  2039. 1:34:57निकालना चाह रहे हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा
  2040. 1:35:00है कि आप ऐसा क्यों कर रहे हैं। यह अच्छा
  2041. 1:35:03होगा कि आप पुलिस का काम पुलिस को ही करने
  2042. 1:35:05दें और आप आराम से कार्यवाही होते देखते
  2043. 1:35:07रहें। यही आपके लिए अच्छा रहेगा।
  2044. 1:35:11शौर्य समझ गया कि इंस्पेक्टर आशा आसान
  2045. 1:35:14टारगेट को निशाना बना रही है। इस
  2046. 1:35:16किडनैपिंग की गहराई में जाने का उसका कोई
  2047. 1:35:18इरादा नहीं है। यह सोचकर उसने इंस्पेक्टर
  2048. 1:35:21आशा से कहा, मिस आशा आप मुझे एक डेढ़ घंटे
  2049. 1:35:24का वक्त दें। मैं कोशिश करता हूं कि इतने
  2050. 1:35:26वक्त में असली गुनहगार को आपके सामने ला
  2051. 1:35:29सकूं।
  2052. 1:35:30मैं आपको रोकने वाली कौन होती हूं? आप कुछ
  2053. 1:35:33भी करने के लिए आजाद हैं। लेकिन मेरे लिए
  2054. 1:35:36यह केस क्लोज हो चुका है। इतना बोलकर आशा
  2055. 1:35:40ने एक सिपाही की ओर देखकर कहा, महतो जी आप
  2056. 1:35:44मिस्टर विहान को लॉकअप के अंदर डालिए।
  2057. 1:35:47इंस्पेक्टर आशा की बात सुनकर विहान के
  2058. 1:35:49चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी।
  2059. 1:35:52वो कुछ बोलना तो चाह रहा था पर उसे समझ
  2060. 1:35:54नहीं आ रहा था कि वह इंस्पेक्टर के सामने
  2061. 1:35:57क्या सफाई दे। वो उम्मीद भरी आंखों से
  2062. 1:36:00शौर्य की ओर देखने लगा। मिसाशा विहान तो
  2063. 1:36:03यहां आपके पास मौजूद ही है। क्या आप यहां
  2064. 1:36:06थोड़ी देर के लिए मेरी बात सुन सकती हैं?
  2065. 1:36:08इसमें आपका कुछ भी बिगड़ने वाला नहीं है।
  2066. 1:36:11मुझे बस थोड़ी देर के लिए रुस्तम का
  2067. 1:36:13मोबाइल चाहिए। शौर्य इंस्पेक्टर आशा से
  2068. 1:36:17रिक्वेस्ट करते हुए बोला। शौर्य की बात
  2069. 1:36:19सुनकर आशा की भए तन गई। उसने शक भरी आंखों
  2070. 1:36:23से शौर्य की ओर देखते हुए पूछा। तुम
  2071. 1:36:26रुस्तम के मोबाइल का क्या करोगे? आप दीजिए
  2072. 1:36:30तो सही जो भी करूंगा आपके सामने ही
  2073. 1:36:32करूंगा। आपको भी समझ में आ जाएगा कि मैं
  2074. 1:36:35क्या करने जा रहा हूं। शौर्य ने जवाब देते
  2075. 1:36:39हुए कहा आशा को समझ नहीं आया कि शौर्य के
  2076. 1:36:42दिमाग में क्या चल रहा है। पर एक जिज्ञासा
  2077. 1:36:45अब उसके मन में भी उठ गई कि देखें आखिर
  2078. 1:36:47इसके दिमाग में क्या चल रहा है। यह सोचकर
  2079. 1:36:50उसने एक सिपाही की ओर देखकर उससे कहा तुम
  2080. 1:36:53जाओ एविडेंस रूम से रुस्तम का मोबाइल ले
  2081. 1:36:56आओ। जब सिपाही रुस्तम का मोबाइल लाने के
  2082. 1:36:59लिए चला गया तब शौर्य ने विहान को समझाना
  2083. 1:37:02शुरू किया कि उसे क्या करना है और कैसे
  2084. 1:37:04करना है। साथ में उसने उसे यह वार्निंग भी
  2085. 1:37:07दी कि यह उसके लिए भी एक आखिरी उम्मीद है।
  2086. 1:37:09अगर वह इस प्लान में कामयाब नहीं हुए तो
  2087. 1:37:12विहान का क्या अंजाम हो सकता है इसका
  2088. 1:37:14अंदाजा वो लगा सकता है। इसीलिए यह काम जो
  2089. 1:37:18वो करेगा वो खुद को बचाने के लिए करेगा।
  2090. 1:37:21जब तक शौर्य ने विहान को समझाया तब तक वो
  2091. 1:37:24सिपाही भी रुस्तम का मोबाइल लेकर आ गया।
  2092. 1:37:26इंस्पेक्टर आशा इस बीच शौर्य की बातें
  2093. 1:37:29सुनती रही। अब उसकी आंखों में भी एक
  2094. 1:37:31उत्सुकता नजर आने लगी थी कि देखते हैं
  2095. 1:37:34क्या होता है। विहान ने अपना मोबाइल
  2096. 1:37:36निकाला और रजत का नंबर डायल किया। दो-तीन
  2097. 1:37:39रिंग जाने के बाद ही रजत ने विहान का फोन
  2098. 1:37:42उठा लिया।
  2099. 1:37:43अरे विहान कहो कैसे फोन किया?
  2100. 1:37:46रजत भाई आपने किसी को कोई सुपारी दी है
  2101. 1:37:49क्या? विहान ने सकुचाते हुए रजत से पूछा।
  2102. 1:37:53दूसरी तरफ रजत ने चौंकते हुए पूछा।
  2103. 1:37:56यह तुम क्या कह रहे हो विहान? मैं क्यों
  2104. 1:37:58किसी की सुपारी देने लगा?
  2105. 1:38:00आपने नहीं दी है तो फिर कौन हो सकता है?
  2106. 1:38:03मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा। विहान ने
  2107. 1:38:06उलझन भरे स्वर में कहा।
  2108. 1:38:07पर हुआ क्या? तुम ऐसा क्यों पूछ रहे हो?
  2109. 1:38:11रजत ने उत्सुकता से पूछा। विहान चिड़चिड़े
  2110. 1:38:14स्वर में बोला। अरे क्या कहूं रजत भाई?
  2111. 1:38:17मेरे पास दो-तीन बार एक रुस्तम नाम के
  2112. 1:38:19बंदे का फोन आ गया है। वो बार-बार फोन
  2113. 1:38:21करके मुझसे कह रहा है कि मेरा काम हो गया
  2114. 1:38:23है। इसीलिए मैं जितनी जल्दी जाकर उस लड़की
  2115. 1:38:26को अपने कब्जे में ले लूं ताकि वो फ्री हो
  2116. 1:38:29जाए और बाकी पैसे भी उसे दे दूं। मुझे समझ
  2117. 1:38:32नहीं आ रहा कि वो मुझे क्यों फोन कर रहा
  2118. 1:38:34है?
  2119. 1:38:35तुम्हें ऐसा क्यों लगा कि उसको सुपारी
  2120. 1:38:37देने वाला मैं हो सकता हूं। हां।
  2121. 1:38:39रजत ने विहान से जानने के लिए पूछा कि
  2122. 1:38:41आखिर उसके दिमाग में ये बात आई क्यों?
  2123. 1:38:44इसकी वजह यह है कि जिस लड़की को उसने
  2124. 1:38:46किडनैप किया है वो शिप्रा राय है। इसीलिए
  2125. 1:38:49मुझे लगा कि मैं आपसे एक बार पूछ लूं कि
  2126. 1:38:51शायद आपको कुछ पता हो। विहान ने शक करने
  2127. 1:38:54की वजह बताई। विहान की बात सुनकर रजत चुप
  2128. 1:38:57रह गया। यह देखकर विहान फिर से बोला क्या
  2129. 1:39:01हुआ रजत भाई? आपने कुछ बताया नहीं। क्या
  2130. 1:39:04सचमुच आपने ही शिप्रा को किडनैप करवाया
  2131. 1:39:06है?
  2132. 1:39:06तुम्हारा दिमाग तो नहीं खराब हो गया।
  2133. 1:39:09मैंने ऐसा कुछ नहीं कराया है। अब फ़ोन रखो
  2134. 1:39:11तुम। रजत ने चिड़चिड़े स्वर में कहा, पर
  2135. 1:39:14रजत भाई अब अगर दोबारा उसका फोन मेरे पास
  2136. 1:39:16आएगा तो मैं उसे क्या बोलूं? विहान जल्दी
  2137. 1:39:19से बोल पड़ा। उसे लगा रजत फोन काट ना दे।
  2138. 1:39:23अब तुमको क्या बोलना है यह तुम्हें मैं
  2139. 1:39:25कैसे बताऊं? तुमको जो बोलना है बोल दो। पर
  2140. 1:39:28मुझसे मत पूछो।
  2141. 1:39:29इतना कहकर रजत ने फोन काट दिया। रजत के
  2142. 1:39:32फोन काटने के बाद विहान के चेहरे पर
  2143. 1:39:34निराशा झलकने लगी। उसे लगा कि रजत ने तो
  2144. 1:39:37कबूल ही नहीं किया कि शिप्रा को किडनैप
  2145. 1:39:39करने में उसका हाथ था। इसका मतलब अब उसका
  2146. 1:39:42फंसना पक्का है। जबकि इसी समय इंस्पेक्टर
  2147. 1:39:46आशा के चेहरे पर एक विजय मुस्कान थी। वो
  2148. 1:39:49शौर्य की ओर मुस्कुराते हुए देख रही थी।
  2149. 1:39:51जैसे कह रही हो। देखा मैंने जो कहा था वो
  2150. 1:39:55सही है। उसने अपना गुनाह कबूल नहीं किया।
  2151. 1:39:58इसका मतलब इस किडनैपिंग का मास्टरमाइंड
  2152. 1:40:00विहान ही है। इंस्पेक्टर आशा के चेहरे की
  2153. 1:40:03मुस्कान देखकर [संगीत] शौर्य के चेहरे पर
  2154. 1:40:05भी एक रहस्यमई मुस्कान आ गई। जब
  2155. 1:40:07इंस्पेक्टर आशा ने शौर्य को इस तरह से
  2156. 1:40:10मुस्कुराते देखा तो उसने कहा
  2157. 1:40:13मैं तुम्हारे इस तरह से मुस्कुराने का
  2158. 1:40:15मतलब पूछ सकती हूं। तुम्हारी सोच तो गलत
  2159. 1:40:18साबित हो गई। फिर तुम क्यों मुस्कुरा रहे
  2160. 1:40:20हो? शौर्य अपने हाथ में रुस्तम के मोबाइल
  2161. 1:40:23से खेलते हुए बोला ये आपसे किसने कहा
  2162. 1:40:26इंस्पेक्टर? कि मेरी सोच गलत साबित हो गई।
  2163. 1:40:29आप बस थोड़ी देर इंतजार कीजिए।
  2164. 1:40:33इंस्पेक्टर आशा शौर्य से कुछ और भी बोलना
  2165. 1:40:35चाह रही थी कि तभी उसने देखा शौर्य के हाथ
  2166. 1:40:38में जो मोबाइल था वो रिंग करने लगा। शौर्य
  2167. 1:40:42ने देखा उस मोबाइल पर एक प्राइवेट नंबर से
  2168. 1:40:44फोन आ रहा था। उसने मोबाइल का स्क्रीन
  2169. 1:40:47इंस्पेक्टर आशा की आंखों के सामने लहराया।
  2170. 1:40:50इंस्पेक्टर आशा ने भी उस प्राइवेट नंबर की
  2171. 1:40:52तरफ देखा और उसकी आंखें भी फैल गई। शौर्य
  2172. 1:40:56ने कॉल एक्सेप्ट किया और मोबाइल को
  2173. 1:40:58लाउडस्पीकर पर डाल दिया। हेलो मिस्टर
  2174. 1:41:01विहान।
  2175. 1:41:02आपने इतनी देर कैसे कर दी? मैंने इतनी बार
  2176. 1:41:06आपको फोन किया और आप मान ही नहीं रहे थे
  2177. 1:41:08कि आपने मुझे यह सुपारी दी है। अब इसका
  2178. 1:41:11मैं क्या मतलब समझूं? शौर्य के गले से
  2179. 1:41:15रुस्तम की आवाज निकल रही थी। इंस्पेक्टर
  2180. 1:41:18आशा के साथ वहां मौजूद सभी लोग शौर्य की
  2181. 1:41:20ओर देखने लगे।
  2182. 1:41:22आपको मेरा पर्सनल नंबर कैसे मिला? मिस्टर
  2183. 1:41:24रुस्तम मैंने तो आपको वो नंबर दिया नहीं
  2184. 1:41:26था। इसीलिए आप समझ सकते हैं कि मैं उस
  2185. 1:41:29नंबर पर एक्सेप्ट नहीं कर सकता था। आपको
  2186. 1:41:32मुझे फोन करने से पहले थोड़ा इंतजार करना
  2187. 1:41:34चाहिए था। मैंने तो कहा ही था कि मैं आपको
  2188. 1:41:37खुद ही फोन करूंगा।
  2189. 1:41:39दूसरी तरफ से रजत की आवाज आई। उसने पूरी
  2190. 1:41:43कोशिश की विहान की आवाज में बात कर सके।
  2191. 1:41:46पर वो इसमें कामयाब नहीं हुआ। जब बहुत देर
  2192. 1:41:49तक आपका कॉल नहीं आया तो फिर आपका नंबर
  2193. 1:41:52निकालना क्या मुश्किल था। बड़ी आसानी से
  2194. 1:41:55मुझे आपका नंबर मिल गया। उस वक्त मुझे समझ
  2195. 1:41:58नहीं आया कि आप शिप्रा को किडनैप करने की
  2196. 1:42:01बात से मुकर क्यों रहे हैं। लेकिन अब समझ
  2197. 1:42:04आ रहा है कि आपका क्या रीजन था।
  2198. 1:42:08शौर्य ने रुस्तम की आवाज में कहा हम अक्सर
  2199. 1:42:11मीटिंग्स में ऑफिशियल लोगों के साथ बैठे
  2200. 1:42:14हुए होते हैं। और उस वक्त आपका फोन आ जाना
  2201. 1:42:17और किडनैपिंग के बारे में पूछना। वो
  2202. 1:42:20सिचुएशन बहुत ऑकवर्ड हो गई थी। इसलिए
  2203. 1:42:22मैंने उस समय इस बात से इंकार किया था। पर
  2204. 1:42:25मैं जैसे ही फ्री हुआ हूं, मैंने आपको फोन
  2205. 1:42:27किया।
  2206. 1:42:28रजत ने जवाब दिया, तो फिर ठीक है, आप
  2207. 1:42:32लड़की को लेने के लिए कब आ रहे हैं? अब
  2208. 1:42:34मैं ज्यादा देर इस शहर में रहना नहीं
  2209. 1:42:36चाहता। एक बार लड़की को आपके हवाले कर दूं
  2210. 1:42:39तो फिर मैं फ्री हो जाऊंगा। शौर्य ने रजत
  2211. 1:42:42से कहा, तो क्या होगा आगे? क्या रजत पुलिस
  2212. 1:42:46के कब्जे में आएगा? क्या शौर्य साजिश की
  2213. 1:42:48तह तक पहुंच पाएगा? जानने के लिए सुनते
  2214. 1:42:51रहिए बेगर हस्बैंड। सुनकर रजत को जवाब
  2215. 1:42:54दिया। इस समय मैं नीलगिरी फॉरेस्ट में
  2216. 1:42:57हूं। आप बताइए आप यहां आओगे या कोई दूसरी
  2217. 1:43:00लोकेशन बता दूं। मैं लड़की को वहां पहुंचा
  2218. 1:43:03सकता हूं। रुस्तम की यह बात सुनकर कि वो
  2219. 1:43:06लड़की को रजत के बताए स्थान पर पहुंचा
  2220. 1:43:08सकता है। रजत खुश हो गया और बोला
  2221. 1:43:10मिस्टर रुस्तम अगर आप लड़की को मेरे बताए
  2222. 1:43:13हुए जगह पर पहुंचा देते हैं तो जो रकम का
  2223. 1:43:15डील हुआ है उसके अलावा मैं आपको ₹1 लाख और
  2224. 1:43:18दूंगा। अगर ऐसी बात है तो फिर आप मुझे वो
  2225. 1:43:21लोकेशन भेजिए। जितनी जल्दी हो सके मैं
  2226. 1:43:24लड़की को आपके पास पहुंचा दूंगा। अपनी
  2227. 1:43:27बातों में खुशी दिखाते हुए उसने जवाब
  2228. 1:43:29दिया। जैसे वो रजत को यह जताना चाहता था
  2229. 1:43:32कि वो अतिरिक्त ₹1 लाख पाने के लिए काफी
  2230. 1:43:35उत्साहित [संगीत] है। रजत ने खुश होकर
  2231. 1:43:37जवाब दिया।
  2232. 1:43:38ठीक है मिस्टर रुस्तम। मैं आपको एक एड्रेस
  2233. 1:43:41भेजता हूं। आप लड़की को इस एड्रेस पर
  2234. 1:43:43पहुंचा दीजिए। वहीं आपको आपका पूरा पेमेंट
  2235. 1:43:46भी मिल जाएगा। इतना बोलकर रजत ने फोन काट
  2236. 1:43:49दिया। [संगीत] शौर्य इंस्पेक्टर आशा की
  2237. 1:43:52तरफ देखने लगा और मुस्कुराते हुए उससे
  2238. 1:43:54पूछा, अब आप बताइए आप क्या कहती हैं? अभी
  2239. 1:43:58तो आप विहान को दोषी मानकर उसे गिरफ्तार
  2240. 1:44:01करने के बारे में सोच रही थी। लेकिन अब
  2241. 1:44:03क्या आपको यकीन हो गया है कि असली गुनहगार
  2242. 1:44:06कौन है। इंस्पेक्टर आशा के चेहरे पर
  2243. 1:44:09शर्मिंदगीगी के भाव आ गए थे।
  2244. 1:44:13शौर्य को लगा कि कहीं वह उसके मोरल को ठेस
  2245. 1:44:15तो नहीं पहुंचा बैठा। इसीलिए उसने माहौल
  2246. 1:44:17को सामान्य करते हुए इंस्पेक्टर आशा से
  2247. 1:44:20सवाल किया। अब आप आगे क्या करने की सोच
  2248. 1:44:24रही हैं? शौर्य की बात सुनकर इंस्पेक्टर
  2249. 1:44:26आशा ने उसकी तरफ गौर से देखा। उसे लगा था
  2250. 1:44:29कि शौर्य शायद फिर से उसका उपहास उड़ाने
  2251. 1:44:32की कोशिश करेगा। क्योंकि उसकी बात सही
  2252. 1:44:34साबित हो चुकी थी। लेकिन जब उसने शौर्य को
  2253. 1:44:37ध्यान से देखा तो उसके चेहरे पर ऐसा कोई
  2254. 1:44:39भाव नहीं था। बल्कि उसे महसूस हुआ कि
  2255. 1:44:42शौर्य सच में उसकी राय जानना चाहता है। जब
  2256. 1:44:45उसने शौर्य का यह व्यवहार देखा तो उसने भी
  2257. 1:44:47ईमानदारी से उत्तर दिया। आपने वाकई हमारी
  2258. 1:44:50बहुत मदद की है। लेकिन अब आप निश्चिंत
  2259. 1:44:53रहिए। अब हम उसे किसी भी कीमत पर नहीं
  2260. 1:44:56छोड़ेंगे।
  2261. 1:44:58फिर भी आपने कुछ तो सोचा होगा कि आप आगे
  2262. 1:45:00क्या कदम उठाने की सोच रही हैं। [संगीत]
  2263. 1:45:03शौर्य पुलिस की आगे की कार्यवाही के बारे
  2264. 1:45:05में जानना चाहता था। इंस्पेक्टर आशा अभी
  2265. 1:45:08भी शौर्य को उसका क्या एक्शन होगा बताने
  2266. 1:45:10से हिचक रही थी। शौर्य ने वहां से उठते
  2267. 1:45:13हुए अपनी बात रखी।
  2268. 1:45:16ठीक है मिस आशा अगर आप मुझे अपने प्लान
  2269. 1:45:18में शामिल नहीं करना चाहती तो फिर मेरा
  2270. 1:45:20यहां रुकने का कोई फायदा नहीं है। इसीलिए
  2271. 1:45:23आप मुझे इजाजत दीजिए। लेकिन एक बात याद
  2272. 1:45:25रखिए। मैं इस केस से पीछे हटने वालों में
  2273. 1:45:28से नहीं हूं। शौर्य उठ खड़ा हुआ और विहान
  2274. 1:45:32को इशारा करते हुए अपनी बात कही। चलो
  2275. 1:45:35विहान अब इंस्पेक्टर साहिबा के पास
  2276. 1:45:37तुम्हें यहां रोकने का कोई कारण नहीं होना
  2277. 1:45:39चाहिए। इंस्पेक्टर आशा खामोशी से शौर्य को
  2278. 1:45:43विहान के साथ उठकर वहां से जाते हुए देखती
  2279. 1:45:45रही। उसके मन में कई सवाल घूम रहे थे और
  2280. 1:45:48वो पूरे मामले को दोबारा सोचने लगी। उसे
  2281. 1:45:51एहसास हुआ कि यह केस जितना सीधा दिख रहा
  2282. 1:45:54था, उतना है नहीं। कहीं ना कहीं कोई
  2283. 1:45:57[संगीत] बड़ा खेल खेला जा रहा था। वो कुछ
  2284. 1:46:00पल वहीं खड़ी रही। फिर धीरे-धीरे अपने
  2285. 1:46:02कागजों को समेटने लगी। उसके चेहरे पर
  2286. 1:46:05गंभीरता साफ झलक [संगीत] रही थी। शौर्य
  2287. 1:46:08विहान के साथ थाने से बाहर आया। विहान ने
  2288. 1:46:11शौर्य की तरफ ध्यान भरी नजरों से देखा और
  2289. 1:46:14आभार जताया।
  2290. 1:46:16धन्यवाद शौर्य जो तुमने मेरी बात पर
  2291. 1:46:18विश्वास किया। शौर्य ने भावहीन स्वर में
  2292. 1:46:22कहा। ज्यादा खुशमत हो। यह मैंने तुम्हारे
  2293. 1:46:25लिए नहीं किया है। शुक्र मनाओ कि तुम इस
  2294. 1:46:27किडनैपिंग में शामिल नहीं थे। वरना तुम
  2295. 1:46:30समझ भी नहीं पाते कि तुम्हारे साथ क्या हो
  2296. 1:46:33सकता था। शौर्य की बात सुनकर विहान के
  2297. 1:46:35चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी। उसके होठ सूख
  2298. 1:46:38गए और वो कुछ पल के लिए कुछ भी बोल नहीं
  2299. 1:46:41पाया। शौर्य विहान की तरफ ध्यान दिए बिना
  2300. 1:46:44थाने के बाहर खड़ी एक गाड़ी की तरफ बढ़
  2301. 1:46:46गया। गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर छगन बैठा
  2302. 1:46:49हुआ था और साथ वाली सीट पर मगन। शौर्य
  2303. 1:46:53गाड़ी के पीछे वाला दरवाजा खोलकर पीछे बैठ
  2304. 1:46:55गया। विहान बाहर खड़ा-खड़ा शौर्य की तरफ
  2305. 1:46:58देखते हुए पूछा,
  2306. 1:47:00"मिस्टर शौर्य, क्या अब मैं जा सकता हूं?"
  2307. 1:47:04शौर्य ने अपने बगल की जगह को हाथ से
  2308. 1:47:06थपथपाते हुए बोला, जाने कि इतनी जल्दी
  2309. 1:47:09क्या है विहान। आज के दिन तो कम से कम
  2310. 1:47:12मेरा साथ दे दो। आ जाओ अंदर बैठ जाओ।
  2311. 1:47:15विहान की हिम्मत नहीं हुई कि वो शौर्य को
  2312. 1:47:18इंकार कर सके। विहान के अंदर बैठने के बाद
  2313. 1:47:21शौर्य ने विहान से रजत का पर्सनल नंबर
  2314. 1:47:23लिया और छगन की तरफ देखकर जानना चाहा।
  2315. 1:47:26क्या तुम्हारे पास ऐसा कोई बंदा है जो
  2316. 1:47:29मोबाइल नंबर से किसी का लोकेशन पता कर
  2317. 1:47:31सके? छगन और मगन एक दूसरे का चेहरा देखने
  2318. 1:47:35लगे। उन्होंने सिर हिलाकर इंकार कर दिया।
  2319. 1:47:38तभी विहान बीच में ही बोल उठा। मैं लोकेशन
  2320. 1:47:41पता कर सकता हूं। विहान की बात सुनकर
  2321. 1:47:45शौर्य गौर से उसका चेहरा देखने लगा। अभी
  2322. 1:47:48विहान आगे कुछ बोल ही रहा था कि उसके
  2323. 1:47:50मोबाइल पर किसी का फोन आया। विहान ने
  2324. 1:47:53मोबाइल निकाल कर नंबर देखा तो उस पर रजत
  2325. 1:47:55का कॉल आ रहा था। उसके चेहरे पर हैरानी के
  2326. 1:47:58भाव आ गए। शौर्य ने उसके हैरान चेहरे को
  2327. 1:48:02देखा और उसकी आंखों में देखते हुए सवाल
  2328. 1:48:04किया। किसका [संगीत] फोन है? हैरानी से
  2329. 1:48:07तुम्हारी आंखें क्यों फटी जा रही हैं?
  2330. 1:48:10रज
  2331. 1:48:12रजत का। विहान हकलाते हुए बोला। जैसे ही
  2332. 1:48:16शौर्य ने विहान की बात सुनी उसकी नसें तन
  2333. 1:48:19गई। वो सीधा बैठ गया और अपनी बात रखते हुए
  2334. 1:48:22कहा तो इंतजार किस बात का कर रहे हो? फोन
  2335. 1:48:25उठाओ। विहान ने डरते हुए जवाब दिया। हाल
  2336. 1:48:30लेकिन कॉल कट गया। वहीं दूसरी तरफ रजत इस
  2337. 1:48:34समय बिरजू के साथ एक [संगीत] कोठी में
  2338. 1:48:36बैठा हुआ था। बिरजू ने रजत से पूछा। रजत
  2339. 1:48:40भाई क्या रुस्तम को यहां बुलाना ठीक
  2340. 1:48:42रहेगा? इस तरह तो उसे पता चल जाएगा कि उसे
  2341. 1:48:46जो सुपारी दी गई है वह विहान ने नहीं आपने
  2342. 1:48:49दी है। रजत ने मुस्कुराते हुए तंज कसा। यह
  2343. 1:48:53तुमसे किसने कहा कि रुस्तम को पता चल
  2344. 1:48:55जाएगा कि उसे किडनैपिंग की सुपारी विहान
  2345. 1:48:58ने नहीं मैंने दी है। बिरजू ने आशंका भरे
  2346. 1:49:02स्वर में सवाल किया। [संगीत]
  2347. 1:49:04आपने जब रुस्तम को यहां बुलाया है तो वो
  2348. 1:49:07तो पूछेगा ही कि मिस्टर विहान कहां है? तब
  2349. 1:49:10आप क्या जवाब देंगे? अरे यार रुस्तम को जब
  2350. 1:49:13विहान ने सुपारी दी है तो उससे मिलेगा भी
  2351. 1:49:16विहान ही। यह देखो मैंने रुस्तम को कहां
  2352. 1:49:19का एड्रेस भेजा है। इतना कहकर रजत ने
  2353. 1:49:22बिरजू के सामने अपने मोबाइल का स्क्रीन
  2354. 1:49:24दिखाया।
  2355. 1:49:26लाल कोठी आपने रुस्तम को जो पता भेजा है
  2356. 1:49:30वो तो लाल कोठी का है। लेकिन लाल कोठी तो
  2357. 1:49:34विहान की ही है। है ना? बिरजू ने हैरानी
  2358. 1:49:37भरे स्वर में पूछा। रजत ने रहस्यमई
  2359. 1:49:40[संगीत] मुस्कान के साथ जवाब दिया तो और
  2360. 1:49:43क्या जब अब तक हर इल्जाम का ठीकरा विहान
  2361. 1:49:46के सर पर फोड़ा है तो आखिरी ठीकरा अपने
  2362. 1:49:49सिर पर क्यों फोड़ूं आखिर आप क्या प्लान
  2363. 1:49:52कर रहे हो बॉस बिरजू जिज्ञासावश पूछने
  2364. 1:49:55[संगीत] से खुद को रोक नहीं सका अभी देखो
  2365. 1:49:58जो भी प्लान कर रहा हूं तुम्हारे सामने ही
  2366. 1:50:01कर रहा हूं। इतना बोलकर रजत ने अपना
  2367. 1:50:04मोबाइल निकाल लिया और किसी को फोन लगाने
  2368. 1:50:06लगा। दूसरी तरफ विहान ने कांपते हाथों से
  2369. 1:50:09रजत का फोन उठाया। शौर्य ने पहले ही विहान
  2370. 1:50:13का मोबाइल लाउडस्पीकर पर कर दिया था।
  2371. 1:50:15विहान ने सम्मान पूर्वक जानना चाहा। अरे
  2372. 1:50:18रजत भाई कहिए कैसे फोन किया?
  2373. 1:50:22तुम अभी कहां हो?
  2374. 1:50:23रजत का सवाल सुनाई दिया। क्या हुआ? बताइए
  2375. 1:50:27तो सही। विहान लड़खड़ाते स्वर में बोला।
  2376. 1:50:31मैं भी तुम्हारे लाल कोठी वाले बंगले पर आ
  2377. 1:50:33रहा हूं। तुम कितनी देर में पहुंच जाओगे?
  2378. 1:50:36एक तरह से रजत विहान को हुक्म देता हुआ
  2379. 1:50:39बोला। शौर्य ने जैसे ही रजत के मुंह से
  2380. 1:50:42लाल कोठी का नाम सुना, उसकी आंखें सिकुड़
  2381. 1:50:44गई। विहान को समझ नहीं आया कि वो रजत से
  2382. 1:50:47क्या बोले। शौर्य ने अपने मोबाइल में
  2383. 1:50:50जल्दी से एक मैसेज टाइप करके विहान के
  2384. 1:50:52सामने दिखाया। विहान ने मैसेज पढ़ा और उसे
  2385. 1:50:56फोन पर दोहराते हुए सवाल किया। पर भाई आप
  2386. 1:50:59अभी लालकोट ही क्यों आ रहे हैं? आप मुझे
  2387. 1:51:02बताइए मैं ही आपके घर आ जाता हूं। रजत ने
  2388. 1:51:05विहान को निर्देश दिया।
  2389. 1:51:08अरे नहीं अभी मैं तुम्हारी लाल कोठी के
  2390. 1:51:10पास ही हूं। इसीलिए तुम यहीं आ जाओ।
  2391. 1:51:12तुम्हारे लिए कुछ काम की बातें हैं।
  2392. 1:51:15शौर्य ने दोबारा कुछ टाइप किया और मोबाइल
  2393. 1:51:18की स्क्रीन विहान की ओर बढ़ा दी। विहान ने
  2394. 1:51:20शौर्य के लिखे शब्दों को रिपीट किया। ठीक
  2395. 1:51:23है भाई अगर ऐसी बात है तो मैं अभी अपनी
  2396. 1:51:26कोठी पहुंचकर आपको फोन करता हूं। इसके बाद
  2397. 1:51:30रजत ने फोन काट दिया। शौर्य ने हैरानी से
  2398. 1:51:33विहान की ओर देखते हुए कहा यह लाल कोठी
  2399. 1:51:37तुम्हारा बंगला है। विहान ने ईमानदारी से
  2400. 1:51:40शौर्य को जवाब दिया। हां, यह हमारा फार्म
  2401. 1:51:43हाउस है। पहले एक दो बार रजत वहां पर आया
  2402. 1:51:46है। शौर्य तंज भरी मुस्कान के साथ बोला।
  2403. 1:51:50तुम्हें मालूम है रजत ने रुस्तम के मोबाइल
  2404. 1:51:52पर शिप्रा को लाने के लिए जो पता भेजा है
  2405. 1:51:55वो कौन सा है? विहान ने किसी अनजानी आशंका
  2406. 1:51:59से घिर कर कहा। कौन सा है? शौर्य ने
  2407. 1:52:03सामान्य स्वर में विहान की ओर देखते हुए
  2408. 1:52:05अपने शब्द रखे। रजत ने रुस्तम के मोबाइल
  2409. 1:52:08पर शिप्रा को लाने के लिए जो पता भेजा है,
  2410. 1:52:12वो यही लाल [संगीत] कोठी का पता है। इसका
  2411. 1:52:15मतलब समझते हो? तुम कहना क्या चाहते हो?
  2412. 1:52:19अनजान आशंका से विहान का दिल तेजी से
  2413. 1:52:21धड़कने लगा। शौर्य ने शांत स्वर में विहान
  2414. 1:52:25को समझाया। इसका सीधा मतलब यही है कि वह
  2415. 1:52:28तुम्हें फंसाने का प्लान पहले से ही बना
  2416. 1:52:31चुका है। विहान का दिल तेजी से धड़कने
  2417. 1:52:34लगा। उसके चेहरे पर घबराहट साफ झलक रही
  2418. 1:52:37थी। उसने घबराए हुए स्वर में पूछा। अब मैं
  2419. 1:52:41क्या [संगीत] करूं? शौर्य ने शांत स्वर
  2420. 1:52:44में अपनी बात रखी। अब तुम्हें कुछ भी करने
  2421. 1:52:47की जरूरत नहीं है। रजत ने जैसा कहा है,
  2422. 1:52:50तुम बस वैसा ही करते जाओ। विहान के पास
  2423. 1:52:54[संगीत] अब कोई चारा नहीं था। उसने शौर्य
  2424. 1:52:56की बात से सहमति जताई पर डरते हुए उसने
  2425. 1:52:59शौर्य से पूछा। इसका मतलब पुलिस मेरी कोठी
  2426. 1:53:02पर अभी छापा मार सकती है। शौर्य के होठों
  2427. 1:53:06पर गहरी मुस्कान उभर आई। उसने कहा पुलिस
  2428. 1:53:09तो छापा मारेगी ही। लेकिन उससे पहले हमें
  2429. 1:53:12अपना काम पूरा करना है। तो मुझे अपनी उस
  2430. 1:53:14लाल कोठी पर ले चलो। उसके चेहरे की
  2431. 1:53:17मुस्कान देखकर साफ लग रहा था कि अब उसे
  2432. 1:53:20अपना काम पहले से कहीं आसान दिखाई देने
  2433. 1:53:22लगा था। फिर उसने छगन की ओर देखकर निर्देश
  2434. 1:53:25दिया।
  2435. 1:53:27छगन गाड़ी को विहान की लाल कोठी की तरफ ले
  2436. 1:53:29चलो। [संगीत] उसके बाद विहान रास्ता बताता
  2437. 1:53:32रहा और छगन गाड़ी को लाल कोठी पर ले आया।
  2438. 1:53:36[संगीत] शौर्य विहान के साथ उसके बंगले
  2439. 1:53:37में पहुंच गया। दोनों वहीं रजत के आने का
  2440. 1:53:40इंतजार करने लगे। [संगीत] लगभग 20 मिनट
  2441. 1:53:43बाद बाहर एक गाड़ी के रुकने की आवाज सुनाई
  2442. 1:53:45दी। शौर्य तुरंत समझ गया कि रजत आ चुका
  2443. 1:53:48है। शौर्य ने विहान को बताया
  2444. 1:53:52तुम अपनी समझदारी से रजत से बात करते
  2445. 1:53:54रहना। जब मुझे सही समय लगेगा मैं खुद बाहर
  2446. 1:53:58आ जाऊंगा। इसके बाद शौर्य छगन मगन के साथ
  2447. 1:54:01एक कमरे के अंदर चला गया। थोड़ी ही देर
  2448. 1:54:04बाद दरवाजे पर दस्तक हुई। विहान ने जाकर
  2449. 1:54:07दरवाजा खोला। सामने रजत और बृजू के साथ एक
  2450. 1:54:10अनजान आदमी भी खड़ा था। विहान ने सभी को
  2451. 1:54:13अंदर आने का रास्ता दिया। विहान को रजत को
  2452. 1:54:16यहां देखकर घबराहट भी हो रही थी। बड़ी
  2453. 1:54:18मुश्किल से वो खुद को संभाले हुए था। रजत
  2454. 1:54:21आकर एक सोफे पर बैठ गया और विहान को भी
  2455. 1:54:24सामने बैठने का इशारा किया। बिरजू अपने
  2456. 1:54:27दूसरे साथी के साथ रजत के पीछे खड़ा रहा।
  2457. 1:54:30रजत ने बिना समय गवाए सीधे मुद्दे पर आते
  2458. 1:54:33हुए पूछा।
  2459. 1:54:35तुम्हें रुस्तम तो याद ही होगा। भाई जिसका
  2460. 1:54:39फोन तुम्हारे पास आया था। हां भाई क्या
  2461. 1:54:42हुआ उसका? विहान की आवाज में घबराहट साफ
  2462. 1:54:46झलक रही थी। उसका कुछ नहीं हुआ। वो थोड़ी
  2463. 1:54:49ही देर में यहां पहुंच जाएगा। [संगीत]
  2464. 1:54:51तुम्हें बस इतना करना है कि वो जो भी
  2465. 1:54:53सामान यहां लेकर आए उसे अपने पास रख लेना
  2466. 1:54:56और बदले में उसे यह ₹ लाख दे देना। बस
  2467. 1:55:00इतना सा काम तुम्हें करना है। रजत ने
  2468. 1:55:03मुस्कुराते हुए उसे समझाया। विहान ने
  2469. 1:55:06हैरानी जताते हुए कहा,
  2470. 1:55:09"इसका मतलब शिप्रा का किडनैपिंग आपने ही
  2471. 1:55:12करवाया है भाई।" रजत गंभीर स्वर में बोला,
  2472. 1:55:16"तुम आम खाओ, गुठलियां गिनने की कोशिश मत
  2473. 1:55:18करो।" उसके साथ तो यही होना था। विहान ने
  2474. 1:55:22उत्सुकता से जानना चाहा।
  2475. 1:55:25वो कब तक यहां आएगा भाई? रजत ने जवाब
  2476. 1:55:28दिया। देखो उसे यहां पहुंचने में लगभग
  2477. 1:55:3225-30 मिनट लग ही जाएंगे। जब वो आएगा तब
  2478. 1:55:35बिरजू तुम्हारे साथ ही रहेगा। इसलिए
  2479. 1:55:37तुम्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। उस
  2480. 1:55:40समय जैसे भी हालात होंगे बिरजू उन्हें
  2481. 1:55:42संभाल लेगा। अंदर कमरे में शौर्य को लगा
  2482. 1:55:45कि अब और देर तक छिपे रहने का कोई मतलब
  2483. 1:55:47नहीं है। यही सोचकर वो कमरे से बाहर निकला
  2484. 1:55:51और सीधे रजत के सामने जाकर बैठ गया। रजत
  2485. 1:55:54ने जब देखा कि शौर्य उसके सामने आकर बैठ
  2486. 1:55:56गया है तो उसकी आंखें बड़ी हो गई। वो एक
  2487. 1:55:59बार शौर्य को देखता तो दूसरी बार विहान
  2488. 1:56:02को। फिर वो विहान की ओर घूरते हुए
  2489. 1:56:04गुर्राया। तो तुमने हमारे साथ गद्दारी की
  2490. 1:56:07है। तुम पहले ही शौर्य से मिल चुके हो।
  2491. 1:56:10विहान ने जवाब दिया भाई गद्दारी तो आपने
  2492. 1:56:12मेरे साथ की है। मेरे नाम से शिप्रा को
  2493. 1:56:15किडनैप कराने की क्या जरूरत थी? और अब भी
  2494. 1:56:17आप चाहते हैं कि मैं आपके साथ वफादार
  2495. 1:56:20रहूं।
  2496. 1:56:21तो क्या होगा आगे? आखिर क्या करेगा शौर्य
  2497. 1:56:25रजत के साथ?
  2498. 1:56:26[संगीत]
  2499. 1:56:27जानने के लिए सुनते रहिए बगैर हस्बैंड।
  2500. 1:56:29जैसे ही रजत ने विहान को रुस्तम के बारे
  2501. 1:56:31में बताया, शौर्य अकेले ही कमरे से बाहर
  2502. 1:56:33आकर रजत के सामने बैठ गया। शौर्य को वहां
  2503. 1:56:36देखकर रजत समझ गया कि विहान पहले ही शौर्य
  2504. 1:56:40के साथ मिल गया था। रजत ने शौर्य को देखते
  2505. 1:56:43हुए विहान का मजाक उड़ाते हुए कहा,
  2506. 1:56:46तो इसका मतलब रुस्तम पहले ही गिरफ्तार हो
  2507. 1:56:49चुका है और तुम्हें लगता है यह फटीचर
  2508. 1:56:51तुम्हें बचा लेगा। तुम्हें समझ नहीं आ रहा
  2509. 1:56:54है कि अब तुम्हारे साथ क्या होने वाला है।
  2510. 1:56:57तुमने सारी हदें पार कर ली है और तुम्हारी
  2511. 1:57:00आखिरी गलती थी शिप्रा को किडनैप करने की।
  2512. 1:57:04शौर्य दहकते स्वर में बोला अफसोस कि
  2513. 1:57:07रुस्तम इस बार चूक गया। पर कोई बात नहीं
  2514. 1:57:10दोबारा ऐसी [संगीत] गलती नहीं होगी। रजत
  2515. 1:57:12ने तंज भरे स्वर में कहा तुम्हें लगता है
  2516. 1:57:15कि तुम अब ऐसा कर पाओगे। शौर्य फीकी
  2517. 1:57:18मुस्कान [संगीत] के साथ बोला। रजत ने अपने
  2518. 1:57:20पीछे खड़े बिरजू से कहा, बिरजू देख क्या
  2519. 1:57:23रहे हो? इस फटीचर को इसकी औकात तो दिखाओ।
  2520. 1:57:27बिरजू रजत की बात सुनकर पीछे से निकलकर
  2521. 1:57:30शौर्य को अपने पैर [संगीत] की ठोकर मारने
  2522. 1:57:32ही वाला था कि शौर्य ने अपनी जगह पर
  2523. 1:57:34बैठे-बैठे ही एक किक बिरजू को दे मारी।
  2524. 1:57:37बिरजू हवा में उड़ता हुआ दूर जाकर गिरा।
  2525. 1:57:40बिरजू को यूं हवा में उड़ते देखकर जो
  2526. 1:57:42दूसरा बदमाश आया था, वह तेजी से शौर्य पर
  2527. 1:57:45झपटा। शौर्य अपनी जगह खड़ा हो गया और
  2528. 1:57:48दूसरे बदमाश के पास आते ही शौर्य ने उसके
  2529. 1:57:51चेहरे पर भी एक घूंसा जमा दिया। वो भी दूर
  2530. 1:57:54जाकर गिरा। उसके मुंह से खून टपकने लगा।
  2531. 1:57:57रजत को विश्वास नहीं हो रहा था कि शौर्य
  2532. 1:57:59इस तरह से अग्रेसिव हो जाएगा। वो गुस्से
  2533. 1:58:02में अपनी जगह से उठा और दहाड़ते हुए शौर्य
  2534. 1:58:04पर झपटा। तेरी इतनी हिम्मत तूने मेरे
  2535. 1:58:08आदमियों पर हाथ उठाया। इतना बोलकर रजत ने
  2536. 1:58:11अपनी शर्ट के नीचे हाथ डाला और अगले ही पल
  2537. 1:58:13उसके हाथ में एक पिस्तल नजर आई। वो अपने
  2538. 1:58:16हाथ को सीधा कर पाता उससे पहले ही शौर्य
  2539. 1:58:19की तेज किक उसके हाथ पर पड़ी। पिस्तल दूर
  2540. 1:58:22जाकर गिरी और शौर्य की किक से रजत की कलाई
  2541. 1:58:25टूट कर झूल गई। रजत के मुंह से तेज चीख
  2542. 1:58:28निकली। अब तक बिरजू और उसके साथी ने खुद
  2543. 1:58:31को संभाल लिया था। वो दोबारा शौर्य की तरफ
  2544. 1:58:34झपटा पर शौर्य ने इस बार कोई रहम नहीं
  2545. 1:58:37किया। उसकी तेज किक फिर से बिरजू और उसके
  2546. 1:58:39साथी से टकराई। दोनों चीखते हुए पीछे जाकर
  2547. 1:58:43गिरे। जबकि रजत गुस्से से आग बबूला होकर
  2548. 1:58:46फिर से शौर्य की तरफ झपटा। इस बार शौर्य
  2549. 1:58:49ने रजत के घुटने पर अपनी किक जमाई। एक
  2550. 1:58:52क्रैक की आवाज के साथ उसका घुटना टूट गया।
  2551. 1:58:55शौर्य ने जल्दी से छगनगन को आवाज दी तो वह
  2552. 1:58:58दोनों भी कमरे में आ गए। शौर्य ने रजत के
  2553. 1:59:02घुटने को अपने पैर से दबा दिया। रजत चीखता
  2554. 1:59:04हुआ जमीन पर लेट गया। रजत का पिस्तल एक
  2555. 1:59:08कोने में जमीन पर पड़ा हुआ था। शौर्य ने
  2556. 1:59:10आगे बढ़कर उस पिस्तल को उठाया। अब तक छगन
  2557. 1:59:13मगन ने भी आकर बिरजू और उसके साथी को दबोच
  2558. 1:59:16लिया था। शौर्य ने भी रजत को उसका कॉलर
  2559. 1:59:19पकड़ कर उठाया। शौर्य ने पास पड़ा पैसे से
  2560. 1:59:22भरा बैग उठा लिया और उसको छगन की तरफ बढ़ा
  2561. 1:59:25दिया। छगन ने पैसे से भरे बैग को देखा तो
  2562. 1:59:28हैरान नजरों से शौर्य की ओर देखकर बोला,
  2563. 1:59:31"इस बैग का क्या करना है बॉस? यह तुम्हारा
  2564. 1:59:34इनाम है। इसका क्या करना है यह तुम्हें
  2565. 1:59:37देखना है। तुम इसे अपने पास रख लो।
  2566. 1:59:40शौर्य ने मुस्कुराते हुए कहा। शौर्य की
  2567. 1:59:43बात सुनकर छगन के चेहरे पर एक बड़ी सी
  2568. 1:59:45स्माइल आ गई। इसके बाद छगन ने शौर्य से
  2569. 1:59:49पूछा। इन दोनों का क्या करना है बॉस?
  2570. 1:59:53शौर्य ने एक नजर बिरजू और उसके साथी पर
  2571. 1:59:55डाली और छगन ने मगन से कहा। इन दोनों को
  2572. 1:59:58उसी गाड़ी में बैठाओ जिसमें सब यहां आए
  2573. 2:00:01हैं। छगनगन बिरजू और उसके साथी को लेकर
  2574. 2:00:05बाहर चले गए। जबकि एक तरफ खड़ा विहान
  2575. 2:00:08हल्का-हल्का कांप रहा था। यहां जो कुछ भी
  2576. 2:00:11हो रहा था उसके कारण तो वो दोनों तरफ से
  2577. 2:00:13फंसा हुआ था। उसके कारण ही रजत शौर्य के
  2578. 2:00:16हाथ लगा था। इसीलिए उसे यह बात डरा रही थी
  2579. 2:00:19कि जब रजत छूटेगा तब वो उसका क्या हाल
  2580. 2:00:22करेगा। उसने डरते हुए शौर्य से पूछा
  2581. 2:00:27तुम इसका क्या करोगे? क्या तुम इसे पुलिस
  2582. 2:00:29के हवाले करोगे? रजब की हालत शौर्य की
  2583. 2:00:32पिटाई से खराब हो गई थी। वो जख्मी शेर की
  2584. 2:00:35तरह दहाड़ा। आज जो तुमने किया है उसे याद
  2585. 2:00:38रखना। अगर मैंने अपने एक-एक जख्म का हिसाब
  2586. 2:00:41तुमसे ना लिया, तो मेरा नाम रजत नहीं।
  2587. 2:00:44रस्सी जल गई, पर बल नहीं गया। शौर्य धीरे
  2588. 2:00:48से बुदबुदाया। तुम मुझे पुलिस के हवाले ही
  2589. 2:00:50करोगे ना? यह भी करके देख लो। दो दिन में
  2590. 2:00:54ही मैं पुलिस कस्टडी से बाहर ना आ गया तो
  2591. 2:00:56मेरा नाम रजत नहीं। उसके बाद मैं तुम्हारी
  2592. 2:00:59उस माशूका का क्या हाल करूंगा जब देखोगे
  2593. 2:01:02तो तुम्हारी रूह भी कांप उठेगी। रजत शौर्य
  2594. 2:01:06के साथ घिसटते हुए बोला। रजत की बात सुनकर
  2595. 2:01:09शौर्य ठिटक गया और गंभीर होकर रजत की ओर
  2596. 2:01:12देखने लगा। अचानक ही उसके दिमाग में कुछ
  2597. 2:01:15चलने लगा। उसने एक नजर विहान पर डाली और
  2598. 2:01:18उससे कहा,
  2599. 2:01:21विहान हो सकता है कि थोड़ी देर के बाद
  2600. 2:01:23यहां पुलिस भी आए। इसीलिए तुम्हारे लिए
  2601. 2:01:25यही अच्छा रहेगा कि जब पुलिस यहां आए तो
  2602. 2:01:28तुम उनसे ना मिलो। दूसरी बात यह कि बाद
  2603. 2:01:31में भी पुलिस तुमसे इसके बारे में कुछ
  2604. 2:01:33पूछे तो तुम्हें यही बताना है कि तुम्हें
  2605. 2:01:36इसके बारे में कुछ नहीं पता। अगर तुम इसके
  2606. 2:01:39मामले से बचना चाहते हो तो तुम्हारे लिए
  2607. 2:01:42यही अच्छा रहेगा। ठीक ठीक है श्रवण मैं
  2608. 2:01:44ऐसा ही करूंगा। विहान ने डरते हुए आश्वासन
  2609. 2:01:47दिया। साथ में आगे उसने यह भी पूछा क्या
  2610. 2:01:51तुम इसको पुलिस के हवाले नहीं करोगे? मैं
  2611. 2:01:53इसके साथ क्या करूंगा? तुम उसके बारे में
  2612. 2:01:56भूल जाओ। बस तुम्हें यही ध्यान रखना है कि
  2613. 2:01:59तुम्हें इसके बारे में कुछ भी नहीं पता।
  2614. 2:02:01तो अगर तुमने इसके बारे में कहीं अपना
  2615. 2:02:03मुंह खोला तो उसका जो भी अंजाम होगा वो
  2616. 2:02:06तुम्हें खुद ही झेलना पड़ेगा। शौर्य ने
  2617. 2:02:09विहान को चेतावनी देते हुए कहा। शौर्य की
  2618. 2:02:12बात सुनकर विहान की आंखें सिकुड़ गई। जबकि
  2619. 2:02:15इस समय रजत के चेहरे पर एक अलग खौफ दिखने
  2620. 2:02:18लगा। वो घबराए हुए स्वर में शौर्य से
  2621. 2:02:21बोला,
  2622. 2:02:22"तुम क्या करोगे मेरे साथ?" मुझे कहां ले
  2623. 2:02:25जाने की कोशिश कर रहे हो? तो देखो मैं
  2624. 2:02:28तुम्हें बोल देता हूं। अगर मेरे भाई को
  2625. 2:02:30पता चल गया कि तुमने मेरे साथ क्या किया
  2626. 2:02:32है। तो तुम्हारा जो हाल वो करेगा। तुम सोच
  2627. 2:02:36भी नहीं सकते।
  2628. 2:02:37रजत शौर्य को धमका रहा था। जबकि शौर्य
  2629. 2:02:40बिना उसकी बात पर ध्यान दिए हुए उसको
  2630. 2:02:42खींचता हुआ बाहर की तरफ चला गया। विहान
  2631. 2:02:45भयभीत निगाहों से शौर्य को रजत को घसीटते
  2632. 2:02:47हुए ले जाते देखता रहा। वो शुक्र मना रहा
  2633. 2:02:50था कि उसने शिप्रा के साथ कुछ ज्यादती
  2634. 2:02:52करने की कोशिश नहीं की। उसे शौर्य की
  2635. 2:02:55आंखों में एक खतरनाक इरादा नजर आ रहा था।
  2636. 2:02:58शौर्य रजत को लेकर उसकी गाड़ी के पास
  2637. 2:03:00पहुंचा तो उसने देखा छगन और मगन अभी भी
  2638. 2:03:03बिरजू और उसके साथी को पकड़े हुए खड़े
  2639. 2:03:05हैं। बिरजू ने जैसे ही शौर्य को रजत को
  2640. 2:03:08घसीटते हुए देखा तो वो दहशत भरे स्वर में
  2641. 2:03:10चिल्लाया। ये ये तुम भाई के साथ ठीक नहीं
  2642. 2:03:13कर रहे हो। अगर मुख्तार भाई को पता चल गया
  2643. 2:03:16कि तुमने उनके भाई के साथ क्या किया है तो
  2644. 2:03:19वो तुम्हारे पूरे परिवार को जहन्नुम भेज
  2645. 2:03:21देंगे।
  2646. 2:03:23शौर्य इस समय तक बिरजू के पास आ गया था।
  2647. 2:03:26जैसे ही उसने बिरजू के मुंह से यह सुना,
  2648. 2:03:28उसका एक तेज घूसा बिरजू के चेहरे पर पड़ा
  2649. 2:03:31और बिरजू बेहोश होकर छगन की बाहों में झूल
  2650. 2:03:33गया। यह देखकर छगन की आंखें फटी की फटी रह
  2651. 2:03:37गई। शौर्य के एक घूसे में ही बिरजू बेहोश
  2652. 2:03:40हो गया। छगन ने हकलाते हुए शौर्य से पूछा।
  2653. 2:03:45अभी अब इन दोनों का क्या करें बॉस?
  2654. 2:03:48शौर्य ने कहा, दोनों को पीछे वाली सीट पर
  2655. 2:03:52डाल दो।
  2656. 2:03:54छगन ने किसी बोरी की तरह बिरजू को उठाया
  2657. 2:03:56और कार के पीछे वाली सीट पर डाल दिया। मगन
  2658. 2:03:59ने जब यह देखा कि बिरजू बेहोश है लेकिन
  2659. 2:04:01उसका साथी होश में है तो वो शौर्य से बोला
  2660. 2:04:05बॉस अगर आप कहो तो क्या मैं इसे भी बेहोश
  2661. 2:04:08कर दूं? यह भी कोई पूछने की बात है। उसको
  2662. 2:04:12भी बेहोश करके पीछे डालो।
  2663. 2:04:14शौर्य ने मुस्कुराते हुए कहा। मगन खुश हो
  2664. 2:04:18गया और उसने भी शौर्य के अंदाज में बिरजू
  2665. 2:04:20के साथी पर घूसा चलाया। पर वो बेहोश नहीं
  2666. 2:04:23हुआ। हां, उसकी तेज चीख जरूर वहां गूंज
  2667. 2:04:26उठी। छगन ने जब यह देखा तो वो मगन पर
  2668. 2:04:28चिल्लाया। यह तुम क्या कर रहे हो? ऐसे तुम
  2669. 2:04:32उसको बेहोश करोगे। मैं तुम्हें दिखाता हूं
  2670. 2:04:34इसे कैसे बेहोश करना है। इतना बोलकर छगन
  2671. 2:04:38भी उसके पास गया और उसने भी शौर्य के
  2672. 2:04:39अंदाज में ही बिरजू [संगीत] के साथी पर
  2673. 2:04:41घूसा चलाया। उसके घूसे से बिरजू के साथी
  2674. 2:04:45का होठ फट गया और उससे भी खून आने लगा। पर
  2675. 2:04:48वह बेहोश [संगीत] अभी भी नहीं हुआ। रजत ने
  2676. 2:04:50बिरजू के साथी को पिटते देखा तो वो शौर्य
  2677. 2:04:53पर गरजते हुए बोला
  2678. 2:04:55यह तुम ठीक नहीं कर रहे हो। अभी भी
  2679. 2:04:58तुम्हारे पास मौका है। तुम मुझे यहां से
  2680. 2:05:00जाने दो तो शायद मैं इस बात को यहीं पर
  2681. 2:05:03भूल जाऊं। नहीं तो मेरा भाई तुम सबका क्या
  2682. 2:05:05हाल करेगा तुम सोच भी नहीं सकते।
  2683. 2:05:09शौर्य ने रजत की बकवास की तरफ कोई ध्यान
  2684. 2:05:12नहीं दिया। वो छगन और मगन की उस हरकत को
  2685. 2:05:15देखता रहा जो वो बिरजू के साथी को बेहोश
  2686. 2:05:17करने के लिए कर रहे थे। लेकिन वो बेहोश
  2687. 2:05:20होने का नाम ही नहीं ले रहा था। जब छगन भी
  2688. 2:05:23अपने मकसद को अंजाम नहीं दे पाया तो मगन
  2689. 2:05:25उसका उपहास उड़ाते हुए बोला तुमने कौन सा
  2690. 2:05:28तीर मार लिया? अभी भी यह कैसे चीख रहा है?
  2691. 2:05:32बिरजू के साथी ने जब देखा कि छगन और मगन
  2692. 2:05:35कैसे उसके साथ खेल खेल रहे हैं तो उसने
  2693. 2:05:37अचानक मगन को धक्का दिया और तेजी से एक
  2694. 2:05:40तरफ भागने लगा। मगन ने ऐसी उम्मीद नहीं की
  2695. 2:05:43थी कि वह ऐसा कुछ कर सकता है। इसीलिए वह
  2696. 2:05:45हड़बड़ा गया और उसके पीछे भागने की कोशिश
  2697. 2:05:48की। पर तभी शौर्य ने अपने हाथ में मौजूद
  2698. 2:05:51रजत की पिस्तल को फेंक कर उस पर मारा।
  2699. 2:05:53भारी पिस्तल जाकर सीधा उसके सर के पिछले
  2700. 2:05:55हिस्से से टकराई और वो मुंह के बल सामने
  2701. 2:05:58गिरा। उसके बाद वो दोबारा उठ नहीं पाया।
  2702. 2:06:01मगन भागकर उसके पास पहुंचा। जब उसने
  2703. 2:06:04मुआयना किया तो पाया कि वो बेहोश हो चुका
  2704. 2:06:06है। उसने आश्चर्य से शौर्य को देखा। अब
  2705. 2:06:10उसे भी पीछे डाल दो। शौर्य ने मगन को
  2706. 2:06:13आर्डर दिया। मगन ने उसके बेहोश शरीर को
  2707. 2:06:15उठाया और साथ में वहीं पर गिरे हुए पिस्तल
  2708. 2:06:18को भी उठाया और गाड़ी के पास आकर बेहोश
  2709. 2:06:20शरीर को बिरजू के साथ पटक [संगीत] दिया।
  2710. 2:06:23फिर वो शौर्य के पास गया और पिस्तल को
  2711. 2:06:25शौर्य की तरफ बढ़ा दिया। जब छगन मगन का
  2712. 2:06:28काम पूरा हो गया तब छगन ने शौर्य से पूछा।
  2713. 2:06:32अब आगे हमारे लिए क्या ऑर्डर है बॉस?
  2714. 2:06:35शौर्य ने गंभीरता से कहा कुछ नहीं।
  2715. 2:06:38तुम्हारा काम पूरा हो गया। अब तुम जा सकते
  2716. 2:06:41हो और हां यहां जो कुछ भी हुआ उस बात को
  2717. 2:06:44भूल जाना यही तुम्हारे लिए अच्छा है। ठीक
  2718. 2:06:48है बॉस जैसा आप कहें पर आप यहां से कैसे
  2719. 2:06:50जाएंगे बॉस छगन ने पूछा तुम मेरी चिंता मत
  2720. 2:06:54करो मैं चला जाऊंगा यह बोलते हुए शौर्य
  2721. 2:06:58रजत की कार का दरवाजा खोलने लगा छगन ने
  2722. 2:07:01रजत की तरफ देखते हुए शौर्य से पूछा
  2723. 2:07:05आप इसके साथ क्या करेंगे बॉस [संगीत] छगन
  2724. 2:07:08के सवाल पर शौर्य छगन की तरफ मुड़ा और
  2725. 2:07:10खामोशी से उसे घूरने लगा। शौर्य को ऐसे
  2726. 2:07:13खुद को घूरते देखकर छगन के शरीर ने
  2727. 2:07:16झुरझुरी सी ली। जल्दी वो अपनी बात को
  2728. 2:07:18बदलते हुए बोला, हम चलते हैं बॉस। [संगीत]
  2729. 2:07:22इसके बाद छगन मगन बिना वक्त गवाए जल्दी से
  2730. 2:07:25अपनी कार को लेकर वहां से निकल गए। उन
  2731. 2:07:28दोनों के जाने के बाद शौर्य ने भी अब
  2732. 2:07:30ज्यादा देर करना सही नहीं समझा और उसने
  2733. 2:07:32रजत को जबरदस्ती ड्राइवर के बगल वाली सीट
  2734. 2:07:34पर बैठाया और खुद जाकर ड्राइविंग सीट पर
  2735. 2:07:37बैठ गया और कार को आगे बढ़ा दिया। रजत को
  2736. 2:07:40समझ नहीं आ रहा था कि शौर्य क्या करने की
  2737. 2:07:42सोच रहा है। वो डरी हुई निगाहों से शौर्य
  2738. 2:07:45को देख रहा था। अब शौर्य की खामोशी उसे
  2739. 2:07:48डराने लगी थी। शौर्य को विहान की लाल कोठी
  2740. 2:07:51से निकले [संगीत] हुए 10 मिनट हो गए थे।
  2741. 2:07:54एक तराहे पर आकर शौर्य ने अचानक शहर का
  2742. 2:07:57रास्ता छोड़ दिया था और एक अलग ही रास्ता
  2743. 2:07:59ले लिया था। रजत अभी तक यही समझ रहा था कि
  2744. 2:08:02शौर्य उसे पुलिस के हवाले ही करेगा। लेकिन
  2745. 2:08:05जब उसने देखा कि शौर्य ने शहर की तरफ जाने
  2746. 2:08:08की बजाय कोई और रास्ता ले लिया है तो उसने
  2747. 2:08:11घबराते हुए पूछा
  2748. 2:08:13तुम मुझे कहां ले जा रहे हो? यह रास्ता
  2749. 2:08:16थाने की तरफ तो नहीं जा रहा है तो क्या
  2750. 2:08:19होगा आगे क्या चल रहा है शौर्य के दिमाग
  2751. 2:08:22में कहां ले जा रहा है शौर्य रजत को आखिर
  2752. 2:08:26शौर्य रजत के साथ क्या [संगीत] करने की
  2753. 2:08:28सोच रहा है जानने के लिए सुनते थाने जाना
  2754. 2:08:31है ताकि फिर तुम दो दिन के बाद जेल से छूट
  2755. 2:08:35कर दोबारा उसे अगवा करने का कोई और तत करो
  2756. 2:08:39शौर्य नफरत भरी निगाहों से उसे घूरता हुआ
  2757. 2:08:42बोला तो तुम मुझे कहां ले जा रहे हो रजत
  2758. 2:08:46खौफ भरे स्वर में बोला जहन्नुम की शहर पर
  2759. 2:08:49शौर्य लापरवाही से बोला रजत का दिल तेजी
  2760. 2:08:53से धड़कने लगा पर शौर्य सपाट भाव से उसे
  2761. 2:08:56सामने देखता रहा जल्दी ही कार एक पहाड़ी
  2762. 2:08:58रास्ते पर चढ़ गई थी जिसके दूसरी तरफ खाई
  2763. 2:09:01थी शौरत ने कार को एक जगह ले जाकर खड़ा
  2764. 2:09:04किया उसने देखा सामने एक मोर था सामने एक
  2765. 2:09:08बोर्ड भी लगा हुआ था जिस पर एक्सीडेंट
  2766. 2:09:10संभावित क्षेत्र लिखा हुआ था शौर्य ने
  2767. 2:09:13देखा बोर्ड के पास ही खाई के साइड का
  2768. 2:09:15रेलिंग टूटा हुआ था। देखकर ही लग रहा था
  2769. 2:09:18कि अभी हाल फिलहाल में ही यहां एक्सीडेंट
  2770. 2:09:20हुआ होगा। इक्का-दुक्का गरियां वहां से
  2771. 2:09:22आती जाती दिख रही थी। [संगीत] शौर्य ने
  2772. 2:09:25थोड़ा इंतजार किया। जब उसे सड़क सुनसान
  2773. 2:09:27नजर आया तो उसने रजत की तरफ देखा। शौर्य
  2774. 2:09:31को अपनी तरफ यूं देखते पाकर रजत को उसकी
  2775. 2:09:33मंशा समझ में आ गई। खौफ से उसका चेहरा
  2776. 2:09:36पीला हो गया। देखो जो तुम करने की सोच रहे
  2777. 2:09:39हो वो बहुत खतरनाक है। तुम ऐसा नहीं कर
  2778. 2:09:42सकते। तुम मुझे पुलिस के हवाले कर दो।
  2779. 2:09:46क्यों? अब क्या हो गया? अब अपने भाई की
  2780. 2:09:48धमकी नहीं दोगे? तुम्हें क्या लगता है कि
  2781. 2:09:51तुम्हारा भाई या तुम ही अपने मन की कर
  2782. 2:09:53सकते हो? मैं वैसा नहीं कर सकता। चिंता मत
  2783. 2:09:56करो। अगर यही रवैया रहा तो जल्दी ही
  2784. 2:09:59तुम्हारे भाई को भी तुम्हारे पास भेज
  2785. 2:10:01दूंगा। बोलते वक्त शौर्य की जबरे की मसल
  2786. 2:10:04कस गई थी। रजत शौर्य के खतरनाक इरादे को
  2787. 2:10:07भांप कर जल्दी से अपने साइड का दरवाजा
  2788. 2:10:09खोलकर भागना चाहता था। पर उसी समय शौर्य
  2789. 2:10:12का गुस्सा रजत के जबरे से टकराया और रजत
  2790. 2:10:15ने अपना होश खो दिया। शौर्य ने रजत को
  2791. 2:10:18खींचकर [संगीत] ड्राइविंग सीट पर बैठाया।
  2792. 2:10:20पास से एक पत्थर ढूंढकर गाड़ी के एक्सलेटर
  2793. 2:10:22पर रख दिया। क्योंकि कार ऑटोमेटिक था।
  2794. 2:10:25गियर का कोई पंगा नहीं था। शौर्य सतर्की
  2795. 2:10:28बरतते हुए अपने रुमाल से हर उस जगह को साफ
  2796. 2:10:31किया जहां उसका फिंगरप्रिंट होने की
  2797. 2:10:33[संगीत] संभावना थी। जब वह निश्चिंत हो
  2798. 2:10:35गया। उसने गाड़ी को स्टार्ट किया। एक नजर
  2799. 2:10:38आगे [संगीत] पीछे डाला और गाड़ी का शीशा
  2800. 2:10:40खोलकर एक्सीलरेटर पर के पत्थर को अच्छे से
  2801. 2:10:43सेट किया। गाड़ी ने धीरे-धीरे आगे बढ़ना
  2802. 2:10:46शुरू कर दिया था। जल्दी ही गाड़ी ने रेस
  2803. 2:10:48पकड़ लिया। [संगीत] आगे मोड़ था पर
  2804. 2:10:50स्टीयरिंग सीधा होने के कारण सीधा उस टूटे
  2805. 2:10:53हुए रेलिंग से होते हुए सामने खाई में
  2806. 2:10:56गिरने लगा। शौर्य दूर से ही गाड़ी [संगीत]
  2807. 2:10:58को नीचे खाई में गिरते हुए देखता रहा।
  2808. 2:11:00कितने ही झटके खाने के बाद गाड़ी जाकर
  2809. 2:11:03पानी से भरे एक झील में जाकर गिरा और
  2810. 2:11:05धीरे-धीरे डूब गया। यह नहीं कहा जा सकता
  2811. 2:11:08था कि [संगीत] किसी को खाई में गिरता हुआ
  2812. 2:11:10गारी नजर नहीं आया होगा। इतनी बड़ी पहाड़ी
  2813. 2:11:13थी। कहीं से किसी ना किसी ने तो उस गारी
  2814. 2:11:15को गिरते जरूर देखा होगा। पर जिस भयंकर
  2815. 2:11:18तरीके से गारी खाई में गई थी, उसको देखकर
  2816. 2:11:20यह अंदाजा लगाना आसान था कि कोई भी ऊन
  2817. 2:11:23तीनों में से बचने वाला नहीं था। शौर्य
  2818. 2:11:26थोड़ी देर एक पेड़ के पीछे से यह जायजा
  2819. 2:11:28लेता रहा। फिर वह पैदल ही अपने पीछे चल
  2820. 2:11:30दिया। शाम का धुंधलका छाने लगा था। शौर्य
  2821. 2:11:33ने कोई कोशिश नहीं किया किसी से लिफ्ट
  2822. 2:11:35लेने का। लगभग एक घंटा वह वैसे ही पैदल
  2823. 2:11:38तेज गति से चलता रहा। जब उसने [संगीत] एक
  2824. 2:11:41पब्लिक बस को आते देखा तो वह उसमें बैठ
  2825. 2:11:43गया। रात के लगभग 9:00 बजे वो मॉडल टाउन
  2826. 2:11:46वाले घर पहुंचा। उसने [संगीत] देखा गिरजा
  2827. 2:11:48किचन में ही थी। उसने गिरजा से पूछा
  2828. 2:11:51शिप्रा कहां है? वो अपने कमरे में है।
  2829. 2:11:54गिरजा ने जवाब दिया। क्या उसने खाना खा
  2830. 2:11:57लिया है? शौर्य समझ रहा था कि वह अभी एक
  2831. 2:11:59मेंटल स्ट्रेस में होगी। इसीलिए अभी उसे
  2832. 2:12:02शायद ही खाने का होश हो। नहीं, अभी तक
  2833. 2:12:05नहीं खाई है। गिरजा बोली, [संगीत]
  2834. 2:12:07"ऐसा करो, एक प्लेट में उसके लिए खाने
  2835. 2:12:10निकाल कर मुझे दो। मैं जाता हूं उसके कमरे
  2836. 2:12:12में।" शौर्य किचन के दरवाजे पर खड़े-खड़े
  2837. 2:12:15ही बोला। गिरजा ने जल्दी से एक प्लेट में
  2838. 2:12:18खाना लगाकर शौर्य के हाथ में थमा दिया।
  2839. 2:12:20शौर्य खाने का प्लेट लेकर शिप्रा के कमरे
  2840. 2:12:23के दरवाजे पर पहुंचा। उसने दरवाजे पर नॉक
  2841. 2:12:26किया। पर अंदर से कोई आवाज नहीं आई। शौर्य
  2842. 2:12:29ने ज्यादा इंतजार नहीं किया। उसने दरवाजे
  2843. 2:12:31का हैंडल घुमाया तो दरवाजा खुल गया। वो
  2844. 2:12:34कमरे में प्रवेश किया तो देखा शिप्रा अपने
  2845. 2:12:37बेड पर घुटनों को मोड़ कर दोनों हाथ से
  2846. 2:12:39घेर कर घुटने पर अपने गाल टिका कर आंखें
  2847. 2:12:42बंद करके बैठी हुई थी। कमरे में किसी के
  2848. 2:12:44आने की आहट पाकर उसने सर उठाया [संगीत] तो
  2849. 2:12:47सामने शौर्य को हाथ में खाने का प्लेट
  2850. 2:12:50लेकर खड़ा देखा। शौर्य भली-भांति उसकी
  2851. 2:12:52मानसिक स्थिति को समझ रहा था। वो अपने
  2852. 2:12:55चेहरे पर मुस्कान लाते हुए बोला, "तुमने
  2853. 2:12:58अभी तक खाना नहीं खाया? लो, मैं यहीं ले
  2854. 2:13:01आया। मुझे भूख नहीं है। शिप्रा शौर्य को
  2855. 2:13:05अपने सामने देखकर बोली, आज से पहले कभी भी
  2856. 2:13:08शौर्य ने शिप्रा के कमरे में कदम नहीं रखा
  2857. 2:13:10था। उसने देखा कितनी खूबसूरती से उसने
  2858. 2:13:13अपना कमरा सजा रखा था। शौर्य ने शिप्रा की
  2859. 2:13:17बात पर कोई ध्यान नहीं दिया। उसने एक चेयर
  2860. 2:13:19खींचकर उसके पलंग के पास बैठते हुए कहा,
  2861. 2:13:22अब खाने से क्या नाराजगी है जो खाना नहीं
  2862. 2:13:24खा रही? किसी और की गलती की सजा खुद को
  2863. 2:13:27क्यों दे रही हो? ऐसी कोई बात नहीं है। बस
  2864. 2:13:30खाने का मन नहीं है। शिप्रा उदासी भरे
  2865. 2:13:33स्वर में बोली, तुम अभी भी उस बात को लेकर
  2866. 2:13:36परेशान हो? भूल जाओ। आज जो भी तुम्हारे
  2867. 2:13:39साथ हुआ है, वैसे भी वे बदमाश पुलिस के
  2868. 2:13:41हाथ लग गए हैं। उनको उनके किए की सजा जरूर
  2869. 2:13:44मिलेगी। शौर्य शिप्रा को सांत्वना देता
  2870. 2:13:47हुआ बोला, "तुमने खाना खा लिया?" शौर्य के
  2871. 2:13:51हाथ में एक ही प्लेट देखकर वह बोली, "तुम
  2872. 2:13:54खा लो, मैं नीचे जाकर खा लूंगा।"
  2873. 2:13:56शौर्य शिप्रा की तरफ उसका प्लेट बढ़ाता
  2874. 2:13:58हुआ बोला, "तुम रुको, मैं तुम्हारा भी
  2875. 2:14:01खाना यहीं ले आती हूं।" शिप्रा पलंग से
  2876. 2:14:04उठती हुई बोली, अरे नहीं, तुम रहने दो,
  2877. 2:14:07मैं ले आता हूं। इतना बोलकर शौर्य कमरे से
  2878. 2:14:10बाहर निकल गया और [संगीत] जल्दी ही एक
  2879. 2:14:12प्लेट के साथ कमरे में हाजिर हुआ। शिप्रा
  2880. 2:14:15ने पहले से रखी हुई प्लेट को अपने सामने
  2881. 2:14:17खींचा और शौर्य को बेड पर ही अपना प्लेट
  2882. 2:14:20रखने के लिए जगह दिया। शौर्य ने भी उसके
  2883. 2:14:23प्लेट के सामने अपना प्लेट रख लिया और
  2884. 2:14:25चेयर को करीब खींचकर उस पर बैठ गया।
  2885. 2:14:28शिप्रा ने एक निवाला अपने मुंह में लेते
  2886. 2:14:30हुए शौर्य से पूछा, तुम्हें कैसे पता चला
  2887. 2:14:33कि उन बदमाशों ने मुझे किडनैप कर लिया है
  2888. 2:14:35[संगीत] और कहां लेकर गए हैं? रुस्तम जो
  2889. 2:14:38कि इस किडनैपिंग का मास्टर प्लानर था।
  2890. 2:14:40उसने छगन के एक आदमी बजरंगी को भी अपने
  2891. 2:14:42काम में शामिल किया हुआ था। जब उन लोगों
  2892. 2:14:45ने तुम्हें उठाया था तो बजरंगी तुम्हें
  2893. 2:14:47देखते ही पहचान गया था।
  2894. 2:14:49[संगीत]
  2895. 2:14:49और उसने यह बात छगन को बताया और छगन ने
  2896. 2:14:52मुझे बाकी उसके नंबर से लोकेशन का पता चल
  2897. 2:14:54गया। बस इस तरह मैं वहां पहुंच गया। शौर्य
  2898. 2:14:58ने नॉर्मल ढंग से बताया जैसे यह कोई
  2899. 2:15:00[संगीत] बड़ी बात नहीं थी। वो नहीं चाहता
  2900. 2:15:02था कि शिप्रा के दिमाग में इस किडनैपिंग
  2901. 2:15:04की कोई भी गांठ रहे। शिप्रा के दिमाग में
  2902. 2:15:07अभी भी रह-रह कर वह घटना याद आ जा रही थी।
  2903. 2:15:10उसने मुश्किल [संगीत] से अपना खाना समाप्त
  2904. 2:15:12किया। उसने शौर्य के खाना समाप्त करने का
  2905. 2:15:15इंतजार किया और वह अपने प्लेट के साथ
  2906. 2:15:17शौर्य का प्लेट भी उठाकर ले जाना चाहती
  2907. 2:15:19थी। पर शौर्य ने उसे उठने से रोक दिया था।
  2908. 2:15:22उसने अपने प्लेट के साथ शिप्रा का प्लेट
  2909. 2:15:24भी नीचे जाकर रख दिया था। शौर्य वापस आया
  2910. 2:15:28और फिर से आकर शिप्रा के पास बैठ गया था।
  2911. 2:15:31वो समझ रहा था कि अभी शिप्रा को मेंटल
  2912. 2:15:33सपोर्ट की जरूरत है। इसलिए वो [संगीत]
  2913. 2:15:35बोला अगर तुम चाहो तो कुछ दिन के लिए अपने
  2914. 2:15:38मम्मी पापा के पास जाकर रह आओ। इससे थोड़ा
  2915. 2:15:40दिल बहल जाएगा। शिप्रा समझ गई कि शौर्य
  2916. 2:15:44उसको लेकर परेशान हो रहा है। [संगीत]
  2917. 2:15:45इसीलिए वह मुस्कुराने का प्रयास करती हुई
  2918. 2:15:48बोली, मैं ठीक हूं, तुम मेरी चिंता मत
  2919. 2:15:51करो। पहली बार इस तरह की परिस्थिति को फेस
  2920. 2:15:53की हूं, इसलिए थोड़ा नर्वसनेस है। [संगीत]
  2921. 2:15:56यह भी सुबह तक ठीक हो जाएगा। शिप्रा शौर्य
  2922. 2:15:59के उसके पास आकर बैठने से अब [संगीत]
  2923. 2:16:01थोड़ा अच्छा फील कर रही थी। उस दिन में
  2924. 2:16:04शौर्य के उसको घर छोड़कर चले जाने से
  2925. 2:16:06ज्यादा परेशान थी। उस समय वह चाहती थी कि
  2926. 2:16:09शौर्य [संगीत] उसके पास ही ठहरे। पर शौर्य
  2927. 2:16:11ने उसकी भावनाओं को नहीं समझा था। इस बात
  2928. 2:16:14से वह और परेशान थी। पर अब शौर्य के उसके
  2929. 2:16:17लिए खाना लाने के कारण जो उसके दिल में एक
  2930. 2:16:20गांठ बन रही थी वो फिर से पिघल गई। तुम
  2931. 2:16:23कहो तो मैं राहुल को कुछ दिन के लिए यहां
  2932. 2:16:25बुला लेता हूं। शौर्य किसी भी तरह शिप्रा
  2933. 2:16:28को अच्छा फील कराना चाहता था। तुम क्यों
  2934. 2:16:31जो बात उन लोगों को अभी तक पता नहीं है
  2935. 2:16:33उससे अवगत [संगीत] कराना चाहते हो? मैंने
  2936. 2:16:36कहा ना मैं अब ठीक हूं। तुम आ गए तो तुमसे
  2937. 2:16:39बात करके अब अच्छा फील कर रही हूं। फिर
  2938. 2:16:42कुछ ध्यान में आने पर उसने आगे पूछा।
  2939. 2:16:43[संगीत]
  2940. 2:16:44कुछ पता चला कि मुझे किडनैपिंग कराने के
  2941. 2:16:46पीछे किसका हाथ था? शौर्य बात बनाता हुआ
  2942. 2:16:50बोला। अभी तक कुछ पता नहीं चला है। पर
  2943. 2:16:53शायद इसके पीछे रजत हो सकता है। [संगीत]
  2944. 2:16:55शिप्रा की आंखें गंभीर हो गई। पहले उसके
  2945. 2:16:59साथ मेघना रहती थी तो उसका मन लगा रहता
  2946. 2:17:02था। पर मेघना के जाने के बाद वो अकेली हो
  2947. 2:17:05गई थी। वैसे [संगीत] मेघना के जाने के बाद
  2948. 2:17:09मेघा शिप्रा का ज्यादा ख्याल रखने लगी थी।
  2949. 2:17:12पर फिर भी शिप्रा को मेघना की कमी खलती
  2950. 2:17:15थी। शौर्य को लगा कि अब ज्यादा समय हो रहा
  2951. 2:17:19है। इसीलिए उसे अपने कमरे में चला जाना
  2952. 2:17:21चाहिए। शिप्रा के सोने का समय भी हो रहा
  2953. 2:17:24है। यह सोचकर वो अपने कमरे में जाने के
  2954. 2:17:27लिए उठा और शिप्रा से बोला, ठीक है अब तुम
  2955. 2:17:31आराम करो। शिप्रा ने शौर्य को उठते देखा
  2956. 2:17:34[संगीत] तो जल्दी से बोली, तुम कहां जा
  2957. 2:17:36रहे हो? यहीं सो जाओ ना। अकेले मुझे
  2958. 2:17:39घबराहट हो रही है। क्या कहा? पर यहां मेरे
  2959. 2:17:42कारण तुम्हें परेशानी होगी। शौर्य को याद
  2960. 2:17:45आया कि कैसे [संगीत] पिछली बार जब वो
  2961. 2:17:47शिप्रा के साथ एक कमरे में था तो उसे सारी
  2962. 2:17:50रात जाग कर बिताना पड़ा था। मुझे लग नहीं
  2963. 2:17:53रहा है कि मुझे जल्दी नींद आने वाली है।
  2964. 2:17:56तुम यहीं सो जाओ ना। शिप्रा शौर्य से
  2965. 2:17:58मनोहार करती हुई बोली। ठीक है मैं अपने
  2966. 2:18:01[संगीत] कपड़े चेंज करके आता हूं। इतना
  2967. 2:18:04बोलकर शौर्य अपने कमरे में चला गया। लगभग
  2968. 2:18:075 सात मिनट के बाद शौर्य अपने साथ एक शॉल
  2969. 2:18:10लेकर हाजिर हुआ। से बेड से [संगीत] एक
  2970. 2:18:13तकिया उठाया और सोफे की तरफ बढ़ गया। जब
  2971. 2:18:16शिप्रा ने यह नोट किया तो वह जल्दी से
  2972. 2:18:18बोली, बड़ा बेड है तो क्यों ना तुम भी इसी
  2973. 2:18:22बेड पर सो जाओ। मजबूरन शौर्य को उसी बेड
  2974. 2:18:25के एक किनारे होकर लेटना पड़ा। शौर्य ने
  2975. 2:18:28कोशिश किया कि बेड के बीच तकियों की दीवार
  2976. 2:18:31बन जाए। शिप्रा शौर्य की झिझक को साफ
  2977. 2:18:34महसूस कर रही थी। शौर्य को बेड पर एक
  2978. 2:18:37दीवार बनाते देखकर उसके दिल में एक टीस सी
  2979. 2:18:40उठी। इसकी कोई जरूरत नहीं है। शिप्रा ने
  2980. 2:18:43बेड से कुशन की दीवार हटा दिया। शिप्रा भी
  2981. 2:18:46जाकर उसी बेड पर लेट गई। वो छत को घूर रही
  2982. 2:18:50थी। नींद उसकी आंख से दूर थी। शिप्रा
  2983. 2:18:53शौर्य की तरफ पलट कर उसका चेहरा देखने
  2984. 2:18:55लगी। अभी भी जब नींद का कोई निशान नहीं
  2985. 2:18:58था। शिप्रा किसक कर शौर्य के पास पहुंची
  2986. 2:19:01और उसके कंधे पर सर रखकर सोने का प्रयास
  2987. 2:19:04करने लगी। शिप्रा के छूने से शौर्य के
  2988. 2:19:07शरीर में झुरझुरी सी हुई। शौर्य का ध्यान
  2989. 2:19:10बरबस ही शिप्रा की तरफ चला गया। उसे समझ
  2990. 2:19:13नहीं आ रहा था कि वो कैसे रिएक्ट करें।
  2991. 2:19:16शिप्रा का इतना पास होना उसकी भावनाओं को
  2992. 2:19:18भर कर रहा था। बड़ी मुश्किल से वह खुद की
  2993. 2:19:21कंट्रोल किए हुए था। शिप्रा की बालों की
  2994. 2:19:24खुशबू उसको मदहोश किए जा रहा था। अब आगे
  2995. 2:19:28क्या होगा? यह एक ऐसा एहसास था जो शौर्य
  2996. 2:19:31को बेचैन कर रहा था। यही तो वह चाहता था
  2997. 2:19:34[संगीत] कि उसे शिप्रा का यह समीप्य
  2998. 2:19:37प्राप्त हो सके। पर उसे इस तरह अचानक
  2999. 2:19:40शिप्रा का अपने पास आना कुछ समझ नहीं आ
  3000. 2:19:43रहा था [संगीत] कि ऐसा क्यों हो रहा है।
  3001. 2:19:46उसका भी मन कर रहा था कि वह शिप्रा को
  3002. 2:19:49अपनी बाहों में भर ले। पर वो ऐसी हिम्मत
  3003. 2:19:52नहीं [संगीत] कर सका। उसकी भावनाओं की
  3004. 2:19:54उड़ान थम नहीं रहा था। वो इस स्थिति में
  3005. 2:19:57था कि वह हिल भी नहीं पा रहा था। [संगीत]
  3006. 2:20:00उसे यह डर सता रहा था कि वह अगर जरा सा भी
  3007. 2:20:03हिला तो शिप्रा अनकंफर्टेबल फील कर सकती
  3008. 2:20:05है। शौर्य का [संगीत] दिल तेजी से धड़क
  3009. 2:20:08रहा था। उसके दिमाग में आया अगर ऐसा ही
  3010. 2:20:11रहा तो वो फिर सारी रात सो नहीं [संगीत]
  3011. 2:20:13पाएगा। उसका गला सूखने लगा था। कमरे का
  3012. 2:20:17एसी चल रहा था। पर फिर भी [संगीत] उसके
  3013. 2:20:20माथे पर पसीने की बूंदे झिलमिलाने लगी थी।
  3014. 2:20:23कमरे की लाइट अभी भी जल रही थी। शौर्य ने
  3015. 2:20:26शिप्रा की तरफ ध्यान दिया तो उसने देखा
  3016. 2:20:28उसकी आंखें बंद थीं। उसने उसके बाएं
  3017. 2:20:31[संगीत] बाह को अपनी दोनों बाहों में लपेट
  3018. 2:20:33रखा था। और उसका गाल उसके बाह के ऊपर से
  3019. 2:20:37होते हुए उसके सीने पर आ रखी थी। [संगीत]
  3020. 2:20:39और उसकी सांसों की तपन उसके सीने को और भी
  3021. 2:20:43गर्मी प्रदान कर रही थी। एक बार को तो
  3022. 2:20:45जितनी बेफिक्र होकर शिप्रा आंखें [संगीत]
  3023. 2:20:47बंद किए हुए थी, शौर्य को लगा शायद वह सो
  3024. 2:20:50गई है। पर इतनी ही देर में शौर्य का कंठ
  3025. 2:20:54एकदम सूख गया था। [संगीत] उसे तेज प्यास
  3026. 2:20:56लग गई थी। उसे लगा अब वो ज्यादा देर तक इस
  3027. 2:21:00स्थिति में नहीं रह पाएगा। वो धीरे से
  3028. 2:21:02शिप्रा को सहारा देकर उसके सर को तकिए पर
  3029. 2:21:05[संगीत] किया और उसकी बाहों से निकालने
  3030. 2:21:07लगा। जब शिप्रा ने महसूस किया कि शौर्य
  3031. 2:21:10बिस्तर से उठने की कोशिश कर रहा है तो
  3032. 2:21:12उसने अपनी आंखें खोलकर उसकी तरफ देखा।
  3033. 2:21:16मुझे प्यास [संगीत] लग रही मैं पानी पीकर
  3034. 2:21:18आता हूं। लाइट भी जल रही है उसे बुझा देता
  3035. 2:21:21हूं। इतनी बात बोलने [संगीत] में ही शौर्य
  3036. 2:21:24को पसीने आ गया था। उसको अपना गला बैठता
  3037. 2:21:26हुआ सा लगा। शिप्रा ने उसकी बात को सुना
  3038. 2:21:29तो कुछ बोली [संगीत] नहीं। बस थोड़ी साइड
  3039. 2:21:32होकर शौर्य को उठने के लिए जगह दिया।
  3040. 2:21:34शौर्य ने जाकर सबसे पहले पानी पिया।
  3041. 2:21:37[संगीत]
  3042. 2:21:37उसने एक पूरी बोतल घटक लिया। तब जाकर उसको
  3043. 2:21:40कुछ राहत आया। दोबारा वह बिस्तर की तरफ
  3044. 2:21:43बढ़ा। पर बेड पर जाने से पहले उसने लाइट
  3045. 2:21:46बुझा दिया। उसने [संगीत] शिप्रा की तरफ
  3046. 2:21:48ध्यान दिया तो देखा उसकी आंखें बंद थी।
  3047. 2:21:51शौर्य [संगीत] गया और बेड के एक किनारे
  3048. 2:21:53छोटी सी जगह पर लेट गया। पर दो पल नहीं
  3049. 2:21:56बीते कि शिप्रा फिर से उसके करीब आकर अपने
  3050. 2:21:59बाएं हाथ को शौर्य के सीने पर रख दिया और
  3051. 2:22:01[संगीत] अपने सर को उसके कंधे पर टिका
  3052. 2:22:03दिया। शौर्य के शरीर ने फिर से झुरझुरी
  3053. 2:22:06[संगीत]
  3054. 2:22:06ली। उसकी सांसे तेज हो गई। उसको अपने इतने
  3055. 2:22:10करीब देखकर शौर्य का मन भी मचलने लगा था।
  3056. 2:22:13उसकी तीव्र इच्छा [संगीत] होने लगी कि
  3057. 2:22:16शिप्रा को भी वह अपनी बाहों में भर ले।
  3058. 2:22:18दोनों में से कोई कुछ नहीं बोल रहे थे। पर
  3059. 2:22:21अपने अधिकार को जताने का शिप्रा का अंदाज
  3060. 2:22:23[संगीत] शौर्य को भी आगे बढ़ने के लिए
  3061. 2:22:26प्रेरित कर रहा था। हिम्मत करके शौर्य ने
  3062. 2:22:29भी शिप्रा के ऊपर अपना दाया हाथ रखा। पर
  3063. 2:22:32अगले ही पल उसे [संगीत] एहसास हुआ कि उसका
  3064. 2:22:34हाथ किसी गलत जगह को छू रहा है। तो उसने
  3065. 2:22:37जल्दी से अपना हाथ वापस ले लिया। उसे बड़ी
  3066. 2:22:40शर्मिंदगीगी [संगीत] सी महसूस हुई। उसे
  3067. 2:22:42लगा कहीं शिप्रा उसके बारे में कुछ गलत ना
  3068. 2:22:44सोचने लगे। इसीलिए उसने फिर दोबारा
  3069. 2:22:47[संगीत] इस तरह की हरकत नहीं की। पर थोड़ी
  3070. 2:22:50देर के बाद शिप्रा ने उसके हाथ को पकड़ कर
  3071. 2:22:52अपने कमर [संगीत] के ऊपर रख लिया और खुद
  3072. 2:22:55कुछ और सिमट कर उसके करीब आ गई। शिप्रा के
  3073. 2:22:58उजों [संगीत] की चुभन साफसाफ शौर्य अपनी
  3074. 2:23:01बाहों एवं सीने के कुछ हिस्सों पर महसूस
  3075. 2:23:03कर रहा था। पर वो अपनी भावनाओं [संगीत] को
  3076. 2:23:06कंट्रोल किए हुए था। यह एक ऐसा एहसास था
  3077. 2:23:09जो शौर्य को स्वर्ग को प्राप्त कर लेने की
  3078. 2:23:12एक अलौकिक खुशी प्रदान कर रही थी। [संगीत]
  3079. 2:23:15कितनी ही देर शौर्य इसी अवस्था में पड़ा
  3080. 2:23:17रहा। एक बार शिप्रा ने उसके हाथ को पकड़
  3081. 2:23:20कर अपने कमर पर रख लिया था। तो शौर्य ने
  3082. 2:23:22[संगीत] उसे वहां से थोड़ा भी इधर-उधर
  3083. 2:23:25हिलाया नहीं। शायद उसे यही डर था कि अगर
  3084. 2:23:28उसने अपने हाथ को हिलाया तो फिर से कहीं
  3085. 2:23:30किसी गलत जगह ना टच कर जाए। काफी देर तक
  3086. 2:23:33शौर्य ऐसी ही स्थिति में रहा। रात के
  3087. 2:23:36अंधेरे में जब शौर्य की आंखें देखने की
  3088. 2:23:38अभ्यस्त हो गई तो उसने [संगीत] शिप्रा के
  3089. 2:23:40चेहरे की तरफ देखा। शिप्रा का मासूम चेहरा
  3090. 2:23:43हर चीज से बेखबर [संगीत] अब पूरी तरह से
  3091. 2:23:46नींद की आगोश में लिपटी हुई नजर आ रही थी।
  3092. 2:23:49शिप्रा का बाया हाथ शौर्य के सीने [संगीत]
  3093. 2:23:51पर के शर्ट को पकड़े हुए थी। उसके चेहरे
  3094. 2:23:54पर एक लट शौर्य को अटखेलियां करता नजर
  3095. 2:23:57आया। तो शौर्य [संगीत] ने अपने दाएं हाथ
  3096. 2:23:59से उसके उस लट को पकड़ कर उसके कान के
  3097. 2:24:02पीछे कर दिया। अब जाकर शौर्य को लगा कि
  3098. 2:24:06उसके [संगीत] चेहरे से वो खौफ गायब हो गया
  3099. 2:24:08था जो शाम को वापस आने के बाद भी शौर्य को
  3100. 2:24:11उसकी आंखों में नजर आ रहा था। इसने
  3101. 2:24:13[संगीत] मन ही मन यह दोहराया। तुम चिंता
  3102. 2:24:16मत करो। आज के बाद वो [संगीत] कमीना फिर
  3103. 2:24:19से तुम्हें परेशान नहीं कर पाएगा। शौर्य
  3104. 2:24:22को शिप्रा पर इतना प्यार आया [संगीत] कि
  3105. 2:24:24उसने थोड़ा झुक कर उसके माथे को अपने
  3106. 2:24:27होठों से चूम लिया। फिर उसने यह भी जानने
  3107. 2:24:30की कोशिश की [संगीत] कि कहीं शिप्रा को
  3108. 2:24:32पता तो नहीं चल गया होगा। उसके बाद थोड़ी
  3109. 2:24:34देर उसने यह जानने में ही लगा दिया कि
  3110. 2:24:37कहीं शिप्रा जाग तो नहीं रही है। जब उसे
  3111. 2:24:40यह यकीन हो गया कि वो पूरी तरह सो गई है
  3112. 2:24:43तो उसे सब आया। जाने कितना ही समय वो
  3113. 2:24:47शिप्रा के चेहरे को घूरता रहा और इसी
  3114. 2:24:49स्थिति में जाने कब [संगीत] उसे नींद आ
  3115. 2:24:52गई। दूसरे दिन सुबह जब शौर्य की आंख खुली
  3116. 2:24:55तो उसने देखा शिप्रा अभी भी उसी स्थिति
  3117. 2:24:58[संगीत] में बेपरवाह सो रही है। अभी भी वो
  3118. 2:25:01शौर्य के सीने पर के शर्ट को पकड़े हुई थी
  3119. 2:25:04और उसका सर शौर्य के बाई [संगीत] छाती पर
  3120. 2:25:07था। शौर्य ने जब यह स्थिति महसूस किया तो
  3121. 2:25:10वह उसी स्थिति में लेटा रहा। वो शिप्रा की
  3122. 2:25:13नींद को डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था। पर
  3123. 2:25:15तभी मोबाइल के अलार्म घड़ी ने बजना शुरू
  3124. 2:25:18किया और शिप्रा की आंख खुली। उसे अपनी
  3125. 2:25:21[संगीत] स्थिति का एहसास हुआ तो वह जल्दी
  3126. 2:25:23से उठ गई। उसने शौर्य से नजर नहीं मिलाया
  3127. 2:25:26ना ही शौर्य को हिम्मत हुई कि वो शिप्रा
  3128. 2:25:28से नजर मिला सके। शौर्य इस ऑकवर्ड स्थिति
  3129. 2:25:31को फेस नहीं करना चाहता था। इसलिए वह
  3130. 2:25:34जल्दी से उठकर अपने कमरे में चला गया।
  3131. 2:25:36शिप्रा भी उठकर फ्रेश होने चली गई। वह
  3132. 2:25:39बाथरूम में शीशे के सामने गई तो [संगीत]
  3133. 2:25:41उसे अपनी अलसाई स्थिति का भान हुआ। उसने
  3134. 2:25:43खड़े-खड़े ही एक अंगराई ली। वो रात की
  3135. 2:25:46घटना को याद करने लगी। अचानक ही [संगीत]
  3136. 2:25:48उसके होठों पर स्माइल आ गई। दूसरे दिन
  3137. 2:25:52शिप्रा ऑफिस नहीं गई। कांता प्रसाद जी ने
  3138. 2:25:54भी उसे फोन करके आज आराम करने को कहा।
  3139. 2:25:57शिप्रा के अपहरण के बारे में ज्यादा बात
  3140. 2:25:59नहीं [संगीत] हुई थी। इसीलिए शहर में
  3141. 2:26:02ज्यादा लोगों को भी यह पता नहीं चला था कि
  3142. 2:26:04पिछले दिन शिप्रा का अपहरण हुआ था। पर
  3143. 2:26:07दूसरे दिन हर न्यूज़ चैनल पर यह खबर
  3144. 2:26:09प्रमुखता से दिखाई जा रही थी जिसमें बताया
  3145. 2:26:12जा रहा था कि रजत और उसके दो साथियों का
  3146. 2:26:15कार दुर्घटना में मौत हो गई। शौर्य इस समय
  3147. 2:26:18ड्राइंग रूम में ही बैठा हुआ था। वो पहले
  3148. 2:26:20से ही न्यूज़ [संगीत] चैनल खोलकर बैठा हुआ
  3149. 2:26:22था। इस खबर को देखकर उसे तसल्ली हुई। वो
  3150. 2:26:25इस खबर को शिप्रा के नॉलेज में लाना चाहता
  3151. 2:26:28था। उसी समय शिप्रा भी डाइनिंग रूम में
  3152. 2:26:30आई। जब उसने भी इस खबर को देखा तो वह भी
  3153. 2:26:33हैरानी से इस खबर को देखने लगी। जब उसे
  3154. 2:26:36यकीन हो गया कि यह खबर सच है, उसने शौर्य
  3155. 2:26:39की ओर देखा। पर शौर्य ने कोई रिएक्शन नहीं
  3156. 2:26:42दिया। पर [संगीत] वह महसूस कर सकता था कि
  3157. 2:26:44इस खबर से शिप्रा बहुत ही आश्वस्त नजर आने
  3158. 2:26:47लगी। वो शौर्य से बोली, क्या तुम्हें लगता
  3159. 2:26:50है कि मेरे अपहरण के पीछे रजत [संगीत] का
  3160. 2:26:52हाथ था? हां, अब यह प्रूवन सच है कि
  3161. 2:26:56रुस्तम को तुम्हें किडनैप करने की सुपारी
  3162. 2:26:58रजत ने ही दिया था। अगर उसका एक्सीडेंट
  3163. 2:27:01नहीं होता, तो वैसे भी [संगीत] वह पुलिस
  3164. 2:27:02के कब्जे में जाने वाला ही था। कहते हैं
  3165. 2:27:05बुरे काम का बुरा नतीजा। आखिर उसको उसकी
  3166. 2:27:08करनी [संगीत] का फल मिल ही गया। रजत
  3167. 2:27:10इत्मीनान से बोला, तुम्हें यह थोड़ा अजीब
  3168. 2:27:13नहीं लग रहा है कि कल उसने मुझे किडनैप
  3169. 2:27:15करने की कोशिश [संगीत] की और आज उसका
  3170. 2:27:17एक्सीडेंट हो गया। शिप्रा संदिग्ध नजरों
  3171. 2:27:20से शौर्य की तरफ देखती हुई [संगीत] बोली।
  3172. 2:27:22उसे पता था कि कल उसको घर छोड़ने के बाद
  3173. 2:27:25शौर्य वापस चला गया था और देर रात को ही
  3174. 2:27:28वापस आया था। इसमें अजीब [संगीत] क्या है?
  3175. 2:27:31अब एक्सीडेंट तो किसी से पूछ के होता
  3176. 2:27:33नहीं। उसे पता चल गया था कि पुलिस उसके
  3177. 2:27:35पीछे है। तेज गाड़ी चला रहा [संगीत] होगा
  3178. 2:27:38जिसके कारण एक्सीडेंट होना कोई आश्चर्य की
  3179. 2:27:41बात नहीं है। वैसे भी पुलिस को उसके पास
  3180. 2:27:43एक पिस्तल [संगीत] भी मिला है। इसका मतलब
  3181. 2:27:45वो किसी अच्छे इरादे से तो कहीं जा नहीं
  3182. 2:27:48रहा होगा। शौर्य शिप्रा से नजर चुराता हुआ
  3183. 2:27:51बोला। चलो जो भी हो। एक शैतान से इस
  3184. 2:27:54दुनिया को मुक्ति मिली। शिप्रा लंबी सांस
  3185. 2:27:58लेती हुई बोली। इस खबर से अचानक ही उसको
  3186. 2:28:01बड़ी शांति की अनुभूति हुई। उसे लग रहा था
  3187. 2:28:04उसके सर पर बहुत समय [संगीत] से जो एक बोझ
  3188. 2:28:06पड़ा हुआ था आज वह उतर गया। उसके चेहरे के
  3189. 2:28:09भावों से शौर्य भी इस बात को अनुभव कर
  3190. 2:28:12सकता था। उसके बगल वाली चेयर पर बैठती हुई
  3191. 2:28:15शिप्रा ने उससे पूछा तुमने लंच कर लिया
  3192. 2:28:17[संगीत] है? नहीं। शौर्य इंकार में गर्दन
  3193. 2:28:21हिलाते हुए बोला। शिप्रा ने दो प्लेट लिया
  3194. 2:28:24और एक शौर्य के सामने और एक अपने सामने
  3195. 2:28:26लगाया।
  3196. 2:28:27[संगीत]
  3197. 2:28:27उसने खुद ही टेबल पर से हर पॉट से रोटी,
  3198. 2:28:30सब्जी एवं बाकी अन्य आइटम शौर्य [संगीत]
  3199. 2:28:33के प्लेट में सर्व किया। शौर्य आश्चर्य से
  3200. 2:28:36उसे देखता रहा। आज शिप्रा उसे काफी बदली
  3201. 2:28:39बदली नजर आ रही थी। शौर्य से जब रहा नहीं
  3202. 2:28:42गया तो उसने पूछ लिया, आज तुम कुछ बदली
  3203. 2:28:45बदली सी नजर आ रही हो? कुछ खास बात
  3204. 2:28:47[संगीत] है क्या? शौर्य की प्लेट में सलाद
  3205. 2:28:50डाल रही शिप्रा का हाथ रुक गया। उसकी भवें
  3206. 2:28:53उसकी तरफ तन गई। क्यों? ऐसा क्यों लगा
  3207. 2:28:56तुम्हें? तुम आज मुझे अपने हाथों से खाना
  3208. 2:29:00[संगीत] सर्व कर रही हो। इसीलिए मुझे
  3209. 2:29:02थोड़ा अजीब लगा। कभी तुम्हें ऐसा करते
  3210. 2:29:05देखा नहीं ना? शौर्य हिचकिचाते [संगीत]
  3211. 2:29:08हुए बोला। उसे यह भी डर था कि कहीं उसकी
  3212. 2:29:10बात का शिपरा बुरा ना मान जाए। अच्छा तुम
  3213. 2:29:14ऐसा कैसे बोल सकते हो? तुम कितनी बार मेरे
  3214. 2:29:16साथ खाने के टेबल पर बैठे हो जो [संगीत]
  3215. 2:29:18तुम यह कह रहे हो? जब तुम आज से पहले कभी
  3216. 2:29:21मेरे साथ लंच के लिए एक टेबल पर बैठे ही
  3217. 2:29:23नहीं तो तुम्हें [संगीत] नहीं लगता कि
  3218. 2:29:24तुम्हारा यह बोलना सरासर गलत है। शिप्रा
  3219. 2:29:27थोड़ी नाराजगी से बोली। शौर्य ने इस बारे
  3220. 2:29:30में सोचा तो उसे शिप्रा की बात सही प्रतीत
  3221. 2:29:33हुई। उसने मन ही मन सोचा कि उसे ऐसा क्यों
  3222. 2:29:36लगा तो उसे एहसास हुआ कि यह सिर्फ इसलिए
  3223. 2:29:39था कि [संगीत] पिछली रात शिप्रा उसके पास
  3224. 2:29:41सोई थी। जिसका एहसास उसे शिप्रा में बदलाव
  3225. 2:29:44दिखा रहा था। वैसे उसके लिए यह बात सच भी
  3226. 2:29:47था। अभी [संगीत] भी शौर्य उस ख्याल से
  3227. 2:29:49रोमांचित था कि रात शिप्रा उसके कितने
  3228. 2:29:52करीब थी। अभी भी वह उसकी खुशबू को [संगीत]
  3229. 2:29:54महसूस कर पा रहा था। तुम कहीं इस बात के
  3230. 2:29:57कारण तो ऐसा नहीं सोच रहे कि मैं रात
  3231. 2:29:59तुम्हारे साथ सोई हुई थी। शिप्रा की बात
  3232. 2:30:02[संगीत] से ऐसा लगा जैसे उसने शौर्य के मन
  3233. 2:30:04की बात पढ़ ली। उसकी बात सुनकर एक बार को
  3234. 2:30:08शौर्य को भी लगा कि उसकी चोरी [संगीत]
  3235. 2:30:09पकड़ी गई। वो हड़बड़ा कर बोला। नहीं ऐसा
  3236. 2:30:13कुछ नहीं है। मैं तो बस ऐसे [संगीत] ही
  3237. 2:30:16एक्चुअली मैं ऐसा उम्मीद नहीं कर रहा था।
  3238. 2:30:19इसलिए मुझे ऐसा भ्रम हो गया। तुम जानते हो
  3239. 2:30:22कल मैं कितना लो [संगीत] फील कर रही थी।
  3240. 2:30:24इसीलिए मुझे अकेले घबराहट हो रही थी।
  3241. 2:30:27शिप्रा सफाई देती हुई बोली। उसकी बात
  3242. 2:30:30सुनकर शौर्य को लगा उसने [संगीत] क्यों
  3243. 2:30:32जानबूझकर अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली।
  3244. 2:30:35कितनी मुश्किल से तो वो उसके करीब आई थी।
  3245. 2:30:37अब ऐसी बात [संगीत] करके उसने शिप्रा को
  3246. 2:30:39नाराज कर दिया है। कहीं ऐसा ना हो कि अब
  3247. 2:30:42वो फिर से उससे दूर हो जाए। वो जल्दी से
  3248. 2:30:44बोला, नहीं वो बात नहीं है। मैं लगता
  3249. 2:30:48[संगीत] है कुछ गलत बोल गया। पर इसके बाद
  3250. 2:30:51शिप्रा ने उसको खाना सर्व करना बंद कर
  3251. 2:30:53दिया। शौर्य की रोटी समाप्त हो गई [संगीत]
  3252. 2:30:56तो उसने शिप्रा की तरफ देखा कि वो उसको
  3253. 2:30:58बढ़ाएगी। पर उसने ऐसी कोई हरकत नहीं की।
  3254. 2:31:01वो हिचकिचाते हुए बोला एक रोटी देना।
  3255. 2:31:05सामने परी है खुद ले लो। शिप्रा भावहीन
  3256. 2:31:09स्वर में बोली। शौर्य को इसी बात का डर
  3257. 2:31:12था। वैसे [संगीत] शौर्य का पेट भर चुका
  3258. 2:31:14था। वो सिर्फ शिप्रा का रिएक्शन देखना
  3259. 2:31:17चाहता था। वो अपने टेबल से [संगीत] उठने
  3260. 2:31:19लगा। शिप्रा ने उसको उठते देखा तो उसका
  3261. 2:31:22हाथ पकड़ लिया। अभी तो तुमको रोटी चाहिए
  3262. 2:31:24थी। तो अब खाना बीच में छोड़कर क्यों उठ
  3263. 2:31:27रहे हो? नहीं। [संगीत] मुझे ऐसा लग रहा है
  3264. 2:31:30कि मेरा पेट भर चुका है। अब और नहीं खाना।
  3265. 2:31:33शौर्य एक सुखद अनुभूति के साथ बोला। उसे
  3266. 2:31:36शिप्रा के द्वारा अपना हाथ पकड़ा [संगीत]
  3267. 2:31:38जाना बहुत ही अच्छा लगा। यह खट्टामीठा
  3268. 2:31:40एहसास उसको एक अलग ही आनंद का बोध करा रहा
  3269. 2:31:43था। बैठ जाओ। [संगीत]
  3270. 2:31:46शिप्रा उसको जबरदस्ती बैठाती हुई बोली।
  3271. 2:31:48इसके बाद उसने पॉट से एक रोटी निकाल कर
  3272. 2:31:51शौर्य की प्लेट में रख दिया। मजबूरन शौर्य
  3273. 2:31:53[संगीत] को पेट भरे होने के बाद भी उस
  3274. 2:31:55रोटी को खाना पड़ा। पर यह एहसास उसके लिए
  3275. 2:31:58अकल्पनीय [संगीत] खुशी प्रदान करने वाला
  3276. 2:32:00था। अब आगे क्या होगा? कब दोनों का रिश्ता
  3277. 2:32:04सामान्य रूप लेगा? [संगीत] मुख्तार भाई
  3278. 2:32:06क्या करेगा रजत की मौत के बाद? क्या वो
  3279. 2:32:08रजत की मौत को एक एक्सीडेंट मान लेगा?
  3280. 2:32:10[संगीत]
  3281. 2:32:11और कौन सी नाई आफत आने वाली है? शौर्य
  3282. 2:32:14शिप्रा में अपनी गति से आगे बढ़ने लगी।
  3283. 2:32:17शिप्रा ने ऑफिस जाना भी शुरू कर दिया था।
  3284. 2:32:20रजत की एक्सीडेंट में मौत वाली खबर ने
  3285. 2:32:23शिप्रा को बहुत तसल्ली दी थी। वैसे उसे
  3286. 2:32:27अभी भी यह डर था कि [संगीत] मुख्तार भाई
  3287. 2:32:29अभी भी उसके खिलाफ कोई हरकत कर सकता है।
  3288. 2:32:32पर इस डर से [संगीत] वह घर नहीं बैठ सकती
  3289. 2:32:35थी। दूसरी तरफ शौर्य भी अपने काम में
  3290. 2:32:38मशगूल हो गया था। रत्नाकर शेट्टी ने शौर्य
  3291. 2:32:41के प्रोडक्शन कंपनी के काम को रफ्तार दे
  3292. 2:32:43दिया था। शौर्य ने जो प्रोडक्शन कंपनी
  3293. 2:32:46बनाया था वो बिग बुल स्टूडियो के नाम से
  3294. 2:32:48ही बनाया था और इसके मैनेजिंग डायरेक्टर
  3295. 2:32:51के रूप में मेनका का नाम ही सामने रखा था।
  3296. 2:32:54इसका कारण यह भी था कि मेनका रत्नाकर
  3297. 2:32:57शेट्टी से भी अच्छी तरह परिचित थी और
  3298. 2:32:59रत्नाकर शेट्टी को शौर्य [संगीत] से
  3299. 2:33:01मिलाने वाली भी मेनका ही थी और जो दूसरी
  3300. 2:33:04बात मेनका के पक्ष में था वो यह कि वो इस
  3301. 2:33:07शहर के कुछ प्रभावशाली लोगों के रूप में
  3302. 2:33:09पहचानी जाने लगी थी। एक बार सब कुछ फाइनल
  3303. 2:33:12होने के [संगीत] बाद शौर्य ने रत्नाकर
  3304. 2:33:14शेट्टी के द्वारा एक साथ पांच फिल्में
  3305. 2:33:16अनाउंस कर दी थी। जिसमें से दो [संगीत]
  3306. 2:33:19फिल्मों में वो मेन लीड एक्टर के रूप में
  3307. 2:33:21काम कर रहा था। वैसे शौर्य का फिल्मों में
  3308. 2:33:24काम करने का कोई इरादा नहीं था। पर वो यह
  3309. 2:33:27सब सिर्फ रणधीर शेखावत को सबक सिखाने के
  3310. 2:33:29मकसद से कर रहा था। आज रत्नाकर शेट्टी ने
  3311. 2:33:33अपनी एक फिल्म का मुहूर्त होटल राजकमल में
  3312. 2:33:35रखा हुआ था। जिसमें इंडस्ट्रीज के सभी
  3313. 2:33:37[संगीत] बड़े लोगों को उसने बुलाया था।
  3314. 2:33:40रत्नाकर शेट्टी ने अभी यह घोषणा नहीं किया
  3315. 2:33:42था कि वह इस फिल्म में किसे कास्ट करने जा
  3316. 2:33:45रहा है। पर उसने इस मुहूर्त की पब्लिसिटी
  3317. 2:33:47पर अच्छा खासा काम किया था। इसलिए
  3318. 2:33:50इंडस्ट्रीज में इस [संगीत] फिल्म का एक
  3319. 2:33:51अच्छा खासा बज क्रिएट हो गया था। रत्नाकर
  3320. 2:33:54शेट्टी ने खासकर इस मुहूर्त पार्टी में
  3321. 2:33:56रणधीर शेखावत को भी इनवाइट किया था और
  3322. 2:33:59उसने रणधीर शेखावत के लिए कुछ खास
  3323. 2:34:02प्लानिंग [संगीत] भी कर रखी थी।
  3324. 2:34:04इंडस्ट्रीज में इस बात की भी चर्चा पूरे
  3325. 2:34:06जोर से थी कि [संगीत] आखिर ऐसा कौन
  3326. 2:34:08प्रोड्यूसर आ गया है जिसने एक साथ पांच
  3327. 2:34:10फिल्में प्रोड्यूस करने की हिम्मत की है।
  3328. 2:34:13इसलिए भी लोगों का इरादा इस प्रोडक्शन
  3329. 2:34:15कंपनी के साथ अपना [संगीत] संबंध बनाने का
  3330. 2:34:17भी था। और सबसे बड़ी बात यह थी कि राजकमल
  3331. 2:34:21जैसे बड़े होटल में [संगीत] फिल्म का
  3332. 2:34:22मुहूर्त होना ही अपने आप में फिल्म की
  3333. 2:34:24पब्लिसिटी को नए लेवल पर लेकर चला गया था।
  3334. 2:34:28शाम के 7:00 [संगीत] बजे होटल राजकमल में
  3335. 2:34:30लोगों का आना जाना शुरू हो गया था।
  3336. 2:34:33इंडस्ट्रीज के लोगों के लिए इस प्रोडक्शन
  3337. 2:34:35कंपनी से जो एक नोन चेहरा इस पार्टी में
  3338. 2:34:37था, वह [संगीत] रत्नाकर शेट्टी का था।
  3339. 2:34:40क्योंकि डायरेक्टर के रूप में लोग रत्नाकर
  3340. 2:34:42शेट्टी को ही जानते थे। एक साथ पांच
  3341. 2:34:44फिल्में डायरेक्टर के [संगीत] रूप में
  3342. 2:34:46रत्नाकर शेट्टी को मिल जाना बहुत बड़ी बात
  3343. 2:34:49थी। जो लोग आज तक रत्नाकर शेट्टी को कोई
  3344. 2:34:51महत्व नहीं दे रहे थे। [संगीत] अचानक ही
  3345. 2:34:54उन लोगों की निगाह में रत्नाकर शेट्टी का
  3346. 2:34:56कद बहुत बढ़ गया था। नए से लेकर पुराने
  3347. 2:34:59आर्टिस्ट तक रत्नाकर शेट्टी का नंबर
  3348. 2:35:01ढूंढकर [संगीत]
  3349. 2:35:02उसको अपनी किसी भी फिल्म में एक रोल देने
  3350. 2:35:04के लिए फोन करने लगे थे। शौर्य पहले से ही
  3351. 2:35:07होटल में [संगीत] मौजूद था और उसने मेनका
  3352. 2:35:10को समझा भी दिया था कि उसे किस तरह से कुछ
  3353. 2:35:12लोगों के साथ पेस [संगीत] आना था। रत्नाकर
  3354. 2:35:15शेट्टी पहले से ही पार्टी हॉल में मौजूद
  3355. 2:35:17था और वह आने वाले हर गेस्ट का स्वागत कर
  3356. 2:35:20रहा था। वो लोगों को मिस मेनका को कंपनी
  3357. 2:35:23के मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में मिलवा
  3358. 2:35:24भी रहा था। क्योंकि मिस मेनका [संगीत]
  3359. 2:35:27पहले से है इस शहर की जानीमानी हस्ती के
  3360. 2:35:29रूप में फेमस थी। रत्नाकर शेट्टी मिस
  3361. 2:35:32मेनका के साथ खड़ा उन्हें कुछ लोगों से
  3362. 2:35:34मिलवा रहा था। तभी उसकी निगाह हाल में
  3363. 2:35:37अंदर आते रणधीर शेखावत और कबीर शेखावत के
  3364. 2:35:40ऊपर गई। वह तेजी से रणधीर शेखावत की तरफ
  3365. 2:35:43बढ़ गया और उनका स्वागत करते हुए बोला अरे
  3366. 2:35:46शेखावत साहब आप आ गए। [संगीत] आपके आने से
  3367. 2:35:50हमारी पार्टी में चार चांद लग गए। शेट्टी
  3368. 2:35:52साहब आप तो हमारी कुछ ज्यादा ही तारीफ कर
  3369. 2:35:54रहे हैं। यह बंदा इस काबिल नहीं है। हां,
  3370. 2:35:58आपके चर्चे जरूर आजकल इंडस्ट्रीज में सबकी
  3371. 2:36:00जुबान पर हैं। एक साथ पांच फिल्मों की
  3372. 2:36:03अनाउंसमेंट छोटी बात नहीं है। आपने तो
  3373. 2:36:05रातोंरात हमारी इंडस्ट्रीज में तूफान ला
  3374. 2:36:07दिया है। जिधर देखो उधर आपकी ही चर्चा हो
  3375. 2:36:10रही है। आखिर कहां से ढूंढ लिया आपने ऐसा
  3376. 2:36:12प्रोड्यूसर? रणधीर शेखावत की जुबान थरा
  3377. 2:36:15खुशामदी था। बस क्या कहें शेखावत साहब?
  3378. 2:36:19मैं थोड़ा लकी निकला जो मुझे [संगीत] ऐसा
  3379. 2:36:21प्रोडक्शन कंपनी मिल गया। रत्नाकर शेट्टी
  3380. 2:36:24संकोच भरे स्वर में बोला आप तो पांचप
  3381. 2:36:26[संगीत]
  3382. 2:36:27फिल्म एक साथ करने जा रहे हैं तो थोड़ा
  3383. 2:36:29हमारे बेटे का भी ध्यान रखिएगा। अगर इसको
  3384. 2:36:32किसी फिल्म में हीरो का रोल मिल जाए
  3385. 2:36:34[संगीत] तो फिर आगे हम भी आपका ध्यान
  3386. 2:36:36रखेंगे। रणधीर शेखावत ने स्पष्ट शब्दों
  3387. 2:36:40में अपने बेटे के लिए रत्नाकर शेट्टी से
  3388. 2:36:43काम मांग लिया था। अगर आपने कहा है तो हम
  3389. 2:36:46जरूर इसके लिए प्रोडक्शन कंपनी में बात
  3390. 2:36:48करेंगे। हमारी कंपनी भी आपसे जुड़कर खुश
  3391. 2:36:51होंगी। आखिर आपकी इतनी बड़ी पहुंच का
  3392. 2:36:54फायदा कौन उठाना नहीं चाहेंगी? रत्नाकर
  3393. 2:36:57शेट्टी भी रणधीर शेखावत को खुश करते हुए
  3394. 2:36:59बोला, [संगीत] "आप अपनी कंपनी के लोगों से
  3395. 2:37:02तो मिलवाइए ताकि हम उन्हें अपनी
  3396. 2:37:04इंडस्ट्रीज में उनके इतने बड़े
  3397. 2:37:05इन्वेस्टमेंट के लिए बधाई दे सकें। रणधीर
  3398. 2:37:09शेखावत उस हॉल में मौजूद कुछ फेमस लोगों
  3399. 2:37:11की ओर देखते हुए बोला जैसे वह जानना चाह
  3400. 2:37:14रहा हो कि इन लोगों में से कौन इस
  3401. 2:37:16प्रोडक्शन से जुड़ा हो सकता है। यह भी कोई
  3402. 2:37:19कहने की बात है। आइए आपको अपनी कंपनी के
  3403. 2:37:22मैनेजिंग डायरेक्टर से मिलवाते हैं।
  3404. 2:37:25रत्नाकर शेट्टी हाथ से एक तरफ चलने का
  3405. 2:37:27इशारा करते हुए बोला। दूसरी तरफ फैब्रिक
  3406. 2:37:30ट्रेंड के ऑफिस में शिप्रा अपना काम
  3407. 2:37:32समाप्त कर निकलने वाली थी कि तभी राजा
  3408. 2:37:35साहब ने उसके केबिन में प्रवेश किया।
  3409. 2:37:37[संगीत]
  3410. 2:37:37जैसे ही शिप्रा ने राजा साहब को अपने
  3411. 2:37:39केबिन में देखा वो खड़ी हो गई। अरे सर आप
  3412. 2:37:43यहां कोई काम था तो मुझे बुलवा लिया होता।
  3413. 2:37:46यह क्या तुमने मुझे फिर से सर कहा?
  3414. 2:37:48[संगीत] मैंने तुम्हें कितनी बार कहा कि
  3415. 2:37:50मुझे दादाजी बोलो। क्या तुम्हें यह बात
  3416. 2:37:52समझ में नहीं आती? राजा साहब थोड़े
  3417. 2:37:55नाराजगी से बोले। सॉरी
  3418. 2:37:57[संगीत]
  3419. 2:37:58दादाजी। गलती हो गई। आगे से मैं ध्यान
  3420. 2:38:00रखूंगी। शिप्रा तुरंत अपनी गलती मानती हुई
  3421. 2:38:04बोली।
  3422. 2:38:05ठीक है।
  3423. 2:38:05[संगीत]
  3424. 2:38:05ठीक है। आगे से ध्यान रखना। राजा साहब
  3425. 2:38:09बनावटी गुस्से में बोले। मुझसे कुछ काम था
  3426. 2:38:12क्या दादा जी? शिप्रा ने संयत स्वर में
  3427. 2:38:14पूछा। अरे नहीं मैं तो तुमसे यह पूछने आया
  3428. 2:38:18था कि अगर तुम भी पार्टी में जा रही हो तो
  3429. 2:38:21मेरे साथ ही चलो। राजा साहब शिप्रा को एक
  3430. 2:38:24बार ऊपर से नीचे तक [संगीत] देखते हुए
  3431. 2:38:26बोले। वो शिप्रा के कपड़ों की ओर देख रहे
  3432. 2:38:28थे जो किसी पार्टी में जाने के लिए
  3433. 2:38:30उपयुक्त नहीं था। क्योंकि वह इस समय एक
  3434. 2:38:33ऑफिस आउटफिट में थी। शिप्रा को समझ नहीं
  3435. 2:38:36आया कि राजा साहब उसे किस पार्टी [संगीत]
  3436. 2:38:38में जाने की बात कर रहे हैं क्योंकि उसे
  3437. 2:38:41तो किसी पार्टी में इनवाइट किया नहीं गया
  3438. 2:38:43था। इसलिए वो हैरान चेहरे से राजा साहब की
  3439. 2:38:46ओर देखकर बोली आप किस पार्टी की बात कर
  3440. 2:38:49रहे हैं? मेरे पास तो किसी पार्टी का
  3441. 2:38:51इनविटेशन है नहीं जहां मुझे जाना [संगीत]
  3442. 2:38:53है। यह कैसी बात कर रही हो तुम? आज शौर्य
  3443. 2:38:56के लिए इतना बड़ा दिन है और उसने तुम्हें
  3444. 2:38:59उस पार्टी में इनवाइट ही नहीं किया। खैर
  3445. 2:39:02कोई बात नहीं तुम मेरे साथ चलो। राजा साहब
  3446. 2:39:05[संगीत] शिप्रा को आदेश देते हुए बोले
  3447. 2:39:08मुझे समझ नहीं आ रहा दादा जी कि आप किस
  3448. 2:39:10पार्टी में जाने की [संगीत] बात करें और
  3449. 2:39:12सॉरी के लिए कौन सा बड़ा दिन है। शिप्रा
  3450. 2:39:15को अभी भी समझ में नहीं आया था कि राजा
  3451. 2:39:17साहब उससे क्या बोल रहे हैं। अरे आज शौर्य
  3452. 2:39:21की फिल्म का मुहूर्त है ना उसी की पार्टी
  3453. 2:39:23होटल राजकमल [संगीत]
  3454. 2:39:24में है। आश्चर्य की बात है कि उसने
  3455. 2:39:26तुम्हें इस बारे में बताया नहीं। हो सकता
  3456. 2:39:29है उसे ध्यान ना रहा हो। खैर कोई बात नहीं
  3457. 2:39:32तुम मेरे साथ चलो। शिप्रा को यह जानकर
  3458. 2:39:35शौर्य पर गुस्सा भी आया कि आज उसकी फिल्म
  3459. 2:39:38का मुहूर्त है और उसने उसे इसके बारे में
  3460. 2:39:40बताया भी नहीं। एक बार को तो उसका मन किया
  3461. 2:39:43कि वह इस पार्टी में नहीं जाएगी। पर अगले
  3462. 2:39:46ही पल उसके दिमाग में आया कि अगर वह नहीं
  3463. 2:39:48जाएगी तो उसे पता कैसे चलेगा कि वहां चल
  3464. 2:39:51क्या रहा है। एक तरफ तो वह अपने रिश्ते को
  3465. 2:39:53पटरी पर लाने की कोशिश कर रही है और उसे
  3466. 2:39:56इस बात की कदर ही नहीं है। उसने निश्चय कर
  3467. 2:39:59लिया कि वह जरूर इस पार्टी में जाएगी
  3468. 2:40:01[संगीत] जहां वो उसकी उपस्थिति नहीं चाहता
  3469. 2:40:04है। वो उसको यह भी जताएगी कि उसने उसको
  3470. 2:40:07नहीं बुलाया। फिर भी वह वहां पहुंच गई।
  3471. 2:40:10क्या हुआ? तुम किस सोच में गुम हो गई?
