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My Begger Husband | New Episode 51 to 65 |New Episode Daily | Sk hindi novel | Trending Series — Transcript

by SK Hindi Novel · 32,375 words · 3,901 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:04तो हेलो दोस्तों, कैसे हैं आप लोग? मुझे
  2. 0:06आशा है कि आप लोग ठीक ही होंगे और मजे से
  3. 0:08इस चैनल पर जो भी सीरीज आ रही है उसको सुन
  4. 0:11रहे होंगे। तो माय बैगर हस्बैंड का नया
  5. 0:13वीडियो आ चुका है जिसमें एपिसोड 51 से 65
  6. 0:17तक है जिसमें मान लो 15 एपिसोड हैं। तो
  7. 0:20जल्दी से जल्दी इस वीडियो को सुनो और
  8. 0:23देखो। को कोई मिस्टेक तो नहीं हुई है और
  9. 0:26वीडियो को लाइक करें, चैनल को सब्सक्राइब
  10. 0:28करें और बेल आइकॉन जरूर दबाएंसे कि आपसे
  11. 0:31कोई भी वीडियो मिस ना हो। तो करते हैं लेट
  12. 0:34स्टार्ट दिस वीडियो। शिप्रा ने कार के
  13. 0:36अंदर बैठकर जिस तरह धड़ाम से दरवाजा बंद
  14. 0:38किया, शौर्य ने आंखों को झपकाते हुए
  15. 0:41अंदाजा लगा लिया कि मैडम ने गुस्से में
  16. 0:43अपनी भड़ास दरवाजे पर निकाली है। शिप्रा
  17. 0:46के चेहरे के भाव भी यही संदेश दे रहे थे
  18. 0:48कि खन्ना की घिनौनी हरकत से उसका दिल सदमे
  19. 0:51में है। उसका दिमाग अभी भी पिछले आधे घंटे
  20. 0:54की घटना से बाहर नहीं निकला था। उसकी
  21. 0:57जुबान खामोश थी लेकिन मन ही मन वो बोल रही
  22. 0:59थी। अगर दोनों गुंडे मुझे पकड़ लेते और
  23. 1:02मुझ पर तेजाब फेंक देते तो? शिप्रा के
  24. 1:05पूरे बदन में एक डरावनी सी हिरन सी दौड़
  25. 1:07गई। वो मन ही मन शौर्य से भी सवाल करने
  26. 1:10लगी। ये जनाब पता नहीं आज इनको क्या हो
  27. 1:14गया। अपनी सीट से हिले ही नहीं। शौर्य को
  28. 1:17शिप्रा की आंखों से उसकी घबराहट का एहसास
  29. 1:19हो रहा था। वो सोच ही रहा था कि माहौल को
  30. 1:22हल्का कैसे किया जाए। तभी शिप्रा ने एक पल
  31. 1:24के लिए शौर्य की तरफ देखा तो शौर्य ने
  32. 1:27तुरंत ही शिप्रा की तरफ देखते हुए हल्की
  33. 1:29मुस्कान के साथ कहा। वाकई आपने तो अकेले
  34. 1:33ही सब कुछ कंट्रोल कर लिया। वैसे आपने उन
  35. 1:35दोनों से ऐसा क्या कहा कि वह बिना कोई
  36. 1:38बवाल किए ही वहां से चले गए। यह सुनकर
  37. 1:41शिप्रा की भौए सिकुड़ गई। वो अपनी नाराजगी
  38. 1:44को कंट्रोल नहीं कर पाई और शिकायती लहजे
  39. 1:46में शौर्य से बोली जब तुम्हें बाहर आना
  40. 1:49चाहिए था तब तो तुम आए नहीं और अब पूछ रहे
  41. 1:51हो कि वो दोनों कैसे चले गए? शौर्य ने
  42. 1:54बड़ी ही मासूमियत से कंधे उचकाते हुए कहा,
  43. 1:57"कमाल करती हैं आप।" अरे आपने ही तो कहा
  44. 1:59था कि कार से बाहर नहीं निकलना और अब आप
  45. 2:02ही शिकायत कर रही हैं कि मैं बाहर नहीं
  46. 2:03आया। वेरी स्मार्ट। मैंने वो तब कहा था जब
  47. 2:07मुझे लगा कि खन्ना अकेला है। लेकिन जब वो
  48. 2:09दोनों गुंडे आ गए थे तब तो तुम्हें बाहर
  49. 2:11आना चाहिए था। शिप्रा की शिकायत कम नहीं
  50. 2:15हो रही थी क्योंकि शिप्रा का गुस्सा अभी
  51. 2:17शांत नहीं हुआ था। शिप्रा शौर्य से नाराज
  52. 2:20थी। लेकिन कुछ ज्यादा भी नहीं क्योंकि उसे
  53. 2:22इस बात का भी एहसास था कि आज अगर उसकी जान
  54. 2:25बची है तो वह शौर्य के नाम के कारण ही
  55. 2:28उसके जानबूझकर नाराजगी जताने का कारण यह
  56. 2:30भी था कि वो इस बात से श्योर होना चाहती
  57. 2:32थी कि कहीं शौर्य के कार से बाहर निकलने
  58. 2:34की वजह उसके द्वारा जिंदगी साथ बिताने
  59. 2:37वाला प्रपोजल रिजेक्ट करना तो नहीं था।
  60. 2:39कार के अंदर के माहौल में एक अलग ही
  61. 2:41खुशनुमा खिंचाव था। शिप्रा और शौर्य दोनों
  62. 2:44की जुबान खामोश थी, लेकिन कान एक दूसरे की
  63. 2:47आवाज सुनने को बेताब हो रहे थे। धीरे-धीरे
  64. 2:50वह घर की ओर बढ़ रहे थे। शौर्य और शिप्रा
  65. 2:52की नजरें बार-बार एक दूसरे से टकरा रही
  66. 2:55थी। उधर दूसरी तरफ शिप्रा के घर में भी
  67. 2:57पारिवारिक माहौल कुछ टकराहट वाला ही था।
  68. 3:00हॉल में बलवंत राय, राजदीप राय और बीना जी
  69. 3:03बैठे थे। तीनों के चेहरे गंभीर थे। कुछ पल
  70. 3:06की चुप्पी के बाद बलवंत राय ने गहरी आवाज
  71. 3:09में कहा।
  72. 3:11देखो तुम दोनों एक बार शिप्रा से उसकी
  73. 3:13अंतिम राय जरूर जान लो। भावनाओं में बहकर
  74. 3:15कोई फैसला नहीं लिया जाता।
  75. 3:18अपनी बात को आगे समझाते हुए बलवंत राय
  76. 3:20बोले अगर वो श्रवण से तलाक के लिए तैयार
  77. 3:23नहीं है तो फिर उसे सर्वेंट क्वार्टर में
  78. 3:25रखने का क्या मतलब? उसे घर में ही बुला लो
  79. 3:28क्योंकि यह बात ज्यादा समय तक दुनिया से
  80. 3:30छुपी नहीं रहेगी। कमरे का माहौल और भारी
  81. 3:33हो गया। राजदीप राय और बीना जी बेबसी से
  82. 3:36एक दूसरे की ओर देखने लगे। तभी बलवंत राय
  83. 3:39ने एक और बात जोड़ी। वैसे भी अब श्रवण का
  84. 3:42कायाकल्प हो चुका है। अगर कोई उसे पहले से
  85. 3:45नहीं जानता हो तो कोई भी उसे भिखारी नहीं
  86. 3:48कहेगा। फिर उन्होंने सीधे दोनों की तरफ
  87. 3:50देखा और तुम्हें भी तो यह तय करना होगा कि
  88. 3:53क्या तुम उसे अपने दामाद के रूप में
  89. 3:55स्वीकार कर सकते हो या नहीं। बलवंत राय के
  90. 3:59ऐसा बोलते ही कमरे में फिर से सन्नाटा छा
  91. 4:01गया। अब फैसला सिर्फ शिप्रा का नहीं, पूरे
  92. 4:04परिवार का होने वाला था। राजदीप जी और
  93. 4:07बीना जी दोनों अंदर ही अंदर सन्न रह गए
  94. 4:10थे। बात अब उनके हाथ से निकलती जा रही थी।
  95. 4:13वे शौर्य को दामाद के रूप में कभी स्वीकार
  96. 4:15नहीं करना चाहते थे। लेकिन शिप्रा पर उनका
  97. 4:18जोर भी नहीं चल रहा था। उन्होंने तो आज
  98. 4:21ठान लिया था कि किसी भी तरह शिप्रा को
  99. 4:23दबाव में लाकर तलाक के लिए मना लें। और
  100. 4:25इसी के लिए उन्होंने बलवंत राय जी का
  101. 4:27सहारा लिया था। पिताजी आप ही शिप्रा को
  102. 4:31समझाइए। हमारी तो वह सुनती ही नहीं।
  103. 4:33राजदीप जी को जब कुछ जवाब नहीं सूझा तो
  104. 4:36उन्होंने अपने पिताजी से उम्मीद भरे स्वर
  105. 4:38में कहा। तभी बलवंत राय ने धीमे लेकिन साफ
  106. 4:41लहजे में जवाब दिया।
  107. 4:43अरे भाई मैंने भी तो कोशिश की थी। मैं तो
  108. 4:46रजत के साथ उसकी शादी के लिए भी तैयार था।
  109. 4:49लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ी है कि श्रवण से
  110. 4:50तलाक नहीं लेगी। अब बताओ मैं भी उसे कितना
  111. 4:53दबाव में ला सकता हूं। उनकी बात में बेबसी
  112. 4:56कम और स्थिति को स्वीकार करने का संकेत
  113. 4:59ज्यादा था। वहीं दूसरी तरफ कार के अंदर
  114. 5:02शिप्रा और शौर्य के बीच की गहरी खामोशी
  115. 5:04अभी भी टूटने का नाम ही नहीं ले रही थी।
  116. 5:06शिप्रा और शौर्य दोनों अपने-अपने ख्यालों
  117. 5:09में डूबे हुए थे। तभी शौर्य ने पहल की और
  118. 5:12उस सन्नाटे को तोड़ा। मैं सोच रहा था
  119. 5:15मैंने अपने लिए एक घर देख लिया है। शायद
  120. 5:17कल शाम तक मैं वहां शिफ्ट भी हो जाऊं।
  121. 5:20अचानक शौर्य के मुंह से कुछ अलग और
  122. 5:22सरप्राइजिंग सुनकर शिप्रा चौंक गई। यह
  123. 5:24उसके लिए बिल्कुल नई बात थी। एक दिन पहले
  124. 5:27उसने नई नौकरी ज्वाइन करने की बात की थी
  125. 5:29और अब अचानक घर बदलने की बात से शिप्रा के
  126. 5:32मन में कई सवाल एक साथ उठ खड़े हुए थे।
  127. 5:35अचानक श्रवण ऐसी बात क्यों कर रहा है?
  128. 5:37क्या उसे कुछ बुरा लगा या फिर वो जानबूझकर
  129. 5:40दूर जाना चाहता है? उसकी सोच में थोड़ी
  130. 5:43घबराहट आ गई। शिप्रा को लगने लगा अगर
  131. 5:45शौर्य सच में अलग रहने चला गया तो उसके
  132. 5:48सारे प्लान बिखर सकते हैं। उसने तुरंत
  133. 5:50उसकी तरफ देखते हुए पूछा। तुम्हारी नौकरी
  134. 5:53की बात तो समझ में आती है लेकिन यहां
  135. 5:55अचानक घर छोड़ने का क्या मतलब है? शौर्य
  136. 5:58ने एक पल के लिए उसकी तरफ देखा। फिर नजर
  137. 6:00वापस सड़क पर टिका दी। आप क्या चाहती हैं
  138. 6:03कि मैं जहां हूं वहीं रहूं। असल में ये घर
  139. 6:06मुझे उसी कंपनी की तरफ से मिल रहा है जहां
  140. 6:09मैं काम करने वाला हूं। शौर्य ने समझाते
  141. 6:12हुए कहा, तो शिप्रा कुछ पल के लिए सोच में
  142. 6:14पड़ गई। आखिर ऐसी भी कौन सी बड़ी कंपनी
  143. 6:17में काम मिल गया? जब उससे रहा नहीं गया तो
  144. 6:20उसने पूछ ही लिया। अच्छा बताओ ऐसा क्या
  145. 6:22काम मिला है तुम्हें जो कंपनी ने रहने के
  146. 6:25लिए घर भी दे दिया? शौर्य ने थोड़ा सोचते
  147. 6:27हुए जवाब दिया। अभी तो काम का पूरा अंदाजा
  148. 6:30नहीं है लेकिन शायद किसी कंपनी को
  149. 6:32इंटरनेशनल लेवल पर बूस्ट करना है। उसके
  150. 6:35लिए एक पूरी टीम बनाई जा रही है। लगता है
  151. 6:37जिसने हमें हायर किया है, उसने किसी बड़ी
  152. 6:40कंपनी के साथ कोलैबोरेशन किया है। बोलते
  153. 6:43हुए वह धीरे-धीरे नई कहानी गढ़ रहा था।
  154. 6:46शौर्य की बात सुनकर शिप्रा के मन में शक
  155. 6:49पैदा हुआ। कहीं वह उसी की कंपनी के बारे
  156. 6:52में तो बात नहीं कर रहा जिसकी बात मोहित
  157. 6:54कर रहा था। कहीं मोहित रैना ने ही इसे
  158. 6:56हायर तो नहीं किया। लेकिन फिर उसके मन में
  159. 6:59एक और सवाल उठा। क्या श्रवण इतना काबिल है
  160. 7:02कि किसी कंपनी को इंटरनेशनल लेवल पर बूस्ट
  161. 7:04कर सके? आखिर शिप्रा ने सीधे पूछ लिया।
  162. 7:08तुम्हें हायर किसने किया है? अब शौर्य को
  163. 7:11बहुत सोच समझ कर जवाब देना था। कुछ पल चुप
  164. 7:14रहने के बाद उसने कहा उसका नाम विक्रम
  165. 7:17राणावत है। शौर्य जानता था कि शिप्रा इस
  166. 7:20नाम से वाकिफ नहीं होगी। इसीलिए वो ज्यादा
  167. 7:22सवाल नहीं करेगी। शिप्रा ने दिमाग पर जोर
  168. 7:25डाला लेकिन विक्रम राणावत नाम उसके लिए
  169. 7:27बिल्कुल अनजान था। जितना वो सोचती उसकी
  170. 7:30उतनी ही उलझन बढ़ती जा रही थी। कौन है
  171. 7:34विक्रम? और अचानक कहां से आ गया? हमने
  172. 7:36इसके बारे में पहले कभी सुना क्यों नहीं?
  173. 7:39आखिरकार शिप्रा ने अपनी बेचैनी जाहिर कर
  174. 7:41ही दी। शौर्य ने हल्की सी सांस ली और
  175. 7:44संभलकर जवाब दिया। अब यह तो मुझे नहीं पता
  176. 7:47कि आपने उसके बारे में क्यों नहीं सुना।
  177. 7:49लेकिन मैंने जो सुना है वो यह कि उसे
  178. 7:51इंडिया आए ज्यादा समय नहीं हुआ है। उसका
  179. 7:54मेन बिजनेस यूके में ही सेटल है और शायद
  180. 7:56अब वो यहां अपने पैर जमाने की सोच रहा है।
  181. 8:00शिप्रा को यह बात हजम नहीं हो रही थी।
  182. 8:02उसके दिमाग में फिर सवाल गूंजा।
  183. 8:05यूके से आया हुआ कोई बड़ा बिजनेसमैन श्रवण
  184. 8:07जैसे इंसान को हायर करके इतना बड़ा रिस्क
  185. 8:10ले रहा है। शिप्रा के मन में एक और सवाल
  186. 8:12उठा। कहीं मैं श्रवण को ही अंडरएस्टिमेट
  187. 8:15तो नहीं कर रही या फिर इस पूरे खेल में
  188. 8:18कुछ ऐसा है जो मुझे दिखाई नहीं दे रहा।
  189. 8:20फिर उसने सीधे मुद्दे पर आते हुए शौर्य से
  190. 8:23कहा ठीक है। यह तो अच्छी बात है कि
  191. 8:25तुम्हें जॉब मिल गई। लेकिन तुम्हें यहां
  192. 8:27से जाने की इतनी जल्दी क्यों है? शौर्य ने
  193. 8:30शांत अंदाज में कहा। इसमें जल्दी वाली तो
  194. 8:33कोई बात नहीं है। जब मेरे रहने की
  195. 8:35व्यवस्था हो गई है तो कोई कारण नहीं कि
  196. 8:37मैं आपके यहां और ठहरूं। शिप्रा ने उसकी
  197. 8:40बात ध्यान से सुनी। फिर गंभीरता से बोली
  198. 8:43हां मैं समझती हूं लेकिन यह मैं तुम्हारे
  199. 8:46लिए नहीं अपने लिए कह रही हूं। अगर तुम
  200. 8:48हमारे घर से चले गए तो तुम्हें भी पता है
  201. 8:51कि मेरे घर वाले मेरे साथ क्या करेंगे।
  202. 8:54उसकी बात में छुपा डर साफ था। यह सिर्फ
  203. 8:57रहने का मामला नहीं था बल्कि उसके ऊपर आने
  204. 8:59वाले दबाव का भी था। शौर्य ने उसे समझाने
  205. 9:02की कोशिश की। वैसे अगर मैं सच कहूं तो
  206. 9:05आपको अपने घर वालों की बात मान लेनी
  207. 9:08चाहिए। वो जो भी कर रहे हैं आपकी भलाई के
  208. 9:11लिए ही कर रहे हैं। शौर्य खुद जानता था कि
  209. 9:14वो जो कह रहा है वो शिप्रा को मंजूर नहीं
  210. 9:17होगा। फिर भी वो यह बातें जानबूझकर कर रहा
  211. 9:19था। फिर थोड़ा रुक कर उसने सीधा सवाल
  212. 9:22किया। पता नहीं लेकिन मुझे यह समझ नहीं
  213. 9:25आता। आप यह सब खेल कब तक खेलती रहेंगी?
  214. 9:28आखिर कब तक इस तरह एक मुखौटा पहनकर जी
  215. 9:30पाएंगी?
  216. 9:33इस पर शिप्रा ने बिना हिचक के जवाब दिया।
  217. 9:35तब तक जब तक मेरे घर वालों को यह समझ ना आ
  218. 9:38जाए कि मेरे पीछे पड़ने का कोई फायदा नहीं
  219. 9:41है। और अगर वह कभी नहीं माने तो।
  220. 9:44शौर्य ने फिर पूछ डाला तो शिप्रा ने पूरे
  221. 9:46आत्मविश्वास के साथ कहा। ऐसा हो ही नहीं
  222. 9:49सकता। हर चीज की एक सीमा होती है। देर
  223. 9:52सवेेर उन्हें मेरी बात समझ आ ही जाएगी।
  224. 9:55रेयर व्यू मिरर में शौर्य कुछ पल छिप्रा
  225. 9:57को देखता रहा जैसे उसके आत्मविश्वास को
  226. 10:00परख रहा हो। फिर हल्की सी मुस्कान के साथ
  227. 10:02बोला ठीक है। अब जब आप इतनी कॉन्फिडेंटली
  228. 10:06कह रही हैं तो मैं कुछ दिन और आपके यहां
  229. 10:09रुक जाता हूं। शौर्य का जवाब सुनकर शिप्रा
  230. 10:11ने राहत की सांस ली। लेकिन वो नहीं जानती
  231. 10:14थी कि शौर्य के मन में क्या चल रहा है।
  232. 10:16शौर्य सब समझ रहा था। शिप्रा की मजबूरी,
  233. 10:19उसका डर, उसका यह मुखौटा। लेकिन फिर भी वो
  234. 10:23जानबूझकर इस खेल का हिस्सा बना हुआ था
  235. 10:25क्योंकि उसके दिल के कोने में शिप्रा ने
  236. 10:27अपनी जगह बना ली थी। शौर्य उससे दूर जाने
  237. 10:30की सोच भी नहीं सकता था। वो चाहता था कि
  238. 10:33एक दिन शिप्रा खुद अपने दिल की बात माने
  239. 10:35और कहे कि उसे भी उससे प्यार है। वो उसकी
  240. 10:37जरूरत नहीं उसकी चाहत बनना चाहता है।
  241. 10:40शौर्य का जवाब सुनकर अंदर से खुश शिप्रा
  242. 10:42से रहा नहीं गया और वो बोली शुक्रिया
  243. 10:45श्रवण तुम्हारे घर से जाने की बात सुनकर
  244. 10:48तो मेरी धड़कन ही थम गई थी। हां, मेरी भी
  245. 10:51थम गई थी। शौर्य के इन शब्दों को सुनकर
  246. 10:54शिप्रा की आंखों में हैरानी उतर आई। वहीं
  247. 10:57दूसरी तरफ फटने को तैयार तो शिप्रा के
  248. 10:59परिवार के सदस्य भी हैं। उन्हें शिप्रा का
  249. 11:02ही इंतजार है। शिप्रा घर की दहलीज पर कदम
  250. 11:05रख चुकी है। उसकी नजर हॉल में बैठे
  251. 11:07दादाजी, पापा और मम्मी पर जाती है। शिप्रा
  252. 11:10अपने कमरे में ना जाकर सीधा उन सबके सामने
  253. 11:13जाकर खड़ी हो जाती है। तकदीर ने बना दी
  254. 11:15शौर्य और शिप्रा की जोड़ी। और अब इनके इस
  255. 11:18रिश्ते की वजह से जो घटनाएं घट रही हैं वो
  256. 11:20किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। इनके
  257. 11:23जीवन में हर रोज एक नया ट्विस्ट आ जाता
  258. 11:25है। जहां एक तरफ इन दोनों की सोच थोड़ी
  259. 11:27जिद्दी है वहीं दूसरी तरफ दोनों के ही मन
  260. 11:30में एक दूसरे के प्रति सम्मान और स्वयं के
  261. 11:33प्रति स्वाभिमान भी कूट-कूट [संगीत]
  262. 11:34कर भरा है। शायद इसीलिए दोनों अपने दिल की
  263. 11:37बात जुबान तक लाने में थोड़ा समय ले रहे
  264. 11:40हैं। फिलहाल दोनों के कमरे अलग हैं। लेकिन
  265. 11:43घर एक है। और इस वक्त का सबसे बड़ा सवाल
  266. 11:45यह है कि क्या दोनों के दिल कभी एक दूसरे
  267. 11:48के लिए धड़क पाएंगे? क्या शौर्य और शिप्रा
  268. 11:51एक हो पाएंगे?
  269. 11:53अरे भाई शिप्रा है कहां? बेहतर यही रहेगा
  270. 11:56कि सच्चाई शिप्रा ही बताएं। आखिर उसके मन
  271. 11:59[संगीत] में क्या चल रहा है? दादा बलवंत
  272. 12:01राय ने जैसे ही यह शब्द बोले, तो राजदीप
  273. 12:04राय ने भी सहमति जताते हुए कहा, "हां हमें
  274. 12:07शिप्रा से साफ-साफ पूछ लेना चाहिए।
  275. 12:11मैं तो कहूंगी बात कयामत तक पहुंच जाए
  276. 12:13उससे पहले ही हमें पूछना नहीं शिप्रा को
  277. 12:16बताने देना चाहिए कि हम श्रवण को अपने
  278. 12:18दामाद के रूप में स्वीकार नहीं कर सकते।
  279. 12:21बीना जी थोड़ा सख्त रवैया दिखाते हुए
  280. 12:23बोली। तभी सबने देखा कि सामने के बड़े
  281. 12:26वाले दरवाजे से शिप्रा अंदर आ रही है।
  282. 12:28शिप्रा को देखते ही दादाजी, पिता राजदीप
  283. 12:31और मां बीना जी तीनों [संगीत] अचानक चुप
  284. 12:33हो गए। शिप्रा तुरंत समझ गई कि बात उसी के
  285. 12:36बारे में हो रही है। आमतौर पर वो सीधे
  286. 12:38अपने कमरे में चली जाती है लेकिन आज वो
  287. 12:40वहीं रुक गई। सबकी तरफ देखते हुए उसने
  288. 12:43शांत लेकिन सीधे लहजे में पूछा। ऐसा लग
  289. 12:47रहा है शायद आप लोग मुझसे कुछ बात करना
  290. 12:49चाहते हैं।
  291. 12:51सही सोचा तुमने लेकिन बेटी थकी सी लग रही
  292. 12:54हो। पहले आराम से बैठ जाओ। बलवंत राय ने
  293. 12:57गंभीर स्वर में कहा। शिप्रा उनके सामने
  294. 13:00रखे सिंगल सोफे पर बैठ गई और बोली
  295. 13:03नहीं मैं बिल्कुल ठीक हूं दादा जी कहिए आप
  296. 13:06लोगों को मुझसे क्या बात करनी है बलवंत
  297. 13:09राय ने गहरी सांस ली और धीमे लेकिन ठहराव
  298. 13:11भरे स्वर में बोले सबसे पहले यह समझ लो कि
  299. 13:15हम सब तुम्हारे दुश्मन नहीं है। हम जो कुछ
  300. 13:17भी कहेंगे तुम्हारी भलाई के लिए ही
  301. 13:20कहेंगे। बस हमारी बातों को समझने की कोशिश
  302. 13:23करना। कमरे में एक अजीब सी खामोशी फैल गई।
  303. 13:26शिप्रा सामने बैठे पापा और मम्मी की आंखों
  304. 13:29में देखने लगी जैसे आने वाले सवालों के
  305. 13:31लिए खुद को तैयार कर रही हो। पहेलियां
  306. 13:35बुझाने से अच्छा है दादा जी कि आप सीधे
  307. 13:37मुद्दे पर आ जाए वही ज्यादा बेहतर रहेगा
  308. 13:40और जहां तक दुश्मन ना समझने की बात है तो
  309. 13:42मैं अच्छी तरह जानती हूं कि आप सब कभी
  310. 13:44मेरा बुरा नहीं सोच सकते। इसीलिए यह कहने
  311. 13:47की जरूरत नहीं है कि आप मेरे दुश्मन नहीं
  312. 13:50हैं। शिप्रा ने अपनी बात रखते हुए कहा।
  313. 13:53उसकी बात सुनकर बलवंत राय ने हल्का सा सिर
  314. 13:55हिलाया और बोले, ठीक है तो साफ-साफ सुन
  315. 13:58लो। तुम्हारे इस फैसले से हम में से कोई
  316. 14:01भी खुश नहीं है। ना तुम्हारे पापा मम्मी
  317. 14:04और ना ही मैं। देखो कुछ फैसले भावनाओं में
  318. 14:07बहकर नहीं लिए जाते। अभी भले तुम्हें सब
  319. 14:10सही लग रहा हो लेकिन यह तुम्हारे भविष्य
  320. 14:12के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने गंभीर और
  321. 14:15प्रभावशाली लहजे में कहा। शिप्रा ने उनकी
  322. 14:18आंखों में देखते हुए पूछा। आप आखिर किस
  323. 14:20फैसले की बात कर रहे हैं?
  324. 14:22उसकी आवाज में अब हल्की बेचैनी और उलझन
  325. 14:25झलक रही थी। जैसे वह समझने की कोशिश कर
  326. 14:28रही हो कि आखिर यह सब चल क्या रहा है।
  327. 14:32देखो शिप्रा सब कुछ जानते-बूझते भी अनजान
  328. 14:35बनने की कोशिश मत करो। तुम यह कहकर क्या
  329. 14:38साबित करना चाहती हो कि तुम्हें नहीं पता
  330. 14:40हम किस मुद्दे में बात कर रहे हैं। बीना
  331. 14:43जी ने गुस्से में कहा।
  332. 14:45हम तुम्हारे श्रवण से तलाक ना लेने की बात
  333. 14:47कर रहे हैं। मैं अपनी बेटी की जिंदगी की
  334. 14:49कल्पना किसी भिखारी के साथ नहीं कर सकती।
  335. 14:52तुम जिससे कहोगी हम तुम्हारी शादी के लिए
  336. 14:54हर जगह बात करेंगे। लेकिन पहले तुम श्रवण
  337. 14:57से तलाक ले लो। उनकी आवाज में गुस्सा तो
  338. 15:00था। लेकिन असली दर्द समाज के तानों का था।
  339. 15:03बीना जी की बातों ने उस दर्द को और गहरा
  340. 15:05कर दिया था जो अक्सर मौका मिलते ही शिप्रा
  341. 15:08पर तंज कसती रहती थी।
  342. 15:10शिप्रा ने बिना घबराए सीधा अपनी मां की
  343. 15:13आंखों में देखते हुए कहा, क्या आप मुझे यह
  344. 15:15बताएंगी कि आप लोग क्यों चाहते हैं कि मैं
  345. 15:18श्रवण से तलाक ले लूं? अगर उसके गरीब होने
  346. 15:20के अलावा कोई और भी तार्किक कारण है तो आप
  347. 15:23जरूर बताइए। मैं उस बारे में सोचने के लिए
  348. 15:26तैयार हूं। बताइए कोई है क्या? उसका सवाल
  349. 15:30सुनकर कमरे में सन्नाटा छा गया। सबकी
  350. 15:32जुबान मानो थम गई। किसी के पास तुरंत कोई
  351. 15:36जवाब नहीं था। तभी राजदीप राय ने गंभीरता
  352. 15:39से कहा,
  353. 15:40जिस कारण को तुम नजरअंदाज कर रही हो, असल
  354. 15:43में वही सबसे बड़ा कारण है। तुम यह अच्छी
  355. 15:46तरह जानती हो कि तुम्हारा और श्रवण का कोई
  356. 15:48मेल नहीं है। हम एक सामाजिक ढांचे में
  357. 15:51रहते हैं। जहां सिर्फ दो लोगों का नहीं
  358. 15:53बल्कि पूरे परिवार का स्तर और रिश्ते देखे
  359. 15:56जाते हैं। हमारी इज्जत, हमारी पहचान,
  360. 15:59हमारा रुतबा यह सब हमारी रिश्तेदारियों से
  361. 16:02ही तो तय होता है। फिर उन्होंने थोड़ी देर
  362. 16:05रुक कर आगे कहा। और सच यही है शिप्रा कि
  363. 16:08जिस सामाजिक ढांचे में हम रहते हैं उस
  364. 16:10ढांचे में उस सोसाइटी में श्रवण कहीं फिट
  365. 16:13नहीं बैठता।
  366. 16:15शिप्रा के पिता राजदीप राय की बातों में
  367. 16:17तर्क तो था लेकिन उसके पीछे छुपा हुआ
  368. 16:20दिखावटी सामाजिक दबाव साफ झलक रहा था।
  369. 16:23शिप्रा अब तक शांत बैठी थी। मुश्किल
  370. 16:25परिस्थितियों और तीखे सवालों का सामना
  371. 16:28करना तो अब उसकी आदत सी बन गई थी। उसकी
  372. 16:30आंखों में एक दृढ़ता उभरने लगी थी। वो अब
  373. 16:33सिर्फ सुनने के लिए नहीं मजबूती से जवाब
  374. 16:35देने के लिए तैयार हो रही थी। आप किस
  375. 16:38रुतबे की बात कर रहे हैं पापा? जब भरी
  376. 16:40महफिल में मुख्तार ने मेरी जबरदस्ती शादी
  377. 16:43श्रवण से करवा दी थी तब कहां गया था आपका
  378. 16:45रुतबा? उस वक्त कोई समाज का ठेकेदार आगे
  379. 16:48क्यों नहीं आया? मुख्तार को देख सब एक-एक
  380. 16:51करके दुम दबाकर भाग रहे थे। ऐसे खतरनाक
  381. 16:55माहौल में अगर कोई मेरे साथ खड़ा था, तो
  382. 16:57वह सिर्फ और सिर्फ श्रवण ही था। उसने तो
  383. 17:00किसी की परवाह नहीं की।
  384. 17:02शिप्रा पूरी तरह से भरी हुई थी। वो रुकी
  385. 17:05नहीं। वो बोलती ही गई। आपको तो यह भी नहीं
  386. 17:08पता कि कुछ दिन पहले रजत [संगीत] के भेजे
  387. 17:10हुए गुंडे मेरे चेहरे पर तेजाब डालने आए
  388. 17:12थे। अगर उस दिन श्रवण वहां नहीं होता तो
  389. 17:15आज आपकी बेटी का चेहरा किसी को दिखाने
  390. 17:17लायक नहीं रहता। उसने अपनी जान की परवाह
  391. 17:20किए बिना मुझे बचाया।
  392. 17:22शिप्रा की आवाज भर्रा गई थी। लेकिन उसकी
  393. 17:25बात किसी तमाचे की तरह पूरे कमरे में गूंज
  394. 17:27गई। वो रुकने को तैयार नहीं थी। इस बार
  395. 17:30उसने अपने पापा राजदीप की ओर देखा और बोली
  396. 17:34और आपने आपने क्या किया? जिस इंसान ने
  397. 17:37मेरी जिंदगी बर्बाद करने की कोशिश की उसी
  398. 17:40से समझौता करके उसे जेल से बाहर निकलवा
  399. 17:42दिया। इतना ही नहीं वो हमारे ऑफिस तक आ
  400. 17:46गया और हद तो यह है कि आप लोग उसी से मेरी
  401. 17:48शादी करवाना चाहते थे या शायद अभी भी
  402. 17:50चाहते हैं। बीना जी, राजदीप और बलवंत राय
  403. 17:54तीनों के पास शिप्रा की बातों का कोई जवाब
  404. 17:56नहीं था। कुछ पल की खामोशी के बाद बीना जी
  405. 17:59खुद को रोक नहीं पाई और तुरंत बोल पड़ी।
  406. 18:02अरे बेटी हम श्रवण के किए हुए एहसान को
  407. 18:04नकार नहीं रहे। उन्होंने थोड़ा नरम लेकिन
  408. 18:07जिद भरे स्वर में कहा। लेकिन उसके लिए उसे
  409. 18:10अपना पति बनाए रखना। यह समझदारी नहीं है।
  410. 18:13उसने जो किया उसके बदले हम उसे पैसे देकर
  411. 18:16उसका भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं। शिप्रा
  412. 18:20के होठों पर एक कड़वी हंसी आ गई और उसने
  413. 18:22तंज कसते हुए कहा। वाह कितने एहसान फरामोश
  414. 18:26हैं आप लोग। किसी के किए हुए त्याग और
  415. 18:29साहस को आप पैसों में तोलना चाहते हैं।
  416. 18:32बीना जी चुप हो गई। उनके पास अब कहने को
  417. 18:35कुछ नहीं था। बलवंत राय के चेहरे पर अब
  418. 18:38सख्ती साफ नजर आ रही थी। रजत की घिनौनी
  419. 18:41करतूत का सच जो अभी उन्होंने शिप्रा के
  420. 18:43मुंह से सुना उसने उन्हें अंदर तक झकझोर
  421. 18:45दिया था। मन ही मन उन्हें अपने पिछले कुछ
  422. 18:48फैसलों पर अफसोस होने लगा। उनकी आंखों में
  423. 18:51एक ठोस फैसला उभर आया। फिर कुछ देर सोचकर
  424. 18:54उन्होंने गहरी आवाज में कहा ठीक है बीती
  425. 18:59बातों को यहीं छोड़ देते हैं। इसके बाद
  426. 19:02उन्होंने सीधे शिप्रा की ओर देखा और बोले
  427. 19:05मैं तुम्हारी बात मानने को तैयार हूं। अब
  428. 19:08तुम बताओ तुम चाहती क्या हो?
  429. 19:12राजदीप राय हैरानी से बलवंत राय की ओर
  430. 19:14देखने लगे। शिप्रा भी उनकी बात सुनकर
  431. 19:16अचंभित रह गई। उसे समझ नहीं आ रहा था कि
  432. 19:19क्या जवाब दे। कहीं उसका जवाब उसके ही गले
  433. 19:22की फांस ना बन जाए। यही सोचकर उसने बहुत
  434. 19:24संभल कर कहा। मैं दूसरी शादी नहीं करना
  435. 19:28चाहती।
  436. 19:30मतलब तुम श्रवण के साथ ही शादीशुदा रिश्ते
  437. 19:33में रहना चाहती हो। बलवंत राय ने सीधा
  438. 19:36सवाल किया। अब यह सवाल शिप्रा के लिए
  439. 19:39सचमुच धर्म संकट बन गया था। कुछ पल सोचने
  440. 19:42के बाद उसने अपने शब्दों को तोलते हुए
  441. 19:44कहा। मैं श्रवण से तलाक नहीं लेना चाहती।
  442. 19:48उसके इस जवाब से बलवंत राय के चेहरे पर
  443. 19:51गहरी सोच उभर आई। उन्होंने गौर किया कि
  444. 19:54शिप्रा ने यह नहीं कहा कि वह श्रवण के साथ
  445. 19:56रहना चाहती है बल्कि सिर्फ इतना कहा कि वो
  446. 19:59उससे तलाक नहीं चाहती। कुछ पल बाद
  447. 20:02उन्होंने पूछा जब तुम श्रवण से तलाक नहीं
  448. 20:05लेना चाहती तो फिर उसके साथ रहती क्यों
  449. 20:07नहीं हो? वो अब भी सर्वेंट क्वार्टर में
  450. 20:10क्यों रह रहा है? यह सवाल सीधा था और इस
  451. 20:13बार शिप्रा के पास बचने का कोई आसान
  452. 20:15रास्ता नहीं था।
  453. 20:17थोड़ा संभलते हुए शिप्रा ने जवाब दिया,
  454. 20:20श्रवण को सर्वेंट क्वार्टर में रखने का
  455. 20:22फैसला तो आप लोगों का ही था। बलवंत राय
  456. 20:25हल्के से मुस्कुराए और बोले, ठीक है, तो
  457. 20:28फिर कल से श्रवण को घर के अंदर रहने को
  458. 20:30कहो और अब समय आ गया है कि तुम लोग भी यह
  459. 20:33स्वीकार करो कि श्रवण ही तुम्हारा दामाद
  460. 20:35है। इस बार दादा बलवंत राय ने अपने फैसले
  461. 20:39में कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी थी। राजदीप
  462. 20:42राय और बीना जी के चेहरे पर एक पल के लिए
  463. 20:44मायूसी उभरी। लेकिन हालात को समझते हुए
  464. 20:47राजदीप ने धीमे स्वर में कहा, ठीक है
  465. 20:50पिताजी कल से श्रवण हमारे साथ ही रहेगा।
  466. 20:53मैं आज ही उसके रहने का पूरा इंतजाम कर
  467. 20:55देता हूं। यह सुनते ही जैसे शिप्रा के
  468. 20:58पैरों तले जमीन खिसक गई। उसे बिल्कुल
  469. 21:01उम्मीद नहीं थी कि उसके पापा इतनी जल्दी
  470. 21:03और इतनी आसानी से श्रवण को अपना दामाद मान
  471. 21:06लेंगे। अब उसके पास मना करने का कोई
  472. 21:08रास्ता नहीं बचा था। एक तरह से वह अपने ही
  473. 21:11बुने हुए जाल में फंस चुकी थी। वो चुपचाप
  474. 21:14बैठी रही लेकिन उसके मन में सवालों का
  475. 21:16तूफान उठ रहा था। अब क्या होगा? कैसे
  476. 21:20निभेगा यह सब? और सबसे बड़ी बात वो श्रवण
  477. 21:23को यह सब कैसे समझाएगी? शिप्रा ने गहरी
  478. 21:26सांस [संगीत] ली। उसने मन ही मन तय किया
  479. 21:28कि वो श्रवण के साथ मिलकर इस स्थिति को
  480. 21:31संभालने की कोशिश करेगी। लेकिन अंदर ही
  481. 21:33अंदर उसके मन में कहीं एक डर अब भी था।
  482. 21:36क्या यह सच में इतना आसान होगा? बलवंत राय
  483. 21:39के फैसले के बाद सब अपने-अपने कमरों में
  484. 21:42लौट गए। शिप्रा भी अपने रूम में आ चुकी थी
  485. 21:44और दीवार पर लगे बड़े से शीशे के सामने
  486. 21:46खड़ी होकर वो खुद से ही सवाल कर रही थी।
  487. 21:49याद करो शिप्रा जब से तुम्हारी लाइफ में
  488. 21:52श्रवण आया है। तुम्हारे ऊपर आई हर मुश्किल
  489. 21:54से तुम्हें उसी ने बाहर निकाला है। लेकिन
  490. 21:57अब जो मुश्किल खड़ी हो गई है उसका कारण तो
  491. 22:00खुद श्रवण ही है। और इस मुश्किल से बाहर
  492. 22:02तभी निकला जा सकता है जब श्रवण ही लाइफ से
  493. 22:05बाहर निकल जाए। [संगीत] लेकिन क्या तुम
  494. 22:08ऐसा चाहोगी? संतों के झाड़ू पोछे में
  495. 22:10जितनी सफाई थी, उतनी ही सफाई उसके दिल में
  496. 22:13भी थी। उसका सीधा सच्चा खरा स्वभाव अपने
  497. 22:16दिल की किसी भी बात को बिना किसी मिलावट
  498. 22:19और भय के बेबाक तरीके से बाहर ले आता था।
  499. 22:22वो जरूर राय फैमिली के महल की काम वाली
  500. 22:25थी। लेकिन उसके चेहरे की मासूमियत और
  501. 22:27खूबसूरती महल की किसी भी लड़की से कम नहीं
  502. 22:30थी। [संगीत] वैसे तो अभी उसके सपनों में
  503. 22:32कोई राजकुमार नहीं था। लेकिन जब से शौर्य
  504. 22:35सर्वेंट क्वार्टर में रहने आया था और जब
  505. 22:37से उसने अपना भिखारी वाला अवतार त्यागा था
  506. 22:40वो उसके चेहरे और पर्सनालिटी को पसंद करने
  507. 22:42लगी थी। वो शौर्य के बारे में सिर्फ इतना
  508. 22:45ही जानती थी कि वो शिप्रा का ड्राइवर है।
  509. 22:48इसीलिए उसके कमरे की सफाई करते-करते उसने
  510. 22:51अपने दिल की बात बड़े बिंदास तरीके से
  511. 22:53शौर्य को बता भी दी थी। और आज वो अपने
  512. 22:56झाड़ू पोछे के साथ अपनी प्रेम कहानी की
  513. 22:58स्क्रिप्ट दिल में लिए अपनी प्रिय शिप्रा
  514. 23:01दीदी के कमरे का दरवाजा खटखटा रही थी।
  515. 23:04[संगीत] शिप्रा दीदी क्या मैं अंदर आ
  516. 23:06जाऊं? शिप्रा अभी-अभी नींद से उठी ही थी।
  517. 23:09शतो हमेशा की तरह झाड़ू पोछा लेकर कमरे की
  518. 23:12सफाई में लग जाती है। पिछली रात वैसे ही
  519. 23:15शिप्रा के लिए बहुत भारी रही थी। उसके
  520. 23:17दिमाग में बस एक ही बात घूम रही थी। उसे
  521. 23:20शौर्य को सर्वेंट क्वार्टर से अपने घर में
  522. 23:23लाना था। यही बात उसे लगातार परेशान किए
  523. 23:26जा रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह
  524. 23:29शौर्य के सामने अपनी [संगीत] स्थिति कैसे
  525. 23:31स्पष्ट करें। ऊपर से अब उसे शौर्य को घर
  526. 23:34में रहने के लिए मनाना भी था। कल तक तो
  527. 23:36शौर्य खुद यहां से जाने की बात कर रहा था
  528. 23:39और आज हालात ऐसे थे कि शिप्रा को ही उसे
  529. 23:41रोकने के लिए समझाना पड़ रहा था। एक दिन
  530. 23:45पहले ही शिप्रा ने शौर्य का लव प्रपोजल
  531. 23:48रिजेक्ट कर उसे उसकी औकात दिखा दी थी। और
  532. 23:51आज शिप्रा को उसी से अपने साथ रहने की
  533. 23:54गुजारिश करनी थी।
  534. 23:57उसने मन ही मन सोचा और उसे इस सिचुएशन पर
  535. 24:00हंसी आ गई। वाह री किस्मत वो जल्दी से
  536. 24:04फ्रेश होकर आई और शीशे के सामने खड़ी होकर
  537. 24:06बाल बनाने लगी। उदर्शन तो सफाई तो कर रही
  538. 24:10थी लेकिन हर 2 मिनट में चोरी-चोरी [संगीत]
  539. 24:12शिप्रा को देख रही थी जैसे टीवी का कोई
  540. 24:14सीरियल चल रहा हो और उसका परफेक्ट सीन मिस
  541. 24:17ना हो जाए। शिप्रा ने आईने में ही उसकी
  542. 24:20हरकत पकड़ ली। क्या बात है शंतो? आज
  543. 24:24तुम्हारा मन काम करने का नहीं कर रहा
  544. 24:26क्या? उसने पीछे देखे बिना ही पूछा। नहीं
  545. 24:28नहीं दीदी ऐसा कुछ नहीं है। संतो घबरा गई
  546. 24:32जैसेंगे हाथों पकड़ी गई हो। [संगीत]
  547. 24:34शिप्रा अब उसकी तरफ पलटी। कोई तो बात है।
  548. 24:38बोलना क्या चाहती हो? बताओ क्या बात है?
