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My Begger Husband Episode 66 to 80 | Original Voice | Sk hindi novel |daily New Episode| — Transcript

by SK Hindi Novel · 33,583 words · 4,121 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00तो हेलो दोस्तों, कैसे हैं आप लोग? मुझे
  2. 0:02आशा है कि आप लोग ठीक ही होंगे और मजे से
  3. 0:04इस चैनल पर जो भी सीरीज आ रही है उसको सुन
  4. 0:06रहे होंगे। [गला साफ़ करने की आवाज़] तो
  5. 0:08बैगर और हस्बैंड का नया वीडियो आ चुका है
  6. 0:10जिसमें एपिसोड 66 से 80 तक है। तो जल्दी
  7. 0:14से जल्दी से वीडियो को देखो और बताओ कि
  8. 0:16कोई मिस्टेक तो नहीं हुई है। और वीडियो को
  9. 0:19शुरू करने से पहले वीडियो को लाइक करें,
  10. 0:21चैनल को सब्सक्राइब करें जिससे कि आपसे
  11. 0:24आने वाला वीडियो कोई भी मिस ना हो। तो
  12. 0:26करते हैं लेट स्टार्ट दिस वीडियो। मेनका
  13. 0:29के भेजे गिफ्ट्स ने राय परिवार को दो
  14. 0:32हिस्सों में बांट दिया था। एक तरफ थे
  15. 0:34शौर्य और शिप्रा और दूसरी तरफ पार्टी में
  16. 0:37मौजूद बाकी सब फैमिली मेंबर्स। राधिका का
  17. 0:40गिफ्ट बॉक्स खुल चुका था और उससे निकले 3
  18. 0:43लाख के खूबसूरत नेकलेस ने सबके दिलों को
  19. 0:45लूट लिया था। वहीं शौर्य मन ही मन सोच रहा
  20. 0:48था कैसी दुनिया है यह? यहां रिश्तों की
  21. 0:52असली कीमत दिल से नहीं गिफ्ट के बिल से तय
  22. 0:54होती [संगीत] है। शिप्रा के गिफ्ट बॉक्स
  23. 0:57में क्या है? यह राज सिर्फ मेनका को ही
  24. 0:59मालूम था और उस राज का खुलासा करने का
  25. 1:02दबाव अब शिप्रा पर था क्योंकि गिफ्ट बॉक्स
  26. 1:05उसके हाथ में था। बलवंत राय ने जैसे ही
  27. 1:07शिप्रा से गिफ्ट खोलकर सबको दिखाने की बात
  28. 1:10कही नैना राय और युविका का चेहरा खिल गया।
  29. 1:13बलवंत राय की बात सुनकर शिप्रा शौर्य की
  30. 1:16तरफ देखने लगी। जैसे कि वो उससे पूछ रही
  31. 1:19हो कि अब क्या किया जाए। शिप्रा को अपने
  32. 1:21दादाजी की बात पसंद नहीं आई। वो नहीं
  33. 1:24चाहती थी कि किसी और के फंक्शन में उसके
  34. 1:26और श्रवण के बीच इस तरह का कार्यक्रम किया
  35. 1:28जाए। यही सोचकर उसने अपने दादा जी से कहा
  36. 1:32दादा जी जहां तक इस गिफ्ट को देखने की बात
  37. 1:35है तो मैं यह अभी आपको दिखा सकती हूं। पर
  38. 1:38आपने जो कहा कि इस गिफ्ट को अभी सबके
  39. 1:40सामने श्रवण मुझे पहनाएं। यह मुझे मंजूर
  40. 1:42नहीं है। यह राधिका की बर्थडे पार्टी है।
  41. 1:45उसके बीच में हम अपने पर्सनल मोमेंट शेयर
  42. 1:48नहीं कर सकते। शौर्य को भी शिप्रा का यह
  43. 1:51दो टूक जवाब पसंद आया क्योंकि वो नैना राय
  44. 1:54और युविका की मंशा समझ रहा था। वो चाहती
  45. 1:57थी कि अगर शिप्रा का गिफ्ट राधिका को दिए
  46. 1:59गिफ्ट से सस्ता हुआ तो शिप्रा के मन में
  47. 2:02शौर्य के लिए कड़वाहट आ जाएगी। शौर्य को
  48. 2:05खुद भी यह डर था कि अगर सच में गिफ्ट
  49. 2:06सस्ता हुआ तो शिप्रा क्या सोचेगी? पर अब
  50. 2:09शौर्य के हाथ में कुछ नहीं था। दूसरी तरफ
  51. 2:13जब नैना बुआ ने शिप्रा की बात सुनी तो वो
  52. 2:15बोली
  53. 2:17कोई बात नहीं अगर तुम ऐसा चाहती हो तो ठीक
  54. 2:20है हम इससे ही संतुष्ट हो जाएंगे कि
  55. 2:23तुम्हारे लिए श्रवण जो गिफ्ट लाया है वो
  56. 2:25तुम्हारे लायक है या नहीं। नैना राय के
  57. 2:28शब्द मीठे थे। लेकिन इरादा बेहद कड़वा।
  58. 2:32अपनी हर चाल में मात खाने के बाद भी नैना
  59. 2:35राय के मन में शौर्य को नीचा दिखाने की
  60. 2:38कसक बाकी थी। शिप्रा ने जब देख लिया कि अब
  61. 2:41कोई चारा नहीं है तो उसने कांपते हाथों से
  62. 2:44बॉक्स को खोल दिया। बॉक्स खोलते ही उसकी
  63. 2:47नजर अंदर रखे बिल पर पड़ी। उसने बिल
  64. 2:49निकाला और धीरे से खोला। जैसे ही शिप्रा
  65. 2:52की नजर बिल की कीमत पर पड़ी, शिप्रा की
  66. 2:55सांसे थम गई। 5 लाख कीमत पड़ते ही उसके
  67. 2:59दिमाग में सवालों का तूफान उमड़ पड़ा। ये
  68. 3:02ये कैसे मुमकिन है? क्या श्रवण सच में
  69. 3:06मेरे लिए इतना महंगा गिफ्ट लाया है? पर
  70. 3:09कैसे? शिप्रा ने माहौल को देखते हुए तुरंत
  71. 3:12ही खुद को संभाला और सोचा कि वो इस बारे
  72. 3:15में श्रवण से बाद में बात करेगी। उसने
  73. 3:17चुपचाप बिल को मोड़कर वापस बॉक्स में रख
  74. 3:20दिया और उसमें से डिब्बी को बाहर निकाल
  75. 3:22लिया। शिप्रा वो डिब्बी नैना राय की तरफ
  76. 3:25बढ़ाते हुए बोली। बुआ आप ही क्यों नहीं यह
  77. 3:28गिफ्ट सबको दिखा देती? नैना बुआ पहले तो
  78. 3:32शिप्रा की बात सुनकर हड़बड़ा गई। पर फिर
  79. 3:34खुद को नियंत्रित करके बोली, हां क्यों
  80. 3:37नहीं? लाओ, मैं ही दिखाती हूं सबको।
  81. 3:42नैना बुआ ने हल्के कांपते हाथों से डिब्बी
  82. 3:45खोली और जैसे ही अंदर का गिफ्ट निकला, उसे
  83. 3:47देखते ही हॉल में मौजूद सबकी आंखें फटी रह
  84. 3:51गई। बॉक्स में था येलो, वाइट और रोज गोल्ड
  85. 3:54के कॉम्बिनेशन से बना एक लाजवाब [संगीत]
  86. 3:57डायमंड नेकलेस। जिसकी चमक ऐसी थी जो आंखों
  87. 4:00को बांध ले। शिप्रा ने भी जब उस डायमंड
  88. 4:03सेट को देखा तो उसकी आंखें भी उस सेट पर
  89. 4:06जमकर रह गई। उस सेट को देखने के बाद उसने
  90. 4:09शौर्य की तरफ देखा तो उसे उसके चेहरे पर
  91. 4:11भी संतुष्टि के भाव नजर आए। वो सोचने को
  92. 4:14मजबूर हो गई थी कि क्या शौर्य को भी नहीं
  93. 4:17पता था कि इस बॉक्स में क्या है क्योंकि
  94. 4:20थोड़ी देर पहले जब उसने शौर्य की तरफ देखा
  95. 4:22था तो उसे शौर्य के चेहरे पर चिंता की झलक
  96. 4:25दिखाई दी थी। पर अब उस नेकलेस को देखने के
  97. 4:27[संगीत] बाद वह संतुष्ट नजर आ रहा था।
  98. 4:31शिप्रा यह सोच ही रही थी कि तभी कुलवंत की
  99. 4:34वाइफ टीना की आवाज सुनाई दी।
  100. 4:37अरे यह तो वही नेकलेस है जो हमने यहां आने
  101. 4:40पर इस होटल के ज्वेलरी आउटलेट में देखा
  102. 4:42था। यह तो 5 लाख का था।
  103. 4:46टीना की बात सुनकर राधिका का मुंह खुला का
  104. 4:48खुला रह गया जो थोड़ी देर पहले तक यह सोच
  105. 4:51कर खुश थी कि उसका गिफ्ट 3 लाख का है। पर
  106. 4:54जैसे ही उसने सुना कि शिप्रा का गिफ्ट 5
  107. 4:56लाख का है तो उसकी खुशी तुरंत गम में बदल
  108. 4:59गई। दूसरी तरफ रजत के दिल पर भी छुरियां
  109. 5:03चल रही थी। सामने का नजारा देख वो मन ही
  110. 5:06मन बोला आखिर इस भिखारी ने यह मुमकिन कैसे
  111. 5:09किया? कल तक जो भीख मांगकर अपना गुजर बसर
  112. 5:12कर रहा था आज लाखों के गिफ्ट देने की हालत
  113. 5:14में कैसे आ गया? क्या कोई है जो इस भिखारी
  114. 5:17की मदद कर रहा है? तभी बलवंत राय की आवाज
  115. 5:20गूंजी। वाह, बहुत खूब। मानना पड़ेगा। यह
  116. 5:26गिफ्ट वाकई बहुत खूबसूरत है। मुझे नहीं
  117. 5:28पता श्रवण कि तुमने यह गिफ्ट कैसे अरेंज
  118. 5:31किया है। पर जैसे भी किया है यह दिखाता है
  119. 5:34कि तुम मेरी पोती के लिए कुछ भी कर सकते
  120. 5:37हो। बलवंत राय शौर्य के सामने जाकर उसकी
  121. 5:40तारीफ करते हुए बोला मुख्तार भाई को बलवंत
  122. 5:43राय का शौर्य की तारीफ करना बर्दाश्त नहीं
  123. 5:46हुआ। इसीलिए वह चिढ़कर बोले यह बात आप कह
  124. 5:51रहे हैं राय साहब। यह जानते हुए कि इसके
  125. 5:54लिए इसने पता नहीं किसकी तिजोरी में सेंध
  126. 5:57लगाई होगी। किसके घर चोरी की होगी। शौर्य
  127. 6:02मुख्तार भाई की बात सुनते ही तंज कसते हुए
  128. 6:05बोला जिसने अपनी सारी संपत्ति ही दो नंबर
  129. 6:09के कामों से कमाई हो। वो आज दूसरों को
  130. 6:11आईना दिखाने की कोशिश कर रहा है। मुख्तार
  131. 6:14भाई को शौर्य की बात सुई की तरह चुभ। वो
  132. 6:17और बर्दाश्त नहीं कर सकते थे। इसीलिए वो
  133. 6:20गुस्से में बोले ए लड़के तुम आज कुछ
  134. 6:23ज्यादा ही ऊंचा उड़ने की कोशिश कर रहे हो।
  135. 6:26मुझे नहीं पता तुम्हें यह हिम्मत कहां से
  136. 6:29मिल रही है। पर तुम खुद अपनी ही कब्र खोद
  137. 6:32रहे हो।
  138. 6:33जैसी बेइज्जती मुख्तार भाई की आज इस
  139. 6:35पार्टी में हुई, ऐसी शायद ही कभी पहले
  140. 6:38कहीं हुई होगी। और सबसे बड़ी बात, शौर्य
  141. 6:41का वो कुछ कर नहीं पाए। कोई और जगह होती,
  142. 6:44तो शायद उनका रवैया अलग होता।
  143. 6:46[संगीत]
  144. 6:46पर वह जानते थे कि यह होटल राजा साहब का
  145. 6:49है। अगर वह इस होटल में कोई हंगामा करने
  146. 6:52की कोशिश करते तो यह सीधे राजा साहब से
  147. 6:55पंगे लेने वाली बात हो जाती।
  148. 6:58और विशालगढ़ में रहकर राजा साहब से
  149. 7:00दुश्मनी वो बर्दाश्त नहीं कर सकते थे।
  150. 7:03बलवंत राय भी इस बात को अच्छे से समझ रहे
  151. 7:05थे कि जब तक शौर्य होटल राजकमल में है तब
  152. 7:09तक तो मुख्तार भाई शौर्य के खिलाफ कोई
  153. 7:11एक्शन नहीं ले सकते। लेकिन मुख्तार भाई
  154. 7:14शौर्य के द्वारा की गई बेइज्जती को इतनी
  155. 7:17आसानी से भूलने वाले भी नहीं है। इसीलिए
  156. 7:19उन्हें अब शौर्य के लिए चिंता भी होने लगी
  157. 7:22थी। वहीं दूसरी तरफ शिप्रा भी शौर्य के
  158. 7:25लिए चिंतित थी। पर शौर्य इन सब बातों से
  159. 7:28बेपरवाह मुख्तार भाई से बोला।
  160. 7:31आपको पता होना चाहिए कि जब आप किसी पर
  161. 7:34उंगली उठाते हैं [संगीत] तो बाकी चार
  162. 7:36उंगलियां खुद की तरफ भी रहती हैं। आइंदा
  163. 7:39जब किसी को कुछ बोले तो उससे जवाब सुनने
  164. 7:41को भी तैयार रहिएगा।
  165. 7:44तभी मुख्तार भाई अपने शब्दों को चबाते हुए
  166. 7:46बोले शुक्र मनाओ कि तुम अभी होटल राजकमल
  167. 7:50में हो। नहीं तो तुम्हारी इस हरकत पर
  168. 7:53तुम्हारे साथ क्या हो जाता तुम सोच भी
  169. 7:56नहीं पाते।
  170. 7:58मुख्तार की बात सुनकर शौर्य एक तंज भरी
  171. 8:00हंसी-हंसता हुआ बोला, "आप जैसे लोगों से
  172. 8:03और उम्मीद भी क्या की जा सकती है। अपनी
  173. 8:06पहचान तो दिखाओगे ही।"
  174. 8:09श्रवण तुम क्यों मुख्तार भाई से बहस किए
  175. 8:11जा रहे हो? राजकुमार टंडन शौर्य को टोकते
  176. 8:15हुए बोले, उन्हें डर था कि हालात ज्यादा
  177. 8:17ना बिगड़ जाए। बड़ी मुश्किल से तो मुख्तार
  178. 8:20भाई के साथ हालात पटरी पर आए थे। फिर
  179. 8:23राजकुमार टंडन मुख्तार भाई के पास गए और
  180. 8:26उन्हें मक्खन लगाते हुए बोले आप क्यों इस
  181. 8:29लड़के के मुंह लग रहे हैं? इसकी अपनी तो
  182. 8:31कोई इज्जत है नहीं तो दूसरों की क्या ही
  183. 8:33करेगा। मुख्तार भाई के ईगो को राजकुमार
  184. 8:36टंडन की बात सुनकर थोड़ी तसल्ली मिली।
  185. 8:39शौर्य ने भी राजकुमार टंडन की बात को सुना
  186. 8:42पर वो उनके हालात को समझता था। यह उनकी
  187. 8:45बेटी की बर्थडे पार्टी है। इसीलिए वो
  188. 8:47इसमें ज्यादा परेशानी नहीं चाहते थे। और
  189. 8:49रही बात मुख्तार भाई की तो वो यह कैसे चाह
  190. 8:52सकते थे कि मुख्तार भाई का मूड खराब हो।
  191. 8:55इसीलिए शौर्य ने भी आगे मुख्तार भाई को
  192. 8:57कुछ कहना उचित नहीं समझा। और फिर वो
  193. 9:00शिप्रा के लिए भी ऑकवर्ड स्थिति पैदा करना
  194. 9:02नहीं चाहता था। शिप्रा को यह समझ नहीं आ
  195. 9:05रहा था कि शौर्य के सामने तो उसने पहले ही
  196. 9:08अपना और उसका रिश्ता क्लियर कर दिया था।
  197. 9:11फिर उसे [संगीत] उसके लिए गिफ्ट लेने की
  198. 9:13क्या जरूरत थी। वैसे शिप्रा को वो गिफ्ट
  199. 9:16पसंद आया था। पर वो शौर्य से इतना महंगा
  200. 9:19गिफ्ट नहीं ले सकती थी। उसने सोच लिया था
  201. 9:22कि घर जाकर वो गिफ्ट शौर्य को वापस कर
  202. 9:24देगी। वो शौर्य को किसी गलतफहमी में नहीं
  203. 9:27डालना चाहती थी। उसे यह भी डर था कि अगर
  204. 9:30उसने शौर्य से इतना महंगा गिफ्ट ले लिया
  205. 9:32तो कहीं शौर्य उसके बारे में कुछ गलत ना
  206. 9:35सोचने लगे। शिप्रा के दिमाग में एक और
  207. 9:38सवाल भी था और वो यह था कि शौर्य के पास
  208. 9:41इतने पैसे आए कहां से? जब कुछ समझ नहीं
  209. 9:45आया तो उसने सोचा बाद में वो शौर्य से इस
  210. 9:47बारे में बात कर लेगी। शिप्रा ने शौर्य का
  211. 9:50दिया हुआ गिफ्ट अपने [संगीत] पर्स में डाल
  212. 9:52लिया। राधिका भी अब अपने दोस्तों के साथ
  213. 9:55बिजी हो गई। [संगीत] वो शौर्य को अब और
  214. 9:57उकसाना नहीं चाहती थी। जब सब अपने में
  215. 9:59बिजी हो गए तो शौर्य अकेला पड़ गया। तभी
  216. 10:02रागिनी अपने हाथ में एक ड्रिंक का ग्लास
  217. 10:05लेकर शौर्य के पास पहुंची। उसने ग्लास
  218. 10:07शौर्य की तरफ बढ़ाते हुए कहा। आज तो आप छा
  219. 10:11गए जीजू। आपसे तो कोई यह उम्मीद भी नहीं
  220. 10:14कर सकता था। अच्छा ऐसा है क्या? पर मैंने
  221. 10:17ऐसा कुछ खास तो किया नहीं। शौर्य रागिनी
  222. 10:20के हाथ से ड्रिंक का ग्लास लेते हुए बोला।
  223. 10:23तभी रागिनी अपना लॉजिक देते हुए बोली आपने
  224. 10:26क्या किया वो तो आप यहां सबकी आंखों में
  225. 10:28देख ही सकते हो और मुझे नहीं लगता कि आप
  226. 10:31इतने भी सीधे हैं कि आपको यह बात समझ में
  227. 10:33भी ना आए। शौर्य ने रागिनी की बात सुनी और
  228. 10:36फिर मुख्तार भाई की ओर आंखें घुमाते हुए
  229. 10:38कहा। सच कहूं तो मुझे नहीं लगा कि मैंने
  230. 10:42ऐसा कुछ किया। हां, एक दो लोगों को आईना
  231. 10:44दिखाने का काम जरूर किया है बस। तभी
  232. 10:48रागिनी सवालिया नजरों से शौर्य की तरफ
  233. 10:50देखती हुई बोली, कुछ तो ऐसी बात है आप में
  234. 10:53जीजू जो आपको कुछ खास बनाती है और आप में
  235. 10:57सबको चौंकाने की एक अलग ही खूबी है। वैसे
  236. 11:00एक बात पूछूं? हां, क्या पूछना चाहती हो?
  237. 11:04शौर्य शिप्रा की तरफ देखता हुआ बोला,
  238. 11:07"इतने अच्छे भले चेहरे को आप पहले दाढ़ी
  239. 11:10में क्यों छुपाए हुए थे? अगर मैं आप सबकी
  240. 11:12बातें नहीं सुनती, तो मैं तो पहचान ही
  241. 11:14नहीं पाती कि आप ही शिप्रा दी के पति हो।
  242. 11:17रागिनी की बातों में अपने लिए तारीफ का
  243. 11:20भाव शौर्य स्पष्ट महसूस कर सकता था। वैसे
  244. 11:23तारीफ के लिए शुक्रिया। लेकिन क्या मैं
  245. 11:26दाढ़ी के बिना इतना अलग लगता हूं? शौर्य
  246. 11:28मुस्कुराता हुआ बोला तो रागिनी शौर्य के
  247. 11:31करीब आई और अपनी आंखें बड़ी करती हुई
  248. 11:33बोली। जीजू सच कहूं आपको देखकर अब मुझे
  249. 11:37शिप्रा दी से ईर्ष्या होने लगी है। तभी
  250. 11:41राहुल सबके बीच से निकल कर शौर्य के पास आ
  251. 11:43गया। वो शायद अभी-अभी ही आया था। तभी जो
  252. 11:47कुछ भी हुआ था उसके बारे में पता चला तो
  253. 11:50वो सीधा शौर्य के पास ही आकर मुस्कुराता
  254. 11:52हुआ बोला। क्या जीजू आपने ऐसा क्या कर
  255. 11:55दिया कि सबके बीच आपकी ही चर्चा हो रही
  256. 11:58है। मैंने तो कुछ खास किया नहीं पर पता
  257. 12:01नहीं क्यों सब मेरी ही चर्चा कर रहे हैं।
  258. 12:04शौर्य ने सफाई दी तभी राहुल हल्के से
  259. 12:06मुख्तार भाई की तरफ देखता हुआ बोला।
  260. 12:10आपको डर नहीं लगता जीजू जो आप मुख्तार भाई
  261. 12:13से भी उलझ गए थे। देखना अब वो जरूर आपके
  262. 12:16पीछे पड़ जाएंगे। शौर्य के आज के दमदार
  263. 12:19अवतार को देखकर राय परिवार के हर सदस्य के
  264. 12:22दिमाग में एक ही सवाल हथौड़े मार रहा था।
  265. 12:25क्या यह वही भिखारी है? यकीन किसी को नहीं
  266. 12:28हो रहा था लेकिन इस सवाल का जवाब भी किसी
  267. 12:31के पास नहीं था। क्योंकि पार्टी में जो
  268. 12:33सभी ने अपनी आंखों से देखा वो कोई सपना
  269. 12:36नहीं हकीकत थी। सबके पास इस हकीकत को एक
  270. 12:39बुरा सपना समझकर भुला देने का एक ही
  271. 12:41रास्ता बचा था। बर्थडे पार्टी। इसीलिए सब
  272. 12:45गिफ्ट को छोड़कर धीरे-धीरे म्यूजिक, डांस,
  273. 12:48ड्रिंक और डिशेस को एंजॉय करने लगे। माहौल
  274. 12:51एकदम से बदल गया। कुछ ही देर बाद पार्टी
  275. 12:54अपने शबाब पर थी। शौर्य रागिनी और राहुल
  276. 12:57के साथ अलग ही रहा। ना ही मुख्तार भाई फिर
  277. 13:00से शौर्य के पास आया और ना ही कोई अप्रिय
  278. 13:02घटना घटी। हां, यह जरूर था कि शौर्य अभी
  279. 13:05भी रजत की आंखों में खटक रहा था। शौर्य
  280. 13:08शिप्रा के बारे में सोच रहा था। पता नहीं
  281. 13:11क्यों शौर्य को यह एहसास हो रहा था कि
  282. 13:13शिप्रा ने गिफ्ट तो ले लिया है पर क्या वो
  283. 13:16इसे एक्सेप्ट करेगी। फिर उसने मेनका के
  284. 13:18बारे में सोचा और मन ही मन बोला।
  285. 13:22पता नहीं मेनका के दिमाग में क्या आया जो
  286. 13:24उसने शिप्रा के लिए भी गिफ्ट भेज दिया।
  287. 13:27शौर्य ने सोचा एक बार उसे जाकर मेनका से
  288. 13:29मिलना चाहिए। वैसे भी अब यह पार्टी उसके
  289. 13:32लिए बेमतलब सी हो गई थी और किसी को अब
  290. 13:35यहां उसकी परवाह भी नहीं थी। बहुत से लोग
  291. 13:37तो उससे इसलिए भी दूर थे क्योंकि उसने
  292. 13:40मुख्तार भाई से जबरदस्ती का पंगा ले लिया
  293. 13:42था और वहां पर ज्यादातर लोग ऐसे थे जो
  294. 13:45मुख्तार भाई की आंखों में ना खटक जाएं
  295. 13:47इसीलिए शौर्य से दूर ही थे। शौर्य रागिनी
  296. 13:50से हटकर शिप्रा के पास गया और बोला
  297. 13:54मैं अभी जा रहा हूं बाद में मिलता हूं।
  298. 13:57क्या हुआ? इतनी जल्दी क्यों जा रहे हो?
  299. 14:00अभी तो खाना भी नहीं खाया। शिप्रा हैरानी
  300. 14:03से बोली। शौर्य को यह अच्छा लगा कि शिप्रा
  301. 14:06को उसकी फिक्र है। तभी तो उसे पता था कि
  302. 14:08उसने खाना नहीं खाया। पर शौर्य तो यहां
  303. 14:11आने से पहले ही मोहित और प्रिया के साथ
  304. 14:13खाना खा चुका था। उसे भूख भी नहीं थी।
  305. 14:16इसीलिए उसने शिप्रा से कहा मुझे भूख नहीं
  306. 14:19है। शिप्रा को लग रहा था कि जो कुछ हुआ
  307. 14:23उसी के कारण वो यहां से जल्दी जाना चाहता
  308. 14:26है। इसीलिए उसने शौर्य को फिर से रोकने की
  309. 14:28कोशिश की। पर इतनी जल्दी क्या है जाने की?
  310. 14:32घर ही तो जाना है। हमारे साथ ही चलना।
  311. 14:36पर शौर्य के दिमाग में शायद कुछ और ही चल
  312. 14:38रहा था। इसीलिए शौर्य शिप्रा को टालते हुए
  313. 14:41बोला इसकी कोई जरूरत नहीं है। मैं आ
  314. 14:44जाऊंगा। वैसे भी तुम सबके साथ आई हो तो
  315. 14:47सबके साथ ही जाना सही रहेगा। शिप्रा यह भी
  316. 14:51सोच रही [संगीत] थी कि शौर्य होटल राजकमल
  317. 14:53का खाना छोड़कर जा रहा है। क्या कभी उसने
  318. 14:55ऐसा खाना खाया भी होगा? क्या पता फिर कभी
  319. 14:59उसे ऐसी जगह पर खाने का मौका शायद ना
  320. 15:01मिले। इसीलिए शिप्रा एक और कोशिश करते हुए
  321. 15:04बोली क्या तुम्हारा अभी जाना इतना जरूरी
  322. 15:07है? नहीं जरूरी तो नहीं है पर मेरा भी
  323. 15:11यहां पर कोई खास काम नहीं है। तो सोचा जो
  324. 15:14थोड़ा सा काम बचा है उसे निपटा लूं। शौर्य
  325. 15:17बहाना बनाते हुए बोला तो शिप्रा बोली वैसे
  326. 15:20मैं भी अब ज्यादा देर यहां नहीं रुकूंगी।
  327. 15:23थोड़ी देर रुकोगे तो साथ ही चलेंगे।
  328. 15:26शिप्रा की आंखों की बेचैनी देखकर शौर्य
  329. 15:29समझ गया था कि उसका ऐसे बीच पार्टी से
  330. 15:31जाना शिप्रा को अच्छा नहीं लग रहा है।
  331. 15:33इसीलिए वो शिप्रा को आश्वस्त करते हुए
  332. 15:36बोला अगर ऐसा है तो मैं अभी होटल के पास
  333. 15:39ही हूं। जब तुम्हें जाना हो तो 5 मिनट
  334. 15:42पहले बता देना मैं आ जाऊंगा।
  335. 15:44ठीक है। तो फिर तुम जाओ। मैं जिस समय यहां
  336. 15:47से जाऊंगी तुम्हें फोन कर लूंगी। शिप्रा
  337. 15:50हारी सी आवाज में शौर्य से बोली। शौर्य
  338. 15:53वहां से निकल गया और सीधा मेनका के ऑफिस
  339. 15:56में पहुंचा। मेनका अकेले ही बैठी थी।
  340. 15:58शौर्य को ऑफिस में देखकर उसे आश्चर्य नहीं
  341. 16:01हुआ। इसका मतलब था कि वह शौर्य पर ही नजर
  342. 16:04रखे हुए थी। शौर्य आकर सीधा उसके सामने
  343. 16:07वाली चेयर पर बैठ गया।
  344. 16:10क्या बात है? लगता है वह पार्टी तुम्हें
  345. 16:12कुछ ज्यादा रास नहीं आई। इसीलिए इतनी
  346. 16:15जल्दी वहां से चले आए। मेनका मुस्कुराती
  347. 16:18हुई बोली। तो शौर्य ने मेनका के चेहरे को
  348. 16:21गौर से देखते हुए कहा, "इसका मतलब तुम मुझ
  349. 16:24पर नजर रखे हुए थी। तभी तो तुम ऐसे बोल
  350. 16:27रही हो।" हां, ऐसा था तो सही। मैं जानना
  351. 16:30चाहती थी कि तुम्हें वो गिफ्ट पसंद आया या
  352. 16:32नहीं।" मेनका मुस्कुराती हुई बोली तो
  353. 16:35शौर्य बोला, पसंद तो आया था, पर तुम्हें
  354. 16:38वो दूसरा गिफ्ट लेने की क्या जरूरत थी।"
  355. 16:40शौर्य का सवाल सुनकर मेनका ने तुरंत ही
  356. 16:43शिकायती लहजे में बोल दिया। अरे कमाल है।
  357. 16:46जिस [संगीत] चीज के लिए तुम्हें मुझे
  358. 16:48थैंक्स बोलना चाहिए उल्टा उसके लिए ही
  359. 16:50शिकायत कर रहे हो। अरे शिकायत नहीं कर रहा
  360. 16:53पर तुम्हें पता नहीं है हम [संगीत] दोनों
  361. 16:55का रिलेशन कैसा है। अगर पता होता तो तुम
  362. 16:57ऐसा नहीं करती। शौर्य ने मेनका को समझाने
  363. 17:01की कोशिश की। तो मेनका के चेहरे पर
  364. 17:03सवालिया सा भाव उभर आया और वो बोली
  365. 17:07तुम दोनों पति-पत्नी हो। इसमें पता नहीं
  366. 17:10होने वाली कौन सी बात है? एक पत्नी के लिए
  367. 17:13इससे ज्यादा खुशी की बात क्या होगी कि
  368. 17:15उसका पति उसके लिए इतना सुंदर गिफ्ट लाए।
  369. 17:18इस पर शौर्य अपनी बात को स्पष्ट करते हुए
  370. 17:20बोला देवी जी यह सही है कि हम पति-पत्नी
  371. 17:24हैं। पर बाय चॉइस नहीं है। यह एक मजबूरी
  372. 17:27के कारण है। और दूसरी बात शिप्रा की नजर
  373. 17:30में मेरा स्टेटस एक भिखारी का है। अब इतना
  374. 17:33तो तुम [संगीत] समझ ही सकती हो कि एक
  375. 17:35भिखारी के स्टेटस वाला शख्स जब अपनी पत्नी
  376. 17:37को इतना महंगा गिफ्ट देगा तो वह क्या
  377. 17:40सोचेगी?
  378. 17:41तो वो खेद भरे स्वर में बोली ओह सॉरी यह
  379. 17:46बात मुझे पता नहीं थी। अब क्या करोगे तुम?
  380. 17:49बोलते हुए मेनका के दिमाग में कोई बात आई
  381. 17:52तो वो आगे बोली एक मिनट तुम उसे अपनी
  382. 17:55असलियत क्यों नहीं बता देते? देवी जी मेरी
  383. 17:59जो उससे शादी हुई है यह [संगीत] उसकी पसंद
  384. 18:01से नहीं है। बल्कि यह उसकी मजबूरी की शादी
  385. 18:04है। जैसे ही हालात ठीक होंगे वो मुझसे
  386. 18:07तलाक ले लेगी। मैं नहीं चाहता कि मैं उसे
  387. 18:10अपनी असलियत बताकर उसे किसी उलझन में
  388. 18:12उलझाऊं। और दूसरी बात यह है कि मैं नहीं
  389. 18:15चाहता कि अभी दुनिया के सामने मेरी हकीकत
  390. 18:18जाहिर हो। इसीलिए मैंने तुम्हें भी कहा था
  391. 18:20कि मेरी हकीकत किसी के सामने जाहिर मत
  392. 18:23करना। अगर मेरे बारे में किसी को जानना हो
  393. 18:26तो तुम विक्रम को ही इस होटल के नए मालिक
  394. 18:28के रूप में प्रस्तुत करोगी। मेरा नाम तो
  395. 18:32पता ही होगा। श्रवण अगर किसी के सामने
  396. 18:35मेरा नाम लेना पड़े तो मुझे श्रवण के नाम
  397. 18:38से ही संबोधित करना। इतना बोलकर शौर्य
  398. 18:41रुका और अंत में अपनी बात को खत्म करता
  399. 18:43हुआ बोला तुम मेरी बात समझ गई ना? यह कुछ
  400. 18:47और है जो तुम्हें समझने की जरूरत है। वो
  401. 18:50सब तो ठीक है। पर तुम्हें क्या जरूरत है
  402. 18:52कि तुम शिप्रा के साथ बंधे हो? वो तलाक ले
  403. 18:55उससे पहले तुम भी तो उससे तलाक ले सकते
  404. 18:57हो। या कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम्हें उससे
  405. 19:00प्यार हो गया है।
  406. 19:03मेनका ने एक गहरा सवाल शौर्य से किया तो
  407. 19:05मेनका के सवाल से शौर्य सोच में पड़ गया
  408. 19:08कि उसे क्या जवाब दे। तभी कुछ सोचकर उसने
  409. 19:10कहा, "इसका कारण यह है कि अभी मुझे भी एक
  410. 19:14आइडेंटिटी की जरूरत है और यह पहचान मुझे
  411. 19:17अपनी असली पहचान छुपाने में मददगार साबित
  412. 19:20हो रही है। मेनका गौर से शौर्य की आंखों
  413. 19:23में देखती रही और यह जानने की कोशिश करती
  414. 19:26रही कि [संगीत] क्या यह सच बोल रहा है या
  415. 19:28यह सिर्फ बातें बना रहा है। पर उसकी आंखों
  416. 19:31से मेनका कुछ खास पता नहीं कर पाई। फिर एक
  417. 19:34लंबी सांस लेकर वो बोली।
  418. 19:38अब तो गिफ्ट तुमने शिप्रा को दे दिया है
  419. 19:40और उसने एक्सेप्ट भी कर लिया है। तो फिर
  420. 19:42तुम क्यों इस बात से चिंतित हो और जहां तक
  421. 19:45मुझे लग रहा है उसने अभी तक तुमसे कोई
  422. 19:47सवाल भी नहीं किया है। नहीं किया है तो
  423. 19:50इसका मतलब यह नहीं है कि आगे करेगी भी
  424. 19:53नहीं। जैसे ही उसे मैं अकेला मिलूंगा वो
  425. 19:56सबसे पहले यही सवाल करेगी और सिर्फ सवाल
  426. 19:59ही नहीं करेगी। मुझे लगता है वह गिफ्ट भी
  427. 20:01मुझे वापस कर देगी। शौर्य ने फिर मेनका को
  428. 20:05अपनी बात समझाते हुए बोला तो मेनका ने
  429. 20:07तुरंत ही इंकार में सिर हिलाते हुए कहा
  430. 20:10असंभव मैं एक बार को तो यह मान सकती हूं
  431. 20:13कि वो तुमसे [संगीत] सवाल करेगी पर वो
  432. 20:15गिफ्ट वापस कर देगी यह नहीं मान सकती तुम
  433. 20:19अभी शिप्रा को जानती नहीं हो वो कुछ भी कर
  434. 20:22सकती है शौर्य मुस्कुराते हुए बोला लेकिन
  435. 20:25मेनका अभी भी अपनी बात को सही साबित करने
  436. 20:28के लिए बोली तुम अभी लड़कियों की फितरत को
  437. 20:31नहीं जानते जैसी वो जताती है वैसी वह होती
  438. 20:34नहीं है। कोई बात नहीं ज्यादा इंतजार नहीं
  439. 20:38करना होगा। कल ही पता चल जाएगा। शौर्य
  440. 20:41विश्वास भरे स्वर में बोला तो मेनका भी
  441. 20:43मुस्कुरा दी और बोली ठीक है। मैं भी देखती
  442. 20:46हूं कि तुम उसे कितना समझते हो। अभी शौर्य
  443. 20:50और मेनका की बात चल ही रही थी। [संगीत]
  444. 20:51तभी अचानक एक शख्स धड़ाते हुए गार्ड को
  445. 20:54पीछे धकेल कर अंदर आ गया। शौर्य उस शख्स
  446. 20:58को यहां देखकर हैरान रह गया। उस शख्स के
  447. 21:01चेहरे पर भी शौर्य को यहां देखकर हैरानी
  448. 21:03थी। जो शख्स मेनका के केबिन के अंदर आया
  449. 21:06था वो कोई और नहीं राजकुमार टंडन था।
  450. 21:10दरअसल राजकुमार टंडन मेनका से मिलने ही जा
  451. 21:13रहा था। उसी समय उसने देखा कि शौर्य बिना
  452. 21:16किसी इजाजत के मेनका के कमरे में चला गया
  453. 21:19था। दरवाजे के बाहर खड़े गार्ड ने उसे
  454. 21:22रोकने की कोशिश भी नहीं की। उल्टा उसने
  455. 21:25शौर्य का अभिवादन सिर झुका कर किया था।
  456. 21:27जबकि वह खुद जब भी मेनका से मिलने आता है,
  457. 21:31गार्ड की अनुमति के बाद ही उसे अंदर जाने
  458. 21:33दिया गया। राजकुमार टंडन को यह बात हजम
  459. 21:36नहीं हो रही थी कि शौर्य बिना किसी इजाजत
  460. 21:39के मेनका केबिन में चला गया था। आखिर
  461. 21:42दोनों में रिश्ता क्या है? यही सोच-सच कर
  462. 21:45राजकुमार टंडन परेशान हो रहा था। जब उससे
  463. 21:48बर्दाश्त नहीं हुआ तो वह यह जानने के लिए
  464. 21:50कि दोनों के बीच कोई गलत संबंध तो नहीं
  465. 21:53है। बिना गार्ड के बाहर आने का इंतजार किए
  466. 21:56वह अंदर चला गया। वो उम्मीद कर रहा था कि
  467. 21:58वह दोनों को किसी आपत्तिजनक स्थिति में
  468. 22:01देखेगा। पर उसने अंदर शौर्य को मेनका के
  469. 22:04सामने बैठे देखा। उसकी इच्छा अधूरी रह गई।
  470. 22:07पर उसने यह दिखावा करने की कोशिश की कि
  471. 22:09जैसे उसे पता ही नहीं था कि शौर्य पहले से
  472. 22:12ही यहां उपस्थित था। राजकुमार टंडन ने
  473. 22:15हैरान स्वर में शौर्य से कहा। तुम तुम
  474. 22:20यहां क्या कर रहे हो?
  475. 22:22शौर्य अभी यह उम्मीद नहीं कर रहा था कि
  476. 22:24राजकुमार टंडन अचानक क्यों मेनका केबिन
  477. 22:26में आ जाएगा। वो सोच ही रहा था कि वो क्या
  478. 22:29जवाब दे कि इसी बीच मेनका ने राजकुमार
  479. 22:32टंडन से पूछा। मिस्टर टंडन यह क्या
  480. 22:35बदतमीजी है? आप यूं बिना पूछे मेरे केबिन
  481. 22:38के अंदर कैसे आ गए? राजकुमार [संगीत] टंडन
  482. 22:41मेनका की बात सुनकर हड़बड़ा गया और खुद को
  483. 22:44संतुलित करते हुए बोला, "मिस मेनका, मैंने
  484. 22:47सोचा आप अकेली हैं और मुझे थोड़ी जल्दी
  485. 22:49थी। इसीलिए मैं बाहर इंतजार नहीं कर पाया।
  486. 22:52पर मुझे उम्मीद नहीं थी कि आप किसी के साथ
  487. 22:54होंगी। मैं श्रवण को जानता हूं पर यह नहीं
  488. 22:57समझ पा रहा हूं कि यह यहां क्या कर रहा
  489. 22:59है।
  490. 23:01यह आपको जानने की जरूरत नहीं है कि श्रवण
  491. 23:04यहां क्या कर रहा है। आप तो बस यह बताइए
  492. 23:07कि आप यहां क्या करने आए हैं? मेनका रूखे
  493. 23:10स्वर में बोली। राजकुमार टंडन को उम्मीद
  494. 23:13नहीं थी कि मेनका श्रवण के सामने उससे
  495. 23:16इतने तीखे अंदाज में बात करेगी। पर वो खुद
  496. 23:18को नॉर्मल दिखाने की कोशिश करते हुए बोला,
  497. 23:21"मिस मेनका, मैं तो यहां पर आपका जो
  498. 23:24बैलेंस अमाउंट है, उसका चेक देने के लिए
  499. 23:26आया था। पर मुझे यह नहीं पता था कि श्रवण
  500. 23:29आपके साथ यहां बैठा होगा।" मिस्टर टंडन,
  501. 23:32मैं श्रवण की बात नहीं कर रही। मैं बस
  502. 23:35आपसे यह कह रही हूं कि इतनी करसी तो आपके
  503. 23:37अंदर होनी चाहिए कि आपको मेरे कमरे में
  504. 23:39आने से पहले इजाजत लेनी चाहिए थी। आप
  505. 23:43श्रवण को जानते हैं या नहीं जानते हैं
  506. 23:45इससे मेरा कोई वास्ता नहीं है। उम्मीद
  507. 23:48करती हूं कि आपको मेरी बात समझ आ रही
  508. 23:50होगी। इस बार मेनका का स्वर और भी सख्त हो
  509. 23:54गया था। सॉरी मिस मेनका आइंदा मैं यह
  510. 23:57ध्यान रखूंगा। राजकुमार टंडन को ऐसा लग
  511. 24:00रहा था जैसे किसी ने भरे चौराहे पर उसे
  512. 24:03नंगा कर दिया हो। बेइज्जती का घूंट पीते
  513. 24:05हुए राजकुमार टंडन अंदर ही अंदर बोले कुछ
  514. 24:09तो गड़बड़ है। आखिर यह भिखारी मेनका को
  515. 24:12कैसे जानता है? राजकुमार टंडन मेनका के
  516. 24:15कमरे में बैलेंस पेमेंट का चेक देने गए
  517. 24:17थे। लेकिन उनका असल मकसद मेनका और शौर्य
  518. 24:20के आपसी संबंधों को चेक करना था। जिस
  519. 24:23आपत्तिजनक दृश्य की कल्पना राजकुमार टंडन
  520. 24:25ने की थी, [संगीत] वह तो उन्हें कमरे में
  521. 24:27देखने को नहीं मिला, लेकिन जिस आपत्तिजनक
  522. 24:30व्यवहार की उन्होंने उम्मीद नहीं [संगीत]
  523. 24:32की थी, वो मेनका के कड़वे शब्दों में
  524. 24:34सुनने को मिल गया। शौर्य सामने बैठे-बैठे
  525. 24:37मेनका के कड़े रुख को गौर से देख रहा था।
  526. 24:40जब उसने देखा कि मेनका राजकुमार टंडन से
  527. 24:43कुछ ज्यादा ही रूढ़ हो रही है तो उसने
  528. 24:45आंखों के इशारे से उसे शांत रहने को कहा।
  529. 24:48वैसे उसे अच्छा भी लगा जिस तरह से मेनका
  530. 24:51ने राजकुमार टंडन की अकड़ को शांत किया
  531. 24:53था। लेकिन राजकुमार टंडन को यह बात ज्यादा
  532. 24:56ही चुभ रही थी कि मेनका ने शौर्य के सामने
  533. 24:59उसे झाड़ा था। शौर्य के इशारे के बाद अपने
  534. 25:03आप पर काबू करते हुए मेनका ने राजकुमार
  535. 25:05टंडन की तरफ हाथ बढ़ाया और बोली ठीक है
  536. 25:08मिस्टर टंडन चेक दीजिए। फिर मेनका ने
  537. 25:12शौर्य की तरफ देखा और बोली
  538. 25:15तुम इन्हें कैसे जानते हो श्रवण?
