My Begger Husband Episode 66 to 80 | Original Voice | Sk hindi novel |daily New Episode| — Transcript
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- 0:00तो हेलो दोस्तों, कैसे हैं आप लोग? मुझे
- 0:02आशा है कि आप लोग ठीक ही होंगे और मजे से
- 0:04इस चैनल पर जो भी सीरीज आ रही है उसको सुन
- 0:06रहे होंगे। [गला साफ़ करने की आवाज़] तो
- 0:08बैगर और हस्बैंड का नया वीडियो आ चुका है
- 0:10जिसमें एपिसोड 66 से 80 तक है। तो जल्दी
- 0:14से जल्दी से वीडियो को देखो और बताओ कि
- 0:16कोई मिस्टेक तो नहीं हुई है। और वीडियो को
- 0:19शुरू करने से पहले वीडियो को लाइक करें,
- 0:21चैनल को सब्सक्राइब करें जिससे कि आपसे
- 0:24आने वाला वीडियो कोई भी मिस ना हो। तो
- 0:26करते हैं लेट स्टार्ट दिस वीडियो। मेनका
- 0:29के भेजे गिफ्ट्स ने राय परिवार को दो
- 0:32हिस्सों में बांट दिया था। एक तरफ थे
- 0:34शौर्य और शिप्रा और दूसरी तरफ पार्टी में
- 0:37मौजूद बाकी सब फैमिली मेंबर्स। राधिका का
- 0:40गिफ्ट बॉक्स खुल चुका था और उससे निकले 3
- 0:43लाख के खूबसूरत नेकलेस ने सबके दिलों को
- 0:45लूट लिया था। वहीं शौर्य मन ही मन सोच रहा
- 0:48था कैसी दुनिया है यह? यहां रिश्तों की
- 0:52असली कीमत दिल से नहीं गिफ्ट के बिल से तय
- 0:54होती [संगीत] है। शिप्रा के गिफ्ट बॉक्स
- 0:57में क्या है? यह राज सिर्फ मेनका को ही
- 0:59मालूम था और उस राज का खुलासा करने का
- 1:02दबाव अब शिप्रा पर था क्योंकि गिफ्ट बॉक्स
- 1:05उसके हाथ में था। बलवंत राय ने जैसे ही
- 1:07शिप्रा से गिफ्ट खोलकर सबको दिखाने की बात
- 1:10कही नैना राय और युविका का चेहरा खिल गया।
- 1:13बलवंत राय की बात सुनकर शिप्रा शौर्य की
- 1:16तरफ देखने लगी। जैसे कि वो उससे पूछ रही
- 1:19हो कि अब क्या किया जाए। शिप्रा को अपने
- 1:21दादाजी की बात पसंद नहीं आई। वो नहीं
- 1:24चाहती थी कि किसी और के फंक्शन में उसके
- 1:26और श्रवण के बीच इस तरह का कार्यक्रम किया
- 1:28जाए। यही सोचकर उसने अपने दादा जी से कहा
- 1:32दादा जी जहां तक इस गिफ्ट को देखने की बात
- 1:35है तो मैं यह अभी आपको दिखा सकती हूं। पर
- 1:38आपने जो कहा कि इस गिफ्ट को अभी सबके
- 1:40सामने श्रवण मुझे पहनाएं। यह मुझे मंजूर
- 1:42नहीं है। यह राधिका की बर्थडे पार्टी है।
- 1:45उसके बीच में हम अपने पर्सनल मोमेंट शेयर
- 1:48नहीं कर सकते। शौर्य को भी शिप्रा का यह
- 1:51दो टूक जवाब पसंद आया क्योंकि वो नैना राय
- 1:54और युविका की मंशा समझ रहा था। वो चाहती
- 1:57थी कि अगर शिप्रा का गिफ्ट राधिका को दिए
- 1:59गिफ्ट से सस्ता हुआ तो शिप्रा के मन में
- 2:02शौर्य के लिए कड़वाहट आ जाएगी। शौर्य को
- 2:05खुद भी यह डर था कि अगर सच में गिफ्ट
- 2:06सस्ता हुआ तो शिप्रा क्या सोचेगी? पर अब
- 2:09शौर्य के हाथ में कुछ नहीं था। दूसरी तरफ
- 2:13जब नैना बुआ ने शिप्रा की बात सुनी तो वो
- 2:15बोली
- 2:17कोई बात नहीं अगर तुम ऐसा चाहती हो तो ठीक
- 2:20है हम इससे ही संतुष्ट हो जाएंगे कि
- 2:23तुम्हारे लिए श्रवण जो गिफ्ट लाया है वो
- 2:25तुम्हारे लायक है या नहीं। नैना राय के
- 2:28शब्द मीठे थे। लेकिन इरादा बेहद कड़वा।
- 2:32अपनी हर चाल में मात खाने के बाद भी नैना
- 2:35राय के मन में शौर्य को नीचा दिखाने की
- 2:38कसक बाकी थी। शिप्रा ने जब देख लिया कि अब
- 2:41कोई चारा नहीं है तो उसने कांपते हाथों से
- 2:44बॉक्स को खोल दिया। बॉक्स खोलते ही उसकी
- 2:47नजर अंदर रखे बिल पर पड़ी। उसने बिल
- 2:49निकाला और धीरे से खोला। जैसे ही शिप्रा
- 2:52की नजर बिल की कीमत पर पड़ी, शिप्रा की
- 2:55सांसे थम गई। 5 लाख कीमत पड़ते ही उसके
- 2:59दिमाग में सवालों का तूफान उमड़ पड़ा। ये
- 3:02ये कैसे मुमकिन है? क्या श्रवण सच में
- 3:06मेरे लिए इतना महंगा गिफ्ट लाया है? पर
- 3:09कैसे? शिप्रा ने माहौल को देखते हुए तुरंत
- 3:12ही खुद को संभाला और सोचा कि वो इस बारे
- 3:15में श्रवण से बाद में बात करेगी। उसने
- 3:17चुपचाप बिल को मोड़कर वापस बॉक्स में रख
- 3:20दिया और उसमें से डिब्बी को बाहर निकाल
- 3:22लिया। शिप्रा वो डिब्बी नैना राय की तरफ
- 3:25बढ़ाते हुए बोली। बुआ आप ही क्यों नहीं यह
- 3:28गिफ्ट सबको दिखा देती? नैना बुआ पहले तो
- 3:32शिप्रा की बात सुनकर हड़बड़ा गई। पर फिर
- 3:34खुद को नियंत्रित करके बोली, हां क्यों
- 3:37नहीं? लाओ, मैं ही दिखाती हूं सबको।
- 3:42नैना बुआ ने हल्के कांपते हाथों से डिब्बी
- 3:45खोली और जैसे ही अंदर का गिफ्ट निकला, उसे
- 3:47देखते ही हॉल में मौजूद सबकी आंखें फटी रह
- 3:51गई। बॉक्स में था येलो, वाइट और रोज गोल्ड
- 3:54के कॉम्बिनेशन से बना एक लाजवाब [संगीत]
- 3:57डायमंड नेकलेस। जिसकी चमक ऐसी थी जो आंखों
- 4:00को बांध ले। शिप्रा ने भी जब उस डायमंड
- 4:03सेट को देखा तो उसकी आंखें भी उस सेट पर
- 4:06जमकर रह गई। उस सेट को देखने के बाद उसने
- 4:09शौर्य की तरफ देखा तो उसे उसके चेहरे पर
- 4:11भी संतुष्टि के भाव नजर आए। वो सोचने को
- 4:14मजबूर हो गई थी कि क्या शौर्य को भी नहीं
- 4:17पता था कि इस बॉक्स में क्या है क्योंकि
- 4:20थोड़ी देर पहले जब उसने शौर्य की तरफ देखा
- 4:22था तो उसे शौर्य के चेहरे पर चिंता की झलक
- 4:25दिखाई दी थी। पर अब उस नेकलेस को देखने के
- 4:27[संगीत] बाद वह संतुष्ट नजर आ रहा था।
- 4:31शिप्रा यह सोच ही रही थी कि तभी कुलवंत की
- 4:34वाइफ टीना की आवाज सुनाई दी।
- 4:37अरे यह तो वही नेकलेस है जो हमने यहां आने
- 4:40पर इस होटल के ज्वेलरी आउटलेट में देखा
- 4:42था। यह तो 5 लाख का था।
- 4:46टीना की बात सुनकर राधिका का मुंह खुला का
- 4:48खुला रह गया जो थोड़ी देर पहले तक यह सोच
- 4:51कर खुश थी कि उसका गिफ्ट 3 लाख का है। पर
- 4:54जैसे ही उसने सुना कि शिप्रा का गिफ्ट 5
- 4:56लाख का है तो उसकी खुशी तुरंत गम में बदल
- 4:59गई। दूसरी तरफ रजत के दिल पर भी छुरियां
- 5:03चल रही थी। सामने का नजारा देख वो मन ही
- 5:06मन बोला आखिर इस भिखारी ने यह मुमकिन कैसे
- 5:09किया? कल तक जो भीख मांगकर अपना गुजर बसर
- 5:12कर रहा था आज लाखों के गिफ्ट देने की हालत
- 5:14में कैसे आ गया? क्या कोई है जो इस भिखारी
- 5:17की मदद कर रहा है? तभी बलवंत राय की आवाज
- 5:20गूंजी। वाह, बहुत खूब। मानना पड़ेगा। यह
- 5:26गिफ्ट वाकई बहुत खूबसूरत है। मुझे नहीं
- 5:28पता श्रवण कि तुमने यह गिफ्ट कैसे अरेंज
- 5:31किया है। पर जैसे भी किया है यह दिखाता है
- 5:34कि तुम मेरी पोती के लिए कुछ भी कर सकते
- 5:37हो। बलवंत राय शौर्य के सामने जाकर उसकी
- 5:40तारीफ करते हुए बोला मुख्तार भाई को बलवंत
- 5:43राय का शौर्य की तारीफ करना बर्दाश्त नहीं
- 5:46हुआ। इसीलिए वह चिढ़कर बोले यह बात आप कह
- 5:51रहे हैं राय साहब। यह जानते हुए कि इसके
- 5:54लिए इसने पता नहीं किसकी तिजोरी में सेंध
- 5:57लगाई होगी। किसके घर चोरी की होगी। शौर्य
- 6:02मुख्तार भाई की बात सुनते ही तंज कसते हुए
- 6:05बोला जिसने अपनी सारी संपत्ति ही दो नंबर
- 6:09के कामों से कमाई हो। वो आज दूसरों को
- 6:11आईना दिखाने की कोशिश कर रहा है। मुख्तार
- 6:14भाई को शौर्य की बात सुई की तरह चुभ। वो
- 6:17और बर्दाश्त नहीं कर सकते थे। इसीलिए वो
- 6:20गुस्से में बोले ए लड़के तुम आज कुछ
- 6:23ज्यादा ही ऊंचा उड़ने की कोशिश कर रहे हो।
- 6:26मुझे नहीं पता तुम्हें यह हिम्मत कहां से
- 6:29मिल रही है। पर तुम खुद अपनी ही कब्र खोद
- 6:32रहे हो।
- 6:33जैसी बेइज्जती मुख्तार भाई की आज इस
- 6:35पार्टी में हुई, ऐसी शायद ही कभी पहले
- 6:38कहीं हुई होगी। और सबसे बड़ी बात, शौर्य
- 6:41का वो कुछ कर नहीं पाए। कोई और जगह होती,
- 6:44तो शायद उनका रवैया अलग होता।
- 6:46[संगीत]
- 6:46पर वह जानते थे कि यह होटल राजा साहब का
- 6:49है। अगर वह इस होटल में कोई हंगामा करने
- 6:52की कोशिश करते तो यह सीधे राजा साहब से
- 6:55पंगे लेने वाली बात हो जाती।
- 6:58और विशालगढ़ में रहकर राजा साहब से
- 7:00दुश्मनी वो बर्दाश्त नहीं कर सकते थे।
- 7:03बलवंत राय भी इस बात को अच्छे से समझ रहे
- 7:05थे कि जब तक शौर्य होटल राजकमल में है तब
- 7:09तक तो मुख्तार भाई शौर्य के खिलाफ कोई
- 7:11एक्शन नहीं ले सकते। लेकिन मुख्तार भाई
- 7:14शौर्य के द्वारा की गई बेइज्जती को इतनी
- 7:17आसानी से भूलने वाले भी नहीं है। इसीलिए
- 7:19उन्हें अब शौर्य के लिए चिंता भी होने लगी
- 7:22थी। वहीं दूसरी तरफ शिप्रा भी शौर्य के
- 7:25लिए चिंतित थी। पर शौर्य इन सब बातों से
- 7:28बेपरवाह मुख्तार भाई से बोला।
- 7:31आपको पता होना चाहिए कि जब आप किसी पर
- 7:34उंगली उठाते हैं [संगीत] तो बाकी चार
- 7:36उंगलियां खुद की तरफ भी रहती हैं। आइंदा
- 7:39जब किसी को कुछ बोले तो उससे जवाब सुनने
- 7:41को भी तैयार रहिएगा।
- 7:44तभी मुख्तार भाई अपने शब्दों को चबाते हुए
- 7:46बोले शुक्र मनाओ कि तुम अभी होटल राजकमल
- 7:50में हो। नहीं तो तुम्हारी इस हरकत पर
- 7:53तुम्हारे साथ क्या हो जाता तुम सोच भी
- 7:56नहीं पाते।
- 7:58मुख्तार की बात सुनकर शौर्य एक तंज भरी
- 8:00हंसी-हंसता हुआ बोला, "आप जैसे लोगों से
- 8:03और उम्मीद भी क्या की जा सकती है। अपनी
- 8:06पहचान तो दिखाओगे ही।"
- 8:09श्रवण तुम क्यों मुख्तार भाई से बहस किए
- 8:11जा रहे हो? राजकुमार टंडन शौर्य को टोकते
- 8:15हुए बोले, उन्हें डर था कि हालात ज्यादा
- 8:17ना बिगड़ जाए। बड़ी मुश्किल से तो मुख्तार
- 8:20भाई के साथ हालात पटरी पर आए थे। फिर
- 8:23राजकुमार टंडन मुख्तार भाई के पास गए और
- 8:26उन्हें मक्खन लगाते हुए बोले आप क्यों इस
- 8:29लड़के के मुंह लग रहे हैं? इसकी अपनी तो
- 8:31कोई इज्जत है नहीं तो दूसरों की क्या ही
- 8:33करेगा। मुख्तार भाई के ईगो को राजकुमार
- 8:36टंडन की बात सुनकर थोड़ी तसल्ली मिली।
- 8:39शौर्य ने भी राजकुमार टंडन की बात को सुना
- 8:42पर वो उनके हालात को समझता था। यह उनकी
- 8:45बेटी की बर्थडे पार्टी है। इसीलिए वो
- 8:47इसमें ज्यादा परेशानी नहीं चाहते थे। और
- 8:49रही बात मुख्तार भाई की तो वो यह कैसे चाह
- 8:52सकते थे कि मुख्तार भाई का मूड खराब हो।
- 8:55इसीलिए शौर्य ने भी आगे मुख्तार भाई को
- 8:57कुछ कहना उचित नहीं समझा। और फिर वो
- 9:00शिप्रा के लिए भी ऑकवर्ड स्थिति पैदा करना
- 9:02नहीं चाहता था। शिप्रा को यह समझ नहीं आ
- 9:05रहा था कि शौर्य के सामने तो उसने पहले ही
- 9:08अपना और उसका रिश्ता क्लियर कर दिया था।
- 9:11फिर उसे [संगीत] उसके लिए गिफ्ट लेने की
- 9:13क्या जरूरत थी। वैसे शिप्रा को वो गिफ्ट
- 9:16पसंद आया था। पर वो शौर्य से इतना महंगा
- 9:19गिफ्ट नहीं ले सकती थी। उसने सोच लिया था
- 9:22कि घर जाकर वो गिफ्ट शौर्य को वापस कर
- 9:24देगी। वो शौर्य को किसी गलतफहमी में नहीं
- 9:27डालना चाहती थी। उसे यह भी डर था कि अगर
- 9:30उसने शौर्य से इतना महंगा गिफ्ट ले लिया
- 9:32तो कहीं शौर्य उसके बारे में कुछ गलत ना
- 9:35सोचने लगे। शिप्रा के दिमाग में एक और
- 9:38सवाल भी था और वो यह था कि शौर्य के पास
- 9:41इतने पैसे आए कहां से? जब कुछ समझ नहीं
- 9:45आया तो उसने सोचा बाद में वो शौर्य से इस
- 9:47बारे में बात कर लेगी। शिप्रा ने शौर्य का
- 9:50दिया हुआ गिफ्ट अपने [संगीत] पर्स में डाल
- 9:52लिया। राधिका भी अब अपने दोस्तों के साथ
- 9:55बिजी हो गई। [संगीत] वो शौर्य को अब और
- 9:57उकसाना नहीं चाहती थी। जब सब अपने में
- 9:59बिजी हो गए तो शौर्य अकेला पड़ गया। तभी
- 10:02रागिनी अपने हाथ में एक ड्रिंक का ग्लास
- 10:05लेकर शौर्य के पास पहुंची। उसने ग्लास
- 10:07शौर्य की तरफ बढ़ाते हुए कहा। आज तो आप छा
- 10:11गए जीजू। आपसे तो कोई यह उम्मीद भी नहीं
- 10:14कर सकता था। अच्छा ऐसा है क्या? पर मैंने
- 10:17ऐसा कुछ खास तो किया नहीं। शौर्य रागिनी
- 10:20के हाथ से ड्रिंक का ग्लास लेते हुए बोला।
- 10:23तभी रागिनी अपना लॉजिक देते हुए बोली आपने
- 10:26क्या किया वो तो आप यहां सबकी आंखों में
- 10:28देख ही सकते हो और मुझे नहीं लगता कि आप
- 10:31इतने भी सीधे हैं कि आपको यह बात समझ में
- 10:33भी ना आए। शौर्य ने रागिनी की बात सुनी और
- 10:36फिर मुख्तार भाई की ओर आंखें घुमाते हुए
- 10:38कहा। सच कहूं तो मुझे नहीं लगा कि मैंने
- 10:42ऐसा कुछ किया। हां, एक दो लोगों को आईना
- 10:44दिखाने का काम जरूर किया है बस। तभी
- 10:48रागिनी सवालिया नजरों से शौर्य की तरफ
- 10:50देखती हुई बोली, कुछ तो ऐसी बात है आप में
- 10:53जीजू जो आपको कुछ खास बनाती है और आप में
- 10:57सबको चौंकाने की एक अलग ही खूबी है। वैसे
- 11:00एक बात पूछूं? हां, क्या पूछना चाहती हो?
- 11:04शौर्य शिप्रा की तरफ देखता हुआ बोला,
- 11:07"इतने अच्छे भले चेहरे को आप पहले दाढ़ी
- 11:10में क्यों छुपाए हुए थे? अगर मैं आप सबकी
- 11:12बातें नहीं सुनती, तो मैं तो पहचान ही
- 11:14नहीं पाती कि आप ही शिप्रा दी के पति हो।
- 11:17रागिनी की बातों में अपने लिए तारीफ का
- 11:20भाव शौर्य स्पष्ट महसूस कर सकता था। वैसे
- 11:23तारीफ के लिए शुक्रिया। लेकिन क्या मैं
- 11:26दाढ़ी के बिना इतना अलग लगता हूं? शौर्य
- 11:28मुस्कुराता हुआ बोला तो रागिनी शौर्य के
- 11:31करीब आई और अपनी आंखें बड़ी करती हुई
- 11:33बोली। जीजू सच कहूं आपको देखकर अब मुझे
- 11:37शिप्रा दी से ईर्ष्या होने लगी है। तभी
- 11:41राहुल सबके बीच से निकल कर शौर्य के पास आ
- 11:43गया। वो शायद अभी-अभी ही आया था। तभी जो
- 11:47कुछ भी हुआ था उसके बारे में पता चला तो
- 11:50वो सीधा शौर्य के पास ही आकर मुस्कुराता
- 11:52हुआ बोला। क्या जीजू आपने ऐसा क्या कर
- 11:55दिया कि सबके बीच आपकी ही चर्चा हो रही
- 11:58है। मैंने तो कुछ खास किया नहीं पर पता
- 12:01नहीं क्यों सब मेरी ही चर्चा कर रहे हैं।
- 12:04शौर्य ने सफाई दी तभी राहुल हल्के से
- 12:06मुख्तार भाई की तरफ देखता हुआ बोला।
- 12:10आपको डर नहीं लगता जीजू जो आप मुख्तार भाई
- 12:13से भी उलझ गए थे। देखना अब वो जरूर आपके
- 12:16पीछे पड़ जाएंगे। शौर्य के आज के दमदार
- 12:19अवतार को देखकर राय परिवार के हर सदस्य के
- 12:22दिमाग में एक ही सवाल हथौड़े मार रहा था।
- 12:25क्या यह वही भिखारी है? यकीन किसी को नहीं
- 12:28हो रहा था लेकिन इस सवाल का जवाब भी किसी
- 12:31के पास नहीं था। क्योंकि पार्टी में जो
- 12:33सभी ने अपनी आंखों से देखा वो कोई सपना
- 12:36नहीं हकीकत थी। सबके पास इस हकीकत को एक
- 12:39बुरा सपना समझकर भुला देने का एक ही
- 12:41रास्ता बचा था। बर्थडे पार्टी। इसीलिए सब
- 12:45गिफ्ट को छोड़कर धीरे-धीरे म्यूजिक, डांस,
- 12:48ड्रिंक और डिशेस को एंजॉय करने लगे। माहौल
- 12:51एकदम से बदल गया। कुछ ही देर बाद पार्टी
- 12:54अपने शबाब पर थी। शौर्य रागिनी और राहुल
- 12:57के साथ अलग ही रहा। ना ही मुख्तार भाई फिर
- 13:00से शौर्य के पास आया और ना ही कोई अप्रिय
- 13:02घटना घटी। हां, यह जरूर था कि शौर्य अभी
- 13:05भी रजत की आंखों में खटक रहा था। शौर्य
- 13:08शिप्रा के बारे में सोच रहा था। पता नहीं
- 13:11क्यों शौर्य को यह एहसास हो रहा था कि
- 13:13शिप्रा ने गिफ्ट तो ले लिया है पर क्या वो
- 13:16इसे एक्सेप्ट करेगी। फिर उसने मेनका के
- 13:18बारे में सोचा और मन ही मन बोला।
- 13:22पता नहीं मेनका के दिमाग में क्या आया जो
- 13:24उसने शिप्रा के लिए भी गिफ्ट भेज दिया।
- 13:27शौर्य ने सोचा एक बार उसे जाकर मेनका से
- 13:29मिलना चाहिए। वैसे भी अब यह पार्टी उसके
- 13:32लिए बेमतलब सी हो गई थी और किसी को अब
- 13:35यहां उसकी परवाह भी नहीं थी। बहुत से लोग
- 13:37तो उससे इसलिए भी दूर थे क्योंकि उसने
- 13:40मुख्तार भाई से जबरदस्ती का पंगा ले लिया
- 13:42था और वहां पर ज्यादातर लोग ऐसे थे जो
- 13:45मुख्तार भाई की आंखों में ना खटक जाएं
- 13:47इसीलिए शौर्य से दूर ही थे। शौर्य रागिनी
- 13:50से हटकर शिप्रा के पास गया और बोला
- 13:54मैं अभी जा रहा हूं बाद में मिलता हूं।
- 13:57क्या हुआ? इतनी जल्दी क्यों जा रहे हो?
- 14:00अभी तो खाना भी नहीं खाया। शिप्रा हैरानी
- 14:03से बोली। शौर्य को यह अच्छा लगा कि शिप्रा
- 14:06को उसकी फिक्र है। तभी तो उसे पता था कि
- 14:08उसने खाना नहीं खाया। पर शौर्य तो यहां
- 14:11आने से पहले ही मोहित और प्रिया के साथ
- 14:13खाना खा चुका था। उसे भूख भी नहीं थी।
- 14:16इसीलिए उसने शिप्रा से कहा मुझे भूख नहीं
- 14:19है। शिप्रा को लग रहा था कि जो कुछ हुआ
- 14:23उसी के कारण वो यहां से जल्दी जाना चाहता
- 14:26है। इसीलिए उसने शौर्य को फिर से रोकने की
- 14:28कोशिश की। पर इतनी जल्दी क्या है जाने की?
- 14:32घर ही तो जाना है। हमारे साथ ही चलना।
- 14:36पर शौर्य के दिमाग में शायद कुछ और ही चल
- 14:38रहा था। इसीलिए शौर्य शिप्रा को टालते हुए
- 14:41बोला इसकी कोई जरूरत नहीं है। मैं आ
- 14:44जाऊंगा। वैसे भी तुम सबके साथ आई हो तो
- 14:47सबके साथ ही जाना सही रहेगा। शिप्रा यह भी
- 14:51सोच रही [संगीत] थी कि शौर्य होटल राजकमल
- 14:53का खाना छोड़कर जा रहा है। क्या कभी उसने
- 14:55ऐसा खाना खाया भी होगा? क्या पता फिर कभी
- 14:59उसे ऐसी जगह पर खाने का मौका शायद ना
- 15:01मिले। इसीलिए शिप्रा एक और कोशिश करते हुए
- 15:04बोली क्या तुम्हारा अभी जाना इतना जरूरी
- 15:07है? नहीं जरूरी तो नहीं है पर मेरा भी
- 15:11यहां पर कोई खास काम नहीं है। तो सोचा जो
- 15:14थोड़ा सा काम बचा है उसे निपटा लूं। शौर्य
- 15:17बहाना बनाते हुए बोला तो शिप्रा बोली वैसे
- 15:20मैं भी अब ज्यादा देर यहां नहीं रुकूंगी।
- 15:23थोड़ी देर रुकोगे तो साथ ही चलेंगे।
- 15:26शिप्रा की आंखों की बेचैनी देखकर शौर्य
- 15:29समझ गया था कि उसका ऐसे बीच पार्टी से
- 15:31जाना शिप्रा को अच्छा नहीं लग रहा है।
- 15:33इसीलिए वो शिप्रा को आश्वस्त करते हुए
- 15:36बोला अगर ऐसा है तो मैं अभी होटल के पास
- 15:39ही हूं। जब तुम्हें जाना हो तो 5 मिनट
- 15:42पहले बता देना मैं आ जाऊंगा।
- 15:44ठीक है। तो फिर तुम जाओ। मैं जिस समय यहां
- 15:47से जाऊंगी तुम्हें फोन कर लूंगी। शिप्रा
- 15:50हारी सी आवाज में शौर्य से बोली। शौर्य
- 15:53वहां से निकल गया और सीधा मेनका के ऑफिस
- 15:56में पहुंचा। मेनका अकेले ही बैठी थी।
- 15:58शौर्य को ऑफिस में देखकर उसे आश्चर्य नहीं
- 16:01हुआ। इसका मतलब था कि वह शौर्य पर ही नजर
- 16:04रखे हुए थी। शौर्य आकर सीधा उसके सामने
- 16:07वाली चेयर पर बैठ गया।
- 16:10क्या बात है? लगता है वह पार्टी तुम्हें
- 16:12कुछ ज्यादा रास नहीं आई। इसीलिए इतनी
- 16:15जल्दी वहां से चले आए। मेनका मुस्कुराती
- 16:18हुई बोली। तो शौर्य ने मेनका के चेहरे को
- 16:21गौर से देखते हुए कहा, "इसका मतलब तुम मुझ
- 16:24पर नजर रखे हुए थी। तभी तो तुम ऐसे बोल
- 16:27रही हो।" हां, ऐसा था तो सही। मैं जानना
- 16:30चाहती थी कि तुम्हें वो गिफ्ट पसंद आया या
- 16:32नहीं।" मेनका मुस्कुराती हुई बोली तो
- 16:35शौर्य बोला, पसंद तो आया था, पर तुम्हें
- 16:38वो दूसरा गिफ्ट लेने की क्या जरूरत थी।"
- 16:40शौर्य का सवाल सुनकर मेनका ने तुरंत ही
- 16:43शिकायती लहजे में बोल दिया। अरे कमाल है।
- 16:46जिस [संगीत] चीज के लिए तुम्हें मुझे
- 16:48थैंक्स बोलना चाहिए उल्टा उसके लिए ही
- 16:50शिकायत कर रहे हो। अरे शिकायत नहीं कर रहा
- 16:53पर तुम्हें पता नहीं है हम [संगीत] दोनों
- 16:55का रिलेशन कैसा है। अगर पता होता तो तुम
- 16:57ऐसा नहीं करती। शौर्य ने मेनका को समझाने
- 17:01की कोशिश की। तो मेनका के चेहरे पर
- 17:03सवालिया सा भाव उभर आया और वो बोली
- 17:07तुम दोनों पति-पत्नी हो। इसमें पता नहीं
- 17:10होने वाली कौन सी बात है? एक पत्नी के लिए
- 17:13इससे ज्यादा खुशी की बात क्या होगी कि
- 17:15उसका पति उसके लिए इतना सुंदर गिफ्ट लाए।
- 17:18इस पर शौर्य अपनी बात को स्पष्ट करते हुए
- 17:20बोला देवी जी यह सही है कि हम पति-पत्नी
- 17:24हैं। पर बाय चॉइस नहीं है। यह एक मजबूरी
- 17:27के कारण है। और दूसरी बात शिप्रा की नजर
- 17:30में मेरा स्टेटस एक भिखारी का है। अब इतना
- 17:33तो तुम [संगीत] समझ ही सकती हो कि एक
- 17:35भिखारी के स्टेटस वाला शख्स जब अपनी पत्नी
- 17:37को इतना महंगा गिफ्ट देगा तो वह क्या
- 17:40सोचेगी?
- 17:41तो वो खेद भरे स्वर में बोली ओह सॉरी यह
- 17:46बात मुझे पता नहीं थी। अब क्या करोगे तुम?
- 17:49बोलते हुए मेनका के दिमाग में कोई बात आई
- 17:52तो वो आगे बोली एक मिनट तुम उसे अपनी
- 17:55असलियत क्यों नहीं बता देते? देवी जी मेरी
- 17:59जो उससे शादी हुई है यह [संगीत] उसकी पसंद
- 18:01से नहीं है। बल्कि यह उसकी मजबूरी की शादी
- 18:04है। जैसे ही हालात ठीक होंगे वो मुझसे
- 18:07तलाक ले लेगी। मैं नहीं चाहता कि मैं उसे
- 18:10अपनी असलियत बताकर उसे किसी उलझन में
- 18:12उलझाऊं। और दूसरी बात यह है कि मैं नहीं
- 18:15चाहता कि अभी दुनिया के सामने मेरी हकीकत
- 18:18जाहिर हो। इसीलिए मैंने तुम्हें भी कहा था
- 18:20कि मेरी हकीकत किसी के सामने जाहिर मत
- 18:23करना। अगर मेरे बारे में किसी को जानना हो
- 18:26तो तुम विक्रम को ही इस होटल के नए मालिक
- 18:28के रूप में प्रस्तुत करोगी। मेरा नाम तो
- 18:32पता ही होगा। श्रवण अगर किसी के सामने
- 18:35मेरा नाम लेना पड़े तो मुझे श्रवण के नाम
- 18:38से ही संबोधित करना। इतना बोलकर शौर्य
- 18:41रुका और अंत में अपनी बात को खत्म करता
- 18:43हुआ बोला तुम मेरी बात समझ गई ना? यह कुछ
- 18:47और है जो तुम्हें समझने की जरूरत है। वो
- 18:50सब तो ठीक है। पर तुम्हें क्या जरूरत है
- 18:52कि तुम शिप्रा के साथ बंधे हो? वो तलाक ले
- 18:55उससे पहले तुम भी तो उससे तलाक ले सकते
- 18:57हो। या कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम्हें उससे
- 19:00प्यार हो गया है।
- 19:03मेनका ने एक गहरा सवाल शौर्य से किया तो
- 19:05मेनका के सवाल से शौर्य सोच में पड़ गया
- 19:08कि उसे क्या जवाब दे। तभी कुछ सोचकर उसने
- 19:10कहा, "इसका कारण यह है कि अभी मुझे भी एक
- 19:14आइडेंटिटी की जरूरत है और यह पहचान मुझे
- 19:17अपनी असली पहचान छुपाने में मददगार साबित
- 19:20हो रही है। मेनका गौर से शौर्य की आंखों
- 19:23में देखती रही और यह जानने की कोशिश करती
- 19:26रही कि [संगीत] क्या यह सच बोल रहा है या
- 19:28यह सिर्फ बातें बना रहा है। पर उसकी आंखों
- 19:31से मेनका कुछ खास पता नहीं कर पाई। फिर एक
- 19:34लंबी सांस लेकर वो बोली।
- 19:38अब तो गिफ्ट तुमने शिप्रा को दे दिया है
- 19:40और उसने एक्सेप्ट भी कर लिया है। तो फिर
- 19:42तुम क्यों इस बात से चिंतित हो और जहां तक
- 19:45मुझे लग रहा है उसने अभी तक तुमसे कोई
- 19:47सवाल भी नहीं किया है। नहीं किया है तो
- 19:50इसका मतलब यह नहीं है कि आगे करेगी भी
- 19:53नहीं। जैसे ही उसे मैं अकेला मिलूंगा वो
- 19:56सबसे पहले यही सवाल करेगी और सिर्फ सवाल
- 19:59ही नहीं करेगी। मुझे लगता है वह गिफ्ट भी
- 20:01मुझे वापस कर देगी। शौर्य ने फिर मेनका को
- 20:05अपनी बात समझाते हुए बोला तो मेनका ने
- 20:07तुरंत ही इंकार में सिर हिलाते हुए कहा
- 20:10असंभव मैं एक बार को तो यह मान सकती हूं
- 20:13कि वो तुमसे [संगीत] सवाल करेगी पर वो
- 20:15गिफ्ट वापस कर देगी यह नहीं मान सकती तुम
- 20:19अभी शिप्रा को जानती नहीं हो वो कुछ भी कर
- 20:22सकती है शौर्य मुस्कुराते हुए बोला लेकिन
- 20:25मेनका अभी भी अपनी बात को सही साबित करने
- 20:28के लिए बोली तुम अभी लड़कियों की फितरत को
- 20:31नहीं जानते जैसी वो जताती है वैसी वह होती
- 20:34नहीं है। कोई बात नहीं ज्यादा इंतजार नहीं
- 20:38करना होगा। कल ही पता चल जाएगा। शौर्य
- 20:41विश्वास भरे स्वर में बोला तो मेनका भी
- 20:43मुस्कुरा दी और बोली ठीक है। मैं भी देखती
- 20:46हूं कि तुम उसे कितना समझते हो। अभी शौर्य
- 20:50और मेनका की बात चल ही रही थी। [संगीत]
- 20:51तभी अचानक एक शख्स धड़ाते हुए गार्ड को
- 20:54पीछे धकेल कर अंदर आ गया। शौर्य उस शख्स
- 20:58को यहां देखकर हैरान रह गया। उस शख्स के
- 21:01चेहरे पर भी शौर्य को यहां देखकर हैरानी
- 21:03थी। जो शख्स मेनका के केबिन के अंदर आया
- 21:06था वो कोई और नहीं राजकुमार टंडन था।
- 21:10दरअसल राजकुमार टंडन मेनका से मिलने ही जा
- 21:13रहा था। उसी समय उसने देखा कि शौर्य बिना
- 21:16किसी इजाजत के मेनका के कमरे में चला गया
- 21:19था। दरवाजे के बाहर खड़े गार्ड ने उसे
- 21:22रोकने की कोशिश भी नहीं की। उल्टा उसने
- 21:25शौर्य का अभिवादन सिर झुका कर किया था।
- 21:27जबकि वह खुद जब भी मेनका से मिलने आता है,
- 21:31गार्ड की अनुमति के बाद ही उसे अंदर जाने
- 21:33दिया गया। राजकुमार टंडन को यह बात हजम
- 21:36नहीं हो रही थी कि शौर्य बिना किसी इजाजत
- 21:39के मेनका केबिन में चला गया था। आखिर
- 21:42दोनों में रिश्ता क्या है? यही सोच-सच कर
- 21:45राजकुमार टंडन परेशान हो रहा था। जब उससे
- 21:48बर्दाश्त नहीं हुआ तो वह यह जानने के लिए
- 21:50कि दोनों के बीच कोई गलत संबंध तो नहीं
- 21:53है। बिना गार्ड के बाहर आने का इंतजार किए
- 21:56वह अंदर चला गया। वो उम्मीद कर रहा था कि
- 21:58वह दोनों को किसी आपत्तिजनक स्थिति में
- 22:01देखेगा। पर उसने अंदर शौर्य को मेनका के
- 22:04सामने बैठे देखा। उसकी इच्छा अधूरी रह गई।
- 22:07पर उसने यह दिखावा करने की कोशिश की कि
- 22:09जैसे उसे पता ही नहीं था कि शौर्य पहले से
- 22:12ही यहां उपस्थित था। राजकुमार टंडन ने
- 22:15हैरान स्वर में शौर्य से कहा। तुम तुम
- 22:20यहां क्या कर रहे हो?
- 22:22शौर्य अभी यह उम्मीद नहीं कर रहा था कि
- 22:24राजकुमार टंडन अचानक क्यों मेनका केबिन
- 22:26में आ जाएगा। वो सोच ही रहा था कि वो क्या
- 22:29जवाब दे कि इसी बीच मेनका ने राजकुमार
- 22:32टंडन से पूछा। मिस्टर टंडन यह क्या
- 22:35बदतमीजी है? आप यूं बिना पूछे मेरे केबिन
- 22:38के अंदर कैसे आ गए? राजकुमार [संगीत] टंडन
- 22:41मेनका की बात सुनकर हड़बड़ा गया और खुद को
- 22:44संतुलित करते हुए बोला, "मिस मेनका, मैंने
- 22:47सोचा आप अकेली हैं और मुझे थोड़ी जल्दी
- 22:49थी। इसीलिए मैं बाहर इंतजार नहीं कर पाया।
- 22:52पर मुझे उम्मीद नहीं थी कि आप किसी के साथ
- 22:54होंगी। मैं श्रवण को जानता हूं पर यह नहीं
- 22:57समझ पा रहा हूं कि यह यहां क्या कर रहा
- 22:59है।
- 23:01यह आपको जानने की जरूरत नहीं है कि श्रवण
- 23:04यहां क्या कर रहा है। आप तो बस यह बताइए
- 23:07कि आप यहां क्या करने आए हैं? मेनका रूखे
- 23:10स्वर में बोली। राजकुमार टंडन को उम्मीद
- 23:13नहीं थी कि मेनका श्रवण के सामने उससे
- 23:16इतने तीखे अंदाज में बात करेगी। पर वो खुद
- 23:18को नॉर्मल दिखाने की कोशिश करते हुए बोला,
- 23:21"मिस मेनका, मैं तो यहां पर आपका जो
- 23:24बैलेंस अमाउंट है, उसका चेक देने के लिए
- 23:26आया था। पर मुझे यह नहीं पता था कि श्रवण
- 23:29आपके साथ यहां बैठा होगा।" मिस्टर टंडन,
- 23:32मैं श्रवण की बात नहीं कर रही। मैं बस
- 23:35आपसे यह कह रही हूं कि इतनी करसी तो आपके
- 23:37अंदर होनी चाहिए कि आपको मेरे कमरे में
- 23:39आने से पहले इजाजत लेनी चाहिए थी। आप
- 23:43श्रवण को जानते हैं या नहीं जानते हैं
- 23:45इससे मेरा कोई वास्ता नहीं है। उम्मीद
- 23:48करती हूं कि आपको मेरी बात समझ आ रही
- 23:50होगी। इस बार मेनका का स्वर और भी सख्त हो
- 23:54गया था। सॉरी मिस मेनका आइंदा मैं यह
- 23:57ध्यान रखूंगा। राजकुमार टंडन को ऐसा लग
- 24:00रहा था जैसे किसी ने भरे चौराहे पर उसे
- 24:03नंगा कर दिया हो। बेइज्जती का घूंट पीते
- 24:05हुए राजकुमार टंडन अंदर ही अंदर बोले कुछ
- 24:09तो गड़बड़ है। आखिर यह भिखारी मेनका को
- 24:12कैसे जानता है? राजकुमार टंडन मेनका के
- 24:15कमरे में बैलेंस पेमेंट का चेक देने गए
- 24:17थे। लेकिन उनका असल मकसद मेनका और शौर्य
- 24:20के आपसी संबंधों को चेक करना था। जिस
- 24:23आपत्तिजनक दृश्य की कल्पना राजकुमार टंडन
- 24:25ने की थी, [संगीत] वह तो उन्हें कमरे में
- 24:27देखने को नहीं मिला, लेकिन जिस आपत्तिजनक
- 24:30व्यवहार की उन्होंने उम्मीद नहीं [संगीत]
- 24:32की थी, वो मेनका के कड़वे शब्दों में
- 24:34सुनने को मिल गया। शौर्य सामने बैठे-बैठे
- 24:37मेनका के कड़े रुख को गौर से देख रहा था।
- 24:40जब उसने देखा कि मेनका राजकुमार टंडन से
- 24:43कुछ ज्यादा ही रूढ़ हो रही है तो उसने
- 24:45आंखों के इशारे से उसे शांत रहने को कहा।
- 24:48वैसे उसे अच्छा भी लगा जिस तरह से मेनका
- 24:51ने राजकुमार टंडन की अकड़ को शांत किया
- 24:53था। लेकिन राजकुमार टंडन को यह बात ज्यादा
- 24:56ही चुभ रही थी कि मेनका ने शौर्य के सामने
- 24:59उसे झाड़ा था। शौर्य के इशारे के बाद अपने
- 25:03आप पर काबू करते हुए मेनका ने राजकुमार
- 25:05टंडन की तरफ हाथ बढ़ाया और बोली ठीक है
- 25:08मिस्टर टंडन चेक दीजिए। फिर मेनका ने
- 25:12शौर्य की तरफ देखा और बोली
- 25:15तुम इन्हें कैसे जानते हो श्रवण?
