My begger husband | Episode 251 to 300 | Full Episode | क्या इस भिखारी पति का राज सब बदल देगा? | — Transcript
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- 0:00तुमने एकदम सही कहा कि मैं इस काबिल नहीं
- 0:03हूं कि कनिका से शादी कर सकूं। पर तुम
- 0:06कितने काबिल हो यह तो साबित करूं। अगर तुम
- 0:10इतने ही काबिल हो तो फिर खुद ही क्यों
- 0:12नहीं मना कर रहे इस शादी से? मेरे सामने
- 0:15यूं गिरगिराने का क्या मतलब हुआ? शौर्य
- 0:17विराज की बात सुनकर तैश में बोला। शौर्य
- 0:20की बात विराज को भड़काने के लिए काफी था।
- 0:23उसे गुस्सा तो बहुत आया पर उसने खुद पर
- 0:25काबू किया। अगर वह यहां कुछ करता और यह
- 0:28बात उसके दादाजी को पता चल जाती तो शायद
- 0:31यह उसके लिए अच्छा नहीं होता। वो खुद को
- 0:34कंट्रोल करते हुए बोला देखो शौर्य मैं बात
- 0:37को बढ़ाना नहीं चाहता। पर तुम्हें यह बात
- 0:40माननी पड़ेगी। अगर तुम चाहो तो हम तुम्हें
- 0:42इसके लिए कुछ हरर्जाना भी दे देंगे। पर
- 0:45तुम्हें अपनी तरफ से ही इस शादी से इंकार
- 0:47करना पड़ेगा। मैं समझता हूं कि तुम कनिका
- 0:49से शादी करके अपनी हैसियत बढ़ाना चाहते
- 0:51हो। क्योंकि तुम्हें पता है कि तुम्हें
- 0:53चाहकर भी कभी कनिका जैसी पत्नी तो मिल
- 0:56नहीं सकती। लेकिन यह भी सच है कि यह सब
- 0:58तुम पैसे की लालच में कर रहे हो। हम इसके
- 1:01लिए तुम्हारी जो भी डिमांड होगी उसको पूरी
- 1:03करने की कोशिश करेंगे। पर पहले तुम्हें
- 1:06अपनी तरफ से इस रिश्ते के लिए इंकार करना
- 1:08पड़ेगा। इस रिश्ते की डिमांड तुम्हारे
- 1:10दादाजी की तरफ से की गई थी ना कि मेरी तरफ
- 1:13से और यह शर्त थी दोनों परिवार की दुश्मनी
- 1:16खत्म करने की। मेरे पिताजी पहले से ही इस
- 1:19अपराध बोध से ग्रसित हैं कि उनके कारण ही
- 1:21इन दोनों परिवार के बीच में दुश्मनी हो
- 1:23रखी है। और अब जब तुम्हारे दादाजी की तरफ
- 1:26से इस दुश्मनी को खत्म करने के लिए यह
- 1:28रिश्ता तय किया गया है तो मैं इससे इंकार
- 1:31करके फिर से दुश्मनी को बरकरार रखना नहीं
- 1:33चाहता। तुम मुझे पसंद नहीं करती तो तुम
- 1:36क्यों नहीं जाकर खुद ही यह बात अपने
- 1:38दादाजी को बता देती हो। इससे तुम्हें शादी
- 1:40भी नहीं करनी पड़ेगी और कम से कम फिर हम
- 1:43दोनों के परिवार के बीच की दुश्मनी तो
- 1:45खत्म हो जाएगी। शौर्य ने उन सबको समझाने
- 1:48की कोशिश की कि वह क्यों अपनी तरफ से इस
- 1:50शादी से इंकार नहीं कर सकता। क्या तुम
- 1:53हमें बेवकूफ समझ रहे हो जो हम तुम्हारी
- 1:55बात पर विश्वास कर लेंगे? मैं अच्छी तरह
- 1:58समझता हूं कि यह सिर्फ तुम्हारा दिखावा
- 2:00है। तुम्हारा मकसद मैं अच्छे से समझता
- 2:02हूं। कर्ण को शौर्य की बात पर विश्वास
- 2:05नहीं हुआ था कि शौर्य का इस शादी के लिए
- 2:07तैयार होने के पीछे सिर्फ दोनों परिवार के
- 2:10बीच की दुश्मनी को खत्म करना ही मकसद था।
- 2:13वो यह बात अच्छे से समझता था कि उसकी बहन
- 2:16से शादी करने के लिए अच्छे-अच्छे लड़के
- 2:18लाइन में लगे हुए थे। पता नहीं उसके
- 2:20दादाजी को क्या सुझा जो उन्होंने अचानक
- 2:22शौर्य से कनिका की शादी फिक्स कर दी। देखो
- 2:26जैसा तुम जता रहे हो कि इन दोनों परिवार
- 2:28के बीच में बहुत दुश्मनी है। ऐसा भी नहीं
- 2:31है। एक समय था जब ऐसा वाकई था। पर
- 2:34धीरे-धीरे दोनों परिवार अपने आप में ही
- 2:36सिमट गए थे। ना हमें राठौर फैमिली से मतलब
- 2:39था और ना ही राठौर फैमिली को हमसे। बस यही
- 2:42स्थिति थी। पर तुम्हारे पापा के आने के
- 2:45बाद जरूर दादाजी का जख्म हरा हो गया था और
- 2:48वह गुस्से में तुम्हारे घर चले गए थे। अगर
- 2:50तुम इस रिश्ते से इंकार भी करोगे तो दोनों
- 2:53परिवार की सेहत पर कुछ ज्यादा फर्क नहीं
- 2:55पड़ेगा। बस यही होगा कि फिर दोनों परिवार
- 2:58एक दूसरे से कोई मतलब नहीं रखेंगे।
- 3:00[संगीत] इससे ज्यादा कुछ नहीं होने वाला
- 3:02है। दोनों परिवार में ऐसी दुश्मनी नहीं थी
- 3:05कि दोनों एक दूसरे को मारने काटने के पीछे
- 3:08पड़े हुए थे। तो यह सिर्फ तुम्हारा बहाना
- 3:11है। विराज शौर्य को दोनों परिवार की
- 3:14स्थिति को समझने की कोशिश करते हुए बोला,
- 3:17चलो 1 मिनट के लिए मैं यह मान भी लेता हूं
- 3:19कि जो तुम कह रहे हो वह ठीक है। तो फिर
- 3:22तुम ऐसा क्यों नहीं करते कि तुम खुद ही
- 3:24अपनी तरफ से इस रिश्ते के लिए मना कर दो।
- 3:26तुम मुझसे ऐसी उम्मीद क्यों कर रहे हो?
- 3:29तुम ऐसा भी समझ सकते हो कि मुझे कनिका
- 3:31पसंद है और मैं सच में उससे शादी करना
- 3:34चाहता हूं। तो फिर मैं कैसे इस रिश्ते के
- 3:36लिए मना कर सकता हूं? शौर्य अपनी दलील
- 3:38देता हुआ बोला, शौर्य इन भाई बहनों को
- 3:42इतना मजबूर कर देना चाहता था कि वह खुद ही
- 3:44अपनी तरफ से इस रिश्ते के लिए इंकार कर
- 3:46दे। जिससे उसके ऊपर कल कोई इल्जाम नहीं आए
- 3:49कि उसने अपने पिताजी की बात की लाज नहीं
- 3:51रखी। आखिर तुम्हारा मकसद सामने आ ही गया।
- 3:55तो पहले यह बड़ी बात बोलने का क्या मतलब
- 3:57था कि तुम दोनों परिवार के बीच की दुश्मनी
- 4:00खत्म करना चाहते हो। मुझे पहले से ही
- 4:02तुम्हारी नियत पर शक था। कनिका बीच में
- 4:05आती हुई बोली यह तुम गलत कह रही हो। किसी
- 4:08को पसंद करना गलत कैसे हो सकता है? कोई भी
- 4:12अपने [संगीत] लिए बेस्ट जीवन साथी चाहता
- 4:14है। तो अगर मैं ऐसा चाहता हूं तो इसमें
- 4:17गलत क्या है? शौर्य हल्की मुस्कान के साथ
- 4:20बोला। शौर्य के इस बात ने कनिका [संगीत]
- 4:23को स्पीचलेस कर दिया। उसे समझ नहीं आया कि
- 4:26वो शौर्य के इस बात का क्या जवाब दे। उसे
- 4:30शिप्रा की कहीं बात याद आई कि वह जिस भी
- 4:33लड़की को देखता है उसको उसी से प्यार हो
- 4:35जाता है। कर्ण और विराज भी अब यह नहीं समझ
- 4:38पा रहे थे कि वे शौर्य को कैसे इस रिश्ते
- 4:41से मना करने के लिए मजबूर करें क्योंकि वह
- 4:44यह थी समझते थे कि उसके दादाजी उनकी इस
- 4:47बात को तो मानने वाले हैं नहीं कि वह
- 4:49कनिका के रिश्ते की बात को भूल जाए।
- 4:52उन्हें भी अपनी जुबान से पीछे हटना मंजूर
- 4:54नहीं था। जबकि उन्हें लगता था कि उनका यह
- 4:57फैसला सही है। जिस तरह से शौर्य भी अपनी
- 5:00जिद पर अड़ा हुआ था कि वह अपनी तरफ से इस
- 5:03रिश्ते से पीछे नहीं हटेगा। उससे कनिका को
- 5:06और पक्का यकीन होता जा रहा था कि यह सब
- 5:08शौर्य की सोची समझी प्लान के तहत ही हो
- 5:11रहा है। कनिका मायूस होकर विराज की ओर
- 5:14देखने लगी कि अब वह क्या करें। विराज भी
- 5:17समझ गया कि शौर्य घाग लड़का है। वह इतनी
- 5:20आसानी से उसकी बातों में नहीं आने वाला
- 5:22है। वह शौर्य को धमका भी नहीं सकता था।
- 5:25अगर उसके दादाजी को पता चल गया कि उन सब
- 5:27ने शौर्य को धमका कर इस रिश्ते से इंकार
- 5:30करने के लिए प्रेशराइज किया तो उन सबकी
- 5:32खैर नहीं। विराज को यह डर सताने भी लगा कि
- 5:36कहीं शौर्य यह बात उसके दादाजी के सामने
- 5:38जाहिर ना कर दे कि उसने उसके साथ क्या
- 5:40करने की कोशिश की। अचानक विराज ने अपना
- 5:44इरादा बदल लिया और वह मुस्कुराते हुए
- 5:46शौर्य से बोला मानना पड़ेगा तुम कनिका के
- 5:50लिए एकदम सही लड़के हो। तुम मेरी परीक्षा
- 5:52में पास हुए। मैं यही देखना चाहता था कि
- 5:55तुम अपनी बात के कितने पक्के हो। मुझे लगा
- 5:58था कि कहीं लालच देने या मुसीबत में तुम
- 6:00कनिका का साथ तो नहीं छोड़ दोगे। पर मानना
- 6:03पड़ेगा कि दादाजी ने कनिका के लिए
- 6:05तुम्हारा चुनाव करके एकदम सही फैसला किया।
- 6:08विराज को यूं गिरगिट की तरह रंग बदलते
- 6:11देखकर शौर्य को बहुत आश्चर्य हुआ। उसे समझ
- 6:14नहीं आया कि विराज में अचानक यह परिवर्तन
- 6:16क्यों आया। आश्चर्य सिर्फ शौर्य को ही
- 6:18नहीं हुआ बल्कि कर्ण, कनिका और नंदिनी को
- 6:21भी हो रहा था कि यह अचानक विराज का सुर
- 6:24क्यों चेंज हो गया। उन्हें भी कुछ समझ में
- 6:26नहीं आया। पर इतना तो वह समझ गए कि इसके
- 6:29पीछे विराज का कुछ ना कुछ रीजन तो जरूर
- 6:31होगा। पर इस सबसे कनिका बड़ी दुखी थी कि
- 6:34उसका प्लान शौर्य पर वर्क नहीं किया। तो
- 6:37क्या तुम अभी तक मुझे जांच रहे थे कि मैं
- 6:40कनिका के लिए सही लड़का हूं या नहीं?
- 6:42शौर्य आश्चर्य के साथ बोला तो और क्या और
- 6:46मुझे यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि
- 6:48तुम इसमें पास हुए। विराज शौर्य की तारीफ
- 6:51करते हुए बोला, विराज की बात सुनकर कनिका
- 6:54के सीने पर तो सांप लूट रहे थे। पर उसने
- 6:57अपने चेहरे से यह जाहिर होने नहीं दिया।
- 6:59इसी समय कनिका का फोन रिंक करने लगा। उसने
- 7:02नंबर की तरफ देखा तो शिप्रा का कॉल आ रहा
- 7:05था। उसने कॉल उठाया तो दूसरी तरफ से
- 7:07शिप्रा ने कहा कि वह आयरन फिस्ट फाइट क्लब
- 7:10के बाहर ही खड़ी है। वह कहां मिलेगी?
- 7:12कनिका ने कहा वो वहीं खड़ी रहे। वो बाहर
- 7:16आती है उसको लेने के लिए। इतना कहकर कनिका
- 7:18अपनी जगह से खड़ी हो गई और बाहर जाने लगी
- 7:21तो कर्ण ने पूछा। अब तुम कहां जा रही हो?
- 7:25मेरी एक दोस्त आई है। वो बाहर खड़ी है।
- 7:28अभी उसको लेकर आती हूं। इतना कहकर कनिका
- 7:31वहां से चली गई। इसी समय उस रेस्टोरेंट के
- 7:34एक दूसरे टेबल पर एक लड़की एक लगभग 60 65
- 7:37साल के वृद्ध व्यक्ति के साथ बैठी ड्रिंक
- 7:39ले रही थी। लड़की की पीठ शौर्य की तरफ था।
- 7:42जबकि बूढ़े व्यक्ति का चेहरा शौर्य की तरफ
- 7:45था। अपनी जगह पर बैठा वो वृद्ध शौर्य को
- 7:48स्पष्ट देख सकता था। उसके चेहरे पर हैरानी
- 7:50के साथ अविश्वास भी नजर आ रहा था। उसने
- 7:54सामने बैठी लड़की से सहमति जताते हुए कहा,
- 7:57"तुमने सही कहा वैशाली? यह वही फोटो वाला
- 8:00लड़का है। पर मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो
- 8:02रहा है कि ऐसा कैसे हो सकता है। इसका मतलब
- 8:05[संगीत] उस समय दूसरी पार्टी ने जो बात
- 8:07कही थी वह सच था। यानी वो जो लाश मिली थी
- 8:11वो सिकंदर का ही था। अब इसमें शक की कोई
- 8:15गुंजाइश कहां रह गई मास्टर? अब आप यह
- 8:18बताइए कि आगे क्या करना है? सिकंदर की
- 8:20कुर्बानी हम यूं व्यर्थ तो नहीं जाने दे
- 8:23सकते। लड़की गंभीरता से बोली, अभी ज्यादा
- 8:27कुछ करने की जरूरत नहीं है। अभी बस पता
- 8:30करना है कि यह रहता कहां है। अच्छे से
- 8:33रेकी करने के बाद ही हम कोई एक्शन लेंगे।
- 8:36इस बीच पार्टी से बात करके उस तय अमाउंट
- 8:38की बात भी तो करनी है जो हमें उनसे लेनी
- 8:41है। मास्टर ने शौर्य की ओर देखते हुए
- 8:44लड़की से यह बात कही। पर यह समझ नहीं आ
- 8:47रहा कि चौहान फैमिली से इस लड़के का क्या
- 8:50संबंध है। लड़की मास्टर की ओर देखते हुए
- 8:53बोली जो भी हो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता
- 8:56कि इसका संबंध [संगीत] किस फैमिली से है।
- 8:59हमने जो काम पहले ले लिया है उसको हर हाल
- 9:02में पूरा करना है। और सबसे बड़ी बात यह है
- 9:05कि इसके चक्कर में हमारा एक साथी पहले ही
- 9:07मारा जा चुका है। तो उसकी कुर्बानी का
- 9:10बदला तो लेना पड़ेगा। मास्टर दृढ़ इरादों
- 9:13के साथ बोला मैं भी यही चाहती हूं मास्टर
- 9:16सिकंदर कि कुर्बानी हम यूं ही व्यर्थ नहीं
- 9:19जाने देंगे। बोलते हुए लड़की की आंखों में
- 9:22खून उतर आया था। मैं महंत को बुला लेता
- 9:25हूं। तुम्हारे साथ वह भी इस काम में
- 9:27रहेगा। पर एक बात का ध्यान रखना कि जोश
- 9:30में आकर जल्दबाजी में कोई काम मत करना। जो
- 9:33भी करना है वो ठंडे दिमाग से सोच विचार
- 9:36करना है। पहले वाली गलती को दोहराना नहीं
- 9:39है। महंत लड़की को समझाते हुए बोला जी
- 9:43मास्टर। लड़की ने मास्टर की बात से अपनी
- 9:46सहमति जताई। दूसरी तरफ कनिका शिप्रा को
- 9:49लेकर रेस्टोरेंट में वापस आई। वो आकर टेबल
- 9:52पर बैठती हुई अपने भाइयों से शिप्रा का
- 9:54परिचय कराया और फिर शौर्य की ओर देखती हुई
- 9:57बोली इसको तो तुम पहचानती ही होगी। शिप्रा
- 10:01कुछ कहती उससे पहले शौर्य शिप्रा से बोला
- 10:04तुम यहां कनिका शौर्य की बात सुनकर बोली
- 10:08क्यों यह यहां नहीं हो सकती? यह भी यहां
- 10:11विराज भाई का मैच देखने आने वाली थी पर
- 10:13लेट हो गई। नहीं, मेरा यह कहने का मतलब
- 10:17नहीं था। शौर्य नर्वस दिखाई देने लगा।
- 10:20उसके चेहरे से ऐसा लग रहा था जैसे उसकी
- 10:23कोई चूड़ी पकड़ी गई। शौर्य यह सब जानबूझकर
- 10:26कर रहा था। उसे तो पहले से पता था कि
- 10:29शिप्रा को भी यहां आना था। उसे तो इसी बात
- 10:32की चिंता थी कि शिप्रा अभी तक आई क्यों
- 10:34नहीं। जबकि शिप्रा की खूबसूरती देखकर कर्ण
- 10:37और विराज भी शिप्रा को घरे जा रहे थे।
- 10:40उन्हें उम्मीद नहीं था कि कनिका की कोई
- 10:42इतनी खूबसूरत दोस्त भी है जिससे वह आज तक
- 10:45मिले नहीं। शौर्य को कर्ण और विराज की नजर
- 10:48शिप्रा पर गरा देखकर जलन भी हुई। कनिका
- 10:52तुम्हारी इतनी खूबसूरत दोस्त आने वाली थी।
- 10:55तुमने इस बारे में बताया नहीं था। कर्ण
- 10:57शिप्रा की खूबसूरती की तारीफ करती हुई
- 11:00बोली। इसमें बताने जैसी तो कोई बात थी
- 11:02नहीं। शिप्रा से अचानक मिलना ही गया था तो
- 11:05हमने उसे आज विराज भाई का मैच देखने के
- 11:08लिए आमंत्रित कर लिया था। कनिका ने सफाई
- 11:11दिया। पर क्या फायदा? वो तो मेरा मैच देख
- 11:14ही नहीं पाई। विराज अफसोस भरे स्वर में
- 11:17बोला। पर मैंने सुना है कि आपने आज अपने
- 11:20प्रतिद्वंदी को अच्छे से धूल चटा दिया।
- 11:23आपको इस जीत के लिए [संगीत] बधाई। शिप्रा
- 11:26ने मुस्कुराकर विराज को जवाब दिया। पर यह
- 11:29शौर्य को कैसे जानती है? विराज को इस बात
- 11:32के लिए शौर्य से जलन भी हुई। दरअसल शिप्रा
- 11:36शौर्य के दादाजी की कंपनी फैब्रिक ट्रेंड
- 11:38की सीईओ है और उससे पहले से ही शौर्य की
- 11:41शिप्रा से पहचान है। कनिका अर्थपूर्ण स्वर
- 11:44में बोली अच्छा तो यह बात है। फिर तो
- 11:48शौर्य का शिप्रा के ऊपर कभी ना कभी दिल
- 11:52जरूर आया होगा। नंदिनी बीच में बोल पड़ी।
- 11:55तुम ऐसा क्यों बोल रही हो? ऐसा जरूरी तो
- 11:57नहीं कि लड़की खूबसूरत होगी तो शौर्य का
- 12:00दिल उस पर आ ही जाएगा। कर्ण शिप्रा का
- 12:02बचाव करता हुआ बोला। नहीं ऐसा नहीं है
- 12:05नंदनी सही कह रही है। शौर्य ने पहले
- 12:08शिप्रा को प्रपोज किया था। हां, यह अलग
- 12:10बात है कि शिप्रा ने शौर्य के प्रपोजल को
- 12:13रिजेक्ट कर दिया था। कनिका तिरछी नजर से
- 12:16शौर्य की ओर देखती हुई बोली। शौर्य समझ
- 12:19रहा था कि कनिका अब ऐसी ही कोई कोशिश
- 12:21करेगी क्योंकि वह कनिका के प्लान से तो
- 12:24पहले से ही वाकिफ था। हां, उसे भी ऐसा
- 12:26दिखावा करना था कि उसके लिए यह बात शॉकिंग
- 12:29था कि यह बात कनिका को पहले से पता है। यह
- 12:32तुम क्या कह रही हो? ऐसा कुछ नहीं था।
- 12:35शौर्य ने कहने को तो ऐसा कह दिया था पर
- 12:37उसके चेहरे से ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे
- 12:40उसकी कोई चोरी पकड़ी गई हो। तुम बोल तो
- 12:43कुछ और रहे हो पर तुम्हारा चेहरा कुछ और
- 12:45बोल रहा है। नंदिनी बीच में तपाक से बोली।
- 12:49फिर वो आगे शिप्रा की तरफ पलट कर उससे
- 12:51बोली। वैसे इस बात को तो शिप्रा ही स्पष्ट
- 12:54कर सकती है कि जो बात अभी कनिका ने कही
- 12:56उसमें थोड़ी भी सच्चाई है कि नहीं। नंदिनी
- 12:59की बात सुनकर शिप्रा के चेहरे पर एक संकोच
- 13:02नजर आने लगा। [संगीत] वो थोड़ा शर्मिंदा
- 13:04फील करते हुए बोली अब छोड़ो भी इन बातों
- 13:06को। तुम भी क्या बात लेकर बैठ गई। नाना
- 13:09इसमें छोड़ने वाली कोई बात नहीं है।
- 13:11तुम्हें बताना पड़ेगा कि अभी जो कनिका ने
- 13:13कहा, क्या उस बात में थोड़ी भी सच्चाई है?
- 13:16विराज उस बात को लपकते हुए बोला। विराज की
- 13:19बात सुनकर शिप्रा शौर्य की ओर देखने लगी।
- 13:22जैसे वह उससे सॉरी बोल रही हो कि उसे यह
- 13:24बात नहीं बोलनी चाहिए थी। पर वह अभी विराज
- 13:27की बात का कोई जवाब देती उससे पहले शौर्य
- 13:29बोला देखो इतनी भी बड़ी कोई बात नहीं थी।
- 13:33हां, यह सच है कि बहुत पहले ऐसा हुआ था कि
- 13:36मैंने शिप्रा से अपने प्यार का इजहार किया
- 13:37था। पर उसने उस समय कहा कि उसके दिल में
- 13:40ऐसी कोई फीलिंग नहीं है। उसके बाद यह बात
- 13:42तो वहीं समाप्त हो गई थी और उसके बाद तो
- 13:44हम दोनों अच्छे दोस्त भी बन गए हैं। मुझे
- 13:47समझ नहीं आ रहा है। तुम लोग इस बात की
- 13:49चर्चा अभी यहां क्यों कर रहे हो? यह
- 13:51पुरानी बात है और यह पहले ही समाप्त हो गई
- 13:54है। [संगीत] अब इस बात को रिपीट करने का
- 13:56कोई मतलब नहीं बनता। शिप्रा सफाई देती हुई
- 13:59बोली। शौर्य यह तो अच्छी बात नहीं है कि
- 14:02पहले तुम शिप्रा से प्यार करते थे और अब
- 14:04तुम कनिका से शादी करना चाहते हो। यह कैसा
- 14:07प्यार है तुम्हारा कि प्यार किसी और से और
- 14:09शादी किसी और से? कर्ण को शौर्य को घेरने
- 14:12का मुद्दा मिल गया था। अभी मैंने बताया तो
- 14:15कि यह बहुत पहले की बात है और शिप्रा ने
- 14:17मेरे प्रपोजल को एक्सेप्ट भी नहीं किया
- 14:19था। तो फिर यह कहने का कोई मतलब नहीं है
- 14:21कि मैं अभी भी उससे प्यार करता हूं। शौर्य
- 14:24सफाई देता हुआ बोला। अगर मान लो आज शिप्रा
- 14:27तुम्हारे प्रपोजल को स्वीकार कर लेती है
- 14:29तो क्या तुम कनिका के साथ हुए रिश्ते के
- 14:31लिए मना कर सकते हो? कर्ण उत्साहित स्वर
- 14:33में बोला। उसे लगा उसके पास एक मौका मिल
- 14:36गया है कि वह शौर्य को कनिका के साथ हुए
- 14:38रिश्ते से पीछे हटने के लिए तैयार कर सकता
- 14:41है। यह कैसे हो सकता है? अब यह संभव नहीं
- 14:44है। और दूसरी बात यह भी है कि शिप्रा अब
- 14:46क्यों मेरा प्रपोजल स्वीकार करने लगी?
- 14:48जबरदस्ती तो किसी के दिल में प्यार पैदा
- 14:50नहीं किया जा सकता और वैसे भी यह पुरानी
- 14:53बात हो गई है। अब शिप्रा के लिए मेरी
- 14:55फीलिंग भी चेंज हो गई है। अब हम सिर्फ एक
- 14:57अच्छे दोस्त हैं। शौर्य स्थिति के अनुरूप
- 15:00कहानी गढ़ता हुआ बोला। शौर्य की इस बात ने
- 15:03विराज को खुशी ही [संगीत] प्रदान की। वह
- 15:05भले चाहता था कि शौर्य कनिका से अपनी शादी
- 15:07के लिए मना कर दे, पर शिप्रा जैसी खूबसूरत
- 15:10लड़की शौर्य के प्यार में पड़ जाए, वो ऐसा
- 15:12नहीं चाहता था। शिप्रा उसे पहली ही नजर
- 15:15में भाग गई थी। जब उसने यह सुना कि शौर्य
- 15:18ने पहले [संगीत] शिप्रा को भी लव प्रपोजल
- 15:19दिया था। तो यह सुनकर उसे अच्छा नहीं लगा।
- 15:22पर जब उसने यह सुना [संगीत] कि शिप्रा ने
- 15:24शौर्य के प्रपोजल को रिजेक्ट कर दिया तो
- 15:26उसे हार्दिक खुशी हुई। देखो यहां पर अब
- 15:29मेरी और शौर्य की बात करना ठीक नहीं है।
- 15:31और अब तो वैसे भी कनिका तुम्हारे साथ तो
- 15:33शौर्य का रिश्ता तय कर दिया गया है। तो
- 15:35फिर इस तरह की बात करना तो अब वैसे भी ठीक
- 15:38नहीं है। शिप्रा अब कनिका के मुंह से
- 15:40सुनना चाहती थी कि वो इस समय क्या बोलती
- 15:43है। ऐसा कुछ नहीं है कि शौर्य [संगीत] का
- 15:46रिश्ता मेरे साथ ही तय हुआ है। जिससे
- 15:48शौर्य की शादी तय हुई है वो मैं या नंदिनी
- 15:51में से कोई [संगीत] भी हो सकती है। कनिका
- 15:53बम फोड़ती हुई बोली नहीं ऐसा कुछ नहीं है।
- 15:57शौर्य का रिश्ता कनिका के साथ ही तय हुआ
- 15:58है। [संगीत] मेरे रिश्ते की तो कोई बात ही
- 16:00नहीं है। वैसे भी मेरा रिश्ता पक्का करने
- 16:03के लिए मेरे पापा हैं। नंदिनी तुरंत कनिका
- 16:05की बात तो काटती हुई बोली। कनिका और
- 16:08नंदिनी की बात सुनकर शौर्य को भी झटका
- 16:10लगा। उसे समझ नहीं आया कि चौहान फैमिली
- 16:12में क्या चल रहा है। वैसे शौर्य को यह ठीक
- 16:15भी लगा। उसने सोचा यह उसके लिए अच्छा ही
- 16:17है। जितना उसको लेकर नापसंद बढ़ेगी, उसका
- 16:20रिश्ता चौहान फैमिली से टूटना उतना ही
- 16:22आसान होगा। कमबेस शिप्रा के लिए भी यह बात
- 16:25शॉकिंग ही था। पर विराज का दोनों लड़कियों
- 16:27को एक दूसरे के ऊपर यह रिश्ता थोपने का जो
- 16:29एटीट्यूड था वो पसंद नहीं आया। इसलिए वह
- 16:32दोनों को दपटते हुए बोला यूं एक दूसरे के
- 16:35लिए यह कहना कि यह रिश्ता हमारे [संगीत]
- 16:36लिए नहीं तुम्हारे लिए है। यह ठीक नहीं
- 16:38है। शौर्य तुम इनकी बात का बुरा मत मानना।
- 16:41अभी यह लड़कियां तुम्हें [संगीत] ठीक से
- 16:43जानती नहीं है। धीरे-धीरे सब सामान्य हो
- 16:45जाएगा। अचानक ही विराज समझदारी भरी बात
- 16:48करने लगा। यहां पर सबसे बड़ा वही था। वैसे
- 16:51उन सबके ऐज में कोई खास अंतर नहीं था। फिर
- 16:54भी सबसे बड़ा होने के कारण विराज ने सबको
- 16:56लीड किया। उसको शायद शिप्रा के सामने खुद
- 16:58को साबित भी करने की चिंता थी। कनिका और
- 17:01नंदिनी दोनों चुप तो हो गई थी पर दोनों के
- 17:03चेहरे पर नागवारी के भाव था। देखो ऐसी
- 17:06उलझन की भी बात नहीं है। इन दोनों के बीच
- 17:09में थोड़ा कंफ्यूजन है पर [संगीत] वो
- 17:10जल्दी ही ठीक हो जाएगा। हमें लगता है कि
- 17:12हमें मिलते रहना चाहिए। इससे हो सकता है।
- 17:15इससे हमारी आपसी अंडरस्टैंडिंग बेहतर
- 17:17होगी। कर्ण भी बीच में अपनी समझदारी
- 17:19दिखाते हुए बोला।
- 17:21ठीक है फिर अब मैं चलना चाहूंगा। मुझे तुम
- 17:24सब से मिलकर अच्छा रूल्स। शौर्य अब वहां
- 17:26से विदा लेना चाहता था। वो नहीं चाहता था
- 17:29कि [संगीत] उनके बीच की अंडरस्टैंडिंग
- 17:30बेहतर हो जिससे उसके और कनिका के बीच में
- 17:33सब कुछ सामान्य हो। विराज भी अब चाहता था
- 17:36कि शौर्य चला जाए वही अच्छा है। क्योंकि
- 17:38जैसा उसने सोचा था वैसा कुछ हुआ नहीं। वह
- 17:41तो समझा था कि वह शौर्य को आसानी से इस
- 17:43रिश्ते से बाहर करने के लिए मना लेगा। पर
- 17:45शौर्य उसकी उम्मीद से ज्यादा तेज निकला।
- 17:47इसलिए अब उसने अपनी नीति चेंज करने की
- 17:49सोची। ठीक है शौर्य हम फिर मिलेंगे। इतना
- 17:53कहकर विराज ने शौर्य की तरफ अपना हाथ बढ़ा
- 17:55दिया। शौर्य ने भी विराज से हाथ मिलाया।
- 17:58विराज ने शौर्य के पंजे पर अपना जोर
- 18:00दिखाना चाहा पर उसने महसूस किया कि शौर्य
- 18:02ने आसानी से उसके हाथ के जोर को मैनेज कर
- 18:04लिया था। [संगीत] उसे आश्चर्य भी हुआ। पर
- 18:07विराज की इस हरकत से शौर्य के चेहरे पर
- 18:09स्माइल आ गई। शौर्य को खड़ा होते देखकर
- 18:11शिप्रा [संगीत] भी खड़ी हो गई और वो कनिका
- 18:13से बोली, मैं भी चलती हूं कनिका। अरे तुम
- 18:16कहां जा रही हो? तुम तो अभी आई हो। थोड़ी
- 18:19देर हम सबके साथ तो बैठो। फिर चली जाना।
- 18:22विराज जल्दी से शिप्रा को रोकते हुए बोला।
- 18:24कनिका विराज के इरादे को समझ रही थी। पर
- 18:27वह तो यही समझ रही थी कि शिप्रा जो भी कर
- 18:29रही है यह सब उसी के कहने से कह रही है।
- 18:32मैं फिर कभी मिलती हूं आप सब से। अब जब
- 18:34शौर्य जा रहा है तो यह मुझे घर भी छोड़
- 18:37देगा। शिप्रा शौर्य की तरफ देखती हुई
- 18:39बोली। अरे तुम घर जाने की चिंता क्यों कर
- 18:42रही हो? मैं तुम्हें तुम्हारे घर छोड़
- 18:44दूंगा। विराज जल्दी से बोला। विराज की बात
- 18:47सुनकर शिप्रा कनिका की ओर देखने लगी। जैसे
- 18:49वह उससे पूछ [संगीत] रही हो कि यह क्या हो
- 18:51रहा है? कनिका भी शिप्रा के इशारे को समझ
- 18:53गई और वह बीच में बोल पड़ी। शिप्रा का घर
- 18:57शौर्य के घर के रास्ते में ही पड़ता है।
- 18:58इसलिए यह अच्छा रहेगा कि शौर्य ही उसको
- 19:01छोड़ दे। विराज को कनिका की बात पसंद तो
- 19:04नहीं आई पर वह अब कुछ कर भी नहीं सकता था।
- 19:06पर उसे यह आभास जरूर हुआ कि जरूर कनिका के
- 19:09दिमाग में कुछ और भी चल रहा है। शिप्रा
- 19:12शौर्य के साथ वहां से निकल गई। दोनों के
- 19:14जाने के बाद विराज फट पड़ा। तुम्हें
- 19:16शिप्रा को शौर्य के साथ भेजने की क्या
- 19:18जरूरत थी? अरे पर शिप्रा शौर्य के साथ गई
- 19:21तो इसमें आप क्यों इतना परेशान हो रहे
- 19:23हैं? कनिका आश्चर्य से विराज से बोली। सच
- 19:26कहूं तो मुझे तुम्हारी वो दोस्त बहुत पसंद
- 19:29आई। इसलिए मैं नहीं चाहता था कि वो शौर्य
- 19:32के साथ यहां से जाए। विराज नाराजगी भरे
- 19:34स्वर में बोला। कनिका बड़ी-बड़ी आंखों से
- 19:37विराज की ओर देखने लगी। वो विराज को
- 19:39समझाने की कोशिश करती हुई बोली आपको पता
- 19:42है मैंने शिप्रा को किसी खास मकसद से यहां
- 19:44बुलाया था। मैं जानती थी कि शौर्य पहले
- 19:47उसको पसंद करता था पर शिप्रा ने उसे भाव
- 19:50नहीं दिया था। अब मेरे कहने पर वह शौर्य
- 19:52को अपने प्यार में फंसाने को तैयार हुई है
- 19:54ताकि मैं इस आधार पर उससे अपना रिश्ता
- 19:56तोड़ सकूं। इसलिए उसका यहां से शौर्य के
- 19:59साथ जाना एक मकसद के तहत था ताकि वह शौर्य
- 20:03के साथ थोड़ा समय व्यतीत करें और उसे
- 20:05एहसास कराए कि उसका प्रपोजल स्वीकार ना
- 20:07करना यह उसकी गलती थी। अब जबकि शौर्य का
- 20:10रिश्ता किसी और के साथ हो गया है तो उसे
- 20:12एहसास हो रहा है कि वह भी शौर्य को प्यार
- 20:14करने लगी है। अगर शिप्रा अपने इस मकसद में
- 20:17कामयाब हो जाती है तो उसका शौर्य से पीछा
- 20:19छुड़ाना आसान हो जाएगा। कनिका की बात
- 20:22सुनकर विराज को अपना दिल बैठता सा लगा। वो
- 20:24शिप्रा के लिए चिंता करता हुआ बोला तुम
- 20:27क्यों उस लड़की को फंसा रही हो? हम शौर्य
- 20:29का मामला किसी और तरह से निपटा लेंगे। तुम
- 20:32इस सब में उस लड़की को मत इनवॉल्व करो।
- 20:34विराज भाई सही कह रहे हैं। हम शौर्य से
- 20:36निपटने का कोई और रास्ता निकाल लेंगे। पर
- 20:39इस सब में उस लड़की को घसीटना सही नहीं
- 20:41है। कर्ण भी बीच में अपनी राय देता हुआ
- 20:43बोला। कहीं तुम भी तो उस लड़की शिप्रा को
- 20:45पसंद नहीं करने लगे। नंदिनी कर्ण की बात
- 20:48सुनकर बोली। नंदिनी की बात सुनकर कर्ण
- 20:50नंदिनी और कनिका से अपनी नजर चुराने लगा।
- 20:53हे भगवान आप दोनों को हो क्या गया है? आज
- 20:56पहली बार तो आप शिप्रा से मिले हैं और
- 20:58उसको एक ही मुलाकात में पसंद भी करने लगे।
- 21:01कनिका हैरानी से बोली उस लड़की से अभी तक
- 21:04हमें नहीं मिलवाना तुम्हारी गलती थी।
- 21:06तुम्हारी इतनी खूबसूरत दोस्त है और तुमने
- 21:08आज तक उसे मुझसे नहीं मिलवाया। विराज
- 21:10कनिका को घूरते हुए बोला। फिर वो कर्ण की
- 21:13तरफ पलट कर बोला। तुम उस लड़की के बारे
- 21:15में सोचना भी मत। वो तुम्हारी भाभी होने
- 21:17वाली है। यह यह कब [संगीत] हो गया? ऐसा
- 21:20कुछ नहीं है। वो मुझे भी पसंद आई है। फिर
- 21:23आप यह फैसला नहीं कर सकते। कर्ण भी झिझकता
- 21:26हुआ बोला। कनिका तो मुंह भाए अपने भाइयों
- 21:28को देखे जा रही थी जो आपस में ही शिप्रा
- 21:31पर अपना हक जताए जा रहे थे। यह बढ़िया है।
- 21:34उस लड़की को पता भी नहीं है और आप दोनों
- 21:36ने उसे अपना बना भी लिया है। एक अनार दो
- 21:39बीमार। क्या किस्मत पाई है शिप्रा ने? और
- 21:42एक मैं हूं जो उस फटीचर से अपना पीछा भी
- 21:44नहीं छुड़ा पा रही। और मेरे भाइयों को
- 21:46अपनी परी है। बकवास मत कर। वैसे शौर्य
- 21:49इतना भी बुरा नहीं है। देखने में हैंडसम
- 21:52है और राठौर फैमिली से संबंध तो रखता ही
- 21:54है। तो तुम्हें क्या दिक्कत है उससे शादी
- 21:56करने में? रोड पर भीख तो मांग नहीं रहा जो
- 21:59तुम उससे पीछा छुड़ाना चाहती हो। विराज
- 22:01कनिका को झिरकता हुआ बोला हे भगवान
- 22:03[संगीत]
- 22:04यह मेरे भाई हैं जो एक लड़की के लिए एक पल
- 22:07में बदल गए। मुझे तो आपसे कोई उम्मीद ही
- 22:09नहीं करनी चाहिए। मैं समझ गई कि जो भी
- 22:11करना है मुझे खुद ही करना है। कनिका
- 22:14निराशा से विराज की ओर देखती हुई बोली अब
- 22:17ज्यादा नौटंकी मत कर। हमसे जो बन पड़ेगा
- 22:19हम वह तुम्हारे लिए जरूर करेंगे। पर तुम
- 22:22अपने उस दोस्त को उसके चक्कर में मत
- 22:23फंसाओ। विराज कनिका को चेताते हुए बोला।
- 22:27शौर्य के साथ ही शिप्रा भी रेस्टोरेंट से
- 22:30बाहर आई थी। शिप्रा को अपने पीछे ही आते
- 22:32देखकर शौर्य उससे पूछा तुम्हारी कार कहां
- 22:35है? [संगीत]
- 22:36मैंने कब कहा कि मैं कार से यहां आई थी?
- 22:39मैं टैक्सी करके यहां आई थी। शिप्रा सपाट
- 22:42स्वर में बोली। क्यों? तुम्हारी कार को
- 22:45क्या हुआ? शौर्य हैरानी से बोला। बस मेरा
- 22:49चलाने का मन नहीं किया और मैं टैक्सी करके
- 22:51यहां आ गई। शिप्रा शौर्य के पीछे चलती हुई
- 22:54बोली। शौर्य पार्किंग से अपनी कार निकाल
- 22:57लाया तो शिप्रा उसकी बगल वाली सीट पर बैठ
- 22:59गई। तुम यहां कैसे आ गई? तुम्हारा तो ऐसा
- 23:02कोई प्लान नहीं था। शौर्य ने हिचकिचाते
- 23:04हुए शिप्रा से पूछा। तुम्हारे पास समय है
- 23:07यह जानने की कि मेरा क्या सब प्लान है?
- 23:10शिप्रा सामने देखती हुई बोली।
- 23:12यहां आने से शिप्रा को यह तो पता चल गया
- 23:14था कि कनिका शौर्य के साथ हुए अपने रिश्ते
- 23:17को तोड़ने की पूरी कोशिश कर रही है। यह
- 23:20बात उसके लिए तसल्ली वाली थी। पर उसे
- 23:23शौर्य का यह रवैया परेशान कर रहा था कि
- 23:25शौर्य कनिका को यह जताने की पूरी कोशिश कर
- 23:28रहा था कि वह उसके लिए एकदम परफेक्ट है।
- 23:30इसलिए उसको अपने परिवार की बात मान लेनी
- 23:32चाहिए। उसको समझ नहीं आ रहा था कि वह
- 23:35कनिका से अपना रिश्ता तोड़ना चाहता है या
- 23:37जोड़ना। एक तो कनिका के सामने उसको इतनी
- 23:40कहानी बनानी पर यह भी उसे पसंद नहीं आ रहा
- 23:42था। शिप्रा के चेहरे को देखकर शौर्य इतना
- 23:46तो समझ गया था कि अब उसको शिप्रा को
- 23:48समझाना भारी पड़ने वाला है। शिप्रा को इस
- 23:51बात से भी हैरानी हो रही थी कि शौर्य ने
- 23:53उससे यह तो पूछा कि वो अपनी कार से क्यों
- 23:55नहीं आई पर यह नहीं पूछा कि वो यहां कैसे
- 23:58आ गई। मुझे पता था कि तुम यहां आने वाली
- 24:01हो। शौर्य शायद समझ गया कि शिप्रा के
- 24:04दिमाग में क्या चल रहा है। इसलिए बात की
- 24:06दिशा बदलते हुए बोला शिप्रा ने हैरानी से
- 24:09शौर्य की ओर देखा। उसे शौर्य की बात पर
- 24:11यकीन नहीं हुआ। यह कैसे हो सकता है? उसकी
- 24:15तो शौर्य से यहां आने से पहले ही बात हुई
- 24:17थी। तब तो उसकी बातों से ऐसा नहीं लगा था
- 24:19कि शौर्य को ऐसा कुछ आभास भी था। [संगीत]
- 24:22इसलिए उसने चिढ़कर कहा अच्छा ऐसा भी कुछ
- 24:25है जो तुम्हें पहले से पता नहीं होता है।
- 24:27है ना? जैसे इस समय तुम्हारे दिमाग में
- 24:30क्या चल रहा है यह मुझे नहीं पता। एक बात
- 24:33और भी है जो मुझे नहीं पता। मैंने कब
- 24:35तुमको प्रपोज किया था और तुमने मेरे
- 24:37प्रपोजल को रिजेक्ट कर दिया था। वैसे यह
- 24:39कब हुआ था? शौर्य मुस्कुराते हुए बोला।
- 24:43शिप्रा ने शौर्य के सवाल को सुना तो वो
- 24:45खिड़की से बाहर की ओर देखने लगी। फिर वो
- 24:47शौर्य की तरफ पलटी और चिढ़े स्वर में
- 24:49बोली। और क्या करती? तुम तो उसको इंप्रेस
- 24:52करने के चक्कर में लगे हुए हो। तो मैं यूं
- 24:54हाथ पर हाथ धड़कर बैठी तो नहीं रह सकती।
- 24:57तो इसके लिए तुम मेरा इमेज ही खराब कर
- 24:58दोगी? और क्या कहा था तुमने? मैं तो जिस
- 25:02लड़की को देखता हूं, उसी से प्यार कर
- 25:03बैठता हूं। हां, यह भी तो कहा था। तुमसे
- 25:07पहले मैंने तुम्हारी बहन मेघना को भी
- 25:08प्रपोज किया था और उसने भी मेरे प्रपोजल
- 25:11को ठुकरा दिया था। बोलते हुए शौर्य के
- 25:13चेहरे पर एक प्यारी मुस्कान खेल रही थी।
- 25:16जबकि शिप्रा हैरानी से भरी आंखों से शौर्य
- 25:18[संगीत] को देख रही थी। उसे समझ नहीं आया
- 25:21कि यह बात शौर्य को कैसे पता चली। यह बात
- 25:24तो उसने [संगीत] कनिका से कही थी और उस
- 25:26समय तो शौर्य उसके आसपास भी कहीं नहीं था।
- 25:29इतना हैरान होने की जरूरत नहीं है। मुझे
- 25:31पता है होटल पैराडाइज में तुम दोनों के
- 25:33बीच में क्या बात हुई। शौर्य शिप्रा के
- 25:36चेहरे की तरफ देखता हुआ बोला। इसलिए
- 25:38तुम्हें पता था कि मैं यहां आने वाली थी।
- 25:41पर यह तुमने किया कैसे? तुम तो वहां आसपास
- 25:44भी नहीं थे। अभी भी शिप्रा की हैरानी कम
- 25:47नहीं हो रही थी। वो यह तो समझ सकती थी कि
- 25:49दूर से शौर्य उस पर नजर रख सकता था कि वह
- 25:52किससे मिलती है। पर उसकी किससे क्या बात
- 25:55हुई यह पता कर लेना यह आसान नहीं था। मेरे
- 25:58लिए यह कोई बड़ी बात नहीं है। शौर्य गर्व
- 26:01से सीना चौरा करते हुए बोला, "यह मेरे लिए
- 26:04कोई बड़ी बात नहीं है।" शिप्रा ने शौर्य
- 26:07के शब्दों की नकल की। फिर अपनी बात को आगे
- 26:09बढ़ाती हुई बोली, "अगर इतने ही बड़े सुरमा
- 26:12हो, तो चौहान फैमिली से अपना पीछा क्यों
- 26:14नहीं छुड़ा पाते हो? ऐसे ही सीना चौरा
- 26:16करके सबके सामने यह भी कबूल कर लो कि मैं
- 26:18तुम्हारी बीवी हूं। शिप्रा के कटाक्ष से
- 26:21शौर्य की बोलती बंद हो गई। शौर्य ने भी
- 26:24ऐसा नहीं सोचा था कि जब सब कुछ सामान्य हो
- 26:27जाएगा उसके बाद भी उसे शिप्रा से अपने
- 26:29रिश्ते की बात यूं सबसे छुपानी पड़ेगी।
- 26:32उसके चेहरे पर शर्मिंदगीगी के भाव भी आए।
- 26:35शिप्रा शौर्य के मनोभाव को समझ गई। वो
- 26:38शौर्य की मजबूरी भी समझती थी। इसीलिए उसने
- 26:41शौर्य के हाथ पर अपना हाथ रखकर उसे
- 26:44आश्वस्त किया। शौर्य ने एक नजर शिप्रा की
- 26:47ओर देखा। फिर आगे देखने लगा। बातों में
- 26:50शिप्रा को भी ध्यान नहीं रहा कि उसकी कार
- 26:52किस रास्ते पर है। [संगीत] अनजान रास्ते
- 26:55को देखकर उसने शौर्य से पूछा, वैसे हम
- 26:58कहां जा रहे हैं? तुम साथ हो इसलिए मैं भी
- 27:00ड्राइविंग का मजा ले रहा हूं। सोच रहा हूं
- 27:02तुम्हारे साथ एक लॉन्ग ड्राइव पर हुआ हूं।
- 27:05शौर्य मुस्कुराते हुए बोला। इस बीच शौर्य
- 27:08ने अपना मोबाइल निकाला और किसी को मैसेज
- 27:10किया। इसके बाद वह यूं ही 10-15 मिनट
- 27:12सड़कों पर अपनी गाड़ी भगाता रहा। शिप्रा
- 27:15को जब समझ नहीं आया कि शौर्य कर क्या रहा
- 27:17है? तो उसने पूछा तुम कर क्या रहे हो? कुछ
- 27:20बात है क्या? शौर्य शिप्रा की ओर देखकर
- 27:23मुस्कुराया और बोला फिल्म देखने चले क्या?