  3472. 2:40:13राजा साहब ने शिप्रा को किसी सोच में गुम
  3473. 2:40:16देखकर पूछा [संगीत]
  3474. 2:40:18कुछ नहीं। ऐसा लगा जैसे शिप्रा नींद से
  3475. 2:40:21जागी। फिर कुछ सोचकर उसने राजा [संगीत]
  3476. 2:40:24साहब से पूछा क्या आपको शौर्य ने ही
  3477. 2:40:26इनवाइट किया है दादा जी? अरे नहीं मुझे तो
  3478. 2:40:30शिप्रा ने इनवाइट किया है। वैसे तो मैं
  3479. 2:40:32[संगीत] जाता नहीं पर जब पता चला कि शौर्य
  3480. 2:40:34इस फिल्म में काम करने वाला है तो सोचा
  3481. 2:40:37जाकर देखना चाहिए। इसीलिए तो मैंने तुमसे
  3482. 2:40:40पूछा मुझे नहीं पता था कि शौर्य ने अपनी
  3483. 2:40:43पत्नी को ही अपनी फिल्म की मुहूर्त पार्टी
  3484. 2:40:46में नहीं बुलाया है। राजा साहब जानबूझकर
  3485. 2:40:50शिप्रा के मन में चिंगारी लगाते हुए कहा
  3486. 2:40:53उन्हें लगा इस तरह से दोनों आपस में थोड़ा
  3487. 2:40:55कहासनी करेंगे तो दोनों को करीब आने का
  3488. 2:40:58मौका मिलेगा। एक दूसरे से उदासीन रहने से
  3489. 2:41:01अच्छा है कि हल्काफुल्का तकरार पतिप के
  3490. 2:41:04बीच होते रहना चाहिए। फिर उन्होंने शिप्रा
  3491. 2:41:08के चेहरे का भाव देखकर कहा, क्या तुम चल
  3492. 2:41:11रही हो या फिर मैं जाऊं? मैं चलती हूं
  3493. 2:41:14आपके साथ। शिप्रा तुरंत तैयार [संगीत]
  3494. 2:41:17होती हुई बोली। वो जल्दी से राजा साहब के
  3495. 2:41:20साथ उनकी कार में बैठ गई। जैसे ही उनकी
  3496. 2:41:22[संगीत] कार शहर के बीच में पहुंची, राजा
  3497. 2:41:25साहब ने एक ब्रांडेड डिजाइनर कपड़े की शॉप
  3498. 2:41:28के सामने जाकर कार रोकी। आपने यहां कार
  3499. 2:41:31क्यों रुकवा दी दादा जी? शिप्रा ने उस शॉप
  3500. 2:41:34[संगीत] की ओर देखते हुए कहा, तुम जाकर
  3501. 2:41:36अपने लिए एक अच्छा सा डिजाइनर ड्रेस खरीद
  3502. 2:41:38लो और उसे पहन भी लेना। पार्टी के लिए यह
  3503. 2:41:42ड्रेस ठीक नहीं है। राजा साहब [संगीत] भी
  3504. 2:41:45शॉप की तरफ देखते हुए बोले फिर वो
  3505. 2:41:47ड्राइविंग कर रहे कांता प्रसाद से बोले
  3506. 2:41:50कांता प्रसाद तुम शिप्रा के साथ जाकर इसको
  3507. 2:41:52एक अच्छा सा ड्रेस पसंद करवा दो। ना चाहते
  3508. 2:41:56हुए भी शिप्रा को कार से उतर कर उस शॉप
  3509. 2:41:58में जाना पड़ा। दूसरी तरफ रत्नाकर शेट्टी
  3510. 2:42:01रणधीर शेखावत के साथ मेनका के पास पहुंचा।
  3511. 2:42:05मिस्टर शेखावत इनसे मिलिए। [संगीत] मिस
  3512. 2:42:07मेनका बिग बुल स्टूडियो की मैनेजिंग
  3513. 2:42:09डायरेक्टर। अरे मिस मेनका तो आप है इस
  3514. 2:42:13कंपनी की मैनेजिंग डायरेक्टर मानना
  3515. 2:42:15पड़ेगा। आप जैसी ही कोई हस्ती इतना बड़ा
  3516. 2:42:18इन्वेस्टमेंट करवा सकती है इस इंडस्ट्रीज
  3517. 2:42:20में। रणधीर शेखावत मेनका की तारीफ करते
  3518. 2:42:23[संगीत] हुए बोले ऐसा कुछ नहीं है मिस्टर
  3519. 2:42:26शेखावत। बस छोटी सी कोशिश है कि इस
  3520. 2:42:29इंडस्ट्रीज में भी किस्मत आजमाया जाए। आप
  3521. 2:42:31[संगीत] जैसी बड़ी मछली के बीच में कितने
  3522. 2:42:33दिन सर्वाइव कर पाते हैं, यह देखना है।
  3523. 2:42:36मेनका रणधीर शेखावत के सामने हंबल बनती
  3524. 2:42:38[संगीत] हुई बोली, "यह आप कैसी बात करती
  3525. 2:42:41हैं? मिस मेनका? आपने तो सीधा शार्क बनकर
  3526. 2:42:44इस इंडस्ट्रीज में गोता लगाया है। मैं भी
  3527. 2:42:47इस इंडस्ट्रीज [संगीत] का छोटा-मोटा
  3528. 2:42:48डिस्ट्रीब्यूटर हूं। हमें भी अपने साथ काम
  3529. 2:42:51करने का मौका दीजिएगा। रणधीर शेखावत
  3530. 2:42:54व्यवसायिक मुस्कान [संगीत] के साथ बोला।
  3531. 2:42:56अरे हां मिस्टर शेखावत। मुझे शेट्टी साहब
  3532. 2:42:59से पता चला था कि आप इस इंडस्ट्रीज के
  3533. 2:43:01बहुत बड़े डिस्ट्रीब्यूटर हैं। हमें पता
  3534. 2:43:04है भविष्य [संगीत] में आपसे तो काम पर ही
  3535. 2:43:06है। अगर आप तैयार हो तो अभी आपके साथ हम
  3536. 2:43:09अपनी बिजनेस की शुरुआत कर सकते हैं। कहावत
  3537. 2:43:11है ना कि काल करे सो आज कर आज करे सो अब
  3538. 2:43:15पल में प्रलय होत है बहरी करेगा कब? तो
  3539. 2:43:18कहिए क्या ख्याल है आपका? मेनका तिरछी
  3540. 2:43:22मुस्कान के साथ बोली। रणधीर शेखावत तो
  3541. 2:43:25उसकी मुस्कान पर ही फ्लैट हो गया। फिर वह
  3542. 2:43:27समझने की कोशिश करता हुआ कि मेनका किस तरह
  3543. 2:43:30की बिजनेस की बात कर रही है। यह जानने की
  3544. 2:43:32कोशिश करता हुआ बोला, "आप किस तरह का सौदा
  3545. 2:43:36करना चाहती हैं? मिस मेनका?" सबसे पहले तो
  3546. 2:43:39मुझे आप बताइए कि आपके पास कितने हॉल हैं?
  3547. 2:43:42मेनका विचारशील स्वर में बोली, लगभग 1000
  3548. 2:43:46से ज्यादा हॉल अभी मेरे कंट्रोल में हैं।
  3549. 2:43:49रणधीर शेखावत गर्व से सीना चौरा करता हुआ
  3550. 2:43:52बोला, "बोह बढ़िया। अगर आप तैयार हैं तो 6
  3551. 2:43:55महीने के बाद लगभग 2 महीने के लिए मुझे
  3552. 2:43:58आपका सारा हॉल चाहिए। अगर आप तैयार हैं तो
  3553. 2:44:0160% ऑक्यूपेसी के साथ मैं आज के डेट में
  3554. 2:44:04ही एडवांस पेमेंट करने को तैयार हूं।
  3555. 2:44:07मेनका ने रणधीर शेखावत के सामने प्रपोजल
  3556. 2:44:09रख दिया। मेनका का प्रपोजल सुनकर रणधीर
  3557. 2:44:13शेखावत तो मेनका का चेहरा देखता रह गया।
  3558. 2:44:16उसे लगा कि यह लड़की बेवकूफ [संगीत] है
  3559. 2:44:18क्या जो पूरे 2 महीने के लिए 1000 हॉल को
  3560. 2:44:21बुक करना चाहती है। यहां एक फिल्म को एक
  3561. 2:44:24सप्ताह हॉल में चलाना मुश्किल है। अगर यह
  3562. 2:44:26अपने पांचों फिल्म को 6 महीने में तैयार
  3563. 2:44:29भी कर लेती है तो क्या वो यह पांच फिल्म 2
  3564. 2:44:31महीने लगातार चला लेगी? अभी नई आई है
  3565. 2:44:35बिजनेस में। इसे बस पैसे लुटाना है तो फिर
  3566. 2:44:37ठीक है। मुझे क्या? मुझे तो एडवांस में
  3567. 2:44:40पैसे मिल रहे हैं। तो मैं इतने अच्छे मौके
  3568. 2:44:42को हाथ से कैसे जाने दे [संगीत] सकता हूं?
  3569. 2:44:45अब आगे क्या होगा? आखिर शौर्य का क्या
  3570. 2:44:48प्लान है इसके पीछे? वो क्यों रणधीर
  3571. 2:44:50शेखावत से 2 महीने के लिए उसके सारे हॉल
  3572. 2:44:54को पहले ही बुक कर लेना चाहता है? आखिर
  3573. 2:44:56इसके पीछे शौर्य की क्या मंशा है? शिप्रा
  3574. 2:45:00को इस पार्टी में देखकर शौर्य का क्या हाल
  3575. 2:45:02होगा? मिस मीनका आप पहली बार इस लाइन में
  3576. 2:45:06आ रही हैं। तो हम जैसे डिस्ट्रीब्यूटर का
  3577. 2:45:09कर्तव्य बनता है कि हम आप जैसे प्रोडक्शन
  3578. 2:45:11कंपनी का दिल से सहयोग करें। इसलिए मैं
  3579. 2:45:14आपके प्रपोजल के लिए तैयार हूं। रणधीर
  3580. 2:45:17शेखावत कुटिल मुस्कान के साथ बोला। रणधीर
  3581. 2:45:20शेखावत की बात सुनकर मेनका हल्के से
  3582. 2:45:23मुस्कुराई और बोली यह तो बढ़िया है। तो
  3583. 2:45:26मैं अभी एग्रीमेंट पेपर तैयार करवाती हूं।
  3584. 2:45:29इतना कहकर वो रत्नाकर शेट्टी की तरफ मुड़ी
  3585. 2:45:31और उनसे बोली मिस्टर शेट्टी आपने हम दोनों
  3586. 2:45:35की बात सुन ही ली? तो अभी 10 मिनट में
  3587. 2:45:37एग्रीमेंट पेपर तैयार करवा कर इस डील को
  3588. 2:45:40लॉक कर दीजिए। मैं अभी पेपर तैयार करवाता
  3589. 2:45:43हूं। मेम सब कुछ तैयार ही है। बस नाम ही
  3590. 2:45:46तो एडिट करना है। मैं अभी पेपर लाता हूं।
  3591. 2:45:49इतना बोलकर रत्नाकर शेट्टी वहां से चला
  3592. 2:45:51गया। जबकि मेनका की आंखों में शैतानी चमक
  3593. 2:45:54आ गई थी। वो यह सोच कर खुश थी [संगीत] कि
  3594. 2:45:57रणधीर शेखावत तो आसानी से उसकी बातों में
  3595. 2:45:59आ गया था। वो तो सोच कर बैठी थी कि अगर
  3596. 2:46:02रणधीर शेखावत नहीं मानता तो वह 80%
  3597. 2:46:05ऑक्यूपेशी तक प्राइस को हाई करने को तैयार
  3598. 2:46:07थी। पर ऐसी नौबत ही नहीं आई। शौर्य की
  3599. 2:46:10बातों से वह इतना तो समझ ही गई थी कि अगर
  3600. 2:46:12रणधीर शेखावत को यह पता चल जाता कि इस
  3601. 2:46:15प्रोजेक्ट में शौर्य और नताशा इनवॉल्व हैं
  3602. 2:46:17तो वह किसी भी कीमत पर उसको अपने हॉल नहीं
  3603. 2:46:19देने वाला था। इसीलिए नताशा ने शुरुआत में
  3604. 2:46:22ही रणधीर शेखावत के साथ इस डील को करने का
  3605. 2:46:25प्लान किया था। थोड़ी ही देर में रत्नाकर
  3606. 2:46:28शेट्टी एक लड़के के साथ वहां उपस्थित हुआ
  3607. 2:46:30जिसके हाथ में कुछ दस्तावेज [संगीत] था।
  3608. 2:46:32उसने वह पेपर मेनका की तरफ बढ़ाया। मेनका
  3609. 2:46:36ने एक सरसरी निगाह उस पेपर पर डाला और उसे
  3610. 2:46:38रणधीर शेखावत की तरफ बढ़ा दिया। देख लीजिए
  3611. 2:46:41शेखावत साहब आप एग्रीमेंट के क्लॉज़ को
  3612. 2:46:44अच्छी तरह पढ़ लीजिए
  3613. 2:46:45[संगीत]
  3614. 2:46:46ताकि आपको कोई कंफ्यूजन ना रहे। पेपर को
  3615. 2:46:49पढ़ते हुए एक जगह जाकर रणधीर शेखावत की
  3616. 2:46:51नजर अटक गई। वो मेनका की तरफ देखकर बोला
  3617. 2:46:54मेनका जी इसमें यह क्या कंडीशन है कि अगर
  3618. 2:46:57मैं किसी कारण से इस एग्रीमेंट से निकलता
  3619. 2:46:59हूं तो मुझे फिर फाइव टाइम्स पेमेंट आपको
  3620. 2:47:01रिटर्न करना पड़ेगा। यह तो ठीक नहीं है।
  3621. 2:47:04मिस्टर शेखावत क्या आप बाद में मुकरने की
  3622. 2:47:07सोच रहे हैं? आप यह क्यों नहीं सोच रहे
  3623. 2:47:09हैं कि [संगीत] मैं 6 महीने पहले आपको
  3624. 2:47:12एडवांस में यह सारा पेमेंट कर रही हूं तो
  3625. 2:47:14इतनी सिक्योरिटी तो मुझे चाहिए। नहीं तो
  3626. 2:47:16कल का क्या पता? अगर आप उस समय किसी और
  3627. 2:47:19लालच में अपनी बात से मुकर जाते हैं तो
  3628. 2:47:22इसलिए आपको यह कंडीशन तो माननी पड़ेगी। और
  3629. 2:47:25इसमें गलत क्या है? आप अपनी जुबान के
  3630. 2:47:27पक्के हैं तो इस कंडीशन से कोई खास फर्क
  3631. 2:47:30पड़ने वाला तो नहीं है? हां, अगर आपके
  3632. 2:47:32दिमाग [संगीत] में यह चल रहा हो कि अभी तो
  3633. 2:47:34पैसे ले लो बाद की बाद में देखेंगे तो फिर
  3634. 2:47:37दिक्कत है। इसलिए आप अच्छे से सोच लीजिए।
  3635. 2:47:41मेनका रणधीर शेखावत के ईगो पर चोट करती
  3636. 2:47:44हुई बोली। [संगीत] मेनका जी आप ऐसा कैसे
  3637. 2:47:46बोल सकते हैं? आप इंडस्ट्रीज में किसी से
  3638. 2:47:49पता कर सकते हैं कि रणधीर शेखावत अपनी
  3639. 2:47:51जुबान का कितना पक्का है? रणधीर शेखावत
  3640. 2:47:54[संगीत]
  3641. 2:47:55तुनक कर बोला उसने ऐसा जहर किया जैसे
  3642. 2:47:58मेनका ने कितनी छोटी बात उसके बारे में कह
  3643. 2:48:00दी थी। फिर तो बात ही खत्म है मिस्टर
  3644. 2:48:03शेखावत। फिर इस ब्लाउज का होना ना होना तो
  3645. 2:48:05आपके लिए बराबर ही है। आपको यह समझना
  3646. 2:48:08चाहिए कि जब कंपनियां इस तरह का एग्रीमेंट
  3647. 2:48:11बनाती है तो हर छोटी बातों [संगीत] को
  3648. 2:48:13उसमें ध्यान रखकर मेंशन करना पड़ता है।
  3649. 2:48:16मेनका ने रणधीर शेखावत को समझाने की कोशिश
  3650. 2:48:18की। रणधीर शेखावत ने एक पल को सोचा और फिर
  3651. 2:48:22अपनी जेब से पेन निकाल कर बोला ठीक है जब
  3652. 2:48:25आप ऐसा बोल रही हैं तो मैं साइन कर देता
  3653. 2:48:27हूं। मेनका ने [संगीत] हाथों हाथ रणधीर
  3654. 2:48:30शेखावत के अकाउंट में पैसे भी ट्रांसफर कर
  3655. 2:48:32दिए। डील ओके होने के बाद दोनों ने हाथ
  3656. 2:48:35मिलाया। यह पहली [संगीत] बार है जब कोई
  3657. 2:48:38इतना बड़ा डील इतने कम समय में फाइनल हो
  3658. 2:48:41गया है। रणधीर शेखावत खुश होते हुए बोला
  3659. 2:48:44इस बात पर चीयर्स तो बनता है मिस्टर
  3660. 2:48:46शेखावत। रत्नाकर शेट्टी एक वेटर को रोक कर
  3661. 2:48:50उसके ट्रे से ड्रिंक की दो गिलास लेते हुए
  3662. 2:48:52बोला। उसने एक गिलास रणधीर शेखावत की तरफ
  3663. 2:48:55बढ़ाया। रणधीर शेखावत ने भी रत्नाकर
  3664. 2:48:58शेट्टी के साथ ग्लास को टकराया। उसी समय
  3665. 2:49:01हॉल में प्रवेश करती नताशा कपूर की तरफ
  3666. 2:49:03सबकी निगाह घूम गई। नताशा कपूर को इस हॉल
  3667. 2:49:06में देखकर बहुत से मीडिया वालों का ध्यान
  3668. 2:49:08बरबस ही उसकी तरफ चला गया। शौर्य भी उसके
  3669. 2:49:11साथ था। नताशा कपूर ने मीडिया वालों को
  3670. 2:49:14अपने कुछ पोज़ दिए जिसे कैमरों ने तुरंत
  3671. 2:49:16कैप्चर किया। शौर्य साइड में खड़ा रहा।
  3672. 2:49:19तभी कहीं भीड़ से राहुल निकल कर शौर्य के
  3673. 2:49:22पास आया और उसके कान के पास जाकर बोला,
  3674. 2:49:26"जीजू, आप [संगीत] तो एकदम हीरो लग रहे
  3675. 2:49:29हो। हीरो लग रहा हूं का क्या मतलब हुआ?
  3676. 2:49:32हीरो हूं। अभी थोड़ी देर में इसकी घोषणा
  3677. 2:49:34भी हो जाएगी। शौर्य भी उसके कान के पास
  3678. 2:49:37फुसफुसाया। [संगीत]
  3679. 2:49:39फिर शौर्य को कुछ ध्यान आया तो वह राहुल
  3680. 2:49:42से बोला एक बात का ध्यान [संगीत] रखना
  3681. 2:49:44मुझे पब्लिक के बीच में जीजू मत बोलना।
  3682. 2:49:48इसका क्या मतलब हुआ कि मैं आपको जीजू नहीं
  3683. 2:49:51बोलूंगा। आप मेरे जीजू हो तो जीजू ही
  3684. 2:49:53बोलूंगा ना। राहुल नाराजगी भरे स्वर में
  3685. 2:49:56बोला। अरे मैं तुम्हारा जीजू हूं। यह
  3686. 2:49:59तुम्हें पता है ना? दुनिया को तो [संगीत]
  3687. 2:50:01नहीं पता। और वैसे भी मैं हीरो बनने जा
  3688. 2:50:04रहा हूं। तो लोगों को एक शादीशुदा हीरो
  3689. 2:50:06पसंद आएगा क्या? इसीलिए इस तरह की बात अभी
  3690. 2:50:09पब्लिक ना हो तो [संगीत] यही अच्छा है
  3691. 2:50:11मेरे लिए। शौर्य ने राहुल को समझाने की
  3692. 2:50:14कोशिश की जो कि राहुल को भी समझ में आई।
  3693. 2:50:18तो फिर मैं आपको क्या कह कर बुलाऊंगा?
  3694. 2:50:21राहुल असमंजस [संगीत] भरे स्वर में बोला।
  3695. 2:50:24तुम मुझे भैया कहकर संबोधित कर सकते हो।
  3696. 2:50:28शौर्य फुसफुसाया।
  3697. 2:50:30और अगर दीदी [संगीत] ने मुझे आपको भैया
  3698. 2:50:32बोलते सुन लिया, तो उनका क्या रिएक्शन
  3699. 2:50:34होगा? राहुल ने अपना संशय प्रकट किया।
  3700. 2:50:38तुम्हारी दीदी वैसे भी मुझे अपना पति कहां
  3701. 2:50:40मानती है? वह तो परिवार वालों को दिखाने
  3702. 2:50:43के लिए यह आवरण ओढ़ रखी है। उसे कोई फर्क
  3703. 2:50:46नहीं पड़ने वाला कि तुम मुझे क्या कहकर
  3704. 2:50:48बुलाते हो और वैसे भी तुम घर पर मुझे जैसे
  3705. 2:50:51चाहे वैसे बुला सकते हो। [संगीत] यह बात
  3706. 2:50:54सिर्फ बाहर वालों के सामने लागू होती है।
  3707. 2:50:56शौर्य ने स्पष्ट तरीके से राहुल को
  3708. 2:50:59समझाया।
  3709. 2:51:00ठीक है जी। भैया
  3710. 2:51:03राहुल जीजू बोलने वाला था पर बीच में ही
  3711. 2:51:06अपने शब्द को रोक कर भैया बोला यह बात
  3712. 2:51:09[संगीत] अब की तुमने समझदारी वाली बात
  3713. 2:51:12शौर्य खुश होते हुए बोला पर राहुल की
  3714. 2:51:15आंखें सिकुड़ गई वो संदेह भरे स्वर में
  3715. 2:51:18बोला जीजू [संगीत] कहीं आप दीदी को तलाक
  3716. 2:51:22देने की तो नहीं सोच रहे राहुल की बात
  3717. 2:51:25सुनकर शौर्य चौंक गया वो हैरान होकर राहुल
  3718. 2:51:29की तरफ देखने लगा [संगीत]
  3719. 2:51:30तुमने ऐसा कैसे सोच लिया? अगर तुम्हारी
  3720. 2:51:33बहन मुझसे तलाक लेना चाहेंगी भी तो मैं
  3721. 2:51:35ऐसे हालात क्रिएट कर दूंगा कि उसे अपनी इस
  3722. 2:51:38चाहत [संगीत] को छोड़ना पड़ेगा। शौर्य
  3723. 2:51:40दृढ़ स्वर में बोला वो मुझे अपना पति माने
  3724. 2:51:44या ना माने पर मैंने तो उसे अपनी पत्नी
  3725. 2:51:46मान [संगीत] लिया। इसलिए अब इस दिल में
  3726. 2:51:48तुम्हारी बहन के अलावा किसी और के लिए जगह
  3727. 2:51:50नहीं है। [संगीत] इतने भी शरीफ नहीं हो
  3728. 2:51:53आप। जिस तरह नताशा कपूर के इर्द-गिर्द
  3729. 2:51:56मंडराते हो तो कोई भी देखकर आपके इरादे को
  3730. 2:51:58समझ सकता है। राहुल अपनी आंखें तरेरते हुए
  3731. 2:52:01बोला क्या बात करते हो? [संगीत] मैं इतना
  3732. 2:52:04अच्छी हरकत करता हूं क्या? शौर्य अपनी
  3733. 2:52:07आंखें बड़ी करते हुए बोला, नहीं [संगीत]
  3734. 2:52:10ऐसा नहीं है। पर जब नताशा कपूर आपके करीब
  3735. 2:52:13आती है तो आप उससे दूर जाने की कोशिश भी
  3736. 2:52:16नहीं करते। राहुल संकोच भरे स्वर में
  3737. 2:52:19बोला। शाले साहब जब इतनी खूबसूरत लड़की
  3738. 2:52:22पास आती [संगीत] है तो दिल तो मचल ही जाता
  3739. 2:52:25है पर फिर भी मैं अपनी भावनाओं को पूरी
  3740. 2:52:27तरह कंट्रोल में रखता हूं। शौर्य सफाई
  3741. 2:52:30देते हुए बोला। दूसरी तरफ रणधीर शेखावत ने
  3742. 2:52:34जब नताशा और शौर्य को इस पार्टी में देखा
  3743. 2:52:36तो बुरा सा मुंह बनाते हुए बोला मिस्टर
  3744. 2:52:39शेट्टी आपने इन दोनों को भी अपने पार्टी
  3745. 2:52:42में आमंत्रित किया है। हमने तो इंडस्ट्रीज
  3746. 2:52:45के सारे ही लोगों को आमंत्रित किया है
  3747. 2:52:47बिना किसी भेदभाव के। और जहां तक रहा
  3748. 2:52:50नताशा कपूर की बात, तो वह तो अभी
  3749. 2:52:52इंडस्ट्रीज की हॉट केक है, उन्हें [संगीत]
  3750. 2:52:54कैसे नहीं बुलाता? रत्नाकर शेट्टी ने
  3751. 2:52:57व्यवहार सुलभ मुस्कान के साथ कहा। इसी समय
  3752. 2:53:00प्रदुमन सेठ रणधीर शेखावत के पास आया। अरे
  3753. 2:53:04शेखावत साहब यह दोनों यहां कैसे नजर आ रहे
  3754. 2:53:06हैं? आपने तो इन दोनों को इंडस्ट्रीज से
  3755. 2:53:09बैन करवा रखा है। यह मिस्टर शेट्टी की
  3756. 2:53:11मेहरबानी है। यह इनकी पहली फिल्म की
  3757. 2:53:14हीरोइन है ना? शायद इसीलिए शेट्टी साहब को
  3758. 2:53:16दया आ गई होगी। शेखावत तिरस्कार भरी नजरों
  3759. 2:53:20[संगीत] से नताशा की ओर देखते हुए बोला।
  3760. 2:53:23आपको पता होना चाहिए था शेट्टी साहब कि
  3761. 2:53:25हमने मिस्टर शेखावत के कहने पर ही आप जो
  3762. 2:53:28फिल्म हमारे लिए इन दोनों के साथ बनाने
  3763. 2:53:30वाले थे उन्हें [संगीत] डब्बा बंद कर
  3764. 2:53:32दिया। उसके बाद भी आपने इन दोनों को अपने
  3765. 2:53:35पार्टी में आमंत्रित किया। आपको कुछ तो
  3766. 2:53:37मिस्टर शेखावत का लिहाज करना चाहिए था।
  3767. 2:53:40प्रदुमन शेठ शेखावत की चापलूसी [संगीत]
  3768. 2:53:42करता हुआ बोला। प्रदुमन जी यह हमारी कंपनी
  3769. 2:53:46तो है नहीं और यह एक कॉर्पोरेट हाउस है।
  3770. 2:53:49यह किसी के पर्सनल रिलेशन के लिए काम नहीं
  3771. 2:53:51करती। यहां सबको [संगीत] एक ही आईने से
  3772. 2:53:54देखा जाता है। किसका किसके साथ क्या
  3773. 2:53:56कॉम्बिनेशन है? कंपनी उसके चक्कर [संगीत]
  3774. 2:53:59में नहीं पड़ती। यहां तो यह देखा जाता है
  3775. 2:54:01कि सामने वाला कंपनी की तरक्की के लिए
  3776. 2:54:04कितना लॉयल है। रत्नाकर शेट्टी अपनी बेबसी
  3777. 2:54:07जताते [संगीत] हुए बोला, "ऐसा होता है
  3778. 2:54:09प्रदुमन जी, इन्होंने अभी-अभी इस
  3779. 2:54:11इंडस्ट्रीज में कदम रखा है। धीरे-धीरे
  3780. 2:54:14इन्हें पता चल जाएगा कि यहां रिलेशन कितना
  3781. 2:54:16मायने रखता है। हम जैसे बड़ी मछलियों से
  3782. 2:54:19बिगाड़ कर कितने दिन ये यहां सर्वाइव कर
  3783. 2:54:21पाएंगे। रणधीर शेखावत नाराजगी भरे स्वर
  3784. 2:54:24में बोला। इसी समय शौर्य नताशा के साथ
  3785. 2:54:27रत्नाकर शेट्टी के पास पहुंचा। नमस्कार
  3786. 2:54:30शेट्टी साहब। आपने तो लगता है पूरी
  3787. 2:54:32इंडस्ट्रीज को ही इस पार्टी में बुला लिया
  3788. 2:54:34है। मुझे उम्मीद नहीं था कि इतनी जल्दी
  3789. 2:54:36मिस्टर शेखावत से दोबारा मिलने का मौका
  3790. 2:54:38मिलेगा। कोई बात नहीं है। कभी-कभी तुम
  3791. 2:54:41जैसे छोटे लोगों को भी मुस्कुराने का मौका
  3792. 2:54:43मिल जाना चाहिए। नहीं तो कहीं हताशा में
  3793. 2:54:45तुम जैसे लोग सुसाइड ना कर लें। मुफ्त का
  3794. 2:54:47खाना मिल रहा है खाओ और जाओ। तुम जैसे लोग
  3795. 2:54:50बस पार्टी की शोभा बढ़ाने के लिए होते
  3796. 2:54:52हैं। उसके बदले में मुफ्त की शराब तो मिल
  3797. 2:54:54ही जाती है। रणधीर शेखावत ने अपनी भरास
  3798. 2:54:57निकालने की कोशिश की। अरे शेखावत साहब आप
  3799. 2:55:00भी किन लोगों को तरजीह दे रहे हैं? आप
  3800. 2:55:03जैसे लोग अगर इन जैसे लोगों के बारे में
  3801. 2:55:05बात भी करेंगे तो वह इन्हें फालतू की
  3802. 2:55:07पब्लिसिटी देने वाली बात हो गई। इसलिए इन
  3803. 2:55:09जैसे लोगों को जितना इग्नोर कर सकते हैं
  3804. 2:55:11वो उतना बढ़िया है। प्रदुमन सेठ बीच में
  3805. 2:55:14आते हुए बोला। शौर्य ने प्रदुमन शेठ की
  3806. 2:55:17बात सुना तो वो नताशा से बोला नताशा यह
  3807. 2:55:20वही प्रदुमन शेठ हैं जो हम दोनों को लेकर
  3808. 2:55:23फिल्म बनाने वाले थे। क्या सच में यह एक
  3809. 2:55:25प्रोड्यूसर हैं? मुझे तो यह अभी किसी का
  3810. 2:55:27भोपू नजर आ रहे हैं जिनकी अपनी [संगीत]
  3811. 2:55:29कोई आवाज नहीं है। शौर्य की बात बड़ी
  3812. 2:55:32तिलमिलाकर प्रदुमन सेठ को लगी। वो शौर्य
  3813. 2:55:34को गुस्से [संगीत] में घूरते हुए बोला।
  3814. 2:55:37लड़के अभी जुम्मा जुम्मा चार दिन हुआ नहीं
  3815. 2:55:39इस इंडस्ट्रीज में आए हुए और इतनी जुबान
  3816. 2:55:42चलने लगी है। मैं भी देखता हूं कि तुम
  3817. 2:55:44कितने दिन इस इंडस्ट्रीज में दिखते हो।
  3818. 2:55:46श्रवण लगता [संगीत] है तुमने किसी को भोपू
  3819. 2:55:48बोलकर ज्यादा इज्जत दे दी है। किसी के
  3820. 2:55:50पीछे दुम हिलाने वाले को कुत्ता बोला जाता
  3821. 2:55:52है ना कि भोपू। और तुम्हें तुम्हें पता
  3822. 2:55:54होना चाहिए कुत्ते को घी हजम नहीं होती।
  3823. 2:55:57नताशा सरकाजम करती हुई बोली। मिस नताशा
  3824. 2:56:00मैं देख रहा हूं कि आपकी जुबान कुछ ज्यादा
  3825. 2:56:02ही चलने लगी है। लगता [संगीत] है आप सारी
  3826. 2:56:04तहजीब भूल गई हैं। रणधीर शेखावत नताशा की
  3827. 2:56:08बात सुनकर बोला, अब कहीं आप मेरी जुबान पर
  3828. 2:56:10भी बैन तो नहीं लगाने वाले हैं। मैं तो
  3829. 2:56:12भूल ही गई कि मुझे आप जैसे बिग शॉट से डर
  3830. 2:56:15कर रहना चाहिए। [संगीत] पिछली बार जो कुछ
  3831. 2:56:17हुआ, उसके बाद रणधीर शेखावत का सारा
  3832. 2:56:20सम्मान नताशा की नजर में समाप्त हो चुका
  3833. 2:56:22था। जिस आदमी ने उसके करियर को डूबाने की
  3834. 2:56:25कोशिश की, उसका अब वो कैसा सम्मान कर सकती
  3835. 2:56:27थी? बहुत खूब। अब तो गूंगे के मुंह में भी
  3836. 2:56:30जुबान आ गई। रणधीर शेखावत का चेहरा गुस्से
  3837. 2:56:33से लाल हो गया। यह तो आपकी ही मेहरबानी है
  3838. 2:56:36मिस्टर शेखावत। जब आप किसी को सम्मान दे
  3839. 2:56:38नहीं सकते तो दूसरे से सम्मान पाने की
  3840. 2:56:41उम्मीद भी खो देनी चाहिए। शौर्य तंज भरे
  3841. 2:56:44स्वर में बोला। इस समय मेनका उन लोगों से
  3842. 2:56:47कुछ ही दूरी पर किसी से बात कर रही थी।
  3843. 2:56:49रणधीर शेखावत ने वहीं से आवाज लगाई। मिस
  3844. 2:56:52मेनका क्या आप 1 मिनट के लिए आप यहां आ
  3845. 2:56:54सकती हैं? मेनका उन सभी को देखती हुई उनके
  3846. 2:56:58पास आई। कहिए मिस्टर शेखावत क्या बात है?
  3847. 2:57:01मिस मेनका मैं देख रहा हूं कि आपकी पार्टी
  3848. 2:57:04में दो ऐसे लोग हैं जो इस इंडस्ट्रीज में
  3849. 2:57:06अवांछित हैं। इसलिए मैं चाहता हूं कि आप
  3850. 2:57:09उन दोनों को अभी के अभी इस पार्टी से
  3851. 2:57:11[संगीत] निकाल दें। रणधीर शेखावत नताशा की
  3852. 2:57:14ओर देखता हुआ बोला क्या मैं जान सकती
  3853. 2:57:16[संगीत] हूं कि आप किसके बारे में बात कर
  3854. 2:57:18रहे हैं? मेनका ने शांति से पूछा, "यह जो
  3855. 2:57:21आपके सामने दो बदतमीज लोग खड़े [संगीत]
  3856. 2:57:23हैं, मैं इन्हीं के बारे में बात कर रहा
  3857. 2:57:25हूं। रणधीर शेखावत शौर्य और नताशा की ओर
  3858. 2:57:28इशारा करता [संगीत] हुआ बोला मिस्टर
  3859. 2:57:30शेखावत हो सकता है कि आपका इन दोनों से
  3860. 2:57:32कोई पर्सनल ग्रज हो पर यह यहां हमारे
  3861. 2:57:35सम्मानित [संगीत] गेस्ट हैं। आप भले अपनी
  3862. 2:57:38पार्टी में किसको बुलाते हैं और किसको
  3863. 2:57:40नहीं बुलाते यह आपका पर्सनल मामला है। पर
  3864. 2:57:43मैं अपनी पार्टी में किसको बुलाती हूं यह
  3865. 2:57:46मेरा पर्सनल [संगीत] मामला है। इसलिए मैं
  3866. 2:57:48आपके कहने से अपनी पार्टी से अपने किसी
  3867. 2:57:50गेस्ट को आपके कहने मात्र से नहीं निकाल
  3868. 2:57:53सकती। आशा है आप मेरी [संगीत] बात को
  3869. 2:57:55समझेंगे। इतना बोलकर नताशा ने रणधीर
  3870. 2:57:58शेखावत को दोनों हाथ जोड़कर नमस्कार किया
  3871. 2:58:01और वहां से चली गई। अब आगे क्या होगा?
  3872. 2:58:04क्या रणधीर शेखावत [संगीत]
  3873. 2:58:06अपनी इस बेइज्जती को बर्दाश्त कर पाएगा?
  3874. 2:58:08अभी और क्या ड्रामा होना बाकी है इस हॉल
  3875. 2:58:11[संगीत] में? क्या होगा जब शिप्रा की
  3876. 2:58:13एंट्री होगी इस पार्टी में? मेनका की बात
  3877. 2:58:15रणधीर शेखावत को किसी थप्पड़ की तरह लगा।
  3878. 2:58:18अभी [संगीत] थोड़ी देर पहले ही उसका मेनका
  3879. 2:58:21के साथ इतनी अच्छी तरह से बात हुई थी।
  3880. 2:58:23यहां तक [संगीत] कि उसने अभी अपने अंदर
  3881. 2:58:25आने वाले 1000 से अधिक स्क्रीन का 6 महीने
  3882. 2:58:29के बाद के डेट में लगातार 2 महीने के लिए
  3883. 2:58:32एग्रीमेंट भी किया था। सब कुछ इतने अच्छी
  3884. 2:58:35तरह से हुआ था कि रणधीर शेखावत यह सोच
  3885. 2:58:38नहीं सकता था कि मेनका उसकी इतनी छोटी सी
  3886. 2:58:40रिक्वेस्ट रिजेक्ट कर देगी। अभी तक वह खुद
  3887. 2:58:43को इंडस्ट्रीज का तुर्रम खां समझ रहा था।
  3888. 2:58:46पर मेनका ने उसको कोई भाव नहीं दिया और यह
  3889. 2:58:49सब [संगीत] प्रदुमन शेठ के सामने हुआ था
  3890. 2:58:51जो उसके लिए और भी एम्ब्रेसिंग था। मिस्टर
  3891. 2:58:54शेखावत [संगीत]
  3892. 2:58:55यह लड़की कुछ ज्यादा ही घमंडी नहीं है
  3893. 2:58:58उसने आपकी बात को ऐसे रिजेक्ट करने की
  3894. 2:59:00हिम्मत कैसे कर दी? अगर इंडस्ट्रीज के
  3895. 2:59:03लोगों को पता चलेगा तो क्या इज्जत रह
  3896. 2:59:05जाएगी आपकी? प्रदुमन सेठ ने आग में घी
  3897. 2:59:08लगाने का काम किया। जबकि रणधीर शेखावत अभी
  3898. 2:59:11भी शॉक्ड की स्थिति में था। उसे विश्वास
  3899. 2:59:13नहीं हो रहा था कि मेनका ने बिना कुछ सोचे
  3900. 2:59:16[संगीत] समझे उसकी बात को सिरे से नकार
  3901. 2:59:18दिया था। एक बार को उसका मन किया कि वो
  3902. 2:59:21वहां से निकल जाए। पर इस तरह से पार्टी को
  3903. 2:59:24छोड़कर जाने पर लोग तरह-तरह की बात
  3904. 2:59:26करेंगे। जो उस जैसे पर्सनालिटी के लिए
  3905. 2:59:29अच्छा नहीं होता। वो धीरे से अपने होठों
  3906. 2:59:31[संगीत] में बुदबुदाया। मिस मेनका यह आपने
  3907. 2:59:34अच्छा नहीं किया। इस इंडस्ट्रीज में रहकर
  3908. 2:59:37रणधीर [संगीत] शेखावत से बैर बहुत महंगा
  3909. 2:59:40पड़ेगा। शेखावत साहब सच में मिस मेनका को
  3910. 2:59:44आपके साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था। प्रदुमन
  3911. 2:59:46सेठ रणधीर शेखावत को भड़काने का मौका चूक
  3912. 2:59:49नहीं रहा था। तभी स्टेज पर एक एंकर अनाउंस
  3913. 2:59:52करने जा रहा था कि अब आपके [संगीत] सामने
  3914. 2:59:54बिग बबुल स्टूडियो की पहली फिल्म का
  3915. 2:59:56पोस्टर लॉन्च होने जा रहा है। इसके बाद
  3916. 2:59:58स्टेज [संगीत] पर एक पोस्टर था जो कपड़े
  3917. 3:00:01से ढका हुआ था। रत्नाकर शेट्टी ने आगे
  3918. 3:00:03बढ़कर उस पोस्टर पर से कपड़ा हटाया। जैसे
  3919. 3:00:06ही पोस्टर से कपड़ा हटा रणधीर [संगीत]
  3920. 3:00:08शेखावत का चेहरा और लाल हो गया क्योंकि उस
  3921. 3:00:11पोस्टर में जो हीरो हीरोइन नजर आ रहे थे
  3922. 3:00:14वो शौर्य और नताशा थी। एक खूबसूरत [संगीत]
  3923. 3:00:16पोस्टर रणधीर शेखावत को अपना मुंह चिढ़ाता
  3924. 3:00:19नजर आया। प्रदुमन शेठ के लिए भी यह शॉकिंग
  3925. 3:00:22था [संगीत] क्योंकि फिल्म का नाम दीवाना
  3926. 3:00:24सनम वही नाम था जिसे पहले वह नताशा कपूर
  3927. 3:00:27के साथ करने वाले थे। पर [संगीत] रणधीर
  3928. 3:00:29शेखावत के मना करने के बाद उन्होंने इस
  3929. 3:00:32प्रोजेक्ट से अपना हाथ खींच लिया था।
  3930. 3:00:34स्टेज पर एंकर ने हीरो हीरोइन के रूप में
  3931. 3:00:36शौर्य और नताशा को आमंत्रित किया। दोनों
  3932. 3:00:39एक दूसरे का हाथ थामे स्टेज पर आए।
  3933. 3:00:41[संगीत] मीडिया वालों का कैमरा दोनों का
  3934. 3:00:43पिक्चर क्लिक करने लगे। यही वो समय था जब
  3935. 3:00:46राजा साहब [संगीत] कांता प्रसाद और शिप्रा
  3936. 3:00:48के साथ उस हॉल में प्रवेश किया। हॉल में
  3937. 3:00:51आते ही शिप्रा के सामने जो शौर्य की सबसे
  3938. 3:00:53पहले झलक आई वो थी [संगीत] कि वो नताशा के
  3939. 3:00:56साथ हाथ में हाथ डाले स्टेज पर उपस्थित
  3940. 3:00:59था। शिप्रा की निगाह उन दोनों पर ही चिपक
  3941. 3:01:01गई [संगीत] थी। उसे अपने दिल पर छुड़ियां
  3942. 3:01:04चलती सी प्रतीत हुई। मीडिया वालों की
  3943. 3:01:06रिक्वेस्ट पर शौर्य और नताशा ने मीडिया के
  3944. 3:01:09लिए कुछ अलग-अलग [संगीत] पोज़ भी दिए। इसी
  3945. 3:01:11समय शौर्य की निगाह दूर खड़ी शिप्रा पर
  3946. 3:01:13पड़ी। अभी तक जो कॉन्फिडेंस [संगीत]
  3947. 3:01:15उसके चेहरे पर नजर आ रहा था, शिप्रा को
  3948. 3:01:18यहां देखते ही उसका सारा कॉन्फिडेंस हवा
  3949. 3:01:20हो गया। राजा साहब को [संगीत] आया देखकर
  3950. 3:01:22मेनका वहां आ गई। उसने आगे बढ़कर राजा
  3951. 3:01:25साहब का स्वागत किया और साथ में [संगीत]
  3952. 3:01:27शिप्रा का अभिवादन भी किया। शिप्रा ने भी
  3953. 3:01:30शिष्टाचार वश मेनका से हाथ मिलाया। मेनका
  3954. 3:01:33ने तुरंत एक वेटर को बुलाकर उनका ध्यान
  3955. 3:01:36रखने को कहा। राजा साहब की निगाह भी शौर्य
  3956. 3:01:39और नताशा पर ही जमी हुई थी। इसी समय राहुल
  3957. 3:01:42की निगाह भी शिप्रा के ऊपर चला गया था। वो
  3958. 3:01:45भाग कर उसके पास पहुंचा। अरे दीदी तुम भी
  3959. 3:01:48यहां आई हो। अगर मुझे पहले पता होता
  3960. 3:01:50[संगीत] कि तुम भी यहां आने वाले हो तो
  3961. 3:01:52मैं तुम्हें फोन कर लेता। शिप्रा ने यह
  3962. 3:01:54उम्मीद नहीं किया था कि [संगीत] उसे राहुल
  3963. 3:01:56यहां मिलेगा। उसे मन ही मन शौर्य पर
  3964. 3:01:58गुस्सा आया कि उसे राहुल को यहां बुलाना
  3965. 3:02:01ध्यान रहा पर उसने उसको इस बारे में कुछ
  3966. 3:02:03नहीं बताया। दूसरी तरफ रणधीर शेखावत राजा
  3967. 3:02:06साहब को इस पार्टी में देखकर हैरान था।
  3968. 3:02:09उसे पता था कि राजा साहब [संगीत] इस तरह
  3969. 3:02:11की फिल्मी पार्टीज में नहीं जाया करते पर
  3970. 3:02:13वो यहां बिग बुल स्टूडियो की फिल्म
  3971. 3:02:15मुहूर्त की जगह पर आए हुए हैं। कोई और समय
  3972. 3:02:18होता तो वो [संगीत] जरूर जाकर राजा साहब
  3973. 3:02:20से मिलता। पर आज जो उसकी यहां बेइज्जती
  3974. 3:02:23हुई थी उसको देखते हुए वो यहां राजा साहब
  3975. 3:02:25से मिलने नहीं जा सकता था। अब तो शौर्य और
  3976. 3:02:28नताशा को हीरो हीरोइन के रूप में देखकर
  3977. 3:02:31[संगीत] रणधीर शेखावत ने निश्चय किया कि
  3978. 3:02:33वो अभी मेनका के साथ हुई डील को तोड़
  3979. 3:02:35देगा। वो मेनका के करीब गया और [संगीत]
  3980. 3:02:38उससे बोला मिस मेनका मुझे आपसे कुछ जरूरी
  3981. 3:02:42बात करनी है। मेनका समझ गई कि रणधीर
  3982. 3:02:45शेखावत उससे क्या बात करने वाला है। वो
  3983. 3:02:47खड़ी होकर रणधीर शेखावत की ओर देखने लगी।
  3984. 3:02:51मिस मेनका अभी जो हमने एक एग्रीमेंट किया
  3985. 3:02:53था अब शायद मैं वो कंटिन्यू नहीं कर
  3986. 3:02:56पाऊंगा। मैं अभी आपके पैसे को आपको वापस
  3987. 3:02:58करने जा रहा हूं। रणधीर शेखावत रूखे स्वर
  3988. 3:03:01में बोला। मेनका ने [संगीत] भावहीन चेहरे
  3989. 3:03:04से रणधीर शेखावत की ओर देखा और कहा यह
  3990. 3:03:07पूरी तरह से [संगीत] आपकी अपनी विश है।
  3991. 3:03:09अगर आप इस एग्रीमेंट से मुकरते हैं तो ठीक
  3992. 3:03:12है। जितना पेमेंट आपको हुआ है, उसका पांच
  3993. 3:03:15गुना अमाउंट आप अभी [संगीत] मेरे अकाउंट
  3994. 3:03:17में डाल दीजिए। इस तरह से मैं भी उस
  3995. 3:03:20एग्रीमेंट को भूल जाऊंगी। क्या कहा? पांच
  3996. 3:03:23गुना अमाउंट। यह क्या है? यह जबरदस्ती है।
  3997. 3:03:27पांच गुना अमाउंट सुनकर रणधीर शेखावत
  3998. 3:03:29[संगीत] का सर चक्कर घिन्नी हो गया।
  3999. 3:03:32मिस्टर शेखावत आपने अच्छी तरह एग्रीमेंट
  4000. 3:03:34के क्लास को पढ़ लिया था। फिर आप इतने
  4001. 3:03:36हैरान क्यों हो रहे हैं? अगर आप इस
  4002. 3:03:39एग्रीमेंट से मुकरते हैं तो आपको पांच
  4003. 3:03:41गुना अमाउंट वापस करना होगा। इसीलिए आप
  4004. 3:03:44अच्छी तरह सोच लीजिए कि आपको क्या करना
  4005. 3:03:46है। मेनका का चेहरा अभी भी भावहीन ही था।
  4006. 3:03:50पर वह दिल ही दिल में शौर्य के प्लान की
  4007. 3:03:52तारीफ करने से खुद को रोक नहीं सकी। शौर्य
  4008. 3:03:55को पहले से ही पता था कि ऐसा होगा। मिस
  4009. 3:03:58मेनका मैं इस एग्रीमेंट को नहीं मानता।
  4010. 3:04:00अभी एक घंटे भी नहीं हुए इस एग्रीमेंट को
  4011. 3:04:03हुए। सोचने के लिए दो-चार दिन तो चाहिए
  4012. 3:04:05होता है। रणधीर शेखावत ने भरसक प्रयास
  4013. 3:04:08किया अपनी बात को दमदार तरीके से पेश करने
  4014. 3:04:11की। पर उन्हें खुद [संगीत] पर ही अभी
  4015. 3:04:13कॉन्फिडेंस नहीं आ रहा था। यह तो आपको
  4016. 3:04:16पेपर साइन करने से पहले सोचना चाहिए था।
  4017. 3:04:18मिस्टर शेखावत। [संगीत]
  4018. 3:04:19अब इस बात को कहने का क्या फायदा? अगर आप
  4019. 3:04:21अपनी बात से मुकरते हैं तो आपको पांच गुना
  4020. 3:04:24पैसा वापस करने को तैयार रहना चाहिए। आप
  4021. 3:04:27ठंडे दिमाग से सोच लीजिए। उसके बाद आप जो
  4022. 3:04:30भी निर्णय लेंगे, मैं उसे स्वीकार करने
  4023. 3:04:32में पीछे नहीं हटूंगी। इतना बोलकर मेनका
  4024. 3:04:35फिर से राजा साहब के पास चली गई थी। रणधीर
  4025. 3:04:38शेखावत [संगीत]
  4026. 3:04:39राजा साहब को इस पार्टी में देखकर इतना तो
  4027. 3:04:41समझ गया था कि वह होटल राजकमल के मालिक
  4028. 3:04:44हैं और मेनका ही इस होटल की मैनेजर भी है।
  4029. 3:04:47इसलिए इस पार्टी में राजा साहब का
  4030. 3:04:48सम्मिलित होना कोई बड़ी बात नहीं है।
  4031. 3:04:51रणधीर शेखावत यह भी समझ गया कि उसके
  4032. 3:04:53[संगीत] लिए अब अपने एग्रीमेंट से पीछे
  4033. 3:04:55हटना संभव नहीं है। नहीं तो उसे अच्छा
  4034. 3:04:58खासा नुकसान झेलना पड़ सकता है। पर उसने
  4035. 3:05:01मन ही मन सोच लिया कोई बात नहीं। अभी
  4036. 3:05:03[संगीत] तो इन लोगों ने फिल्म की
  4037. 3:05:05अनाउंसमेंट ही की है। पहले 6 महीने में
  4038. 3:05:07अपनी फिल्म तो पूरी कर ले तभी तो 6 महीने
  4039. 3:05:10बाद रिलीज करेंगे। अब मैं भी देखता हूं कि
  4040. 3:05:13यह लोग कैसे अपनी फिल्म को पूरा कर पाते
  4041. 3:05:15हैं। ना 9 मन तेल होगा ना राधा नाचेगी। इस
  4042. 3:05:20सोच ने रणधीर शेखावत को बड़ी ही संतुष्टि
  4043. 3:05:22प्रदान की। इस सोच के बाद रणधीर शेखावत अब
  4044. 3:05:25निश्चिंत नजर आ रहा था। दूसरी तरफ शौर्य
  4045. 3:05:29और नताशा का फोटो सेशन अभी भी चल रहा था।
  4046. 3:05:32शिप्रा देख रही थी कि शौर्य उसको देखने के
  4047. 3:05:35बाद थोड़ा सतर्क हो गया था। [संगीत] पर
  4048. 3:05:37नताशा शौर्य के साथ बहुत फ्री हो रखी थी।
  4049. 3:05:40उसे शौर्य के करीब होने में कोई झिझक नहीं
  4050. 3:05:43होती थी। पर शिप्रा जितना नताशा [संगीत]
  4051. 3:05:46को शौर्य के करीब देखती उसकी जलन बढ़ती जा
  4052. 3:05:48रही थी। एक तरफ वो यह भी समझ रही थी कि
  4053. 3:05:51फिल्म की मेन लीड कैरेक्टर होने के कारण
  4054. 3:05:54यह [संगीत] फोटो सेशन जरूरी था। पर वो
  4055. 3:05:56अपने मन को नहीं समझा पा रही थी। फोटो
  4056. 3:05:59सेशन समाप्त होने के बाद कुछ मीडिया वाले
  4057. 3:06:01नताशा का इंटरव्यू के लिए जोर डालने लगे।
  4058. 3:06:04रत्नाकर शेट्टी [संगीत] भी समझता था कि यह
  4059. 3:06:06फिल्म की पब्लिसिटी के लिए अच्छा था।
  4060. 3:06:08इसीलिए उसने भी नताशा को इंटरव्यू के लिए
  4061. 3:06:11तैयार कर लिया। क्योंकि शौर्य कोई बड़ा
  4062. 3:06:13नाम नहीं था इस इंडस्ट्रीज [संगीत] के
  4063. 3:06:15लिए। इसीलिए मीडिया वालों ने उसके
  4064. 3:06:17इंटरव्यू पर कोई जोर नहीं दिया। शौर्य
  4065. 3:06:20राजा [संगीत] साहब के पास पहुंचा और
  4066. 3:06:21नमस्कार किया। राजा साहब शौर्य की तारीफ
  4067. 3:06:24करते हुए बहुत अच्छे तो अब तुम हीरो बनने
  4068. 3:06:28[संगीत] जा रहे हो। मेरी शुभकामना
  4069. 3:06:29तुम्हारे साथ है कि तुम इसमें सफल हो।
  4070. 3:06:32धन्यवाद
  4071. 3:06:33[संगीत]
  4072. 3:06:33दादा जी। शौर्य ने राजा साहब को धन्यवाद
  4073. 3:06:36किया पर एक डिस्टेंस बनाकर रखा क्योंकि
  4074. 3:06:40शिप्रा वहीं पर थी और वो उसको एहसास होने
  4075. 3:06:43नहीं दे सकता था कि राजा साहब के [संगीत]
  4076. 3:06:46साथ उसका रिलेशन क्या था। राजा साहब भी
  4077. 3:06:49इसीलिए ज्यादा खुलकर कुछ नहीं बोले।
  4078. 3:06:52[संगीत]
  4079. 3:06:52क्योंकि उनके लिए भी स्थिति को सामान्य
  4080. 3:06:55रखना जरूरी था क्योंकि शौर्य [संगीत] की
  4081. 3:06:58यही कंडीशन थी। इस दरमियान शिप्रा की
  4082. 3:07:02निगाह शौर्य पर ही रही पर वो कुछ बोली
  4083. 3:07:05नहीं जबकि शौर्य उससे [संगीत] अपनी नजर
  4084. 3:07:08चुराता रहा। शिप्रा ने अपने भाई राहुल को
  4085. 3:07:12राजा साहब से मिलवाया। [संगीत] राजा साहब
  4086. 3:07:14भी राहुल से मिलकर खुश हुए। धीरे-धीरे
  4087. 3:07:18पार्टी अपने समापन पर पहुंच गई। शौर्य ने
  4088. 3:07:21नताशा के रहने की व्यवस्था होटल राजकमल
  4089. 3:07:24में ही कर रखा था। इसलिए खाना खाने के बाद
  4090. 3:07:27जब राजा साहब जाने लगे तो वह शिप्रा
  4091. 3:07:29[संगीत] से बोले चलो मैं हम तुम्हें
  4092. 3:07:32तुम्हारे घर छोड़ते हुए चले जाएंगे। तभी
  4093. 3:07:34शौर्य आगे आता हुआ बोला आप लेट हो जाइएगा
  4094. 3:07:38दादा जी। आप चले जाइए। शिप्रा मेरे साथ
  4095. 3:07:41चली जाएगी। राजा साहब ने शिप्रा की तरफ
  4096. 3:07:45देखा जैसे वह जानना चाहते हो कि वो क्या
  4097. 3:07:48कहती है। नहीं दादा जी अगर आपको तकलीफ ना
  4098. 3:07:52हो तो मुझे घर छुड़वा दीजिए। अभी इसको
  4099. 3:07:55यहां बहुत काम होगा। मैं नहीं चाहती कि
  4100. 3:07:58मेरे कारण इसका कोई काम खराब हो। वैसे भी
  4101. 3:08:01अभी इसको मिस नताशा की [संगीत] देखरेख भी
  4102. 3:08:03करनी होगी। शिप्रा सरकास्टिक वे में बोली।
  4103. 3:08:07शौर्य [संगीत] समझ गया कि शिप्रा उससे
  4104. 3:08:10अपनी नाराजगी शो कर रही है। अभी कुछ दिन
  4105. 3:08:12पहले ही दोनों के बीच की दूरी कुछ कम
  4106. 3:08:14[संगीत] हुई थी। वो नहीं चाहता था कि
  4107. 3:08:17इसमें फिर से कोई बढ़ोतरी हो। इसीलिए वो
  4108. 3:08:20[संगीत] जल्दी से सामने आकर बोला, नहीं
  4109. 3:08:23ऐसा कुछ नहीं है। मिस नताशा की देखरेख
  4110. 3:08:26[संगीत] के लिए रत्नाकर शेट्टी जी हैं।
  4111. 3:08:28मेरा अब यहां कोई काम नहीं है। मुझे भी अब
  4112. 3:08:31घर ही जाना है। अगर ऐसा है तो फिर शिप्रा
  4113. 3:08:34बेटी [संगीत] तुम शौर्य के साथ ही चली
  4114. 3:08:36जाओ। मैं भी जल्दी ही घर पहुंच जाऊंगा।
  4115. 3:08:39राजा साहब [संगीत] भी उन दोनों के बीच में
  4116. 3:08:41विलेन नहीं बनना चाहते थे। वैसे भी उन्हें
  4117. 3:08:44पता था कि अभी उन दोनों का रिश्ता नॉर्मल
  4118. 3:08:46नहीं [संगीत] हुआ था। इसलिए उन दोनों को
  4119. 3:08:49जितना ज्यादा से ज्यादा समय साथ में
  4120. 3:08:51बिताना चाहिए। अब शिप्रा के पास बोलने को
  4121. 3:08:55कुछ रह नहीं गया था। राजा साहब [संगीत]
  4122. 3:08:57कांता प्रसाद जी के साथ वहां से निकल गए।
  4123. 3:09:00राजा साहब के जाने के बाद शिप्रा ने राहुल
  4124. 3:09:03से पूछा। तुम यहां कैसे आए हो? मैं तो
  4125. 3:09:07पापा की कार लेकर आया हूं। पर तुम यह
  4126. 3:09:10क्यों पूछ रही [संगीत] हो? राहुल असमंजस
  4127. 3:09:12में बोला। अगर कार से हो तो मुझे मॉडल
  4128. 3:09:16टाउन छोड़ते हुए घर [संगीत] चले जाना।
  4129. 3:09:18शिप्रा शौर्य को नजरअंदाज करती हुई बोली
  4130. 3:09:22पर दीदी [संगीत] जीजू तो जा रहे हैं ना
  4131. 3:09:23तुम्हारे साथ। राहुल ने प्रतिरोध किया।
  4132. 3:09:27क्यों? क्या तुम मुझे नहीं छोड़ सकते?
  4133. 3:09:30शिप्रा नाराजगी से बोली। मैंने ऐसा तो
  4134. 3:09:33नहीं कहा। मुझे लगा जी भैया तो जा ही रहे
  4135. 3:09:36हैं। अगर तुमको [संगीत] भी उधर ही जाना है
  4136. 3:09:38तो वह तुम्हें छोड़ देंगे।
  4137. 3:09:41राहुल शौर्य को जीजू बोलने जा रहा था। पर
  4138. 3:09:44उसी समय उसने देखा [संगीत] कि नताशा कपूर
  4139. 3:09:46वहां पर शौर्य को ढूंढते हुए आ गई थी।
  4140. 3:09:49इसीलिए जीजू [संगीत] से वो भैया पर आ गया।
  4141. 3:09:52शिप्रा ने भी इस बात को नोटिस किया कि
  4142. 3:09:55राहुल ने नताशा को देखकर शौर्य को जीजू ना
  4143. 3:09:58बोलकर भैया बोला [संगीत] था। यह देखकर
  4144. 3:10:01उसने आंखें तरेर कर राहुल को देखा। तुम
  4145. 3:10:04यहां हो? मैं तुम्हें अंदर हॉल में ढूंढ
  4146. 3:10:07रही थी। तुम यहां क्यों आ गए? नताशा शौर्य
  4147. 3:10:10के पास आकर उसका हाथ पकड़ती हुई बोली यह
  4148. 3:10:14देखकर तो शिप्रा [संगीत] का चेहरा और
  4149. 3:10:15बदरंग हो गया। दूसरी तरफ राहुल ने जब देखा
  4150. 3:10:19कि शौर्य के लिए यह एक ऑकवर्ड स्थिति बनने
  4151. 3:10:22[संगीत] वाली है तो वो शिप्रा से बोला ठीक
  4152. 3:10:25है तुम चलो मेरे साथ मैं तुम्हें घर छोड़
  4153. 3:10:27देता हूं। अभी जो शिप्रा शौर्य से नाराजगी
  4154. 3:10:31दिखा रही थी। जैसे ही उसने [संगीत] नताशा
  4155. 3:10:33को फिर से शौर्य के पास देखा। अब वो अपनी
  4156. 3:10:36जगह से हिल भी नहीं पा रही थी। उसने राहुल
  4157. 3:10:39से कहा, अभी तो तुम लेट हो रहे थे। तुम
  4158. 3:10:42जाओ। अभी [संगीत] श्रवण ने कहा ना कि वो
  4159. 3:10:44मुझे घर छोड़ देगा। जैसे ही शौर्य ने यह
  4160. 3:10:47सुना, वो आश्चर्य से शिप्रा को देखने लगा।
  4161. 3:10:51जब शिप्रा ने शौर्य को ऐसे अपनी तरफ देखते
  4162. 3:10:53पाया तो वो उससे बोली, "क्या हुआ? अब
  4163. 3:10:57तुम्हारा इरादा बदल तो नहीं गया? अभी तो
  4164. 3:11:00दादाजी के सामने बोल रहे थे कि तुम मुझे
  4165. 3:11:02घर छोड़ दोगे?" नताशा ने जब शिप्रा
  4166. 3:11:05[संगीत] की बात सुना तो वह शौर्य से बोली,
  4167. 3:11:08क्या हुआ? तुम कहीं जा रहे हो क्या? हां,
  4168. 3:11:11दरअसल शिप्रा राजा साहब के साथ यहां आई
  4169. 3:11:14थी। उन्होंने मुझसे कहा था कि मैं इसको
  4170. 3:11:16इसके घर छोड़ दूं।
  4171. 3:11:19मैं तुमसे कल मिलता हूं। अभी मुझे जाना
  4172. 3:11:21पड़ेगा। शौर्य ने भी मौके की नजाकत को
  4173. 3:11:25समझकर स्थिति अनुरूप बात को बदल दिया।
  4174. 3:11:29नताशा ने आज पहली बार शिप्रा को देखा था।
  4175. 3:11:33वो आश्चर्य से बोली अरे तुम भी आई थी पहले
  4176. 3:11:36क्यों नहीं [संगीत] मिली थी तुम इंटरव्यू
  4177. 3:11:39में बिजी थी ना इसलिए उस समय डिस्टर्ब
  4178. 3:11:42करना ठीक नहीं था [संगीत] शिप्रा अपने
  4179. 3:11:44चेहरे पर एक प्यारी मुस्कान लाती हुई बोली
  4180. 3:11:48ओह ठीक है तो फिर तुम शिप्रा को उसके घर
  4181. 3:11:51छोड़ दो नताशा शौर्य से बोलते हुए अपनी
  4182. 3:11:55बात को आगे बढ़ाई कल मिलते हैं तुम भी जाओ
  4183. 3:11:58और आराम करो इतना बोलकर शौर्य रत्ना आकर
  4184. 3:12:02शेट्टी की तरफ घुमा और उनसे बोला शेट्टी
  4185. 3:12:06साहब [संगीत] आप नताशा को उसके कमरे तक
  4186. 3:12:08पहुंचा दीजिएगा। आप बेफिक्र होकर जाइए
  4187. 3:12:11मिस्टर श्रवण मैं नताशा जी को उनके रूम तक
  4188. 3:12:14पहुंचा दूंगा। [संगीत]
  4189. 3:12:15रत्नाकर शेट्टी ने भी मुस्कुराते हुए कहा।
  4190. 3:12:18नताशा आगे बढ़कर शौर्य से गले मिलकर उसको
  4191. 3:12:22विदा किया। यह देखकर तो शिप्रा को लगा कि
  4192. 3:12:25कोई दिन दहारे उसकी संपत्ति पर कब्जा करने
  4193. 3:12:28की कोशिश कर रहा है। अब आगे क्या होगा?
  4194. 3:12:32[संगीत] क्या मुश्किल फेस करने वाला है
  4195. 3:12:34शौर्य दो पार्टों के बीच में फंसकर।
  4196. 3:12:37शौर्य [संगीत] कैसे शिप्रा की नाराजगी दूर
  4197. 3:12:39करेगा? राहुल शिप्रा के मूड को स्विंग
  4198. 3:12:42होते देखकर हैरान था। अभी तो शिप्रा ने
  4199. 3:12:45उससे जिद की थी कि वो उसे उसके घर छोड़
  4200. 3:12:48दे। पर अचानक उसने फिर शौर्य को उसे साथ
  4201. 3:12:51ले जाने की बात करने लगी। [संगीत] जबकि
  4202. 3:12:54कुछ ही पल पहले वो
  4203. 3:12:55[गला साफ़ करने की आवाज़] शौर्य के साथ
  4204. 3:12:56जाने को तैयार नहीं थी। तब राहुल को शौर्य
  4205. 3:12:59के साथ नताशा को देखकर यह समझ आया कि
  4206. 3:13:01[संगीत] क्या उसकी दीदी नताशा से जेलस के
  4207. 3:13:04कारण शौर्य के साथ जाने को तैयार हुई है।
  4208. 3:13:07उसको कुछ शरारत सूझी। तो वो शिप्रा के पास
  4209. 3:13:10जाकर धीरे से [संगीत] बोला। अब क्या हो
  4210. 3:13:13गया? मैं चल रहा हूं ना तुम्हारे साथ।
  4211. 3:13:15जीजू को रहने दो ना [संगीत] यहीं। शिप्रा
  4212. 3:13:18ने राहुल को घूर कर देखा। तुम्हारी जुबान
  4213. 3:13:21कुछ ज्यादा ही नहीं चलने लगी है। और अभी
  4214. 3:13:24तुमने श्रवण से क्या कहा था? वो तुम्हारा
  4215. 3:13:26जीजू से भैया कैसे हो गया था? क्या
  4216. 3:13:29[संगीत] दीदी समझा करो ऐसे सबके सामने
  4217. 3:13:32जीजू बोलना ठीक है क्या? जीजू अब हीरो
  4218. 3:13:35बनने वाले हैं। लोगों को पता चलेगा कि
  4219. 3:13:38हीरो शादीशुदा है। तो हीरो का क्रेज कम हो
  4220. 3:13:40जाता है [संगीत] ना। इसीलिए ऐसी बातों को
  4221. 3:13:43जितने समय तक छुपा कर रख सकते हैं, यह
  4222. 3:13:46[संगीत] उतना अच्छा है। एक बार जीजू स्टार
  4223. 3:13:49बन जाएंगे, तो वैसे ही यह बात आम हो जानी
  4224. 3:13:51है। तुमसे यह बात किसने कही कि तुम
  4225. 3:13:54[संगीत] उसे जीजू नहीं भैया बोलोगे?
  4226. 3:13:57शिप्रा संदेह भरी नजरों से शौर्य की तरफ
  4227. 3:14:00देखती हुई बोली। अब क्या इतनी [संगीत]
  4228. 3:14:03छोटी बात मुझसे किसी को बोलनी पड़ेगी?
  4229. 3:14:05इतनी तो समझ मैं भी रखता हूं। राहुल
  4230. 3:14:08मुस्कुराते हुए बोला, "क्या हुआ? अब चलना
  4231. 3:14:11नहीं है। शौर्य दोनों को आपस में बातें
  4232. 3:14:14[संगीत] करता देखकर बोला, शिप्रा ने कुछ
  4233. 3:14:17कहा नहीं। बस शौर्य के पीछेछे चल दी।
  4234. 3:14:20शौर्य अपनी कार लाकर शिप्रा के सामने खड़ा
  4235. 3:14:23कर दिया। शिप्रा कुछ पल तो खामोश खड़ी
  4236. 3:14:25रही। फिर [संगीत] आगे ड्राइवर के बगल वाली
  4237. 3:14:28सीट का गेट खोलकर बैठ गई। राहुल भी अपनी
  4238. 3:14:31कार लेकर वहां से निकल गया था। शौर्य ने
  4239. 3:14:34कार को आगे बढ़ा दिया। दोनों के बीच
  4240. 3:14:36खामोशी छाई रही। शौर्य चाह रहा था कि वह
  4241. 3:14:39शिप्रा से कुछ बात करें। पर उसे समझ नहीं
  4242. 3:14:42आ रहा था कि वह कैसे शुरू करें। वो यह भी
  4243. 3:14:45भली-भांति समझ रहा था कि शिप्रा शायद उससे
  4244. 3:14:48इस वजह से नाराज है कि उसने उसे पहले
  4245. 3:14:51[संगीत] से इस पार्टी में इनवाइट नहीं
  4246. 3:14:52किया था और इनवाइट करने की बात तो दूर
  4247. 3:14:55उसने तो इसके बारे में उसे बताया भी नहीं
  4248. 3:14:57था। शिप्रा की नाराजगी का सबसे बड़ा कारण
  4249. 3:15:00यही था [संगीत] कि उसे इसके बारे में पता
  4250. 3:15:02चला भी तो किसी और के द्वारा। शौरी शौर्य
  4251. 3:15:07सामने [संगीत] देखते हुए बोला शिप्रा ने
  4252. 3:15:09शौर्य की तरफ देखा वो अभी भी सामने देख
  4253. 3:15:12रहा था तुमने मुझसे कुछ कहा मैंने शौरी
  4254. 3:15:16कहा तुम शायद मुझसे नाराज [संगीत] हो
  4255. 3:15:19शौर्य एक नजर शिप्रा की तरफ देखकर बोला
  4256. 3:15:22मैं कौन होती हूं तुमसे नाराज होने वाली
  4257. 3:15:24वैसे तुम्हें कोई फर्क पड़ता है मेरी
  4258. 3:15:26नाराजगी से शिप्रा उदासीन स्वर में बोली
  4259. 3:15:30वैसे क्या [संगीत] तुम बताओगी कि तुम
  4260. 3:15:32नाराज किस लिए हो शौर्य शौर्य ने डरते हुए
  4261. 3:15:35पूछा तुम्हें यह भी नहीं [संगीत] पता कि
  4262. 3:15:38मैं नाराज किस लिए हूं? फिर भी तुमने शौरी
  4263. 3:15:40बोला कमाल है। शिप्रा ताना मारती हुई बोली
  4264. 3:15:45नहीं ऐसी [संगीत] बात नहीं है। दरअसल
  4265. 3:15:48मैंने कई गलती की है। इसलिए मुझे समझ नहीं
  4266. 3:15:50आया कि तुम मेरी किस गलती पर नाराज हुई
  4267. 3:15:53हो। शौर्य ने बात [संगीत] को संभालते हुए
  4268. 3:15:55कहा। शौर्य की इस बात ने शिप्रा को थोड़ा
  4269. 3:15:58हैरान किया। वो एक टक शौर्य की तरफ देखने
  4270. 3:16:02लगी। इस बात [संगीत] ने उसे थोड़ी
  4271. 3:16:04संतुष्टि प्रदान की। अगर ऐसी बात है तो
  4272. 3:16:07फिर तुम ही बताओ तुमने कौन-कौन सी गलती की
  4273. 3:16:10है। शौर्य सोच [संगीत] में पड़ गया कि वो
  4274. 3:16:13अब क्या जवाब दे? अब तुम ही बता दो मुझे
  4275. 3:16:16समझ नहीं आ रहा। जब तुम्हें समझ ही नहीं आ
  4276. 3:16:19रहा तो फिर तुम्हें बताने का मतलब ही क्या
  4277. 3:16:22है? शिप्रा का स्वर [संगीत] अभी भी उदासीन
  4278. 3:16:24ही था। शौर्य समझ गया कि शिप्रा का मूड
  4279. 3:16:28ठीक करना इतना [संगीत] आसान नहीं है। पर
  4280. 3:16:30वो उसको ऐसे नाराज भी नहीं देख सकता था।
  4281. 3:16:33अभी भी उसकी आंखों के सामने वो रात घूम जा
  4282. 3:16:36रही थी जब शिप्रा उसके साथ सोई थी। वो खुद
  4283. 3:16:39उसके करीब जाने की हिम्मत नहीं कर पाता
  4284. 3:16:41था। पर वो रात शौर्य की सबसे खूबसूरत रात
  4285. 3:16:45में से एक थी। इस समय रात के लगभग 10:00
  4286. 3:16:49बज रहे थे। सड़क पर गड़ियों की आवाजाही कम
  4287. 3:16:52हो गई थी। शौर्य ने एक जगह आइसक्रीम
  4288. 3:16:55[संगीत] पार्लर देखा तो उसने गड़ी को खड़ा
  4289. 3:16:57किया और जाकर दो आइसक्रीम ले आया था। उसे
  4290. 3:17:00लगा यह [संगीत] शिप्रा की नाराजगी दूर
  4291. 3:17:02करने का अच्छा तरीका है क्योंकि उसे पता
  4292. 3:17:04था कि शिप्रा को आइसक्रीम बहुत पसंद है।
  4293. 3:17:08पर शिप्रा [संगीत] ने आइसक्रीम को उसके
  4294. 3:17:09हाथ में देखने के बाद भी कोई रिएक्शन नहीं
  4295. 3:17:12दिया।
  4296. 3:17:13शिप्रा ने शौर्य के हाथ में दो आइसक्रीम
  4297. 3:17:16का केन देखा। [संगीत]
  4298. 3:17:18पर उसने कोई रिएक्शन नहीं दिया। शौर्य ने
  4299. 3:17:21एक आइसक्रीम का कप उसकी तरफ बढ़ाया। पर
  4300. 3:17:24शिप्रा ने उसे लेने का कोई उपक्रम नहीं
  4301. 3:17:26किया। आइसक्रीम तो ले लो। शौर्य का हाथ
  4302. 3:17:31अभी भी शिप्रा के सामने था। मैंने तुमसे
  4303. 3:17:34कहा मेरे लिए लेने को। शिप्रा भावहीन स्वर
  4304. 3:17:38में बोली। ये क्या बात हुई? आइसक्रीम तो
  4305. 3:17:41तुम्हें पसंद है? शौर्य ने अभी भी अपना
  4306. 3:17:44हाथ पीछे नहीं किया था। पसंद है पर अभी
  4307. 3:17:48नहीं खाना है। शिप्रा ने शौर्य के हाथ से
  4308. 3:17:51आइसक्रीम लेने की कोई कोशिश नहीं की। अब
  4309. 3:17:55ले लिया है तो खा भी लो। मैंने सॉरी बोला
  4310. 3:17:57तो तुमसे तुम मुझसे [संगीत] नाराज हो
  4311. 3:17:59इसीलिए आइसक्रीम लेने से मना कर रही हो
  4312. 3:18:01ना? शौर्य सफाई देता हुआ बोला। एक ही बात
  4313. 3:18:05को बार-बार रिपीट करना जरूरी है क्या? लेट
  4314. 3:18:08हो रहा है। घर भी पहुंचना है। शिप्रा
  4315. 3:18:12सामने देखती हुई बोली। जब शिप्रा ने शौर्य
  4316. 3:18:15से आइसक्रीम लेने की कोई कोशिश [संगीत]
  4317. 3:18:16नहीं की तो शौर्य ने दोनों आइसक्रीम के कप
  4318. 3:18:19को कार के कप होल्डर में रख दिया और गाड़ी
  4319. 3:18:22को आगे बढ़ा दिया। शिप्रा ने जब देखा कि
  4320. 3:18:26शौर्य ने भी अपना आइसक्रीम नहीं खाया तो
  4321. 3:18:28वह बोली मैंने तुम्हें आइसक्रीम खाने से
  4322. 3:18:31मना नहीं किया है। तुम अपना आइसक्रीम खा
  4323. 3:18:33लो। पर शौर्य बिना कुछ बोले गाड़ी चलाता
  4324. 3:18:37रहा। मैंने कहा ना तुम अपना आइसक्रीम खा
  4325. 3:18:40लो। शिप्रा ने अपनी बात को रिपीट किया। वह
  4326. 3:18:44तो मैंने तुम्हारे लिए लिया था। जब
  4327. 3:18:46तुम्हें ही नहीं खाना है तो फिर मैं कैसे
  4328. 3:18:48खाऊंगा? शौर्य सामने सड़क की तरफ देखता
  4329. 3:18:51हुआ बोला। जब शौर्य बिना उसकी तरफ देखे
  4330. 3:18:54गाड़ी चलाता रहा [संगीत] तो शिप्रा ने कप
  4331. 3:18:56होल्डर से एक आइसक्रीम का कप उठाया और
  4332. 3:18:59उसका ऊपर का ढक्कन हटाकर उसमें उसके साथ
  4333. 3:19:02मिले चम्मच को डालकर शौर्य के सामने कर
  4334. 3:19:04दिया। पर शौर्य ने फिर भी कोई रिएक्शन
  4335. 3:19:07नहीं दिया। जब शिप्रा ने देखा कि शौर्य ने
  4336. 3:19:10अभी भी उसके हाथ के आइसक्रीम के कप की तरफ
  4337. 3:19:13कोई ध्यान नहीं दिया तो [संगीत] उसने
  4338. 3:19:14थोड़ा सख्ती से कहा गारी रोको। इस बार
  4339. 3:19:19शौर्य ने गाड़ी को साइड करके रोका पर उसके
  4340. 3:19:21हाथ से आइसक्रीम का कप लेने की कोई कोशिश
  4341. 3:19:24नहीं की। शिप्रा ने कप होल्डर से दूसरे
  4342. 3:19:26आइसक्रीम का कप भी निकालकर अपने दूसरे हाथ
  4343. 3:19:29में ले लिया और दोबारा शौर्य की तरफ पहले
  4344. 3:19:32से खोले हुए कप को बढ़ाया। इस बार शौर्य
  4345. 3:19:35ने बिना किसी प्रतिरोध के [संगीत] शिप्रा
  4346. 3:19:38के हाथ से आइसक्रीम का कप ले लिया और हाथ
  4347. 3:19:40में पकड़े रहा। जब शिप्रा ने अपने कप से
  4348. 3:19:43पहला चम्मच [संगीत] आइसक्रीम का अपने मुंह
  4349. 3:19:45में डाला तो फिर शौर्य भी अपने हाथ की
  4350. 3:19:47आइसक्रीम को खाने लगा। आइसक्रीम खत्म होने
  4351. 3:19:50के बाद शौर्य ने फिर से गाड़ी को आगे बढ़ा
  4352. 3:19:53दिया। कुछ आगे जाने के बाद शिप्रा उसकी
  4353. 3:19:55[संगीत] तरफ देखती हुई बोली।
  4354. 3:19:58तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया था कि
  4355. 3:20:00आज तुम्हारी फिल्म का मुहूर्त है। पिछले
  4356. 3:20:03कुछ दिन तुम डिस्टर्ब रही थी और [संगीत]
  4357. 3:20:05अब तुम ऑफिस के काम में ज्यादा बिजी हो गई
  4358. 3:20:07थी। मुझे लगा तुम्हें इस बारे में बताना
  4359. 3:20:09ठीक होगा या नहीं। [संगीत] और यह भी था कि
  4360. 3:20:12लोगों को हमारे रिलेशन के बारे में पता चल
  4361. 3:20:14सकता था। अब तुम एक बड़ी कंपनी की सीईओ
  4362. 3:20:16हो। [संगीत] तो शायद तुम्हारे स्टेटस के
  4363. 3:20:18लिए यह बात आम होना शायद सही नहीं होता कि
  4364. 3:20:21तुम मेरी पत्नी हो। शौर्य ने सफाई देने की
  4365. 3:20:24कोशिश की। मैंने कब लोगों से अपनी
  4366. 3:20:27शादीशुदा जिंदगी को छुपाने की कोशिश की।
  4367. 3:20:29फिर तुमने यह कैसे सोच लिया कि यह बात
  4368. 3:20:32मेरे स्टेटस के लिए सही नहीं होता। क्या
  4369. 3:20:34मैंने तुमसे ऐसा कुछ करने को कहा? शिप्रा
  4370. 3:20:37शौर्य को घूरती [संगीत] हुई बोली नहीं,
  4371. 3:20:41तुमने नहीं कहा। पर तुम्हारे दादाजी इसी
  4372. 3:20:44बात को [संगीत] लेकर तो तुम पर तलाक लेने
  4373. 3:20:45के लिए दबाव बना रहे थे। और फिर यह भी तो
  4374. 3:20:48है कि हम दोनों का रिलेशन आम लोगों की तरह
  4375. 3:20:50भी नहीं है। [संगीत] एक नॉर्मल पति-पत्नी
  4376. 3:20:52के रिलेशन और हमारे रिलेशन एक जैसे नहीं
  4377. 3:20:55है। इसलिए कई बार मुझे समझ नहीं आता कि
  4378. 3:20:58मैं इस रिलेशन को किस तरह से [संगीत]
  4379. 3:21:00हैंडल करूं। शौर्य ने अपनी भावनाओं को
  4380. 3:21:03शिप्रा के सामने उजागर किया। शौर्य की बात
  4381. 3:21:06सुनकर शिप्रा आगे कुछ बोल [संगीत] नहीं
  4382. 3:21:08सकी। वो पिछले कुछ दिनों में सोच रही थी
  4383. 3:21:11कि उसका रिलेशन शौर्य के साथ कुछ आगे बढ़ा
  4384. 3:21:13है। पर जब उसने शौर्य की बात को सुना तो
  4385. 3:21:16उसे लगा अभी भी उसके और शौर्य के बीच में
  4386. 3:21:19बहुत गैप [संगीत] है। वो खामोशी से शौर्य
  4387. 3:21:22की ओर देखती रही। कहां तो वह [संगीत] अभी
  4388. 3:21:24शौर्य से अपनी नाराजगी प्रदर्शित कर रखी
  4389. 3:21:26थी। पर अब वो उसकी बात को सुनकर व्यथित
  4390. 3:21:29महसूस कर रही थी। उसका अब मकसद यही था कि
  4391. 3:21:32[संगीत] उसके और शौर्य के बीच में जो कुछ
  4392. 3:21:35डिस्टेंस है धीरे-धीरे करके उसको खत्म
  4393. 3:21:38किया जाए। पूरे रास्ते दोनों के बीच में
  4394. 3:21:42फिर कोई बात नहीं हुई। कुछ देर बाद शौर्य
  4395. 3:21:45की गाड़ी घर पहुंची। शिप्रा उतर कर घर के
  4396. 3:21:48अंदर चली गई। शौर्य भी गाड़ी को पार्किंग
  4397. 3:21:50में खड़ा करने के बाद अपने कमरे में
  4398. 3:21:52पहुंचा। शौर्य खाना तो खा ही रखा था। वो
  4399. 3:21:56थका हुआ भी था। इसलिए वह बिना कपड़े चेंज
  4400. 3:21:59किए हो बिस्तर पर ढेर हो गया। जबकि दूसरी
  4401. 3:22:02तरफ शिप्रा ने अपने कपड़े चेंज किए और
  4402. 3:22:04अपने बिस्तर पर चली गई। पर नींद उसकी
  4403. 3:22:07आंखों से कोसों दूर था। रह-रह कर उसकी
  4404. 3:22:10आंखों के सामने वो दृश्य आ जा रहा था
  4405. 3:22:13जिसमें नताशा शौर्य को विदा करते वक्त
  4406. 3:22:15उसके गले [संगीत] लगी थी। उसको बेचैनी
  4407. 3:22:17होने लगी। उसे ऐसा लगा जैसे कोई शौर्य को
  4408. 3:22:20उससे छीनकर उससे दूर ले जा रही है। शिप्रा
  4409. 3:22:24अपनी बिस्तर पर करवट बदलती रही। इसी समय
  4410. 3:22:27उसकी [संगीत] कानों में मेघना की कही हुई
  4411. 3:22:28बात गूंजने लगी कि अभी तुम्हें शौर्य की
  4412. 3:22:31कदर नहीं है। पर एक समय [संगीत] आएगा जब
  4413. 3:22:33वो किसी और के इतना करीब चला जाएगा कि फिर
  4414. 3:22:36तुम चाहकर भी उसकी नहीं बन पाओगी। इस सोच
  4415. 3:22:39ने शिप्रा की बेचैनी [संगीत]
  4416. 3:22:40और भी बढ़ा दिया। तुरंत वो अपने बिस्तर से
  4417. 3:22:43उठ गई और अपने कमरे से बाहर निकली। वो
  4418. 3:22:46धीमे कदमों से शौर्य के कमरे की तरफ बढ़
  4419. 3:22:48गई। उसने दरवाजे को हल्का सा धक्का दिया।
  4420. 3:22:51दरवाजा खुल गया। शौर्य अपने बिस्तर पर
  4421. 3:22:54लेटा हुआ अपने मोबाइल को देख रहा था। उसने
  4422. 3:22:57शिप्रा को अपने कमरे में आते देखा तो उठ
  4423. 3:22:59बैठा। तुम्हें कुछ चाहिए क्या? क्यों?
  4424. 3:23:03मुझे कुछ चाहिए [संगीत] होगा तभी मैं
  4425. 3:23:04तुम्हारे कमरे में आऊंगी? शिप्रा इसको
  4426. 3:23:07घूरती हुई बोली। नहीं ऐसी बात नहीं है।
  4427. 3:23:10तुम पहले [संगीत] कभी इस तरह से मेरे कमरे
  4428. 3:23:12में आई नहीं इसीलिए पूछ लिया। शौर्य ने
  4429. 3:23:15सफाई दिया। मुझे नींद नहीं आ रही थी।
  4430. 3:23:18इसीलिए आ गई। शिप्रा गौर से शौर्य को
  4431. 3:23:21देखती हुई बोली। उसने देखा शौर्य उसी
  4432. 3:23:24कपड़े में बिस्तर पर था जिसमें [संगीत] वो
  4433. 3:23:26आया था। इसीलिए उसने आगे पूछा। तुमने
  4434. 3:23:29कपड़े चेंज नहीं किए? कोई बात नहीं कोई
  4435. 3:23:32फर्क नहीं पड़ता। सुबह चेंज कर लंगा।
  4436. 3:23:35शौर्य [संगीत] नॉर्मल भाव में बोला। शर्ट
  4437. 3:23:38तो चेंज कर लो। शिप्रा उसके शर्ट चेंज
  4438. 3:23:41करने पर जोर [संगीत] देती हुई बोली। अब
  4439. 3:23:43शर्ट में क्या रखा है? सुबह कर लूंगा।
  4440. 3:23:46शौर्य आलस करता हुआ बोला। बोला ना शर्ट
  4441. 3:23:49चेंज कर लो। शिप्रा जोर देती हुई [संगीत]
  4442. 3:23:52बोली शौर्य को समझ नहीं आया कि शिप्रा इस
  4443. 3:23:55बात पर जोर क्यों दे रही है। कोई बात है
  4444. 3:23:57क्या जो तुम इस बात के पीछे परी हो कि मैं
  4445. 3:23:59शर्ट चेंज कर लूं। शिप्रा समझ गई कि शौर्य
  4446. 3:24:02इतनी आसानी से उसकी बात [संगीत] समझने
  4447. 3:24:04वाला नहीं है। इसलिए उसे बोलना पड़ा।
  4448. 3:24:07तुम्हारे शर्ट से नताशा के इत्र की खुशबू
  4449. 3:24:10आ रही है। शौर्य ने यह सुना तो उसकी आंखें
  4450. 3:24:13झुक गई। वो शिप्रा से नजर नहीं मिला पा
  4451. 3:24:15रहा था। वो जल्दी से बिस्तर से उठा और
  4452. 3:24:18अलमीरा से अपने कपड़े निकालकर तुरंत
  4453. 3:24:20बाथरूम में चला [संगीत] गया। 5 मिनट बाद
  4454. 3:24:22वो बाथरूम से बाहर आया। शिप्रा अभी भी
  4455. 3:24:25कमरे में खड़ी थी। उसने नाइटी चेंज कर रखा
  4456. 3:24:28था। शौर्य बाथरूम से बाहर आया पर वो
  4457. 3:24:30शिप्रा से नजर नहीं मिला पा रहा था। शौर्य
  4458. 3:24:33अपने बेड [संगीत] पर जाने से पहले सोचा
  4459. 3:24:35क्या उसे शिप्रा से पूछना चाहिए कि क्या
  4460. 3:24:37अभी भी उसके कपड़े से नताशा के इत्र की
  4461. 3:24:40खुशबू आ रही है? पर उसकी हिम्मत [संगीत]
  4462. 3:24:42नहीं हुई कि वह शिप्रा से इस बारे में पूछ
  4463. 3:24:44सके। अब आगे क्या होगा? क्या शौर्य और
  4464. 3:24:48शिप्रा अपने दिल में [संगीत] उमड़ते
  4465. 3:24:49जज्बात को एक दूसरे से बयान कर पाएंगे या
  4466. 3:24:52यूं हो एक दूसरे से लुका छिपी खेलते रहे।
  4467. 3:24:55शौर्य बाथरूम से बाहर तो आ गया था परकि
  4468. 3:24:58शिप्रा अभी भी कमरे में मौजूद थी इसलिए वो
  4469. 3:25:02सीधा [संगीत] बिस्तर पर नहीं जा सकता था।
  4470. 3:25:04तुम्हारी तबीयत तो ठीक है। शौर्य ने अपना
  4471. 3:25:07कंसर्न जाहिर किया। हां मेरी तबीयत एकदम
  4472. 3:25:11ठीक है। शिप्रा अपने गले को खरासती हुई
  4473. 3:25:14बोली तो फिर तुम्हें नींद क्यों नहीं आ
  4474. 3:25:17रही है? [संगीत] शौर्य शिप्रा को जी भर कर
  4475. 3:25:20देखता हुआ बोला। पिंक नाइटी में सिमटा
  4476. 3:25:23शिप्रा का मिल्की बदन उसके जज्बात को
  4477. 3:25:26भड़काने के लिए काफी था। उसे अपना गला
  4478. 3:25:29सूखता सा प्रतीत हो रहा था। [संगीत] यह
  4479. 3:25:32तुम्हारे कारण ही है। शिप्रा शौर्य पर ही
  4480. 3:25:35इल्जाम लगाती हुई बोली मेरे कारण। पर
  4481. 3:25:38मैंने क्या किया? शौर्य अचरज भरे स्वर में
  4482. 3:25:42बोला, "तुमने क्या किया? [संगीत]
  4483. 3:25:44तुम्हारे कारण मुझे राजा साहब के सामने
  4484. 3:25:46शर्मिंदा होना पड़ा। वो तुम्हारी फिल्म के
  4485. 3:25:49मुहूर्त में आ रहे थे। जब मुझसे [संगीत]
  4486. 3:25:51उन्होंने साथ चलने को कहा तो इस बारे में
  4487. 3:25:54मुझे पता ही नहीं था। कितना एंब्रेसिंग
  4488. 3:25:57स्थिति था वो मेरे लिए। तुमने तो इस बारे
  4489. 3:25:59में मुझे बताना भी जरूरी नहीं समझा।
  4490. 3:26:02शिप्रा ने अपने दिल में दबा कर रखे अपने
  4491. 3:26:04जज्बात बयान कर दिया। शौर्य को भी लगा
  4492. 3:26:07शिप्रा का कंप्लेन अपनी जगह जायज [संगीत]
  4493. 3:26:10है। उसने एक बार फिर से शिप्रा से सॉरी
  4494. 3:26:12कहा। तुम्हारे लिए तो बड़ा आसान है हर बार
  4495. 3:26:16सॉरी बोल देना और इस अपनी गलतियों [संगीत]
  4496. 3:26:18से छुटकारा पा लेना। शिप्रा शौर्य को
  4497. 3:26:21तिरछी नजरों से देखती हुई बोली। ऐसा कुछ
  4498. 3:26:24नहीं [संगीत] है। मैंने इतना सोचा नहीं
  4499. 3:26:27था। शौर्य बेबस स्वर में बोला। शिप्रा
  4500. 3:26:31शांत आंखों से उसे देखती रही। शौर्य ने
  4501. 3:26:34बड़ी ही मासूमियत से शिप्रा [संगीत] को
  4502. 3:26:36जवाब दिया था। शिप्रा शौर्य के करीब गई और
  4503. 3:26:39उसके कपड़ों को सूंघने की कोशिश की। शौर्य
  4504. 3:26:42समझ नहीं पाया कि शिप्रा उसके पास क्यों
  4505. 3:26:44आई है? वो एक कदम पीछे हो गया। वो हड़बड़ा
  4506. 3:26:48कर बोला क्या हुआ? सब ठीक तो है? तुम ऐसे
  4507. 3:26:52हड़बड़ा क्यों रहे हो? मैं यह देखने को
  4508. 3:26:55पास आई थी कि अभी [संगीत] भी तुम्हारे
  4509. 3:26:57कपड़ों से नताशा के इत्र की खुशबू तो नहीं
  4510. 3:26:59आ रही। शिप्रा शौर्य को करे नजरों से
  4511. 3:27:02देखती हुई बोली शौर्य को अपनी इस बेवकूफी
  4512. 3:27:05पर खुद ही तरस आया। वैसे तो वह उम्मीद
  4513. 3:27:08[संगीत] करता रहता था कि काश उसे शिप्रा
  4514. 3:27:10के करीब जाने का मौका मिले और जब वह पास आ
  4515. 3:27:13रही थी तो वह स्वयं पीछे हट गया। वो फिर
  4516. 3:27:16घबराते हुए शिप्रा के करीब आया। उसने
  4517. 3:27:19शिप्रा की सांसों की गर्मी को अपने सीने
  4518. 3:27:22पर महसूस किया। उसे वो रात ध्यान आया जिस
  4519. 3:27:25रात शिप्रा उसके सीने के ऊपर अपना सर रखकर
  4520. 3:27:27सोई थी। बरबस ही उसका हाथ शिप्रा के पीछे
  4521. 3:27:31लिपट गया जिससे शिप्रा उसके सीने से लग
  4522. 3:27:33गई। शिप्रा ने ऐसी उम्मीद नहीं की थी कि
  4523. 3:27:36शौर्य उसे अपनी बाहों में भर लेगा। वैसे
  4524. 3:27:39तो उसे शौर्य का उसे अपनी बाहों में भरना
  4525. 3:27:42अच्छा ही लगा था। पर [संगीत] उसने अपनी
  4526. 3:27:44भौही चढ़ाकर कहा यह क्या है? शौर्य को
  4527. 3:27:48एहसास हुआ कि [संगीत] उसने क्या किया है।
  4528. 3:27:50पर अब तक तो वह उसको अपनी बाहों में भर
  4529. 3:27:53चुका था। इसलिए वह बात बनाता हुआ बोला।
  4530. 3:27:56अभी तुम ही तो बोली थी कि तुमको देखना है
  4531. 3:27:58कि अभी भी नताशा के इत्र की खुशबू मेरे
  4532. 3:28:01कपड़ों से तो नहीं आ रही। उसके लिए मुझे
  4533. 3:28:04तुम्हारे इतने पास आने की भी जरूरत नहीं
  4534. 3:28:06है। वो थोड़ी दूरी से भी पता किया जा सकता
  4535. 3:28:09[संगीत] है। तुम्हें तो बस किसी ना किसी
  4536. 3:28:11बहाने लड़कियों को अपने पास लाने का बहाना
  4537. 3:28:13चाहिए। पहले नताशा को अपनी बाहों में भरा
  4538. 3:28:16[संगीत] था। अब मौका मिलते ही मुझे अपनी
  4539. 3:28:18बाहों में भर लिया। शिप्रा को मौका मिला
  4540. 3:28:21शौर्य पर तंज कसने का तो वो इससे चुकी
  4541. 3:28:24नहीं। जैसे ही शौर्य ने शिप्रा की बात को
  4542. 3:28:27सुना, वह तुरंत शिप्रा को छोड़कर एक कदम
  4543. 3:28:29[संगीत] पीछे हो गया। इस तरह शौर्य को
  4544. 3:28:32पीछे जाते देखकर शिप्रा को तुरंत महसूस
  4545. 3:28:35हुआ कि उसने शौर्य से [संगीत] कुछ ज्यादा
  4546. 3:28:37चुभने वाली बात तो नहीं बोल दी। पर अब
  4547. 3:28:40क्या हो सकता है? तीर तो निकल चुका है।
  4548. 3:28:42उसको अपने दिल में हल्की सी चुभन महसूस
  4549. 3:28:45हुई। शौर्य अब उसकी ओर देख भी नहीं रहा
  4550. 3:28:48था। वो शिप्रा से नजर चुराता हुआ धीरे से
  4551. 3:28:51बोला। सॉरी। शिप्रा समझ गई कि शौर्य ने
  4552. 3:28:55उसकी बात को दिल पर ले [संगीत] लिया है।
  4553. 3:28:57उसके चेहरे का भाव भी बदल गया था। शिप्रा
  4554. 3:29:00को लगा शौर्य के दिमाग में कोई और गलत
  4555. 3:29:03विचार आए। उससे पहले उसे कुछ करना चाहिए।
  4556. 3:29:06यह सोचकर वह खुद आगे बढ़ी और शौर्य के
  4557. 3:29:08सीने से लिपट गई। अब शौर्य के हैरान होने
  4558. 3:29:12की बारी थी। उसे समझ नहीं आया कि इस लड़की
  4559. 3:29:15का दिमाग कैसे काम करता है। अभी इसी बात
  4560. 3:29:17के लिए उसके ऊपर तंज कस रही थी और अब खुद
  4561. 3:29:20ही आकर उससे लिपट गई है। अब यह क्या है?
  4562. 3:29:23अभी इसी बात के लिए मुझे सुना रही थी और
  4563. 3:29:26[संगीत] अब खुद मुझसे आकर लिपट गई हो। तो
  4564. 3:29:28अब मैं इसके लिए क्या कहूं? शौर्य ने ऐसा
  4565. 3:29:31बोल तो दिया पर [संगीत] उसने फिर शिप्रा
  4566. 3:29:34को पकड़ने की कोई कोशिश नहीं की। उसने
  4567. 3:29:36अपना हाथ उससे दूर ही रखा। तुम्हें जो भी
  4568. 3:29:39कहना है कह सकते हो। मुझे फर्क नहीं
  4569. 3:29:42पड़ता। शिप्रा शौर्य के सीने से लिपटी हुई
  4570. 3:29:45ही बोली। उसकी आंखें बंद थी। [संगीत] इसी
  4571. 3:29:48समय उसने अपना सर उठाया और शौर्य के गर्दन
  4572. 3:29:51के नीचे अपने होठों को रख दिया। शिप्रा के
  4573. 3:29:54इस एक्शन से शौर्य के पूरे शरीर में करंट
  4574. 3:29:57सा दौड़ गया। पूरे शरीर ने एक झुरझुरी
  4575. 3:30:00[संगीत] सी ली। शौर्य को लगा कि वह अगर
  4576. 3:30:02कुछ और देर इसी अवस्था में रहा तो वह अपनी
  4577. 3:30:05भावनाओं पर कंट्रोल नहीं रख पाएगा। वो
  4578. 3:30:08शिप्रा का कंधा पकड़ कर उसको खुद से अलग
  4579. 3:30:11करता हुआ बोला, अब और मुझे पागल [संगीत]
  4580. 3:30:13बनाने की जरूरत नहीं है। एक पल पहले तो
  4581. 3:30:16ऐसी चुभने वाली बात बोलती हो और दूसरे पल
  4582. 3:30:19ऐसा दिखाती हो जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो।
  4583. 3:30:22तो और क्या करती उस नताशा से? तो ऐसे
  4584. 3:30:25लिपटे हुए थे जैसे वो तुम्हारी बीवी
  4585. 3:30:27[संगीत] हो। शिप्रा शौर्य की आंखों में
  4586. 3:30:29देखती हुई बोली। पर शौर्य अभी भी उससे
  4587. 3:30:32अपनी नजर नहीं मिला पा रहा था। पर जैसे ही
  4588. 3:30:35उसने शिप्रा [संगीत] की बात सुना वो बोला
  4589. 3:30:38ओ हेलो तुम्हें ध्यान है ना कि हमारे बीच
  4590. 3:30:40क्या कंडीशन निर्धारित हुई है और वो भी
  4591. 3:30:43तुम्हारे द्वारा ही तुमने पहले ही कहा है
  4592. 3:30:46कि अगर मेरी जिंदगी में कोई और लड़की आती
  4593. 3:30:48है या मैं किसी और के साथ रिलेशन में जाता
  4594. 3:30:51भी हूं तो [संगीत] तुम्हें कोई फर्क नहीं
  4595. 3:30:53पड़ेगा। अब अगर मैं नताशा के साथ गले लगता
  4596. 3:30:56हूं या किसी और के साथ तो तुम्हें इससे
  4597. 3:30:58कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। वह तो पहले की
  4598. 3:31:01बात थी ना। उस समय मैंने यह भी तो कहा था
  4599. 3:31:04कि तुम मुझसे एक पत्नी के रिलेशन की
  4600. 3:31:06उम्मीद मत रखना। पर अब जब मैं खुद ही
  4601. 3:31:08तुमसे गले [संगीत] मिल सकती हूं। तुम्हारे
  4602. 3:31:10सीने से लिपट सकती हूं तो तुम्हें किसी और
  4603. 3:31:13के पास जाने की क्या जरूरत [संगीत] है?
  4604. 3:31:15इतना बोलकर शिप्रा एक बार फिर से शौर्य के
  4605. 3:31:18सीने से लिपट गई। पर इस बार उसने यह अपने
  4606. 3:31:21चेहरे की शर्मिंदगीगी छुपाने के लिए की
  4607. 3:31:23थी। क्योंकि यह एक तरह से उसकी
  4608. 3:31:25स्वीकारोक्ति थी कि वो उसे पसंद करने लगी
  4609. 3:31:27है। एक ही पल में शौर्य के दिल की धड़कन
  4610. 3:31:30तेज हो गई। उसे उम्मीद नहीं था कि इतनी
  4611. 3:31:33जल्दी शिप्रा [संगीत] उससे अपने प्यार का
  4612. 3:31:35इजहार कर देगी। उसने पूरी तरह से खुद को
  4613. 3:31:38शौर्य की पत्नी स्वीकार कर लिया है। अचानक
  4614. 3:31:40ही वह महसूस करने लगा कि उसे [संगीत]
  4615. 3:31:42दुनिया की सबसे बड़ी खुशी मिल गई है। वो
  4616. 3:31:45भी शिप्रा को अपनी बाहों में भरने [संगीत]
  4617. 3:31:47ही जा रहा था कि अचानक उसके भी मन में कुछ
  4618. 3:31:49खुराफात सुझा। उसने शिप्रा को फिर से खुद
  4619. 3:31:52से अलग किया [संगीत] और बोला अब इस बात का
  4620. 3:31:55कोई मतलब नहीं है। अब मैं किसी और के साथ
  4621. 3:31:58आगे बढ़ रहा हूं तो तुमने अपनी कंडीशन बदल
  4622. 3:32:00दी। यह क्या कोई [संगीत] खेल चल रहा है कि
  4623. 3:32:03तुम अपनी सुविधा के हिसाब से डूज एवन डोंट
  4624. 3:32:06निर्धारित करती रहो। अब यह संभव नहीं है।
  4625. 3:32:09शिप्रा को समझ नहीं आया कि शौर्य यह क्या
  4626. 3:32:12कह रहा है। अचानक ही उसको अपना दिल बैठता
  4627. 3:32:14सा महसूस हुआ। अचानक उसकी आंखों [संगीत]
  4628. 3:32:17के सामने मेघना का चेहरा घूम गया। उसे
  4629. 3:32:20उसकी बात याद आने लगी जब उसने कहा था
  4630. 3:32:22[संगीत] कि एक दिन शौर्य उससे इतना दूर हो
  4631. 3:32:25जाएगा कि वह चाहकर भी फिर उसे वापस नहीं
  4632. 3:32:27ला पाएगी। तो क्या मेघना की बात सच साबित
  4633. 3:32:30हो गई? नहीं यह नहीं हो सकता। वो शौर्य को
  4634. 3:32:35अपनी जिंदगी से दूर नहीं [संगीत] जाने
  4635. 3:32:36देगी। चाहे इसके लिए उसे कुछ भी करना
  4636. 3:32:39पड़े। शिप्रा यह सोच ही रही थी कि तभी फिर
  4637. 3:32:42[संगीत] से उसके कान में शौर्य की आवाज
  4638. 3:32:44सुनाई दिया। देखो मैं तुमको यह अश्योर
  4639. 3:32:47करता हूं कि मैं किसी और से शादी नहीं
  4640. 3:32:49[संगीत] करूंगा। इस तरह मेरी ब्याहता
  4641. 3:32:51पत्नी तुम ही रहोगी। इसके अलावे मैं किसके
  4642. 3:32:54साथ क्या करता हूं या मेरे साथ कौन होती
  4643. 3:32:57है [संगीत] इससे तुमको मतलब नहीं होना
  4644. 3:32:58चाहिए। शौर्य भावहीन चेहरे के साथ बोला।
  4645. 3:33:03मैं जानती हूं उस समय मैंने क्या कहा था।
  4646. 3:33:05वो मेरी गलती थी। अब मैं समझ गई हूं कि
  4647. 3:33:08मैं अपनी जिंदगी की कल्पना तुम्हारे बिना
  4648. 3:33:10नहीं कर सकती और मैं समझती हूं कि तुम भी
  4649. 3:33:13मुझे पसंद करते हो। तो फिर तुम ऐसी बात
  4650. 3:33:16क्यों कर रहे हो? शिप्रा बेचैनी [संगीत]
  4651. 3:33:18से पहलू बदलती हुई बोली। उसकी बातों से
  4652. 3:33:21ऐसा लग रहा था जैसे उसकी दुनिया ही उजड़ने
  4653. 3:33:24वाली हो। देखो मुझे माफ करो। पर अब यह
  4654. 3:33:28संभव नहीं है और तुम्हें भी इस सच्चाई को
  4655. 3:33:30स्वीकार कर [संगीत] लेना चाहिए। मुझे लगता
  4656. 3:33:33है कि जिस तरह से हमारा रिलेशन आगे बढ़
  4657. 3:33:35रहा है, हमें वैसे [संगीत] ही कंटिन्यू
  4658. 3:33:37करना चाहिए।
  4659. 3:33:39शायद यही हम दोनों के लिए अच्छा है। शौर्य
  4660. 3:33:42गमगीन स्वर में बोला। इस बीच वह शिप्रा
  4661. 3:33:45[संगीत] के चेहरे के बदलते भावों को भी
  4662. 3:33:47देख रहा था। शौर्य की बातों ने शिप्रा की
  4663. 3:33:50रही सही उम्मीद भी खत्म कर दी। [संगीत]
  4664. 3:33:52अचानक ही उसे लगा कि अगर वह थोड़ी देर और
  4665. 3:33:55खड़ी रही तो वह गिर जाएगी। वो लड़खराती
  4666. 3:33:58हुई दो कदम आगे बढ़ी और शौर्य के बेड पर
  4667. 3:34:01बैठ गई। उसने सहारे के लिए बेड [संगीत] के
  4668. 3:34:03कॉर्नर के स्तंभ को पकड़ लिया। उसकी आंखें
  4669. 3:34:06झुक गई थी जिससे दो बूंद आंसू उसके गाल पर
  4670. 3:34:09लुढ़क गई। वो लरसते [संगीत] होठों से बोली
  4671. 3:34:13क्या तुम सचमुच किसी के साथ रिलेशन में आ
  4672. 3:34:15गए हो? शिप्रा की आवाज में जो वेदना थी,
  4673. 3:34:18उसने शौर्य को तड़पा दिया। उसे लगा उसे यह
  4674. 3:34:21खेल और लंबा नहीं चलाना चाहिए। पहले ही
  4675. 3:34:24उसकी आंखों में आंसू आ गए हैं। फिर भी
  4676. 3:34:26उसने शिप्रा के सवाल के जवाब [संगीत] में
  4677. 3:34:28कहा, तुम्हें उसके बारे में नहीं जानना
  4678. 3:34:31चाहिए कि मैं किसके साथ रिलेशन में हूं या
  4679. 3:34:33मैं किसको लेकर सीरियस हूं। मुझे क्यों
  4680. 3:34:36[संगीत] नहीं जानना चाहिए। मैं बोल देती
  4681. 3:34:38हूं अगर कोई भी दूसरी लड़की तुम्हारी
  4682. 3:34:40जिंदगी में आई तो मैं उसका खून कर दूंगी।
  4683. 3:34:42बोलते हुए शिप्रा का चेहरा बिगड़ गया।
  4684. 3:34:45[संगीत] उसकी आंखों में आंसुओं का शैलाब
  4685. 3:34:47नजर आने लगा। शौर्य का दिल पसीज गया था।
  4686. 3:34:50पर उसके शब्द ने शौर्य को और भी अचरज में
  4687. 3:34:53डाल दिया। वो सोचने को मजबूर हो गया कि
  4688. 3:34:55क्या [संगीत] शिप्रा उसको इतना पसंद करने
  4689. 3:34:57लगी कि उसके लिए इस स्तर तक जाने की बात
  4690. 3:35:00कर सकती है। देखो तुम कुछ ज्यादा ही भावुक
  4691. 3:35:02हो [संगीत] रही हो। इसमें कुछ भी गलत नहीं
  4692. 3:35:04है। मैंने ऐसा कुछ नहीं किया या करने वाला
  4693. 3:35:07हूं जो तुम्हारी कंडीशन को तोड़ता हो।
  4694. 3:35:09इसीलिए तुम्हें मेरी स्थिति को समझना
  4695. 3:35:11चाहिए। तुम्हारी इस तरह [संगीत] की बातें
  4696. 3:35:14मुझे तकलीफ देती हैं। शौर्य ने अभी भी
  4697. 3:35:16अपना खेल जारी रखा। शौर्य की इस बात ने
  4698. 3:35:19[संगीत] शिप्रा को पूरी तरह तोड़ दिया।
  4699. 3:35:21उसकी शारीरिक अभिव्यक्ति यह जाहिर करने के
  4700. 3:35:23लिए काफी था कि उसने अपनी हार मान ली है।
  4701. 3:35:26वो भावपूर्ण नजरों से [संगीत] शौर्य को
  4702. 3:35:28देखती हुई बोली, क्या कोई ऐसी संभावना है
  4703. 3:35:31कि तुम मेरी जिंदगी का हिस्सा हो सकते हो?
  4704. 3:35:34तुम्हारी कोई भी कंडीशन हो, मैं उसे मानने
  4705. 3:35:36को तैयार [संगीत] हूं। शौर्य ने पहली बार
  4706. 3:35:39शिप्रा की आंखों में अपने लिए एक तड़प
  4707. 3:35:41देखी थी। जिसे देखने के लिए वह कब से तड़प
  4708. 3:35:44रहा था। यही तो वह चाहता [संगीत] था कि
  4709. 3:35:46शिप्रा उसे उसी रूप में प्यार करे जिस रूप
  4710. 3:35:48में उससे मिली थी। और आज जो उसकी आंखों
  4711. 3:35:51में उसके लिए तड़प थी उसमें वही [संगीत]
  4712. 3:35:53अनुभूति थी। उसको खो देने के डर ने उसको
  4713. 3:35:56कितना तड़पा दिया था यह उसकी आंखों में
  4714. 3:35:58साफ देखा जा [संगीत] सकता था। उसकी भरी
  4715. 3:36:00हुई आंखें कभी भी अपनी सीमा को तोड़ने को
  4716. 3:36:03तैयार थी। उसकी वेदना से भरी आंखें देखकर
  4717. 3:36:06शौर्य को पछतावा होने लगा कि मजाकमज़ाक
  4718. 3:36:09में उसने शिप्रा को रुला दिया। एक कंडीशन
  4719. 3:36:12है अगर मेरी पत्नी मुझे दिल [संगीत] की
  4720. 3:36:14गहराई से किस करती है तो हो सकता है कि
  4721. 3:36:16मेरा इरादा बदल जाए। शौर्य शिप्रा [संगीत]
  4722. 3:36:19के मुरझाए चेहरे को देखकर बोला, पहले तो
  4723. 3:36:21शिप्रा को समझ नहीं आया कि शौर्य ने क्या
  4724. 3:36:23कहा। फिर उसने शौर्य की तरफ देखा। इसके
  4725. 3:36:26चेहरे पर उसने एक [संगीत] हल्की मुस्कान
  4726. 3:36:28देखी। तब जाकर उसका ध्यान उसके कहे शब्दों
  4727. 3:36:31की तरफ गया और जब समझ आया [संगीत] कि अभी
  4728. 3:36:33शौर्य ने क्या कहा है तो उसकी आंखें शौर्य
  4729. 3:36:36के चेहरे पर स्थिर हो गई। उसके चेहरे के
  4730. 3:36:38भाव से वह समझ गई कि शौर्य अभी तक उसके
  4731. 3:36:41साथ मजाक कर रहा था। वो अपनी जगह से उठी
  4732. 3:36:44और भागकर शौर्य के पास पहुंची और उसे कसकर
  4733. 3:36:47अपनी बाहों में जकड़ लिया। वो अभी तक अपनी
  4734. 3:36:49[संगीत] आंसुओं के शैलाब को जो रोक कर रखी
  4735. 3:36:52थी वो अपना बांध तोड़कर धारा प्रवाह बहने
  4736. 3:36:54लगा। शौर्य को शिप्रा का यह आलिंगन ने जो
  4737. 3:36:57सुख प्रदान किया वो उसको व्यक्त नहीं कर
  4738. 3:36:59[संगीत] सकता था। जब कुछ देर शिप्रा उसी
  4739. 3:37:02अवस्था में खड़ी अपने आंसुओं से शौर्य के
  4740. 3:37:04शर्ट को गीला करती रही तो शौर्य ने फिर से
  4741. 3:37:07कहा मेरी कंडीशन [संगीत] अभी भी पूरी नहीं
  4742. 3:37:09हुई। शौर्य अभी आगे और भी कुछ बोलता। पर
  4743. 3:37:13उससे पहले [संगीत] शिप्रा के होंठ उसके
  4744. 3:37:15होंठ से चिपक गए। उसके शब्द उसके होठों
  4745. 3:37:17में ही दब गए। शिप्रा भी अब अपनी कुछ देर
  4746. 3:37:20पहले के ट्रॉमा [संगीत] से बाहर आ गई थी।
  4747. 3:37:22उसे जब यह समझ आया कि शौर्य ने अभी उसके
  4748. 3:37:25साथ मजाक किया था तो उसने उसके होठों पर
  4749. 3:37:27एक तेज बाइट कर ली। शौर्य ने झटके से अपना
  4750. 3:37:31चेहरा उससे अलग [संगीत] किया। उसका हाथ
  4751. 3:37:33खुद ही उसके होठों पर चला गया था। उसने
  4752. 3:37:36देखा उसके हाथ में खून आ गया था। यह क्या
  4753. 3:37:39है? शौर्य अपने हाथ [संगीत] में लगे खून
  4754. 3:37:41को शिप्रा को दिखाता हुआ बोला,
  4755. 3:37:44तुम्ही ने तो कहा था तुम्हें दिल की गहराई
  4756. 3:37:47से किस चाहिए था। वही तो दिया है। एक से
  4757. 3:37:51मन नहीं भरा होगा। [संगीत] आ जाओ एक दूसरा
  4758. 3:37:54भी दे देती हूं। शिप्रा अपनी हाथ शौर्य के
  4759. 3:37:57सर की तरफ बढ़ाती हुई बोली। ना मुझे माफ
  4760. 3:38:01करो। मुझे ऐसा वाइल [संगीत] किस नहीं
  4761. 3:38:03चाहिए। शौर्य शिप्रा को अपने करीब आने से
  4762. 3:38:07रोकता हुआ बोला ऐसे कैसे नहीं चाहिए अभी
  4763. 3:38:10तो तुमने डिमांड की थी अब मैं उसे पूरी
  4764. 3:38:12[संगीत] करने को तैयार हूं तो तुम पीछे
  4765. 3:38:15नहीं हट सकते शिप्रा जिद करती हुई बोली
  4766. 3:38:19अरे कर तो दी पूरी [संगीत] मैंने तो एक
  4767. 3:38:21किसके लिए कहा था वो मुझे मिल गया इसलिए
  4768. 3:38:25मेरी शर्त पूरी हो गई शौर्य डरता [संगीत]
  4769. 3:38:28हुआ बोला उसे अभी भी डर था कि कहीं शिप्रा
  4770. 3:38:31फिर से उसके होठों को काट ना ले शिप्रा को
  4771. 3:38:34शौर्य का यह डरा चेहरा देखकर उस पर और भी
  4772. 3:38:37प्यार आया। उसने उसे फिर से अपनी बाहों
  4773. 3:38:40में भर लिया और उसके सीने पर अपना सर रखकर
  4774. 3:38:43अपनी आंखें बंद कर ली। जाने कितनी ही देर
  4775. 3:38:46वो उसी अवस्था में खड़ी रही। बिना कुछ
  4776. 3:38:49बोले, बिना कुछ सुने। शौर्य ने महसूस किया
  4777. 3:38:52कि अगर उसने कुछ नहीं किया तो शिप्रा उसी
  4778. 3:38:55अवस्था में जाने और कब तक खड़ी रहेगी?
  4779. 3:38:58शौर्य ने उसके कंधे पकड़ कर उसको हिलाया।
  4780. 3:39:01क्या ऐसे ही खड़ा रहना है? इतना बोलकर
  4781. 3:39:04शौर्य ने उसे खुद से अलग करने की कोशिश
  4782. 3:39:06की। पर शिप्रा ने उसे और भी जोर से पकड़
  4783. 3:39:09लिया। [संगीत]
  4784. 3:39:10क्या ऐसे ही खड़ा रहना है? शौर्य प्यार से
  4785. 3:39:13शिप्रा के सर पर हाथ फेरता हुआ बोला। अब
  4786. 3:39:16मैं और खड़ा नहीं रह सकता। मुझे सोना है
  4787. 3:39:18और तुमको भी सो जाना चाहिए। सवेरे तुम्हें
  4788. 3:39:21उठना भी है। अभी भी शिप्रा कुछ नहीं बोली।
  4789. 3:39:25बस उसको कसकर पकड़ी रही। जब शौर्य ने
  4790. 3:39:28महसूस किया कि वह जानबूझकर उसको अनसुना कर
  4791. 3:39:30रही है तो उसने उसको झुककर अपने हाथों में
  4792. 3:39:33उठा लिया और कमरे [संगीत] से बाहर की तरफ
  4793. 3:39:35चल दिया। शिप्रा ने जब उसे बाहर की तरफ
  4794. 3:39:38बढ़ते देखा तो वो अपना सर उठाकर बोली इधर
  4795. 3:39:41कहां जा रहे हो? तुम्हें तुम्हारे कमरे
  4796. 3:39:44में छोड़ने जा रहा हूं। शौर्य मुस्कुराता
  4797. 3:39:47हुआ बोला। क्यों [संगीत] यहां क्या हो
  4798. 3:39:50गया? मुझे तुम्हारे पास ही रहना है।
  4799. 3:39:52शिप्रा अपने पैर हिलाती हुई बोली। पर
  4800. 3:39:55शौर्य अब तक अपने कमरे से निकलकर शिप्रा
  4801. 3:39:58के कमरे में पहुंच गया था। वो शिप्रा के
  4802. 3:40:00बेड के पास पहुंचकर उसको उसके बेड पर
  4803. 3:40:03छोड़ा। पर शिप्रा की बाहें अभी भी शौर्य
  4804. 3:40:06की गर्दन पर लिपटी हुई थी। शौर्य ने
  4805. 3:40:08शिप्रा से अपनी गर्दन छुराना चाहा। पर
  4806. 3:40:10शिप्रा ने शौर्य के कॉलर पकड़ कर एक झटका
  4807. 3:40:13दिया तो शौर्य उसके बेड पर गिर गया। एक
  4808. 3:40:16करवट लेती हुई शिप्रा शौर्य के ऊपर आ गई।
  4809. 3:40:19शौर्य असहाय महसूस करने लगा। शौर्य फिर से
  4810. 3:40:22उठने की कोशिश करने लगा [संगीत] तो शिप्रा
  4811. 3:40:24अपना सर उठाकर उसकी आंखों में देखती हुई
  4812. 3:40:26बोली तुम चाहते हो कि मैं सो जाऊं तो फिर
  4813. 3:40:30तुम यहां से मत जाओ। अगर तुम यहां से चले
  4814. 3:40:33गए तो मुझे नींद नहीं आएगी। [संगीत]
  4815. 3:40:35शिप्रा ने अपनी ठोरी शौर्य के सीने पर
  4816. 3:40:37टिका रखी थी। शिप्रा की बात सुनकर [संगीत]
  4817. 3:40:40शौर्य स्थिर हो गया था। उसकी आंखें शिप्रा
  4818. 3:40:43के चेहरे पर जम गई। आज से पहले कभी
  4819. 3:40:46[संगीत] भी इतने इत्मीनान के साथ शौर्य ने
  4820. 3:40:48शिप्रा का चेहरा नहीं देखा था। आज जब वह
  4821. 3:40:51उसके इतने करीब थी तो उसे महसूस हुआ कि
  4822. 3:40:54उसको उसका सारा जहान मिल गया। अब अगर वह
  4823. 3:40:56चाहे तो शिप्रा को अपनी असलियत बता सकता
  4824. 3:40:59है। अब आगे क्या होगा? क्या परिवर्तन आएगा
  4825. 3:41:03शौर्य की लाइफ में? शिप्रा का प्यार पाकर
  4826. 3:41:06क्या शौर्य अब शिप्रा को अपनी असलियत बता
  4827. 3:41:08देगा। यह पल शौर्य के लिए किसी [संगीत]
  4828. 3:41:11सपने का सच होने जैसा था। वह कब से इसी पल
  4829. 3:41:14का इंतजार कर रहा था कि शिप्रा उसे
  4830. 3:41:17[संगीत] कब अपनाती है और आज वह दिन आ गया।
  4831. 3:41:20शिप्रा का समीप्य उसे एक अलग अनुभूति
  4832. 3:41:22[संगीत] प्रदान कर रही थी। शौर्य ने
  4833. 3:41:24शिप्रा के चेहरे को अपने दोनों हाथों में
  4834. 3:41:27भर लिया। उसकी थोड़ी देर पहले की झिझक
  4835. 3:41:29समाप्त हो गई थी। उसने देखा उसके गालों पर
  4836. 3:41:33आंसुओं की सूखी लाइन बन चुकी थी। स्पष्ट
  4837. 3:41:35पता चल रहा था कि थोड़ी देर पहले वह रोई
  4838. 3:41:38थी। शौर्य को अपने दिल में [संगीत] दर्द
  4839. 3:41:40का एहसास हुआ। उसे दुख हुआ कि उसने अपने
  4840. 3:41:42मजाक से अभी उसे रुला दिया था। सॉरी।
  4841. 3:41:46शौर्य अपनी उंगलियों से शिप्रा के गाल को
  4842. 3:41:48सहलाते हुए बोला। शिप्रा ने शौर्य की बात
  4843. 3:41:51सुना तो उसकी आंखों में देखा। अब यह सॉरी
  4844. 3:41:54किस लिए? मैंने तुम्हें रुला दिया इसलिए।
  4845. 3:41:57शौर्य की उंगलियां अभी भी उसके गालों पर
  4846. 3:41:59थी। जैसे [संगीत] वो अपनी उंगलियों से
  4847. 3:42:01उसकी आंसुओं की दाग को मिटाने की कोशिश कर
  4848. 3:42:04रहा था। शिप्रा को समझ आया कि तब से शौर्य
  4849. 3:42:06क्या करने की कोशिश कर रहा है? क्या तुम
  4850. 3:42:09मेरे गाल को साफ करने की कोशिश कर रहे हो?
  4851. 3:42:11जाओ जाकर अपना चेहरा साफ कर लो। मैं
  4852. 3:42:14तुम्हें ऐसे नहीं देख सकता। शौर्य शिप्रा
  4853. 3:42:16के बालों में उंगलियां फेरता हुआ बोला।
  4854. 3:42:19अगर तुम मुझे ऐसे नहीं देख सकते तो फिर
  4855. 3:42:21मुझे रुलाया क्यों? शिप्रा अपनी भवें
  4856. 3:42:23चढ़ाती हुई बोली। मुझे क्या पता था कि तुम
  4857. 3:42:26इतनी कमजोर हो जो मेरी इतनी छोटी सी मजाक
  4858. 3:42:29पर रो पड़ोगी। शौर्य शिप्रा के गाल पर
  4859. 3:42:31हल्की चपत जमाते हुए बोला।
  4860. 3:42:33[संगीत]
  4861. 3:42:33चाहे कोई भी मजाक करना पर मुझसे यह मजाक
  4862. 3:42:36मत करना कि तुम्हारी जिंदगी में मेरे सिवा
  4863. 3:42:38भी कोई आ सकती है। शिप्रा सीरियस होती हुई
  4864. 3:42:41बोली ओह हेलो क्या हो गया? [संगीत] तुम
  4865. 3:42:44इतनी सीरियस क्यों हो गई? आज अचानक
  4866. 3:42:46तुम्हें मुझ पर इतना प्यार क्यों आ गया?
  4867. 3:42:48शौर्य शिप्रा को सीरियस देखकर [संगीत]
  4868. 3:42:50माहौल को हल्का करने की नियत से बोला। यह
  4869. 3:42:53आज अचानक नहीं हुआ। यह तो पहले से [संगीत]
  4870. 3:42:56ही है। पर आज कहने की हिम्मत कर पाई।
  4871. 3:42:58शिप्रा ने सफाई दिया। यानी अगर [संगीत]
  4872. 3:43:01मैं आज यह मजाक नहीं करता तो मैं यह जान
  4873. 3:43:03ही नहीं पाता कि तुम मुझे कितना प्यार
  4874. 3:43:05करती हो। शौर्य मुस्कुराता हुआ बोला, "यह
  4875. 3:43:09तुम गलत बोल रहे हो।" मैंने तो पहले ही
  4876. 3:43:11तुमसे बोल दिया था कि मैं तुम्हें पसंद
  4877. 3:43:13करने लगी हूं। पर तुमने मुझे जानबूझकर
  4878. 3:43:15रुलाया। शिप्रा शिकायत करती हुई बोली, अब
  4879. 3:43:19जल्दी से अपने कान को पकड़ कर मुझे रुलाने
  4880. 3:43:21के लिए सॉरी बोलो। ठीक है, [संगीत] मैं
  4881. 3:43:23कान पकड़ कर सॉरी बोलूंगा। पर पहले तुम
  4882. 3:43:26जाकर अपना चेहरा अच्छे से साफ कर लो।
  4883. 3:43:28शौर्य ने फिर से उसे अपना चेहरा साफ करने
  4884. 3:43:30का याद दिलाया। [संगीत]
  4885. 3:43:32क्या मैं इतनी बुरी लग रही हूं कि तुम
  4886. 3:43:34मेरा चेहरा नहीं देख पा रहे हो? शिप्रा
  4887. 3:43:36शंका भरे स्वर [संगीत] में बोली, कैसी बात
  4888. 3:43:39करती हो? तुम कभी बुरी लग ही नहीं सकती।
  4889. 3:43:41अगर मेरा बस चले तो मैं हमेशा तुम्हें
  4890. 3:43:43देखता ही रहूं। शौर्य शिप्रा का गाल पकड़
  4891. 3:43:46कर खींचता हुआ बोला। अगर ऐसी बात है
  4892. 3:43:48[संगीत] तो तुम मेरा चेहरा क्यों धुलवाने
  4893. 3:43:50पर तुले हुए हो? शिप्रा ने यह सवाल
  4894. 3:43:53मासूमियत से पूछा। [संगीत]
  4895. 3:43:54वो इसलिए कि तुम्हारे चेहरे पर के आंसुओं
  4896. 3:43:57की परत देखकर मेरा मन अपराध बोध से भर जा
  4897. 3:44:00रहा है कि [संगीत] मेरे कारण तुम्हारी
  4898. 3:44:01आंखों में आंसू आ गया। शौर्य ने असली कारण
  4899. 3:44:05बताया। शौर्य की बात सुनकर शिप्रा का मन
  4900. 3:44:08भर आया। वो शौर्य के होठों को चूमने के
  4901. 3:44:10लिए उसकी तरफ [संगीत] आगे बढ़ी। शौर्य ने
  4902. 3:44:12जैसे ही महसूस किया कि शिप्रा फिर से उसके
  4903. 3:44:15होठों के पास आ रही है तो तुरंत वो शिप्रा
  4904. 3:44:18के होठों के सामने अपना हाथ अड़ा दिया।
  4905. 3:44:20शिप्रा ने यह देखा तो उसे आश्चर्य [संगीत]
  4906. 3:44:23हुआ कि शौर्य ने ऐसी हरकत क्यों की पर वह
  4907. 3:44:25कुछ और सोच पाती उससे पहले शौर्य बोला
  4908. 3:44:28तुमने पहले ही मेरे होठों को काट लिया है
  4909. 3:44:31अब और नहीं। [संगीत]
  4910. 3:44:32शौर्य की बात सुनकर शिप्रा के चेहरे पर
  4911. 3:44:35स्माइल आ गई। वो बेड से उठी और बाथरूम के
  4912. 3:44:38अंदर [संगीत] चली गई। 5 मिनट बाद ही
  4913. 3:44:40शिप्रा अपना फेस वॉश करके बाथरूम से बाहर
  4914. 3:44:42आ गई। शौर्य बिस्तर से उठकर [संगीत] खड़ा
  4915. 3:44:45हो गया था। शिप्रा ने उसे खड़ा देखा तो
  4916. 3:44:47उसकी भौहें चढ़ गई। वो उसके पास जाकर बोली
  4917. 3:44:51तुम उठ क्यों गए? अपने कमरे में जा रहा
  4918. 3:44:53हूं। मुझे दूसरे के बिस्तर पर नींद नहीं
  4919. 3:44:55आती। शौर्य हिचकिचाता [संगीत] हुआ बोला
  4920. 3:44:59यानी तुम कहना चाहते हो कि तुम्हें मेरे
  4921. 3:45:02साथ सोने पर नींद नहीं आएगी। बोलते हुए
  4922. 3:45:06शिप्रा के चेहरे पर हल्का [संगीत] आक्रोश
  4923. 3:45:08नजर आ रहा था। नहीं मैंने ऐसा तो नहीं
  4924. 3:45:12कहा। शौर्य बात को संभालते हुए बोला। ठीक
  4925. 3:45:16है जाओ फिर। इतना बोलकर शिप्रा वापस मुरी
  4926. 3:45:20और अपने बेड पर आकर पैर ऊपर करके बैठ गई।
  4927. 3:45:24शौर्य को लगा क्या उसने फिर से कोई
  4928. 3:45:26जल्दबाजी कर दी? वो जाकर शिप्रा के पास
  4929. 3:45:29बेड पर बैठ गया और बोला मैं इसलिए उठा था
  4930. 3:45:33कि मैं तुम्हें [संगीत]
  4931. 3:45:34अपने साथ अपने कमरे में ले जाना चाहता था।
  4932. 3:45:38क्यों? इस कमरे में क्या कांटे बिछे हुए
  4933. 3:45:40हैं जो तुम्हारे यहां सोने पर वो तुम्हें
  4934. 3:45:43चुभ [संगीत] जाएंगे? शिप्रा नाराजगी भरे
  4935. 3:45:45स्वर में बोली। नहीं ऐसा तो नहीं है। हां,
  4936. 3:45:50कुछ और रीजन है जिसके लिए मैं तुम्हें अब
  4937. 3:45:52अपने [संगीत] कमरे में ले जाना चाहता हूं।
  4938. 3:45:54शौर्य अपने होठों पर एक मुस्कान लाते हुए
  4939. 3:45:57बोला, "मैं खूब समझ रही [संगीत] हूं। मैं
  4940. 3:46:00बुरा ना मान जाऊं इसलिए तुम अब बातें बना
  4941. 3:46:03रहे हो।" शिप्रा शौर्य के सामने से अपना
  4942. 3:46:06[संगीत] चेहरा फेरती हुई बोली। अरे बाप रे
  4943. 3:46:10अभी तुमको मुझ पर इतना प्यार आ रहा था और
  4944. 3:46:12अब इतनी जल्दी इतना गुस्सा। शौर्य शिप्रा
  4945. 3:46:16के नाराज चेहरे को देखकर [संगीत] बोला, अब
  4946. 3:46:19इस तरह बातें बनाने का कोई फायदा नहीं है।
  4947. 3:46:21तुम्हें यहां नींद नहीं आएगी ना तो अब तुम
  4948. 3:46:24अपने कमरे में जा सकते हो। इतना बोलकर
  4949. 3:46:26[संगीत] शिप्रा बेड पर शौर्य के विपरीत
  4950. 3:46:29दिशा में करवट लेकर लेट गई। शौर्य को
  4951. 3:46:32शिप्रा के इस गुस्से पर भी प्यार आ रहा
  4952. 3:46:34था। वो शिप्रा के कंधे को पकड़ कर अपनी
  4953. 3:46:37[संगीत] तरफ करते हुए बोला। तुम पहले ही
  4954. 3:46:40मुझसे बहुत दूर रह चुकी हो। अब जबकि मैं
  4955. 3:46:42जान गया हूं कि तुम मुझे प्यार करती हो तो
  4956. 3:46:45मैं तुम्हारी और नाराजगी अब झेल नहीं
  4957. 3:46:47सकता। मैं कोई नाराज नहीं हूं। तुम्हें तो
  4958. 3:46:51अपने कमरे में जाना है ना तो जाओ। मैं
  4959. 3:46:53नहीं रोक रही। शिप्रा ने बोलते [संगीत]
  4960. 3:46:55हुए शौर्य की तरफ देखने की कोई कोशिश नहीं
  4961. 3:46:58की। पर मैं तुम्हारे साथ जाना चाहता हूं।
  4962. 3:47:01कुछ ऐसा है जो मैं आज इस पल में जीना
  4963. 3:47:04चाहता हूं। और वो तुम्हारे साथ के बिना
  4964. 3:47:07संभव नहीं है। शौर्य भावनात्मक रूप से
  4965. 3:47:10[संगीत] शांत स्वर में बोला। उसके शब्दों
  4966. 3:47:12से ऐसा लग रहा था कि वो शिप्रा से याचना
  4967. 3:47:15कर [संगीत] रहा है। उसकी कुछ ऐसी ख्वाहिश
  4968. 3:47:18है जिसे शिप्रा ही पूरा कर सकती है। शौर्य
  4969. 3:47:21की रिक्वेस्ट भरी बात सुनकर शिप्रा उसकी
  4970. 3:47:24तरफ पलट कर उठ बैठी। अभी थोड़ी देर पहले
  4971. 3:47:27जो शौर्य उसे रूढ़ नजर आ रहा था, अब अचानक
  4972. 3:47:30उसे सौम्य नजर आने लगा। एक ही पल में उसकी
  4973. 3:47:33सारी नाराजगी दूर हो गई। वो उसकी आंखों
  4974. 3:47:36में देखती हुई बोली, कुछ साफ बताओगे कि
  4975. 3:47:39तुम्हारे दिल में क्या चल रहा है। ठीक है?