- 25:18यह मेरी पत्नी की बुआ के हस्बैंड है। यानी
- 25:21[संगीत] यह मेरे ससुर जी हुए। शौर्य शराफत
- 25:25से बोला, क्या बात करते हो? अगर ऐसा था तो
- 25:28तुम्हें मुझे पहले बताना चाहिए था। मेनका
- 25:31पूरी तरह से एक्टिंग करती हुई बोली, शौर्य
- 25:34भी उसकी एक्टिंग देखकर [संगीत] मन में उसे
- 25:36दाद देने से खुद को रोक नहीं सका। मेनका
- 25:39फिर राजकुमार टंडन की तरफ होकर बोली, माफ
- 25:42कीजिएगा मिस्टर टंडन। मुझे नहीं पता था कि
- 25:45आप श्रवण के ससुर जी हैं। कोई बात नहीं
- 25:48ऐसे हो जाता है। राजकुमार टंडन खिसियानी
- 25:51हंसी-हंसते हुए बोला, उम्मीद करती हूं कि
- 25:54पार्टी में किसी चीज की कमी नहीं रही
- 25:56होगी। कोई खास डिमांड हो तो बता दीजिए।
- 25:59मैं आपके लिए वो अरेंज करवा सकती हूं और
- 26:01इसका कोई चार्ज नहीं लगेगा। आफ्टर ऑल आप
- 26:04श्रवण के ससुर जी हैं। मेनका अपनी
- 26:07दरियादिली दिखाते हुए बोली, नहीं नहीं सब
- 26:10अरेंजमेंट बहुत बढ़िया है। अब किसी और चीज
- 26:12की जरूरत भी नहीं है। मैं तो बस आपको
- 26:14बैलेंस अमाउंट पे करने आया था। ठीक है, अब
- 26:17मैं चलता हूं। आप दोनों एंजॉय करो। इतना
- 26:20बोलकर राजकुमार टंडन वहां से निकल गया।
- 26:23लेकिन जाते-जाते भी कई सारे सवाल उनके
- 26:26दिमाग में घूम रहे थे। उनके लिए तो सबसे
- 26:28बड़े आश्चर्य की बात यही थी कि श्रवण होटल
- 26:31राजकमल के मैनेजर को कैसे जानता था और ना
- 26:34सिर्फ जानता था बल्कि दोनों को देखकर लगता
- 26:37था कि दोनों में अच्छी खासी घनिष्ठता भी
- 26:40थी। आखिर कैसे एक भिखारी की इतने बड़े
- 26:43लोगों से जान पहचान हो सकती है? अगर
- 26:45उन्हें पहले पता होता तो जब उन्होंने होटल
- 26:48को बुक किया था उस समय श्रवण के द्वारा
- 26:50होटल बुक करते तो उन्हें कुछ छूट भी मिल
- 26:52जाती। पर अब यह सोचने का क्या फायदा?
- 26:56दूसरी तरफ राजकुमार टंडन के जाने के बाद
- 26:58मेनका ने शौर्य से पूछा। मैंने टंडन साहब
- 27:02के साथ कुछ ज्यादा तो नहीं कर दिया। अरे
- 27:04नहीं तुमने तो बढ़िया डील किया। वो इसी
- 27:07लायक थे। मुझे लगता है उन्होंने मुझे यहां
- 27:09आते देख लिया होगा। इसी कारण वह बिना
- 27:12इजाजत अंदर चले आए। उनके मन में जरूर कोई
- 27:15और खिचड़ी पकने लगी होगी। शौर्य ने अपना
- 27:18अंदाजा बताया। मेनका को जब एहसास हुआ कि
- 27:21शौर्य क्या कहना चाहता है तो अचानक उसके
- 27:24चेहरे पर गुस्से की एक लहर दौड़ गई और वह
- 27:26बोली। अगर यह बात थी तो तुमने मुझे उसी
- 27:30समय हिंट क्यों नहीं दिया। अगर मुझे जरा
- 27:32भी आभास होता तो मैं उसे इतनी आसानी से
- 27:35नहीं छोड़ती।
- 27:37अरे छोड़ो अपना मूड मत खराब करो। वैसे भी
- 27:41तुमने उनकी हेकड़ी निकालने में कोई कसर
- 27:43छोड़ी भी नहीं। शौर्य हल्की मुस्कान के
- 27:46साथ बोला। अभी मेनका आगे कुछ बोलने ही
- 27:49वाली थी कि तभी शौर्य का मोबाइल रिंग करने
- 27:52लगा। उसने नंबर की तरफ देखा तो वो शिप्रा
- 27:54का कॉल था। उसने कॉल उठाया और कहा हेलो
- 27:59आ जाओ। अब मैं घर के लिए निकलने वाली हूं।
- 28:02शिप्रा ने बिना किसी औपचारिकता के शौर्य
- 28:05को आने के लिए बोल दिया। ठीक है मैं 5
- 28:07मिनट में आता हूं। इतना बोलकर शौर्य ने
- 28:10फोन काट दिया। मेनका का ध्यान शौर्य की
- 28:13बातों की तरफ ही था। उसने कहा तुम जा रहे
- 28:17हो? मैंने सोचा तुम रात होटल में ही
- 28:19बिताओगे। नहीं फिर कभी अभी तो जाना
- 28:23पड़ेगा। इतना बोलकर शौर्य अपनी जगह से उठ
- 28:26खड़ा हुआ। दूसरी तरफ राजकुमार टंडन को चैन
- 28:29नहीं था। उन्हें यह बात परेशान किए हुए थी
- 28:32कि श्रवण मेनका को कैसे जानता है। जब
- 28:35उन्हें कुछ समझ नहीं आया तो उन्होंने सोचा
- 28:37शायद शिप्रा को पता होगा क्यों ना उसी से
- 28:40पूछ लिया जाए। यह सोचकर वो शिप्रा को
- 28:43ढूंढते हुए उसके पास पहुंचे। शिप्रा इस
- 28:45समय अपने पापा के साथ खड़ी थी। राजकुमार
- 28:48टंडन ने बड़े प्यार से शिप्रा से पूछा।
- 28:51शिप्रा बेटी मुझे तुमसे एक बात पूछनी थी।
- 28:55शिप्रा को हैरानी हुई कि उसके फूफा भला
- 28:57उससे क्या पूछना चाहते हैं? उसने आशंकित
- 29:00स्वर में कहा क्या जानना चाहते हैं फूफा
- 29:03जी टंडन साहब शिप्रा के चेहरे को ध्यान से
- 29:06देखते हुए बोले बेटे यह अपना श्रवण मिस
- 29:10मेनका को कैसे जानता है शिप्रा को समझ
- 29:13नहीं आया कि वो किस मेनका की बात कर रहे
- 29:15हैं सवालिया नजरों से उसने पूछा यह मेनका
- 29:19कौन है फूफा जी अरे मिस मेनका होटल राजकमल
- 29:23की मैनेजर है श्रवण उसको कैसे जानता है
- 29:26टंडन साहब अपनी बात को स्पष्ट करते हुए
- 29:28बोले बोले टंडन साहब की बात सुनकर शिप्रा
- 29:32को एक झटका सा लगा। उसने सोचा यह कैसे हो
- 29:35सकता है? कहा श्रवण और कहा मिस मेनका इन
- 29:38दोनों का क्या मेल? भला श्रवण मिस मेनका
- 29:41को कैसे जानेगा? इसीलिए उसने कहा आप कैसी
- 29:44बातें कर रहे हैं फूफा जी। भला श्रवण मिस
- 29:47मेनका को कैसे जानेगा? शिप्रा के चेहरे के
- 29:50भाव को देखकर राजकुमार टंडन समझ गए कि इस
- 29:53बारे में शिप्रा को भी कुछ नहीं पता है।
- 29:55यह सोचकर उनके दिमाग में सोई पड़ी खुराफात
- 29:58अचानक से जाग गई और वह बोले तुम बहुत भोली
- 30:02हो शिप्रा बेटी। श्रवण ना सिर्फ मिस मेनका
- 30:05को जानता है बल्कि दोनों के बीच घनिष्ठता
- 30:08भी है। शिप्रा को राजकुमार टंडन की बात पर
- 30:11विश्वास ही नहीं हो रहा था। वो कैसे यह
- 30:14बात मान सकती थी कि श्रवण मिस मेनका को
- 30:16पहले से जानता हो। ना ही इस बारे में उसने
- 30:19शिप्रा से कुछ कहा था। लेकिन वो अपने फूफा
- 30:22जी की बात को भी तो झुठला नहीं सकती थी।
- 30:24फिर भी यह जानने के लिए कि उसके फूफा जी
- 30:27को कैसे पता चला कि श्रवण मेनका को कैसे
- 30:29जानता है? उसने उनसे पूछा।
- 30:32फूफा जी आप इतने विश्वास के साथ कैसे कह
- 30:35सकते हैं कि श्रवण मिस मेनका को पहले से
- 30:38जानता है? शिप्रा की बात सुनकर राजकुमार
- 30:41टंडन जोर से हंसे और बोले तुम्हें क्या
- 30:44लगता है कि मैं तुमसे मजाक कर रहा हूं।
- 30:46अरे मैंने खुद अपनी आंखों से देखा है। अभी
- 30:49जब मैं मिस मेनका को पेमेंट करने गया था
- 30:51तो श्रवण पहले से ही उनके केबिन में बैठा
- 30:54हुआ था। मिस मेनका ने तो यहां तक कहा कि
- 30:56अगर आपको कुछ और चाहिए तो मैं वह भी अरेंज
- 30:59करवा सकती हूं और उसका कोई चार्ज भी नहीं
- 31:02लगेगा। इसका मतलब तुम समझती हो ना कि
- 31:04दोनों कितने क्लोज हैं।
- 31:07जिस तरह से राजकुमार टंडन शिप्रा को शौर्य
- 31:10के बारे में बता रहे थे, उससे शिप्रा इतना
- 31:12समझ रही थी कि उनके कहने का मकसद सिर्फ
- 31:15पहचान बताना नहीं बल्कि यह जताना भी था कि
- 31:18दोनों के बीच दोस्ती से बढ़कर रिश्ता है।
- 31:20अगर ऐसा होता भी तो शिप्रा को इससे कोई
- 31:23खास फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वह पहले ही
- 31:25अपने और शौर्य के रिश्ते को स्पष्ट कर
- 31:27चुकी थी। इसीलिए शौर्य किसके साथ क्या
- 31:30रिश्ता रखता है यह उसके लिए मायने नहीं
- 31:32रखता था। लेकिन उसके लिए यह मानना मुश्किल
- 31:35था कि शौर्य मिस मेनका को इतनी अच्छी तरह
- 31:38जानता है कि किसी को उनके बीच खास रिश्ता
- 31:40होने का शक हो सकता है। शिप्रा को समझ
- 31:44नहीं आया कि वह अपने फूफा जी को क्या जवाब
- 31:46दे। इसीलिए उसने बात टालते हुए कहा।
- 31:49एक्चुअली मुझे भी इस बारे में कुछ पता
- 31:51नहीं। श्रवण आएगा तो मैं उससे पूछ लूंगी
- 31:54कि वह मिस मेनका को कैसे जानता है। हां
- 31:57जरूर पूछना। पता नहीं अचानक ही उसका
- 31:59व्यक्तित्व कुछ रहस्यमई होता जा रहा है।
- 32:02राजकुमार टंडन संदेह भरे स्वर में बोले।
- 32:06शिप्रा अपने फूफा जी के इरादे को समझ रही
- 32:08थी। लेकिन उसने उनकी बातों पर ध्यान नहीं
- 32:10दिया। खैर उसे ज्यादा इंतजार नहीं करना
- 32:13पड़ा। अगले कुछ ही पलों में उसे श्रवण
- 32:15सामने से आता दिखाई दिया। शिप्रा ने उसे
- 32:18ध्यान से देखा। उसका व्यक्तित्व अब पहले
- 32:21से कहीं ज्यादा प्रभावशाली लग रहा था। वो
- 32:23समझ नहीं पा रही थी कि इन कुछ दिनों में
- 32:25ऐसा क्या बदल गया जो श्रवण इतना अलग नजर
- 32:28आने लगा है। उसकी स्मार्टनेस ऐसी थी कि
- 32:31पूरी पार्टी में वह सबसे अलग दिख रहा था।
- 32:33ऐसा व्यक्तित्व जिस पर किसी की भी नजर टिक
- 32:36जाए। शिप्रा ने आज से पहले कभी शौर्य को
- 32:39इतने ध्यान से नहीं देखा था। उसमें कुछ तो
- 32:42ऐसा था जो उसे दूसरों से अलग बनाता था।
- 32:45फिर उसने सोचा क्या सच में ऐसा हो सकता है
- 32:48कि मिस मेनका श्रवण को पसंद करती हो पर
- 32:52कैसे? कहां मिस मेनका इतनी बड़ी हस्ती और
- 32:55कहां श्रवण दोनों में कोई मेल ही नहीं।
- 32:58फिर यह कैसे संभव है? राजकुमार टंडन अभी
- 33:01भी शिप्रा के साथ ही खड़े थे। वह भी जानना
- 33:04चाहते [संगीत] थे कि श्रवण मिस मेनका को
- 33:05कैसे जानता है। वो सोच रहे थे कि अगर वह
- 33:08यहां से चले गए तो फिर पता नहीं श्रवण से
- 33:11बात करने का मौका मिलेगा या नहीं।
- 33:14यही सोचकर वह खुद ही श्रवण से बात करना
- 33:16चाहते थे। जब श्रवण शिप्रा के पास आ गया
- 33:19और उसने राजकुमार टंडन को शिप्रा के साथ
- 33:22खड़ा देखा तो वह समझ गया कि जरूर फूफा जी
- 33:25ने शिप्रा को सारी [संगीत] कहानी बता दी
- 33:27होगी। यही सोचकर वो अपने दिमाग में एक
- 33:30स्क्रिप्ट तैयार करने लगा कि उसे शिप्रा
- 33:32को कैसे और क्या जवाब देना है। जब शौर्य
- 33:35राजकुमार टंडन के पास पहुंचा तो वो
- 33:38मुस्कुराते हुए बोले अरे श्रवण बेटा तुमने
- 33:41पहले बताया नहीं कि तुम मिस मेनका को इतनी
- 33:44अच्छी तरह जानते हो।
- 33:47इसी समय राधिका जिसने शौर्य को बाहर से
- 33:49आते देख लिया था वहां आ गई। उसने देखा कि
- 33:52उसके पापा भी उसके पास खड़े हैं तो वह भी
- 33:55वहीं आकर खड़ी हो गई। जब उसने अपने पापा
- 33:57की बात सुनी तो वह आश्चर्य से बोली ये आप
- 34:01क्या कह रहे हैं पापा श्रवण मिस मेनका को
- 34:04जानता है यह कैसे हो सकता है
- 34:07तुम चुप रहो तुम्हें क्या लगता है कि मैं
- 34:10मजाक कर रहा हूं मैंने अपनी आंखों से
- 34:12दोनों को साथ में बैठे देखा है राजकुमार
- 34:15टंडन राधिका को झपट कर बोला
- 34:18क्या फूफा जी सच कह रहे हैं श्रवण तुम मिस
- 34:21मेनका को पहले से जानते हो शिप्रा ने भी
- 34:24अपने फूफा जी की बात की पुष्टि करने के के
- 34:26लिए श्रवण से पूछ लिया। वैसे वह सबके
- 34:29सामने उससे पूछना नहीं चाहती थी। हां बेटे
- 34:32तुम्हें बताना चाहिए था। जानते हो मिस
- 34:35मेनका इस शहर की कितनी बड़ी हस्ती हैं।
- 34:37राजा साहब भी इन्हें कितना पसंद करते हैं
- 34:40और तुम दोनों को साथ में देखकर मुझे लगा
- 34:42कि तुम दोनों की अच्छी जमती है। राजकुमार
- 34:46टंडन दिखाने को तो शौर्य की तारीफ कर रहे
- 34:48थे। पर कहने का तरीका ऐसा था जैसे वह यह
- 34:51दिखाना चाहते हो कि उसके और मिस मेनका के
- 34:53बीच कुछ चल रहा है।
- 34:55शौर्य उनके कहने का भाव समझ गया था। पर
- 34:58उसने इसे गलत ढंग से नहीं लिया और हंसते
- 35:00हुए बोला हां अंकल हम दोनों की पुरानी
- 35:03पहचान है। किसी काम के सिलसिले में आज
- 35:06अचानक ही मिलना हो गया। पुरानी पहचान पर
- 35:10तुमने कभी बताया नहीं कि तुम मिस मेनका
- 35:12जैसी हस्ती को पहले से जानते हो। यहां तक
- 35:15कि तुमने शिप्रा को भी अपनी इस पहचान के
- 35:17बारे में नहीं बताया। राजकुमार टंडन श्रवण
- 35:20पर सवाल खड़े करते हुए बोले मैं मिस मेनका
- 35:24के अलावा भी और कई हस्तियों [संगीत] को
- 35:25जानता हूं और मैंने किसी के भी बारे में
- 35:28किसी को कुछ नहीं बताया है। कभी जरूरत ही
- 35:31नहीं पड़ी और बताने का कोई कारण भी तो हो।
- 35:34शौर्य व्यंग्ञात्मक अंदाज में बोला। शौर्य
- 35:37का जवाब सुनकर राजकुमार टंडन आगे कुछ नहीं
- 35:40बोल पाए। शिप्रा सिर्फ दोनों की बात
- 35:42[संगीत] सुनती रही वो कुछ बोली नहीं।
- 35:44राधिका जो अब तक शौर्य को कुछ समझ नहीं
- 35:47रही थी। अचानक उसे शौर्य का व्यक्तित्व
- 35:49प्रभावशाली नजर आने लगा। वो इस बात से
- 35:52हैरान थी कि इतना शानदार व्यक्तित्व होने
- 35:55के बाद भी वो भिखारी का जीवन क्यों जी रहा
- 35:57था। राधिका तारीफ भरे अंदाज में अपनी
- 36:00आंखें बड़ी करती हुई बोली। तुम तो बड़े
- 36:03छुपे रुस्तम हो श्रवण। पता नहीं अभी और
- 36:05कितने रूप तुम्हारे देखने पड़ेंगे।
- 36:08शौर्य ने महसूस किया कि जो राधिका अब तक
- 36:10उसे जीजू और आप कहकर बुला रही थी, अचानक
- 36:13उसे उसके नाम से बुलाने लगी।
- 36:16क्या बात है राधिका? तुम अपने जीजू को
- 36:19सीधे नाम से पुकारने लगी हो। शिप्रा तंज
- 36:22भरे स्वर में बोली तो राधिका तुरंत ही
- 36:24सफाई देते हुए बोली वो तो श्रवण को ही
- 36:27मेरा जीजू बोलना पसंद नहीं इसलिए मैं नाम
- 36:29से ही बुला रही हूं। राधिका के श्रवण के
- 36:32लिए मीठे बोल और मेनका के साथ श्रवण की
- 36:34पहचान के ताजा समाचारों ने शिप्रा के
- 36:37दिमाग में हलचल मचाना शुरू कर दिया था।
- 36:39होटल राजकमल में शौर्य और मेनका को साथ
- 36:42देखने के बाद राजकुमार टंडन को ऐसा लग रहा
- 36:44था मानो उनके हाथ में शिप्रा और शौर्य की
- 36:47ऐसी कमजोरनेस आ गई है जिसे दबाने से ना
- 36:50केवल दर्द होगा बल्कि दोनों के रिश्तों
- 36:53में दरार भी पड़ जाएगी। इसीलिए यह
- 36:55ब्रेकिंग न्यूज़ शिप्रा को सुनाने के बाद
- 36:58टंडन साहब यह उम्मीद लिए बैठे थे कि वह
- 37:00अपने मकसद में कामयाब हो जाएंगे और मेनका
- 37:03के रूम में हुई उनकी बेइज्जती का घाव भी
- 37:05भर जाएगा। खैर घाव तो होटल राजकमल की
- 37:09पार्टी ने कईयों को दिए। राजकुमार टंडन
- 37:12अकेले नहीं थे जो जख्मी थे। मुख्तार भाई,
- 37:15रजत, नैना देवी और इन सबके साथ खुद बर्थडे
- 37:19कल राधिका भी थी जो शौर्य का नया अवतार और
- 37:21शिप्रा को शौर्य का दिया महंगा गिफ्ट
- 37:23देखकर जल चुकी थी। और अपनी गिरगिटी स्वभाव
- 37:26के अनुरूप बदल भी चुकी थी। जैसे ही राजकमल
- 37:30होटल के बाहर शौर्य से राधिका का सामना
- 37:32हुआ। वो शौर्य के साथ बातचीत में जीजू से
- 37:36श्रवण और आपसे तुम में उतर गई। लेकिन साथ
- 37:38खड़ी शिप्रा को राधिका की यह बात पसंद
- 37:41नहीं आई।
- 37:44लोग कितनी जल्दी बदल जाते हैं और बहाना
- 37:46ऐसा बनाते हैं जिसका कोई मतलब नहीं।
- 37:49शिप्रा सामान्य भाव में बोली पर उसका
- 37:52इशारा शौर्य से तू तड़ाक करके बात कर रही
- 37:54राधिका की तरफ ही था। फिर वह राजकुमार
- 37:58टंडन की तरफ पलट कर बोली।
- 38:01अब हम निकलते हैं फूफा जी। इतना कहकर उसने
- 38:04तुरंत ही शौर्य की ओर देखा और बोली, चलें।
- 38:08शौर्य ने सहमति जताई और वो शिप्रा के साथ
- 38:10बाहर की तरफ बढ़ गया। अभी वे दोनों कुछ
- 38:13कदम ही बड़े थे कि पार्टी का एक और घायल
- 38:15किरदार रजत उनके सामने आकर खड़ा हो गया और
- 38:18बोला,
- 38:20नमस्कार।
- 38:22यह क्या बदतमीज़ी है? तुम मेरे सामने क्या
- 38:25करने आए हो? मेरा रास्ता छोड़ो। शिप्रा
- 38:27रजत को घूरते हुए तीखे अंदाज में बोली ऐसी
- 38:31भी क्या नाराजगी मिस शिप्रा हमने तो आपके
- 38:33लिए अपनी दुश्मनी भी भुला दी और आप हैं कि
- 38:36अभी भी हमसे रूठी हुई है। रजत मुस्कुराने
- 38:40का भरसक प्रयास करता हुआ बोला तो शिप्रा
- 38:42ने मखौल उड़ाने वाले भाव में कहा नाराजगी
- 38:46उनसे होती है जिन्हें हम अपना मानते हैं।
- 38:49पर माफ कीजिएगा आप तो हमारी उस लिस्ट में
- 38:51ही [संगीत] नहीं हैं।
- 38:53शौर्य ने एक बार मुट्ठियां जरूर कसी,
- 38:56लेकिन फिर उसने तुरंत ही खुद को काबू कर
- 38:57लिया। अभी वह उन दोनों की तकरार भरी बातों
- 39:00को सिर्फ सुन रहा था। उसने बीच में दखल
- 39:03देने की कोई कोशिश नहीं की। यह तो हमारे
- 39:06ऊपर बड़ी ज्यादती है। हमने तो यह सोचकर
- 39:08सुलह करने की कोशिश की थी कि शायद इसके
- 39:11बाद आप हमारी नूर नजर होंगी। पर आप तो
- 39:14लगातार हमारा दिल तोड़ रही हैं। रजत
- 39:17शायराना अंदाज में बोला। लेकिन शिप्रा भी
- 39:19चुपचाप सुनने वाली कहां? वो बोली फिर तो
- 39:23आदत डाल ही लीजिए। ऐसे अगर शीशे का दिल
- 39:25लेकर घूमेंगे तो यह ऐसे ही बार-बार टूटता
- 39:28रहेगा। रजत का चेहरा शिप्रा का जवाब सुनकर
- 39:32लाल हो गया। वो शौर्य की तरफ देखते हुए
- 39:34बोला। लगता है इस भिखारी की संगत कुछ
- 39:37ज्यादा ही रास आ रही है। तभी तो महल और
- 39:40झोपड़े का फर्क नजर नहीं आ रहा। वो फर्क
- 39:43तो अभी थोड़ी देर पहले पार्टी में सब ने
- 39:45देख ही लिया कि महल में रहने वाले के
- 39:48गिफ्ट और झोपड़े में रहने वाले के गिफ्ट
- 39:50में क्या अंतर था। शिप्रा थोड़ी देर पहले
- 39:53शौर्य द्वारा दिए गए गिफ्ट की तरफ रजत का
- 39:56ध्यान दिलाते हुए बोली
- 39:58मैं देख रहा हूं कुछ ज्यादा ही जुबान तेज
- 40:01हो गई है तुम्हारी। ध्यान रखना कहीं इसके
- 40:04कारण बड़ा खामियाजा नहीं भुगतना पड़ जाए।
- 40:07रजत जब बातों से नहीं जीता तो अप्रत्यक्ष
- 40:10रूप से धमकाते हुए बोला
- 40:12तुम मेरी चिंता छोड़कर अपनी चिंता कर लो।
- 40:15वो तुम्हारे लिए ज्यादा बेहतर होगा। अब
- 40:17अगर तुम्हारी बकवास खत्म हो गई हो तो मेरा
- 40:20रास्ता छोड़ो। इतना बोलकर शिप्रा शौर्य के
- 40:24साथ रजत के साइड से निकल कर आगे बढ़ गई।
- 40:27रजत के साथ शिप्रा के तकरार के वक्त अगर
- 40:30शौर्य चाहता तो बीच में पड़ सकता था। पर
- 40:32उसने जानबूझकर कुछ नहीं बोला था। वो देख
- 40:35रहा था कि शिप्रा स्वयं रजत को अच्छे से
- 40:37हैंडल कर पा रही थी। शौर्य को यह देखकर भी
- 40:40अच्छा लग रहा था कि शिप्रा ने रजत को जवाब
- 40:43देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। होटल से
- 40:46निकलकर शौर्य शिप्रा के साथ उसके घर की
- 40:48तरफ बढ़ गया। राजदीप राय और बीना जी राहुल
- 40:52के साथ पहले ही वहां से निकल गए थे।
- 40:54शिप्रा कार में थी लेकिन उसके दिमाग में
- 40:57मेनका वाली बात ही चल रही थी। अभी क्योंकि
- 41:00शौर्य शिप्रा के साथ गाड़ी में अकेला था
- 41:02तो शिप्रा ने सोचा यही सही मौका है और
- 41:05उसने पूछ ही लिया तुम मिस मेनका को कैसे
- 41:08जानते हो? दरअसल मैंने वहां सबके सामने
- 41:12तुमसे सवाल करना सही नहीं समझा लेकिन अब
- 41:14यहां कोई नहीं है। इसलिए अगर तुम चाहो तो
- 41:17मुझे बता सकते हो। यह मत समझना कि तुम्हें
- 41:20मेरे सवाल का जवाब देना ही होगा। पर यह
- 41:22बात मेरे मन को लगातार परेशान कर रही है।
- 41:25इसीलिए जिज्ञासा वश मैं तुमसे यह जानना
- 41:27चाहती हूं।
- 41:29शौर्य को पहले से ही यह उम्मीद थी कि यह
- 41:31सवाल उसके सामने आने वाला है। इसीलिए उसने
- 41:34कहा,
- 41:35एक्चुअली यह सब मेरे जॉब से रिलेटेड है।
- 41:39अपने जॉब के सिलसिले में ही मेरा मिस
- 41:41मेनका से कई बार मिलना हुआ था और हम दोनों
- 41:43की अच्छी जमने लगी। बस इतनी सी बात है।
- 41:47बोलते बोलते शौर्य यह सोच भी रहा था कि
- 41:49मिस मेनका को वो अपनी जॉब से कैसे रिलेट
- 41:51करें। मैं समझी नहीं। मिस मेनका भला
- 41:55तुम्हारे जॉब के बीच में कहां से आ गई?
- 41:58शिप्रा शक भरे अंदाज में बोली। तभी शौर्य
- 42:01ने कहा, "ऐसा है कि मेरे बॉस ने अपना ऑफिस
- 42:04होटल राजकमल के ही पास लिया है और मुझे जो
- 42:07सबसे पहला काम मिला है, वो एक कंपनी की
- 42:10ब्रांडिंग करना है। उसके लिए एक ऐड बनाना
- 42:13है और हर माध्यम से उसे एडवर्टाइज करना है
- 42:16ताकि जल्दी से जल्दी वो ब्रांड पॉपुलर हो
- 42:18जाए। एक्चुअली इसी सिलसिले में मुझे एक
- 42:22पॉपुलर मॉडल की तलाश थी। अभी की जो सबसे
- 42:25पॉपुलर मॉडल नताशा है वो मिस मेनका की
- 42:28दोस्त है। मिस मेनका के जरिए ही मैं मिस
- 42:31नताशा से बात कर पाया और वो मुझसे मिलने
- 42:33के लिए भी तैयार हो गई। कहते हुए शौर्य एक
- 42:36कड़ी को दूसरी कड़ी से जोड़ने की कोशिश कर
- 42:39रहा था ताकि शिप्रा को उस पर शक ना हो।
- 42:42कहीं तुम उस फेमस मॉडल नताशा की बात तो
- 42:45नहीं कर रहे? वो तो बहुत पॉपुलर है और जिस
- 42:48भी ब्रांड का उसने कैंपेन किया है वो बहुत
- 42:50सक्सेस हुआ है। शिप्रा नताशा का नाम सुनकर
- 42:54बीच में बोल पड़ी लेकिन फिर कुछ सोचकर
- 42:56उसने कहा पर तुम मेनका से कैसे मिले? मिस
- 43:00मेनका से मुझे मेरे बॉस ने मिलाया था। और
- 43:03एक दो बार मिलने से हमारी जान पहचान हो गई
- 43:05या ऐसा कह सकते हैं कि दोस्ती हो गई।
- 43:08क्योंकि हमारे बॉस ने कहा था कि आगे भी
- 43:11अगर मुझे कहीं मिस मेनका की हेल्प की
- 43:12जरूरत होगी तो मैं उनसे ले सकता हूं।
- 43:16शौर्य संतुष्ट भाव से बोला। उसने मन ही मन
- 43:19सोचा कि उसने एक ठीक-ठाक कहानी बना ली है।
- 43:22तभी शिप्रा ने अगला सवाल किया। कौन है
- 43:25तुम्हारा बॉस?
- 43:27इस पर शौर्य एक पल को सोचकर बोला, विक्रम
- 43:31विक्रम चौहान। शिप्रा ने विक्रम चौहान का
- 43:34नाम सुनकर एक पल को सोचा कि क्या वो इस
- 43:37नाम के किसी व्यक्ति से परिचित है? पर उसे
- 43:39याद नहीं आया। फिर उसने अगला सवाल दाग
- 43:42दिया।
- 43:43तुम जो यह ऐड बनाने वाले हो वो किस कंपनी
- 43:46के लिए है?
- 43:48शौर्य ने एक पल सोचा कि एक ही साथ सारे
- 43:51पत्ते खोलना ठीक नहीं है। इसीलिए उसने कहा
- 43:54एक्चुअली अभी तो मुझे उस कंपनी का नाम पता
- 43:56नहीं है। पर शायद एक-द दिनों में इस संबंध
- 43:59में हमारी मीटिंग होगी। तब जाकर पता चलेगा
- 44:02कि हमें यह ऐड किस कंपनी के लिए बनाना है।
- 44:06अभी तो बॉस ने हमें सिर्फ मिस नताशा को
- 44:08फाइनल करने के लिए और साथ में शूटिंग की
- 44:10सारी तैयारी कर लेने के लिए कहा था। तो
- 44:13अभी हमारी यही प्रक्रिया चल रही है। तभी
- 44:16शिप्रा कुछ याद करते हुए बोली पता है कभी
- 44:20मैंने भी सोचा था कि मिस नताशा से ही मैं
- 44:22अपने ब्रांड का एंडोर्समेंट करवाऊंगी। पर
- 44:25बजट ने इसकी परमिशन नहीं दी। [संगीत] शायद
- 44:27भविष्य में मैं ऐसा कर पाऊं। अच्छा यह तो
- 44:31बढ़िया आईडिया है। अगर तुम कहो तो मैं इस
- 44:34बारे में मिस नताशा से बात करूं। शौर्य
- 44:37शिप्रा के मन की इच्छा को टटोलते हुए बोला
- 44:40तो शिप्रा ने मना करते हुए कहा नहीं नहीं
- 44:43अभी इसकी कोई जरूरत नहीं है। अभी हमारी
- 44:45बातें बिग बुल के साथ हुई हैं। बिगबुल के
- 44:48भी कुछ प्लान है। फिर देखते हैं। ठीक है
- 44:52जैसी तुम्हारी इच्छा। शौर्य ने सहमति
- 44:55जताई। शौर्य की यह सब बातें सुनकर शिप्रा
- 44:58ने सोचा। श्रवण ने इतनी जल्दी अपने लिए
- 45:01इतना अच्छा जॉब कैसे ढूंढ लिया? क्या उसे
- 45:04समझने में मुझसे कोई गलती हुई है? क्या वो
- 45:07यह सब संभाल पाएगा? क्या सच में वो इतना
- 45:10एजुकेटेड है कि इतना कुछ खुद ही मैनेज कर
- 45:12ले? शिप्रा को उसकी बातें सुनकर उसके
- 45:15कैलिबर पर आश्चर्य हो रहा था। इस जॉब के
- 45:18लिए उसे कितने ही लोगों से मिलना पड़ेगा।
- 45:21उनसे बात करनी पड़ेगी और उन सबको हैंडल
- 45:24करना आसान नहीं होगा। वहीं शिप्रा ने तो
- 45:26उसे एक भिखारी समझकर उसे कोई खास उम्मीद
- 45:29ही नहीं की थी।
- 45:31शौर्य का जॉब प्रोफाइल जानकर उसे एक सुखद
- 45:34अनुभूति हुई। वो खुश होकर बोली मुझे बहुत
- 45:38खुशी है कि तुम्हें इतना अच्छा जॉब मिला
- 45:40है। मैं चाहकर भी तुम्हारे लिए ऐसा कुछ
- 45:43नहीं कर सकती थी। मेरे दादाजी ने भी जो
- 45:46तुम्हारे लिए सोचा था वो एक ड्राइवर के
- 45:48जॉब तक ही सीमित था। पर तुम तो सबकी
- 45:51उम्मीद से बेहतर निकले। शौर्य को शिप्रा
- 45:54से अपने लिए तारीफ भरी बातें सुनकर अच्छा
- 45:56लगा। इस समय आधी रात हो रही थी। शौर्य
- 46:00गाड़ी ड्राइव कर रहा था और शिप्रा उसके
- 46:02बगल वाली सीट पर बैठी थी। सड़क बिल्कुल
- 46:04सुनसान थी। इक्कादुक्का गाड़ियां ही आसपास
- 46:07से गुजर रही थी। शौर्य ने गाड़ी का शीशा
- 46:10खोल दिया। खिड़की से आती हल्की-ठंडी हवा
- 46:13सुकून देने वाली थी। शिप्रा की लटें हवा
- 46:16में अटखेलियां करने लगी। उसे इतना अच्छा
- 46:18लगा कि उसने अपना सिर थोड़ा सा खिड़की के
- 46:21बाहर निकालकर खिड़की की हुड़ पर अपनी
- 46:23ठोड़ी टिकाई और आंखें बंद करके हवा को
- 46:26अपने चेहरे पर महसूस करने लगी। शौर्य ने
- 46:29जब शिप्रा की तरफ देखा तो उसकी नजर उसके
- 46:31चेहरे पर ठहर सी गई। कितना सुकून था उस
- 46:34चेहरे में। शौर्य को लगा अगर वक्त यहीं
- 46:37ठहर जाए तो कितना अच्छा हो। वो यूं ही
- 46:40घंटों शिप्रा को देखता रह सकता है। वो इस
- 46:42हसीन [संगीत] पल को अपनी यादों में समेट
- 46:44लेना चाहता था। उसने मन ही मन कहा। शिप्रा
- 46:49मुझे यही सुकून तुम्हारे चेहरे पर चाहिए।
- 46:52और यह मेरा वादा है कि मैं इस चेहरे को
- 46:54कभी किसी परेशानी को छूने नहीं दूंगा। पर
- 46:58कहते हैं ना कि अच्छा वक्त किसी को ज्यादा
- 47:01वक्त नहीं देता। खैर जल्दी ही शिप्रा का
- 47:04घर आ गया। शौर्य ने गाड़ी खड़ी कर दी पर
- 47:07शिप्रा अभी भी उसी अवस्था में कहीं खोई
- 47:09थी। शौर्य कुछ बोला नहीं। बस वहीं बैठा
- 47:12खामोशी से शिप्रा के चेहरे की तरफ देखता
- 47:15रहा। ऐसे ही कुछ पल और बीत गए। फिर अचानक
- 47:18शिप्रा को एहसास हुआ कि गाड़ी तो चल ही
- 47:20नहीं रही है। उसने आंख खोलकर अपने आसपास
- 47:24देखा तो पाया कि वह अपने घर पहुंच चुकी
- 47:26थी। उसने शौर्य की तरफ देखते हुए पूछा।
- 47:30अरे हम कब पहुंचे? ज्यादा समय नहीं हुआ
- 47:34है। बस अभी कुछ देर पहले ही पहुंचे हैं।
- 47:37तो तुमने मुझे उठाया क्यों नहीं? शौर्य का
- 47:40जवाब सुनकर शिप्रा हैरानी से बोली। तभी
- 47:43शौर्य ने मासूमियत से कहा। आप गहरी नींद
- 47:46में लग रही थी इसीलिए उठाया नहीं। यह क्या
- 47:50बात हुई? ऐसे तो मैं जाने कब तक सोती
- 47:52रहती। शिप्रा अपनी आंखें बड़ी करके बोली
- 47:55तो शौर्य ने सीधा सपाट जवाब दिया। मुझे
- 47:59कौन सा अभी ऑफिस जाना था? जब तक आप सोती
- 48:02रहती, मैं भी अपनी सीट पर ही आराम करता
- 48:04रहता। शौर्य की बात सुनकर शिप्रा जैसे
- 48:07सन्न रह गई। पर उसे उसकी यह बातें पसंद ही
- 48:10आ रही थी। शिप्रा ने गाड़ी का गेट खोला और
- 48:13नीचे उतर कर बोली, ठीक है, गाड़ी पार्क
- 48:17करके आ जाओ। मैं यहीं तुम्हारा इंतजार
- 48:19करती हूं। शौर्य गाड़ी पार्किंग में खड़ी
- 48:21करके वापस आ गया। वो और शिप्रा धीरे-धीरे
- 48:24कदम बढ़ाते हुए घर की तरफ बढ़ गए। शौर्य
- 48:28की जिंदगी में आज कुछ नया होने जा रहा था
- 48:31क्योंकि आज से उसका आशियाना बदल चुका था।
- 48:33वो मन ही मन सोच रहा था। जिंदगी में ऐसी
- 48:37रात भी आएगी कल्पना भी नहीं की थी। शिप्रा
- 48:41के साथ उसके घर में रहना यह सोचकर ही
- 48:43शौर्य रोमांचित हो रहा था। राय विला की
- 48:46ऊंची और भव्य दीवारों के पीछे रात का
- 48:48सन्नाटा अब अपने चरम पर था। घर के भीतर
- 48:51अंधेरा और खामोशी का राज था। इसी खामोशी
- 48:55के बीच शौर्य शिप्रा के पीछे-पीछे उसके घर
- 48:57की तरफ कदम बढ़ा रहा था। शिप्रा के चलने
- 49:00की गति में एक तरह की सावधानी थी। जैसे वह
- 49:03जमीन पर अपने पैरों की आहट भी नहीं होने
- 49:05देना चाहती थी। रात बहुत हो चुकी थी। घर
- 49:09के सभी सदस्य गहरी नींद [संगीत] में थे।
- 49:11शिपरा मुख्य द्वार के पास पहुंची और एक पल
- 49:14के लिए ठिटक गई। उसके मन में विचार आया कि
- 49:17वह बैल बजाए ताकि कोई अंदर से आकर दरवाजा
- 49:19खोल दे। पर अगले ही पल उसने अपनी कलाई पर
- 49:22बंधी घड़ी देखी। इतनी रात [संगीत] गए किसी
- 49:25को भी नींद से जगाना और परेशान करना उसे
- 49:28ठीक नहीं लगा। [संगीत] उसने अपना इरादा
- 49:30तुरंत बदल लिया। उसने अपने कीमती लेदर के
- 49:33पर्स को खोला और उसमें हाथ डालकर चाबियों
- 49:35का एक गुच्छा निकाला। ताले में चाबी के
- 49:38घूमने की हल्की सी क्लिक की आवाज हुई जो
- 49:41सन्नाटे में किसी धमाके जैसी महसूस हुई।
- 49:44शिप्रा ने धीरे से पल्ला धकेला और घर के
- 49:46अंदर कदम रखा। शौर्य भी एक साए की तरह
- 49:50उसके ठीक पीछे-पीछे अंदर आ गया। यह शौर्य
- 49:53के लिए एक बिल्कुल नया अनुभव था। वो पहली
- 49:55बार शिप्रा के घर के आलीशान माहौल को अंदर
- 49:58से देख रहा था। फर्श पर बिछी महंगी टाइलें
- 50:02और दीवारों पर टंगी पेंटिंग्स [संगीत] रात
- 50:04की हल्की रोशनी में भी अपनी भव्यता का
- 50:06एहसास करा रही थी। शिप्रा ने बिना पीछे
- 50:09मुड़े बस अपने हाथ के इशारे से शौर्य को
- 50:12अपने पीछे आने का संकेत दिया। वो बहुत ही
- 50:15दबे पांव लकड़ी की बनी शानदार सीढ़ियों की
- 50:18तरफ बढ़ी और फर्स्ट फ्लोर की ओर जाने
- 50:20[संगीत] लगी। शौर्य के मन में कई सवाल थे
- 50:23पर उसने खामोश रहना ही बेहतर समझा और
- 50:25शिप्रा का अनुसरण करता रहा। ऊपर पहुंचकर
- 50:28शिप्रा एक बड़े और नक्काशीदार दरवाजे वाले
- 50:31कमरे के पास रुकी। उसने शौर्य की आंखों
- 50:34में देखते हुए उसे वहीं गलियारे में खड़े
- 50:36रहने का इशारा किया। इसके बाद वो खुद उस
- 50:39कमरे के अंदर चली गई। कुछ ही पल बीते थे
- 50:42कि वह वापस बाहर आ गई। उसने अपना पर्स
- 50:45अंदर रख दिया और अब वह पूरी तरह तनाव
- 50:47मुक्त दिख रही [संगीत] थी। फिर उसने शौर्य
- 50:50को साथ आने का इशारा किया और उस कमरे से
- 50:52बिल्कुल सटे हुए दूसरे कमरे की ओर बढ़ गई।
- 50:55उसने कमरे का दरवाजा खोला और शौर्य को
- 50:58अंदर आने का संकेत दिया। कमरे के अंदर कदम
- 51:01रखते ही शिप्रा ने स्विच बोर्ड की तरफ हाथ
- 51:03बढ़ाकर लाइट ऑन कर दी। जैसे ही बल्ब की
- 51:06रोशनी कमरे में फैली, शौर्य की आंखें
- 51:08चौंधिया गई। कमरा बेहद व्यवस्थित, साफ
- 51:11सुथरा और सुरुचिपूर्ण फर्नीचर से सजा हुआ
- 51:13था। दीवारों का रंग आंखों को सुकून देने
- 51:16वाला था। उसने अनचाहे ही अपने मन में उस
- 51:19पुराने सीलन भरे सर्वेंट क्वार्टर की
- 51:22तुलना इस कमरे से की और पाया कि यह उससे
- 51:24लाख गुना बेहतर है। शिप्रा ने कमरे के
- 51:27वातावरण को सामान्य बनाने के लहजे में
- 51:29कहा। आज से यही तुम्हारा कमरा है। उम्मीद
- 51:33करती हूं कि यह तुम्हें पसंद आया होगा।
- 51:36शौर्य ने कमरे के आरामदायक बिस्तर और सोफे
- 51:38को देखते हुए बड़े ही संतुष्ट भाव से जवाब
- 51:41दिया। नहीं यह बढ़िया है और मुझे पसंद भी
- 51:44आया है। शिप्रा ने कमरे के कोने में रखी
- 51:47विशाल वार्ड्रोब की तरफ इशारा किया और आगे
- 51:50कहा चलो यह अच्छी बात है कि तुम्हें कमरा
- 51:52पसंद आया। मैंने राहुल से बोलकर तुम्हारे
- 51:56हिसाब से कुछ कपड़े भी मंगवा दिए हैं जो
- 51:58इस कमरे के वार्ड्रोब में रखे हुए हैं।
- 52:00तुम सोने से पहले चेंज कर लेना। [संगीत]
- 52:03शौर्य ने अपनी सहमति जताते हुए संक्षिप्त
- 52:05में उत्तर दिया, ठीक है मैं देख लूंगा।
- 52:08शिप्रा को शायद अब थकान महसूस हो रही थी।
- 52:11उसने कमरे से बाहर निकलने के लिए कदम
- 52:13बढ़ाए। पर दरवाजे के पास पहुंचकर एक बार
- 52:16फिर पीछे मुड़ी और कहा तो फिर ठीक है मैं
- 52:20चलती हूं। अब सुबह [संगीत] मिलेंगे। अगर
- 52:23तुम्हें किसी चीज की जरूरत हो तो मुझे बता
- 52:25देना। इसके साथ वाला कमरा मेरा ही है।
- 52:28[संगीत]
- 52:29शिप्रा के जाते ही शौर्य ने एक गहरी और
- 52:32लंबी अंगड़ाई ली। उसने अपने होठों में ही
- 52:34बहुत धीरे से बुदबुदाया।
- 52:37अपने घर में जगह भी दी तो कमरा अलग कर
- 52:39दिया। कोई बात नहीं शिपरा राय। एक दिन तुम
- 52:43खुद ही मुझे अपने कमरे में भी बुलाओगी।
- 52:45शौर्य फुर्ती से वार्ड्रोब के पास गया और
- 52:48उसने एक नाइट ड्रेस निकाली। [संगीत] अपने
- 52:50कपड़े बदले और फिर गद्देदार बिस्तर पर लेट
- 52:52गया। काफी समय बाद उसे आज आरामदायक नींद
- 52:56आने वाली थी। अगली सुबह उसे ऐसा लगा जैसे
- 52:59कोई उसे धीरे-धीरे हिलाकर जगाने [संगीत]
- 53:01की कोशिश कर रहा है। उसने भारी आंखों से
- 53:04अपनी पलकें झपकाई और सामने देखा तो
- 53:06[संगीत] राहुल उसके बिस्तर के पास खड़ा
- 53:08उसे उठा रहा था। शौर्य ने अपनी आवाज को
- 53:11थोड़ा साफ करते हुए राहुल से पूछा।
- 53:13[संगीत] क्या बात है?