  549. 24:41संतो ने झाड़ू को ऐसे पकड़ लिया जैसे वो
  550. 24:43उसका सहारा हो। फिर धीरे से बोली बात तो
  551. 24:46है दीदी पर पहले आप प्रॉमिस करो कि आप
  552. 24:49गुस्सा नहीं करोगी। शिप्रा ने भौए उठाई।
  553. 24:53अरे बाप रे इतनी बड़ी बात है क्या? शंतू
  554. 24:56थोड़ी हड़बड़ा गई। पर तुरंत ही सिर हिलाते
  555. 24:59हुए बोली नहीं मतलब है भी और नहीं भी।
  556. 25:02मतलब थोड़ा सा बस हल्काफुल्का वाला गुस्सा
  557. 25:05भी नहीं करना। अरे मैं भला तुम पर क्यों
  558. 25:07गुस्सा करूंगी? बोलो ना क्या बात है?
  559. 25:10शिप्रा मुस्कुराते हुए बोली। नहीं दीदी
  560. 25:13पहले आप प्रॉमिस करो गुस्सा बिल्कुल नहीं
  561. 25:15करोगी। संतो जिद भरे लेकिन मासूम स्वर में
  562. 25:18बोली। इस पर शिप्रा हंसते हुए उसके पास आ
  563. 25:21गई। अरे बाबा नहीं करूंगी गुस्सा। अब बताओ
  564. 25:25भी इतना सस्पेंस क्यों बना रही हो? संतो
  565. 25:28ने गहरी सांस ली जैसे किसी बहुत बड़ी बात
  566. 25:30का ऐलान करने जा रही हो। फिर धीरे-धीरे
  567. 25:33बोली दीदी आपका जो ड्राइवर है ना श्रवण वो
  568. 25:38आपसे बहुत डरता है। शिप्रा एक पल के लिए
  569. 25:42चौकी फिर बोए सिक कोड़ कर बोली बस यही बात
  570. 25:46कहने में तुम इतना डर रही थी। शंतू जल्दी
  571. 25:50से बोली नहीं दीदी वो तो दूसरी बात थी।
  572. 25:53असल बात तो अभी बाकी है। शिप्रा ने हाथ
  573. 25:56बांधते हुए कहा तो फिर जल्दी से असल बात
  574. 26:00भी बता दो। संतों ने आंखें बंद की जैसे
  575. 26:03हिम्मत इकट्ठा कर रही हो और एक ही सांस
  576. 26:05में बोल गई। दीदी मुझे श्रवण बहुत पसंद है
  577. 26:09और शायद वो भी मुझे पसंद करता है लेकिन
  578. 26:11आपके डर से वो मेरे सामने कुछ बोलता ही
  579. 26:14नहीं। इतना कहकर उसने धीरे से एक आंख खोली
  580. 26:17और मासूमियत से पूछा।
  581. 26:19अब आपको गुस्सा तो नहीं आ रहा ना? शिप्रा
  582. 26:23उसकी बात सुनकर सन्न रह गई। उसे लगा यह
  583. 26:25लड़की क्या बोल रही है? शंतो उसी से उसके
  584. 26:28पति के बारे में कह रही है कि वह उसे पसंद
  585. 26:30करती है और साथ में यह भी कि श्रवण भी उसे
  586. 26:33पसंद करता है। शिप्रा के शरीर में ऊपर से
  587. 26:36नीचे तक झनझनाहट सी होने लगी। शिप्रा को
  588. 26:39समझ नहीं आया कि वो इस पर गुस्सा करे या
  589. 26:41अपनी किस्मत पर हंसे। उसका पति उसकी ही
  590. 26:44नौकरानी को पसंद करता है। एकदम से उसने
  591. 26:46खुद को नॉर्मल किया और सोचने लगी। वैसे
  592. 26:50इसमें गलत भी क्या है? उस बेचारे ने अपनी
  593. 26:52औकात के हिसाब से ही लड़की पसंद की है। और
  594. 26:55सच तो यह भी है कि संतो कोई कम सुंदर नहीं
  595. 26:58थी। उसका मासूम चेहरा किसी का भी ध्यान
  596. 27:01खींच सकता था। शिप्रा को संतो के मुंह से
  597. 27:03श्रवण के लिए ऐसी बात सुनने की उम्मीद
  598. 27:05नहीं थी। पर इसमें संतो की गलती भी क्या
  599. 27:08थी? उसे तो पता ही नहीं था कि श्रवण
  600. 27:10शिप्रा का पति है। शिप्रा ने संभलते हुए
  601. 27:13पूछा। अच्छा एक बात बताओ तुमने श्रवण को
  602. 27:17अपने दिल की बात बताई थी?
  603. 27:19संतो ने मासूमियत से कहा, हां बताई थी ना
  604. 27:22दीदी पर वो आपसे डरता है इसलिए उसने कोई
  605. 27:25जवाब ही नहीं दिया। अच्छा तो क्या कहा था
  606. 27:29उसने? शिप्रा ने थोड़ा कुरदते हुए पूछा।
  607. 27:32उसे डर था कि अगर आपको पता चल गया कि वो
  608. 27:35मुझे पसंद करता है तो आप उसे नौकरी से
  609. 27:37निकाल दोगी। इसी डर से वह कुछ बोल ही नहीं
  610. 27:40पाया। संतो ने वही बताया जो श्रवण ने उससे
  611. 27:43कहा था। यह सुनकर शिप्रा सोच में पड़ गई।
  612. 27:46क्या सच में ऐसा हो सकता है कि श्रवण संतो
  613. 27:49को पसंद करने लगा हो? उसके मन में हल्की
  614. 27:51सी जलन भी उभर आई। उसने सोचा शंतो कहीं
  615. 27:55ज्यादा ही इमोशनली ना जुड़ जाए। उससे पहले
  616. 27:58ही उसे सच्चाई पता होनी चाहिए। वैसे भी
  617. 28:01अगर श्रवण घर में रहने आएगा तो यह बात
  618. 28:03ज्यादा दिन छिप नहीं पाएगी। यही सोचकर
  619. 28:05शिप्रा ने उससे पूछा। अच्छा संतो एक बात
  620. 28:08बताओ क्या तुम मेरे पति से मिली हो? आपने
  621. 28:12कभी मिलवाया ही नहीं दीदी? फिर संतो ने
  622. 28:14सहानुभूति जताते हुए कहा आपके साथ जो हुआ
  623. 28:18था उसके बाद [संगीत] हां यह तो है लेकिन
  624. 28:21क्या तुम्हारा कभी मन नहीं किया उन्हें
  625. 28:23देखने का शिप्रा ने बात आगे बढ़ाते हुए
  626. 28:26पूछा एक बार देखने का तो बड़ा मन किया था
  627. 28:29दीदी पर मैं आपको दुख नहीं देना चाहती थी
  628. 28:32संतो धीमे स्वर में बोली शिप्रा ने एक पल
  629. 28:35उसे देखा फिर सीधे कहा मैं नहीं चाहती कि
  630. 28:39तुम्हें बाद में ज्यादा दुख हो इसीलिए अभी
  631. 28:42बता रही हूं श्रवण ही वो है जिससे मेरी
  632. 28:45शादी हुई है। क्या संतो का मुंह खुला का
  633. 28:48खुला रह गया?
  634. 28:50उसे यकीन ही [संगीत] नहीं हुआ जिसे वो
  635. 28:53पसंद करने लगी थी वही शिप्रा दीदी का पति
  636. 28:55है। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह
  637. 28:58एकदम चुप सी हो गई। उसे लगने लगा यह कैसी
  638. 29:01बात कह दी उसने। पर साथ ही उसे राहत भी
  639. 29:04हुई कि समय रहते सच पता चल गया। मुझे माफ
  640. 29:07कर दीजिए दीदी। मुझे नहीं पता था कि श्रवण
  641. 29:10आपका पति है इसीलिए मैं आपसे इतना सब बोल
  642. 29:12गई। संतो शर्मिंदा होते हुए बोली इस पर
  643. 29:15शिप्रा ने हल्के स्वर में कहा अरे नहीं
  644. 29:18इसमें शर्मिंदा होने की क्या बात है?
  645. 29:20तुमने कुछ भी जानबूझकर नहीं किया। अब संतो
  646. 29:24को याद आया। शायद इसी वजह से श्रवण ने
  647. 29:27उससे कहा था कि वह इस बारे में शिप्रा से
  648. 29:29बात कर ले। उसके चेहरे पर ग्लानी साफ झलक
  649. 29:32रही थी। शिप्रा ने उसे फिर समझाया।
  650. 29:35तुम्हें शर्मिंदा होने की कोई जरूरत नहीं
  651. 29:37है। संतो तुमने कुछ गलत नहीं किया। कोई और
  652. 29:40समय होता तो शायद मैं खुद तुम दोनों को
  653. 29:43मिलवाती। लेकिन अभी दादा जी ने साफ कह
  654. 29:45दिया है कि आज से श्रवण इसी घर में रहेगा।
  655. 29:48इसीलिए जब तक वो यहां है मैं कुछ नहीं कर
  656. 29:51सकती। खैर संतो फटाफट शिप्रा के कमरे की
  657. 29:54सफाई करके चली गई थी। पर शिप्रा के दिमाग
  658. 29:56में अभी भी संतो के द्वारा कही गई बातें
  659. 29:58ही घूम रही थी। वो सोचने पर मजबूर थी कि
  660. 30:02क्या सच में श्रवण संतो को पसंद करता
  661. 30:04होगा?
  662. 30:05वैसे शिप्रा को इसमें कुछ गलत भी नहीं लग
  663. 30:07रहा था। अगर उसकी मजबूरी नहीं होती तो वह
  664. 30:10खुद दोनों को मिलाने की कोशिश करती। लेकिन
  665. 30:12अभी के हालात ऐसे थे कि अगर इन दोनों के
  666. 30:15बीच कुछ होने वाला भी होता तो शिप्रा नहीं
  667. 30:17चाहती थी कि शंतों के मन में कोई उम्मीद
  668. 30:19जागे। यही वजह थी कि उसने शंतों को सच्चाई
  669. 30:23बता दी। ताकि वो श्रवण से ज्यादा इमोशनली
  670. 30:26अटैच ना हो जाए और बाद में उसे दूर होने
  671. 30:28में तकलीफ ना हो। अब संतो शिप्रा और श्रवण
  672. 30:32की सच्चाई जानकर खुद ही उससे दूर [संगीत]
  673. 30:34हो जाएगी। यह सोचकर शिप्रा को श्रवण के
  674. 30:37लिए बुरा लग रहा था। क्योंकि उसकी वजह से
  675. 30:39ही उसे संतो से दूर होना पड़ेगा। अगर उसके
  676. 30:42दादाजी ने श्रवण को उसके साथ रहने की शर्त
  677. 30:45ना रखी होती तो वह कभी भी उन्हें अलग करने
  678. 30:48की कोशिश नहीं करती।
  679. 30:50अब वो सोचने [संगीत] लगी कि वो श्रवण को
  680. 30:53कैसे मनाए कि वो यहीं रुके। क्या वो उसे
  681. 30:55अपने पति के रूप में स्वीकार कर पाएगी? इस
  682. 30:58[संगीत] बारे में सोचकर उसे लगा कि वो ऐसा
  683. 31:00नहीं कर पाएगी। लेकिन परिवार के सामने उसे
  684. 31:03यह ड्रामा तो करना ही पड़ेगा कि उसने
  685. 31:05श्रवण को अपने पति के रूप में स्वीकार कर
  686. 31:08लिया है। अगर श्रवण की अपनी कोई मजबूरी ना
  687. 31:11होती तो वो उसे डमी पति के रूप में हमेशा
  688. 31:14के लिए स्वीकार कर लेती। शिप्रा ने अपनी
  689. 31:17घड़ी में समय देखा, तो घड़ी में 9:00 बजने
  690. 31:19वाले थे। उसने सोचा कि श्रवण के जाने से
  691. 31:22पहले उसे उससे बात कर लेनी चाहिए। यही
  692. 31:25सोचकर वो अपने कमरे से बाहर निकली और
  693. 31:27सर्वेंट क्वार्टर की ओर बढ़ गई। जब शिप्रा
  694. 31:30श्रवण के कमरे के पास पहुंची, तो उसे अंदर
  695. 31:32से दो लोगों की आवाजें सुनाई दी। वो
  696. 31:35खिड़की के पास गई और महसूस किया कि कमरे
  697. 31:37में श्रवण के साथ शंतो भी है। यह जानकर कि
  698. 31:41शंतो उसके साथ कमरे में अकेली है। वो धीरे
  699. 31:44से खिड़की के पास खड़ी हो गई और उनकी
  700. 31:46बातें सुनने लगी। तभी उसे संतो की आवाज
  701. 31:49सुनाई दी। तुमने मेरे साथ गलत किया।
  702. 31:53तुम्हें पहले ही बता देना चाहिए था कि
  703. 31:55शिप्रा दीदी की शादी तुमसे हुई है। अगर
  704. 31:57मुझे पहले पता होता तो मैं ऐसी बेवकूफी
  705. 32:00कभी नहीं करती। ओह हेलो मेरी उनसे
  706. 32:03जबरदस्ती शादी हुई है। इस तरह शादी होने
  707. 32:05से मैं उनका पति नहीं हो जाता। तुम्हें
  708. 32:08लगता है मेरे जैसी हैसियत वाले इंसान को
  709. 32:10वो अपना पति मानेंगी। शौर्य का चिढ़ा हुआ
  710. 32:13स्वर सुनाई दिया। बात उनके मानने या ना
  711. 32:16मानने की नहीं है। अगर मुझे पता होता तो
  712. 32:19मैं कभी तुमसे ऐसा बोलने की हिम्मत नहीं
  713. 32:21करती। तुम्हें पता है मैं कितनी बेवकूफ लग
  714. 32:23रही थी जब उन्होंने मुझे बताया कि तुम
  715. 32:25उनके पति हो। संतो उस पल को याद करके आहत
  716. 32:29लग रही थी। इस पर शौर्य ने उसकी ओर देखते
  717. 32:32हुए कहा तो क्या अब तुम मुझसे प्यार नहीं
  718. 32:34[संगीत] करती? क्या कहा? तुम अब भी ऐसा
  719. 32:38सोचते हो? तुम शिप्रा दीदी के पति हो। मैं
  720. 32:40अब तुम्हारे लिए ऐसा सोच भी नहीं सकती।
  721. 32:43संतो ने साफ शब्दों में जवाब दिया। इस पर
  722. 32:46शौर्य उसे समझाने की कोशिश करता हुआ बोला।
  723. 32:49अरे वो तो मैं सिर्फ नाम का पति हूं।
  724. 32:51हकीकत में थोड़ी उनका पति बन जाऊंगा। इस
  725. 32:54पर संतोष शौर्य को समझाने की कोशिश करती
  726. 32:57हुई बोली तुमने तो सपना दिखाकर मेरा सपना
  727. 33:00ही तोड़ दिया। रहने दो ज्यादा नौटंकी मत
  728. 33:02करो। आज से यही समझो कि मैं तुम्हारी साली
  729. 33:05हूं क्योंकि शिप्रा दीदी मेरी बड़ी बहन के
  730. 33:08जैसी ही है। तुम्हें नहीं पता वो बहुत
  731. 33:10अच्छी हैं। शंतों की बात सुनकर शौर्य के
  732. 33:13चेहरे पर मुस्कान आ गई। ठीक है। तुम्हारी
  733. 33:16यही इच्छा है तो यही सही। मैं अपने दिल पर
  734. 33:18पत्थर रख लूंगा। शिप्रा जो खिड़की के पास
  735. 33:21से दोनों की बातें सुन रही थी, उसे शौर्य
  736. 33:24का यह ड्रामा लगा। ठीक है, अब मैं यहां से
  737. 33:27जाती हूं। इतना बोलकर शंतो वहां से बाहर
  738. 33:30चली गई। शंतो को कमरे से बाहर निकलते
  739. 33:33देखकर शिप्रा खिड़की से साइड होकर एक
  740. 33:35दीवार की ओठ में आ गई। शंतो वहां से
  741. 33:38निकलकर सीधा विला की ओर चली गई। शंतों के
  742. 33:41लौटते कदमों में शिप्रा पहली बार सुस्ती
  743. 33:44देख रही थी। उसके कदम हमेशा जोश और एनर्जी
  744. 33:47से ही भरे नजर आते थे। शिप्रा कुछ देर
  745. 33:50वहीं खड़ी रही। उसकी जिंदगी हर पल उसके
  746. 33:53इम्तिहान ले रही थी। शायद यही वजह थी कि
  747. 33:56वो आजकल लोगों से कम अपने आप से ज्यादा
  748. 33:59सवाल जवाब कर रही थी। श्रवण और संतो की जो
  749. 34:02बातें सुनाई दे रही थी, क्या मुझे उन पर
  750. 34:05यकीन करना चाहिए? क्या श्रवण भी उन मर्दों
  751. 34:07जैसा है जो खूबसूरत लड़की देखते ही फिसल
  752. 34:10जाते हैं? नहीं। ऐसा नहीं हो सकता मेरा
  753. 34:14श्रवण।
  754. 34:15शिप्रा एकदम से बोलते बोलते [संगीत] रुक
  755. 34:17गई। उसके चेहरे पर हल्की सी हंसी खिल आई।
  756. 34:20शायद उसके मुंह से निकले मेरा श्रवण शब्द
  757. 34:23ने दिन रात हालातों से जूझ रहे उसके दिल
  758. 34:26को रेगिस्तानी धरती पर गिरी पानी की बूंद
  759. 34:29जैसी ठंडक पहुंचाई थी। शिप्रा के नसीब में
  760. 34:32शायद अभी खुशी के सिर्फ दो-चार पल ही थे।
  761. 34:35चुनौतियों से अब उसकी दोस्ती सी हो गई थी।
  762. 34:38ख्यालों की दुनिया से शिप्रा अब जमीन पर
  763. 34:40लौट चुकी थी। संतो के जाने के करीब 5 मिनट
  764. 34:43बाद शिप्रा शौर्य के कमरे के दरवाजे पर
  765. 34:46पहुंची। शौर्य अंदर कपड़े बदलते हुए
  766. 34:48फिल्मी गाना गुनगुना रहा था। संभल के दिल
  767. 34:52जरा फिर मोहब्बत कर रहा है तू। बोल किसके
  768. 34:56लिए धड़क रहा है तू। तभी शिप्रा दरवाजा
  769. 34:59खटखटाती है तो [संगीत] गाने की आवाज बंद
  770. 35:01हो जाती है। शिप्रा अंदर झांकती है। वो
  771. 35:04देखती है शौर्य शर्ट पहन रहा है। उसके बटन
  772. 35:07आधे खुले हैं। जैसे ही शौर्य की नजर
  773. 35:09शिप्रा पर पड़ती है वो झट से दरवाजा बंद
  774. 35:12कर देता है। शिप्रा उसकी इस हरकत पर
  775. 35:14मुस्कुरा देती है। करीब 30 सेकंड बाद
  776. 35:17दरवाजा फिर खुलता है। अब शौर्य ने शर्ट के
  777. 35:20सारे बटन बंद कर लिए थे। वो झिझकते हुए
  778. 35:23बोला। मुझे पता नहीं था कि बाहर आप खड़ी
  779. 35:25हैं। मैंने समझा था गिरधर काका हैं।
  780. 35:28शिप्रा उसकी घबराहट देख रही थी। [संगीत]
  781. 35:30अभी वह नहा कर आया था। उसके बालों से पानी
  782. 35:33की बूंदे टपक रही थी। उसका दमकता चेहरा
  783. 35:35देखकर शिप्रा सोचने लगी। कौन कह सकता है
  784. 35:39कि यह वही इंसान है जो कुछ दिन पहले
  785. 35:42भिखारी की जिंदगी जी रहा था। तभी शौर्य ने
  786. 35:45पूछा आप यहां अचानक कुछ काम था क्या? इस
  787. 35:49पर शिप्रा बोली क्या मैं अंदर आ सकती हूं?
  788. 35:52मुझे तुमसे कुछ बात करनी है। शौर्य एक तरफ
  789. 35:55हट गया और बोला, आइए।
  790. 35:59शिप्रा अंदर आई और कमरे को देखा। कमरा था
  791. 36:02तो साफ पर थोड़ा अस्त-व्यस्त। बेड पर
  792. 36:04कपड़े बिखरे थे। शौर्य ने तुरंत कपड़े
  793. 36:07हटाए, बिस्तर ठीक किया और बोला, बैठिए।
  794. 36:11शिप्रा बेड पर बैठ गई। तुम भी बैठ जाओ।
  795. 36:15शौर्य कुर्सी पर बैठ गया और उसके बोलने का
  796. 36:17इंतजार करने लगा। कुछ पल सोचकर शिप्रा
  797. 36:20[संगीत] बोली देखो श्रवण मैं जानती हूं
  798. 36:23तुम्हारे अपने प्लान हैं लेकिन अभी मैं
  799. 36:25मुश्किल में हूं [संगीत] और मुझे तुम्हारी
  800. 36:27मदद चाहिए।
  801. 36:29शौर्य ने थोड़ा हैरान होकर पूछा कैसी मदद
  802. 36:33और मैं आपकी मदद कैसे कर सकता हूं? देखो
  803. 36:36आज मेरी मेरे परिवार वालों के साथ लंबी
  804. 36:39बहस हुई और उसका नतीजा यह रहा कि तुम्हें
  805. 36:41अब हमारे साथ हमारे घर में रहना होगा।
  806. 36:45दादाजी की यही शर्त है। शिप्रा ने बेचैनी
  807. 36:48भरे स्वर में कहा तो शौर्य उसकी बात समझने
  808. 36:51की कोशिश करते हुए बोला
  809. 36:53लेकिन इस तरह की बेतुकी शर्त का क्या
  810. 36:55मतलब?
  811. 36:57इस पर शिप्रा ने गहरी सांस ली और कहा
  812. 37:00तुम्हें तो मालूम ही है मेरे परिवार वाले
  813. 37:03मेरी दूसरी शादी कराना चाहते हैं। उससे
  814. 37:06बचने का यही एक तरीका है कि तुम मेरे साथ
  815. 37:08मेरे घर में शिफ्ट हो जाओ। वो जैसे अपने
  816. 37:11दिल की बात साफ-साफ उसके सामने रख रही थी।
  817. 37:14[संगीत]
  818. 37:14शौर्य अंदर ही अंदर खुश था कि उसे शिप्रा
  819. 37:16के साथ रहने का मौका मिल रहा है। लेकिन
  820. 37:19उसने अपने चेहरे पर यह भाव जाहिर नहीं
  821. 37:21होने दिया। क्यों ना तुम अभी मेरे साथ
  822. 37:24चलो। तुम्हारी शिफ्टिंग हो जाएगी तो घर
  823. 37:27वालों के सिर पर सवार मेरी दूसरी शादी का
  824. 37:29भूत भी उतर जाएगा और मैं फाइनली बिजनेस
  825. 37:32में पूरा ध्यान लगा पाऊंगी।
  826. 37:36शिप्रा ने खुद को मन ही मन तैयार कर लिया
  827. 37:39था कि अब उसे शौर्य के साथ रहना ही होगा।
  828. 37:41शौर्य ने शिप्रा के वहां जाने से पहले कहा
  829. 37:45पर मैंने तो अपने रहने के लिए घर भी देख
  830. 37:47लिया है। आज ही शिफ्ट होना था। क्या शिपरा
  831. 37:51हैरानी से बोली
  832. 37:53इतनी जल्दी क्या थी तुम्हें घर देखने की?
  833. 37:55शौर्य ने कंधे उचकाते हुए कहा इतना सोचने
  834. 37:58का समय कहां था? जब यहां से जाना ही था तो
  835. 38:01जल्दी क्या और देर क्या? एक्चुअली [संगीत]
  836. 38:04मैं भी यही सोच रहा था कि अगर यहां से
  837. 38:06फ्री हो जाऊंगा तो अपनी नौकरी में पूरा
  838. 38:08ध्यान लगाऊंगा। वो जानबूझकर ऐसे बोल रहा
  839. 38:11था। वो देखना चाहता था कि उसकी बातों का
  840. 38:14शिप्रा पर क्या असर होता है। शिप्रा बेचैन
  841. 38:17सी दिखी। कुछ पल [संगीत] चुप रही। फिर
  842. 38:19धीरे से बोली मैं समझती हूं कि मुझे कहने
  843. 38:22का हक नहीं है कि तुम कहां रहो और कैसे
  844. 38:25रहो। लेकिन अगर तुम यहां से चले गए तो
  845. 38:27मेरे लिए बहुत मुश्किल हो जाएगी। तुम तो
  846. 38:30जानते हो अभी मेरे पास तुम्हें अपने साथ
  847. 38:32घर में रखने के अलावा कोई स्यूशन नहीं है।
  848. 38:35कहते हुए शिप्रा ने गहरी सांस ली और आगे
  849. 38:37कहा। मेरे घर वाले तो पहले से ही चाहते
  850. 38:40हैं कि मेरा तुमसे तलाक हो जाए और मेरी
  851. 38:43शादी किसी और से कर दें। इसीलिए मैं तुमसे
  852. 38:45रिक्वेस्ट कर रही हूं कुछ दिन मेरे घर में
  853. 38:47रह लो। हो सकता है तब तक उनका यह ख्याल भी
  854. 38:50बदल जाए। उसकी आवाज में पहली बार साफ झलक
  855. 38:54रहा था कि वो हालातों से बहुत हताश है और
  856. 38:56सच में मदद मांग रही है। शौर्य ने उसकी
  857. 39:00तरफ देखा। फिर धीरे से [संगीत] बोला।
  858. 39:02लेकिन मेरे आपके घर में रहने से बदनामी तो
  859. 39:05आपकी ही होगी।
  860. 39:07लोग तो आपके बारे में ही उल्टी सीधी बातें
  861. 39:09करेंगे। शौर्य की बात में चिंता थी। लेकिन
  862. 39:12कहीं ना कहीं वह यह भी देख रहा था कि
  863. 39:15शिप्रा उसके लिए कितनी दूर तक जाने को
  864. 39:17तैयार है। तुम्हें क्या लगता है? मुझे
  865. 39:20इसकी कोई परवाह है कि लोग मेरे बारे में
  866. 39:22क्या कहेंगे? और वैसे भी लोग मेरे बारे
  867. 39:25में इतना कुछ कह चुके हैं कि अब उनके पास
  868. 39:27कहने को क्या ही बचा होगा। शिप्रा ने साफ
  869. 39:30शब्दों में कहा। मैं तो बस अपने परिवार के
  870. 39:33उस दबाव से बचना चाहती हूं जो तुम्हारे
  871. 39:35यहां से जाने के बाद मुझ पर दूसरी शादी के
  872. 39:38लिए डाला जाएगा। उनकी सोच उफ तुम सुनोगे
  873. 39:42तो हैरान हो जाओगे। वो लोग तो रजत से ही
  874. 39:45मेरी शादी कराने को तैयार बैठे हैं।
  875. 39:49शिप्रा के मुंह से रजत का जिक्र सुनकर
  876. 39:51शौर्य ने अपनी आंखों को ऐसे बंद किया मानो
  877. 39:53वो अपने गुस्से को अंदर ही अंदर पी गया
  878. 39:55हो। उसने गंभीर नजर से शिप्रा की ओर देखा
  879. 39:58और कहा आप कब तक अपने घर वालों को यूं ही
  880. 40:01धोखा देती रहेंगी? जब तक उनके दिमाग से
  881. 40:05मेरी दूसरी शादी कराने का फितूर नहीं उतर
  882. 40:07जाता तब तक। शिप्रा ने बिना झिझक जवाब
  883. 40:10दिया। [संगीत] वैसे भी तुम्हारे यहां रहने
  884. 40:12से तुम्हारे काम पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
  885. 40:14तुम यहां से भी ऑफिस आ जा सकते हो। और
  886. 40:17मेरी तरफ से तुम पर कोई रोक-टोक नहीं
  887. 40:19होगी। तुम कहां जाते हो? किससे मिलते हो?
  888. 40:22मुझे कोई ऐतराज नहीं। वो उसे मनाने की
  889. 40:25पूरी कोशिश कर रही थी। शौर्य ने कुछ पल
  890. 40:28सोचा। शिप्रा की फिक्रमंद आंखों को देखा
  891. 40:31और फिर अपना सिर हिलाते हुए कहा,
  892. 40:34ठीक है। अगर आप चाहती हैं कि मैं यहां
  893. 40:36रहूं तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है। मैं तो
  894. 40:39बस आपके बारे में सोच कर मना कर रहा था।
  895. 40:42यह सुनते ही जैसे शिप्रा के सिर से बड़ा
  896. 40:44बोझ उतर गया। उसके चेहरे की टेंशन एकदम से
  897. 40:47गायब हो गई। वो तुरंत उठते हुए बोली तो
  898. 40:50फिर चलो अपना सामान पैक करो और मेरे साथ
  899. 40:53चलो। शौर्य को उम्मीद नहीं थी कि वो
  900. 40:56[संगीत] उसे तुरंत साथ ले जाने को कहेगी।
  901. 40:58वैसे भी उसके पास ज्यादा सामान नहीं था।
  902. 41:01बस एक छोटा सा बैग जिसमें कुछ कपड़े थे।
  903. 41:03वो बैग उठाकर शिप्रा के साथ उसके बंगले
  904. 41:06में पहुंच गया। फिर जैसे ही उसने अंदर कदम
  905. 41:09रखा सामने राजदीप राय और बीना जी बैठे हुए
  906. 41:13थे। शौर्य को वहां देखकर राजदीप राय का
  907. 41:15चेहरा तो भावहीन रहा लेकिन बीना जी के
  908. 41:18चेहरे पर साफ नाखुशी झलक रही थी। शौर्य ने
  909. 41:21दोनों को झुककर नमस्ते किया। राजदीप राय
  910. 41:24ने हल्के से सिर हिलाकर जवाब दे दिया
  911. 41:27लेकिन बीना जी का चेहरा वैसा ही बना रहा।
  912. 41:29हालांकि भीतर ही भीतर वो थोड़ी हैरान जरूर
  913. 41:32थी। उन्होंने शौर्य को पहले से इंप्रेसिव
  914. 41:35रूप में कभी नहीं देखा था। बिना दाढ़ी
  915. 41:38सलीके से तैयार उसका व्यक्तित्व पहले से
  916. 41:41बिल्कुल अलग और प्रभावशाली लग रहा था। एक
  917. 41:44पल को तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि यही
  918. 41:47वो इंसान है जिसे वह अब तक भिखारी समझती
  919. 41:50आई थी। कुछ ऐसा ही हाल राजदीप राय का भी
  920. 41:53था। शौर्य के इस बदले हुए रूप को देखकर
  921. 41:56उनके मन में जो खटक थी, वह काफी हद तक कम
  922. 41:59हो गई। अब उसे देखकर कोई भी उसे भिखारी
  923. 42:01नहीं कह सकता था। बस एक बात अब भी बाकी
  924. 42:04थी। उसके सामाजिक रुतबे की कमी और शायद
  925. 42:08यही बात इस घर में उसके लिए सबसे बड़ी
  926. 42:10कसौटी बनने वाली थी। बीना जी को अब भी
  927. 42:13यकीन नहीं हो रहा था। उन्होंने ध्यान से
  928. 42:16शौर्य को देखा। फिर शिप्रा से पूछ ही
  929. 42:18लिया। बेटा क्या यह वही है जिससे तुम्हारी
  930. 42:23शादी हुई है? मां का सवाल सुनकर शिप्रा एक
  931. 42:26पल को चौंकी। फिर उसे अपनी ही गलती का
  932. 42:28एहसास हुआ। मां पापा ने उसे इस रूप में
  933. 42:31कभी देखा ही नहीं था। मां पापा के चेहरे
  934. 42:34में थोड़ी संतुष्टि देखकर वो हल्का
  935. 42:36मुस्कुराते हुए उत्साह से बोली, हां मां
  936. 42:40यह श्रवण ही है। बीना जी के चेहरे के भाव
  937. 42:43धीरे-धीरे बदलने लगे। जिस दामाद की
  938. 42:45उन्होंने कल्पना की थी, शौर्य उससे कहीं
  939. 42:48बेहतर निकला। उनके मन की सबसे बड़ी चिंता
  940. 42:51थी बेटी और दामाद का बेमेल रूप। लेकिन वो
  941. 42:54चिंता अब एक ही पल में खत्म हो गई। अब
  942. 42:56उनकी नजरें बार-बार शौर्य के चेहरे पर टिक
  943. 42:59रही थी। अब कोई इसका मजाक नहीं उड़ा सकता
  944. 43:02और जहां तक पैसों का सवाल था वो तो आ ही
  945. 43:05जाते हैं कभी ना कभी। शिप्रा मां के बदलते
  946. 43:08भाव पड़ चुकी थी। अचानक उसमें कुछ नई
  947. 43:10एनर्जी सी आ गई थी। वो शौर्य के साथ
  948. 43:13सीढ़ियों की ओर बढ़ते हुए बोली मां मैं
  949. 43:15श्रवण को उसका कमरा दिखाकर आती हूं। इसके
  950. 43:18बाद दोनों ऊपर चले गए और नीचे डाइनिंग
  951. 43:20एरिया में राजदीप जी और बीना जी एक दूसरे
  952. 43:23को देखने लगे।
  953. 43:26आपने इसे पहले कभी इस रूप में देखा था?
  954. 43:29बीना जी ने धीमे से पूछा। नहीं राजदीप ने
  955. 43:34सिर हिलाया। मैं खुद हैरान हूं। मैंने
  956. 43:37सोचा भी नहीं था कि दाढ़ी हटाने के बाद यह
  957. 43:40ऐसा लगेगा। बीना जी ने राहत की सांस ली।
  958. 43:43सच कहूं तो मेरे सिर से बहुत बड़ा बोझ उतर
  959. 43:46गया। मैं तो इसके रूप को लेकर ही परेशान
  960. 43:49थी। लेकिन अब कम से कम कोई इसका मजाक तो
  961. 43:52नहीं बनाएगा। राजदीप जी ने भी हामी भरी।
  962. 43:55तुम ठीक कहती हो। और जहां तक इसकी स्थिति
  963. 43:58की बात है अगर हम साथ देंगे तो वह भी बदल
  964. 44:02जाएगी। उधर शिप्रा शौर्य को उसके कमरे में
  965. 44:05लेकर आई। वो कमरा उसके अपने कमरे के पास
  966. 44:07ही था। अब से यह तुम्हारा कमरा है। शिप्रा
  967. 44:11ने कहा [संगीत] अगर कुछ बदलवाना हो तो बता
  968. 44:14देना। शौर्य ने चारों तरफ देखा। फिर हल्की
  969. 44:17मुस्कान के साथ बोला। नहीं इसकी कोई जरूरत
  970. 44:20नहीं है। यह मेरी उम्मीद से भी बेहतर है।
  971. 44:23वो पहले से तैयार था। इसीलिए उसने तुरंत
  972. 44:26पूछा
  973. 44:28आपको ऑफिस नहीं जाना है क्या?
  974. 44:32हम जाना तो है लेकिन सोचा पहले तुम्हें
  975. 44:35यहां सेट कर दूं। शिप्रा ने जवाब दिया।
  976. 44:37[संगीत] इस पर शौर्य ने दरवाजे की ओर
  977. 44:39इशारा किया। तो चलिए मैं आपको ऑफिस
  978. 44:42[संगीत] छोड़ देता हूं। और तुम तुम्हें भी
  979. 44:44तो कहीं जाना था। शिप्रा ने उसकी आंखों
  980. 44:47में देखते हुए पूछा। मैं आपको छोड़कर चला
  981. 44:50जाऊंगा। उसने सहजता से जवाब दिया। दोनों
  982. 44:53नीचे आए। राजदीप जी और बीना जी अब भी वहीं
  983. 44:56बैठे थे। मां मैं ऑफिस जा रही हूं। श्रवण
  984. 44:59मुझे छोड़ देगा। शिप्रा ने कहा। राजदीप ने
  985. 45:02तुरंत पूछा। अच्छा और फिर यह कहां जाएगा?
  986. 45:07पापा श्रवण आज से एक नया ऑफिस ज्वाइन कर
  987. 45:09रहा है। मुझे छोड़कर वहीं चला जाएगा।
  988. 45:12राजदीप जी कुछ पल चुप रहे और सोचने लगे।
  989. 45:15[संगीत]
  990. 45:17नया ऑफिस उन्हें समझ नहीं आया कि इसकी
  991. 45:20जरूरत क्या है। लेकिन उन्होंने अभी कुछ
  992. 45:22कहना सही नहीं समझा। शौर्य शिप्रा को लेकर
  993. 45:25कार में ऑफिस की तरफ निकल गया। वो आधे
  994. 45:28रास्ते ही पहुंचे थे कि शौर्य का फोन बज
  995. 45:30उठा। उसने जेब से फोन निकाला। स्क्रीन पर
  996. 45:33नजर पड़ते ही उसके चेहरे का भाव हल्का सा
  997. 45:36बदल गया और बिना कुछ कहे उसने फोन का
  998. 45:39स्क्रीन शिप्रा की तरफ से घुमा लिया। जैसे
  999. 45:42वो नहीं चाहता था कि शिप्रा देखे कौन कॉल
  1000. 45:45कर रहा है। बलवंत राय, राजदीप और बीना जी
  1001. 45:49के दिमाग में आज काफी हल्कापन था। ऐसा लग
  1002. 45:52रहा था मानो तीनों के ही दिमाग में भिखारी
  1003. 45:55का भूत चढ़ा हुआ था। भूत ने सभी को भयभीत
  1004. 45:58कर रखा था। लेकिन अब अपने दामाद शौर्य के
  1005. 46:01नए अवतार को देखकर सभी का भूत उतर सा गया
  1006. 46:04है। अचानक शौर्य को लेकर सभी की सोच में
  1007. 46:07परिवर्तन की लहर उठ रही है। शौर्य अब
  1008. 46:10सर्वेंट क्वार्टर छोड़ शिप्रा के साथ उसके
  1009. 46:12घर में ही रहने लगा है। शायद यही उसके दिल
  1010. 46:15के अंदर की चाहत थी और शिप्रा के लिए सबसे
  1011. 46:18बड़ी राहत थी। शिप्रा अपने मकसद में
  1012. 46:20कामयाब हो गई थी। लेकिन शौर्य का मकसद आज
  1013. 46:23कुछ और ही था। कार की रफ्तार आज थोड़ी
  1014. 46:26धीमी ही रखनी पड़ रही थी। रास्ते में आज
  1015. 46:29ट्रैफिक कुछ ज्यादा ही था। एक तरफ कार का
  1016. 46:31हॉर्न बज रहा था तो दूसरी ओर शौर्य का
  1017. 46:34फोन। जब शौर्य का फोन लगातार बजता रहा तो
  1018. 46:37उसने आखिरकार फोन उठा लिया। दूसरी तरफ
  1019. 46:40मोहित रहना था। अभिवादन के बाद उसने कहा
  1020. 46:44सर क्या आप 1 घंटे में हमारे पास आ सकते
  1021. 46:46हैं?