- 27:26शिप्रा को समझ नहीं आया कि शौर्य कुछ अजीब
- 27:28व्यवहार क्यों कर रहा है? इसलिए वो शौर्य
- 27:30को शक भरी नजरों से देखते हुए बोली, कोई
- 27:33बात है क्या? मुझे तुम्हारा व्यवहार कुछ
- 27:35अजीब लग रहा है। शिप्रा ने यह कह तो दिया
- 27:38पर उसे यह अच्छा लगा कि शौर्य उसके साथ
- 27:40फिल्म देखने की बात कर रहा है। शौर्य कुछ
- 27:43और प्लान कर ले। उससे पहले वह जल्दी से
- 27:45बोली चलो चलते हैं। देखो तो यहां सबसे
- 27:48करीब कौन सा हॉल है? शौर्य शिप्रा की ओर
- 27:51देखकर बोला। शिप्रा ने अपना मोबाइल निकाल
- 27:54कर अपना लोकेशन देखा तो उसे आश्चर्य हुआ
- 27:56कि वो अपने घर से इतने दूर क्यों है? वो
- 27:59शौर्य से बोली, "यह हम कहां आ गए हैं?"
- 28:02"मैं तो बस ऐसे ही चलाए जा रहा था। इसीलिए
- 28:04मुझे रास्ते का ध्यान ही नहीं रहा।" उसके
- 28:07बाद शिप्रा ने अपने घर के रास्ते में
- 28:08पड़ने वाला ही एक पीवीआर का लोकेशन मोबाइल
- 28:11पर लगाकर शौर्य के सामने कर दिया। शौर्य
- 28:14ने कुछ कहा नहीं। बस नेविगेशन को देखकर
- 28:16[संगीत] उसी रास्ते पर अपनी कार डाल दिया।
- 28:18लगभग 10-15 मिनट बाद शौर्य लोकेशन पर
- 28:21पहुंचा। उसने कार को पार्किंग में लगाया
- 28:23और कार से बाहर आ गया। वो शिप्रा के साथ
- 28:26टिकट काउंटर की तरफ बढ़ गया। साथ चलते हुए
- 28:29शिप्रा ने शौर्य की बाहों में अपनी बाहें
- 28:31फंसा लिया। शिप्रा की छुवन से शौर्य के
- 28:34शरीर में एक सिंहण दौड़ गई। वो तुरंत
- 28:37शिप्रा की ओर देखकर बोला, अभी तुमने मेरे
- 28:39लव प्रपोजल को एक्सेप्ट नहीं किया है जो
- 28:41ऐसे बाहों में बाहें डालकर हम घूम सके।
- 28:44शौर्य के कहने का मतलब समझकर शिप्रा ने
- 28:46उसकी बाह को छोड़ दिया। वो सरसरी निगाह से
- 28:49अपनी चारों तरफ देखने लगी कि कोई उसका
- 28:51पीछा तो नहीं कर रहा है पर उसे अपने आसपास
- 28:54कोई ऐसा शख्स दिखाई नहीं दिया। उसने कुछ
- 28:57कहा नहीं बस शौर्य के साथ चलती रही। शौर्य
- 29:00ने दो टिकट लिया और हॉल में प्रवेश कर
- 29:02गया। अभी भी शो शुरू होने में 10 मिनट का
- 29:05वक्त था। वो शिप्रा के साथ फिट कोर्ट में
- 29:08गया और अपने और शिप्रा के लिए दो कॉफी
- 29:10लिया। शौर्य के साथ यूं अकेले पहली बार
- 29:13कोई मूवी देखने आना शिप्रा को बहुत अच्छा
- 29:15लग रहा था। शौर्य कॉफी का मग लेकर फूड
- 29:18कोर्ट के बालकनी में आ गया था। यह फूड
- 29:20कोर्ट फर्स्ट फ्लोर पर था। जहां शौर्य
- 29:22खड़ा था, वहां से पार्किंग साफ दिखाई दे
- 29:25रिप्रेजेंट दे रहा था। शौर्य कुछ देर बाहर
- 29:27की ओर देखता रहा। फिर उसने शिप्रा की तरफ
- 29:30ध्यान दिया। शिप्रा उसके चेहरे की तरफ ही
- 29:32देख रही थी। किस सोच में डूबे हुए हो? कोई
- 29:35बात है क्या? शिप्रा शौर्य की आंखों में
- 29:37देखती हुई बोली, नहीं कुछ भी तो नहीं।
- 29:41शौर्य मुस्कुराने का प्रयास करता हुआ
- 29:43बोला, शौर्य शिप्रा के साथ मूवी देखने तो
- 29:46आ गया था, पर उसने यह भी नहीं देखा कि
- 29:48उसने किस मूवी का टिकट लिया है और ना ही
- 29:50शिप्रा ने भी इस बात पर गौर किया कि वो
- 29:52[संगीत] कौन सा फिल्म देखने आई थी। वो तो
- 29:54इसी बात से खुश थी कि वह शौर्य के साथ है।
- 29:58लोगों ने हॉल में प्रवेश करना शुरू कर
- 29:59दिया। शौर्य और शिप्रा ने भी अपना कॉफी का
- 30:02कप डस्टबिन में डाला और हॉल के अंदर जाने
- 30:04के लिए बढ़ गई। एक बार फिर से शिप्रा ने
- 30:07शौर्य का हाथ पकड़ लिया और उसकी उंगलियों
- 30:09में अपनी उंगली फंसा लिया। यह देखकर
- 30:11[संगीत] शौर्य फिर से शिप्रा की ओर देखने
- 30:13लगा। खबरदार जो अब कुछ कहा तो अब मैं इतनी
- 30:16बंदिश अपने ऊपर नहीं ले सकती। शिप्रा
- 30:19चेतावनी देती हुई बोली। शिप्रा की
- 30:21वार्निंग सुनकर शौर्य मुस्कुरा पड़ा। उसने
- 30:24भी शिप्रा की उंगलियों पर अपनी पकड़ मजबूत
- 30:26कर ली। हॉल के अंदर आते ही शौर्य ने महसूस
- 30:30किया कि हॉल में ज्यादा भीड़ नहीं थी।
- 30:32वैसे भी शौर्य ने जो टिकट ले रखा था वह
- 30:34बालकनी का था। शौर्य अपनी सीट पर पहुंचा।
- 30:38यह एक सोफा था जो दो लोगों के लिए ही था।
- 30:41शौर्य शिप्रा के साथ अपनी सीट पर बैठ गया।
- 30:44शिप्रा शौर्य के एकदम करीब होकर बैठ गई।
- 30:47शौर्य अपना मोबाइल निकालकर कुछ मैसेज
- 30:50देखने लगा और और कुछ मैसेज टाइप करके किसी
- 30:53को भेजा भी। शिप्रा ने जब देखा कि अंदर
- 30:56आने के बाद भी शौर्य अपने मोबाइल में लग
- 30:58गया है तो उसने उसके हाथ से उसका मोबाइल
- 31:01ले लिया। शिप्रा को आश्चर्य हुआ कि यह वही
- 31:04मोबाइल था जो उसने शौर्य को शुरुआत में ही
- 31:06दिया था। तुम अभी तक वही मोबाइल चला रहे
- 31:09हो जो मैंने तुम्हें दिया था। तुम्हें तो
- 31:11कोई बढ़िया मोबाइल ले लेना चाहिए था।
- 31:13शिप्रा मोबाइल को उलट-पुलट कर देखती हुई
- 31:16बोली क्या करना? मोबाइल का जो काम है वो
- 31:18तो हो ही रहा है। तो फिर फालतू में इस पर
- 31:21और पैसे खर्च करने का क्या फायदा? शौर्य
- 31:23लापरवाही से बोला। इतना कहकर उसने मोबाइल
- 31:26लेने के लिए शिप्रा की तरफ अपना हाथ
- 31:28बढ़ाया। तो शिप्रा ने अपना हाथ पीछे कर
- 31:31लिया और मोबाइल को अपने पर्श में रखती हुई
- 31:34बोली, "अब यह तुमको यहां से बाहर जाने के
- 31:36बाद ही मिलेगा।" शौर्य समझ गया कि उसका
- 31:39शिप्रा से जिद करने का कोई फायदा नहीं।
- 31:41इसलिए उसने खुद को रिलैक्स किया और सोफे
- 31:44से टेक लगाकर पीछे हो गया। शिप्रा भी पीछे
- 31:47उसके पास खिसक गई और उसकी बाहों में अपनी
- 31:49बाहें फंसाकर उसके करीब हो गई और अपना सर
- 31:53उसके कंधे पर टिका दिया। इस बीच मूवी भी
- 31:56शुरू हो गई थी। पर सही मायने में मूवी की
- 31:58तरफ दोनों में से किसी का भी ध्यान नहीं
- 32:00था। दोनों एक दूसरे की नजदीकियों को महसूस
- 32:03कर रहे थे। शौर्य खामोश था पर उसके दिल की
- 32:07धड़कन बढ़ गई थी। यही हॉल शिप्रा का भी
- 32:10था। उसका भी मन कर रहा था काश यहीं वक्त
- 32:13ठहर जाता और वह यूं ही शौर्य की बाहों में
- 32:16खोई रहती। जब से उसे पता चला था कि शौर्य
- 32:18राठौर फैमिली का सदस्य था और उस पर भी
- 32:21उसका रिश्ता चौहान फैमिली के साथ हो गया
- 32:23है तब से उसे यह डर लगातार सताए हुए था कि
- 32:26कहीं फैमिली के दबाव में शौर्य उससे अलग
- 32:29ना हो जाए। [संगीत] इसीलिए वह अपनी तरफ से
- 32:31पूरी कोशिश कर रही थी कि कनिका की निगाह
- 32:33में शौर्य की ऐसी इमेज बना दे कि वह खुद
- 32:36उससे रिश्ता करने से इंकार कर दे। और जब
- 32:38तक वह अपने इस मकसद में कामयाब नहीं हो
- 32:40जाती वह कोशिश करती रहेगी। शौर्य उससे दूर
- 32:44ना हो जाए यह डर उसको शौर्य के और करीब ला
- 32:47रही थी। उसने सोचा अगर शौर्य उससे अलग हो
- 32:50जाएगा तो वो क्या करेगी? इस ख्याल ने ही
- 32:53उसको डरा दिया। उसकी पकड़ शौर्य की बाहों
- 32:56पर और कस गई। शौर्य ने यह महसूस किया तो
- 32:59वो शिप्रा की ओर देखकर बोला क्या हुआ?
- 33:02शिप्रा ने भी अपना चेहरा उठाकर उसकी तरफ
- 33:04देखा और बोली, कुछ नहीं। स्क्रीन की मध्यम
- 33:08रोशनी में शौर्य का चेहरा नीला नजर आ रहा
- 33:10था। शिप्रा अपनी भावनाओं पर कंट्रोल नहीं
- 33:13कर सकी और उसने अपना एक हाथ बढ़ाकर शौर्य
- 33:16की बालों में फंसाया और उसके चेहरे को
- 33:18अपने करीब खींचा और उसके होठों पर अपना
- 33:21होठ रख दिया। शौर्य की सांसे तेज हो गई।
- 33:24उसका हाथ भी शिप्रा की बालों में उलझ गया।
- 33:27वो भी उसकी सांसों की महक को अपनी सांसों
- 33:29के साथ समाने लगा। तभी उसने महसूस की पानी
- 33:32की दो गर्म बूंदे उसके गालों को छू गई
- 33:34हैं। उसे कुछ ठीक नहीं लगा। तो उसने
- 33:37शिप्रा के चेहरे को दोनों हाथ से पकड़ कर
- 33:39खुद से अलग किया तो देखा शिप्रा की आंखें
- 33:42भरी हुई थी। यानी अभी जो पानी की दो
- 33:45बूंदों ने उसके गाल को छुआ था वो शिप्रा
- 33:47का आंसू था। यह आंसू क्यों है? शौर्य का
- 33:51चिंतित स्वर शिप्रा के कानों में पड़ा।
- 33:54कुछ नहीं बस ऐसे ही आ गया। शिप्रा अपने
- 33:57आंसू पोछती हुई बोली अब तुम मुझसे भी नहीं
- 34:00बताओगी बोलो क्या बात है शौर्य प्यार से
- 34:03शिप्रा के गाल को सहलाता हुआ बोला मुझे डर
- 34:06लग रहा है शिप्रा शौर्य की आंखों में
- 34:09देखती हुई बोली यह क्या बात कर रही हो
- 34:11तुम्हें किस बात का डर शौर्य अपने चेहरे
- 34:14पर मुस्कान लाता हुआ बोला मुझे डर लग रहा
- 34:17है कि कहीं तुम मुझसे दूर ना हो जाओ
- 34:20शिप्रा ने कारण बताया मैं तुमसे दूर
- 34:23होऊंगा ऐसा कभी नहीं होगा फालतू की बात को
- 34:26दिमाग में लाने की कोई जरूरत नहीं है।
- 34:29शौर्य ने शिप्रा को आश्वस्त करने की कोशिश
- 34:31की। तुम्हारे लिए बोलना आसान है। जिस तरह
- 34:34से तुम्हारा रिश्ता कनिका के साथ हुआ है,
- 34:36यह बात मुझे परेशान करती रहती है। शिप्रा
- 34:39ने अपनी चिंता जाहिर की। ऐसा उल्टापुल्टा
- 34:42सोचने की कोई जरूरत नहीं है। मैं खुद
- 34:44तुमसे दूर नहीं रह सकता। और दूसरी बात यह
- 34:47है कि मैं तुम्हें तब से प्यार करता हूं
- 34:49जब मैंने तुम्हें पहली बार देखा था। मैंने
- 34:51तभी सोच लिया था कि तुम्हारी आंखों में
- 34:54कभी आंसू नहीं आने दूंगा। शौर्य शिप्रा की
- 34:56आंखों को चूमता हुआ बोला, "अगर ऐसा था, तो
- 34:59तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया कि तुम
- 35:01कौन हो।" शिप्रा शिकायती स्वर में बोली,
- 35:04क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि तुम यह
- 35:06जानने के बाद मुझे प्यार करो कि मैं कौन
- 35:09हूं। मैं चाहता था कि तुम मुझे उसी रूप
- 35:12में प्यार करो जिस स्थिति में मैं तुमसे
- 35:14मिला था। इसलिए मैंने तुम्हें अपने बारे
- 35:16में कुछ नहीं बताया। शौर्य गंभीरता से
- 35:19बोला, "अगर मैंने अपनी फीलिंग तुमसे जाहिर
- 35:22नहीं की होती, तो क्या करते? शिप्रा अपनी
- 35:25भवे बड़ी करती हुई बोली तब तक इंतजार करता
- 35:28जब तक तुम मुझसे अपने प्यार का इजहार नहीं
- 35:30करती। शौर्य मुस्कुराते हुए बोला और अगर
- 35:33मैं रजत से शादी के लिए तैयार हो जाती तो
- 35:36शिप्रा रजत के कंधे पर अपना ठोरी टिकाते
- 35:38हुए बोली तो फिर मैं क्या कर सकता था? यह
- 35:41तुम्हारी इच्छा होती तो मैं उसका सम्मान
- 35:44करता। शौर्य अपना चेहरा स्क्रीन की तरफ
- 35:46करता हुआ बोला। तो क्या तुम मुझे किसी और
- 35:49के साथ शादी करते देखते रहते? क्या यही
- 35:51तुम्हारा प्यार है? शिप्रा शौर्य का चेहरा
- 35:54अपनी तरफ घुमाते हुए बोली, "मेरे लिए किसी
- 35:57को प्यार करने का यह मतलब नहीं है कि उसे
- 35:59मैं अपने साथ रखूं। मेरे लिए प्यार का
- 36:02मायने यह है कि जिससे हम प्यार करते हैं,
- 36:04उसकी इच्छाओं का सम्मान करना। यह देखना कि
- 36:07वो किसी मुसीबत में तो नहीं है। वो जहां
- 36:09जिसके भी साथ है, खुश तो है ना। शौर्य
- 36:12भावुक स्वर में बोला, और अगर मैं तुम्हारी
- 36:15सच्चाई जानने के बाद तुमसे अपने प्यार का
- 36:17इजहार करती तो? शिप्रा झिझकती हुई बोली तो
- 36:21फिर शायद मैं यूं तुम्हारे साथ यहां बैठा
- 36:23नहीं होता। शौर्य शिप्रा के चेहरे पर
- 36:25लहराते एक लट को सामने से हटाते हुए बोला
- 36:29मुझे तुम्हारे स्टेटस से कोई फर्क नहीं
- 36:30पड़ता। मुझे अपना वो ड्राइवर पति ही पसंद
- 36:33है जो मेरे लिए किसी भी मुसीबत से टकराने
- 36:35के लिए तैयार रहता है। उल्टा मैं तो तब से
- 36:38और डर कर जी रही हूं जब से पता चला है कि
- 36:40तुम राठौर फैमिली से संबंध रखते हो।
- 36:43शिप्रा सफाई देती हुई बोली तुम्हें सफाई
- 36:46देने की कोई जरूरत नहीं है। मैं जानता हूं
- 36:49तुम भले ही मुझ पर जुल्म ढती हो पर मुझसे
- 36:51प्यार करती हो। इसलिए अब तो मैं तुम्हें
- 36:53खुद से दूर नहीं होने देने वाला हूं।
- 36:56शौर्य शिप्रा का नाक पकड़ कर हिलाता हुआ
- 36:58बोला। क्या कहा? मैं तुम पर जुल्म ढती
- 37:01हूं। मैंने ऐसा क्या किया जो तुम मुझ पर
- 37:03इतना बड़ा इल्जाम लगा रहे हो? शिप्रा
- 37:06रूठती हुई बोली। अभी शौर्य कुछ और बोलता
- 37:09तभी मोबाइल रिंग करने की आवाज आई। यह रिंग
- 37:12शौर्य के मोबाइल की थी। शौर्य ने शिप्रा
- 37:14से अपना मोबाइल मांगा। शिप्रा ने पर्श से
- 37:17मोबाइल निकाला तो उस पर छगन का नाम फ्लैश
- 37:20हो रहा था। यह अभी तुम्हें किस लिए फोन कर
- 37:22रहा है? शिप्रा मोबाइल शौर्य की तरफ
- 37:25बढ़ाती हुई बोली। मैंने इसे कुछ काम दिया
- 37:28था। हो सकता है उसी के लिए फोन कर रहा हो।
- 37:31बोलते हुए शौर्य ने शिप्रा के हाथ से
- 37:32मोबाइल लिया और कॉल को रिसीव किया। शौर्य
- 37:36के फोन उठाते ही छगन की आवाज आई। बॉस यह
- 37:40लोग किसके आदमी हैं पता चल गया? शौर्य को
- 37:43आश्चर्य हुआ कि अभी मुश्किल से एक घंटा भी
- 37:46नहीं हुआ और छगन ने अपना काम कर भी लिया
- 37:48था। इसलिए वो आश्चर्य से बोला तुमने इतनी
- 37:51जल्दी कैसे पता कर लिया? इसके लिए तो मुझे
- 37:54कुछ करना ही नहीं पड़ा बॉस। अभी तो मैं
- 37:56सिनेमा हॉल के बाहर ही हूं। छगन ने जवाब
- 37:58दिया। यानी अभी वे लोग बाहर ही हैं। शौर्य
- 38:02ने पूछा। हां बॉस आप तो उनकी मांद में ही
- 38:06आकर बैठ गए हैं तो उनको कहीं और जाने की
- 38:08जरूरत ही नहीं है। छगन धीमे से बोला कौन
- 38:12लोग हैं यह और मेरा पीछा क्यों कर रहे
- 38:14हैं। शौर्य शिप्रा की ओर देखता हुआ बोला
- 38:17शिप्रा ध्यान से शौर्य की बात सुन रही थी
- 38:20और समझने की कोशिश कर रही थी कि वे क्या
- 38:22बात कर रहे हैं। पर कुछ भी उसके पल्ले
- 38:24नहीं पड़ रहा था। इसका नाम जहांगीर खान है
- 38:27बॉस। यह शैडो बॉक्सर फाइट क्लब का मास्टर
- 38:30है। यह अभी आकर उनकी कार में बैठा है।
- 38:32इसका मतलब जो आपका पीछा कर रहे थे, वह
- 38:35उन्हीं के क्लब का फाइटर होगा। रहा यह कि
- 38:37वह आपका पीछा क्यों कर रहा है, यह तो उससे
- 38:40मिलने के बाद ही पता चलेगा। छगन को जो पता
- 38:42चला था, उसने बता दिया। तुमने ऐसा क्यों
- 38:45कहा था कि हम उसकी मांद में ही आकर बैठ गए
- 38:47हैं। शौर्य उत्सुकतावश पूछा। क्योंकि उसका
- 38:51क्लब यहीं पास में ही है। छगन ने जवाब
- 38:53दिया। ठीक है। अब यह बताओ कि उसको कंट्रोल
- 38:56करना कितना मुश्किल हो सकता है। शौर्य यह
- 38:59जानना चाहता था कि छगन की निगाह में यह
- 39:01जहांगीर खान कितना पावरफुल है। बॉस इस
- 39:04जहांगीर खान का इस एरिया में अच्छा दबदबा
- 39:06है। इसका ग्रुप सुपारी किलर के नाम से भी
- 39:09फेमस है। क्योंकि यह लोग सुपारी लेकर भी
- 39:11दूसरों का काम करते हैं और इनके पास इस
- 39:13तरह के फाइटर का अच्छा खासा जमावड़ा भी
- 39:16रहता है। इसलिए हम यह तो कह सकते हैं कि
- 39:18पावरफुल तो हैं यह लोग। इसलिए हम सीधे
- 39:20इसके ऊपर हाथ भी नहीं डाल सकते। छगन ने
- 39:23अपना विचार दिया। शौर्य को समझ नहीं आया
- 39:25कि शैडो बॉक्सर फाइट क्लब का मास्टर उसके
- 39:28पीछे क्यों पड़ा हुआ है। आखिर इन लोगों को
- 39:30उसके पीछे कौन लगाया है। इस समय वो इनसे
- 39:33उलझ भी नहीं सकता था क्योंकि [संगीत]
- 39:34शिप्रा उसके साथ थी। उसने छगन से कहा, अभी
- 39:38तुम सिर्फ दूर से ही उस पर नजर रखो। आगे
- 39:40का निर्देश मैं तुम्हें थोड़ी देर में
- 39:42देता हूं। ठीक है बॉस। छगन ने इतना कहा और
- 39:45फोन काट दिया। दूसरी तरफ शौर्य के फोन
- 39:48रखते ही शिप्रा शौर्य से पूछ बैठी। क्या
- 39:50है यह सब? अभी छगन किसके बारे में बता रहा
- 39:53था? तुम जरा मुझे समझाओगे कि आखिर चल क्या
- 39:56रहा है? दरअसल जब से हम आयरन फिस्ट क्लब
- 39:58से निकले थे तभी से एक कार हमारा पीछा कर
- 40:01रही थी। इसलिए मैंने छगन को मैसेज करके
- 40:03अपने पीछे बुला लिया था ताकि वह पता कर
- 40:06सके कि जो हमारा पीछा कर रहे हैं वह कौन
- 40:08लोग हैं। शौर्य ने संक्षेप में बताया।
- 40:12अच्छा तो इसी कारण तुम कार को घर जाने के
- 40:14बजाय इधर-उधर घुमा रहे थे। शिप्रा शंका
- 40:17भरेश्वर में बोली, "मैं बस यकीन करना
- 40:20चाहता था कि कहीं यह मेरा भ्रम तो नहीं
- 40:21है। इसलिए मैं कार को बिना किसी मंजिल के
- 40:24घुमाए जा रहा था। जब यह समझ आ गया कि छगन
- 40:26हमारे पीछे आ चुका है, तब मैंने यहां आने
- 40:28का सोचा ताकि इस बीच छगन यह भी पता कर सके
- 40:31कि वो लोग हैं कौन। शौर्य शिप्रा को अपनी
- 40:34बाहों के घेरे में लेते हुए बोला, शिप्रा
- 40:36को यकीन नहीं हो रहा था कि आयरन फिस्ट
- 40:39क्लब से निकलने के बाद शौर्य इतना कुछ कर
- 40:41रहा था और उसे इसका हल्का आभास भी नहीं
- 40:43हुआ। वह तो यही समझ रही थी कि शौर्य उसके
- 40:46साथ समय बिताना चाहता है। इसलिए वह उसे
- 40:49मूवी दिखाने के लिए लाया था। यह सोचकर
- 40:51उसका चेहरा उतर गया। वो नाराजगी भरे स्वर
- 40:54में बोली। मैं फालतू में ही यह सोच कर खुश
- 40:56हो रही थी कि तुम मेरे साथ समय बिताना
- 40:58चाहते हो इसलिए मुझे यहां लेकर आए हो।
- 41:01इसमें गलत कुछ भी नहीं है। मैं सच में
- 41:04तुम्हारे साथ समय बिताना चाहता था। यह तो
- 41:06संयोग हो गया कि इसी समय वह बदमाश हमारे
- 41:08पीछे लग गए। उसके बाद भी मैंने अपना प्लान
- 41:10चेंज नहीं किया। अगर मुझे तुम्हारे साथ
- 41:12समय बिताना नहीं होता तो क्या मैं यहां
- 41:15फिल्म देखने के लिए आता? मैं तो उस कार से
- 41:17कब का अपना पीछा भी छुड़ा लिया होता। मेरे
- 41:19लिए उनसे अपना पीछा छुड़ाना इतना भी
- 41:21मुश्किल नहीं था। शौर्य ने शिप्रा को यकीन
- 41:24दिलाने की कोशिश किया। पर शिप्रा के चेहरे
- 41:26के भाव में कोई भी परिवर्तन नहीं आया। अभी
- 41:29भी उसे शौर्य की कही हुई बातों पर विश्वास
- 41:31नहीं हो रहा था। यह देखकर शौर्य ने शिप्रा
- 41:34के चेहरे को अपने दोनों हाथों में भरा और
- 41:36झुककर उसके होठों पर अपना हंठ रख दिया।
- 41:39शिप्रा ने शौर्य को रोका तो नहीं पर उसके
- 41:41हावभाव से पहले वाला उत्साह गायब था।
- 41:45शौर्य ने यह महसूस किया तो शिप्रा के ऊपर
- 41:48से उसकी पकड़ धीमी हो गई। वो शिप्रा से
- 41:50अलग हुआ और बोला मैं सच कह रहा हूं अगर
- 41:54मेरा बस चले तो मैं तो तुमसे एक पल के लिए
- 41:56भी दूर ना जाऊं। पर शिप्रा का चेहरा अभी
- 41:59भी उदासीन था। पर वो एक टक शौर्य को ही
- 42:02देखे जा रही थी। अब ऐसे खामोश मत रहो। कुछ
- 42:05तो बोलो। इस तरह तुम मुझे डरा रही हो।
- 42:07शौर्य अभी भी शिप्रा को कुछ बोलते ना
- 42:10देखकर बोला अगर वे बदमाश उस क्लब से ही
- 42:12हमारे पीछे थे तो तुमने हमें पहले क्यों
- 42:14नहीं बताया? शिप्रा तल्खी भरे स्वर में
- 42:17बोली अरे वो तो मैं तुम्हें डराना नहीं
- 42:19चाहता था। वैसे भी तुम्हें यह बात तो पता
- 42:21चलनी ही थी। शौर्य ने शिप्रा को फिर से
- 42:24समझाने का प्रयास किया। ठीक है। मैंने
- 42:27तुम्हारी बात का विश्वास किया। अब क्या
- 42:29करना है? शिप्रा ठंडे स्वर में बोली।
- 42:32शिप्रा का ठंडा रिस्पांस देखकर शौर्य का
- 42:34मूड भी ऑफ हो गया। वो उसकी आंखों में
- 42:36देखता हुआ बोला, "अगर तुम्हें मेरी बात पर
- 42:39विश्वास हो गया, तो मुझे ऐसा क्यों महसूस
- 42:41नहीं हो रहा? अब यह मुझे क्या पता? यह तो
- 42:44तुम्हें पता होना चाहिए। शिप्रा सोफे पर
- 42:46सीधी बैठती हुई बोली, "देखो, यह गलत बात
- 42:49है। अभी तो तुम मेरे साथ कितने प्यार से
- 42:51पेश आ रही थी और अब तुम मुझे ठीक से देख
- 42:53भी नहीं रही हो।" शौर्य बेबसी से बोला, तो
- 42:56तुम क्या चाहते हो? यह जानते हुए कि बाहर
- 42:59कुछ बदमाश हमारा हॉल से बाहर आने का
- 43:01इंतजार कर रहे हैं। मैं यहां रोमांस करने
- 43:03के मूड में रहूं। शिप्रा के चेहरे पर
- 43:05परेशानी नजर आने लगी थी। उसे लग रहा था कि
- 43:07यह बदमाश शिप्रा के लिए ही यहां आए हुए
- 43:10होंगे क्योंकि अभी तक उसके ऊपर बदमाशों ने
- 43:12घात लगाकर कई बार हमला किया था। कुछ सोचकर
- 43:15उसने दोबारा शौर्य से पूछा। कहीं इन
- 43:18बदमाशों को मुख्तार भाई ने ही तो नहीं
- 43:19भेजा। शौर्य को अब जाकर समझ आया कि शिप्रा
- 43:22इस बात से परेशान है कि यह बदमाश उसके लिए
- 43:25ही उसके पीछे पड़े [संगीत] हुए हैं। यह
- 43:27सोचकर शौर्य बोला, "तुम गलत समझ रही हो।
- 43:30मुझे नहीं लगता कि यह बदमाश तुम्हारे कारण
- 43:32हमारा पीछा कर रहे हैं। मुझे लगता है कि
- 43:34यह मेरे पीछे परे हैं। इनका तुमसे कोई
- 43:36मतलब नहीं है। ऐसा कैसे हो सकता है?
- 43:39तुम्हारा भला यहां कोई दुश्मन कैसे हो
- 43:41सकता है? जरूर यह मुख्तार भाई के भेजे हुए
- 43:43बदमाश होंगे। शिप्रा अविश्वास भरे स्वर
- 43:46में बोली। ऐसा नहीं है। जो हमारा पीछा कर
- 43:49रहे थे उसमें एक लड़की है जिससे मेरी
- 43:51टक्कर आयरन फिस्ट क्लब में जाते ही हुई
- 43:53थी। उसके बाद से ही वह मेरे पीछे पड़ी है।
- 43:56इसका मतलब वह तुम्हारा नहीं मेरा पीछा कर
- 43:58रहे हैं। शौर्य ने शिप्रा को समझाने की
- 44:00कोशिश की। इससे क्या फर्क पड़ता है कि वो
- 44:03मेरा पीछा कर रहे हैं या तुम्हारा? यह
- 44:05परेशानी की बात तो है ना? शिप्रा झल्ला कर
- 44:08बोली अरे अब जब मुझे पता है कि कोई हमारा
- 44:11पीछा कर रहा है तो यह उसके लिए परेशानी की
- 44:14बात है ना कि हमारे लिए। तुम उनके चक्कर
- 44:16में हमारे रोमांटिक मूड का कबाड़ा मत करो।
- 44:19शौर्य शिप्रा को अपनी तरफ घुमाता हुआ
- 44:21बोला। तुम्हें इस मुश्किल में भी रोमांच
- 44:23सूझ रहा है। पहले यह सोचो कि यहां से
- 44:25निकलना कैसे है। इस बार शिप्रा थोड़ा नम्र
- 44:28स्वर में बोली, "देखो, वैसे ही मुझे अगले
- 44:31दो दिनों तक तुम्हारा चेहरा नहीं दिखने
- 44:33वाला। इसलिए मैं इन कुछ अमूल्य पलों को
- 44:35यूं ही बर्बाद नहीं कर सकता। शौर्य सीधा
- 44:38होकर शिप्रा की आंखों में देखता [संगीत]
- 44:39हुआ बोला, "क्यों? दो दिन तक मैं क्यों
- 44:42नहीं देखूंगी?" शिप्रा शौर्य की बात सुनकर
- 44:45चौंक कर बोली। उसकी नजरें शौर्य के ऊपर
- 44:47गिर गई थी कि शौर्य के ऐसा कहने का क्या
- 44:50मतलब हुआ? दरअसल कल सुबह से मेरी फिल्म की
- 44:53शूटिंग शुरू हो रही है। अभी एक गाने का
- 44:55शूटिंग होना है जिसका दो दिन का शेड्यूल
- 44:57बना हुआ है। इसलिए शायद मुमकिन ना हो कि
- 44:59मैं दो दिन तक घर आ पाऊं। शौर्य ने झिझकते
- 45:02हुए शिप्रा से कहा। शौर्य की बात सुनकर
- 45:05शिप्रा गुस्से में शौर्य को घूरने लगी।
- 45:07तुम्हें नहीं लगता कि तुमने कुछ जल्दी ही
- 45:09मुझे यह बात बता [संगीत] दी कि तुम दो दिन
- 45:10तक घर नहीं आने वाले हो। तुम्हें तो कल जब
- 45:13तुम शूटिंग पर चले जाते तब यह बात बताना
- 45:15चाहिए था। इतनी मेहरबानी किस लिए? शिप्रा
- 45:18शौर्य पर तंज कसती हुई बोली
- 45:21शौर्य यह समझता था कि ऐसा कुछ उसको सुनने
- 45:24को जरूर मिलेगा। फिर भी वह सफाई देता हुआ
- 45:27बोला, "तुम तो पिछले दिनों मुझसे नाराज ही
- 45:29चल रही थी। इसलिए कहने का समय ही नहीं
- 45:31मिला। पर अब तुम और नाराज मत हो। मैं सब
- 45:34गलतियों की माफी तुमसे एक साथ मांग लूंगा।
- 45:38मैं और ज्यादा तुम्हारी नाराजगी नहीं झेल
- 45:40सकता। बड़ी मुश्किल से तो मैं तुम्हारे
- 45:42करीब आ पाया हूं। अब फिर से तुमसे दूरी
- 45:45नहीं झेल सकता। शौर्य शिप्रा को मनाने की
- 45:48कोशिश करता हुआ बोला, शौर्य को ऐसे खुद के
- 45:51सामने सरेंडर करते देखकर शिप्रा को खुशी
- 45:54हुई। पर उसने अपने चेहरे [संगीत] पर ऐसा
- 45:57भाव आने नहीं दिया। अब यह कहने का क्या
- 46:00मतलब? तुम्हें मेरी भावनाओं की कदर ही
- 46:02नहीं है। यह तो तुम्हें उस समय सोचना
- 46:04चाहिए जिस समय तुमने मुझे यह बात बताना
- 46:07जरूरी नहीं समझा। ठीक है। जब तुम्हें मुझ
- 46:10पर प्यार ही नहीं आ रहा है तो अगर बाहर
- 46:13मुझे कहीं प्यार मिलता है और मैं बहक जाता
- 46:15हूं तो फिर बाद में शिकायत मत करना। शौर्य
- 46:18इमोशनल गेम खेलता हुआ बोला। शौर्य की बात
- 46:21सुनकर शिप्रा शौर्य को तीखी नजरों से
- 46:24घूरने लगी। अभी वह कुछ और बोलती तभी फिर
- 46:27से शौर्य का फोन बजने लगा। कॉल छगन का ही
- 46:30था। शौर्य ने कॉल पीक किया। बोलो क्या बात
- 46:34है? शौर्य सपाट स्वर में बोला। अभी
- 46:36जहांगीर खान यहां से चला गया है। अभी वह
- 46:38दोनों लड़का लड़की अकेले ही हैं। हो सकता
- 46:40है कि जहांगीर खान फिल्म के खत्म होने के
- 46:42समय फिर से वापस आए। संभव है कि उस समय
- 46:44उसके साथ उसके और भी फाइटर हो। इसलिए मुझे
- 46:47लगता है कि आपका यहां से अभी ही निकल जाना
- 46:49ठीक रहेगा। [संगीत] इन दोनों को काबू करना
- 46:51ज्यादा मुश्किल नहीं होगा। छगन ने
- 46:54परिस्थिति का आकलन कर जो उसे उचित लगा वो
- 46:56विचार पेश कर दिया। शौर्य को भी यह बात
- 46:59सही जान पड़ा। ठीक है मैं थोड़ी देर में
- 47:02हॉल से निकलता हूं। [संगीत] फिर देखता हूं
- 47:03कि आगे क्या करना है। इतना कहकर शौर्य ने
- 47:06फोन काट दिया। शिप्रा अभी भी शौर्य को
- 47:09तीखी नजरों से देख रही थी। शौर्य समझ गया
- 47:12था कि शिप्रा का मूड इतनी जल्दी [संगीत]
- 47:14से ठीक होने से तो रहा इसलिए उसने अब वैसी
- 47:17कोई कोशिश नहीं की। उसने सोचा बाद में
- 47:19उसका मूड ठीक कर देगा। पर अभी उसका यहां
- 47:22से निकलना जरूरी है। ठीक है अभी मैं यहां
- 47:25से निकलता हूं। 10-15 मिनट के बाद मैं
- 47:27तुम्हें फोन करूंगा तो तुम यहां से निकल
- 47:29कर टैक्सी लेकर घर चली जाना। शौर्य समझाते
- 47:32शिप्रा को समझाते हुए बोला। पर शिप्रा
- 47:34बिना किसी रिएक्शन के शौर्य को घूरती रही।
- 47:37लगता नहीं था कि उसने शौर्य की कहीं बातों
- 47:40पर कोई ध्यान भी [संगीत] दिया था। इस तरह
- 47:42से शिप्रा को अपनी तरफ देखते पाकर शौर्य
- 47:45थोड़ा नर्वस फील करने लगा। शिप्रा कुछ
- 47:47बोले बिना अचानक खड़ी [संगीत] हुई। उसने
- 47:50अपने आसपास नजर दोहराया। हॉल वैसे ही खाली
- 47:52सा ही था। किसी का भी ध्यान उसकी तरफ नहीं
- 47:55था। शौर्य भी समझ नहीं पाया कि शिप्रा यूं
- 47:58खड़ी क्यों हो गई। वो शौर्य के सामने आई।
- 48:00वह उचक [संगीत] कर शौर्य के गोद में बैठ
- 48:02गई और अपनी बाहों की माला उसके गले में
- 48:05डाल दिया। अब बोलो क्या बोल रहे थे?
- 48:08[संगीत] किसी और से प्यार मिलता है तो तुम
- 48:10बहक भी सकते हो। पहले तो यह बताओ तुम्हें
- 48:13और किससे प्यार मिलेगा जो तुम बहक जाओगे?
- 48:16कहीं पहले से ही तो कहीं और चक्कर नहीं
- 48:18चला रहे। शौर्य को उम्मीद नहीं था कि
- 48:21शिप्रा इतनी हिम्मत करेगी। उसकी सांसों की
- 48:24गर्मी शौर्य को अपने चेहरे पर महसूस हो
- 48:26रही थी। अचानक उसका गला सूखने लगा। दिल
- 48:29में गुदगुदी सी होने लगी। शिप्रा उसके
- 48:32चेहरे पर गोलाई में अपनी अंगुली घुमाती
- 48:34हुई आगे बोली। अब चुप क्यों हो? बताओ तो
- 48:37सही। वो कौन है जिसके साथ तुम बहकने को
- 48:40तैयार हो? कैसी बात कर रही हो? इतनी
- 48:43खूबसूरत बीवी के होते हुए मेरी मजाल है जो
- 48:46मैं किसी को नजर उठाकर भी देखने की हिम्मत
- 48:48करूंगा। बड़ी मुश्किल से शौर्य के कंठ से
- 48:51यह बात निकली। अच्छा तो अपने आप ही
- 48:54तुम्हारे मुंह से यह बात निकल गई। जरूर
- 48:56तुम्हारे दिमाग में कुछ ना कुछ तो खिचड़ी
- 48:58पक रही है। शिप्रा बोलते हुए अपनी गाल को
- 49:01शौर्य के गाल से रगड़ भी रही थी। मैं तो
- 49:04सिर्फ इसलिए बोला कि शायद यह कहने से तुम
- 49:06मेरे करीब आ जाओ। शौर्य को अब खुद पर
- 49:08कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था। उसका भी
- 49:11हाथ शिप्रा के अंगों पर रेंगने लगा।
- 49:14शिप्रा शौर्य को बेकाबू होते देख रही थी।
- 49:16अब वह खुद भी अपने ऊपर से कंट्रोल खोती जा
- 49:18रही थी। उसने शौर्य के चेहरे को अपने
- 49:21चुंबनों से भर दिया और लास्ट में उसके अधर
- 49:24शौर्य के अधर से मिल गए। कुछ पलों के लिए
- 49:26तो दोनों सब कुछ भूल गए थे। पर जल्दी ही
- 49:29शौर्य होश में आ गया। उसे पता था कि उसे
- 49:32जल्दी ही यहां से निकलना है। जबकि शिप्रा
- 49:35सब कुछ भूलकर शौर्य के सीने में ही सिमट
- 49:38गई थी। अब तो वह यही चाहती थी कि काश यह
- 49:41वक्त यहीं ठहर जाए। पर तभी शौर्य के शब्द
- 49:44उसके कान में पड़ा। मैंने तो बूंद की चाहत
- 49:47की थी। तुमने तो दरिया बहा दिया। [संगीत]
- 49:49शौर्य के शब्द सुनकर शिप्रा ने और कसकर
- 49:52शौर्य को अपनी बाहों में भेज लिया। शौर्य
- 49:55का मन तो नहीं कर रहा था शिप्रा से अलग
- 49:57होने को। पर वह जानता था कि यह समय आशिकी
- 50:01करने का नहीं है। उसने शिप्रा का कंधा
- 50:04पकड़ कर उसको खुद से अलग करने की कोशिश
- 50:06की। पर शिप्रा तो जैसे सब कुछ भूलकर अब
- 50:10शौर्य में ही समा जाना चाहती थी। उसने
- 50:12अपनी पकड़ और मजबूत कर ली। शौर्य शिप्रा
- 50:16के कान के पास अपना मुंह ले जाकर बोला।
- 50:19कोई और वक्त होता तो मैं खुद ही तुमसे अलग
- 50:21नहीं होता। पर क्या करें? अभी मजबूरी है।
- 50:25शिप्रा को भी शौर्य की बात समझ आई। वो
- 50:27शौर्य से अलग हुई। पर अभी भी वह उसकी गोद
- 50:30में ही बैठी हुई थी। [संगीत] उसने शौर्य
- 50:32के चेहरे की तरफ देखा तो अचानक उसके चेहरे
- 50:35पर हंसी आ गई। शौर्य को समझ नहीं आया कि
- 50:38शिप्रा के चेहरे पर यह मुस्कान क्यों आई
- 50:40है? तो वो अपनी आंखें मटकाते हुए बोला। इस
- 50:43हंसी का क्या मतलब हुआ? कुछ नहीं बस ऐसे
- 50:45ही। अब क्या मेरे हंसने पर भी पाबंदी है?