- 53:16[गला साफ़ करने की आवाज़][नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 53:16इतनी सुबह-सुबह क्यों उठाने आ गए?
- 53:20राहुल जो पहले से ही स्पोर्ट्स गियर में
- 53:22तैयार और उत्साहित दिख रहा था मुस्कुरा कर
- 53:24बोला अब और कितना सोगे जीजू चलो [संगीत]
- 53:28बाहर चलकर टेनिस खेलते हैं। रागिनी भी आ
- 53:31चुकी है। उसने खास करके मुझे बोला कि मैं
- 53:34आपको बुला लूं। शौर्य को राहुल की बात
- 53:37सुनकर थोड़ा अचरज हुआ। उसने अंगड़ाई लेते
- 53:39हुए सवाल किया। क्या
- 53:42टेनिस इतनी सुबह? क्या तुम लोग रोज खेलते
- 53:46हो? राहुल ने अपने हाथ में पकड़े रैकेट को
- 53:48हवा में लहराते हुए बड़े गर्व से कहा, हां
- 53:51जीजू, असल में कुछ ही दिनों में हमारा
- 53:54स्टेट लेवल का ट्रायल होने वाला है।
- 53:56जिसमें मैं और रागिनी दोनों पार्टिसिपेट
- 53:58करने वाले हैं। इसीलिए रोज सुबह-सुबह हम
- 54:01लोग यहां कोर्ट पर जमकर प्रैक्टिस करते
- 54:03हैं। शौर्य बिस्तर से उठकर खड़ा हो गया
- 54:06था। उसने खिड़की के बाहर फैले टेनिस कोर्ट
- 54:09की ओर देखा और पूछा।
- 54:11और कौन-कौन खेलते हैं?
- 54:14राहुल ने तुरंत जवाब दिया, हमारे साथ
- 54:16कुलवंत भैया और मयूर भी होते हैं। [संगीत]
- 54:18आपको पता है कुलवंत भैया स्टेट लेवल के
- 54:21खिलाड़ी रह चुके हैं और जब से आपने उन्हें
- 54:24हराया है तब से वह और भी ज्यादा प्रैक्टिस
- 54:26करने लगे हैं। राहुल की यह बात सुनकर
- 54:29शौर्य समझ [संगीत] गया कि कुलवंत के मन
- 54:31में उस हार की कसक अभी भी ताजी है। वो बेड
- 54:34से उतरते हुए आत्मविश्वास के साथ बोला।
- 54:38ठीक है। चलो चलकर देखते हैं तुम लोगों का
- 54:41खेल।
- 54:42[संगीत]
- 54:42कुछ ही देर में शौर्य राहुल के साथ टेनिस
- 54:44कोर्ट पहुंचा। वहां उसने देखा कि कोर्ट पर
- 54:46कुलवंत और मयूर के बीच एक आक्रामक मैच चल
- 54:49रहा था। रागिनी कोर्ट के किनारे नेट के
- 54:52पास खड़ी होकर बहुत ध्यान से उनके खेल की
- 54:55बारीकियों को देख रही थी। शौर्य ने अपनी
- 54:57नजर चारों ओर घुमाई। उसने राहुल के करीब
- 55:00जाकर धीरे से पूछा। [संगीत] तुम्हारी वो
- 55:03बहन क्या नाम था उसका? हां युविका। वो नजर
- 55:07नहीं आ रही। इस पर राहुल ने शरारती
- 55:10मुस्कान के साथ जवाब दिया। आप चिंता मत
- 55:13करो वो भी आ जाएगी। तभी अचानक पीछे से एक
- 55:16तीखी और व्यंग्ञात्मक आवाज कोर्ट पर
- 55:18गूंजी। अरे देखो तो आज कौन आया है? आज तो
- 55:22फिर से हमारे बीच मिस्टर श्रवण पधार चुके
- 55:25हैं। यह आवाज किसी और की नहीं बल्कि
- 55:28युविका की ही थी। शौर्य ने शांत भाव से
- 55:30पीछे पलट कर उसे देखा और बोला [संगीत]
- 55:33मैं राहुल से अभी आपके बारे में ही पूछ
- 55:35रहा था। बस यहां आपकी ही कमी नजर आ रही
- 55:38थी। [संगीत] आप आ गई हैं तो अब वो भी पूरी
- 55:40हो गई है। अब तक रागिनी भी शौर्य की
- 55:43मौजूदगी को भांप चुकी थी। वो दौड़कर उनके
- 55:45पास आ गई। उसने विनम्रता से पूछा। आप कैसे
- 55:49हैं जीजू? मैं कब से दोबारा आपका खेल
- 55:52देखना चाहती थी। अब जाकर मौका मिला है।
- 55:54उम्मीद करती हूं कि मुझे आपसे कुछ सीखने
- 55:57को मिलेगा। युविका को रागिनी की यह
- 55:59प्रशंसा बिल्कुल रास नहीं आई। उसने तुरंत
- 56:02अपनी कड़वी जुबान से तंज कसते हुए कहा।
- 56:05रागिनी, तुम कुछ ज्यादा ही श्रवण से
- 56:07उम्मीद कर रही हो। उस दिन यह गलती से जीत
- 56:09क्या गया? पता नहीं तुमने इसे क्या समझ
- 56:12लिया है। ऐसी बेवकूफी [संगीत]
- 56:13करने का कोई मतलब नहीं है। तुम्हारे पास
- 56:16जब कुलवंत भैया जैसे सीनियर खिलाड़ी हैं
- 56:18तो तुम्हें किसी और से कुछ सीखने की जरूरत
- 56:21क्या है? शौर्य ने युविका की कड़वाहट का
- 56:24जवाब बहुत ही शालीनता से दिया। आपकी दीदी
- 56:27सही कह रही हैं रागिनी। आप वैसे भी अच्छा
- 56:30खेलती हैं और आपको सिखाने के लिए आपके
- 56:33भैया हैं ही। तो मुझे नहीं लगता कि मैं
- 56:35आपकी कोई मदद कर पाऊंगा।
- 56:38रागिनी शौर्य की इस विनम्रता से और भी
- 56:40प्रभावित हुई। उसने दृढ़ता के साथ शौर्य
- 56:43की आंखों में देखते हुए कहा।
- 56:46मेरे लिए क्या अच्छा है यह मुझे अच्छे से
- 56:48पता है जीजू और मैंने यह तो कभी कहा ही
- 56:51नहीं कि मेरे कुलवंत भैया अच्छा नहीं
- 56:53खेलते। मैं [संगीत] उनसे भी अभी तक सीखती
- 56:55ही रही हूं। लेकिन अब जब मुझे आपसे भी कुछ
- 56:57सीखने का मौका मिल रहा है तो मैं उसे अपने
- 56:59हाथ से क्यों जाने दूं। तभी कोर्ट पर चल
- 57:02रहा मुकाबला एक तेज शॉट के साथ समाप्त
- 57:04हुआ। मैच खत्म करने के बाद कुलवंत पसीने
- 57:07में नहाया हुआ कोर्ट के किनारे आया और
- 57:10शौर्य को सीधे चुनौती देते हुए बोला श्रवण
- 57:14आ जाओ मैदान में। क्यों ना एक गेम हमारे
- 57:16बीच भी हो जाए। शौर्य कुलवंत के लहजे में
- 57:20छिपी उस टीस को बखूबी महसूस कर सकता था जो
- 57:22उसे अपनी पिछली हार से मिली थी। उसने बहुत
- 57:25ही सहज भाव से मैच को टालना चाहा और कहा।
- 57:29इसकी कोई जरूरत नहीं है भैया। मैं तो बस
- 57:31रागिनी और राहुल का खेल देखने के लिए आया
- 57:33था। आप खेलो मैं यहीं ठीक हूं। इसी समय घर
- 57:38के भीतर शिप्रा की भी नींद खुल चुकी थी।
- 57:40इसीलिए वह सीधे किचन में गई और अपने लिए
- 57:43चाय बनाने लगी। तभी उसे शौर्य का ख्याल
- 57:46आया। वो चाय का कप लेकर शौर्य के कमरे की
- 57:49ओर बढ़ी। पर वहां का मंजर देखकर वो ठटक
- 57:52गई। कमरा पूरी तरह खाली था। वो चाय का कप
- 57:55हाथ में लिए घर के बाहर लॉन की तरफ आई।
- 57:58उसे शौर्य भी वहां नजर आ गया। शिप्रा को
- 58:02देखते ही युविका ने पासा फेंका। ये लो अब
- 58:05तो शिप्रा भी आ गई। अब शायद शिप्रा कहेगी
- 58:08तो श्रवण कुलवंत भैया के साथ एक सोलो मैच
- 58:10खेलने के लिए तैयार हो जाएगा। शिप्रा ने
- 58:14हैरानी से राहुल से पूछा तो उसने कहा
- 58:18कुलवंत भैया जीजू के साथ एक सोलो मैच
- 58:20खेलना चाहते हैं। पर जीजू इसके लिए तैयार
- 58:22नहीं है।
- 58:25शिप्रा समझ गई कि कुलवंत अपनी हार का बदला
- 58:27लेना चाहता है। मयूर ने भी दबाव डाला। हां
- 58:31शिप्रा तुम बोलो श्रवण को। शायद तुम्हारी
- 58:33बात मानकर यह कुलवंत भैया के साथ एक मैच
- 58:36खेलने को तैयार हो जाए। शिप्रा ने शौर्य
- 58:39का पक्ष लेते हुए कहा इसकी क्या जरूरत है?
- 58:43तुम लोग आपस में खेलो। श्रवण को क्यों
- 58:45इसमें शामिल कर रहे हो? युविका ने फिर से
- 58:48उकसाया। लो लगता है कि शिप्रा डर गई है कि
- 58:52कहीं श्रवण [संगीत] कुलवंत भैया से बुरी
- 58:54तरह हार ना जाए। इसीलिए वो नहीं चाहती कि
- 58:57श्रवण उनका मुकाबला करें। शिप्रा ने शांत
- 59:00स्वर में जवाब दिया। अगर तुम्हें यही
- 59:03समझना है तो यही सही। कुलवंत ने बहुत ही
- 59:07चतुराई से कहा, क्या शिप्रा? तुम भी
- 59:09छोटी-छोटी बातों को दिल पर ले लेती हो। यह
- 59:12एक फ्रेंडली मैच है। मैं जानता हूं कि
- 59:14श्रवण अच्छा खेलता है। इसीलिए मैं उसके
- 59:16साथ खेलना चाहता हूं। क्षिप्रा ने अब बात
- 59:19शौर्य पर डाल दी। यह फैसला तो श्रवण का
- 59:22होगा कि उसे मैच खेलना है या नहीं। मैं
- 59:25बीच में कोई नहीं हूं जो यह कहे कि उसे
- 59:27मैच खेलना चाहिए या नहीं। राहुल और रागिनी
- 59:30ने भी मिन्नतें की। खेल लो ना जीजू। कौन
- 59:33सा यहां जमीन जायदाद किसी के नाम करनी है।
- 59:35या तो हार होगी या जीत। हां, इससे कुलवंत
- 59:39भैया की इच्छा जरूर पूरी हो जाएगी।
- 59:42शौर्य ने सबकी ज़िद और कुलवंत की आंखों में
- 59:44छिपे उस घमंड को देखा। तभी रागिनी ने भी
- 59:47अनुरोध किया।
- 59:49बस एक मैच की बात है जीजू खेल लो ना।
- 59:52आखिरकार शौर्य ने गहरी सांस लेते हुए कहा,
- 59:55"अगर सबकी यही इच्छा है तो फिर ठीक है।
- 59:58मैं कुलवंत भैया के साथ एक मैच खेलने के
- 1:00:00लिए तैयार हूं।" शौर्य के इस फैसले ने
- 1:00:03शिप्रा को चौंका दिया। वो शौर्य के चेहरे
- 1:00:06पर कोई तनाव ना देखकर हैरान [संगीत] थी।
- 1:00:09युविका ने शोर मचाते हुए कहा, ठीक है तो
- 1:00:12फिर देर किस बात की? मैच शुरू करो भैया।
- 1:00:15श्रवण तुम तैयार तो हो? शौर्य ने
- 1:00:18मुस्कुराकर जवाब दिया, हां, मैं तैयार
- 1:00:21हूं। अब मैच शुरू कर सकते हैं।
- 1:00:24राहुल ने अपना रैकेट शौर्य को थमाया।
- 1:00:26शौर्य कोर्ट में कुलवंत के आमने-सामने
- 1:00:28खड़ा हो गया। कुलवंत ने पूछा,
- 1:00:32"तुम तैयार हो तो मैच शुरू करें?" शौर्य
- 1:00:35ने बहुत ही शांत तरीके से कहा, "हां जरूर,
- 1:00:38आप ही [संगीत] सर्विस कीजिए।" खेल की
- 1:00:41शुरुआत में कुलवंत की सर्विस पर शौर्य
- 1:00:43थोड़ा लड़खड़ाया क्योंकि उसने वार्म अप
- 1:00:45नहीं किया था। युविका ने मयूर की तरफ
- 1:00:48देखा। मयूर ने भी चुटकी लेते हुए धीरे से
- 1:00:50कहा, "ल लगता है आज किस्मत श्रवण का साथ
- 1:00:54नहीं दे रही।
- 1:00:56लेकिन जैसे ही खेल का दूसरा सेट शुरू हुआ,
- 1:00:58शौर्य की चाल बदल गई। शौर्य ने एक ऐसा
- 1:01:01क्रॉस कोड शॉट मारा कि कुलवंत गेंद तक
- 1:01:04पहुंच भी नहीं पाया। रागिनी और राहुल जोश
- 1:01:07में आकर चिल्लाने लगे। कुलवंत तब बौखला
- 1:01:09गया था। उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर एक तेज
- 1:01:13स्मैश मारा। लेकिन शौर्य ने उसे बड़ी
- 1:01:15आसानी से ना केवल डिफेंड [संगीत] किया
- 1:01:18बल्कि उसे ड्रॉप शॉट में बदल दिया। गेंद
- 1:01:20नेट के बिल्कुल करीब गिर कर रुक गई। जैसे
- 1:01:23ही अंतिम पॉइंट के साथ शौर्य ने मैच जीता
- 1:01:26युविका का चेहरा उतर गया। कुलवंत अपना
- 1:01:29रैकेट जमीन पर टिकाए हाफ रहा था। शौर्य ने
- 1:01:32शांत कदमों से नेट [संगीत] के पास जाकर
- 1:01:34कुलवंत की ओर हाथ बढ़ाया। लेकिन कुलवंत ने
- 1:01:37शौर्य से हाथ नहीं मिलाया। कुलवंत को यकीन
- 1:01:40नहीं हो रहा था कि आज वो फिर से शौर्य से
- 1:01:43हार गया। वहीं युविका जो थोड़ी देर पहले
- 1:01:45तक चहक रही थी [संगीत] अचानक चुप हो गई।
- 1:01:48वो खुद भी इस नतीजे से हैरान थी। अब तक
- 1:01:50कुलवंत उन सबके बीच एक हीरो की तरह था।
- 1:01:53लेकिन आज शौर्य ने उसका स्टारडम धूमिल कर
- 1:01:56दिया था। जब कुलवंत को समझ आ गया कि अब
- 1:01:58कोई बहाना काम नहीं आएगा तो वह शौर्य के
- 1:02:01पास आया और बोला मानना पड़ेगा। मैंने
- 1:02:04तुम्हें अंडरएस्टीमेट किया था। लेकिन अब
- 1:02:06मैं मानता हूं कि तुम सच में मुझसे बेहतर
- 1:02:08हो। ऐसा कुछ नहीं है भैया। आज मेरा दिन
- 1:02:12अच्छा था इसीलिए मैं जीत पाया। शौर्य ने
- 1:02:15विनम्रता से कहा। आप तो कमाल हो जीजू आपका
- 1:02:19तो कोई जवाब ही नहीं। मैंने आपसे बेहतर
- 1:02:21टेनिस पैर नहीं देखा। अब आइए एक-एक हाक
- 1:02:24मेरे साथ भी हो जाए। जीतने का तो पता नहीं
- 1:02:27लेकिन मैं आपको टक्कर देने की पूरी कोशिश
- 1:02:29करूंगी। रागिनी उत्साहित होकर बोली। जहां
- 1:02:32रागिनी शौर्य के खेल से खुश थी, वहीं
- 1:02:35युविका का चेहरा ऐसा लग रहा था जैसे किसी
- 1:02:37ने उसके सपनों का महल तोड़ दिया हो।
- 1:02:40शिप्रा भी शौर्य की जीत से बेहद खुश थी,
- 1:02:42लेकिन उसे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की थी
- 1:02:44कि शौर्य की जीत ने युविका के चेहरे की
- 1:02:47चमक छीन ली थी। [संगीत] इसके बाद शौर्य ने
- 1:02:49युविका और राहुल के साथ भी एक-एक मैच
- 1:02:52खेला। यह तो तय था कि दोनों मैच शौर्य ने
- 1:02:55ही जीते। लेकिन इससे रागिनी और राहुल की
- 1:02:57अच्छी प्रैक्टिस हो गई। मैच खत्म होने के
- 1:03:00बाद शौर्य शिप्रा के साथ घर जाने के लिए
- 1:03:02मुड़ा। तभी रागिनी सामने आकर बोली, "जीजू,
- 1:03:06परसों मेरा ट्रायल है। अगर आप मेरे साथ
- 1:03:08चलोगे, मुझे अच्छा लगेगा।"
- 1:03:11रागिनी की बात सुनकर शौर्य ने एक बार
- 1:03:13शिप्रा की तरफ देखा। पर शिप्रा ने कुछ
- 1:03:16नहीं कहा। यह देखकर रागिनी शिप्रा से
- 1:03:18बोली, दी, आप कहो ना जीजू से, यह आपकी बात
- 1:03:22नहीं टालेंगे। रागिनी की बात सुनकर शिप्रा
- 1:03:25ना चाहते हुए भी शौर्य से बोली अगर
- 1:03:28तुम्हारा कोई जरूरी काम ना हो तो देख लो
- 1:03:31तुम्हारे साथ होने से इन्हें थोड़ी हिम्मत
- 1:03:34मिलेगी। [संगीत] शौर्य बोला मैं वादा तो
- 1:03:38नहीं करता लेकिन कोशिश करूंगा। शौर्य की
- 1:03:41बात सुनकर रागिनी खुश हो गई। उसने धन्यवाद
- 1:03:43देते हुए कहा आपने इतना कह दिया तो मैं
- 1:03:46मान लेती हूं कि आप मेरे साथ जरूर चलोगे।
- 1:03:49रागिनी की बात से युविका चिढ़ रही थी। उसे
- 1:03:52रागिनी द्वारा शौर्य को इतना सम्मान देना
- 1:03:55पसंद [संगीत] नहीं आ रहा था। लेकिन वो कुछ
- 1:03:57कह नहीं पाई। कुलवंत पहले ही शौर्य से
- 1:03:59हारने के बाद ऑफिस जाने की बात कहकर वहां
- 1:04:02से जा चुका था। इसके बाद सभी अपने-अपने घर
- 1:04:05चले गए। शौर्य भी राहुल और शिप्रा के साथ
- 1:04:07शिप्रा के घर आ गया। उसने देखा कि राजदीप
- 1:04:10राय और बीना जी सेंटर टेबल पर बैठे चाय पी
- 1:04:13रहे थे। राजदीप जी ने जब शौर्य, राहुल और
- 1:04:17शिप्रा को घर में आते देखा तो उन्होंने
- 1:04:19संतो को आवाज देते हुए कहा,
- 1:04:22संतो जरा तीन कप चाय और बना देना। फिर
- 1:04:26उन्होंने तीनों से कहा आओ बैठो। तीनों आकर
- 1:04:31सेंटर टेबल पर बैठ गए। राजदीप जी ने शौर्य
- 1:04:34से कहा श्रवण तुम तो बहुत अच्छा टेनिस
- 1:04:37खेलते हो। मैंने छत से देखा जब तुम कुलवंत
- 1:04:41को हरा रहे थे। कुलवंत बहुत अच्छा खिलाड़ी
- 1:04:44है। अगर तुमने उसे हरा दिया है तो मतलब
- 1:04:47तुम भी बेहतरीन खिलाड़ी हो। राजदीप जी की
- 1:04:50बात सुनकर शौर्य हल्की मुस्कान के साथ
- 1:04:52बोला, "जी ऐसा कुछ नहीं है। बस आज मेरा
- 1:04:56नसीब अच्छा था।" तभी राहुल ने तारीफ करते
- 1:04:59हुए कहा, "क्या जीजू, अब इतना भी हम्ल
- 1:05:02होने की जरूरत नहीं है। आप कुलवंत भैया से
- 1:05:05अच्छे खिलाड़ी हो। जब आप सर्विस करते हो
- 1:05:08तो देखने लायक होता है। आपके शरीर की जो
- 1:05:11फ्लेक्सिबिलिटी है, वह तो कमाल है। मैं तो
- 1:05:14चाहता हूं ऐसी फ्लेक्सिबिलिटी मुझ में भी
- 1:05:16आ जाए। इस पर शौर्य मुस्कुराते हुए बोला,
- 1:05:20ज्यादा मुश्किल नहीं है। अगर तुम योग के
- 1:05:22कुछ आसन करो तो जल्दी ही तुम्हें अपने
- 1:05:25शरीर में बदलाव नजर आने लगेगा।
- 1:05:28अगर ऐसी बात है तो आप मुझे सिखा देना
- 1:05:30जीजू। मैं जरूर फॉलो करूंगा। राहुल एक
- 1:05:33आज्ञाकारी शिष्य की तरह बोला। अब तक संतोष
- 1:05:36सबके सामने चाय रखकर [संगीत] जा चुकी थी।
- 1:05:39शौर्य ने जल्दी-जल्दी अपनी चाय खत्म की और
- 1:05:42उठते हुए बोला, "एक जरूरी काम के लिए आज
- 1:05:45मुझे निकलना पड़ेगा। शाम को मिलता हूं।
- 1:05:48इतना कहकर वो अपने कमरे की तरफ बढ़ गया।
- 1:05:51शिप्रा जो अब तक कुछ बोल नहीं रही थी,
- 1:05:53सिर्फ शौर्य की हर एक्टिविटी को ध्यान से
- 1:05:55देख रही थी। [संगीत] जब शौर्य ने राहुल को
- 1:05:58योग के आसनों के बारे में बताया, तो उसे
- 1:06:00आश्चर्य हुआ कि शौर्य को योग की भी इतनी
- 1:06:03अच्छी जानकारी थी। किसी भिखारी का ऐसा
- 1:06:05कायाकल्प शिप्रा ने कभी नहीं सोचा था।
- 1:06:09शौर्य के जाने के बाद राजदीप राय ने
- 1:06:11शिप्रा से कहा। अब तो कोई श्रवण को देखकर
- 1:06:14यह सोच भी नहीं सकता कि यह कभी भिखारी रहा
- 1:06:17होगा। जरूर इसके अतीत में कुछ ऐसा है
- 1:06:20जिसकी वजह से इसे वो जीवन जीना पड़ा था।
- 1:06:24फिर उन्होंने शिप्रा की तरफ देखते हुए
- 1:06:26पूछा। बेटा तुम्हें इसके अतीत के बारे में
- 1:06:30कुछ पता है? अपने पिता का सवाल सुनकर
- 1:06:32शिप्रा बोली बस इतना पता है कि पुश्तैनी
- 1:06:36संपत्ति के लिए इसके परिवार वाले ही इसकी
- 1:06:39जान लेना चाहते थे। एक हादसे के बाद कुछ
- 1:06:42मछुआरों ने इसकी जान बचाई [संगीत] और उसके
- 1:06:44बाद इसने मंदिर में शरण ली। अपने लोगों से
- 1:06:48धोखा खाकर शायद इसे ऐसी विरक्ति हो गई कि
- 1:06:51इसने कभी भी वापस जाने की कोशिश ही नहीं
- 1:06:53की।
- 1:06:55अच्छा तो ऐसी बात है। यानी यह शुरू से
- 1:06:58भिखारी नहीं था। हालात ने इसे वो दौर
- 1:07:01दिखाया था। राजदीप राय सोचते हुए बोले।
- 1:07:04फिर उन्होंने पूछा इसकी पढ़ाई लिखाई के
- 1:07:08बारे में कुछ पता है तुम्हें? नहीं पापा
- 1:07:10इस बारे में मैंने कभी उससे कुछ नहीं पूछा
- 1:07:14लेकिन देखकर [संगीत] लगता है कि यह पढ़ा
- 1:07:15लिखा है। आफ्टर ऑल जिस तरह का जॉब इसे
- 1:07:18मिला है उसे मैनेज करना आसान नहीं होता।
- 1:07:21शिप्रा ने जवाब दिया अच्छा क्या जॉब मिला
- 1:07:25है? राजदीप राय ने उत्सुकता से पूछा तो
- 1:07:28शिप्रा बोली [संगीत] इसे एक कंपनी का
- 1:07:30ब्रांड एंडोर्समेंट संभालने का काम मिला
- 1:07:32है। ऐड कैंपेन के लिए मिस नताशा को हायर
- 1:07:36करने की बात चल रही है और पूरी शूटिंग की
- 1:07:38जिम्मेदारी भी इसी की है। ऐसा काम हर किसी
- 1:07:41के बस की बात नहीं होती। यह तो बड़ी बात
- 1:07:44है। लेकिन इसे यह जॉब मिला कैसे? राजदीप
- 1:07:48राय ने फिर पूछा तो शिप्रा ने कहा यह तो
- 1:07:51मुझे नहीं पता और मैंने पूछा भी नहीं।
- 1:07:54लेकिन हो सकता है इसके कुछ पुराने कनेक्शन
- 1:07:56हो क्योंकि उसी की वजह से हमारी बिग बुल
- 1:07:59के साथ पार्टनरशिप भी हो पाई है। शिप्रा
- 1:08:03की बात सुनकर राजदीप प्राय संतुष्ट नजर
- 1:08:05आए। [संगीत] अब उन्हें यह चिंता नहीं रही
- 1:08:07कि श्रवण कोई नाकारा इंसान है। उसका
- 1:08:10प्रभावशाली व्यक्तित्व वाकई काबिले तारीफ
- 1:08:12था। ऐसा कि कोई भी उससे प्रभावित हो जाए।
- 1:08:16तभी उन्होंने देखा कि शौर्य सीढ़ियों से
- 1:08:18नीचे आ रहा था। वह पूरी तरह तैयार होकर
- 1:08:21आया था।
- 1:08:22[संगीत]
- 1:08:22नीचे आकर उसने शिप्रा से कहा, "मैं निकल
- 1:08:25रहा हूं। मुझे आज जल्दी ऑफिस पहुंचना है।"
- 1:08:29शिप्रा ने उसे रोकते हुए कहा, "अरे जाने
- 1:08:32से पहले नाश्ता तो कर लो। मैं ऑफिस में कर
- 1:08:35लूंगा। अभी मुझे निकलना है।" इतना कहकर
- 1:08:38शौर्य बाहर चला गया। शिप्रा उसे जाते हुए
- 1:08:41देखती रही। दरअसल, आज उसे वहीं पास में
- 1:08:44अपना एक ऑफिस देखना था। [संगीत] साथ ही
- 1:08:46उसे मिस नताशा से मिलकर ऐड के लिए
- 1:08:48एग्रीमेंट भी करना था। उसने शिप्रा से जो
- 1:08:51कुछ भी कहा था अब उसे सच में पूरा करना
- 1:08:53था। शिप्रा के घर से निकलकर शौर्य सीधे
- 1:08:57होटल राजकमल पहुंचा। वहां पहुंचकर उसने
- 1:09:00मेनका के बारे में पूछा तो पता चला कि वो
- 1:09:03अभी तक आई नहीं है। इसके बाद वो विक्रम के
- 1:09:06रूम में चला गया। विक्रम अपने कमरे में
- 1:09:08नाश्ता कर रहा था। जैसे ही उसने शौर्य को
- 1:09:11देखा वो बोला अरे बॉस आप सुबह-सुबह वो भी
- 1:09:16होटल में? सब ठीक तो है? शौर्य ने उसे
- 1:09:19झड़कते हुए कहा, क्या मतलब है तुम्हारा?
- 1:09:22क्या मैं सुबह-सुबह यहां नहीं आ सकता? अरे
- 1:09:25नहीं बॉस, ऐसी बात नहीं है। बस मुझे आपकी
- 1:09:27इतनी सुबह यहां आने की उम्मीद नहीं थी।
- 1:09:30इसीलिए पूछ लिया। विक्रम ने सफाई दी। तो
- 1:09:34फिर क्या उम्मीद थी तुम्हें? शौर्य ने
- 1:09:36हल्की नाराजगी से पूछा। अरे बॉस आप तो
- 1:09:39नाराज हो गए। अच्छा छोड़िए यह सब। यह
- 1:09:42बताइए कि आपने नाश्ता किया या नहीं?
- 1:09:45विक्रम ने बात बदलते हुए कहा। शौर्य ने
- 1:09:48उसकी प्लेट की तरफ देखते हुए कहा, नहीं
- 1:09:51अभी कुछ नहीं खाया। जल्दी से मेरे लिए भी
- 1:09:53कुछ मंगा दो। मेरे पेट में भी चूहे कूद
- 1:09:55रहे हैं। ठीक है बॉस, अभी मंगवाता हूं।
- 1:09:58विक्रम ने तुरंत फोन उठाया और शौर्य की
- 1:10:01पसंद के हिसाब से नाश्ते का आर्डर दे
- 1:10:03दिया। थोड़ी ही देर में एक वेटर ट्रॉली पर
- 1:10:06नाश्ता लेकर कमरे में आया और शौर्य के
- 1:10:08सामने प्लेट सजा दी। शौर्य ने भी विक्रम
- 1:10:12के साथ बैठकर नाश्ता खत्म किया। इसके बाद
- 1:10:14दोनों मेनका से मिलने के लिए कमरे से बाहर
- 1:10:17निकल गए। शौर्य ने सोचा अब तक शायद मेनका
- 1:10:20आ गई होगी। यही सोचकर वो सीधे उसके केबिन
- 1:10:23में पहुंचा। संयोग से इस समय मेनका अपने
- 1:10:26केबिन में मौजूद थी। शौर्य को देखकर वो
- 1:10:29हैरानी से बोली। क्या बात है? आज तो तुम
- 1:10:33बहुत सुबह यहां आ गए हो। हां, आज कुछ खास
- 1:10:36काम था तुमसे। इसीलिए जल्दी आ गया। मुझे
- 1:10:40तुम्हारी मदद चाहिए। शौर्य सामने की
- 1:10:43कुर्सी पर बैठते हुए बोला तो मेनका ने
- 1:10:46उत्सुकता से पूछा अच्छा ऐसा क्या काम पड़
- 1:10:49गया जो तुम इतनी सवेरे मुझसे मिलने आ गए
- 1:10:53हां कुछ ऐसा काम है जो सिर्फ [संगीत] तुम
- 1:10:55ही कर सकती हो इस शहर में ज्यादा लोगों को
- 1:10:58नहीं जानता जिनसे मदद मांग सकूं शौर्य ने
- 1:11:01साफ शब्दों में कहा तो मैं इनका हल्का
- 1:11:04मुस्कुराते हुए बोली अब पहेलियां मत बुझाओ
- 1:11:07सीधे-सीधे बताओ कि तुम्हें कैसी मदद चाहिए
- 1:11:11शौर्य थोड़ा आगे आगे झुक कर बोला, ठीक है।
- 1:11:14मुझे इसी एरिया में एक ऑफिस चाहिए। ऐसी
- 1:11:17जगह जो रेडी टू मूव हो। मेरे पास इतना समय
- 1:11:20नहीं है कि मैं नई जगह पर पूरा सेटअप
- 1:11:22तैयार करूं और मुझे लगता [संगीत] है कि इस
- 1:11:25काम में तुम ही मेरी मदद कर सकती हो।
- 1:11:27क्योंकि तुम्हें इस इलाके की पूरी जानकारी
- 1:11:30है। शौर्य की बात सुनकर मेनका कुछ पल
- 1:11:33सोचती रही। फिर अचानक उसे कुछ ध्यान आया
- 1:11:35तो वह मुस्कुराते हुए शौर्य की तरफ देखने
- 1:11:38लगी। शौर्य ने जब मेनका को स्माइल करते
- 1:11:40हुए देखा तो वह अधीर होकर बोला अब मैं
- 1:11:44तुम्हारी इस मुस्कुराहट का क्या मतलब
- 1:11:46समझूं? अरे मेरे मुस्कुराने का एक और कारण
- 1:11:49है। दरअसल मेरी एक फ्रेंड है जिसका ऑफिस
- 1:11:52यहीं पास की एक बिल्डिंग में है और संयोग
- 1:11:55से उसने मुझसे कहा था कि वो अपना ऑफिस
- 1:11:57बेचना चाहती है। तो मुझे लगता है यह
- 1:12:00तुम्हारे लिए अच्छा ऑप्शन हो सकता है।
- 1:12:02मेनका बोली उसकी बात सुनकर शौर्य खुश हो
- 1:12:06गया और बोला [संगीत] यह तो बहुत अच्छी बात
- 1:12:08है। तो क्यों ना अभी चलकर उस ऑफिस को देख
- 1:12:10लिया जाए। मेरे पास समय कम है और मैं जल्द
- 1:12:13से जल्द [संगीत] अपना ऑफिस सेटअप करना
- 1:12:15चाहता हूं। शौर्य की जल्दीबाजी देखकर
- 1:12:18मेनका बोली, ठीक है, मैं भी अपनी उस दोस्त
- 1:12:22को चाबी के साथ ऑफिस बुला लेती हूं। यह
- 1:12:25कहकर उसने अपना मोबाइल निकाला और कॉल
- 1:12:27मिलाया। कुछ ही पल [संगीत] बाद फोन उठते
- 1:12:30ही मेनका सीधे मुद्दे पर आ गई। अरे रुचि,
- 1:12:33तुम्हारे ऑफिस के लिए मेरे पास एक कस्टमर
- 1:12:35है। अगर तुम इंटरेस्टेड हो तो अभी चाबी
- 1:12:38लेकर ऑफिस पहुंच जाओ। दूसरी तरफ से रुचि
- 1:12:41ने जवाब दिया,
- 1:12:43ठीक है, मैं 15-20 मिनट में पहुंच रही
- 1:12:45हूं।
- 1:12:46शौर्य ने यह सुनकर कहा, तो चलो जल्दी चलते
- 1:12:49हैं। मैं यह मौका हाथ से नहीं जाने देना
- 1:12:52चाहता। मेनका उसकी जल्दीबाजी देखकर हल्के
- 1:12:55आश्चर्य में बोली। घबराओ मत वहां पहुंचने
- 1:12:58में हमें ज्यादा से ज्यादा 10 मिनट
- 1:13:00लगेंगे। अभी [संगीत] यहीं थोड़ा इंतजार कर
- 1:13:02लेते हैं। फिर निकलेंगे। शौर्य ने सहमति
- 1:13:06में सिर हिला दिया। अब उसके पास थोड़ा समय
- 1:13:09था। तो उसने मेनका से कहा। मुझे एक और काम
- 1:13:12है। शायद [संगीत] उसका भी कोई सशन
- 1:13:14तुम्हारे पास हो। मेनका उत्सुकता से बोली
- 1:13:18तो फिर इंतजार किस बात का? बताओ क्या काम
- 1:13:21है? शौर्य ने कहा दरअसल [संगीत] मुझे फेमस
- 1:13:25मॉडल मिस नताशा से मिलना है। एक ब्रांड
- 1:13:28एंडोर्समेंट के लिए मुझे उनकी जरूरत है।
- 1:13:31क्या तुम्हारे पास कोई लिंक है जिससे मैं
- 1:13:34उनसे मिल सकूं? मेनका एक पल के लिए सोच
- 1:13:37में पड़ गई। इसे मिस नताशा क्यों चाहिए?