  539. 25:18यह मेरी पत्नी की बुआ के हस्बैंड है। यानी
  540. 25:21[संगीत] यह मेरे ससुर जी हुए। शौर्य शराफत
  541. 25:25से बोला, क्या बात करते हो? अगर ऐसा था तो
  542. 25:28तुम्हें मुझे पहले बताना चाहिए था। मेनका
  543. 25:31पूरी तरह से एक्टिंग करती हुई बोली, शौर्य
  544. 25:34भी उसकी एक्टिंग देखकर [संगीत] मन में उसे
  545. 25:36दाद देने से खुद को रोक नहीं सका। मेनका
  546. 25:39फिर राजकुमार टंडन की तरफ होकर बोली, माफ
  547. 25:42कीजिएगा मिस्टर टंडन। मुझे नहीं पता था कि
  548. 25:45आप श्रवण के ससुर जी हैं। कोई बात नहीं
  549. 25:48ऐसे हो जाता है। राजकुमार टंडन खिसियानी
  550. 25:51हंसी-हंसते हुए बोला, उम्मीद करती हूं कि
  551. 25:54पार्टी में किसी चीज की कमी नहीं रही
  552. 25:56होगी। कोई खास डिमांड हो तो बता दीजिए।
  553. 25:59मैं आपके लिए वो अरेंज करवा सकती हूं और
  554. 26:01इसका कोई चार्ज नहीं लगेगा। आफ्टर ऑल आप
  555. 26:04श्रवण के ससुर जी हैं। मेनका अपनी
  556. 26:07दरियादिली दिखाते हुए बोली, नहीं नहीं सब
  557. 26:10अरेंजमेंट बहुत बढ़िया है। अब किसी और चीज
  558. 26:12की जरूरत भी नहीं है। मैं तो बस आपको
  559. 26:14बैलेंस अमाउंट पे करने आया था। ठीक है, अब
  560. 26:17मैं चलता हूं। आप दोनों एंजॉय करो। इतना
  561. 26:20बोलकर राजकुमार टंडन वहां से निकल गया।
  562. 26:23लेकिन जाते-जाते भी कई सारे सवाल उनके
  563. 26:26दिमाग में घूम रहे थे। उनके लिए तो सबसे
  564. 26:28बड़े आश्चर्य की बात यही थी कि श्रवण होटल
  565. 26:31राजकमल के मैनेजर को कैसे जानता था और ना
  566. 26:34सिर्फ जानता था बल्कि दोनों को देखकर लगता
  567. 26:37था कि दोनों में अच्छी खासी घनिष्ठता भी
  568. 26:40थी। आखिर कैसे एक भिखारी की इतने बड़े
  569. 26:43लोगों से जान पहचान हो सकती है? अगर
  570. 26:45उन्हें पहले पता होता तो जब उन्होंने होटल
  571. 26:48को बुक किया था उस समय श्रवण के द्वारा
  572. 26:50होटल बुक करते तो उन्हें कुछ छूट भी मिल
  573. 26:52जाती। पर अब यह सोचने का क्या फायदा?
  574. 26:56दूसरी तरफ राजकुमार टंडन के जाने के बाद
  575. 26:58मेनका ने शौर्य से पूछा। मैंने टंडन साहब
  576. 27:02के साथ कुछ ज्यादा तो नहीं कर दिया। अरे
  577. 27:04नहीं तुमने तो बढ़िया डील किया। वो इसी
  578. 27:07लायक थे। मुझे लगता है उन्होंने मुझे यहां
  579. 27:09आते देख लिया होगा। इसी कारण वह बिना
  580. 27:12इजाजत अंदर चले आए। उनके मन में जरूर कोई
  581. 27:15और खिचड़ी पकने लगी होगी। शौर्य ने अपना
  582. 27:18अंदाजा बताया। मेनका को जब एहसास हुआ कि
  583. 27:21शौर्य क्या कहना चाहता है तो अचानक उसके
  584. 27:24चेहरे पर गुस्से की एक लहर दौड़ गई और वह
  585. 27:26बोली। अगर यह बात थी तो तुमने मुझे उसी
  586. 27:30समय हिंट क्यों नहीं दिया। अगर मुझे जरा
  587. 27:32भी आभास होता तो मैं उसे इतनी आसानी से
  588. 27:35नहीं छोड़ती।
  589. 27:37अरे छोड़ो अपना मूड मत खराब करो। वैसे भी
  590. 27:41तुमने उनकी हेकड़ी निकालने में कोई कसर
  591. 27:43छोड़ी भी नहीं। शौर्य हल्की मुस्कान के
  592. 27:46साथ बोला। अभी मेनका आगे कुछ बोलने ही
  593. 27:49वाली थी कि तभी शौर्य का मोबाइल रिंग करने
  594. 27:52लगा। उसने नंबर की तरफ देखा तो वो शिप्रा
  595. 27:54का कॉल था। उसने कॉल उठाया और कहा हेलो
  596. 27:59आ जाओ। अब मैं घर के लिए निकलने वाली हूं।
  597. 28:02शिप्रा ने बिना किसी औपचारिकता के शौर्य
  598. 28:05को आने के लिए बोल दिया। ठीक है मैं 5
  599. 28:07मिनट में आता हूं। इतना बोलकर शौर्य ने
  600. 28:10फोन काट दिया। मेनका का ध्यान शौर्य की
  601. 28:13बातों की तरफ ही था। उसने कहा तुम जा रहे
  602. 28:17हो? मैंने सोचा तुम रात होटल में ही
  603. 28:19बिताओगे। नहीं फिर कभी अभी तो जाना
  604. 28:23पड़ेगा। इतना बोलकर शौर्य अपनी जगह से उठ
  605. 28:26खड़ा हुआ। दूसरी तरफ राजकुमार टंडन को चैन
  606. 28:29नहीं था। उन्हें यह बात परेशान किए हुए थी
  607. 28:32कि श्रवण मेनका को कैसे जानता है। जब
  608. 28:35उन्हें कुछ समझ नहीं आया तो उन्होंने सोचा
  609. 28:37शायद शिप्रा को पता होगा क्यों ना उसी से
  610. 28:40पूछ लिया जाए। यह सोचकर वो शिप्रा को
  611. 28:43ढूंढते हुए उसके पास पहुंचे। शिप्रा इस
  612. 28:45समय अपने पापा के साथ खड़ी थी। राजकुमार
  613. 28:48टंडन ने बड़े प्यार से शिप्रा से पूछा।
  614. 28:51शिप्रा बेटी मुझे तुमसे एक बात पूछनी थी।
  615. 28:55शिप्रा को हैरानी हुई कि उसके फूफा भला
  616. 28:57उससे क्या पूछना चाहते हैं? उसने आशंकित
  617. 29:00स्वर में कहा क्या जानना चाहते हैं फूफा
  618. 29:03जी टंडन साहब शिप्रा के चेहरे को ध्यान से
  619. 29:06देखते हुए बोले बेटे यह अपना श्रवण मिस
  620. 29:10मेनका को कैसे जानता है शिप्रा को समझ
  621. 29:13नहीं आया कि वो किस मेनका की बात कर रहे
  622. 29:15हैं सवालिया नजरों से उसने पूछा यह मेनका
  623. 29:19कौन है फूफा जी अरे मिस मेनका होटल राजकमल
  624. 29:23की मैनेजर है श्रवण उसको कैसे जानता है
  625. 29:26टंडन साहब अपनी बात को स्पष्ट करते हुए
  626. 29:28बोले बोले टंडन साहब की बात सुनकर शिप्रा
  627. 29:32को एक झटका सा लगा। उसने सोचा यह कैसे हो
  628. 29:35सकता है? कहा श्रवण और कहा मिस मेनका इन
  629. 29:38दोनों का क्या मेल? भला श्रवण मिस मेनका
  630. 29:41को कैसे जानेगा? इसीलिए उसने कहा आप कैसी
  631. 29:44बातें कर रहे हैं फूफा जी। भला श्रवण मिस
  632. 29:47मेनका को कैसे जानेगा? शिप्रा के चेहरे के
  633. 29:50भाव को देखकर राजकुमार टंडन समझ गए कि इस
  634. 29:53बारे में शिप्रा को भी कुछ नहीं पता है।
  635. 29:55यह सोचकर उनके दिमाग में सोई पड़ी खुराफात
  636. 29:58अचानक से जाग गई और वह बोले तुम बहुत भोली
  637. 30:02हो शिप्रा बेटी। श्रवण ना सिर्फ मिस मेनका
  638. 30:05को जानता है बल्कि दोनों के बीच घनिष्ठता
  639. 30:08भी है। शिप्रा को राजकुमार टंडन की बात पर
  640. 30:11विश्वास ही नहीं हो रहा था। वो कैसे यह
  641. 30:14बात मान सकती थी कि श्रवण मिस मेनका को
  642. 30:16पहले से जानता हो। ना ही इस बारे में उसने
  643. 30:19शिप्रा से कुछ कहा था। लेकिन वो अपने फूफा
  644. 30:22जी की बात को भी तो झुठला नहीं सकती थी।
  645. 30:24फिर भी यह जानने के लिए कि उसके फूफा जी
  646. 30:27को कैसे पता चला कि श्रवण मेनका को कैसे
  647. 30:29जानता है? उसने उनसे पूछा।
  648. 30:32फूफा जी आप इतने विश्वास के साथ कैसे कह
  649. 30:35सकते हैं कि श्रवण मिस मेनका को पहले से
  650. 30:38जानता है? शिप्रा की बात सुनकर राजकुमार
  651. 30:41टंडन जोर से हंसे और बोले तुम्हें क्या
  652. 30:44लगता है कि मैं तुमसे मजाक कर रहा हूं।
  653. 30:46अरे मैंने खुद अपनी आंखों से देखा है। अभी
  654. 30:49जब मैं मिस मेनका को पेमेंट करने गया था
  655. 30:51तो श्रवण पहले से ही उनके केबिन में बैठा
  656. 30:54हुआ था। मिस मेनका ने तो यहां तक कहा कि
  657. 30:56अगर आपको कुछ और चाहिए तो मैं वह भी अरेंज
  658. 30:59करवा सकती हूं और उसका कोई चार्ज भी नहीं
  659. 31:02लगेगा। इसका मतलब तुम समझती हो ना कि
  660. 31:04दोनों कितने क्लोज हैं।
  661. 31:07जिस तरह से राजकुमार टंडन शिप्रा को शौर्य
  662. 31:10के बारे में बता रहे थे, उससे शिप्रा इतना
  663. 31:12समझ रही थी कि उनके कहने का मकसद सिर्फ
  664. 31:15पहचान बताना नहीं बल्कि यह जताना भी था कि
  665. 31:18दोनों के बीच दोस्ती से बढ़कर रिश्ता है।
  666. 31:20अगर ऐसा होता भी तो शिप्रा को इससे कोई
  667. 31:23खास फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वह पहले ही
  668. 31:25अपने और शौर्य के रिश्ते को स्पष्ट कर
  669. 31:27चुकी थी। इसीलिए शौर्य किसके साथ क्या
  670. 31:30रिश्ता रखता है यह उसके लिए मायने नहीं
  671. 31:32रखता था। लेकिन उसके लिए यह मानना मुश्किल
  672. 31:35था कि शौर्य मिस मेनका को इतनी अच्छी तरह
  673. 31:38जानता है कि किसी को उनके बीच खास रिश्ता
  674. 31:40होने का शक हो सकता है। शिप्रा को समझ
  675. 31:44नहीं आया कि वह अपने फूफा जी को क्या जवाब
  676. 31:46दे। इसीलिए उसने बात टालते हुए कहा।
  677. 31:49एक्चुअली मुझे भी इस बारे में कुछ पता
  678. 31:51नहीं। श्रवण आएगा तो मैं उससे पूछ लूंगी
  679. 31:54कि वह मिस मेनका को कैसे जानता है। हां
  680. 31:57जरूर पूछना। पता नहीं अचानक ही उसका
  681. 31:59व्यक्तित्व कुछ रहस्यमई होता जा रहा है।
  682. 32:02राजकुमार टंडन संदेह भरे स्वर में बोले।
  683. 32:06शिप्रा अपने फूफा जी के इरादे को समझ रही
  684. 32:08थी। लेकिन उसने उनकी बातों पर ध्यान नहीं
  685. 32:10दिया। खैर उसे ज्यादा इंतजार नहीं करना
  686. 32:13पड़ा। अगले कुछ ही पलों में उसे श्रवण
  687. 32:15सामने से आता दिखाई दिया। शिप्रा ने उसे
  688. 32:18ध्यान से देखा। उसका व्यक्तित्व अब पहले
  689. 32:21से कहीं ज्यादा प्रभावशाली लग रहा था। वो
  690. 32:23समझ नहीं पा रही थी कि इन कुछ दिनों में
  691. 32:25ऐसा क्या बदल गया जो श्रवण इतना अलग नजर
  692. 32:28आने लगा है। उसकी स्मार्टनेस ऐसी थी कि
  693. 32:31पूरी पार्टी में वह सबसे अलग दिख रहा था।
  694. 32:33ऐसा व्यक्तित्व जिस पर किसी की भी नजर टिक
  695. 32:36जाए। शिप्रा ने आज से पहले कभी शौर्य को
  696. 32:39इतने ध्यान से नहीं देखा था। उसमें कुछ तो
  697. 32:42ऐसा था जो उसे दूसरों से अलग बनाता था।
  698. 32:45फिर उसने सोचा क्या सच में ऐसा हो सकता है
  699. 32:48कि मिस मेनका श्रवण को पसंद करती हो पर
  700. 32:52कैसे? कहां मिस मेनका इतनी बड़ी हस्ती और
  701. 32:55कहां श्रवण दोनों में कोई मेल ही नहीं।
  702. 32:58फिर यह कैसे संभव है? राजकुमार टंडन अभी
  703. 33:01भी शिप्रा के साथ ही खड़े थे। वह भी जानना
  704. 33:04चाहते [संगीत] थे कि श्रवण मिस मेनका को
  705. 33:05कैसे जानता है। वो सोच रहे थे कि अगर वह
  706. 33:08यहां से चले गए तो फिर पता नहीं श्रवण से
  707. 33:11बात करने का मौका मिलेगा या नहीं।
  708. 33:14यही सोचकर वह खुद ही श्रवण से बात करना
  709. 33:16चाहते थे। जब श्रवण शिप्रा के पास आ गया
  710. 33:19और उसने राजकुमार टंडन को शिप्रा के साथ
  711. 33:22खड़ा देखा तो वह समझ गया कि जरूर फूफा जी
  712. 33:25ने शिप्रा को सारी [संगीत] कहानी बता दी
  713. 33:27होगी। यही सोचकर वो अपने दिमाग में एक
  714. 33:30स्क्रिप्ट तैयार करने लगा कि उसे शिप्रा
  715. 33:32को कैसे और क्या जवाब देना है। जब शौर्य
  716. 33:35राजकुमार टंडन के पास पहुंचा तो वो
  717. 33:38मुस्कुराते हुए बोले अरे श्रवण बेटा तुमने
  718. 33:41पहले बताया नहीं कि तुम मिस मेनका को इतनी
  719. 33:44अच्छी तरह जानते हो।
  720. 33:47इसी समय राधिका जिसने शौर्य को बाहर से
  721. 33:49आते देख लिया था वहां आ गई। उसने देखा कि
  722. 33:52उसके पापा भी उसके पास खड़े हैं तो वह भी
  723. 33:55वहीं आकर खड़ी हो गई। जब उसने अपने पापा
  724. 33:57की बात सुनी तो वह आश्चर्य से बोली ये आप
  725. 34:01क्या कह रहे हैं पापा श्रवण मिस मेनका को
  726. 34:04जानता है यह कैसे हो सकता है
  727. 34:07तुम चुप रहो तुम्हें क्या लगता है कि मैं
  728. 34:10मजाक कर रहा हूं मैंने अपनी आंखों से
  729. 34:12दोनों को साथ में बैठे देखा है राजकुमार
  730. 34:15टंडन राधिका को झपट कर बोला
  731. 34:18क्या फूफा जी सच कह रहे हैं श्रवण तुम मिस
  732. 34:21मेनका को पहले से जानते हो शिप्रा ने भी
  733. 34:24अपने फूफा जी की बात की पुष्टि करने के के
  734. 34:26लिए श्रवण से पूछ लिया। वैसे वह सबके
  735. 34:29सामने उससे पूछना नहीं चाहती थी। हां बेटे
  736. 34:32तुम्हें बताना चाहिए था। जानते हो मिस
  737. 34:35मेनका इस शहर की कितनी बड़ी हस्ती हैं।
  738. 34:37राजा साहब भी इन्हें कितना पसंद करते हैं
  739. 34:40और तुम दोनों को साथ में देखकर मुझे लगा
  740. 34:42कि तुम दोनों की अच्छी जमती है। राजकुमार
  741. 34:46टंडन दिखाने को तो शौर्य की तारीफ कर रहे
  742. 34:48थे। पर कहने का तरीका ऐसा था जैसे वह यह
  743. 34:51दिखाना चाहते हो कि उसके और मिस मेनका के
  744. 34:53बीच कुछ चल रहा है।
  745. 34:55शौर्य उनके कहने का भाव समझ गया था। पर
  746. 34:58उसने इसे गलत ढंग से नहीं लिया और हंसते
  747. 35:00हुए बोला हां अंकल हम दोनों की पुरानी
  748. 35:03पहचान है। किसी काम के सिलसिले में आज
  749. 35:06अचानक ही मिलना हो गया। पुरानी पहचान पर
  750. 35:10तुमने कभी बताया नहीं कि तुम मिस मेनका
  751. 35:12जैसी हस्ती को पहले से जानते हो। यहां तक
  752. 35:15कि तुमने शिप्रा को भी अपनी इस पहचान के
  753. 35:17बारे में नहीं बताया। राजकुमार टंडन श्रवण
  754. 35:20पर सवाल खड़े करते हुए बोले मैं मिस मेनका
  755. 35:24के अलावा भी और कई हस्तियों [संगीत] को
  756. 35:25जानता हूं और मैंने किसी के भी बारे में
  757. 35:28किसी को कुछ नहीं बताया है। कभी जरूरत ही
  758. 35:31नहीं पड़ी और बताने का कोई कारण भी तो हो।
  759. 35:34शौर्य व्यंग्ञात्मक अंदाज में बोला। शौर्य
  760. 35:37का जवाब सुनकर राजकुमार टंडन आगे कुछ नहीं
  761. 35:40बोल पाए। शिप्रा सिर्फ दोनों की बात
  762. 35:42[संगीत] सुनती रही वो कुछ बोली नहीं।
  763. 35:44राधिका जो अब तक शौर्य को कुछ समझ नहीं
  764. 35:47रही थी। अचानक उसे शौर्य का व्यक्तित्व
  765. 35:49प्रभावशाली नजर आने लगा। वो इस बात से
  766. 35:52हैरान थी कि इतना शानदार व्यक्तित्व होने
  767. 35:55के बाद भी वो भिखारी का जीवन क्यों जी रहा
  768. 35:57था। राधिका तारीफ भरे अंदाज में अपनी
  769. 36:00आंखें बड़ी करती हुई बोली। तुम तो बड़े
  770. 36:03छुपे रुस्तम हो श्रवण। पता नहीं अभी और
  771. 36:05कितने रूप तुम्हारे देखने पड़ेंगे।
  772. 36:08शौर्य ने महसूस किया कि जो राधिका अब तक
  773. 36:10उसे जीजू और आप कहकर बुला रही थी, अचानक
  774. 36:13उसे उसके नाम से बुलाने लगी।
  775. 36:16क्या बात है राधिका? तुम अपने जीजू को
  776. 36:19सीधे नाम से पुकारने लगी हो। शिप्रा तंज
  777. 36:22भरे स्वर में बोली तो राधिका तुरंत ही
  778. 36:24सफाई देते हुए बोली वो तो श्रवण को ही
  779. 36:27मेरा जीजू बोलना पसंद नहीं इसलिए मैं नाम
  780. 36:29से ही बुला रही हूं। राधिका के श्रवण के
  781. 36:32लिए मीठे बोल और मेनका के साथ श्रवण की
  782. 36:34पहचान के ताजा समाचारों ने शिप्रा के
  783. 36:37दिमाग में हलचल मचाना शुरू कर दिया था।
  784. 36:39होटल राजकमल में शौर्य और मेनका को साथ
  785. 36:42देखने के बाद राजकुमार टंडन को ऐसा लग रहा
  786. 36:44था मानो उनके हाथ में शिप्रा और शौर्य की
  787. 36:47ऐसी कमजोरनेस आ गई है जिसे दबाने से ना
  788. 36:50केवल दर्द होगा बल्कि दोनों के रिश्तों
  789. 36:53में दरार भी पड़ जाएगी। इसीलिए यह
  790. 36:55ब्रेकिंग न्यूज़ शिप्रा को सुनाने के बाद
  791. 36:58टंडन साहब यह उम्मीद लिए बैठे थे कि वह
  792. 37:00अपने मकसद में कामयाब हो जाएंगे और मेनका
  793. 37:03के रूम में हुई उनकी बेइज्जती का घाव भी
  794. 37:05भर जाएगा। खैर घाव तो होटल राजकमल की
  795. 37:09पार्टी ने कईयों को दिए। राजकुमार टंडन
  796. 37:12अकेले नहीं थे जो जख्मी थे। मुख्तार भाई,
  797. 37:15रजत, नैना देवी और इन सबके साथ खुद बर्थडे
  798. 37:19कल राधिका भी थी जो शौर्य का नया अवतार और
  799. 37:21शिप्रा को शौर्य का दिया महंगा गिफ्ट
  800. 37:23देखकर जल चुकी थी। और अपनी गिरगिटी स्वभाव
  801. 37:26के अनुरूप बदल भी चुकी थी। जैसे ही राजकमल
  802. 37:30होटल के बाहर शौर्य से राधिका का सामना
  803. 37:32हुआ। वो शौर्य के साथ बातचीत में जीजू से
  804. 37:36श्रवण और आपसे तुम में उतर गई। लेकिन साथ
  805. 37:38खड़ी शिप्रा को राधिका की यह बात पसंद
  806. 37:41नहीं आई।
  807. 37:44लोग कितनी जल्दी बदल जाते हैं और बहाना
  808. 37:46ऐसा बनाते हैं जिसका कोई मतलब नहीं।
  809. 37:49शिप्रा सामान्य भाव में बोली पर उसका
  810. 37:52इशारा शौर्य से तू तड़ाक करके बात कर रही
  811. 37:54राधिका की तरफ ही था। फिर वह राजकुमार
  812. 37:58टंडन की तरफ पलट कर बोली।
  813. 38:01अब हम निकलते हैं फूफा जी। इतना कहकर उसने
  814. 38:04तुरंत ही शौर्य की ओर देखा और बोली, चलें।
  815. 38:08शौर्य ने सहमति जताई और वो शिप्रा के साथ
  816. 38:10बाहर की तरफ बढ़ गया। अभी वे दोनों कुछ
  817. 38:13कदम ही बड़े थे कि पार्टी का एक और घायल
  818. 38:15किरदार रजत उनके सामने आकर खड़ा हो गया और
  819. 38:18बोला,
  820. 38:20नमस्कार।
  821. 38:22यह क्या बदतमीज़ी है? तुम मेरे सामने क्या
  822. 38:25करने आए हो? मेरा रास्ता छोड़ो। शिप्रा
  823. 38:27रजत को घूरते हुए तीखे अंदाज में बोली ऐसी
  824. 38:31भी क्या नाराजगी मिस शिप्रा हमने तो आपके
  825. 38:33लिए अपनी दुश्मनी भी भुला दी और आप हैं कि
  826. 38:36अभी भी हमसे रूठी हुई है। रजत मुस्कुराने
  827. 38:40का भरसक प्रयास करता हुआ बोला तो शिप्रा
  828. 38:42ने मखौल उड़ाने वाले भाव में कहा नाराजगी
  829. 38:46उनसे होती है जिन्हें हम अपना मानते हैं।
  830. 38:49पर माफ कीजिएगा आप तो हमारी उस लिस्ट में
  831. 38:51ही [संगीत] नहीं हैं।
  832. 38:53शौर्य ने एक बार मुट्ठियां जरूर कसी,
  833. 38:56लेकिन फिर उसने तुरंत ही खुद को काबू कर
  834. 38:57लिया। अभी वह उन दोनों की तकरार भरी बातों
  835. 39:00को सिर्फ सुन रहा था। उसने बीच में दखल
  836. 39:03देने की कोई कोशिश नहीं की। यह तो हमारे
  837. 39:06ऊपर बड़ी ज्यादती है। हमने तो यह सोचकर
  838. 39:08सुलह करने की कोशिश की थी कि शायद इसके
  839. 39:11बाद आप हमारी नूर नजर होंगी। पर आप तो
  840. 39:14लगातार हमारा दिल तोड़ रही हैं। रजत
  841. 39:17शायराना अंदाज में बोला। लेकिन शिप्रा भी
  842. 39:19चुपचाप सुनने वाली कहां? वो बोली फिर तो
  843. 39:23आदत डाल ही लीजिए। ऐसे अगर शीशे का दिल
  844. 39:25लेकर घूमेंगे तो यह ऐसे ही बार-बार टूटता
  845. 39:28रहेगा। रजत का चेहरा शिप्रा का जवाब सुनकर
  846. 39:32लाल हो गया। वो शौर्य की तरफ देखते हुए
  847. 39:34बोला। लगता है इस भिखारी की संगत कुछ
  848. 39:37ज्यादा ही रास आ रही है। तभी तो महल और
  849. 39:40झोपड़े का फर्क नजर नहीं आ रहा। वो फर्क
  850. 39:43तो अभी थोड़ी देर पहले पार्टी में सब ने
  851. 39:45देख ही लिया कि महल में रहने वाले के
  852. 39:48गिफ्ट और झोपड़े में रहने वाले के गिफ्ट
  853. 39:50में क्या अंतर था। शिप्रा थोड़ी देर पहले
  854. 39:53शौर्य द्वारा दिए गए गिफ्ट की तरफ रजत का
  855. 39:56ध्यान दिलाते हुए बोली
  856. 39:58मैं देख रहा हूं कुछ ज्यादा ही जुबान तेज
  857. 40:01हो गई है तुम्हारी। ध्यान रखना कहीं इसके
  858. 40:04कारण बड़ा खामियाजा नहीं भुगतना पड़ जाए।
  859. 40:07रजत जब बातों से नहीं जीता तो अप्रत्यक्ष
  860. 40:10रूप से धमकाते हुए बोला
  861. 40:12तुम मेरी चिंता छोड़कर अपनी चिंता कर लो।
  862. 40:15वो तुम्हारे लिए ज्यादा बेहतर होगा। अब
  863. 40:17अगर तुम्हारी बकवास खत्म हो गई हो तो मेरा
  864. 40:20रास्ता छोड़ो। इतना बोलकर शिप्रा शौर्य के
  865. 40:24साथ रजत के साइड से निकल कर आगे बढ़ गई।
  866. 40:27रजत के साथ शिप्रा के तकरार के वक्त अगर
  867. 40:30शौर्य चाहता तो बीच में पड़ सकता था। पर
  868. 40:32उसने जानबूझकर कुछ नहीं बोला था। वो देख
  869. 40:35रहा था कि शिप्रा स्वयं रजत को अच्छे से
  870. 40:37हैंडल कर पा रही थी। शौर्य को यह देखकर भी
  871. 40:40अच्छा लग रहा था कि शिप्रा ने रजत को जवाब
  872. 40:43देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। होटल से
  873. 40:46निकलकर शौर्य शिप्रा के साथ उसके घर की
  874. 40:48तरफ बढ़ गया। राजदीप राय और बीना जी राहुल
  875. 40:52के साथ पहले ही वहां से निकल गए थे।
  876. 40:54शिप्रा कार में थी लेकिन उसके दिमाग में
  877. 40:57मेनका वाली बात ही चल रही थी। अभी क्योंकि
  878. 41:00शौर्य शिप्रा के साथ गाड़ी में अकेला था
  879. 41:02तो शिप्रा ने सोचा यही सही मौका है और
  880. 41:05उसने पूछ ही लिया तुम मिस मेनका को कैसे
  881. 41:08जानते हो? दरअसल मैंने वहां सबके सामने
  882. 41:12तुमसे सवाल करना सही नहीं समझा लेकिन अब
  883. 41:14यहां कोई नहीं है। इसलिए अगर तुम चाहो तो
  884. 41:17मुझे बता सकते हो। यह मत समझना कि तुम्हें
  885. 41:20मेरे सवाल का जवाब देना ही होगा। पर यह
  886. 41:22बात मेरे मन को लगातार परेशान कर रही है।
  887. 41:25इसीलिए जिज्ञासा वश मैं तुमसे यह जानना
  888. 41:27चाहती हूं।
  889. 41:29शौर्य को पहले से ही यह उम्मीद थी कि यह
  890. 41:31सवाल उसके सामने आने वाला है। इसीलिए उसने
  891. 41:34कहा,
  892. 41:35एक्चुअली यह सब मेरे जॉब से रिलेटेड है।
  893. 41:39अपने जॉब के सिलसिले में ही मेरा मिस
  894. 41:41मेनका से कई बार मिलना हुआ था और हम दोनों
  895. 41:43की अच्छी जमने लगी। बस इतनी सी बात है।
  896. 41:47बोलते बोलते शौर्य यह सोच भी रहा था कि
  897. 41:49मिस मेनका को वो अपनी जॉब से कैसे रिलेट
  898. 41:51करें। मैं समझी नहीं। मिस मेनका भला
  899. 41:55तुम्हारे जॉब के बीच में कहां से आ गई?
  900. 41:58शिप्रा शक भरे अंदाज में बोली। तभी शौर्य
  901. 42:01ने कहा, "ऐसा है कि मेरे बॉस ने अपना ऑफिस
  902. 42:04होटल राजकमल के ही पास लिया है और मुझे जो
  903. 42:07सबसे पहला काम मिला है, वो एक कंपनी की
  904. 42:10ब्रांडिंग करना है। उसके लिए एक ऐड बनाना
  905. 42:13है और हर माध्यम से उसे एडवर्टाइज करना है
  906. 42:16ताकि जल्दी से जल्दी वो ब्रांड पॉपुलर हो
  907. 42:18जाए। एक्चुअली इसी सिलसिले में मुझे एक
  908. 42:22पॉपुलर मॉडल की तलाश थी। अभी की जो सबसे
  909. 42:25पॉपुलर मॉडल नताशा है वो मिस मेनका की
  910. 42:28दोस्त है। मिस मेनका के जरिए ही मैं मिस
  911. 42:31नताशा से बात कर पाया और वो मुझसे मिलने
  912. 42:33के लिए भी तैयार हो गई। कहते हुए शौर्य एक
  913. 42:36कड़ी को दूसरी कड़ी से जोड़ने की कोशिश कर
  914. 42:39रहा था ताकि शिप्रा को उस पर शक ना हो।
  915. 42:42कहीं तुम उस फेमस मॉडल नताशा की बात तो
  916. 42:45नहीं कर रहे? वो तो बहुत पॉपुलर है और जिस
  917. 42:48भी ब्रांड का उसने कैंपेन किया है वो बहुत
  918. 42:50सक्सेस हुआ है। शिप्रा नताशा का नाम सुनकर
  919. 42:54बीच में बोल पड़ी लेकिन फिर कुछ सोचकर
  920. 42:56उसने कहा पर तुम मेनका से कैसे मिले? मिस
  921. 43:00मेनका से मुझे मेरे बॉस ने मिलाया था। और
  922. 43:03एक दो बार मिलने से हमारी जान पहचान हो गई
  923. 43:05या ऐसा कह सकते हैं कि दोस्ती हो गई।
  924. 43:08क्योंकि हमारे बॉस ने कहा था कि आगे भी
  925. 43:11अगर मुझे कहीं मिस मेनका की हेल्प की
  926. 43:12जरूरत होगी तो मैं उनसे ले सकता हूं।
  927. 43:16शौर्य संतुष्ट भाव से बोला। उसने मन ही मन
  928. 43:19सोचा कि उसने एक ठीक-ठाक कहानी बना ली है।
  929. 43:22तभी शिप्रा ने अगला सवाल किया। कौन है
  930. 43:25तुम्हारा बॉस?
  931. 43:27इस पर शौर्य एक पल को सोचकर बोला, विक्रम
  932. 43:31विक्रम चौहान। शिप्रा ने विक्रम चौहान का
  933. 43:34नाम सुनकर एक पल को सोचा कि क्या वो इस
  934. 43:37नाम के किसी व्यक्ति से परिचित है? पर उसे
  935. 43:39याद नहीं आया। फिर उसने अगला सवाल दाग
  936. 43:42दिया।
  937. 43:43तुम जो यह ऐड बनाने वाले हो वो किस कंपनी
  938. 43:46के लिए है?
  939. 43:48शौर्य ने एक पल सोचा कि एक ही साथ सारे
  940. 43:51पत्ते खोलना ठीक नहीं है। इसीलिए उसने कहा
  941. 43:54एक्चुअली अभी तो मुझे उस कंपनी का नाम पता
  942. 43:56नहीं है। पर शायद एक-द दिनों में इस संबंध
  943. 43:59में हमारी मीटिंग होगी। तब जाकर पता चलेगा
  944. 44:02कि हमें यह ऐड किस कंपनी के लिए बनाना है।
  945. 44:06अभी तो बॉस ने हमें सिर्फ मिस नताशा को
  946. 44:08फाइनल करने के लिए और साथ में शूटिंग की
  947. 44:10सारी तैयारी कर लेने के लिए कहा था। तो
  948. 44:13अभी हमारी यही प्रक्रिया चल रही है। तभी
  949. 44:16शिप्रा कुछ याद करते हुए बोली पता है कभी
  950. 44:20मैंने भी सोचा था कि मिस नताशा से ही मैं
  951. 44:22अपने ब्रांड का एंडोर्समेंट करवाऊंगी। पर
  952. 44:25बजट ने इसकी परमिशन नहीं दी। [संगीत] शायद
  953. 44:27भविष्य में मैं ऐसा कर पाऊं। अच्छा यह तो
  954. 44:31बढ़िया आईडिया है। अगर तुम कहो तो मैं इस
  955. 44:34बारे में मिस नताशा से बात करूं। शौर्य
  956. 44:37शिप्रा के मन की इच्छा को टटोलते हुए बोला
  957. 44:40तो शिप्रा ने मना करते हुए कहा नहीं नहीं
  958. 44:43अभी इसकी कोई जरूरत नहीं है। अभी हमारी
  959. 44:45बातें बिग बुल के साथ हुई हैं। बिगबुल के
  960. 44:48भी कुछ प्लान है। फिर देखते हैं। ठीक है
  961. 44:52जैसी तुम्हारी इच्छा। शौर्य ने सहमति
  962. 44:55जताई। शौर्य की यह सब बातें सुनकर शिप्रा
  963. 44:58ने सोचा। श्रवण ने इतनी जल्दी अपने लिए
  964. 45:01इतना अच्छा जॉब कैसे ढूंढ लिया? क्या उसे
  965. 45:04समझने में मुझसे कोई गलती हुई है? क्या वो
  966. 45:07यह सब संभाल पाएगा? क्या सच में वो इतना
  967. 45:10एजुकेटेड है कि इतना कुछ खुद ही मैनेज कर
  968. 45:12ले? शिप्रा को उसकी बातें सुनकर उसके
  969. 45:15कैलिबर पर आश्चर्य हो रहा था। इस जॉब के
  970. 45:18लिए उसे कितने ही लोगों से मिलना पड़ेगा।
  971. 45:21उनसे बात करनी पड़ेगी और उन सबको हैंडल
  972. 45:24करना आसान नहीं होगा। वहीं शिप्रा ने तो
  973. 45:26उसे एक भिखारी समझकर उसे कोई खास उम्मीद
  974. 45:29ही नहीं की थी।
  975. 45:31शौर्य का जॉब प्रोफाइल जानकर उसे एक सुखद
  976. 45:34अनुभूति हुई। वो खुश होकर बोली मुझे बहुत
  977. 45:38खुशी है कि तुम्हें इतना अच्छा जॉब मिला
  978. 45:40है। मैं चाहकर भी तुम्हारे लिए ऐसा कुछ
  979. 45:43नहीं कर सकती थी। मेरे दादाजी ने भी जो
  980. 45:46तुम्हारे लिए सोचा था वो एक ड्राइवर के
  981. 45:48जॉब तक ही सीमित था। पर तुम तो सबकी
  982. 45:51उम्मीद से बेहतर निकले। शौर्य को शिप्रा
  983. 45:54से अपने लिए तारीफ भरी बातें सुनकर अच्छा
  984. 45:56लगा। इस समय आधी रात हो रही थी। शौर्य
  985. 46:00गाड़ी ड्राइव कर रहा था और शिप्रा उसके
  986. 46:02बगल वाली सीट पर बैठी थी। सड़क बिल्कुल
  987. 46:04सुनसान थी। इक्कादुक्का गाड़ियां ही आसपास
  988. 46:07से गुजर रही थी। शौर्य ने गाड़ी का शीशा
  989. 46:10खोल दिया। खिड़की से आती हल्की-ठंडी हवा
  990. 46:13सुकून देने वाली थी। शिप्रा की लटें हवा
  991. 46:16में अटखेलियां करने लगी। उसे इतना अच्छा
  992. 46:18लगा कि उसने अपना सिर थोड़ा सा खिड़की के
  993. 46:21बाहर निकालकर खिड़की की हुड़ पर अपनी
  994. 46:23ठोड़ी टिकाई और आंखें बंद करके हवा को
  995. 46:26अपने चेहरे पर महसूस करने लगी। शौर्य ने
  996. 46:29जब शिप्रा की तरफ देखा तो उसकी नजर उसके
  997. 46:31चेहरे पर ठहर सी गई। कितना सुकून था उस
  998. 46:34चेहरे में। शौर्य को लगा अगर वक्त यहीं
  999. 46:37ठहर जाए तो कितना अच्छा हो। वो यूं ही
  1000. 46:40घंटों शिप्रा को देखता रह सकता है। वो इस
  1001. 46:42हसीन [संगीत] पल को अपनी यादों में समेट
  1002. 46:44लेना चाहता था। उसने मन ही मन कहा। शिप्रा
  1003. 46:49मुझे यही सुकून तुम्हारे चेहरे पर चाहिए।
  1004. 46:52और यह मेरा वादा है कि मैं इस चेहरे को
  1005. 46:54कभी किसी परेशानी को छूने नहीं दूंगा। पर
  1006. 46:58कहते हैं ना कि अच्छा वक्त किसी को ज्यादा
  1007. 47:01वक्त नहीं देता। खैर जल्दी ही शिप्रा का
  1008. 47:04घर आ गया। शौर्य ने गाड़ी खड़ी कर दी पर
  1009. 47:07शिप्रा अभी भी उसी अवस्था में कहीं खोई
  1010. 47:09थी। शौर्य कुछ बोला नहीं। बस वहीं बैठा
  1011. 47:12खामोशी से शिप्रा के चेहरे की तरफ देखता
  1012. 47:15रहा। ऐसे ही कुछ पल और बीत गए। फिर अचानक
  1013. 47:18शिप्रा को एहसास हुआ कि गाड़ी तो चल ही
  1014. 47:20नहीं रही है। उसने आंख खोलकर अपने आसपास
  1015. 47:24देखा तो पाया कि वह अपने घर पहुंच चुकी
  1016. 47:26थी। उसने शौर्य की तरफ देखते हुए पूछा।
  1017. 47:30अरे हम कब पहुंचे? ज्यादा समय नहीं हुआ
  1018. 47:34है। बस अभी कुछ देर पहले ही पहुंचे हैं।
  1019. 47:37तो तुमने मुझे उठाया क्यों नहीं? शौर्य का
  1020. 47:40जवाब सुनकर शिप्रा हैरानी से बोली। तभी
  1021. 47:43शौर्य ने मासूमियत से कहा। आप गहरी नींद
  1022. 47:46में लग रही थी इसीलिए उठाया नहीं। यह क्या
  1023. 47:50बात हुई? ऐसे तो मैं जाने कब तक सोती
  1024. 47:52रहती। शिप्रा अपनी आंखें बड़ी करके बोली
  1025. 47:55तो शौर्य ने सीधा सपाट जवाब दिया। मुझे
  1026. 47:59कौन सा अभी ऑफिस जाना था? जब तक आप सोती
  1027. 48:02रहती, मैं भी अपनी सीट पर ही आराम करता
  1028. 48:04रहता। शौर्य की बात सुनकर शिप्रा जैसे
  1029. 48:07सन्न रह गई। पर उसे उसकी यह बातें पसंद ही
  1030. 48:10आ रही थी। शिप्रा ने गाड़ी का गेट खोला और
  1031. 48:13नीचे उतर कर बोली, ठीक है, गाड़ी पार्क
  1032. 48:17करके आ जाओ। मैं यहीं तुम्हारा इंतजार
  1033. 48:19करती हूं। शौर्य गाड़ी पार्किंग में खड़ी
  1034. 48:21करके वापस आ गया। वो और शिप्रा धीरे-धीरे
  1035. 48:24कदम बढ़ाते हुए घर की तरफ बढ़ गए। शौर्य
  1036. 48:28की जिंदगी में आज कुछ नया होने जा रहा था
  1037. 48:31क्योंकि आज से उसका आशियाना बदल चुका था।
  1038. 48:33वो मन ही मन सोच रहा था। जिंदगी में ऐसी
  1039. 48:37रात भी आएगी कल्पना भी नहीं की थी। शिप्रा
  1040. 48:41के साथ उसके घर में रहना यह सोचकर ही
  1041. 48:43शौर्य रोमांचित हो रहा था। राय विला की
  1042. 48:46ऊंची और भव्य दीवारों के पीछे रात का
  1043. 48:48सन्नाटा अब अपने चरम पर था। घर के भीतर
  1044. 48:51अंधेरा और खामोशी का राज था। इसी खामोशी
  1045. 48:55के बीच शौर्य शिप्रा के पीछे-पीछे उसके घर
  1046. 48:57की तरफ कदम बढ़ा रहा था। शिप्रा के चलने
  1047. 49:00की गति में एक तरह की सावधानी थी। जैसे वह
  1048. 49:03जमीन पर अपने पैरों की आहट भी नहीं होने
  1049. 49:05देना चाहती थी। रात बहुत हो चुकी थी। घर
  1050. 49:09के सभी सदस्य गहरी नींद [संगीत] में थे।
  1051. 49:11शिपरा मुख्य द्वार के पास पहुंची और एक पल
  1052. 49:14के लिए ठिटक गई। उसके मन में विचार आया कि
  1053. 49:17वह बैल बजाए ताकि कोई अंदर से आकर दरवाजा
  1054. 49:19खोल दे। पर अगले ही पल उसने अपनी कलाई पर
  1055. 49:22बंधी घड़ी देखी। इतनी रात [संगीत] गए किसी
  1056. 49:25को भी नींद से जगाना और परेशान करना उसे
  1057. 49:28ठीक नहीं लगा। [संगीत] उसने अपना इरादा
  1058. 49:30तुरंत बदल लिया। उसने अपने कीमती लेदर के
  1059. 49:33पर्स को खोला और उसमें हाथ डालकर चाबियों
  1060. 49:35का एक गुच्छा निकाला। ताले में चाबी के
  1061. 49:38घूमने की हल्की सी क्लिक की आवाज हुई जो
  1062. 49:41सन्नाटे में किसी धमाके जैसी महसूस हुई।
  1063. 49:44शिप्रा ने धीरे से पल्ला धकेला और घर के
  1064. 49:46अंदर कदम रखा। शौर्य भी एक साए की तरह
  1065. 49:50उसके ठीक पीछे-पीछे अंदर आ गया। यह शौर्य
  1066. 49:53के लिए एक बिल्कुल नया अनुभव था। वो पहली
  1067. 49:55बार शिप्रा के घर के आलीशान माहौल को अंदर
  1068. 49:58से देख रहा था। फर्श पर बिछी महंगी टाइलें
  1069. 50:02और दीवारों पर टंगी पेंटिंग्स [संगीत] रात
  1070. 50:04की हल्की रोशनी में भी अपनी भव्यता का
  1071. 50:06एहसास करा रही थी। शिप्रा ने बिना पीछे
  1072. 50:09मुड़े बस अपने हाथ के इशारे से शौर्य को
  1073. 50:12अपने पीछे आने का संकेत दिया। वो बहुत ही
  1074. 50:15दबे पांव लकड़ी की बनी शानदार सीढ़ियों की
  1075. 50:18तरफ बढ़ी और फर्स्ट फ्लोर की ओर जाने
  1076. 50:20[संगीत] लगी। शौर्य के मन में कई सवाल थे
  1077. 50:23पर उसने खामोश रहना ही बेहतर समझा और
  1078. 50:25शिप्रा का अनुसरण करता रहा। ऊपर पहुंचकर
  1079. 50:28शिप्रा एक बड़े और नक्काशीदार दरवाजे वाले
  1080. 50:31कमरे के पास रुकी। उसने शौर्य की आंखों
  1081. 50:34में देखते हुए उसे वहीं गलियारे में खड़े
  1082. 50:36रहने का इशारा किया। इसके बाद वो खुद उस
  1083. 50:39कमरे के अंदर चली गई। कुछ ही पल बीते थे
  1084. 50:42कि वह वापस बाहर आ गई। उसने अपना पर्स
  1085. 50:45अंदर रख दिया और अब वह पूरी तरह तनाव
  1086. 50:47मुक्त दिख रही [संगीत] थी। फिर उसने शौर्य
  1087. 50:50को साथ आने का इशारा किया और उस कमरे से
  1088. 50:52बिल्कुल सटे हुए दूसरे कमरे की ओर बढ़ गई।
  1089. 50:55उसने कमरे का दरवाजा खोला और शौर्य को
  1090. 50:58अंदर आने का संकेत दिया। कमरे के अंदर कदम
  1091. 51:01रखते ही शिप्रा ने स्विच बोर्ड की तरफ हाथ
  1092. 51:03बढ़ाकर लाइट ऑन कर दी। जैसे ही बल्ब की
  1093. 51:06रोशनी कमरे में फैली, शौर्य की आंखें
  1094. 51:08चौंधिया गई। कमरा बेहद व्यवस्थित, साफ
  1095. 51:11सुथरा और सुरुचिपूर्ण फर्नीचर से सजा हुआ
  1096. 51:13था। दीवारों का रंग आंखों को सुकून देने
  1097. 51:16वाला था। उसने अनचाहे ही अपने मन में उस
  1098. 51:19पुराने सीलन भरे सर्वेंट क्वार्टर की
  1099. 51:22तुलना इस कमरे से की और पाया कि यह उससे
  1100. 51:24लाख गुना बेहतर है। शिप्रा ने कमरे के
  1101. 51:27वातावरण को सामान्य बनाने के लहजे में
  1102. 51:29कहा। आज से यही तुम्हारा कमरा है। उम्मीद
  1103. 51:33करती हूं कि यह तुम्हें पसंद आया होगा।
  1104. 51:36शौर्य ने कमरे के आरामदायक बिस्तर और सोफे
  1105. 51:38को देखते हुए बड़े ही संतुष्ट भाव से जवाब
  1106. 51:41दिया। नहीं यह बढ़िया है और मुझे पसंद भी
  1107. 51:44आया है। शिप्रा ने कमरे के कोने में रखी
  1108. 51:47विशाल वार्ड्रोब की तरफ इशारा किया और आगे
  1109. 51:50कहा चलो यह अच्छी बात है कि तुम्हें कमरा
  1110. 51:52पसंद आया। मैंने राहुल से बोलकर तुम्हारे
  1111. 51:56हिसाब से कुछ कपड़े भी मंगवा दिए हैं जो
  1112. 51:58इस कमरे के वार्ड्रोब में रखे हुए हैं।
  1113. 52:00तुम सोने से पहले चेंज कर लेना। [संगीत]
  1114. 52:03शौर्य ने अपनी सहमति जताते हुए संक्षिप्त
  1115. 52:05में उत्तर दिया, ठीक है मैं देख लूंगा।
  1116. 52:08शिप्रा को शायद अब थकान महसूस हो रही थी।
  1117. 52:11उसने कमरे से बाहर निकलने के लिए कदम
  1118. 52:13बढ़ाए। पर दरवाजे के पास पहुंचकर एक बार
  1119. 52:16फिर पीछे मुड़ी और कहा तो फिर ठीक है मैं
  1120. 52:20चलती हूं। अब सुबह [संगीत] मिलेंगे। अगर
  1121. 52:23तुम्हें किसी चीज की जरूरत हो तो मुझे बता
  1122. 52:25देना। इसके साथ वाला कमरा मेरा ही है।
  1123. 52:28[संगीत]
  1124. 52:29शिप्रा के जाते ही शौर्य ने एक गहरी और
  1125. 52:32लंबी अंगड़ाई ली। उसने अपने होठों में ही
  1126. 52:34बहुत धीरे से बुदबुदाया।
  1127. 52:37अपने घर में जगह भी दी तो कमरा अलग कर
  1128. 52:39दिया। कोई बात नहीं शिपरा राय। एक दिन तुम
  1129. 52:43खुद ही मुझे अपने कमरे में भी बुलाओगी।
  1130. 52:45शौर्य फुर्ती से वार्ड्रोब के पास गया और
  1131. 52:48उसने एक नाइट ड्रेस निकाली। [संगीत] अपने
  1132. 52:50कपड़े बदले और फिर गद्देदार बिस्तर पर लेट
  1133. 52:52गया। काफी समय बाद उसे आज आरामदायक नींद
  1134. 52:56आने वाली थी। अगली सुबह उसे ऐसा लगा जैसे
  1135. 52:59कोई उसे धीरे-धीरे हिलाकर जगाने [संगीत]
  1136. 53:01की कोशिश कर रहा है। उसने भारी आंखों से
  1137. 53:04अपनी पलकें झपकाई और सामने देखा तो
  1138. 53:06[संगीत] राहुल उसके बिस्तर के पास खड़ा
  1139. 53:08उसे उठा रहा था। शौर्य ने अपनी आवाज को
  1140. 53:11थोड़ा साफ करते हुए राहुल से पूछा।
  1141. 53:13[संगीत] क्या बात है?