  4976. 3:47:42तो सबसे पहले तो मैं तुम्हें यह बता दूं
  4977. 3:47:44कि यह आज [संगीत] की रात जो है वो
  4978. 3:47:46तुम्हारे लिए लंबी होने वाली है। इसलिए
  4979. 3:47:49मैं तुमसे पहले ही इसके लिए माफी मांग
  4980. 3:47:51लेता हूं। बोलते हुए शौर्य ने अपना कान
  4981. 3:47:54पकड़ लिया। फिर आगे [संगीत] बात को जारी
  4982. 3:47:56रखा। हो सकता है कि मेरे कुछ कृत तुम्हें
  4983. 3:48:00बेवकूफी भरा लगे तो उसके लिए भी पहले से
  4984. 3:48:02माफी मांग रहा हूं। [संगीत] शिप्रा को समझ
  4985. 3:48:05नहीं आ रहा था कि शौर्य आखिर कहना क्या
  4986. 3:48:08चाहता है। वो थोड़ी इरिटेट होती [संगीत]
  4987. 3:48:10हुई बोली तुम यूं मुहावरों में ही बात
  4988. 3:48:13करोगे या कुछ साफ-साफ बताओगे भी कि तुम
  4989. 3:48:16चाहते क्या हो? वही तो बताने की कोशिश कर
  4990. 3:48:19रहा हूं। पर उसके लिए तुम्हें मेरे कमरे
  4991. 3:48:21[संगीत] में चलना होगा। बोलते हुए शौर्य
  4992. 3:48:24बेड से खड़ा हो गया। जितनी जल्दी में
  4993. 3:48:27शौर्य खड़ा हुआ, शिप्रा ने शौर्य को घुर
  4994. 3:48:29कर देखा। मुझे तुम्हारे कमरे [संगीत] में
  4995. 3:48:32जाने में कोई आपत्ति नहीं है। पर अब मुझसे
  4996. 3:48:34उठा नहीं जाएगा। इतना बोलकर [संगीत]
  4997. 3:48:37शिप्रा ने अपनी बाहें शौर्य की तरफ फैला
  4998. 3:48:39दी। यह इशारा था कि वो अगर उसको [संगीत]
  4999. 3:48:42अपने कमरे में ले जाना चाहता है तो फिर
  5000. 3:48:45अपनी बाहों में उठाकर ले जाए। शौर्य को
  5001. 3:48:48लगा कि वह फिर से नाराज ना हो जाए। इसीलिए
  5002. 3:48:51उसने जल्दी से उसको [संगीत] अपनी बाहों
  5003. 3:48:53में उठा लिया। शिप्रा ने भी अपनी बाहों की
  5004. 3:48:56माला शौर्य के गले में [संगीत] डाल दिया।
  5005. 3:48:59शौर्य बिना समय गवाए शिप्रा को अपने कमरे
  5006. 3:49:02में लेकर पहुंचा। वो उसको [संगीत] लेकर एक
  5007. 3:49:04कवर्ड के पास पहुंचा और शिप्रा को फर्श पर
  5008. 3:49:07खड़ा किया। शिप्रा ने जब देखा कि वो एक
  5009. 3:49:10कवर्ड [संगीत] के पास खड़ी है तो वो शौर्य
  5010. 3:49:12की आंखों में देखती हुई बोली। अब अपने
  5011. 3:49:15सस्पेंस [संगीत] को खत्म भी करो और जल्दी
  5012. 3:49:17से बताओ कि तुम्हारे इन एक्शन के पीछे
  5013. 3:49:20क्या कारण है। ठीक है? तो पहले अपनी
  5014. 3:49:23[संगीत] आंखें बंद करो और पीछे पलट जाओ।
  5015. 3:49:28शौर्य हल्की [संगीत] मुस्कान के साथ बोला।
  5016. 3:49:30शिप्रा ने वैसा ही किया जैसा शौर्य ने कहा
  5017. 3:49:33था। शौर्य उसको कवर्ड के सामने ले जाकर
  5018. 3:49:37खड़ा कर दिया था। उसने कवर्ड का दरवाजा
  5019. 3:49:40खोला और शिप्रा से अपनी आंख खोलने को कहा।
  5020. 3:49:44शिप्रा ने अपनी आंखें [संगीत] खोली तो
  5021. 3:49:46सामने का नजारा देखकर उसकी आंखें फटी की
  5022. 3:49:49फटी रह गई। [संगीत] उसके सामने एक खूबसूरत
  5023. 3:49:52दुल्हन का लिबास खूबसूरती से कवर्ड में
  5024. 3:49:54लटका हुआ था। इसके साथ ही दुल्हन के पहनने
  5025. 3:49:58के लिए गहनों [संगीत] का एक पूरा सेट भी
  5026. 3:50:00सजा कर रखा हुआ था। शिप्रा शौर्य की तरफ
  5027. 3:50:03पलटी और असमंजस भरे स्वर में बोली। यह
  5028. 3:50:07क्या है? यह मेरा [संगीत] सपना है। शादी
  5029. 3:50:10तो मेरी पहले ही हो रखी है। पर मेरा जो एक
  5030. 3:50:13सपना था कि मैं अपनी [संगीत] पत्नी को
  5031. 3:50:16पहली रात दुल्हन के वेश में देखूं। मैं
  5032. 3:50:18अपने हाथों से उसका घूंघट उठाऊं। वो अधूरा
  5033. 3:50:22ही रह गया। [संगीत] अगर देखा जाए तो सही
  5034. 3:50:24मायने में आज मुझे मेरी पत्नी मिली है। तो
  5035. 3:50:27अगर मेरा यह सपना [संगीत] भी पूरा हो जाए
  5036. 3:50:30तो मैं अपने आप को धन्य समझूंगा। शौर्य
  5037. 3:50:33शिप्रा को देखते हुए भावुक [संगीत] स्वर
  5038. 3:50:35में बोला। शौर्य की बात सुनकर शिप्रा की
  5039. 3:50:38आंखें भी भर आई। उसने खुद को संभाला और
  5040. 3:50:41शौर्य से [संगीत] बोली, तुम इस कमरे से
  5041. 3:50:44बाहर जाओ। अचानक शिप्रा की यह बात सुनकर
  5042. 3:50:47शौर्य घबरा गया। [संगीत] उसे लगा कि कहीं
  5043. 3:50:49फिर से शिप्रा को उसकी बात बुरी तो नहीं
  5044. 3:50:51लग गई। इसलिए वो जल्दी से सफाई [संगीत]
  5045. 3:50:54देता हुआ बोला। ठीक है अगर तुम्हें यह
  5046. 3:50:56पसंद नहीं है तो कोई बात नहीं। मैं तुमसे
  5047. 3:50:59दोबारा [संगीत] ऐसा नहीं कहूंगा। पर तुम
  5048. 3:51:01नाराज मत हो। शिप्रा का मन किया कि वो
  5049. 3:51:04अपना माथा पीट ले। वो अपनी जगह पर खड़ी एक
  5050. 3:51:07टक शौर्य को बिना कुछ कहे [संगीत] देखती
  5051. 3:51:09रही। जब शौर्य चुप हो गया तो वह बोली
  5052. 3:51:12प्यारे पतिदेव पहले [संगीत] समझ तो लो कि
  5053. 3:51:14मैं क्या कहना चाहती हूं। फिर कोई रिएक्शन
  5054. 3:51:16दो। बिना बात को समझे कुछ भी बोलने लगते
  5055. 3:51:19हो। अगर तुम बाहर नहीं जाओगे तो [संगीत]
  5056. 3:51:22मैं तैयार कैसे होंगी? इसलिए पूरे 10 मिनट
  5057. 3:51:25के लिए इस कमरे से बाहर जाओ। उससे पहले
  5058. 3:51:27कमरे में मत आना। बोलते हुए शिप्रा को कुछ
  5059. 3:51:31ध्यान आया तो वह बोली बाहर जाने से अच्छा
  5060. 3:51:33है तुम इस गैलरी में [संगीत] चले जाओ और
  5061. 3:51:3510 मिनट के बाद खुद कमरे में आ जाना।
  5062. 3:51:38शौर्य को जल्दी में अपने दिए रिएक्शन पर
  5063. 3:51:40शर्मिंदगीगी हुई। वो बिना कुछ कहे गैलरी
  5064. 3:51:43में चला गया। वो बेसब्री से इंतजार करने
  5065. 3:51:46लगा। बाहर इंतजार करते हुए उसे एक-एक पल
  5066. 3:51:49भारी लग रहा था। उसकी निगाह घड़ी की सुई
  5067. 3:51:52पर ही [संगीत] अटकी हुई थी। जैसे ही 10
  5068. 3:51:54मिनट पूरे हुए, वो कमरे के अंदर आ गया।
  5069. 3:51:57उसने देखा कमरे की लाइट बुझी हुई थी। कमरे
  5070. 3:52:00में एक नाइट [संगीत] बल्ब जल रही थी। अंदर
  5071. 3:52:02आने पर पहले तो शौर्य को कुछ दिखाई नहीं
  5072. 3:52:04दिया। पर धीरे-धीरे जब नजर अंधेरे में
  5073. 3:52:07देखने की अभ्यस्त [संगीत] हुई तो उसने
  5074. 3:52:09देखा शिप्रा बेड के ऊपर दुल्हन के वेश में
  5075. 3:52:11बैठी हुई थी। उसने अपने सर पर लंबी सी
  5076. 3:52:14घूंघट डाल रखी थी। शौर्य ने यह नहीं सोचा
  5077. 3:52:17था कि शिप्रा इस तरह से उसको [संगीत] कमरे
  5078. 3:52:19में तैयार होकर बैठी मिलेगी। उसने जब यह
  5079. 3:52:22महसूस किया कि उसकी एक इच्छा पर शिप्रा ने
  5080. 3:52:25बिना किसी शवाल के उसकी इच्छा के अनुरूप
  5081. 3:52:28खुद को सजाकर उसके [संगीत] लिए बेड पर बैठ
  5082. 3:52:30गई थी तो इसका मन उसके लिए अथाह प्रेम से
  5083. 3:52:33भर उठा। वो धीरे से चलकर बेड के पास
  5084. 3:52:36पहुंचा और शिप्रा के पास जाकर बैठ गया।
  5085. 3:52:39उसने जी भरकर दुल्हन के वेश में सिमटी
  5086. 3:52:41[संगीत] हुई शिप्रा को देखा और फिर धीरे
  5087. 3:52:43से उसका घूंघट को ऊपर किया। उसने देखा
  5088. 3:52:46शिप्रा की आंखें बंद थी। दुल्हन के वेश
  5089. 3:52:49में उसकी [संगीत] खूबसूरती चांद को भी
  5090. 3:52:50शर्माने पर मजबूर कर देती। उसने अपनी नाक
  5091. 3:52:53में एक बड़ी सी नथ भी डाल रखी थी जो कि
  5092. 3:52:56उसकी खूबसूरती को और [संगीत] चार चांद लगा
  5093. 3:52:58रखा था। उसकी इस खूबसूरती को देखकर शौर्य
  5094. 3:53:02खुद को और रोक नहीं सका। उसने उसके चेहरे
  5095. 3:53:05को अपने दोनों हाथ में भरा और उसके
  5096. 3:53:07[संगीत] होठों को चूम लिया। शौर्य के इस
  5097. 3:53:09चुंबन से शिप्रा के शरीर में एक सिंहरण सी
  5098. 3:53:12दौड़ गई। उसकी पलकें खुल गई और उसने गौर
  5099. 3:53:15से [संगीत] शौर्य की आंखों में देखा। उसने
  5100. 3:53:17शौर्य के रखे हुए सारे ही गहने पहन लिए
  5101. 3:53:20थे। आज मैं दिल से कबूल करता हूं कि
  5102. 3:53:23[संगीत] मैंने जब तुमको पहली बार देखा था,
  5103. 3:53:25मैं तभी से अपना सब कुछ तुम पर हार गया
  5104. 3:53:28था। तुम मुझे मिली मेरी जिंदगी का [संगीत]
  5105. 3:53:31सबसे बड़ा तोहफा हो जो ऊपर वाले ने मुझे
  5106. 3:53:33नवाजा है। मैं तुम्हारे लिए एक अभिशाप हो
  5107. 3:53:37सकता हूं। पर तुम मेरे लिए मेरी जिंदगी
  5108. 3:53:39हो। तुम्हारे बिना [संगीत] मैं अपनी
  5109. 3:53:41जिंदगी की कल्पना नहीं कर सकता। अब आगे
  5110. 3:53:44क्या होगा? क्या शौर्य शिप्रा की जिंदगी
  5111. 3:53:47इतनी आसान रहेगी जिसमें प्यार ही प्यार हो
  5112. 3:53:51या इसको किसी की नजर लग जाएगी। के शब्द
  5113. 3:53:54सुनकर शिप्रा भावपूर्ण नजरों से शौर्य को
  5114. 3:53:57देखने लगी। उसे यह जानकर और भी सुखद
  5115. 3:54:00आश्चर्य हुआ कि शौर्य शुरुआत से ही उसे
  5116. 3:54:03पसंद करता आ रहा है। उसे खुद पर तरस
  5117. 3:54:05[संगीत] आया कि उसने पहले यह बात नोटिस
  5118. 3:54:08क्यों नहीं किया। वो शौर्य की झिरकी लेती
  5119. 3:54:11हुई बोली अगर ऐसा था तो तुमने पहले मुझसे
  5120. 3:54:14यह बात क्यों नहीं कही। अच्छा अगर मैं
  5121. 3:54:17पहले तुमसे अपने प्यार का इजहार करता तो
  5122. 3:54:20तुम उसे स्वीकारती। तुम्हें ध्यान है
  5123. 3:54:22तुमने शुरुआत में ही मुझसे क्या कहा था?
  5124. 3:54:25तुम्हें तो डमी हस्बैंड चाहिए था। [संगीत]
  5125. 3:54:27मैं तुमसे कभी भी एक पति का हक पाने की
  5126. 3:54:30उम्मीद ना करूं। फिर किस मुंह से अपने
  5127. 3:54:32प्यार का इजहार करता। एक बार तुमसे
  5128. 3:54:35हल्के-फुल्के ढंग से इस बारे में बात भी
  5129. 3:54:37की [संगीत] थी तो उस समय तुमने मुझे अपने
  5130. 3:54:40और मेरे बीच का अंतर दिखा दिया था। शौर्य
  5131. 3:54:43की बात सुनकर शिप्रा की नजर झुक गई। उसे
  5132. 3:54:46वह समय याद आया जब [संगीत] शौर्य शुरुआत
  5133. 3:54:48में उसका ड्राइवर बनकर उसको छोड़ने उसके
  5134. 3:54:50ऑफिस जाता था। उस समय उसका कोई इरादा
  5135. 3:54:53शौर्य को हर्ट करने का नहीं था। पर उस समय
  5136. 3:54:56उसने उसको अपने और उसके बीच का अंतर बता
  5137. 3:54:58दिया था। वैसे उस बात को लेकर उसे अफसोस
  5138. 3:55:01भी हुआ था। तुमको लगता है कि जिस तरह की
  5139. 3:55:03स्थिति के बीच में हमारी शादी हुई थी, उस
  5140. 3:55:06स्थिति में इस बात को स्वीकार कर पाना
  5141. 3:55:08इतना आसान होता था क्या? मैं मानती हूं।
  5142. 3:55:11मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं तुम्हें
  5143. 3:55:13अपने पति के रूप में स्वीकार कर पाऊंगी।
  5144. 3:55:16पर समय बीतता [संगीत] गया और जाने कब मुझे
  5145. 3:55:18तुमसे लगाव हो गया। मैं जब तुम्हारे पास
  5146. 3:55:21किसी दूसरी लड़की को देखती थी तो मुझे
  5147. 3:55:24उससे जलन होने लगी। उसके बाद भी मैं यह
  5148. 3:55:27मानने को तैयार नहीं थी कि मुझे तुमसे
  5149. 3:55:29प्यार हो गया है। शिप्रा ने भी अपने पहले
  5150. 3:55:32के जज्बात बयान किया। [संगीत] अगर ऐसा था
  5151. 3:55:34तो अब क्या नया हो गया जो तुमने मुझसे
  5152. 3:55:37अपने प्यार का इजहार कर दिया। शौर्य
  5153. 3:55:39जिज्ञासावश पूछ बैठा। अब रहने दो। यह
  5154. 3:55:43जानकर क्या करोगे? बस अब यह मायने रखता है
  5155. 3:55:46कि अब हम दोनों के बीच में कोई नहीं आ
  5156. 3:55:48सकता। शिप्रा जवाब को टालते हुए बोली। तुम
  5157. 3:55:52ऐसे जवाब देने से बच नहीं सकती। तुम्हें
  5158. 3:55:54बताना पड़ेगा। शौर्य जिद करता हुआ बोला,
  5159. 3:55:58सुनना ही चाहते हो तो सुनो। मैं कहीं
  5160. 3:56:01तुम्हें हमेशा के लिए खो ना दूं। इस डर ने
  5161. 3:56:03मुझे वो करने की हिम्मत दी जो शायद मैं
  5162. 3:56:06नॉर्मल स्थिति में शायद ही कभी करती।
  5163. 3:56:08शिप्रा सच्चाई बयान करती हुई बोली। तो अब
  5164. 3:56:12तुम्हें अफसोस तो नहीं हो रहा कि तुमने
  5165. 3:56:13मुझसे अपने प्यार का इजहार करके कोई गलती
  5166. 3:56:15की है। शौर्य शिप्रा की ठोरी को अपने हाथ
  5167. 3:56:19से ऊपर उठाता हुआ बोला। अफसोस तो हो रहा
  5168. 3:56:22है पर [संगीत] इस बात के लिए कि मेरा पति
  5169. 3:56:24कितना बेवकूफ है जो फालतू की बातों में
  5170. 3:56:27अपनी अच्छी भली रात को काली कर रहा है।
  5171. 3:56:30शिप्रा अपना सर पीटती हुई बोली। शौर्य को
  5172. 3:56:33अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने घड़ी पर नजर
  5173. 3:56:36डाली [संगीत] तो एक से ऊपर बज गए थे। उसे
  5174. 3:56:38पता था कि शिप्रा को सवेरे ऑफिस के लिए
  5175. 3:56:41तैयार भी होना होता था। सॉरी। मुझे पता ही
  5176. 3:56:44नहीं चला था कि इतनी रात हो गई है।
  5177. 3:56:46तुम्हें सवेरे उठना भी होता है। तुम सो
  5178. 3:56:49जाओ। शौर्य झिझकता हुआ बोला, "मैं तो सो
  5179. 3:56:53जाऊंगी, पर तुम क्या करोगे?" शिप्रा मन ही
  5180. 3:56:56मन कुड़ती हुई बोली। उसने मन में सोचा,
  5181. 3:56:59[संगीत] क्या यह सच में इतना बेवकूफ है या
  5182. 3:57:02जानबूझकर बेवकूफ बन रहा है? क्या इसे इतना
  5183. 3:57:04भी समझ नहीं आया कि [संगीत] मैं क्या कहना
  5184. 3:57:06चाहती थी? इसे मेरे सवेरे उठने की चिंता
  5185. 3:57:09है। यह अच्छी खासी रात को बर्बाद कर रहा
  5186. 3:57:12है। इसकी [संगीत] कोई फिक्र ही नहीं है।
  5187. 3:57:14मुझे भी सोना है। मुझे तुम्हारी तरह जल्दी
  5188. 3:57:17नहीं उठना है। पर उठना तो है ही।
  5189. 3:57:19[संगीत]
  5190. 3:57:19शौर्य मुस्कुराता हुआ बोला, "अगर तुम्हें
  5191. 3:57:22सोने की इतनी ही जल्दी थी, तो मुझे इतना
  5192. 3:57:25सजने सवरने के लिए क्यों कहा था?" शिप्रा
  5193. 3:57:28शौर्य के ऊपर तंज करती हुई बोली, शौर्य
  5194. 3:57:31समझ नहीं पाया कि शिप्रा ने ऐसा क्यों
  5195. 3:57:33कहा। वो [संगीत] बस उसकी तरफ देखता रहा और
  5196. 3:57:36समझने की कोशिश कर रहा था कि शिप्रा का
  5197. 3:57:38कहने का क्या मतलब था। शिप्रा ने जब भूत
  5198. 3:57:41की तरह शौर्य को अपनी तरफ देखते पाया, तो
  5199. 3:57:44उसने पूछा। मैंने जी इतनी मेहनत से यह
  5200. 3:57:47ज्वेलरी पहनी है। अब इसको कौन खोलेगा? मैं
  5201. 3:57:50खोल देता हूं ना। शौर्य जल्दी से बोला।
  5202. 3:57:53फिर उसने धीरे-धीरे करके उसके सारे आभूषण
  5203. 3:57:56को उतार दिया। फिर उसको अच्छे से एक थैले
  5204. 3:57:59में रखकर वापस कवर्ड में रख आया। शिप्रा
  5205. 3:58:03इस बात से हैरान थी कि इस बीच शौर्य ने
  5206. 3:58:05उसकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। उसे मन ही
  5207. 3:58:08मन गुस्सा भी आ रहा था।
  5208. 3:58:10[संगीत]
  5209. 3:58:10वो समझ गई कि शौर्य अपने मन से उसके साथ
  5210. 3:58:13कुछ नहीं करने वाला है। इसलिए जब [संगीत]
  5211. 3:58:16वह आभूषण रखकर वापस उसके पास आया तो वो
  5212. 3:58:19गंभीरता से बोली मैं यहीं सो जाऊं [संगीत]
  5213. 3:58:22या अपने कमरे में चली जाऊं। पर तुम अब
  5214. 3:58:25अपने कमरे में क्यों जाओगी? तुम यहां भी
  5215. 3:58:28तो सो सकती हो। देखा जाए तो यह कमरा भी
  5216. 3:58:31[संगीत] तुम्हारा ही है। शौर्य असमंजस भरे
  5217. 3:58:34स्वर में बोला। उसे समझ नहीं आया कि
  5218. 3:58:36शिप्रा ने फिर से अपने कमरे में जाने की
  5219. 3:58:38बात क्यों की। शिप्रा ने कुछ कहा नहीं। बस
  5220. 3:58:42दूसरी साइड करवट लेकर सो गई। शौर्य को अब
  5221. 3:58:46शिप्रा का चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था।
  5222. 3:58:48उसने मन ही मन सोचा शिप्रा ने दूसरी तरफ
  5223. 3:58:51करवट क्यों ले लिया? [संगीत] इस तरफ पलट
  5224. 3:58:53कर भी तो वह सो सकती है। थोड़ी देर वो
  5225. 3:58:56बैठा हुआ उसकी तरफ देखता रहा। इतना तो वह
  5226. 3:59:00समझ गया था कि आज जल्दी उसे नींद नहीं आने
  5227. 3:59:02वाली है। वो शिप्रा के पास लेट गया और
  5228. 3:59:06पीछे से अपना हाथ उसके कमर से ले जाकर
  5229. 3:59:08उसके पेट [संगीत] को पकड़ लिया। शिप्रा ने
  5230. 3:59:11जब महसूस किया कि शौर्य उसके एकदम पास
  5231. 3:59:14[संगीत] है तो वो उसका हाथ पकड़ कर बोली
  5232. 3:59:17यह क्या है? जैसे ही [संगीत] शिप्रा ने
  5233. 3:59:20शौर्य के हाथ को पकड़ कर पूछा यह क्या है?
  5234. 3:59:23शौर्य ने तुरंत अपना हाथ पीछे कर लिया।
  5235. 3:59:26शिप्रा पीछे पलटी और शौर्य की तरफ देखकर
  5236. 3:59:29बोली क्या हुआ? कुछ नहीं मुझे नींद नहीं आ
  5237. 3:59:34रही है। शौर्य हिचकिचाते हुए बोला तो मैं
  5238. 3:59:38क्या [संगीत] करूं? शिप्रा रूखे स्वर में
  5239. 3:59:40बोली। शिप्रा को अपने इतने पास देखकर
  5240. 3:59:44शौर्य के दिल की धड़कन की गति फिर से बढ़
  5241. 3:59:46[संगीत] गई। उसने डरते हुए कहा, "क्या मैं
  5242. 3:59:50तुम्हें अपनी बाहों में भर सकता हूं?
  5243. 3:59:52क्यों? शिप्रा आंखें तरेर कर बोली,
  5244. 3:59:56तुम्हें प्यार करने को मन कर रहा है।
  5245. 3:59:58शौर्य ने बड़ी ही मासूमियत से कहा, शौर्य
  5246. 4:00:02की शराफत देखकर शिप्रा ने मन ही मन कहा,
  5247. 4:00:05"क्या आदमी है। इतना कुछ होने के बाद भी
  5248. 4:00:08मुझसे इजाजत मांग रहा है कि मैं [संगीत]
  5249. 4:00:10तुम्हारे पास आऊं। वो खुद को रोक नहीं सकी
  5250. 4:00:14और शौर्य से लिपट गई। उसने उसके चेहरे
  5251. 4:00:16[संगीत] पर चुंबनों की बरसात कर दी।
  5252. 4:00:19शिप्रा की इस हरकत ने शौर्य की भी हिम्मत
  5253. 4:00:22बढ़ा दी। [संगीत] इसके बाद बेड पर एक
  5254. 4:00:24तूफान सा आया। इतने समय से दबी हुई
  5255. 4:00:27इच्छाओं [संगीत] ने अपनी हर शर्म लिहाज को
  5256. 4:00:30छोड़कर अपने सारे बंधन तोड़कर स्वर्ग की
  5257. 4:00:33उस अनुपम अनुभूति का आनंद पाने को मचल
  5258. 4:00:35गया। कमरे में बस तेज [संगीत] सांसों की
  5259. 4:00:38आवाजाही ही जारी रही। ना कोई रोक-टोक ना
  5260. 4:00:42कोई पर्दादारी। बस दो जवान दिल एक दूसरे
  5261. 4:00:45में विलीन होने को व्याकुल। [संगीत]
  5262. 4:00:48आखिर वो समय भी आया जब तूफान के बाद शांति
  5263. 4:00:51छा गई। धीरे-धीरे [संगीत] इस कमरे का
  5264. 4:00:54वातावरण भी दो जवान दिल की सांसों की महक
  5265. 4:00:57से सराबोर हो गई थी। दो संतृप्त आत्माएं
  5266. 4:00:59[संगीत]
  5267. 4:01:00एक दूसरे के आलिंगन में सुधबुध खोए एक
  5268. 4:01:03दूसरे के दिल की धड़कन को धड़कते हुए
  5269. 4:01:05महसूस कर रही थी। शौर्य और शिप्रा ने आज
  5270. 4:01:09[संगीत] पूरी तरह से अपने मन के खालीपन को
  5271. 4:01:11दूर कर दिया था और पूरे दिल से दोनों ने
  5272. 4:01:14एक दूसरे को आत्मसात कर लिया था। सवेरे
  5273. 4:01:17शौर्य के फोन की आवाज से शौर्य की नींद
  5274. 4:01:20टूटी। उसका फोन रिंग हुए जा रहा था। उसने
  5275. 4:01:24घड़ी की तरफ ध्यान दिया तो सुबह के 8:00
  5276. 4:01:26बजने वाले थे। शिप्रा अभी भी नींद में थी।
  5277. 4:01:30उसका सर अभी भी शौर्य के सीने पर था।
  5278. 4:01:33शौर्य के हिलने से उसने एक बार अपनी आंख
  5279. 4:01:36खोला फिर [संगीत] बंद कर लिया। शौर्य ने
  5280. 4:01:39देखा विक्रम का फोन आ रहा था। उसने शिप्रा
  5281. 4:01:42को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश की तो
  5282. 4:01:44शिप्रा ने अपनी आंख [संगीत] खोल दी। क्या
  5283. 4:01:47हुआ? इतनी जल्दी उठने की क्या जरूरत है?
  5284. 4:01:51शिप्रा आलस के साथ बोली तुम पहले से ही
  5285. 4:01:54उठी हुई हो शौर्य शिप्रा को देखते हुए
  5286. 4:01:57बोला तो क्या हुआ अभी उठने का मन नहीं कर
  5287. 4:02:01रहा शिप्रा आलस भरे स्वर में बोली तो फिर
  5288. 4:02:05ठीक है मैं ही कहां उठना चाहता हूं इतना
  5289. 4:02:08कहकर शौर्य ने शिप्रा को बाहों में भरा और
  5290. 4:02:11उसके ऊपर आ गया शिप्रा ने देखा शौर्य मूड
  5291. 4:02:15में आ रहा था तो [संगीत] वो उसको रोकते
  5292. 4:02:17हुए बोली अब यह क्या है एक ही रात में तुम
  5293. 4:02:22कुछ ज्यादा ही शरारती नहीं हो गए। मैंने
  5294. 4:02:25तो सोचा तुम्हारे आलस को दूर कर दूं।
  5295. 4:02:27इसमें मेरा कोई स्वार्थ नहीं है। शौर्य
  5296. 4:02:30अपने होठों को शिप्रा के होठों के पास ले
  5297. 4:02:32जाते हुए बोला। शिप्रा शौर्य की बाहों में
  5298. 4:02:36मचलने लगी। पर शौर्य की पकड़ ढीली नहीं
  5299. 4:02:39हुई तो शिप्रा शांत हो गई और उसकी आंखों
  5300. 4:02:42में देखती हुई बोली लगता है कल रात की
  5301. 4:02:45बाइट को भूल गए हो। मुझे क्या? जब तुम्हें
  5302. 4:02:49यह पसंद है तो मैं क्या कर सकती हूं?
  5303. 4:02:52शिप्रा की बात सुनकर शौर्य एकदम उसके करीब
  5304. 4:02:55जाकर रुक गया। उसका हाथ अपने होठ के उस
  5305. 4:02:58कटे हुए हिस्से पर चला गया जहां [संगीत]
  5306. 4:03:00शिप्रा ने बाइट किया था। क्या हुआ? रुक
  5307. 4:03:04क्यों गए? आगे बढ़ो। शिप्रा भी शरारती भाव
  5308. 4:03:07में बोली। शौर्य आगे कुछ और बोलता तभी एक
  5309. 4:03:11बार फिर से उसका मोबाइल बजने लगा। कॉल
  5310. 4:03:13विक्रम का ही था। दोबारा विक्रम का कॉल
  5311. 4:03:16देखकर शौर्य समझ गया कि कुछ अर्जेंट होगा।
  5312. 4:03:19इसीलिए विक्रम दोबारा कॉल कर रहा है। वो
  5313. 4:03:22शिप्रा के ऊपर से हट गया। क्या [संगीत]
  5314. 4:03:24हुआ? किसका फोन है? शिप्रा भुनभुनाती हुई
  5315. 4:03:27बोली। उसे शौर्य का यूं उसको छोड़कर उठना
  5316. 4:03:31अच्छा नहीं लगा। विक्रम विक्रम सर का।
  5317. 4:03:35शौर्य पहले तो सिर्फ विक्रम बोला पर तुरंत
  5318. 4:03:37ही उसने अपनी बात को संभाल लिया। तुम्हारे
  5319. 4:03:41सर ने बड़े सही समय पर फोन किया। तुम्हारा
  5320. 4:03:44रोमांटिक मूड चौपट कर दिया। शिप्रा बेड से
  5321. 4:03:46उठती हुई बोली, [संगीत]
  5322. 4:03:48तुम एक बार इशारा तो करो। मैं तो फिर से
  5323. 4:03:51अपना मूड बना लूंगा। शौर्य फिर से
  5324. 4:03:53रोमांटिक होते हुए बोला, "पह अपने सर से
  5325. 4:03:56बात तो कर लो। पता नहीं किस लिए फोन कर
  5326. 4:03:59रहे हैं।" शिप्रा उठकर बाथरूम की तरफ जाती
  5327. 4:04:01हुई बोली। शिप्रा के बाथरूम में जाने के
  5328. 4:04:04बाद शौर्य [संगीत] ने विक्रम को फोन
  5329. 4:04:06लगाया। विक्रम के फोन उठाने पर शौर्य ने
  5330. 4:04:09पूछा, "क्या बात है? [संगीत] कुछ अर्जेंट
  5331. 4:04:11था क्या जो दो-दो बार तुम्हारा फोन आ गया?
  5332. 4:04:14यह तो आप बताएंगे कि यह बात आपके लिए
  5333. 4:04:16जरूरी है या नहीं? विक्रम भूमिका बनाते
  5334. 4:04:19हुए बोला, "अब [संगीत] तुम पहेलियां मत
  5335. 4:04:21बुझाओ। बात क्या है वो बताओ।" शौर्य
  5336. 4:04:24जल्दबाजी में बोला, शिप्रा बाथरूम से
  5337. 4:04:26निकले उससे पहले शौर्य अपनी बात समाप्त
  5338. 4:04:29करना चाहता था। बात यह है कि फाइनली आपके
  5339. 4:04:32पापा अपना सारा बिजनेस समेट [संगीत] कर
  5340. 4:04:34इंडिया वापस आ रहे हैं। विक्रम ने बम
  5341. 4:04:37फोड़ा। कि वापस आ रहे हैं। पर यह कैसे
  5342. 4:04:40[संगीत] हुआ? जो वो अभी तक नहीं किए, वह
  5343. 4:04:43अब ऐसे वापस आने को तैयार हो गए। शायद
  5344. 4:04:46इसके पीछे आपके दादाजी का हाथ है।
  5345. 4:04:48उन्होंने खुद फोन करके उनको वापस आ जाने
  5346. 4:04:50को कहा और उनका बुलाना आपके पापा के लिए
  5347. 4:04:53आदेश के समान था। ओ तो फाइनली दादाजी ने
  5348. 4:04:57उन्हें खुद फोन करके वापस बुला लिया।
  5349. 4:04:59शौर्य जानता था कि उसके पापा सूर्यभान
  5350. 4:05:02राठौर उनको घर से निकाल देने के बाद ही
  5351. 4:05:05यूके चले गए थे। पर उनका दिल तो यहां भारत
  5352. 4:05:08में ही बसता [संगीत] था। वह वापस नहीं आ
  5353. 4:05:10रहे थे तो सिर्फ अपने पिताजी के कारण। पर
  5354. 4:05:13जब चंद्रभान राठौर ने खुद ही उन्हें फोन
  5355. 4:05:15करके वापस आ जाने को कहा होगा तो वह तुरंत
  5356. 4:05:18तैयार हो गए होंगे क्योंकि वह वर्षों से
  5357. 4:05:21इसी पल का तो इंतजार कर रहे थे कि काश
  5358. 4:05:24उनके पिताजी उनकी गलती को भूलकर उन्हें
  5359. 4:05:26वापस बुला लें। तो फिर कुछ पता चला कि वो
  5360. 4:05:29लोग वापस कब आ रहे हैं। शौर्य मुद्दे पर
  5361. 4:05:32आता हुआ बोला। परसों सुबह की फ्लाइट है और
  5362. 4:05:35उस शाम को ही आपके दादाजी ने उनके वापस
  5363. 4:05:37आने की खुशी में एक बड़ी सी पार्टी भी रखी
  5364. 4:05:40है जिसमें वह आपके पापा के वापस परिवार
  5365. 4:05:42में आने की घोषणा भी करेंगे। विक्रम ने
  5366. 4:05:45शौर्य को पूरी बात बताई। उसी समय शिप्रा
  5367. 4:05:48के बाथरूम से निकलने की आहट हुई तो शौर्य
  5368. 4:05:50ने फोन रखते हुए कहा। ठीक है [संगीत] बाकी
  5369. 4:05:54बातें मिलने पर करते हैं। तो हो गई बात
  5370. 4:05:57इतनी सुबह किस लिए फोन किया था? शिप्रा
  5371. 4:06:00शौर्य के पास आकर बोली, इतनी सुबह भी
  5372. 4:06:03[संगीत] नहीं है और फिर वह बॉस हैं। उनका
  5373. 4:06:05तो जब मर्जी तब फोन कर सकते हैं। शौर्य
  5374. 4:06:08बातें बनाता हुआ बोला। फिर एक कदम शिप्रा
  5375. 4:06:11[संगीत] की ओर बढ़ते हुए कहा। वैसे अगर
  5376. 4:06:13तुम कहो तो अभी थोड़ा समय है मेरे पास।
  5377. 4:06:16पहले अपनी ड्यूटी सही से कर लो। रोमांस
  5378. 4:06:19करने के लिए हमारे पास बहुत समय है।
  5379. 4:06:21शिप्रा शौर्य को अपने करीब आने से रोकती
  5380. 4:06:23[संगीत] हुई बोली। इस विक्रम की तो मैं
  5381. 4:06:26अच्छे से खबर लूंगा। इसने मेरे सारे
  5382. 4:06:28रोमांस की ऐसी तैसी कर दी। मैं तो सोच रहा
  5383. 4:06:31हूं कि जॉब ही छोड़ दूं। वैसे भी अब तो
  5384. 4:06:33मैं [संगीत] हीरो बनने वाला हूं। तुम क्या
  5385. 4:06:35कहती हो? शौर्य फिर से शिप्रा के करीब
  5386. 4:06:38जाता हुआ बोला। यह तुम कैसी बात कर रहे
  5387. 4:06:41हो? इतनी छोटी सी बात पर कोई जॉब [संगीत]
  5388. 4:06:43छोड़ता है और वैसे भी निश्चित को छोड़कर
  5389. 4:06:46अनिश्चित के पीछे नहीं भागना चाहिए।
  5390. 4:06:48शिप्रा प्यार से शौर्य की नाक पकड़ कर
  5391. 4:06:51हिलाती हुई बोली। एक बात [संगीत] कहूं आज
  5392. 4:06:54मेरा मन कहीं बाहर जाने का नहीं कर रहा।
  5393. 4:06:57तुम भी ऐसा क्यों नहीं करती कि [संगीत] आज
  5394. 4:07:00छुट्टी लेकर घर पर ही रहो। शौर्य शिप्रा
  5395. 4:07:03को बाहों में भरता हुआ बोला अच्छा तो तुम
  5396. 4:07:06क्या चाहते हो कि राजा साहब ने इतने
  5397. 4:07:09विश्वास करके इतनी बड़ी जिम्मेदारी
  5398. 4:07:11[संगीत] जो मुझे दी है मैं उसे ऐसे ही
  5399. 4:07:14नजरअंदाज कर दूं। शिप्रा शौर्य के सीने पर
  5400. 4:07:17एक किस [संगीत] लेते हुए बोली, अरे मैं
  5401. 4:07:20सिर्फ आज की बात कर रहा हूं। शौर्य शिप्रा
  5402. 4:07:23का चेहरा अपने दोनों हाथों में भरता हुआ
  5403. 4:07:26बोला, [संगीत] कोई जरूरत नहीं है। मुझे भी
  5404. 4:07:29अपने ऑफिस जाना है और तुम भी अपने काम पर
  5405. 4:07:32[संगीत] जाओ। और हां, तुम्हें मुझे मेरे
  5406. 4:07:35ऑफिस भी छोड़ना है क्योंकि मेरी कार
  5407. 4:07:37[संगीत] मेरे ऑफिस में ही पड़ी हुई है। अब
  5408. 4:07:39जाओ जल्दी से तैयार हो जाओ। शिप्रा शौर्य
  5409. 4:07:43को खुद से अलग करती हुई बोली, अब आगे क्या
  5410. 4:07:46होगा? कितने दिन शौर्य और शिप्रा की खुशी
  5411. 4:07:50बरकरार रहेगी या लग जाएगी किसी की नजर?
  5412. 4:07:53क्या होगा जब चंद्रभान राठौर वापस आएंगे?
  5413. 4:07:56और ने शिप्रा को उसके ऑफिस छोड़ा और वापस
  5414. 4:08:00राजकमल होटल के लिए निकला। अचानक ही उसकी
  5415. 4:08:02एक्टिविटी बढ़ने [संगीत] वाली थी। अब उसे
  5416. 4:08:04यह सोचना था कि अपने मम्मी पापा से शिप्रा
  5417. 4:08:08को कैसे मिलाएगा। अभी [संगीत] तक उसने
  5418. 4:08:10अपने मम्मी पापा को शिप्रा के बारे में
  5419. 4:08:12कुछ नहीं बताया था। इसलिए उसको अपनी मां
  5420. 4:08:15से अभी डांट भी सुननी थी। अच्छी बात यह थी
  5421. 4:08:18कि उसके दादाजी को शिप्रा के बारे में सब
  5422. 4:08:21कुछ पता था। इन कुछ दिनों में सबसे अच्छी
  5423. 4:08:24बात यह भी हुई थी कि आखिरकार [संगीत]
  5424. 4:08:26चंद्रभान राठौर को सूर्यभान के प्रति जो
  5425. 4:08:29गुस्सा था वो शौर्य और उसकी बहन के कारण
  5426. 4:08:32समाप्त हो गया था। और आखिरकार उन्होंने
  5427. 4:08:35सूर्यभान को वापस घर बुलाने का फैसला कर
  5428. 4:08:37लिया था। सूर्यभान राठौर भी चंद्रभान जी
  5429. 4:08:41के एक बार उन्हें वापस [संगीत] बुलाने पर
  5430. 4:08:43तुरंत वापस आने को तैयार हो गए थे। शौर्य
  5431. 4:08:46यह भी समझ रहा था कि अभी राठौर फैमिली का
  5432. 4:08:49जो हाल है उसमें उसके पिता के आने के बाद
  5433. 4:08:52छोटी-मोटी महाभारत होनी तो निश्चित थी।
  5434. 4:08:55शौर्य शिप्रा को उसके ऑफिस छोड़ने के बाद
  5435. 4:08:57होटल राजकमल के लिए निकल गया। अभी वह
  5436. 4:09:00रास्ते में ही था कि उसके पास हर्षल मेहता
  5437. 4:09:03का फोन आया। शौर्य ने फोन उठाया तो दूसरी
  5438. 4:09:06तरफ से हर्षल मेहता की घबराई हुई आवाज
  5439. 4:09:09सुनाई दिया। मिस्टर श्रवण क्या आप अभी
  5440. 4:09:12बसंत विहार आ सकते हैं? क्या बात है सब
  5441. 4:09:15ठीक तो है? शौर्य हर्षल मेहता की आवाज में
  5442. 4:09:18घबराहट महसूस करके बोला, पता नहीं मैं इस
  5443. 4:09:22बात को कैसे कहूं पर सब ठीक नहीं है। मेरी
  5444. 4:09:25बेटी मानसी को बसंत विहार में कुछ लोगों
  5445. 4:09:27ने बंधक बना रखा है। हर्षल मेहता की घबराई
  5446. 4:09:31हुई आवाज सुनाई दिया। मानसी को बंधक बना
  5447. 4:09:34रखा है। पर क्यों? शौर्य को समझ नहीं आया
  5448. 4:09:38कि हर्षल मेहता कहना क्या चाहते हैं।
  5449. 4:09:40मिस्टर श्रवण वसंत विहार के पहाड़ी पर की
  5450. 4:09:43जो जमीन हमने ली है, अचानक ही कल कुछ
  5451. 4:09:45बदमाशों ने उसके एक बड़े हिस्से पर कब्जा
  5452. 4:09:48कर लिया था। क्योंकि बसंत विहार जमीन
  5453. 4:09:50अधिग्रह करने का मामला मानसी ही देख रही
  5454. 4:09:53थी। इसलिए वह वहां बात करने गई थी। पर उन
  5455. 4:09:56लोगों ने उसे वहां बंधक [संगीत] ही बना
  5456. 4:09:58लिया है। वे लोग उसको प्रेशराइज कर रहे
  5457. 4:10:00हैं कि वह जमीन हम उनके नाम कर दें। उसी
  5458. 4:10:03शर्त पर वो मानसी को छोड़ेंगे। हर्षल
  5459. 4:10:06मेहता ने सारी बात शौर्य को बताया। पर हैं
  5460. 4:10:10कौन वे लोग जिन्होंने मानसी को बंधक बनाया
  5461. 4:10:13है? शौर्य ने पूछा दद्दन पहलवान उसका नाम
  5462. 4:10:16दद्दन पहलवान है। वो उसी इलाके का एक
  5463. 4:10:19बदमाश है। उस इलाके में उसका एक अखाड़ा भी
  5464. 4:10:22चलता है। यह समझा जा सकता है कि उसके पीछे
  5465. 4:10:25रूलिंग पार्टी के किसी मंत्री का हाथ है
  5466. 4:10:27जिसके इशारे पर वो ऐसी हिम्मत कर रहा है।
  5467. 4:10:30क्योंकि उस इलाके की जमीन तेजी से बिक गई
  5468. 4:10:33है। जिसके कारण बहुत से लोग जो वहां जमीन
  5469. 4:10:36लेना चाहते थे उन्हें मौका ही नहीं मिला।
  5470. 4:10:38इसलिए अब वे लोग इस तरह का रास्ता अपना
  5471. 4:10:41रहे हैं। हर्षल मेहता ने मानसी को बंधक
  5472. 4:10:44बनाने के पीछे का कारण बताया। शौर्य कुछ
  5473. 4:10:47पल सोचता रहा। फिर उसने हर्षल मेहता से
  5474. 4:10:50पूछा, उस एरिया में हमारे अलावे भी तो
  5475. 4:10:54[संगीत] और लोगों ने जमीन लिया होगा? क्या
  5476. 4:10:56उनमें से भी किसी के साथ ऐसी कोई जबरदस्ती
  5477. 4:10:59की जा रही है? इस इलाके में [संगीत] जमीन
  5478. 4:11:01का सबसे बड़ा हिस्सा हमने ही लिया है।
  5479. 4:11:04लेकिन एक और पार्टी है। उसने भी एक
  5480. 4:11:06[संगीत] बड़ा हिस्सा जमीन का वहां पर लिया
  5481. 4:11:08है। सुनने में तो यह आया है कि उनके जमीन
  5482. 4:11:10के कुछ हिस्से को भी दद्दन पहलवान ने घेर
  5483. 4:11:13लिया है। जमीन का वह हिस्सा [संगीत] भी
  5484. 4:11:16हमारे जमीन के साथ ही लगा है। पहले तो
  5485. 4:11:18हमें यह गलतफहमी हो गई थी कि उन्हीं
  5486. 4:11:20[संगीत] लोगों ने हमारे जमीन को कब्जाने
  5487. 4:11:22की कोशिश की है। यही सोच दूसरी पार्टी की
  5488. 4:11:26भी थी। वह भी हमारे बारे [संगीत] में ही
  5489. 4:11:27सोच रहे थे कि हमने ही उनके जमीन पर कब्जा
  5490. 4:11:30किया है। पर असलियत कुछ और ही सामने आई
  5491. 4:11:33है। हर्षल मेहता [संगीत] ने विस्तार से
  5492. 4:11:35शौर्य को सब कुछ बताया। तो अब आप क्या
  5493. 4:11:38कहते हैं? आपने मानसी को दद्दन पहलवान से
  5494. 4:11:41छुड़ाने के लिए क्या सोचा [संगीत] है?
  5495. 4:11:43शौर्य हर्षल मेहता की सोच जानना चाहता था
  5496. 4:11:46कि वो अब क्या करने की सोच रहे हैं। सच
  5497. 4:11:49कहूं तो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा। मुझे बस
  5498. 4:11:52मानसी [संगीत] की चिंता ही रही है कि वे
  5499. 4:11:54बदमाश उसके साथ कुछ गलत ना कर दे क्योंकि
  5500. 4:11:57उस जमीन के मेन शेयर होल्डर आप हैं। इसलिए
  5501. 4:12:00मैंने सबसे पहले आपसे ही यह बात करना उचित
  5502. 4:12:02[संगीत] समझा। हर्षल मेहता का उनकी बेटी
  5503. 4:12:05के लिए डर शौर्य साफ महसूस कर सकता था। आप
  5504. 4:12:09चिंता मत कीजिए मेहता साहब। मानसी के साथ
  5505. 4:12:12कुछ गलत नहीं होगा। मैं अभी वहां आ रहा
  5506. 4:12:15हूं। आप इस समय कहां हैं? शौर्य हर्षल
  5507. 4:12:18मेहता को सांत्वना देता हुआ बोला। मैं शहर
  5508. 4:12:22से बाहर आया हुआ था। जैसे ही मुझे मानसी
  5509. 4:12:24के बंधक होने की खबर लगी, मैं बसंत विहार
  5510. 4:12:27के लिए निकल गया हूं। मुझे वहां पहुंचने
  5511. 4:12:29में अभी भी डेढ़ दो घंटे लगेंगे। हर्षल
  5512. 4:12:33मेहता चिंतित स्वर में बोला। उससे पहले आप
  5513. 4:12:36एक काम कीजिए। आप अभी कुछ मजदूर और
  5514. 4:12:38मिस्त्री को फोन करके बसंत विहार बुला
  5515. 4:12:40लीजिए। मैं चाहता हूं कि जो भी जमीन हमने
  5516. 4:12:43अपने नाम करवा ली है, उसकी बाउंड्री वाल
  5517. 4:12:45का काम आज ही शुरू हो जाए। बाकी मैं देखता
  5518. 4:12:48हूं इस दन पहलवान से कैसे निपटा जा सकता
  5519. 4:12:50है। शौर्य हर्षल मेहता को निर्देश देता
  5520. 4:12:53हुआ बोला कारीगर तो मैं जब चाहे तब भेज
  5521. 4:12:56सकता हूं मिस्टर श्रवण पर उससे पहले दद्दन
  5522. 4:12:59पहलवान से निपटना जरूरी है। [संगीत] यह
  5523. 4:13:01इतना आसान नहीं होने वाला। हर्षल मेहता की
  5524. 4:13:04आवाज में दद्दन पहलवान का खौफ साफ महसूस
  5525. 4:13:08किया जा सकता था। दद्दन पहलवान को आप मेरे
  5526. 4:13:11लिए छोड़ दीजिए। उसे [संगीत] कैसे रास्ते
  5527. 4:13:13पर लाना है वो मैं देख लूंगा। आप उतना काम
  5528. 4:13:16कीजिए जितना मैंने आपको कहा है। शौर्य
  5529. 4:13:19गंभीरता से बोला, ठीक है अगर आप कहते हैं
  5530. 4:13:22तो मैं अभी कुछ लोगों को इस काम के लिए
  5531. 4:13:24बोल देता हूं। वे आज ही इस काम [संगीत] को
  5532. 4:13:27शुरू कर देंगे। हर्षल मेहता ने अब शौर्य
  5533. 4:13:29की बात पर कोई किंतु परंतु नहीं किया। ठीक
  5534. 4:13:32है। तब तक मैं इस दद्दन पहलवान से मिल
  5535. 4:13:35लेता हूं। बाकी आप मानसी की चिंता मत
  5536. 4:13:37कीजिए। उसे मैं कुछ नहीं होने दूंगा। इतना
  5537. 4:13:41कहकर शौर्य ने फोन रख दिया। थोड़ी देर
  5538. 4:13:44शौर्य सोचता रहा कि उसे क्या करना चाहिए।
  5539. 4:13:46फिर कुछ सोचकर उसने छगन को फोन लगाया।
  5540. 4:13:49दूसरी तरफ से एक रिंग के बाद ही छगन की
  5541. 4:13:52आवाज आई। अरे बॉस कहिए कैसे याद किया?
  5542. 4:13:56शौर्य कुछ सोच कर बोला। क्या तुम एक घंटे
  5543. 4:13:59में 20-25 लोगों को इकट्ठा कर सकते हो? यह
  5544. 4:14:03आप कैसी बात कर रहे हो बॉस? यह तो मेरे
  5545. 4:14:05लिए छोटी सी बात है। आप बस हुक्म कीजिए।
  5546. 4:14:08आपको कितने आदमी चाहिए? एक घंटे में वह
  5547. 4:14:11आपके सामने हाजिर हो जाएंगे। छगन गर्व से
  5548. 4:14:14बोला, ठीक है, अगर ऐसी बात है तो मुझे
  5549. 4:14:17लगभग 25 लोग एक घंटे में बसंत विहार में
  5550. 4:14:20चाहिए और सभी मजबूत कद काठी के होने
  5551. 4:14:22चाहिए। वैसे तो उन्हें लड़ने की जरूरत
  5552. 4:14:25नहीं पड़ेगी, पर 1% के लिए मान लें कि अगर
  5553. 4:14:28ऐसी नौबत आ भी गई, तो वह कम से कम पीठ ना
  5554. 4:14:31दिखाएं। शौर्य ने छगन को अपनी जरूरत बताई।
  5555. 4:14:35कोई वांदा नहीं बॉस। मैं उनको एक घंटे में
  5556. 4:14:38लेकर बसंत विहार पहुंचता हूं। छगन सहमति
  5557. 4:14:41जताते हुए बोला। छगन से बात होने के बाद
  5558. 4:14:44शौर्य ने अब स्थिति पर गौर किया। जैसा कि
  5559. 4:14:47हर्षल मेहता ने कहा था कि दद्दन पहलवान के
  5560. 4:14:50पीछे किसी मंत्री का हाथ हो सकता है।
  5561. 4:14:52इसीलिए वह यह तो समझ गया कि पुलिस इस
  5562. 4:14:54मामले में उसकी कोई मदद नहीं करेगा
  5563. 4:14:56क्योंकि उसके ऊपर पहले से ही पॉलिटिकल
  5564. 4:14:58दबाव है और अगर वह अपनी तरफ से कोई कारवाई
  5565. 4:15:02करने की सोचता है तो हो सकता है उसको
  5566. 4:15:04रोकने के लिए पुलिस वहां उपस्थित हो जाए
  5567. 4:15:06तो उसको रोकने का कुछ ना कुछ प्रबंध हो
  5568. 4:15:08जाना चाहिए। इतना सोचने के बाद उसके दिमाग
  5569. 4:15:12में महिमा चौधरी का नाम आया। अभी कुछ दिन
  5570. 4:15:14पहले ही उसने [संगीत] पार्टी फंड में
  5571. 4:15:16करोड़ों रुपए दिए थे और महिमा चौधरी ने
  5572. 4:15:19उसे कहा भी था कि अगर उसको किसी तरह
  5573. 4:15:21[संगीत] की मदद की जरूरत होती है तो वह
  5574. 4:15:23उसको फोन कर सकता है। वह हर संभव कोशिश
  5575. 4:15:26करेगी कि उसकी जरूरत को पूरा कर सके। वैसे
  5576. 4:15:29उसे अभी महिमा चौधरी से कोई खास मदद नहीं
  5577. 4:15:31चाहिए था। पर वह चाहता था कि जिस तरह
  5578. 4:15:34पुलिस दद्दन [संगीत] पहलवान के मामले में
  5579. 4:15:36निष्क्रिय है, वह बाद में शौर्य के कुछ
  5580. 4:15:38एक्शन लेने पर सक्रिय ना हो जाए। [संगीत]
  5581. 4:15:40इसलिए शौर्य चाहता था कि अगर पुलिस अभी इस
  5582. 4:15:43मामले में निष्क्रिय है तो बाद में भी
  5583. 4:15:46निष्क्रिय ही रहे। ऐसा ना हो कि वह बाद
  5584. 4:15:48में दद्दन पहलवान के साथ जाकर खड़ा हो जाए
  5585. 4:15:51और शौर्य को लगा इस मामले में महिमा चौधरी
  5586. 4:15:54ही उसकी मदद कर सकती है। यही सोचकर उसने
  5587. 4:15:57महिमा चौधरी को फोन लगाया। दूसरी तरफ से
  5588. 4:16:00महिमा चौधरी ने फोन उठाया। हेलो मिस
  5589. 4:16:03महिमा। मैं शौर्य पहले भी आपसे बात हुई
  5590. 4:16:06थी। शौर्य ने महिमा चौधरी को अपना [संगीत]
  5591. 4:16:09परिचय दिया।
  5592. 4:16:10कैसी बात कर रहे हैं मिस्टर शौर्य? मैं
  5593. 4:16:13आपको पहचान रही हूं। आपने हमारी पार्टी की
  5594. 4:16:15मजबूती [संगीत] के लिए सहयोग किया है।
  5595. 4:16:18कहिए कैसे फोन किया? महिमा चौधरी व्यवहार
  5596. 4:16:21सुलभ स्वर में बोली। मिस महिमा मुझे आपकी
  5597. 4:16:25एक छोटी सी मदद की जरूरत है। इतना कहकर
  5598. 4:16:28शौर्य ने पूरी बात [संगीत] महिमा चौधरी को
  5599. 4:16:30बताया। महिमा चौधरी ने शौर्य की बात सुनने
  5600. 4:16:33के बाद कहा, "यह कोई बड़ी बात नहीं। अगर
  5601. 4:16:36थाने ने दद्दन पहलवान के खिलाफ कोई एक्शन
  5602. 4:16:39नहीं लिया है तो मैं थाने में बात करती
  5603. 4:16:42हूं। उन्हें ताकत कर दूंगी कि आगे भी वह
  5604. 4:16:45निष्क्रिय ही रहे। और जैसा कि आप कह रहे
  5605. 4:16:48हैं कि इसके पीछे किसी मंत्री का हाथ है
  5606. 4:16:51तो आप निश्चिंत रहिए। [संगीत]
  5607. 4:16:53अगर वह मंत्री साहब सामने आते हैं तो मैं
  5608. 4:16:55इस मामले को पब्लिक में ले आऊंगी कि
  5609. 4:16:57मंत्री अपने पावर का नाजायज फायदा उठा रहा
  5610. 4:17:00है। एक बार अगर पॉलिटिकल एंगल आ गया तो
  5611. 4:17:03मंत्री साहब को जवाब देना [संगीत] मुश्किल
  5612. 4:17:05हो जाएगा। थैंक यू मिस महिमा। मुझे बस
  5613. 4:17:09आपकी इतनी ही मदद चाहिए। शौर्य ने धन्यवाद
  5614. 4:17:13किया। पर मिस्टर शौर्य क्या आपको पक्का
  5615. 4:17:15[संगीत] यकीन है कि आप दन पहलवान से निपट
  5616. 4:17:19पाएंगे? क्योंकि मैं उसके नाम से वाकिफ
  5617. 4:17:21हूं। यह आदमी पिछले इलेक्शन में भी हमारे
  5618. 4:17:24लिए सर दर्द बना रहा था। लोकल स्तर पर
  5619. 4:17:27उसका अच्छा खासा सपोर्ट है। महिमा चौधरी
  5620. 4:17:30[संगीत] ने अपनी चिंता व्यक्त की है। यह
  5621. 4:17:32बात आप मुझ पर छोड़ दीजिए। मैं उससे निपट
  5622. 4:17:35लूंगा। बस आप पुलिस का ध्यान रख [संगीत]
  5623. 4:17:38लीजिए। बस बाद में भी उसकी एंट्री ना हो।
  5624. 4:17:42शौर्य हल्की मुस्कान के साथ बोला। अगर
  5625. 4:17:45आपने ददन पहलवान को सचमुच ठिकाने लगा दिया
  5626. 4:17:48तो यह हमारी पार्टी के लिए भी दूसरी आपकी
  5627. 4:17:50मदद होगी। महिमा चौधरी शौर्य का आभार
  5628. 4:17:53जताते हुए बोली। महिमा चौधरी से बात होने
  5629. 4:17:56के बाद शौर्य ने फोन रखा और अपनी कार को
  5630. 4:17:59बसंत विहार की तरफ मोड़ दिया। जल्दी ही वह
  5631. 4:18:02बसंत विहार पहुंचा। वहां उसने कुछ लोगों
  5632. 4:18:05से दद्दन पहलवान के अखाड़े के बारे में
  5633. 4:18:07पूछा तो उसे जल्दी ही उसके अखारे का पता
  5634. 4:18:09चल गया। वह पता करता हुआ वहां पहुंचा। यह
  5635. 4:18:13लगभग एक एकड़ का एरिया था जिसमें आम और
  5636. 4:18:16लीची के पेड़ भरे हुए थे। [संगीत] जिसके
  5637. 4:18:18बीच में घास और मिट्टी का खूबसूरत घर बना
  5638. 4:18:21हुआ था। जिसके सामने एक तालाब था जिसमें
  5639. 4:18:24कई बत्तखों [संगीत] का जोड़ा तैर रहा था।
  5640. 4:18:26तालाब के बगल में एक बड़ा सा अखाड़ा भी था
  5641. 4:18:29जिसमें इस समय भी कुछ पहलवान आपस में जोर
  5642. 4:18:32आजमाइश कर रहे थे। यहां पहुंचकर शौर्य ने
  5643. 4:18:35अपना करंट लोकेशन छगन को भेज दिया। इसके
  5644. 4:18:38बाद वह अपनी कार से बाहर आया और उस मिट्टी
  5645. 4:18:40के घर की तरफ बढ़ गया। शौर्य ने देखा यहां
  5646. 4:18:44पर 10-15 पहलवान अपने कार्यों में लगे हुए
  5647. 4:18:46थे। एक [संगीत] पहलवान ने शौर्य को देखा
  5648. 4:18:48तो उससे पूछा हां भाई ऐसे कहां मुंह उठाकर
  5649. 4:18:52अंदर आए जा रहे हो? पहले बता तो दो किससे
  5650. 4:18:54मिलना है और यहां क्यों आए हो? मुझे दद्दन
  5651. 4:18:58पहलवान से मिलना है। उन्होंने मेरे एक
  5652. 4:19:00दोस्त को यहां पर रोक रखा है। उसी [संगीत]
  5653. 4:19:02बारे में बात करनी है। शौर्य ने जवाब
  5654. 4:19:05दिया। ओहो, तो तू उस छोड़ी का [संगीत]
  5655. 4:19:07दोस्त है। पर 1 मिनट उसका नाम तो बता।
  5656. 4:19:10यहां तो दो छोरियां हैं। तुम किसके बारे
  5657. 4:19:12में बात कर रहे हो? उस पहलवान ने कुछ याद
  5658. 4:19:15आने पर कहा। शौर्य दो लड़कियों [संगीत] की
  5659. 4:19:18बात सुनकर चौंक गया। उसने सोचा इस बदमाश
  5660. 4:19:21ने दूसरी कौन सी लड़की को उठा लिया है। यह
  5661. 4:19:24सोचकर उसने नाम बताया। उसका नाम मानसी
  5662. 4:19:27मेहता है। ओ तो तू उस मेहता की छोड़ी के
  5663. 4:19:30लिए आया है। पहलवान उपहास भरे मुस्कान के
  5664. 4:19:33साथ बोला। फिर वह अपना फोन निकालते हुए
  5665. 4:19:36बोला, एक बार भाई से पूछ तो लूं कि वह
  5666. 4:19:38तुमसे मिलेंगे भी या नहीं। पहलवान ने किसी
  5667. 4:19:41को अपना फोन लगाया और बोला, "भाई, उस
  5668. 4:19:44मेहता की छोड़ी का कोई दोस्त यहां पर आया
  5669. 4:19:46है। उसे अंदर भेजूं क्या? [संगीत]
  5670. 4:19:48भेज दो। दूसरी तरफ से फोन पर कहा गया, जा
  5671. 4:19:53भाई, वो जो सामने घर दिख रहा है, उसी में
  5672. 4:19:55चला जा।" पहलवान मिट्टी के उस घर की तरफ
  5673. 4:19:58इशारा करते हुए बोला, शौर्य आगे बढ़ गया।
  5674. 4:20:01[संगीत]
  5675. 4:20:01बारंडा से होता हुआ वो मिट्टी के उस घर के
  5676. 4:20:04अंदर पहुंचा। अंदर आते हुए उसे एक ठंडक का
  5677. 4:20:07एहसास हुआ। जबकि उस घर में कोई एसी नहीं
  5678. 4:20:10लगा हुआ था। यह तो इस घर की बनावट के कारण
  5679. 4:20:13था। अंदर से वो घर बड़ा [संगीत] था। अंदर
  5680. 4:20:16जाते हुए शौर्य की नजर एक कोने में बैठी
  5681. 4:20:18मानसी पर गई और उससे कुछ हो कदम की दूरी
  5682. 4:20:21पर एक दूसरी लड़की खड़ी थी। इसकी भी
  5683. 4:20:23खूबसूरती मानसी से 20 ही नजर आ रही थी।
  5684. 4:20:26शौर्य को यह चेहरा कुछ जाना पहचाना सा
  5685. 4:20:29लगा। इसे लगा अभी हाल फिलहाल में हो वो
  5686. 4:20:32उससे मिला था। अब आगे क्या होगा? कौन थी
  5687. 4:20:36यह लड़की जो मानसी [संगीत]
  5688. 4:20:37के साथ यहां बंधक बनी हुई थी? क्या शौर्य
  5689. 4:20:40मानसी को यहां से छुड़ा पाएगा? मानसी एक
  5690. 4:20:43चेयर पर उदास बैठी सामने खड़ी उस लड़की को
  5691. 4:20:46देख रही थी। जिसके किसी प्रिंसेस के जैसे
  5692. 4:20:49तेवर थे। पर कुछ समय में ही दद्दन पहलवान
  5693. 4:20:53के [संगीत] सामने धीरे-धीरे उसके तेवर
  5694. 4:20:55फीके पर गए थे। उसके साथ का बॉडीगार्ड एक
  5695. 4:20:59[संगीत] कोने में घायल पड़ा हुआ था। यह
  5696. 4:21:02आपका भानगढ़ नहीं है मिसकनिका। इसलिए यहां
  5697. 4:21:05आपका तेवर किसी काम का नहीं है। यहां पर
  5698. 4:21:08दद्दन पहलवान का कानून चलता है। इसलिए
  5699. 4:21:12यहां पर आप हमारे हिसाब से चल लें तो यह
  5700. 4:21:15आपके लिए बेहतर होगा। यह भानगढ़ नहीं है।
  5701. 4:21:18पर है तो इसी देश का हिस्सा। कितनी देर तक
  5702. 4:21:22आप कानून को अपने हिसाब से नचाते रहेंगे।
  5703. 4:21:25अभी आप जबरदस्ती कर सकते हैं। पर एक बार
  5704. 4:21:28मैं यहां से चली गई उसके बाद में आपको
  5705. 4:21:30जवाब देना मुश्किल हो जाएगा। कनिका तीखे
  5706. 4:21:34स्वर में बोली आप भानगढ़ की राजकुमारी
  5707. 4:21:37हैं। यही कारण है जो मैं अभी तक आपसे
  5708. 4:21:40प्यार से बात कर रहा हूं। आपकी जो भी लागत
  5709. 4:21:43इस जमीन में लगी है, मैं उतना आपको वापस
  5710. 4:21:46देने के लिए तैयार हूं। पर मुझे आपका यह
  5711. 4:21:48जो 5 एकड़ का टुकड़ा है, वह हर हाल में
  5712. 4:21:51चाहिए। दद्दन पहलवान अपनी आवाज को थोड़ा
  5713. 4:21:55नरम करते [संगीत] हुए बोला, ठीक है अगर
  5714. 4:21:57ऐसी बात है तो मैं एक बार अपने घर जाकर
  5715. 4:22:00अपने परिवार से मिलके इस बारे में आपको
  5716. 4:22:03बताऊंगी। [संगीत] राजकुमारी कनिका ने ऐसा
  5717. 4:22:06जाहिर किया जैसे वह दद्दन पहलवान के
  5718. 4:22:08प्रस्ताव के बारे में सोचेगी। इसमें सोचने
  5719. 4:22:11के लिए समय नहीं है राजकुमारी। मुझे
  5720. 4:22:13[संगीत] पता है कि यह जमीन आपके नाम पर ही
  5721. 4:22:16है। पेपर तैयार है। आप बस उस पर साइन कर
  5722. 4:22:19दीजिए। उसके बाद आप आजाद हैं। दद्दन
  5723. 4:22:22पहलवान धूर्तता से बोला। इसके बाद दद्दन
  5724. 4:22:25पहलवान ने वहीं पर खड़े एक शूट बूट पहने
  5725. 4:22:28व्यक्ति को देखते हुए बोला, चौबे जी जरा
  5726. 4:22:32उस जमीन का पेपर जो आपने तैयार किया है,
  5727. 4:22:34वो मिस कनिका की तरफ बढ़ाइए। अब शायद
  5728. 4:22:37राजकुमारी हमारी बात समझ गई होंगी। कनिका
  5729. 4:22:40के चेहरे पर परेशानी के भाव नजर आने लगा।
  5730. 4:22:43वो बेचैनी से अपना हाथ मलने लगी। दद्दन
  5731. 4:22:46पहलवान कनिका की बेचैनी को समझ रहा था।
  5732. 4:22:49इसलिए वह थोड़ा और प्रेशर डालने की नियत
  5733. 4:22:52से बोला, "हमारे पास ज्यादा समय नहीं है
  5734. 4:22:55राजकुमारी। हमारे पास यह दूसरी लड़की भी
  5735. 4:22:57है। अभी इसका मामला भी निपटाना है। आप
  5736. 4:23:00शुक्र मनाइए कि मैं आपको आपके द्वारा खर्च
  5737. 4:23:03पैसा वापस भी करने को तैयार हूं। पर इसके
  5738. 4:23:05बाप के पास ऐसा कोई ऑप्शन नहीं होगा। इसका
  5739. 4:23:09भी कोई खैर ख्वाह लेने वाला आया है। अभी
  5740. 4:23:11उसको भी शीशे में उतारना है। कनिका ने
  5741. 4:23:14[संगीत] एक बार वही एक कोने में डरी सहमी
  5742. 4:23:17मानसी की तरफ देखा। मानसी के लिए यह नया
  5743. 4:23:20था। उसने आज तक इस तरह की स्थिति को फेस
  5744. 4:23:23नहीं किया था। इसलिए उसके चेहरे पर डर नजर
  5745. 4:23:26आना आम बात थी। जबकि राजकुमारी कनिका के
  5746. 4:23:29लिए यह परिस्थिति सामान्य तो नहीं था। पर
  5747. 4:23:32इस तरह की स्थिति से वो दो-चार [संगीत]
  5748. 4:23:34होती रही थी। पर हां, यह उसके लिए भी पहली
  5749. 4:23:37बार था जब वो किसी के सामने खुद को इतना
  5750. 4:23:40कमजोर महसूस [संगीत] कर रही थी। अभी कनिका
  5751. 4:23:43इसी उधरबुन में थी कि वो कैसे इस
  5752. 4:23:46परिस्थिति से बाहर निकले। इसी समय उस कमरे
  5753. 4:23:49में शौर्य ने प्रवेश किया। उसने पहले
  5754. 4:23:52मानसी को एक चेयर पर डरी सहमी [संगीत]
  5755. 4:23:54अवस्था में देखा। उसके बाद उसकी निगाह
  5756. 4:23:57सामने खड़ी लड़की कनिका के ऊपर गई। उसे
  5757. 4:24:00उसका चेहरा जाना पहचाना तो लग रहा था पर
  5758. 4:24:02[संगीत] वह याद नहीं कर पा रहा था कि उसने
  5759. 4:24:05इसको कहां देखा है। मानसी ने शौर्य को
  5760. 4:24:08यहां देखा तो उसे [संगीत] और सदमा पहुंचा।
  5761. 4:24:11उसने सोचा क्या पापा ने इसको यहां भेजा
  5762. 4:24:13है। उसे अभी तक यह समझ नहीं आया था कि
  5763. 4:24:17[संगीत] उसके पापा उसको इतना तरजीह क्यों
  5764. 4:24:19देते हैं। यह क्या ही कर लेगा यहां पर।
  5765. 4:24:22उसकी रही सही उम्मीद भी अब बैठ गया था।
  5766. 4:24:25[संगीत]
  5767. 4:24:25शौर्य ने जब डरी हुई मानसी को देखा तो उसे
  5768. 4:24:28उसके ऊपर दया भी आई। वो उसके पास पहुंचा
  5769. 4:24:31[संगीत] और उसको देखते हुए बोला मिस मानसी
  5770. 4:24:35मुझे आपके पापा ने भेजा है आपको लाने के
  5771. 4:24:37लिए। इन लोगों [संगीत] ने आपको ज्यादा
  5772. 4:24:40परेशान तो नहीं किया। मानसी को समझ नहीं
  5773. 4:24:43आया कि वो शौर्य को क्या जवाब दे। वो डरी
  5774. 4:24:46हुई आंखों से दद्दन पहलवान को देखने लगी।
  5775. 4:24:50क्या बात है? [संगीत] तुम तो अच्छा मजाक
  5776. 4:24:52कर लेते हो। हर्षल मेहता ने तुमको इसे
  5777. 4:24:54लाने भेजा है। वह भी मेरा कंडीशन पूरा किए
  5778. 4:24:57बगैर। दद्दन पहलवान उपहास भरे स्वर में
  5779. 4:25:01बोला। फिर वो कनिका की ओर देखकर बोला,
  5780. 4:25:04राजकुमारी अब आप थोड़ी देर साइड में बैठ
  5781. 4:25:07जाओ। पहले इस लड़के का मामला ही निपटाता
  5782. 4:25:09हूं। तब तक आप भी सोच लो कि आपको क्या
  5783. 4:25:12करना है। जैसे ही शौर्य ने दद्दन पहलवान
  5784. 4:25:15के मुंह से राजकुमारी [संगीत]
  5785. 4:25:17शब्द सुना, उसे याद आ गया कि उसने इसको
  5786. 4:25:20कहां देखा था। वो दद्दन पहलवान की बात
  5787. 4:25:23सुनकर [संगीत] मानसी से बोला मिस मानसी आप
  5788. 4:25:26थोड़ी देर यहीं पर बैठी रहो तब तक मैं इस
  5789. 4:25:28पहलवान के साथ का मामला निपटा [संगीत]
  5790. 4:25:30लेता हूं।कि शौर्य राजकुमारी को पहचान गया
  5791. 4:25:34था। इसलिए वह दद्दन पहलवान के ऊपर ध्यान
  5792. 4:25:37दिए बिना कनिका के पास पहुंचा और बोला
  5793. 4:25:40राजकुमारी कनिका आप यहां मुझे उम्मीद
  5794. 4:25:44[संगीत] नहीं था कि इतनी जल्दी आपसे
  5795. 4:25:45दोबारा मुलाकात होगी। क्या आपने पहचाना
  5796. 4:25:48मुझे? [संगीत] राजकुमारी को ध्यान आ गया
  5797. 4:25:51था कि वह अभी कुछ दिन पहले ही शौर्य से
  5798. 4:25:53मिली थी। इसलिए वह उम्मीद भारी आंखों से
  5799. 4:25:56शौर्य को देखने लगी। शौर्य समझ गया था कि
  5800. 4:25:59इस [संगीत] पहलवान ने राजकुमारी कनिका को
  5801. 4:26:01भी बंधक बना रखा था। तुम्हारी हिम्मत की
  5802. 4:26:04दाद देनी पड़ेगी लड़के। तुमको क्या लग रहा
  5803. 4:26:07है कि तुम किसी मुगल बाग में [संगीत]
  5804. 4:26:08घूमने के लिए आए हो जो अपने मन से किसी को
  5805. 4:26:10भी यहां से लेकर जा सकते हो। तुम यहां आए
  5806. 4:26:13हो अपनी मर्जी से पर जाओगे हमारी मर्जी
  5807. 4:26:15से। दद्दन [संगीत] पहलवान शौर्य की तरफ
  5808. 4:26:18बढ़ता हुआ बोला अगर ऐसी बात है तो फिर तुम
  5809. 4:26:21मुझे रोकने की कोशिश करके देख लो और
  5810. 4:26:24तुम्हें मैं इतना और बता दूं कि मैं अभी
  5811. 4:26:26यहां सिर्फ मानसी को [संगीत] लेने के लिए
  5812. 4:26:27आया था पर अब मैं यहां से राजकुमारी कनिका
  5813. 4:26:30को भी अपने साथ लेकर जाऊंगा। शौर्य की इस
  5814. 4:26:33तरह की निर्भीक बात सुनकर कनिका भी शौर्य
  5815. 4:26:36की तरफ देखने लगी। शौर्य पहले मानसी के
  5816. 4:26:39पास गया और उसे बोला चलो अब तुम उठ जाओ।
  5817. 4:26:42तुम्हें अभी मेरे साथ चलना है। शौर्य
  5818. 4:26:45मानसी की बाह पकड़ कर बोला। मानसी डरते
  5819. 4:26:48हुए चेयर [संगीत] से उठ गई। उसे शौर्य की
  5820. 4:26:50हिम्मत पर आश्चर्य भी हो रहा था। मानसी को
  5821. 4:26:53उम्मीद नहीं था कि शौर्य उसे [संगीत]
  5822. 4:26:54बचाने की कोशिश कर भी पाएगा। जबकि उसने तो
  5823. 4:26:57राजकुमारी कनिका को भी अपने साथ बचाने की
  5824. 4:27:00बात की थी। नवाब [संगीत] जरा इन महाशय को
  5825. 4:27:03थोड़ा मेरा परिचय तो देना। इसकी जुबान कुछ
  5826. 4:27:05ज्यादा ही चल रहा है। दद्दन पहलवान
  5827. 4:27:08नाराजगी भरे स्वर में बोला। इस समय तक
  5828. 4:27:11शौर्य राजकुमारी कनिका के पास पहुंच गया।
  5829. 4:27:14राजकुमारी जी इन बदमाशों ने आपके साथ कुछ
  5830. 4:27:16ज्यादा ही गुस्ताखी कर दी है। अगर आप कहें
  5831. 4:27:19तो मैं अभी इन सबको आपकी तरफ से सजा दे
  5832. 4:27:21सकता हूं। शौर्य मुस्कुराते हुए बोला। इसी
  5833. 4:27:25समय नवाब नाम का आदमी शौर्य के पास पहुंचा
  5834. 4:27:28और पीछे से उसके कंधे पर हाथ रखा। पर यहीं
  5835. 4:27:32पर उसने सबसे बड़ी गलती कर [संगीत] दी।
  5836. 4:27:34शौर्य ने अपने हाथ से उसकी कालाई पकड़ कर
  5837. 4:27:36अपने आगे खींचा और दो कदम आगे बढ़कर उस
  5838. 4:27:39हाथ को किसी धोबी [संगीत] की तरह घुमाकर
  5839. 4:27:41खाली जमीन पर पटक दिया। नवाब नाम के उस
  5840. 4:27:45व्यक्ति के मुंह से तेज चिक निकल [संगीत]
  5841. 4:27:46गई। दद्दन पहलवान ने सोचा नहीं था कि
  5842. 4:27:49शौर्य ऐसी गुस्ताखी करने की हिम्मत कर
  5843. 4:27:51सकता है। उसने अपने पास खड़े [संगीत] दो
  5844. 4:27:53आदमियों को भी इशारा किया कि वह शौर्य को
  5845. 4:27:56सबक सिखाए। इस समय उस कमरे में दद्दन
  5846. 4:27:59पहलवान के अलावा उसके छह और पहलवान लोग
  5847. 4:28:02खड़े थे जो देखने में ही किसी हट्टे-कट्टे
  5848. 4:28:04गैे की तरह लग रहे थे। उसने दद्दन पहलवान
  5849. 4:28:08के पास खड़े दो आदमी [संगीत] को तेजी से
  5850. 4:28:10अपनी तरफ आते देखा तो उसने कनिका और मानसी
  5851. 4:28:12दोनों की तरफ देखकर कहा तुम दोनों जरा
  5852. 4:28:16पीछे दीवार के पास जाकर खड़ी [संगीत] हो
  5853. 4:28:17जाओ। तब तक मैं इन महानुभाव के गैंडों को
  5854. 4:28:20भी अपनी ताकत का दर्शन करा देता हूं। इतना
  5855. 4:28:23कहकर शौर्य ने हवा में एक जंप लिया और
  5856. 4:28:26उसका दोनों पर सामने से आ रहे [संगीत]
  5857. 4:28:28हैं। उन दोनों पहलवानों के चेहरे से
  5858. 4:28:29टकराया और वो किस मदमस्त हाथी की तरह
  5859. 4:28:32लहराते हुए दद्दन पहलवान के पैर में
  5860. 4:28:34[संगीत] जाकर गिरा। इतने पर भी शौर्य रुका
  5861. 4:28:37नहीं। तेजी से जंप लेकर सीधा दद्दन पहलवान
  5862. 4:28:40के सामने पहुंचा और एक तेज घुसा उसके पेट
  5863. 4:28:43पर जमा दिया। दद्दन पहलवान को शौर्य के एक
  5864. 4:28:46घुसे में ही तारे नजर आने लगे। इस समय
  5865. 4:28:49उसके ज्यादातर आदमी उस कमरे से बाहर
  5866. 4:28:51अखाड़े के आसपास घूम रहे थे। उन्हें नहीं
  5867. 4:28:54पता था कि अंदर क्या सब चल रहा है। पर
  5868. 4:28:56किसी को भी बिना पूछे अंदर आने की मनाही
  5869. 4:28:58थी। इसलिए कोई अपने मन से वहां अंदर जाने
  5870. 4:29:01की हिम्मत भी नहीं कर सकता था। एक घुसे
  5871. 4:29:04में ही दद्दन पहलवान भी दोहरा हो गया था।
  5872. 4:29:06वो अपना पेट पड़कर वहीं पर बैठ गया था।
  5873. 4:29:09थोड़ा समय देने पर वो फिर से अपनी [संगीत]
  5874. 4:29:11जगह पर खड़ा हुआ। पर शौर्य शायद इसी पल का
  5875. 4:29:14इंतजार कर रहा था। जैसे ही दद्दन पहलवान
  5876. 4:29:16अपनी जगह पर खड़ा हुआ, शौर्य [संगीत] ने
  5877. 4:29:18एक बार फिर से अपने पैर का किक उसके पेट
  5878. 4:29:21पर जमा दिया। दद्दन पहलवान उड़कर 10 कदम
  5879. 4:29:25दूर जाकर गिरा। मानसी और कनिका हैरानी से
  5880. 4:29:28शौर्य की [संगीत] ओर देखने लगी। सबसे
  5881. 4:29:31ज्यादा हैरान तो मानसी थी। उसे विश्वास
  5882. 4:29:34नहीं [संगीत] हो रहा था कि शौर्य उसके लिए
  5883. 4:29:37इस बदमाश से लड़ सकता है। ना सिर्फ लड़
  5884. 4:29:41सकता है बल्कि उसने तो दो वार में है
  5885. 4:29:44दद्दन [संगीत] पहलवान को धूल चटा दिया था।
  5886. 4:29:47मानसी को पता था कि इसके ज्यादातर पहलवान
  5887. 4:29:50अभी भी इस घर के बाहर खड़े होंगे। अगर
  5888. 4:29:53उनको पता चल गया कि अंदर यह सब चल रहा है
  5889. 4:29:56तो वो तुरंत अंदर आ जाएंगे। उसके बाद
  5890. 4:29:59शौर्य के लिए मुसीबत हो [संगीत] जाएगी।
  5891. 4:30:02दद्दन पहलवान ही क्या? उसके आदमियों ने भी
  5892. 4:30:05यह नहीं सोचा था कि शौर्य उसके कमरे में
  5893. 4:30:08ही आकर उस पर इस तरह अचानक हमला कर देगा।
  5894. 4:30:11जब तक दद्दन [संगीत] पहलवान के बाकी बचे
  5895. 4:30:14तीन साथी को स्थिति का आभास हुआ तब तक
  5896. 4:30:17पासा पलट चुका था। शौर्य ने उस कमरे में
  5897. 4:30:20मौजूद एक छोटे टेबल के ऊपर मौजूद एक फल की
  5898. 4:30:24टोकरी में मौजूद चाकू को तेजी से उठाया और
  5899. 4:30:28जमीन से उठते हुए दद्दन पहलवान की गर्दन
  5900. 4:30:31को अपनी बाहों में जकर लिया। यह देखकर कि
  5901. 4:30:35दद्दन पहलवान की गर्दन अब शौर्य की बाहों
  5902. 4:30:38में है और उसके हाथ में चाकू भी नजर आ रहा
  5903. 4:30:40है। आगे बढ़ रहे उसके बाकी [संगीत] तीन
  5904. 4:30:43पहलवान अपनी जगह पर ही खड़े हो गए। उन्हें
  5905. 4:30:46समझ नहीं आ रहा था कि वह आगे क्या करें।
  5906. 4:30:49दद्दन पहलवान को भी उम्मीद नहीं था कि
  5907. 4:30:51स्थिति इस तरह [संगीत] से चेंज हो जाएगी।
  5908. 4:30:54दद्दन पहलवान के बगल में खड़ा सूट बूट में
  5909. 4:30:57मौजूद चौबे [संगीत] जी का शरीर अब किसी
  5910. 4:31:00सूखे पत्ते की तरह कांप रहा था। उनके हाथ
  5911. 4:31:03में जो पेपर मौजूद [संगीत] था जिस पर वो
  5912. 4:31:05कनिका का साइन लेने वाले थे। जाने कब वो
  5913. 4:31:07उनके हाथ से गिर कर फर्श [संगीत] पर बिखर
  5914. 4:31:09गया था।
  5915. 4:31:11शौर्य की निगाह उन पेपर के ऊपर गया तो वो
  5916. 4:31:14कुटिल मुस्कान के साथ बोला क्या बात है
  5917. 4:31:16[संगीत] तुम तो पूरी तैयारी के साथ थे एक
  5918. 4:31:19ही दिन में सारी रजिस्ट्री अपने नाम करना
  5919. 4:31:21चाहते थे लड़के मुझे नहीं पता कि तुम कौन
  5920. 4:31:24हो पर आज की तुम्हारी हरकत ने तुम्हारी
  5921. 4:31:27[संगीत] उम्र छोटी कर दी है तुम समझ भी
  5922. 4:31:30नहीं सकते कि अब मैं तुम्हारे साथ क्या
  5923. 4:31:32करूंगा।
  5924. 4:31:33दद्दन पहलवान शौर्य [संगीत] की पकड़ में
  5925. 4:31:35कसमसाता हुआ बोला। इसे ही कहते हैं रस्सी
  5926. 4:31:39जल गया पर बल नहीं गया। इतना बोलते
  5927. 4:31:42[संगीत] हुए शौर्य ने दद्दन पहलवान के सर
  5928. 4:31:45पर एक टपली बजाई। तुम क्या समझते हो?
  5929. 4:31:48तुमने [संगीत] मुझे यहां पर अपनी पकड़ में
  5930. 4:31:49ले लिया है तो क्या तुम इस जगह से बाहर जा
  5931. 4:31:51पाओगे? इस कमरे से बाहर जाते हैं मेरे
  5932. 4:31:54आदमी तुम्हें भूखे भेड़िए की तरह नोच
  5933. 4:31:56डालेंगे। ददन पहलवान की जुबान अभी भी बंद
  5934. 4:32:00नहीं हो रही थी। तुम चिंता मत करो। अभी
  5935. 4:32:04थोड़ी देर में तुम्हारे बाकी आदमियों की
  5936. 4:32:05भी हालत तुम्हारे जैसे ही होने वाली है।
  5937. 4:32:08अभी तक तुम्हारा सामना गीदड़ों से होता
  5938. 4:32:10रहा है। अब जाकर तुम्हें किसी शेर से
  5939. 4:32:12टकराने का मौका मिला है तो तुम्हें पता तो
  5940. 4:32:15चलना चाहिए कि शेर से टकराने का क्या
  5941. 4:32:17अंजाम होता है। इतना कहकर शौर्य ने फिर से
  5942. 4:32:21दद्दन पहलवान के सर पर एक टपली बजाई। यह
  5943. 4:32:24तो पक्का था कि [संगीत] आज तक कभी दद्दन
  5944. 4:32:27पहलवान की इतनी बेइज्जती नहीं हुई होगी।
  5945. 4:32:29उसके आदमियों की नजर झुक गई थी जो बाकी
  5946. 4:32:32तीन पहलवान [संगीत] सलामत उसे रूम में
  5947. 4:32:34मौजूद थे। अचानक वह मानसी की तरफ देखने
  5948. 4:32:37लगे। उन्हें लगा अगर वह मानसी को अपने
  5949. 4:32:40कंट्रोल [संगीत] में ले लेते हैं तो फिर
  5950. 4:32:42इस लड़के को मजबूर किया जा सकता है। शौर्य
  5951. 4:32:45को उन तीनों पहलवानों का इरादा समझने में
  5952. 4:32:47देर नहीं लगी। उसने दद्दन पहलवान की गर्दन
  5953. 4:32:51पर चाकू की नोक चुभाते हुए कहा। अगर
  5954. 4:32:54[संगीत] तुमने उन लड़कियों की तरफ बढ़ने
  5955. 4:32:56की कोशिश भी की तो तुम्हारे इस उस्ताद की
  5956. 4:32:58जीवन लीला आज ही समाप्त हो जाएगी। दद्दन
  5957. 4:33:02पहलवान के गर्दन पर चाकू की नोक के बढ़ते
  5958. 4:33:05दबाव को देखकर उसके पहलवान अपनी जगह पर ही
  5959. 4:33:08रुक गए। इसी समय शौर्य का फोन रिंग करने
  5960. 4:33:11लगा। उसने फोन उठाया। फोन छगन का था। कहां
  5961. 4:33:16हो तुम सब? शौर्य ने पूछा। मैंने दद्दन
  5962. 4:33:19पहलवान के अखाड़े को तो घेर लिया [संगीत]
  5963. 4:33:20है उस्ताद पर अभी-अभी तीन-चार गाड़ी में
  5964. 4:33:232530 लोग हथियारों से लैश इस अखाड़े में
  5965. 4:33:26ही आ रहे हैं। छगन की चिंतित आवाज शौर्य
  5966. 4:33:30के कान में पड़ी। क्या वे सब दन पहलवान के
  5967. 4:33:33आदमी हैं? शौर्य चिंता [संगीत] भरे स्वर
  5968. 4:33:35में बोला मेरे लिए अभी यह कहना मुश्किल है
  5969. 4:33:38बॉस कि यह सब द्न पहलवान के ही आदमी हैं
  5970. 4:33:41या [संगीत] कोई और। छगन अनिश्चितता में
  5971. 4:33:44बोला अगर ऐसी बात है तो तुम थोड़ी देर दूर
  5972. 4:33:47[संगीत] से ही यहां हो रहे तमाशे को देखते
  5973. 4:33:49रहो। बाद में मैं जैसा निर्देश करूंगा उस
  5974. 4:33:52हिसाब से काम करना। इतना कहकर शौर्य ने
  5975. 4:33:55फोन रख [संगीत] दिया। इसी समय बाहर
  5976. 4:33:57तीन-चार गाड़ियों के रुकने की आवाज सुनाई
  5977. 4:34:00दिया। अब आगे क्या होगा? अभी कौन गाड़ियों
  5978. 4:34:03में भरकर बाहर आया था? क्या दद्दन पहलवान
  5979. 4:34:06के और आदमी यहां आ गए थे? क्या शौर्य
  5980. 4:34:08मानसी को यहां से बचा कर ले जा पाएगा?
  5981. 4:34:11राजकुमारी कनिका का क्या होगा? ज्यादा समय
  5982. 4:34:13नहीं बीता। जल्दी ही 810 लोगों के धरधराते
  5983. 4:34:17कदमों की आवाज अंदर आती सुनाई दी। शौर्य
  5984. 4:34:21भी दिल थामे आने वाले व्यक्ति का इंतजार
  5985. 4:34:23करने लगा। इंतजार खत्म हुआ और कमरे में
  5986. 4:34:27वीरभद्र चौहान 810 हथियार बंद लोगों के
  5987. 4:34:31साथ प्रवेश किया। कनिका भी हैरान नजरों से
  5988. 4:34:34अपने पापा को देखने लगी कि वह यहां कैसे
  5989. 4:34:37पहुंच गए। हैरान तो शौर्य भी था कि कैसे
  5990. 4:34:41पूरे लाओ लश्कर के साथ वीरभद्र [संगीत]
  5991. 4:34:44चौहान ने यहां पर अपनी दस्तक दी। दद्दन
  5992. 4:34:47पहलवान की हालत तो यह सब देखकर पहले ही
  5993. 4:34:50खराब हो रखी थी। उसे उम्मीद नहीं था कि
  5994. 4:34:53[संगीत] वीरभद्र चौहान इस शहर में भी इतनी
  5995. 4:34:56तैयारी के साथ उसके कु्बे पर धावा बोल
  5996. 4:34:59सकता है। उसको देखकर ऐसा लग रहा था जैसे
  5997. 4:35:02किसी ने उसके पूरे शरीर का खून निचोड़
  5998. 4:35:05लिया हो। एक तो पहले ही शौर्य ने उसकी
  5999. 4:35:07हालत खराब कर रखी थी। ऊपर से अब [संगीत]
  6000. 4:35:10यह और अपने दल फौज के साथ आ गया था।
  6001. 4:35:13वीरभद्र चौहान यहां की बदली परिस्थिति को
  6002. 4:35:16[संगीत] देखकर अचंभित नजर आ रहा था।
  6003. 4:35:18उन्होंने कनिका की ओर देखा। उसे ठीक देखकर
  6004. 4:35:21उनको तसल्ली [संगीत] हुई। वो कनिका के
  6005. 4:35:23करीब जाकर बोले क्या चल रहा है यहां?
  6006. 4:35:27कनिका ने उन्हें सारी [संगीत] बात बताई कि
  6007. 4:35:29कैसे दद्दन पहलवान ने उसको बंधक बनाया और
  6008. 4:35:32कैसे उससे बसंत विहार के पहाड़ी के पास
  6009. 4:35:34वाला 5 [संगीत] एकड़ जमीन अपने नाम कराना
  6010. 4:35:37चाहता था। यह सुनकर वीरभद्र चौहान ने जलती
  6011. 4:35:40निगाहों से [संगीत] दद्दन पहलवान को देखा।
  6012. 4:35:43फिर उनकी निगाह दद्दन पहलवान को अपने
  6013. 4:35:46कब्जे में लिए शौर्य के ऊपर गई। उनको यह
  6014. 4:35:49चेहरा कुछ जाना पहचाना सा लगा। पर [संगीत]
  6015. 4:35:51उन्हें याद नहीं आया कि उन्होंने इससे
  6016. 4:35:53पहले शौर्य को कहां देखा था। अब तक शौर्य
  6017. 4:35:56की पकड़ भी दद्दन पहलवान के ऊपर ढीली पड़
  6018. 4:35:59गई थी। बदली परिस्थिति में शौर्य समझ सकता
  6019. 4:36:02था कि अब दद्दन पहलवान कुछ भी करने की
  6020. 4:36:04स्थिति में नहीं है। वीरभद्र चौहान शौर्य
  6021. 4:36:07के पास जाकर बोले मुझे ऐसा क्यों लग रहा
  6022. 4:36:10है कि हम पहले भी एक दूसरे से मिल चुके
  6023. 4:36:12हैं। शौर्य कुछ कहता उससे पहले कनिका बोली
  6024. 4:36:16क्या पापा अभी कुछ समय पहले ही तो आप
  6025. 4:36:18शौर्य से होटल पैराडाइज में मिले थे। इतनी
  6026. 4:36:20जल्दी भूल गए। वीरभद्र [संगीत] चौहान को
  6027. 4:36:23तुरंत होटल वाली घटना याद आ गई। तभी तो
  6028. 4:36:26मैं कहूं कि यह चेहरा मुझे कुछ जाना
  6029. 4:36:28पहचाना सा क्यों लग रहा है? पर तुम यहां
  6030. 4:36:31क्या कर रहे हो? शौर्य कुछ [संगीत] जवाब
  6031. 4:36:33देता उससे पहले कनिका ही बोल पड़ी। जैसे
  6032. 4:36:36इस दन पहलवान ने मुझे बंधक बनाया है, वैसे
  6033. 4:36:39ही इस लड़की मानसी मेहता को भी बंधक बना
  6034. 4:36:41[संगीत] रखा था। शौर्य शायद इस लड़की के
  6035. 4:36:44लिए ही यहां आया था। अगर यह समय पर नहीं
  6036. 4:36:46आया होता, तो शायद यह अपनी मनमानी कर गया
  6037. 4:36:49होता। सही समय पर इसने [संगीत] इस बदमाश
  6038. 4:36:51से हमें बचा लिया। वीरभद्र चौहान शौर्य का
  6039. 4:36:55कंधा थपथपाते हुए बोले, बहुत बढ़िया यंग
  6040. 4:36:58मैन। तुम्हारा यह एहसान मैं कभी नहीं
  6041. 4:37:00भूलूंगा। शौर्य शर्मिंदा होते हुए बोला,
  6042. 4:37:04"इसमें एहसान की कोई बात नहीं है अंकल।
  6043. 4:37:06मुझे तो इस पहलवान को सबक सिखाना ही था।"
  6044. 4:37:09वैसे आपकी तैयारी देखकर लग नहीं रहा है कि
  6045. 4:37:12आपको किसी और की हेल्प की कोई जरूरत थी।
  6046. 4:37:15शौर्य से फ्री होकर वीरभद्र चौहान दद्दन
  6047. 4:37:18पहलवान की तरफ पलटे। दद्दन पहलवान के सारे
  6048. 4:37:21आदमियों को वीरभद्र चौहान के साथ आए
  6049. 4:37:23आदमियों ने अपने कब्जे [संगीत] में ले
  6050. 4:37:25लिया था। जो दद्दन पहलवान अभी थोड़ी देर
  6051. 4:37:28पहले शेर बन रहा था। अब वो भीगी बिल्ली
  6052. 4:37:31बना हुआ था। उसने तो सपने में भी नहीं
  6053. 4:37:33सोचा होगा कि वीरभद्र चौहान इतने दल फौज
  6054. 4:37:36[संगीत] के साथ यहां आ धमकेगा। वीरभद्र
  6055. 4:37:40चौहान दद्दन पहलवान और उसके आदमियों पर
  6056. 4:37:42अपनी नजर फेटते हुए बोले, [संगीत] वैसे
  6057. 4:37:45तुम्हारी हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी।
  6058. 4:37:47तुमने अकेले इस कमीने के गढ़ में आकर इसे
  6059. 4:37:49घुटनों पर ला दिया। आखिर किस हैसियत के बल
  6060. 4:37:52पर यह इतनी ऊंची [संगीत] उड़ान उड़ने की
  6061. 4:37:54कोशिश कर रहा था। शौर्य उस पेपर को हाथ
  6062. 4:37:57में लेते हुए बोला जिस पर दद्दन पहलवान
  6063. 4:38:00कनिका से साइन करवाने वाला था। इस अकेले
  6064. 4:38:03की इतनी हिम्मत नहीं हो सकती अंकल। जरूर
  6065. 4:38:06इसके [संगीत] पीछे किसी और पावरफुल आदमी
  6066. 4:38:08का हाथ होगा। यह भी जल्दी ही पता चल
  6067. 4:38:10जाएगा। वीरभद्र चौहान ने शौर्य के हाथ से
  6068. 4:38:13वो पेपर लेकर चेक किया। उसमें जिसके नाम
  6069. 4:38:16प्रॉपर्टी [संगीत] होनी थी, उसके नाम के
  6070. 4:38:18सामने शर्मा डेवलपर लिखा हुआ था। वीरभद्र
  6071. 4:38:22चौहान [संगीत] ने दद्दन पहलवान की ओर
  6072. 4:38:24देखकर पूछा। इस शर्मा डेवलपर का [संगीत]
  6073. 4:38:27मालिक कौन है? पर दद्दन पहलवान ने वीरभद्र
  6074. 4:38:30चौहान के सवाल का कोई जवाब नहीं दिया। कुछ
  6075. 4:38:33पल तो वीरभद्र चौहान जवाब की प्रतीक्षा
  6076. 4:38:36करते रहे। पर अगले ही पल उनका [संगीत] एक
  6077. 4:38:38जोरदार थप्पड़ दद्दन पहलवान के गाल पर
  6078. 4:38:41पड़ा। दद्दन पहलवान का चेहरा थप्पड़ खाकर
  6079. 4:38:45लाल हो गया। मैं तुमसे बार-बार एक ही सवाल
  6080. 4:38:48नहीं पूछूंगा। अगर अब जवाब देने में तुमने
  6081. 4:38:51थोड़ी भी कोताही बरती तो मैं तुम्हारा जो
  6082. 4:38:54हाल करूंगा तुम उसकी कल्पना भी नहीं कर
  6083. 4:38:57पाओगे। वीरभद्र चौहान इतना बोलने के बाद
  6084. 4:39:01दोबारा दद्दन पहलवान पर हाथ उठाने ही वाले
  6085. 4:39:04थे कि दद्दन पहलवान तुरंत बोल पड़ा।
  6086. 4:39:07रमाकांत शर्मा मंत्री रमाकांत शर्मा की
  6087. 4:39:10कंपनी है यह। दद्दन पहलवान जल्दी से बोला।
  6088. 4:39:13उसे लगा अगर उसने और थोड़ी देर कर दिया तो
  6089. 4:39:16इस बार उसका जबड़ा टूटने से कोई भी बचा
  6090. 4:39:19नहीं पाएगा। वीरभद्र चौहान का हाथ जो
  6091. 4:39:23दद्दन पहलवान को पड़ने ही वाला [संगीत] था
  6092. 4:39:25वो रुक गया।
  6093. 4:39:27तो इस सारे कर्मकांड के पीछे यह रमाकांत
  6094. 4:39:31शर्मा [संगीत] है। अब मैं भी देखता हूं कि
  6095. 4:39:33कितने समय यह मंत्री बना रह सकता है।
  6096. 4:39:37शौर्य यह सब देख सुन रहा था। वह [संगीत]
  6097. 4:39:39समझ गया कि अब मंत्री रमाकांत शर्मा का
  6098. 4:39:42दिन लदने वाला था। शौर्य वीरभद्र चौहान और
  6099. 4:39:45उसके परिवार के बारे में ज्यादा कुछ नहीं
  6100. 4:39:48जानता था। पर इतना तो वह समझ गया था
  6101. 4:39:50[संगीत] कि वीरभद्र चौहान बहुत ही बड़े
  6102. 4:39:52रसूखदार परिवार से संबंध रखता है। शायद
  6103. 4:39:55रमाकांत शर्मा इसके फैमिली बैकग्राउंड से
  6104. 4:39:58अच्छी तरह वाकिफ नहीं होगा। इसीलिए
  6105. 4:40:00[संगीत] उसने कनिका चौहान को बंधक बनाने
  6106. 4:40:02की हिम्मत कर सका। यह बात दन पहलवान के
  6107. 4:40:06एक्सप्रेशन से भी पता चल रहा था कि वह
  6108. 4:40:08वीरभद्र चौहान का रुतबा देखकर समझ गया था
  6109. 4:40:11कि उसने वीरभद्र चौहान के परिवार को
  6110. 4:40:14[संगीत] कम करके आंका था। पर अब कुछ नहीं
  6111. 4:40:16हो सकता था। यह सब जल्दबाजी में हो गया
  6112. 4:40:19था। उसने सोचा नहीं था कि [संगीत] पुराने
  6113. 4:40:21राजशाही परिवारों का रुतबा आज भी पहले की
  6114. 4:40:24तरह होगा। वैसे भी वह पहलवान आदमी था।
  6115. 4:40:28उसने [संगीत] कनिका के बॉडीगार्ड से जाना
  6116. 4:40:30था कि वह भानगढ़ की राजकुमारी है। पर वह
  6117. 4:40:32जानता था कि अब कोई राजशाही रही नहीं। वे
  6118. 4:40:35[संगीत] सब तो नाम की ही राजकुमारी होंगी।
  6119. 4:40:38वैसी कोई हैसियत नहीं होगी। अब उसे अपने
  6120. 4:40:41द्वारा लिए [संगीत] गए डिसीजन पर अफसोस हो
  6121. 4:40:43रहा था। शौर्य ने वीरभद्र चौहान [संगीत]
  6122. 4:40:46से पूछा, अब आप इस दद्दन पहलवान का क्या
  6123. 4:40:49करेंगे अंकल? वीरभद्र चौहान मुस्कुराते
  6124. 4:40:52हुए बोले, [संगीत] तुम इसकी चिंता मत करो।
  6125. 4:40:55मैं अब इसको भानगढ़ का सैर कराऊंगा। आज से
  6126. 4:40:58यह डेली पश्चाताप [संगीत]
  6127. 4:40:59करेगा कि इसने हमारे खिलाफ जाने की हिम्मत
  6128. 4:41:01क्यों की? तुम भी अब इसकी चिंता छोड़ दो।
  6129. 4:41:04अब यह दोबारा [संगीत] फिर कभी तुम्हारा
  6130. 4:41:06रास्ता काटने की हिम्मत नहीं कर पाएगा।
  6131. 4:41:09शौर्य बोला, ठीक है अंकल। जब आप कह रहे
  6132. 4:41:12हैं तो मुझे आप पर विश्वास [संगीत] है।
  6133. 4:41:14कनिका शौर्य से मुखातिब हुई। वैसे तुम किस
  6134. 4:41:17कंपनी के लिए काम कर रहे हो? शौर्य शौर्य
  6135. 4:41:20ने जवाब दिया मैं बिगबुल के लिए काम कर
  6136. 4:41:23रहा हूं। वीरभद्र चौहान उत्सुकता वश पूछ
  6137. 4:41:27बैठे। तुमने यहां पर प्रॉपर्टी में कितना
  6138. 4:41:29इन्वेस्ट किया है? [संगीत] शौर्य सामान्य
  6139. 4:41:32स्वर में बोला, यहीं कोई लगभग 5000 करोड़
  6140. 4:41:35टोटल इन्वेस्ट करने का प्लान है। 5000
  6141. 4:41:39करोड़ की रकम सुनकर वीरभद्र चौहान की
  6142. 4:41:42आंखें फैल गई। मेरे जानने में कई और भी
  6143. 4:41:45डेवलपर हैं जो यहां पर प्रॉपर्टी में अपना
  6144. 4:41:47पैसा इन्वेस्ट कर रहे हैं। पर मेरे जानने
  6145. 4:41:50में कोई भी ऐसा नहीं है जो यहां पर
  6146. 4:41:52प्रॉपर्टी में 5000 करोड़ या उससे ज्यादा
  6147. 4:41:54इन्वेस्ट कर रहा हो। शौर्य अनभिज्ञता
  6148. 4:41:58जाहिर करते हुए बोला। मुझे इसके बारे में
  6149. 4:42:00ज्यादा कुछ पता नहीं है अंकल। मुझे
  6150. 4:42:02[संगीत] तो बस अपना ही पताता है। इसी समय
  6151. 4:42:05उसकी निगाह मानसी पर पड़ी जो उसी को गौर
  6152. 4:42:08से देख रही थी। उसकी आंखें फैली हुई थी।
  6153. 4:42:11शौर्य की बात सुनकर उसे आश्चर्य हो रहा
  6154. 4:42:14था। वह [संगीत] समझ नहीं पा रही थी कि अभी
  6155. 4:42:16शौर्य वीरभद्र चौहान से जो कुछ भी बोल रहा
  6156. 4:42:19था, क्या वह सच है या वह अपना इंप्रेशन
  6157. 4:42:22जमाने के लिए लंबी-लंबी [संगीत]
  6158. 4:42:23फेंक रहा है। शौर्य को भी अपनी गलती का
  6159. 4:42:27एहसास हुआ कि उसने वीरभद्र चौहान से बात
  6160. 4:42:29करने के प्रवाह में मानसी को भूल ही गया
  6161. 4:42:32था। उसने अब यहां और रुकना ठीक नहीं समझा।
  6162. 4:42:35इसलिए वह वीरभद्र चौहान से बोला, ठीक है
  6163. 4:42:38अंकल। अब हम यहां से निकलते हैं। मानसी भी
  6164. 4:42:41सदमे की स्थिति में है। यह घर जाकर ही
  6165. 4:42:43रिलैक्स कर पाएगी। वीरभद्र चौहान मानसी की
  6166. 4:42:46ओर देखकर बोले, "यह लड़की कौन है? शौर्य
  6167. 4:42:50ने मानसी का परिचय दिया। यह हर्षल मेहता
  6168. 4:42:53की बेटी मानसी मेहता है। हर्षल मेहता की
  6169. 4:42:56भी इन्वेस्टमेंट हमारी इस कंपनी में 10%
  6170. 4:42:58के लगभग है। और वैसे भी कंपनी का काम
  6171. 4:43:01मानसी ही देख रही है। वीरभद्र चौहान मानसी
  6172. 4:43:05की तारीफ करते हुए बोले, बहुत खूब। आजकल
  6173. 4:43:08के यंग जनरेशन बहुत तेज हो रखे हैं। शौर्य
  6174. 4:43:11भी मानसी की तारीफ में दो बोल बोल गया।
  6175. 4:43:14आपने सही कहा अंकल। मानसी भी बहुत मेहनती
  6176. 4:43:17है। उसने बहुत कम समय में अपनी योग्यता का
  6177. 4:43:20परिचय दिया है। [संगीत] वीरभद्र चौहान ने
  6178. 4:43:22शौर्य से संकोच के साथ कहा। क्या मैं
  6179. 4:43:25तुमसे [संगीत] कोई प्रश्न कर सकता हूं?
  6180. 4:43:28शौर्य तसल्ली देते हुए बोला, "आप बेफिक्र
  6181. 4:43:31होकर पूछ सकते हैं।" वीरभद्र चौहान संकोच
  6182. 4:43:34प्रकट करते हुए बोले, "क्या हम किसी
  6183. 4:43:36प्रोजेक्ट में यहां पर साथ में काम कर
  6184. 4:43:38सकते हैं?" शौर्य ने सहमति जताते हुए कहा,
  6185. 4:43:41"यह [संगीत] कोई बड़ी बात नहीं है अंकल।
  6186. 4:43:43शायद इससे कंपनी को और भी बड़ा मार्केट
  6187. 4:43:45मिलेगा। वीरभद्र चौहान ने भी अपनी बात
  6188. 4:43:48समाप्त [संगीत] की। ठीक है फिर किसी दिन
  6189. 4:43:51साथ बैठकर इस पर बात करेंगे। शौर्य ने
  6190. 4:43:53मानसी को अपने साथ आने का इशारा किया।
  6191. 4:43:56मानसी भी बिना कुछ बोले शौर्य के साथ उस
  6192. 4:43:59अखाड़े से बाहर आ गई थी। शौर्य जाकर अपनी
  6193. 4:44:02कार में बैठा तो मानसी भी उसके साथ बैठ
  6194. 4:44:04गई। मानसी को समझ नहीं आ रहा था कि वह
  6195. 4:44:07शौर्य से किस तरह बात करें। पहले जब उसकी
  6196. 4:44:10मुलाकात शौर्य से हुई थी तो शौर्य के
  6197. 4:44:12प्रति उसका इंप्रेशन कुछ खास नहीं था। पर
  6198. 4:44:14आज जिस तरह शौर्य दद्दन पहलवान की गुफा
  6199. 4:44:17में आकर उसको ललकारा और धूल चटा दी। उसको
  6200. 4:44:20[संगीत] देखकर मानसी का विचार शौर्य के
  6201. 4:44:22लिए बदल गया। और दूसरी बात उसके लिए यह भी
  6202. 4:44:26आश्चर्य थी कि क्या शौर्य ही बिग बुल का
  6203. 4:44:28असली मालिक है? मानसी ने ठंडे स्वर में
  6204. 4:44:31शौर्य से सवाल किया। क्या मैं पूछ सकती
  6205. 4:44:33हूं कि तुम्हारी असलियत क्या है? शौर्य
  6206. 4:44:36समझ गया कि मानसी के मन में यह सवाल क्यों
  6207. 4:44:38आया? उसने जो वीरभद्र चौहान के सामने
  6208. 4:44:41खुलकर बात कर ली। इसीलिए उसका यह सवाल
  6209. 4:44:44शौर्य के सामने आया था। शौर्य ने सोचा अब
  6210. 4:44:47उसको बात को संभालना है। पर उससे पहले
  6211. 4:44:50शौर्य ने अपना मोबाइल निकाला और छगन को
  6212. 4:44:52मैसेज किया कि वह अपने आदमियों को लेकर
  6213. 4:44:55वापस चला जाए।
  6214. 4:44:56[संगीत]
  6215. 4:44:56यहां का काम समाप्त हो गया है। आदमी को
  6216. 4:44:58इकट्ठा करने में जो खर्च हुआ होगा उसका
  6217. 4:45:01पेमेंट वो उसको कर देगा। इसके बाद वो
  6218. 4:45:03मानसी से मुखातिब होकर बोला यहां वीरभद्र
  6219. 4:45:06चौहान से हमारी जो भी बातें हुई उसे तुम
  6220. 4:45:09भूल जाओ। वह सब बस उनको गुमराह करने के
  6221. 4:45:11लिए था। आखिर इस मार्केट में वह हमारे
  6222. 4:45:13कॉम्पिटिट हैं। इसलिए उनसे हकीकत कैसे कहा
  6223. 4:45:16जा सकता था? मानसी का तो दिमाग ही घूम
  6224. 4:45:19गया। उसे कहीं से यह नहीं लगा था कि शौर्य
  6225. 4:45:22वीरभद्र चौहान से कुछ झूठ भी बोल रहा
  6226. 4:45:24होगा। क्या तुम अभी अब मुझे बेवकूफ बनाने
  6227. 4:45:27की कोशिश कर रहे हो? अब मैं समझ सकती हूं
  6228. 4:45:30कि पापा [संगीत] क्यों तुम्हें इतना फेवर
  6229. 4:45:32करते हैं। शौर्य नहीं चाहता था कि मानसी
  6230. 4:45:34इस बारे में ज्यादा सोचे। तुम कुछ ज्यादा
  6231. 4:45:37ही सोचने लगी हो। अपने दिमाग पर इतना जोर
  6232. 4:45:40मत दो। अभी शौर्य ज्यादा आगे भी नहीं गया
  6233. 4:45:43कि तभी सामने से एक कार आकर उसकी कार के
  6234. 4:45:46सामने खड़ी हो गई। शौर्य को मजबूरन अपनी
  6235. 4:45:48कार को रोकना पड़ा। अब आगे क्या होगा?
  6236. 4:45:52आखिर किसकी कार शौर्य की कार के सामने आकर
  6237. 4:45:55रुकी थी? क्या मानसी का विचार शौर्य के
  6238. 4:45:58लिए बदल जाएगा? शौर्य ने देखा जो कार
  6239. 4:46:00[संगीत] शौर्य की कार के सामने रुकी थी,
  6240. 4:46:03वह किसी और का नहीं बल्कि हर्षल मेहता का
  6241. 4:46:06था। मानसी ने जब अपने पापा को कार से
  6242. 4:46:09निकलते देखा तो वह जल्दी से कार से बाहर
  6243. 4:46:12आकर उनके पास गई। हर्षल [संगीत] मेहता ने
  6244. 4:46:14जब मानसी को सकुशल देखा तो उन्हें तसल्ली
  6245. 4:46:17हुई। शौर्य भी कार से निकल कर हर्षल मेहता
  6246. 4:46:20के पास आ गया था। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद
  6247. 4:46:23मिस्टर श्रवण जो आपने मानसी को उस दद्दन
  6248. 4:46:26पहलवान के हाथ से सुरक्षित निकाल लिया।
  6249. 4:46:28हर्षल मेहता [संगीत] शौर्य का आभार जताते
  6250. 4:46:30हुए बोले, "यह आप कैसी बात कर रहे हैं?
  6251. 4:46:33मिस्टर मेहता, यह तो हमारा फर्ज था। शौर्य
  6252. 4:46:36झिझकता हुआ बोला, "आपने इस मुश्किल घड़ी
  6253. 4:46:39में किसी और को ना भेजकर खुद उस दद्दन
  6254. 4:46:42पहलवान से मेरी बेटी को छुड़ाने चले गए।
  6255. 4:46:44यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। हर्षल
  6256. 4:46:47मेहता की आंखें भावुकता में भर आई थी।
  6257. 4:46:50शिप्रा शौर्य के प्रति अपने पापा का
  6258. 4:46:52व्यवहार देखकर अब निश्चित हो गई थी कि जो
  6259. 4:46:55वह अभी तक शौर्य को समझ रही थी, उसकी
  6260. 4:46:57[संगीत] वास्तविकता निश्चित रूप से कुछ और
  6261. 4:46:59थी। वो अपने पापा से बोली पापा क्या आप
  6262. 4:47:03मुझे बताएंगे कि मिस्टर श्रवण की
  6263. 4:47:05वास्तविकता क्या है? इतना तो मैं समझ गई
  6264. 4:47:08हूं कि यह वो तो बिल्कुल नहीं है जो मैं
  6265. 4:47:10इन्हें अभी तक समझ रही थी। मानसी की बात
  6266. 4:47:13ने हर्षल मेहता को चौंकाया। वह तो भूल ही
  6267. 4:47:16गए थे कि वहां पर मानसी भी खड़ी है जो
  6268. 4:47:19उनकी बातचीत से स्वतः ही अंदाजा लगा सकती
  6269. 4:47:21है कि श्रवण की हकीकत कुछ और ही है। वह
  6270. 4:47:24समझ गए कि मानसी से अब और ज्यादा शौर्य की
  6271. 4:47:27हकीकत को छुपाना संभव नहीं है। इसलिए वह
  6272. 4:47:30शौर्य की ओर देखकर बोले मिस्टर श्रवण आपकी
  6273. 4:47:34हकीकत मानसी से अब छुपाने का कोई मतलब
  6274. 4:47:36नहीं रह गया है। इसलिए आप मुझे इस बात के
  6275. 4:47:38लिए माफ करें। इतना कहकर हर्षल मेहता
  6276. 4:47:41मानसी की ओर पलटे और उससे कहा बेटी
  6277. 4:47:45[संगीत] यह मिस्टर श्रवण हैं जो कि बिग
  6278. 4:47:47बुल के असली ओनर हैं और इन्होंने ही हमारी
  6279. 4:47:50कंपनी के 90% शेयर को भी खरीदा है। मानसी
  6280. 4:47:53तो इस [संगीत] सच्चाई को जानकर शौक में ही
  6281. 4:47:55चली गई थी। उसे शौर्य के साथ अपने किए
  6282. 4:47:58व्यवहार याद आ रहे थे। उसने कोई कसर नहीं
  6283. 4:48:00छोड़ा था शौर्य को नीचा दिखाने का। पर अब
  6284. 4:48:03क्या ही हो [संगीत] सकता था। उसे अपने
  6285. 4:48:06पापा पर गुस्सा भी आया था कि उन्हें उसकी
  6286. 4:48:08हकीकत पहले नहीं बताना चाहिए था। क्या
  6287. 4:48:11पापा [संगीत] आपको मुझे इस बारे में पहले
  6288. 4:48:13नहीं बताना चाहिए था? मानसी नाराजगी जाहिर
  6289. 4:48:16करती हुई [संगीत] बोली यह मिस्टर श्रवण का
  6290. 4:48:19खुद का फैसला था। इसमें मैं कुछ नहीं कर
  6291. 4:48:21सकता था। यह नहीं चाहते थे [संगीत] कि
  6292. 4:48:23इनकी हकीकत दुनिया के सामने जाहिर हो।
  6293. 4:48:26हर्षल मेहता ने सफाई दी। आपको पता है इनकी
  6294. 4:48:29पहचान गलत होने के कारण कितना कुछ गलत हो
  6295. 4:48:32रहा था। मैं खुद कई बार मिस्टर श्रवण को
  6296. 4:48:34नीचा दिखाने की कोशिश की। अगर मुझे यह पता
  6297. 4:48:37होता तो क्या मैं ऐसी हरकत करती? मानसी की
  6298. 4:48:40नाराजगी अभी भी कम नहीं हो रही थी। शौर्य
  6299. 4:48:43ने जब मानसी [संगीत] के चेहरे पर ग्लानी
  6300. 4:48:45के भाव को देखा तो वह मुस्कुराते हुए
  6301. 4:48:47बोला, तुमको बुरा फील करने की कोई जरूरत
  6302. 4:48:50नहीं है। मिस मानसी। मैं जानता हूं तुमने
  6303. 4:48:52जो भी व्यवहार मेरे साथ किया वह
  6304. 4:48:54परिस्थितिजन्य व्यवहार था और [संगीत] मुझे
  6305. 4:48:57उसमें कुछ भी बुरा नहीं लगा। इसलिए तुम
  6306. 4:48:59अपने मन में किसी भी तरह की ग्लानी को ना
  6307. 4:49:01आने दो। तुम्हारे लिए यह कहना आसान है। पर
  6308. 4:49:04मैं खुद को कितना ठगा हुआ महसूस कर रही
  6309. 4:49:07हूं। अभी भी मानसी का प्रलाप कम नहीं हो
  6310. 4:49:10रहा था। तुम ज्यादा ही सोच रही हो। मुझे
  6311. 4:49:13[संगीत] पता था कि अगर मैं अपनी आइडेंटिटी
  6312. 4:49:14को छुपा कर रखूंगा तो इस तरह की घटना होना
  6313. 4:49:17आम था। और तुम अकेली नहीं हो जो मेरी
  6314. 4:49:20[संगीत] असली आईडेंटिटी से अनजान थी।
  6315. 4:49:22बल्कि यहां कोई भी मेरी असली आइडेंटिटी से
  6316. 4:49:24वाकिफ नहीं है। [संगीत] एक-दो लोगों को
  6317. 4:49:26छोड़कर। शौर्य ने मानसी को समझाने की
  6318. 4:49:29कोशिश की। शौर्य की बात सुनकर कुछ देर के
  6319. 4:49:32लिए मानसी किसी सोच में डूब गई। फिर कुछ
  6320. 4:49:35ध्यान में आने पर उसने [संगीत] शौर्य से
  6321. 4:49:37पूछा, क्या शिप्रा राय तुम्हारी असली
  6322. 4:49:39आइडेंटिटी से वाकिफ है? शौर्य को समझ नहीं
  6323. 4:49:42आया कि अचानक मानसी के दिमाग में शिप्रा
  6324. 4:49:45कहां से आ गई? पर जब उसने पूछा [संगीत] तो
  6325. 4:49:47उसको जवाब तो देना था। इसलिए उसने कहा
  6326. 4:49:51नहीं शिप्रा भी मेरी असली आइडेंटिटी से
  6327. 4:49:53वाकिफ नहीं है। और नताशा कपूर मानसी ने
  6328. 4:49:57लगे हाथों [संगीत] नताशा कपूर के बारे में
  6329. 4:50:00भी पूछ लिया। वो भी मेरे बारे में उतना ही
  6330. 4:50:03जानती है जितना तुम या कोई और। शौर्य
  6331. 4:50:07मुस्कुराते हुए बोला। उसे [संगीत] समझ आ
  6332. 4:50:09रहा था कि इस समय मानसी के दिमाग में क्या
  6333. 4:50:12चल रहा है। सॉरी मेरे पहले के व्यवहार के
  6334. 4:50:15लिए। मैं [संगीत] पहले तुम्हारे साथ बहुत
  6335. 4:50:18रूढ़ रही हूं। मानसी सचमुच बुरा फील कर
  6336. 4:50:21रही थी। मानसी की बात सुनकर शौर्य के साथ
  6337. 4:50:24हर्षल मेहता के चेहरे पर भी मुस्कान
  6338. 4:50:27[संगीत] आ गई थी। हर्षल मेहता ने शौर्य को
  6339. 4:50:29बताया कि उसने जमीन के बाउंड्री वॉल करने
  6340. 4:50:32के लिए कारीगरों को समझा दिया है। [संगीत]
  6341. 4:50:34वह अपनी देखरेख में ही इस काम को पूरा
  6342. 4:50:36करवा लेगा। शौर्य को भी हर्षल मेहता की
  6343. 4:50:39बात सुनकर तसल्ली हुई। साथ में उसने हर्षल
  6344. 4:50:42मेहता को यह भी निर्देश दिया कि वह आगे से
  6345. 4:50:45मानसी के साथ कम से कम एक बॉडीगार्ड को
  6346. 4:50:47जरूर नियुक्त कर दें ताकि इस तरह की कोई
  6347. 4:50:50मिसहपनिंग ना होने पाए। दूसरी तरफ मानसी
  6348. 4:50:53अपने ऑफिस में बैठी हुई थी। आज ऑफिस के
  6349. 4:50:56सीनियर स्टाफ की एक मीटिंग भी हुई थी
  6350. 4:50:59जिसमें [संगीत] कंपनी के आगे के प्लान पर
  6351. 4:51:00चर्चा हुई थी। मानसी ने एक अलग से अपेरल
  6352. 4:51:04डिपार्टमेंट की ओपनिंग का प्रपोजल दिया था
  6353. 4:51:06जिसे [संगीत] राजा साहब ने भी पसंद किया
  6354. 4:51:08था। साथ ही उसने बिगबुल के साथ होने वाले
  6355. 4:51:10मीटिंग के बारे में भी बताया। कुल [संगीत]
  6356. 4:51:13मिलाकर उसने जो आगे का प्लान सबके सामने
  6357. 4:51:15रखा था उससे कुछ ही समय में कपड़ों की
  6358. 4:51:17डिमांड में ग्रोथ होना निश्चित था। राजा
  6359. 4:51:20साहब शिप्रा के इस कदम से काफी खुश नजर
  6360. 4:51:23आए। पर वहां कुछ ऐसे लोग भी थे जो शिप्रा
  6361. 4:51:26की इस कामयाबी पर खुश नहीं हुए थे। एक
  6362. 4:51:28[संगीत] तो स्वर्णलत्ता जी थी जिन्हें
  6363. 4:51:30शिप्रा की कामयाबी ने परेशान कर दिया।
  6364. 4:51:33दूसरी तरफ प्रतीक भी शिप्रा की इस कामयाबी
  6365. 4:51:36से ज्यादा खुश तो नहीं था [संगीत] पर उसने
  6366. 4:51:38ऐसा जताया जैसे शिप्रा की कामयाबी से वह
  6367. 4:51:40बहुत खुश था। शिप्रा आज की वाहवाही से
  6368. 4:51:44बहुत खुश थी। उसे अच्छा लग रहा था कि वह
  6369. 4:51:46राजा साहब की उम्मीद पर खड़ी उतर रही थी।
  6370. 4:51:49अभी जब वह फ्री हुई तो उसने एक बार शौर्य
  6371. 4:51:52के बारे में सोचा और उसे फोन करने की
  6372. 4:51:54सोचने लगी। आखिर उसके इस सारे प्लान के
  6373. 4:51:57पीछे शौर्य का भी हाथ था। उसी ने आईडिया
  6374. 4:52:00दिया था कि अपना एक अपेरल का डिपार्टमेंट
  6375. 4:52:02भी साथ में खोल दे। इसके अलावा बिग बुल के
  6376. 4:52:05साथ डील करने का विचार भी उसी का दिया हुआ
  6377. 4:52:07था। अभी शिप्रा इसी सोच में खोई थी कि तभी
  6378. 4:52:11दरवाजे पर दस्तक हुई। उसके बाद प्रतीक
  6379. 4:52:14ऑफिस का दरवाजा खोलकर अंदर झांकता हुआ
  6380. 4:52:16बोला। क्या मैं अंदर आ सकता हूं? शिप्रा
  6381. 4:52:20ने देखा और व्यावहारिक मुस्कान के साथ
  6382. 4:52:22कहा, "आप कैसी बात कर रहे हैं? [संगीत]
  6383. 4:52:24आइए अंदर आइए।"
  6384. 4:52:26प्रतीक आकर शिप्रा के सामने बैठ गया।
  6385. 4:52:28मानना पड़ेगा [संगीत] तुमने कंपनी के लिए
  6386. 4:52:30जो कुछ डिसीजन लिए हैं, वह काबिले तारीफ
  6387. 4:52:33है और मुझे उम्मीद है कि जल्दी ही इसका
  6388. 4:52:35असर कंपनी की प्रॉफिट में भी नजर आने
  6389. 4:52:38लगेगा। अगर आप ऐसा सोचते हैं तो मैं इसे
  6390. 4:52:41अपना खुशनसीबी समझूंगी। शिप्रा हल्की
  6391. 4:52:44मुस्कान के साथ बोली। वो यह गौर कर रही थी
  6392. 4:52:47कि प्रतीक को जब भी मौका मिलता था वो उसके
  6393. 4:52:50पास आने की कोशिश करता था। शिप्रा ने इस
  6394. 4:52:53पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। जब तक वह सभ्य
  6395. 4:52:55तरीके से उससे पेश आ रहा था, उसे कोई फर्क
  6396. 4:52:58नहीं पड़ता था। अगर कभी वह अपना दायरा पार
  6397. 4:53:01करने की कोशिश करता, तो वह जरूर आपत्ति
  6398. 4:53:03करती। तुमने गौ ने गौर नहीं किया?