- 1:13:41और किस कंपनी के लिए? जब उसे कुछ समझ नहीं
- 1:13:43आया तो उसने पूछा किस कंपनी के लिए ब्रांड
- 1:13:47एंडोर्समेंट करना है? शौर्य ने सहजता से
- 1:13:50जवाब दिया एक कंपनी है। तुम बस यह बताओ कि
- 1:13:54क्या तुम्हारे पास कोई ऐसा तरीका है जिससे
- 1:13:56मैं मिस नताशा तक पहुंच सकूं। मेनका
- 1:13:59मुस्कुराई और बोली यह काम भी हो जाएगा।
- 1:14:03लेकिन पहले हम चलकर रुचि से मिलते हैं और
- 1:14:05उसका ऑफिस देखते हैं। ठीक है। पहले वही कर
- 1:14:10लेते हैं। शौर्य ने हामी भरते हुए कहा।
- 1:14:13इसके बाद दोनों होटल से बाहर निकल गए।
- 1:14:15शौर्य ने देखा कि मेनका पैदल ही आगे बढ़
- 1:14:18रही है। तो उसने पूछा क्या हम पैदल हट
- 1:14:22चलकर उस ऑफिस तक जाएंगे? शौर्य की बात
- 1:14:25सुनकर मेनका बोली हां वो ऑफिस ज्यादा दूर
- 1:14:28नहीं है। हम चलकर ही पहुंच जाएंगे। इस तरह
- 1:14:31तुम यहां के मार्केट को भी देख लोगे।
- 1:14:34शौर्य को मेनका का यह सुझाव पसंद आया तो
- 1:14:36वह पैदल ही मेनका के साथ आगे बढ़ गया।
- 1:14:39चलते-चलते शौर्य ने मेनका से पूछा वैसे यह
- 1:14:43[संगीत] ऑफिस था किस चीज के लिए? तो जवाब
- 1:14:46में मेनका ने कहा, एक्चुअली रुचि पहले
- 1:14:49यहां कॉल सेंटर चलाती थी। लेकिन अब उसने
- 1:14:51अपना ऑफिस यहां से शिफ्ट कर लिया है
- 1:14:53क्योंकि इस तरह के जितने भी कॉल सेंटर थे
- 1:14:55वो सब अब शहर के बाहर वाले हिस्से में चले
- 1:14:58गए हैं। इसीलिए अब यह ऑफिस रुचि के लिए
- 1:15:00किसी काम का नहीं रहा और जो दूसरा ऑफिस वो
- 1:15:03शहर के बाहर ले रही है उसके लिए उसे कुछ
- 1:15:05पैसों की जरूरत है। इसीलिए वो इस ऑफिस को
- 1:15:08बेचना चाहती है। शौर्य को मेनकाक की बात
- 1:15:11समझ में आ गई। फिर लगभग 10 मिनट में वो
- 1:15:14लोग एक बिल्डिंग तक पहुंचे। उस बिल्डिंग
- 1:15:16का नाम है न्यू सिटी टावर। लगभग 10 मिनट
- 1:15:19में या उससे थोड़ा पहले मेनका और विक्रम
- 1:15:22के साथ शौर्य उस बिल्डिंग तक पहुंच गया।
- 1:15:24उस बिल्डिंग का नाम न्यू सिटी टावर था।
- 1:15:27शौर्य ने यहां तक का सफर पैदल ही तय किया
- 1:15:30था। उसे जगह बहुत पसंद आई। यह [संगीत]
- 1:15:32पूरी तरह एक कमर्शियल बिल्डिंग थी। शौर्य
- 1:15:35ने मन ही मन सोचा। हां, मुझे ऐसी ही जगह
- 1:15:39चाहिए थी। अभी कुछ ही पल बीते थे कि तभी
- 1:15:42एक कार आकर उनके पास रुकी। कार से एक
- 1:15:44खूबसूरत लड़की बाहर आई। उसे देखते ही
- 1:15:47मेनका जल्दी से उसके पास गई और उससे गले
- 1:15:49मिली। मेनका से अलग होकर वो लड़की बोली
- 1:15:53हां तो अब बताओ किससे लेना है यह स्पेस?
- 1:15:56उसकी जल्दीबाजी देखकर मेनका [संगीत] बोली
- 1:15:58अरे पहले सांस तो ले लो। इस पर लड़की
- 1:16:02मुस्कुराते हुए बोली [संगीत] ले तो ली
- 1:16:04सांस। अब बताओ कौन है? अच्छा बाबा मुझे
- 1:16:07पता है तुम्हारा टाइम बहुत कीमती है। इनसे
- 1:16:10मिलो। मेनका ने परिचय कराते हुए कहा, "यह
- 1:16:13है श्रवण और यह है विक्रम। यह तुम्हारे
- 1:16:16ऑफिस स्पेस में इंटरेस्टेड है।"
- 1:16:19शौर्य आगे बढ़ा और हाथ मिलाया। यह है
- 1:16:22रुचि। वो करीब 24-25 साल की बेहद खूबसूरत
- 1:16:25लड़की है। एक पल [संगीत] के लिए शौर्य
- 1:16:28उसकी खूबसूरती में खो गया। लेकिन जल्दी ही
- 1:16:30संभल भी गया। रुचि शौर्य की स्थिति देखकर
- 1:16:33हल्का मुस्कुरा दी। वो समझ गई थी कि लोग
- 1:16:36अक्सर उसे देखकर कुछ पल के लिए खो जाते
- 1:16:39हैं। उसने हाथ मिलाते हुए कहा
- 1:16:43हेलो मैं रुचि मल्होत्रा और आप शौर्य बोला
- 1:16:47श्रवण लोग मुझे श्रवण ही कहते हैं और यह
- 1:16:50मेरा दोस्त विक्रम है। रुचि ने दोनों का
- 1:16:53अभिवादन किया और टावर की ओर बढ़ते हुए
- 1:16:56बोली चलिए पहले ऑफिस देख लेते हैं। लिफ्ट
- 1:17:00की तरफ बढ़ते हुए रुचि ने मेनका से पूछा।
- 1:17:04वैसे ऑफिस लेना किसे है? इससे पहले कि
- 1:17:08मेनका कुछ कहती शौर्य ने जवाब दिया, यह
- 1:17:11ऑफिस मिस्टर विक्रम को [संगीत] लेना है।
- 1:17:14यहां का काम मैं देखूंगा इसीलिए मैं इनके
- 1:17:16साथ हूं। रुचि ने सहमति में सिर हिला
- 1:17:19दिया। विक्रम भी चुप रहा क्योंकि वह शौर्य
- 1:17:22की योजना समझ रहा था। चारों लोग लिफ्ट में
- 1:17:25सातवें फ्लोर पर पहुंचे और रुचि के
- 1:17:27पीछे-पीछे उसके ऑफिस की ओर बढ़े। लेकिन
- 1:17:30जैसे ही रुचि अपने ऑफिस के पास पहुंची
- 1:17:33उसने देखा कि दरवाजा पहले से खुला हुआ है।
- 1:17:36वो हैरान रह गई और बोली मैं तो यह गेट बंद
- 1:17:40करके गई थी। फिर यह खुला कैसे? मेनका ने
- 1:17:43भी चौंकते हुए कहा इसका मतलब अंदर कोई है
- 1:17:47क्या? चलो देखते हैं। रुचि ने ग्लास डोर
- 1:17:52को धक्का दिया और अंदर चली गई। उसके पीछे
- 1:17:54शौर्य, विक्रम और मेनका भी अंदर आ गए।
- 1:17:57अंदर आते ही उन्होंने देखा कि सभी लाइट्स
- 1:18:00जल रही थी। जैसे ही वह आगे बढ़े अंदर से
- 1:18:03कुछ आवाजें सुनाई देने लगी। रुचि तेजी से
- 1:18:06अंदर गई और उसने वहां जो देखा उससे वह
- 1:18:09चौंक गई। ऑफिस के मेन एरिया में कुछ लोग
- 1:18:12बैठे थे और उन्हीं में उसके पापा देवव्रत
- 1:18:15मल्होत्रा भी मौजूद थे। वो तुरंत उनके पास
- 1:18:18जाकर बोली
- 1:18:20पापा आप यहां अगर आना ही था मुझे बता तो
- 1:18:24देते। देवव्रत मल्होत्रा भी उसे देखकर
- 1:18:27हैरान थे। उन्होंने कहा
- 1:18:30दरअसल विहान का फोन आया था। यह आज ही डील
- 1:18:34फाइनल करना चाहता था इसीलिए मैं आ गया।
- 1:18:37रुचि ने सामने खड़े विहान रायजादा को देखा
- 1:18:40और सख्त आवाज में बोली पापा हमारी बात तो
- 1:18:44पहले ही हो चुकी है ना। इनकी डील हमें
- 1:18:46मंजूर नहीं है। फिर यह सब क्यों? उधर
- 1:18:50विहान रायजादा को देखकर शौर्य के दिमाग
- 1:18:53में एक झटका सा लगा। उसे याद आया यह वही
- 1:18:56शख्स है जिसने शादी के मंडप में शिप्रा को
- 1:18:59छोड़ दिया था। या यूं कहें कि मुख्तार के
- 1:19:02डर से वो भाग गया था। खैर जो हुआ वो अतीत
- 1:19:05की बात है। कहीं ना कहीं वो हादसा शौर्य
- 1:19:08के लिए अच्छा ही साबित हुआ। क्योंकि उसी
- 1:19:10की वजह से आज वो खुद शिप्रा का पति है।
- 1:19:14उसने देखा कि विहान के साथ उसके दो बाउंसर
- 1:19:16और एक व्यक्ति हैं जो उसका वकील लग रहा
- 1:19:19था। शौर्य को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि इस
- 1:19:22प्रॉपर्टी में विहान रायजादा भी दिलचस्पी
- 1:19:24रखता है। लेकिन शौर्य को भी यह जगह बहुत
- 1:19:26पसंद आ चुकी थी। वो किसी भी हाल में इस
- 1:19:29ऑफिस को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता
- 1:19:32था। फिलहाल वो स्थिति को समझना चाहता था
- 1:19:35कि विहान की डील कहां तक पहुंची है।
- 1:19:38इसीलिए वो चुपचाप रुचि और उसके पापा की
- 1:19:40बातचीत सुनने लगा। रुचि ने अपने पापा से
- 1:19:43पूछा तो अब ये क्या डील दे रहा है पापा?
- 1:19:48रुचि की बात सुनकर देवव्रत मल्होत्रा बोले
- 1:19:52यह अभी भी 45 करोड़ पर अटके हैं। लेकिन
- 1:19:55मेरा फाइनल ऑफर 51 करोड़ है। अपने पापा की
- 1:20:00बात सुनकर रुचि ने विहान की तरफ देखते हुए
- 1:20:02कहा। तो मिस्टर विहान क्या आपकी यही फाइनल
- 1:20:06डील है या आप 51 करोड़ में फाइनल करने के
- 1:20:09लिए तैयार हैं?
- 1:20:12विहान ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया।
- 1:20:15मिस रुचि मार्केट के हिसाब से मैं जो
- 1:20:17प्राइस ऑफर कर रहा हूं वो पहले ही ज्यादा
- 1:20:20है। इसीलिए मेरा सुझाव है कि आप लालच ना
- 1:20:23करें और 45 करोड़ की इस डील को स्वीकार कर
- 1:20:26लें। विहान की बात सुनकर रुचि ने एक नजर
- 1:20:29मेनका, विक्रम और शौर्य की तरफ डाली और
- 1:20:32बोली, आपने देख ही लिया कि यहां क्या चल
- 1:20:35रहा है। अब मैं आपसे जानना चाहती हूं कि
- 1:20:38आप क्या कहते हैं। शौर्य ने रुचि की बात
- 1:20:41सुनी और तुरंत मन ही मन पूरी सिचुएशन को
- 1:20:44एनालाइज करने लगा। उसने गौर किया कि
- 1:20:47लोकेशन के हिसाब से यह ऑफिस बेहद प्रीमियम
- 1:20:50है। शायद उसे [संगीत] दोबारा इतनी अच्छी
- 1:20:53जगह ना मिले। साथ ही यहां पहले से ही
- 1:20:56सेटअप तैयार था। फर्नीचर, कंप्यूटर और
- 1:20:59बाकी सुविधाएं। अगर वह यह ऑफिस लेता है तो
- 1:21:02वह अगले ही दिन से काम शुरू कर सकता है।
- 1:21:05जबकि नई जगह लेने पर उसे सेटअप तैयार करने
- 1:21:08में काफी समय लग जाता। इन सब बातों को
- 1:21:11सोचकर शौर्य ने फैसला ले लिया। वो आगे
- 1:21:14बढ़ा और आत्मविश्वास से बोला। हम आपकी
- 1:21:17शर्त के अनुसार इस ऑफिस के लिए 51 करोड़
- 1:21:20देने को तैयार हैं। लेकिन मेरी एक शर्त
- 1:21:24है।
- 1:21:26सभी की नजर एक साथ शौर्य पर टिक गई। शौर्य
- 1:21:30ने आगे कहा
- 1:21:32यहां जो भी फर्नीचर, कंप्यूटर और बाकी
- 1:21:35सेटअप पहले से मौजूद है। उसे उसी स्थिति
- 1:21:38में यहीं रहने दिया जाए। अगर उसके लिए अलग
- 1:21:41से भुगतान करना पड़े तो मैं उसके लिए भी
- 1:21:43तैयार हूं। [संगीत]
- 1:21:45शौर्य की बात सुनकर रुचि गौर से उसे देखने
- 1:21:48लगी। यह क्या? इस आदमी ने अकेले ही फैसला
- 1:21:51कर लिया। जबकि अभी तक तो यही कहा जा रहा
- 1:21:54था कि असली ओनर विक्रम होगा और शौर्य
- 1:21:57सिर्फ देखने आया है। फिर इसने खुद ही इतना
- 1:22:00बड़ा फैसला कैसे ले लिया? उसके मन में
- 1:22:03सवाल उठा और सबसे हैरानी की बात विक्रम ने
- 1:22:06भी उसे रोका नहीं। शौर्य ने एक बार भी
- 1:22:08विक्रम की राय जानने की कोशिश नहीं की और
- 1:22:11सीधे 51 करोड़ का ऑफर स्वीकार कर लिया।
- 1:22:15असल हैरानी तो इस बात की थी कि बिना किसी
- 1:22:17नेगोशिएशन के कोई इतनी बड़ी डील कैसे मान
- 1:22:20सकता है। दूसरी तरफ देवव्रत मल्होत्रा भी
- 1:22:23शौर्य की बात सुनकर हैरान थे।
- 1:22:27वो इतने दिनों से विहान रायजादा से कीमत
- 1:22:29बढ़वाने की कोशिश कर रहे थे। अगर विहान 2
- 1:22:32करोड़ भी और बढ़ा देता तो वह उसी के साथ
- 1:22:35डील फाइनल कर देते। लेकिन यहां तो बिना
- 1:22:37किसी बहस के ही पूरी कीमत मान ली गई थी।
- 1:22:41उधर शौर्य की बात सुनकर विहान के चेहरे पर
- 1:22:44साफ नाराजगी दिखाई देने लगी। वो शौर्य को
- 1:22:46घूरते हुए सोचने लगे।
- 1:22:49यह कौन है जो बीच में आकर मेरी डील बिगाड़
- 1:22:52रहा है। उसने तुरंत स्थिति संभालने की
- 1:22:55कोशिश की और देवव्रत मल्होत्रा से बोला।
- 1:22:57मिस्टर मल्होत्रा मैं कई दिनों से इस डील
- 1:23:00पर काम कर रहा हूं। 40 से बढ़ाकर 45 करोड़
- 1:23:03तक आ गया हूं। लेकिन अचानक आपकी बेटी किसी
- 1:23:06और को बीच में ले आई है। अगर आपको ज्यादा
- 1:23:09कीमत चाहिए तो ठीक है। मैं आपकी खुशी के
- 1:23:11लिए 2 करोड़ और बढ़ा देता हूं। अब मैं इस
- 1:23:14ऑफिस के लिए 47 करोड़ ऑफर करता हूं। आइए
- 1:23:18इस डील को यहीं फाइनल कर लेते हैं। विहान
- 1:23:23की बात खत्म होते ही रुचि आगे बढ़ी और
- 1:23:25सख्त स्वर में बोली
- 1:23:27लगता है आपको ठीक से सुनाई नहीं देता
- 1:23:29मिस्टर रायजादा मिस्टर श्रवण ने अभी-अभी
- 1:23:32इस ऑफिस के लिए हमारी 51 करोड़ की डील
- 1:23:34स्वीकार कर ली है। अब यह ऑफिस मिस्टर
- 1:23:37विक्रम का होने जा रहा है। आपने नेगोशिएशन
- 1:23:40में बहुत समय लगा दिया। इसीलिए अब हम आपके
- 1:23:44साथ ही डील नहीं कर सकते। इस पर विहान
- 1:23:46झुंझुलाकर बोला
- 1:23:49ये आप कैसी बात कर रही हैं मिस रुचि? हम
- 1:23:51इतने दिनों से इस पर काम कर रहे हैं और अब
- 1:23:54आप मना कर रही हैं। यह ठीक नहीं है। इस पर
- 1:23:58रुचि हल्की मुस्कान के साथ बोली यही तो
- 1:24:01आपकी गलती है मिस्टर रायजादा। आप इतने
- 1:24:04दिनों से सिर्फ नेगोशिएशन ही करते रहे।
- 1:24:06जबकि जिसे सच में खरीदना होता है वो एक पल
- 1:24:10में फैसला कर लेता है। जैसा कि अभी मिस्टर
- 1:24:12श्रवण ने किया। यह अभी-अभी यहां आए हैं और
- 1:24:15बिना समय बर्बाद किए अपना निर्णय दे दिया।
- 1:24:19तो हम इन्हें कैसे मना कर सकते हैं?
- 1:24:21इसीलिए आप हमें माफ करें और अपने लिए कोई
- 1:24:24दूसरा ऑफिस देख लें जो आपके बजट में हो।
- 1:24:27रुचि की बात सुनकर विहान का चेहरा गुस्से
- 1:24:30से लाल हो गया। उसने दांत भीते हुए कहा,
- 1:24:34"ल लगता है आप समझ नहीं रही हैं कि आप
- 1:24:36क्या कर रही हैं। हमें यह ऑफिस हर हाल में
- 1:24:39चाहिए और अगर नहीं मिला, तो इसके गंभीर
- 1:24:42परिणाम भी हो सकते हैं। इसीलिए बेहतर होगा
- 1:24:46कि आप मेरा ऑफर स्वीकार कर लें और यह डील
- 1:24:49मेरे साथ फाइनल करें।
- 1:24:52विहान की इस खुली धमकी के बाद माहौल अचानक
- 1:24:55भारी हो गया। तभी मेनका आगे बढ़ी और ठंडी
- 1:24:58लेकिन तीखी आवाज में बोली मिस्टर रायजादा
- 1:25:03क्या आप कुछ ज्यादा ही बड़े बोल नहीं बोल
- 1:25:05रहे हैं आपको अंदाजा भी है कि आप किसके
- 1:25:09सामने मिस रुचि को धमकाने की कोशिश कर रहे
- 1:25:11हैं मेनका को बीच में आते देखकर विहान
- 1:25:14रायजादा ने उसकी तरफ देखा और एक ही नजर
- 1:25:17में पहचान लिया और अपनी आवाज को थोड़ा नरम
- 1:25:20करते हुए बोला
- 1:25:22तो मिस मेनका आप भी यहां आई हुई हैं क्या
- 1:25:25आप भी इस ऑफिस को लेने में इंटरेस्टेड है।
- 1:25:27इस पर मेनका ने रूखे और सख्त स्वर में
- 1:25:30कहा, नहीं मैं तो नहीं पर मेरे दोस्त यह
- 1:25:33ऑफिस लेना चाहते हैं और उन्होंने मिस्टर
- 1:25:35मल्होत्रा का ऑफर स्वीकार कर लिया है।
- 1:25:38इसलिए अब आपको मिस रुचि को धमकाने की कोई
- 1:25:40जरूरत नहीं है। अगर आपने पहले ही इनका ऑफर
- 1:25:43मान लिया होता तो शायद यह ऑफिस आपका होता।
- 1:25:47लेकिन अब इसे अपने हाथ से निकलते देखकर
- 1:25:49मिस रुचि को धमकाना यह बिल्कुल सही नहीं
- 1:25:52है।
- 1:25:54विहान मेनका की बात सुनकर सकपका गया।
- 1:25:57लेकिन अगले ही पल खुद को संभालते हुए बोला
- 1:26:00मिस मेनका मेरा आपसे कोई लेना देना नहीं
- 1:26:03है और ना ही मैं आपके किसी काम में दखल दे
- 1:26:06रहा हूं। यह मेरे और देवव्रत मल्होत्रा के
- 1:26:08बीच की बात है। हम इस डील को फाइनल करने
- 1:26:11के बेहद करीब थे और आप बीच में आकर इसे
- 1:26:14बिगाड़ रही हैं।
- 1:26:17मेनका ने तुरंत पलट कर जवाब दिया, "अगर
- 1:26:20ऐसा था तो आपने अपनी डील पहले ही फाइनल
- 1:26:23क्यों नहीं कर ली? आज तक इंतजार किस बात
- 1:26:26का था? और दूसरी बात, कोई अपनी संपत्ति
- 1:26:29किसे बेचना चाहता है, यह उसका अधिकार है।
- 1:26:32इसीलिए किसी को धमका कर अपना काम निकालने
- 1:26:35की कोशिश तो आप भूल ही जाइए।" विहान के
- 1:26:38चेहरे पर चिढ़ साफ दिखाई देने लगी। वो
- 1:26:41बोला
- 1:26:42मुझे आपसे यह सीखने की जरूरत नहीं है कि
- 1:26:45मैं अपना काम कैसे करता हूं। मैं पहले इस
- 1:26:48डील को फाइनल करने के करीब था। आप आखिरी
- 1:26:51वक्त में आकर मेरा काम खराब करने की कोशिश
- 1:26:53मत कीजिए।
- 1:26:55इतना कहकर वो देवव्रत मल्होत्रा की तरफ
- 1:26:57मुड़ा और बोला मिस्टर मल्होत्रा आप मेरी
- 1:27:01बात समझ सकते हैं। हमारे पुराने संबंध
- 1:27:03हैं। इसलिए उम्मीद है कि आप फैसला लेते
- 1:27:06वक्त उसे ध्यान में रखेंगे।
- 1:27:09देवव्रत मल्होत्रा विहान की बातों में
- 1:27:11छिपी धमकी को अच्छी तरह समझ रहे थे। लेकिन
- 1:27:14शौर्य का ऑफर सुनने के बाद वो 4 करोड़ का
- 1:27:17नुकसान उठाने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं
- 1:27:19थे। तभी शौर्य आगे बढ़ा और बोला मिस रुचि
- 1:27:23क्या आप मुझे अपना अकाउंट नंबर देंगी?
- 1:27:27शौर्य की बात सुनते ही देवव्रत मल्होत्रा
- 1:27:29खुद आगे आए और अपने मोबाइल में अकाउंट
- 1:27:31नंबर दिखा दिया। शौर्य ने एक नजर उस नंबर
- 1:27:35पर डाली और फिर विक्रम की तरफ देखा।
- 1:27:37विक्रम तुरंत समझ गया कि शौर्य क्या चाहता
- 1:27:40है। वो आगे बढ़ा, मल्होत्रा जी का मोबाइल
- 1:27:42लिया, अपना फोन निकाला और कुछ ही सेकंड
- 1:27:45में ट्रांजैक्शन प्रोसेस कर दिया। कमरे
- 1:27:48में हल्की खामोशी छा गई और तभी बीप की
- 1:27:51आवाज के साथ देवव्रत मल्होत्रा के मोबाइल
- 1:27:54पर मैसेज आया। उन्होंने स्क्रीन देखी और
- 1:27:57उनकी आंखें फैल गई। कुछ पल तक मानो उन्हें
- 1:28:00यकीन ही नहीं हुआ। फिर वो रुचि के पास गए
- 1:28:03और धीमे स्वर में बोले [संगीत]
- 1:28:06पैसे आ गए क्या? रुचि के चेहरे पर भी
- 1:28:10हैरानी साफ थी। बिना किसी एग्रीमेंट के
- 1:28:14इतनी बड़ी रकम सीधे अकाउंट में ट्रांसफर
- 1:28:18वो अब तक इस डर में थी कि कहीं विहान को
- 1:28:21मना करने के बाद शौर्य भी पीछे ना हट जाए।
- 1:28:24लेकिन अब सब कुछ साफ था। उसने जल्दी से
- 1:28:26पूछा कितने पैसे आए हैं? देवव्रत
- 1:28:30मल्होत्रा ने कहा पूरे 51 करोड़।
- 1:28:35रुचि ने फिर एक बार शौर्य की तरफ देखा। इस
- 1:28:38बार उसकी नजर में सिर्फ हैरानी नहीं
- 1:28:40सम्मान भी था। उसने कहा था कि वो सिर्फ
- 1:28:43काम संभालेगा। लेकिन जिस तरह से उसने पूरी
- 1:28:46डील अपने हाथ में लेकर खत्म कर दी। यह कुछ
- 1:28:49और ही कहानी बता रहा था। रुचि विहान की
- 1:28:51तरफ मुड़ी और ठंडे लेकिन स्पष्ट स्वर में
- 1:28:54बोली।
- 1:28:56अब आपके कुछ भी कहने से कोई फर्क नहीं
- 1:28:58पड़ेगा। मिस्टर रायजादा हम पेमेंट रिसीव
- 1:29:01कर चुके हैं। इसलिए आज से यह ऑफिस मिस्टर
- 1:29:04विक्रम का है। बाकी पेपर वर्क एक-द दिन
- 1:29:07में पूरा कर लिया जाएगा। विहान रायजादा
- 1:29:10स्तब्ध खड़ा था। उसने आज तक इतनी तेजी से
- 1:29:14किसी डील को फाइनल होते नहीं देखा था।
- 1:29:17उसका चेहरा गुस्से से लाल था और मन में
- 1:29:20सिर्फ एक ही सवाल था। आखिर यह श्रवण है
- 1:29:24कौन? विहान रायजादा ने सोचा नहीं था कि
- 1:29:27कोई इतनी जल्दी किसी डील को फाइनल कर सकता
- 1:29:30है। वो भी बिना किसी पेपर वर्क के एक साथ
- 1:29:33पूरे पैसे देकर। यह कोई छोटी बात नहीं थी।
- 1:29:36यानी उस व्यक्ति को खुद पर कितना भरोसा था
- 1:29:39कि उसके साथ कुछ गलत नहीं हो सकता। आखिर
- 1:29:43कौन था यह व्यक्ति? विहान रायजादा ने आज
- 1:29:46से पहले ना तो विक्रम के बारे में सुना था
- 1:29:48और ना ही शौर्य के बारे में। हां, वो मिस
- 1:29:51मेनका को होटल राजकमल की मैनेजर के रूप
- 1:29:54में जानता था क्योंकि उसके ऊपर राजा साहब
- 1:29:56का हाथ था। इसीलिए कोई भी मेनका के साथ
- 1:29:59बदतमीजी करने की हिम्मत नहीं कर सकता था।
- 1:30:02हर जगह उसकी इज्जत होती थी। पर जैसा कि
- 1:30:05मेनका ने खुद कहा था कि शौर्य और विक्रम
- 1:30:08उसके जानने वाले हैं। यानी उसका कोई
- 1:30:10डायरेक्ट रिश्ता उन दोनों के साथ नहीं था।
- 1:30:13विहान रायजादा को यह बात भी परेशान कर रही
- 1:30:16थी कि उसके सामने यह डील हो गई और वह कुछ
- 1:30:19भी नहीं कर पाया। एक तरह से यह उसकी
- 1:30:22बेइज्जती ही थी। जो चीज वो चाहता था उसके
- 1:30:25सामने किसी और ने उसे हासिल कर लिया। इतनी
- 1:30:28आसानी से वो इस ऑफिस को अपने हाथ से जाने
- 1:30:31नहीं दे सकता था। एक तरह से यह उसके ईगो
- 1:30:34को भी चोट दे रहा था। उसने एक बार फिर
- 1:30:37देवव्रत मल्होत्रा से कहा। मिस्टर
- 1:30:40मल्होत्रा अगर आपकी यही जिद है कि आप इस
- 1:30:43ऑफिस को 51 करोड़ से कम में नहीं बेचेंगे
- 1:30:46तो ठीक है। मैं आपको 51 करोड़ देने के लिए
- 1:30:49तैयार हूं। पर यह ऑफिस मुझे ही चाहिए।
- 1:30:54अब हैरान होने की बारी मिस्टर देवव्रत
- 1:30:56मल्होत्रा की थी। वो आश्चर्य से विहान
- 1:30:59रायजादा की तरफ देखने लगे। उन्हें समझ
- 1:31:01नहीं आया कि जो विहान अभी तक 45 करोड़ से
- 1:31:04थोड़ा भी ऊपर बढ़ने को तैयार नहीं था वो
- 1:31:07अचानक 51 करोड़ देने को कैसे राजी हो गया।
- 1:31:11पर अब वो क्या कर सकते थे? पैसे तो उन्हें
- 1:31:13पहले ही मिल चुके थे। उन्होंने खुद को
- 1:31:16संभालते हुए कहा
- 1:31:19मिस्टर रायजादा
- 1:31:21मेरी बेटी ने कहा ना कि अब कुछ नहीं हो
- 1:31:23सकता। मिस्टर विक्रम हमें पेमेंट कर चुके
- 1:31:26हैं। इसलिए अब हमारे हाथ में कुछ नहीं है।
- 1:31:30अगर आप थोड़ी देर पहले तैयार हो गए होते
- 1:31:32तो शायद यह ऑफिस आपका होता।
- 1:31:36विहान रायजादा ने तुरंत कहा अभी इन्होंने
- 1:31:39सिर्फ पैसे ट्रांसफर किए हैं। मिस्टर
- 1:31:40मल्होत्रा आपने अभी प्रॉपर्टी इनके नाम
- 1:31:43नहीं की है। इसलिए मालिकाना हक अभी भी
- 1:31:46आपका ही है। आप इनके पैसे वापस कीजिए और
- 1:31:49मेरे एग्रीमेंट पेपर पर साइन कीजिए। अब
- 1:31:52मैं आपकी मांगी हुई कीमत देने को तैयार
- 1:31:54हूं। तो बहाने मत बनाइए और प्रक्रिया शुरू
- 1:31:57कीजिए।
- 1:31:59विहान की ये धमकी भरी बात रुचि मल्होत्रा
- 1:32:01को बिल्कुल पसंद नहीं आई। वो उसके सामने
- 1:32:03आकर बोली मिस्टर विहान यह आपका ऑफिस नहीं
- 1:32:08है कि आप हमें यहां धमका रहे हैं। ऐसी
- 1:32:11बातें अपने ऑफिस या घर में कीजिए। यह सब
- 1:32:14यहां नहीं चलेगा। हमने इस ऑफिस का पेमेंट
- 1:32:17रिसीव कर लिया है। इसलिए अब यह ऑफिस मेरी
- 1:32:20तरफ से मिस्टर विक्रम को ही जाएगा। वो आगे
- 1:32:23बोली उन्होंने बिना किसी नेगोशिएशन के
- 1:32:26हमारी बताई हुई कीमत पर सीधा पेमेंट
- 1:32:28ट्रांसफर कर दिया है। इसलिए हम लीगली
- 1:32:31उन्हें ही यह प्रॉपर्टी देने के लिए बाध्य
- 1:32:33हैं। अब इस प्रॉपर्टी से जुड़ी कोई भी बात
- 1:32:36करनी है तो आप मिस्टर शौर्य या मिस्टर
- 1:32:39विक्रम से करें क्योंकि अब यह प्रॉपर्टी
- 1:32:41पर मालिकाना हक उन्हीं का है। क्या बकवास
- 1:32:44है यह? इतने दिनों तक जो मैं यहां चक्कर
- 1:32:47लगाकर जूते घिस रहा हूं। क्या वो यह देखने
- 1:32:50के लिए कि कोई नया बंदा इस शहर में आए और
- 1:32:52मेरे किए कराए पर पानी फेर कर चला जाए? यह
- 1:32:56कहते हुए विहान रायजादा के नथने फूलने
- 1:32:59लगे। विहान रायजादा को गुस्से में देखकर
- 1:33:02उसके दोनों बाउंसर उसके सामने आकर खड़े हो
- 1:33:05गए थे। जैसे वे इसी इंतजार में हो कि कब
- 1:33:08विहान रायजादा आदेश दे और वे यहां मौजूद
- 1:33:11लोगों की अकड़ ढीली कर दें। शौरभ स्थिति
- 1:33:15को और ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर सकता था।
- 1:33:17वो आगे बढ़कर विहान रायजादा के सामने आया
- 1:33:20और बोला
- 1:33:22मिस्टर रायजादा
- 1:33:24अगर आपको अपना खून जलाना है तो कहीं और
- 1:33:27जाकर जलाइए। यहां उसका कोई फायदा नहीं
- 1:33:30होने वाला। आपकी जानकारी के लिए बता दूं
- 1:33:33कि हमने इस प्रॉपर्टी का फुल और फाइनल
- 1:33:35पेमेंट कर दिया है। इसलिए अब यह प्रॉपर्टी
- 1:33:39हमारे अधिकार क्षेत्र में आती है। इससे
- 1:33:41जुड़ी [संगीत] कोई भी बात करनी है तो
- 1:33:44मुझसे कीजिए। मिस्टर देवव्रत मल्होत्रा या
- 1:33:47रुचि मल्होत्रा का इसमें अब कोई हस्तक्षेप
- 1:33:49नहीं होगा।
- 1:33:51शौर्य की बात सुनकर विहान रायजादा का सिर
- 1:33:54गुस्से से फट पड़ा। वो अपने शब्दों पर
- 1:33:57कंट्रोल नहीं रख सका। वो मिस मेनका का
- 1:33:59लिहाज भी भूल गया और शौर्य से बोला।
- 1:34:03तुम हो कौन? जो मुझसे इस तरह बात करने की
- 1:34:06हिम्मत कर रहे हो। तुम मुझे जानते नहीं
- 1:34:08हो। तुम सोच भी नहीं सकते कि मैं तुम्हारा
- 1:34:11क्या हाल कर सकता हूं। इस पर शौर्य हंसते
- 1:34:14हुए बोला [हंसी]
- 1:34:17तुम्हें कौन नहीं जानता मिस्टर विहान
- 1:34:19रायजादा
- 1:34:21सारा शहर जानता है कि तुम एक भगोड़े हो जो
- 1:34:24अपनी शादी के दिन एक गुंडे के डर से अपनी
- 1:34:27होने वाली पत्नी को अकेला छोड़कर भाग गया
- 1:34:30था। सच कहूं तो तुमसे ज्यादा कायर इंसान
- 1:34:33मैंने आज तक नहीं देखा। और तुम मुझे धमकी
- 1:34:36दे रहे हो।
- 1:34:38शौर्य के दिल में जो गुस्सा था वो उसकी
- 1:34:41बातों में साफ झलक रहा था। उसकी बात सुनकर
- 1:34:44ऐसा लगा जैसे किसी ने विहान रायजादा की
- 1:34:46दुखती नस पर हाथ रख दिया हो। वो और ज्यादा
- 1:34:50तिलमिला उठा। अब वो खुद पर बिल्कुल भी
- 1:34:53काबू नहीं रख सका और गरज कर अपने बाउंसरों
- 1:34:55से बोला। तुम दोनों मेरा मुंह क्या देख
- 1:34:58रहे हो? इस आदमी को इतना मारो कि इसकी एक
- 1:35:00भी हड्डी सलामत नहीं रहनी चाहिए। जैसे ही
- 1:35:04आदेश मिला दोनों बाउंसर शौर्य पर झपट
- 1:35:06पड़े। लेकिन शौर्य पहले से तैयार था। जैसे
- 1:35:10ही वे उसके करीब पहुंचे, वो फुर्ती से दो
- 1:35:12कदम पीछे हट गया। बाउंसरों का वार खाली
- 1:35:15गया और वह दोनों लड़खड़ा गए। हालांकि अगले
- 1:35:18ही पल उन्होंने खुद को संभाल लिया और जलती
- 1:35:21निगाहों से शौर्य को घूरने लगे। मेनका यह
- 1:35:24सब देखती ही रह गई। उसे उम्मीद नहीं थी कि
- 1:35:26उसके सामने होते हुए भी विहान रायजादा इस
- 1:35:29हद तक चला जाएगा। वो तुरंत आगे बढ़ी और
- 1:35:32सख्त आवाज में बोली। मिस्टर विहान आप समझ
- 1:35:35भी रहे हैं कि आप क्या करने जा रहे हैं।
- 1:35:38इसका परिणाम बेहद गंभीर हो सकता है। लेकिन
- 1:35:42विहान रायजादा ने उसकी बातों को नजरअंदाज
- 1:35:45करते हुए कहा मिस मेनका मैं आपसे उलझना
- 1:35:48नहीं चाहता। लेकिन इस आदमी को मैं नहीं
- 1:35:50छोडूंगा। चाहे इसके लिए मुझे कुछ भी क्यों
- 1:35:52ना झेलना पड़े।
- 1:35:55मेनका को यकीन नहीं हुआ कि उसकी बात को
- 1:35:57इतनी आसानी से नजरअंदाज कर दिया गया। उसने
- 1:36:00विक्रम की तरफ देखा जिससे कह रही हो तुम
- 1:36:03खड़े-खड़े क्या देख रहे हो? आगे बढ़ो।
- 1:36:06लेकिन विक्रम के चेहरे पर जरा भी चिंता
- 1:36:08नहीं थी। उल्टा वो इस पूरे सीन को एंजॉय
- 1:36:11करता हुआ नजर आ रहा था। विक्रम के चेहरे
- 1:36:14की मुस्कान को देखकर मेनका को एक पल के
- 1:36:16लिए शक हुआ। क्या यह सच में शौर्य का
- 1:36:19पर्सनल असिस्टेंट या बॉडीगार्ड है? जब उसे
- 1:36:22वहां से भी कोई उम्मीद नहीं मिली, तो उसने
- 1:36:24फिर से शौर्य की तरफ देखा। शौर्य के चेहरे
- 1:36:27पर भी जरा सा डर नहीं था बल्कि उसके होठों
- 1:36:30पर एक हल्की आत्मविश्वास से भरी मुस्कान
- 1:36:33खेल रही थी और यह देखकर वो और भी ज्यादा
- 1:36:36हैरान रह गई। यह हाल सिर्फ मेनका का ही
- 1:36:39नहीं था। कमोबेश यही स्थिति देवव्रत
- 1:36:42मल्होत्रा और रुचि मल्होत्रा की भी थी।
- 1:36:45उनकी आंखों में भी शौर्य के लिए चिंता साफ
- 1:36:47नजर आ रही थी। लेकिन शौर्य इन सबसे
- 1:36:50बेपरवाह था। वो अब विहान रायजादा के
- 1:36:53बाउंसरों को सबक सिखाने के मूड में आ चुका
- 1:36:56था। एक बार फिर दोनों बाउंसर ने उसे आगे
- 1:36:59पीछे से घेर लिया और एक साथ उस पर झपट
- 1:37:01पड़े। लेकिन इस बार भी शौर्य ने कमाल कर
- 1:37:04दिया। उसने एक ऊंची छलांग लगाई और उनके
- 1:37:07बीच से निकल कर सीधा विहान रायजादा के
- 1:37:10सामने आकर लैंड किया। पीछे दोनों बाउंसर
- 1:37:13आपस में ही टकरा गए। शौर्य ने बिना एक पल
- 1:37:16गवाए हाथ घुमाया।
- 1:37:19और एक जोरदार थप्पड़ विहान रायजादा के गाल
- 1:37:22पर जा पड़ा। पूरा हॉल सन रह गया। विहान
- 1:37:26रायजादा अविश्वास से शौर्य को घूर रहा था।
- 1:37:30उसे उम्मीद ही नहीं थी कि कोई उस पर हाथ
- 1:37:32उठाने की हिम्मत करेगा। उसका एक हाथ अपने
- 1:37:35गाल पर था और आंखें फटी रह गई थी। तभी
- 1:37:39उसके दोनों बाउंसर संभल चुके थे। जैसे ही
- 1:37:42उन्होंने देखा कि उनके बॉस पर हाथ उठाया
- 1:37:44गया है। वे गुस्से से शौर्य की तरफ बढ़े।
- 1:37:48लेकिन शौर्य ने विहान को उसी हालत में
- 1:37:50छोड़ दिया और बाउंसरों का इंतजार करने
- 1:37:52लगा। इस बार उसका इरादा साफ था। पहले
- 1:37:56इन्हें धूल चटानी है फिर विहान की अकड़
- 1:37:58तोड़नी है। जब उसे लगा कि वे धीरे-धीरे
- 1:38:01बढ़ रहे हैं तो उसने खुद ही हमला कर दिया।
- 1:38:04वो बिजली की रफ्तार से दौड़ा। एक ऊंची
- 1:38:06छलांग लगाई और हवा में ही दोनों पैरों से
- 1:38:09एक साथ किक मारी।
- 1:38:13दोनों बाउंसर 5-प फीट पीछे जाकर गिरे।
- 1:38:16उनके चेहरे से खून रिसने लगा और शौर्य वो
- 1:38:20उसी जगह खड़ा था जहां कुछ पल पहले वे
- 1:38:23दोनों खड़े थे। अब बाउंसर उसे किसी इंसान
- 1:38:26की तरह नहीं बल्कि किसी अजूबे की तरह देख
- 1:38:28रहे थे। लेकिन हार मानना उनके स्वभाव में
- 1:38:32नहीं था। उन्होंने खून पोंछा, दांत भी और
- 1:38:35फिर से उसकी तरफ बढ़े। इस बार वे सर्क थे।
- 1:38:39दोनों के बीच थोड़ा फासला था। अचानक एक
