My Begger Husband | New Episode 51 to 65 |New Episode Daily | Sk hindi novel | Trending Series — Transcript
Full transcript
- 0:04तो हेलो दोस्तों, कैसे हैं आप लोग? मुझे
- 0:06आशा है कि आप लोग ठीक ही होंगे और मजे से
- 0:08इस चैनल पर जो भी सीरीज आ रही है उसको सुन
- 0:11रहे होंगे। तो माय बैगर हस्बैंड का नया
- 0:13वीडियो आ चुका है जिसमें एपिसोड 51 से 65
- 0:17तक है जिसमें मान लो 15 एपिसोड हैं। तो
- 0:20जल्दी से जल्दी इस वीडियो को सुनो और
- 0:23देखो। को कोई मिस्टेक तो नहीं हुई है और
- 0:26वीडियो को लाइक करें, चैनल को सब्सक्राइब
- 0:28करें और बेल आइकॉन जरूर दबाएंसे कि आपसे
- 0:31कोई भी वीडियो मिस ना हो। तो करते हैं लेट
- 0:34स्टार्ट दिस वीडियो। शिप्रा ने कार के
- 0:36अंदर बैठकर जिस तरह धड़ाम से दरवाजा बंद
- 0:38किया, शौर्य ने आंखों को झपकाते हुए
- 0:41अंदाजा लगा लिया कि मैडम ने गुस्से में
- 0:43अपनी भड़ास दरवाजे पर निकाली है। शिप्रा
- 0:46के चेहरे के भाव भी यही संदेश दे रहे थे
- 0:48कि खन्ना की घिनौनी हरकत से उसका दिल सदमे
- 0:51में है। उसका दिमाग अभी भी पिछले आधे घंटे
- 0:54की घटना से बाहर नहीं निकला था। उसकी
- 0:57जुबान खामोश थी लेकिन मन ही मन वो बोल रही
- 0:59थी। अगर दोनों गुंडे मुझे पकड़ लेते और
- 1:02मुझ पर तेजाब फेंक देते तो? शिप्रा के
- 1:05पूरे बदन में एक डरावनी सी हिरन सी दौड़
- 1:07गई। वो मन ही मन शौर्य से भी सवाल करने
- 1:10लगी। ये जनाब पता नहीं आज इनको क्या हो
- 1:14गया। अपनी सीट से हिले ही नहीं। शौर्य को
- 1:17शिप्रा की आंखों से उसकी घबराहट का एहसास
- 1:19हो रहा था। वो सोच ही रहा था कि माहौल को
- 1:22हल्का कैसे किया जाए। तभी शिप्रा ने एक पल
- 1:24के लिए शौर्य की तरफ देखा तो शौर्य ने
- 1:27तुरंत ही शिप्रा की तरफ देखते हुए हल्की
- 1:29मुस्कान के साथ कहा। वाकई आपने तो अकेले
- 1:33ही सब कुछ कंट्रोल कर लिया। वैसे आपने उन
- 1:35दोनों से ऐसा क्या कहा कि वह बिना कोई
- 1:38बवाल किए ही वहां से चले गए। यह सुनकर
- 1:41शिप्रा की भौए सिकुड़ गई। वो अपनी नाराजगी
- 1:44को कंट्रोल नहीं कर पाई और शिकायती लहजे
- 1:46में शौर्य से बोली जब तुम्हें बाहर आना
- 1:49चाहिए था तब तो तुम आए नहीं और अब पूछ रहे
- 1:51हो कि वो दोनों कैसे चले गए? शौर्य ने
- 1:54बड़ी ही मासूमियत से कंधे उचकाते हुए कहा,
- 1:57"कमाल करती हैं आप।" अरे आपने ही तो कहा
- 1:59था कि कार से बाहर नहीं निकलना और अब आप
- 2:02ही शिकायत कर रही हैं कि मैं बाहर नहीं
- 2:03आया। वेरी स्मार्ट। मैंने वो तब कहा था जब
- 2:07मुझे लगा कि खन्ना अकेला है। लेकिन जब वो
- 2:09दोनों गुंडे आ गए थे तब तो तुम्हें बाहर
- 2:11आना चाहिए था। शिप्रा की शिकायत कम नहीं
- 2:15हो रही थी क्योंकि शिप्रा का गुस्सा अभी
- 2:17शांत नहीं हुआ था। शिप्रा शौर्य से नाराज
- 2:20थी। लेकिन कुछ ज्यादा भी नहीं क्योंकि उसे
- 2:22इस बात का भी एहसास था कि आज अगर उसकी जान
- 2:25बची है तो वह शौर्य के नाम के कारण ही
- 2:28उसके जानबूझकर नाराजगी जताने का कारण यह
- 2:30भी था कि वो इस बात से श्योर होना चाहती
- 2:32थी कि कहीं शौर्य के कार से बाहर निकलने
- 2:34की वजह उसके द्वारा जिंदगी साथ बिताने
- 2:37वाला प्रपोजल रिजेक्ट करना तो नहीं था।
- 2:39कार के अंदर के माहौल में एक अलग ही
- 2:41खुशनुमा खिंचाव था। शिप्रा और शौर्य दोनों
- 2:44की जुबान खामोश थी, लेकिन कान एक दूसरे की
- 2:47आवाज सुनने को बेताब हो रहे थे। धीरे-धीरे
- 2:50वह घर की ओर बढ़ रहे थे। शौर्य और शिप्रा
- 2:52की नजरें बार-बार एक दूसरे से टकरा रही
- 2:55थी। उधर दूसरी तरफ शिप्रा के घर में भी
- 2:57पारिवारिक माहौल कुछ टकराहट वाला ही था।
- 3:00हॉल में बलवंत राय, राजदीप राय और बीना जी
- 3:03बैठे थे। तीनों के चेहरे गंभीर थे। कुछ पल
- 3:06की चुप्पी के बाद बलवंत राय ने गहरी आवाज
- 3:09में कहा।
- 3:11देखो तुम दोनों एक बार शिप्रा से उसकी
- 3:13अंतिम राय जरूर जान लो। भावनाओं में बहकर
- 3:15कोई फैसला नहीं लिया जाता।
- 3:18अपनी बात को आगे समझाते हुए बलवंत राय
- 3:20बोले अगर वो श्रवण से तलाक के लिए तैयार
- 3:23नहीं है तो फिर उसे सर्वेंट क्वार्टर में
- 3:25रखने का क्या मतलब? उसे घर में ही बुला लो
- 3:28क्योंकि यह बात ज्यादा समय तक दुनिया से
- 3:30छुपी नहीं रहेगी। कमरे का माहौल और भारी
- 3:33हो गया। राजदीप राय और बीना जी बेबसी से
- 3:36एक दूसरे की ओर देखने लगे। तभी बलवंत राय
- 3:39ने एक और बात जोड़ी। वैसे भी अब श्रवण का
- 3:42कायाकल्प हो चुका है। अगर कोई उसे पहले से
- 3:45नहीं जानता हो तो कोई भी उसे भिखारी नहीं
- 3:48कहेगा। फिर उन्होंने सीधे दोनों की तरफ
- 3:50देखा और तुम्हें भी तो यह तय करना होगा कि
- 3:53क्या तुम उसे अपने दामाद के रूप में
- 3:55स्वीकार कर सकते हो या नहीं। बलवंत राय के
- 3:59ऐसा बोलते ही कमरे में फिर से सन्नाटा छा
- 4:01गया। अब फैसला सिर्फ शिप्रा का नहीं, पूरे
- 4:04परिवार का होने वाला था। राजदीप जी और
- 4:07बीना जी दोनों अंदर ही अंदर सन्न रह गए
- 4:10थे। बात अब उनके हाथ से निकलती जा रही थी।
- 4:13वे शौर्य को दामाद के रूप में कभी स्वीकार
- 4:15नहीं करना चाहते थे। लेकिन शिप्रा पर उनका
- 4:18जोर भी नहीं चल रहा था। उन्होंने तो आज
- 4:21ठान लिया था कि किसी भी तरह शिप्रा को
- 4:23दबाव में लाकर तलाक के लिए मना लें। और
- 4:25इसी के लिए उन्होंने बलवंत राय जी का
- 4:27सहारा लिया था। पिताजी आप ही शिप्रा को
- 4:31समझाइए। हमारी तो वह सुनती ही नहीं।
- 4:33राजदीप जी को जब कुछ जवाब नहीं सूझा तो
- 4:36उन्होंने अपने पिताजी से उम्मीद भरे स्वर
- 4:38में कहा। तभी बलवंत राय ने धीमे लेकिन साफ
- 4:41लहजे में जवाब दिया।
- 4:43अरे भाई मैंने भी तो कोशिश की थी। मैं तो
- 4:46रजत के साथ उसकी शादी के लिए भी तैयार था।
- 4:49लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ी है कि श्रवण से
- 4:50तलाक नहीं लेगी। अब बताओ मैं भी उसे कितना
- 4:53दबाव में ला सकता हूं। उनकी बात में बेबसी
- 4:56कम और स्थिति को स्वीकार करने का संकेत
- 4:59ज्यादा था। वहीं दूसरी तरफ कार के अंदर
- 5:02शिप्रा और शौर्य के बीच की गहरी खामोशी
- 5:04अभी भी टूटने का नाम ही नहीं ले रही थी।
- 5:06शिप्रा और शौर्य दोनों अपने-अपने ख्यालों
- 5:09में डूबे हुए थे। तभी शौर्य ने पहल की और
- 5:12उस सन्नाटे को तोड़ा। मैं सोच रहा था
- 5:15मैंने अपने लिए एक घर देख लिया है। शायद
- 5:17कल शाम तक मैं वहां शिफ्ट भी हो जाऊं।
- 5:20अचानक शौर्य के मुंह से कुछ अलग और
- 5:22सरप्राइजिंग सुनकर शिप्रा चौंक गई। यह
- 5:24उसके लिए बिल्कुल नई बात थी। एक दिन पहले
- 5:27उसने नई नौकरी ज्वाइन करने की बात की थी
- 5:29और अब अचानक घर बदलने की बात से शिप्रा के
- 5:32मन में कई सवाल एक साथ उठ खड़े हुए थे।
- 5:35अचानक श्रवण ऐसी बात क्यों कर रहा है?
- 5:37क्या उसे कुछ बुरा लगा या फिर वो जानबूझकर
- 5:40दूर जाना चाहता है? उसकी सोच में थोड़ी
- 5:43घबराहट आ गई। शिप्रा को लगने लगा अगर
- 5:45शौर्य सच में अलग रहने चला गया तो उसके
- 5:48सारे प्लान बिखर सकते हैं। उसने तुरंत
- 5:50उसकी तरफ देखते हुए पूछा। तुम्हारी नौकरी
- 5:53की बात तो समझ में आती है लेकिन यहां
- 5:55अचानक घर छोड़ने का क्या मतलब है? शौर्य
- 5:58ने एक पल के लिए उसकी तरफ देखा। फिर नजर
- 6:00वापस सड़क पर टिका दी। आप क्या चाहती हैं
- 6:03कि मैं जहां हूं वहीं रहूं। असल में ये घर
- 6:06मुझे उसी कंपनी की तरफ से मिल रहा है जहां
- 6:09मैं काम करने वाला हूं। शौर्य ने समझाते
- 6:12हुए कहा, तो शिप्रा कुछ पल के लिए सोच में
- 6:14पड़ गई। आखिर ऐसी भी कौन सी बड़ी कंपनी
- 6:17में काम मिल गया? जब उससे रहा नहीं गया तो
- 6:20उसने पूछ ही लिया। अच्छा बताओ ऐसा क्या
- 6:22काम मिला है तुम्हें जो कंपनी ने रहने के
- 6:25लिए घर भी दे दिया? शौर्य ने थोड़ा सोचते
- 6:27हुए जवाब दिया। अभी तो काम का पूरा अंदाजा
- 6:30नहीं है लेकिन शायद किसी कंपनी को
- 6:32इंटरनेशनल लेवल पर बूस्ट करना है। उसके
- 6:35लिए एक पूरी टीम बनाई जा रही है। लगता है
- 6:37जिसने हमें हायर किया है, उसने किसी बड़ी
- 6:40कंपनी के साथ कोलैबोरेशन किया है। बोलते
- 6:43हुए वह धीरे-धीरे नई कहानी गढ़ रहा था।
- 6:46शौर्य की बात सुनकर शिप्रा के मन में शक
- 6:49पैदा हुआ। कहीं वह उसी की कंपनी के बारे
- 6:52में तो बात नहीं कर रहा जिसकी बात मोहित
- 6:54कर रहा था। कहीं मोहित रैना ने ही इसे
- 6:56हायर तो नहीं किया। लेकिन फिर उसके मन में
- 6:59एक और सवाल उठा। क्या श्रवण इतना काबिल है
- 7:02कि किसी कंपनी को इंटरनेशनल लेवल पर बूस्ट
- 7:04कर सके? आखिर शिप्रा ने सीधे पूछ लिया।
- 7:08तुम्हें हायर किसने किया है? अब शौर्य को
- 7:11बहुत सोच समझ कर जवाब देना था। कुछ पल चुप
- 7:14रहने के बाद उसने कहा उसका नाम विक्रम
- 7:17राणावत है। शौर्य जानता था कि शिप्रा इस
- 7:20नाम से वाकिफ नहीं होगी। इसीलिए वो ज्यादा
- 7:22सवाल नहीं करेगी। शिप्रा ने दिमाग पर जोर
- 7:25डाला लेकिन विक्रम राणावत नाम उसके लिए
- 7:27बिल्कुल अनजान था। जितना वो सोचती उसकी
- 7:30उतनी ही उलझन बढ़ती जा रही थी। कौन है
- 7:34विक्रम? और अचानक कहां से आ गया? हमने
- 7:36इसके बारे में पहले कभी सुना क्यों नहीं?
- 7:39आखिरकार शिप्रा ने अपनी बेचैनी जाहिर कर
- 7:41ही दी। शौर्य ने हल्की सी सांस ली और
- 7:44संभलकर जवाब दिया। अब यह तो मुझे नहीं पता
- 7:47कि आपने उसके बारे में क्यों नहीं सुना।
- 7:49लेकिन मैंने जो सुना है वो यह कि उसे
- 7:51इंडिया आए ज्यादा समय नहीं हुआ है। उसका
- 7:54मेन बिजनेस यूके में ही सेटल है और शायद
- 7:56अब वो यहां अपने पैर जमाने की सोच रहा है।
- 8:00शिप्रा को यह बात हजम नहीं हो रही थी।
- 8:02उसके दिमाग में फिर सवाल गूंजा।
- 8:05यूके से आया हुआ कोई बड़ा बिजनेसमैन श्रवण
- 8:07जैसे इंसान को हायर करके इतना बड़ा रिस्क
- 8:10ले रहा है। शिप्रा के मन में एक और सवाल
- 8:12उठा। कहीं मैं श्रवण को ही अंडरएस्टिमेट
- 8:15तो नहीं कर रही या फिर इस पूरे खेल में
- 8:18कुछ ऐसा है जो मुझे दिखाई नहीं दे रहा।
- 8:20फिर उसने सीधे मुद्दे पर आते हुए शौर्य से
- 8:23कहा ठीक है। यह तो अच्छी बात है कि
- 8:25तुम्हें जॉब मिल गई। लेकिन तुम्हें यहां
- 8:27से जाने की इतनी जल्दी क्यों है? शौर्य ने
- 8:30शांत अंदाज में कहा। इसमें जल्दी वाली तो
- 8:33कोई बात नहीं है। जब मेरे रहने की
- 8:35व्यवस्था हो गई है तो कोई कारण नहीं कि
- 8:37मैं आपके यहां और ठहरूं। शिप्रा ने उसकी
- 8:40बात ध्यान से सुनी। फिर गंभीरता से बोली
- 8:43हां मैं समझती हूं लेकिन यह मैं तुम्हारे
- 8:46लिए नहीं अपने लिए कह रही हूं। अगर तुम
- 8:48हमारे घर से चले गए तो तुम्हें भी पता है
- 8:51कि मेरे घर वाले मेरे साथ क्या करेंगे।
- 8:54उसकी बात में छुपा डर साफ था। यह सिर्फ
- 8:57रहने का मामला नहीं था बल्कि उसके ऊपर आने
- 8:59वाले दबाव का भी था। शौर्य ने उसे समझाने
- 9:02की कोशिश की। वैसे अगर मैं सच कहूं तो
- 9:05आपको अपने घर वालों की बात मान लेनी
- 9:08चाहिए। वो जो भी कर रहे हैं आपकी भलाई के
- 9:11लिए ही कर रहे हैं। शौर्य खुद जानता था कि
- 9:14वो जो कह रहा है वो शिप्रा को मंजूर नहीं
- 9:17होगा। फिर भी वो यह बातें जानबूझकर कर रहा
- 9:19था। फिर थोड़ा रुक कर उसने सीधा सवाल
- 9:22किया। पता नहीं लेकिन मुझे यह समझ नहीं
- 9:25आता। आप यह सब खेल कब तक खेलती रहेंगी?
- 9:28आखिर कब तक इस तरह एक मुखौटा पहनकर जी
- 9:30पाएंगी?
- 9:33इस पर शिप्रा ने बिना हिचक के जवाब दिया।
- 9:35तब तक जब तक मेरे घर वालों को यह समझ ना आ
- 9:38जाए कि मेरे पीछे पड़ने का कोई फायदा नहीं
- 9:41है। और अगर वह कभी नहीं माने तो।
- 9:44शौर्य ने फिर पूछ डाला तो शिप्रा ने पूरे
- 9:46आत्मविश्वास के साथ कहा। ऐसा हो ही नहीं
- 9:49सकता। हर चीज की एक सीमा होती है। देर
- 9:52सवेेर उन्हें मेरी बात समझ आ ही जाएगी।
- 9:55रेयर व्यू मिरर में शौर्य कुछ पल छिप्रा
- 9:57को देखता रहा जैसे उसके आत्मविश्वास को
- 10:00परख रहा हो। फिर हल्की सी मुस्कान के साथ
- 10:02बोला ठीक है। अब जब आप इतनी कॉन्फिडेंटली
- 10:06कह रही हैं तो मैं कुछ दिन और आपके यहां
- 10:09रुक जाता हूं। शौर्य का जवाब सुनकर शिप्रा
- 10:11ने राहत की सांस ली। लेकिन वो नहीं जानती
- 10:14थी कि शौर्य के मन में क्या चल रहा है।
- 10:16शौर्य सब समझ रहा था। शिप्रा की मजबूरी,
- 10:19उसका डर, उसका यह मुखौटा। लेकिन फिर भी वो
- 10:23जानबूझकर इस खेल का हिस्सा बना हुआ था
- 10:25क्योंकि उसके दिल के कोने में शिप्रा ने
- 10:27अपनी जगह बना ली थी। शौर्य उससे दूर जाने
- 10:30की सोच भी नहीं सकता था। वो चाहता था कि
- 10:33एक दिन शिप्रा खुद अपने दिल की बात माने
- 10:35और कहे कि उसे भी उससे प्यार है। वो उसकी
- 10:37जरूरत नहीं उसकी चाहत बनना चाहता है।
- 10:40शौर्य का जवाब सुनकर अंदर से खुश शिप्रा
- 10:42से रहा नहीं गया और वो बोली शुक्रिया
- 10:45श्रवण तुम्हारे घर से जाने की बात सुनकर
- 10:48तो मेरी धड़कन ही थम गई थी। हां, मेरी भी
- 10:51थम गई थी। शौर्य के इन शब्दों को सुनकर
- 10:54शिप्रा की आंखों में हैरानी उतर आई। वहीं
- 10:57दूसरी तरफ फटने को तैयार तो शिप्रा के
- 10:59परिवार के सदस्य भी हैं। उन्हें शिप्रा का
- 11:02ही इंतजार है। शिप्रा घर की दहलीज पर कदम
- 11:05रख चुकी है। उसकी नजर हॉल में बैठे
- 11:07दादाजी, पापा और मम्मी पर जाती है। शिप्रा
- 11:10अपने कमरे में ना जाकर सीधा उन सबके सामने
- 11:13जाकर खड़ी हो जाती है। तकदीर ने बना दी
- 11:15शौर्य और शिप्रा की जोड़ी। और अब इनके इस
- 11:18रिश्ते की वजह से जो घटनाएं घट रही हैं वो
- 11:20किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। इनके
- 11:23जीवन में हर रोज एक नया ट्विस्ट आ जाता
- 11:25है। जहां एक तरफ इन दोनों की सोच थोड़ी
- 11:27जिद्दी है वहीं दूसरी तरफ दोनों के ही मन
- 11:30में एक दूसरे के प्रति सम्मान और स्वयं के
- 11:33प्रति स्वाभिमान भी कूट-कूट [संगीत]
- 11:34कर भरा है। शायद इसीलिए दोनों अपने दिल की
- 11:37बात जुबान तक लाने में थोड़ा समय ले रहे
- 11:40हैं। फिलहाल दोनों के कमरे अलग हैं। लेकिन
- 11:43घर एक है। और इस वक्त का सबसे बड़ा सवाल
- 11:45यह है कि क्या दोनों के दिल कभी एक दूसरे
- 11:48के लिए धड़क पाएंगे? क्या शौर्य और शिप्रा
- 11:51एक हो पाएंगे?
- 11:53अरे भाई शिप्रा है कहां? बेहतर यही रहेगा
- 11:56कि सच्चाई शिप्रा ही बताएं। आखिर उसके मन
- 11:59[संगीत] में क्या चल रहा है? दादा बलवंत
- 12:01राय ने जैसे ही यह शब्द बोले, तो राजदीप
- 12:04राय ने भी सहमति जताते हुए कहा, "हां हमें
- 12:07शिप्रा से साफ-साफ पूछ लेना चाहिए।
- 12:11मैं तो कहूंगी बात कयामत तक पहुंच जाए
- 12:13उससे पहले ही हमें पूछना नहीं शिप्रा को
- 12:16बताने देना चाहिए कि हम श्रवण को अपने
- 12:18दामाद के रूप में स्वीकार नहीं कर सकते।
- 12:21बीना जी थोड़ा सख्त रवैया दिखाते हुए
- 12:23बोली। तभी सबने देखा कि सामने के बड़े
- 12:26वाले दरवाजे से शिप्रा अंदर आ रही है।
- 12:28शिप्रा को देखते ही दादाजी, पिता राजदीप
- 12:31और मां बीना जी तीनों [संगीत] अचानक चुप
- 12:33हो गए। शिप्रा तुरंत समझ गई कि बात उसी के
- 12:36बारे में हो रही है। आमतौर पर वो सीधे
- 12:38अपने कमरे में चली जाती है लेकिन आज वो
- 12:40वहीं रुक गई। सबकी तरफ देखते हुए उसने
- 12:43शांत लेकिन सीधे लहजे में पूछा। ऐसा लग
- 12:47रहा है शायद आप लोग मुझसे कुछ बात करना
- 12:49चाहते हैं।
- 12:51सही सोचा तुमने लेकिन बेटी थकी सी लग रही
- 12:54हो। पहले आराम से बैठ जाओ। बलवंत राय ने
- 12:57गंभीर स्वर में कहा। शिप्रा उनके सामने
- 13:00रखे सिंगल सोफे पर बैठ गई और बोली
- 13:03नहीं मैं बिल्कुल ठीक हूं दादा जी कहिए आप
- 13:06लोगों को मुझसे क्या बात करनी है बलवंत
- 13:09राय ने गहरी सांस ली और धीमे लेकिन ठहराव
- 13:11भरे स्वर में बोले सबसे पहले यह समझ लो कि
- 13:15हम सब तुम्हारे दुश्मन नहीं है। हम जो कुछ
- 13:17भी कहेंगे तुम्हारी भलाई के लिए ही
- 13:20कहेंगे। बस हमारी बातों को समझने की कोशिश
- 13:23करना। कमरे में एक अजीब सी खामोशी फैल गई।
- 13:26शिप्रा सामने बैठे पापा और मम्मी की आंखों
- 13:29में देखने लगी जैसे आने वाले सवालों के
- 13:31लिए खुद को तैयार कर रही हो। पहेलियां
- 13:35बुझाने से अच्छा है दादा जी कि आप सीधे
- 13:37मुद्दे पर आ जाए वही ज्यादा बेहतर रहेगा
- 13:40और जहां तक दुश्मन ना समझने की बात है तो
- 13:42मैं अच्छी तरह जानती हूं कि आप सब कभी
- 13:44मेरा बुरा नहीं सोच सकते। इसीलिए यह कहने
- 13:47की जरूरत नहीं है कि आप मेरे दुश्मन नहीं
- 13:50हैं। शिप्रा ने अपनी बात रखते हुए कहा।
- 13:53उसकी बात सुनकर बलवंत राय ने हल्का सा सिर
- 13:55हिलाया और बोले, ठीक है तो साफ-साफ सुन
- 13:58लो। तुम्हारे इस फैसले से हम में से कोई
- 14:01भी खुश नहीं है। ना तुम्हारे पापा मम्मी
- 14:04और ना ही मैं। देखो कुछ फैसले भावनाओं में
- 14:07बहकर नहीं लिए जाते। अभी भले तुम्हें सब
- 14:10सही लग रहा हो लेकिन यह तुम्हारे भविष्य
- 14:12के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने गंभीर और
- 14:15प्रभावशाली लहजे में कहा। शिप्रा ने उनकी
- 14:18आंखों में देखते हुए पूछा। आप आखिर किस
- 14:20फैसले की बात कर रहे हैं?
- 14:22उसकी आवाज में अब हल्की बेचैनी और उलझन
- 14:25झलक रही थी। जैसे वह समझने की कोशिश कर
- 14:28रही हो कि आखिर यह सब चल क्या रहा है।
- 14:32देखो शिप्रा सब कुछ जानते-बूझते भी अनजान
- 14:35बनने की कोशिश मत करो। तुम यह कहकर क्या
- 14:38साबित करना चाहती हो कि तुम्हें नहीं पता
- 14:40हम किस मुद्दे में बात कर रहे हैं। बीना
- 14:43जी ने गुस्से में कहा।
- 14:45हम तुम्हारे श्रवण से तलाक ना लेने की बात
- 14:47कर रहे हैं। मैं अपनी बेटी की जिंदगी की
- 14:49कल्पना किसी भिखारी के साथ नहीं कर सकती।
- 14:52तुम जिससे कहोगी हम तुम्हारी शादी के लिए
- 14:54हर जगह बात करेंगे। लेकिन पहले तुम श्रवण
- 14:57से तलाक ले लो। उनकी आवाज में गुस्सा तो
- 15:00था। लेकिन असली दर्द समाज के तानों का था।
- 15:03बीना जी की बातों ने उस दर्द को और गहरा
- 15:05कर दिया था जो अक्सर मौका मिलते ही शिप्रा
- 15:08पर तंज कसती रहती थी।
- 15:10शिप्रा ने बिना घबराए सीधा अपनी मां की
- 15:13आंखों में देखते हुए कहा, क्या आप मुझे यह
- 15:15बताएंगी कि आप लोग क्यों चाहते हैं कि मैं
- 15:18श्रवण से तलाक ले लूं? अगर उसके गरीब होने
- 15:20के अलावा कोई और भी तार्किक कारण है तो आप
- 15:23जरूर बताइए। मैं उस बारे में सोचने के लिए
- 15:26तैयार हूं। बताइए कोई है क्या? उसका सवाल
- 15:30सुनकर कमरे में सन्नाटा छा गया। सबकी
- 15:32जुबान मानो थम गई। किसी के पास तुरंत कोई
- 15:36जवाब नहीं था। तभी राजदीप राय ने गंभीरता
- 15:39से कहा,
- 15:40जिस कारण को तुम नजरअंदाज कर रही हो, असल
- 15:43में वही सबसे बड़ा कारण है। तुम यह अच्छी
- 15:46तरह जानती हो कि तुम्हारा और श्रवण का कोई
- 15:48मेल नहीं है। हम एक सामाजिक ढांचे में
- 15:51रहते हैं। जहां सिर्फ दो लोगों का नहीं
- 15:53बल्कि पूरे परिवार का स्तर और रिश्ते देखे
- 15:56जाते हैं। हमारी इज्जत, हमारी पहचान,
- 15:59हमारा रुतबा यह सब हमारी रिश्तेदारियों से
- 16:02ही तो तय होता है। फिर उन्होंने थोड़ी देर
- 16:05रुक कर आगे कहा। और सच यही है शिप्रा कि
- 16:08जिस सामाजिक ढांचे में हम रहते हैं उस
- 16:10ढांचे में उस सोसाइटी में श्रवण कहीं फिट
- 16:13नहीं बैठता।
- 16:15शिप्रा के पिता राजदीप राय की बातों में
- 16:17तर्क तो था लेकिन उसके पीछे छुपा हुआ
- 16:20दिखावटी सामाजिक दबाव साफ झलक रहा था।
- 16:23शिप्रा अब तक शांत बैठी थी। मुश्किल
- 16:25परिस्थितियों और तीखे सवालों का सामना
- 16:28करना तो अब उसकी आदत सी बन गई थी। उसकी
- 16:30आंखों में एक दृढ़ता उभरने लगी थी। वो अब
- 16:33सिर्फ सुनने के लिए नहीं मजबूती से जवाब
- 16:35देने के लिए तैयार हो रही थी। आप किस
- 16:38रुतबे की बात कर रहे हैं पापा? जब भरी
- 16:40महफिल में मुख्तार ने मेरी जबरदस्ती शादी
- 16:43श्रवण से करवा दी थी तब कहां गया था आपका
- 16:45रुतबा? उस वक्त कोई समाज का ठेकेदार आगे
- 16:48क्यों नहीं आया? मुख्तार को देख सब एक-एक
- 16:51करके दुम दबाकर भाग रहे थे। ऐसे खतरनाक
- 16:55माहौल में अगर कोई मेरे साथ खड़ा था, तो
- 16:57वह सिर्फ और सिर्फ श्रवण ही था। उसने तो
- 17:00किसी की परवाह नहीं की।
- 17:02शिप्रा पूरी तरह से भरी हुई थी। वो रुकी
- 17:05नहीं। वो बोलती ही गई। आपको तो यह भी नहीं
- 17:08पता कि कुछ दिन पहले रजत [संगीत] के भेजे
- 17:10हुए गुंडे मेरे चेहरे पर तेजाब डालने आए
- 17:12थे। अगर उस दिन श्रवण वहां नहीं होता तो
- 17:15आज आपकी बेटी का चेहरा किसी को दिखाने
- 17:17लायक नहीं रहता। उसने अपनी जान की परवाह
- 17:20किए बिना मुझे बचाया।
- 17:22शिप्रा की आवाज भर्रा गई थी। लेकिन उसकी
- 17:25बात किसी तमाचे की तरह पूरे कमरे में गूंज
- 17:27गई। वो रुकने को तैयार नहीं थी। इस बार
- 17:30उसने अपने पापा राजदीप की ओर देखा और बोली
- 17:34और आपने आपने क्या किया? जिस इंसान ने
- 17:37मेरी जिंदगी बर्बाद करने की कोशिश की उसी
- 17:40से समझौता करके उसे जेल से बाहर निकलवा
- 17:42दिया। इतना ही नहीं वो हमारे ऑफिस तक आ
- 17:46गया और हद तो यह है कि आप लोग उसी से मेरी
- 17:48शादी करवाना चाहते थे या शायद अभी भी
- 17:50चाहते हैं। बीना जी, राजदीप और बलवंत राय
- 17:54तीनों के पास शिप्रा की बातों का कोई जवाब
- 17:56नहीं था। कुछ पल की खामोशी के बाद बीना जी
- 17:59खुद को रोक नहीं पाई और तुरंत बोल पड़ी।
- 18:02अरे बेटी हम श्रवण के किए हुए एहसान को
- 18:04नकार नहीं रहे। उन्होंने थोड़ा नरम लेकिन
- 18:07जिद भरे स्वर में कहा। लेकिन उसके लिए उसे
- 18:10अपना पति बनाए रखना। यह समझदारी नहीं है।
- 18:13उसने जो किया उसके बदले हम उसे पैसे देकर
- 18:16उसका भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं। शिप्रा
- 18:20के होठों पर एक कड़वी हंसी आ गई और उसने
- 18:22तंज कसते हुए कहा। वाह कितने एहसान फरामोश
- 18:26हैं आप लोग। किसी के किए हुए त्याग और
- 18:29साहस को आप पैसों में तोलना चाहते हैं।
- 18:32बीना जी चुप हो गई। उनके पास अब कहने को
- 18:35कुछ नहीं था। बलवंत राय के चेहरे पर अब
- 18:38सख्ती साफ नजर आ रही थी। रजत की घिनौनी
- 18:41करतूत का सच जो अभी उन्होंने शिप्रा के
- 18:43मुंह से सुना उसने उन्हें अंदर तक झकझोर
- 18:45दिया था। मन ही मन उन्हें अपने पिछले कुछ
- 18:48फैसलों पर अफसोस होने लगा। उनकी आंखों में
- 18:51एक ठोस फैसला उभर आया। फिर कुछ देर सोचकर
- 18:54उन्होंने गहरी आवाज में कहा ठीक है बीती
- 18:59बातों को यहीं छोड़ देते हैं। इसके बाद
- 19:02उन्होंने सीधे शिप्रा की ओर देखा और बोले
- 19:05मैं तुम्हारी बात मानने को तैयार हूं। अब
- 19:08तुम बताओ तुम चाहती क्या हो?
- 19:12राजदीप राय हैरानी से बलवंत राय की ओर
- 19:14देखने लगे। शिप्रा भी उनकी बात सुनकर
- 19:16अचंभित रह गई। उसे समझ नहीं आ रहा था कि
- 19:19क्या जवाब दे। कहीं उसका जवाब उसके ही गले
- 19:22की फांस ना बन जाए। यही सोचकर उसने बहुत
- 19:24संभल कर कहा। मैं दूसरी शादी नहीं करना
- 19:28चाहती।
- 19:30मतलब तुम श्रवण के साथ ही शादीशुदा रिश्ते
- 19:33में रहना चाहती हो। बलवंत राय ने सीधा
- 19:36सवाल किया। अब यह सवाल शिप्रा के लिए
- 19:39सचमुच धर्म संकट बन गया था। कुछ पल सोचने
- 19:42के बाद उसने अपने शब्दों को तोलते हुए
- 19:44कहा। मैं श्रवण से तलाक नहीं लेना चाहती।
- 19:48उसके इस जवाब से बलवंत राय के चेहरे पर
- 19:51गहरी सोच उभर आई। उन्होंने गौर किया कि
- 19:54शिप्रा ने यह नहीं कहा कि वह श्रवण के साथ
- 19:56रहना चाहती है बल्कि सिर्फ इतना कहा कि वो
- 19:59उससे तलाक नहीं चाहती। कुछ पल बाद
- 20:02उन्होंने पूछा जब तुम श्रवण से तलाक नहीं
- 20:05लेना चाहती तो फिर उसके साथ रहती क्यों
- 20:07नहीं हो? वो अब भी सर्वेंट क्वार्टर में
- 20:10क्यों रह रहा है? यह सवाल सीधा था और इस
- 20:13बार शिप्रा के पास बचने का कोई आसान
- 20:15रास्ता नहीं था।
- 20:17थोड़ा संभलते हुए शिप्रा ने जवाब दिया,
- 20:20श्रवण को सर्वेंट क्वार्टर में रखने का
- 20:22फैसला तो आप लोगों का ही था। बलवंत राय
- 20:25हल्के से मुस्कुराए और बोले, ठीक है, तो
- 20:28फिर कल से श्रवण को घर के अंदर रहने को
- 20:30कहो और अब समय आ गया है कि तुम लोग भी यह
- 20:33स्वीकार करो कि श्रवण ही तुम्हारा दामाद
- 20:35है। इस बार दादा बलवंत राय ने अपने फैसले
- 20:39में कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी थी। राजदीप
- 20:42राय और बीना जी के चेहरे पर एक पल के लिए
- 20:44मायूसी उभरी। लेकिन हालात को समझते हुए
- 20:47राजदीप ने धीमे स्वर में कहा, ठीक है
- 20:50पिताजी कल से श्रवण हमारे साथ ही रहेगा।
- 20:53मैं आज ही उसके रहने का पूरा इंतजाम कर
- 20:55देता हूं। यह सुनते ही जैसे शिप्रा के
- 20:58पैरों तले जमीन खिसक गई। उसे बिल्कुल
- 21:01उम्मीद नहीं थी कि उसके पापा इतनी जल्दी
- 21:03और इतनी आसानी से श्रवण को अपना दामाद मान
- 21:06लेंगे। अब उसके पास मना करने का कोई
- 21:08रास्ता नहीं बचा था। एक तरह से वह अपने ही
- 21:11बुने हुए जाल में फंस चुकी थी। वो चुपचाप
- 21:14बैठी रही लेकिन उसके मन में सवालों का
- 21:16तूफान उठ रहा था। अब क्या होगा? कैसे
- 21:20निभेगा यह सब? और सबसे बड़ी बात वो श्रवण
- 21:23को यह सब कैसे समझाएगी? शिप्रा ने गहरी
- 21:26सांस [संगीत] ली। उसने मन ही मन तय किया
- 21:28कि वो श्रवण के साथ मिलकर इस स्थिति को
- 21:31संभालने की कोशिश करेगी। लेकिन अंदर ही
- 21:33अंदर उसके मन में कहीं एक डर अब भी था।
- 21:36क्या यह सच में इतना आसान होगा? बलवंत राय
- 21:39के फैसले के बाद सब अपने-अपने कमरों में
- 21:42लौट गए। शिप्रा भी अपने रूम में आ चुकी थी
- 21:44और दीवार पर लगे बड़े से शीशे के सामने
- 21:46खड़ी होकर वो खुद से ही सवाल कर रही थी।
- 21:49याद करो शिप्रा जब से तुम्हारी लाइफ में
- 21:52श्रवण आया है। तुम्हारे ऊपर आई हर मुश्किल
- 21:54से तुम्हें उसी ने बाहर निकाला है। लेकिन
- 21:57अब जो मुश्किल खड़ी हो गई है उसका कारण तो
- 22:00खुद श्रवण ही है। और इस मुश्किल से बाहर
- 22:02तभी निकला जा सकता है जब श्रवण ही लाइफ से
- 22:05बाहर निकल जाए। [संगीत] लेकिन क्या तुम
- 22:08ऐसा चाहोगी? संतों के झाड़ू पोछे में
- 22:10जितनी सफाई थी, उतनी ही सफाई उसके दिल में
- 22:13भी थी। उसका सीधा सच्चा खरा स्वभाव अपने
- 22:16दिल की किसी भी बात को बिना किसी मिलावट
- 22:19और भय के बेबाक तरीके से बाहर ले आता था।
- 22:22वो जरूर राय फैमिली के महल की काम वाली
- 22:25थी। लेकिन उसके चेहरे की मासूमियत और
- 22:27खूबसूरती महल की किसी भी लड़की से कम नहीं
- 22:30थी। [संगीत] वैसे तो अभी उसके सपनों में
- 22:32कोई राजकुमार नहीं था। लेकिन जब से शौर्य
- 22:35सर्वेंट क्वार्टर में रहने आया था और जब
- 22:37से उसने अपना भिखारी वाला अवतार त्यागा था
- 22:40वो उसके चेहरे और पर्सनालिटी को पसंद करने
- 22:42लगी थी। वो शौर्य के बारे में सिर्फ इतना
- 22:45ही जानती थी कि वो शिप्रा का ड्राइवर है।
- 22:48इसीलिए उसके कमरे की सफाई करते-करते उसने
- 22:51अपने दिल की बात बड़े बिंदास तरीके से
- 22:53शौर्य को बता भी दी थी। और आज वो अपने
- 22:56झाड़ू पोछे के साथ अपनी प्रेम कहानी की
- 22:58स्क्रिप्ट दिल में लिए अपनी प्रिय शिप्रा
- 23:01दीदी के कमरे का दरवाजा खटखटा रही थी।
- 23:04[संगीत] शिप्रा दीदी क्या मैं अंदर आ
- 23:06जाऊं? शिप्रा अभी-अभी नींद से उठी ही थी।
- 23:09शतो हमेशा की तरह झाड़ू पोछा लेकर कमरे की
- 23:12सफाई में लग जाती है। पिछली रात वैसे ही
- 23:15शिप्रा के लिए बहुत भारी रही थी। उसके
- 23:17दिमाग में बस एक ही बात घूम रही थी। उसे
- 23:20शौर्य को सर्वेंट क्वार्टर से अपने घर में
- 23:23लाना था। यही बात उसे लगातार परेशान किए
- 23:26जा रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह
- 23:29शौर्य के सामने अपनी [संगीत] स्थिति कैसे
- 23:31स्पष्ट करें। ऊपर से अब उसे शौर्य को घर
- 23:34में रहने के लिए मनाना भी था। कल तक तो
- 23:36शौर्य खुद यहां से जाने की बात कर रहा था
- 23:39और आज हालात ऐसे थे कि शिप्रा को ही उसे
- 23:41रोकने के लिए समझाना पड़ रहा था। एक दिन
- 23:45पहले ही शिप्रा ने शौर्य का लव प्रपोजल
- 23:48रिजेक्ट कर उसे उसकी औकात दिखा दी थी। और
- 23:51आज शिप्रा को उसी से अपने साथ रहने की
- 23:54गुजारिश करनी थी।
- 23:57उसने मन ही मन सोचा और उसे इस सिचुएशन पर
- 24:00हंसी आ गई। वाह री किस्मत वो जल्दी से
- 24:04फ्रेश होकर आई और शीशे के सामने खड़ी होकर
- 24:06बाल बनाने लगी। उदर्शन तो सफाई तो कर रही
- 24:10थी लेकिन हर 2 मिनट में चोरी-चोरी [संगीत]
- 24:12शिप्रा को देख रही थी जैसे टीवी का कोई
- 24:14सीरियल चल रहा हो और उसका परफेक्ट सीन मिस
- 24:17ना हो जाए। शिप्रा ने आईने में ही उसकी
- 24:20हरकत पकड़ ली। क्या बात है शंतो? आज
- 24:24तुम्हारा मन काम करने का नहीं कर रहा
- 24:26क्या? उसने पीछे देखे बिना ही पूछा। नहीं
- 24:28नहीं दीदी ऐसा कुछ नहीं है। संतो घबरा गई
- 24:32जैसेंगे हाथों पकड़ी गई हो। [संगीत]
- 24:34शिप्रा अब उसकी तरफ पलटी। कोई तो बात है।
- 24:38बोलना क्या चाहती हो? बताओ क्या बात है?