- 50:48शिप्रा अपनी हंसी को दबाते हुए बोली।
- 50:51शौर्य समझ गया कुछ तो बात है। अचानक उसको
- 50:53कुछ शक हुआ। उसने पास ही परी शिप्रा का
- 50:56पर्श खोला और उसमें से एक छोटा शीशा
- 50:58निकाला और उसने अपने चेहरे को देखा तो
- 51:00उसको अपने चेहरे पर शिप्रा के होठों की
- 51:02लिपस्टिक के निशान दिखाई दिए। अपने चेहरे
- 51:05पर इतने सारे निशान देखकर वो हड़बड़ा गया।
- 51:08[संगीत] यह क्या है? इतने सारे निशान तुम
- 51:10कब से ऐसी लिपस्टिक लगाने लगी हो जो मेरा
- 51:12पूरा चेहरा बिगाड़ दिया। यह तो मेरे प्यार
- 51:15की निशानी है। शिप्रा मुस्कुराती हुई बोली
- 51:18ऐसी निशानी नहीं चाहिए जो किसी को अपना
- 51:21चेहरा ही नहीं दिखा सकूं। शौर्य बेचारगी
- 51:23से बोला। शिप्रा ने अपने पर्श की तरफ
- 51:25देखा। खुले पर्श को देखकर वो शौर्य से
- 51:28बोली, "कसी लड़की का पर्श ऐसे खोलना गलत
- 51:31बात है। पर मैंने तो अपनी वाइफ का पर्श
- 51:33खोला है। शौर्य मुस्कुराता हुआ बोला,
- 51:36शिप्रा ने शौर्य के जवाब पर कुछ कहा नहीं।
- 51:39बस उसने अपने पर्श से एक रुमाल निकाला और
- 51:41शौर्य के चेहरे पर लगे लिपस्टिक को साफ
- 51:43करने लगा। जब शौर्य के चेहरा साफ हो गया
- 51:46तो वो शिप्रा से बोला, "मैं अभी यहां से
- 51:48निकल रहा हूं। तुम ऐसा करना 10-15 मिनट के
- 51:51बाद यहां से निकलना। नहीं मैं भी तुम्हारे
- 51:54साथ ही चलूंगी। शिप्रा ने [संगीत] रुकने
- 51:56से तुरंत मना कर दिया। देखो मेरे साथ खतरा
- 52:00हो सकता है। मुझे नहीं पता उन बदमाशों का
- 52:02मेरा पीछा करने का मकसद क्या है। शौर्य
- 52:05शिप्रा को समझाने की कोशिश करता हुआ बोला।
- 52:08पर मैं तो सबसे ज्यादा सेफ तुम्हारे साथ
- 52:10ही रहती हूं। शिप्रा जिद भरे स्वर में
- 52:12बोली। तुमको तो समझाना ही बेकार है। ठीक
- 52:15है फिर तुम मेरे साथ ही चलो। शौर्य हार
- 52:18मानते हुए बोला। दोनों हॉल से बाहर आए और
- 52:21जाकर अपनी कार में बैठ गए। शौर्य ने दूर
- 52:24से ही उस कार की तरफ ध्यान दिया जो कार
- 52:26उसका पीछा कर रही थी। उसने छगन मगन की कार
- 52:29को भी देख लिया था। वो तैयार बैठा शौर्य
- 52:31के बाहर आने का ही वेट कर रहा था। जबकि
- 52:34दूसरी तरफ वो लड़की जो आयरन फिस्ट क्लब से
- 52:37ही शौर्य का पीछा करती आई थी। वो शौर्य को
- 52:40अचानक मूवी के बीच में ही बाहर आते देखकर
- 52:42हैरान थी। उसे समझ नहीं आया कि शौर्य ने
- 52:45बीच में ही मूवी को क्यों छोड़ दिया था।
- 52:47हैरानी में ही वह अपने साथ बैठे सिकंदर की
- 52:50ओर देखने लगी। हैरानी सिकंदर के चेहरे पर
- 52:53भी नजर आ रहा था। उसे भी यकीन नहीं हो रहा
- 52:55था कि शौर्य मूवी [संगीत] को बीच में ही
- 52:57छोड़कर यूं बाहर आ जाएगा। क्योंकि थोड़ी
- 53:00देर पहले जहांगीर खान यही सोच कर वहां से
- 53:02गया था कि शौर्य और शिप्रा तो मूवी के
- 53:04खत्म होने के बाद ही बाहर [संगीत] आएंगे।
- 53:06तब तक वह वापस आ जाएगा। पर बीच में ही
- 53:09शौर्य को बाहर निकलते देखकर उस लड़की ने
- 53:11सिकंदर से पूछा अब क्या करें? मास्टर तो
- 53:15बोल कर गए थे कि मूवी खत्म होने से पहले
- 53:17वो आ जाएंगे। पर यह दोनों तो बीच में ही
- 53:19मूवी छोड़कर निकल आए हैं। उस लड़की की बात
- 53:22सुनकर सिकंदर बोला, करना क्या है? जब तक
- 53:25मास्टर से हमें दूसरा कोई आदेश नहीं मिलता
- 53:27तब तक हम इसका पीछा करेंगे। अब तक शौर्य
- 53:30ने अपनी कार आगे बढ़ा दी थी। तो उसको
- 53:32देखते हुए उस लड़की ने भी अपनी कार को
- 53:34शौर्य की कार के पीछे लगा दिया। तुम
- 53:36मास्टर को फोन करके यहां के हालात से अवगत
- 53:38करा दो। वो लड़की शौर्य की कार पर नजरें
- 53:41जमाए हुए ही सिकंदर [संगीत] से बोली।
- 53:43सिकंदर ने भी बिना किसी तर्क के अपने
- 53:46मास्टर को फोन लगाया और शौर्य के वहां से
- 53:48निकल जाने के बारे में बताया। सिकंदर की
- 53:50बात सुनकर जहांगीर खान बोला, "मुझे उम्मीद
- 53:53नहीं था कि वो लड़का बीच मूवी में ही वहां
- 53:56से निकल जाएगा। कहीं उसे पता तो नहीं चल
- 53:58गया है कि तुम दोनों उसका पीछा कर रहे
- 54:00हो।" लगता तो नहीं। पर अगर उसे यह पता
- 54:03होता कि हम उसका पीछा कर रहे हैं तो वह
- 54:05अपनी कार से यहां से भागने की जगह हॉल से
- 54:08ही बाहर भाग गया होता। कार तो वह बाद में
- 54:10भी टो करवा सकता है। इसलिए मुझे नहीं लगता
- 54:12कि उसे उसका पीछा किए जाने का कोई एहसास
- 54:15होगा। सिकंदर ने जहांगीर खान को संतुष्ट
- 54:18करने की कोशिश की। जिसकी बात सुनकर
- 54:20जहांगीर खान भी उसकी बात मानने को मजबूर
- 54:22हो गया। जहांगीर खान ने अपनी बात को आगे
- 54:25बढ़ाते हुए कहा, "तुम दोनों भी ध्यान
- 54:27रखना। अभी उस लड़के को छेड़ने की कोई
- 54:29जरूरत नहीं है। तुम दोनों को बस पता करना
- 54:31है कि वह कहां रहता है ताकि हम बाद में
- 54:33आसानी से उस तक पहुंच सकें। ठीक है मास्टर
- 54:36हम आपके कहे हिसाब से ही चलेंगे। इतना
- 54:38कहकर सिकंदर ने फोन काट दिया और वह अपने
- 54:41साथ वाली लड़की की ओर देखने लगा जिसका कि
- 54:43नाम रुबिया था। शौर्य की कार अपनी गति से
- 54:46आगे बढ़े जा रही थी। शिप्रा उसके साथ ही
- 54:48बैठी हुई थी। शौर्य लगातार अपने पीछे आ
- 54:51रही कार पर नजर बनाए रखा। वह [संगीत] अपने
- 54:53पीछे आ रहे छगन मगन की कार को भी देख पा
- 54:55रहा था। उसने अपना फोन निकाला और छगन को
- 54:57फोन लगा दिया। छगन ने फोन उठाया तो शौर्य
- 54:59ने उससे कहा, थोड़ा आगे जाने पर हमें कुछ
- 55:02दूरी के लिए कम आवाजाही वाला रास्ता
- 55:03मिलेगा। एक तरह से वह एक सुनसान इलाका ही
- 55:06होगा। हम वहीं पर पीछा करने वालों की कार
- 55:08को घेरेंगे। तुम बस इतना ध्यान रखना कि
- 55:10जैसे ही हम अपनी कार को ब्रेक लगाएंगे, तो
- 55:12हमारे पीछे आ रही कार को भी मजबूरन हमारे
- 55:14पास तक आते-आते ब्रेक लगाना पड़ेगा। उस
- 55:16समय तुमको भी यही करना है कि तुम उस कार
- 55:19के एकदम पीछे जाकर अपनी कार को खड़ी कर
- 55:21दोगे, जिससे कि उस कार को आगे पीछे ना
- 55:23किया जा सके। ठीक है बॉस मैं समझ गया। छगन
- 55:27ने शौर्य की बात से सहमति जताई। उसके बाद
- 55:29शौर्य उस पल का इंतजार करने लगा। आखिरकार
- 55:32वो घड़ी आ गई जब शौर्य की कार उस रास्ते
- 55:34से गुजर रही थी जहां सड़क के किनारे आबादी
- 55:36नहीं था। शौर्य ने धीरे-धीरे अपने कार की
- 55:39रफ्तार कम की। पीछे आ रही सिकंदर की कार
- 55:41शौर्य के कार के करीब पहुंच गया। शौर्य ने
- 55:43शिप्रा की ओर देखा और उससे कहा, "तुम इस
- 55:45बात का ध्यान रखना कि बाहर कुछ भी होता
- 55:48रहे। पर तुम कार से बाहर नहीं आओगी।"
- 55:50शौर्य का इरादा जानकर शिप्रा बोली, ठीक
- 55:53है, जब तक तुम नहीं कहोगे, तब तक मैं कार
- 55:55से बाहर नहीं आऊंगी। शौर्य ने एक नजर
- 55:57शिप्रा को देखा और कहा, थोड़ा झटके सहने
- 56:00के लिए तैयार रहना। मैं कार में ब्रेक
- 56:02लगाने जा रहा हूं। इतना कहने के बाद शौर्य
- 56:04ने अपनी कार में ब्रेक लगाई और कार को
- 56:06तिरछा करके बीच सड़क पर रोक दिया। उसकी
- 56:09कार के पीछे आ रही रुबिया को जबरदस्ती
- 56:11अपनी कार को रोकनी पड़ रही थी। एक ही पल
- 56:13में रुबिया समझ गई कि उसका भंडा फोर हो
- 56:15चुका है। जबकि इसी समय रुबिया ने महसूस
- 56:17किया कि एक कार उसकी कार के पीछे भी खड़ा
- 56:19हो गया है। इसी समय शौर्य तेजी से [संगीत]
- 56:22अपनी कार से बाहर आया और जाकर रुबिया के
- 56:24कार के दरवाजे के पास पहुंचा और शीशे पर
- 56:26अपनी अंगुली से ठकठकाने लगा। रुबिया ने
- 56:29अपनी कार का शीशा नीचे किया और अपनी गर्दन
- 56:31बाहर निकालते हुए बोली, "यह क्या बदतमीजी
- 56:33[संगीत] है? तुमने मेरा रास्ता क्यों रोक
- 56:35दिया है?" "मैं देख रहा हूं कि तुम बहुत
- 56:37देर से मेरा पीछा किए जा रही हो।" तो
- 56:39मैंने सोचा एक बार तुमसे मिलना तो बनता
- 56:41है। शौर्य मुस्कान लिए चेहरे के साथ बोला,
- 56:44"मैं क्यों तुम्हारा पीछा करूंगी? तुम्हें
- 56:46कोई गलतफहमी हुई है? उल्टा तुम मेरा
- 56:48रास्ता रोकने की कोशिश कर रहे हो। रुबिया
- 56:51बिना डरे उल्टा शौर्य पर ही इल्जाम लगाती
- 56:53हुई बोली।
- 56:53[संगीत]
- 56:54रुबिया की बात सुनकर शौर्य मुस्कुराया।
- 56:56फिर धीरे से उसके चेहरे के पास झुकता हुआ
- 56:58बोला, "तुम सही कह रही हो। मुझे तुम पसंद
- 57:00आ गई हो। इसलिए तुम्हारे साथ मुझे इलूइलू
- 57:03करने का मन कर रहा है।" "यह मिस्टर तुम
- 57:05अपनी हद से बाहर जा रहे हो।" मैं कहता हूं
- 57:08मेरा रास्ता छोड़ो नहीं तो मैं पुलिस को
- 57:10फोन करूंगा। सिकंदर स्थिति को हाथ से
- 57:12निकलते देखकर बोला, जब मैंने अपने दिल की
- 57:14बात तुमको बता दिया, उसके बाद भी तुम यह
- 57:16कहने की हिम्मत कर रहे हो। चलो अब जल्दी
- 57:19से कार से बाहर आ जाओ। शौर्य अपने चेहरे
- 57:21पर बेशर्मी के भाव लाते हुए बोला, रुबिया
- 57:23को समझ नहीं आया कि शौर्य जो कह रहा है वह
- 57:26सही है या वह सच में जान गया है कि वह
- 57:29उसका पीछा कर रही है। इसलिए उसने उसका
- 57:32रास्ता रोकने की हिम्मत की है। शौर्य के
- 57:35चेहरे के भाव को देखकर तो उसको यही लग रहा
- 57:37था कि शौर्य के दिमाग में उसको लेकर गलत
- 57:40इरादे हैं। जबकि रुबिया के साथ बैठे
- 57:42सिकंदर ने सोचा जब शौर्य ने उसका रास्ता
- 57:45रोकने की हिम्मत कर ही दिया तो क्यों ना
- 57:47वह इस मौके के फायदा उठाकर उसको अपने
- 57:50कब्जे में कर ही ले। यह सोचकर वो अपनी कार
- 57:52से बाहर निकल आया और शौर्य के पास पहुंचा।
- 57:55तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तुम हमारी दोस्त
- 57:57के साथ बदतमीजी करने की हिम्मत करो। आज
- 57:59तुमको पता चलेगा कि तुमने [संगीत] कितनी
- 58:01बड़ी गलती कर दी। सिकंदर को लग रहा था
- 58:04शौर्य से निपटना कोई मुश्किल नहीं होगा।
- 58:06इसलिए वह पूरे विश्वास से शौर्य के पास
- 58:08पहुंचा। वो बिना किसी वार्निंग के शौर्य
- 58:10के ऊपर घुसा चला दिया। पर शौर्य पहले से
- 58:13तैयार था। उसने आसानी से खुद को सिकंदर के
- 58:15घुसे से बचाया और एक फ्लाइंग किक सिकंदर
- 58:18के ऊपर चला दिया। किक बहुत तेज था। सिकंदर
- 58:21आंह भरता हुआ दूर जाकर गिरा। जहां सिकंदर
- 58:24गिरा था वहीं पर छगन मगन खड़े थे। उन
- 58:26दोनों ने भी देर नहीं की। पिटे पिटाए
- 58:28बदमाशों को तुरंत अपने कब्जे में लिया और
- 58:30उसका मुंह बंद करके अपनी कार की डिक्की
- 58:32में डाल दिया। रुबिया ने यह तो देखा कि
- 58:34शौर्य के किक खाकर सिकंदर उड़ता हुआ उसके
- 58:37पीछे चला गया था। उसने यह नहीं देखा था कि
- 58:39उसके पीछे छगन मगन ने झटपट सिकंदर को
- 58:42कंट्रोल करके अपने गाड़ी की डिक्की में भी
- 58:44डाल दिया था। रुबिया के सामने भी अब
- 58:46स्थिति से निपटने के अलावा दूसरा कोई
- 58:48रास्ता नहीं बचा था। अब वो खुलकर शौर्य के
- 58:51सामने आ ही जाना चाहती थी। वो कार से बाहर
- 58:53आई और शौर्य के सामने आती हुई बोली तुमने
- 58:56ठीक समझा था। मैं तुम्हारा पीछा ही कर रही
- 58:59थी। अब तुम जब यह जान ही गए हो तो मैं
- 59:01तुम्हें एक मौका देती हूं कि तुम आराम से
- 59:03मेरे साथ चल लो तो शायद मैं तुम पर थोड़ा
- 59:05रहम कर दूंगी। नहीं तो फिर तुम अपने पैरों
- 59:07के ऊपर खड़ा नहीं रह पाओगे। शौर्य कुछ
- 59:10कहता कि उससे पहले छगन मगन उसके दाएं बाएं
- 59:12से निकल कर उसके सामने आ गए। तुम मेरे बॉस
- 59:15से तो बाद में निपटना पहले मुझसे तो निपट
- 59:18कर दिखाओ। इतना कहते हुए छगन ने रुबिया पर
- 59:20हमला कर दिया। पर अगले ही पल रुबिया अपनी
- 59:23जगह से गायब थी। छगन झोंक में आगे
- 59:25लड़खड़ाते हुए गया। बड़ी मुश्किल से उसने
- 59:27खुद को जमीन पर गिरने से बचाया और आश्चर्य
- 59:30से रुबिया की ओर देखने लगा। छगन ने भी
- 59:32मार्शल आर्ट की बेसिक ट्रेनिंग ले रखी थी।
- 59:34वो रुबिया की फुर्ती देखकर बड़ी-बड़ी
- 59:36आंखों से उसका चेहरा देखने लगा। इसी बीच
- 59:38मगन ने भी सामने से अपने शरीर की टक्कर
- 59:41रुबिया के शरीर पर मारने की कोशिश की। उसे
- 59:43लगा उसका शरीर रुबिया से तो मजबूत ही
- 59:46होगा। पर जैसे ही वह रुबिया से टकराता,
- 59:48रुबिया ने किसी भैंसे के जैसा अपना सर
- 59:50झुकाया और अपने सर की तेज टक्कर मगन के
- 59:52सीने पर दे मारा। मगन हवा में उड़कर दूर
- 59:55जाकर गिरा। इस बीच शौर्य आराम से अपनी जगह
- 59:58पर खड़ा। रुबिया को छगन और मगन से लड़ते
- 1:00:01देख रहा था। उसके मुंह पर रुबिया के लिए
- 1:00:03तारीफ के शब्द निकले। वाह। एक बार फिर से
- 1:00:06छगन मगन रुबिया को घेरने के लिए उसके पास
- 1:00:09गया। पर इस बार रुबिया ने और फुर्ती दिखाई
- 1:00:11और दो मूव में ही छगन मगन को धूल चटा दी।
- 1:00:14छगन मगन समझ गए कि रुबिया से पार पाना
- 1:00:17उसके बस की बात नहीं है। वे दोनों बेबस
- 1:00:19नजरों से शौर्य की ओर देखने लगे। मानना
- 1:00:23पड़ेगा। तुम में काबिलियत तो है। तुमने
- 1:00:25अकेले इन दोनों को धूल चटा दी। इंप्रेसिव।
- 1:00:29शौर्य रुबिया की तरफ बढ़ता हुआ तारीफ भरे
- 1:00:31स्वर में बोला। जब मेरी काबिलियत को मान
- 1:00:34ही गए हो तो फिर अब आराम से मेरे साथ चल
- 1:00:36भी लो। इससे होगा यह कि तुम्हारी हड्डी
- 1:00:39पसली सलामत रहेगी। रुबिया मुस्कुराती हुई
- 1:00:42बोली, "मैं भी तुम्हें एक ऑफर देता हूं।
- 1:00:45अगर तुम मुझे यह बता देती हो कि [संगीत]
- 1:00:47तुम किसके लिए काम कर रही हो या किसके
- 1:00:49कहने पर तुम मेरा पीछा कर रही हो तो शायद
- 1:00:52मैं तुम्हें ऐसे ही छोड़ दूं। इतना
- 1:00:54तुम्हें जान गया हूं कि तुम जहांगीर खान
- 1:00:56की शागिर्द हो। पर तुम्हारा मास्टर किसके
- 1:00:58कहने पर [संगीत] मेरा पीछा करवा रहा है।
- 1:01:00मुझे बस यह जानना है। अगर तुम बिना किसी
- 1:01:03होज्जत के यह बता देती हो तो तुम आराम से
- 1:01:05यहां से जा सकती हो। नहीं तो मजबूरन मुझे
- 1:01:08तुम्हारे साथ ज्यादती करनी पड़ सकती है।
- 1:01:11किसी लड़की के ऊपर हाथ उठाना मुझे वैसे ही
- 1:01:13अच्छा नहीं लगता है। शौर्य अपना हाथ मलता
- 1:01:16हुआ बोला तो तुम्हारी मुश्किल मैं आसान कर
- 1:01:18देती हूं। पहले मैं तुम पर हाथ उठाकर इतना
- 1:01:22कहकर रुबिया ने शौर्य के ऊपर जंप किया।
- 1:01:24उड़ता हुआ फ्लाइंग किक शौर्य की तरफ आया।
- 1:01:27शौर्य ने फुर्ती से अपनी जगह को छोड़ा
- 1:01:29जिससे रुबिया उसके पीछे जाकर गिरी। पर
- 1:01:31उसने खुद को जल्दी ही संभाल लिया। वो पैनी
- 1:01:34निगाह से शौर्य को घूरने लगी। उसे उम्मीद
- 1:01:36नहीं था कि अचानक किए उसके वार से शौर्य
- 1:01:38खुद को बचा लेगा। अब वह थोड़ा सतर्क हो
- 1:01:41गई। इसके बाद वह सधे कदमों से शौर्य की
- 1:01:44तरफ बढ़ी। देखो मैं अभी भी कह रहा हूं अगर
- 1:01:47तुम मेरी बात मान जाती हो तो मैं तुम्हें
- 1:01:49सही सलामत यहां से जाने दूंगा। नहीं तो
- 1:01:52मजबूरन मुझे तुम्हारे साथ सख्ती करनी
- 1:01:54पड़ेगी। शौर्य रुबिया पर नजरें गराए हुए
- 1:01:57बोला। उसने रुबिया की प्रतिभा को पहले ही
- 1:01:59देख लिया था। इसलिए वह उसे हल्के में नहीं
- 1:02:01ले सकता था। जबकि रुबिया अपना पहला वार
- 1:02:04खाली जाता देखकर भूखी शेरनी बन गई थी।
- 1:02:07छगनगन साइड में खड़े उन दोनों को लड़ाई
- 1:02:09करते देख रहे थे। एक लड़की से हारकर दोनों
- 1:02:12का मनोबल पहले ही नीचे गिर चुका था। अब वह
- 1:02:15यही उम्मीद कर रहा था कि शौर्य उसको सबक
- 1:02:17सिखाए तो उसकी इज्जत वापस आए। शौर्य ने एक
- 1:02:20पल को रुबिया की स्थिति को ऑब्जर्व किया
- 1:02:22और तेजी से रुबिया की तरफ लहराते हुए
- 1:02:24भागा। रुबिया को उम्मीद नहीं था कि शौर्य
- 1:02:26का रिएक्शन इतना तेज होगा। उसने भी अपनी
- 1:02:29तरफ शौर्य की तरफ कदम बढ़ाया। सेकंड नहीं
- 1:02:31बीता। शौर्य शिप्रा को पार करके उसके पीछे
- 1:02:34निकल गया। देखने वालों को समझ नहीं आया कि
- 1:02:36क्या हुआ क्योंकि दोनों एक दूसरे को पार
- 1:02:38करते हुए आगे निकल गए। कोई टक्कर नहीं
- 1:02:41हुआ। छगन मगन भी सोचने को मजबूर थे कि अभी
- 1:02:43हुआ क्या? शौर्य रुबिया के पीछे और रुबिया
- 1:02:46शौर्य के पीछे। पर तभी अचानक छगन ने देखा
- 1:02:49रुबिया भरभरा कर अपनी जगह पर ढेर हो गई।
- 1:02:52छगन सोचने को मजबूर था कि यह कैसे हुआ।
- 1:02:54शौर्य अपनी जगह से पलटा और इत्मीनान से
- 1:02:57खड़ा होकर रुबिया की ओर देखने लगा। दरअसल
- 1:03:00हुआ यह था कि जब शौर्य रुबिया के सामने से
- 1:03:02लहराते हुए उसके पीछे गया, उसने अपने हाथ
- 1:03:04का एक बार रुबिया के गर्दन के पीछे वाले
- 1:03:06हिस्से पर एक खास जगह पर कर दिया था। यह
- 1:03:09बार इतना तेज और सटीक था कि किसी की नजर
- 1:03:12के सामने भी नहीं आ पाया कि शौर्य ने कब
- 1:03:14रुबिया के गर्दन पर अपना हाथ दे मारा था।
- 1:03:16उसी का परिणाम था कि रुबिया बेहोश होकर
- 1:03:19जमीन पर ढेर हो गई थी। छगन मगन आश्चर्य से
- 1:03:22शौर्य को देखते हुए रुबिया के पास आए और
- 1:03:24शौर्य की ओर देखते हुए छगन बोला, "यह कैसे
- 1:03:26हुआ बॉस? मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आया।
- 1:03:29कुछ नहीं। बस यह बेहोश हुई है। लगभग एक
- 1:03:32घंटे तक तो यह इसी स्थिति में रहने वाली
- 1:03:34है। उसके बाद यह होश में आ जाएगी। तुम ऐसा
- 1:03:37करो। इसका हाथ बांधकर उसे दूसरे लड़के के
- 1:03:39साथ अपने अड्डे पर ले जाओ। फ्री होने के
- 1:03:41बाद मैं तुमसे मिलूंगा और फिर पता करने की
- 1:03:44कोशिश करूंगा कि इस सबके पीछे है कौन?
- 1:03:46शौर्य लापरवाही से बोला। पर बॉस आपने इसको
- 1:03:50बेहोश कब किया। मैं तो कुछ देख ही नहीं
- 1:03:52पाया। छगन अभी भी याद करने की कोशिश कर
- 1:03:55रहा था कि शौर्य ने रुबिया को कैसे बेहोश
- 1:03:57किया था। क्योंकि शौर्य के रुबिया के पीछे
- 1:03:59जाने के बाद रुबिया अपनी जगह पर खड़ी ही
- 1:04:02थी। लगभग 5-7 सेकंड के बाद रुबिया जमीन पर
- 1:04:05गिरी थी। उसके पीछे जाते ही मैंने अपना
- 1:04:07हाथ उसकी गर्दन की एक खास पोर्शन दे मारा
- 1:04:10था। जिसका असर आदमी पर 5-7 सेकंड बाद
- 1:04:12दिखता है। शौर्य मुस्कुराते हुए बोला अब
- 1:04:16जाकर छगन को समझ आया कि आखिर यह कैसे हुआ।
- 1:04:20वह अभी भी याद करने की कोशिश कर रहा था कि
- 1:04:23शौर्य ने कब अपना हाथ रुबिया की गर्दन पर
- 1:04:26मारा था। पर उसे वह एक्शन ध्यान नहीं आया।
- 1:04:28आखिर कितना फास्ट था शौर्य का वो मूव जो
- 1:04:31छगन की निगाह में आ ही नहीं सका। उसकी
- 1:04:34आंखों में एक बार फिर से शौर्य के लिए
- 1:04:36अथाह सम्मान नजर आने लगा। अभी थोड़ी देर
- 1:04:39[संगीत] पहले ही वह सामने पड़ी बेहोश
- 1:04:41लड़की ने छगन और मगन दोनों को एक साथ धूल
- 1:04:44चटा दी थी। पर शौर्य ने तो उसे चुटकियों
- 1:04:47में बेहोश कर दिया। शिप्रा जो कार में
- 1:04:50बैठी यह सब देख रही थी वह भी शौर्य के इस
- 1:04:52एक्शन को देखकर हैरान थी। उसने शौर्य को
- 1:04:55पहले भी बदमाशों को टेक करते देखा था। पर
- 1:04:57अभी जिस तरह से उसने रुबिया को एक पल में
- 1:05:00बेहोश कर दिया था वो एक्शन देखने के काबिल
- 1:05:02था। थोड़ी देर पहले छगन मगन को रुबिया से
- 1:05:05हारते देखकर शिप्रा को शौर्य की चिंता
- 1:05:07होने लगी थी। पर शौर्य के लिए तो यह बहुत
- 1:05:10आसान निकला। शिप्रा की आंखों में शौर्य के
- 1:05:13लिए प्यार और भी गहरा हो गया।
- 1:05:14[संगीत]
- 1:05:15उसने अपने अतीत के बारे में सोचा तो उसे
- 1:05:17ध्यान आया अपने इस हुनर के कारण ही शौर्य
- 1:05:20कभी मुख्तार भाई या रजत से घबराया नहीं।
- 1:05:22वो कार से बाहर आई और शौर्य के पास आकर
- 1:05:25खड़ी हो गई। छगन मगन ने शिप्रा को देखा तो
- 1:05:28उसे नमस्ते किया। सड़क से आती जाती गरियों
- 1:05:31की निगाह वहां पड़ती तो गरियां और तेजी से
- 1:05:33वहां से पास हो जाती। कोई भी इन लफरों में
- 1:05:36उलझना नहीं चाहता है। इसलिए किसी ने वहां
- 1:05:38रुकने की कोशिश नहीं की। मगन ने अपनी कार
- 1:05:40से एक रस्सियों का पुलंदा ले आया और उसने
- 1:05:43कसकर रुबिया का हाथ उसके पीछे करके बांध
- 1:05:45दिया और मगन के साथ उसको उठाकर अपनी कार
- 1:05:48की पीछे वाली सीट पर डाल दिया। इस लड़की
- 1:05:51का खास ध्यान रखना। कहीं ऐसा ना हो कि यह
- 1:05:53लड़की तुम्हें चकमा देकर छूट जाए। शौर्य
- 1:05:56छगन को ताकत करता हुआ बोला। आपको कहना
- 1:05:59नहीं पड़ेगा बॉस। मैंने पहले ही इस लड़की
- 1:06:01के जलवे देख लिए हैं। इसलिए आगे से मैं इस
- 1:06:03लड़की से खास सतर्क रहूंगा। छगन शर्मिंदा
- 1:06:06होते हुए बोला। शौर्य ने छगन के झुके हुए
- 1:06:08सर को देखा तो उसका हौसला बढ़ाते हुए
- 1:06:10बोला, "इसमें शर्मिंदा होने वाली कोई बात
- 1:06:13नहीं है। यह लड़की टैलेंटेड है और मार्शल
- 1:06:16आर्ट की माहिर भी। इसलिए इससे तुम दोनों
- 1:06:18का हार जाना कोई बड़ी बात नहीं है। पर
- 1:06:20तुम्हें अपने स्किल पर ध्यान देना चाहिए।
- 1:06:22शौर्य ने छगन मगन को आईना दिखाया। हम आगे
- 1:06:25से इसके लिए मेहनत करेंगे बॉस। छगन ने
- 1:06:27जवाब दिया। छगन अपनी कार को लेकर वहां से
- 1:06:30निकल गया। उसके बाद शौर्य भी शिप्रा के
- 1:06:32साथ आकर अपनी कार में बैठा और कार को आगे
- 1:06:35बढ़ा दिया। छगन मगन उन दोनों को लेकर कहां
- 1:06:37गए हैं? शिप्रा ने शौर्य से पूछा, अभी तो
- 1:06:40छगन मगन उसे अपने किसी अड्डे पर रखेंगे।
- 1:06:43मुझे फ्री होकर उनसे कुछ पूछताछ करनी है
- 1:06:45कि वह क्यों मेरा पीछा कर रहे थे? शौर्य
- 1:06:48ने जवाब दिया, पर यह तो गलत है ना? इस तरह
- 1:06:51से किसी को अपने कब्जे में करना तो एक तरह
- 1:06:53का क्राइम ही हुआ ना? इससे कहीं बाद में
- 1:06:55तुम्हें प्रॉब्लम तो नहीं होगी। शिप्रा ने
- 1:06:57अपना चिंता व्यक्त किया। क्यों ना तुम उन
- 1:06:59दोनों को पुलिस के यहां लगा लेगी कि वे
- 1:07:01दोनों किसके लिए काम कर रहे हैं। शिप्रा
- 1:07:04को शौर्य के लिए चिंता भी हो रही थी कि
- 1:07:06कहीं शौर्य पुलिस के लफरे में ना पड़ जाए।
- 1:07:08तुम भूल रही हो कि वह दोनों मेरा पीछा कर
- 1:07:10रहे थे जो कि एक तरह का क्राइम ही है।
- 1:07:13इसलिए हम अगर उसको छोड़ भी देंगे तो वह
- 1:07:15दोनों कम से कम हमारे खिलाफ पुलिस में
- 1:07:17नहीं जाएंगे। इसलिए मैंने अभी उन दोनों को
- 1:07:19छगन मगन के पास ही रखने का सोचा है। एक
- 1:07:22बार उन दोनों से पूछताछ करने के बाद
- 1:07:23सोचूंगा कि उन्हें छोड़ दें या पुलिस के
- 1:07:26हवाले कर दें। शौर्य ने जवाब दिया, ठीक
- 1:07:29है, जैसा तुम्हें उचित लगे पर अपना ध्यान
- 1:07:32रखना। शिप्रा को शौर्य की चिंता हो रही
- 1:07:35थी। शौर्य को भी शिप्रा का यह कंसर्न
- 1:07:37देखकर अच्छा लगा। शिप्रा शौर्य को ड्राइव
- 1:07:40करते हुए देखती हुई आगे बोली, "तुम तो
- 1:07:42बहुत अच्छा लड़ लेते हो। क्या तुमने भी
- 1:07:44फाइट की कोई ट्रेनिंग ले रखी है क्या? तुम
- 1:07:47ऐसा कह सकती हो? शौर्य सामने देखकर
- 1:07:49मुस्कुराते हुए बोला, "अब मैं सोचती हूं
- 1:07:52तो मुझे लगता है कि मैं तो तुम्हारे बारे
- 1:07:54में कुछ जानती ही नहीं हूं। क्यों टुकड़ों
- 1:07:56में मुझे पता चले कि तुम और क्या-क्या कर
- 1:07:58लेते हो या करते हो? क्या तुम मुझे एक बार
- 1:08:00में ही अपने बारे में सब कुछ बताओगे? ताकि
- 1:08:03बाद में मैं तुम्हारे सामने खुद को बेवकूफ
- 1:08:05ना महसूस करूं। शिप्रा शौर्य की तरफ पलट
- 1:08:08कर बोली तो तुम मेरे बारे में सब कुछ
- 1:08:10जानना चाहती हो तो ठीक है। पूछो क्या
- 1:08:13जानना चाहती हो? शौर्य चौरी मुस्कान के
- 1:08:16साथ बोला। तुम शुरू से ही क्यों नहीं मुझे
- 1:08:18अपने बारे में बताते? इससे मुझे बाद में
- 1:08:20तुमसे कुछ और पूछने की जरूरत ही नहीं
- 1:08:22पड़ेगी। शिप्रा उत्साह भरे स्वर में बोली,
- 1:08:26ठीक है फिर सुनो। इसके बाद शौर्य ने उसे
- 1:08:30पहले अपने पापा के बारे में बताया को किस
- 1:08:32तरह उसके पापा की शादी चौहान फैमिली में
- 1:08:35फिक्स हो गई थी। पर उसके पापा ने अपने
- 1:08:38प्यार के लिए अपना घर छोड़ दिया। जिसके
- 1:08:40कारण राठौर फैमिली और चौहान फैमिली के बीच
- 1:08:43में दुश्मनी भी हो गई। शौर्य अपने पापा के
- 1:08:46साथ ही यूके में बचपन से रहा। उसके पापा
- 1:08:49ने शुरुआत की मुश्किलों के बाद यूके में
- 1:08:52अपना बिजनेस बहुत ही बढ़िया कर लिया था।
- 1:08:54उसके बाद शौर्य ने भी अपनी पढ़ाई पूरी
- 1:08:56करने के बाद अपना बिजनेस शुरू किया। उसने
- 1:08:59बिगबुल को खड़ा किया जो आज एक ब्रांडिंग
- 1:09:01स्टोर के रूप में बहुत ही जाना पहचाना नाम
- 1:09:03है। उसने कई देशों में अपने स्टोर को
- 1:09:05सफलतापूर्वक लॉन्च भी किया और आज वह सफलता
- 1:09:08से अपने आप को और भी ग्रो किए जा रहा है।
- 1:09:11इसके बाद शौर्य ने यह भी बताया कि कैसे
- 1:09:14उसके दादाजी ने उसे वापस अपने पास बुलाया
- 1:09:16था और जब वह इंडिया आया तो किस तरह से
- 1:09:19उसको मारने की कोशिश हुई जिसके कारण उसे
- 1:09:21भिखारी की जिंदगी जीनी पड़ी। उसके बाद का
- 1:09:24तो शिप्रा को सब कुछ पता ही है। शौर्य की
- 1:09:27कहानी सुनते हुए शिप्रा के चेहरे का
- 1:09:29एक्सप्रेशन बार-बार बदलता रहा। उसे शौर्य
- 1:09:31के भिखारी होने के पीछे की कहानी भी पता
- 1:09:33चली जिससे वह अभी तक अनजान थी। अब उसे यह
- 1:09:37भी पता चल गया कि बिगbul कंपनी का असली
- 1:09:39मालिक शौर्य ही है। उसके लिए इस बात पर
- 1:09:42विश्वास करना मुश्किल हो रहा था। पहले उसे
- 1:09:44लगा था कि शौर्य कैसे ना कैसे बिगबुल से
- 1:09:46जुड़ा हुआ है। पर उसका ओनर उसके लिए इस
- 1:09:49बात पर विश्वास करना मुश्किल था। बिग बुल
- 1:09:52का जो वर्ल्ड वाइड रेपुटेशन है वो कंपनी
- 1:09:54शौर्य की हो सकती है। इस बात ने शिप्रा को
- 1:09:57सबसे ज्यादा हैरान किया। वो अविश्वास भरे
- 1:09:59स्वर में बोली क्या सच में बिग बबुल को
- 1:10:03तुमने अपने दम पर अकेले खड़ा किया? अब मैं
- 1:10:06तुम्हें कैसे यकीन दिलाऊं? क्या तुम्हें
- 1:10:08लगता है कि तुम्हारे जिंक कलेक्शन का
- 1:10:10कोलैबोरेशन बिग बबुल के साथ करना इतना
- 1:10:12आसान था? शौर्य मुस्कुराते हुए बोला।
- 1:10:15शिप्रा को अब उस बात को याद करके बुरा फील
- 1:10:17हो रहा था कि कैसे उसके घरवाले शौर्य को
- 1:10:20ओछी नजर से देखते थे। उसके दादाजी तो उसको
- 1:10:23अपनी कंपनी में कोई छोटी-मोटी पोस्ट देकर
- 1:10:25उस पर एहसान जताना चाहते थे और शौर्य उसके
- 1:10:28लिए सब कुछ सह रहा था। अगर वो उन लोगों को
- 1:10:31अपनी औकात दिखा देता तो उन लोगों की क्या
- 1:10:33इज्जत रह जाती। उसे शौर्य के लिए बुरा फील
- 1:10:36हुआ। वो भावुक स्वर में शौर्य से बोली
- 1:10:40थैंक यू मेरी जिंदगी में आने के लिए। मुझे
- 1:10:42प्यार करने के लिए, मेरे घर वालों का ताना
- 1:10:44सुनने के लिए और उसके बाद भी किसी बात का
- 1:10:47शिकायत नहीं करने के लिए। अच्छा तो इतना
- 1:10:50कुछ सहने के लिए सिर्फ एक छोटा सा थैंक
- 1:10:52यू। यह तो बहुत नाइंसाफी है। शौर्य मजाक
- 1:10:55के मूड [संगीत] में बोला, नहीं, तुमने
- 1:10:57जितना कुछ मेरे लिए किया है, सहा है, उसके
- 1:11:00बदले में तो मैं कुछ भी नहीं कर सकती। और
- 1:11:02दूसरी बात यह है [संगीत] कि उसका मैं कोई
- 1:11:04बदला चुकाना भी नहीं चाहती। या यह कहूं तो
- 1:11:06ज्यादा बेहतर होगा कि चुका भी नहीं सकती।
- 1:11:09तुमने ना सिर्फ मुझे मेरे मुश्किल वक्त से
- 1:11:11बाहर निकाला बल्कि मेरे मुश्किल वक्त में
- 1:11:13कदम दर कदम मेरे साथ भी चलते रहे। जहां
- 1:11:16मुझे मेरे अपनों से भी सहारा नहीं मिला।
- 1:11:18उस वक्त भी तुम मेरे साथ खड़े रहे। मैं
- 1:11:21समझती हूं कि इतना कुछ जो मेरे लिए कोई कर
- 1:11:23सकता है, उसका एहसान तो मैं सात जन्म लेकर
- 1:11:26भी नहीं चुका सकती। बस उस ऊपर वाले का
- 1:11:28शुक्रिया कर सकती हूं। जिसने तुम्हें एक
- 1:11:30फरिश्ते की तरह मेरी जिंदगी में भेज दिया।
- 1:11:33करने वाले तो मेरा बुरा करना चाहते थे। पर
- 1:11:36ऊपर वाले ने ऐसा चक्र चलाया कि दूसरे का
- 1:11:38बुरा किया हुआ मेरे लिए भला साबित हो गया।
- 1:11:41शिप्रा भावुकता के प्रवाह में बहती जा रही
- 1:11:43थी। उसने बोलते हुए शौर्य के हाथ पर अपना
- 1:11:46हाथ रखा और उसकी आंखों में देखने लगी। तुम
- 1:11:49मानती हो ना कि मैं तुम्हारे लिए ऊपर वाले
- 1:11:52के द्वारा भेजा हुआ फरिश्ता हूं। तो फिर
- 1:11:54आज के बाद मुझसे नाराज मत होना। और मेरे
- 1:11:56ऊपर कोई हुक्म नहीं चलाना। उल्टा अगर मैं
- 1:11:59तुमसे कुछ कहूं तो बिना किसी होज्जत के
- 1:12:01तुरंत मान लेना। इतना ठीक है या कुछ और
- 1:12:04कंडीशन लगाऊं। शौर्य शिप्रा का मूड चेंज
- 1:12:07करना चाहता था। इसलिए उसने यह बात मजाकिया
- 1:12:10लहजे में कहा। शिप्रा शौर्य के मजाक को
- 1:12:12समझ गई। उसने खुद को नॉर्मल किया और शौर्य
- 1:12:16के सुर में ही सुर मिलाते हुए बोली बोलने
- 1:12:18से काम नहीं चलेगा। ऐसा करना तुम अपनी
- 1:12:21सारी कंडीशन एक पेपर पर लिख कर दे देना या
- 1:12:23अगर हो सके तो उसे नोटरी से रजिस्टर करवा
- 1:12:26कर देना ताकि उसके क्लाउच को बाद में बदल
- 1:12:29ना जा सके। यह कुछ ज्यादा मेहनत का काम
- 1:12:32नहीं है। तुम बस अपनी जुबान से मेरी बात
- 1:12:34में सिर्फ सहमति दे दो। उसी से मैं समझ
- 1:12:37लूंगा कि तुम मेरे कलाउच में बंध गई हो।
- 1:12:40शौर्य गंभीरता का मुखौटा ओढ़कर बोला, ऐसा
- 1:12:43लग रहा था जैसे वो यह बात कितना सीरियस
- 1:12:45होकर कह रहा है। नहीं, ऐसा नहीं चलेगा। कल
- 1:12:48को मेरा मूड बदल गया और मैं उस बात को
- 1:12:50मानने से इंकार कर दूं। तो फिर तुम कैसे
- 1:12:53अपनी बात को प्रूफ करोगे? इसलिए अपनी बात
- 1:12:55को लिखकर नोटरी से रजिस्टर करके दोगे तो
- 1:12:58फिर उससे मुकरा नहीं जा सकेगा। शिप्रा भी
- 1:13:00जबरदस्ती का तर्क करते हुए बोली सीधा कहो
- 1:13:03ना कि तुम इस बात के लिए इंटरेस्टेड नहीं
- 1:13:05हो। क्यों फालतू में बात को खींच कर दिल
- 1:13:08का तार बना रही हो? शौर्य लंबी सांस
- 1:13:10छोड़ता हुआ बोला। अच्छा यह तुमको समझ आ
- 1:13:13गया। पर शुरू किसने किया था? शिप्रा उपहास
- 1:13:16भरे स्वर में बोली। इतना एनर्जी बर्बाद
- 1:13:19करने का कोई फायदा नहीं। शौर्य हार मानते
- 1:13:22हुए बोला। इसी समय भानगढ़ के महल में
- 1:13:24विक्रमजीत चौहान और वीरभद्र के सामने
- 1:13:26भानुमती अपनी बेटी नंदिनी के साथ बैठी थी।
- 1:13:29माहौल कुछ बोझिल हो रखा था। तो तुम यह
- 1:13:32चाहती हो कि तुम अपनी बेटी की शादी प्रतीक
- 1:13:34से करना चाहती हो? विक्रमजीत जी की गंभीर
- 1:13:37आवाज वहां गूंजी। नंदिनी के पापा की यही
- 1:13:40इच्छा है। अगर आप नंदिनी की शादी राठौर
- 1:13:43फैमिली में करना ही चाहते हैं तो प्रतीक
- 1:13:45राठौर के साथ भी तो आप नंदिनी का रिश्ता
- 1:13:47कर ही सकते हैं। भानुमती तर्क करती हुई
- 1:13:49बोली और नाना जी यह भी तो ठीक नहीं लगेगा
- 1:13:52कि जिस बंदे का रिश्ता कभी मेरी मां के
- 1:13:54साथ फिक्स हुआ था। अब उसके बेटे से उसी
- 1:13:56औरत की बेटी की शादी की जाए। इसलिए भी
- 1:13:59पापा को यह उचित लगा कि अगर राठौर फैमिली
- 1:14:01में रिश्ता करना ही है तो आप प्रतीक के
- 1:14:03साथ मेरा रिश्ता कर सकते हैं। नंदिनी भी
- 1:14:05अपनी मां की बात के समर्थन में तर्क देती
- 1:14:07हुई बोली। यह नंदिनी का ऐसा तर्क था जिसको
- 1:14:10सुनकर विक्रमजीत जी भी कुछ बोल नहीं पाए।
- 1:14:13तुम सब भाई बहन आज शौर्य से मिले थे?
- 1:14:15विक्रमजीत जी ने नंदिनी से पूछा। हां, हम
- 1:14:19लोग उससे आज मिले तो थे? नंदिनी ने जवाब
- 1:14:21दिया। तो क्या शौर्य कनिका को पसंद आया?
- 1:14:24वीरभद्र जी ने शवालिया निगाह से नंदिनी को
- 1:14:26देखते हुए पूछा। वीरभद्र जी को स्वयं
- 1:14:29शौर्य बहुत पसंद आया था। इसलिए वह स्वयं
- 1:14:31भी चाहते थे कि कनिका शौर्य को पसंद कर
- 1:14:34ले। शौर्य से मिलने के बाद वीरभद्र जी की
- 1:14:36कनिका से कोई बात नहीं हुई। इसलिए उन्हें
- 1:14:39अभी पता नहीं था कि शौर्य के लिए कनिका की
- 1:14:41सोच क्या है? अब यह मैं कैसे बताऊं मामा
- 1:14:44जी? यह बात तो आपको कनिका से ही पूछनी
- 1:14:46चाहिए। इसका सही उत्तर तो वही दे पाएगी।
- 1:14:50नंदनी वीरभद्र [संगीत] जी को जवाब देने से
- 1:14:51बचना चाहती थी। वो कैसे बताती कि वे सारे
- 1:14:54भाई बहन शौर्य के लिए क्या प्लान कर रहे
- 1:14:57हैं? इस बीच वह सिर्फ इतना चाहती थी कि
- 1:14:59शौर्य से शादी करने वालों की लिस्ट से
- 1:15:01उसका नाम बाहर हो जाए। यह सारा प्रयास इसी
- 1:15:04के लिए था। फिर अपने पापा से प्रतीक के
- 1:15:06बारे में सुनकर उसको भी लगा यह उसके लिए
- 1:15:09अच्छा होगा। चलो यह भी ठीक है। मैं इस
- 1:15:12बारे में कनिका से बात करूंगा। वीरभद्र जी
- 1:15:14नंदिनी की बात सुनकर बोले सही कह रहा था
- 1:15:17चंद्रभान कि मुझे पहले अपने बच्चों से बात
- 1:15:20कर लेनी चाहिए। नहीं तो मेरे बच्चे
- 1:15:22[संगीत] भी उसके बच्चे की तरह मेरे वचन की
- 1:15:24कोई लाज नहीं रखेंगे। मैंने ही घमंड में
- 1:15:27उसे जाने क्या कह दिया। अब मैं उसकी
- 1:15:29स्थिति समझ सकता हूं। [संगीत] जब उसके
- 1:15:31बेटे ने उसकी बात ना मानकर अपने मन की की
- 1:15:34होगी तो उसे कैसा लगा होगा। मैं भी कितना
- 1:15:36बेवकूफ था कि उसके बेटे की गलती के कारण
- 1:15:39इतने वर्षों तक मैं अपने दोस्त से दूर रहा
- 1:15:42था। विक्रमजीत जी भावुकता के प्रवाह में
- 1:15:44क्या-क्या बोले जा रहे थे। आप व्यर्थ ही
- 1:15:47चिंतित हो रहे हैं पिताजी। कनिका को आपकी
- 1:15:49बात माननी ही होगी। वीरभद्र जी अपने
- 1:15:52[संगीत] पिता को सांत्वना देते हुए बोले।
- 1:15:54अब आगे क्या होगा? क्या कनिका शौर्य से
- 1:15:57शादी के लिए तैयार होगी? क्या शौर्य कनिका
- 1:16:00से शादी के लिए तैयार होगा? नंदिनी
- 1:16:03वीरभद्र जी की बात सुनकर मन ही मन खुश हो
- 1:16:06रही थी। उसने सोचा उसका तो काम हो गया।
- 1:16:09उसने ऐसी बात कह दी थी कि अब विक्रमजीत जी
- 1:16:12स्वयं भी उसको शौर्य से शादी के लिए
- 1:16:15प्रेशराइज नहीं कर पाएंगे। तो पापा आप
- 1:16:18नंदिनी की शादी प्रतीक से करने के लिए
- 1:16:20क्या कहते हैं? भानुमती विक्रमजीत जी को
- 1:16:23दोबारा अपनी कही बात याद दिलाते हुए बोली।
- 1:16:26अपने पति से प्रतीक के बारे में जानने के
- 1:16:28बाद अब वह यही चाहती थी कि उनकी बेटी का
- 1:16:31रिश्ता प्रतीक से हो ही जाना चाहिए। पहले
- 1:16:34जब दोनों परिवार के बीच शीत युद्ध वाली
- 1:16:36स्थिति थी तो वह अपनी बेटी की शादी राठौर
- 1:16:39फैमिली में करने की सोच भी नहीं सकती थी।
- 1:16:42पर जब दोनों परिवार में दुश्मनी खत्म होने
- 1:16:44की नौबत आ ही गई तो फिर क्यों ना वह इस
- 1:16:46मौके का फायदा उठाकर अपनी बेटी की शादी
- 1:16:49प्रतीक से करा दे। इसलिए भी भानुमती अब हर
- 1:16:52हाल में अपनी बेटी की शादी प्रतीक से
- 1:16:54कराना चाहती थी। अगर कनिका की शादी शौर्य
- 1:16:57से होती है तो उस स्थिति में नंदिनी कनिका
- 1:16:59से बेहतर स्थिति में होंगी। यह सोचकर
- 1:17:02भानुमती और भी खुश हो गई। देखो अभी इस
- 1:17:05बारे में बात करना संभव नहीं है। पहले
- 1:17:07हमने शौर्य की शादी कनिका से करने का वचन
- 1:17:10राठौर फैमिली को दिया है। अगर यह रिश्ता
- 1:17:12सही सलामत हो जाता है तो उसके बाद ही मैं
- 1:17:14फिर नंदिनी का रिश्ता प्रतीक से करने के
- 1:17:17बारे में बात कर पाऊंगा। विक्रमजीत जी ने
- 1:17:19स्पष्ट शब्दों में भानुमती को अपना फैसला
- 1:17:22सुनाया। विक्रमजीत जी की बात सुनकर
- 1:17:24भानुमती को थोड़ा निराशा तो हुआ पर उसने
- 1:17:27फिर यह भी सोचा कि जब उसके पापा ने एक बार
- 1:17:30को शौर्य से कनिका के रिश्ते की बात के
- 1:17:32लिए कह दिया है तो यह हर हाल में होना ही
- 1:17:34है। और एक बार जब यह रिश्ता हो जाएगा तो
- 1:17:37वह फिर खुद कोशिश करेगी कि नंदिनी का
- 1:17:39रिश्ता प्रतीक से हो जाए। हो सकता है उस
- 1:17:41समय फिर उसके पापा ही इसके लिए बात करने
- 1:17:44को राजी हो जाए। तुम्हें कुछ और भी कहना
- 1:17:46है? भानुमती को किसी सोच में डूबा देखकर
- 1:17:49विक्रमजीत जी ने पूछा नहीं कुछ और नहीं
- 1:17:53भानुमती अपनी सोच से बाहर आती हुई बोली
- 1:17:56जबकि इसी समय राठौर फैमिली में भी एक
- 1:17:59मीटिंग हो रही थी जिसमें जयभान जी
- 1:18:01स्वर्णलता जी प्रतीक कुणाल और अरविंद सभी
- 1:18:04शामिल थे। यह मीटिंग स्वर्णलता के कहने पर
- 1:18:08रखी गई थी। देखा जाए तो स्वर्णलता और
- 1:18:10जयभान एक दूसरे को खास पसंद तो नहीं करते
- 1:18:13थे। पर इस परिस्थिति में जब सूर्यभान वापस
- 1:18:16आ गया था तो दोनों ने अपने आपस के मतभेद
- 1:18:18भुलाकर यह मीटिंग रखी थी। इतने वर्षों से
- 1:18:21यही दोनों चंद्रभान राठौर की पुश्तैनी
- 1:18:24संपत्ति का उत्तराधिकारी खुद को समझ रहे
- 1:18:26थे। पर सूर्यभान के वापस आने से उन्हें लग
- 1:18:28रहा था कि उनके साथ धोखा हुआ है। जयभान को
- 1:18:32यह भी बुरा लगता था कि उसके पिताजी ने
- 1:18:34पहले ही स्वर्णलता को बहुत कुछ दे दिया
- 1:18:36था। इस पर उसका ससुराल पक्ष भी बहुत मजबूत
- 1:18:39है। फिर भी उसकी निगाह चंद्रभान जी से और
- 1:18:41कितना कुछ ले सकती है उस पर टिका हुआ था।
- 1:18:44सूर्यभान के वापस आने से उसे जो उम्मीद थी
- 1:18:47कि फैब्रिक ट्रेंड वह अपने नाम कर सकती
- 1:18:49है। वह सपना उसका टूटता प्रतीत हो रहा था।
- 1:18:52वह चाहती थी कि फैब्रिक ट्रेंड का सीईओ वह
- 1:18:55अपने बेटे कुणाल को बना देगी। जिससे कुणाल
- 1:18:58का रुतबा एक बार में ही बिजनेस इंडस्ट्रीज
- 1:19:00में तेजी से उभर आएगा। चंद्रभान जी ने
- 1:19:03पहले ही शिप्रा को उसके सर पर लाकर बिठा
- 1:19:05दिया था। उस पर सूर्यभान का वापस आ जाने
- 1:19:08से उसे अपना यह सपना और भी मुश्किल लगने
- 1:19:10लगा था। कहो स्वर्णा किस लिए तुमने यह
- 1:19:13मीटिंग अरेंज की है? जयभान जी सपाट स्वर
- 1:19:16में बोले क्यों आपको नहीं पता कि हम लोग
- 1:19:18किस लिए यहां इकट्ठे हुए हैं? स्वर्णलता
- 1:19:21भी नाराजगी प्रदर्शित करती हुई बोली। इस
- 1:19:24तरह से बात करेंगे तो कुछ सही नहीं होगा।
- 1:19:27बढ़िया यह होगा कि हम लोग शांति से एक
- 1:19:29दूसरे की बात को सुने और समझें। अरविंद
- 1:19:32आपस की तल्खी को समाप्त करने की नियत से
- 1:19:35बोला। उसे अपने पापा के साथ स्वर्णलता
- 1:19:38दोनों की बात में मौजूद रुखापन स्पष्ट समझ
- 1:19:40आ रहा था। मैंने ऐसा क्या पूछ लिया जो
- 1:19:43स्वर्णा इतना रूखा व्यवहार कर रही है?