  6399. 4:53:06स्वर्णलत्ता बुआ तुम्हारी इस उपलब्धि से
  6400. 4:53:08[संगीत] कोई खास खुश नजर नहीं आ रही थी।
  6401. 4:53:11क्यों वो इस बात से क्यों खुश नहीं होंगी?
  6402. 4:53:14अगर कंपनी तरक्की करती है तो उससे जुड़े
  6403. 4:53:16सभी लोगों को उसका फायदा मिलता है। शिप्रा
  6404. 4:53:19ने मासूमियत से कहा, वह अभी तक [संगीत]
  6405. 4:53:22फैमिली के पॉलिटिक्स से अनजान थी। तुम
  6406. 4:53:24बहुत भोली हो। वो दिखावे के लिए भले ही
  6407. 4:53:27अच्छा अच्छा बोलती है पर उनकी नजर भी
  6408. 4:53:29तुम्हारी पोजीशन पर थी और अब एक नया
  6409. 4:53:32मुश्किल और उनके सामने आने वाली है जिसके
  6410. 4:53:34[संगीत] कारण उनकी चिंता और भी बढ़ गई है।
  6411. 4:53:37प्रतीक ऐसे बोला जैसे कोई बहुत बड़ा राज
  6412. 4:53:40वो शिप्रा को बताने जा रहा है। शिप्रा को
  6413. 4:53:43समझ नहीं आया कि प्रतीक किस बारे में बात
  6414. 4:53:45कर रहा है। इसलिए वह उत्सुकता वश पूछ
  6415. 4:53:47बैठी। आप कैसी मुश्किल की बात कर रहे हैं?
  6416. 4:53:51अरे यार, सबसे पहले तुम मुझे आप कहना बंद
  6417. 4:53:54करो। हम दोनों एक ही उम्र के हैं और
  6418. 4:53:56तुम्हारे आप कहने से लगता है कि मैं
  6419. 4:53:58तुम्हारा कोई सीनियर हूं। [संगीत] जबकि
  6420. 4:54:00देखा जाए तो इस कंपनी में तुम ही मेरी
  6421. 4:54:02सीनियर हो। प्रतीक बनावटी नाराजगी दिखाते
  6422. 4:54:05हुए बोला, ठीक है, कोशिश करूंगी। पर तुम
  6423. 4:54:10किस बारे में बात कर रहे थे? शिप्रा
  6424. 4:54:12प्रतीक को फिर से अब बोलने जा रही थी। पर
  6425. 4:54:15बीच में ही अपने शब्द को संभाल लिया।
  6426. 4:54:18दरअसल कल हमारे परिवार का एक सदस्य वर्षों
  6427. 4:54:21बाद परिवार में वापस आने जा रहे हैं। वैसे
  6428. 4:54:24तो यह बात किसी को पसंद नहीं है। पर
  6429. 4:54:27दादाजी इस कंपनी [संगीत] की जिम्मेदारी भी
  6430. 4:54:29उन्हीं को देने का प्लान कर रखे हैं जो
  6431. 4:54:32हमारी बुआ को कुछ ज्यादा ही नागवार है।
  6432. 4:54:35उन्हें अभी तक लग रहा था कि देर सवेर
  6433. 4:54:37[संगीत] इस कंपनी पर वो अपना कंट्रोल कर
  6434. 4:54:39लेंगी। पर चाचा जी के आने के बाद यह संभव
  6435. 4:54:43नहीं हो पाएगा। प्रतीक ने राज से पर्दा
  6436. 4:54:45उठाया। वैसे देखा जाए तो यह बात प्रतीक को
  6437. 4:54:48भी पसंद नहीं था। वो खुद भी इस कंपनी पर
  6438. 4:54:51अपना कंट्रोल स्थापित करना चाहता [संगीत]
  6439. 4:54:52था। पर उसने शिप्रा के सामने ऐसा जताया
  6440. 4:54:55जैसे उसकी बुआ को ही उसके चाचा के आने से
  6441. 4:54:57प्रॉब्लम [संगीत] है। वैसे शिप्रा प्रतीक
  6442. 4:55:00के फैमिली मैटर से अभी तक अनजान थी। वो
  6443. 4:55:02स्वर्णलता जी [संगीत] एवं प्रतीक के बारे
  6444. 4:55:04में तो जान गई थी। पर उसका कोई चाचा भी
  6445. 4:55:07उसके परिवार में वापसी करने जा रहा है। यह
  6446. 4:55:09बात उसे अभी प्रतीक से ही पता [संगीत]
  6447. 4:55:11चली। उसके मन में भी एक स्वाभाविक
  6448. 4:55:13उत्सुकता राजा साहब के परिवार के बारे में
  6449. 4:55:16जानने की जाग गई। वह थोड़ी हैरानी भरे
  6450. 4:55:18स्वर में बोली, "मुझे यह समझ नहीं आया कि
  6451. 4:55:21तुम्हारे चाचा जी की वर्षों [संगीत] बाद
  6452. 4:55:22परिवार में वापसी होने जा रही है।" दरअसल
  6453. 4:55:25वर्षों पहले मेरे चाचा जी के दादाजी के
  6454. 4:55:27खिलाफ जाने के कारण दादाजी [संगीत] ने
  6455. 4:55:29उन्हें परिवार से बेदखल कर दिया था। पर आज
  6456. 4:55:32इतने वर्षों के बाद लगता है चाचा जी ने
  6457. 4:55:34किसी तरह दादाजी को परिवार [संगीत] में
  6458. 4:55:36वापस आने के लिए मना लिया है। मैं जानता
  6459. 4:55:39हूं कि यह सब संपत्ति में हिस्सा [संगीत]
  6460. 4:55:41लेने के लिए ही चाचा जी की तरफ से दादाजी
  6461. 4:55:43को इमोशनली ब्लैकमेल किया गया होगा। तभी
  6462. 4:55:46दादाजी उन्हें परिवार में वापस लाने के
  6463. 4:55:48लिए माने होंगे। पर देखा जाए [संगीत] तो
  6464. 4:55:50यह हम लोगों के साथ एक तरह से अन्याय ही
  6465. 4:55:52तो है। हम सब ने मिलकर इतने वर्षों तक
  6466. 4:55:55परिवार के बिजनेस को आगे बढ़ाया [संगीत]
  6467. 4:55:57और लास्ट में चाचा जी संपत्ति में हिस्सा
  6468. 4:55:59लेने को आ गए हैं। तो तुम ही सोचो किसे यह
  6469. 4:56:01बात पसंद आएगी। बोलते-बोलते प्रतीक की
  6470. 4:56:04अपनी भावना [संगीत] भी उसकी बातों में
  6471. 4:56:06झलकने लगी। पर शिप्रा से भी रहा नहीं गया।
  6472. 4:56:09उसे प्रतीक की मक्कारी भली-भांति समझ में
  6473. 4:56:11आ रही थी। इसलिए उसने प्रतीक से बोल दिया।
  6474. 4:56:14एक तरह से देखा जाए तो तुम्हारे चाचा जी
  6475. 4:56:16के साथ भी तो अन्याय हुआ क्योंकि [संगीत]
  6476. 4:56:18इतने वर्षों तक उन्हें अपनी पुश्तैनी
  6477. 4:56:20संपत्ति में से कुछ भी नहीं मिला।
  6478. 4:56:22तुम्हारा पूरा परिवार तो इस पुश्तैनी
  6479. 4:56:24संपत्ति का उपभोग करती रही पर तुम्हारे
  6480. 4:56:26चाचा जी इससे महरूम रहे। [संगीत] इस तरह
  6481. 4:56:29देखा जाए तो अन्याय तो उनके साथ ही हुआ।
  6482. 4:56:31तुम्हारी संपत्ति [संगीत] का ज्यादातर
  6483. 4:56:33हिस्सा तो पुश्तैनी ही है। तो उसमें
  6484. 4:56:35तुम्हारे दादाजी चाहे या ना चाहे उसमें
  6485. 4:56:38कानूनी हक तो तुम्हारे चाचा जी को [संगीत]
  6486. 4:56:39स्वाभाविक रूप से ही मिलती है। सीधी साधी
  6487. 4:56:42शिप्रा इस फैमिली की गुटबाजी से कोसों दूर
  6488. 4:56:45थी। इसलिए जो उसे स्वाभाविक रूप से सही
  6489. 4:56:48लगा उसने वह [संगीत] बात बोल दी। प्रतीक
  6490. 4:56:50ने उम्मीद नहीं किया था कि शिप्रा इस तरह
  6491. 4:56:52से उसके चाचा जी के पक्ष में अपना विचार
  6492. 4:56:54[संगीत] देगी। जैसे ही उसने शिप्रा का
  6493. 4:56:57विचार सुना, तुरंत अपने चेहरे पर एक
  6494. 4:56:59खिसियानी हंसी-हंसते हुए बोला, बोल तो तुम
  6495. 4:57:02सही रही हो। इसलिए हम इस बात का कोई विरोध
  6496. 4:57:04भी नहीं कर रहे हैं। पर स्वर्णलता बुआ के
  6497. 4:57:07लिए इस बात को पचाना मुश्किल है। उन्हें
  6498. 4:57:09[संगीत] यह बात बर्दाश्त नहीं हो रही है
  6499. 4:57:11कि इतने वर्षों बाद चाचा जी आकर संपत्ति
  6500. 4:57:14में अपना हिस्सा लें। शिप्रा ने प्रतीक की
  6501. 4:57:16बात को सुना। उसे यह भी अच्छे से समझ आया
  6502. 4:57:19कि प्रतीक अपनी पहले कही [संगीत] गई बातों
  6503. 4:57:21पर पर्दा डालकर खुद को सही दिखाना चाहता
  6504. 4:57:24है और अपनी बुआ को विलेन के रूप में
  6505. 4:57:26प्रस्तुत करना चाहता है। वैसे शिप्रा को
  6506. 4:57:29प्रतीक के फैमिली मैटर [संगीत] से कुछ
  6507. 4:57:30लेना देना नहीं था। इसलिए उसने इस बारे
  6508. 4:57:33में ज्यादा कुछ सोचना सही नहीं समझा। अभी
  6509. 4:57:35प्रतीक शिप्रा से कुछ [संगीत] और भी
  6510. 4:57:37बोलता। पर उसी समय एक सब स्टाफ शिप्रा के
  6511. 4:57:40कैबिन में आया और उससे कहा कि राजा
  6512. 4:57:42[संगीत] साहब उसे अपने कैबिन में बुला रहे
  6513. 4:57:44हैं। अब आगे क्या होगा? आखिर राजा साहब ने
  6514. 4:57:48शिप्रा को अपने पास क्यों बुलाया? क्या
  6515. 4:57:50प्रतीक शिप्रा को रिझाने के अपने प्लान
  6516. 4:57:52में कामयाब हो पाएगा? [संगीत] क्या होगा
  6517. 4:57:54जब शिप्रा मिलेगी अपने सासससुर से? जब
  6518. 4:57:57प्रतीक ने देखा कि शिप्रा को उसके [संगीत]
  6519. 4:57:59दादाजी ने अपने कैबिन में बुलाया है तो वह
  6520. 4:58:02उठता हुआ बोला, ठीक है फिर मैं तुमसे बाद
  6521. 4:58:05में मिलता हूं। शिप्रा भी प्रतीक के साथ
  6522. 4:58:07उठी और दादाजी से मिलने के लिए अपने
  6523. 4:58:10[संगीत] कैबिन से बाहर निकल गई। शिप्रा
  6524. 4:58:13सोच रही थी थोड़ी देर पहले तो मीटिंग में
  6525. 4:58:16दादाजी साथ ही थे। [संगीत] इतनी थोड़ी देर
  6526. 4:58:18में ऐसा क्या हुआ जो वह पहले नहीं कह सके।
  6527. 4:58:21शिप्रा राजा साहब के कैबिन में पहुंची।
  6528. 4:58:24क्या बात है दादा जी? कुछ [संगीत] काम था
  6529. 4:58:26क्या? उसको देखते ही राजा साहब बोले
  6530. 4:58:30क्यों? काम होगा तभी मैं तुमको बुलाऊंगा।
  6531. 4:58:33नहीं ऐसी बात नहीं है। अभी तो मैं आपके
  6532. 4:58:36साथ ही थी। मुझे लगा कुछ रह गया होगा। उसी
  6533. 4:58:39को बताने के लिए आपने दोबारा बुलाया है।
  6534. 4:58:42नहीं ऐसी कोई बात नहीं है। हर समय काम की
  6535. 4:58:45बात नहीं की जाती। तुम्हें बुलाने का
  6536. 4:58:47दूसरा कारण है। शिप्रा राजा साहब को खुश
  6537. 4:58:50देखकर थोड़ा अचंभित थी। वो सोचने को मजबूर
  6538. 4:58:53थी कि ऐसी क्या बात हो सकती है जो आज इनका
  6539. 4:58:56मूड बदला हुआ नजर आ रहा था। आज आप और
  6540. 4:58:59दिनों की तुलना में कुछ ज्यादा ही खुश नजर
  6541. 4:59:02आ रहे हैं दादा जी। ऐसी [संगीत] क्या बात
  6542. 4:59:04है? अब बता भी दीजिए। शिप्रा की उत्सुकता
  6543. 4:59:07भी बढ़ गई। [संगीत]
  6544. 4:59:08इतना तो वह समझ गई थी कि बात कुछ ज्यादा
  6545. 4:59:10ही खास होगी। वैसे उसके मन में [संगीत]
  6546. 4:59:13प्रतीक की बात भी घूम रही थी कि कहीं राजा
  6547. 4:59:15साहब की खुशी का कारण उनके बेटे के वापस
  6548. 4:59:18आना ही तो नहीं है। बात ऐसी है कि कल मेरे
  6549. 4:59:22घर एक पार्टी है तो उसमें तुम्हें आना है।
  6550. 4:59:24यही बताने के लिए मैंने तुम्हें अपने पास
  6551. 4:59:26बुलाया है। तो तुम ध्यान रखना कल [संगीत]
  6552. 4:59:29समय से पार्टी में आ जाना। पर दादा जी यह
  6553. 4:59:32तो बता दीजिए कि पार्टी किस खुशी में है
  6554. 4:59:34ताकि हमें पता तो चले कि हम जिस पार्टी
  6555. 4:59:36में आ रहे हैं वह है किसके लिए। शिप्रा यह
  6556. 4:59:40बात इसलिए जानना चाहती थी ताकि उसे अगर
  6557. 4:59:42कोई गिफ्ट लेना पड़े तो समझ में तो आए कि
  6558. 4:59:45किसके लिए क्या गिफ्ट लेना है। वैसे तो इस
  6559. 4:59:48पार्टी के कई रीजन हैं। पर एक प्रमुख कारण
  6560. 4:59:50तो यह है कल मेरी पोती का बर्थडे है। और
  6561. 4:59:53दूसरा कारण यह है कि कल मेरा बेटा अपने
  6562. 4:59:56पूरे परिवार के साथ फिर से हमारी फैमिली
  6563. 4:59:59में वापस आ रहा है। जिसे मैंने वर्षों
  6564. 5:00:01पहले अपनी नासमझी में अपने घर से निकाल
  6565. 5:00:04दिया था। आपकी पोती का बर्थडे उसका नाम
  6566. 5:00:07क्या है दादा जी और [संगीत] उसकी उम्र
  6567. 5:00:09कितनी है? अगर मुझे पता होगा तो मैं उसके
  6568. 5:00:12लिए कोई अच्छा सा गिफ्ट ले सकूंगी। उसका
  6569. 5:00:14नाम नीलिमा है और जहां तक रही उम्र की बात
  6570. 5:00:17तो उम्र यही कोई 16 17 साल की होगी। ठीक
  6571. 5:00:21है दादा जी मैं [संगीत] जरूर आऊंगी। इतना
  6572. 5:00:24बोलने के बाद शिप्रा को कुछ ध्यान आया तो
  6573. 5:00:26उसने दोबारा सकुचाते हुए पूछा।
  6574. 5:00:29दादा जी क्या मैं श्रवण को भी कल पार्टी
  6575. 5:00:32में अपने साथ ला सकती हूं?
  6576. 5:00:34[गला साफ़ करने की आवाज़] शिप्रा की बात
  6577. 5:00:35सुनकर राजा साहब के चेहरे पर एक मुस्कान आ
  6578. 5:00:38गई। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, तुम्हें
  6579. 5:00:41यह पूछने की कोई जरूरत नहीं है। वैसे
  6580. 5:00:43मैंने पहले ही श्रवण को भी इस पार्टी में
  6581. 5:00:45इनवाइट कर रखा है। राजा साहब समझ रहे थे
  6582. 5:00:48कि कल का दिन शिप्रा के लिए बहुत ही
  6583. 5:00:50शॉकिंग हो सकता है। क्योंकि उम्मीदतः कल
  6584. 5:00:53के दिन ही वह इस सच्चाई से अवगत हो जाएगी
  6585. 5:00:56कि वह हमारे परिवार की बहू है। और जिसके
  6586. 5:00:59लिए वह [संगीत] गिफ्ट लाने की सोच रही है,
  6587. 5:01:00वह उसकी अपनी ननद होगी। शिप्रा को इस बात
  6588. 5:01:04से [संगीत] बड़ा झटका लगा कि राजा साहब ने
  6589. 5:01:06श्रवण को पहले ही इस पार्टी के लिए इनवाइट
  6590. 5:01:09कर रखा है। जबकि उसको एकदम लास्ट समय में
  6591. 5:01:12[संगीत] अपनी पार्टी में इनवाइट किया है।
  6592. 5:01:14वो समझ नहीं पाई कि ऐसा क्यों है। वो तो
  6593. 5:01:17राजा साहब की कंपनी में जॉब [संगीत] भी
  6594. 5:01:19करती है और जहां तक श्रवण की बात रही तो
  6595. 5:01:21उसका तो कोई डायरेक्ट कनेक्शन भी राजा
  6596. 5:01:23साहब के साथ नहीं है। फिर भी उन्होंने उसे
  6597. 5:01:26शिप्रा से पहले अपनी पार्टी का इनविटेशन
  6598. 5:01:28दिया। आखिर [संगीत] ऐसा क्यों है? पर
  6599. 5:01:31शिप्रा के पास इस बात का कोई जवाब नहीं
  6600. 5:01:33था। उसने फिर खुद को यह सोचकर तसल्ली दिया
  6601. 5:01:36कि चलो यह उसके लिए भी अच्छा ही है कि
  6602. 5:01:39राजा साहब श्रवण को भी पसंद करते हैं।
  6603. 5:01:42राजा साहब से बात होने के बाद शिप्रा वहां
  6604. 5:01:45से निकल कर फिर से अपने कैबिन के पास
  6605. 5:01:47पहुंची तो उसने देखा प्रतीक अभी भी उसकी
  6606. 5:01:50कैबिन के बाहर खड़ा था। उसे आश्चर्य भी
  6607. 5:01:53हुआ कि प्रतीक अभी तक वहां क्यों खड़ा है?
  6608. 5:01:55इसलिए उसने प्रतीक से पूछा भी। क्या बात
  6609. 5:01:58है? तुम अभी तक गए नहीं। तुम तो उसी समय
  6610. 5:02:01जा रहे थे। दरअसल प्रतीक जानना चाहता था
  6611. 5:02:04कि राजा साहब ने शिप्रा को अपने पास
  6612. 5:02:07[संगीत] क्यों बुलाया। वो यह बात सीधे तो
  6613. 5:02:09उससे पूछ नहीं सकता था। इसलिए उसने एक
  6614. 5:02:12बहाना बनाते हुए कहा, हां जा ही रहा था।
  6615. 5:02:16पर फिर मुझे ध्यान आया कि मुझे तुमको कल
  6616. 5:02:19अपने यहां होने वाली पार्टी में इनवाइट
  6617. 5:02:21करना था। इसलिए [संगीत] मैं तुम्हारा यहां
  6618. 5:02:23इंतजार करने लगा। प्रतीक ने तुरंत अच्छी
  6619. 5:02:26खासी कहानी बनकर शिप्रा को सुना दिया।
  6620. 5:02:29सीधी साधी शिप्रा ने शराफत से प्रतीक से
  6621. 5:02:31कहा, "कहीं तुम उसी पार्टी की बात तो नहीं
  6622. 5:02:34कर रहे जिसके [संगीत] लिए अभी दादाजी ने
  6623. 5:02:36भी मुझे अपने यहां आमंत्रित किया है।"
  6624. 5:02:38उन्होंने अभी मुझे अपने पास बुलाया भी
  6625. 5:02:40इसलिए था ताकि [संगीत] कल की पार्टी के
  6626. 5:02:43लिए इनवाइट कर सकें। बिना पूछे ही प्रतीक
  6627. 5:02:46को पता चल गया कि [संगीत] राजा साहब ने
  6628. 5:02:48शिप्रा को अपने पास क्यों बुलाया था। पर
  6629. 5:02:50उसे अफसोस हुआ कि उसने शिप्रा को इनवाइट
  6630. 5:02:53करने में देर कर दी। उसे राजा साहब से
  6631. 5:02:55पहले शिप्रा को खुद ही पार्टी के लिए
  6632. 5:02:57इनवाइट कर देना था। वो शिप्रा की नजर में
  6633. 5:03:00खुद को लाना चाहता था। वो दिखाना चाहता था
  6634. 5:03:02कि वह उसको बहुत पसंद करता है। पर वो इस
  6635. 5:03:05सही मौके को चूक गया [संगीत] था। पर उसने
  6636. 5:03:08मन ही मन सोचा। कोई बात नहीं जब कल शिप्रा
  6637. 5:03:12पार्टी में आएगी तो वह उसको इंप्रेस करने
  6638. 5:03:14की पूरी कोशिश करेगा। प्रतीक ने मन ही मन
  6639. 5:03:17निश्चित कर लिया था कि वह शिप्रा को अपनी
  6640. 5:03:20बनाकर रहेगा। क्योंकि दिन प्रतिदिन शिप्रा
  6641. 5:03:22की खूबसूरती [संगीत] उसको अपनी ओर आकर्षित
  6642. 5:03:25किए जा रही थी। इसका मतलब मैं लेट हो गया।
  6643. 5:03:28मैं तुम्हें पहले ही इनवाइट करना चाहता था
  6644. 5:03:31और [संगीत] मैं तुम्हारे पास आया भी
  6645. 5:03:32इसीलिए था। पर तुमसे बात करते हुए अचानक
  6646. 5:03:35मेरे दिमाग से यह बात चली गई थी। और इसी
  6647. 5:03:38बीच दादाजी ने तुमको अपने पास बुला लिया
  6648. 5:03:40था। जिससे मुझे अपनी बात कहने का मौका ही
  6649. 5:03:43नहीं मिला। खैर कोई बात नहीं जो [संगीत]
  6650. 5:03:46भी हो। तुम कल हमारे घर की पार्टी में आ
  6651. 5:03:49रही हो। यही बात मेरे लिए खास है। चलो
  6652. 5:03:52अच्छा है। इसी बहाने मुझे तुम्हारा राजभवन
  6653. 5:03:55भी देखने को मिलेगा। आज तक मैं उसे बाहर
  6654. 5:03:58से ही देखती आ रही हूं। कल उसको अंदर से
  6655. 5:04:00भी देखने का मौका मिलेगा। अगर ऐसी बात है
  6656. 5:04:04तो कल मैं खुद ही तुम्हें पूरा राजमहल
  6657. 5:04:06दिखाऊंगा। उसके बाद शिप्रा प्रतीक से विदा
  6658. 5:04:09लेकर ऑफिस से बाहर आ गई। वह इस बात से खुश
  6659. 5:04:12थी कि राजा साहब ने उसे अपने यहां होने
  6660. 5:04:14वाली पार्टी में इनवाइट किया है। यह उसके
  6661. 5:04:17लिए बड़े गर्व की बात [संगीत] थी। वह इस
  6662. 5:04:19खुशी को श्रवण के साथ सेलिब्रेट करना
  6663. 5:04:21चाहती थी। इसलिए उसने अपने [संगीत] ऑफिस
  6664. 5:04:24से निकलते ही श्रवण को फोन लगाया। श्रवण
  6665. 5:04:27ने जब फोन उठाया तो शिप्रा ने सबसे पहले
  6666. 5:04:29पूछा कहां हो तुम? श्रवण को समझ नहीं आया
  6667. 5:04:33कि शिप्रा अचानक उससे ऐसा क्यों पूछ रही
  6668. 5:04:36[संगीत] है? पर श्रवण ने बिना किसी जगह के
  6669. 5:04:38शिप्रा को जवाब दिया। मैं अभी वापस घर जा
  6670. 5:04:41रहा हूं। तुम बताओ आखिर फोन किस लिए किया?
  6671. 5:04:44श्रवण की बात सुनकर शिप्रा ने [संगीत]
  6672. 5:04:46सोचा यह श्रवण के साथ बाहर कुछ पल बिताने
  6673. 5:04:49का अच्छा मौका है। उसने देखा कि उसकी
  6674. 5:04:52वापसी के रास्ते में ही [संगीत] होटल
  6675. 5:04:53पैराडाइज पड़ता है। इसलिए उसने श्रवण से
  6676. 5:04:56कहा तुम जहां भी हो अभी होटल पैराडाइज आ
  6677. 5:04:59जाओ। मैं यहीं तुम्हारा इंतजार कर रही
  6678. 5:05:01हूं। श्रवण ने भी बिना कुछ सोचे समझे
  6679. 5:05:04[संगीत] अपनी गाड़ी को होटल पैराडाइज जाने
  6680. 5:05:07वाले रास्ते पर मोड़ लिया। वो भी शिप्रा
  6681. 5:05:09के साथ इस पल को एंजॉय करना चाहता था। उसे
  6682. 5:05:13शिप्रा से बात भी [संगीत] करनी थी क्योंकि
  6683. 5:05:15वह यह निश्चित कर चुका था कि कल के दिन वह
  6684. 5:05:18शिप्रा को अपनी सारी हकीकत बता देगा। फिर
  6685. 5:05:21देखेगा कि शिप्रा का रिएक्शन किस प्रकार
  6686. 5:05:23होता है। उसे उम्मीद थी कि शिप्रा इस बात
  6687. 5:05:26को जानकर खुशी होगी। वह जिस राजा साहब के
  6688. 5:05:29यहां जॉब कर रही है, वह [संगीत] हकीकत में
  6689. 5:05:32उसके दादाजी हैं और वह उनकी बहू है।
  6690. 5:05:35शिप्रा जल्दी से होटल पैराडाइज पहुंची और
  6691. 5:05:38पार्किंग में अपनी कार खड़ी करने के बाद
  6692. 5:05:40वो रेस्टोरेंट एरिया में पहुंची और उसने
  6693. 5:05:43अपने लिए एक टेबल रिजर्व [संगीत] कर लिया।
  6694. 5:05:46थोड़ा इंतजार करने के बाद ही शिप्रा को
  6695. 5:05:48श्रवण आता हुआ दिखाई दिया। जो शिप्रा
  6696. 5:05:51[संगीत] पहले श्रवण को कोई तरजीह नहीं
  6697. 5:05:52देती थी। अब उसकी निगाह उससे हटाने को
  6698. 5:05:55तैयार नहीं थी। इस पूरे दिन में शिप्रा
  6699. 5:05:58श्रवण से दूर रही थी। [संगीत] श्रवण को
  6700. 5:06:00सामने से आते देखकर उसका मन किया कि वह
  6701. 5:06:04दौड़ कर जाए और श्रवण से लिपट जाए। पर
  6702. 5:06:08लास्ट समय में उसने खुद पर कंट्रोल किया।
  6703. 5:06:12श्रवण मुस्कुराते हुए शिप्रा के पास
  6704. 5:06:14पहुंचा और उसके टेबल पर बैठ गया। शिप्रा
  6705. 5:06:18ने अपने और श्रवण दोनों के [संगीत] लिए
  6706. 5:06:20पास्ता ऑर्डर किया। श्रवण को भी शिप्रा को
  6707. 5:06:24कल की पार्टी के लिए राजमहल [संगीत]
  6708. 5:06:26में इनवाइट करना था। पर उसे समझ नहीं आ
  6709. 5:06:28रहा था कि वह स्वयं शिप्रा को किस तरह
  6710. 5:06:31इनवाइट करें। अभी वह इसी उधेड़बुन में था
  6711. 5:06:34कि शिप्रा ने सामने से कहा कल तुम्हें
  6712. 5:06:37राजा साहब ने अपने आप पार्टी में इनवाइट
  6713. 5:06:39किया है। तो तुमने यह बात मुझे पहले क्यों
  6714. 5:06:42नहीं बताई?
  6715. 5:06:43श्रवण को समझ नहीं आया कि शिप्रा किस
  6716. 5:06:46इनविटेशन की बात कर रही है। राजा साहब ने
  6717. 5:06:49तो उसे कोई इनविटेशन नहीं दिया। पर वह कुछ
  6718. 5:06:52बोलता उससे पहले ही उसके दिमाग ने काम
  6719. 5:06:54किया। उसने सोचा कहीं राजा साहब ने शिप्रा
  6720. 5:06:58के सामने कोई नई कहानी तो नहीं कह दी।
  6721. 5:07:01जरूर यही बात होगी। इसीलिए मजबूरन [संगीत]
  6722. 5:07:05श्रवण ने सहमति जताते हुए कहा, "अरे हां,
  6723. 5:07:09मैं तो भूल ही गया था। राजा साहब ने तो कल
  6724. 5:07:11के लिए मुझे आमंत्रित कर रखा है।" बहुत
  6725. 5:07:14बढ़िया। [संगीत] राजा साहब ने पहले ही
  6726. 5:07:16तुम्हें अपनी पार्टी का इनविटेशन दे दिया
  6727. 5:07:18था। और तुमसे यह भी नहीं हुआ कि तुम यह
  6728. 5:07:21बात मुझे बता सको। मैं तुम्हें बताना तो
  6729. 5:07:24चाहता था पर मैंने सोचा मैं तुमसे मिलकर
  6730. 5:07:28ही तुम्हें यह बात बताऊंगा।
  6731. 5:07:30उसे अपने दादाजी पर गुस्सा भी आया कि
  6732. 5:07:33उन्होंने उसे फंसाने की कोशिश की क्योंकि
  6733. 5:07:35श्रवण को आज या आज से पहले राजा साहब ने
  6734. 5:07:39पार्टी में आने का कोई इनविटेशन नहीं दिया
  6735. 5:07:41था। वह तो यह मानकर चल रहे थे यह पार्टी
  6736. 5:07:45तो श्रवण की ही है। इसलिए उसको तो आना ही
  6737. 5:07:48है। बाकी वह खुद ही परिस्थिति का आकलन
  6738. 5:07:51करके शिप्रा को जवाब दे देगा।
  6739. 5:07:54तुम्हें पता है कि कल राजा साहब की पोती
  6740. 5:07:56का बर्थडे [संगीत] है और हमें उनके लिए
  6741. 5:07:58कोई गिफ्ट भी लेना है। इस समय शिप्रा एक
  6742. 5:08:01टिपिकल पत्नी की तरह श्रवण का सजेशन मांग
  6743. 5:08:04रही थी। बातें करते हुए शिप्रा ने श्रवण
  6744. 5:08:08के सामने उसकी प्लेट भी लगा दी। जबकि
  6745. 5:08:10श्रवण सोच रहा था कि वह शिप्रा के सामने
  6746. 5:08:13अपनी हकीकत कैसे बयां करें। अब श्रवण के
  6747. 5:08:16पास शिप्रा से अपना राज छुपाने का कोई
  6748. 5:08:19कारण नहीं था। वो चाहता था कि शिप्रा उससे
  6749. 5:08:22बिना उसका स्टेटस जाने प्यार करें और वो
  6750. 5:08:25इसमें कामयाब रहा। इसलिए वह कल के लिए एक
  6751. 5:08:29भूमिका बनाते [संगीत] हुए शिप्रा से कहा
  6752. 5:08:32शिप्रा क्या तुम्हें मेरे बारे में जानने
  6753. 5:08:34की कोई इच्छा नहीं होती कि मैं कौन हूं
  6754. 5:08:37कहां से आया हूं और मेरी हकीकत क्या है अब
  6755. 5:08:41मेरे लिए यह बात मायने नहीं रखती कि तुम
  6756. 5:08:44कौन हो और कहां [संगीत] से आए हो और
  6757. 5:08:46तुम्हारा भूतकाल कैसा रहा है। बस अब मैं
  6758. 5:08:49इतना जानती हूं कि तुम वो हो जिससे मैं
  6759. 5:08:52प्यार करती हूं और तुम्हारे साथ मैं अपनी
  6760. 5:08:55पूरी [संगीत] जिंदगी बिताना चाहती हूं।
  6761. 5:08:57शिप्रा अपना एक हाथ प्यार से श्रवण के हाथ
  6762. 5:09:00के ऊपर रखते हुए [संगीत] यह बोली अब आगे
  6763. 5:09:03क्या होगा? क्या होगा जब शिप्रा श्रवण की
  6764. 5:09:06हकीकत जानेगी। उस समय क्या रिएक्शन होगा
  6765. 5:09:09शिप्रा का? जानने के लिए सुनते रहिए कहानी
  6766. 5:09:13का अगला एपिसोड। शौर्य शिप्रा का प्यार
  6767. 5:09:15देखकर अभिभूत हो गया। वह सोचने को मजबूर
  6768. 5:09:18हो गया था कि जब शिप्रा को इसकी हकीकत पता
  6769. 5:09:21चलेगी तो क्या तब भी इसका प्यार इतना ही
  6770. 5:09:24निश्चल रह पाएगा। अब वो शिप्रा को अपनी
  6771. 5:09:27हकीकत बताना तो चाहता था पर वह समझ नहीं
  6772. 5:09:30पा रहा था कि वो इस काम को कैसे करें। फिर
  6773. 5:09:33उसने मन ही मन ठान लिया कि [संगीत] कल
  6774. 5:09:35उसके सामने तो सब कुछ जाहिर हो ही जाएगा।
  6775. 5:09:38तो फिर वो क्यों इस बात को सोचकर अभी
  6776. 5:09:40परेशान हो रहा है। इसलिए उसने अपने मन से
  6777. 5:09:43इस ख्याल को झटका और शिप्रा की ओर देखने
  6778. 5:09:45[संगीत] लगा। अभी शिप्रा और शौर्य एक
  6779. 5:09:48दूसरे में ही खोए हुए थे कि तभी [संगीत]
  6780. 5:09:51शौर्य के कानों में एक आवाज सुनाई दी।
  6781. 5:09:54शौर्य से कुछ दूरी पर ही एक दूसरे टेबल पर
  6782. 5:09:57रणधीर शेखावत, प्रदुमन सेठ और एक खूबसूरत
  6783. 5:10:00लड़की साथ में बैठे थे। प्रदुमन सेठ शौर्य
  6784. 5:10:04की टेबल की तरफ देखता हुआ बोला। मिस्टर
  6785. 5:10:06शेखावत यह देखिए [संगीत] कौन उस टेबल पर
  6786. 5:10:09खाना खा रहा है। इस जानी पहचानी आवाज को
  6787. 5:10:12सुनकर शौर्य [संगीत] ने उस ओर देखा तो उसे
  6788. 5:10:15रणधीर शेखावत, प्रदुमन शेठ और इंडस्ट्री
  6789. 5:10:18की नई उभरती हीरोइन तान्या शर्मा [संगीत]
  6790. 5:10:20एक दूसरे टेबल पर नजर आई। रणधीर शेखावत को
  6791. 5:10:23यहां देखकर शौर्य का मुंह कसला सा हो गया।
  6792. 5:10:26रणधीर शेखावत ने जब शौर्य को शिप्रा के
  6793. 5:10:29साथ बैठे देखा तो वह भी शिप्रा की
  6794. 5:10:31खूबसूरती से प्रभावित हुए बिना नहीं रह
  6795. 5:10:33सका। वो शौर्य पर कमेंट करता हुआ बोला,
  6796. 5:10:36मानना पड़ेगा यह लड़का है बहुत तेज।
  6797. 5:10:39[संगीत] डेली किसी नई लड़की को फंसा लेता
  6798. 5:10:41है और इतने बड़े होटल में खाना खाने का
  6799. 5:10:44अपना जुगाड़ कर लेता है। पता नहीं इन
  6800. 5:10:46खूबसूरत लड़कियों को ऊपर वाले ने इतना
  6801. 5:10:48दिमाग [संगीत] क्यों नहीं दिया कि वह सही
  6802. 5:10:50गलत की पहचान कर सके। रणधीर शेखावत की बात
  6803. 5:10:53सुनकर तान्या शर्मा [संगीत] ने उनकी नजरों
  6804. 5:10:56का पीछा करते हुए कहा, "आप किसकी बात कर
  6805. 5:10:58रहे हैं मिस्टर शेखावत? उसकी निगाह भी
  6806. 5:11:01शौर्य और शिप्रा के ऊपर गई। शिप्रा की
  6807. 5:11:04खूबसूरती देखकर [संगीत] एक बार को उसे जलन
  6808. 5:11:06भी हुई। प्रदुमन सेठ मजे लेते हुए तान्या
  6809. 5:11:09शर्मा को सब सुनाता हुआ बोला, वो जो आप
  6810. 5:11:12दूसरी टेबल पर बैठे उस लड़के को देख रही
  6811. 5:11:14हैं मिस तान्या शेखावत साहब उस लड़के की
  6812. 5:11:17बात कर रहे हैं। उसने अभी एक ऐड फिल्म में
  6813. 5:11:19काम क्या कर लिया है। खुद को इंडस्ट्री का
  6814. 5:11:21अगला स्टार समझने लगा है। लेकिन इसने
  6815. 5:11:24इंडस्ट्री में आने से पहले ही शेखावत साहब
  6816. 5:11:26जैसे जॉइंट से पंगा ले लिया है। उसके बाद
  6817. 5:11:29भी समझता है कि यह इंडस्ट्री में सफल हो
  6818. 5:11:31जाएगा। इसे नहीं पता यह अपना नाम क्या
  6819. 5:11:34इंडस्ट्री में बनाएगा। इसने तो अपने साथ
  6820. 5:11:36नताशा कपूर का करियर भी इंडस्ट्री में
  6821. 5:11:38डूबा दिया है। इसके कारण आज के समय में
  6822. 5:11:41कोई नताशा कपूर के साथ भी काम करने को
  6823. 5:11:43तैयार नहीं है। तान्या शर्मा भी आंखें
  6824. 5:11:46बड़ी करके शौर्य की ओर देखती हुई बोली
  6825. 5:11:49अच्छा
  6826. 5:11:51यही है वो लड़का जिसके कारण नताशा कपूर को
  6827. 5:11:53आजकल इंडस्ट्री में कोई नहीं पूछ रहा है।
  6828. 5:11:56मैंने भी इस बारे में बहुत रूमर सुने हैं।
  6829. 5:11:58रणधीर शेखावत [संगीत]
  6830. 5:12:00दया भरी नजरों से शिप्रा की ओर देखते हुए
  6831. 5:12:02कहा मुझे तो तरस आ रहा है इस लड़की पर पता
  6832. 5:12:06नहीं इस फटीचर [संगीत] ने इसे क्या झांसा
  6833. 5:12:08देकर फंसा रखा है। प्रदुमन सेठ याद करता
  6834. 5:12:11हुआ बोला मैंने इस लड़की को [संगीत] उस
  6835. 5:12:13दिन होटल राजकमल की पार्टी में भी देखा था
  6836. 5:12:15शेखावत साहब। लगता है इसने इसे भी हीरोइन
  6837. 5:12:18बनाने का झांसा दिया होगा। इसीलिए यह इसके
  6838. 5:12:20पीछे घूम रही है। इन बातों की तरफ [संगीत]
  6839. 5:12:23जब शिप्रा का ध्यान गया तो वह घूर कर उस
  6840. 5:12:26टेबल की ओर देखने लगी। अब तक वह समझ गई कि
  6841. 5:12:29उस [संगीत] टेबल पर जो कुछ भी बोला जा रहा
  6842. 5:12:31है, वो उन दोनों के बारे में ही बोला जा
  6843. 5:12:33रहा है। वैसे तो [संगीत] उसे इस बात से
  6844. 5:12:36कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था कि दूसरे
  6845. 5:12:38क्या बोल रहे हैं। पर जब उसने शौर्य के
  6846. 5:12:41चेहरे के बदलते रंग को देखा तो उसे भी
  6847. 5:12:43गुस्सा आ गया। वो अभी कुछ एक्शन लेने की
  6848. 5:12:46सोच ही रही थी कि तभी उसने देखा रणधीर
  6849. 5:12:49शेखावत उठकर उसके पास आया था और शौर्य को
  6850. 5:12:52इग्नोर करके उसकी ओर देखता हुआ बोला। सुनो
  6851. 5:12:55लड़की क्या नाम है तुम्हारा? शिप्रा ने
  6852. 5:12:59देखा कि रणधीर शेखावत उससे ही यह सवाल कर
  6853. 5:13:01रहा है तो वह भी गुस्से में बोली, आप है
  6854. 5:13:04कौन जो मैं आपको अपना नाम बताऊं? आप यहां
  6855. 5:13:07इस होटल में जिस काम के लिए आए हैं, अपने
  6856. 5:13:10उस काम से ही मतलब रखें तो यह ज्यादा
  6857. 5:13:12अच्छा होगा। रणधीर शेखावत गर्व से अपना
  6858. 5:13:15सीना चौड़ा करते हुए बोला, "तुम गलत समझ
  6859. 5:13:18रहे हो। मैं तो तुम्हारी भलाई के लिए
  6860. 5:13:20तुम्हारे पास आया। तुम्हें शायद इस फटीचर
  6861. 5:13:23ने कुछ ज्यादा ही बड़े सपने दिखाकर भरमा
  6862. 5:13:25दिया है। तुम खूबसूरत हो। अगर तुम इसका
  6863. 5:13:28साथ छोड़ती हो तो मैं तुम्हें इंडस्ट्री
  6864. 5:13:31में अच्छा खासा काम दिलवा सकता हूं। तुम
  6865. 5:13:33मुझे तो जानती ही होगी कि इंडस्ट्री में
  6866. 5:13:35मेरी क्या पोजीशन है। शिप्रा को रणधीर
  6867. 5:13:38शेखावत की बकवास कुछ भी समझ में नहीं आ
  6868. 5:13:40रही थी। वो हैरान नजरों से कभी रणधीर
  6869. 5:13:42शेखावत को तो कभी शौर्य की ओर देख रही थी
  6870. 5:13:45कि यह क्या बोल रहा [संगीत] है। शौर्य को
  6871. 5:13:48रणधीर शेखावत पर तरस भी आ रहा था कि वो
  6872. 5:13:50बिना सच्चाई को जाने कुछ भी बोले जा रहा
  6873. 5:13:53है। पर उसने बीच में कुछ भी इंटरफेयर नहीं
  6874. 5:13:55किया। वो देखना चाहता था कि शिप्रा इस
  6875. 5:13:58सिचुएशन को कैसे हैंडल करती है। क्योंकि
  6876. 5:14:01उसे पता था कि उसे इस तरह की स्थिति का
  6877. 5:14:03सामना कई [संगीत] बार करना पड़ सकता है और
  6878. 5:14:05उस स्थिति को शिप्रा कैसे हैंडल कर पाती
  6879. 5:14:08है वो यह देखना चाहता था। जब शिप्रा ने
  6880. 5:14:10शौर्य को कुछ भी रिएक्ट करते नहीं देखा तो
  6881. 5:14:13वह खुद रणधीर शेखावत के सामने खड़ी हो गई
  6882. 5:14:15और भड़कती [संगीत] हुई बोली आपका दिमाग तो
  6883. 5:14:18ठिकाने हैं। क्या आपको मेरी कही गई बात
  6884. 5:14:20समझ में नहीं आई जो आप कुछ भी बोले जा रहे
  6885. 5:14:22हैं? आप हैं कौन और इस तरह हमारे बारे में
  6886. 5:14:25बात करने का अधिकार आपको किसने दे दिया?
  6887. 5:14:28आपको जो मैं अभी [संगीत] तक इज्जत दे रही
  6888. 5:14:29हूं। क्या वो आपको रास नहीं आ रही है? अगर
  6889. 5:14:32अपनी इज्जत बनाए रखना चाहते हैं तो आराम
  6890. 5:14:34से जाकर अपना खाना खाइए और घर जाइए और
  6891. 5:14:37दूसरों की फटी में घुसने की आदत भी बदलिए।
  6892. 5:14:40रणधीर शेखावत शिप्रा जैसी नई लड़की से
  6893. 5:14:42अपनी उपेक्षा किया जाना बर्दाश्त नहीं कर
  6894. 5:14:44पा रहा था। उसे यह भी समझ नहीं आ रहा था
  6895. 5:14:47कि यह कैसी लड़की है जो इंडस्ट्री में
  6896. 5:14:49होकर [संगीत] भी उसे नहीं जानती। लगता है
  6897. 5:14:52इस लड़के ने तुम्हें कुछ ज्यादा ही बड़ा
  6898. 5:14:53सपना दिखा दिया है। इसलिए तुम्हें मेरी
  6899. 5:14:56बात समझ में नहीं आ रही है। तुम मुझसे
  6900. 5:14:58रणधीर शेखावत [संगीत] से ऐसे बात करने की
  6901. 5:15:01हिम्मत कर रही हो। कितने दिन तक इस
  6902. 5:15:03इंडस्ट्री में रह पाओगी? मैं तो तुम्हारी
  6903. 5:15:05भलाई के लिए तुम्हें सलाह दे रहा था। पर
  6904. 5:15:07जब तुम्हें कुएं में ही डूबना है तो डूबो।
  6905. 5:15:10जब इस फटीचर के हाथों बर्बाद हो जाओगी तब
  6906. 5:15:13जाकर तुम्हें मेरी बात समझ में आएगी। पर
  6907. 5:15:15शिप्रा ने जब रणधीर शेखावत के मुंह से
  6908. 5:15:17शौर्य के लिए कई बार फटीचर शब्द सुन लिया
  6909. 5:15:20तो उसे बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने एक
  6910. 5:15:22थप्पड़ रणधीर शेखावत के गाल पर जमा दिया।
  6911. 5:15:25थप्पड़ की आवाज उस पूरे हॉल में गूंज गई।
  6912. 5:15:28रणधीर शेखावत ने तो कभी सपने में भी नहीं
  6913. 5:15:30सोचा था कि उसके सामने खड़ी लड़की इतनी
  6914. 5:15:33हिम्मत कर सकती है कि उसको सरेआम थप्पड़
  6915. 5:15:35मार देगी। उस हॉल में मौजूद सभी लोगों की
  6916. 5:15:38निगाह रणधीर शेखावत की ओर ही घूम गई।
  6917. 5:15:40रणधीर शेखावत का चेहरा शर्म से लाल हो
  6918. 5:15:43गया। जवाब में वह शिप्रा के ऊपर हाथ उठाने
  6919. 5:15:46ही वाला था कि तभी पीछे से शौर्य ने उसका
  6920. 5:15:48हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचा और उसको तेज
  6921. 5:15:51धक्का दे दिया। वो [संगीत] जाकर अपनी टेबल
  6922. 5:15:53से टकराया जहां प्रदुमन सेठ और तान्या
  6923. 5:15:56शर्मा भी खड़े होकर आवाक स्थिति में यह सब
  6924. 5:15:58देख रहे थे। रणधीर शेखावत ने आज से पहले
  6925. 5:16:01कभी भी ऐसी बेइज्जती नहीं झेली थी। एक
  6926. 5:16:04लड़की के हाथों थप्पड़ खाना उसके लिए तो
  6927. 5:16:06डूब मरने जैसी स्थिति थी। इस हॉल में
  6928. 5:16:09मौजूद बहुत से प्रतिष्ठित लोग रणधीर
  6929. 5:16:11शेखावत को पहचान रहे थे। पर इस समय उनकी
  6930. 5:16:14[संगीत] स्थिति देखकर सभी चुप हो रखे थे।
  6931. 5:16:16रणधीर शेखावत को जब अपनी स्थिति का आभास
  6932. 5:16:19हुआ तो वो उठा और जोर से चिल्लाने लगा।
  6933. 5:16:22कहां है इस होटल का सिक्योरिटी स्टाफ?
  6934. 5:16:25क्या यहां के गेस्ट के साथ ऐसे मिस बिहेव
  6935. 5:16:27किया जाता है? रणधीर शेखावत यहां के स्टाफ
  6936. 5:16:30को कोस रहा था। इसी समय यहां हो रहे
  6937. 5:16:32हंगामे को जानकर सिक्योरिटी के कई स्टाफ
  6938. 5:16:35जल्दी से आ भी गए थे। रणधीर शेखावत ने एक
  6939. 5:16:38स्टाफ से अपनी मैनेजर को यहां बुला लाने
  6940. 5:16:40के लिए कहा। वो सिक्योरिटी वाला बंदा
  6941. 5:16:42जल्दी से वहां से अपनी मैनेजर को बुलाने
  6942. 5:16:45के लिए भाग गया। दूसरी तरफ शिप्रा ने
  6943. 5:16:47रणधीर शेखावत को थप्पड़ तो मार दिया था पर
  6944. 5:16:50अब जाकर उसे अफसोस हो रहा था कि उसे
  6945. 5:16:52जल्दबाजी में ऐसा तो नहीं करना चाहिए था।
  6946. 5:16:55उसके चेहरे पर भी घबराहट आ गई थी। उसने
  6947. 5:16:58घबराई नजरों से शौर्य की तरफ देखा। शौर्य
  6948. 5:17:01ने जब उसके चेहरे पर परेशानी के भाव को
  6949. 5:17:03देखा तो उसने उसे अपनी आंखों के इशारे से
  6950. 5:17:05तसल्ली दी कि कोई बात नहीं है सब ठीक हो
  6951. 5:17:08जाएगा। उसने शिप्रा का हाथ पकड़ कर हल्के
  6952. 5:17:11से दबाया भी। इससे शिप्रा को थोड़ी राहत
  6953. 5:17:14महसूस हुई। पर उसे यह एहसास तो हो रहा था
  6954. 5:17:17कि अब जो भी कुछ यहां होगा वो अच्छा तो
  6955. 5:17:19नहीं ही होगा। रणधीर शेखावत धीमे कदमों से
  6956. 5:17:23चलता हुआ शौर्य की तरफ आया और अपने दांत
  6957. 5:17:26पीसते हुए बोला [संगीत]
  6958. 5:17:27आज तुमने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल कर
  6959. 5:17:30दी है आज तक तुम बचे रहे पर आज मैं
  6960. 5:17:34[संगीत] तुम्हें इतनी आसानी से नहीं
  6961. 5:17:35छोडूंगा तुमने मेरे ऊपर हाथ उठाया रणधीर
  6962. 5:17:39शेखावत के ऊपर अब मैं तुम्हारे साथ इस
  6963. 5:17:42लड़की की [संगीत] जिंदगी भी जहन्नुम कर
  6964. 5:17:44दूंगा शौर्य भी एक कदम बढ़कर रणधीर शेखावत
  6965. 5:17:48के करीब जाते हुए बोला
  6966. 5:17:49[संगीत]
  6967. 5:17:50तुम पूरे कुत्ते हो। तुम बस भौंकना जानते
  6968. 5:17:53हो। काटना नहीं। आज [संगीत] तो सिर्फ
  6969. 5:17:55तुम्हें थप्पड़ पड़ी है। अगर तुम्हारा यही
  6970. 5:17:58रवैया रहा तो जल्द ही तुम रोड पर नजर
  6971. 5:18:01आओगे। मेरी यह बात गांठ बांध लो। तुम तुम
  6972. 5:18:05मैं तुम्हें छोडूंगा नहीं। रणधीर शेखावत
  6973. 5:18:08अपने दांत पीसने लगा। तभी उसने देखा कि
  6974. 5:18:11मिस रूपा उस हॉल में आ गई थी। उसके चेहरे
  6975. 5:18:14पर भी घबराहट नजर आ रही थी। रणधीर शेखावत
  6976. 5:18:17मिस रूपा को देखकर उसके सामने जाकर बोला,
  6977. 5:18:20मिस रूपा, क्या आपके होटल में गेस्ट के
  6978. 5:18:22साथ ऐसा बिहेव किया जाता है? आप अभी यहां
  6979. 5:18:25पुलिस को बुलाइए। इस लड़के ने मुझे यहां
  6980. 5:18:28धक्का दिया और इस लड़की [संगीत] ने मेरे
  6981. 5:18:29ऊपर हाथ उठाया। मैं यह बात बर्दाश्त नहीं
  6982. 5:18:32कर सकता। आप जल्दी से इन दोनों के खिलाफ
  6983. 5:18:34एक्शन लीजिए। नहीं तो मैं आपके होटल को भी
  6984. 5:18:36नहीं छोडूंगा। रणधीर शेखावत बोलते हुए
  6985. 5:18:39गुस्से में कांप [संगीत] रहा था। जबकि
  6986. 5:18:41शौर्य सौम्य मुस्कुराहट के साथ उसकी हालत
  6987. 5:18:44देखकर मजे ले रहा था। रूपा को समझ नहीं आ
  6988. 5:18:47रहा था कि वह इस स्थिति को कैसे हैंडल
  6989. 5:18:49करें। उसे ज्यादा समय नहीं हुआ था इस होटल
  6990. 5:18:51का मैनेजर बने हुए और जब उसने दूसरी तरफ
  6991. 5:18:54सामने शौर्य को देखा तो वह तो वैसे ही
  6992. 5:18:56मजबूर नजर आने लगी क्योंकि आज अगर वह इस
  6993. 5:18:59होटल की मैनेजर [संगीत] थी भी तो उसका एक
  6994. 5:19:01बड़ा कारण शौर्य ही था। अभी रूपा इस
  6995. 5:19:04स्थिति से उभ भी नहीं पाई थी कि [संगीत]
  6996. 5:19:05तभी वहां पर सिक्योरिटी इंचार्ज दिलीप
  6997. 5:19:07कामत भी आ गया था। वह रूपा के सामने गया
  6998. 5:19:10और बोला, यहां कुछ प्रॉब्लम है क्या? मिस
  6999. 5:19:13रूपा। रणधीर शेखावत सिक्योरिटी इंचार्ज
  7000. 5:19:16दिलीप कामत को [संगीत] यहां देखकर उसके
  7001. 5:19:18सामने जाकर बोला, मिस्टर कामत, आपके इन
  7002. 5:19:21सिक्योरिटी वालों के होते हुए भी ऐसे
  7003. 5:19:23बदतमीज लोग इस होटल में आ जाते हैं। आप
  7004. 5:19:26अभी इन दोनों को पुलिस के हवाले कीजिए।
  7005. 5:19:28इन्होंने सारे गेस्ट के सामने मेरी
  7006. 5:19:30बेइज्जती करने की कोशिश की है। दिलीप कामत
  7007. 5:19:33ने जब उस तरफ देखा जिधर रणधीर शेखावत ने
  7008. 5:19:35इशारा किया था तो शौर्य को देखकर ही उसका
  7009. 5:19:38शरीर [संगीत] तन गया। उसने तो सपने में भी
  7010. 5:19:40नहीं सोचा था कि आज फिर यहां यह हंगामा
  7011. 5:19:43मिस्टर शौर्य के साथ ही हो रहा था। पर वह
  7012. 5:19:46अब शौर्य के स्टेटस से वाकिफ था। इसलिए वह
  7013. 5:19:48कैसे शौर्य के खिलाफ जा सकता था। उसने
  7014. 5:19:51शौर्य को नजरअंदाज करते हुए रणधीर शेखावत
  7015. 5:19:54से कहा, "मिस्टर शेखावत, मैं देख रहा हूं
  7016. 5:19:57कि आजकल आप इस होटल के लिए प्रॉब्लम
  7017. 5:19:59क्रिएट करते जा रहे हैं। पहले भी आपके
  7018. 5:20:01कारण यहां हमारे गेस्ट को प्रॉब्लम हो
  7019. 5:20:03चुकी है और आज आप फिर से एक नया बखेड़ा
  7020. 5:20:06करना चाहते हैं। मेरी आपको सलाह है कि आप
  7021. 5:20:08इस होटल में आते हैं तो [संगीत] तमीज में
  7022. 5:20:10रहकर ही व्यवहार किया कीजिए। दिलीप कामत
  7023. 5:20:13को पता नहीं था कि यहां असलियत में क्या
  7024. 5:20:15हुआ था। पर जब उसने शौर्य को सामने देखा
  7025. 5:20:18तो एक तरह से शौर्य को सही साबित करते हुए
  7026. 5:20:21सारा [संगीत] दोष रणधीर शेखावत के ऊपर ही
  7027. 5:20:23डाल दिया। रूपा जो वहां खड़ी समझ नहीं पा
  7028. 5:20:26रही थी कि वह [संगीत] इस स्थिति को कैसे
  7029. 5:20:28हैंडल करें। जब उसने दिलीप कामत को एक
  7030. 5:20:30स्टैंड लेते देखा तो वह [संगीत] भी उसी के
  7031. 5:20:33साथ होली। उसको लगा दिलीप कामत की बात का
  7032. 5:20:36अनुसरण करना ही ज्यादा सही [संगीत] होगा
  7033. 5:20:38क्योंकि वह शौर्य के खिलाफ जाने का रिस्क
  7034. 5:20:40नहीं ले सकती थी। वह इतना तो समझती थी कि
  7035. 5:20:43मिस्टर शौर्य का नजदीकी [संगीत] कनेक्शन
  7036. 5:20:44मिस मेनका के साथ था। अब आगे क्या होगा?
  7037. 5:20:48क्या रणधीर शेखावत [संगीत] शौर्य का कुछ
  7038. 5:20:50बिगाड़ पाएगा या अभी उसकी और बेइज्जती
  7039. 5:20:52होगी? क्या होगा राठौर फैमिली की पार्टी?
  7040. 5:20:55रणधीर शेखावत को विश्वास नहीं हो रहा था
  7041. 5:20:58कि दिलीप कामत शौर्य को कुछ ना कहकर उल्टा
  7042. 5:21:02इस पर ही सारा ब्लेम डाल रहा था। उसके लिए
  7043. 5:21:05यह हैरानी की बात थी। वह [संगीत] होटल
  7044. 5:21:07पैराडाइज का रेगुलर कस्टमर था। उसके बाद
  7045. 5:21:10भी इस होटल का सिक्योरिटी इंचार्ज उसको
  7046. 5:21:14थोड़ी भी इज्जत नहीं दे रहा था और [संगीत]
  7047. 5:21:16एक तरह से जो भी कुछ अभी यहां हुआ था उसका
  7048. 5:21:20जिम्मेवार उसे ही ठहरा रहा था और होटल की
  7049. 5:21:23मैनेजर मिस रूपा भी दिलीप [संगीत] कामत का
  7050. 5:21:26ही साथ दे रही थी। आज यह सब उसके लिए
  7051. 5:21:28दूसरी बार हो रहा था। देखा जाए तो यह उसके
  7052. 5:21:32लिए शर्म से डूब मरने वाली बात थी। होटल
  7053. 5:21:35के दूसरे [संगीत] गेस्ट की नजरों में जो
  7054. 5:21:37इज्जत रणधीर शेखावत की थी वो एक झटके में
  7055. 5:21:40ही चूरचूर हो गई थी। उसे यह भी समझ में
  7056. 5:21:43नहीं आ रहा था कि आखिर उसके सामने शौर्य
  7057. 5:21:46[संगीत] की हैसियत ही क्या थी जो दिलीप
  7058. 5:21:48कामत उसकी हिमायत कर रहा था। मिस रूपा मैं
  7059. 5:21:52आपके होटल का वीआईपी [संगीत] कस्टमर हूं।
  7060. 5:21:54उसके बाद भी आपका यह व्यवहार मुझे समझ
  7061. 5:21:57नहीं आ रहा है। आप एक फटीचर के लिए मुझे
  7062. 5:22:00रणधीर शेखावत को ऑफेंड करने की हिम्मत कर
  7063. 5:22:03रही हैं। रणधीर शेखावत गुस्से से
  7064. 5:22:05तिलमिलाता हुआ बोला, "आप गलत समझ रहे हैं
  7065. 5:22:08मिस्टर शेखावत। हमारे लिए हमारे होटल में
  7066. 5:22:11आने वाला हर एक गेस्ट वीआईपी ही है। और
  7067. 5:22:13किसी को भी यह अधिकार नहीं है कि वह हमारे
  7068. 5:22:16होटल में आकर किसी भी दूसरे गेस्ट [संगीत]
  7069. 5:22:18का अनादर करें। रूपा ने भी हिम्मत करके
  7070. 5:22:20रणधीर शेखावत को जवाब दिया। और एक्चुअली
  7071. 5:22:23रूपा को यह करके अच्छा लग रहा था। इतना
  7072. 5:22:26कहकर रूपा ने शौर्य की तरफ देखा। जबकि
  7073. 5:22:28रूपा का जवाब सुनकर शौर्य के चेहरे पर भी
  7074. 5:22:31एक संतुष्टिपूर्ण मुस्कान थी जो कि रणधीर
  7075. 5:22:34शेखावत के खून को और भी खौला रही थी।
  7076. 5:22:37रणधीर शेखावत को विश्वास नहीं हो रहा था
  7077. 5:22:40कि होटल का स्टाफ एक फटीचर के लिए उसको
  7078. 5:22:43ऑफेंड कर रहा है। उसने अपना फोन निकाला और
  7079. 5:22:46किसी को फोन लगाते हुए होटल स्टाफ की ओर
  7080. 5:22:49देखते हुए बोला तुम लोग एक फटीचर के लिए
  7081. 5:22:51मुझे ऑफेंड कर रहे हो। अब देखो मैं
  7082. 5:22:54तुम्हारे होटल के साथ तुम सभी का क्या हाल
  7083. 5:22:56करता हूं। बस थोड़ा इंतजार करो। रणधीर
  7084. 5:23:00शेखावत को किसी को फोन लगाते देखकर
  7085. 5:23:02[संगीत]
  7086. 5:23:02दिलीप कामत के चेहरे पर थोड़ी घबराहट
  7087. 5:23:05दिखाई दी। यही हाल रूपा का भी था। दिलीप
  7088. 5:23:08कामत शौर्य की ओर देखने लगा कि उसकी तरफ
  7089. 5:23:11से कोई इशारा मिले। शौर्य भी दिलीप कामत
  7090. 5:23:13की परेशानी [संगीत] को समझ रहा था। इसलिए
  7091. 5:23:16वो दिलीप कामत की तरफ एक कदम बढ़ाकर बोला।
  7092. 5:23:18मिस्टर कामत आप क्या इस बेहूदा आदमी को
  7093. 5:23:21यहां ड्रामा करने दे रहे हैं। ऐसे आदमी को
  7094. 5:23:23तो आपको होटल से बाहर निकाल फेंकना चाहिए।
  7095. 5:23:26शौर्य की यह बात दिलीप कामत के लिए
  7096. 5:23:29[संगीत] एक इशारा था कि उसे आगे क्या करना
  7097. 5:23:31है। यह समझते ही उसने अपने साथ खड़े दो
  7098. 5:23:34सिक्योरिटी स्टाफ से कहा, बहुत हो गया।
  7099. 5:23:37तुम दोनों देख [संगीत] क्या रहे हो?
  7100. 5:23:39मिस्टर शेखावत को इज्जत के साथ जाकर होटल
  7101. 5:23:42के बाहर छोड़कर आओ। रूपा दिलीप कामत
  7102. 5:23:44[संगीत] की बात सुनकर थोड़ी हैरान भी हुई
  7103. 5:23:47कि उसके होते हुए भी दिलीप कामत ने बिना
  7104. 5:23:49उससे पूछे रणधीर शेखावत [संगीत] को होटल
  7105. 5:23:52से बाहर करने का फैसला भी कर लिया। जबकि
  7106. 5:23:54यह डिसीजन उसका होना चाहिए था। उसने
  7107. 5:23:57[संगीत] गौर किया कि दिलीप कामत ने शौर्य
  7108. 5:23:59की बात सुनने के बाद ही सिक्योरिटी के
  7109. 5:24:01स्टाफ से रणधीर शेखावत को बाहर करने के
  7110. 5:24:03लिए कहा है। इसका मतलब है कि दिलीप कामत
  7111. 5:24:07मिस्टर श्रवण के बारे में ऐसा कुछ जानता
  7112. 5:24:09है जो कि उसको भी नहीं पता है। उसने पहले
  7113. 5:24:12भी [संगीत] शौर्य का पावर देख ही रखा था।
  7114. 5:24:14इसलिए दिलीप कामत के आदेश में एक वाक्य और
  7115. 5:24:17जोड़ते हुए कहा और हां इस बात का ध्यान
  7116. 5:24:20रखना कि आगे से कभी भी मिस्टर रणधीर
  7117. 5:24:23शेखावत हमारे होटल में एंट्री ना कर पाए।
  7118. 5:24:26आज से इनके लिए हमारे होटल का दरवाजा बंद
  7119. 5:24:29है। रणधीर शेखावत जो किसी को फोन लगाने जा
  7120. 5:24:32रहा था। वह दिलीप कामत और रूपा दोनों की
  7121. 5:24:35बातों को सुनकर आश्चर्य [संगीत] से उनकी
  7122. 5:24:37ओर देखने लगा और सोचने लगा कि यह आज उसके
  7123. 5:24:40साथ क्या हो रहा है। ऐसी बेइज्जती तो उसने
  7124. 5:24:43आज तक कभी नहीं झेली थी। आज तो उसकी इज्जत
  7125. 5:24:46का जनाजा बड़ी शान से इस होटल से निकलने
  7126. 5:24:49जा रहा था। अब तक जो कसर बाकी रह गया था,
  7127. 5:24:52उसको [संगीत] पूरा करने में अब यह दोनों
  7128. 5:24:54भी कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे थे।
  7129. 5:24:57प्रदुमन सेठ और तान्या शर्मा वे दोनों
  7130. 5:25:00रणधीर [संगीत] शेखावत के सपोर्ट में कुछ
  7131. 5:25:01बोलने वाले भी थे कि सिक्योरिटी इंचार्ज
  7132. 5:25:04दिलीप कामत [संगीत] और मिस रूपा की बात
  7133. 5:25:06सुनकर चुप रह गए। उन्हें लगा कि अगर वह
  7134. 5:25:09कुछ बोलते हैं तो कहीं उनकी भी बेइज्जती
  7135. 5:25:11रणधीर [संगीत] शेखावत की तरह ना हो जाए।
  7136. 5:25:14रणधीर शेखावत जिसको भी फोन लगा रहा था अब
  7137. 5:25:17[संगीत] वह भूल गया। अब तो यह उसके लिए एक
  7138. 5:25:20और बड़ा सदमा था कि उसको इस होटल से उठाकर
  7139. 5:25:23फेंकने की बात हो रही थी। सिक्योरिटी वाले
  7140. 5:25:26ने आकर दोनों तरफ से रणधीर शेखावत की
  7141. 5:25:28दोनों बाह को पकड़ लिया और [संगीत] उन्हें
  7142. 5:25:30होटल से बाहर ले जाने के लिए बड़े ही थे
  7143. 5:25:33कि तभी एक वेटर रूपा के सामने आकर बोला
  7144. 5:25:37मैम इन्होंने [संगीत] जो खाया है उसका बिल
  7145. 5:25:39अभी क्लियर नहीं हुआ है। इनके साथ में यह
  7146. 5:25:42दोनों भी हैं। वेटर ने प्रदुमन सेठ और
  7147. 5:25:45तान्या शर्मा की
  7148. 5:25:46[संगीत]
  7149. 5:25:46ओर इशारा किया। कोई बात नहीं इन्हें जाने
  7150. 5:25:48दो। बिल यह पे कर देंगे।
  7151. 5:25:51रूपा ने लापरवाही [संगीत] से कहा, उसे बिल
  7152. 5:25:53की कोई चिंता नहीं थी। वह तो चाहती थी कि
  7153. 5:25:56कैसे भी करके इस बखेड़े को समाप्त किया
  7154. 5:25:58जाए। यह आप गलत कर रही हैं। मिस रूपा, यह
  7155. 5:26:01ठीक नहीं [संगीत] है। मैं इस बात को ऐसे
  7156. 5:26:02नहीं जाने दूंगा। रणधीर शेखावत चिल्लाता
  7157. 5:26:06रहा। पर सिक्योरिटी वाले उसकी बातों को
  7158. 5:26:07नजरअंदाज करते हुए उसे खींचते हुए बाहर की
  7159. 5:26:10तरफ बढ़ गए। रणधीर शेखावत के बाहर जाने के
  7160. 5:26:13बाद रूपा प्रदुमन सेठ की ओर देखने लगी।
  7161. 5:26:16रूपा को अपनी ओर देखते पाकर प्रदुमन सेठ
  7162. 5:26:19जल्दी से बोला मैं बिल पे कर देता हूं पर
  7163. 5:26:22आज यह जो कुछ भी हुआ वह ठीक नहीं [संगीत]
  7164. 5:26:24हुआ रूपा कुछ बोलती उससे पहले शौर्य चलकर
  7165. 5:26:28प्रदुमन सेठ के पास पहुंचा और उनसे बोला
  7166. 5:26:31आप शुक्र मनाइए कि आपके साथ कुछ नहीं हुआ
  7167. 5:26:33नहीं तो हरकत आपकी भी ऐसी ही थी कि आपको
  7168. 5:26:36भी यहां से धक्के मारकर ही बाहर करना
  7169. 5:26:38चाहिए था वैसे आप जैसे बिना पें के लोटे
  7170. 5:26:41के साथ कभी भी ऐसा हो सकता है और आगे से
  7171. 5:26:43ध्यान रखिएगा कि मेरे सामने आप जब भी
  7172. 5:26:45आइएगा तो थोड़ा तहजीब में ही रहिएगा। नहीं
  7173. 5:26:48तो आज जैसे उस बड़े सुरमा [संगीत] की
  7174. 5:26:50इज्जत की ऐसी तैसी हुई है, वह आपके साथ
  7175. 5:26:52होने में भी देर नहीं लगेगी। प्रदुमन सेठ
  7176. 5:26:56के मुंह पर तो जैसे ताला ही लग [संगीत]
  7177. 5:26:57गया। वो उम्मीद नहीं कर रहा था कि शौर्य
  7178. 5:27:00इस तरह से उसको लताड़ेगा। उसे इस बात का
  7179. 5:27:03भी आश्चर्य हो रहा था कि होटल की मैनेजर
  7180. 5:27:05[संगीत] और सिक्योरिटी इंचार्ज ने रणधीर
  7181. 5:27:08शेखावत को तो बेइज्जत करके यहां से बाहर
  7182. 5:27:10कर दिया। पर उन्होंने शौर्य को एक शब्द भी
  7183. 5:27:12नहीं कहा। और अभी जब शौर्य सबके सामने
  7184. 5:27:15उसको लताड़ लगा रहा है तब भी बीच [संगीत]
  7185. 5:27:18में कोई भी कुछ बोलने को नहीं आया। आखिर
  7186. 5:27:21इस स्ट्रगलर में ऐसा क्या है जो ना मिस
  7187. 5:27:23रूपा और ना दिलीप कामत [संगीत] उसे कुछ
  7188. 5:27:25बोलने की हिम्मत कर पा रहे हैं। उसने सोचा
  7189. 5:27:29उसकी कुछ और बेइज्जती हो उससे पहले ही उसे
  7190. 5:27:32यहां से निकल जाना चाहिए। यह सोचकर उसने
  7191. 5:27:34वेटर [संगीत] से अपना बिल लिया और अपने
  7192. 5:27:36पर्स से पैसे निकालकर उसको थमा दिया और
  7193. 5:27:38तान्या शर्मा की ओर मुड़कर बोला चलो
  7194. 5:27:41तान्या [संगीत]
  7195. 5:27:41हम यहां से चलते हैं। तान्या शर्मा के
  7196. 5:27:44चेहरे पर भी यहां जो कुछ हुआ था उसको
  7197. 5:27:47देखकर घबराहट नजर आने लगी थी। वो प्रदुमन
  7198. 5:27:50सेठ के साथ वहां से बाहर जाने ही वाली थी
  7199. 5:27:52कि तभी शौर्य उसके सामने आकर बोला मिस
  7200. 5:27:55तान्या शर्मा मैंने रत्नाकर शेट्टी से
  7201. 5:27:58आपके बारे में सुना था।
  7202. 5:27:59[संगीत]
  7203. 5:27:59आप जिस उम्मीद में इंडस्ट्रीज के इन सो
  7204. 5:28:02कॉल्ड बड़े नाम के साथ घूम रही हैं, यह
  7205. 5:28:04सिर्फ आपको एक्सप्लइट [संगीत] करेंगे और
  7206. 5:28:06कुछ नहीं। और मैं एक बात आपको और बता दूं
  7207. 5:28:09कि यह लोग ज्यादा समय तक अब इस इंडस्ट्रीज
  7208. 5:28:11में सर्वाइव भी नहीं कर पाएंगे। इसलिए
  7209. 5:28:13[संगीत] मेरी आपको सलाह है कि आप जितनी
  7210. 5:28:15जल्दी इन डूबते जहाज को छोड़ दें, वो उतना
  7211. 5:28:18ही आपके लिए अच्छा होगा। नहीं तो बाद में
  7212. 5:28:21सिर्फ पछतावे के अलावा आपके पास कुछ नहीं
  7213. 5:28:23रह जाएगा। [संगीत]
  7214. 5:28:24अगर आप बिग बुल प्रोडक्शन के साथ जुड़ना
  7215. 5:28:27चाहती हैं तो आप एक बार मिस्टर रत्नाकर
  7216. 5:28:29शेट्टी से मिल लीजिएगा। शायद यह आपके
  7217. 5:28:31करियर [संगीत] के लिए ज्यादा बेहतर होगा।
  7218. 5:28:34तान्या शर्मा शौर्य की बात सुनकर उसको
  7219. 5:28:36देखती रह गई। जिसे वह अभी थोड़ी देर पहले
  7220. 5:28:39रणधीर शेखावत के कारण एक फटीचर समझ रही
  7221. 5:28:42थी। लेकिन अब वह उसके [संगीत] रुआबाब को
  7222. 5:28:44देखकर मान ही नहीं पा रही थी कि जो कुछ भी
  7223. 5:28:46रणधीर शेखावत ने अभी शौर्य [संगीत] के लिए
  7224. 5:28:48कहा वो कहीं से भी सही हो सकता है। उसका
  7225. 5:28:51कॉन्फिडेंस से भरा चेहरा तो कुछ और ही
  7226. 5:28:53कहानी कह [संगीत] रहा था। जबकि उसके साथ
  7227. 5:28:56खड़े प्रदुमन सेठ के चेहरे पर भी हवाइयां
  7228. 5:28:58उड़ [संगीत] रही थी। उन्होंने भी शौर्य के
  7229. 5:29:00रुबाब को देखा था और जिस कॉन्फिडेंस से
  7230. 5:29:03शौर्य [संगीत] ने अपनी बात कही उसने उनके
  7231. 5:29:05अंतर्मन को भी हिला दिया। एक बार को तो वह
  7232. 5:29:08भी यह सोचने को मजबूर [संगीत] हो गए कि
  7233. 5:29:10उसने पहले रणधीर शेखावत की बात मानकर कोई
  7234. 5:29:13गलती तो नहीं कर दी। लेकिन अब वो इतना आगे
  7235. 5:29:16आ चुके थे कि [संगीत] वहां से वापस जाना
  7236. 5:29:18भी अब मुमकिन नहीं था। वो यह सोचने को भी
  7237. 5:29:21मजबूर थे कि आखिर इसके पीछे ऐसी कौन सी
  7238. 5:29:23बैकिंग है जो यह इतने कॉन्फिडेंस में इतनी
  7239. 5:29:26बड़ी [संगीत] बात बोल रहा है। अब उनसे
  7240. 5:29:28यहां खड़ा रहना मुश्किल हो रहा था। इसलिए
  7241. 5:29:31उन्होंने तान्या शर्मा का हाथ पकड़ा और
  7242. 5:29:34उसको खींचते हुए होटल से बाहर की तरफ बढ़
  7243. 5:29:36गए और तान्या शर्मा कंफ्यूज सी प्रदुमन
  7244. 5:29:40सेठ के साथ बाहर खींचती चली गई। दिलीप
  7245. 5:29:43कामत और रूपा शौर्य की बात को सुनती रही
  7246. 5:29:46पर उनके बीच में आने की कोई कोशिश नहीं
  7247. 5:29:48की। जबकि शिप्रा शौर्य का यह रूप देखकर
  7248. 5:29:51थोड़ी अचंभित थी। वो होटल की मैनेजर और
  7249. 5:29:54सिक्योरिटी इंचार्ज के व्यवहार से भी
  7250. 5:29:56हैरान थी कि उन्होंने शौर्य को कुछ भी
  7251. 5:29:59नहीं कहा था। जबकि शौर्य की बात का अनुसरण
  7252. 5:30:01करते हुए रणधीर शेखावत को होटल से बाहर
  7253. 5:30:04फिकवा दिया। उन्होंने तो रणधीर शेखावत की
  7254. 5:30:07कोई सफाई भी सुनने की कोशिश नहीं की।
  7255. 5:30:10[संगीत] सीधा उन्हें होटल से बाहर करने का
  7256. 5:30:12फैसला ही कर लिया और यह सब सिर्फ शौर्य के
  7257. 5:30:15कारण। आखिर ऐसा क्या पावर था शौर्य में?
  7258. 5:30:19रणधीर शेखावत जैसे लोगों के सामने तो
  7259. 5:30:22शौर्य की कोई हैसियत भी नहीं है। और रणधीर
  7260. 5:30:25शेखावत तो इस होटल का पुराना कस्टमर भी
  7261. 5:30:27[संगीत] था। फिर भी उन्होंने सिर्फ शौर्य
  7262. 5:30:29के लिए उन्हें होटल से बाहर करवा दिया।
  7263. 5:30:32उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर यह क्यों
  7264. 5:30:34कर हो रहा था। आखिर शौर्य का इतना बड़ा
  7265. 5:30:37कदब हो गया कि कोई उसको ऑफेंड करने की
  7266. 5:30:40हिम्मत नहीं कर पा रहा था और अभी भी लग
  7267. 5:30:42रहा था कि दिलीप कामत और रूपा बस शौर्य के
  7268. 5:30:45अगले आदेश की प्रतीक्षा कर रही हैं।
  7269. 5:30:48शिप्रा के मन में बहुत से सवाल उथल-पुथल
  7270. 5:30:50करने लगे। वह जानना चाहती थी कि होटल के
  7271. 5:30:53स्टाफ ने उसका पक्ष क्यों लिया? पर उसे
  7272. 5:30:56अभी यहां यह पूछना सही नहीं लगा। पर उसने
  7273. 5:30:58सोच लिया घर जाकर वह इसके बारे में जरूर
  7274. 5:31:01शौर्य से पूछेगी। दूसरी तरफ शौर्य ने भी
  7275. 5:31:04सोचा अब यहां जितना ड्रामा हो गया है उसके
  7276. 5:31:07बाद उसका यहां और रुकना सही नहीं है। पता
  7277. 5:31:10नहीं शिप्रा के मन में क्या-क्या विचार
  7278. 5:31:12आएंगे। यह सोचकर वो शिप्रा से बोला। खाना
  7279. 5:31:16तो हो ही गया। हम [संगीत] भी चलते हैं
  7280. 5:31:18यहां से। शिप्रा भी अब यहां से निकल ही
  7281. 5:31:20जाना चाहती थी। इसलिए उसने वेटर की ओर
  7282. 5:31:23देखकर कहा आप मेरा बिल ले आइए। वेटर ने
  7283. 5:31:26रूपा की तरफ देखा तो रूपा सामने आकर बोली
  7284. 5:31:29इसकी कोई जरूरत नहीं है मैम आपने खाना
  7285. 5:31:32एंजॉय किया यह हमारे लिए काफी है। यह आप
  7286. 5:31:36कैसी बात कर रही हैं? आप हमसे बिल क्यों
  7287. 5:31:38नहीं लेंगी? शिप्रा हैरान स्वर में बोली।
  7288. 5:31:41अगर हम आपसे पेमेंट लेंगी तो हो सकता है
  7289. 5:31:43हमारी ओनर को यह अच्छा नहीं लगे। इसलिए
  7290. 5:31:46मैं आपसे पेमेंट नहीं ले सकती। रूपा ने
  7291. 5:31:48सफाई दी। जबकि शौर्य रूपा की इस जेस्चर पर
  7292. 5:31:52अपना सिर पीट रहा था कि इतना भी क्या
  7293. 5:31:54दिखावा करना। अभी तो उसको पता भी नहीं है
  7294. 5:31:57कि मैं इस होटल का ओनर हूं। उसके बाद भी
  7295. 5:32:00रूपा के इस कदम का कारण शौर्य को समझ नहीं
  7296. 5:32:02आया। [संगीत]
  7297. 5:32:03शौर्य भी बीच में आकर कुछ बोलना चाहता था
  7298. 5:32:06कि तभी उसने देखा दिलीप कामत शिप्रा के
  7299. 5:32:08सामने आकर बोला मैम आप बिल की चिंता मत
  7300. 5:32:12कीजिए।
  7301. 5:32:13[संगीत]
  7302. 5:32:13आप यहां आई यह हमारे होटल के लिए सौभाग्य
  7303. 5:32:16की बात है। हमें कहां मिस्टर श्रवण की
  7304. 5:32:18सेवा करने का मौका बार-बार मिलता है।
  7305. 5:32:21दिलीप कामत रूपा की तरफ पड़ गया था। शौर्य
  7306. 5:32:24चाहते हुए भी अब कुछ नहीं बोल पा रहा था।
  7307. 5:32:27[संगीत] उसने सोचा अगर वो और थोड़ी देर
  7308. 5:32:30यहां रहेगा तो कहीं दिलीप कामत उसकी सारी
  7309. 5:32:32हकीकत यहां जाहिर ना कर दे। इसलिए वो
  7310. 5:32:35शिप्रा [संगीत] से बोला। चलो हम चलते हैं।
  7311. 5:32:38मैं बाद में यहां का मैटर देख लूंगा।
  7312. 5:32:41शिप्रा समझने की कोशिश कर रही थी कि यहां
  7313. 5:32:43चल क्या रहा है। पर शौर्य उसका [संगीत]
  7314. 5:32:46हाथ पकड़ कर उसको खींचते हुए बाहर की तरफ
  7315. 5:32:48पड़ गया। अब आगे क्या होगा? क्या रणधीर
  7316. 5:32:52शेखावत अपनी बेइज्जती को इतनी आसानी से
  7317. 5:32:55भूल पाएगा या [संगीत] उठाएगा कोई कदम?
  7318. 5:32:58शौर्य की फैमिली पार्टी में क्या हंगामा
  7319. 5:33:00होगा? श्रवण शिप्रा के साथ होटल पैराडाइज
  7320. 5:33:03से बाहर निकला और पार्किंग की तरफ बढ़
  7321. 5:33:05गया। तभी उसे ख्याल आया कि दोनों की कार
  7322. 5:33:09यहीं है तो क्या दोनों अपनी-अपनी कार से
  7323. 5:33:11यहां से जाएंगे? शिप्रा को भी यह परेशानी
  7324. 5:33:14भरा लगा। वो श्रवण की ओर देखते हुए बोली
  7325. 5:33:17अब क्या करें? शिप्रा की बात सुनकर श्रवण
  7326. 5:33:21मुस्कुराया और बोला, ठीक है, मैं कुछ करता
  7327. 5:33:24हूं। इतना कहकर श्रवण ने दिलीप कामत को
  7328. 5:33:27फोन करके अपने पास बुलाया। दिलीप कामत के
  7329. 5:33:30आने पर उसने अपनी कार की चाबी दिलीप कामत
  7330. 5:33:33की तरफ बढ़ाते हुए कहा, तुम किसी के
  7331. 5:33:35द्वारा मेरी कार को मेरे घर भिजवा देना।
  7332. 5:33:38मैं शिप्रा की कार से यहां से जा रहा हूं।
  7333. 5:33:40इतना कहकर श्रवण ने दिलीप कामत को अपने घर
  7334. 5:33:43का पता लिखवा दिया। उसके बाद वो शिप्रा की
  7335. 5:33:45कार लेकर आया और उसके साथ होटल से निकल
  7336. 5:33:48गया। शिप्रा के मन में बहुत से सवाल उमड़
  7337. 5:33:51घुमड़ रहे थे जो वो श्रवण से पूछना चाहती
  7338. 5:33:54थी। [संगीत] एक तो जो अभी हुआ जो वह इतने
  7339. 5:33:57अधिकार से दिलीप कामत से अपनी कार को घर
  7340. 5:33:59पहुंचाने के लिए कहा और दिलीप कामत ने
  7341. 5:34:01सहर्ष इसे स्वीकार भी कर लिया। यह भी
  7342. 5:34:04शिप्रा के लिए हैरानी की बात थी। जब
  7343. 5:34:07शिप्रा से रहा नहीं गया तो उसने पूछ भी
  7344. 5:34:09लिया। आखिर माजरा क्या है? तुमने दिलीप
  7345. 5:34:12कामत से अपनी कार घर पहुंचाने के लिए कहा
  7346. 5:34:15और उसने तुम्हारी बात मान भी ली? जबकि
  7347. 5:34:17अभी-अभी तुम्हारे कारण इस होटल में इतना
  7348. 5:34:19बड़ा बखेड़ा होते-होते रहा और यह बात वहां
  7349. 5:34:22साफ-साफ नजर आ रही थी कि दिलीप कामत और
  7350. 5:34:25रूपा दोनों तुम्हारा पक्ष ले रहे थे। जबकि
  7351. 5:34:28देखने से लग रहा था कि रणधीर शेखावत इस
  7352. 5:34:31शहर की एक बड़ी हस्ती है और उसके बाद भी
  7353. 5:34:33तुम्हारे लिए उन्होंने रणधीर शेखावत को
  7354. 5:34:36होटल से बाहर कर दिया। श्रवण यह समझ रहा
  7355. 5:34:39था कि इस तरह का सवाल उसके सामने आएगा। पर
  7356. 5:34:41इस वक्त वो इन सवालों से बचना चाहता था।
  7357. 5:34:44पर [संगीत] जब शिप्रा ने यह सवाल कर ही
  7358. 5:34:46दिया तो उसने कहा ऐसा भी कुछ खास नहीं है।
  7359. 5:34:49बस दिलीप कामत से मेरी पुरानी पहचान है
  7360. 5:34:52इसलिए वह मेरा [संगीत] पक्ष ले रहा था।
  7361. 5:34:54शिप्रा के लिए श्रवण की इस बात को पचाना
  7362. 5:34:56मुश्किल हो रहा था। एक [संगीत] बार को मान
  7363. 5:34:59भी लिया जाए कि दिलीप कामत से श्रवण की
  7364. 5:35:01कोई पुरानी पहचान थी। पर वहां पर तो होटल
  7365. 5:35:04की मैनेजर रूपा भी थी। उसने भी दिलीप
  7366. 5:35:06[संगीत] कामत के सुर में ही सुर मिलाया
  7367. 5:35:08था। तुम अभी भी सच्ची बात मुझे नहीं बता
  7368. 5:35:11रहे हो। वहां कोई भी इस बात को आसानी से
  7369. 5:35:13समझ सकता था कि मैनेजर रूपा और दिलीप कामत
  7370. 5:35:16दोनों ही किसी बात को लेकर तुमसे ज्यादा
  7371. 5:35:19ही प्रभावित थे। क्योंकि जब दिलीप वहां पर
  7372. 5:35:21आया था और उसने तुम्हें नहीं देखा था। तब
  7373. 5:35:24तक वह ध्यान से रणधीर शेखावत की बात को
  7374. 5:35:26सुन रहा था। पर जैसे ही दिलीप कामत ने
  7375. 5:35:29तुम्हें देखा उसका रणधीर शेखावत से बात
  7376. 5:35:31करने का ढंग ही बदल गया था। श्रवण इस बात
  7377. 5:35:34से हैरान था कि शिप्रा ने कितने अच्छे
  7378. 5:35:36[संगीत] से उस समय की स्थिति को ऑब्जर्व
  7379. 5:35:38किया था। वैसे भी अब समय आ गया था जब
  7380. 5:35:42श्रवण शिप्रा को हकीकत बता सकता था।
  7381. 5:35:44शुरुआत वो यहां से ही कर सकता था। अब अगर
  7382. 5:35:47शिप्रा को असलियत का पता भी चल जाता तो
  7383. 5:35:49कोई [संगीत] खास फर्क नहीं पड़ने वाला था
  7384. 5:35:52क्योंकि कल तो उसे सब कुछ पता चलने ही
  7385. 5:35:54वाला था और जिस तरह से शिप्रा बाल की खाल
  7386. 5:35:57निकालने पर तुली हुई थी उसको देखकर श्रवण
  7387. 5:35:59[संगीत] ने मुस्कुराते हुए कहा अगर तुम सच
  7388. 5:36:02जानना ही चाहती हो तो सुनो। असलियत यह है
  7389. 5:36:05कि मैं ही इस होटल का मालिक हूं। इसलिए
  7390. 5:36:08दिलीप [संगीत] कामत मुझे कैसे ऑफेंड कर
  7391. 5:36:10सकता था। श्रवण की बात सुनकर पहले तो
  7392. 5:36:13शिप्रा आग सी श्रवण को देखती रही। फिर
  7393. 5:36:16मुस्कुराती हुई बोली [संगीत]
  7394. 5:36:18बात को इधर से उधर घुमा रहे हो पर तुमसे
  7395. 5:36:20सच नहीं बोला जा रहा। सीधा क्यों नहीं
  7396. 5:36:23कहते कि इस होटल को भी मेनका ही मैनेज
  7397. 5:36:25करती है। क्योंकि मेनका तुम्हारी दोस्त
  7398. 5:36:27है। इसलिए दिलीप कामत और रूपा तुम्हें
  7399. 5:36:30ऑफेंड नहीं कर सकते थे। अब हैरान होने की
  7400. 5:36:33बारी श्रवण की थी। कितनी आसानी से उसने एक
  7401. 5:36:36थ्योरी बना ली [संगीत] थी। वो शिप्रा की
  7402. 5:36:38सोच पर दंग रह गया। वो इस बात पर विश्वास
  7403. 5:36:41ही नहीं कर पा रही थी कि [संगीत] यह होटल
  7404. 5:36:43श्रवण का भी हो सकता है। वो गहरी आंखों से
  7405. 5:36:46शिप्रा की ओर देखते हुए बोला वैसे देखा
  7406. 5:36:49जाए तो तुमने सही सोचा। वाकई इस होटल की
  7407. 5:36:52देखरेख मेनका ही कर रही है। पर अगर मैं
  7408. 5:36:55तुमसे यह कहूं [संगीत] कि मेनका भी मेरे
  7409. 5:36:57लिए ही काम कर रही है तो तो फिर तो तुम यह
  7410. 5:37:00भी कहोगे कि होटल राजकमल भी तुम्हारा ही
  7411. 5:37:03है। क्योंकि होटल राजकमल की मैनेजर भी तो
  7412. 5:37:06मेनका ही है। हो सकता है तुम्हारी यह बात
  7413. 5:37:09भी सही हो कि मैं ही होटल राजकमल का भी
  7414. 5:37:13मालिक हूं। श्रवण की मुस्कान और भी गहरी
  7415. 5:37:16होती जा रही थी। अब रहने भी दो। इतना
  7416. 5:37:19ज्यादा भी मत फेंको कि मैं लपेट ही ना
  7417. 5:37:21सकूं। कहीं [संगीत] तुम्हारी देखादे देखी
  7418. 5:37:24मैं भी खुद को इस शहर की महारानी ना समझने
  7419. 5:37:26लगूं। बोलते हुए [संगीत] शिप्रा के चेहरे
  7420. 5:37:29पर भी एक प्यारी मुस्कान खिल गई थी। उसे
  7421. 5:37:32श्रवण से इस तरह से बात करना अब अच्छा लग
  7422. 5:37:35रहा था। मैं एक काम करता हूं। कल से मैं
  7423. 5:37:38तुम्हारे अंदर एक महारानी वाली फीलिंग
  7424. 5:37:40लाने की कोशिश करता हूं। तुम्हारे जो भी
  7425. 5:37:43सपने [संगीत] होंगे मैं कोशिश करूंगा कि
  7426. 5:37:45वह अगले दिन ही पूरा कर दूं। चलो अभी
  7427. 5:37:47[संगीत] से अपने सपने बताओ। देखना
  7428. 5:37:50तुम्हारा यह खादिम तुम्हारे लिए उसे यूं
  7429. 5:37:52चुटकियों में पूरा कर देगा। बस बस अब रहने
  7430. 5:37:55भी दो। [संगीत] इतनी ज्यादा ऊंची उड़ान भी
  7431. 5:37:58मत उड़ो कि गिरने पर हड्डियों का कचूमर बन
  7432. 5:38:00जाए। हम जमीन पर ही अच्छे हैं। और जहां तक
  7433. 5:38:03रही मेरे सपने पूरे करने की बात तो वो कोई
  7434. 5:38:06बहुत बड़ी नहीं है। बस मैं इतना ही चाहती
  7435. 5:38:09हूं कि मैं जहां भी रहूं तुम मेरे साथ
  7436. 5:38:11रहो। बोलते हुए शिप्रा भावुक हो गई।
  7437. 5:38:15शिप्रा की बात सुनकर श्रवण का भी मन
  7438. 5:38:17आह्लादित हो गया। जहां पहले कभी शिप्रा
  7439. 5:38:20अपनी फीलिंग श्रवण से शेयर नहीं करती थी।
  7440. 5:38:22पर अब वह अपनी फीलिंग शेयर करने में चूकती
  7441. 5:38:25भी नहीं थी। श्रवण को शरारत सूझी तो उसने
  7442. 5:38:28कहा यह थोड़ा अजीब नहीं है। पहले तुमने
  7443. 5:38:32कहा था कि अगर मुझे कोई लड़की पसंद आती है
  7444. 5:38:34तो मैं उसके साथ हो सकता हूं। तुम्हें
  7445. 5:38:36उससे कोई आपत्ति नहीं होगी। अब इसमें तुम
  7446. 5:38:39कोई किंतु परंतु तो नहीं करने वाली हो।
  7447. 5:38:41श्रवण की बात से शिप्रा को झटका सा लगा।
  7448. 5:38:44वह आंखें तरेर कर श्रवण को घूरती हुई
  7449. 5:38:47बोली, "यह दूसरी लड़की [संगीत] की बात
  7450. 5:38:49कहां से आ गई? और तुम्हारे कहने का क्या
  7451. 5:38:51मतलब है? मेरा कहने का मतलब है कि
  7452. 5:38:54तुम्हारे इस कंडीशन में कोई बदलाव तो नहीं
  7453. 5:38:56हुआ है। अगर अभी भी मुझे कोई लड़की पसंद
  7454. 5:38:59आती है तो तुम्हें उससे कोई आपत्ति तो
  7455. 5:39:01नहीं होगी? क्या मेरे होते हुए [संगीत] भी
  7456. 5:39:04तुम्हें किसी और लड़की की जरूरत है? नहीं,
  7457. 5:39:07अभी तो नहीं है। पर बाद में अगर कोई लड़की
  7458. 5:39:10मुझे कभी पसंद आ जाती है, मैं तब की बात
  7459. 5:39:13कर रहा हूं। तब भी जो तुमने कंडीशन
  7460. 5:39:15निर्धारित की है उसमें कोई चेंज तो नहीं
  7461. 5:39:17है? [संगीत] मैं तो बस अपना कंफ्यूजन दूर
  7462. 5:39:20करना चाहता हूं। तुम बाद में मुझ पर यह
  7463. 5:39:22इल्जाम ना लगाओ कि मैं तुम्हारे साथ गलत
  7464. 5:39:24कर रहा हूं। अभी थोड़ी देर पहले तक जो
  7465. 5:39:28शिप्रा का चेहरा खिला हुआ था वो श्रवण की
  7466. 5:39:30इन्हीं बातों से कुमला गया था। कहा तो अभी
  7467. 5:39:34थोड़ी देर पहले वो उसको [संगीत] महारानी
  7468. 5:39:36बना रहा था। चुटकियों में उसके सपने पूरे
  7469. 5:39:38करने की बात कर रहा था और अब उसको दूसरी
  7470. 5:39:41लड़की के साथ प्यार की पींगे [संगीत] भी
  7471. 5:39:43बढ़ानी थी। शिप्रा का गुस्सा धीरे-धीरे
  7472. 5:39:46बढ़ता जा रहा था। वो कड़वाहट भरे स्वर में
  7473. 5:39:49बोली अगर ऐसी बात है तो फिर तो तुमने किसी
  7474. 5:39:52और को पसंद भी कर लिया होगा। फिर तुम अपना
  7475. 5:39:55यह कीमती समय [संगीत] मेरे साथ क्यों
  7476. 5:39:57बर्बाद कर रहे हो? तुम्हें तो उस दूसरी
  7477. 5:39:59लड़की के साथ होना चाहिए। नहीं ऐसा नहीं
  7478. 5:40:02है। मैंने कहा ना यह तुम्हें बाद [संगीत]
  7479. 5:40:05में कभी ऐसा होता है तो मैं उसके लिए बोल
  7480. 5:40:07रहा था। इस बार शिप्रा ने कुछ कहा नहीं।
  7481. 5:40:11वो घूर कर श्रवण को देखने लगी। इस समय
  7482. 5:40:14गाड़ी किसी मार्केट से होकर गुजर रही थी।
  7483. 5:40:16शिप्रा ने भावहीन स्वर में श्रवण से कहा
  7484. 5:40:19गाड़ी रोको। क्या? मैंने कहा गाड़ी रोको।
  7485. 5:40:24पर यहां किस लिए? तुम्हें कुछ लेना है
  7486. 5:40:26क्या? तुम्हें समझ नहीं आ रहा है क्या?
  7487. 5:40:29मैंने कहा गाड़ी रोको।
  7488. 5:40:31स्वतः ही श्रवण का पैर ब्रेक पर चला गया।
  7489. 5:40:34कुछ [संगीत] दूर टायर घिसटने के बाद कार
  7490. 5:40:36रुक गई। श्रवण असमंजस की स्थिति में
  7491. 5:40:39शिप्रा की ओर देखने लगा। पर शिप्रा का
  7492. 5:40:41चेहरा गुस्से से लाल हो रखा था। वो अपनी
  7493. 5:40:44साइड का दरवाजा खोलकर कार से बाहर आई और
  7494. 5:40:47ड्राइवर की साइड में जाकर दरवाजा खोला और
  7495. 5:40:49श्रवण से बाहर आने के लिए कहा। श्रवण को
  7496. 5:40:53कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या कर
  7497. 5:40:55रही है। पर जब उसने [संगीत] शिप्रा को
  7498. 5:40:57बाहर देखा तो वह कार से बाहर आ गया।
  7499. 5:41:00श्रवण के बाहर आते ही शिप्रा ड्राइविंग
  7500. 5:41:03सीट पर जाकर बैठ गई और कार को आगे बढ़ा
  7501. 5:41:07दिया। श्रवण ने सोचा नहीं था कि शिप्रा
  7502. 5:41:10ऐसा कर सकती है। उसको यूं बीच [संगीत]
  7503. 5:41:12चौराहे पर छोड़कर वो चली जाएगी। उसने उसको
  7504. 5:41:15रोकने के लिए आवाज भी दिया। पर शिप्रा
  7505. 5:41:18उसकी बात को अनसुना करके वहां से चली गई।
  7506. 5:41:22शिप्रा के वहां से जाने पर श्रवण को अपनी
  7507. 5:41:24गलती का एहसास हुआ। उसने सोचा नहीं
  7508. 5:41:27[संगीत] था कि उसका यह मजाक उसको इतना
  7509. 5:41:29भारी पड़ जाएगा। उसने मन में ठान लिया कि
  7510. 5:41:33वो आगे से इस तरह का मजाक नहीं करेगा।
  7511. 5:41:36कहां तो कुछ देर पहले वो उसको रानी बना
  7512. 5:41:39रहा था और कहां अगले ही पल में उसको इतना
  7513. 5:41:42गुस्सा दिला दिया कि वो उसको भरे बाजार
  7514. 5:41:45छोड़कर चली गई। श्रवण ने सोचा अब तो
  7515. 5:41:49मुसीबत हो गई। अब उसे कोई टैक्सी लेकर ही
  7516. 5:41:52घर जाना पड़ेगा। पर फिर उसने सोचा एक
  7517. 5:41:55[संगीत] बार दिलीप कामत को फोन करके पूछता
  7518. 5:41:57हूं। शायद अभी उसकी कार पीछे ही हो। उसने
  7519. 5:42:01दिलीप कामत को फोन किया और उसे अपना
  7520. 5:42:03लोकेशन बताया। दिलीप कामत ने कहा 5 मिनट
  7521. 5:42:07में ड्राइवर कार लेकर उसके पास पहुंच
  7522. 5:42:09जाएगा। और सच में लगभग 5 मिनट बाद ही उसकी
  7523. 5:42:14कार [संगीत] उसके पास आकर रुकी। श्रवण ने
  7524. 5:42:17देखा कि होटल का एक सिक्योरिटी वाला उसकी
  7525. 5:42:19कार को लेकर आया था। श्रवण ने उससे अपनी
  7526. 5:42:22कार ली और घर की तरफ बढ़ गया। श्रवण को
  7527. 5:42:25शिप्रा के साथ अपनी बहन नीलिमा के लिए कोई
  7528. 5:42:28गिफ्ट भी लेना था। पर शिप्रा के चले जाने
  7529. 5:42:31से यह मामला [संगीत] बीच में ही लटक गया।
  7530. 5:42:34उसने सोचा कोई बात नहीं कल का दिन भी पड़ा
  7531. 5:42:37हुआ है। कल दिन में नीलिमा के लिए गिफ्ट
  7532. 5:42:39ले लेगा। यह सोचकर वह घर की तरफ बढ़ गया।
  7533. 5:42:43वो घर पहुंचा [संगीत] तो देखा शिप्रा की
  7534. 5:42:45कार पार्किंग में ही खड़ी थी। उसे तसल्ली
  7535. 5:42:48हुई कि चलो वह कहीं और नहीं गई और घर
  7536. 5:42:51पहुंच गई है। उसने अपनी कार खड़ी की और घर
  7537. 5:42:54के अंदर गया। अब उसको कैसे भी करके शिप्रा
  7538. 5:42:58का गुस्सा ठंडा करना था और उसको मनाना था।
  7539. 5:43:01बड़ी मुश्किल से तो शिप्रा के दिल में
  7540. 5:43:03उसके लिए प्यार के फूल खिले थे। और दूसरे
  7541. 5:43:06ही दिन उसने उसको नाराज कर दिया। उसने
  7542. 5:43:10देखा शिप्रा के कमरे की लाइट बुझी हुई थी।
  7543. 5:43:13वह समझ गया कि वह अभी भी गुस्से में ही
  7544. 5:43:15है। श्रवण ने सबसे पहले अपने कमरे में
  7545. 5:43:19जाकर अपना कपड़ा चेंज किया और धीरे से आकर
  7546. 5:43:22शिप्रा के कमरे के दरवाजे को धक्का दिया
  7547. 5:43:24तो दरवाजा खुल गया। उसने ऊपर वाले का
  7548. 5:43:27शुक्र किया कि चलो दरवाजा अंदर से बंद
  7549. 5:43:30नहीं था। कमरे में अंधेरा था। श्रवण ने
  7550. 5:43:33दरवाजे के पास खड़े रहकर कमरे के अंदर की
  7551. 5:43:36स्थिति को समझने की कोशिश किया। जब उसकी
  7552. 5:43:39आंखें अंधेरे में देखने की अभ्यस्त हो गई
  7553. 5:43:41तो उसने देखा कि शिप्रा बेड पर करवट लिए
  7554. 5:43:44हुए लेटी थी। वो यह नहीं समझ पाया कि
  7555. 5:43:47शिप्रा सो चुकी थी या [संगीत] सिर्फ सोने
  7556. 5:43:49का दिखावा कर रही थी। पर श्रवण ने उस कमरे
  7557. 5:43:52में आने के बाद शिप्रा का कोई रिएक्शन
  7558. 5:43:54नहीं देखा था। यह तो वह समझ गया था कि उसे
  7559. 5:43:57शिप्रा को मनाने में मशक्कत तो करनी
  7560. 5:43:59पड़ेगी। यह सोचकर वो धीरे से बेड पर जाकर
  7561. 5:44:03शिप्रा के बगल में लेट गया। अब आगे क्या
  7562. 5:44:07होगा? कैसा चलेगा श्रवण और शिप्रा का
  7563. 5:44:09प्यार तक्रार का खेल? क्या श्रवण शिप्रा
  7564. 5:44:12को मना पाएगा या खेलना होगा उसको कोई और
  7565. 5:44:16खेल। शिप्रा ने जैसे ही महसूस किया कि
  7566. 5:44:18शौर्य [संगीत] उसके बेड पर आ गया है। वो
  7567. 5:44:20उसकी ओर पलटी और तीखे स्वर में बोली तुम
  7568. 5:44:24यहां क्या कर रहे हो? तुम्हारी यहां कोई
  7569. 5:44:26जरूरत नहीं है। अपने कमरे में जाओ। पर
  7570. 5:44:29शौर्य इतनी आसानी से कहां हार मानने वाला
  7571. 5:44:31था? वो भी बातें बनाता हुआ बोला। यह कमरा
  7572. 5:44:35भी तो मेरा ही है। [संगीत] जो तुम्हारा है
  7573. 5:44:37वह मेरा है। तो फिर देखा जाए तो मैं तो
  7574. 5:44:40अपने कमरे में ही हूं। ज्यादा होशियार
  7575. 5:44:42बनने की कोशिश मत करो। मैंने कहा मेरे बेड
  7576. 5:44:45से उतरो। तुम कहां सोते हो? मुझे उससे कोई
  7577. 5:44:48फर्क नहीं पड़ता। बस तुम यहां नहीं सो
  7578. 5:44:50सकते। शौर्य शिप्रा की ओर करवट लेता हुआ
  7579. 5:44:53बोला। मैं समझता हूं यह तुम्हारा बेड है।
  7580. 5:44:56पर कल तुम मेरे बेड पर सोई थी तो [संगीत]
  7581. 5:44:59आज तो मेरा यहां सोना बनता है। इस तरह वो
  7582. 5:45:02एकदम शिप्रा के पास आ गया था। उसकी सांसों
  7583. 5:45:04की गर्मी उसे अपने पास [संगीत] महसूस होने
  7584. 5:45:07लगी। एक पल के लिए शिप्रा सब भूल ही गई
  7585. 5:45:09थी। पर अगले ही पल वह होश [संगीत] में आ
  7586. 5:45:11गई और उसने झटके से शौर्य को खुद से दूर
  7587. 5:45:14किया। नतीजा यह हुआ कि शौर्य बेड से नीचे
  7588. 5:45:16गिर गया। [संगीत] शौर्य के मुंह से एक चीख
  7589. 5:45:19निकल गई। आ एक पल को तो शिप्रा भी घबरा गई
  7590. 5:45:23कि कहीं [संगीत] शौर्य को ज्यादा चोट ना
  7591. 5:45:25लग गई हो। वो उठकर उसको देखना चाहती थी।
  7592. 5:45:28पर शौर्य ने जितनी तेज [संगीत] आवाज में
  7593. 5:45:30मुंह से आह निकाली उससे शिप्रा समझ गई कि
  7594. 5:45:33वो नौटंकी कर रहा है। [संगीत] वो जानबूझकर
  7595. 5:45:36दिखावा कर रहा है कि उसे चोट लगी है। जिस
  7596. 5:45:39तेजी से वह बेड से उठने वाली थी वो दोबारा
  7597. 5:45:41[संगीत] उसी स्थिति में आ गई क्योंकि कमरे
  7598. 5:45:43में अंधेरा था इसलिए शौर्य समझ नहीं पाया
  7599. 5:45:46कि शिप्रा ने कोई रिएक्शन दिया था या
  7600. 5:45:48नहीं। [संगीत] वो उम्मीद कर रहा था कि
  7601. 5:45:50उसकी आंख सुनकर शायद वह उससे पूछे कि चोट
  7602. 5:45:52तो नहीं लगी। इसी कारण वो थोड़ी देर जमीन
  7603. 5:45:55पर ही लेटा रहा। पर जब शिप्रा की तरफ से
  7604. 5:45:58कोई भी रिएक्शन नहीं हुआ तो मजबूरन वह
  7605. 5:46:01अपनी जगह पर उठ गया। उसने शिप्रा की तरफ
  7606. 5:46:04देखा तो पाया वो दूसरी तरफ करवट लेकर अभी
  7607. 5:46:07भी लेटी हुई थी। वो खड़े-खड़े सोचने लगा।
  7608. 5:46:10[संगीत] अब इसे कैसे मनाऊं? यह तो कुछ
  7609. 5:46:13ज्यादा ही नाराज हो गई है। वो धीरे से
  7610. 5:46:15दोबारा बेड पर बैठ गया और [संगीत] थोड़ी
  7611. 5:46:17नाराजगी जताते हुए बोला। देखो यह ठीक नहीं
  7612. 5:46:21है। अगर तुम बात नहीं करोगी तो फिर मैं
  7613. 5:46:23अपनी सफाई कैसे दूंगा। माना कि मैं कुछ
  7614. 5:46:26ज्यादा बोल दिया पर वो तो मैं मजाक कर रहा
  7615. 5:46:28था। चलो मैं इसके लिए तुम्हें सॉरी बोलता
  7616. 5:46:31हूं। सॉरी। इतना बोलकर शौर्य थोड़ी देर
  7617. 5:46:35शिप्रा की तरफ से जवाब की प्रतीक्षा करता
  7618. 5:46:37रहा। पर शिप्रा ने कोई रिएक्शन नहीं दिया।
  7619. 5:46:40फिर शौर्य सोचने लगा, अब क्या करूं? यह तो
  7620. 5:46:43कुछ बोल ही नहीं रही है। वो एक बार फिर से
  7621. 5:46:46धीरे से उसके पास लेट गया और हल्के से
  7622. 5:46:49उसके कंधे पर अपना हाथ रखा। पर अगले ही पल
  7623. 5:46:52तेजी [संगीत] से शिप्रा ने उसके हाथ को
  7624. 5:46:54झटक दिया। इस बार शुक्र था कि शिप्रा ने
  7625. 5:46:57उसे बेड से बाहर धक्का [संगीत] नहीं दिया।
  7626. 5:46:59पर इस बात से शौर्य की थोड़ी हिम्मत बढ़ी।
  7627. 5:47:02वो फिर से शिप्रा से बोला, "अब कुछ तो
  7628. 5:47:04बोलो।" वैसे चुप रहोगी तो फिर मुझसे
  7629. 5:47:07तुम्हारी यह बेरुखी सही नहीं जाएगी। मैंने
  7630. 5:47:10सॉरी बोला [संगीत] तो। देखो मैं अपने कान
  7631. 5:47:12भी पकड़ रहा हूं। शिप्रा पीछे पलट कर तीखे
  7632. 5:47:15स्वर में ही बोली। अब इस नौटंकी का कोई
  7633. 5:47:18फायदा नहीं है। अच्छा यही होगा कि तुम
  7634. 5:47:21जाकर अपने कमरे में सो जाओ और [संगीत]
  7635. 5:47:23मेरी नींद मत खराब करो। शिप्रा के जवाब से
  7636. 5:47:26शौर्य समझ गया कि अभी वो कितनी भी कोशिश
  7637. 5:47:29कर ले यह मानने वाली [संगीत] नहीं है।
  7638. 5:47:31थोड़ी देर वो इस अवस्था में बैठा रहा और
  7639. 5:47:33अपने मोबाइल से खेलता रहा। उसने एक नजर
  7640. 5:47:36शिप्रा की ओर [संगीत] देखा। जब उसने महसूस
  7641. 5:47:39किया कि वो सच में उसे कोई भाव नहीं देने
  7642. 5:47:41वाली है तो वो बेड से उठ गया। उसी समय
  7643. 5:47:45उसका फोन रिंग करने लगा। उसने एक पल के
  7644. 5:47:48[संगीत] लिए फोन देखा। फिर वो फोन को
  7645. 5:47:50उठाकर कान से लगाते हुए कमरे से बाहर की
  7646. 5:47:52तरफ जाते हुए बोला, "अरे तुम इस समय फोन
  7647. 5:47:55कर रही हो? सब ठीक तो है?" इतना कहकर वो
  7648. 5:47:59कमरे से बाहर चला गया। [संगीत] शौर्य को
  7649. 5:48:01बाहर जाते हुए शिप्रा ने उसकी आखिरी बात
  7650. 5:48:04सुन ली थी। जिससे उसे लगा कि फोन किसी
  7651. 5:48:06लड़की का था और जिस तेजी से शौर्य कमरे से
  7652. 5:48:09बाहर गया, उसने शिप्रा के शक को और भी
  7653. 5:48:12पक्का कर दिया। यह जानकर कि इस समय शौर्य
  7654. 5:48:15के पास किसी लड़की का फोन [संगीत] आया है।
  7655. 5:48:17वह तुरंत अपने बिस्तर से उठ गई और अपने
  7656. 5:48:19दरवाजे के पास पहुंची और दरवाजे को हल्का
  7657. 5:48:22सा खोलकर बाहर की आवाज सुनने [संगीत] की
  7658. 5:48:24कोशिश करने लगी।
  7659. 5:48:26शौर्य उसे राहदारी में खड़ा नजर आया। वो
  7660. 5:48:29खड़े-खड़े ही किसी से हल्की आवाज में बात
  7661. 5:48:32कर रहा [संगीत] था। शिप्रा ने दरवाजा
  7662. 5:48:34थोड़ा और खोलकर उसकी आवाज सुनने की कोशिश
  7663. 5:48:37की। शौर्य फोन पर [संगीत] किसी से बोल रहा
  7664. 5:48:39था। क्या इस समय मेरा आना ठीक होगा? नहीं
  7665. 5:48:43ऐसी कोई दिक्कत नहीं है। अगर तुम कहोगी तो
  7666. 5:48:45मैं अभी आ जाऊंगा। ऐसा कुछ है भी नहीं
  7667. 5:48:48करने को। ठीक है। अगर ऐसी बात है तो मैं
  7668. 5:48:51अभी थोड़ी देर में तुम्हारे [संगीत] पास
  7669. 5:48:52पहुंचता हूं। ओके बाय टेक केयर। इतना कहकर
  7670. 5:48:56शौर्य ने फोन रख दिया। इधर शिप्रा ने जब
  7671. 5:48:59उसका आखिरी वाक्य सुना कि मैं अभी पहुंचता
  7672. 5:49:02हूं तो उसका चेहरा और बिगड़ गया। वो सोचने
  7673. 5:49:05लगी कि शौर्य इस समय किस लड़की से मिलने
  7674. 5:49:08जा रहा होगा। उसे अच्छा नहीं लग रहा था।
  7675. 5:49:11वो कमरे में खड़ी-खड़ी ही कसमसाने लगी।
  7676. 5:49:14उसे खुद पर भी गुस्सा आ रहा था कि जब वो
  7677. 5:49:16उसके कमरे में आ ही गया था तो वह उसे कम
  7678. 5:49:19से कम [संगीत] अपने बेड पर सोने तो दे ही
  7679. 5:49:21सकती थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि अब वो
  7680. 5:49:24क्या करें। उसने राहदारी में झांक कर देखा
  7681. 5:49:26तो पाया कि शौर्य अपने कमरे में चला गया
  7682. 5:49:29था। तब उसे दरवाजे के पास खड़ा रहना
  7683. 5:49:32मुश्किल लग रहा था। उसे लगा अगर वह थोड़ी
  7684. 5:49:34देर और ऐसे ही यहां खड़ी रही [संगीत] तो
  7685. 5:49:36इतने समय में शौर्य तैयार होकर चला भी
  7686. 5:49:39जाएगा। जैसे ही यह [संगीत] ख्याल उसके मन
  7687. 5:49:42में आया, वो तुरंत अपने कमरे से निकल कर
  7688. 5:49:44जाकर शौर्य के कमरे के दरवाजे के बाहर
  7689. 5:49:46खड़ी हो गई। वो दरवाजे के बाहर ही चक्कर
  7690. 5:49:49लगाने लगी। उसने कमरे के अंदर जाने
  7691. 5:49:51[संगीत] की कोई कोशिश नहीं की। पर एक-द
  7692. 5:49:54मिनट ही बीता होगा कि शौर्य के कमरे का
  7693. 5:49:56दरवाजा खुला और शौर्य अपने [संगीत] कमरे
  7694. 5:49:58से बाहर आया। वो पूरी तरह से तैयार था।
  7695. 5:50:01यहां तक कि उसके कपड़ों से सेंट की हल्की
  7696. 5:50:04खुशबू भी आ रही थी। शिप्रा ने शौर्य को इस
  7697. 5:50:07तरह बन ठन कर बाहर आते देखा तो उसकी आंखें
  7698. 5:50:10फैल गई। शौर्य उम्मीद नहीं कर रहा था कि
  7699. 5:50:13शिप्रा उसे दरवाजा खोलते ही सामने नजर आ
  7700. 5:50:15जाएगी। वो हैरान स्वर में बोला तुम यहां?
  7701. 5:50:19तुम तो अभी सो [संगीत] रही थी ना। फिर तुम
  7702. 5:50:21यहां कैसे आ गई? पर शिप्रा ने उसकी बात का
  7703. 5:50:24कोई जवाब नहीं दिया। वो शौर्य के सामने
  7704. 5:50:27खड़ी होकर बोली। [संगीत] इस समय तुम यूं
  7705. 5:50:29बन ठन कर कहां जा रहे हो? शौर्य भी शिप्रा
  7706. 5:50:33के ही अंदाज [संगीत] में बोला। बन ठनकर
  7707. 5:50:35कहने का क्या मतलब हुआ? अगर लोग कहीं बाहर
  7708. 5:50:38जाते हैं तो तैयार होकर ही तो [संगीत]
  7709. 5:50:40जाते हैं। शिप्रा इस बार थोड़े नरम स्वर
  7710. 5:50:43में बोली। मेरे कहने का भी वही मतलब हुआ
  7711. 5:50:46कि इस समय यूं तैयार [संगीत] होकर कहां जा
  7712. 5:50:48रहे हो? शौर्य ने जवाब के साथ उल्टा सवाल
  7713. 5:50:51भी शिप्रा से कर दिया। बस कुछ काम था।
  7714. 5:50:53[संगीत] किसी से मिलना था इसलिए जा रहा
  7715. 5:50:55हूं। पर तुम यहां क्या कर रही हो? तुम्हें
  7716. 5:50:58दिख नहीं रहा कि मैं यहां क्या कर रही
  7717. 5:51:00हूं? मैं तुमसे पूछ रही हूं। तुम अभी कहां
  7718. 5:51:03जा रहे हो? इस समय [संगीत] कौन सा काम
  7719. 5:51:05होता है? जरूरी है कि किसी काम से ही बाहर
  7720. 5:51:08जाना होगा। मुझे अभी किसी से मिलने जाना
  7721. 5:51:10है। चलो मेरा रास्ता छोड़ो। शौर्य शिप्रा
  7722. 5:51:13के सामने से हटकर पीछे [संगीत] निकलना चाह
  7723. 5:51:15रहा था। पर शिप्रा ने अपना हाथ अड़ाकर
  7724. 5:51:18उसको रोक लिया। पर शौर्य ने जब यह देखा
  7725. 5:51:20[संगीत] कि अभी भी वह उसका रास्ता रोके
  7726. 5:51:22हुए हैं तो वो उसकी आंखों में देखता हुआ
  7727. 5:51:25बोला, "तुम तो वैसे भी अभी मुझसे बातें
  7728. 5:51:27[संगीत] नहीं कर रही थी। तो अब तुम फिर
  7729. 5:51:30मेरा यहां रास्ता क्यों रोक रही हो?