- 24:41संतो ने झाड़ू को ऐसे पकड़ लिया जैसे वो
- 24:43उसका सहारा हो। फिर धीरे से बोली बात तो
- 24:46है दीदी पर पहले आप प्रॉमिस करो कि आप
- 24:49गुस्सा नहीं करोगी। शिप्रा ने भौए उठाई।
- 24:53अरे बाप रे इतनी बड़ी बात है क्या? शंतू
- 24:56थोड़ी हड़बड़ा गई। पर तुरंत ही सिर हिलाते
- 24:59हुए बोली नहीं मतलब है भी और नहीं भी।
- 25:02मतलब थोड़ा सा बस हल्काफुल्का वाला गुस्सा
- 25:05भी नहीं करना। अरे मैं भला तुम पर क्यों
- 25:07गुस्सा करूंगी? बोलो ना क्या बात है?
- 25:10शिप्रा मुस्कुराते हुए बोली। नहीं दीदी
- 25:13पहले आप प्रॉमिस करो गुस्सा बिल्कुल नहीं
- 25:15करोगी। संतो जिद भरे लेकिन मासूम स्वर में
- 25:18बोली। इस पर शिप्रा हंसते हुए उसके पास आ
- 25:21गई। अरे बाबा नहीं करूंगी गुस्सा। अब बताओ
- 25:25भी इतना सस्पेंस क्यों बना रही हो? संतो
- 25:28ने गहरी सांस ली जैसे किसी बहुत बड़ी बात
- 25:30का ऐलान करने जा रही हो। फिर धीरे-धीरे
- 25:33बोली दीदी आपका जो ड्राइवर है ना श्रवण वो
- 25:38आपसे बहुत डरता है। शिप्रा एक पल के लिए
- 25:42चौकी फिर बोए सिक कोड़ कर बोली बस यही बात
- 25:46कहने में तुम इतना डर रही थी। शंतू जल्दी
- 25:50से बोली नहीं दीदी वो तो दूसरी बात थी।
- 25:53असल बात तो अभी बाकी है। शिप्रा ने हाथ
- 25:56बांधते हुए कहा तो फिर जल्दी से असल बात
- 26:00भी बता दो। संतों ने आंखें बंद की जैसे
- 26:03हिम्मत इकट्ठा कर रही हो और एक ही सांस
- 26:05में बोल गई। दीदी मुझे श्रवण बहुत पसंद है
- 26:09और शायद वो भी मुझे पसंद करता है लेकिन
- 26:11आपके डर से वो मेरे सामने कुछ बोलता ही
- 26:14नहीं। इतना कहकर उसने धीरे से एक आंख खोली
- 26:17और मासूमियत से पूछा।
- 26:19अब आपको गुस्सा तो नहीं आ रहा ना? शिप्रा
- 26:23उसकी बात सुनकर सन्न रह गई। उसे लगा यह
- 26:25लड़की क्या बोल रही है? शंतो उसी से उसके
- 26:28पति के बारे में कह रही है कि वह उसे पसंद
- 26:30करती है और साथ में यह भी कि श्रवण भी उसे
- 26:33पसंद करता है। शिप्रा के शरीर में ऊपर से
- 26:36नीचे तक झनझनाहट सी होने लगी। शिप्रा को
- 26:39समझ नहीं आया कि वो इस पर गुस्सा करे या
- 26:41अपनी किस्मत पर हंसे। उसका पति उसकी ही
- 26:44नौकरानी को पसंद करता है। एकदम से उसने
- 26:46खुद को नॉर्मल किया और सोचने लगी। वैसे
- 26:50इसमें गलत भी क्या है? उस बेचारे ने अपनी
- 26:52औकात के हिसाब से ही लड़की पसंद की है। और
- 26:55सच तो यह भी है कि संतो कोई कम सुंदर नहीं
- 26:58थी। उसका मासूम चेहरा किसी का भी ध्यान
- 27:01खींच सकता था। शिप्रा को संतो के मुंह से
- 27:03श्रवण के लिए ऐसी बात सुनने की उम्मीद
- 27:05नहीं थी। पर इसमें संतो की गलती भी क्या
- 27:08थी? उसे तो पता ही नहीं था कि श्रवण
- 27:10शिप्रा का पति है। शिप्रा ने संभलते हुए
- 27:13पूछा। अच्छा एक बात बताओ तुमने श्रवण को
- 27:17अपने दिल की बात बताई थी?
- 27:19संतो ने मासूमियत से कहा, हां बताई थी ना
- 27:22दीदी पर वो आपसे डरता है इसलिए उसने कोई
- 27:25जवाब ही नहीं दिया। अच्छा तो क्या कहा था
- 27:29उसने? शिप्रा ने थोड़ा कुरदते हुए पूछा।
- 27:32उसे डर था कि अगर आपको पता चल गया कि वो
- 27:35मुझे पसंद करता है तो आप उसे नौकरी से
- 27:37निकाल दोगी। इसी डर से वह कुछ बोल ही नहीं
- 27:40पाया। संतो ने वही बताया जो श्रवण ने उससे
- 27:43कहा था। यह सुनकर शिप्रा सोच में पड़ गई।
- 27:46क्या सच में ऐसा हो सकता है कि श्रवण संतो
- 27:49को पसंद करने लगा हो? उसके मन में हल्की
- 27:51सी जलन भी उभर आई। उसने सोचा शंतो कहीं
- 27:55ज्यादा ही इमोशनली ना जुड़ जाए। उससे पहले
- 27:58ही उसे सच्चाई पता होनी चाहिए। वैसे भी
- 28:01अगर श्रवण घर में रहने आएगा तो यह बात
- 28:03ज्यादा दिन छिप नहीं पाएगी। यही सोचकर
- 28:05शिप्रा ने उससे पूछा। अच्छा संतो एक बात
- 28:08बताओ क्या तुम मेरे पति से मिली हो? आपने
- 28:12कभी मिलवाया ही नहीं दीदी? फिर संतो ने
- 28:14सहानुभूति जताते हुए कहा आपके साथ जो हुआ
- 28:18था उसके बाद [संगीत] हां यह तो है लेकिन
- 28:21क्या तुम्हारा कभी मन नहीं किया उन्हें
- 28:23देखने का शिप्रा ने बात आगे बढ़ाते हुए
- 28:26पूछा एक बार देखने का तो बड़ा मन किया था
- 28:29दीदी पर मैं आपको दुख नहीं देना चाहती थी
- 28:32संतो धीमे स्वर में बोली शिप्रा ने एक पल
- 28:35उसे देखा फिर सीधे कहा मैं नहीं चाहती कि
- 28:39तुम्हें बाद में ज्यादा दुख हो इसीलिए अभी
- 28:42बता रही हूं श्रवण ही वो है जिससे मेरी
- 28:45शादी हुई है। क्या संतो का मुंह खुला का
- 28:48खुला रह गया?
- 28:50उसे यकीन ही [संगीत] नहीं हुआ जिसे वो
- 28:53पसंद करने लगी थी वही शिप्रा दीदी का पति
- 28:55है। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह
- 28:58एकदम चुप सी हो गई। उसे लगने लगा यह कैसी
- 29:01बात कह दी उसने। पर साथ ही उसे राहत भी
- 29:04हुई कि समय रहते सच पता चल गया। मुझे माफ
- 29:07कर दीजिए दीदी। मुझे नहीं पता था कि श्रवण
- 29:10आपका पति है इसीलिए मैं आपसे इतना सब बोल
- 29:12गई। संतो शर्मिंदा होते हुए बोली इस पर
- 29:15शिप्रा ने हल्के स्वर में कहा अरे नहीं
- 29:18इसमें शर्मिंदा होने की क्या बात है?
- 29:20तुमने कुछ भी जानबूझकर नहीं किया। अब संतो
- 29:24को याद आया। शायद इसी वजह से श्रवण ने
- 29:27उससे कहा था कि वह इस बारे में शिप्रा से
- 29:29बात कर ले। उसके चेहरे पर ग्लानी साफ झलक
- 29:32रही थी। शिप्रा ने उसे फिर समझाया।
- 29:35तुम्हें शर्मिंदा होने की कोई जरूरत नहीं
- 29:37है। संतो तुमने कुछ गलत नहीं किया। कोई और
- 29:40समय होता तो शायद मैं खुद तुम दोनों को
- 29:43मिलवाती। लेकिन अभी दादा जी ने साफ कह
- 29:45दिया है कि आज से श्रवण इसी घर में रहेगा।
- 29:48इसीलिए जब तक वो यहां है मैं कुछ नहीं कर
- 29:51सकती। खैर संतो फटाफट शिप्रा के कमरे की
- 29:54सफाई करके चली गई थी। पर शिप्रा के दिमाग
- 29:56में अभी भी संतो के द्वारा कही गई बातें
- 29:58ही घूम रही थी। वो सोचने पर मजबूर थी कि
- 30:02क्या सच में श्रवण संतो को पसंद करता
- 30:04होगा?
- 30:05वैसे शिप्रा को इसमें कुछ गलत भी नहीं लग
- 30:07रहा था। अगर उसकी मजबूरी नहीं होती तो वह
- 30:10खुद दोनों को मिलाने की कोशिश करती। लेकिन
- 30:12अभी के हालात ऐसे थे कि अगर इन दोनों के
- 30:15बीच कुछ होने वाला भी होता तो शिप्रा नहीं
- 30:17चाहती थी कि शंतों के मन में कोई उम्मीद
- 30:19जागे। यही वजह थी कि उसने शंतों को सच्चाई
- 30:23बता दी। ताकि वो श्रवण से ज्यादा इमोशनली
- 30:26अटैच ना हो जाए और बाद में उसे दूर होने
- 30:28में तकलीफ ना हो। अब संतो शिप्रा और श्रवण
- 30:32की सच्चाई जानकर खुद ही उससे दूर [संगीत]
- 30:34हो जाएगी। यह सोचकर शिप्रा को श्रवण के
- 30:37लिए बुरा लग रहा था। क्योंकि उसकी वजह से
- 30:39ही उसे संतो से दूर होना पड़ेगा। अगर उसके
- 30:42दादाजी ने श्रवण को उसके साथ रहने की शर्त
- 30:45ना रखी होती तो वह कभी भी उन्हें अलग करने
- 30:48की कोशिश नहीं करती।
- 30:50अब वो सोचने [संगीत] लगी कि वो श्रवण को
- 30:53कैसे मनाए कि वो यहीं रुके। क्या वो उसे
- 30:55अपने पति के रूप में स्वीकार कर पाएगी? इस
- 30:58[संगीत] बारे में सोचकर उसे लगा कि वो ऐसा
- 31:00नहीं कर पाएगी। लेकिन परिवार के सामने उसे
- 31:03यह ड्रामा तो करना ही पड़ेगा कि उसने
- 31:05श्रवण को अपने पति के रूप में स्वीकार कर
- 31:08लिया है। अगर श्रवण की अपनी कोई मजबूरी ना
- 31:11होती तो वो उसे डमी पति के रूप में हमेशा
- 31:14के लिए स्वीकार कर लेती। शिप्रा ने अपनी
- 31:17घड़ी में समय देखा, तो घड़ी में 9:00 बजने
- 31:19वाले थे। उसने सोचा कि श्रवण के जाने से
- 31:22पहले उसे उससे बात कर लेनी चाहिए। यही
- 31:25सोचकर वो अपने कमरे से बाहर निकली और
- 31:27सर्वेंट क्वार्टर की ओर बढ़ गई। जब शिप्रा
- 31:30श्रवण के कमरे के पास पहुंची, तो उसे अंदर
- 31:32से दो लोगों की आवाजें सुनाई दी। वो
- 31:35खिड़की के पास गई और महसूस किया कि कमरे
- 31:37में श्रवण के साथ शंतो भी है। यह जानकर कि
- 31:41शंतो उसके साथ कमरे में अकेली है। वो धीरे
- 31:44से खिड़की के पास खड़ी हो गई और उनकी
- 31:46बातें सुनने लगी। तभी उसे संतो की आवाज
- 31:49सुनाई दी। तुमने मेरे साथ गलत किया।
- 31:53तुम्हें पहले ही बता देना चाहिए था कि
- 31:55शिप्रा दीदी की शादी तुमसे हुई है। अगर
- 31:57मुझे पहले पता होता तो मैं ऐसी बेवकूफी
- 32:00कभी नहीं करती। ओह हेलो मेरी उनसे
- 32:03जबरदस्ती शादी हुई है। इस तरह शादी होने
- 32:05से मैं उनका पति नहीं हो जाता। तुम्हें
- 32:08लगता है मेरे जैसी हैसियत वाले इंसान को
- 32:10वो अपना पति मानेंगी। शौर्य का चिढ़ा हुआ
- 32:13स्वर सुनाई दिया। बात उनके मानने या ना
- 32:16मानने की नहीं है। अगर मुझे पता होता तो
- 32:19मैं कभी तुमसे ऐसा बोलने की हिम्मत नहीं
- 32:21करती। तुम्हें पता है मैं कितनी बेवकूफ लग
- 32:23रही थी जब उन्होंने मुझे बताया कि तुम
- 32:25उनके पति हो। संतो उस पल को याद करके आहत
- 32:29लग रही थी। इस पर शौर्य ने उसकी ओर देखते
- 32:32हुए कहा तो क्या अब तुम मुझसे प्यार नहीं
- 32:34[संगीत] करती? क्या कहा? तुम अब भी ऐसा
- 32:38सोचते हो? तुम शिप्रा दीदी के पति हो। मैं
- 32:40अब तुम्हारे लिए ऐसा सोच भी नहीं सकती।
- 32:43संतो ने साफ शब्दों में जवाब दिया। इस पर
- 32:46शौर्य उसे समझाने की कोशिश करता हुआ बोला।
- 32:49अरे वो तो मैं सिर्फ नाम का पति हूं।
- 32:51हकीकत में थोड़ी उनका पति बन जाऊंगा। इस
- 32:54पर संतोष शौर्य को समझाने की कोशिश करती
- 32:57हुई बोली तुमने तो सपना दिखाकर मेरा सपना
- 33:00ही तोड़ दिया। रहने दो ज्यादा नौटंकी मत
- 33:02करो। आज से यही समझो कि मैं तुम्हारी साली
- 33:05हूं क्योंकि शिप्रा दीदी मेरी बड़ी बहन के
- 33:08जैसी ही है। तुम्हें नहीं पता वो बहुत
- 33:10अच्छी हैं। शंतों की बात सुनकर शौर्य के
- 33:13चेहरे पर मुस्कान आ गई। ठीक है। तुम्हारी
- 33:16यही इच्छा है तो यही सही। मैं अपने दिल पर
- 33:18पत्थर रख लूंगा। शिप्रा जो खिड़की के पास
- 33:21से दोनों की बातें सुन रही थी, उसे शौर्य
- 33:24का यह ड्रामा लगा। ठीक है, अब मैं यहां से
- 33:27जाती हूं। इतना बोलकर शंतो वहां से बाहर
- 33:30चली गई। शंतो को कमरे से बाहर निकलते
- 33:33देखकर शिप्रा खिड़की से साइड होकर एक
- 33:35दीवार की ओठ में आ गई। शंतो वहां से
- 33:38निकलकर सीधा विला की ओर चली गई। शंतों के
- 33:41लौटते कदमों में शिप्रा पहली बार सुस्ती
- 33:44देख रही थी। उसके कदम हमेशा जोश और एनर्जी
- 33:47से ही भरे नजर आते थे। शिप्रा कुछ देर
- 33:50वहीं खड़ी रही। उसकी जिंदगी हर पल उसके
- 33:53इम्तिहान ले रही थी। शायद यही वजह थी कि
- 33:56वो आजकल लोगों से कम अपने आप से ज्यादा
- 33:59सवाल जवाब कर रही थी। श्रवण और संतो की जो
- 34:02बातें सुनाई दे रही थी, क्या मुझे उन पर
- 34:05यकीन करना चाहिए? क्या श्रवण भी उन मर्दों
- 34:07जैसा है जो खूबसूरत लड़की देखते ही फिसल
- 34:10जाते हैं? नहीं। ऐसा नहीं हो सकता मेरा
- 34:14श्रवण।
- 34:15शिप्रा एकदम से बोलते बोलते [संगीत] रुक
- 34:17गई। उसके चेहरे पर हल्की सी हंसी खिल आई।
- 34:20शायद उसके मुंह से निकले मेरा श्रवण शब्द
- 34:23ने दिन रात हालातों से जूझ रहे उसके दिल
- 34:26को रेगिस्तानी धरती पर गिरी पानी की बूंद
- 34:29जैसी ठंडक पहुंचाई थी। शिप्रा के नसीब में
- 34:32शायद अभी खुशी के सिर्फ दो-चार पल ही थे।
- 34:35चुनौतियों से अब उसकी दोस्ती सी हो गई थी।
- 34:38ख्यालों की दुनिया से शिप्रा अब जमीन पर
- 34:40लौट चुकी थी। संतो के जाने के करीब 5 मिनट
- 34:43बाद शिप्रा शौर्य के कमरे के दरवाजे पर
- 34:46पहुंची। शौर्य अंदर कपड़े बदलते हुए
- 34:48फिल्मी गाना गुनगुना रहा था। संभल के दिल
- 34:52जरा फिर मोहब्बत कर रहा है तू। बोल किसके
- 34:56लिए धड़क रहा है तू। तभी शिप्रा दरवाजा
- 34:59खटखटाती है तो [संगीत] गाने की आवाज बंद
- 35:01हो जाती है। शिप्रा अंदर झांकती है। वो
- 35:04देखती है शौर्य शर्ट पहन रहा है। उसके बटन
- 35:07आधे खुले हैं। जैसे ही शौर्य की नजर
- 35:09शिप्रा पर पड़ती है वो झट से दरवाजा बंद
- 35:12कर देता है। शिप्रा उसकी इस हरकत पर
- 35:14मुस्कुरा देती है। करीब 30 सेकंड बाद
- 35:17दरवाजा फिर खुलता है। अब शौर्य ने शर्ट के
- 35:20सारे बटन बंद कर लिए थे। वो झिझकते हुए
- 35:23बोला। मुझे पता नहीं था कि बाहर आप खड़ी
- 35:25हैं। मैंने समझा था गिरधर काका हैं।
- 35:28शिप्रा उसकी घबराहट देख रही थी। [संगीत]
- 35:30अभी वह नहा कर आया था। उसके बालों से पानी
- 35:33की बूंदे टपक रही थी। उसका दमकता चेहरा
- 35:35देखकर शिप्रा सोचने लगी। कौन कह सकता है
- 35:39कि यह वही इंसान है जो कुछ दिन पहले
- 35:42भिखारी की जिंदगी जी रहा था। तभी शौर्य ने
- 35:45पूछा आप यहां अचानक कुछ काम था क्या? इस
- 35:49पर शिप्रा बोली क्या मैं अंदर आ सकती हूं?
- 35:52मुझे तुमसे कुछ बात करनी है। शौर्य एक तरफ
- 35:55हट गया और बोला, आइए।
- 35:59शिप्रा अंदर आई और कमरे को देखा। कमरा था
- 36:02तो साफ पर थोड़ा अस्त-व्यस्त। बेड पर
- 36:04कपड़े बिखरे थे। शौर्य ने तुरंत कपड़े
- 36:07हटाए, बिस्तर ठीक किया और बोला, बैठिए।
- 36:11शिप्रा बेड पर बैठ गई। तुम भी बैठ जाओ।
- 36:15शौर्य कुर्सी पर बैठ गया और उसके बोलने का
- 36:17इंतजार करने लगा। कुछ पल सोचकर शिप्रा
- 36:20[संगीत] बोली देखो श्रवण मैं जानती हूं
- 36:23तुम्हारे अपने प्लान हैं लेकिन अभी मैं
- 36:25मुश्किल में हूं [संगीत] और मुझे तुम्हारी
- 36:27मदद चाहिए।
- 36:29शौर्य ने थोड़ा हैरान होकर पूछा कैसी मदद
- 36:33और मैं आपकी मदद कैसे कर सकता हूं? देखो
- 36:36आज मेरी मेरे परिवार वालों के साथ लंबी
- 36:39बहस हुई और उसका नतीजा यह रहा कि तुम्हें
- 36:41अब हमारे साथ हमारे घर में रहना होगा।
- 36:45दादाजी की यही शर्त है। शिप्रा ने बेचैनी
- 36:48भरे स्वर में कहा तो शौर्य उसकी बात समझने
- 36:51की कोशिश करते हुए बोला
- 36:53लेकिन इस तरह की बेतुकी शर्त का क्या
- 36:55मतलब?
- 36:57इस पर शिप्रा ने गहरी सांस ली और कहा
- 37:00तुम्हें तो मालूम ही है मेरे परिवार वाले
- 37:03मेरी दूसरी शादी कराना चाहते हैं। उससे
- 37:06बचने का यही एक तरीका है कि तुम मेरे साथ
- 37:08मेरे घर में शिफ्ट हो जाओ। वो जैसे अपने
- 37:11दिल की बात साफ-साफ उसके सामने रख रही थी।
- 37:14[संगीत]
- 37:14शौर्य अंदर ही अंदर खुश था कि उसे शिप्रा
- 37:16के साथ रहने का मौका मिल रहा है। लेकिन
- 37:19उसने अपने चेहरे पर यह भाव जाहिर नहीं
- 37:21होने दिया। क्यों ना तुम अभी मेरे साथ
- 37:24चलो। तुम्हारी शिफ्टिंग हो जाएगी तो घर
- 37:27वालों के सिर पर सवार मेरी दूसरी शादी का
- 37:29भूत भी उतर जाएगा और मैं फाइनली बिजनेस
- 37:32में पूरा ध्यान लगा पाऊंगी।
- 37:36शिप्रा ने खुद को मन ही मन तैयार कर लिया
- 37:39था कि अब उसे शौर्य के साथ रहना ही होगा।
- 37:41शौर्य ने शिप्रा के वहां जाने से पहले कहा
- 37:45पर मैंने तो अपने रहने के लिए घर भी देख
- 37:47लिया है। आज ही शिफ्ट होना था। क्या शिपरा
- 37:51हैरानी से बोली
- 37:53इतनी जल्दी क्या थी तुम्हें घर देखने की?
- 37:55शौर्य ने कंधे उचकाते हुए कहा इतना सोचने
- 37:58का समय कहां था? जब यहां से जाना ही था तो
- 38:01जल्दी क्या और देर क्या? एक्चुअली [संगीत]
- 38:04मैं भी यही सोच रहा था कि अगर यहां से
- 38:06फ्री हो जाऊंगा तो अपनी नौकरी में पूरा
- 38:08ध्यान लगाऊंगा। वो जानबूझकर ऐसे बोल रहा
- 38:11था। वो देखना चाहता था कि उसकी बातों का
- 38:14शिप्रा पर क्या असर होता है। शिप्रा बेचैन
- 38:17सी दिखी। कुछ पल [संगीत] चुप रही। फिर
- 38:19धीरे से बोली मैं समझती हूं कि मुझे कहने
- 38:22का हक नहीं है कि तुम कहां रहो और कैसे
- 38:25रहो। लेकिन अगर तुम यहां से चले गए तो
- 38:27मेरे लिए बहुत मुश्किल हो जाएगी। तुम तो
- 38:30जानते हो अभी मेरे पास तुम्हें अपने साथ
- 38:32घर में रखने के अलावा कोई स्यूशन नहीं है।
- 38:35कहते हुए शिप्रा ने गहरी सांस ली और आगे
- 38:37कहा। मेरे घर वाले तो पहले से ही चाहते
- 38:40हैं कि मेरा तुमसे तलाक हो जाए और मेरी
- 38:43शादी किसी और से कर दें। इसीलिए मैं तुमसे
- 38:45रिक्वेस्ट कर रही हूं कुछ दिन मेरे घर में
- 38:47रह लो। हो सकता है तब तक उनका यह ख्याल भी
- 38:50बदल जाए। उसकी आवाज में पहली बार साफ झलक
- 38:54रहा था कि वो हालातों से बहुत हताश है और
- 38:56सच में मदद मांग रही है। शौर्य ने उसकी
- 39:00तरफ देखा। फिर धीरे से [संगीत] बोला।
- 39:02लेकिन मेरे आपके घर में रहने से बदनामी तो
- 39:05आपकी ही होगी।
- 39:07लोग तो आपके बारे में ही उल्टी सीधी बातें
- 39:09करेंगे। शौर्य की बात में चिंता थी। लेकिन
- 39:12कहीं ना कहीं वह यह भी देख रहा था कि
- 39:15शिप्रा उसके लिए कितनी दूर तक जाने को
- 39:17तैयार है। तुम्हें क्या लगता है? मुझे
- 39:20इसकी कोई परवाह है कि लोग मेरे बारे में
- 39:22क्या कहेंगे? और वैसे भी लोग मेरे बारे
- 39:25में इतना कुछ कह चुके हैं कि अब उनके पास
- 39:27कहने को क्या ही बचा होगा। शिप्रा ने साफ
- 39:30शब्दों में कहा। मैं तो बस अपने परिवार के
- 39:33उस दबाव से बचना चाहती हूं जो तुम्हारे
- 39:35यहां से जाने के बाद मुझ पर दूसरी शादी के
- 39:38लिए डाला जाएगा। उनकी सोच उफ तुम सुनोगे
- 39:42तो हैरान हो जाओगे। वो लोग तो रजत से ही
- 39:45मेरी शादी कराने को तैयार बैठे हैं।
- 39:49शिप्रा के मुंह से रजत का जिक्र सुनकर
- 39:51शौर्य ने अपनी आंखों को ऐसे बंद किया मानो
- 39:53वो अपने गुस्से को अंदर ही अंदर पी गया
- 39:55हो। उसने गंभीर नजर से शिप्रा की ओर देखा
- 39:58और कहा आप कब तक अपने घर वालों को यूं ही
- 40:01धोखा देती रहेंगी? जब तक उनके दिमाग से
- 40:05मेरी दूसरी शादी कराने का फितूर नहीं उतर
- 40:07जाता तब तक। शिप्रा ने बिना झिझक जवाब
- 40:10दिया। [संगीत] वैसे भी तुम्हारे यहां रहने
- 40:12से तुम्हारे काम पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
- 40:14तुम यहां से भी ऑफिस आ जा सकते हो। और
- 40:17मेरी तरफ से तुम पर कोई रोक-टोक नहीं
- 40:19होगी। तुम कहां जाते हो? किससे मिलते हो?
- 40:22मुझे कोई ऐतराज नहीं। वो उसे मनाने की
- 40:25पूरी कोशिश कर रही थी। शौर्य ने कुछ पल
- 40:28सोचा। शिप्रा की फिक्रमंद आंखों को देखा
- 40:31और फिर अपना सिर हिलाते हुए कहा,
- 40:34ठीक है। अगर आप चाहती हैं कि मैं यहां
- 40:36रहूं तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है। मैं तो
- 40:39बस आपके बारे में सोच कर मना कर रहा था।
- 40:42यह सुनते ही जैसे शिप्रा के सिर से बड़ा
- 40:44बोझ उतर गया। उसके चेहरे की टेंशन एकदम से
- 40:47गायब हो गई। वो तुरंत उठते हुए बोली तो
- 40:50फिर चलो अपना सामान पैक करो और मेरे साथ
- 40:53चलो। शौर्य को उम्मीद नहीं थी कि वो
- 40:56[संगीत] उसे तुरंत साथ ले जाने को कहेगी।
- 40:58वैसे भी उसके पास ज्यादा सामान नहीं था।
- 41:01बस एक छोटा सा बैग जिसमें कुछ कपड़े थे।
- 41:03वो बैग उठाकर शिप्रा के साथ उसके बंगले
- 41:06में पहुंच गया। फिर जैसे ही उसने अंदर कदम
- 41:09रखा सामने राजदीप राय और बीना जी बैठे हुए
- 41:13थे। शौर्य को वहां देखकर राजदीप राय का
- 41:15चेहरा तो भावहीन रहा लेकिन बीना जी के
- 41:18चेहरे पर साफ नाखुशी झलक रही थी। शौर्य ने
- 41:21दोनों को झुककर नमस्ते किया। राजदीप राय
- 41:24ने हल्के से सिर हिलाकर जवाब दे दिया
- 41:27लेकिन बीना जी का चेहरा वैसा ही बना रहा।
- 41:29हालांकि भीतर ही भीतर वो थोड़ी हैरान जरूर
- 41:32थी। उन्होंने शौर्य को पहले से इंप्रेसिव
- 41:35रूप में कभी नहीं देखा था। बिना दाढ़ी
- 41:38सलीके से तैयार उसका व्यक्तित्व पहले से
- 41:41बिल्कुल अलग और प्रभावशाली लग रहा था। एक
- 41:44पल को तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि यही
- 41:47वो इंसान है जिसे वह अब तक भिखारी समझती
- 41:50आई थी। कुछ ऐसा ही हाल राजदीप राय का भी
- 41:53था। शौर्य के इस बदले हुए रूप को देखकर
- 41:56उनके मन में जो खटक थी, वह काफी हद तक कम
- 41:59हो गई। अब उसे देखकर कोई भी उसे भिखारी
- 42:01नहीं कह सकता था। बस एक बात अब भी बाकी
- 42:04थी। उसके सामाजिक रुतबे की कमी और शायद
- 42:08यही बात इस घर में उसके लिए सबसे बड़ी
- 42:10कसौटी बनने वाली थी। बीना जी को अब भी
- 42:13यकीन नहीं हो रहा था। उन्होंने ध्यान से
- 42:16शौर्य को देखा। फिर शिप्रा से पूछ ही
- 42:18लिया। बेटा क्या यह वही है जिससे तुम्हारी
- 42:23शादी हुई है? मां का सवाल सुनकर शिप्रा एक
- 42:26पल को चौंकी। फिर उसे अपनी ही गलती का
- 42:28एहसास हुआ। मां पापा ने उसे इस रूप में
- 42:31कभी देखा ही नहीं था। मां पापा के चेहरे
- 42:34में थोड़ी संतुष्टि देखकर वो हल्का
- 42:36मुस्कुराते हुए उत्साह से बोली, हां मां
- 42:40यह श्रवण ही है। बीना जी के चेहरे के भाव
- 42:43धीरे-धीरे बदलने लगे। जिस दामाद की
- 42:45उन्होंने कल्पना की थी, शौर्य उससे कहीं
- 42:48बेहतर निकला। उनके मन की सबसे बड़ी चिंता
- 42:51थी बेटी और दामाद का बेमेल रूप। लेकिन वो
- 42:54चिंता अब एक ही पल में खत्म हो गई। अब
- 42:56उनकी नजरें बार-बार शौर्य के चेहरे पर टिक
- 42:59रही थी। अब कोई इसका मजाक नहीं उड़ा सकता
- 43:02और जहां तक पैसों का सवाल था वो तो आ ही
- 43:05जाते हैं कभी ना कभी। शिप्रा मां के बदलते
- 43:08भाव पड़ चुकी थी। अचानक उसमें कुछ नई
- 43:10एनर्जी सी आ गई थी। वो शौर्य के साथ
- 43:13सीढ़ियों की ओर बढ़ते हुए बोली मां मैं
- 43:15श्रवण को उसका कमरा दिखाकर आती हूं। इसके
- 43:18बाद दोनों ऊपर चले गए और नीचे डाइनिंग
- 43:20एरिया में राजदीप जी और बीना जी एक दूसरे
- 43:23को देखने लगे।
- 43:26आपने इसे पहले कभी इस रूप में देखा था?
- 43:29बीना जी ने धीमे से पूछा। नहीं राजदीप ने
- 43:34सिर हिलाया। मैं खुद हैरान हूं। मैंने
- 43:37सोचा भी नहीं था कि दाढ़ी हटाने के बाद यह
- 43:40ऐसा लगेगा। बीना जी ने राहत की सांस ली।
- 43:43सच कहूं तो मेरे सिर से बहुत बड़ा बोझ उतर
- 43:46गया। मैं तो इसके रूप को लेकर ही परेशान
- 43:49थी। लेकिन अब कम से कम कोई इसका मजाक तो
- 43:52नहीं बनाएगा। राजदीप जी ने भी हामी भरी।
- 43:55तुम ठीक कहती हो। और जहां तक इसकी स्थिति
- 43:58की बात है अगर हम साथ देंगे तो वह भी बदल
- 44:02जाएगी। उधर शिप्रा शौर्य को उसके कमरे में
- 44:05लेकर आई। वो कमरा उसके अपने कमरे के पास
- 44:07ही था। अब से यह तुम्हारा कमरा है। शिप्रा
- 44:11ने कहा [संगीत] अगर कुछ बदलवाना हो तो बता
- 44:14देना। शौर्य ने चारों तरफ देखा। फिर हल्की
- 44:17मुस्कान के साथ बोला। नहीं इसकी कोई जरूरत
- 44:20नहीं है। यह मेरी उम्मीद से भी बेहतर है।
- 44:23वो पहले से तैयार था। इसीलिए उसने तुरंत
- 44:26पूछा
- 44:28आपको ऑफिस नहीं जाना है क्या?
- 44:32हम जाना तो है लेकिन सोचा पहले तुम्हें
- 44:35यहां सेट कर दूं। शिप्रा ने जवाब दिया।
- 44:37[संगीत] इस पर शौर्य ने दरवाजे की ओर
- 44:39इशारा किया। तो चलिए मैं आपको ऑफिस
- 44:42[संगीत] छोड़ देता हूं। और तुम तुम्हें भी
- 44:44तो कहीं जाना था। शिप्रा ने उसकी आंखों
- 44:47में देखते हुए पूछा। मैं आपको छोड़कर चला
- 44:50जाऊंगा। उसने सहजता से जवाब दिया। दोनों
- 44:53नीचे आए। राजदीप जी और बीना जी अब भी वहीं
- 44:56बैठे थे। मां मैं ऑफिस जा रही हूं। श्रवण
- 44:59मुझे छोड़ देगा। शिप्रा ने कहा। राजदीप ने
- 45:02तुरंत पूछा। अच्छा और फिर यह कहां जाएगा?
- 45:07पापा श्रवण आज से एक नया ऑफिस ज्वाइन कर
- 45:09रहा है। मुझे छोड़कर वहीं चला जाएगा।
- 45:12राजदीप जी कुछ पल चुप रहे और सोचने लगे।
- 45:15[संगीत]
- 45:17नया ऑफिस उन्हें समझ नहीं आया कि इसकी
- 45:20जरूरत क्या है। लेकिन उन्होंने अभी कुछ
- 45:22कहना सही नहीं समझा। शौर्य शिप्रा को लेकर
- 45:25कार में ऑफिस की तरफ निकल गया। वो आधे
- 45:28रास्ते ही पहुंचे थे कि शौर्य का फोन बज
- 45:30उठा। उसने जेब से फोन निकाला। स्क्रीन पर
- 45:33नजर पड़ते ही उसके चेहरे का भाव हल्का सा
- 45:36बदल गया और बिना कुछ कहे उसने फोन का
- 45:39स्क्रीन शिप्रा की तरफ से घुमा लिया। जैसे
- 45:42वो नहीं चाहता था कि शिप्रा देखे कौन कॉल
- 45:45कर रहा है। बलवंत राय, राजदीप और बीना जी
- 45:49के दिमाग में आज काफी हल्कापन था। ऐसा लग
- 45:52रहा था मानो तीनों के ही दिमाग में भिखारी
- 45:55का भूत चढ़ा हुआ था। भूत ने सभी को भयभीत
- 45:58कर रखा था। लेकिन अब अपने दामाद शौर्य के
- 46:01नए अवतार को देखकर सभी का भूत उतर सा गया
- 46:04है। अचानक शौर्य को लेकर सभी की सोच में
- 46:07परिवर्तन की लहर उठ रही है। शौर्य अब
- 46:10सर्वेंट क्वार्टर छोड़ शिप्रा के साथ उसके
- 46:12घर में ही रहने लगा है। शायद यही उसके दिल
- 46:15के अंदर की चाहत थी और शिप्रा के लिए सबसे
- 46:18बड़ी राहत थी। शिप्रा अपने मकसद में
- 46:20कामयाब हो गई थी। लेकिन शौर्य का मकसद आज
- 46:23कुछ और ही था। कार की रफ्तार आज थोड़ी
- 46:26धीमी ही रखनी पड़ रही थी। रास्ते में आज
- 46:29ट्रैफिक कुछ ज्यादा ही था। एक तरफ कार का
- 46:31हॉर्न बज रहा था तो दूसरी ओर शौर्य का
- 46:34फोन। जब शौर्य का फोन लगातार बजता रहा तो
- 46:37उसने आखिरकार फोन उठा लिया। दूसरी तरफ
- 46:40मोहित रहना था। अभिवादन के बाद उसने कहा
- 46:44सर क्या आप 1 घंटे में हमारे पास आ सकते
- 46:46हैं?