- 1:38:42बाउंसर ने छलांग लगाई और सीधा शौर्य के
- 1:38:44चेहरे पर किक मारने की कोशिश की। लेकिन
- 1:38:47शौर्य झुका और उस बाउंसर का वार खाली गया।
- 1:38:50उसी पल वो फर्श पर पलटी खाकर दूसरे बाउंसर
- 1:38:53के पास पहुंच गया और अपने हाथों पर घूमते
- 1:38:56हुए अपने पैर से चकरी जैसी घुमावदार किक
- 1:38:59उसके पैर पर दे मारी।
- 1:39:02दूसरा बाउंसर वहीं गिर पड़ा। उसका पैर
- 1:39:05बुरी तरह मुड़ चुका था। अब वह चाहकर भी
- 1:39:08खड़ा नहीं हो सकता था। शौर्य धीरे से उठकर
- 1:39:11खड़ा हुआ और फिर पलट कर पहले बाउंसर की
- 1:39:13तरफ देखा। पहला बाउंसर फिर से खड़ा हो
- 1:39:16चुका था। लेकिन जैसे ही उसने अपने साथी की
- 1:39:19हालत देखी, उसके चेहरे का रंग उड़ गया। अब
- 1:39:22उसके अंदर डर साफ नजर आ रहा था। शौर्य
- 1:39:26धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगा। हर कदम के
- 1:39:28साथ उसका आत्मविश्वास और सामने वाले का डर
- 1:39:32बढ़ता जा रहा था। और फिर बाउंसर अचानक आगे
- 1:39:35बढ़ा। लेकिन हमला करने के लिए नहीं। वो
- 1:39:38सीधे घुटनों के बल बैठ गया और हाथ जोड़ते
- 1:39:41हुए बोला मैं हार मानता हूं बड़े भाई। मैं
- 1:39:44आपसे जीत नहीं सकता। उसकी बात सुनकर शौर्य
- 1:39:48बोला अगर हार ही माननी थी तो पहले मान
- 1:39:52लेते। इससे तुम्हारे साथी का पैर तो बच
- 1:39:55जाता।
- 1:39:57शौर्य की यह बात सुनकर भी पहला बाउंसर चुप
- 1:40:00ही रहा। वो उसी तरह सिर झुकाए खड़ा रहा।
- 1:40:03शौर्य उसे छोड़कर विहान रायजादा की तरफ
- 1:40:06बढ़ा। उसके करीब पहुंचकर वो ठंडी आवाज में
- 1:40:09बोला,
- 1:40:11हां जी, अब क्या बोलते हो? तुम्हारे दोनों
- 1:40:14बाउंसर तो ढेर हो गए। अब तुम्हें कौन
- 1:40:17बचाने आएगा? शौर्य की बात सुनकर विहान
- 1:40:20रायजादा के शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई।
- 1:40:23फिर भी उसने खुद को संभालते हुए कहा, "यह
- 1:40:27तुमने अच्छा नहीं किया। मैं इस बात को
- 1:40:30भूलने वाला नहीं हूं। ऐसा बदला लूंगा कि
- 1:40:34तुम्हारी रूह तक कांप जाएगी।
- 1:40:37शौर्य जोर से हंसा और बोला [हंसी]
- 1:40:41अभी भी धमकी दे रहे हो। बदला तो तुम बाद
- 1:40:44में लोगे लेकिन अभी तुम्हें मुझसे कौन
- 1:40:47बचाएगा। इतना कहते ही उसने एक और जोरदार
- 1:40:51थप्पड़ उसके गाल पर जड़ दिया।
- 1:40:55इस बार थप्पड़ इतना भारी था कि विहान
- 1:40:58रायजादा का जबड़ा हिल गया। अब उसके चेहरे
- 1:41:01पर साफ डर नजर आने लगा। कांपती आवाज में
- 1:41:04उसने पूछा क्या चाहते हो तुम मुझसे? अब आए
- 1:41:08ना तुम औकात पर।
- 1:41:10शौर्य मुस्कुराते हुए बोला। फिर उसने ठंडे
- 1:41:13लेकिन खतरनाक लहजे में कहा। अपने घुटनों
- 1:41:17पर आओ। और जैसे तुम्हारे बाउंसर ने कहा कि
- 1:41:20वो अपनी हार मानता है। [संगीत] वैसे ही
- 1:41:23तुम भी कहो कि तुम हार मानते हो। और
- 1:41:26दोबारा मेरे रास्ते में आने की कोशिश नहीं
- 1:41:29करोगे। वरना जो हाल तुम्हारे दूसरे बाउंसर
- 1:41:33का हुआ है, वही हाल [संगीत] तुम्हारा भी
- 1:41:36करूंगा। शौर्य की बात सुनकर अनायास ही
- 1:41:39विहान की नजर अपने घायल बाउंसर पर गई। वो
- 1:41:42फर्श पर पड़ा था। अपने टेढ़े पैर को सीधा
- 1:41:45करने की कोशिश कर रहा था। उसकी हालत देखकर
- 1:41:48ही विहान के शरीर में सिहरन दौड़ गई और
- 1:41:52बिना कुछ सोचे वो धीरे-धीरे घुटनों पर आ
- 1:41:54गया। उसकी आवाज में अब अहंकार नहीं सिर्फ
- 1:41:58बेबसी थी। वो बोला मैं अपनी हार मानता हूं
- 1:42:02और दोबारा तुम्हारे सामने आने की कोशिश
- 1:42:06नहीं करूंगा।
- 1:42:08यह कहते ही वो तुरंत उठा और बिना किसी की
- 1:42:10तरफ देखे तेज कदमों से बाहर निकल गया।
- 1:42:13उसके पीछे-पीछे उसका वो तीसरा आदमी जो
- 1:42:16शायद वकील था वो भी वहां से चला गया। उनके
- 1:42:19जाने के बाद पहला बाउंसर उठा। अपने घायल
- 1:42:22साथी को सहारा दिया और धीरे-धीरे उसे लेकर
- 1:42:25बाहर निकल गया। कुछ ही पलों में पूरा हॉल
- 1:42:28खाली हो गया। और वहां छा गई एक गहरी सन्न
- 1:42:33कर देने वाली खामोशी। क्योंकि वहां मौजूद
- 1:42:36किसी भी [संगीत] व्यक्ति को समझ नहीं आ
- 1:42:38रहा था कि कुछ ही मिनटों में यहां क्या से
- 1:42:42क्या हो गया। शौर्य अब सबके लिए एक पहेली
- 1:42:45बन गया था। सबके दिमाग में उसे देखकर यही
- 1:42:48सवाल गूंजने लगा था कि आखिर वो है क्या
- 1:42:51चीज? जो लोग उसे अंडरएस्टिमेट कर रहे थे,
- 1:42:54वह उसके किसी भी डील को तुरंत एस्टीमेट
- 1:42:56करके हाथों हाथ पेमेंट करने के तरीके से
- 1:42:59चौंक गए थे। रुचि से कुछ ही मिनटों में 51
- 1:43:03करोड़ में खरीदे नए ऑफिस के आलीशान कमरे
- 1:43:06में मेनका एक कोने में खड़ी होकर अभी भी
- 1:43:08उस दृश्य को अपनी आंखों के सामने दोहरा
- 1:43:11रही थी। जो अभी-अभी घटित हुआ था। उसे अपनी
- 1:43:15आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था कि शौर्य ने
- 1:43:18विहान रायजादा जैसे रसूखदार आदमी का बुरा
- 1:43:21हाल कर दिया था। शुरुआत में मेनका को लगा
- 1:43:24था कि शौर्य विहान के खूंखार बाउंसरों का
- 1:43:27मुकाबला नहीं कर पाएगा। पर शौर्य ने जिस
- 1:43:30सहजता से उन्हें धूल चटाई उसे देखकर मेनका
- 1:43:34के मन में शौर्य की छवि पूरी तरह बदल गई
- 1:43:37थी।
- 1:43:38मेनका खुद को कोस रही थी कि उसने शौर्य को
- 1:43:42कितना अंडरएस्टिमेट किया था। वो इस उलझन
- 1:43:44में भी थी कि शौर्य के पास इतनी अपार धन
- 1:43:47दौलत आई कहां से? पर जब उसे कुछ भी समझ
- 1:43:50नहीं आया तो उसने खुद को तसल्ली दी कि वो
- 1:43:52होटल में पहुंचते ही शौर्य से इस बारे में
- 1:43:55सवाल करेगी। दूसरी तरफ रुचि मल्होत्रा भी
- 1:43:59शौर्य से पूरी तरह प्रभावित थी। रुचि धीरे
- 1:44:02से शौर्य के करीब आई और आभार प्रकट करते
- 1:44:05हुए बोली आपका बहुत-बहुत धन्यवाद मिस्टर
- 1:44:09श्रवण। आपने आज विहान रायजादा को अच्छा
- 1:44:12सबक सिखाया।
- 1:44:14शौर्य ने शिष्टाचार निभाते हुए जवाब दिया।
- 1:44:17इसकी कोई जरूरत [संगीत] नहीं है मिस रुचि।
- 1:44:19वो इसी काबिल था। रुचि के चेहरे पर चमक
- 1:44:22थी। वो आगे बोली।
- 1:44:25मैं आपके तुरंत फैसले लेने की काबिलियत से
- 1:44:27काफी इंप्रेस हूं। आपने बिना किसी
- 1:44:30एग्रीमेंट के सारा पेमेंट भी एक साथ कर
- 1:44:33दिया। यह बहुत ही साहसिक फैसला है। मुझे
- 1:44:37अभी पैसे की जरूरत थी। आपके कारण मेरा काम
- 1:44:40समय से हो जाएगा।
- 1:44:43शौर्य ने एक सरसरी निगाह पूरे ऑफिस में
- 1:44:45दौड़ाई और बोला ऐसा बोलने की आपको कोई
- 1:44:48जरूरत नहीं है। बिसरुचि मेरे लिए सबसे
- 1:44:51बड़ी बात यह है कि मुझे एक तैयार ऑफिस मिल
- 1:44:54गया है। अब मुझे यहां ज्यादा कुछ करने की
- 1:44:56जरूरत नहीं पड़ेगी। मैं चाहूं तो कल से ही
- 1:44:59अपना काम शुरू कर सकता हूं। बातचीत के बीच
- 1:45:03रुचि मल्होत्रा के दिमाग में कुछ संशय ने
- 1:45:05भी जन्म लिया। शौर्य ने उसके दिमाग में भी
- 1:45:08यही सवाल पैदा करवा दिया था कि आखिर शौर्य
- 1:45:11है क्या चीज? रुचि भी यह सोचकर हैरान थी
- 1:45:14कि मेनका ने तो कहा था कि मिस्टर विक्रम
- 1:45:16इस जगह के ओनर होने वाले हैं और शौर्य
- 1:45:19सिर्फ देखरेख करेगा। पर यहां सारे फैसले
- 1:45:22शौर्य ले रहा था। रुचि ने फिर शौर्य से
- 1:45:25पूछा। मिस्टर श्रवण इस प्रॉपर्टी से
- 1:45:28रिलेटेड पेपर तैयार करने के लिए अगर आपके
- 1:45:31कोई लोग हो तो आप बता दीजिए। शौर्य ने
- 1:45:35मेनका की तरफ देखा तो मेनका ने कुछ सोचकर
- 1:45:37कहा रुचि तुम रहने दो जो हमारा प्रॉपर्टी
- 1:45:41से रिलेटेड काम देखता है उससे बोलकर मैं
- 1:45:43यह पेपर तैयार करवा लूंगी पेपर तैयार होने
- 1:45:46के बाद जब रजिस्ट्रेशन की डेट निश्चित
- 1:45:48होगी तो मैं तुम्हें बता दूंगी।
- 1:45:51रुचि ने जवाब दिया ठीक है यही अच्छा
- 1:45:54रहेगा। जब तुम्हारी कागजी कार्यवाही पूरी
- 1:45:56हो जाए तो तुम मुझे बता देना। मैं समय पर
- 1:45:59रजिस्ट्रार ऑफिस पहुंच जाऊंगी।
- 1:46:02रुचि और मेनका पुराने दोस्त थे। लेकिन
- 1:46:05रुचि इस बात से हैरान थी कि उसने आज से
- 1:46:07पहले मेनका से शौर्य और विक्रम के बारे
- 1:46:10में कुछ नहीं सुना था। वो आगे भी शौर्य के
- 1:46:13टच में रहना चाहती थी। इसीलिए उसने सीधा
- 1:46:15शौर्य से ही पूछा। मिस्टर श्रवण अगर आप
- 1:46:19बुरा ना माने तो [संगीत] क्या मैं आपसे
- 1:46:21कुछ पूछ सकती हूं? शौर्य को रुचि के बदलते
- 1:46:24भाव देखकर अंदाजा हो गया था कि वह क्या
- 1:46:27जानना चाहती है। उसने कहा पूछिए क्या
- 1:46:30जानना चाहती हैं आप? रुचि ने संकोच छोड़कर
- 1:46:34अपनी जिज्ञासा व्यक्त की। मिस्टर श्रवण
- 1:46:36मैं इसी शहर की हूं और यहां की एलट क्लास
- 1:46:39फैमिलीज के बारे में जानकारी रखती हूं। पर
- 1:46:42आप और विक्रम सर ऐसे शख्स हैं जिनके बारे
- 1:46:44में मैं कुछ भी नहीं जानती। आपने इतना
- 1:46:48बड़ा अमाउंट एक बार में ही पे कर दिया है
- 1:46:50तो मैं समझ सकती हूं कि आप किसी बहुत बड़े
- 1:46:53परिवार से संबंध रखते हैं। तो इतना तो मैं
- 1:46:56यकीन के साथ कह सकती हूं कि आप इस शहर से
- 1:46:58नहीं हैं और जिस तरह आपने विहान रायजादा
- 1:47:01को सबक सिखाया है। इससे यह भी पता चलता है
- 1:47:04कि आपको यहां की हस्तियों का डर नहीं है।
- 1:47:07बस मैं आपके बैकग्राउंड के बारे में जानना
- 1:47:10चाह रही थी। शौर्य जानता था कि रुचि को शक
- 1:47:14होना स्वाभाविक है। इसीलिए उसने तुरंत एक
- 1:47:17कहानी बनाई। आपने सही कहा मिस रुचि। मैं
- 1:47:21और विक्रम बहुत अच्छे दोस्त हैं। निर्णय
- 1:47:24उसका हो या मेरा हम कभी एक दूसरे के
- 1:47:26निर्णय पर सवाल नहीं उठाते। विक्रम
- 1:47:29अभी-अभी यूके से यहां आया है। मेरे दिमाग
- 1:47:32में कुछ बिजनेस प्रपोजल थे जिसे उसने अपनी
- 1:47:34सहमति दे दी है। तो [संगीत] आप यह समझ
- 1:47:37सकती हैं कि इस सबके पीछे पैसा उसका और
- 1:47:40दिमाग मेरा है।
- 1:47:41मेनका बगल में खड़ी शौर्य के दिमाग की दाद
- 1:47:44दिए बिना रह नहीं सकी। उसने सोचा कितना
- 1:47:47शातिर है यह आदमी। पल भर में इसने क्या
- 1:47:50कहानी बना ली। तभी रुचि ने ऑफिस की
- 1:47:53चाबियां शौर्य की तरफ बढ़ाते हुए कहा।
- 1:47:56मिस्टर श्रवण पेपर वर्क तो अपने समय से
- 1:47:58होता रहेगा। पर अभी से यह ऑफिस आपका हुआ।
- 1:48:02यह रही इस ऑफिस की चाबियां। अब आप संभालिए
- 1:48:05इसे। शौर्य ने चाबियां ली और मेनका की ओर
- 1:48:08देखकर बोला तो मिस मेनका यहां का काम तो
- 1:48:12पूरा हुआ अब चलें शौर्य विक्रम मेनका
- 1:48:17तीनों होटल की ओर चल पड़े मेनका शौर्य का
- 1:48:20नया रूप देखकर शॉक्ड थी उसके दिमाग में
- 1:48:23सवालों का उफान बेकाबू हो रहा था। फिर कुछ
- 1:48:27देर बाद होटल राजकमल केबिन में मेनका अपनी
- 1:48:30कुर्सी पर बैठी थी। पर उसकी नजरें लगातार
- 1:48:33शौर्य पर टिकी थी। जैसे आज वो उसे पूरी
- 1:48:36तरह पढ़ लेना चाहती हो। लेकिन शौर्य शायद
- 1:48:39उसके चेहरे के हाफ भावों को पहले ही पढ़
- 1:48:41चुका था। उसे मालूम था कि अब सामने से
- 1:48:44सीधे दिल और दिमाग को चीरते हुए सवाल
- 1:48:46आएंगे।
- 1:48:48वो आराम से कुर्सी पर टिक गया। जैसे वो तय
- 1:48:51कर चुका हो। अब कुछ भी छुपाना नहीं है।
- 1:48:54कुछ पल की खामोशी के बाद मेनका ने सीधे
- 1:48:57वार किया। क्या मैं तुमसे कुछ सवाल पूछ
- 1:49:00सकती हूं? शौर्य ने बिना घबराए उसकी आंखों
- 1:49:03में देखा और मुस्कुराया। चलो अब पूछ भी लो
- 1:49:07इतना हाइप क्रिएट क्यों कर रही हो? मेनका
- 1:49:10ने गहरी सांस ली और पहला सवाल दागा। सबसे
- 1:49:14पहले यह बताओ अब से पहले तुम कहां थे?
- 1:49:18शौर्य ने बिना पलक झपकाए जवाब दिया।
- 1:49:20[संगीत] यह तो मैं तुम्हें बता चुका हूं।
- 1:49:22मैं पिछले 6 महीने से इसी शहर में भिखारी
- 1:49:25की जिंदगी जी रहा था। मैं इनका अगला सवाल
- 1:49:28सोच पाती। उससे पहले ही शौर्य ने खुद ही
- 1:49:31आगे बढ़ते हुए कहा, "मैं तुम्हें शुरू से
- 1:49:34पूरी कहानी बता देता हूं। शायद [संगीत]
- 1:49:36उसके बाद तुम्हें कुछ पूछने की जरूरत ही
- 1:49:39ना पड़े। इससे पहले कि मेनका कुछ कहती
- 1:49:42[संगीत] शौर्य ने एक स्टोरी टेलर की तरह
- 1:49:44बोलना शुरू किया। मेरे पापा ने अपनी मर्जी
- 1:49:48से शादी कर ली थी। जिससे मेरे दादाजी
- 1:49:50नाराज हो गए और उन्होंने उन्हें घर से
- 1:49:53निकाल दिया। घर से निकाले जाने के बाद
- 1:49:56मेरे पापा को लगा कि इस शहर में वे कुछ
- 1:49:58खास कर नहीं पाएंगे। इसीलिए उन्होंने मेरी
- 1:50:01मां के साथ भारत छोड़ दिया और यूके में
- 1:50:04शिफ्ट हो गए। कुछ समय तक उन्होंने वहां
- 1:50:07अलग-अलग जगह काम किया। फिर अपना बिजनेस
- 1:50:10शुरू किया। उन्हें जल्दी ही सफलता मिल गई
- 1:50:12और हमारा परिवार यूके [संगीत] में अच्छे
- 1:50:14से सेटल हो गया। मैंने भी वहीं रहते हुए
- 1:50:17अपना बिजनेस शुरू किया और धीरे-धीरे उसे
- 1:50:20स्थापित कर लिया। मेनका बड़े गौर से पूरी
- 1:50:24बात सुन रही थी। शौर्य ने कहना जारी रखा।
- 1:50:28इधर इंडिया जब मेरे दादाजी को पता चला कि
- 1:50:30उनका एक पोता भी है तो उनके दिल में मुझे
- 1:50:33देखने की इच्छा जाग उठी। इसी वजह से मैं
- 1:50:36उनसे मिलने भारत आ गया। शौर्य हल्का
- 1:50:39मुस्कुराया और बोला
- 1:50:42लेकिन शायद किसी को मेरा भारत आना रास
- 1:50:44नहीं आया। इसीलिए उसने मुझे जान से मारने
- 1:50:47की कोशिश की। अब इसे मेरा नसीब कहो या
- 1:50:50मेरे दुश्मन की बदनसीबी। उस एक्सीडेंट में
- 1:50:53मैं बच गया। और जब मुझे पता चला कि किसी
- 1:50:56ने मुझे मारने की कोशिश की है तो मैंने
- 1:50:59दुनिया के सामने खुद को जीवित दिखाना ठीक
- 1:51:02नहीं समझा। और मैं एक भिखारी की जिंदगी
- 1:51:04जीता रहा। अभी जब मेरे दादाजी को हार्ट
- 1:51:07अटैक आया तब मुझे उनके सामने आना पड़ा।
- 1:51:11लेकिन मैं सीधे उनके महल में नहीं जा सकता
- 1:51:13था। क्योंकि जब तक मुझे यह पता नहीं चल
- 1:51:15जाता कि मुझे मारने [संगीत] की कोशिश
- 1:51:17किसने की तब तक मैं खुद को सबके सामने
- 1:51:20जाहिर नहीं करना चाहता था। मेनका एक टक
- 1:51:24शौर्य को देख रही थी। तभी शौर्य ने टेबल
- 1:51:27पर हल्का सा हाथ मारकर कहा बस यही है मेरी
- 1:51:31कहानी। इतना कहकर शौर्य चुप हो गया। लेकिन
- 1:51:35मेनका के कुछ सवाल शायद अभी भी बाकी थे।
- 1:51:38उसने शौर्य से पूछा।
- 1:51:40क्या मैं जान सकती हूं कि तुमने कौन सा
- 1:51:42बिजनेस एस्टैब्लिश कर रखा है? शौर्य ने
- 1:51:46मुस्कुराते हुए कहा, वैसे तो मेरे पापा ने
- 1:51:49यूके में अपने कई बिजनेस फैला रखे हैं।
- 1:51:52लेकिन मैंने जो अपने दम पर एस्टैब्लिश
- 1:51:54किया है वो है बिगबुल। तुमने शायद इसका
- 1:51:57नाम सुना होगा। यूके में तो इसकी कई
- 1:51:59ब्रांचेस पहले से ही अच्छे से रन कर रही
- 1:52:02हैं और अब इंडिया में भी हाल फिलहाल कुछ
- 1:52:04ब्रांचेस शुरू हो चुकी हैं। मेनका ने जैसे
- 1:52:08ही शौर्य के मुंह से बिगbul का नाम सुना
- 1:52:11वो आश्चर्य से बोली क्या कहा तुमने? बिग
- 1:52:15बुल तुम्हारी कंपनी है और इसे तुमने अपने
- 1:52:18दम पर खड़ा किया है। यह तो बहुत बड़ी
- 1:52:21कंपनी है। मेरे ख्याल से ज्यादातर
- 1:52:24बड़े-बड़े इंटरनेशनल ब्रांड्स का
- 1:52:25कोलैबोरेशन बिगbul के साथ है। मेनका ये
- 1:52:29जानकर हैरान थी कि इतनी कम उम्र में शौर्य
- 1:52:32ने इतना बड़ा ब्रांड खड़ा कर लिया था।
- 1:52:34उसने अपनी हैरानी को कंट्रोल किया और
- 1:52:36बोली। तो अब तुम्हारा आगे का क्या इरादा
- 1:52:39है? मेनका की बात सुनकर शौर्य वर्तमान में
- 1:52:42लौट आया। उसने कहा
- 1:52:45जहां तक मेरे मेन फोकस की बात है वो
- 1:52:49ब्रांड एंडोर्समेंट है। इसके लिए मुझे मिस
- 1:52:51नताशा से मिलना है। मैं उन्हें अपनी कंपनी
- 1:52:54का ब्रांड एंबेसडर बनाना चाहता हूं। क्या
- 1:52:57तुम्हारे पास कोई ऐसा लिंक है [संगीत]
- 1:52:59जिससे मैं मिस नताशा के साथ मीटिंग सेट कर
- 1:53:01सकूं। मेनका ने धैर्य से शौर्य की बात को
- 1:53:05सुना और बोली, "यह कोई मुश्किल काम नहीं
- 1:53:08है। एक डायरेक्टर है रत्नाकर शेट्टी। उसने
- 1:53:11नताशा के साथ कई ऐड फिल्में बनाई हैं।
- 1:53:14उससे बात करने पर वो नताशा के साथ
- 1:53:16तुम्हारी मीटिंग अरेंज कर सकते हैं। मेनका
- 1:53:19की बात सुनकर शौर्य खुश होते हुए बोला अरे
- 1:53:22वाह यह तो बहुत आसान हो गया। तुम अभी उनसे
- 1:53:25बात करके हमारी मीटिंग फिक्स कर दो। मेनका
- 1:53:29शौर्य की बात सुनकर बोली इतनी भी क्या
- 1:53:32जल्दी है? डोंट वरी हो जाएगा यह काम। अरे
- 1:53:36हो जाएगा तो फिर करो ना। शौर्य ने
- 1:53:38मुस्कुराते हुए कहा मेनका समझ गई कि शौर्य
- 1:53:41मानने वाला नहीं है। उसने अपना मोबाइल
- 1:53:44निकाला उसमें रत्नाकर शेट्टी का नंबर
- 1:53:46ढूंढा और कॉल लगा दिया। दो-तीन रिंग के
- 1:53:49बाद दूसरी तरफ से फोन उठाया गया। हेलो
- 1:53:52रत्नाकर जी। मैं मेनका बोल रही हूं होटल
- 1:53:55राजकमल से। पहचाना मुझे
- 1:53:58अरे आप कैसी बात कर रही हैं मिस मेनका। आप
- 1:54:02हुक्म कीजिए। आपने इस नाचीज को कैसे याद
- 1:54:05किया? रत्नाकर शेट्टी ने मुस्कुरा कर कहा
- 1:54:09ऐसा है रत्नाकर जी मेरे एक मित्र हैं
- 1:54:11जिन्हें अपने प्रोजेक्ट के लिए एक
- 1:54:14डायरेक्टर और एक फेमस मॉडल की जरूरत है।
- 1:54:17इसी सिलसिले में आपसे मीटिंग करनी थी। तो
- 1:54:20आप बताइए कि आप कब मिल सकते हैं? मेनका ने
- 1:54:23अपनी बात साफ-साफ रख दी। मेनका की बात
- 1:54:26सुनकर रत्नाकर शेट्टी खुश होकर बोले
- 1:54:29आप जब भी कहे मिस मेनका [संगीत] मैं मिलने
- 1:54:32के लिए समय निकाल सकता हूं। लेकिन क्या
- 1:54:35पहले मैं जान सकता हूं कि आपके वो मित्र
- 1:54:38किस मॉडल के साथ काम करना चाहते हैं।
- 1:54:41रत्नाकर शेट्टी की बात सुनकर मेनका बोली
- 1:54:44अरे ये तो मैं आपको बताना ही भूल गई। मॉडल
- 1:54:47के रूप में मेरे फ्रेंड को मिस नताशा ही
- 1:54:50चाहिए।
- 1:54:50अरे वाह। आपने तो बहुत ही सही समय पर फोन
- 1:54:54किया है। एक्चुअली अभी मैं मिस नताशा के
- 1:54:58साथ ही एक शूटिंग पर आया हुआ हूं।
- 1:55:00कृष्णापुरम की पहाड़ी पर जो कॉटेज है वहीं
- 1:55:03पर हमारा कल और परसों का शूटिंग शेड्यूल
- 1:55:05है। क्यों ना आप अपने मित्र को वहीं भेज
- 1:55:07दें ताकि हमें मीटिंग के लिए ज्यादा
- 1:55:10इंतजार ना करना पड़े।
- 1:55:12रत्नाकर शेट्टी ने अपना सुझाव दिया।
- 1:55:14रत्नाकर शेट्टी की बात सुनकर मेनका ने
- 1:55:17शौर्य की तरफ देखा क्योंकि उसका मोबाइल
- 1:55:20लाउडस्पीकर पर था। जैसे ही मेनका ने उसकी
- 1:55:22तरफ देखा, शौर्य ने हल्का सा सिर हिलाकर
- 1:55:25अपनी सहमति दे दी। शौर्य की सहमति मिलने
- 1:55:28के बाद मेनका ने कहा, ठीक है रत्नाकर जी
- 1:55:32यह बढ़िया रहेगा। कल मेरा फ्रेंड
- 1:55:34कृष्णापुरम के कॉटेज में आकर आपसे मिल
- 1:55:36लेगा।
- 1:55:38जी यह सही रहेगा।
- 1:55:40रत्नाकर शेट्टी ने सहमति जताई। इसके बाद
- 1:55:43मेनका ने फोन काट दिया और शौर्य की तरफ
- 1:55:46देखते हुए बोली, [संगीत] लो तुम्हारा यह
- 1:55:49काम भी हो गया। अब तो खुश हो। इस पर शौर्य
- 1:55:52मुस्कुराते हुए बोला बहुत बहुत ज्यादा पता
- 1:55:56नहीं तुम नहीं होती तो मेरा क्या होता बस
- 1:55:59बस अब ज्यादा ड्रामा करने की जरूरत नहीं
- 1:56:02है अभी मेनका बोल ही रही थी कि अचानक उसके
- 1:56:05फोन पर घंटी बज उठी उसने स्क्रीन की तरफ
- 1:56:08देखा और नंबर देखते ही उसकी [संगीत] आंखें
- 1:56:10सिकुड़ गई वो मन ही मन बोली
- 1:56:14आखिर इस वक्त इनका फोन आने का क्या मतलब
- 1:56:18हो सकता है
- 1:56:20एक फोन की घंटी ने मेनका के चेहरे का रंग
- 1:56:22बदल दिया था। शौर्य का सच जानकर [संगीत]
- 1:56:25मेनका के दिल ने अभी राहत की सांस भी नहीं
- 1:56:27ली थी कि एक नई आफत उसके फोन पर ब्लिंक
- 1:56:30[संगीत] करने लगी। फोन की घंटी लगातार बज
- 1:56:34रही थी और स्क्रीन पर आया नाम देखकर मेनका
- 1:56:36[संगीत] की आंखें कुछ प्रश्न चिन्ह सा
- 1:56:39संकेत दे रही थी। मेनका के मस्तक पर उभर
- 1:56:42रही लकीरें देखकर शौर्य ने मेनका [संगीत]
- 1:56:45से पूछा।
- 1:56:47क्या हुआ? कोई प्रॉब्लम? किसका फोन है?
- 1:56:51मेनका ने तुरंत ही सिर उठाकर शौर्य की तरफ
- 1:56:54देखा और बोली,
- 1:56:56"यह तो देवव्रत मल्होत्रा का फोन है।" अभी
- 1:57:00तो उनके पास से आए हैं। अब वो इतनी जल्दी
- 1:57:03किस लिए फोन कर रहे हैं? अरे तुम फोन तो
- 1:57:05उठाओ। शौर्य के बोलते ही मेनका ने बिना
- 1:57:08कुछ कहे फोन उठाया। उसे स्पीकर पर डाला और
- 1:57:12बोली, नमस्ते अंकल, [संगीत] क्या बात हो
- 1:57:15गई? मेनका की आवाज सुनते ही दूसरी तरफ से
- 1:57:18देवव्रत मल्होत्रा की टूटी हुई घबराई हुई
- 1:57:21आवाज आई। [संगीत]
- 1:57:22बेटे विहान रायजादा के आदमियों ने रुचि को
- 1:57:26अगवा कर लिया है। अभी मुझे फोन करके बोले
- 1:57:29हैं कि मैं तुरंत उनके पास जाकर उस ऑफिस
- 1:57:32को उनके नाम कर दूं नहीं तो वो मेरी बेटी
- 1:57:34को किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं
- 1:57:36छोड़ेंगे।
- 1:57:37मेनका थोड़ी घबराई लेकिन फिर तुरंत संभल
- 1:57:40कर बोली। अंकल आप घबराइए मत। आप शुरू से
- 1:57:43बताइए आखिर यह हुआ कैसे?
- 1:57:46अब मैं तुम्हें क्या बताऊं बेटी? हम अभी
- 1:57:49न्यू सिटी टावर से निकले ही थे कि एक कार
- 1:57:51हमारी कार के सामने आकर खड़ी हो गई।
- 1:57:54मजबूरन हमें अपनी गाड़ी रोकनी पड़ी। सामने
- 1:57:57वाली गाड़ी से इस शहर के दो मशहूर गुंडे
- 1:58:00छगन और मगन उतरे और जबरदस्ती रुचि को
- 1:58:03हमारी कार से खींच कर अपनी कार में ले गए।
- 1:58:06जाने से पहले उन्होंने कहा कि एक घंटे के
- 1:58:09अंदर मैं उस ऑफिस के पेपर और चाबी लेकर
- 1:58:12जहां वो बताएंगे वहां पहुंच जाऊं। नहीं तो
- 1:58:15वो रुचि को किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं
- 1:58:17छोड़ेंगे।
- 1:58:18देवव्रत मल्होत्रा भयभीत आवाज में बोले।
- 1:58:20[संगीत] देवव्रत की हालत सुनकर शौर्य ने
- 1:58:23फौरन मेनका के हाथ से मोबाइल लिया और बोला
- 1:58:26अंकल घबराइए मत। दिमाग को ठंडा रखिए। मेरा
- 1:58:31विश्वास कीजिए रुचि को कुछ नहीं होगा।
- 1:58:34क्या उन्होंने आपको यह बताया कि आपको कहां
- 1:58:37आना है?
- 1:58:38नहीं, बस इतना कहा है कि मैं सब कुछ तैयार
- 1:58:42रखूं। फिर दोबारा उनका फोन आएगा और मुझे
- 1:58:45उनके इंस्ट्रक्शन फॉलो करने होंगे।
- 1:58:48देवव्रत मल्होत्रा ने बताया। इस पर शौर्य
- 1:58:52बोला, ठीक है, अगर ऐसी बात है तो जल्दी से
- 1:58:56आप होटल राजकमल आ जाइए और यहां से चाबी ले
- 1:58:59जाइए। पैसे की चिंता करने की आपको कोई
- 1:59:02जरूरत नहीं है। अभी जैसा वो कह रहे हैं आप
- 1:59:06वैसा ही कीजिए। देवव्रत मल्होत्रा को यकीन
- 1:59:09नहीं हुआ कि शौर्य इतनी आसानी से मान
- 1:59:11जाएगा। वो भरी हुई आवाज में बोले
- 1:59:14"धन्यवाद बेटे। मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं
- 1:59:17थी कि तुम मेरी मजबूरी को इतनी आसानी से
- 1:59:20समझोगे।"
- 1:59:21शौर्य ने फिर शांत स्वर में कहा। अंकल आप
- 1:59:24मेरी चिंता मत कीजिए। सबसे पहला काम रुचि
- 1:59:28को सुरक्षित करना है।
- 1:59:30ठीक है बेटे। मैं अभी होटल राजकमल आ रहा
- 1:59:33हूं।
- 1:59:34इतना कहकर देवव्रत मल्होत्रा ने फोन काट
- 1:59:36दिया। फोन कटते ही मेनका ने शौर्य की तरफ
- 1:59:39देखते हुए पूछा। क्या तुम सचमुच चाबी वापस
- 1:59:42करने की सोच रहे हो? क्या तुम्हें वो ऑफिस
- 1:59:45नहीं चाहिए? इस पर शौर्य हल्की [संगीत]
- 1:59:48मगर रहस्यमई मुस्कान के साथ बोला। किसने
- 1:59:51कहा कि मुझे वो ऑफिस नहीं चाहिए। अब तो
- 1:59:54पक्का वो मुझे ही चाहिए। मेनका को कुछ समझ
- 1:59:57नहीं आया। [संगीत] उसने हैरानी से पूछा।
- 2:00:00अगर वो ऑफिस तुम्हें चाहिए तो फिर तुम
- 2:00:03इतनी आसानी से चाबी वापस करने के लिए
- 2:00:05तैयार [संगीत] क्यों हो गए? मेनका की बात
- 2:00:08सुनकर शौर्य मुस्कुरा कर बोला, "मैं नहीं
- 2:00:11चाहता कि देवव्रत मल्होत्रा किसी परेशानी
- 2:00:13में पड़े या रुचि का कुछ बुरा हो।" यह कदम
- 2:00:16उठाकर विहान रायजादा ने अपने लिए मुसीबत
- 2:00:19मोल ले ली है। मेनका को कुछ समझ नहीं आया
- 2:00:23तो उसने शौर्य को गौर से देखा और पूछा। अब
- 2:00:27तुम क्या करने वाले हो? जो भी करूंगा
- 2:00:30तुम्हारे सामने ही करूंगा। आज का दिन
- 2:00:33विहान रायजादा अपनी जिंदगी में कभी नहीं
- 2:00:36भूल पाएगा। उसने अपनी औकात से बाहर जाकर
- 2:00:39काम किया है। कहते हुए शौर्य का जबड़ा भी
- 2:00:43गया। फिर कुछ सोचकर वो मेनका की तरफ देखकर
- 2:00:46बोला। क्या तुम इस एरिया के किसी
- 2:00:49छोटे-मोटे गुंडे को जानती हो? मेनका को
- 2:00:52समझ नहीं आया कि शौर्य ऐसा क्यों पूछ रहा
- 2:00:54है। लेकिन थोड़ा सोच कर उसने कहा अगर कुछ
- 2:00:58तुरंत करना है तो हमारे यहां एक
- 2:01:00सिक्योरिटी गार्ड है जो पहले इस एरिया का
- 2:01:02छोटा-मोटा बदमाश हुआ करता था। क्या उससे
- 2:01:06तुम्हारा काम चल जाएगा? मेनका की बात
- 2:01:09सुनकर शौर्य की आंखें चमक उठी। उसने तुरंत
- 2:01:12कहा हां उसे जल्दी से यहां बुलाओ।
- 2:01:16मेनका ने टेबल पर रखी बेल बजाई तो एक
- 2:01:19गार्ड अंदर आया।
- 2:01:21जाओ मेन गेट पर जाकर मनसुख मारवा को यहां
- 2:01:24बुलाओ। मेनका ने आदेश दिया। मनसुख
- 2:01:28हट्टाकट्टा आदमी था। शौर्य ने उसे ऊपर से
- 2:01:31नीचे तक देखा। फिर पूछा,
- 2:01:34क्या तुम छगन मगन को जानते हो? मुझे छगन
- 2:01:38का नंबर चाहिए। क्या तुम्हारे पास है?
- 2:01:42किसी परेशानी में पड़ने से बचने के लिए
- 2:01:44उसने कहा,
- 2:01:46"मैं इस नाम के किसी आदमी को नहीं जानता।
- 2:01:50मनसुख का जवाब सुनकर शौर्य मुस्कान के साथ
- 2:01:52बोला, "मैं जानता हूं कि तुम उन्हें अच्छे
- 2:01:55से जानते हो।" मनसुख असमंजस में खड़ा रहा।
- 2:01:59उसे समझ नहीं आ रहा था कि सच बोले या चुप
- 2:02:02रहे। यह देखकर शौर्य ने ठंडे लेकिन सख्त
- 2:02:06स्वर में मेनका से कहा। यह आदमी यहां काम
- 2:02:09करने के लायक नहीं है। इसके अंदर कंपनी के
- 2:02:12लिए कोई वफादारी नहीं है। इसे अभी के अभी
- 2:02:16यहां से फायर कर दो। जैसे ही मनसुख ने
- 2:02:19शौर्य की यह बात सुनी, वो जल्दी से बोला,
- 2:02:21नहीं साहब, मुझे नौकरी से मत निकालिए। मैं
- 2:02:24बताता हूं उसका नंबर। इसके बाद मनसुख ने
- 2:02:28अपना मोबाइल निकाला और उसमें से छगन का
- 2:02:30नंबर ढूंढकर शौर्य को नोट करा दिया। तभी
- 2:02:34शौर्य ने कहा, अब तुम जा सकते हो। मनसुख
- 2:02:38के जाते ही मेनका ने शौर्य से पूछा।
- 2:02:42अब तुम इस नंबर का क्या करोगे? शौर्य
- 2:02:44हल्की मुस्कान के साथ बोला, "तुम में जरा
- 2:02:47भी सब्र नहीं है। मैंने अभी तुमसे कहा था
- 2:02:50कि जो भी होगा तुम्हारे सामने होगा।"
- 2:02:54शौर्य की बात सुनकर मेनका चुप हो गई। तभी
- 2:02:58शौर्य ने मोबाइल उठाया। उसकी उंगलियां,
- 2:03:01नंबर डायल कर रही थी और उसके चेहरे पर एक
- 2:03:04अजीब सी शांति थी। अब शुरू होता है असली
- 2:03:08खेल। फोन कनेक्ट होते ही दो रिंग के बाद
- 2:03:11सामने [संगीत] से एक भारी सी आवाज गूंजी।
- 2:03:14कौन बोल रहे हो?
- 2:03:15शौर्य की आंखों में चमक [संगीत] आ गई। वो
- 2:03:18तुरंत ही बोला, "क्या मैं छगन से बात कर
- 2:03:21रहा हूं?" कुछ सेकंड की खामोशी के बाद उस
- 2:03:24भारी आवाज में जवाब आया,
- 2:03:26कौन है तू? [संगीत]
- 2:03:27शौर्य हल्का सा हंसा और बोला, "वही जिसकी
- 2:03:31वजह से आज तेरा दिन खराब होने वाला है।"
- 2:03:35शौर्य के जवाब से फोन में खामोशी छा गई।
- 2:03:38[संगीत] मेनका ने पहली बार महसूस किया
- 2:03:41शौर्य सिर्फ बिजनेसमैन नहीं है। वह एक
- 2:03:43तूफान है। मेनका को यकीन हो गया कि विहान
- 2:03:47रायजादा की जिंदगी में शौर्य नाम का तूफान
- 2:03:50तबाही [संगीत] मचाने वाला है। अब चकि
- 2:03:52शौर्य ने फोन पर अभी अपनी पहचान उजागर
- 2:03:55नहीं की थी। [संगीत] इसीलिए छगन कोई नया
- 2:03:57नंबर समझकर बोला
- 2:03:59ओ हेलो तुम बोल कौन रहे हो?