  7730. 5:51:32शिप्रा शौर्य से नजर [संगीत] नहीं मिला
  7731. 5:51:34रही थी। जबकि शौर्य एक टक उसी को देख रहा
  7732. 5:51:37था। मैं कोई तुम्हारा रास्ता [संगीत] नहीं
  7733. 5:51:40रोक रही। यह समय घर से बाहर जाने का नहीं
  7734. 5:51:43है। तुम्हें अगर किसी से मिलने ही जाना है
  7735. 5:51:45तो सुबह चले जाना पर अभी नहीं। अभी जाकर
  7736. 5:51:49सो जाओ। इस समय शिप्रा नाइट ड्रेस में थी।
  7737. 5:51:52पिंक [संगीत] कलर की नाइटी में उसका
  7738. 5:51:54खूबसूरत शरीर शौर्य को अपनी ओर आमंत्रण
  7739. 5:51:57देता प्रतीत हो रहा था। शौर्य बड़ी
  7740. 5:51:59मुश्किल से खुद पर कंट्रोल किए हुए था। सब
  7741. 5:52:02कुछ उसकी उम्मीद के मुताबिक हो रहा था। पर
  7742. 5:52:04शिप्रा की नाराजगी अभी भी बरकरार थी। उसने
  7743. 5:52:08एक कोशिश और करते हुए कहा, अरे मुझे किसी
  7744. 5:52:12से अभी मिलना है तो फिर सुबह तक इंतजार
  7745. 5:52:14करने की क्या जरूरत है? तुम समझा करो।
  7746. 5:52:17मैंने सामने वाले को बोल रखा है कि मैं
  7747. 5:52:19थोड़ी देर में उसके पास पहुंच रहा हूं। इस
  7748. 5:52:22बार शिप्रा आदेश भरे स्वर में बोली,
  7749. 5:52:24[संगीत]
  7750. 5:52:25इतनी रात को तुम कहीं नहीं जाओगे। जिसको
  7751. 5:52:27भी तुमने बोला है अभी आने के लिए उसे फोन
  7752. 5:52:30करके बोल दो कि [संगीत] तुम अभी नहीं आ
  7753. 5:52:32सकते। बस इतनी सी बात है। अगर इतना ही
  7754. 5:52:36मिलना जरूरी है तो सुबह चले जाना। खुद को
  7755. 5:52:40शिप्रा की तरफ से आदेश दिया जाना शौर्य को
  7756. 5:52:42बहुत पसंद आया। यही तो वह चाहता [संगीत]
  7757. 5:52:45था। शिप्रा ऐसे ही उस पर अपना हक जताए।
  7758. 5:52:49शौर्य थोड़ी देर अपनी जगह पर खड़ा शिप्रा
  7759. 5:52:52को देखता रहा। जब उसने देखा कि वो उसके
  7760. 5:52:54सामने से नहीं हटने वाली तो वह हार मानते
  7761. 5:52:57हुए बोला ठीक है मैं अभी नहीं जाऊंगा जाओ
  7762. 5:53:01तुम जाकर सो जाओ पहले तुम जाकर अपने कपड़े
  7763. 5:53:04चेंज करो फिर मैं चली [संगीत] जाऊंगी
  7764. 5:53:07शिप्रा को अभी भी शौर्य पर विश्वास नहीं
  7765. 5:53:09हो रहा था उसे लग रहा था कि जैसे ही वह
  7766. 5:53:11अपने कमरे में जाएगी शौर्य पीछे से निकल
  7767. 5:53:14जाएगा शौर्य समझ गया कि अगर वह कमरे के
  7768. 5:53:17अंदर नहीं गया तो वह ऐसे ही उसके सामने
  7769. 5:53:20खड़ी रहेगी इसलिए [संगीत] वह पलटा और और
  7770. 5:53:22अपने कमरे में चला गया। अंदर जाकर उसने
  7771. 5:53:25अपने कपड़े चेंज किए और [संगीत] फिर यह
  7772. 5:53:27देखने के लिए बाहर आया कि शिप्रा अभी भी
  7773. 5:53:30बाहर खड़ी है या अपने कमरे में चली गई।
  7774. 5:53:33दरवाजा खोलते ही उसने देखा कि [संगीत]
  7775. 5:53:35शिप्रा अभी भी उसके दरवाजे के बाहर खड़ी
  7776. 5:53:37थी। वो उसे हाथ जोड़ते हुए बोला, अरे मेरी
  7777. 5:53:40मां बोला ना अब नहीं जाऊंगा। जाकर सो जाओ।
  7778. 5:53:45तुम भी चल के मेरे कमरे में ही सो जाओ।
  7779. 5:53:48इतना कहकर शिप्रा ने शौर्य का शर्ट अपनी
  7780. 5:53:50दो उंगलियों के बीच में पकड़ा और उसको
  7781. 5:53:52खींचते हुए अपने कमरे की तरफ बढ़ गई।
  7782. 5:53:55शौर्य ना चाहते हुए भी उसके साथ खींचता
  7783. 5:53:57हुआ चला गया। शिप्रा अपने कमरे में पहुंची
  7784. 5:54:01और उसने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद किया
  7785. 5:54:03और अपने [संगीत] बिस्तर पर जाकर लेट गई।
  7786. 5:54:06शौर्य को लगा अब शायद शिप्रा मान जाए।
  7787. 5:54:09इसलिए वह भी उसके पास जाकर लेट गया। पर वो
  7788. 5:54:12उसके और करीब आता उससे पहले ही शिप्रा ने
  7789. 5:54:14अपनी और उसके बीच [संगीत] में तकिया रख
  7790. 5:54:15दिया और उसे वर्न करते हुए बोली तकिए के
  7791. 5:54:19इस तरफ होने की कोई जरूरत नहीं है। इसलिए
  7792. 5:54:21[संगीत] अपनी सीमा में ही रहना। यह देखकर
  7793. 5:54:24शौर्य को खुद पर तरस आया। उसने सोचा यह
  7794. 5:54:27[संगीत] भी कोई बात हुई। सामने मिठाई पड़ी
  7795. 5:54:29हुई है और वो चख भी नहीं सकता। इसलिए वह
  7796. 5:54:32बेचारगी से बोला अगर यही करना था तो फिर
  7797. 5:54:36मुझे अपने कमरे [संगीत] में लाने की क्या
  7798. 5:54:37जरूरत थी? इससे बढ़िया तो मैं अपने कमरे
  7799. 5:54:40में ही था। शिप्रा शौर्य पर तंज कसती हुई
  7800. 5:54:43बोली, तुम्हें ही तो मेरे साथ सोना था ना,
  7801. 5:54:46तो अब ऐसे ही सो। तुम तो मुझे माफ ही करो।
  7802. 5:54:49यह तो मेरे लिए सजा ही हो गई। इससे बढ़िया
  7803. 5:54:52तो मैं अपने कमरे में ही रहूंगा। [संगीत]
  7804. 5:54:54इतना कहकर शौर्य फिर से बेड से उठ गया और
  7805. 5:54:57दरवाजे की तरफ बढ़ गया। शौर्य को दरवाजे
  7806. 5:55:00की तरफ बढ़ता देखकर शिप्रा [संगीत] भी
  7807. 5:55:02उठकर बैठ गई और बोली, फिर से कहां जा रहे
  7808. 5:55:05हो? तुम्हारा कोई भरोसा नहीं।
  7809. 5:55:07[संगीत]
  7810. 5:55:07फिर से कहीं बाहर चले गए तो हद है। अब
  7811. 5:55:10इतना भी विश्वास नहीं [संगीत] रहा मुझ पर।
  7812. 5:55:12अगर ऐसा ही है तो फिर ठीक है। तुम ऐसा
  7813. 5:55:15करना मेरे कमरे के दरवाजे को बाहर से बंद
  7814. 5:55:18कर देना। [संगीत]
  7815. 5:55:19ठीक है। फिर तो मैं कहीं नहीं जा पाऊंगा।
  7816. 5:55:22इतना कहकर शौर्य ने कमरे का दरवाजा खोला
  7817. 5:55:24और अपने कमरे में चला गया। शौर्य तो
  7818. 5:55:27शिप्रा के कमरे से चला गया। पर शिप्रा की
  7819. 5:55:30नींद उड़ गई। अब उसे अपने कमरे में अकेले
  7820. 5:55:32बेचैनी होने लगी। थोड़ी देर उसने कोशिश
  7821. 5:55:35किया कि वह सो जाए। पर वह इसमें कामयाब
  7822. 5:55:38नहीं हो पाई। वो उठकर अपने कमरे से बाहर
  7823. 5:55:40चली गई। शिप्रा शौर्य के कमरे के बाहर
  7824. 5:55:43पहुंची तो उसने देखा दरवाजा बंद था।
  7825. 5:55:46[संगीत] वो थोड़ी देर बाहर खड़ी सोचती रही
  7826. 5:55:48कि क्या करें पर उसके दिल को चैन नहीं
  7827. 5:55:50आया। आखिर हार कर उसने दरवाजे को अंदर की
  7828. 5:55:53तरफ धक्का दिया तो उसने पाया कि दरवाजा
  7829. 5:55:56अंदर से बंद था। वो मन ही मन बुदबुदाई। यह
  7830. 5:56:00बढ़िया [संगीत] है। एक तो मुझे गुस्सा
  7831. 5:56:02दिलाया और अब खुद ही भाव खा रहा है। उसका
  7832. 5:56:05तो मन किया कि वह वापस अपने कमरे में चली
  7833. 5:56:07जाए। पर फिर उसे लगा कि कहीं उसके जाने के
  7834. 5:56:10बाद वो फिर [संगीत] से तैयार होकर बाहर ना
  7835. 5:56:12चला जाए। यह सोचकर उसने दरवाजे को नॉक
  7836. 5:56:15किया। कमरे के अंदर से शौर्य की आवाज आई।
  7837. 5:56:18[संगीत]
  7838. 5:56:18अरे मैं सो रहा हूं। मैंने कहा ना मैं
  7839. 5:56:21कहीं नहीं जाऊंगा। अगर तुम्हें विश्वास
  7840. 5:56:23नहीं है तो तुम बाहर [संगीत] से दरवाजा
  7841. 5:56:25बंद कर दो। शिप्रा रूखे स्वर में बोली।
  7842. 5:56:28दरवाजा खोलो। कुछ पल के बाद ही दरवाजा खुल
  7843. 5:56:32गया। शौर्य सामने ही खड़ा था। शिप्रा
  7844. 5:56:35थोड़ी देर उसको यूं ही खड़े देखती रही।
  7845. 5:56:38फिर वो उसका शर्ट पकड़ कर खींचती हुई अपने
  7846. 5:56:41कमरे में लेकर चली गई। बेड के पास जाकर
  7847. 5:56:44उसने जो बेड पर बीच [संगीत] में तकिया रखा
  7848. 5:56:47हुआ था उसको हटा दिया और बोली अब सो जाओ
  7849. 5:56:51यहीं पर। और अब कोई ड्रामा करने की जरूरत
  7850. 5:56:53नहीं है। [संगीत] इसके बाद शिप्रा ने वापस
  7851. 5:56:56जाकर दरवाजा अंदर से बंद किया और आकर बेड
  7852. 5:57:00पर लेट गई। शौर्य भी दूसरे किनारे बेड पर
  7853. 5:57:03लेट गया था। अब दोनों के बीच से तकिए की
  7854. 5:57:06दीवार भी हट गई थी। इसके बाद भी अब शौर्य
  7855. 5:57:09की हिम्मत नहीं हो रही थी कि वह शिप्रा के
  7856. 5:57:12पास जाए। शौर्य ने जब देखा था कि शिप्रा
  7857. 5:57:15ने बीच से तकिया हटा दिया है। वो भी सिर्फ
  7858. 5:57:18इसलिए कि वह फिर से वापस अपने कमरे में ना
  7859. 5:57:21चला जाए। तो उसे लगा कि कहीं शिप्रा
  7860. 5:57:23[संगीत] यह तो नहीं सोच रही है कि वह
  7861. 5:57:25सिर्फ उसके पास जाने के लिए ही उसके साथ
  7862. 5:57:27सोना चाहता है। इस सोच के मन में आते ही
  7863. 5:57:30शौर्य को खुद पर ग्लानी होने लगी। इसलिए
  7864. 5:57:33उसने दोबारा उसके पास जाने की कोशिश नहीं
  7865. 5:57:36की। दूसरी तरफ शिप्रा बेड के दूसरी साइड
  7866. 5:57:39में लेटी हुई थी और वह उम्मीद कर रही थी
  7867. 5:57:41कि तकिया बीच से हट जाने के कारण शौर्य
  7868. 5:57:44जरूर उसके पास आने की कोशिश करेगा। पर
  7869. 5:57:47[संगीत] जब थोड़ी देर ऐसा कुछ नहीं हुआ तो
  7870. 5:57:49उसने पलट कर उसकी तरफ देखा। यह [संगीत]
  7871. 5:57:52देखकर वह और हैरान रह गई कि शौर्य बेड के
  7872. 5:57:55एकदम दूसरी साइड में दूसरी तरफ मुंह करके
  7873. 5:57:58लेटा हुआ था। यह देखकर उसे धक्का सा लगा
  7874. 5:58:00कि उसको क्या हो गया।
  7875. 5:58:02[संगीत]
  7876. 5:58:02अब उसे खुद यह अच्छा नहीं लग रहा था कि एक
  7877. 5:58:04बेड पर होते हुए भी शौर्य उससे इतनी दूर
  7878. 5:58:07था। उसे उस पर गुस्सा भी आ रहा था। पता
  7879. 5:58:10[संगीत] नहीं खुद को क्या समझता है। पर जब
  7880. 5:58:13थोड़ी देर शिप्रा इसी स्थिति में रही तो
  7881. 5:58:15उससे रहा नहीं गया। उसने खुद में ही सोचा
  7882. 5:58:18कहीं वो उसके साथ ज्यादा हार्ड तो नहीं हो
  7883. 5:58:21गई। [संगीत] वो थोड़ी देर और इंतजार करती
  7884. 5:58:23रही कि शौर्य उसकी तरफ पलटेगा। पर शौर्य
  7885. 5:58:26ने जो दूसरी साइड करवट ली तो वह उसी
  7886. 5:58:29स्थिति में पड़ा रहा। शिप्रा को लगा अगर
  7887. 5:58:32वह ऐसे ही रही तो सारी रात जागती ही रह
  7888. 5:58:35जाएगी। हद तो यह हो गई कि जब से शौर्य
  7889. 5:58:38लेटा था तब से उसने दोबारा एक शब्द भी
  7890. 5:58:40नहीं बोला था। यह बात शिप्रा को और भी
  7891. 5:58:43बेचैन कर रही थी। जब शिप्रा से और नहीं
  7892. 5:58:46रहा गया तो वह खुद शौर्य के करीब गई और
  7893. 5:58:49उसको पीछे से अपनी बाहों में भर लिया और
  7894. 5:58:51उसके पीठ से एकदम सट कर सो गई। शौर्य जो
  7895. 5:58:55कि खुद अभी तक जाग रहा था। कई ख्याल उसके
  7896. 5:58:58मन में चल रहे थे। पर इसी बीच जब उसने
  7897. 5:59:00महसूस किया कि शिप्रा ने पीछे से उसको
  7898. 5:59:03अपनी बाहों में भर लिया है तो उसे एक
  7899. 5:59:05सुकून मिला। वो [संगीत] कुछ बोला नहीं पर
  7900. 5:59:08उस सुखद अनुभूति को फील करने लगा जो उसकी
  7901. 5:59:10आत्मा को संतृप्त कर रही थी। कुछ देर पहले
  7902. 5:59:13[संगीत] जो उसके मन में ग्लानी का भाव
  7903. 5:59:15जन्म ले रहा था। अब उसका कोई नामोनिशान
  7904. 5:59:18नहीं था। अब आगे क्या होगा? [संगीत]
  7905. 5:59:20कब तक इनका रूठना मनाना चलता रहेगा? क्या
  7906. 5:59:23कल शिप्रा शौर्य की हकीकत से वाकिफ हो
  7907. 5:59:26पाएगी? या कुछ ऐसा होगा पार्टी में जो
  7908. 5:59:28सबकी जिंदगी ही चेंज हो जाए। कहते हैं
  7909. 5:59:31खामोशी की भी अपनी एक भाषा होती है। शौर्य
  7910. 5:59:35और शिप्रा दोनों एक दूसरे के पास [संगीत]
  7911. 5:59:38थे। पर दोनों में से बोल कोई भी कुछ नहीं
  7912. 5:59:41रहा था। पर भावनाएं एक दूसरे के पास पहुंच
  7913. 5:59:44रही थी। शिप्रा शौर्य से नाराज थी। पर
  7914. 5:59:47[संगीत] उससे दूर होने की कल्पना उसको
  7915. 5:59:49डराती थी। कहा तो पहले वह इस रिश्ते को
  7916. 5:59:52इसलिए निभाना चाहती थी [संगीत] कि उसके
  7917. 5:59:54घरवाले उसको दोबारा शादी के लिए प्रेशराइज
  7918. 5:59:57नहीं करेंगे। पर जाने कब शौर्य उसके दिल
  7919. 5:59:59को भा गया उसे पता ही नहीं चला। अब तो
  7920. 6:00:02हालत यह हो गई कि शौर्य के बिना वो अपनी
  7921. 6:00:05जिंदगी की कल्पना ही नहीं कर सकती थी। अब
  7922. 6:00:07उसका सबसे बड़ा डर इसी बात से था कि कोई
  7923. 6:00:10और लड़की उसकी जिंदगी में ना [संगीत] आ
  7924. 6:00:12जाए। शौर्य शिप्रा की समीप से रोमांचित
  7925. 6:00:15था। पर वो अपनी स्थिति में ही जड़ा था। ना
  7926. 6:00:18ही हिल रहा था ना अपनी पोजीशन चेंज
  7927. 6:00:20[संगीत] कर रहा था। उसे डर था कि अगर उसने
  7928. 6:00:23कोई और हरकत की तो शिप्रा फिर से उससे दूर
  7929. 6:00:26चली जाएगी। शिप्रा उसके पास तो आ गई थी पर
  7930. 6:00:29वो उससे बोल्ड कुछ [संगीत] नहीं रही थी।
  7931. 6:00:31शौर्य को अपनी गर्दन पर शिप्रा की सांसों
  7932. 6:00:33की गर्मी महसूस हो रही थी जिसके [संगीत]
  7933. 6:00:35कारण उसका शरीर रोमांचित हुए जा रहा था।
  7934. 6:00:38पीठ पर उसके उरोज की चुभन उसकी बेचैनी को
  7935. 6:00:41और भी बढ़ा रही थी। जब उसी स्थिति में
  7936. 6:00:44उसका रहना मुश्किल हो [संगीत] गया तो वह
  7937. 6:00:46शिप्रा की ओर पलट गया। शौर्य का फेस अपने
  7938. 6:00:48सामने देखकर शिप्रा ने अपना हाथ पीछे कर
  7939. 6:00:51लिया। शौर्य ने हिम्मत करके अपना हाथ उसके
  7940. 6:00:54कमर पर रखा तो शिप्रा ने उसे झटक कर अलग
  7941. 6:00:56कर दिया। अब यह क्या है? अभी तो तुम मेरे
  7942. 6:00:59पास आई थी तो अब मेरा हाथ क्यों झटक दिया?
  7943. 6:01:02शौर्य मासूमियत [संगीत] से बोला। उसकी
  7944. 6:01:04हालत ऐसी हो गई थी कि आवाज भी उसके गले से
  7945. 6:01:07बड़ी मुश्किल से निकल रही थी। अभी मैंने
  7946. 6:01:10तुमको इसकी इजाजत [संगीत] नहीं दी है।
  7947. 6:01:12शिप्रा सपाट स्वर में बोली, "यह क्या बात
  7948. 6:01:15हुई? अभी तो तुम खुद ही मेरे करीब आई थी
  7949. 6:01:17और मुझे अपने ऊपर हाथ रखने से भी रोक रही
  7950. 6:01:20हो।" शौर्य शिकायत करता हुआ बोला, वो मेरी
  7951. 6:01:23मर्जी थी। पर मैंने तुम्हें ऐसा करने की
  7952. 6:01:26इजाजत नहीं दी। शिप्रा ने फिर से अपना
  7953. 6:01:28उद्देश्य स्पष्ट [संगीत] किया। यह तो गलत
  7954. 6:01:31बात है। पेट्रोल छिड़क कर उसको आग दिखाओगी
  7955. 6:01:34और यह [संगीत] भी चाहोगी कि पेट्रोल आग भी
  7956. 6:01:36नहीं पकड़े। शौर्य बेचारगी से बोला अब तुम
  7957. 6:01:39जो समझो यही तुम्हारी पनिशमेंट है। शिप्रा
  7958. 6:01:43लापरवाही से बोली अरे मैंने उस गलती के
  7959. 6:01:46लिए सॉरी बोला तो देखो ऐसे अपने चाहने
  7960. 6:01:48वाले को तड़पाना अच्छी बात नहीं [संगीत]
  7961. 6:01:50है। शौर्य फिर से शिप्रा के कंधे पर हाथ
  7962. 6:01:53रखते हुए बोला मुझे पता है क्या अच्छी बात
  7963. 6:01:56है और क्या बुरी बात। इसलिए [संगीत] अब
  7964. 6:01:58यहां तुम्हारा कोई भी इमोशनल ट्रैप अब काम
  7965. 6:02:01नहीं करने वाला। शिप्रा दृढ़ता दिखाती हुई
  7966. 6:02:04बोली। शौर्य को लगा शिप्रा उससे अब खेल
  7967. 6:02:07रही है। इसलिए [संगीत] हार कर उसने पूछा
  7968. 6:02:10क्या तुम इतना बताने का कष्ट करोगी कि
  7969. 6:02:12तुम्हारा यह पनिशमेंट कब तक चालू रहेगा?
  7970. 6:02:14अभी तो भूल ही जाओ कि तुम्हारी पनिशमेंट
  7971. 6:02:16खत्म होने वाली है। शिप्रा लापरवाही से
  7972. 6:02:19[संगीत] बोली तो तुमने पक्का कर लिया है
  7973. 6:02:22कि अभी मुझे तुम्हें छूने की इजाजत नहीं
  7974. 6:02:24मिलेगी। शौर्य कंफर्म करते हुए बोला अभी
  7975. 6:02:27भी वह उम्मीद कर रहा था कि शायद [संगीत]
  7976. 6:02:29शिप्रा उससे खेल रही है और वह जल्दी ही
  7977. 6:02:32मान जाएगी। तो और क्या तुम क्या समझते हो?
  7978. 6:02:35इतनी आसानी से तुम्हें माफी मिल जाएगी।
  7979. 6:02:38शिप्रा के चेहरे पर कोई भाव नहीं था।
  7980. 6:02:41शौर्य कुछ देर तक अपना चेहरा मासूम बनाकर
  7981. 6:02:43शिप्रा की ओर देखता रहा कि शायद उसे
  7982. 6:02:45[संगीत] उस पर दया आ जाए। पर जब शिप्रा ने
  7983. 6:02:48कोई रिएक्शन नहीं दिया तो फिर वह दोबारा
  7984. 6:02:50दूसरी तरफ करवट बदल कर सो [संगीत] गया। पर
  7985. 6:02:53उसके दूसरी तरफ करवट बदलते ही शिप्रा फिर
  7986. 6:02:55से उसके पास आ गई और उसके पीठ से सट कर सो
  7987. 6:02:58[संगीत] गई। साथ में उसने उसको अपनी बाहों
  7988. 6:03:00में भी भर लिया था। अब यह क्या है? खुद तो
  7989. 6:03:04तुम मुझे उकसा रही हो और जब मैं पास आने
  7990. 6:03:06की कोशिश करता [संगीत] हूं तो मुझे दूर कर
  7991. 6:03:08देती हो। शौर्य गर्दन पीछे करके शिकायत
  7992. 6:03:11करता हुआ बोला। बोला तो यही तुम्हारी
  7993. 6:03:14पनिशमेंट है। शिप्रा ने उसी अवस्था में
  7994. 6:03:17जवाब दिया। इससे अच्छा तो वही था कि बीच
  7995. 6:03:20में तकिया लगा हुआ था। शौर्य मायूसी भरे
  7996. 6:03:24स्वर में बोला। पर शिप्रा ने कुछ बोला
  7997. 6:03:26नहीं। एक [संगीत] बार फिर से शिप्रा के
  7998. 6:03:28पास होने से शौर्य की बेचैनी बढ़ गई। वो
  7999. 6:03:31समझ गया कि शिप्रा जानबूझकर उसे परेशान कर
  8000. 6:03:34रही है। देखो अगर तुम ऐसे मुझे छेड़ती रही
  8001. 6:03:37तो फिर मैं अपनी सीमा तोड़ दूंगा तो फिर
  8002. 6:03:40शिकायत मत करना। शौर्य शिप्रा को वार्निंग
  8003. 6:03:43देते हुए बोला। शिप्रा [संगीत] फिर भी
  8004. 6:03:44खामोश रही। एक बार फिर से शौर्य शिप्रा की
  8005. 6:03:47तरफ पलट गया। पर इस बार शिप्रा ने कोई
  8006. 6:03:50रिएक्शन नहीं दिया। वो शौर्य को अपनी
  8007. 6:03:52बाहों में भरी हुई आंखें बंद करके सोई
  8008. 6:03:54रही। शौर्य [संगीत] ने जब शिप्रा को कुछ
  8009. 6:03:56भी रिएक्ट करते नहीं देखा तो उसने पहले
  8010. 6:03:59हल्के से उसके कंधे पर हाथ रखा। फिर भी
  8011. 6:04:01शिप्रा [संगीत] ने कोई प्रतिरोध नहीं
  8012. 6:04:03किया। तो फिर शौर्य धीरे से अपने हाथ को
  8013. 6:04:05उसके कमर पर ले गया। शिप्रा ने फिर भी कोई
  8014. 6:04:08प्रतिरोध [संगीत] नहीं किया। तो शौर्य का
  8015. 6:04:10हौसला थोड़ा और बढ़ गया और उसने उसको कसकर
  8016. 6:04:13अपनी बाहों में भर लिया। शिप्रा भी उसकी
  8017. 6:04:15बाहों में और सिमट गई। शौर्य [संगीत] को
  8018. 6:04:18लगा शायद शिप्रा उसकी बात को सुनकर पिघल
  8019. 6:04:20गई है और उसने उसे माफ कर दिया है। वो खुश
  8020. 6:04:23होते हुए बोला तुम्हें पता है तुम्हें
  8021. 6:04:25बाहों में भरकर [संगीत] लग रहा है जैसे
  8022. 6:04:27मैंने सारा जहां पा लिया। शौर्य की बात
  8023. 6:04:30सुनने के बाद भी शिप्रा कुछ नहीं बोली। वो
  8024. 6:04:33खामोशी से आंखें [संगीत] बंद किए शौर्य की
  8025. 6:04:35बाहों में सोई रही। कुछ तो बोलो। तुम्हारी
  8026. 6:04:38प्यार भरी बातें सुनने के लिए मेरे कान
  8027. 6:04:40तरस [संगीत] रहे हैं। शौर्य शिप्रा की
  8028. 6:04:43खामोशी से परेशान होकर बोला, ज्यादा खुश
  8029. 6:04:46होने की जरूरत नहीं है। तुम्हें मैंने
  8030. 6:04:48अपने पास आने दिया है। इसका मतलब यह नहीं
  8031. 6:04:50है कि मैंने तुम्हें माफ कर दिया है। एक
  8032. 6:04:53ही पल में शौर्य का सारा उत्साह ठंडा हो
  8033. 6:04:55गया। जिस गर्मजशी से उसने शिप्रा को अपनी
  8034. 6:04:58बाहों में जकड़ा था, अगले ही पल वो पकड़
  8035. 6:05:00ढीली पड़ गई। उसका सारा रोमांच खत्म हो
  8036. 6:05:03गया। उसने अपना हाथ वापस ले लिया। उसके मन
  8037. 6:05:06पर जो शिप्रा का नशा छाया हुआ था, वह नशा
  8038. 6:05:09भी खत्म हो गया। अब वह बेड पर छत की ओर
  8039. 6:05:12मुंह करके लेट गया। शिप्रा का एक हाथ अभी
  8040. 6:05:15भी शौर्य के सीने पर था। पर शौर्य ने अपने
  8041. 6:05:17हाथ को समेट लिया था। वो छत को घूरते हुए
  8042. 6:05:20आंख लगने का इंतजार करने लगा। उसने
  8043. 6:05:23[संगीत] सोचा उसने ऐसी भी क्या गलती कर दी
  8044. 6:05:25जो वो इतना नाराज हो गई। वो तो सिर्फ एक
  8045. 6:05:28मजाक कर रहा था। उसने चेहरा घुमाकर शिप्रा
  8046. 6:05:31की ओर देखा तो अभी भी उसे उसकी आंखें बंद
  8047. 6:05:34दिखाई दी। उसने सोचा कहीं वह सो नहीं गई।
  8048. 6:05:38फिर उसने शिप्रा [संगीत] को देखते हुए
  8049. 6:05:39अपने मन में ही सोचा कुछ भी हो वो उसके
  8050. 6:05:42पास तो है। यही उसके लिए काफी है। [संगीत]
  8051. 6:05:45उसका रूठना मनाना तो चलता ही रहेगा। भले
  8052. 6:05:48अभी नाराज है पर उसे यकीन था कि कल तक फिर
  8053. 6:05:51से सब नॉर्मल हो जाएगा। [संगीत] यह सोचकर
  8054. 6:05:54उसको थोड़ा सुकून मिला और उसने अपनी आंखें
  8055. 6:05:56बंद कर ली। पर दूसरी तरफ शिप्रा को शौर्य
  8056. 6:05:59का यह बदलता व्यवहार थोड़ा अजीब भी लगा।
  8057. 6:06:02एक ही पल में शौर्य [संगीत] का एक्शन इतना
  8058. 6:06:04चेंज हो गया जैसे लगा अब उसे शिप्रा का
  8059. 6:06:07कोई मोह ही नहीं है। शौर्य का यह विरक्त
  8060. 6:06:09[संगीत] व्यवहार देखकर शिप्रा को थोड़ा
  8061. 6:06:11बुरा भी लगा। उसने अपनी आंखें खोलकर शौर्य
  8062. 6:06:14के चेहरे की तरफ देखा तो उसकी आंखें बंद
  8063. 6:06:16थी। इस समय उसे शौर्य [संगीत] का चेहरा
  8064. 6:06:19एकदम शांत नजर आ रहा था। उसके चेहरे की
  8065. 6:06:22सौम्यता उसे [संगीत] अपनी ओर आकर्षित भी
  8066. 6:06:24कर रही थी। पर अगले ही पल उसने अपने मन को
  8067. 6:06:27समझाया। इस समय कमजोर नहीं पड़ना है। उसे
  8068. 6:06:31अगर बुरा लगा है तो उसको [संगीत] भी थोड़ा
  8069. 6:06:33पनिशमेंट तो बनता है। यह ख्याल मन में आते
  8070. 6:06:36ही उसने अपनी आंखें बंद कर ली और शौर्य को
  8071. 6:06:39और कसकर अपनी बाहों में भर लिया। दूसरे
  8072. 6:06:42दिन सुबह शौर्य की आंख खुली तो उसने घड़ी
  8073. 6:06:44की ओर देखा। 7:00 बजने वाले [संगीत] थे।
  8074. 6:06:47आज उसकी पूरी फैमिली इंडिया वापस आ रही
  8075. 6:06:50थी। शौर्य को विक्रम के साथ उनको पिक करने
  8076. 6:06:52भी जाना था। यह डिसाइड पहले ही हो गया था
  8077. 6:06:55कि वह आते ही राजमहल ही जाएंगे। सुबह 9:00
  8078. 6:06:58बजे उनकी फ्लाइट आने वाली थी। 7:00 बज गए
  8079. 6:07:01थे। शौर्य जानना चाहता था कि विक्रम
  8080. 6:07:03[संगीत] उन लोगों को लाने के लिए निकला या
  8081. 6:07:05नहीं। शौर्य ने गौर किया कि शिप्रा का सिर
  8082. 6:07:08उसके सीने पर था और बाहें [संगीत] उसके
  8083. 6:07:10पेट पर लिपटी हुई थी और वह अभी तक बेसुध
  8084. 6:07:13सोई हुई थी। सोते हुए में उसका प्यारा
  8085. 6:07:16चेहरा इस बात की गवाही दे रहा था कि उससे
  8086. 6:07:18खूबसूरत और मासूम तो कोई हो ही नहीं सकता।
  8087. 6:07:21शौर्य को [संगीत] उठना था। इसलिए उसने
  8088. 6:07:23आराम से शिप्रा का सिर अपने सीने से हटाकर
  8089. 6:07:26आराम [संगीत] से तकिए पर रखा और उसकी
  8090. 6:07:28बाहों को प्यार से अपने ऊपर से हटाया और
  8091. 6:07:31बिना कोई आवाज [संगीत] किए बेड से बाहर आ
  8092. 6:07:33गया। वो अपने कमरे में पहुंचा और विक्रम
  8093. 6:07:36को फोन लगाया। विक्रम के फोन उठाने पर
  8094. 6:07:39उसने पूछा क्या तुम एयरपोर्ट पहुंच गए? बस
  8095. 6:07:42पहुंचने वाला ही हूं बॉस। विक्रम ने जवाब
  8096. 6:07:45दिया। [संगीत] और आप निकले कि नहीं बॉस?
  8097. 6:07:49बस तैयार होकर निकल ही रहा हूं। चिंता मत
  8098. 6:07:52करो। समय से पहुंच जाऊंगा। शौर्य ने भी
  8099. 6:07:55जवाब दिया। फोन रखने के बाद शौर्य जल्दी
  8100. 6:07:59से बाथरूम में गया और तैयार होकर बाहर
  8101. 6:08:02निकला। 10 मिनट बाद ही वो अपनी कार में
  8102. 6:08:05एयरपोर्ट [संगीत] की तरफ जा रहा था।
  8103. 6:08:07एयरपोर्ट पहुंचकर उसने अपनी कार को
  8104. 6:08:09पार्किंग में लगाया और विक्रम को फोन
  8105. 6:08:11मिलाया। अराइवल वाले गेट के पास ही विक्रम
  8106. 6:08:14शौर्य को मिल गया। अब बस फ्लाइट के लैंड
  8107. 6:08:17होने की देर थी। लगभग आधे घंटे के बाद
  8108. 6:08:21फ्लाइट लैंड कर गई। शौर्य लगभग [संगीत] 89
  8109. 6:08:24महीने के बाद अपने पेरेंट्स से मिल रहा
  8110. 6:08:26था। उसकी आंखों में मिक्स इमोशंस उमड़ रहे
  8111. 6:08:29थे। [संगीत] आखिरकार उसे गेट से बाहर आते
  8112. 6:08:32हुए अपने पापा मम्मी और बहन नजर आ गए।
  8113. 6:08:35शौर्य भाग [संगीत] कर उनके पास पहुंचा और
  8114. 6:08:38अपने मम्मी पापा को प्रणाम किया और अपनी
  8115. 6:08:40बहन का बाल खींचते हुए बोला हैप्पी बर्थडे
  8116. 6:08:43मेरी तीखी मिर्ची। मम्मी देखो भैया फिर से
  8117. 6:08:46मेरा नाम बिगाड़ रहे हैं। नीलिमा अपनी मां
  8118. 6:08:49से [संगीत] शिकायत करते हुए बोली, पर अगले
  8119. 6:08:51ही पल वह शौर्य के सीने से भी लग गई।
  8120. 6:08:54नीलिमा से अलग होने के बाद कल्पना जी आकर
  8121. 6:08:56शौर्य को अपनी बाहों में भर लिया। तुम्हें
  8122. 6:08:59अपनी मां की थोड़ी भी फिक्र नहीं है ना?
  8123. 6:09:02तुमसे यह भी नहीं होता कि तुम समय-समय पर
  8124. 6:09:04अपनी मां को अपनी खबर भेज भी दिया करो।
  8125. 6:09:07तुम तो यहां आकर एकदम पराए हो गए हो।
  8126. 6:09:09[संगीत] ऐसा कुछ नहीं है मां। यह तो मैं
  8127. 6:09:12जानबूझकर करता था। तभी तो तुम यहां वापस
  8128. 6:09:14[संगीत] आई हो। नहीं तो अभी भी वही लंदन
  8129. 6:09:18में पड़ी रहती। शौर्य सफाई [संगीत] देता
  8130. 6:09:20हुआ बोला, सुन रहे हो इसकी बात? अब तो यह
  8131. 6:09:24हमसे भी बातें बनाने लगा है। कल्पना जी
  8132. 6:09:26सूर्यभान [संगीत] जी से शौर्य की शिकायत
  8133. 6:09:28करते हुए बोली, "तुम मुझे क्या सुना रही
  8134. 6:09:31हो? तुम खुद देखो। आखिर यह सब तुम्हारी
  8135. 6:09:33लाड प्यार के कारण ही तो हुआ है।"
  8136. 6:09:36सूर्यभान जी उल्टा कल्पना जी को ही दोष
  8137. 6:09:38देते हुए बोले, "अब रहने भी दो मां।" तुम
  8138. 6:09:41कौन सा किस्सा लेकर बैठ गई? अब तुम यहां आ
  8139. 6:09:44गई हो ना? अब तो तुम्हारा ही राज चलेगा।
  8140. 6:09:47शौर्य बात को [संगीत] टालने की नियत से
  8141. 6:09:48बोला, मैं तो करती हूं मां। जल्दी से तुम
  8142. 6:09:51मेरे लिए एक भाभी ला दो। फिर देखना भैया
  8143. 6:09:54[संगीत] कभी घर से गायब नहीं रहेंगे।
  8144. 6:09:57नीलिमा भी बीच में शौर्य का टांग खींचती
  8145. 6:09:59हुई बोली। ए तीखी मिर्ची तुम्हें कौन बीच
  8146. 6:10:02में बोलने [संगीत] के लिए बोला? जहां
  8147. 6:10:04जरूरत ना हो वहां अपनी जुबान मत चलाया कर।
  8148. 6:10:07शौर्य नीलिमा को एक हल्की चप जमाते
  8149. 6:10:09[संगीत] हुए बोला। देखो मां आज मेरा
  8150. 6:10:12बर्थडे है और आज के दिन [संगीत] भी भैया
  8151. 6:10:14मुझे थप्पड़ मार रहे हैं। नीली मां तुरंत
  8152. 6:10:17अपनी मां से शिकायत करते हुए बोली। इधर
  8153. 6:10:20मां बेटे [संगीत] का मिलन हो रहा था।
  8154. 6:10:22दूसरी तरफ विक्रम उनके लगेज को ट्रॉली में
  8155. 6:10:24रखकर अपनी कार की तरफ बढ़ गया। अब आगे
  8156. 6:10:27क्या होगा? शाम की पार्टी में कौन-कौन से
  8157. 6:10:30हंगामे देखने को मिलेंगे? क्या सूर्यभान
  8158. 6:10:33[संगीत] राठौर जान पाएंगे कि शौर्य की
  8159. 6:10:35शादी हो रखी है? एयरपोर्ट से लाके अपनी
  8160. 6:10:37फैमिली को श्रवण ने होटल राजकमल में ही
  8161. 6:10:40ठहराया। यह डिसाइड हुआ कि वह लोग शाम को
  8162. 6:10:44सीधा पार्टी [संगीत] में ही राजमहल
  8163. 6:10:45जाएंगे। पार्टी की सारी तैयारी कांता
  8164. 6:10:48प्रसाद जी कर रहे थे। इसलिए उसमें श्रवण
  8165. 6:10:51का कोई रोल नहीं था। बाकी श्रवण के मम्मी
  8166. 6:10:54पापा की जिम्मेवारी विक्रम की थी। उसे ही
  8167. 6:10:58सूर्यभान जी एवं फैमिली को लेकर पार्टी
  8168. 6:11:00में समय से पहुंचना था। श्रवण को होटल
  8169. 6:11:03राजकमल में अपने मम्मी पापा को शिफ्ट
  8170. 6:11:06करते-करते 12:00 बज गए थे। वहां से फ्री
  8171. 6:11:09होकर उसने रत्नाकर शेट्टी के साथ फिल्म को
  8172. 6:11:12लेकर मीटिंग की और शूट शुरू करने के लिए
  8173. 6:11:15शेड्यूल डिसाइड किया। इन सबके बीच उसे
  8174. 6:11:18नीलिमा के लिए गिफ्ट भी खरीदना [संगीत]
  8175. 6:11:20था। आश्चर्य की बात यह थी कि अभी तक उसके
  8176. 6:11:24पास शिप्रा का फोन नहीं आया था। उसने
  8177. 6:11:26जानने की कोशिश भी नहीं की कि श्रवण सुबह
  8178. 6:11:29से कहां है। उसने सोचा उसे एक बार उससे
  8179. 6:11:32बात कर लेनी चाहिए। नहीं [संगीत] तो कहीं
  8180. 6:11:34उसकी नाराजगी और ज्यादा ना बढ़ जाए। आखिर
  8181. 6:11:37आज का दिन उसके लिए बहुत इंपॉर्टेंट था।
  8182. 6:11:40आज शिप्रा उसकी असलियत से वाकिफ होने वाली
  8183. 6:11:43[संगीत] थी। ऐसे समय में उसका नाराज रहना
  8184. 6:11:45सही नहीं था। यह सोचकर ही उसने शिप्रा को
  8185. 6:11:48कॉल करने का सोचा। उसने कॉल लगाया। लंबी
  8186. 6:11:52रिंग जाने के बाद शिप्रा ने कॉल उठाया।
  8187. 6:11:55कहो किस लिए फोन किया? यह क्या? मैंने
  8188. 6:11:59इतने प्यार [संगीत] से फोन किया और इतना
  8189. 6:12:01ठंडा रिएक्शन। कम से कम मेरा दिल रखने के
  8190. 6:12:04लिए ही प्यार से बात कर लेती। ज्यादा
  8191. 6:12:06ड्रामा करने की जरूरत नहीं है। बताओ किस
  8192. 6:12:09लिए फोन किया? हद है। [संगीत] मैंने इसलिए
  8193. 6:12:12फोन किया कि मुझे तुम्हारी प्यारी आवाज
  8194. 6:12:14सुनने को मिलेगी जिससे दिल बहल जाएगा। पर
  8195. 6:12:17तुम तो बातों से ही लाठी मार रही हो।
  8196. 6:12:20तुमने तो मेरा सारा प्यार का नशा ही छीन
  8197. 6:12:22लिया। श्रवण को इस तरह से बातें करते
  8198. 6:12:25देखकर शिप्रा चुप रह गई। फिर उसने पहले की
  8199. 6:12:28तुलना में अपने स्वर को थोड़ा नरम करते
  8200. 6:12:30हुए कहा, ठीक है। बोलो [संगीत] किस लिए
  8201. 6:12:33कॉल किया? आई लव यू। दूसरी तरफ खामोशी छा
  8202. 6:12:38गई। फिर कुछ पल के बाद उधर से आवाज आई।
  8203. 6:12:41क्या इसीलिए फोन किया था? अब तुम बोलो।
  8204. 6:12:45क्या? आई लव [संगीत] यू। अब यही बात तुम
  8205. 6:12:48भी तो बोलो। मैं क्यों बोलूं? मुझे नहीं
  8206. 6:12:51बोलना। तो क्या तुम मुझे प्यार नहीं करती?
  8207. 6:12:55मैंने कब कहा कि मैं तुमसे प्यार करती
  8208. 6:12:56हूं। कितनी झूठी ही हो। [संगीत] अभी कल ही
  8209. 6:13:00तो कहा था कि तुम सिर्फ मेरे साथ अपनी
  8210. 6:13:02पूरी जिंदगी बिताना चाहती हो। अब तुम ही
  8211. 6:13:05बताओ इस [संगीत] बात का क्या मतलब हुआ?
  8212. 6:13:07तुम्हें जो मतलब निकालना है निकालते रहो।
  8213. 6:13:09मुझे अभी कुछ नहीं [संगीत] बोलना। यह तो
  8214. 6:13:12गलत बात है। तुम्हें कोई एक बात तो बोलनी
  8215. 6:13:15है। या तो तुम कह [संगीत] दो कि तुम मुझसे
  8216. 6:13:17प्यार करती हो या फिर यहीं कह दो कि तुम
  8217. 6:13:20मुझसे प्यार नहीं करती। [संगीत] मैं कुछ
  8218. 6:13:22नहीं बोलूंगी। यह बात नहीं चलने वाली।
  8219. 6:13:25देखो तुम अभी स्पष्ट कर दोगी [संगीत] तो
  8220. 6:13:28मैं फिर तुम्हें आगे से इस बात के लिए
  8221. 6:13:29परेशान भी नहीं करूंगा। शिप्रा अजीब
  8222. 6:13:32स्थिति में फंस गई। उसे कोई जवाब देते
  8223. 6:13:35नहीं बना तो वो बोली ठीक है मैं फोन रख
  8224. 6:13:39रही हूं। यह क्या बात हुई? तुमने तो जवाब
  8225. 6:13:42ही नहीं दिया और फोन रखने की बात कर रही
  8226. 6:13:44हो। अगर इतना ही मुश्किल है तो यहीं
  8227. 6:13:47[संगीत] कह दो कि तुम मुझे प्यार नहीं
  8228. 6:13:49करती। मैं तुम्हारी इसी बात को सच मान
  8229. 6:13:51लूंगा। वैसे किसी बात का जवाब नहीं देना
  8230. 6:13:54भी अपने आप में जवाब ही होता है कि सामने
  8231. 6:13:57वाला अपने प्यार का इजहार कर रहा है और
  8232. 6:14:00सामने से जवाब नहीं आता तो इसका मतलब
  8233. 6:14:02इंकार ही होता है। अपने आप कुछ भी मतलब मत
  8234. 6:14:05निकालो। मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा है। मैं
  8235. 6:14:08समझ गया। तुम मेरा दिल दुखाना नहीं चाहती।
  8236. 6:14:11इसलिए साफ-साफ नहीं बोल रही हो। पर चिंता
  8237. 6:14:14मत [संगीत] करो। मैं इतना भी कमजोर नहीं
  8238. 6:14:15हूं। इसको भी सह लूंगा। अब अगर और ड्रामा
  8239. 6:14:19किया ना तो जहां हो वहीं आकर चप जमाऊंगी।
  8240. 6:14:22अब सीधे-सीधे बताओगे कि फोन किस लिए किया
  8241. 6:14:24[संगीत] था? बोला तो तुमसे अपने प्यार का
  8242. 6:14:28इजहार करने का मन किया इसलिए [संगीत] फोन
  8243. 6:14:30किया था। मैं तो समझा था तुम भी मुझे
  8244. 6:14:32प्यार करने लगी हो। पर अच्छा हुआ जल्दी ही
  8245. 6:14:35गलतफहमी दूर हो गई।
  8246. 6:14:38देखा जाए तो यह ठीक भी है। तुम्हारे और
  8247. 6:14:41मेरे स्टेटस में इतना बड़ा अंतर है। इसको
  8248. 6:14:44पाठ पाना इतना आसान भी नहीं है। आज
  8249. 6:14:47सुबह-सुबह ही भांग खा लिया है [संगीत]
  8250. 6:14:49क्या? जो कुछ भी अनापशनाब बक रहे हो। हो
  8251. 6:14:52कहां तुम? आज पता था ना कि राजा साहब की
  8252. 6:14:56पोती के लिए गिफ्ट [संगीत] भी लेना है। पर
  8253. 6:14:58तुम तो सुबह-सुबह ही गायब हो गए हो और अब
  8254. 6:15:00जाकर फोन कर रहे हो और तुम्हारा अलग ही
  8255. 6:15:03ड्रामा चालू है। प्यार में असफल व्यक्ति
  8256. 6:15:06की बात [संगीत] तुम्हें अनापश-शनाप लग रही
  8257. 6:15:08है। खैर कोई बात नहीं। मैं ऊपर वाले से
  8258. 6:15:11दुआ करूंगा कि तुम्हारा प्यार असफल ना हो।
  8259. 6:15:14जहां तक रही राजा साहब की पार्टी में जाने
  8260. 6:15:17की बात तो तुम उसमें चली जाना। मैं जा रहा
  8261. 6:15:20हूं अपने मम्मी पापा से मिलने। शिप्रा का
  8262. 6:15:23तो दिमाग ही घूम गया। श्रवण के मम्मी पापा
  8263. 6:15:26कब आ गए? उसने पहले तो इस बारे में कुछ
  8264. 6:15:28सुना ही नहीं था और आज इतने दिनों बाद
  8265. 6:15:31उसने अपने मम्मी पापा का जिक्र क्यों
  8266. 6:15:33किया? श्रवण की बात ने उसको परेशान कर
  8267. 6:15:36दिया। श्रवण कहीं फोन ना रख दे उससे पहले
  8268. 6:15:38ही वह बोली, सुनो, फोन मत काटना। यह तुम
  8269. 6:15:41किस बारे में बात कर रहे हो? तुमने पहले
  8270. 6:15:44तो कभी अपने मम्मी पापा के बारे में नहीं
  8271. 6:15:45बताया। यह आज इतने समय के बाद तुम्हारे
  8272. 6:15:48मम्मी पापा कहां से आ गए? कहां से आ गए?
  8273. 6:15:51क्या मतलब? वो पहले से ही हैं। तुमने कभी
  8274. 6:15:54पूछा नहीं इसलिए बताया नहीं। तुम्हें वैसे
  8275. 6:15:57भी मेरे बारे में जानने की कभी इच्छा ही
  8276. 6:15:59नहीं हुई। तो मैं कैसे बताता? श्रवण एक
  8277. 6:16:03तरह से आज जो कुछ पार्टी में होगा उसकी
  8278. 6:16:05रूपरेखा पहले से ही बना रहा था कि शिप्रा
  8279. 6:16:08को जब उसके मम्मी पापा के बारे में पता
  8280. 6:16:10चलेगा तो उसे इस बात से झटका ना लगे। अब
  8281. 6:16:13शिप्रा को समझ नहीं आ रहा था कि वो इस नई
  8282. 6:16:16जानकारी पर कैसे रिएक्ट करें। एक तो श्रवण
  8283. 6:16:19की बातों ने पहले ही उसका दिमाग खराब कर
  8284. 6:16:21दिया था। ऊपर [संगीत] से उसके मम्मी पापा
  8285. 6:16:23की जानकारी मिलना उसके लिए एक साथ इन सारी
  8286. 6:16:26जानकारी को एक्सेप्ट करना थोड़ा मुश्किल
  8287. 6:16:28हो रहा था। उसका कोई सासससुर भी है जिनके
  8288. 6:16:32साथ रिश्तों का सामंजस्य बैठाना आसान तो
  8289. 6:16:34नहीं होने वाला। उसके मन में एक डर ने भी
  8290. 6:16:37जन्म ले लिया कि क्या श्रवण के मम्मी पापा
  8291. 6:16:39उसको बहू के रूप में एक्सेप्ट करेंगे।
  8292. 6:16:42पहले ही श्रवण से नाराजगी के कारण वो उससे
  8293. 6:16:44ठीक से [संगीत] बात नहीं कर रही थी। उस पर
  8294. 6:16:46यह नई शॉकिंग खबर ने उसे और परेशान कर
  8295. 6:16:49दिया। उसने श्रवण की बातों की तरफ ध्यान
  8296. 6:16:52दिया तो उसे लगा [संगीत] श्रवण सही तो कह
  8297. 6:16:54रहा है। उसने पहले कभी उसके परिवार के
  8298. 6:16:57बारे में जानने की कोशिश ही नहीं की। एक
  8299. 6:16:59बार उसने अपने दादाजी के बारे में बताया
  8300. 6:17:01तो था जिन्हें मिलने के लिए वह हॉस्पिटल
  8301. 6:17:03में गया था। शिप्रा को थोड़ा बुरा भी लगा
  8302. 6:17:06कि वह अपनी उलझन के बीच श्रवण की
  8303. 6:17:09पारिवारिक स्थिति के बारे में जानने की भी
  8304. 6:17:11कोशिश नहीं की। उनके दादाजी के बारे में
  8305. 6:17:14तो उसे पता था पर उसने उनके बारे में भी
  8306. 6:17:16कभी श्रवण से बात नहीं की। वह खुद को दोषी
  8307. 6:17:19महसूस करने लगी। वह बात को संभालने की
  8308. 6:17:22कोशिश करती हुई बोली, "इस समय कहां हो
  8309. 6:17:25तुम?" मैं अभी तुम्हारे पास आती हूं। फिर
  8310. 6:17:28कुछ सोचकर वो दोबारा बोली, तुम ऐसा क्यों
  8311. 6:17:30नहीं करते? अपने मम्मी पापा को घर ही
  8312. 6:17:32क्यों नहीं ले आते? अभी तो नहीं। [संगीत]
  8313. 6:17:35बाद में देखता हूं। अगर वह तैयार होते हैं
  8314. 6:17:38तो उन्हें लेकर आऊंगा। फिर यह भी दिक्कत
  8315. 6:17:41तो [संगीत] है कि उन्हें तुम्हारे बारे
  8316. 6:17:42में क्या बताऊंगा। उन्हें हमारी शादी के
  8317. 6:17:45बारे में तो कुछ पता भी नहीं है और शायद
  8318. 6:17:47तुम्हें भी [संगीत] यह पसंद ना आए। शिप्रा
  8319. 6:17:50को यह बुरा भी लगा कि श्रवण सब कुछ उसके
  8320. 6:17:52नाम के ऊपर ही टालता जा रहा था। तुम इस सब
  8321. 6:17:55में मुझे क्यों विलेन बना रहे हो? मुझे तो
  8322. 6:17:58आज तक तुम्हारी पारिवारिक स्थिति के बारे
  8323. 6:18:00में पता ही नहीं [संगीत] था। अगर मैं
  8324. 6:18:02जानते-बूझते कुछ करती तो शायद मैं दोषी
  8325. 6:18:04होती। तुम कैसी बात करती हो? मैं तुम्हें
  8326. 6:18:07क्यों विलन बनाऊंगा? ऐसा कुछ नहीं है। मैं
  8327. 6:18:10तुम्हें कैसे दोष दे सकता हूं? मैं समझता
  8328. 6:18:13हूं तुम्हारे साथ पहले ही बहुत बड़ा
  8329. 6:18:15अन्याय हुआ कि तुम्हारी शादी मुझसे
  8330. 6:18:17जबरदस्ती कर दी [संगीत] गई। तुम चिंता मत
  8331. 6:18:20करो। तुम जब तक चाहोगी मैं तब तक तुम्हारे
  8332. 6:18:22लिए तुम्हारी [संगीत] मैरिज स्टेटस को
  8333. 6:18:24बरकरार रखूंगा। शिप्रा को समझ नहीं आ रहा
  8334. 6:18:27था कि कहां [संगीत] की बात कहां को जा रही
  8335. 6:18:29है। और यह सब सिर्फ इसलिए कि उसने श्रवण
  8336. 6:18:33को आई लव यू नहीं कहा।
  8337. 6:18:35यह बेवकूफ इतना भी नहीं समझता कि अभी मैं
  8338. 6:18:38उससे गुस्सा हूं तो इतनी आसानी से यह बात
  8339. 6:18:41कैसे बोल सकती हूं। वैसे तो बड़ा होशियार
  8340. 6:18:44समझता है खुद को पर इतनी छोटी बात उसको
  8341. 6:18:46समझ में नहीं आती। शिप्रा ने निश्चय किया
  8342. 6:18:50कि बात कहीं और कि कहीं और पहुंच जाए उससे
  8343. 6:18:53पहले उसे [संगीत] इसे संभालना पड़ेगा।
  8344. 6:18:56कहां हो तुम इस समय? अब छोड़ो भी। क्या
  8345. 6:18:59करोगी जानकर? मैं कल तुमसे [संगीत]
  8346. 6:19:01मिलूंगा या समय मिला तो हो सकता है राजा
  8347. 6:19:04साहब की पार्टी में आ भी सकता हूं। वहां
  8348. 6:19:06भी मिलना हो सकता है। आई लव यू। तुम यही
  8349. 6:19:11सुनना चाहते थे ना? अब सुन लिया। अब तो सब
  8350. 6:19:14ठीक है। अब बताओ इस समय कहां हो तुम?
  8351. 6:19:18दूसरी तरफ विशाल गढ़ के राजमहल के एक कमरे
  8352. 6:19:21में एक मीटिंग चल रही थी। जिसमें कुछ खास
  8353. 6:19:24लोग ही उपस्थित थे। एक तो जयभान राठौर।
  8354. 6:19:28राजा साहब का बड़ा बेटा यानी [संगीत]
  8355. 6:19:30प्रतीक का पिता। स्वर्णलता जी। स्वर्णलता
  8356. 6:19:34जी का बेटा कुणाल नारंग, प्रतीक और प्रतीक
  8357. 6:19:37का बड़ा भाई अरविंद राठौर। सभी किसी गहरी
  8358. 6:19:41विचार में मग्न थे। मुझे लगता है आप लोग
  8359. 6:19:44फालतू में ही इस बात पर इतनी माथापच्ची कर
  8360. 6:19:47रहे हैं। कुछ भी हो। आखिर वह हमारे परिवार
  8361. 6:19:50का सदस्य ही तो है। भले ही वह इतने वर्षों
  8362. 6:19:53परिवार से दूर रहे हैं। पर इसका मतलब यह
  8363. 6:19:55तो नहीं है कि अब हम उन्हें अपना दुश्मन
  8364. 6:19:57समझने लगे। अरविंद वहां मौजूद खामोशी को
  8365. 6:20:01भंग करता हुआ बोला। सब अगर आपकी तरह ही
  8366. 6:20:04सोचने लगे बड़े भैया तो फिर हो गया
  8367. 6:20:06कल्याण। आप इतनी छोटी सी बात को समझते
  8368. 6:20:08क्यों नहीं हैं? इतने वर्षों तक हमें पता
  8369. 6:20:11था कि हम ही इस संपत्ति के असली मालिक
  8370. 6:20:14हैं। पर इतने वर्षों बाद अचानक हमें यह
  8371. 6:20:16सुनने को मिले कि नहीं? संपत्ति का एक और
  8372. 6:20:19हिस्सेदार भी है तो समझो हमारे ऊपर क्या
  8373. 6:20:21बीतेगी।
  8374. 6:20:23यही हमारे साथ होने जा रहा है। अभी तक
  8375. 6:20:25जिसका कोई पता ठिकाना नहीं था। आज वह
  8376. 6:20:28हमारे सामने हमारा एक हिस्सेदार बनने जा
  8377. 6:20:30रहा है। तो यह परेशानी की बात तो है ही।
  8378. 6:20:33कुणाल नारंग अरविंद की कही बात का उपहास
  8379. 6:20:36उड़ाते हुए बोला। स्वर्णलता जयभान राठौर
  8380. 6:20:39से मुखातिब होकर बोली। इस बारे में आपका
  8381. 6:20:42क्या ख्याल है भैया? अब मैं क्या ही
  8382. 6:20:45बोलूं? यह ठीक है कि मुझे भी संपत्ति में
  8383. 6:20:48एक और हिस्सेदार पसंद नहीं है। पर देखने
  8384. 6:20:51वाली बात यह है कि जो [संगीत] भी हो वो
  8385. 6:20:53हमारा छोटा भाई है। अगर वह घर से निकाला
  8386. 6:20:57नहीं गया होता तो वो ऑलरेडी हमारा
  8387. 6:20:59हिस्सेदार होता। आप कुछ भी कहिए पिताजी।
  8388. 6:21:02पर मैं इस बात के लिए तैयार नहीं हूं।
  8389. 6:21:04इतनी आसानी से मैं हार मानने वाला नहीं
  8390. 6:21:07हूं। आप देखना जिस तरह से वह यहां आए हैं,
  8391. 6:21:10वह खुद उल्टे पांव वापस यूके नहीं चले गए
  8392. 6:21:13तो मेरा नाम प्रतीक राठौर नहीं। प्रतीक के
  8393. 6:21:16दिमाग में कुछ खुराफात चल रहा था। बहुत
  8394. 6:21:19सही छोटे [संगीत] भाई मुझे तुमसे यही
  8395. 6:21:21उम्मीद था। तुम्हें अगर मेरी किसी हेल्प
  8396. 6:21:23की जरूरत हो तो बिना संकोच बोलना। कुणाल
  8397. 6:21:27नारन था। अब आगे क्या होगा? यहां मौजूद
  8398. 6:21:31[संगीत] लोग आखिर किस बारे में बात कर रहे
  8399. 6:21:32हैं? क्या षड्यंत्र चल रहा है सूर्यभान के
  8400. 6:21:35खिलाफ? शौर्य को विश्वास नहीं हुआ कि जो
  8401. 6:21:38उसने सुना वो सच है। कहीं उसके कान तो
  8402. 6:21:42नहीं बज रहे थे। उसने कंफर्म करने के लिए
  8403. 6:21:45दोबारा शिप्रा से पूछा। क्या कहा तुमने?
  8404. 6:21:48लगता है मुझे कुछ सुनने में गलती हो गई
  8405. 6:21:51है। एक बार फिर से कहना। शिप्रा नाराजगी
  8406. 6:21:55व्यक्त करते हुए बोली। [संगीत] अब कुछ
  8407. 6:21:57ज्यादा ही हो रहा है। तुमने जो कहने के
  8408. 6:22:00लिए कहा था वो मैंने कह दिया। [संगीत] तो
  8409. 6:22:02अब दोबारा वही बात करने का क्या मतलब हुआ?
  8410. 6:22:05शौर्य शिप्रा पर दबाव बनाते हुए बोला।
  8411. 6:22:08[संगीत] एक बार रिपीट कर भी दोगी तो
  8412. 6:22:10तुम्हारा क्या जाएगा? कम से कम मुझे
  8413. 6:22:13क्लियर तो हो जाएगा कि जो [संगीत] मैंने
  8414. 6:22:14सुना था वो सच था या झूठ। शिप्रा अपना
  8415. 6:22:18फैसला सुनाती हुई बोली तो तुम्हें सुनाई
  8416. 6:22:21नहीं दिया। अगर ऐसी बात है तो तुम्हें जो
  8417. 6:22:24सोचना है वो सोचो पर मैं दोबारा अब नहीं
  8418. 6:22:27बोलूंगी। [संगीत]
  8419. 6:22:28शौर्य बात को समाप्त करते हुए बोला पर
  8420. 6:22:31उसने फोन रखने में जल्दबाजी नहीं दिखाई।
  8421. 6:22:34मैं तो पहले [संगीत] ही समझता था कि मैंने
  8422. 6:22:36गलत ही सुना था। ठीक है फिर मैं फोन रखता
  8423. 6:22:39हूं। शिप्रा थोड़े गुस्से में बोली। वो
  8424. 6:22:42समझ रही थी कि शौर्य जानबूझकर उसकी आवाज
  8425. 6:22:45ना सुनने का बहाना कर रहा है। जबकि उसे
  8426. 6:22:47पक्का विश्वास था कि उसने [संगीत] अच्छे
  8427. 6:22:49से उसकी आवाज को सुना था। क्या तुम्हें यह
  8428. 6:22:52भी सुनाई नहीं दिया कि मैंने पूछा इस
  8429. 6:22:55[संगीत] समय तुम कहां हो? शौर्य शिप्रा के
  8430. 6:22:58सवाल को टालने की नियत से बोला। क्या
  8431. 6:23:00करोगी जानकर? वैसे भी अभी [संगीत] मैं
  8432. 6:23:03अपने मम्मी पापा से मिलने जाने की सोच रहा
  8433. 6:23:05हूं। शिप्रा अपने दांत पीसती [संगीत] हुई
  8434. 6:23:08बोली, "तुम तब से फालतू इधर-उधर की बातें
  8435. 6:23:10कर रहे हो, पर मेरे सवाल का जवाब नहीं
  8436. 6:23:13दिया जा रहा तुमसे।" फिर उसने अपने
  8437. 6:23:15[संगीत] गुस्से को शांत करके अपनी आवाज को
  8438. 6:23:17संयत कर बोली, "तुम अपने मम्मी पापा से
  8439. 6:23:20मिलने जाने वाले हो ना?" ठीक है, मिल आना।
  8440. 6:23:23पर तुम्हें उससे पहले राजा साहब की पोती
  8441. 6:23:25के लिए मेरे साथ चलकर एक गिफ्ट [संगीत]
  8442. 6:23:27खरीदना है। शौर्य ने भी सोचा अब और ज्यादा
  8443. 6:23:30ड्रामा करना ठीक नहीं है। नहीं तो कहीं
  8444. 6:23:33ऐसा ना हो जाए कि उसका बना हुआ काम भी
  8445. 6:23:35बिगड़ जाए। इसीलिए उसने शिप्रा की बात
  8446. 6:23:38मानते हुए कहा ठीक है। अगर ऐसी बात है
  8447. 6:23:42[संगीत] तो मैं अभी घर आता हूं और
  8448. 6:23:43तुम्हारे साथ चलकर पहले वो खरीदारी कर
  8449. 6:23:46लेता हूं। उसके बाद मैं चला जाऊंगा।
  8450. 6:23:49शिप्रा को भी शौर्य का जवाब सुनकर तसल्ली
  8451. 6:23:51हुई।
  8452. 6:23:52[संगीत]
  8453. 6:23:52अभी इतना कुछ शौर्य ने जो शिप्रा से बात
  8454. 6:23:54की थी उसका सिर्फ एक ही मकसद था। इस तरह
  8455. 6:23:57से वह शिप्रा के गुस्से को शांत करना
  8456. 6:23:59चाहता था जिसमें कि वह बहुत हद तक सफल भी
  8457. 6:24:02रहा। फोन रखने के बाद शौर्य अपने मॉडल
  8458. 6:24:05टाउन वाले घर पहुंचा। शिप्रा पहले से ही
  8459. 6:24:08उसका इंतजार कर रही थी। उसे शौर्य पर
  8460. 6:24:10गुस्सा तो बहुत आ रहा था पर वह [संगीत]
  8461. 6:24:12उसको दबाए हुए थी। शौर्य आकर सीधा अपने
  8462. 6:24:15कमरे में चला गया। शिप्रा ने शौर्य को
  8463. 6:24:18अपने कमरे में जाते देखा तो पीछे-पीछे वह
  8464. 6:24:20भी उसके कमरे में पहुंच गई और कमरे के
  8465. 6:24:23अंदर जाकर उसने अंदर से कमरे का दरवाजा
  8466. 6:24:25बंद कर दिया। शौर्य समझ गया कि इतनी आसानी
  8467. 6:24:29से शिप्रा मानने वाली तो नहीं है इसलिए वो
  8468. 6:24:31कुछ ना कुछ ड्रामा तो वहां जरूर करेगी।
  8469. 6:24:34शिप्रा सीधा जाकर शौर्य के सामने खड़ी हो
  8470. 6:24:36गई और [संगीत] उसकी आंखों में देखती हुई
  8471. 6:24:38बोली फोन पर क्या बकवास कर रहे थे तुम? अब
  8472. 6:24:42जरा फिर से वही बात बोलना तो। शौर्य अनजान
  8473. 6:24:45बनने की कोशिश करता हुआ बोला, अब उस बात
  8474. 6:24:48को रिपीट करने का क्या मतलब? जवाब तो मुझे
  8475. 6:24:51पता ही है। शिप्रा शौर्य से सारकास्टिक
  8476. 6:24:54तरीके में बोली, अब तो तुम्हें सब कुछ
  8477. 6:24:56पहले से ही पता होने लगा है। वैसे फिर भी
  8478. 6:24:59मेरी जानकारी के लिए एक बार मुझे भी बता
  8479. 6:25:02दो कि मेरा [संगीत] क्या जवाब होगा। शौर्य
  8480. 6:25:05मुद्दे की बात पर रहते हुए बोला, "छोड़ो
  8481. 6:25:08उस बात को। अब उस बात को यहां रिपीट करने
  8482. 6:25:10का कोई फायदा नहीं। तुम्हें राजा साहब
  8483. 6:25:13[संगीत] की पोती के लिए गिफ्ट लेना था ना
  8484. 6:25:15तो चलो फिर वो तो चलेंगे ही लेकिन उससे
  8485. 6:25:18पहले तुम [संगीत] जो कुछ बोल रहे थे उसके
  8486. 6:25:20बारे में और बात नहीं करोगे तुम्हें मुझसे
  8487. 6:25:23क्या-क्या शिकायतें [संगीत] थी कुछ सुनना
  8488. 6:25:25भी तो चाहते थे तुम मेरे बोलने पर तुम्हें
  8489. 6:25:28वो बात ठीक से सुनाई [संगीत] भी नहीं दिया
  8490. 6:25:30था उसके बारे में भी तो बात कर लेते हैं।
  8491. 6:25:33बोलते हुए शिप्रा एक टक शौर्य की तरफ ही
  8492. 6:25:35देख रही थी [संगीत] जबकि शौर्य शिप्रा से
  8493. 6:25:38नजरें नहीं मिला पा रहा था। शौर्य शिप्रा
  8494. 6:25:41को खुद को एक टक घूरते देखकर थोड़ा
  8495. 6:25:44अनकंफर्टेबल फील कर रहा था। इसलिए वह
  8496. 6:25:47जल्दी से यहां से निकल जाना चाहता था। अभी
  8497. 6:25:49उस बारे में बात करके क्यों और समय बर्बाद
  8498. 6:25:51करना गिफ्ट लाकर फिर राजा साहब के यहां
  8499. 6:25:54जाने के लिए भी तो निकलना है। इसलिए पहले
  8500. 6:25:57इस काम को कर लेते हैं। शिप्रा शौर्य का
  8501. 6:26:00तीर अब शौर्य पर ही चला रही थी। तुम लेट
  8502. 6:26:02होने की चिंता मत करो। अभी हमारे पास बहुत
  8503. 6:26:05समय है। अभी तो हम उसके बारे में बात
  8504. 6:26:07करेंगे जो अभी थोड़ी देर पहले तुम बोल रहे
  8505. 6:26:10थे। क्या-क्या बोल रहे थे तुम? तुमने कुछ
  8506. 6:26:13कहा भी था। क्या कहा था? फिर से उसे रिपीट
  8507. 6:26:16करोगे? मुझे भी ठीक से सुनाई नहीं दिया
  8508. 6:26:19था। शौर्य समझ गया कि शिप्रा अब उसको इतनी
  8509. 6:26:23आसानी से नहीं छोड़ने वाली। अब छोड़ो भी
  8510. 6:26:25उस बात को। अब जो बात खत्म हो गई [संगीत]
  8511. 6:26:28उसको फिर से क्यों रिपीट करना? क्यों नहीं
  8512. 6:26:30रिपीट करना? तुम ही तो उस बात के पीछे
  8513. 6:26:33पड़े हुए थे। क्या कुछ बोल रहे [संगीत]
  8514. 6:26:35थे? लव यू टाइप। ऐसा ही कुछ था। एक बार
  8515. 6:26:39फिर से उसे रिपीट करना ताकि मैं भी समझ
  8516. 6:26:41सकूं। तुम अब ऐसे अपनी बात से पीछे नहीं
  8517. 6:26:44पलट [संगीत] सकते। अब मुझे भी जानना है कि
  8518. 6:26:46तुम क्या कह रहे थे। अब शौर्य जल्दी से
  8519. 6:26:49जल्दी इस बात [संगीत] से अपना पीछा
  8520. 6:26:50छुड़ाना चाहता था। अब छोड़ो ना उस बात को
  8521. 6:26:53जो बात तुम्हें भी ध्यान [संगीत] नहीं है।
  8522. 6:26:55और शायद मैं भी भूल गया। शौर्य शिप्रा के
  8523. 6:26:58सामने से हटकर कमरे से बाहर निकलना चाहता
  8524. 6:27:01था। पर शिप्रा ने फिर से उसका [संगीत]
  8525. 6:27:02शर्ट पकड़ कर अपने सामने खड़ा कर दिया।
  8526. 6:27:05तुम भागने की कोशिश कहां कर रहे हो?
  8527. 6:27:07[संगीत] अब मुझे भी जानना है कि तुम अभी
  8528. 6:27:10थोड़ी देर पहले फोन पर क्या कह रहे थे?
  8529. 6:27:12शौर्य सफाई देता हुआ बोला। सॉरी। शायद मैं
  8530. 6:27:16फोन पर कुछ ज्यादा ही बोल गया था। इसमें
  8531. 6:27:19सॉरी की तो कोई बात ही नहीं है। मैं तो वो
  8532. 6:27:22बात [संगीत] सुनना चाहती हूं जो तुमने
  8533. 6:27:24थोड़ी देर पहले फोन पर कहा था। शौर्य किसी
  8534. 6:27:27भी तरह से अब शिप्रा के सवाल जवाब से पीछा
  8535. 6:27:29छुड़ाना चाहता [संगीत] था। देखो मुझे यहां
  8536. 6:27:31से अपने मम्मी पापा के पास भी जाना है और
  8537. 6:27:34अगर ऐसे ही करते रहे तो फिर लेट हो जाएगा।
  8538. 6:27:37देखो मैं इतनी आसानी से तुम्हारी इस बात
  8539. 6:27:39का पीछा छोड़ने वाली नहीं जो तुमने फोन पर
  8540. 6:27:42कहा था। इसलिए जितनी जल्दी तुम उस बात को
  8541. 6:27:44बताओगे उतना ही अच्छा होगा। दूसरी तरफ
  8542. 6:27:48राजमहल में स्वर्णलता जी, जयभान जी,
  8543. 6:27:51प्रतीक, अरविंद और कुणाल अभी भी किसी
  8544. 6:27:53निष्कर्ष पर पहुंचना चाहते थे। स्वर्णलता
  8545. 6:27:57जी जयभान जी को परिस्थिति से अवगत कराते
  8546. 6:27:59हुए बोली, देखिए भैया, मैं आपको एक बात
  8547. 6:28:02स्पष्ट करती हूं कि मैं इतनी आसानी से
  8548. 6:28:04सूर्यभान को इस संपत्ति में हिस्सा लेते
  8549. 6:28:06नहीं देख सकती। अगर वह इस संपत्ति से
  8550. 6:28:09बेदखल हुए हैं, तो वह अपनी गलती के कारण
  8551. 6:28:11हुआ था। उस समय वह खुद परिवार के फैसले के
  8552. 6:28:14खिलाफ गए थे। तो आज उनके वापस आने पर फिर
  8553. 6:28:17से संपत्ति में हिस्सा लेने की बात करना
  8554. 6:28:19सही नहीं है। जयभान जी कटु स्वर में बोले
  8555. 6:28:23देखो तुम्हें जो करना है तुम वह करो पर
  8556. 6:28:26मुझे इस झमेले में शामिल मत करो। प्रतीक
  8557. 6:28:29बीच में अपने पापा को जवाब देते हुए बोला
  8558. 6:28:31[संगीत]
  8559. 6:28:32पापा अगर आप बीच में नहीं पढ़ना चाहते तो
  8560. 6:28:34कोई आपके साथ जबरदस्ती भी नहीं करेगा। पर
  8561. 6:28:37अब मुझे लगता है ज्यादा समय तक इस बात को
  8562. 6:28:40खींचना भी सही नहीं है। कुणाल अपनी मां
  8563. 6:28:42स्वर्णलता जी से बोला, ठीक है, ज्यादा इस
  8564. 6:28:46बात के पीछे पड़ने का कोई मतलब नहीं है।
  8565. 6:28:48पहले [संगीत] देखते हैं कि मामा जी का
  8566. 6:28:50क्या प्लान है। प्रतीक ने शायद कुछ
  8567. 6:28:52खुराफात जानबूझकर [संगीत] सेट किया हुआ
  8568. 6:28:54था। मुझे नहीं लगता कि हमें इतना ज्यादा
  8569. 6:28:57इंतजार करना पड़ेगा। मैंने जो ट्रिगर सेट
  8570. 6:28:59किया है उसके कारण हो सकता है कि चाचा जी
  8571. 6:29:02जितनी तेजी से वापस आए हैं, शायद उसी तेजी
  8572. 6:29:05[संगीत] से वह वापस भी चले जाएं। इसी समय
  8573. 6:29:08कुणाल के मोबाइल पर किसी का फोन आया था।
  8574. 6:29:11कुणाल थोड़ी देर कुछ सुनता रहा। उसके बाद
  8575. 6:29:13उसने फोन [संगीत] रख दिया। फिर सबको अपनी
  8576. 6:29:16तरफ आकर्षित करते हुए बोला। आप सबकी
  8577. 6:29:18जानकारी के लिए बता दूं मामा जी
  8578. 6:29:21[संगीत]
  8579. 6:29:21यूके से इंडिया पधार चुके हैं। इस समय वो
  8580. 6:29:24लोग होटल राजकमल में जाकर आराम कर रहे
  8581. 6:29:27हैं। शायद उसके बाद वो सीधा ही यहां
  8582. 6:29:29आएंगे। जयभान जी बात को खत्म करने की नियत
  8583. 6:29:32से बोले ठीक है अभी इस बारे में बात करने
  8584. 6:29:36का कोई फायदा नहीं है। पहले आज की पार्टी
  8585. 6:29:39को निपट जाने देते हैं। फिर सोचेंगे कि
  8586. 6:29:41आगे क्या करना है। दूसरी तरफ शिप्रा अभी
  8587. 6:29:45तक शौर्य से उसके द्वारा कही गई बात को
  8588. 6:29:47रिपीट करने के लिए बोल [संगीत] रही थी। पर
  8589. 6:29:49शौर्य अब शिप्रा से पीछा छुड़ाना चाहता
  8590. 6:29:51था। क्यों? अब क्यों तुम्हारी बोलती
  8591. 6:29:54[संगीत] बंद हो गई? उस समय तो बहुत आवाज
  8592. 6:29:56निकल रही थी। अब क्या हो गया? अभी [संगीत]
  8593. 6:29:58भी उसी तरह से बोलो ना। शौर्य के चेहरे पर
  8594. 6:30:02इस समय बेचारगी के भाव थे। चलो ठीक है।
  8595. 6:30:05[संगीत] तुम्हें अपनी बात याद नहीं। तो
  8596. 6:30:07क्या तुम अब बताओगे कि क्या तुम्हें सच
  8597. 6:30:08में मेरी बात सुनाई नहीं दी थी जो मैंने
  8598. 6:30:10बोली थी? शौर्य शिप्रा की [संगीत] ओर गौर
  8599. 6:30:13से देखते हुए बोला। नहीं ऐसा नहीं है।
  8600. 6:30:16मुझे सुनाई दिया था जो तुमने कहा था। पर
  8601. 6:30:18[संगीत] मैं यह भी जानता हूं कि तुमने वो
  8602. 6:30:20बात सिर्फ मुझसे पीछा छुड़ाने के लिए कहा
  8603. 6:30:22था। अब जाकर उसने शिप्रा की [संगीत] तरफ
  8604. 6:30:25ध्यान दिया था। इस समय वो पूरी तरह बन ठन
  8605. 6:30:28कर तैयार हो रखी थी। नीले सूट में वो
  8606. 6:30:30कयामत ढा [संगीत] रही थी। शौर्य ने एक बार
  8607. 6:30:33उसको गौर से देखा। पर शिप्रा शौर्य की नजर
  8608. 6:30:36को नजरअंदाज करते हुए बोली, तुम्हें तो सब
  8609. 6:30:39कुछ [संगीत] पहले से ही पता होता है।
  8610. 6:30:41तुम्हें तो यह सुनने की भी जरूरत नहीं है।
  8611. 6:30:43तुम खुद डिसाइड कर लेते [संगीत] हो कि
  8612. 6:30:45सामने वाले के दिमाग में क्या चल रहा है।
  8613. 6:30:48शिप्रा शौर्य के करीब [संगीत] जाती हुई
  8614. 6:30:49बोली। शिप्रा के शौर्य के और करीब आ जाने
  8615. 6:30:52से शौर्य के शरीर में सिहरन दौड़ [संगीत]
  8616. 6:30:54गई। और क्या-क्या बकवास कर रहे थे तुम फोन
  8617. 6:30:57पर वो भी मुझे बता दो। क्या मैं पूछ सकती
  8618. 6:31:00हूं? [संगीत] तुम वो सब कर क्यों रहे थे?
  8619. 6:31:02क्या तुम्हें अब तक सही में समझ नहीं आया
  8620. 6:31:04कि मैं क्या चाहती हूं और क्या पूछ रहे थे
  8621. 6:31:07कि मैं तुम्हें [संगीत] प्यार करती हूं कि
  8622. 6:31:08नहीं? चलो तुम ही ईमानदारी से बताओ।
  8623. 6:31:11तुम्हें क्या लगता है मैं तुम्हें प्यार
  8624. 6:31:13करती हूं या [संगीत] नहीं करती हूं? शौर्य
  8625. 6:31:15खामोशी से शिप्रा की बात को सुनता रहा पर
  8626. 6:31:18बोला कुछ नहीं। शौर्य को चुप देखकर शिप्रा
  8627. 6:31:21फिर से [संगीत] उसकी आंखों में देखती हुई
  8628. 6:31:22बोली कल तुम क्या पूछ रहे थे कि अगर
  8629. 6:31:25तुम्हें कोई लड़की पसंद आती है तो क्या
  8630. 6:31:27तुम उसके करीब [संगीत] जा सकते हो? तो
  8631. 6:31:29सुनो अगर तुम किसी और लड़की के करीब भी
  8632. 6:31:32नजर आए तो मैं उसका खून कर दूंगी। [संगीत]
  8633. 6:31:34मुझे नहीं पता कि मैंने तुम्हें पहले कब
  8634. 6:31:36क्या कहा। पर अब मेरी बात गांठ बांध लो।
  8635. 6:31:39अगर मैंने किसी और लड़की को तुम्हारी
  8636. 6:31:41जिंदगी [संगीत] का हिस्सा बनते देखा तो
  8637. 6:31:43मैं उसका खून कर दूंगी। जो चीज मेरी
  8638. 6:31:46[संगीत] है वो मैं किसी और के साथ नहीं
  8639. 6:31:48बांट सकती। अब आगे क्या होगा? क्या शिप्रा
  8640. 6:31:51का यह जज्बा शौर्य तक पहुंच [संगीत]
  8641. 6:31:53पाएगा? राजा साहब की पार्टी में क्या
  8642. 6:31:56होगा? जानने ने अपनी बात कहने में कोई
  8643. 6:31:59कंजूसी [संगीत] नहीं बरती। उसने खुलकर
  8644. 6:32:01अपने दिल के उद्गार को शौर्य के सामने
  8645. 6:32:04व्यक्त कर दिया। शौर्य ऐसी उम्मीद नहीं कर
  8646. 6:32:07रहा था कि शिप्रा इस तरह से उसके घर आते
  8647. 6:32:10ही उसकी बोलती बंद कर देगी। शौर्य भले ही
  8648. 6:32:13जवाब में शिप्रा को कुछ नहीं कह रहा था पर
  8649. 6:32:16उसका यह अवतार शौर्य को बहुत पसंद [संगीत]
  8650. 6:32:18आ रहा था। पहले जो उसकी बातचीत में थोड़ा
  8651. 6:32:21बहुत संकोच हुआ करता था आज वो सब गायब हो
  8652. 6:32:24रखा था। शिप्रा को अपनी बात कहे [संगीत]
  8653. 6:32:27हुए जब कुछ पल बीत गए और उसके बाद भी
  8654. 6:32:29शौर्य की तरफ से कुछ नहीं कहा गया तो वह
  8655. 6:32:32फिर से शौर्य से बोली अब कुछ बोल क्यों
  8656. 6:32:34नहीं रहे हो? फोन पर तो बहुत सवाल कर रहे
  8657. 6:32:37थे। अब कुछ और नहीं पूछना [संगीत] है। तुम
  8658. 6:32:40ऐसे गुस्सा क्यों हो रही हो? शौर्य शिप्रा
  8659. 6:32:43को धारा प्रवाह बोलते देखकर मासूमियत
  8660. 6:32:45[संगीत] से बोला, "मैं क्यों गुस्सा
  8661. 6:32:47होऊंगी?" मैंने तो बस तुम्हारे सवाल का
  8662. 6:32:49जवाब दिया। शौर्य की बात सुनकर शिप्रा ने
  8663. 6:32:52अपनी आवाज के फ्लो को थोड़ा धीमा कर लिया।
  8664. 6:32:55अगर जवाब ही देना था तो तब देना था ना जब
  8665. 6:32:58मैंने सवाल किया था। [संगीत]
  8666. 6:33:00सवाल जवाब साथ के साथ होता है ना कि मैंने
  8667. 6:33:02सवाल आज किया और तुम्हारा जवाब कल आएगा।
  8668. 6:33:05तो क्या मतलब रह जाएगा ऐसे जवाब का? तुम
  8669. 6:33:08ऐसे बात बनाकर नहीं बच सकते। सामने
  8670. 6:33:10[संगीत] तो कुछ बोला नहीं जाता। फोन पर
  8671. 6:33:12सवाल करना सूझता है। शिप्रा शौर्य को
  8672. 6:33:16एक्सक्यूज देते देखकर बोली, [संगीत]
  8673. 6:33:18तुम्हें राजा साहब की पोती के लिए गिफ्ट
  8674. 6:33:20लेने जाना था ना? शौर्य शिप्रा का माइंड
  8675. 6:33:22डायवर्ट करने की नियत से बोला। वो देख रहा
  8676. 6:33:25था कि उसके आते ही शिप्रा [संगीत] उस पर
  8677. 6:33:27पूरी तरह हावी होने की कोशिश कर रही है।
  8678. 6:33:30तुम्हारे पास अब कहने को कुछ रह नहीं गया
  8679. 6:33:32तो अब तुम बात को बदलने की कोशिश कर रहे
  8680. 6:33:34हो। शिप्रा तुरंत शौर्य पर चढ़ दौड़ी।
  8681. 6:33:37शौर्य ने देखा कि शिप्रा एकदम थमने का नाम
  8682. 6:33:40नहीं ले रही इसलिए उसका फ्लो तोड़ने के
  8683. 6:33:42लिए वह बोला तो क्या तुम सच में मुझसे
  8684. 6:33:45प्यार करने लगी हो? फिर से शौर्य का यह
  8685. 6:33:48सवाल सुनकर शिप्रा का मुंह बिगड़ गया।
  8686. 6:33:50[संगीत] यह क्या है? तुम्हारी सुई एक जगह
  8687. 6:33:52ही जाकर क्यों अटक गई? बस मैं जानना चाहता
  8688. 6:33:55हूं कि तुम जो कह रही [संगीत] हो, क्या वह
  8689. 6:33:57सच है भी? या यह सब तुम मुझे भरमाने के
  8690. 6:33:59लिए बोल रही हो? शौर्य शिप्रा के चेहरे के
  8691. 6:34:02बदलते भावों को [संगीत] देखता हुआ बोला
  8692. 6:34:05तुम्हारा बार-बार एक ही सवाल करने से मेरा
  8693. 6:34:07जवाब बदल नहीं जाएगा। शिप्रा चिढ़कर बोली
  8694. 6:34:11तो क्या जो प्यार करते हैं वो ऐसे अपने
  8695. 6:34:13प्यार करने वाले को सताते हैं? शौर्य
  8696. 6:34:16शिप्रा की आंखों में देखता [संगीत] हुआ
  8697. 6:34:18बोला। मैं तो सब करती हूं। तुम जो मुझे
  8698. 6:34:20सता रहे थे उसका क्या? अब खुद पर आई तो
  8699. 6:34:23दुहाई दे रहे हो। शिप्रा शिकायती लहजे में
  8700. 6:34:26बोलती हुई [संगीत] शौर्य के एकदम पास आ गई
  8701. 6:34:28थी। शौर्य तो बस उसके चेहरे को देखने में
  8702. 6:34:31ही खोसा गया था। आज [संगीत] शिप्रा की
  8703. 6:34:33बातों में वह अधिकार साफ-साफ झलक रहा था
  8704. 6:34:36जो वह शौर्य के प्रति जता रही थी। शौर्य
  8705. 6:34:38का मन तो किया वो [संगीत] उसको अपनी बाहों
  8706. 6:34:40में भर ले पर साथ में उसे यह डर भी सता
  8707. 6:34:43रहा था कि अभी [संगीत] उसकी नाराजगी खत्म
  8708. 6:34:45नहीं हुई है। हो सकता है वो उसे कुछ और ना
  8709. 6:34:48सुना दे। शिप्रा ने महसूस किया कि शौर्य
  8710. 6:34:51एक टक उसे देखे ही जा रहा है। तो वह
  8711. 6:34:54कंफ्यूज होकर बोली तुम ऐसे क्या मुझे घूर
  8712. 6:34:57रहे हो? अब अगर तुम ऐसे ही मुझे सुनाती
  8713. 6:34:59रहोगी तो मैं तुम्हें अपनी बाहों में भर
  8714. 6:35:01लूंगा। शौर्य शिप्रा को चेताते हुए बोला
  8715. 6:35:05क्या? शिप्रा सकपका कर बोली। शिप्रा ने
  8716. 6:35:09बोल तो दिया पर अगले [संगीत] ही पल वो
  8717. 6:35:11शौर्य से थोड़ा हटकर खड़ी हो गई। उसने ठान
  8718. 6:35:14लिया था कि वो इतनी आसानी से शौर्य को माफ
  8719. 6:35:16नहीं करेगी। फिर उसने जल्दी से शौर्य से
  8720. 6:35:19कहा। चलो राजा साहब की पोती के लिए कुछ
  8721. 6:35:22गिफ्ट ले आते हैं। तुम [संगीत] यह काम
  8722. 6:35:24अकेले भी तो कर सकती थी। तब तक मैं कुछ और
  8723. 6:35:26काम निपटा लेता। शौर्य को वैसे भी खरीदारी
  8724. 6:35:30करना पसंद नहीं था। शिप्रा समझती थी कि
  8725. 6:35:32मर्दों के लिए मार्केटिंग का काम बोरिंग
  8726. 6:35:34ही होता था। पर लड़कियों को खरीदारी करना
  8727. 6:35:36पसंद होता था। शिप्रा को ध्यान आया कि
  8728. 6:35:39शौर्य ने कहा था उसको अपने मम्मी पापा के
  8729. 6:35:42पास जाना था। इसलिए वह आना भी नहीं चाहता
  8730. 6:35:44था। वो तो सिर्फ शिप्रा की शिकायत भरी
  8731. 6:35:47बातों को दूर करने की नियत से आया था।
  8732. 6:35:50क्या मैं भी तुम्हारे साथ चलूं? तुम्हारे
  8733. 6:35:52मम्मी पापा से मिलने? शिप्रा शौर्य से
  8734. 6:35:55बोली पर आज तो तुम्हें पार्टी में होना है
  8735. 6:35:57इसलिए फिर कभी मिल लेना। शौर्य टालते हुए
  8736. 6:36:00बोला अगर तुम्हारा जाना जरूरी है तो तुम
  8737. 6:36:03एक काम कर सकते हो। तुम बहुत जल्दी निकल
  8738. 6:36:06[संगीत] जाओ और अपनी फैमिली से मिलकर तुम
  8739. 6:36:08भी सीधा पार्टी में आ जाना। थैंक यू।
  8740. 6:36:11शौर्य दिल से बोला। उसके बाद वो बाहर की
  8741. 6:36:14तरफ जाते हुए बोला तो फिर मैं चलता हूं।
  8742. 6:36:17कोशिश करूंगा कि मैं समय से पार्टी में
  8743. 6:36:19पहुंच जाऊं। [संगीत] इसके बाद शौर्य वहां
  8744. 6:36:22से निकल गया। शिप्रा भी कुछ समय बाद
  8745. 6:36:24खरीदारी करने मार्केट को निकल गई। शौर्य
  8746. 6:36:27एक बार फिर से होटल राजकमल पहुंचा। उसने
  8747. 6:36:30सारी व्यवस्था का जायजा लिया। शौर्य के
  8748. 6:36:33पापा का प्लान यह था कि वो यहां से सीधा
  8749. 6:36:36पार्टी में पहुंचेंगे। शौर्य ने अपने
  8750. 6:36:38मम्मी पापा को इस बात के लिए कन्विंस कर
  8751. 6:36:40लिया कि वह तुरंत ही उसकी सच्चाई सबके
  8752. 6:36:42सामने जाहिर ना कर दें। क्योंकि राजा साहब
  8753. 6:36:45के अलावा अभी शौर्य की सच्चाई और किसी को
  8754. 6:36:48अभी पता नहीं थी। शाम का समय था। 7:00
  8755. 6:36:51[संगीत] बज गए थे। आज राजमहल को बहुत ही
  8756. 6:36:54खूबसूरत ढंग से सजाया गया था। कोई भी आज
  8757. 6:36:56राजमहल को देखकर कह सकता था कि जरूर आज का
  8758. 6:37:00दिन कुछ खास होगा। इसलिए राजमहल को इतना
  8759. 6:37:02अच्छे से सजाया [संगीत] गया होगा। राजा
  8760. 6:37:05साहब और कांता प्रसाद पहले से उस लॉन में
  8761. 6:37:08आकर वहां की व्यवस्था को देख रहे थे। वो
  8762. 6:37:10नहीं चाहते [संगीत] थे कि आज किसी गलती की
  8763. 6:37:12गुंजाइश रहे। धीरे-धीरे करके गेस्ट्स का
  8764. 6:37:15आना शुरू हो गया था। आज की इस पार्टी
  8765. 6:37:17[संगीत] में शहर भर के खास लोगों को ही
  8766. 6:37:20बुलाया गया था। राजा साहब ने कांता प्रसाद
  8767. 6:37:23से पूछा सूर्यभान कब तक इस पार्टी में
  8768. 6:37:26पहुंचेगा? [संगीत]
  8769. 6:37:27वो होटल से निकल गए हैं। अब तक में पहुंच
  8770. 6:37:29ही जाएंगे। कांता प्रसाद ने जवाब दिया।
  8771. 6:37:32राजा साहब कांता प्रसाद के जवाब को सुनकर
  8772. 6:37:35संतुष्ट नजर आए। दूसरी तरफ शौर्य अपने
  8773. 6:37:38मम्मी [संगीत] पापा को लेकर राजमहल के लिए
  8774. 6:37:40निकल गया था। शौर्य ने पहले ही अपनी तरफ
  8775. 6:37:43से अपनी बहन को एक बढ़िया सा गिफ्ट दे
  8776. 6:37:45दिया था। अपने पापा को होटल लाते [संगीत]
  8777. 6:37:48हुए शौर्य ने समझा दिया था कि वह उनसे
  8778. 6:37:50पार्टी के दौरान अनजान बनकर रहें। राजमहल
  8779. 6:37:53पहुंचने के बाद शौर्य ने विक्रम के साथ
  8780. 6:37:55अपने मम्मी पापा को राजमहल के अंदर भेज
  8781. 6:37:58दिया। सूर्यभान जी, कल्पना जी एवं नीलिमा
  8782. 6:38:01एक साथ मुख्य [संगीत] द्वार से होते हुए
  8783. 6:38:03पार्टी हॉल में पहुंचे। राजा साहब पहले से
  8784. 6:38:06ही वहां मौजूद थे। सूर्यभान जी जल्दी से
  8785. 6:38:08आगे बढ़ गए और उन्होंने [संगीत] अपने पापा
  8786. 6:38:10को पैर छूकर प्रणाम किया। साथ में कल्पना
  8787. 6:38:13जी एवं नीलिमा ने भी अपने पापा का अनुसरण
  8788. 6:38:16किया। धीरे-धीरे करके परिवार के बाकी
  8789. 6:38:19[संगीत] सदस्य भी पार्टी में पहुंच गए थे।
  8790. 6:38:21सभी सूर्यभान से मिलकर ऐसा रिएक्ट कर रहे
  8791. 6:38:24थे जैसे वे लोग उनसे [संगीत] मिलकर कितने
  8792. 6:38:26खुश हैं। वैसे ऐसे लोगों की संख्या कम ही
  8793. 6:38:28थी जो सही मायने में सूर्यभान को यहां
  8794. 6:38:30देखकर खुश थे। पर जो सबसे ज्यादा खुश होने
  8795. 6:38:34का दिखावा कर रहे [संगीत] थे वो थे
  8796. 6:38:35प्रतीक, कुणाल, स्वर्णलता, अरविंद। आपने
  8797. 6:38:39आने में बहुत देर कर दी [संगीत] छोटे
  8798. 6:38:41भैया। आपके बिना यह महल कितना सुनाना था।
  8799. 6:38:44स्वर्णलता जी [संगीत] मुस्कुराने का
  8800. 6:38:46प्रयास करती हुई बोली। तुम ठीक कह रही हो।
  8801. 6:38:49यह हमारे लिए भी कम तकलीफ देह नहीं
  8802. 6:38:51[संगीत] था। तुम्हें नहीं पता मैं कितना
  8803. 6:38:53याद करता था उस पुराने समय को। सूर्यभान
  8804. 6:38:56जी ने भी [संगीत] अपनी व्यथा बताई। तभी
  8805. 6:38:58सामने से जायभान आते दिखाई दिए। जायभान को
  8806. 6:39:01अपने पास देखकर सूर्यभान ने उन्हें आगे
  8807. 6:39:03बढ़कर [संगीत] नमस्कार किया। नीलिमा भी
  8808. 6:39:06पीछे नहीं रही। उसने भी आगे बढ़कर जायभान
  8809. 6:39:08को नमस्ते किया। मेरी गुड़िया तो [संगीत]
  8810. 6:39:11बड़ी हो गई। लगता है जल्दी ही इसकी शादी
  8811. 6:39:13के लिए लड़के देखने पड़ेंगे। जायभान
  8812. 6:39:16मुस्कुराते हुए बोले मुझसे भी इंतजार नहीं
  8813. 6:39:18हो रहा बड़े पापा। आप यह काम जल्दी से कर
  8814. 6:39:21ही दो। नीलिमा भी जायभान [संगीत] के सुर
  8815. 6:39:24में सुर मिलाते हुए बोली। बहुत खूब। तुम
  8816. 6:39:27तो बहुत हाजिर जवाब हो। राजा साहब ठहाका
  8817. 6:39:30लगाते हुए बोले तुम्हारा बेटा कहीं दिखाई
  8818. 6:39:33नहीं दे रहा सूर्यभान। जायभान सूर्यभान के
  8819. 6:39:36आसपास देखते हुए बोले [संगीत]
  8820. 6:39:37उन्होंने पहले कभी सूर्यभान के बेटे को
  8821. 6:39:40नहीं देखा था। वह बस भीड़ में पहचानने
  8822. 6:39:41[संगीत] की कोशिश कर रहे थे। वो अभी आया
  8823. 6:39:44नहीं है भैया। जैसे ही आता है मैं आपसे
  8824. 6:39:47मिलवाता हूं। सूर्यभान दरवाजे की ओर देखते
  8825. 6:39:50हुए बोले सूर्यभान अपने परिवार के सारे
  8826. 6:39:54लोगों को एक साथ देखकर बहुत भावुक हो रहे
  8827. 6:39:58थे। उनके पास सब कुछ था। अगर कुछ नहीं था
  8828. 6:40:02तो यह परिवार जिसे वह जिंदगी भर मिस करते
  8829. 6:40:05रहे। सब कुछ होते हुए भी वह अधूरे थे
  8830. 6:40:09क्योंकि यूके में अगर उन्हें किसी चीज की
  8831. 6:40:12कमी थी तो वह था परिवार। आज एक बार फिर से
  8832. 6:40:15अपना भरा पूरा परिवार देखकर वह भावुक हो
  8833. 6:40:19रहे थे। तभी भीड़ में से किसी की आवाज
  8834. 6:40:22राजा साहब के लिए आई। चंद्रभान [संगीत]
  8835. 6:40:25जी अच्छा किया आपने जो अपने बेटे को वापस
  8836. 6:40:27बुला लिया। आज तक कैसे आप अपनी इतनी
  8837. 6:40:30[संगीत] प्यारी पोती से दूर रह पाए? आप
  8838. 6:40:33सही कह रहे हैं जानकीदास जी। मुझे यह
  8839. 6:40:35समझने में बहुत टाइम लग गया। मैं बस अपने
  8840. 6:40:38अहम के चक्कर में [संगीत] अपने परिवार को
  8841. 6:40:40तोले बैठा था। राजा साहब भी अफसोस जाहिर
  8842. 6:40:43करते हुए बोले काश इस खुशी के मौके पर
  8843. 6:40:46आपके पुराने दोस्त भी आपकी इस खुशी में
  8844. 6:40:49आपके साथ खड़े होते तो आपकी इस खुशी को और
  8845. 6:40:52चार चांद लग जाते। जानकी दास जी राजा साहब
  8846. 6:40:56के जरूर पुराने मित्र रहे होंगे। तभी उनको
  8847. 6:40:59उनके करीबी दोस्त और दुश्मन के बारे में
  8848. 6:41:02जानकारी थी। सबको एक साथ खुश तो नहीं रखा
  8849. 6:41:05जा सकता है। राजा साहब गला खंखारते हुए
  8850. 6:41:08बोले अब आगे क्या होगा? राजा साहब किस
  8851. 6:41:12दोस्त और दुश्मन के बारे में बात कर रहे
  8852. 6:41:14थे। इस पार्टी में अभी [संगीत] क्या-क्या
  8853. 6:41:16गुल खिलेंगे? जानने के लिए सुनते रहिए।
  8854. 6:41:19धीरे-धीरे अपने शबाब की तरफ बढ़ गई थी।
  8855. 6:41:22लगभग सारे ही गेस्ट्स आ चुके थे। श्रवण एक
  8856. 6:41:26साइड विक्रम के साथ खड़ा था। उसे शिप्रा
  8857. 6:41:28का इंतजार था। अभी वह शिप्रा के बारे में
  8858. 6:41:31सोच रहा था कि वो अभी तक क्यों नहीं आई।
  8859. 6:41:34तभी वह उसे हॉल में आती हुई दिखाई दी।
  8860. 6:41:37उसकी नजर श्रवण से मिली तो उसके चेहरे पर
  8861. 6:41:39हैरानी थी। क्योंकि वो श्योर नहीं थी कि
  8862. 6:41:42श्रवण इस पार्टी में दिखाई देगा क्योंकि
  8863. 6:41:44उसने कहा था कि वह अपने मम्मी पापा से
  8864. 6:41:47मिलने जा रहा है। उसने सोचा वह इसके बारे
  8865. 6:41:50में बाद में उससे पूछेगी। यह सोचकर वह
  8866. 6:41:53सीधा राजा साहब की तरफ बढ़ गई। राजा साहब
  8867. 6:41:56ने शिप्रा को देखा तो वह खुश हो गए।
  8868. 6:41:58शिप्रा ने उनके पास पहुंचकर उनका अभिवादन
  8869. 6:42:01किया। राजा साहब ने शिप्रा का परिचय
  8870. 6:42:03सूर्यभान से कराया। इससे [संगीत] मिलो। यह
  8871. 6:42:06शिप्रा है हमारी टेक्सटाइल कंपनी की सीईओ।
  8872. 6:42:09इतना कहकर उन्होंने नीलिमा की तरफ इशारा
  8873. 6:42:12करते हुए कहा। और यह है हमारी पोती
  8874. 6:42:14नीलिमा। आज इसी का बर्थडे है। बर्थडे
  8875. 6:42:18स्वीट हार्ट। थैंक यू। नीलिमा भी
  8876. 6:42:21मुस्कुराती हुई बोली। वो शिप्रा की
  8877. 6:42:23खूबसूरती से बहुत प्रभावित हुई थी। इसलिए
  8878. 6:42:26वो साथ में कॉम्प्लीमेंट करते हुए बोली
  8879. 6:42:28पता नहीं आपको किसी ने कभी कहा या नहीं पर
  8880. 6:42:31आप बहुत खूबसूरत हैं। पर तुम तो एकदम परी
  8881. 6:42:34सी लग रही हो। शिप्रा नीलिमा के गाल को
  8882. 6:42:37हल्के से सहलाती हुई बोली। उसके बाद
  8883. 6:42:40शिप्रा ने अपने हाथ में पकड़ा हुआ एक
  8884. 6:42:41गिफ्ट बॉक्स नीलिमा की तरफ बढ़ा दिया। यह
  8885. 6:42:45तुम्हारे लिए है। उम्मीद करती हूं कि
  8886. 6:42:47तुम्हें पसंद आएगा। इसके बाद राजा साहब ने
  8887. 6:42:50शिप्रा का परिचय कल्पना जी से भी कराया।
  8888. 6:42:53शिप्रा ने आगे बढ़कर उनका भी अभिवादन
  8889. 6:42:55किया। शिप्रा को यह बात थोड़ा अजीब भी
  8890. 6:42:58[संगीत] लगा कि राजा साहब खुद उसका परिचय
  8891. 6:43:00अपने बेटे और बहू से करा रहे थे। यही बात
  8892. 6:43:03कल्पना जी भी फील कर रही थी कि इतने सारे
  8893. 6:43:06लोग उनसे मिलने के लिए आए थे। पर किसी का
  8894. 6:43:09भी परिचय राजा साहब ने खुद उन दोनों से
  8895. 6:43:11नहीं कराया था। पर जब शिप्रा आई [संगीत]
  8896. 6:43:14तो उन्होंने खुद ही आगे बढ़कर उसे उनसे
  8897. 6:43:16मिलवाया था। मैं तुम्हें एक बात बताना
  8898. 6:43:18चाहता हूं। सूर्यभान यह लड़की बहुत मेहनती
  8899. 6:43:21है। जब से इसने सीईओ का पद संभाला है,
  8900. 6:43:24उसके बाद कंपनी की ग्रोथ बहुत बढ़ गई है।
  8901. 6:43:27बहुत बढ़िया मानना पड़ेगा। अगर पिताजी
  8902. 6:43:30तुम्हारी तारीफ कर रहे हैं, तो जरूर तुम
  8903. 6:43:32में कुछ खास होगा। दूसरी तरफ श्रवण विक्रम
  8904. 6:43:35के साथ एक कोने में खड़ा था। वो इंतजार कर
  8905. 6:43:38रहा था केक कटने का। श्रवण जानबूझकर एक
  8906. 6:43:42साइड पकड़े हुए था। इसका कारण यह था कि वह
  8907. 6:43:45नहीं चाहता था कि उस पर सीधी नजर किसी की
  8908. 6:43:47पड़े क्योंकि यहां पर कई ऐसे चेहरे थे जो
  8909. 6:43:50उसे खास पसंद नहीं करते थे। जिनमें से एक
  8910. 6:43:53स्वर्णलता थी। इसके अलावा विक्की और
  8911. 6:43:56प्रतीक भी थे जो श्रवण को अगर यहां देखते
  8912. 6:43:59तो उनका पारा हाई होना निश्चित था। तो
  8913. 6:44:02आपने क्या सोचा है बॉस? आज आप अपनी सच्चाई
  8914. 6:44:05शिप्रा मेम को बताएंगे या अभी आपका ड्रामा
  8915. 6:44:07ऐसे ही चलता रहेगा? विक्रम मेनका की ओर
  8916. 6:44:10देखते हुए बोला जो कि उसी की ओर आ रही थी।
  8917. 6:44:14अब इस ड्रामा को चलाना इतना आसान नहीं है।
  8918. 6:44:16लेकिन पहले मुझे मम्मी पापा की जानकारी
  8919. 6:44:18में यह बात लानी होगी। उसके बाद ही यह
  8920. 6:44:21ड्रामा खत्म होगा। श्रवण शिप्रा की ओर
  8921. 6:44:24देखते हुए बोला जो इस समय उसके दादाजी के
  8922. 6:44:26साथ उसके मम्मी पापा से मिल रही थी। तुम
  8923. 6:44:29इधर कोने में क्यों खड़े हुए हो? मैं
  8924. 6:44:31तुम्हें सब जगह ढूंढ रही थी। तुम कहीं
  8925. 6:44:33दिखाई नहीं दिए। लास्ट में जाकर इधर नजर
  8926. 6:44:36आए। कुछ [संगीत] खास नहीं। सोच रहा हूं जब
  8927. 6:44:39तक कुछ लोगों से बच सकता हूं बचूं बाद में
  8928. 6:44:42सबके सामने तो आना ही है। श्रवण एक तरफ
  8929. 6:44:45देखते हुए बोला मेनका ने उसकी नजर का पीछा
  8930. 6:44:48किया तो उसने देखा श्रवण जिस लड़के को देख
  8931. 6:44:51रहा है वह भी आश्चर्य से श्रवण की ओर देख
  8932. 6:44:53रहा था। उसको देखकर ऐसा लग रहा था जैसे
  8933. 6:44:56उसे उम्मीद ना हो कि श्रवण भी इस पार्टी
  8934. 6:44:59में हो सकता है। वो लड़का कोई और नहीं
  8935. 6:45:02विक्की था। विक्की वही लड़का था जिसकी
  8936. 6:45:05पिटाई श्रवण ने मेघा को छेड़ने के कारण
  8937. 6:45:08मेडिकल कॉलेज में की थी। विक्की के साथ एक
  8938. 6:45:11और भी लड़का खड़ा था। विक्की ने जब श्रवण
  8939. 6:45:14को पहचान लिया तो वह बिना किसी को कुछ
  8940. 6:45:16बोले स्वर्णलता जी की ओर बढ़ गया। श्रवण
  8941. 6:45:19समझ गया। अब थोड़ी देर में एक पंगा होना
  8942. 6:45:22तो यहां निश्चित है। मेनका ने भी विक्की
  8943. 6:45:24को स्वर्णलता जी की ओर बढ़ते देख लिया था।
  8944. 6:45:27उसने विक्की के चेहरे के भाव को भी देखा
  8945. 6:45:29था। इसलिए उसने श्रवण से पूछा क्या इस
  8946. 6:45:33लड़के से तुम्हारा कोई पंगा हुआ था? उसके
  8947. 6:45:36चेहरे पर जो आश्चर्य का भाव था उसको देखकर
  8948. 6:45:39लग रहा था उसे उम्मीद ना हो कि तुम इस
  8949. 6:45:42पार्टी में आ सकते हो। तुमने सही समझा।
  8950. 6:45:46मैंने इस लड़के की एक बार पिटाई कर दी थी।
  8951. 6:45:48इसलिए मुझे यहां देखकर उसके चेहरे पर
  8952. 6:45:51आश्चर्य के भाव तो होना ही था। श्रवण
  8953. 6:45:54लापरवाही से बोला। अब वो किसी भी स्थिति
  8954. 6:45:56को फेस करने के लिए तैयार था। श्रवण अभी
  8955. 6:46:00मेनका से विक्की के बारे में बात कर ही
  8956. 6:46:02रहा था कि तभी उसने देखा मालिनी एक हाथ
  8957. 6:46:05में ड्रिंक का ग्लास लिए उसकी ओर आ रही
  8958. 6:46:08थी। उसने सोचा नहीं था कि मालिनी इस
  8959. 6:46:10पार्टी में हो सकती है। पर फिर उसे ध्यान
  8960. 6:46:13आया कि मालिनी को प्रतीक ने पार्टी में
  8961. 6:46:16इनवाइट किया होगा। मुझे उम्मीद नहीं था कि
  8962. 6:46:19मैं तुम्हें यहां देखूंगी। पर तुम्हें
  8963. 6:46:21यहां देखकर अच्छा लगा। मैंने खुद नहीं
  8964. 6:46:24सोचा था कि मेरा तुमसे यहां मिलना होगा।
  8965. 6:46:27पर मुझे समझना चाहिए था कि तुम तो प्रतीक
  8966. 6:46:30की दोस्त हो तो तुम्हारा तो यहां होना
  8967. 6:46:32लाजमी है। ऐसा नहीं है कि मैं प्रतीक
  8968. 6:46:35[संगीत] की दोस्त हूं इसलिए यहां इनवाइटेड
  8969. 6:46:37हूं। दरअसल मेरे पापा जी का संबंध राजा
  8970. 6:46:40साहब से दोस्ताना है। इसलिए यह इनविटेशन
  8971. 6:46:43राजा साहब की तरफ से ही था। अच्छा तो यह
  8972. 6:46:46बात है। [संगीत]
  8973. 6:46:47मैं तो समझ रहा था कि तुम और प्रतीक एक
  8974. 6:46:50दूसरे को पसंद करते हो। मैंने तुमसे तो
  8975. 6:46:53ऐसा नहीं कहा था। फिर तुमने यह कैसे सोच
  8976. 6:46:55लिया?
  8977. 6:46:56नहीं मेरा ऐसा सोचने का कारण दूसरा था
  8978. 6:47:00क्योंकि मुझे लगा प्रतीक तुमको लेकर कुछ
  8979. 6:47:03ज्यादा ही पजेसिव है। यहां तक कि मुझे
  8980. 6:47:06तुमसे दूर रखने के लिए उसने मुझे धमका भी
  8981. 6:47:09दिया था। बात मालिनी के भी समझ में आई।
  8982. 6:47:12अभी मालिनी और श्रवण आपस में बातें कर ही
  8983. 6:47:15रहे थे कि तभी प्रतीक [संगीत] वहां पर आ
  8984. 6:47:17गया। तुम यहां कैसे आ गए? तुम्हें यहां
  8985. 6:47:20किसने बुलाया है? अब जब मैं इस पार्टी
  8986. 6:47:23[संगीत] में हूं तो इसका मतलब है किसी ने
  8987. 6:47:25तो मुझे यहां बुलाया ही होगा। तभी मैं
  8988. 6:47:28यहां हूं। और दूसरी बात यह [संगीत] है कि
  8989. 6:47:31मैं तुम्हें सफाई देना जरूरी नहीं समझता।
  8990. 6:47:34कहीं तुम मेनका के साथ फ्री की दावत
  8991. 6:47:37[संगीत] खाने के लिए तो यहां नहीं आ गए।
  8992. 6:47:39तुम आजाद हो। इसलिए जो भी सोचना चाहो सोच
  8993. 6:47:43[संगीत] सकते हो। मुझे उससे कोई फर्क नहीं
  8994. 6:47:45पड़ता। प्रतीक को श्रवण का यह लापरवाह
  8995. 6:47:48अंदाज गुस्सा दिला रहा था। पर वो अपनी ही
  8996. 6:47:51पार्टी में हंगामा [संगीत] नहीं कर सकता
  8997. 6:47:53था। इसलिए वह मेनका से बोला, मेनका
  8998. 6:47:57तुम्हें अपने दोस्त को ऐसी जगह लाने से
  8999. 6:47:59पहले सोचना चाहिए कि वो उस जगह के काबिल
  9000. 6:48:02है भी या नहीं। [संगीत]
  9001. 6:48:03पर मैंने तुम्हें कब कहा कि श्रवण मेरे
  9002. 6:48:05साथ यहां आया है। तुम अपने मन से कुछ भी
  9003. 6:48:08मेरे ऊपर इल्जाम नहीं लगा सकते। अगर यह
  9004. 6:48:11तुम्हारे साथ नहीं आया तो फिर किसके साथ
  9005. 6:48:14आया है? और कौन होगा जिसने इसको यहां
  9006. 6:48:16इनवाइट किया होगा? यह मैं तुम्हें कैसे
  9007. 6:48:19बता सकती हूं? यह तो तुमको खुद ही पता
  9008. 6:48:21करना होगा। तुम अगर अपनी बेइज्जती [संगीत]
  9009. 6:48:24नहीं करवाना चाहते तो साफ-साफ बताओ
  9010. 6:48:27तुम्हें यहां इस पार्टी में किसने इनवाइट
  9011. 6:48:29किया? और अगर नहीं बता सकते तो मैं
  9012. 6:48:32तुम्हें लास्ट वार्निंग दे रहा हूं कि तुम
  9013. 6:48:35अभी के अभी इस पार्टी से बाहर चले जाओ।
  9014. 6:48:38नहीं तो तुम्हारे साथ कुछ भी बुरा हो सकता
  9015. 6:48:41है। प्रतीक तुम इस तरह से यहां आए किसी
  9016. 6:48:45गेस्ट से कैसे बात कर सकते हो? जबकि अभी
  9017. 6:48:48तुम्हें पता भी नहीं है कि इसको यहां
  9018. 6:48:50किसने इनवाइट किया है। उसके बाद भी किसी
  9019. 6:48:53से इस तरह बात करना एक तरह से उसकी
  9020. 6:48:55बेइज्जती करना ही है। मैं देख रहा हूं कि
  9021. 6:48:58आजकल तुम पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा हुआ
  9022. 6:49:01है। इसलिए आजकल तुम भी इसके सुर में गाने
  9023. 6:49:04लगी हो। मुझे समझ नहीं आ रहा कि मेरे मना
  9024. 6:49:07करने के बाद भी तुम इससे बात करने के लिए
  9025. 6:49:10आ जाती हो।
  9026. 6:49:11[संगीत]
  9027. 6:49:11मुझे किससे कब कहां और कैसे बात करनी है?
  9028. 6:49:15क्या यह मुझे तुमसे पूछकर करना पड़ेगा?
  9029. 6:49:18तुम अपने आप को कुछ ज्यादा ही तुर्रम खां
  9030. 6:49:20तो नहीं समझने लगे? यह बात तो भूल ही जाओ
  9031. 6:49:23कि मैं तुम्हारे इशारे पर नाच सकती हूं।
  9032. 6:49:26तुम गलत सोच रही हो। मैं तुम पर कोई नकेल
  9033. 6:49:29कसने की कोशिश नहीं कर रहा। मैं तो बस
  9034. 6:49:31तुम्हें समझाने की कोशिश कर रहा हूं कि
  9035. 6:49:33तुम जैसा इस लड़के के बारे में सोच रही
  9036. 6:49:35हो, यह वैसा बिल्कुल भी नहीं है। इसलिए
  9037. 6:49:38तुम्हें इससे बचकर ही रहना चाहिए। मेरे
  9038. 6:49:41लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा है वो मैं
  9039. 6:49:44खुद देख लूंगी। तुम खुद से ही मतलब रखो तो
  9040. 6:49:47यह तुम्हारे लिए अच्छा होगा। पता नहीं
  9041. 6:49:49इसने तुम पर क्या जादू कर दिया कि तुम कुछ
  9042. 6:49:51सुनने को ही तैयार नहीं हो। इसी समय
  9043. 6:49:54प्रतीक ने अपनी बुआ स्वर्णलता को विक्की
  9044. 6:49:57के साथ उधर आते हुए देखा। बुआ आप यहां कोई
  9045. 6:50:01बात है क्या? स्वर्णलता ने [संगीत] प्रतीक
  9046. 6:50:04को कोई जवाब नहीं दिया। वो श्रवण को घूरने
  9047. 6:50:07लगी। तुम यहां क्या कर रहे हो? क्या बात
  9048. 6:50:10है बुआ? क्या आप इस लड़के को जानती हैं?
  9049. 6:50:13मैं भी इससे यही पूछ रहा था कि यह यहां
  9050. 6:50:15कैसे आ गया है या इसे किसने बुलाया है?
  9051. 6:50:19प्रतीक की बात सुनकर स्वर्णलता जी श्रवण
  9052. 6:50:21के सामने आई और उसे तीखी नजरों से घूरते
  9053. 6:50:24हुए उन्होंने कहा, "तुम जिसके भी बुलावे
  9054. 6:50:27पर यहां आए हो, तो मैं तुम्हें सलाह देना
  9055. 6:50:29चाहूंगी कि मैं यहां इस पार्टी में कोई
  9056. 6:50:32हंगामा नहीं चाहती। इसलिए अगर तुम अपनी
  9057. 6:50:34सलामती चाहते हो तो उल्टे पैर यहां से
  9058. 6:50:37वापस चले जाओ। तब शायद मैं तुम्हें कुछ ना
  9059. 6:50:39कहूं। अगर आप मुझे इस पार्टी से निकालना
  9060. 6:50:42चाहती हैं तो ठीक है। मैं यहां से चला
  9061. 6:50:45जाऊंगा। पर जाने से पहले मैं राजा साहब को
  9062. 6:50:47बता तो दूं कि आपने मुझे यहां से चले जाने
  9063. 6:50:50के लिए कहा है। तुमने क्या कहा? तुम्हें
  9064. 6:50:53पिताजी ने यहां बुलाया है? तो आपको क्या?
  9065. 6:50:56मैं कोई उठाई गिरा लगता हूं जो किसी की भी
  9066. 6:50:59[संगीत] पार्टी में यूं ही घुस जाएगा। अगर
  9067. 6:51:01तुम्हें पिताजी ने ही यहां बुलाया है तो
  9068. 6:51:03फिर तुम्हें यहां से जाने की कोई जरूरत
  9069. 6:51:05नहीं है। [संगीत]
  9070. 6:51:06स्वर्णलता जी पहले की तुलना में थोड़े
  9071. 6:51:09शांत स्वर में बोली। प्रतीक को अपनी बुआ
  9072. 6:51:12का यूं पलट [संगीत] जाना समझ से परे था।
  9073. 6:51:14उसे समझ नहीं आया कि बुआ की भाषा अचानक
  9074. 6:51:16शांत कैसे हो गई। स्वर्णलता जी को ऐसे
  9075. 6:51:19बोलते देखकर उनके साथ आए विक्की को भी
  9076. 6:51:22आश्चर्य होने लगा। अब आगे क्या होगा? क्या
  9077. 6:51:26श्रवण को यहां से जाना होगा? क्या राजा
  9078. 6:51:28साहब सबके सामने श्रवण की पहचान जाहिर
  9079. 6:51:31करेंगे जानने के लिए सुनते शौर्य प्रतीक
  9080. 6:51:33का उपहास उड़ाने वाले भाव में बोला आप तो
  9081. 6:51:37बड़ी समझदार निकली आपने मुझे धमकाने की
  9082. 6:51:40कोई कोशिश नहीं की पर [संगीत] यह प्रतीक
  9083. 6:51:42तो अपने पजामे से बाहर होता जा रहा है आप
  9084. 6:51:45इसको समझा दीजिए कि घर आए मेहमान से तमीज
  9085. 6:51:47से बात की जाती है। गुंडे मवालियों वाली
  9086. 6:51:50भाषा इस जैसे शख्स को शोभा नहीं देती।
  9087. 6:51:53शौर्य की बात [संगीत] सुनकर प्रतीक को
  9088. 6:51:56गुस्सा तो बहुत आया पर उसने अपने गुस्से
  9089. 6:51:58को जाहिर नहीं किया। स्वर्णलता जी शौर्य
  9090. 6:52:01को ऐसे भाव से देख रही थी जैसे समझने की
  9091. 6:52:04कोशिश कर रही हो कि यह लड़का उनके पापा से
  9092. 6:52:07कैसे कनेक्टेड [संगीत] हो सकता है। शौर्य
  9093. 6:52:10उनके चेहरे के भाव से समझ पा रहा था कि
  9094. 6:52:13उनके दिमाग में क्या चल रहा है। इसलिए वह
  9095. 6:52:16बोला चिंता मत कीजिए थोड़ी देर में आप
  9096. 6:52:19मुझे जान जाएंगी तब शायद आपकी गलतफहमी भी
  9097. 6:52:22दूर हो जाएगी। स्वर्णलता जी समझने की
  9098. 6:52:25कोशिश कर रही थी कि शौर्य के इस
  9099. 6:52:27कॉन्फिडेंस के पीछे क्या कारण हो सकता है।
  9100. 6:52:29पर इतना तो वह समझ गई थी कि जितना [संगीत]
  9101. 6:52:32हल्के में वह शौर्य को ले रही हैं, यह
  9102. 6:52:34लड़का उनके लिए इतना आसान नहीं है। पहले
  9103. 6:52:37भी उन्होंने इस लड़के को अंडरएस्टीमेट
  9104. 6:52:39[संगीत]
  9105. 6:52:39किया था। जिसका खामियाजा विक्की को आज तक
  9106. 6:52:42झेलना पड़ रहा है। वो दोबारा इस लड़के की
  9107. 6:52:45सच्चाई [संगीत] पूरी तरह से जाने बगैर कोई
  9108. 6:52:47कदम नहीं उठाएंगी। यह सोचकर उन्होंने
  9109. 6:52:50विक्की से कहा, "तुम यहां पार्टी में आए
  9110. 6:52:53हो तो पार्टी एंजॉय करो और जो बात खत्म हो
  9111. 6:52:56गई है, उसके पीछे पड़ने [संगीत] का कोई
  9112. 6:52:57फायदा नहीं है। अब चलो यहां से। विक्की
  9113. 6:53:00हताश स्वर में स्वर्णता जी से बोला। पर
  9114. 6:53:03आंटी क्या [संगीत] आप इस लड़के को ऐसे ही
  9115. 6:53:06छोड़ देंगी? आप जानती हैं इसके कारण मुझे
  9116. 6:53:08मेडिकल कॉलेज से निकाल दिया गया और मैं
  9117. 6:53:11इसका कुछ [संगीत] नहीं कर पाया। स्वर्णलता
  9118. 6:53:13जी विक्की को डांटते हुए बोली। उसका
  9119. 6:53:16जिम्मेदार भी तो तुम खुद ही हो। तुमने ऐसे
  9120. 6:53:19काम क्यों किए जिसके कारण तुम्हें आज यह
  9121. 6:53:21दिन देखना पड़ रहा है। अगर तुम उस लड़की
  9122. 6:53:23मेघा को नहीं छेड़ते तो तुम्हारे साथ कुछ
  9123. 6:53:25बुरा नहीं होता। तुम्हें उस लड़की को
  9124. 6:53:28छेड़ने से पहले यह सोचना [संगीत] चाहिए था
  9125. 6:53:30कि क्या सही है और क्या गलत। अब चलो यहां
  9126. 6:53:33से। स्वर्णलता जी की बात सुनकर विक्की
  9127. 6:53:36[संगीत] का चेहरा उतर गया। अब उसने वहां
  9128. 6:53:38से जाने में ही अपनी भलाई समझी। स्वर्णलता
  9129. 6:53:41जी शौर्य [संगीत] के पास से चली गई।
  9130. 6:53:43मजबूरन विक्की को भी उनके पीछेछे जाना
  9131. 6:53:46पड़ा। प्रतीक जो वहां खड़ा सब कुछ देख सुन
  9132. 6:53:49[संगीत] रहा था उसे समझ नहीं आया कि अभी
  9133. 6:53:51यहां पर क्या हुआ क्योंकि विक्की के साथ
  9134. 6:53:54क्या घटना घटी थी वो इस बात से अनजान था।
  9135. 6:53:57पर इतना तो वह समझ गया कि विक्की के साथ
  9136. 6:53:59जो कुछ भी बुरा हुआ वो सब शौर्य के कारण
  9137. 6:54:02ही हुआ है। यह देखकर उसे भी लगा कि इस समय
  9138. 6:54:05पार्टी में शौर्य से उलझना ठीक नहीं है।
  9139. 6:54:08उसको सबक सिखाने से पहले उसे शौर्य के
  9140. 6:54:11बारे में पूरी जानकारी [संगीत] निकाल लेनी
  9141. 6:54:13चाहिए। इस समय तो मैं तुम्हें छोड़ रहा
  9142. 6:54:15हूं क्योंकि यह मेरे घर की पार्टी है और
  9143. 6:54:18मैं नहीं चाहता कि यहां कुछ हंगामा हो। पर
  9144. 6:54:20तुम यह ध्यान रखना कि मैं तुम्हें इतनी
  9145. 6:54:23आसानी [संगीत] से नहीं छोड़ने वाला। इतना
  9146. 6:54:25कहकर प्रतीक वहां से जाने लगा। पर उसके
  9147. 6:54:28जाते-जाते पीछे से शौर्य ने कहा। मुझे उस
  9148. 6:54:31पल का इंतजार रहेगा जब तुम मुझे सबक
  9149. 6:54:33सिखाओगे। मालिनी को भी भरोसा नहीं हो रहा
  9150. 6:54:37था कि शौर्य [संगीत] इतनी आसानी से इस
  9151. 6:54:39स्थिति से निपट लेगा। क्योंकि वह जानती थी
  9152. 6:54:42कि प्रतीक स्वभाव का जिद्दी था। अगर उसने
  9153. 6:54:44शौर्य को यहां से निकालने का सोच लिया था
  9154. 6:54:47तो इसके लिए वह कुछ भी कर जाएगा। [संगीत]
  9155. 6:54:49पर वह तो बड़ी आसानी से पीछे हट गया। फिर
  9156. 6:54:52उसने शौर्य के बारे में सोचा [संगीत] तो
  9157. 6:54:54उसे लगा कि शायद उसने शौर्य को समझने में
  9158. 6:54:57भी गलती कर दी है। जितना वो उसको समझ रही
  9159. 6:55:00है, शायद शौर्य उससे बड़ी चीज [संगीत] है।
  9160. 6:55:03उसके बारे में कुछ ऐसा है जो अभी उसको
  9161. 6:55:05नहीं पता। पर शौर्य की असली स्थिति उससे
  9162. 6:55:09कहीं ज्यादा पावरफुल है जितना वह [संगीत]
  9163. 6:55:11समझ पा रही है। क्योंकि पहले भी शौर्य ने
  9164. 6:55:14उसको ऐसा दिखाया हुआ था जैसे उसकी फिल्म
  9165. 6:55:16की ही बात ली जाए जिसे उसने एक [संगीत]
  9166. 6:55:19तरह से डब्बा बंद कर दिया था। पर शौर्य ने
  9167. 6:55:22खुद ही उस प्रोजेक्ट को पूरा करने का सोच
  9168. 6:55:24लिया था। और उसके लिए तो उसने बाकायदा
  9169. 6:55:27फाइनेंसियल भी ढूंढ लिया था। दूसरी तरफ
  9170. 6:55:29शिप्रा जो राजा साहब के पास थी उसे उसके
  9171. 6:55:32ऑफिस के कुछ सीनियर स्टाफ मिल गए थे
  9172. 6:55:34जिन्होंने उसको घेर लिया था। वह उनसे
  9173. 6:55:37बातें करने लगी थी। पर उसका ध्यान शौर्य
  9174. 6:55:39की तरफ ही था। पहले तो उसने शौर्य को
  9175. 6:55:42सिर्फ विक्रम के साथ देखा था। फिर उसके
  9176. 6:55:45पास मेनका आ गई। फिर उसने मालिनी को भी
  9177. 6:55:49उसके पास आते देख लिया। उसने दूर से यह भी
  9178. 6:55:52नोटिस कर लिया कि उन सबके बीच उन सबका
  9179. 6:55:55केंद्रबिंदु शौर्य ही था। जबकि हकीकत में
  9180. 6:55:59होना यह चाहिए था कि विक्रम [संगीत] को उन
  9181. 6:56:01सबका अट्रैक्शन होना चाहिए था। क्योंकि
  9182. 6:56:04विक्रम इतनी बड़ी कंपनी का मालिक था और
  9183. 6:56:07वहां पर जो भी थे सब उसके लिए ही काम कर
  9184. 6:56:10रहे थे। पर वहां उपस्थित लोगों की शारीरिक
  9185. 6:56:13भाषा कुछ और ही कहानी कह रही थी। वो
  9186. 6:56:16साफ-साफ [संगीत]
  9187. 6:56:16नोटिस कर पा रही थी कि विक्रम शौर्य की
  9188. 6:56:19बात को बड़ी ध्यान से सुनता था और वो
  9189. 6:56:21शौर्य के सामने कुछ झुका सा प्रतीत होता
  9190. 6:56:24था। उसकी शारीरिक भाषा कहीं से यह [संगीत]
  9191. 6:56:27शो नहीं कर रही थी कि वह शौर्य का बॉस है।
  9192. 6:56:30बल्कि उल्टा शौर्य उसका बॉस [संगीत] लग
  9193. 6:56:32रहा था। पर वो समझ नहीं पा रही थी कि ऐसा
  9194. 6:56:35क्यों हो सकता है। क्योंकि [संगीत] वो तो
  9195. 6:56:37अच्छे से जानती थी कि शौर्य का स्टेटस
  9196. 6:56:40क्या था। वो अपने आसपास के लोगों से फ्री
  9197. 6:56:43होकर शौर्य के पास जाना चाहती [संगीत] थी।
  9198. 6:56:45पर कोई ना कोई आकर उसको घेर लेता था। बड़ी
  9199. 6:56:48मुश्किल से उसने सबसे पीछा छुड़ाकर शौर्य
  9200. 6:56:51के पास जाने का सोचा ही था कि तभी सामने
  9201. 6:56:54से प्रतीक अपने हाथ में दो ड्रिंक की
  9202. 6:56:56ग्लास लेकर उसके [संगीत] सामने आ गया। अगर
  9203. 6:56:59कोई मुझसे पूछे कि इस पूरी महफिल में सबसे
  9204. 6:57:02खूबसूरत लड़की कौन है? तो मैं बेहिचक
  9205. 6:57:04तुम्हारा नाम लूंगा। शिप्रा झेपती हुई
  9206. 6:57:06बोली। [संगीत]
  9207. 6:57:07बस बस लगता है आज तुम्हें कोई झाड़ पर
  9208. 6:57:10चढ़ाने के लिए नहीं मिली जो तुम यूं मुझे
  9209. 6:57:12झाड़ पर चढ़ा रहे हो। प्रतीक पूरे हॉल में
  9210. 6:57:15अपनी नजर घुमाता हुआ बोला।
  9211. 6:57:17[संगीत]
  9212. 6:57:17मैं सच कह रहा हूं। अगर तुम्हें यकीन नहीं
  9213. 6:57:19है तो तुम यहां मौजूद लोगों की नजर को देख
  9214. 6:57:21[संगीत] सकती हो। ज्यादातर लोग चोरी छुपे
  9215. 6:57:24बीच-बीच में तुम्हें देख ही लेते हैं।
  9216. 6:57:26शिप्रा भी प्रतीक की बात पर हॉल में अपनी
  9217. 6:57:28नजर फेरती हुई बोली। क्या आज तुम कसम खाकर
  9218. 6:57:31आए हो कि मुझे एंबरेस करके ही मानोगे?