  1022. 46:47शौर्य ने संक्षेप में जवाब दिया। ठीक है
  1023. 46:50मैं एक घंटे में पहुंचता हूं। इतना कहकर
  1024. 46:52उसने फोन काट दिया। शिप्रा की नजर शौर्य
  1025. 46:55पर ही थी और उसे ये बात भी परेशान कर रही
  1026. 46:58थी कि आखिर शौर्य उससे फोन छुपा क्यों रहा
  1027. 47:01है? उत्सुकता में उसने पूछ ही लिया। किसका
  1028. 47:04फोन था? शौर्य ने बड़ी ही सहजता से कहा।
  1029. 47:07एक दोस्त का। पूछ रहा था कि मैं कब तक
  1030. 47:10पहुंचूंगा।
  1031. 47:11शिप्रा को उसकी बात पर पूरा भरोसा तो नहीं
  1032. 47:14हुआ लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। थोड़ी देर
  1033. 47:17बाद शौर्य शिप्रा को ऑफिस छोड़कर पार्किंग
  1034. 47:19में गाड़ी खड़ी करने के बाद चाबी देते हुए
  1035. 47:22बोला, ठीक है मैं चलता हूं। अगर शाम को
  1036. 47:25समय मिला तो आपको फोन करूंगा। इसके बाद वो
  1037. 47:28सीधे बिग बुल के ऑफिस पहुंच गया। उसे
  1038. 47:31अंदाजा नहीं था कि मोहित रैना ने उसे
  1039. 47:33क्यों बुलाया है लेकिन उसे यकीन था कि बात
  1040. 47:36जरूर कुछ बहुत इंपॉर्टेंट ही होगी। वो
  1041. 47:38सीधे मोहित रैना के केबिन में गया जहां
  1042. 47:40विक्रम पहले से मौजूद था। उनके साथ एक और
  1043. 47:43व्यक्ति भी बैठा था जिसे शौर्य नहीं जानता
  1044. 47:46था। शौर्य को देखते ही मोहित रैना और
  1045. 47:49विक्रम खड़े हो गए। उनके साथ वो तीसरा
  1046. 47:51व्यक्ति भी सम्मान में उठ खड़ा हुआ। मोहित
  1047. 47:54रैना ने अपनी कुर्सी शौर्य को ऑफर की और
  1048. 47:56शौर्य जाकर उस पर बैठ गया। मोहित रैना
  1049. 47:59विक्रम के पास बैठते हुए बोले।
  1050. 48:02सर यह है मिस्टर राघव जिनके बारे में मैं
  1051. 48:04आपको बता रहा था। शौर्य ने राघव का
  1052. 48:07अभिवादन किया और कहा तो आप है राघव बजाज।
  1053. 48:11मैंने सुना है कि आपके पास बिग कलेक्शन के
  1054. 48:1430% शेयर हैं। क्या यह सच है? राघव बजाज
  1055. 48:18ने हल्का गला साफ करते हुए कहा,
  1056. 48:21[गला साफ़ करने की आवाज़] "जी हां, यह सच
  1057. 48:22है। मेरे पास 30% शेयर हैं और मैं उन्हें
  1058. 48:25आपको देने के लिए तैयार हूं।" शौर्य ने
  1059. 48:28थोड़ा राहत भरे रवय से सिर हिलाया। बहुत
  1060. 48:31बढ़िया। मुझे आपसे यही उम्मीद थी। लेकिन
  1061. 48:3430% शेयर से मेरा काम नहीं चलेगा। मुझे
  1062. 48:37लगभग 60% चाहिए। क्या आप मेरी यह उम्मीद
  1063. 48:40भी पूरी करवा सकते हैं? राघव बजाज
  1064. 48:43मुस्कुराते हुए बोला,
  1065. 48:45"सर, पहले आप यह डील तो कीजिए, भरोसा
  1066. 48:48रखिए। बाकी का 30% शेयर भी मैं आपके नाम
  1067. 48:51करवा दूंगा।" दरअसल, सच तो यह है कि मेरा
  1068. 48:54बड़ा भाई भी रौनित को पसंद नहीं करता। वो
  1069. 48:57सिर्फ पिताजी के दबाव में चुप है। अगर आप
  1070. 48:59उसे थोड़ा लालच देंगे, तो वह भी अपना शहर
  1071. 49:02आपको देने के लिए तैयार हो जाएगा।
  1072. 49:05शौर्य ने दिमाग में कुछ सोचते हुए सिर
  1073. 49:07हिलाया और फिर आगे बोला अच्छा तो यह बात
  1074. 49:10है। ठीक है लेकिन मैं देर नहीं करना
  1075. 49:14चाहता। जितनी जल्दी हो सके मैं सारे शहर
  1076. 49:16अपने नाम करवाना चाहता हूं। तो बताइए कब
  1077. 49:19मिलवा रहे हैं अपने बड़े भाई से? शौर्य की
  1078. 49:22बात सुनकर मोहित रैना बोला सर पुनीत बजाज
  1079. 49:26से भी हमारी बात हो चुकी है। वो 1 घंटे
  1080. 49:28में यहां पहुंचने वाले हैं। उम्मीद है
  1081. 49:30उनसे भी आज ही डील फाइनल हो जाएगी। वाह
  1082. 49:34बहुत बढ़िया। अगर ऐसा है तो पहले क्यों
  1083. 49:36नहीं बताया? मैं तो बेकार में परेशान हो
  1084. 49:39रहा था। शौर्य हल्का सा मुस्कुराया। ठीक
  1085. 49:42है। राघव के साथ सारी फॉर्मेलिटी पूरी
  1086. 49:45करके डील फाइनल कीजिए और पुनीत वाली डील
  1087. 49:48भी जल्द से जल्द क्लोज करिए। मैं रौनित
  1088. 49:50जनेजा को अब ज्यादा देर तक बिग कलेक्शन का
  1089. 49:53डायरेक्टर नहीं देख सकता। जैसे ही शौर्य
  1090. 49:56की बात खत्म हुई, मोहित रैना ने एक
  1091. 49:58डॉक्यूमेंट आगे बढ़ाते हुए कहा,
  1092. 50:01"सर, राघव के पेपर तैयार हैं। बस आपके
  1093. 50:03साइन की देर है और उनका 30% शेयर आपका हो
  1094. 50:06जाएगा। पुनीत के पेपर भी तैयार हैं। जैसे
  1095. 50:09ही वह आएंगे, उनकी डील भी फाइनल हो जाएगी।
  1096. 50:12उसके बाद बगैर कलेक्शन के 60% शेयर आपके
  1097. 50:15पास होंगे। और फिर आप रौनित जनेजा के साथ
  1098. 50:18जो चाहे कर सकते हैं। तभी विक्रम ने आगे
  1099. 50:21बढ़कर कहा, बॉस राघव को पेमेंट ट्रांसफर
  1100. 50:24हो चुका है और उनके साइन भी हो गए हैं। अब
  1101. 50:26बस आपके साइन बाकी हैं और डील पूरी। ओके।
  1102. 50:31लेकिन जब सब तैयार था तो पुनीत क्यों रह
  1103. 50:33गया? शौर्य ने मोहित की ओर देखते हुए
  1104. 50:36पूछा। मोहित ने जवाब दिया। अरे बॉस आप
  1105. 50:39चिंता मत कीजिए। उसका भी फाइनल ही समझिए।
  1106. 50:42बस उसके आने की देर है। दोनों भाई रौनित
  1107. 50:44से परेशान हैं और उसे डायरेक्टर के रूप
  1108. 50:46में नहीं देखना चाहते। लेकिन अपने पिता
  1109. 50:49रत्नाकर बजाज की वजह से वो दोनों कुछ कर
  1110. 50:51नहीं पा रहे थे। शौर्य ने बिना देर किए
  1111. 50:54डॉक्यूमेंट पर साइन कर दिए। यह देखकर राघव
  1112. 50:57बजाज खड़ा हो गया और बोला सर आपके साथ
  1113. 51:01बिजनेस करके अच्छा लगा। मैं काफी समय से
  1114. 51:03अपने शेयर बेचना चाहता था, लेकिन कोई सही
  1115. 51:05कीमत देने को तैयार नहीं था। आपने बिना
  1116. 51:08मोलभाव के मेरी बात मान [संगीत] ली। इसके
  1117. 51:11लिए मैं आपका आभारी हूं। भविष्य में भी
  1118. 51:13अगर आपको मदद की जरूरत हो तो निसंकोच याद
  1119. 51:16कीजिएगा। इतना कहकर राघव वहां से निकल
  1120. 51:19गया। वो जल्दी में था क्योंकि थोड़ी देर
  1121. 51:21में उसका भाई पुनीत आने वाला था और वह
  1122. 51:23उससे सामना नहीं करना चाहता था। बजाज
  1123. 51:26भाइयों की आपसी खींचतान से शौर्य का काम
  1124. 51:29आसान हो गया था। राघव बजाज के वहां से
  1125. 51:32जाने के बाद शौर्य ने मोहित रैना को बधाई
  1126. 51:35देते हुए कहा। बहुत बढ़िया मोहित। तुमने
  1127. 51:38मेरी उम्मीद से बढ़कर काम किया। मैं खुश
  1128. 51:40हूं कि तुमने अपने काम में कोई कोताही
  1129. 51:43नहीं बरती। मैं चाहता हूं कि देर सवेर
  1130. 51:46राघव की बहन और उसके पिता भी अपने शहर
  1131. 51:48हमारे नाम कर दें। शौर्य की बात सुनकर
  1132. 51:51मोहित ने कहा, "सर, एक्चुअली यह इतना आसान
  1133. 51:54नहीं होने वाला क्योंकि राघव की बहन
  1134. 51:56पल्लवी इतनी जल्दी हमारी बात नहीं मानने
  1135. 51:58वाली और ना ही रत्नाकर बजाज।" मोहित की
  1136. 52:01बात सुनकर शौर्य ने एक माहिर बिजनेसमैन की
  1137. 52:04तरह बोलते हुए कहा, कोई बात नहीं। अगर वह
  1138. 52:07हमारी बात नहीं मानते तो कंपनी के शेयर को
  1139. 52:09इतना नीचे गिरा दो कि उनके पास अपने शेयर
  1140. 52:12को बेचने के अलावा और कोई रास्ता ही ना
  1141. 52:15बचे। शौर्य की बात सुनकर मोहित ने कहा पर
  1142. 52:18सर इससे तो हमारा ही नुकसान होगा क्योंकि
  1143. 52:21इस शेयर डील के बाद बिग कलेक्शन के मेन
  1144. 52:23शेयर होल्डर तो हम ही होंगे। मोहित की बात
  1145. 52:26सुनकर शौर्य मुस्कुराया और बोला तुम इसकी
  1146. 52:29फिक्र मत करो मोहित यह गिरावट तात्कालिक
  1147. 52:32होगी। जैसे ही बाप-बेटा इससे बाहर होंगे,
  1148. 52:34[संगीत] हम इस कंपनी में एक मोटा
  1149. 52:36इन्वेस्टमेंट करेंगे और जल्दी ही बगैर
  1150. 52:38कलेक्शन को दोबारा मार्केट में एस्टैब्लिश
  1151. 52:40कर देंगे। [संगीत]
  1152. 52:42शौर्य की बात सुनकर मोहित की आंखें फैल
  1153. 52:44गई। उसने मन ही मन सोचा आखिर इनके पास
  1154. 52:47कितना पैसा है। इन्होंने एक बार भी नहीं
  1155. 52:50सोचा कि शेयर के दाम गिरने पर नुकसान
  1156. 52:52इन्हीं का होगा। लेकिन अंदर ही अंदर उसने
  1157. 52:55शौर्य के दिमाग को भी सलूट [संगीत] किया।
  1158. 52:57जिसने कैसे एक ही झटके में बगैर कलेक्शन
  1159. 53:00को अपने कब्जे में लेने का प्लान बना
  1160. 53:02लिया। विक्रम मुस्कुराते हुए बोला बॉस
  1161. 53:05मानना पड़ेगा। आप जब किसी के पीछे पड़ते
  1162. 53:07हैं तो उसे कहीं का नहीं छोड़ते। अब इस
  1163. 53:10रौनक जनेजा का तो भगवान ही मालिक है। तभी
  1164. 53:13मोहित ने भी पूछा सर आपका आगे का क्या
  1165. 53:16प्लान है? शौर्य हल्का सा मुस्कुराया और
  1166. 53:19बोला
  1167. 53:21पहले पुनीत बजाज को आने दो। उसके शेयर भी
  1168. 53:24हमारे नाम हो जाए। फिर सीधे बगैर कलेक्शन
  1169. 53:26चलेंगे। सबसे पहले रोने जनेजा को वहां से
  1170. 53:29निकालना है। आगे बाद में देखेंगे। फिर
  1171. 53:32उसने मोहित से कहा एक बार पुनीत को फोन
  1172. 53:35लगाकर पूछो वो कहां पहुंचा? मोहित फोन
  1173. 53:39मिलाने ही वाला था कि तभी एक गार्ड अंदर
  1174. 53:41आया और बोला, "सर, पुनीत [संगीत] बजाज आए
  1175. 53:44हैं। क्या उन्हें अंदर भेज दूं?" मोहित ने
  1176. 53:47कहा, "हां भेज दो।" कुछ ही पल में पुनीत
  1177. 53:50बजाज कमरे में आया। वो सिर्फ मोहित को
  1178. 53:53जानता था। इसीलिए उसने पहले उसे अभिवादन
  1179. 53:55किया। फिर शौर्य और विक्रम की ओर देखा।
  1180. 53:58मोहित ने शौर्य से उसका परिचय करवाया।
  1181. 54:00शौर्य के बारे में सुनकर पुनीत की आंखें
  1182. 54:03भी फैल गई। इतनी कम उम्र में इतना बड़ा
  1183. 54:06बिजनेस शौर्य ने बिना वक्त गवाए सीधे
  1184. 54:09मुद्दे पर आते हुए कहा। मिस्टर पुनीत आपको
  1185. 54:12तो पता ही होगा कि आप यहां क्यों आए हैं।
  1186. 54:15हां, पता है। पुनीत ने जवाब दिया। फिर
  1187. 54:19थोड़ा ठहर कर कहा। लेकिन मैं चाहता हूं कि
  1188. 54:21आप अपना ऑफर थोड़ा और बढ़ाएं ताकि मुझे
  1189. 54:24फैसला लेने में आसानी हो। शौर्य समझ गया
  1190. 54:27कि पुनीत लालच में आ चुका है लेकिन उसने
  1191. 54:30इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वो शांत
  1192. 54:32स्वर में बोला ठीक है तो आप ही बताइए आपको
  1193. 54:35क्या चाहिए। शौर्य का कॉन्फिडेंस देखकर
  1194. 54:39पुनीत बजाज दुविधा में पड़ गया। उसे समझ
  1195. 54:41नहीं आ रहा था कि शौर्य के सामने क्या
  1196. 54:43कीमत रखे। उसके शेयर की असली कीमत करीब 45
  1197. 54:47करोड़ थी। लेकिन उसे लगा कि शौर्य इस डील
  1198. 54:49के लिए कुछ ज्यादा ही उत्सुक है। इसीलिए
  1199. 54:52उसने थोड़ा सोचकर 50 करोड़ की मांग रख दी।
  1200. 54:55पुनीत की बात सुनकर शौर्य ने मोहित की ओर
  1201. 54:58देखा। मोहित तुरंत समझ गया कि यह सीधा
  1202. 55:00लालच है। इसीलिए वो बीच में पड़ते हुए
  1203. 55:03बोला,
  1204. 55:04पुनीत साहब, लगता है कि आप अपने शेयर
  1205. 55:06बेचना ही नहीं चाहते। आपको भी पता है कि
  1206. 55:0930% शेयर के 50 करोड़ कोई नहीं देगा। अगर
  1207. 55:13आपने थोड़ा बहुत बढ़ाया होता तो हम मान भी
  1208. 55:15जाते। लेकिन सॉरी। इस कीमत पर डील मुश्किल
  1209. 55:18है। मोहित की बात सुनकर पुनीत को झटका
  1210. 55:21लगा। उसे उम्मीद नहीं थी डील इतनी जल्दी
  1211. 55:24मना हो जाएगी। सौदा हाथ से निकलता देख
  1212. 55:27पुनीत तुरंत संभलते हुए बोला, ठीक है
  1213. 55:30मोहित जी शायद मैंने ज्यादा कीमत बोल दी।
  1214. 55:33आप ही कोई उचित मूल्य बताइए जिसे मैं मना
  1215. 55:35ना कर सकूं। शौर्य ने पुनीत के मन का लालच
  1216. 55:38भांप लिया। वो शांत स्वर में बोला मिस्टर
  1217. 55:41पुनीत आपके शहर की असली कीमत 45 करोड़ है।
  1218. 55:44मैं आपको अधिकतम 46 करोड़ दे सकता हूं।
  1219. 55:47अगर यह कीमत मंजूर है तो सामने पेपर रखा
  1220. 55:50है। साइन कीजिए और डील फाइनल कीजिए। वरना
  1221. 55:53आप जा सकते हैं। हमें आपके शहर में कोई
  1222. 55:56दिलचस्पी नहीं है। शौर्य के सख्त लहजे को
  1223. 55:59देखकर पुनीत समझ गया कि अब मोल भाव का कोई
  1224. 56:01फायदा नहीं है। उसने सोचा 1 करोड़ का
  1225. 56:04फायदा भी कम नहीं होता। अगर शौर्य 45 पर
  1226. 56:07अड़ा रहता तब भी वह मान जाता। इसीलिए उसने
  1227. 56:10तुरंत फैसला किया ठीक है मिस्टर शौर्य
  1228. 56:12मुझे आपकी डील मंजूर है लेकिन मुझे पेमेंट
  1229. 56:15कैश में चाहिए। यह सुनकर शौर्य थोड़ा
  1230. 56:18हैरान हुआ। उसने साफ शब्दों में कहा इतनी
  1231. 56:22बड़ी रकम कैश में कौन देता है? अगर डील
  1232. 56:24करनी है तो अधिकतम 10 करोड़ कैश मिल सकता
  1233. 56:27है। बाकी पेमेंट ऑनलाइन ही होगी। अगर यह
  1234. 56:30मंजूर है तो साइन कीजिए। मजबूरी में पुनीत
  1235. 56:33बजाज को शौर्य की शर्त माननी पड़ी। शौर्य
  1236. 56:36के इशारे पर विक्रम ने उसका अकाउंट लेकर
  1237. 56:38₹36 करोड़ ट्रांसफर कर दिए और बाकी 10
  1238. 56:42करोड़ के लिए मोहित रैना बोला मिस्टर
  1239. 56:45पुनीत यह रकम आपको एक साथ नहीं मिलेगी। एक
  1240. 56:48हफ्ते में धीरे-धीरे पूरी कर दी जाएगी।
  1241. 56:51अभी आपको 2 करोड़ कैश मिलेंगे। बाकी रोज 2
  1242. 56:54करोड़ लेकर जाना होगा। थोड़ा नानकोर के
  1243. 56:57बाद पुनीत को यह भी मानना पड़ा। मोहित उसे
  1244. 56:592 करोड़ कैश देने के लिए साथ लेकर बाहर
  1245. 57:02चला गया। अब कमरे में सिर्फ शौर्य और
  1246. 57:04विक्रम रह गए थे। शौर्य ने पुनीत के साइन
  1247. 57:07किए हुए पेपर पर अपने साइन भी कर दिए। अब
  1248. 57:09वो बगैर कलेक्शन के 60% शेयर का मालिक बन
  1249. 57:13चुका था। डील पूरी होने के बाद विक्रम ने
  1250. 57:16पूछा। बॉस अब आगे क्या इरादा है? शौर्य
  1251. 57:20मुस्कुराया। चलो अब रौनित जुनेजा से मिलते
  1252. 57:24हैं। विक्रम हैरान था कि शौर्य इतनी जल्दी
  1253. 57:27में क्यों है? लेकिन उसने कुछ नहीं कहा और
  1254. 57:29उसके साथ चल पड़ा। दोनों लिफ्ट से नीचे
  1255. 57:32आए। वो दोनों बाहर निकलने ही वाले थे कि
  1256. 57:34अचानक शौर्य के दिमाग में कुछ और आया और
  1257. 57:37वो मुड़कर बिग बुल के ज्वेलरी डिपार्टमेंट
  1258. 57:39की ओर बढ़ गया। वो किसी को ढूंढता हुआ
  1259. 57:42इधर-उधर देखने लगा। तभी उसकी नजर एक जगह
  1260. 57:45जाकर ठहर गई। शौर्य की नजर जिस चेहरे पर
  1261. 57:48आकर ठहर गई थी, वह चेहरा प्रिया का था।
  1262. 57:51शौर्य का दौड़ता दिमाग उसे देखकर कुछ पल
  1263. 57:54के लिए क्यों रुक गया? इसका जवाब सिर्फ
  1264. 57:56शौर्य ही जानता था। प्रिया की समझदारी और
  1265. 57:59किसी भी स्थिति को स्मार्टली संभाल लेने
  1266. 58:01की काबिलियत का अंदाजा शौर्य को भली-भांति
  1267. 58:04हो चुका था। इसीलिए उसने अपने अगले प्लान
  1268. 58:07में उसे एक लीड रोल देने का फैसला लिया और
  1269. 58:10इसी के चलते वो रौनित के पास जाते-जाते
  1270. 58:13अचानक यूटर्न लेकर प्रिया के सामने पहुंच
  1271. 58:15गया। प्रिया ने जैसे ही शौर्य को देखा वो
  1272. 58:19तुरंत सीधे खड़ी हो गई। अरे सर आप यहां
  1273. 58:22शौर्य हल्के अंदाज में बोला क्यों क्या
  1274. 58:25मैं यहां नहीं हो सकता ऐसी बात नहीं है सर
  1275. 58:28आप तो यहां के ओनर है आप कहीं भी हो सकते
  1276. 58:31हैं प्रिया ने जल्दी से कहा शौर्य
  1277. 58:33मुस्कुराया
  1278. 58:35क्या बात है तुम्हारे हाजिर जवाबी के इसी
  1279. 58:38हुनर से मैं इंप्रेस हूं यह सुनकर प्रिया
  1280. 58:40थोड़ी घबरा गई उसे लगा कहीं शौर्य को बुरा
  1281. 58:43तो नहीं लग गया उसके चेहरे पर हल्की
  1282. 58:45परेशानी झलकने लगी शौर्य ने तुरंत कहा
  1283. 58:48घबराओ मत मुझे तुमसे काम है। प्रिया ने
  1284. 58:52खुद को संभाला और बोली, "क्या बात कर रहे
  1285. 58:54हैं सर? आपको मुझसे काम है। मैं तो यहां
  1286. 58:57आपके काम के लिए ही हूं। बताइए मैं क्या
  1287. 59:00कर सकती हूं? उसके चेहरे पर हल्की हैरानी
  1288. 59:03के साथ उत्सुकता भी झलक रही थी। जैसे वह
  1289. 59:05अभी भी यकीन करने की कोशिश कर रही हो।
  1290. 59:08शौर्य ने प्रिया के एकदम सीधे खड़े रहकर
  1291. 59:11बात करने के अंदाज को गौर से देखा और
  1292. 59:13हल्की मुस्कान के साथ कहा।
  1293. 59:16सबसे पहले तो इस अटेंशन वाली मुद्रा से
  1294. 59:18बाहर आओ और थोड़ा नॉर्मल हो जाओ। मैं कोई
  1295. 59:21बाघ नहीं हूं जो तुम्हें खा जाऊंगा। मैंने
  1296. 59:24पहले भी कहा था मेरे सामने ऐसे खड़े मत
  1297. 59:26हुआ करो। अब जो काम मैं बता रहा हूं उसे
  1298. 59:29ध्यान से सुनो। उसकी आवाज में सख्ती कम और
  1299. 59:32अपनापन ज्यादा था। जिससे माहौल थोड़ा
  1300. 59:35हल्का हो गया। प्रिया शौर्य की बात सुनकर
  1301. 59:38धीरे-धीरे सहज हुई। वो हल्का सा मुस्कुरा
  1302. 59:40कर बोली। ठीक है सर। अब बताइए क्या काम
  1303. 59:43है? उसकी आवाज में अब पहले जैसी घबराहट
  1304. 59:46नहीं थी बल्कि एक हल्की सी सहजता आ गई थी।
  1305. 59:49शौर्य ने बात को बिना ज्यादा घुमाए सीधे
  1306. 59:51कहा। तुम तैयार हो जाओ। तुम्हें भी मेरे
  1307. 59:54साथ चलना है। कहां जाना है सर? प्रिया एक
  1308. 59:57पल के लिए चौंक गई और उसने तुरंत पूछा तो
  1309. 59:59शौर्य ने बस उसकी ओर देखते हुए कहा। साथ
  1310. 1:00:02चलोगी तो खुद ही पता चल जाएगा। प्रिया ने
  1311. 1:00:05एक पल सोचा। फिर सिर हिला कर बोली। ठीक है
  1312. 1:00:08सर चलती हूं। उसके मन में हल्की जिज्ञासा
  1313. 1:00:11के साथ एक अनकाहा उत्साह भी जाग गया था।
  1314. 1:00:14तभी शौर्य ने उसके ड्रेस पर नजर डाली और
  1315. 1:00:16कहा लेकिन इस ड्रेस में नहीं पहले जाकर
  1316. 1:00:20चेंज कर लो फिर चलते हैं। अब प्रिया को
  1317. 1:00:22समझ आ गया कि उसे कहीं बाहर ले जाया जाने
  1318. 1:00:24वाला है। एक [संगीत] पल के लिए उसके मन
  1319. 1:00:26में हल्की सी शंका भी उठी। लेकिन अगले ही
  1320. 1:00:29पल उसे शिप्रा के साथ वाली पिछली मुलाकात
  1321. 1:00:31याद आ गई। जिसने उसके मन का संदेह पूरी
  1322. 1:00:34तरह मिटा दिया। वो जल्दी से वहां से गई और
  1323. 1:00:37कुछ ही मिनटों में कपड़े बदलकर वापस आ गई।
  1324. 1:00:39आसमानी सूट सलवार में वो बेहद [संगीत]
  1325. 1:00:42खूबसूरत लग रही थी। एक पल को उसे बदले रूप
  1326. 1:00:44में देखकर शौर्य की नजर में थोड़ी हलचल सी
  1327. 1:00:47हुई लेकिन उसने तुरंत खुद को संभाल लिया।
  1328. 1:00:50उसी वक्त मोहित रैना भी वहां पहुंच गया।
  1329. 1:00:53उसने शौर्य को देखते ही कहा। सर मैं आपको
  1330. 1:00:55ही ढूंढ रहा था। मैंने अभी पुनीत बजाज को
  1331. 1:00:582 करोड़ कैश दे दिया है। बाकी भी जल्द ही
  1332. 1:01:00दे दूंगा। इतनी बड़ी रकम की बात सुनकर तो
  1333. 1:01:03प्रिया की सांसे ही अटकने को हो रही थी।
  1334. 1:01:05पर प्रिया ने अपनी हैरानी को अंदर ही दबा
  1335. 1:01:08लिया और चुपचाप उन सबकी बात सुनती रही।
  1336. 1:01:11खैर शौर्य का आज का टारगेट सिर्फ एक ही
  1337. 1:01:14था। रौनित जनेजा को बिग कलेक्शन से हटाना।
  1338. 1:01:17वैसे तो शौर्य का प्लान खुद ही बिग
  1339. 1:01:19कलेक्शन के ऑफिस में जाने का था। पर अचानक
  1340. 1:01:21मोहित रैना को देखने के बाद उसका विचार
  1341. 1:01:23बदल गया। उसने मोहित रैना से कहा सुनो
  1342. 1:01:27मोहित तुम्हें प्रिया के साथ बगैर कलेक्शन
  1343. 1:01:30के ऑफिस जाना है और आगे की कार्यवाही
  1344. 1:01:32संभालनी है। मैं चाहता हूं कि आज के आज ही
  1345. 1:01:35रौनी जनेजा बिग कलेक्शन के डायरेक्टर के
  1346. 1:01:37पद से हट जाए और आज के बाद बिग कलेक्शन का
  1347. 1:01:40कार्यभार प्रिया संभाले।
  1348. 1:01:43शौर्य यहीं नहीं रुका। उसने प्लान की
  1349. 1:01:45स्क्रिप्ट को कंटिन्यू करते हुए आगे कहा।
  1350. 1:01:48तुम्हारे साथ विक्रम भी जाएगा। मैं भी
  1351. 1:01:50अपनी पहचान सामने नहीं लाना चाहता। इसलिए
  1352. 1:01:53विक्रम फ्रंट पर रहेगा। आज के बाद लोग उसी
  1353. 1:01:56को बिगर कलेक्शन का नया शेयर होल्डर
  1354. 1:01:58जानेंगे। नो प्रॉब्लम बॉस। मैं अभी विक्रम
  1355. 1:02:01सर के साथ ऑफिस जाता हूं और जैसा आपने कहा
  1356. 1:02:03है मैं वैसा ही करूंगा। मोहित ने तुरंत
  1357. 1:02:06जवाब दिया। इस पर शौर्य ने कहा, बहुत
  1358. 1:02:10बढ़िया। काम खत्म होने के बाद तुम सब सीधे
  1359. 1:02:12होटल राजकमल आ जाना। वहां मैं तुम सबको
  1360. 1:02:15शानदार ट्रीट दूंगा। इतना बोलकर शौर्य ने
  1361. 1:02:18विक्रम से उसकी गाड़ी की चाबी देने के लिए
  1362. 1:02:20कहा। फिर आगे बोला,
  1363. 1:02:22[संगीत]
  1364. 1:02:23ठीक है तो अब मैं चलता हूं और मैं तुम
  1365. 1:02:25लोगों का इंतजार वहीं करूंगा। गुड न्यूज़
  1366. 1:02:28जल्दी देना। विक्रम ने उसे चाबी दे दी और
  1367. 1:02:31तीनों वहां से निकल गए। [संगीत] अब शौर्य
  1368. 1:02:33के पास कोई खास काम नहीं था। इसीलिए वो
  1369. 1:02:35विक्रम की कार लेकर सीधे होटल राजकमल
  1370. 1:02:38पहुंच गया। रिसेप्शन से होते हुए वो सीधा
  1371. 1:02:41मेनका के ऑफिस में गया। मेनका मैनेजर की
  1372. 1:02:44कुर्सी पर बैठी थी। शौर्य को अचानक देखकर
  1373. 1:02:47वो थोड़ा हैरान हुई और बोली अरे मिस्टर
  1374. 1:02:50शौर्य आप यहां अचानक आपने खबर भी नहीं की।
  1375. 1:02:54इस पर शौर्य हल्की मुस्कान के साथ बोला
  1376. 1:02:57आने का कोई खास प्लान नहीं था। बस अचानक
  1377. 1:03:00मन किया और चला आया। मुझे अपने रूम की
  1378. 1:03:02चाबी दे दीजिए। थोड़ा आराम करना है। शौर्य
  1379. 1:03:05की बात सुनकर मेनका ने दराज खोला और एक
  1380. 1:03:08कार्ड निकालकर उसकी ओर बढ़ा दिया। कार्ड
  1381. 1:03:10लेते हुए शौर्य ने कुछ महसूस किया और बोला
  1382. 1:03:14लगता है मुझे देखकर आपको खास खुशी नहीं
  1383. 1:03:16हुई। मेनका हल्का मुस्कुरा कर बोली नहीं
  1384. 1:03:19ऐसी बात नहीं है। बस आपके आने की उम्मीद
  1385. 1:03:22नहीं थी और सच कहूं तो यह एक्सेप्ट करने
  1386. 1:03:24में थोड़ा समय लगेगा कि अब आप इस होटल के
  1387. 1:03:27मालिक हैं। शौर्य मुस्कुराया। कोई बात
  1388. 1:03:30नहीं। धीरे-धीरे सब नॉर्मल हो जाएगा। वैसे
  1389. 1:03:33भी मैं यहां बॉस बनकर नहीं आया हूं। आप
  1390. 1:03:36मुझे एक दोस्त की तरह ट्रीट कर सकती हैं।
  1391. 1:03:38उसकी सादगी देखकर मेनका थोड़ा असमंजस में
  1392. 1:03:41पड़ गई। फिर बोली आप चाहे तो मैं किसी को
  1393. 1:03:44आपके कमरे तक छोड़ने भेज दूं। शौर्य तुरंत
  1394. 1:03:47बोला हां यह बेहतर रहेगा और हां थोड़ी देर
  1395. 1:03:50में मेरे दोस्त आएंगे। मैं उन्हीं के साथ
  1396. 1:03:52लंच करूंगा। अभी मैं थोड़ा आराम करना
  1397. 1:03:54चाहता हूं। इतना कहकर वो रिसेप्शन से बाहर
  1398. 1:03:57निकल गया। वेटर उसे कमरे तक ले गया। उसने
  1399. 1:04:00दरवाजा खोलकर लाइट ऑन की और कार्ड होल्डर
  1400. 1:04:03में लगाकर चुपचाप चला गया। लंबे समय बाद
  1401. 1:04:06उसे सामने आरामदायक बिस्तर दिखा, तो वह
  1402. 1:04:08सीधा जाकर उसमें गिर गया। भिखारी वाली
  1403. 1:04:11जिंदगी जीने के बाद आज पहली बार उसे लगा
  1404. 1:04:14कि जिंदगी फिर से पटरी पर लौट रही है।
  1405. 1:04:16लेकिन यह राहत सिर्फ कुछ पलों की थी। उसके
  1406. 1:04:19थक चुके दिमाग में अभी भी कई सवाल घूम रहे
  1407. 1:04:22थे। किसने उसकी जान लेने की कोशिश की थी
  1408. 1:04:25और क्यों? साथ ही शिप्रा के साथ उसका
  1409. 1:04:28रिश्ता भी एक अधूरी कहानी की तरह था। जिसे
  1410. 1:04:31उसे किसी अंजाम तक पहुंचाना था। इन्हीं
  1411. 1:04:34उलझनों और ख्यालों के बीच कब उसकी आंख लग
  1412. 1:04:36गई उसे पता ही नहीं चला। लगभग एक घंटे बाद
  1413. 1:04:39जब उसकी नींद खुली तो उसने घड़ी की ओर
  1414. 1:04:42देखा तो 4:00 बजने वाले थे। उसने मन ही मन
  1415. 1:04:45सोचा अब तक तो मोहित ने बगैर कलेक्शन का
  1416. 1:04:47मामला निपटा लिया होगा। रौनी जनेजा को
  1417. 1:04:50उसकी औकात दिखा ही दी होगी। लेकिन अगले ही
  1418. 1:04:52पल उसके मन में हल्की सी शंका उठी। लेकिन
  1419. 1:04:56उसका कॉल क्यों नहीं आया? कहीं कुछ गड़बड़
  1420. 1:04:58तो नहीं हो गई। शौर्य ने तुरंत मोबाइल
  1421. 1:05:01उठाया। कुछ सेकंड स्क्रीन को देखा। फिर
  1422. 1:05:03बिना देर किए मोहित को कॉल लगा दिया।
  1423. 1:05:06मोहित ने एक ही रिंग में कॉल उठा लिया।
  1424. 1:05:08तभी शौर्य ने पूछा हेलो मोहित क्या हुआ?
  1425. 1:05:11सब मामला निपट गया? मोहित बोला
  1426. 1:05:15हां निपट तो गया सर लेकिन इतनी आसानी से
  1427. 1:05:17नहीं।
  1428. 1:05:18इस पर शौर्य ने चिंता जताते हुए पूछा।
  1429. 1:05:20क्यों क्या हुआ? कोई प्रॉब्लम आई थी क्या?
  1430. 1:05:24प्रॉब्लम आई थी सर लेकिन अब सब संभल गया।
  1431. 1:05:26मोहित ने शौर्य को आश्वस्त किया। आखिर हुआ
  1432. 1:05:29क्या वहां? शौर्य की जिज्ञासा बढ़ गई तो
  1433. 1:05:32मोहित बोला
  1434. 1:05:33मैं अभी आपके पास ही आ रहा हूं सर वहीं
  1435. 1:05:35आकर सब बताता हूं।
  1436. 1:05:36ठीक है जल्दी आओ यहीं बात करते हैं। शौर्य
  1437. 1:05:40ने इतना कहा और फोन काट दिया। शौर्य ने
  1438. 1:05:43तुरंत आलस झटक कर बिस्तर छोड़ा। वो अब भी
  1439. 1:05:46उन्हीं कपड़ों में था जिनमें यहां आया था।
  1440. 1:05:48उसे ख्याल आया कि यहां के लिए कुछ नए
  1441. 1:05:51कपड़े ले लेना बेहतर रहेगा ताकि जब
  1442. 1:05:53[संगीत] भी वो यहां आए तो बदलने के लिए
  1443. 1:05:55कपड़े यहीं पर हो। वो कमरे से बाहर निकला
  1444. 1:05:58और सीढ़ियों से नीचे उतरने लगा। उसने तय
  1445. 1:06:01किया कि पास की किसी दुकान से ही जल्दी से
  1446. 1:06:03खरीदारी कर लेगा। तभी चलते-चलते उसके मन
  1447. 1:06:06में ख्याल आया। क्यों ना किसी को साथ ले
  1448. 1:06:08लिया जाए। आखिर नई जगह है किसी की सलाह
  1449. 1:06:11काम आ सकती है। यही सोचकर उसके दिमाग में
  1450. 1:06:14मेनका का नाम आया। वो लॉबी से गुजरता हुआ
  1451. 1:06:17सीधे मेनका के कमरे की ओर बढ़ गया। जब वो
  1452. 1:06:20कमरे में पहुंचा तो उसने देखा कि मेनका
  1453. 1:06:22अपनी सीट पर अकेली बैठी हुई है। शौर्य
  1454. 1:06:24बिना नॉक किए ही कमरे के अंदर चला गया था।
  1455. 1:06:27मेनका ने नाखुशी भरी नजर से उसकी ओर देखा
  1456. 1:06:30और तीखे स्वर में बोली क्या आप में जरा भी
  1457. 1:06:33तमीज नहीं है? किसी के कमरे में आने से
  1458. 1:06:36पहले दरवाजा खटखटाना नहीं सिखाया गया
  1459. 1:06:39आपको। शौर्य को अपनी गलती का एहसास हुआ।
  1460. 1:06:42उसने तुरंत सॉरी कहा। फिर इजाजत लेते हुए
  1461. 1:06:44बोला, "क्या मैं यहां बैठ सकता हूं?"
  1462. 1:06:48मेनका ने आश्चर्य से उसकी तरफ देखा और
  1463. 1:06:50बोली, "क्या बात है? आपको कुछ चाहिए
  1464. 1:06:53क्या?" शौर्य ने थोड़ी झिझक के साथ मानो
  1465. 1:06:56कैजुअल होने की कोशिश करते हुए कहा, "यार,
  1466. 1:06:59सबसे पहले तो तुम मुझे आप कहना बंद करो।
  1467. 1:07:02क्योंकि मेरी और तुम्हारी उम्र में ज्यादा
  1468. 1:07:04फर्क नहीं है। इसलिए तुम मुझे मेरे नाम से
  1469. 1:07:07बुला सकती हो। और जहां तक मुझे पता है,
  1470. 1:07:09तुम मेरे दादाजी के किसी दोस्त की बेटी
  1471. 1:07:12हो। इसीलिए मुझे तुम्हारा आप कह कर बुलाना
  1472. 1:07:15अच्छा नहीं लगता। उम्मीद है तुम मेरी बात
  1473. 1:07:18समझ गई होगी। ओके जैसी तुम्हारी मर्जी
  1474. 1:07:22मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। मेनका ने बिना
  1475. 1:07:25देर किए उसकी बात मान ली। यह देखकर शौर्य
  1476. 1:07:28को थोड़ा आश्चर्य हुआ। उसे लगा जैसे मेनका
  1477. 1:07:31उसके कहने का इंतजार ही कर रही थी। ठीक है
  1478. 1:07:34फिर बताओ कैसे आना हुआ? अब तुम्हें क्या
  1479. 1:07:37चाहिए? मेनका अनमने ढंग से बोली। शौर्य ने
  1480. 1:07:40उसकी बात सुनकर कहा, "मुझे तुम्हारी मदद
  1481. 1:07:43की जरूरत है।" मेनका भए सिकोड़ते हुए
  1482. 1:07:46बोली, किस तरह की मदद? असल में मुझे थोड़ी
  1483. 1:07:49खरीदारी करनी है। उसी के लिए मुझे
  1484. 1:07:51तुम्हारी मदद चाहिए। शौर्य ने अपनी बेबसी
  1485. 1:07:54जताते हुए कहा, इस पर मेनका लापरवाही से
  1486. 1:07:57बोली, "तुम्हें खरीदारी करनी है तो उसमें
  1487. 1:07:59मैं तुम्हारी क्या मदद कर सकती हूं? भला।"
  1488. 1:08:02शौर्य ने मुस्कुराते हुए कहा, "यार,
  1489. 1:08:04शॉपिंग करना मेरे बस की बात नहीं है।
  1490. 1:08:06मैंने कभी अपने लिए खुद कोई खरीदारी नहीं
  1491. 1:08:09की। इसीलिए मुझे तुम्हारी मदद चाहिए। और
  1492. 1:08:12लड़कियों से ज्यादा शॉपिंग का एक्सपीरियंस
  1493. 1:08:13किसे होता है?
  1494. 1:08:16शौर्य की बात सुनकर एक पल को मेनका को
  1495. 1:08:18लगा, क्या यह मुझ पर लाइन मार रहा है?