- 1:19:46जयभान जी पहले के बनिस्पत थोड़ा सौम्य
- 1:19:49स्वर में बोले। बस अपने बोलने के टोन को
- 1:19:51ही कंट्रोल में रखना है पापा। यहां बोल तो
- 1:19:54कोई भी गलत नहीं रहा है। बस बोलने के
- 1:19:56अंदाज से कोई बात बुरी [संगीत] लग जाती
- 1:19:58है। अरविंद अपनी समझदारी का परिचय देता
- 1:20:01हुआ बोला। वैसे भी अरविंद वहां मौजूद सभी
- 1:20:04में कूल था। वो कुछ भी करता था तो पहले
- 1:20:07उसके सभी पहलू के बारे में सोच लेता था।
- 1:20:09अपनी इसी आदत के कारण अरविंद अपने बिजनेस
- 1:20:12को भी बहुत ऊंचाई पर ले जा सका था। अरविंद
- 1:20:15सही कह रहा है भैया। हमें अच्छे माहौल में
- 1:20:17इस पर बात करनी चाहिए। स्वर्णलता भी
- 1:20:20अरविंद की बात से सहमति जताते हुए बोली,
- 1:20:22ठीक है बताओ तुम क्या कहना चाहती हो?
- 1:20:25जयभान जी ने शांति से अपनी बात कही। देखिए
- 1:20:28भैया, मैं पिताजी के बिजनेस में ज्यादा
- 1:20:30कुछ नहीं चाहती हूं। पर मेरी एक ही इच्छा
- 1:20:32है कि फैब्रिक ट्रेंड की हिस्सेदारी मेरे
- 1:20:35पास आए। मैं चाहती हूं कि कुणाल आगे चलकर
- 1:20:37फैब्रिक ट्रेंड का सीईओ बने। इसलिए मैं
- 1:20:39चाहती हूं कि इस मामले में आप मुझे समर्थन
- 1:20:42करें। स्वर्णलता जी ने अपनी बात जयभान जी
- 1:20:44के सामने रखी। तुमको लगता है कि सूर्यभान
- 1:20:47के आने के बाद तुम अपने इस मकसद में
- 1:20:49कामयाब हो पाओगी क्योंकि मुझे पक्का पता
- 1:20:51है कि पिताजी अपने पास के शेयर को
- 1:20:53सूर्यभान को ट्रांसफर करने का मन पहले ही
- 1:20:55बना चुके हैं। तो इस मामले में हम चाहकर
- 1:20:57भी क्या कर सकते हैं और एक बार को हम यह
- 1:20:59मान भी लें कि हमारे प्रयास से तुम अपने
- 1:21:01मकसद में कामयाब भी हो जाती हो तो इसमें
- 1:21:03हमारा क्या फायदा है? जयभान जी सोच भरे
- 1:21:06स्वर में बोले देखो भैया मैं बस इसी कंपनी
- 1:21:09में अपनी हिस्सेदारी [संगीत] चाहता हूं।
- 1:21:11इसके अलावा किसी और कंपनी में मेरा कोई
- 1:21:13इंटरेस्ट नहीं है। अगर आपको किसी और कंपनी
- 1:21:16के लिए कहीं मेरी जरूरत होती है तो वहां
- 1:21:18मैं आपका समर्थन करूंगी। स्वर्णलता ने
- 1:21:20जयभान जी के सामने चारा फेंका। जयभान जी
- 1:21:23कुछ पल के लिए सोचते रहे। फिर स्वर्णलता
- 1:21:25जी से बोले एक बार को मैं तुम्हारी बात
- 1:21:28मान भी जाता हूं तो तुमने सोचा है कि तुम
- 1:21:30इस काम को कैसे करोगी? सभी शेयर धारकों को
- 1:21:33अपने पक्ष में करना इतना आसान नहीं होगा।
- 1:21:35जबकि हमें पता है कि 45% शेयर पिताजी के
- 1:21:38नाम है। सुना [संगीत] है उसमें से 5% शेयर
- 1:21:41उन्होंने उस नई लड़की जो अभी सीईओ बनी है
- 1:21:43उसके नाम कर दी है। और तुम्हें अपने बेटे
- 1:21:46को सीईओ बनाने के लिए कम से कम 51% शेयर
- 1:21:49धारकों को अपने पक्ष में करना होगा। तो
- 1:21:51तुम इस नामुमकिन को मुमकिन कैसे करोगी?
- 1:21:54पिताजी को तो किसी भी एक शेयर धारक को
- 1:21:56अपने पक्ष में करना है। इस तरह वह 51%
- 1:21:59शेयर के साथ विनिंग पोजीशन में आ जाते
- 1:22:01हैं। जयभान जी ने सीईओ बनने के पीछे की
- 1:22:04कहानी बताई। उन्होंने आगे अपने शब्द
- 1:22:06जोड़े। अगर तुम कुणाल को फैब्रिक ट्रेंड
- 1:22:09का सीईओ बनाना चाहती हो तो तुम्हें सबसे
- 1:22:11पहले पिताजी को ही अपने पक्ष में करना
- 1:22:13होगा। तभी वह सीईओ बन पाएगा। पता नहीं उस
- 1:22:17लड़की ने पिताजी पर ऐसा क्या जादू कर दिया
- 1:22:19है कि वह कुछ और सुनने को ही तैयार नहीं
- 1:22:21होते। स्वर्णलता रूखे स्वर में बोली, वैसे
- 1:22:25मैंने सुना है जब से उस लड़की ने कंपनी की
- 1:22:27कमान संभाली है तब से कंपनी तेजी से
- 1:22:29तरक्की कर रही है। अरविंद तारीफ भरे स्वर
- 1:22:32में बोला हां बात तो सही है। पर हम यह
- 1:22:35कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं कि हमारे
- 1:22:37परिवार से बाहर का कोई व्यक्ति फैब्रिक
- 1:22:39ट्रेंड का सीईओ बन जाए। स्वर्णलता जी ने
- 1:22:42अपनी पीड़ा व्यक्त किया। आपने कुछ प्लान
- 1:22:45किया है बुआ कि आप कुणाल को कैसे फैब्रिक
- 1:22:47ट्रेंड का सीईओ बनाएंगी? अरविंद ने समझने
- 1:22:50की कोशिश करते हुए स्वर्णलता जी से पूछा,
- 1:22:53नहीं अभी इस बारे में प्लान नहीं किया है।
- 1:22:55पर मैं इतना चाहती हूं कि जब भी ऐसी कोई
- 1:22:58नौबत आए तो आप कुणाल का समर्थन करें। बाकी
- 1:23:01और लोगों को भी मैं अपने पक्ष में करने का
- 1:23:03प्रयत्न कर रही हूं। स्वर्णलता जी ने अपनी
- 1:23:05इच्छा व्यक्त किया। अगर ऐसी बात है बुआ तो
- 1:23:08ठीक है। मैं ऐसी कोई नौबत आने पर कुणाल का
- 1:23:11समर्थन करूंगा। प्रतीक ने स्वर्णलता जी को
- 1:23:14अपना समर्थन दिया। थैंक यू प्रतीक। कुणाल
- 1:23:17खुश होते हुए बोला मुझे पता है कि प्रतीक
- 1:23:20की निगाह होटल राजकमल पर जमी हुई थी। वह
- 1:23:22इस होटल को अपने नाम करना चाहता था। अगर
- 1:23:25पिताजी को कन्विंस करने की नौबत आएगी तो
- 1:23:27मैं तुम्हारे लिए आवाज उठाऊंगी। स्वर्णलता
- 1:23:30जी प्रतीक को खुश करने की नियत से बोली।
- 1:23:32पर तभी प्रतीक ने बम फूड़ा। अब इस बात का
- 1:23:35कोई फायदा नहीं हुआ। दादाजी ने पहले ही
- 1:23:38होटल राजकमल को शौर्य को ट्रांसफर कर दिया
- 1:23:40है। क्या? इस नई जानकारी से सबके मुंह
- 1:23:44खुले रह गए। यह कब हुआ? और तुम्हें यह खबर
- 1:23:47कैसे मिली? स्वर्णलता जी हैरान स्वर में
- 1:23:50बोली,
- 1:23:52"यह बात तो अब पुरानी हो गई है बुआ। जब
- 1:23:55दादा जी ने शौर्य के नाम यह प्रॉपर्टी
- 1:23:56ट्रांसफर की थी, तभी मेनका से हमें पता
- 1:23:59चला था। उस समय शौर्य की हकीकत मेरे सामने
- 1:24:01नहीं आई थी। मैंने अपने कुछ आदमियों को
- 1:24:03शौर्य पर हमला करने को भी भेजा था। पर उस
- 1:24:06समय वह बच गया था। फिर बाद में पता चला कि
- 1:24:08जिस पर हमने शौर्य समझकर हमला किया था, वह
- 1:24:11शौर्य नहीं, कोई और था। शौर्य के सामने
- 1:24:14होने के बावजूद हम उसे पहचानते नहीं थे।
- 1:24:17इसका कारण था कि मेनका भी पलट गई थी। उसने
- 1:24:20शौर्य की जानकारी बाहर आने नहीं दी। मैं
- 1:24:22खुद कल से पहले तक शौर्य की सच्चाई से
- 1:24:24वाकिफ नहीं हो पाया था। आपको नहीं पता
- 1:24:27शौर्य ने ही होटल पैराडाइज को भी नीलामी
- 1:24:29में खरीदा है। पता नहीं इतना पैसा वो कहां
- 1:24:31से लाया होगा। कहीं इसमें भी दादाजी ने ही
- 1:24:34तो उसका सहयोग नहीं किया। नहीं तो शौर्य
- 1:24:36के पास इतना सारा पैसा कहां से आता।
- 1:24:38प्रतीक ने सब कुछ सुनाने के बाद अपनी शंका
- 1:24:40[संगीत] भी जाहिर की। यह जो भी हो रहा है
- 1:24:43ठीक नहीं हो रहा है भैया। इस तरह से तो
- 1:24:45पापा सब कुछ सूर्यभान के नाम ही कर देंगे।
- 1:24:48स्वर्णलता ने अपनी पीड़ा [संगीत] जाहिर
- 1:24:50की। अगर ठंडे दिमाग से सोचा जाए तो इसमें
- 1:24:52कुछ गलत भी नहीं है। पिताजी ने पहले ही हम
- 1:24:55लोगों के हिस्से का शेयर हमें सौंप दिया
- 1:24:57है। उनके पास वही बचा हुआ था जो उन्होंने
- 1:24:59सूर्यभान को देने के लिए सोचा था। एक
- 1:25:02हॉस्पिटल ही है जो उन्होंने अपने पास रखने
- 1:25:04का सोचा है। जयभान ने हकीकत बयान किया। तो
- 1:25:07क्या आप पिताजी के इस निर्णय से खुश हैं
- 1:25:09भैया? क्या आपने कभी सोचा कि इतने वर्षों
- 1:25:11के बाद सूर्यभान एक हिस्सेदार बनकर आ
- 1:25:14जाएगा? इतने वर्षों में सब कुछ बदल गया है
- 1:25:16भैया। अब इस संपत्ति पर सूर्यभान का कोई
- 1:25:19हक नहीं होना चाहिए था। स्वर्णलता यह बात
- 1:25:22मानने को तैयार नहीं थी कि घर से निकाले
- 1:25:24जाने के बाद सूर्यभान फिर से संपत्ति में
- 1:25:26हिस्सा लेने वापस आ गया। यह जो है सो है।
- 1:25:29उस पर भी सबसे बुरा तो यह है कि शौर्य अब
- 1:25:32चौहान फैमिली का दामाद बनने वाला है। आपको
- 1:25:34उस समय बोलना चाहिए था पिताजी। अगर चौहान
- 1:25:37फैमिली में रिशेदारी करनी ही है तो वह
- 1:25:39मेरा या कुणाल का होना चाहिए था। प्रतीक
- 1:25:42को इस बात से भी तकलीफ थी कि शौर्य का
- 1:25:44रिश्ता चौहान फैमिली [संगीत] में क्यों
- 1:25:45होने जा रहा है? अब इसमें हम कर भी क्या
- 1:25:48सकते थे? यह ऑफर तो विक्रमजीत चौहान की
- 1:25:50तरफ से दिया गया था। हमारे हाथ में था ही
- 1:25:53क्या? जयभान जी ने अपनी मुश्किल बताई। यही
- 1:25:57तो मैं कह रहा हूं पिताजी कि उस समय आपको
- 1:25:59बात संभालनी चाहिए थी। आप कह सकते थे कि
- 1:26:02दुश्मनी खत्म करने के लिए आप अपने बेटे की
- 1:26:04शादी उनके परिवार में करने को तैयार हैं।
- 1:26:06सूर्यभान अंकल तो पहले ही उन्हें धोखा दे
- 1:26:08चुके थे। [संगीत] इसलिए उन्हें आपकी बात
- 1:26:10पर विश्वास करना चाहिए था। प्रतीक सारा
- 1:26:13कैलकुलेशन बैठाने की कोशिश [संगीत] कर रहा
- 1:26:14था। यह इतना आसान नहीं है जितना तुम अभी
- 1:26:17सोच रहे हो। कल जो भी हुआ था सब
- 1:26:19अप्रत्याशित था। किसी ने सोचा नहीं था कि
- 1:26:22ऐसा कुछ हो सकता है। प्लंड कुछ भी नहीं
- 1:26:24था। जयभान जी ने समझाया। [संगीत] एक बात
- 1:26:27हो सकती है पिताजी अभी भी पाशा पलट सकता
- 1:26:30है। मेरे ख्याल से प्रतीक शौर्य से बड़ा
- 1:26:33होगा। हम कह सकते हैं कि पहले इस परिवार
- 1:26:35के बड़े बेटे की शादी होगी उसके बाद ही
- 1:26:37दूसरे बेटे की शादी हो सकती है। इसलिए
- 1:26:40बड़ा होने के कारण प्रतीक की शादी चौहान
- 1:26:42फैमिली में होनी चाहिए। अरविंद यह दूर की
- 1:26:45कौड़ी बीच में ले आया। अरविंद की बात
- 1:26:47सुनकर जयभान जी की आंखों में भी चमक आ गई।
- 1:26:49उन्हें भी एक उम्मीद की किरण नजर आने लगी।
- 1:26:52तुमने सही [संगीत] कहा। इस बात को मुद्दा
- 1:26:55बनाकर हम अपनी बात रख तो सकते हैं और मुझे
- 1:26:57भी नहीं लगता कि इससे विक्रमजीत जी को कोई
- 1:27:00आपत्ति भी होगी। आप सही कह रहे हैं भैया।
- 1:27:03हमारा कुणाल भी शौर्य से बड़ा ही होगा
- 1:27:05क्योंकि सूर्यभान के घर से निकाले जाने के
- 1:27:08एक साल बाद ही कुणाल का जन्म हुआ था। हम
- 1:27:11कुणाल के लिए भी बात कर सकते हैं। अब
- 1:27:13स्वर्णलता जी भी अपने बेटे की शादी चौहान
- 1:27:15फैमिली में करना चाहती थी। प्रतीक को बुरा
- 1:27:18भी लगा कि जब वह अपनी शादी की बात को लेकर
- 1:27:20यहां बात कर रहा था तो इसी समय स्वर्णलता
- 1:27:22आंटी को अपने बेटे की शादी भी उसी परिवार
- 1:27:25में करने की बात करना जरूरी था। पर
- 1:27:27प्रत्यक्ष में वह बोला कुछ नहीं। उसके
- 1:27:29पक्ष में यह बात अच्छी थी कि प्रतीक
- 1:27:31ऑलरेडी बिजनेस वर्ल्ड में अपना अच्छा नाम
- 1:27:33कर चुका था। जबकि कुणाल अभी अपने बिजनेस
- 1:27:36[संगीत] को लेकर स्ट्रगल ही कर रहा था।
- 1:27:38विशालगढ़ में प्रतीक का अच्छा खासा नाम भी
- 1:27:41था। इसलिए चौहान फैमिली को दोनों में से
- 1:27:43किसी का सिलेक्शन करना होगा तो वह प्रतीक
- 1:27:45का ही करेंगे। इस सोच ने प्रतीक को तसल्ली
- 1:27:48दिया। ठीक है पापा। एक बात तो यह फाइनल
- 1:27:51रही कि इस बात को लेकर आप पिताजी के साथ
- 1:27:54विक्रमजीत जी से भी बात करेंगे। और जहां
- 1:27:56तक रही फैब्रिक ट्रेंड का सीईओ कुणाल को
- 1:27:59बनाने की बात तो हम ऐसी किसी चुनाव की
- 1:28:01घड़ी में कुणाल के पक्ष में ही वोट
- 1:28:03करेंगे। वैसे भी बुआ के पास फैब्रिक
- 1:28:05ट्रेंड का 11% शेयर हैं और 11% शेयर ही
- 1:28:08हमारे पास भी है। दोनों को मिलाकर 22% ही
- 1:28:11होते हैं। अभी भी 29% शेयर धारकों का
- 1:28:14समर्थन कुणाल को चाहिए होगा। अगर बुआ यह
- 1:28:17काम कर लेती हैं तो हमें भला क्या आपत्ति
- 1:28:19होगी। अरविंद कैलकुलेशन बिठाता हुआ बोला,
- 1:28:23ठीक है, अभी हम इसी बात को लेकर चलते हैं।
- 1:28:25फिर देखते हैं कि आगे क्या होता है।
- 1:28:28स्वर्णलता जी भी अपनी सहमति जताते हुए
- 1:28:30बोली, छगन, मगन के साथ सिकंदर और रुबिया
- 1:28:34को भेजने के बाद शौर्य शिप्रा के साथ वापस
- 1:28:37मॉडल टाउन पहुंचा। अगली सुबह को शौर्य के
- 1:28:41सॉन्ग की शूटिंग शुरू होने वाली थी। इसलिए
- 1:28:43वह थोड़ा असमंजस की स्थिति में था कि वह
- 1:28:45शूटिंग के लिए अभी रात में ही निकल जाए या
- 1:28:48सुबह जाना ठीक रहेगा। पर उसे यह चिंता भी
- 1:28:52थी कि अगर वह सुबह लेट हो गया तो शूटिंग
- 1:28:54शेड्यूल बिगड़ सकता है। शौर्य और शिप्रा
- 1:28:57के घर आने के बाद गिरजा ने शौर्य से पूछा।
- 1:29:00वो खाना खाएगा क्या? शौर्य ने शिप्रा की
- 1:29:04ओर देखा जैसे उससे पूछ रहा हो कि उसका
- 1:29:06क्या इरादा है? तो शिप्रा ने मना कर दिया।
- 1:29:10शौर्य को भी अपना पेट भरा हुआ ही लग रहा
- 1:29:12था। इसलिए उसने भी खाने से मना कर दिया।
- 1:29:15दरअसल पहले ही रात ज्यादा हो रखी थी।
- 1:29:18इसलिए शिप्रा अपने कमरे में जाकर सोना
- 1:29:20चाहती थी। अपने कमरे में जाने से पहले
- 1:29:22शिप्रा ने गिरजा से पूछा। मेघा खा चुकी
- 1:29:26है। हां, वो तो सो भी चुकी है। शिप्रा को
- 1:29:30भी मेघा से बहुत स्नेह हो गया था। शौर्य
- 1:29:33से ज्यादा ध्यान तो अब वो खुद मेघा का
- 1:29:35रखती थी। इस बात से शौर्य को भी बहुत खुशी
- 1:29:38थी। गिरजा के वहां से जाने के बाद शिप्रा
- 1:29:41शौर्य को असमंजस की स्थिति में देखकर बोली
- 1:29:44अब तुम किस सोच में डूबे हुए हो? चलकर
- 1:29:47सोना नहीं है क्या? मैंने तुम्हें बताया
- 1:29:50तो था कि कल सुबह से मेरी शूटिंग शुरू हो
- 1:29:52रही है। इसलिए मुझे अभी निकलना पड़ेगा
- 1:29:54ताकि कल सुबह समय से शूटिंग शुरू हो सके।
- 1:29:57शौर्य हिचकिचाता हुआ बोला। वो समझ रहा था
- 1:30:01कि यह बात शिप्रा को पसंद नहीं आएगी।
- 1:30:03अभी-अभी दोनों ने एक दूसरे को एक्सेप्ट
- 1:30:05किया था।
- 1:30:06[संगीत]
- 1:30:06दिल से एक दूसरे को कबूल किया था और उसके
- 1:30:09बाद शौर्य का यूं रात में ही चले जाना
- 1:30:11शिप्रा को पसंद भी कैसे आ सकता था। शिप्रा
- 1:30:14ने शौर्य का हाथ पकड़ा और उसको खींचती हुई
- 1:30:16अपने कमरे में लेकर चली गई। शौर्य ने
- 1:30:19हल्का प्रतिरोध तो किया पर वह समझ गया कि
- 1:30:21अभी शिप्रा उसका कुछ भी सुनने के मूड में
- 1:30:23नहीं है। इसलिए वह भी उसके साथ खींचता चला
- 1:30:26गया। कमरे में जाकर शिप्रा ने कमरा अंदर
- 1:30:29से बंद कर लिया। जैसे उसे डर हो कि अगर
- 1:30:32उसने दरवाजा खुला छोड़ दिया तो शौर्य वहां
- 1:30:34से भाग जाएगा।
- 1:30:36तुम तो समझो मेरा सुबह शूटिंग पर होना
- 1:30:39जरूरी है। अगर मैं अभी नहीं गया तो सुबह
- 1:30:41लेट हो सकता है। शौर्य शिप्रा को प्यार से
- 1:30:44समझाता हुआ बोला तो ठीक है सुबह जल्दी
- 1:30:48निकल [संगीत] जाना। मैं तुम्हें जाने से
- 1:30:50थोड़े ही मना कर रही हूं। शिप्रा बेपरवाह
- 1:30:53अंदाज में बोली पर अभी निकल जाऊंगा तो ठीक
- 1:30:56रहेगा। सुबह नहीं तो जल्दबाजी रहेगी।
- 1:30:59शौर्य अपनी मजबूरी जाहिर करते हुए बोला
- 1:31:02क्या तुम मुझसे भाग रहे हो? तुम्हें मुझे
- 1:31:05अकेले छोड़कर कैसे जाने का मन कर रहा है?
- 1:31:08शिप्रा शौर्य के एकदम करीब जाकर बोली,
- 1:31:11शिप्रा का यह रोमांटिक अंदाज देखकर एक बार
- 1:31:14को तो शौर्य का दिल धक से रह गया। शिप्रा
- 1:31:17ने जानबूझकर अपने शरीर का अंदाज इस तरह से
- 1:31:19कर लिया था कि कोई भी उसके इस अंदाज
- 1:31:21[संगीत] को देखकर उससे अपनी नजर नहीं हटा
- 1:31:23पाता। शिप्रा के पहले के अंदाज और अब के
- 1:31:27अंदाज में बहुत परिवर्तन आ गया था। जब वह
- 1:31:29शौर्य से एक दूरी मेंटेन की हुई थी तब वह
- 1:31:32शौर्य से बहुत ही फॉर्मल होकर मिलती थी और
- 1:31:34जब से उसने शौर्य को अपने पति के रूप में
- 1:31:36दिल से स्वीकार कर लिया था उसके बाद उसका
- 1:31:39प्रयास हमेशा शौर्य को लुभाने वाला रहा।
- 1:31:42वो खुद अब शौर्य से दूर नहीं रहना [संगीत]
- 1:31:44चाहती थी। अभी की जो परिस्थिति बन गई थी,
- 1:31:47इस बात ने शिप्रा को और भी डरा दिया था।
- 1:31:49उसे डर था कहीं शौर्य कनिका के आकर्षण में
- 1:31:52आ गया तो। कनिका थी भी खूबसूरत। उस पर
- 1:31:55उसका राजशाही अंदाज किसी को भी पागल बनाने
- 1:31:58के लिए काफी था। यह सोचकर भी जितना हो सके
- 1:32:01शौर्य को अपने करीब रखना चाहती थी। शिप्रा
- 1:32:04शौर्य के करीब गई और उसके सीने पर हाथ
- 1:32:06रखकर उसके शर्ट का एक बटन खोल दी। शिप्रा
- 1:32:10के छुवन से शौर्य के [संगीत] शरीर में
- 1:32:11सिंहरण दौड़ गई। यह क्या कर रही हो? शौर्य
- 1:32:16एक कदम पीछे हटता हुआ बोला। क्यों? सोने
- 1:32:19से पहले कपड़े नहीं चेंज करना है क्या?
- 1:32:21शिप्रा उसकी आंखों में देखती हुई बोली।
- 1:32:24वो तो करने हैं पर मैं वह खुद कर लूंगा और
- 1:32:27वैसे भी मेरे कपड़े दूसरे कमरे में हैं।
- 1:32:29[संगीत] मैं वहां जाकर कर लूंगा। कहते हुए
- 1:32:32शौर्य एक कदम और पीछे हो गया। शिप्रा ने
- 1:32:36अपना हाथ शौर्य के पीछे के अलमीराह की तरफ
- 1:32:38बढ़ाया और उसका दरवाजा खोलती हुई बोली
- 1:32:41किसने कहा कि तुम्हारा कपड़ा दूसरे कमरे
- 1:32:43में है? वो तो यह रहा। शौर्य ने शिप्रा की
- 1:32:46नजर का पीछा किया और अलमीराह के अंदर अपना
- 1:32:49कपड़ा देखकर आश्चर्य [संगीत] से बोला,
- 1:32:51"मेरा कपड़ा यहां कैसे आया? इतना कहकर
- 1:32:54शौर्य शक भरी नजरों से शिप्रा की ओर देखते
- 1:32:57हुए आगे बोला। क्या यह तुमने [संगीत] किया
- 1:33:00है? पर क्यों? यह अच्छा थोड़े ही ना लगता
- 1:33:04है कि पतिपत्नी होते हुए हम दोनों का कमरा
- 1:33:06अलग हो। इसलिए मैंने तुम्हारे सारे कपड़े
- 1:33:08इस रूम में शिफ्ट कर दिया। शिप्रा मासूम
- 1:33:11बनती हुई बोली। अच्छा हम तो बहुत समय से
- 1:33:15पतिपत्नी हैं। पर आज तक तो तुमने ऐसा नहीं
- 1:33:17किया। शौर्य शिप्रा को गहरी नजरों से
- 1:33:21घूरते हुए बोला।
- 1:33:23यही तो अब जाकर उस गलती को सही किया तो
- 1:33:27क्या तुम्हें ऐतराज है इससे? शिप्रा एक
- 1:33:30कदम शौर्य के करीब जाकर नीचे जमीन की ओर
- 1:33:33देखती हुई बोली इसका मतलब अब हम कुछ भी कर
- 1:33:37सकते हैं। शौर्य शरारत भरे स्वर में बोला।
- 1:33:41तुम्हारा कुछ भी कहने से क्या मतलब है?
- 1:33:44बोलते हुए शिप्रा का सर तो जमीन की तरफ था
- 1:33:46पर उसकी निगाह शौर्य की तरफ [संगीत] उठी
- 1:33:48हुई थी।
- 1:33:50कुछ भी का मतलब है कुछ भी जो एक पति-पत्नी
- 1:33:54के बीच हो सकता है। हगिंग और किसिंग से
- 1:33:56आगे बढ़कर भी हम कुछ भी कर सकते हैं।
- 1:33:59शौर्य अपना चेहरा शिप्रा के कान के पास ले
- 1:34:02जाकर धीरे से फुसफुसाया।
- 1:34:04मुझे नहीं पता पर अब से हम दोनों का कमरा
- 1:34:07यही है। शिप्रा मुंह फेर कर बोली। अगर अब
- 1:34:12से हम दोनों का कमरा यही है तो फिर इतनी
- 1:34:14रात होने के बाद भी हम रात काली क्यों कर
- 1:34:16रहे हैं? मुझे तो सुबह जल्दी जाना है
- 1:34:18इसलिए जल्दी सोना भी पड़ेगा। तुम भी तो थक
- 1:34:21गई होगी। चलो मैं खुद तुम्हें बिस्तर पर
- 1:34:23पहुंचा देता हूं। इतना कहकर शौर्य ने
- 1:34:26शिप्रा को अपनी बाहों में उठा लिया और
- 1:34:28बिस्तर के पास [संगीत] जाने लगा। अरे यह
- 1:34:31क्या कर रहे हो? अपने कपड़े तो चेंज कर
- 1:34:34लो। शिप्रा शौर्य को रोकने की कोशिश करती
- 1:34:36हुई बोली। पर अब शौर्य कहां रुकने वाला
- 1:34:39था? शिप्रा की नजदीकी से उसका मन तो पहले
- 1:34:42से ही रोमांचित था। शिप्रा से यह सहमति
- 1:34:45पाकर कि ऊन दोनों पतिपत्नी का कमरा अब यही
- 1:34:48है। अब वह खुद को हर बंधन से आजाद महसूस
- 1:34:50कर रहा था। उसने शिप्रा को बेड पर धीरे से
- 1:34:53डाला और वह भी कूद कर उसकी बगल में लेट
- 1:34:56गया और करवट लेकर शिप्रा के ऊपर आ गया।
- 1:34:59शिप्रा ने कभी शौर्य को अपनी तरफ से इतना
- 1:35:01बेसब्र होते नहीं देखा था। वह शौर्य की इस
- 1:35:04हरकत से आश्चर्य में भी थी। पर उसे शौर्य
- 1:35:07का यूं आगे बढ़ना अच्छा भी लग रहा था।
- 1:35:09नहीं तो थोड़ी देर पहले उसे यह लगने लगा
- 1:35:12था कि वह ही शौर्य के पास जाने को लालायित
- 1:35:14रहती थी। जबकि शौर्य की तरफ से कभी उसके
- 1:35:17पास आने की पहल नहीं होती थी। जिससे उसको
- 1:35:20शक भी होने लगा था कि शौर्य उसको प्यार
- 1:35:22करता भी है या नहीं। शिप्रा ने जब देखा
- 1:35:26[संगीत] शौर्य उसके ऊपर है। वह उसकी
- 1:35:28सांसों को भी अपनी सांसों के साथ महसूस कर
- 1:35:30पा रही थी तो वह उसको रोकते हुए बोली।
- 1:35:33तुमको कपड़े नहीं चेंज करने थे। पर मुझे
- 1:35:36तो कपड़े चेंज करने हैं। तुम चिंता क्यों
- 1:35:39करती हो? यह काम भी मैं ही कर दूंगा।
- 1:35:42शौर्य शिप्रा की कान के पास सरगोसी करता
- 1:35:44हुआ बोला। तुम तो बहुत बेशर्म हो गए हो।
- 1:35:47आज से पहले तो कभी ऐसी हरकत नहीं की थी।
- 1:35:50फिर आज क्यों? शिप्रा शौर्य के होठों पर
- 1:35:53उंगली रखती हुई बोली, आज से पहले तुमने
- 1:35:56मुझे यह सिग्नल भी तो नहीं दिया था कि आज
- 1:35:58के बाद हम पूरी तरह से एक पतिप होने जा
- 1:36:01रहे हैं। जब तुमने मुझे एक्सेप्ट कर लिया
- 1:36:03तो फिर मैं क्यों जानबूझकर अपने आप को
- 1:36:05सताता रहूं। मैं तो कितने ही समय से
- 1:36:08तुम्हारी सहमति का इंतजार कर रहा था। तो
- 1:36:10भला अब मैं पीछे क्यों रहूंगा? कोई बेवकूफ
- 1:36:13ही होगा जो इतनी खूबसूरत पत्नी को छोड़कर
- 1:36:16अपनी रात बाहर कहीं काली करेगा। अब तो भले
- 1:36:19सवेरे का अलार्म ही क्यों ना लगाना पड़े
- 1:36:21पर इस तरुणी का पंखुरित मधुलय अधर का
- 1:36:23रसपान करने का मौका मैं नहीं चुकूंगा।
- 1:36:26शौर्य शिप्रा का अंगुली अपने होठों के
- 1:36:28सामने से हटाकर किसी कवि की तरह तरन्नुम
- 1:36:31में बोला। शिप्रा को तो समझ ही नहीं आया
- 1:36:34कि शौर्य ने अभी कहा क्या? पर जो भी कहा
- 1:36:37उसके भाव से शिप्रा को इतना तो समझ आ गया
- 1:36:39कि वे शब्द उसकी तारीफ में ही था। उसका
- 1:36:42शरारती व्यवहार शिप्रा को भी उद्वेलित कर
- 1:36:45रहा था। उसने भी अब सारी बंदिशों को
- 1:36:47तोड़कर आजाद होने का निश्चय कर लिया। खुद
- 1:36:50को संयमित कर वह शौर्य से बोली, लाइट तो
- 1:36:54बंद कर दो। शौर्य ने शिप्रा के ऊपर से ही
- 1:36:57बेड के बगल में ही जो स्विच था, उसको
- 1:36:59दबाया और लाइट ऑफ हो गई। उसके बाद तो उस
- 1:37:02कमरे में एक तूफान का आगमन हुआ। वर्षों के
- 1:37:05प्यासे दो भवरे आज अपनी वर्षों की दबी हुई
- 1:37:09इच्छाओं को संतृप्त कर अपनी आकांक्षाओं को
- 1:37:12नई उड़ान देने के पथ पर आगे बढ़ चले थे।
- 1:37:15ना कोई शंका ना संदेह। वरन विश्वास की एक
- 1:37:19दूर जिसकी मजबूती पर किसी को कोई शक नहीं
- 1:37:23था। आखिर तूफान थमा। दो जवान सांसों का
- 1:37:27ज्वार शांत हुआ। दो संतृप्त काया एक दूसरे
- 1:37:31के आलिंगन में एक से हो गए थे।
- 1:37:34सुबह 5:00 बजे शौर्य की नींद खुली तो उसने
- 1:37:37देखा शिप्रा बेसुद सी उसके सीने पर सर
- 1:37:40रखकर सोई हुई थी। उसने उसको उठाना ठीक
- 1:37:43नहीं समझा। इसलिए शिप्रा को धीरे से खुद
- 1:37:46से अलग करके तकिए के सहारे लिटाया और वो
- 1:37:50बेड से उठने लगा। तभी शिप्रा की आंख खुल
- 1:37:52गई। उसने शौर्य को अपनी तरफ खींचा और फिर
- 1:37:56दो अधर एक हो गए। लगभग 30 सेकंड के बाद
- 1:37:59शिप्रा ने उसको छोड़ा और बोली अब तुम जा
- 1:38:02सकते हो। यह क्या था? शौर्य को शिप्रा के
- 1:38:06व्यवहार पर हैरानी हुई। अब कम से कम इसको
- 1:38:09याद करके दिन भर तुम मुझे याद तो करोगे।
- 1:38:12इतना कहकर शिप्रा दूसरी करवट लेकर फिर से
- 1:38:14सो गई। शौर्य जल्दी से बिस्तर से उठा और
- 1:38:17तैयार होकर घर से निकल गया। उसने WhatsApp
- 1:38:20खोला और उसमें रत्नाकर शेट्टी के द्वारा
- 1:38:22भेजे गए लोकेशन को मैप पर लगाया और कार
- 1:38:25आगे बढ़ा दिया। लोकेशन की दूरी लगभग 70
- 1:38:28किलोमीटर दिखा रहा था। जगह का नाम पहाड़।
- 1:38:33यह एक टूरिस्ट स्पॉट था जहां घूमने के लिए
- 1:38:36लोग दूर-दूर से आते थे। पहाड़, झरना, नदी
- 1:38:39यह सब इस जगह की खूबसूरती [संगीत] को चार
- 1:38:42चांद लगाते थे। शौर्य को आश्चर्य भी हुआ
- 1:38:45कि रत्नाकर शेट्टी यहां के क्राउड को कैसे
- 1:38:47मैनेज करेगा? प्रशासन से शूटिंग के लिए
- 1:38:50क्लीयरेंस लेना भी आसान नहीं होगा। फिर
- 1:38:52उसने सोचा जब रत्नाकर शेट्टी ने शूटिंग
- 1:38:55रखा है तो कुछ ना कुछ सोच रखा होगा। सुबह
- 1:38:58का समय होने के कारण रोड पर ज्यादा
- 1:39:00ट्रैफिक नहीं था जिसके कारण शौर्य कोंगा
- 1:39:03पहाड़ पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगा।
- 1:39:06रत्नाकर शेट्टी ने वहां के हिसाब से बेस्ट
- 1:39:08होटल ले रखा था। शौर्य को रत्नाकर शेट्टी
- 1:39:11होटल के बाहर ही मिल गया। वो उसको लेकर
- 1:39:13पहले से ही शौर्य के लिए रिजर्व कमरे में
- 1:39:15ले गया। वहां पहले से ही एक मेकअप मैन
- 1:39:18मौजूद था। मुझे आने में देर तो नहीं हुई?