  9219. 6:57:34प्रतीक ग्लास शिप्रा की ओर बढ़ाते हुए
  9220. 6:57:36बोला। चलो छोड़ो इस बात को। तुम तो मेरी
  9221. 6:57:39बात मानोगी नहीं। लो यह ड्रिंक लो। मैंने
  9222. 6:57:42खुद अपने हाथों से तुम्हारे लिए बनाया है।
  9223. 6:57:44थैंक यू। इतना कहकर शिप्रा ने प्रतीक के
  9224. 6:57:47हाथ से ग्लास ले लिया। शिप्रा ने कुछ देर
  9225. 6:57:50पहले प्रतीक और स्वर्णलता जी दोनों को
  9226. 6:57:52शौर्य के साथ देखा था। उनके बीच कुछ बातें
  9227. 6:57:55भी हुई थी जिन्हें शिप्रा ने सुना तो नहीं
  9228. 6:57:57था पर उनके चेहरे के भाव से यह समझ गई थी
  9229. 6:58:00कि [संगीत] उनके बीच जो बातें हुई वो
  9230. 6:58:02अच्छे माहौल में तो नहीं हुई थी। उसे उनके
  9231. 6:58:04बीच के लफड़े का कुछ पता नहीं था। प्रतीक
  9232. 6:58:07से उसे इस बारे में [संगीत] पूछना उचित
  9233. 6:58:08नहीं लगा। उसने सोचा जब वह शौर्य से
  9234. 6:58:11मिलेगी तो उससे जरूर इस बारे में पूछेगी।
  9235. 6:58:14प्रतीक उस तरफ देखता हुआ बोला जिधर शिप्रा
  9236. 6:58:16के ऑफिस के ज्यादातर स्टाफ एक साथ खड़े
  9237. 6:58:19बातें कर रहे थे। मैं देख रहा हूं [संगीत]
  9238. 6:58:21कि इतने कम समय में ही ऑफिस के लोग
  9239. 6:58:23तुम्हें बहुत पसंद करने लगे हैं। शिप्रा
  9240. 6:58:26मुस्कुराती हुई बोली अच्छा सच में ऐसा है
  9241. 6:58:29क्या? मुझे नहीं पता। अगर ऐसा है तो मैं
  9242. 6:58:32इसे अपनी खुशनसीबी समझूंगी। [संगीत]
  9243. 6:58:34प्रतीक शरारत भरे स्वर में बोला। तुम्हारी
  9244. 6:58:36अदा के भी क्या कहने? तुम जान भी ले लेती
  9245. 6:58:39हो और तुम्हें पता भी नहीं होता कि तुमने
  9246. 6:58:41क्या कर दिया है। शिप्रा को समझ नहीं आया
  9247. 6:58:44कि प्रतीक क्या बोल रहा है। उसके होठों पर
  9248. 6:58:47शरारती मुस्कान देखकर वो अपनी आंखें
  9249. 6:58:49चढ़ाती हुई बोली क्या तुम मेरे साथ फ्लर्ट
  9250. 6:58:52करने की कोशिश कर रहे हो? तुम इसे फ्लर्ट
  9251. 6:58:55कह रही हो पर [संगीत] मैं तो तुम्हारी
  9252. 6:58:56तारीफ कर रहा हूं। क्या बात है? सब ठीक तो
  9253. 6:58:59है? आज तुम कुछ अलग ही मूड में नजर आ रहे
  9254. 6:59:02हो। शिप्रा समझ नहीं पा रही थी कि आज
  9255. 6:59:05[संगीत] प्रतीक इस तरह से बात क्यों कर
  9256. 6:59:06रहा है। वो यह तो समझती थी कि प्रतीक
  9257. 6:59:09हमेशा उसको इंप्रेस करने की कोशिश करता
  9258. 6:59:11रहता है। पर आज इस [संगीत] पार्टी में वो
  9259. 6:59:13कुछ ज्यादा ही ओपन होने की कोशिश कर रहा
  9260. 6:59:16था। प्रतीक शिप्रा की खूबसूरती के कसीदे
  9261. 6:59:18पढ़ता हुआ बोला। इसमें मेरी कोई गलती नहीं
  9262. 6:59:21है। यह सब तुम्हारी खूबसूरती का दोष है।
  9263. 6:59:24तुम्हारी खूबसूरती ही [संगीत] मुझे इस तरह
  9264. 6:59:26से बात करने के लिए प्रेरित कर रही है।
  9265. 6:59:28शिप्रा प्रतीक की बातों को इग्नोर करती
  9266. 6:59:30हुई बोली। लगता है नशा तुम्हारे सिर पर
  9267. 6:59:33चढ़ गया है। इसलिए आज तुम बहकी [संगीत]
  9268. 6:59:35बहकी बातें कर रहे हो। प्रतीक शिप्रा की
  9269. 6:59:38आंखों में देखता हुआ बोला तुम्हें ऐसा
  9270. 6:59:40क्यों लग रहा है कि जो भी मैं कह रहा हूं
  9271. 6:59:42वो नशे की हालत में कह रहा हूं। मैं तुमसे
  9272. 6:59:46सच कह रहा हूं। मैं तुमसे वही कह रहा हूं
  9273. 6:59:49जो मैं तुम्हारे लिए महसूस करता हूं।
  9274. 6:59:52शिप्रा ने उम्मीद नहीं किया था कि प्रतीक
  9275. 6:59:54इस हद तक उससे बात कर सकता है। वह अभी तक
  9276. 6:59:57प्रतीक के साथ एक डिस्टेंस मेंटेन करती आ
  9277. 7:00:00रही थी। पर आज प्रतीक सोच कर बैठा था कि
  9278. 7:00:03वो उस डिस्टेंस को दूर कर देगा। शिप्रा
  9279. 7:00:07खूबसूरती से प्रतीक की बातों के मायने
  9280. 7:00:09बदलते हुए बोली अगर तुम्हें लगता है कि
  9281. 7:00:11मैं सच में खूबसूरत हूं और तुम मेरी तारीफ
  9282. 7:00:14भी कर रहे हो तो मैं तुम्हें थैंक यू
  9283. 7:00:16कहूंगी। प्रतीक की बातों से लग रहा था
  9284. 7:00:19जैसे वह आज ठान कर बैठा था कि वह शिप्रा
  9285. 7:00:22के सामने अपने दिल के जज्बात को बयान कर
  9286. 7:00:25देगा। बहुत समय से मेरे दिल में एक बात थी
  9287. 7:00:28जो [संगीत] मैं तुमसे करना चाहता था पर
  9288. 7:00:30कभी सही समय ही नहीं मिला कि मैं तुमसे वो
  9289. 7:00:32बात कर सकूं। शिप्रा भी समझ गई [संगीत] थी
  9290. 7:00:35कि प्रतीक अब आगे उससे क्या बात करने वाला
  9291. 7:00:38है। वो खुद को फंसी हुई महसूस कर रही थी
  9292. 7:00:41कि वो उसको कैसे इग्नोर करके उसके पास से
  9293. 7:00:44हट जाए। वो सोचने लगी [संगीत] आज तो वह
  9294. 7:00:47अच्छी फंसी। उसे कोई रास्ता नजर नहीं आ
  9295. 7:00:49रहा था कि वह प्रतीक से कैसे पीछा छुड़ाए।
  9296. 7:00:52तभी उसके कानों में एक आवाज सुनाई दी।
  9297. 7:00:55शौर्य बोलते हुए शिप्रा [संगीत] के सामने
  9298. 7:00:57आ गया। अरे मिस शिप्रा तुम यहां हो? मैंने
  9299. 7:01:01तुम्हें कहां-कहां ना ढूंढ लिया। शिप्रा
  9300. 7:01:03ने शौर्य को अपने सामने देखा [संगीत] तो
  9301. 7:01:05उसकी सांस में सांस आई। उसे लगा एकदम सही
  9302. 7:01:08समय पर शौर्य ने उसके सामने एंट्री की थी।
  9303. 7:01:12पर शौर्य को देखकर प्रतीक की भौहें चढ़ गई
  9304. 7:01:14थी। तुम यहां क्या कर रहे हो? तुम देख
  9305. 7:01:17नहीं रहे कि हम अभी बिजी हैं। शौर्य बातें
  9306. 7:01:20बनाता हुआ बोला, पार्टी में भला कौन बिजी
  9307. 7:01:23हो सकता है। यहां तो सब फ्री होकर आते
  9308. 7:01:26हैं। और फिर मेरी तो मिस शिप्रा से पहले
  9309. 7:01:28ही बात हो रखी थी कि वो मुझे यहां [संगीत]
  9310. 7:01:30पर थोड़ा समय देंगी। बिजनेस की बातों को
  9311. 7:01:33इग्नोर तो नहीं किया जा सकता। आखिर मैंने
  9312. 7:01:35इनकी कंपनी को इतना बड़ा आर्डर दिलवाया
  9313. 7:01:38है। तुमने आर्डर दिलवाया? [संगीत]
  9314. 7:01:40आखिर तुमने कौन सा बड़ा आर्डर कंपनी को
  9315. 7:01:42दिलवाया है? प्रतीक का मन कर रहा था कि वह
  9316. 7:01:45शौर्य को घूंसा जमा दे। पर उसने बड़ी
  9317. 7:01:48मुश्किल से अपने इरादों को रोक कर रखा।
  9318. 7:01:50शौर्य कुछ बोले उससे पहले शिप्रा ने सफाई
  9319. 7:01:53दी। यह बिग बुल के साथ जो हमारी डील हुई
  9320. 7:01:56है उसके बारे में बात कर रहे हैं। वो डील
  9321. 7:01:59शौर्य के कारण ही संभव हो पाई है। प्रतीक
  9322. 7:02:02मुंह बनाता हुआ बोला। अगर ऐसा है तो तुम
  9323. 7:02:05इसको बोल दो। तुम इस बारे में इससे बाद
  9324. 7:02:07में बात कर लोगी। अभी यह यहां से चला जाए।
  9325. 7:02:11यह तुम कैसी बात कर रहे हो प्रतीक? मैंने
  9326. 7:02:14खुद शौर्य को बोला था कि मैं पार्टी के
  9327. 7:02:16दौरान आपसे बात करूंगी। और अब जब यह आ गए
  9328. 7:02:19हैं तो मैं इन्हें कैसे मना कर सकती हूं?
  9329. 7:02:22कोई बात नहीं है। जब यह आ गए हैं तो मैं
  9330. 7:02:25इनसे बात कर लेती हूं। मैं तुमसे फ्री
  9331. 7:02:27होकर मिलती हूं। इतना कहकर शिप्रा एक तरफ
  9332. 7:02:30को बढ़ती हुई बोली। आइए मिस्टर शौर्य हम
  9333. 7:02:33उस तरफ चलते हैं। शिप्रा ने प्रतीक की बात
  9334. 7:02:36को सुनने का भी इंतजार नहीं किया। दोनों
  9335. 7:02:39बातें करते हुए एक तरफ को बढ़ गए और
  9336. 7:02:41प्रतीक दांत पीसता हुआ अपनी [संगीत] जगह
  9337. 7:02:43पर ही खड़ा रह गया। उसे अपनी भारी
  9338. 7:02:46बेइज्जती महसूस हो रही थी कि शिप्रा
  9339. 7:02:48[संगीत] उसको इग्नोर करके शौर्य के साथ
  9340. 7:02:50चली गई थी। अब आगे क्या होगा? क्या प्रतीक
  9341. 7:02:54अपनी इस [संगीत] बेइज्जती का बदला लेगा?
  9342. 7:02:56क्या शिप्रा शौर्य का सच जान पाएगी? क्या
  9343. 7:02:59कोई नया हंगामा अभी होना बाकी है इस
  9344. 7:03:01पार्टी में? जानने के लिए सुनिए। कृप्रा
  9345. 7:03:04शौर्य के साथ जल्दी [संगीत] से प्रतीक से
  9346. 7:03:06दूर चली गई। उसे अभी भी यह डर सता रहा था
  9347. 7:03:09कि प्रतीक कहीं उसके पीछेछे ना आ जाए। जब
  9348. 7:03:12उसने महसूस किया कि प्रतीक उसके पीछे नहीं
  9349. 7:03:15आ रहा है तो उसे तसल्ली हुई। वो हॉल के
  9350. 7:03:19शेड से निकल कर वहां मौजूद लॉन में आ गई
  9351. 7:03:22और एक खाली टेबल देखकर वो शौर्य के साथ
  9352. 7:03:25बैठ गई।
  9353. 7:03:27थैंक गॉड। तुम एकदम सही समय पर वहां पर आ
  9354. 7:03:30गए। नहीं तो पता नहीं वो प्रतीक मुझे और
  9355. 7:03:32कितना पकाता। शिप्रा एक लंबी सांस लेती
  9356. 7:03:35[संगीत] हुई बोली। क्या तुम कोई खाने की
  9357. 7:03:38चीज हो जो वो तुम्हें पका रहा था? शौर्य
  9358. 7:03:41शरारत भरे स्वर में बोला, अपनी बकवास बंद
  9359. 7:03:44करो। वहां मेरी जान पर बनी हुई थी और
  9360. 7:03:47तुम्हें शरारत सूझ रही है। शिप्रा अपनी
  9361. 7:03:49आंखों में गुस्सा भरती हुई बोली। ये लो
  9362. 7:03:53मैंने [संगीत] कौन सी शरारत की? तुम ही तो
  9363. 7:03:55अभी बोली थी कि वो तुमको पका रहा था।
  9364. 7:03:58शौर्य जवाब देते हुए बोला। एक से अभी बच
  9365. 7:04:01कर आई हूं। और अब क्या तुमने यह ठान लिया
  9366. 7:04:03है कि तुम भी मुझे वैसे ही पकाओगे? शिप्रा
  9367. 7:04:06शौर्य को घूरती हुई बोली, वैसे एक बात तो
  9368. 7:04:10है तुम यहां जिसके भी साथ खड़ी नजर आती हो
  9369. 7:04:13वो यहां लोगों के आकर्षण का केंद्र बिंदु
  9370. 7:04:15बन जाता है। शौर्य अपने आसपास के लोगों की
  9371. 7:04:18नजरों को देखकर बोला क्योंकि [संगीत] उसने
  9372. 7:04:20महसूस किया था कि वहां मौजूद ज्यादातर
  9373. 7:04:23लोगों का ध्यान रहकर उसकी तरफ ही आ रहा
  9374. 7:04:25है। शौर्य की बात सुनकर शिप्रा को प्रतीक
  9375. 7:04:29की कही बात भी ध्यान में आई। उसने भी उसको
  9376. 7:04:31लेकर कुछ ऐसा ही कहा था। अब तुम भी प्रतीक
  9377. 7:04:34की तरह बात करने लगे। शिप्रा अपने आसपास
  9378. 7:04:37का जायजा [संगीत] लेती हुई बोली, तो अब
  9379. 7:04:40मेरे ऐसे दिन आ गए हैं कि तुम मुझे प्रतीक
  9380. 7:04:42से कंपेयर कर रही हो। एक तो मैं अभी
  9381. 7:04:44तुम्हें उसके पास से बचाकर लाया हूं और
  9382. 7:04:46उसका यह शिला मुझे मिल रहा है। शौर्य
  9383. 7:04:49बेचारगी से बोला। बचा कर लाए हो का क्या
  9384. 7:04:52मतलब हुआ? क्या वो मेरी जान ले रहा था जो
  9385. 7:04:55तुम मुझे उसके पास से बचा कर लाए हो?
  9386. 7:04:58शिप्रा अपनी भुकुटी चढ़ाते हुए बोली।
  9387. 7:05:00अच्छा ऐसा नहीं था तो कोई बात नहीं। मैं
  9388. 7:05:03अभी फिर से उसे तुम्हारे पास बुला [संगीत]
  9389. 7:05:05देता हूं। वो यहीं पीछे ही तो है। मेरे
  9390. 7:05:08आवाज देने की देर है। वो भागता हुआ
  9391. 7:05:10[संगीत] खुद यहां आ जाएगा। कहता हुआ शौर्य
  9392. 7:05:13शिप्रा के पीछे देखकर हाथ उठाकर कुछ इशारा
  9393. 7:05:16करने वाला था कि तभी शिप्रा ने उसका हाथ
  9394. 7:05:18झटक कर नीचे कर दिया। यह क्या कर रहे हो
  9395. 7:05:21तुम? [संगीत]
  9396. 7:05:22शिप्रा जल्दी से बोली। वो तुम्हारे पीछे
  9397. 7:05:25ही है। कहो तो अभी उसे तुम्हारे पास बुला
  9398. 7:05:27देता हूं। शौर्य मुस्कुराते हुए शिप्रा के
  9399. 7:05:30पीछे देखता हुआ बोला। शौर्य के मुंह से यह
  9400. 7:05:33सुनकर कि प्रतीक उसके पीछे ही है। शिप्रा
  9401. 7:05:36के चेहरे का रंग उड़ गया। वो सहम कर
  9402. 7:05:39मासूमियत से बोली क्या सच में वो हमारे
  9403. 7:05:42पीछे ही है। शिप्रा की हिम्मत नहीं हुई कि
  9404. 7:05:45वो पीछे पलट कर देखे कि शौर्य सही कह रहा
  9405. 7:05:47है या गलत? [संगीत]
  9406. 7:05:49क्या हुआ तुम्हारे चेहरे का रंग? क्यों
  9407. 7:05:51उड़ गया? अभी तो तुम बड़ी बहादुर बन रही
  9408. 7:05:54थी। अब तुम्हारे होश क्यों उड़े हुए हैं?
  9409. 7:05:57बुला लो उसे या [संगीत] तुम ही उसके पास
  9410. 7:05:59चली जाओ। मैं तो तुम्हें उसकी तरह पका रहा
  9411. 7:06:01हूं ना। शौर्य की निगाह अभी भी शिप्रा के
  9412. 7:06:04पीछे कहीं टिकी हुई थी। जिसके कारण शिप्रा
  9413. 7:06:07को लग रहा था कि सच में ही प्रतीक कहीं
  9414. 7:06:09उसके पीछे खड़ा है। उसके पकाने और
  9415. 7:06:12तुम्हारे पकाने में थोड़ा सा फर्क तो है।
  9416. 7:06:14मैं उसे झेल नहीं पा रही थी। पर [संगीत]
  9417. 7:06:16तुमको तो झेल सकती हूं। शिप्रा ने बड़ी
  9418. 7:06:19मासूमियत से शौर्य की आंखों में देखते हुए
  9419. 7:06:22जवाब दिया। शिप्रा का यह मासूम भाव देखकर
  9420. 7:06:25शौर्य [संगीत] का मन किया कि वो उसको अपनी
  9421. 7:06:27बाहों में भर ले। शिप्रा के चेहरे की यही
  9422. 7:06:30मासूमियत तो उसको पागल कर देती है। शौर्य
  9423. 7:06:33तो उसके चेहरे में खोसा [संगीत] ही गया
  9424. 7:06:35था। शिप्रा ने शौर्य को ऐसे खोए हुए देखा
  9425. 7:06:38तो उसने टेबल के नीचे से उसके पैर पर अपना
  9426. 7:06:41सैंडल मारा और बोली अब तुम कहां खो गए?
  9427. 7:06:44तुम मेरी बात सुन भी रहे हो या किसी सपने
  9428. 7:06:47में गुम हो गए हो? अपने पैर पर शिप्रा के
  9429. 7:06:50पैर की ठोकर खाकर शौर्य होश में आ गया। अब
  9430. 7:06:53तुम्हें क्या हो गया? तुम मेरे पैर पर
  9431. 7:06:55अपना पैर क्यों मार रही हो? तुम यूं
  9432. 7:06:58बैठे-बैठे कहां खो जाते हो? मैं पूछ रही
  9433. 7:07:00हूं कि क्या सच में प्रतीक मेरे [संगीत]
  9434. 7:07:02पीछे ही कहीं है? शिप्रा अभी भी इसी डर
  9435. 7:07:05में थी कि शायद प्रतीक अभी भी उसके इंतजार
  9436. 7:07:08में उसके पीछे कहीं खड़ा है। तो मैं क्या
  9437. 7:07:11तुम्हारे साथ मजाक कर रहा हूं? तुम कहो तो
  9438. 7:07:14मैं अभी उसे बुला देता हूं। शौर्य शिप्रा
  9439. 7:07:16के पीछे [संगीत] देखता हुआ बोला चलो यहां
  9440. 7:07:19से कहीं और चलते हैं। शिप्रा उठते हुए
  9441. 7:07:22बोली शौर्य ने जब शिप्रा को उठते देखा तो
  9442. 7:07:25वो हड़बड़ा कर जल्दी से बोला अरे नहीं वो
  9443. 7:07:28तुम्हारे पीछे नहीं है। [संगीत] मैं बस
  9444. 7:07:30मजाक कर रहा था। शौर्य के चेहरे पर शरारती
  9445. 7:07:33मुस्कान देखकर शिप्रा गुस्से में अपने
  9446. 7:07:36नथूने फुलाने लगी। [संगीत]
  9447. 7:07:38मुझे आश्चर्य हो रहा है कि उसने तुम्हें
  9448. 7:07:40इतना डरा दिया है कि तुम उससे भागती फिर
  9449. 7:07:42रही हो। शौर्य अपनी आंखें बड़ी करते हुए
  9450. 7:07:45बोला, मैं उससे कोई डर नहीं रही हूं। बस
  9451. 7:07:49वो जो करने वाला था, मैं अभी वो सिचुएशन
  9452. 7:07:51फेस करना नहीं चाहती। बस इतनी सी [संगीत]
  9453. 7:07:53बात है। शिप्रा सपाट चेहरे के साथ बोली,
  9454. 7:07:57"अच्छा, ऐसा क्या करने वाला था वो? जरा
  9455. 7:07:59मैं भी तो सुनूं। क्या सच में वो डरने
  9456. 7:08:01वाली स्थिति है भी या नहीं?" शौर्य
  9457. 7:08:04लापरवाही से बोला, शिप्रा कुछ पल खामोशी
  9458. 7:08:07से शौर्य को देखती रही। फिर [संगीत] बोली,
  9459. 7:08:10"मुझे ऐसा लगा जैसे वह उस समय मुझे प्रपोज
  9460. 7:08:13करने वाला था। जिसे [संगीत] मैं उस समय
  9461. 7:08:15फेस करने की स्थिति में नहीं थी। अच्छा,
  9462. 7:08:18तो इस वजह से तुम डर रही थी। पर यह तो
  9463. 7:08:21अच्छी बात थी। इतना बड़ा आदमी तुम्हें
  9464. 7:08:23प्रपोज करने वाला था और तुम डर कर उससे
  9465. 7:08:25भाग रही हो। समझ भी रही हो? तुम्हें फिर
  9466. 7:08:28ऐसा मौका दोबारा कभी मिलेगा भी या नहीं।
  9467. 7:08:30वो [संगीत] हैंडसम है। साथ में पैसे वाला
  9468. 7:08:33भी। तुम समझ रही हो? वो यहां के राज
  9469. 7:08:35परिवार से संबंध रखता है। शौर्य अपनी
  9470. 7:08:38प्रवाह में यह सब बोले जा रहा था और
  9471. 7:08:40शिप्रा उसे एक टक घूर [संगीत] रही थी।
  9472. 7:08:43शौर्य ने जब यह महसूस किया कि शिप्रा उसे
  9473. 7:08:46गुस्से में घूर रही है तो वह चुप हो गया।
  9474. 7:08:49हो गया तुम्हारा या उसकी [संगीत] तारीफ
  9475. 7:08:51में कुछ और कसीदे गढ़ने बाकी रह गए हैं तो
  9476. 7:08:53वह भी बोल दो। बोलते हुए भी शिप्रा की
  9477. 7:08:56निगाह शौर्य को घूर रही थी। तुम मुझे ऐसे
  9478. 7:08:59क्यों घूर रही हो? मैं तो वही कह रहा था
  9479. 7:09:02जो सच है। तुम समझ भी रही हो प्रतीक का
  9480. 7:09:05परिवार विशालगढ़ का सबसे बड़ा परिवार है।
  9481. 7:09:08शौर्य शिप्रा से अपनी नजर [संगीत] चुराता
  9482. 7:09:10हुआ बोला तो फिर ठीक है तुम ही बताओ अगर
  9483. 7:09:13वो मुझे प्रपोज करता तो फिर मुझे क्या
  9484. 7:09:16करना चाहिए था? शिप्रा भावहीन चेहरे के
  9485. 7:09:19साथ बोली। शिप्रा के सवाल पर शौर्य को समझ
  9486. 7:09:22नहीं आया कि अब उसे [संगीत] क्या बोलना
  9487. 7:09:24चाहिए? पहले तो वह मजाक में कुछ भी बोले
  9488. 7:09:26जा रहा था। पर जब शिप्रा ने उससे पूछ लिया
  9489. 7:09:29तो उसकी बोलती बंद हो गई। अब मैं तुम्हें
  9490. 7:09:31[संगीत] कैसे कह सकता हूं कि तुम्हें क्या
  9491. 7:09:33करना चाहिए? यह तो तुम्हारा डिसीजन होगा
  9492. 7:09:35कि तुमको क्या करना है। शौर्य हकलाते हुए
  9493. 7:09:38बोला डिसीजन तो मेरा ही होगा। पर [संगीत]
  9494. 7:09:41मैं तुमसे तुम्हारी राय पूछ रही हूं कि
  9495. 7:09:43मुझे क्या करना चाहिए। क्योंकि अभी तुम ही
  9496. 7:09:46बता रहे थे कि वह क्या है? कितना बड़ा
  9497. 7:09:48आदमी है। तो अब तुम यह भी बता दो कि
  9498. 7:09:50[संगीत] ऐसी स्थिति में मुझे क्या करना
  9499. 7:09:52चाहिए। शिप्रा के चेहरे पर अभी भी कोई भाव
  9500. 7:09:55नहीं था। शौर्य एक पल को शिप्रा का चेहरा
  9501. 7:09:58देखता रहा और फिर बोलना शुरू किया।
  9502. 7:10:01तुम्हें उससे कहना चाहिए कि एक बेवकूफ
  9503. 7:10:04[संगीत] है जो तुम्हें बहुत प्यार करता है
  9504. 7:10:05और वह तुम्हें किसी और के साथ जाते हुए
  9505. 7:10:08नहीं देख सकता। अगर तुम किसी और के साथ
  9506. 7:10:10चली जाती हो तो वह इस कारण अपनी [संगीत]
  9507. 7:10:12जान भी दे सकता है। इसलिए तुम किसी की जान
  9508. 7:10:15जाने का कारण नहीं बन सकती। इसलिए उसके
  9509. 7:10:17प्रपोजल को स्वीकार नहीं कर सकती। शौर्य
  9510. 7:10:20की बात [संगीत] सुनकर शिप्रा को अच्छा
  9511. 7:10:22लगा। उसने सोच लिया था कि अगर शौर्य ने अब
  9512. 7:10:25कुछ और उल्टा जवाब दिया तो वह उसको अच्छे
  9513. 7:10:27से सबक सिखाएगी। पर शौर्य के जवाब ने उसका
  9514. 7:10:30मन मोह लिया। पर शिप्रा उसी भावहीन चेहरे
  9515. 7:10:33के साथ आगे बोली। अगर कोई बेवकूफ मेरे लिए
  9516. 7:10:36अपनी जान देता भी है तो उससे मुझे क्या?
  9517. 7:10:39मैं तो उस बेवकूफ [संगीत] को प्यार नहीं
  9518. 7:10:40करती ना। तो अब वो मेरे लिए जान दे या कुछ
  9519. 7:10:43भी करे। मुझे क्यों उसके चक्कर में इतने
  9520. 7:10:45अच्छे प्रपोजल को रिजेक्ट करना चाहिए? यह
  9521. 7:10:48तुम क्या कह [संगीत] रही हो? तुम भी तो उस
  9522. 7:10:50बेवकूफ को प्यार करती हो। तुमने कल ही तो
  9523. 7:10:53कहा था। फिर आज तुम इस बात से कैसे इंकार
  9524. 7:10:55कर सकती हो? शौर्य हैरान स्वर में बोला,
  9525. 7:10:58"मैं [संगीत] क्या बेवकूफ हूं जो किसी
  9526. 7:11:00दूसरे बेवकूफ से प्यार करूंगी?" और फिर जब
  9527. 7:11:03इतना अच्छा प्रपोजल सामने हो तो बेवकूफ बन
  9528. 7:11:06जाने [संगीत] में भी क्या नुकसान है? तो
  9529. 7:11:09मैं तो सोचती हूं कि मुझे प्रतीक के
  9530. 7:11:12प्रपोजल को स्वीकार कर ही लेना चाहिए। अब
  9531. 7:11:15मैं गंभीरता से [संगीत] तुम्हारी सलाह पर
  9532. 7:11:17विचार करूंगी। शिप्रा भी शौर्य का दांव
  9533. 7:11:20शौर्य के ऊपर ही चलती [संगीत] हुई बोली।
  9534. 7:11:23मैं अभी जाकर उसे बता रहा हूं कि तुम मेरी
  9535. 7:11:25पत्नी हो [संगीत] इसलिए वो तुम्हारे बारे
  9536. 7:11:27में ऐसा कुछ सोचे भी नहीं। नहीं तो फिर
  9537. 7:11:30मैं उसे नहीं छोडूंगा। शौर्य शिप्रा के
  9538. 7:11:33बदलते रंग को देखकर [संगीत] बोला। अच्छा
  9539. 7:11:36तो फिर देर किस बात की है? जाओ जल्दी से
  9540. 7:11:38जाकर उसे बोलो। शिप्रा शौर्य को उकसाती
  9541. 7:11:41हुई बोली। ठीक है ना बोल दूंगा। अभी तो
  9542. 7:11:45मैं किसी और की पार्टी में आया हुआ हूं
  9543. 7:11:47ना। पर जैसे ही मौका मिलेगा मैं उसे जरूर
  9544. 7:11:50यह बात बोलूंगा। शौर्य निराश स्वर में
  9545. 7:11:53बोला। अभी शौर्य और शिप्रा आपस में बातें
  9546. 7:11:56ही कर रहे थे कि तभी उन्होंने अंदर शोर की
  9547. 7:11:59आवाज सुनी। [संगीत]
  9548. 7:12:00साथ में अंदर से नीलिमा के केक कटिंग की
  9549. 7:12:03घोषणा हो रही थी। सभी गेस्ट्स उस स्टेज की
  9550. 7:12:06तरफ बढ़ गए जहां पर केक को सजाया गया था।
  9551. 7:12:09शौर्य भी शिप्रा के साथ स्टेज की ओर बढ़
  9552. 7:12:12गया। उसने देखा स्टेज के पास एक बड़ा सा
  9553. 7:12:15सर्कल बना हुआ था। शौर्य भी शिप्रा के साथ
  9554. 7:12:18जाकर उसमें शामिल हो गया। उसने देखा
  9555. 7:12:21नीलिमा सूर्यभान और कल्पना जी के साथ केक
  9556. 7:12:24के पास खड़ी थी। पर उसकी निगाह किसी को
  9557. 7:12:27ढूंढ रही थी। वो बोल तो कुछ नहीं रहा था।
  9558. 7:12:30पर उसके घूमती निगाहों [संगीत] को देखकर
  9559. 7:12:32शौर्य समझ गया कि वह उसी को ढूंढ रही है।
  9560. 7:12:35जब उसकी नजर [संगीत] शौर्य से मिली तो
  9561. 7:12:38शौर्य ने आंखों के इशारे से ही उसे कहा सब
  9562. 7:12:41ठीक है तुम केक काटो। शिप्रा ने भी इस बात
  9563. 7:12:44को नोटिस किया कि जैसे ही नीलिमा की निगाह
  9564. 7:12:47शौर्य से मिली, उसके चेहरे की परेशानी दूर
  9565. 7:12:50हो गई। वो आश्चर्य से कभी शौर्य को तो कभी
  9566. 7:12:53नीलिमा को देख रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा
  9567. 7:12:56था यह दोनों आंखों के इशारे में क्या
  9568. 7:12:58बातें [संगीत] कर रहे हैं। क्या शौर्य
  9569. 7:13:00नीलिमा को पहले से जानता है? उसे समझ नहीं
  9570. 7:13:03आ रहा था कि यह क्या चक्कर है। अभी सब
  9571. 7:13:06वहां पर सर्कल में खड़े थे। इसलिए वह इस
  9572. 7:13:09समय शौर्य से यह पूछ भी नहीं सकती [संगीत]
  9573. 7:13:11थी कि वो नीलिमा को कैसे जानता है। नीलिमा
  9574. 7:13:14तो आज ही यूके से आई थी। फिर वो शौर्य को
  9575. 7:13:17कैसे जान सकती थी? कहीं ऐसा तो नहीं है कि
  9576. 7:13:20पार्टी में आने के बाद ही शौर्य ने नीलिमा
  9577. 7:13:22को अपने झांसे में ले लिया है। आखिर शौर्य
  9578. 7:13:25उसके आने से पहले से [संगीत] पार्टी में
  9579. 7:13:27मौजूद था। इस बीच शौर्य और नीलिमा के बीच
  9580. 7:13:30क्या कुछ हुआ यह शिप्रा को नहीं पता था।
  9581. 7:13:33और शिप्रा यह महसूस करती थी कि शौर्य में
  9582. 7:13:36यह गुण तो है कि लड़कियां उसकी ओर जल्दी
  9583. 7:13:39आकर्षित हो जाती हैं। तो क्या नीलिमा भी
  9584. 7:13:41खुद को शौर्य के आकर्षण से बचा नहीं सकी?
  9585. 7:13:44नीलिमा शिप्रा से ज्यादा से ज्यादा दो ढाई
  9586. 7:13:47साल ही छोटी होगी। और इस उम्र में किसी के
  9587. 7:13:50प्रति तीव्र आकर्षण हो जाना कोई बड़ी बात
  9588. 7:13:52नहीं थी। तो क्या नीलिमा के साथ भी यही
  9589. 7:13:55हुआ है? अभी शिप्रा अपनी [संगीत] सोच में
  9590. 7:13:57ही गुम थी कि तभी तालियों की गड़गड़ाहट से
  9591. 7:14:00वो हॉल गूंज गया और साथ में हैप्पी बर्थडे
  9592. 7:14:04का सॉन्ग भी गूंजने [संगीत] लगा। नीलिमा
  9593. 7:14:06ने अपने हाथों से अपने मम्मी पापा एवं
  9594. 7:14:09अपने दादाजी को केक खिलाया। सबको खिलाने
  9595. 7:14:12के बाद वो फिर से शौर्य [संगीत] की ओर
  9596. 7:14:14देखने लगी और उसकी आंखों में हल्की उदासी
  9597. 7:14:16सी तैर गई। क्योंकि शिप्रा को [संगीत]
  9598. 7:14:18पहले ही उन दोनों पर शक हो गया था। इसलिए
  9599. 7:14:21वह इस बात को नोटिस कर गई। पर बाकी लोग इस
  9600. 7:14:24बात को नहीं समझ पाए। केक कटिंग के बाद
  9601. 7:14:27फिर से सारे लोग अपने ग्रुप में बट गए थे।
  9602. 7:14:30शौर्य अभी भी अपनी जगह [संगीत] पर खड़ा
  9603. 7:14:32नीलिमा की ओर ही देख रहा था और शिप्रा साथ
  9604. 7:14:35में खड़ी कभी शौर्य को तो कभी नीलिमा को
  9605. 7:14:38देख रही थी। शौर्य यह भी भूल गया [संगीत]
  9606. 7:14:41था कि शिप्रा उसके साथ ही खड़ी है। पर जब
  9607. 7:14:44शिप्रा को लगा कि अगर लोगों ने शौर्य और
  9608. 7:14:46शिप्रा की स्थिति को नोटिस कर लिया तो
  9609. 7:14:48कहीं कोई बात ना बनने लगे। इसलिए वो शौर्य
  9610. 7:14:51से बोली तुम कहां खो गए हो? तुम क्या एक
  9611. 7:14:55टक नीलिमा को ही देखे जा रहे हो? शिप्रा
  9612. 7:14:58की बात सुनकर शौर्य की तंद्रा भंग हुई। वो
  9613. 7:15:01होश में आया और शिप्रा से बोला, चलो हम भी
  9614. 7:15:05लॉन में चलते हैं। इतना कहकर शौर्य लॉन की
  9615. 7:15:09तरफ बढ़ गया और शिप्रा भी उसके पीछे चल
  9616. 7:15:12दी। शौर्य ऐसी जगह पर जाकर बैठा जहां
  9617. 7:15:15[संगीत] से स्टेज साफ-साफ नजर आ रहा था।
  9618. 7:15:17सूर्यभान जी, कल्पना जी, राजा साहब और
  9619. 7:15:20बाकी फैमिली के मेंबर्स भी वहां से स्पष्ट
  9620. 7:15:23देखे [संगीत] जा सकते थे। शिप्रा भी उसके
  9621. 7:15:26साथ उस टेबल पर बैठ गई और उसने शौर्य की
  9622. 7:15:28नजरों का पीछा [संगीत] किया तो वो उसे
  9623. 7:15:30नीलिमा की तरफ देखते हुए ही महसूस हुआ।
  9624. 7:15:33क्या बात है? मैं देख रही हूं कि जब से
  9625. 7:15:36तुमने नीलिमा को देखा है तब से उसी को
  9626. 7:15:38देखे जा रहे [संगीत] हो। शिप्रा ने यह बात
  9627. 7:15:41तो सिंपली कह दिया था। पर उसकी बातों में
  9628. 7:15:43छिपे तंज को [संगीत] शौर्य ने साफ-साफ
  9629. 7:15:46महसूस किया था। वो सतर्क हो गया और शिप्रा
  9630. 7:15:50की ओर देखते हुए बोला, "यह तुम कैसी बात
  9631. 7:15:52कर रही हो?" मैं कैसी बात कर रही हूं? मैं
  9632. 7:15:55जो देख रही [संगीत] हूं वही बोल रही हूं।
  9633. 7:15:58शिप्रा की बातों में उसकी जलन साफ झलक रही
  9634. 7:16:00थी। शौर्य ने जब यह महसूस किया, तो उसके
  9635. 7:16:03चेहरे पर मुस्कान खिल गई। शिप्रा ने जब
  9636. 7:16:06शौर्य को मुस्कुराते [संगीत] देखा, तो उसे
  9637. 7:16:08और गुस्सा आ गया। वो अभी शौर्य को कुछ
  9638. 7:16:11सुनाना ही चाहती थी कि तभी उसे पीछे से एक
  9639. 7:16:13लड़की की आवाज सुनाई [संगीत] दी। क्या मैं
  9640. 7:16:16भी इस टेबल पर बैठ सकती हूं? इस आवाज को
  9641. 7:16:19सुनकर शिप्रा ने पलट कर पीछे देखा और पीछे
  9642. 7:16:22खड़ी लड़की का चेहरा देखकर वो आवाक रह गई।
  9643. 7:16:25वो तो सपने में भी नहीं सोच सकती थी कि यह
  9644. 7:16:28लड़की उसे अपने पीछे खड़ी नजर आएगी। वो
  9645. 7:16:31कभी शौर्य को तो कभी उस लड़की को [संगीत]
  9646. 7:16:33देख रही थी। अब आगे क्या होगा? शिप्रा ने
  9647. 7:16:37किस लड़की को अपने पीछे खड़ा देख लिया?
  9648. 7:16:39शौर्य शिप्रा के शक को कैसे दूर करेगा?
  9649. 7:16:42क्या शिप्रा जान पाएगी कि नीलिमा शौर्य की
  9650. 7:16:44बहन है? जानने के लिए अपने सामने नीलिमा
  9651. 7:16:47को अपने हाथों में एक प्लेट लिए हुए देखा
  9652. 7:16:50[संगीत] जिसमें केक का एक बड़ा सा टुकड़ा
  9653. 7:16:53रखा हुआ था। नीलिमा को अपने सामने देखकर
  9654. 7:16:56शिप्रा हड़बड़ा गई। तुम यहां क्यों? मैं
  9655. 7:17:00यहां नहीं आ सकती क्या? नहीं, मेरा यह
  9656. 7:17:03कहने का मतलब नहीं था। मैं उम्मीद नहीं कर
  9657. 7:17:06रही थी कि तुम सबको छोड़कर यहां आ सकती
  9658. 7:17:08हो। शिप्रा को समझ नहीं आ रहा था कि वह
  9659. 7:17:11क्या बोले। [संगीत] इसलिए जो भी उसके मन
  9660. 7:17:13में आया उसने बोल दिया। जबकि श्रवण के
  9661. 7:17:16चेहरे पर शिप्रा की घबराहट देखकर स्माइल
  9662. 7:17:18था। आप तो मुझे बैठने के लिए बोल नहीं रहे
  9663. 7:17:21हो तो मैं खुद ही बैठ जाती हूं। यह कहकर
  9664. 7:17:24नीलिमा एक चेयर खींचकर [संगीत] उस पर बैठ
  9665. 7:17:26गई। उसने अपना प्लेट श्रवण की तरफ बढ़ा
  9666. 7:17:29दिया। [संगीत] शिप्रा अभी भी आवाक स्थिति
  9667. 7:17:32में खड़ी थी। वो समझ नहीं पा रही थी कि यह
  9668. 7:17:34क्या हो रहा है। वो इस बात से हैरान थी कि
  9669. 7:17:38नीलिमा ने स्पेशली श्रवण के लिए एक प्लेट
  9670. 7:17:40में केक [संगीत] लाई थी। श्रवण ने शिप्रा
  9671. 7:17:43को अभी भी खड़ा देखा तो बोला खड़े-खड़े
  9672. 7:17:46तुम्हारे पैर में दर्द होने लगेंगे। उससे
  9673. 7:17:48[संगीत] अच्छा यह होगा कि तुम भी बैठ जाओ।
  9674. 7:17:51शिप्रा को अपनी स्थिति का भान हुआ तो वो
  9675. 7:17:53नीलिमा की ओर देखते हुए बैठ गई। आप मुझे
  9676. 7:17:57ऐसे क्यों देख रही हैं जैसे लग रहा है कि
  9677. 7:17:59मुझे यहां नहीं होना चाहिए। नहीं ऐसा नहीं
  9678. 7:18:03है। मुझे नहीं पता था कि [संगीत] तुम
  9679. 7:18:05श्रवण को पहले से जानती हो। श्रवण कौन
  9680. 7:18:09श्रवण? [संगीत] मैं किसी श्रवण को नहीं
  9681. 7:18:11जानती। नीलिमा श्रवण की ओर देखती हुई
  9682. 7:18:14बोली। [संगीत]
  9683. 7:18:15फिर उसे एहसास हुआ कि शिप्रा श्रवण को ही
  9684. 7:18:18श्रवण कहकर संबोधित कर रही है। तो वो
  9685. 7:18:20श्रवण की ओर घूम कर बोली। क्या आपने
  9686. 7:18:23[संगीत] अपना नाम चेंज कर लिया? नहीं ऐसा
  9687. 7:18:26नहीं है। पर यहां कुछ लोग मुझे श्रवण के
  9688. 7:18:28नाम से ही जानते हैं। श्रवण ने जब यह देख
  9689. 7:18:31लिया कि नीलिमा उसके पास आ गई है तो वह अब
  9690. 7:18:34वैसे भी ज्यादा बहाना नहीं कर सकता था।
  9691. 7:18:37इसलिए उसे लगा [संगीत] शायद यही सही समय
  9692. 7:18:39है जब शिप्रा इसकी हकीकत से वाकिफ हो। अगर
  9693. 7:18:42उसको शिप्रा का सबसे पहले किसी से परिचय
  9694. 7:18:44कराना है तो वह उसकी बहन ही ठीक है। बहन
  9695. 7:18:48के द्वारा यह बात उसके मम्मी [संगीत] पापा
  9696. 7:18:49तक भी पहुंच ही जाएगी। यह सोचकर श्रमण
  9697. 7:18:52उत्साहित था। अब शिप्रा उसकी हकीकत से
  9698. 7:18:55वाकिफ होने ही वाली है। उसने बस चीजें
  9699. 7:18:58जैसी हो रही हैं, उसी तरह होते रहने देना
  9700. 7:19:00चाहा। सच्चाई अपने आप ही शिप्रा के सामने
  9701. 7:19:03आ जानी थी। शिप्रा इस बात से भी हैरान रह
  9702. 7:19:06गई कि नीलिमा श्रवण के श्रवण नाम से अनजान
  9703. 7:19:09थी। उसने सोचा तो फिर श्रवण ने नीलिमा को
  9704. 7:19:12अपना कौन सा नाम बता रखा है? इसलिए उसने
  9705. 7:19:15पूछा तो तुम श्रवण को किस नाम से जानती
  9706. 7:19:18हो? इनका एक ही तो नाम है श्रवण। पता नहीं
  9707. 7:19:22क्यों आप श्रवण के नाम से इनको बुला रही
  9708. 7:19:24हो। नीलिमा की बात सुनकर शिप्रा हैरान
  9709. 7:19:27होती जा रही थी। नीलिमा श्रवण को कैसे
  9710. 7:19:30जानती है और उसकी बातचीत से ऐसा नहीं लग
  9711. 7:19:32रहा था कि वो जैसे आज उससे पहली बार मिली
  9712. 7:19:35हो। आखिर यह चक्कर क्या है? उसका दिमाग
  9713. 7:19:38चक्कर गिन्नी बना हुआ [संगीत] था। तुमको
  9714. 7:19:41यहां आने की क्या जरूरत थी? तुमको कोई भी
  9715. 7:19:44बात सीधे से समझ [संगीत] में नहीं आती?
  9716. 7:19:46आपको लुकाछुपी का गेम खेलना अच्छा लगता
  9717. 7:19:48होगा पर मुझे यह पसंद [संगीत] नहीं है।
  9718. 7:19:51लोगों को पता चलता है तो चल जाए पर मैं
  9719. 7:19:54आपके सामने होते हुए भी आपसे [संगीत] दूर
  9720. 7:19:56नहीं रह सकती। तुमको कुछ भी समझाना बेकार
  9721. 7:19:59है। तो फिर कोशिश क्यों कर रहे हो? मैं
  9722. 7:20:02आपके लिए केक लाई हूं ना तो अब जल्दी से
  9723. 7:20:04खाकर दिखाओ या कहो तो फिर मैं अपने
  9724. 7:20:07[संगीत] हाथों से खिलाती हूं। जबकि शिप्रा
  9725. 7:20:10उन दोनों की बात को सुनकर कुछ और ही मतलब
  9726. 7:20:12निकाल रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि
  9727. 7:20:15यह दोनों इतने करीब कब [संगीत] आ गए जो
  9728. 7:20:17उसके सामने इस तरह से बातें कर रहे हैं।
  9729. 7:20:20नीलिमा जितने अधिकार से श्रवण को अपनी बात
  9730. 7:20:23कह रही [संगीत] थी और श्रवण चुपचाप उसको
  9731. 7:20:25सुन रहा था। ऐसा तो उसके साथ भी कभी नहीं
  9732. 7:20:28हुआ। उसे अपना दिल [संगीत] डूबता हुआ
  9733. 7:20:30प्रतीत हो रहा था। उसे लगा जैसे उसकी
  9734. 7:20:33दुनिया ही उससे छीनी जा रही है। इसमें तो
  9735. 7:20:37एक ही चम्मच है। अगर तुम इसे मेरे पास लाई
  9736. 7:20:39ही थी तो कम [संगीत] से कम दो चम्मच तो
  9737. 7:20:41डालकर लाती। दोनों इस तरह से बातें कर रहे
  9738. 7:20:45थे जैसे वह वहां शिप्रा को भूल ही गए थे।
  9739. 7:20:48श्रवण की बात सुनकर मिलिमा शिप्रा [संगीत]
  9740. 7:20:50की ओर देखकर बोली क्या दूसरी चम्मच आप
  9741. 7:20:53इनके लिए बोल रहे हैं? क्या तुम्हें कोई
  9742. 7:20:55और भी
  9743. 7:20:56[संगीत]
  9744. 7:20:56यहां बैठा हुआ नजर आ रहा है? जब मैं पहले
  9745. 7:20:58से इसके साथ बैठा हुआ हूं तो फिर और किसके
  9746. 7:21:01लिए बोलूंगा? वैसे तो मैं इनसे [संगीत]
  9747. 7:21:03पहले ही मिल चुकी हूं। और दादाजी इनकी खूब
  9748. 7:21:06तारीफ भी कर रहे थे। पर अभी यह आपके साथ
  9749. 7:21:09बैठी हुई है तो क्या आप मुझे बताएंगे कि
  9750. 7:21:12आपका और इनका क्या रिश्ता है? नीलिमा ने
  9751. 7:21:15इतना बोला। फिर कुछ सोचकर वो आगे बोली, आप
  9752. 7:21:18रहने दीजिए। मैं इनसे ही पूछ लेती हूं। आप
  9753. 7:21:21बताइए क्या आप इनकी दोस्त हैं या उससे कुछ
  9754. 7:21:24ज्यादा? शिप्रा को समझ नहीं आया कि वो
  9755. 7:21:27नीलिमा की बात का क्या जवाब दे। वो श्रवण
  9756. 7:21:30की ओर देखने लगी। जैसे वह उससे पूछ रही हो
  9757. 7:21:33कि उसे क्या बोलना चाहिए। अभी तक वह यही
  9758. 7:21:36नहीं समझ पा रही थी कि नीलिमा और श्रवण का
  9759. 7:21:39आपस में क्या रिश्ता है। पर जिस [संगीत]
  9760. 7:21:41तरह से वह दोनों बातें कर रहे थे, उनकी
  9761. 7:21:44बातचीत से जाहिर हो रहा था कि वह दोनों एक
  9762. 7:21:47दूसरे के बहुत करीब हैं। और यह बात शिप्रा
  9763. 7:21:50को परेशान कर रही थी। क्योंकि शिप्रा
  9764. 7:21:53श्रवण और नीलिमा के रिलेशन के बारे में
  9765. 7:21:55कुछ नहीं जानती थी। इसलिए वह बात को
  9766. 7:21:57नॉर्मल तरीके से पेश करने के लिए बोली। हम
  9767. 7:22:00बस अच्छे दोस्त हैं और कुछ नहीं। सचमुच आप
  9768. 7:22:04दोनों सिर्फ अच्छे दोस्त ही हैं और कुछ
  9769. 7:22:06नहीं। पर तुम ऐसा पूछ क्यों रही हो? मैंने
  9770. 7:22:09सोचा अगर आप दोनों का रिश्ता दोस्ती से
  9771. 7:22:12[संगीत]
  9772. 7:22:12थोड़ा ज्यादा होता तो आप दोनों एक चम्मच
  9773. 7:22:15से भी तो खा सकते थे। नीलिमा की यह बात
  9774. 7:22:18सुनकर शिप्रा के मन में जो अभी तक शक का
  9775. 7:22:20कीड़ा कुलबुला रहा था [संगीत] वो दूर हो
  9776. 7:22:22गया। वो यह तो समझ गई कि इन दोनों के बीच
  9777. 7:22:25जिस तरह का रिश्ता वह सोच रही [संगीत] थी,
  9778. 7:22:27वह तो नहीं हो सकता। क्योंकि अगर जो शक
  9779. 7:22:30उसके मन में उपजा था वैसा कुछ अगर होता तो
  9780. 7:22:33नीलिमा श्रवण से यह नहीं कहती कि वह समझ
  9781. 7:22:36रही थी कि उन [संगीत] दोनों का रिश्ता
  9782. 7:22:38दोस्ती से कुछ ज्यादा हो सकता है। अभी तक
  9783. 7:22:41जो शिप्रा के मन में नीलिमा को लेकर
  9784. 7:22:43असुरक्षा की भावना आ गई थी वो तुरंत दूर
  9785. 7:22:46हो गई। दूसरी तरफ श्रवण को शरारत सूझी और
  9786. 7:22:49वो [संगीत] नीलिमा से बोला वैसे मैं तो
  9787. 7:22:52चाहता हूं कि हमारा रिश्ता दोस्ती से आगे
  9788. 7:22:54बढ़े पर इसका पता नहीं चलता। तुम पूछ कर
  9789. 7:22:57देखो। शायद [संगीत] तुम्हारी बात कहीं यह
  9790. 7:22:59मान जाए। शिप्रा को समझ नहीं आ रहा था कि
  9791. 7:23:02वहां चल क्या रहा [संगीत] है? यह दोनों
  9792. 7:23:04ऐसे बातें कर रहे हैं जैसे दोनों एक दूसरे
  9793. 7:23:07को कितनी अच्छी तरह से [संगीत] जानते हैं
  9794. 7:23:09और शिप्रा तो खुद आज पहली बार नीलिमा से
  9795. 7:23:12मिली थी। तो यह कैसे संभव हुआ कि श्रवण
  9796. 7:23:15नीलिमा को पहले से जानता हो सकता था। अभी
  9797. 7:23:18वह असमंजस की स्थिति में ही थी कि तभी
  9798. 7:23:21नीलिमा उससे बोल पड़ी। आप सोच क्या रही
  9799. 7:23:24हैं? आपको ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलेगा।
  9800. 7:23:27मैं तो कहती हूं कि आज आप दोनों एक चम्मच
  9801. 7:23:30से [संगीत] यह केक खा ही लो और इस गरीब पर
  9802. 7:23:32यह एहसान कर ही दो। आप जैसी खूबसूरत लड़की
  9803. 7:23:36इनकी जिंदगी में आ [संगीत] जाए तो इनकी
  9804. 7:23:37जिंदगी थोड़ी तो सुधर ही जाएगी। जिस तरह
  9805. 7:23:40से नीलिमा श्रवण के लिए बात कर रही थी, यह
  9806. 7:23:43[संगीत] बात शिप्रा को हैरान कर रही थी।
  9807. 7:23:45वो सोचने को मजबूर थी कि इस तरह से भला
  9808. 7:23:48कोई किसी अनजान व्यक्ति के लिए [संगीत]
  9809. 7:23:50कैसे बात कर सकता है। श्रवण ने उसे कुछ
  9810. 7:23:53हिंट भी तो नहीं दिया कि वो नीलिमा को
  9811. 7:23:55कैसे जानता है। उसने यह तो महसूस किया कि
  9812. 7:23:58श्रवण उसके साथ खेल रहा है तो उसने भी सोच
  9813. 7:24:01लिया कि वो नीलिमा के सामने हकीकत ही बयान
  9814. 7:24:03कर देती है। फिर देखती है कि नीलिमा का
  9815. 7:24:06क्या रिएक्शन होता है। यह [संगीत] सोचकर
  9816. 7:24:09उसने नीलिमा से पूछा तुम जानती हो कि हम
  9817. 7:24:11दोनों के बीच में क्या रिश्ता [संगीत] है?
  9818. 7:24:14अब हैरान होने की बारी नीलिमा की थी। उसने
  9819. 7:24:16हैरानी में सवाल किया, क्या आप दोनों के
  9820. 7:24:19बीच में कोई रिलेशन भी है? यह जिस गरीब
  9821. 7:24:22[संगीत] पर तुम एहसान करने की बात कर रही
  9822. 7:24:24हो, इसने तुमसे एक बहुत बड़ी बात छुपा कर
  9823. 7:24:27रखी है। शिप्रा की बात सुनकर नीलिमा
  9824. 7:24:29[संगीत] शक भरी निगाहों से श्रवण की तरफ
  9825. 7:24:32देखने लगी। तुम्हारी जानकारी के लिए बता
  9826. 7:24:35दूं हम दोनों का रिश्ता पतिप का [संगीत]
  9827. 7:24:37है। और नीलिमा का रिएक्शन और भी शॉकिंग
  9828. 7:24:40था। वो अपनी जगह पर खड़ी हो गई। उसे यकीन
  9829. 7:24:44नहीं हो रहा था कि जो शिप्रा [संगीत] ने
  9830. 7:24:45कहा था उसमें थोड़ी सच्चाई भी हो सकती है।
  9831. 7:24:49वो कभी शिप्रा को तो कभी श्रवण को देखने
  9832. 7:24:51लगी। [संगीत] अंत में वो श्रवण की ओर
  9833. 7:24:53देखकर बोली ये क्या कह रही है? क्या इसमें
  9834. 7:24:58[संगीत] थोड़ी भी सच्चाई है? अब जब यह खुद
  9835. 7:25:01ही इस बात को कह रही है तो फिर मैं कैसे
  9836. 7:25:04इस बात से इंकार कर सकता हूं? यानी आप
  9837. 7:25:07दोनों सच में पतिपत्नी हैं। फिर वो थोड़ी
  9838. 7:25:11नाराजगी से श्रवण से बोली, "यह कब हुआ?
  9839. 7:25:14आपने शादी कर ली और मुझे बताया भी नहीं।
  9840. 7:25:17हल्की भनक [संगीत] भी नहीं लगने दी। अब
  9841. 7:25:20मैं आपका क्या करूं? मैं इतनी आसानी
  9842. 7:25:23[संगीत] से इस बात को जाने नहीं देने
  9843. 7:25:24वाली। अगर अभी मुझे इस बारे में आपसे
  9844. 7:25:27सेटिस्फेक्टरी जवाब नहीं [संगीत] मिला, तो
  9845. 7:25:29आप सोच लेना मैं आपके साथ क्या करूंगी।
  9846. 7:25:32शिप्रा को समझ नहीं आ रहा था कि नीलिमा
  9847. 7:25:35श्रवण से इस तरह [संगीत] से बात क्यों कर
  9848. 7:25:37रही है। अगर श्रवण ने उसे इस बारे में
  9849. 7:25:40नहीं बताया तो यह उसके लिए इतनी बड़ी बात
  9850. 7:25:43कैसे हो गई कि वो इस छोटी सी बात को लेकर
  9851. 7:25:46श्रवण से इस तरह से बात कर सकती है। यह
  9852. 7:25:49सोचकर उसने नीलिमा से कहा तुम कुछ ज्यादा
  9853. 7:25:52ही ओवर रिएक्ट नहीं कर रही हो। शिप्रा की
  9854. 7:25:55बात सुनकर नीलिमा ने उसकी तरफ देखा और
  9855. 7:25:57बोली आपको हमारे बारे में कुछ नहीं पता।
  9856. 7:26:01पर आप चिंता मत करो। आप मुझे बहुत पसंद हो
  9857. 7:26:04और मुझे आपसे कोई [संगीत] शिकायत भी नहीं
  9858. 7:26:06है। इतना कहकर उसने श्रवण के सामने से केक
  9859. 7:26:10[संगीत] की प्लेट खींच ली और उसको शिप्रा
  9860. 7:26:12के सामने करती हुई बोली, आप यह केक खाओ और
  9861. 7:26:15हमारी बात की तरफ ध्यान मत दो। [संगीत]
  9862. 7:26:18आज तो मैं इनको छोडूंगी नहीं। इन्होंने
  9863. 7:26:21मुझसे इतनी बड़ी बात आज तक छुपा कर क्यों
  9864. 7:26:24रखी? अभी तो मैं यहां उपस्थित इतने सारे
  9865. 7:26:28लोगों के कारण कुछ नहीं कह रही। पर मैं इस
  9866. 7:26:30बात को इतनी आसानी से छोड़ने वाली नहीं
  9867. 7:26:33हूं। शिप्रा को समझ नहीं आया कि यह क्या
  9868. 7:26:36चक्कर है। नीलिमा उससे तो प्यार से बात कर
  9869. 7:26:38रही है पर श्रवण से गुस्सा कर रही है। जब
  9870. 7:26:42उसे कुछ समझ नहीं आया तो वो उन दोनों के
  9871. 7:26:44बीच में पड़ती हुई बोली कोई मुझे भी कुछ
  9872. 7:26:47समझाएगा कि तुम दोनों के बीच में यह चल
  9873. 7:26:50क्या [संगीत] रहा है। शिप्रा की बात सुनकर
  9874. 7:26:52नीलिमा चुप हो गई। वो शिप्रा की ओर देखने
  9875. 7:26:55लगी। फिर उसके प्लेट की ओर देखती हुई
  9876. 7:26:57[संगीत] बोली आप केक क्यों नहीं खा रही?
  9877. 7:27:00आप हमारी बातों की तरफ ध्यान मत दो। हमारी
  9878. 7:27:03तो ऐसे [संगीत] ही लड़ाई चलती रहती है।
  9879. 7:27:05शिप्रा को अभी भी समझ में नहीं आ रहा था
  9880. 7:27:08कि ये दोनों किस तरह की बातें कर रहे हैं।
  9881. 7:27:11इधर उनकी बातें चल रही थी। उसी समय हॉल
  9882. 7:27:14में राजा साहब सबको संबोधित करके बोल रहे
  9883. 7:27:16थे। आप सब ने आज यहां हमारी खुशी में शरीक
  9884. 7:27:19होकर जो अपना बहुमूल्य [संगीत] समय हमारे
  9885. 7:27:22साथ व्यतीत किया। उसके लिए आप सभी का
  9886. 7:27:24बहुत-बहुत धन्यवाद। आज हमारी पोती का
  9887. 7:27:28जन्मदिन तो है ही। साथ में हमारे [संगीत]
  9888. 7:27:30लिए सबसे बड़ी खुशी की बात यह भी है कि
  9889. 7:27:32वर्षों बाद आज हमारा छोटा बेटा सूर्यभान
  9890. 7:27:35वापस [संगीत] हमारे पास आ गया है। राजा
  9891. 7:27:38साहब की बात अभी पूरी ही हुई थी कि इसी
  9892. 7:27:41समय उन्हीं की उम्र का एक बुजुर्ग ताली
  9893. 7:27:43[संगीत] बजाते हुए हॉल में प्रवेश करते
  9894. 7:27:45हुए बोला। बहुत खूब चंद्रभान। वर्षों पहले
  9895. 7:27:49इसी बेटे के कारण हमारी [संगीत] खुशियों
  9896. 7:27:51में आग लगाने के बाद आज फिर से तुम हमारी
  9897. 7:27:54घाव पर नमक छिड़कने के लिए इसे वापस बुला
  9898. 7:27:57लिया है। बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया। आगे
  9899. 7:28:01क्या होगा? कौन था यह वृद्ध? इसके इस तरह
  9900. 7:28:04से बात करने का कारण क्या था? वो किस घाव
  9901. 7:28:07पर नमक छिड़कने की बात कर रहा था? अली की
  9902. 7:28:10आवाज सुनकर राजा साहब ने उस तरफ देखा तो
  9903. 7:28:14उन्हीं की उम्र का एक बुजुर्ग सामने से
  9904. 7:28:17चला आ रहा था। उस शख्स को देखते ही राजा
  9905. 7:28:20साहब के चेहरे का तेज गायब हो गया और उनके
  9906. 7:28:23मुख से निकला विक्रमजीत चौहान तुम यहां
  9907. 7:28:29क्यों तुम्हें उम्मीद नहीं थी ना कि मैं
  9908. 7:28:32यहां आज के दिन तुम्हारे सामने आ सकता
  9909. 7:28:34हूं। मैं तो आना भी नहीं चाहता था। पर
  9910. 7:28:38तुम्हारी बेशर्मी के कारण आज मुझे यहां
  9911. 7:28:41आना पड़ा। राजा साहब ने सर्द लहजे में
  9912. 7:28:44अपनी बात कही। तो फिर यहां क्यों आए हो?
  9913. 7:28:48हमने तो तुम्हें यहां आमंत्रित नहीं किया
  9914. 7:28:50था। अगर किसी गलत इरादे से आए हो तो मैं
  9915. 7:28:54तुमसे यही कहूंगा कि जैसे आए हो वैसे ही
  9916. 7:28:57वापस चले जाओ। यह तुम्हारे लिए भी और
  9917. 7:29:00हमारे लिए भी अच्छा नहीं है। मैं कहां
  9918. 7:29:03यहां आना चाहता था? पर तुम्हारे फरेब के
  9919. 7:29:06कारण मुझे यहां आना पड़ा। तुम्हें अपने
  9920. 7:29:09बेटे को वापस नहीं बुलाना चाहिए था।
  9921. 7:29:11चंद्रभान [संगीत]
  9922. 7:29:12हम दोनों के परिवार में जो यह वर्षों से
  9923. 7:29:14शीत युद्ध चला आ रहा है, यह ऐसे ही चलता
  9924. 7:29:18रहता और इसमें उबाल नहीं आता। पर तुमने
  9925. 7:29:21अपने बेटे को वापस बुलाकर उसमें आग लगाने
  9926. 7:29:24का काम किया है। तुम यह कैसे उम्मीद कर
  9927. 7:29:27सकते हो कि तुम अपने बेटे को वापस बुला
  9928. 7:29:29लोगे और हम शांत बैठे इसे देखते रहेंगे।
  9929. 7:29:33विक्रमजीत चौहान बोलते हुए राजा साहब के
  9930. 7:29:35सामने जाकर खड़े हो गए। राजा साहब ने
  9931. 7:29:38दृढ़ता से जवाब दिया। चौहान अगर मैंने
  9932. 7:29:42अपने बेटे को पहले भी अपने घर से निकाला
  9933. 7:29:44था तो अपनी मर्जी से निकाला था। तुम्हारे
  9934. 7:29:47कहने से नहीं। [संगीत] जब मैं उसे अपनी
  9935. 7:29:49मर्जी से निकाला था तो तुम्हें क्या लगता
  9936. 7:29:52है? मैं उसे वापस बुलाने से पहले तुमसे
  9937. 7:29:54पूछता। वैसे भी हमारे संबंध इतने अच्छे
  9938. 7:29:58नहीं रहे हैं कि मुझे
  9939. 7:29:59[गला साफ़ करने की आवाज़] तुम्हारे कुछ भी
  9940. 7:30:00चाहने से कोई फर्क पड़ता है। इसलिए मैं
  9941. 7:30:03क्या करता हूं या नहीं करता हूं इससे
  9942. 7:30:05तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। वैसे
  9943. 7:30:08भी [संगीत] मुझे तुम्हारे साथ दोस्ती की
  9944. 7:30:10कोई नई आलेख लिखने का शौक नहीं है। यह
  9945. 7:30:13ख्वाहिश तो मेरी तभी खत्म हो गई थी जब
  9946. 7:30:16तुमने मुझे मेरे बेटे को घर से निकालने के
  9947. 7:30:18बाद भी दुश्मन [संगीत]
  9948. 7:30:19समझा था। वीरभद्र विक्रमजीत चौहान के पीछे
  9949. 7:30:23से निकलकर सामने आता हुआ बोला। अगर आप
  9950. 7:30:26अपनी जिद पर अड़े रहेंगे अंकल तो समझिए
  9951. 7:30:29हमारे परिवार [संगीत] के बीच में खूनी खेल
  9952. 7:30:31शुरू हो जाएगा। सूर्यभान के कारण जो हमारे
  9953. 7:30:34परिवार की बेइज्जती हुई थी, हम उसको आज तक
  9954. 7:30:37भूले नहीं हैं। हम आज तक इसलिए शांत थे
  9955. 7:30:40क्योंकि आपने उसे घर से बाहर निकाल दिया
  9956. 7:30:42था। पर आज उसको वापस बुलाकर आपने हमें
  9957. 7:30:45उकसाने का काम किया है। आपको क्या लगता
  9958. 7:30:48है? हम आपके बेटे को वापस इस शहर में
  9959. 7:30:50बर्दाश्त कर पाएंगे? हुआ यह था कि जब राजा
  9960. 7:30:54साहब अपने बेटे की वापसी के बारे में बता
  9961. 7:30:56रहे [संगीत] थे। उसी समय विक्रमजीत चौहान
  9962. 7:30:58ने पूरे दल फौज के साथ उस हॉल में प्रवेश
  9963. 7:31:01किया था। विक्रमजीत चौहान के साथ वीरभद्र
  9964. 7:31:04चौहान व [संगीत] 1520 हथियारबंद बॉडीगार्ड
  9965. 7:31:07काले लिबास में धरधराते हुए अंदर आए थे।
  9966. 7:31:11राजा साहब काले लिबास में आए उन हथियारबंद
  9967. 7:31:13गार्ड को देखकर बोले [संगीत]
  9968. 7:31:15क्या तुम हमें अपने इन आदमियों के दम पर
  9969. 7:31:18डराने आए हो? इसके बाद उन्होंने कांता
  9970. 7:31:20प्रसाद की तरफ देखा तो कांता प्रसाद ने
  9971. 7:31:23आंखों के [संगीत] इशारे में ही उन्हें
  9972. 7:31:25आश्वासन दिया कि सब ठीक है। नहीं ऐसा
  9973. 7:31:29बिल्कुल नहीं है। यह गार्ड तो वैसे ही
  9974. 7:31:31हमेशा हमारे साथ होते हैं। इसलिए इन्हें
  9975. 7:31:34हमारे साथ तो आना ही था। पर एक सच यह भी
  9976. 7:31:37है कि हम सूर्यभान को इतनी आसानी से
  9977. 7:31:39छोड़ने वाले नहीं हैं। वीरभद्र चलते हुए
  9978. 7:31:42जाकर सूर्यभान के सामने खड़ा हो गया।
  9979. 7:31:45दूसरी तरफ शौर्य ने जब यह सब देखा तो उसके
  9980. 7:31:48तो होश ही उड़ गए। उसे समझ नहीं आया कि यह
  9981. 7:31:51क्या हो रहा है। क्या आज के समय में भी
  9982. 7:31:54कोई इस तरह हथियारों के साथ किसी के घर
  9983. 7:31:56में घुस सकता है। उसे इसके पीछे की कहानी
  9984. 7:31:59समझ में नहीं आ रही थी कि चक्कर [संगीत]
  9985. 7:32:01क्या है। शौर्य के साथ नीलिमा और शिप्रा
  9986. 7:32:04भी उसी हंगामे को देखने लगे। शौर्य ने जब
  9987. 7:32:08देखा कि वीरभद्र चौहान ने सीधा उसके पापा
  9988. 7:32:11को टारगेट करके अपनी बात कही [संगीत] तो
  9989. 7:32:13वह नीलिमा और शिप्रा की ओर देखकर बोला तुम
  9990. 7:32:16दोनों यहीं रहना मैं जाकर [संगीत] देखता
  9991. 7:32:18हूं। इतना कहकर शौर्य अपनी जगह से उठकर
  9992. 7:32:22अपने पापा की तरफ बढ़ गया। इस समय जब यहां
  9993. 7:32:25का मामला बड़ा संगीन नजर आ रहा था। ऐसे
  9994. 7:32:28समय [संगीत] में भी प्रतीक के चेहरे पर
  9995. 7:32:30संतुष्टि के भाव थे। कोई अगर उसको देखता
  9996. 7:32:33तो यही समझता कि ऐसा कुछ होगा। उसको इसका
  9997. 7:32:37आभास पहले से ही था। [संगीत] इसी समय
  9998. 7:32:39प्रतीक और कुणाल की नजर मिली तो दोनों के
  9999. 7:32:42चेहरे पर एक कुटिल [संगीत] मुस्कान आ गई
  10000. 7:32:45थी। दूसरी तरफ वीरभद्र सूर्यभान के सामने
  10001. 7:32:48जाकर खड़ा हो गया था। सूर्यभान वीरभद्र के
  10002. 7:32:51साइड से निकलकर विक्रमजीत चौहान के सामने
  10003. 7:32:54आ गए और [संगीत] बोले देखिए अंकल जब 26 27
  10004. 7:32:58साल पहले वो घटना घटी थी। उस समय भी मैंने
  10005. 7:33:01अपनी बात को आपके सामने स्पष्ट करने की
  10006. 7:33:04कोशिश की थी। पर किसी ने मेरी बात सुनने
  10007. 7:33:07की कोशिश ही नहीं की। मैं मानता हूं कि उस
  10008. 7:33:10समय मैं अपनी बात को सही ढंग से आपके
  10009. 7:33:12सामने नहीं रख पाया। आपके ही क्या? अपने
  10010. 7:33:15[संगीत] पापा के सामने भी अपनी बात सही
  10011. 7:33:18तरीके से नहीं रख पाया। यह शायद मेरी उस
  10012. 7:33:20समय की नादानी थी। पर अगर आप में से कोई
  10013. 7:33:23मेरी बात सुनता, तो शायद मैं उसे समझा
  10014. 7:33:26पाता। अच्छा क्या समझाते तुम मुझे?
  10015. 7:33:29तुम्हारे बाप ने पहले [संगीत] ही मुझे वचन
  10016. 7:33:31दिया था कि तुम्हारी शादी भानुमती से ही
  10017. 7:33:34होगी। उसके बाद भी तुमने उनकी बात का
  10018. 7:33:36लिहाज नहीं किया और पूरे राज्य में हमारी
  10019. 7:33:39इज्जत [संगीत] को रुसवा किया। राजा साहब
  10020. 7:33:41ने दृढ़ता से अपनी बात विक्रमजीत चौहान के
  10021. 7:33:44सामने रखी। विक्रमजीत उस बात को दोहराने
  10022. 7:33:47का अब कोई फायदा नहीं। उस समय जो भी हुआ
  10023. 7:33:50था अगर उसका असली गुनाहगार कोई है तो वह
  10024. 7:33:53मैं हूं जो मैंने बिना अपने बेटे की इच्छा
  10025. 7:33:56जाने तुम्हें वचन दे दिया था। उस बात को
  10026. 7:34:00लेकर मैं आज तक शर्मिंदा हूं। अगर तुम उस
  10027. 7:34:02बात के लिए मुझे सजा देना चाहते हो तो मैं
  10028. 7:34:05उसे सहर्ष स्वीकार करूंगा। पर उस समय अपने
  10029. 7:34:08बेटे को घर से निकालने की जो गलती मैंने
  10030. 7:34:10की थी उसको अब दोहराऊंगा नहीं। तुम्हारे
  10031. 7:34:14इतना बोल देने से क्या मेरा वो सम्मान
  10032. 7:34:16वापस आ जाएगा? चंद्रभान जो मेरे परिवार ने
  10033. 7:34:18उस समय झेली थी। अगर मुझे या मेरे परिवार
  10034. 7:34:21में से किसी को पता होता कि तुम्हारा बेटा
  10035. 7:34:24पहले से किसी के प्यार में पड़ा हुआ है तो
  10036. 7:34:26मैं खुद उस समय उस रिश्ते के लिए सहमति
  10037. 7:34:28नहीं देता। पर तुम बाप बेटे ने मेरे
  10038. 7:34:31सम्मान का मजाक बना दिया। विक्रमजीत चौहान
  10039. 7:34:34की नजर में सूर्यभान के लिए हिकारत नजर आ
  10040. 7:34:37रही थी। आप ऐसा नहीं कह सकते कि आपके
  10041. 7:34:40परिवार में किसी को मेरी कल्पना से प्यार
  10042. 7:34:42करने वाली बात पता नहीं थी। आपने और
  10043. 7:34:45पिताजी ने मेरी शादी भानुमती से फिक्स तो
  10044. 7:34:47कर दी थी पर मुझे किसी ने पूछने की जरूरत
  10045. 7:34:50भी नहीं समझी। उस समय मैं पहले से ही
  10046. 7:34:52[संगीत] कल्पना से प्यार में था और इस बात
  10047. 7:34:54से वीरभद्र भी अच्छी तरह वाकिफ था क्योंकि
  10048. 7:34:57मैं वीरभद्र [संगीत]
  10049. 7:34:58और कल्पना तीनों कॉलेज के एक ही बैच में
  10050. 7:35:01थे। तो आप यह नहीं कह सकते कि आपके परिवार
  10051. 7:35:04में से किसी को मेरे प्यार के बारे में
  10052. 7:35:06पता नहीं था। सूर्यभान की बात सुनकर
  10053. 7:35:08विक्रमजीत चौहान वीरभद्र की ओर देखने लगे।
  10054. 7:35:12जैसे वह उससे पूछ [संगीत] रहे हो कि जो
  10055. 7:35:14सूर्यभान कह रहा है क्या वह सही है?
  10056. 7:35:16विक्रमजीत चौहान को अपनी तरफ देखते पाकर
  10057. 7:35:19वीरभद्र अपने पिता से नजर मिलाने [संगीत]
  10058. 7:35:21का साहस नहीं ला सका। वो अपने पिता को
  10059. 7:35:24नजरअंदाज करके सूर्यभान की तरफ बढ़ते हुए
  10060. 7:35:27बोला तुम [संगीत] यह बोलकर अपनी गुनाह को
  10061. 7:35:29कम नहीं कर सकते सूर्यभान उस उम्र में उस
  10062. 7:35:32तरह का अफेयर हो जाना आम बात थी। पर शादी
  10063. 7:35:35के लिए परिवार की रजामंदी [संगीत]
  10064. 7:35:36हम जैसे लोगों के लिए जरूरी होता था। हम
  10065. 7:35:39लोग शादी अपनी हैसियत के परिवार के बीच
  10066. 7:35:41में ही करते थे। इसलिए तुम्हारा यह
  10067. 7:35:43[संगीत] कह देना कि तुम किसी से प्यार
  10068. 7:35:45करते थे इसलिए मंडप छोड़कर भाग गए। बोलकर
  10069. 7:35:49अपने आप को सही नहीं ठहरा सकते। मैं यहां
  10070. 7:35:52खुद को [संगीत] सही ठहराने की कोशिश नहीं
  10071. 7:35:53कर रहा हूं। वीरभद्र मैं बस यह कह रहा हूं
  10072. 7:35:56कि तुम्हें तो मेरी स्थिति पता थी। तुम भी
  10073. 7:35:59तो अपने घर में बता सकते थे कि मैं कल्पना
  10074. 7:36:02से [संगीत] प्यार करता हूं। मैं तुम्हारी
  10075. 7:36:04बहन के लिए सही हूं भी या नहीं। वीरभद्र
  10076. 7:36:07गुस्से [संगीत] में भड़कते हुए कल्पना जी
  10077. 7:36:09की ओर देखते हुए बोला तो क्या यह कल्पना
  10078. 7:36:12मेरी बहन से ज्यादा हैसियत रखती थी जो
  10079. 7:36:14तुमने इसके लिए मेरी बहन को ठुकरा दिया।
  10080. 7:36:16इसी समय शौर्य सूर्यभान [संगीत] जी और
  10081. 7:36:18वीरभद्र जी के बीच में पहुंच गया और
  10082. 7:36:21वीरभद्र जी के सामने खड़ा होकर बोला कुछ
  10083. 7:36:24भी बोलने से पहले आप यह देख लीजिए अंकल कि
  10084. 7:36:27आप किसके लिए क्या भाषा प्रयोग कर रहे
  10085. 7:36:29हैं। अगर आप किसी का सम्मान नहीं कर सकते
  10086. 7:36:32तो किसी का अपमान करने का भी हक आपको नहीं
  10087. 7:36:34है। और अगर कोई मेरी मां के लिए अपमानजनक
  10088. 7:36:37शब्द का प्रयोग करें तो मुझे यह बर्दाश्त
  10089. 7:36:39नहीं। वीरभद्र जी शौर्य को अपने सामने
  10090. 7:36:43देखकर हैरान रह गए। उन्हें उम्मीद नहीं था
  10091. 7:36:45कि वह शौर्य से इस तरह दोबारा मिलेंगे।
  10092. 7:36:49उन्होंने अटकते हुए शौर्य से पूछा, "तुम
  10093. 7:36:52यहां? मैंने तुम्हारी मां [संगीत] के लिए
  10094. 7:36:54कब कोई अपमानजनक शब्द बोल दिया?" शौर्य
  10095. 7:36:57गंभीरता से बोला, अभी आप जिस कल्पना जी की
  10096. 7:37:00[संगीत] हैसियत नाप रहे थे, मैं उसी
  10097. 7:37:03कल्पना का बेटा हूं। यानी तुम सूर्यभान के
  10098. 7:37:07बेटे हो। शौर्य कल्पना जी की ओर देखते हुए
  10099. 7:37:10गर्व से बोला हां मैं इसी सूर्यभान और
  10100. 7:37:13कल्पना जी का बेटा हूं। दूसरी तरफ शिप्रा
  10101. 7:37:16ने जब देखा कि शौर्य वीरभद्र जी और
  10102. 7:37:19सूर्यभान जी की लड़ाई के बीच में [संगीत]
  10103. 7:37:21जा रहा है तो उसे थोड़ी घबराहट भी होने
  10104. 7:37:23लगी। पर जब उसने शौर्य की बात को सुना तो
  10105. 7:37:26वो आश्चर्य से नीलिमा की ओर देखने लगी।
  10106. 7:37:28जैसे [संगीत] वो उससे पूछ रही हो कि शौर्य
  10107. 7:37:31जो बोल रहा है उसकी बात में कितनी सच्चाई
  10108. 7:37:33है। नीलिमा ने जब शिप्रा को अपनी ओर देखते
  10109. 7:37:36पाया [संगीत] तो वो बोली इसमें आश्चर्य
  10110. 7:37:38करने की कोई बात नहीं है। वो मेरा भाई है
  10111. 7:37:41और मैं उसकी बहन और सूर्यभान जी और कल्पना
  10112. 7:37:44[संगीत] जी हमारे मम्मी पापा हैं। नीलिमा
  10113. 7:37:47के इस रहस्य उद्घाटन से शिप्रा को तो ऐसा
  10114. 7:37:49लगा जैसे उसके सिर पर कोई बम फटा हो। उसके
  10115. 7:37:52लिए यकीन करना मुश्किल था। यह कैसे सच हो
  10116. 7:37:55सकता है? शौर्य तो एक भिखारी था। तो फिर
  10117. 7:37:58वह इतने बड़े परिवार से कैसे हो सकता है?
  10118. 7:38:01उसके लिए तो इस बात पर विश्वास करना
  10119. 7:38:03मुश्किल हो रहा था। वो कभी नीलिमा को तो
  10120. 7:38:05कभी शौर्य को तो कभी सूर्यभान और कल्पना
  10121. 7:38:08जी की ओर देख रही थी। वीरभद्र जी के लिए
  10122. 7:38:11भी विश्वास करना मुश्किल हो रहा था कि
  10123. 7:38:13शौर्य सूर्यभान जी का लड़का है। जबकि इसी
  10124. 7:38:16समय विक्रमजीत सिंह जी वीरभद्र जी की ओर
  10125. 7:38:18नाराजगी से देख रहे थे। उन्होंने वीरभद्र
  10126. 7:38:21से पूछा क्या तुम इस कल्पना और सूर्यभान
  10127. 7:38:24के अफेयर के बारे में पहले से जानते थे?
  10128. 7:38:27वीरभद्र जी को विक्रमजीत सिंह चौहान को
  10129. 7:38:29जवाब देना मुश्किल हो रहा था। मजबूरन
  10130. 7:38:32उन्होंने कबूल किया कि सूर्यभान सच कह रहा
  10131. 7:38:34है। शौर्य विक्रमजीत सिंह जी की आंखों में
  10132. 7:38:37देखता हुआ बोला। अब आप क्या कहेंगे अंकल?
  10133. 7:38:41आपने कहा था कि आपके परिवार में से किसी
  10134. 7:38:43को हमारे पापा के रिलेशन के बारे में नहीं
  10135. 7:38:45पता था। जबकि आपका बेटा मेरे पापा की इस
  10136. 7:38:48राज से वाकिफ था। [संगीत]
  10137. 7:38:50क्या अब भी आप कहेंगे कि मेरे पापा ने
  10138. 7:38:52आपके साथ फरेब किया था? तो अब आप अपने
  10139. 7:38:54बेटे [संगीत] के बारे में क्या कहेंगे?
  10140. 7:38:56मेरे पापा से बड़े गुनाहगार तो आपके अपने
  10141. 7:38:59बेटे थे। जैसे ही विक्रमजीत सिंह जी को
  10142. 7:39:02पता चला कि वीरभद्र सूर्यभान जी एवं
  10143. 7:39:05कल्पना जी के रिलेशन के बारे में पहले से
  10144. 7:39:07जानता था, तो इस बात से उनकी नजर झुक गई।
  10145. 7:39:10अब आगे क्या होगा? क्या अभी भी विक्रमजीत
  10146. 7:39:13सूर्यभान जी को घर से निकालने की बात
  10147. 7:39:15करेंगे? शिप्रा का क्या रिएक्शन होगा
  10148. 7:39:18शौर्य की हकीकत जानकर? चक्रभान [संगीत]
  10149. 7:39:20जी भी सूर्यभान के इस नए खुलासे से हैरान
  10150. 7:39:23रह गए। उन्होंने सोचा अगर उन्हें 27 साल
  10151. 7:39:27पहले यह बात पता होती तो क्या वह अपने
  10152. 7:39:29बेटे को घर से निकालते? उस समय उन्होंने
  10153. 7:39:32अपनी आन के कारण जल्दबाजी में सूर्यभान की
  10154. 7:39:35कोई भी सफाई सुने बिना [संगीत] उन्हें घर
  10155. 7:39:37से निकाल दिया था। अब इतने वर्षों बाद
  10156. 7:39:40उन्हें अपने उस डिसीजन पर पश्चाताप हो रहा
  10157. 7:39:43था। विक्रमजीत चौहान [संगीत] वीरभद्र जी
  10158. 7:39:46से गुस्से में बोले अगर तुम्हें पता था कि
  10159. 7:39:48सूर्यभान का अफेयर किसी लड़की के साथ है
  10160. 7:39:51तो तुम्हें तो यह बात अपने परिवार में
  10161. 7:39:52बतानी चाहिए थी। किसी का अफेयर होना और
  10162. 7:39:55शादी होना दोनों अलग बात थी पापा। इस तरह
  10163. 7:39:58का अफेयर आम होते हैं। पर शादी एक परिवार
  10164. 7:40:01का फैसला होता है। इसमें दो परिवार भी
  10165. 7:40:03जुड़ते हैं। इसलिए मैंने सोचा कि जब
  10166. 7:40:06चंद्रभान अंकल ने जुबान दे रखी है तो शादी
  10167. 7:40:08तो सूर्यभान की हमारे परिवार में ही होगी।
  10168. 7:40:11इसलिए उस समय इस बात को मैंने ज्यादा
  10169. 7:40:13तरजीह नहीं [संगीत] दी। वीरभद्र जी अपनी
  10170. 7:40:16सफाई देते हुए बोले वीरभद्र जी की बात
  10171. 7:40:19सुनने के बाद सूर्यभान विक्रमजीत चौहान के
  10172. 7:40:22सामने जाकर शांत स्वर में बोला मैं जानता
  10173. 7:40:25हूं उस समय मेरे में भी बहुत सारी कमियां
  10174. 7:40:27रही। अंकल शायद मुझे और पहले आप लोगों के
  10175. 7:40:31सामने आकर अपनी बात रखनी चाहिए थी। पर उस
  10176. 7:40:33समय मैं भी डरा हुआ था। जिस कारण मैं खुद
  10177. 7:40:36भी कई गलतियां करता चला गया। पर एक बात
  10178. 7:40:39मैं आपको बहुत यकीन के साथ कह रहा हूं कि
  10179. 7:40:41अगर मैं किसी दबाव में आकर आपकी बेटी से
  10180. 7:40:44शादी कर भी लेता तो ना ही कभी वह खुश रह
  10181. 7:40:46पाती [संगीत] और ना ही मैं। इसलिए मेरा
  10182. 7:40:49भानुमती से शादी ना करना उसके लिए भी
  10183. 7:40:51अच्छा ही था। तुमने कितनी आसानी से यह बात
  10184. 7:40:54बोलकर अपना पल्ला झाड़ लिया। तुम जानते हो
  10185. 7:40:56तुम्हारी इस एक गलती के कारण वर्षों
  10186. 7:40:59पुरानी चंद्रभान से हमारी दोस्ती खत्म हो
  10187. 7:41:01गई। हम दोनों दोस्त जो एक दूसरे पर जान
  10188. 7:41:04लुटाते थे वो तुम्हारी एक गलती [संगीत] के
  10189. 7:41:06कारण एक दूसरे के जान के दुश्मन हो गए।
  10190. 7:41:09हमारे परिवार के बीच में जो वर्षों पुराना
  10191. 7:41:11संबंध था वो खत्म [संगीत] हो गया। सिर्फ
  10192. 7:41:14तुम्हारे अपने एक स्वार्थ के कारण क्योंकि
  10193. 7:41:16तुम्हें परिवार से ज्यादा अपना प्यार
  10194. 7:41:18[संगीत] पसंद था। तुम्हें आज तक यह नहीं
  10195. 7:41:21समझ आया कि हमारे समाज में शादी सिर्फ दो
  10196. 7:41:23लोगों का मिलन नहीं बल्कि दो परिवारों का
  10197. 7:41:26भी मिलन होता है। पर तुम्हारे स्वार्थ के
  10198. 7:41:28आगे तो तुम्हारे परिवार की कोई वैल्यू ही
  10199. 7:41:30नहीं रही। तुम्हारे पिता की दी हुई वचन की
  10200. 7:41:33भी कोई वैल्यू नहीं रही और तुम मुझे आज
  10201. 7:41:36प्यार की सीख दे रहे हो। विक्रमजीत चौहान
  10202. 7:41:39ने सूर्यभान को धिक्कारते हुए [संगीत]
  10203. 7:41:40कहा। उस हॉल में कोई भी ऐसा शख्स मौजूद
  10204. 7:41:44नहीं था जो विक्रमजीत चौहान की बात से
  10205. 7:41:46प्रभावित हुए बिना रह सका हो। खुद
  10206. 7:41:48सूर्यभान भी विक्रमजीत चौहान की बातों का
  10207. 7:41:51कोई जवाब नहीं ढूंढ पाए। शौर्य भी
  10208. 7:41:53विक्रमजीत चौहान की बातों से प्रभावित हुए
  10209. 7:41:55बिना नहीं रह सका। पर वह यह भी जानता था
  10210. 7:41:58कि उसके पिता को अगर सबसे ज्यादा किसी बात
  10211. 7:42:00का मलाल था तो इसी बात का था कि उनके कारण
  10212. 7:42:03उनके पिता और उनके सबसे अच्छे दोस्त के
  10213. 7:42:05बीच में दुश्मनी हो गई। आप सही कह रहे हैं
  10214. 7:42:09अंकल। अगर मैं सच कहूं तो इस बात को मैं
  10215. 7:42:12उस समय नहीं समझ पाया था। पर इतने वर्षों
  10216. 7:42:15के बाद अगर मुझे सबसे ज्यादा किसी बात का
  10217. 7:42:17मलाल है तो इसी बात का कि मैं अपने पिता
  10218. 7:42:20के सबसे अच्छे दोस्त के बीच दुश्मनी का
  10219. 7:42:22कारण बन गया। मुझे उस समय जल्दबाजी ना
  10220. 7:42:25करके कुछ बेहतर रास्ता तलाश करना चाहिए था
  10221. 7:42:28जिससे [संगीत] कि मैं आप दोनों के बीच
  10222. 7:42:30दुश्मनी का कारण नहीं बनता। पर उस वक्त की
  10223. 7:42:33नादानी में मैं यह बात नहीं समझ पाया।
  10224. 7:42:36उसके लिए मैं आप दोनों का दोषी हूं। इसके
  10225. 7:42:39लिए आप जो भी सजा मुझे देंगे, मुझे वह
  10226. 7:42:41कबूल [संगीत] होगी। सूर्यभान जी विक्रमजीत
  10227. 7:42:44चौहान के सामने सिर झुकाते हुए बोले शौर्य
  10228. 7:42:47[संगीत] जल्दी से अपने पापा के पास पहुंचा
  10229. 7:42:49और उनके साथ खड़े होकर विक्रमजीत जी से
  10230. 7:42:51बोला आप मेरे दादाजी [संगीत] के दोस्त रहे
  10231. 7:42:54हैं तो मेरे लिए भी आप दादाजी के ही समान
  10232. 7:42:57हैं। मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं
  10233. 7:42:59कि इन [संगीत] 25 वर्षों में मैंने अपने
  10234. 7:43:01पापा को हमेशा इस बोझ के तले दबे पाया कि
  10235. 7:43:04इनके कारण दादाजी और आपके बीच में दुश्मनी
  10236. 7:43:07हो गई और यह कुछ नहीं कर [संगीत] पाए। यह
  10237. 7:43:10अपराध बोध ही था जिसके कारण यह आज तक खुद
  10238. 7:43:13आगे बढ़कर यहां वापस आने की कभी कोशिश
  10239. 7:43:15[संगीत] भी नहीं की। यह हमेशा अपने
  10240. 7:43:18भाई-बहन, मां-पिताजी सबको मिस करते रहे।
  10241. 7:43:21पर चाहकर भी कभी [संगीत] वापस इस दहलीज पर
  10242. 7:43:23आने की हिम्मत नहीं कर पाए। अगर आज आप और
  10243. 7:43:27दादाजी फिर से [संगीत] पुराने दोस्तों की
  10244. 7:43:29तरह एक हो जाएं तो मैं आपको यकीन दिलाता
  10245. 7:43:32हूं। अगर आप यही चाहते हैं कि मेरे पापा
  10246. 7:43:36वापस इस परिवार में ना आए तो आज और अभी हम
  10247. 7:43:40अपने परिवार के साथ इस शहर को छोड़कर चले
  10248. 7:43:43जाएंगे। शौर्य यह तुम क्या बोल रहे हो?
  10249. 7:43:46तुम [संगीत] बोलने से पहले सोच तो लिया
  10250. 7:43:48करो। पहले ही मैं अपनी एक गलती के कारण
  10251. 7:43:51तुम लोगों से इतने वर्षों तक दूर रहा हूं।
  10252. 7:43:53अब दोबारा मैं नहीं चाहता कि तुम लोग फिर
  10253. 7:43:56से मुझसे दूर चले जाओ। चंद्रभान जी आगे
  10254. 7:43:59आते हुए बोले नहीं पिताजी शौर्य [संगीत]
  10255. 7:44:02ठीक कह रहा है अगर आप दोनों फिर से पुराने
  10256. 7:44:05दोस्तों की तरह एक हो जाते हैं तो मैं
  10257. 7:44:07समझूंगा कि आपसे दूर होना एक तरह से हमारे
  10258. 7:44:10लिए प्रायश्चित होगा पर मेरे लिए यह
  10259. 7:44:13संतुष्टि प्रदान करने वाला भी होगा कि
  10260. 7:44:15आखिर अंत में मैं आप दोनों को वापस मिलाने
  10261. 7:44:18में कामयाब रहा। सूर्यभान भी शौर्य की बात
  10262. 7:44:21का समर्थन करते हुए बोले विक्रमजीत चौहान
  10263. 7:44:24शौर्य से प्रभावित नजर आ रहे थे। जिस तरह
  10264. 7:44:27से सामने आकर शौर्य ने अपने पिता का पक्ष
  10265. 7:44:29रखा और उनके साथ खड़ा हुआ। यह उसके उच्च
  10266. 7:44:32चरित्र को दर्शाता था। उन्होंने यह भी
  10267. 7:44:35देखा था कि वीरभद्र इस लड़के को पहले से
  10268. 7:44:38जानता था। उन्हें यह बात समझ में नहीं आया
  10269. 7:44:40कि वीरभद्र इस लड़के को पहले से कैसे
  10270. 7:44:43जानता था। उन्होंने वीरभद्र से धीरे से
  10271. 7:44:45पूछा। वीरभद्र तुम इस लड़के को पहले से
  10272. 7:44:49कैसे जानते थे? वीरभद्र जी ने भी अपने
  10273. 7:44:52पिताजी के कान के पास जाकर धीरे से बोला,
  10274. 7:44:55"पिताजी, कनिका को दद्दन पहलवान से इसी ने
  10275. 7:44:58बचाया था। बसंत विहार में जो दूसरा सबसे
  10276. 7:45:01बड़ा इन्वेस्टर है, वह
  10277. 7:45:03[संगीत]
  10278. 7:45:03यही है। जबकि राजा साहब सोच रहे थे कि
  10279. 7:45:06विक्रमजीत शायद वीरभद्र के साथ विचार कर
  10280. 7:45:08रहा था कि वो सूर्यभान को क्या सजा दें।
  10281. 7:45:11यह [संगीत] सोचकर ही वह विक्रमजीत के
  10282. 7:45:13सामने जाकर बोले, विक्रमजीत तुम्हारा असली
  10283. 7:45:16गुनहगार मैं हूं क्योंकि मैंने तुम्हें
  10284. 7:45:19वचन दिया था और उसको पूरा नहीं कर पाना भी
  10285. 7:45:21मेरी गलती है। तो तुम इसके लिए जो भी सजा
  10286. 7:45:24देना चाहते हो मुझे दे सकते हो। पर मेरे
  10287. 7:45:27बच्चों को मुझसे दूर करने की कोशिश मत
  10288. 7:45:29करना। चंद्रभान तुम्हारा यह बेटा आज भी
  10289. 7:45:32अपना पीठ ही दिखाना चाहता है। मुसीबत
  10290. 7:45:34[संगीत] से अपना पीछा ही छुड़ाना चाहता
  10291. 7:45:36है। क्या यह इतना भी नहीं समझता कि हम और
  10292. 7:45:39तुम पुराने दिनों की तरह दोस्त बन जाएंगे
  10293. 7:45:42और उसके बाद इसको तुमसे दूर कर ही दिया तो
  10294. 7:45:44फिर दोस्त कैसा हुआ? यह खुद का बलिदान
  10295. 7:45:47देकर महान बनना चाहता है। पर मुसीबत का
  10296. 7:45:50सामना करना नहीं चाहता। विक्रमजीत चौहान
  10297. 7:45:53सूर्यभान [संगीत] पर कटाक्ष करते हुए
  10298. 7:45:55बोले। बात सूर्यभान जी को भी समझ में आई
  10299. 7:45:58और वह आगे आकर सफाई देते हुए बोले ऐसी बात
  10300. 7:46:02नहीं है अंकल मैं कोई भी बलिदान [संगीत]
  10301. 7:46:04देना नहीं चाहता। मुझे लगा कि शायद मेरे
  10302. 7:46:07यहां से चले जाने के बाद मेरा यह कदम शायद
  10303. 7:46:09आपके गुस्से को थोड़ा ठंडा कर दे। बस यही
  10304. 7:46:12कारण है कि मैंने यह बात कही। बाकी अगर
  10305. 7:46:15आपकी निगाह में कोई दूसरी भी सजा आपने
  10306. 7:46:17मेरे लिए सोची है तो मैं उसको भी भुगतने
  10307. 7:46:20के लिए तैयार हूं। और मैं यह बात बहुत
  10308. 7:46:22[संगीत] सोच समझकर आपसे कह रहा हूं।
  10309. 7:46:25तुम्हें पता है तुम क्या करने जा रहे हो?
  10310. 7:46:27तुम बिना यह जाने कि मैं तुमसे क्या कहने
  10311. 7:46:30वाला हूं। तुम यह बात बोलने की हिम्मत कर
  10312. 7:46:32रहे हो कि मैं जो भी कहूंगा तुम मेरी बात
  10313. 7:46:35को मान लोगे। विक्रमजीत चौहान सारकास्टिक
  10314. 7:46:38अंदाज में बोले। एक बार को तो विक्रमजीत
  10315. 7:46:41चौहान की बात सुनकर राजा साहब की भी आंखें
  10316. 7:46:43सिकुड़ गई कि पता नहीं विक्रमजीत सूर्यभान
  10317. 7:46:46के सामने क्या कंडीशन रखते। वो थोड़ा
  10318. 7:46:49हिचकिचाए भी पर वह चुप ही रहे। उस पार्टी
  10319. 7:46:53में मौजूद लोग भी यह जानने को बहुत उत्सुक
  10320. 7:46:55थे कि [संगीत] विक्रमजीत चौहान सूर्यभान
  10321. 7:46:57के सामने क्या कंडीशन रखने वाले हैं।
  10322. 7:47:00नीलिमा के साथ खड़ी शिप्रा भी धड़कते दिल
  10323. 7:47:02से [संगीत] विक्रमजीत चौहान की बातों की
  10324. 7:47:04तरफ ध्यान लगाए हुई थी। आज उसको एक साथ
  10325. 7:47:07इतने सारे झटके लगे थे कि उसका [संगीत]
  10326. 7:47:09दिमाग सही से काम नहीं कर रहा था। उसे ऐसा
  10327. 7:47:12लग रहा था जैसे वो कोई सपना [संगीत] देख
  10328. 7:47:14रही हो। उसे लगा बस अगले ही पल उसका सपना
  10329. 7:47:18टूटेगा और फिर से वह अपने घर में अपने
  10330. 7:47:20बिस्तर पर नजर आएगी। अभी तो उससे यही सदमा
  10331. 7:47:24बर्दाश्त नहीं हुआ था कि शौर्य राजा साहब
  10332. 7:47:27का पोता है और अब ऊपर से यह एक नया लफड़ा
  10333. 7:47:30होने वाला है कि शायद उसे यह शहर ही
  10334. 7:47:32छोड़ना [संगीत] पड़े। वो अभी और ज्यादा
  10335. 7:47:34झटके बर्दाश्त नहीं कर सकती थी। इसलिए
  10336. 7:47:37उसने सोच लिया अभी वह कुछ नहीं सोचेंगी
  10337. 7:47:39[संगीत]
  10338. 7:47:39और जो भी हो रहा है उसके साथ बहती चली
  10339. 7:47:42जाएगी। नीलिमा शायद शिप्रा की स्थिति को
  10340. 7:47:45समझ रही थी। इसलिए उसने शिप्रा का हाथ
  10341. 7:47:48अपने हाथों में पकड़ लिया और उसे आश्वस्त
  10342. 7:47:51करने की कोशिश की कि सब ठीक होगा। शिप्रा
  10343. 7:47:54को भी नीलिमा का यह जेस्चर अच्छा लगा।
  10344. 7:47:57दूसरी तरफ विक्रमजीत चौहान [संगीत] के साथ
  10345. 7:48:00खड़ा वीरभद्र भी समझने की कोशिश कर रहा था
  10346. 7:48:03कि उसके पिताजी शौर्य के सामने क्या
  10347. 7:48:05कंडीशन रखने वाले हैं। जबकि विक्रमजीत
  10348. 7:48:08[संगीत] चौहान गौर से सूर्यभान की आंखों
  10349. 7:48:10में देख रहे थे और सोच रहे थे कि क्या
  10350. 7:48:13उन्हें अपनी सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए?
  10351. 7:48:15उन्होंने एक नजर शौर्य की तरफ देखा। फिर
  10352. 7:48:18शौर्य से पूछा, "तुम समझ रहे हो [संगीत]
  10353. 7:48:20तुम्हारे पिता ने अभी क्या कहा है? क्या
  10354. 7:48:22तुम्हें लगता है कि तुम्हारे पिता अपनी
  10355. 7:48:24बात पर खड़ा उतर पाएंगे? या यह भी तो हो
  10356. 7:48:27सकता है कि जिस तरह तुम्हारे पिता अपने
  10357. 7:48:29पिता की बात की मर्यादा [संगीत] नहीं रख
  10358. 7:48:30पाए, शायद वैसे ही तुम भी अपने पिता की
  10359. 7:48:33बात का सम्मान ना कर पाओ। यह आप कैसी बात
  10360. 7:48:35कर रहे हैं अंकल? अगर मेरे पिता ने कुछ
  10361. 7:48:37कहा है, तो वह जरूर अपनी बात को पूरा
  10362. 7:48:39करेंगे और मैं खुद अपने पिता के सिर को
  10363. 7:48:42दोबारा झुकने नहीं दूंगा। शौर्य विश्वास
  10364. 7:48:44के साथ बोला, शौर्य की बात सुनकर
  10365. 7:48:46विक्रमजीत [संगीत] चौहान के चेहरे पर एक
  10366. 7:48:48स्माइल छा गई। उन्होंने फिर से सूर्यभान
  10367. 7:48:51को उकसाते हुए कहा, पता नहीं तुम कह तो
  10368. 7:48:53रहे हो कि तुम अपनी बात से [संगीत] पीछे
  10369. 7:48:55नहीं हटोगे पर मुझे विश्वास नहीं हो रहा
  10370. 7:48:57है। आप अपनी बात कहिए अंकल। मैं पूरी
  10371. 7:49:00कोशिश करूंगा कि मुझे दोबारा आपके सामने
  10372. 7:49:02शर्मिंदा ना होना पड़े। बोलते हुए
  10373. 7:49:04सूर्यभान के चेहरे पर कठोरता आ गई। अगर
  10374. 7:49:07ऐसी बात है तो [संगीत] मेरी कंडीशन यही है
  10375. 7:49:10कि जहां से हमारी दोस्ती की डोर टूटी थी
  10376. 7:49:12हम फिर से वहीं से शुरुआत करते हैं।
  10377. 7:49:15विक्रमजीत चौहान सूर्यभान की आंखों में
  10378. 7:49:17देखते हुए बोले सूर्यभान [संगीत] को समझ
  10379. 7:49:19नहीं आया कि विक्रमजीत चौहान का कहने का
  10380. 7:49:21मतलब क्या हुआ? मैं समझा नहीं अंकल कि आप
  10381. 7:49:24क्या कहना चाहते [संगीत] हैं। आप जरा
  10382. 7:49:26स्पष्ट शब्दों में अपनी बात कहिए।
  10383. 7:49:28सूर्यभान असमंजस की स्थिति में बोले। 27
  10384. 7:49:32साल पहले हमारी दोस्ती रिशेदारी में बदलने
  10385. 7:49:34वाली थी और तुम्हारे कारण हमारी यह इच्छा
  10386. 7:49:37अधूरी रह गई। आज अगर हमारे पास फिर से
  10387. 7:49:39मौका है तो मैं [संगीत] चाहता हूं कि
  10388. 7:49:41हमारी यह दोस्ती फिर से रिशेदारी से शुरू
  10389. 7:49:43हो। यही मेरी कंडीशन है। विक्रमजीत चौहान
  10390. 7:49:46संदेह भरी नजर से सूर्यभान को देखते हुए
  10391. 7:49:49बोले पर अभी भी सूर्यभान विक्रमजीत
  10392. 7:49:51[संगीत] जी के कहने का मतलब नहीं समझे थे।
  10393. 7:49:53इसलिए उन्होंने फिर से कहा अंकल आप जरा
  10394. 7:49:56अपनी [संगीत] बात को स्पष्टता के साथ
  10395. 7:49:58कहेंगे। ठीक है। अगर तुम और भी स्पष्ट
  10396. 7:50:01तरीके से हमारी बात सुनना चाहते हो तो
  10397. 7:50:03सुनो। मैं यह चाहता हूं कि जिस [संगीत]
  10398. 7:50:05काम को तुमने बीच में छोड़ दिया था उसे
  10399. 7:50:07तुम्हारा बेटा पूरा करें। तुम्हें अपने
  10400. 7:50:09बेटे की शादी हमारी पोती से करनी पड़ेगी।
  10401. 7:50:11[संगीत] अब बताओ यह बात तुम्हें मंजूर है
  10402. 7:50:14या आज फिर तुम भगोड़े साबित होंगे।
  10403. 7:50:16विक्रमजीत जी ने स्पष्टता [संगीत] से अपनी
  10404. 7:50:18बात कही। उनकी बात सुनकर सूर्यभान जी खुश
  10405. 7:50:21हो गए। उन्हें लगा यह तो बहुत ही आसान
  10406. 7:50:23कंडीशन है। वैसे भी विक्रमजीत चौहान
  10407. 7:50:26[संगीत] की पोती से अच्छी लड़की उनके बेटे
  10408. 7:50:28को कहां मिलेगी? इसलिए उन्होंने बिना सोचे
  10409. 7:50:30समझे कहा मुझे [संगीत] मंजूर है अंकल मैं
  10410. 7:50:32इस रिश्ते के लिए तैयार हूं। अब आगे क्या
  10411. 7:50:35होगा? क्या शौर्य इस रिश्ते के लिए तैयार
  10412. 7:50:38होगा या फिर से वह पुरानी कहानी दोहराई
  10413. 7:50:40जाएगी। सुभान जी ने श्रवण से उसकी राय
  10414. 7:50:43जानने की भी कोशिश नहीं की और सीधा
  10415. 7:50:45[संगीत] ही अपनी सहमति विक्रमजीत जी को दे
  10416. 7:50:48दी। राजा साहब को कुछ समझने का मौका ही
  10417. 7:50:51नहीं मिला। वह जब तक आगे बढ़कर कुछ कह दे,
  10418. 7:50:54उससे पहले ही सूर्यभान जी ने खुश होते हुए
  10419. 7:50:57इस रिश्ते के लिए अपनी सहमति दे दी। श्रवण
  10420. 7:51:00भी [संगीत] आवाहक स्थिति में वहां खड़ा रह
  10421. 7:51:02गया। उसने तो ऐसा सोचा ही नहीं था कि
  10422. 7:51:05विक्रमजीत जी उसके पापा के सामने इस तरह
  10423. 7:51:07की कंडीशन रखेंगे। जैसे ही सूर्यभान जी ने
  10424. 7:51:11विक्रमजीत जी की पोती के साथ श्रवण की
  10425. 7:51:13शादी के लिए सहमति [संगीत] दी, श्रवण की
  10426. 7:51:16निगाह बरबस ही शिप्रा की ओर चली गई।
  10427. 7:51:19शिप्रा का चेहरा भी यह बात सुनकर सफेद पड़
  10428. 7:51:21गया था। उसे [संगीत] तो सब कुछ एक सपने
  10429. 7:51:24जैसा लग रहा था। शिप्रा का शरीर कांपने
  10430. 7:51:27लगा था। नीलिमा [संगीत] ने साफ-साफ उसके
  10431. 7:51:30शरीर की कंपन महसूस की और उसने मजबूती से
  10432. 7:51:33उसका हाथ [संगीत] थाम लिया। राजा साहब भी
  10433. 7:51:36इस सबसे सदमे की स्थिति में थे। उन्होंने
  10434. 7:51:38शिप्रा की ओर देखा और उसके चेहरे की सफेदी
  10435. 7:51:41देखकर [संगीत] उनका भी दिल भर आया था। वो
  10436. 7:51:44निर्णय नहीं कर पा रहे थे कि इस समय वह
  10437. 7:51:46क्या करें। बड़ी मुश्किल [संगीत] से जो
  10438. 7:51:49इतनी पुरानी दुश्मनी खत्म होने की कगार पर
  10439. 7:51:51थी उनके कुछ बोलने से फिर से वह वैसे ही
  10440. 7:51:54बनी रह जाती। उन्होंने सोचा इस [संगीत]
  10441. 7:51:57समय कुछ भी बोलना ठीक नहीं है। बाद में जब
  10442. 7:52:00स्थिति थोड़ी सामान्य होगी तब वह इस बारे
  10443. 7:52:02[संगीत] में विक्रमजीत चौहान से बात
  10444. 7:52:04करेंगे। उन्हीं के जैसी गलती आज सूर्यभान
  10445. 7:52:08ने भी की थी। उन्होंने भी बिना श्रवण के
  10446. 7:52:10मन की बात जाने इस शादी [संगीत] के लिए
  10447. 7:52:12अपनी सहमति दे दी। इस सब में सबसे बड़ी
  10448. 7:52:15विकट स्थिति श्रवण की हो रखी थी। अभी-अभी
  10449. 7:52:18ही उसने बड़े गर्व से विक्रमजीत [संगीत]
  10450. 7:52:21चौहान को आश्वासन दिया था कि वह उनकी
  10451. 7:52:23कंडीशन को पूरा करने की पूरी कोशिश करेगा।
  10452. 7:52:26अब वो किस मुंह से यह कहता कि वह ऐसा नहीं
  10453. 7:52:28कर सकता। उसने भी ठंडे दिमाग से सोचा और
  10454. 7:52:32उसे भी यही उचित जान पड़ा। अभी वह स्थिति
  10455. 7:52:35को सामान्य होने देगा। फिर वह इसका कोई ना
  10456. 7:52:37कोई रास्ता जरूर ढूंढ लेगा। [संगीत]
  10457. 7:52:40यह बढ़िया बात है सूर्यभान कि तुम इस
  10458. 7:52:42रिश्ते के लिए तैयार हो गए हो। पर एक बार
  10459. 7:52:45अपने बेटे [संगीत] से तो पूछ लो। कहीं बाद
  10460. 7:52:48में ऐसा ना हो कि तुम्हारी तरह यह भी मंडप
  10461. 7:52:50[संगीत] छोड़कर भाग जाए। ऐसा कुछ नहीं
  10462. 7:52:53होगा अंकल। मुझे अपने बेटे पर पूरा भरोसा
  10463. 7:52:56है। [संगीत] वो मेरी बात से इंकार नहीं
  10464. 7:52:58करेगा। आज अगर मैं 27 साल पहले की अपनी
  10465. 7:53:01स्थिति देखूं और आज अपने बेटे [संगीत] की
  10466. 7:53:03स्थिति देखूं तो मैं समझता हूं कि मेरा
  10467. 7:53:06बेटा मुझसे ज्यादा समझदार है। सूर्यभान जी
  10468. 7:53:09गर्व [संगीत] से श्रवण की ओर देखते हुए
  10469. 7:53:11बोले जैसे-जैसे सूर्यभान जी अपनी बात कह
  10470. 7:53:14रहे थे वैसे-वैसे श्रवण [संगीत] का दिल
  10471. 7:53:17बैठता जा रहा था। उसे आज खुद के अपने
  10472. 7:53:19डिसीजन पर पछतावा हो रहा था कि उसने पहले
  10473. 7:53:22ही अपने [संगीत] मम्मी पापा को अपनी शादी
  10474. 7:53:24के बारे में क्यों नहीं बता दिया था।
  10475. 7:53:27क्योंकि इस सब में उसके पापा [संगीत] की
  10476. 7:53:29भी कोई गलती नहीं थी। वह तो यही समझ रहे
  10477. 7:53:31थे कि श्रवण की जिंदगी में कोई लड़की
  10478. 7:53:33[संगीत] है ही नहीं। इसी विश्वास के दम पर
  10479. 7:53:36वह श्रवण के रिश्ते के लिए तैयार हो गए
  10480. 7:53:38थे। हमें लगता है शादी विवाह का फैसला
  10481. 7:53:42[संगीत]
  10482. 7:53:42थोड़ा सोच समझ करना चाहिए। विक्रमजीत इस
  10483. 7:53:45तरह खड़े पैर कोई फैसला कर लेना सही नहीं
  10484. 7:53:48है। आजकल के समय में लड़के लड़की आपस में
  10485. 7:53:51बात व्यवहार करके कोई फैसला करते हैं।
  10486. 7:53:54तुम्हें पहले अपनी पोती से [संगीत] भी इस
  10487. 7:53:56बारे में बात कर लेनी चाहिए। चंद्रभान जी
  10488. 7:53:59बीच में हस्तक्षेप करते हुए बोले जिस तरह
  10489. 7:54:02से बात आगे बढ़ती जा रही [संगीत] थी
  10490. 7:54:04उन्हें लग रहा था यह जो भी हो रहा है सही
  10491. 7:54:07नहीं हो रहा है इसलिए उन्होंने इस तरह की
  10492. 7:54:09बात करके इस बात को टालने की कोशिश की।
  10493. 7:54:13क्या बात है चंद्रभान? क्या तुम्हें अपने
  10494. 7:54:15बेटे और पोते पर भरोसा नहीं है? तुम मेरी
  10495. 7:54:18पोती की चिंता मत करो। मुझे पता है मेरी
  10496. 7:54:21[संगीत] हां में ही उसकी हां है। मैंने
  10497. 7:54:24अगर कुछ भी फैसला उसके लिए कर लिया तो वह
  10498. 7:54:26खुशी-खुशी [संगीत]
  10499. 7:54:27इसके लिए तैयार हो जाएगी। तुम साफ-साफ यह
  10500. 7:54:30क्यों नहीं कहते कि तुम चाहते ही नहीं कि
  10501. 7:54:32हमारे बीच की दुश्मनी कभी खत्म हो। यह तुम
  10502. 7:54:36कैसी बात कर रहे हो विक्रमजीत? मैं भला
  10503. 7:54:38क्यों नहीं चाहूंगा [संगीत] कि हमारी
  10504. 7:54:40दोस्ती पहले की तरह हो जाए। पर मैं नहीं
  10505. 7:54:43चाहता कि [संगीत] आजकल के लड़के लड़की जिस
  10506. 7:54:46स्वच्छंद वातावरण के आदि हैं, उन्हें यह
  10507. 7:54:48लगे कि हम उनके साथ जबरदस्ती कर रहे हैं।
  10508. 7:54:51हमारे पोते के [संगीत] साथ तुम्हारी पोती
  10509. 7:54:54भी आज के जमाने की लड़की है। मैं तो सिर्फ
  10510. 7:54:56यह विचार दे रहा हूं कि कोई भी फैसला करने
  10511. 7:54:59से पहले तुम्हें एक बार अपने बच्चों की
  10512. 7:55:01राय भी ले लेनी चाहिए। नहीं तो कहीं ऐसा
  10513. 7:55:04ना हो कि हमारी [संगीत] तरह तुम्हें भी 27
  10514. 7:55:06साल पहले वाली स्थिति का सामना करना पड़े।
  10515. 7:55:09राजा साहब [संगीत] चाहते थे कि किसी तरह
  10516. 7:55:12विक्रमजीत इस बात के लिए राजी हो जाए तो
  10517. 7:55:14वह ऐसी स्थिति बनाने की कोशिश [संगीत]
  10518. 7:55:16करेंगे जिससे पता चल जाए कि श्रवण की शादी
  10519. 7:55:19पहले ही हो रखी है और अगर दोनों परिवार
  10520. 7:55:21में रिशेदारी ही करनी [संगीत] है तो उसके
  10521. 7:55:23लिए प्रतीक की शादी भी तो उनके परिवार में
  10522. 7:55:25की जा सकती है। फिर तुम वही बात कर रहे हो
  10523. 7:55:28चंद्रभान मैंने [संगीत] कहा ना कि मेरे
  10524. 7:55:30बच्चे मुझसे बाहर नहीं है। मैंने अगर उनके
  10525. 7:55:32लिए कोई फैसला कर लिया तो इसमें उनकी भी
  10526. 7:55:35सहमति [संगीत] है। विक्रमजीत जी गर्व से
  10527. 7:55:38अपना सीना चौड़ा करते हुए बोले वह ऐसे जता
  10528. 7:55:41रहे थे जैसे [संगीत] उनके बच्चे तो उनके
  10529. 7:55:43कंट्रोल में हैं पर चंद्रभान के बच्चे
  10530. 7:55:45उनके कंट्रोल में नहीं राजा साहब आगे कुछ
  10531. 7:55:48बोलने की स्थिति में नहीं थे पर सूर्यभान
  10532. 7:55:50जी विक्रमजीत जी की बात सुनकर आगे बढ़ते
  10533. 7:55:53हुए बोले फिर आप हमारी तरफ से भी निश्चिंत
  10534. 7:55:55रहे अंकल क्योंकि हमारा बेटा भी हमसे बाहर
  10535. 7:55:57नहीं है। इधर यह सब हो रहा था और दूसरी
  10536. 7:56:00तरफ प्रतीक और कुणाल के सीने पर सांप लूट
  10537. 7:56:03रहे थे। प्रतीक तो इस पार्टी का माहौल
  10538. 7:56:05बिगाड़ना चाहता था पर हो उल्टा गया था।
  10539. 7:56:08श्रवण की शादी विक्रमजीत चौहान के परिवार
  10540. 7:56:10में होने की बात हो रही थी। प्रतीक तो यह
  10541. 7:56:12जानकर पहले ही सदमे में था कि श्रवण उसके
  10542. 7:56:15चाचा का लड़का है और ऊपर से अब उसकी शादी
  10543. 7:56:18भी इतने बड़े परिवार में होने जा रही थी।
  10544. 7:56:20उसे लगा यह रिश्ता तो उसके लिए होना चाहिए
  10545. 7:56:22था ना कि श्रवण के लिए। उसने [संगीत] अपने
  10546. 7:56:25पापा की तरफ देखा तो उसके पापा जयभान
  10547. 7:56:28राठौर भी उसी की तरफ देख रहे थे। प्रतीक
  10548. 7:56:30जल्दी से अपने पापा के पास गया और धीरे
  10549. 7:56:33[संगीत] से फुसफुसाते हुए बोला पापा आप
  10550. 7:56:36देख क्या रहे हैं? आप कुछ करते क्यों
  10551. 7:56:38नहीं? जयभान राठौर को समझ नहीं आया कि
  10552. 7:56:41[संगीत] इस सब में वो क्या कर सकते हैं?
  10553. 7:56:43इसलिए वो चिढ़ते हुए बोले अब इसमें मैं
  10554. 7:56:45क्या कर [संगीत] सकता हूं? पापा आप समझते
  10555. 7:56:48क्यों नहीं? आपका बेटा भी तो कुंवारा ही
  10556. 7:56:50है। अगर दोनों परिवार में रिशेदारी होनी
  10557. 7:56:53ही है तो यह रिश्ता आपके बेटे के साथ भी
  10558. 7:56:55तो हो सकता है। तुम्हें लगता है ऐसे माहौल
  10559. 7:56:58में मेरा कुछ बोलना सही होगा। अभी वैसे ही
  10560. 7:57:00यहां की स्थिति खराब थी। तुम धैर्य रखो।
  10561. 7:57:03स्थिति को सामान्य होने दो। फिर मैं इस
  10562. 7:57:05बारे में परिवार में चर्चा [संगीत]
  10563. 7:57:07करूंगा। ठीक है? पर आप इसमें देर मत
  10564. 7:57:10कीजिएगा। मुझे लगता है स्वर्ण लगता बुआ के
  10565. 7:57:13दिमाग में भी कुछ ऐसा ही चल रहा होगा।
  10566. 7:57:15इसलिए जितनी जल्दी स्थिति को अपने काबू
  10567. 7:57:18में करने की कोशिश करेंगे उतना अच्छा
  10568. 7:57:20होगा। तुम भी अगर उनकी पोती को जानते
  10569. 7:57:22होंगे तो उससे मेलजोल बढ़ाने की कोशिश
  10570. 7:57:25करना। हो सकता है इस तरह से तुम्हारी बात
  10571. 7:57:27बन जाए। [संगीत]
  10572. 7:57:28जबकि वीरभद्र भी इस बदली परिस्थिति से खुश
  10573. 7:57:31नजर आ रहा था। वो पहले से ही श्रवण से
  10574. 7:57:33प्रभावित था। पहले तो उसे यह जानकर
  10575. 7:57:35[संगीत] दुख भी हुआ था कि श्रवण उसके
  10576. 7:57:37दुश्मन सूर्यभान का बेटा है। पर जब उसने
  10577. 7:57:40देखा कि उसके पिता अब राठौर फैमिली से
  10578. 7:57:42दुश्मनी भुलाकर दोस्ती की तरफ कदम बढ़ा
  10579. 7:57:45रहे हैं तो उसे भी खुशी हुई। वो सूर्यभान
  10580. 7:57:48के करीब जाकर बोले सूर्यभान ध्यान रखना इस
  10581. 7:57:51बार पहले [संगीत] की तरह हमारे साथ धोखा
  10582. 7:57:53ना हो। अगर इस बार भी तुम्हारे परिवार की
  10583. 7:57:56तरफ से कुछ धोखा हुआ तो फिर हम बर्दाश्त
  10584. 7:57:58[संगीत] नहीं कर पाएंगे। पहले जो भी हुआ
  10585. 7:58:01तुम उस बात को भूल जाओ वीरभद्र अब वैसा
  10586. 7:58:04कुछ नहीं होगा। आओ अब हम एक नए युग की
  10587. 7:58:06शुरुआत करते हैं। सूर्यभान जी आगे बढ़कर
  10588. 7:58:10वीरभद्र से हाथ मिलाते हुए बोले इतने में
  10589. 7:58:12जयभान जी मंच की तरफ आए और [संगीत] जोर से
  10590. 7:58:15बोले विक्रमजीत अंकल आज जब हम दोनों का
  10591. 7:58:20परिवार 27 साल पुरानी दुश्मनी [संगीत] को
  10592. 7:58:22बुलाकर एक नए रिश्ते की शुरुआत करने जा
  10593. 7:58:25रहा है तो क्यों ना इस खुशी में पापा के
  10594. 7:58:28साथ आपका एक ड्रिंक हो जाए। क्यों नहीं?
  10595. 7:58:31आज [संगीत] सचमुच खुशी का दिन है जो आज
  10596. 7:58:33मुझे अपने पुराने दोस्त के साथ चियर्स
  10597. 7:58:36करने का मौका मिल रहा है। [संगीत]
  10598. 7:58:38विक्रमजीत जी बोलते हुए चंद्रभान जी के
  10599. 7:58:40पास आ गए। जयभान जी ने एक वेटर को अपने
  10600. 7:58:43पास बुलाया [संगीत] जिसके हाथ में ड्रिंक
  10601. 7:58:45से भरी ग्लासेस एक प्लेट में सजी हुई थी।
  10602. 7:58:48चंद्रभान जी और विक्रमजीत [संगीत] चौहान
  10603. 7:58:51दोनों ने एक-एक ग्लास अपने हाथ में पकड़ा
  10604. 7:58:53और आपस में टकराते हुए चेयर्स किया।
  10605. 7:58:55[संगीत]
  10606. 7:58:56इसके बाद उन दोनों के आसपास मौजूद बाकी
  10607. 7:58:59लोगों ने भी अपना गिलास हवा में लहराते
  10608. 7:59:01हुए चियर्स किया। आज सचमुच इस स्टेट के
  10609. 7:59:04लिए भी खुशी की बात है चंद्रभान जी। इस
  10610. 7:59:07स्टेट के दो प्रमुख परिवार अपनी आपसी
  10611. 7:59:09दुश्मनी [संगीत] भुलाकर जब एक साथ काम
  10612. 7:59:12करेंगे तो हमारा स्टेट भी तेजी से तरक्की
  10613. 7:59:14करेगा। घनश्याम दास आगे आते हुए बोले, वह
  10614. 7:59:18भी विशालगढ़ के एक बड़े व्यवसाय [संगीत]
  10615. 7:59:20थे। इन दो परिवारों की दुश्मनी के कारण
  10616. 7:59:23स्टेट की जीडीपी अपनी स्वाभाविक गति से
  10617. 7:59:25पीछे रह जा रही थी। अगर यह दो परिवार आज
  10618. 7:59:28एक हो जाते हैं तो निश्चित रूप से स्टेट
  10619. 7:59:31की [संगीत] जीडीपी पर फर्क पड़ेगा।
  10620. 7:59:33चंद्रभान जी और विक्रमजीत जी दोनों ने
  10621. 7:59:35अपना ग्लास खाली किया और एक [संगीत] ट्रे
  10622. 7:59:37में रख दिया। उसके बाद दोनों एक दूसरे के
  10623. 7:59:40गले मिले। चंद्रभान जी ने भी इस समय चुप
  10624. 7:59:43रहना ही बेहतर समझा। उन्होंने सोचा अगर
  10625. 7:59:46बात करनी भी होगी तो कभी और करेंगे या वह
  10626. 7:59:49पूरे परिवार के साथ आपस में बैठकर फिर उस
  10627. 7:59:52पर विचार करेंगे कि उन्हें क्या करना
  10628. 7:59:54चाहिए। यह सोचकर उन्हें थोड़ा सुकून मिला।
  10629. 7:59:58दूसरी तरफ जब स्वर्णलता ने [संगीत] देखा
  10630. 8:00:01कि जयभान जी ने आगे बढ़कर विक्रमजीत चौहान
  10631. 8:00:03का स्वागत किया तो वह भी कैसे पीछे रहती।
  10632. 8:00:05[संगीत]
  10633. 8:00:06स्वर्णलता भी विक्रमजीत जी के सामने
  10634. 8:00:08पहुंचकर उनको नमस्कार किया और खुशी
  10635. 8:00:11[संगीत] जताई कि इतने वर्षों बाद यह दोनों
  10636. 8:00:13परिवार फिर से एक होने जा रहे हैं।
  10637. 8:00:16[संगीत] दूसरी तरफ शिप्रा निढाल सी एक
  10638. 8:00:18चेयर पर बैठ गई। नीलिमा ने जब शिप्रा का
  10639. 8:00:21उतरा हुआ चेहरा [संगीत] देखा तो उसे भी
  10640. 8:00:23बहुत बुरा लगा। उसे अपने भाई पर गुस्सा भी
  10641. 8:00:26आ रहा था कि वो चुपचाप क्यों खड़ा वहां
  10642. 8:00:28तमाशा देख रहा है। वो बोल क्यों नहीं रहा
  10643. 8:00:31[संगीत] है कि वो किसी नए रिश्ते में अब
  10644. 8:00:33नहीं बंध सकता। वो पहले से शादीशुदा है।
  10645. 8:00:36वो शिप्रा को वहीं छोड़कर जल्दी से श्रवण
  10646. 8:00:39के पास पहुंची और उसके कान के पास जाकर
  10647. 8:00:41[संगीत] धीरे से बोली भैया आप चुपचाप
  10648. 8:00:44तमाशा क्या देख रहे हो? कुछ बोल क्यों
  10649. 8:00:46नहीं रहे? श्रवण ने उदास आंखों से नीलिमा
  10650. 8:00:49की तरफ देखा पर कुछ [संगीत] बोल नहीं
  10651. 8:00:51पाया। वो खुद नहीं समझ पा रहा था कि अचानक
  10652. 8:00:54यहां क्या हो गया है। जब वो [संगीत]
  10653. 8:00:56स्थिति को समझ पाया तब जाकर उसे लगा कि
  10654. 8:00:59वहां कितना बड़ा ब्लंडर हो चुका है। पर
  10655. 8:01:02उसने मन ही मन ठान लिया। अभी तो नहीं पर
  10656. 8:01:05वह बाद में इस स्थिति को अपने कंट्रोल में
  10657. 8:01:07कर लेगा। [संगीत] यह सोचकर उसे थोड़ी
  10658. 8:01:09तसल्ली हुई। उसने एक बार फिर से शिप्रा की
  10659. 8:01:12ओर देखा तो पाया कि शिप्रा उसी की ओर देख
  10660. 8:01:15रही [संगीत] है। वो शिप्रा से नजर मिलाने
  10661. 8:01:17का ताव नहीं ला पाया और अपनी नजर दूसरी ओर
  10662. 8:01:20फेर ली। दूसरी ओर वीरभद्र जी और सूर्यभान
  10663. 8:01:23जी भी आपस [संगीत] में गले मिले और वर्षों
  10664. 8:01:25पुरानी अपनी दोस्ती को याद किया। अब आगे
  10665. 8:01:28क्या [संगीत] होगा? क्या श्रवण विक्रमजीत
  10666. 8:01:31चौहान की पोती से शादी करेगा? या फिर वह
  10667. 8:01:34भी अपने [संगीत] पापा की तरह इस शादी को
  10668. 8:01:36बीच में ही छोड़कर भाग जाएगा। क्या दोनों
  10669. 8:01:38परिवारों की दोस्ती लंबी टिक पाएगी? जानने
  10670. 8:01:42के लिए सुनिए कहानी का अगला एपिसोड। आज जो
  10671. 8:01:44कुछ भी इस पार्टी में हुआ था, उससे शहर के
  10672. 8:01:47बड़े व्यवसाय खुश थे। क्योंकि राठौर
  10673. 8:01:50फैमिली और चौहान फैमिली की दुश्मनी के
  10674. 8:01:53कारण दोनों परिवार के बीच वर्चस्व [संगीत]
  10675. 8:01:55की लड़ाई चलती रहती थी। इससे शहर के
  10676. 8:01:58मंझोले व्यवसाय के व्यापार पर बुरा असर
  10677. 8:02:00पड़ता था। जो [संगीत] लोग चौहान फैमिली के
  10678. 8:02:03साथ काम करते थे, वह राठौर फैमिली की
  10679. 8:02:05आंखों में खटकते थे और जो राठौर फैमिली के
  10680. 8:02:08साथ काम करते थे, वह [संगीत] चौहान फैमिली
  10681. 8:02:11की आंखों में खटकते थे। आज की यह खबर कि
  10682. 8:02:14दोनों परिवार फिर से अपनी दोस्ती की नई
  10683. 8:02:16शुरुआत करने जा रही है। इन मंझोले
  10684. 8:02:18व्यापारिक घरानों के लिए सुकुन देने वाला
  10685. 8:02:21था। विक्रमजीत चौहान ने चंद्रभान जी के
  10686. 8:02:23साथ बात करके यह फैसला किया कि वह जल्दी
  10687. 8:02:26ही अपने परिवार के बीच बात करके एक
  10688. 8:02:28निश्चित डेट को इस बात का ऐलान पूरे शहर
  10689. 8:02:31के बीच करेंगे। चंद्रभान जी ने इस पर कुछ
  10690. 8:02:33नहीं कहा। पर सूर्यभान जी आगे बढ़कर बोले
  10691. 8:02:37आप सही कह रहे हैं अंकल यह बढ़िया रहेगा।
  10692. 8:02:40तब तक हम भी अपनी तरफ से इसके लिए तैयारी
  10693. 8:02:42पूरी कर लेंगे। चंद्रभान जी खामोशी से
  10694. 8:02:45सूर्यभान को देखते रहे। वह सूर्यभान से
  10695. 8:02:47कैसे बताते कि वह कितनी बड़ी गलती करने जा
  10696. 8:02:50रहा है। इस समय वह सूर्यभान को रोक भी
  10697. 8:02:52नहीं सकते थे। अगर वह बीच में कुछ बोलते
  10698. 8:02:55तो विक्रमजीत जी यही सोचते कि चंद्रभान को
  10699. 8:02:58ही उनकी पुरानी दोस्ती की कोई कदर नहीं
  10700. 8:03:00है। चंद्रभान जी भी नहीं चाहते थे कि
  10701. 8:03:02वर्षों पुरानी दुश्मनी जो खत्म होती
  10702. 8:03:04प्रतीत हो रही थी वह उनकी किसी बात से
  10703. 8:03:06बिगड़ जाए। अच्छे माहौल में पार्टी समाप्त
  10704. 8:03:09हुई। पर शौर्य और शिप्रा के लिए एक नई
  10705. 8:03:12परेशानी की शुरुआत होने वाली थी। शिप्रा
  10706. 8:03:15के लिए तो यही बात शॉकिंग था कि शौर्य
  10707. 8:03:18विशालगढ़ के राजघराने से संबंध रखता है।
  10708. 8:03:20अभी वह इसी बात को सही से एक्सेप्ट नहीं
  10709. 8:03:23कर पाई थी कि उस पर से उसके लिए इस घोषणा
  10710. 8:03:25ने वज्रपात का काम किया कि शौर्य की शादी
  10711. 8:03:28विक्रमजीत चौहान की पोती के साथ तय कर दी
  10712. 8:03:30गई थी। एक साथ इतने झटके शिप्रा के लिए
  10713. 8:03:34भारी पड़ने वाले थे। उसको जब पार्टी में
  10714. 8:03:36ठहरना मुश्किल हो गया तो वहां से निकल गई।
  10715. 8:03:39शौर्य उसको रोकना तो चाहता था पर वह इतने
  10716. 8:03:42लोगों के बीच में ऐसा कर नहीं सकता था।
  10717. 8:03:44शिप्रा मॉडल टाउन वाले घर पहुंची। वह
  10718. 8:03:47परेशान सी अपने कमरे में आकर लेट गई। इस
  10719. 8:03:50नई खबर ने की जिसे वह आज तक एक भिखारी समझ
  10720. 8:03:53रही थी। वो दरअसल में इतने बड़े परिवार से
  10721. 8:03:55संबंध रखता था। जिसके साथ अपने रिश्ते की
  10722. 8:03:58तो वह कल्पना भी नहीं कर सकती थी। वह
  10723. 8:04:00निश्चय नहीं कर पा रही थी कि अब उसके
  10724. 8:04:03रिश्ते का क्या अंजाम होगा। अब तो शौर्य
  10725. 8:04:05की शादी भानगढ़ की राजकुमारी से तय हो गई
  10726. 8:04:08थी। तो क्या उसका रिश्ता यहीं समाप्त हो
  10727. 8:04:10जाएगा? इस सोच मात्र से उसके शरीर में एक
  10728. 8:04:13सिंहरण सी दौड़ गई। नहीं, उसके होते हुए
  10729. 8:04:17शौर्य किसी और का नहीं हो सकता। क्या है?