  1496. 1:08:20लेकिन उसने जाहिर नहीं होने दिया। आखिर
  1497. 1:08:23इसके मन में चल क्या रहा है? यही जानने की
  1498. 1:08:25सोचकर वो बोली, ठीक है, मैं चलती हूं
  1499. 1:08:28तुम्हारे साथ। यहां सामने ही एक मॉल है।
  1500. 1:08:30वहीं चलते हैं। मेनका की बात पर शौर्य ने
  1501. 1:08:33भी सहमति जताई और उसके साथ होटल से बाहर
  1502. 1:08:36जाने के लिए चल पड़ा। कुछ ही देर में
  1503. 1:08:38दोनों होटल से बाहर आ गए। मेनका शौर्य के
  1504. 1:08:41साथ पैदल ही होटल के सामने बने एक बड़े से
  1505. 1:08:43मॉल में चली गई। आज पहली बार मेनका ने
  1506. 1:08:46शौर्य को ध्यान से देखा था। अब उसे शौर्य
  1507. 1:08:49उतना भी बुरा नहीं लग रहा था जितना पहली
  1508. 1:08:51नजर में लगा था। वो देख रही थी कि मॉल में
  1509. 1:08:54एंट्री करते ही कई लोगों की निगाहें उसकी
  1510. 1:08:57ओर घूम गई थी। वो सोचने लगी क्या यह शौर्य
  1511. 1:09:00की वजह से है? कुछ भी हो शौर्य की
  1512. 1:09:03पर्सनालिटी तो लाजवाब थी लेकिन उसके शरीर
  1513. 1:09:06पर पहने कपड़े साधारण और सस्ते लग रहे थे।
  1514. 1:09:09मेनका सोचने पर मजबूर हो गई। लगता है
  1515. 1:09:12शौर्य की आर्थिक स्थिति पहले इतनी अच्छी
  1516. 1:09:14नहीं थी। इसीलिए उसके पास ढंग के कपड़े
  1517. 1:09:17नहीं है। लेकिन अब तो वो इस होटल का मालिक
  1518. 1:09:19बन चुका है। तो आगे चलकर तो पैसों की कोई
  1519. 1:09:22कमी नहीं रहने वाली है। चलते-चलते मेनका
  1520. 1:09:24ने शौर्य से पूछ ही लिया। वैसे बुरा ना
  1521. 1:09:27मानो तो क्या मैं तुमसे एक सवाल कर सकती
  1522. 1:09:29हूं? शौर्य ने उसकी तरफ देखा और हल्की
  1523. 1:09:32मुस्कान के साथ बोला। हां पूछो। मेनका ने
  1524. 1:09:36उसकी आंखों में झांकते हुए सवाल किया।
  1525. 1:09:38[संगीत] मैं यह जानना चाहती हूं कि इससे
  1526. 1:09:40पहले तुम क्या करते थे? मैं यह जानना
  1527. 1:09:43चाहती हूं कि इससे पहले तुम क्या करते थे।
  1528. 1:09:46मेनका के सवाल पर शौर्य ने गहरी सांस ली
  1529. 1:09:49जैसे अपने दिमाग में किसी पुरानी किताब के
  1530. 1:09:51पन्नों को पलट रहा हो। फिर अपने चेहरे पर
  1531. 1:09:54थोड़ी बेबसी लाते हुए बोला अच्छा तो सुनो।
  1532. 1:09:58इससे पहले मैं एक भिखारी की जिंदगी जी रहा
  1533. 1:10:00था। ना रहने का ठिकाना ना खाने का कोई
  1534. 1:10:03भरोसा। जो मिल गया वही खा लिया और इसी तरह
  1535. 1:10:06दिन कटते गए। करीब 6 महीने तक मैं ऐसी ही
  1536. 1:10:09जिंदगी जीता रहा। यह सुनकर मेनका की चाल
  1537. 1:10:12धीमी हो गई। उसकी आंखों में अब उत्सुकता
  1538. 1:10:15थी और ध्यान पूरी तरह शौर्य पर टिक गया
  1539. 1:10:18था। शौर्य आगे बोला और फिर एक दिन अचानक
  1540. 1:10:22सब कुछ बदल गया। एक बदमाश ने जबरदस्ती
  1541. 1:10:25मेरी शादी शिपरा राय से करवा दी। उसी दिन
  1542. 1:10:28से मेरी किस्मत ने करवट ले ली। मेरे
  1543. 1:10:31दादाजी ने मुझे अपना लिया और देखते ही
  1544. 1:10:33देखते यह होटल भी मेरे नाम कर दिया। उसने
  1545. 1:10:36मुस्कुराते हुए हल्का सा सिर झुकाया और
  1546. 1:10:38बोला तो अब कहो हूं ना मैं किस्मत का धनी।
  1547. 1:10:42शौर्य ने सच और कहानी के बीच छुपी हुई
  1548. 1:10:45अपनी दास्तान मेनका को सुना दी। मेनका कुछ
  1549. 1:10:48पल तक उसे देखती रही। वो समझ नहीं पा रही
  1550. 1:10:50थी कि यह सच [संगीत] है, मजाक है या फिर
  1551. 1:10:53कोई अधूरी कहानी है जिसे शौर्य जानबूझकर
  1552. 1:10:56गढ़ रहा है। मेनका को सच में शौर्य की बात
  1553. 1:10:58पर विश्वास नहीं हुआ। लेकिन जब उसने यह
  1554. 1:11:01सुना कि किसी ने जबरदस्ती उसकी शादी
  1555. 1:11:03शिप्रा राय के साथ करवा दी थी तो यह नाम
  1556. 1:11:06उसे कुछ जाना पहचाना सा लगा। उसे याद आया
  1557. 1:11:10अरे यह तो वही खबर थी जो सोशल मीडिया पर
  1558. 1:11:12वायरल हुई थी जिसमें बताया गया था कि
  1559. 1:11:14मुख्तार अहमद ने जबरदस्ती भिखारी से
  1560. 1:11:17शिप्रा राय की शादी करवा दी थी। क्या सच
  1561. 1:11:20में शौर्य ही वह भिखारी था? वह भी
  1562. 1:11:23अविश्वास भरी नजरों से शौर्य को देख रही
  1563. 1:11:25थी। आखिर उससे रहा नहीं गया तो उसने पूछ
  1564. 1:11:28ही लिया।
  1565. 1:11:30कहीं तुम उसी शिप्रा राय की बात तो नहीं
  1566. 1:11:32कर रहे जिसकी शादी की न्यूज़ सोशल मीडिया
  1567. 1:11:35पर वायरल हुई थी। शौर्य को यह सुनकर थोड़ा
  1568. 1:11:38आश्चर्य हुआ कि मेनका को भी उसकी शादी की
  1569. 1:11:41खबर पता थी। [संगीत] वो मन ही मन सोचने
  1570. 1:11:43लगा। आखिर मुख्तार भाई ने इस बात को कितना
  1571. 1:11:46फैलाया होगा कि हर किसी को इसके बारे में
  1572. 1:11:49मालूम है। शिप्रा और उसकी फैमिली की इज्जत
  1573. 1:11:52दागदार करने में मुख्तार भाई ने कोई कसर
  1574. 1:11:54नहीं छोड़ी। उसने हल्की बेचारगी के साथ
  1575. 1:11:57मेनका की तरफ देखा और बोला हां मैं ही वो
  1576. 1:12:01भिखारी हूं जिससे शिपरा राय की शादी हुई
  1577. 1:12:04है। [संगीत]
  1578. 1:12:05यह क्या बकवास है? मेनका लगभग भन-भनाते
  1579. 1:12:08हुए बोली तुम और भिखारी क्या मुख्तार भाई
  1580. 1:12:11की आंखें फूट गई थी? जो उसने तुम्हें
  1581. 1:12:13भिखारी समझकर तुम्हारी शादी शिप्रा राय से
  1582. 1:12:16कर दी। शौर्य के चेहरे पर हल्की सी
  1583. 1:12:18मुस्कान आ गई। वो शांत स्वर में बोला।
  1584. 1:12:21मैंने पहले ही कहा था कि तुम मेरी बात पर
  1585. 1:12:24विश्वास नहीं करोगी। देखा सच में तुम्हें
  1586. 1:12:27मुझ पर विश्वास नहीं हुआ ना? मेनका चुप हो
  1587. 1:12:30गई लेकिन उसके मन में सवालों का तूफान उठ
  1588. 1:12:33रहा था। पहले उसने सोचा था क्या किस्मत है
  1589. 1:12:36इस लड़के की। दादाजी ने अपना लिया और इतना
  1590. 1:12:39बड़ा होटल तक दे दिया। लेकिन अब सच जानने
  1591. 1:12:42के बाद उसका नजरिया बदल चुका था। जो खुशी
  1592. 1:12:45उसे पहले हुई थी, वह अब कहीं गायब हो गई
  1593. 1:12:47थी। उसकी जगह एक अजीब सी संवेदना ने ले
  1594. 1:12:50ली। शायद शौर्य की जिंदगी कभी उससे भी
  1595. 1:12:53ज्यादा मुश्किल रही होगी। उसने गहरी सांस
  1596. 1:12:56ली। अपने ख्यालों को झटक दिया और सामान्य
  1597. 1:12:59स्वर में बोली। अच्छा छोड़ो यह सब बताओ
  1598. 1:13:03तुम्हें क्या लेना है? शौर्य ने कहा कुछ
  1599. 1:13:06खास नहीं बस रोजमर्रा की कुछ चीजें हैं जो
  1600. 1:13:09मैं चाहता हूं कि होटल में मौजूद रहें।
  1601. 1:13:12ताकि जब भी [संगीत] जरूरत पड़े मैं उन्हें
  1602. 1:13:14इस्तेमाल कर सकूं। वो अपनी बात पूरी ही कर
  1603. 1:13:17रहा था कि अचानक उसे हल्का सा झटका लगा।
  1604. 1:13:20उसने तुरंत पलट कर देखा तो एक लड़की फर्श
  1605. 1:13:22पर गिरी हुई थी और उसके हाथों से सामान
  1606. 1:13:25छिटक कर चारों तरफ बिखर गया था। शौर्य ने
  1607. 1:13:28उस लड़की की तरफ देखा। वो हैरान था कि वो
  1608. 1:13:31लड़की उससे कैसे टकरा गई। वो तो ज्यादा
  1609. 1:13:33तेजी से जा भी नहीं रहा था। फिर भी उसने
  1610. 1:13:36उस लड़की का सामान समेटने में उसकी मदद
  1611. 1:13:39की। लेकिन वो लड़की किसी और ही मूड में
  1612. 1:13:41थी। उसने गुस्से में शौर्य की तरफ देखा और
  1613. 1:13:44बोली, "अंधे हो क्या? दिखाई नहीं दे रहा
  1614. 1:13:47या जानबूझकर टकराए हो?" शौर्य ने आराम से
  1615. 1:13:50उस लड़की की तरफ देखा और बोला, माफ
  1616. 1:13:53कीजिएगा मैंने सच में आपको नहीं देखा। पर
  1617. 1:13:56क्या आपको भी दिखाई नहीं दे रहा था जो आप
  1618. 1:13:58मुझसे टकरा गई?
  1619. 1:14:01मैं तो इनसे बात करते हुए धीरे-धीरे चल
  1620. 1:14:03रहा था। आप ही सामने से आकर मुझसे टकराई
  1621. 1:14:05और अब मुझे ही सुना रही हैं। शौर्य मेनका
  1622. 1:14:08की तरफ इशारा करते हुए बोला अच्छा मैं
  1623. 1:14:11तुमसे टकराऊंगी वो भी जानबूझकर। शक्ल
  1624. 1:14:14देखिए अपनी फटीचर जैसी हालत लग रही है और
  1625. 1:14:16मुझ पर इल्जाम लगा रहे हो। तुम जैसे लोग
  1626. 1:14:19ऐसी जगह पर आते ही इसलिए हैं ताकि खूबसूरत
  1627. 1:14:22लड़कियों से छेड़खानी कर सकें। वो लड़की
  1628. 1:14:25अपना सारा सामान छोड़कर शौर्य को सुनाने
  1629. 1:14:28में लगी हुई थी। शौर्य को समझ नहीं आया कि
  1630. 1:14:31यह लड़की इतनी छोटी सी बात का बतंगड़
  1631. 1:14:33क्यों बना रही है। उस लड़की की बात सुनकर
  1632. 1:14:35शौर्य भी थोड़े कड़े स्वर में बोला, ओ
  1633. 1:14:38मैडम, आप जो लड़कियों की बात कर रही हैं
  1634. 1:14:40ना, तो आपको पता होना चाहिए कि आपसे
  1635. 1:14:42ज्यादा खूबसूरत लड़की मेरे साथ चल रही है।
  1636. 1:14:45फिर मुझे क्या जरूरत पड़ी है आप जैसी नक
  1637. 1:14:47चढ़ी लड़की से टकराने की। शौर्य के मुंह
  1638. 1:14:50से अपने लिए खूबसूरत लड़की सुनकर मेनका को
  1639. 1:14:53खुशी हुई। वो भी नहीं समझ पा रही थी कि यह
  1640. 1:14:56लड़की क्यों इतनी छोटी सी बात को तूल दे
  1641. 1:14:58रही है। वो बीच में पड़ने ही वाली थी
  1642. 1:15:00लेकिन फिर उसने सोचा देखते हैं शौर्य इस
  1643. 1:15:03मामले को कैसे हैंडल करता है। जबकि वहीं
  1644. 1:15:06वो लड़की शौर्य के मुंह से अपने लिए नक
  1645. 1:15:08चढ़ी शब्द सुनकर और आग बबूला हो गई। वो
  1646. 1:15:11गुस्से में भड़कते हुए बोली तुम्हारी यह
  1647. 1:15:14मजाल कि तुम मुझसे ऐसे बात कर रहे हो। अब
  1648. 1:15:16देखो मैं तुम्हारा क्या हश्र करवाती हूं।
  1649. 1:15:20उसी समय एक लड़का तेजी से चलकर उस लड़की
  1650. 1:15:22के पास पहुंचा और बोला क्या हुआ बेबी यह
  1651. 1:15:26तुम्हारा सामान क्यों बिखरा हुआ है?
  1652. 1:15:29इस पर वो लड़की उसे देखकर बोली देखो ना
  1653. 1:15:31रैंबो इस लड़के ने पहले तो मुझे टक्कर
  1654. 1:15:34मारी मेरे सारे सामान को बिखरा दिया और अब
  1655. 1:15:36मुझसे बदतमीजी कर रहा है। अब तुम ही इसे
  1656. 1:15:38सबक सिखाओ। रैम्बो ने उस लड़की की बात
  1657. 1:15:41सुनकर गुस्से से शौर्य की तरफ देखा और
  1658. 1:15:44बोला, "क्यों बे, मजनू की औलाद, यह क्या
  1659. 1:15:46कह रही है मेरी बेबी? तुम्हारी हिम्मत
  1660. 1:15:49कैसे हुई इसे टक्कर मारने की? और टक्कर
  1661. 1:15:51मारी सो मारी उसके बाद तुम इसे अकड़ भी
  1662. 1:15:53दिखा रहे हो। चलो जल्दी से अपने घुटनों पर
  1663. 1:15:56बैठो और वृंदा से माफी मांगो। रैंबो करीब
  1664. 1:16:0025- 26 साल का लड़का था। पूरा बॉडी
  1665. 1:16:02बिल्डर। उसने इस समय टाइट जींस और टी-शर्ट
  1666. 1:16:05पहन रखी थी। उसे देखकर कोई भी समझ सकता था
  1667. 1:16:08कि उसका ज्यादातर समय जिम में ही बीतता
  1668. 1:16:11होगा। मिनका ने जब इस झमेले में रैंबो की
  1669. 1:16:14एंट्री देखी तो उसने सोचा कि मामला कहीं
  1670. 1:16:16ज्यादा ना बढ़ जाए। इसीलिए उसे बीच-बचाव
  1671. 1:16:19करना चाहिए। यह सोचकर वो आगे आई और रैंबो
  1672. 1:16:22से बोली देखिए मिस्टर इसमें सारी गलती
  1673. 1:16:25आपकी दोस्त की है। शौर्य ने तो उसे देखा
  1674. 1:16:28भी नहीं था। वो खुद इससे टकराई है। इसीलिए
  1675. 1:16:30इस मामले को ज्यादा तूल ना दें तो अच्छा
  1676. 1:16:33रहेगा।
  1677. 1:16:34तुम्हारी यह हिम्मत कि तुमने मेरी दोस्त
  1678. 1:16:36को झूठा कहा। अगर अपने दोस्त की सलामती
  1679. 1:16:39चाहती हो तो इससे कहो कि अभी घुटनों के बल
  1680. 1:16:41बैठकर वृंदा से माफी मांगे। नहीं तो यह
  1681. 1:16:44अपने पैरों पर चलकर यहां से जा नहीं
  1682. 1:16:46पाएगा। रैंबो मेनका को धमकाते हुए बोला
  1683. 1:16:49लेकिन मेनका भी पीछे हटने वालों में से
  1684. 1:16:51नहीं थी। उसने तुरंत जवाब दिया देखो
  1685. 1:16:54मिस्टर अब ये कुछ ज्यादा ही हो रहा है।
  1686. 1:16:57अगर तुमने यूं ही हंगामा करना जारी रखा तो
  1687. 1:16:59मुझे पुलिस बुलानी पड़ेगी। [हंसी]
  1688. 1:17:02तुम मुझे पुलिस की धमकी दे रही हो। रैम्बो
  1689. 1:17:04को पुलिस की धमकी। तुम्हें शायद पता नहीं
  1690. 1:17:07पुलिस वाले मुझे जहां देख लेते हैं तो
  1691. 1:17:09अपना रास्ता बदल लेते हैं। क्यों तुम अपनी
  1692. 1:17:11ऐसी तैसी कराना चाहती हो? मेरी बात मानो
  1693. 1:17:14और अपने दोस्त से कहो कि यह आ जाए घुटनों
  1694. 1:17:16पर। नहीं तो इसकी तो बेइज्जती होगी ही।
  1695. 1:17:19साथ में तुम भी कहीं मुंह दिखाने के लायक
  1696. 1:17:20नहीं रहोगी। रैंबो मेनका का उपहास उड़ाते
  1697. 1:17:23हुए बोला। रैमो की बात सुनकर मेनका के
  1698. 1:17:27चेहरे पर हल्की घबराहट के निशान उभर आए।
  1699. 1:17:29शौर्य जो यह सब देख रहा था समझने की कोशिश
  1700. 1:17:32कर रहा था कि आखिर यह सब क्यों हो रहा है।
  1701. 1:17:35उसे लगा अब उसे खुद सामने आना चाहिए। उसने
  1702. 1:17:38मेनका से कहा रुको रुको। तुम साइड में हो
  1703. 1:17:41जाओ। मैं इन महाशय से बात करता हूं। मेनका
  1704. 1:17:45अनच्छा से उसके सामने से हट गई। उसे डर था
  1705. 1:17:48कि यह रैंबो कहीं शौर्य को नुकसान ना
  1706. 1:17:50पहुंचा दे। क्योंकि कद काठी में वो शौर्य
  1707. 1:17:53से काफी बड़ा था। शौर्य का शरीर भी
  1708. 1:17:55ठीक-ठाक है। लेकिन रैंबो का शरीर किसी
  1709. 1:17:57राक्षस जैसा लग रहा था। यही सोचकर मेनका
  1710. 1:18:00के मन में एक स्वाभाविक डर बैठ गया था।
  1711. 1:18:02उसी समय जब यह सब हो रहा था, कोई और भी था
  1712. 1:18:06जो मॉल के फर्स्ट फ्लोर से यह सब देख रहा
  1713. 1:18:08था। उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान थी।
  1714. 1:18:11वो भीड़ से दूर खड़ा था, लेकिन उसे देखकर
  1715. 1:18:13लग रहा था कि जो कुछ भी हो रहा है, उसके
  1716. 1:18:16पीछे उसी का हाथ है। इन सब बातों से अनजान
  1717. 1:18:19शौर्य रैंबो के सामने जाकर खड़ा हो गया और
  1718. 1:18:22बोला हां महोदय आप कुछ कह रहे थे। कहिए
  1719. 1:18:26मैं आपकी सेवा कैसे कर सकता हूं। इस पर
  1720. 1:18:28रैम्बो शौर्य के और पास आकर बोला। बहरे हो
  1721. 1:18:31क्या? अभी दो बार इतना साफ-साफ तुम्हारे
  1722. 1:18:34दोस्त के सामने मैंने जो कहा वो तुम्हें
  1723. 1:18:36समझ नहीं आया। मैं तुम्हें लास्ट वार्निंग
  1724. 1:18:39दे रहा हूं। अगर तुरंत तुमने अपने घुटनों
  1725. 1:18:41पर आकर वृंदा से माफी नहीं मांगी तो
  1726. 1:18:44तुम्हारे शरीर की सारी हड्डियां ताता थैया
  1727. 1:18:46करने लगेंगी। मेनका शौर्य की हिम्मत देखकर
  1728. 1:18:50हैरान थी कि वो आखिर कहां से रैंबो के
  1729. 1:18:52सामने खड़े होने की हिम्मत ला रहा है। वो
  1730. 1:18:55तो देखने में ही राक्षस लग रहा था। मेनका
  1731. 1:18:58के मन में बार-बार यही ख्याल आ रहा था कि
  1732. 1:19:00कहीं शौर्य को इस बेवकूफी की वजह से कोई
  1733. 1:19:03नुकसान ना हो जाए। इसी सोच में वो पुलिस
  1734. 1:19:06को फोन लगाने ही वाली थी कि तभी उसका फोन
  1735. 1:19:08बजने लगा। उसने कॉल उठाया तो दूसरी तरफ से
  1736. 1:19:11आवाज आई।
  1737. 1:19:13कुछ मत करो बस [संगीत] देखती रहो। बाकी
  1738. 1:19:16मैं तुम्हें बाद में समझाता हूं।
  1739. 1:19:18इतना कहकर फोन कट गया। मेनका हैरानी से
  1740. 1:19:21अपने फोन की तरफ देखने लगी। जब उसे होश
  1741. 1:19:24आया कि उसने अभी क्या सुना है तो उसने
  1742. 1:19:26चारों ओर नजर घुमाई लेकिन उसे कोई भी जाना
  1743. 1:19:29पहचाना चेहरा नजर नहीं आया। उसने पुलिस को
  1744. 1:19:32फोन करने का इरादा त्याग दिया और वहां जो
  1745. 1:19:34कुछ हो रहा था उसे देखने लगी। वो समझ रही
  1746. 1:19:38थी कि जो हो रहा है वह सही नहीं है। पर
  1747. 1:19:40फिलहाल वो कुछ करने की स्थिति में नहीं
  1748. 1:19:42थी। दूसरी तरफ शौर्य रैंबो के सामने खड़ा
  1749. 1:19:45होकर उसे चिढ़ाते हुए बोला। हां भाई रैंबो
  1750. 1:19:50अगर मैं आपकी बात नहीं मानूं तो आप मेरी
  1751. 1:19:52हड्डियों से ताता थैया करवाने वाले हैं।
  1752. 1:19:55भैया मैंने आज तक अपनी हड्डियों को ताता
  1753. 1:19:58थैया करते नहीं देखा। तो मैं चाहता हूं कि
  1754. 1:20:01आप एक बार मुझे यह नजारा जरूर दिखाएं।
  1755. 1:20:04शौर्य की बात सुनकर मेनका का दिमाग खराब
  1756. 1:20:06हो गया। वो मन ही मन बोली ये लड़का पागल
  1757. 1:20:10है क्या जो आफत को खुद ही न्योता दे रहा
  1758. 1:20:12है। पर फिर उसने खुद को रोक लिया। अब जब
  1759. 1:20:16यह खुद ही इस पहलवान को उकसा रहा है तो
  1760. 1:20:18उसके नतीजों के लिए भी यह खुद ही
  1761. 1:20:20जिम्मेदार होगा। शौर्य की बात सुनकर रैंबो
  1762. 1:20:23भी हैरान था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि
  1763. 1:20:26उसके सामने खड़ा यह लड़का आखिर किस बात का
  1764. 1:20:28घमंड रखता है। आमतौर पर लोग उसके सामने
  1765. 1:20:31अपनी सलामती के लिए गिड़गिड़ाने लगते थे।
  1766. 1:20:34लेकिन शौर्य तो उसे और भड़का रहा था।
  1767. 1:20:37रैंबो के साथ खड़ी वृंदा भी भड़क उठी।
  1768. 1:20:39उसने कहा देख क्या रहे हो? यह ऐसे समझने
  1769. 1:20:43वाला नहीं है। जब तक इसकी दो-चार हड्डियों
  1770. 1:20:45का चूरमा नहीं बनाओगे, यह भौकता ही रहेगा।
  1771. 1:20:49लड़के तुमने अपने लिए आफत मोल ले ली है।
  1772. 1:20:52जो भी तुम्हारे साथ होगा उसके लिए तुम खुद
  1773. 1:20:54ही जिम्मेदार होगे। मैंने तुम्हें मौका
  1774. 1:20:56दिया था। पर तुमने उसे गवा दिया। इतना
  1775. 1:21:00कहकर रैंबो शौर्य की तरफ बढ़ा। रैंबो की
  1776. 1:21:03बात सुनकर शौर्य सिर्फ मुस्कुरा रहा था।
  1777. 1:21:05उसे लग रहा था कि रैंबो उसे मारना नहीं
  1778. 1:21:07चाहता बल्कि बस यह चाहता है कि वो अपने
  1779. 1:21:09घुटनों पर गिर कर उससे माफी मांगे। शौर्य
  1780. 1:21:12भली-भांति रैंबो का इरादा समझ गया था।
  1781. 1:21:15लेकिन झुकना तो दूर उसने खुद रमबो को सबक
  1782. 1:21:17सिखाने का फैसला कर लिया था। लेकिन वो
  1783. 1:21:19पहले देखना चाहता था कि रैंबो किस हद तक
  1784. 1:21:22जा सकता है। दूसरी तरफ मेनका शौर्य को कोस
  1785. 1:21:25रही थी। उसे लग रहा था कि वह खुद ही
  1786. 1:21:27मुसीबत मोल ले रहा है। उसे सॉरी बोल देना
  1787. 1:21:30चाहिए था। उसने कोशिश करके देख लिया था पर
  1788. 1:21:32शौर्य उसकी बात मानने वाला नहीं था। इसी
  1789. 1:21:35बीच मेनका उस रहस्यमय कॉल के बारे में भी
  1790. 1:21:38सोच रही थी। दरअसल उसे फोन करने वाला कोई
  1791. 1:21:41और नहीं बल्कि राजा साहब का पहला ग्रैंडसन
  1792. 1:21:44प्रतीक राठौड़ था। दरअसल रैंबो को भी
  1793. 1:21:47प्रतीक राठौड़ ने ही भेजा था। रमबो के
  1794. 1:21:49जरिए प्रतीक शौर्य का मनोबल तोड़ना चाहता
  1795. 1:21:51था। उसका प्लान यह था कि बिना किसी पिटाई
  1796. 1:21:54के ही शौर्य मॉल में सबके सामने घुटनों पर
  1797. 1:21:57बैठकर गिड़गिड़ाए ताकि उसकी इज्जत धूल में
  1798. 1:21:59मिल जाए और वह फिर किसी का सामना करने
  1799. 1:22:01लायक ना रहे। प्रतीक का मुख्य मकसद शौर्य
  1800. 1:22:04के आत्मविश्वास को तोड़ना था। बाकी सब
  1801. 1:22:07अपने आप हो जाता। इसीलिए वो मॉल में छिप
  1802. 1:22:10कर यह सब देख रहा था। दूसरी तरफ शौर्य को
  1803. 1:22:13मुस्कुराता देखकर रम्बो के खून में और
  1804. 1:22:15उबाल आ गया। उसने ठान लिया कि वो शौर्य को
  1805. 1:22:18इतनी आसानी से नहीं छोड़ेगा। यह सोचकर
  1806. 1:22:21उसने शौर्य पर वार करने का फैसला किया।
  1807. 1:22:24उसने अपना घूंसा शौर्य के चेहरे की तरफ
  1808. 1:22:26चलाया। लेकिन शौर्य पहले से ही तैयार था।
  1809. 1:22:29उसने अपनी गर्दन हल्की सी घुमाई और रैंबो
  1810. 1:22:32का घूंसा उसके कान के पास से निकल गया। अब
  1811. 1:22:34शौर्य की बारी थी। उसने अपने हाथ की दो
  1812. 1:22:37उंगलियों से रमबो के सिर पर हल्का सा टैप
  1813. 1:22:40किया। जिससे रमबो लड़खड़ाते हुए दो कदम
  1814. 1:22:43पीछे हो गया। वो हैरान था कि शौर्य ने उस
  1815. 1:22:45पर वार कर दिया। उसने तो सपने में भी ऐसा
  1816. 1:22:48नहीं सोचा था। रैंबो के साथ खड़ी वृंदा भी
  1817. 1:22:50हैरान थी कि शौर्य ने रैंबो पर हमला करने
  1818. 1:22:53की हिम्मत कर दी। अब रैंबो का गुस्सा और
  1819. 1:22:56बढ़ गया था। वो झपटते हुए शौर्य की तरफ
  1820. 1:22:58बढ़ा। लेकिन शौर्य ने खुद को बचाते हुए
  1821. 1:23:01फुर्ती से उसके पीछे पोजीशन ले ली। रैंबो
  1822. 1:23:04शौर्य की तेजी देखकर हैरान था। अपने हमलों
  1823. 1:23:07को बार-बार नाकाम होता देखकर उसने दोनों
  1824. 1:23:10बाहें फैलाकर शौर्य को पकड़ने की कोशिश
  1825. 1:23:12की। लेकिन शौर्य उसके हाथ ही नहीं आ रहा
  1826. 1:23:15था। मॉल में मौजूद लोग जो उनके चारों तरफ
  1827. 1:23:18खड़े होकर तमाशा देख रहे थे वो भी शौर्य
  1828. 1:23:20की हिम्मत और फुर्ती को देखकर दंग रह गए।
  1829. 1:23:23एक तरफ दैत्य जैसा विशाल रैंबो और दूसरी
  1830. 1:23:26तरफ फिट और संतुलित शौर्य। दोनों का कोई
  1831. 1:23:29मुकाबला नहीं लग रहा था। रैंबो ताकत में
  1832. 1:23:32बहुत आगे था, लेकिन कई कोशिशों के बाद भी
  1833. 1:23:35वो शौर्य का कुछ नहीं बिगाड़ पा रहा था।
  1834. 1:23:37वो बार-बार उसे अपने फंदे में फंसाने की
  1835. 1:23:40कोशिश कर रहा था। लेकिन शौर्य उसे एक भी
  1836. 1:23:42मौका नहीं दे रहा था। जब इस तरह खेलते हुए
  1837. 1:23:45कुछ पल बीत गए तो शौर्य ने इस खेल को
  1838. 1:23:48जल्दी खत्म करने का फैसला किया। इस बार
  1839. 1:23:51जैसे ही रैंबो ने झपट्टा मारकर उसे दबोचने
  1840. 1:23:54की कोशिश की, शौर्य अपने स्थान से हिला
  1841. 1:23:56नहीं। और फिर जैसे ही रैंबो उसके करीब आया
  1842. 1:23:59शौर्य का एक जबरदस्त पंच उसकी छाती से जा
  1843. 1:24:01टकराया जिससे रैंबो लगभग 10 कदम पीछे जाकर
  1844. 1:24:05जमीन पर गिर पड़ा। वो शौर्य से ऐसे हमले
  1845. 1:24:07की कल्पना भी नहीं कर सकता था। लेकिन
  1846. 1:24:09सच्चाई यही थी कि शौर्य के एक ही घूसे ने
  1847. 1:24:12उसे जमीन पर लापटका था। रैंबो ही नहीं
  1848. 1:24:15वहां मौजूद लोग भी इस पर यकीन नहीं कर पा
  1849. 1:24:18रहे थे कि एक ही वार में इतना विशाल आदमी
  1850. 1:24:21कैसे गिर सकता है। मेनका भी फटी आंखों से
  1851. 1:24:24शौर्य को देख रही थी। उसे दूर-दूर तक
  1852. 1:24:27शौर्य की आंखों में कहीं भी भय नजर नहीं आ
  1853. 1:24:30रहा था। उल्टा वो ऐसे मुस्कुरा रहा था
  1854. 1:24:32जैसे रैंबो की उसके सामने कोई औकात ही ना
  1855. 1:24:35हो। वो तो उससे बच्चों की तरह खेल रहा था।
  1856. 1:24:38एक ही पल में मेनका का शौर्य को देखने का
  1857. 1:24:41नजरिया बदल गया। जो अभी तक उसे फुद्दू लग
  1858. 1:24:44रहा था वही अब उसे बब्बर शेर नजर आने लगा।
  1859. 1:24:47शौर्य धीरे-धीरे चलते हुए रैंबो के पास
  1860. 1:24:50पहुंचा। रैंबो दांत पीसते हुए उठा और गाली
  1861. 1:24:53देते हुए बोला कुत्ते तेरी यह हिम्मत कि
  1862. 1:24:56तू मुझ पर हमला करेगा। जैसे ही रैंबो के
  1863. 1:25:00मुंह से गाली निकली वैसे ही चटा की तेज
  1864. 1:25:03आवाज पर पूरे माहौल में गूंज उठी। सबने
  1865. 1:25:07देखा शौर्य ने रैंबो के गाल पर एक जोरदार
  1866. 1:25:09तमाचा जड़ दिया था। मैं तुझे
  1867. 1:25:13छोडूंगा नहीं। तूने बहुत मस्ती कर ली। अब
  1868. 1:25:16अगर तू गिड़गिड़ाएगा भी तो भी मैं तुझे
  1869. 1:25:19नहीं छोडूंगा। रैंबो फिर से उठते हुए
  1870. 1:25:21बोला, वो हर हाल में शौर्य को सबक सिखाना
  1871. 1:25:24चाहता था। लेकिन इस बार भी उसकी कोशिश
  1872. 1:25:26नाकाम रही। उसने पूरी ताकत से शौर्य पर
  1873. 1:25:29किक से हमला किया। लेकिन शौर्य ने तुरंत
  1874. 1:25:32अपनी लाश से उसके वार को रोक दिया। टक्कर
  1875. 1:25:35इतनी जबरदस्त थी कि रैंबो का पैर बुरी तरह
  1876. 1:25:38झूल गया। वो टूट चुका था। रैंबो दर्द से
  1877. 1:25:41करहाते हुए जमीन पर गिर पड़ा और अपने पैर
  1878. 1:25:44को पकड़ कर सीधा करने की कोशिश करने लगा।
  1879. 1:25:47अब वो कुछ भी करने की हालत में नहीं था।
  1880. 1:25:50रैंबो की गर्लफ्रेंड वृंदा भी स्तब्ध खड़ी
  1881. 1:25:52थी। उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि यह सब
  1882. 1:25:55कैसे हो गया। शौर्य रैंबो के सामने फर्श
  1883. 1:25:58पर बैठते हुए मुस्कुरा कर बोला।
  1884. 1:26:01अब बताओ कोई और भी हसरत है तो अभी पूरी कर
  1885. 1:26:04दूं। तभी वृंदा शौर्य को धमकाते हुए बोली
  1886. 1:26:08ये तुमने क्या किया? तुमने रैंबो का पैर
  1887. 1:26:11तोड़ दिया। अब तुम्हें इसकी बहुत ही
  1888. 1:26:13खतरनाक सजा मिलने वाली है। मेरी सजा को
  1889. 1:26:16छोड़ो। अभी तुम दोनों यह सोचो कि तुम यहां
  1890. 1:26:18से बचकर कैसे जाओगे। शौर्य रैंबबो का मजाक
  1891. 1:26:21उड़ाते हुए बोला। अब पूरी तरह से यहां का
  1892. 1:26:24पासा पलट चुका था। रैंबो के चेहरे पर
  1893. 1:26:27पछतावा साफ नजर आ रहा था और यही हाल वृंदा
  1894. 1:26:30का भी था। आखिर यह सब शुरू ही वृंदा ने
  1895. 1:26:33किया था तो सजा तो मिलनी ही थी। दूसरी तरफ
  1896. 1:26:36यह सीन पलटता देख मेनका सोचने को मजबूर थी
  1897. 1:26:39कि अब प्रतीक क्या करेगा। उसने तो शौर्य
  1898. 1:26:42पर हमला भी करवा दिया लेकिन उसका कुछ
  1899. 1:26:44बिगाड़ नहीं पाया। तभी शौर्य वृंदा की तरफ
  1900. 1:26:47देखते हुए बोला क्या [संगीत] हुआ? अब
  1901. 1:26:50मुझसे माफी नहीं मंगवाओगी। मुझ पर हमला
  1902. 1:26:53नहीं करोगी। तुम तो मुझे सबक सिखाना चाहती
  1903. 1:26:56थी ना। लेकिन अब कैसे करोगी? इसका तो खड़ा
  1904. 1:26:59होना भी मुश्किल हो रहा है। अब वृंदा के
  1905. 1:27:02मुंह पर जैसे ताला लग गया था। उसे समझ
  1906. 1:27:04नहीं आ रहा था कि वो क्या करें? उसकी
  1907. 1:27:06नजरें किसी को ढूंढते हुए इधर-उधर घूमने
  1908. 1:27:09लगी। उधर जब प्रतीक ने वृंदा को इस तरह
  1909. 1:27:11इधर-उधर देखते पाया तो वह समझ गया कि वो
  1910. 1:27:14उसी को ढूंढ रही है। यह समझते ही वो अपनी
  1911. 1:27:17जगह पर छिप गया। वहीं मेनका ने सोचा भी
  1912. 1:27:20नहीं था कि शौर्य इतना स्ट्रांग निकलेगा।
  1913. 1:27:22शौर्य ने रमबो को हराने में ज्यादा प्रयास
  1914. 1:27:25भी नहीं किया था। जबकि उसकी एक ही किक ने
  1915. 1:27:27रमबो को जमीन पर ला दिया था। वैसे तो रमबो
  1916. 1:27:31का शरीर शौर्य से डेढ़ गुना बड़ा था। अभी
  1917. 1:27:33तक जो किसी राक्षस जैसा नजर आ रहा था, वो
  1918. 1:27:36अब जमीन पर पड़ा हुआ था। वह अविश्वास भरी
  1919. 1:27:39नजरों से शौर्य को देख रहा था। उसने शौर्य
  1920. 1:27:42को बहुत कमजोर समझा था। लेकिन अब उसे अपनी
  1921. 1:27:45सोच पर अफसोस हो रहा था। दूसरी तरफ जिस
  1922. 1:27:48वृंदा की जुबान चाकू की तरह चल रही थी, अब
  1923. 1:27:50[संगीत] उसकी बोलती बंद हो चुकी थी।
  1924. 1:27:54हां जी बहन जी। यह बंदा तो अब किसी लायक
  1925. 1:27:57रहा नहीं। कोई और आपका हिमायती है जो आकर
  1926. 1:28:00आपके लिए खड़ा हो सके। शौर्य रैंबो को
  1927. 1:28:03छोड़कर वृंदा के पास जाकर बोला। लेकिन
  1928. 1:28:06वृंदा कुछ नहीं बोली। वो खामोशी से सिर्फ
  1929. 1:28:08शौर्य को देखती रह गई। तभी शौर्य ने व्यंग
  1930. 1:28:12करते हुए कहा, क्या बात है? अब आपने मुझे
  1931. 1:28:15अपनी निगाहों से ही मारने का इरादा कर
  1932. 1:28:17लिया है क्या?
  1933. 1:28:19तुम रैंबो को हराकर खुद को बड़ा तीस मारखा
  1934. 1:28:21समझते हो लेकिन देर सवेेर मैं तुमसे अपनी
  1935. 1:28:24बेइज्जती का बदला जरूर लूंगी। वृंदा जख्मी
  1936. 1:28:27नागिन की तरह फुफकारते हुए बोली।
  1937. 1:28:31रस्सी जल गई पर बल नहीं गया। वैसे मैं अभी
  1938. 1:28:33कुछ देर यहीं हूं। कोई और आपका हितचिंतक
  1939. 1:28:37हो तो उसे भी बुला लो। शायद वह आपकी मुराद
  1940. 1:28:40पूरी कर दे। शौर्य ने उपहास भरे अंदाज में
  1941. 1:28:42कहा तो वृंदा दांत भीते हुए बोली अभी
  1942. 1:28:46जितनी शेखी भगारनी है बघार लो लेकिन मैं
  1943. 1:28:49तुम्हें भूलूंगी नहीं। वैसे मैं भूलने की
  1944. 1:28:53[संगीत] चीज भी नहीं हूं। मैं उस पल का
  1945. 1:28:55इंतजार करूंगा जब आप अपने मन की मुराद
  1946. 1:28:57पूरी कर सको। तब तक के लिए बाय। और हां
  1947. 1:29:01अपने इस दोस्त को जल्दी किसी अस्पताल ले
  1948. 1:29:03जाओ। शायद इसका पैर बच जाए। शौर्य ने
  1949. 1:29:06रैंबो की तरफ देखते हुए कहा, रैंबो का सिर
  1950. 1:29:09शर्मिंदगीगी से झुका हुआ था। उसके लिए यह
  1951. 1:29:12स्वीकार करना मुश्किल था कि वो शौर्य से
  1952. 1:29:14हार गया है। शौर्य मेनका के पास पहुंचा और
  1953. 1:29:17बोला अब चलें जिस काम के लिए आए थे उसे
  1954. 1:29:21पूरा करते हैं। मेनका हैरानी से शौर्य को
  1955. 1:29:24देख रही थी। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि
  1956. 1:29:27जिस स्थिति से वो अभी गुजरा है उसके बाद
  1957. 1:29:30भी कोई इतना सामान्य रह सकता है और तो और
  1958. 1:29:33उसके चेहरे पर वही हल्की प्यारी मुस्कान
  1959. 1:29:36थी। वो सोचने पर मजबूर हो गई कि क्या उसने
  1960. 1:29:39शौर्य के बारे में जो राय बनाई थी वो सच
  1961. 1:29:41में सही थी। मेनका ने अपने चेहरे के भाव
  1962. 1:29:44सामान्य किए और बोली ठीक है। चलते हैं।
  1963. 1:29:48उसके बाद दोनों मेन सेक्शन में गए और
  1964. 1:29:50शौर्य ने अपनी जरूरत का सामान लिया। फिर
  1965. 1:29:53दोनों वहां से होटल वापस आ गए। मेनका इस
  1966. 1:29:56दौरान शौर्य के साथ तो थी लेकिन उसके
  1967. 1:29:58दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। उसे
  1968. 1:30:01बार-बार प्रतीक की बातें याद आ रही थी। वो
  1969. 1:30:04समझ नहीं पा रही थी कि प्रतीक को यह
  1970. 1:30:06ड्रामा करने की क्या जरूरत थी और अगर वह
  1971. 1:30:08ऐसा करने वाला था तो उसने उसे पहले क्यों
  1972. 1:30:11नहीं बताया। क्या उसने शौर्य के बारे में
  1973. 1:30:14प्रतीक को बताकर कोई गलती कर दी है?
  1974. 1:30:17शौर्य के साथ जो कुछ हुआ उसके लिए वह खुद
  1975. 1:30:20को जिम्मेदार मान रही थी। अगर शौर्य के
  1976. 1:30:22साथ कुछ अनहोनी हो जाती तो वह खुद को कभी
  1977. 1:30:25माफ नहीं कर पाती। यह सच था कि वह शौर्य
  1978. 1:30:28को पसंद नहीं करती थी, लेकिन वो यह भी
  1979. 1:30:30नहीं चाहती थी कि उसकी वजह से शौर्य के
  1980. 1:30:32साथ कुछ बुरा हो। उसने मन ही मन तय किया
  1981. 1:30:35कि वो इस बारे में प्रतीक से बात करेगी।
  1982. 1:30:38खैर, होटल पहुंचने के बाद जब शौर्य अपना
  1983. 1:30:41सामान रखने के लिए अपने कमरे में चला गया,
  1984. 1:30:43तो मेनका कुछ देर तक उसी सोच में डूबी रही
  1985. 1:30:46कि आखिर प्रतीक ने ऐसा क्यों किया। कहीं
  1986. 1:30:49वो इस संपत्ति के लिए शौर्य को अपने
  1987. 1:30:51रास्ते से हटाने की कोशिश तो नहीं कर रहा।
  1988. 1:30:53क्या एक होटल के लिए वो इतना गिर सकता है
  1989. 1:30:56कि शौर्य को नुकसान पहुंचाने जैसा कदम उठा
  1990. 1:30:59ले। यही सब सोचकर उसने प्रतीक को फोन
  1991. 1:31:01लगाया। कुछ रिंग के बाद प्रतीक ने फोन उठा
  1992. 1:31:04लिया। यह सब क्या था प्रतीक? मैंने कभी
  1993. 1:31:08सोचा भी नहीं था कि तुम इतनी घटिया हरकत
  1994. 1:31:10करोगे। मेनका बिना उसे कुछ कहने का मौका
  1995. 1:31:12दिए ही फट पड़ी।
  1996. 1:31:15अरे शांत शांत पहले मुझे कुछ बोलने का
  1997. 1:31:17मौका तो दो।
  1998. 1:31:19प्रतीक ने उसे समझाने की कोशिश करते हुए
  1999. 1:31:21कहा लेकिन मेनका का गुस्सा जरा भी कम नहीं
  2000. 1:31:24हुआ।
  2001. 1:31:26तुम्हें लगता है कि अब भी तुम्हारे पास
  2002. 1:31:28अपनी सफाई में कुछ कहने को है?