- 1:39:21शौर्य कमरे के अंदर आते ही बोला, नहीं आप
- 1:39:25एकदम सही समय पर हैं। आप रिलैक्स होकर इस
- 1:39:27चेयर पर बैठ जाइए। रत्नाकर शेट्टी ने एक
- 1:39:30चेयर की तरफ इशारा करते हुए कहा। शौर्य के
- 1:39:33बैठने के बाद रत्नाकर शेट्टी ने मेकअप मैन
- 1:39:35को इशारा किया और उसने शौर्य को मेकअप
- 1:39:38करना शुरू कर दिया। मेकअप को लाइट ही रखना
- 1:39:41अलग से पता ना चले कि चेहरे पर कुछ
- 1:39:42एक्स्ट्रा कर रखा है। रत्नाकर शेट्टी ने
- 1:39:45मेकअप मैन को गाइड किया। जी सर। मेकअप मैन
- 1:39:49ने सहमति जताई। शेट्टी साहब समझ नहीं आ
- 1:39:52रहा कि प्रशासन से आपने इस जगह पर शूटिंग
- 1:39:54करने की परमिशन कैसे ली। शौर्य के मन में
- 1:39:57जो संदेह था उसने रत्नाकर शेट्टी से पूछ
- 1:39:59लिया। यह मैंने कब कहा कि मैंने यहां
- 1:40:02शूटिंग करने की परमिशन ली है। मैंने
- 1:40:04शूटिंग की कोई परमिशन नहीं ली है। रत्नाकर
- 1:40:06शेट्टी ने धमाका किया। शौर्य जो रिलैक्स
- 1:40:09के मूड में था तुरंत उसकी आंखें खुल गई।
- 1:40:12वो सीधा होकर शेट्टी साहब को देखने लगा।
- 1:40:15यह क्या कह रहे हो शेट्टी साहब? मरवाओगे
- 1:40:17क्या? एक तो आपने प्रशासन से परमिशन नहीं
- 1:40:20ली है। कुछ ऊंचनीच हो गया तो लेने के देने
- 1:40:22पर जाएंगे। आप उसकी चिंता मत कीजिए सर। बस
- 1:40:26जैसा मैं कहूंगा आपको बस उस हिसाब से कर
- 1:40:28देना है। कोई पंगा नहीं होगा। रत्नाकर
- 1:40:31शेट्टी विश्वास के साथ बोला, "क्या यह बात
- 1:40:34नताशा कपूर को पता है? क्योंकि मुझे तो
- 1:40:37कोई नहीं जानता पर पब्लिक उसे तो अच्छे से
- 1:40:39जानती है। भीड़ तो उसको देखते ही टूट
- 1:40:42पड़ेगी। फिर आप क्या करेंगे? शौर्य ने
- 1:40:44अपनी चिंता जाहिर किए। उनको भी नहीं पता
- 1:40:47है। नताशा कपूर को भी अभी बताना है कि
- 1:40:50मेरा क्या प्लान है। शौर्य से इतना कहने
- 1:40:53के बाद रत्नाकर शेट्टी ने अपने पीछे खड़े
- 1:40:55असिस्टेंट से कहा कि वह नताशा कपूर को इसी
- 1:40:58कमरे में बुला लाए। असिस्टेंट नताशा कपूर
- 1:41:01को बुलाने वहां से चला गया। लगभग 5 मिनट
- 1:41:05बाद नताशा कपूर शौर्य के कमरे में पहुंची।
- 1:41:08उसने अपने चेहरे पर एक बड़ा सा हैट लगा
- 1:41:10रखा था। हैट के ऊपर ही एक बड़ा सा काला
- 1:41:13चश्मा भी लगा हुआ था। कमरे में आते ही
- 1:41:15[संगीत] उसने शौर्य को देखा तो बोली, आ गए
- 1:41:19तुम। मैं कल से तुम्हारा इंतजार कर रही
- 1:41:21हूं और तुम अब आए। मैं दूसरों को इंतजार
- 1:41:24करवाती थी और तुम मुझे ही इंतजार करवा रहे
- 1:41:27हो। सॉरी फॉर दैट। दरअसल मुझे कुछ काम आ
- 1:41:31गया था इसलिए मैं कल नहीं आ पाया। शौर्य
- 1:41:33खेद प्रकट करते हुए बोला। [संगीत] इस बीच
- 1:41:36रत्नाकर शेट्टी ने नताशा को एक चेयर की
- 1:41:38तरफ इशारा करते हुए बैठने को कहा। नताशा
- 1:41:41के बैठने के बाद रत्नाकर शेट्टी शौर्य और
- 1:41:44नताशा को संबोधित करते हुए बोला, "आप
- 1:41:47दोनों ने गाना तो सुन ही लिया है।" गाना
- 1:41:50सुनकर इतना तो आप समझ गए होंगे कि यह कोई
- 1:41:52डांस वाला सॉन्ग नहीं है। इसलिए मैंने कोई
- 1:41:55कोरियोग्राफर हायर नहीं किया है। स्टोरी
- 1:41:57बेस्ड सॉन्ग है। इसलिए अलग-अलग परिस्थिति
- 1:42:00में आप दोनों के बीच कुछ ऐसे मोमेंट
- 1:42:02क्रिएट होते हैं जो इस गाने के थीम को
- 1:42:05रिलेट करते हैं। रत्नाकर शेट्टी बोलता जा
- 1:42:08रहा था और दोनों ध्यान से उनकी बात को सुन
- 1:42:10रहे थे। शिप्रा को कुछ संदेह हुआ तो वह
- 1:42:13बोली शेट्टी साहब आप शूट करने की बात कर
- 1:42:17रहे हैं पर आपका शूटिंग क्रू तो आया ही
- 1:42:19नहीं है। मेकअप मैन और कैमरामैन के अलावा
- 1:42:22तो मैंने किसी और को देखा ही नहीं। शिप्रा
- 1:42:25की बात सुनकर रत्नाकर शेट्टी मुस्कुराया
- 1:42:27और बोला, बस इतने लोगों का ही क्रू है
- 1:42:30हमारा। मेरा मकसद यहां कोई तामझाम करने का
- 1:42:33नहीं है। चुपके से शूटिंग करना है और किसी
- 1:42:36को कोई भनक भी नहीं लगने देना है कि यहां
- 1:42:38कोई शूटिंग चल रही है। अपना काम खत्म करना
- 1:42:42है और यहां से चलते बनना है। पर पब्लिक को
- 1:42:45कैसे मैनेज करेंगे? क्योंकि लोगों ने एक
- 1:42:48बार देख लिया तो उनको मैनेज करना आसान
- 1:42:50नहीं होने वाला। शिप्रा ने अपनी चिंता
- 1:42:52जाहिर की। आप कल से आई हुई हैं यहां। अभी
- 1:42:56तक कितने लोगों ने आपको यहां पर पहचाना
- 1:42:58है? रत्नाकर शेट्टी मुस्कुराता हुआ बोला
- 1:43:01वो तो इसलिए कि लोगों को विश्वास करना
- 1:43:03मुश्किल हो रहा है कि उनके बीच में इस
- 1:43:05छोटे से जगह पर कोई हीरोइन हो सकती है।
- 1:43:08बाकी कई लोगों को शक तो हुआ मुझे देखकर।
- 1:43:11पर शायद उन्हें यही लगा कि मेरा चेहरा
- 1:43:13नताशा कपूर से मिलताजुलता होगा। वैसे भी
- 1:43:16यहां पर लोग घूमने के लिए आते हैं। इसलिए
- 1:43:18ज्यादा किसी को किसी से कोई मतलब होता
- 1:43:20नहीं है। नताशा कपूर ने सोचते हुए जवाब
- 1:43:23दिया। आपने खुद ही मेरे सवाल का जवाब दे
- 1:43:26दिया।
- 1:43:28लोगों को आपको देखने के बाद भी यकीन करना
- 1:43:30मुश्किल होगा कि नताशा कपूर उनके बीच में
- 1:43:32यूं एक आम लड़की की तरह घूम सकती है।
- 1:43:35इसलिए लोग आपको उससे मिलती जुलती शक्ल
- 1:43:37वाली लड़की तो समझ सकते हैं पर आपको नताशा
- 1:43:40कपूर नहीं मानेंगे। वहीं अगर मैं आपके साथ
- 1:43:43दो-तीन बॉडीगार्ड लगा दूं तो बिना कुछ कहे
- 1:43:45ही लोगों का ध्यान आपकी तरफ चला जाएगा और
- 1:43:48लोगों को यकीन हो जाएगा कि उनके बीच में
- 1:43:50नताशा कपूर आई हुई है। मुझे इसी बात का
- 1:43:53फायदा उठाना है। आप और श्रवण सर दोनों
- 1:43:57अकेले यहां के विभिन्न लोकेशनों पर घूमने
- 1:43:59के लिए निकलेंगे और कैमरा क्रू से
- 1:44:01सीक्रेटली आपको कैप्चर करेंगे। आपको बस
- 1:44:03स्टोरी के हिसाब से वो मोमेंट क्रिएट करना
- 1:44:06है जो हमें चाहिए। बाकी काम हमारा कैमरा
- 1:44:09मेन कर लेंगे। इस तरह लोगों को पता भी
- 1:44:12नहीं चलेगा और हमारा सूट भी पूरा हो जाएगा
- 1:44:15क्योंकि यह [संगीत] सॉन्ग एक ख्याल मात्र
- 1:44:17है जो कि हीरो की सोच में चल रहा है।
- 1:44:20स्टोरी पार्ट शूट होने के बाद हीरो की
- 1:44:22लिप्सिंग के लिए हम अलग से लिप्सिंग
- 1:44:23क्रोमा पर शूट करेंगे। इस तरह यह हमारा
- 1:44:26गाना पूरा हो जाएगा। रत्नाकर शेट्टी ने
- 1:44:29अपना पूरा शूटिंग प्लान शौर्य और शिप्रा
- 1:44:32को समझाया। शौर्य ने जब इस बारे में सोचा
- 1:44:34तो उसे भी रत्नाकर शेट्टी की बात सही लगी
- 1:44:37क्योंकि उसने भी गाना सुना था और पूरा
- 1:44:39सॉन्ग उसे सिचुएशन बेस्ड भी लगा। इसमें
- 1:44:42छोटी-छोटी स्टोरी को जोड़कर उसके ख्याल को
- 1:44:44बुनना था। नताशा को भी रत्नाकर शेट्टी का
- 1:44:48यह आईडिया पसंद आया। उसे भी लगा चलो यह
- 1:44:51अच्छा है कि बार-बार कैमरे के सामने खड़े
- 1:44:53होकर रिटेक करने से अच्छा है कि उन दोनों
- 1:44:56का घूमते हुए ही वीडियो शूट हो जाए और
- 1:44:58उसमें से जो बेस्ट पार्ट होगा वो सॉन्ग के
- 1:45:00लिए यूज़ हो जाएगा। और शायद यह ज्यादा
- 1:45:03नेचुरल भी लगेगा। शौर्य और नताशा दोनों को
- 1:45:07चुप देखकर रत्नाकर शेट्टी को चिंता हुई।
- 1:45:10क्या आप दोनों को मेरा आईडिया पसंद नहीं
- 1:45:12आया? अगर आप दोनों मेरे हिसाब से चलती हैं
- 1:45:15तो यह सॉन्ग 2 दिन में ही पूरा हो जाएगा।
- 1:45:17नहीं तो इसमें और ज्यादा समय लग सकता है।
- 1:45:20नहीं, ऐसा नहीं है। मुझे तो आपका आईडिया
- 1:45:23बहुत पसंद आया। शायद इस तरह हम ज्यादा
- 1:45:25नेचुरल नजर आएंगे। वैसे भी अगर कुछ चीजें
- 1:45:28हम कैमरा के सामने भी करेंगे तो भी लोगों
- 1:45:30को शक नहीं होगा क्योंकि मैंने कल देखा था
- 1:45:33कि यहां पर लोग प्रीवेडिंग शूट करने के
- 1:45:35लिए भी आते हैं। अगर कुछ शॉट्स हम कैमरा
- 1:45:37के साथ भी करते हैं तो भी
- 1:45:39[गला साफ़ करने की आवाज़] लोगों को यही
- 1:45:39लगेगा कि हम भी कोई ऐसा ही जोड़ा है।
- 1:45:42नताशा खुश होती हुई बोली रत्नाकर शेट्टी
- 1:45:44को भी नताशा की बात सही लगी। इस बात से वह
- 1:45:47खुश होते हुए बोला आपने सही कहा। इस तरह
- 1:45:50तो हम एक कैमरामैन को आपके साथ भी लगा
- 1:45:52सकते हैं जो कि आपके साथ चलता भी रहेगा और
- 1:45:55जरूरी शॉट्स भी लेता रहेगा। शौर्य चुपचाप
- 1:45:58उन दोनों की बातों को सुन रहा था। जब
- 1:46:00रत्नाकर शेट्टी ने शौर्य को कुछ बोलते
- 1:46:02नहीं देखा तो उससे पूछा इस बारे में आपका
- 1:46:04क्या ख्याल है मिस्टर श्रवण अब मैं क्या
- 1:46:06ही बोलूं। आप दोनों एक्सपीरियंस्ड लोग
- 1:46:09हैं। जब आपको सही लग रहा है तो फिर यही
- 1:46:11सही होगा। मैं तो बस वह करता जाऊंगा जो आप
- 1:46:14मुझे बोलेंगे। शौर्य भी रत्नाकर शेट्टी से
- 1:46:16सहमति जताते हुए बोला, पूरे समय हमारे साथ
- 1:46:19कैमरामैन को लगाने की जरूरत नहीं है।
- 1:46:21शेट्टी साहब जब आपको लगेगा कि कुछ शॉट्स
- 1:46:23ज्यादा ही जरूरी है जो कि करीब से लेना है
- 1:46:26और कुछ खास डिमांड है स्टोरी कि तभी आप
- 1:46:28किसी कैमरामैन को हमारे करीब भेजिएगा।
- 1:46:30नहीं तो आपका जो प्लान है कि आप सीक्रेटली
- 1:46:33ही हम दोनों का वीडियो कैप्चर करेंगे। तो
- 1:46:35आप इस प्लान पर ही ज्यादा फोकस कीजिएगा।
- 1:46:37नताशा को पूरे समय अपने साथ एक कैमरामैन
- 1:46:40को लगाना सही नहीं लगा। उसे लगा यह अच्छा
- 1:46:42समय है शौर्य के साथ बेफिक्र होकर दो दिन
- 1:46:44तक यहां घूमने का। एक टूरिस्ट की तरह वह
- 1:46:47भी यहां के प्राकृतिक नजारों को एंजॉय कर
- 1:46:49सकती है। ठीक है। मुझे भी इससे कोई आपत्ति
- 1:46:52नहीं है। तो फिर यह फाइनल हुआ। रत्नाकर
- 1:46:55शेट्टी खुश होते हुए बोला। इससे पहले उसे
- 1:46:57बहुत चिंता थी कि शौर्य और नताशा में से
- 1:46:59कोई इस तरह शूट करने से मना ना कर दे। पर
- 1:47:02नताशा तो इसके लिए आसानी से तैयार हो गई।
- 1:47:04इसके बाद रत्नाकर शेट्टी नताशा और शौर्य
- 1:47:07को समझाने लगे कि उन्हें उन दोनों से किस
- 1:47:09तरह के शॉट चाहिए होंगे तो वे लोग उस
- 1:47:11स्टोरी को ही ध्यान में रखकर बीच-बीच में
- 1:47:13ऐसे ऐसे मोमेंट क्रिएट करेंगे जिससे उनका
- 1:47:16सूट पूरा हो सके। स्टोरी नताशा को समझ में
- 1:47:18आ गई तो वह खुश होती हुई बोली अब आप चिंता
- 1:47:21मत कीजिए शेट्टी साहब। आप बस अपने
- 1:47:23कैमरामैन को तैयार रखिएगा। आपको वह सारे
- 1:47:26शॉट मिल जाएंगे जो आपको चाहिए होगा। बस आप
- 1:47:29अब दो दिन तक हम दोनों को डिस्टर्ब मत
- 1:47:31कीजिएगा और हमें एक कपल की तरह ही यहां
- 1:47:33घूमने फिरने की आजादी दीजिएगा। रत्नाकर
- 1:47:36शेट्टी को भी भला इससे क्या ऐतराज होता।
- 1:47:38इसलिए वह भी इस बात के लिए तैयार हो गया।
- 1:47:40रत्नाकर शेट्टी इतना तो समझ गया था कि
- 1:47:42नताशा के दिल में शौर्य के लिए कैसी
- 1:47:44फीलिंग है। इसलिए [संगीत] उसे लगा इससे
- 1:47:46उसका काम आसान ही होगा। उसे चिंता करने की
- 1:47:49जरूरत नहीं है। अब तक शौर्य का मेकअप भी
- 1:47:51हो गया था। मेकअप को लाइट रखा गया था।
- 1:47:54रत्नाकर शेट्टी ने अपने असिस्टेंट से
- 1:47:56बोलकर शौर्य का कपड़ा मंगवाया। कपड़ा
- 1:47:58बदलने के बाद शौर्य तैयार हो गया। मैंने
- 1:48:01आपके लिए रेड कलर की खुली छत वाली कार
- 1:48:03हायर की है। बाकी कैमरा क्रू के लिए तीन
- 1:48:05कार अलग से हायर कर रखा है। रत्नाकर
- 1:48:08शेट्टी शौर्य से बोला, ठीक है, अब मैं भी
- 1:48:11तैयार हूं तो [संगीत] फिर चलें। शौर्य
- 1:48:13खड़ा होते हुए बोला, बस 5 मिनट। मैं कैमरा
- 1:48:16क्रू को तैयार करके आता हूं। इतना कहकर
- 1:48:18रत्नाकर शेट्टी उस कमरे से बाहर चला गया।
- 1:48:21अब कमरे में शौर्य और नताशा अकेले रह गए
- 1:48:23थे। तुम कहां इतने बिजी रहते हो जो कभी
- 1:48:26फोन करने का भी मन नहीं करता। नताशा शौर्य
- 1:48:29को उलहना देती हुई बोली था कुछ अपनी
- 1:48:31उलझनों में उलझा हुआ। तुम्हारी तरह मैं
- 1:48:34इतना बड़ा स्टार तो हूं नहीं। भाई हमें
- 1:48:37बहुत काम करना पड़ता है। शौर्य बहाना
- 1:48:39बनाता हुआ बोला। फोन करने में कोई बहुत
- 1:48:42ज्यादा समय तो नहीं लगता। उसके लिए यह
- 1:48:44बहाना तो ठीक नहीं है। नताशा शौर्य के पास
- 1:48:47जाते हुए बोली। उसने शौर्य के कपड़े पर आई
- 1:48:49सिलवट को अपने हाथों से ठीक किया। नताशा
- 1:48:52के पास आने से शौर्य थोड़ा अनकंफर्टेबल
- 1:48:54हुआ पर उसने कोशिश [संगीत] किया कि नताशा
- 1:48:56को कुछ फील ना हो। तुम बड़ी स्टार हो। पता
- 1:48:59नहीं कब कहां बिजी रहती होगी। तुम
- 1:49:01डिस्टर्ब ना हो जाओ इसलिए भी कभी कॉल करने
- 1:49:04की हिम्मत नहीं की। शौर्य सफाई देते हुए
- 1:49:06बोला। ऐसा लग रहा है जैसे तुम बहाने
- 1:49:09[संगीत] पहले से ही रट कर आए हो। नताशा
- 1:49:11शौर्य की आंखों में देखती हुई बोली। अभी
- 1:49:14शौर्य आगे कुछ और बोलता। उसी समय रत्नाकर
- 1:49:17शेट्टी कमरे में प्रवेश [संगीत] किया। अब
- 1:49:19हम चल सकते हैं। सबसे पहले हम विशालगढ़ का
- 1:49:22किला देखने जाएंगे जो कि राठौर फैमिली का
- 1:49:24पु्तैनी किला है। यह किला अब राष्ट्रीय
- 1:49:26धरोहर के रूप में सरकार के अधीन है। यह
- 1:49:29किला यहां आने वाले टूरिस्टों के आकर्षण
- 1:49:31का केंद्र बिंदु भी है। रत्नाकर शेट्टी से
- 1:49:34यह सुनकर कि शौर्य जहां जाने वाला है, यह
- 1:49:37उसके खानदान का पुश्तैनी किला है, उसे
- 1:49:39बड़ा आश्चर्य [संगीत] हुआ। उसे अभी तक
- 1:49:41अपने खानदान के ऐतिहासिक धरोहर के बारे
- 1:49:43में कुछ नहीं पता था। अब उसका भी मन अपने
- 1:49:45पुरखों के इतिहास के बारे में जानने को
- 1:49:47मचल गया। पहले के समय में राजा महाराजा
- 1:49:51जानबूझकर सुरक्षा को ध्यान में रखकर
- 1:49:53पहाड़ों पर अपना किला बनवाते थे जिससे कोई
- 1:49:55दुश्मन आसानी से उस किले पर आक्रमण ना कर
- 1:49:57सके। इस किले पर जाने का भी एक [संगीत] हो
- 1:50:00रास्ता था। बाकी तीन तरफ गहरी खाई थी। ठीक
- 1:50:04है फिर चलते हैं। अब देर करने का कोई
- 1:50:06फायदा नहीं। इतना कहकर शौर्य बाहर जाने को
- 1:50:09तैयार हो गया। रत्नाकर शेट्टी भी शौर्य के
- 1:50:11[संगीत] साथ बाहर की तरफ बढ़ते हुए बोला,
- 1:50:13"आपसे आगे एक कार चलेगी जिसमें मैंने एक
- 1:50:16गाइड को भी बिठा रखा है। आपको उस कार को
- 1:50:18फॉलो करना पड़ेगा। शौर्य नताशा के साथ
- 1:50:21बाहर पार्किंग में आ गया। रत्नाकर शेट्टी
- 1:50:23ने उसकी कार [संगीत] का चाबी पहले हो उसे
- 1:50:25थमा दिया था। शौर्य नताशा के साथ जाकर उस
- 1:50:28कार में बैठ गया। नताशा शौर्य के साथ वाली
- 1:50:31सीट पर बैठते हुए बोली, अब से दो दिनों के
- 1:50:34लिए हम एक रील लाइफ जीने जा रहे हैं
- 1:50:36जिसमें हम ऐसे कपल हैं जिसे तुम बहुत
- 1:50:38प्यार करते हो। मैं भी तुम्हें पसंद तो
- 1:50:40करती हूं पर मेरी फीलिंग तुम्हारी तरह
- 1:50:42स्ट्रांग नहीं है। हां, कुछ शॉट्स हमें
- 1:50:45रोमांटिक भी देने पड़ेंगे जो आगे जाकर
- 1:50:47मूवी यूज़ होंगे। तो अब से तुम्हें ऐसा हो
- 1:50:49व्यवहार करना है। जी मैम समझ गया। शौर्य
- 1:50:53मुस्कुराता हुआ बोला। शौर्य यह बात
- 1:50:55रत्नाकर शेट्टी के समझाने से हो समझ गया
- 1:50:57था। पर नताशा उसे ऐसे समझा रही थी जैसे
- 1:51:00कोई सीनियर अपने जूनियर को समझाता है।
- 1:51:03नताशा को लग रहा था कि शौर्य अभी पहली बार
- 1:51:05किसी फिल्म में काम करने जा रहा है। इसलिए
- 1:51:08उससे कोई गलती ना हो इसलिए उसे एक बच्चे
- 1:51:10की तरह समझा रही थी। शौर्य के चेहरे पर एक
- 1:51:13स्माइल आ गई। वो सामने देखता हुआ बोला तो
- 1:51:16मैं अब गाड़ी आगे बढ़ाऊं। नताशा ने सहमति
- 1:51:19में अपना हाथ हिलाकर आगे बढ़ने का इशारा
- 1:51:21किया और शौर्य ने कार आगे बढ़ा दिया।
- 1:51:24दूसरी तरफ शिप्रा कमरे में किसी का आहट
- 1:51:26पाकर उठी थी। उसने देखा मेघा हाथ में चाय
- 1:51:29का कप लेकर खड़ी थी। शिप्रा ने मेघा को
- 1:51:32चाय का कप लिए खड़ा देखा तो वह आंखें मलती
- 1:51:34हुई बोली तुम चाय लेकर क्यों आई हो? गिरजा
- 1:51:37दीदी को भेज देती। क्यों? मैं आपके लिए
- 1:51:40चाय लेकर नहीं आ सकती क्या? आप तो इतनी
- 1:51:42बिजी रहती हैं कि आपसे मिलने का समय ही
- 1:51:44नहीं मिलता। इसी बहाने आपके साथ चाय पीने
- 1:51:47का मौका तो मिला। मेघा मुस्कुराती हुई
- 1:51:49बोली। शिप्रा ने बेड पर पड़े कंबल को एक
- 1:51:52साइड किया और मेघा को बेड पर बैठने का
- 1:51:54इशारा किया। मेघा ने चाय की ट्रे को बेड
- 1:51:57पर रखा और शिप्रा के बगल में बैठ गई। मेघा
- 1:52:00शिप्रा को गौर से देखती हुई बोली, "आपकी
- 1:52:03एक कान की बाली कहां गई?" एक कान में तो
- 1:52:05है, दूसरा कान खाली है। मेघा की बात सुनकर
- 1:52:08शिप्रा का हाथ अपनी कान पर चला गया। एक
- 1:52:11कान की बाली गायब देखकर वो बेड पर ही उसे
- 1:52:13ढूंढने लगी। एक किनारे बेडशीट से उलझी हुई
- 1:52:16बाली उसे मिल गई। मेघा ने उसे उठाया और
- 1:52:19शिप्रा के करीब जाकर उसके कान में पहनाते
- 1:52:21हुए बोली लगता है भैया ने रात आपको ठीक से
- 1:52:24सोने नहीं दिया। मेघा की बात सुनकर शिप्रा
- 1:52:27का गाल लाल हो गया। वो खुद को नॉर्मल करती
- 1:52:29हुई बोली शैतान कहीं की तुम कुछ भी बोले
- 1:52:33जा रही हो। मैं क्या गलत बोल रही हूं? आज
- 1:52:36तक तो आपको कभी भी इतनी देर से उठते नहीं
- 1:52:37देखा। इसका तो यही कारण हो सकता है कि रात
- 1:52:40आप ठीक से सोई नहीं है। मेघा शिप्रा को
- 1:52:43घूरती हुई बोली। बहुत दिमाग चलने लगा है
- 1:52:46तुम्हारा। लगता है जल्दी हो तुम्हारी शादी
- 1:52:48भी करनी पड़ेगी। शिप्रा मेघा के कान
- 1:52:51पकड़ती हुई बोली। ना मुझे अभी अपनी रात
- 1:52:54जागकर नहीं बितानी है। मैं अभी ऐसे ही ठीक
- 1:52:57हूं। मेघा अपनी कान छुड़ाती हुई बोली तो
- 1:53:00तुम मुझे छेड़ने के लिए ही सुबह-सुबह मेरे
- 1:53:02कमरे में आई हो। शिप्रा चाय का कप उठाती
- 1:53:05हुई बोली। मैं तो आई थी कि आप दोनों से एक
- 1:53:08साथ मिलना हो जाएगा। पर मुझे क्या पता था
- 1:53:10कि भैया तो आपको छोड़कर पहले ही जा चुके
- 1:53:12हैं। मेघा मायूसी से बोली। शिप्रा ने देखा
- 1:53:16कि ट्रे में चाय की तीन कप थी। यानी तीसरा
- 1:53:19कप मेघा शौर्य के लिए ही लाई थी। तो यह
- 1:53:22तीसरा कप तुम अपने भैया के लिए लाई थी।
- 1:53:25हां, पर वो सुबह-सुबह कहां चले गए? मेघा
- 1:53:28अफसोस भरे स्वर में बोली। हीरो बनने गया
- 1:53:31है। आज से उसके फिल्म की शूटिंग शुरू हो
- 1:53:34रही है। शिप्रा भी अफसोस के साथ बोली। तभी
- 1:53:37कमरे का दरवाजा खुला और गिरजा कमरे में
- 1:53:39प्रवेश की। दीदी आपसे कोई मिलने आई है?
- 1:53:43शिप्रा गिरजा की ओर देखती हुई बोली, "यह
- 1:53:46सुबह-सुबह कौन मुझसे मिलने आ गया?"
- 1:53:48उन्होंने कहा कि वो आपकी बुआ है। गिरजा ने
- 1:53:51जवाब दिया। शिप्रा की आंखों के सामने अपनी
- 1:53:54नैना बुआ का चेहरा घूम गया। उसने सोचा वो
- 1:53:57इतना सवेरे उससे मिलने कैसे आ गई? उसने
- 1:53:59जल्दी से चाय खत्म किया और अपने कपड़े को
- 1:54:01ठीक करके नीचे की तरफ बढ़ गई। मेघा भी
- 1:54:04शिप्रा के साथ ही कमरे से बाहर आ गई।
- 1:54:06शिप्रा जब ड्राइंग रूम में पहुंची तो उसने
- 1:54:08सोफे पर अपनी नैना बुआ और राधिका को सोफे
- 1:54:11पर बैठे पाया। शिप्रा ड्राइंग रूम में
- 1:54:14पहुंची तो उसने देखा उसकी नैना बुआ और
- 1:54:16राधिका दोनों सोफे पर बैठी उसका इंतजार कर
- 1:54:19रही थी। शिप्रा ने नैना बुआ के पास जाकर
- 1:54:22उनको प्रणाम किया और आश्चर्य से बोली अरे
- 1:54:25बुआ आप यहां अचानक [संगीत]
- 1:54:28सब ठीक तो है? हां हां सब ठीक है। अब तो
- 1:54:32तुम अपने पापा के घर भी नहीं आती इसलिए
- 1:54:35तुमसे मिलना नहीं हो पाता। फाइनली आज
- 1:54:37मैंने राजदीप भाई से तुम्हारा पता लिया।
- 1:54:39तब जाकर यहां आ पाई हूं। नैना बुआ पूरा
- 1:54:42तहरीर सुनाती हुई बोली। पर बात क्या है
- 1:54:45बुआ जो आप खास करके मुझसे मिलने के लिए
- 1:54:48यहां आई हैं शिप्रा को अभी भी समझ नहीं
- 1:54:50आया कि उसकी नैना बुआ वो भी राधिका के साथ
- 1:54:53यहां क्यों आई हैं? दरअसल परसों राधिका की
- 1:54:56इंगेजमेंट है इसलिए यही होटल राजकमल में
- 1:54:58हमने उसकी इंगेजमेंट पार्टी रखी है तो
- 1:55:01तुम्हें उसमें आना है। इतना कहकर नैना बुआ
- 1:55:04ने इनविटेशन कार्ड शिप्रा की तरफ बढ़ा
- 1:55:06दिया। जब शिप्रा ने सुना कि दो दिन बाद
- 1:55:08राधिका की इंगेजमेंट होनी है तो उसने
- 1:55:10राधिका की तरफ हाथ बढ़ाते हुए कहा बधाई हो
- 1:55:13राधिका [संगीत] यह तो बहुत अच्छी खबर है।
- 1:55:16यह बधाई तुम परसों उस पार्टी में आकर
- 1:55:18देना। [संगीत] मैं जानती हूं कि आजकल नाना
- 1:55:20जी से तुम्हारा कुछ मनमुटाव चल रहा है।
- 1:55:22इसलिए मैं मम्मी के साथ खास करके खुद
- 1:55:25तुम्हें यहां इनवाइट करने आई हूं। राधिका
- 1:55:27शिप्रा का हाथ पकड़ कर बोली। शिप्रा को
- 1:55:30राधिका के व्यवहार पर आश्चर्य हुआ क्योंकि
- 1:55:32राधिका कभी भी शिप्रा के साथ इतना स्वीट
- 1:55:34व्यवहार नहीं करती थी। फिर अचानक उसका
- 1:55:36शिप्रा के साथ इतना स्वीट होना उसे
- 1:55:38आश्चर्य में डाल रहा था। क्या यह सब इसलिए
- 1:55:41था कि वह अब फैब्रिक ट्रेंड की सीईओ है?
- 1:55:45यही बात होगी। उसने मन में सोचा। पर बुआ
- 1:55:48सिर्फ इनवाइट करने के लिए स्पेशल करके
- 1:55:50आपको यहां आने की क्या जरूरत थी? आप तो
- 1:55:52फोन पर भी यह बात बता सकती थी। शिप्रा ने
- 1:55:54अपने मन की बात कह ही दी। बता तो सकती थी
- 1:55:58पर इसके पापा ने कहा कि हमें खुद ही जाकर
- 1:56:00तुम्हें तुमसे मिलकर इनवाइट करना चाहिए।
- 1:56:02और दूसरी बात यह भी थी कि मैं देखना भी
- 1:56:05चाहती थी कि मेरी बच्ची अभी कहां रह रही
- 1:56:06है। नैना बुआ अपने चेहरे पर चौरी सी
- 1:56:09स्माइल लाती हुई बोली। इसी समय गिरजा एक
- 1:56:12ट्रे में चाय लेकर वहां उपस्थित हुई। उसने
- 1:56:14नैना बुआ और राधिका दोनों को चाय थमाया।
- 1:56:17चाय का कप हाथ में लेकर नैना बुआ उस घर को
- 1:56:20नजर घुमा कर देखने लगी और तारीफ भरे स्वर
- 1:56:22में शिप्रा से बोली। यह घर तो तुमने बहुत
- 1:56:25अच्छा लिया है। शिप्रा बेटी मुझे तो
- 1:56:27तुम्हारी बहुत चिंता थी। पर अब इस घर को
- 1:56:30देखकर लग रहा है तुम अच्छे से रह रही हो।
- 1:56:32श्रवण नहीं दिखाई दे रहा है शिप्रा। क्या
- 1:56:35वो अभी तक सो ही रहा है? राधिका शौर्य की
- 1:56:38तलाश में अपनी नजर इधर-उधर घुमाती हुई
- 1:56:40बोली। नहीं वो घर में नहीं है। वो अपने
- 1:56:44काम पर गया है। शिप्रा ने जवाब दिया। चलो
- 1:56:47अच्छा है। वो कुछ कर रहा है। नहीं तो मुझे
- 1:56:50तुम्हारे पति को लेकर हमेशा चिंता लगी
- 1:56:52रहती है। नैना अफसोस जताती हुई बोली। बुआ
- 1:56:56आपको मेरे पति की चिंता करने की कोई जरूरत
- 1:56:58नहीं है। वो जो भी कर रहा है बहुत अच्छा
- 1:57:01कर रहा है। शिप्रा किसियानी हंसी-हंसती
- 1:57:03हुई बोली कैसे चिंता नहीं करूंगा बेटी? अब
- 1:57:07देखो राधिका की भी शादी शहर के बड़े रईसों
- 1:57:09में से एक सोलंकी फैमिली में होने जा रही
- 1:57:11है जो कि विशालगढ़ के चुनिंदा रईसों में
- 1:57:14से एक है और जल्दी ही युविका की भी शादी
- 1:57:17एक बड़े घर में होने की संभावना बन रही
- 1:57:19है। इसलिए तुमको लेकर चिंता करना तो
- 1:57:21स्वाभाविक है पर मुझे खुशी है कि तुम खुद
- 1:57:24बहुत अच्छा कर रही हो। नैना बुआ
- 1:57:26बातोंबातों में यह बताना नहीं भूली कि
- 1:57:28राधिका की शादी कितने बड़े परिवार में
- 1:57:30होने जा रही है। उनका भी मैं मकसद तो
- 1:57:32शिप्रा के सामने यही जताना था कि उनकी
- 1:57:34बेटी शिप्रा से कितनी ज्यादा भाग्यशाली
- 1:57:36है। यह तो राधिका के लिए बहुत खुशी की बात
- 1:57:39है बुआ। मुझे खुशी है कि राधिका इतने
- 1:57:42अच्छे परिवार में जा रही है। शिप्रा खुशी
- 1:57:44जताती हुई बोली। यह बुरा हुआ कि मैं यहां
- 1:57:47आई और मुझे जीजू से मिलने का अवसर नहीं
- 1:57:49मिला। मैं उन्हें खुद इनवाइट करना चाहती
- 1:57:52थी। पर कोई नहीं जब वह घर पर नहीं है तो
- 1:57:55क्या ही कर सकते हैं। पर तुम पार्टी में
- 1:57:57जीजू को लेकर जरूर आना। राधिका अफसोस भरे
- 1:58:00स्वर में बोली। उसकी बातों से लग रहा था
- 1:58:02कि शौर्य से नहीं मिलने से उसे कितना दुख
- 1:58:05हुआ। कोशिश करूंगी। शिप्रा अनमने भाव से
- 1:58:08बोली। कोशिश करूंगी इससे क्या मतलब?
- 1:58:10तुम्हें आना ही है। इसलिए तो मैं खुद चलकर
- 1:58:13तुम्हारे पास तुमको इनवाइट करने आई हूं कि
- 1:58:15कल को तुम कोई बहाना ना बना सको। पूरी
- 1:58:18फैमिली इस पार्टी में शिरकत करेंगी। और
- 1:58:20अगर तुम नहीं होगी तो क्या यह अच्छा
- 1:58:22लगेगा? इसलिए कोई बहाना नहीं। तुम्हें हर
- 1:58:25हाल में आना ही है। नैना बुआ जिद करती हुई
- 1:58:28बोली। दूसरी तरफ शौर्य नताशा कपूर के साथ
- 1:58:31विशालगढ़ किला पहुंचा। एक तरफ से वह दोनों
- 1:58:34एक्टिंग के मोड़ में ही थे। पर शौर्य को
- 1:58:36विशालगढ़ के किला पर घूमना अच्छा लग रहा
- 1:58:38था। जब से उसने जाना था कि यह किला उसके
- 1:58:40पुरखों से संबंधित है। उसे उस किला से एक
- 1:58:42जुराव सा महसूस होने लगा था। उस किला पर
- 1:58:45घूमते हुए उसने नताशा के साथ कई वैसे
- 1:58:47मोमेंट क्रिएट किए थे जो उसे चाहिए था।
- 1:58:49वहां और भी पर्यटक थे जिनमें से कईयों का
- 1:58:51ध्यान नताशा की तरफ गया था और उन्हें शक
- 1:58:53भी हुआ था कि जिसे वह देख रहे हैं वह फेमस
- 1:58:56मॉडल नताशा ही तो नहीं है। पर यह देखकर कि
- 1:58:59अगर नताशा कपूर होती तो क्या वो यूं अकेले
- 1:59:01पेयर में घूम रही होती? उसके साथ तो कई
- 1:59:03बॉडीगार्ड होते। ऐसा ही एक मोमेंट था जब
- 1:59:06नताशा किले की चार दीवारी के ऊपर उगते हुए
- 1:59:08सूर्य की तरफ देख रही थी। उसका हेट उसके
- 1:59:10हाथ में था और चश्मा उसके सर के ऊपर बालों
- 1:59:13में लगा हुआ था। शौर्य उससे कुछ दूर खड़ा
- 1:59:15एक टक नताशा को ही देख रहा था। उसके चेहरे
- 1:59:18पर कई एक्सप्रेशनंस आ जा रहे थे। इस समय
- 1:59:20उसके दिमाग में फिल्म का वही सॉन्ग चल रहा
- 1:59:22था जिसका शूट हो रहा था। जान मुझे ना
- 1:59:25देखोगी तो मैं मर जाऊंगा। सब्र अब होता
- 1:59:28नहीं मैं कुछ भी कर जाऊंगा। गाने का बोल
- 1:59:31शौर्य को कहीं दिल को टच कर रहा था। उसने
- 1:59:34सोचा वो और क्या बेहतर कर सकता है उस बोल
- 1:59:36के हिसाब से। उसने देखा नताशा दूर घाटी
- 1:59:39में सूर्य को देखने में व्यस्त है। तो
- 1:59:41उसने सोचा वह नताशा को देखते हुए एक चक्कर
- 1:59:43लगा लेता है। उसने खुद से कुछ दूर रत्नाकर
- 1:59:46शेट्टी को अपने कैमरामैन के साथ देख लिया
- 1:59:47था। वे लोग ऐसा जता रहे थे जैसे वे किले
- 1:59:50की फोटोग्राफी कर रहे हैं क्योंकि वह
- 1:59:52शौर्य और नताशा के पास नहीं आ रहे थे।
- 1:59:54इसलिए लोगों को शक भी नहीं हो रहा था कि
- 1:59:56वे सब एक टीम का हिस्सा है। शौर्य अभी
- 1:59:59नताशा की तरफ बढ़ना शुरू ही किया था कि
- 2:00:01तभी एक 14-15 साल की लड़की दौड़ती हुई
- 2:00:04नताशा के पास पहुंची और उससे बोली दीदी आप
- 2:00:07नताशा कपूर हो? नताशा हैरान नजरों से उस
- 2:00:10लड़की को देखने लगी। पर जल्दी से अपने
- 2:00:12चेहरे के एक्सप्रेशन को ठीक किया और
- 2:00:14मुस्कुराती हुई बोली, तुम्हें कोई गलतफहमी
- 2:00:17हुई है? मैं वो नहीं हूं जो तुम समझ रही
- 2:00:19हो। नताशा की बात सुनकर उस लड़की का चेहरा
- 2:00:21मुरझा गया। पर आपकी शक्ल तो एकदम नताशा
- 2:00:24कपूर की तरह ही है। इसमें तुम्हारी गलती
- 2:00:27नहीं है। अक्सर लोग मुझे नताशा कपूर समझ
- 2:00:30लेते हैं। दरअसल मेरा चेहरा नताशा कपूर से
- 2:00:32बहुत हद तक मिलता है। नताशा ने उस लड़की
- 2:00:34को मुस्कुराते हुए जवाब दिया। फिर उसने
- 2:00:36अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, "अगर मैं
- 2:00:39नताशा कपूर होती, तो क्या यूं अकेले घूम
- 2:00:41रही होती? उसके साथ तो बहुत सारे
- 2:00:43बॉडीगार्ड लगे होते। लड़की के चेहरे पर
- 2:00:46उलझन के भाव थे। पर नताशा की बात भी उसे
- 2:00:48सही लगी। फिर कुछ सोचकर वो मुस्कुराते हुए
- 2:00:51बोली कोई बात नहीं अगर आप नताशा कपूर नहीं
- 2:00:54भी हैं तो मुझे फर्क नहीं पड़ता पर आपकी
- 2:00:57शक्ल तो हूबहू उनके जैसा ही है तो क्या आप
- 2:00:59मेरे साथ एक फोटो खिंचवा सकती हैं नताशा
- 2:01:02ने एक पल को सोचा और तैयार होती हुई बोली
- 2:01:05क्यों नहीं मुझे इसमें क्या ऐतराज हो सकता
- 2:01:07है भला उस लड़की ने अपना मोबाइल निकाला और
- 2:01:10नताशा के साथ दो-तीन सेल्फी क्लिक की जब
- 2:01:12नताशा इस लड़की के साथ फोटो क्लिक करवा
- 2:01:14रही थी उसी समय उससे कुछ दूरी पर चार
- 2:01:16लड़कों का एक ग्रुप ध्यान से नताशा कपूर
- 2:01:19की ओर ही देख रहा था। इन लड़कों का ध्यान
- 2:01:21भी नताशा की तरफ तभी गया था जब उस लड़की
- 2:01:23ने आकर नताशा कपूर से बात किया था। शौर्य
- 2:01:26अलग से ही उस लड़की और नताशा को बात करते
- 2:01:28और फोटो खिंचवाते देख रहा था। लड़की ने जब
- 2:01:31कई फोटो क्लिक कर लिया तो वह नताशा का
- 2:01:33धन्यवाद करके वहां से चली गई। उस लड़की के
- 2:01:36जाने के बाद जब शौर्य ने नताशा के पास
- 2:01:38जाने की सोची उसी समय उसने देखा चार
- 2:01:40लड़कों का ग्रुप नताशा के पास पहुंच गया।
- 2:01:43नताशा ने उस लड़की को विदा करने के बाद
- 2:01:45अपने सर पर के गगल्स को अपनी आंख पर लगा
- 2:01:47लिया। उसी समय उसको अपने पीछे से एक आवाज
- 2:01:50सुनाई दिया। एक्सक्यूज मी। नताशा ने पलट
- 2:01:53कर देखा तो सामने चार लड़के खड़े थे।
- 2:01:56पहनावे से ही सभी किसी ना किसी रईस घरों
- 2:01:59के लड़के लग रहे थे। उसमें जो सबसे आगे था
- 2:02:02वो अपने चेहरे पर स्माइल लाते हुए बोला,
- 2:02:06"हेलो, मेरा नाम रुद्र है। मैंने अभी आपकी
- 2:02:09और उस लड़की की बात सुनी। पता नहीं क्यों
- 2:02:12पर मुझे भी आप एकदम नताशा कपूर की तरह ही
- 2:02:14लग रही हैं। क्या आप सच में नताशा कपूर
- 2:02:17नहीं है? नताशा ने उम्मीद नहीं की थी कि
- 2:02:19उस लड़की के बाद फिर से कोई उसके पीछे पड़
- 2:02:22जाएगा। उसने अपने चेहरे पर एक व्यावहारिक
- 2:02:25मुस्कान लाते हुए कहा। जब आपने हम दोनों
- 2:02:28की बात को सुना ही था तो फिर तो आपको समझ
- 2:02:30जाना चाहिए कि मैं वह नहीं हूं जो आप समझ
- 2:02:32रहे हैं। ऐसा नहीं है कि मैं समझना नहीं
- 2:02:35चाहता। पर क्या है कि मुझे अब विश्वास
- 2:02:38नहीं हो रहा है कि आप नताशा कपूर नहीं
- 2:02:40हैं। रुद्र कुटिल मुस्कान के साथ बोला,
- 2:02:43"अगर आपको मेरी बात पर विश्वास नहीं हो
- 2:02:45रहा, तो यह आपकी प्रॉब्लम है। इसमें मैं
- 2:02:48कुछ नहीं कर सकती। आपके लिए यही बेहतर है
- 2:02:50कि आप मेरा रास्ता छोड़िए और अपने काम से
- 2:02:53काम [संगीत] रखें।" नताशा रूखे स्वर में
- 2:02:55बोली, "अरे आप तो बुरा मान गई। हम तो आपके
- 2:02:58फैन हैं। जैसे आपने उस लड़की की इच्छा
- 2:03:01पूरी की, वैसे ही हमारी इच्छा भी पूरी कर
- 2:03:03दीजिए। दो-चार पिक्चर हमारे साथ ही क्लिक
- 2:03:05करवा लीजिए, तो हमारी इच्छा भी पूरी हो
- 2:03:07जाएगी।"
- 2:03:08रुद्र बेशर्मी से हंसते हुए बोला। रुद्र
- 2:03:11की बात पर उसके साथ के लड़कों ने भी ठहाका
- 2:03:14लगाया। तुम यहां मुझे अकेले ही नजर आ रही
- 2:03:16हो। अगर कोई तुम्हारे साथ है भी तो क्यों
- 2:03:19ना तुम हमारे ग्रुप को ज्वाइन कर लो। जो
- 2:03:21भी खर्चा होगा वो सब हम बियर कर लेंगे।
- 2:03:24रुद्र के ग्रुप के ही एक लड़के ने बेशर्मी
- 2:03:27से कहा। तभी शौर्य जो दूर से ही उनकी
- 2:03:29बातों को सुन रहा था। जब उसे लगा कि उसको
- 2:03:32अब इंटरफेयर करना पड़ेगा तो वह उसके पास
- 2:03:34जाता हुआ बोला। क्या बात है डार्लिंग? यह
- 2:03:37क्या हो रहा है यहां? नताशा शौर्य की बात
- 2:03:40सुनकर उसकी तरफ पलटी। उसके साथ ही रुद्र
- 2:03:43और उसके साथियों का ध्यान भी शौर्य की तरफ
- 2:03:45गया। शौर्य के मुंह से नताशा के लिए
- 2:03:48डार्लिंग शब्द सुनकर वे भी आश्चर्य से
- 2:03:50शौर्य को देखने लगे। उन्हें पक्का यकीन था
- 2:03:53कि यह लड़की कोई और नहीं नताशा कपूर ही
- 2:03:56है। फिर यह उसको डार्लिंग बोलने वाला कौन
- 2:03:58आ गया। नताशा शौर्य की तरफ बढ़ी और उसका
- 2:04:01हाथ पकड़ कर बोली। देखो ना पता नहीं यह
- 2:04:04कहां से आ गए हैं और नताशा कपूर बोलकर
- 2:04:07हमारे पीछे ही पड़ गए हैं। क्यों भाई
- 2:04:09लोगों तुम लोगों को क्या दिक्कत है? क्यों
- 2:04:12तुम मेरी गर्लफ्रेंड के पीछे पड़े हो?
- 2:04:14शौर्य रुद्र की ओर देखते हुए बोला। तुम
- 2:04:17कौन हो और यूं हमारे बीच में कहां से टपक
- 2:04:19गए? रुद्र रूखे स्वर में शौर्य से बोला।
- 2:04:22मैं कौन हूं यह जानकर तुम क्या करोगे?
- 2:04:25बड़ी बात यह है कि तुम मेरी गर्लफ्रेंड के
- 2:04:27साथ बदतमीजी क्यों कर रहे हो? यहां घूमने
- 2:04:30आए हो तो घूमो, फिरो और हमसे दूर रहो।
- 2:04:33शौर्य रुद्र से तीखे स्वर में बोला और
- 2:04:35नताशा का हाथ पकड़ कर ऊ चारों से दूर जाने
- 2:04:38लगा। पर रुद्र फिर से उसके सामने आकर उसका
- 2:04:41रास्ता रोकते हुए बोला, "अरे चले जाना,
- 2:04:43इतनी जल्दी भी क्या है? देखो, मैं नताशा
- 2:04:46कपूर का बहुत बड़ा फैन हूं। बस दो-चार फोटो
- 2:04:49मुझे इसके साथ खिं लेने दो। फिर तुम इसको
- 2:04:52लेकर यहां से चले जाना। तुम बड़ी गलत ज़िद
- 2:04:54कर रहे हो दोस्त। यह कभी पूरा नहीं हो
- 2:04:57सकता। बेहतर होगा कि तुम अपने काम से मतलब
- 2:04:59रखो और हमारा पीछा छोड़ दो। शौर्य रुद्र
- 2:05:02से समझाने वाले भाव में बोला, "देखो, मैं
- 2:05:06बहुत समय के बाद अपने देश वापस आया हूं।
- 2:05:08दोस्तों ने जिद की तो यहां घूमने आ गया और
- 2:05:11सच कहूं तो मुझे यह चेहरा बहुत पसंद है।
- 2:05:14मैंने इसकी मूवी देखी थी। मुझे बहुत पसंद
- 2:05:16आया था। यह चेहरा मेरे दिल में ऐसा बस गया
- 2:05:19कि मैंने बहुत पहले ही इससे मिलने की
- 2:05:21तमन्ना कर ली थी। ख्वाबों में तो मैंने
- 2:05:24इसे अपनी रानी भी बना ली थी। अब यह कह रही
- 2:05:26है कि यह वो लड़की नहीं है। पर मैं मान ही
- 2:05:29नहीं सकता कि यह नताशा कपूर नहीं है। और
- 2:05:32अब तुम भी यही शो करने की कोशिश कर रहे
- 2:05:34हो। यह बात यह साबित करने के लिए काफी है
- 2:05:37कि तुम दोनों ड्रामा कर रहे हो। मेरी
- 2:05:39आंखें धोखा नहीं खा सकती। नताशा कपूर तुम
- 2:05:43मुझे नहीं जानती पर मैं तुम्हारा सबसे
- 2:05:45बड़ा आशिक हूं। अगर तुम मुझे एक्सेप्ट कर
- 2:05:48लेती हो तो तुम्हें रानी बनाकर रखूंगा।
- 2:05:50रुद्र भावावेश [संगीत] में बहुत कुछ बोलता
- 2:05:52चला गया। नताशा रुद्र का पागलपन देखकर
- 2:05:55हैरान थी। शौर्य को भी इस समय रुद्र किसी
- 2:05:58साइको की तरह लग रहा था। उसने नताशा का
- 2:06:00हाथ पकड़ कर अपने पीछे किया और रुद्र के
- 2:06:03सामने खड़ा होकर बोला, "अगर अगर 1 मिनट के
- 2:06:05लिए यह मान भी लिया जाए कि यह नताशा कपूर
- 2:06:08ही है। तो क्या तुमको यह लाइसेंस मिल गया
- 2:06:10है कि तुम आकर उसका रास्ता रोक लोगे? और
- 2:06:12तुम्हें हम ड्रामा करते क्यों लग रहे हैं?