  10730. 8:04:20अगर शौर्य इतने बड़े परिवार से है, वह तो
  10731. 8:04:23उसकी बीवी है तो उसके होते हुए वह किसी और
  10732. 8:04:25से शादी कैसे कर सकता है? वो इतनी आसानी
  10733. 8:04:28से हार नहीं मान सकती। शिप्रा ने मन ही मन
  10734. 8:04:31सोचा। पर यह भी तो सच है कि उसकी शादी
  10735. 8:04:34जबरदस्ती की है। उसने भी तो मजबूरी में ही
  10736. 8:04:37इस रिश्ते को एक्सेप्ट किया था। अगर शौर्य
  10737. 8:04:40उससे अलग होना चाहेगा तो वो [संगीत] क्या
  10738. 8:04:42ही कर लेगी। इस ख्याल ने अगले पल उसको डरा
  10739. 8:04:45भी दिया। शिप्रा को ध्यान आया कि कैसे
  10740. 8:04:48शौर्य ने कहा था कि वह होटल पैराडाइज का
  10741. 8:04:50मालिक है। पर उसने उसकी बात का [संगीत]
  10742. 8:04:52विश्वास नहीं किया था। उसने तो उससे यह भी
  10743. 8:04:55कहा था कि मेनका भी उसके लिए ही काम करती
  10744. 8:04:58है। अगले ही पल उसने सोचा [संगीत]
  10745. 8:05:00कहीं ऐसा तो नहीं है कि बिगबुल का मालिक
  10746. 8:05:02भी शौर्य ही है। इस सोच [संगीत] मात्र से
  10747. 8:05:05उसके शरीर में फिर से एक झुरझुरी सी हुई।
  10748. 8:05:08अब उसे लगने लगा कि उसके साथ जो भी अच्छा
  10749. 8:05:11अच्छा हो रहा था वो सब शौर्य के कारण ही
  10750. 8:05:13था। [संगीत]
  10751. 8:05:14यानी वह जो फैब्रिक ट्रेंड की सीईओ बनी
  10752. 8:05:16है, वह भी शौर्य के ही कारण। जाने कब तक
  10753. 8:05:20शिप्रा ऐसे ही ख्यालों में उलझी रही। तभी
  10754. 8:05:22[संगीत] उसके कमरे का दरवाजा खुला और
  10755. 8:05:25शौर्य उसके कमरे के अंदर आया। जब उसने
  10756. 8:05:27महसूस किया कि उसके कमरे में आने वाला
  10757. 8:05:30शख्स शौर्य है। उसने [संगीत] दूसरी तरफ
  10758. 8:05:32करवट फेर लिया। शौर्य कुछ पल खड़ा खामोशी
  10759. 8:05:35से उसको देखता रहा। जब शिप्रा की तरफ से
  10760. 8:05:38कोई भी रिएक्शन नहीं आया तो वह उसके पास
  10761. 8:05:40जाकर बेड पर बैठ गया। शौर्य की पीठ शिप्रा
  10762. 8:05:44की तरफ था। उसके सामने शीशा लगा हुआ था
  10763. 8:05:47जिसमें उसे अपने पीछे लेटी हुई शिप्रा
  10764. 8:05:49साफ-साफ दिखाई दे रही थी। शौर्य के बैठने
  10765. 8:05:52के बाद भी कमरे में खामोशी छाई रही। आखिर
  10766. 8:05:55शौर्य ने ही उस खामोशी को भंग करते हुए
  10767. 8:05:57कहा, कुछ बोलोगी नहीं? [संगीत]
  10768. 8:06:00थोड़ी देर की खामोशी के बाद शिप्रा ने
  10769. 8:06:02कहा, अब मेरे बोलने के लिए कुछ रह गया है
  10770. 8:06:05क्या? शिप्रा की उदासी उसकी आवाज में
  10771. 8:06:08साफ-साफ झलक रही थी। तुम ऐसा क्यों बोल
  10772. 8:06:10रही हो? हमारे बीच ऐसा क्या बदल गया है जो
  10773. 8:06:14तुम [संगीत] इस तरह से बात कर रही हो?
  10774. 8:06:16शौर्य हल्की झिझक के साथ बोला, तुम अभी भी
  10775. 8:06:20यह बोलने की हिम्मत कर रहे हो। इतना कुछ
  10776. 8:06:23होने के बाद भी कमाल है। [संगीत] क्या मैं
  10777. 8:06:26तुम्हें इतना नादान लग रही हूं जो
  10778. 8:06:28परिस्थिति का आकलन नहीं कर सकती? बोलते
  10779. 8:06:31हुए ऐसा लग रहा था जैसे शिप्रा के अंदर से
  10780. 8:06:34कुछ टूट कर बहने को तैयार है। [संगीत]
  10781. 8:06:36वो बेड से उठकर बैठ गई थी। पर वो बेड पर
  10782. 8:06:40शौर्य के ऑपोजिट साइड में बैठ गई थी।
  10783. 8:06:42[संगीत]
  10784. 8:06:43आज जो भी हुआ उससे हमारी स्थिति चेंज नहीं
  10785. 8:06:45हो जाती। हम अभी भी पतिप्नी हैं। शौर्य
  10786. 8:06:49पलट कर शिप्रा की ओर देखते हुए बोला
  10787. 8:06:52[संगीत]
  10788. 8:06:52अच्छा तो फिर आज जो कुछ उस पार्टी में हुआ
  10789. 8:06:55वो क्या था? बोलती हुई शिप्रा अपनी जगह पर
  10790. 8:06:59खड़ी हो गई। शौर्य भी अपनी जगह पर खड़ा हो
  10791. 8:07:01गया था। वो पलटा और शिप्रा के करीब जाकर
  10792. 8:07:05बोला जो [संगीत] कुछ भी हुआ वो सब
  10793. 8:07:08तुम्हारे सामने ही हुआ। मुझे खुद नहीं पता
  10794. 8:07:10था कि ऐसा कुछ वहां हो सकता था। यहां तक
  10795. 8:07:13कि मैंने सपने में भी ऐसी कल्पना नहीं थी
  10796. 8:07:15कि इतना कुछ अनएक्सेक्टेड हो सकता है और
  10797. 8:07:18जिस तरह से घटना घटती चली गई थी वो मेरे
  10798. 8:07:21कंट्रोल में नहीं था। शौर्य सफाई देते हुए
  10799. 8:07:24बोला अगर तुमने पहले ही अपने पापा को अपनी
  10800. 8:07:27शादी के बारे में बता रखा होता तो ऐसा
  10801. 8:07:30क्यों कर होता? शिप्रा शौर्य को घूरती हुई
  10802. 8:07:33बोली तुम समझो भी इतना कुछ कौन सोचता है
  10803. 8:07:36कि इस तरह से कुछ हो सकता है? मैं आज
  10804. 8:07:39उन्हें सब बताने ही वाला था। चौहान फैमिली
  10805. 8:07:42के आ जाने से सारा प्लान बिगड़ गया। बोलते
  10806. 8:07:45हुए शौर्य ने शिप्रा का हाथ अपने हाथ में
  10807. 8:07:48ले लिया। पर शिप्रा ने [संगीत] अगले ही पल
  10808. 8:07:50झटका देकर उससे अपना हाथ छुरा लिया।
  10809. 8:07:53मुबारक हो तुम्हें। अब तो तुम भानगढ़ की
  10810. 8:07:56राजकुमारी से शादी करने वाले हो। शिप्रा
  10811. 8:07:59तंज भरे स्वर में बोली। यह तुम कैसी बात
  10812. 8:08:01कर रही हो? क्या तुम ऐसा चाहती हो कि मैं
  10813. 8:08:04भानगढ़ की राजकुमारी से शादी करूं? शौर्य
  10814. 8:08:07अपने हाथ मलता हुआ बोला, "मेरे चाहने ना
  10815. 8:08:10चाहने से क्या होता है?" तुम तो ऐसा चाहते
  10816. 8:08:13ही होगे। तभी तो तुमसे उस समय इंकार नहीं
  10817. 8:08:15किया गया। नहीं तो तुम उसी समय वहां पर
  10818. 8:08:18बोल नहीं देते कि तुम पहले से शादीशुदा
  10819. 8:08:20हो। शिप्रा ने तर्क के साथ अपनी बात कही।
  10820. 8:08:24यह इतना आसान नहीं था। जो बात मेरे
  10821. 8:08:27पेरेंट्स को भी नहीं पता था। उस बात को
  10822. 8:08:29वहां पर बोलने पर मेरे पेरेंट्स के साथ
  10823. 8:08:31मेरे दादाजी की भी जगसाई होती। और दूसरी
  10824. 8:08:35बात यह है कि दोनों परिवार के बीच में
  10825. 8:08:37वर्षों से यह दुश्मनी चली आ रही है और इस
  10826. 8:08:40दुश्मनी का कारण मेरे पापा है। यहां पर
  10827. 8:08:43मुझे इस दुश्मनी के खत्म होने की एक छोटी
  10828. 8:08:45सी उम्मीद दिखाई दी थी। तो मैं नहीं चाहता
  10829. 8:08:47था कि मेरी सच्चाई जाहिर करने से यह
  10830. 8:08:50दुश्मनी फिर वैसे ही बरकरार रहे। शौर्य ने
  10831. 8:08:53असली कारण बताया कि वो क्यों नहीं अपनी
  10832. 8:08:55सच्चाई जाहिर कर सका। सिर्फ यही एक कारण
  10833. 8:08:58नहीं है। [संगीत]
  10834. 8:08:59तुमने पहले मुझे अपने बारे में क्यों नहीं
  10835. 8:09:01बताया? शिप्रा संदेह भरे स्वर में बोली,
  10836. 8:09:04[संगीत]
  10837. 8:09:05देखो, यह कोई बात नहीं हुई। इस तरह तो मैं
  10838. 8:09:08भी कह सकता हूं कि तुमने शादी के तुरंत
  10839. 8:09:10बाद ही मुझे अपना पति क्यों नहीं स्वीकार
  10840. 8:09:13किया। हर एक चीज के पीछे अपना कुछ कारण
  10841. 8:09:16होता है। कुछ तो कारण था जो मैं एक भिखारी
  10842. 8:09:19की जिंदगी जी रहा था। अचानक एक दिन मेरी
  10843. 8:09:22शादी तुम्हारे साथ जबरदस्ती कर दी जाती
  10844. 8:09:24है। इस तरह जो घटना होती है उसमें
  10845. 8:09:27सामंजस्य से बैठने में समय लगता है। लोग
  10846. 8:09:30एक दूसरे को समझते हैं। फिर चीजें सामान्य
  10847. 8:09:33होनी शुरू होती हैं। मैंने भी महसूस किया
  10848. 8:09:36कि कहीं ना कहीं तुम मुझे प्यार करने लगी
  10849. 8:09:38हो। तो फिर मैंने भी तुम्हें अपने बारे
  10850. 8:09:40में सब कुछ बताने का फैसला कर लिया था। यह
  10851. 8:09:44तुमने कैसे सोच लिया कि मैं तुम्हें प्यार
  10852. 8:09:46करने लगी हूं? कुछ भी मत सोचने लगो।
  10853. 8:09:49शिप्रा तुनक कर बोली शौर्य समझ गया शिप्रा
  10854. 8:09:52फिर से खुद को भरमाने लगी है वो इतनी
  10855. 8:09:55आसानी से [संगीत] अब इस बात को स्वीकार
  10856. 8:09:57नहीं करेगी इसलिए वो उस पर थोड़ा दबाव
  10857. 8:10:00बनाने के लिए बोला तुम यह कहना चाहती हो
  10858. 8:10:03कि तुम मुझसे प्यार नहीं करती नहीं शिप्रा
  10859. 8:10:07शौर्य से नजर हटाकर दूसरी ओर देखती हुई
  10860. 8:10:10बोली सोच लो तुम जो कह रही हो वो दिल से
  10861. 8:10:14कह रही हो ना शौर्य सरकास्टिक वे में बोला
  10862. 8:10:17इसमें सोचना क्या है? नहीं करती तो नहीं
  10863. 8:10:20करती। शिप्रा हिचकिचाते हुए बोली। साथ में
  10864. 8:10:24वो यह भी सोच रही थी कि पता नहीं इसके
  10865. 8:10:27दिमाग में क्या चल रहा है। उसे लग रहा था
  10866. 8:10:30कि शौर्य उसको मनाने की कोशिश करेगा
  10867. 8:10:32[संगीत] क्योंकि वो यह तो समझ गई थी कि
  10868. 8:10:35शौर्य भी उससे प्यार करने लगा है। पर
  10869. 8:10:38शौर्य तो उसके साथ कुछ और ही खेल खेलने के
  10870. 8:10:40मूड में था। वह भी समझ गया था कि शिप्रा
  10871. 8:10:43इतनी आसानी से उसकी [संगीत] बात नहीं
  10872. 8:10:45मानने वाली। इसलिए वह बोला अगर ऐसा है तो
  10873. 8:10:49फिर तो प्रॉब्लम ही सॉल्व है। फिर मैं
  10874. 8:10:52क्यों इतनी परेशानी ले रहा हूं। शिप्रा को
  10875. 8:10:55समझ नहीं आया कि शौर्य की बात का मतलब
  10876. 8:10:58क्या हुआ? अभी तक वो परेशान नजर आ रहा था।
  10877. 8:11:01अचानक ही वो इतना रिलैक्स कैसे ही गया।
  10878. 8:11:03[संगीत]
  10879. 8:11:04वो हैरान स्वर में शौर्य से बोली प्रॉब्लम
  10880. 8:11:07सॉल्व ही गया। इसका क्या मतलब हुआ? मुझे
  10881. 8:11:11लगा तुम मुझे प्यार करने लगी हो। तो मैं
  10882. 8:11:14तुमको कैसे तकलीफ दे सकता था? पर अब जब
  10883. 8:11:17पता है कि तुम्हें मुझसे प्यार ही नहीं है
  10884. 8:11:19तो [संगीत] फिर मैं निश्चिंत होकर
  10885. 8:11:21विक्रमजीत चौहान की पोती से शादी कर सकता
  10886. 8:11:24हूं। बोलते हुए शौर्य रिलैक्स नजर आ रहा
  10887. 8:11:27था। आ गई ना दिल की बात जुबान पर? [संगीत]
  10888. 8:11:30तुम यही तो चाहते थे। तुम्हें तो मौका
  10889. 8:11:33चाहिए था। तुम कुछ भी करो मेरी बला से।
  10890. 8:11:37शिप्रा परेशान सी होकर बोली। उसे उम्मीद
  10891. 8:11:40नहीं था कि शौर्य उससे इस तरह से बोलेगा।
  10892. 8:11:43जब तुम्हें कोई फर्क ही नहीं पड़ता तो फिर
  10893. 8:11:46तुम ऐसे क्यों बोल रही हो? वैसे तुम अपने
  10894. 8:11:48पेरेंट्स के सामने हमारे झूठ को बरकरार रख
  10895. 8:11:51सकती हो। मैं उनके सामने अपनी हकीकत जाहिर
  10896. 8:11:54नहीं करूंगा। [संगीत] शौर्य शिप्रा की
  10897. 8:11:56बेचैनी को महसूस कर रहा था। वो तो यह
  10898. 8:11:59देखना चाहता था कि वो [संगीत] कब तक अपने
  10899. 8:12:01जज्बात को जज्ब करके रखती है। फिर शौर्य
  10900. 8:12:04कमरे से बाहर जाने का दिखावा करते हुए
  10901. 8:12:06बोला, ठीक है, रात ही बहुत हो गई है। तुम
  10902. 8:12:10आराम करो। मैं भी अपने कमरे में जाता हूं।
  10903. 8:12:13अब इतनी जल्दी कहां चलती है? मेरी बात अभी
  10904. 8:12:16खत्म नहीं हुई है। शिप्रा शौर्य का हाथ
  10905. 8:12:19पकड़ती हुई बोली। अब तुम मुझे पकड़ क्यों
  10906. 8:12:22रही हो? [संगीत] मैंने तुम्हारा हाथ पकड़ा
  10907. 8:12:24तो तुमने तो मुझे दूर कर दिया। मेरा हाथ
  10908. 8:12:27तो छोड़ो। शौर्य शिप्रा से अपना हाथ
  10909. 8:12:30छुराने का प्रयास करता हुआ बोला। [संगीत]
  10910. 8:12:32अब तो मुझसे दूर जाओगे ही। कल तक तो अपने
  10911. 8:12:35प्यार की दुहाई दे रहे थे। अब तो सारा
  10912. 8:12:38प्यार हवा हो गया। शिप्रा मजबूती से शौर्य
  10913. 8:12:41की कलाई को पकड़े हुए थी। उसे लगा अगर
  10914. 8:12:44उसने शौर्य को छोड़ा तो वह वहां से चला
  10915. 8:12:46जाएगा। जबकि वो उसे अपने पास से जाने देना
  10916. 8:12:49नहीं चाहती थी। वो बोल कुछ रही थी पर उसका
  10917. 8:12:52[संगीत] एक्शन कुछ और कह रहा था। ठीक है
  10918. 8:12:55ना? अभी तो मुझे जाने दो। कल बात करते
  10919. 8:12:58हैं। शौर्य शांत भाव से बोला। शिप्रा ने
  10920. 8:13:02शौर्य को बेड पर धक्का दिया। मैंने कहा ना
  10921. 8:13:05मुझे अभी तुमसे बात करनी है और फिर
  10922. 8:13:08तुम्हें जाने की इतनी जल्दी क्या है?
  10923. 8:13:10शिप्रा शौर्य के करीब बेड पर बैठ गई।
  10924. 8:13:13शौर्य जो शिप्रा के धक्का देने से बेड पर
  10925. 8:13:15गिर गया था उठकर बैठ गया। अब ऐसी भी क्या
  10926. 8:13:19बात करनी है जो मुझे जबरदस्ती रोके हुई
  10927. 8:13:21हो? अगर तुमको बात ही करनी है तो कल करते
  10928. 8:13:24हैं ना। इतना कहते हुए शौर्य फिर से खड़ा
  10929. 8:13:27हो गया। इस बार शिप्रा [संगीत] शौर्य के
  10930. 8:13:29खड़े होते ही उससे लिपट गई और कसकर उसको
  10931. 8:13:32अपनी बाहों में भर ली। शौर्य को जैसे इसी
  10932. 8:13:35पल का इंतजार था। वो अब महसूस करने लगा था
  10933. 8:13:38कि भले ही [संगीत] शिप्रा बोलती कुछ भी हो
  10934. 8:13:41पर वो उसे दिल की गहराइयों से प्यार करने
  10935. 8:13:43लगी है। उसकी बातें कुछ होती थी पर उसके
  10936. 8:13:46एक्शंस [संगीत] कुछ और होते थे। वो शिप्रा
  10937. 8:13:49की बाह पकड़ता हुआ बोला। अब मैं इसका क्या
  10938. 8:13:52मतलब निकालूं? मुझे तो खुद को छूने नहीं
  10939. 8:13:54देती और खुद [संगीत] जबरदस्ती मुझसे लिपट
  10940. 8:13:57रही हो। अब आगे क्या होगा? आखिर शिप्रा
  10941. 8:14:00किस उलझन में यह सब कर रही है? क्या करेगा
  10942. 8:14:03शौर्य अपनी इस मुश्किल से निकलने के लिए?
  10943. 8:14:06क्या शौर्य विक्रमजीत चौहान की पोती से
  10944. 8:14:08शादी करेगा? शिप्रा को इस एहसास ने और डरा
  10945. 8:14:11दिया [संगीत]
  10946. 8:14:12कि अगर शौर्य उसके पास से चला गया तो उसके
  10947. 8:14:15बीच की दूरियां कहीं और बढ़ती ना चली जाए।
  10948. 8:14:18वो शौर्य से नाराज तो थी पर वो उसे खुद से
  10949. 8:14:22[संगीत] दूर नहीं होने दे सकती थी। बड़ी
  10950. 8:14:24मुश्किल से तो उसने उसके सामने अपनी भावना
  10951. 8:14:27को व्यक्त किया था। वो फिर से पुरानी
  10952. 8:14:30स्थिति में वापस आना नहीं चाहती थी कि
  10953. 8:14:32दोनों में गैप हो जाए। अगर एक बार दोनों
  10954. 8:14:36के बीच कम्युनिकेशन गैप आ जाएगा तो फिर
  10955. 8:14:38उनके बीच दूरियां बढ़ती चली जाएगी। जो कि
  10956. 8:14:41शिप्रा किसी भी हाल में होने देना नहीं
  10957. 8:14:43चाहती थी। इसलिए शौर्य ने फिर से जब उससे
  10958. 8:14:46दूर जाने की कोशिश की तो शिप्रा बिना सोचे
  10959. 8:14:49समझे उससे लिपट गई। [संगीत]
  10960. 8:14:51शौर्य तो जैसे इसी मौके की तलाश में था।
  10961. 8:14:54उसे अपनी मनचाही मुराद मिल गई थी। दिखावे
  10962. 8:14:58के लिए उसने शिप्रा से कहा, "तुम तो मुझे
  10963. 8:15:00प्यार नहीं करती। तो फिर मैं इस सब का
  10964. 8:15:02क्या मतलब समझूं?" शौर्य ने शिप्रा का
  10965. 8:15:05कंधा पकड़ कर उसे [संगीत] खुद से अलग करके
  10966. 8:15:07उसकी आंखों में देखना चाहा। पर शिप्रा ने
  10967. 8:15:10उसकी पीठ पर [संगीत] से अपनी पकड़ ढीली
  10968. 8:15:12नहीं कि उल्टा उसने और कसकर अपनी बंधन को
  10969. 8:15:15और मजबूत कर दिया। शौर्य चाहकर भी शिप्रा
  10970. 8:15:19को खुद से थोड़ा भी अलग नहीं कर पाया।
  10971. 8:15:21उल्टा [संगीत]
  10972. 8:15:22इस कोशिश में वो लड़खरा गया और पीठ के बल
  10973. 8:15:25बेड पर गिर गया। शिप्रा भी उसके साथ ही
  10974. 8:15:28उसके ऊपर बेड पर गिर गई। इस सबके बावजूद
  10975. 8:15:31भी शिप्रा ने अपनी पकड़ [संगीत] ढीली नहीं
  10976. 8:15:33की। अब शौर्य ने भी उठने की कोई कोशिश
  10977. 8:15:36नहीं की। वो यही तो चाहता था शिप्रा का
  10978. 8:15:39समीप्य। शिप्रा के शरीर की खुशबू शौर्य को
  10979. 8:15:42मददोश किए जा रहा था। शिप्रा का सर शौर्य
  10980. 8:15:46के ठोरी के पास था। जब थोड़ी देर तक
  10981. 8:15:48शिप्रा ने कुछ नहीं कहा और वह उसी अवस्था
  10982. 8:15:51में शौर्य के सीने पर लेटी रही तो शौर्य
  10983. 8:15:54ने फिर से कहा मैं अभी भी तुम्हारे जवाब
  10984. 8:15:56की प्रतीक्षा कर रहा हूं। जब शिप्रा
  10985. 8:15:59[संगीत] ने फिर से शौर्य का वही सवाल सुना
  10986. 8:16:01तो उसने अपना सर ऊपर उठाया और खिसक कर
  10987. 8:16:04शौर्य के थोड़ा और ऊपर हो गई। इस तरह उसका
  10988. 8:16:08चेहरा शौर्य के चेहरे के पास आ गया। शौर्य
  10989. 8:16:12ने उसके चेहरे की तरफ देखा तो अभी भी उसके
  10990. 8:16:14चेहरे पर नाराजगी के भाव नजर आ रहा था।
  10991. 8:16:17तुम बार-बार एक ही बात दोहराकर क्या साबित
  10992. 8:16:20करना चाहते हो? जब मैंने पहले ही तुमसे
  10993. 8:16:23अपनी फीलिंग जाहिर [संगीत] कर दी थी, तो
  10994. 8:16:24बार-बार एक ही रट लगाने का क्या मतलब हुआ?
  10995. 8:16:28उल्टा मुझे तुमसे शिकायत होनी चाहिए। पर
  10996. 8:16:30नहीं तुम तो मुझे ही गलत साबित करने पर
  10997. 8:16:33तुले हुए हो। मैं तुमसे प्यार करती हूं।
  10998. 8:16:36नहीं करती हूं। क्या मतलब हुआ इस सबका?
  10999. 8:16:39अगर अभी भी तुम्हें समझ नहीं आया तो एक
  11000. 8:16:42बार फिर से कह देती हूं। अगर मैंने किसी
  11001. 8:16:45और लड़की को तुम्हारे पास भी देख लिया तो
  11002. 8:16:47मैं उसका खून कर दूंगी। आज का ड्रामा
  11003. 8:16:50दिखाकर तुमने पहले ही मेरा दिमाग खराब कर
  11004. 8:16:52दिया है। तुम खुद को मेरे सामने कैसे
  11005. 8:16:55जस्टिफाई करोगे? इसको छोड़कर मुझे ही
  11006. 8:16:58अग्नि परीक्षा देने को बोल रहे हो। एक ही
  11007. 8:17:01बार में शिप्रा ने अपने दिल के उद्गार
  11008. 8:17:03शौर्य के सामने उगल दिया। शिप्रा के
  11009. 8:17:06उद्गार को सुनकर शौर्य की बोलती बंद हो
  11010. 8:17:08गई। अभी तक जो वो स्मार्ट बनने की कोशिश
  11011. 8:17:11कर रहा था, उसकी सारी स्मार्टनेस शिप्रा
  11012. 8:17:14के जवाब ने धराशाई कर दिया। [संगीत] अब
  11013. 8:17:16उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो आगे शिप्रा
  11014. 8:17:19से क्या बोले। शिप्रा के चेहरे पर नाराजगी
  11015. 8:17:22के भाव को शौर्य स्पष्ट देख सकता [संगीत]
  11016. 8:17:24था। पर इसके बावजूद उसके चेहरे का आकर्षण
  11017. 8:17:28कम नहीं हुआ था। वो शिप्रा से [संगीत]
  11018. 8:17:30बहुत कुछ कहना चाहता था। पर इस समय उसका
  11019. 8:17:33दिमाग एकदम ब्लैंक हो गया था। वो फिर से
  11020. 8:17:37सिलसिलेवार तरीके से इसके लिए [संगीत]
  11021. 8:17:39शिप्रा के क्या-क्या सवाल हो सकता है और
  11022. 8:17:42शौर्य को उसका जवाब कैसे देना है उसके
  11023. 8:17:44बारे में सोचने लगा। शिप्रा ने जब शौर्य
  11024. 8:17:47को खामोशी से अपनी तरफ देखते पाया तो वह
  11025. 8:17:50उसकी आंखों के सामने हाथ लहराती हुई बोली।
  11026. 8:17:53अब कुछ बोलोगे भी या मुझे ऐसे ही घूरते
  11027. 8:17:56रहोगे? तुम मेरे इतने पास रहोगी तो मैं
  11028. 8:17:59कैसे [संगीत] कुछ बोल पाऊंगा? शौर्य अटकते
  11029. 8:18:02गले के साथ बोला। ऐसा लग रहा था जैसे आवाज
  11030. 8:18:05उसके गले से बड़ी मुश्किल से निकल रही है।
  11031. 8:18:08शिप्रा ने जब देखा [संगीत] अब शौर्य फालतू
  11032. 8:18:11की इधर-उधर की बातें नहीं कर रहा है तो वह
  11033. 8:18:14उससे अलग हुई और बेड के ऊपर सिरहाने
  11034. 8:18:16[संगीत] के पास आकर उससे टेक लगाकर बैठ गई
  11035. 8:18:19और शौर्य का कॉलर पकड़ कर ऊपर अपने पास
  11036. 8:18:22खींचने [संगीत] लगी। शौर्य समझ गया कि
  11037. 8:18:24शिप्रा क्या चाहती है। इसलिए उसने भी
  11038. 8:18:27प्रतिरोध नहीं किया और उचक कर सिरहाने के
  11039. 8:18:30पास आ गया। दरअसल शिप्रा के मन में शौर्य
  11040. 8:18:33को लेकर कई सवाल चल रहे थे। उसे अभी तक
  11041. 8:18:37यही नहीं समझ में आया कि ऐसा क्यों कर हुआ
  11042. 8:18:40कि शौर्य राजा साहब का पोता निकला और ऐसी
  11043. 8:18:44क्या स्थिति हुई जिसके कारण शौर्य को एक
  11044. 8:18:46भिखारी [संगीत] की जिंदगी जीना पड़ रहा
  11045. 8:18:48था। इतना तो वो आज की पार्टी में जो भी
  11046. 8:18:52हुआ था उसको देखकर समझ [संगीत] गई थी कि
  11047. 8:18:54शौर्य चाहकर भी आज पार्टी के दौरान जो कुछ
  11048. 8:18:58हुआ था उस परिस्थिति में अपनी तरफ से
  11049. 8:19:00ज्यादा कुछ बोल नहीं सकता था। पर वह अब यह
  11050. 8:19:04बात किसी भी हाल में स्वीकार नहीं कर सकती
  11051. 8:19:06थी कि शौर्य किसी और से शादी करें।
  11052. 8:19:10उसकी परेशानी का सबसे बड़ा कारण यह भी था
  11053. 8:19:12कि सूर्यभान राठौर ने बिना शौर्य की
  11054. 8:19:15सच्चाई जाने विक्रमजीत [संगीत] चौहान की
  11055. 8:19:17पोती से शौर्य की शादी के लिए अपनी सहमति
  11056. 8:19:20दे दी थी। देखा जाए तो इसमें उनकी भी कोई
  11057. 8:19:23गलती नहीं थी। क्योंकि शौर्य की जिंदगी ने
  11058. 8:19:26क्या करवट ली थी इस बारे में [संगीत]
  11059. 8:19:28सूर्यभान राठौर को कोई जानकारी नहीं थी।
  11060. 8:19:32देखा जाए तो इसमें सारी गलती शौर्य की ही
  11061. 8:19:34थी। उसे पहले ही अपने मम्मी पापा को अपनी
  11062. 8:19:37वर्तमान स्थिति से अवगत करा देनी चाहिए
  11063. 8:19:40थी। इस बात को लेकर ही उसे शौर्य पर और भी
  11064. 8:19:43गुस्सा आ रहा था। शिप्रा इस उम्मीद में
  11065. 8:19:47शौर्य को एक टक देख रही थी कि शौर्य अब
  11066. 8:19:50उसे अपने बारे में बताएगा। पर शौर्य इस
  11067. 8:19:52उलझन में था कि वो शिप्रा को अपने बारे
  11068. 8:19:55में कैसे बताएं।
  11069. 8:19:57अब कुछ बोलोगे भी या ऐसे ही मेरा चेहरा
  11070. 8:20:00देखते रहोगे। शिप्रा सपाट स्वर में शौर्य
  11071. 8:20:03से बोली। शौर्य को भी लगा कि यह सही मौका
  11072. 8:20:07है शिप्रा को अपने बारे में सिलसिलेवार
  11073. 8:20:09ढंग [संगीत] से सब कुछ बताने का। इसलिए
  11074. 8:20:12उसने शिप्रा को बताना शुरू किया कि कैसे
  11075. 8:20:14इस शहर में उसका आना हुआ। कैसे उसको मारने
  11076. 8:20:17की कोशिश हुई। किस तरह से वह बचा और क्यों
  11077. 8:20:20वो मंदिर में भिखारी के रूप में रह रहा
  11078. 8:20:22था। शिप्रा ने जब यह सब कुछ जाना तो उसे
  11079. 8:20:26शौर्य के लिए बुरा भी लगा कि कैसे [संगीत]
  11080. 8:20:28वह अकेले इतने समय से सब कुछ झेलता रहा।
  11081. 8:20:32शौर्य ने उसे अपने परिवार और विक्रमजीत
  11082. 8:20:34चौहान के परिवार के बीच में किस तरह से
  11083. 8:20:37दुश्मनी शुरू हुई इसके बारे में भी बताया
  11084. 8:20:40और क्यों वो विक्रमजीत चौहान की शादी के
  11085. 8:20:42प्रपोजल मिलने के बाद भी कुछ नहीं बोल
  11086. 8:20:44पाया इसके बारे में भी अपनी स्थिति स्पष्ट
  11087. 8:20:47की। शिप्रा ने भी जब शौर्य का पक्ष जाना
  11088. 8:20:51तो वह भी उसकी मजबूरी को समझ पाई। बहुत हद
  11089. 8:20:54तक उसकी शिकायत [संगीत] भी दूर हो गई थी।
  11090. 8:20:56शौर्य ने भी जब शिप्रा के चेहरे पर अपने
  11091. 8:20:59लिए सिंपथी का भाव देखा [संगीत] तो उसने
  11092. 8:21:01हिम्मत करके शिप्रा का हाथ पकड़ लिया।
  11093. 8:21:04शौर्य के उसके हाथ पकड़ने [संगीत] पर
  11094. 8:21:06शिप्रा घुर कर शौर्य को देखने लगी। शौर्य
  11095. 8:21:09ने महसूस किया कि कुछ गड़बड़ है तो वो
  11096. 8:21:11शिप्रा से बोला ऐसे घूर कर क्या देख रहे
  11097. 8:21:14हो? तुम्हारा जब मन करता है तुम मेरे पास
  11098. 8:21:17आ जाती हो तो क्या [संगीत] मैं अपने मन से
  11099. 8:21:19तुम्हारा हाथ भी नहीं पकड़ सकता?
  11100. 8:21:22नहीं क्योंकि मेरी नाराजगी अभी दूर नहीं
  11101. 8:21:24हुई है। शिप्रा सपाट स्वर में बोली यह
  11102. 8:21:28क्या बात हुई? खुद तो मेरे पास आ जाओगी और
  11103. 8:21:31उसके बाद यह उम्मीद करोगी कि मैं [संगीत]
  11104. 8:21:33अपनी तरफ से कोई हरकत भी ना करूं। मैं कह
  11105. 8:21:35देता हूं ऐसा नहीं चल पाएगा। मेरे इतने
  11106. 8:21:38पास रहोगी तो फिर मुझे खुद को छूने से
  11107. 8:21:40नहीं रोक सकती। इतना कहते हुए शौर्य ने
  11108. 8:21:44फिर से शिप्रा के हाथ को अपने हाथों में
  11109. 8:21:46ले लिया। तो तुम मेरे साथ जबरदस्ती करोगे।
  11110. 8:21:50शिप्रा ने शौर्य से यह बोल तो दिया पर
  11111. 8:21:53उसने इस बार उससे अपना हाथ छुराने की कोई
  11112. 8:21:55कोशिश नहीं की।
  11113. 8:21:57यह क्या बात हुई? अगर तुम चाहती हो कि मैं
  11114. 8:22:00तुम्हारा हाथ नहीं पकड़ूं या खुद को
  11115. 8:22:02कंट्रोल में रखूं तो मुझसे थोड़ा डिस्टेंस
  11116. 8:22:04बनाकर रखो। तुम्हें क्या पता [संगीत] कि
  11117. 8:22:07खुद को तुम्हारे पास आने से रोकने में
  11118. 8:22:09मुझे खुद को कितना मशक्कत करना पड़ता है।
  11119. 8:22:12शौर्य ने बहुत ही भोलेपन से कहते हुए उसका
  11120. 8:22:15हाथ छोड़ दिया। वो शिप्रा से नजर मिलाने
  11121. 8:22:18का ताव नहीं ला पा रहा था। पर जब शिप्रा
  11122. 8:22:21ने देखा कि शौर्य ने उसका हाथ छोड़ दिया
  11123. 8:22:24तो उसे अच्छा ना लगा। वो शौर्य का चेहरा
  11124. 8:22:27अपनी ओर घुमाती हुई बोली अभी तो मैंने
  11125. 8:22:30तुमसे अपना हाथ नहीं छुराया तो फिर तुमने
  11126. 8:22:32क्यों छोड़ दिया। शौर्य को समझ में नहीं
  11127. 8:22:36आया कि इस बात पर वो उसको क्या बोले। पर
  11128. 8:22:39फिर भी उसने अपनी भावना को व्यक्त करते
  11129. 8:22:41हुए कहा। तुम्हें समझना बहुत ही मुश्किल
  11130. 8:22:44है। तुम्हारे चेहरे के भाव से समझ ही नहीं
  11131. 8:22:47आता कि तुम चाहती क्या हो। तुम ऐसे घूर कर
  11132. 8:22:50देखती हो कि लगता है मेरा एक्शन तुम्हें
  11133. 8:22:52पसंद नहीं आ रहा। अभी भी शिप्रा का चेहरा
  11134. 8:22:55एक्सप्रेशनलेस था। यह देखकर शौर्य आगे
  11135. 8:22:58बोला। ठीक है, अभी मैं सोने जाता हूं। अब
  11136. 8:23:02सुबह बात होगी। शिप्रा के दिल को शौर्य की
  11137. 8:23:05यह बातें गुदगुदा रही थी। जबकि शौर्य अपनी
  11138. 8:23:08बात कहने के बाद बेड से उतरने के लिए आगे
  11139. 8:23:11बढ़ा कि तभी फिर से उसके कान में शिप्रा
  11140. 8:23:14की आवाज सुनाई दिया। तुम्हें मेरे पास से
  11141. 8:23:16जाने की इतनी जल्दी क्यों है? क्या कहा
  11142. 8:23:19मुझे? तुम्हारे पास से जाने की जल्दी है?
  11143. 8:23:21मैं तो इस डर से यहां से जाना चाहता हूं
  11144. 8:23:23कि कहीं खुद पर से कंट्रोल ना खो दूं और
  11145. 8:23:26तुम्हारी नाराजगी को और ना बढ़ा दूं।
  11146. 8:23:28शिप्रा की बात सुनकर शौर्य रुक गया और
  11147. 8:23:31उसकी ओर देखते हुए बोला तो कौन बोल रहा है
  11148. 8:23:34खुद पर इतना कंट्रोल रखने को जो दिल में
  11149. 8:23:36आता है वह करते क्यों नहीं शिप्रा एक तरह
  11150. 8:23:39से शौर्य को खुला आमंत्रण देते हुए बोली
  11151. 8:23:42शिप्रा की बात सुनकर शौर्य शक भरी नजरों
  11152. 8:23:44से शिप्रा को देखने लगा [संगीत] उसे
  11153. 8:23:46उम्मीद नहीं था कि शिप्रा से उसे इस तरह
  11154. 8:23:48की बात सुनने को मिलेगा। जब शिप्रा
  11155. 8:23:50[संगीत] ने शौर्य की आंखों में शक देखा तो
  11156. 8:23:53उसने अपनी बाहें शौर्य की ओर फैला दी कि
  11157. 8:23:55वह उसे अपनी बाहों में भर ले। पर शौर्य को
  11158. 8:23:58अभी भी शिप्रा पर विश्वास नहीं हो रहा था।
  11159. 8:24:00शौर्य की आंखों में अविश्वास के भाव को
  11160. 8:24:02देखकर शिप्रा होठों में बुदबुदाई। ऐसे
  11161. 8:24:05अनाड़ी आदमी से मेरी शादी हुई है कि मेरा
  11162. 8:24:07कुछ नहीं हो सकता। इतना कहकर उसने शौर्य
  11163. 8:24:10के कॉलर पकड़ कर अपनी ओर खींचा और उसको
  11164. 8:24:13अपनी बाहों में भर लिया। दूसरी तरफ भानगढ़
  11165. 8:24:16के राजमहल में विक्रमजीत चौहान वीरभद्र के
  11166. 8:24:19साथ पहुंचे, तो उन्होंने घर के कई मेंबर
  11167. 8:24:21[संगीत] को पहले से डाइनिंग एरिया में
  11168. 8:24:22अपना इंतजार करते पाया। जिसमें कनिका के
  11169. 8:24:25साथ उसका बड़ा भाई करण चौहान, [संगीत]
  11170. 8:24:27भानुमती उसकी बेटी नंदिनी, राणा प्रताप और
  11171. 8:24:30उसका बेटा विराज चौहान मौजूद थे। इन्हें
  11172. 8:24:32पहले ही यह खबर मिल गई थी कि राठौर
  11173. 8:24:35[संगीत] फैमिली की पार्टी में आज क्या कुछ
  11174. 8:24:36हुआ था। सबके चेहरे पर गंभीरता झलक रही
  11175. 8:24:39थी। उन्हें समझ नहीं आया [संगीत] कि
  11176. 8:24:41विक्रमजीत चौहान तो सूर्यभान को धमकाने के
  11177. 8:24:43लिए गए थे कि वह जहां से आया है वहीं वापस
  11178. 8:24:46चला जाए। पर विक्रमजीत चौहान तो उल्टा
  11179. 8:24:48सूर्यभान के बेटे से [संगीत] कनिका का
  11180. 8:24:50रिश्ता पक्का करके चले आए हैं। इस डिसीजन
  11181. 8:24:53से कनिका भी नाराज नजर आ रही थी। जैसे ही
  11182. 8:24:56विक्रमजीत जी ने डाइनिंग हॉल में प्रवेश
  11183. 8:24:58किया राणा प्रताप जी तेजी से उनके पास आते
  11184. 8:25:01हुए बोला यह क्या है पिताजी? [संगीत] आप
  11185. 8:25:03तो सूर्यभान को धमकाने गए थे। पर आप तो
  11186. 8:25:05उल्टा उसके बेटे से अपने घर की बेटी का
  11187. 8:25:07रिश्ता पक्का करके आ गए। ऐसा करने से पहले
  11188. 8:25:10कम से कम एक बार परिवार में बैठकर अच्छे
  11189. 8:25:12से इस बात पर विचार तो कर लेते। तुम इस
  11190. 8:25:15बात की चिंता मत करो। मैंने जो भी किया है
  11191. 8:25:17वह सोच समझ कर किया है। मुझे अच्छे से पता
  11192. 8:25:20है कि मैंने सूर्यभान के बेटे से अपनी
  11193. 8:25:22पोती का रिश्ता करके कितना अच्छा काम किया
  11194. 8:25:24है। इसलिए इस बात पर फालतू में तर्क करने
  11195. 8:25:27का कोई फायदा नहीं। विक्रमजीत अपना फैसला
  11196. 8:25:30सुनाते हुए बोले, "अब आगे क्या होगा? क्या
  11197. 8:25:33कनिका शौर्य से शादी करने को तैयार होगी?
  11198. 8:25:35क्या बाकी परिवार के सदस्य विक्रमजीत
  11199. 8:25:38चौहान की बातों से सहमत होंगे? क्या शौर्य
  11200. 8:25:40खुद इस शादी के लिए तैयार होगा? कनिका ने
  11201. 8:25:43अपने दादाजी की बात सुनकर नाराजगी से कहा
  11202. 8:25:46दादा जी कम से कम आप एक बार मुझसे पूछ तो
  11203. 8:25:50लेते कि मैं इस रिश्ते के लिए तैयार हूं
  11204. 8:25:52भी या नहीं। यह तो गलत है ना कि आपने
  11205. 8:25:55मुझसे पूछे बिना मेरा रिश्ता किसी अनजान
  11206. 8:25:58लड़के के साथ कर दिया है। तो क्या मुझे इस
  11207. 8:26:01घर में क्या करना है या क्या [संगीत]
  11208. 8:26:03नहीं? इसका डिसीजन तुझसे पूछकर करना
  11209. 8:26:06पड़ेगा। आज तक इस घर के सारे फैसले मैं ही
  11210. 8:26:09करता रहा। और आज तुम मुझे यह बताना चाहती
  11211. 8:26:12हो कि अब कोई फैसला लेने से पहले मुझे तुम
  11212. 8:26:16सबसे पूछना पड़ेगा। मैंने यह नहीं कहा
  11213. 8:26:19दादा जी यह मेरी जिंदगी का सवाल है। मुझे
  11214. 8:26:22[संगीत] अपनी जिंदगी किसके साथ बितानी है,
  11215. 8:26:24इसका फैसला तो मुझे करने का अधिकार होना
  11216. 8:26:27चाहिए। पहली बार कनिका अपने दादाजी के साथ
  11217. 8:26:31इस तरह से बात कर रही थी। अगर आज भी यह
  11218. 8:26:34फैसला उसकी शादी को लेकर नहीं होता तो
  11219. 8:26:36[संगीत] शायद ही वह अपने दादाजी से इस तरह
  11220. 8:26:39जिराह करती। अभी तुम इतनी बड़ी नहीं हो गई
  11221. 8:26:42कि तुम अपने बारे में खुद कोई फैसला ले
  11222. 8:26:44सको। मैं आजकल के बच्चों की [संगीत]
  11223. 8:26:46मेंटालिटी को अच्छे से समझता हूं। तुम
  11224. 8:26:48जैसे बच्चे इस तरह के फैसले दिमाग से ना
  11225. 8:26:52करके दिल से करते हैं। जिसका दुष्परिणाम
  11226. 8:26:55उन्हें आगे जाकर भुगतना पड़ता है।
  11227. 8:26:58विक्रमजीत जी कनिका से ऊंची आवाज में बोले
  11228. 8:27:01[संगीत]
  11229. 8:27:02पर पिताजी आपके इस फैसले से हम भी सहमत
  11230. 8:27:06नहीं हैं। यह ठीक नहीं है। आपने एक दुश्मन
  11231. 8:27:10के बेटे से ही अपने घर की बेटी का रिश्ता
  11232. 8:27:12तय कर दिया है। वह भी एक भगोरे के बेटे के
  11233. 8:27:16साथ। अगर आप जयभान के बेटे के साथ ही
  11234. 8:27:18रिश्ता तय करते तो एक बार कुछ समझ में भी
  11235. 8:27:21आता। जयभान का बेटा प्रतीक ने अपने बिजनेस
  11236. 8:27:25को अच्छा खासा ग्रो किया हुआ है और शहर
  11237. 8:27:28में उसका ठीक-ठाक नाम भी है। पर सूर्यभान
  11238. 8:27:32के बेटे के साथ कनिका का रिश्ता करना ठीक
  11239. 8:27:34नहीं है। पता नहीं अभी तक वह क्या करता
  11240. 8:27:37रहा है। जब उसके साथ अभी तक उसके पिता का
  11241. 8:27:40ही नाम जुड़ा हुआ नहीं था तो क्या ही कर
  11242. 8:27:43लिया होगा उसने। और उसका बेटा अभावों के
  11243. 8:27:46बीच रहकर कितना भी कुछ बड़ा अचीव किया
  11244. 8:27:49होगा तो मुश्किल से सर्वाइव कर पा रहा
  11245. 8:27:51होगा। आपको अपने इस फैसले के बारे में एक
  11246. 8:27:55बार और अच्छे से सोचना चाहिए।
  11247. 8:27:58राणा प्रताप जी ने भी विक्रमजीत जी के
  11248. 8:28:00फैसले से अपनी नाखशी जाहिर की। मुझे ऐसा
  11249. 8:28:04क्यों लग रहा है कि तुम सब इस रिश्ते के
  11250. 8:28:06खिलाफ हो? क्या इसलिए तुम सब एक साथ यहां
  11251. 8:28:09पर इकट्ठे हो? कहते हुए विक्रमजीत जी ने
  11252. 8:28:13एक बार सबके ऊपर सरसरी निगाह दौड़ाते हुए
  11253. 8:28:16देखा।
  11254. 8:28:18आप सही समझ रहे हैं दादा जी यहां पर कोई
  11255. 8:28:21भी आपके इस फैसले से सहमत नहीं है। विराज
  11256. 8:28:24भी सबके बीच में आते हुए तैश में बोला।
  11257. 8:28:27[संगीत] यह तुम सब कैसी बात कर रहे हो?
  11258. 8:28:30तुम्हें क्या लगता है कि पिताजी ने जो भी
  11259. 8:28:32फैसला किया है वो गलत किया है? मैं भी
  11260. 8:28:35वहां था। मुझे लगता है पिताजी ने एकदम सही
  11261. 8:28:38फैसला किया है। वीरभद्र की भी सबको झिरकते
  11262. 8:28:42हुए बोले आप समझ क्यों नहीं [संगीत] रहे
  11263. 8:28:45पापा मैं ऐसे ही किसी अनजान लड़के से शादी
  11264. 8:28:48नहीं कर सकती जिसे मैं जानती तक नहीं मैं
  11265. 8:28:51कैसे उसे अपना जीवन साथी बना सकती हूं
  11266. 8:28:54कनिका एक बार फिर से अपने पापा से अपना
  11267. 8:28:57विरोध जताते हुए बोली यह तुम कैसी बात कर
  11268. 8:29:00रही हो हम सब तुम्हारे [संगीत] दुश्मन
  11269. 8:29:03नहीं है और ऐसा भी नहीं है कि तुम उस
  11270. 8:29:05लड़के को नहीं जानती हो तुम उस लड़के से
  11271. 8:29:08पहले भी मिल चुकी हो [संगीत]
  11272. 8:29:10वीरभद्र जी कनिका से थोड़े गुस्से में
  11273. 8:29:13बोले, मैं उस लड़के को पहले से जानती हूं।
  11274. 8:29:16पर कैसे? मैं उससे कब मिली? [संगीत]
  11275. 8:29:19कनिका अपने दिमाग पर जोर डालकर याद करने
  11276. 8:29:22की कोशिश करने लगी कि वह सूर्यभान जी के
  11277. 8:29:25लड़के से कब मिली? कनिका को ऐसा सोचते
  11278. 8:29:28देखकर वीरभद्र जी ने कनिका से कहा, शौर्य
  11279. 8:29:32वही लड़का है जिसने तुम्हें ददन [संगीत]
  11280. 8:29:34पहलवान से बचाया था। अपने पापा की बात
  11281. 8:29:37सुनकर कनिका के सामने शौर्य का चेहरा घूम
  11282. 8:29:40गया। उसे याद आया कि कैसे शौर्य ने उसे
  11283. 8:29:43ददन पहलवान से बचाया था। पर उसे यह भी
  11284. 8:29:47ध्यान था कि शौर्य वहां उसे बचाने नहीं
  11285. 8:29:49आया था बल्कि वह वहां पर मानसी मेहता के
  11286. 8:29:52लिए आया था। इसलिए वह अपने पापा को करेक्ट
  11287. 8:29:56करते हुए बोली आप गलत बोल रहे हैं पापा।
  11288. 8:29:59वह लड़का वहां मुझे बचाने नहीं बल्कि वह
  11289. 8:30:02वहां पर मानसी मेहता के लिए आया था। और
  11290. 8:30:06दूसरी बात यह है कि मैंने उसे वहां देखा
  11291. 8:30:08भर था। इससे यह कैसे पता चल जाता कि वह
  11292. 8:30:11मेरे लिए सही लड़का है। [संगीत]
  11293. 8:30:14मुझे उसके बारे में पता ही क्या है? और
  11294. 8:30:16बिना उसके बारे में जाने मैं यह फैसला
  11295. 8:30:18कैसे कर सकती हूं कि [संगीत] वह मेरे लिए
  11296. 8:30:21ठीक है भी या नहीं। अगर तुम्हें उसके बारे
  11297. 8:30:24में जानना ही है तो ठीक है। मैं [संगीत]
  11298. 8:30:26उसे कल बुला लूंगा। यहां तुम उससे मिल
  11299. 8:30:28लेना। तुम्हें उससे जो भी उसके बारे में
  11300. 8:30:31जानना हो सब जान लेना। वीरभद्र जी नाराजगी
  11301. 8:30:35भरे स्वर में बोले। पर अंकल उसके बारे में
  11302. 8:30:38जाने बिना उससे कनिका का रिश्ता कर देना
  11303. 8:30:41यह थोड़ी जल्दबाजी नहीं हो गई। ऐसी भी
  11304. 8:30:44क्या जल्दी थी। विराज एक बार फिर [संगीत]
  11305. 8:30:46से बीच में आते हुए बोला, "तुम लोगों के
  11306. 8:30:49लिए इतना ही काफी नहीं है कि मैंने उस
  11307. 8:30:51लड़के को अपने घर के दामाद के लिए पसंद
  11308. 8:30:53किया है। तो फिर मेरी पसंद पर तुम लोगों
  11309. 8:30:56का सवाल खड़ा करना कितना जायज है। इतनी
  11310. 8:30:59पहचान तो मुझे लोगों की हो गई है कि मैं
  11311. 8:31:01एक बार किसी को देखकर यह अंदाजा लगा सकता
  11312. 8:31:04हूं वो भविष्य में कितना ऊपर जाने वाला
  11313. 8:31:07है। विक्रमजीत जी विराज को घूरते हुए बोले
  11314. 8:31:11अगर आपको वह लड़का इतना ही पसंद है दादा
  11315. 8:31:14जी तो फिर यह क्या जरूरी है कि उसकी शादी
  11316. 8:31:17मुझसे ही हो। आप उसकी शादी नंदिनी के साथ
  11317. 8:31:21भी तो करवा सकते हैं। कनिका को लग रहा था
  11318. 8:31:24यही मौका है। अगर वह दादाजी से अपनी बात
  11319. 8:31:27मनवा सकी तो ठीक है। नहीं तो आगे जाकर
  11320. 8:31:30शायद ही उसे मौका मिले। पर वहां पर खड़ी
  11321. 8:31:33नंदिनी ने जैसे ही सुना कि कनिका अपनी आफत
  11322. 8:31:36[संगीत] उसके सर डालना चाहती है। वो जल्दी
  11323. 8:31:38से बोली परी यह तुम मुझे क्यों बीच में ला
  11324. 8:31:42रही हो? मुझे फालतू में अपने बीच में मत
  11325. 8:31:44घसीटो। मैं तुम्हें कहां बीच में घसीट रही
  11326. 8:31:47हूं? बीच में तो मैं आ रही हूं। आखिर
  11327. 8:31:50राठौर फैमिली से हमारी दुश्मनी तो भानुमती
  11328. 8:31:53बुआ के कारण ही है। उनसे ही सूर्य भांजी
  11329. 8:31:56की शादी नहीं होने के कारण यह दुश्मनी
  11330. 8:31:58शुरू हुई थी। और अब अगर फिर से उस घर में
  11331. 8:32:01रिश्ता होना है तो फिर वह तुम्हारे साथ ही
  11332. 8:32:04होना चाहिए। नंदिनी की बात सुनकर कनिका ने
  11333. 8:32:07अपना लॉजिक लगा दिया। दोनों लड़कियों की
  11334. 8:32:10बात सुनकर विक्रमजीत जी का गुस्सा बढ़ता
  11335. 8:32:13जा रहा था। उन्हें उम्मीद नहीं था कि उनके
  11336. 8:32:16बच्चे उनकी पसंद उंगली उठाने शुरू कर
  11337. 8:32:18देंगे। उन्हें चंद्रभान जी की बात याद आई।
  11338. 8:32:22जब उन्होंने कहा था कि कुछ भी फाइनल
  11339. 8:32:24[संगीत] करने से पहले उन्हें एक बार अपने
  11340. 8:32:26बच्चों से भी बात कर लेनी चाहिए। अब
  11341. 8:32:29उन्हें महसूस हो रहा था कि वर्षों पहले जब
  11342. 8:32:32सूर्यभान ने उनका कहा नहीं माना होगा तो
  11343. 8:32:35उनके मन पर भी क्या बीत रहा होगा। अचानक
  11344. 8:32:38उन्हें लगने लगा कि अपने परिवार पर से
  11345. 8:32:40[संगीत] उनकी पकड़ कमजोर होती जा रही है।
  11346. 8:32:43उन्होंने राठौर फैमिली की पार्टी में
  11347. 8:32:45[संगीत] कितने गर्व से कहा था कि उनके
  11348. 8:32:47बच्चे उनके कहे को नहीं तालने वाले हैं।
  11349. 8:32:50पर [संगीत] जब से वह घर आए हैं तब से उनके
  11350. 8:32:52सारे बच्चों ने उनकी पसंद पर सवाल करना
  11351. 8:32:55शुरू खड़ा करना शुरू कर दिया था।
  11352. 8:32:57वीरभद्र जी ने जब अपने पापा के चेहरे के
  11353. 8:32:59बदलते रंग को देखा तो वह वहां मौजूद सभी
  11354. 8:33:02की ओर देखते हुए बोले आज तक हम में से
  11355. 8:33:05किसी ने पिताजी के फैसले पर उंगली नहीं
  11356. 8:33:07उठाई और आज तुम सब इतने बड़े हो गए हो कि
  11357. 8:33:11इनके सामने जवान चलाने लगे हो एक बात तुम
  11358. 8:33:14लोग अच्छे से जान लो कि यह तो पक्का है कि
  11359. 8:33:17शौर्य इस घर का दामाद बनने वाला है। हां,
  11360. 8:33:21अभी यह पक्का नहीं है कि उसकी शादी तुम
  11361. 8:33:23दोनों में से किसके साथ होनी है। अगर तुम
  11362. 8:33:26में से कोई खुद ही तैयार हो जाता है तो
  11363. 8:33:29ठीक है। नहीं तो तुम दोनों की जन्मपत्री
  11364. 8:33:31का मिलान शौर्य की जन्मपत्री से किया
  11365. 8:33:34जाएगा। जिसके गुण बेहतर तरीके से उससे
  11366. 8:33:37मिलेंगे उसके साथ फिर शौर्य की शादी की
  11367. 8:33:40जाएगी। वीरभद्र जी की बात सुनकर कनिका
  11368. 8:33:43[संगीत] और नंदिनी दोनों एक दूसरे का
  11369. 8:33:45चेहरा देखने लगे। उन्हें समझ में नहीं आया
  11370. 8:33:48कि अब वह इस बात पर क्या कहे। पर कनिका अब
  11371. 8:33:51पहले की तुलना में थोड़ी रिलैक्स नजर आ
  11372. 8:33:54रही थी। क्योंकि उसे अब लगने लगा कि उसके
  11373. 8:33:56पास एक मौका है कि उसे शौर्य से शादी ना
  11374. 8:33:59करनी पड़े। जबकि इसी समय वीरभद्र जी को
  11375. 8:34:03कुछ याद आया तो उन्होंने कनिका से कहा अरे
  11376. 8:34:06हां तुम्हारी वो दोस्त थी। क्या नाम था?
  11377. 8:34:10हां शिप्रा। वो चंद्रभान जी की कंपनी
  11378. 8:34:13फैब्रिक ट्रेंड की सीईओ है। वो भी शौर्य
  11379. 8:34:16को अच्छे से जानती है। तुम्हें याद होगा
  11380. 8:34:19जब हम पिछली बार होटल पैराडाइज में शौर्य
  11381. 8:34:21से मिले थे तब वह दोनों साथ थे।
  11382. 8:34:24तुम उससे भी शौर्य के बारे में पता कर
  11383. 8:34:26सकती हो। कनिका को वो किस्सा भी याद आया
  11384. 8:34:30जब वो होटल पैराडाइज में एक प्रोग्राम
  11385. 8:34:32[संगीत] देखने के दौरान शौर्य से मिली थी।
  11386. 8:34:35उस समय शौर्य ने उसके पापा को गिरने से
  11387. 8:34:38बचाया था। [संगीत] जहां पर उसे शिप्रा भी
  11388. 8:34:40मिली थी। यह बात शिप्रा के ध्यान में आते
  11389. 8:34:43ही उसके दिमाग में शक का कीड़ा कुलबुलाने
  11390. 8:34:46लगा। उसे लगा कि यह सब जो हो रहा है, कहीं
  11391. 8:34:50इसके पीछे शौर्य का ही तो कोई हाथ नहीं
  11392. 8:34:53है। वो दो बार उससे मिला और दोनों [संगीत]
  11393. 8:34:56बार उसने किसी ना किसी तरह उसकी सहायता ही
  11394. 8:34:59की। एक बार उसके पापा को गिरने से बचाया
  11395. 8:35:02था तो दूसरी बार जब वो दद्दन [संगीत]
  11396. 8:35:05पहलवान के यहां फंसी हुई थी तो उसे मौके
  11397. 8:35:08पर पहुंचकर उसने एक तरह से उसके ऊपर एहसान
  11398. 8:35:12किया था। और आज जब उसके [संगीत] दादाजी और
  11399. 8:35:15पापा राठौर फैमिली के यहां अपनी शिकायत
  11400. 8:35:18लेकर गए थे, तो वहां से वह शौर्य से उसका
  11401. 8:35:21रिश्ता तय करके आ गए। क्या यह सब [संगीत]
  11402. 8:35:24संयोग हो सकता है? पर उसे इस बात पर
  11403. 8:35:27विश्वास नहीं हो रहा था। पिताजी आप समझ
  11404. 8:35:30नहीं रहे हैं। मुझे तो अब शौर्य पर भी शक
  11405. 8:35:33हो रहा है कि यह सब कहीं उसका सोचा समझा
  11406. 8:35:36प्लान तो नहीं है। ऐसा क्यों कर हुआ कि वो
  11407. 8:35:39हमसे दो बार टकराया और दोनों बार किसी ना
  11408. 8:35:43किसी तरह वो हमारी सहायता करता पाया गया।
  11409. 8:35:46और तीसरी बार जब आप मिले तो यह पता चलने
  11410. 8:35:49पर कि वो सूर्यभान [संगीत]
  11411. 8:35:50जी का बेटा है। आप उससे हमारा रिश्ता करके
  11412. 8:35:53आ गए। क्या यह महज संयोग हो सकता है?
  11413. 8:35:57कनिका ने अपनी शंका अपने दादाजी और पिताजी
  11414. 8:36:00के सामने जाहिर कर दी। क्या सच में ऐसा
  11415. 8:36:03हुआ था? अगर ऐसा है तो फिर तो मुझे भी इस
  11416. 8:36:06लड़के पर शक हो रहा है। राणा प्रताप जी
  11417. 8:36:09कनिका की बात सुनकर बोले बस बहुत हो गया।
  11418. 8:36:12अब मैं इस बारे में और कुछ सुनना नहीं
  11419. 8:36:14चाहता। हमने तुम्हें अपना फैसला बता दिया
  11420. 8:36:17है। वीरभद्र ने तुम्हारे सामने एक ऑप्शन
  11421. 8:36:20भी दे दिया है। अगर तुम दोनों में से कोई
  11422. 8:36:22पहले ही यह तय कर लेता है कि किसको शौर्य
  11423. 8:36:25से शादी करनी है तो ठीक है। नहीं तो फिर
  11424. 8:36:28जन्मत्री के हिसाब से ही मैं यह तय करूंगा
  11425. 8:36:30कि किसको शौर्य से शादी करनी पड़ेगी।
  11426. 8:36:33विक्रमजीत जी कनिका को शौर्य पर शक करते
  11427. 8:36:36देखकर ऊंची आवाज में बोले। पर पापा जैसा
  11428. 8:36:40कनिका ने कहा अगर उस बारे में सोचा जाए तो
  11429. 8:36:43शौर्य के ऊपर शक करना तो बनता है। राणा
  11430. 8:36:46प्रताप जी फिर से विक्रमजीत जी से बोले इस
  11431. 8:36:49लड़की के साथ तुम्हारा भी दिमाग खराब हो
  11432. 8:36:51गया है जो तुम भी इसकी तरह कुछ भी उलजुलूल
  11433. 8:36:53बोले जा रहे हो। विक्रमजीत जी राणा प्रताप
  11434. 8:36:57जी को डांटते हुए बोले। दूसरी तरफ राठौर
  11435. 8:37:00फॅमिली में चौहान फैमिली के चले जाने के
  11436. 8:37:02बाद शौर्य भी मौका पाकर वहां से निकल गया
  11437. 8:37:04था। अब वहां राठौर फैमिली के ही खास
  11438. 8:37:07[संगीत] सदस्य रह गए थे। सबके जाने के बाद
  11439. 8:37:09चंद्रभान जी ने सूर्यभान जी को डांटते हुए
  11440. 8:37:12कहा भी कि तुम्हें विक्रमजीत की बात मानने
  11441. 8:37:14की इतनी जल्दी क्या थी? इसमें जल्दी की
  11442. 8:37:17कोई बात नहीं थी पिताजी। मुझे उनके
  11443. 8:37:19प्रपोजल में कुछ भी गलत नहीं लगा। इसलिए
  11444. 8:37:22मैं तुरंत ही उनके दिए हुए रिश्ते के लिए
  11445. 8:37:24तैयार हो गया। सूर्यभान जी ने अपना रीजन
  11446. 8:37:27दिया। सूर्यभान जी की बात सुनकर चंद्रभान
  11447. 8:37:30जी ने सोचा कि वह कैसे सूर्यभान को शौर्य
  11448. 8:37:33की हकीकत बताएं कि उसका बेटा पहले से ही
  11449. 8:37:36शादीशुदा है तो अब वह कैसे किसी और से
  11450. 8:37:38शादी कर सकता है। पर प्रत्यक्ष में
  11451. 8:37:41उन्होंने ऐसा कुछ कहा नहीं। उन्हें पता था
  11452. 8:37:44कि अगर सूर्यभान को पता चल गया कि शौर्य
  11453. 8:37:46की शादी हो गई है और वह उस लड़की को बहुत
  11454. 8:37:49पसंद भी करता है तो सूर्यभान कहीं ग्लानी
  11455. 8:37:52में ही डूब जाएगा और वह अपने बेटे को इस
  11456. 8:37:54अपराध बोध में डूबा हुआ नहीं देखना चाहते
  11457. 8:37:57थे। अब आगे क्या होगा? आखिर किसके साथ
  11458. 8:38:00शौर्य की शादी होंगी? कनिका के साथ या
  11459. 8:38:03नंदिनी के साथ? शौर्य को आगे किस परीक्षा
  11460. 8:38:07से गुजरना पड़ेगा? दिन सुबह शौर्य की आंख
  11461. 8:38:10खुली तो उसने देखा शिप्रा उसके पास ही
  11462. 8:38:13बेसुद होकर सोई हुई थी। उसका चेहरा उसके
  11463. 8:38:16सामने ही था। उसके चेहरे की मासूमियत में
  11464. 8:38:19शौर्य एक पल को तो सब कुछ भूल ही गया था।
  11465. 8:38:23अगर शिप्रा नींद में नहीं होती तो शौर्य
  11466. 8:38:26उसे यूं एक टक नहीं देख सकता था। पर
  11467. 8:38:29शिप्रा की आंख बंद होने के कारण उसे कोई
  11468. 8:38:31चिंता नहीं थी। जब तक वह चाहता उसके चेहरे
  11469. 8:38:34की खूबसूरती का रसपान कर सकता था। उसने
  11470. 8:38:37देखा कि पंखे की हवा में एक लठ बार-बार
  11471. 8:38:41लहराते हुए उसके चेहरे पर इधर-उधर
  11472. 8:38:44अटखेलियां कर रहा था। उसे बर्दाश्त नहीं
  11473. 8:38:46हुआ तो उसने उस लठ को पकड़ कर उसके कान के
  11474. 8:38:50पीछे फंसा दिया। शिप्रा का अलहर मदमाता
  11475. 8:38:53यौवन शौर्य को अपनी तरफ आमंत्रण देता
  11476. 8:38:56प्रतीत हो रहा था। यूं शिप्रा को घूरते
  11477. 8:38:59हुए उसका कंठ सूखने लगा। उसका मन किया कि
  11478. 8:39:02वह आगे बढ़े और उसके होठों को चूम ले। इस
  11479. 8:39:05ख्याल ने एक पल के लिए उसे आंदोलित कर
  11480. 8:39:08दिया और स्वतः ही उसका चेहरा शिप्रा के
  11481. 8:39:10चेहरे की तरफ पड़ गया। जब उसके होठ शिप्रा
  11482. 8:39:13के होठ के एकदम करीब पहुंच गया तो अचानक
  11483. 8:39:16उसके मन में यह डर भर गया कि उसके शिप्रा
  11484. 8:39:19को चूमते ही उसकी आंख खुल गई तो पता नहीं
  11485. 8:39:22फिर वो कैसे रिएक्ट करेगी। इस ख्याल के मन
  11486. 8:39:25में आते ही शौर्य ने अपना इरादा टाल दिया
  11487. 8:39:28और वो पीछे होने लगा। पर उसी समय शिप्रा
  11488. 8:39:31का हाथ आगे बढ़ा और उसका कॉलर पकड़ कर
  11489. 8:39:34उसको अपनी ओर खींच लिया और शौर्य का होठ
  11490. 8:39:37जाकर सीधा शिप्रा के होठ से मिल गया।
  11491. 8:39:40शौर्य समझ ही नहीं पाया कि यह अचानक क्या
  11492. 8:39:42हो गया। उसके पूरे शरीर में एक सनसनी सी
  11493. 8:39:45दौड़ गई। उसने महसूस किया कि शिप्रा की
  11494. 8:39:48बाहें उसकी पीठ पर कस गई थी। लगभग 30
  11495. 8:39:51सेकंड तक उसी स्थिति में रहने के बाद
  11496. 8:39:53शिप्रा ने उसे छोड़ दिया। शौर्य शिप्रा से
  11497. 8:39:56अलग तो हो गया था पर उसकी सांसे तेज हो गई
  11498. 8:39:59थी। शिप्रा से अलग होने के बाद शौर्य ने
  11499. 8:40:02शिप्रा की ओर देखा तो शिप्रा के चेहरे पर
  11500. 8:40:05शरारती मुस्कान खेल रही थी। शौर्य थोड़ा
  11501. 8:40:08शर्मिंदा महसूस करने लगा। उसे लगा उसकी
  11502. 8:40:11चोरी पकड़ी गई थी। वो हिचकिचाते हुए बोला
  11503. 8:40:14तुम जाग रही
  11504. 8:40:15[संगीत]
  11505. 8:40:15थी यानी तुम जानबूझकर सोने का दिखावा कर
  11506. 8:40:18रही थी। पर शिप्रा ने उसकी बात का कोई
  11507. 8:40:21जवाब नहीं दिया। उल्टा उससे ही सवाल कर
  11508. 8:40:24दिया। जब तुम्हें मुझको किस करने का मन कर
  11509. 8:40:26रहा था तो फिर इतने पास आकर वापस क्यों
  11510. 8:40:29जाने लगे? शौर्य इसी कारण तो शर्मिंदा
  11511. 8:40:32महसूस कर रहा था कि उसकी चोरी पकड़ी गई।
  11512. 8:40:34तो अब वो शिप्रा के इस सवाल का क्या जवाब
  11513. 8:40:37देता? वो उससे नजर चुराता हुआ बोला। मैंने
  11514. 8:40:41कब कहा कि मैं तुम्हें किस करना चाहता था?
  11515. 8:40:43ऐसा कुछ नहीं था। अच्छा अगर ऐसा नहीं था
  11516. 8:40:47तो तुम मुझसे [संगीत] नजर चुराकर जवाब
  11517. 8:40:49क्यों दे रहे हो? यही बात तुम मुझसे नजर
  11518. 8:40:51मिलाकर भी तो कह सकते हो। शिप्रा शौर्य की
  11519. 8:40:54आंखों में देखती हुई बोली पता नहीं तुम
  11520. 8:40:57कुछ भी बोले जा रही हो। मैं फ्रेश होने जा
  11521. 8:41:00रहा हूं। इतना कहकर शौर्य बेड से उठने
  11522. 8:41:02लगा। पर शिप्रा ने अगले ही पल उसका कॉलर
  11523. 8:41:05पकड़ कर फिर से उसको अपने पास खींच लिया।
  11524. 8:41:09यह तुम क्या कर रही हो? [संगीत]
  11525. 8:41:107:00 बज गए हैं। तुम भी उठकर जल्दी से
  11526. 8:41:12तैयार हो जाओ। शौर्य हड़बड़ाता हुआ बोला।
  11527. 8:41:16तो फिर जल्दी से मुझे मेरे सवाल का जवाब
  11528. 8:41:18दे दो। फिर मैं तुम्हें छोड़ दूंगी।
  11529. 8:41:21शिप्रा शौर्य के चेहरे के पास जाकर अपना
  11530. 8:41:23नाक उसके नाक से लराती हुई बोली। शिप्रा
  11531. 8:41:27के सांसों की महक शौर्य को फिर से मददोस
  11532. 8:41:29करने लगा। उसे लगा अगर और थोड़ी देर वो
  11533. 8:41:33इसी अवस्था में रहा तो अपने ऊपर से पूरा
  11534. 8:41:35कंट्रोल खो देगा। उसने सूखते कंठ से जल्दी
  11535. 8:41:39से जवाब दिया। मुझे लगा तुम्हारी नींद ना
  11536. 8:41:42टूट जाए। इसीलिए पीछे हो रहा था। शिप्रा
  11537. 8:41:45को शौर्य के जवाब पर तरस आया। उसे लगा
  11538. 8:41:48क्या बेवकूफी है। मेरी नींद में खलल ना
  11539. 8:41:51पड़े इसलिए अपनी इच्छा को मार दिया। मैं
  11540. 8:41:54तो ऐसा नहीं करती। वो महसूस कर रही थी कि
  11541. 8:41:57अभी भी शौर्य का गला सूख रहा है। उसने
  11542. 8:42:00धीरे से कहा क्या कहते हो? अभी भी तुम्हें
  11543. 8:42:04उठना है। दरअसल शिप्रा का मन भी अभी शौर्य
  11544. 8:42:07से अलग होने का नहीं कर रहा था। पर तभी
  11545. 8:42:10शिप्रा का फोन रिंग करने लगा। उसने अनमने
  11546. 8:42:13ढंग से अपने फोन की तरफ देखा तो उस पर
  11547. 8:42:15कनिका चौहान का नाम फ्लैश हो रहा था।
  11548. 8:42:18कनिका का नाम फोन पर देखते ही शिप्रा का
  11549. 8:42:21शरीर तन गया। अभी जो उसके दिल में रोमांस
  11550. 8:42:24की धुन हिलोरे मार रही थी वो तुरंत गायब
  11551. 8:42:26हो गई। साथ में उसके चेहरे का रंग भी उड़
  11552. 8:42:29गया। शौर्य ने शिप्रा के चेहरे के बदलते
  11553. 8:42:32रंग को देखा तो वो हैरान स्वर में बोला।
  11554. 8:42:35क्या हुआ? किसका फोन है? जिसे देखते ही
  11555. 8:42:38तुम्हारे चेहरे का रंग उड़ गया। शिप्रा ने
  11556. 8:42:41कुछ कहा नहीं। बस फोन का स्क्रीन शौर्य की
  11557. 8:42:44तरफ घुमा दिया। शौर्य ने जब स्क्रीन पर
  11558. 8:42:47कनिका का नाम फ्लैश होते देखा तो उसे
  11559. 8:42:50आश्चर्य हुआ कि कनिका शिप्रा को फोन कर
  11560. 8:42:52रही है। अभी शौर्य कुछ कहता उससे पहले ही
  11561. 8:42:55रिंग पूरा होने के बाद फोन कट गया। शिप्रा
  11562. 8:42:59फैसला नहीं कर पा रही थी कि वह फोन उठाए
  11563. 8:43:01या नहीं। उसे लगा पहले उसे मेंटली तैयार
  11564. 8:43:04हो जाना चाहिए कि वह कनिका से कैसे बात
  11565. 8:43:07करेंगी। इसी के चलते उसने फोन उठाया नहीं
  11566. 8:43:09था। अभी तो उसको यह भी पता नहीं था कि
  11567. 8:43:12कनिका उसको फोन क्यों कर रही थी। पर कल
  11568. 8:43:15पार्टी के दौरान जो इंसिडेंट हुआ था, उससे
  11569. 8:43:17वह यह तो समझ गई थी कि शौर्य से जिस लड़की
  11570. 8:43:20के रिश्ते की बात हो रही थी, वह शायद
  11571. 8:43:23कनिका ही थी। उसके मन में यह सवाल भी आया
  11572. 8:43:26कि कहीं कनिका को पता तो नहीं चल गया है
  11573. 8:43:28कि शौर्य और वह दोनों पति-पत्नी हैं।
  11574. 8:43:31कनिका बिस्तर पर उठकर बैठ गई। वो फोन की
  11575. 8:43:34तरफ देखते हुए शौर्य से बोली, "यह
  11576. 8:43:36सुबह-सुबह किस लिए फोन कर रही है?" तुम
  11577. 8:43:39फोन उठाती तो पता चल जाता ना। वो शायद फिर
  11578. 8:43:42से दोबारा फोन करेगी ही। शौर्य ने इतना
  11579. 8:43:44कहा ही था कि फिर से शिप्रा का फोन रिंग
  11580. 8:43:47करने लगा। [संगीत]
  11581. 8:43:47उसने शौर्य की तरफ देखा तो शौर्य ने कहा
  11582. 8:43:50फोन तो उठाओ। तभी तो पता चलेगा कि वो किस
  11583. 8:43:53लिए तुमको फोन कर रही है। शिप्रा ने नहीं
  11584. 8:43:56चाहते हुए भी फोन उठा लिया। तो दूसरी तरफ
  11585. 8:43:58से कनिका की आवाज आई। हेलो शिप्रा पहचानी
  11586. 8:44:03मुझे तुम भी यह कैसी बात कर रही हो
  11587. 8:44:05तुम्हें नहीं पहचानूंगी तो और किसको
  11588. 8:44:07पहचानूंगी कहो कैसे याद किया शिप्रा खुद
  11589. 8:44:10को नॉर्मल दिखाने की कोशिश करती हुई बोली
  11590. 8:44:13सुनो ना मुझे तुमसे आज मिलना है तुम्हारे
  11591. 8:44:16पास टाइम हो तो क्या तुम मुझसे अभी मिल
  11592. 8:44:18सकती हो कनिका [संगीत] मुद्दे पर आती हुई
  11593. 8:44:21बोली कनिका की बात सुनकर शिप्रा ने कहा
  11594. 8:44:24मुझसे मिलना है वो भी अभी पर बात क्या है
  11595. 8:44:28कुछ काम वो मैं तुम्हें तुम्हें मिलने पर
  11596. 8:44:30ही बताऊंगी। प्लीज क्या तुम अभी आ सकती
  11597. 8:44:33हो? कनिका रिक्वेस्ट करती हुई बोली। पर
  11598. 8:44:36मैं तो अभी सोकर उठी हूं। मुझे तैयार होने
  11599. 8:44:38में थोड़ा समय लग जाएगा। शिप्रा टालने
  11600. 8:44:41[संगीत] की कोशिश करती हुई बोली। अगर ऐसा
  11601. 8:44:44है तो तुम मुझे अपना लोकेशन भेजो। मैं
  11602. 8:44:46तुम्हारे [संगीत] पास आ जाती हूं। मेरा
  11603. 8:44:48तुमसे मिलना जरूरी है। कनिका की आवाज की
  11604. 8:44:51बेचैनी शिप्रा साफ-साफ महसूस कर सकती थी।
  11605. 8:44:55पर बात क्या है? तुम यह मुझे फोन पर भी तो
  11606. 8:44:57बता सकती हो। शिप्रा भी जानने की कोशिश
  11607. 8:45:00करते हुए बोली कि शायद कनिका उसकी बात
  11608. 8:45:03सुनकर कुछ एहसास करा दे कि वो उससे किस
  11609. 8:45:05बारे में बात करना चाहती है। समझो यार कुछ
  11610. 8:45:09ऐसी बात है जो मैं [संगीत] फोन पर नहीं कर
  11611. 8:45:11सकती हूं। वो मैं तुमसे आमने-सामने बैठकर
  11612. 8:45:13ही कर सकती हूं। कनिका जिद भरे स्वर में
  11613. 8:45:16बोली। ठीक है। मैं 10-15 मिनट में तैयार
  11614. 8:45:19होकर ऑफिस के लिए निकलूूंगी। देख लो कहीं
  11615. 8:45:22रास्ते में मिल सकती हो तो मिल लेते हैं।
  11616. 8:45:24या तुम अगर मेरी ऑफिस आना चाहो तो वहीं आ
  11617. 8:45:26जाना। शिप्रा ने शौर्य की ओर देखते हुए
  11618. 8:45:29जवाब दिया। उसके चेहरे से ऐसा भाव झलक रहा
  11619. 8:45:32था जैसे वह उससे पूछ रही हो कि वह ठीक
  11620. 8:45:34[संगीत] तो कर रही है। शौर्य ने भी अपनी
  11621. 8:45:37पलक झपका कर उसकी बात में अपनी सहमति
  11622. 8:45:39जताई। नहीं तुम्हारे ऑफिस आना ठीक नहीं
  11623. 8:45:43रहेगा। ऐसा करते हैं कि रास्ते में किसी
  11624. 8:45:45होटल में मिलते हैं। हां, हम उसी होटल
  11625. 8:45:48पैराडाइज में मिलते हैं जहां तुम कुछ दिन
  11626. 8:45:50पहले मुझसे मिली थी। अभी 7:30 हो रहा है।
  11627. 8:45:53ऐसा करते हैं। 8:30 पर हम होटल पैराडाइज
  11628. 8:45:56के रेस्टोरेंट में मिलते हैं। कनिका ने
  11629. 8:45:59अपनी घड़ी की ओर देखकर कहा। ठीक है मैं
  11630. 8:46:028:30 तक होटल पैराडाइज पहुंच जाऊंगी।
  11631. 8:46:05शिप्रा ने जवाब दिया [संगीत] और जल्दी से
  11632. 8:46:07फोन रख दिया। फोन रखने के बाद वो शौर्य की
  11633. 8:46:10ओर पलट कर बोली। वो मुझसे क्यों मिलना
  11634. 8:46:13चाहती है? तुम्हें कोई आईडिया है? शौर्य
  11635. 8:46:16ने कुछ पल सोचा और फिर कहा कुछ दिन पहले
  11636. 8:46:19उसने तुम्हें मेरे साथ प्रोग्राम के दौरान
  11637. 8:46:21होटल पैराडाइज में देखा था। हो सकता है वो
  11638. 8:46:24मेरे बारे में तुमसे कुछ जानना चाहती
  11639. 8:46:26होगी। शौर्य को यही कारण उचित जान पड़ा।
  11640. 8:46:30इसी [संगीत] कारण वो सुबह-सुबह शिप्रा को
  11641. 8:46:32फोन कर सकती है। पर अगर वो मुझसे तुम्हारे
  11642. 8:46:34बारे में पूछेगी तो मैं [संगीत] क्या
  11643. 8:46:36बोलूंगी? शिप्रा घबराहट भरे स्वर में
  11644. 8:46:39बोली। तुम इतना घबरा क्यों रही हो? वो
  11645. 8:46:42तुम्हारी दोस्त रही है ना? तो जो वह तुमसे
  11646. 8:46:45पूछेगी सिंपली [संगीत] तुम्हें उसका बस
  11647. 8:46:47जवाब दे देना है। तुम्हें नर्वस होने की
  11648. 8:46:49कोई जरूरत नहीं है। शौर्य शिप्रा का
  11649. 8:46:52हिम्मत बढ़ाते हुए बोला तुमने तो बड़े
  11650. 8:46:55आराम से कह दिया कि जो वो मुझसे पूछेगी
  11651. 8:46:57मैं जवाब दे दूंगी। तो क्या मैं उसे यह भी
  11652. 8:47:00बोल दूंगी कि हम दोनों पति-पत्नी हैं?
  11653. 8:47:02शिप्रा थोड़ा तीखे स्वर में बोली। शिप्रा
  11654. 8:47:05की बात सुनकर शौर्य के चेहरे पर परेशानी
  11655. 8:47:07नजर आने लगी। तो शिप्रा ने फिर से कहा,
  11656. 8:47:10"अब ऐसा चेहरा क्यों बना रहे हो? अभी तो
  11657. 8:47:13तुमने कहा ना कि जो वो पूछेगी मैं उसका
  11658. 8:47:16जवाब दे दूंगी। तो फिर इस जवाब में क्या
  11659. 8:47:19कमी है? और सबसे बड़ी बात है कि यह सच भी
  11660. 8:47:22है। तो इसके लिए मुझे फिर कुछ झूठ भी नहीं
  11661. 8:47:26बोलना पड़ेगा। दरअसल कनिका यह समझ रही
  11662. 8:47:29होगी कि तुम्हारी मुझसे दोस्ती होगी। तो
  11663. 8:47:32इसलिए वो [संगीत] शायद तुमसे मेरे बारे
  11664. 8:47:34में जानना चाहेगी कि मैं कैसा हूं, किस
  11665. 8:47:37तरह का हूं, क्या करता हूं। बस इस बारे
  11666. 8:47:40में ही तुम्हें बताना है। अभी कुछ बातें
  11667. 8:47:43छुपाना ही ठीक है। शौर्य शिप्रा से याचना
  11668. 8:47:47करते हुए बोला, वो नहीं चाहता था कि अभी
  11669. 8:47:50शिप्रा कनिका के सामने ज्यादा कुछ उसके
  11670. 8:47:52बारे में कहे। एक बार जब हालात सामान्य हो
  11671. 8:47:55जाएगी तो वह खुद ही ऐसी स्थिति उत्पन्न कर
  11672. 8:47:58देगा कि शौर्य की हकीकत सबके सामने जाहिर
  11673. 8:48:01हो जाएगी। मैं कोशिश करूंगी कि मैं
  11674. 8:48:04[संगीत] अभी यह बात उसके सामने जाहिर ना
  11675. 8:48:06होने दूं कि हम पतिपत्नी हैं। पर देख लेना
  11676. 8:48:09मैं [संगीत] यह ज्यादा समय तक नहीं कर
  11677. 8:48:11सकूंगी। तुम्हें जल्दी ही इस स्थिति को
  11678. 8:48:13सामान्य करना पड़ेगा। शिप्रा शौर्य को
  11679. 8:48:16धमकाते हुए बोली। इसके बाद शिप्रा जल्दी
  11680. 8:48:20से तैयार होने चली गई। इधर शिप्रा वॉशरूम
  11681. 8:48:22में गई और दूसरी तरफ फिर से शौर्य का फोन
  11682. 8:48:25रिंग करने लगा। शौर्य ने जब अपना फोन देखा
  11683. 8:48:28तो उस पर उसे एक अननोन नंबर से कॉल आता
  11684. 8:48:31दिखाई दिया। नए नंबर को देखकर शौर्य ने
  11685. 8:48:34फोन की तरफ ध्यान नहीं दिया। उसका ध्यान
  11686. 8:48:36कनिका की तरफ था कि वो शिप्रा से किस लिए
  11687. 8:48:38मिलना चाहती है। उसने सोच लिया कि शिप्रा
  11688. 8:48:41से पहले वो होटल पैराडाइज जाएगा और पता
  11689. 8:48:44करने की कोशिश करेगा कि आखिर कनिका शिप्रा
  11690. 8:48:46से क्या बात करती है। यह सोचकर अब वह भी
  11691. 8:48:50जल्दी में नजर आने लगा। इस कमरे के वाशरूम
  11692. 8:48:52में शिप्रा गई थी। इसलिए शौर्य कमरे से
  11693. 8:48:55निकलकर अपने कमरे में पहुंचा और जल्दी से
  11694. 8:48:57फ्रेज होकर बिना शिप्रा को कुछ बताए घर से
  11695. 8:49:00निकल गया। कुछ देर बाद वो होटल पैराडाइज
  11696. 8:49:03के रास्ते में था। [संगीत]
  11697. 8:49:04एक बार फिर से शौर्य का फोन रिंक करने
  11698. 8:49:07लगा। उसने नंबर की तरफ ध्यान दिया तो इस
  11699. 8:49:10बार [संगीत] भी उसी नंबर से कॉल आ रहा था।
  11700. 8:49:12जिससे थोड़ी देर पहले आ रहा था। दोबारा इस
  11701. 8:49:15नंबर से कॉल आते देखकर शौर्य [संगीत] ने
  11702. 8:49:17कॉल उठाकर कान से लीड्स लगाया। दूसरी तरफ
  11703. 8:49:20की बात सुनकर शौर्य का माथा ठनका और उसने
  11704. 8:49:23सोचा बस यही कमी रह गई थी। वो समझ गया कि
  11705. 8:49:27उसकी परीक्षा [संगीत] की घड़ी आ गई है। वो
  11706. 8:49:29फोन पर जो दूसरी तरफ बंदा था उसको जवाब
  11707. 8:49:32देने के लिए खुद को तैयार करने लगा। अब
  11708. 8:49:35आगे क्या होगा? आखिर किसका फोन आया था
  11709. 8:49:38शौर्य के पास? कनिका शिप्रा से क्यों
  11710. 8:49:41मिलने वाली थी? क्या कनिका जान पाएगी कि
  11711. 8:49:44शिप्रा और शौर्य पति-पत्नी है?
  11712. 8:49:47शौर्य से फोन पर जो बात कर रहा था वो कर्ण
  11713. 8:49:50चौहान था। उसने अभी-अभी शौर्य को अपना
  11714. 8:49:53परिचय देने के बाद कहा था कि वो उससे
  11715. 8:49:56मिलना चाहता है। शौर्य ने कुछ सोच कर उससे
  11716. 8:50:00कहा ठीक है। बताओ कब और कहां मिलना है? आज
  11717. 8:50:05शाम को क्या कर रहे हो? ऐसा करो शाम को
  11718. 8:50:08आयरन फिस्ट फाइट क्लब आ जाओ। वहीं मिलना
  11719. 8:50:11हो जाएगा। आज [संगीत] विराज भाई का फाइट
  11720. 8:50:14भी है। वह भी देखने को मिल जाएगा। कर्ण
  11721. 8:50:17चौहान विराज की ओर देखते हुए बोला ठीक है
  11722. 8:50:21मैं पहुंच जाऊंगा। शौर्य ने कर्ण से सहमति
  11723. 8:50:25जता दिया। इस समय कर्ण, विराज, कनिका और
  11724. 8:50:29नंदिनी चारों एक साथ ही बैठे हुए थे। अभी
  11725. 8:50:32कुछ देर पहले ही कनिका ने शिप्रा से बात
  11726. 8:50:35की थी। उसके बाद चारों ने मिलकर शौर्य से
  11727. 8:50:38बात करने का प्लान किया था। इन सबका प्लान
  11728. 8:50:42था पहले शौर्य से मिलकर देखा जाए कि
  11729. 8:50:44[संगीत] वह इस लायक है कि उससे शादी की जा
  11730. 8:50:46सकती है। नहीं तो उसको समझाया जाए कि वह
  11731. 8:50:50इस रिश्ते से इंकार कर दे। क्योंकि
  11732. 8:50:52[संगीत] जब से कनिका और नंदिनी ने यह सुना
  11733. 8:50:54था कि उसके दादाजी ने उसका रिश्ता शौर्य
  11734. 8:50:58के साथ फिक्स कर दिया। उसके बाद से ही सब
  11735. 8:51:01परेशान थे। अब यह चारों इसी जुगत में थे
  11736. 8:51:04कि कैसे [संगीत] इस सब से पीछा छुड़ाया
  11737. 8:51:06जाए। कनिका को लग रहा था कि यह सब शौर्य
  11738. 8:51:10का पहले से सोचा समझा प्लान था। इसलिए वह
  11739. 8:51:13दो बार उसके सामने आया और दोनों बार ऐसा
  11740. 8:51:16लगा कि यह संयोग मात्र था कि वो उनकी मदद
  11741. 8:51:20को सामने आ गया। पर इससे उसके पिता
  11742. 8:51:23वीरभद्र चौहान की नजर में शौर्य की इमेज
  11743. 8:51:26अच्छी बन गई थी।
  11744. 8:51:27[संगीत]
  11745. 8:51:28जिसका परिणाम यह निकला कि जब वे लोग
  11746. 8:51:30चंद्रभान जी के यहां गए तो वहां यह जानकर
  11747. 8:51:33कि शौर्य सूर्यभान का बेटा है। वो उससे
  11748. 8:51:36अपनी बेटी की शादी कराने को तैयार हो गए।
  11749. 8:51:40ठीक है तुम निकलो और जाकर अपने दोस्त से
  11750. 8:51:42पता करो कि वो करता क्या है और किस तरह का
  11751. 8:51:46लड़का है। बाकी तो हम शाम को उससे मिलकर
  11752. 8:51:49देख ही लेंगे कि वो कितने पानी में है।
  11753. 8:51:52विराज चेहरे पर कुटिल मुस्कान लाते हुए
  11754. 8:51:54बोला ठीक है भैया मैं निकलती हूं और
  11755. 8:51:58शिप्रा से मिलकर पता करने की कोशिश करती
  11756. 8:52:01हूं कि उसका बैकग्राउंड क्या है। इतना
  11757. 8:52:04कहकर कनिका वहां से निकल गई। कनिका की यह
  11758. 8:52:07कोठी संगम विहार इलाके में स्थित था। संगम
  11759. 8:52:10विहार विशालगढ़ का एक पौस इलाका था। वैसे
  11760. 8:52:13तो विक्रमजीत चौहान की हवेली भानगढ़ में
  11761. 8:52:16स्थित था। पर देश के साथ राजघरानों का
  11762. 8:52:19विलय होने के बाद विशालगढ़ एक बड़े
  11763. 8:52:21व्यवसाय शहर के रूप में उभरा था। जिसके
  11764. 8:52:24कारण विक्रमजीत चौहान ने विशालगढ़ में भी
  11765. 8:52:27अपनी एक बड़ी सी कोठी ले ली थी। शौर्य
  11766. 8:52:30जल्दी ही होटल पैराडाइज पहुंच गया। वो
  11767. 8:52:33सीधा दिलीप कामत के पास पहुंचा। दिलीप
  11768. 8:52:35कामत ने जैसे ही शौर्य को देखा वह अपनी
  11769. 8:52:38जगह से खड़ा हो गया। अरे सर आप यहां वो भी
  11770. 8:52:43इतना सवेरे बस कुछ जरूरी काम आ गया था
  11771. 8:52:46इसीलिए इतना सवेरे आना पड़ा। शौर्य
  11772. 8:52:49जल्दबाजी में बोला उसे यह डर भी था कि
  11773. 8:52:52कहीं कनिका पहले ही होटल में आ ना रखी हो।
  11774. 8:52:55कहिए ना सर क्या काम है? आप बस हुकुम
  11775. 8:52:58कीजिए। चुटकियों में आपका काम हो जाएगा।
  11776. 8:53:01दिलीप कामत खुशामदी स्वर में बोला। मैं
  11777. 8:53:04तुम पर कितना विश्वास कर सकता हूं दिलीप
  11778. 8:53:06कामत शौर्य दिलीप कामत की आंखों में देखता
  11779. 8:53:10हुआ बोला सर जबकि मैं आपकी हकीकत जानता
  11780. 8:53:13हूं और आपके ही कारण हमारा घर परिवार चल
  11781. 8:53:16रहा है तो मैं आपसे बाहर कैसे जा सकता हूं
  11782. 8:53:19आप आंख बंद करके मुझ पर विश्वास कर सकते
  11783. 8:53:21हैं मैं कभी आपको धोखा नहीं दे सकता दिलीप
  11784. 8:53:25कामत स्पष्ट इरादों के साथ बोला तो ठीक है
  11785. 8:53:28सुनो अभी थोड़ी देर में दो लड़की इस होटल
  11786. 8:53:32में आने वाली है वो वो [संगीत] कुछ नाश्ता
  11787. 8:53:34वगैरह करेगी फिर चली जाएगी। मुझे उन दोनों
  11788. 8:53:37के बीच जो भी बातें होंगी वो [संगीत]
  11789. 8:53:39जाननी है। अब तुम बताओ कि यह हो पाएगा?
  11790. 8:53:43शौर्य उम्मीद भरे स्वर में बोला। यह तो
  11791. 8:53:46छोटा काम है सर। यह तो यूं चुटकियों में
  11792. 8:53:49हो जाएगा। आप आइए मेरे साथ। इतना कहकर
  11793. 8:53:52दिलीप कामत ने कमरे के दराज से कुछ सामान
  11794. 8:53:55निकाला और शौर्य के साथ अपने ऑफिस से निकल
  11795. 8:53:58गया। वो रेस्टोरेंट एरिया में पहुंचा और
  11796. 8:54:01एक टेबल देखकर [संगीत] उस टेबल के नीचे
  11797. 8:54:03कुछ चिपका दिया और उसके बाद एक वेटर के
  11798. 8:54:06पास जाकर उसको कुछ समझाया और उसके बाद
  11799. 8:54:09शौर्य के पास जाकर उसे अपने साथ आने को
  11800. 8:54:11कहा। वो शौर्य को लेकर मैनेजर के कमरे में
  11801. 8:54:14पहुंचा। एक स्टाफ से उसने मैनेजर का कमरा
  11802. 8:54:17खुलवाया क्योंकि रूपा अभी होटल नहीं आई थी
  11803. 8:54:20और दिलीप कामत शौर्य को कहीं और नहीं ले
  11804. 8:54:23जा सकता था। इसलिए उसने मैनेजर का कमरा
  11805. 8:54:26खुलवा दिया। कमरे में पहुंचकर दिलीप कामत
  11806. 8:54:29ने सामने वॉलपर के बड़े टीवी स्क्रीन को
  11807. 8:54:32चालू कर दिया। जिस पर होटल में लगे
  11808. 8:54:34विभिन्न कैमरों का फुटेज आ रहा था। उसने
  11809. 8:54:37होटल के मेन गेट का कैमरे के फुटेज को
  11810. 8:54:39बड़ा किया और शौर्य की ओर देखते हुए बोला
  11811. 8:54:42सर जिस लड़की की आवाज आपको सुननी है वो इस
  11812. 8:54:45[संगीत] गेट से ही अंदर आएगी। जैसे ही वह
  11813. 8:54:48दिखे आप इशारा कर दीजिएगा। बाकी काम मैं
  11814. 8:54:50फिक्स कर दूंगा। दिलीप कामत की बात सुनकर
  11815. 8:54:54शौर्य को इतना तो समझ आ गया था कि दिलीप
  11816. 8:54:56कामत का आगे क्या करने का इरादा है। उसने
  11817. 8:54:59पहले ही नोट कर लिया था कि दिलीप कामत ने
  11818. 8:55:02होटल की एक टेबल के नीचे एक ट्रांसमीटर
  11819. 8:55:04फिक्स कर दिया था। इसलिए उस टेबल पर बैठे
  11820. 8:55:07व्यक्ति के बीच जो भी बात होती वो दिलीप
  11821. 8:55:10कामत को सुनाई दे जाती। दिलीप कामत ने एक
  11822. 8:55:13गैजेट निकालकर पहले ही शौर्य के सामने
  11823. 8:55:15टेबल पर रख दिया था। इस बीच शौर्य की
  11824. 8:55:18निगाह टीवी स्क्रीन पर ही लगा हुआ था।
  11825. 8:55:21अचानक उसे कनिका होटल के अंदर आती दिखाई
  11826. 8:55:23दी। फैशनेबल कपड़े में वह कोई राजकुमारी
  11827. 8:55:26ही लग रही थी। उसके ऊपर उसने अपनी आंख पर
  11828. 8:55:29एक बड़ा सा गगल्स लगा रखा था। शौर्य ने
  11829. 8:55:32दिलीप कामत का ध्यान उसकी तरफ आकर्षित
  11830. 8:55:35करते हुए कहा। एक तो यही लड़की है। दूसरी
  11831. 8:55:38भी अभी आ जाएगी। जैसे ही दिलीप कामत ने
  11832. 8:55:41कनिका को देखा, उसने फोन निकालकर किसी को
  11833. 8:55:43फोन किया और फोन पर इंस्ट्रक्शन देने लगा।
  11834. 8:55:47उसने दूसरी तरफ वाले को कनिका के पहनावे
  11835. 8:55:49के बारे में भी बताया। उसके बाद इसने फोन
  11836. 8:55:52काट दिया और सीसीटीवी के द्वारा कनिका को
  11837. 8:55:54फॉलो करने लगा। जैसा कि अंदाजा था कनिका
  11838. 8:55:58रेस्टोरेंट एरिया में ही पहुंची। उसके
  11839. 8:56:00पहुंचते ही एक वेटर जल्दी से उसके पास
  11840. 8:56:02पहुंचा और उसे [संगीत] एक टेबल पर आने का
  11841. 8:56:04इशारा करने लगा। शौर्य ने गौर किया कि एक
  11842. 8:56:07दो टेबल जो उस टेबल के पास ही खाली था, उस
  11843. 8:56:10पर एक रिजर्व लिखा हुआ बैनर रखा हुआ था।
  11844. 8:56:13जिसके कारण कनिका को मजबूरन उसी टेबल पर
  11845. 8:56:15जाना पड़ा। कनिका के उस टेबल पर बैठते ही
  11846. 8:56:19शौर्य समझ गया कि अब उसका काम बन गया। अब
  11847. 8:56:22उसे शिप्रा के आने का इंतजार था। उसे
  11848. 8:56:25ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा। जल्दी ही
  11849. 8:56:27उसे होटल के मेन गेट से शिप्रा भी आती हुई
  11850. 8:56:29नजर आ गई। दिलीप कामत की नजर जैसे ही
  11851. 8:56:32शिप्रा के ऊपर गई उसके मुंह से निकला। अगर
  11852. 8:56:35मैं गलत नहीं हूं तो यह तो आपकी वाइफ है
  11853. 8:56:38ना सर? हां, तुमने सही पहचाना। यह मेरी
  11854. 8:56:41वाइफ ही है। शौर्य हल्की मुस्कान के साथ
  11855. 8:56:44बोला। शौर्य की बात सुनकर दिलीप कामत एक
  11856. 8:56:47बार फिर से टीवी स्क्रीन की तरफ देखने
  11857. 8:56:49लगा। शिप्रा को आया देखकर शौर्य समझ गया
  11858. 8:56:52कि अब तो शिप्रा कनिका के टेबल पर चली ही
  11859. 8:56:55जाएगी। इसलिए वो दिलीप कामत से टेबल पर
  11860. 8:56:57पड़े उस गैजेट की तरफ इशारा करते हुए
  11861. 8:57:00बोला। मेरे ख्याल से इस गैजेट से उस टेबल
  11862. 8:57:03पर होने वाली सारी आवाज यहां सुनाई देगी।
  11863. 8:57:06जी हां, आपने सही अंदाजा लगाया। दिलीप
  11864. 8:57:09कामत शौर्य का समर्थन करते हुए बोला। जब
  11865. 8:57:12शौर्य को भरोसा हो गया कि शौर्य अब अपने
  11866. 8:57:15मकसद में कामयाब हो जाएगा तो उसने [संगीत]
  11867. 8:57:17दिलीप कामत से कहा दिलीप अब तुम थोड़ी देर
  11868. 8:57:21के लिए मुझे यहां अकेला छोड़ दो। दिलीप
  11869. 8:57:23कामत समझ गया कि शौर्य नहीं चाहता कि वह
  11870. 8:57:26उन दोनों लड़कियों के बीच होने वाली बात
  11871. 8:57:28को सुने। ऐसा सोचकर वह तुरंत उस कमरे से
  11872. 8:57:31निकल गया और जाते-जाते वो शौर्य से कहता
  11873. 8:57:33गया। सर अगर आपको हमारी जरूरत महसूस हो तो
  11874. 8:57:37बस आप सिर्फ टेबल के ऊपर की घंटी बजा
  11875. 8:57:39दीजिएगा। मैं तुरंत आपके सामने हाजिर हो
  11876. 8:57:41जाऊंगा। ठीक है? इतना कहकर शौर्य ने टीवी
  11877. 8:57:46स्क्रीन की तरफ नजर कर लिया। जबकि उसके
  11878. 8:57:48सामने परे गैजेट से कनिका की आवाज आ रही
  11879. 8:57:51थी जो शिप्रा को निर्देशित कर रही थी कि
  11880. 8:57:53उसे कहां आना है। शिप्रा कनिका के टेबल पर
  11881. 8:57:56पहुंची तो कनिका ने उठकर शिप्रा का स्वागत
  11882. 8:57:59किया और उसको अपनी बाहों में भर लिया।
  11883. 8:58:02शिप्रा को भी कनिका से मिलकर खुशी हुई। पर
  11884. 8:58:04इस खुशी में कहीं ना कहीं थोड़ा ग्रहण लगा
  11885. 8:58:06हुआ था। वह भी इस कारण कि शिप्रा को पता
  11886. 8:58:10चल गया था कि कनिका ही वह लड़की है जिसके
  11887. 8:58:12साथ शौर्य के रिश्ते की बात हुई थी। पर यह
  11888. 8:58:15बात शिप्रा के हावभाव से जाहिर नहीं हो
  11889. 8:58:17रहा था। दोनों किसी पुराने दोस्त की तरह
  11890. 8:58:20मिले जिनका बहुत दिनों के बाद मिलना हुआ।
  11891. 8:58:24क्या बात है? तुम तो दिन पर दिन और भी
  11892. 8:58:26खूबसूरत होती जा रही हो। कनिका शिप्रा की
  11893. 8:58:29तारीफ करती हुई बोली। क्या करूं? तुमसे
  11894. 8:58:32कंपटीशन जो करनी है इसलिए खूबसूरत तो होना
  11895. 8:58:35पड़ेगा। नहीं तो तुम्हारे सामने फिर मुझे
  11896. 8:58:37कौन देखेगा? शिप्रा भी कनिका के सुर में
  11897. 8:58:40सुर मिलाते हुए बोली, "क्यों तुम्हें
  11898. 8:58:43कंपटीशन करने के लिए मैं ही मिली?" वैसे
  11899. 8:58:46चिंता मत करो। अगर मेरे घर वालों का जोर
  11900. 8:58:48चल गया तो मैं पहले ही कंपटीशन से बाहर हो
  11901. 8:58:51जाऊंगी। कनिका अपने दादाजी के डिसीजन को
  11902. 8:58:54याद करती हुई बोली कि उन्होंने उसके लिए
  11903. 8:58:56क्या फैसला लिया है। शिप्रा भी कनिका के
  11904. 8:58:59तंज को समझ गई कि वह क्या कहना चाहती है।
  11905. 8:59:02पर कनिका की बात सुनकर उसने मन ही मन में
  11906. 8:59:05कहा यही तो मैं चाहती हूं कि तुम अपने घर
  11907. 8:59:08वालों के दबाव में मत आओ। नहीं तो मेरी
  11908. 8:59:10दुनिया उजाड़ने वाली तुम ही होगी। पर
  11909. 8:59:13प्रत्यक्ष में वह कनिका से बोली, अब इन
  11910. 8:59:15बातों को छोड़ो और यह बताओ कि ऐसी क्या
  11911. 8:59:17बात हो गई जो तुम मुझसे आमने-सामने ही बात
  11912. 8:59:20कर सकती थी जिसके लिए इतना सवेरे सवेरे
  11913. 8:59:22मुझे यहां बुला लिया। बताती हूं पर पहले
  11914. 8:59:25दम तो ले ले अभी आई हो कुछ नाश्ता हो जाए।
  11915. 8:59:29अभी कनिका ने यह बात कही ही थी कि वेटर ने
  11916. 8:59:32आकर दो प्लेट उन दोनों के सामने लगा दिया
  11917. 8:59:34था। कनिका ने शिप्रा के आने से पहले ही
  11918. 8:59:37ऑर्डर कर दिया था। शिप्रा ने भी कनिका की
  11919. 8:59:39इस बात पर कुछ कहा नहीं क्योंकि वह भी
  11920. 8:59:41जल्दबाजी में बिना नाश्ता किए ही घर से
  11921. 8:59:44निकल गई थी। वह कनिका के कुछ कहने का
  11922. 8:59:46इंतजार करने लगी। ड्रिंक का एक शिप लेने
  11923. 8:59:49के बाद कनिका ने शिप्रा से कहा, तुम्हें
  11924. 8:59:52याद है जब हम कुछ दिन पहले मिस लीजा के
  11925. 8:59:55प्रोग्राम के दौरान इसी होटल में मिले थे।
  11926. 8:59:57यह क्या बात हुई? इसमें भूलने जैसा क्या
  11927. 9:00:00है? इतने वर्षों के बाद तो तुमसे मिलना
  11928. 9:00:02हुआ। तो उस बात को इतनी जल्दी कैसे भूल
  11929. 9:00:04जाऊंगी? शिप्रा कटलेट का एक छोटा टुकड़ा
  11930. 9:00:07अपने मुंह में लेती हुई बोली उस दिन
  11931. 9:00:09तुम्हारे साथ एक लड़का था वो कौन था?
  11932. 9:00:12कनिका पहले शिप्रा के मुंह से सुनना चाहती
  11933. 9:00:15थी कि शिप्रा उस लड़के को कैसे जानती थी।
  11934. 9:00:17शिप्रा ने दिखावा किया कि वह याद करने की
  11935. 9:00:20कोशिश कर रही है कि कनिका किसके बारे में
  11936. 9:00:22पूछ रही है। फिर ऐसा जताया जैसे उसे कुछ
  11937. 9:00:25याद आया और वह बोली कहीं तुम शौर्य की बात
  11938. 9:00:28तो नहीं कर रही क्योंकि उस दिन तो मेरे
  11939. 9:00:30साथ मेघदना और शौर्य ही था। तुम उस लड़के
  11940. 9:00:34को कैसे जानती हो? कनिका ने अगला सवाल
  11941. 9:00:36किया, "अरे उसने मेरी बहन मेघना के लिए
  11942. 9:00:39उसका ऐड शूट का काम संभाला था और जहां वह
  11943. 9:00:42काम करता है, उस कंपनी के साथ मेरा भी काम
  11944. 9:00:45होता रहता था।" इस तरह जान पहचान होने पर
  11945. 9:00:47दोस्ती हो गई। शिप्रा ने पहचान को सिंपल
  11946. 9:00:50बनाने की कोशिश की। सिर्फ दोस्ती ही है या
  11947. 9:00:54उससे कुछ आगे भी है तुम दोनों के बीच में?
  11948. 9:00:57कनिका शिप्रा का दिल टटोलने की नियत से
  11949. 9:00:59बोली, "क्या मतलब हुआ तुम्हारी इस बात का?
  11950. 9:01:02शिप्रा अपनी भवें चढ़ाती हुई बोली, "मेरे
  11951. 9:01:05कहने का मतलब है कि तुम्हारी जैसी खूबसूरत
  11952. 9:01:08लड़की के पास होने के बावजूद वह कैसे
  11953. 9:01:10तुमसे दूर रह सकता था। उसने तुम्हें पटाने
  11954. 9:01:13की कोशिश तो जरूर की होगी। कनिका शिप्रा
  11955. 9:01:16के चेहरे के भाव से पता करने की कोशिश
  11956. 9:01:18करती हुई बोली कि उसकी बात में कुछ सच्चाई
  11957. 9:01:21हो सकती है। किसी के कोशिश करने से क्या
  11958. 9:01:24मैं उससे पट जाती? ऐसे बहुत से लड़के हर
  11959. 9:01:26दिन मिलते हैं जो ऐसी कोशिश करते रहते
  11960. 9:01:29हैं। अगर मैं ऐसे ही हर लड़के के प्यार
  11961. 9:01:31में पड़ने लगी तो फिर मुझे लड़कों की
  11962. 9:01:33गिनती याद रखनी मुश्किल हो जाती। शिप्रा
  11963. 9:01:36बुरा सा मुंह बनाती हुई बोली। उसे समझ
  11964. 9:01:39नहीं आ रहा था कि कनिका उसके मुंह से क्या
  11965. 9:01:41सुनना चाहती है। पर शौर्य में बुराई क्या
  11966. 9:01:44थी जो वह तुम्हें पसंद नहीं आया। देखने
  11967. 9:01:47सुनने में तो मुझे उस दिन अच्छा ही लगा
  11968. 9:01:49था। कनिका को यह जानकर निराशा हुई कि उन
  11969. 9:01:52दोनों के बीच में कुछ भी नहीं था। उसे लगा
  11970. 9:01:55अगर शिप्रा के साथ शौर्य रिलेशन में होता
  11971. 9:01:58तो उसे अपना शौर्य से शादी से इंकार करने
  11972. 9:02:00का बहाना मिल जाता। अब आगे क्या होगा?
  11973. 9:02:04क्या कनिका शिप्रा और शौर्य के रिश्ते के
  11974. 9:02:06बारे में जान पाएगी? क्या होगा जब शौर्य
  11975. 9:02:08विराज और कर्ण से मिलेगा। जाने क्या कहा
  11976. 9:02:11तुमने? शौर्य में बुराई क्या है? तो सुनो।
  11977. 9:02:16पहले तो वह मेरी बहन मेघना के पीछे पड़
  11978. 9:02:19गया था। जब उसने उसको भाव नहीं दिया तो जब
  11979. 9:02:22मुझसे मिला तो मुझे भी अपने झांसे में
  11980. 9:02:25लेने की कोशिश करने लगा। वो तो मेघना ने
  11981. 9:02:27मुझे समझाया कि उसके साथ प्रॉब्लम है कि
  11982. 9:02:30वो जिस भी लड़की से मिलता है उसी से उसे
  11983. 9:02:33प्यार हो जाता है। शिप्रा ने कुछ नई
  11984. 9:02:35[संगीत] ही कहानी गढ़नी शुरू कर दी थी।
  11985. 9:02:37जबकि शिप्रा की बात सुनकर कनिका का दिमाग
  11986. 9:02:40घूम गया। वो सोचने को मजबूर हो गई कि क्या
  11987. 9:02:44सच में जो शिप्रा कह रही है वो सही हो
  11988. 9:02:46सकता है। पर उस दिन उसको देखकर ऐसा तो
  11989. 9:02:49नहीं लगा था कि वो इस तरह का लड़का हो
  11990. 9:02:52सकता है। और एक बात और अगर वो ऐसा ही दिल
  11991. 9:02:56फेक टाइप का है तो वो फिर उस दिन तुम्हारे
  11992. 9:02:58साथ क्या कर रहा था? कनिका सोच भरे स्वर
  11993. 9:03:01में बोली। अरे यह क्या बात हुई? वो दिल
  11994. 9:03:05फेक टाइप का तो है पर इतना बुरा भी नहीं
  11995. 9:03:07है कि उससे दोस्ती ना की जा सके। एक बार
  11996. 9:03:10जब वह समझ गया कि हम पर उसका जादू नहीं
  11997. 9:03:13चलने वाला तो फिर उसने हमें पटाने की
  11998. 9:03:15कोशिश करनी छोड़ दी। शिप्रा बात को
  11999. 9:03:18संभालती हुई बोली अच्छा कनिका सांस छोड़ती
  12000. 9:03:22हुई बोली उसे जो एक उम्मीद जगी थी कि वो
  12001. 9:03:26शिप्रा से कुछ काम की बात पता चल सकती है।
  12002. 9:03:29वैसा कुछ हुआ नहीं। पर फिर भी वो शिप्रा
  12003. 9:03:31का दिल टटोलने की नियत से बोली। वैसे
  12004. 9:03:34तुमने शौर्य का प्रपोजल ठुकराया क्यों?
  12005. 9:03:37जबकि तुम जानती थी कि वो राजा साहब का
  12006. 9:03:39पोता है। इतने बड़े घर के लड़के को यूं
  12007. 9:03:42ठुकरा कर तुमने गलती तो नहीं कर दी। एक
  12008. 9:03:45बात कहूं कल से पहले [संगीत] तो मुझे पता
  12009. 9:03:48ही नहीं था कि वो राजा साहब का पोता है।
  12010. 9:03:50मैं तो सोच भी नहीं सकती थी कि इतने बड़े
  12011. 9:03:53घर का लड़का होकर कोई इतना साधारण काम कर
  12012. 9:03:55सकता है। शिप्रा अफसोस जताते हुए बोली
  12013. 9:03:59साधारण काम ऐसा तुम कैसे कह सकती हो?
  12014. 9:04:03कनिका का सर चकरा गया। वो खुद की भावनाओं
  12015. 9:04:06को कंट्रोल करके आगे बोली। वैसे वो क्या
  12016. 9:04:08[संगीत] सब करता है? बताया तो वह बिगbul
  12017. 9:04:11कंपनी के लिए ब्रांड प्रमोशनल डिपार्टमेंट
  12018. 9:04:13में प्रोडक्शन का काम देखता है। आजकल उसने
  12019. 9:04:16एक्टिंग के फील्ड में भी हाथ आजमाना शुरू
  12020. 9:04:18किया है। हो सकता है आगे जाकर उसे इसमें
  12021. 9:04:21सफलता मिल जाए और वह एक बड़ा स्टार
  12022. 9:04:23[संगीत] बन जाए। पर अभी तो उसका स्ट्रगल
  12023. 9:04:25ही चल रहा है। शिप्रा शौर्य को इतना
  12024. 9:04:28साधारण बताने की कोशिश कर थी कि कनिका के
  12025. 9:04:31दिमाग में उसका इमेज एक फेलियर आदमी का बन
  12026. 9:04:33गया था। पर कनिका को यह समझ नहीं आया कि
  12027. 9:04:36जब वो राठौर फैमिली का साधारण काम करने की
  12028. 9:04:39क्या जरूरत थी? उसे ध्यान आया कि बसंत
  12029. 9:04:42विहार में जो जमीन अधिग्रह हुआ था, उसमें
  12030. 9:04:45एक बड़ा हिस्सा तो शौर्य की कंपनी के पास
  12031. 9:04:47भी था। तो क्या शिप्रा को इस बारे में कुछ
  12032. 9:04:49भी नहीं पता? यह सोचकर उसने शिप्रा
  12033. 9:04:52[संगीत] से पूछा, तुम्हें पता है कि शौर्य
  12034. 9:04:55की कंपनी ने बसंत विहार में जमीन अधिग्रह
  12035. 9:04:58में बहुत बड़ा इन्वेस्टमेंट किया है।
  12036. 9:05:00मैंने खुद उसे वहां हर्षल मेहता की बेटी
  12037. 9:05:02के साथ देखा था। कनिका की बात सुनकर
  12038. 9:05:05शिप्रा का माथा घूम गया। इस बारे में उसे
  12039. 9:05:08कुछ नहीं पता था। पर हर्षल मेहता का नाम
  12040. 9:05:10सुनते ही तुरंत ही उसने कहानी बनाई। इसमें
  12041. 9:05:14शौर्य की कंपनी कहां से आ गया? जरूर
  12042. 9:05:16[संगीत] वह हर्षल मेहता के लिए काम कर रहा
  12043. 9:05:18होगा। उसे जहां भी लगता है कि उसकी कुछ
  12044. 9:05:20कमाई ही सकती है, वह वहां काम करने लगता
  12045. 9:05:23है। तुम्हारी बात से लगता है कि जरूर वह
  12046. 9:05:25अपने फ्री टाइम में हर्षल मेहता के लिए भी
  12047. 9:05:27काम करता होगा। पहले भी उनकी कंपनी
  12048. 9:05:30[संगीत] के एक एनर्जी ड्रिंक के एड में
  12049. 9:05:31उसने काम किया है। इस तरह से हर्षल मेहता
  12050. 9:05:34के साथ उसकी जान पहचान हो ही रखी है। मुझे
  12051. 9:05:37तो यह भी लगता [संगीत] है कि कहीं अब वह
  12052. 9:05:39मानसी मेहता के पीछे ना पड़ गया हो। आखिर
  12053. 9:05:42वह भी तो बहुत खूबसूरत है। शिप्रा की बात
  12054. 9:05:45सुनकर कनिका सोचने को मजबूर हो गई। इसे भी
  12055. 9:05:49शिप्रा की बात सही प्रतीत हो रही [संगीत]
  12056. 9:05:51थी। अब उसे लगने लगा कि उस दिन जो ददन
  12057. 9:05:53पहलवान के सामने वह हीरो बन रहा था, वह
  12058. 9:05:56सिर्फ मानसी मेहता पर अपना अच्छा इंप्रेशन
  12059. 9:05:58बनाने के लिए देखा जाए तो उसके ऊपर भी तो
  12060. 9:06:01उसका अच्छा इंप्रेशन पड़ा था। कह तो तुम
  12061. 9:06:04सही रही हो। पर वो राजा साहब का पोता है
  12062. 9:06:07तो उनकी संपत्ति में उसका भी तो हिस्सा
  12063. 9:06:09होगा ही। कनिका इस बारे में शिप्रा का
  12064. 9:06:12विचार जानना चाहती थी। कह तो तुम सही रही
  12065. 9:06:14हो। यह तो हमें भी देखना पड़ेगा कि उसे
  12066. 9:06:17राजा साहब की संपत में क्या मिलता है।
  12067. 9:06:20ज्यादातर संपत पर तो पहले ही जयभान जी
  12068. 9:06:22प्रतीक स्वर्णलता जी ने कब्जा कर रखा है।
  12069. 9:06:25पर अब जब राजा साहब ने शौर्य के पिता को
  12070. 9:06:28अपना लिया है तो कुछ ना कुछ तो उनके
  12071. 9:06:30हिस्से भी आएगा ही। पर वो जयभान जी और
  12072. 9:06:33स्वर्णलता जी की तुलना में तो कम ही होगा।
  12073. 9:06:36यह भी आगे जाकर ही पता चलेगा। मेरी तो
  12074. 9:06:38पूरी हमदर्दी शौर्य के साथ है। आखिर वह
  12075. 9:06:41मेरा दोस्त भी तो है। शिप्रा ने शौर्य के
  12076. 9:06:44लिए अपनी हमदर्दी जताते हुए कहा। फिर कुछ
  12077. 9:06:47ध्यान में आने पर वो आश्चर्य से कनिका की
  12078. 9:06:50ओर देखती हुई बोली। मुझे समझ नहीं आ रहा
  12079. 9:06:52कि तुम शौर्य के बारे में इतना कुछ क्यों
  12080. 9:06:55पूछ रही हो? एक मिनट। कल पार्टी में उसके
  12081. 9:06:58रिश्ते की बात हुई थी। कहीं वो तुम ही तो
  12082. 9:07:01नहीं हो जिसके [संगीत] साथ उसके रिश्ते की
  12083. 9:07:02बात हुई है। अरे हां वीरभद्र जी तुम्हारे
  12084. 9:07:06पिता ही तो हैं। [संगीत] तुम्हारे दादाजी
  12085. 9:07:08और पिताजी ने तो बहुत बड़ा ड्रामा क्रिएट
  12086. 9:07:10कर दिया था राठौर फैमिली की पार्टी में।
  12087. 9:07:13उस समय मैं यह कैसे नहीं समझ पाई थी कि
  12088. 9:07:15शौर्य से जिसके रिश्ते की बात [संगीत] हो
  12089. 9:07:17रही थी वो तुम थी। शिप्रा ने अपनी
  12090. 9:07:20एक्सप्रेशन से ऐसा जाहिर किया जैसे इतनी
  12091. 9:07:23बड़ी बात उसे अब जाकर समझ में आई थी।
  12092. 9:07:26मुझे तो तुम्हारा फोन आते ही समझ जाना
  12093. 9:07:28चाहिए था कि जो कनिका इतने समय से मुझे
  12094. 9:07:31कभी याद नहीं कि अचानक उसको मुझसे क्या
  12095. 9:07:33काम आ गया। शिप्रा अपने हाथ का कांटा
  12096. 9:07:36प्लेट में रखती हुई बोली। उसके चेहरे के
  12097. 9:07:38आश्चर्य को आसानी से समझा जा सकता था।
  12098. 9:07:41जबकि दूसरी तरफ शौर्य होटल पैराडाइज के
  12099. 9:07:43मैनेजर के कमरे में सीसीटीवी के सामने
  12100. 9:07:46बैठा शिप्रा और कनिका की बातचीत को सुन
  12101. 9:07:48रहा था और उसे शिप्रा की बात पर आश्चर्य
  12102. 9:07:50हो रहा था कि उसने क्या कहानी बना दी थी।
  12103. 9:07:53उसे समझ नहीं आ रहा था कि शिप्रा को इतनी
  12104. 9:07:56कहानी बनाने की क्या जरूरत थी। आखिर इस
  12105. 9:07:58सबके पीछे उसका मकसद क्या था? क्यों वो
  12106. 9:08:01जानबूझकर कनिका के सामने उसका इमेज खराब
  12107. 9:08:03करने की कोशिश कर रही थी। कहीं यह सब
  12108. 9:08:06इसलिए तो नहीं कि कनिका ही अपनी तरफ से
  12109. 9:08:08उससे शादी करने से इंकार कर दे। जरूर यही
  12110. 9:08:11बात होगी। शौर्य को भी एक उम्मीद नजर आई।
  12111. 9:08:14अगर वह भी इसी राह पर चलता है तो हो सकता
  12112. 9:08:17है कि चौहान फैमिली की तरफ से ही इस
  12113. 9:08:18रिश्ते के लिए मना हो जाए। इस तरह से उस
  12114. 9:08:21पर यह इल्जाम भी नहीं लगेगा कि वह अपनी
  12115. 9:08:23जुबान से पीछे हो गया। यह सोचकर उसे अच्छा
  12116. 9:08:26लगा। शौर्य को शिप्रा की चालाकी पर भी
  12117. 9:08:29बहुत प्यार आया। उसको स्क्रीन पर दोनों
  12118. 9:08:31आमने-सामने बैठे स्पष्ट दिख रहे थे। मैं
  12119. 9:08:34सच में एक मुसीबत में फंस गई हूं। मेरे
  12120. 9:08:36दादाजी ने [संगीत] बिना सोचे समझे इस
  12121. 9:08:38फटीचर से मेरा रिश्ता कर दिया है। मैं तो
  12122. 9:08:41तुम्हारे पास आई ही उसके बारे में जानने
  12123. 9:08:43के लिए थी। मुझे तो समझ नहीं आ रहा कि मैं
  12124. 9:08:46इस रिश्ते से कैसे अपना पीछा छुराऊं।
  12125. 9:08:48कनिका बेचारगी से बोली पर इसमें बुरा क्या
  12126. 9:08:51है? वो देखने में अच्छा [संगीत] है और अब
  12127. 9:08:54तो यह भी पता चल गया है कि वो राठौर
  12128. 9:08:56फैमिली का पोता भी है तो फिर शादी करने
  12129. 9:08:58में क्या बुराई है? शिप्रा ने मासूमियत से
  12130. 9:09:01यह सवाल किया। अच्छा अगर इतना ही अच्छा है
  12131. 9:09:05और अब वो राजा साहब का पोता भी निकल आया
  12132. 9:09:07है तो फिर तुम क्यों नहीं कर लेती उससे
  12133. 9:09:09शादी? उसने तुमसे पहले अपने प्यार का
  12134. 9:09:12इज़हार भी तो किया है। कनिका बुरा सा मुंह
  12135. 9:09:15बनाती हुई बोली। अब मेरे सामने तो यह
  12136. 9:09:17ऑप्शन नहीं है ना कि मैं उससे शादी कर
  12137. 9:09:20सकती हूं। तुम्हारे पास तो ऑप्शन है और
  12138. 9:09:23तुम दोनों राज परिवार से संबंध रखती हो तो
  12139. 9:09:25फिर तुम दोनों के परिवार में संबंध हो
  12140. 9:09:27जाना तो आम है। शिप्रा अपने शब्दों को
  12141. 9:09:30बड़ा नापतोल कर कनिका के सामने रख रही थी।
  12142. 9:09:33दोनों राज परिवार से संबंध रखते हैं। इसी
  12143. 9:09:36कारण तो फंस गई। पर तुम्हें इतना तो समझना
  12144. 9:09:39चाहिए कि उसकी जिंदगी राठौर फैमिली के साथ
  12145. 9:09:41नहीं बीता है। इतने [संगीत] वर्षों तक वह
  12146. 9:09:43इस परिवार से संबंधित नहीं रहा और आज
  12147. 9:09:46अचानक उसको राठौर फैमिली में प्रवेश मिल
  12148. 9:09:48गया [संगीत] और साथ में मुझ जैसी लड़की से
  12149. 9:09:50शादी करने का ऑप्शन भी क्या तकदीर लिखा के
  12150. 9:09:53आया है। कनिका का गुस्सा उसकी बातों में
  12151. 9:09:56साफ झलक रहा था। तो अब तुम्हारा क्या करने
  12152. 9:09:59का इरादा है? शिप्रा की निगाह कनिका के
  12153. 9:10:02चेहरे पर ही गरा हुआ था। उसे यह जानकर
  12154. 9:10:04अच्छा लग रहा था कि कनिका के दिल में
  12155. 9:10:06शौर्य को लेकर बहुत गुस्सा भरा हुआ था।
  12156. 9:10:09अचानक [संगीत] कनिका के चेहरे पर एक
  12157. 9:10:11उम्मीद नजर आने लगी थी। वो शिप्रा का हाथ
  12158. 9:10:13पकड़ कर आशा भरी नजरों से उसकी ओर देखती
  12159. 9:10:16हुई बोली क्या तुम मेरा एक काम करेगी?