  1142. 53:16[गला साफ़ करने की आवाज़][नाक से की जाने वाली आवाज़]
  1143. 53:16इतनी सुबह-सुबह क्यों उठाने आ गए?
  1144. 53:20राहुल जो पहले से ही स्पोर्ट्स गियर में
  1145. 53:22तैयार और उत्साहित दिख रहा था मुस्कुरा कर
  1146. 53:24बोला अब और कितना सोगे जीजू चलो [संगीत]
  1147. 53:28बाहर चलकर टेनिस खेलते हैं। रागिनी भी आ
  1148. 53:31चुकी है। उसने खास करके मुझे बोला कि मैं
  1149. 53:34आपको बुला लूं। शौर्य को राहुल की बात
  1150. 53:37सुनकर थोड़ा अचरज हुआ। उसने अंगड़ाई लेते
  1151. 53:39हुए सवाल किया। क्या
  1152. 53:42टेनिस इतनी सुबह? क्या तुम लोग रोज खेलते
  1153. 53:46हो? राहुल ने अपने हाथ में पकड़े रैकेट को
  1154. 53:48हवा में लहराते हुए बड़े गर्व से कहा, हां
  1155. 53:51जीजू, असल में कुछ ही दिनों में हमारा
  1156. 53:54स्टेट लेवल का ट्रायल होने वाला है।
  1157. 53:56जिसमें मैं और रागिनी दोनों पार्टिसिपेट
  1158. 53:58करने वाले हैं। इसीलिए रोज सुबह-सुबह हम
  1159. 54:01लोग यहां कोर्ट पर जमकर प्रैक्टिस करते
  1160. 54:03हैं। शौर्य बिस्तर से उठकर खड़ा हो गया
  1161. 54:06था। उसने खिड़की के बाहर फैले टेनिस कोर्ट
  1162. 54:09की ओर देखा और पूछा।
  1163. 54:11और कौन-कौन खेलते हैं?
  1164. 54:14राहुल ने तुरंत जवाब दिया, हमारे साथ
  1165. 54:16कुलवंत भैया और मयूर भी होते हैं। [संगीत]
  1166. 54:18आपको पता है कुलवंत भैया स्टेट लेवल के
  1167. 54:21खिलाड़ी रह चुके हैं और जब से आपने उन्हें
  1168. 54:24हराया है तब से वह और भी ज्यादा प्रैक्टिस
  1169. 54:26करने लगे हैं। राहुल की यह बात सुनकर
  1170. 54:29शौर्य समझ [संगीत] गया कि कुलवंत के मन
  1171. 54:31में उस हार की कसक अभी भी ताजी है। वो बेड
  1172. 54:34से उतरते हुए आत्मविश्वास के साथ बोला।
  1173. 54:38ठीक है। चलो चलकर देखते हैं तुम लोगों का
  1174. 54:41खेल।
  1175. 54:42[संगीत]
  1176. 54:42कुछ ही देर में शौर्य राहुल के साथ टेनिस
  1177. 54:44कोर्ट पहुंचा। वहां उसने देखा कि कोर्ट पर
  1178. 54:46कुलवंत और मयूर के बीच एक आक्रामक मैच चल
  1179. 54:49रहा था। रागिनी कोर्ट के किनारे नेट के
  1180. 54:52पास खड़ी होकर बहुत ध्यान से उनके खेल की
  1181. 54:55बारीकियों को देख रही थी। शौर्य ने अपनी
  1182. 54:57नजर चारों ओर घुमाई। उसने राहुल के करीब
  1183. 55:00जाकर धीरे से पूछा। [संगीत] तुम्हारी वो
  1184. 55:03बहन क्या नाम था उसका? हां युविका। वो नजर
  1185. 55:07नहीं आ रही। इस पर राहुल ने शरारती
  1186. 55:10मुस्कान के साथ जवाब दिया। आप चिंता मत
  1187. 55:13करो वो भी आ जाएगी। तभी अचानक पीछे से एक
  1188. 55:16तीखी और व्यंग्ञात्मक आवाज कोर्ट पर
  1189. 55:18गूंजी। अरे देखो तो आज कौन आया है? आज तो
  1190. 55:22फिर से हमारे बीच मिस्टर श्रवण पधार चुके
  1191. 55:25हैं। यह आवाज किसी और की नहीं बल्कि
  1192. 55:28युविका की ही थी। शौर्य ने शांत भाव से
  1193. 55:30पीछे पलट कर उसे देखा और बोला [संगीत]
  1194. 55:33मैं राहुल से अभी आपके बारे में ही पूछ
  1195. 55:35रहा था। बस यहां आपकी ही कमी नजर आ रही
  1196. 55:38थी। [संगीत] आप आ गई हैं तो अब वो भी पूरी
  1197. 55:40हो गई है। अब तक रागिनी भी शौर्य की
  1198. 55:43मौजूदगी को भांप चुकी थी। वो दौड़कर उनके
  1199. 55:45पास आ गई। उसने विनम्रता से पूछा। आप कैसे
  1200. 55:49हैं जीजू? मैं कब से दोबारा आपका खेल
  1201. 55:52देखना चाहती थी। अब जाकर मौका मिला है।
  1202. 55:54उम्मीद करती हूं कि मुझे आपसे कुछ सीखने
  1203. 55:57को मिलेगा। युविका को रागिनी की यह
  1204. 55:59प्रशंसा बिल्कुल रास नहीं आई। उसने तुरंत
  1205. 56:02अपनी कड़वी जुबान से तंज कसते हुए कहा।
  1206. 56:05रागिनी, तुम कुछ ज्यादा ही श्रवण से
  1207. 56:07उम्मीद कर रही हो। उस दिन यह गलती से जीत
  1208. 56:09क्या गया? पता नहीं तुमने इसे क्या समझ
  1209. 56:12लिया है। ऐसी बेवकूफी [संगीत]
  1210. 56:13करने का कोई मतलब नहीं है। तुम्हारे पास
  1211. 56:16जब कुलवंत भैया जैसे सीनियर खिलाड़ी हैं
  1212. 56:18तो तुम्हें किसी और से कुछ सीखने की जरूरत
  1213. 56:21क्या है? शौर्य ने युविका की कड़वाहट का
  1214. 56:24जवाब बहुत ही शालीनता से दिया। आपकी दीदी
  1215. 56:27सही कह रही हैं रागिनी। आप वैसे भी अच्छा
  1216. 56:30खेलती हैं और आपको सिखाने के लिए आपके
  1217. 56:33भैया हैं ही। तो मुझे नहीं लगता कि मैं
  1218. 56:35आपकी कोई मदद कर पाऊंगा।
  1219. 56:38रागिनी शौर्य की इस विनम्रता से और भी
  1220. 56:40प्रभावित हुई। उसने दृढ़ता के साथ शौर्य
  1221. 56:43की आंखों में देखते हुए कहा।
  1222. 56:46मेरे लिए क्या अच्छा है यह मुझे अच्छे से
  1223. 56:48पता है जीजू और मैंने यह तो कभी कहा ही
  1224. 56:51नहीं कि मेरे कुलवंत भैया अच्छा नहीं
  1225. 56:53खेलते। मैं [संगीत] उनसे भी अभी तक सीखती
  1226. 56:55ही रही हूं। लेकिन अब जब मुझे आपसे भी कुछ
  1227. 56:57सीखने का मौका मिल रहा है तो मैं उसे अपने
  1228. 56:59हाथ से क्यों जाने दूं। तभी कोर्ट पर चल
  1229. 57:02रहा मुकाबला एक तेज शॉट के साथ समाप्त
  1230. 57:04हुआ। मैच खत्म करने के बाद कुलवंत पसीने
  1231. 57:07में नहाया हुआ कोर्ट के किनारे आया और
  1232. 57:10शौर्य को सीधे चुनौती देते हुए बोला श्रवण
  1233. 57:14आ जाओ मैदान में। क्यों ना एक गेम हमारे
  1234. 57:16बीच भी हो जाए। शौर्य कुलवंत के लहजे में
  1235. 57:20छिपी उस टीस को बखूबी महसूस कर सकता था जो
  1236. 57:22उसे अपनी पिछली हार से मिली थी। उसने बहुत
  1237. 57:25ही सहज भाव से मैच को टालना चाहा और कहा।
  1238. 57:29इसकी कोई जरूरत नहीं है भैया। मैं तो बस
  1239. 57:31रागिनी और राहुल का खेल देखने के लिए आया
  1240. 57:33था। आप खेलो मैं यहीं ठीक हूं। इसी समय घर
  1241. 57:38के भीतर शिप्रा की भी नींद खुल चुकी थी।
  1242. 57:40इसीलिए वह सीधे किचन में गई और अपने लिए
  1243. 57:43चाय बनाने लगी। तभी उसे शौर्य का ख्याल
  1244. 57:46आया। वो चाय का कप लेकर शौर्य के कमरे की
  1245. 57:49ओर बढ़ी। पर वहां का मंजर देखकर वो ठटक
  1246. 57:52गई। कमरा पूरी तरह खाली था। वो चाय का कप
  1247. 57:55हाथ में लिए घर के बाहर लॉन की तरफ आई।
  1248. 57:58उसे शौर्य भी वहां नजर आ गया। शिप्रा को
  1249. 58:02देखते ही युविका ने पासा फेंका। ये लो अब
  1250. 58:05तो शिप्रा भी आ गई। अब शायद शिप्रा कहेगी
  1251. 58:08तो श्रवण कुलवंत भैया के साथ एक सोलो मैच
  1252. 58:10खेलने के लिए तैयार हो जाएगा। शिप्रा ने
  1253. 58:14हैरानी से राहुल से पूछा तो उसने कहा
  1254. 58:18कुलवंत भैया जीजू के साथ एक सोलो मैच
  1255. 58:20खेलना चाहते हैं। पर जीजू इसके लिए तैयार
  1256. 58:22नहीं है।
  1257. 58:25शिप्रा समझ गई कि कुलवंत अपनी हार का बदला
  1258. 58:27लेना चाहता है। मयूर ने भी दबाव डाला। हां
  1259. 58:31शिप्रा तुम बोलो श्रवण को। शायद तुम्हारी
  1260. 58:33बात मानकर यह कुलवंत भैया के साथ एक मैच
  1261. 58:36खेलने को तैयार हो जाए। शिप्रा ने शौर्य
  1262. 58:39का पक्ष लेते हुए कहा इसकी क्या जरूरत है?
  1263. 58:43तुम लोग आपस में खेलो। श्रवण को क्यों
  1264. 58:45इसमें शामिल कर रहे हो? युविका ने फिर से
  1265. 58:48उकसाया। लो लगता है कि शिप्रा डर गई है कि
  1266. 58:52कहीं श्रवण [संगीत] कुलवंत भैया से बुरी
  1267. 58:54तरह हार ना जाए। इसीलिए वो नहीं चाहती कि
  1268. 58:57श्रवण उनका मुकाबला करें। शिप्रा ने शांत
  1269. 59:00स्वर में जवाब दिया। अगर तुम्हें यही
  1270. 59:03समझना है तो यही सही। कुलवंत ने बहुत ही
  1271. 59:07चतुराई से कहा, क्या शिप्रा? तुम भी
  1272. 59:09छोटी-छोटी बातों को दिल पर ले लेती हो। यह
  1273. 59:12एक फ्रेंडली मैच है। मैं जानता हूं कि
  1274. 59:14श्रवण अच्छा खेलता है। इसीलिए मैं उसके
  1275. 59:16साथ खेलना चाहता हूं। क्षिप्रा ने अब बात
  1276. 59:19शौर्य पर डाल दी। यह फैसला तो श्रवण का
  1277. 59:22होगा कि उसे मैच खेलना है या नहीं। मैं
  1278. 59:25बीच में कोई नहीं हूं जो यह कहे कि उसे
  1279. 59:27मैच खेलना चाहिए या नहीं। राहुल और रागिनी
  1280. 59:30ने भी मिन्नतें की। खेल लो ना जीजू। कौन
  1281. 59:33सा यहां जमीन जायदाद किसी के नाम करनी है।
  1282. 59:35या तो हार होगी या जीत। हां, इससे कुलवंत
  1283. 59:39भैया की इच्छा जरूर पूरी हो जाएगी।
  1284. 59:42शौर्य ने सबकी ज़िद और कुलवंत की आंखों में
  1285. 59:44छिपे उस घमंड को देखा। तभी रागिनी ने भी
  1286. 59:47अनुरोध किया।
  1287. 59:49बस एक मैच की बात है जीजू खेल लो ना।
  1288. 59:52आखिरकार शौर्य ने गहरी सांस लेते हुए कहा,
  1289. 59:55"अगर सबकी यही इच्छा है तो फिर ठीक है।
  1290. 59:58मैं कुलवंत भैया के साथ एक मैच खेलने के
  1291. 1:00:00लिए तैयार हूं।" शौर्य के इस फैसले ने
  1292. 1:00:03शिप्रा को चौंका दिया। वो शौर्य के चेहरे
  1293. 1:00:06पर कोई तनाव ना देखकर हैरान [संगीत] थी।
  1294. 1:00:09युविका ने शोर मचाते हुए कहा, ठीक है तो
  1295. 1:00:12फिर देर किस बात की? मैच शुरू करो भैया।
  1296. 1:00:15श्रवण तुम तैयार तो हो? शौर्य ने
  1297. 1:00:18मुस्कुराकर जवाब दिया, हां, मैं तैयार
  1298. 1:00:21हूं। अब मैच शुरू कर सकते हैं।
  1299. 1:00:24राहुल ने अपना रैकेट शौर्य को थमाया।
  1300. 1:00:26शौर्य कोर्ट में कुलवंत के आमने-सामने
  1301. 1:00:28खड़ा हो गया। कुलवंत ने पूछा,
  1302. 1:00:32"तुम तैयार हो तो मैच शुरू करें?" शौर्य
  1303. 1:00:35ने बहुत ही शांत तरीके से कहा, "हां जरूर,
  1304. 1:00:38आप ही [संगीत] सर्विस कीजिए।" खेल की
  1305. 1:00:41शुरुआत में कुलवंत की सर्विस पर शौर्य
  1306. 1:00:43थोड़ा लड़खड़ाया क्योंकि उसने वार्म अप
  1307. 1:00:45नहीं किया था। युविका ने मयूर की तरफ
  1308. 1:00:48देखा। मयूर ने भी चुटकी लेते हुए धीरे से
  1309. 1:00:50कहा, "ल लगता है आज किस्मत श्रवण का साथ
  1310. 1:00:54नहीं दे रही।
  1311. 1:00:56लेकिन जैसे ही खेल का दूसरा सेट शुरू हुआ,
  1312. 1:00:58शौर्य की चाल बदल गई। शौर्य ने एक ऐसा
  1313. 1:01:01क्रॉस कोड शॉट मारा कि कुलवंत गेंद तक
  1314. 1:01:04पहुंच भी नहीं पाया। रागिनी और राहुल जोश
  1315. 1:01:07में आकर चिल्लाने लगे। कुलवंत तब बौखला
  1316. 1:01:09गया था। उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर एक तेज
  1317. 1:01:13स्मैश मारा। लेकिन शौर्य ने उसे बड़ी
  1318. 1:01:15आसानी से ना केवल डिफेंड [संगीत] किया
  1319. 1:01:18बल्कि उसे ड्रॉप शॉट में बदल दिया। गेंद
  1320. 1:01:20नेट के बिल्कुल करीब गिर कर रुक गई। जैसे
  1321. 1:01:23ही अंतिम पॉइंट के साथ शौर्य ने मैच जीता
  1322. 1:01:26युविका का चेहरा उतर गया। कुलवंत अपना
  1323. 1:01:29रैकेट जमीन पर टिकाए हाफ रहा था। शौर्य ने
  1324. 1:01:32शांत कदमों से नेट [संगीत] के पास जाकर
  1325. 1:01:34कुलवंत की ओर हाथ बढ़ाया। लेकिन कुलवंत ने
  1326. 1:01:37शौर्य से हाथ नहीं मिलाया। कुलवंत को यकीन
  1327. 1:01:40नहीं हो रहा था कि आज वो फिर से शौर्य से
  1328. 1:01:43हार गया। वहीं युविका जो थोड़ी देर पहले
  1329. 1:01:45तक चहक रही थी [संगीत] अचानक चुप हो गई।
  1330. 1:01:48वो खुद भी इस नतीजे से हैरान थी। अब तक
  1331. 1:01:50कुलवंत उन सबके बीच एक हीरो की तरह था।
  1332. 1:01:53लेकिन आज शौर्य ने उसका स्टारडम धूमिल कर
  1333. 1:01:56दिया था। जब कुलवंत को समझ आ गया कि अब
  1334. 1:01:58कोई बहाना काम नहीं आएगा तो वह शौर्य के
  1335. 1:02:01पास आया और बोला मानना पड़ेगा। मैंने
  1336. 1:02:04तुम्हें अंडरएस्टीमेट किया था। लेकिन अब
  1337. 1:02:06मैं मानता हूं कि तुम सच में मुझसे बेहतर
  1338. 1:02:08हो। ऐसा कुछ नहीं है भैया। आज मेरा दिन
  1339. 1:02:12अच्छा था इसीलिए मैं जीत पाया। शौर्य ने
  1340. 1:02:15विनम्रता से कहा। आप तो कमाल हो जीजू आपका
  1341. 1:02:19तो कोई जवाब ही नहीं। मैंने आपसे बेहतर
  1342. 1:02:21टेनिस पैर नहीं देखा। अब आइए एक-एक हाक
  1343. 1:02:24मेरे साथ भी हो जाए। जीतने का तो पता नहीं
  1344. 1:02:27लेकिन मैं आपको टक्कर देने की पूरी कोशिश
  1345. 1:02:29करूंगी। रागिनी उत्साहित होकर बोली। जहां
  1346. 1:02:32रागिनी शौर्य के खेल से खुश थी, वहीं
  1347. 1:02:35युविका का चेहरा ऐसा लग रहा था जैसे किसी
  1348. 1:02:37ने उसके सपनों का महल तोड़ दिया हो।
  1349. 1:02:40शिप्रा भी शौर्य की जीत से बेहद खुश थी,
  1350. 1:02:42लेकिन उसे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की थी
  1351. 1:02:44कि शौर्य की जीत ने युविका के चेहरे की
  1352. 1:02:47चमक छीन ली थी। [संगीत] इसके बाद शौर्य ने
  1353. 1:02:49युविका और राहुल के साथ भी एक-एक मैच
  1354. 1:02:52खेला। यह तो तय था कि दोनों मैच शौर्य ने
  1355. 1:02:55ही जीते। लेकिन इससे रागिनी और राहुल की
  1356. 1:02:57अच्छी प्रैक्टिस हो गई। मैच खत्म होने के
  1357. 1:03:00बाद शौर्य शिप्रा के साथ घर जाने के लिए
  1358. 1:03:02मुड़ा। तभी रागिनी सामने आकर बोली, "जीजू,
  1359. 1:03:06परसों मेरा ट्रायल है। अगर आप मेरे साथ
  1360. 1:03:08चलोगे, मुझे अच्छा लगेगा।"
  1361. 1:03:11रागिनी की बात सुनकर शौर्य ने एक बार
  1362. 1:03:13शिप्रा की तरफ देखा। पर शिप्रा ने कुछ
  1363. 1:03:16नहीं कहा। यह देखकर रागिनी शिप्रा से
  1364. 1:03:18बोली, दी, आप कहो ना जीजू से, यह आपकी बात
  1365. 1:03:22नहीं टालेंगे। रागिनी की बात सुनकर शिप्रा
  1366. 1:03:25ना चाहते हुए भी शौर्य से बोली अगर
  1367. 1:03:28तुम्हारा कोई जरूरी काम ना हो तो देख लो
  1368. 1:03:31तुम्हारे साथ होने से इन्हें थोड़ी हिम्मत
  1369. 1:03:34मिलेगी। [संगीत] शौर्य बोला मैं वादा तो
  1370. 1:03:38नहीं करता लेकिन कोशिश करूंगा। शौर्य की
  1371. 1:03:41बात सुनकर रागिनी खुश हो गई। उसने धन्यवाद
  1372. 1:03:43देते हुए कहा आपने इतना कह दिया तो मैं
  1373. 1:03:46मान लेती हूं कि आप मेरे साथ जरूर चलोगे।
  1374. 1:03:49रागिनी की बात से युविका चिढ़ रही थी। उसे
  1375. 1:03:52रागिनी द्वारा शौर्य को इतना सम्मान देना
  1376. 1:03:55पसंद [संगीत] नहीं आ रहा था। लेकिन वो कुछ
  1377. 1:03:57कह नहीं पाई। कुलवंत पहले ही शौर्य से
  1378. 1:03:59हारने के बाद ऑफिस जाने की बात कहकर वहां
  1379. 1:04:02से जा चुका था। इसके बाद सभी अपने-अपने घर
  1380. 1:04:05चले गए। शौर्य भी राहुल और शिप्रा के साथ
  1381. 1:04:07शिप्रा के घर आ गया। उसने देखा कि राजदीप
  1382. 1:04:10राय और बीना जी सेंटर टेबल पर बैठे चाय पी
  1383. 1:04:13रहे थे। राजदीप जी ने जब शौर्य, राहुल और
  1384. 1:04:17शिप्रा को घर में आते देखा तो उन्होंने
  1385. 1:04:19संतो को आवाज देते हुए कहा,
  1386. 1:04:22संतो जरा तीन कप चाय और बना देना। फिर
  1387. 1:04:26उन्होंने तीनों से कहा आओ बैठो। तीनों आकर
  1388. 1:04:31सेंटर टेबल पर बैठ गए। राजदीप जी ने शौर्य
  1389. 1:04:34से कहा श्रवण तुम तो बहुत अच्छा टेनिस
  1390. 1:04:37खेलते हो। मैंने छत से देखा जब तुम कुलवंत
  1391. 1:04:41को हरा रहे थे। कुलवंत बहुत अच्छा खिलाड़ी
  1392. 1:04:44है। अगर तुमने उसे हरा दिया है तो मतलब
  1393. 1:04:47तुम भी बेहतरीन खिलाड़ी हो। राजदीप जी की
  1394. 1:04:50बात सुनकर शौर्य हल्की मुस्कान के साथ
  1395. 1:04:52बोला, "जी ऐसा कुछ नहीं है। बस आज मेरा
  1396. 1:04:56नसीब अच्छा था।" तभी राहुल ने तारीफ करते
  1397. 1:04:59हुए कहा, "क्या जीजू, अब इतना भी हम्ल
  1398. 1:05:02होने की जरूरत नहीं है। आप कुलवंत भैया से
  1399. 1:05:05अच्छे खिलाड़ी हो। जब आप सर्विस करते हो
  1400. 1:05:08तो देखने लायक होता है। आपके शरीर की जो
  1401. 1:05:11फ्लेक्सिबिलिटी है, वह तो कमाल है। मैं तो
  1402. 1:05:14चाहता हूं ऐसी फ्लेक्सिबिलिटी मुझ में भी
  1403. 1:05:16आ जाए। इस पर शौर्य मुस्कुराते हुए बोला,
  1404. 1:05:20ज्यादा मुश्किल नहीं है। अगर तुम योग के
  1405. 1:05:22कुछ आसन करो तो जल्दी ही तुम्हें अपने
  1406. 1:05:25शरीर में बदलाव नजर आने लगेगा।
  1407. 1:05:28अगर ऐसी बात है तो आप मुझे सिखा देना
  1408. 1:05:30जीजू। मैं जरूर फॉलो करूंगा। राहुल एक
  1409. 1:05:33आज्ञाकारी शिष्य की तरह बोला। अब तक संतोष
  1410. 1:05:36सबके सामने चाय रखकर [संगीत] जा चुकी थी।
  1411. 1:05:39शौर्य ने जल्दी-जल्दी अपनी चाय खत्म की और
  1412. 1:05:42उठते हुए बोला, "एक जरूरी काम के लिए आज
  1413. 1:05:45मुझे निकलना पड़ेगा। शाम को मिलता हूं।
  1414. 1:05:48इतना कहकर वो अपने कमरे की तरफ बढ़ गया।
  1415. 1:05:51शिप्रा जो अब तक कुछ बोल नहीं रही थी,
  1416. 1:05:53सिर्फ शौर्य की हर एक्टिविटी को ध्यान से
  1417. 1:05:55देख रही थी। [संगीत] जब शौर्य ने राहुल को
  1418. 1:05:58योग के आसनों के बारे में बताया, तो उसे
  1419. 1:06:00आश्चर्य हुआ कि शौर्य को योग की भी इतनी
  1420. 1:06:03अच्छी जानकारी थी। किसी भिखारी का ऐसा
  1421. 1:06:05कायाकल्प शिप्रा ने कभी नहीं सोचा था।
  1422. 1:06:09शौर्य के जाने के बाद राजदीप राय ने
  1423. 1:06:11शिप्रा से कहा। अब तो कोई श्रवण को देखकर
  1424. 1:06:14यह सोच भी नहीं सकता कि यह कभी भिखारी रहा
  1425. 1:06:17होगा। जरूर इसके अतीत में कुछ ऐसा है
  1426. 1:06:20जिसकी वजह से इसे वो जीवन जीना पड़ा था।
  1427. 1:06:24फिर उन्होंने शिप्रा की तरफ देखते हुए
  1428. 1:06:26पूछा। बेटा तुम्हें इसके अतीत के बारे में
  1429. 1:06:30कुछ पता है? अपने पिता का सवाल सुनकर
  1430. 1:06:32शिप्रा बोली बस इतना पता है कि पुश्तैनी
  1431. 1:06:36संपत्ति के लिए इसके परिवार वाले ही इसकी
  1432. 1:06:39जान लेना चाहते थे। एक हादसे के बाद कुछ
  1433. 1:06:42मछुआरों ने इसकी जान बचाई [संगीत] और उसके
  1434. 1:06:44बाद इसने मंदिर में शरण ली। अपने लोगों से
  1435. 1:06:48धोखा खाकर शायद इसे ऐसी विरक्ति हो गई कि
  1436. 1:06:51इसने कभी भी वापस जाने की कोशिश ही नहीं
  1437. 1:06:53की।
  1438. 1:06:55अच्छा तो ऐसी बात है। यानी यह शुरू से
  1439. 1:06:58भिखारी नहीं था। हालात ने इसे वो दौर
  1440. 1:07:01दिखाया था। राजदीप राय सोचते हुए बोले।
  1441. 1:07:04फिर उन्होंने पूछा इसकी पढ़ाई लिखाई के
  1442. 1:07:08बारे में कुछ पता है तुम्हें? नहीं पापा
  1443. 1:07:10इस बारे में मैंने कभी उससे कुछ नहीं पूछा
  1444. 1:07:14लेकिन देखकर [संगीत] लगता है कि यह पढ़ा
  1445. 1:07:15लिखा है। आफ्टर ऑल जिस तरह का जॉब इसे
  1446. 1:07:18मिला है उसे मैनेज करना आसान नहीं होता।
  1447. 1:07:21शिप्रा ने जवाब दिया अच्छा क्या जॉब मिला
  1448. 1:07:25है? राजदीप राय ने उत्सुकता से पूछा तो
  1449. 1:07:28शिप्रा बोली [संगीत] इसे एक कंपनी का
  1450. 1:07:30ब्रांड एंडोर्समेंट संभालने का काम मिला
  1451. 1:07:32है। ऐड कैंपेन के लिए मिस नताशा को हायर
  1452. 1:07:36करने की बात चल रही है और पूरी शूटिंग की
  1453. 1:07:38जिम्मेदारी भी इसी की है। ऐसा काम हर किसी
  1454. 1:07:41के बस की बात नहीं होती। यह तो बड़ी बात
  1455. 1:07:44है। लेकिन इसे यह जॉब मिला कैसे? राजदीप
  1456. 1:07:48राय ने फिर पूछा तो शिप्रा ने कहा यह तो
  1457. 1:07:51मुझे नहीं पता और मैंने पूछा भी नहीं।
  1458. 1:07:54लेकिन हो सकता है इसके कुछ पुराने कनेक्शन
  1459. 1:07:56हो क्योंकि उसी की वजह से हमारी बिग बुल
  1460. 1:07:59के साथ पार्टनरशिप भी हो पाई है। शिप्रा
  1461. 1:08:03की बात सुनकर राजदीप प्राय संतुष्ट नजर
  1462. 1:08:05आए। [संगीत] अब उन्हें यह चिंता नहीं रही
  1463. 1:08:07कि श्रवण कोई नाकारा इंसान है। उसका
  1464. 1:08:10प्रभावशाली व्यक्तित्व वाकई काबिले तारीफ
  1465. 1:08:12था। ऐसा कि कोई भी उससे प्रभावित हो जाए।
  1466. 1:08:16तभी उन्होंने देखा कि शौर्य सीढ़ियों से
  1467. 1:08:18नीचे आ रहा था। वह पूरी तरह तैयार होकर
  1468. 1:08:21आया था।
  1469. 1:08:22[संगीत]
  1470. 1:08:22नीचे आकर उसने शिप्रा से कहा, "मैं निकल
  1471. 1:08:25रहा हूं। मुझे आज जल्दी ऑफिस पहुंचना है।"
  1472. 1:08:29शिप्रा ने उसे रोकते हुए कहा, "अरे जाने
  1473. 1:08:32से पहले नाश्ता तो कर लो। मैं ऑफिस में कर
  1474. 1:08:35लूंगा। अभी मुझे निकलना है।" इतना कहकर
  1475. 1:08:38शौर्य बाहर चला गया। शिप्रा उसे जाते हुए
  1476. 1:08:41देखती रही। दरअसल, आज उसे वहीं पास में
  1477. 1:08:44अपना एक ऑफिस देखना था। [संगीत] साथ ही
  1478. 1:08:46उसे मिस नताशा से मिलकर ऐड के लिए
  1479. 1:08:48एग्रीमेंट भी करना था। उसने शिप्रा से जो
  1480. 1:08:51कुछ भी कहा था अब उसे सच में पूरा करना
  1481. 1:08:53था। शिप्रा के घर से निकलकर शौर्य सीधे
  1482. 1:08:57होटल राजकमल पहुंचा। वहां पहुंचकर उसने
  1483. 1:09:00मेनका के बारे में पूछा तो पता चला कि वो
  1484. 1:09:03अभी तक आई नहीं है। इसके बाद वो विक्रम के
  1485. 1:09:06रूम में चला गया। विक्रम अपने कमरे में
  1486. 1:09:08नाश्ता कर रहा था। जैसे ही उसने शौर्य को
  1487. 1:09:11देखा वो बोला अरे बॉस आप सुबह-सुबह वो भी
  1488. 1:09:16होटल में? सब ठीक तो है? शौर्य ने उसे
  1489. 1:09:19झड़कते हुए कहा, क्या मतलब है तुम्हारा?
  1490. 1:09:22क्या मैं सुबह-सुबह यहां नहीं आ सकता? अरे
  1491. 1:09:25नहीं बॉस, ऐसी बात नहीं है। बस मुझे आपकी
  1492. 1:09:27इतनी सुबह यहां आने की उम्मीद नहीं थी।
  1493. 1:09:30इसीलिए पूछ लिया। विक्रम ने सफाई दी। तो
  1494. 1:09:34फिर क्या उम्मीद थी तुम्हें? शौर्य ने
  1495. 1:09:36हल्की नाराजगी से पूछा। अरे बॉस आप तो
  1496. 1:09:39नाराज हो गए। अच्छा छोड़िए यह सब। यह
  1497. 1:09:42बताइए कि आपने नाश्ता किया या नहीं?
  1498. 1:09:45विक्रम ने बात बदलते हुए कहा। शौर्य ने
  1499. 1:09:48उसकी प्लेट की तरफ देखते हुए कहा, नहीं
  1500. 1:09:51अभी कुछ नहीं खाया। जल्दी से मेरे लिए भी
  1501. 1:09:53कुछ मंगा दो। मेरे पेट में भी चूहे कूद
  1502. 1:09:55रहे हैं। ठीक है बॉस, अभी मंगवाता हूं।
  1503. 1:09:58विक्रम ने तुरंत फोन उठाया और शौर्य की
  1504. 1:10:01पसंद के हिसाब से नाश्ते का आर्डर दे
  1505. 1:10:03दिया। थोड़ी ही देर में एक वेटर ट्रॉली पर
  1506. 1:10:06नाश्ता लेकर कमरे में आया और शौर्य के
  1507. 1:10:08सामने प्लेट सजा दी। शौर्य ने भी विक्रम
  1508. 1:10:12के साथ बैठकर नाश्ता खत्म किया। इसके बाद
  1509. 1:10:14दोनों मेनका से मिलने के लिए कमरे से बाहर
  1510. 1:10:17निकल गए। शौर्य ने सोचा अब तक शायद मेनका
  1511. 1:10:20आ गई होगी। यही सोचकर वो सीधे उसके केबिन
  1512. 1:10:23में पहुंचा। संयोग से इस समय मेनका अपने
  1513. 1:10:26केबिन में मौजूद थी। शौर्य को देखकर वो
  1514. 1:10:29हैरानी से बोली। क्या बात है? आज तो तुम
  1515. 1:10:33बहुत सुबह यहां आ गए हो। हां, आज कुछ खास
  1516. 1:10:36काम था तुमसे। इसीलिए जल्दी आ गया। मुझे
  1517. 1:10:40तुम्हारी मदद चाहिए। शौर्य सामने की
  1518. 1:10:43कुर्सी पर बैठते हुए बोला तो मेनका ने
  1519. 1:10:46उत्सुकता से पूछा अच्छा ऐसा क्या काम पड़
  1520. 1:10:49गया जो तुम इतनी सवेरे मुझसे मिलने आ गए
  1521. 1:10:53हां कुछ ऐसा काम है जो सिर्फ [संगीत] तुम
  1522. 1:10:55ही कर सकती हो इस शहर में ज्यादा लोगों को
  1523. 1:10:58नहीं जानता जिनसे मदद मांग सकूं शौर्य ने
  1524. 1:11:01साफ शब्दों में कहा तो मैं इनका हल्का
  1525. 1:11:04मुस्कुराते हुए बोली अब पहेलियां मत बुझाओ
  1526. 1:11:07सीधे-सीधे बताओ कि तुम्हें कैसी मदद चाहिए
  1527. 1:11:11शौर्य थोड़ा आगे आगे झुक कर बोला, ठीक है।
  1528. 1:11:14मुझे इसी एरिया में एक ऑफिस चाहिए। ऐसी
  1529. 1:11:17जगह जो रेडी टू मूव हो। मेरे पास इतना समय
  1530. 1:11:20नहीं है कि मैं नई जगह पर पूरा सेटअप
  1531. 1:11:22तैयार करूं और मुझे लगता [संगीत] है कि इस
  1532. 1:11:25काम में तुम ही मेरी मदद कर सकती हो।
  1533. 1:11:27क्योंकि तुम्हें इस इलाके की पूरी जानकारी
  1534. 1:11:30है। शौर्य की बात सुनकर मेनका कुछ पल
  1535. 1:11:33सोचती रही। फिर अचानक उसे कुछ ध्यान आया
  1536. 1:11:35तो वह मुस्कुराते हुए शौर्य की तरफ देखने
  1537. 1:11:38लगी। शौर्य ने जब मेनका को स्माइल करते
  1538. 1:11:40हुए देखा तो वह अधीर होकर बोला अब मैं
  1539. 1:11:44तुम्हारी इस मुस्कुराहट का क्या मतलब
  1540. 1:11:46समझूं? अरे मेरे मुस्कुराने का एक और कारण
  1541. 1:11:49है। दरअसल मेरी एक फ्रेंड है जिसका ऑफिस
  1542. 1:11:52यहीं पास की एक बिल्डिंग में है और संयोग
  1543. 1:11:55से उसने मुझसे कहा था कि वो अपना ऑफिस
  1544. 1:11:57बेचना चाहती है। तो मुझे लगता है यह
  1545. 1:12:00तुम्हारे लिए अच्छा ऑप्शन हो सकता है।
  1546. 1:12:02मेनका बोली उसकी बात सुनकर शौर्य खुश हो
  1547. 1:12:06गया और बोला [संगीत] यह तो बहुत अच्छी बात
  1548. 1:12:08है। तो क्यों ना अभी चलकर उस ऑफिस को देख
  1549. 1:12:10लिया जाए। मेरे पास समय कम है और मैं जल्द
  1550. 1:12:13से जल्द [संगीत] अपना ऑफिस सेटअप करना
  1551. 1:12:15चाहता हूं। शौर्य की जल्दीबाजी देखकर
  1552. 1:12:18मेनका बोली, ठीक है, मैं भी अपनी उस दोस्त
  1553. 1:12:22को चाबी के साथ ऑफिस बुला लेती हूं। यह
  1554. 1:12:25कहकर उसने अपना मोबाइल निकाला और कॉल
  1555. 1:12:27मिलाया। कुछ ही पल [संगीत] बाद फोन उठते
  1556. 1:12:30ही मेनका सीधे मुद्दे पर आ गई। अरे रुचि,
  1557. 1:12:33तुम्हारे ऑफिस के लिए मेरे पास एक कस्टमर
  1558. 1:12:35है। अगर तुम इंटरेस्टेड हो तो अभी चाबी
  1559. 1:12:38लेकर ऑफिस पहुंच जाओ। दूसरी तरफ से रुचि
  1560. 1:12:41ने जवाब दिया,
  1561. 1:12:43ठीक है, मैं 15-20 मिनट में पहुंच रही
  1562. 1:12:45हूं।
  1563. 1:12:46शौर्य ने यह सुनकर कहा, तो चलो जल्दी चलते
  1564. 1:12:49हैं। मैं यह मौका हाथ से नहीं जाने देना
  1565. 1:12:52चाहता। मेनका उसकी जल्दीबाजी देखकर हल्के
  1566. 1:12:55आश्चर्य में बोली। घबराओ मत वहां पहुंचने
  1567. 1:12:58में हमें ज्यादा से ज्यादा 10 मिनट
  1568. 1:13:00लगेंगे। अभी [संगीत] यहीं थोड़ा इंतजार कर
  1569. 1:13:02लेते हैं। फिर निकलेंगे। शौर्य ने सहमति
  1570. 1:13:06में सिर हिला दिया। अब उसके पास थोड़ा समय
  1571. 1:13:09था। तो उसने मेनका से कहा। मुझे एक और काम
  1572. 1:13:12है। शायद [संगीत] उसका भी कोई सशन
  1573. 1:13:14तुम्हारे पास हो। मेनका उत्सुकता से बोली
  1574. 1:13:18तो फिर इंतजार किस बात का? बताओ क्या काम
  1575. 1:13:21है? शौर्य ने कहा दरअसल [संगीत] मुझे फेमस
  1576. 1:13:25मॉडल मिस नताशा से मिलना है। एक ब्रांड
  1577. 1:13:28एंडोर्समेंट के लिए मुझे उनकी जरूरत है।
  1578. 1:13:31क्या तुम्हारे पास कोई लिंक है जिससे मैं
  1579. 1:13:34उनसे मिल सकूं? मेनका एक पल के लिए सोच
  1580. 1:13:37में पड़ गई। इसे मिस नताशा क्यों चाहिए?