- 2:06:14क्या नताशा का कोई बॉयफ्रेंड नहीं हो
- 2:06:16सकता? इसलिए समझदारी से काम लो और हमारा
- 2:06:18रास्ता छोड़ो। अबे यार, तू क्यों पंगे ले
- 2:06:21रहा है रुद्र भाई से? सिर्फ दो-चार फोटो
- 2:06:23खिंचाने के लिए ही तो बोला है। शुक्र मनाओ
- 2:06:26कि कुछ बड़ी डिमांड नहीं की है। हो जाने
- 2:06:28दो ना दो चार फोटो। तुम्हारा क्या ही
- 2:06:30बिगड़ जाएगा। रुद्र के बाकी तीन दोस्तों
- 2:06:33में से एक आगे आते हुए बोला मुझे पसंद
- 2:06:36नहीं है कि मेरी गर्लफ्रेंड किसी और लड़के
- 2:06:38के साथ फोटो खिंचाए। इसलिए तुम्हारी कोशिश
- 2:06:40बेकार है। किला देखने आए हो तो वो देखो।
- 2:06:43किले के साथ जितने फोटो खिंाने हैं
- 2:06:45खिंचाओ। किसने रोका है? शौर्य ने इतना कहा
- 2:06:48और नताशा को खींचते हुए आगे बढ़ गया।
- 2:06:51रुद्र शौर्य को जाते देखता रहा। उसके
- 2:06:53चेहरे पर नागवारी के भाव था। उसके दोस्तों
- 2:06:56में से कोई बोला भी क्या रुद्र भाई यह
- 2:06:59तुम्हारी बेइज्जती करके चला गया? क्या इसे
- 2:07:01ऐसे ही जाने दोगे? अभी इसे जाने दो। यहां
- 2:07:04इतने टूरिस्टों के बीच अभी कुछ करना ठीक
- 2:07:06नहीं है। पर इसे इतनी आसानी से छोडूंगा
- 2:07:09नहीं। इस लड़की को तो सबक सिखाने के और भी
- 2:07:11तरीके हैं मेरे पास। पर इस लड़के की भी
- 2:07:13अक्ल सीधी करनी पड़ेगी। रुद्र शौर्य और
- 2:07:16नताशा को पीछे से जाते देखते हुए बोला।
- 2:07:19तुम्हारे फूफा जी की तो फिल्म इंडस्ट्रीज
- 2:07:21में बहुत बड़ा नाम है। उनको बोलोगे तो यह
- 2:07:23हीरोइन तो ऐसे ही तुम्हारे आगे पीछे घूमने
- 2:07:25लगेगी। रुद्र के दोस्तों में से एक बोला
- 2:07:28जब घी सीधी उंगली से ही निकल सकती है तो
- 2:07:31उंगली टेढ़ी करने की क्या जरूरत है? रुद्र
- 2:07:34कुटिल मुस्कान मुस्कुराते हुए बोला। दूसरी
- 2:07:36तरफ नताशा ने जब उन चारों लड़कों को पीछे
- 2:07:39आते नहीं देखा तो उसने राहत की सांस ली।
- 2:07:42इस बीच रत्नाकर शेट्टी ने भी जब बात को
- 2:07:44बढ़ते देखा था तो वह भी बीच बचाव करने आगे
- 2:07:46आने वाला था। पर शौर्य ने उसे इशारे से ही
- 2:07:49अपने पास आने से रोक दिया था। वहां से
- 2:07:52निकलने के बाद भी शौर्य और नताशा ने अपना
- 2:07:54काम चालू रखा। हां, नताशा को अपने दिमाग
- 2:07:57से पिछली घटना निकालने में थोड़ा समय लगा
- 2:08:00पर थोड़ी देर बाद वो भी नॉर्मल हो गई।
- 2:08:03किले पर का काम पूरा होने के बाद इन लोगों
- 2:08:05का इरादा रिवर राफ्टिंग का भी था। नताशा
- 2:08:07इस बात से उत्साहित भी थी। उसे इस तरह का
- 2:08:10एडवेंचर बहुत पसंद था। वैसे रिवर राफ्टिंग
- 2:08:13[संगीत] शूटिंग का हिस्सा नहीं था। पर जब
- 2:08:15यह लोग यहां आए ही थे तो सभी का विचार
- 2:08:17रिवर राफ्टिंग का बन गया था। इसका प्रपोजल
- 2:08:20मेनली नताशा की तरफ से ही आया था। उसे
- 2:08:23बहुत कम समय ही ऐसा मिलता था जब वह अपनी
- 2:08:25मन की दबी हुई इच्छाओं को पूरा कर सकती
- 2:08:27थी। जब उसे पता चला किंगा पहाड़ रिवर
- 2:08:30राफ्टिंग के लिए भी फेमस है तो उसने अपना
- 2:08:32मन बना लिया। शौर्य नताशा और बाकी क्रू
- 2:08:35मेंबर के साथ रिवर राफ्टिंग के लिए किले
- 2:08:37से निकला। किले से बाहर आने का भी सेम ही
- 2:08:40रास्ता था। किले से बाहर आने के बाद कुछ
- 2:08:43दूर का एरिया पूरा जंगलों वाला था। अभी
- 2:08:45शौर्य की कार कुछ ही किलोमीटर चली थी कि
- 2:08:48उसे सामने रोड पर एक थार गाड़ी अपने आगे
- 2:08:50चलती दिखाई दी। शौर्य ने कई बार साइड के
- 2:08:53लिए हॉर्न दिया पर थार वाले ड्राइवर ने
- 2:08:55साइड नहीं दिया। शौर्य को गुस्सा भी आ रहा
- 2:08:57था। वो तेज-तेज़ हॉर्न दे रहा था। और जब भी
- 2:09:00साइड से निकलना चाहता था तो थार उस तरफ का
- 2:09:03ही रास्ता ब्लॉक कर लेता था। अचानक एक
- 2:09:06संकरी सड़क पर थार गाड़ी तिरछा होकर खड़ा
- 2:09:08हो गया। उसने पूरे रोड को ही कवर कर लिया
- 2:09:10था। कोई गाड़ी चाहकर भी आगे नहीं जा सकती
- 2:09:13थी। मजबूरन शौर्य को अपनी गाड़ी को ब्रेक
- 2:09:15लगाना पड़ा। शौर्य भी अपनी कर से निकाल कर
- 2:09:18गुस्से में उसे थार के ड्राइवर के पास
- 2:09:20जाना ही चाहता था कि तभी उसने देखा थार का
- 2:09:23दरवाजा खुला और उसके दोनों तरफ से दो-दो
- 2:09:26लड़के बाहर आए और उसकी कार की तरफ ही बढ़
- 2:09:28गया। शौर्य ने उन लड़कों को देखा तो उसकी
- 2:09:31आंखें चौड़ी हो गई। यह लड़के कोई और नहीं।
- 2:09:34रुद्र और उसके साथी ही थे। रुद्रा शौर्य
- 2:09:37की कार के ड्राइविंग वाले दरवाजे के पास
- 2:09:39आया और बोनट के ऊपर अपना पैर टिकाता हुआ
- 2:09:41बोला हां यार तुम तो किले पर बहुत बड़े
- 2:09:44हीरो बन रहे थे। क्या कहा था तुमने कि
- 2:09:47तुम्हें नहीं पसंद कि तुम्हारी गर्लफ्रेंड
- 2:09:49किसी और लड़के के साथ फोटो खिंचाए। अब
- 2:09:51बताओ क्या अभी भी तुम वही कहोगे? शौर्य का
- 2:09:55मन किया कि वो रुद्र की बेवकूफी पर ठहाका
- 2:09:57मार कर हंसे। पर उसने अपने इमोशन पर
- 2:10:00कंट्रोल किया और मुस्कुराते हुए रुद्र से
- 2:10:02बोला चार गीदड़ मिलकर शेर का रास्ता रोक
- 2:10:05रहे हो और खुद को तिस्मार खान समझ रहे हो
- 2:10:08अगर अपनी भलाई चाहते हो तो मेरा रास्ता
- 2:10:10छोड़ो और अपने काम से काम रखो मानना
- 2:10:13पड़ेगा तुम में हिम्मत तो है पर क्या
- 2:10:16फायदा अगर ज्यादा हिम्मत दिखाने की कोशिश
- 2:10:19करोगे तो अपना ही नुकसान करोगे रुद्र
- 2:10:21शौर्य का उपहास उड़ाने वाले अंदाज में
- 2:10:23बोला इसी समय रत्नाकर शेट्टी की कार भी
- 2:10:26शौर्य की कार के पीछे आकर रुक गई थी। उसने
- 2:10:29जब रुद्र और उसके साथियों को शौर्य की कार
- 2:10:32के पास खड़ा देखा तो वह जल्दी से उतर कर
- 2:10:35रुद्र के पास आया और बोला ये तुम लोगों ने
- 2:10:38रास्ता क्यों रोक रखा है? चलो रास्ता खाली
- 2:10:40करो नहीं तो मैं पुलिस को फोन लगाता हूं।
- 2:10:43अबे तू जाकर अपनी कार में बैठ ना। क्यों
- 2:10:46फालतू में बीच में आकर सरपंच बन रहा है?
- 2:10:48रुद्र बुरी तरह रत्नाकर शेट्टी को झिरकता
- 2:10:51हुआ बोला। रुद्र की बात सुनकर रत्नाकर
- 2:10:53शेट्टी का चेहरा उतर गया। उसने शौर्य की
- 2:10:56तरफ देखा तो शौर्य ने उसे आंखों के इशारे
- 2:10:58से अपनी कार में जाकर बैठने को कहा।
- 2:11:01रत्नाकर शेट्टी भी बिना किसी आर्गुमेंट के
- 2:11:03वापस जाकर अपनी कार में बैठ गया। रत्नाकर
- 2:11:06शेट्टी को वापस जाता देखकर रुद्र घमंड में
- 2:11:09मुस्कुराया। समझदार था जो बिना किसी जिरा
- 2:11:12के वापस चला गया। इतना कहकर रुद्र नताशा
- 2:11:16की तरफ देखता हुआ बोला। हां तो मिस नताशा।
- 2:11:20अब आप इस महाशय की कार छोड़िए और मेरे साथ
- 2:11:22चलिए। मैं आपको पहाड़ की सैर कराता हूं।
- 2:11:26रुद्र की बात सुनकर नताशा शौर्य की तरफ
- 2:11:29देखने लगी। उसके चेहरे पर घबराहट नजर आने
- 2:11:32लगी। शौर्य ने उसे अपनी आंखों के इशारे से
- 2:11:34शांत रहने को कहा। मैंने तुम्हें कहा था
- 2:11:37कि तुम फालतू में रुद्र भाई से पंगा ले
- 2:11:39रहे हो। पर उस समय तुम्हें मेरी बात समझ
- 2:11:42नहीं आई थी। अगर उस समय मेरी बात समझ गए
- 2:11:44होते तो यूं अब जलील नहीं होना पड़ता।
- 2:11:48रुद्र का वो साथी जिसने शौर्य को पिछली
- 2:11:50मीटिंग में रुद्र से ना उलझने का सलाह
- 2:11:52दिया था। वो कूदकर शौर्य की कार के पीछे
- 2:11:55वाली सीट पर बैठता हुआ बोला। वो तो अभी
- 2:11:57पता चल जाएगा कि यहां पर जलील किसे होना
- 2:12:00पड़ेगा। शौर्य मुस्कुराते हुए बोला तुमको
- 2:12:03अभी भी लगता है कि तुम अपनी गर्लफ्रेंड के
- 2:12:05साथ यहां से सही सलामत जा पाओगे। रुद्र के
- 2:12:08चेहरे पर बड़ी सी स्माइल आ गई थी। कौन
- 2:12:10रोकेगा मुझे? तुम अपने इस टट्टुओं के
- 2:12:14भरोसे। शौर्य रुद्र के साथियों पर उपहास
- 2:12:17भरी दृष्टि डालते हुए बोला, अबे तू टट्टू
- 2:12:20किसे बोल रहा है? तुम्हारी जुबान कुछ
- 2:12:22ज्यादा ही नहीं चल रही है। अभी भी तुम्हें
- 2:12:24समझ नहीं आया कि तू किस मुसीबत में फंस
- 2:12:26गया है। शौर्य की कार के पीछे वाली सीट पर
- 2:12:29बैठा शख्स पीछे से शौर्य के कॉलर को
- 2:12:32पकड़ता हुए बोला। उसने अभी शौर्य के कॉलर
- 2:12:34पर हाथ ही डाला था कि शौर्य का हाथ उसकी
- 2:12:37कलाई पर जम गया। शौर्य ने बैठे-बैठे ही
- 2:12:40उसकी कलाई पर ऐसा झटका दिया कि वह शख्स
- 2:12:42पीछे से उड़ता हुआ कार के बोनट के सामने
- 2:12:45जाकर गिरा। रोड पर पड़ा वो शख्स अविश्वास
- 2:12:48भरी नजरों से शौर्य को देख रहा था। रोड पर
- 2:12:51गिरने के कारण उसे उसकी पीठ में तेज चोट
- 2:12:53लगा था। वो तो शुक्र था कि वो पीठ के बल
- 2:12:56रोड पर गिरा था। जिसके कारण उसे सिर्फ तेज
- 2:12:59चोट ही लगी थी। कुछ टूटा फूटा नहीं था।
- 2:13:02बड़ी मुश्किल से वह दर्द को सहते हुए अपने
- 2:13:04पैरों पर खड़ा हुआ था। अपने साथी का यह
- 2:13:06हाल देखकर रुद्र के बाकी के दो साथी भी
- 2:13:09उसकी कार से अलग हटकर खड़े हो गए थे। अब
- 2:13:12उनकी आंखों में एक खौफ नजर आने लगा था।
- 2:13:15रुद्र गहरी नजरों से शौर्य को देखता रहा।
- 2:13:18तुम्हें बिना मेरी इजाजत के मेरी कार में
- 2:13:20बैठना नहीं चाहिए था। शुक्र मनाओ कि
- 2:13:22तुम्हें सस्ते में छोड़ दिया। नहीं तो तुम
- 2:13:25जैसों का एक-दो हड्डी पसली टूट जाना आम
- 2:13:27बात है। शौर्य उसी शख्स को नसीहत देता हुआ
- 2:13:30बोला जिसे उसने अभी गाड़ी के बाहर पटका
- 2:13:32था। तुम कुछ ज्यादा ही बड़े बोल बोल रहे
- 2:13:35हो। तुम्हें सबक सिखाना ही पड़ेगा। रुद्र
- 2:13:38शौर्य की कार के दरवाजे को पकड़ता हुआ
- 2:13:40बोला। मैंने कहा दूर रहो मेरी कार से नहीं
- 2:13:43तो तुम्हारा हाल भी तुम्हारे साथी के जैसा
- 2:13:46ही कर दूंगा। इतना कहकर शौर्य ने अपनी कार
- 2:13:49का दरवाजा खोला और कार से बाहर आ गया।
- 2:13:52शौर्य को कार के बाहर आते देखकर रुद्र भी
- 2:13:54कार से दो कदम पीछे आ गया। तो तुम हमसे
- 2:13:57टकराने का सोच रहे हो। चलो बढ़िया है।
- 2:14:00इससे तुम्हारी थोड़ी इज्जत तो मेरी नजरों
- 2:14:02में बन गई है कि तुमने सीधे हथियार नहीं
- 2:14:04डाल दिए हैं। रुद्र शौर्य के सामने पोजीशन
- 2:14:07लेता हुआ बोला। रुद्र के बाकी साथियों ने
- 2:14:10भी शौर्य को घेर लिया था। अपने इन साथियों
- 2:14:13के दम पर तुम मुझसे टकराना चाहते हो।
- 2:14:15शौर्य रुद्र और उसके साथियों पर नजर डालता
- 2:14:18हुआ बोला। क्यों? हम चार को एक साथ देखकर
- 2:14:21पट गीली होने लगी। रुद्र का एक दूसरा साथी
- 2:14:25शौर्य का मजाक बनाते हुए बोला, "तुम लोग
- 2:14:28सिर्फ बातें ही बनाना जानते हो या कुछ
- 2:14:30करना भी?" तब से देख रहा हूं। बड़ी-बड़ी
- 2:14:33बातें किए जा रहे हो। अगर कुछ करना बस में
- 2:14:36नहीं है तो अपना गाड़ी लो [संगीत] और यहां
- 2:14:38से 9 2 11 हो जाओ। शौर्य रुद्र और उसके
- 2:14:41साथियों को उकसाता हुआ। शौर्य का इतना
- 2:14:43बोलना था कि रुद्र ने अपने दो साथियों को
- 2:14:46आंखों के इशारे में कुछ कहा और दोनों
- 2:14:48शौर्य के ऊपर झपटे। शौर्य ने उन दोनों से
- 2:14:52बचने की कोशिश नहीं की। अगर वह चाहता तो
- 2:14:54उनके वार से आसानी से बच सकता था। पर
- 2:14:57शौर्य को लगा कि उनकी यह कोशिश इसलिए थी
- 2:14:59कि वह शौर्य की ताकत को परखना चाहते थे।
- 2:15:02शौर्य ने उन दोनों के वार को अपने दोनों
- 2:15:05हाथों पर रोका और दो कदम पीछे हो गया।
- 2:15:08शौर्य को बैकफुट पर जाते देखकर रुद्र के
- 2:15:11दूसरे साथियों के चेहरे पर स्माइल आ गई।
- 2:15:13वे समझ गए कि शौर्य ने जो अपना पहला
- 2:15:15इंप्रेशन उनके ऊपर छोड़ा था, वह सिर्फ एक
- 2:15:18फ्लूक था। वह लड़ने में इतना भी तेज नहीं
- 2:15:21था। रुद्र शौर्य का बचाव का मुद्रा देखकर
- 2:15:24समझ गया कि शौर्य के लिए उसके तीन साथी ही
- 2:15:26काफी थे। या यह कहना ठीक होगा कि काफी से
- 2:15:29भी बहुत ज्यादा थे। इसलिए उसने खड़ा होकर
- 2:15:32तमाशा देखने का सोचा। ज्यादा लगी तो नहीं?
- 2:15:36अभी भी कहता हूं मेरे पैरों में गिरकर
- 2:15:38अपनी सलामती के लिए गिरगिराओ तो हो सकता
- 2:15:40है मुझे तुम पर रहम आ जाए। रुद्र घमंड में
- 2:15:43बोला। फिर वो नताशा की तरफ देखते हुए
- 2:15:46बोला, मिस नताशा, मैं सच में तुम्हारा
- 2:15:49बहुत बड़ा फैन हूं। अगर तुम मुझे अपने दिल
- 2:15:51में थोड़ी सी जगह दो, तो मैं तुम्हारे
- 2:15:53साथी को छोड़ने की सोच सकता हूं। मैं
- 2:15:55तुम्हारे और भी काम आ सकता हूं। मेरे फूफा
- 2:15:58जी तुम्हारी इंडस्ट्रीज के किंग हैं। अगर
- 2:16:00मैंने तुम्हारी थोड़ी सिफारिश कर दी तो
- 2:16:02तुम रातोंरात इस इंडस्ट्रीज की स्टार बन
- 2:16:04जाओगी। रुद्र गर्व भरे स्वर में बोला,
- 2:16:07नताशा को समझ नहीं आया कि उसे क्या करना
- 2:16:10चाहिए। उसने साफ-साफ शौर्य को कमजोर पड़ते
- 2:16:13देखा था। उसकी आंखों में परेशानी नजर आने
- 2:16:15लगी। असमंजस की स्थिति में कभी वह शौर्य
- 2:16:18को तो कभी रुद्र को देख रही थी। इस तरह
- 2:16:21जबरदस्ती किसी के दिल में जगह नहीं बनाया
- 2:16:23जाता। पहले तुम्हें सामने वाले से पेस आने
- 2:16:25का सलीका आना चाहिए। उसके बाद इस तरह की
- 2:16:28बात करना तुम्हें शोभा देता। नताशा रूखे
- 2:16:30स्वर में बोली। मानना पड़ेगा। हो तुम एकदम
- 2:16:34मीठी छुरी। तुम्हारी बातें भी बड़ी
- 2:16:36कातिलाना है। मैं तो तुम्हारी किस्मत
- 2:16:38बदलने की बात कर रहा हूं और तुम मुझे
- 2:16:40उपदेश दे रही हो। तुम जानना नहीं चाहोगी
- 2:16:43कि मेरे फूफाजी कौन है। रुद्र कुटिल
- 2:16:45मुस्कान के साथ बोला। शौर्य अपनी जगह पर
- 2:16:48खड़ा यही देखना चाहता था कि रुद्र किस
- 2:16:50स्तर तक जाता है। इन चारों को निपटाना
- 2:16:53शौर्य के लिए कोई मुश्किल नहीं था। जब
- 2:16:55उसने रुद्र को अपने फूफाजी का हुल देते
- 2:16:57देखा तो उसकी भी इच्छा हुई कि वह जाने कि
- 2:17:00आखिर रुद्र किसको इस इंडस्ट्रीज का किंग
- 2:17:02बोल रहा है। दूसरी तरफ नताशा रुद्र की बात
- 2:17:05सुनकर बोली मेरे ना पूछने पर भी तुम तुम
- 2:17:08खुद को बताने से रोक नहीं पाओगे। तो बता
- 2:17:10ही दो कि आखिर तुम्हारे फूफाजी कौन है?
- 2:17:13तुमने रणधीर शेखावत का नाम तो सुना ही
- 2:17:15होगा। क्या अब भी मुझे यह बताने की जरूरत
- 2:17:18है कि वह तुम्हारी इंडस्ट्रीज के किंग हैं
- 2:17:20या नहीं? रुद्र की आवाज में उसका घमंड
- 2:17:22कूट-कूट कर भरा था। रुद्र की बात सुनकर
- 2:17:25नताशा ने शौर्य की तरफ देखा जैसे उसे कह
- 2:17:27रही हो लो रणधीर शेखावत का एक और
- 2:17:30रिश्तेदार उसके पीछे पड़ गया। मुझे पहले
- 2:17:33ही लगा था कि कोई कमीना ही तेरा फूफा
- 2:17:35होगा। अब नाम सुनकर कंफर्म हो गया। तुमने
- 2:17:38साबित कर दिया कि तुम सच में उस कमीने के
- 2:17:40रिश्तेदार हो सकते हो। शौर्य रुद्र का
- 2:17:42उपहास उड़ाते हुए बोला तुम्हारी इतनी
- 2:17:45हिम्मत कि तुम मेरे फूफा जी के लिए ऐसा
- 2:17:47बोलोगे? आरव विपिन देख क्या रहे हो? इसे
- 2:17:51ऐसा सबक सिखाओ कि यह मेरे पैरों में
- 2:17:53गिड़गिरा कर अपनी सलामती की भीख मांगे।
- 2:17:55आरव और विपिन को शायद रुद्र के इस आदेश का
- 2:17:58ही इंतजार था। दोनों तेजी से शौर्य पर एक
- 2:18:00साथ झपटे। इस बार शौर्य ने उन्हें कोई
- 2:18:03मौका नहीं दिया। उसने अपने बाएं पैर पर
- 2:18:05स्पिन किया और उसके दाएं पैर का फ्लाइंग
- 2:18:07किक आरव और विपिन से एक के बाद एक टकराया
- 2:18:10और अगले ही पल दोनों जमीन पर धूल चाटते
- 2:18:13नजर आए। और इस बीच शौर्य रुद्र के तीसरे
- 2:18:16साथी के सामने पहुंच गया था। अपने दो
- 2:18:18साथियों का हश्र देखकर रुद्र के तीसरे
- 2:18:21साथी का चेहरा पीला पड़ गया था। शौर्य ने
- 2:18:23बिना कुछ कहे उसके गाल पर अपने हाथ का एक
- 2:18:26थप्पड़ जमाया। वो भी नाच कर जमीन पर गिर
- 2:18:28गया। कुछ ही पलों में रुद्र के तीनों साथी
- 2:18:31जमीन की धूल चाट रहे थे। रुद्र कभी शौर्य
- 2:18:34को तो कभी अपने साथियों की हालत को देख
- 2:18:36रहा था। अविश्वास से उसकी आंखें फटी जा
- 2:18:39रही थी। यह कैसे हो सकता है? उसने तो अभी
- 2:18:42साफ-साफ महसूस किया था कि शौर्य उसके
- 2:18:44साथियों के सामने थोड़ी देर भी टिक
- 2:18:46[संगीत] नहीं पाएगा। पर उसके एक ही वार से
- 2:18:48उसके साथी खड़े होने की स्थिति में नहीं
- 2:18:51थे। यह क्या हुआ? तुम्हारे यह मिट्टी के
- 2:18:54शेर तो मेरा एक वार भी झेल। अब बताओ कौन
- 2:18:57किसके पैर में गिर के अपनी सलामती के भीख
- 2:19:00मांगेगा? शौर्य अब रुद्र का मजाक बनाते
- 2:19:03हुए बोला। नताशा ने भी उम्मीद नहीं थी कि
- 2:19:05यूं एक झटके में ही शौर्य रुद्र के
- 2:19:08साथियों को यूं ढूल चटा देगा। अभी थोड़ी
- 2:19:10देर पहले तक वो शौर्य के लिए चिंतित थी।
- 2:19:12पर एक पल में ही पाशा पलट गया। तुम अभी
- 2:19:16अपनी जीत पर इतरा सकते हो। पर यह समझ जाना
- 2:19:18कि यह बात यहीं खत्म नहीं होने वाली। तुम
- 2:19:21अभी मेरे बारे में कुछ नहीं जानते। रुद्र
- 2:19:23अपनी इस हार को पचा नहीं पा रहा था। वो
- 2:19:26अभी डिसाइड नहीं कर पा रहा था कि वह पीछे
- 2:19:28हटे या वह खुद शौर्य पर आक्रमण करें।
- 2:19:31शौर्य को फोन करते हुए अभी ज्यादा समय
- 2:19:34नहीं हुआ था कि दोबारा उसका फोन रिंग करने
- 2:19:36लगा। शौर्य को जैसे पहले से ही पता था कि
- 2:19:39ऐसा ही होना है। उसने फिर से कॉल को
- 2:19:41एक्सेप्ट किया और बोला इस तरह बार-बार फोन
- 2:19:44करने से कोई फायदा नहीं। अगर तुम चाहते हो
- 2:19:46कि मैं तुम्हारे आदमियों को छोड़ दूं तो
- 2:19:48तुम्हें यह बताना पड़ेगा कि तुम मेरा पीछा
- 2:19:50क्यों कर रहे हो। कुछ पल की खामोशी के बाद
- 2:19:53दूसरी तरफ से आवाज आई। मुझे किसी ने
- 2:19:56तुम्हारा पीछा करने के लिए कहा था। और
- 2:19:58सिर्फ तुम्हारा पीछा करने के मुझे अच्छे
- 2:20:00पैसे मिल रहे थे। इसलिए हमारे आदमी
- 2:20:03तुम्हारा पीछा कर रहे थे। अच्छा जब
- 2:20:05तुम्हें मेरा पीछा करने के इतने अच्छे
- 2:20:07पैसे मिल रहे थे तो फिर तुम्हें मेरा कत्ल
- 2:20:09करने के लिए कितने पैसे मिले थे? शौर्य
- 2:20:11मुस्कुराता हुआ बोला शौर्य समझ गया था कि
- 2:20:14जहांगीर खान कहानी बना रहा था।
- 2:20:17क्या यह तुम क्या बोल रहे हो? मैं
- 2:20:20तुम्हारा कत्ल क्यों करवाने लगा? शौर्य की
- 2:20:22बात सुनकर जहांगीर खान हकला गया था। अच्छा
- 2:20:25तो फिर तुम्हारा वो शागिर्द महंत तो फालतू
- 2:20:28में ही मारा गया। शौर्य तंज भरे स्वर में
- 2:20:30बोला। शौर्य की बात सुनकर जहांगीर खान की
- 2:20:33बोलती बंद हो गई। वह समझ गया कि सामने
- 2:20:36वाले को सब पता चल गया है। इसलिए अब उसके
- 2:20:38पास कहानी बनाने का कोई फायदा नहीं है।
- 2:20:40अच्छा तो तुम्हें सब पता चल गया है। जब
- 2:20:42तुम सब जान ही गए हो तो फिर तुम्हें हमारी
- 2:20:44बात समझनी चाहिए। हम यह काम पैसे के लिए
- 2:20:47करते हैं। तुम्हारे कारण हमारा एक आदमी
- 2:20:49पहले ही मारा जा चुका है। अब जबकि मेरे दो
- 2:20:52आदमी तुम्हारे कब्जे में हैं तो मैं
- 2:20:53तुम्हारे सामने एक प्रपोजल रखता हूं कि
- 2:20:55तुम हमारे दोनों आदमियों को छोड़ दो और
- 2:20:57मैं तुम्हें मारने का जो मेरे पास सुपारी
- 2:20:59है मैं उसे भूल जाऊंगा। जहांगीर खान सोच
- 2:21:02भरे स्वर में बोला देखो जहांगीर खान मैं
- 2:21:06तुम्हारी बात मान सकता हूं। पर इसके साथ
- 2:21:08ही तुम्हें मुझे यह भी बताना पड़ेगा कि
- 2:21:10मुझे मारने की सुपारी तुम्हें किसने दी
- 2:21:12थी। अगर तुम इसके लिए तैयार हो तो फिर मैं
- 2:21:14तुम्हारे आदमी को छोड़ने के लिए सोच सकता
- 2:21:16हूं। शौर्य जहांगीर खान के प्रपोजल में
- 2:21:19अपनी यह बात जोड़ता हुआ बोला। शौर्य को
- 2:21:22अभी यह जानने में इंटरेस्ट था कि [संगीत]
- 2:21:23जब वो भारत आया था तो उसे मारने की सुपारी
- 2:21:26जहांगीर खान को आखिर किसने दी थी। शौर्य
- 2:21:29की बात सुनकर जहांगीर खान चुप हो गया।
- 2:21:32उसके लिए अपने क्लाइंट का नाम पब्लिक करना
- 2:21:33मुमकिन नहीं था। वो आसानी से इस बात के
- 2:21:36लिए तैयार नहीं हो सकता था। यह बात शौर्य
- 2:21:38भी समझता था। पर उसे तो हर हाल में यह
- 2:21:40जानना था कि उसका कत्ल कौन करवाना चाहता
- 2:21:42था। इसलिए इससे कम की कंडीशन पर तो वह
- 2:21:45जहांगीर खान की बात मान ही नहीं सकता था।
- 2:21:48सुनो लड़के यह बात इतनी आसान नहीं है। अगर
- 2:21:51सच कहूं तो यह बात अभी मुझे भी नहीं पता
- 2:21:53कि तुम्हें मारने की सुपारी हमें किसने दी
- 2:21:55है। हमारे पास जो यह सुपारी आई थी, यह
- 2:21:58किसी थर्ड पर्सन के द्वारा आई थी। जैसे
- 2:22:00मुझे यह नहीं पता कि यह सुपारी किसके
- 2:22:02द्वारा मेरे पास आई है, वैसे ही उस शख्स
- 2:22:04को भी यह नहीं पता होगा कि उसने यह सुपारी
- 2:22:06किसे दी है। जहांगीर खान ने अपनी मजबूरी
- 2:22:09शौर्य के सामने रखी। शौर्य को समझ नहीं
- 2:22:12आया कि जहांगीर खान जो बात बोल रहा है
- 2:22:14क्या वो सच हो सकता है। पर वो इतनी आसानी
- 2:22:16से जहांगीर खान की बात नहीं मान सकता था।
- 2:22:19जब उसने देखा कि जहांगीर खान से उसे कुछ
- 2:22:21भी काम की बात पता नहीं चली तो उसने कहा
- 2:22:24अगर तुम यह नहीं बता सकते कि तुम्हें यह
- 2:22:26काम किसने दिया तो फिर तुम्हें अपने
- 2:22:27आदमियों के बारे में भूल जाना चाहिए। देखो
- 2:22:30लड़के समझने की कोशिश करो। तुम वो पहले
- 2:22:33आदमी हो जो मेरे बारे में भी जान गया है।
- 2:22:35नहीं तो आज तक कोई भी नहीं जान पाया कि
- 2:22:37मैं या मेरा ग्रुप ऐसे काम करते हैं। उसके
- 2:22:40बाद भी मैं तुम्हें छोड़ने की बात कर रहा
- 2:22:42हूं। अगर तुमने मेरे आदमियों को नुकसान
- 2:22:44पहुंचाया तो फिर तुम समझ सकते हो कि मैं
- 2:22:46तुम्हें किसी भी हाल में नहीं छोडूंगा।
- 2:22:48भले मुझे जमीन आसमान एक क्यों ना करना
- 2:22:50पड़े पर मैं तुम्हें जहन्नुम से भी ढूंढ
- 2:22:52कर मार डालूंगा। इसलिए मैं कह रहा हूं अभी
- 2:22:55भी तुम्हारे पास मौका है। तुम मुझे मजबूर
- 2:22:57मत करो। जहांगीर खान शौर्य को समझाने की
- 2:23:00कोशिश करता हुआ बोला मैं तुम्हारी बकवास
- 2:23:03सुनने के मूड में नहीं हूं। तुम्हें अपने
- 2:23:05ऊपर कुछ ज्यादा ही भरोसा है। इसलिए तुम
- 2:23:07अभी भी मुझे धमकाने की कोशिश कर रहे हो।
- 2:23:10पर हो इसका उल्टा भी सकता है। कहीं ऐसा ना
- 2:23:13हो कि मैं तुम्हारे पूरे शैडो बॉक्सर क्लब
- 2:23:15को ही मटियामेट कर दूं। शौर्य उल्टा
- 2:23:18जहांगीर खान को ही धमकाते हुए बोला।
- 2:23:20जहांगीर खान को इस बात से आश्चर्य हुआ कि
- 2:23:23शौर्य उसके क्लब के बारे में भी जान गया
- 2:23:25है। यह उसके लिए बहुत खतरनाक बात हो सकती
- 2:23:27थी। उसे समझ नहीं आया कि शौर्य को आखिर
- 2:23:30उसके क्लब के बारे में कैसे पता चला। इसका
- 2:23:33मतलब रुबिया या सिकंदर में से किसी ने
- 2:23:35अपनी जुबान खोल दी। तभी वह उसके क्लब के
- 2:23:37बारे में जान गया है। उसे समझ नहीं आया कि
- 2:23:40इस स्थिति में उसे क्या करना चाहिए।
- 2:23:42जहांगीर खान को थोड़ा समय चाहिए था ताकि
- 2:23:44इस बीच में वह अपने आदमी को बचाने के लिए
- 2:23:46कुछ कर सके। वो अपने आदमियों की जान गवाने
- 2:23:49का रिस्क नहीं ले सकता था। इसलिए थोड़े
- 2:23:51समय की तलाश में उसने शौर्य से कहा देखो
- 2:23:54अभी मुझे सच में नहीं पता कि मुझे सुपारी
- 2:23:56देने वाला आदमी कौन था। तुम मुझे थोड़ा
- 2:23:58समय दो ताकि मैं इस बीच में पता कर सकूं
- 2:24:01कि वह आदमी कौन है जिसने तुम्हें मरवाने
- 2:24:03की सुपारी मुझे दी थी। तुम्हारे आदमियों
- 2:24:05के लिए यही अच्छा भी होगा। जितनी जल्दी
- 2:24:07तुम मुझे यह बता दोगे कि मुझे मारने की
- 2:24:10सुपारी तुम्हें किसने दी थी। उतनी जल्दी
- 2:24:12तुम्हारे आदमी मेरे पास से छूटेंगे। शौर्य
- 2:24:14जहांगीर खान को वर्न करते हुए बोला। इतना
- 2:24:17कहने के बाद शौर्य ने फोन काट दिया।
- 2:24:20जहांगीर खान से बात हो जाने के बाद भी
- 2:24:22शौर्य को पता नहीं क्यों लग रहा था कि
- 2:24:24[संगीत] इतनी बात होने के बाद भी जहांगीर
- 2:24:26खान शांत नहीं बैठेगा। इसलिए वह उस पुराने
- 2:24:29स्टेडियम के अंदर गया और स्टेडियम के अंदर
- 2:24:31मौजूद खिलाड़ियों को ठहरने का जो रूम था
- 2:24:33उसमें गया। वैसे तो रूम की हालत खस्ता थी
- 2:24:36पर उससे शौर्य को कोई खास मतलब नहीं था।
- 2:24:38उसने अपने हाथ में मौजूद मोबाइल को उस रूम
- 2:24:41में मौजूद एक तख्त के ऊपर रखा और उस कमरे
- 2:24:43से निकल गया। छगन और मगन जो कि शौर्य के
- 2:24:46साथ-साथ ही चल रहे थे उन्हें शौर्य की यह
- 2:24:48हरकत समझ में नहीं आ रही थी कि शौर्य
- 2:24:50आखिरकार कर क्या रहा है। वो बस शौर्य का
- 2:24:53अनुसरण किए जा रहे थे। वे सभी भी शौर्य के
- 2:24:56साथ बाहर आ गए। तो आखिरकार छगन ने शौर्य
- 2:24:58से पूछ ही लिया। बॉस आप जो यह कर रहे हो
- 2:25:01मुझे समझ नहीं आ रहा है कि इसके पीछे क्या
- 2:25:04कारण है। इससे हमें क्या फायदा होने वाला
- 2:25:06है। यह तो अभी मैं भी नहीं बता सकता कि
- 2:25:08इससे कुछ फायदा होगा भी या नहीं। बस मेरे
- 2:25:11दिमाग में कुछ ख्याल आया तो मैंने सोचा उस
- 2:25:13पर अमल करके देखा जाए। शायद मेरी यह सोच
- 2:25:15सही साबित हो जाए। इससे यह भी पता चल
- 2:25:18जाएगा कि यह बात फायदेमंद रहती है या
- 2:25:20नहीं। शौर्य छगन मगन से यह बोलते हुए उस
- 2:25:23रूम से दूर चला गया। वहां दर्शकों के
- 2:25:25बैठने के लिए जो स्टेयर था वो एक जगह से
- 2:25:27टूट रहा था। शौर्य छगन मगन और उसके
- 2:25:30आदमियों के साथ उस टूटे हुए स्टेयर के
- 2:25:32पीछे चला गया। स्टेयर के बड़े-बड़े टूटे
- 2:25:34टुकड़े नीचे पड़े हुए थे। हमें लगभग एक
- 2:25:37घंटा यहां रुकना पड़ सकता है। तो क्यों ना
- 2:25:39अपने आदमियों से बोलकर यहां बैठने की
- 2:25:41व्यवस्था कर दो। शौर्य वहां गिरी हुई
- 2:25:43ईंटों और पत्थरों को देखता हुआ बोला। छगन
- 2:25:46के आदमी शौर्य का कहने का मतलब समझ गए। तो
- 2:25:48उन्होंने कुछ ईंटों को जमा किया और एक के
- 2:25:51ऊपर दूसरा रखकर ऊंचाई देने के बाद
- 2:25:53उन्होंने स्टेयर के बड़े टुकड़े को उठाकर
- 2:25:55उनके ऊपर रख दिया। जिससे एक बेंच का आकार
- 2:25:58बन गया जिस पर कि अब बैठा जा सकता था।
- 2:26:00शौर्य आगे बढ़कर बेंच पर बैठ गया। छगन मगन
- 2:26:04को अभी भी समझ में नहीं आया वह सब यहां
- 2:26:06बैठकर किसका इंतजार करेंगे। जब छगन और मगन
- 2:26:09ने देखा कि शौर्य आराम से बैठ गया है तो
- 2:26:11मजबूरन वह दोनों भी शौर्य के पास ही बैठ
- 2:26:13गए। पर उन्हें अभी भी यही लग रहा था यहां
- 2:26:16बैठकर किसी का इंतजार करना बेवकूफी ही है।
- 2:26:18इस समय शाम के लगभग 7:00 बज रहे थे। आसमान
- 2:26:21में धीरे-धीरे अंधेरा जाने लगा था। अभी
- 2:26:24शौर्य को वहां बैठे हुए ज्यादा समय नहीं
- 2:26:26हुआ था कि तभी उसका मोबाइल रिंग करने लगा।
- 2:26:29शौर्य ने मोबाइल स्क्रीन की तरफ देखा तो
- 2:26:31उसे उस पर शिप्रा का नाम फ्लैश होते दिख
- 2:26:33रहा था। उसने कॉल को पिक किया तो दूसरी
- 2:26:36तरफ से शिप्रा की शिकायत भरी आवाज आई। तुम
- 2:26:39जब से गए हो तब से एक बार भी फोन नहीं
- 2:26:41किया। तुम तो वहां जाकर मुझे भूल ही गए।
- 2:26:44अरे ऐसा कुछ नहीं है। मैं वापस तो आ गया
- 2:26:46हूं। बस कुछ काम में फंस गया हूं। जल्दी
- 2:26:48ही घर आता हूं। शौर्य ने मुस्कुराते हुए
- 2:26:51शिप्रा को जवाब दिया। तुम्हें मेरी कोई
- 2:26:53फिक्र भी है या नहीं? कम से कम फोन करके
- 2:26:55पूछ तो सकते थे कि मैं कैसी हूं, क्या कर
- 2:26:57रही हूं? शिप्रा की शिकायत कम होने का नाम
- 2:27:00नहीं ले रही थी। तुम भी कैसी बात कर रही
- 2:27:03हो? मैं एक घंटे में तुम्हारे पास आ ही
- 2:27:05रहा हूं। फिर सारी शिकायत दूर कर दूंगा।
- 2:27:07शौर्य ने महसूस किया था कि शिप्रा को
- 2:27:10शौर्य से अब कुछ ज्यादा ही शिकायत हो रही
- 2:27:12थी। क्यों? अभी क्यों नहीं आ सकते? मैं
- 2:27:15इतनी देर तक तुम्हारा इंतजार नहीं कर
- 2:27:16सकती। मेरी तो आंखें तरस गई है तुम्हें
- 2:27:18देखने को। शिप्रा ऐसे भाव में बोली जैसे
- 2:27:21वह कोई बच्ची हो और किसी खिलौने की चाह
- 2:27:24में रूठ गई हो। शौर्य का दिल तो उसके मुंह
- 2:27:26को आ गया। वो अभी जिस स्थिति में बैठा था
- 2:27:29उस स्थिति में अभी उससे कुछ बोला भी नहीं
- 2:27:31जा रहा था। छगन मगन उसके पास ही बैठे हुए
- 2:27:34थे और उसे देख रहे थे। इतना अंदाजा तो छगन
- 2:27:37मगन को भी लग गया था कि फोन के दूसरी तरफ
- 2:27:40शौर्य की वाइफ मौजूद है। शौर्य अभी अगर
- 2:27:43यहां अकेले होता तो वह बहुत कुछ शिप्रा को
- 2:27:45बोलता। पर वह इन लोगों के सामने शिप्रा से
- 2:27:48बात भी नहीं कर पा रहा था। वह अभी वहां से
- 2:27:50कहीं बाहर भी नहीं जा सकता था। उसने थोड़े
- 2:27:52शांत भाव से शिप्रा से कहा, मैं तुम्हें
- 2:27:55थोड़ी देर में फोन करता हूं। अभी थोड़ा
- 2:27:57बिजी हूं। शौर्य के बोलने के भाव से
- 2:28:00शिप्रा समझ गई कि जरूर वो किसी के बीच है
- 2:28:02इसलिए वो ऐसी बात कर रहा है। इसलिए उसने
- 2:28:05पूछा तुम्हारे पास कोई है क्या जो तुम ऐसे
- 2:28:08बात कर रहे हो? हां। शौर्य शिप्रा की बात
- 2:28:11से सहमति जताते हुए बोला, अभी तुम दो दिन
- 2:28:14की शूटिंग खत्म करके आए हो और उसके बाद भी
- 2:28:16किसी और से मिलने चले गए। तुम्हें सबसे
- 2:28:18पहले मेरे पास नहीं आना चाहिए था। शिप्रा
- 2:28:21इस बात से और भी आहत होती हुई बोली।
- 2:28:23शूटिंग पर से आने के बाद भी शौर्य किसी और
- 2:28:26से मिलने चला गया था। यह उसे अच्छा नहीं
- 2:28:27लगा। उसने सोचा अगर वह कहीं और जा रहा था
- 2:28:30तो कम से कम उसे पहले फोन करके आगाह तो कर
- 2:28:33देता। शौर्य खुद को फंसा हुआ सा महसूस कर
- 2:28:36रहा था। वो अभी बोलता भी तो क्या बोलता?