- 2:04:03शौर्य ने शांत लेकिन खतरनाक अंदाज में
- 2:04:05कहा, "यह तीसरी बार है जब तुमने मेरा
- 2:04:08रास्ता काटा है।" पहली बार सिटी [संगीत]
- 2:04:11हॉस्पिटल के बाहर जब तुमने विक्की के कहने
- 2:04:14पर मेरी बहन को उठाने की कोशिश की थी।
- 2:04:17दूसरी बार बलराज खन्ना के लिए तुमने मेरी
- 2:04:21वाइफ के साथ बदतमीजी करने की कोशिश की थी।
- 2:04:24[संगीत]
- 2:04:24और आज तीसरी बार तुमने मेरी एक दोस्त को
- 2:04:28अगवा कर लिया है। अब बताओ मुझे तुम्हारे
- 2:04:32[संगीत] साथ क्या करना चाहिए?
- 2:04:36एक पल के लिए सन्नाटा छा गया। छगन को एक
- 2:04:39झटका [संगीत] सा लगा। अब वो पहचान चुका था
- 2:04:42कि फोन के उस पार कौन है। उसने तुरंत अपना
- 2:04:45लहजा बदला और बोला
- 2:04:48उस्ताद आप मुझे नहीं पता था कि ये लड़की
- 2:04:51आपकी दोस्त है।
- 2:04:52शौर्य ने ठंडे स्वर में कहा अब तो पता चल
- 2:04:56गया है कि वो हमारी दोस्त है। तो बताओ तुम
- 2:05:00हमारे लिए क्या कर सकते हो? शौर्य की बात
- 2:05:03सुनते ही छगन मजबूरी भरे स्वर में बोला।
- 2:05:07माफ कीजिए उस्ताद अगर आपका फोन कुछ देर
- 2:05:10पहले आया होता तो शायद मैं आपकी बात मान
- 2:05:12भी जाता। लेकिन अब मैं चाहकर भी कुछ नहीं
- 2:05:15कर सकता।
- 2:05:17शौर्य को लगा जरूर कोई गड़बड़ हो चुकी है।
- 2:05:20उसने तुरंत ही गंभीर होकर पूछा। क्यों? अब
- 2:05:24ऐसा क्या हो गया कि तुम कुछ नहीं कर सकते?
- 2:05:27छगन ने धीरे-धीरे कहा।
- 2:05:29असल में अभी थोड़ी देर पहले ही मैंने रुचि
- 2:05:32मल्होत्रा को उनके हवाले किया है। हमारी
- 2:05:35डील सिर्फ अगवा करने तक थी।
- 2:05:38शौर्य की आंखों में गुस्से की आग भड़क
- 2:05:41उठी। उसने दांत भीते हुए कहा, विहान
- 2:05:44रायजादा
- 2:05:46तूने अपनी औकात से बढ़कर काम किया है। मैं
- 2:05:50तुझे छोडूंगा नहीं। शौर्य की बात सुनकर
- 2:05:53छगन बोला
- 2:05:54उस्ताद यह सब कुछ विहान रायजादा अकेले
- 2:05:57नहीं कर रहा है। कोई और भी उसके साथ है।
- 2:06:01छगन की बात सुनकर शौर्य का माथा ठनका।
- 2:06:04शौर्य ने तुरंत पूछा कौन है वो जो विहान
- 2:06:08रायजादा की ताकत बना हुआ है। छगन ने धीमे
- 2:06:11स्वर में कहा।
- 2:06:12उस्ताद आप किसी को मत बताइएगा। विहान
- 2:06:16रायजादा की ताकत बना है गजराज सोलंकी।
- 2:06:20शौर्य ने तुरंत ही पूछा कहा मिलेगा यह अभी
- 2:06:24रुचि कहां है छगन कुछ पल चुप रहा फिर बोला
- 2:06:29उस्ताद विशालगढ़ से जो बहादुरगढ़ को जाने
- 2:06:32वाला हाईवे है उसी पर लगभग 5 किमी आगे
- 2:06:36सोलंकी फार्म हाउस है अभी रुचि वहीं है
- 2:06:40जैसे ही छगन को लगा कि शौर्य फोन काटने
- 2:06:43वाला है उसने जल्दी से कहा
- 2:06:45उस्ताद आप वहां भूल [संगीत] कर भी मत
- 2:06:47आइएगा वहां सोलंकी के 10-15 बाउंसर पहले
- 2:06:51से मौजूद हैं।
- 2:06:53मैं खुद देख लूंगा। शौर्य ने ठंडे स्वर
- 2:06:56में जवाब दिया और फोन काट दिया। फोन
- 2:06:59स्पीकर पर था। इसीलिए मेनका और विक्रम
- 2:07:02दोनों ने पूरी बातचीत सुन ली थी। मेनका ने
- 2:07:05कभी सोचा भी नहीं था कि शौर्य का छगन जैसे
- 2:07:08लोगों के साथ इतना गहरा कनेक्शन है कि वह
- 2:07:11उसे उस्ताद कह रहा है। फोन कटने के बाद
- 2:07:15मेनका ने शौर्य से पूछा। अब तुम क्या
- 2:07:18करोगे? क्या पुलिस को फोन कर दें? मेनका
- 2:07:21की बात सुनकर शौर्य हल्का सा मुस्कुराया
- 2:07:24और बोला, नहीं जो भी करना है हमें खुद ही
- 2:07:28करना होगा। मेनका चिंतित स्वर में बोली,
- 2:07:32पर हम क्या कर पाएंगे? तुमने सुना नहीं कि
- 2:07:35छगन क्या कह रहा था। वहां सोलंकी के 10-15
- 2:07:39बाउंसर हैं। शौर्य ने उसकी तरफ देखते हुए
- 2:07:42कहा, तुम्हें यह सोचने की जरूरत नहीं है।
- 2:07:45तुम बस हमारा इंतजार करो। मैं और विक्रम
- 2:07:48सोलंकी फार्म हाउस के लिए निकलते हैं।
- 2:07:50शौर्य की बात सुनकर विक्रम भी खड़ा हो
- 2:07:52गया। मेनका ने देखा कि शौर्य की बात सुनकर
- 2:07:56विक्रम के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। जब
- 2:07:59उसने दोनों को उठते देखा तो वह बोली तो
- 2:08:02फिर ठीक है मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगी।
- 2:08:04शौर्य ने आश्चर्य से उसकी तरफ देखा। इसकी
- 2:08:07कोई जरूरत नहीं है। तुम यहीं होटल में
- 2:08:10इंतजार करो। मैं जल्दी ही रुचि को वहां से
- 2:08:13छुड़ाकर वापस आ जाऊंगा। शौर्य का
- 2:08:15कॉन्फिडेंस देखकर मेनका बोली, "यह यूके
- 2:08:18[संगीत] नहीं इंडिया है। मैं गजराज सोलंकी
- 2:08:21के नाम से वाकिफ हूं। वो कोई अच्छा आदमी
- 2:08:24नहीं है। उसका कनेक्शन अंडरवर से भी है।
- 2:08:28शौर्य ने बेपरवाही से कहा, तुम मेरी चिंता
- 2:08:32मत करो। [संगीत] मैं जितना अच्छों के लिए
- 2:08:34अच्छा हूं, उतना ही बुरों के लिए बुरा
- 2:08:36हूं। आज के बाद यह गजराज [संगीत] सोलंकी
- 2:08:39भी याद रखेगा कि उसका पाला किससे पड़ा है।
- 2:08:44मेनका ने उसे चुनौती देते हुए कहा, "अगर
- 2:08:47अगर तुम्हें खुद पर इतना ही कॉन्फिडेंस
- 2:08:49है, तो हमें साथ ले जाने से क्यों डर रहे
- 2:08:51हो?" तभी शौर्य ने हाथ जोड़ते हुए कहा,
- 2:08:54"अरे ठीक है मेरी मां, तुम साथ चलो। पर
- 2:08:57प्लीज हमारे लिए मुसीबत मत बनना।" मेनका
- 2:09:00के चेहरे पर मुस्कान आ गई। वो तुरंत खड़ी
- 2:09:02[संगीत] हुई और बोली, चलो। कुछ ही देर में
- 2:09:06तीनों होटल से बाहर आ गए। विक्रम ने कार
- 2:09:09निकाली और तीनों उसमें बैठ गए। शौर्यन ने
- 2:09:12मोबाइल में सोलंकी फार्म हाउस लोकेशन
- 2:09:14डाली। करीब आधे घंटे बाद वे फार्म हाउस के
- 2:09:17पास पहुंच गए। विक्रम ने लगभग 500 मीटर
- 2:09:20पहले ही कार रोक दी। सामने सोलंकी फार्म
- 2:09:23हाउस का बोर्ड साफ नजर आ रहा था। जो चारों
- 2:09:26तरफ से ऊंची दीवारों से घिरा हुआ था।
- 2:09:29विक्रम ने शौर्य की तरफ देखा जैसे आगे के
- 2:09:32निर्देश का इंतजार कर रहा हो। शौर्य बोला,
- 2:09:36"यं साइड में गाड़ी खड़ी कर लो। गाड़ी
- 2:09:38रुकने के बाद शौर्य मेनका की तरफ मुड़ा।
- 2:09:41तुम यहीं कार में रहोगी। मैं और विक्रम
- 2:09:44अंदर जाएंगे। अगर आधे घंटे में हम वापस
- 2:09:46नहीं आए या तुम्हें कोई खबर नहीं मिली तो
- 2:09:50उसके बाद तुम जो चाहो कर सकती हो। यह
- 2:09:52सुनकर मेनका के चेहरे पर चिंता की लहर
- 2:09:55दौड़ गई। लेकिन उसने चुपचाप सिर हिला
- 2:09:58दिया। शौर्य और विक्रम कार से उतर गए।
- 2:10:01शौर्य ने मेनका से कहा। तुम ड्राइविंग सीट
- 2:10:04पर आ जाओ और गाड़ी को थोड़ा आगे पीछे करती
- 2:10:07रहना ताकि किसी को शक ना हो। मेनका
- 2:10:10ड्राइविंग सीट पर बैठ गई। जाते-जाते उसने
- 2:10:14धीमे स्वर में कहा अपना ध्यान रखना। शौर्य
- 2:10:18ने मुस्कुरा कर जवाब दिया। कुछ नहीं होगा
- 2:10:21मुझे। मैं आता हूं। इसके बाद दोनों फार्म
- 2:10:24हाउस की तरफ बढ़ गए। करीब 100 मीटर पहले
- 2:10:27ही विक्रम ने रास्ता बदल लिया और एक
- 2:10:29पगडंडी पकड़ ली। अब शौर्य अकेला ही मुख्य
- 2:10:32गेट की तरफ बढ़ा। फार्म हाउस का बड़ा
- 2:10:35स्टील गेट अंदर से बंद था। बाहर कोई नजर
- 2:10:38नहीं आ रहा था। उसने गेट में लगी भारी
- 2:10:41लोहे की साकल को पकड़ा और उसे जोर से
- 2:10:44पीटा। कुछ देर इंतजार किया लेकिन शौर्य को
- 2:10:47दरवाजे पर कोई हलचल नजर नहीं आई। शौर्य एक
- 2:10:51बार चिंता में पड़ गया। कहीं उनको मेरे
- 2:10:54आने की खबर तो नहीं हो गई। कहीं वि रुचि
- 2:10:57को लेकर यहां से निकल तो नहीं गए। शौर्य
- 2:11:00के कॉन्फिडेंस का लेवल इतना ऊंचा था कि
- 2:11:02सोलंकी फार्म हाउस की दीवारें उसके आगे
- 2:11:04छोटी लग रही थी। शौर्य के इरादे फार्म
- 2:11:07हाउस के भारी-भरकम मुख्य गेट के लोहे की
- 2:11:10मजबूती को भी चुनौती देने को तैयार थे।
- 2:11:12हवा में एक अजीब सा भारीपन था जैसे कुदरत
- 2:11:15को भी पता हो कि आज यहां कुछ बड़ा होने
- 2:11:18वाला है। शौर्य फार्म हाउस के विशाल लोहे
- 2:11:21के गेट के बाहर आकर रुका। उसकी आंखों में
- 2:11:24जलती आग उस ठंडी ढलती शाम को भी मात दे
- 2:11:27रही थी। उसने अपने दोनों हाथों की
- 2:11:30मुट्ठियों को भी। यह जानते हुए कि वह मौत
- 2:11:33के जबड़े में कदम रखने जा रहा है। फिर भी
- 2:11:36डर उसके करीब भी नहीं भटक रहा था। उसने
- 2:11:39लोहे के उस भारी गेट की साल को हाथ में
- 2:11:42लेकर जोर से बजाया। लोहे से लोहे के
- 2:11:44टकराने की वो आवाज पूरे सन्नाटे को चीरते
- 2:11:47हुए अंदर तक गई। लेकिन अंदर से कोई जवाब
- 2:11:50नहीं आया। शौर्य के सब्र का बांध टूटने
- 2:11:53लगा। उसने दोबारा और भी तेज आवाज में साल
- 2:11:57को पीटा। इस बार उसकी चोट में गुस्सा था।
- 2:12:00एक चेतावनी थी। फिर कुछ पलों बाद सन्नाटा
- 2:12:03टूटा। गेट के दूसरी तरफ से भारी जूतों की
- 2:12:07आहट सुनाई दी। [संगीत] उस बड़े से गेट में
- 2:12:09ही मौजूद छोटा गेट एक चरमराहट के साथ
- 2:12:11खुला। एक हट्टाकट्टा चौड़ी छाती वाला आदमी
- 2:12:15बाहर आया। उसकी गर्दन किसी सांड की तरह
- 2:12:17मोटी थी और हाथों पर बने निशान गवाही दे
- 2:12:21रहे थे कि वह गजराज सोलंकी का सबसे वफादार
- 2:12:24और खूंखार पालतू है। उसने शौर्य को ऊपर से
- 2:12:28नीचे तक घूरते हुए पूछा। कौन हो तुम? और
- 2:12:31यहां क्या करने आए हो? शौर्य के चेहरे पर
- 2:12:34एक ऐसी मुस्कान आई जो अक्सर शिकार को डरा
- 2:12:37देती है। उसने शांति से कहा, "मेरा नाम
- 2:12:41श्रवण है और मैं गजराज सोलंकी से मिलने
- 2:12:44आया हूं। तुम जो कोई भी हो चले जाओ यहां
- 2:12:47से। अभी सर किसी से भी मिलने के मूड में
- 2:12:50नहीं है। वो आदमी इतना बोलकर वापस पलटने
- 2:12:53ही वाला था कि शौर्य उसे रोकते हुए बोला
- 2:12:56[संगीत] मुझे वापस भेजने से पहले एक बार
- 2:12:59अपने बॉस को मेरा नाम बताकर पूछ तो लो कि
- 2:13:02वो मुझसे मिलना चाहते हैं कि नहीं। मैंने
- 2:13:05कहा ना चले जाओ यहां से। अभी बॉस किसी
- 2:13:09जरूरी काम में व्यस्त हैं। इसलिए तुम उनसे
- 2:13:11बाद में मिल लेना। वो आदमी शौर्य को
- 2:13:14गुस्से से घूरते हुए बोला कहीं तुम्हारे
- 2:13:16बॉस रुचि मल्होत्रा और विहान रायजादा के
- 2:13:19साथ तो बिजी नहीं है। अगर ऐसा है तो अपने
- 2:13:22बॉस से बोलो श्रवण आपसे मिलना चाहता है।
- 2:13:25वो खुद ही मुझे बुलाएंगे। शौर्य
- 2:13:27मुस्कुराते हुए बोला। शौर्य की बात सुनकर
- 2:13:30उसने उसे तिरछी नजर से घूरा। वापस
- 2:13:33जाते-जाते वो अचानक रुक गया क्योंकि उसने
- 2:13:36उसके मुंह से रुचि मल्होत्रा और विहान
- 2:13:38रायजादा का नाम सुना था। इसीलिए उसने अपना
- 2:13:41मोबाइल निकाला और गजराज सोलंकी को फोन लगा
- 2:13:43दिया। एक पल [संगीत] बाद ही दूसरी तरफ से
- 2:13:46फोन उठाया गया तो इस पहलवान ने कहा सर
- 2:13:50श्रवण नाम का कोई शख्स आया है। वो आपसे
- 2:13:52मिलना चाहता है। दूसरी तरफ से गजराज
- 2:13:55सोलंकी ने पूछा
- 2:13:57कौन है श्रवण?
- 2:13:58सर इसे रुचि मल्होत्रा और विहान रायजादा
- 2:14:01के बारे में पता है। पहलवान गजराज के सवाल
- 2:14:04पर बोला। तभी शौर्य पीछे से चिल्ला उठा।
- 2:14:07अपने बॉस से कहो कि अगर मेरे बारे में
- 2:14:09जानना है तो वह विहान रायजादा से पूछ ले।
- 2:14:12शौर्य इतना जोर से बोला कि दूसरी तरफ
- 2:14:15मौजूद गजराज को भी फोन पर उसकी आवाज सुनाई
- 2:14:17दे गई। उसने कहा
- 2:14:20ठीक है तुम उसे अंदर ले आओ।
- 2:14:22पहलवान ने फोन काटा और शौर्य से कड़े स्वर
- 2:14:25में बोला। चलो मेरे साथ। शाम का धुंधलका
- 2:14:29पूरी तरह अंधेरे में बदल चुका था। शौर्य
- 2:14:31से अलग होने के बाद विक्रम एक पगडंडी पकड़
- 2:14:34कर खेतों के रास्ते उस फार्म हाउस के
- 2:14:36पिछले हिस्से में पहुंच गया था। फार्म
- 2:14:38हाउस की चार दीवारी किसी किले की तरह ऊंची
- 2:14:41थी जिसके ऊपर कटीले तार लगे थे। विक्रम
- 2:14:44साय की तरह दीवार के साथ-साथ चलता रहा।
- 2:14:48उसने देखा कि एक जगह कई सारे पेड़ चार
- 2:14:51दीवारी के काफी करीब हैं। यह हिस्सा अंदर
- 2:14:54जाने के लिए सबसे सही था। विक्रम ने एक
- 2:14:57बार चारों तरफ नजर दौड़ाई। चारों तरफ गहरा
- 2:15:00सन्नाटा पसरा था। वो मुड़ा और बिजली जैसी
- 2:15:03फुर्ती के साथ एक जंप लिया। अगले ही पल वो
- 2:15:06दीवार के ऊपर था। उसने अंदर झांका। वहां
- 2:15:09एक तालाब था और उसके आगे एक आलीशान कोठी।
- 2:15:13वो कोठी ही उसका लक्ष्य थी। दीवार से उतर
- 2:15:15कर विक्रम पेड़ों की ओठ लेते हुए आगे
- 2:15:18बढ़ा। तभी उसे दो पहलवान जैसे आदमी बेंच
- 2:15:21पर बैठे बातें करते दिखाई दिए। विक्रम
- 2:15:24पीछे से घूमते हुए अचानक उनके सामने आ
- 2:15:27खड़ा हुआ। उन दोनों की सिट्टी पिट्टी गुम
- 2:15:29हो गई। उन दोनों में से एक ने पूछा, "तुम
- 2:15:32कौन हो?" विक्रम ने उसका सवाल सुना और
- 2:15:35बोला, "वैसे मुझे विक्रम कहते हैं। मैं
- 2:15:37यहां तुम दोनों से कुछ जानने के लिए आया
- 2:15:39हूं।" अभी कुछ समय पहले एक लड़की यहां लाई
- 2:15:42गई थी। मैं यह जानना चाहता हूं कि वो अभी
- 2:15:45कहां पर है। विक्रम के मुंह से लड़की के
- 2:15:47बारे में सुनकर दोनों पहलवान चौकन्ने हो
- 2:15:50गए और तेजी से अपनी जगह पर खड़े हो गए।
- 2:15:52दोनों में से एक विक्रम के सामने आकर
- 2:15:55बोला, "तुम हो कौन? और तुम यहां तक आ कैसे
- 2:15:58गए? विक्रम फिर से उसी मुस्कान के साथ
- 2:16:00बोला, "मैं कौन हूं? यह तो मैंने पहले ही
- 2:16:04बता दिया। और रहा सवाल कि मैं यहां आया
- 2:16:06कैसे? तो मैं पीछे की चार दीवारी फान कर
- 2:16:09आया हूं। अब अगर मैंने तुम्हारे सवाल का
- 2:16:12जवाब दे दिया है तो अब तुम मेरे सवाल का
- 2:16:14जवाब दो कि वो लड़की अभी कहां पर है।
- 2:16:17विक्रम की बात सुनकर दोनों पहलवानों के
- 2:16:20तेवर बदलने लगे थे। दोनों ने विक्रम को
- 2:16:22आगे पीछे से घेर लिया और उनमें से एक बोला
- 2:16:25तुम यहां आ तो गए हो अपने पैरों पर पर
- 2:16:28यहां से वापस अपने पैरों से नहीं जा
- 2:16:30पाओगे। भाई मेरे मैं यहां चलकर आया हूं।
- 2:16:33तो मैं चाहता भी नहीं कि यहां से जाते समय
- 2:16:36भी दोबारा चलकर ही जाऊं। [संगीत] यहां से
- 2:16:38जाऊंगा तो किसी गाड़ी में बैठकर जाऊंगा।
- 2:16:41बस तुम जल्दी से मुझे यह बता दो कि वो
- 2:16:44लड़की अभी कहां पर है। विक्रम उसकी बात का
- 2:16:46मजाक उड़ाते हुए बोला। विक्रम का जवाब
- 2:16:48सुनकर वो पहलवान गुस्से में बोला, यहां
- 2:16:51क्या कोई कॉमेडी शो चल रहा है जो तुम यहां
- 2:16:53आए और हमारा मजाक उड़ाकर यूं ही चले
- 2:16:55जाओगे? इतना बोलकर वो पहलवान विक्रम पर
- 2:16:58झपटा। पर विक्रम पहले से ही इसके लिए
- 2:17:00तैयार था। जैसे ही वह विक्रम के पास
- 2:17:03पहुंचा, विक्रम ने सीधा पंच उसकी छाती और
- 2:17:05गर्दन के बीच में जड़ दिया। वो पहलवान जिस
- 2:17:08तेजी से विक्रम पर झपटा था, उसी तेजी से
- 2:17:11पीछे जाकर धड़ाम से जमीन पर गिरा और ऐसा
- 2:17:14गिरा कि दोबारा उठ नहीं पाया। विक्रम ने
- 2:17:17उसे ऐसी जगह पर पंच किया था कि उसका बेहोश
- 2:17:20होना तय था। विक्रम के पीछे खड़े दूसरे
- 2:17:23पहलवान ने जब अपने साथी का यह हाल देखा तो
- 2:17:26उसकी आंखों में डर झलकने लगा। अगर तुम
- 2:17:29अपने साथी जैसी हालत नहीं करवाना चाहते तो
- 2:17:32जल्दी से मुझे बता दो कि वो [संगीत] लड़की
- 2:17:34कहां पर है। विक्रम उसे घूरते हुए बोला।
- 2:17:37पर उसने विक्रम की बातों पर ध्यान नहीं
- 2:17:39दिया और तेजी से अपना घूंसा विक्रम पर चला
- 2:17:41दिया। विक्रम ने अपने हाथ से उसकी कलाई
- 2:17:44पकड़ ली और ऐसा झटका दिया कि उस पहलवान की
- 2:17:47कलाई पलट कर उसकी पीठ पर आ गई। वो दर्द से
- 2:17:50करहाते हुए बोला छोड़ दो मुझे। मैंने कहा
- 2:17:53छोड़ दो मुझे। विक्रम ने कहा अगर तुम
- 2:17:56चाहते हो कि मैं तुम्हें छोड़ दूं तो आराम
- 2:17:59से बता दो कि वो लड़की कहां है जिसे अभी
- 2:18:02थोड़ी देर पहले यहां लाया गया था। उस
- 2:18:05पहलवान से दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था।
- 2:18:07उसने करहाते हुए कहा, वो लड़की उस सामने
- 2:18:10वाली कोठी में ही है और अभी उसे कहीं ले
- 2:18:13जाने का कोई प्लान भी नहीं है। बढ़िया।
- 2:18:17अब तुम मेरे एक और सवाल का जवाब दे दो।
- 2:18:20यहां पर तुम्हारे जैसे और कितने लोग हैं?
- 2:18:22विक्रम उसके हाथ पर अपनी पकड़ मजबूत करता
- 2:18:25हुआ बोला तो दर्द से तड़पता हुआ पहलवान
- 2:18:27बोला, यहां पर मेरे जैसे और भी 10-12 लोग
- 2:18:31हैं। मैं तुम्हें बता दूं कि [संगीत] तुम
- 2:18:33यहां से बचकर जा नहीं पाओगे। उस पहलवान का
- 2:18:36हाल देखने के बाद विक्रम को लगा कि अब यह
- 2:18:39उसके किसी काम का नहीं है। तो एक झटके से
- 2:18:41उसे जमीन पर पटक दिया और अगला कदम सोचने
- 2:18:44लगा। दूसरी तरफ शौर्य उस पहलवान के साथ
- 2:18:48गजराज सोलंकी की कोठी में पहुंचा। इस कोठी
- 2:18:51के अंदर आते हुए शौर्य [संगीत] ने नोटिस
- 2:18:53किया कि गजराज सोलंकी ने अपनी सुरक्षा को
- 2:18:56ध्यान में रखकर कोई खास इंतजाम नहीं किया
- 2:18:58था क्योंकि गजराज सोलंकी इस भरोसे में था
- 2:19:01कि इस शहर में कोई उसके खिलाफ जाने की
- 2:19:03हिम्मत नहीं कर सकता।
- 2:19:06अंदर पहुंचते ही उसने देखा कि गजराज
- 2:19:08सोलंकी किसी से फोन पर बात कर रहा था।
- 2:19:11उसके पीछे दो पहलवान टाइप के आदमी खड़े
- 2:19:14थे। विहान रायजादा उसके साथ वाले सोफे पर
- 2:19:17बैठा हुआ था। विहान के ऑोजिट जो सोफा था
- 2:19:20उस पर छगन और मगन बैठे हुए थे। और उन
- 2:19:23दोनों के पीछे रुचि मल्होत्रा एक कुर्सी
- 2:19:26पर डरी सहमी सी बैठी [संगीत] हुई थी। फोन
- 2:19:28रखने के बाद गजराज सोलंकी शौर्य की तरफ
- 2:19:31पलटा। उसके साथ ही विहान रायजादा भी शौर्य
- 2:19:35की तरफ बढ़ता हुआ बोला तुम्हारी हिम्मत की
- 2:19:38दाद देनी पड़ेगी कि तुमने यहां आने की
- 2:19:40जुर्रत कर दी। अभी तुम्हें पता ही कहां है
- 2:19:43रायजादा कि मैं और क्या-क्या कर सकता हूं।
- 2:19:47शौर्य बिना किसी डर के बोला तो तुम ही
- 2:19:49श्रवण हो जिसने विहान को थप्पड़ मारने की
- 2:19:52हिम्मत की और उसके बाद यहां मेरी माद में
- 2:19:56भी आ गए। वाकई मानना पड़ेगा। तुम में
- 2:19:59हिम्मत तो है लड़के। गजराज सोलंकी शौर्य
- 2:20:02को ऊपर से नीचे तक देखते हुए अचानक ही
- 2:20:05बोला, पर तुम्हें इस जगह का पता कैसे चला?
- 2:20:08सामने बैठे छगन ने गजराज सोलंकी की यह बात
- 2:20:11सुनी तो उसके कान खड़े हो गए। दिल में
- 2:20:14सच्ची चाह हो तो लोग भगवान तक को ढूंढ
- 2:20:17लेते हैं। फिर आप कौन सी बड़ी चीज हो?
- 2:20:19शौर्य उपहास करने वाले भाव में बोला। रुचि
- 2:20:22मल्होत्रा ने जब शौर्य को देखा तो उसके
- 2:20:25डरे हुए चेहरे पर एक उम्मीद की किरण दिखाई
- 2:20:27दी। वह आश्चर्य से शौर्य को देख रही थी और
- 2:20:30सोच रही थी कि क्या शौर्य उसके लिए यहां
- 2:20:33आया है। दूसरी [संगीत] तरफ जब मगन ने
- 2:20:35शौर्य को यहां देखा तो उसके चेहरे पर आग
- 2:20:38सी दिखाई देने लगी। वो अपनी जगह से खड़ा
- 2:20:40हुआ और शौर्य के करीब जाकर बोला कहते हैं
- 2:20:44कि जब गीदड़ की मौत आती है तो वो शहर की
- 2:20:47तरफ भागता है। लगता है तुम्हारी मौत आई है
- 2:20:50इसीलिए तुम यहां आ गए हो। शौर्य ने मगन की
- 2:20:53बात सुनकर जोर से हंसते हुए कहा, कमाल है।
- 2:20:57मैंने सोचा नहीं था कि तुम मुझे यहां
- 2:20:59मिलोगे। लगता है मुझसे अपनी पहली मुलाकात
- 2:21:03को भूल गए हो। उसे कैसे भूल जाऊंगा। उसी
- 2:21:07को याद करके ही तो रोज ऊपर वाले से दुआ
- 2:21:10मांगता हूं कि मुझे तुमसे बदला लेने का
- 2:21:12मौका दे। तभी तो मैं अपने दोस्त की आंखों
- 2:21:15पर पड़ी पट्टी को उतार सकूंगा जो पता नहीं
- 2:21:18तुम्हें क्या समझने लगा है। अच्छा पर तुम
- 2:21:22वो करोगे कैसे? शौर्य मगन की आंखों में
- 2:21:25देखते हुए बोला तो मगन घमंड से बोला शेर
- 2:21:28की गुफा में आ गए हो और कहते हो कि मैं
- 2:21:31तुमसे बदला कैसे लूंगा? अब यहां तुम्हें
- 2:21:34बचाने कौन आएगा? तभी छगन मगन के सामने आकर
- 2:21:37बोला मगन तुम ये क्या कर रहे हो? हमारा
- 2:21:41काम खत्म हो गया है। चलो घर चलते हैं।
- 2:21:43[संगीत] इसका क्या करना है? वो सोलंकी
- 2:21:45साहब देख लेंगे। क्यों भाई? आखिर ये चल
- 2:21:48क्या रहा है? किन-किन लोगों से तुमने
- 2:21:50दुश्मनी मोल ले रखी है? गजराज सोलंकी
- 2:21:53शौर्य के पास जाकर बोला तो शौर्य
- 2:21:56मुस्कुराते हुए बोला, "क्या करें? ऊपर
- 2:21:59वाला कुछ ज्यादा ही मेहरबान है मुझ पर।"
- 2:22:01आपने देखा ठाकुर साहब यह कुछ ज्यादा
- 2:22:04बड़बोला नहीं बन रहा है। विहान रायजादा ने
- 2:22:06गजराज सोलंकी से कहा गजराज सोलंकी अभी भी
- 2:22:10शौर्य को ही ऑब्जर्व कर रहे थे। उनके
- 2:22:12ठिकाने में आकर भी शौर्य के चेहरे पर कोई
- 2:22:15भय नहीं था। इस बात से वह हैरान थे। वो इस
- 2:22:18बात से भी परेशान थे कि शौर्य ने यह कैसे
- 2:22:21पता लगाया कि रुचि उनके फार्म हाउस में
- 2:22:24है। जब तक उन्हें इस बात का जवाब नहीं मिल
- 2:22:26जाता वो शौर्य के खिलाफ कोई एक्शन नहीं ले
- 2:22:29सकते थे। पता नहीं वह अपने पीछे क्या
- 2:22:31तैयारी करके आया हो। यही बात उन्हें
- 2:22:34परेशान कर रही थी। वहीं मगन जाने से पहले
- 2:22:37शौर्य से अपनी मार का बदला लेना चाहता था।
- 2:22:40छगन की समस्या यह थी कि वो इन सबके बीच
- 2:22:43ज्यादा कुछ बोल भी नहीं सकता था। नहीं तो
- 2:22:46यह राज खुल जाता कि उसी ने शौर्य को यहां
- 2:22:48के बारे में बताया है। मगर ने छगन से अपना
- 2:22:51हाथ छुड़ाकर गजराज सोलंकी से पूछा। ठाकुर
- 2:22:55साहब आपको इसके साथ जो करना है वह तो आप
- 2:22:57करेंगे ही पर जाने से पहले इसका कुछ उधार
- 2:23:00है मुझ पर। मैं उसे करके जाना चाहता
- 2:23:03हूं। मगन के इतना बोलने के बाद भी जब
- 2:23:06गजराज को शौर्य के चेहरे पर कोई शिकन
- 2:23:08दिखाई नहीं दी तो उन्होंने सोचा कि मगन को
- 2:23:11थोड़ा फ्री हैंड देकर देखा जाए। यही सोचकर
- 2:23:13वे बोले अगर सच में तुम्हें अपना उधार
- 2:23:16चुकता करना है तो तुम उसे चुका सकते हो।
- 2:23:19गजराज सोलंकी से ग्रीन सिग्नल मिलते ही
- 2:23:21मगन बड़ी तेजी से शौर्य की तरफ बढ़ा और
- 2:23:24तभी पूरे हॉल में एक जोरदार थप्पड़ की
- 2:23:27आवाज गूंज उठी। गजराज सोलंकी के दरबार में
- 2:23:30थप्पड़ की गूंज इतनी जबरदस्त थी कि वहां
- 2:23:33मौजूद जितने भी 30 मार खान थे उनकी आंखें
- 2:23:36फटी की फटी रह गई। अपने सामने का नजारा
- 2:23:39देखकर सभी हैरान थे। शौर्य का चेहरा
- 2:23:42गुस्से में लाल हो रहा था और थप्पड़ खाकर
- 2:23:45मगन का गाल लाल था। एक पल के लिए मगन को
- 2:23:49सब कुछ घूमता सा दिख रहा था और उसके पैर
- 2:23:52जमीन पर ठहर से गए थे। पिछले कुछ सेकंड्स
- 2:23:55में जो भी घटित हुआ वो गजराज गैंग की सोच
- 2:23:59के बिल्कुल उल्टा था। कुछ पल के लिए वहां
- 2:24:02सन्नाटा सा पसर गया। मगन अपने गाल पकड़े
- 2:24:06भौचक्का सा शौर्य की तरफ देख रहा था। वो
- 2:24:09समझ नहीं पाया कि शौर्य ने उसे कब थप्पड़
- 2:24:12जड़ दिया था। वो शौर्य के हाथों एक बार
- 2:24:15फिर अपनी हार बर्दाश्त नहीं कर सका और
- 2:24:18हुर्राया
- 2:24:20मैं तुम्हें छोडूंगा नहीं तुमने फिर से
- 2:24:24मेरे ऊपर हाथ उठाया
- 2:24:26मगन की बात सुनकर शौर्य मुस्कुरा कर बोला
- 2:24:30शुक्र मनाओ कि अभी तक अपने पैरों पर खड़े
- 2:24:33हो नहीं तो अगर [संगीत] मैं अपनी ताकत से
- 2:24:35मारता तो भी जमीन की धूल चाट रहे होते।
- 2:24:40गैंग वालों के सामने सरेआम हो रही
- 2:24:43बेइज्जती से मगन के बदन में आग लग गई और
- 2:24:46वह फिर शौर्य की ओर घूंसा लेकर दौड़ा।
- 2:24:49शौर्य ने खड़े-खड़े अपने शरीर को एक दिशा
- 2:24:52में झुकाया और खुद को उसके घूंसे से बचा
- 2:24:54[संगीत] लिया और फिर से मगन के गाल पर एक
- 2:24:57जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। इस बार मगन खड़ा
- 2:25:00नहीं रह पाया और सीधा जमीन पर गिरा। छगन
- 2:25:04दौड़ कर मगन के पास आया। उसने मगन को
- 2:25:07सहारा दिया। छगन को उम्मीद नहीं थी कि
- 2:25:10शौर्य इतने लोगों के बीच भी मगन का यह हाल
- 2:25:13करेगा। वो समझ गया कि उसे गजराज सोलंकी का
- 2:25:17भी खौफ नहीं है। इसीलिए अभी यहां से चले
- 2:25:21जाना ही [संगीत] ठीक है।
- 2:25:24छगन ने सोलंकी साहब से कहा
- 2:25:28ठाकुर साहब अभी मैं इसको लेकर जा रहा हूं।
- 2:25:31आपसे बाद में मिलता हूं।
- 2:25:34लो सोलंकी साहब इसका हिसाब तो हो
- 2:25:37गया। अब अपनी बात कर लें।
- 2:25:40शौर्य ने यह बात गजराज [संगीत] से कही थी।
- 2:25:42पर उसकी नजर सामने बैठी रुचि की ओर थी।
- 2:25:46शौर्य ने अपना हाथ उठाकर रुचि को कहा, हाय
- 2:25:49रुचि कैसी हो तुम? मैं आ गया हूं।
- 2:25:54इन्होंने तुम्हें कोई [संगीत] तकलीफ तो
- 2:25:55नहीं दी? अगर दी है तो उसका हिसाब इनको
- 2:25:58करना पड़ेगा।
- 2:26:01रुचि को कुछ समझ नहीं आया। उसने जवाब में
- 2:26:04सिर्फ गर्दन हिला दी। रुचि इतने खूंखार
- 2:26:07लोगों के बीच शौर्य को इतने आराम से बात
- 2:26:10करते देख हैरान थी। तभी शौर्य विहान
- 2:26:13रायजादा के करीब गया और बोला
- 2:26:17मैंने तुम्हें कहा था कि तुम हमारे बीच
- 2:26:20में मत आना पर तुम्हें शायद मेरी बात समझ
- 2:26:23में नहीं आई। कोई बात नहीं। आज के बाद तुम
- 2:26:28यह [संगीत] समझने के लायक ही नहीं रहोगे।
- 2:26:32विहान रायजादा को गजराज सोलंकी पर कुछ
- 2:26:34ज्यादा ही भरोसा था। इसीलिए वह घमंड भरी
- 2:26:37टोन में [संगीत] बोला,
- 2:26:40[हंसी]