  1581. 1:13:41और किस कंपनी के लिए? जब उसे कुछ समझ नहीं
  1582. 1:13:43आया तो उसने पूछा किस कंपनी के लिए ब्रांड
  1583. 1:13:47एंडोर्समेंट करना है? शौर्य ने सहजता से
  1584. 1:13:50जवाब दिया एक कंपनी है। तुम बस यह बताओ कि
  1585. 1:13:54क्या तुम्हारे पास कोई ऐसा तरीका है जिससे
  1586. 1:13:56मैं मिस नताशा तक पहुंच सकूं। मेनका
  1587. 1:13:59मुस्कुराई और बोली यह काम भी हो जाएगा।
  1588. 1:14:03लेकिन पहले हम चलकर रुचि से मिलते हैं और
  1589. 1:14:05उसका ऑफिस देखते हैं। ठीक है। पहले वही कर
  1590. 1:14:10लेते हैं। शौर्य ने हामी भरते हुए कहा।
  1591. 1:14:13इसके बाद दोनों होटल से बाहर निकल गए।
  1592. 1:14:15शौर्य ने देखा कि मेनका पैदल ही आगे बढ़
  1593. 1:14:18रही है। तो उसने पूछा क्या हम पैदल हट
  1594. 1:14:22चलकर उस ऑफिस तक जाएंगे? शौर्य की बात
  1595. 1:14:25सुनकर मेनका बोली हां वो ऑफिस ज्यादा दूर
  1596. 1:14:28नहीं है। हम चलकर ही पहुंच जाएंगे। इस तरह
  1597. 1:14:31तुम यहां के मार्केट को भी देख लोगे।
  1598. 1:14:34शौर्य को मेनका का यह सुझाव पसंद आया तो
  1599. 1:14:36वह पैदल ही मेनका के साथ आगे बढ़ गया।
  1600. 1:14:39चलते-चलते शौर्य ने मेनका से पूछा वैसे यह
  1601. 1:14:43[संगीत] ऑफिस था किस चीज के लिए? तो जवाब
  1602. 1:14:46में मेनका ने कहा, एक्चुअली रुचि पहले
  1603. 1:14:49यहां कॉल सेंटर चलाती थी। लेकिन अब उसने
  1604. 1:14:51अपना ऑफिस यहां से शिफ्ट कर लिया है
  1605. 1:14:53क्योंकि इस तरह के जितने भी कॉल सेंटर थे
  1606. 1:14:55वो सब अब शहर के बाहर वाले हिस्से में चले
  1607. 1:14:58गए हैं। इसीलिए अब यह ऑफिस रुचि के लिए
  1608. 1:15:00किसी काम का नहीं रहा और जो दूसरा ऑफिस वो
  1609. 1:15:03शहर के बाहर ले रही है उसके लिए उसे कुछ
  1610. 1:15:05पैसों की जरूरत है। इसीलिए वो इस ऑफिस को
  1611. 1:15:08बेचना चाहती है। शौर्य को मेनकाक की बात
  1612. 1:15:11समझ में आ गई। फिर लगभग 10 मिनट में वो
  1613. 1:15:14लोग एक बिल्डिंग तक पहुंचे। उस बिल्डिंग
  1614. 1:15:16का नाम है न्यू सिटी टावर। लगभग 10 मिनट
  1615. 1:15:19में या उससे थोड़ा पहले मेनका और विक्रम
  1616. 1:15:22के साथ शौर्य उस बिल्डिंग तक पहुंच गया।
  1617. 1:15:24उस बिल्डिंग का नाम न्यू सिटी टावर था।
  1618. 1:15:27शौर्य ने यहां तक का सफर पैदल ही तय किया
  1619. 1:15:30था। उसे जगह बहुत पसंद आई। यह [संगीत]
  1620. 1:15:32पूरी तरह एक कमर्शियल बिल्डिंग थी। शौर्य
  1621. 1:15:35ने मन ही मन सोचा। हां, मुझे ऐसी ही जगह
  1622. 1:15:39चाहिए थी। अभी कुछ ही पल बीते थे कि तभी
  1623. 1:15:42एक कार आकर उनके पास रुकी। कार से एक
  1624. 1:15:44खूबसूरत लड़की बाहर आई। उसे देखते ही
  1625. 1:15:47मेनका जल्दी से उसके पास गई और उससे गले
  1626. 1:15:49मिली। मेनका से अलग होकर वो लड़की बोली
  1627. 1:15:53हां तो अब बताओ किससे लेना है यह स्पेस?
  1628. 1:15:56उसकी जल्दीबाजी देखकर मेनका [संगीत] बोली
  1629. 1:15:58अरे पहले सांस तो ले लो। इस पर लड़की
  1630. 1:16:02मुस्कुराते हुए बोली [संगीत] ले तो ली
  1631. 1:16:04सांस। अब बताओ कौन है? अच्छा बाबा मुझे
  1632. 1:16:07पता है तुम्हारा टाइम बहुत कीमती है। इनसे
  1633. 1:16:10मिलो। मेनका ने परिचय कराते हुए कहा, "यह
  1634. 1:16:13है श्रवण और यह है विक्रम। यह तुम्हारे
  1635. 1:16:16ऑफिस स्पेस में इंटरेस्टेड है।"
  1636. 1:16:19शौर्य आगे बढ़ा और हाथ मिलाया। यह है
  1637. 1:16:22रुचि। वो करीब 24-25 साल की बेहद खूबसूरत
  1638. 1:16:25लड़की है। एक पल [संगीत] के लिए शौर्य
  1639. 1:16:28उसकी खूबसूरती में खो गया। लेकिन जल्दी ही
  1640. 1:16:30संभल भी गया। रुचि शौर्य की स्थिति देखकर
  1641. 1:16:33हल्का मुस्कुरा दी। वो समझ गई थी कि लोग
  1642. 1:16:36अक्सर उसे देखकर कुछ पल के लिए खो जाते
  1643. 1:16:39हैं। उसने हाथ मिलाते हुए कहा
  1644. 1:16:43हेलो मैं रुचि मल्होत्रा और आप शौर्य बोला
  1645. 1:16:47श्रवण लोग मुझे श्रवण ही कहते हैं और यह
  1646. 1:16:50मेरा दोस्त विक्रम है। रुचि ने दोनों का
  1647. 1:16:53अभिवादन किया और टावर की ओर बढ़ते हुए
  1648. 1:16:56बोली चलिए पहले ऑफिस देख लेते हैं। लिफ्ट
  1649. 1:17:00की तरफ बढ़ते हुए रुचि ने मेनका से पूछा।
  1650. 1:17:04वैसे ऑफिस लेना किसे है? इससे पहले कि
  1651. 1:17:08मेनका कुछ कहती शौर्य ने जवाब दिया, यह
  1652. 1:17:11ऑफिस मिस्टर विक्रम को [संगीत] लेना है।
  1653. 1:17:14यहां का काम मैं देखूंगा इसीलिए मैं इनके
  1654. 1:17:16साथ हूं। रुचि ने सहमति में सिर हिला
  1655. 1:17:19दिया। विक्रम भी चुप रहा क्योंकि वह शौर्य
  1656. 1:17:22की योजना समझ रहा था। चारों लोग लिफ्ट में
  1657. 1:17:25सातवें फ्लोर पर पहुंचे और रुचि के
  1658. 1:17:27पीछे-पीछे उसके ऑफिस की ओर बढ़े। लेकिन
  1659. 1:17:30जैसे ही रुचि अपने ऑफिस के पास पहुंची
  1660. 1:17:33उसने देखा कि दरवाजा पहले से खुला हुआ है।
  1661. 1:17:36वो हैरान रह गई और बोली मैं तो यह गेट बंद
  1662. 1:17:40करके गई थी। फिर यह खुला कैसे? मेनका ने
  1663. 1:17:43भी चौंकते हुए कहा इसका मतलब अंदर कोई है
  1664. 1:17:47क्या? चलो देखते हैं। रुचि ने ग्लास डोर
  1665. 1:17:52को धक्का दिया और अंदर चली गई। उसके पीछे
  1666. 1:17:54शौर्य, विक्रम और मेनका भी अंदर आ गए।
  1667. 1:17:57अंदर आते ही उन्होंने देखा कि सभी लाइट्स
  1668. 1:18:00जल रही थी। जैसे ही वह आगे बढ़े अंदर से
  1669. 1:18:03कुछ आवाजें सुनाई देने लगी। रुचि तेजी से
  1670. 1:18:06अंदर गई और उसने वहां जो देखा उससे वह
  1671. 1:18:09चौंक गई। ऑफिस के मेन एरिया में कुछ लोग
  1672. 1:18:12बैठे थे और उन्हीं में उसके पापा देवव्रत
  1673. 1:18:15मल्होत्रा भी मौजूद थे। वो तुरंत उनके पास
  1674. 1:18:18जाकर बोली
  1675. 1:18:20पापा आप यहां अगर आना ही था मुझे बता तो
  1676. 1:18:24देते। देवव्रत मल्होत्रा भी उसे देखकर
  1677. 1:18:27हैरान थे। उन्होंने कहा
  1678. 1:18:30दरअसल विहान का फोन आया था। यह आज ही डील
  1679. 1:18:34फाइनल करना चाहता था इसीलिए मैं आ गया।
  1680. 1:18:37रुचि ने सामने खड़े विहान रायजादा को देखा
  1681. 1:18:40और सख्त आवाज में बोली पापा हमारी बात तो
  1682. 1:18:44पहले ही हो चुकी है ना। इनकी डील हमें
  1683. 1:18:46मंजूर नहीं है। फिर यह सब क्यों? उधर
  1684. 1:18:50विहान रायजादा को देखकर शौर्य के दिमाग
  1685. 1:18:53में एक झटका सा लगा। उसे याद आया यह वही
  1686. 1:18:56शख्स है जिसने शादी के मंडप में शिप्रा को
  1687. 1:18:59छोड़ दिया था। या यूं कहें कि मुख्तार के
  1688. 1:19:02डर से वो भाग गया था। खैर जो हुआ वो अतीत
  1689. 1:19:05की बात है। कहीं ना कहीं वो हादसा शौर्य
  1690. 1:19:08के लिए अच्छा ही साबित हुआ। क्योंकि उसी
  1691. 1:19:10की वजह से आज वो खुद शिप्रा का पति है।
  1692. 1:19:14उसने देखा कि विहान के साथ उसके दो बाउंसर
  1693. 1:19:16और एक व्यक्ति हैं जो उसका वकील लग रहा
  1694. 1:19:19था। शौर्य को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि इस
  1695. 1:19:22प्रॉपर्टी में विहान रायजादा भी दिलचस्पी
  1696. 1:19:24रखता है। लेकिन शौर्य को भी यह जगह बहुत
  1697. 1:19:26पसंद आ चुकी थी। वो किसी भी हाल में इस
  1698. 1:19:29ऑफिस को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता
  1699. 1:19:32था। फिलहाल वो स्थिति को समझना चाहता था
  1700. 1:19:35कि विहान की डील कहां तक पहुंची है।
  1701. 1:19:38इसीलिए वो चुपचाप रुचि और उसके पापा की
  1702. 1:19:40बातचीत सुनने लगा। रुचि ने अपने पापा से
  1703. 1:19:43पूछा तो अब ये क्या डील दे रहा है पापा?
  1704. 1:19:48रुचि की बात सुनकर देवव्रत मल्होत्रा बोले
  1705. 1:19:52यह अभी भी 45 करोड़ पर अटके हैं। लेकिन
  1706. 1:19:55मेरा फाइनल ऑफर 51 करोड़ है। अपने पापा की
  1707. 1:20:00बात सुनकर रुचि ने विहान की तरफ देखते हुए
  1708. 1:20:02कहा। तो मिस्टर विहान क्या आपकी यही फाइनल
  1709. 1:20:06डील है या आप 51 करोड़ में फाइनल करने के
  1710. 1:20:09लिए तैयार हैं?
  1711. 1:20:12विहान ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया।
  1712. 1:20:15मिस रुचि मार्केट के हिसाब से मैं जो
  1713. 1:20:17प्राइस ऑफर कर रहा हूं वो पहले ही ज्यादा
  1714. 1:20:20है। इसीलिए मेरा सुझाव है कि आप लालच ना
  1715. 1:20:23करें और 45 करोड़ की इस डील को स्वीकार कर
  1716. 1:20:26लें। विहान की बात सुनकर रुचि ने एक नजर
  1717. 1:20:29मेनका, विक्रम और शौर्य की तरफ डाली और
  1718. 1:20:32बोली, आपने देख ही लिया कि यहां क्या चल
  1719. 1:20:35रहा है। अब मैं आपसे जानना चाहती हूं कि
  1720. 1:20:38आप क्या कहते हैं। शौर्य ने रुचि की बात
  1721. 1:20:41सुनी और तुरंत मन ही मन पूरी सिचुएशन को
  1722. 1:20:44एनालाइज करने लगा। उसने गौर किया कि
  1723. 1:20:47लोकेशन के हिसाब से यह ऑफिस बेहद प्रीमियम
  1724. 1:20:50है। शायद उसे [संगीत] दोबारा इतनी अच्छी
  1725. 1:20:53जगह ना मिले। साथ ही यहां पहले से ही
  1726. 1:20:56सेटअप तैयार था। फर्नीचर, कंप्यूटर और
  1727. 1:20:59बाकी सुविधाएं। अगर वह यह ऑफिस लेता है तो
  1728. 1:21:02वह अगले ही दिन से काम शुरू कर सकता है।
  1729. 1:21:05जबकि नई जगह लेने पर उसे सेटअप तैयार करने
  1730. 1:21:08में काफी समय लग जाता। इन सब बातों को
  1731. 1:21:11सोचकर शौर्य ने फैसला ले लिया। वो आगे
  1732. 1:21:14बढ़ा और आत्मविश्वास से बोला। हम आपकी
  1733. 1:21:17शर्त के अनुसार इस ऑफिस के लिए 51 करोड़
  1734. 1:21:20देने को तैयार हैं। लेकिन मेरी एक शर्त
  1735. 1:21:24है।
  1736. 1:21:26सभी की नजर एक साथ शौर्य पर टिक गई। शौर्य
  1737. 1:21:30ने आगे कहा
  1738. 1:21:32यहां जो भी फर्नीचर, कंप्यूटर और बाकी
  1739. 1:21:35सेटअप पहले से मौजूद है। उसे उसी स्थिति
  1740. 1:21:38में यहीं रहने दिया जाए। अगर उसके लिए अलग
  1741. 1:21:41से भुगतान करना पड़े तो मैं उसके लिए भी
  1742. 1:21:43तैयार हूं। [संगीत]
  1743. 1:21:45शौर्य की बात सुनकर रुचि गौर से उसे देखने
  1744. 1:21:48लगी। यह क्या? इस आदमी ने अकेले ही फैसला
  1745. 1:21:51कर लिया। जबकि अभी तक तो यही कहा जा रहा
  1746. 1:21:54था कि असली ओनर विक्रम होगा और शौर्य
  1747. 1:21:57सिर्फ देखने आया है। फिर इसने खुद ही इतना
  1748. 1:22:00बड़ा फैसला कैसे ले लिया? उसके मन में
  1749. 1:22:03सवाल उठा और सबसे हैरानी की बात विक्रम ने
  1750. 1:22:06भी उसे रोका नहीं। शौर्य ने एक बार भी
  1751. 1:22:08विक्रम की राय जानने की कोशिश नहीं की और
  1752. 1:22:11सीधे 51 करोड़ का ऑफर स्वीकार कर लिया।
  1753. 1:22:15असल हैरानी तो इस बात की थी कि बिना किसी
  1754. 1:22:17नेगोशिएशन के कोई इतनी बड़ी डील कैसे मान
  1755. 1:22:20सकता है। दूसरी तरफ देवव्रत मल्होत्रा भी
  1756. 1:22:23शौर्य की बात सुनकर हैरान थे।
  1757. 1:22:27वो इतने दिनों से विहान रायजादा से कीमत
  1758. 1:22:29बढ़वाने की कोशिश कर रहे थे। अगर विहान 2
  1759. 1:22:32करोड़ भी और बढ़ा देता तो वह उसी के साथ
  1760. 1:22:35डील फाइनल कर देते। लेकिन यहां तो बिना
  1761. 1:22:37किसी बहस के ही पूरी कीमत मान ली गई थी।
  1762. 1:22:41उधर शौर्य की बात सुनकर विहान के चेहरे पर
  1763. 1:22:44साफ नाराजगी दिखाई देने लगी। वो शौर्य को
  1764. 1:22:46घूरते हुए सोचने लगे।
  1765. 1:22:49यह कौन है जो बीच में आकर मेरी डील बिगाड़
  1766. 1:22:52रहा है। उसने तुरंत स्थिति संभालने की
  1767. 1:22:55कोशिश की और देवव्रत मल्होत्रा से बोला।
  1768. 1:22:57मिस्टर मल्होत्रा मैं कई दिनों से इस डील
  1769. 1:23:00पर काम कर रहा हूं। 40 से बढ़ाकर 45 करोड़
  1770. 1:23:03तक आ गया हूं। लेकिन अचानक आपकी बेटी किसी
  1771. 1:23:06और को बीच में ले आई है। अगर आपको ज्यादा
  1772. 1:23:09कीमत चाहिए तो ठीक है। मैं आपकी खुशी के
  1773. 1:23:11लिए 2 करोड़ और बढ़ा देता हूं। अब मैं इस
  1774. 1:23:14ऑफिस के लिए 47 करोड़ ऑफर करता हूं। आइए
  1775. 1:23:18इस डील को यहीं फाइनल कर लेते हैं। विहान
  1776. 1:23:23की बात खत्म होते ही रुचि आगे बढ़ी और
  1777. 1:23:25सख्त स्वर में बोली
  1778. 1:23:27लगता है आपको ठीक से सुनाई नहीं देता
  1779. 1:23:29मिस्टर रायजादा मिस्टर श्रवण ने अभी-अभी
  1780. 1:23:32इस ऑफिस के लिए हमारी 51 करोड़ की डील
  1781. 1:23:34स्वीकार कर ली है। अब यह ऑफिस मिस्टर
  1782. 1:23:37विक्रम का होने जा रहा है। आपने नेगोशिएशन
  1783. 1:23:40में बहुत समय लगा दिया। इसीलिए अब हम आपके
  1784. 1:23:44साथ ही डील नहीं कर सकते। इस पर विहान
  1785. 1:23:46झुंझुलाकर बोला
  1786. 1:23:49ये आप कैसी बात कर रही हैं मिस रुचि? हम
  1787. 1:23:51इतने दिनों से इस पर काम कर रहे हैं और अब
  1788. 1:23:54आप मना कर रही हैं। यह ठीक नहीं है। इस पर
  1789. 1:23:58रुचि हल्की मुस्कान के साथ बोली यही तो
  1790. 1:24:01आपकी गलती है मिस्टर रायजादा। आप इतने
  1791. 1:24:04दिनों से सिर्फ नेगोशिएशन ही करते रहे।
  1792. 1:24:06जबकि जिसे सच में खरीदना होता है वो एक पल
  1793. 1:24:10में फैसला कर लेता है। जैसा कि अभी मिस्टर
  1794. 1:24:12श्रवण ने किया। यह अभी-अभी यहां आए हैं और
  1795. 1:24:15बिना समय बर्बाद किए अपना निर्णय दे दिया।
  1796. 1:24:19तो हम इन्हें कैसे मना कर सकते हैं?
  1797. 1:24:21इसीलिए आप हमें माफ करें और अपने लिए कोई
  1798. 1:24:24दूसरा ऑफिस देख लें जो आपके बजट में हो।
  1799. 1:24:27रुचि की बात सुनकर विहान का चेहरा गुस्से
  1800. 1:24:30से लाल हो गया। उसने दांत भीते हुए कहा,
  1801. 1:24:34"ल लगता है आप समझ नहीं रही हैं कि आप
  1802. 1:24:36क्या कर रही हैं। हमें यह ऑफिस हर हाल में
  1803. 1:24:39चाहिए और अगर नहीं मिला, तो इसके गंभीर
  1804. 1:24:42परिणाम भी हो सकते हैं। इसीलिए बेहतर होगा
  1805. 1:24:46कि आप मेरा ऑफर स्वीकार कर लें और यह डील
  1806. 1:24:49मेरे साथ फाइनल करें।
  1807. 1:24:52विहान की इस खुली धमकी के बाद माहौल अचानक
  1808. 1:24:55भारी हो गया। तभी मेनका आगे बढ़ी और ठंडी
  1809. 1:24:58लेकिन तीखी आवाज में बोली मिस्टर रायजादा
  1810. 1:25:03क्या आप कुछ ज्यादा ही बड़े बोल नहीं बोल
  1811. 1:25:05रहे हैं आपको अंदाजा भी है कि आप किसके
  1812. 1:25:09सामने मिस रुचि को धमकाने की कोशिश कर रहे
  1813. 1:25:11हैं मेनका को बीच में आते देखकर विहान
  1814. 1:25:14रायजादा ने उसकी तरफ देखा और एक ही नजर
  1815. 1:25:17में पहचान लिया और अपनी आवाज को थोड़ा नरम
  1816. 1:25:20करते हुए बोला
  1817. 1:25:22तो मिस मेनका आप भी यहां आई हुई हैं क्या
  1818. 1:25:25आप भी इस ऑफिस को लेने में इंटरेस्टेड है।
  1819. 1:25:27इस पर मेनका ने रूखे और सख्त स्वर में
  1820. 1:25:30कहा, नहीं मैं तो नहीं पर मेरे दोस्त यह
  1821. 1:25:33ऑफिस लेना चाहते हैं और उन्होंने मिस्टर
  1822. 1:25:35मल्होत्रा का ऑफर स्वीकार कर लिया है।
  1823. 1:25:38इसलिए अब आपको मिस रुचि को धमकाने की कोई
  1824. 1:25:40जरूरत नहीं है। अगर आपने पहले ही इनका ऑफर
  1825. 1:25:43मान लिया होता तो शायद यह ऑफिस आपका होता।
  1826. 1:25:47लेकिन अब इसे अपने हाथ से निकलते देखकर
  1827. 1:25:49मिस रुचि को धमकाना यह बिल्कुल सही नहीं
  1828. 1:25:52है।
  1829. 1:25:54विहान मेनका की बात सुनकर सकपका गया।
  1830. 1:25:57लेकिन अगले ही पल खुद को संभालते हुए बोला
  1831. 1:26:00मिस मेनका मेरा आपसे कोई लेना देना नहीं
  1832. 1:26:03है और ना ही मैं आपके किसी काम में दखल दे
  1833. 1:26:06रहा हूं। यह मेरे और देवव्रत मल्होत्रा के
  1834. 1:26:08बीच की बात है। हम इस डील को फाइनल करने
  1835. 1:26:11के बेहद करीब थे और आप बीच में आकर इसे
  1836. 1:26:14बिगाड़ रही हैं।
  1837. 1:26:17मेनका ने तुरंत पलट कर जवाब दिया, "अगर
  1838. 1:26:20ऐसा था तो आपने अपनी डील पहले ही फाइनल
  1839. 1:26:23क्यों नहीं कर ली? आज तक इंतजार किस बात
  1840. 1:26:26का था? और दूसरी बात, कोई अपनी संपत्ति
  1841. 1:26:29किसे बेचना चाहता है, यह उसका अधिकार है।
  1842. 1:26:32इसीलिए किसी को धमका कर अपना काम निकालने
  1843. 1:26:35की कोशिश तो आप भूल ही जाइए।" विहान के
  1844. 1:26:38चेहरे पर चिढ़ साफ दिखाई देने लगी। वो
  1845. 1:26:41बोला
  1846. 1:26:42मुझे आपसे यह सीखने की जरूरत नहीं है कि
  1847. 1:26:45मैं अपना काम कैसे करता हूं। मैं पहले इस
  1848. 1:26:48डील को फाइनल करने के करीब था। आप आखिरी
  1849. 1:26:51वक्त में आकर मेरा काम खराब करने की कोशिश
  1850. 1:26:53मत कीजिए।
  1851. 1:26:55इतना कहकर वो देवव्रत मल्होत्रा की तरफ
  1852. 1:26:57मुड़ा और बोला मिस्टर मल्होत्रा आप मेरी
  1853. 1:27:01बात समझ सकते हैं। हमारे पुराने संबंध
  1854. 1:27:03हैं। इसलिए उम्मीद है कि आप फैसला लेते
  1855. 1:27:06वक्त उसे ध्यान में रखेंगे।
  1856. 1:27:09देवव्रत मल्होत्रा विहान की बातों में
  1857. 1:27:11छिपी धमकी को अच्छी तरह समझ रहे थे। लेकिन
  1858. 1:27:14शौर्य का ऑफर सुनने के बाद वो 4 करोड़ का
  1859. 1:27:17नुकसान उठाने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं
  1860. 1:27:19थे। तभी शौर्य आगे बढ़ा और बोला मिस रुचि
  1861. 1:27:23क्या आप मुझे अपना अकाउंट नंबर देंगी?
  1862. 1:27:27शौर्य की बात सुनते ही देवव्रत मल्होत्रा
  1863. 1:27:29खुद आगे आए और अपने मोबाइल में अकाउंट
  1864. 1:27:31नंबर दिखा दिया। शौर्य ने एक नजर उस नंबर
  1865. 1:27:35पर डाली और फिर विक्रम की तरफ देखा।
  1866. 1:27:37विक्रम तुरंत समझ गया कि शौर्य क्या चाहता
  1867. 1:27:40है। वो आगे बढ़ा, मल्होत्रा जी का मोबाइल
  1868. 1:27:42लिया, अपना फोन निकाला और कुछ ही सेकंड
  1869. 1:27:45में ट्रांजैक्शन प्रोसेस कर दिया। कमरे
  1870. 1:27:48में हल्की खामोशी छा गई और तभी बीप की
  1871. 1:27:51आवाज के साथ देवव्रत मल्होत्रा के मोबाइल
  1872. 1:27:54पर मैसेज आया। उन्होंने स्क्रीन देखी और
  1873. 1:27:57उनकी आंखें फैल गई। कुछ पल तक मानो उन्हें
  1874. 1:28:00यकीन ही नहीं हुआ। फिर वो रुचि के पास गए
  1875. 1:28:03और धीमे स्वर में बोले [संगीत]
  1876. 1:28:06पैसे आ गए क्या? रुचि के चेहरे पर भी
  1877. 1:28:10हैरानी साफ थी। बिना किसी एग्रीमेंट के
  1878. 1:28:14इतनी बड़ी रकम सीधे अकाउंट में ट्रांसफर
  1879. 1:28:18वो अब तक इस डर में थी कि कहीं विहान को
  1880. 1:28:21मना करने के बाद शौर्य भी पीछे ना हट जाए।
  1881. 1:28:24लेकिन अब सब कुछ साफ था। उसने जल्दी से
  1882. 1:28:26पूछा कितने पैसे आए हैं? देवव्रत
  1883. 1:28:30मल्होत्रा ने कहा पूरे 51 करोड़।
  1884. 1:28:35रुचि ने फिर एक बार शौर्य की तरफ देखा। इस
  1885. 1:28:38बार उसकी नजर में सिर्फ हैरानी नहीं
  1886. 1:28:40सम्मान भी था। उसने कहा था कि वो सिर्फ
  1887. 1:28:43काम संभालेगा। लेकिन जिस तरह से उसने पूरी
  1888. 1:28:46डील अपने हाथ में लेकर खत्म कर दी। यह कुछ
  1889. 1:28:49और ही कहानी बता रहा था। रुचि विहान की
  1890. 1:28:51तरफ मुड़ी और ठंडे लेकिन स्पष्ट स्वर में
  1891. 1:28:54बोली।
  1892. 1:28:56अब आपके कुछ भी कहने से कोई फर्क नहीं
  1893. 1:28:58पड़ेगा। मिस्टर रायजादा हम पेमेंट रिसीव
  1894. 1:29:01कर चुके हैं। इसलिए आज से यह ऑफिस मिस्टर
  1895. 1:29:04विक्रम का है। बाकी पेपर वर्क एक-द दिन
  1896. 1:29:07में पूरा कर लिया जाएगा। विहान रायजादा
  1897. 1:29:10स्तब्ध खड़ा था। उसने आज तक इतनी तेजी से
  1898. 1:29:14किसी डील को फाइनल होते नहीं देखा था।
  1899. 1:29:17उसका चेहरा गुस्से से लाल था और मन में
  1900. 1:29:20सिर्फ एक ही सवाल था। आखिर यह श्रवण है
  1901. 1:29:24कौन? विहान रायजादा ने सोचा नहीं था कि
  1902. 1:29:27कोई इतनी जल्दी किसी डील को फाइनल कर सकता
  1903. 1:29:30है। वो भी बिना किसी पेपर वर्क के एक साथ
  1904. 1:29:33पूरे पैसे देकर। यह कोई छोटी बात नहीं थी।
  1905. 1:29:36यानी उस व्यक्ति को खुद पर कितना भरोसा था
  1906. 1:29:39कि उसके साथ कुछ गलत नहीं हो सकता। आखिर
  1907. 1:29:43कौन था यह व्यक्ति? विहान रायजादा ने आज
  1908. 1:29:46से पहले ना तो विक्रम के बारे में सुना था
  1909. 1:29:48और ना ही शौर्य के बारे में। हां, वो मिस
  1910. 1:29:51मेनका को होटल राजकमल की मैनेजर के रूप
  1911. 1:29:54में जानता था क्योंकि उसके ऊपर राजा साहब
  1912. 1:29:56का हाथ था। इसीलिए कोई भी मेनका के साथ
  1913. 1:29:59बदतमीजी करने की हिम्मत नहीं कर सकता था।
  1914. 1:30:02हर जगह उसकी इज्जत होती थी। पर जैसा कि
  1915. 1:30:05मेनका ने खुद कहा था कि शौर्य और विक्रम
  1916. 1:30:08उसके जानने वाले हैं। यानी उसका कोई
  1917. 1:30:10डायरेक्ट रिश्ता उन दोनों के साथ नहीं था।
  1918. 1:30:13विहान रायजादा को यह बात भी परेशान कर रही
  1919. 1:30:16थी कि उसके सामने यह डील हो गई और वह कुछ
  1920. 1:30:19भी नहीं कर पाया। एक तरह से यह उसकी
  1921. 1:30:22बेइज्जती ही थी। जो चीज वो चाहता था उसके
  1922. 1:30:25सामने किसी और ने उसे हासिल कर लिया। इतनी
  1923. 1:30:28आसानी से वो इस ऑफिस को अपने हाथ से जाने
  1924. 1:30:31नहीं दे सकता था। एक तरह से यह उसके ईगो
  1925. 1:30:34को भी चोट दे रहा था। उसने एक बार फिर
  1926. 1:30:37देवव्रत मल्होत्रा से कहा। मिस्टर
  1927. 1:30:40मल्होत्रा अगर आपकी यही जिद है कि आप इस
  1928. 1:30:43ऑफिस को 51 करोड़ से कम में नहीं बेचेंगे
  1929. 1:30:46तो ठीक है। मैं आपको 51 करोड़ देने के लिए
  1930. 1:30:49तैयार हूं। पर यह ऑफिस मुझे ही चाहिए।
  1931. 1:30:54अब हैरान होने की बारी मिस्टर देवव्रत
  1932. 1:30:56मल्होत्रा की थी। वो आश्चर्य से विहान
  1933. 1:30:59रायजादा की तरफ देखने लगे। उन्हें समझ
  1934. 1:31:01नहीं आया कि जो विहान अभी तक 45 करोड़ से
  1935. 1:31:04थोड़ा भी ऊपर बढ़ने को तैयार नहीं था वो
  1936. 1:31:07अचानक 51 करोड़ देने को कैसे राजी हो गया।
  1937. 1:31:11पर अब वो क्या कर सकते थे? पैसे तो उन्हें
  1938. 1:31:13पहले ही मिल चुके थे। उन्होंने खुद को
  1939. 1:31:16संभालते हुए कहा
  1940. 1:31:19मिस्टर रायजादा
  1941. 1:31:21मेरी बेटी ने कहा ना कि अब कुछ नहीं हो
  1942. 1:31:23सकता। मिस्टर विक्रम हमें पेमेंट कर चुके
  1943. 1:31:26हैं। इसलिए अब हमारे हाथ में कुछ नहीं है।
  1944. 1:31:30अगर आप थोड़ी देर पहले तैयार हो गए होते
  1945. 1:31:32तो शायद यह ऑफिस आपका होता।
  1946. 1:31:36विहान रायजादा ने तुरंत कहा अभी इन्होंने
  1947. 1:31:39सिर्फ पैसे ट्रांसफर किए हैं। मिस्टर
  1948. 1:31:40मल्होत्रा आपने अभी प्रॉपर्टी इनके नाम
  1949. 1:31:43नहीं की है। इसलिए मालिकाना हक अभी भी
  1950. 1:31:46आपका ही है। आप इनके पैसे वापस कीजिए और
  1951. 1:31:49मेरे एग्रीमेंट पेपर पर साइन कीजिए। अब
  1952. 1:31:52मैं आपकी मांगी हुई कीमत देने को तैयार
  1953. 1:31:54हूं। तो बहाने मत बनाइए और प्रक्रिया शुरू
  1954. 1:31:57कीजिए।
  1955. 1:31:59विहान की ये धमकी भरी बात रुचि मल्होत्रा
  1956. 1:32:01को बिल्कुल पसंद नहीं आई। वो उसके सामने
  1957. 1:32:03आकर बोली मिस्टर विहान यह आपका ऑफिस नहीं
  1958. 1:32:08है कि आप हमें यहां धमका रहे हैं। ऐसी
  1959. 1:32:11बातें अपने ऑफिस या घर में कीजिए। यह सब
  1960. 1:32:14यहां नहीं चलेगा। हमने इस ऑफिस का पेमेंट
  1961. 1:32:17रिसीव कर लिया है। इसलिए अब यह ऑफिस मेरी
  1962. 1:32:20तरफ से मिस्टर विक्रम को ही जाएगा। वो आगे
  1963. 1:32:23बोली उन्होंने बिना किसी नेगोशिएशन के
  1964. 1:32:26हमारी बताई हुई कीमत पर सीधा पेमेंट
  1965. 1:32:28ट्रांसफर कर दिया है। इसलिए हम लीगली
  1966. 1:32:31उन्हें ही यह प्रॉपर्टी देने के लिए बाध्य
  1967. 1:32:33हैं। अब इस प्रॉपर्टी से जुड़ी कोई भी बात
  1968. 1:32:36करनी है तो आप मिस्टर शौर्य या मिस्टर
  1969. 1:32:39विक्रम से करें क्योंकि अब यह प्रॉपर्टी
  1970. 1:32:41पर मालिकाना हक उन्हीं का है। क्या बकवास
  1971. 1:32:44है यह? इतने दिनों तक जो मैं यहां चक्कर
  1972. 1:32:47लगाकर जूते घिस रहा हूं। क्या वो यह देखने
  1973. 1:32:50के लिए कि कोई नया बंदा इस शहर में आए और
  1974. 1:32:52मेरे किए कराए पर पानी फेर कर चला जाए? यह
  1975. 1:32:56कहते हुए विहान रायजादा के नथने फूलने
  1976. 1:32:59लगे। विहान रायजादा को गुस्से में देखकर
  1977. 1:33:02उसके दोनों बाउंसर उसके सामने आकर खड़े हो
  1978. 1:33:05गए थे। जैसे वे इसी इंतजार में हो कि कब
  1979. 1:33:08विहान रायजादा आदेश दे और वे यहां मौजूद
  1980. 1:33:11लोगों की अकड़ ढीली कर दें। शौरभ स्थिति
  1981. 1:33:15को और ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर सकता था।
  1982. 1:33:17वो आगे बढ़कर विहान रायजादा के सामने आया
  1983. 1:33:20और बोला
  1984. 1:33:22मिस्टर रायजादा
  1985. 1:33:24अगर आपको अपना खून जलाना है तो कहीं और
  1986. 1:33:27जाकर जलाइए। यहां उसका कोई फायदा नहीं
  1987. 1:33:30होने वाला। आपकी जानकारी के लिए बता दूं
  1988. 1:33:33कि हमने इस प्रॉपर्टी का फुल और फाइनल
  1989. 1:33:35पेमेंट कर दिया है। इसलिए अब यह प्रॉपर्टी
  1990. 1:33:39हमारे अधिकार क्षेत्र में आती है। इससे
  1991. 1:33:41जुड़ी [संगीत] कोई भी बात करनी है तो
  1992. 1:33:44मुझसे कीजिए। मिस्टर देवव्रत मल्होत्रा या
  1993. 1:33:47रुचि मल्होत्रा का इसमें अब कोई हस्तक्षेप
  1994. 1:33:49नहीं होगा।
  1995. 1:33:51शौर्य की बात सुनकर विहान रायजादा का सिर
  1996. 1:33:54गुस्से से फट पड़ा। वो अपने शब्दों पर
  1997. 1:33:57कंट्रोल नहीं रख सका। वो मिस मेनका का
  1998. 1:33:59लिहाज भी भूल गया और शौर्य से बोला।
  1999. 1:34:03तुम हो कौन? जो मुझसे इस तरह बात करने की
  2000. 1:34:06हिम्मत कर रहे हो। तुम मुझे जानते नहीं
  2001. 1:34:08हो। तुम सोच भी नहीं सकते कि मैं तुम्हारा
  2002. 1:34:11क्या हाल कर सकता हूं। इस पर शौर्य हंसते
  2003. 1:34:14हुए बोला [हंसी]
  2004. 1:34:17तुम्हें कौन नहीं जानता मिस्टर विहान
  2005. 1:34:19रायजादा
  2006. 1:34:21सारा शहर जानता है कि तुम एक भगोड़े हो जो
  2007. 1:34:24अपनी शादी के दिन एक गुंडे के डर से अपनी
  2008. 1:34:27होने वाली पत्नी को अकेला छोड़कर भाग गया
  2009. 1:34:30था। सच कहूं तो तुमसे ज्यादा कायर इंसान
  2010. 1:34:33मैंने आज तक नहीं देखा। और तुम मुझे धमकी
  2011. 1:34:36दे रहे हो।
  2012. 1:34:38शौर्य के दिल में जो गुस्सा था वो उसकी
  2013. 1:34:41बातों में साफ झलक रहा था। उसकी बात सुनकर
  2014. 1:34:44ऐसा लगा जैसे किसी ने विहान रायजादा की
  2015. 1:34:46दुखती नस पर हाथ रख दिया हो। वो और ज्यादा
  2016. 1:34:50तिलमिला उठा। अब वो खुद पर बिल्कुल भी
  2017. 1:34:53काबू नहीं रख सका और गरज कर अपने बाउंसरों
  2018. 1:34:55से बोला। तुम दोनों मेरा मुंह क्या देख
  2019. 1:34:58रहे हो? इस आदमी को इतना मारो कि इसकी एक
  2020. 1:35:00भी हड्डी सलामत नहीं रहनी चाहिए। जैसे ही
  2021. 1:35:04आदेश मिला दोनों बाउंसर शौर्य पर झपट
  2022. 1:35:06पड़े। लेकिन शौर्य पहले से तैयार था। जैसे
  2023. 1:35:10ही वे उसके करीब पहुंचे, वो फुर्ती से दो
  2024. 1:35:12कदम पीछे हट गया। बाउंसरों का वार खाली
  2025. 1:35:15गया और वह दोनों लड़खड़ा गए। हालांकि अगले
  2026. 1:35:18ही पल उन्होंने खुद को संभाल लिया और जलती
  2027. 1:35:21निगाहों से शौर्य को घूरने लगे। मेनका यह
  2028. 1:35:24सब देखती ही रह गई। उसे उम्मीद नहीं थी कि
  2029. 1:35:26उसके सामने होते हुए भी विहान रायजादा इस
  2030. 1:35:29हद तक चला जाएगा। वो तुरंत आगे बढ़ी और
  2031. 1:35:32सख्त आवाज में बोली। मिस्टर विहान आप समझ
  2032. 1:35:35भी रहे हैं कि आप क्या करने जा रहे हैं।
  2033. 1:35:38इसका परिणाम बेहद गंभीर हो सकता है। लेकिन
  2034. 1:35:42विहान रायजादा ने उसकी बातों को नजरअंदाज
  2035. 1:35:45करते हुए कहा मिस मेनका मैं आपसे उलझना
  2036. 1:35:48नहीं चाहता। लेकिन इस आदमी को मैं नहीं
  2037. 1:35:50छोडूंगा। चाहे इसके लिए मुझे कुछ भी क्यों
  2038. 1:35:52ना झेलना पड़े।
  2039. 1:35:55मेनका को यकीन नहीं हुआ कि उसकी बात को
  2040. 1:35:57इतनी आसानी से नजरअंदाज कर दिया गया। उसने
  2041. 1:36:00विक्रम की तरफ देखा जिससे कह रही हो तुम
  2042. 1:36:03खड़े-खड़े क्या देख रहे हो? आगे बढ़ो।
  2043. 1:36:06लेकिन विक्रम के चेहरे पर जरा भी चिंता
  2044. 1:36:08नहीं थी। उल्टा वो इस पूरे सीन को एंजॉय
  2045. 1:36:11करता हुआ नजर आ रहा था। विक्रम के चेहरे
  2046. 1:36:14की मुस्कान को देखकर मेनका को एक पल के
  2047. 1:36:16लिए शक हुआ। क्या यह सच में शौर्य का
  2048. 1:36:19पर्सनल असिस्टेंट या बॉडीगार्ड है? जब उसे
  2049. 1:36:22वहां से भी कोई उम्मीद नहीं मिली, तो उसने
  2050. 1:36:24फिर से शौर्य की तरफ देखा। शौर्य के चेहरे
  2051. 1:36:27पर भी जरा सा डर नहीं था बल्कि उसके होठों
  2052. 1:36:30पर एक हल्की आत्मविश्वास से भरी मुस्कान
  2053. 1:36:33खेल रही थी और यह देखकर वो और भी ज्यादा
  2054. 1:36:36हैरान रह गई। यह हाल सिर्फ मेनका का ही
  2055. 1:36:39नहीं था। कमोबेश यही स्थिति देवव्रत
  2056. 1:36:42मल्होत्रा और रुचि मल्होत्रा की भी थी।
  2057. 1:36:45उनकी आंखों में भी शौर्य के लिए चिंता साफ
  2058. 1:36:47नजर आ रही थी। लेकिन शौर्य इन सबसे
  2059. 1:36:50बेपरवाह था। वो अब विहान रायजादा के
  2060. 1:36:53बाउंसरों को सबक सिखाने के मूड में आ चुका
  2061. 1:36:56था। एक बार फिर दोनों बाउंसर ने उसे आगे
  2062. 1:36:59पीछे से घेर लिया और एक साथ उस पर झपट
  2063. 1:37:01पड़े। लेकिन इस बार भी शौर्य ने कमाल कर
  2064. 1:37:04दिया। उसने एक ऊंची छलांग लगाई और उनके
  2065. 1:37:07बीच से निकल कर सीधा विहान रायजादा के
  2066. 1:37:10सामने आकर लैंड किया। पीछे दोनों बाउंसर
  2067. 1:37:13आपस में ही टकरा गए। शौर्य ने बिना एक पल
  2068. 1:37:16गवाए हाथ घुमाया।
  2069. 1:37:19और एक जोरदार थप्पड़ विहान रायजादा के गाल
  2070. 1:37:22पर जा पड़ा। पूरा हॉल सन रह गया। विहान
  2071. 1:37:26रायजादा अविश्वास से शौर्य को घूर रहा था।
  2072. 1:37:30उसे उम्मीद ही नहीं थी कि कोई उस पर हाथ
  2073. 1:37:32उठाने की हिम्मत करेगा। उसका एक हाथ अपने
  2074. 1:37:35गाल पर था और आंखें फटी रह गई थी। तभी
  2075. 1:37:39उसके दोनों बाउंसर संभल चुके थे। जैसे ही
  2076. 1:37:42उन्होंने देखा कि उनके बॉस पर हाथ उठाया
  2077. 1:37:44गया है। वे गुस्से से शौर्य की तरफ बढ़े।
  2078. 1:37:48लेकिन शौर्य ने विहान को उसी हालत में
  2079. 1:37:50छोड़ दिया और बाउंसरों का इंतजार करने
  2080. 1:37:52लगा। इस बार उसका इरादा साफ था। पहले
  2081. 1:37:56इन्हें धूल चटानी है फिर विहान की अकड़
  2082. 1:37:58तोड़नी है। जब उसे लगा कि वे धीरे-धीरे
  2083. 1:38:01बढ़ रहे हैं तो उसने खुद ही हमला कर दिया।
  2084. 1:38:04वो बिजली की रफ्तार से दौड़ा। एक ऊंची
  2085. 1:38:06छलांग लगाई और हवा में ही दोनों पैरों से
  2086. 1:38:09एक साथ किक मारी।
  2087. 1:38:13दोनों बाउंसर 5-प फीट पीछे जाकर गिरे।
  2088. 1:38:16उनके चेहरे से खून रिसने लगा और शौर्य वो
  2089. 1:38:20उसी जगह खड़ा था जहां कुछ पल पहले वे
  2090. 1:38:23दोनों खड़े थे। अब बाउंसर उसे किसी इंसान
  2091. 1:38:26की तरह नहीं बल्कि किसी अजूबे की तरह देख
  2092. 1:38:28रहे थे। लेकिन हार मानना उनके स्वभाव में
  2093. 1:38:32नहीं था। उन्होंने खून पोंछा, दांत भी और
  2094. 1:38:35फिर से उसकी तरफ बढ़े। इस बार वे सर्क थे।
  2095. 1:38:39दोनों के बीच थोड़ा फासला था। अचानक एक