  2003. 1:31:30अरे तुम्हें इतना हाइपर होने की क्या
  2004. 1:31:32जरूरत है? अगर मैं कुछ करता हूं तो उसके
  2005. 1:31:35लिए तुम थोड़ी ही जिम्मेदार हो।
  2006. 1:31:36प्रतीक ने लापरवाही से कहा, जैसे उसके लिए
  2007. 1:31:39यह कोई बड़ी बात ही ना हो। क्यों? मैं
  2008. 1:31:42कैसे जिम्मेदार नहीं हूं? मैंने ही
  2009. 1:31:44तुम्हें शौर्य के बारे में बताया था और आज
  2010. 1:31:46तुम उसके मेनका आगे कुछ और कह पाती उससे
  2011. 1:31:49पहले ही दरवाजा खुला और शौर्य उसके सामने
  2012. 1:31:52आ गया। मेनका के आगे के शब्द उसके होठों
  2013. 1:31:55पर ही अटक गए। उधर जब प्रतीक ने महसूस
  2014. 1:31:57किया कि मेनका अचानक चुप हो गई है तो उसने
  2015. 1:32:00पूछा
  2016. 1:32:01क्या हुआ? तुम चुप क्यों हो गई?
  2017. 1:32:04ठीक है। मैं तुमसे फिर बात करती हूं। इतना
  2018. 1:32:06कहकर मेनका ने बिना प्रतीक के जवाब का
  2019. 1:32:09इंतजार किए ही फोन काट दिया। शौर्य ने
  2020. 1:32:11महसूस किया कि मेनका ने उसके कारण ही फोन
  2021. 1:32:14काटा है। लेकिन उसने इस बारे में उससे कुछ
  2022. 1:32:16नहीं कहा।
  2023. 1:32:18तुम फिर से आ गए। अब कुछ और रह गया क्या?
  2024. 1:32:21मेनका अपनी घबराहट छुपाते हुए बोली, "अरे
  2025. 1:32:24नहीं ऐसा कुछ नहीं है।" मैं तो तुम्हें बस
  2026. 1:32:27थैंक यू कहना भूल गया था। वही कहने आया
  2027. 1:32:29हूं। तुमने जो खरीदारी में मेरी मदद की,
  2028. 1:32:32उसके लिए तुम्हारा बहुत-बहुत धन्यवाद।
  2029. 1:32:34शौर्य ने चेहरे पर हल्की सी मुस्कान लाते
  2030. 1:32:36हुए कहा, "यह कोई इतनी बड़ी बात नहीं थी
  2031. 1:32:39जिसके लिए तुम्हें मुझे धन्यवाद कहना
  2032. 1:32:41पड़े। मेनका थोड़ा सहज बनने की कोशिश करते
  2033. 1:32:44हुए बोली,
  2034. 1:32:46एक बात और है जो मुझे तुमसे करनी है।
  2035. 1:32:49शौर्य ने रहस्यमय अंदाज में कहा। एक बात
  2036. 1:32:52और है जो मुझे तुमसे करनी है। शौर्य ने
  2037. 1:32:55रहस्यमय अंदाज में कहा। उसके भाव देखकर
  2038. 1:32:58मेनका का दिल धड़क उठा। उसे लगा कहीं
  2039. 1:33:00शौर्य को उसके और प्रतीक के बीच हुई
  2040. 1:33:02बातचीत का अंदाजा तो नहीं हो गया। वो
  2041. 1:33:04थोड़ी घबराहट के साथ बोली, बोलो और क्या
  2042. 1:33:08बात करनी है? शौर्य कुर्सी खींच कर उसके
  2043. 1:33:10पास बैठते हुए बोला, "देखो, मैं चाहता हूं
  2044. 1:33:13कि तुम किसी को भी मेरी सच्चाई मत बताना
  2045. 1:33:16कि अब इस होटल का मालिक मैं हूं या फिर यह
  2046. 1:33:18कि मैं राजा साहब का ग्रैंडसन हूं। जिसे
  2047. 1:33:21यह होटल गिफ्ट में मिला है। शौर्य की बात
  2048. 1:33:23सुनकर मेनका का दिल जोर से धड़क उठा। उसने
  2049. 1:33:26तो पहले ही शौर्य के बारे में प्रतीक को
  2050. 1:33:28बता दिया था। फिर भी उसने अपने चेहरे पर
  2051. 1:33:31कोई भाव नहीं आने दिया और बोली पर इसमें
  2052. 1:33:34छुपाने वाली क्या बात है? एक ना एक दिन तो
  2053. 1:33:36सबको पता चल ही जाएगा। मैं समझता हूं कि
  2054. 1:33:40देर सवेेर यह बात सामने आनी ही है। लेकिन
  2055. 1:33:42तब तक मुझे थोड़ा समय मिल जाएगा और हो
  2056. 1:33:45सकता है तब तक मेरा मकसद भी पूरा हो जाए।
  2057. 1:33:49शौर्य ने गहरे स्वर में कहा, पर मुझे समझ
  2058. 1:33:52नहीं आ रहा कि इसकी जरूरत क्या है। अगर
  2059. 1:33:54कोई मुझसे पूछेगा तो मैं क्या जवाब दूंगी।
  2060. 1:33:57मेनका ने हल्का विरोध जताया। इस पर शौर्य
  2061. 1:34:00ने सहजता से कहा देखो अगर कभी बताना जरूरी
  2062. 1:34:03ही हो जाए तो तुम मेरी जगह विक्रम को राजा
  2063. 1:34:06साहब का पोता बता सकती हो। फिर वो अपनी
  2064. 1:34:09बात पर जोर देते हुए बोला हां तुम ऐसा ही
  2065. 1:34:13करना। दूसरों के सामने विक्रम को ही शौर्य
  2066. 1:34:16के रूप में प्रस्तुत करना। इससे तुम्हारे
  2067. 1:34:18अलावा किसी को मेरी असली पहचान पता नहीं
  2068. 1:34:20चलेगी क्योंकि यहां कोई भी मेरे चेहरे से
  2069. 1:34:23परिचित नहीं है और जहां तक मेरी बात है आज
  2070. 1:34:26से मेरा नाम तुम्हारे लिए श्रवण है जो
  2071. 1:34:29शौर्य का पिए बनकर रहेगा। मेनका का सिर
  2072. 1:34:32जैसे चक्कर खाने लगा। उसे समझ नहीं आ रहा
  2073. 1:34:34था कि जो गलती वो पहले ही कर चुकी है उसे
  2074. 1:34:37अब कैसे संभालेगी। उसने तो प्रतीक को पहले
  2075. 1:34:40ही दिन बता दिया था कि राजा साहब ने यह
  2076. 1:34:42होटल शौर्य को गिफ्ट कर दिया है और शायद
  2077. 1:34:45इसी वजह से प्रतीक इस हद तक उतर आया। अब
  2078. 1:34:48वो अपने ही [संगीत] फैलाए जाल को कैसे
  2079. 1:34:49सुलझाए। तभी अचानक बिजली की तरह उसके
  2080. 1:34:52दिमाग में एक विचार कौंधा और उसके चेहरे
  2081. 1:34:55पर छाई घबराहट पल भर में गायब हो गई।
  2082. 1:34:57शौर्य के वहां से जाते ही मेनका ने तुरंत
  2083. 1:35:00प्रतीक को फोन मिला दिया। एक ही रिंग में
  2084. 1:35:02उधर से कॉल उठ गया। हेलो अब क्या हुआ?
  2085. 1:35:06प्रतीक की आवाज आई तो मेनका ने खुद को
  2086. 1:35:09संयत रखते हुए कहा हुआ कुछ नहीं बस यह
  2087. 1:35:12जानना है कि अगर तुम्हें कुछ करना ही था
  2088. 1:35:14तो मुझे पहले बता देते बताता पर मौका ही
  2089. 1:35:17नहीं मिला प्रतीक ने सफाई दी मेनका हल्का
  2090. 1:35:21सा मुस्कुराई बात मौका मिलने की नहीं है
  2091. 1:35:24बात यह है कि जिसके खिलाफ तुम प्लान बना
  2092. 1:35:26रहे हो पहले उससे ठीक से जान तो लेते उसकी
  2093. 1:35:30बात सुनकर प्रतीक चौंक गया मतलब तुम्हारे
  2094. 1:35:34साथ और कौन था यही होता है जल्दीबाजी में।
  2095. 1:35:37मेनका ने धीमे लेकिन चुपते लहजे में कहा।
  2096. 1:35:40मैंने कहा ना पहले मुझसे बात कर लेते तो
  2097. 1:35:43यह गलती नहीं होती। अब प्रतीक के मन में
  2098. 1:35:47घबराहट घर करने लगी थी। सीधे-सीधे बोलोगी
  2099. 1:35:50भी आखिर कहना क्या चाहती हो? मेनका ने एक
  2100. 1:35:54पल चुप रहकर उसकी बेचैनी बढ़ाई। फिर बोली,
  2101. 1:35:58जानना चाहते हो तो सुनो। जिसे तुम फंसाने
  2102. 1:36:00निकले थे वो तो वो था ही नहीं। उसके होठों
  2103. 1:36:04पर हल्की मुस्कान आ गई। अब उसे प्रतीक के
  2104. 1:36:06साथ ही खेल खेलने में मजा आने लगा था।
  2105. 1:36:08वैसे भी वह प्रतीक पर गुस्सा थी क्योंकि
  2106. 1:36:11उसने बिना बताए शौर्य को नीचा दिखाने की
  2107. 1:36:13जो कोशिश की थी उसका हिसाब तो बनता था। तो
  2108. 1:36:17फिर वो कौन था जो तुम्हारे साथ मॉल में
  2109. 1:36:19गया था? प्रतीक ने उलझन भरे स्वर में
  2110. 1:36:21पूछा। वो श्रवण था। शौर्य का असिस्टेंट।
  2111. 1:36:25मेनका ने बिल्कुल सहजता से जवाब दिया।
  2112. 1:36:27क्या? प्रतीक का मुंह खुला का खुला रह
  2113. 1:36:30गया। पर तुमने तो कहा था कि तुम्हारे साथ
  2114. 1:36:32शौर्य है। मेनका हल्का सा हंस दी। लेकिन
  2115. 1:36:36मैंने यह कब कहा कि शॉपिंग के लिए भी वही
  2116. 1:36:38आ रहा है। उसने तो अपने असिस्टेंट को भेज
  2117. 1:36:40दिया था मेरे साथ। उसके चेहरे पर अब एक
  2118. 1:36:43अलग ही सुकून था। उसे महसूस हो रहा था कि
  2119. 1:36:46प्रतीक को बेवकूफ बनाना कितना आसान है।
  2120. 1:36:49अगर ऐसा था तो तुमने मुझे पहले क्यों नहीं
  2121. 1:36:51बताया? प्रतीक ने शिकायत भरे लहजे में
  2122. 1:36:54कहा। तो मेनका ने तुरंत पलटवार किया। मुझे
  2123. 1:36:57क्या सपना आया था कि तुमने शौर्य के लिए
  2124. 1:36:59कोई प्लान बना रखा है और अगर ऐसी कोई
  2125. 1:37:01प्लानिंग थी तो तुम्हें पहले मुझे विश्वास
  2126. 1:37:03में लेना चाहिए था। शिकायत तो मुझे तुमसे
  2127. 1:37:06होनी चाहिए। तुम्हें मुझसे नहीं। प्रतीक
  2128. 1:37:08एकदम चुप हो गया। उसकी बोलती जैसे बंद हो
  2129. 1:37:11गई थी। फिर थोड़ा संभल कर उसने पूछा। अगर
  2130. 1:37:14तुम्हारे साथ असिस्टेंट था तो शौर्य कहां
  2131. 1:37:17था? वो वो तो होटल में ही था। अपने कमरे
  2132. 1:37:21में आराम कर रहा था। मेनका ने बिना रुके
  2133. 1:37:24जवाब दिया। कुछ पल की खामोशी के बाद
  2134. 1:37:26प्रतीक ने कहा, शौर्य का कोई फोटो है
  2135. 1:37:29तुम्हारे पास? भेजो ना। इस पर मेनका ने
  2136. 1:37:32तुरंत मना कर दिया। मेरे पास उसके फोटो का
  2137. 1:37:35क्या काम? मेरे पास कोई फोटो नहीं है।
  2138. 1:37:38लेकिन उसके चेहरे पर अब भी हल्की सी
  2139. 1:37:40मुस्कान थी क्योंकि वह जानबूझकर प्रतीक को
  2140. 1:37:42उलझा रही थी और सच कहें तो उसे इसमें मजा
  2141. 1:37:45आ रहा था। प्रतीक से इतनी बातें करने के
  2142. 1:37:48बाद मेनका के सिर से जैसे एक बड़ा बोझ उतर
  2143. 1:37:51गया। उसे उम्मीद नहीं थी कि प्रतीक उसकी
  2144. 1:37:53दी हुई जानकारी का इस तरह इस्तेमाल करेगा
  2145. 1:37:56कि लोगों के बीच उसका तमाशा बन जाए। अब तक
  2146. 1:37:59प्रतीक की जो अच्छी छवि उसके मन में थी वो
  2147. 1:38:01मॉल वाली घटना के बाद पूरी तरह टूट चुकी
  2148. 1:38:04थी। उधर प्रतीक भी समझ गया था कि मेनका
  2149. 1:38:07उससे नाराज है। शायद यही वजह थी कि मेनका
  2150. 1:38:10ने उसे शौर्य का फोटो देने का कोई वादा
  2151. 1:38:12नहीं किया। वहीं दूसरी तरफ शौर्य होटल के
  2152. 1:38:15रेस्टोरेंट एरिया में पहुंच गया। वहां
  2153. 1:38:17विक्रम, मोहित और प्रिया एक टेबल पर बैठे
  2154. 1:38:20थे। टेबल दीवार से सटी हुई थी। लेकिन
  2155. 1:38:23दीवार की जगह पूरा हिस्सा रंगीन शीशे का
  2156. 1:38:25बना था। जिससे बाहर की सड़क साफ दिखाई
  2157. 1:38:28देती थी। जबकि बाहर से अंदर का नजारा नहीं
  2158. 1:38:31दिखता था। शौर्य उनके पास जाकर बैठ गया।
  2159. 1:38:34तीनों ने उसका अभिवादन किया। प्रिया के
  2160. 1:38:36चेहरे से साफ लग रहा था कि वह पहली बार
  2161. 1:38:39इतने बड़े होटल में आई है। चारों तरफ का
  2162. 1:38:41माहौल और साज सज्जा सब कुछ उसके लिए नया
  2163. 1:38:44था। शौर्य ने मेनू उठाकर उसकी तरफ बढ़ाया।
  2164. 1:38:48जो तुम्हें पसंद हो आर्डर कर दो। प्रिया
  2165. 1:38:51ने धीरे से मेनू खोला। लेकिन जैसे ही उसकी
  2166. 1:38:54नजर कीमतों पर पड़ी तो इतनी महंगी चीजें
  2167. 1:38:56देखकर कुछ ऑर्डर करने की उसकी हिम्मत ही
  2168. 1:38:59नहीं हुई। उसकी झिझक शौर्य से छुपी नहीं
  2169. 1:39:01रही। उसने बिना कुछ कहे वेटर को बुलाया और
  2170. 1:39:04सहज स्वर में कहा।
  2171. 1:39:07यहां का जो बेस्ट है वो सबके लिए ले आइए।
  2172. 1:39:11वेटर शौर्य की बात सुनकर मुस्कुराया और यस
  2173. 1:39:14सर कहकर वहां से चला गया। शौर्य ने मोहित
  2174. 1:39:17की ओर देखते हुए कहा हां अब बताओ क्या हुआ
  2175. 1:39:21बिगर कलेक्शन में इस पर मोहित ने बताया
  2176. 1:39:25सब ठीक से निपट गया सर रोहित जुनेजा ने
  2177. 1:39:27थोड़ी नौटंकी जरूर की कुछ गुंडे भी बुला
  2178. 1:39:30लिए थे उसे पहले से पता चल गया था कि राघव
  2179. 1:39:33ने अपने शहर बेच दिए हैं [संगीत] लेकिन
  2180. 1:39:35दूसरे साले के शहर के बारे में उसे
  2181. 1:39:37जानकारी नहीं थी उसने हमें धमकाने की
  2182. 1:39:40कोशिश भी की पर विक्रम सर ने उसे ऐसा सबक
  2183. 1:39:42सिखाया कि उसकी सारी अकड़ निकल गई अब वह
  2184. 1:39:45दोबारा सामने सामने आने की हिम्मत नहीं
  2185. 1:39:47करेगा। शौर्य को भरोसा था कि विक्रम ऐसी
  2186. 1:39:50परिस्थितियों को संभाल सकता है। तभी तो
  2187. 1:39:52उसने उसे साथ भेजा था। अच्छा है। उसे सबक
  2188. 1:39:56भी मिल गया। शौर्य ने संतोष भरे स्वर में
  2189. 1:39:59कहा। फिर प्रिया की ओर मुड़ते हुए पूछा।
  2190. 1:40:02और प्रिया तुम्हें वहां का काम समझा दिया
  2191. 1:40:05गया है ना? तभी वेटर खाना लेकर आ गया और
  2192. 1:40:09सबके सामने प्लेटें सजाने लगा। खाने की
  2193. 1:40:11खुशबू से ही प्रिया की भूख और बढ़ गई।
  2194. 1:40:14मोहित ने जवाब दिया, मैंने इसे बेसिक समझा
  2195. 1:40:17दिए हैं। बाकी यह खुद बताएगी कि संभाल
  2196. 1:40:19पाएगी या नहीं। शौर्य ने सीधे प्रिया से
  2197. 1:40:22पूछा, तो क्या कहती हो? संभाल लोगी या मैं
  2198. 1:40:25किसी और को जिम्मेदारी दूं। प्रिया एकदम
  2199. 1:40:28घबरा गई। उसने तुरंत कहा, नहीं सर मैं
  2200. 1:40:31संभाल लूंगी। अगर कहीं दिक्कत आई तो मोहित
  2201. 1:40:33सर है ही। इनसे मदद ले लूंगी। उसे डर था
  2202. 1:40:37कि अगर उसने जरा भी देर की तो इतना अच्छा
  2203. 1:40:39मौका उसके हाथ से निकल जाएगा। उसकी घबराहट
  2204. 1:40:42देखकर सबके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ
  2205. 1:40:44गई। इसके बाद सब खाने में लग गए। खाते हुए
  2206. 1:40:48शौर्य की नजर होटल के गेट के पास लगे एक
  2207. 1:40:50बोर्ड पर पड़ी। दरअसल होटल के गेट पर कई
  2208. 1:40:54डिस्प्ले बोर्ड लगे हुए थे। [संगीत] जिन
  2209. 1:40:55पर उस दिन के रिजर्व हॉल की जानकारी रहती
  2210. 1:40:58है ताकि आने वाले गेस्ट आसानी से समझ सकें
  2211. 1:41:01कि उन्हें किस हॉल नंबर में जाना है। ऐसे
  2212. 1:41:03ही एक डिस्प्ले बोर्ड पर राधिका टंडन
  2213. 1:41:05बर्थडे सेलिब्रेशन हॉल नंबर पांच लिखा नजर
  2214. 1:41:08आ रहा था। इसी डिस्प्ले बोर्ड पर शौर्य की
  2215. 1:41:11नजर ठहर गई। उसे यह नाम जाना पहचाना लगा।
  2216. 1:41:15उसे ध्यान आया कि यह नाम शिप्रा की बुआ की
  2217. 1:41:18बेटी का है। जिससे एक-द दिन पहले ही शौर्य
  2218. 1:41:21उसके ऑफिस की पार्किंग में मिला था। यानी
  2219. 1:41:23आज उसका बर्थडे था और सेलिब्रेशन राजकमल
  2220. 1:41:26होटल में ही था। शौर्य को लगा कि शायद
  2221. 1:41:28शिप्रा भी आज उसके बर्थडे सेलिब्रेशन में
  2222. 1:41:31यहां आएगी। शौर्य सेलिब्रेशन में इनवाइटेड
  2223. 1:41:34नहीं था। शायद अभी उसने सक्सेना फैमिली
  2224. 1:41:36में वह हैसियत हासिल नहीं की थी कि उसे
  2225. 1:41:39किसी फैमिली फंक्शन में इनवाइट किया जा
  2226. 1:41:41सके। शौर्य को कई जाने पहचाने चेहरे होटल
  2227. 1:41:44में आते दिखाई दिए। लेकिन जिस चेहरे को वो
  2228. 1:41:47देखना चाह रहा था वो अभी तक नजर नहीं आया
  2229. 1:41:49था। शौर्य ध्यान से हर आने जाने वाले को
  2230. 1:41:53देखने लगा। तभी शौर्य को वो चेहरा दिखाई
  2231. 1:41:55दिया जिसके लिए वह दरवाजे के सामने अपनी
  2232. 1:41:58नजरें गड़ाए हुए था। उसने देखा शिप्रा
  2233. 1:42:01अपने पिता, मां और भाई के साथ होटल के
  2234. 1:42:04अंदर प्रवेश कर रही थी। इस समय शिप्रा
  2235. 1:42:07पिंक कलर के सूट में किसी अप्सरा जैसी लग
  2236. 1:42:09रही थी। शौर्य की निगाह तो उसके चेहरे पर
  2237. 1:42:11अटक ही गई थी जब तक कि वो होटल के अंदर
  2238. 1:42:14प्रवेश नहीं कर गई। इसके बाद शौर्य ने
  2239. 1:42:16वहां से अपनी नजर हटाई और अपने साथ बैठे
  2240. 1:42:19लोगों की तरफ ध्यान दिया। वो मन ही मन
  2241. 1:42:21बुदबुदाया।
  2242. 1:42:23हॉल नंबर पांच। वो वहां जा तो नहीं सकता
  2243. 1:42:26था पर वह चाहता था कि वहां जो भी हो रहा
  2244. 1:42:28है उसे देख सके। [संगीत]
  2245. 1:42:30अब तक सभी अपना खाना खा चुके थे। शौर्य ने
  2246. 1:42:33एक बार सबकी तरफ देखा और पूछा किसी को कुछ
  2247. 1:42:36और भी चाहिए? सबने मना कर दिया। शौर्य भी
  2248. 1:42:40यही तो चाहता था। उसने वेटर से बोलकर बिल
  2249. 1:42:42मंगवाया। क्योंकि यहां स्टाफ के लोग उसके
  2250. 1:42:45बारे में नहीं जानते थे। इसीलिए शौर्य
  2251. 1:42:47उन्हें यह नहीं बता सकता था कि वह इस होटल
  2252. 1:42:49का मालिक है। इसीलिए उसने बिल पे करना ही
  2253. 1:42:52उचित समझा। शौर्य ने बिल पे करने के लिए
  2254. 1:42:55अपना कार्ड वेटर की तरफ बढ़ाया तो वेटर ने
  2255. 1:42:57कहा नो सर मैम ने कहा था कि आपको बिल पे
  2256. 1:43:01करने की कोई जरूरत नहीं है। शौर्य को भी
  2257. 1:43:04समझ नहीं आया कि मेनका को कैसे पता चला कि
  2258. 1:43:06वो यहां लंच कर रहा है। फिर उसने सोचा हो
  2259. 1:43:09सकता है उसने सीसीटीवी पर उसे लंच करते
  2260. 1:43:12देख लिया हो। इसीलिए उसने खासतौर पर वेटर
  2261. 1:43:14को यह इंस्ट्रक्शन दिया होगा। शौर्य ने
  2262. 1:43:17फिर वेटर को कार्ड देने की कोशिश नहीं की।
  2263. 1:43:19वहीं मोहित और प्रिया हैरान थे कि होटल
  2264. 1:43:22वालों ने शौर्य से बिल पे करने के लिए मना
  2265. 1:43:24क्यों किया। उन्होंने अपना बहुत दिमाग
  2266. 1:43:27लगाया पर उन्हें कुछ समझ नहीं आया। खैर
  2267. 1:43:30शौर्य अपनी सीट से उठते हुए बोला तो फिर
  2268. 1:43:33ठीक है मैं चलता हूं अभी। मुझे कुछ काम आ
  2269. 1:43:36गया है। मैं फिर मिलता हूं तुम सबसे। ठीक
  2270. 1:43:39है सर हम भी निकलते हैं। मोहित भी प्रिया
  2271. 1:43:42के साथ खड़े होते हुए बोला। इसके बाद
  2272. 1:43:44शौर्य विक्रम के साथ वहां से निकल गया।
  2273. 1:43:47चलते हुए विक्रम ने पूछा क्या हुआ? अचानक
  2274. 1:43:51ऐसा क्या काम आ गया जो आप जल्दीबाजी में
  2275. 1:43:53यहां से निकल लिए? इस पर शौर्य मुस्कुराते
  2276. 1:43:56हुए बोला, अभी-अभी मुझे पता चला है कि
  2277. 1:43:59राधिका टंडन का बर्थडे सेलिब्रेशन इसी
  2278. 1:44:01होटल में हो रहा है और सक्सेना फैमिली के
  2279. 1:44:04लगभग सभी लोग यहां मौजूद हैं। मैं वहां
  2280. 1:44:07इनवाइटेड तो नहीं हूं पर मैं उस पार्टी का
  2281. 1:44:09नजारा देखना चाहता हूं। इसीलिए यहां से
  2282. 1:44:11निकल गया। चलो मैनेजर के रूम से सीसीटीवी
  2283. 1:44:15पर लाइव कवरेज देखते हैं। मुझे समझ नहीं आ
  2284. 1:44:18रहा है कि आप क्यों यह चूहे बिल्ली का खेल
  2285. 1:44:20खेल रहे हैं। अरे आप अपने बारे में उन्हें
  2286. 1:44:23बताइए। आपके बारे में जानते ही सभी आपके
  2287. 1:44:26आगे पीछे घूमने लगेंगे। विक्रम बेपरवाही
  2288. 1:44:29से बोला तो शौर्य मुस्कुराया और बोला
  2289. 1:44:32मैंने तुम्हें पहले भी कहा था कि यह बताना
  2290. 1:44:35आसान नहीं है जितना तुम सोच रहे हो। मुझे
  2291. 1:44:38शिप्रा को अपने पीछे नहीं घुमाना है बल्कि
  2292. 1:44:40उसके दिल में जगह बनानी है। मैं [संगीत]
  2293. 1:44:42नहीं चाहता कि वो मेरी दौलत और रुतबा
  2294. 1:44:44देखकर अपना डिसीजन ले। मुझे सुकून तब होगा
  2295. 1:44:48अगर वो मेरी सच्चाई जाने बिना मुझे
  2296. 1:44:50अपनाएगी। यह सुनकर विक्रम अपना सिर झटकते
  2297. 1:44:53हुए बोला। आपकी बातें मुझे कभी समझ नहीं
  2298. 1:44:56आएंगी। तो फिर तुम कोशिश ही क्यों करते
  2299. 1:44:58हो? कहते हुए शौर्य मंदमंद मुस्कुराने
  2300. 1:45:01लगा। इस पर विक्रम ने लंबी सांस छोड़ते
  2301. 1:45:04हुए कहा। ठीक है। फिर मैं बस देखता हूं कि
  2302. 1:45:07कब तक आप ऐसे ही अपने आप को तड़पाते रहते
  2303. 1:45:10हैं। शौर्य और विक्रम मेनका के कमरे तक
  2304. 1:45:12पहुंचे। उस समय मेनका वहां नहीं थी।
  2305. 1:45:14दरवाजे पर गार्ड मौजूद था लेकिन शौर्य को
  2306. 1:45:17पहचानता था। इसलिए बिना कुछ कहे अंदर जाने
  2307. 1:45:20दिया। [संगीत]
  2308. 1:45:20शौर्य ने एक चेयर खींच कर बैठते हुए रिमोट
  2309. 1:45:23उठाया और सीसीटीवी ऑन कर दिया। चैनल बदलते
  2310. 1:45:26बदलते अचानक स्क्रीन पर हॉल नंबर पांच का
  2311. 1:45:29लाइव नजारा उभर आया। विक्रम ने तिरछी नजर
  2312. 1:45:32से उसे देखा जैसे समझ गया हो कि शौर्य
  2313. 1:45:34क्या देखना चाहता है। उधर हॉल नंबर पांच
  2314. 1:45:37में राधिका नैना राय के साथ स्टेज पर खड़ी
  2315. 1:45:40थी। [संगीत] पूरा हॉल बेहद खूबसूरती से
  2316. 1:45:42सजाया गया था। रंग बिरंगी लाइट्स, फूलों
  2317. 1:45:45की सजावट और चारों तरफ रौनक थी। सब कुछ
  2318. 1:45:48किसी बड़े आयोजन की गवाही दे रहा था।
  2319. 1:45:50गेस्ट धीरे-धीरे आ रहे थे और वेटर रिंग्स
  2320. 1:45:53और स्टार्टर्स सर्व करने में लगे थे। वाइट
  2321. 1:45:56गाउन में राधिका सचमुच किसी परी जैसी लग
  2322. 1:45:58रही थी। तभी बलराज सक्सेना उसके पास आए और
  2323. 1:46:01अपने हाथ में पकड़ा गिफ्ट उसे थमा दिया।
  2324. 1:46:04राधिका ने झुककर उनके पैर छुए तो बलराज
  2325. 1:46:06सक्सेना ने उसके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद
  2326. 1:46:09दिया। राधिका ने उत्साहित होकर गिफ्ट को
  2327. 1:46:12देखते हुए पूछा।
  2328. 1:46:14इसमें क्या है नाना जी? क्या मैं इसे अभी
  2329. 1:46:16खोल कर देख लूं? बलराज सक्सेना मुस्कुराए।
  2330. 1:46:19अरे इतनी [संगीत] भी क्या जल्दी है? यह
  2331. 1:46:22तुम्हारे लिए ही है। कहीं भागा तो नहीं जा
  2332. 1:46:25रहा। अभी तो तुम्हें और भी बहुत सारे
  2333. 1:46:28गिफ्ट मिलने हैं। पहले उन पर ध्यान दो।
  2334. 1:46:31धीरे-धीरे गेस्ट की संख्या बढ़ने लगी और
  2335. 1:46:34राधिका के सामने गिफ्ट्स का ढेर लग गया।
  2336. 1:46:36इसी बीच राधिका की नजर दरवाजे की तरफ गई।
  2337. 1:46:40वहां मुख्तार भाई और रजत अंदर आते दिखाई
  2338. 1:46:42दिए। रजत के हाथ में भी एक गिफ्ट था। वो
  2339. 1:46:46मुख्तार भाई के साथ सीधे स्टेज की ओर बढ़ा
  2340. 1:46:48और राधिका के पास पहुंचकर मुस्कुराते हुए
  2341. 1:46:51बोला। हैप्पी बर्थडे डियर राधिका। मैं दुआ
  2342. 1:46:54करता हूं कि आपकी जिंदगी हमेशा खुशियों से
  2343. 1:46:57भरी रहे। राधिका ने रजत की ओर देखा और
  2344. 1:47:00हल्की सी मुस्कान के साथ उसके हाथ से
  2345. 1:47:02गिफ्ट लिया। उसने प्यार भरी आवाज से कहा
  2346. 1:47:05थैंक यू। रजत ने भी मुस्कुराने की कोशिश
  2347. 1:47:08की लेकिन उसकी नजरें राधिका पर टिक नहीं
  2348. 1:47:10पाई। जैसे ही उसने सिर उठाया, उसकी आंखें
  2349. 1:47:13पूरे हॉल में किसी को खोजने लगी। उसकी
  2350. 1:47:15बेचैनी साफ झलक रही थी। खैर, उसे ज्यादा
  2351. 1:47:19इंतजार नहीं करना पड़ा। कुछ ही पलों में
  2352. 1:47:21हॉल के मुख्य दरवाजे पर हलचल हुई। शिप्रा
  2353. 1:47:24अपने पूरे परिवार के साथ अंदर प्रवेश कर
  2354. 1:47:26रही थी। जैसे ही शिप्रा की झलक रजत की
  2355. 1:47:29आंखों में पड़ी, उसकी तलाश खत्म हो गई।
  2356. 1:47:32उसकी निगाहें वहीं ठहर गई जैसे वक्त कुछ
  2357. 1:47:35पल के लिए थम गया हो। दूसरी ओर शौर्य अपने
  2358. 1:47:39कमरे में बैठा सीसीटीवी स्क्रीन पर पार्टी
  2359. 1:47:41का हर नजारा देख रहा था। जैसे ही उसकी नजर
  2360. 1:47:44हॉल में मौजूद चेहरों पर गई, वो अचानक
  2361. 1:47:47चौकन्ना हो गया। मुख्तार और रजत उसकी
  2362. 1:47:50आंखें सिकुड़ गई। माथे पर लकीरें उभर आई।
  2363. 1:47:53उसे समझ नहीं आया कि राधिका के बर्थडे
  2364. 1:47:56पार्टी में इन दोनों का क्या काम।
  2365. 1:47:59क्या सक्सेना फैमिली मुख्तार भाई के आगे
  2366. 1:48:01झुक गई है? यह ख्याल उसके मन में बिजली की
  2367. 1:48:04तरह कौंधा। वो स्क्रीन पर नजरें गड़ाए
  2368. 1:48:07रहा। जैसे किसी बड़े राज का इंतजार कर रहा
  2369. 1:48:10हो। तभी हॉल के दरवाजे से शिप्रा का
  2370. 1:48:12प्रवेश हुआ। शौर्य की नजर तुरंत रजत पर गई
  2371. 1:48:15और उसने साफ देखा कि रजत की निगाहें
  2372. 1:48:18शिप्रा पर आकर ठहर गई थी। हॉल में प्रवेश
  2373. 1:48:21करते ही शिप्रा की नजर जैसे ही रजत पर
  2374. 1:48:23पड़ी उसके चेहरे पर सख्ती तैर गई। जैसे
  2375. 1:48:26किसी पुराने जख्म को कोरेदा गया हो। लेकिन
  2376. 1:48:29अगले ही क्षण उसने अपनी भावनाओं को अपने
  2377. 1:48:31चेहरे से मिटा दिया। सदी हुई चाल से वो
  2378. 1:48:34रजत को पूरी तरह नजरअंदाज करती हुई अपने
  2379. 1:48:36पापा के साथ राधिका की ओर बढ़ गई। राधिका
  2380. 1:48:40के सामने रुक कर उसने हल्की मुस्कान के
  2381. 1:48:42साथ कहा।
  2382. 1:48:44मेनी हैप्पी रिटर्न्स ऑफ द डे। स्वीट
  2383. 1:48:46हार्ट। हैप्पी बर्थडे।
  2384. 1:48:48राधिका मुस्कुराई। थैंक यू। लेकिन उसकी
  2385. 1:48:51आंखें किसी और को तलाश रही थी। शिप्रा ने
  2386. 1:48:54उसकी आंखें पढ़ ली। उसने पूछा क्या हुआ?
  2387. 1:48:57किसे ढूंढ रही हो? राधिका के होठों पर एक
  2388. 1:49:00चालाक मुस्कान उभरी। वो जानबूझकर आवाज
  2389. 1:49:03ऊंची कर बोली। अरे अपने जीजा जी को। आखिर
  2390. 1:49:07वो कहां है? वो यहीं नहीं रुकी। आवाज में
  2391. 1:49:10नौटंकी लाते हुए बोली। इतनी तारीफ सुनी है
  2392. 1:49:13उनकी। सोचा था आज मिल ही लूंगी लेकिन वो
  2393. 1:49:16तो नजर ही नहीं आ रहे। आसपास खड़े लोग
  2394. 1:49:19सारी बातें साफ-साफ सुन रहे थे। माहौल में
  2395. 1:49:22हल्की फुसफुसाहट घुलने लगी। तभी नैना बुआ
  2396. 1:49:25आगे आई और होठों पर व्यंग भरी मुस्कान से
  2397. 1:49:27बोली। हां शिप्रा तुम्हारे पतिदेव कहां
  2398. 1:49:31है? उन्हें नहीं लाई या फिर वो यहां इतनी
  2399. 1:49:34बड़ी पार्टी में आने से कतरा रहे थे। सबकी
  2400. 1:49:37नजरें अब शिप्रा पर टिक गई। सबको तमाशे का
  2401. 1:49:39इंतजार था। लेकिन शिप्रा वो जरा भी नहीं
  2402. 1:49:42डगमगाई। उसने सदी और साफ आवाज में कहा
  2403. 1:49:46किसी को बुलाना हो तो पहले निमंत्रण दिया
  2404. 1:49:49जाता है ना नैना बुआ। फिर वो राधिका की ओर
  2405. 1:49:51देखते हुए बोली बिन बुलाए सिर्फ बेगैरत
  2406. 1:49:55लोग ही आते हैं। अगली बार अगर सच में उनसे
  2407. 1:49:58मिलना हो तो इज्जत से [संगीत] बुलाना।
  2408. 1:50:00नैना बुआ ने भौए चढ़ाते हुए शिप्रा के
  2409. 1:50:02करीब आकर कहा। तुम कैसी बातें कर रही हो
  2410. 1:50:06शिप्रा? अपने ही परिवार में क्या किसी को
  2411. 1:50:08अलग-अलग इनवाइट किया जाता है? जब वह इस घर
  2412. 1:50:11में रह रहा है तो कायदे से फैमिली फंक्शन
  2413. 1:50:13में अपने आप ही उसे आना चाहिए था। शिप्रा
  2414. 1:50:16ने नैना बुआ की तरफ देखा और फिर होठों पर
  2415. 1:50:19हल्की सी कड़वी मुस्कान आई। कायदे की बात
  2416. 1:50:22कर रही हो ना बुआ? एक कदम आगे बढ़ते हुए
  2417. 1:50:25वो बिना आवाज ऊंचे किए बोली। कायदे से तो
  2418. 1:50:28मुझे भी नहीं आना चाहिए था। लेकिन पापा
  2419. 1:50:31मुझे जबरदस्ती ले आए। और जहां तक श्रवण की
  2420. 1:50:34बात है उसे कोई सपना तो आया नहीं था कि आज
  2421. 1:50:36राधिका का बर्थडे है और उसे यहां हाजिरी
  2422. 1:50:38लगानी चाहिए। उसके शब्दों में रूखापन था
  2423. 1:50:42लेकिन उसका मकसद किसी का अपमान करना नहीं
  2424. 1:50:44था। तभी राजदीप राय आगे आए। उनका चेहरा
  2425. 1:50:47सख्त था।
  2426. 1:50:49हां नैना अगर तुम चाहती थी कि श्रवण भी
  2427. 1:50:52यहां आए तो सीधे बोलना चाहिए था। उन्होंने
  2428. 1:50:56हल्की सी नजर चारों तरफ घुमाई।
  2429. 1:50:58अधूरी बातों से सिर्फ गलतफहमियां पैदा
  2430. 1:51:01होती हैं। रिश्ते नहीं। अब माहौल थोड़ा
  2431. 1:51:04बदलने लगा था। राधिका ने तुरंत बीच में
  2432. 1:51:06आकर बात संभालने की कोशिश की। क्या मम्मी
  2433. 1:51:10आप एक काम भी ठीक से नहीं कर सकती? गेस्ट
  2434. 1:51:12लिस्ट आपकी जिम्मेदारी थी और आपने हमारे
  2435. 1:51:15प्यारे जीजा जी को ही इनवाइट नहीं किया।
  2436. 1:51:18उसने प्यारे शब्द पर हल्का जोर दिया जैसे
  2437. 1:51:20जानबूझकर चुभाना चाहती हो। फिर वो पलट कर
  2438. 1:51:23शिप्रा की तरफ मुड़ी और जबरदस्ती चेहरे पर
  2439. 1:51:26मीठी मुस्कान लाती हुई बोली। कोई बात नहीं
  2440. 1:51:29शिप्रा तुम मुझे उनका नंबर दे दो। मैं भी
  2441. 1:51:31कॉल करके उन्हें इनवाइट कर लेती हूं।
  2442. 1:51:34शिप्रा ने उसकी आंखों में सीधा देखा।
  2443. 1:51:36राधिका की मुस्कान देखकर कोई भी कह सकता
  2444. 1:51:38था कि यह मासूमियत नहीं एक चाल [संगीत]
  2445. 1:51:41थी। शिप्रा ने धीरे से सिर हिलाकर कहा
  2446. 1:51:44रहने दो राधिका अब इसकी कोई जरूरत नहीं
  2447. 1:51:47है। राधिका कुछ बोलती उससे पहले ही शिप्रा
  2448. 1:51:50ने बात पूरी कर दी। वैसे भी पता नहीं
  2449. 1:51:53श्रवण अभी कहां होगा। किसी काम से बाहर
  2450. 1:51:56गया था और अभी तक लौटा नहीं। नहीं नहीं
  2451. 1:51:59ऐसा कैसे हो सकता है? राधिका ने जिद भरे
  2452. 1:52:02स्वर में कहा जब परिवार के सारे मेंबर
  2453. 1:52:04यहां मौजूद हैं तो हमारे जीजाजी कैसे नहीं
  2454. 1:52:07होंगे? उन्हें तो आना ही पड़ेगा। वो
  2455. 1:52:09शिप्रा का हाथ पकड़ कर बोली तुम बस मुझे
  2456. 1:52:12उनका नंबर दे दो। मैं खुद उन्हें बुला
  2457. 1:52:14लूंगी। राधिका के चेहरे पर भले ही मीठी
  2458. 1:52:17मुस्कान थी लेकिन उसके मन में कुछ और ही
  2459. 1:52:19चल रहा था। वो पूरी तरह आश्वस्त थी कि एक
  2460. 1:52:22बार बस शिप्रा का पति यहां आ जाए। फिर
  2461. 1:52:25देखती हूं उसका सारा घमंड कैसे चूर होता
  2462. 1:52:27है। जो एक भिखारी था उसकी हैसियत भला
  2463. 1:52:30कितनी बदल गई होगी। उसके मन में एक
  2464. 1:52:33तिरस्कार भरी हंसी उठी। सिर्फ कपड़े बदल
  2465. 1:52:36लेने से या थोड़ा बहुत साज सज्जा कर लेने
  2466. 1:52:38से कोई अपनी औकात नहीं बदल सकता। आज उसे
  2467. 1:52:42शिप्रा को सबके सामने नीचा दिखाने का
  2468. 1:52:44अच्छा मौका मिला था। राधिका ऐसे मौके को
  2469. 1:52:47यूं ही जाने देने वालों में से नहीं थी।
  2470. 1:52:49तभी राजदीप राय बीच में आ गए और समझाने के
  2471. 1:52:52ढंग से बोले रहने दो राधिका क्यों जिद कर
  2472. 1:52:56रही हो उन्होंने हल्की सी नजर शिप्रा पर
  2473. 1:52:59डाली और अपनी बात पूरी की पता नहीं अभी
  2474. 1:53:02कहां होगा श्रवण बाद में मिल लेना उससे
  2475. 1:53:06लेकिन राधिका अब रुकने वाली नहीं थी वो
  2476. 1:53:08सीधा बलराज सक्सेना के पास पहुंची और
  2477. 1:53:11चेहरे पर बनावटी मासूमियत लेकर बोली नाना
  2478. 1:53:14जी आप ही शिप्रा को बोलिए ना कि वो मुझे
  2479. 1:53:16श्रवण जीजू का नंबर दे दें।
  2480. 1:53:19उसने हल्का सा मुंह बनाया।
  2481. 1:53:22मुझे अच्छा नहीं लगेगा। मेरी बर्थडे
  2482. 1:53:24पार्टी में मेरे जीजाजी ना हो। बलराज
  2483. 1:53:27सक्सेना ने एक नजर राधिका पर डाली। फिर
  2484. 1:53:29शिप्रा की ओर मुड़कर बोले शिप्रा बेटा दे
  2485. 1:53:33दो नंबर। बाकी ये खुद बात कर लेगी। आना
  2486. 1:53:37होगा तो श्रवण आ जाएगा। अब शिप्रा के पास
  2487. 1:53:40मना करने का कोई सीधा रास्ता नहीं बचा था।
  2488. 1:53:43बिना कुछ कहे उसने अपना मोबाइल निकाला और
  2489. 1:53:46श्रवण का नंबर राधिका को नोट करा दिया।
  2490. 1:53:49राधिका के होठों पर जीत की हल्की मुस्कान
  2491. 1:53:51आ गई। उसने तुरंत नंबर डायल किया। वहीं
  2492. 1:53:54दूसरी तरफ श्रवण सीसीटीवी स्क्रीन पर पूरे
  2493. 1:53:57हॉल का नजारा देख रहा था। लोगों की हलचल
  2494. 1:54:00दिख रही थी। चेहरे दिख रहे थे। लेकिन वो
  2495. 1:54:03आवाजें नहीं सुन सकता था। वो ध्यान से देख
  2496. 1:54:06रहा था कि शिप्रा कुछ कह रही थी और राधिका
  2497. 1:54:08अपने मोबाइल में कुछ नोट कर रही थी। उसकी
  2498. 1:54:11भए सिकुड़ गई।
  2499. 1:54:15क्या चल क्या रहा है वहां?