- 2:26:40"मानना पड़ेगा। तुम में हिम्मत तो बहुत
- 2:26:44है। तुम हमारी जगह पर आकर हमें ही धमका
- 2:26:47रहे हो। यह न्यू सिटी टावर नहीं है। यह
- 2:26:50सोलंकी फार्म है। यहां पर लोग अपनी मर्जी
- 2:26:54से आ तो जाते हैं। पर यहां से जाने के लिए
- 2:26:57उन्हें हमारी दया पर निर्भर रहना पड़ता
- 2:27:00है।
- 2:27:01बहुत खूब। मुझे देखकर अच्छा लगा कि गीदड़
- 2:27:05भी भौकना जानता है। जब मैं यहां से जाऊंगा
- 2:27:09तब तुम्हें भी पता चल जाएगा कि मैं आता भी
- 2:27:12अपनी मर्जी से हूं और जाता भी अपनी मर्जी
- 2:27:15से ही हूं।
- 2:27:16शौर्य विहान रायजादा के कंधे को थपथपाते
- 2:27:19हुए बोला [संगीत]
- 2:27:21गजराज सोलंकी जो अभी तक शौर्य की एक-एक
- 2:27:24एक्टिविटी को नोटिस करता जा रहा था वो
- 2:27:27शौर्य से बोला कुछ तो बात तुम में है। तुम
- 2:27:32पहले लड़के हो जो मेरे सामने आकर मुझे
- 2:27:34चैलेंज करने की हिम्मत कर रहा है। वैसे
- 2:27:37तुम हो कौन? मैंने आज से पहले कभी
- 2:27:41तुम्हारे बारे में इस शहर में सुना नहीं।
- 2:27:44मैं कुछ भी नहीं हूं मिस्टर सोलंकी। बस
- 2:27:47मैं तो अपनी एक दोस्त को लेने आया हूं
- 2:27:49जिसे आपने आज जबरदस्ती बंधक बना लिया है।
- 2:27:53बस आपसे यही विनती है कि आप उसे मेरे साथ
- 2:27:57यहां से जाने दें। तो मैं दोबारा कभी आपके
- 2:28:00सामने नहीं आऊंगा। शौर्य ने यह सब पोलाइट
- 2:28:03वे में ही बोला था। लेकिन गजराज गुस्से
- 2:28:06में आ गया। लड़के तुम्हें लगता है कि तुम
- 2:28:10मेरे सामने शर्तबाजी कर सकते हो। तुमसे दो
- 2:28:13प्यार भरी बातें क्या कर ली? तुम तो अपने
- 2:28:16आप को खुदा समझने लगे। शायद तुम्हें पता
- 2:28:19नहीं गजराज सोलंकी से नजर मिलाकर बात करने
- 2:28:22की हिम्मत करने वाले का क्या हश्र होता
- 2:28:25है। इस पर शौर्य थोड़ा सा मुस्कुराया और
- 2:28:28प्यार से ही बोला। कहते हैं कुत्ते को घी
- 2:28:31हजम नहीं होता। उसी तरह कमजोर को अगर आप
- 2:28:35किसी चीज के लिए रिक्वेस्ट करते हैं तो वो
- 2:28:38इसको उस व्यक्ति की कमजोरी समझ लेता है और
- 2:28:41अपने आप को तुर्रम खान समझने लगता है।
- 2:28:45इसीलिए यह कहावत आप पर एकदम फिट बैठती है।
- 2:28:49बहुत जुबान चलती है तुम्हारी। पर ज्यादा
- 2:28:52देर नहीं चलेगी। गजराज सोलंकी ने इतना
- 2:28:55बोला ही था कि तभी कुछ कदमों की आहट उस
- 2:28:58हॉल के अंदर सुनाई दी। शौर्य ने देखा
- 2:29:01पहलवान देवव्रत मल्होत्रा को पकड़ कर लाया
- 2:29:04है। [संगीत] देवव्रत ने हैरानी से शौर्य
- 2:29:06की तरफ देखा और उसके पास जाकर बोले अरे
- 2:29:10श्रवण बेटे तुम यहां क्यों आ गए? देवव्रत
- 2:29:14मल्होत्रा का सवाल सुनकर शौर्य [संगीत]
- 2:29:16बोला अंकल मैं आपको चाबी वापस नहीं कर
- 2:29:20पाया था तो सोचा इनके पास आकर इन्हें खुद
- 2:29:23ही चाबी थमा दूं। गजराज सोलंकी को पेपर
- 2:29:26लेने की जल्दी थी। इसीलिए वो देवव्रत
- 2:29:29मल्होत्रा से बोला बंद करो ये नौटंकी लाओ
- 2:29:33ऑफिस के पेपर दो। इस पर देवव्रत मल्होत्रा
- 2:29:36ने बैग में से फाइल निकालकर बिजराज सोलंकी
- 2:29:39की तरफ बढ़ाते हुए कहा ये ये लीजिए अब तो
- 2:29:43मेरी बेटी को छोड़ दीजिए। आप चिंता क्यों
- 2:29:46करते हो देवव्रत जी? जब आपने अपनी बात
- 2:29:50पूरी की तो मैं भी अपनी बात पूरी करने से
- 2:29:53पीछे नहीं हटूंगा। गजराज सोलंकी पेपर्स को
- 2:29:56एक सरसरी नजर से देखते हुए बोला अंकल जब
- 2:29:59पेपर दे दिए हैं तो पैसे भी तो ट्रांसफर
- 2:30:02करवा लो। कहीं ऐसा तो नहीं इनका पैसे देने
- 2:30:05का कोई इरादा ही ना हो। शौर्य गजराज
- 2:30:08सोलंकी का मन भांपना चाहता था कि वो इस
- 2:30:10प्रॉपर्टी के बदले में पैसे देने का ख्याल
- 2:30:13रखता है या नहीं। तभी गजराज सोलंकी शौर्य
- 2:30:17को घूरता हुआ बोला बच्चे अगर यह डील न्यू
- 2:30:20सिटी टावर के ऑफिस में हो जाती तो इसके
- 2:30:23पैसे मिल भी जाते पर जब मैं इसमें इनवॉल्व
- 2:30:26हो गया तो फिर पैसे की बात तो भूल ही जाओ
- 2:30:29यह तो फिर दादागिरी हुई शौर्य गजराज
- 2:30:32सोलंकी के पास पहुंचते हुए बोला तो गजराज
- 2:30:36सोलंकी ने अपनी आंखों से चिंगारी बरसाते
- 2:30:38हुए कहा लड़के शहर में नए हो इसीलिए
- 2:30:42तुम्हें मेरे बारे में कुछ पता नहीं है
- 2:30:45नहीं तो तुम ऐसी बात करने की हिम्मत नहीं
- 2:30:48करते। शौर्य आगे बढ़ा और एक झटके से गजराज
- 2:30:51सोलंकी के हाथों से वो फाइल छीन ली और
- 2:30:54बोला अगर यह बात है तो फिर आप इस ऑफिस को
- 2:30:57भूल जाइए क्योंकि मैंने पहले ही इसके पूरे
- 2:31:00पैसे मिस्टर देवव्रत मल्होत्रा को दे रखे
- 2:31:03हैं। इसीलिए अब से यह प्रॉपर्टी मेरी है
- 2:31:06और अगर आपको यह प्रॉपर्टी चाहिए तो आपको
- 2:31:09मुझसे डील करनी पड़ेगी। गजराज सोलंकी को
- 2:31:12उम्मीद नहीं थी कि शौर्य उसके हाथ से पेपर
- 2:31:15छीन लेगा। वो गुर्राते हुए बोला तुम्हारी
- 2:31:18इतनी हिम्मत कि तुमने मेरे हाथ से यह फाइल
- 2:31:21छीनने की जुर्रत [संगीत] की। अब तुम्हें
- 2:31:24मेरे कहर से कोई नहीं बचा सकता। विहान
- 2:31:27रायजादा जो पास में ही था वो तेजी से
- 2:31:29शौर्य पर झपटा। पर शौर्य अब पूरी तरह से
- 2:31:32एक्शन के मूड में था। जैसे ही विहान
- 2:31:35रायजादा उसके पास पहुंचा, उसने अपनी जगह
- 2:31:37पर खड़े-खड़े जोरदार केक उसके सीने पर
- 2:31:40मारी। वो उछल कर 5 फीट दूर जा गिरा। वो
- 2:31:43अपना सीना पकड़ कर उसी जगह फर्श पर ढेर हो
- 2:31:46गया था। तभी गजराज सोलंकी ने अपने पीछे
- 2:31:49खड़े दोनों पहलवानों को चिल्ला कर कहा।
- 2:31:52तुम लोग खड़े-खड़े तमाशा क्या देख रहे हो।
- 2:31:55इसकी एक भी हड्डी सलामत नहीं रहनी चाहिए।
- 2:31:58जैसे ही दोनों पहलवान शौर्य की तरफ बढ़े,
- 2:32:01शौर्य चिल्लाकर बोला, रुक जाओ। शौर्य की
- 2:32:05गरज सुनकर दोनों [संगीत] पहलवान अपनी जगह
- 2:32:07पर ही जड़ हो गए। शौर्य ने गजराज सोलंकी
- 2:32:10को चेतावनी देते हुए कहा, मिस्टर सोलंकी
- 2:32:14आखिरी मौका दे रहा हूं। अपने पहलवानों को
- 2:32:17रोक लीजिए। अगर इन्होंने मुझ पर हमला कर
- 2:32:20दिया तो मां कसम मैं आपको किसी को मुंह
- 2:32:23दिखाने लायक नहीं [संगीत] छोडूंगा। शौर्य
- 2:32:26की ललकार सुनकर एक बार को तो गजराज सोलंकी
- 2:32:29भी हिल गए और तुरंत ही जो पहलवान देवव्रत
- 2:32:32मल्होत्रा को लेकर आया था उससे बोले तुम
- 2:32:36बाहर जाकर यहां जितने भी आदमी हैं सबको
- 2:32:39बुला लाओ। आदेश मिलते [संगीत] ही वो शख्स
- 2:32:41तेजी से बाहर की तरफ चला गया। इधर दो
- 2:32:44पहलवान पहले ही शौर्य के सामने खड़े थे।
- 2:32:47उन्हीं में से एक मतवाले हाथी की तरह
- 2:32:49शौर्य की तरफ बढ़ा। उसका शरीर [संगीत]
- 2:32:52किसी दैत्य की तरह ही नजर आ रहा था। शौर्य
- 2:32:55उसकी शारीरिक ताकत का अंदाजा लगाना चाहता
- 2:32:57था क्योंकि उसे महसूस हो गया था कि वह
- 2:33:00इतनी आसानी से सामने [संगीत] वाले राक्षस
- 2:33:03को हरा नहीं पाएगा। शौर्य अपनी जगह से
- 2:33:05उछला और उसके दोनों पैर एक साथ उस पहलवान
- 2:33:08के सीने पर [संगीत] जाकर लगे और वैसे ही
- 2:33:10फिर बैकफ्लिप मारकर शौर्य दोबारा अपनी जगह
- 2:33:13पर वापस भी [संगीत] आ गया। पर शौर्य की इस
- 2:33:16किक का उस पहलवान पर कोई असर नहीं हुआ। वो
- 2:33:18हल्का सा लड़खड़ाया जरूर पर तुरंत [संगीत]
- 2:33:20संभल भी गया। तुम मुझे मगन समझने की भूल
- 2:33:24मत करना। एक बार तुम मेरे हाथ आ जाओ तो
- 2:33:27मैं तुम्हें [संगीत] चींटी की तरह मसल
- 2:33:29दूंगा। पहलवान भद्दी हंसी-हंसते हुए बोला
- 2:33:32और यहीं पर शौर्य चूक कर गया। इस समय उसका
- 2:33:35सारा ध्यान सामने वाले पहलवान पर था। इसी
- 2:33:39मौके का फायदा उठाकर उसके पीछे वाले
- 2:33:41पहलवान ने शौर्य को पीछे से अपनी बाहों
- 2:33:44में जकड़ लिया। शौर्य ने पूरा जोर लगाया
- 2:33:47पर वह छूट नहीं पाया। शौर्य के माथे पर
- 2:33:50पसीने की बूंदे झिलमिलाने लगी। शौर्य को
- 2:33:52दूसरे पहलवान के हाथों में मछली की तरह
- 2:33:55छटपटाते देखकर सामने वाला पहलवान तेजी से
- 2:33:58शौर्य की तरफ बढ़ा। उसके करीब पहुंचकर वो
- 2:34:02शौर्य के दोनों पैरों के बीच वाले हिस्से
- 2:34:04की तरफ देखने लगा। शौर्य समझ गया कि सामने
- 2:34:07वाले पहलवान के दिमाग में क्या चल रहा है।
- 2:34:10इसी समय सामने वाले पहलवान ने अपना पैर
- 2:34:13शौर्य की जांघों के बीच में मारने के लिए
- 2:34:16चलाया। और यही वो समय था जब शौर्य ने अपने
- 2:34:19दोनों पैर उठाकर अपने सिर के ऊपर कर लिए।
- 2:34:22उसका शरीर 180 डिग्री के कोण पर मुड़ गया
- 2:34:25था। उसके सीने से नीचे का हिस्सा मुड़कर
- 2:34:28उसके सिर के ऊपर पहुंच रहा था। जबकि उसका
- 2:34:31सीना अभी भी उसके पीछे वाले पहलवान की
- 2:34:34बाहों में ही कैद था। नियमित योग करने का
- 2:34:37यही फायदा था कि शौर्य का शरीर बहुत ही
- 2:34:40लचीला था। शौर्य के शरीर का निचला हिस्सा
- 2:34:43ऊपर उठते ही सामने वाले पहलवान का पैर
- 2:34:46सीधे जाकर पीछे वाले पहलवान की जांघों के
- 2:34:49बीच वाले हिस्से पर जाकर लगा और अगले ही
- 2:34:52पल पीछे वाले पहलवान की पकड़ शौर्य पर से
- 2:34:55ढीली हुई और शौर्य आजाद हो गया। पर दूसरा
- 2:34:58पहलवान अपने हाथों से अपनी जांघों के बीच
- 2:35:01वाले [संगीत] हिस्से को पकड़ कर वही जमीन
- 2:35:03पर चित हो गया। शौर्य समझ गया कि वार इतना
- 2:35:06तेज था कि यह दूसरा पहलवान अब चाहकर भी
- 2:35:09खड़ा नहीं हो पाएगा। इश् अगर यह किक मुझे
- 2:35:12लग गई होती तो यह सोचकर ही शौर्य के शरीर
- 2:35:15में सेन दौड़ गई। दूसरे पहलवान का हश्र
- 2:35:18[संगीत] देखकर शौर्य गजराज सोलंकी से
- 2:35:20बोला, "यह लो सोलंकी साहब, आपके खिलाड़ी
- 2:35:24ने अपने ही [संगीत] पाले में गोल कर लिया।
- 2:35:26शौर्य की बात सुनकर गजराज सोलंकी के चेहरे
- 2:35:28पर गुस्सा नजर आया। वो दरवाजे से बाहर की
- 2:35:32तरफ देखते हुए चिल्लाया। बाकी सब आदमी
- 2:35:34कहां मर गए? अभी तक आए क्यों नहीं? पर
- 2:35:37सोलंकी साहब के सवाल का कोई जवाब नहीं
- 2:35:40मिला। वो अभी भी इसी उम्मीद में दरवाजे की
- 2:35:43तरफ देख रहे थे कि उनके आदमी बस आने ही
- 2:35:45वाले हैं। पर किसी को भी आता ना देखकर
- 2:35:48शौर्य [संगीत] समझ गया कि विक्रम ने अपना
- 2:35:51काम अच्छे से किया है। वहीं शौर्य के
- 2:35:54सामने अभी भी दूसरा पहलवान अपने दैत्य
- 2:35:56जैसे शरीर के साथ खड़ा था। वो जलती आंखों
- 2:36:00से शौर्य को घूरते हुए बोला, तुम्हारे
- 2:36:03कारण मैंने अपने ही साथी को घायल कर दिया।
- 2:36:05तुम्हें इसका हिसाब करना पड़ेगा।
- 2:36:08पहले तो शायद मैं तुम्हें जिंदा भी छोड़
- 2:36:10देता पर अब तुम्हारी जान लेने के बाद ही
- 2:36:13मुझे चैन आएगा। गैंडे, सपने देखने में कुछ
- 2:36:18नहीं जाता। तुम भी सपने देखो। इससे शायद
- 2:36:21तुम्हारे दिल को थोड़ा चैन मिल जाए। शौर्य
- 2:36:25उस पहलवान की हंसी उड़ाते हुए बोला। शौर्य
- 2:36:27की बात सुनकर पहलवान और भड़क गया। वो
- 2:36:30अंधाधुंध शौर्य पर टूट पड़ा। पर शौर्य
- 2:36:33उसके हाथ नहीं आ रहा था। शौर्य सोच रहा था
- 2:36:35कि इस गैंडे को कैसे काबू में किया जाए।
- 2:36:38तभी अचानक उसके दिमाग में कुछ ख्याल आया।
- 2:36:41उसे ज्यादा से ज्यादा फोर्स जनरेट करना
- 2:36:43था। उसने हॉल का मुआयना किया तो पाया कि
- 2:36:46हॉल में मौजूद [संगीत] पिलर के साथ ऊपर
- 2:36:49वाले फ्लोर का छज्जा निकला हुआ था। शौर्य
- 2:36:51पीछे होते-होते पिलर के पास आ गया। जब
- 2:36:54उसने [संगीत] महसूस किया कि वो पहलवान अब
- 2:36:57उसकी रेंज में आ गया है तो वह फुर्ती से
- 2:36:59उस पिलर की तरफ भागा। पिलर के सहारे जंप
- 2:37:02लेकर [संगीत] वो छज्जे पर पहुंचा और वहां
- 2:37:04से एक लंबा जंप लेकर सीधा उस पहलवान के
- 2:37:07ऊपर कूदा। इतने [संगीत] ऊपर से कूदने के
- 2:37:09कारण उसके शरीर का फोर्स बहुत बढ़ गया और
- 2:37:12जब शौर्य की किक पहलवान की छाती से टकराई
- 2:37:15तो वो उछल कर पीछे [संगीत] जाकर गिरा। यह
- 2:37:18वार इतना तेज था कि पहलवान के मुंह से खून
- 2:37:21निकल आया। तभी बाहर से भागते हुए कदमों की
- 2:37:23आवाज सुनाई दी। जैसे-जैसे रात काली होती
- 2:37:27जा रही थी, फार्म हाउस में गजराज सोलंकी
- 2:37:30और विहान रायजादा की काली करतूतें भी अपने
- 2:37:32अंजाम की ओर बढ़ रही थी। एक तरफ गजराज
- 2:37:36गैंग की बेचैनी उफान पर थी। लेकिन दूसरी
- 2:37:39तरफ शौर्य शांत खड़ा था। जैसा तूफान थमने
- 2:37:42के बाद होता है। उसके सामने वो विशाल
- 2:37:45पहलवान जमीन पर पड़ा आंखें फाड़े शौर्य
- 2:37:48[संगीत] को ही देख रहा था। उसे लगा जरूर
- 2:37:51उसके सीने की कोई हड्डी टूट चुकी है। जब
- 2:37:54उससे दर्द बर्दाश्त नहीं हुआ तो वह धड़ाम
- 2:37:57से जमीन पर गिर गया था। वहीं गजराज की नजर
- 2:38:01एक [संगीत] टक दरवाजे पर टिकी थी। उसे
- 2:38:03इंतजार था अपने मुष्टों के आने का। तभी
- 2:38:06कदमों की आहट सुनाई दी। अगले ही पल दरवाजे
- 2:38:10से बदहवास हालत में वही शख्स अंदर आता
- 2:38:13दिखाई दिया जिसे गजराज सोलंकी ने आदमियों
- 2:38:16को इकट्ठा करके लाने के लिए भेजा था। उसे
- 2:38:19अकेले अंदर आते देख गजराज सोलंकी चिल्लाकर
- 2:38:22बोला विट्ठल तुम अकेले बाकी आदमी कहां है?
- 2:38:28विट्ठल ने गजराज के सामने सिर झुका दिया
- 2:38:31और बोला सर बाहर कोई भी आदमी होश में नहीं
- 2:38:35है। किसी ने पहले ही उन्हें बेहोश कर दिया
- 2:38:37है। यह सुनकर गजराज सोलंकी के चेहरे पर
- 2:38:40हवाइयां उड़ने लगी। जबकि शौर्य अपनी जगह
- 2:38:43पर खड़ा मुस्कुरा रहा था।
- 2:38:46जब गजराज सोलंकी ने शौर्य को मुस्कुराते
- 2:38:48देखा तो वह समझ गया कि इसके पीछे शौर्य का
- 2:38:52ही हाथ है। गजराज बौखला गया लेकिन उसने
- 2:38:56हार नहीं मानी। उसने विहान रायजादा की तरफ
- 2:38:59देखा और उसे आंखों से इशारा किया। विहान
- 2:39:03समझ गया। उसने मेज पर रखा फलों वाला चाकू
- 2:39:06उठाया और अपने पीछे खड़ी रुचि की गर्दन से
- 2:39:09सटाकर चिल्लाया। खबरदार
- 2:39:12जो एक भी कदम बढ़ाया तो तभी गजराज सोलंकी
- 2:39:16रुचि को चाकू की नोक पर देखकर खुश होता
- 2:39:19हुआ बोला शाबाश विहान अगर इनमें से कोई भी
- 2:39:23हमारी तरफ एक भी कदम बढ़ाता है तो तुम
- 2:39:26निसंकोच इस लड़की का गला रेत देना शौर्य
- 2:39:30की आंखों में गुस्सा उबलने लगा उसने गजराज
- 2:39:33की ओर देखकर कहा आखिर अपनी औकात दिखा ही
- 2:39:37दी तुमने तुम्हें क्या लगता है इस तरह तरह
- 2:39:40तुम हमें कितनी देर तक रोक [संगीत] पाओगे?
- 2:39:43और हां, अगर रुचि को एक भी खरोच आई तो फिर
- 2:39:47तुम्हारा क्या होगा? तुमने यह सोचा है?
- 2:39:50शौर्य को अब सिर्फ विक्रम से ही उम्मीद
- 2:39:53थी। पोसी के बारे में सोच रहा था। तभी उसे
- 2:39:56बाहर से भारी कदमों की आवाज सुनाई देने
- 2:39:58लगी। उसने देखा कि दरवाजे से 8-10 पुलिस
- 2:40:01वालों के साथ मेनका हॉल में प्रवेश कर रही
- 2:40:04है। शौर्य ने अपनी घड़ी पर नजर दौड़ाई तो
- 2:40:07उसने गौर [संगीत] किया कि उसे यहां आए हुए
- 2:40:101 घंटे से ऊपर का समय हो गया है और उसने
- 2:40:13मेनका को आधे घंटे का ही समय दिया था।
- 2:40:16मेनका ने जब शौर्य को सही सलामत अपने
- 2:40:18सामने देखा तो उसे राहत महसूस हुई। फिर
- 2:40:21उसकी निगाह सबसे होती हुई रुचि पर गई
- 2:40:24जिसके गले पर विहान रायजादा चाकू रखे हुए
- 2:40:27था।
- 2:40:28पुलिस को देखकर विहान रायजादा उलझन में
- 2:40:31पड़ गया। एक तरह से वोे हाथों पुलिस की
- 2:40:35नजर में आ गया था जो उसके जैसे बिजनेसमैन
- 2:40:38के लिए अच्छा नहीं था। दूसरी तरफ गजराज
- 2:40:42सोलंकी फार्म हाउस में पुलिस को देखकर समझ
- 2:40:44गया कि शौर्य अच्छे से तैयारी करके उसके
- 2:40:47खिलाफ व्यू रचना कर चुका था। अब पुलिस से
- 2:40:51बचने का उसके पास कोई चारा नहीं था।
- 2:40:54इसीलिए उसने पुलिस वालों को धमकाते हुए
- 2:40:56कहा। खबरदार जो मेरी तरफ बढ़े तो अगर तुम
- 2:41:00सब यहां से बाहर नहीं गए तो इस [संगीत]
- 2:41:02लड़की को अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा।
- 2:41:06विहान ने जब यह सुना तो उसका हाथ कांप
- 2:41:08गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या
- 2:41:11करें। [संगीत]
- 2:41:12वो गजराज सोलंकी की बात माने या अपने आप
- 2:41:15को पुलिस के हवाले कर दे। तभी अचानक उसके
- 2:41:18पीछे से एक हाथ आया और उसकी कलाई जिसमें
- 2:41:22चाकू था उसको पकड़ कर उमेटते हुए उसकी पीठ
- 2:41:25पर सटा दिया। विहान रायजादा के गले से चीख
- 2:41:29निकल गई। विहान के पीछे जाकर उसका हाथ
- 2:41:32पकड़ने वाला कोई और नहीं विक्रम ही था जो
- 2:41:36कि अभी तक मौके की फिराक में था। जैसे ही
- 2:41:39विहान के हाथ से चाकू छूटा, दो पुलिस वाले
- 2:41:42दौड़ कर गए और विहान रायजादा को अपने
- 2:41:45कब्जे में ले लिया। अब पासा [संगीत] पूरी
- 2:41:48तरह से पलट चुका था। दो पुलिस वालों ने
- 2:41:51आगे बढ़कर गजराज सोलंकी और विहान को
- 2:41:54हिरासत में ले लिया था। शौर्य आराम से
- 2:41:56चलकर गजराज [संगीत] सोलंकी और विहान
- 2:41:58रायजादा के पास पहुंचा और बोला आज
- 2:42:01तुम्हारा दिन अच्छा था कि पुलिस यहां आ
- 2:42:04गई। नहीं तो मैं तुम दोनों का वो हश्र
- 2:42:07करने वाला था कि फिर जिंदगी में कभी
- 2:42:10दोबारा तुम भूलकर भी मेरा सामना करने की
- 2:42:13हिम्मत नहीं करते। शौर्य की बात सुनकर
- 2:42:16विहान रायजादा ने अपना सिर नीचे कर लिया।
- 2:42:19पुलिस गजराज सोलंकी और विहान रायजादा के
- 2:42:21साथ बाकी पहलवानों को भी गिरफ्तार करके
- 2:42:24थाने लेकर चली गई। शौर्य भी सबके साथ
- 2:42:27पुलिस गाड़ी के पीछे-पीछे थाने पहुंच गया
- 2:42:30और देवव्रत मल्होत्रा ने गजराज सोलंकी और
- 2:42:33विहान रायजादा के खिलाफ अपनी कंप्लेंट
- 2:42:35दर्ज कराई। उसके बाद सभी वहां से होटल
- 2:42:38राजकमल आ गए। मेनका ने होटल राजकमल में
- 2:42:42ऑफिस की रजिस्ट्री से संबंधित सारी
- 2:42:44कार्यवाही पूरी की। सब कुछ कंप्लीट होने
- 2:42:47के बाद रुचि शौर्य के पास आई और उसका
- 2:42:50धन्यवाद करते हुए बोली, तुम्हारा
- 2:42:52बहुत-बहुत धन्यवाद श्रवण। अगर आज तुम नहीं
- 2:42:56होते तो शायद पता नहीं हमारे साथ
- 2:42:58क्या-क्या हो सकता था। अरे कुछ भी नहीं
- 2:43:00होता। अच्छे लोगों का साथ ऊपर वाला भी
- 2:43:03देता है। शौर्य मीठी मुस्कान के साथ बोला।
- 2:43:07मेनका जो उन दोनों से कुछ अलग [संगीत]
- 2:43:09खड़ी थी। जब उसने रुचि को शौर्य से इतने
- 2:43:11प्यार से बातें करते देखा तो उसे रुचि से
- 2:43:14जलन सी हुई। वो स्पष्ट [संगीत] नोट कर
- 2:43:16सकती थी कि रुचि के दिल में कहीं ना कहीं
- 2:43:19शौर्य के लिए एक सॉफ्ट कॉर्नर विकसित हो
- 2:43:21गया था। वहां से रवाना होने से पहले रुचि
- 2:43:25एक बार [संगीत] फिर से शौर्य के पास गई और
- 2:43:27उससे उसका नंबर मांगा। तो शौर्य हैरानी से
- 2:43:30बोला [संगीत] मेरा नंबर। हां, कुछ दिनों
- 2:43:33बाद मेरा बर्थडे है और तुम्हें बुलाना
- 2:43:35[संगीत] है तो तुम्हारा नंबर तो होना
- 2:43:37चाहिए ना मेरे पास। रुचि प्यार भरी नजरों
- 2:43:40से शौर्य की तरफ देखते [संगीत] हुए बोली।
- 2:43:43शौर्य ने रुचि को अपनी तरफ ऐसे प्यार से
- 2:43:45देखते पाया तो वो नर्वस फील [संगीत] करने
- 2:43:48लगा। रुचि खूबसूरत थी और उसका आकर्षण भी
- 2:43:51कम नहीं था। खैर, शौर्य ने अपनी भावनाओं
- 2:43:55पर कंट्रोल किया और रुचि से अपना नंबर
- 2:43:57एक्सचेंज किया। रुचि के वहां से जाने के
- 2:44:00बाद शौर्य मेनका के पास पहुंचा तो मेनका
- 2:44:02ने उसे तंग करते हुए कहा क्या बात है सब
- 2:44:07ठीक तो है [संगीत] बहुत नंबर शंबर
- 2:44:09एक्सचेंज हो रहे हैं शौर्य मेनका के कहने
- 2:44:11का भाव समझ गया था तो उसने झेपते हुए कहा
- 2:44:15अब इसमें मैं क्या कर सकता हूं उसने नंबर
- 2:44:17मांगा इसीलिए मुझे उसे अपना नंबर देना
- 2:44:19पड़ा बस इतनी सी बात ही है ना मेनका अपनी
- 2:44:24पलकें झपकाते हुए बोली अरे यार तुम
- 2:44:27[संगीत] भी हद करती और क्या बात हो सकती
- 2:44:29है? शौर्य टालने वाले भाव में बोला। इतना
- 2:44:33बोलने [संगीत] के बाद शौर्य ने अपनी घड़ी
- 2:44:35की तरफ देखा तो रात के 9:00 बजने वाले थे।
- 2:44:38वो हड़बड़ी दिखाते हुए बोला रात बहुत हो
- 2:44:41गई है। अब मुझे जाना पड़ेगा। मेनका जानती
- 2:44:44थी कि शौर्य के पास अपनी कोई गाड़ी नहीं
- 2:44:46है। तो उसने पूछा पर जाओगे कैसे? तुम्हारे
- 2:44:51पास कोई गाड़ी तो है नहीं। वैसे होटल की
- 2:44:53अपनी बहुत सी कारें हैं। तुम चाहो तो
- 2:44:56उनमें से कोई भी ले जा सकते हो। आफ्टर ऑल
- 2:44:59अब तुम ही उसके मालिक हो।
- 2:45:01शौर्य ने मेनका की बात सुनी। उसने सोचा यह
- 2:45:05हो तो सकता है पर उसे लगा इतनी जल्दी कार
- 2:45:08को मेंटेन करना उसके लिए ठीक नहीं होगा।
- 2:45:11इससे शिप्रा को उसके ऊपर शक करने का मौका
- 2:45:14मिलेगा। इसीलिए वो बोला नहीं अभी रहने दो।
- 2:45:18अभी इसकी कोई जरूरत नहीं है। जब मुझे
- 2:45:21लगेगा कि अब मैं कार अफोर्ड कर सकता हूं
- 2:45:23तो मैं खुद ही ले लूंगा।
- 2:45:26क्या कहा तुमने कि तुम कार अफोर्ड नहीं कर
- 2:45:29सकते? मेनका शौर्य पर तंज कसती हुई
- 2:45:32[संगीत] बोली अरे मेरा कहने का मतलब यह है
- 2:45:36कि जब मैं शिप्रा की नजरों में यह साबित
- 2:45:38कर दूंगा कि अब मैं कार अफोर्ड कर सकता
- 2:45:40हूं तब [संगीत] मैं कार भी ले लूंगा।
- 2:45:43शौर्य सफाई देता हुआ बोला तो मेनका ने
- 2:45:46बेबसी से कहा ठीक है फिर अब मैं इससे
- 2:45:49ज्यादा तुम्हारे लिए और कुछ नहीं कर सकती
- 2:45:52जब तुम्हें खुद ही कैब में धक्के खाने का
- 2:45:54मन कर रहा है तो खाओ धक्के
- 2:45:57खैर इसके बाद शौर्य ने अपने मोबाइल
- 2:45:59[संगीत] से कैब बुक की
- 2:46:00[गला साफ़ करने की आवाज़] 5 मिनट के अंदर
- 2:46:02ही कैब वहां आ गई थी शौर्य कैब में बैठकर
- 2:46:05शिप्रा के घर के लिए निकल गया लगभग 20
- 2:46:08मिनट के बाद वो राय हाउस में पहुंच गया था
- 2:46:11वो अभी शिप्रा के घर के दरवाजे पर पहुंचा
- 2:46:13ही था कि [संगीत] तभी उसका फोन बजा। उसने
- 2:46:16नंबर देखा तो यह शिप्रा का ही था। उसने
- 2:46:19फोन उठाया तो दूसरी तरफ से शिप्रा की आवाज
- 2:46:22आई।
- 2:46:22हेलो कहां रह गए तुम? अभी तक आए [संगीत]
- 2:46:26नहीं।
- 2:46:28शौर्य ने कहा, बस दरवाजे के बाहर ही खड़ा
- 2:46:31हूं। आप दरवाजा तो खोलिए।
- 2:46:34शिप्रा डाइनिंग एरिया में बैठी शौर्य का
- 2:46:36ही इंतजार कर रही थी। घर के बाकी लोग शायद
- 2:46:39सो गए थे। शिप्रा ने घर का दरवाजा खोला तो
- 2:46:43शौर्य अंदर आ गया। जब दोनों डाइनिंग एरिया
- 2:46:46में पहुंचे तो शिप्रा शौर्य से बोली ऐसा
- 2:46:49करो तुम हाथ मुंह धोकर नीचे आ जाओ।
- 2:46:51[संगीत] मैं तुम्हारे लिए खाना लगा देती
- 2:46:53हूं। शौर्य ने शिप्रा के मुंह से यह सुना
- 2:46:56तो उसने आश्चर्य से उसकी तरफ देखा। अब उसे
- 2:46:59एहसास हुआ [संगीत] कि शिप्रा उसी के
- 2:47:01इंतजार में अभी तक बैठी हुई थी और क्योंकि
- 2:47:04उसे लगा होगा कि उसने खाना नहीं खाया है
- 2:47:07तो इसीलिए वह उसे [संगीत] खाने के बारे
- 2:47:09में कह रही है।
- 2:47:11शौर्य के दिल में यह देखकर हलचल सी हुई।
- 2:47:14उसके अंदर एक फीलिंग जागी। जैसे कोई बीवी
- 2:47:17अपने पति का इंतजार करती है और खाने के
- 2:47:19लिए पूछती है। वो अभी इसी सोच में डूबा
- 2:47:23हुआ था तो शिप्रा ने दोबारा पूछा क्या
- 2:47:26हुआ? तुम क्या सोच कर विचार करने लगे?
- 2:47:29खाना तो खाना है ना?
- 2:47:32शौर्य झेपते हुए बोला [संगीत] नहीं आप
- 2:47:35रहने दीजिए। मैं खाना खाकर आया हूं।
- 2:47:38शिप्रा को अब शौर्य से खुद के लिए आप
- 2:47:40सुनकर इरिटेशन होने लगी थी। उसने सोचा वो
- 2:47:44शौर्य से इस बारे में बात करेगी। लेकिन
- 2:47:46पहले उसने उसके खाने को लेकर कहा अगर तुम
- 2:47:50खाना खाकर आने वाले थे तो तुम्हें यहां घर
- 2:47:53पर बता देना चाहिए था। संतो को तुम्हारे
- 2:47:55लिए खाना तो नहीं बनाना पड़ता। तभी शौर्य
- 2:47:58सफाई देता हुआ बोला। मुझे नहीं पता था कि
- 2:48:02यहां मेरा खाना भी बनना था। इसलिए मैं
- 2:48:04इन्फॉर्म नहीं कर पाया। आगे से मैं इस बात
- 2:48:07का ध्यान रखूंगा।
- 2:48:09शौर्य की बात सुनकर शिप्रा [संगीत] को
- 2:48:11शौर्य पर तरस आया। उसे लगा यह उसकी ही
- 2:48:14गलती है। उसने शौर्य [संगीत] को इस बारे
- 2:48:17में तो कुछ कहा ही नहीं था। पर फिर उसने
- 2:48:19खुद ही सोचा कि इतना तो समझदार उसे होना
- 2:48:22चाहिए कि जब वो यहां इस घर में रहने लगा
- 2:48:24है तो उसका खाना तो यहां बनेगा ही ना।
- 2:48:28शिप्रा समझाने वाले भाव में बोली। देखो
- 2:48:31श्रवण अब तुम इस घर में रहते हो तो यहां
- 2:48:34अगर खाना बनेगा तो सबके लिए बनेगा ना।
- 2:48:37इतना तो तुम्हें खुद भी समझना चाहिए।
- 2:48:40शिप्रा की बात सुनने के बाद शौर्य ने सोचा
- 2:48:44उसे कुछ डोज़ शिप्रा को भी देना चाहिए।
- 2:48:46इसीलिए उसने कहा देखिए आप जहां हैं उस जगह
- 2:48:50से आपके [संगीत] लिए यह कहना आसान है। पर
- 2:48:53मैं समझता हूं कि मैं यहां हूं तो सिर्फ
- 2:48:55आपकी मजबूरी के कारण। नहीं तो मेरी यहां
- 2:48:58कोई जरूरत नहीं है। मैं यहां जो आपके घर
- 2:49:01में रह रहा हूं वही मेरे लिए बहुत है।
- 2:49:04उसके ऊपर अगर मैं यह भी उम्मीद करूं कि आप
- 2:49:07मेरे लिए खाना [संगीत] पीना, मेरे कपड़े
- 2:49:09और भी जो जरूरत की चीजें हैं वो देखें तो
- 2:49:13मैं इसे कैसे एक्सेप्ट कर पाऊंगा?