  12160. 9:10:19शिप्रा को समझ नहीं आया कि कनिका कहना
  12161. 9:10:21क्या चाहती है। वो शंकित स्वर में बोली
  12162. 9:10:24मैं समझी नहीं तुम कहना क्या चाहती हो।
  12163. 9:10:28देखो शौर्य तुम्हें पसंद भी करता है और अब
  12164. 9:10:31तो तुमको पता है कि वह राठौर फैमिली का
  12165. 9:10:33सदस्य भी है। तो तुम क्यों नहीं उसके
  12166. 9:10:35प्रपोजल को एक्सेप्ट कर लेती हो? कहते हुए
  12167. 9:10:38कनिका की आंखों में एक उम्मीद नजर आ रही
  12168. 9:10:41थी। तुम्हारा दिमाग तो खराब नहीं हो गया
  12169. 9:10:44है। उसने तो बहुत पहले मुझसे अपने प्यार
  12170. 9:10:47का इज़हार किया था। अब इतने समय के बाद
  12171. 9:10:49जाकर मैं उससे क्या कहूंगी कि मैं
  12172. 9:10:51तुम्हारे प्रपोजल को स्वीकार करती हूं। और
  12173. 9:10:54अब जाकर वो मेरी बात को क्यों समझेगा।
  12174. 9:10:57जबकि वह जानता है कि उसका रिश्ता एक
  12175. 9:10:59राजकुमारी के साथ फिक्स हो गया है और
  12176. 9:11:02तुम्हें तो उसने देख भी रखा है। तो मुझे
  12177. 9:11:04उम्मीद है कि तुम्हारी खूबसूरती का भी वह
  12178. 9:11:06दीवाना हो ही गया होगा। शिप्रा ने यह बात
  12179. 9:11:10कनिका से बोल तो दिया था पर साथ ही उसके
  12180. 9:11:13मन में यह आशंका भी घर कर गया कि कहीं सच
  12181. 9:11:15में ही शौर्य कनिका को पसंद करने लगा तो
  12182. 9:11:19आखिर कनिका भी तो बहुत खूबसूरत है। किसी
  12183. 9:11:22भी जवान लड़के पर कनिका की खूबसूरती का
  12184. 9:11:24जादू चल जाना क्या बड़ी बात है? कनिका की
  12185. 9:11:27खूबसूरती ने शिप्रा के मन में भी डर पैदा
  12186. 9:11:30कर दिया। उसके भी दिल में एक असुरक्षा की
  12187. 9:11:32भावना पैदा हो गई। दूसरी तरफ कनिका की
  12188. 9:11:36आंखों में जो एक उम्मीद नजर आया था शिप्रा
  12189. 9:11:39की बात सुनकर वो खत्म हो गई। फिर भी उसने
  12190. 9:11:42उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा और शिप्रा से
  12191. 9:11:44बोली तुम कोशिश तो करना मुझे उम्मीद है
  12192. 9:11:48इतनी जल्दी उसका तुमसे मुंह भंग नहीं हुआ
  12193. 9:11:50होगा। आखिर तुम हो ही इतनी खूबसूरत। तुम
  12194. 9:11:54उसे कुछ ज्यादा ही बेवकूफ नहीं समझ रही।
  12195. 9:11:56जो कुछ भी उम्मीद लगाई हुई हो। शिप्रा
  12196. 9:11:59कनिका पर तंज कसती हुई बोली। बेवकूफ तो वह
  12197. 9:12:02है। तभी तो वह बाहर की कंपनियों में धक्के
  12198. 9:12:05खा रहा है। और तुम उसके दादाजी की कंपनी
  12199. 9:12:08में ही सीईओ बनी हुई हो। अगर वह इतना ही
  12200. 9:12:11काबिल होता तो उसके दादाजी उसको अपनी ही
  12201. 9:12:13किसी कंपनी में कोई बड़ा पोस्ट नहीं दे
  12202. 9:12:15देते। कनिका शौर्य का उपहास उड़ाने वाली
  12203. 9:12:18भाव में बोली। कनिका का शौर्य के लिए इस
  12204. 9:12:21तरह बोलना शिप्रा को अच्छा तो नहीं लगा पर
  12205. 9:12:24उसने सोचा एक तरह से यह ठीक भी है। कनिका
  12206. 9:12:27की सोच शौर्य के लिए जितना नेगेटिव रहेगा
  12207. 9:12:30उसके लिए उतना ही अच्छा होगा। देखो मुझे
  12208. 9:12:34नहीं लगता कि इस सब से कुछ होने वाला है।
  12209. 9:12:36अगर तुम सच में शौर्य से शादी नहीं करना
  12210. 9:12:38चाहती तो तुम्हें खुद आगे बढ़कर अपने
  12211. 9:12:40दादाजी के सामने अपनी बात रखनी पड़ेगी।
  12212. 9:12:43शौर्य इतना बेवकूफ नहीं है कि तुमको
  12213. 9:12:46छोड़कर किसी और से चक्कर चलाने की सोचेगा।
  12214. 9:12:49और कल जो ड्रामा उस पार्टी में हुआ उसके
  12215. 9:12:51बाद मुझे उम्मीद नहीं है कि शौर्य के पास
  12216. 9:12:54इस रिश्ते से इंकार करने का कोई वैलिड
  12217. 9:12:56रीजन होगा। अगर वह अपनी तरफ से इस शादी से
  12218. 9:12:59मना करेगा तो उसके और तुम्हारी फैमिली के
  12219. 9:13:01बीच तो दुश्मनी बरकरार ही रहेगी। शिप्रा
  12220. 9:13:04कनिका को समझाने की कोशिश करती हुई बोली
  12221. 9:13:07अब आगे क्या होगा? अब कनिका क्या करेगी?
  12222. 9:13:11क्या कनिका शौर्य से शादी करने को तैयार
  12223. 9:13:13होगी? इस शादी से बचने के लिए शौर्य क्या
  12224. 9:13:16करेगा? पता नहीं मेरे दादाजी को उसमें
  12225. 9:13:18क्या ऐसा दिख गया जो उन्होंने मेरी शादी
  12226. 9:13:20उससे फिक्स कर दी। मानना पड़ेगा वो लड़का
  12227. 9:13:23है तो बहुत चालाक। तभी उसने मेरे दादाजी
  12228. 9:13:26को अपनी चाल में फंसा लिया और सिर्फ फंसा
  12229. 9:13:30नहीं लिया। उन पर अपना ऐसा इंप्रेशन बना
  12230. 9:13:32लिया कि वो उसे अपने घर का दामाद बनाने पर
  12231. 9:13:35तूल गए। कनिका ने शिप्रा के सामने अपनी
  12232. 9:13:38पीड़ा व्यक्त की। कहीं तुम कुछ ज्यादा ही
  12233. 9:13:41नेगेटिव तो नहीं सोच रही शौर्य के बारे
  12234. 9:13:43में। अगर तुम्हारे दादाजी ने यह सोचा है
  12235. 9:13:46तो हो सकता है उन्हें शौर्य में कुछ नजर
  12236. 9:13:48आया होगा। शिप्रा हर स्थिति के अनुसार
  12237. 9:13:51कनिका के माइंड को रीड करना चाहती थी कि
  12238. 9:13:54कहीं वह अपने [संगीत] दादाजी के दबाव में
  12239. 9:13:56शौर्य से शादी के लिए तैयार ना हो जाए। वो
  12240. 9:13:59सोच रही थी कि कैसे वह कनिका की निगाह में
  12241. 9:14:02शौर्य की इमेज को इस कदर गिरा दे कि वह
  12242. 9:14:04किसी भी सूरत में शौर्य से शादी के लिए
  12243. 9:14:06तैयार ना हो। पहले तो शायद मैं उसके बारे
  12244. 9:14:09में गलत हो भी सकती थी। पर अब मुझे यह
  12245. 9:14:11पक्का यकीन है [संगीत] कि यह जो भी हो रहा
  12246. 9:14:14है वह सब शौर्य के सोचे समझे प्लान का
  12247. 9:14:17हिस्सा है। कनिका शौर्य को लेकर एकदम
  12248. 9:14:20स्पष्ट [संगीत] नजर आ रही थी। अगर तुम
  12249. 9:14:22शौर्य को लेकर इतने ही यकीन से यह कह रही
  12250. 9:14:24हो कि तुमसे शादी करना यह सब उसके प्लान
  12251. 9:14:27[संगीत] का हिस्सा है तो फिर तुम्हारा आगे
  12252. 9:14:29क्या करने का प्लान है? शिप्रा कनिका के
  12253. 9:14:32आगे के प्लान के बारे में जानना चाहती थी।
  12254. 9:14:34कुछ भी प्लान करने से पहले [संगीत] एक बार
  12255. 9:14:37उससे मिलना पड़ेगा। आज मेरे भाइयों के साथ
  12256. 9:14:40उससे मिलने का प्लान है। देखते हैं उस
  12257. 9:14:42मीटिंग में क्या होता है। उसके बाद ही सही
  12258. 9:14:45से प्लान कर पाऊंगी कि उसके साथ क्या करना
  12259. 9:14:47है या कैसे उसे अपने रास्ते से हटाना है।
  12260. 9:14:50कनिका ने शिप्रा को शाम को शौर्य के साथ
  12261. 9:14:53होने वाली मीटिंग के बारे में बताया।
  12262. 9:14:55अच्छा तो तुमने पहले ही सब कुछ फिक्स कर
  12263. 9:14:58रखा है। शिप्रा को कनिका और शौर्य के बीच
  12264. 9:15:01होने वाली मीटिंग के बारे में कुछ नहीं
  12265. 9:15:03पता था। इसलिए यह बात जानकर उसे आश्चर्य
  12266. 9:15:06भी हुआ था। शिप्रा और कनिका की बात पूरी
  12267. 9:15:09हो गई थी तो शिप्रा नैपकिन में अपना हाथ
  12268. 9:15:11साफ करती हुई बोली [संगीत]
  12269. 9:15:13अगर आपकी पूछताछ पूरी हो गई हो तो क्या
  12270. 9:15:15मैं अब अपने ऑफिस जा सकती हूं? हां जा
  12271. 9:15:18सकती [संगीत] हो। पर तुमसे रिक्वेस्ट है
  12272. 9:15:20कि तुम शौर्य के साथ अपने प्यार के ड्रामे
  12273. 9:15:23को आगे बढ़ाने की कोशिश करना। अगर वह
  12274. 9:15:25तुम्हारे प्यार में पड़ जाता है तो मुझे
  12275. 9:15:27यह रिश्ता तोड़ने का एक [संगीत] बहाना मिल
  12276. 9:15:29जाएगा। शिप्रा उम्मीद भरे स्वर में बोली,
  12277. 9:15:33"यानी तुम अपनी [संगीत] जगह मुझे बलि का
  12278. 9:15:35बकरा बनाना चाहती हो?
  12279. 9:15:37शिप्रा कनिका की आंखों में देखती हुई
  12280. 9:15:39बोली, "तुम यह क्यों नहीं [संगीत] देखती
  12281. 9:15:41कि जब शौर्य ने तुम्हारे सामने अपने प्यार
  12282. 9:15:43का इजहार किया था, उस समय उसकी हैसियत कुछ
  12283. 9:15:46नहीं थी। पर आज की डेट [संगीत] में वह
  12284. 9:15:48राठौड़ फैमिली का सदस्य है। अगर शौर्य
  12285. 9:15:50तुम्हारे प्रपोजल को स्वीकार कर लेता है
  12286. 9:15:52और तुम्हारी उससे शादी हो जाती है, तो
  12287. 9:15:55इससे तुम्हारी हैसियत भी बढ़ जाएगी। कनिका
  12288. 9:15:58शिप्रा का उत्साह बढ़ाती हुई बोली, "यानी
  12289. 9:16:01तुम अपनी बला मेरे सिर डालना चाहती हो।"
  12290. 9:16:03शिप्रा बुरा सा मुंह बनाती हुई बोली तुम
  12291. 9:16:06ऐसा क्यों सोचती हो? यह तुम्हारे लिए भी
  12292. 9:16:09तो अच्छा है। एक बात और आज शाम को अगर तुम
  12293. 9:16:12भी आ सको तो वहां आ जाना जहां हम शौर्य से
  12294. 9:16:15मिलने वाले हैं। कनिका शिप्रा को चारे के
  12295. 9:16:18रूप में इस्तेमाल करना चाहती थी और इस बात
  12296. 9:16:20को शिप्रा भी अच्छे से समझ रही थी। उसे
  12297. 9:16:23कनिका पर तरस भी आया था कि वह खुद उसको
  12298. 9:16:25शौर्य के साथ सेट करना चाहती थी जिससे
  12299. 9:16:28उसको शौर्य से अपना रिश्ता तोड़ने में
  12300. 9:16:30आसानी हो। जब कनिका की बात पूरी हो गई तो
  12301. 9:16:33[संगीत] उसने वेटर से बिल लाने को कहा।
  12302. 9:16:35शिप्रा भी उठ गई और जाते-जाते कनिका से
  12303. 9:16:38पूछी। तुमने यह तो बताया ही नहीं कि आज
  12304. 9:16:41शाम को तुम शौर्य से कहां मिलने वाली हो।
  12305. 9:16:44आयरन फिस्ट फाइट क्लब में आज विराज भाई का
  12306. 9:16:47मैच भी है और हम सब भाई-बहन का एक साथ
  12307. 9:16:50उससे मिलने का प्लान है। इसलिए वहीं बुला
  12308. 9:16:52लिया है। कनिका ने जवाब दिया।
  12309. 9:16:56दूसरी तरफ शौर्य ने उन दोनों की पूरी बात
  12310. 9:16:59सुनी। उसे पहले यह अंदाजा नहीं था कि
  12311. 9:17:03कनिका उसके लिए क्या सोचती है। पर अब जब
  12312. 9:17:06उसको पता चल गया कि कनिका का उसके लिए
  12313. 9:17:08कैसा ख्याल है। तो उसने कनिका के ही इरादे
  12314. 9:17:11को हवा देने का [संगीत] प्लान कर लिया।
  12315. 9:17:14उसने सोच लिया कि वह कनिका को इस हद तक
  12316. 9:17:17मजबूर कर देगा कि उसे अपनी तरफ से इस शादी
  12317. 9:17:20को तोड़ने की जरूरत ही ना पड़े। शौर्य
  12318. 9:17:23अपने ख्याल से निकलकर जैसे ही टीवी
  12319. 9:17:26स्क्रीन की तरफ देखा तो पाया शिप्रा होटल
  12320. 9:17:29से निकल गई थी और कनिका भी बिल पे करने के
  12321. 9:17:31बाद वहां से जाने वाली ही थी। दूसरी तरफ
  12322. 9:17:35फ्रेंड्स कॉलोनी के एक बंगले में भानुमती
  12323. 9:17:38और नंदिनी आपस में किसी गंभीर मंत्रणा में
  12324. 9:17:40उलझे हुए थे। अचानक ही नंदिनी ने तेज आवाज
  12325. 9:17:44में अपनी मां भानुमती से कहा। मां आप नाना
  12326. 9:17:47जी से कह देना मैं किसी भी कीमत पर उस
  12327. 9:17:50शौर्य से शादी नहीं करूंगी। अगर उनको अपनी
  12328. 9:17:52जिद पूरी करनी ही है तो वह कनिका की शादी
  12329. 9:17:55उससे कर दें। अरे तुम चिंता क्यों करती
  12330. 9:17:58हो? वैसे भी पिताजी ने कनिका की शादी की
  12331. 9:18:00ही तो बात की है तो फिर आगे भी अगर शादी
  12332. 9:18:03होनी होगी तो उसी की होगी। मैं [संगीत]
  12333. 9:18:06तुम्हारी शादी क्यों उससे करने लगी?
  12334. 9:18:08भानुमती नंदिनी को आश्वस्त करते हुए बोली
  12335. 9:18:11अगर ऐसा था तो आपने उसी समय नाना जी के
  12336. 9:18:14सामने मना क्यों नहीं किया कि आप उनकी इस
  12337. 9:18:16बात से सहमत नहीं है कि [संगीत] मेरी शादी
  12338. 9:18:19भी शौर्य से करने की नौबत आ सकती है।
  12339. 9:18:21नंदिनी शंका भरे स्वर में बोली सबसे पहली
  12340. 9:18:25बात अगर [संगीत] तुम्हारे नाना जी ने
  12341. 9:18:26शौर्य को कनिका के लिए पसंद किया है तो
  12342. 9:18:29जरूर उन्होंने उस लड़के में कुछ देखा
  12343. 9:18:31होगा। इसीलिए बिना [संगीत] सच्चाई जाने
  12344. 9:18:33सीधा इंकार कर देना बेवकूफी होती। पहले हम
  12345. 9:18:36उस लड़के के बारे में पूरी छानबीन कर
  12346. 9:18:38लेंगे। उसके बाद डिसाइड करेंगे तो ज्यादा
  12347. 9:18:41बेहतर होगा ना। भानुमती नंदिनी को समझाते
  12348. 9:18:43हुए बोली अगर ऐसी बात है तो [संगीत] आपने
  12349. 9:18:47इसके लिए क्या किया है? नंदिनी भानुमती की
  12350. 9:18:49आंखों में देखती हुई बोली। तुम्हें जल्दी
  12351. 9:18:52क्या है? [संगीत] अभी तो हम घर आए हैं।
  12352. 9:18:54मैंने तुम्हारे पापा को बुलाया है। वही
  12353. 9:18:57पता करेंगे कि तुम्हारे लिए क्या अच्छा है
  12354. 9:18:59और क्या [संगीत] बुरा। भानुमती नंदिनी को
  12355. 9:19:01तसल्ली देते हुए बोले।
  12356. 9:19:04इसी समय एक शख्स ने कमरे [संगीत] में
  12357. 9:19:06प्रवेश किया और अपनी रौबदार आवाज में
  12358. 9:19:08भानुमती से पूछा क्या बात है इतनी जल्दी
  12359. 9:19:12में मुझे क्यों बुलाया है यह शख्स कोई और
  12360. 9:19:15नहीं रणधीर शेखावत था यानी भानुमती की
  12361. 9:19:18शादी रणधीर शेखावत से हुई थी मतलब नंदिनी
  12362. 9:19:21रणधीर शेखावत की बेटी थी। रणधीर शेखावत की
  12363. 9:19:25बात सुनकर भानुमती ने पूरा किस्सा रणधीर
  12364. 9:19:28शेखावत को कह सुनाया और उसके बाद यह भी
  12365. 9:19:30बताया कि परिवार [संगीत] की वर्तमान
  12366. 9:19:32स्थिति क्या है और अब उनका खुद का इस बारे
  12367. 9:19:34में क्या विचार है। यानी तुम यह कह रही हो
  12368. 9:19:38कि राठौड़ फैमिली से तुम्हारे पिताजी की
  12369. 9:19:40सुलह हो गई। रणधीर शेखावत के चेहरे पर
  12370. 9:19:43हैरानी के भाव था। यह क्या इतनी बड़ी
  12371. 9:19:46[संगीत] बात है जो आप इतने हैरान नजर आ
  12372. 9:19:48रहे हैं? भानुमती भी हैरान स्वर में बोली।
  12373. 9:19:52बड़ी ही बात है। विशालगढ़ में रहकर राठौड़
  12374. 9:19:54फैमिली से दुश्मनी रखना क्या छोटी बात है?
  12375. 9:19:57अगर तुम्हारी दुश्मनी राठौड़ फैमिली से
  12376. 9:19:59नहीं होती तो हमारे व्यवसाय को पंख लग गए
  12377. 9:20:02होते। पर तुम्हारे परिवार की दुश्मनी के
  12378. 9:20:04कारण [संगीत] हम भी उनके साथ कोई काम नहीं
  12379. 9:20:06कर पा रहे थे। अब अगर उनके परिवार में
  12380. 9:20:08हमारी रिशेदारी भी हो जाए तो कहने ही
  12381. 9:20:11क्या? रणधीर [संगीत] शेखावत खुश होते हुए
  12382. 9:20:13बोले तो आप चाहते हैं कि सूर्यभान के बेटे
  12383. 9:20:17शौर्य से हमारी [संगीत] बेटी की शादी की
  12384. 9:20:19बात मान लेनी चाहिए। भानुमती नंदिनी की ओर
  12385. 9:20:22देखते हुए [संगीत] बोली नहीं सूर्यभान के
  12386. 9:20:25बेटे से शादी करने की बात है तो यह कनिका
  12387. 9:20:28को करने दो। अगर हमारी बेटी की शादी की
  12388. 9:20:30बात राठौड़ [संगीत] फैमिली में करनी है तो
  12389. 9:20:32प्रतीक के साथ हम उसकी शादी करवा सकते
  12390. 9:20:35हैं। प्रतीक का अच्छा खासा नाम इस शहर में
  12391. 9:20:37है। [संगीत] इस शहर का मोस्ट एलिजिबल
  12392. 9:20:39बैचलर के रूप में उससे बढ़िया लड़का इस
  12393. 9:20:42शहर में कौन होगा? रणधीर शेखावत ने अपना
  12394. 9:20:44विचार दिया। यानी आप चाहते हैं कि हम अपनी
  12395. 9:20:48[संगीत] बेटी की शादी प्रतीक के साथ करवा
  12396. 9:20:50सकते हैं। भानुमती ने एक बार फिर से
  12397. 9:20:52कंफर्म [संगीत] करने की नियत से पूछा।
  12398. 9:20:56और क्या सूर्यभान के बेटे के बारे में
  12399. 9:20:58[संगीत] कुछ पता तो है नहीं। पता नहीं अभी
  12400. 9:21:00तक क्या करता रहा होगा। अचानक फैमिली में
  12401. 9:21:02आ जाने से वो पावर और ओहदा उसको थोड़े ही
  12402. 9:21:05मिल जाएगा जो अभी प्रतीक को हासिल है।
  12403. 9:21:07रणधीर शेखावत ने भानुमती को समझाया।
  12404. 9:21:10[संगीत]
  12405. 9:21:10अब बताओ तुम क्या कहती हो? क्या तुम
  12406. 9:21:13प्रतीक से शादी करना चाहोगी? भानुमती
  12407. 9:21:16नंदिनी की ओर देखते हुए बोली। अगर पिताजी
  12408. 9:21:19को लगता है कि वो मेरे लिए ठीक रहेगा तो
  12409. 9:21:22मुझे कोई आपत्ति नहीं है। नंदिनी शर्माते
  12410. 9:21:25हुए बोली ठीक है फिर मैं इस बारे में
  12411. 9:21:28पिताजी से बात करूंगी। भानुमती ने रणधीर
  12412. 9:21:31शेखावत से कहा, "इदर शिप्रा अपने ऑफिस
  12413. 9:21:34पहुंच गई थी।" शौर्य की रिश्ते की बात
  12414. 9:21:36सुनकर उसका मूड तो कुछ उखरा हुआ ही था। पर
  12415. 9:21:39कनिका से बात होने के बाद उसको थोड़ा
  12416. 9:21:41तसल्ली हुआ कि कनिका का शौर्य से शादी
  12417. 9:21:43करने का [संगीत] कोई प्लान नहीं है। अभी
  12418. 9:21:45शिप्रा को ऑफिस आए ज्यादा समय नहीं हुआ था
  12419. 9:21:48कि एक ऑफिस बॉय उसके केबिन में आया और
  12420. 9:21:50उससे कहा कि राजा साहब उसको अपने [संगीत]
  12421. 9:21:52ऑफिस में बुला रहे हैं। शिप्रा समझ गई कि
  12422. 9:21:55जरूर राजा साहब को कल जो हुआ उसके [संगीत]
  12423. 9:21:57बारे में ही बात करनी होगी। इसीलिए
  12424. 9:22:00उन्होंने उसको बुलाया होगा। अब वह यह भी
  12425. 9:22:02तो समझ रहे होंगे कि शिप्रा को उनकी हकीकत
  12426. 9:22:04पता चल गई होगी। इसलिए पहले की स्थिति
  12427. 9:22:06[संगीत] में और अब की स्थिति में बहुत
  12428. 9:22:08परिवर्तन आ गया होगा। अब उसे यह भी समझ आ
  12429. 9:22:11गया था कि राजा साहब क्यों उसे खुद को
  12430. 9:22:13दादाजी बोलने के लिए कहते थे। क्योंकि
  12431. 9:22:16उनको तो पहले से पता था कि वो उनकी बहू
  12432. 9:22:18है। [संगीत]
  12433. 9:22:18शिप्रा को यह सोचकर भी तसल्ली हुई कि राजा
  12434. 9:22:21साहब ने बहू के रूप में उसे पहले [संगीत]
  12435. 9:22:23ही स्वीकार कर लिया था। तभी तो उन्होंने
  12436. 9:22:25उसे अपनी कंपनी की जिम्मेदारी दी थी।
  12437. 9:22:28शिप्रा राजा साहब के कमरे के बाहर पहुंची।
  12438. 9:22:30उसने [संगीत] दरवाजे पर नॉक किया तो अंदर
  12439. 9:22:33से आवाज आई अंदर आ जाओ। शिप्रा ने दरवाजे
  12440. 9:22:36को धक्का देकर खोला [संगीत] और अंदर आ गई।
  12441. 9:22:39कमरे के अंदर के दृश्य देखकर उसका दिमाग
  12442. 9:22:41घूम गया। राजा [संगीत] साहब खिड़की के पास
  12443. 9:22:44खड़े थे और उनकी चेयर पर नीलिमा पांव
  12444. 9:22:46फैलाए बैठी हुई थी। शिप्रा कभी राजा साहब
  12445. 9:22:49की [संगीत] ओर तो कभी नीलिमा की ओर देखे
  12446. 9:22:51जा रही थी। जबकि नीलिमा भी शिप्रा को ही
  12447. 9:22:54घूरे जा रही थी। कोई कुछ और कहता उससे
  12448. 9:22:57पहले वहां पर नीलिमा की आवाज गूंजी। आपको
  12449. 9:23:00अपनी सफाई में कुछ कहना है? नीलिमा की
  12450. 9:23:02आवाज सुनकर शिप्रा उसकी ओर देखने लगी।
  12451. 9:23:05नीलिमा के चेहरे पर नाराजगी के भाव को वह
  12452. 9:23:08स्पष्ट देख सकती [संगीत] थी। उसे समझ नहीं
  12453. 9:23:10आया कि नीलिमा उससे ऐसे क्यों बात कर रही
  12454. 9:23:12है। उसे समझ नहीं आया कि वह क्या बोले। जब
  12455. 9:23:16शिप्रा ने कुछ नहीं कहा तो नीलिमा अपनी
  12456. 9:23:18सीट से उठी और शिप्रा के पास आती हुई
  12457. 9:23:20बोली। मैं आपसे ही पूछ रही हूं कि आपको
  12458. 9:23:23अपनी [संगीत] सफाई में कुछ कहना है? पर
  12459. 9:23:26किस बात की सफाई देनी है मुझे? शिप्रा
  12460. 9:23:28अनजान बनती हुई बोली। वह राजा साहब की ओर
  12461. 9:23:31देखने लगी। उसे लगा कहीं राजा साहब तो
  12462. 9:23:34उसकी किसी बात से नाराज नहीं हो गए। राजा
  12463. 9:23:37साहब ने जब शिप्रा को अपनी ओर देखते
  12464. 9:23:38[संगीत] पाया तो वह जल्दी से बोले मेरा
  12465. 9:23:41इसमें कोई हाथ नहीं है। यह सब तुम दोनों
  12466. 9:23:43के बीच की बात है तो तुम दोनों ही निपटाओ।
  12467. 9:23:46राजा साहब की बात सुनकर शिप्रा फिर से
  12468. 9:23:49नीलिमा की ओर देखने लगी। नीलिमा उसके पास
  12469. 9:23:52आ गई थी और घूम-घूम [संगीत] कर उसकी ओर
  12470. 9:23:54देखने लगी। शिप्रा को समझ नहीं आया कि
  12471. 9:23:56नीलिमा यह क्या कर रही है। जबकि [संगीत]
  12472. 9:23:58अचानक नीलिमा के चेहरे पर मुस्कान दिखने
  12473. 9:24:00लगी। यह गलत बात है। मेरी इतनी सुंदर भाभी
  12474. 9:24:04है और मुझे अभी तक आपसे मिलने का मौका भी
  12475. 9:24:06नहीं मिला। मुझे आप पर बहुत गुस्सा आ रहा
  12476. 9:24:09है। [संगीत] नीलिमा की नाराजगी ऐसी थी
  12477. 9:24:12जैसे किसी बच्चे का खिलौना तो आ रखा था पर
  12478. 9:24:15उसे उससे खेलने का मौका नहीं मिला। नाराज
  12479. 9:24:18तो मुझे होना चाहिए ना कि मेरी [संगीत]
  12480. 9:24:20इतनी प्यारी ननद है और मुझे उसके बारे में
  12481. 9:24:22बताया नहीं गया। अब तुम ही बताओ मैं अपना
  12482. 9:24:25गुस्सा किस पर निकालूं? शिप्रा नीलिमा का
  12483. 9:24:28दांव उसी पर चलती हुई बोली। जब नीलिमा ने
  12484. 9:24:30शिप्रा की यह बात [संगीत] सुनी तो उसने
  12485. 9:24:32अपने दादाजी की ओर देखा और बोली दादाजी ये
  12486. 9:24:36भाभी क्या बोल रही है? यानी [संगीत] आपने
  12487. 9:24:38ही इनसे मेरे बारे में कुछ नहीं कहा।
  12488. 9:24:40तुम्हारे बारे में। इन्होंने [संगीत] तो
  12489. 9:24:42मुझे अभी तक यह भी नहीं पता चलने दिया कि
  12490. 9:24:44मेरी कोई सासससुर भी है। मैं तो अभी आई ही
  12491. 9:24:48इसीलिए हूं कि मैं आज यहां अपना इस्तीफा
  12492. 9:24:50[संगीत] सौंप दूं। जब यहां किसी को मेरी
  12493. 9:24:52फिक्र ही नहीं है तो फिर मैं यहां किस लिए
  12494. 9:24:55काम करूं? शिप्रा ने एक कदम और आगे बढ़कर
  12495. 9:24:58अपनी नाराजगी का प्रदर्शन [संगीत] किया।
  12496. 9:25:00अब आगे क्या होगा? क्या होगा जब शौर्य
  12497. 9:25:04कनिका से मिलने जाएगा? क्या भानुमती
  12498. 9:25:07नंदिनी की शादी की बात प्रतीक के [संगीत]
  12499. 9:25:09लिए कर पाएगी? गलत बात है। उसमें हमारी
  12500. 9:25:12क्या गलती है? मैं तो तुम्हें बताना चाहता
  12501. 9:25:15था। पर शौर्य ने मुझे ऐसा नहीं करने दिया।
  12502. 9:25:18इसलिए [संगीत] अगर तुम्हें किसी से लड़ना
  12503. 9:25:19है तो तुम इसके लिए शौर्य से लड़ाई करना।
  12504. 9:25:22उल्टा मैं तो तुम्हें अपने पास रखने के
  12505. 9:25:24लिए यहां ले आया। चंद्रभान [संगीत] जी
  12506. 9:25:25शिप्रा को सफाई देते हुए बोले। शिप्रा
  12507. 9:25:28हैरानी से राजा साहब की ओर देखने लगी। उसे
  12508. 9:25:31उम्मीद नहीं थी कि राजा साहब किसी बच्चे
  12509. 9:25:33की तरह उसको इस बात के लिए सफाई देंगे। पर
  12510. 9:25:36उसने यह बात अपने चेहरे से जाहिर नहीं
  12511. 9:25:38होने दी। उल्टा वो ऐसा ही दिखा रही थी कि
  12512. 9:25:40उसे इस बात का बहुत दुख था। सॉरी भाभी।
  12513. 9:25:43मैं [संगीत] तो फालतू में ही आप पर गुस्सा
  12514. 9:25:45हो रही थी। मिलने दो भैया को। मैं उनकी
  12515. 9:25:48ऐसी खबर लूंगी कि वह भी याद रखेंगे कि
  12516. 9:25:50[संगीत] उन्होंने मुझसे यह खबर छुपाकर
  12517. 9:25:52अच्छा नहीं किया। नीलिमा शौर्य के लिए ही
  12518. 9:25:54अपना गुस्सा दिखाती हुई बोली। नीलिमा को
  12519. 9:25:57तुरंत रंग बदलते देखकर शिप्रा के चेहरे पर
  12520. 9:25:59एक मुस्कान आ गई। उसे नीलिमा बहुत ही
  12521. 9:26:01प्यारी लड़की लगी। अगर उसे पता होता कि
  12522. 9:26:04उसकी एक इतनी खूबसूरत प्यारी सी ननद है तो
  12523. 9:26:06वह पहले ही उससे मिलने की कोशिश करती।
  12524. 9:26:08उसने सूर्यभान जी और कल्पना जी को भी
  12525. 9:26:10पार्टी में देखा था और उन दोनों का ही
  12526. 9:26:12व्यक्तित्व उसे बहुत प्रभावशाली लगा था।
  12527. 9:26:15अभी भी उसको शौर्य और उसकी फैमिली का क्या
  12528. 9:26:17स्टेटस है इसके बारे में कुछ पता नहीं था।
  12529. 9:26:19अभी तक उसको तसल्ली से इस बारे में जानने
  12530. 9:26:22का समय ही नहीं मिला। पिछली [संगीत] रात
  12531. 9:26:24भी उसका शौर्य से रूठते मनाते ही गुजर गया
  12532. 9:26:26था और सवेरे उसे जल्दी घर से निकलना पड़ा
  12533. 9:26:28था और शौर्य तो उससे भी पहले उसको बिना
  12534. 9:26:30बताए घर से निकल गया था। इस बात पर उसे
  12535. 9:26:33शौर्य पर गुस्सा भी आया था। पर उसे खुद
  12536. 9:26:36कनिका से मिलने की जल्दी थी। इसलिए शिप्रा
  12537. 9:26:38ने इस बात पर उस समय ज्यादा ध्यान नहीं
  12538. 9:26:40दिया। पर उसने सोचा था अगर उसको जल्दी
  12539. 9:26:42निकलना ही था तो कम से कम उसे इनफॉर्म तो
  12540. 9:26:45कर देना चाहिए था। दूसरी तरफ शौर्य होटल
  12541. 9:26:48पैराडाइज से निकलकर रत्नाकर शेट्टी से
  12542. 9:26:50मिलने पहुंचा। वो इस समय गीत स्टूडियो में
  12543. 9:26:52मौजूद था जहां [संगीत] आज उसकी मूवी जान
  12544. 9:26:54का टाइटल सॉन्ग रिकॉर्ड होने वाला था।
  12545. 9:26:57रत्नाकर शेट्टी ने खासकर शौर्य को इसलिए
  12546. 9:26:59बुलाया था कि वह एक बार खुद इस मूवी के
  12547. 9:27:01टाइटल सॉन्ग को सुन ले। आज सॉन्ग की डमी
  12548. 9:27:04होनी थी और अगले ही दिन [संगीत] सबसे पहले
  12549. 9:27:06इस सॉन्ग से ही शूटिंग स्टार्ट होने वाली
  12550. 9:27:08थी। पहली मूवी होने के कारण शौर्य को भी
  12551. 9:27:10[संगीत] सॉन्ग सुनने की उत्सुकता चरम पर
  12552. 9:27:12थी। शौर्य जब स्टूडियो पहुंचा तो सॉन्ग की
  12553. 9:27:14रिकॉर्डिंग शुरू ही होने वाली थी। इसलिए
  12554. 9:27:17उसने भी रत्नाकर शेट्टी से ज्यादा बात
  12555. 9:27:18नहीं किया [संगीत] और सॉन्ग के बोल की तरफ
  12556. 9:27:20ध्यान देने लगा। सामने शीशे के दूसरी तरफ
  12557. 9:27:23सिंगर [संगीत] वोकल रूम में कान के ऊपर
  12558. 9:27:25हेडफोन लगाए गाने को तैयार था।
  12559. 9:27:27रिकॉर्डिस्ट ने म्यूजिक प्ले किया और लगभग
  12560. 9:27:29[संगीत] 20 सेकंड के म्यूजिक के बाद सिंगर
  12561. 9:27:32ने गाना शुरू किया। गाने के बोल थे। जान
  12562. 9:27:35[संगीत] मुझे ना देखोगी तो मैं मर जाऊंगा।
  12563. 9:27:38सब्र अब होता नहीं मैं कुछ भी कर जाऊंगा
  12564. 9:27:41जान मुझे। पहली ही बार में शौर्य को गाने
  12565. 9:27:44के यह बोल बहुत पसंद आए। सॉन्ग की
  12566. 9:27:46रिकॉर्डिंग के बाद रत्नाकर शेट्टी ने
  12567. 9:27:48रिकॉर्डिस्ट से गाने की डमी अपने मोबाइल
  12568. 9:27:50में ले ली और उसके बाद शौर्य से पूछा अब
  12569. 9:27:52बताइए सर यह टाइटल सॉन्ग आपको पसंद आया?
  12570. 9:27:55बहुत बात तो है इस सॉन्ग में। शौर्य इस
  12571. 9:27:59गाने से संतुष्ट दिखाई दे रहा था। तो फिर
  12572. 9:28:01हम कल से ही शूटिंग शुरू करने जा रहे हैं।
  12573. 9:28:03सब कुछ पहले से ही शेड्यूल हो रखा है।
  12574. 9:28:05हमारी यूनिट आज शाम को ही शूटिंग लोकेशन
  12575. 9:28:07पर पहुंच जाएगी। अच्छा होगा [संगीत] कि आप
  12576. 9:28:09आज शाम को ही हमारे साथ ही लोकेशन पर चल
  12577. 9:28:11लीजिएगा। नहीं तो फिर आपको सुबह-सुबह
  12578. 9:28:14लोकेशन पर पहुंचना पड़ेगा। रत्नाकर शेट्टी
  12579. 9:28:16ने शौर्य को शूटिंग शेड्यूल बताया। पर अब
  12580. 9:28:19शौर्य का मूड बदल रहा था। अब वह चाह नहीं
  12581. 9:28:21रहा था कि वह फिल्म में काम करे। अब
  12582. 9:28:23परिस्थिति चेंज हो गई थी और इस बदली
  12583. 9:28:25परिस्थिति में शौर्य को खुद एक्टिंग करना
  12584. 9:28:27सही नहीं लग रहा था। इसलिए उसने रत्नाकर
  12585. 9:28:30शेट्टी से कहा शेट्टी साहब क्या हम इस
  12586. 9:28:33फिल्म में किसी और हीरो को नहीं रख सकते?
  12587. 9:28:35शौर्य की बात सुनकर एक बार को तो रत्नाकर
  12588. 9:28:38शेट्टी का माथा घूम गया कि यह अचानक
  12589. 9:28:40मिस्टर श्रवण को क्या हो गया? वो घबराहट
  12590. 9:28:42भरे स्वर में बोला यह आप कैसी बात कर रहे
  12591. 9:28:45हैं मिस्टर श्रवण? इस फिल्म की अनाउंसमेंट
  12592. 9:28:47पहले ही हो गई है। इसलिए कम से कम आपको यह
  12593. 9:28:50फिल्म तो करनी ही पड़ेगी और मिस नताशा
  12594. 9:28:52कपूर भी आपके साथ काम करने को लेकर बहुत
  12595. 9:28:54उत्साहित हैं। इसलिए आपको अपनी ये दो
  12596. 9:28:57फिल्म तो करनी ही पड़ेगी। बाकी की तीन
  12597. 9:28:59फिल्म के लिए हम अलग स्टार तो कास्ट कर ही
  12598. 9:29:01रहे हैं। पता नहीं मैं आपसे कैसे कहूं पर
  12599. 9:29:05पहले की तुलना में मेरी परिस्थिति थोड़ी
  12600. 9:29:07चेंज हो गई है। मेरे पास अब थोड़ा समय की
  12601. 9:29:10कमी रहने वाली है। इसलिए आपके लिए भी
  12602. 9:29:13समस्या हो सकती है। शौर्य ने अपनी
  12603. 9:29:15प्रॉब्लम रत्नाकर शेट्टी को बताई। अगर ऐसी
  12604. 9:29:18बात है तो भी आप चिंता मत कीजिए। मैं
  12605. 9:29:20मैनेज कर लूंगा। बस आप सबसे पहले कल का
  12606. 9:29:23समय मुझे दे दीजिए। उसके बाद आगे का समय
  12607. 9:29:26मैं आपकी सहूलियत के हिसाब से एक शूटिंग
  12608. 9:29:28शेड्यूल बना लूंगा। इस बीच मैं दूसरे
  12609. 9:29:30आर्टिस्ट के शूट को पूरा कर लूंगा।
  12610. 9:29:32रत्नाकर शेट्टी भी कहा मानने वाला था। देख
  12611. 9:29:36लीजिए बाद में आप मुझसे कंप्लेन मत
  12612. 9:29:38कीजिएगा कि मैं आपको समय नहीं दे रहा हूं।
  12613. 9:29:40शौर्य शेट्टी साहब को देखकर मुस्कुराते
  12614. 9:29:42हुए बोला, वो मैं मैनेज कर लूंगा। आप
  12615. 9:29:45चिंता मत कीजिए। रत्नाकर शेट्टी ने शौर्य
  12616. 9:29:48को आश्वस्त किया। रत्नाकर शेट्टी से शौर्य
  12617. 9:29:51निपटकर बसंत विहार के लिए निकल गया। वहां
  12618. 9:29:53हर्षल मेहता के साथ एक मीटिंग की और आगे
  12619. 9:29:56कैसे बसंत विहार में अपने प्रोजेक्ट को
  12620. 9:29:58[संगीत] आगे बढ़ाएगा इस बारे में चर्चा
  12621. 9:30:00की। बसंत विहार को लेकर अब शौर्य का प्लान
  12622. 9:30:03बहुत आगे का था। उसे यहां बहुत संभावना
  12623. 9:30:06दिख रही थी। इसको लेकर ही यहां के लिए
  12624. 9:30:08उसके प्लान बहुत बड़े थे। वह [संगीत] अपने
  12625. 9:30:10हिसाब से यहां बनने वाले एयरपोर्ट के
  12626. 9:30:12आसपास रेजिडेंशियल कॉलोनी से लेकर
  12627. 9:30:14बड़े-बड़े [संगीत] मॉल, मल्टीप्लेक्स,
  12628. 9:30:16अम्यूजमेंट पार्क यह सब बनाने का प्लान कर
  12629. 9:30:18रहा था। इसके लिए उसने स्पेशल करके इन
  12630. 9:30:21सबको प्लान करने के लिए स्पेशलिस्ट हायर
  12631. 9:30:23करने के लिए हर्षल मेहता से बोल दिया था।
  12632. 9:30:25[संगीत] इन सब कामों को करते-करते बहुत
  12633. 9:30:27समय बीत गया था। शौर्य को याद आया कि शाम
  12634. 9:30:30को उसको कनिका और उसके भाइयों से भी मिलने
  12635. 9:30:32जाना है। इसलिए वह बसंत विहार [संगीत] से
  12636. 9:30:34निकलकर पहले अपने मॉडल टाउन वाले घर गया
  12637. 9:30:37और तैयार होकर आयरन फिस्ट फाइट क्लब जाने
  12638. 9:30:39की सोच ही रहा था कि तभी उसके फोन पर उसके
  12639. 9:30:42पापा का कॉल आया। शौर्य ने फोन उठाया तो
  12640. 9:30:44दूसरी तरफ से उसके पापा ने पूछा कहां हो
  12641. 9:30:47तुम? कल पार्टी से जाने के बाद फिर से
  12642. 9:30:50तुम्हारा कुछ पता ही नहीं है। तुम्हारी
  12643. 9:30:52मां भी तुमको लेकर परेशान है। क्या
  12644. 9:30:54[संगीत] फायदा हुआ वापस आने का? जब अभी भी
  12645. 9:30:56तुमको देखने के लिए तुम्हारी मां तरस रही
  12646. 9:30:59हैं। शौर्य अपने पापा की [संगीत] बात समझ
  12647. 9:31:01रहा था। इसलिए उसने उन्हें समझाने के लिए
  12648. 9:31:03बोला। पापा कुछ चीजें हैं जिन्हें अभी
  12649. 9:31:06मुझे फिक्स करना है। जिसके कारण मैं अभी
  12650. 9:31:09राजमहल में आकर नहीं रह सकता। पर आप चिंता
  12651. 9:31:12मत कीजिए। मैं मां और आप सब से मिलने आता
  12652. 9:31:14रहूंगा। जब [संगीत] चीजें सामान्य हो
  12653. 9:31:16जाएंगी तो फिर आपको कहना नहीं पड़ेगा मैं
  12654. 9:31:19खुद ही वापस महल आ जाऊंगा। अगर ऐसी बात है
  12655. 9:31:22तो ठीक है पर [संगीत] जो भी चीजें तुम्हें
  12656. 9:31:24फिक्स करनी है वह जल्दी कर लो और अब दूसरी
  12657. 9:31:27जिम्मेदारी भी तुम पर आने वाली है। उसको
  12658. 9:31:29भी ध्यान में रखना। [संगीत]
  12659. 9:31:31वीरभद्र से बात हुई थी तो पता चला था कि
  12660. 9:31:33उसके बच्चे तुमसे मिलना चाहते थे। क्या
  12661. 9:31:35[संगीत] किसी का फोन आया था? सूर्यभान जी
  12662. 9:31:38अपना कंसर्न दिखाते हुए बोले हां बात हुई
  12663. 9:31:41थी। अभी [संगीत] मैं उन्हीं से मिलने जा
  12664. 9:31:43रहा हूं। शौर्य बोला, ओह, यह तो बढ़िया
  12665. 9:31:46है। इस तरह तुम भी उस लड़की से मिल लोगे।
  12666. 9:31:49मुझे खुशी है कि जो रिश्ता मेरे कारण
  12667. 9:31:51वर्षों पहले बिगड़ गया था, वो फिर से मेरे
  12668. 9:31:54बेटे [संगीत] के कारण जुड़ने जा रहा है।
  12669. 9:31:56थैंक यू बेटा। तुम्हारे कारण जो वर्षों से
  12670. 9:31:59एक बोझ मेरे सिर पर पड़ा हुआ था, अब जाकर
  12671. 9:32:01लग रहा है कि वो हल्का हो गया है।
  12672. 9:32:03सूर्यभान जी भावुक होते हुए बोले, "यह आप
  12673. 9:32:07कैसी बात कर रहे हैं? पापा, आपको चिंता
  12674. 9:32:09करने की कोई जरूरत नहीं है। सब बढ़िया ही
  12675. 9:32:12होगा। शौर्य ने अपने पापा को आश्वस्त
  12676. 9:32:15किया। [संगीत] मैं आपको एक बात और कहना
  12677. 9:32:17चाहता हूं। अभी मेरी असलियत से इस शहर के
  12678. 9:32:20लोग वाकिफ नहीं है। इसलिए [संगीत] अभी मैं
  12679. 9:32:22नहीं चाहता कि किसी को अभी मेरी हकीकत पता
  12680. 9:32:25चले। इसलिए आप भी अभी किसी को मेरे काम या
  12681. 9:32:28मेरे बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताएंगे।
  12682. 9:32:30यह [संगीत] बात चौहान फैमिली के लिए भी
  12683. 9:32:32है। आप उन्हें भी मेरे बिजनेस या काम से
  12684. 9:32:35संबंधित कोई जानकारी नहीं देंगे। समय आने
  12685. 9:32:37पर मैं खुद ही उन्हें अपने बारे में सब
  12686. 9:32:39बता दूंगा। शौर्य ने अपने पापा को कुछ
  12687. 9:32:42निर्देश दिए और फोन रख दिया। शौर्य भी
  12688. 9:32:45अपने [संगीत] पापा से बात करने के बाद
  12689. 9:32:47थोड़ा हल्का महसूस कर रहा था। नहीं तो अभी
  12690. 9:32:50[संगीत] तक उसको भी अपने मम्मी पापा को
  12691. 9:32:53समय ना देने के कारण ग्लानी हो रही थी।
  12692. 9:32:57शौर्य मॉडल टाउन से निकला और अपनी कार में
  12693. 9:33:00सवार होकर आयरन फिस्ट क्लब की तरफ कार
  12694. 9:33:02बढ़ा दी। अभी उसको कार बढ़ाए हुए ज्यादा
  12695. 9:33:06समय हुआ भी नहीं कि तभी फिर से उसका फोन
  12696. 9:33:09बजने लगा। इस बार कॉल शिप्रा का था। शौर्य
  12697. 9:33:14समझ गया कि शिप्रा उसके बारे में जानना
  12698. 9:33:16चाहती होगी कि वो आयरन फिस्ट फाइट क्लब के
  12699. 9:33:18लिए निकला कि नहीं। पर वो सीधा इसके बारे
  12700. 9:33:21में ना पूछकर [संगीत] घुमाकर सवाल करती
  12701. 9:33:23है। कहां हो तुम? मैं कहां हूं? अभी तो
  12702. 9:33:28मॉडल टाटाउन वाले घर पर ही हूं। पर किसी
  12703. 9:33:30से मिलने के लिए अभी निकल रहा हूं। शौर्य
  12704. 9:33:33ने जवाब दिया। शिप्रा समझ गई कि शौर्य
  12705. 9:33:36शायद आयरन फिस्ट फाइट क्लब के लिए ही
  12706. 9:33:39निकलने वाला होगा। शिप्रा अभी डिसाइड नहीं
  12707. 9:33:41कर पा रही थी कि वह भी उस फाइट क्लब में
  12708. 9:33:44जाए या नहीं। कनिका ने उसे इनवाइट तो किया
  12709. 9:33:47था। शिप्रा यह भी समझ रही थी कि उसको
  12710. 9:33:50बुलाकर कनिका उसको अपने [संगीत] मतलब के
  12711. 9:33:52लिए यूज करना चाहती थी। पर वह यह कहा
  12712. 9:33:55जानती थी कि एक तरह से वह शिप्रा के काम
  12713. 9:33:58को ही आसान कर रही थी।
  12714. 9:34:00अब किससे मिलने जा रहे हो? शिप्रा शौर्य
  12715. 9:34:03से अपना कंसर्न दिखाते हुए बोली। वो यह भी
  12716. 9:34:06देखना चाहती थी कि शौर्य [संगीत] उसको
  12717. 9:34:08क्या बोलता है। शौर्य पहले तो हिचकिचाया
  12718. 9:34:12फिर धीरे से बोला। दरअसल सुबह कनिका का
  12719. 9:34:15फोन आया था। कनिका ने उसे अभी मिलने के
  12720. 9:34:18लिए आयरन फिस्ट क्लब बुलाया है। इसलिए वह
  12721. 9:34:21अभी वहीं जा रहा है। शौर्य जानता था
  12722. 9:34:24[संगीत] कि शिप्रा को पता है कि शाम को वो
  12723. 9:34:26कनिका और उसके भाइयों से मिलने जाने वाला
  12724. 9:34:29है। इसलिए उससे ना बताना शिप्रा को उस पर
  12725. 9:34:32शक करने का मौका देना होगा। जबकि दूसरी
  12726. 9:34:35तरफ शिप्रा को खुशी हुई कि शौर्य ने उससे
  12727. 9:34:38कुछ छुपाने की कोशिश नहीं की। शौर्य ने
  12728. 9:34:41फोन रखा और फिर कार चलाने पर ध्यान
  12729. 9:34:43केंद्रित किया। थोड़ी देर बाद ही उसकी कार
  12730. 9:34:46आयरन फिस्ट क्लब के दरवाजे के पास थी।
  12731. 9:34:49उसने कार को पार्किंग में खड़ा किया और
  12732. 9:34:51अपना पास निकालकर क्लब के अंदर दाखिल हो
  12733. 9:34:54गया। आयरन फिस्ट क्लब विशालगढ़ का जाना
  12734. 9:34:57माना क्लब था। आज यहां मार्शल आर्ट का
  12735. 9:35:00कंपटीशन होने जा रहा था जिसके चाहने वालों
  12736. 9:35:02की भीड़ से यह क्लब अटा पड़ा था। क्लब के
  12737. 9:35:06अंदर आने के बाद शौर्य ने देखा कि उसके
  12738. 9:35:08सामने कुछ दूरी पर एक खुला रेस्टोरेंट
  12739. 9:35:10एरिया था। जिसके बगल में ही एक बड़ा सा
  12740. 9:35:13गुंबदनुमा हॉल था। ऊंचे गुंबदनुमा हॉल के
  12741. 9:35:17बीच में एक फाइटिंग रिंग मौजूद था। जहां
  12742. 9:35:19पर दो फाइटर अभी भी रिंग के अंदर फाइट कर
  12743. 9:35:22रहे थे। शौर्य उस हॉल में प्रवेश किया।
  12744. 9:35:25उसे पता नहीं था कि यहां कनिका और उसके
  12745. 9:35:27भाई उसे कहां मिलेंगे। हॉल लोगों के हुजूम
  12746. 9:35:30से भरा हुआ था। शौर्य इधर-उधर देखता हुआ
  12747. 9:35:33आगे बढ़ रहा था। अभी वह कुछ ही आगे बढ़ा
  12748. 9:35:36था कि किसी से उसकी टक्कर हो गई। उसने
  12749. 9:35:39ध्यान दिया तो देखा जिससे उसकी टक्कर हुई
  12750. 9:35:42वो एक जवान खूबसूरत लड़की थी। लड़की के
  12751. 9:35:45हाथ में एक कोल्ड ड्रिंक का केन था जो
  12752. 9:35:48शौर्य से धक्का लगने के कारण गिर गया था।
  12753. 9:35:50शौर्य को जैसे ही अपनी गलती का एहसास हुआ,
  12754. 9:35:53[संगीत] उसने उस लड़की से सॉरी कहा। लड़की
  12755. 9:35:57ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। पर अचानक
  12756. 9:35:59ही उसकी निगाह शौर्य के चेहरे पर गई। उसका
  12757. 9:36:03चेहरा देखकर उसके चेहरे पर चौंकने के भाव
  12758. 9:36:05आए। पर अगले ही पल उसने अपने चेहरे के भाव
  12759. 9:36:08को छुपा लिया और जल्दी से शौर्य से दूर
  12760. 9:36:11चली गई। शौर्य से कुछ दूर जाने के बाद वह
  12761. 9:36:14रुकी और फिर शौर्य की तरफ ध्यान से देखने
  12762. 9:36:16लगी। उस लड़की को देखकर ऐसा लगा कि वो
  12763. 9:36:19शौर्य को पहचानने की कोशिश कर रही है। उसे
  12764. 9:36:22जब यकीन हो गया कि वह कुछ गलत नहीं देख
  12765. 9:36:24रही तो उसने अपना फोन निकाला और किसी को
  12766. 9:36:27फोन लगाने लगी। अब आगे क्या होगा? कौन थी
  12767. 9:36:31यह लड़की? और वो शौर्य को कैसे जानती है?
  12768. 9:36:34शौर्य उस क्लब में कर्ण को ढूंढ रहा था।
  12769. 9:36:37उसने यह तो बताया ही नहीं था कि वह कहां
  12770. 9:36:40मिलेगा। उसने कर्ण को फोन लगाया तो दूसरी
  12771. 9:36:43[संगीत] तरफ से कर्ण ने फोन उठाकर पूछा।
  12772. 9:36:46तुम क्लब में आ गए हो क्या? हां। शौर्य ने
  12773. 9:36:50जवाब दिया। तो ठीक है। वीआईपी गैलरी के
  12774. 9:36:53पास आ जाओ। हम तुम्हें यहीं मिलेंगे। इसी
  12775. 9:36:56समय शौर्य ने देखा जो मैच रिंग में चल रहा
  12776. 9:36:59था वो खत्म हो गया था। और दोनों फाइटर
  12777. 9:37:02रिंग से बाहर आ गए थे। शौर्य ने अपनी नजर
  12778. 9:37:05उस पूरे एरीना में यह देखने के लिए घुमाया
  12779. 9:37:07कि वीआईपी गैलरी किधर है? तो उसकी निगाह
  12780. 9:37:10एक गैलरी की तरफ ठहर गई। क्योंकि शौर्य ने
  12781. 9:37:13गौर किया कि बाकी गैलरी की तुलना में उस
  12782. 9:37:16गैलरी की सिंग अरेंजमेंट बढ़िया थी।
  12783. 9:37:19बढ़िया सोफा लगा हुआ था और सभी सोफे के
  12784. 9:37:22सामने ग्लास की टेबल भी लगी हुई [संगीत]
  12785. 9:37:24थी जो यह साबित करने के लिए काफी थी कि
  12786. 9:37:27वही वीआईपी गैलरी हो सकती है। शौर्य ने उस
  12787. 9:37:31गैलरी के लोगों के ऊपर नजर दोहराई तो उसे
  12788. 9:37:34वहां पर बैठी हुई कनिका नजर आ गई थी।
  12789. 9:37:37शौर्य उसी ओर बढ़ गया। [संगीत]
  12790. 9:37:39जबकि इसी समय शौर्य से 10-15 कदम पीछे वही
  12791. 9:37:43[संगीत] लड़की जिससे शौर्य अभी थोड़ी देर
  12792. 9:37:45पहले टकराया था। शौर्य पर नजरें गराए उसका
  12793. 9:37:48पीछा कर रही थी। मोबाइल उसके कान पर लगा
  12794. 9:37:51था जिस पर वो धीरे-धीरे किसी से बात कर
  12795. 9:37:53रही थी। शौर्य का पीछा करते हुए उसने कहा
  12796. 9:37:57मैं सही कह रही हूं मास्टर। यह वही लड़का
  12797. 9:38:00है जिसका फोटो हमने देखा था। अगर आपको
  12798. 9:38:02यकीन नहीं है तो आप आकर खुद देख लीजिए।
  12799. 9:38:05थोड़े पल की खामोशी के बाद दूसरी तरफ से
  12800. 9:38:08आवाज आई। ठीक है। मैं थोड़ी देर में
  12801. 9:38:11तुम्हारे पास आता हूं। वैसे [संगीत] भी अब
  12802. 9:38:13हमारे लिए फाइट में कुछ रह नहीं गया। मेरे
  12803. 9:38:16आने तक तुम दूर से ही उस लड़के पर नजर
  12804. 9:38:18रखना। ठीक है मास्टर। लड़की ने इतना कहा
  12805. 9:38:21और फोन काट दिया। वह सावधानी से शौर्य पर
  12806. 9:38:24नजर जमाए रही। शौर्य कनिका के पास पहुंचा।
  12807. 9:38:28उसने देखा कनिका के साथ एक और लड़की बैठी
  12808. 9:38:31हुई थी। जबकि उसके साथ के सोफे पर ही एक
  12809. 9:38:34लड़का भी बैठा हुआ था। जिस तरह से तीनों
  12810. 9:38:36आपस में बातें कर रहे थे। उससे शौर्य समझ
  12811. 9:38:39गया कि यह लड़का कोई और नहीं कर्ण ही
  12812. 9:38:42होगा। उस लड़के की शक्ल भी बहुत हद तक
  12813. 9:38:45कनिका से मिलता था। जिससे शौर्य को और
  12814. 9:38:47पक्का हो गया कि जरूर यह कनिका का भाई
  12815. 9:38:50होगा। पर उसे यह पक्का नहीं था कि वो
  12816. 9:38:52कनिका से बड़ा है या छोटा। शौर्य कर्ण के
  12817. 9:38:56सामने जाकर बोला, "हेलो, तुम ही कर्ण हो।"
  12818. 9:39:00कर्ण ने शौर्य की आवाज सुनकर उसकी ओर देखा
  12819. 9:39:02और पहचानने की कोशिश करता हुआ बोला,
  12820. 9:39:05"अच्छा तो तुम ही शौर्य हो।" बड़ी देर कर
  12821. 9:39:08दी आते-आते। खैर, कोई बात नहीं। अभी भी
  12822. 9:39:12समय पर ही हो। अब विराज भाई का मैच होने
  12823. 9:39:14वाला है। पहले इसको [संगीत] देखते हैं फिर
  12824. 9:39:17बातें करते हैं। कनिका ने भी शौर्य को देख
  12825. 9:39:20लिया था। अगर उसको पता नहीं होता कि शौर्य
  12826. 9:39:23के साथ ही उसकी शादी फिक्स कर दी गई है तो
  12827. 9:39:25वह नॉर्मल व्यवहार करती। पर यह पता होने
  12828. 9:39:28पर कि इसी लड़के के साथ उसका रिश्ता तय कर
  12829. 9:39:30दिया गया था। वो थोड़ा नर्वस फील कर रही
  12830. 9:39:33थी। फिर भी उसने खुद की भावनाओं पर
  12831. 9:39:35कंट्रोल करते हुए शौर्य से हेलो किया और
  12832. 9:39:38बोली, कर्ण से तो मिल ही लिए। इससे और
  12833. 9:39:41मिलो। यह नंदिनी है। मेरी बुआ की बेटी।
  12834. 9:39:44शौर्य ने नंदिनी को हेलो किया। नंदिनी ने
  12835. 9:39:47गौर से शौर्य को देखा। सूरत से तो शौर्य
  12836. 9:39:50उसे पसंद आया था। [संगीत] पर जब उसे पहले
  12837. 9:39:52से ही यह पता था कि यह अभी-अभी राठौर
  12838. 9:39:55फैमिली में शामिल हुआ है। इसलिए इसकी
  12839. 9:39:57हैसियत प्रतीक की तरह तो नहीं ही होगा।
  12840. 9:40:00उसको अपने पापा का फैसला सही लगा कि उसके
  12841. 9:40:02लिए प्रतीक सही रहेगा। वो इस शहर में
  12842. 9:40:05प्रतीक के [संगीत] रुबाब से वाकिफ भी थी।
  12843. 9:40:07अभी तक उसके बारे में नहीं सोचने का मेन
  12844. 9:40:09कारण था कि राठौर फैमिली से उसके परिवार
  12845. 9:40:12की दुश्मनी चल रही थी। कनिका ने शौर्य को
  12846. 9:40:15बैठने का इशारा किया तो शौर्य कर्ण के
  12847. 9:40:17साइड में बैठ गया। कर्ण का ध्यान इस समय
  12848. 9:40:20रिंग की तरफ था। रिंग में अभी-अभी दो
  12849. 9:40:23फाइटर आए थे जो आज का फाइनल मुकाबला
  12850. 9:40:25[संगीत] था। कर्ण ने रिंग में मौजूद एक
  12851. 9:40:28लड़के की तरफ इशारा करते हुए कहा, वो
  12852. 9:40:31विराज भाई है। देखना कैसे वह सामने वाले
  12853. 9:40:34फाइटर को धूल चटाते हैं। शौर्य ने अब रिंग
  12854. 9:40:37की तरफ गौर से देखा। विराज भी शौर्य की
  12855. 9:40:40उम्र का ही होगा। उसने अपने शरीर पर अच्छी
  12856. 9:40:42खासी मेहनत की होगी यह उसको देखकर ही लगता
  12857. 9:40:45था। शरीर का मशल उसकी शरीर की मजबूती का
  12858. 9:40:48वर्णन खुद कर रहा था। शौर्य भी अब
  12859. 9:40:51उत्सुकता से उस फाइट को देखने लगा। फाइट
  12860. 9:40:54शुरू हो गई थी। विराज का प्रतिद्वंदी भी
  12861. 9:40:56विराज से कम स्ट्रांग नजर नहीं आ रहा था।
  12862. 9:40:59पल-पल फाइट का रोमांच बढ़ता जा रहा था।
  12863. 9:41:02मुकाबला कांटे का था। पर लास्ट में फाइनली
  12864. 9:41:04विराज ने अपने प्रतिद्वंदी को परास्त कर
  12865. 9:41:06दिया था। कर्ण के साथ कनिका और नंदिनी भी
  12866. 9:41:10जोश में चिल्लाने लगे थे। सभी बहुत खुश
  12867. 9:41:13थे। देखा मैंने तो पहले ही कहा था। विराज
  12868. 9:41:16भाई का जवाब नहीं। कर्ण शौर्य के कंधे पर
  12869. 9:41:19हाथ मारता हुआ बोला। शौर्य कर्ण की
  12870. 9:41:22उत्तेजना को समझ रहा था। इसलिए उसने कोई
  12871. 9:41:25खास रिएक्शन नहीं दिया। हां, वो भी सबके
  12872. 9:41:28साथ ताली बजाकर विराज की जीत की सराहना
  12873. 9:41:31किया। इस बीच एंकर ने अनाउंस किया कि
  12874. 9:41:34लगातार दूसरी बार आयरन फिस्ट फाइट क्लब ने
  12875. 9:41:38यह चैंपियनशिप अपने नाम की है। मैच खत्म
  12876. 9:41:41होने के बाद धीरे-धीरे भीड़ छटने लगी थी।
  12877. 9:41:44कर्ण भी अपनी जगह से उठा और कनिका से
  12878. 9:41:47बोला, चलो, हम लोग भी रेस्टोरेंट एरिया
  12879. 9:41:49में चलते हैं। विराज भाई वहीं आ जाएंगे।
  12880. 9:41:53कनिका और नंदिनी भी खड़ी हो गई। शौर्य
  12881. 9:41:55पहले ही कर्ण की बात पर खड़ा हो गया था।
  12882. 9:41:58सभी कर्ण के पीछे हो लिए। थोड़ी देर में
  12883. 9:42:01ही सभी पास के रेस्टोरेंट में पहुंच गए।
  12884. 9:42:04कर्ण ने विराज को फोन करके बता दिया कि
  12885. 9:42:06उसे कहां आना है। कर्ण ने वेटर के आने पर
  12886. 9:42:10सबके लिए ऑर्डर किया और फिर शौर्य की तरफ
  12887. 9:42:12पलट कर बोला। हां तो शौर्य क्या तुम
  12888. 9:42:16बताओगे कि तुम अभी क्या करते हो?
  12889. 9:42:19मैं मैं अभी बिग बुल के एडवरटाइजिंग
  12890. 9:42:22डिपार्टमेंट में प्रोडक्शन का काम देखता
  12891. 9:42:24हूं। शौर्य ने जवाब दिया, क्या तुम यह कह
  12892. 9:42:28रहे हो कि तुम किसी और की कंपनी में इस
  12893. 9:42:31तरह का काम कर रहे हो? कर्ण आश्चर्य से
  12894. 9:42:34बोला, तुम्हारे दादाजी की इतनी सारी
  12895. 9:42:36कंपनियां होते हुए भी तुम किसी और की
  12896. 9:42:39कंपनी में काम करते हो। हां, इसमें
  12897. 9:42:43आश्चर्य की क्या बात है? मैं अपने दादाजी
  12898. 9:42:45के द्वारा तो एक दिन पहले ही स्वीकार किया
  12899. 9:42:48गया हूं। आगे जाकर क्या करूंगा पता नहीं।
  12900. 9:42:51पर वर्तमान में तो यही कर रहा हूं। हां,
  12901. 9:42:54इसके अलावे एक्टिंग के फील्ड में भी हाथ
  12902. 9:42:57आजमा रहा हूं। देखता हूं किस्मत कहां ले
  12903. 9:43:00जाती है। शौर्य हल्की मुस्कान के साथ
  12904. 9:43:03बोला। उसने साफ महसूस किया कि कर्ण को
  12905. 9:43:06उसके काम के बारे में पता चलने पर बहुत
  12906. 9:43:09निराशा हुई।
  12907. 9:43:11शौर्य मुझे नहीं पता तुम इस तरह का काम
  12908. 9:43:14क्यों कर रहे हो। पर तुम्हें नहीं लगता कि
  12909. 9:43:17राठौर फैमिली का सदस्य होने के कारण
  12910. 9:43:19तुम्हें कुछ बड़ा करना चाहिए। कर्ण निराश
  12911. 9:43:22स्वर में बोला मेरे लिए तो कोई भी काम
  12912. 9:43:25छोटा बड़ा नहीं होता। अभी कुछ दिन पहले ही
  12913. 9:43:28नॉलेज के लिए मैंने यह काम शुरू किया है।
  12914. 9:43:31इसके अलावे भी कुछ और कामों में हाथ डाला
  12915. 9:43:33है। पर वही बात है ना कि जब तक इन कामों
  12916. 9:43:36का आउटपुट बाहर दिखने ना लगे तब तक उसकी
  12917. 9:43:39चर्चा करने का कोई फायदा नहीं। शौर्य कर्ण
  12918. 9:43:42के सवालों से पीछा छुड़ाने की नियत से
  12919. 9:43:44बोला। तुम वसंत विहार में भी कुछ कर रहे
  12920. 9:43:47हो क्या? कनिका ने वसंत विहार वाली घटना
  12921. 9:43:50को याद करके कहा। हां, हर्षल मेहता के साथ
  12922. 9:43:54वहां पर कुछ इन्वेस्टमेंट किया है। देखते
  12923. 9:43:57हैं उसका क्या परिणाम रहता है। शौर्य ने
  12924. 9:44:00जवाब दिया। कनिका को समझ नहीं आया कि वो
  12925. 9:44:03इस बात को किस तरह समझे। फिर उसे शिप्रा
  12926. 9:44:06की बात का ध्यान आया। उसे लगा जरूर शौर्य
  12927. 9:44:09हर्षल मेहता का सिर्फ नाम का ही सहयोगी
  12928. 9:44:12होगा। नहीं तो वह उसे गर्व से बताता कि वह
  12929. 9:44:15हर्षल मेहता के साथ कितने परसेंट का
  12930. 9:44:17पार्टनर है। कनिका को जो कुछ उम्मीद शौर्य
  12931. 9:44:20से थी भी वह भी खत्म हो गई। अब वो इसी सोच
  12932. 9:44:24में थी कि वो कैसे शौर्य से अपना पीछा
  12933. 9:44:26छुड़ाए। वो कुछ बोलती उससे पहले कर्ण बोला
  12934. 9:44:31तुम्हें पता है शौर्य? मैंने तुम्हें यहां
  12935. 9:44:34क्यों बुलाया है?
  12936. 9:44:35शौर्य ने पहले एक बार सबके चेहरे की तरफ
  12937. 9:44:38ध्यान दिया और बोला, हां, यह इतना भी
  12938. 9:44:41मुश्किल नहीं है कि यह समझ नहीं आए कि
  12939. 9:44:44तुमने मुझे यहां क्यों बुलाया। कल
  12940. 9:44:46तुम्हारे दादाजी और मेरे पापा ने मिलकर
  12941. 9:44:49तुम्हारी बहन के साथ मेरा रिश्ता तय कर
  12942. 9:44:51दिया है। तो स्वाभाविक है इस कारण ही तुम
  12943. 9:44:54मुझसे मिलना चाहते होंगे। शौर्य कर्ण की
  12944. 9:44:57आंखों में देखता हुआ बोला, "क्या तुम्हें
  12945. 9:44:59लगता है कि तुम हमारी बहन के काबिल हो?"
  12946. 9:45:02इसी समय विराज उस केबिन के अंदर आते हुए
  12947. 9:45:05बोला, विराज ने अपना कपड़ा चेंज कर लिया
  12948. 9:45:08था और अब वो फॉर्मल पेंट शर्ट में एक
  12949. 9:45:11स्टाइलिश लड़के की तरह लग रहा था। अगर मैं
  12950. 9:45:14पहले ही यह मान लूंगा कि मैं किस काबिल
  12951. 9:45:16हूं और किस काबिल नहीं। तो फिर तो मेरा
  12952. 9:45:19आगे बढ़ने का रास्ता ही अवरुद्ध हो जाएगा।
  12953. 9:45:22इसलिए मैं इन सब बातों [संगीत] के बारे
  12954. 9:45:24में सोचता ही नहीं। बस अपना काम किए जाता
  12955. 9:45:27हूं। शौर्य ने विराज को जवाब दिया। देखो
  12956. 9:45:31शौर्य मेरी [संगीत] तुम्हारे साथ कोई
  12957. 9:45:33दुश्मनी नहीं है। पर मैं चाहता हूं कि तुम
  12958. 9:45:36इस शादी से इंकार कर दो। विराज भावहीन
  12959. 9:45:39स्वर में बोला तुम यह क्यों चाहते हो कि
  12960. 9:45:42मैं अपनी तरफ से इस [संगीत] शादी से इंकार
  12961. 9:45:44कर दूं। जबकि मुझे तो यह रिश्ता पसंद है।
  12962. 9:45:48अगर तुम्हें मेरे साथ शादी नहीं करनी तो
  12963. 9:45:50तुम्हें अपना स्टैंड अपने दादाजी के सामने
  12964. 9:45:52रखना चाहिए। शौर्य ने अपनी बात स्पष्टता
  12965. 9:45:56से रखी। [संगीत]
  12966. 9:45:57तुम समझ नहीं रहे जब दादाजी तुम्हारे पापा
  12967. 9:46:00के साथ मिलकर कनिका का रिश्ता तुम्हारे
  12968. 9:46:02साथ कर रहे थे तो उस समय हम लोग वहां
  12969. 9:46:05मौजूद नहीं थे। इसलिए हम लोग इस मामले में
  12970. 9:46:09कुछ कर नहीं सकते थे। पर तुम तो वहां
  12971. 9:46:11मौजूद थे। तुम्हें तो अपनी सहमति देने से
  12972. 9:46:14पहले एक बार कनिका [संगीत] का विचार जानना
  12973. 9:46:17चाहिए था। अभी भी मेरा जवाब वही है। अगर
  12974. 9:46:20तुम्हारी बहन को यह रिश्ता नहीं पसंद तो
  12975. 9:46:23उसे खुद सामने आकर इस शादी से इंकार करना
  12976. 9:46:26चाहिए। शौर्य अपनी बात पर अड़ा रहा। तुम
  12977. 9:46:30समझ क्यों नहीं रहे? मेरे दादाजी मेरी बात
  12978. 9:46:32नहीं सुनने वाले। पर तुम्हारी बात अलग है।
  12979. 9:46:35कनिका अपना दांत पीसती हुई बोली। यह तुम
  12980. 9:46:38गलत समझ रही हो। मेरी स्थिति भी तुमसे कुछ
  12981. 9:46:41खास अलग नहीं है। दोनों परिवार की दुश्मनी
  12982. 9:46:45वर्षों से चली आ रही है। इस दुश्मनी को
  12983. 9:46:47खत्म करने की यही शर्त है कि मुझे
  12984. 9:46:49तुम्हारे साथ शादी करनी पड़ेगी और मैं
  12985. 9:46:52अपनी तरफ से इंकार करके फिर से दोनों
  12986. 9:46:54परिवार के बीच की दुश्मनी को बरकरार रखने
  12987. 9:46:57के पक्ष में नहीं हूं। शौर्य ने जवाब
  12988. 9:46:59दिया। शौर्य की बात सुनकर कनिका कुछ बोल
  12989. 9:47:02नहीं पाई। वह विराज की ओर देखने लगी। अब
  12990. 9:47:05उसे विराज से ही उम्मीद [संगीत] थी। देखो
  12991. 9:47:08शौर्य जहां इतने वर्षों से यह दुश्मनी चली
  12992. 9:47:11आ रही है, वहां कुछ और समय चलती रहे तो
  12993. 9:47:14कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। कनिका का एक
  12994. 9:47:17लड़की होते हुए इस तरह का कदम उठाना ठीक
  12995. 9:47:19नहीं है। इसलिए तुम्हें खुद ही अपनी तरफ
  12996. 9:47:22से इस रिश्ते से इंकार कर देना चाहिए।
  12997. 9:47:24विराज शौर्य को प्रेशराइज करते हुए बोला,
  12998. 9:47:27"तुम मुझसे कुछ ज्यादा ही उम्मीद कर रहे
  12999. 9:47:29हो। मैं अपनी तरफ से तुम्हें स्पष्ट कर
  13000. 9:47:31दूं कि मैं ऐसा कुछ नहीं करने वाला। अगर
  13001. 9:47:34कनिका यह रिश्ता नहीं करना चाहती तो उसे
  13002. 9:47:36खुद सामने से इंकार करना पड़ेगा। पर मुझे
  13003. 9:47:39एक बात समझ नहीं आ रही कि कनिका मुझसे
  13004. 9:47:42शादी करना क्यों नहीं चाहती? शौर्य ने
  13005. 9:47:44विराज की बात से सीधा इंकार ही नहीं किया
  13006. 9:47:47बल्कि उसने यह भी पूछ लिया कि कनिका उससे
  13007. 9:47:49शादी करना क्यों नहीं चाहती? अगर तुम
  13008. 9:47:52जानना ही चाहते हो तो सुनो। तुम इस काबिल
  13009. 9:47:55नहीं हो कि कनिका तुमसे शादी करे। विराज
  13010. 9:47:58थोड़ी नाराजगी भरे [संगीत] स्वर में बोला।
  13011. 9:48:00अब आगे क्या होगा? क्या कनिका खुद शौर्य
  13012. 9:48:04से अपने रिश्ते को तुरवा सकती है? जो
  13013. 9:48:06लड़की शौर्य पर नजर रखे हुए है, वह शौर्य
  13014. 9:48:08को कैसे जानती है? वह लड़की जिसे मास्टर
  13015. 9:48:11कह रही है, वह कौन है? एकदम सही कहा कि
  13016. 9:48:14मैं इस काबिल नहीं हूं कि कनिका से शादी
  13017. 9:48:17कर सकूं। पर तुम कितने काबिल हो यह तो
  13018. 9:48:20साबित करो। अगर तुम इतने ही काबिल हो तो
  13019. 9:48:23फिर खुद ही क्यों नहीं मना कर रहे इस शादी
  13020. 9:48:25से? मेरे सामने यूं गिरगिराने का क्या
  13021. 9:48:28मतलब हुआ? शौर्य विराज की बात सुनकर तैश
  13022. 9:48:30में बोला। शौर्य की बात विराज को भड़काने
  13023. 9:48:33के लिए काफी था। उसे गुस्सा तो बहुत आया
  13024. 9:48:36पर उसने खुद पर काबू किया। अगर वो यहां
  13025. 9:48:38कुछ करता और यह बात उसके दादाजी को पता चल
  13026. 9:48:41जाती तो शायद [संगीत] यह उसके लिए अच्छा
  13027. 9:48:43नहीं होता। वो खुद को कंट्रोल करते हुए
  13028. 9:48:46बोला, देखो शौर्य, मैं बात को बढ़ाना नहीं
  13029. 9:48:49चाहता। पर तुम्हें यह बात माननी पड़ेगी।
  13030. 9:48:51अगर तुम चाहो तो हम [संगीत] तुम्हें इसके
  13031. 9:48:53लिए कुछ हरजाना भी दे देंगे। पर तुम्हें
  13032. 9:48:55अपनी तरफ से ही इस शादी से इंकार करना
  13033. 9:48:58पड़ेगा। मैं समझता हूं कि तुम कनिका से
  13034. 9:49:00शादी करके अपनी हैसियत बढ़ाना चाहते हो
  13035. 9:49:02क्योंकि तुम्हें पता है कि तुम्हें चाहकर
  13036. 9:49:04भी कभी कनिका जैसी पत्नी तो मिल नहीं
  13037. 9:49:06सकती। लेकिन यह भी सच है कि यह सब तुम
  13038. 9:49:09पैसे की लालच में कर रहे हो। हम इसके लिए
  13039. 9:49:11तुम्हारी जो भी डिमांड होगी, उसको पूरी
  13040. 9:49:14करने की कोशिश करेंगे। पर पहले [संगीत]
  13041. 9:49:16तुम्हें अपनी तरफ से इस रिश्ते के लिए
  13042. 9:49:18इंकार करना पड़ेगा। इस रिश्ते की डिमांड
  13043. 9:49:20तुम्हारे दादाजी की तरफ से की गई थी ना कि
  13044. 9:49:23मेरी तरफ से और यह शर्त थी दोनों परिवार
  13045. 9:49:26की दुश्मनी खत्म करने की। मेरे पिताजी
  13046. 9:49:28पहले से ही इस अपराध बोध से ग्रसित हैं कि
  13047. 9:49:31उनके कारण ही इन दोनों परिवार के बीच में
  13048. 9:49:33दुश्मनी हो रखी है और अब जब तुम्हारे
  13049. 9:49:36दादाजी की तरफ से इस दुश्मनी को खत्म करने
  13050. 9:49:38के लिए यह रिश्ता तय किया गया है तो मैं
  13051. 9:49:40इससे इंकार करके फिर से दुश्मनी को बरकरार
  13052. 9:49:42रखना नहीं चाहता। तुम मुझे पसंद नहीं करती
  13053. 9:49:45तो तुम क्यों नहीं जाकर खुद ही यह बात
  13054. 9:49:47अपने दादाजी को बता देती हो। इससे तुम्हें
  13055. 9:49:49शादी भी नहीं करनी पड़ेगी और कम से कम फिर
  13056. 9:49:52हम दोनों के परिवार के बीच की दुश्मनी तो
  13057. 9:49:54खत्म हो जाएगी। शौर्य ने उन सबको समझाने
  13058. 9:49:57की कोशिश की कि वो क्यों अपनी तरफ से इस
  13059. 9:49:59शादी से इंकार नहीं कर सकता? क्या तुम
  13060. 9:50:02हमें बेवकूफ समझ रहे हो जो हम तुम्हारी
  13061. 9:50:04बात पर विश्वास कर लेंगे? मैं अच्छी तरह
  13062. 9:50:06समझता हूं कि यह सिर्फ तुम्हारा दिखावा
  13063. 9:50:08है। तुम्हारा मकसद मैं अच्छे से समझता
  13064. 9:50:11हूं। कर्ण को शौर्य की बात पर विश्वास
  13065. 9:50:13नहीं हुआ था [संगीत] कि शौर्य का इस शादी
  13066. 9:50:15के लिए तैयार होने के पीछे सिर्फ दोनों
  13067. 9:50:18परिवार के बीच की दुश्मनी को खत्म करना ही
  13068. 9:50:20मकसद था। वो यह बात अच्छे से समझता था कि
  13069. 9:50:23उसकी बहन से शादी करने के लिए अच्छे-अच्छे
  13070. 9:50:25[संगीत]
  13071. 9:50:26लड़के लाइन में लगे हुए थे। पता नहीं उसके
  13072. 9:50:28दादाजी को क्या सुझा जो उन्होंने अचानक
  13073. 9:50:30शौर्य से कनिका की शादी फिक्स कर दी। देखो
  13074. 9:50:34जैसा तुम जता रहे हो कि इन दोनों परिवार
  13075. 9:50:36के बीच में बहुत दुश्मनी है। ऐसा भी नहीं
  13076. 9:50:39है। [संगीत] एक समय था जब ऐसा वाकई था पर
  13077. 9:50:42धीरे-धीरे दोनों परिवार अपने आप में ही
  13078. 9:50:44सिमट गए थे। ना हमें राठौर फैमिली से मतलब
  13079. 9:50:46था और ना ही राठौर फैमिली को हमसे। बस यही
  13080. 9:50:49स्थिति थी। पर तुम्हारे पापा के आने के
  13081. 9:50:52बाद जरूर दादाजी का जख्म हरा हो गया था और
  13082. 9:50:55वह गुस्से में तुम्हारे [संगीत] घर चले गए
  13083. 9:50:56थे। अगर तुम इस रिश्ते से इंकार भी करोगे
  13084. 9:50:59तो दोनों परिवार की सेहत पर कुछ ज्यादा
  13085. 9:51:01फर्क नहीं पड़ेगा। बस यही होगा कि फिर
  13086. 9:51:04दोनों परिवार एक दूसरे से कोई मतलब नहीं
  13087. 9:51:06रखेंगे। इससे ज्यादा कुछ नहीं होने वाला
  13088. 9:51:08है। दोनों परिवार में ऐसी दुश्मनी नहीं थी
  13089. 9:51:11कि दोनों एक दूसरे को मारने काटने के पीछे
  13090. 9:51:14पड़े हुए थे। तो यह सिर्फ तुम्हारा बहाना
  13091. 9:51:16है। विराज शौर्य को दोनों परिवार की
  13092. 9:51:19स्थिति को समझने [संगीत] की कोशिश करते
  13093. 9:51:20हुए बोला, "चलो एक मिनट के लिए मैं यह मान
  13094. 9:51:23भी लेता हूं कि जो तुम कह रहे हो वो ठीक
  13095. 9:51:25है। तो फिर तुम ऐसा क्यों नहीं करते कि
  13096. 9:51:28तुम खुद ही अपनी तरफ से इस रिश्ते के लिए
  13097. 9:51:30मना कर दो। तुम मुझसे ऐसी उम्मीद क्यों कर
  13098. 9:51:32रहे हो? तुम ऐसा भी समझ सकते हो कि मुझे
  13099. 9:51:35कनिका पसंद है और मैं सच में उससे शादी
  13100. 9:51:37करना चाहता हूं। तो फिर मैं कैसे इस
  13101. 9:51:39रिश्ते के लिए मना कर सकता हूं?"
  13102. 9:51:41शौर्य अपनी दलील देता हुआ बोला, शौर्य इन
  13103. 9:51:45भाई बहनों को इतना मजबूर कर देना चाहता था
  13104. 9:51:47कि वह खुद ही अपनी तरफ से इस रिश्ते के
  13105. 9:51:49लिए इंकार कर दे। जिससे उसके ऊपर कल कोई
  13106. 9:51:52इल्जाम नहीं आए कि उसने अपने पिताजी की
  13107. 9:51:54बात की लाज नहीं रखी। आखिर तुम्हारा मकसद
  13108. 9:51:57सामने आ ही गया। तो पहले यह बड़ी बात
  13109. 9:52:00बोलने का क्या मतलब था कि तुम दोनों
  13110. 9:52:02परिवार के बीच की दुश्मनी खत्म करना चाहते
  13111. 9:52:05हो? मुझे पहले से ही तुम्हारी नियत पर शक
  13112. 9:52:08था। [संगीत] कनिका बीच में आती हुई बोली
  13113. 9:52:10यह तुम गलत कह रही हो। किसी को पसंद करना
  13114. 9:52:13गलत कैसे हो सकता है? कोई भी अपने लिए
  13115. 9:52:15बेस्ट जीवन साथी चाहता है तो अगर मैं ऐसा
  13116. 9:52:18चाहता हूं तो इसमें गलत क्या है? शौर्य
  13117. 9:52:21हल्की मुस्कान के साथ बोला, शौर्य कि इस
  13118. 9:52:24बात ने कनिका को स्पीचलेस कर दिया। उसे
  13119. 9:52:27समझ नहीं आया कि वो शौर्य की इस बात का
  13120. 9:52:30क्या जवाब दे। उसे शिप्रा की कहीं बात याद
  13121. 9:52:33आई कि वह जिस भी लड़की को देखता है उसको
  13122. 9:52:36उसी से प्यार हो जाता है। कर्ण और विराज
  13123. 9:52:39भी अब यह नहीं समझ पा रहे थे कि वे शौर्य
  13124. 9:52:42को कैसे इस रिश्ते [संगीत] से मना करने के
  13125. 9:52:44लिए मजबूर करें क्योंकि वह यह थी समझते थे
  13126. 9:52:48कि उसके दादाजी उनकी इस बात को तो मानने
  13127. 9:52:50वाले हैं नहीं कि वह कनिका की रिश्ते की
  13128. 9:52:53बात को भूल जाए। उन्हें भी अपनी जुबान से
  13129. 9:52:56पीछे हटना मंजूर नहीं था। जबकि उन्हें
  13130. 9:52:58लगता था कि उनका यह फैसला सही है। जिस तरह
  13131. 9:53:02से शौर्य [संगीत] भी अपनी जिद पर अड़ा हुआ
  13132. 9:53:04था कि वह अपनी तरफ से इस रिश्ते से पीछे
  13133. 9:53:06नहीं हटेगा। उससे कनिका को और पक्का यकीन
  13134. 9:53:10होता जा रहा था कि यह सब शौर्य की सोची
  13135. 9:53:12समझी प्लान के तहत ही हो रहा है। कनिका
  13136. 9:53:15मायूस होकर विराज की ओर देखने लगी कि अब
  13137. 9:53:18वो क्या करें। विराज भी समझ गया कि शौर्य
  13138. 9:53:21घाग लड़का है। [संगीत] वो इतनी आसानी से
  13139. 9:53:23उसकी बातों में नहीं आने वाला है। वो
  13140. 9:53:26शौर्य को धमका भी नहीं सकता था। अगर उसके
  13141. 9:53:28दादाजी को पता चल गया कि उन सब [संगीत] ने
  13142. 9:53:31शौर्य को धमका कर इस रिश्ते से इंकार करने
  13143. 9:53:33के लिए प्रेशराइज किया तो उन सब की खैर
  13144. 9:53:35नहीं। विराज को यह डर सताने भी लगा कि
  13145. 9:53:38कहीं शौर्य यह बात उसके दादाजी के सामने
  13146. 9:53:41जाहिर ना कर दे कि उसने उसके साथ क्या
  13147. 9:53:43करने की कोशिश की। अचानक विराज ने अपना
  13148. 9:53:46इरादा बदल लिया और वह मुस्कुराते हुए
  13149. 9:53:49शौर्य से बोला मानना पड़ेगा तुम कनिका के
  13150. 9:53:52लिए एकदम सही लड़के हो। तुम मेरी परीक्षा
  13151. 9:53:55में पास हुए। मैं यही देखना चाहता था कि
  13152. 9:53:58तुम अपनी बात के कितने पक्के हो। मुझे लगा
  13153. 9:54:00था कि कहीं लालच देने या मुसीबत में तुम
  13154. 9:54:03कनिका का साथ तो नहीं छोड़ दोगे। पर मानना
  13155. 9:54:06पड़ेगा कि दादाजी ने कनिका के लिए
  13156. 9:54:07तुम्हारा चुनाव करके एकदम सही फैसला किया।
  13157. 9:54:11विराज [संगीत] को यूं गिरगिट की तरह रंग
  13158. 9:54:13बदलते देखकर शौर्य को बहुत आश्चर्य हुआ।
  13159. 9:54:16उसे समझ नहीं आया कि विराज में अचानक यह
  13160. 9:54:18परिवर्तन क्यों आया। आश्चर्य सिर्फ शौर्य
  13161. 9:54:21को ही नहीं हुआ बल्कि कर्ण, कनिका और
  13162. 9:54:23नंदिनी को भी हो रहा था कि यह अचानक विराज
  13163. 9:54:26का सुर क्यों चेंज हो गया। उन्हें भी कुछ
  13164. 9:54:29समझ में नहीं आया। पर इतना तो वह समझ गए
  13165. 9:54:32कि इसके [संगीत] पीछे विराज का कुछ ना कुछ
  13166. 9:54:33रीजन तो जरूर होगा। पर इस सबसे कनिका बड़ी
  13167. 9:54:36दुखी थी कि उसका प्लान शौर्य पर वर्क नहीं
  13168. 9:54:39किया। तो क्या तुम अभी तक मुझे जांच रहे
  13169. 9:54:42थे कि मैं कनिका के लिए सही लड़का हूं या
  13170. 9:54:44नहीं? शौर्य आश्चर्य के साथ बोला तो और
  13171. 9:54:48क्या और मुझे यह कहने में कोई गुरेज नहीं
  13172. 9:54:51है कि तुम इसमें पास हुए। विराज शौर्य की
  13173. 9:54:53तारीफ करते हुए बोला। विराज की बात सुनकर
  13174. 9:54:56कनिका के सीने पर तो सांप लौट रहे थे। पर
  13175. 9:54:59उसने अपने चेहरे से यह जाहिर होने नहीं
  13176. 9:55:01दिया। इसी समय कनिका का फोन रिंग करने
  13177. 9:55:04लगा। उसने नंबर की तरफ देखा तो शिप्रा का
  13178. 9:55:07कॉल आ रहा था। उसने कॉल उठाया तो दूसरी
  13179. 9:55:10तरफ से शिप्रा ने कहा कि वह आयरन फिस्ट
  13180. 9:55:12फाइट क्लब के बाहर ही खड़ी है। वह कहां
  13181. 9:55:15मिलेगी? कनिका ने कहा वो वहीं खड़ी रहे।
  13182. 9:55:18वो बाहर आती है उसको लेने के लिए। इतना
  13183. 9:55:21कहकर कनिका अपनी जगह से खड़ी हो गई और
  13184. 9:55:24बाहर जाने लगी। तो कर्ण ने पूछा अब तुम
  13185. 9:55:27कहां जा रही हो? मेरी एक दोस्त आई है। वो
  13186. 9:55:30बाहर खड़ी है। अभी उसको लेकर आती हूं।
  13187. 9:55:33इतना कहकर कनिका वहां से चली गई। इसी समय
  13188. 9:55:36उस रेस्टोरेंट के एक दूसरे टेबल पर एक
  13189. 9:55:39लड़की एक लगभग 60 65 साल के वृद्ध व्यक्ति
  13190. 9:55:42के [संगीत] साथ बैठी ड्रिंक ले रही थी।
  13191. 9:55:44लड़की की पीठ शौर्य की तरफ था। जबकि बूढ़े
  13192. 9:55:47व्यक्ति का चेहरा शौर्य की तरफ था। अपनी
  13193. 9:55:50जगह पर बैठा वो वृद्ध शौर्य को स्पष्ट देख
  13194. 9:55:53सकता था। उसके चेहरे पर हैरानी के साथ
  13195. 9:55:55अविश्वास भी नजर आ रहा था। उसने सामने
  13196. 9:55:58बैठी लड़की से सहमति जताते हुए कहा,
  13197. 9:56:01"तुमने सही कहा रूबिया? यह वही फोटो वाला
  13198. 9:56:04लड़का है। पर मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो
  13199. 9:56:06रहा है कि ऐसा कैसे हो सकता है। इसका मतलब
  13200. 9:56:10उस समय दूसरी पार्टी ने जो बात कही थी वो
  13201. 9:56:12सच था। [संगीत]
  13202. 9:56:13यानी वो जो लाश मिली थी वो महंत का ही था।
  13203. 9:56:17अब इसमें शक की कोई गुंजाइश कहां रह गई
  13204. 9:56:19मास्टर? अब आप यह बताइए कि [संगीत] आगे
  13205. 9:56:22क्या करना है? महंत की कुर्बानी हम यूं
  13206. 9:56:24व्यर्थ तो नहीं जाने दे सकते। लड़की
  13207. 9:56:26[संगीत] गंभीरता से बोली, अभी ज्यादा कुछ
  13208. 9:56:30करने की जरूरत नहीं है। अभी बस पता करना
  13209. 9:56:33है कि यह रहता कहां है। अच्छे से रेकी
  13210. 9:56:36करने के बाद ही हम कोई एक्शन लेंगे। इस
  13211. 9:56:39बीच पार्टी [संगीत] से बात करके उस तय
  13212. 9:56:41अमाउंट की बात भी तो करनी है जो हमें उनसे
  13213. 9:56:44लेनी है। मास्टर ने शौर्य की ओर देखते हुए
  13214. 9:56:47लड़की से यह बात कही। पर यह समझ नहीं आ
  13215. 9:56:50रहा [संगीत] कि चौहान फैमिली से इस लड़के
  13216. 9:56:52का क्या संबंध है। लड़की मास्टर की ओर
  13217. 9:56:55देखते हुए बोली जो भी हो इससे कोई फर्क
  13218. 9:56:58नहीं पड़ता कि इसका संबंध किस फैमिली से
  13219. 9:57:00है। हमने [संगीत] जो काम पहले ले लिया है
  13220. 9:57:03उसको हर हाल में पूरा करना है। और सबसे
  13221. 9:57:05बड़ी बात यह है कि इसके चक्कर में हमारा
  13222. 9:57:08एक साथी पहले ही मारा जा चुका है। तो उसकी
  13223. 9:57:11कुर्बानी का बदला तो लेना पड़ेगा। मास्टर
  13224. 9:57:13दृढ़ इरादों के साथ बोला मैं भी यही चाहती
  13225. 9:57:17हूं मास्टर। महंत की कुर्बानी हम यूं ही
  13226. 9:57:20व्यर्थ नहीं जाने देंगे। बोलते हुए लड़की
  13227. 9:57:23की आंखों में खून उतर आया था। मैं सिकंदर
  13228. 9:57:26को बुला लेता हूं। तुम्हारे साथ वो भी इस
  13229. 9:57:28काम में रहेगा। पर एक बात का ध्यान रखना
  13230. 9:57:31कि जोश में आकर जल्दबाजी में कोई [संगीत]
  13231. 9:57:33काम मत करना। जो भी करना है वह ठंडे दिमाग
  13232. 9:57:36से सोच विचार करना है। पहले [संगीत] वाली
  13233. 9:57:38गलती को दोहराना नहीं है। मास्टर लड़की को
  13234. 9:57:41समझाते हुए बोला। जी मास्टर। [संगीत]
  13235. 9:57:44लड़की ने मास्टर की बात से अपनी सहमति
  13236. 9:57:47जताई। दूसरी तरफ कनिका शिप्रा को लेकर
  13237. 9:57:50रेस्टोरेंट में वापस आई। वो आकर टेबल पर
  13238. 9:57:53बैठती हुई अपने भाइयों से शिप्रा का परिचय
  13239. 9:57:55कराया और फिर शौर्य की ओर देखती हुई बोली
  13240. 9:57:58[संगीत]
  13241. 9:57:59इसको तो तुम पहचानती ही होगी। शिप्रा कुछ
  13242. 9:58:02कहती उससे पहले शौर्य शिप्रा से बोला तुम
  13243. 9:58:06यहां? कनिका शौर्य की बात सुनकर बोली
  13244. 9:58:10क्यों यह यहां नहीं हो सकती? यह [संगीत]
  13245. 9:58:12भी यहां विराज भाई का मैच देखने आने वाली
  13246. 9:58:14थी पर लेट हो गई।
  13247. 9:58:17नहीं मेरा यह कहने का मतलब नहीं था। शौर्य
  13248. 9:58:20नर्वस दिखाई देने लगा। उसके चेहरे से ऐसा
  13249. 9:58:22लग रहा था जैसे उसकी कोई चोरी पकड़ी
  13250. 9:58:24[संगीत] गई। शौर्य यह सब जानबूझकर कर रहा
  13251. 9:58:27था। उसे तो पहले से पता था कि शिप्रा को
  13252. 9:58:30भी यहां आना था। उसे तो इसी बात की चिंता
  13253. 9:58:33थी कि शिप्रा [संगीत] अभी तक आई क्यों
  13254. 9:58:35नहीं। जबकि शिप्रा की खूबसूरती देखकर कर्ण
  13255. 9:58:38और विराज भी शिप्रा को घूरे जा रहे थे।
  13256. 9:58:40उन्हें उम्मीद नहीं था कि कनिका की कोई
  13257. 9:58:43इतनी खूबसूरत दोस्त भी है जिससे वह आज तक
  13258. 9:58:45मिले नहीं। शौर्य को कर्ण और विराज की नजर
  13259. 9:58:48शिप्रा पर गरा देखकर जलन भी हुई। [संगीत]
  13260. 9:58:51कनिका तुम्हारी इतनी खूबसूरत दोस्त आने
  13261. 9:58:54वाली थी तुमने इस बारे में बताया नहीं था।
  13262. 9:58:56कर्ण शिप्रा की खूबसूरती की तारीफ करती
  13263. 9:58:59हुई बोली। इसमें [संगीत] बताने जैसी तो
  13264. 9:59:01कोई बात थी नहीं। शिप्रा से अचानक मिलना
  13265. 9:59:03हो गया था तो हमने उसे आज विराज भाई का
  13266. 9:59:06मैच देखने के लिए आमंत्रित कर लिया था।
  13267. 9:59:08कनिका ने सफाई दिया। पर क्या फायदा? वो तो
  13268. 9:59:12मेरा मैच देख ही नहीं पाई। विराज अफसोस
  13269. 9:59:15भरे स्वर में बोला। पर मैंने सुना है कि
  13270. 9:59:18आपने आज अपने प्रतिद्वंदी को अच्छे से धूल
  13271. 9:59:20चटा दिया। आपको इस जीत के लिए बधाई।
  13272. 9:59:23शिप्रा ने मुस्कुराकर विराज को जवाब दिया।
  13273. 9:59:26पर यह शौर्य को कैसे जानती है? विराज को
  13274. 9:59:29इस बात के लिए शौर्य से जलन भी हुई। दरअसल
  13275. 9:59:32शिप्रा शौर्य के दादाजी की कंपनी फैब्रिक
  13276. 9:59:35ट्रेंड की सीईओ है और उससे पहले से ही
  13277. 9:59:38शौर्य की शिप्रा से पहचान है। कनिका
  13278. 9:59:40अर्थपूर्ण स्वर में बोली अब आगे क्या
  13279. 9:59:43होगा? अब कनिका शौर्य से अपना रिश्ता
  13280. 9:59:46तोड़ने [संगीत] के लिए क्या करेगी? कर्ण
  13281. 9:59:48और विराज के ऊपर शिप्रा का क्या प्रभाव
  13282. 9:59:50पड़ेगा? तो यह बात है। फिर तो शौर्य का
  13283. 9:59:54शिप्रा के ऊपर कभी ना कभी दिल जरूर आया
  13284. 9:59:58होगा। नंदिनी बीच में बोल पड़ी। तुम ऐसा
  13285. 10:00:01क्यों बोल रही हो? ऐसा जरूरी तो नहीं
  13286. 10:00:03[संगीत] कि लड़की खूबसूरत होगी तो शौर्य
  13287. 10:00:05का दिल उस पर आ ही जाएगा। कर्ण शिप्रा का
  13288. 10:00:08बचाव करता हुआ बोला। नहीं ऐसा नहीं है
  13289. 10:00:11नंदिनी सही कह रही है। शौर्य ने पहले
  13290. 10:00:14शिप्रा को प्रपोज किया था। हां, यह अलग
  13291. 10:00:17बात है कि शिप्रा ने शौर्य के प्रपोजल को
  13292. 10:00:20रिजेक्ट कर दिया था। कनिका [संगीत] तिरछी
  13293. 10:00:23नजर से शौर्य की ओर देखती हुई बोली। शौर्य
  13294. 10:00:27समझ रहा था कि कनिका अब ऐसी ही कोई कोशिश
  13295. 10:00:29करेगी क्योंकि वह कनिका के प्लान से तो
  13296. 10:00:32पहले से ही वाकिफ था। हां, उसे भी ऐसा
  13297. 10:00:35दिखावा करना था कि उसके लिए यह बात शॉकिंग
  13298. 10:00:38था कि यह बात कनिका को पहले से पता है। यह
  13299. 10:00:41तुम क्या कह रही हो? [संगीत] ऐसा कुछ नहीं
  13300. 10:00:43था। शौर्य ने कहने को तो ऐसा कह दिया था।
  13301. 10:00:46पर उसके चेहरे से ऐसा प्रतीत हो रहा था
  13302. 10:00:49जैसे उसकी कोई चोरी पकड़ी गई हो। तुम बोल
  13303. 10:00:52तो कुछ और रहे हो पर तुम्हारा चेहरा कुछ
  13304. 10:00:55और बोल रहा है। नंदिनी बीच में तपाक से
  13305. 10:00:58बोली। फिर वह आगे शिप्रा की तरफ पलट कर
  13306. 10:01:01उससे बोली, वैसे इस बात को तो शिप्रा ही
  13307. 10:01:04स्पष्ट कर सकती है कि जो [संगीत] बात अभी
  13308. 10:01:06कनिका ने कही उसमें थोड़ी भी सच्चाई है कि
  13309. 10:01:09नहीं। नंदिनी की बात सुनकर शिप्रा के
  13310. 10:01:12चेहरे पर एक संकोच नजर आने लगा। वो थोड़ा
  13311. 10:01:15शर्मिंदा फील करते हुए बोली। अब छोड़ो भी
  13312. 10:01:18इन बातों को। तुम भी क्या बात लेकर बैठ
  13313. 10:01:20गई? ना इसमें छोड़ने वाली कोई बात नहीं
  13314. 10:01:23है। तुम्हें बताना पड़ेगा कि अभी जो कनिका
  13315. 10:01:26ने कहा क्या उस बात में थोड़ी भी सच्चाई
  13316. 10:01:28है? विराज उस बात को लपकते हुए बोला।
  13317. 10:01:32विराज की बात सुनकर शिप्रा शौर्य की ओर
  13318. 10:01:34देखने लगी। जैसे वह उसे सॉरी बोल रही हो
  13319. 10:01:37कि उसे यह बात नहीं बोलनी चाहिए थी। पर वो
  13320. 10:01:40अभी विराज की बात का कोई जवाब देती। उससे
  13321. 10:01:43पहले शौर्य बोला। देखो इतनी भी बड़ी कोई
  13322. 10:01:46बात नहीं थी। हां, यह सच है कि बहुत पहले
  13323. 10:01:49ऐसा हुआ था कि मैंने शिप्रा से अपने प्यार
  13324. 10:01:51का इजहार किया था। पर उसने उस समय कहा कि
  13325. 10:01:54उसके दिल में ऐसी कोई फीलिंग नहीं है।
  13326. 10:01:57उसके बाद यह बात तो वहीं समाप्त हो गई थी
  13327. 10:01:59और उसके बाद तो हम दोनों अच्छे दोस्त भी
  13328. 10:02:01बन गए हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा है। तुम
  13329. 10:02:04लोग इस बात की चर्चा अभी यहां क्यों कर
  13330. 10:02:06रहे हो? यह पुरानी बात है और यह पहले ही
  13331. 10:02:09समाप्त हो गई है। अब इस बात को रिपीट करने
  13332. 10:02:12का कोई मतलब नहीं बनता। शिप्रा सफाई देती
  13333. 10:02:15हुई बोली शौर्य यह तो अच्छी बात नहीं है
  13334. 10:02:18कि पहले तुम शिप्रा से प्यार करते थे और
  13335. 10:02:21अब तुम कनिका से शादी करना चाहते हो। यह
  13336. 10:02:23[संगीत] कैसा प्यार है तुम्हारा कि प्यार
  13337. 10:02:26किसी और से और शादी किसी और से कर्ण को
  13338. 10:02:29शौर्य को घेरने का मुद्दा [संगीत] मिल गया
  13339. 10:02:30था। अभी मैंने बताया तो कि यह बहुत पहले
  13340. 10:02:34की बात है और शिप्रा ने मेरे प्रपोजल को
  13341. 10:02:36एक्सेप्ट भी नहीं किया था। तो फिर यह कहने
  13342. 10:02:38का कोई मतलब नहीं है कि मैं अभी भी उससे
  13343. 10:02:41प्यार करता हूं। शौर्य सफाई देता हुआ
  13344. 10:02:44बोला। अगर मान लो आज शिप्रा तुम्हारे
  13345. 10:02:47प्रपोजल को स्वीकार कर लेती है तो क्या
  13346. 10:02:49तुम कनिका के साथ हुए रिश्ते के लिए मना
  13347. 10:02:51कर सकते हो? कर्ण उत्साहित स्वर में बोला।
  13348. 10:02:54उसे लगा उसके पास एक मौका मिल गया है कि
  13349. 10:02:57वह शौर्य को कनिका के साथ हुए रिश्ते से
  13350. 10:02:59पीछे हटने के लिए तैयार कर [संगीत] सकता
  13351. 10:03:01है। यह कैसे हो सकता है? अब यह संभव नहीं
  13352. 10:03:04है। और दूसरी बात यह भी है कि शिप्रा अब
  13353. 10:03:08क्यों मेरा प्रपोजल स्वीकार करने लगी?
  13354. 10:03:10जबरदस्ती तो किसी के दिल में प्यार पैदा
  13355. 10:03:12नहीं [संगीत] किया जा सकता। और वैसे भी यह
  13356. 10:03:14पुरानी बात हो गई है। अब शिप्रा के लिए
  13357. 10:03:17मेरी फीलिंग भी चेंज हो गई [संगीत] है। अब
  13358. 10:03:19हम सिर्फ एक अच्छे दोस्त हैं। शौर्य
  13359. 10:03:22स्थिति के अनुरूप कहानी गढ़ता हुआ बोला।
  13360. 10:03:24शौर्य की इस बात ने विराज को खुशी ही
  13361. 10:03:27प्रदान की। वह भले चाहता था कि शौर्य
  13362. 10:03:29[संगीत] कनिका से अपनी शादी के लिए मना कर
  13363. 10:03:31दे, पर शिप्रा जैसी खूबसूरत लड़की शौर्य
  13364. 10:03:34के प्यार में पड़ जाए, वह ऐसा नहीं चाहता
  13365. 10:03:37था। शिप्रा उसे पहली ही नजर में भा गई थी।
  13366. 10:03:40जब उसने यह सुना कि शौर्य ने पहले शिप्रा
  13367. 10:03:42[संगीत] को भी लव प्रपोजल दिया था तो यह
  13368. 10:03:45सुनकर उसे अच्छा नहीं लगा। पर जब [संगीत]
  13369. 10:03:47उसने यह सुना कि शिप्रा ने शौर्य के
  13370. 10:03:49प्रपोजल को रिजेक्ट कर दिया तो उसे
  13371. 10:03:51हार्दिक खुशी हुई। देखो यहां पर अब मेरी
  13372. 10:03:54और शौर्य की बात करना ठीक नहीं है। और अब
  13373. 10:03:56तो वैसे भी कनिका तुम्हारे साथ तो शौर्य
  13374. 10:03:59का रिश्ता तय कर दिया गया है। तो फिर इस
  13375. 10:04:02तरह की बात करना तो अब वैसे भी ठीक नहीं
  13376. 10:04:04है। शिप्रा अब कनिका के मुंह से सुनना
  13377. 10:04:07चाहती थी कि वो इस समय क्या बोलती है। ऐसा
  13378. 10:04:11कुछ नहीं है कि शौर्य का रिश्ता मेरे साथ
  13379. 10:04:13ही तय हुआ है। जिससे शौर्य की शादी तय हुई
  13380. 10:04:16है वह मैं या नंदिनी में से कोई भी हो
  13381. 10:04:19सकती है। कनिका बम फोड़ती हुई बोली नहीं
  13382. 10:04:23ऐसा कुछ नहीं है। शौर्य का रिश्ता कनिका
  13383. 10:04:25के साथ ही तय हुआ है। मेरे रिश्ते की तो
  13384. 10:04:27कोई बात ही नहीं है। वैसे भी मेरा रिश्ता
  13385. 10:04:30पक्का करने के लिए मेरे पापा हैं। नंदिनी
  13386. 10:04:33तुरंत कनिका की बात तो काटती हुई [संगीत]
  13387. 10:04:35बोली। कनिका और नंदिनी की बात सुनकर शौर्य
  13388. 10:04:38को भी झटका लगा। उसे समझ नहीं आया कि
  13389. 10:04:40चौहान फैमिली में क्या चल रहा [संगीत] है।
  13390. 10:04:42वैसे शौर्य को यह ठीक भी लगा। उसने सोचा
  13391. 10:04:45यह उसके लिए अच्छा ही है। जितना उसको लेकर
  13392. 10:04:47नापसंद बढ़ेगी, उसका रिश्ता चौहान फैमिली
  13393. 10:04:50से टूटना उतना ही आसान होगा। कमबेस शिप्रा
  13394. 10:04:54के लिए भी यह बात शॉकिंग ही था। पर विराज
  13395. 10:04:56का दोनों लड़कियों को एक दूसरे के ऊपर यह
  13396. 10:04:58रिश्ता थोपने का जो [संगीत] एटीट्यूड था
  13397. 10:05:00वो पसंद नहीं आया। इसलिए वह दोनों को
  13398. 10:05:03दपटते हुए बोला। यूं एक दूसरे के लिए यह
  13399. 10:05:06कहना कि यह रिश्ता [संगीत] हमारे लिए नहीं
  13400. 10:05:08तुम्हारे लिए है। यह ठीक नहीं है। शौर्य
  13401. 10:05:11तुम इनकी बात का बुरा मत मानना। अभी यह
  13402. 10:05:13[संगीत] लड़कियां तुम्हें ठीक से जानती
  13403. 10:05:15नहीं है। धीरे-धीरे सब सामान्य हो जाएगा।
  13404. 10:05:18अचानक ही विराज समझदारी भरी बात करने लगा।
  13405. 10:05:21[संगीत]
  13406. 10:05:21यहां पर सबसे बड़ा वही था। वैसे उन सबके
  13407. 10:05:24एज में कोई खास अंतर नहीं था। फिर भी
  13408. 10:05:26[संगीत] सबसे बड़ा होने के कारण विराज ने
  13409. 10:05:28सबको लीड किया। उसको शायद शिप्रा के सामने
  13410. 10:05:31खुद को साबित भी करने की चिंता थी। कनिका
  13411. 10:05:34और नंदिनी दोनों चुप तो हो गई थी पर दोनों
  13412. 10:05:37के चेहरे पर नागवारी के भाव था। देखो ऐसी
  13413. 10:05:40उलझन की भी बात नहीं है। इन [संगीत] दोनों
  13414. 10:05:42के बीच में थोड़ा कंफ्यूजन है पर वो जल्दी
  13415. 10:05:45ही ठीक हो जाएगा। हमें लगता है कि हमें
  13416. 10:05:47मिलते रहना चाहिए। इससे हो सकता है इससे
  13417. 10:05:50हमारी आपसी अंडरस्टैंडिंग बेहतर होगी।
  13418. 10:05:52कर्ण भी बीच में अपनी समझदारी दिखाते हुए
  13419. 10:05:55बोला। ठीक है फिर अब मैं चलना चाहूंगा।
  13420. 10:05:59मुझे तुम सबसे मिलकर अच्छा रूल्स। शौर्य
  13421. 10:06:02अब वहां से विदा लेना चाहता था। वह
  13422. 10:06:04[संगीत] नहीं चाहता था कि उनके बीच की
  13423. 10:06:06अंडरस्टैंडिंग बेहतर हो जिससे उसके और
  13424. 10:06:08कनिका के बीच में [संगीत] सब कुछ सामान्य
  13425. 10:06:10हो। विराज भी अब चाहता था कि शौर्य चला
  13426. 10:06:13जाए वही अच्छा है क्योंकि जैसा उसने सोचा
  13427. 10:06:16था वैसा कुछ हुआ नहीं। वो तो समझा था कि
  13428. 10:06:18वह शौर्य को आसानी से इस रिश्ते से बाहर
  13429. 10:06:20करने के लिए मना लेगा। पर शौर्य उसकी
  13430. 10:06:23उम्मीद से ज्यादा तेज निकला। [संगीत]
  13431. 10:06:24इसलिए अब उसने अपनी नीति चेंज करने की
  13432. 10:06:27सोची। ठीक है शौर्य हम फिर मिलेंगे। इतना
  13433. 10:06:31कहकर विराज ने शौर्य की तरफ अपना हाथ बढ़ा
  13434. 10:06:33दिया। शौर्य ने भी विराज से हाथ मिलाया।
  13435. 10:06:36विराज ने शौर्य के पंजे [संगीत] पर अपना
  13436. 10:06:38जोर दिखाना चाहा पर उसने महसूस किया कि
  13437. 10:06:41शौर्य ने आसानी से उसके हाथ के जोर को
  13438. 10:06:43मैनेज कर लिया था। उसे आश्चर्य भी हुआ। पर
  13439. 10:06:46विराज [संगीत] की इस हरकत से शौर्य के
  13440. 10:06:48चेहरे पर स्माइल आ गई। शौर्य को खड़ा होते
  13441. 10:06:51देखकर शिप्रा भी खड़ी हो गई और वो कनिका
  13442. 10:06:53से बोली, मैं भी चलती हूं कनिका। [संगीत]
  13443. 10:06:56अरे तुम कहां जा रही हो? तुम तो अभी आई
  13444. 10:06:58हो। थोड़ी देर हम सबके साथ तो बैठो। फिर
  13445. 10:07:01[संगीत] चली जाना। विराज जल्दी से शिप्रा
  13446. 10:07:04को रोकते हुए बोला। कनिका विराज के इरादे
  13447. 10:07:06[संगीत] को समझ रही थी। पर वह तो यही समझ
  13448. 10:07:09रही थी कि शिप्रा जो भी कर रही है यह सब
  13449. 10:07:11उसी के कहने से कह रही है। मैं फिर कभी
  13450. 10:07:14मिलती हूं आप सबसे। अब जब शौर्य जा रहा है
  13451. 10:07:17तो यह मुझे घर भी छोड़ देगा। शिप्रा शौर्य
  13452. 10:07:21की तरफ देखती हुई बोली। [संगीत]
  13453. 10:07:23अरे तुम घर जाने की चिंता क्यों कर रही
  13454. 10:07:25हो? मैं तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ दूंगा।
  13455. 10:07:27विराज जल्दी से बोला। विराज की बात सुनकर
  13456. 10:07:30शिप्रा कनिका की ओर देखने लगी। जैसे वह
  13457. 10:07:33उससे पूछ [संगीत] रही हो कि यह क्या हो
  13458. 10:07:35रहा है? कनिका भी शिप्रा के इशारे को समझ
  13459. 10:07:37गई और वह बीच [संगीत] में बोल पड़ी।
  13460. 10:07:40शिप्रा का घर शौर्य के घर के रास्ते में
  13461. 10:07:42ही पड़ता है। इसलिए यह अच्छा रहेगा
  13462. 10:07:44[संगीत] कि शौर्य ही उसको छोड़ दे। विराज
  13463. 10:07:47को कनिका की बात पसंद तो नहीं आई पर वह अब
  13464. 10:07:49कुछ कर भी नहीं सकता था। पर उसे यह आभास
  13465. 10:07:52जरूर हुआ कि जरूर कनिका के दिमाग में कुछ
  13466. 10:07:55और भी चल रहा है। शिप्रा शौर्य के साथ
  13467. 10:07:58वहां से निकल गई। दोनों के जाने के बाद
  13468. 10:08:00विराज फट पड़ा। तुम्हें शिप्रा को शौर्य
  13469. 10:08:03के साथ भेजने की क्या जरूरत थी? अरे पर
  13470. 10:08:06शिप्रा शौर्य के साथ गई तो इसमें आप क्यों
  13471. 10:08:08इतना परेशान हो रहे हैं? कनिका आश्चर्य से
  13472. 10:08:11विराज से बोली। सच कहूं तो मुझे तुम्हारी
  13473. 10:08:14वो दोस्त बहुत पसंद आई। इसलिए मैं नहीं
  13474. 10:08:17चाहता था कि वो शौर्य के साथ यहां से जाए।
  13475. 10:08:20विराज नाराजगी भरे स्वर में बोला। कनिका
  13476. 10:08:23बड़ी-बड़ी आंखों से विराज की ओर देखने
  13477. 10:08:25लगी। वो विराज को समझाने की कोशिश करती
  13478. 10:08:28हुई बोली आपको पता है मैंने शिप्रा को
  13479. 10:08:31किसी खास मकसद से यहां बुलाया था। मैं
  13480. 10:08:34जानती थी कि शौर्य पहले उसको पसंद करता था
  13481. 10:08:37पर शिप्रा ने उसे भाव नहीं दिया था। अब
  13482. 10:08:40मेरे कहने पर वो शौर्य को अपने प्यार में
  13483. 10:08:42फंसाने को तैयार हुई है ताकि मैं इस आधार
  13484. 10:08:45पर उससे अपना रिश्ता तोड़ सकूं। इसलिए
  13485. 10:08:47उसका यहां से शौर्य के साथ जाना एक मकसद
  13486. 10:08:50के तहत था ताकि वह शौर्य के साथ थोड़ा समय
  13487. 10:08:53व्यतीत करें और उसे एहसास कराए कि उसका
  13488. 10:08:56प्रपोजल स्वीकार ना करना यह उसकी गलती थी।
  13489. 10:08:59अब जबकि शौर्य का रिश्ता किसी और के साथ
  13490. 10:09:02हो गया है तो उसे एहसास हो रहा है कि वह
  13491. 10:09:04भी शौर्य को प्यार करने लगी है। अगर
  13492. 10:09:07शिप्रा अपने इस मकसद में कामयाब हो जाती
  13493. 10:09:09है तो उसका शौर्य से पीछा छुराना आसान हो
  13494. 10:09:12जाएगा। कनिका की बात सुनकर विराज को अपना
  13495. 10:09:14दिल बैठता सा लगा। वो शिप्रा के लिए चिंता
  13496. 10:09:17करता हुआ बोला तुम क्यों उस लड़की को फंसा
  13497. 10:09:20रही हो? हम शौर्य का मामला किसी और तरह से
  13498. 10:09:23निपटा लेंगे। तुम इस सब में उस लड़की को
  13499. 10:09:25मत इनवॉल्व करो। विराज भाई सही कह रहे
  13500. 10:09:28हैं। हम शौर्य से निपटने का कोई और रास्ता
  13501. 10:09:31निकाल लेंगे। पर इस सब में उस लड़की को
  13502. 10:09:33घसीटना सही नहीं है। कर्ण भी बीच में अपनी
  13503. 10:09:36राय देता हुआ बोला। कहीं तुम भी तो उस
  13504. 10:09:38लड़की शिप्रा को पसंद नहीं करने लगे।
  13505. 10:09:41नंदिनी कर्ण की बात सुनकर बोली। नंदिनी की
  13506. 10:09:44बात सुनकर कर्ण नंदिनी और कनिका से अपनी
  13507. 10:09:46नजर चुराने लगा। हे भगवान आप दोनों को हो
  13508. 10:09:50क्या गया है? आज पहली बार तो आप शिप्रा से
  13509. 10:09:52मिले हैं और उसको एक ही मुलाकात में पसंद
  13510. 10:09:55भी करने लगे। कनिका हैरानी से बोली उस
  13511. 10:09:58लड़की से अभी तक हमें नहीं मिलवाना
  13512. 10:10:00तुम्हारी गलती थी। तुम्हारी इतनी खूबसूरत
  13513. 10:10:03दोस्त है और तुमने आज तक उसे मुझसे नहीं
  13514. 10:10:05मिलवाया। विराज कनिका को घूरते हुए बोला।
  13515. 10:10:08फिर वो कर्ण की तरफ पलट कर बोला। तुम उस
  13516. 10:10:11लड़की के बारे में सोचना भी मत। वो
  13517. 10:10:13तुम्हारी भाभी होने वाली है। यह यह कब हो
  13518. 10:10:16गया? ऐसा कुछ नहीं है। वो मुझे भी पसंद आई
  13519. 10:10:20है। फिर आप यह फैसला नहीं कर सकते। कर्ण
  13520. 10:10:23भी झिझकता हुआ बोला। कनिका तो मुंह भाए
  13521. 10:10:26अपने भाइयों को देखे जा रही थी। जो आपस
  13522. 10:10:28में ही शिप्रा पर अपना हक जताए जा रहे थे।
  13523. 10:10:31यह बढ़िया है। उस लड़की को पता भी नहीं है
  13524. 10:10:34और आप दोनों ने उसे अपना बना भी लिया है।
  13525. 10:10:37एक अनार दो बीमार। क्या किस्मत पाई है
  13526. 10:10:39शिप्रा ने और एक मैं हूं जो उस फटीचर से
  13527. 10:10:43अपना पीछा भी नहीं छुरा पा रही और मेरे
  13528. 10:10:45भाइयों को अपनी परी है। बकवास मत कर। वैसे
  13529. 10:10:49शौर्य इतना भी बुरा नहीं है। देखने में
  13530. 10:10:51हैंडसम है और राठौर फैमिली से संबंध तो
  13531. 10:10:54रखता ही है तो तुम्हें क्या दिक्कत है
  13532. 10:10:56उससे शादी करने में? रोड पर भीख तो मांग
  13533. 10:10:58नहीं रहा जो तुम उससे पीछा छुड़ाना चाहती
  13534. 10:11:01हो। विराज कनिका को झिरकता हुआ बोला। हे
  13535. 10:11:04भगवान यह मेरे भाई हैं जो एक लड़की के लिए
  13536. 10:11:07एक पल में बदल गए। मुझे तो आपसे कोई
  13537. 10:11:10उम्मीद ही नहीं करनी चाहिए। मैं समझ गई कि
  13538. 10:11:12जो भी करना है मुझे खुद ही करना है। कनिका
  13539. 10:11:16निराशा से विराज की ओर देखती हुई बोली अब
  13540. 10:11:18ज्यादा नौटंकी मत कर। हमसे जो बन पड़ेगा
  13541. 10:11:22हम वो तुम्हारे लिए जरूर करेंगे। पर तुम
  13542. 10:11:24अपने उस दोस्त को उसके चक्कर में मत
  13543. 10:11:26फंसाओ। विराज कनिका को चेताते हुए बोला।
  13544. 10:11:30अब आगे क्या होगा? क्या कनिका अपने मकसद
  13545. 10:11:32में कामयाब हो पाएगी या शौर्य अपने मन की
  13546. 10:11:35कर पाएगा?

About this transcript

This page contains the full transcript of My Begger Husband series Episode 201 to 250 by SK Hindi Novel, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 112,002 words across 13,546 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

What you can do with it

Use the transcript to take notes, quote the speaker, build a study guide, generate a summary with ChatGPT or Claude via the YouTube Summary tool, or export it as a timed subtitle file with YouTube to SRT. You can also re-open it in the transcriber to translate the transcript into 100+ languages.

Free YouTube transcript tool

YouTube2Text is a free YouTube transcript generator — no signup, no daily limit. Paste any YouTube link and get the full transcript instantly, with timestamps, click-to-jump, translation to 100+ languages, AI prompts for ChatGPT, Claude, and Gemini, and exports to TXT, SRT, VTT, or Markdown.