  2500. 1:54:18वो समझने की कोशिश ही कर रहा था कि तभी
  2501. 1:54:20उसका मोबाइल बज उठा। उसने स्क्रीन पर नजर
  2502. 1:54:23डाली। अननोन नंबर। लेकिन अगले ही पल उसकी
  2503. 1:54:27नजर सीसीटीवी पर गई। राधिका फोन कान से
  2504. 1:54:30लगाए खड़ी थी। एक हल्की सी मुस्कान उसके
  2505. 1:54:32होठों पर आ गई। ओ तो खेल यहां तक पहुंच
  2506. 1:54:36गया। उसने कॉल रिसीव किया। हेलो
  2507. 1:54:41दूसरी तरफ से एक मीठी लेकिन बनावटी आवाज
  2508. 1:54:44आई।
  2509. 1:54:45हेलो
  2510. 1:54:46श्रवण शांत और सतर्क आवाज में बोला जी कौन
  2511. 1:54:50बोल रही हैं?
  2512. 1:54:51हेलो जीजा जी।
  2513. 1:54:53राधिका आवाज में मिठास घोल कर बोली।
  2514. 1:54:55मैं आपकी साली राधिका टंडन बोल रही हूं।
  2515. 1:54:59बस इतना सुनते ही श्रवण का शक यकीन में
  2516. 1:55:01बदल गया। अब उसे पूरी कहानी समझ आ चुकी
  2517. 1:55:03थी। वो कुर्सी पर थोड़ा पीछे टिक गया और
  2518. 1:55:06आवाज में हल्का सा उत्साह लाते हुए बोला
  2519. 1:55:09ओह राधिका जी कहिए राधिका जी आज अचानक
  2520. 1:55:12हमें कैसे याद कर लिया
  2521. 1:55:14जीजा जी पहले तो आप यह बताइए कि अभी आप
  2522. 1:55:17हैं कहां उसके बाद ही मैं आपको अपने फोन
  2523. 1:55:19करने की वजह बताऊंगी
  2524. 1:55:21राधिका ने इसरार करते हुए कहा शौर्य एक पल
  2525. 1:55:24को चुप रहा उसकी नजर अब भी सीसीटीवी
  2526. 1:55:27स्क्रीन पर टिकी थी जहां राधिका फोन पकड़े
  2527. 1:55:29खड़ी थी उसने थोड़ा सोचा फिर नॉर्मली बोला
  2528. 1:55:33अभी अभी मैं गुलमोहर मार्केट में हूं। कुछ
  2529. 1:55:36काम से आया था यहां। आप बताइए क्या काम
  2530. 1:55:38है? शौर्य ने जानबूझकर होटल का नाम नहीं
  2531. 1:55:41लिया। लेकिन गुलमोहर मार्केट सुनते ही
  2532. 1:55:43राधिका के चेहरे पर खुशी चमक उठी। शिकार
  2533. 1:55:47खुद जाल के पास है। उसने तुरंत उत्साहित
  2534. 1:55:49होकर कहा।
  2535. 1:55:50अरे वाह, यह तो बहुत अच्छी बात है जीजा
  2536. 1:55:52जी। तो ध्यान से सुनिए। आज मेरा बर्थडे है
  2537. 1:55:55और मैंने अपनी पार्टी होटल राजकमल के हॉल
  2538. 1:55:58नंबर पांच में रखी है।
  2539. 1:56:00थोड़ा रुक कर उसने बात को मोड़ा।
  2540. 1:56:02शायद किसी गलतफहमी की वजह से मम्मी आपको
  2541. 1:56:05पहले इनवाइट नहीं कर पाई।
  2542. 1:56:07फिर सीधा दबाव डालते हुए बोली,
  2543. 1:56:09लेकिन अब आपको हर हाल में आना है। सब कुछ
  2544. 1:56:12छोड़िए और प्लीज अभी होटल राजकमल आ जाइए।
  2545. 1:56:15हम सब आपका इंतजार कर रहे हैं।
  2546. 1:56:17शौर्य ने पूरी बात सुनी। उसके होठों पर
  2547. 1:56:20हल्की मुस्कान आई। अच्छा तो यह खेल है।
  2548. 1:56:24लेकिन वो इतनी आसानी से मोहरा बनने वाला
  2549. 1:56:27नहीं था। उसने सोचकर बहुत सधे हुए स्वर
  2550. 1:56:30में कहा। माफ कीजिए मिस राधिका मुझे इस
  2551. 1:56:32बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं है और
  2552. 1:56:35ना ही शिप्रा ने मुझे इसके बारे में कुछ
  2553. 1:56:37बताया है तो मैं बिना शिप्रा की जानकारी
  2554. 1:56:40के वहां नहीं आ सकता। जब शौर्य ने कहा था
  2555. 1:56:44कि वह गुलमोहर मार्केट में है तो राधिका
  2556. 1:56:46ने तुरंत फोन का स्पीकर ऑन कर दिया था।
  2557. 1:56:48हॉल में मौजूद हर व्यक्ति उसकी आवाज
  2558. 1:56:51साफ-साफ सुन रहा था। शिप्रा ने जब यह
  2559. 1:56:53सुना, तो उसे राहत महसूस हुई। कम से कम वह
  2560. 1:56:56तुरंत झुक नहीं गया। लेकिन राधिका के लिए
  2561. 1:56:59यह सीधा झटका था। उसने सोचा था कि होटल
  2562. 1:57:02राजकमल का नाम सुनते ही वो भागा चला आएगा।
  2563. 1:57:05पर यहां तो बात उल्टी पड़ गई थी। एक पल को
  2564. 1:57:08उसका चेहरा सख्त हुआ। पर अगले ही पल उसने
  2565. 1:57:10खुद को संभाल लिया और फिर खिसियानी हंसी
  2566. 1:57:13के साथ बोली।
  2567. 1:57:14अरे जीजा जी आप भी कैसी बातें कर रहे हैं?
  2568. 1:57:17क्या मैं आपसे झूठ बोलूंगी?
  2569. 1:57:20फिर उसने तुरप का पत्ता फेंका।
  2570. 1:57:22शिप्रा भी यहीं है और आपकी आवाज सुन रही
  2571. 1:57:25है।
  2572. 1:57:26उसने तुरंत फोन शिप्रा की ओर बढ़ा दिया।
  2573. 1:57:28लो शिप्रा तुम ही अपने पतिदेव से कह दो कि
  2574. 1:57:31वो यहां आ जाए।
  2575. 1:57:33सबकी नजर शिप्रा पर टिक गई। अब उसके पास
  2576. 1:57:36मना करने की कोई गुंजाइश नहीं थी। कम से
  2577. 1:57:39कम इस माहौल में तो बिल्कुल नहीं। उसने
  2578. 1:57:41फोन लिया कुछ पल चुप रही। फिर धीमे से
  2579. 1:57:44बोली
  2580. 1:57:46अगर तुम पास में ही हो तो आ जाओ।
  2581. 1:57:49थोड़ा रुक कर वो बोली
  2582. 1:57:51पूरी फैमिली यहीं है।
  2583. 1:57:53शौर्य समझ रहा था कि उसकी आवाज में ना
  2584. 1:57:55उत्साह था ना आग्रह। एक मजबूरी जरूर थी
  2585. 1:57:59लेकिन उसके चेहरे पर एक अलग सी मुस्कान
  2586. 1:58:01उभरी। अब खेल दिलचस्प हो चुका था। उसने
  2587. 1:58:04शांत स्वर में कहा।
  2588. 1:58:06[संगीत]
  2589. 1:58:06ठीक है। मैं आता हूं थोड़ी देर में। और
  2590. 1:58:09बिना कुछ और बोले उसने कॉल काट दिया। हॉल
  2591. 1:58:12में एक अजीब सी हलचल फैल गई। राधिका के
  2592. 1:58:15चेहरे पर फिर से वही आत्मविश्वास लौट आया।
  2593. 1:58:19अब आएगा मजा। उसने मन ही मन सोचा। राय
  2594. 1:58:23परिवार की बेटी शिप्रा की शादी एक भिखारी
  2595. 1:58:25के साथ होने की वायरल स्टोरी ने जितना
  2596. 1:58:28लोगों को हैरान किया था, उससे भी चौगुनी
  2597. 1:58:30हैरानियत अब लोगों को शौर्य के बदले अवतार
  2598. 1:58:33को देखकर हो रही थी। शौर्य को देखते ही
  2599. 1:58:36लोगों की आंखें जिस गति से फैलकर बड़ी हो
  2600. 1:58:38रही थी, उन्हें वापस से कुड़ने में वक्त
  2601. 1:58:40लग रहा था। आज शौर्य की पर्सनालिटी में और
  2602. 1:58:43भी चार चांद लगने वाले हैं। कई दिलों की
  2603. 1:58:46जलन और धड़कनें बढ़ने वाली हैं क्योंकि
  2604. 1:58:48शौर्य ने अब अपने पुराने सस्ते कपड़े भी
  2605. 1:58:51बदल लिए हैं। कुछ ही देर पहले वो मेनका के
  2606. 1:58:54साथ शॉपिंग करके लौटा था और उन्हीं कपड़ों
  2607. 1:58:56में से एक उसने पहन भी लिया था। उसका
  2608. 1:58:59व्यक्तित्व अब और भी डैशिंग और शाही लग
  2609. 1:59:01रहा है। आज जहां उसे जाना है वहां मामला
  2610. 1:59:04सिर्फ जाने का नहीं है। कैसे और कब
  2611. 1:59:06[संगीत] जाना है यह ज्यादा अहम है। उसने
  2612. 1:59:09घड़ी पर नजर डाली और सोचा
  2613. 1:59:12इतनी जल्दी पहुंचने पर तो खेल बिगड़
  2614. 1:59:14जाएगा। वो सोच ही रहा था कि क्या उसे कुछ
  2615. 1:59:18और तैयारी करनी चाहिए। तभी कमरे का दरवाजा
  2616. 1:59:20खुला। मेनका अंदर आई और शौर्य को वहां
  2617. 1:59:23देखकर ठिठक गई। तुम यहां क्या कर रहे हो?
  2618. 1:59:27उसकी आवाज में हैरानी थी। [संगीत] लेकिन
  2619. 1:59:29शौर्य ने सहज नजरों से उसकी ओर देखा और
  2620. 1:59:32कहा मैं आया तो तुमसे ही मिलने था।
  2621. 1:59:36[संगीत]
  2622. 1:59:37और फिर हल्का सा सिर टीवी स्क्रीन की तरफ
  2623. 1:59:39घुमाया। लेकिन तुम थी नहीं तो सोचा हॉल
  2624. 1:59:42नंबर पांच में क्या चल रहा है वो ही देख
  2625. 1:59:44लूं। मेनका की नजर दीवार पर लगे स्क्रीन
  2626. 1:59:47पर गई। स्क्रीन पर चल रही बर्थडे पार्टी
  2627. 1:59:50चमकती रोशनी के बीच हंसते मुस्कुराते
  2628. 1:59:52चेहरे। लेकिन जैसे ही उसकी नजर कुछ चेहरों
  2629. 1:59:55पर टिकने लगी, उसकी आंखें हल्की सी सिकुड़
  2630. 1:59:58गई। उसे शौर्य की वह बात याद आ गई। मेरी
  2631. 2:00:01शादी जबरदस्ती शिप्रा राय से कर दी गई थी।
  2632. 2:00:04मेनका को मालूम था आज पूरी राय फैमिली इसी
  2633. 2:00:07होटल में मौजूद है। मेनका के मन की
  2634. 2:00:09उथल-पुथल बढ़ चुकी थी। उसकी नजर स्क्रीन
  2635. 2:00:12पर दौड़ने लगी। वो हर एक लड़की के चेहरे
  2636. 2:00:15पर ठहरती, तुलना करती, [संगीत] शायद वो
  2637. 2:00:17किसी खास चेहरे को पहचानने की कोशिश कर
  2638. 2:00:20रही थी।
  2639. 2:00:22इनमें से शिप्रा कौन है? वहां मौजूद
  2640. 2:00:26खूबसूरत चेहरों की भीड़ में उसे पहचान
  2641. 2:00:28पाना आसान नहीं था। इसीलिए उसने शौर्य से
  2642. 2:00:30पूछ लिया। लेकिन तभी उसके दिमाग में कुछ
  2643. 2:00:33क्लिक हुआ। वो धीरे से मुड़ी और शौर्य की
  2644. 2:00:36आंखों में देखते हुए बोली, एक बात बताओ
  2645. 2:00:39तुम खुद पार्टी में क्यों नहीं जा रहे?
  2646. 2:00:41क्या तुम किसी से बच रहे हो? शौर्य ने
  2647. 2:00:45फीकी सी मुस्कान के साथ कंधे उचकाए और
  2648. 2:00:47हल्के से व्यंग करते हुए कहा, राय फैमिली
  2649. 2:00:50की नजर में मेरी अभी वह हैसियत नहीं है कि
  2650. 2:00:53मुझे पहले से इनवाइट किया जाए। हां,
  2651. 2:00:55अभी-अभी मिस राधिका का फोन आया था। बड़ी
  2652. 2:00:58मेहरबानी से बुलाया है और मुझे पूरा यकीन
  2653. 2:01:00है इसके पीछे भी उसकी कोई खास मंशा ही
  2654. 2:01:03होगी। मेनका ने गौर से उसे देखते हुए कहा,
  2655. 2:01:07तो क्या करोगे तुम? जाओगे? शौर्य ने गहरी
  2656. 2:01:10सांस ली जैसे खुद को तैयार करते हुए बोला
  2657. 2:01:13[संगीत] जाना तो पड़ेगा फिर हल्का सा
  2658. 2:01:15मुस्कुराया आखिर देखना तो पड़ेगा ना मुझे
  2659. 2:01:19आखिरी वक्त पर बुलाने के पीछे असली खेल
  2660. 2:01:22क्या है मेनका ने स्क्रीन की ओर देखा जहां
  2661. 2:01:25पार्टी पूरे शबाब पर थी तो फिर इंतजार किस
  2662. 2:01:29बात का है पार्टी तो शुरू हो चुकी है
  2663. 2:01:32शौर्य ने घड़ी की तरफ देखा और शांत स्वर
  2664. 2:01:34में बोला जाऊंगा लेकिन तुरंत नहीं उसने
  2665. 2:01:38मेनका की तरफ देखते हुए समझाया। मैंने
  2666. 2:01:41राधिका से कहा है कि मैं अभी गुलमोहर
  2667. 2:01:43मार्केट में हूं। तो वहां से यहां आने में
  2668. 2:01:46थोड़ा वक्त तो लगेगा ही। फिर होठों पर
  2669. 2:01:48हल्की सी चालाकी से मुस्कुराते हुए बोला।
  2670. 2:01:51थोड़ा इंतजार इंपैक्ट बढ़ा देता है। यह
  2671. 2:01:55सुनकर मेनका ने हंसते हुए कहा, बहुत
  2672. 2:01:57बढ़िया। मतलब एंट्री भी पूरी प्लंड होगी।
  2673. 2:02:00वैसे तुम्हें मेरी कोई और मदद चाहिए?
  2674. 2:02:03शौर्य कुछ पल चुप रहा। जैसे यही सवाल
  2675. 2:02:05सुनने का इंतजार कर रहा हो। अचानक उसकी
  2676. 2:02:08आंखों में एक चमक आ गई। हां, मदद चाहिए और
  2677. 2:02:12वो भी बहुत जरूरी। मेनका ने भौए हल्की सी
  2678. 2:02:15उठाई। एक पल को उसके मन में ख्याल आया।
  2679. 2:02:18क्या यह सच में मेरे पूछने का इंतजार कर
  2680. 2:02:20रहा था? वो शौर्य के सामने आकर खड़ी हो
  2681. 2:02:23गई। ठीक है बताओ अब क्या चाहिए तुम्हें?
  2682. 2:02:27शौर्य ने थोड़ा झिझकते हुए कहा। देखो मैं
  2683. 2:02:30बर्थडे सेलिब्रेशन में जा रहा हूं तो तो
  2684. 2:02:32बर्थडे गर्ल के लिए कोई गिफ्ट तो चाहिए
  2685. 2:02:34होगा और मेरे पास अभी कुछ है नहीं। कहते
  2686. 2:02:37हुए उसने हल्की सी मासूमियत के साथ मेनका
  2687. 2:02:40की ओर देखा। तो क्या तुम मेरे लिए एक
  2688. 2:02:42गिफ्ट का इंतजाम कर सकती हो? उसका अंदाज
  2689. 2:02:45इतना सीधा था कि मेनका का मन सच में हंसने
  2690. 2:02:47का हुआ। लेकिन उसने खुद को संभालते हुए
  2691. 2:02:50कहा।
  2692. 2:02:52ठीक है मैं देखती हूं क्या कर सकती हूं।
  2693. 2:02:54शौर्य ने राहत की सांस ली। प्लीज कुछ ना
  2694. 2:02:57कुछ अरेंज कर देना। फिर मुस्कुराते हुए
  2695. 2:03:00बोला, "पता नहीं उस लड़की ने मुझे किस सोच
  2696. 2:03:03के साथ बुलाया है। अगर मैं बिना गिफ्ट के
  2697. 2:03:05पहुंचा तो उसे मुझे बेइज्जत करने का पूरा
  2698. 2:03:07मौका मिल जाएगा। मेनका ने उसे गौर से
  2699. 2:03:10देखा। अजीब आदमी है, मालिक है। चाहे तो
  2700. 2:03:14हुक्म दे सकता है, पर रिक्वेस्ट कर रहा
  2701. 2:03:16है। मेनका के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान
  2702. 2:03:18आई। शौर्य के प्रति उसका नजरिया धीरे-धीरे
  2703. 2:03:21बदल रहा था।
  2704. 2:03:23ठीक है। उसने सहजता से कहा, "मैं पक्का
  2705. 2:03:26कुछ करती हूं। तुम जाओ पार्टी एंजॉय करो।
  2706. 2:03:29मैं गिफ्ट वहीं भिजवा दूंगी या खुद लेकर आ
  2707. 2:03:31जाऊंगी। शौर्य जाने के लिए मुड़ा ही था कि
  2708. 2:03:34मेनका को कुछ याद आया। 1 मिनट। उसने शौर्य
  2709. 2:03:38की तरफ देखा और बोली जाने से पहले यह तो
  2710. 2:03:41बता दो स्क्रीन में दिख रही लड़कियों में
  2711. 2:03:43से तुम्हारी वाइफ कौन है? शौर्य ने बिना
  2712. 2:03:46झिझक स्क्रीन की ओर इशारा किया। वो पिंक
  2713. 2:03:50सूट में जो है वही शिप्रा है। मेनका की
  2714. 2:03:53नजर स्क्रीन पर गई और एक पल को वो ठिटक
  2715. 2:03:55गई। ये
  2716. 2:03:58शिप्रा की खूबसूरती सच में चौंकाने वाली
  2717. 2:04:01थी। उसकी पर्सनालिटी, उसका ग्रेस मेनका के
  2718. 2:04:04मन में एक हल्की सी चुभन उठी। इतनी
  2719. 2:04:07खूबसूरत एक पल को जलन भी हुई पर उसने उसे
  2720. 2:04:11चेहरे पर आने नहीं दिया। खैर, मैं भी कम
  2721. 2:04:14नहीं हूं। उसने मन ही मन खुद को सांत्वना
  2722. 2:04:16दी और तुरंत ही एक वेटर को बुलाया। राम
  2723. 2:04:20सिंह इन्हें हॉल नंबर पांच तक छोड़ आओ।
  2724. 2:04:22जी मैडम। लिफ्ट से होते हुए फिफ्थ फ्लोर
  2725. 2:04:26और फिर हॉल नंबर पांच के दरवाजे के बाहर
  2726. 2:04:28पहुंचते ही राम सिंह रुक गया। यही है
  2727. 2:04:31साहब।
  2728. 2:04:33शौर्य ने हल्का सा सिर हिलाया और अंदर कदम
  2729. 2:04:36रखा। हॉल की भव्यता देखते ही बनती थी।
  2730. 2:04:39रोशनी, सजावट और लोगों की भीड़ शौर्य कुछ
  2731. 2:04:42पल के लिए चारों ओर देखता रह गया। फिर वो
  2732. 2:04:45भीड़ के बीच से रास्ता बनाते हुए स्टेज की
  2733. 2:04:48ओर बढ़ने लगा। उधर शिप्रा की नजर दरवाजे
  2734. 2:04:50पर ही टिकी हुई थी। मानो उसे किसी का
  2735. 2:04:53इंतजार हो। जैसे ही शौर्य अंदर आया, उसकी
  2736. 2:04:56सांस एक पल को थम गई। ब्लैक सूट, शानदार
  2737. 2:04:59पर्सनालिटी और आत्मविश्वास भरी चाल। उसकी
  2738. 2:05:02आंखें शौर्य पर ही अटक गई। सुबह वाले
  2739. 2:05:05कपड़ों को याद कर वो थोड़ी चिंतित थी कि
  2740. 2:05:07अगर वो उसी में आ गया तो लेकिन अब उसके
  2741. 2:05:11होठों पर राहत भरी मुस्कान थी। कम से कम
  2742. 2:05:14उसे खुद को संभालना तो आता है। दूसरी तरफ
  2743. 2:05:17राधिका भी बेसब्री से इंतजार कर रही थी।
  2744. 2:05:20जैसे ही उसकी नजर दरवाजे की ओर गई वो चौंक
  2745. 2:05:23गई। ये ये तो वही है। शिप्रा के ऑफिस का
  2746. 2:05:27ड्राइवर। एक पल को उसके चेहरे पर हैरानी
  2747. 2:05:30आई। ये यहां क्या कर रहा है? लेकिन अगले
  2748. 2:05:33ही पल उसने शिप्रा की ओर देखा और पाया कि
  2749. 2:05:35शिप्रा भी उसी को देख रही थी। राधिका के
  2750. 2:05:38दिमाग में जैसे बिजली कौंधी, उसका दिल एक
  2751. 2:05:41पल को तेजी से धड़क उठा। क्या यही शिप्रा
  2752. 2:05:44का पति है? उसने फिर से शौर्य की ओर देखा
  2753. 2:05:48और इस बार उसकी नजर हट ही नहीं पाई। जिस
  2754. 2:05:50इंसान को उसने अपने मन में एक भिखारी के
  2755. 2:05:53रूप में गढ़ रखा था, वो सामने खड़ा था। एक
  2756. 2:05:55ऐसी शख्सियत जिससे नजरें हटाना मुश्किल हो
  2757. 2:05:58रहा था। राधिका की धड़कन अब बेकाबू हो रही
  2758. 2:06:02थी। अपने मन में शक के बुलबुलाते कीड़े को
  2759. 2:06:05लेकर वो तुरंत अपनी मां के पास जाकर श्रवण
  2760. 2:06:07की तरफ इशारा करते हुए पूछने लगी।
  2761. 2:06:11क्या यही श्रवण है? नैना राय ने श्रवण की
  2762. 2:06:14तरफ देखा और इंकार करते हुए बोली नहीं वो
  2763. 2:06:18श्रवण कैसे हो सकता है? उसकी तो बहुत
  2764. 2:06:20बड़ी-बड़ी दाढ़ी है और यह तो एकदम क्लीन
  2765. 2:06:23शेव्ड है। लेकिन तभी उसने देखा कि श्रवण
  2766. 2:06:26शिप्रा के पास पहुंच गया। शिप्रा ने श्रवण
  2767. 2:06:28को अपने पास आते देखा तो तारीफ भरे स्वर
  2768. 2:06:31में बोली अच्छे लग रहे हो। चलो चलकर
  2769. 2:06:35राधिका को बर्थडे विश कर दो। शायद वो
  2770. 2:06:37तुम्हारा ही इंतजार कर रही है। शौर्य
  2771. 2:06:39शिप्रा के साथ राधिका के पास पहुंचा और
  2772. 2:06:41उसे बर्थडे विश करते हुए बोला, "मेनी मेनी
  2773. 2:06:44हैप्पी रिटर्न्स ऑफ द डे।" मिस राधिका,
  2774. 2:06:46आपका जीवन हमेशा खुशियों से भरा रहे। यही
  2775. 2:06:49मेरी दुआ है। जब राधिका ने श्रवण को
  2776. 2:06:52शिप्रा के साथ आकर उसे विश करते देखा तो
  2777. 2:06:55उसे यकीन हो गया कि यही श्रवण है। वो
  2778. 2:06:58शिप्रा से बोली [संगीत]
  2779. 2:06:59जब हम ऑफिस की पार्किंग में मिले थे तुमने
  2780. 2:07:02उस दिन क्यों नहीं बताया कि यह तुम्हारे
  2781. 2:07:03पति श्रवण हैं। इस पर शिप्रा ने हल्की
  2782. 2:07:06मुस्कान के साथ जवाब दिया। मैं उस दिन
  2783. 2:07:09तुम्हें श्रवण से मिलवाना तो चाहती थी
  2784. 2:07:11लेकिन तुम जल्दी में थी। खैर कोई बात नहीं
  2785. 2:07:14उस दिन नहीं मिली तो आज मिल [संगीत] लो।
  2786. 2:07:17यही है श्रवण। श्रवण को इस तरह
  2787. 2:07:19प्रेजेंटेबल देखकर शिप्रा में अब थोड़ा
  2788. 2:07:21कॉन्फिडेंस आ गया था। लेकिन राधिका ने
  2789. 2:07:24शिप्रा पर तंज कसते हुए कहा मुझे नहीं पता
  2790. 2:07:27था कि तुमने अपने पति को अपना ड्राइवर बना
  2791. 2:07:30रखा है। यह सुनकर शिप्रा एक पल के लिए चुप
  2792. 2:07:33रह गई। उसे समझ नहीं आया कि वो इसका क्या
  2793. 2:07:35जवाब दे? तभी शौर्य ने आगे बढ़कर कहा।
  2794. 2:07:39लगता है आपको मेरी कुछ ज्यादा ही चिंता
  2795. 2:07:41है। तभी आपको यह बात तकलीफ दे रही है।
  2796. 2:07:45लेकिन क्या आज आपके बर्थडे से ज्यादा
  2797. 2:07:46जरूरी यह है कि मैं क्या करता हूं? राधिका
  2798. 2:07:50ने जिस अंदाज में शौर्य पर टिप्पणी की थी,
  2799. 2:07:52शौर्य ने उसी भाषा में उसे जवाब दे दिया।
  2800. 2:07:55वो आगे बोला, "अगर ऐसा है, तो हम आपका
  2801. 2:07:58बर्थडे सेलिब्रेशन छोड़कर इसी बात पर
  2802. 2:08:00चर्चा कर लेते हैं कि मैं अपनी पत्नी का
  2803. 2:08:02ड्राइवर हूं या नहीं।" शौर्य का यह जवाब
  2804. 2:08:05सुनकर शिप्रा के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ
  2805. 2:08:07गई। उसे अच्छा लगा कि इस बार शौर्य ने
  2806. 2:08:10बिना झिझक उसके लिए स्टैंड लिया। मानना
  2807. 2:08:13पड़ेगा शिप्रा तुम्हारा पति बहुत हाजिर
  2808. 2:08:15जवाब है। वो अच्छे से तुम्हारा बचाव कर
  2809. 2:08:17रहा है। राधिका शौर्य को सीधे जवाब ना दे
  2810. 2:08:21पाने पर भी शिप्रा पर तंज कसते हुए बोली।
  2811. 2:08:24शिप्रा और राधिका की खींचतान के बीच वहां
  2812. 2:08:26अचानक मुख्तार भाई ने एंट्री मारी। अरे
  2813. 2:08:30तुम वही भिखारी हो ना जिसकी मैंने शिप्रा
  2814. 2:08:34से शादी करवाई थी।
  2815. 2:08:36मानना पड़ेगा। शिपरा ने तो तुम्हारा पूरा
  2816. 2:08:40कायापलट ही कर डाला। तभी साथ में आया रजत
  2817. 2:08:44भी शौर्य का मजाक उड़ाते हुए बोल पड़ा।
  2818. 2:08:47क्या भैया आप भी कैसी बात कर रहे हो? कौवे
  2819. 2:08:50को उजले रंग से रंग देने से वो बगुला नहीं
  2820. 2:08:52हो जाता। वो तब भी कौवा ही रहता है। इसका
  2821. 2:08:55कितना भी कायापलट कर दो रहेगा तो यह
  2822. 2:08:57भिखारी ही। वो तो मिस राधिका ने इस पर तरस
  2823. 2:09:00खाकर इसे पार्टी में बुला लिया। नहीं तो
  2824. 2:09:02इसकी इतनी औकात कहां कि यह इतने बड़े होटल
  2825. 2:09:05में कदम भी रख सके। शिप्रा यह सब देख रही
  2826. 2:09:08थी। उसे गुस्सा भी आ रहा था। लेकिन वो
  2827. 2:09:10पार्टी में कोई सीन क्रिएट नहीं करना
  2828. 2:09:12चाहती थी। इसीलिए चुप रही। शौर्य ने जब
  2829. 2:09:15देखा कि मुख्तार भाई और रजत सरेआम उसका
  2830. 2:09:18मजाक उड़ा रहे हैं तो वो उनकी तरफ मुड़कर
  2831. 2:09:20शांत लेकिन तीखे स्वर में बोला। आपने सही
  2832. 2:09:24कहा। मेरी औकात सच में इस होटल में आने
  2833. 2:09:26लायक नहीं है। लेकिन अफसोस की बात यह है
  2834. 2:09:29कि यह बात बोल कौन रहा है? शहर का एक जाना
  2835. 2:09:32माना गुंडा जो दूसरों को लूट कर अपनी
  2836. 2:09:35हैसियत इस लायक बनाता है कि लोग डर के
  2837. 2:09:37मारे उसे थोड़ी बहुत इज्जत दे देते हैं।
  2838. 2:09:40जवाब में रजत कुछ बोलता उससे पहले शौर्य
  2839. 2:09:43आगे बोला वरना आप तो इस लायक भी नहीं कि
  2840. 2:09:46कोई आपको इज्जत से अपने यहां बुलाए। आप
  2841. 2:09:49जैसे लोगों की जिंदगी तो जेल की चार
  2842. 2:09:51दीवारी के पीछे ही लिखी होती है और शायद
  2843. 2:09:53अभी आपका जो भाई खुली हवा में सांस ले रहा
  2844. 2:09:56है वो भी मेरी पत्नी की ही मेहरबानी है।
  2845. 2:10:00शौर्य की आवाज शांत थी लेकिन उसके शब्द
  2846. 2:10:02सीधे दिल पर वार कर रहे थे और इस बार
  2847. 2:10:05माहौल सच में बदलने वाला था। शिप्रा ने जब
  2848. 2:10:08शौर्य की बातें सुनी तो उसे यकीन ही नहीं
  2849. 2:10:11हुआ कि वो इस तरह मुख्तार भाई को जवाब दे
  2850. 2:10:13सकता है। श्रवण ने जैसे उसके दिल के
  2851. 2:10:15जज्बात सामने रख दिए थे। शिप्रा को डर भी
  2852. 2:10:18लग रहा था। पता नहीं यह अब मुख्तार भाई
  2853. 2:10:20क्या करेंगे। उधर राधिका भी श्रवण की बात
  2854. 2:10:23सुनकर दंग रह गई थी। उसे शौर्य से इतनी
  2855. 2:10:26हिम्मत की उम्मीद नहीं थी। शौर्य द्वारा
  2856. 2:10:29की गई बेइज्जती से मुख्तार भाई के चेहरे
  2857. 2:10:31का रंग लाल हो गया था। लेकिन इतने लोगों
  2858. 2:10:34के बीच वो कुछ कर भी तो नहीं सकता था। ऊपर
  2859. 2:10:37से होटल राजकमल था। विशालगढ़ के राजा साहब
  2860. 2:10:40का होटल। वो राजा साहब से सीधा पंगा लेने
  2861. 2:10:42की हिम्मत नहीं कर सकता था। मुख्तार भाई
  2862. 2:10:45खून का घूंट पीकर रह गया लेकिन कुछ बोला
  2863. 2:10:48नहीं। वो गुस्से से शौर्य को ऐसे घूर रहा
  2864. 2:10:51था जैसे आंखों से ही उसे भस्म कर देगा। एक
  2865. 2:10:54तरफ शौर्य का मुंह तोड़ जवाब सुनकर
  2866. 2:10:56मुख्तार का खून खौल रहा था। वहीं दूसरी
  2867. 2:10:58तरफ अंदर ही अंदर वो शॉक्ड भी था कि शौर्य
  2868. 2:11:01में इतनी हिम्मत आखिर कैसे और कहां से आई?
  2869. 2:11:04क्या उसके पीछे कोई ऐसा शख्स है जिसे
  2870. 2:11:07मुख्तार का भी खौफ नहीं है। बलवंत राय भी
  2871. 2:11:10शौर्य की हिम्मत देखकर हैरान थे। उनके
  2872. 2:11:12दिमाग में सवाल दस्तक देने लगा। यह लड़का
  2873. 2:11:16वाकई निडर है या किसी के भरोसे इसने
  2874. 2:11:18मुख्तार के सामने इतनी बड़ी बात कहने का
  2875. 2:11:20साहस कर लिया है। आज पहली बार मुख्तार भाई
  2876. 2:11:24को अपने ही शहर में किसी ने भरी महफिल में
  2877. 2:11:26बेइज्जत किया था। इस समय सभी लोग मुख्तार
  2878. 2:11:29भाई के सामने आने से बच रहे थे। [संगीत]
  2879. 2:11:32कोई भी उसके खिलाफ खड़ा नहीं होना चाहता
  2880. 2:11:34था। क्योंकि कोई यह नहीं चाहता था कि बाद
  2881. 2:11:37में मुख्तार भाई यह कहे कि जब उसकी
  2882. 2:11:39बेइज्जती हो रही थी तब कोई उसके साथ नहीं
  2883. 2:11:41था। तभी राधिका ने मुख्तार का फेवर करते
  2884. 2:11:44हुए शौर्य से कहा क्या तुम्हें इतनी भी
  2885. 2:11:48समझ नहीं है कि किससे कैसे बात की जाती
  2886. 2:11:50है? आखिर तुम किस आधार पर मुख्तार भाई के
  2887. 2:11:53लिए ऐसी बातें कर सकते हो। तुम्हें पता
  2888. 2:11:55होना चाहिए कि मुख्तार भाई शहर के एक
  2889. 2:11:58प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं। लेकिन शौर्य भी
  2890. 2:12:01आज कहां रुकने वाला था। उसने हाथों हाथ
  2891. 2:12:03उसी तीखे अंदाज में राधिका को जवाब दे
  2892. 2:12:06दिया। प्रतिष्ठित व्यक्ति वो आपके लिए
  2893. 2:12:08होंगे। मेरे लिए नहीं। पूरा शहर जानता है
  2894. 2:12:11कि इन्होंने सिर्फ शिप्रा से बदला लेने के
  2895. 2:12:14लिए जबरदस्ती उसकी शादी मुझसे करवाई थी।
  2896. 2:12:17तो जरा आप ही बताइए कौन सा प्रतिष्ठित
  2897. 2:12:19इंसान किसी की जबरदस्ती शादी करवाता है।
  2898. 2:12:22शौर्य अभी मुख्तार को छोड़ने के मूड में
  2899. 2:12:24नहीं था और माहौल अब पहले से ज्यादा
  2900. 2:12:27खतरनाक हो चुका था। शौर्य को अभी भी चुप
  2901. 2:12:30ना होते देखकर राधिका वहां से सरकने की
  2902. 2:12:32कोशिश करने लगी। तभी मुख्तार भाई गुर्राते
  2903. 2:12:35हुए बोले, [संगीत] लड़के
  2904. 2:12:38दाद देता हूं तुम्हारी हिम्मत की। मुख्तार
  2905. 2:12:41से पंगा लेने की सोच रहे हो। यह मत भूलो।
  2906. 2:12:45आज तुम इस घर [संगीत] के दामाद बने हुए हो
  2907. 2:12:47तो यह मेरी ही वजह से संभव हुआ है। नहीं
  2908. 2:12:50तो तुम अभी भी कहीं भीख मांग रहे होते।
  2909. 2:12:54तुम्हें तो मेरे पैरों को धोकर पीना
  2910. 2:12:56चाहिए। राजदीप राय यह सब सुन रहे थे।
  2911. 2:12:59उन्हें भी थोड़ा आश्चर्य हो रहा था कि
  2912. 2:13:01श्रवण आखिर इतनी हिम्मत कहां से ला रहा है
  2913. 2:13:04जो वो लगातार मुख्तार भाई से भिड़ा हुआ
  2914. 2:13:06है। शौर्य की बातें कड़वी जरूर थी लेकिन
  2915. 2:13:09राजदीप राय को कहीं ना कहीं सुकून भी दे
  2916. 2:13:12रही थी। हे तुमने इस बात को सही साबित कर
  2917. 2:13:15दिया कि अगर कीचड़ पर कंकड़ मारोगे तो वह
  2918. 2:13:18पलट कर तुम्हारे ऊपर ही आएगा। भाई साहब ने
  2919. 2:13:20जो गलती की थी यह उसी का नतीजा है कि तुम
  2920. 2:13:23इतना बोल पा रहे हो।
  2921. 2:13:25रजत अपने गुस्से को काबू में रखते हुए
  2922. 2:13:27बोला। लेकिन शौर्य ने रजत की बात को यह
  2923. 2:13:30कहते [संगीत] हुए उसी पर पलट दिया। कुछ
  2924. 2:13:33लोग पैदाइशी बेवकूफ होते हैं। इसीलिए सब
  2925. 2:13:35कुछ जानने समझने के बाद भी कीचड़ पर कंकड़
  2926. 2:13:38मारने से बाज नहीं [संगीत] आते। शौर्य चुप
  2927. 2:13:41होने का नाम ही नहीं ले रहा था। रजत को
  2928. 2:13:44समझ आ गया कि मुंह बंद रखना ही बेहतर है।
  2929. 2:13:46वरना शौर्य आखिर तक बोलता ही रहेगा। तभी
  2930. 2:13:49बलवंत राय आगे आए और बोले यह क्या आप लोग
  2931. 2:13:53फालतू में एक दूसरे पर तंज कस रहे हैं?