- 2:28:38इसलिए उसने बात को समाप्त करने की नियत से
- 2:28:40कहा, मैं तुमसे बाद में बात करता हूं।
- 2:28:43इतना कहकर शौर्य ने फोन काट दिया। वह अभी
- 2:28:46छगन मगन के सामने शिप्रा से अपने हालात भी
- 2:28:48बयान नहीं कर सकता था। शिप्रा शौर्य की
- 2:28:51हालात समझने की स्थिति में भी नहीं थी।
- 2:28:54शौर्य को अभी यहां इंतजार करते हुए लगभग
- 2:28:5715-20 मिनट ही हुए थे कि तभी उसे स्टेडियम
- 2:29:00की टूटी हुई एक चार दीवारी के पीछे से तीन
- 2:29:04साया सधे कदमों से स्टेडियम के अंदर आता
- 2:29:07दिखाई दिया। इतनी दूर से इन सायों को
- 2:29:09पहचानना मुमकिन नहीं था। पर सॉरी इतना तो
- 2:29:12समझता था कि यह लोग जहांगीर खान के आदमी
- 2:29:15ही होंगे। शौर्य को दिखाई दिया कि आगे-आगे
- 2:29:17जो व्यक्ति चल रहा था, उसके हाथ में कोई
- 2:29:20गैजेट था। जिसको देखकर ही वह आगे बढ़ता जा
- 2:29:23रहा था। इसका मतलब था शौर्य ने जो सोचा था
- 2:29:26वह सही साबित हुआ। शौर्य को पहले ही समझ
- 2:29:29में आ गया था कि जैसे ही वो रूबिया और
- 2:29:31सिकंदर के मोबाइल को ऑन करेगा तो उसका
- 2:29:33नोटिफिकेशन जहांगीर खान के पास जरूर जाएगा
- 2:29:36और वह अपने लोगों का लोकेशन पता करने के
- 2:29:38लिए उसके मोबाइल का लोकेशन पता करके वहां
- 2:29:40आने की कोशिश जरूर करेगा। इतनी छोटी बात
- 2:29:43छगन मगन को समझ नहीं आया था। पर जब उसने
- 2:29:45उन तीनों सायों को उस रूम की तरफ बढ़ते
- 2:29:48देखा जहां उन्होंने मोबाइल छोड़ा था। तब
- 2:29:50जाकर छगन को यह समझ आया कि शौर्य ने क्या
- 2:29:53प्लानिंग किया था। अब क्या करें? बस वे
- 2:29:55लोग तो आ गए और अब वह लोग उसी कमरे की तरफ
- 2:29:58ही जा रहे हैं। छगन शौर्य का चेहरा देखते
- 2:30:00हुए बोला, "चलो, यह अच्छा है कि वह ज्यादा
- 2:30:02लोग नहीं है। तीन ही [संगीत] लोग हैं। तो,
- 2:30:04हमारे लिए उन तीनों पर काबू करना आसान
- 2:30:06होना चाहिए।" शौर्य को यहां आने वालों की
- 2:30:09संख्या तीन ही देखकर आश्चर्य हुआ। उसे लगा
- 2:30:11जरूर जहांगीर खान को अपने आदमियों पर कुछ
- 2:30:14ज्यादा ही भरोसा है। तभी उन्होंने यहां पर
- 2:30:16ज्यादा तामझाम नहीं भेजा है। इतना तो
- 2:30:19शौर्य समझता था कि वह जो तीन लोग हैं
- 2:30:21तीनों अच्छे फाइटर होंगे और सब एक पर एक
- 2:30:24होंगे। इसीलिए छगनगन जैसे व्यक्ति के लिए
- 2:30:26उन पर काबू करना आसान नहीं होने वाला था।
- 2:30:29पर उन्हें पता नहीं था कि शौर्य क्या
- 2:30:31काबिलियत रखता है। शौर्य अपनी जगह से उठा
- 2:30:33और वह उन तीनों के पीछे-पीछे उसे कमरे की
- 2:30:36तरफ बढ़ गया। छगन मगन और उसके साथी भी
- 2:30:38शौर्य के पीछे हो लिए। शौर्य जल्दी ही
- 2:30:41तीनों के पीछे आ गया था। वह इंतजार कर रहा
- 2:30:43था जब वह तीनों उस कमरे में प्रवेश करेंगे
- 2:30:45जिसमें उसने मोबाइल छोड़ा था। उसके बाद ही
- 2:30:48शौर्य कोई एक्शन करेगा। शौर्य यह निश्चित
- 2:30:51कर लेना चाहता था कि उन तीनों को वहां से
- 2:30:53भागने का कोई मौका ना मिले। जिसके लिए उन
- 2:30:56तीनों का उस कमरे में जाना जरूरी था। उन
- 2:30:58तीनों में सबसे आगे चल रहा है शख्स उस
- 2:31:00कमरे के पास पहुंचकर थोड़ा ठहरा। वह वहां
- 2:31:03हो रहे कोई भी आहट का जायजा लेना चाहता
- 2:31:05था। पर चारों तरफ शांति ही छाई रही। जब
- 2:31:07[संगीत] कोई भी आहट उन्हें महसूस नहीं हुई
- 2:31:10तब धीरे से उन्होंने उस कमरे के अंदर कदम
- 2:31:12रखा। कमरा खाली [संगीत] था। वह तीनों फिर
- 2:31:14बिना किसी संकोच के उस कमरे के अंदर चले
- 2:31:17गए। उन्हें सामने एक तख्त पर वो मोबाइल
- 2:31:19रखा नजर आ गया। जैसे ही सामने वाले शख्स
- 2:31:22की निगाह मोबाइल के ऊपर गई, उसके दिमाग
- 2:31:24में बिजली सी कौंधी कि [संगीत] यह एक
- 2:31:26ट्रैप है जिसमें वह फंस गए हैं। शौर्य को
- 2:31:29तो जैसे इसी पल का इंतजार था। वो बिना देर
- 2:31:31किए तुरंत उस दरवाजे के पास पहुंच गया और
- 2:31:33दरवाजे को घेर लिया। जबकि अंदर मौजूद
- 2:31:36तीनों शख्स जब यह समझ गए कि वह ट्रैप में
- 2:31:38फंस गए हैं तो उन्होंने तुरंत उस कमरे से
- 2:31:40बाहर आने की कोशिश नहीं की। वह अब यह
- 2:31:42देखना चाहते थे कि कौन सा आता है। अब तक
- 2:31:45उन्होंने दरवाजे के सामने आहट भी देख लिया
- 2:31:48था। शौर्य के साथ छगन भी दरवाजे पर खड़े
- 2:31:50होकर कमरे के अंदर का नजारा कर रहा था।
- 2:31:53कमरे के अंदर मौजूद सामने वाले शख्स को
- 2:31:55देखकर छगन की निगाह चोरी हो गई। वो धीरे
- 2:31:57से शौर्य के कान के पास फुसफुसाया। बॉस यह
- 2:32:00जो सामने शख्स खड़ा है, यही जहांगीर खान
- 2:32:03है। शौर्य ने यह उम्मीद नहीं किया था कि
- 2:32:05जहांगीर खान स्वयं इतनी आसानी से उसके हाथ
- 2:32:08लग जाएगा। उसने मन में सोचा, चलो, यह भी
- 2:32:10अच्छा है। अब ज्यादा इधर-उधर हाथ पैर नहीं
- 2:32:12मारना पड़ेगा। जबकि जहांगीर खान भी दरवाजे
- 2:32:15के सामने पांच लोगों को ही देखकर हैरान
- 2:32:17था। उसे उम्मीद नहीं था कि उसको ट्रैप में
- 2:32:20फंसाने के लिए शौर्य ने सिर्फ पांच लोगों
- 2:32:22को ही इकट्ठा किया था। जहांगीर खान को लगा
- 2:32:25वो तो आसानी से इन लोगों से निपट लेगा।
- 2:32:27सामने मौजूद लोगों को देखकर जहांगीर खान
- 2:32:29का कॉन्फिडेंस उसके चेहरे पर नजर आने लगा।
- 2:32:32लड़के मुझे तुमसे ऐसी बेवकूफी की उम्मीद
- 2:32:35नहीं थी। तुमने हमारे लिए ट्रैप तो अच्छा
- 2:32:37बिछाया था। पर तुमने यह कैसे सोच लिया कि
- 2:32:39तुम पांच लोग मिलकर ही हमें कंट्रोल कर
- 2:32:41लोगे। जहांगीर खान सामने खड़े शौर्य को
- 2:32:44देखकर उपहास भरे स्वर में बोला, "मैं
- 2:32:46समझता हूं यह तुम्हारे लिए ज्यादती है।
- 2:32:49तुम तीनों के लिए तो मुझे किसी आदमी की
- 2:32:51जरूरत ही नहीं थी।" शौर्य जहांगीर खान को
- 2:32:54देखकर मुस्कुराता हुआ बोला, बातें तो बहुत
- 2:32:57बड़ी-बड़ी बोल रहे हो, पर तुम्हें पता
- 2:32:59होना चाहिए कि हमारा एक आदमी ही तुम
- 2:33:01पांचों पर भारी पड़ने वाला है। जहांगीर
- 2:33:03खान अपने दाएं साइड खड़े शख्स को कुछ
- 2:33:06इशारा करते हुए बोला। जहांगीर खान का
- 2:33:08इशारा करना था और वह शख्स तेजी से दरवाजे
- 2:33:11की तरफ भागा। उसने शौर्य की तरफ छलांग लगा
- 2:33:13दिया। शौर्य को उम्मीद नहीं था कि जहांगीर
- 2:33:16खान यूं अचानक अपने आदमी को उस पर हमला
- 2:33:18करने के लिए बोल देगा। शौर्य ने झुककर खुद
- 2:33:20को बचाया। पर वो शख्स शौर्य के ऊपर से
- 2:33:23उड़ता हुआ उसके पीछे खड़े मगन से जाकर
- 2:33:25टकराया और मगन पीछे जाकर गिरा। मगन को
- 2:33:28अपनी छाती की हड्डी टूटा हुआ सा लगा और वो
- 2:33:30शख्स जिसने हमला किया था अभी भी अपने
- 2:33:33पैरों पर खड़ा था। जबकि शौर्य उससे दो-चार
- 2:33:35कदम आगे कमरे के अंदर आ गया था। मगन के
- 2:33:38गिरने के बाद छगन अपने दोनों शागिर्दों के
- 2:33:40साथ लड़ने की पोजीशन लेकर उस शख्स के
- 2:33:43सामने खड़ा हो गया। पर उस शख्स ने उड़ती
- 2:33:45हुई निगाह छगन और उसके साथियों पर डाली और
- 2:33:47कमरे के अंदर की तरफ पलट कर वो शौर्य की
- 2:33:50तरफ देखने लगा। उसके चेहरे पर हैरानी के
- 2:33:52भाव था कि उसके हमले से शौर्य बच गया था।
- 2:33:55पर एक बार फिर से उसका निशाना शौर्य ही
- 2:33:57होने वाला था। उसने छगन और उसके साथियों
- 2:33:59पर तो ध्यान देना भी जरूरी नहीं समझा।
- 2:34:01उसने एक बार फिर से शौर्य के ऊपर छलांग
- 2:34:03लगाया। पर इस बार शौर्य तैयार खड़ा था।
- 2:34:06उसने हवा में ही उस शख्स का पैर पकड़ा और
- 2:34:08उसका पैर पकड़े हुए हवा में ही अपने चारों
- 2:34:10तरफ घुमाते हुए हैमर थ्रो की तरह उसको
- 2:34:13दीवार की तरफ फेंक दिया। वो शख्स तेज गति
- 2:34:15से जाकर दीवार से टकराया और नीचे फर्श पर
- 2:34:18गिर गया। वो इतनी तेजी से दीवार से टकराया
- 2:34:20था कि देखने से लग रहा था जरूर उसके शरीर
- 2:34:23का कोई ना कोई हड्डी जरूर टूट गया होगा।
- 2:34:25जहांगीर खान को जो शौर्य अभी एक मामूली
- 2:34:28बरबोला इंसान लग रहा था। शौर्य का यह
- 2:34:30अंदाज देखकर उसकी आंखें फैल गई। उसे
- 2:34:32उम्मीद नहीं था कि शौर्य इतनी आसानी से
- 2:34:34उसके आदमी को यूं धूल चटा देगा। उसने सोचा
- 2:34:37कि उसने शौर्य को कुछ ज्यादा ही
- 2:34:39अंडरएस्टिमेट कर लिया है। उसने दीवार के
- 2:34:41पास मौजूद अपने आदमी की तरफ देखा। वो जमीन
- 2:34:43से उठने की कोशिश कर रहा था। जिसमें कि वो
- 2:34:46बहुत तकलीफ महसूस कर रहा था। लड़के मुझे
- 2:34:48मानना पड़ेगा कि मैंने तुम्हें
- 2:34:49अंडरएस्टीमेट किया था। पर क्या तुम्हें
- 2:34:51लगता है कि तुम मेरा सामना कर पाओगे? तुम
- 2:34:53मुझे जानते नहीं हो। अब तुम्हारे साथ जो
- 2:34:55भी होगा उसके लिए तुम खुद जिम्मेदार होगे।
- 2:34:58जहांगीर खान दो कदम आगे बढ़कर शौर्य के
- 2:35:01सामने आते हुए बोला, "मैंने सुना है मेरे
- 2:35:03आदमी बोल रहे थे कि तुम [संगीत] जहांगीर
- 2:35:05खान हो। शैडो बॉक्सर क्लब के मास्टर। आज
- 2:35:08तो मैं भी देखना चाहूंगा कि तुम्हारे अंदर
- 2:35:10मास्टर बनने लायक कुछ है भी या यूं ही तुम
- 2:35:12यहां के फन्ने खान बने हुए हो। शौर्य भी
- 2:35:14जहांगीर खान के सामने अपना पोजीशन लेते
- 2:35:16हुए बोला। इतना तो वह समझ गया था कि सामने
- 2:35:19मौजूद शख्स बाकी प्रतिद्वंदियों की तरह
- 2:35:21उसके लिए आसान नहीं होने वाला। अगर वह
- 2:35:23किसी क्लब का मास्टर है तो [संगीत] इसका
- 2:35:25मतलब है उसके अंदर कुछ ना कुछ विशेष
- 2:35:27काबिलियत तो जरूर होगी। पर शौर्य इस बात
- 2:35:30से हार नहीं मान सकता था। शौर्य अपनी तरफ
- 2:35:32से खुद पहल नहीं करने वाला था। वो इंतजार
- 2:35:34कर रहा था कि जहांगीर खान खुद उस पर हमला
- 2:35:37करने की पहल करे। वो पहले जहांगीर खान की
- 2:35:39पूरी स्किल का जायजा लेना चाहता था। उसके
- 2:35:42बाद ही वह अपना कदम उठाना चाहता था। इसलिए
- 2:35:44वह अपनी नजर जहांगीर खान के हर एक मूवमेंट
- 2:35:46पर जमाए हुए था। जहांगीर खान ने ज्यादा
- 2:35:49इंतजार नहीं कराया। उसने फुर्ती से अपने
- 2:35:51दाएं हाथ का हमला शौर्य के चेहरे की तरफ
- 2:35:53कर दिया। शौर्य ने उसके हमले को ब्लॉक
- 2:35:56करने के लिए अपना हाथ आगे किया। पर यह
- 2:35:58क्या? जहांगीर खान का दाया हाथ तो अपनी
- 2:36:00जगह पर ही रहा। उसका बाया हाथ तेजी से आगे
- 2:36:03आ गया और शौर्य के पेट पर लगा। शौर्य के
- 2:36:06पेट में दर्द की एक तेज लहर दौड़ गई।
- 2:36:08शौर्य [संगीत] ने यह उम्मीद नहीं किया था
- 2:36:10कि यूं बीच हमले में ही जहांगीर खान अपना
- 2:36:12एक्शन चेंज कर लेगा। यह जहांगीर खान की
- 2:36:14तरफ से एक अच्छा मूव था। शौर्य के लिए
- 2:36:16अच्छी बात यह रही कि बीच हमले में अपना
- 2:36:18एक्शन चेंज करने के बाद जहांगीर खान
- 2:36:21[संगीत] के इस हमले की इंटेंसिटी थोड़ी कम
- 2:36:23हो गई थी। इसके कारण शौर्य को कोई ज्यादा
- 2:36:25नुकसान नहीं हुआ। शौर्य अपनी जगह से दो
- 2:36:28कदम पीछे हो गया था। उसने अपने आप को
- 2:36:30संतुलित करने में थोड़ा समय लिया। अब हो
- 2:36:32रही थी शौर्य की असली लड़ाई। जहांगीर खान
- 2:36:35की आंखों में शौर्य के लिए आश्चर्य नजर
- 2:36:37आया। उसे उम्मीद नहीं था कि शौर्य इतनी
- 2:36:40जल्दी खुद को व्यवस्थित कर लेगा [संगीत]
- 2:36:42क्योंकि उसने सोचा जैसे ही शौर्य थोड़ा
- 2:36:45कमजोर पड़ेगा वो अपना अगला मूव कर देगा।
- 2:36:48पर शौर्य ने दर्द में होते हुए भी दो कदम
- 2:36:50पीछे हटकर जहांगीर खान के अगले मुंह को
- 2:36:53नाकाम कर दिया था। लड़के मानना पड़ेगा।
- 2:36:57तुम में काबिलियत तो है। पर फिर भी तुम
- 2:37:00कितनी देर तक मेरे सामने टिक पाओगे?
- 2:37:02जहांगीर खान फीकी हंसी-हंसते हुए बोला।
- 2:37:05शौर्य पर तंज करते हुए जहांगीर खान थोड़ा
- 2:37:07लापरवाह नजर आया और इसी समय शौर्य ने अपनी
- 2:37:10फुर्ती दिखाई और सामने जमीन पर [संगीत]
- 2:37:12जंप लेते हुए अपने हाथों पर चक्कर घिन्नी
- 2:37:15की तरह घूम गया और उसका पैर जाकर सीधा
- 2:37:17जहांगीर खान के पैर से टकराया और जहांगीर
- 2:37:20खान के पैर ने जमीन को छोड़ दिया। वो धम्म
- 2:37:23से जमीन पर गिरा। यह तो शुक्र था कि जमीन
- 2:37:26पर गिरते हुए जहांगीर खान ने सर के सामने
- 2:37:28अपना हाथ हड़ा लिया जिससे उसका सर टूटने
- 2:37:30से बच गया। पर चोट तो उसे फिर भी अच्छा
- 2:37:33खासा लगा था। शौर्य फिर से अपना पोजीशन
- 2:37:36लेकर जहांगीर खान के सामने खड़ा हो गया।
- 2:37:38जहांगीर खान ने भी खुद को जल्दी से संभाल
- 2:37:41लिया था। छगन मगन और उसके साथी आश्चर्य से
- 2:37:44श और जहांगीर खान का मुकाबला देख रहे थे।
- 2:37:47छगन ने सोचा नहीं था कि शौर्य मार्शल आर्ट
- 2:37:49में इतना माहिर है क्योंकि वो जहांगीर खान
- 2:37:51के बारे में जानता था। वो विशालगढ़ के
- 2:37:54अच्छे फाइटरों में से एक था और उसके शैडो
- 2:37:56बॉक्सर क्लब का अच्छा खासा नाम भी
- 2:37:57विशालगढ़ में था। जहांगीर खान का चेहरा
- 2:38:00गुस्से में लाल था। शौर्य से यह चोट खाकर
- 2:38:03उसके अहम को ठेस पहुंचा था। इतने छोटे
- 2:38:06लड़के से यूं मुंह की खाना उसे बर्दाश्त
- 2:38:08नहीं हो रहा था। इसलिए उसने इस बार गुस्से
- 2:38:10में बिना कुछ सोचे समझे शौर्य की तरफ
- 2:38:13छलांग लगा दिया। जहांगीर खान की फुर्ती
- 2:38:15देखने लायक थी। शौर्य को जहांगीर खान से
- 2:38:18बचने का कोई रास्ता नजर नहीं आया। तो उसने
- 2:38:20अपने दोनों हाथों को ढाल की तरह अपने
- 2:38:22चेहरे के सामने कर लिया और इसी समय
- 2:38:25जहांगीर खान का घुटना उसके चेहरे के सामने
- 2:38:27मौजूद दोनों हाथों से टकराया। टक्कर भीषण
- 2:38:30था। शौर्य 5 फीट पीछे जाकर गिरा। पर इस
- 2:38:34फुर्ती से शौर्य फिर से अपनी जगह पर खड़ा
- 2:38:36भी हो गया। उसको ऐसा लगा जैसे उसके हाथों
- 2:38:38पर कोई हथौड़ा टकराया हो। अगर उसने सही
- 2:38:41समय पर अपना हाथ अपने चेहरे के सामने नहीं
- 2:38:43कर लिया होता तो उसका चेहरा बिगड़ गया
- 2:38:45होता। शौर्य ने गहरी नजरों से जहांगीर खान
- 2:38:48की तरफ देखा। जहांगीर खान इस समय वहां पर
- 2:38:51खड़ा था, जहां पर थोड़ी देर पहले शौर्य
- 2:38:53खड़ा था। जहांगीर खान के वार ने शौर्य को
- 2:38:565 फीट पीछे फेंक दिया था। शौर्य ने
- 2:38:58जहांगीर खान के घुटने की तरफ ध्यान दिया।
- 2:39:01उसने महसूस किया कि जहांगीर खान भी अपनी
- 2:39:03जगह पर सहज रूप से खड़ा नहीं था। भले ही
- 2:39:06उसने अपने बार से शौर्य को 5 फीट दूर फेंक
- 2:39:09दिया था, पर उसके हाथों का वार भी तो
- 2:39:11जहांगीर खान के घुटने को सहना पड़ा था।
- 2:39:13शौर्य ने हल्का कंपन जहांगीर खान के घुटने
- 2:39:16में साफ [संगीत] महसूस किया था। शौर्य को
- 2:39:18अपना टारगेट मिल गया था। वो समझ गया था कि
- 2:39:21उसे क्या [संगीत] करना है। अब हमले की
- 2:39:23बारी शौर्य की थी। शौर्य ने किसी एथलीट की
- 2:39:26तरह जमीन पर पलटी मारा। उसने ऐसा जाताया
- 2:39:29जैसे वो अपने पैर का वार जहांगीर खान के
- 2:39:31सर पर करने वाला है। पर जैसे ही वह
- 2:39:34जहांगीर खान के पास पहुंचा, उसने एक बार
- 2:39:36फिर से जमीन पर फिरकी ली और चकरी की तरह
- 2:39:39घूमते हुए अपना किक जहांगीर खान के घुटने
- 2:39:41पर दे मारा। घुटने पर की यह दोहरी मार
- 2:39:44जहांगीर खान बर्दाश्त नहीं कर पाया। वो एक
- 2:39:46बार फिर से जमीन पर गिर गया। इस बार शौर्य
- 2:39:49ने जहांगीर खान को फिर से दूसरा मौका नहीं
- 2:39:51दिया। जहांगीर खान के जमीन पर गिरते ही
- 2:39:54उसने अपने हाथ का पंच उसके चेहरे पर दे
- 2:39:56मारा। जहांगीर खान के नाक से खून आ गया।
- 2:40:00अभी जहांगीर खान जमीन पर गिरा ही था कि
- 2:40:02शौर्य फुर्ती से उसके सामने खड़ा हो गया
- 2:40:04और जहांगीर खान के उठने का इंतजार करने
- 2:40:07लगा। अब वह जहांगीर खान को कोई मौका नहीं
- 2:40:09देना चाहता था क्योंकि वह समझ गया कि अगर
- 2:40:12एक बार फिर से जहांगीर खान को मौका मिल
- 2:40:14गया तो वह फिर शौर्य को दूसरा मौका नहीं
- 2:40:16देगा। जहांगीर खान ने उठने की कोशिश की और
- 2:40:20इसी समय शौर्य ने अपने घुटने का वार
- 2:40:22जहांगीर खान के पेट पर कर दिया। खड़ा होता
- 2:40:25हुआ जहांगीर खान फिर से जमीन पर दोहरा
- 2:40:28होकर बैठ गया। यह वार इतना घातक था कि अब
- 2:40:31वह सीधा खड़ा होने की हिम्मत नहीं कर सकता
- 2:40:33था। जहांगीर खान को ऐसा लगा जैसे उसकी पेट
- 2:40:36की सारी आतें एक दूसरे में उलझ गई हो।
- 2:40:39अपने मास्टर का यह हाल होते देखकर जहांगीर
- 2:40:42खान के पीछे खड़ा उसका दूसरा शागिर्द अपने
- 2:40:45इमोशंस पर कंट्रोल नहीं कर पाया और उसने
- 2:40:48शौर्य पर छलांग लगा दी। उसको अपनी तरफ आते
- 2:40:51देखकर शौर्य ने खड़े-खड़े अपनी जगह से
- 2:40:54घुमाकर एक किक उसको मारा और जहांगीर खान
- 2:40:57का वो दूसरा शागिर्द भी किसी फुटबॉल की
- 2:41:00तरह उछल कर दूर जाकर गिरा और दोबारा अपनी
- 2:41:03जगह से उठ नहीं पाया। शौर्य ने छगन को
- 2:41:06इशारा किया तो छगन अपने दोनों चेलों के
- 2:41:09साथ आकर जहांगीर खान को मजबूती से पकड़
- 2:41:12लिया। उसने अपनी जेब से एक मजबूत
- 2:41:14प्लास्टिक की रस्सी निकाली और जहांगीर खान
- 2:41:16का हाथ उसके पीछे करके बांध दिया ताकि वह
- 2:41:19दोबारा फिर से कोई हरकत ना कर पाए।
- 2:41:21जहांगीर खान के चेहरे पर अविश्वास के भाव
- 2:41:23था। उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि वह एक
- 2:41:26जवान लड़के से हार गया था। शौर्य के पास
- 2:41:29अभी समय नहीं था। शिप्रा उसका इंतजार कर
- 2:41:32रही थी। इसलिए उसे जल्दी जाना था। उसने
- 2:41:34जहांगीर खान और उसके शागिर्दों को छगन मगन
- 2:41:37के हवाले किया और यह बोलकर वहां से निकल
- 2:41:39गया कि वह दूसरे दिन आकर उनसे पूछताछ
- 2:41:42करेगा। तब तक छगन मगन उन सभी को ले जाकर
- 2:41:45अपने अड्डे पर कैद कर ले। जहांगीर खान और
- 2:41:48उसके गुरों को छगन मगन को सौंपने के बाद
- 2:41:51शौर्य ने शिप्रा को फोन लगाया। शिप्रा भी
- 2:41:54कनिका और उसके भाई को विदा करके मॉडल टाउन
- 2:41:57वाले घर के लिए निकल गई थी। वो शौर्य के
- 2:41:59फोन का ही इंतजार कर रही थी। उसे शौर्य पर
- 2:42:02गुस्सा भी आ रहा था कि शूटिंग से आने के
- 2:42:04बाद वह कहीं और बिजी हो गया था। शौर्य का
- 2:42:07फोन आने पर उसने उसे शिकायती लहजे में
- 2:42:09कहा, अब हो गए फ्री। हां, तुम
- 2:42:12[गला साफ़ करने की आवाज़] बताओ तुम कहां
- 2:42:13हो? शौर्य उत्साहित स्वर में बोला, "अभी
- 2:42:16यह पूछने की क्या जरूरत है?" देख लो कोई
- 2:42:19और काम रह गया होगा तो पहले वो निपटा लो।
- 2:42:21मैं कहां जा [संगीत] रही हूं? शिप्रा तंज
- 2:42:23भरे स्वर में बोली। शौर्य समझ गया कि
- 2:42:26शिप्रा फिर से उससे नाराज हो गई है। वो
- 2:42:28फिर से उसकी नाराजगी मोल नहीं ले सकता था।
- 2:42:31इसलिए खुशामदी स्वर में बोला, [संगीत] "यह
- 2:42:33तुम कैसी बात कर रही हो? तुमसे ज्यादा
- 2:42:35जरूरी मेरे लिए क्या हो सकता है?" तुम यह
- 2:42:38तो बताओ इस समय तुम कहां हो? शिप्रा पहले
- 2:42:40से ही शौर्य से दो दिनों से दूर थी।
- 2:42:42[संगीत] इसलिए वह ज्यादा अभी नाराजगी भी
- 2:42:44शो नहीं कर सकती थी कि कहीं फिर से वह
- 2:42:46कहीं और ना बिजी हो जाए। इसलिए वह बोली,
- 2:42:50कितना इंतजार करती? अब तो मैं घर पहुंचने
- 2:42:52वाली हूं। क्या तुम वापस पैराडाइज होटल आ
- 2:42:54सकती हो? मुझे भूख भी लग रही है। साथ में
- 2:42:57खाना खाएंगे? शौर्य सकुचाते हुए बोला। वह
- 2:43:01चाह रहा था कि बाहर साथ में खाना खाकर वो
- 2:43:03शिप्रा की नाराजगी को दूर कर सकता है। मैं
- 2:43:07खाना खा चुकी हूं। अब मुझे नहीं खाना है।
- 2:43:09तुम अपना देख लो। तुमको जो करना है वो
- 2:43:12करो। शिप्रा ने रूखा सा जवाब दिया। अच्छा।
- 2:43:16शौर्य के मुंह से इतना ही निकला। फिर आगे
- 2:43:18कुछ और बोलने की उसकी हिम्मत नहीं हुई।
- 2:43:21उसने फोन रख दिया और सोचा अब क्या [संगीत]
- 2:43:23करें? जिस बात के लिए उसने जल्दी किया कि
- 2:43:26वह शिप्रा से जाकर मिलेगा, उसका ठंडा
- 2:43:28रिस्पांस देखकर उसका उत्साह खत्म हो गया।
- 2:43:31उसने सोचा वह अकेले होटल पैराडाइज चला जाए
- 2:43:34और खाना खाने के बाद फिर घर जाए क्योंकि
- 2:43:36[संगीत] घर पहुंचते-पहुंचते ज्यादा रात हो
- 2:43:38जानी थी और उस समय गिरजा से खाना बनवाना
- 2:43:41सही नहीं था। उसने यही किया। पहले होटल
- 2:43:44गया और खाना खाने के बाद वह घर पहुंचा। घर
- 2:43:47पहुंचते-पहुंचते रात के 11:00 बज गए थे।
- 2:43:50गिरजा ने जब उसको घर आते देखा तो पूछा भी
- 2:43:53कि क्या वह खाना बना दे? पर शौर्य ने मना
- 2:43:55कर दिया। वो शिप्रा के कमरे के बाहर
- 2:43:57पहुंचा। उसने दरवाजे पर हल्का धक्का दिया।
- 2:44:00पर दरवाजा अंदर से बंद था। ऐसा कम ही होता
- 2:44:04था कि शिप्रा अपने कमरे का दरवाजा बंद
- 2:44:06करके सोती थी। पर आज शौर्य से नाराजगी
- 2:44:08जाहिर करने का उसका यही तरीका था। शौर्य
- 2:44:12ने दरवाजे पर दस्तक दिया। पर अंदर से कोई
- 2:44:14आहट नहीं हुई। उसने सोचा कि क्या शिप्रा
- 2:44:17सो गई है? उसने घड़ी की तरफ देखा। [संगीत]
- 2:44:2011 से ज्यादा बज रहे थे। अगर वह सो भी गई
- 2:44:23होगी तो कोई बड़ी बात नहीं थी। शौर्य ने
- 2:44:26दोबारा दरवाजे पर दस्तक दी तो अंदर से
- 2:44:28शिप्रा की आवाज आई। कौन है? मैं हूं।
- 2:44:32शौर्य धीरे से बोला। [संगीत] वह नहीं
- 2:44:34चाहता था कि घर में किसी और को पता चले कि
- 2:44:37वह शिप्रा के दरवाजे के बाहर खड़ा है।
- 2:44:39क्या है? दरवाजा क्यों पीट रहे हो? शिप्रा
- 2:44:42का रूखा स्वर सुनाई दिया। दरवाजा खोलो।
- 2:44:46मुझे सोना है। [संगीत] शौर्य हिम्मत करके
- 2:44:48बोला, मैं सो रही हूं। मैं अभी उठ नहीं
- 2:44:51सकती। शिप्रा का भावलेस स्वर सुनाई दिया।
- 2:44:55शिप्रा जब एक बार नाराज हो जाती थी, तो
- 2:44:57फिर उसे मनाना बड़ा मुश्किल होता था।
- 2:44:59शौर्य ने एक दो बार और दरवाजे पर दस्तक
- 2:45:02दी। पर उसके बाद अंदर से कोई आहट सुनाई
- 2:45:04नहीं दिया। इसका मतलब अब शिप्रा जानबूझकर
- 2:45:07शौर्य को इग्नोर कर रही थी। शौर्य समझ गया
- 2:45:11कि अभी कुछ भी करने का कोई फायदा नहीं है।
- 2:45:13थक कर वह वापस अपने कमरे में ही चला गया।
- 2:45:16कमरे में आकर शौर्य सोचा अगर पहले पता
- 2:45:19होता कि घर आकर भी शिप्रा की नाराजगी ही
- 2:45:21झेलनी है तो वह छगन के अड्डे पर ही चला
- 2:45:23जाता। वह जहांगीर खान से पता करने की
- 2:45:25कोशिश ही करता कि उसको मारने की सुपारी
- 2:45:28उसे किसने दी। उसने एक बार को [संगीत]
- 2:45:30सोचा कि क्या वह अभी दोबारा चला जाए? उसने
- 2:45:33एक बार फिर से घड़ी पर निगाह डाली। 11:30
- 2:45:36होने वाले थे। अगर वह अभी छगन के अड्डे के
- 2:45:39लिए निकलता भी है तो वहां पहुंचते-पहुंचते
- 2:45:4112:00 बज जाएंगे। इतनी रात को दूसरों की
- 2:45:44नींद खराब करना सही नहीं है। यह सोचकर
- 2:45:47उसने अभी जाने का अपना विचार बदल दिया।
- 2:45:49उसने अपने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद
- 2:45:52किया और अपने बिस्तर पर चला गया।
- 2:45:55बिस्तर पर परेपरे वो शिप्रा के व्यवहार के
- 2:45:58बारे में सोचने लगा। उसका व्यवहार अभी भी
- 2:46:01पूरी तरह बच्चों वाला था। किसी से नाराज
- 2:46:04तो वो [संगीत] यूं चुटकियों में हो जाती
- 2:46:06है। शिप्रा के व्यवहार के बारे में सोचकर
- 2:46:09शौर्य के चेहरे पर एक मुस्कान खिल गई। वो
- 2:46:12शिप्रा के बारे में सोचते हुए सोने की
- 2:46:14कोशिश करने लगा। दूसरी तरफ शिप्रा अपने
- 2:46:18कमरे में शौर्य से यह बोल तो दी कि वह सो
- 2:46:21रही है और उठकर अपना दरवाजा नहीं खोल
- 2:46:23सकती। पर वो उम्मीद कर रही थी कि शौर्य
- 2:46:26उसे मनाने की कोशिश करता रहे। उसके बोलने
- 2:46:29के बाद भी दरवाजे पर दो और दस्तक हुई। पर
- 2:46:32जब अंदर से कोई रिस्पांस नहीं मिला तो
- 2:46:34शौर्य अपने कमरे में चला गया।
- 2:46:36शिप्रा अपने बिस्तर पर करवट बदलती रही।
- 2:46:39नींद तो वैसे ही उसकी आंखों में नहीं थी।
- 2:46:41वो तो बस शौर्य को तड़पाना चाहती थी। जब
- 2:46:44उसने देखा कि दोबारा फिर से कमरे के बाहर
- 2:46:46से कोई आहट नहीं आ रही है तो उसकी बेचैनी
- 2:46:49बढ़ने लगी। वो तो वापस आने के बाद शौर्य
- 2:46:52का चेहरा देख भी नहीं पाई थी। इतनी जल्दी
- 2:46:55शौर्य का अपने कमरे में चले जाना अब उसको
- 2:46:57बर्दाश्त नहीं हो रहा था। अब उसे खुद पर
- 2:47:00ही खिंच आने लगी कि उसके मना करने के बाद
- 2:47:03भी जब शौर्य ने दो बार और दरवाजे पर दस्तक
- 2:47:05दी थी तो तभी उसको उसका दरवाजा खोल देना
- 2:47:08चाहिए था। पर अपनी ईगो के चक्कर में उसने
- 2:47:10[संगीत] यह मौका गवा दिया। जब उससे और
- 2:47:13बिस्तर पर रहना संभव नहीं हुआ तो वह
- 2:47:15बिस्तर से उठ गई। उसने जाकर अपना दरवाजा
- 2:47:17खोला और शौर्य के कमरे के सामने आकर खड़ी
- 2:47:20हो गई। पहले तो उसने कमरे के अंदर की आहट
- 2:47:23लेने की कोशिश की। पर अंदर एकदम शांति छाई
- 2:47:26थी। शिप्रा ने मन में सोचा क्या वो इतनी
- 2:47:29जल्दी सो गया है? उसकी नींद हराम कर वो तो
- 2:47:32सोएगा ही। थोड़ी देर वो उसी अवस्था में
- 2:47:35खड़ी रही। फिर सोचा एक बार शौर्य को देखने
- 2:47:38के बाद वो वापस अपने कमरे में चली जाएगी।
- 2:47:41उसने शौर्य के कमरे के दरवाजे को अंदर की
- 2:47:43तरफ धक्का दिया। पर यह क्या? दरवाजा तो
- 2:47:46अंदर से बंद था। क्या शौर्य उससे बदला ले
- 2:47:49रहा है कि उसने अपने कमरे का दरवाजा बंद
- 2:47:52कर रखा था? शिप्रा कशमकश की स्थिति में
- 2:47:55दिखाई [संगीत] देने लगी। उसने खुद के मन
- 2:47:57को मारकर दरवाजे पर दस्तक दिया। पर अंदर
- 2:48:00से कोई आवाज नहीं आई। शौर्य अपने बिस्तर
- 2:48:02पर पड़ा रहा पर कोई हरकत नहीं की। जब
- 2:48:05दो-तीन दस्तक के बाद भी दरवाजा नहीं खुला
- 2:48:07तो शिप्रा की बेचैनी और बढ़ गई। उसे समझ
- 2:48:10नहीं आया कि अब वो क्या करें। क्या शौर्य
- 2:48:13सच में इतनी जल्दी सो गया? देखो तो उसकी
- 2:48:16नींद हराम करके खुद मजे से सो गया। वो
- 2:48:19वापस कमरे में आई। वो बिस्तर पर ना जाकर
- 2:48:22कमरे में ही टहलने लगी। उसने सोचा क्या वो
- 2:48:25उसको फोन करें। पर इस बात के लिए उसके दिल
- 2:48:27ने गवारा नहीं किया। वो टहलते हुए अपने
- 2:48:30कमरे से लगी गैलरी में आ गई। उसने गैलरी
- 2:48:33से जो दरवाजा शौर्य के कमरे में जा रही थी
- 2:48:35उस पर हाथ रखा तो दरवाजा अंदर की तरफ चला
- 2:48:38गया। इसका मतलब यह दरवाजा खुला हुआ था।
- 2:48:41[संगीत] वो धीरे से कमरे में बिना किसी
- 2:48:44आहट के प्रवेश की। उसने दरवाजे को फिर से
- 2:48:46बंद किया और अपनी आंखों को मिचमचाकर
- 2:48:49अंधेरे में देखने का अभ्यस्त किया। उसने
- 2:48:52देखा शौर्य बिस्तर पर सोया हुआ था। सांसों
- 2:48:55के साथ उसका सीना ऊपर नीचे हो रहा था। एक
- 2:48:58पल के लिए वह असमंजस में रही। उसके बाद वो
- 2:49:02शौर्य के बिस्तर के पास गई। उसने गौर से
- 2:49:04शौर्य के चेहरे की तरफ देखा तो उसका मन
- 2:49:07किया कि वो उसके पास जाकर उसको किस कर ले।
- 2:49:10पर अगले ही पल उसका अहम जाग गया कि वो
- 2:49:12क्यों उसके पास जाए। शौर्य को उसके पास
- 2:49:15आना चाहिए था। पर वह तो घोड़े बेचकर सो
- 2:49:18रहा है। उसका मन किया कि जब वह जाग रही है
- 2:49:21तो उसे भी जगा दे। पर उसकी हिम्मत नहीं
- 2:49:24हुई। जब थोड़ी देर वह शौर्य को देखती रही
- 2:49:27तो अब उसको खुद को खड़ा रखना मुश्किल लगने
- 2:49:29लगा। वो कमरे में यह सोच कर आई थी कि एक
- 2:49:32बार शौर्य को देखने के बाद वो वापस अपने
- 2:49:34कमरे में चली जाएगी। पर अब यह काम उसे
- 2:49:37मुश्किल लगने लगा। वो जाकर शौर्य के करीब
- 2:49:40बेड पर बैठ गई। उसका मन किया कि वह शौर्य
- 2:49:43को हिलाकर उठा दे। पर अगले ही पल उसे लगा
- 2:49:46नहीं यह दो दिनों का थका हारा आया है।
- 2:49:48इसलिए इसका सोना ही सही है। शिप्रा ने
- 2:49:51अपने मन में निश्चय किया कि अब वो इसी
- 2:49:53कमरे में सोएगी। वो शौर्य के बगल में लेट
- 2:49:56गई और शौर्य के चेहरे की तरफ देखने लगी।
- 2:49:59वो शौर्य से गुस्सा तो बहुत थी पर उसको
- 2:50:02नींद में देखकर उसका सारा गुस्सा उड़नछू
- 2:50:04हो गया। उसका मन तो उसकी बाहों में जाने
- 2:50:07को मचलने लगा। शिप्रा से रहा नहीं गया तो
- 2:50:10वह शौर्य के और करीब चली गई। उसने अपना सर
- 2:50:14उसके सीने पर रख लिया और उसके शरीर को
- 2:50:17अपनी बाहों में भर लिया। अब जाकर उसके दिल
- 2:50:20को चैन मिला था। शौर्य की गर्म सांसे
- 2:50:22शिप्रा के मस्तक को छू रही थी। शिप्रा ने
- 2:50:25सर उठाकर देखा कि कहीं शौर्य जाग तो नहीं
- 2:50:28रहा है। पर शौर्य निश्चल पड़ा रहा। उसने
- 2:50:31उचक कर शौर्य के होठों पर एक किस ले लिया
- 2:50:33और फिर से उसके सीने पर अपना सर रख लिया।
- 2:50:36जहां शिप्रा यह सब हरकत कर रही थी, उस समय
- 2:50:39शौर्य जाग रहा था। पर वह ऐसा ही जता रहा
- 2:50:42था जैसे वह गहरी नींद में है। शिप्रा का
- 2:50:45समीप्य शौर्य की बेचैनी बढ़ा रही थी। पर
- 2:50:47उसे पता था कि अगर शिप्रा को पता चल गया
- 2:50:50कि वह सिर्फ सोने का नाटक कर रहा है तो
- 2:50:52दोबारा उसको उसके गुस्से का सामना करना
- 2:50:54पड़ेगा। इसलिए शौर्य जगे होने के बावजूद
- 2:50:56भी सोने का नाटक करता रहा। जबकि शिप्रा
- 2:50:59शौर्य के सीने से लगकर सो गई और शौर्य
- 2:51:02सोने का नाटक करते हुए [संगीत] जागता ही
- 2:51:04रह गया। सवेरे शिप्रा की नींद खुली तो वह
- 2:51:07शौर्य के सीने पर ही थी। उसने जी भरकर
- 2:51:09शौर्य के चेहरे को देखा। अब तक उसके दिल
- 2:51:12का गुबार थोड़ा शांत हो गया था। उसने कसकर
- 2:51:14शौर्य को अपनी बाहों में भी लिया। वो
- 2:51:17शौर्य के उठने का इंतजार करने लगी। शौर्य
- 2:51:20की भी आंखें जाने कब लग गई थी। शिप्रा के
- 2:51:22उसको कसकर बाहों में भीने से शौर्य की
- 2:51:24नींद तो खुल गई थी। पर उसने शिप्रा को पता
- 2:51:27नहीं चलने दिया कि वो जाग गया है। वो उसके
- 2:51:29बिस्तर से उठने का इंतजार करने लगा। पर
- 2:51:32शिप्रा तो जैसे कसम खा ले रही थी कि वह
- 2:51:34शौर्य के बिस्तर छोड़ने के बाद ही उठेगी।
- 2:51:37शिप्रा बेड पर उठकर बैठ गई थी। वह सिरहाने
- 2:51:39से टेक लगाकर शौर्य को देखे जा रही थी।
- 2:51:42तभी उसने महसूस किया कि बाहर गिरजा उसके
- 2:51:45कमरे के दरवाजा खटखटा रही है। शिप्रा
- 2:51:47शौर्य के कमरे में बालकनी के रास्ते आई
- 2:51:49थी। इसलिए गिरजा तो यही समझ रही होगी कि
- 2:51:52शिप्रा अपने कमरे में है। शिप्रा जल्दी
- 2:51:54बेड से उठी और बालकनी के रास्ते अपने कमरे
- 2:51:56में पहुंच गई। जबकि शौर्य शिप्रा के उसके
- 2:51:59कमरे से जाते ही बेड से उठ गया और फ्रेश
- 2:52:01होने के लिए बाथरूम में चला गया। उसे समझ
- 2:52:04नहीं आ रहा था कि वह शिप्रा से इतना क्यों
- 2:52:06डर रहा है। बाथरूम से निकलने के बाद वो
- 2:52:08कमरे में रुका नहीं और नीचे डाइनिंग रूम
- 2:52:10में आ गया। जहां मेघा पहले से बैठी चाय पी
- 2:52:13रही थी। उसने शौर्य को नीचे आते देखा तो
- 2:52:16गिरजा से बोलकर उसके लिए भी चाय मंगवाया।
- 2:52:18दूसरी तरफ शिप्रा जब अपने कमरे में आकर
- 2:52:20दरवाजा खोली तो गिरजा उसके लिए चाय लेकर
- 2:52:23आई हुई थी। वो गिरजा को चाय टेबल पर रखने
- 2:52:25को बोलकर वाशरूम में चली गई। वाशरूम से
- 2:52:28बाहर आने के बाद उसने चाय का कप लिया और
- 2:52:30पीते हुए बालकनी के रास्ते ही फिर से
- 2:52:32शौर्य के कमरे में पहुंच गई। पर वहां
- 2:52:35पहुंचकर उसने देखा कि बेड तो खाली है।
- 2:52:37इसका मतलब शौर्य उठ गया। पर वो उसे कमरे
- 2:52:40में कहीं नजर नहीं आया। उसने वाशरूम की
- 2:52:42तरफ देखा तो वो उसे खाली नजर आया। इतनी
- 2:52:45जल्दी उठकर वो कहां चला गया? उसने मन ही
- 2:52:47मन सोचा। वो शौर्य को तलाश करती हुई नीचे
- 2:52:50डाइनिंग रूम की तरफ बढ़ गई। उसने उसे वहां
- 2:52:53मेघा के साथ बात करते हुए देखा। चाय की कप
- 2:52:55उसके सामने टेबल पर पड़ी हुई थी। मेघा ने
- 2:52:58डाइनिंग रूम में शिप्रा को आते देखा तो
- 2:53:00शौर्य से मुस्कुराती हुई बोली, "आप भाभी
- 2:53:03से बचकर ही यहां आए थे ना? अब लो वो यहीं
- 2:53:05आ रही है। [संगीत] अब आपकी खैर नहीं। मैं
- 2:53:07तो अपने कमरे में जा रही हूं। मेघा की
- 2:53:10बच्ची मुझे मुसीबत में छोड़कर तुम कहां जा
- 2:53:12रही हो? यहीं बैठो ना। शौर्य मेघा से धीरे
- 2:53:16से बोला। पर मेघा शौर्य की बात को
- 2:53:18नजरअंदाज कर वहां से चली गई। उसे पिछली
- 2:53:21रात को ही पता चल गया था कि शिप्रा शौर्य
- 2:53:23से गुस्सा थी। शिप्रा डाइनिंग रूम में
- 2:53:26शौर्य के पास पहुंची और बिना कुछ कहे उसके
- 2:53:29सामने बैठ गई। शौर्य शिप्रा से नजर मिलाने
- 2:53:32का ताव नहीं ला सका। अभी तो तुम सोए हुए
- 2:53:35थे। इतनी जल्दी नीचे कैसे आ गए? शिप्रा एक
- 2:53:39टक शौर्य को घूरते हुए बोली। जल्दी कहां
- 2:53:42आया? अब तो 8:00 बजने वाले हैं। उठा तो
- 2:53:45चाय की तलब लगी थी तो चाय पीने नीचे आ
- 2:53:47गया। शौर्य अपने चेहरे पर कॉन्फिडेंस
- 2:53:50दिखाते हुए बोला, "अच्छा, जब तक मैं
- 2:53:53तुम्हारे कमरे में थी, तब तक तो तुम्हारी
- 2:53:55नींद नहीं टूटी थी।" मेरे कमरे से 5 मिनट
- 2:53:57के लिए बाहर जाते ही तुम्हारी नींद भी टूट
- 2:54:00गई और तुम नीचे आकर चाय भी पीने लगे।
- 2:54:03शिप्रा शौर्य की चाय की कप को देखती हुई
- 2:54:05बोली, "तुम मेरे कमरे में थी?" "तुम मजाक
- 2:54:08कर रही हो।" अगर तुम मेरे कमरे में होती
- 2:54:11तो मुझे पता नहीं चलता। मैं तो जो रात
- 2:54:13सोया था तो सुबह जब नींद टूटी तो [संगीत]
- 2:54:15मैंने तो तुम्हें कमरे में नहीं देखा।
- 2:54:18शौर्य पूरे कॉन्फिडेंस से झूठ बोला।
- 2:54:20शिप्रा को भी शक होने लगा कि क्या शौर्य
- 2:54:23सच बोल रहा है? क्या वो सचमुच इतनी गहरी
- 2:54:26नींद में था कि शिप्रा का रात भर उसके साथ
- 2:54:28होने का पता ही नहीं चला। वो शौर्य के
- 2:54:31चेहरे को पढ़ने की कोशिश करती हुई बोली।
- 2:54:33और तुम्हारा शाम का क्या प्लान है? तुम
- 2:54:36बता रही थी आज राधिका का इंगेजमेंट है।
- 2:54:38शौर्य शिप्रा से ऐसे बात करने लगा जैसे
- 2:54:41रात उन दोनों के बीच कोई नाराजगी ही नहीं
- 2:54:43थी। शिप्रा को इस बात से भी हैरानी हो रही
- 2:54:46थी कि शौर्य उसके इमोशन से अनजान कैसे हो
- 2:54:48सकता है। वो तो सोच रही थी कि जब वो शौर्य
- 2:54:51के सामने होगी तो वह कल के लिए सॉरी
- 2:54:53बोलेगा। पर वो तो ऐसे व्यवहार कर रहा था
- 2:54:56जैसे उनके बीच कल सब कुछ ठीक था। तुम्हें
- 2:54:59कल के लिए कोई सफाई नहीं देनी है। शिप्रा
- 2:55:02शौर्य के पूछे गए सवाल को इग्नोर करती हुई
- 2:55:04बोली। शौर्य समझ गया कि शिप्रा कल वाली
- 2:55:07बात को इतनी आसानी से नहीं जाने देने वाली
- 2:55:09है। उसे लगा था जिस तरह वो रात में उसके
- 2:55:12साथ आकर सोई थी, वो अब तक कल उसके लेट से
- 2:55:14आने वाली बात को भूल गई होगी। पर वो अभी
- 2:55:17भी उस बात को पकड़े हुए थी। अब मैं
- 2:55:19तुम्हें कैसे बताऊं? कुछ ऐसा अर्जेंट आ
- 2:55:22गया था कि मैं चाहकर भी फ्री नहीं हो
- 2:55:24पाया। जब फ्री होकर तुम्हें फोन किया था
- 2:55:26तब तक तुम घर आ गई थी। शौर्य शिप्रा के
- 2:55:29हाथ के ऊपर अपना हाथ रखता हुआ बोला।
- 2:55:32शिप्रा ने शौर्य के हाथ के नीचे से अपना
- 2:55:34हाथ खींच लिया। शौर्य को शिप्रा का
- 2:55:36व्यवहार समझ नहीं आ रहा था। वैसे तो वह
- 2:55:39रात भर उसके सीने से लगकर सोई पर अभी
- 2:55:41शौर्य के उसके हाथ पर हाथ रखने पर अपना
- 2:55:43हाथ हटा ली। क्या तुम मुझसे नाराज हो?