  2096. 1:38:42बाउंसर ने छलांग लगाई और सीधा शौर्य के
  2097. 1:38:44चेहरे पर किक मारने की कोशिश की। लेकिन
  2098. 1:38:47शौर्य झुका और उस बाउंसर का वार खाली गया।
  2099. 1:38:50उसी पल वो फर्श पर पलटी खाकर दूसरे बाउंसर
  2100. 1:38:53के पास पहुंच गया और अपने हाथों पर घूमते
  2101. 1:38:56हुए अपने पैर से चकरी जैसी घुमावदार किक
  2102. 1:38:59उसके पैर पर दे मारी।
  2103. 1:39:02दूसरा बाउंसर वहीं गिर पड़ा। उसका पैर
  2104. 1:39:05बुरी तरह मुड़ चुका था। अब वह चाहकर भी
  2105. 1:39:08खड़ा नहीं हो सकता था। शौर्य धीरे से उठकर
  2106. 1:39:11खड़ा हुआ और फिर पलट कर पहले बाउंसर की
  2107. 1:39:13तरफ देखा। पहला बाउंसर फिर से खड़ा हो
  2108. 1:39:16चुका था। लेकिन जैसे ही उसने अपने साथी की
  2109. 1:39:19हालत देखी, उसके चेहरे का रंग उड़ गया। अब
  2110. 1:39:22उसके अंदर डर साफ नजर आ रहा था। शौर्य
  2111. 1:39:26धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगा। हर कदम के
  2112. 1:39:28साथ उसका आत्मविश्वास और सामने वाले का डर
  2113. 1:39:32बढ़ता जा रहा था। और फिर बाउंसर अचानक आगे
  2114. 1:39:35बढ़ा। लेकिन हमला करने के लिए नहीं। वो
  2115. 1:39:38सीधे घुटनों के बल बैठ गया और हाथ जोड़ते
  2116. 1:39:41हुए बोला मैं हार मानता हूं बड़े भाई। मैं
  2117. 1:39:44आपसे जीत नहीं सकता। उसकी बात सुनकर शौर्य
  2118. 1:39:48बोला अगर हार ही माननी थी तो पहले मान
  2119. 1:39:52लेते। इससे तुम्हारे साथी का पैर तो बच
  2120. 1:39:55जाता।
  2121. 1:39:57शौर्य की यह बात सुनकर भी पहला बाउंसर चुप
  2122. 1:40:00ही रहा। वो उसी तरह सिर झुकाए खड़ा रहा।
  2123. 1:40:03शौर्य उसे छोड़कर विहान रायजादा की तरफ
  2124. 1:40:06बढ़ा। उसके करीब पहुंचकर वो ठंडी आवाज में
  2125. 1:40:09बोला,
  2126. 1:40:11हां जी, अब क्या बोलते हो? तुम्हारे दोनों
  2127. 1:40:14बाउंसर तो ढेर हो गए। अब तुम्हें कौन
  2128. 1:40:17बचाने आएगा? शौर्य की बात सुनकर विहान
  2129. 1:40:20रायजादा के शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई।
  2130. 1:40:23फिर भी उसने खुद को संभालते हुए कहा, "यह
  2131. 1:40:27तुमने अच्छा नहीं किया। मैं इस बात को
  2132. 1:40:30भूलने वाला नहीं हूं। ऐसा बदला लूंगा कि
  2133. 1:40:34तुम्हारी रूह तक कांप जाएगी।
  2134. 1:40:37शौर्य जोर से हंसा और बोला [हंसी]
  2135. 1:40:41अभी भी धमकी दे रहे हो। बदला तो तुम बाद
  2136. 1:40:44में लोगे लेकिन अभी तुम्हें मुझसे कौन
  2137. 1:40:47बचाएगा। इतना कहते ही उसने एक और जोरदार
  2138. 1:40:51थप्पड़ उसके गाल पर जड़ दिया।
  2139. 1:40:55इस बार थप्पड़ इतना भारी था कि विहान
  2140. 1:40:58रायजादा का जबड़ा हिल गया। अब उसके चेहरे
  2141. 1:41:01पर साफ डर नजर आने लगा। कांपती आवाज में
  2142. 1:41:04उसने पूछा क्या चाहते हो तुम मुझसे? अब आए
  2143. 1:41:08ना तुम औकात पर।
  2144. 1:41:10शौर्य मुस्कुराते हुए बोला। फिर उसने ठंडे
  2145. 1:41:13लेकिन खतरनाक लहजे में कहा। अपने घुटनों
  2146. 1:41:17पर आओ। और जैसे तुम्हारे बाउंसर ने कहा कि
  2147. 1:41:20वो अपनी हार मानता है। [संगीत] वैसे ही
  2148. 1:41:23तुम भी कहो कि तुम हार मानते हो। और
  2149. 1:41:26दोबारा मेरे रास्ते में आने की कोशिश नहीं
  2150. 1:41:29करोगे। वरना जो हाल तुम्हारे दूसरे बाउंसर
  2151. 1:41:33का हुआ है, वही हाल [संगीत] तुम्हारा भी
  2152. 1:41:36करूंगा। शौर्य की बात सुनकर अनायास ही
  2153. 1:41:39विहान की नजर अपने घायल बाउंसर पर गई। वो
  2154. 1:41:42फर्श पर पड़ा था। अपने टेढ़े पैर को सीधा
  2155. 1:41:45करने की कोशिश कर रहा था। उसकी हालत देखकर
  2156. 1:41:48ही विहान के शरीर में सिहरन दौड़ गई और
  2157. 1:41:52बिना कुछ सोचे वो धीरे-धीरे घुटनों पर आ
  2158. 1:41:54गया। उसकी आवाज में अब अहंकार नहीं सिर्फ
  2159. 1:41:58बेबसी थी। वो बोला मैं अपनी हार मानता हूं
  2160. 1:42:02और दोबारा तुम्हारे सामने आने की कोशिश
  2161. 1:42:06नहीं करूंगा।
  2162. 1:42:08यह कहते ही वो तुरंत उठा और बिना किसी की
  2163. 1:42:10तरफ देखे तेज कदमों से बाहर निकल गया।
  2164. 1:42:13उसके पीछे-पीछे उसका वो तीसरा आदमी जो
  2165. 1:42:16शायद वकील था वो भी वहां से चला गया। उनके
  2166. 1:42:19जाने के बाद पहला बाउंसर उठा। अपने घायल
  2167. 1:42:22साथी को सहारा दिया और धीरे-धीरे उसे लेकर
  2168. 1:42:25बाहर निकल गया। कुछ ही पलों में पूरा हॉल
  2169. 1:42:28खाली हो गया। और वहां छा गई एक गहरी सन्न
  2170. 1:42:33कर देने वाली खामोशी। क्योंकि वहां मौजूद
  2171. 1:42:36किसी भी [संगीत] व्यक्ति को समझ नहीं आ
  2172. 1:42:38रहा था कि कुछ ही मिनटों में यहां क्या से
  2173. 1:42:42क्या हो गया। शौर्य अब सबके लिए एक पहेली
  2174. 1:42:45बन गया था। सबके दिमाग में उसे देखकर यही
  2175. 1:42:48सवाल गूंजने लगा था कि आखिर वो है क्या
  2176. 1:42:51चीज? जो लोग उसे अंडरएस्टिमेट कर रहे थे,
  2177. 1:42:54वह उसके किसी भी डील को तुरंत एस्टीमेट
  2178. 1:42:56करके हाथों हाथ पेमेंट करने के तरीके से
  2179. 1:42:59चौंक गए थे। रुचि से कुछ ही मिनटों में 51
  2180. 1:43:03करोड़ में खरीदे नए ऑफिस के आलीशान कमरे
  2181. 1:43:06में मेनका एक कोने में खड़ी होकर अभी भी
  2182. 1:43:08उस दृश्य को अपनी आंखों के सामने दोहरा
  2183. 1:43:11रही थी। जो अभी-अभी घटित हुआ था। उसे अपनी
  2184. 1:43:15आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था कि शौर्य ने
  2185. 1:43:18विहान रायजादा जैसे रसूखदार आदमी का बुरा
  2186. 1:43:21हाल कर दिया था। शुरुआत में मेनका को लगा
  2187. 1:43:24था कि शौर्य विहान के खूंखार बाउंसरों का
  2188. 1:43:27मुकाबला नहीं कर पाएगा। पर शौर्य ने जिस
  2189. 1:43:30सहजता से उन्हें धूल चटाई उसे देखकर मेनका
  2190. 1:43:34के मन में शौर्य की छवि पूरी तरह बदल गई
  2191. 1:43:37थी।
  2192. 1:43:38मेनका खुद को कोस रही थी कि उसने शौर्य को
  2193. 1:43:42कितना अंडरएस्टिमेट किया था। वो इस उलझन
  2194. 1:43:44में भी थी कि शौर्य के पास इतनी अपार धन
  2195. 1:43:47दौलत आई कहां से? पर जब उसे कुछ भी समझ
  2196. 1:43:50नहीं आया तो उसने खुद को तसल्ली दी कि वो
  2197. 1:43:52होटल में पहुंचते ही शौर्य से इस बारे में
  2198. 1:43:55सवाल करेगी। दूसरी तरफ रुचि मल्होत्रा भी
  2199. 1:43:59शौर्य से पूरी तरह प्रभावित थी। रुचि धीरे
  2200. 1:44:02से शौर्य के करीब आई और आभार प्रकट करते
  2201. 1:44:05हुए बोली आपका बहुत-बहुत धन्यवाद मिस्टर
  2202. 1:44:09श्रवण। आपने आज विहान रायजादा को अच्छा
  2203. 1:44:12सबक सिखाया।
  2204. 1:44:14शौर्य ने शिष्टाचार निभाते हुए जवाब दिया।
  2205. 1:44:17इसकी कोई जरूरत [संगीत] नहीं है मिस रुचि।
  2206. 1:44:19वो इसी काबिल था। रुचि के चेहरे पर चमक
  2207. 1:44:22थी। वो आगे बोली।
  2208. 1:44:25मैं आपके तुरंत फैसले लेने की काबिलियत से
  2209. 1:44:27काफी इंप्रेस हूं। आपने बिना किसी
  2210. 1:44:30एग्रीमेंट के सारा पेमेंट भी एक साथ कर
  2211. 1:44:33दिया। यह बहुत ही साहसिक फैसला है। मुझे
  2212. 1:44:37अभी पैसे की जरूरत थी। आपके कारण मेरा काम
  2213. 1:44:40समय से हो जाएगा।
  2214. 1:44:43शौर्य ने एक सरसरी निगाह पूरे ऑफिस में
  2215. 1:44:45दौड़ाई और बोला ऐसा बोलने की आपको कोई
  2216. 1:44:48जरूरत नहीं है। बिसरुचि मेरे लिए सबसे
  2217. 1:44:51बड़ी बात यह है कि मुझे एक तैयार ऑफिस मिल
  2218. 1:44:54गया है। अब मुझे यहां ज्यादा कुछ करने की
  2219. 1:44:56जरूरत नहीं पड़ेगी। मैं चाहूं तो कल से ही
  2220. 1:44:59अपना काम शुरू कर सकता हूं। बातचीत के बीच
  2221. 1:45:03रुचि मल्होत्रा के दिमाग में कुछ संशय ने
  2222. 1:45:05भी जन्म लिया। शौर्य ने उसके दिमाग में भी
  2223. 1:45:08यही सवाल पैदा करवा दिया था कि आखिर शौर्य
  2224. 1:45:11है क्या चीज? रुचि भी यह सोचकर हैरान थी
  2225. 1:45:14कि मेनका ने तो कहा था कि मिस्टर विक्रम
  2226. 1:45:16इस जगह के ओनर होने वाले हैं और शौर्य
  2227. 1:45:19सिर्फ देखरेख करेगा। पर यहां सारे फैसले
  2228. 1:45:22शौर्य ले रहा था। रुचि ने फिर शौर्य से
  2229. 1:45:25पूछा। मिस्टर श्रवण इस प्रॉपर्टी से
  2230. 1:45:28रिलेटेड पेपर तैयार करने के लिए अगर आपके
  2231. 1:45:31कोई लोग हो तो आप बता दीजिए। शौर्य ने
  2232. 1:45:35मेनका की तरफ देखा तो मेनका ने कुछ सोचकर
  2233. 1:45:37कहा रुचि तुम रहने दो जो हमारा प्रॉपर्टी
  2234. 1:45:41से रिलेटेड काम देखता है उससे बोलकर मैं
  2235. 1:45:43यह पेपर तैयार करवा लूंगी पेपर तैयार होने
  2236. 1:45:46के बाद जब रजिस्ट्रेशन की डेट निश्चित
  2237. 1:45:48होगी तो मैं तुम्हें बता दूंगी।
  2238. 1:45:51रुचि ने जवाब दिया ठीक है यही अच्छा
  2239. 1:45:54रहेगा। जब तुम्हारी कागजी कार्यवाही पूरी
  2240. 1:45:56हो जाए तो तुम मुझे बता देना। मैं समय पर
  2241. 1:45:59रजिस्ट्रार ऑफिस पहुंच जाऊंगी।
  2242. 1:46:02रुचि और मेनका पुराने दोस्त थे। लेकिन
  2243. 1:46:05रुचि इस बात से हैरान थी कि उसने आज से
  2244. 1:46:07पहले मेनका से शौर्य और विक्रम के बारे
  2245. 1:46:10में कुछ नहीं सुना था। वो आगे भी शौर्य के
  2246. 1:46:13टच में रहना चाहती थी। इसीलिए उसने सीधा
  2247. 1:46:15शौर्य से ही पूछा। मिस्टर श्रवण अगर आप
  2248. 1:46:19बुरा ना माने तो [संगीत] क्या मैं आपसे
  2249. 1:46:21कुछ पूछ सकती हूं? शौर्य को रुचि के बदलते
  2250. 1:46:24भाव देखकर अंदाजा हो गया था कि वह क्या
  2251. 1:46:27जानना चाहती है। उसने कहा पूछिए क्या
  2252. 1:46:30जानना चाहती हैं आप? रुचि ने संकोच छोड़कर
  2253. 1:46:34अपनी जिज्ञासा व्यक्त की। मिस्टर श्रवण
  2254. 1:46:36मैं इसी शहर की हूं और यहां की एलट क्लास
  2255. 1:46:39फैमिलीज के बारे में जानकारी रखती हूं। पर
  2256. 1:46:42आप और विक्रम सर ऐसे शख्स हैं जिनके बारे
  2257. 1:46:44में मैं कुछ भी नहीं जानती। आपने इतना
  2258. 1:46:48बड़ा अमाउंट एक बार में ही पे कर दिया है
  2259. 1:46:50तो मैं समझ सकती हूं कि आप किसी बहुत बड़े
  2260. 1:46:53परिवार से संबंध रखते हैं। तो इतना तो मैं
  2261. 1:46:56यकीन के साथ कह सकती हूं कि आप इस शहर से
  2262. 1:46:58नहीं हैं और जिस तरह आपने विहान रायजादा
  2263. 1:47:01को सबक सिखाया है। इससे यह भी पता चलता है
  2264. 1:47:04कि आपको यहां की हस्तियों का डर नहीं है।
  2265. 1:47:07बस मैं आपके बैकग्राउंड के बारे में जानना
  2266. 1:47:10चाह रही थी। शौर्य जानता था कि रुचि को शक
  2267. 1:47:14होना स्वाभाविक है। इसीलिए उसने तुरंत एक
  2268. 1:47:17कहानी बनाई। आपने सही कहा मिस रुचि। मैं
  2269. 1:47:21और विक्रम बहुत अच्छे दोस्त हैं। निर्णय
  2270. 1:47:24उसका हो या मेरा हम कभी एक दूसरे के
  2271. 1:47:26निर्णय पर सवाल नहीं उठाते। विक्रम
  2272. 1:47:29अभी-अभी यूके से यहां आया है। मेरे दिमाग
  2273. 1:47:32में कुछ बिजनेस प्रपोजल थे जिसे उसने अपनी
  2274. 1:47:34सहमति दे दी है। तो [संगीत] आप यह समझ
  2275. 1:47:37सकती हैं कि इस सबके पीछे पैसा उसका और
  2276. 1:47:40दिमाग मेरा है।
  2277. 1:47:41मेनका बगल में खड़ी शौर्य के दिमाग की दाद
  2278. 1:47:44दिए बिना रह नहीं सकी। उसने सोचा कितना
  2279. 1:47:47शातिर है यह आदमी। पल भर में इसने क्या
  2280. 1:47:50कहानी बना ली। तभी रुचि ने ऑफिस की
  2281. 1:47:53चाबियां शौर्य की तरफ बढ़ाते हुए कहा।
  2282. 1:47:56मिस्टर श्रवण पेपर वर्क तो अपने समय से
  2283. 1:47:58होता रहेगा। पर अभी से यह ऑफिस आपका हुआ।
  2284. 1:48:02यह रही इस ऑफिस की चाबियां। अब आप संभालिए
  2285. 1:48:05इसे। शौर्य ने चाबियां ली और मेनका की ओर
  2286. 1:48:08देखकर बोला तो मिस मेनका यहां का काम तो
  2287. 1:48:12पूरा हुआ अब चलें शौर्य विक्रम मेनका
  2288. 1:48:17तीनों होटल की ओर चल पड़े मेनका शौर्य का
  2289. 1:48:20नया रूप देखकर शॉक्ड थी उसके दिमाग में
  2290. 1:48:23सवालों का उफान बेकाबू हो रहा था। फिर कुछ
  2291. 1:48:27देर बाद होटल राजकमल केबिन में मेनका अपनी
  2292. 1:48:30कुर्सी पर बैठी थी। पर उसकी नजरें लगातार
  2293. 1:48:33शौर्य पर टिकी थी। जैसे आज वो उसे पूरी
  2294. 1:48:36तरह पढ़ लेना चाहती हो। लेकिन शौर्य शायद
  2295. 1:48:39उसके चेहरे के हाफ भावों को पहले ही पढ़
  2296. 1:48:41चुका था। उसे मालूम था कि अब सामने से
  2297. 1:48:44सीधे दिल और दिमाग को चीरते हुए सवाल
  2298. 1:48:46आएंगे।
  2299. 1:48:48वो आराम से कुर्सी पर टिक गया। जैसे वो तय
  2300. 1:48:51कर चुका हो। अब कुछ भी छुपाना नहीं है।
  2301. 1:48:54कुछ पल की खामोशी के बाद मेनका ने सीधे
  2302. 1:48:57वार किया। क्या मैं तुमसे कुछ सवाल पूछ
  2303. 1:49:00सकती हूं? शौर्य ने बिना घबराए उसकी आंखों
  2304. 1:49:03में देखा और मुस्कुराया। चलो अब पूछ भी लो
  2305. 1:49:07इतना हाइप क्रिएट क्यों कर रही हो? मेनका
  2306. 1:49:10ने गहरी सांस ली और पहला सवाल दागा। सबसे
  2307. 1:49:14पहले यह बताओ अब से पहले तुम कहां थे?
  2308. 1:49:18शौर्य ने बिना पलक झपकाए जवाब दिया।
  2309. 1:49:20[संगीत] यह तो मैं तुम्हें बता चुका हूं।
  2310. 1:49:22मैं पिछले 6 महीने से इसी शहर में भिखारी
  2311. 1:49:25की जिंदगी जी रहा था। मैं इनका अगला सवाल
  2312. 1:49:28सोच पाती। उससे पहले ही शौर्य ने खुद ही
  2313. 1:49:31आगे बढ़ते हुए कहा, "मैं तुम्हें शुरू से
  2314. 1:49:34पूरी कहानी बता देता हूं। शायद [संगीत]
  2315. 1:49:36उसके बाद तुम्हें कुछ पूछने की जरूरत ही
  2316. 1:49:39ना पड़े। इससे पहले कि मेनका कुछ कहती
  2317. 1:49:42[संगीत] शौर्य ने एक स्टोरी टेलर की तरह
  2318. 1:49:44बोलना शुरू किया। मेरे पापा ने अपनी मर्जी
  2319. 1:49:48से शादी कर ली थी। जिससे मेरे दादाजी
  2320. 1:49:50नाराज हो गए और उन्होंने उन्हें घर से
  2321. 1:49:53निकाल दिया। घर से निकाले जाने के बाद
  2322. 1:49:56मेरे पापा को लगा कि इस शहर में वे कुछ
  2323. 1:49:58खास कर नहीं पाएंगे। इसीलिए उन्होंने मेरी
  2324. 1:50:01मां के साथ भारत छोड़ दिया और यूके में
  2325. 1:50:04शिफ्ट हो गए। कुछ समय तक उन्होंने वहां
  2326. 1:50:07अलग-अलग जगह काम किया। फिर अपना बिजनेस
  2327. 1:50:10शुरू किया। उन्हें जल्दी ही सफलता मिल गई
  2328. 1:50:12और हमारा परिवार यूके [संगीत] में अच्छे
  2329. 1:50:14से सेटल हो गया। मैंने भी वहीं रहते हुए
  2330. 1:50:17अपना बिजनेस शुरू किया और धीरे-धीरे उसे
  2331. 1:50:20स्थापित कर लिया। मेनका बड़े गौर से पूरी
  2332. 1:50:24बात सुन रही थी। शौर्य ने कहना जारी रखा।
  2333. 1:50:28इधर इंडिया जब मेरे दादाजी को पता चला कि
  2334. 1:50:30उनका एक पोता भी है तो उनके दिल में मुझे
  2335. 1:50:33देखने की इच्छा जाग उठी। इसी वजह से मैं
  2336. 1:50:36उनसे मिलने भारत आ गया। शौर्य हल्का
  2337. 1:50:39मुस्कुराया और बोला
  2338. 1:50:42लेकिन शायद किसी को मेरा भारत आना रास
  2339. 1:50:44नहीं आया। इसीलिए उसने मुझे जान से मारने
  2340. 1:50:47की कोशिश की। अब इसे मेरा नसीब कहो या
  2341. 1:50:50मेरे दुश्मन की बदनसीबी। उस एक्सीडेंट में
  2342. 1:50:53मैं बच गया। और जब मुझे पता चला कि किसी
  2343. 1:50:56ने मुझे मारने की कोशिश की है तो मैंने
  2344. 1:50:59दुनिया के सामने खुद को जीवित दिखाना ठीक
  2345. 1:51:02नहीं समझा। और मैं एक भिखारी की जिंदगी
  2346. 1:51:04जीता रहा। अभी जब मेरे दादाजी को हार्ट
  2347. 1:51:07अटैक आया तब मुझे उनके सामने आना पड़ा।
  2348. 1:51:11लेकिन मैं सीधे उनके महल में नहीं जा सकता
  2349. 1:51:13था। क्योंकि जब तक मुझे यह पता नहीं चल
  2350. 1:51:15जाता कि मुझे मारने [संगीत] की कोशिश
  2351. 1:51:17किसने की तब तक मैं खुद को सबके सामने
  2352. 1:51:20जाहिर नहीं करना चाहता था। मेनका एक टक
  2353. 1:51:24शौर्य को देख रही थी। तभी शौर्य ने टेबल
  2354. 1:51:27पर हल्का सा हाथ मारकर कहा बस यही है मेरी
  2355. 1:51:31कहानी। इतना कहकर शौर्य चुप हो गया। लेकिन
  2356. 1:51:35मेनका के कुछ सवाल शायद अभी भी बाकी थे।
  2357. 1:51:38उसने शौर्य से पूछा।
  2358. 1:51:40क्या मैं जान सकती हूं कि तुमने कौन सा
  2359. 1:51:42बिजनेस एस्टैब्लिश कर रखा है? शौर्य ने
  2360. 1:51:46मुस्कुराते हुए कहा, वैसे तो मेरे पापा ने
  2361. 1:51:49यूके में अपने कई बिजनेस फैला रखे हैं।
  2362. 1:51:52लेकिन मैंने जो अपने दम पर एस्टैब्लिश
  2363. 1:51:54किया है वो है बिगबुल। तुमने शायद इसका
  2364. 1:51:57नाम सुना होगा। यूके में तो इसकी कई
  2365. 1:51:59ब्रांचेस पहले से ही अच्छे से रन कर रही
  2366. 1:52:02हैं और अब इंडिया में भी हाल फिलहाल कुछ
  2367. 1:52:04ब्रांचेस शुरू हो चुकी हैं। मेनका ने जैसे
  2368. 1:52:08ही शौर्य के मुंह से बिगbul का नाम सुना
  2369. 1:52:11वो आश्चर्य से बोली क्या कहा तुमने? बिग
  2370. 1:52:15बुल तुम्हारी कंपनी है और इसे तुमने अपने
  2371. 1:52:18दम पर खड़ा किया है। यह तो बहुत बड़ी
  2372. 1:52:21कंपनी है। मेरे ख्याल से ज्यादातर
  2373. 1:52:24बड़े-बड़े इंटरनेशनल ब्रांड्स का
  2374. 1:52:25कोलैबोरेशन बिगbul के साथ है। मेनका ये
  2375. 1:52:29जानकर हैरान थी कि इतनी कम उम्र में शौर्य
  2376. 1:52:32ने इतना बड़ा ब्रांड खड़ा कर लिया था।
  2377. 1:52:34उसने अपनी हैरानी को कंट्रोल किया और
  2378. 1:52:36बोली। तो अब तुम्हारा आगे का क्या इरादा
  2379. 1:52:39है? मेनका की बात सुनकर शौर्य वर्तमान में
  2380. 1:52:42लौट आया। उसने कहा
  2381. 1:52:45जहां तक मेरे मेन फोकस की बात है वो
  2382. 1:52:49ब्रांड एंडोर्समेंट है। इसके लिए मुझे मिस
  2383. 1:52:51नताशा से मिलना है। मैं उन्हें अपनी कंपनी
  2384. 1:52:54का ब्रांड एंबेसडर बनाना चाहता हूं। क्या
  2385. 1:52:57तुम्हारे पास कोई ऐसा लिंक है [संगीत]
  2386. 1:52:59जिससे मैं मिस नताशा के साथ मीटिंग सेट कर
  2387. 1:53:01सकूं। मेनका ने धैर्य से शौर्य की बात को
  2388. 1:53:05सुना और बोली, "यह कोई मुश्किल काम नहीं
  2389. 1:53:08है। एक डायरेक्टर है रत्नाकर शेट्टी। उसने
  2390. 1:53:11नताशा के साथ कई ऐड फिल्में बनाई हैं।
  2391. 1:53:14उससे बात करने पर वो नताशा के साथ
  2392. 1:53:16तुम्हारी मीटिंग अरेंज कर सकते हैं। मेनका
  2393. 1:53:19की बात सुनकर शौर्य खुश होते हुए बोला अरे
  2394. 1:53:22वाह यह तो बहुत आसान हो गया। तुम अभी उनसे
  2395. 1:53:25बात करके हमारी मीटिंग फिक्स कर दो। मेनका
  2396. 1:53:29शौर्य की बात सुनकर बोली इतनी भी क्या
  2397. 1:53:32जल्दी है? डोंट वरी हो जाएगा यह काम। अरे
  2398. 1:53:36हो जाएगा तो फिर करो ना। शौर्य ने
  2399. 1:53:38मुस्कुराते हुए कहा मेनका समझ गई कि शौर्य
  2400. 1:53:41मानने वाला नहीं है। उसने अपना मोबाइल
  2401. 1:53:44निकाला उसमें रत्नाकर शेट्टी का नंबर
  2402. 1:53:46ढूंढा और कॉल लगा दिया। दो-तीन रिंग के
  2403. 1:53:49बाद दूसरी तरफ से फोन उठाया गया। हेलो
  2404. 1:53:52रत्नाकर जी। मैं मेनका बोल रही हूं होटल
  2405. 1:53:55राजकमल से। पहचाना मुझे
  2406. 1:53:58अरे आप कैसी बात कर रही हैं मिस मेनका। आप
  2407. 1:54:02हुक्म कीजिए। आपने इस नाचीज को कैसे याद
  2408. 1:54:05किया? रत्नाकर शेट्टी ने मुस्कुरा कर कहा
  2409. 1:54:09ऐसा है रत्नाकर जी मेरे एक मित्र हैं
  2410. 1:54:11जिन्हें अपने प्रोजेक्ट के लिए एक
  2411. 1:54:14डायरेक्टर और एक फेमस मॉडल की जरूरत है।
  2412. 1:54:17इसी सिलसिले में आपसे मीटिंग करनी थी। तो
  2413. 1:54:20आप बताइए कि आप कब मिल सकते हैं? मेनका ने
  2414. 1:54:23अपनी बात साफ-साफ रख दी। मेनका की बात
  2415. 1:54:26सुनकर रत्नाकर शेट्टी खुश होकर बोले
  2416. 1:54:29आप जब भी कहे मिस मेनका [संगीत] मैं मिलने
  2417. 1:54:32के लिए समय निकाल सकता हूं। लेकिन क्या
  2418. 1:54:35पहले मैं जान सकता हूं कि आपके वो मित्र
  2419. 1:54:38किस मॉडल के साथ काम करना चाहते हैं।
  2420. 1:54:41रत्नाकर शेट्टी की बात सुनकर मेनका बोली
  2421. 1:54:44अरे ये तो मैं आपको बताना ही भूल गई। मॉडल
  2422. 1:54:47के रूप में मेरे फ्रेंड को मिस नताशा ही
  2423. 1:54:50चाहिए।
  2424. 1:54:50अरे वाह। आपने तो बहुत ही सही समय पर फोन
  2425. 1:54:54किया है। एक्चुअली अभी मैं मिस नताशा के
  2426. 1:54:58साथ ही एक शूटिंग पर आया हुआ हूं।
  2427. 1:55:00कृष्णापुरम की पहाड़ी पर जो कॉटेज है वहीं
  2428. 1:55:03पर हमारा कल और परसों का शूटिंग शेड्यूल
  2429. 1:55:05है। क्यों ना आप अपने मित्र को वहीं भेज
  2430. 1:55:07दें ताकि हमें मीटिंग के लिए ज्यादा
  2431. 1:55:10इंतजार ना करना पड़े।
  2432. 1:55:12रत्नाकर शेट्टी ने अपना सुझाव दिया।
  2433. 1:55:14रत्नाकर शेट्टी की बात सुनकर मेनका ने
  2434. 1:55:17शौर्य की तरफ देखा क्योंकि उसका मोबाइल
  2435. 1:55:20लाउडस्पीकर पर था। जैसे ही मेनका ने उसकी
  2436. 1:55:22तरफ देखा, शौर्य ने हल्का सा सिर हिलाकर
  2437. 1:55:25अपनी सहमति दे दी। शौर्य की सहमति मिलने
  2438. 1:55:28के बाद मेनका ने कहा, ठीक है रत्नाकर जी
  2439. 1:55:32यह बढ़िया रहेगा। कल मेरा फ्रेंड
  2440. 1:55:34कृष्णापुरम के कॉटेज में आकर आपसे मिल
  2441. 1:55:36लेगा।
  2442. 1:55:38जी यह सही रहेगा।
  2443. 1:55:40रत्नाकर शेट्टी ने सहमति जताई। इसके बाद
  2444. 1:55:43मेनका ने फोन काट दिया और शौर्य की तरफ
  2445. 1:55:46देखते हुए बोली, [संगीत] लो तुम्हारा यह
  2446. 1:55:49काम भी हो गया। अब तो खुश हो। इस पर शौर्य
  2447. 1:55:52मुस्कुराते हुए बोला बहुत बहुत ज्यादा पता
  2448. 1:55:56नहीं तुम नहीं होती तो मेरा क्या होता बस
  2449. 1:55:59बस अब ज्यादा ड्रामा करने की जरूरत नहीं
  2450. 1:56:02है अभी मेनका बोल ही रही थी कि अचानक उसके
  2451. 1:56:05फोन पर घंटी बज उठी उसने स्क्रीन की तरफ
  2452. 1:56:08देखा और नंबर देखते ही उसकी [संगीत] आंखें
  2453. 1:56:10सिकुड़ गई वो मन ही मन बोली
  2454. 1:56:14आखिर इस वक्त इनका फोन आने का क्या मतलब
  2455. 1:56:18हो सकता है
  2456. 1:56:20एक फोन की घंटी ने मेनका के चेहरे का रंग
  2457. 1:56:22बदल दिया था। शौर्य का सच जानकर [संगीत]
  2458. 1:56:25मेनका के दिल ने अभी राहत की सांस भी नहीं
  2459. 1:56:27ली थी कि एक नई आफत उसके फोन पर ब्लिंक
  2460. 1:56:30[संगीत] करने लगी। फोन की घंटी लगातार बज
  2461. 1:56:34रही थी और स्क्रीन पर आया नाम देखकर मेनका
  2462. 1:56:36[संगीत] की आंखें कुछ प्रश्न चिन्ह सा
  2463. 1:56:39संकेत दे रही थी। मेनका के मस्तक पर उभर
  2464. 1:56:42रही लकीरें देखकर शौर्य ने मेनका [संगीत]
  2465. 1:56:45से पूछा।
  2466. 1:56:47क्या हुआ? कोई प्रॉब्लम? किसका फोन है?
  2467. 1:56:51मेनका ने तुरंत ही सिर उठाकर शौर्य की तरफ
  2468. 1:56:54देखा और बोली,
  2469. 1:56:56"यह तो देवव्रत मल्होत्रा का फोन है।" अभी
  2470. 1:57:00तो उनके पास से आए हैं। अब वो इतनी जल्दी
  2471. 1:57:03किस लिए फोन कर रहे हैं? अरे तुम फोन तो
  2472. 1:57:05उठाओ। शौर्य के बोलते ही मेनका ने बिना
  2473. 1:57:08कुछ कहे फोन उठाया। उसे स्पीकर पर डाला और
  2474. 1:57:12बोली, नमस्ते अंकल, [संगीत] क्या बात हो
  2475. 1:57:15गई? मेनका की आवाज सुनते ही दूसरी तरफ से
  2476. 1:57:18देवव्रत मल्होत्रा की टूटी हुई घबराई हुई
  2477. 1:57:21आवाज आई। [संगीत]
  2478. 1:57:22बेटे विहान रायजादा के आदमियों ने रुचि को
  2479. 1:57:26अगवा कर लिया है। अभी मुझे फोन करके बोले
  2480. 1:57:29हैं कि मैं तुरंत उनके पास जाकर उस ऑफिस
  2481. 1:57:32को उनके नाम कर दूं नहीं तो वो मेरी बेटी
  2482. 1:57:34को किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं
  2483. 1:57:36छोड़ेंगे।
  2484. 1:57:37मेनका थोड़ी घबराई लेकिन फिर तुरंत संभल
  2485. 1:57:40कर बोली। अंकल आप घबराइए मत। आप शुरू से
  2486. 1:57:43बताइए आखिर यह हुआ कैसे?
  2487. 1:57:46अब मैं तुम्हें क्या बताऊं बेटी? हम अभी
  2488. 1:57:49न्यू सिटी टावर से निकले ही थे कि एक कार
  2489. 1:57:51हमारी कार के सामने आकर खड़ी हो गई।
  2490. 1:57:54मजबूरन हमें अपनी गाड़ी रोकनी पड़ी। सामने
  2491. 1:57:57वाली गाड़ी से इस शहर के दो मशहूर गुंडे
  2492. 1:58:00छगन और मगन उतरे और जबरदस्ती रुचि को
  2493. 1:58:03हमारी कार से खींच कर अपनी कार में ले गए।
  2494. 1:58:06जाने से पहले उन्होंने कहा कि एक घंटे के
  2495. 1:58:09अंदर मैं उस ऑफिस के पेपर और चाबी लेकर
  2496. 1:58:12जहां वो बताएंगे वहां पहुंच जाऊं। नहीं तो
  2497. 1:58:15वो रुचि को किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं
  2498. 1:58:17छोड़ेंगे।
  2499. 1:58:18देवव्रत मल्होत्रा भयभीत आवाज में बोले।
  2500. 1:58:20[संगीत] देवव्रत की हालत सुनकर शौर्य ने
  2501. 1:58:23फौरन मेनका के हाथ से मोबाइल लिया और बोला
  2502. 1:58:26अंकल घबराइए मत। दिमाग को ठंडा रखिए। मेरा
  2503. 1:58:31विश्वास कीजिए रुचि को कुछ नहीं होगा।
  2504. 1:58:34क्या उन्होंने आपको यह बताया कि आपको कहां
  2505. 1:58:37आना है?
  2506. 1:58:38नहीं, बस इतना कहा है कि मैं सब कुछ तैयार
  2507. 1:58:42रखूं। फिर दोबारा उनका फोन आएगा और मुझे
  2508. 1:58:45उनके इंस्ट्रक्शन फॉलो करने होंगे।
  2509. 1:58:48देवव्रत मल्होत्रा ने बताया। इस पर शौर्य
  2510. 1:58:52बोला, ठीक है, अगर ऐसी बात है तो जल्दी से
  2511. 1:58:56आप होटल राजकमल आ जाइए और यहां से चाबी ले
  2512. 1:58:59जाइए। पैसे की चिंता करने की आपको कोई
  2513. 1:59:02जरूरत नहीं है। अभी जैसा वो कह रहे हैं आप
  2514. 1:59:06वैसा ही कीजिए। देवव्रत मल्होत्रा को यकीन
  2515. 1:59:09नहीं हुआ कि शौर्य इतनी आसानी से मान
  2516. 1:59:11जाएगा। वो भरी हुई आवाज में बोले
  2517. 1:59:14"धन्यवाद बेटे। मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं
  2518. 1:59:17थी कि तुम मेरी मजबूरी को इतनी आसानी से
  2519. 1:59:20समझोगे।"
  2520. 1:59:21शौर्य ने फिर शांत स्वर में कहा। अंकल आप
  2521. 1:59:24मेरी चिंता मत कीजिए। सबसे पहला काम रुचि
  2522. 1:59:28को सुरक्षित करना है।
  2523. 1:59:30ठीक है बेटे। मैं अभी होटल राजकमल आ रहा
  2524. 1:59:33हूं।
  2525. 1:59:34इतना कहकर देवव्रत मल्होत्रा ने फोन काट
  2526. 1:59:36दिया। फोन कटते ही मेनका ने शौर्य की तरफ
  2527. 1:59:39देखते हुए पूछा। क्या तुम सचमुच चाबी वापस
  2528. 1:59:42करने की सोच रहे हो? क्या तुम्हें वो ऑफिस
  2529. 1:59:45नहीं चाहिए? इस पर शौर्य हल्की [संगीत]
  2530. 1:59:48मगर रहस्यमई मुस्कान के साथ बोला। किसने
  2531. 1:59:51कहा कि मुझे वो ऑफिस नहीं चाहिए। अब तो
  2532. 1:59:54पक्का वो मुझे ही चाहिए। मेनका को कुछ समझ
  2533. 1:59:57नहीं आया। [संगीत] उसने हैरानी से पूछा।
  2534. 2:00:00अगर वो ऑफिस तुम्हें चाहिए तो फिर तुम
  2535. 2:00:03इतनी आसानी से चाबी वापस करने के लिए
  2536. 2:00:05तैयार [संगीत] क्यों हो गए? मेनका की बात
  2537. 2:00:08सुनकर शौर्य मुस्कुरा कर बोला, "मैं नहीं
  2538. 2:00:11चाहता कि देवव्रत मल्होत्रा किसी परेशानी
  2539. 2:00:13में पड़े या रुचि का कुछ बुरा हो।" यह कदम
  2540. 2:00:16उठाकर विहान रायजादा ने अपने लिए मुसीबत
  2541. 2:00:19मोल ले ली है। मेनका को कुछ समझ नहीं आया
  2542. 2:00:23तो उसने शौर्य को गौर से देखा और पूछा। अब
  2543. 2:00:27तुम क्या करने वाले हो? जो भी करूंगा
  2544. 2:00:30तुम्हारे सामने ही करूंगा। आज का दिन
  2545. 2:00:33विहान रायजादा अपनी जिंदगी में कभी नहीं
  2546. 2:00:36भूल पाएगा। उसने अपनी औकात से बाहर जाकर
  2547. 2:00:39काम किया है। कहते हुए शौर्य का जबड़ा भी
  2548. 2:00:43गया। फिर कुछ सोचकर वो मेनका की तरफ देखकर
  2549. 2:00:46बोला। क्या तुम इस एरिया के किसी
  2550. 2:00:49छोटे-मोटे गुंडे को जानती हो? मेनका को
  2551. 2:00:52समझ नहीं आया कि शौर्य ऐसा क्यों पूछ रहा
  2552. 2:00:54है। लेकिन थोड़ा सोच कर उसने कहा अगर कुछ
  2553. 2:00:58तुरंत करना है तो हमारे यहां एक
  2554. 2:01:00सिक्योरिटी गार्ड है जो पहले इस एरिया का
  2555. 2:01:02छोटा-मोटा बदमाश हुआ करता था। क्या उससे
  2556. 2:01:06तुम्हारा काम चल जाएगा? मेनका की बात
  2557. 2:01:09सुनकर शौर्य की आंखें चमक उठी। उसने तुरंत
  2558. 2:01:12कहा हां उसे जल्दी से यहां बुलाओ।
  2559. 2:01:16मेनका ने टेबल पर रखी बेल बजाई तो एक
  2560. 2:01:19गार्ड अंदर आया।
  2561. 2:01:21जाओ मेन गेट पर जाकर मनसुख मारवा को यहां
  2562. 2:01:24बुलाओ। मेनका ने आदेश दिया। मनसुख
  2563. 2:01:28हट्टाकट्टा आदमी था। शौर्य ने उसे ऊपर से
  2564. 2:01:31नीचे तक देखा। फिर पूछा,
  2565. 2:01:34क्या तुम छगन मगन को जानते हो? मुझे छगन
  2566. 2:01:38का नंबर चाहिए। क्या तुम्हारे पास है?
  2567. 2:01:42किसी परेशानी में पड़ने से बचने के लिए
  2568. 2:01:44उसने कहा,
  2569. 2:01:46"मैं इस नाम के किसी आदमी को नहीं जानता।
  2570. 2:01:50मनसुख का जवाब सुनकर शौर्य मुस्कान के साथ
  2571. 2:01:52बोला, "मैं जानता हूं कि तुम उन्हें अच्छे
  2572. 2:01:55से जानते हो।" मनसुख असमंजस में खड़ा रहा।
  2573. 2:01:59उसे समझ नहीं आ रहा था कि सच बोले या चुप
  2574. 2:02:02रहे। यह देखकर शौर्य ने ठंडे लेकिन सख्त
  2575. 2:02:06स्वर में मेनका से कहा। यह आदमी यहां काम
  2576. 2:02:09करने के लायक नहीं है। इसके अंदर कंपनी के
  2577. 2:02:12लिए कोई वफादारी नहीं है। इसे अभी के अभी
  2578. 2:02:16यहां से फायर कर दो। जैसे ही मनसुख ने
  2579. 2:02:19शौर्य की यह बात सुनी, वो जल्दी से बोला,
  2580. 2:02:21नहीं साहब, मुझे नौकरी से मत निकालिए। मैं
  2581. 2:02:24बताता हूं उसका नंबर। इसके बाद मनसुख ने
  2582. 2:02:28अपना मोबाइल निकाला और उसमें से छगन का
  2583. 2:02:30नंबर ढूंढकर शौर्य को नोट करा दिया। तभी
  2584. 2:02:34शौर्य ने कहा, अब तुम जा सकते हो। मनसुख
  2585. 2:02:38के जाते ही मेनका ने शौर्य से पूछा।
  2586. 2:02:42अब तुम इस नंबर का क्या करोगे? शौर्य
  2587. 2:02:44हल्की मुस्कान के साथ बोला, "तुम में जरा
  2588. 2:02:47भी सब्र नहीं है। मैंने अभी तुमसे कहा था
  2589. 2:02:50कि जो भी होगा तुम्हारे सामने होगा।"
  2590. 2:02:54शौर्य की बात सुनकर मेनका चुप हो गई। तभी
  2591. 2:02:58शौर्य ने मोबाइल उठाया। उसकी उंगलियां,
  2592. 2:03:01नंबर डायल कर रही थी और उसके चेहरे पर एक
  2593. 2:03:04अजीब सी शांति थी। अब शुरू होता है असली
  2594. 2:03:08खेल। फोन कनेक्ट होते ही दो रिंग के बाद
  2595. 2:03:11सामने [संगीत] से एक भारी सी आवाज गूंजी।
  2596. 2:03:14कौन बोल रहे हो?
  2597. 2:03:15शौर्य की आंखों में चमक [संगीत] आ गई। वो
  2598. 2:03:18तुरंत ही बोला, "क्या मैं छगन से बात कर
  2599. 2:03:21रहा हूं?" कुछ सेकंड की खामोशी के बाद उस
  2600. 2:03:24भारी आवाज में जवाब आया,
  2601. 2:03:26कौन है तू? [संगीत]
  2602. 2:03:27शौर्य हल्का सा हंसा और बोला, "वही जिसकी
  2603. 2:03:31वजह से आज तेरा दिन खराब होने वाला है।"
  2604. 2:03:35शौर्य के जवाब से फोन में खामोशी छा गई।
  2605. 2:03:38[संगीत] मेनका ने पहली बार महसूस किया
  2606. 2:03:41शौर्य सिर्फ बिजनेसमैन नहीं है। वह एक
  2607. 2:03:43तूफान है। मेनका को यकीन हो गया कि विहान
  2608. 2:03:47रायजादा की जिंदगी में शौर्य नाम का तूफान
  2609. 2:03:50तबाही [संगीत] मचाने वाला है। अब चकि
  2610. 2:03:52शौर्य ने फोन पर अभी अपनी पहचान उजागर
  2611. 2:03:55नहीं की थी। [संगीत] इसीलिए छगन कोई नया
  2612. 2:03:57नंबर समझकर बोला
  2613. 2:03:59ओ हेलो तुम बोल कौन रहे हो?