  2932. 2:13:55शायद आप लोग भूल रहे हो हम सब यहां राधिका
  2933. 2:13:58के बर्थडे सेलिब्रेशन के लिए आए हैं। तो
  2934. 2:14:00प्लीज पार्टी को एंजॉय करें। रजत को कुछ
  2935. 2:14:04और नहीं सूझा तो वो राधिका की तरफ मुड़कर
  2936. 2:14:06बोला मिस राधिका आपने मेरा गिफ्ट देखा
  2937. 2:14:10क्या? वैसे इस भिखारी [संगीत] ने आपको कोई
  2938. 2:14:12गिफ्ट दिया भी है या नहीं? रजत की बात से
  2939. 2:14:16शिप्रा को थोड़ी चिड़ हुई तो वह बोल पड़ी।
  2940. 2:14:19मिस्टर रजत मुझे लगता है आपको खुद से
  2941. 2:14:22ज्यादा दूसरों की पड़ी है। किसने राधिका
  2942. 2:14:24को क्या गिफ्ट दिया यह सोचने से ज्यादा
  2943. 2:14:27बेहतर होगा कि आप अपने काम से मतलब रखें।
  2944. 2:14:30आज पहली बार शिप्रा को भी अपने दिल का
  2945. 2:14:32गुबार निकालने का मौका मिल रहा था। राधिका
  2946. 2:14:36ने शिप्रा और शौर्य को नीचा दिखाने का खेल
  2947. 2:14:38खेलकर अपनी खुद की बर्थडे पार्टी में ही
  2948. 2:14:40नफरत, जलन और बदले को इनवाइट कर लिया था।
  2949. 2:14:45पार्टी में सेलिब्रेशन से ज्यादा टेंशन
  2950. 2:14:47नजर आ रहा था। अभी जो कुछ भी इस पार्टी
  2951. 2:14:49हॉल में हो रहा था वो शिप्रा के लिए पूरी
  2952. 2:14:52तरह अनएक्सेक्टेड था। उसने सोचा नहीं था
  2953. 2:14:54कि श्रवण इस तरह सबका सामना करेगा। शिप्रा
  2954. 2:14:58श्रवण को इस पार्टी में इसीलिए बुलाना
  2955. 2:15:00नहीं चाहती थी क्योंकि उसे लगता था कि
  2956. 2:15:02यहां सभी उसे नीचा दिखाने की कोशिश करेंगे
  2957. 2:15:05या श्रवण पर कटाक्ष करेंगे। लेकिन यहां तो
  2958. 2:15:07उल्टा ही हो रहा था। श्रवण किसी को भी
  2959. 2:15:10जवाब देने से पीछे नहीं हट रहा था। श्रवण
  2960. 2:15:13का यह रूप देखकर शिप्रा में भी कॉन्फिडेंस
  2961. 2:15:15आ गया था। अब वो तैयार थी कि श्रवण जैसे
  2962. 2:15:18भी हालात का सामना करेगा वो उसके साथ खड़ी
  2963. 2:15:21रहेगी। शिप्रा ने श्रवण में यह बात पहले
  2964. 2:15:24भी नोटिस की थी कि वो किसी भी गलत बात को
  2965. 2:15:26बर्दाश्त नहीं करता। उसने पहले भी उसका यह
  2966. 2:15:29रूप देखा था। इसीलिए वह समझ गई थी कि
  2967. 2:15:32श्रवण चुपचाप सहने वालों में से नहीं है।
  2968. 2:15:34वो सामने वाले को उसी की भाषा में जवाब
  2969. 2:15:37देना बखूबी जानता है। वहीं शौर्य को अब यह
  2970. 2:15:40समझ में आ चुका था कि उसे इस पार्टी में
  2971. 2:15:42बुलाने का असली मकसद क्या था। इसीलिए वो
  2972. 2:15:45किसी को भी अपने ऊपर हावी नहीं होने देना
  2973. 2:15:48चाहता था। वो समझ रहा था कि वहां मौजूद
  2974. 2:15:51ज्यादातर लोग उसके सहारे शिप्रा को नीचा
  2975. 2:15:53दिखाने की कोशिश करेंगे। इसीलिए वो हर बात
  2976. 2:15:56का जवाब देने में पीछे नहीं हट रहा था। जब
  2977. 2:16:00राधिका ने देखा कि उसके सारे वार बेअसर हो
  2978. 2:16:02रहे हैं। तो वो मुस्कुराते हुए शिप्रा से
  2979. 2:16:05बोली
  2980. 2:16:06मैं समझती हूं कि तुम्हें रजत पसंद नहीं
  2981. 2:16:08है। लेकिन बात तो उसने सही ही कही। यार जब
  2982. 2:16:11जीजाजी यहां आए हैं तो अपनी साली के लिए
  2983. 2:16:14कुछ ना कुछ गिफ्ट तो लाए ही होंगे। मैं भी
  2984. 2:16:17देखना चाहती हूं कि वो मेरे लिए क्या लाए
  2985. 2:16:19हैं। शिप्रा राधिका के इरादे को अच्छे से
  2986. 2:16:22समझ रही थी। उसने राधिका की ओर देखा और
  2987. 2:16:25थोड़े कड़े शब्दों में बोली क्यों? मैंने
  2988. 2:16:28जो दिया वो कम पड़ गया क्या? जो अब
  2989. 2:16:30तुम्हें मेरे पति से भी गिफ्ट चाहिए। अरे
  2990. 2:16:33यार तुम क्यों मेरे और मेरे प्यारे जीजू
  2991. 2:16:35के बीच में पड़ रही हो? यह साली और जीजू
  2992. 2:16:38के बीच की बात है। इतना हक तो बनता है
  2993. 2:16:40मेरा उन पर। क्यों जीजू? मैं सही कह रही
  2994. 2:16:42हूं ना। राधिका शिप्रा से हटकर शौर्य के
  2995. 2:16:46पास जाकर बोली तो शौर्य उसकी बात सुनकर बस
  2996. 2:16:49मुस्कुरा दिया। जब शौर्य ने कुछ नहीं कहा
  2997. 2:16:51तो राधिका फिर बोली क्या हुआ जीजू? मैंने
  2998. 2:16:55कोई गलत बात कह दी क्या? इसी समय बलवंत
  2999. 2:16:58राय भी वहां आ गए। उन्होंने राधिका से
  3000. 2:17:01पूछा। क्या हुआ? कौन सी गलत बात कह दी?
  3001. 2:17:06तभी राधिका ने अपने नाना जी को देखते ही
  3002. 2:17:08कहा, नाना जी, मैंने तो बस इतना कहा कि आज
  3003. 2:17:12श्रवण जीजू पहली बार मेरे बर्थडे पर आए
  3004. 2:17:14हैं तो कुछ ना कुछ गिफ्ट तो लाए ही होंगे।
  3005. 2:17:17क्या मेरा ऐसा सोचना गलत है?
  3006. 2:17:20नहीं नहीं इसमें गलत क्या है? आखिर श्रवण
  3007. 2:17:23अब तुम्हारा जीजा है तो उसका अपनी साली के
  3008. 2:17:25लिए गिफ्ट लाना तो बनता है। बलवंत राय
  3009. 2:17:28राधिका से सहमति जताते हुए बोले वही तो
  3010. 2:17:32नाना जी मैं शिप्रा को यही कह रही हूं। पर
  3011. 2:17:34यह तो कह रही है कि जब वो गिफ्ट लाई है तो
  3012. 2:17:37फिर श्रवण को गिफ्ट देने की क्या जरूरत
  3013. 2:17:38है? राधिका शिप्रा को टारगेट करते हुए
  3014. 2:17:41बोली। राधिका की इस बात पर शौर्य
  3015. 2:17:44मुस्कुराते हुए बोला तुम चिंता मत करो।
  3016. 2:17:47[संगीत] मैं जल्दीबाजी में आया इसीलिए
  3017. 2:17:49तुम्हारा गिफ्ट साथ में नहीं ला पाया।
  3018. 2:17:51लेकिन मैंने किसी को बोल रखा है। वो थोड़ी
  3019. 2:17:53देर में तुम्हारा गिफ्ट यहां पहुंचा देगा।
  3020. 2:17:57देखा? मैंने तुम्हें कहा था ना मेरे जीजा
  3021. 2:18:00जी मेरे लिए जरूर गिफ्ट लाएंगे। हां अभी
  3022. 2:18:02नहीं है तो क्या हुआ लेकिन जब उन्होंने
  3023. 2:18:05कहा है तो गिफ्ट जरूर आएगा। राधिका ने
  3024. 2:18:08शिप्रा की तरफ शरारती मुस्कान के साथ
  3025. 2:18:10देखते हुए कहा। शिप्रा मन ही मन सोचने
  3026. 2:18:13लगी। क्या सचमुच श्रवण ने राधिका के लिए
  3027. 2:18:16गिफ्ट मंगवाया है? शिप्रा समझ गई थी कि
  3028. 2:18:18जैसे ही गिफ्ट आएगा राधिका उसे सस्ता
  3029. 2:18:21बताकर उसका मजाक बनाएगी। तभी रजत ने हीरो
  3030. 2:18:24स्टाइल में सीना चौड़ा करते हुए कहा। मिस
  3031. 2:18:27राधिका श्रवण का गिफ्ट जब आएगा तब आएगा।
  3032. 2:18:30अभी तो आप मेरा गिफ्ट खोल कर देखिए।
  3033. 2:18:32[संगीत] क्या आपको लगता है कि श्रवण आपके
  3034. 2:18:35लिए वैसा गिफ्ट ला सकता है जैसा मैं लाया
  3035. 2:18:38हूं।
  3036. 2:18:39अच्छा अगर ऐसी बात है तो सबसे पहले मैं
  3037. 2:18:42आपका गिफ्ट ही खोल कर देखती हूं। मिस्टर
  3038. 2:18:44रजत इतना कहकर राधिका उसका गिफ्ट खोलने
  3039. 2:18:47लगी। जैसे ही बॉक्स खुला अंदर एक बेहद
  3040. 2:18:50खूबसूरत बटरफ्लाई शेप पेंडेंट था। गोल्ड
  3041. 2:18:53पर छोटे-छोटे डायमंड जड़े हुए थे और दोनों
  3042. 2:18:56पंखों की जगह नीले स्टोन लगे थे जो उसकी
  3043. 2:18:58खूबसूरती को और बढ़ा रहे थे। पेंडेंट
  3044. 2:19:01देखते ही राधिका का चेहरा खुशी से चमक
  3045. 2:19:04उठा। वाओ यह तो बहुत खूबसूरत है। अरे आपकी
  3046. 2:19:09खूबसूरती के सामने तो यह कुछ भी नहीं है।
  3047. 2:19:12रजत ने तारीफ करते हुए कहा। थैंक यू
  3048. 2:19:14मिस्टर रजत। आपने सचमुच एक लाजवाब गिफ्ट
  3049. 2:19:17दिया है? राधिका ने उत्साह में रजत के हाथ
  3050. 2:19:19पर अपना हाथ रख दिया और बोली, अब तो बस
  3051. 2:19:23मुझे अपने जीजू के गिफ्ट का इंतजार है।
  3052. 2:19:25पता नहीं वो कब आएगा।
  3053. 2:19:28शौर्य राधिका के सरकाज्म को समझ रहा था पर
  3054. 2:19:31उसने कुछ नहीं कहा। दूसरी तरफ शिप्रा रजत
  3055. 2:19:34और राधिका की बातों से टेंशन में आ चुकी
  3056. 2:19:37थी। वैसे शिप्रा को भी रजत का दिया हुआ
  3057. 2:19:39गिफ्ट बहुत पसंद आया था। उसने अंदाजा
  3058. 2:19:41लगाया कि उसकी कीमत कम से कम ₹1.5 लाख के
  3059. 2:19:44आसपास तो होगी ही। अब वो श्रवण के गिफ्ट
  3060. 2:19:46के बारे में सोचने लगी। ना जाने उसने क्या
  3061. 2:19:49मंगवाया होगा। उसके पास पैसे भी कहां
  3062. 2:19:51होंगे और अगर उसने कुछ मंगवाया भी है तो
  3063. 2:19:54वो ज्यादा से ज्यादा 500 तक का ही होगा।
  3064. 2:19:57उसे श्रवण पर तरस आने लगा और वो खुद को
  3065. 2:20:00कोसने लगी। मेरी ही वजह से आज शौर्य इस
  3066. 2:20:03मुसीबत में फंसा है। वो सोचने लगी काश
  3067. 2:20:06पहले ही उसे बता दिया जाता कि श्रवण को
  3068. 2:20:08साथ लाना है तो वो उसके लिए एक अच्छा सा
  3069. 2:20:10गिफ्ट दिलवा देती। अब उसे साफ लग रहा था
  3070. 2:20:13कि राधिका और उसकी बुआ ने जानबूझकर ऐसा
  3071. 2:20:16किया है। तभी एक तीखी आवाज उसे वापस
  3072. 2:20:19ख्यालों से पार्टी में ले आई।
  3073. 2:20:22क्यों बे भिखारी? और कितना टाइम लगेगा
  3074. 2:20:25तुम्हारे गिफ्ट आने में? कुछ मंगाया भी है
  3075. 2:20:27या बस झूठ बोलकर टाइम पास कर रहा है? रजत
  3076. 2:20:30ने शौर्य पर तंज कसते हुए कहा, रजत की बात
  3077. 2:20:34सुनकर बलवंत राय सामने आए और बोले, मिस्टर
  3078. 2:20:36रजत अगर आप श्रवण को तमीज से पुकारे तो
  3079. 2:20:39बेहतर रहेगा। आपको पता होना चाहिए जैसा भी
  3080. 2:20:42है। वो अब हमारे घर का दामाद है। बलवंत
  3081. 2:20:46राय की बात सुनकर शौर्य को अच्छा लगा।
  3082. 2:20:48उसने सोचा चलो कहीं से तो उसे स्वीकृति
  3083. 2:20:51मिलनी शुरू हुई। कि हां राय साहब आपने भी
  3084. 2:20:55इस भिखारी को अपना दामाद स्वीकार कर लिया।
  3085. 2:20:59मुख्तार भाई जो बलवंत राय के साथ ही खड़ा
  3086. 2:21:01था तंज कसते हुए बोला। तभी बलवंत राय ने
  3087. 2:21:05अपने एक जवाबी तीर से दो निशाने लगा दिए।
  3088. 2:21:08वे शांत स्वर में बोले अब जो भी है मानना
  3089. 2:21:12तो पड़ेगा। जब शिप्रा ने ही उसे अपना पति
  3090. 2:21:14मान लिया है तो मेरे मानने या ना मानने का
  3091. 2:21:17सवाल ही कहां रह जाता है। इस एक वाक्य से
  3092. 2:21:21उन्होंने साफ कर दिया कि अगर कोई अब भी
  3093. 2:21:23शिप्रा और रजत की शादी के बारे में सोच
  3094. 2:21:25रहा है तो वह भूल जाए। बलवंत राय की बात
  3095. 2:21:29सुनकर रजत के चेहरे पर गुस्से की लहर दौड़
  3096. 2:21:31गई। अब तक जो उम्मीद उसे थी कि शायद उसकी
  3097. 2:21:34शादी शिप्रा से हो सकती है वो टूटती नजर
  3098. 2:21:37आई। तब उसके अंदर शौर्य के लिए नफरत और
  3099. 2:21:40बढ़ गई। वो गुस्से से शौर्य को घूरने लगा।
  3100. 2:21:43लेकिन शौर्य पर उसका कोई असर नहीं हुआ।
  3101. 2:21:45बल्कि शौर्य तो यही चाहता था कि रजत अपना
  3102. 2:21:48आपा खो दे और कुछ ऐसा कर बैठे जिससे उसकी
  3103. 2:21:51असलियत सबके सामने आ जाए। लेकिन रजत ने
  3104. 2:21:54पहली बार वक्त रहते खुद पर काबू पा लिया।
  3105. 2:21:58राधिका ने जब देखा कि माहौल बदलने लगा है
  3106. 2:22:00तो उसने फिर सबका ध्यान अपनी तरफ खींचते
  3107. 2:22:03हुए कहा, जीजू और कितना समय लगेगा आपका
  3108. 2:22:06गिफ्ट आने में? अब मुझसे इंतजार नहीं हो
  3109. 2:22:09रहा। आखिर किससे मंगवाया है आपने मेरा
  3110. 2:22:11गिफ्ट? शौर्य भी एक पल के लिए सोच में पड़
  3111. 2:22:14गया। कहीं मेनका गिफ्ट के बारे में भूल तो
  3112. 2:22:17नहीं गई। अगर ऐसा हुआ तो आज उसकी बेइज्जती
  3113. 2:22:20होना तय है। लेकिन अगले ही पल उसने खुद को
  3114. 2:22:23संभाला। नहीं ऐसा नहीं हो सकता। मेनका
  3115. 2:22:27इतनी लापरवाह नहीं हो सकती। वो राधिका को
  3116. 2:22:30जवाब देने ही वाला था कि तभी हॉल के मेन
  3117. 2:22:33गेट से एक वेट्रेस अंदर आती दिखाई दी।
  3118. 2:22:36शौर्य के गिफ्ट का इंतजार पार्टी में
  3119. 2:22:38मौजूद हर व्यक्ति कर रहा था और अब वो घड़ी
  3120. 2:22:41आ गई थी जब शौर्य का गिफ्ट पार्टी हॉल में
  3121. 2:22:44एंटर कर चुका था। सबकी निगाहें पार्टी
  3122. 2:22:46गर्ल राधिका से हटकर अब उस वेट्रेस पर
  3123. 2:22:48टिकी थी जिसके हाथ में गिफ्ट के दो बॉक्स
  3124. 2:22:51थे जिसने अभी-अभी हॉल में एंट्री मारी थी।
  3125. 2:22:54शौर्य उस वेट्रेस को देखकर सोच में डूब
  3126. 2:22:56गया। उसे समझ नहीं आया कि मेनका ने दो
  3127. 2:22:59गिफ्ट क्यों भिजवा दिए। फिर उसने सोचा इस
  3128. 2:23:02बारे में बाद में सोचूंगा। पहले देख तो
  3129. 2:23:05लूं कि वो क्या लेकर आई है। अब तक राधिका
  3130. 2:23:08और रजत की नजर भी उस वेट्रेस पर पड़ चुकी
  3131. 2:23:11थी। राधिका भी उसके हाथ में दो गिफ्ट
  3132. 2:23:14बॉक्स देखकर हैरान थी। उसके दिमाग में भी
  3133. 2:23:17यही सवाल उठ रहा था कि श्रवण ने एक गिफ्ट
  3134. 2:23:19तो उसके लिए मंगवाया होगा लेकिन दूसरा
  3135. 2:23:21बॉक्स किसके लिए है? वो भी इंतजार करने
  3136. 2:23:24लगी। अब सामने आ ही जाएगा। उसे पूरा भरोसा
  3137. 2:23:28था कि गिफ्ट ज्यादा महंगा नहीं होगा और अब
  3138. 2:23:30सबके सामने श्रवण का मजाक उड़ाने का मौका
  3139. 2:23:33ज्यादा दूर नहीं था। कुछ ही पलों में
  3140. 2:23:35वेट्रेस शौर्य के पास आकर रुक गई। उसने
  3141. 2:23:38गौर से उसका चेहरा देखा जैसे पहचानने की
  3142. 2:23:41कोशिश कर रही हो। जब उसे तसल्ली हो गई कि
  3143. 2:23:43वो वही इंसान है तो वो बॉक्स उसकी तरफ
  3144. 2:23:46बढ़ाते हुए बोली सर यह बॉक्स आपकी वाइफ के
  3145. 2:23:49लिए है और यह दूसरा बॉक्स बर्थडे गर्ल के
  3146. 2:23:52लिए। वेट्रेस की बात सुनकर शौर्य के चेहरे
  3147. 2:23:55पर हैरानी झलक गई। उसने तो सिर्फ एक गिफ्ट
  3148. 2:23:57राधिका के लिए मंगवाया था। लेकिन मेनका ने
  3149. 2:24:00अपनी तरफ से उसकी वाइफ के लिए भी गिफ्ट
  3150. 2:24:02भिजवा दिया था। उसे मेनका की समझदारी पर
  3151. 2:24:05गर्व हुआ। उसने खुद तो शिप्रा के लिए
  3152. 2:24:08गिफ्ट लेने के बारे में सोचा भी नहीं था।
  3153. 2:24:10लेकिन मेनका ने यह बात समझ ली थी। दूसरी
  3154. 2:24:13तरफ शिप्रा लगातार शौर्य के चेहरे के भाव
  3155. 2:24:15पड़ रही थी और उसने उसकी हैरानी को नोटिस
  3156. 2:24:18कर लिया था। उसे लगा जैसे शौर्य को खुद
  3157. 2:24:21नहीं पता कि वेट्रेस क्या लेकर आई है।
  3158. 2:24:24उलझन में पड़ गई। आखिर मामला क्या है?
  3159. 2:24:26हालांकि उसने वेट्रेस की बात साफ-साफ सुनी
  3160. 2:24:29थी। एक गिफ्ट उसकी वाइफ के लिए है और
  3161. 2:24:31दूसरा बर्थडे गर्ल के लिए। यानी श्रवण ने
  3162. 2:24:34उसके लिए भी गिफ्ट मंगवाया है। यह सोचकर
  3163. 2:24:37उसके दिल में हल्की सी हलचल हुई। पर उसने
  3164. 2:24:40ज्यादा दिमाग नहीं लगाया। सोचा जो भी है
  3165. 2:24:44थोड़ी देर में खुद ही सामने आ जाएगा। उधर
  3166. 2:24:46राधिका जैसे ही देखती है कि वेट्रेस गिफ्ट
  3167. 2:24:49देकर जा चुकी है। वो तुरंत शौर्य के पास
  3168. 2:24:51आकर बोली। आपने सही कहा था जीजू कि आपने
  3169. 2:24:55यहीं गिफ्ट मंगवाया हुआ है। अब तो गिफ्ट आ
  3170. 2:24:57गया है। प्लीज जल्दी से दीजिए। मैं भी
  3171. 2:25:00देखूं आपने मेरे लिए क्या मंगवाया है।
  3172. 2:25:03जैसे ही शिप्रा ने राधिका को शौर्य के पास
  3173. 2:25:05जाते देखा वो भी तुरंत आगे बढ़ी और बोली
  3174. 2:25:09वो तो ठीक है लेकिन पहले तुम वो गिफ्ट तो
  3175. 2:25:11मुझे वापस करो जो मैंने तुम्हें दिया था।
  3176. 2:25:14वो हल्के तंज भरे अंदाज में बोली हम दोनों
  3177. 2:25:17पति-पत्नी में से कोई एक ही गिफ्ट देगा।
  3178. 2:25:20कोई ऐसा रिवाज तो है नहीं कि दोनों
  3179. 2:25:22अलग-अलग गिफ्ट दें। तुम्हें अपने जीजू का
  3180. 2:25:24गिफ्ट चाहिए था तो लो। उन्होंने खुद ही
  3181. 2:25:27मंगवा दिया। अब जो मैंने पहले दिया था वो
  3182. 2:25:29तो वापस कर दो। शिप्रा की बात सुनकर माहौल
  3183. 2:25:33में एक नया मोड़ आ गया। अब देखने वाली बात
  3184. 2:25:35यह थी कि राधिका क्या करती है। राजदीप राय
  3185. 2:25:38जो अब तक वहां खड़े सब कुछ देख रहे थे
  3186. 2:25:41बोले
  3187. 2:25:42हां भाई बात तो सही है शिप्रा की। अब
  3188. 2:25:45तुम्हें कायदे से शिप्रा का दिया हुआ
  3189. 2:25:47गिफ्ट उसे वापस कर देना चाहिए। राधिका के
  3190. 2:25:50दिमाग का तो मानो फ्यूज ही उड़ गया। वो तो
  3191. 2:25:53होशियारी दिखाकर श्रवण को नीचा दिखाना
  3192. 2:25:56चाहती थी। लेकिन अब उसी चक्कर में उसे
  3193. 2:25:58शिप्रा का दिया हुआ गिफ्ट लौटाना पड़ रहा
  3194. 2:26:00था। उसे पूरा यकीन था कि शिप्रा का गिफ्ट
  3195. 2:26:03श्रवण के गिफ्ट से कहीं बेहतर होगा। लेकिन
  3196. 2:26:06अब शिप्रा को नीचा दिखाने के खेल में उसे
  3197. 2:26:08एक अच्छा खासा गिफ्ट गवाना पड़ सकता है।
  3198. 2:26:11उसने उम्मीद भरी नजरों से अपने नाना बलवंत
  3199. 2:26:13राय की तरफ देखा। लेकिन बलवंत राय ने जैसे
  3200. 2:26:16ही उसकी नजरों का मतलब समझा, उन्होंने हाथ
  3201. 2:26:18उठाते हुए साफ कहा। इसमें मैं तुम्हारी
  3202. 2:26:22कोई मदद नहीं कर सकता। शिप्रा की बात अपनी
  3203. 2:26:25जगह बिल्कुल सही है। अब शिप्रा ने मौका
  3204. 2:26:28भांपते हुए दोबारा वार किया।
  3205. 2:26:31अभी भी तुम्हारे पास मौका है। सोच लो
  3206. 2:26:33तुम्हें कौन सा गिफ्ट चाहिए। शिप्रा का यह
  3207. 2:26:36मास्टर स्ट्रोक देखकर शौर्य भी मन ही मन
  3208. 2:26:39उसकी तारीफ किए बिना रह नहीं सका। राधिका
  3209. 2:26:42अब असली धर्म संकट में फंस गई थी। उसने
  3210. 2:26:44सोचा भी नहीं था कि शिप्रा इतनी चालाकी से
  3211. 2:26:47खेल पलट देगी। यह तो वही बात हो गई कि
  3212. 2:26:50चौबे जी छब्बे बनने गए थे और दुबे बनकर
  3213. 2:26:53लौट आए। राधिका पीछे नहीं हट सकती थी।
  3214. 2:26:56इसीलिए उसने ठान लिया चाहे उसे कीमती
  3215. 2:26:58गिफ्ट छोड़ना पड़े लेकिन श्रवण को नीचा
  3216. 2:27:01दिखाने का मौका वो नहीं छोड़ेगी। वो
  3217. 2:27:03गिफ्ट्स के ढेर के पास गई। शिप्रा का दिया
  3218. 2:27:06हुआ गिफ्ट निकाला और वापस उसके हाथ में
  3219. 2:27:08थमा दिया। शिप्रा ने भी बिना कुछ कहे अपना
  3220. 2:27:11गिफ्ट वापस ले लिया। अब तो मैं तुम्हारे
  3221. 2:27:14पतिदेव का गिफ्ट ले सकती हूं। राधिका ने
  3222. 2:27:17हल्की मुस्कान के साथ कहा। लेकिन शिप्रा
  3223. 2:27:19कुछ नहीं बोली। वो बस राधिका के चेहरे को
  3224. 2:27:22देखती रही। उसे साफ दिख रहा था कि राधिका
  3225. 2:27:25कितनी शिद्दत से उसे सबके सामने नीचा
  3226. 2:27:27दिखाना चाहती है। शिप्रा अब बस उस पल का
  3227. 2:27:30इंतजार कर रही थी जब राधिका गिफ्ट खोलेगी
  3228. 2:27:32और फिर उस पर अपना तीखा कमेंट करेगी। तभी
  3229. 2:27:35रजत ने उपहास भरे स्वर में कहा, "अब अपना
  3230. 2:27:38गिफ्ट राधिका को दे भी दो।" अब और सस्पेंस
  3231. 2:27:40बर्दाश्त नहीं हो रहा कि तुमने उसे गिफ्ट
  3232. 2:27:43में कौन सा जवाहरात दिया है। इस पर शौर्य
  3233. 2:27:46शांत भाव से बोला। मेरे लिए गिफ्ट की कीमत
  3234. 2:27:48मायने नहीं रखती बल्कि वो भावना मायने
  3235. 2:27:51रखती है जिससे सामने वाले को गिफ्ट दिया
  3236. 2:27:54जाता है। लो इसने तो पहले ही कह दिया कि
  3237. 2:27:57कीमत मायने नहीं रखती। अब खुद ही समझ लो
  3238. 2:28:00राधिका इसने तुम्हें गिफ्ट में क्या कबाड़
  3239. 2:28:02लाकर दिया होगा। [हंसी]
  3240. 2:28:05कहते हुए रजत जोर से हंस पड़ा। मुझे लग
  3241. 2:28:08रहा है इस गिफ्ट में राधिका से ज्यादा
  3242. 2:28:10तुम्हें इंटरेस्ट है। कहो तो एक गिफ्ट
  3243. 2:28:12तुम्हारे बर्थडे के लिए एडवांस में
  3244. 2:28:14तुम्हें भी दे दूं। शिप्रा रजत की बात
  3245. 2:28:17सुनकर गुस्से में बोली। तभी रजत शिप्रा के
  3246. 2:28:19पास जाकर बेशर्मी से हंसते हुए बोला। अरे
  3247. 2:28:23तुम तो मुझे जहर भी लाकर दोगी तो वो भी
  3248. 2:28:25मैं तुम्हारे हाथ से हंसते-हंसते ले
  3249. 2:28:27लूंगा। तुम लाकर दो तो सही। अरे वाह!
  3250. 2:28:31इसमें कौन सी बड़ी बात है? मैं अभी यहीं
  3251. 2:28:33जहर भी मंगवा देता हूं। शिप्रा तुम अपने
  3252. 2:28:35हाथ से अपने इस दोस्त को वो गिफ्ट कर
  3253. 2:28:37देना। उम्मीद करता हूं मिस्टर रजत अपनी
  3254. 2:28:40बात से मुकरेंगे नहीं। रजत के घटिया
  3255. 2:28:43डायलॉग का जवाब जब शौर्य ने मुस्कुराते
  3256. 2:28:45हुए दिया तो शिप्रा का चेहरा भी खिल उठा।
  3257. 2:28:48उसने तुरंत बात संभालते हुए कहा। प्लीज
  3258. 2:28:51श्रवण एक जहर की पुड़िया मंगवा ही दो। मैं
  3259. 2:28:54नहीं चाहती कि मेरे इस दोस्त को कोई रंज
  3260. 2:28:56रह जाए कि मैंने उसकी मन की मुराद पूरी
  3261. 2:28:58नहीं की। शौर्य और शिप्रा की बातें सुनकर
  3262. 2:29:01रजत का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। शायद
  3263. 2:29:04ही उसने पहले कभी इतनी बेइज्जती महसूस की
  3264. 2:29:06होगी। मुख्तार भाई ने रजत का लाल चेहरा
  3265. 2:29:09देखा तो उनकी भी मुट्ठियां कस गई।
  3266. 2:29:11उन्होंने इशारे से उसे शांत रहने को कहा।
  3267. 2:29:14शौर्य ने रजत के चेहरे की तरफ देखा और
  3268. 2:29:17शिप्रा से बोला।
  3269. 2:29:20रहने दो शिप्रा। लगता है तुम्हारे इस
  3270. 2:29:22दोस्त ने अपना इरादा बदल दिया है। इसका
  3271. 2:29:24लाल चेहरा बता रहा है कि अगर इसका कोई
  3272. 2:29:27इरादा था भी तो अब वो बदल गया है। मुख्तार
  3273. 2:29:31भाई को लग रहा था कि श्रवण जानबूझकर रजत
  3274. 2:29:33को उकसा रहा है ताकि वह अपना आपा खो दे और
  3275. 2:29:36जो रिश्ता उन्होंने मुश्किल से संभाला है
  3276. 2:29:39वो फिर बिगड़ जाए। लेकिन अब यह सब उनकी
  3277. 2:29:41सहनशक्ति से बाहर होने लगा था। वो शौर्य
  3278. 2:29:44के सामने आकर बोले ए लड़के मैं देख रहा
  3279. 2:29:48हूं कि तुम कुछ ज्यादा ही ऊंची उड़ान भरने
  3280. 2:29:51की कोशिश कर रहे हो। अभी तुम्हें पता नहीं
  3281. 2:29:54है कि तुम किस बिल में हाथ डाल रहे हो।
  3282. 2:29:58मैंने तुम्हें पंख दिए हैं तो मैं उन्हें
  3283. 2:30:01कतरना भी जानता हूं। शौर्य ने बिना डरे
  3284. 2:30:04जवाब दिया। एक कहावत है कायदे में रहोगे
  3285. 2:30:09तो फायदे में रहोगे। ऐसी कुछ सीख अपने भाई
  3286. 2:30:12को भी दे दीजिए। अगर वह लिमिट में रहेगा
  3287. 2:30:15तो यूं चेहरा लाल नहीं करना पड़ेगा। अब
  3288. 2:30:18उपहास उड़ाने की बारी शौर्य की थी। शिप्रा
  3289. 2:30:21यह सब सुनकर हैरान थी। अब उसे सच में
  3290. 2:30:24शौर्य की चिंता होने लगी थी। वो समझ नहीं
  3291. 2:30:26पा रही थी कि वो क्यों जानबूझकर मुख्तार
  3292. 2:30:29भाई से उलझ रहा है। कुछ ऐसा ही हाल राजदीप
  3293. 2:30:32राय का भी था। उन्हें भी शौर्य से इतनी
  3294. 2:30:34हिम्मत की उम्मीद नहीं थी। मुख्तार भाई
  3295. 2:30:37खुद को काबू में रखते हुए बोले कभी-कभी
  3296. 2:30:41ज्यादा बहादुरी दिखाना नुकसानदेह हो जाता
  3297. 2:30:44है। शायद यह बात तुमने सुनी नहीं है। शायद
  3298. 2:30:48तुम मुझे अच्छे से जानते नहीं हो। नहीं तो
  3299. 2:30:51मेरे सामने इतना बोलने की हिम्मत नहीं
  3300. 2:30:54करते।
  3301. 2:30:56शौर्य उनके बिल्कुल पास जाकर धीमे स्वर
  3302. 2:30:58में बोला।
  3303. 2:31:00मैं आपको अच्छे से जानता हूं पर आप मुझे
  3304. 2:31:03नहीं जानते। आपके पास खोने को बहुत कुछ है
  3305. 2:31:06[संगीत] लेकिन मेरे पास कुछ भी नहीं तो आप
  3306. 2:31:09मेरा क्या बिगाड़ लेंगे? वो आगे और
  3307. 2:31:12संजीदगी से बोला और हां जहां तक मेरी बात
  3308. 2:31:15है अगर मेरी सटक गई तो आपका क्या होगा
  3309. 2:31:19[संगीत] यह आप सोच भी नहीं सकते इसीलिए
  3310. 2:31:21मेरी एक सलाह है मुझसे उलझने की कोशिश मत
  3311. 2:31:24कीजिए क्योंकि मैं ऐसा भवरा हूं अगर मैंने
  3312. 2:31:28डंक मार दिया तो उसकी दवा पूरी दुनिया
  3313. 2:31:30[संगीत] में नहीं मिलेगी।
  3314. 2:31:32शौर्य की आवाज इतनी धीमी थी कि शायद ही
  3315. 2:31:34किसी और ने सुनी हो। लेकिन मुख्तार भाई के
  3316. 2:31:37चेहरे के बदलते रंग ने सब कुछ बयां कर
  3317. 2:31:39दिया। एक पल के लिए जैसे उनके शरीर में भी
  3318. 2:31:42झुरझुरी दौड़ गई। तभी राधिका के पिता
  3319. 2:31:45राजकुमार टंडन जो अब तक [संगीत] चुपचाप सब
  3320. 2:31:48देख रहे थे आगे आए और माहौल संभालने की
  3321. 2:31:51कोशिश करते हुए बोले। अरे मुख्तार भाई आप
  3322. 2:31:54कहां इस बच्चे के मुंह लग रहे हैं। आजकल
  3323. 2:31:56के बच्चों को तहजीब कहां पता? उन्होंने
  3324. 2:31:59पास खड़े वेटर से एक ड्रिंक उठाई और
  3325. 2:32:01मुख्तार भाई की तरफ बढ़ाते हुए कहा,
  3326. 2:32:04"लीजिए, यह ड्रिंक लीजिए, आपको पसंद
  3327. 2:32:06आएगी।" मुख्तार भाई की भाई गिरी को आज
  3328. 2:32:09पहली बार किसी ने सरेआम बेइज्जत किया था।
  3329. 2:32:12आज से पहले कभी किसी ने उनके सामने इतना
  3330. 2:32:14बोलने की हिम्मत नहीं की थी। पर आज यह
  3331. 2:32:17लड़का ना सिर्फ उनके सामने खड़े होने की
  3332. 2:32:19हिम्मत कर रहा था, बल्कि उनसे आंख में आंख
  3333. 2:32:22मिलाकर धमका भी रहा था। शौर्य से निपटने
  3334. 2:32:25के लिए ना तो यह जगह सही थी ना [संगीत] ही
  3335. 2:32:28समय। इसीलिए मुख्तार भाई ने मन में निश्चय
  3336. 2:32:31कर लिया कि वे शौर्य को बाद में सबक जरूर
  3337. 2:32:33सिखाएंगे और ऐसा सिखाएंगे कि वो जिंदगी भर
  3338. 2:32:36कभी भूल नहीं पाएगा। वहीं राजकुमार टंडन
  3339. 2:32:39समझ रहे थे कि मुख्तार भाई को कंट्रोल
  3340. 2:32:42करना जरूरी है। नहीं तो स्थिति हाथ से
  3341. 2:32:44निकल सकती है। इसीलिए वह बीच में आकर
  3342. 2:32:47मुख्तार भाई को अलग ले गए। दूसरी तरफ जब
  3343. 2:32:50राधिका ने यह महसूस किया कि कुछ और नया
  3344. 2:32:52बखेड़ा ना शुरू हो जाए। इसीलिए वह जल्दी
  3345. 2:32:54से शौर्य के पास पहुंची और बोली अब तो
  3346. 2:32:58आपका गिफ्ट आ गया जीजू अब तो मैं देख सकती
  3347. 2:33:00हूं। देखिए ना मैंने आपके दिए गिफ्ट के
  3348. 2:33:04लिए शिप्रा का दिया गिफ्ट भी वापस कर
  3349. 2:33:06दिया। अब और ज्यादा सस्पेंस क्रिएट किए
  3350. 2:33:08बिना सबको दिखा दीजिए कि आपने मेरे
  3351. 2:33:10[संगीत] लिए क्या गिफ्ट पसंद किया है।
  3352. 2:33:13शौर्य राधिका की जल्दीबाजी देखकर
  3353. 2:33:15मुस्कुराते हुए बोला, "हां जरूर। यह मैंने
  3354. 2:33:18तुम्हारे लिए ही मंगाया है। तो अब तुम देख
  3355. 2:33:20सकती हो। इतना बोलकर शौर्य ने गिफ्ट का एक
  3356. 2:33:24बॉक्स राधिका की तरफ बढ़ा दिया। राधिका ने
  3357. 2:33:26जल्दी से वो गिफ्ट अपने हाथ में लिया और
  3358. 2:33:29बॉक्स में से एक छोटी सी डिब्बी निकाल कर
  3359. 2:33:31सबके सामने लहराई। राधिका को खुद यकीन
  3360. 2:33:34नहीं था कि उसमें कोई बहुत बढ़िया गिफ्ट
  3361. 2:33:36होगा। पर वो देखना चाहती थी कि आखिर इस
  3362. 2:33:39कंगले ने उसके लिए क्या मंगवाया है। अभी
  3363. 2:33:42वो उस डब्बी को खोलने वाली थी कि तभी उसे
  3364. 2:33:44रजत की आवाज सुनाई दी। देखना राधिका कहीं
  3365. 2:33:48इस गिफ्ट को देखकर तुम्हारा दिल तुम्हारे
  3366. 2:33:50शरीर से बाहर ना आ जाए। इस पर राधिका कुछ
  3367. 2:33:53बोली तो नहीं पर वो मुस्कुरा कर रजत की
  3368. 2:33:55तरफ देखी जैसे वो उससे कह रही हो कि तुम
  3369. 2:33:58चिंता मत करो। देखो अभी मैं इस भिखारी की
  3370. 2:34:01कैसे धज्जियां उड़ाती हूं। दूसरी तरफ
  3371. 2:34:03शिपरा भी टकटकी लगाए राधिका की ओर ही देख
  3372. 2:34:06रही थी। वो भी जानने को उत्सुक थी कि आखिर
  3373. 2:34:09शौर्य ने राधिका के लिए क्या गिफ्ट मंगाया
  3374. 2:34:11है। वो जानती थी कि राधिका इतना ज्यादा
  3375. 2:34:14हाइप इसीलिए क्रिएट कर रही है कि उसे
  3376. 2:34:16गिफ्ट खोलने के बाद यह भी दिखाना था कि
  3377. 2:34:19खोदा पहाड़ और निकली चुिया। वहां पर सिर्फ
  3378. 2:34:22राधिका ही ऐसी नहीं थी जो शौर्य का मजाक
  3379. 2:34:24बनाना चाहती थी। उसके अलावा भी नैना राय,
  3380. 2:34:28बृजभूषण राय, सरला राय और इन [संगीत] सबके
  3381. 2:34:30अलावा मुख्तार भाई और रजत तो थे ही जो
  3382. 2:34:33शौर्य का मजाक बनते देखना चाहते थे।
  3383. 2:34:36अब और कितना सस्पेंस क्रिएट करोगी राधिका।
  3384. 2:34:39अब दिखा भी दो कि हमारे प्यारे जीजू ने
  3385. 2:34:41क्या गिफ्ट दिया है तुम्हें। युविका अब और
  3386. 2:34:44ज्यादा इंतजार नहीं कर पा रही थी। तभी
  3387. 2:34:47राधिका सबको सुनाते हुए बोली तो फिर ठीक
  3388. 2:34:50है। मैं अब इस बॉक्स को खोलने जा रही हूं।
  3389. 2:34:53इतना बोलकर राधिका ने उस बॉक्स को खोल
  3390. 2:34:56दिया। शौर्य को पार्टी में इनवाइट करने का
  3391. 2:34:59राधिका का प्लान। अब राय परिवार की शिप्रा
  3392. 2:35:02विरोधी महिलाओं की एक सोची समझी साजिश नजर
  3393. 2:35:05आ रही थी। होटल राजकमल के पार्टी हॉल के
  3394. 2:35:07माहौल को देखकर ऐसा लग रहा था मानो राधिका
  3395. 2:35:11ने पार्टी बर्थडे सेलिब्रेट करने के लिए
  3396. 2:35:13नहीं बल्कि शिप्रा और शौर्य को नीचा
  3397. 2:35:15दिखाकर सबके सामने उनका मजाक उड़ाने के
  3398. 2:35:18उद्देश्य से दी है। राधिका यह भी भूल गई
  3399. 2:35:21थी कि उसे केक काटना था। वो तो रजत युविका
  3400. 2:35:24नैना जी के साथ मिलकर शिप्रा और शौर्य को
  3401. 2:35:27काटने में लगी थी। पार्टी हॉल में कहीं
  3402. 2:35:29निगाहों में बेताबी थी तो कहीं धड़कनों
  3403. 2:35:32में तूफान क्योंकि कुछ ही पलों में शौर्य
  3404. 2:35:34के गिफ्ट बॉक्स का रहस्य उजागर होने वाला
  3405. 2:35:36था। हॉल में सबको दिखाते हुए राधिका ने
  3406. 2:35:39शौर्य का गिफ्ट बॉक्स खोल दिया और जैसे ही
  3407. 2:35:42बॉक्स खुला राधिका की निगाह उसमें रखी
  3408. 2:35:44आइटम पर ही जमी रह गई। कुछ पलों के लिए
  3409. 2:35:48हॉल में सन्नाटा सा छा गया। तभी एक आवाज
  3410. 2:35:51ने सन्नाटे को [संगीत] तोड़ा।
  3411. 2:35:54क्या हुआ? ऐसा क्या देख लिया कि तुम तो
  3412. 2:35:56बुद्धी बन गई। जरा हमें भी तो दीदार कराओ।
  3413. 2:36:00युविका की यह हल्की सी मुस्कुराहट भरी
  3414. 2:36:02आवाज जैसे पूरे माहौल को चीरती हुई
  3415. 2:36:04[संगीत] निकल गई। उसकी आंखों में शरारत
  3416. 2:36:07थी। उसे लगा था कि बॉक्स में जरूर कुछ ऐसा
  3417. 2:36:10होगा जिसे दिखाने में भी राधिका को शर्म आ
  3418. 2:36:12रही होगी। शिप्रा की भी धड़कन बेकाबू हो
  3419. 2:36:15रही थी। यह सोच कर [संगीत] कि ऐसा क्या
  3420. 2:36:17देख लिया राधिका ने कि वह बुद्धी बन गई
  3421. 2:36:20है। राधिका की हालत भी वैसी नहीं थी जैसे
  3422. 2:36:24किसी लड़की की तब होती है जब उसे कोई
  3423. 2:36:26खूबसूरत गिफ्ट मिलता है। उसकी आंखें पूरी
  3424. 2:36:29तरह फैल चुकी थी। होंठ हल्के खुले हुए और
  3425. 2:36:32हाथ जैसे किसी अनमोल चीज को थामे कांप रहे
  3426. 2:36:34हो। उसकी उंगलियों में एक पर्ल नेकलेस था
  3427. 2:36:37और वो भी कोई साधारण नेकलेस नहीं।
  3428. 2:36:39फ्लेयर्ड ब्लू बटरफ्लाई नेकलेस। जिसके
  3429. 2:36:42बीचोंबीच जड़ा हुआ था [संगीत] एक चमकता
  3430. 2:36:44हुआ खूबसूरत डायमंड। उसकी चमक इतनी तेज थी
  3431. 2:36:48कि जैसे आसपास की रोशनी भी उसके आगे फीकी
  3432. 2:36:50पड़ गई हो। यह नेकलेस राधिका को बुध बनाने
  3433. 2:36:53के लिए काफी था। पूरा हॉल एक पल के लिए
  3434. 2:36:56जैसे थम गया। राधिका ने कुछ नहीं कहा। बस
  3435. 2:37:00धीरे से अपनी उंगली से नेकलेस का एक सिरा
  3436. 2:37:02पकड़ा [संगीत] और उसे हवा में उठा दिया।
  3437. 2:37:05हॉल में कुछ पल के लिए खामोशी पसर गई। जो
  3438. 2:37:08भी वहां मौजूद था सबकी आंखें उसी नेकलेस
  3439. 2:37:11पर टिक गई। युविका के चेहरे से मुस्कान
  3440. 2:37:13गायब हो गई। वो तेजी से आगे बढ़ी और बिना
  3441. 2:37:16कुछ कहे राधिका के हाथ से नेकलेस ले लिया।
  3442. 2:37:20ये क्या यह सच है? उसकी आवाज कांप रही थी।
  3443. 2:37:24उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि श्रवण
  3444. 2:37:27इतना महंगा गिफ्ट दे सकता है। शिप्रा भी
  3445. 2:37:30चुप थी। पर उसके मन में तूफान चल रहा था।
  3446. 2:37:33हैरानी, राहत और कहीं ना कहीं एक हल्की सी
  3447. 2:37:36ईर्ष्या इतना खूबसूरत नेकलेस राधिका के
  3448. 2:37:40लिए। अचानक उसे याद आया वेट्रेस ने दो
  3449. 2:37:43बॉक्स दिए थे और उसने साफ कहा था एक आपकी
  3450. 2:37:46वाइफ के लिए है। शिप्रा का दिल अचानक तेज
  3451. 2:37:49धड़कने लगा।
  3452. 2:37:52तो क्या श्रवण मेरे लिए भी? उसका मन बॉक्स
  3453. 2:37:55को देखने के लिए बेचैन हो उठा। पर वो
  3454. 2:37:57शौर्य को बोल भी नहीं सकती थी कि उसने
  3455. 2:37:59उसके लिए जो गिफ्ट मंगाया है उसे दिखा दे।
  3456. 2:38:02वो सोच में ही थी। तभी किसी ने उसकी बाह
  3457. 2:38:05पकड़ कर झंझोड़ दिया।
  3458. 2:38:07शिप्रा अचानक उसने मुड़कर देखा तो बीना जी
  3459. 2:38:10उसके पास खड़ी थी। उनकी आवाज फुसफुसाहट
  3460. 2:38:13में थी। लेकिन उसमें घबराहट साफ झलक रही
  3461. 2:38:16थी। यह क्या है? श्रवण इतना महंगा नेकलेस
  3462. 2:38:19खरीदने के लिए पैसे कहां से लाया? शिप्रा
  3463. 2:38:22ने धीरे से सिर हिलाया। मां, मुझे भी कुछ
  3464. 2:38:26नहीं पता। उधर भीड़ में फुसफुसाहट शुरू हो
  3465. 2:38:29चुकी थी और बीच में खड़ा शौर्य बस
  3466. 2:38:32मुस्कुरा रहा था। लेकिन हर कोई चुप रहने
  3467. 2:38:34वाला नहीं था। रजत जो अभी तक बड़ी-बड़ी
  3468. 2:38:37बातें कर रहा था, अब कुछ सेकंड के लिए
  3469. 2:38:39खामोश जरूर हुआ। पर फिर उसके चेहरे पर एक
  3470. 2:38:42अजीब सी मुस्कान आ गई। वो आगे बढ़ा और
  3471. 2:38:44राधिका के हाथ से नेकलेस लेकर बोला बहुत
  3472. 2:38:48बढ़िया अच्छा बेवकूफ बनाया है इस कंगले ने
  3473. 2:38:50सबको। रजत की बात सुनकर राधिका चौंकी।
  3474. 2:38:54क्या मतलब? रजत हंसा। ऐसी हंसी जिसमें तंज
  3475. 2:38:58था। तुम भी नहीं समझी। अरे यह नकली है।
  3476. 2:39:01रजत के दावे से एक बार फिर हॉल में
  3477. 2:39:04सन्नाटा छा गया। वो फिर रुक कर बोला। यह
  3478. 2:39:08कोई असली नेकलेस नहीं है। रेडी पटरी पर
  3479. 2:39:10मिल जाता है 500-600 में। राधिका की भों
  3480. 2:39:14सिकुड़ गई और वो बोली पर देखकर तो नहीं
  3481. 2:39:17लगता। इस पर रजत ने कंधे उचकाए। अगर इतनी
  3482. 2:39:20आसानी से फर्क समझ में आ जाए तो बनाने
  3483. 2:39:23वालों का धंधा कैसे चलेगा।
  3484. 2:39:25उसकी बात धीरे-धीरे असर करने लगी। राधिका
  3485. 2:39:28की आंखों में अब शक उतर आया था। वो पलटी
  3486. 2:39:32और सीधा शौर्य की तरफ देखा और बोली क्यों
  3487. 2:39:35जीजू बेवकूफ बनाने के लिए मैं ही मिली थी?