- 46:47शौर्य ने संक्षेप में जवाब दिया। ठीक है
- 46:50मैं एक घंटे में पहुंचता हूं। इतना कहकर
- 46:52उसने फोन काट दिया। शिप्रा की नजर शौर्य
- 46:55पर ही थी और उसे ये बात भी परेशान कर रही
- 46:58थी कि आखिर शौर्य उससे फोन छुपा क्यों रहा
- 47:01है? उत्सुकता में उसने पूछ ही लिया। किसका
- 47:04फोन था? शौर्य ने बड़ी ही सहजता से कहा।
- 47:07एक दोस्त का। पूछ रहा था कि मैं कब तक
- 47:10पहुंचूंगा।
- 47:11शिप्रा को उसकी बात पर पूरा भरोसा तो नहीं
- 47:14हुआ लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। थोड़ी देर
- 47:17बाद शौर्य शिप्रा को ऑफिस छोड़कर पार्किंग
- 47:19में गाड़ी खड़ी करने के बाद चाबी देते हुए
- 47:22बोला, ठीक है मैं चलता हूं। अगर शाम को
- 47:25समय मिला तो आपको फोन करूंगा। इसके बाद वो
- 47:28सीधे बिग बुल के ऑफिस पहुंच गया। उसे
- 47:31अंदाजा नहीं था कि मोहित रैना ने उसे
- 47:33क्यों बुलाया है लेकिन उसे यकीन था कि बात
- 47:36जरूर कुछ बहुत इंपॉर्टेंट ही होगी। वो
- 47:38सीधे मोहित रैना के केबिन में गया जहां
- 47:40विक्रम पहले से मौजूद था। उनके साथ एक और
- 47:43व्यक्ति भी बैठा था जिसे शौर्य नहीं जानता
- 47:46था। शौर्य को देखते ही मोहित रैना और
- 47:49विक्रम खड़े हो गए। उनके साथ वो तीसरा
- 47:51व्यक्ति भी सम्मान में उठ खड़ा हुआ। मोहित
- 47:54रैना ने अपनी कुर्सी शौर्य को ऑफर की और
- 47:56शौर्य जाकर उस पर बैठ गया। मोहित रैना
- 47:59विक्रम के पास बैठते हुए बोले।
- 48:02सर यह है मिस्टर राघव जिनके बारे में मैं
- 48:04आपको बता रहा था। शौर्य ने राघव का
- 48:07अभिवादन किया और कहा तो आप है राघव बजाज।
- 48:11मैंने सुना है कि आपके पास बिग कलेक्शन के
- 48:1430% शेयर हैं। क्या यह सच है? राघव बजाज
- 48:18ने हल्का गला साफ करते हुए कहा,
- 48:21[गला साफ़ करने की आवाज़] "जी हां, यह सच
- 48:22है। मेरे पास 30% शेयर हैं और मैं उन्हें
- 48:25आपको देने के लिए तैयार हूं।" शौर्य ने
- 48:28थोड़ा राहत भरे रवय से सिर हिलाया। बहुत
- 48:31बढ़िया। मुझे आपसे यही उम्मीद थी। लेकिन
- 48:3430% शेयर से मेरा काम नहीं चलेगा। मुझे
- 48:37लगभग 60% चाहिए। क्या आप मेरी यह उम्मीद
- 48:40भी पूरी करवा सकते हैं? राघव बजाज
- 48:43मुस्कुराते हुए बोला,
- 48:45"सर, पहले आप यह डील तो कीजिए, भरोसा
- 48:48रखिए। बाकी का 30% शेयर भी मैं आपके नाम
- 48:51करवा दूंगा।" दरअसल, सच तो यह है कि मेरा
- 48:54बड़ा भाई भी रौनित को पसंद नहीं करता। वो
- 48:57सिर्फ पिताजी के दबाव में चुप है। अगर आप
- 48:59उसे थोड़ा लालच देंगे, तो वह भी अपना शहर
- 49:02आपको देने के लिए तैयार हो जाएगा।
- 49:05शौर्य ने दिमाग में कुछ सोचते हुए सिर
- 49:07हिलाया और फिर आगे बोला अच्छा तो यह बात
- 49:10है। ठीक है लेकिन मैं देर नहीं करना
- 49:14चाहता। जितनी जल्दी हो सके मैं सारे शहर
- 49:16अपने नाम करवाना चाहता हूं। तो बताइए कब
- 49:19मिलवा रहे हैं अपने बड़े भाई से? शौर्य की
- 49:22बात सुनकर मोहित रैना बोला सर पुनीत बजाज
- 49:26से भी हमारी बात हो चुकी है। वो 1 घंटे
- 49:28में यहां पहुंचने वाले हैं। उम्मीद है
- 49:30उनसे भी आज ही डील फाइनल हो जाएगी। वाह
- 49:34बहुत बढ़िया। अगर ऐसा है तो पहले क्यों
- 49:36नहीं बताया? मैं तो बेकार में परेशान हो
- 49:39रहा था। शौर्य हल्का सा मुस्कुराया। ठीक
- 49:42है। राघव के साथ सारी फॉर्मेलिटी पूरी
- 49:45करके डील फाइनल कीजिए और पुनीत वाली डील
- 49:48भी जल्द से जल्द क्लोज करिए। मैं रौनित
- 49:50जनेजा को अब ज्यादा देर तक बिग कलेक्शन का
- 49:53डायरेक्टर नहीं देख सकता। जैसे ही शौर्य
- 49:56की बात खत्म हुई, मोहित रैना ने एक
- 49:58डॉक्यूमेंट आगे बढ़ाते हुए कहा,
- 50:01"सर, राघव के पेपर तैयार हैं। बस आपके
- 50:03साइन की देर है और उनका 30% शेयर आपका हो
- 50:06जाएगा। पुनीत के पेपर भी तैयार हैं। जैसे
- 50:09ही वह आएंगे, उनकी डील भी फाइनल हो जाएगी।
- 50:12उसके बाद बगैर कलेक्शन के 60% शेयर आपके
- 50:15पास होंगे। और फिर आप रौनित जनेजा के साथ
- 50:18जो चाहे कर सकते हैं। तभी विक्रम ने आगे
- 50:21बढ़कर कहा, बॉस राघव को पेमेंट ट्रांसफर
- 50:24हो चुका है और उनके साइन भी हो गए हैं। अब
- 50:26बस आपके साइन बाकी हैं और डील पूरी। ओके।
- 50:31लेकिन जब सब तैयार था तो पुनीत क्यों रह
- 50:33गया? शौर्य ने मोहित की ओर देखते हुए
- 50:36पूछा। मोहित ने जवाब दिया। अरे बॉस आप
- 50:39चिंता मत कीजिए। उसका भी फाइनल ही समझिए।
- 50:42बस उसके आने की देर है। दोनों भाई रौनित
- 50:44से परेशान हैं और उसे डायरेक्टर के रूप
- 50:46में नहीं देखना चाहते। लेकिन अपने पिता
- 50:49रत्नाकर बजाज की वजह से वो दोनों कुछ कर
- 50:51नहीं पा रहे थे। शौर्य ने बिना देर किए
- 50:54डॉक्यूमेंट पर साइन कर दिए। यह देखकर राघव
- 50:57बजाज खड़ा हो गया और बोला सर आपके साथ
- 51:01बिजनेस करके अच्छा लगा। मैं काफी समय से
- 51:03अपने शेयर बेचना चाहता था, लेकिन कोई सही
- 51:05कीमत देने को तैयार नहीं था। आपने बिना
- 51:08मोलभाव के मेरी बात मान [संगीत] ली। इसके
- 51:11लिए मैं आपका आभारी हूं। भविष्य में भी
- 51:13अगर आपको मदद की जरूरत हो तो निसंकोच याद
- 51:16कीजिएगा। इतना कहकर राघव वहां से निकल
- 51:19गया। वो जल्दी में था क्योंकि थोड़ी देर
- 51:21में उसका भाई पुनीत आने वाला था और वह
- 51:23उससे सामना नहीं करना चाहता था। बजाज
- 51:26भाइयों की आपसी खींचतान से शौर्य का काम
- 51:29आसान हो गया था। राघव बजाज के वहां से
- 51:32जाने के बाद शौर्य ने मोहित रैना को बधाई
- 51:35देते हुए कहा। बहुत बढ़िया मोहित। तुमने
- 51:38मेरी उम्मीद से बढ़कर काम किया। मैं खुश
- 51:40हूं कि तुमने अपने काम में कोई कोताही
- 51:43नहीं बरती। मैं चाहता हूं कि देर सवेर
- 51:46राघव की बहन और उसके पिता भी अपने शहर
- 51:48हमारे नाम कर दें। शौर्य की बात सुनकर
- 51:51मोहित ने कहा, "सर, एक्चुअली यह इतना आसान
- 51:54नहीं होने वाला क्योंकि राघव की बहन
- 51:56पल्लवी इतनी जल्दी हमारी बात नहीं मानने
- 51:58वाली और ना ही रत्नाकर बजाज।" मोहित की
- 52:01बात सुनकर शौर्य ने एक माहिर बिजनेसमैन की
- 52:04तरह बोलते हुए कहा, कोई बात नहीं। अगर वह
- 52:07हमारी बात नहीं मानते तो कंपनी के शेयर को
- 52:09इतना नीचे गिरा दो कि उनके पास अपने शेयर
- 52:12को बेचने के अलावा और कोई रास्ता ही ना
- 52:15बचे। शौर्य की बात सुनकर मोहित ने कहा पर
- 52:18सर इससे तो हमारा ही नुकसान होगा क्योंकि
- 52:21इस शेयर डील के बाद बिग कलेक्शन के मेन
- 52:23शेयर होल्डर तो हम ही होंगे। मोहित की बात
- 52:26सुनकर शौर्य मुस्कुराया और बोला तुम इसकी
- 52:29फिक्र मत करो मोहित यह गिरावट तात्कालिक
- 52:32होगी। जैसे ही बाप-बेटा इससे बाहर होंगे,
- 52:34[संगीत] हम इस कंपनी में एक मोटा
- 52:36इन्वेस्टमेंट करेंगे और जल्दी ही बगैर
- 52:38कलेक्शन को दोबारा मार्केट में एस्टैब्लिश
- 52:40कर देंगे। [संगीत]
- 52:42शौर्य की बात सुनकर मोहित की आंखें फैल
- 52:44गई। उसने मन ही मन सोचा आखिर इनके पास
- 52:47कितना पैसा है। इन्होंने एक बार भी नहीं
- 52:50सोचा कि शेयर के दाम गिरने पर नुकसान
- 52:52इन्हीं का होगा। लेकिन अंदर ही अंदर उसने
- 52:55शौर्य के दिमाग को भी सलूट [संगीत] किया।
- 52:57जिसने कैसे एक ही झटके में बगैर कलेक्शन
- 53:00को अपने कब्जे में लेने का प्लान बना
- 53:02लिया। विक्रम मुस्कुराते हुए बोला बॉस
- 53:05मानना पड़ेगा। आप जब किसी के पीछे पड़ते
- 53:07हैं तो उसे कहीं का नहीं छोड़ते। अब इस
- 53:10रौनक जनेजा का तो भगवान ही मालिक है। तभी
- 53:13मोहित ने भी पूछा सर आपका आगे का क्या
- 53:16प्लान है? शौर्य हल्का सा मुस्कुराया और
- 53:19बोला
- 53:21पहले पुनीत बजाज को आने दो। उसके शेयर भी
- 53:24हमारे नाम हो जाए। फिर सीधे बगैर कलेक्शन
- 53:26चलेंगे। सबसे पहले रोने जनेजा को वहां से
- 53:29निकालना है। आगे बाद में देखेंगे। फिर
- 53:32उसने मोहित से कहा एक बार पुनीत को फोन
- 53:35लगाकर पूछो वो कहां पहुंचा? मोहित फोन
- 53:39मिलाने ही वाला था कि तभी एक गार्ड अंदर
- 53:41आया और बोला, "सर, पुनीत [संगीत] बजाज आए
- 53:44हैं। क्या उन्हें अंदर भेज दूं?" मोहित ने
- 53:47कहा, "हां भेज दो।" कुछ ही पल में पुनीत
- 53:50बजाज कमरे में आया। वो सिर्फ मोहित को
- 53:53जानता था। इसीलिए उसने पहले उसे अभिवादन
- 53:55किया। फिर शौर्य और विक्रम की ओर देखा।
- 53:58मोहित ने शौर्य से उसका परिचय करवाया।
- 54:00शौर्य के बारे में सुनकर पुनीत की आंखें
- 54:03भी फैल गई। इतनी कम उम्र में इतना बड़ा
- 54:06बिजनेस शौर्य ने बिना वक्त गवाए सीधे
- 54:09मुद्दे पर आते हुए कहा। मिस्टर पुनीत आपको
- 54:12तो पता ही होगा कि आप यहां क्यों आए हैं।
- 54:15हां, पता है। पुनीत ने जवाब दिया। फिर
- 54:19थोड़ा ठहर कर कहा। लेकिन मैं चाहता हूं कि
- 54:21आप अपना ऑफर थोड़ा और बढ़ाएं ताकि मुझे
- 54:24फैसला लेने में आसानी हो। शौर्य समझ गया
- 54:27कि पुनीत लालच में आ चुका है लेकिन उसने
- 54:30इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वो शांत
- 54:32स्वर में बोला ठीक है तो आप ही बताइए आपको
- 54:35क्या चाहिए। शौर्य का कॉन्फिडेंस देखकर
- 54:39पुनीत बजाज दुविधा में पड़ गया। उसे समझ
- 54:41नहीं आ रहा था कि शौर्य के सामने क्या
- 54:43कीमत रखे। उसके शेयर की असली कीमत करीब 45
- 54:47करोड़ थी। लेकिन उसे लगा कि शौर्य इस डील
- 54:49के लिए कुछ ज्यादा ही उत्सुक है। इसीलिए
- 54:52उसने थोड़ा सोचकर 50 करोड़ की मांग रख दी।
- 54:55पुनीत की बात सुनकर शौर्य ने मोहित की ओर
- 54:58देखा। मोहित तुरंत समझ गया कि यह सीधा
- 55:00लालच है। इसीलिए वो बीच में पड़ते हुए
- 55:03बोला,
- 55:04पुनीत साहब, लगता है कि आप अपने शेयर
- 55:06बेचना ही नहीं चाहते। आपको भी पता है कि
- 55:0930% शेयर के 50 करोड़ कोई नहीं देगा। अगर
- 55:13आपने थोड़ा बहुत बढ़ाया होता तो हम मान भी
- 55:15जाते। लेकिन सॉरी। इस कीमत पर डील मुश्किल
- 55:18है। मोहित की बात सुनकर पुनीत को झटका
- 55:21लगा। उसे उम्मीद नहीं थी डील इतनी जल्दी
- 55:24मना हो जाएगी। सौदा हाथ से निकलता देख
- 55:27पुनीत तुरंत संभलते हुए बोला, ठीक है
- 55:30मोहित जी शायद मैंने ज्यादा कीमत बोल दी।
- 55:33आप ही कोई उचित मूल्य बताइए जिसे मैं मना
- 55:35ना कर सकूं। शौर्य ने पुनीत के मन का लालच
- 55:38भांप लिया। वो शांत स्वर में बोला मिस्टर
- 55:41पुनीत आपके शहर की असली कीमत 45 करोड़ है।
- 55:44मैं आपको अधिकतम 46 करोड़ दे सकता हूं।
- 55:47अगर यह कीमत मंजूर है तो सामने पेपर रखा
- 55:50है। साइन कीजिए और डील फाइनल कीजिए। वरना
- 55:53आप जा सकते हैं। हमें आपके शहर में कोई
- 55:56दिलचस्पी नहीं है। शौर्य के सख्त लहजे को
- 55:59देखकर पुनीत समझ गया कि अब मोल भाव का कोई
- 56:01फायदा नहीं है। उसने सोचा 1 करोड़ का
- 56:04फायदा भी कम नहीं होता। अगर शौर्य 45 पर
- 56:07अड़ा रहता तब भी वह मान जाता। इसीलिए उसने
- 56:10तुरंत फैसला किया ठीक है मिस्टर शौर्य
- 56:12मुझे आपकी डील मंजूर है लेकिन मुझे पेमेंट
- 56:15कैश में चाहिए। यह सुनकर शौर्य थोड़ा
- 56:18हैरान हुआ। उसने साफ शब्दों में कहा इतनी
- 56:22बड़ी रकम कैश में कौन देता है? अगर डील
- 56:24करनी है तो अधिकतम 10 करोड़ कैश मिल सकता
- 56:27है। बाकी पेमेंट ऑनलाइन ही होगी। अगर यह
- 56:30मंजूर है तो साइन कीजिए। मजबूरी में पुनीत
- 56:33बजाज को शौर्य की शर्त माननी पड़ी। शौर्य
- 56:36के इशारे पर विक्रम ने उसका अकाउंट लेकर
- 56:38₹36 करोड़ ट्रांसफर कर दिए और बाकी 10
- 56:42करोड़ के लिए मोहित रैना बोला मिस्टर
- 56:45पुनीत यह रकम आपको एक साथ नहीं मिलेगी। एक
- 56:48हफ्ते में धीरे-धीरे पूरी कर दी जाएगी।
- 56:51अभी आपको 2 करोड़ कैश मिलेंगे। बाकी रोज 2
- 56:54करोड़ लेकर जाना होगा। थोड़ा नानकोर के
- 56:57बाद पुनीत को यह भी मानना पड़ा। मोहित उसे
- 56:592 करोड़ कैश देने के लिए साथ लेकर बाहर
- 57:02चला गया। अब कमरे में सिर्फ शौर्य और
- 57:04विक्रम रह गए थे। शौर्य ने पुनीत के साइन
- 57:07किए हुए पेपर पर अपने साइन भी कर दिए। अब
- 57:09वो बगैर कलेक्शन के 60% शेयर का मालिक बन
- 57:13चुका था। डील पूरी होने के बाद विक्रम ने
- 57:16पूछा। बॉस अब आगे क्या इरादा है? शौर्य
- 57:20मुस्कुराया। चलो अब रौनित जुनेजा से मिलते
- 57:24हैं। विक्रम हैरान था कि शौर्य इतनी जल्दी
- 57:27में क्यों है? लेकिन उसने कुछ नहीं कहा और
- 57:29उसके साथ चल पड़ा। दोनों लिफ्ट से नीचे
- 57:32आए। वो दोनों बाहर निकलने ही वाले थे कि
- 57:34अचानक शौर्य के दिमाग में कुछ और आया और
- 57:37वो मुड़कर बिग बुल के ज्वेलरी डिपार्टमेंट
- 57:39की ओर बढ़ गया। वो किसी को ढूंढता हुआ
- 57:42इधर-उधर देखने लगा। तभी उसकी नजर एक जगह
- 57:45जाकर ठहर गई। शौर्य की नजर जिस चेहरे पर
- 57:48आकर ठहर गई थी, वह चेहरा प्रिया का था।
- 57:51शौर्य का दौड़ता दिमाग उसे देखकर कुछ पल
- 57:54के लिए क्यों रुक गया? इसका जवाब सिर्फ
- 57:56शौर्य ही जानता था। प्रिया की समझदारी और
- 57:59किसी भी स्थिति को स्मार्टली संभाल लेने
- 58:01की काबिलियत का अंदाजा शौर्य को भली-भांति
- 58:04हो चुका था। इसीलिए उसने अपने अगले प्लान
- 58:07में उसे एक लीड रोल देने का फैसला लिया और
- 58:10इसी के चलते वो रौनित के पास जाते-जाते
- 58:13अचानक यूटर्न लेकर प्रिया के सामने पहुंच
- 58:15गया। प्रिया ने जैसे ही शौर्य को देखा वो
- 58:19तुरंत सीधे खड़ी हो गई। अरे सर आप यहां
- 58:22शौर्य हल्के अंदाज में बोला क्यों क्या
- 58:25मैं यहां नहीं हो सकता ऐसी बात नहीं है सर
- 58:28आप तो यहां के ओनर है आप कहीं भी हो सकते
- 58:31हैं प्रिया ने जल्दी से कहा शौर्य
- 58:33मुस्कुराया
- 58:35क्या बात है तुम्हारे हाजिर जवाबी के इसी
- 58:38हुनर से मैं इंप्रेस हूं यह सुनकर प्रिया
- 58:40थोड़ी घबरा गई उसे लगा कहीं शौर्य को बुरा
- 58:43तो नहीं लग गया उसके चेहरे पर हल्की
- 58:45परेशानी झलकने लगी शौर्य ने तुरंत कहा
- 58:48घबराओ मत मुझे तुमसे काम है। प्रिया ने
- 58:52खुद को संभाला और बोली, "क्या बात कर रहे
- 58:54हैं सर? आपको मुझसे काम है। मैं तो यहां
- 58:57आपके काम के लिए ही हूं। बताइए मैं क्या
- 59:00कर सकती हूं? उसके चेहरे पर हल्की हैरानी
- 59:03के साथ उत्सुकता भी झलक रही थी। जैसे वह
- 59:05अभी भी यकीन करने की कोशिश कर रही हो।
- 59:08शौर्य ने प्रिया के एकदम सीधे खड़े रहकर
- 59:11बात करने के अंदाज को गौर से देखा और
- 59:13हल्की मुस्कान के साथ कहा।
- 59:16सबसे पहले तो इस अटेंशन वाली मुद्रा से
- 59:18बाहर आओ और थोड़ा नॉर्मल हो जाओ। मैं कोई
- 59:21बाघ नहीं हूं जो तुम्हें खा जाऊंगा। मैंने
- 59:24पहले भी कहा था मेरे सामने ऐसे खड़े मत
- 59:26हुआ करो। अब जो काम मैं बता रहा हूं उसे
- 59:29ध्यान से सुनो। उसकी आवाज में सख्ती कम और
- 59:32अपनापन ज्यादा था। जिससे माहौल थोड़ा
- 59:35हल्का हो गया। प्रिया शौर्य की बात सुनकर
- 59:38धीरे-धीरे सहज हुई। वो हल्का सा मुस्कुरा
- 59:40कर बोली। ठीक है सर। अब बताइए क्या काम
- 59:43है? उसकी आवाज में अब पहले जैसी घबराहट
- 59:46नहीं थी बल्कि एक हल्की सी सहजता आ गई थी।
- 59:49शौर्य ने बात को बिना ज्यादा घुमाए सीधे
- 59:51कहा। तुम तैयार हो जाओ। तुम्हें भी मेरे
- 59:54साथ चलना है। कहां जाना है सर? प्रिया एक
- 59:57पल के लिए चौंक गई और उसने तुरंत पूछा तो
- 59:59शौर्य ने बस उसकी ओर देखते हुए कहा। साथ
- 1:00:02चलोगी तो खुद ही पता चल जाएगा। प्रिया ने
- 1:00:05एक पल सोचा। फिर सिर हिला कर बोली। ठीक है
- 1:00:08सर चलती हूं। उसके मन में हल्की जिज्ञासा
- 1:00:11के साथ एक अनकाहा उत्साह भी जाग गया था।
- 1:00:14तभी शौर्य ने उसके ड्रेस पर नजर डाली और
- 1:00:16कहा लेकिन इस ड्रेस में नहीं पहले जाकर
- 1:00:20चेंज कर लो फिर चलते हैं। अब प्रिया को
- 1:00:22समझ आ गया कि उसे कहीं बाहर ले जाया जाने
- 1:00:24वाला है। एक [संगीत] पल के लिए उसके मन
- 1:00:26में हल्की सी शंका भी उठी। लेकिन अगले ही
- 1:00:29पल उसे शिप्रा के साथ वाली पिछली मुलाकात
- 1:00:31याद आ गई। जिसने उसके मन का संदेह पूरी
- 1:00:34तरह मिटा दिया। वो जल्दी से वहां से गई और
- 1:00:37कुछ ही मिनटों में कपड़े बदलकर वापस आ गई।
- 1:00:39आसमानी सूट सलवार में वो बेहद [संगीत]
- 1:00:42खूबसूरत लग रही थी। एक पल को उसे बदले रूप
- 1:00:44में देखकर शौर्य की नजर में थोड़ी हलचल सी
- 1:00:47हुई लेकिन उसने तुरंत खुद को संभाल लिया।
- 1:00:50उसी वक्त मोहित रैना भी वहां पहुंच गया।
- 1:00:53उसने शौर्य को देखते ही कहा। सर मैं आपको
- 1:00:55ही ढूंढ रहा था। मैंने अभी पुनीत बजाज को
- 1:00:582 करोड़ कैश दे दिया है। बाकी भी जल्द ही
- 1:01:00दे दूंगा। इतनी बड़ी रकम की बात सुनकर तो
- 1:01:03प्रिया की सांसे ही अटकने को हो रही थी।
- 1:01:05पर प्रिया ने अपनी हैरानी को अंदर ही दबा
- 1:01:08लिया और चुपचाप उन सबकी बात सुनती रही।
- 1:01:11खैर शौर्य का आज का टारगेट सिर्फ एक ही
- 1:01:14था। रौनित जनेजा को बिग कलेक्शन से हटाना।
- 1:01:17वैसे तो शौर्य का प्लान खुद ही बिग
- 1:01:19कलेक्शन के ऑफिस में जाने का था। पर अचानक
- 1:01:21मोहित रैना को देखने के बाद उसका विचार
- 1:01:23बदल गया। उसने मोहित रैना से कहा सुनो
- 1:01:27मोहित तुम्हें प्रिया के साथ बगैर कलेक्शन
- 1:01:30के ऑफिस जाना है और आगे की कार्यवाही
- 1:01:32संभालनी है। मैं चाहता हूं कि आज के आज ही
- 1:01:35रौनी जनेजा बिग कलेक्शन के डायरेक्टर के
- 1:01:37पद से हट जाए और आज के बाद बिग कलेक्शन का
- 1:01:40कार्यभार प्रिया संभाले।
- 1:01:43शौर्य यहीं नहीं रुका। उसने प्लान की
- 1:01:45स्क्रिप्ट को कंटिन्यू करते हुए आगे कहा।
- 1:01:48तुम्हारे साथ विक्रम भी जाएगा। मैं भी
- 1:01:50अपनी पहचान सामने नहीं लाना चाहता। इसलिए
- 1:01:53विक्रम फ्रंट पर रहेगा। आज के बाद लोग उसी
- 1:01:56को बिगर कलेक्शन का नया शेयर होल्डर
- 1:01:58जानेंगे। नो प्रॉब्लम बॉस। मैं अभी विक्रम
- 1:02:01सर के साथ ऑफिस जाता हूं और जैसा आपने कहा
- 1:02:03है मैं वैसा ही करूंगा। मोहित ने तुरंत
- 1:02:06जवाब दिया। इस पर शौर्य ने कहा, बहुत
- 1:02:10बढ़िया। काम खत्म होने के बाद तुम सब सीधे
- 1:02:12होटल राजकमल आ जाना। वहां मैं तुम सबको
- 1:02:15शानदार ट्रीट दूंगा। इतना बोलकर शौर्य ने
- 1:02:18विक्रम से उसकी गाड़ी की चाबी देने के लिए
- 1:02:20कहा। फिर आगे बोला,
- 1:02:22[संगीत]
- 1:02:23ठीक है तो अब मैं चलता हूं और मैं तुम
- 1:02:25लोगों का इंतजार वहीं करूंगा। गुड न्यूज़
- 1:02:28जल्दी देना। विक्रम ने उसे चाबी दे दी और
- 1:02:31तीनों वहां से निकल गए। [संगीत] अब शौर्य
- 1:02:33के पास कोई खास काम नहीं था। इसीलिए वो
- 1:02:35विक्रम की कार लेकर सीधे होटल राजकमल
- 1:02:38पहुंच गया। रिसेप्शन से होते हुए वो सीधा
- 1:02:41मेनका के ऑफिस में गया। मेनका मैनेजर की
- 1:02:44कुर्सी पर बैठी थी। शौर्य को अचानक देखकर
- 1:02:47वो थोड़ा हैरान हुई और बोली अरे मिस्टर
- 1:02:50शौर्य आप यहां अचानक आपने खबर भी नहीं की।
- 1:02:54इस पर शौर्य हल्की मुस्कान के साथ बोला
- 1:02:57आने का कोई खास प्लान नहीं था। बस अचानक
- 1:03:00मन किया और चला आया। मुझे अपने रूम की
- 1:03:02चाबी दे दीजिए। थोड़ा आराम करना है। शौर्य
- 1:03:05की बात सुनकर मेनका ने दराज खोला और एक
- 1:03:08कार्ड निकालकर उसकी ओर बढ़ा दिया। कार्ड
- 1:03:10लेते हुए शौर्य ने कुछ महसूस किया और बोला
- 1:03:14लगता है मुझे देखकर आपको खास खुशी नहीं
- 1:03:16हुई। मेनका हल्का मुस्कुरा कर बोली नहीं
- 1:03:19ऐसी बात नहीं है। बस आपके आने की उम्मीद
- 1:03:22नहीं थी और सच कहूं तो यह एक्सेप्ट करने
- 1:03:24में थोड़ा समय लगेगा कि अब आप इस होटल के
- 1:03:27मालिक हैं। शौर्य मुस्कुराया। कोई बात
- 1:03:30नहीं। धीरे-धीरे सब नॉर्मल हो जाएगा। वैसे
- 1:03:33भी मैं यहां बॉस बनकर नहीं आया हूं। आप
- 1:03:36मुझे एक दोस्त की तरह ट्रीट कर सकती हैं।
- 1:03:38उसकी सादगी देखकर मेनका थोड़ा असमंजस में
- 1:03:41पड़ गई। फिर बोली आप चाहे तो मैं किसी को
- 1:03:44आपके कमरे तक छोड़ने भेज दूं। शौर्य तुरंत
- 1:03:47बोला हां यह बेहतर रहेगा और हां थोड़ी देर
- 1:03:50में मेरे दोस्त आएंगे। मैं उन्हीं के साथ
- 1:03:52लंच करूंगा। अभी मैं थोड़ा आराम करना
- 1:03:54चाहता हूं। इतना कहकर वो रिसेप्शन से बाहर
- 1:03:57निकल गया। वेटर उसे कमरे तक ले गया। उसने
- 1:04:00दरवाजा खोलकर लाइट ऑन की और कार्ड होल्डर
- 1:04:03में लगाकर चुपचाप चला गया। लंबे समय बाद
- 1:04:06उसे सामने आरामदायक बिस्तर दिखा, तो वह
- 1:04:08सीधा जाकर उसमें गिर गया। भिखारी वाली
- 1:04:11जिंदगी जीने के बाद आज पहली बार उसे लगा
- 1:04:14कि जिंदगी फिर से पटरी पर लौट रही है।
- 1:04:16लेकिन यह राहत सिर्फ कुछ पलों की थी। उसके
- 1:04:19थक चुके दिमाग में अभी भी कई सवाल घूम रहे
- 1:04:22थे। किसने उसकी जान लेने की कोशिश की थी
- 1:04:25और क्यों? साथ ही शिप्रा के साथ उसका
- 1:04:28रिश्ता भी एक अधूरी कहानी की तरह था। जिसे
- 1:04:31उसे किसी अंजाम तक पहुंचाना था। इन्हीं
- 1:04:34उलझनों और ख्यालों के बीच कब उसकी आंख लग
- 1:04:36गई उसे पता ही नहीं चला। लगभग एक घंटे बाद
- 1:04:39जब उसकी नींद खुली तो उसने घड़ी की ओर
- 1:04:42देखा तो 4:00 बजने वाले थे। उसने मन ही मन
- 1:04:45सोचा अब तक तो मोहित ने बगैर कलेक्शन का
- 1:04:47मामला निपटा लिया होगा। रौनी जनेजा को
- 1:04:50उसकी औकात दिखा ही दी होगी। लेकिन अगले ही
- 1:04:52पल उसके मन में हल्की सी शंका उठी। लेकिन
- 1:04:56उसका कॉल क्यों नहीं आया? कहीं कुछ गड़बड़
- 1:04:58तो नहीं हो गई। शौर्य ने तुरंत मोबाइल
- 1:05:01उठाया। कुछ सेकंड स्क्रीन को देखा। फिर
- 1:05:03बिना देर किए मोहित को कॉल लगा दिया।
- 1:05:06मोहित ने एक ही रिंग में कॉल उठा लिया।
- 1:05:08तभी शौर्य ने पूछा हेलो मोहित क्या हुआ?
- 1:05:11सब मामला निपट गया? मोहित बोला
- 1:05:15हां निपट तो गया सर लेकिन इतनी आसानी से
- 1:05:17नहीं।
- 1:05:18इस पर शौर्य ने चिंता जताते हुए पूछा।
- 1:05:20क्यों क्या हुआ? कोई प्रॉब्लम आई थी क्या?
- 1:05:24प्रॉब्लम आई थी सर लेकिन अब सब संभल गया।
- 1:05:26मोहित ने शौर्य को आश्वस्त किया। आखिर हुआ
- 1:05:29क्या वहां? शौर्य की जिज्ञासा बढ़ गई तो
- 1:05:32मोहित बोला
- 1:05:33मैं अभी आपके पास ही आ रहा हूं सर वहीं
- 1:05:35आकर सब बताता हूं।
- 1:05:36ठीक है जल्दी आओ यहीं बात करते हैं। शौर्य
- 1:05:40ने इतना कहा और फोन काट दिया। शौर्य ने
- 1:05:43तुरंत आलस झटक कर बिस्तर छोड़ा। वो अब भी
- 1:05:46उन्हीं कपड़ों में था जिनमें यहां आया था।
- 1:05:48उसे ख्याल आया कि यहां के लिए कुछ नए
- 1:05:51कपड़े ले लेना बेहतर रहेगा ताकि जब
- 1:05:53[संगीत] भी वो यहां आए तो बदलने के लिए
- 1:05:55कपड़े यहीं पर हो। वो कमरे से बाहर निकला
- 1:05:58और सीढ़ियों से नीचे उतरने लगा। उसने तय
- 1:06:01किया कि पास की किसी दुकान से ही जल्दी से
- 1:06:03खरीदारी कर लेगा। तभी चलते-चलते उसके मन
- 1:06:06में ख्याल आया। क्यों ना किसी को साथ ले
- 1:06:08लिया जाए। आखिर नई जगह है किसी की सलाह
- 1:06:11काम आ सकती है। यही सोचकर उसके दिमाग में
- 1:06:14मेनका का नाम आया। वो लॉबी से गुजरता हुआ
- 1:06:17सीधे मेनका के कमरे की ओर बढ़ गया। जब वो
- 1:06:20कमरे में पहुंचा तो उसने देखा कि मेनका
- 1:06:22अपनी सीट पर अकेली बैठी हुई है। शौर्य
- 1:06:24बिना नॉक किए ही कमरे के अंदर चला गया था।
- 1:06:27मेनका ने नाखुशी भरी नजर से उसकी ओर देखा
- 1:06:30और तीखे स्वर में बोली क्या आप में जरा भी
- 1:06:33तमीज नहीं है? किसी के कमरे में आने से
- 1:06:36पहले दरवाजा खटखटाना नहीं सिखाया गया
- 1:06:39आपको। शौर्य को अपनी गलती का एहसास हुआ।
- 1:06:42उसने तुरंत सॉरी कहा। फिर इजाजत लेते हुए
- 1:06:44बोला, "क्या मैं यहां बैठ सकता हूं?"
- 1:06:48मेनका ने आश्चर्य से उसकी तरफ देखा और
- 1:06:50बोली, "क्या बात है? आपको कुछ चाहिए
- 1:06:53क्या?" शौर्य ने थोड़ी झिझक के साथ मानो
- 1:06:56कैजुअल होने की कोशिश करते हुए कहा, "यार,
- 1:06:59सबसे पहले तो तुम मुझे आप कहना बंद करो।
- 1:07:02क्योंकि मेरी और तुम्हारी उम्र में ज्यादा
- 1:07:04फर्क नहीं है। इसलिए तुम मुझे मेरे नाम से
- 1:07:07बुला सकती हो। और जहां तक मुझे पता है,
- 1:07:09तुम मेरे दादाजी के किसी दोस्त की बेटी
- 1:07:12हो। इसीलिए मुझे तुम्हारा आप कह कर बुलाना
- 1:07:15अच्छा नहीं लगता। उम्मीद है तुम मेरी बात
- 1:07:18समझ गई होगी। ओके जैसी तुम्हारी मर्जी
- 1:07:22मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। मेनका ने बिना
- 1:07:25देर किए उसकी बात मान ली। यह देखकर शौर्य
- 1:07:28को थोड़ा आश्चर्य हुआ। उसे लगा जैसे मेनका
- 1:07:31उसके कहने का इंतजार ही कर रही थी। ठीक है
- 1:07:34फिर बताओ कैसे आना हुआ? अब तुम्हें क्या
- 1:07:37चाहिए? मेनका अनमने ढंग से बोली। शौर्य ने
- 1:07:40उसकी बात सुनकर कहा, "मुझे तुम्हारी मदद
- 1:07:43की जरूरत है।" मेनका भए सिकोड़ते हुए
- 1:07:46बोली, किस तरह की मदद? असल में मुझे थोड़ी
- 1:07:49खरीदारी करनी है। उसी के लिए मुझे
- 1:07:51तुम्हारी मदद चाहिए। शौर्य ने अपनी बेबसी
- 1:07:54जताते हुए कहा, इस पर मेनका लापरवाही से
- 1:07:57बोली, "तुम्हें खरीदारी करनी है तो उसमें
- 1:07:59मैं तुम्हारी क्या मदद कर सकती हूं? भला।"
- 1:08:02शौर्य ने मुस्कुराते हुए कहा, "यार,
- 1:08:04शॉपिंग करना मेरे बस की बात नहीं है।
- 1:08:06मैंने कभी अपने लिए खुद कोई खरीदारी नहीं
- 1:08:09की। इसीलिए मुझे तुम्हारी मदद चाहिए। और
- 1:08:12लड़कियों से ज्यादा शॉपिंग का एक्सपीरियंस
- 1:08:13किसे होता है?
- 1:08:16शौर्य की बात सुनकर एक पल को मेनका को
- 1:08:18लगा, क्या यह मुझ पर लाइन मार रहा है?