  2614. 2:04:03शौर्य ने शांत लेकिन खतरनाक अंदाज में
  2615. 2:04:05कहा, "यह तीसरी बार है जब तुमने मेरा
  2616. 2:04:08रास्ता काटा है।" पहली बार सिटी [संगीत]
  2617. 2:04:11हॉस्पिटल के बाहर जब तुमने विक्की के कहने
  2618. 2:04:14पर मेरी बहन को उठाने की कोशिश की थी।
  2619. 2:04:17दूसरी बार बलराज खन्ना के लिए तुमने मेरी
  2620. 2:04:21वाइफ के साथ बदतमीजी करने की कोशिश की थी।
  2621. 2:04:24[संगीत]
  2622. 2:04:24और आज तीसरी बार तुमने मेरी एक दोस्त को
  2623. 2:04:28अगवा कर लिया है। अब बताओ मुझे तुम्हारे
  2624. 2:04:32[संगीत] साथ क्या करना चाहिए?
  2625. 2:04:36एक पल के लिए सन्नाटा छा गया। छगन को एक
  2626. 2:04:39झटका [संगीत] सा लगा। अब वो पहचान चुका था
  2627. 2:04:42कि फोन के उस पार कौन है। उसने तुरंत अपना
  2628. 2:04:45लहजा बदला और बोला
  2629. 2:04:48उस्ताद आप मुझे नहीं पता था कि ये लड़की
  2630. 2:04:51आपकी दोस्त है।
  2631. 2:04:52शौर्य ने ठंडे स्वर में कहा अब तो पता चल
  2632. 2:04:56गया है कि वो हमारी दोस्त है। तो बताओ तुम
  2633. 2:05:00हमारे लिए क्या कर सकते हो? शौर्य की बात
  2634. 2:05:03सुनते ही छगन मजबूरी भरे स्वर में बोला।
  2635. 2:05:07माफ कीजिए उस्ताद अगर आपका फोन कुछ देर
  2636. 2:05:10पहले आया होता तो शायद मैं आपकी बात मान
  2637. 2:05:12भी जाता। लेकिन अब मैं चाहकर भी कुछ नहीं
  2638. 2:05:15कर सकता।
  2639. 2:05:17शौर्य को लगा जरूर कोई गड़बड़ हो चुकी है।
  2640. 2:05:20उसने तुरंत ही गंभीर होकर पूछा। क्यों? अब
  2641. 2:05:24ऐसा क्या हो गया कि तुम कुछ नहीं कर सकते?
  2642. 2:05:27छगन ने धीरे-धीरे कहा।
  2643. 2:05:29असल में अभी थोड़ी देर पहले ही मैंने रुचि
  2644. 2:05:32मल्होत्रा को उनके हवाले किया है। हमारी
  2645. 2:05:35डील सिर्फ अगवा करने तक थी।
  2646. 2:05:38शौर्य की आंखों में गुस्से की आग भड़क
  2647. 2:05:41उठी। उसने दांत भीते हुए कहा, विहान
  2648. 2:05:44रायजादा
  2649. 2:05:46तूने अपनी औकात से बढ़कर काम किया है। मैं
  2650. 2:05:50तुझे छोडूंगा नहीं। शौर्य की बात सुनकर
  2651. 2:05:53छगन बोला
  2652. 2:05:54उस्ताद यह सब कुछ विहान रायजादा अकेले
  2653. 2:05:57नहीं कर रहा है। कोई और भी उसके साथ है।
  2654. 2:06:01छगन की बात सुनकर शौर्य का माथा ठनका।
  2655. 2:06:04शौर्य ने तुरंत पूछा कौन है वो जो विहान
  2656. 2:06:08रायजादा की ताकत बना हुआ है। छगन ने धीमे
  2657. 2:06:11स्वर में कहा।
  2658. 2:06:12उस्ताद आप किसी को मत बताइएगा। विहान
  2659. 2:06:16रायजादा की ताकत बना है गजराज सोलंकी।
  2660. 2:06:20शौर्य ने तुरंत ही पूछा कहा मिलेगा यह अभी
  2661. 2:06:24रुचि कहां है छगन कुछ पल चुप रहा फिर बोला
  2662. 2:06:29उस्ताद विशालगढ़ से जो बहादुरगढ़ को जाने
  2663. 2:06:32वाला हाईवे है उसी पर लगभग 5 किमी आगे
  2664. 2:06:36सोलंकी फार्म हाउस है अभी रुचि वहीं है
  2665. 2:06:40जैसे ही छगन को लगा कि शौर्य फोन काटने
  2666. 2:06:43वाला है उसने जल्दी से कहा
  2667. 2:06:45उस्ताद आप वहां भूल [संगीत] कर भी मत
  2668. 2:06:47आइएगा वहां सोलंकी के 10-15 बाउंसर पहले
  2669. 2:06:51से मौजूद हैं।
  2670. 2:06:53मैं खुद देख लूंगा। शौर्य ने ठंडे स्वर
  2671. 2:06:56में जवाब दिया और फोन काट दिया। फोन
  2672. 2:06:59स्पीकर पर था। इसीलिए मेनका और विक्रम
  2673. 2:07:02दोनों ने पूरी बातचीत सुन ली थी। मेनका ने
  2674. 2:07:05कभी सोचा भी नहीं था कि शौर्य का छगन जैसे
  2675. 2:07:08लोगों के साथ इतना गहरा कनेक्शन है कि वह
  2676. 2:07:11उसे उस्ताद कह रहा है। फोन कटने के बाद
  2677. 2:07:15मेनका ने शौर्य से पूछा। अब तुम क्या
  2678. 2:07:18करोगे? क्या पुलिस को फोन कर दें? मेनका
  2679. 2:07:21की बात सुनकर शौर्य हल्का सा मुस्कुराया
  2680. 2:07:24और बोला, नहीं जो भी करना है हमें खुद ही
  2681. 2:07:28करना होगा। मेनका चिंतित स्वर में बोली,
  2682. 2:07:32पर हम क्या कर पाएंगे? तुमने सुना नहीं कि
  2683. 2:07:35छगन क्या कह रहा था। वहां सोलंकी के 10-15
  2684. 2:07:39बाउंसर हैं। शौर्य ने उसकी तरफ देखते हुए
  2685. 2:07:42कहा, तुम्हें यह सोचने की जरूरत नहीं है।
  2686. 2:07:45तुम बस हमारा इंतजार करो। मैं और विक्रम
  2687. 2:07:48सोलंकी फार्म हाउस के लिए निकलते हैं।
  2688. 2:07:50शौर्य की बात सुनकर विक्रम भी खड़ा हो
  2689. 2:07:52गया। मेनका ने देखा कि शौर्य की बात सुनकर
  2690. 2:07:56विक्रम के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। जब
  2691. 2:07:59उसने दोनों को उठते देखा तो वह बोली तो
  2692. 2:08:02फिर ठीक है मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगी।
  2693. 2:08:04शौर्य ने आश्चर्य से उसकी तरफ देखा। इसकी
  2694. 2:08:07कोई जरूरत नहीं है। तुम यहीं होटल में
  2695. 2:08:10इंतजार करो। मैं जल्दी ही रुचि को वहां से
  2696. 2:08:13छुड़ाकर वापस आ जाऊंगा। शौर्य का
  2697. 2:08:15कॉन्फिडेंस देखकर मेनका बोली, "यह यूके
  2698. 2:08:18[संगीत] नहीं इंडिया है। मैं गजराज सोलंकी
  2699. 2:08:21के नाम से वाकिफ हूं। वो कोई अच्छा आदमी
  2700. 2:08:24नहीं है। उसका कनेक्शन अंडरवर से भी है।
  2701. 2:08:28शौर्य ने बेपरवाही से कहा, तुम मेरी चिंता
  2702. 2:08:32मत करो। [संगीत] मैं जितना अच्छों के लिए
  2703. 2:08:34अच्छा हूं, उतना ही बुरों के लिए बुरा
  2704. 2:08:36हूं। आज के बाद यह गजराज [संगीत] सोलंकी
  2705. 2:08:39भी याद रखेगा कि उसका पाला किससे पड़ा है।
  2706. 2:08:44मेनका ने उसे चुनौती देते हुए कहा, "अगर
  2707. 2:08:47अगर तुम्हें खुद पर इतना ही कॉन्फिडेंस
  2708. 2:08:49है, तो हमें साथ ले जाने से क्यों डर रहे
  2709. 2:08:51हो?" तभी शौर्य ने हाथ जोड़ते हुए कहा,
  2710. 2:08:54"अरे ठीक है मेरी मां, तुम साथ चलो। पर
  2711. 2:08:57प्लीज हमारे लिए मुसीबत मत बनना।" मेनका
  2712. 2:09:00के चेहरे पर मुस्कान आ गई। वो तुरंत खड़ी
  2713. 2:09:02[संगीत] हुई और बोली, चलो। कुछ ही देर में
  2714. 2:09:06तीनों होटल से बाहर आ गए। विक्रम ने कार
  2715. 2:09:09निकाली और तीनों उसमें बैठ गए। शौर्यन ने
  2716. 2:09:12मोबाइल में सोलंकी फार्म हाउस लोकेशन
  2717. 2:09:14डाली। करीब आधे घंटे बाद वे फार्म हाउस के
  2718. 2:09:17पास पहुंच गए। विक्रम ने लगभग 500 मीटर
  2719. 2:09:20पहले ही कार रोक दी। सामने सोलंकी फार्म
  2720. 2:09:23हाउस का बोर्ड साफ नजर आ रहा था। जो चारों
  2721. 2:09:26तरफ से ऊंची दीवारों से घिरा हुआ था।
  2722. 2:09:29विक्रम ने शौर्य की तरफ देखा जैसे आगे के
  2723. 2:09:32निर्देश का इंतजार कर रहा हो। शौर्य बोला,
  2724. 2:09:36"यं साइड में गाड़ी खड़ी कर लो। गाड़ी
  2725. 2:09:38रुकने के बाद शौर्य मेनका की तरफ मुड़ा।
  2726. 2:09:41तुम यहीं कार में रहोगी। मैं और विक्रम
  2727. 2:09:44अंदर जाएंगे। अगर आधे घंटे में हम वापस
  2728. 2:09:46नहीं आए या तुम्हें कोई खबर नहीं मिली तो
  2729. 2:09:50उसके बाद तुम जो चाहो कर सकती हो। यह
  2730. 2:09:52सुनकर मेनका के चेहरे पर चिंता की लहर
  2731. 2:09:55दौड़ गई। लेकिन उसने चुपचाप सिर हिला
  2732. 2:09:58दिया। शौर्य और विक्रम कार से उतर गए।
  2733. 2:10:01शौर्य ने मेनका से कहा। तुम ड्राइविंग सीट
  2734. 2:10:04पर आ जाओ और गाड़ी को थोड़ा आगे पीछे करती
  2735. 2:10:07रहना ताकि किसी को शक ना हो। मेनका
  2736. 2:10:10ड्राइविंग सीट पर बैठ गई। जाते-जाते उसने
  2737. 2:10:14धीमे स्वर में कहा अपना ध्यान रखना। शौर्य
  2738. 2:10:18ने मुस्कुरा कर जवाब दिया। कुछ नहीं होगा
  2739. 2:10:21मुझे। मैं आता हूं। इसके बाद दोनों फार्म
  2740. 2:10:24हाउस की तरफ बढ़ गए। करीब 100 मीटर पहले
  2741. 2:10:27ही विक्रम ने रास्ता बदल लिया और एक
  2742. 2:10:29पगडंडी पकड़ ली। अब शौर्य अकेला ही मुख्य
  2743. 2:10:32गेट की तरफ बढ़ा। फार्म हाउस का बड़ा
  2744. 2:10:35स्टील गेट अंदर से बंद था। बाहर कोई नजर
  2745. 2:10:38नहीं आ रहा था। उसने गेट में लगी भारी
  2746. 2:10:41लोहे की साकल को पकड़ा और उसे जोर से
  2747. 2:10:44पीटा। कुछ देर इंतजार किया लेकिन शौर्य को
  2748. 2:10:47दरवाजे पर कोई हलचल नजर नहीं आई। शौर्य एक
  2749. 2:10:51बार चिंता में पड़ गया। कहीं उनको मेरे
  2750. 2:10:54आने की खबर तो नहीं हो गई। कहीं वि रुचि
  2751. 2:10:57को लेकर यहां से निकल तो नहीं गए। शौर्य
  2752. 2:11:00के कॉन्फिडेंस का लेवल इतना ऊंचा था कि
  2753. 2:11:02सोलंकी फार्म हाउस की दीवारें उसके आगे
  2754. 2:11:04छोटी लग रही थी। शौर्य के इरादे फार्म
  2755. 2:11:07हाउस के भारी-भरकम मुख्य गेट के लोहे की
  2756. 2:11:10मजबूती को भी चुनौती देने को तैयार थे।
  2757. 2:11:12हवा में एक अजीब सा भारीपन था जैसे कुदरत
  2758. 2:11:15को भी पता हो कि आज यहां कुछ बड़ा होने
  2759. 2:11:18वाला है। शौर्य फार्म हाउस के विशाल लोहे
  2760. 2:11:21के गेट के बाहर आकर रुका। उसकी आंखों में
  2761. 2:11:24जलती आग उस ठंडी ढलती शाम को भी मात दे
  2762. 2:11:27रही थी। उसने अपने दोनों हाथों की
  2763. 2:11:30मुट्ठियों को भी। यह जानते हुए कि वह मौत
  2764. 2:11:33के जबड़े में कदम रखने जा रहा है। फिर भी
  2765. 2:11:36डर उसके करीब भी नहीं भटक रहा था। उसने
  2766. 2:11:39लोहे के उस भारी गेट की साल को हाथ में
  2767. 2:11:42लेकर जोर से बजाया। लोहे से लोहे के
  2768. 2:11:44टकराने की वो आवाज पूरे सन्नाटे को चीरते
  2769. 2:11:47हुए अंदर तक गई। लेकिन अंदर से कोई जवाब
  2770. 2:11:50नहीं आया। शौर्य के सब्र का बांध टूटने
  2771. 2:11:53लगा। उसने दोबारा और भी तेज आवाज में साल
  2772. 2:11:57को पीटा। इस बार उसकी चोट में गुस्सा था।
  2773. 2:12:00एक चेतावनी थी। फिर कुछ पलों बाद सन्नाटा
  2774. 2:12:03टूटा। गेट के दूसरी तरफ से भारी जूतों की
  2775. 2:12:07आहट सुनाई दी। [संगीत] उस बड़े से गेट में
  2776. 2:12:09ही मौजूद छोटा गेट एक चरमराहट के साथ
  2777. 2:12:11खुला। एक हट्टाकट्टा चौड़ी छाती वाला आदमी
  2778. 2:12:15बाहर आया। उसकी गर्दन किसी सांड की तरह
  2779. 2:12:17मोटी थी और हाथों पर बने निशान गवाही दे
  2780. 2:12:21रहे थे कि वह गजराज सोलंकी का सबसे वफादार
  2781. 2:12:24और खूंखार पालतू है। उसने शौर्य को ऊपर से
  2782. 2:12:28नीचे तक घूरते हुए पूछा। कौन हो तुम? और
  2783. 2:12:31यहां क्या करने आए हो? शौर्य के चेहरे पर
  2784. 2:12:34एक ऐसी मुस्कान आई जो अक्सर शिकार को डरा
  2785. 2:12:37देती है। उसने शांति से कहा, "मेरा नाम
  2786. 2:12:41श्रवण है और मैं गजराज सोलंकी से मिलने
  2787. 2:12:44आया हूं। तुम जो कोई भी हो चले जाओ यहां
  2788. 2:12:47से। अभी सर किसी से भी मिलने के मूड में
  2789. 2:12:50नहीं है। वो आदमी इतना बोलकर वापस पलटने
  2790. 2:12:53ही वाला था कि शौर्य उसे रोकते हुए बोला
  2791. 2:12:56[संगीत] मुझे वापस भेजने से पहले एक बार
  2792. 2:12:59अपने बॉस को मेरा नाम बताकर पूछ तो लो कि
  2793. 2:13:02वो मुझसे मिलना चाहते हैं कि नहीं। मैंने
  2794. 2:13:05कहा ना चले जाओ यहां से। अभी बॉस किसी
  2795. 2:13:09जरूरी काम में व्यस्त हैं। इसलिए तुम उनसे
  2796. 2:13:11बाद में मिल लेना। वो आदमी शौर्य को
  2797. 2:13:14गुस्से से घूरते हुए बोला कहीं तुम्हारे
  2798. 2:13:16बॉस रुचि मल्होत्रा और विहान रायजादा के
  2799. 2:13:19साथ तो बिजी नहीं है। अगर ऐसा है तो अपने
  2800. 2:13:22बॉस से बोलो श्रवण आपसे मिलना चाहता है।
  2801. 2:13:25वो खुद ही मुझे बुलाएंगे। शौर्य
  2802. 2:13:27मुस्कुराते हुए बोला। शौर्य की बात सुनकर
  2803. 2:13:30उसने उसे तिरछी नजर से घूरा। वापस
  2804. 2:13:33जाते-जाते वो अचानक रुक गया क्योंकि उसने
  2805. 2:13:36उसके मुंह से रुचि मल्होत्रा और विहान
  2806. 2:13:38रायजादा का नाम सुना था। इसीलिए उसने अपना
  2807. 2:13:41मोबाइल निकाला और गजराज सोलंकी को फोन लगा
  2808. 2:13:43दिया। एक पल [संगीत] बाद ही दूसरी तरफ से
  2809. 2:13:46फोन उठाया गया तो इस पहलवान ने कहा सर
  2810. 2:13:50श्रवण नाम का कोई शख्स आया है। वो आपसे
  2811. 2:13:52मिलना चाहता है। दूसरी तरफ से गजराज
  2812. 2:13:55सोलंकी ने पूछा
  2813. 2:13:57कौन है श्रवण?
  2814. 2:13:58सर इसे रुचि मल्होत्रा और विहान रायजादा
  2815. 2:14:01के बारे में पता है। पहलवान गजराज के सवाल
  2816. 2:14:04पर बोला। तभी शौर्य पीछे से चिल्ला उठा।
  2817. 2:14:07अपने बॉस से कहो कि अगर मेरे बारे में
  2818. 2:14:09जानना है तो वह विहान रायजादा से पूछ ले।
  2819. 2:14:12शौर्य इतना जोर से बोला कि दूसरी तरफ
  2820. 2:14:15मौजूद गजराज को भी फोन पर उसकी आवाज सुनाई
  2821. 2:14:17दे गई। उसने कहा
  2822. 2:14:20ठीक है तुम उसे अंदर ले आओ।
  2823. 2:14:22पहलवान ने फोन काटा और शौर्य से कड़े स्वर
  2824. 2:14:25में बोला। चलो मेरे साथ। शाम का धुंधलका
  2825. 2:14:29पूरी तरह अंधेरे में बदल चुका था। शौर्य
  2826. 2:14:31से अलग होने के बाद विक्रम एक पगडंडी पकड़
  2827. 2:14:34कर खेतों के रास्ते उस फार्म हाउस के
  2828. 2:14:36पिछले हिस्से में पहुंच गया था। फार्म
  2829. 2:14:38हाउस की चार दीवारी किसी किले की तरह ऊंची
  2830. 2:14:41थी जिसके ऊपर कटीले तार लगे थे। विक्रम
  2831. 2:14:44साय की तरह दीवार के साथ-साथ चलता रहा।
  2832. 2:14:48उसने देखा कि एक जगह कई सारे पेड़ चार
  2833. 2:14:51दीवारी के काफी करीब हैं। यह हिस्सा अंदर
  2834. 2:14:54जाने के लिए सबसे सही था। विक्रम ने एक
  2835. 2:14:57बार चारों तरफ नजर दौड़ाई। चारों तरफ गहरा
  2836. 2:15:00सन्नाटा पसरा था। वो मुड़ा और बिजली जैसी
  2837. 2:15:03फुर्ती के साथ एक जंप लिया। अगले ही पल वो
  2838. 2:15:06दीवार के ऊपर था। उसने अंदर झांका। वहां
  2839. 2:15:09एक तालाब था और उसके आगे एक आलीशान कोठी।
  2840. 2:15:13वो कोठी ही उसका लक्ष्य थी। दीवार से उतर
  2841. 2:15:15कर विक्रम पेड़ों की ओठ लेते हुए आगे
  2842. 2:15:18बढ़ा। तभी उसे दो पहलवान जैसे आदमी बेंच
  2843. 2:15:21पर बैठे बातें करते दिखाई दिए। विक्रम
  2844. 2:15:24पीछे से घूमते हुए अचानक उनके सामने आ
  2845. 2:15:27खड़ा हुआ। उन दोनों की सिट्टी पिट्टी गुम
  2846. 2:15:29हो गई। उन दोनों में से एक ने पूछा, "तुम
  2847. 2:15:32कौन हो?" विक्रम ने उसका सवाल सुना और
  2848. 2:15:35बोला, "वैसे मुझे विक्रम कहते हैं। मैं
  2849. 2:15:37यहां तुम दोनों से कुछ जानने के लिए आया
  2850. 2:15:39हूं।" अभी कुछ समय पहले एक लड़की यहां लाई
  2851. 2:15:42गई थी। मैं यह जानना चाहता हूं कि वो अभी
  2852. 2:15:45कहां पर है। विक्रम के मुंह से लड़की के
  2853. 2:15:47बारे में सुनकर दोनों पहलवान चौकन्ने हो
  2854. 2:15:50गए और तेजी से अपनी जगह पर खड़े हो गए।
  2855. 2:15:52दोनों में से एक विक्रम के सामने आकर
  2856. 2:15:55बोला, "तुम हो कौन? और तुम यहां तक आ कैसे
  2857. 2:15:58गए? विक्रम फिर से उसी मुस्कान के साथ
  2858. 2:16:00बोला, "मैं कौन हूं? यह तो मैंने पहले ही
  2859. 2:16:04बता दिया। और रहा सवाल कि मैं यहां आया
  2860. 2:16:06कैसे? तो मैं पीछे की चार दीवारी फान कर
  2861. 2:16:09आया हूं। अब अगर मैंने तुम्हारे सवाल का
  2862. 2:16:12जवाब दे दिया है तो अब तुम मेरे सवाल का
  2863. 2:16:14जवाब दो कि वो लड़की अभी कहां पर है।
  2864. 2:16:17विक्रम की बात सुनकर दोनों पहलवानों के
  2865. 2:16:20तेवर बदलने लगे थे। दोनों ने विक्रम को
  2866. 2:16:22आगे पीछे से घेर लिया और उनमें से एक बोला
  2867. 2:16:25तुम यहां आ तो गए हो अपने पैरों पर पर
  2868. 2:16:28यहां से वापस अपने पैरों से नहीं जा
  2869. 2:16:30पाओगे। भाई मेरे मैं यहां चलकर आया हूं।
  2870. 2:16:33तो मैं चाहता भी नहीं कि यहां से जाते समय
  2871. 2:16:36भी दोबारा चलकर ही जाऊं। [संगीत] यहां से
  2872. 2:16:38जाऊंगा तो किसी गाड़ी में बैठकर जाऊंगा।
  2873. 2:16:41बस तुम जल्दी से मुझे यह बता दो कि वो
  2874. 2:16:44लड़की अभी कहां पर है। विक्रम उसकी बात का
  2875. 2:16:46मजाक उड़ाते हुए बोला। विक्रम का जवाब
  2876. 2:16:48सुनकर वो पहलवान गुस्से में बोला, यहां
  2877. 2:16:51क्या कोई कॉमेडी शो चल रहा है जो तुम यहां
  2878. 2:16:53आए और हमारा मजाक उड़ाकर यूं ही चले
  2879. 2:16:55जाओगे? इतना बोलकर वो पहलवान विक्रम पर
  2880. 2:16:58झपटा। पर विक्रम पहले से ही इसके लिए
  2881. 2:17:00तैयार था। जैसे ही वह विक्रम के पास
  2882. 2:17:03पहुंचा, विक्रम ने सीधा पंच उसकी छाती और
  2883. 2:17:05गर्दन के बीच में जड़ दिया। वो पहलवान जिस
  2884. 2:17:08तेजी से विक्रम पर झपटा था, उसी तेजी से
  2885. 2:17:11पीछे जाकर धड़ाम से जमीन पर गिरा और ऐसा
  2886. 2:17:14गिरा कि दोबारा उठ नहीं पाया। विक्रम ने
  2887. 2:17:17उसे ऐसी जगह पर पंच किया था कि उसका बेहोश
  2888. 2:17:20होना तय था। विक्रम के पीछे खड़े दूसरे
  2889. 2:17:23पहलवान ने जब अपने साथी का यह हाल देखा तो
  2890. 2:17:26उसकी आंखों में डर झलकने लगा। अगर तुम
  2891. 2:17:29अपने साथी जैसी हालत नहीं करवाना चाहते तो
  2892. 2:17:32जल्दी से मुझे बता दो कि वो [संगीत] लड़की
  2893. 2:17:34कहां पर है। विक्रम उसे घूरते हुए बोला।
  2894. 2:17:37पर उसने विक्रम की बातों पर ध्यान नहीं
  2895. 2:17:39दिया और तेजी से अपना घूंसा विक्रम पर चला
  2896. 2:17:41दिया। विक्रम ने अपने हाथ से उसकी कलाई
  2897. 2:17:44पकड़ ली और ऐसा झटका दिया कि उस पहलवान की
  2898. 2:17:47कलाई पलट कर उसकी पीठ पर आ गई। वो दर्द से
  2899. 2:17:50करहाते हुए बोला छोड़ दो मुझे। मैंने कहा
  2900. 2:17:53छोड़ दो मुझे। विक्रम ने कहा अगर तुम
  2901. 2:17:56चाहते हो कि मैं तुम्हें छोड़ दूं तो आराम
  2902. 2:17:59से बता दो कि वो लड़की कहां है जिसे अभी
  2903. 2:18:02थोड़ी देर पहले यहां लाया गया था। उस
  2904. 2:18:05पहलवान से दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था।
  2905. 2:18:07उसने करहाते हुए कहा, वो लड़की उस सामने
  2906. 2:18:10वाली कोठी में ही है और अभी उसे कहीं ले
  2907. 2:18:13जाने का कोई प्लान भी नहीं है। बढ़िया।
  2908. 2:18:17अब तुम मेरे एक और सवाल का जवाब दे दो।
  2909. 2:18:20यहां पर तुम्हारे जैसे और कितने लोग हैं?
  2910. 2:18:22विक्रम उसके हाथ पर अपनी पकड़ मजबूत करता
  2911. 2:18:25हुआ बोला तो दर्द से तड़पता हुआ पहलवान
  2912. 2:18:27बोला, यहां पर मेरे जैसे और भी 10-12 लोग
  2913. 2:18:31हैं। मैं तुम्हें बता दूं कि [संगीत] तुम
  2914. 2:18:33यहां से बचकर जा नहीं पाओगे। उस पहलवान का
  2915. 2:18:36हाल देखने के बाद विक्रम को लगा कि अब यह
  2916. 2:18:39उसके किसी काम का नहीं है। तो एक झटके से
  2917. 2:18:41उसे जमीन पर पटक दिया और अगला कदम सोचने
  2918. 2:18:44लगा। दूसरी तरफ शौर्य उस पहलवान के साथ
  2919. 2:18:48गजराज सोलंकी की कोठी में पहुंचा। इस कोठी
  2920. 2:18:51के अंदर आते हुए शौर्य [संगीत] ने नोटिस
  2921. 2:18:53किया कि गजराज सोलंकी ने अपनी सुरक्षा को
  2922. 2:18:56ध्यान में रखकर कोई खास इंतजाम नहीं किया
  2923. 2:18:58था क्योंकि गजराज सोलंकी इस भरोसे में था
  2924. 2:19:01कि इस शहर में कोई उसके खिलाफ जाने की
  2925. 2:19:03हिम्मत नहीं कर सकता।
  2926. 2:19:06अंदर पहुंचते ही उसने देखा कि गजराज
  2927. 2:19:08सोलंकी किसी से फोन पर बात कर रहा था।
  2928. 2:19:11उसके पीछे दो पहलवान टाइप के आदमी खड़े
  2929. 2:19:14थे। विहान रायजादा उसके साथ वाले सोफे पर
  2930. 2:19:17बैठा हुआ था। विहान के ऑोजिट जो सोफा था
  2931. 2:19:20उस पर छगन और मगन बैठे हुए थे। और उन
  2932. 2:19:23दोनों के पीछे रुचि मल्होत्रा एक कुर्सी
  2933. 2:19:26पर डरी सहमी सी बैठी [संगीत] हुई थी। फोन
  2934. 2:19:28रखने के बाद गजराज सोलंकी शौर्य की तरफ
  2935. 2:19:31पलटा। उसके साथ ही विहान रायजादा भी शौर्य
  2936. 2:19:35की तरफ बढ़ता हुआ बोला तुम्हारी हिम्मत की
  2937. 2:19:38दाद देनी पड़ेगी कि तुमने यहां आने की
  2938. 2:19:40जुर्रत कर दी। अभी तुम्हें पता ही कहां है
  2939. 2:19:43रायजादा कि मैं और क्या-क्या कर सकता हूं।
  2940. 2:19:47शौर्य बिना किसी डर के बोला तो तुम ही
  2941. 2:19:49श्रवण हो जिसने विहान को थप्पड़ मारने की
  2942. 2:19:52हिम्मत की और उसके बाद यहां मेरी माद में
  2943. 2:19:56भी आ गए। वाकई मानना पड़ेगा। तुम में
  2944. 2:19:59हिम्मत तो है लड़के। गजराज सोलंकी शौर्य
  2945. 2:20:02को ऊपर से नीचे तक देखते हुए अचानक ही
  2946. 2:20:05बोला, पर तुम्हें इस जगह का पता कैसे चला?
  2947. 2:20:08सामने बैठे छगन ने गजराज सोलंकी की यह बात
  2948. 2:20:11सुनी तो उसके कान खड़े हो गए। दिल में
  2949. 2:20:14सच्ची चाह हो तो लोग भगवान तक को ढूंढ
  2950. 2:20:17लेते हैं। फिर आप कौन सी बड़ी चीज हो?
  2951. 2:20:19शौर्य उपहास करने वाले भाव में बोला। रुचि
  2952. 2:20:22मल्होत्रा ने जब शौर्य को देखा तो उसके
  2953. 2:20:25डरे हुए चेहरे पर एक उम्मीद की किरण दिखाई
  2954. 2:20:27दी। वह आश्चर्य से शौर्य को देख रही थी और
  2955. 2:20:30सोच रही थी कि क्या शौर्य उसके लिए यहां
  2956. 2:20:33आया है। दूसरी [संगीत] तरफ जब मगन ने
  2957. 2:20:35शौर्य को यहां देखा तो उसके चेहरे पर आग
  2958. 2:20:38सी दिखाई देने लगी। वो अपनी जगह से खड़ा
  2959. 2:20:40हुआ और शौर्य के करीब जाकर बोला कहते हैं
  2960. 2:20:44कि जब गीदड़ की मौत आती है तो वो शहर की
  2961. 2:20:47तरफ भागता है। लगता है तुम्हारी मौत आई है
  2962. 2:20:50इसीलिए तुम यहां आ गए हो। शौर्य ने मगन की
  2963. 2:20:53बात सुनकर जोर से हंसते हुए कहा, कमाल है।
  2964. 2:20:57मैंने सोचा नहीं था कि तुम मुझे यहां
  2965. 2:20:59मिलोगे। लगता है मुझसे अपनी पहली मुलाकात
  2966. 2:21:03को भूल गए हो। उसे कैसे भूल जाऊंगा। उसी
  2967. 2:21:07को याद करके ही तो रोज ऊपर वाले से दुआ
  2968. 2:21:10मांगता हूं कि मुझे तुमसे बदला लेने का
  2969. 2:21:12मौका दे। तभी तो मैं अपने दोस्त की आंखों
  2970. 2:21:15पर पड़ी पट्टी को उतार सकूंगा जो पता नहीं
  2971. 2:21:18तुम्हें क्या समझने लगा है। अच्छा पर तुम
  2972. 2:21:22वो करोगे कैसे? शौर्य मगन की आंखों में
  2973. 2:21:25देखते हुए बोला तो मगन घमंड से बोला शेर
  2974. 2:21:28की गुफा में आ गए हो और कहते हो कि मैं
  2975. 2:21:31तुमसे बदला कैसे लूंगा? अब यहां तुम्हें
  2976. 2:21:34बचाने कौन आएगा? तभी छगन मगन के सामने आकर
  2977. 2:21:37बोला मगन तुम ये क्या कर रहे हो? हमारा
  2978. 2:21:41काम खत्म हो गया है। चलो घर चलते हैं।
  2979. 2:21:43[संगीत] इसका क्या करना है? वो सोलंकी
  2980. 2:21:45साहब देख लेंगे। क्यों भाई? आखिर ये चल
  2981. 2:21:48क्या रहा है? किन-किन लोगों से तुमने
  2982. 2:21:50दुश्मनी मोल ले रखी है? गजराज सोलंकी
  2983. 2:21:53शौर्य के पास जाकर बोला तो शौर्य
  2984. 2:21:56मुस्कुराते हुए बोला, "क्या करें? ऊपर
  2985. 2:21:59वाला कुछ ज्यादा ही मेहरबान है मुझ पर।"
  2986. 2:22:01आपने देखा ठाकुर साहब यह कुछ ज्यादा
  2987. 2:22:04बड़बोला नहीं बन रहा है। विहान रायजादा ने
  2988. 2:22:06गजराज सोलंकी से कहा गजराज सोलंकी अभी भी
  2989. 2:22:10शौर्य को ही ऑब्जर्व कर रहे थे। उनके
  2990. 2:22:12ठिकाने में आकर भी शौर्य के चेहरे पर कोई
  2991. 2:22:15भय नहीं था। इस बात से वह हैरान थे। वो इस
  2992. 2:22:18बात से भी परेशान थे कि शौर्य ने यह कैसे
  2993. 2:22:21पता लगाया कि रुचि उनके फार्म हाउस में
  2994. 2:22:24है। जब तक उन्हें इस बात का जवाब नहीं मिल
  2995. 2:22:26जाता वो शौर्य के खिलाफ कोई एक्शन नहीं ले
  2996. 2:22:29सकते थे। पता नहीं वह अपने पीछे क्या
  2997. 2:22:31तैयारी करके आया हो। यही बात उन्हें
  2998. 2:22:34परेशान कर रही थी। वहीं मगन जाने से पहले
  2999. 2:22:37शौर्य से अपनी मार का बदला लेना चाहता था।
  3000. 2:22:40छगन की समस्या यह थी कि वो इन सबके बीच
  3001. 2:22:43ज्यादा कुछ बोल भी नहीं सकता था। नहीं तो
  3002. 2:22:46यह राज खुल जाता कि उसी ने शौर्य को यहां
  3003. 2:22:48के बारे में बताया है। मगर ने छगन से अपना
  3004. 2:22:51हाथ छुड़ाकर गजराज सोलंकी से पूछा। ठाकुर
  3005. 2:22:55साहब आपको इसके साथ जो करना है वह तो आप
  3006. 2:22:57करेंगे ही पर जाने से पहले इसका कुछ उधार
  3007. 2:23:00है मुझ पर। मैं उसे करके जाना चाहता
  3008. 2:23:03हूं। मगन के इतना बोलने के बाद भी जब
  3009. 2:23:06गजराज को शौर्य के चेहरे पर कोई शिकन
  3010. 2:23:08दिखाई नहीं दी तो उन्होंने सोचा कि मगन को
  3011. 2:23:11थोड़ा फ्री हैंड देकर देखा जाए। यही सोचकर
  3012. 2:23:13वे बोले अगर सच में तुम्हें अपना उधार
  3013. 2:23:16चुकता करना है तो तुम उसे चुका सकते हो।
  3014. 2:23:19गजराज सोलंकी से ग्रीन सिग्नल मिलते ही
  3015. 2:23:21मगन बड़ी तेजी से शौर्य की तरफ बढ़ा और
  3016. 2:23:24तभी पूरे हॉल में एक जोरदार थप्पड़ की
  3017. 2:23:27आवाज गूंज उठी। गजराज सोलंकी के दरबार में
  3018. 2:23:30थप्पड़ की गूंज इतनी जबरदस्त थी कि वहां
  3019. 2:23:33मौजूद जितने भी 30 मार खान थे उनकी आंखें
  3020. 2:23:36फटी की फटी रह गई। अपने सामने का नजारा
  3021. 2:23:39देखकर सभी हैरान थे। शौर्य का चेहरा
  3022. 2:23:42गुस्से में लाल हो रहा था और थप्पड़ खाकर
  3023. 2:23:45मगन का गाल लाल था। एक पल के लिए मगन को
  3024. 2:23:49सब कुछ घूमता सा दिख रहा था और उसके पैर
  3025. 2:23:52जमीन पर ठहर से गए थे। पिछले कुछ सेकंड्स
  3026. 2:23:55में जो भी घटित हुआ वो गजराज गैंग की सोच
  3027. 2:23:59के बिल्कुल उल्टा था। कुछ पल के लिए वहां
  3028. 2:24:02सन्नाटा सा पसर गया। मगन अपने गाल पकड़े
  3029. 2:24:06भौचक्का सा शौर्य की तरफ देख रहा था। वो
  3030. 2:24:09समझ नहीं पाया कि शौर्य ने उसे कब थप्पड़
  3031. 2:24:12जड़ दिया था। वो शौर्य के हाथों एक बार
  3032. 2:24:15फिर अपनी हार बर्दाश्त नहीं कर सका और
  3033. 2:24:18हुर्राया
  3034. 2:24:20मैं तुम्हें छोडूंगा नहीं तुमने फिर से
  3035. 2:24:24मेरे ऊपर हाथ उठाया
  3036. 2:24:26मगन की बात सुनकर शौर्य मुस्कुरा कर बोला
  3037. 2:24:30शुक्र मनाओ कि अभी तक अपने पैरों पर खड़े
  3038. 2:24:33हो नहीं तो अगर [संगीत] मैं अपनी ताकत से
  3039. 2:24:35मारता तो भी जमीन की धूल चाट रहे होते।
  3040. 2:24:40गैंग वालों के सामने सरेआम हो रही
  3041. 2:24:43बेइज्जती से मगन के बदन में आग लग गई और
  3042. 2:24:46वह फिर शौर्य की ओर घूंसा लेकर दौड़ा।
  3043. 2:24:49शौर्य ने खड़े-खड़े अपने शरीर को एक दिशा
  3044. 2:24:52में झुकाया और खुद को उसके घूंसे से बचा
  3045. 2:24:54[संगीत] लिया और फिर से मगन के गाल पर एक
  3046. 2:24:57जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। इस बार मगन खड़ा
  3047. 2:25:00नहीं रह पाया और सीधा जमीन पर गिरा। छगन
  3048. 2:25:04दौड़ कर मगन के पास आया। उसने मगन को
  3049. 2:25:07सहारा दिया। छगन को उम्मीद नहीं थी कि
  3050. 2:25:10शौर्य इतने लोगों के बीच भी मगन का यह हाल
  3051. 2:25:13करेगा। वो समझ गया कि उसे गजराज सोलंकी का
  3052. 2:25:17भी खौफ नहीं है। इसीलिए अभी यहां से चले
  3053. 2:25:21जाना ही [संगीत] ठीक है।
  3054. 2:25:24छगन ने सोलंकी साहब से कहा
  3055. 2:25:28ठाकुर साहब अभी मैं इसको लेकर जा रहा हूं।
  3056. 2:25:31आपसे बाद में मिलता हूं।
  3057. 2:25:34लो सोलंकी साहब इसका हिसाब तो हो
  3058. 2:25:37गया। अब अपनी बात कर लें।
  3059. 2:25:40शौर्य ने यह बात गजराज [संगीत] से कही थी।
  3060. 2:25:42पर उसकी नजर सामने बैठी रुचि की ओर थी।
  3061. 2:25:46शौर्य ने अपना हाथ उठाकर रुचि को कहा, हाय
  3062. 2:25:49रुचि कैसी हो तुम? मैं आ गया हूं।
  3063. 2:25:54इन्होंने तुम्हें कोई [संगीत] तकलीफ तो
  3064. 2:25:55नहीं दी? अगर दी है तो उसका हिसाब इनको
  3065. 2:25:58करना पड़ेगा।
  3066. 2:26:01रुचि को कुछ समझ नहीं आया। उसने जवाब में
  3067. 2:26:04सिर्फ गर्दन हिला दी। रुचि इतने खूंखार
  3068. 2:26:07लोगों के बीच शौर्य को इतने आराम से बात
  3069. 2:26:10करते देख हैरान थी। तभी शौर्य विहान
  3070. 2:26:13रायजादा के करीब गया और बोला
  3071. 2:26:17मैंने तुम्हें कहा था कि तुम हमारे बीच
  3072. 2:26:20में मत आना पर तुम्हें शायद मेरी बात समझ
  3073. 2:26:23में नहीं आई। कोई बात नहीं। आज के बाद तुम
  3074. 2:26:28यह [संगीत] समझने के लायक ही नहीं रहोगे।
  3075. 2:26:32विहान रायजादा को गजराज सोलंकी पर कुछ
  3076. 2:26:34ज्यादा ही भरोसा था। इसीलिए वह घमंड भरी
  3077. 2:26:37टोन में [संगीत] बोला,
  3078. 2:26:40[हंसी]