- 2:49:15इतना बोलकर शौर्य 2 मिनट के लिए चुप हो
- 2:49:18गया। फिर कुछ सोच कर बोला। मेरी भी अपनी
- 2:49:21एक ईगो है। मुझे उसको भी संतुष्ट रखना
- 2:49:24पड़ता है। मैं जब भिखारी की जिंदगी भी जी
- 2:49:27रहा था तो उस समय भी मैंने कभी [संगीत]
- 2:49:29किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया। जो खुद ही
- 2:49:32मुझे कुछ देकर चले जाते थे। मैं उसे ग्रहण
- 2:49:35कर लेता था। मंदिर के जो पुजारी बाबा
- 2:49:38[संगीत] थे वो मेरी स्थिति भली-भांति
- 2:49:40समझते थे। इसीलिए ज्यादातर समय ऐसा होता
- 2:49:44था कि वह खुद मेरे लिए खाना उपलब्ध करा
- 2:49:46देते थे और उनका स्नेह मेरे लिए एक बेटे
- 2:49:49के जैसा था। इसीलिए उनकी दी हुई चीजें
- 2:49:53मेरे अंतर्मन को कभी कचोटती नहीं थी और
- 2:49:56मुझसे जितना बन पड़ता था मैं उनके लिए
- 2:49:58करता भी था। तो वो मुझे अपने जैसे लगते
- 2:50:01थे। पर यहां एक पल उसने शिप्रा की आंखों
- 2:50:06में देखा और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए
- 2:50:08बोला इस घर में सभी मुझे अपना दामाद अपना
- 2:50:12जीजा या जो भी एक रिश्ता जो आपने उन्हें
- 2:50:15दिखाने के लिए बना दिया है सभी मुझे वैसे
- 2:50:18ही ट्रीट करते हैं। लेकिन मुझे हकीकत पता
- 2:50:21है कि मैं यहां सिर्फ एक रोल प्ले कर रहा
- 2:50:24हूं। शायद यहां सभी हकीकत में जी रहे होते
- 2:50:27हैं। पर मैं हमेशा एक एक्टिंग ही कर रहा
- 2:50:29होता हूं। क्योंकि उनके लिए जो सच [संगीत]
- 2:50:32है मेरे लिए वो एक रोल प्ले है। आप समझ
- 2:50:34सकती हैं कितना मुश्किल होता है हर समय
- 2:50:37एक्टिंग मोड में रहना। शौर्य ने एक ही
- 2:50:40सांस में अपने दिल का गुबार जाहिर कर
- 2:50:42दिया। शिप्रा सन्यासी उसे देख रही थी। तभी
- 2:50:45[संगीत] शिप्रा के प्रति थोड़ी सिंपैथी
- 2:50:47दिखाते हुए शौर्य ने कहा, "मैं समझता
- 2:50:50[संगीत] हूं कि यह आपके लिए भी उतना ही
- 2:50:52मुश्किल है। पर आपको सिर्फ मेरे सामने
- 2:50:55एक्टिंग करनी होती [संगीत] है। लेकिन मुझे
- 2:50:58मुझे तो हर पल सबके सामने आपके पति होने
- 2:51:01का वो ढोंग करना पड़ता है। जिसकी सच्चाई
- 2:51:04जगजाहिर है। शौर्य की इन बातों ने शिप्रा
- 2:51:08को अंदर से हिला दिया। शौर्य की बातों से
- 2:51:10शिप्रा की सांसे थम सीसी गई थी। शौर्य के
- 2:51:14शब्द उसके कानों में किसी धमाके की तरह
- 2:51:16गूंज रहे थे। उसने आज तक शौर्य को सिर्फ
- 2:51:19एक जरूरत या एक मोहरे की तरह देखा था।
- 2:51:22लेकिन आज पहली बार उसे उस मोहरे के पीछे
- 2:51:24छिपा घायल स्वाभिमान दिखाई दिया। शौर्य की
- 2:51:28आंखों में जो दर्द और विद्रोह था, उसने
- 2:51:31शिप्रा की आत्मा को झकझोर कर रख दिया था।
- 2:51:34शिप्रा ने मन ही मन सोचा कितना कुछ इसके
- 2:51:37दिल में दबा हुआ है। आज इसके जज्बात जहर
- 2:51:41बनकर बाहर निकल रहे हैं। क्या मैं वाकई
- 2:51:44इतनी पत्थर दिल हो गई थी? यह कड़वा सच था
- 2:51:47कि शिप्रा अब तक सिर्फ अपने लिए सोच रही
- 2:51:50थी। वो अपनी सहूलियत के हिसाब से शौर्य को
- 2:51:53नचा रही थी। उसे कभी एहसानों के नीचे
- 2:51:56दबाती तो कभी रिश्तों के नाम पर मजबूर
- 2:51:58करती। शौर्य की कड़वाहट [संगीत] जायज थी।
- 2:52:02अगर दादा बलवंत राय ने शौर्य को घर में
- 2:52:04रखने की जिद नहीं की होती तो वह आज भी उसी
- 2:52:07अंधेरे सर्वेंट क्वार्टर की धूल फांक रहा
- 2:52:09होता। शिप्रा को पहली बार महसूस हुआ कि
- 2:52:13उसकी दी हुई हर सुख सुविधा शौर्य के लिए
- 2:52:15तोहफा नहीं बल्कि एक घाव थी। उसका शौर्य
- 2:52:19के लिए महंगे कपड़े लेना, उसके खानेपीने
- 2:52:22का शाही इंतजाम करना या उसे जेब खर्च के
- 2:52:24लिए पैसे देना यह सब बातें शौर्य को अंदर
- 2:52:28ही अंदर काट रही थी। क्योंकि उसे यह सब
- 2:52:30पति होने के नाते नहीं बल्कि एक बेचारे पर
- 2:52:33की गई दया के रूप में मिला था। शिप्रा ने
- 2:52:36अपनी मुट्ठियां भी। उसे एहसास हुआ कि अब
- 2:52:39और दिखावा मुमकिन नहीं है। उसे कुछ चीजें
- 2:52:43शौर्य के सामने अब स्पष्ट रूप से रख देनी
- 2:52:45चाहिए ताकि दोबारा किसी बात को लेकर शौर्य
- 2:52:48[संगीत] का ईगो हर्ट ना हो। ड्राइंग हॉल
- 2:52:51की खामोशी उसे काटने लगी थी। उसे डर था कि
- 2:52:55कहीं घर का कोई सदस्य उनकी इस तनातनी को
- 2:52:58देख ना ले। इसीलिए शिप्रा ने शौर्य से
- 2:53:00कहा, ऐसा करो तुम अपने कमरे में चलकर अपने
- 2:53:04कपड़े चेंज कर लो। मैं वहीं आकर तुमसे बात
- 2:53:07करती हूं। ठीक है। इतना कहकर शौर्य अपने
- 2:53:11कमरे में चला आया। उसने बाथरूम में
- 2:53:13[संगीत] जाकर मुंह हाथ धोए और नाइट ड्रेस
- 2:53:15में आ गया। वो तैयार होकर शिप्रा का
- 2:53:18इंतजार करने लगा और सोचने भी लगा। पता
- 2:53:21नहीं मेरी बातों का शिप्रा पर क्या असर
- 2:53:23हुआ होगा। कहीं उल्टा असर हुआ तो पता चला
- 2:53:26कि अगले ही दिन मुझे इस घर से रुखसत ही कर
- 2:53:30दिया। यह सोचकर वो अपनी ही सोच से घबरा
- 2:53:33गया। फिर उसने ही खुद को तसल्ली दी। नहीं
- 2:53:38वो ऐसा नहीं कर सकती। अभी उसे मेरी जरूरत
- 2:53:41है। तभी शौर्य ने दरवाजे पर आहट महसूस की।
- 2:53:45उसने देखा शिप्रा उसके कमरे के अंदर आ रही
- 2:53:48थी। शिप्रा ने भी इतने [संगीत] समय में
- 2:53:50अपने कपड़े बदल लिए थे। पिंक कलर की नाइटी
- 2:53:53में उसका गोरा चेहरा किसी [संगीत] आसमान
- 2:53:56से उतरी परी के जैसा लग रहा था। उसके खुले
- 2:53:59हुए बाल जो उसके कंधों पर लहरा रहे थे,
- 2:54:01शौर्य को अपनी तरफ खींच रहे थे। इसी समय
- 2:54:05एक हवा का झोंका बालकनी के दरवाजे से होकर
- 2:54:08कमरे में आया और शिप्रा के चेहरे से
- 2:54:10टकराया तो उसके बाल पीछे की तरफ लहरा गए।
- 2:54:14शौर्य ने यह देखा तो उसका दिल मुंह को आ
- 2:54:16गया। उसे लगा अगर वह कुछ पल और शिप्रा की
- 2:54:20तरफ देखता रहा तो अपनी भावनाओं पर कंट्रोल
- 2:54:22नहीं कर पाएगा। [संगीत] इसीलिए उसने अपनी
- 2:54:25नजर शिप्रा से फेर ली। वो बालकनी के
- 2:54:28दरवाजे को बंद करने के लिए आगे बढ़ा तो
- 2:54:30शिप्रा [संगीत] ने कहा उसे खुला ही रहने
- 2:54:33दो। शिप्रा की बात सुनकर शौर्य ठटक गया।
- 2:54:37शिप्रा दरवाजे से होती हुई बालकनी में आ
- 2:54:40गई। [संगीत] मजबूरन शौर्य को भी उसके
- 2:54:42पीछे-पीछे बालकनी में आना पड़ा। रात के इस
- 2:54:46वक्त हल्की-ठंडी हवा शरीर को सुकून दे रही
- 2:54:49थी। बालकनी के सामने बड़ा सा लॉन और उसमें
- 2:54:53बीच-बीच में टिमटिमाती [संगीत] लाइटें
- 2:54:55उसकी खूबसूरती बढ़ा रही थी। शिप्रा बालकनी
- 2:54:59की रेलिंग के सहारे शौर्य की तरफ पलट कर
- 2:55:01खड़ी हो गई। शौर्य भी बालकनी की रेलिंग
- 2:55:04पकड़े हुए लॉन की तरफ मुंह करके खड़ा हो
- 2:55:07गया। दोनों की आंखों ने तो एक दूसरे को
- 2:55:10अपने राज बता दिए थे। लेकिन दिल की हकीकत
- 2:55:13को अभी भी जुबान तक पहुंचने का रास्ता तय
- 2:55:16करना बाकी था। शायद शिप्रा की जिद शौर्य
- 2:55:19की उम्मीदों पर अभी भारी पड़ रही थी।
- 2:55:22शौर्य को डर सा लग रहा था कि खामोशी टूटते
- 2:55:25ही कहीं [संगीत] सब कुछ खत्म ना हो जाए।
- 2:55:27तभी शिप्रा शौर्य की तरफ देखते हुए बोली।
- 2:55:31मुझे नहीं पता था कि मेरे द्वारा की गई
- 2:55:33कुछ [संगीत] चीजें तुम्हारी ईगो को हर्ट
- 2:55:35कर रही थी। दरअसल मैंने इतना सोचा ही
- 2:55:39नहीं। पर अब सोचती हूं तो [संगीत] लगता है
- 2:55:41कि तुम सही कह रहे थे। मैं हमेशा अपनी
- 2:55:43प्रॉब्लम्स के बारे में ही सोचती रही। कभी
- 2:55:46तुम्हारे बारे में सोचा ही नहीं क्योंकि
- 2:55:48कभी यह एहसास ही नहीं हुआ कि मेरी कोई बात
- 2:55:51तुम्हारे ईगो को हर्ट कर सकती है। इतना
- 2:55:54[संगीत] कहकर शिप्रा 2 मिनट के लिए रुकी
- 2:55:57और फिर बोली मैंने तो यही सोचा कि आभावों
- 2:56:01के बीच रहे तुम। अगर मैं तुम्हारे लिए कुछ
- 2:56:04करूंगी तो तुम्हें अच्छा ही लगेगा।
- 2:56:07रही दूसरी बात कि तुम्हें जो मेरे कारण
- 2:56:09मेरे परिवार के सामने हमेशा एक्टिंग करनी
- 2:56:12पड़ती है। अगर तुम चाहो [संगीत] तो वह
- 2:56:14एक्टिंग ना रहकर सच भी हो सकती है। शौर्य
- 2:56:18ने जैसे ही शिप्रा की यह बात सुनी, उसका
- 2:56:20दिल उछल [संगीत] कर खुशी में भंगड़ा करने
- 2:56:22लगा। उसके दिमाग में सबसे पहला ख्याल यही
- 2:56:26आया कि क्या शिप्रा [संगीत] ने उसे अपना
- 2:56:28पति स्वीकार कर लिया? पर समय से पहले वो
- 2:56:31उत्साहित होकर बाद में बेवकूफ नहीं बनना
- 2:56:34चाहता था। इसीलिए उसने खुद की भावनाओं पर
- 2:56:37कंट्रोल करके कहा मैं आपके कहने का मतलब
- 2:56:40नहीं समझा। देखो अगर तुम चाहो तो मैं कभी
- 2:56:44तुमसे तलाक नहीं लूंगी। तुम्हें ध्यान
- 2:56:47होगा जब तुम यहां रहने आए थे तो मैंने
- 2:56:50तुमसे इसी बारे में कुछ बात कही थी।
- 2:56:53शिप्रा की यह बात सुनकर शौर्य को ध्यान
- 2:56:55आया। जब शिप्रा ने यहीं सामने नजर आ रहे
- 2:56:58लॉन में उससे कहा था कि वह उसकी पत्नी
- 2:57:01बनकर रह सकती है [संगीत] पर कभी पत्नी का
- 2:57:04सुख नहीं देगी। शौर्य ने कहा हां तुम्हारी
- 2:57:09कही एक-एक बात मुझे याद है। तो क्या
- 2:57:12तुम्हें मंजूर होगा मेरा पति बनकर रहना?
- 2:57:15यह जानते हुए कि मैं तुम्हें कभी एक पत्नी
- 2:57:17का सुख नहीं दूंगी। शिप्रा शौर्य की आंखों
- 2:57:20में देखती हुई [संगीत] बोली। शौर्य को
- 2:57:23तुरंत कोई जवाब देते नहीं बना। उसके दिल
- 2:57:25में जो अभी थोड़ी देर पहले एक उम्मीद की
- 2:57:27लहर दौड़ी थी वो हवा हो गई। शिप्रा ने
- 2:57:31उसके चेहरे के बिगड़े हुए भाव को देखा तो
- 2:57:34वो उसकी भावनाओं को समझ गई। इसीलिए वो
- 2:57:37शौर्य को दोबारा समझाते हुए बोली देखो मैं
- 2:57:41समझती हूं कि हर किसी के शरीर की अपनी
- 2:57:43जरूरत होती है। इसीलिए अगर तुम्हारा किसी
- 2:57:46के साथ अफेयर भी होता है या तुम [संगीत]
- 2:57:48किसी और के साथ अपनी नीड को पूरा करते हो
- 2:57:51तो भी मुझे उसमें कोई आपत्ति नहीं है।
- 2:57:54क्या इसके बाद तुम मेरे पति बनकर [संगीत]
- 2:57:56हमेशा रहने के लिए तैयार हो? शौर्य का मन
- 2:57:59किया कि वो अपना सिर पीट ले। उसने सोचा
- 2:58:03कैसी लड़की है यार? क्या सिर्फ मर्दों के
- 2:58:06शरीर को ही एक साथी की नीड होती है? औरतों
- 2:58:09की ऐसी कोई जरूरत नहीं होती?
- 2:58:12इसके बाद उसके दिल में यह ख्याल भी आया कि
- 2:58:14क्या सच में [संगीत] अगर उसका किसी के साथ
- 2:58:17कोई अफेयर होगा तो शिप्रा को कोई फर्क
- 2:58:19नहीं पड़ेगा। उसने अपनी जिज्ञासा शांत
- 2:58:22करने के लिए कहा। [संगीत]
- 2:58:24क्या सिर्फ मर्दों के शरीर की ही अपनी नीड
- 2:58:26होती है? औरतों के शरीर की अपनी कोई नीड
- 2:58:29नहीं होती? और दूसरी बात क्या सच में ऐसा
- 2:58:32होगा कि मेरा अगर [संगीत] किसी के साथ
- 2:58:34अफेयर होगा या मैं किसी लड़की के साथ अपना
- 2:58:37समय बिताऊंगा तो आपको कोई फर्क नहीं
- 2:58:40पड़ेगा।
- 2:58:41शौर्य का सवाल सुनकर शिप्रा पूरे
- 2:58:43कॉन्फिडेंस के साथ बोली तुम मेरी चिंता मत
- 2:58:47करो। मुझे पता है [संगीत] कि मेरी क्या
- 2:58:49नीड है। अपनी देखो। तुम कहां किसके साथ
- 2:58:52क्या करते हो या किसके साथ अपना समय
- 2:58:54बिताते हो उससे मुझे कोई दिक्कत नहीं है।
- 2:58:57बस एक चीज चाहूंगी कि तुम दूसरी शादी नहीं
- 2:59:00करोगे। शौर्य को अपने ऊपर तरस आने लगा। वो
- 2:59:04सोचने को मजबूर हो गया कि क्या उसका
- 2:59:06व्यक्तित्व इतना साधारण है कि शिप्रा को
- 2:59:10उसके होने या ना होने से कोई फर्क ही नहीं
- 2:59:12पड़ेगा। फालतू में ही वह खुद को बड़ा
- 2:59:15स्मार्ट समझता था [संगीत] या जो लड़कियां
- 2:59:17उसे स्पेशल फील कराती थी वो सिर्फ पैसे के
- 2:59:20लिए ही उसकी दीवानी होने का दिखावा करती
- 2:59:23थी। तो क्या आज जो उसने रुचि की आंखों में
- 2:59:26अपने लिए एक लगाव महसूस किया [संगीत] था।
- 2:59:28क्या वो सब एक दिखावा था? या वो उसके
- 2:59:31एहसान के कारण उससे इंप्रेस थी। फिर शौर्य
- 2:59:34के दिमाग में एक दूसरा ख्याल आया। उसने
- 2:59:37कहा चलो एक बार को मैं आपकी बात को मान
- 2:59:40[संगीत] भी लेता हूं। मैं हमेशा के लिए
- 2:59:43आपका पति बनकर रहने को तैयार भी हो जाता
- 2:59:45हूं। [संगीत] पर इसके अलावा भी कुछ ऐसी
- 2:59:48चाहतें होती हैं जिन्हें इंसान अपने दिल
- 2:59:50से निकाल नहीं सकता। उनको कैसे पूरा
- 2:59:53करेंगे? सभी चाहते हैं कि उसका परिवार
- 2:59:56[संगीत] हो, बच्चे हो। इस तरह तो ना आप
- 2:59:59कभी मां बन सकेंगी और ना ही मैं बाप।
- 3:00:02[संगीत] शौर्य की बात सुनकर शिप्रा कुछ पल
- 3:00:05सोचती रही। फिर बोली, अगर तुम फादर बनना
- 3:00:08चाहते हो तो उसका भी [संगीत] रास्ता है।
- 3:00:11ऐसा नहीं है कि मुझे मां बनने की ख्वाहिश
- 3:00:14नहीं है। इसके लिए कुछ समय बाद हम सरोगेसी
- 3:00:18के द्वारा मां-बाप बन सकते हैं। शौर्य ने
- 3:00:21सोचा [संगीत] कि क्या यह सब कुछ उसने पहले
- 3:00:24से ही सोच रखा है?
- 3:00:26फिर भी अपनी शंका के निवारण के लिए
- 3:00:28[संगीत] उसने पूछा अगर आप सरोगेसी के
- 3:00:31द्वारा बच्चा पैदा [संगीत] करेंगी तो क्या
- 3:00:34आपके मां-बाप आपसे सवाल नहीं करेंगे? आप
- 3:00:38जब खुद बच्चे को जन्म दे सकती हैं तो
- 3:00:41सरोगेसी का रास्ता क्यों अपना [संगीत] रही
- 3:00:43हैं? शौर्य का यह सवाल सुनकर शिप्रा कुछ
- 3:00:46सोच कर बोली, "इसके लिए हम एक [संगीत]
- 3:00:49दूसरा रास्ता भी अपना सकते हैं। हम आईवीएफ
- 3:00:52के द्वारा भी बच्चे को जन्म दे सकते हैं।
- 3:00:55इस तरह किसी को सवाल करने की जरूरत ही
- 3:00:58नहीं होगी।" शौर्य का दिमाग चकरा गया।
- 3:01:02उसने सोचा इसे मर्दों से ऐसी क्या ही चिढ़
- 3:01:05हो गई है कि बच्चे भी पैदा करने को तैयार
- 3:01:08हो गई है। पर नेचुरल तरीके से नहीं आईवीएफ
- 3:01:11के द्वारा। यह लड़की सब कुछ के लिए तैयार
- 3:01:14है। पर जो एक पति के लिए सबसे जरूरी चीज
- 3:01:17है उसके लिए ही तैयार नहीं है। फिर एक बार
- 3:01:20शौर्य को शक हुआ कि क्या शिप्रा जो बोल
- 3:01:23रही है सच में वो ऐसा कर पाएगी?
- 3:01:26क्या सच में वो उसे किसी और लड़की के साथ
- 3:01:29देख [संगीत] पाएगी? फिर शौर्य ने सोचा अगर
- 3:01:32वो ऐसे रह सकती है तो फिर वो क्यों नहीं
- 3:01:35उसके बिना रह सकता। यह बात दिमाग में आते
- 3:01:38ही शौर्य बोला अगर ऐसी बात है तो मुझे
- 3:01:42मंजूर है। मैं पूरी जिंदगी आपका पति बनकर
- 3:01:45रहने के लिए तैयार हूं। बिना आपसे कोई
- 3:01:47अपेक्षा किए। पर मेरी भी यही शर्त है कि
- 3:01:50अगर मैं अपनी शारीरिक जरूरत के लिए किसी
- 3:01:53के साथ होता हूं [संगीत] तो आप कोई आपत्ति
- 3:01:55नहीं करेंगी। और क्योंकि मुझे भविष्य में
- 3:01:58बच्चे चाहिए तो उसके लिए किसी और की कोख
- 3:02:01नहीं चाहिए। वो बच्चा आपके द्वारा ही
- 3:02:04होगा। भले ही वह आईवीएफ के द्वारा ही हो।
- 3:02:07अगर आपको यह मंजूर है तो [संगीत] मुझे कोई
- 3:02:09दिक्कत नहीं है। शिप्रा शौर्य को अपनी कही
- 3:02:13गई शर्त मानते देखकर बोली तो फिर ठीक है।
- 3:02:16मैं कभी तुमसे तलाक लेने की कोशिश नहीं
- 3:02:19करूंगी। अब तुम्हें भी अपने मन पर यह
- 3:02:21[संगीत] बोझ रखने की जरूरत नहीं है कि
- 3:02:23तुम्हें हर समय मेरा पति होने का ड्रामा
- 3:02:26करना पड़ता है। जब दोनों की आपसी सहमति से
- 3:02:29एक डिसीजन हो गया तो [संगीत] शौर्य बोला
- 3:02:32इसका यह मतलब भी नहीं होगा कि मैं हमेशा
- 3:02:35इसी घर में रहूंगा। मेरा [संगीत] जब मन
- 3:02:37करेगा मैं अपने अलग घर में रह सकता हूं।
- 3:02:40आपके मम्मी पापा जब भी चाहे आकर देख सकते
- 3:02:43हैं कि मैं कहां और कैसे रहता हूं।
- 3:02:46क्योंकि मर्द की रिस्पेक्ट [संगीत] तभी तक
- 3:02:48होती है जब तक वह अपने घर में होता है।
- 3:02:51ससुराल में होने पर उसकी इज्जत नहीं रहती।
- 3:02:55मेरी तो वैसे ही नहीं है। तो मुझे वो अपनी
- 3:02:57मेहनत से कमानी [संगीत] है। शिप्रा शौर्य
- 3:03:00की इस बात के लिए भी तुरंत तैयार हो गई।
- 3:03:03हां, मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है। बल्कि
- 3:03:06यह तो अच्छा ही होगा। जब एक बार हमारे
- 3:03:09परिवार की नजर में यह पक्का हो गया
- 3:03:11[संगीत] कि हम पति-पत्नी हैं, तो तुम उसके
- 3:03:13बाद यहां रहो या अपने घर में। मुझे कोई
- 3:03:16फर्क नहीं पड़ेगा। फिर सारी बातें होने के
- 3:03:19बाद शिप्रा ने एक बॉक्स शौर्य की तरफ
- 3:03:22बढ़ाया। शिप्रा और शौर्य का रिश्ता एक
- 3:03:25अनसुलझी पहेली बन गया था। दोनों ही एक
- 3:03:28दूसरे को पकड़े रखना चाहते थे। शौर्य ने
- 3:03:30तो शिप्रा को अपने सपनों में भी एंट्री दे
- 3:03:33दी थी। लेकिन उसे क्या पता था कि शिप्रा
- 3:03:36उसके सपनों को समझौते में बदल देगी।
- 3:03:39बालकनी में [संगीत] एक दूसरे की शर्तों पर
- 3:03:41सहमति जताने के बाद समझौता वार्ता जैसे ही
- 3:03:44खत्म हुई तो शिप्रा ने शौर्य की तरफ एक
- 3:03:47बॉक्स बढ़ा दिया। शौर्य एक पल को रुक गया।
- 3:03:51तभी उसे याद आया यह वही ज्वेलरी बॉक्स है
- 3:03:54जो उसने राधिका की बर्थडे पार्टी में
- 3:03:56शिप्रा को दिया था। तभी शिप्रा [संगीत]
- 3:03:59बोली यह वही गिफ्ट है जो तुमने मुझे दिया
- 3:04:02था। तो वापस क्यों कर रही हो? शौर्य ने
- 3:04:06कहा तो शिप्रा की आवाज सख्त हो गई। वो
- 3:04:09बोली मैं इतना महंगा गिफ्ट नहीं ले सकती।
- 3:04:12इसे वापस कर दो। शौर्य ने शिप्रा को
- 3:04:15समझाने की कोशिश [संगीत] की। मैंने ये
- 3:04:18आपके लिए दिल से लिया था। लेकिन शिप्रा की
- 3:04:21सख्ती नहीं टूटी। [संगीत] वो बोली हम
- 3:04:24दुनिया के लिए पतिपत्नी होंगे लेकिन असल
- 3:04:26में नहीं। और तुम इस रिश्ते को सच बनाने
- 3:04:30की कोशिश कर रहे हो। इस पर शौर्य ने हल्की
- 3:04:33मुस्कान के साथ कहा ऐसी कोई शर्त नहीं थी।
- 3:04:37हमने सिर्फ यह तय किया था कि हमारे बीच वो
- 3:04:40नजदीकी नहीं होगी। पर इसका मतलब यह
- 3:04:42[संगीत] नहीं कि हम एक दूसरे के लिए कुछ
- 3:04:45कर ही नहीं सकते। शिप्रा ने उसकी आंखों
- 3:04:48में देखते [संगीत] हुए कहा यहीं से सब
- 3:04:50शुरू होता है। पहले चीजों का आदानप्रदान,
- 3:04:54फिर आदत, फिर चाहत और एक दिन हक। और मैं
- 3:04:58उस शुरुआत तक नहीं जाना चाहती।
- 3:05:01यह सुनकर शौर्य की आवाज में खींच उतर आई।
- 3:05:05तो फिर इस रिश्ते का मतलब ही क्या है? जब
- 3:05:08कुछ करना ही नहीं है तो बेहतर है हम अजनबी
- 3:05:11ही रहें। शिप्रा चुप हो गई। उसे महसूस हुआ
- 3:05:15कि बना हुआ समझौता बिखर ना जाए। लेकिन वो
- 3:05:19यह रिश्ता छोड़ भी नहीं सकती थी क्योंकि
- 3:05:21उसे पता था शौर्य जैसा दमदार आदमी उसे फिर
- 3:05:24नहीं मिलेगा। उधर शौर्य शिप्रा की बातों
- 3:05:27से थोड़ा परेशान हुआ। लेकिन उसने खुद को
- 3:05:30[संगीत] संभालते हुए कहा, "आप कुछ ज्यादा
- 3:05:33सोच रही हैं। हर चीज का मतलब जिस्मानी
- 3:05:35रिश्ते से नहीं होता। कुछ चीजें सिर्फ
- 3:05:38खुशी देती हैं। इसीलिए की जाती हैं। जैसे
- 3:05:42आपने मुझे मोबाइल दिया तो मुझे अच्छा लगा
- 3:05:44था। फिर उसने धीरे [संगीत] से कहा, खैर,
- 3:05:48अगर आपको पसंद नहीं है तो कोई बात नहीं।"
- 3:05:52शिप्रा का लहजा थोड़ा नरम पड़ा और वो बोली
- 3:05:56मेरी बात का गलत मतलब मत निकालो। छोटा
- 3:05:58गिफ्ट ले [संगीत] लेती लेकिन इतना महंगा
- 3:06:01नहीं ले सकती। शौर्य के होठों पर हल्की
- 3:06:04मुस्कान आ गई। उसने बिना कुछ कहे बॉक्स
- 3:06:07अपने पास रख लिया। जैसे उसने [संगीत] मन
- 3:06:10ही मन कोई फैसला कर लिया हो। फिर उसने
- 3:06:13शांत स्वर में कहा। क्या मैं आपसे कुछ पूछ
- 3:06:16सकता हूं? क्या? शिप्रा ने तुरंत लेकिन
- 3:06:20सपाट लहजे में पूछा। शौर्य ने नजरें लॉन
- 3:06:23की तरफ घुमा ली और [संगीत] बोला
- 3:06:26आपको कितना समय चाहिए जिसके बाद अगर आप
- 3:06:29मुझसे अलग भी हो जाए तो आपके घर वाले आपको
- 3:06:32दोबारा शादी के लिए मजबूर ना करें। यह वही
- 3:06:36सवाल था जिससे शिप्रा डर रही थी। फिर भी
- 3:06:39उसने खुद को संभालकर कहा। तुम यह क्यों
- 3:06:42पूछ रहे हो? शौर्य ने बात को बिना घुमाए
- 3:06:45[संगीत] सीधा जवाब दिया।
- 3:06:48क्योंकि मैं यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं
- 3:06:50निभा पाऊंगा। ज्यादा से ज्यादा एक साल या
- 3:06:54डेढ़ साल। शिप्रा ने थोड़ा सोचा फिर धीमे
- 3:06:58से कहा। हां, इतना वक्त काफी होगा। ठीक है
- 3:07:02फिर। अब आप अपने कमरे में जाइए। रात बहुत
- 3:07:05हो चुकी है। शौर्य ने अब बात को समाप्त
- 3:07:09करते हुए कहा। फिर दोनों बालकनी से कमरे
- 3:07:12[संगीत] में आ गए। शिप्रा ने जाते-जाते
- 3:07:14शौर्य से कहा, अब तो मुझे आप कहकर मत
- 3:07:17बुलाया करो वरना लोगों को हमारे रिश्ते पर
- 3:07:20शक हो सकता है। शौर्य थोड़ा हिचकिचाया और
- 3:07:24बोला नहीं मुझसे नहीं होगा। शिप्रा ने
- 3:07:28हल्की सी भौए चढ़ाई और बोली इतना भी
- 3:07:31मुश्किल नहीं है। मैं तो तुम्हें तुम ही
- 3:07:33कहती हूं। फिर तुम्हें क्या दिक्कत है?
- 3:07:36शौर्य ने शिप्रा से अपनी नजरें चुरा ली
- 3:07:39फिर बोला।
- 3:07:40मैं कोशिश करूंगा।
- 3:07:44शिप्रा ने एक पल उसे देखा। फिर बिना कुछ
- 3:07:46कहे वहां से चली गई। शौर्य बस उसे जाते
- 3:07:49हुए देखता रह गया। [संगीत] एक पल को उसके
- 3:07:52मन में ख्याल आया। क्या अपनी हकीकत बता
- 3:07:55दूं? लेकिन अगले ही पल उसने खुद को रोक
- 3:07:58लिया। अगर मुझे उसे पाने के लिए अपनी
- 3:08:01सच्चाई बतानी पड़े तो ऐसा प्यार मुझे नहीं
- 3:08:05चाहिए।
- 3:08:06वो थका हुआ [संगीत] सा बिस्तर पर गिर पड़ा
- 3:08:09और शिप्रा के ख्यालों में खोते-खोते उसे
- 3:08:12नींद आ गई। अगली सुबह दरवाजे की आवाज से
- 3:08:15उसकी नींद [संगीत] टूटी। वो उठकर दरवाजा
- 3:08:18खोलता है। सामने शंतो चाय की ट्रे लिए
- 3:08:21खड़ी थी। शंतो शायद जल्दी में थी। उसने
- 3:08:24टेबल पर चाय रखी और चली गई। कमरे में
- 3:08:27सन्नाटा छा गया। शौर्य सोच में डूबा
- 3:08:30बालकनी में आकर चाय पीने लगा। तभी अचानक
- 3:08:34उसका फोन बज उठा। मेनका का नाम फ्लैश होते
- 3:08:37दिखा तो उसने फोन उठाते [संगीत] हुए बोला
- 3:08:40क्या बात है इतने ही सुबह-सुबह सब ठीक तो
- 3:08:43है शौर्य की बात सुनकर मेनका बोली
- 3:08:47तुम भूल गए क्या तुम्हें आज नताशा से
- 3:08:50मिलने कृष्णापुरम जाना था
- 3:08:53अरे हां यार मुझे तो ध्यान ही नहीं रहा
- 3:08:57क्या रत्नाकर शेट्टी से तुम्हारी बात हुई
- 3:08:59है शौर्य ने अपना आलस दूर करते हुए पूछा
- 3:09:03तो मेनका [संगीत] बोली
- 3:09:04उसी का फोन आया था। जितनी जल्दी हो सके
- 3:09:07पहुंच जाओ क्योंकि डेढ़ दो घंटे के बाद एक
- 3:09:10बार [संगीत] शूट शुरू हो गया तो फिर वो
- 3:09:12तुम्हें ज्यादा टाइम नहीं दे पाएगा।
- 3:09:14चलो ठीक है। मैं अभी जल्दी से निकलता हूं।
- 3:09:17तुम रत्नाकर शेट्टी का नंबर मुझे भेज दो।
- 3:09:19इतना कहकर शौर्य ने फोन काट दिया। शौर्य
- 3:09:23आनन-फानन में तैयार होकर नीचे उतरा।
- 3:09:25ड्राइंग रूम में शिपरा नाश्ते की टेबल पर
- 3:09:28थी। आ जाओ नाश्ता कर लो। शौर्य ने बिना
- 3:09:32उसकी तरफ देखे बोला, "मुझे थोड़ी जल्दी
- 3:09:35है। मैंने किसी को टाइम दे रखा था। मैं
- 3:09:37[संगीत] नाश्ता बाहर कर लूंगा। तभी शिप्रा
- 3:09:40फिर बोली, "अरे नाश्ता तैयार है। 2 मिनट
- 3:09:43ही तो लगेंगे।"
- 3:09:45वहां शंतू भी [संगीत] बीच में बोल पड़ी।
- 3:09:47अरे आ जाइए जीजा जी। हमारी दीदी इतने
- 3:09:50प्यार से कह रही हैं और आप भाव खा रहे
- 3:09:52हैं। अब शौर्य के लिए मना करना मुश्किल हो
- 3:09:55रहा था। इसीलिए वह बैठ गया। तभी राहुल भी
- 3:09:58वहां आ गया और बोला, क्या बात है जीजू
- 3:10:02इतनी सुबह-सुबह आप तैयार होकर कहां जा रहे
- 3:10:04हो? मीटिंग किसी लड़की से तो नहीं है?
- 3:10:08शौर्य ने थोड़ी आें भरी और बोला, है तो
- 3:10:12लड़की ही और बेहद खूबसूरत भी है। मैं
- 3:10:15नताशा कपूर से मिलने जा रहा हूं। नताशा
- 3:10:18कपूर का नाम सुनते ही शिप्रा ने सिर उठाकर
- 3:10:21शौर्य को देखा। शौर्य ने जानबूझकर उसकी
- 3:10:24तरफ ध्यान नहीं दिया। तभी राहुल उछल पड़ा।
- 3:10:28क्या फेमस मॉडल नताशा कपूर जीजू वो तो
- 3:10:32मेरी फेवरेट है। क्या मैं आपके साथ चल
- 3:10:34सकता हूं? चल तो सकते हो पर मेरे पास कार
- 3:10:37नहीं है। मैं टैक्सी से जाऊंगा। शौर्य का
- 3:10:40जवाब सुनकर राहुल बोला जीजू आप नताशा कपूर
- 3:10:43से मिलने टैक्सी से जाओगे। आपके पास तो
- 3:10:45कोई पावरफुल कार होनी चाहिए
- 3:10:47[संगीत]
- 3:10:47ताकि अच्छा इंप्रेशन पड़े। तभी शिप्रा बोल
- 3:10:50पड़ी। अगर तुम चाहो तो मेरी कार ले जा
- 3:10:53सकते हो।
- 3:10:54शौर्य इग्नोर करते हुए बोला, नहीं इसकी
- 3:10:57कोई जरूरत नहीं है। मैं [संगीत] मैनेज कर
- 3:10:59लूंगा। शिप्रा को शौर्य का यह रूखापन अजीब
- 3:11:02लगा। उसने फिर ऑफर किया लेकिन शौर्य अपनी
- 3:11:06बात पर अड़ा रहा। उसने मेनका को चुपके से
- 3:11:09एक मैसेज किया। लेकिन शिप्रा ने फिर अपनी
- 3:11:11कार ऑफर कर दी। अरे अब और कितना इंतजार
- 3:11:15करोगे? ले जाओ मेरी कार।
- 3:11:17तभी शौर्य थोड़ा सख्त होकर बोला। मैंने
- 3:11:20कहा ना मेरी फिक्र ना करें। बस कुछ समय की
- 3:11:24बात है। शौर्य बोल ही रहा था। तभी बाहर
- 3:11:27कार के ब्रेक लगने की आवाज आई और
- 3:11:29सिक्योरिटी गार्ड कार [संगीत] की चाबी
- 3:11:31लेकर अंदर आया।
- 3:11:33मैम एक आदमी श्रवण जी के लिए कार छोड़कर
- 3:11:36गया है। शौर्य मुस्कुराया। गार्ड के हाथ
- 3:11:39से चाबी ली और राहुल की तरफ देखकर बोला,
- 3:11:42"चलें?" राहुल ने सहमति में अपना सिर
- 3:11:45हिलाया और दोनों बाहर की तरफ चल दिए।
- 3:11:47शिप्रा भी उसके साथ ही घर से बाहर निकली।
- 3:11:50शौर्य राहुल के साथ मेन गेट पर पहुंचा तो
- 3:11:53उसने [संगीत] देखा कि गेट के बाहर साइड
- 3:11:55में एक लंबी लग्जरी कार खड़ी थी। राहुल ने
- 3:11:59उस गाड़ी को देखा तो शौर्य की तारीफ करता
- 3:12:01हुआ बोला अरे वाह जीजू आपने तो सच में
- 3:12:05कमाल की गाड़ी मंगवा ली। यह हुई ना बात।
- 3:12:09राहुल की बात सुनकर शौर्य कुछ बोला नहीं।
- 3:12:12बस मुस्कुरा कर रह गया। वो जाकर ड्राइविंग
- 3:12:15सीट पर बैठ गया और राहुल उसके बगल वाली
- 3:12:18सीट पर [संगीत] जाकर बैठ गया। अभी शौर्य
- 3:12:20कार आगे बढ़ाता उसी समय उसके पास से
- 3:12:23शिप्रा की कार गुजरी। शिप्रा की निगाह भी
- 3:12:26उस लंबी गाड़ी पर पड़ी तो वो सोचने को
- 3:12:28मजबूर हो गई कि शौर्य ने इतनी जल्दी इस
- 3:12:31[संगीत] कार की व्यवस्था कैसे कर ली। पर
- 3:12:34उसने अपने दिमाग पर इस बारे में सोचने में
- 3:12:37ज्यादा जोर नहीं लगाया और वहां से गुजर
- 3:12:39गई। शौर्य ने भी कार स्टार्ट [संगीत] की
- 3:12:42और आगे बढ़ा दी। कार को चलाते-चलाते ही
- 3:12:45उसने मोबाइल के मैप पर मेनका द्वारा भेजी
- 3:12:48गई लोकेशन सेट की और कार को उसी दिशा में
- 3:12:51आगे बढ़ा दिया। मेनका ने शौर्य को रत्नाकर
- 3:12:54शेट्टी के नंबर के साथ उनके द्वारा भेजी
- 3:12:57गई करंट लोकेशन भी भेज दी थी। शौर्य को
- 3:13:00यहां से निकलते-निकलते 10:00 बज गए थे।
- 3:13:02लगभग 45 मिनट के बाद शौर्य इस लोकेशन पर
- 3:13:05पहुंचा। उसने देखा कि [संगीत] एक पहाड़ी
- 3:13:08एरिया था जहां पहाड़ी के साथ-साथ एक नदी
- 3:13:11गुजर रही थी। नदी के किनारे पर एक
- 3:13:14रेस्टोरेंट था जिसका एक प्लेटफार्म नदी के
- 3:13:17अंदर तक गया हुआ था। वो प्लेटफार्म नदी से
- 3:13:20लगभग 15 फुट ऊंचा था। उस प्लेटफार्म के
- 3:13:23नीचे कुछ दूरी पर एक छोटी नाव थी जिस पर
- 3:13:26दो-तीन लड़कियां खड़ी थी। नदी के किनारे
- 3:13:28पर कुछ जवान लड़के लड़कियां नहा रहे थे।
- 3:13:31किनारे पर एक कन खड़ी थी जिसके टॉप पर एक
- 3:13:34कैमरामैन अपने असिस्टेंट के साथ कैमरा लिए
- 3:13:37[संगीत] खड़ा था। राहुल ने जब यह दृश्य
- 3:13:39देखा तो वो उत्साहित होकर बोला जीजू यहां
- 3:13:43तो शूटिंग चल रही है। शौर्य राहुल की बात
- 3:13:46सुनकर मुस्कुराया। उसने अपना मोबाइल
- 3:13:48निकाला और रत्नाकर शेट्टी को कॉल लगाया।
- 3:13:51दो रिंग के बाद ही फोन उठा लिया गया और
- 3:13:54दूसरी तरफ से रत्नाकर शेट्टी की आवाज आई।
- 3:13:57हेलो मिस्टर श्रवण आप आ गए?
- 3:13:59श्रवण ने जब रत्नाकर शेट्टी के मुंह से
- 3:14:01अपना नाम सुना तो समझ गया कि मेनका ने
- 3:14:04रत्नाकर शेट्टी के पास उसका नंबर भेज दिया
- 3:14:07होगा। इसीलिए उसने उसे उसके नाम से
- 3:14:10पुकारा। वो बोला हां मैं रेस्टोरेंट के
- 3:14:14बाहर खड़ा हूं। तभी उसने देखा रेस्टोर का
- 3:14:17जो प्लेटफार्म नदी के अंदर जा रहा था। उसी
- 3:14:20पर एक मोटा सा आदमी खड़ा हुआ और शौर्य की
- 3:14:22तरफ देखते हुए [संगीत] हाथ हिलाने लगा।
- 3:14:25शौर्य समझ गया कि यही रत्नाकर शेट्टी है।
- 3:14:28तभी उसके कान में दोबारा रत्नाकर शेट्टी
- 3:14:30[संगीत] की आवाज आई।
- 3:14:32मिस्टर श्रवण आप यहीं इस प्लेटफार्म पर आ
- 3:14:35जाइए।
- 3:14:36इसके बाद शौर्य ने फोन काटा और राहुल के
- 3:14:39साथ उस प्लेटफार्म की तरफ बढ़ गया।
- 3:14:40[संगीत]
- 3:14:41जल्दी ही वो उस प्लेटफार्म पर पहुंच गया।
- 3:14:43रत्नाकर शेट्टी ने अपने असिस्टेंट से
- 3:14:46बोलकर दो कुर्सियां मंगवाई। रत्नाकर
- 3:14:48शेट्टी के बगल में ही एक स्पॉट [संगीत]
- 3:14:50बॉय एक प्लेट में सेब काट रहा था। जिसमें
- 3:14:53से रत्नाकर शेट्टी सेब के टुकड़े उठाकर
- 3:14:56अपने मुंह में डालता जा रहा था। रत्नाकर
- 3:14:58शेट्टी के सामने एक मॉनिटर लगा हुआ था।
- 3:15:01जिस पर नाव पर मौजूद लड़कियों की तस्वीरें
- 3:15:03दिखाई दे रही थी। शौर्य को यूं तो नाव पर
- 3:15:07मौजूद लड़कियों का चेहरा नजर नहीं आ रहा
- 3:15:09था। पर उस मॉनिटर स्क्रीन पर नताशा कपूर
- 3:15:12का चेहरा स्पष्ट नजर आ रहा था। रत्नाकर
- 3:15:15शेट्टी ने शौर्य से कहा, "श्रवण जी, यह
- 3:15:18टेक पूरा हो जाता है। उसके बाद नताशा जी
- 3:15:21के साथ बैठकर बात करते हैं।" कोई बात
- 3:15:23[संगीत] नहीं, आप आराम से अपना काम पूरा
- 3:15:26कीजिए। मुझे कोई जल्दी नहीं है। शौर्य
- 3:15:29रत्नाकर शेट्टी की बात सुनकर बोला। उसी
- 3:15:31समय रत्नाकर [संगीत] शेट्टी ने कैमरामैन
- 3:15:33से कैमरा रोल का इशारा मिलने के बाद एक्शन
- 3:15:36कहा। उसके बाद शौर्यन ने देखा एक
- 3:15:39आर्टिफिशियल शार्क जो एकदम [संगीत] असली
- 3:15:41प्रतीत हो रही थी वो नताशा की नाव की तरफ
- 3:15:44बढ़ी और एक टक्कर उस नाव को दे मारी।
- 3:15:46शार्क की टक्कर से नाव पलट गई। नाव के
- 3:15:49पलटते ही नताशा नाव से नीचे गिर गई और वो
- 3:15:52पानी में डूबने लगी। तभी एक मोटर बोट तेजी
- 3:15:56से नताशा के करीब आती है और उस पर से एक
- 3:15:58लड़का कूदता है। उसके हाथ में एक ड्रिंक
- 3:16:01की बोतल है जो बोट से कूदते हुए भी उसके
- 3:16:04हाथ में है। वो हवा में उड़ते हुए उस कैन
- 3:16:07से दो घूंट
- 3:16:07[संगीत]
- 3:16:07लेता है और उसे हवा में उछालकर पानी में
- 3:16:10कूदता है। जैसे ही वह नताशा के पास
- 3:16:13पहुंचता है तो नताशा उसे कसकर पकड़ लेती
- 3:16:16है। लड़का नताशा को खींचने की कोशिश करता
- 3:16:18है तो महसूस करता है कि वो नताशा को खींच
- 3:16:21नहीं पा रहा। उल्टा वो भी उसके साथ पानी
- 3:16:24के नीचे जाने लगता है। जैसे तैसे वो लड़का
- 3:16:27खुद को नताशा से छुड़ाता है और उससे दूर
- 3:16:30हो जाता है। वहां मौजूद सभी लोग हैरान हो
- 3:16:33जाते हैं कि यह क्या हो गया? नताशा डूब
- 3:16:36कैसे रही है? कैमरामैन जब नताशा पर कैमरा
- 3:16:39क्लोज में फोकस करता है तो उसे दिखता है
- 3:16:41कि नताशा के पैरों में एक रस्सी उलझी हुई
- 3:16:44है जो उसे नीचे की तरफ खींच रही थी। तो
- 3:16:48क्या होगा आगे? क्या नताशा शौर्य से मिलने
- 3:16:50से पहले ही नदी में डूब जाएगी [संगीत] या
- 3:16:53फिर शौर्य उसे बचाने की कोशिश करेगा? क्या
- 3:16:56शौर्य के दिल में शिप्रा की जगह कोई और
- 3:16:58लेने वाला है? जानने [संगीत] के लिए सुनते
- 3:17:00रहिए बेगर हस्बैंड।
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