- 1:08:20लेकिन उसने जाहिर नहीं होने दिया। आखिर
- 1:08:23इसके मन में चल क्या रहा है? यही जानने की
- 1:08:25सोचकर वो बोली, ठीक है, मैं चलती हूं
- 1:08:28तुम्हारे साथ। यहां सामने ही एक मॉल है।
- 1:08:30वहीं चलते हैं। मेनका की बात पर शौर्य ने
- 1:08:33भी सहमति जताई और उसके साथ होटल से बाहर
- 1:08:36जाने के लिए चल पड़ा। कुछ ही देर में
- 1:08:38दोनों होटल से बाहर आ गए। मेनका शौर्य के
- 1:08:41साथ पैदल ही होटल के सामने बने एक बड़े से
- 1:08:43मॉल में चली गई। आज पहली बार मेनका ने
- 1:08:46शौर्य को ध्यान से देखा था। अब उसे शौर्य
- 1:08:49उतना भी बुरा नहीं लग रहा था जितना पहली
- 1:08:51नजर में लगा था। वो देख रही थी कि मॉल में
- 1:08:54एंट्री करते ही कई लोगों की निगाहें उसकी
- 1:08:57ओर घूम गई थी। वो सोचने लगी क्या यह शौर्य
- 1:09:00की वजह से है? कुछ भी हो शौर्य की
- 1:09:03पर्सनालिटी तो लाजवाब थी लेकिन उसके शरीर
- 1:09:06पर पहने कपड़े साधारण और सस्ते लग रहे थे।
- 1:09:09मेनका सोचने पर मजबूर हो गई। लगता है
- 1:09:12शौर्य की आर्थिक स्थिति पहले इतनी अच्छी
- 1:09:14नहीं थी। इसीलिए उसके पास ढंग के कपड़े
- 1:09:17नहीं है। लेकिन अब तो वो इस होटल का मालिक
- 1:09:19बन चुका है। तो आगे चलकर तो पैसों की कोई
- 1:09:22कमी नहीं रहने वाली है। चलते-चलते मेनका
- 1:09:24ने शौर्य से पूछ ही लिया। वैसे बुरा ना
- 1:09:27मानो तो क्या मैं तुमसे एक सवाल कर सकती
- 1:09:29हूं? शौर्य ने उसकी तरफ देखा और हल्की
- 1:09:32मुस्कान के साथ बोला। हां पूछो। मेनका ने
- 1:09:36उसकी आंखों में झांकते हुए सवाल किया।
- 1:09:38[संगीत] मैं यह जानना चाहती हूं कि इससे
- 1:09:40पहले तुम क्या करते थे? मैं यह जानना
- 1:09:43चाहती हूं कि इससे पहले तुम क्या करते थे।
- 1:09:46मेनका के सवाल पर शौर्य ने गहरी सांस ली
- 1:09:49जैसे अपने दिमाग में किसी पुरानी किताब के
- 1:09:51पन्नों को पलट रहा हो। फिर अपने चेहरे पर
- 1:09:54थोड़ी बेबसी लाते हुए बोला अच्छा तो सुनो।
- 1:09:58इससे पहले मैं एक भिखारी की जिंदगी जी रहा
- 1:10:00था। ना रहने का ठिकाना ना खाने का कोई
- 1:10:03भरोसा। जो मिल गया वही खा लिया और इसी तरह
- 1:10:06दिन कटते गए। करीब 6 महीने तक मैं ऐसी ही
- 1:10:09जिंदगी जीता रहा। यह सुनकर मेनका की चाल
- 1:10:12धीमी हो गई। उसकी आंखों में अब उत्सुकता
- 1:10:15थी और ध्यान पूरी तरह शौर्य पर टिक गया
- 1:10:18था। शौर्य आगे बोला और फिर एक दिन अचानक
- 1:10:22सब कुछ बदल गया। एक बदमाश ने जबरदस्ती
- 1:10:25मेरी शादी शिपरा राय से करवा दी। उसी दिन
- 1:10:28से मेरी किस्मत ने करवट ले ली। मेरे
- 1:10:31दादाजी ने मुझे अपना लिया और देखते ही
- 1:10:33देखते यह होटल भी मेरे नाम कर दिया। उसने
- 1:10:36मुस्कुराते हुए हल्का सा सिर झुकाया और
- 1:10:38बोला तो अब कहो हूं ना मैं किस्मत का धनी।
- 1:10:42शौर्य ने सच और कहानी के बीच छुपी हुई
- 1:10:45अपनी दास्तान मेनका को सुना दी। मेनका कुछ
- 1:10:48पल तक उसे देखती रही। वो समझ नहीं पा रही
- 1:10:50थी कि यह सच [संगीत] है, मजाक है या फिर
- 1:10:53कोई अधूरी कहानी है जिसे शौर्य जानबूझकर
- 1:10:56गढ़ रहा है। मेनका को सच में शौर्य की बात
- 1:10:58पर विश्वास नहीं हुआ। लेकिन जब उसने यह
- 1:11:01सुना कि किसी ने जबरदस्ती उसकी शादी
- 1:11:03शिप्रा राय के साथ करवा दी थी तो यह नाम
- 1:11:06उसे कुछ जाना पहचाना सा लगा। उसे याद आया
- 1:11:10अरे यह तो वही खबर थी जो सोशल मीडिया पर
- 1:11:12वायरल हुई थी जिसमें बताया गया था कि
- 1:11:14मुख्तार अहमद ने जबरदस्ती भिखारी से
- 1:11:17शिप्रा राय की शादी करवा दी थी। क्या सच
- 1:11:20में शौर्य ही वह भिखारी था? वह भी
- 1:11:23अविश्वास भरी नजरों से शौर्य को देख रही
- 1:11:25थी। आखिर उससे रहा नहीं गया तो उसने पूछ
- 1:11:28ही लिया।
- 1:11:30कहीं तुम उसी शिप्रा राय की बात तो नहीं
- 1:11:32कर रहे जिसकी शादी की न्यूज़ सोशल मीडिया
- 1:11:35पर वायरल हुई थी। शौर्य को यह सुनकर थोड़ा
- 1:11:38आश्चर्य हुआ कि मेनका को भी उसकी शादी की
- 1:11:41खबर पता थी। [संगीत] वो मन ही मन सोचने
- 1:11:43लगा। आखिर मुख्तार भाई ने इस बात को कितना
- 1:11:46फैलाया होगा कि हर किसी को इसके बारे में
- 1:11:49मालूम है। शिप्रा और उसकी फैमिली की इज्जत
- 1:11:52दागदार करने में मुख्तार भाई ने कोई कसर
- 1:11:54नहीं छोड़ी। उसने हल्की बेचारगी के साथ
- 1:11:57मेनका की तरफ देखा और बोला हां मैं ही वो
- 1:12:01भिखारी हूं जिससे शिपरा राय की शादी हुई
- 1:12:04है। [संगीत]
- 1:12:05यह क्या बकवास है? मेनका लगभग भन-भनाते
- 1:12:08हुए बोली तुम और भिखारी क्या मुख्तार भाई
- 1:12:11की आंखें फूट गई थी? जो उसने तुम्हें
- 1:12:13भिखारी समझकर तुम्हारी शादी शिप्रा राय से
- 1:12:16कर दी। शौर्य के चेहरे पर हल्की सी
- 1:12:18मुस्कान आ गई। वो शांत स्वर में बोला।
- 1:12:21मैंने पहले ही कहा था कि तुम मेरी बात पर
- 1:12:24विश्वास नहीं करोगी। देखा सच में तुम्हें
- 1:12:27मुझ पर विश्वास नहीं हुआ ना? मेनका चुप हो
- 1:12:30गई लेकिन उसके मन में सवालों का तूफान उठ
- 1:12:33रहा था। पहले उसने सोचा था क्या किस्मत है
- 1:12:36इस लड़के की। दादाजी ने अपना लिया और इतना
- 1:12:39बड़ा होटल तक दे दिया। लेकिन अब सच जानने
- 1:12:42के बाद उसका नजरिया बदल चुका था। जो खुशी
- 1:12:45उसे पहले हुई थी, वह अब कहीं गायब हो गई
- 1:12:47थी। उसकी जगह एक अजीब सी संवेदना ने ले
- 1:12:50ली। शायद शौर्य की जिंदगी कभी उससे भी
- 1:12:53ज्यादा मुश्किल रही होगी। उसने गहरी सांस
- 1:12:56ली। अपने ख्यालों को झटक दिया और सामान्य
- 1:12:59स्वर में बोली। अच्छा छोड़ो यह सब बताओ
- 1:13:03तुम्हें क्या लेना है? शौर्य ने कहा कुछ
- 1:13:06खास नहीं बस रोजमर्रा की कुछ चीजें हैं जो
- 1:13:09मैं चाहता हूं कि होटल में मौजूद रहें।
- 1:13:12ताकि जब भी [संगीत] जरूरत पड़े मैं उन्हें
- 1:13:14इस्तेमाल कर सकूं। वो अपनी बात पूरी ही कर
- 1:13:17रहा था कि अचानक उसे हल्का सा झटका लगा।
- 1:13:20उसने तुरंत पलट कर देखा तो एक लड़की फर्श
- 1:13:22पर गिरी हुई थी और उसके हाथों से सामान
- 1:13:25छिटक कर चारों तरफ बिखर गया था। शौर्य ने
- 1:13:28उस लड़की की तरफ देखा। वो हैरान था कि वो
- 1:13:31लड़की उससे कैसे टकरा गई। वो तो ज्यादा
- 1:13:33तेजी से जा भी नहीं रहा था। फिर भी उसने
- 1:13:36उस लड़की का सामान समेटने में उसकी मदद
- 1:13:39की। लेकिन वो लड़की किसी और ही मूड में
- 1:13:41थी। उसने गुस्से में शौर्य की तरफ देखा और
- 1:13:44बोली, "अंधे हो क्या? दिखाई नहीं दे रहा
- 1:13:47या जानबूझकर टकराए हो?" शौर्य ने आराम से
- 1:13:50उस लड़की की तरफ देखा और बोला, माफ
- 1:13:53कीजिएगा मैंने सच में आपको नहीं देखा। पर
- 1:13:56क्या आपको भी दिखाई नहीं दे रहा था जो आप
- 1:13:58मुझसे टकरा गई?
- 1:14:01मैं तो इनसे बात करते हुए धीरे-धीरे चल
- 1:14:03रहा था। आप ही सामने से आकर मुझसे टकराई
- 1:14:05और अब मुझे ही सुना रही हैं। शौर्य मेनका
- 1:14:08की तरफ इशारा करते हुए बोला अच्छा मैं
- 1:14:11तुमसे टकराऊंगी वो भी जानबूझकर। शक्ल
- 1:14:14देखिए अपनी फटीचर जैसी हालत लग रही है और
- 1:14:16मुझ पर इल्जाम लगा रहे हो। तुम जैसे लोग
- 1:14:19ऐसी जगह पर आते ही इसलिए हैं ताकि खूबसूरत
- 1:14:22लड़कियों से छेड़खानी कर सकें। वो लड़की
- 1:14:25अपना सारा सामान छोड़कर शौर्य को सुनाने
- 1:14:28में लगी हुई थी। शौर्य को समझ नहीं आया कि
- 1:14:31यह लड़की इतनी छोटी सी बात का बतंगड़
- 1:14:33क्यों बना रही है। उस लड़की की बात सुनकर
- 1:14:35शौर्य भी थोड़े कड़े स्वर में बोला, ओ
- 1:14:38मैडम, आप जो लड़कियों की बात कर रही हैं
- 1:14:40ना, तो आपको पता होना चाहिए कि आपसे
- 1:14:42ज्यादा खूबसूरत लड़की मेरे साथ चल रही है।
- 1:14:45फिर मुझे क्या जरूरत पड़ी है आप जैसी नक
- 1:14:47चढ़ी लड़की से टकराने की। शौर्य के मुंह
- 1:14:50से अपने लिए खूबसूरत लड़की सुनकर मेनका को
- 1:14:53खुशी हुई। वो भी नहीं समझ पा रही थी कि यह
- 1:14:56लड़की क्यों इतनी छोटी सी बात को तूल दे
- 1:14:58रही है। वो बीच में पड़ने ही वाली थी
- 1:15:00लेकिन फिर उसने सोचा देखते हैं शौर्य इस
- 1:15:03मामले को कैसे हैंडल करता है। जबकि वहीं
- 1:15:06वो लड़की शौर्य के मुंह से अपने लिए नक
- 1:15:08चढ़ी शब्द सुनकर और आग बबूला हो गई। वो
- 1:15:11गुस्से में भड़कते हुए बोली तुम्हारी यह
- 1:15:14मजाल कि तुम मुझसे ऐसे बात कर रहे हो। अब
- 1:15:16देखो मैं तुम्हारा क्या हश्र करवाती हूं।
- 1:15:20उसी समय एक लड़का तेजी से चलकर उस लड़की
- 1:15:22के पास पहुंचा और बोला क्या हुआ बेबी यह
- 1:15:26तुम्हारा सामान क्यों बिखरा हुआ है?
- 1:15:29इस पर वो लड़की उसे देखकर बोली देखो ना
- 1:15:31रैंबो इस लड़के ने पहले तो मुझे टक्कर
- 1:15:34मारी मेरे सारे सामान को बिखरा दिया और अब
- 1:15:36मुझसे बदतमीजी कर रहा है। अब तुम ही इसे
- 1:15:38सबक सिखाओ। रैम्बो ने उस लड़की की बात
- 1:15:41सुनकर गुस्से से शौर्य की तरफ देखा और
- 1:15:44बोला, "क्यों बे, मजनू की औलाद, यह क्या
- 1:15:46कह रही है मेरी बेबी? तुम्हारी हिम्मत
- 1:15:49कैसे हुई इसे टक्कर मारने की? और टक्कर
- 1:15:51मारी सो मारी उसके बाद तुम इसे अकड़ भी
- 1:15:53दिखा रहे हो। चलो जल्दी से अपने घुटनों पर
- 1:15:56बैठो और वृंदा से माफी मांगो। रैंबो करीब
- 1:16:0025- 26 साल का लड़का था। पूरा बॉडी
- 1:16:02बिल्डर। उसने इस समय टाइट जींस और टी-शर्ट
- 1:16:05पहन रखी थी। उसे देखकर कोई भी समझ सकता था
- 1:16:08कि उसका ज्यादातर समय जिम में ही बीतता
- 1:16:11होगा। मिनका ने जब इस झमेले में रैंबो की
- 1:16:14एंट्री देखी तो उसने सोचा कि मामला कहीं
- 1:16:16ज्यादा ना बढ़ जाए। इसीलिए उसे बीच-बचाव
- 1:16:19करना चाहिए। यह सोचकर वो आगे आई और रैंबो
- 1:16:22से बोली देखिए मिस्टर इसमें सारी गलती
- 1:16:25आपकी दोस्त की है। शौर्य ने तो उसे देखा
- 1:16:28भी नहीं था। वो खुद इससे टकराई है। इसीलिए
- 1:16:30इस मामले को ज्यादा तूल ना दें तो अच्छा
- 1:16:33रहेगा।
- 1:16:34तुम्हारी यह हिम्मत कि तुमने मेरी दोस्त
- 1:16:36को झूठा कहा। अगर अपने दोस्त की सलामती
- 1:16:39चाहती हो तो इससे कहो कि अभी घुटनों के बल
- 1:16:41बैठकर वृंदा से माफी मांगे। नहीं तो यह
- 1:16:44अपने पैरों पर चलकर यहां से जा नहीं
- 1:16:46पाएगा। रैंबो मेनका को धमकाते हुए बोला
- 1:16:49लेकिन मेनका भी पीछे हटने वालों में से
- 1:16:51नहीं थी। उसने तुरंत जवाब दिया देखो
- 1:16:54मिस्टर अब ये कुछ ज्यादा ही हो रहा है।
- 1:16:57अगर तुमने यूं ही हंगामा करना जारी रखा तो
- 1:16:59मुझे पुलिस बुलानी पड़ेगी। [हंसी]
- 1:17:02तुम मुझे पुलिस की धमकी दे रही हो। रैम्बो
- 1:17:04को पुलिस की धमकी। तुम्हें शायद पता नहीं
- 1:17:07पुलिस वाले मुझे जहां देख लेते हैं तो
- 1:17:09अपना रास्ता बदल लेते हैं। क्यों तुम अपनी
- 1:17:11ऐसी तैसी कराना चाहती हो? मेरी बात मानो
- 1:17:14और अपने दोस्त से कहो कि यह आ जाए घुटनों
- 1:17:16पर। नहीं तो इसकी तो बेइज्जती होगी ही।
- 1:17:19साथ में तुम भी कहीं मुंह दिखाने के लायक
- 1:17:20नहीं रहोगी। रैंबो मेनका का उपहास उड़ाते
- 1:17:23हुए बोला। रैमो की बात सुनकर मेनका के
- 1:17:27चेहरे पर हल्की घबराहट के निशान उभर आए।
- 1:17:29शौर्य जो यह सब देख रहा था समझने की कोशिश
- 1:17:32कर रहा था कि आखिर यह सब क्यों हो रहा है।
- 1:17:35उसे लगा अब उसे खुद सामने आना चाहिए। उसने
- 1:17:38मेनका से कहा रुको रुको। तुम साइड में हो
- 1:17:41जाओ। मैं इन महाशय से बात करता हूं। मेनका
- 1:17:45अनच्छा से उसके सामने से हट गई। उसे डर था
- 1:17:48कि यह रैंबो कहीं शौर्य को नुकसान ना
- 1:17:50पहुंचा दे। क्योंकि कद काठी में वो शौर्य
- 1:17:53से काफी बड़ा था। शौर्य का शरीर भी
- 1:17:55ठीक-ठाक है। लेकिन रैंबो का शरीर किसी
- 1:17:57राक्षस जैसा लग रहा था। यही सोचकर मेनका
- 1:18:00के मन में एक स्वाभाविक डर बैठ गया था।
- 1:18:02उसी समय जब यह सब हो रहा था, कोई और भी था
- 1:18:06जो मॉल के फर्स्ट फ्लोर से यह सब देख रहा
- 1:18:08था। उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान थी।
- 1:18:11वो भीड़ से दूर खड़ा था, लेकिन उसे देखकर
- 1:18:13लग रहा था कि जो कुछ भी हो रहा है, उसके
- 1:18:16पीछे उसी का हाथ है। इन सब बातों से अनजान
- 1:18:19शौर्य रैंबो के सामने जाकर खड़ा हो गया और
- 1:18:22बोला हां महोदय आप कुछ कह रहे थे। कहिए
- 1:18:26मैं आपकी सेवा कैसे कर सकता हूं। इस पर
- 1:18:28रैम्बो शौर्य के और पास आकर बोला। बहरे हो
- 1:18:31क्या? अभी दो बार इतना साफ-साफ तुम्हारे
- 1:18:34दोस्त के सामने मैंने जो कहा वो तुम्हें
- 1:18:36समझ नहीं आया। मैं तुम्हें लास्ट वार्निंग
- 1:18:39दे रहा हूं। अगर तुरंत तुमने अपने घुटनों
- 1:18:41पर आकर वृंदा से माफी नहीं मांगी तो
- 1:18:44तुम्हारे शरीर की सारी हड्डियां ताता थैया
- 1:18:46करने लगेंगी। मेनका शौर्य की हिम्मत देखकर
- 1:18:50हैरान थी कि वो आखिर कहां से रैंबो के
- 1:18:52सामने खड़े होने की हिम्मत ला रहा है। वो
- 1:18:55तो देखने में ही राक्षस लग रहा था। मेनका
- 1:18:58के मन में बार-बार यही ख्याल आ रहा था कि
- 1:19:00कहीं शौर्य को इस बेवकूफी की वजह से कोई
- 1:19:03नुकसान ना हो जाए। इसी सोच में वो पुलिस
- 1:19:06को फोन लगाने ही वाली थी कि तभी उसका फोन
- 1:19:08बजने लगा। उसने कॉल उठाया तो दूसरी तरफ से
- 1:19:11आवाज आई।
- 1:19:13कुछ मत करो बस [संगीत] देखती रहो। बाकी
- 1:19:16मैं तुम्हें बाद में समझाता हूं।
- 1:19:18इतना कहकर फोन कट गया। मेनका हैरानी से
- 1:19:21अपने फोन की तरफ देखने लगी। जब उसे होश
- 1:19:24आया कि उसने अभी क्या सुना है तो उसने
- 1:19:26चारों ओर नजर घुमाई लेकिन उसे कोई भी जाना
- 1:19:29पहचाना चेहरा नजर नहीं आया। उसने पुलिस को
- 1:19:32फोन करने का इरादा त्याग दिया और वहां जो
- 1:19:34कुछ हो रहा था उसे देखने लगी। वो समझ रही
- 1:19:38थी कि जो हो रहा है वह सही नहीं है। पर
- 1:19:40फिलहाल वो कुछ करने की स्थिति में नहीं
- 1:19:42थी। दूसरी तरफ शौर्य रैंबो के सामने खड़ा
- 1:19:45होकर उसे चिढ़ाते हुए बोला। हां भाई रैंबो
- 1:19:50अगर मैं आपकी बात नहीं मानूं तो आप मेरी
- 1:19:52हड्डियों से ताता थैया करवाने वाले हैं।
- 1:19:55भैया मैंने आज तक अपनी हड्डियों को ताता
- 1:19:58थैया करते नहीं देखा। तो मैं चाहता हूं कि
- 1:20:01आप एक बार मुझे यह नजारा जरूर दिखाएं।
- 1:20:04शौर्य की बात सुनकर मेनका का दिमाग खराब
- 1:20:06हो गया। वो मन ही मन बोली ये लड़का पागल
- 1:20:10है क्या जो आफत को खुद ही न्योता दे रहा
- 1:20:12है। पर फिर उसने खुद को रोक लिया। अब जब
- 1:20:16यह खुद ही इस पहलवान को उकसा रहा है तो
- 1:20:18उसके नतीजों के लिए भी यह खुद ही
- 1:20:20जिम्मेदार होगा। शौर्य की बात सुनकर रैंबो
- 1:20:23भी हैरान था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि
- 1:20:26उसके सामने खड़ा यह लड़का आखिर किस बात का
- 1:20:28घमंड रखता है। आमतौर पर लोग उसके सामने
- 1:20:31अपनी सलामती के लिए गिड़गिड़ाने लगते थे।
- 1:20:34लेकिन शौर्य तो उसे और भड़का रहा था।
- 1:20:37रैंबो के साथ खड़ी वृंदा भी भड़क उठी।
- 1:20:39उसने कहा देख क्या रहे हो? यह ऐसे समझने
- 1:20:43वाला नहीं है। जब तक इसकी दो-चार हड्डियों
- 1:20:45का चूरमा नहीं बनाओगे, यह भौकता ही रहेगा।
- 1:20:49लड़के तुमने अपने लिए आफत मोल ले ली है।
- 1:20:52जो भी तुम्हारे साथ होगा उसके लिए तुम खुद
- 1:20:54ही जिम्मेदार होगे। मैंने तुम्हें मौका
- 1:20:56दिया था। पर तुमने उसे गवा दिया। इतना
- 1:21:00कहकर रैंबो शौर्य की तरफ बढ़ा। रैंबो की
- 1:21:03बात सुनकर शौर्य सिर्फ मुस्कुरा रहा था।
- 1:21:05उसे लग रहा था कि रैंबो उसे मारना नहीं
- 1:21:07चाहता बल्कि बस यह चाहता है कि वो अपने
- 1:21:09घुटनों पर गिर कर उससे माफी मांगे। शौर्य
- 1:21:12भली-भांति रैंबो का इरादा समझ गया था।
- 1:21:15लेकिन झुकना तो दूर उसने खुद रमबो को सबक
- 1:21:17सिखाने का फैसला कर लिया था। लेकिन वो
- 1:21:19पहले देखना चाहता था कि रैंबो किस हद तक
- 1:21:22जा सकता है। दूसरी तरफ मेनका शौर्य को कोस
- 1:21:25रही थी। उसे लग रहा था कि वह खुद ही
- 1:21:27मुसीबत मोल ले रहा है। उसे सॉरी बोल देना
- 1:21:30चाहिए था। उसने कोशिश करके देख लिया था पर
- 1:21:32शौर्य उसकी बात मानने वाला नहीं था। इसी
- 1:21:35बीच मेनका उस रहस्यमय कॉल के बारे में भी
- 1:21:38सोच रही थी। दरअसल उसे फोन करने वाला कोई
- 1:21:41और नहीं बल्कि राजा साहब का पहला ग्रैंडसन
- 1:21:44प्रतीक राठौड़ था। दरअसल रैंबो को भी
- 1:21:47प्रतीक राठौड़ ने ही भेजा था। रमबो के
- 1:21:49जरिए प्रतीक शौर्य का मनोबल तोड़ना चाहता
- 1:21:51था। उसका प्लान यह था कि बिना किसी पिटाई
- 1:21:54के ही शौर्य मॉल में सबके सामने घुटनों पर
- 1:21:57बैठकर गिड़गिड़ाए ताकि उसकी इज्जत धूल में
- 1:21:59मिल जाए और वह फिर किसी का सामना करने
- 1:22:01लायक ना रहे। प्रतीक का मुख्य मकसद शौर्य
- 1:22:04के आत्मविश्वास को तोड़ना था। बाकी सब
- 1:22:07अपने आप हो जाता। इसीलिए वो मॉल में छिप
- 1:22:10कर यह सब देख रहा था। दूसरी तरफ शौर्य को
- 1:22:13मुस्कुराता देखकर रम्बो के खून में और
- 1:22:15उबाल आ गया। उसने ठान लिया कि वो शौर्य को
- 1:22:18इतनी आसानी से नहीं छोड़ेगा। यह सोचकर
- 1:22:21उसने शौर्य पर वार करने का फैसला किया।
- 1:22:24उसने अपना घूंसा शौर्य के चेहरे की तरफ
- 1:22:26चलाया। लेकिन शौर्य पहले से ही तैयार था।
- 1:22:29उसने अपनी गर्दन हल्की सी घुमाई और रैंबो
- 1:22:32का घूंसा उसके कान के पास से निकल गया। अब
- 1:22:34शौर्य की बारी थी। उसने अपने हाथ की दो
- 1:22:37उंगलियों से रमबो के सिर पर हल्का सा टैप
- 1:22:40किया। जिससे रमबो लड़खड़ाते हुए दो कदम
- 1:22:43पीछे हो गया। वो हैरान था कि शौर्य ने उस
- 1:22:45पर वार कर दिया। उसने तो सपने में भी ऐसा
- 1:22:48नहीं सोचा था। रैंबो के साथ खड़ी वृंदा भी
- 1:22:50हैरान थी कि शौर्य ने रैंबो पर हमला करने
- 1:22:53की हिम्मत कर दी। अब रैंबो का गुस्सा और
- 1:22:56बढ़ गया था। वो झपटते हुए शौर्य की तरफ
- 1:22:58बढ़ा। लेकिन शौर्य ने खुद को बचाते हुए
- 1:23:01फुर्ती से उसके पीछे पोजीशन ले ली। रैंबो
- 1:23:04शौर्य की तेजी देखकर हैरान था। अपने हमलों
- 1:23:07को बार-बार नाकाम होता देखकर उसने दोनों
- 1:23:10बाहें फैलाकर शौर्य को पकड़ने की कोशिश
- 1:23:12की। लेकिन शौर्य उसके हाथ ही नहीं आ रहा
- 1:23:15था। मॉल में मौजूद लोग जो उनके चारों तरफ
- 1:23:18खड़े होकर तमाशा देख रहे थे वो भी शौर्य
- 1:23:20की हिम्मत और फुर्ती को देखकर दंग रह गए।
- 1:23:23एक तरफ दैत्य जैसा विशाल रैंबो और दूसरी
- 1:23:26तरफ फिट और संतुलित शौर्य। दोनों का कोई
- 1:23:29मुकाबला नहीं लग रहा था। रैंबो ताकत में
- 1:23:32बहुत आगे था, लेकिन कई कोशिशों के बाद भी
- 1:23:35वो शौर्य का कुछ नहीं बिगाड़ पा रहा था।
- 1:23:37वो बार-बार उसे अपने फंदे में फंसाने की
- 1:23:40कोशिश कर रहा था। लेकिन शौर्य उसे एक भी
- 1:23:42मौका नहीं दे रहा था। जब इस तरह खेलते हुए
- 1:23:45कुछ पल बीत गए तो शौर्य ने इस खेल को
- 1:23:48जल्दी खत्म करने का फैसला किया। इस बार
- 1:23:51जैसे ही रैंबो ने झपट्टा मारकर उसे दबोचने
- 1:23:54की कोशिश की, शौर्य अपने स्थान से हिला
- 1:23:56नहीं। और फिर जैसे ही रैंबो उसके करीब आया
- 1:23:59शौर्य का एक जबरदस्त पंच उसकी छाती से जा
- 1:24:01टकराया जिससे रैंबो लगभग 10 कदम पीछे जाकर
- 1:24:05जमीन पर गिर पड़ा। वो शौर्य से ऐसे हमले
- 1:24:07की कल्पना भी नहीं कर सकता था। लेकिन
- 1:24:09सच्चाई यही थी कि शौर्य के एक ही घूसे ने
- 1:24:12उसे जमीन पर लापटका था। रैंबो ही नहीं
- 1:24:15वहां मौजूद लोग भी इस पर यकीन नहीं कर पा
- 1:24:18रहे थे कि एक ही वार में इतना विशाल आदमी
- 1:24:21कैसे गिर सकता है। मेनका भी फटी आंखों से
- 1:24:24शौर्य को देख रही थी। उसे दूर-दूर तक
- 1:24:27शौर्य की आंखों में कहीं भी भय नजर नहीं आ
- 1:24:30रहा था। उल्टा वो ऐसे मुस्कुरा रहा था
- 1:24:32जैसे रैंबो की उसके सामने कोई औकात ही ना
- 1:24:35हो। वो तो उससे बच्चों की तरह खेल रहा था।
- 1:24:38एक ही पल में मेनका का शौर्य को देखने का
- 1:24:41नजरिया बदल गया। जो अभी तक उसे फुद्दू लग
- 1:24:44रहा था वही अब उसे बब्बर शेर नजर आने लगा।
- 1:24:47शौर्य धीरे-धीरे चलते हुए रैंबो के पास
- 1:24:50पहुंचा। रैंबो दांत पीसते हुए उठा और गाली
- 1:24:53देते हुए बोला कुत्ते तेरी यह हिम्मत कि
- 1:24:56तू मुझ पर हमला करेगा। जैसे ही रैंबो के
- 1:25:00मुंह से गाली निकली वैसे ही चटा की तेज
- 1:25:03आवाज पर पूरे माहौल में गूंज उठी। सबने
- 1:25:07देखा शौर्य ने रैंबो के गाल पर एक जोरदार
- 1:25:09तमाचा जड़ दिया था। मैं तुझे
- 1:25:13छोडूंगा नहीं। तूने बहुत मस्ती कर ली। अब
- 1:25:16अगर तू गिड़गिड़ाएगा भी तो भी मैं तुझे
- 1:25:19नहीं छोडूंगा। रैंबो फिर से उठते हुए
- 1:25:21बोला, वो हर हाल में शौर्य को सबक सिखाना
- 1:25:24चाहता था। लेकिन इस बार भी उसकी कोशिश
- 1:25:26नाकाम रही। उसने पूरी ताकत से शौर्य पर
- 1:25:29किक से हमला किया। लेकिन शौर्य ने तुरंत
- 1:25:32अपनी लाश से उसके वार को रोक दिया। टक्कर
- 1:25:35इतनी जबरदस्त थी कि रैंबो का पैर बुरी तरह
- 1:25:38झूल गया। वो टूट चुका था। रैंबो दर्द से
- 1:25:41करहाते हुए जमीन पर गिर पड़ा और अपने पैर
- 1:25:44को पकड़ कर सीधा करने की कोशिश करने लगा।
- 1:25:47अब वो कुछ भी करने की हालत में नहीं था।
- 1:25:50रैंबो की गर्लफ्रेंड वृंदा भी स्तब्ध खड़ी
- 1:25:52थी। उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि यह सब
- 1:25:55कैसे हो गया। शौर्य रैंबो के सामने फर्श
- 1:25:58पर बैठते हुए मुस्कुरा कर बोला।
- 1:26:01अब बताओ कोई और भी हसरत है तो अभी पूरी कर
- 1:26:04दूं। तभी वृंदा शौर्य को धमकाते हुए बोली
- 1:26:08ये तुमने क्या किया? तुमने रैंबो का पैर
- 1:26:11तोड़ दिया। अब तुम्हें इसकी बहुत ही
- 1:26:13खतरनाक सजा मिलने वाली है। मेरी सजा को
- 1:26:16छोड़ो। अभी तुम दोनों यह सोचो कि तुम यहां
- 1:26:18से बचकर कैसे जाओगे। शौर्य रैंबबो का मजाक
- 1:26:21उड़ाते हुए बोला। अब पूरी तरह से यहां का
- 1:26:24पासा पलट चुका था। रैंबो के चेहरे पर
- 1:26:27पछतावा साफ नजर आ रहा था और यही हाल वृंदा
- 1:26:30का भी था। आखिर यह सब शुरू ही वृंदा ने
- 1:26:33किया था तो सजा तो मिलनी ही थी। दूसरी तरफ
- 1:26:36यह सीन पलटता देख मेनका सोचने को मजबूर थी
- 1:26:39कि अब प्रतीक क्या करेगा। उसने तो शौर्य
- 1:26:42पर हमला भी करवा दिया लेकिन उसका कुछ
- 1:26:44बिगाड़ नहीं पाया। तभी शौर्य वृंदा की तरफ
- 1:26:47देखते हुए बोला क्या [संगीत] हुआ? अब
- 1:26:50मुझसे माफी नहीं मंगवाओगी। मुझ पर हमला
- 1:26:53नहीं करोगी। तुम तो मुझे सबक सिखाना चाहती
- 1:26:56थी ना। लेकिन अब कैसे करोगी? इसका तो खड़ा
- 1:26:59होना भी मुश्किल हो रहा है। अब वृंदा के
- 1:27:02मुंह पर जैसे ताला लग गया था। उसे समझ
- 1:27:04नहीं आ रहा था कि वो क्या करें? उसकी
- 1:27:06नजरें किसी को ढूंढते हुए इधर-उधर घूमने
- 1:27:09लगी। उधर जब प्रतीक ने वृंदा को इस तरह
- 1:27:11इधर-उधर देखते पाया तो वह समझ गया कि वो
- 1:27:14उसी को ढूंढ रही है। यह समझते ही वो अपनी
- 1:27:17जगह पर छिप गया। वहीं मेनका ने सोचा भी
- 1:27:20नहीं था कि शौर्य इतना स्ट्रांग निकलेगा।
- 1:27:22शौर्य ने रमबो को हराने में ज्यादा प्रयास
- 1:27:25भी नहीं किया था। जबकि उसकी एक ही किक ने
- 1:27:27रमबो को जमीन पर ला दिया था। वैसे तो रमबो
- 1:27:31का शरीर शौर्य से डेढ़ गुना बड़ा था। अभी
- 1:27:33तक जो किसी राक्षस जैसा नजर आ रहा था, वो
- 1:27:36अब जमीन पर पड़ा हुआ था। वह अविश्वास भरी
- 1:27:39नजरों से शौर्य को देख रहा था। उसने शौर्य
- 1:27:42को बहुत कमजोर समझा था। लेकिन अब उसे अपनी
- 1:27:45सोच पर अफसोस हो रहा था। दूसरी तरफ जिस
- 1:27:48वृंदा की जुबान चाकू की तरह चल रही थी, अब
- 1:27:50[संगीत] उसकी बोलती बंद हो चुकी थी।
- 1:27:54हां जी बहन जी। यह बंदा तो अब किसी लायक
- 1:27:57रहा नहीं। कोई और आपका हिमायती है जो आकर
- 1:28:00आपके लिए खड़ा हो सके। शौर्य रैंबो को
- 1:28:03छोड़कर वृंदा के पास जाकर बोला। लेकिन
- 1:28:06वृंदा कुछ नहीं बोली। वो खामोशी से सिर्फ
- 1:28:08शौर्य को देखती रह गई। तभी शौर्य ने व्यंग
- 1:28:12करते हुए कहा, क्या बात है? अब आपने मुझे
- 1:28:15अपनी निगाहों से ही मारने का इरादा कर
- 1:28:17लिया है क्या?
- 1:28:19तुम रैंबो को हराकर खुद को बड़ा तीस मारखा
- 1:28:21समझते हो लेकिन देर सवेेर मैं तुमसे अपनी
- 1:28:24बेइज्जती का बदला जरूर लूंगी। वृंदा जख्मी
- 1:28:27नागिन की तरह फुफकारते हुए बोली।
- 1:28:31रस्सी जल गई पर बल नहीं गया। वैसे मैं अभी
- 1:28:33कुछ देर यहीं हूं। कोई और आपका हितचिंतक
- 1:28:37हो तो उसे भी बुला लो। शायद वह आपकी मुराद
- 1:28:40पूरी कर दे। शौर्य ने उपहास भरे अंदाज में
- 1:28:42कहा तो वृंदा दांत भीते हुए बोली अभी
- 1:28:46जितनी शेखी भगारनी है बघार लो लेकिन मैं
- 1:28:49तुम्हें भूलूंगी नहीं। वैसे मैं भूलने की
- 1:28:53[संगीत] चीज भी नहीं हूं। मैं उस पल का
- 1:28:55इंतजार करूंगा जब आप अपने मन की मुराद
- 1:28:57पूरी कर सको। तब तक के लिए बाय। और हां
- 1:29:01अपने इस दोस्त को जल्दी किसी अस्पताल ले
- 1:29:03जाओ। शायद इसका पैर बच जाए। शौर्य ने
- 1:29:06रैंबो की तरफ देखते हुए कहा, रैंबो का सिर
- 1:29:09शर्मिंदगीगी से झुका हुआ था। उसके लिए यह
- 1:29:12स्वीकार करना मुश्किल था कि वो शौर्य से
- 1:29:14हार गया है। शौर्य मेनका के पास पहुंचा और
- 1:29:17बोला अब चलें जिस काम के लिए आए थे उसे
- 1:29:21पूरा करते हैं। मेनका हैरानी से शौर्य को
- 1:29:24देख रही थी। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि
- 1:29:27जिस स्थिति से वो अभी गुजरा है उसके बाद
- 1:29:30भी कोई इतना सामान्य रह सकता है और तो और
- 1:29:33उसके चेहरे पर वही हल्की प्यारी मुस्कान
- 1:29:36थी। वो सोचने पर मजबूर हो गई कि क्या उसने
- 1:29:39शौर्य के बारे में जो राय बनाई थी वो सच
- 1:29:41में सही थी। मेनका ने अपने चेहरे के भाव
- 1:29:44सामान्य किए और बोली ठीक है। चलते हैं।
- 1:29:48उसके बाद दोनों मेन सेक्शन में गए और
- 1:29:50शौर्य ने अपनी जरूरत का सामान लिया। फिर
- 1:29:53दोनों वहां से होटल वापस आ गए। मेनका इस
- 1:29:56दौरान शौर्य के साथ तो थी लेकिन उसके
- 1:29:58दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। उसे
- 1:30:01बार-बार प्रतीक की बातें याद आ रही थी। वो
- 1:30:04समझ नहीं पा रही थी कि प्रतीक को यह
- 1:30:06ड्रामा करने की क्या जरूरत थी और अगर वह
- 1:30:08ऐसा करने वाला था तो उसने उसे पहले क्यों
- 1:30:11नहीं बताया। क्या उसने शौर्य के बारे में
- 1:30:14प्रतीक को बताकर कोई गलती कर दी है?
- 1:30:17शौर्य के साथ जो कुछ हुआ उसके लिए वह खुद
- 1:30:20को जिम्मेदार मान रही थी। अगर शौर्य के
- 1:30:22साथ कुछ अनहोनी हो जाती तो वह खुद को कभी
- 1:30:25माफ नहीं कर पाती। यह सच था कि वह शौर्य
- 1:30:28को पसंद नहीं करती थी, लेकिन वो यह भी
- 1:30:30नहीं चाहती थी कि उसकी वजह से शौर्य के
- 1:30:32साथ कुछ बुरा हो। उसने मन ही मन तय किया
- 1:30:35कि वो इस बारे में प्रतीक से बात करेगी।
- 1:30:38खैर, होटल पहुंचने के बाद जब शौर्य अपना
- 1:30:41सामान रखने के लिए अपने कमरे में चला गया,
- 1:30:43तो मेनका कुछ देर तक उसी सोच में डूबी रही
- 1:30:46कि आखिर प्रतीक ने ऐसा क्यों किया। कहीं
- 1:30:49वो इस संपत्ति के लिए शौर्य को अपने
- 1:30:51रास्ते से हटाने की कोशिश तो नहीं कर रहा।
- 1:30:53क्या एक होटल के लिए वो इतना गिर सकता है
- 1:30:56कि शौर्य को नुकसान पहुंचाने जैसा कदम उठा
- 1:30:59ले। यही सब सोचकर उसने प्रतीक को फोन
- 1:31:01लगाया। कुछ रिंग के बाद प्रतीक ने फोन उठा
- 1:31:04लिया। यह सब क्या था प्रतीक? मैंने कभी
- 1:31:08सोचा भी नहीं था कि तुम इतनी घटिया हरकत
- 1:31:10करोगे। मेनका बिना उसे कुछ कहने का मौका
- 1:31:12दिए ही फट पड़ी।
- 1:31:15अरे शांत शांत पहले मुझे कुछ बोलने का
- 1:31:17मौका तो दो।
- 1:31:19प्रतीक ने उसे समझाने की कोशिश करते हुए
- 1:31:21कहा लेकिन मेनका का गुस्सा जरा भी कम नहीं
- 1:31:24हुआ।
- 1:31:26तुम्हें लगता है कि अब भी तुम्हारे पास
- 1:31:28अपनी सफाई में कुछ कहने को है?