  3079. 2:26:40"मानना पड़ेगा। तुम में हिम्मत तो बहुत
  3080. 2:26:44है। तुम हमारी जगह पर आकर हमें ही धमका
  3081. 2:26:47रहे हो। यह न्यू सिटी टावर नहीं है। यह
  3082. 2:26:50सोलंकी फार्म है। यहां पर लोग अपनी मर्जी
  3083. 2:26:54से आ तो जाते हैं। पर यहां से जाने के लिए
  3084. 2:26:57उन्हें हमारी दया पर निर्भर रहना पड़ता
  3085. 2:27:00है।
  3086. 2:27:01बहुत खूब। मुझे देखकर अच्छा लगा कि गीदड़
  3087. 2:27:05भी भौकना जानता है। जब मैं यहां से जाऊंगा
  3088. 2:27:09तब तुम्हें भी पता चल जाएगा कि मैं आता भी
  3089. 2:27:12अपनी मर्जी से हूं और जाता भी अपनी मर्जी
  3090. 2:27:15से ही हूं।
  3091. 2:27:16शौर्य विहान रायजादा के कंधे को थपथपाते
  3092. 2:27:19हुए बोला [संगीत]
  3093. 2:27:21गजराज सोलंकी जो अभी तक शौर्य की एक-एक
  3094. 2:27:24एक्टिविटी को नोटिस करता जा रहा था वो
  3095. 2:27:27शौर्य से बोला कुछ तो बात तुम में है। तुम
  3096. 2:27:32पहले लड़के हो जो मेरे सामने आकर मुझे
  3097. 2:27:34चैलेंज करने की हिम्मत कर रहा है। वैसे
  3098. 2:27:37तुम हो कौन? मैंने आज से पहले कभी
  3099. 2:27:41तुम्हारे बारे में इस शहर में सुना नहीं।
  3100. 2:27:44मैं कुछ भी नहीं हूं मिस्टर सोलंकी। बस
  3101. 2:27:47मैं तो अपनी एक दोस्त को लेने आया हूं
  3102. 2:27:49जिसे आपने आज जबरदस्ती बंधक बना लिया है।
  3103. 2:27:53बस आपसे यही विनती है कि आप उसे मेरे साथ
  3104. 2:27:57यहां से जाने दें। तो मैं दोबारा कभी आपके
  3105. 2:28:00सामने नहीं आऊंगा। शौर्य ने यह सब पोलाइट
  3106. 2:28:03वे में ही बोला था। लेकिन गजराज गुस्से
  3107. 2:28:06में आ गया। लड़के तुम्हें लगता है कि तुम
  3108. 2:28:10मेरे सामने शर्तबाजी कर सकते हो। तुमसे दो
  3109. 2:28:13प्यार भरी बातें क्या कर ली? तुम तो अपने
  3110. 2:28:16आप को खुदा समझने लगे। शायद तुम्हें पता
  3111. 2:28:19नहीं गजराज सोलंकी से नजर मिलाकर बात करने
  3112. 2:28:22की हिम्मत करने वाले का क्या हश्र होता
  3113. 2:28:25है। इस पर शौर्य थोड़ा सा मुस्कुराया और
  3114. 2:28:28प्यार से ही बोला। कहते हैं कुत्ते को घी
  3115. 2:28:31हजम नहीं होता। उसी तरह कमजोर को अगर आप
  3116. 2:28:35किसी चीज के लिए रिक्वेस्ट करते हैं तो वो
  3117. 2:28:38इसको उस व्यक्ति की कमजोरी समझ लेता है और
  3118. 2:28:41अपने आप को तुर्रम खान समझने लगता है।
  3119. 2:28:45इसीलिए यह कहावत आप पर एकदम फिट बैठती है।
  3120. 2:28:49बहुत जुबान चलती है तुम्हारी। पर ज्यादा
  3121. 2:28:52देर नहीं चलेगी। गजराज सोलंकी ने इतना
  3122. 2:28:55बोला ही था कि तभी कुछ कदमों की आहट उस
  3123. 2:28:58हॉल के अंदर सुनाई दी। शौर्य ने देखा
  3124. 2:29:01पहलवान देवव्रत मल्होत्रा को पकड़ कर लाया
  3125. 2:29:04है। [संगीत] देवव्रत ने हैरानी से शौर्य
  3126. 2:29:06की तरफ देखा और उसके पास जाकर बोले अरे
  3127. 2:29:10श्रवण बेटे तुम यहां क्यों आ गए? देवव्रत
  3128. 2:29:14मल्होत्रा का सवाल सुनकर शौर्य [संगीत]
  3129. 2:29:16बोला अंकल मैं आपको चाबी वापस नहीं कर
  3130. 2:29:20पाया था तो सोचा इनके पास आकर इन्हें खुद
  3131. 2:29:23ही चाबी थमा दूं। गजराज सोलंकी को पेपर
  3132. 2:29:26लेने की जल्दी थी। इसीलिए वो देवव्रत
  3133. 2:29:29मल्होत्रा से बोला बंद करो ये नौटंकी लाओ
  3134. 2:29:33ऑफिस के पेपर दो। इस पर देवव्रत मल्होत्रा
  3135. 2:29:36ने बैग में से फाइल निकालकर बिजराज सोलंकी
  3136. 2:29:39की तरफ बढ़ाते हुए कहा ये ये लीजिए अब तो
  3137. 2:29:43मेरी बेटी को छोड़ दीजिए। आप चिंता क्यों
  3138. 2:29:46करते हो देवव्रत जी? जब आपने अपनी बात
  3139. 2:29:50पूरी की तो मैं भी अपनी बात पूरी करने से
  3140. 2:29:53पीछे नहीं हटूंगा। गजराज सोलंकी पेपर्स को
  3141. 2:29:56एक सरसरी नजर से देखते हुए बोला अंकल जब
  3142. 2:29:59पेपर दे दिए हैं तो पैसे भी तो ट्रांसफर
  3143. 2:30:02करवा लो। कहीं ऐसा तो नहीं इनका पैसे देने
  3144. 2:30:05का कोई इरादा ही ना हो। शौर्य गजराज
  3145. 2:30:08सोलंकी का मन भांपना चाहता था कि वो इस
  3146. 2:30:10प्रॉपर्टी के बदले में पैसे देने का ख्याल
  3147. 2:30:13रखता है या नहीं। तभी गजराज सोलंकी शौर्य
  3148. 2:30:17को घूरता हुआ बोला बच्चे अगर यह डील न्यू
  3149. 2:30:20सिटी टावर के ऑफिस में हो जाती तो इसके
  3150. 2:30:23पैसे मिल भी जाते पर जब मैं इसमें इनवॉल्व
  3151. 2:30:26हो गया तो फिर पैसे की बात तो भूल ही जाओ
  3152. 2:30:29यह तो फिर दादागिरी हुई शौर्य गजराज
  3153. 2:30:32सोलंकी के पास पहुंचते हुए बोला तो गजराज
  3154. 2:30:36सोलंकी ने अपनी आंखों से चिंगारी बरसाते
  3155. 2:30:38हुए कहा लड़के शहर में नए हो इसीलिए
  3156. 2:30:42तुम्हें मेरे बारे में कुछ पता नहीं है
  3157. 2:30:45नहीं तो तुम ऐसी बात करने की हिम्मत नहीं
  3158. 2:30:48करते। शौर्य आगे बढ़ा और एक झटके से गजराज
  3159. 2:30:51सोलंकी के हाथों से वो फाइल छीन ली और
  3160. 2:30:54बोला अगर यह बात है तो फिर आप इस ऑफिस को
  3161. 2:30:57भूल जाइए क्योंकि मैंने पहले ही इसके पूरे
  3162. 2:31:00पैसे मिस्टर देवव्रत मल्होत्रा को दे रखे
  3163. 2:31:03हैं। इसीलिए अब से यह प्रॉपर्टी मेरी है
  3164. 2:31:06और अगर आपको यह प्रॉपर्टी चाहिए तो आपको
  3165. 2:31:09मुझसे डील करनी पड़ेगी। गजराज सोलंकी को
  3166. 2:31:12उम्मीद नहीं थी कि शौर्य उसके हाथ से पेपर
  3167. 2:31:15छीन लेगा। वो गुर्राते हुए बोला तुम्हारी
  3168. 2:31:18इतनी हिम्मत कि तुमने मेरे हाथ से यह फाइल
  3169. 2:31:21छीनने की जुर्रत [संगीत] की। अब तुम्हें
  3170. 2:31:24मेरे कहर से कोई नहीं बचा सकता। विहान
  3171. 2:31:27रायजादा जो पास में ही था वो तेजी से
  3172. 2:31:29शौर्य पर झपटा। पर शौर्य अब पूरी तरह से
  3173. 2:31:32एक्शन के मूड में था। जैसे ही विहान
  3174. 2:31:35रायजादा उसके पास पहुंचा, उसने अपनी जगह
  3175. 2:31:37पर खड़े-खड़े जोरदार केक उसके सीने पर
  3176. 2:31:40मारी। वो उछल कर 5 फीट दूर जा गिरा। वो
  3177. 2:31:43अपना सीना पकड़ कर उसी जगह फर्श पर ढेर हो
  3178. 2:31:46गया था। तभी गजराज सोलंकी ने अपने पीछे
  3179. 2:31:49खड़े दोनों पहलवानों को चिल्ला कर कहा।
  3180. 2:31:52तुम लोग खड़े-खड़े तमाशा क्या देख रहे हो।
  3181. 2:31:55इसकी एक भी हड्डी सलामत नहीं रहनी चाहिए।
  3182. 2:31:58जैसे ही दोनों पहलवान शौर्य की तरफ बढ़े,
  3183. 2:32:01शौर्य चिल्लाकर बोला, रुक जाओ। शौर्य की
  3184. 2:32:05गरज सुनकर दोनों [संगीत] पहलवान अपनी जगह
  3185. 2:32:07पर ही जड़ हो गए। शौर्य ने गजराज सोलंकी
  3186. 2:32:10को चेतावनी देते हुए कहा, मिस्टर सोलंकी
  3187. 2:32:14आखिरी मौका दे रहा हूं। अपने पहलवानों को
  3188. 2:32:17रोक लीजिए। अगर इन्होंने मुझ पर हमला कर
  3189. 2:32:20दिया तो मां कसम मैं आपको किसी को मुंह
  3190. 2:32:23दिखाने लायक नहीं [संगीत] छोडूंगा। शौर्य
  3191. 2:32:26की ललकार सुनकर एक बार को तो गजराज सोलंकी
  3192. 2:32:29भी हिल गए और तुरंत ही जो पहलवान देवव्रत
  3193. 2:32:32मल्होत्रा को लेकर आया था उससे बोले तुम
  3194. 2:32:36बाहर जाकर यहां जितने भी आदमी हैं सबको
  3195. 2:32:39बुला लाओ। आदेश मिलते [संगीत] ही वो शख्स
  3196. 2:32:41तेजी से बाहर की तरफ चला गया। इधर दो
  3197. 2:32:44पहलवान पहले ही शौर्य के सामने खड़े थे।
  3198. 2:32:47उन्हीं में से एक मतवाले हाथी की तरह
  3199. 2:32:49शौर्य की तरफ बढ़ा। उसका शरीर [संगीत]
  3200. 2:32:52किसी दैत्य की तरह ही नजर आ रहा था। शौर्य
  3201. 2:32:55उसकी शारीरिक ताकत का अंदाजा लगाना चाहता
  3202. 2:32:57था क्योंकि उसे महसूस हो गया था कि वह
  3203. 2:33:00इतनी आसानी से सामने [संगीत] वाले राक्षस
  3204. 2:33:03को हरा नहीं पाएगा। शौर्य अपनी जगह से
  3205. 2:33:05उछला और उसके दोनों पैर एक साथ उस पहलवान
  3206. 2:33:08के सीने पर [संगीत] जाकर लगे और वैसे ही
  3207. 2:33:10फिर बैकफ्लिप मारकर शौर्य दोबारा अपनी जगह
  3208. 2:33:13पर वापस भी [संगीत] आ गया। पर शौर्य की इस
  3209. 2:33:16किक का उस पहलवान पर कोई असर नहीं हुआ। वो
  3210. 2:33:18हल्का सा लड़खड़ाया जरूर पर तुरंत [संगीत]
  3211. 2:33:20संभल भी गया। तुम मुझे मगन समझने की भूल
  3212. 2:33:24मत करना। एक बार तुम मेरे हाथ आ जाओ तो
  3213. 2:33:27मैं तुम्हें [संगीत] चींटी की तरह मसल
  3214. 2:33:29दूंगा। पहलवान भद्दी हंसी-हंसते हुए बोला
  3215. 2:33:32और यहीं पर शौर्य चूक कर गया। इस समय उसका
  3216. 2:33:35सारा ध्यान सामने वाले पहलवान पर था। इसी
  3217. 2:33:39मौके का फायदा उठाकर उसके पीछे वाले
  3218. 2:33:41पहलवान ने शौर्य को पीछे से अपनी बाहों
  3219. 2:33:44में जकड़ लिया। शौर्य ने पूरा जोर लगाया
  3220. 2:33:47पर वह छूट नहीं पाया। शौर्य के माथे पर
  3221. 2:33:50पसीने की बूंदे झिलमिलाने लगी। शौर्य को
  3222. 2:33:52दूसरे पहलवान के हाथों में मछली की तरह
  3223. 2:33:55छटपटाते देखकर सामने वाला पहलवान तेजी से
  3224. 2:33:58शौर्य की तरफ बढ़ा। उसके करीब पहुंचकर वो
  3225. 2:34:02शौर्य के दोनों पैरों के बीच वाले हिस्से
  3226. 2:34:04की तरफ देखने लगा। शौर्य समझ गया कि सामने
  3227. 2:34:07वाले पहलवान के दिमाग में क्या चल रहा है।
  3228. 2:34:10इसी समय सामने वाले पहलवान ने अपना पैर
  3229. 2:34:13शौर्य की जांघों के बीच में मारने के लिए
  3230. 2:34:16चलाया। और यही वो समय था जब शौर्य ने अपने
  3231. 2:34:19दोनों पैर उठाकर अपने सिर के ऊपर कर लिए।
  3232. 2:34:22उसका शरीर 180 डिग्री के कोण पर मुड़ गया
  3233. 2:34:25था। उसके सीने से नीचे का हिस्सा मुड़कर
  3234. 2:34:28उसके सिर के ऊपर पहुंच रहा था। जबकि उसका
  3235. 2:34:31सीना अभी भी उसके पीछे वाले पहलवान की
  3236. 2:34:34बाहों में ही कैद था। नियमित योग करने का
  3237. 2:34:37यही फायदा था कि शौर्य का शरीर बहुत ही
  3238. 2:34:40लचीला था। शौर्य के शरीर का निचला हिस्सा
  3239. 2:34:43ऊपर उठते ही सामने वाले पहलवान का पैर
  3240. 2:34:46सीधे जाकर पीछे वाले पहलवान की जांघों के
  3241. 2:34:49बीच वाले हिस्से पर जाकर लगा और अगले ही
  3242. 2:34:52पल पीछे वाले पहलवान की पकड़ शौर्य पर से
  3243. 2:34:55ढीली हुई और शौर्य आजाद हो गया। पर दूसरा
  3244. 2:34:58पहलवान अपने हाथों से अपनी जांघों के बीच
  3245. 2:35:01वाले [संगीत] हिस्से को पकड़ कर वही जमीन
  3246. 2:35:03पर चित हो गया। शौर्य समझ गया कि वार इतना
  3247. 2:35:06तेज था कि यह दूसरा पहलवान अब चाहकर भी
  3248. 2:35:09खड़ा नहीं हो पाएगा। इश् अगर यह किक मुझे
  3249. 2:35:12लग गई होती तो यह सोचकर ही शौर्य के शरीर
  3250. 2:35:15में सेन दौड़ गई। दूसरे पहलवान का हश्र
  3251. 2:35:18[संगीत] देखकर शौर्य गजराज सोलंकी से
  3252. 2:35:20बोला, "यह लो सोलंकी साहब, आपके खिलाड़ी
  3253. 2:35:24ने अपने ही [संगीत] पाले में गोल कर लिया।
  3254. 2:35:26शौर्य की बात सुनकर गजराज सोलंकी के चेहरे
  3255. 2:35:28पर गुस्सा नजर आया। वो दरवाजे से बाहर की
  3256. 2:35:32तरफ देखते हुए चिल्लाया। बाकी सब आदमी
  3257. 2:35:34कहां मर गए? अभी तक आए क्यों नहीं? पर
  3258. 2:35:37सोलंकी साहब के सवाल का कोई जवाब नहीं
  3259. 2:35:40मिला। वो अभी भी इसी उम्मीद में दरवाजे की
  3260. 2:35:43तरफ देख रहे थे कि उनके आदमी बस आने ही
  3261. 2:35:45वाले हैं। पर किसी को भी आता ना देखकर
  3262. 2:35:48शौर्य [संगीत] समझ गया कि विक्रम ने अपना
  3263. 2:35:51काम अच्छे से किया है। वहीं शौर्य के
  3264. 2:35:54सामने अभी भी दूसरा पहलवान अपने दैत्य
  3265. 2:35:56जैसे शरीर के साथ खड़ा था। वो जलती आंखों
  3266. 2:36:00से शौर्य को घूरते हुए बोला, तुम्हारे
  3267. 2:36:03कारण मैंने अपने ही साथी को घायल कर दिया।
  3268. 2:36:05तुम्हें इसका हिसाब करना पड़ेगा।
  3269. 2:36:08पहले तो शायद मैं तुम्हें जिंदा भी छोड़
  3270. 2:36:10देता पर अब तुम्हारी जान लेने के बाद ही
  3271. 2:36:13मुझे चैन आएगा। गैंडे, सपने देखने में कुछ
  3272. 2:36:18नहीं जाता। तुम भी सपने देखो। इससे शायद
  3273. 2:36:21तुम्हारे दिल को थोड़ा चैन मिल जाए। शौर्य
  3274. 2:36:25उस पहलवान की हंसी उड़ाते हुए बोला। शौर्य
  3275. 2:36:27की बात सुनकर पहलवान और भड़क गया। वो
  3276. 2:36:30अंधाधुंध शौर्य पर टूट पड़ा। पर शौर्य
  3277. 2:36:33उसके हाथ नहीं आ रहा था। शौर्य सोच रहा था
  3278. 2:36:35कि इस गैंडे को कैसे काबू में किया जाए।
  3279. 2:36:38तभी अचानक उसके दिमाग में कुछ ख्याल आया।
  3280. 2:36:41उसे ज्यादा से ज्यादा फोर्स जनरेट करना
  3281. 2:36:43था। उसने हॉल का मुआयना किया तो पाया कि
  3282. 2:36:46हॉल में मौजूद [संगीत] पिलर के साथ ऊपर
  3283. 2:36:49वाले फ्लोर का छज्जा निकला हुआ था। शौर्य
  3284. 2:36:51पीछे होते-होते पिलर के पास आ गया। जब
  3285. 2:36:54उसने [संगीत] महसूस किया कि वो पहलवान अब
  3286. 2:36:57उसकी रेंज में आ गया है तो वह फुर्ती से
  3287. 2:36:59उस पिलर की तरफ भागा। पिलर के सहारे जंप
  3288. 2:37:02लेकर [संगीत] वो छज्जे पर पहुंचा और वहां
  3289. 2:37:04से एक लंबा जंप लेकर सीधा उस पहलवान के
  3290. 2:37:07ऊपर कूदा। इतने [संगीत] ऊपर से कूदने के
  3291. 2:37:09कारण उसके शरीर का फोर्स बहुत बढ़ गया और
  3292. 2:37:12जब शौर्य की किक पहलवान की छाती से टकराई
  3293. 2:37:15तो वो उछल कर पीछे [संगीत] जाकर गिरा। यह
  3294. 2:37:18वार इतना तेज था कि पहलवान के मुंह से खून
  3295. 2:37:21निकल आया। तभी बाहर से भागते हुए कदमों की
  3296. 2:37:23आवाज सुनाई दी। जैसे-जैसे रात काली होती
  3297. 2:37:27जा रही थी, फार्म हाउस में गजराज सोलंकी
  3298. 2:37:30और विहान रायजादा की काली करतूतें भी अपने
  3299. 2:37:32अंजाम की ओर बढ़ रही थी। एक तरफ गजराज
  3300. 2:37:36गैंग की बेचैनी उफान पर थी। लेकिन दूसरी
  3301. 2:37:39तरफ शौर्य शांत खड़ा था। जैसा तूफान थमने
  3302. 2:37:42के बाद होता है। उसके सामने वो विशाल
  3303. 2:37:45पहलवान जमीन पर पड़ा आंखें फाड़े शौर्य
  3304. 2:37:48[संगीत] को ही देख रहा था। उसे लगा जरूर
  3305. 2:37:51उसके सीने की कोई हड्डी टूट चुकी है। जब
  3306. 2:37:54उससे दर्द बर्दाश्त नहीं हुआ तो वह धड़ाम
  3307. 2:37:57से जमीन पर गिर गया था। वहीं गजराज की नजर
  3308. 2:38:01एक [संगीत] टक दरवाजे पर टिकी थी। उसे
  3309. 2:38:03इंतजार था अपने मुष्टों के आने का। तभी
  3310. 2:38:06कदमों की आहट सुनाई दी। अगले ही पल दरवाजे
  3311. 2:38:10से बदहवास हालत में वही शख्स अंदर आता
  3312. 2:38:13दिखाई दिया जिसे गजराज सोलंकी ने आदमियों
  3313. 2:38:16को इकट्ठा करके लाने के लिए भेजा था। उसे
  3314. 2:38:19अकेले अंदर आते देख गजराज सोलंकी चिल्लाकर
  3315. 2:38:22बोला विट्ठल तुम अकेले बाकी आदमी कहां है?
  3316. 2:38:28विट्ठल ने गजराज के सामने सिर झुका दिया
  3317. 2:38:31और बोला सर बाहर कोई भी आदमी होश में नहीं
  3318. 2:38:35है। किसी ने पहले ही उन्हें बेहोश कर दिया
  3319. 2:38:37है। यह सुनकर गजराज सोलंकी के चेहरे पर
  3320. 2:38:40हवाइयां उड़ने लगी। जबकि शौर्य अपनी जगह
  3321. 2:38:43पर खड़ा मुस्कुरा रहा था।
  3322. 2:38:46जब गजराज सोलंकी ने शौर्य को मुस्कुराते
  3323. 2:38:48देखा तो वह समझ गया कि इसके पीछे शौर्य का
  3324. 2:38:52ही हाथ है। गजराज बौखला गया लेकिन उसने
  3325. 2:38:56हार नहीं मानी। उसने विहान रायजादा की तरफ
  3326. 2:38:59देखा और उसे आंखों से इशारा किया। विहान
  3327. 2:39:03समझ गया। उसने मेज पर रखा फलों वाला चाकू
  3328. 2:39:06उठाया और अपने पीछे खड़ी रुचि की गर्दन से
  3329. 2:39:09सटाकर चिल्लाया। खबरदार
  3330. 2:39:12जो एक भी कदम बढ़ाया तो तभी गजराज सोलंकी
  3331. 2:39:16रुचि को चाकू की नोक पर देखकर खुश होता
  3332. 2:39:19हुआ बोला शाबाश विहान अगर इनमें से कोई भी
  3333. 2:39:23हमारी तरफ एक भी कदम बढ़ाता है तो तुम
  3334. 2:39:26निसंकोच इस लड़की का गला रेत देना शौर्य
  3335. 2:39:30की आंखों में गुस्सा उबलने लगा उसने गजराज
  3336. 2:39:33की ओर देखकर कहा आखिर अपनी औकात दिखा ही
  3337. 2:39:37दी तुमने तुम्हें क्या लगता है इस तरह तरह
  3338. 2:39:40तुम हमें कितनी देर तक रोक [संगीत] पाओगे?
  3339. 2:39:43और हां, अगर रुचि को एक भी खरोच आई तो फिर
  3340. 2:39:47तुम्हारा क्या होगा? तुमने यह सोचा है?
  3341. 2:39:50शौर्य को अब सिर्फ विक्रम से ही उम्मीद
  3342. 2:39:53थी। पोसी के बारे में सोच रहा था। तभी उसे
  3343. 2:39:56बाहर से भारी कदमों की आवाज सुनाई देने
  3344. 2:39:58लगी। उसने देखा कि दरवाजे से 8-10 पुलिस
  3345. 2:40:01वालों के साथ मेनका हॉल में प्रवेश कर रही
  3346. 2:40:04है। शौर्य ने अपनी घड़ी पर नजर दौड़ाई तो
  3347. 2:40:07उसने गौर [संगीत] किया कि उसे यहां आए हुए
  3348. 2:40:101 घंटे से ऊपर का समय हो गया है और उसने
  3349. 2:40:13मेनका को आधे घंटे का ही समय दिया था।
  3350. 2:40:16मेनका ने जब शौर्य को सही सलामत अपने
  3351. 2:40:18सामने देखा तो उसे राहत महसूस हुई। फिर
  3352. 2:40:21उसकी निगाह सबसे होती हुई रुचि पर गई
  3353. 2:40:24जिसके गले पर विहान रायजादा चाकू रखे हुए
  3354. 2:40:27था।
  3355. 2:40:28पुलिस को देखकर विहान रायजादा उलझन में
  3356. 2:40:31पड़ गया। एक तरह से वोे हाथों पुलिस की
  3357. 2:40:35नजर में आ गया था जो उसके जैसे बिजनेसमैन
  3358. 2:40:38के लिए अच्छा नहीं था। दूसरी तरफ गजराज
  3359. 2:40:42सोलंकी फार्म हाउस में पुलिस को देखकर समझ
  3360. 2:40:44गया कि शौर्य अच्छे से तैयारी करके उसके
  3361. 2:40:47खिलाफ व्यू रचना कर चुका था। अब पुलिस से
  3362. 2:40:51बचने का उसके पास कोई चारा नहीं था।
  3363. 2:40:54इसीलिए उसने पुलिस वालों को धमकाते हुए
  3364. 2:40:56कहा। खबरदार जो मेरी तरफ बढ़े तो अगर तुम
  3365. 2:41:00सब यहां से बाहर नहीं गए तो इस [संगीत]
  3366. 2:41:02लड़की को अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा।
  3367. 2:41:06विहान ने जब यह सुना तो उसका हाथ कांप
  3368. 2:41:08गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या
  3369. 2:41:11करें। [संगीत]
  3370. 2:41:12वो गजराज सोलंकी की बात माने या अपने आप
  3371. 2:41:15को पुलिस के हवाले कर दे। तभी अचानक उसके
  3372. 2:41:18पीछे से एक हाथ आया और उसकी कलाई जिसमें
  3373. 2:41:22चाकू था उसको पकड़ कर उमेटते हुए उसकी पीठ
  3374. 2:41:25पर सटा दिया। विहान रायजादा के गले से चीख
  3375. 2:41:29निकल गई। विहान के पीछे जाकर उसका हाथ
  3376. 2:41:32पकड़ने वाला कोई और नहीं विक्रम ही था जो
  3377. 2:41:36कि अभी तक मौके की फिराक में था। जैसे ही
  3378. 2:41:39विहान के हाथ से चाकू छूटा, दो पुलिस वाले
  3379. 2:41:42दौड़ कर गए और विहान रायजादा को अपने
  3380. 2:41:45कब्जे में ले लिया। अब पासा [संगीत] पूरी
  3381. 2:41:48तरह से पलट चुका था। दो पुलिस वालों ने
  3382. 2:41:51आगे बढ़कर गजराज सोलंकी और विहान को
  3383. 2:41:54हिरासत में ले लिया था। शौर्य आराम से
  3384. 2:41:56चलकर गजराज [संगीत] सोलंकी और विहान
  3385. 2:41:58रायजादा के पास पहुंचा और बोला आज
  3386. 2:42:01तुम्हारा दिन अच्छा था कि पुलिस यहां आ
  3387. 2:42:04गई। नहीं तो मैं तुम दोनों का वो हश्र
  3388. 2:42:07करने वाला था कि फिर जिंदगी में कभी
  3389. 2:42:10दोबारा तुम भूलकर भी मेरा सामना करने की
  3390. 2:42:13हिम्मत नहीं करते। शौर्य की बात सुनकर
  3391. 2:42:16विहान रायजादा ने अपना सिर नीचे कर लिया।
  3392. 2:42:19पुलिस गजराज सोलंकी और विहान रायजादा के
  3393. 2:42:21साथ बाकी पहलवानों को भी गिरफ्तार करके
  3394. 2:42:24थाने लेकर चली गई। शौर्य भी सबके साथ
  3395. 2:42:27पुलिस गाड़ी के पीछे-पीछे थाने पहुंच गया
  3396. 2:42:30और देवव्रत मल्होत्रा ने गजराज सोलंकी और
  3397. 2:42:33विहान रायजादा के खिलाफ अपनी कंप्लेंट
  3398. 2:42:35दर्ज कराई। उसके बाद सभी वहां से होटल
  3399. 2:42:38राजकमल आ गए। मेनका ने होटल राजकमल में
  3400. 2:42:42ऑफिस की रजिस्ट्री से संबंधित सारी
  3401. 2:42:44कार्यवाही पूरी की। सब कुछ कंप्लीट होने
  3402. 2:42:47के बाद रुचि शौर्य के पास आई और उसका
  3403. 2:42:50धन्यवाद करते हुए बोली, तुम्हारा
  3404. 2:42:52बहुत-बहुत धन्यवाद श्रवण। अगर आज तुम नहीं
  3405. 2:42:56होते तो शायद पता नहीं हमारे साथ
  3406. 2:42:58क्या-क्या हो सकता था। अरे कुछ भी नहीं
  3407. 2:43:00होता। अच्छे लोगों का साथ ऊपर वाला भी
  3408. 2:43:03देता है। शौर्य मीठी मुस्कान के साथ बोला।
  3409. 2:43:07मेनका जो उन दोनों से कुछ अलग [संगीत]
  3410. 2:43:09खड़ी थी। जब उसने रुचि को शौर्य से इतने
  3411. 2:43:11प्यार से बातें करते देखा तो उसे रुचि से
  3412. 2:43:14जलन सी हुई। वो स्पष्ट [संगीत] नोट कर
  3413. 2:43:16सकती थी कि रुचि के दिल में कहीं ना कहीं
  3414. 2:43:19शौर्य के लिए एक सॉफ्ट कॉर्नर विकसित हो
  3415. 2:43:21गया था। वहां से रवाना होने से पहले रुचि
  3416. 2:43:25एक बार [संगीत] फिर से शौर्य के पास गई और
  3417. 2:43:27उससे उसका नंबर मांगा। तो शौर्य हैरानी से
  3418. 2:43:30बोला [संगीत] मेरा नंबर। हां, कुछ दिनों
  3419. 2:43:33बाद मेरा बर्थडे है और तुम्हें बुलाना
  3420. 2:43:35[संगीत] है तो तुम्हारा नंबर तो होना
  3421. 2:43:37चाहिए ना मेरे पास। रुचि प्यार भरी नजरों
  3422. 2:43:40से शौर्य की तरफ देखते [संगीत] हुए बोली।
  3423. 2:43:43शौर्य ने रुचि को अपनी तरफ ऐसे प्यार से
  3424. 2:43:45देखते पाया तो वो नर्वस फील [संगीत] करने
  3425. 2:43:48लगा। रुचि खूबसूरत थी और उसका आकर्षण भी
  3426. 2:43:51कम नहीं था। खैर, शौर्य ने अपनी भावनाओं
  3427. 2:43:55पर कंट्रोल किया और रुचि से अपना नंबर
  3428. 2:43:57एक्सचेंज किया। रुचि के वहां से जाने के
  3429. 2:44:00बाद शौर्य मेनका के पास पहुंचा तो मेनका
  3430. 2:44:02ने उसे तंग करते हुए कहा क्या बात है सब
  3431. 2:44:07ठीक तो है [संगीत] बहुत नंबर शंबर
  3432. 2:44:09एक्सचेंज हो रहे हैं शौर्य मेनका के कहने
  3433. 2:44:11का भाव समझ गया था तो उसने झेपते हुए कहा
  3434. 2:44:15अब इसमें मैं क्या कर सकता हूं उसने नंबर
  3435. 2:44:17मांगा इसीलिए मुझे उसे अपना नंबर देना
  3436. 2:44:19पड़ा बस इतनी सी बात ही है ना मेनका अपनी
  3437. 2:44:24पलकें झपकाते हुए बोली अरे यार तुम
  3438. 2:44:27[संगीत] भी हद करती और क्या बात हो सकती
  3439. 2:44:29है? शौर्य टालने वाले भाव में बोला। इतना
  3440. 2:44:33बोलने [संगीत] के बाद शौर्य ने अपनी घड़ी
  3441. 2:44:35की तरफ देखा तो रात के 9:00 बजने वाले थे।
  3442. 2:44:38वो हड़बड़ी दिखाते हुए बोला रात बहुत हो
  3443. 2:44:41गई है। अब मुझे जाना पड़ेगा। मेनका जानती
  3444. 2:44:44थी कि शौर्य के पास अपनी कोई गाड़ी नहीं
  3445. 2:44:46है। तो उसने पूछा पर जाओगे कैसे? तुम्हारे
  3446. 2:44:51पास कोई गाड़ी तो है नहीं। वैसे होटल की
  3447. 2:44:53अपनी बहुत सी कारें हैं। तुम चाहो तो
  3448. 2:44:56उनमें से कोई भी ले जा सकते हो। आफ्टर ऑल
  3449. 2:44:59अब तुम ही उसके मालिक हो।
  3450. 2:45:01शौर्य ने मेनका की बात सुनी। उसने सोचा यह
  3451. 2:45:05हो तो सकता है पर उसे लगा इतनी जल्दी कार
  3452. 2:45:08को मेंटेन करना उसके लिए ठीक नहीं होगा।
  3453. 2:45:11इससे शिप्रा को उसके ऊपर शक करने का मौका
  3454. 2:45:14मिलेगा। इसीलिए वो बोला नहीं अभी रहने दो।
  3455. 2:45:18अभी इसकी कोई जरूरत नहीं है। जब मुझे
  3456. 2:45:21लगेगा कि अब मैं कार अफोर्ड कर सकता हूं
  3457. 2:45:23तो मैं खुद ही ले लूंगा।
  3458. 2:45:26क्या कहा तुमने कि तुम कार अफोर्ड नहीं कर
  3459. 2:45:29सकते? मेनका शौर्य पर तंज कसती हुई
  3460. 2:45:32[संगीत] बोली अरे मेरा कहने का मतलब यह है
  3461. 2:45:36कि जब मैं शिप्रा की नजरों में यह साबित
  3462. 2:45:38कर दूंगा कि अब मैं कार अफोर्ड कर सकता
  3463. 2:45:40हूं तब [संगीत] मैं कार भी ले लूंगा।
  3464. 2:45:43शौर्य सफाई देता हुआ बोला तो मेनका ने
  3465. 2:45:46बेबसी से कहा ठीक है फिर अब मैं इससे
  3466. 2:45:49ज्यादा तुम्हारे लिए और कुछ नहीं कर सकती
  3467. 2:45:52जब तुम्हें खुद ही कैब में धक्के खाने का
  3468. 2:45:54मन कर रहा है तो खाओ धक्के
  3469. 2:45:57खैर इसके बाद शौर्य ने अपने मोबाइल
  3470. 2:45:59[संगीत] से कैब बुक की
  3471. 2:46:00[गला साफ़ करने की आवाज़] 5 मिनट के अंदर
  3472. 2:46:02ही कैब वहां आ गई थी शौर्य कैब में बैठकर
  3473. 2:46:05शिप्रा के घर के लिए निकल गया लगभग 20
  3474. 2:46:08मिनट के बाद वो राय हाउस में पहुंच गया था
  3475. 2:46:11वो अभी शिप्रा के घर के दरवाजे पर पहुंचा
  3476. 2:46:13ही था कि [संगीत] तभी उसका फोन बजा। उसने
  3477. 2:46:16नंबर देखा तो यह शिप्रा का ही था। उसने
  3478. 2:46:19फोन उठाया तो दूसरी तरफ से शिप्रा की आवाज
  3479. 2:46:22आई।
  3480. 2:46:22हेलो कहां रह गए तुम? अभी तक आए [संगीत]
  3481. 2:46:26नहीं।
  3482. 2:46:28शौर्य ने कहा, बस दरवाजे के बाहर ही खड़ा
  3483. 2:46:31हूं। आप दरवाजा तो खोलिए।
  3484. 2:46:34शिप्रा डाइनिंग एरिया में बैठी शौर्य का
  3485. 2:46:36ही इंतजार कर रही थी। घर के बाकी लोग शायद
  3486. 2:46:39सो गए थे। शिप्रा ने घर का दरवाजा खोला तो
  3487. 2:46:43शौर्य अंदर आ गया। जब दोनों डाइनिंग एरिया
  3488. 2:46:46में पहुंचे तो शिप्रा शौर्य से बोली ऐसा
  3489. 2:46:49करो तुम हाथ मुंह धोकर नीचे आ जाओ।
  3490. 2:46:51[संगीत] मैं तुम्हारे लिए खाना लगा देती
  3491. 2:46:53हूं। शौर्य ने शिप्रा के मुंह से यह सुना
  3492. 2:46:56तो उसने आश्चर्य से उसकी तरफ देखा। अब उसे
  3493. 2:46:59एहसास हुआ [संगीत] कि शिप्रा उसी के
  3494. 2:47:01इंतजार में अभी तक बैठी हुई थी और क्योंकि
  3495. 2:47:04उसे लगा होगा कि उसने खाना नहीं खाया है
  3496. 2:47:07तो इसीलिए वह उसे [संगीत] खाने के बारे
  3497. 2:47:09में कह रही है।
  3498. 2:47:11शौर्य के दिल में यह देखकर हलचल सी हुई।
  3499. 2:47:14उसके अंदर एक फीलिंग जागी। जैसे कोई बीवी
  3500. 2:47:17अपने पति का इंतजार करती है और खाने के
  3501. 2:47:19लिए पूछती है। वो अभी इसी सोच में डूबा
  3502. 2:47:23हुआ था तो शिप्रा ने दोबारा पूछा क्या
  3503. 2:47:26हुआ? तुम क्या सोच कर विचार करने लगे?
  3504. 2:47:29खाना तो खाना है ना?
  3505. 2:47:32शौर्य झेपते हुए बोला [संगीत] नहीं आप
  3506. 2:47:35रहने दीजिए। मैं खाना खाकर आया हूं।
  3507. 2:47:38शिप्रा को अब शौर्य से खुद के लिए आप
  3508. 2:47:40सुनकर इरिटेशन होने लगी थी। उसने सोचा वो
  3509. 2:47:44शौर्य से इस बारे में बात करेगी। लेकिन
  3510. 2:47:46पहले उसने उसके खाने को लेकर कहा अगर तुम
  3511. 2:47:50खाना खाकर आने वाले थे तो तुम्हें यहां घर
  3512. 2:47:53पर बता देना चाहिए था। संतो को तुम्हारे
  3513. 2:47:55लिए खाना तो नहीं बनाना पड़ता। तभी शौर्य
  3514. 2:47:58सफाई देता हुआ बोला। मुझे नहीं पता था कि
  3515. 2:48:02यहां मेरा खाना भी बनना था। इसलिए मैं
  3516. 2:48:04इन्फॉर्म नहीं कर पाया। आगे से मैं इस बात
  3517. 2:48:07का ध्यान रखूंगा।
  3518. 2:48:09शौर्य की बात सुनकर शिप्रा [संगीत] को
  3519. 2:48:11शौर्य पर तरस आया। उसे लगा यह उसकी ही
  3520. 2:48:14गलती है। उसने शौर्य [संगीत] को इस बारे
  3521. 2:48:17में तो कुछ कहा ही नहीं था। पर फिर उसने
  3522. 2:48:19खुद ही सोचा कि इतना तो समझदार उसे होना
  3523. 2:48:22चाहिए कि जब वो यहां इस घर में रहने लगा
  3524. 2:48:24है तो उसका खाना तो यहां बनेगा ही ना।
  3525. 2:48:28शिप्रा समझाने वाले भाव में बोली। देखो
  3526. 2:48:31श्रवण अब तुम इस घर में रहते हो तो यहां
  3527. 2:48:34अगर खाना बनेगा तो सबके लिए बनेगा ना।
  3528. 2:48:37इतना तो तुम्हें खुद भी समझना चाहिए।
  3529. 2:48:40शिप्रा की बात सुनने के बाद शौर्य ने सोचा
  3530. 2:48:44उसे कुछ डोज़ शिप्रा को भी देना चाहिए।
  3531. 2:48:46इसीलिए उसने कहा देखिए आप जहां हैं उस जगह
  3532. 2:48:50से आपके [संगीत] लिए यह कहना आसान है। पर
  3533. 2:48:53मैं समझता हूं कि मैं यहां हूं तो सिर्फ
  3534. 2:48:55आपकी मजबूरी के कारण। नहीं तो मेरी यहां
  3535. 2:48:58कोई जरूरत नहीं है। मैं यहां जो आपके घर
  3536. 2:49:01में रह रहा हूं वही मेरे लिए बहुत है।
  3537. 2:49:04उसके ऊपर अगर मैं यह भी उम्मीद करूं कि आप
  3538. 2:49:07मेरे लिए खाना [संगीत] पीना, मेरे कपड़े
  3539. 2:49:09और भी जो जरूरत की चीजें हैं वो देखें तो
  3540. 2:49:13मैं इसे कैसे एक्सेप्ट कर पाऊंगा?