  3488. 2:39:38शौर्य उसकी बात सुनकर मुस्कुराया और बोला
  3489. 2:39:41आपने यह कैसे पक्का कर लिया [संगीत] कि
  3490. 2:39:43मैंने जो गिफ्ट आपको दिया वो नकली है। तो
  3491. 2:39:47आपको क्या लगता है कि रजत मुझसे झूठ
  3492. 2:39:49बोलेगा? राधिका रजत की तरफ देखती हुई
  3493. 2:39:52बोली। तभी शौर्य रजत का मजाक उड़ाने वाले
  3494. 2:39:55भाव में बोला।
  3495. 2:39:56क्या यह कहीं का जहरी है जो इसने देखकर
  3496. 2:39:59अंदाजा लगा लिया कि यह नेकलेस नकली है? बस
  3497. 2:40:03यही रजत भड़क गया। ओए भिखारी तुझे पता भी
  3498. 2:40:07है असली पर्ल नेकलेस की कीमत क्या होती
  3499. 2:40:09है? कभी देखे भी हैं इतने पैसे? शौर्य
  3500. 2:40:12हल्के से मुस्कुराया और बोला, हाथ कंगन को
  3501. 2:40:15आरसी क्या और पढ़े लिखे को फारसी क्या?
  3502. 2:40:18मिस राधिका, ज्वेलरी का बॉक्स आपके हाथ
  3503. 2:40:21में है। उसमें इसके बिल के साथ गारंटी
  3504. 2:40:24कार्ड भी होगा। क्यों ना आप वहीं से
  3505. 2:40:26कंफर्म कर लें कि यह नेकलेस नकली है या
  3506. 2:40:28असली। शौर्य के चेहरे का कॉन्फिडेंस देखकर
  3507. 2:40:31राधिका समझ गई थी कि [संगीत] यह नेकलेस
  3508. 2:40:33नकली नहीं हो सकता। फिर भी उसने जल्दी से
  3509. 2:40:36बॉक्स के अंदर से बिल की कॉपी निकाली।
  3510. 2:40:38सबसे पहले उसका ध्यान प्राइस पर गया।
  3511. 2:40:41प्राइस था ₹ लाख। यह प्राइस देखकर राधिका
  3512. 2:40:45की आंखें और चौड़ी हो गई। मन ही मन उसने
  3513. 2:40:48सोचा क्या श्रवण की इतनी औकात है कि वह
  3514. 2:40:51किसी को 3 लाख का गिफ्ट दे सके। फिर उसने
  3515. 2:40:54बिल पर सेलर का नाम देखा तो उसके सारे
  3516. 2:40:56अरमान ध्वस्त हो गए। अविश्वास की अब कोई
  3517. 2:40:59गुंजाइश ही नहीं बची थी क्योंकि बिल पर
  3518. 2:41:01जिस सेलर का नाम था उस पर राधिका डाउट कर
  3519. 2:41:04ही नहीं सकती थी क्योंकि वह समझ सकती थी
  3520. 2:41:06कि श्रवण कुछ भी कर ले पर इतना बड़ा गैंबल
  3521. 2:41:09नहीं कर सकता था। अगर वह ऐसा करता तो उसकी
  3522. 2:41:12चोरी हाथों हाथ पकड़ी जाती। अब राधिका को
  3523. 2:41:15खुद पर अफसोस हो रहा था कि उसने इतनी
  3524. 2:41:17आसानी से रजत की बातों पर भरोसा क्यों कर
  3525. 2:41:20लिया। जब रजत ने राधिका को खामोश देखा तो
  3526. 2:41:23उसने पूछा तुम चुप क्यों हो? आखिर ऐसा
  3527. 2:41:26क्या देख लिया तुमने उस बिल में? कहीं यह
  3528. 2:41:29भी इस ज्वेलरी की तरह नकली तो नहीं है?
  3529. 2:41:32राधिका ने उसकी बात सुनकर गंभीर स्वर में
  3530. 2:41:34कहा।
  3531. 2:41:36यह कैसे हो सकता है? यह पेंडेंट तो होटल
  3532. 2:41:38राजकमल के ज्वेलरी आउटलेट से खरीदा गया
  3533. 2:41:40है। अगर यह नकली हुआ तो तुरंत पता चल
  3534. 2:41:43जाएगा क्योंकि हम अभी उसी होटल में हैं।
  3535. 2:41:46राधिका की बात सुनकर रजत को जोर का झटका
  3536. 2:41:49लगा। उसे यकीन ही नहीं [संगीत] हुआ कि
  3537. 2:41:51शौर्य ने इतनी महंगी ज्वेलरी यहीं से
  3538. 2:41:53खरीदी है। दरअसल होटल राजकमल के रिसेप्शन
  3539. 2:41:57एरिया में एक छोटा सा ज्वेलरी आउटलेट था।
  3540. 2:41:59जहां डिजाइनर और एंटीक ज्वेलरी रखी जाती
  3541. 2:42:02थी। होटल में आने वाले मेहमान अक्सर वहीं
  3542. 2:42:05से खरीदारी करते थे। राजकमल के नाम की
  3543. 2:42:07मोहर के बाद उस ज्वेलरी की ऑथेंटिसिटी पर
  3544. 2:42:10कोई सवाल नहीं उठ सकता। अब रजत के पास
  3545. 2:42:13बोलने के लिए कुछ बचा ही नहीं था। शौर्य
  3546. 2:42:16ने जब देखा कि रजत की बोलती बंद हो गई है
  3547. 2:42:18तो वह हल्की मुस्कान के साथ बोला क्या
  3548. 2:42:21हुआ? अब चुप क्यों हो गए? अभी तो कह रहे
  3549. 2:42:24थे कि पेंडेंट नकली है। चलो ज्यादा दूर
  3550. 2:42:28जाने की जरूरत भी नहीं है। यहीं पर चेक कर
  3551. 2:42:30लो असली है या नकली। रजत गुस्से में शौर्य
  3552. 2:42:33को घूरता रहा। लेकिन उसके पास कोई जवाब
  3553. 2:42:36[संगीत] नहीं था। तभी मुख्तार भाई से ये
  3554. 2:42:38सब बर्दाश्त नहीं हुआ। वो आगे बढ़े और
  3555. 2:42:40बोले सोचने वाली बात यह है कि इस भिखारी
  3556. 2:42:44के पास इतना पैसा आया कहां से? जरूर इसने
  3557. 2:42:49कोई गलत तरीका अपनाया [संगीत] होगा। बताओ
  3558. 2:42:52इतना महंगा नेकलेस खरीदने के लिए तुम्हारे
  3559. 2:42:55पास पैसे कहां से आए? उनकी बात सुनकर
  3560. 2:42:59राधिका को भी मौका मिल गया। वो तुरंत बोली
  3561. 2:43:02हां श्रवण तुम्हें यह बताना ही पड़ेगा कि
  3562. 2:43:05इतने पैसे तुमने कैसे जुटाए। शौर्य ने गौर
  3563. 2:43:08किया कि जो राधिका अभी तक उसे जीजू कह रही
  3564. 2:43:10थी अब [संगीत] सीधे नाम से पुकार रही है।
  3565. 2:43:12शौर्य मुस्कुराते हुए सबके बदलते चेहरे को
  3566. 2:43:15देखता रहा। युविका भी कहां पीछे रहने वाली
  3567. 2:43:18थी। वो भी आगे आती हुई बोली हां श्रवण अब
  3568. 2:43:21तुम्हें जवाब देना ही पड़ेगा। आखिर इतना
  3569. 2:43:23महंगा नेकलेस तुमने कैसे खरीदा? लोगों के
  3570. 2:43:27तेवर बदलते देख शिप्रा भी मन ही मन सोचने
  3571. 2:43:29लगी। कैसे लोग हैं ये? इनकी सोच को बदलने
  3572. 2:43:33में एक पल भी नहीं लगता।
  3573. 2:43:35जहां वो सोच रही थी कि श्रवण के सस्ते
  3574. 2:43:37गिफ्ट को देखकर राधिका उसका मजाक बनाएगी,
  3575. 2:43:40वहीं अब उल्टा हो रहा था। सब लोग उसके
  3576. 2:43:43महंगे गिफ्ट को देखकर उसी पर सवाल उठा रहे
  3577. 2:43:45थे। हालांकि यह सवाल उसे भी परेशान कर रहा
  3578. 2:43:48था कि आखिर श्रवण इतने पैसे लाया कहां से?
  3579. 2:43:51लेकिन वो इस बात के लिए उसे सबके सामने
  3580. 2:43:54घेरने वालों में से नहीं थी। हां, बाद में
  3581. 2:43:56वो जरूर जानना चाहेगी कि उसने यह सब कैसे
  3582. 2:43:59किया। पर जो बात उसे सबसे ज्यादा चौंका
  3583. 2:44:02रही थी वो थी श्रवण का बदला हुआ रूप। कुछ
  3584. 2:44:05दिनों पहले का श्रवण और आज का श्रवण।
  3585. 2:44:08दोनों में जमीन आसमान का फर्क था। आज वो
  3586. 2:44:11आत्मविश्वास से भरा हुआ था। वो ऐसे सबका
  3587. 2:44:14सामना कर रहा था जैसे वहां मौजूद कोई भी
  3588. 2:44:16उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकता। आखिर कहां से
  3589. 2:44:19आया श्रवण के अंदर इतना कॉन्फिडेंस? जिस
  3590. 2:44:22मुख्तार भाई के सामने लोग बोलने से कतराते
  3591. 2:44:24थे। उसी को वो ऐसे जवाब दे रहा था जैसे
  3592. 2:44:27उसकी कोई औकात ही ना हो। और सबसे खास बात
  3593. 2:44:31उसके हर जवाब में ऐसा वजन था कि सामने
  3594. 2:44:34वाले की बोलती खुद ब खुद बंद हो जाती थी।
  3595. 2:44:36अब शिप्रा बस यह देखना चाहती थी कि इस
  3596. 2:44:39बदली हुई स्थिति में श्रवण क्या करेगा।
  3597. 2:44:42इसी बीच जब शौर्य ने देखा कि वहां मौजूद
  3598. 2:44:45हर इंसान की नजर उसी पर टिकी हुई है तो वह
  3599. 2:44:48हल्की मुस्कान के साथ बोला।
  3600. 2:44:51कितने दोगले इंसान हैं आप सब। शौर्य की यह
  3601. 2:44:55बात सुनते ही बलवंत राय ने उसे टोक दिया।
  3602. 2:44:58श्रवण यह क्या बदतमीजी है? तुम क्या बोल
  3603. 2:45:02रहे हो? तुम्हें समझ में आ रहा है? शिप्रा
  3604. 2:45:05भी उसकी बात सुनकर चौंक गई। लेकिन शौर्य
  3605. 2:45:08बिना रुके उसी जहरीली मुस्कान के साथ
  3606. 2:45:10बोला,
  3607. 2:45:11"हां, मुझे बहुत अच्छे से समझ आ रहा है।"
  3608. 2:45:14मैंने कुछ गलत भी नहीं कहा। फिर उसने सबकी
  3609. 2:45:17तरफ देखते हुए अपनी बात आगे बढ़ाई। मिस
  3610. 2:45:20राधिका यहां जितने भी गिफ्ट्स का ढेर लगा
  3611. 2:45:23हुआ है उनमें से कितने लोगों से आपने यह
  3612. 2:45:26पूछा कि उन्होंने यह गिफ्ट कैसे खरीदा या
  3613. 2:45:29उनके पास पैसे कहां से आए? वो एक पल के
  3614. 2:45:33लिए रुका। फिर उसकी नजर सीधे राधिका की
  3615. 2:45:35आंखों में जाकर टिक गई और वो फिर बोला जब
  3616. 2:45:39आपने किसी और से सवाल नहीं किया तो मुझसे
  3617. 2:45:42क्यों? शौर्य का जवाब सुनकर राधिका बगले
  3618. 2:45:45झांकने लगी। उसकी हिम्मत नहीं हुई कि वो
  3619. 2:45:48शौर्य से नजर भी मिला सके। पर शौर्य यहीं
  3620. 2:45:50नहीं रुका। वो आगे बोला [संगीत] चलो मैं
  3621. 2:45:53कहता हूं कि मैंने यह पैसे चोरी करके कमाए
  3622. 2:45:56हैं और उसी से ये गिफ्ट खरीदा है। तो उससे
  3623. 2:45:58क्या बदल जाएगा? क्या इस गिफ्ट की वैल्यू
  3624. 2:46:01कम हो जाएगी? और दूसरी बात अभी थोड़ी देर
  3625. 2:46:04पहले आप मुझे जीजू-जीजू बोलते हुए एक बार
  3626. 2:46:07भी हिचकिचा नहीं रही थी। और अब अचानक मैं
  3627. 2:46:10आपके जीजू से श्रवण हो गया। फिर शौर्य
  3628. 2:46:14थोड़ी देर रुक कर बोला। चलिए अगर आपको कोई
  3629. 2:46:17भी गिफ्ट लेने से पहले यह जानने का शौक है
  3630. 2:46:20कि वो कैसे खरीदा गया और यह जाने बिना आप
  3631. 2:46:23वो गिफ्ट नहीं लेती तो मेहरबानी करके आप
  3632. 2:46:26मुझे मेरा दिया हुआ गिफ्ट वापस कर दीजिए
  3633. 2:46:29क्योंकि मैं आपको कोई गिफ्ट दे सकूं इतनी
  3634. 2:46:32औकात मेरी नहीं है। इतना बोलकर शौर्य ने
  3635. 2:46:36राधिका की तरफ अपना हाथ बढ़ाया ताकि वह
  3636. 2:46:38उससे अपना गिफ्ट वापस ले सके। अचानक इस
  3637. 2:46:41बदली हुई स्थिति में राधिका को समझ नहीं
  3638. 2:46:44आया कि क्या उसे सचमुच श्रवण को उसका
  3639. 2:46:46गिफ्ट वापस करना पड़ेगा। उसे श्रवण का
  3640. 2:46:49दिया हुआ गिफ्ट बहुत पसंद आया था। [संगीत]
  3641. 2:46:52वो इसे अपने हाथ से आसानी से जाने नहीं
  3642. 2:46:54देना चाहती थी। उसे खुद पर अफसोस होने लगा
  3643. 2:46:57कि शिप्रा को नीचा दिखाने के चक्कर में अब
  3644. 2:46:59वो शौर्य के दिए गिफ्ट से भी हाथ धोने
  3645. 2:47:02वाली थी। उसे इस बात का भी अफसोस होने लगा
  3646. 2:47:05कि वो बिना सोचे समझे सिर्फ शौर्य को नीचा
  3647. 2:47:08दिखाने के चक्कर में रजत की बातों में आकर
  3648. 2:47:10श्रवण को कुछ भी सुनाई जा रही थी। शौर्य
  3649. 2:47:14का हाथ अब भी आगे बढ़ा हुआ था और उसकी
  3650. 2:47:17आंखों में एक ऐसी शांति थी जो तूफान से
  3651. 2:47:20पहले होती है। होटल राजकमल के पार्टी हॉल
  3652. 2:47:23में अब एक तरफ सीना तान कर खड़ा था शौर्य
  3653. 2:47:25का सच। तो दूसरी ओर था नेकलेस के मुंह में
  3654. 2:47:28मचलता राधिका का मौका परस्त लालच। शौर्य
  3655. 2:47:32के आज के जवाबी हमलों ने ना केवल शिप्रा
  3656. 2:47:34को नीचा दिखाने की राधिका गैंग की साजिश
  3657. 2:47:37को नाकाम कर दिया था बल्कि सवाल करने वाले
  3658. 2:47:40हर एक शख्स को आईना भी दिखा दिया था।
  3659. 2:47:42शौर्य के तर्क और शब्दों के तीर इतने सटीक
  3660. 2:47:45थे कि उनके उत्तर किसी के पास नहीं थे।
  3661. 2:47:48वहीं मौजूद बलवंत राय को भी शौर्य का जवाब
  3662. 2:47:50सुनकर लगा कि वह भी पूर्वाग्रह से ग्रसित
  3663. 2:47:53होकर शौर्य के साथ गलत व्यवहार कर रहे थे।
  3664. 2:47:56उसने कुछ भी तो गलत नहीं कहा था। जो उसने
  3665. 2:47:58महसूस किया वही तो कहा। सच में सब उसके
  3666. 2:48:02साथ सौतेला व्यवहार ही तो कर रहे थे।
  3667. 2:48:04दूसरी तरफ शिप्रा भी शौर्य का जवाब सुनकर
  3668. 2:48:07यह सोचने को मजबूर हो गई थी कि क्या सच
  3669. 2:48:09में शौर्य वही है जो [संगीत] उसे दिखाई दे
  3670. 2:48:12रहा है या इसकी असलियत कुछ और है पर जिस
  3671. 2:48:15तरह से शौर्य ने राधिका को जवाब दिया था
  3672. 2:48:17उस बात से वह खुश थी। अगर कोई खुश नहीं था
  3673. 2:48:20तो वह थी नैना बुआ। राधिका को दिया हुआ
  3674. 2:48:23गिफ्ट आसानी से शौर्य को वापस हो जाए यह
  3675. 2:48:26बात उन्हें हजम नहीं हो रही थी। जब
  3676. 2:48:28उन्होंने देखा कि शौर्य राधिका से अपना
  3677. 2:48:30दिया हुआ गिफ्ट लेने वाला है तो वह बीच
  3678. 2:48:32में आकर बोली अरे श्रवण बेटे कोई अपना
  3679. 2:48:36दिया हुआ गिफ्ट भला वापस लेता है क्या
  3680. 2:48:39वैसे भी राधिका का वो मतलब नहीं था जो तुम
  3681. 2:48:41समझ रहे हो उसने तो किसी और की बातों में
  3682. 2:48:44आकर तुम्हें कुछ बोल दिया बच्ची है यह
  3683. 2:48:47उसकी नासमझी थी पर वो तुम्हें हर्ट नहीं
  3684. 2:48:50करना चाहती थी जब राधिका ने देखा कि उसकी
  3685. 2:48:53मां उसके सपोर्ट में सामने आ गई है तो
  3686. 2:48:55उसने तुरंत ही पलटी मारी और शौर्य के
  3687. 2:48:57सामने ने मासूम बनते हुए बोली। हां जीजू
  3688. 2:49:01मां सही कह रही है। मेरा आपका दिल दुखाने
  3689. 2:49:03का कोई इरादा नहीं था। वो तो मैं औरों की
  3690. 2:49:05बातों में आकर आपकी बात पर यकीन नहीं कर
  3691. 2:49:08पाई। पर अब मैं शर्मिंदा हूं। शिप्रा ने
  3692. 2:49:11जब राधिका की बात सुनी तो मन ही मन गुस्से
  3693. 2:49:13में बोली।
  3694. 2:49:15कितनी बेशर्म है यह। इसने कितनी जल्दी
  3695. 2:49:17अपना रंग बदल लिया। इसे देखकर तो गिरगिट
  3696. 2:49:20भी शर्मा जाए। राधिका की बात सुनकर शौर्य
  3697. 2:49:23को भी आश्चर्य हुआ कि कितनी जल्दी वो अपनी
  3698. 2:49:25बात से पलट गई। एक तंज भरी मुस्कान शौर्य
  3699. 2:49:28के चेहरे पर नजर आने लगी। पर उसे अब
  3700. 2:49:31राधिका के मुंह से जीजू सुनकर अच्छा नहीं
  3701. 2:49:33लग रहा था। इसीलिए वो राधिका से बोला,
  3702. 2:49:36"मिस राधिका, आप मुझे यह जीजू कहना बंद कर
  3703. 2:49:39दीजिए।" अभी आप जैसे मुझे श्रवण कह कर
  3704. 2:49:42बुला रही थी, वही सही था। यह दिखावा मुझे
  3705. 2:49:44पसंद नहीं है।
  3706. 2:49:47आप ऐसा क्यों बोल रहे हैं जीजू? मैंने
  3707. 2:49:49सॉरी तो कहा। आप मेरी नादानी समझकर उन
  3708. 2:49:52बातों को भूल जाइए। शौर्य का व्यवहार
  3709. 2:49:55देखकर राधिका समझ गई कि शौर्य अब उससे
  3710. 2:49:57नेकलेस वापस करने की बात नहीं करने वाला।
  3711. 2:50:00दूसरी तरफ नैना बुआ जिन्होंने महसूस किया
  3712. 2:50:02कि अब शौर्य राधिका से गिफ्ट वापस करने की
  3713. 2:50:05बात छोड़ चुका है। वो शौर्य के करीब जाकर
  3714. 2:50:07उससे बोली श्रवण बेटे मैंने देखा उस
  3715. 2:50:10वेट्रेस ने तुम्हारे हाथ में दो गिफ्ट के
  3716. 2:50:13बॉक्स दिए थे। एक तो मैं समझती हूं कि
  3717. 2:50:15राधिका के लिए था। पर वो दूसरा बॉक्स
  3718. 2:50:18किसके लिए है?
  3719. 2:50:20तभी युविका शौर्य के हाथ में थमे उस बॉक्स
  3720. 2:50:22की तरफ देखते हुए बोली, "क्या बुआ, आपने
  3721. 2:50:26उस वेट्रेस की बात नहीं सुनी थी क्या? जब
  3722. 2:50:28उसने कहा था कि यह वाला गिफ्ट उसकी वाइफ
  3723. 2:50:30के लिए है। यानी कि हमारी शिप्रा के लिए।
  3724. 2:50:33युविका के दिमाग में अभी भी शरारत चल रही
  3725. 2:50:35थी। वो सोच रही थी कि श्रवण ने पहले ही
  3726. 2:50:38राधिका के गिफ्ट पर ₹3 लाख खर्च कर दिए
  3727. 2:50:41हैं। तो जरूर शिप्रा के लिए जो गिफ्ट उसने
  3728. 2:50:44लिया है, वह उतना महंगा नहीं होगा। और अगर
  3729. 2:50:46वह इस गिफ्ट को यहीं खुलवाने में कामयाब
  3730. 2:50:48रही तो जरूर शिप्रा के मन में जलन आ जाएगी
  3731. 2:50:52और हो सकता है उसे बेइज्जती भी फील हो और
  3732. 2:50:54वह पार्टी से चली जाए।
  3733. 2:50:57युविका की बात सुनकर नैना बुआ भी शरारत से
  3734. 2:50:59बाज नहीं आई और बनावटी अंदाज में बोली
  3735. 2:51:03क्या सच में ऐसा है? यह तो अच्छी बात है
  3736. 2:51:06कि श्रवण ने हमारी शिप्रा के लिए भी कोई
  3737. 2:51:08गिफ्ट [संगीत] लिया है। तो फिर उसे बॉक्स
  3738. 2:51:10में पैक रखने का क्या मतलब? आखिर हम भी तो
  3739. 2:51:13देखें कि श्रवण ने हमारी शिप्रा के लिए
  3740. 2:51:16क्या गिफ्ट मंगवाया है। शौर्य नहीं चाहता
  3741. 2:51:19था कि अभी वह गिफ्ट शिप्रा को दे क्योंकि
  3742. 2:51:21उसे नहीं पता था कि मेनका ने शिप्रा के
  3743. 2:51:24लिए कौन सा गिफ्ट लिया है। अगर वो गिफ्ट
  3744. 2:51:26राधिका को दिए गिफ्ट से सस्ता होगा तो
  3745. 2:51:28यहां पर लोगों को उसका मजाक बनाने का मौका
  3746. 2:51:30मिल जाएगा। लोग तुरंत दोनों गिफ्ट की
  3747. 2:51:33तुलना करने लगेंगे। इसीलिए वह चाहता था कि
  3748. 2:51:36पार्टी के बाद ही वो गिफ्ट शिप्रा को दे।
  3749. 2:51:38पर नैना राय ने इस समय शौर्य को शिप्रा को
  3750. 2:51:41एक गिफ्ट देने के लिए बोलकर उसके लिए धर्म
  3751. 2:51:43संकट की स्थिति पैदा कर दी। दूसरी तरफ
  3752. 2:51:46शिप्रा जो यह सब देख सुन रही थी जब उसने
  3753. 2:51:49[संगीत] देखा कि उसकी बुआ ने शौर्य को अभी
  3754. 2:51:51उसे गिफ्ट देने के लिए बोला है तो वह भी
  3755. 2:51:53अनकंफर्टेबल महसूस करने लगी। वो नहीं
  3756. 2:51:56चाहती थी कि शौर्य यहां सबके सामने उसे वह
  3757. 2:51:58गिफ्ट दे। उसे पता था कि अगर शौर्य यहां
  3758. 2:52:01पर उसको कोई गिफ्ट देता है तो लोग उसके
  3759. 2:52:03गिफ्ट की तुलना राधिका को दिए गिफ्ट से
  3760. 2:52:06करने लगेंगे। हालांकि उसके दिल में गिफ्ट
  3761. 2:52:08को लेकर हलचल भी थी और वह यह जानना भी
  3762. 2:52:10चाहती थी कि आखिर शौर्य उसके लिए क्या
  3763. 2:52:13गिफ्ट लाया है। पर माहौल को देखकर उसने
  3764. 2:52:16खुद को संभाला और बोली नहीं बुआ इसकी कोई
  3765. 2:52:19जरूरत नहीं है। अगर श्रवण मेरे लिए कोई
  3766. 2:52:22गिफ्ट लाया है तो मैं उससे बाद में ले
  3767. 2:52:24लूंगी पर अभी नहीं। पर नैना बुआ को यह बात
  3768. 2:52:27बर्दाश्त होने वाली कहां थी? अब तो वो हर
  3769. 2:52:30हाल में उस गिफ्ट को देखना चाहती थी जो
  3770. 2:52:32श्रवण शिप्रा के लिए लाया था। इसीलिए वो
  3771. 2:52:35शिप्रा को दोष देते हुए बोली इसका मतलब
  3772. 2:52:38तुम नहीं चाहती हो कि हम उस गिफ्ट को
  3773. 2:52:40देखें जो श्रवण तुम्हारे लिए लाया है। अरे
  3774. 2:52:43हम उसको तुमसे छीन थोड़ी ना लेंगे। हमें
  3775. 2:52:46तो यह देखकर अच्छा लगेगा कि श्रवण ने
  3776. 2:52:48तुम्हें कोई गिफ्ट दिया है। शौर्य को भी
  3777. 2:52:51नैना बुआ का यूं जिद करना अच्छा नहीं लग
  3778. 2:52:53रहा था। पर वो इसके लिए ज्यादा कुछ बोल
  3779. 2:52:55नहीं सकता था। वो समझ रहा था कि यह स्थिति
  3780. 2:52:58शिप्रा के लिए भी असहज होने वाली थी।
  3781. 2:53:00इसीलिए वह अभी गिफ्ट लेने से मना कर रही
  3782. 2:53:03थी और सही भी यही था क्योंकि यह राधिका की
  3783. 2:53:06बर्थडे पार्टी थी। इस भरी पार्टी में
  3784. 2:53:09शिप्रा को उसका गिफ्ट देना सही नहीं था।
  3785. 2:53:11जब राजदीप राय ने नैना को श्रवण से जिद
  3786. 2:53:13करते देखा तो वह सामने आते हुए बोले अरे
  3787. 2:53:17नैना तुम क्यों यह ज़िद पकड़े हुए हो कि
  3788. 2:53:19श्रवण अभी ही शिप्रा को गिफ्ट दे। हो सकता
  3789. 2:53:22है उसका कुछ अपना प्लान हो। इसलिए
  3790. 2:53:24तुम्हारा यह जिद करना सही नहीं है। जब
  3791. 2:53:27श्रवण को लगेगा कि यह शिप्रा को गिफ्ट
  3792. 2:53:29देने का सही समय है तो वह खुद ही दे देगा।
  3793. 2:53:32वैसे भी यह पार्टी राधिका की है ना कि
  3794. 2:53:34शिप्रा की। अपने पापा की बात सुनकर शिप्रा
  3795. 2:53:37ने राहत की सांस ली। पर नैना को राजदीप का
  3796. 2:53:40यूं बीच में आना अच्छा नहीं लगा। लेकिन वो
  3797. 2:53:43कुछ बोल नहीं सकती थी। उधर युविका को भी
  3798. 2:53:45लग रहा था कि अरमानों पर पानी फिर गया।
  3799. 2:53:48क्योंकि वो यह [संगीत] उम्मीद कर रही थी
  3800. 2:53:50कि उसकी बुआ की जिद के कारण श्रवण को उसका
  3801. 2:53:53गिफ्ट अभी ही शिप्रा को देना पड़ेगा। पर
  3802. 2:53:56युविका इतनी आसानी से हार नहीं मान सकती
  3803. 2:53:58थी। वो राजदीप राय के सामने आकर बोली क्या
  3804. 2:54:01चाचा जी आप भी कैसी बात कर रहे हैं? इससे
  3805. 2:54:04बढ़िया मौका और भला क्या होगा? जब हमारा
  3806. 2:54:07सारा परिवार यहां पर इकट्ठा है। हम सब भी
  3807. 2:54:09तो शिप्रा की खुशी में शामिल होना चाहते
  3808. 2:54:11हैं। आखिर हम भी तो देखें कि शिप्रा के
  3809. 2:54:14पति ने उसे पहला गिफ्ट क्या दिया है।
  3810. 2:54:18शौर्य सोचने लगा कि मेनका ने भी उसे कैसी
  3811. 2:54:21अजीब मुसीबत में डाल दिया है। क्या जरूरत
  3812. 2:54:24थी उसे शिप्रा के लिए भी गिफ्ट भेजने की?
  3813. 2:54:27पर अगले ही पल उसके दिमाग में आया कि
  3814. 2:54:29इसमें मेनका की क्या गलती है? उसने अपनी
  3815. 2:54:32तरफ से तो सब सही ही किया था। यह तो यहां
  3816. 2:54:35मौजूद युविका और नैना बुआ जैसे लोग हैं जो
  3817. 2:54:37जानबूझकर उसके लिए ऑकवर्ड स्थिति पैदा कर
  3818. 2:54:40रहे हैं। वो सोचने लगा कि स्थिति से कैसे
  3819. 2:54:42निपटा जाए। हालांकि राधिका का गिफ्ट देखकर
  3820. 2:54:46शौर्य को यकीन हो गया था कि मेनका इतनी
  3821. 2:54:48बेवकूफ नहीं हो सकती कि वो शिप्रा के लिए
  3822. 2:54:51राधिका से कम कीमत का गिफ्ट सेलेक्ट
  3823. 2:54:53करेगी। लेकिन एक अजीब सा डर उसे सबके
  3824. 2:54:56सामने गिफ्ट खोलने और शिप्रा को देने से
  3825. 2:54:58रोक रहा था। उसके दिमाग में [संगीत] एक ही
  3826. 2:55:01सवाल गूंज रहा था। अगर गलती से भी कोई चूक
  3827. 2:55:04हो गई तो यह सामने खड़ी घटिया मानसिकता
  3828. 2:55:07वाली महिलाएं शिप्रा को नीचा दिखाने में
  3829. 2:55:09कोई कसर नहीं छोड़ेंगी। और जो मकसद लेकर
  3830. 2:55:12वह पार्टी में आई हैं, वह आसानी से पूरा
  3831. 2:55:14हो जाएगा और वे बर्थडे से भी ज्यादा बड़ा
  3832. 2:55:16जश्न शिप्रा की हार का मनाएंगी। दूसरी तरफ
  3833. 2:55:20शिप्रा की दिली हालत भी कुछ ऐसी ही थी। पर
  3834. 2:55:23वो शौर्य की स्थिति को समझ रही थी। जब उसे
  3835. 2:55:26भी इससे निपटने का कोई तरीका नजर नहीं आया
  3836. 2:55:28तो वो शौर्य के पास गई और बोली,
  3837. 2:55:32क्या यह जो तुम्हारे हाथ में गिफ्ट है, यह
  3838. 2:55:34मेरे लिए है। शौर्य ने हां में सिर हिलाकर
  3839. 2:55:37अपनी सहमति जताई। शौर्य की सहमति देखकर
  3840. 2:55:40शिप्रा ने कहा, तो फिर ठीक है, तुम यह
  3841. 2:55:43गिफ्ट मुझे दे दो, मैं घर जाकर इसे देख
  3842. 2:55:45लूंगी। शिप्रा की बात सुनकर शौर्य ने राहत
  3843. 2:55:48की सांस ली और गिफ्ट शिप्रा की तरफ बढ़ा
  3844. 2:55:51दिया। पर यह बात नैना और युविका को गवारा
  3845. 2:55:54नहीं हुई। [संगीत] नैना बुआ शिप्रा के
  3846. 2:55:56सामने आकर बोली, "यह क्या बात हुई शिप्रा?
  3847. 2:55:59अगर श्रवण तुम्हें कोई गिफ्ट दे रहा है,
  3848. 2:56:01तो हमारे पूरे परिवार को भी तो पता होना
  3849. 2:56:04चाहिए कि उसने तुम्हें आखिर दिया क्या
  3850. 2:56:06है?"
  3851. 2:56:07जब शिप्रा ने महसूस किया कि उसकी बुआ इतनी
  3852. 2:56:10आसानी से हार नहीं मानने वाली है तो वह
  3853. 2:56:12थोड़े कड़े स्वर में बोली
  3854. 2:56:15आप कैसी बात कर रही हो बुआ यह हमारे और
  3855. 2:56:18श्रवण के बीच की पर्सनल चीज है आप क्यों
  3856. 2:56:20चाहती हैं कि मैं इसे सबके साथ शेयर करूं
  3857. 2:56:23शिप्रा की बात नैना बुआ को बुरी तो लगी पर
  3858. 2:56:26वो खिसियानी हंसी हंसते हुए बोली कैसी बात
  3859. 2:56:29करती हो शिप्रा बेटी मैं समझती हूं कि यह
  3860. 2:56:31तुम दोनों का पर्सनल मामला है पर हम
  3861. 2:56:34परिवार के लोगों की भी [संगीत] यह जानने
  3862. 2:56:36की इच्छा होती है कि आखिर हमारे बच्चों का
  3863. 2:56:38रिश्ता कैसा चल रहा है और फिर यह तो खुशी
  3864. 2:56:41की बात है तो इसमें छुपाने की क्या जरूरत
  3865. 2:56:44है? इस पर शिप्रा भावहीन चेहरे के साथ
  3866. 2:56:47बोली इसमें छुपाने जैसी कोई बात नहीं है
  3867. 2:56:50बुआ बस मैं नहीं चाहती कि मैं अपने और
  3868. 2:56:53श्रवण [संगीत] के बीच की चीज को सबसे साझा
  3869. 2:56:55करूं। बस इतनी सी बात है। मुझे लगता है अब
  3870. 2:56:58आपको मेरी बात समझ में आ गई होगी। अब नैना
  3871. 2:57:02राय के सामने और जिद करने की कोई वजह नहीं
  3872. 2:57:04बची। इसीलिए वह चुप हो गई। पर बहुत देर से
  3873. 2:57:07ये सब देख रहे बलवंत राय के मन की
  3874. 2:57:09जिज्ञासा भी चरम पर पहुंच गई थी। अब तो
  3875. 2:57:12उनकी भी इच्छा हो गई कि आखिर श्रवण ने
  3876. 2:57:14शिप्रा को क्या गिफ्ट दिया है। यही सोचकर
  3877. 2:57:17वो शिप्रा से बोले शिप्रा बेटी मैं समझता
  3878. 2:57:21हूं कि यह तुम दोनों के बीच का पर्सनल
  3879. 2:57:24मामला है। पर बच्चे हम परिवार के लोग भी
  3880. 2:57:27जानना चाहते हैं कि तुम्हारे लिए श्रवण के
  3881. 2:57:30दिल में [संगीत] कैसी फीलिंग है। और इसे
  3882. 2:57:32जानने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि यह
  3883. 2:57:35देखा जाए कि वह तुम्हारी कितनी परवाह करता
  3884. 2:57:38है। अगर वह तुम्हारे लिए कुछ लाता है तो
  3885. 2:57:41वह चीज किस तरह की है? इतना कहने के बाद
  3886. 2:57:45थोड़ा रुक कर वह फिर बोले और हम यह भी
  3887. 2:57:48चाहते हैं कि श्रवण जो भी गिफ्ट तुम्हारे
  3888. 2:57:50लिए लाया है वो हम सबके सामने तुम्हें
  3889. 2:57:53अपने हाथों से पहनाए। हमारी यह मांग कुछ
  3890. 2:57:56ज्यादा नहीं है। मुझे लगता है कि इसे पूरा
  3891. 2:58:00करने में तुम्हें कोई दिक्कत नहीं होगी और
  3892. 2:58:03हमें यह जानने का भी मौका मिलेगा कि श्रवण
  3893. 2:58:05को लेकर जो तुमने फैसला लिया है वो सही है
  3894. 2:58:09या नहीं।
  3895. 2:58:10दादा बलवंत राय की बात सुनकर शिप्रा ने
  3896. 2:58:13पहले अपने हाथ के गिफ्ट को देखा और फिर
  3897. 2:58:15शौर्य की ओर देखने लगी। तो क्या होगा आगे?
  3898. 2:58:19क्या शिप्रा बलवंत राय की बात मानेगी?
  3899. 2:58:21क्या शौर्य शिप्रा को अपने हाथों से वो
  3900. 2:58:24गिफ्ट पहनाएगा और आखिर गिफ्ट में है क्या?
  3901. 2:58:27[संगीत]

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