- 1:31:30अरे तुम्हें इतना हाइपर होने की क्या
- 1:31:32जरूरत है? अगर मैं कुछ करता हूं तो उसके
- 1:31:35लिए तुम थोड़ी ही जिम्मेदार हो।
- 1:31:36प्रतीक ने लापरवाही से कहा, जैसे उसके लिए
- 1:31:39यह कोई बड़ी बात ही ना हो। क्यों? मैं
- 1:31:42कैसे जिम्मेदार नहीं हूं? मैंने ही
- 1:31:44तुम्हें शौर्य के बारे में बताया था और आज
- 1:31:46तुम उसके मेनका आगे कुछ और कह पाती उससे
- 1:31:49पहले ही दरवाजा खुला और शौर्य उसके सामने
- 1:31:52आ गया। मेनका के आगे के शब्द उसके होठों
- 1:31:55पर ही अटक गए। उधर जब प्रतीक ने महसूस
- 1:31:57किया कि मेनका अचानक चुप हो गई है तो उसने
- 1:32:00पूछा
- 1:32:01क्या हुआ? तुम चुप क्यों हो गई?
- 1:32:04ठीक है। मैं तुमसे फिर बात करती हूं। इतना
- 1:32:06कहकर मेनका ने बिना प्रतीक के जवाब का
- 1:32:09इंतजार किए ही फोन काट दिया। शौर्य ने
- 1:32:11महसूस किया कि मेनका ने उसके कारण ही फोन
- 1:32:14काटा है। लेकिन उसने इस बारे में उससे कुछ
- 1:32:16नहीं कहा।
- 1:32:18तुम फिर से आ गए। अब कुछ और रह गया क्या?
- 1:32:21मेनका अपनी घबराहट छुपाते हुए बोली, "अरे
- 1:32:24नहीं ऐसा कुछ नहीं है।" मैं तो तुम्हें बस
- 1:32:27थैंक यू कहना भूल गया था। वही कहने आया
- 1:32:29हूं। तुमने जो खरीदारी में मेरी मदद की,
- 1:32:32उसके लिए तुम्हारा बहुत-बहुत धन्यवाद।
- 1:32:34शौर्य ने चेहरे पर हल्की सी मुस्कान लाते
- 1:32:36हुए कहा, "यह कोई इतनी बड़ी बात नहीं थी
- 1:32:39जिसके लिए तुम्हें मुझे धन्यवाद कहना
- 1:32:41पड़े। मेनका थोड़ा सहज बनने की कोशिश करते
- 1:32:44हुए बोली,
- 1:32:46एक बात और है जो मुझे तुमसे करनी है।
- 1:32:49शौर्य ने रहस्यमय अंदाज में कहा। एक बात
- 1:32:52और है जो मुझे तुमसे करनी है। शौर्य ने
- 1:32:55रहस्यमय अंदाज में कहा। उसके भाव देखकर
- 1:32:58मेनका का दिल धड़क उठा। उसे लगा कहीं
- 1:33:00शौर्य को उसके और प्रतीक के बीच हुई
- 1:33:02बातचीत का अंदाजा तो नहीं हो गया। वो
- 1:33:04थोड़ी घबराहट के साथ बोली, बोलो और क्या
- 1:33:08बात करनी है? शौर्य कुर्सी खींच कर उसके
- 1:33:10पास बैठते हुए बोला, "देखो, मैं चाहता हूं
- 1:33:13कि तुम किसी को भी मेरी सच्चाई मत बताना
- 1:33:16कि अब इस होटल का मालिक मैं हूं या फिर यह
- 1:33:18कि मैं राजा साहब का ग्रैंडसन हूं। जिसे
- 1:33:21यह होटल गिफ्ट में मिला है। शौर्य की बात
- 1:33:23सुनकर मेनका का दिल जोर से धड़क उठा। उसने
- 1:33:26तो पहले ही शौर्य के बारे में प्रतीक को
- 1:33:28बता दिया था। फिर भी उसने अपने चेहरे पर
- 1:33:31कोई भाव नहीं आने दिया और बोली पर इसमें
- 1:33:34छुपाने वाली क्या बात है? एक ना एक दिन तो
- 1:33:36सबको पता चल ही जाएगा। मैं समझता हूं कि
- 1:33:40देर सवेेर यह बात सामने आनी ही है। लेकिन
- 1:33:42तब तक मुझे थोड़ा समय मिल जाएगा और हो
- 1:33:45सकता है तब तक मेरा मकसद भी पूरा हो जाए।
- 1:33:49शौर्य ने गहरे स्वर में कहा, पर मुझे समझ
- 1:33:52नहीं आ रहा कि इसकी जरूरत क्या है। अगर
- 1:33:54कोई मुझसे पूछेगा तो मैं क्या जवाब दूंगी।
- 1:33:57मेनका ने हल्का विरोध जताया। इस पर शौर्य
- 1:34:00ने सहजता से कहा देखो अगर कभी बताना जरूरी
- 1:34:03ही हो जाए तो तुम मेरी जगह विक्रम को राजा
- 1:34:06साहब का पोता बता सकती हो। फिर वो अपनी
- 1:34:09बात पर जोर देते हुए बोला हां तुम ऐसा ही
- 1:34:13करना। दूसरों के सामने विक्रम को ही शौर्य
- 1:34:16के रूप में प्रस्तुत करना। इससे तुम्हारे
- 1:34:18अलावा किसी को मेरी असली पहचान पता नहीं
- 1:34:20चलेगी क्योंकि यहां कोई भी मेरे चेहरे से
- 1:34:23परिचित नहीं है और जहां तक मेरी बात है आज
- 1:34:26से मेरा नाम तुम्हारे लिए श्रवण है जो
- 1:34:29शौर्य का पिए बनकर रहेगा। मेनका का सिर
- 1:34:32जैसे चक्कर खाने लगा। उसे समझ नहीं आ रहा
- 1:34:34था कि जो गलती वो पहले ही कर चुकी है उसे
- 1:34:37अब कैसे संभालेगी। उसने तो प्रतीक को पहले
- 1:34:40ही दिन बता दिया था कि राजा साहब ने यह
- 1:34:42होटल शौर्य को गिफ्ट कर दिया है और शायद
- 1:34:45इसी वजह से प्रतीक इस हद तक उतर आया। अब
- 1:34:48वो अपने ही [संगीत] फैलाए जाल को कैसे
- 1:34:49सुलझाए। तभी अचानक बिजली की तरह उसके
- 1:34:52दिमाग में एक विचार कौंधा और उसके चेहरे
- 1:34:55पर छाई घबराहट पल भर में गायब हो गई।
- 1:34:57शौर्य के वहां से जाते ही मेनका ने तुरंत
- 1:35:00प्रतीक को फोन मिला दिया। एक ही रिंग में
- 1:35:02उधर से कॉल उठ गया। हेलो अब क्या हुआ?
- 1:35:06प्रतीक की आवाज आई तो मेनका ने खुद को
- 1:35:09संयत रखते हुए कहा हुआ कुछ नहीं बस यह
- 1:35:12जानना है कि अगर तुम्हें कुछ करना ही था
- 1:35:14तो मुझे पहले बता देते बताता पर मौका ही
- 1:35:17नहीं मिला प्रतीक ने सफाई दी मेनका हल्का
- 1:35:21सा मुस्कुराई बात मौका मिलने की नहीं है
- 1:35:24बात यह है कि जिसके खिलाफ तुम प्लान बना
- 1:35:26रहे हो पहले उससे ठीक से जान तो लेते उसकी
- 1:35:30बात सुनकर प्रतीक चौंक गया मतलब तुम्हारे
- 1:35:34साथ और कौन था यही होता है जल्दीबाजी में।
- 1:35:37मेनका ने धीमे लेकिन चुपते लहजे में कहा।
- 1:35:40मैंने कहा ना पहले मुझसे बात कर लेते तो
- 1:35:43यह गलती नहीं होती। अब प्रतीक के मन में
- 1:35:47घबराहट घर करने लगी थी। सीधे-सीधे बोलोगी
- 1:35:50भी आखिर कहना क्या चाहती हो? मेनका ने एक
- 1:35:54पल चुप रहकर उसकी बेचैनी बढ़ाई। फिर बोली,
- 1:35:58जानना चाहते हो तो सुनो। जिसे तुम फंसाने
- 1:36:00निकले थे वो तो वो था ही नहीं। उसके होठों
- 1:36:04पर हल्की मुस्कान आ गई। अब उसे प्रतीक के
- 1:36:06साथ ही खेल खेलने में मजा आने लगा था।
- 1:36:08वैसे भी वह प्रतीक पर गुस्सा थी क्योंकि
- 1:36:11उसने बिना बताए शौर्य को नीचा दिखाने की
- 1:36:13जो कोशिश की थी उसका हिसाब तो बनता था। तो
- 1:36:17फिर वो कौन था जो तुम्हारे साथ मॉल में
- 1:36:19गया था? प्रतीक ने उलझन भरे स्वर में
- 1:36:21पूछा। वो श्रवण था। शौर्य का असिस्टेंट।
- 1:36:25मेनका ने बिल्कुल सहजता से जवाब दिया।
- 1:36:27क्या? प्रतीक का मुंह खुला का खुला रह
- 1:36:30गया। पर तुमने तो कहा था कि तुम्हारे साथ
- 1:36:32शौर्य है। मेनका हल्का सा हंस दी। लेकिन
- 1:36:36मैंने यह कब कहा कि शॉपिंग के लिए भी वही
- 1:36:38आ रहा है। उसने तो अपने असिस्टेंट को भेज
- 1:36:40दिया था मेरे साथ। उसके चेहरे पर अब एक
- 1:36:43अलग ही सुकून था। उसे महसूस हो रहा था कि
- 1:36:46प्रतीक को बेवकूफ बनाना कितना आसान है।
- 1:36:49अगर ऐसा था तो तुमने मुझे पहले क्यों नहीं
- 1:36:51बताया? प्रतीक ने शिकायत भरे लहजे में
- 1:36:54कहा। तो मेनका ने तुरंत पलटवार किया। मुझे
- 1:36:57क्या सपना आया था कि तुमने शौर्य के लिए
- 1:36:59कोई प्लान बना रखा है और अगर ऐसी कोई
- 1:37:01प्लानिंग थी तो तुम्हें पहले मुझे विश्वास
- 1:37:03में लेना चाहिए था। शिकायत तो मुझे तुमसे
- 1:37:06होनी चाहिए। तुम्हें मुझसे नहीं। प्रतीक
- 1:37:08एकदम चुप हो गया। उसकी बोलती जैसे बंद हो
- 1:37:11गई थी। फिर थोड़ा संभल कर उसने पूछा। अगर
- 1:37:14तुम्हारे साथ असिस्टेंट था तो शौर्य कहां
- 1:37:17था? वो वो तो होटल में ही था। अपने कमरे
- 1:37:21में आराम कर रहा था। मेनका ने बिना रुके
- 1:37:24जवाब दिया। कुछ पल की खामोशी के बाद
- 1:37:26प्रतीक ने कहा, शौर्य का कोई फोटो है
- 1:37:29तुम्हारे पास? भेजो ना। इस पर मेनका ने
- 1:37:32तुरंत मना कर दिया। मेरे पास उसके फोटो का
- 1:37:35क्या काम? मेरे पास कोई फोटो नहीं है।
- 1:37:38लेकिन उसके चेहरे पर अब भी हल्की सी
- 1:37:40मुस्कान थी क्योंकि वह जानबूझकर प्रतीक को
- 1:37:42उलझा रही थी और सच कहें तो उसे इसमें मजा
- 1:37:45आ रहा था। प्रतीक से इतनी बातें करने के
- 1:37:48बाद मेनका के सिर से जैसे एक बड़ा बोझ उतर
- 1:37:51गया। उसे उम्मीद नहीं थी कि प्रतीक उसकी
- 1:37:53दी हुई जानकारी का इस तरह इस्तेमाल करेगा
- 1:37:56कि लोगों के बीच उसका तमाशा बन जाए। अब तक
- 1:37:59प्रतीक की जो अच्छी छवि उसके मन में थी वो
- 1:38:01मॉल वाली घटना के बाद पूरी तरह टूट चुकी
- 1:38:04थी। उधर प्रतीक भी समझ गया था कि मेनका
- 1:38:07उससे नाराज है। शायद यही वजह थी कि मेनका
- 1:38:10ने उसे शौर्य का फोटो देने का कोई वादा
- 1:38:12नहीं किया। वहीं दूसरी तरफ शौर्य होटल के
- 1:38:15रेस्टोरेंट एरिया में पहुंच गया। वहां
- 1:38:17विक्रम, मोहित और प्रिया एक टेबल पर बैठे
- 1:38:20थे। टेबल दीवार से सटी हुई थी। लेकिन
- 1:38:23दीवार की जगह पूरा हिस्सा रंगीन शीशे का
- 1:38:25बना था। जिससे बाहर की सड़क साफ दिखाई
- 1:38:28देती थी। जबकि बाहर से अंदर का नजारा नहीं
- 1:38:31दिखता था। शौर्य उनके पास जाकर बैठ गया।
- 1:38:34तीनों ने उसका अभिवादन किया। प्रिया के
- 1:38:36चेहरे से साफ लग रहा था कि वह पहली बार
- 1:38:39इतने बड़े होटल में आई है। चारों तरफ का
- 1:38:41माहौल और साज सज्जा सब कुछ उसके लिए नया
- 1:38:44था। शौर्य ने मेनू उठाकर उसकी तरफ बढ़ाया।
- 1:38:48जो तुम्हें पसंद हो आर्डर कर दो। प्रिया
- 1:38:51ने धीरे से मेनू खोला। लेकिन जैसे ही उसकी
- 1:38:54नजर कीमतों पर पड़ी तो इतनी महंगी चीजें
- 1:38:56देखकर कुछ ऑर्डर करने की उसकी हिम्मत ही
- 1:38:59नहीं हुई। उसकी झिझक शौर्य से छुपी नहीं
- 1:39:01रही। उसने बिना कुछ कहे वेटर को बुलाया और
- 1:39:04सहज स्वर में कहा।
- 1:39:07यहां का जो बेस्ट है वो सबके लिए ले आइए।
- 1:39:11वेटर शौर्य की बात सुनकर मुस्कुराया और यस
- 1:39:14सर कहकर वहां से चला गया। शौर्य ने मोहित
- 1:39:17की ओर देखते हुए कहा हां अब बताओ क्या हुआ
- 1:39:21बिगर कलेक्शन में इस पर मोहित ने बताया
- 1:39:25सब ठीक से निपट गया सर रोहित जुनेजा ने
- 1:39:27थोड़ी नौटंकी जरूर की कुछ गुंडे भी बुला
- 1:39:30लिए थे उसे पहले से पता चल गया था कि राघव
- 1:39:33ने अपने शहर बेच दिए हैं [संगीत] लेकिन
- 1:39:35दूसरे साले के शहर के बारे में उसे
- 1:39:37जानकारी नहीं थी उसने हमें धमकाने की
- 1:39:40कोशिश भी की पर विक्रम सर ने उसे ऐसा सबक
- 1:39:42सिखाया कि उसकी सारी अकड़ निकल गई अब वह
- 1:39:45दोबारा सामने सामने आने की हिम्मत नहीं
- 1:39:47करेगा। शौर्य को भरोसा था कि विक्रम ऐसी
- 1:39:50परिस्थितियों को संभाल सकता है। तभी तो
- 1:39:52उसने उसे साथ भेजा था। अच्छा है। उसे सबक
- 1:39:56भी मिल गया। शौर्य ने संतोष भरे स्वर में
- 1:39:59कहा। फिर प्रिया की ओर मुड़ते हुए पूछा।
- 1:40:02और प्रिया तुम्हें वहां का काम समझा दिया
- 1:40:05गया है ना? तभी वेटर खाना लेकर आ गया और
- 1:40:09सबके सामने प्लेटें सजाने लगा। खाने की
- 1:40:11खुशबू से ही प्रिया की भूख और बढ़ गई।
- 1:40:14मोहित ने जवाब दिया, मैंने इसे बेसिक समझा
- 1:40:17दिए हैं। बाकी यह खुद बताएगी कि संभाल
- 1:40:19पाएगी या नहीं। शौर्य ने सीधे प्रिया से
- 1:40:22पूछा, तो क्या कहती हो? संभाल लोगी या मैं
- 1:40:25किसी और को जिम्मेदारी दूं। प्रिया एकदम
- 1:40:28घबरा गई। उसने तुरंत कहा, नहीं सर मैं
- 1:40:31संभाल लूंगी। अगर कहीं दिक्कत आई तो मोहित
- 1:40:33सर है ही। इनसे मदद ले लूंगी। उसे डर था
- 1:40:37कि अगर उसने जरा भी देर की तो इतना अच्छा
- 1:40:39मौका उसके हाथ से निकल जाएगा। उसकी घबराहट
- 1:40:42देखकर सबके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ
- 1:40:44गई। इसके बाद सब खाने में लग गए। खाते हुए
- 1:40:48शौर्य की नजर होटल के गेट के पास लगे एक
- 1:40:50बोर्ड पर पड़ी। दरअसल होटल के गेट पर कई
- 1:40:54डिस्प्ले बोर्ड लगे हुए थे। [संगीत] जिन
- 1:40:55पर उस दिन के रिजर्व हॉल की जानकारी रहती
- 1:40:58है ताकि आने वाले गेस्ट आसानी से समझ सकें
- 1:41:01कि उन्हें किस हॉल नंबर में जाना है। ऐसे
- 1:41:03ही एक डिस्प्ले बोर्ड पर राधिका टंडन
- 1:41:05बर्थडे सेलिब्रेशन हॉल नंबर पांच लिखा नजर
- 1:41:08आ रहा था। इसी डिस्प्ले बोर्ड पर शौर्य की
- 1:41:11नजर ठहर गई। उसे यह नाम जाना पहचाना लगा।
- 1:41:15उसे ध्यान आया कि यह नाम शिप्रा की बुआ की
- 1:41:18बेटी का है। जिससे एक-द दिन पहले ही शौर्य
- 1:41:21उसके ऑफिस की पार्किंग में मिला था। यानी
- 1:41:23आज उसका बर्थडे था और सेलिब्रेशन राजकमल
- 1:41:26होटल में ही था। शौर्य को लगा कि शायद
- 1:41:28शिप्रा भी आज उसके बर्थडे सेलिब्रेशन में
- 1:41:31यहां आएगी। शौर्य सेलिब्रेशन में इनवाइटेड
- 1:41:34नहीं था। शायद अभी उसने सक्सेना फैमिली
- 1:41:36में वह हैसियत हासिल नहीं की थी कि उसे
- 1:41:39किसी फैमिली फंक्शन में इनवाइट किया जा
- 1:41:41सके। शौर्य को कई जाने पहचाने चेहरे होटल
- 1:41:44में आते दिखाई दिए। लेकिन जिस चेहरे को वो
- 1:41:47देखना चाह रहा था वो अभी तक नजर नहीं आया
- 1:41:49था। शौर्य ध्यान से हर आने जाने वाले को
- 1:41:53देखने लगा। तभी शौर्य को वो चेहरा दिखाई
- 1:41:55दिया जिसके लिए वह दरवाजे के सामने अपनी
- 1:41:58नजरें गड़ाए हुए था। उसने देखा शिप्रा
- 1:42:01अपने पिता, मां और भाई के साथ होटल के
- 1:42:04अंदर प्रवेश कर रही थी। इस समय शिप्रा
- 1:42:07पिंक कलर के सूट में किसी अप्सरा जैसी लग
- 1:42:09रही थी। शौर्य की निगाह तो उसके चेहरे पर
- 1:42:11अटक ही गई थी जब तक कि वो होटल के अंदर
- 1:42:14प्रवेश नहीं कर गई। इसके बाद शौर्य ने
- 1:42:16वहां से अपनी नजर हटाई और अपने साथ बैठे
- 1:42:19लोगों की तरफ ध्यान दिया। वो मन ही मन
- 1:42:21बुदबुदाया।
- 1:42:23हॉल नंबर पांच। वो वहां जा तो नहीं सकता
- 1:42:26था पर वह चाहता था कि वहां जो भी हो रहा
- 1:42:28है उसे देख सके। [संगीत]
- 1:42:30अब तक सभी अपना खाना खा चुके थे। शौर्य ने
- 1:42:33एक बार सबकी तरफ देखा और पूछा किसी को कुछ
- 1:42:36और भी चाहिए? सबने मना कर दिया। शौर्य भी
- 1:42:40यही तो चाहता था। उसने वेटर से बोलकर बिल
- 1:42:42मंगवाया। क्योंकि यहां स्टाफ के लोग उसके
- 1:42:45बारे में नहीं जानते थे। इसीलिए शौर्य
- 1:42:47उन्हें यह नहीं बता सकता था कि वह इस होटल
- 1:42:49का मालिक है। इसीलिए उसने बिल पे करना ही
- 1:42:52उचित समझा। शौर्य ने बिल पे करने के लिए
- 1:42:55अपना कार्ड वेटर की तरफ बढ़ाया तो वेटर ने
- 1:42:57कहा नो सर मैम ने कहा था कि आपको बिल पे
- 1:43:01करने की कोई जरूरत नहीं है। शौर्य को भी
- 1:43:04समझ नहीं आया कि मेनका को कैसे पता चला कि
- 1:43:06वो यहां लंच कर रहा है। फिर उसने सोचा हो
- 1:43:09सकता है उसने सीसीटीवी पर उसे लंच करते
- 1:43:12देख लिया हो। इसीलिए उसने खासतौर पर वेटर
- 1:43:14को यह इंस्ट्रक्शन दिया होगा। शौर्य ने
- 1:43:17फिर वेटर को कार्ड देने की कोशिश नहीं की।
- 1:43:19वहीं मोहित और प्रिया हैरान थे कि होटल
- 1:43:22वालों ने शौर्य से बिल पे करने के लिए मना
- 1:43:24क्यों किया। उन्होंने अपना बहुत दिमाग
- 1:43:27लगाया पर उन्हें कुछ समझ नहीं आया। खैर
- 1:43:30शौर्य अपनी सीट से उठते हुए बोला तो फिर
- 1:43:33ठीक है मैं चलता हूं अभी। मुझे कुछ काम आ
- 1:43:36गया है। मैं फिर मिलता हूं तुम सबसे। ठीक
- 1:43:39है सर हम भी निकलते हैं। मोहित भी प्रिया
- 1:43:42के साथ खड़े होते हुए बोला। इसके बाद
- 1:43:44शौर्य विक्रम के साथ वहां से निकल गया।
- 1:43:47चलते हुए विक्रम ने पूछा क्या हुआ? अचानक
- 1:43:51ऐसा क्या काम आ गया जो आप जल्दीबाजी में
- 1:43:53यहां से निकल लिए? इस पर शौर्य मुस्कुराते
- 1:43:56हुए बोला, अभी-अभी मुझे पता चला है कि
- 1:43:59राधिका टंडन का बर्थडे सेलिब्रेशन इसी
- 1:44:01होटल में हो रहा है और सक्सेना फैमिली के
- 1:44:04लगभग सभी लोग यहां मौजूद हैं। मैं वहां
- 1:44:07इनवाइटेड तो नहीं हूं पर मैं उस पार्टी का
- 1:44:09नजारा देखना चाहता हूं। इसीलिए यहां से
- 1:44:11निकल गया। चलो मैनेजर के रूम से सीसीटीवी
- 1:44:15पर लाइव कवरेज देखते हैं। मुझे समझ नहीं आ
- 1:44:18रहा है कि आप क्यों यह चूहे बिल्ली का खेल
- 1:44:20खेल रहे हैं। अरे आप अपने बारे में उन्हें
- 1:44:23बताइए। आपके बारे में जानते ही सभी आपके
- 1:44:26आगे पीछे घूमने लगेंगे। विक्रम बेपरवाही
- 1:44:29से बोला तो शौर्य मुस्कुराया और बोला
- 1:44:32मैंने तुम्हें पहले भी कहा था कि यह बताना
- 1:44:35आसान नहीं है जितना तुम सोच रहे हो। मुझे
- 1:44:38शिप्रा को अपने पीछे नहीं घुमाना है बल्कि
- 1:44:40उसके दिल में जगह बनानी है। मैं [संगीत]
- 1:44:42नहीं चाहता कि वो मेरी दौलत और रुतबा
- 1:44:44देखकर अपना डिसीजन ले। मुझे सुकून तब होगा
- 1:44:48अगर वो मेरी सच्चाई जाने बिना मुझे
- 1:44:50अपनाएगी। यह सुनकर विक्रम अपना सिर झटकते
- 1:44:53हुए बोला। आपकी बातें मुझे कभी समझ नहीं
- 1:44:56आएंगी। तो फिर तुम कोशिश ही क्यों करते
- 1:44:58हो? कहते हुए शौर्य मंदमंद मुस्कुराने
- 1:45:01लगा। इस पर विक्रम ने लंबी सांस छोड़ते
- 1:45:04हुए कहा। ठीक है। फिर मैं बस देखता हूं कि
- 1:45:07कब तक आप ऐसे ही अपने आप को तड़पाते रहते
- 1:45:10हैं। शौर्य और विक्रम मेनका के कमरे तक
- 1:45:12पहुंचे। उस समय मेनका वहां नहीं थी।
- 1:45:14दरवाजे पर गार्ड मौजूद था लेकिन शौर्य को
- 1:45:17पहचानता था। इसलिए बिना कुछ कहे अंदर जाने
- 1:45:20दिया। [संगीत]
- 1:45:20शौर्य ने एक चेयर खींच कर बैठते हुए रिमोट
- 1:45:23उठाया और सीसीटीवी ऑन कर दिया। चैनल बदलते
- 1:45:26बदलते अचानक स्क्रीन पर हॉल नंबर पांच का
- 1:45:29लाइव नजारा उभर आया। विक्रम ने तिरछी नजर
- 1:45:32से उसे देखा जैसे समझ गया हो कि शौर्य
- 1:45:34क्या देखना चाहता है। उधर हॉल नंबर पांच
- 1:45:37में राधिका नैना राय के साथ स्टेज पर खड़ी
- 1:45:40थी। [संगीत] पूरा हॉल बेहद खूबसूरती से
- 1:45:42सजाया गया था। रंग बिरंगी लाइट्स, फूलों
- 1:45:45की सजावट और चारों तरफ रौनक थी। सब कुछ
- 1:45:48किसी बड़े आयोजन की गवाही दे रहा था।
- 1:45:50गेस्ट धीरे-धीरे आ रहे थे और वेटर रिंग्स
- 1:45:53और स्टार्टर्स सर्व करने में लगे थे। वाइट
- 1:45:56गाउन में राधिका सचमुच किसी परी जैसी लग
- 1:45:58रही थी। तभी बलराज सक्सेना उसके पास आए और
- 1:46:01अपने हाथ में पकड़ा गिफ्ट उसे थमा दिया।
- 1:46:04राधिका ने झुककर उनके पैर छुए तो बलराज
- 1:46:06सक्सेना ने उसके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद
- 1:46:09दिया। राधिका ने उत्साहित होकर गिफ्ट को
- 1:46:12देखते हुए पूछा।
- 1:46:14इसमें क्या है नाना जी? क्या मैं इसे अभी
- 1:46:16खोल कर देख लूं? बलराज सक्सेना मुस्कुराए।
- 1:46:19अरे इतनी [संगीत] भी क्या जल्दी है? यह
- 1:46:22तुम्हारे लिए ही है। कहीं भागा तो नहीं जा
- 1:46:25रहा। अभी तो तुम्हें और भी बहुत सारे
- 1:46:28गिफ्ट मिलने हैं। पहले उन पर ध्यान दो।
- 1:46:31धीरे-धीरे गेस्ट की संख्या बढ़ने लगी और
- 1:46:34राधिका के सामने गिफ्ट्स का ढेर लग गया।
- 1:46:36इसी बीच राधिका की नजर दरवाजे की तरफ गई।
- 1:46:40वहां मुख्तार भाई और रजत अंदर आते दिखाई
- 1:46:42दिए। रजत के हाथ में भी एक गिफ्ट था। वो
- 1:46:46मुख्तार भाई के साथ सीधे स्टेज की ओर बढ़ा
- 1:46:48और राधिका के पास पहुंचकर मुस्कुराते हुए
- 1:46:51बोला। हैप्पी बर्थडे डियर राधिका। मैं दुआ
- 1:46:54करता हूं कि आपकी जिंदगी हमेशा खुशियों से
- 1:46:57भरी रहे। राधिका ने रजत की ओर देखा और
- 1:47:00हल्की सी मुस्कान के साथ उसके हाथ से
- 1:47:02गिफ्ट लिया। उसने प्यार भरी आवाज से कहा
- 1:47:05थैंक यू। रजत ने भी मुस्कुराने की कोशिश
- 1:47:08की लेकिन उसकी नजरें राधिका पर टिक नहीं
- 1:47:10पाई। जैसे ही उसने सिर उठाया, उसकी आंखें
- 1:47:13पूरे हॉल में किसी को खोजने लगी। उसकी
- 1:47:15बेचैनी साफ झलक रही थी। खैर, उसे ज्यादा
- 1:47:19इंतजार नहीं करना पड़ा। कुछ ही पलों में
- 1:47:21हॉल के मुख्य दरवाजे पर हलचल हुई। शिप्रा
- 1:47:24अपने पूरे परिवार के साथ अंदर प्रवेश कर
- 1:47:26रही थी। जैसे ही शिप्रा की झलक रजत की
- 1:47:29आंखों में पड़ी, उसकी तलाश खत्म हो गई।
- 1:47:32उसकी निगाहें वहीं ठहर गई जैसे वक्त कुछ
- 1:47:35पल के लिए थम गया हो। दूसरी ओर शौर्य अपने
- 1:47:39कमरे में बैठा सीसीटीवी स्क्रीन पर पार्टी
- 1:47:41का हर नजारा देख रहा था। जैसे ही उसकी नजर
- 1:47:44हॉल में मौजूद चेहरों पर गई, वो अचानक
- 1:47:47चौकन्ना हो गया। मुख्तार और रजत उसकी
- 1:47:50आंखें सिकुड़ गई। माथे पर लकीरें उभर आई।
- 1:47:53उसे समझ नहीं आया कि राधिका के बर्थडे
- 1:47:56पार्टी में इन दोनों का क्या काम।
- 1:47:59क्या सक्सेना फैमिली मुख्तार भाई के आगे
- 1:48:01झुक गई है? यह ख्याल उसके मन में बिजली की
- 1:48:04तरह कौंधा। वो स्क्रीन पर नजरें गड़ाए
- 1:48:07रहा। जैसे किसी बड़े राज का इंतजार कर रहा
- 1:48:10हो। तभी हॉल के दरवाजे से शिप्रा का
- 1:48:12प्रवेश हुआ। शौर्य की नजर तुरंत रजत पर गई
- 1:48:15और उसने साफ देखा कि रजत की निगाहें
- 1:48:18शिप्रा पर आकर ठहर गई थी। हॉल में प्रवेश
- 1:48:21करते ही शिप्रा की नजर जैसे ही रजत पर
- 1:48:23पड़ी उसके चेहरे पर सख्ती तैर गई। जैसे
- 1:48:26किसी पुराने जख्म को कोरेदा गया हो। लेकिन
- 1:48:29अगले ही क्षण उसने अपनी भावनाओं को अपने
- 1:48:31चेहरे से मिटा दिया। सदी हुई चाल से वो
- 1:48:34रजत को पूरी तरह नजरअंदाज करती हुई अपने
- 1:48:36पापा के साथ राधिका की ओर बढ़ गई। राधिका
- 1:48:40के सामने रुक कर उसने हल्की मुस्कान के
- 1:48:42साथ कहा।
- 1:48:44मेनी हैप्पी रिटर्न्स ऑफ द डे। स्वीट
- 1:48:46हार्ट। हैप्पी बर्थडे।
- 1:48:48राधिका मुस्कुराई। थैंक यू। लेकिन उसकी
- 1:48:51आंखें किसी और को तलाश रही थी। शिप्रा ने
- 1:48:54उसकी आंखें पढ़ ली। उसने पूछा क्या हुआ?
- 1:48:57किसे ढूंढ रही हो? राधिका के होठों पर एक
- 1:49:00चालाक मुस्कान उभरी। वो जानबूझकर आवाज
- 1:49:03ऊंची कर बोली। अरे अपने जीजा जी को। आखिर
- 1:49:07वो कहां है? वो यहीं नहीं रुकी। आवाज में
- 1:49:10नौटंकी लाते हुए बोली। इतनी तारीफ सुनी है
- 1:49:13उनकी। सोचा था आज मिल ही लूंगी लेकिन वो
- 1:49:16तो नजर ही नहीं आ रहे। आसपास खड़े लोग
- 1:49:19सारी बातें साफ-साफ सुन रहे थे। माहौल में
- 1:49:22हल्की फुसफुसाहट घुलने लगी। तभी नैना बुआ
- 1:49:25आगे आई और होठों पर व्यंग भरी मुस्कान से
- 1:49:27बोली। हां शिप्रा तुम्हारे पतिदेव कहां
- 1:49:31है? उन्हें नहीं लाई या फिर वो यहां इतनी
- 1:49:34बड़ी पार्टी में आने से कतरा रहे थे। सबकी
- 1:49:37नजरें अब शिप्रा पर टिक गई। सबको तमाशे का
- 1:49:39इंतजार था। लेकिन शिप्रा वो जरा भी नहीं
- 1:49:42डगमगाई। उसने सदी और साफ आवाज में कहा
- 1:49:46किसी को बुलाना हो तो पहले निमंत्रण दिया
- 1:49:49जाता है ना नैना बुआ। फिर वो राधिका की ओर
- 1:49:51देखते हुए बोली बिन बुलाए सिर्फ बेगैरत
- 1:49:55लोग ही आते हैं। अगली बार अगर सच में उनसे
- 1:49:58मिलना हो तो इज्जत से [संगीत] बुलाना।
- 1:50:00नैना बुआ ने भौए चढ़ाते हुए शिप्रा के
- 1:50:02करीब आकर कहा। तुम कैसी बातें कर रही हो
- 1:50:06शिप्रा? अपने ही परिवार में क्या किसी को
- 1:50:08अलग-अलग इनवाइट किया जाता है? जब वह इस घर
- 1:50:11में रह रहा है तो कायदे से फैमिली फंक्शन
- 1:50:13में अपने आप ही उसे आना चाहिए था। शिप्रा
- 1:50:16ने नैना बुआ की तरफ देखा और फिर होठों पर
- 1:50:19हल्की सी कड़वी मुस्कान आई। कायदे की बात
- 1:50:22कर रही हो ना बुआ? एक कदम आगे बढ़ते हुए
- 1:50:25वो बिना आवाज ऊंचे किए बोली। कायदे से तो
- 1:50:28मुझे भी नहीं आना चाहिए था। लेकिन पापा
- 1:50:31मुझे जबरदस्ती ले आए। और जहां तक श्रवण की
- 1:50:34बात है उसे कोई सपना तो आया नहीं था कि आज
- 1:50:36राधिका का बर्थडे है और उसे यहां हाजिरी
- 1:50:38लगानी चाहिए। उसके शब्दों में रूखापन था
- 1:50:42लेकिन उसका मकसद किसी का अपमान करना नहीं
- 1:50:44था। तभी राजदीप राय आगे आए। उनका चेहरा
- 1:50:47सख्त था।
- 1:50:49हां नैना अगर तुम चाहती थी कि श्रवण भी
- 1:50:52यहां आए तो सीधे बोलना चाहिए था। उन्होंने
- 1:50:56हल्की सी नजर चारों तरफ घुमाई।
- 1:50:58अधूरी बातों से सिर्फ गलतफहमियां पैदा
- 1:51:01होती हैं। रिश्ते नहीं। अब माहौल थोड़ा
- 1:51:04बदलने लगा था। राधिका ने तुरंत बीच में
- 1:51:06आकर बात संभालने की कोशिश की। क्या मम्मी
- 1:51:10आप एक काम भी ठीक से नहीं कर सकती? गेस्ट
- 1:51:12लिस्ट आपकी जिम्मेदारी थी और आपने हमारे
- 1:51:15प्यारे जीजा जी को ही इनवाइट नहीं किया।
- 1:51:18उसने प्यारे शब्द पर हल्का जोर दिया जैसे
- 1:51:20जानबूझकर चुभाना चाहती हो। फिर वो पलट कर
- 1:51:23शिप्रा की तरफ मुड़ी और जबरदस्ती चेहरे पर
- 1:51:26मीठी मुस्कान लाती हुई बोली। कोई बात नहीं
- 1:51:29शिप्रा तुम मुझे उनका नंबर दे दो। मैं भी
- 1:51:31कॉल करके उन्हें इनवाइट कर लेती हूं।
- 1:51:34शिप्रा ने उसकी आंखों में सीधा देखा।
- 1:51:36राधिका की मुस्कान देखकर कोई भी कह सकता
- 1:51:38था कि यह मासूमियत नहीं एक चाल [संगीत]
- 1:51:41थी। शिप्रा ने धीरे से सिर हिलाकर कहा
- 1:51:44रहने दो राधिका अब इसकी कोई जरूरत नहीं
- 1:51:47है। राधिका कुछ बोलती उससे पहले ही शिप्रा
- 1:51:50ने बात पूरी कर दी। वैसे भी पता नहीं
- 1:51:53श्रवण अभी कहां होगा। किसी काम से बाहर
- 1:51:56गया था और अभी तक लौटा नहीं। नहीं नहीं
- 1:51:59ऐसा कैसे हो सकता है? राधिका ने जिद भरे
- 1:52:02स्वर में कहा जब परिवार के सारे मेंबर
- 1:52:04यहां मौजूद हैं तो हमारे जीजाजी कैसे नहीं
- 1:52:07होंगे? उन्हें तो आना ही पड़ेगा। वो
- 1:52:09शिप्रा का हाथ पकड़ कर बोली तुम बस मुझे
- 1:52:12उनका नंबर दे दो। मैं खुद उन्हें बुला
- 1:52:14लूंगी। राधिका के चेहरे पर भले ही मीठी
- 1:52:17मुस्कान थी लेकिन उसके मन में कुछ और ही
- 1:52:19चल रहा था। वो पूरी तरह आश्वस्त थी कि एक
- 1:52:22बार बस शिप्रा का पति यहां आ जाए। फिर
- 1:52:25देखती हूं उसका सारा घमंड कैसे चूर होता
- 1:52:27है। जो एक भिखारी था उसकी हैसियत भला
- 1:52:30कितनी बदल गई होगी। उसके मन में एक
- 1:52:33तिरस्कार भरी हंसी उठी। सिर्फ कपड़े बदल
- 1:52:36लेने से या थोड़ा बहुत साज सज्जा कर लेने
- 1:52:38से कोई अपनी औकात नहीं बदल सकता। आज उसे
- 1:52:42शिप्रा को सबके सामने नीचा दिखाने का
- 1:52:44अच्छा मौका मिला था। राधिका ऐसे मौके को
- 1:52:47यूं ही जाने देने वालों में से नहीं थी।
- 1:52:49तभी राजदीप राय बीच में आ गए और समझाने के
- 1:52:52ढंग से बोले रहने दो राधिका क्यों जिद कर
- 1:52:56रही हो उन्होंने हल्की सी नजर शिप्रा पर
- 1:52:59डाली और अपनी बात पूरी की पता नहीं अभी
- 1:53:02कहां होगा श्रवण बाद में मिल लेना उससे
- 1:53:06लेकिन राधिका अब रुकने वाली नहीं थी वो
- 1:53:08सीधा बलराज सक्सेना के पास पहुंची और
- 1:53:11चेहरे पर बनावटी मासूमियत लेकर बोली नाना
- 1:53:14जी आप ही शिप्रा को बोलिए ना कि वो मुझे
- 1:53:16श्रवण जीजू का नंबर दे दें।
- 1:53:19उसने हल्का सा मुंह बनाया।
- 1:53:22मुझे अच्छा नहीं लगेगा। मेरी बर्थडे
- 1:53:24पार्टी में मेरे जीजाजी ना हो। बलराज
- 1:53:27सक्सेना ने एक नजर राधिका पर डाली। फिर
- 1:53:29शिप्रा की ओर मुड़कर बोले शिप्रा बेटा दे
- 1:53:33दो नंबर। बाकी ये खुद बात कर लेगी। आना
- 1:53:37होगा तो श्रवण आ जाएगा। अब शिप्रा के पास
- 1:53:40मना करने का कोई सीधा रास्ता नहीं बचा था।
- 1:53:43बिना कुछ कहे उसने अपना मोबाइल निकाला और
- 1:53:46श्रवण का नंबर राधिका को नोट करा दिया।
- 1:53:49राधिका के होठों पर जीत की हल्की मुस्कान
- 1:53:51आ गई। उसने तुरंत नंबर डायल किया। वहीं
- 1:53:54दूसरी तरफ श्रवण सीसीटीवी स्क्रीन पर पूरे
- 1:53:57हॉल का नजारा देख रहा था। लोगों की हलचल
- 1:54:00दिख रही थी। चेहरे दिख रहे थे। लेकिन वो
- 1:54:03आवाजें नहीं सुन सकता था। वो ध्यान से देख
- 1:54:06रहा था कि शिप्रा कुछ कह रही थी और राधिका
- 1:54:08अपने मोबाइल में कुछ नोट कर रही थी। उसकी
- 1:54:11भए सिकुड़ गई।
- 1:54:15क्या चल क्या रहा है वहां?