  3541. 2:49:15इतना बोलकर शौर्य 2 मिनट के लिए चुप हो
  3542. 2:49:18गया। फिर कुछ सोच कर बोला। मेरी भी अपनी
  3543. 2:49:21एक ईगो है। मुझे उसको भी संतुष्ट रखना
  3544. 2:49:24पड़ता है। मैं जब भिखारी की जिंदगी भी जी
  3545. 2:49:27रहा था तो उस समय भी मैंने कभी [संगीत]
  3546. 2:49:29किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया। जो खुद ही
  3547. 2:49:32मुझे कुछ देकर चले जाते थे। मैं उसे ग्रहण
  3548. 2:49:35कर लेता था। मंदिर के जो पुजारी बाबा
  3549. 2:49:38[संगीत] थे वो मेरी स्थिति भली-भांति
  3550. 2:49:40समझते थे। इसीलिए ज्यादातर समय ऐसा होता
  3551. 2:49:44था कि वह खुद मेरे लिए खाना उपलब्ध करा
  3552. 2:49:46देते थे और उनका स्नेह मेरे लिए एक बेटे
  3553. 2:49:49के जैसा था। इसीलिए उनकी दी हुई चीजें
  3554. 2:49:53मेरे अंतर्मन को कभी कचोटती नहीं थी और
  3555. 2:49:56मुझसे जितना बन पड़ता था मैं उनके लिए
  3556. 2:49:58करता भी था। तो वो मुझे अपने जैसे लगते
  3557. 2:50:01थे। पर यहां एक पल उसने शिप्रा की आंखों
  3558. 2:50:06में देखा और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए
  3559. 2:50:08बोला इस घर में सभी मुझे अपना दामाद अपना
  3560. 2:50:12जीजा या जो भी एक रिश्ता जो आपने उन्हें
  3561. 2:50:15दिखाने के लिए बना दिया है सभी मुझे वैसे
  3562. 2:50:18ही ट्रीट करते हैं। लेकिन मुझे हकीकत पता
  3563. 2:50:21है कि मैं यहां सिर्फ एक रोल प्ले कर रहा
  3564. 2:50:24हूं। शायद यहां सभी हकीकत में जी रहे होते
  3565. 2:50:27हैं। पर मैं हमेशा एक एक्टिंग ही कर रहा
  3566. 2:50:29होता हूं। क्योंकि उनके लिए जो सच [संगीत]
  3567. 2:50:32है मेरे लिए वो एक रोल प्ले है। आप समझ
  3568. 2:50:34सकती हैं कितना मुश्किल होता है हर समय
  3569. 2:50:37एक्टिंग मोड में रहना। शौर्य ने एक ही
  3570. 2:50:40सांस में अपने दिल का गुबार जाहिर कर
  3571. 2:50:42दिया। शिप्रा सन्यासी उसे देख रही थी। तभी
  3572. 2:50:45[संगीत] शिप्रा के प्रति थोड़ी सिंपैथी
  3573. 2:50:47दिखाते हुए शौर्य ने कहा, "मैं समझता
  3574. 2:50:50[संगीत] हूं कि यह आपके लिए भी उतना ही
  3575. 2:50:52मुश्किल है। पर आपको सिर्फ मेरे सामने
  3576. 2:50:55एक्टिंग करनी होती [संगीत] है। लेकिन मुझे
  3577. 2:50:58मुझे तो हर पल सबके सामने आपके पति होने
  3578. 2:51:01का वो ढोंग करना पड़ता है। जिसकी सच्चाई
  3579. 2:51:04जगजाहिर है। शौर्य की इन बातों ने शिप्रा
  3580. 2:51:08को अंदर से हिला दिया। शौर्य की बातों से
  3581. 2:51:10शिप्रा की सांसे थम सीसी गई थी। शौर्य के
  3582. 2:51:14शब्द उसके कानों में किसी धमाके की तरह
  3583. 2:51:16गूंज रहे थे। उसने आज तक शौर्य को सिर्फ
  3584. 2:51:19एक जरूरत या एक मोहरे की तरह देखा था।
  3585. 2:51:22लेकिन आज पहली बार उसे उस मोहरे के पीछे
  3586. 2:51:24छिपा घायल स्वाभिमान दिखाई दिया। शौर्य की
  3587. 2:51:28आंखों में जो दर्द और विद्रोह था, उसने
  3588. 2:51:31शिप्रा की आत्मा को झकझोर कर रख दिया था।
  3589. 2:51:34शिप्रा ने मन ही मन सोचा कितना कुछ इसके
  3590. 2:51:37दिल में दबा हुआ है। आज इसके जज्बात जहर
  3591. 2:51:41बनकर बाहर निकल रहे हैं। क्या मैं वाकई
  3592. 2:51:44इतनी पत्थर दिल हो गई थी? यह कड़वा सच था
  3593. 2:51:47कि शिप्रा अब तक सिर्फ अपने लिए सोच रही
  3594. 2:51:50थी। वो अपनी सहूलियत के हिसाब से शौर्य को
  3595. 2:51:53नचा रही थी। उसे कभी एहसानों के नीचे
  3596. 2:51:56दबाती तो कभी रिश्तों के नाम पर मजबूर
  3597. 2:51:58करती। शौर्य की कड़वाहट [संगीत] जायज थी।
  3598. 2:52:02अगर दादा बलवंत राय ने शौर्य को घर में
  3599. 2:52:04रखने की जिद नहीं की होती तो वह आज भी उसी
  3600. 2:52:07अंधेरे सर्वेंट क्वार्टर की धूल फांक रहा
  3601. 2:52:09होता। शिप्रा को पहली बार महसूस हुआ कि
  3602. 2:52:13उसकी दी हुई हर सुख सुविधा शौर्य के लिए
  3603. 2:52:15तोहफा नहीं बल्कि एक घाव थी। उसका शौर्य
  3604. 2:52:19के लिए महंगे कपड़े लेना, उसके खानेपीने
  3605. 2:52:22का शाही इंतजाम करना या उसे जेब खर्च के
  3606. 2:52:24लिए पैसे देना यह सब बातें शौर्य को अंदर
  3607. 2:52:28ही अंदर काट रही थी। क्योंकि उसे यह सब
  3608. 2:52:30पति होने के नाते नहीं बल्कि एक बेचारे पर
  3609. 2:52:33की गई दया के रूप में मिला था। शिप्रा ने
  3610. 2:52:36अपनी मुट्ठियां भी। उसे एहसास हुआ कि अब
  3611. 2:52:39और दिखावा मुमकिन नहीं है। उसे कुछ चीजें
  3612. 2:52:43शौर्य के सामने अब स्पष्ट रूप से रख देनी
  3613. 2:52:45चाहिए ताकि दोबारा किसी बात को लेकर शौर्य
  3614. 2:52:48[संगीत] का ईगो हर्ट ना हो। ड्राइंग हॉल
  3615. 2:52:51की खामोशी उसे काटने लगी थी। उसे डर था कि
  3616. 2:52:55कहीं घर का कोई सदस्य उनकी इस तनातनी को
  3617. 2:52:58देख ना ले। इसीलिए शिप्रा ने शौर्य से
  3618. 2:53:00कहा, ऐसा करो तुम अपने कमरे में चलकर अपने
  3619. 2:53:04कपड़े चेंज कर लो। मैं वहीं आकर तुमसे बात
  3620. 2:53:07करती हूं। ठीक है। इतना कहकर शौर्य अपने
  3621. 2:53:11कमरे में चला आया। उसने बाथरूम में
  3622. 2:53:13[संगीत] जाकर मुंह हाथ धोए और नाइट ड्रेस
  3623. 2:53:15में आ गया। वो तैयार होकर शिप्रा का
  3624. 2:53:18इंतजार करने लगा और सोचने भी लगा। पता
  3625. 2:53:21नहीं मेरी बातों का शिप्रा पर क्या असर
  3626. 2:53:23हुआ होगा। कहीं उल्टा असर हुआ तो पता चला
  3627. 2:53:26कि अगले ही दिन मुझे इस घर से रुखसत ही कर
  3628. 2:53:30दिया। यह सोचकर वो अपनी ही सोच से घबरा
  3629. 2:53:33गया। फिर उसने ही खुद को तसल्ली दी। नहीं
  3630. 2:53:38वो ऐसा नहीं कर सकती। अभी उसे मेरी जरूरत
  3631. 2:53:41है। तभी शौर्य ने दरवाजे पर आहट महसूस की।
  3632. 2:53:45उसने देखा शिप्रा उसके कमरे के अंदर आ रही
  3633. 2:53:48थी। शिप्रा ने भी इतने [संगीत] समय में
  3634. 2:53:50अपने कपड़े बदल लिए थे। पिंक कलर की नाइटी
  3635. 2:53:53में उसका गोरा चेहरा किसी [संगीत] आसमान
  3636. 2:53:56से उतरी परी के जैसा लग रहा था। उसके खुले
  3637. 2:53:59हुए बाल जो उसके कंधों पर लहरा रहे थे,
  3638. 2:54:01शौर्य को अपनी तरफ खींच रहे थे। इसी समय
  3639. 2:54:05एक हवा का झोंका बालकनी के दरवाजे से होकर
  3640. 2:54:08कमरे में आया और शिप्रा के चेहरे से
  3641. 2:54:10टकराया तो उसके बाल पीछे की तरफ लहरा गए।
  3642. 2:54:14शौर्य ने यह देखा तो उसका दिल मुंह को आ
  3643. 2:54:16गया। उसे लगा अगर वह कुछ पल और शिप्रा की
  3644. 2:54:20तरफ देखता रहा तो अपनी भावनाओं पर कंट्रोल
  3645. 2:54:22नहीं कर पाएगा। [संगीत] इसीलिए उसने अपनी
  3646. 2:54:25नजर शिप्रा से फेर ली। वो बालकनी के
  3647. 2:54:28दरवाजे को बंद करने के लिए आगे बढ़ा तो
  3648. 2:54:30शिप्रा [संगीत] ने कहा उसे खुला ही रहने
  3649. 2:54:33दो। शिप्रा की बात सुनकर शौर्य ठटक गया।
  3650. 2:54:37शिप्रा दरवाजे से होती हुई बालकनी में आ
  3651. 2:54:40गई। [संगीत] मजबूरन शौर्य को भी उसके
  3652. 2:54:42पीछे-पीछे बालकनी में आना पड़ा। रात के इस
  3653. 2:54:46वक्त हल्की-ठंडी हवा शरीर को सुकून दे रही
  3654. 2:54:49थी। बालकनी के सामने बड़ा सा लॉन और उसमें
  3655. 2:54:53बीच-बीच में टिमटिमाती [संगीत] लाइटें
  3656. 2:54:55उसकी खूबसूरती बढ़ा रही थी। शिप्रा बालकनी
  3657. 2:54:59की रेलिंग के सहारे शौर्य की तरफ पलट कर
  3658. 2:55:01खड़ी हो गई। शौर्य भी बालकनी की रेलिंग
  3659. 2:55:04पकड़े हुए लॉन की तरफ मुंह करके खड़ा हो
  3660. 2:55:07गया। दोनों की आंखों ने तो एक दूसरे को
  3661. 2:55:10अपने राज बता दिए थे। लेकिन दिल की हकीकत
  3662. 2:55:13को अभी भी जुबान तक पहुंचने का रास्ता तय
  3663. 2:55:16करना बाकी था। शायद शिप्रा की जिद शौर्य
  3664. 2:55:19की उम्मीदों पर अभी भारी पड़ रही थी।
  3665. 2:55:22शौर्य को डर सा लग रहा था कि खामोशी टूटते
  3666. 2:55:25ही कहीं [संगीत] सब कुछ खत्म ना हो जाए।
  3667. 2:55:27तभी शिप्रा शौर्य की तरफ देखते हुए बोली।
  3668. 2:55:31मुझे नहीं पता था कि मेरे द्वारा की गई
  3669. 2:55:33कुछ [संगीत] चीजें तुम्हारी ईगो को हर्ट
  3670. 2:55:35कर रही थी। दरअसल मैंने इतना सोचा ही
  3671. 2:55:39नहीं। पर अब सोचती हूं तो [संगीत] लगता है
  3672. 2:55:41कि तुम सही कह रहे थे। मैं हमेशा अपनी
  3673. 2:55:43प्रॉब्लम्स के बारे में ही सोचती रही। कभी
  3674. 2:55:46तुम्हारे बारे में सोचा ही नहीं क्योंकि
  3675. 2:55:48कभी यह एहसास ही नहीं हुआ कि मेरी कोई बात
  3676. 2:55:51तुम्हारे ईगो को हर्ट कर सकती है। इतना
  3677. 2:55:54[संगीत] कहकर शिप्रा 2 मिनट के लिए रुकी
  3678. 2:55:57और फिर बोली मैंने तो यही सोचा कि आभावों
  3679. 2:56:01के बीच रहे तुम। अगर मैं तुम्हारे लिए कुछ
  3680. 2:56:04करूंगी तो तुम्हें अच्छा ही लगेगा।
  3681. 2:56:07रही दूसरी बात कि तुम्हें जो मेरे कारण
  3682. 2:56:09मेरे परिवार के सामने हमेशा एक्टिंग करनी
  3683. 2:56:12पड़ती है। अगर तुम चाहो [संगीत] तो वह
  3684. 2:56:14एक्टिंग ना रहकर सच भी हो सकती है। शौर्य
  3685. 2:56:18ने जैसे ही शिप्रा की यह बात सुनी, उसका
  3686. 2:56:20दिल उछल [संगीत] कर खुशी में भंगड़ा करने
  3687. 2:56:22लगा। उसके दिमाग में सबसे पहला ख्याल यही
  3688. 2:56:26आया कि क्या शिप्रा [संगीत] ने उसे अपना
  3689. 2:56:28पति स्वीकार कर लिया? पर समय से पहले वो
  3690. 2:56:31उत्साहित होकर बाद में बेवकूफ नहीं बनना
  3691. 2:56:34चाहता था। इसीलिए उसने खुद की भावनाओं पर
  3692. 2:56:37कंट्रोल करके कहा मैं आपके कहने का मतलब
  3693. 2:56:40नहीं समझा। देखो अगर तुम चाहो तो मैं कभी
  3694. 2:56:44तुमसे तलाक नहीं लूंगी। तुम्हें ध्यान
  3695. 2:56:47होगा जब तुम यहां रहने आए थे तो मैंने
  3696. 2:56:50तुमसे इसी बारे में कुछ बात कही थी।
  3697. 2:56:53शिप्रा की यह बात सुनकर शौर्य को ध्यान
  3698. 2:56:55आया। जब शिप्रा ने यहीं सामने नजर आ रहे
  3699. 2:56:58लॉन में उससे कहा था कि वह उसकी पत्नी
  3700. 2:57:01बनकर रह सकती है [संगीत] पर कभी पत्नी का
  3701. 2:57:04सुख नहीं देगी। शौर्य ने कहा हां तुम्हारी
  3702. 2:57:09कही एक-एक बात मुझे याद है। तो क्या
  3703. 2:57:12तुम्हें मंजूर होगा मेरा पति बनकर रहना?
  3704. 2:57:15यह जानते हुए कि मैं तुम्हें कभी एक पत्नी
  3705. 2:57:17का सुख नहीं दूंगी। शिप्रा शौर्य की आंखों
  3706. 2:57:20में देखती हुई [संगीत] बोली। शौर्य को
  3707. 2:57:23तुरंत कोई जवाब देते नहीं बना। उसके दिल
  3708. 2:57:25में जो अभी थोड़ी देर पहले एक उम्मीद की
  3709. 2:57:27लहर दौड़ी थी वो हवा हो गई। शिप्रा ने
  3710. 2:57:31उसके चेहरे के बिगड़े हुए भाव को देखा तो
  3711. 2:57:34वो उसकी भावनाओं को समझ गई। इसीलिए वो
  3712. 2:57:37शौर्य को दोबारा समझाते हुए बोली देखो मैं
  3713. 2:57:41समझती हूं कि हर किसी के शरीर की अपनी
  3714. 2:57:43जरूरत होती है। इसीलिए अगर तुम्हारा किसी
  3715. 2:57:46के साथ अफेयर भी होता है या तुम [संगीत]
  3716. 2:57:48किसी और के साथ अपनी नीड को पूरा करते हो
  3717. 2:57:51तो भी मुझे उसमें कोई आपत्ति नहीं है।
  3718. 2:57:54क्या इसके बाद तुम मेरे पति बनकर [संगीत]
  3719. 2:57:56हमेशा रहने के लिए तैयार हो? शौर्य का मन
  3720. 2:57:59किया कि वो अपना सिर पीट ले। उसने सोचा
  3721. 2:58:03कैसी लड़की है यार? क्या सिर्फ मर्दों के
  3722. 2:58:06शरीर को ही एक साथी की नीड होती है? औरतों
  3723. 2:58:09की ऐसी कोई जरूरत नहीं होती?
  3724. 2:58:12इसके बाद उसके दिल में यह ख्याल भी आया कि
  3725. 2:58:14क्या सच में [संगीत] अगर उसका किसी के साथ
  3726. 2:58:17कोई अफेयर होगा तो शिप्रा को कोई फर्क
  3727. 2:58:19नहीं पड़ेगा। उसने अपनी जिज्ञासा शांत
  3728. 2:58:22करने के लिए कहा। [संगीत]
  3729. 2:58:24क्या सिर्फ मर्दों के शरीर की ही अपनी नीड
  3730. 2:58:26होती है? औरतों के शरीर की अपनी कोई नीड
  3731. 2:58:29नहीं होती? और दूसरी बात क्या सच में ऐसा
  3732. 2:58:32होगा कि मेरा अगर [संगीत] किसी के साथ
  3733. 2:58:34अफेयर होगा या मैं किसी लड़की के साथ अपना
  3734. 2:58:37समय बिताऊंगा तो आपको कोई फर्क नहीं
  3735. 2:58:40पड़ेगा।
  3736. 2:58:41शौर्य का सवाल सुनकर शिप्रा पूरे
  3737. 2:58:43कॉन्फिडेंस के साथ बोली तुम मेरी चिंता मत
  3738. 2:58:47करो। मुझे पता है [संगीत] कि मेरी क्या
  3739. 2:58:49नीड है। अपनी देखो। तुम कहां किसके साथ
  3740. 2:58:52क्या करते हो या किसके साथ अपना समय
  3741. 2:58:54बिताते हो उससे मुझे कोई दिक्कत नहीं है।
  3742. 2:58:57बस एक चीज चाहूंगी कि तुम दूसरी शादी नहीं
  3743. 2:59:00करोगे। शौर्य को अपने ऊपर तरस आने लगा। वो
  3744. 2:59:04सोचने को मजबूर हो गया कि क्या उसका
  3745. 2:59:06व्यक्तित्व इतना साधारण है कि शिप्रा को
  3746. 2:59:10उसके होने या ना होने से कोई फर्क ही नहीं
  3747. 2:59:12पड़ेगा। फालतू में ही वह खुद को बड़ा
  3748. 2:59:15स्मार्ट समझता था [संगीत] या जो लड़कियां
  3749. 2:59:17उसे स्पेशल फील कराती थी वो सिर्फ पैसे के
  3750. 2:59:20लिए ही उसकी दीवानी होने का दिखावा करती
  3751. 2:59:23थी। तो क्या आज जो उसने रुचि की आंखों में
  3752. 2:59:26अपने लिए एक लगाव महसूस किया [संगीत] था।
  3753. 2:59:28क्या वो सब एक दिखावा था? या वो उसके
  3754. 2:59:31एहसान के कारण उससे इंप्रेस थी। फिर शौर्य
  3755. 2:59:34के दिमाग में एक दूसरा ख्याल आया। उसने
  3756. 2:59:37कहा चलो एक बार को मैं आपकी बात को मान
  3757. 2:59:40[संगीत] भी लेता हूं। मैं हमेशा के लिए
  3758. 2:59:43आपका पति बनकर रहने को तैयार भी हो जाता
  3759. 2:59:45हूं। [संगीत] पर इसके अलावा भी कुछ ऐसी
  3760. 2:59:48चाहतें होती हैं जिन्हें इंसान अपने दिल
  3761. 2:59:50से निकाल नहीं सकता। उनको कैसे पूरा
  3762. 2:59:53करेंगे? सभी चाहते हैं कि उसका परिवार
  3763. 2:59:56[संगीत] हो, बच्चे हो। इस तरह तो ना आप
  3764. 2:59:59कभी मां बन सकेंगी और ना ही मैं बाप।
  3765. 3:00:02[संगीत] शौर्य की बात सुनकर शिप्रा कुछ पल
  3766. 3:00:05सोचती रही। फिर बोली, अगर तुम फादर बनना
  3767. 3:00:08चाहते हो तो उसका भी [संगीत] रास्ता है।
  3768. 3:00:11ऐसा नहीं है कि मुझे मां बनने की ख्वाहिश
  3769. 3:00:14नहीं है। इसके लिए कुछ समय बाद हम सरोगेसी
  3770. 3:00:18के द्वारा मां-बाप बन सकते हैं। शौर्य ने
  3771. 3:00:21सोचा [संगीत] कि क्या यह सब कुछ उसने पहले
  3772. 3:00:24से ही सोच रखा है?
  3773. 3:00:26फिर भी अपनी शंका के निवारण के लिए
  3774. 3:00:28[संगीत] उसने पूछा अगर आप सरोगेसी के
  3775. 3:00:31द्वारा बच्चा पैदा [संगीत] करेंगी तो क्या
  3776. 3:00:34आपके मां-बाप आपसे सवाल नहीं करेंगे? आप
  3777. 3:00:38जब खुद बच्चे को जन्म दे सकती हैं तो
  3778. 3:00:41सरोगेसी का रास्ता क्यों अपना [संगीत] रही
  3779. 3:00:43हैं? शौर्य का यह सवाल सुनकर शिप्रा कुछ
  3780. 3:00:46सोच कर बोली, "इसके लिए हम एक [संगीत]
  3781. 3:00:49दूसरा रास्ता भी अपना सकते हैं। हम आईवीएफ
  3782. 3:00:52के द्वारा भी बच्चे को जन्म दे सकते हैं।
  3783. 3:00:55इस तरह किसी को सवाल करने की जरूरत ही
  3784. 3:00:58नहीं होगी।" शौर्य का दिमाग चकरा गया।
  3785. 3:01:02उसने सोचा इसे मर्दों से ऐसी क्या ही चिढ़
  3786. 3:01:05हो गई है कि बच्चे भी पैदा करने को तैयार
  3787. 3:01:08हो गई है। पर नेचुरल तरीके से नहीं आईवीएफ
  3788. 3:01:11के द्वारा। यह लड़की सब कुछ के लिए तैयार
  3789. 3:01:14है। पर जो एक पति के लिए सबसे जरूरी चीज
  3790. 3:01:17है उसके लिए ही तैयार नहीं है। फिर एक बार
  3791. 3:01:20शौर्य को शक हुआ कि क्या शिप्रा जो बोल
  3792. 3:01:23रही है सच में वो ऐसा कर पाएगी?
  3793. 3:01:26क्या सच में वो उसे किसी और लड़की के साथ
  3794. 3:01:29देख [संगीत] पाएगी? फिर शौर्य ने सोचा अगर
  3795. 3:01:32वो ऐसे रह सकती है तो फिर वो क्यों नहीं
  3796. 3:01:35उसके बिना रह सकता। यह बात दिमाग में आते
  3797. 3:01:38ही शौर्य बोला अगर ऐसी बात है तो मुझे
  3798. 3:01:42मंजूर है। मैं पूरी जिंदगी आपका पति बनकर
  3799. 3:01:45रहने के लिए तैयार हूं। बिना आपसे कोई
  3800. 3:01:47अपेक्षा किए। पर मेरी भी यही शर्त है कि
  3801. 3:01:50अगर मैं अपनी शारीरिक जरूरत के लिए किसी
  3802. 3:01:53के साथ होता हूं [संगीत] तो आप कोई आपत्ति
  3803. 3:01:55नहीं करेंगी। और क्योंकि मुझे भविष्य में
  3804. 3:01:58बच्चे चाहिए तो उसके लिए किसी और की कोख
  3805. 3:02:01नहीं चाहिए। वो बच्चा आपके द्वारा ही
  3806. 3:02:04होगा। भले ही वह आईवीएफ के द्वारा ही हो।
  3807. 3:02:07अगर आपको यह मंजूर है तो [संगीत] मुझे कोई
  3808. 3:02:09दिक्कत नहीं है। शिप्रा शौर्य को अपनी कही
  3809. 3:02:13गई शर्त मानते देखकर बोली तो फिर ठीक है।
  3810. 3:02:16मैं कभी तुमसे तलाक लेने की कोशिश नहीं
  3811. 3:02:19करूंगी। अब तुम्हें भी अपने मन पर यह
  3812. 3:02:21[संगीत] बोझ रखने की जरूरत नहीं है कि
  3813. 3:02:23तुम्हें हर समय मेरा पति होने का ड्रामा
  3814. 3:02:26करना पड़ता है। जब दोनों की आपसी सहमति से
  3815. 3:02:29एक डिसीजन हो गया तो [संगीत] शौर्य बोला
  3816. 3:02:32इसका यह मतलब भी नहीं होगा कि मैं हमेशा
  3817. 3:02:35इसी घर में रहूंगा। मेरा [संगीत] जब मन
  3818. 3:02:37करेगा मैं अपने अलग घर में रह सकता हूं।
  3819. 3:02:40आपके मम्मी पापा जब भी चाहे आकर देख सकते
  3820. 3:02:43हैं कि मैं कहां और कैसे रहता हूं।
  3821. 3:02:46क्योंकि मर्द की रिस्पेक्ट [संगीत] तभी तक
  3822. 3:02:48होती है जब तक वह अपने घर में होता है।
  3823. 3:02:51ससुराल में होने पर उसकी इज्जत नहीं रहती।
  3824. 3:02:55मेरी तो वैसे ही नहीं है। तो मुझे वो अपनी
  3825. 3:02:57मेहनत से कमानी [संगीत] है। शिप्रा शौर्य
  3826. 3:03:00की इस बात के लिए भी तुरंत तैयार हो गई।
  3827. 3:03:03हां, मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है। बल्कि
  3828. 3:03:06यह तो अच्छा ही होगा। जब एक बार हमारे
  3829. 3:03:09परिवार की नजर में यह पक्का हो गया
  3830. 3:03:11[संगीत] कि हम पति-पत्नी हैं, तो तुम उसके
  3831. 3:03:13बाद यहां रहो या अपने घर में। मुझे कोई
  3832. 3:03:16फर्क नहीं पड़ेगा। फिर सारी बातें होने के
  3833. 3:03:19बाद शिप्रा ने एक बॉक्स शौर्य की तरफ
  3834. 3:03:22बढ़ाया। शिप्रा और शौर्य का रिश्ता एक
  3835. 3:03:25अनसुलझी पहेली बन गया था। दोनों ही एक
  3836. 3:03:28दूसरे को पकड़े रखना चाहते थे। शौर्य ने
  3837. 3:03:30तो शिप्रा को अपने सपनों में भी एंट्री दे
  3838. 3:03:33दी थी। लेकिन उसे क्या पता था कि शिप्रा
  3839. 3:03:36उसके सपनों को समझौते में बदल देगी।
  3840. 3:03:39बालकनी में [संगीत] एक दूसरे की शर्तों पर
  3841. 3:03:41सहमति जताने के बाद समझौता वार्ता जैसे ही
  3842. 3:03:44खत्म हुई तो शिप्रा ने शौर्य की तरफ एक
  3843. 3:03:47बॉक्स बढ़ा दिया। शौर्य एक पल को रुक गया।
  3844. 3:03:51तभी उसे याद आया यह वही ज्वेलरी बॉक्स है
  3845. 3:03:54जो उसने राधिका की बर्थडे पार्टी में
  3846. 3:03:56शिप्रा को दिया था। तभी शिप्रा [संगीत]
  3847. 3:03:59बोली यह वही गिफ्ट है जो तुमने मुझे दिया
  3848. 3:04:02था। तो वापस क्यों कर रही हो? शौर्य ने
  3849. 3:04:06कहा तो शिप्रा की आवाज सख्त हो गई। वो
  3850. 3:04:09बोली मैं इतना महंगा गिफ्ट नहीं ले सकती।
  3851. 3:04:12इसे वापस कर दो। शौर्य ने शिप्रा को
  3852. 3:04:15समझाने की कोशिश [संगीत] की। मैंने ये
  3853. 3:04:18आपके लिए दिल से लिया था। लेकिन शिप्रा की
  3854. 3:04:21सख्ती नहीं टूटी। [संगीत] वो बोली हम
  3855. 3:04:24दुनिया के लिए पतिपत्नी होंगे लेकिन असल
  3856. 3:04:26में नहीं। और तुम इस रिश्ते को सच बनाने
  3857. 3:04:30की कोशिश कर रहे हो। इस पर शौर्य ने हल्की
  3858. 3:04:33मुस्कान के साथ कहा ऐसी कोई शर्त नहीं थी।
  3859. 3:04:37हमने सिर्फ यह तय किया था कि हमारे बीच वो
  3860. 3:04:40नजदीकी नहीं होगी। पर इसका मतलब यह
  3861. 3:04:42[संगीत] नहीं कि हम एक दूसरे के लिए कुछ
  3862. 3:04:45कर ही नहीं सकते। शिप्रा ने उसकी आंखों
  3863. 3:04:48में देखते [संगीत] हुए कहा यहीं से सब
  3864. 3:04:50शुरू होता है। पहले चीजों का आदानप्रदान,
  3865. 3:04:54फिर आदत, फिर चाहत और एक दिन हक। और मैं
  3866. 3:04:58उस शुरुआत तक नहीं जाना चाहती।
  3867. 3:05:01यह सुनकर शौर्य की आवाज में खींच उतर आई।
  3868. 3:05:05तो फिर इस रिश्ते का मतलब ही क्या है? जब
  3869. 3:05:08कुछ करना ही नहीं है तो बेहतर है हम अजनबी
  3870. 3:05:11ही रहें। शिप्रा चुप हो गई। उसे महसूस हुआ
  3871. 3:05:15कि बना हुआ समझौता बिखर ना जाए। लेकिन वो
  3872. 3:05:19यह रिश्ता छोड़ भी नहीं सकती थी क्योंकि
  3873. 3:05:21उसे पता था शौर्य जैसा दमदार आदमी उसे फिर
  3874. 3:05:24नहीं मिलेगा। उधर शौर्य शिप्रा की बातों
  3875. 3:05:27से थोड़ा परेशान हुआ। लेकिन उसने खुद को
  3876. 3:05:30[संगीत] संभालते हुए कहा, "आप कुछ ज्यादा
  3877. 3:05:33सोच रही हैं। हर चीज का मतलब जिस्मानी
  3878. 3:05:35रिश्ते से नहीं होता। कुछ चीजें सिर्फ
  3879. 3:05:38खुशी देती हैं। इसीलिए की जाती हैं। जैसे
  3880. 3:05:42आपने मुझे मोबाइल दिया तो मुझे अच्छा लगा
  3881. 3:05:44था। फिर उसने धीरे [संगीत] से कहा, खैर,
  3882. 3:05:48अगर आपको पसंद नहीं है तो कोई बात नहीं।"
  3883. 3:05:52शिप्रा का लहजा थोड़ा नरम पड़ा और वो बोली
  3884. 3:05:56मेरी बात का गलत मतलब मत निकालो। छोटा
  3885. 3:05:58गिफ्ट ले [संगीत] लेती लेकिन इतना महंगा
  3886. 3:06:01नहीं ले सकती। शौर्य के होठों पर हल्की
  3887. 3:06:04मुस्कान आ गई। उसने बिना कुछ कहे बॉक्स
  3888. 3:06:07अपने पास रख लिया। जैसे उसने [संगीत] मन
  3889. 3:06:10ही मन कोई फैसला कर लिया हो। फिर उसने
  3890. 3:06:13शांत स्वर में कहा। क्या मैं आपसे कुछ पूछ
  3891. 3:06:16सकता हूं? क्या? शिप्रा ने तुरंत लेकिन
  3892. 3:06:20सपाट लहजे में पूछा। शौर्य ने नजरें लॉन
  3893. 3:06:23की तरफ घुमा ली और [संगीत] बोला
  3894. 3:06:26आपको कितना समय चाहिए जिसके बाद अगर आप
  3895. 3:06:29मुझसे अलग भी हो जाए तो आपके घर वाले आपको
  3896. 3:06:32दोबारा शादी के लिए मजबूर ना करें। यह वही
  3897. 3:06:36सवाल था जिससे शिप्रा डर रही थी। फिर भी
  3898. 3:06:39उसने खुद को संभालकर कहा। तुम यह क्यों
  3899. 3:06:42पूछ रहे हो? शौर्य ने बात को बिना घुमाए
  3900. 3:06:45[संगीत] सीधा जवाब दिया।
  3901. 3:06:48क्योंकि मैं यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं
  3902. 3:06:50निभा पाऊंगा। ज्यादा से ज्यादा एक साल या
  3903. 3:06:54डेढ़ साल। शिप्रा ने थोड़ा सोचा फिर धीमे
  3904. 3:06:58से कहा। हां, इतना वक्त काफी होगा। ठीक है
  3905. 3:07:02फिर। अब आप अपने कमरे में जाइए। रात बहुत
  3906. 3:07:05हो चुकी है। शौर्य ने अब बात को समाप्त
  3907. 3:07:09करते हुए कहा। फिर दोनों बालकनी से कमरे
  3908. 3:07:12[संगीत] में आ गए। शिप्रा ने जाते-जाते
  3909. 3:07:14शौर्य से कहा, अब तो मुझे आप कहकर मत
  3910. 3:07:17बुलाया करो वरना लोगों को हमारे रिश्ते पर
  3911. 3:07:20शक हो सकता है। शौर्य थोड़ा हिचकिचाया और
  3912. 3:07:24बोला नहीं मुझसे नहीं होगा। शिप्रा ने
  3913. 3:07:28हल्की सी भौए चढ़ाई और बोली इतना भी
  3914. 3:07:31मुश्किल नहीं है। मैं तो तुम्हें तुम ही
  3915. 3:07:33कहती हूं। फिर तुम्हें क्या दिक्कत है?
  3916. 3:07:36शौर्य ने शिप्रा से अपनी नजरें चुरा ली
  3917. 3:07:39फिर बोला।
  3918. 3:07:40मैं कोशिश करूंगा।
  3919. 3:07:44शिप्रा ने एक पल उसे देखा। फिर बिना कुछ
  3920. 3:07:46कहे वहां से चली गई। शौर्य बस उसे जाते
  3921. 3:07:49हुए देखता रह गया। [संगीत] एक पल को उसके
  3922. 3:07:52मन में ख्याल आया। क्या अपनी हकीकत बता
  3923. 3:07:55दूं? लेकिन अगले ही पल उसने खुद को रोक
  3924. 3:07:58लिया। अगर मुझे उसे पाने के लिए अपनी
  3925. 3:08:01सच्चाई बतानी पड़े तो ऐसा प्यार मुझे नहीं
  3926. 3:08:05चाहिए।
  3927. 3:08:06वो थका हुआ [संगीत] सा बिस्तर पर गिर पड़ा
  3928. 3:08:09और शिप्रा के ख्यालों में खोते-खोते उसे
  3929. 3:08:12नींद आ गई। अगली सुबह दरवाजे की आवाज से
  3930. 3:08:15उसकी नींद [संगीत] टूटी। वो उठकर दरवाजा
  3931. 3:08:18खोलता है। सामने शंतो चाय की ट्रे लिए
  3932. 3:08:21खड़ी थी। शंतो शायद जल्दी में थी। उसने
  3933. 3:08:24टेबल पर चाय रखी और चली गई। कमरे में
  3934. 3:08:27सन्नाटा छा गया। शौर्य सोच में डूबा
  3935. 3:08:30बालकनी में आकर चाय पीने लगा। तभी अचानक
  3936. 3:08:34उसका फोन बज उठा। मेनका का नाम फ्लैश होते
  3937. 3:08:37दिखा तो उसने फोन उठाते [संगीत] हुए बोला
  3938. 3:08:40क्या बात है इतने ही सुबह-सुबह सब ठीक तो
  3939. 3:08:43है शौर्य की बात सुनकर मेनका बोली
  3940. 3:08:47तुम भूल गए क्या तुम्हें आज नताशा से
  3941. 3:08:50मिलने कृष्णापुरम जाना था
  3942. 3:08:53अरे हां यार मुझे तो ध्यान ही नहीं रहा
  3943. 3:08:57क्या रत्नाकर शेट्टी से तुम्हारी बात हुई
  3944. 3:08:59है शौर्य ने अपना आलस दूर करते हुए पूछा
  3945. 3:09:03तो मेनका [संगीत] बोली
  3946. 3:09:04उसी का फोन आया था। जितनी जल्दी हो सके
  3947. 3:09:07पहुंच जाओ क्योंकि डेढ़ दो घंटे के बाद एक
  3948. 3:09:10बार [संगीत] शूट शुरू हो गया तो फिर वो
  3949. 3:09:12तुम्हें ज्यादा टाइम नहीं दे पाएगा।
  3950. 3:09:14चलो ठीक है। मैं अभी जल्दी से निकलता हूं।
  3951. 3:09:17तुम रत्नाकर शेट्टी का नंबर मुझे भेज दो।
  3952. 3:09:19इतना कहकर शौर्य ने फोन काट दिया। शौर्य
  3953. 3:09:23आनन-फानन में तैयार होकर नीचे उतरा।
  3954. 3:09:25ड्राइंग रूम में शिपरा नाश्ते की टेबल पर
  3955. 3:09:28थी। आ जाओ नाश्ता कर लो। शौर्य ने बिना
  3956. 3:09:32उसकी तरफ देखे बोला, "मुझे थोड़ी जल्दी
  3957. 3:09:35है। मैंने किसी को टाइम दे रखा था। मैं
  3958. 3:09:37[संगीत] नाश्ता बाहर कर लूंगा। तभी शिप्रा
  3959. 3:09:40फिर बोली, "अरे नाश्ता तैयार है। 2 मिनट
  3960. 3:09:43ही तो लगेंगे।"
  3961. 3:09:45वहां शंतू भी [संगीत] बीच में बोल पड़ी।
  3962. 3:09:47अरे आ जाइए जीजा जी। हमारी दीदी इतने
  3963. 3:09:50प्यार से कह रही हैं और आप भाव खा रहे
  3964. 3:09:52हैं। अब शौर्य के लिए मना करना मुश्किल हो
  3965. 3:09:55रहा था। इसीलिए वह बैठ गया। तभी राहुल भी
  3966. 3:09:58वहां आ गया और बोला, क्या बात है जीजू
  3967. 3:10:02इतनी सुबह-सुबह आप तैयार होकर कहां जा रहे
  3968. 3:10:04हो? मीटिंग किसी लड़की से तो नहीं है?
  3969. 3:10:08शौर्य ने थोड़ी आें भरी और बोला, है तो
  3970. 3:10:12लड़की ही और बेहद खूबसूरत भी है। मैं
  3971. 3:10:15नताशा कपूर से मिलने जा रहा हूं। नताशा
  3972. 3:10:18कपूर का नाम सुनते ही शिप्रा ने सिर उठाकर
  3973. 3:10:21शौर्य को देखा। शौर्य ने जानबूझकर उसकी
  3974. 3:10:24तरफ ध्यान नहीं दिया। तभी राहुल उछल पड़ा।
  3975. 3:10:28क्या फेमस मॉडल नताशा कपूर जीजू वो तो
  3976. 3:10:32मेरी फेवरेट है। क्या मैं आपके साथ चल
  3977. 3:10:34सकता हूं? चल तो सकते हो पर मेरे पास कार
  3978. 3:10:37नहीं है। मैं टैक्सी से जाऊंगा। शौर्य का
  3979. 3:10:40जवाब सुनकर राहुल बोला जीजू आप नताशा कपूर
  3980. 3:10:43से मिलने टैक्सी से जाओगे। आपके पास तो
  3981. 3:10:45कोई पावरफुल कार होनी चाहिए
  3982. 3:10:47[संगीत]
  3983. 3:10:47ताकि अच्छा इंप्रेशन पड़े। तभी शिप्रा बोल
  3984. 3:10:50पड़ी। अगर तुम चाहो तो मेरी कार ले जा
  3985. 3:10:53सकते हो।
  3986. 3:10:54शौर्य इग्नोर करते हुए बोला, नहीं इसकी
  3987. 3:10:57कोई जरूरत नहीं है। मैं [संगीत] मैनेज कर
  3988. 3:10:59लूंगा। शिप्रा को शौर्य का यह रूखापन अजीब
  3989. 3:11:02लगा। उसने फिर ऑफर किया लेकिन शौर्य अपनी
  3990. 3:11:06बात पर अड़ा रहा। उसने मेनका को चुपके से
  3991. 3:11:09एक मैसेज किया। लेकिन शिप्रा ने फिर अपनी
  3992. 3:11:11कार ऑफर कर दी। अरे अब और कितना इंतजार
  3993. 3:11:15करोगे? ले जाओ मेरी कार।
  3994. 3:11:17तभी शौर्य थोड़ा सख्त होकर बोला। मैंने
  3995. 3:11:20कहा ना मेरी फिक्र ना करें। बस कुछ समय की
  3996. 3:11:24बात है। शौर्य बोल ही रहा था। तभी बाहर
  3997. 3:11:27कार के ब्रेक लगने की आवाज आई और
  3998. 3:11:29सिक्योरिटी गार्ड कार [संगीत] की चाबी
  3999. 3:11:31लेकर अंदर आया।
  4000. 3:11:33मैम एक आदमी श्रवण जी के लिए कार छोड़कर
  4001. 3:11:36गया है। शौर्य मुस्कुराया। गार्ड के हाथ
  4002. 3:11:39से चाबी ली और राहुल की तरफ देखकर बोला,
  4003. 3:11:42"चलें?" राहुल ने सहमति में अपना सिर
  4004. 3:11:45हिलाया और दोनों बाहर की तरफ चल दिए।
  4005. 3:11:47शिप्रा भी उसके साथ ही घर से बाहर निकली।
  4006. 3:11:50शौर्य राहुल के साथ मेन गेट पर पहुंचा तो
  4007. 3:11:53उसने [संगीत] देखा कि गेट के बाहर साइड
  4008. 3:11:55में एक लंबी लग्जरी कार खड़ी थी। राहुल ने
  4009. 3:11:59उस गाड़ी को देखा तो शौर्य की तारीफ करता
  4010. 3:12:01हुआ बोला अरे वाह जीजू आपने तो सच में
  4011. 3:12:05कमाल की गाड़ी मंगवा ली। यह हुई ना बात।
  4012. 3:12:09राहुल की बात सुनकर शौर्य कुछ बोला नहीं।
  4013. 3:12:12बस मुस्कुरा कर रह गया। वो जाकर ड्राइविंग
  4014. 3:12:15सीट पर बैठ गया और राहुल उसके बगल वाली
  4015. 3:12:18सीट पर [संगीत] जाकर बैठ गया। अभी शौर्य
  4016. 3:12:20कार आगे बढ़ाता उसी समय उसके पास से
  4017. 3:12:23शिप्रा की कार गुजरी। शिप्रा की निगाह भी
  4018. 3:12:26उस लंबी गाड़ी पर पड़ी तो वो सोचने को
  4019. 3:12:28मजबूर हो गई कि शौर्य ने इतनी जल्दी इस
  4020. 3:12:31[संगीत] कार की व्यवस्था कैसे कर ली। पर
  4021. 3:12:34उसने अपने दिमाग पर इस बारे में सोचने में
  4022. 3:12:37ज्यादा जोर नहीं लगाया और वहां से गुजर
  4023. 3:12:39गई। शौर्य ने भी कार स्टार्ट [संगीत] की
  4024. 3:12:42और आगे बढ़ा दी। कार को चलाते-चलाते ही
  4025. 3:12:45उसने मोबाइल के मैप पर मेनका द्वारा भेजी
  4026. 3:12:48गई लोकेशन सेट की और कार को उसी दिशा में
  4027. 3:12:51आगे बढ़ा दिया। मेनका ने शौर्य को रत्नाकर
  4028. 3:12:54शेट्टी के नंबर के साथ उनके द्वारा भेजी
  4029. 3:12:57गई करंट लोकेशन भी भेज दी थी। शौर्य को
  4030. 3:13:00यहां से निकलते-निकलते 10:00 बज गए थे।
  4031. 3:13:02लगभग 45 मिनट के बाद शौर्य इस लोकेशन पर
  4032. 3:13:05पहुंचा। उसने देखा कि [संगीत] एक पहाड़ी
  4033. 3:13:08एरिया था जहां पहाड़ी के साथ-साथ एक नदी
  4034. 3:13:11गुजर रही थी। नदी के किनारे पर एक
  4035. 3:13:14रेस्टोरेंट था जिसका एक प्लेटफार्म नदी के
  4036. 3:13:17अंदर तक गया हुआ था। वो प्लेटफार्म नदी से
  4037. 3:13:20लगभग 15 फुट ऊंचा था। उस प्लेटफार्म के
  4038. 3:13:23नीचे कुछ दूरी पर एक छोटी नाव थी जिस पर
  4039. 3:13:26दो-तीन लड़कियां खड़ी थी। नदी के किनारे
  4040. 3:13:28पर कुछ जवान लड़के लड़कियां नहा रहे थे।
  4041. 3:13:31किनारे पर एक कन खड़ी थी जिसके टॉप पर एक
  4042. 3:13:34कैमरामैन अपने असिस्टेंट के साथ कैमरा लिए
  4043. 3:13:37[संगीत] खड़ा था। राहुल ने जब यह दृश्य
  4044. 3:13:39देखा तो वो उत्साहित होकर बोला जीजू यहां
  4045. 3:13:43तो शूटिंग चल रही है। शौर्य राहुल की बात
  4046. 3:13:46सुनकर मुस्कुराया। उसने अपना मोबाइल
  4047. 3:13:48निकाला और रत्नाकर शेट्टी को कॉल लगाया।
  4048. 3:13:51दो रिंग के बाद ही फोन उठा लिया गया और
  4049. 3:13:54दूसरी तरफ से रत्नाकर शेट्टी की आवाज आई।
  4050. 3:13:57हेलो मिस्टर श्रवण आप आ गए?
  4051. 3:13:59श्रवण ने जब रत्नाकर शेट्टी के मुंह से
  4052. 3:14:01अपना नाम सुना तो समझ गया कि मेनका ने
  4053. 3:14:04रत्नाकर शेट्टी के पास उसका नंबर भेज दिया
  4054. 3:14:07होगा। इसीलिए उसने उसे उसके नाम से
  4055. 3:14:10पुकारा। वो बोला हां मैं रेस्टोरेंट के
  4056. 3:14:14बाहर खड़ा हूं। तभी उसने देखा रेस्टोर का
  4057. 3:14:17जो प्लेटफार्म नदी के अंदर जा रहा था। उसी
  4058. 3:14:20पर एक मोटा सा आदमी खड़ा हुआ और शौर्य की
  4059. 3:14:22तरफ देखते हुए [संगीत] हाथ हिलाने लगा।
  4060. 3:14:25शौर्य समझ गया कि यही रत्नाकर शेट्टी है।
  4061. 3:14:28तभी उसके कान में दोबारा रत्नाकर शेट्टी
  4062. 3:14:30[संगीत] की आवाज आई।
  4063. 3:14:32मिस्टर श्रवण आप यहीं इस प्लेटफार्म पर आ
  4064. 3:14:35जाइए।
  4065. 3:14:36इसके बाद शौर्य ने फोन काटा और राहुल के
  4066. 3:14:39साथ उस प्लेटफार्म की तरफ बढ़ गया।
  4067. 3:14:40[संगीत]
  4068. 3:14:41जल्दी ही वो उस प्लेटफार्म पर पहुंच गया।
  4069. 3:14:43रत्नाकर शेट्टी ने अपने असिस्टेंट से
  4070. 3:14:46बोलकर दो कुर्सियां मंगवाई। रत्नाकर
  4071. 3:14:48शेट्टी के बगल में ही एक स्पॉट [संगीत]
  4072. 3:14:50बॉय एक प्लेट में सेब काट रहा था। जिसमें
  4073. 3:14:53से रत्नाकर शेट्टी सेब के टुकड़े उठाकर
  4074. 3:14:56अपने मुंह में डालता जा रहा था। रत्नाकर
  4075. 3:14:58शेट्टी के सामने एक मॉनिटर लगा हुआ था।
  4076. 3:15:01जिस पर नाव पर मौजूद लड़कियों की तस्वीरें
  4077. 3:15:03दिखाई दे रही थी। शौर्य को यूं तो नाव पर
  4078. 3:15:07मौजूद लड़कियों का चेहरा नजर नहीं आ रहा
  4079. 3:15:09था। पर उस मॉनिटर स्क्रीन पर नताशा कपूर
  4080. 3:15:12का चेहरा स्पष्ट नजर आ रहा था। रत्नाकर
  4081. 3:15:15शेट्टी ने शौर्य से कहा, "श्रवण जी, यह
  4082. 3:15:18टेक पूरा हो जाता है। उसके बाद नताशा जी
  4083. 3:15:21के साथ बैठकर बात करते हैं।" कोई बात
  4084. 3:15:23[संगीत] नहीं, आप आराम से अपना काम पूरा
  4085. 3:15:26कीजिए। मुझे कोई जल्दी नहीं है। शौर्य
  4086. 3:15:29रत्नाकर शेट्टी की बात सुनकर बोला। उसी
  4087. 3:15:31समय रत्नाकर [संगीत] शेट्टी ने कैमरामैन
  4088. 3:15:33से कैमरा रोल का इशारा मिलने के बाद एक्शन
  4089. 3:15:36कहा। उसके बाद शौर्यन ने देखा एक
  4090. 3:15:39आर्टिफिशियल शार्क जो एकदम [संगीत] असली
  4091. 3:15:41प्रतीत हो रही थी वो नताशा की नाव की तरफ
  4092. 3:15:44बढ़ी और एक टक्कर उस नाव को दे मारी।
  4093. 3:15:46शार्क की टक्कर से नाव पलट गई। नाव के
  4094. 3:15:49पलटते ही नताशा नाव से नीचे गिर गई और वो
  4095. 3:15:52पानी में डूबने लगी। तभी एक मोटर बोट तेजी
  4096. 3:15:56से नताशा के करीब आती है और उस पर से एक
  4097. 3:15:58लड़का कूदता है। उसके हाथ में एक ड्रिंक
  4098. 3:16:01की बोतल है जो बोट से कूदते हुए भी उसके
  4099. 3:16:04हाथ में है। वो हवा में उड़ते हुए उस कैन
  4100. 3:16:07से दो घूंट
  4101. 3:16:07[संगीत]
  4102. 3:16:07लेता है और उसे हवा में उछालकर पानी में
  4103. 3:16:10कूदता है। जैसे ही वह नताशा के पास
  4104. 3:16:13पहुंचता है तो नताशा उसे कसकर पकड़ लेती
  4105. 3:16:16है। लड़का नताशा को खींचने की कोशिश करता
  4106. 3:16:18है तो महसूस करता है कि वो नताशा को खींच
  4107. 3:16:21नहीं पा रहा। उल्टा वो भी उसके साथ पानी
  4108. 3:16:24के नीचे जाने लगता है। जैसे तैसे वो लड़का
  4109. 3:16:27खुद को नताशा से छुड़ाता है और उससे दूर
  4110. 3:16:30हो जाता है। वहां मौजूद सभी लोग हैरान हो
  4111. 3:16:33जाते हैं कि यह क्या हो गया? नताशा डूब
  4112. 3:16:36कैसे रही है? कैमरामैन जब नताशा पर कैमरा
  4113. 3:16:39क्लोज में फोकस करता है तो उसे दिखता है
  4114. 3:16:41कि नताशा के पैरों में एक रस्सी उलझी हुई
  4115. 3:16:44है जो उसे नीचे की तरफ खींच रही थी। तो
  4116. 3:16:48क्या होगा आगे? क्या नताशा शौर्य से मिलने
  4117. 3:16:50से पहले ही नदी में डूब जाएगी [संगीत] या
  4118. 3:16:53फिर शौर्य उसे बचाने की कोशिश करेगा? क्या
  4119. 3:16:56शौर्य के दिल में शिप्रा की जगह कोई और
  4120. 3:16:58लेने वाला है? जानने [संगीत] के लिए सुनते
  4121. 3:17:00रहिए बेगर हस्बैंड।

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