- 1:54:18वो समझने की कोशिश ही कर रहा था कि तभी
- 1:54:20उसका मोबाइल बज उठा। उसने स्क्रीन पर नजर
- 1:54:23डाली। अननोन नंबर। लेकिन अगले ही पल उसकी
- 1:54:27नजर सीसीटीवी पर गई। राधिका फोन कान से
- 1:54:30लगाए खड़ी थी। एक हल्की सी मुस्कान उसके
- 1:54:32होठों पर आ गई। ओ तो खेल यहां तक पहुंच
- 1:54:36गया। उसने कॉल रिसीव किया। हेलो
- 1:54:41दूसरी तरफ से एक मीठी लेकिन बनावटी आवाज
- 1:54:44आई।
- 1:54:45हेलो
- 1:54:46श्रवण शांत और सतर्क आवाज में बोला जी कौन
- 1:54:50बोल रही हैं?
- 1:54:51हेलो जीजा जी।
- 1:54:53राधिका आवाज में मिठास घोल कर बोली।
- 1:54:55मैं आपकी साली राधिका टंडन बोल रही हूं।
- 1:54:59बस इतना सुनते ही श्रवण का शक यकीन में
- 1:55:01बदल गया। अब उसे पूरी कहानी समझ आ चुकी
- 1:55:03थी। वो कुर्सी पर थोड़ा पीछे टिक गया और
- 1:55:06आवाज में हल्का सा उत्साह लाते हुए बोला
- 1:55:09ओह राधिका जी कहिए राधिका जी आज अचानक
- 1:55:12हमें कैसे याद कर लिया
- 1:55:14जीजा जी पहले तो आप यह बताइए कि अभी आप
- 1:55:17हैं कहां उसके बाद ही मैं आपको अपने फोन
- 1:55:19करने की वजह बताऊंगी
- 1:55:21राधिका ने इसरार करते हुए कहा शौर्य एक पल
- 1:55:24को चुप रहा उसकी नजर अब भी सीसीटीवी
- 1:55:27स्क्रीन पर टिकी थी जहां राधिका फोन पकड़े
- 1:55:29खड़ी थी उसने थोड़ा सोचा फिर नॉर्मली बोला
- 1:55:33अभी अभी मैं गुलमोहर मार्केट में हूं। कुछ
- 1:55:36काम से आया था यहां। आप बताइए क्या काम
- 1:55:38है? शौर्य ने जानबूझकर होटल का नाम नहीं
- 1:55:41लिया। लेकिन गुलमोहर मार्केट सुनते ही
- 1:55:43राधिका के चेहरे पर खुशी चमक उठी। शिकार
- 1:55:47खुद जाल के पास है। उसने तुरंत उत्साहित
- 1:55:49होकर कहा।
- 1:55:50अरे वाह, यह तो बहुत अच्छी बात है जीजा
- 1:55:52जी। तो ध्यान से सुनिए। आज मेरा बर्थडे है
- 1:55:55और मैंने अपनी पार्टी होटल राजकमल के हॉल
- 1:55:58नंबर पांच में रखी है।
- 1:56:00थोड़ा रुक कर उसने बात को मोड़ा।
- 1:56:02शायद किसी गलतफहमी की वजह से मम्मी आपको
- 1:56:05पहले इनवाइट नहीं कर पाई।
- 1:56:07फिर सीधा दबाव डालते हुए बोली,
- 1:56:09लेकिन अब आपको हर हाल में आना है। सब कुछ
- 1:56:12छोड़िए और प्लीज अभी होटल राजकमल आ जाइए।
- 1:56:15हम सब आपका इंतजार कर रहे हैं।
- 1:56:17शौर्य ने पूरी बात सुनी। उसके होठों पर
- 1:56:20हल्की मुस्कान आई। अच्छा तो यह खेल है।
- 1:56:24लेकिन वो इतनी आसानी से मोहरा बनने वाला
- 1:56:27नहीं था। उसने सोचकर बहुत सधे हुए स्वर
- 1:56:30में कहा। माफ कीजिए मिस राधिका मुझे इस
- 1:56:32बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं है और
- 1:56:35ना ही शिप्रा ने मुझे इसके बारे में कुछ
- 1:56:37बताया है तो मैं बिना शिप्रा की जानकारी
- 1:56:40के वहां नहीं आ सकता। जब शौर्य ने कहा था
- 1:56:44कि वह गुलमोहर मार्केट में है तो राधिका
- 1:56:46ने तुरंत फोन का स्पीकर ऑन कर दिया था।
- 1:56:48हॉल में मौजूद हर व्यक्ति उसकी आवाज
- 1:56:51साफ-साफ सुन रहा था। शिप्रा ने जब यह
- 1:56:53सुना, तो उसे राहत महसूस हुई। कम से कम वह
- 1:56:56तुरंत झुक नहीं गया। लेकिन राधिका के लिए
- 1:56:59यह सीधा झटका था। उसने सोचा था कि होटल
- 1:57:02राजकमल का नाम सुनते ही वो भागा चला आएगा।
- 1:57:05पर यहां तो बात उल्टी पड़ गई थी। एक पल को
- 1:57:08उसका चेहरा सख्त हुआ। पर अगले ही पल उसने
- 1:57:10खुद को संभाल लिया और फिर खिसियानी हंसी
- 1:57:13के साथ बोली।
- 1:57:14अरे जीजा जी आप भी कैसी बातें कर रहे हैं?
- 1:57:17क्या मैं आपसे झूठ बोलूंगी?
- 1:57:20फिर उसने तुरप का पत्ता फेंका।
- 1:57:22शिप्रा भी यहीं है और आपकी आवाज सुन रही
- 1:57:25है।
- 1:57:26उसने तुरंत फोन शिप्रा की ओर बढ़ा दिया।
- 1:57:28लो शिप्रा तुम ही अपने पतिदेव से कह दो कि
- 1:57:31वो यहां आ जाए।
- 1:57:33सबकी नजर शिप्रा पर टिक गई। अब उसके पास
- 1:57:36मना करने की कोई गुंजाइश नहीं थी। कम से
- 1:57:39कम इस माहौल में तो बिल्कुल नहीं। उसने
- 1:57:41फोन लिया कुछ पल चुप रही। फिर धीमे से
- 1:57:44बोली
- 1:57:46अगर तुम पास में ही हो तो आ जाओ।
- 1:57:49थोड़ा रुक कर वो बोली
- 1:57:51पूरी फैमिली यहीं है।
- 1:57:53शौर्य समझ रहा था कि उसकी आवाज में ना
- 1:57:55उत्साह था ना आग्रह। एक मजबूरी जरूर थी
- 1:57:59लेकिन उसके चेहरे पर एक अलग सी मुस्कान
- 1:58:01उभरी। अब खेल दिलचस्प हो चुका था। उसने
- 1:58:04शांत स्वर में कहा।
- 1:58:06[संगीत]
- 1:58:06ठीक है। मैं आता हूं थोड़ी देर में। और
- 1:58:09बिना कुछ और बोले उसने कॉल काट दिया। हॉल
- 1:58:12में एक अजीब सी हलचल फैल गई। राधिका के
- 1:58:15चेहरे पर फिर से वही आत्मविश्वास लौट आया।
- 1:58:19अब आएगा मजा। उसने मन ही मन सोचा। राय
- 1:58:23परिवार की बेटी शिप्रा की शादी एक भिखारी
- 1:58:25के साथ होने की वायरल स्टोरी ने जितना
- 1:58:28लोगों को हैरान किया था, उससे भी चौगुनी
- 1:58:30हैरानियत अब लोगों को शौर्य के बदले अवतार
- 1:58:33को देखकर हो रही थी। शौर्य को देखते ही
- 1:58:36लोगों की आंखें जिस गति से फैलकर बड़ी हो
- 1:58:38रही थी, उन्हें वापस से कुड़ने में वक्त
- 1:58:40लग रहा था। आज शौर्य की पर्सनालिटी में और
- 1:58:43भी चार चांद लगने वाले हैं। कई दिलों की
- 1:58:46जलन और धड़कनें बढ़ने वाली हैं क्योंकि
- 1:58:48शौर्य ने अब अपने पुराने सस्ते कपड़े भी
- 1:58:51बदल लिए हैं। कुछ ही देर पहले वो मेनका के
- 1:58:54साथ शॉपिंग करके लौटा था और उन्हीं कपड़ों
- 1:58:56में से एक उसने पहन भी लिया था। उसका
- 1:58:59व्यक्तित्व अब और भी डैशिंग और शाही लग
- 1:59:01रहा है। आज जहां उसे जाना है वहां मामला
- 1:59:04सिर्फ जाने का नहीं है। कैसे और कब
- 1:59:06[संगीत] जाना है यह ज्यादा अहम है। उसने
- 1:59:09घड़ी पर नजर डाली और सोचा
- 1:59:12इतनी जल्दी पहुंचने पर तो खेल बिगड़
- 1:59:14जाएगा। वो सोच ही रहा था कि क्या उसे कुछ
- 1:59:18और तैयारी करनी चाहिए। तभी कमरे का दरवाजा
- 1:59:20खुला। मेनका अंदर आई और शौर्य को वहां
- 1:59:23देखकर ठिठक गई। तुम यहां क्या कर रहे हो?
- 1:59:27उसकी आवाज में हैरानी थी। [संगीत] लेकिन
- 1:59:29शौर्य ने सहज नजरों से उसकी ओर देखा और
- 1:59:32कहा मैं आया तो तुमसे ही मिलने था।
- 1:59:36[संगीत]
- 1:59:37और फिर हल्का सा सिर टीवी स्क्रीन की तरफ
- 1:59:39घुमाया। लेकिन तुम थी नहीं तो सोचा हॉल
- 1:59:42नंबर पांच में क्या चल रहा है वो ही देख
- 1:59:44लूं। मेनका की नजर दीवार पर लगे स्क्रीन
- 1:59:47पर गई। स्क्रीन पर चल रही बर्थडे पार्टी
- 1:59:50चमकती रोशनी के बीच हंसते मुस्कुराते
- 1:59:52चेहरे। लेकिन जैसे ही उसकी नजर कुछ चेहरों
- 1:59:55पर टिकने लगी, उसकी आंखें हल्की सी सिकुड़
- 1:59:58गई। उसे शौर्य की वह बात याद आ गई। मेरी
- 2:00:01शादी जबरदस्ती शिप्रा राय से कर दी गई थी।
- 2:00:04मेनका को मालूम था आज पूरी राय फैमिली इसी
- 2:00:07होटल में मौजूद है। मेनका के मन की
- 2:00:09उथल-पुथल बढ़ चुकी थी। उसकी नजर स्क्रीन
- 2:00:12पर दौड़ने लगी। वो हर एक लड़की के चेहरे
- 2:00:15पर ठहरती, तुलना करती, [संगीत] शायद वो
- 2:00:17किसी खास चेहरे को पहचानने की कोशिश कर
- 2:00:20रही थी।
- 2:00:22इनमें से शिप्रा कौन है? वहां मौजूद
- 2:00:26खूबसूरत चेहरों की भीड़ में उसे पहचान
- 2:00:28पाना आसान नहीं था। इसीलिए उसने शौर्य से
- 2:00:30पूछ लिया। लेकिन तभी उसके दिमाग में कुछ
- 2:00:33क्लिक हुआ। वो धीरे से मुड़ी और शौर्य की
- 2:00:36आंखों में देखते हुए बोली, एक बात बताओ
- 2:00:39तुम खुद पार्टी में क्यों नहीं जा रहे?
- 2:00:41क्या तुम किसी से बच रहे हो? शौर्य ने
- 2:00:45फीकी सी मुस्कान के साथ कंधे उचकाए और
- 2:00:47हल्के से व्यंग करते हुए कहा, राय फैमिली
- 2:00:50की नजर में मेरी अभी वह हैसियत नहीं है कि
- 2:00:53मुझे पहले से इनवाइट किया जाए। हां,
- 2:00:55अभी-अभी मिस राधिका का फोन आया था। बड़ी
- 2:00:58मेहरबानी से बुलाया है और मुझे पूरा यकीन
- 2:01:00है इसके पीछे भी उसकी कोई खास मंशा ही
- 2:01:03होगी। मेनका ने गौर से उसे देखते हुए कहा,
- 2:01:07तो क्या करोगे तुम? जाओगे? शौर्य ने गहरी
- 2:01:10सांस ली जैसे खुद को तैयार करते हुए बोला
- 2:01:13[संगीत] जाना तो पड़ेगा फिर हल्का सा
- 2:01:15मुस्कुराया आखिर देखना तो पड़ेगा ना मुझे
- 2:01:19आखिरी वक्त पर बुलाने के पीछे असली खेल
- 2:01:22क्या है मेनका ने स्क्रीन की ओर देखा जहां
- 2:01:25पार्टी पूरे शबाब पर थी तो फिर इंतजार किस
- 2:01:29बात का है पार्टी तो शुरू हो चुकी है
- 2:01:32शौर्य ने घड़ी की तरफ देखा और शांत स्वर
- 2:01:34में बोला जाऊंगा लेकिन तुरंत नहीं उसने
- 2:01:38मेनका की तरफ देखते हुए समझाया। मैंने
- 2:01:41राधिका से कहा है कि मैं अभी गुलमोहर
- 2:01:43मार्केट में हूं। तो वहां से यहां आने में
- 2:01:46थोड़ा वक्त तो लगेगा ही। फिर होठों पर
- 2:01:48हल्की सी चालाकी से मुस्कुराते हुए बोला।
- 2:01:51थोड़ा इंतजार इंपैक्ट बढ़ा देता है। यह
- 2:01:55सुनकर मेनका ने हंसते हुए कहा, बहुत
- 2:01:57बढ़िया। मतलब एंट्री भी पूरी प्लंड होगी।
- 2:02:00वैसे तुम्हें मेरी कोई और मदद चाहिए?
- 2:02:03शौर्य कुछ पल चुप रहा। जैसे यही सवाल
- 2:02:05सुनने का इंतजार कर रहा हो। अचानक उसकी
- 2:02:08आंखों में एक चमक आ गई। हां, मदद चाहिए और
- 2:02:12वो भी बहुत जरूरी। मेनका ने भौए हल्की सी
- 2:02:15उठाई। एक पल को उसके मन में ख्याल आया।
- 2:02:18क्या यह सच में मेरे पूछने का इंतजार कर
- 2:02:20रहा था? वो शौर्य के सामने आकर खड़ी हो
- 2:02:23गई। ठीक है बताओ अब क्या चाहिए तुम्हें?
- 2:02:27शौर्य ने थोड़ा झिझकते हुए कहा। देखो मैं
- 2:02:30बर्थडे सेलिब्रेशन में जा रहा हूं तो तो
- 2:02:32बर्थडे गर्ल के लिए कोई गिफ्ट तो चाहिए
- 2:02:34होगा और मेरे पास अभी कुछ है नहीं। कहते
- 2:02:37हुए उसने हल्की सी मासूमियत के साथ मेनका
- 2:02:40की ओर देखा। तो क्या तुम मेरे लिए एक
- 2:02:42गिफ्ट का इंतजाम कर सकती हो? उसका अंदाज
- 2:02:45इतना सीधा था कि मेनका का मन सच में हंसने
- 2:02:47का हुआ। लेकिन उसने खुद को संभालते हुए
- 2:02:50कहा।
- 2:02:52ठीक है मैं देखती हूं क्या कर सकती हूं।
- 2:02:54शौर्य ने राहत की सांस ली। प्लीज कुछ ना
- 2:02:57कुछ अरेंज कर देना। फिर मुस्कुराते हुए
- 2:03:00बोला, "पता नहीं उस लड़की ने मुझे किस सोच
- 2:03:03के साथ बुलाया है। अगर मैं बिना गिफ्ट के
- 2:03:05पहुंचा तो उसे मुझे बेइज्जत करने का पूरा
- 2:03:07मौका मिल जाएगा। मेनका ने उसे गौर से
- 2:03:10देखा। अजीब आदमी है, मालिक है। चाहे तो
- 2:03:14हुक्म दे सकता है, पर रिक्वेस्ट कर रहा
- 2:03:16है। मेनका के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान
- 2:03:18आई। शौर्य के प्रति उसका नजरिया धीरे-धीरे
- 2:03:21बदल रहा था।
- 2:03:23ठीक है। उसने सहजता से कहा, "मैं पक्का
- 2:03:26कुछ करती हूं। तुम जाओ पार्टी एंजॉय करो।
- 2:03:29मैं गिफ्ट वहीं भिजवा दूंगी या खुद लेकर आ
- 2:03:31जाऊंगी। शौर्य जाने के लिए मुड़ा ही था कि
- 2:03:34मेनका को कुछ याद आया। 1 मिनट। उसने शौर्य
- 2:03:38की तरफ देखा और बोली जाने से पहले यह तो
- 2:03:41बता दो स्क्रीन में दिख रही लड़कियों में
- 2:03:43से तुम्हारी वाइफ कौन है? शौर्य ने बिना
- 2:03:46झिझक स्क्रीन की ओर इशारा किया। वो पिंक
- 2:03:50सूट में जो है वही शिप्रा है। मेनका की
- 2:03:53नजर स्क्रीन पर गई और एक पल को वो ठिटक
- 2:03:55गई। ये
- 2:03:58शिप्रा की खूबसूरती सच में चौंकाने वाली
- 2:04:01थी। उसकी पर्सनालिटी, उसका ग्रेस मेनका के
- 2:04:04मन में एक हल्की सी चुभन उठी। इतनी
- 2:04:07खूबसूरत एक पल को जलन भी हुई पर उसने उसे
- 2:04:11चेहरे पर आने नहीं दिया। खैर, मैं भी कम
- 2:04:14नहीं हूं। उसने मन ही मन खुद को सांत्वना
- 2:04:16दी और तुरंत ही एक वेटर को बुलाया। राम
- 2:04:20सिंह इन्हें हॉल नंबर पांच तक छोड़ आओ।
- 2:04:22जी मैडम। लिफ्ट से होते हुए फिफ्थ फ्लोर
- 2:04:26और फिर हॉल नंबर पांच के दरवाजे के बाहर
- 2:04:28पहुंचते ही राम सिंह रुक गया। यही है
- 2:04:31साहब।
- 2:04:33शौर्य ने हल्का सा सिर हिलाया और अंदर कदम
- 2:04:36रखा। हॉल की भव्यता देखते ही बनती थी।
- 2:04:39रोशनी, सजावट और लोगों की भीड़ शौर्य कुछ
- 2:04:42पल के लिए चारों ओर देखता रह गया। फिर वो
- 2:04:45भीड़ के बीच से रास्ता बनाते हुए स्टेज की
- 2:04:48ओर बढ़ने लगा। उधर शिप्रा की नजर दरवाजे
- 2:04:50पर ही टिकी हुई थी। मानो उसे किसी का
- 2:04:53इंतजार हो। जैसे ही शौर्य अंदर आया, उसकी
- 2:04:56सांस एक पल को थम गई। ब्लैक सूट, शानदार
- 2:04:59पर्सनालिटी और आत्मविश्वास भरी चाल। उसकी
- 2:05:02आंखें शौर्य पर ही अटक गई। सुबह वाले
- 2:05:05कपड़ों को याद कर वो थोड़ी चिंतित थी कि
- 2:05:07अगर वो उसी में आ गया तो लेकिन अब उसके
- 2:05:11होठों पर राहत भरी मुस्कान थी। कम से कम
- 2:05:14उसे खुद को संभालना तो आता है। दूसरी तरफ
- 2:05:17राधिका भी बेसब्री से इंतजार कर रही थी।
- 2:05:20जैसे ही उसकी नजर दरवाजे की ओर गई वो चौंक
- 2:05:23गई। ये ये तो वही है। शिप्रा के ऑफिस का
- 2:05:27ड्राइवर। एक पल को उसके चेहरे पर हैरानी
- 2:05:30आई। ये यहां क्या कर रहा है? लेकिन अगले
- 2:05:33ही पल उसने शिप्रा की ओर देखा और पाया कि
- 2:05:35शिप्रा भी उसी को देख रही थी। राधिका के
- 2:05:38दिमाग में जैसे बिजली कौंधी, उसका दिल एक
- 2:05:41पल को तेजी से धड़क उठा। क्या यही शिप्रा
- 2:05:44का पति है? उसने फिर से शौर्य की ओर देखा
- 2:05:48और इस बार उसकी नजर हट ही नहीं पाई। जिस
- 2:05:50इंसान को उसने अपने मन में एक भिखारी के
- 2:05:53रूप में गढ़ रखा था, वो सामने खड़ा था। एक
- 2:05:55ऐसी शख्सियत जिससे नजरें हटाना मुश्किल हो
- 2:05:58रहा था। राधिका की धड़कन अब बेकाबू हो रही
- 2:06:02थी। अपने मन में शक के बुलबुलाते कीड़े को
- 2:06:05लेकर वो तुरंत अपनी मां के पास जाकर श्रवण
- 2:06:07की तरफ इशारा करते हुए पूछने लगी।
- 2:06:11क्या यही श्रवण है? नैना राय ने श्रवण की
- 2:06:14तरफ देखा और इंकार करते हुए बोली नहीं वो
- 2:06:18श्रवण कैसे हो सकता है? उसकी तो बहुत
- 2:06:20बड़ी-बड़ी दाढ़ी है और यह तो एकदम क्लीन
- 2:06:23शेव्ड है। लेकिन तभी उसने देखा कि श्रवण
- 2:06:26शिप्रा के पास पहुंच गया। शिप्रा ने श्रवण
- 2:06:28को अपने पास आते देखा तो तारीफ भरे स्वर
- 2:06:31में बोली अच्छे लग रहे हो। चलो चलकर
- 2:06:35राधिका को बर्थडे विश कर दो। शायद वो
- 2:06:37तुम्हारा ही इंतजार कर रही है। शौर्य
- 2:06:39शिप्रा के साथ राधिका के पास पहुंचा और
- 2:06:41उसे बर्थडे विश करते हुए बोला, "मेनी मेनी
- 2:06:44हैप्पी रिटर्न्स ऑफ द डे।" मिस राधिका,
- 2:06:46आपका जीवन हमेशा खुशियों से भरा रहे। यही
- 2:06:49मेरी दुआ है। जब राधिका ने श्रवण को
- 2:06:52शिप्रा के साथ आकर उसे विश करते देखा तो
- 2:06:55उसे यकीन हो गया कि यही श्रवण है। वो
- 2:06:58शिप्रा से बोली [संगीत]
- 2:06:59जब हम ऑफिस की पार्किंग में मिले थे तुमने
- 2:07:02उस दिन क्यों नहीं बताया कि यह तुम्हारे
- 2:07:03पति श्रवण हैं। इस पर शिप्रा ने हल्की
- 2:07:06मुस्कान के साथ जवाब दिया। मैं उस दिन
- 2:07:09तुम्हें श्रवण से मिलवाना तो चाहती थी
- 2:07:11लेकिन तुम जल्दी में थी। खैर कोई बात नहीं
- 2:07:14उस दिन नहीं मिली तो आज मिल [संगीत] लो।
- 2:07:17यही है श्रवण। श्रवण को इस तरह
- 2:07:19प्रेजेंटेबल देखकर शिप्रा में अब थोड़ा
- 2:07:21कॉन्फिडेंस आ गया था। लेकिन राधिका ने
- 2:07:24शिप्रा पर तंज कसते हुए कहा मुझे नहीं पता
- 2:07:27था कि तुमने अपने पति को अपना ड्राइवर बना
- 2:07:30रखा है। यह सुनकर शिप्रा एक पल के लिए चुप
- 2:07:33रह गई। उसे समझ नहीं आया कि वो इसका क्या
- 2:07:35जवाब दे? तभी शौर्य ने आगे बढ़कर कहा।
- 2:07:39लगता है आपको मेरी कुछ ज्यादा ही चिंता
- 2:07:41है। तभी आपको यह बात तकलीफ दे रही है।
- 2:07:45लेकिन क्या आज आपके बर्थडे से ज्यादा
- 2:07:46जरूरी यह है कि मैं क्या करता हूं? राधिका
- 2:07:50ने जिस अंदाज में शौर्य पर टिप्पणी की थी,
- 2:07:52शौर्य ने उसी भाषा में उसे जवाब दे दिया।
- 2:07:55वो आगे बोला, "अगर ऐसा है, तो हम आपका
- 2:07:58बर्थडे सेलिब्रेशन छोड़कर इसी बात पर
- 2:08:00चर्चा कर लेते हैं कि मैं अपनी पत्नी का
- 2:08:02ड्राइवर हूं या नहीं।" शौर्य का यह जवाब
- 2:08:05सुनकर शिप्रा के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ
- 2:08:07गई। उसे अच्छा लगा कि इस बार शौर्य ने
- 2:08:10बिना झिझक उसके लिए स्टैंड लिया। मानना
- 2:08:13पड़ेगा शिप्रा तुम्हारा पति बहुत हाजिर
- 2:08:15जवाब है। वो अच्छे से तुम्हारा बचाव कर
- 2:08:17रहा है। राधिका शौर्य को सीधे जवाब ना दे
- 2:08:21पाने पर भी शिप्रा पर तंज कसते हुए बोली।
- 2:08:24शिप्रा और राधिका की खींचतान के बीच वहां
- 2:08:26अचानक मुख्तार भाई ने एंट्री मारी। अरे
- 2:08:30तुम वही भिखारी हो ना जिसकी मैंने शिप्रा
- 2:08:34से शादी करवाई थी।
- 2:08:36मानना पड़ेगा। शिपरा ने तो तुम्हारा पूरा
- 2:08:40कायापलट ही कर डाला। तभी साथ में आया रजत
- 2:08:44भी शौर्य का मजाक उड़ाते हुए बोल पड़ा।
- 2:08:47क्या भैया आप भी कैसी बात कर रहे हो? कौवे
- 2:08:50को उजले रंग से रंग देने से वो बगुला नहीं
- 2:08:52हो जाता। वो तब भी कौवा ही रहता है। इसका
- 2:08:55कितना भी कायापलट कर दो रहेगा तो यह
- 2:08:57भिखारी ही। वो तो मिस राधिका ने इस पर तरस
- 2:09:00खाकर इसे पार्टी में बुला लिया। नहीं तो
- 2:09:02इसकी इतनी औकात कहां कि यह इतने बड़े होटल
- 2:09:05में कदम भी रख सके। शिप्रा यह सब देख रही
- 2:09:08थी। उसे गुस्सा भी आ रहा था। लेकिन वो
- 2:09:10पार्टी में कोई सीन क्रिएट नहीं करना
- 2:09:12चाहती थी। इसीलिए चुप रही। शौर्य ने जब
- 2:09:15देखा कि मुख्तार भाई और रजत सरेआम उसका
- 2:09:18मजाक उड़ा रहे हैं तो वो उनकी तरफ मुड़कर
- 2:09:20शांत लेकिन तीखे स्वर में बोला। आपने सही
- 2:09:24कहा। मेरी औकात सच में इस होटल में आने
- 2:09:26लायक नहीं है। लेकिन अफसोस की बात यह है
- 2:09:29कि यह बात बोल कौन रहा है? शहर का एक जाना
- 2:09:32माना गुंडा जो दूसरों को लूट कर अपनी
- 2:09:35हैसियत इस लायक बनाता है कि लोग डर के
- 2:09:37मारे उसे थोड़ी बहुत इज्जत दे देते हैं।
- 2:09:40जवाब में रजत कुछ बोलता उससे पहले शौर्य
- 2:09:43आगे बोला वरना आप तो इस लायक भी नहीं कि
- 2:09:46कोई आपको इज्जत से अपने यहां बुलाए। आप
- 2:09:49जैसे लोगों की जिंदगी तो जेल की चार
- 2:09:51दीवारी के पीछे ही लिखी होती है और शायद
- 2:09:53अभी आपका जो भाई खुली हवा में सांस ले रहा
- 2:09:56है वो भी मेरी पत्नी की ही मेहरबानी है।
- 2:10:00शौर्य की आवाज शांत थी लेकिन उसके शब्द
- 2:10:02सीधे दिल पर वार कर रहे थे और इस बार
- 2:10:05माहौल सच में बदलने वाला था। शिप्रा ने जब
- 2:10:08शौर्य की बातें सुनी तो उसे यकीन ही नहीं
- 2:10:11हुआ कि वो इस तरह मुख्तार भाई को जवाब दे
- 2:10:13सकता है। श्रवण ने जैसे उसके दिल के
- 2:10:15जज्बात सामने रख दिए थे। शिप्रा को डर भी
- 2:10:18लग रहा था। पता नहीं यह अब मुख्तार भाई
- 2:10:20क्या करेंगे। उधर राधिका भी श्रवण की बात
- 2:10:23सुनकर दंग रह गई थी। उसे शौर्य से इतनी
- 2:10:26हिम्मत की उम्मीद नहीं थी। शौर्य द्वारा
- 2:10:29की गई बेइज्जती से मुख्तार भाई के चेहरे
- 2:10:31का रंग लाल हो गया था। लेकिन इतने लोगों
- 2:10:34के बीच वो कुछ कर भी तो नहीं सकता था। ऊपर
- 2:10:37से होटल राजकमल था। विशालगढ़ के राजा साहब
- 2:10:40का होटल। वो राजा साहब से सीधा पंगा लेने
- 2:10:42की हिम्मत नहीं कर सकता था। मुख्तार भाई
- 2:10:45खून का घूंट पीकर रह गया लेकिन कुछ बोला
- 2:10:48नहीं। वो गुस्से से शौर्य को ऐसे घूर रहा
- 2:10:51था जैसे आंखों से ही उसे भस्म कर देगा। एक
- 2:10:54तरफ शौर्य का मुंह तोड़ जवाब सुनकर
- 2:10:56मुख्तार का खून खौल रहा था। वहीं दूसरी
- 2:10:58तरफ अंदर ही अंदर वो शॉक्ड भी था कि शौर्य
- 2:11:01में इतनी हिम्मत आखिर कैसे और कहां से आई?
- 2:11:04क्या उसके पीछे कोई ऐसा शख्स है जिसे
- 2:11:07मुख्तार का भी खौफ नहीं है। बलवंत राय भी
- 2:11:10शौर्य की हिम्मत देखकर हैरान थे। उनके
- 2:11:12दिमाग में सवाल दस्तक देने लगा। यह लड़का
- 2:11:16वाकई निडर है या किसी के भरोसे इसने
- 2:11:18मुख्तार के सामने इतनी बड़ी बात कहने का
- 2:11:20साहस कर लिया है। आज पहली बार मुख्तार भाई
- 2:11:24को अपने ही शहर में किसी ने भरी महफिल में
- 2:11:26बेइज्जत किया था। इस समय सभी लोग मुख्तार
- 2:11:29भाई के सामने आने से बच रहे थे। [संगीत]
- 2:11:32कोई भी उसके खिलाफ खड़ा नहीं होना चाहता
- 2:11:34था। क्योंकि कोई यह नहीं चाहता था कि बाद
- 2:11:37में मुख्तार भाई यह कहे कि जब उसकी
- 2:11:39बेइज्जती हो रही थी तब कोई उसके साथ नहीं
- 2:11:41था। तभी राधिका ने मुख्तार का फेवर करते
- 2:11:44हुए शौर्य से कहा क्या तुम्हें इतनी भी
- 2:11:48समझ नहीं है कि किससे कैसे बात की जाती
- 2:11:50है? आखिर तुम किस आधार पर मुख्तार भाई के
- 2:11:53लिए ऐसी बातें कर सकते हो। तुम्हें पता
- 2:11:55होना चाहिए कि मुख्तार भाई शहर के एक
- 2:11:58प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं। लेकिन शौर्य भी
- 2:12:01आज कहां रुकने वाला था। उसने हाथों हाथ
- 2:12:03उसी तीखे अंदाज में राधिका को जवाब दे
- 2:12:06दिया। प्रतिष्ठित व्यक्ति वो आपके लिए
- 2:12:08होंगे। मेरे लिए नहीं। पूरा शहर जानता है
- 2:12:11कि इन्होंने सिर्फ शिप्रा से बदला लेने के
- 2:12:14लिए जबरदस्ती उसकी शादी मुझसे करवाई थी।
- 2:12:17तो जरा आप ही बताइए कौन सा प्रतिष्ठित
- 2:12:19इंसान किसी की जबरदस्ती शादी करवाता है।
- 2:12:22शौर्य अभी मुख्तार को छोड़ने के मूड में
- 2:12:24नहीं था और माहौल अब पहले से ज्यादा
- 2:12:27खतरनाक हो चुका था। शौर्य को अभी भी चुप
- 2:12:30ना होते देखकर राधिका वहां से सरकने की
- 2:12:32कोशिश करने लगी। तभी मुख्तार भाई गुर्राते
- 2:12:35हुए बोले, [संगीत] लड़के
- 2:12:38दाद देता हूं तुम्हारी हिम्मत की। मुख्तार
- 2:12:41से पंगा लेने की सोच रहे हो। यह मत भूलो।
- 2:12:45आज तुम इस घर [संगीत] के दामाद बने हुए हो
- 2:12:47तो यह मेरी ही वजह से संभव हुआ है। नहीं
- 2:12:50तो तुम अभी भी कहीं भीख मांग रहे होते।
- 2:12:54तुम्हें तो मेरे पैरों को धोकर पीना
- 2:12:56चाहिए। राजदीप राय यह सब सुन रहे थे।
- 2:12:59उन्हें भी थोड़ा आश्चर्य हो रहा था कि
- 2:13:01श्रवण आखिर इतनी हिम्मत कहां से ला रहा है
- 2:13:04जो वो लगातार मुख्तार भाई से भिड़ा हुआ
- 2:13:06है। शौर्य की बातें कड़वी जरूर थी लेकिन
- 2:13:09राजदीप राय को कहीं ना कहीं सुकून भी दे
- 2:13:12रही थी। हे तुमने इस बात को सही साबित कर
- 2:13:15दिया कि अगर कीचड़ पर कंकड़ मारोगे तो वह
- 2:13:18पलट कर तुम्हारे ऊपर ही आएगा। भाई साहब ने
- 2:13:20जो गलती की थी यह उसी का नतीजा है कि तुम
- 2:13:23इतना बोल पा रहे हो।
- 2:13:25रजत अपने गुस्से को काबू में रखते हुए
- 2:13:27बोला। लेकिन शौर्य ने रजत की बात को यह
- 2:13:30कहते [संगीत] हुए उसी पर पलट दिया। कुछ
- 2:13:33लोग पैदाइशी बेवकूफ होते हैं। इसीलिए सब
- 2:13:35कुछ जानने समझने के बाद भी कीचड़ पर कंकड़
- 2:13:38मारने से बाज नहीं [संगीत] आते। शौर्य चुप
- 2:13:41होने का नाम ही नहीं ले रहा था। रजत को
- 2:13:44समझ आ गया कि मुंह बंद रखना ही बेहतर है।
- 2:13:46वरना शौर्य आखिर तक बोलता ही रहेगा। तभी
- 2:13:49बलवंत राय आगे आए और बोले यह क्या आप लोग
- 2:13:53फालतू में एक दूसरे पर तंज कस रहे हैं?
- 2:13:55शायद आप लोग भूल रहे हो हम सब यहां राधिका
- 2:13:58के बर्थडे सेलिब्रेशन के लिए आए हैं। तो
- 2:14:00प्लीज पार्टी को एंजॉय करें। रजत को कुछ
- 2:14:04और नहीं सूझा तो वो राधिका की तरफ मुड़कर
- 2:14:06बोला मिस राधिका आपने मेरा गिफ्ट देखा
- 2:14:10क्या? वैसे इस भिखारी [संगीत] ने आपको कोई
- 2:14:12गिफ्ट दिया भी है या नहीं? रजत की बात से
- 2:14:16शिप्रा को थोड़ी चिड़ हुई तो वह बोल पड़ी।
- 2:14:19मिस्टर रजत मुझे लगता है आपको खुद से
- 2:14:22ज्यादा दूसरों की पड़ी है। किसने राधिका
- 2:14:24को क्या गिफ्ट दिया यह सोचने से ज्यादा
- 2:14:27बेहतर होगा कि आप अपने काम से मतलब रखें।
- 2:14:30आज पहली बार शिप्रा को भी अपने दिल का
- 2:14:32गुबार निकालने का मौका मिल रहा था। राधिका
- 2:14:36ने शिप्रा और शौर्य को नीचा दिखाने का खेल
- 2:14:38खेलकर अपनी खुद की बर्थडे पार्टी में ही
- 2:14:40नफरत, जलन और बदले को इनवाइट कर लिया था।
- 2:14:45पार्टी में सेलिब्रेशन से ज्यादा टेंशन
- 2:14:47नजर आ रहा था। अभी जो कुछ भी इस पार्टी
- 2:14:49हॉल में हो रहा था वो शिप्रा के लिए पूरी
- 2:14:52तरह अनएक्सेक्टेड था। उसने सोचा नहीं था
- 2:14:54कि श्रवण इस तरह सबका सामना करेगा। शिप्रा
- 2:14:58श्रवण को इस पार्टी में इसीलिए बुलाना
- 2:15:00नहीं चाहती थी क्योंकि उसे लगता था कि
- 2:15:02यहां सभी उसे नीचा दिखाने की कोशिश करेंगे
- 2:15:05या श्रवण पर कटाक्ष करेंगे। लेकिन यहां तो
- 2:15:07उल्टा ही हो रहा था। श्रवण किसी को भी
- 2:15:10जवाब देने से पीछे नहीं हट रहा था। श्रवण
- 2:15:13का यह रूप देखकर शिप्रा में भी कॉन्फिडेंस
- 2:15:15आ गया था। अब वो तैयार थी कि श्रवण जैसे
- 2:15:18भी हालात का सामना करेगा वो उसके साथ खड़ी
- 2:15:21रहेगी। शिप्रा ने श्रवण में यह बात पहले
- 2:15:24भी नोटिस की थी कि वो किसी भी गलत बात को
- 2:15:26बर्दाश्त नहीं करता। उसने पहले भी उसका यह
- 2:15:29रूप देखा था। इसीलिए वह समझ गई थी कि
- 2:15:32श्रवण चुपचाप सहने वालों में से नहीं है।
- 2:15:34वो सामने वाले को उसी की भाषा में जवाब
- 2:15:37देना बखूबी जानता है। वहीं शौर्य को अब यह
- 2:15:40समझ में आ चुका था कि उसे इस पार्टी में
- 2:15:42बुलाने का असली मकसद क्या था। इसीलिए वो
- 2:15:45किसी को भी अपने ऊपर हावी नहीं होने देना
- 2:15:48चाहता था। वो समझ रहा था कि वहां मौजूद
- 2:15:51ज्यादातर लोग उसके सहारे शिप्रा को नीचा
- 2:15:53दिखाने की कोशिश करेंगे। इसीलिए वो हर बात
- 2:15:56का जवाब देने में पीछे नहीं हट रहा था। जब
- 2:16:00राधिका ने देखा कि उसके सारे वार बेअसर हो
- 2:16:02रहे हैं। तो वो मुस्कुराते हुए शिप्रा से
- 2:16:05बोली
- 2:16:06मैं समझती हूं कि तुम्हें रजत पसंद नहीं
- 2:16:08है। लेकिन बात तो उसने सही ही कही। यार जब
- 2:16:11जीजाजी यहां आए हैं तो अपनी साली के लिए
- 2:16:14कुछ ना कुछ गिफ्ट तो लाए ही होंगे। मैं भी
- 2:16:17देखना चाहती हूं कि वो मेरे लिए क्या लाए
- 2:16:19हैं। शिप्रा राधिका के इरादे को अच्छे से
- 2:16:22समझ रही थी। उसने राधिका की ओर देखा और
- 2:16:25थोड़े कड़े शब्दों में बोली क्यों? मैंने
- 2:16:28जो दिया वो कम पड़ गया क्या? जो अब
- 2:16:30तुम्हें मेरे पति से भी गिफ्ट चाहिए। अरे
- 2:16:33यार तुम क्यों मेरे और मेरे प्यारे जीजू
- 2:16:35के बीच में पड़ रही हो? यह साली और जीजू
- 2:16:38के बीच की बात है। इतना हक तो बनता है
- 2:16:40मेरा उन पर। क्यों जीजू? मैं सही कह रही
- 2:16:42हूं ना। राधिका शिप्रा से हटकर शौर्य के
- 2:16:46पास जाकर बोली तो शौर्य उसकी बात सुनकर बस
- 2:16:49मुस्कुरा दिया। जब शौर्य ने कुछ नहीं कहा
- 2:16:51तो राधिका फिर बोली क्या हुआ जीजू? मैंने
- 2:16:55कोई गलत बात कह दी क्या? इसी समय बलवंत
- 2:16:58राय भी वहां आ गए। उन्होंने राधिका से
- 2:17:01पूछा। क्या हुआ? कौन सी गलत बात कह दी?
- 2:17:06तभी राधिका ने अपने नाना जी को देखते ही
- 2:17:08कहा, नाना जी, मैंने तो बस इतना कहा कि आज
- 2:17:12श्रवण जीजू पहली बार मेरे बर्थडे पर आए
- 2:17:14हैं तो कुछ ना कुछ गिफ्ट तो लाए ही होंगे।
- 2:17:17क्या मेरा ऐसा सोचना गलत है?
- 2:17:20नहीं नहीं इसमें गलत क्या है? आखिर श्रवण
- 2:17:23अब तुम्हारा जीजा है तो उसका अपनी साली के
- 2:17:25लिए गिफ्ट लाना तो बनता है। बलवंत राय
- 2:17:28राधिका से सहमति जताते हुए बोले वही तो
- 2:17:32नाना जी मैं शिप्रा को यही कह रही हूं। पर
- 2:17:34यह तो कह रही है कि जब वो गिफ्ट लाई है तो
- 2:17:37फिर श्रवण को गिफ्ट देने की क्या जरूरत
- 2:17:38है? राधिका शिप्रा को टारगेट करते हुए
- 2:17:41बोली। राधिका की इस बात पर शौर्य
- 2:17:44मुस्कुराते हुए बोला तुम चिंता मत करो।
- 2:17:47[संगीत] मैं जल्दीबाजी में आया इसीलिए
- 2:17:49तुम्हारा गिफ्ट साथ में नहीं ला पाया।
- 2:17:51लेकिन मैंने किसी को बोल रखा है। वो थोड़ी
- 2:17:53देर में तुम्हारा गिफ्ट यहां पहुंचा देगा।
- 2:17:57देखा? मैंने तुम्हें कहा था ना मेरे जीजा
- 2:18:00जी मेरे लिए जरूर गिफ्ट लाएंगे। हां अभी
- 2:18:02नहीं है तो क्या हुआ लेकिन जब उन्होंने
- 2:18:05कहा है तो गिफ्ट जरूर आएगा। राधिका ने
- 2:18:08शिप्रा की तरफ शरारती मुस्कान के साथ
- 2:18:10देखते हुए कहा। शिप्रा मन ही मन सोचने
- 2:18:13लगी। क्या सचमुच श्रवण ने राधिका के लिए
- 2:18:16गिफ्ट मंगवाया है? शिप्रा समझ गई थी कि
- 2:18:18जैसे ही गिफ्ट आएगा राधिका उसे सस्ता
- 2:18:21बताकर उसका मजाक बनाएगी। तभी रजत ने हीरो
- 2:18:24स्टाइल में सीना चौड़ा करते हुए कहा। मिस
- 2:18:27राधिका श्रवण का गिफ्ट जब आएगा तब आएगा।
- 2:18:30अभी तो आप मेरा गिफ्ट खोल कर देखिए।
- 2:18:32[संगीत] क्या आपको लगता है कि श्रवण आपके
- 2:18:35लिए वैसा गिफ्ट ला सकता है जैसा मैं लाया
- 2:18:38हूं।
- 2:18:39अच्छा अगर ऐसी बात है तो सबसे पहले मैं
- 2:18:42आपका गिफ्ट ही खोल कर देखती हूं। मिस्टर
- 2:18:44रजत इतना कहकर राधिका उसका गिफ्ट खोलने
- 2:18:47लगी। जैसे ही बॉक्स खुला अंदर एक बेहद
- 2:18:50खूबसूरत बटरफ्लाई शेप पेंडेंट था। गोल्ड
- 2:18:53पर छोटे-छोटे डायमंड जड़े हुए थे और दोनों
- 2:18:56पंखों की जगह नीले स्टोन लगे थे जो उसकी
- 2:18:58खूबसूरती को और बढ़ा रहे थे। पेंडेंट
- 2:19:01देखते ही राधिका का चेहरा खुशी से चमक
- 2:19:04उठा। वाओ यह तो बहुत खूबसूरत है। अरे आपकी
- 2:19:09खूबसूरती के सामने तो यह कुछ भी नहीं है।
- 2:19:12रजत ने तारीफ करते हुए कहा। थैंक यू
- 2:19:14मिस्टर रजत। आपने सचमुच एक लाजवाब गिफ्ट
- 2:19:17दिया है? राधिका ने उत्साह में रजत के हाथ
- 2:19:19पर अपना हाथ रख दिया और बोली, अब तो बस
- 2:19:23मुझे अपने जीजू के गिफ्ट का इंतजार है।
- 2:19:25पता नहीं वो कब आएगा।
- 2:19:28शौर्य राधिका के सरकाज्म को समझ रहा था पर
- 2:19:31उसने कुछ नहीं कहा। दूसरी तरफ शिप्रा रजत
- 2:19:34और राधिका की बातों से टेंशन में आ चुकी
- 2:19:37थी। वैसे शिप्रा को भी रजत का दिया हुआ
- 2:19:39गिफ्ट बहुत पसंद आया था। उसने अंदाजा
- 2:19:41लगाया कि उसकी कीमत कम से कम ₹1.5 लाख के
- 2:19:44आसपास तो होगी ही। अब वो श्रवण के गिफ्ट
- 2:19:46के बारे में सोचने लगी। ना जाने उसने क्या
- 2:19:49मंगवाया होगा। उसके पास पैसे भी कहां
- 2:19:51होंगे और अगर उसने कुछ मंगवाया भी है तो
- 2:19:54वो ज्यादा से ज्यादा 500 तक का ही होगा।
- 2:19:57उसे श्रवण पर तरस आने लगा और वो खुद को
- 2:20:00कोसने लगी। मेरी ही वजह से आज शौर्य इस
- 2:20:03मुसीबत में फंसा है। वो सोचने लगी काश
- 2:20:06पहले ही उसे बता दिया जाता कि श्रवण को
- 2:20:08साथ लाना है तो वो उसके लिए एक अच्छा सा
- 2:20:10गिफ्ट दिलवा देती। अब उसे साफ लग रहा था
- 2:20:13कि राधिका और उसकी बुआ ने जानबूझकर ऐसा
- 2:20:16किया है। तभी एक तीखी आवाज उसे वापस
- 2:20:19ख्यालों से पार्टी में ले आई।
- 2:20:22क्यों बे भिखारी? और कितना टाइम लगेगा
- 2:20:25तुम्हारे गिफ्ट आने में? कुछ मंगाया भी है
- 2:20:27या बस झूठ बोलकर टाइम पास कर रहा है? रजत
- 2:20:30ने शौर्य पर तंज कसते हुए कहा, रजत की बात
- 2:20:34सुनकर बलवंत राय सामने आए और बोले, मिस्टर
- 2:20:36रजत अगर आप श्रवण को तमीज से पुकारे तो
- 2:20:39बेहतर रहेगा। आपको पता होना चाहिए जैसा भी
- 2:20:42है। वो अब हमारे घर का दामाद है। बलवंत
- 2:20:46राय की बात सुनकर शौर्य को अच्छा लगा।
- 2:20:48उसने सोचा चलो कहीं से तो उसे स्वीकृति
- 2:20:51मिलनी शुरू हुई। कि हां राय साहब आपने भी
- 2:20:55इस भिखारी को अपना दामाद स्वीकार कर लिया।
- 2:20:59मुख्तार भाई जो बलवंत राय के साथ ही खड़ा
- 2:21:01था तंज कसते हुए बोला। तभी बलवंत राय ने
- 2:21:05अपने एक जवाबी तीर से दो निशाने लगा दिए।
- 2:21:08वे शांत स्वर में बोले अब जो भी है मानना
- 2:21:12तो पड़ेगा। जब शिप्रा ने ही उसे अपना पति
- 2:21:14मान लिया है तो मेरे मानने या ना मानने का
- 2:21:17सवाल ही कहां रह जाता है। इस एक वाक्य से
- 2:21:21उन्होंने साफ कर दिया कि अगर कोई अब भी
- 2:21:23शिप्रा और रजत की शादी के बारे में सोच
- 2:21:25रहा है तो वह भूल जाए। बलवंत राय की बात
- 2:21:29सुनकर रजत के चेहरे पर गुस्से की लहर दौड़
- 2:21:31गई। अब तक जो उम्मीद उसे थी कि शायद उसकी
- 2:21:34शादी शिप्रा से हो सकती है वो टूटती नजर
- 2:21:37आई। तब उसके अंदर शौर्य के लिए नफरत और
- 2:21:40बढ़ गई। वो गुस्से से शौर्य को घूरने लगा।
- 2:21:43लेकिन शौर्य पर उसका कोई असर नहीं हुआ।
- 2:21:45बल्कि शौर्य तो यही चाहता था कि रजत अपना
- 2:21:48आपा खो दे और कुछ ऐसा कर बैठे जिससे उसकी
- 2:21:51असलियत सबके सामने आ जाए। लेकिन रजत ने
- 2:21:54पहली बार वक्त रहते खुद पर काबू पा लिया।
- 2:21:58राधिका ने जब देखा कि माहौल बदलने लगा है
- 2:22:00तो उसने फिर सबका ध्यान अपनी तरफ खींचते
- 2:22:03हुए कहा, जीजू और कितना समय लगेगा आपका
- 2:22:06गिफ्ट आने में? अब मुझसे इंतजार नहीं हो
- 2:22:09रहा। आखिर किससे मंगवाया है आपने मेरा
- 2:22:11गिफ्ट? शौर्य भी एक पल के लिए सोच में पड़
- 2:22:14गया। कहीं मेनका गिफ्ट के बारे में भूल तो
- 2:22:17नहीं गई। अगर ऐसा हुआ तो आज उसकी बेइज्जती
- 2:22:20होना तय है। लेकिन अगले ही पल उसने खुद को
- 2:22:23संभाला। नहीं ऐसा नहीं हो सकता। मेनका
- 2:22:27इतनी लापरवाह नहीं हो सकती। वो राधिका को
- 2:22:30जवाब देने ही वाला था कि तभी हॉल के मेन
- 2:22:33गेट से एक वेट्रेस अंदर आती दिखाई दी।
- 2:22:36शौर्य के गिफ्ट का इंतजार पार्टी में
- 2:22:38मौजूद हर व्यक्ति कर रहा था और अब वो घड़ी
- 2:22:41आ गई थी जब शौर्य का गिफ्ट पार्टी हॉल में
- 2:22:44एंटर कर चुका था। सबकी निगाहें पार्टी
- 2:22:46गर्ल राधिका से हटकर अब उस वेट्रेस पर
- 2:22:48टिकी थी जिसके हाथ में गिफ्ट के दो बॉक्स
- 2:22:51थे जिसने अभी-अभी हॉल में एंट्री मारी थी।
- 2:22:54शौर्य उस वेट्रेस को देखकर सोच में डूब
- 2:22:56गया। उसे समझ नहीं आया कि मेनका ने दो
- 2:22:59गिफ्ट क्यों भिजवा दिए। फिर उसने सोचा इस
- 2:23:02बारे में बाद में सोचूंगा। पहले देख तो
- 2:23:05लूं कि वो क्या लेकर आई है। अब तक राधिका
- 2:23:08और रजत की नजर भी उस वेट्रेस पर पड़ चुकी
- 2:23:11थी। राधिका भी उसके हाथ में दो गिफ्ट
- 2:23:14बॉक्स देखकर हैरान थी। उसके दिमाग में भी
- 2:23:17यही सवाल उठ रहा था कि श्रवण ने एक गिफ्ट
- 2:23:19तो उसके लिए मंगवाया होगा लेकिन दूसरा
- 2:23:21बॉक्स किसके लिए है? वो भी इंतजार करने
- 2:23:24लगी। अब सामने आ ही जाएगा। उसे पूरा भरोसा
- 2:23:28था कि गिफ्ट ज्यादा महंगा नहीं होगा और अब
- 2:23:30सबके सामने श्रवण का मजाक उड़ाने का मौका
- 2:23:33ज्यादा दूर नहीं था। कुछ ही पलों में
- 2:23:35वेट्रेस शौर्य के पास आकर रुक गई। उसने
- 2:23:38गौर से उसका चेहरा देखा जैसे पहचानने की
- 2:23:41कोशिश कर रही हो। जब उसे तसल्ली हो गई कि
- 2:23:43वो वही इंसान है तो वो बॉक्स उसकी तरफ
- 2:23:46बढ़ाते हुए बोली सर यह बॉक्स आपकी वाइफ के
- 2:23:49लिए है और यह दूसरा बॉक्स बर्थडे गर्ल के
- 2:23:52लिए। वेट्रेस की बात सुनकर शौर्य के चेहरे
- 2:23:55पर हैरानी झलक गई। उसने तो सिर्फ एक गिफ्ट
- 2:23:57राधिका के लिए मंगवाया था। लेकिन मेनका ने
- 2:24:00अपनी तरफ से उसकी वाइफ के लिए भी गिफ्ट
- 2:24:02भिजवा दिया था। उसे मेनका की समझदारी पर
- 2:24:05गर्व हुआ। उसने खुद तो शिप्रा के लिए
- 2:24:08गिफ्ट लेने के बारे में सोचा भी नहीं था।
- 2:24:10लेकिन मेनका ने यह बात समझ ली थी। दूसरी
- 2:24:13तरफ शिप्रा लगातार शौर्य के चेहरे के भाव
- 2:24:15पड़ रही थी और उसने उसकी हैरानी को नोटिस
- 2:24:18कर लिया था। उसे लगा जैसे शौर्य को खुद
- 2:24:21नहीं पता कि वेट्रेस क्या लेकर आई है।
- 2:24:24उलझन में पड़ गई। आखिर मामला क्या है?
- 2:24:26हालांकि उसने वेट्रेस की बात साफ-साफ सुनी
- 2:24:29थी। एक गिफ्ट उसकी वाइफ के लिए है और
- 2:24:31दूसरा बर्थडे गर्ल के लिए। यानी श्रवण ने
- 2:24:34उसके लिए भी गिफ्ट मंगवाया है। यह सोचकर
- 2:24:37उसके दिल में हल्की सी हलचल हुई। पर उसने
- 2:24:40ज्यादा दिमाग नहीं लगाया। सोचा जो भी है
- 2:24:44थोड़ी देर में खुद ही सामने आ जाएगा। उधर
- 2:24:46राधिका जैसे ही देखती है कि वेट्रेस गिफ्ट
- 2:24:49देकर जा चुकी है। वो तुरंत शौर्य के पास
- 2:24:51आकर बोली। आपने सही कहा था जीजू कि आपने
- 2:24:55यहीं गिफ्ट मंगवाया हुआ है। अब तो गिफ्ट आ
- 2:24:57गया है। प्लीज जल्दी से दीजिए। मैं भी
- 2:25:00देखूं आपने मेरे लिए क्या मंगवाया है।
- 2:25:03जैसे ही शिप्रा ने राधिका को शौर्य के पास
- 2:25:05जाते देखा वो भी तुरंत आगे बढ़ी और बोली
- 2:25:09वो तो ठीक है लेकिन पहले तुम वो गिफ्ट तो
- 2:25:11मुझे वापस करो जो मैंने तुम्हें दिया था।
- 2:25:14वो हल्के तंज भरे अंदाज में बोली हम दोनों
- 2:25:17पति-पत्नी में से कोई एक ही गिफ्ट देगा।
- 2:25:20कोई ऐसा रिवाज तो है नहीं कि दोनों
- 2:25:22अलग-अलग गिफ्ट दें। तुम्हें अपने जीजू का
- 2:25:24गिफ्ट चाहिए था तो लो। उन्होंने खुद ही
- 2:25:27मंगवा दिया। अब जो मैंने पहले दिया था वो
- 2:25:29तो वापस कर दो। शिप्रा की बात सुनकर माहौल
- 2:25:33में एक नया मोड़ आ गया। अब देखने वाली बात
- 2:25:35यह थी कि राधिका क्या करती है। राजदीप राय
- 2:25:38जो अब तक वहां खड़े सब कुछ देख रहे थे
- 2:25:41बोले
- 2:25:42हां भाई बात तो सही है शिप्रा की। अब
- 2:25:45तुम्हें कायदे से शिप्रा का दिया हुआ
- 2:25:47गिफ्ट उसे वापस कर देना चाहिए। राधिका के
- 2:25:50दिमाग का तो मानो फ्यूज ही उड़ गया। वो तो
- 2:25:53होशियारी दिखाकर श्रवण को नीचा दिखाना
- 2:25:56चाहती थी। लेकिन अब उसी चक्कर में उसे
- 2:25:58शिप्रा का दिया हुआ गिफ्ट लौटाना पड़ रहा
- 2:26:00था। उसे पूरा यकीन था कि शिप्रा का गिफ्ट
- 2:26:03श्रवण के गिफ्ट से कहीं बेहतर होगा। लेकिन
- 2:26:06अब शिप्रा को नीचा दिखाने के खेल में उसे
- 2:26:08एक अच्छा खासा गिफ्ट गवाना पड़ सकता है।
- 2:26:11उसने उम्मीद भरी नजरों से अपने नाना बलवंत
- 2:26:13राय की तरफ देखा। लेकिन बलवंत राय ने जैसे
- 2:26:16ही उसकी नजरों का मतलब समझा, उन्होंने हाथ
- 2:26:18उठाते हुए साफ कहा। इसमें मैं तुम्हारी
- 2:26:22कोई मदद नहीं कर सकता। शिप्रा की बात अपनी
- 2:26:25जगह बिल्कुल सही है। अब शिप्रा ने मौका
- 2:26:28भांपते हुए दोबारा वार किया।
- 2:26:31अभी भी तुम्हारे पास मौका है। सोच लो
- 2:26:33तुम्हें कौन सा गिफ्ट चाहिए। शिप्रा का यह
- 2:26:36मास्टर स्ट्रोक देखकर शौर्य भी मन ही मन
- 2:26:39उसकी तारीफ किए बिना रह नहीं सका। राधिका
- 2:26:42अब असली धर्म संकट में फंस गई थी। उसने
- 2:26:44सोचा भी नहीं था कि शिप्रा इतनी चालाकी से
- 2:26:47खेल पलट देगी। यह तो वही बात हो गई कि
- 2:26:50चौबे जी छब्बे बनने गए थे और दुबे बनकर
- 2:26:53लौट आए। राधिका पीछे नहीं हट सकती थी।
- 2:26:56इसीलिए उसने ठान लिया चाहे उसे कीमती
- 2:26:58गिफ्ट छोड़ना पड़े लेकिन श्रवण को नीचा
- 2:27:01दिखाने का मौका वो नहीं छोड़ेगी। वो
- 2:27:03गिफ्ट्स के ढेर के पास गई। शिप्रा का दिया
- 2:27:06हुआ गिफ्ट निकाला और वापस उसके हाथ में
- 2:27:08थमा दिया। शिप्रा ने भी बिना कुछ कहे अपना
- 2:27:11गिफ्ट वापस ले लिया। अब तो मैं तुम्हारे
- 2:27:14पतिदेव का गिफ्ट ले सकती हूं। राधिका ने
- 2:27:17हल्की मुस्कान के साथ कहा। लेकिन शिप्रा
- 2:27:19कुछ नहीं बोली। वो बस राधिका के चेहरे को
- 2:27:22देखती रही। उसे साफ दिख रहा था कि राधिका
- 2:27:25कितनी शिद्दत से उसे सबके सामने नीचा
- 2:27:27दिखाना चाहती है। शिप्रा अब बस उस पल का
- 2:27:30इंतजार कर रही थी जब राधिका गिफ्ट खोलेगी
- 2:27:32और फिर उस पर अपना तीखा कमेंट करेगी। तभी
- 2:27:35रजत ने उपहास भरे स्वर में कहा, "अब अपना
- 2:27:38गिफ्ट राधिका को दे भी दो।" अब और सस्पेंस
- 2:27:40बर्दाश्त नहीं हो रहा कि तुमने उसे गिफ्ट
- 2:27:43में कौन सा जवाहरात दिया है। इस पर शौर्य
- 2:27:46शांत भाव से बोला। मेरे लिए गिफ्ट की कीमत
- 2:27:48मायने नहीं रखती बल्कि वो भावना मायने
- 2:27:51रखती है जिससे सामने वाले को गिफ्ट दिया
- 2:27:54जाता है। लो इसने तो पहले ही कह दिया कि
- 2:27:57कीमत मायने नहीं रखती। अब खुद ही समझ लो
- 2:28:00राधिका इसने तुम्हें गिफ्ट में क्या कबाड़
- 2:28:02लाकर दिया होगा। [हंसी]
- 2:28:05कहते हुए रजत जोर से हंस पड़ा। मुझे लग
- 2:28:08रहा है इस गिफ्ट में राधिका से ज्यादा
- 2:28:10तुम्हें इंटरेस्ट है। कहो तो एक गिफ्ट
- 2:28:12तुम्हारे बर्थडे के लिए एडवांस में
- 2:28:14तुम्हें भी दे दूं। शिप्रा रजत की बात
- 2:28:17सुनकर गुस्से में बोली। तभी रजत शिप्रा के
- 2:28:19पास जाकर बेशर्मी से हंसते हुए बोला। अरे
- 2:28:23तुम तो मुझे जहर भी लाकर दोगी तो वो भी
- 2:28:25मैं तुम्हारे हाथ से हंसते-हंसते ले
- 2:28:27लूंगा। तुम लाकर दो तो सही। अरे वाह!
- 2:28:31इसमें कौन सी बड़ी बात है? मैं अभी यहीं
- 2:28:33जहर भी मंगवा देता हूं। शिप्रा तुम अपने
- 2:28:35हाथ से अपने इस दोस्त को वो गिफ्ट कर
- 2:28:37देना। उम्मीद करता हूं मिस्टर रजत अपनी
- 2:28:40बात से मुकरेंगे नहीं। रजत के घटिया
- 2:28:43डायलॉग का जवाब जब शौर्य ने मुस्कुराते
- 2:28:45हुए दिया तो शिप्रा का चेहरा भी खिल उठा।
- 2:28:48उसने तुरंत बात संभालते हुए कहा। प्लीज
- 2:28:51श्रवण एक जहर की पुड़िया मंगवा ही दो। मैं
- 2:28:54नहीं चाहती कि मेरे इस दोस्त को कोई रंज
- 2:28:56रह जाए कि मैंने उसकी मन की मुराद पूरी
- 2:28:58नहीं की। शौर्य और शिप्रा की बातें सुनकर
- 2:29:01रजत का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। शायद
- 2:29:04ही उसने पहले कभी इतनी बेइज्जती महसूस की
- 2:29:06होगी। मुख्तार भाई ने रजत का लाल चेहरा
- 2:29:09देखा तो उनकी भी मुट्ठियां कस गई।
- 2:29:11उन्होंने इशारे से उसे शांत रहने को कहा।
- 2:29:14शौर्य ने रजत के चेहरे की तरफ देखा और
- 2:29:17शिप्रा से बोला।
- 2:29:20रहने दो शिप्रा। लगता है तुम्हारे इस
- 2:29:22दोस्त ने अपना इरादा बदल दिया है। इसका
- 2:29:24लाल चेहरा बता रहा है कि अगर इसका कोई
- 2:29:27इरादा था भी तो अब वो बदल गया है। मुख्तार
- 2:29:31भाई को लग रहा था कि श्रवण जानबूझकर रजत
- 2:29:33को उकसा रहा है ताकि वह अपना आपा खो दे और
- 2:29:36जो रिश्ता उन्होंने मुश्किल से संभाला है
- 2:29:39वो फिर बिगड़ जाए। लेकिन अब यह सब उनकी
- 2:29:41सहनशक्ति से बाहर होने लगा था। वो शौर्य
- 2:29:44के सामने आकर बोले ए लड़के मैं देख रहा
- 2:29:48हूं कि तुम कुछ ज्यादा ही ऊंची उड़ान भरने
- 2:29:51की कोशिश कर रहे हो। अभी तुम्हें पता नहीं
- 2:29:54है कि तुम किस बिल में हाथ डाल रहे हो।
- 2:29:58मैंने तुम्हें पंख दिए हैं तो मैं उन्हें
- 2:30:01कतरना भी जानता हूं। शौर्य ने बिना डरे
- 2:30:04जवाब दिया। एक कहावत है कायदे में रहोगे
- 2:30:09तो फायदे में रहोगे। ऐसी कुछ सीख अपने भाई
- 2:30:12को भी दे दीजिए। अगर वह लिमिट में रहेगा
- 2:30:15तो यूं चेहरा लाल नहीं करना पड़ेगा। अब
- 2:30:18उपहास उड़ाने की बारी शौर्य की थी। शिप्रा
- 2:30:21यह सब सुनकर हैरान थी। अब उसे सच में
- 2:30:24शौर्य की चिंता होने लगी थी। वो समझ नहीं
- 2:30:26पा रही थी कि वो क्यों जानबूझकर मुख्तार
- 2:30:29भाई से उलझ रहा है। कुछ ऐसा ही हाल राजदीप
- 2:30:32राय का भी था। उन्हें भी शौर्य से इतनी
- 2:30:34हिम्मत की उम्मीद नहीं थी। मुख्तार भाई
- 2:30:37खुद को काबू में रखते हुए बोले कभी-कभी
- 2:30:41ज्यादा बहादुरी दिखाना नुकसानदेह हो जाता
- 2:30:44है। शायद यह बात तुमने सुनी नहीं है। शायद
- 2:30:48तुम मुझे अच्छे से जानते नहीं हो। नहीं तो
- 2:30:51मेरे सामने इतना बोलने की हिम्मत नहीं
- 2:30:54करते।
- 2:30:56शौर्य उनके बिल्कुल पास जाकर धीमे स्वर
- 2:30:58में बोला।
- 2:31:00मैं आपको अच्छे से जानता हूं पर आप मुझे
- 2:31:03नहीं जानते। आपके पास खोने को बहुत कुछ है
- 2:31:06[संगीत] लेकिन मेरे पास कुछ भी नहीं तो आप
- 2:31:09मेरा क्या बिगाड़ लेंगे? वो आगे और
- 2:31:12संजीदगी से बोला और हां जहां तक मेरी बात
- 2:31:15है अगर मेरी सटक गई तो आपका क्या होगा
- 2:31:19[संगीत] यह आप सोच भी नहीं सकते इसीलिए
- 2:31:21मेरी एक सलाह है मुझसे उलझने की कोशिश मत
- 2:31:24कीजिए क्योंकि मैं ऐसा भवरा हूं अगर मैंने
- 2:31:28डंक मार दिया तो उसकी दवा पूरी दुनिया
- 2:31:30[संगीत] में नहीं मिलेगी।
- 2:31:32शौर्य की आवाज इतनी धीमी थी कि शायद ही
- 2:31:34किसी और ने सुनी हो। लेकिन मुख्तार भाई के
- 2:31:37चेहरे के बदलते रंग ने सब कुछ बयां कर
- 2:31:39दिया। एक पल के लिए जैसे उनके शरीर में भी
- 2:31:42झुरझुरी दौड़ गई। तभी राधिका के पिता
- 2:31:45राजकुमार टंडन जो अब तक [संगीत] चुपचाप सब
- 2:31:48देख रहे थे आगे आए और माहौल संभालने की
- 2:31:51कोशिश करते हुए बोले। अरे मुख्तार भाई आप
- 2:31:54कहां इस बच्चे के मुंह लग रहे हैं। आजकल
- 2:31:56के बच्चों को तहजीब कहां पता? उन्होंने
- 2:31:59पास खड़े वेटर से एक ड्रिंक उठाई और
- 2:32:01मुख्तार भाई की तरफ बढ़ाते हुए कहा,
- 2:32:04"लीजिए, यह ड्रिंक लीजिए, आपको पसंद
- 2:32:06आएगी।" मुख्तार भाई की भाई गिरी को आज
- 2:32:09पहली बार किसी ने सरेआम बेइज्जत किया था।
- 2:32:12आज से पहले कभी किसी ने उनके सामने इतना
- 2:32:14बोलने की हिम्मत नहीं की थी। पर आज यह
- 2:32:17लड़का ना सिर्फ उनके सामने खड़े होने की
- 2:32:19हिम्मत कर रहा था, बल्कि उनसे आंख में आंख
- 2:32:22मिलाकर धमका भी रहा था। शौर्य से निपटने
- 2:32:25के लिए ना तो यह जगह सही थी ना [संगीत] ही
- 2:32:28समय। इसीलिए मुख्तार भाई ने मन में निश्चय
- 2:32:31कर लिया कि वे शौर्य को बाद में सबक जरूर
- 2:32:33सिखाएंगे और ऐसा सिखाएंगे कि वो जिंदगी भर
- 2:32:36कभी भूल नहीं पाएगा। वहीं राजकुमार टंडन
- 2:32:39समझ रहे थे कि मुख्तार भाई को कंट्रोल
- 2:32:42करना जरूरी है। नहीं तो स्थिति हाथ से
- 2:32:44निकल सकती है। इसीलिए वह बीच में आकर
- 2:32:47मुख्तार भाई को अलग ले गए। दूसरी तरफ जब
- 2:32:50राधिका ने यह महसूस किया कि कुछ और नया
- 2:32:52बखेड़ा ना शुरू हो जाए। इसीलिए वह जल्दी
- 2:32:54से शौर्य के पास पहुंची और बोली अब तो
- 2:32:58आपका गिफ्ट आ गया जीजू अब तो मैं देख सकती
- 2:33:00हूं। देखिए ना मैंने आपके दिए गिफ्ट के
- 2:33:04लिए शिप्रा का दिया गिफ्ट भी वापस कर
- 2:33:06दिया। अब और ज्यादा सस्पेंस क्रिएट किए
- 2:33:08बिना सबको दिखा दीजिए कि आपने मेरे
- 2:33:10[संगीत] लिए क्या गिफ्ट पसंद किया है।
- 2:33:13शौर्य राधिका की जल्दीबाजी देखकर
- 2:33:15मुस्कुराते हुए बोला, "हां जरूर। यह मैंने
- 2:33:18तुम्हारे लिए ही मंगाया है। तो अब तुम देख
- 2:33:20सकती हो। इतना बोलकर शौर्य ने गिफ्ट का एक
- 2:33:24बॉक्स राधिका की तरफ बढ़ा दिया। राधिका ने
- 2:33:26जल्दी से वो गिफ्ट अपने हाथ में लिया और
- 2:33:29बॉक्स में से एक छोटी सी डिब्बी निकाल कर
- 2:33:31सबके सामने लहराई। राधिका को खुद यकीन
- 2:33:34नहीं था कि उसमें कोई बहुत बढ़िया गिफ्ट
- 2:33:36होगा। पर वो देखना चाहती थी कि आखिर इस
- 2:33:39कंगले ने उसके लिए क्या मंगवाया है। अभी
- 2:33:42वो उस डब्बी को खोलने वाली थी कि तभी उसे
- 2:33:44रजत की आवाज सुनाई दी। देखना राधिका कहीं
- 2:33:48इस गिफ्ट को देखकर तुम्हारा दिल तुम्हारे
- 2:33:50शरीर से बाहर ना आ जाए। इस पर राधिका कुछ
- 2:33:53बोली तो नहीं पर वो मुस्कुरा कर रजत की
- 2:33:55तरफ देखी जैसे वो उससे कह रही हो कि तुम
- 2:33:58चिंता मत करो। देखो अभी मैं इस भिखारी की
- 2:34:01कैसे धज्जियां उड़ाती हूं। दूसरी तरफ
- 2:34:03शिपरा भी टकटकी लगाए राधिका की ओर ही देख
- 2:34:06रही थी। वो भी जानने को उत्सुक थी कि आखिर
- 2:34:09शौर्य ने राधिका के लिए क्या गिफ्ट मंगाया
- 2:34:11है। वो जानती थी कि राधिका इतना ज्यादा
- 2:34:14हाइप इसीलिए क्रिएट कर रही है कि उसे
- 2:34:16गिफ्ट खोलने के बाद यह भी दिखाना था कि
- 2:34:19खोदा पहाड़ और निकली चुिया। वहां पर सिर्फ
- 2:34:22राधिका ही ऐसी नहीं थी जो शौर्य का मजाक
- 2:34:24बनाना चाहती थी। उसके अलावा भी नैना राय,
- 2:34:28बृजभूषण राय, सरला राय और इन [संगीत] सबके
- 2:34:30अलावा मुख्तार भाई और रजत तो थे ही जो
- 2:34:33शौर्य का मजाक बनते देखना चाहते थे।
- 2:34:36अब और कितना सस्पेंस क्रिएट करोगी राधिका।
- 2:34:39अब दिखा भी दो कि हमारे प्यारे जीजू ने
- 2:34:41क्या गिफ्ट दिया है तुम्हें। युविका अब और
- 2:34:44ज्यादा इंतजार नहीं कर पा रही थी। तभी
- 2:34:47राधिका सबको सुनाते हुए बोली तो फिर ठीक
- 2:34:50है। मैं अब इस बॉक्स को खोलने जा रही हूं।
- 2:34:53इतना बोलकर राधिका ने उस बॉक्स को खोल
- 2:34:56दिया। शौर्य को पार्टी में इनवाइट करने का
- 2:34:59राधिका का प्लान। अब राय परिवार की शिप्रा
- 2:35:02विरोधी महिलाओं की एक सोची समझी साजिश नजर
- 2:35:05आ रही थी। होटल राजकमल के पार्टी हॉल के
- 2:35:07माहौल को देखकर ऐसा लग रहा था मानो राधिका
- 2:35:11ने पार्टी बर्थडे सेलिब्रेट करने के लिए
- 2:35:13नहीं बल्कि शिप्रा और शौर्य को नीचा
- 2:35:15दिखाकर सबके सामने उनका मजाक उड़ाने के
- 2:35:18उद्देश्य से दी है। राधिका यह भी भूल गई
- 2:35:21थी कि उसे केक काटना था। वो तो रजत युविका
- 2:35:24नैना जी के साथ मिलकर शिप्रा और शौर्य को
- 2:35:27काटने में लगी थी। पार्टी हॉल में कहीं
- 2:35:29निगाहों में बेताबी थी तो कहीं धड़कनों
- 2:35:32में तूफान क्योंकि कुछ ही पलों में शौर्य
- 2:35:34के गिफ्ट बॉक्स का रहस्य उजागर होने वाला
- 2:35:36था। हॉल में सबको दिखाते हुए राधिका ने
- 2:35:39शौर्य का गिफ्ट बॉक्स खोल दिया और जैसे ही
- 2:35:42बॉक्स खुला राधिका की निगाह उसमें रखी
- 2:35:44आइटम पर ही जमी रह गई। कुछ पलों के लिए
- 2:35:48हॉल में सन्नाटा सा छा गया। तभी एक आवाज
- 2:35:51ने सन्नाटे को [संगीत] तोड़ा।
- 2:35:54क्या हुआ? ऐसा क्या देख लिया कि तुम तो
- 2:35:56बुद्धी बन गई। जरा हमें भी तो दीदार कराओ।
- 2:36:00युविका की यह हल्की सी मुस्कुराहट भरी
- 2:36:02आवाज जैसे पूरे माहौल को चीरती हुई
- 2:36:04[संगीत] निकल गई। उसकी आंखों में शरारत
- 2:36:07थी। उसे लगा था कि बॉक्स में जरूर कुछ ऐसा
- 2:36:10होगा जिसे दिखाने में भी राधिका को शर्म आ
- 2:36:12रही होगी। शिप्रा की भी धड़कन बेकाबू हो
- 2:36:15रही थी। यह सोच कर [संगीत] कि ऐसा क्या
- 2:36:17देख लिया राधिका ने कि वह बुद्धी बन गई
- 2:36:20है। राधिका की हालत भी वैसी नहीं थी जैसे
- 2:36:24किसी लड़की की तब होती है जब उसे कोई
- 2:36:26खूबसूरत गिफ्ट मिलता है। उसकी आंखें पूरी
- 2:36:29तरह फैल चुकी थी। होंठ हल्के खुले हुए और
- 2:36:32हाथ जैसे किसी अनमोल चीज को थामे कांप रहे
- 2:36:34हो। उसकी उंगलियों में एक पर्ल नेकलेस था
- 2:36:37और वो भी कोई साधारण नेकलेस नहीं।
- 2:36:39फ्लेयर्ड ब्लू बटरफ्लाई नेकलेस। जिसके
- 2:36:42बीचोंबीच जड़ा हुआ था [संगीत] एक चमकता
- 2:36:44हुआ खूबसूरत डायमंड। उसकी चमक इतनी तेज थी
- 2:36:48कि जैसे आसपास की रोशनी भी उसके आगे फीकी
- 2:36:50पड़ गई हो। यह नेकलेस राधिका को बुध बनाने
- 2:36:53के लिए काफी था। पूरा हॉल एक पल के लिए
- 2:36:56जैसे थम गया। राधिका ने कुछ नहीं कहा। बस
- 2:37:00धीरे से अपनी उंगली से नेकलेस का एक सिरा
- 2:37:02पकड़ा [संगीत] और उसे हवा में उठा दिया।
- 2:37:05हॉल में कुछ पल के लिए खामोशी पसर गई। जो
- 2:37:08भी वहां मौजूद था सबकी आंखें उसी नेकलेस
- 2:37:11पर टिक गई। युविका के चेहरे से मुस्कान
- 2:37:13गायब हो गई। वो तेजी से आगे बढ़ी और बिना
- 2:37:16कुछ कहे राधिका के हाथ से नेकलेस ले लिया।
- 2:37:20ये क्या यह सच है? उसकी आवाज कांप रही थी।
- 2:37:24उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि श्रवण
- 2:37:27इतना महंगा गिफ्ट दे सकता है। शिप्रा भी
- 2:37:30चुप थी। पर उसके मन में तूफान चल रहा था।
- 2:37:33हैरानी, राहत और कहीं ना कहीं एक हल्की सी
- 2:37:36ईर्ष्या इतना खूबसूरत नेकलेस राधिका के
- 2:37:40लिए। अचानक उसे याद आया वेट्रेस ने दो
- 2:37:43बॉक्स दिए थे और उसने साफ कहा था एक आपकी
- 2:37:46वाइफ के लिए है। शिप्रा का दिल अचानक तेज
- 2:37:49धड़कने लगा।
- 2:37:52तो क्या श्रवण मेरे लिए भी? उसका मन बॉक्स
- 2:37:55को देखने के लिए बेचैन हो उठा। पर वो
- 2:37:57शौर्य को बोल भी नहीं सकती थी कि उसने
- 2:37:59उसके लिए जो गिफ्ट मंगाया है उसे दिखा दे।
- 2:38:02वो सोच में ही थी। तभी किसी ने उसकी बाह
- 2:38:05पकड़ कर झंझोड़ दिया।
- 2:38:07शिप्रा अचानक उसने मुड़कर देखा तो बीना जी
- 2:38:10उसके पास खड़ी थी। उनकी आवाज फुसफुसाहट
- 2:38:13में थी। लेकिन उसमें घबराहट साफ झलक रही
- 2:38:16थी। यह क्या है? श्रवण इतना महंगा नेकलेस
- 2:38:19खरीदने के लिए पैसे कहां से लाया? शिप्रा
- 2:38:22ने धीरे से सिर हिलाया। मां, मुझे भी कुछ
- 2:38:26नहीं पता। उधर भीड़ में फुसफुसाहट शुरू हो
- 2:38:29चुकी थी और बीच में खड़ा शौर्य बस
- 2:38:32मुस्कुरा रहा था। लेकिन हर कोई चुप रहने
- 2:38:34वाला नहीं था। रजत जो अभी तक बड़ी-बड़ी
- 2:38:37बातें कर रहा था, अब कुछ सेकंड के लिए
- 2:38:39खामोश जरूर हुआ। पर फिर उसके चेहरे पर एक
- 2:38:42अजीब सी मुस्कान आ गई। वो आगे बढ़ा और
- 2:38:44राधिका के हाथ से नेकलेस लेकर बोला बहुत
- 2:38:48बढ़िया अच्छा बेवकूफ बनाया है इस कंगले ने
- 2:38:50सबको। रजत की बात सुनकर राधिका चौंकी।
- 2:38:54क्या मतलब? रजत हंसा। ऐसी हंसी जिसमें तंज
- 2:38:58था। तुम भी नहीं समझी। अरे यह नकली है।
- 2:39:01रजत के दावे से एक बार फिर हॉल में
- 2:39:04सन्नाटा छा गया। वो फिर रुक कर बोला। यह
- 2:39:08कोई असली नेकलेस नहीं है। रेडी पटरी पर
- 2:39:10मिल जाता है 500-600 में। राधिका की भों
- 2:39:14सिकुड़ गई और वो बोली पर देखकर तो नहीं
- 2:39:17लगता। इस पर रजत ने कंधे उचकाए। अगर इतनी
- 2:39:20आसानी से फर्क समझ में आ जाए तो बनाने
- 2:39:23वालों का धंधा कैसे चलेगा।
- 2:39:25उसकी बात धीरे-धीरे असर करने लगी। राधिका
- 2:39:28की आंखों में अब शक उतर आया था। वो पलटी
- 2:39:32और सीधा शौर्य की तरफ देखा और बोली क्यों
- 2:39:35जीजू बेवकूफ बनाने के लिए मैं ही मिली थी?
- 2:39:38शौर्य उसकी बात सुनकर मुस्कुराया और बोला
- 2:39:41आपने यह कैसे पक्का कर लिया [संगीत] कि
- 2:39:43मैंने जो गिफ्ट आपको दिया वो नकली है। तो
- 2:39:47आपको क्या लगता है कि रजत मुझसे झूठ
- 2:39:49बोलेगा? राधिका रजत की तरफ देखती हुई
- 2:39:52बोली। तभी शौर्य रजत का मजाक उड़ाने वाले
- 2:39:55भाव में बोला।
- 2:39:56क्या यह कहीं का जहरी है जो इसने देखकर
- 2:39:59अंदाजा लगा लिया कि यह नेकलेस नकली है? बस
- 2:40:03यही रजत भड़क गया। ओए भिखारी तुझे पता भी
- 2:40:07है असली पर्ल नेकलेस की कीमत क्या होती
- 2:40:09है? कभी देखे भी हैं इतने पैसे? शौर्य
- 2:40:12हल्के से मुस्कुराया और बोला, हाथ कंगन को
- 2:40:15आरसी क्या और पढ़े लिखे को फारसी क्या?
- 2:40:18मिस राधिका, ज्वेलरी का बॉक्स आपके हाथ
- 2:40:21में है। उसमें इसके बिल के साथ गारंटी
- 2:40:24कार्ड भी होगा। क्यों ना आप वहीं से
- 2:40:26कंफर्म कर लें कि यह नेकलेस नकली है या
- 2:40:28असली। शौर्य के चेहरे का कॉन्फिडेंस देखकर
- 2:40:31राधिका समझ गई थी कि [संगीत] यह नेकलेस
- 2:40:33नकली नहीं हो सकता। फिर भी उसने जल्दी से
- 2:40:36बॉक्स के अंदर से बिल की कॉपी निकाली।
- 2:40:38सबसे पहले उसका ध्यान प्राइस पर गया।
- 2:40:41प्राइस था ₹ लाख। यह प्राइस देखकर राधिका
- 2:40:45की आंखें और चौड़ी हो गई। मन ही मन उसने
- 2:40:48सोचा क्या श्रवण की इतनी औकात है कि वह
- 2:40:51किसी को 3 लाख का गिफ्ट दे सके। फिर उसने
- 2:40:54बिल पर सेलर का नाम देखा तो उसके सारे
- 2:40:56अरमान ध्वस्त हो गए। अविश्वास की अब कोई
- 2:40:59गुंजाइश ही नहीं बची थी क्योंकि बिल पर
- 2:41:01जिस सेलर का नाम था उस पर राधिका डाउट कर
- 2:41:04ही नहीं सकती थी क्योंकि वह समझ सकती थी
- 2:41:06कि श्रवण कुछ भी कर ले पर इतना बड़ा गैंबल
- 2:41:09नहीं कर सकता था। अगर वह ऐसा करता तो उसकी
- 2:41:12चोरी हाथों हाथ पकड़ी जाती। अब राधिका को
- 2:41:15खुद पर अफसोस हो रहा था कि उसने इतनी
- 2:41:17आसानी से रजत की बातों पर भरोसा क्यों कर
- 2:41:20लिया। जब रजत ने राधिका को खामोश देखा तो
- 2:41:23उसने पूछा तुम चुप क्यों हो? आखिर ऐसा
- 2:41:26क्या देख लिया तुमने उस बिल में? कहीं यह
- 2:41:29भी इस ज्वेलरी की तरह नकली तो नहीं है?
- 2:41:32राधिका ने उसकी बात सुनकर गंभीर स्वर में
- 2:41:34कहा।
- 2:41:36यह कैसे हो सकता है? यह पेंडेंट तो होटल
- 2:41:38राजकमल के ज्वेलरी आउटलेट से खरीदा गया
- 2:41:40है। अगर यह नकली हुआ तो तुरंत पता चल
- 2:41:43जाएगा क्योंकि हम अभी उसी होटल में हैं।
- 2:41:46राधिका की बात सुनकर रजत को जोर का झटका
- 2:41:49लगा। उसे यकीन ही नहीं [संगीत] हुआ कि
- 2:41:51शौर्य ने इतनी महंगी ज्वेलरी यहीं से
- 2:41:53खरीदी है। दरअसल होटल राजकमल के रिसेप्शन
- 2:41:57एरिया में एक छोटा सा ज्वेलरी आउटलेट था।
- 2:41:59जहां डिजाइनर और एंटीक ज्वेलरी रखी जाती
- 2:42:02थी। होटल में आने वाले मेहमान अक्सर वहीं
- 2:42:05से खरीदारी करते थे। राजकमल के नाम की
- 2:42:07मोहर के बाद उस ज्वेलरी की ऑथेंटिसिटी पर
- 2:42:10कोई सवाल नहीं उठ सकता। अब रजत के पास
- 2:42:13बोलने के लिए कुछ बचा ही नहीं था। शौर्य
- 2:42:16ने जब देखा कि रजत की बोलती बंद हो गई है
- 2:42:18तो वह हल्की मुस्कान के साथ बोला क्या
- 2:42:21हुआ? अब चुप क्यों हो गए? अभी तो कह रहे
- 2:42:24थे कि पेंडेंट नकली है। चलो ज्यादा दूर
- 2:42:28जाने की जरूरत भी नहीं है। यहीं पर चेक कर
- 2:42:30लो असली है या नकली। रजत गुस्से में शौर्य
- 2:42:33को घूरता रहा। लेकिन उसके पास कोई जवाब
- 2:42:36[संगीत] नहीं था। तभी मुख्तार भाई से ये
- 2:42:38सब बर्दाश्त नहीं हुआ। वो आगे बढ़े और
- 2:42:40बोले सोचने वाली बात यह है कि इस भिखारी
- 2:42:44के पास इतना पैसा आया कहां से? जरूर इसने
- 2:42:49कोई गलत तरीका अपनाया [संगीत] होगा। बताओ
- 2:42:52इतना महंगा नेकलेस खरीदने के लिए तुम्हारे
- 2:42:55पास पैसे कहां से आए? उनकी बात सुनकर
- 2:42:59राधिका को भी मौका मिल गया। वो तुरंत बोली
- 2:43:02हां श्रवण तुम्हें यह बताना ही पड़ेगा कि
- 2:43:05इतने पैसे तुमने कैसे जुटाए। शौर्य ने गौर
- 2:43:08किया कि जो राधिका अभी तक उसे जीजू कह रही
- 2:43:10थी अब [संगीत] सीधे नाम से पुकार रही है।
- 2:43:12शौर्य मुस्कुराते हुए सबके बदलते चेहरे को
- 2:43:15देखता रहा। युविका भी कहां पीछे रहने वाली
- 2:43:18थी। वो भी आगे आती हुई बोली हां श्रवण अब
- 2:43:21तुम्हें जवाब देना ही पड़ेगा। आखिर इतना
- 2:43:23महंगा नेकलेस तुमने कैसे खरीदा? लोगों के
- 2:43:27तेवर बदलते देख शिप्रा भी मन ही मन सोचने
- 2:43:29लगी। कैसे लोग हैं ये? इनकी सोच को बदलने
- 2:43:33में एक पल भी नहीं लगता।
- 2:43:35जहां वो सोच रही थी कि श्रवण के सस्ते
- 2:43:37गिफ्ट को देखकर राधिका उसका मजाक बनाएगी,
- 2:43:40वहीं अब उल्टा हो रहा था। सब लोग उसके
- 2:43:43महंगे गिफ्ट को देखकर उसी पर सवाल उठा रहे
- 2:43:45थे। हालांकि यह सवाल उसे भी परेशान कर रहा
- 2:43:48था कि आखिर श्रवण इतने पैसे लाया कहां से?
- 2:43:51लेकिन वो इस बात के लिए उसे सबके सामने
- 2:43:54घेरने वालों में से नहीं थी। हां, बाद में
- 2:43:56वो जरूर जानना चाहेगी कि उसने यह सब कैसे
- 2:43:59किया। पर जो बात उसे सबसे ज्यादा चौंका
- 2:44:02रही थी वो थी श्रवण का बदला हुआ रूप। कुछ
- 2:44:05दिनों पहले का श्रवण और आज का श्रवण।
- 2:44:08दोनों में जमीन आसमान का फर्क था। आज वो
- 2:44:11आत्मविश्वास से भरा हुआ था। वो ऐसे सबका
- 2:44:14सामना कर रहा था जैसे वहां मौजूद कोई भी
- 2:44:16उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकता। आखिर कहां से
- 2:44:19आया श्रवण के अंदर इतना कॉन्फिडेंस? जिस
- 2:44:22मुख्तार भाई के सामने लोग बोलने से कतराते
- 2:44:24थे। उसी को वो ऐसे जवाब दे रहा था जैसे
- 2:44:27उसकी कोई औकात ही ना हो। और सबसे खास बात
- 2:44:31उसके हर जवाब में ऐसा वजन था कि सामने
- 2:44:34वाले की बोलती खुद ब खुद बंद हो जाती थी।
- 2:44:36अब शिप्रा बस यह देखना चाहती थी कि इस
- 2:44:39बदली हुई स्थिति में श्रवण क्या करेगा।
- 2:44:42इसी बीच जब शौर्य ने देखा कि वहां मौजूद
- 2:44:45हर इंसान की नजर उसी पर टिकी हुई है तो वह
- 2:44:48हल्की मुस्कान के साथ बोला।
- 2:44:51कितने दोगले इंसान हैं आप सब। शौर्य की यह
- 2:44:55बात सुनते ही बलवंत राय ने उसे टोक दिया।
- 2:44:58श्रवण यह क्या बदतमीजी है? तुम क्या बोल
- 2:45:02रहे हो? तुम्हें समझ में आ रहा है? शिप्रा
- 2:45:05भी उसकी बात सुनकर चौंक गई। लेकिन शौर्य
- 2:45:08बिना रुके उसी जहरीली मुस्कान के साथ
- 2:45:10बोला,
- 2:45:11"हां, मुझे बहुत अच्छे से समझ आ रहा है।"
- 2:45:14मैंने कुछ गलत भी नहीं कहा। फिर उसने सबकी
- 2:45:17तरफ देखते हुए अपनी बात आगे बढ़ाई। मिस
- 2:45:20राधिका यहां जितने भी गिफ्ट्स का ढेर लगा
- 2:45:23हुआ है उनमें से कितने लोगों से आपने यह
- 2:45:26पूछा कि उन्होंने यह गिफ्ट कैसे खरीदा या
- 2:45:29उनके पास पैसे कहां से आए? वो एक पल के
- 2:45:33लिए रुका। फिर उसकी नजर सीधे राधिका की
- 2:45:35आंखों में जाकर टिक गई और वो फिर बोला जब
- 2:45:39आपने किसी और से सवाल नहीं किया तो मुझसे
- 2:45:42क्यों? शौर्य का जवाब सुनकर राधिका बगले
- 2:45:45झांकने लगी। उसकी हिम्मत नहीं हुई कि वो
- 2:45:48शौर्य से नजर भी मिला सके। पर शौर्य यहीं
- 2:45:50नहीं रुका। वो आगे बोला [संगीत] चलो मैं
- 2:45:53कहता हूं कि मैंने यह पैसे चोरी करके कमाए
- 2:45:56हैं और उसी से ये गिफ्ट खरीदा है। तो उससे
- 2:45:58क्या बदल जाएगा? क्या इस गिफ्ट की वैल्यू
- 2:46:01कम हो जाएगी? और दूसरी बात अभी थोड़ी देर
- 2:46:04पहले आप मुझे जीजू-जीजू बोलते हुए एक बार
- 2:46:07भी हिचकिचा नहीं रही थी। और अब अचानक मैं
- 2:46:10आपके जीजू से श्रवण हो गया। फिर शौर्य
- 2:46:14थोड़ी देर रुक कर बोला। चलिए अगर आपको कोई
- 2:46:17भी गिफ्ट लेने से पहले यह जानने का शौक है
- 2:46:20कि वो कैसे खरीदा गया और यह जाने बिना आप
- 2:46:23वो गिफ्ट नहीं लेती तो मेहरबानी करके आप
- 2:46:26मुझे मेरा दिया हुआ गिफ्ट वापस कर दीजिए
- 2:46:29क्योंकि मैं आपको कोई गिफ्ट दे सकूं इतनी
- 2:46:32औकात मेरी नहीं है। इतना बोलकर शौर्य ने
- 2:46:36राधिका की तरफ अपना हाथ बढ़ाया ताकि वह
- 2:46:38उससे अपना गिफ्ट वापस ले सके। अचानक इस
- 2:46:41बदली हुई स्थिति में राधिका को समझ नहीं
- 2:46:44आया कि क्या उसे सचमुच श्रवण को उसका
- 2:46:46गिफ्ट वापस करना पड़ेगा। उसे श्रवण का
- 2:46:49दिया हुआ गिफ्ट बहुत पसंद आया था। [संगीत]
- 2:46:52वो इसे अपने हाथ से आसानी से जाने नहीं
- 2:46:54देना चाहती थी। उसे खुद पर अफसोस होने लगा
- 2:46:57कि शिप्रा को नीचा दिखाने के चक्कर में अब
- 2:46:59वो शौर्य के दिए गिफ्ट से भी हाथ धोने
- 2:47:02वाली थी। उसे इस बात का भी अफसोस होने लगा
- 2:47:05कि वो बिना सोचे समझे सिर्फ शौर्य को नीचा
- 2:47:08दिखाने के चक्कर में रजत की बातों में आकर
- 2:47:10श्रवण को कुछ भी सुनाई जा रही थी। शौर्य
- 2:47:14का हाथ अब भी आगे बढ़ा हुआ था और उसकी
- 2:47:17आंखों में एक ऐसी शांति थी जो तूफान से
- 2:47:20पहले होती है। होटल राजकमल के पार्टी हॉल
- 2:47:23में अब एक तरफ सीना तान कर खड़ा था शौर्य
- 2:47:25का सच। तो दूसरी ओर था नेकलेस के मुंह में
- 2:47:28मचलता राधिका का मौका परस्त लालच। शौर्य
- 2:47:32के आज के जवाबी हमलों ने ना केवल शिप्रा
- 2:47:34को नीचा दिखाने की राधिका गैंग की साजिश
- 2:47:37को नाकाम कर दिया था बल्कि सवाल करने वाले
- 2:47:40हर एक शख्स को आईना भी दिखा दिया था।
- 2:47:42शौर्य के तर्क और शब्दों के तीर इतने सटीक
- 2:47:45थे कि उनके उत्तर किसी के पास नहीं थे।
- 2:47:48वहीं मौजूद बलवंत राय को भी शौर्य का जवाब
- 2:47:50सुनकर लगा कि वह भी पूर्वाग्रह से ग्रसित
- 2:47:53होकर शौर्य के साथ गलत व्यवहार कर रहे थे।
- 2:47:56उसने कुछ भी तो गलत नहीं कहा था। जो उसने
- 2:47:58महसूस किया वही तो कहा। सच में सब उसके
- 2:48:02साथ सौतेला व्यवहार ही तो कर रहे थे।
- 2:48:04दूसरी तरफ शिप्रा भी शौर्य का जवाब सुनकर
- 2:48:07यह सोचने को मजबूर हो गई थी कि क्या सच
- 2:48:09में शौर्य वही है जो [संगीत] उसे दिखाई दे
- 2:48:12रहा है या इसकी असलियत कुछ और है पर जिस
- 2:48:15तरह से शौर्य ने राधिका को जवाब दिया था
- 2:48:17उस बात से वह खुश थी। अगर कोई खुश नहीं था
- 2:48:20तो वह थी नैना बुआ। राधिका को दिया हुआ
- 2:48:23गिफ्ट आसानी से शौर्य को वापस हो जाए यह
- 2:48:26बात उन्हें हजम नहीं हो रही थी। जब
- 2:48:28उन्होंने देखा कि शौर्य राधिका से अपना
- 2:48:30दिया हुआ गिफ्ट लेने वाला है तो वह बीच
- 2:48:32में आकर बोली अरे श्रवण बेटे कोई अपना
- 2:48:36दिया हुआ गिफ्ट भला वापस लेता है क्या
- 2:48:39वैसे भी राधिका का वो मतलब नहीं था जो तुम
- 2:48:41समझ रहे हो उसने तो किसी और की बातों में
- 2:48:44आकर तुम्हें कुछ बोल दिया बच्ची है यह
- 2:48:47उसकी नासमझी थी पर वो तुम्हें हर्ट नहीं
- 2:48:50करना चाहती थी जब राधिका ने देखा कि उसकी
- 2:48:53मां उसके सपोर्ट में सामने आ गई है तो
- 2:48:55उसने तुरंत ही पलटी मारी और शौर्य के
- 2:48:57सामने ने मासूम बनते हुए बोली। हां जीजू
- 2:49:01मां सही कह रही है। मेरा आपका दिल दुखाने
- 2:49:03का कोई इरादा नहीं था। वो तो मैं औरों की
- 2:49:05बातों में आकर आपकी बात पर यकीन नहीं कर
- 2:49:08पाई। पर अब मैं शर्मिंदा हूं। शिप्रा ने
- 2:49:11जब राधिका की बात सुनी तो मन ही मन गुस्से
- 2:49:13में बोली।
- 2:49:15कितनी बेशर्म है यह। इसने कितनी जल्दी
- 2:49:17अपना रंग बदल लिया। इसे देखकर तो गिरगिट
- 2:49:20भी शर्मा जाए। राधिका की बात सुनकर शौर्य
- 2:49:23को भी आश्चर्य हुआ कि कितनी जल्दी वो अपनी
- 2:49:25बात से पलट गई। एक तंज भरी मुस्कान शौर्य
- 2:49:28के चेहरे पर नजर आने लगी। पर उसे अब
- 2:49:31राधिका के मुंह से जीजू सुनकर अच्छा नहीं
- 2:49:33लग रहा था। इसीलिए वो राधिका से बोला,
- 2:49:36"मिस राधिका, आप मुझे यह जीजू कहना बंद कर
- 2:49:39दीजिए।" अभी आप जैसे मुझे श्रवण कह कर
- 2:49:42बुला रही थी, वही सही था। यह दिखावा मुझे
- 2:49:44पसंद नहीं है।
- 2:49:47आप ऐसा क्यों बोल रहे हैं जीजू? मैंने
- 2:49:49सॉरी तो कहा। आप मेरी नादानी समझकर उन
- 2:49:52बातों को भूल जाइए। शौर्य का व्यवहार
- 2:49:55देखकर राधिका समझ गई कि शौर्य अब उससे
- 2:49:57नेकलेस वापस करने की बात नहीं करने वाला।
- 2:50:00दूसरी तरफ नैना बुआ जिन्होंने महसूस किया
- 2:50:02कि अब शौर्य राधिका से गिफ्ट वापस करने की
- 2:50:05बात छोड़ चुका है। वो शौर्य के करीब जाकर
- 2:50:07उससे बोली श्रवण बेटे मैंने देखा उस
- 2:50:10वेट्रेस ने तुम्हारे हाथ में दो गिफ्ट के
- 2:50:13बॉक्स दिए थे। एक तो मैं समझती हूं कि
- 2:50:15राधिका के लिए था। पर वो दूसरा बॉक्स
- 2:50:18किसके लिए है?
- 2:50:20तभी युविका शौर्य के हाथ में थमे उस बॉक्स
- 2:50:22की तरफ देखते हुए बोली, "क्या बुआ, आपने
- 2:50:26उस वेट्रेस की बात नहीं सुनी थी क्या? जब
- 2:50:28उसने कहा था कि यह वाला गिफ्ट उसकी वाइफ
- 2:50:30के लिए है। यानी कि हमारी शिप्रा के लिए।
- 2:50:33युविका के दिमाग में अभी भी शरारत चल रही
- 2:50:35थी। वो सोच रही थी कि श्रवण ने पहले ही
- 2:50:38राधिका के गिफ्ट पर ₹3 लाख खर्च कर दिए
- 2:50:41हैं। तो जरूर शिप्रा के लिए जो गिफ्ट उसने
- 2:50:44लिया है, वह उतना महंगा नहीं होगा। और अगर
- 2:50:46वह इस गिफ्ट को यहीं खुलवाने में कामयाब
- 2:50:48रही तो जरूर शिप्रा के मन में जलन आ जाएगी
- 2:50:52और हो सकता है उसे बेइज्जती भी फील हो और
- 2:50:54वह पार्टी से चली जाए।
- 2:50:57युविका की बात सुनकर नैना बुआ भी शरारत से
- 2:50:59बाज नहीं आई और बनावटी अंदाज में बोली
- 2:51:03क्या सच में ऐसा है? यह तो अच्छी बात है
- 2:51:06कि श्रवण ने हमारी शिप्रा के लिए भी कोई
- 2:51:08गिफ्ट [संगीत] लिया है। तो फिर उसे बॉक्स
- 2:51:10में पैक रखने का क्या मतलब? आखिर हम भी तो
- 2:51:13देखें कि श्रवण ने हमारी शिप्रा के लिए
- 2:51:16क्या गिफ्ट मंगवाया है। शौर्य नहीं चाहता
- 2:51:19था कि अभी वह गिफ्ट शिप्रा को दे क्योंकि
- 2:51:21उसे नहीं पता था कि मेनका ने शिप्रा के
- 2:51:24लिए कौन सा गिफ्ट लिया है। अगर वो गिफ्ट
- 2:51:26राधिका को दिए गिफ्ट से सस्ता होगा तो
- 2:51:28यहां पर लोगों को उसका मजाक बनाने का मौका
- 2:51:30मिल जाएगा। लोग तुरंत दोनों गिफ्ट की
- 2:51:33तुलना करने लगेंगे। इसीलिए वह चाहता था कि
- 2:51:36पार्टी के बाद ही वो गिफ्ट शिप्रा को दे।
- 2:51:38पर नैना राय ने इस समय शौर्य को शिप्रा को
- 2:51:41एक गिफ्ट देने के लिए बोलकर उसके लिए धर्म
- 2:51:43संकट की स्थिति पैदा कर दी। दूसरी तरफ
- 2:51:46शिप्रा जो यह सब देख सुन रही थी जब उसने
- 2:51:49[संगीत] देखा कि उसकी बुआ ने शौर्य को अभी
- 2:51:51उसे गिफ्ट देने के लिए बोला है तो वह भी
- 2:51:53अनकंफर्टेबल महसूस करने लगी। वो नहीं
- 2:51:56चाहती थी कि शौर्य यहां सबके सामने उसे वह
- 2:51:58गिफ्ट दे। उसे पता था कि अगर शौर्य यहां
- 2:52:01पर उसको कोई गिफ्ट देता है तो लोग उसके
- 2:52:03गिफ्ट की तुलना राधिका को दिए गिफ्ट से
- 2:52:06करने लगेंगे। हालांकि उसके दिल में गिफ्ट
- 2:52:08को लेकर हलचल भी थी और वह यह जानना भी
- 2:52:10चाहती थी कि आखिर शौर्य उसके लिए क्या
- 2:52:13गिफ्ट लाया है। पर माहौल को देखकर उसने
- 2:52:16खुद को संभाला और बोली नहीं बुआ इसकी कोई
- 2:52:19जरूरत नहीं है। अगर श्रवण मेरे लिए कोई
- 2:52:22गिफ्ट लाया है तो मैं उससे बाद में ले
- 2:52:24लूंगी पर अभी नहीं। पर नैना बुआ को यह बात
- 2:52:27बर्दाश्त होने वाली कहां थी? अब तो वो हर
- 2:52:30हाल में उस गिफ्ट को देखना चाहती थी जो
- 2:52:32श्रवण शिप्रा के लिए लाया था। इसीलिए वो
- 2:52:35शिप्रा को दोष देते हुए बोली इसका मतलब
- 2:52:38तुम नहीं चाहती हो कि हम उस गिफ्ट को
- 2:52:40देखें जो श्रवण तुम्हारे लिए लाया है। अरे
- 2:52:43हम उसको तुमसे छीन थोड़ी ना लेंगे। हमें
- 2:52:46तो यह देखकर अच्छा लगेगा कि श्रवण ने
- 2:52:48तुम्हें कोई गिफ्ट दिया है। शौर्य को भी
- 2:52:51नैना बुआ का यूं जिद करना अच्छा नहीं लग
- 2:52:53रहा था। पर वो इसके लिए ज्यादा कुछ बोल
- 2:52:55नहीं सकता था। वो समझ रहा था कि यह स्थिति
- 2:52:58शिप्रा के लिए भी असहज होने वाली थी।
- 2:53:00इसीलिए वह अभी गिफ्ट लेने से मना कर रही
- 2:53:03थी और सही भी यही था क्योंकि यह राधिका की
- 2:53:06बर्थडे पार्टी थी। इस भरी पार्टी में
- 2:53:09शिप्रा को उसका गिफ्ट देना सही नहीं था।
- 2:53:11जब राजदीप राय ने नैना को श्रवण से जिद
- 2:53:13करते देखा तो वह सामने आते हुए बोले अरे
- 2:53:17नैना तुम क्यों यह ज़िद पकड़े हुए हो कि
- 2:53:19श्रवण अभी ही शिप्रा को गिफ्ट दे। हो सकता
- 2:53:22है उसका कुछ अपना प्लान हो। इसलिए
- 2:53:24तुम्हारा यह जिद करना सही नहीं है। जब
- 2:53:27श्रवण को लगेगा कि यह शिप्रा को गिफ्ट
- 2:53:29देने का सही समय है तो वह खुद ही दे देगा।
- 2:53:32वैसे भी यह पार्टी राधिका की है ना कि
- 2:53:34शिप्रा की। अपने पापा की बात सुनकर शिप्रा
- 2:53:37ने राहत की सांस ली। पर नैना को राजदीप का
- 2:53:40यूं बीच में आना अच्छा नहीं लगा। लेकिन वो
- 2:53:43कुछ बोल नहीं सकती थी। उधर युविका को भी
- 2:53:45लग रहा था कि अरमानों पर पानी फिर गया।
- 2:53:48क्योंकि वो यह [संगीत] उम्मीद कर रही थी
- 2:53:50कि उसकी बुआ की जिद के कारण श्रवण को उसका
- 2:53:53गिफ्ट अभी ही शिप्रा को देना पड़ेगा। पर
- 2:53:56युविका इतनी आसानी से हार नहीं मान सकती
- 2:53:58थी। वो राजदीप राय के सामने आकर बोली क्या
- 2:54:01चाचा जी आप भी कैसी बात कर रहे हैं? इससे
- 2:54:04बढ़िया मौका और भला क्या होगा? जब हमारा
- 2:54:07सारा परिवार यहां पर इकट्ठा है। हम सब भी
- 2:54:09तो शिप्रा की खुशी में शामिल होना चाहते
- 2:54:11हैं। आखिर हम भी तो देखें कि शिप्रा के
- 2:54:14पति ने उसे पहला गिफ्ट क्या दिया है।
- 2:54:18शौर्य सोचने लगा कि मेनका ने भी उसे कैसी
- 2:54:21अजीब मुसीबत में डाल दिया है। क्या जरूरत
- 2:54:24थी उसे शिप्रा के लिए भी गिफ्ट भेजने की?
- 2:54:27पर अगले ही पल उसके दिमाग में आया कि
- 2:54:29इसमें मेनका की क्या गलती है? उसने अपनी
- 2:54:32तरफ से तो सब सही ही किया था। यह तो यहां
- 2:54:35मौजूद युविका और नैना बुआ जैसे लोग हैं जो
- 2:54:37जानबूझकर उसके लिए ऑकवर्ड स्थिति पैदा कर
- 2:54:40रहे हैं। वो सोचने लगा कि स्थिति से कैसे
- 2:54:42निपटा जाए। हालांकि राधिका का गिफ्ट देखकर
- 2:54:46शौर्य को यकीन हो गया था कि मेनका इतनी
- 2:54:48बेवकूफ नहीं हो सकती कि वो शिप्रा के लिए
- 2:54:51राधिका से कम कीमत का गिफ्ट सेलेक्ट
- 2:54:53करेगी। लेकिन एक अजीब सा डर उसे सबके
- 2:54:56सामने गिफ्ट खोलने और शिप्रा को देने से
- 2:54:58रोक रहा था। उसके दिमाग में [संगीत] एक ही
- 2:55:01सवाल गूंज रहा था। अगर गलती से भी कोई चूक
- 2:55:04हो गई तो यह सामने खड़ी घटिया मानसिकता
- 2:55:07वाली महिलाएं शिप्रा को नीचा दिखाने में
- 2:55:09कोई कसर नहीं छोड़ेंगी। और जो मकसद लेकर
- 2:55:12वह पार्टी में आई हैं, वह आसानी से पूरा
- 2:55:14हो जाएगा और वे बर्थडे से भी ज्यादा बड़ा
- 2:55:16जश्न शिप्रा की हार का मनाएंगी। दूसरी तरफ
- 2:55:20शिप्रा की दिली हालत भी कुछ ऐसी ही थी। पर
- 2:55:23वो शौर्य की स्थिति को समझ रही थी। जब उसे
- 2:55:26भी इससे निपटने का कोई तरीका नजर नहीं आया
- 2:55:28तो वो शौर्य के पास गई और बोली,
- 2:55:32क्या यह जो तुम्हारे हाथ में गिफ्ट है, यह
- 2:55:34मेरे लिए है। शौर्य ने हां में सिर हिलाकर
- 2:55:37अपनी सहमति जताई। शौर्य की सहमति देखकर
- 2:55:40शिप्रा ने कहा, तो फिर ठीक है, तुम यह
- 2:55:43गिफ्ट मुझे दे दो, मैं घर जाकर इसे देख
- 2:55:45लूंगी। शिप्रा की बात सुनकर शौर्य ने राहत
- 2:55:48की सांस ली और गिफ्ट शिप्रा की तरफ बढ़ा
- 2:55:51दिया। पर यह बात नैना और युविका को गवारा
- 2:55:54नहीं हुई। [संगीत] नैना बुआ शिप्रा के
- 2:55:56सामने आकर बोली, "यह क्या बात हुई शिप्रा?
- 2:55:59अगर श्रवण तुम्हें कोई गिफ्ट दे रहा है,
- 2:56:01तो हमारे पूरे परिवार को भी तो पता होना
- 2:56:04चाहिए कि उसने तुम्हें आखिर दिया क्या
- 2:56:06है?"
- 2:56:07जब शिप्रा ने महसूस किया कि उसकी बुआ इतनी
- 2:56:10आसानी से हार नहीं मानने वाली है तो वह
- 2:56:12थोड़े कड़े स्वर में बोली
- 2:56:15आप कैसी बात कर रही हो बुआ यह हमारे और
- 2:56:18श्रवण के बीच की पर्सनल चीज है आप क्यों
- 2:56:20चाहती हैं कि मैं इसे सबके साथ शेयर करूं
- 2:56:23शिप्रा की बात नैना बुआ को बुरी तो लगी पर
- 2:56:26वो खिसियानी हंसी हंसते हुए बोली कैसी बात
- 2:56:29करती हो शिप्रा बेटी मैं समझती हूं कि यह
- 2:56:31तुम दोनों का पर्सनल मामला है पर हम
- 2:56:34परिवार के लोगों की भी [संगीत] यह जानने
- 2:56:36की इच्छा होती है कि आखिर हमारे बच्चों का
- 2:56:38रिश्ता कैसा चल रहा है और फिर यह तो खुशी
- 2:56:41की बात है तो इसमें छुपाने की क्या जरूरत
- 2:56:44है? इस पर शिप्रा भावहीन चेहरे के साथ
- 2:56:47बोली इसमें छुपाने जैसी कोई बात नहीं है
- 2:56:50बुआ बस मैं नहीं चाहती कि मैं अपने और
- 2:56:53श्रवण [संगीत] के बीच की चीज को सबसे साझा
- 2:56:55करूं। बस इतनी सी बात है। मुझे लगता है अब
- 2:56:58आपको मेरी बात समझ में आ गई होगी। अब नैना
- 2:57:02राय के सामने और जिद करने की कोई वजह नहीं
- 2:57:04बची। इसीलिए वह चुप हो गई। पर बहुत देर से
- 2:57:07ये सब देख रहे बलवंत राय के मन की
- 2:57:09जिज्ञासा भी चरम पर पहुंच गई थी। अब तो
- 2:57:12उनकी भी इच्छा हो गई कि आखिर श्रवण ने
- 2:57:14शिप्रा को क्या गिफ्ट दिया है। यही सोचकर
- 2:57:17वो शिप्रा से बोले शिप्रा बेटी मैं समझता
- 2:57:21हूं कि यह तुम दोनों के बीच का पर्सनल
- 2:57:24मामला है। पर बच्चे हम परिवार के लोग भी
- 2:57:27जानना चाहते हैं कि तुम्हारे लिए श्रवण के
- 2:57:30दिल में [संगीत] कैसी फीलिंग है। और इसे
- 2:57:32जानने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि यह
- 2:57:35देखा जाए कि वह तुम्हारी कितनी परवाह करता
- 2:57:38है। अगर वह तुम्हारे लिए कुछ लाता है तो
- 2:57:41वह चीज किस तरह की है? इतना कहने के बाद
- 2:57:45थोड़ा रुक कर वह फिर बोले और हम यह भी
- 2:57:48चाहते हैं कि श्रवण जो भी गिफ्ट तुम्हारे
- 2:57:50लिए लाया है वो हम सबके सामने तुम्हें
- 2:57:53अपने हाथों से पहनाए। हमारी यह मांग कुछ
- 2:57:56ज्यादा नहीं है। मुझे लगता है कि इसे पूरा
- 2:58:00करने में तुम्हें कोई दिक्कत नहीं होगी और
- 2:58:03हमें यह जानने का भी मौका मिलेगा कि श्रवण
- 2:58:05को लेकर जो तुमने फैसला लिया है वो सही है
- 2:58:09या नहीं।
- 2:58:10दादा बलवंत राय की बात सुनकर शिप्रा ने
- 2:58:13पहले अपने हाथ के गिफ्ट को देखा और फिर
- 2:58:15शौर्य की ओर देखने लगी। तो क्या होगा आगे?
- 2:58:19क्या शिप्रा बलवंत राय की बात मानेगी?
- 2:58:21क्या शौर्य शिप्रा को अपने हाथों से वो
- 2:58:24गिफ्ट पहनाएगा और आखिर गिफ्ट में है क्या?
- 2:58:27[संगीत]
About this transcript
This page contains the full transcript of My Begger Husband | New Episode 51 to 65 |New Episode Daily | Sk hindi novel | Trending Series by SK Hindi Novel, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 32,375 words across 3,901 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
What you can do with it
Use the transcript to take notes, quote the speaker, build a study guide, generate a summary with ChatGPT or Claude via the YouTube Summary tool, or export it as a timed subtitle file with YouTube to SRT. You can also re-open it in the transcriber to translate the transcript into 100+ languages.
Free YouTube transcript tool
YouTube2Text is a free YouTube transcript generator — no signup, no daily limit. Paste any YouTube link and get the full transcript instantly, with timestamps, click-to-jump, translation to 100+ languages, AI prompts for ChatGPT, Claude, and Gemini, and exports to TXT, SRT, VTT, or Markdown.