- 2:55:47शौर्य शिप्रा की आंखों में देखते हुए
- 2:55:49बोला। मेरे नाराज होने या ना होने से
- 2:55:52तुम्हें कोई फर्क पड़ता है। शिप्रा उदासीन
- 2:55:55स्वर में बोली। शिप्रा की इस बात पर शौर्य
- 2:55:58कुछ बोल नहीं पाया। उसने शिप्रा के उदासीन
- 2:56:00चेहरे को एक बार देखा। फिर अपनी जगह से
- 2:56:02उठा और शिप्रा को अपनी बाहों में उठा लिया
- 2:56:05और उसको लेकर अपने कमरे की तरफ बढ़ गया।
- 2:56:07शिप्रा खुद को शौर्य की पकड़ से छुराने का
- 2:56:10प्रयास करती हुई बोली छोड़ो मुझे। मैं
- 2:56:12कहती हूं छोड़ो मुझे। शिप्रा शौर्य से
- 2:56:15छूटने का प्रयास करती हुई बोल तो रही थी
- 2:56:18पर उसकी आवाज धीमी ही थी। वो नहीं चाहती
- 2:56:20थी कि मेघा या गिरजा में से किसी को पता
- 2:56:22चले कि उन दोनों के बीच में क्या चल रहा
- 2:56:25है। पर शौर्य शिप्रा के प्रयास को विफल
- 2:56:27करते हुए उसको लेकर अपने कमरे में पहुंचा।
- 2:56:30उसने अपने पैर से कमरे के दरवाजे को
- 2:56:32गिराया और उसको अपने बेड पर ले जाकर धीरे
- 2:56:34से उतारा और खुद भी उसके पास लेट गया।
- 2:56:37उसने शिप्रा पर से अपनी पकड़ ढीली नहीं
- 2:56:39की। शिप्रा उसकी पकड़ में चटपटाती रही और
- 2:56:42साथ में बोलती भी रही। मैं कह रही हूं
- 2:56:45छोड़ो मुझे नहीं तो मैं जोर से
- 2:56:47चिल्लाऊंगी। तो ठीक है ना? चिल्लाओ।
- 2:56:49तुम्हें रोका किसने है? शौर्य उसकी आंखों
- 2:56:52में देखता हुआ बोला। शिप्रा अभी आगे कुछ
- 2:56:55और बोलने ही वाली थी कि तभी शौर्य ने
- 2:56:57शिप्रा के होठों पर अपना होठ रख दिया।
- 2:56:59शिप्रा की आवाज उसकी मुंह में ही दब गई।
- 2:57:02वो उसकी बाहों में कसमसाती रही। तभी वहां
- 2:57:05पर शौर्य के मोबाइल की रिंग सुनाई देने
- 2:57:06लगी। शौर्य की पकड़ शिप्रा पर से हल्की
- 2:57:09हुई। उसने अपना एक हाथ बढ़ाकर अपना मोबाइल
- 2:57:12लिया और मोबाइल पर फ्लैश होते नंबर को
- 2:57:15देखा तो यह कॉल उसके पापा का था।
- 2:57:18सुबह-सुबह अपने पापा का कॉल देखकर शौर्य
- 2:57:21का रोमांस का नशा उड़ गया। उसके अधर
- 2:57:24शिप्रा के अधर से अलग हुए। पकड़ भी शिप्रा
- 2:57:27पर से छूट गई। जो शिप्रा शौर्य से छूटने
- 2:57:30के लिए अपने हाथ पैर मार रही थी। उसने
- 2:57:32अपनी कोशिश बंद कर दी। उसने भी शौर्य के
- 2:57:35मोबाइल पर फ्लैश होते नंबर की तरफ देखा।
- 2:57:38उस पर पापा नाम देखकर वह समझ गई कि कॉल
- 2:57:41शौर्य के पापा की है। शौर्य मोबाइल लेकर
- 2:57:44बेड से उठना चाहता था। पर शिप्रा ने शौर्य
- 2:57:46की शर्ट को पकड़ कर उसको उठने से रोक
- 2:57:49लिया। शौर्य ने शिप्रा की ओर देखा तो
- 2:57:51[संगीत] उसकी आंखों में जिज्ञासा भरी हुई
- 2:57:53थी। जैसे वह भी जानना चाहती हो कि उसके
- 2:57:56पापा ने अभी किस लिए उसको फोन किया था।
- 2:57:58शौर्य ने बेड पर लेटे हुए ही कॉल उठाया।
- 2:58:01हेलो पापा। आप कैसे हैं? कहां हो तुम? जब
- 2:58:06से तुम गए हो एक बार भी दोबारा वापस नहीं
- 2:58:08आए। इतने भी क्या बिजी हो कि अपने मम्मी
- 2:58:10पापा से मिलने का भी समय नहीं है।
- 2:58:12सूर्यभान जी की आवाज दूसरी तरफ से सुनाई
- 2:58:15दिया। अब आपको कैसे कहूं पापा? कुछ ऐसा ही
- 2:58:18काम था। पर अब सब ठीक है। आप बताइए कुछ
- 2:58:22विशेष तो नहीं है? शौर्य संकोच भरे स्वर
- 2:58:25में बोला। विशेष ही है। आज दोपहर में
- 2:58:29विक्रमजीत जी एवं वीरभद्र जी घर आ रहे
- 2:58:31हैं। हो सकता है उनके साथ उनकी पोतियां भी
- 2:58:33हो। उस समय तुम्हारा होना जरूरी है।
- 2:58:36सूर्यभान जी गंभीरता से बोले, "यह जानकर
- 2:58:39कि विक्रमजीत चौहान अपनी फैमिली के साथ
- 2:58:41आने वाले हैं। इस [संगीत] बात ने शौर्य को
- 2:58:43परेशान कर दिया। पर उसने खुद को संयमित कर
- 2:58:46अपने पापा से कहा, ठीक है पापा, मैं समय
- 2:58:49से आ [संगीत] जाऊंगा।" इतना कहकर शौर्य ने
- 2:58:51फोन काट दिया। शिप्रा जो उसके साथ ही लेटी
- 2:58:54थी और दोनों तरफ की बात को सुन पा रही थी।
- 2:58:57यह सुनकर कि कनिका अपने दादाजी के साथ
- 2:58:59शौर्य के घर आने वाली है, उसको अपना दिल
- 2:59:01बैठता हुआ महसूस हुआ। उसको लगा कोई शौर्य
- 2:59:05को उससे छीनने की कोशिश कर रहा है। जो
- 2:59:07शिप्रा अभी थोड़ी देर पहले तक शौर्य की
- 2:59:10पकड़ से छूटने के लिए संघर्ष कर रही थी।
- 2:59:12उसने शौर्य को जोर से अपने सीने से कस
- 2:59:14लिया। [संगीत] शौर्य ने धीरे से उसके पीठ
- 2:59:16को सहलाया। कमाल है। अभी तो मेरी पकड़ से
- 2:59:20आजाद होने के लिए छटपटा रही थी और अब मुझे
- 2:59:22छोड़ने का नाम नहीं ले रही। शौर्य
- 2:59:25मुस्कुराता हुआ बोला। तुमको यह मजाक लग
- 2:59:27रहा है। जब से तुमने यह कनिका नाम का भूत
- 2:59:30मेरे सर पर बैठा दिया है, मेरी रातों की
- 2:59:32नींद और दिन का चैन दोनों उड़ गया है।
- 2:59:35शिप्रा शौर्य के सीने से अपना चेहरा अलग
- 2:59:37करके उसकी आंखों में देखती हुई बोली, उसकी
- 2:59:40आंखें डबडबाई हुई थी। अरे तुम चिंता क्यों
- 2:59:43करती हो? सब ठीक हो जाएगा। बस तुम्हें यह
- 2:59:46प्रॉमिस करना होगा कि आगे से तुम मुझसे
- 2:59:48कभी नाराज नहीं होगी। शौर्य शिप्रा की
- 2:59:51आंखों में देखते हुए शरारती भाव से बोला
- 2:59:54मेरी जान पर बनी हुई है और तुमको मजाक सूझ
- 2:59:56रहा है। शिप्रा शौर्य के सीने पर अपना
- 2:59:59घुसा मारती हुई बोली मुझे तो लगता [संगीत]
- 3:00:01है कि तुम में कोई भूत घुसा हुआ है। एक पल
- 3:00:04को तो तुम मुझसे नाराज रहती हो और दूसरे
- 3:00:06पल में मेरी बाहों में आकर सो जाती हो।
- 3:00:09शौर्य शिकायती लहजे में बोला। शौर्य की
- 3:00:12बात सुनकर शिप्रा की भवेत तन गई। अभी तो
- 3:00:14तुम कह रहे थे कि तुम्हें पता ही नहीं था
- 3:00:16कि मैं रात में तुम्हारे कमरे में आई थी।
- 3:00:18अब कैसे याद आ गया कि मैं तुम्हारी बाहों
- 3:00:21में थी। वो तो वो तो शौर्य बोलने में
- 3:00:25लड़खराया। फिर ढीठता से बोला अब इसका कोई
- 3:00:28मतलब नहीं है कि मुझे [संगीत] क्या याद है
- 3:00:30या क्या नहीं है। पर इसका तुम्हारे पास
- 3:00:32क्या जवाब है कि एक पल में तो तुम मुझे
- 3:00:34अपने पास आने भी नहीं देती और अगले पल में
- 3:00:37खुद आकर मुझे अपनी बाहों में भर कर सो
- 3:00:39जाती हो। इसका मतलब यह है कि [संगीत] मेरी
- 3:00:42नाराजगी तुमसे है। तो सजा तो तुम्हें
- 3:00:44दूंगी ना। मैं खुद को थोड़ी ना पनिशमेंट
- 3:00:46दूंगी। मुझे अच्छी नींद ही इन बाहों में
- 3:00:48आती है तो तो मैं अकेले क्यों सोऊं? वैसे
- 3:00:51भी इस शरीर पर मेरा हक है और इसके साथ मैं
- 3:00:54कैसे रहती हूं यह मेरी मर्जी। शिप्रा
- 3:00:56शौर्य के सीने पर किस करती हुई उसको जोर
- 3:00:59से अपनी बाहों में भी ली। जब इस शरीर पर
- 3:01:02अपना हक जता रही हो तो फिर रात में इसके
- 3:01:04लिए अपना दरवाजा क्यों नहीं खोला? शौर्य
- 3:01:07शिप्रा की ठोरी पकड़ कर उसका चेहरा ऊपर
- 3:01:09उठाते हुए पूछा। शरीर पर तो मेरा हक है पर
- 3:01:12इसके अंदर जो दिमाग काम करता है उस पर
- 3:01:15मेरा कंट्रोल नहीं चलता। वह [संगीत] अपनी
- 3:01:17मनमर्जी करता रहता है। यह सख्ती तो उसके
- 3:01:20लिए होती है। यह जो दिमाग है यही मुझे
- 3:01:23नाराज करता रहता है। शिप्रा अपनी उंगली से
- 3:01:26शौर्य के मस्तिष्क को ठक-ठक करती हुई
- 3:01:29बोली। इस दिमाग की छोटी-मोटी गलती को माफ
- 3:01:33भी कर दिया करो। यह इतना भी हरजाई नहीं है
- 3:01:36जो तुम्हें तकलीफ देने की कोशिश करेगा। यह
- 3:01:39तो खुद तुम्हारा गुलाम है। शौर्य शिप्रा
- 3:01:42के चेहरे पर अपनी उंगली फिराता हुआ बोला।
- 3:01:44दोनों की भावनाएं अभी उबाल पर थी। थोड़ी
- 3:01:47देर पहले कि दोनों की नाराजगी अब गायब हो
- 3:01:50गई थी। दो अतृप्त आत्मा एक होने को मचलने
- 3:01:53लगी थी। कमरे में एक तूफान का आगमन हुआ।
- 3:01:56दो प्यासे दिल अपनी प्यास बुझाने को आतुर
- 3:02:00सारी सीमाओं को तोड़ती जा रही थी। दो
- 3:02:02जिस्म एक होने की [संगीत] चरम पर पहुंच गई
- 3:02:05थी। आखिर वह पल भी आया जब तूफान शांत हुआ।
- 3:02:09सांसों का बवंडर थम गया। शिकवे शिकायत का
- 3:02:12कोई नामोनिशान नहीं था। थोड़ी देर तक
- 3:02:14शौर्य और शिप्रा दोनों शिथिल अवस्था में
- 3:02:17एक दूसरे की बाहों में खोए रहे। शौर्य ने
- 3:02:20शिप्रा का कंधा पकड़ कर हिलाते हुए कहा,
- 3:02:23अब मुझे जाना होगा। जैसे ही शिप्रा ने
- 3:02:26शौर्य की बात को सुना, उसने और कसकर शौर्य
- 3:02:28को जकड़ लिया। मुझे डर लग रहा है। शिप्रा
- 3:02:32ने भोलेपन से कहा, डर? डर किस बात की?
- 3:02:36शौर्य शिप्रा की आंखों में देखता हुआ
- 3:02:38बोला, अगर तुमने जैसा सोचा है वैसा नहीं
- 3:02:41हुआ तो अगर विक्रमजीत जी कनिका से
- 3:02:44तुम्हारी शादी कराने पर अर गए तो यह सोचकर
- 3:02:46ही मेरे शरीर में सिंहरण दौड़ जाती है।
- 3:02:49कहते हुए भी शिप्रा के शरीर ने झुरझुरी
- 3:02:51ली। ऐसा कुछ नहीं होगा। तुम्हें फालतू में
- 3:02:54कुछ भी सोचने की जरूरत नहीं है। सब अच्छा
- 3:02:57होगा। शौर्य शिप्रा के गाल को थपथपाता हुआ
- 3:03:00बोला। चलो उठो और तुम भी तैयार हो जाओ। आज
- 3:03:03तुम्हें भी तो राधिका की पार्टी में जाना
- 3:03:05है। तुमने कुछ गिफ्ट लिया कि नहीं? बोलते
- 3:03:08हुए शौर्य बिस्तर से उठ गया। शिप्रा ने भी
- 3:03:10अपने कपड़े को व्यस्थित किया और बेड से
- 3:03:12उठकर खड़ी हो गई। वो शौर्य के पास गई और
- 3:03:15उसके कपड़े के रिंकल को ठीक करती हुई
- 3:03:17बोली, पार्टी में जाते हुए कोई आइटम ले
- 3:03:20लूंगी। पर क्या तुम नहीं आओगे पार्टी में?
- 3:03:23मैं मुझे नहीं लगता कि तुम्हारे दादाजी के
- 3:03:26साथ तुम्हारे दूसरे फैमिली मेंबर को मेरा
- 3:03:29उस पार्टी में आना अच्छा नहीं लगेगा। पर
- 3:03:31बुआ ने तो कहा था कि तुम्हें भी अपने साथ
- 3:03:33लाने को। शिप्रा मासूमियत से बोली, अब
- 3:03:36तुमसे ऐसे तो नहीं कहती कि तुम अकेली आ
- 3:03:39जाना। अगर वह मुझे भी इनवाइट करना चाहती
- 3:03:41तो डायरेक्ट मुझे भी तो फोन कर सकती थी।
- 3:03:43तुम इस बारे में ज्यादा मत सोचो और जाकर
- 3:03:46पार्टी एंजॉय करो। शौर्य शिप्रा के गाल को
- 3:03:48खींचता हुआ बोला। शिप्रा भी समझती थी कि
- 3:03:51उसके परिवार वाले शौर्य को ज्यादा पसंद
- 3:03:53नहीं करते। इसलिए उसका ना जाना ही ठीक
- 3:03:56होगा। अगर शौर्य के जाने पर किसी ने कुछ
- 3:03:58उल्टा पुल्टा बोल दिया तो उसका मूड भी
- 3:04:00खराब हो जाएगा। तुम भी अपना ध्यान रखना।
- 3:04:03कनिका को लेकर वहां जो भी बात होगी मुझे
- 3:04:06उसके बारे में बताते रहना। शिप्रा चिंतित
- 3:04:08स्वर में बोला। शौर्य जल्दी से तैयार होकर
- 3:04:11अपने दादाजी के घर के लिए निकल गया और
- 3:04:13शिप्रा उसे जाते हुए देखती रही। शौर्य
- 3:04:17राजमहल पहुंचा। पिछली घटना के बाद अब यहां
- 3:04:20के गार्ड शौर्य को पहचान गए थे। उन्होंने
- 3:04:22सैल्यूट मारकर शौर्य का स्वागत किया। एक
- 3:04:25गार्ड शौर्य का मार्गदर्शन करते हुए
- 3:04:27आगे-आगे चलने लगा। शायद उसे पहले से ही यह
- 3:04:30[संगीत] निर्देश दे दिया गया था कि शौर्य
- 3:04:32जैसे ही आए उसे लेकर कहां आना है। शौर्य
- 3:04:35गार्ड का अभिवादन स्वीकार करते हुए आगे
- 3:04:37बढ़ा। गार्ड उसे उस हॉल में लेकर पहुंचा
- 3:04:40जहां उसके सारे रिश्तेदार इकट्ठे थे। एक
- 3:04:43बड़े से टेबल के पास उसके दादाजी बैठे हुए
- 3:04:45थे। जिनके दोनों तरफ चेयर पर उसके बाकी
- 3:04:47रिश्तेदार बैठे हुए थे। जयभान सिंह। जयभान
- 3:04:51सिंह जी की धर्मपत्नी रुक्मणी देवी,
- 3:04:53सूर्यभान जी, कल्पना जी, [संगीत]
- 3:04:55स्वर्णलता जी के साथ उनके पति विशाल
- 3:04:57नारंग, अरविंद, प्रतीक, कुणाल लगभग पूरा
- 3:05:00परिवार चंद्रभान जी के दाएं बाएं बैठे हुए
- 3:05:02थे। शौर्य ने वहां जितने भी बड़े लोग थे
- 3:05:05उन सबका अभिवादन किया। राजा साहब ने शौर्य
- 3:05:08को बैठने का इशारा किया। उसके बाद सब पर
- 3:05:10एक सरसरी निगाह डालते हुए कहा। अब जबकि
- 3:05:13शौर्य भी यहां आ गया है तो हम सब उस बात
- 3:05:16पर विचार कर सकते हैं जो उस दिन अचानक ही
- 3:05:18विक्रमजीत के प्रस्ताव के कारण सूर्यभान
- 3:05:21ने उनके प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। आप
- 3:05:23सबका क्या विचार है इस बारे में? [संगीत]
- 3:05:25ज्यादातर लोगों को तो समझ ही नहीं आया कि
- 3:05:27राजा साहब कि इस बात का मतलब क्या रह गया
- 3:05:30अब? फैसला तो पहले ही सब हो चुका है। बाकी
- 3:05:33लोगों ने तो कुछ नहीं कहा। पर विशाल नारन
- 3:05:36ने अपना गला साफ करते हुए कहा,
- 3:05:39"मैंने [गला साफ़ करने की आवाज़] तो सुना
- 3:05:39है फैसला पहले ही हो चुका है। तो क्या अब
- 3:05:42भी इस बारे में विचार करने की गुंजाइश
- 3:05:43है?" जब तक शादी नहीं हो जाती तब तक
- 3:05:46गुंजाइश ही गुंजाइश है। एक बार शादी हो
- 3:05:49जाने के बाद कोई गुंजाइश नहीं रह जाएगी।
- 3:05:51उस दिन जो भी हुआ वो जल्दबाजी में लिया
- 3:05:53गया फैसला था। पर क्योंकि आज विक्रमजीत
- 3:05:56यहां आ रहे हैं तो मैं चाहता हूं कि उनसे
- 3:05:58कुछ भी बात हो। उससे पहले हम आपस में एक
- 3:06:00बार उस बारे में बात कर लें तो यह
- 3:06:02स्पष्टता आ जाएगी कि [संगीत] हमें उनसे
- 3:06:04कैसे बात करनी है। अगर मेरी राय पूछो तो
- 3:06:08मुझे उस दिन यह बात पसंद नहीं आई जैसे
- 3:06:10आननफानन में शौर्य का रिश्ता वीरभद्र की
- 3:06:13बेटी के साथ कर दी गई। राजा साहब शौर्य की
- 3:06:15ओर देखते हुए बोले शौर्य तो राजा साहब के
- 3:06:18ऐसा बोलने का कारण समझ गया। पर वहां
- 3:06:20उपस्थित बाकी लोगों के लिए यह बात शॉकिंग
- 3:06:23था। कुछ चेहरों पर तो एक आशा भरी चमक भी
- 3:06:25देखने को मिली। आप सही कह रहे हैं पिताजी।
- 3:06:28उस दिन जिस तरह जल्दबाजी में शौर्य का
- 3:06:31रिश्ता विक्रमजीत जी की पोती से कर दी गई
- 3:06:33[संगीत] यह बात मुझे भी पसंद नहीं आई। पर
- 3:06:35मुझे लगा जैसे सूर्यभान भी यही चाहता था
- 3:06:38और उसकी मुराद पूरी हो गई तो मुझे इस बारे
- 3:06:41में कुछ भी बोलना उस समय ठीक नहीं लगा।
- 3:06:43जयभान जी को अपनी बात कहने के लिए यह मौका
- 3:06:46उचित जान पड़ा। आप यह कैसी बात कर रहे हैं
- 3:06:49भैया? मैं ऐसा कैसे चाह सकता था? मुझे
- 3:06:52क्या सपना आया था कि विक्रमजीत जी की तरफ
- 3:06:54से ऐसा कोई प्रस्ताव आएगा? मैं तो सिर्फ
- 3:06:56इसलिए इस बात के लिए तैयार हो गया क्योंकि
- 3:06:58मुझे लगा मेरे तैयार होने से हम दोनों
- 3:07:00परिवार के बीच जो वर्षों पुरानी दुश्मनी
- 3:07:03है वह खत्म हो जाएगी। सूर्यभान जी ने
- 3:07:06तुरंत अपनी तरफ से जयभान जी को सफाई दिया।
- 3:07:09हो सकता है आपके मन में यही बात हो। पर
- 3:07:12अगर दुश्मनी खत्म करने के लिए दोनों
- 3:07:14परिवार में रिशेदारी ही करनी थी तो यह
- 3:07:16क्या जरूरी था कि वह रिश्ता शौर्य का ही
- 3:07:18हो। वह प्रतीक का भी हो सकता था, कुणाल का
- 3:07:21भी हो सकता था। विशाल नारंग बीच में अपनी
- 3:07:24नाक घुसेते हुए बोला, सूर्यभान को विशाल
- 3:07:26नारंग की बात अच्छी तो नहीं लगी पर
- 3:07:28उन्होंने कुछ कहा नहीं। वो अपने पिता की
- 3:07:31तरफ देखने लगे जैसे जानना चाहते हो कि इस
- 3:07:33बारे में उनका क्या विचार है। वैसे देखा
- 3:07:36जाए तो विशाल जी की बात सही है। अगर इस
- 3:07:39परिवार में विक्रमजीत को रिश्ता ही करना
- 3:07:41है तो इसके लिए हम प्रतीक और कुणाल के
- 3:07:43बारे में भी बात कर सकते थे। पर यह भी सच
- 3:07:46है कि उस समय हम में से किसी ने उस दिन इस
- 3:07:48बारे में सोचा नहीं था। अब जबकि विक्रमजीत
- 3:07:51ने शौर्य के साथ अपनी पोती का रिश्ता
- 3:07:53फिक्स कर दिया है तो अब इस स्थिति में हम
- 3:07:56विक्रमजीत से इस बारे में विचार करने को
- 3:07:58कैसे बोल सकते हैं? चंद्रभान जी विशाल जी
- 3:08:01एवं जयभान जी की तरफ देखते हुए बोले यह
- 3:08:04इतना भी मुश्किल नहीं होना चाहिए पापा। आज
- 3:08:06वे लोग आ ही रहे हैं। उनके सामने एक बार
- 3:08:08हमें यह बात रखनी तो चाहिए। स्वर्णलता जी
- 3:08:11भी सूर्यभान जी को एक नजर देखने के बाद
- 3:08:14अपने पापा से बोली पर पिताजी क्या सब
- 3:08:16फाइनल हो जाने के बाद दोबारा इस बारे में
- 3:08:18विक्रमजीत जी से बात करना ठीक होगा क्या
- 3:08:21सूर्यभान जी को अच्छा नहीं लग रहा था कि
- 3:08:23उनके बेटे का रिश्ता पक्का हो जाने के बाद
- 3:08:25दोबारा उस रिश्ते के लिए किसी और के बात
- 3:08:27करना उन्हें शौर्य के लिए बुरा लगने लगा।
- 3:08:30उन्हें यह भी फील होने लगा कि इस परिवार
- 3:08:32में कोई नहीं चाहता कि शौर्य का रिश्ता
- 3:08:34विक्रमजीत जी की पोती से हो। उन्हें तो यह
- 3:08:37भी लगा कि उनके पिताजी भी नहीं चाहते कि
- 3:08:39शौर्य की शादी उनके दोस्त की पोती से हो।
- 3:08:42चंद्रभान जी ने सूर्यभान जी के चेहरे को
- 3:08:44देखकर आसानी से यह अनुमान लगा लिया कि
- 3:08:47उनके मन में क्या चल रहा है। पर वह अभी
- 3:08:49सूर्यभान जी को यह बता नहीं सकते थे कि वह
- 3:08:51ऐसा क्यों कर रहे हैं। सूर्यभान जी के
- 3:08:54सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा हम
- 3:08:57कोई रिश्ता तोड़ने नहीं जा रहे हैं। हम तो
- 3:08:59एक संभावना तलाश रहे हैं कि यह जो
- 3:09:01जल्दबाजी में फैसला लिया गया है, इसका कोई
- 3:09:03और बेहतर विकल्प हो सकता है क्या? पर
- 3:09:06पिताजी जब सब कुछ सही चल रहा है तो और
- 3:09:08किसी दूसरे विकल्प की जरूरत क्या है?
- 3:09:11सूर्यभान जी को राजा साहब की यह जिद पसंद
- 3:09:13नहीं आ रही थी। आप क्यों पिताजी के फैसले
- 3:09:15पर सवाल कर रहे हैं भैया? हम सबको भी यही
- 3:09:18सही लगता है। इन्होंने ऐसा भी तो नहीं कहा
- 3:09:20कि शौर्य का रिश्ता विक्रमजीत जी की पोती
- 3:09:22से हो ही नहीं सकता। बस बात यह है कि एक
- 3:09:25बेहतर विकल्प पर बात किया जा सकता है तो
- 3:09:27करने में कोई बुराई नहीं है। स्वर्णलता
- 3:09:30सूर्यभान जी की बात से ना इत्तेफाकी रखती
- 3:09:32हुई बोली। शौर्य भी यहां हो रही बातों को
- 3:09:34देख सुन रहा था। वह समझ रहा था कि उसके
- 3:09:37दादाजी क्या करने की कोशिश कर रहे हैं। पर
- 3:09:39अपने पिता को बार-बार अपने दादाजी को
- 3:09:41टोकते देखकर वह यह भी समझ रहा था कि उसके
- 3:09:44पिता के मन में क्या चल रहा होगा। अभी
- 3:09:47यहां मौजूद सभी लोग उन्हें दुश्मन लग रहे
- 3:09:49होंगे। उसे अपने पिता पर तरस भी आया। उसे
- 3:09:52खुद के लिए भी बुरा लगा कि क्यों उसने
- 3:09:54पहले ही अपने पिता को अपनी शादी की बात
- 3:09:56नहीं बताई। पर अब वह इस बात पर सिर्फ
- 3:09:58अफसोस ही कर सकता था। दूसरी तरफ चंद्रभान
- 3:10:02जी को स्वर्णलता का इस तरह से सूर्यभान को
- 3:10:04झिरकना भी सही नहीं लगा तो उन्होंने
- 3:10:06स्वर्णलता को टोकते हुए कहा स्वर्णा
- 3:10:08तुम्हें सूर्यभान को इस तरह बोलने का कोई
- 3:10:10हक नहीं है। सूर्यभान की बात अपनी जगह सही
- 3:10:14है। मैंने अगर तुम लोगों के पास अपनी राय
- 3:10:16रखी है तो उसका एकमात्र कारण यह है कि
- 3:10:18मुझे भी पता है कि तुम लोगों के दिमाग में
- 3:10:20क्या चल रहा है। मैंने सिर्फ तुम लोगों को
- 3:10:23एक फेयर चांस देने के लिए यह विकल्प दिया
- 3:10:25है। तुम लोग अगर विक्रमजीत को [संगीत] इस
- 3:10:27बात के लिए कन्विंस कर सकते हो कि उसके
- 3:10:29पास और भी उसके दिए प्रस्ताव से बेहतर
- 3:10:31विकल्प हो सकते हैं और वह तुम में से किसी
- 3:10:33की बात से सहमत हो जाता है तो मुझे उस
- 3:10:35विकल्प के साथ आगे बढ़ने में कोई आपत्ति
- 3:10:37[संगीत] नहीं होगी। पर यह ध्यान रखना कि
- 3:10:40जब तुम लोग उनसे बात करोगे तो बात बिगड़ना
- 3:10:42नहीं चाहिए। इसलिए एक दायरे में रहकर ही
- 3:10:45अपनी बात को उनके सामने रखना। सूर्यभान को
- 3:10:48[संगीत] इस बात से तसल्ली हुई कि उनका
- 3:10:49पक्ष लेकर राजा साहब ने स्वर्णलता को चुप
- 3:10:51कराया। इन सब की बात चल ही रही थी कि तभी
- 3:10:54एक गार्ड वहां आया और राजा साहब से बोला
- 3:10:57साहब विक्रमजीत जी अपने लोगों के साथ आ गए
- 3:11:00हैं। हमने उन्हें डाइनिंग एरिया में ही
- 3:11:01बैठा दिया है। ठीक है तुम जाकर देखो उनके
- 3:11:05स्वागत में कोई कमी ना रह जाए। हम सब वहीं
- 3:11:07आते हैं। राजा साहब ने गार्ड को आदेश
- 3:11:10दिया। गार्ड वहां से चला गया तो राजा साहब
- 3:11:12ने सबसे कहा ठीक है। अब हम सब उनके सामने
- 3:11:16होंगे तो उन्हें कुछ भी बोलने से पहले यह
- 3:11:18ध्यान रखेंगे [संगीत] कि हमारी कोई बात
- 3:11:20उनको अन्यथा ना लगे। कल को उन्हें यह कहने
- 3:11:22का मौका ना मिले कि हमने अपनी बात की लाज
- 3:11:24नहीं रखी। ऐसा कुछ नहीं होगा पिताजी। हम
- 3:11:28भी चौहान फैमिली से रिश्ता सुधारना चाहते
- 3:11:30हैं। इसलिए हमारी तरफ से ऐसी [संगीत] कोई
- 3:11:31कोशिश नहीं होगी कि बात और बिगड़ जाए।
- 3:11:34जयभान जी चंद्रभान जी को आश्वस्त करता हुआ
- 3:11:37बोला। चंद्रभान जी के साथ सभी डाइनिंग
- 3:11:39एरिया में पहुंचे। वहां पहले से ही
- 3:11:41विक्रमजीत जी, वीरभद्र जी, भानुमती और
- 3:11:44यशवर्धन चौहान विक्रमजीत [संगीत]
- 3:11:45जी के छोटे बेटे पहले से ही कॉफी का आनंद
- 3:11:48ले रहे थे। उनके सामने ड्राई फ्रूट के कई
- 3:11:50प्लेट रखे हुए थे। विक्रमजीत आगे आकर
- 3:11:53चंद्रभान जी से गले मिले। बाकी लोगों ने
- 3:11:55एक दूसरे का अभिवादन किया। मुझे खुशी है
- 3:11:58कि हमें इतनी जल्दी दोबारा मिलने का मौका
- 3:12:01मिला है।
- 3:12:02चंद्रभान जी विक्रमजीत जी से अलग होते हुए
- 3:12:05बोले, पहले वाली गलती अब दोबारा नहीं
- 3:12:07होगी। चंद्रभान अब जब हमने एक साथ आगे
- 3:12:10बढ़ने का फैसला किया है तो कुछ छोटी-मोटी
- 3:12:13अड़चनों को अपनी दोस्ती के बीच की बाधा
- 3:12:15नहीं बनने देंगे। विक्रमजीत जी चंद्रभान
- 3:12:18[संगीत] जी का हाथ थामे हुए बोले तुम अपने
- 3:12:21पोते पोतियों को साथ लेकर क्यों नहीं आए?
- 3:12:24चंद्रभान जी पीछे देखते हुए बोले मेरी
- 3:12:27पोती तो अब इस घर में आएगी तो इसी घर की
- 3:12:29होकर आएगी। जहां तक रही पोते सब की बात
- 3:12:32[संगीत] तो वे कुछ दूसरे काम में व्यस्त
- 3:12:34थे। विक्रमजीत जी मुस्कुराते हुए बोले काम
- 3:12:37तो जीवन भर लगा ही रहेगा। मैं तो यह सोच
- 3:12:40रहा था कि इस तरह हमारे बच्चे भी आपस में
- 3:12:42मिल लें। चंद्रभान जी अपने बच्चों पर एक
- 3:12:45नजर डालते हुए बोले बात तो सही कही तुमने
- 3:12:49इसके लिए हम कुछ दिनों में एक गेट टुगेदर
- 3:12:51रखेंगे जहां सबका मिलना भी हो जाएगा और हम
- 3:12:54अपनी दोस्ती को रिशेदारी में बदलने की
- 3:12:56घोषणा भी कर देंगे। विक्रमजीत जी चंद्रभान
- 3:12:59जी की ओर देखते हुए बोले ऐसा लगा जैसे वह
- 3:13:02चंद्रभान जी की सहमति इसके लिए पाना चाहते
- 3:13:04हो। चंद्रभान जी उनकी आंखों की भाषा समझ
- 3:13:07गए। इसलिए उन्होंने अपने बच्चों की तरफ
- 3:13:09देखते हुए बोले हमें भी भला इससे क्या
- 3:13:11आपत्ति हो सकती है? आपने सही कहा अंकल यह
- 3:13:14बढ़िया रहेगा। विशालगढ़ के लोगों को भी
- 3:13:17पता चलना चाहिए कि राठौर फैमिली और चौहान
- 3:13:19फैमिली फिर से एक हो गए हैं। जयभान जी
- 3:13:22उत्साहित स्वर में बोले बिल्कुल हम भी यही
- 3:13:25चाहते हैं और आज खास करके यहां आने का
- 3:13:27मकसद भी यही है। हम कुछ और बातों पर आज
- 3:13:30बात कर लेना चाहते हैं। वीरभद्र राठौर
- 3:13:33फैमिली की तरफ देखता हुआ बोला यह बढ़िया
- 3:13:35रहेगा। वैसे भी पिछली बार जो बात हुई थी,
- 3:13:38वह थोड़ी जल्दबाजी में हुई थी। किसी को
- 3:13:40कुछ सोचने समझने का मौका ही नहीं मिला।
- 3:13:42हमें लगता है कि एक बार बच्चों को आपस में
- 3:13:45मिला देना चाहिए और उन्हें खुद फैसला लेने
- 3:13:47की आजादी देनी चाहिए ताकि कल को उन्हें यह
- 3:13:50शिकायत नहीं रहे कि हमने उनका विचार जानने
- 3:13:53की कोशिश नहीं की। स्वर्णलता आगे आती हुई
- 3:13:55बोली। स्वर्णलता की बात सुनकर विक्रमजीत
- 3:13:59जी वीरभद्र जी की ओर देखने लगे। अभी वह
- 3:14:01कुछ और बोलते उससे पहले ही भानुमती बोली।
- 3:14:04वैसे आपकी बात एक हद तक ठीक भी है। हमारे
- 3:14:07परिवार की लड़कियां हमारे लिए फैशनलों से
- 3:14:09इत नहीं जाती। फिर भी हम कोशिश करते हैं
- 3:14:12कि हमारे लिए फैशनों में उनकी सहमति हो तो
- 3:14:14बढ़िया [संगीत] रहेगा। वैसे आपके इस विचार
- 3:14:17से हमें भी कोई आपत्ति नहीं होंगी। हमारी
- 3:14:20तो सहमति है ही। अगर बच्चों की भी सहमति
- 3:14:22हो जाए तो यह और बढ़िया होगा। भानुमती की
- 3:14:25इस बात से विक्रमजीत थोड़े असहज दिखे पर
- 3:14:28उन्होंने कुछ कहा नहीं। वीरभद्र भी
- 3:14:30भानुमती की छटपटाहट को समझ रहे थे। आज
- 3:14:33यहां आने का एक प्रमुख उद्देश्य भी
- 3:14:34[संगीत] यही था कि उनका नंदिनी के रिश्ते
- 3:14:36की बात प्रतीक के लिए करना था। वीरभद्र
- 3:14:39विक्रमजीत से [संगीत] मुखातिब होते हुए
- 3:14:41बोला अंकल आज यहां आने का एक उद्देश्य यह
- 3:14:44भी है। भानुमती अपनी बेटी नंदिनी की शादी
- 3:14:47प्रतीक के साथ करना चाहती है। नंदिनी को
- 3:14:49भी प्रतीक पसंद है। अगर आप इस बात से सहमत
- 3:14:52हैं तो हम इस बात को आगे बढ़ा सकते हैं।
- 3:14:55चंद्रभान जी वीरभद्र की बात सुनकर जयभान
- 3:14:58जी की तरफ देखने लगे। जैसे वह जानना चाहते
- 3:15:00हो कि उनका इसको लेकर क्या कहना है। वैसे
- 3:15:03तो वीरभद्र चाहता था कि प्रतीक का रिश्ता
- 3:15:05कनिका के साथ हो जाता तो बेहतर होता। पर
- 3:15:08नंदिनी का प्रपोजल प्रतीक के लिए आना भी
- 3:15:10बुरा नहीं था। उन्होंने प्रतीक की तरफ
- 3:15:12देखा जैसे उससे पूछ रहे हो कि उसका क्या
- 3:15:14विचार है। प्रतीक नंदिनी को देख रखा था।
- 3:15:18उसकी खूबसूरती भी अद्वितीय थी। पर उसके मन
- 3:15:21में यह कसक रह गई कि काश उसकी रिश्ते की
- 3:15:23बात कनिका के साथ होती तो क्या ही बेहतर
- 3:15:25होता। पर वह बेहतर की तलाश में जो उसे मिल
- 3:15:28रहा था उसको भी नहीं खो सकता था। इसलिए
- 3:15:31उसने इस रिश्ते के लिए अपनी सहमति दे दी।
- 3:15:34स्वर्णलता के मन में टिस रह गई कि काश
- 3:15:36कुणाल का रिश्ता कनिका के साथ फिक्स ही
- 3:15:38जाता। वह सोचने लगी कि वह इस बात को इन
- 3:15:41सबके बीच कैसे प्लांट करें। किसी को अपनी
- 3:15:44बातों के लिए सहमत करना इतना ही आसान होता
- 3:15:47तो क्या ही बात होती। स्वर्णलत्ता जी को
- 3:15:50यही टिस थी कि प्रतीक के रिश्ते के लिए जो
- 3:15:52प्रपोजल आया काश कनिका के रिश्ते की बात
- 3:15:55उनके बेटे के लिए आता तो उनके मन में कोई
- 3:15:57कसक नहीं रह जाता। आज के आए हुए शौर्य के
- 3:16:00लिए कनिका का रिश्ता फिक्स ही जाना। उनके
- 3:16:03दिल पर किसी कांटे की तरह चुभ रहा था।
- 3:16:05उनको लग रहा था कि उनका बेटा हर लिहाज से
- 3:16:08शौर्य से बेहतर कैंडिडेट था। कायदे से तो
- 3:16:10कनिका का रिश्ता कुणाल के साथ ही होना
- 3:16:12चाहिए था क्योंकि वह शौर्य से उम्र में भी
- 3:16:15बड़ा था और जहां तक स्टेटस की बात थी
- 3:16:17उसमें भी उसके साथ शौर्य का कोई मुकाबला
- 3:16:19नहीं था। नारन फैमिली का भी विशालगढ़ में
- 3:16:22बिजनेस में बड़ा नाम था और कुणाल उनका
- 3:16:24उत्तराधिकारी था तो कल को तो उसे ही सब
- 3:16:27संभालना था। वैसे अभी से ही उसने लगभग हर
- 3:16:30बिजनेस में विशाल नारंग का हाथ बटाना शुरू
- 3:16:32कर दिया था। वैसे मैं आपको कहना चाहूंगा
- 3:16:35वीरभद्र जी कि आपको कनिका से भी उसके
- 3:16:37विचार जानने चाहिए कि वह क्या चाहती है।
- 3:16:40कल को उसके दिल में भी कोई मलाल ना रह
- 3:16:42जाए। हमारा कुणाल भी शादी योग्य है। उसके
- 3:16:44लिए अच्छे घरों से शादी के लिए रिश्ते भी
- 3:16:46आ रहे हैं। और दूसरी बात यह है कि वह
- 3:16:49शौर्य से बड़ा भी है। तो यह बेहतर होगा कि
- 3:16:51शौर्य से पहले उसकी शादी होनी चाहिए। वैसे
- 3:16:54आज के समय में यह बात खास मायने नहीं रखती
- 3:16:57कि किसकी शादी पहले और किसकी बाद में होती
- 3:16:59है। पर मुझे लगता है इस बारे में आपको एक
- 3:17:02बार कनिका की पसंद जान लेना चाहिए। मैं यह
- 3:17:04समझता हूं कि आपके द्वारा पसंद किए गए
- 3:17:06लड़के के लिए वह कभी मना नहीं कर सकती। पर
- 3:17:09अगर आप इसमें उसकी पसंद भी जोर देते हैं
- 3:17:11तो यह बात उसके लिए भी अच्छा होगा। विशाल
- 3:17:14नारन ने अपनी बातों को चाशनी में लपेट कर
- 3:17:16चौहान फैमिली के सामने रखा। वैसे देखा जाए
- 3:17:19तो आपके प्रस्ताव में दम तो है। इस बात पर
- 3:17:22विचार तो किया ही जा सकता है। यशवर्धन
- 3:17:25चौहान तुरंत विशाल नारंग की बात से सहमति
- 3:17:27जताते हुए बोला। विक्रमजीत चौहान ने
- 3:17:29यशवर्धन की जल्दबाजी देखकर घूर कर देखा।
- 3:17:32यशवर्धन चौहान ने उनसे अपनी नजर फेर ली।
- 3:17:34वीरभद्र जी को भी यशवर्धन की जल्दबाजी
- 3:17:36[संगीत] में विशाल नारंग की बात से सहमति
- 3:17:39जताना सही नहीं लगा। वह अपने पापा की ओर
- 3:17:41देखने लगे कि वह अब इस बात पर क्या कहते
- 3:17:43हैं। दरअसल यशवर्धन चौहान का यहां आने का
- 3:17:46एक मकसद यह भी था कि अगर किसी तरह कनिका
- 3:17:49का रिश्ता शौर्य से टूट जाए तो ठीक है
- 3:17:51क्योंकि उन्हें अपने बच्चों की सोच के
- 3:17:53बारे में पता था कि वे किसी भी हालत में
- 3:17:55शौर्य से रिश्ता नहीं करना चाहते थे। इसके
- 3:17:57लिए उन्होंने यशवर्धन को भी राजी कर लिया
- 3:17:59था कि वह किसी तरह कनिका का रिश्ता शौर्य
- 3:18:02के साथ होने से तोड़ दें। उनके पास जब
- 3:18:04कुणाल के रूप में एक विकल्प नजर आया तो
- 3:18:06उन्होंने बिना अपने पिताजी या भाई के
- 3:18:08विचार को जाने अपनी सहमति दे दी। मुझे
- 3:18:11लगता है इस बारे में बात करना बेवकूफी
- 3:18:13होगी। इस बारे में हमने पहले ही फैसला कर
- 3:18:16लिया है। अब अगर हम ऐसी बात करते हैं तो
- 3:18:18यह हमारा अपनी बात से पलटने के सामान
- 3:18:20होगा। विक्रमजीत जी अपना गला खरासते हुए
- 3:18:22बोले, "इसमें अपनी बात से पलटने जैसा तो
- 3:18:25कुछ भी नहीं है पिताजी।" यह रिश्ता तो
- 3:18:27इनके परिवार में होने की ही बात हो रही
- 3:18:29है। इससे क्या ही फर्क पड़ जाता है कि वह
- 3:18:31एक से ना होकर दूसरे से हो जाता है।
- 3:18:33रिश्ता तो इनके परिवार में होने से मतलब
- 3:18:36है। यशवर्धन ने दोबारा अपनी बात पर जोर
- 3:18:38देते हुए कहा, उन्हें लगा यही मौका है जब
- 3:18:41वह अपनी बात को प्रभावशाली तरीके से रख
- 3:18:43सकते हैं। वो विशालगढ़ में नारंग फैमिली
- 3:18:45के रुतबे से भी वाकिफ थे और कुणाल इस शहर
- 3:18:48के मोस्ट एलिजिबल बैचलर में से एक था और
- 3:18:50उनकी निगाह में भी वह हर लिहाज से शौर्य
- 3:18:53से बेहतर था। मुझे लगता है कि यशवर्धन की
- 3:18:56बात सही है। अंकल एक बार आपको अपनी पोती
- 3:18:58कनिका की पसंद के बारे में जान लेने में
- 3:19:00कोई बुराई नहीं है। जयभान जी यशवर्धन की
- 3:19:04बात का समर्थन करते हुए बोले पर यह बात
- 3:19:06मैंने सूर्यभान से की थी। वो क्या सोचेगा?
- 3:19:09विक्रमजीत जी सूर्यभान की तरफ देखते हुए
- 3:19:11बोले इस बात में भला सूर्यभान को भी क्या
- 3:19:14आपत्ति होगी अंकल? विशाल नारंग सूर्यभान
- 3:19:17की तरफ देखते हुए बोले अब सबकी निगाह
- 3:19:19सूर्यभान की तरफ मुड़ गई थी। सूर्यभान जी
- 3:19:21को यहां हो रही बातें पसंद तो नहीं आ रही
- 3:19:23थी पर सबकी निगाह अपनी ओर देखकर उन्होंने
- 3:19:26कहा इस बात से भला मुझे भी क्या आपत्ति ही
- 3:19:28सकती है अंकल दोनों लड़के हमारे परिवार के
- 3:19:31हैं। कनिका का रिश्ता किसी के भी साथ हो
- 3:19:33वो होगी तो इस अगर ऐसी बात है तो फिर
- 3:19:37देखते हैं क्या होता है। वैसे हमने पहले
- 3:19:40ही कनिका को अपनी पसंद बता दिया था। अब
- 3:19:42उससे उसकी पसंद भी जानने की कोशिश करेंगे।
- 3:19:45वीरभद्र जी विशाल नारंग की जिज्ञासा को
- 3:19:48शांत करते हुए बोले। वीरभद्र की बात सुनकर
- 3:19:51स्वर्णलता के चेहरे पर एक उत्साह नजर आया।
- 3:19:54जबकि कुणाल के चेहरे पर एक लंबी सी स्माइल
- 3:19:56आ गई। उसने तो गर्व से शौर्य की ओर देखा।
- 3:20:00उसने तो मान लिया कि अब कनिका उसी की होकर
- 3:20:02रहेगी। वह पहले भी कनिका से कई बिजनेस
- 3:20:05सेमिनार में मिल चुका था। उसने उसके साथ
- 3:20:07मेलजोल बढ़ाने की कोशिश इसलिए नहीं कि
- 3:20:10क्योंकि दोनों परिवार के बीच पुरानी
- 3:20:12दुश्मनी चली आ रही थी। जबकि इतना सब होने
- 3:20:14के बाद अब प्रतीक को अफसोस हो रहा था कि
- 3:20:17वह कुणाल से पिछड़ गया। अब प्रतीक के पास
- 3:20:19कनिका की पसंद बनने का मौका नहीं होगा
- 3:20:22क्योंकि उसके रिश्ते की बात पहले ही
- 3:20:24नंदिनी के साथ फिक्स कर ली गई। उसे अफसोस
- 3:20:26तो हुआ पर उसे इस बात से तसल्ली भी थी कि
- 3:20:29कम से कम उसका रिश्ता नंदिनी के साथ पक्का
- 3:20:31तो हो गया था। जबकि अगर कुणाल का देखा जाए
- 3:20:34तो अभी कुछ फिक्स नहीं था कि कनिका उसको
- 3:20:36पसंद करेगी ही करेगी। मैं इस बारे में
- 3:20:38कनिका से बात करूंगा और [संगीत] जल्दी ही
- 3:20:40हम किसी निष्कर्ष पर पहुंच जाएंगे।
- 3:20:43यशवर्धन उत्साहित स्वर में बोले। उनको लगा
- 3:20:45उन्होंने किला फतेह कर लिया। वह यहां इसी
- 3:20:48सोच के साथ आए थे। अब वह जल्दी से जल्दी
- 3:20:50कनिका तक यह खबर पहुंचाना चाहते थे। इस
- 3:20:53सबसे शौर्य बहुत खुश था। उसको लगा उसके सर
- 3:20:56से एक बहुत बड़ा बोझ हट गया। अब वह अपने
- 3:20:59मम्मी पापा से अपनी शादी की बात साझा कर
- 3:21:01सकता था। उसने सोच लिया किसी सही समय पर
- 3:21:04वह अपने मम्मी पापा को शिप्रा से मिलवाकर
- 3:21:06उन्हें बताएगा कि वह उनकी बहू है। क्योंकि
- 3:21:09वह देख रहा था कि अभी यहां जो कुछ भी हुआ
- 3:21:12उससे उसके मम्मी पापा दोनों बड़े निराश
- 3:21:14थे। अचानक उसको कुछ खुराफात सूझी। वो
- 3:21:17पार्टी में भीड़ से अलग हुआ और शिप्रा को
- 3:21:19फोन लगाया। दूसरी तरफ से शिप्रा ने फोन
- 3:21:22उठाया तो उसने पूछा क्या कर रही हो? कुछ
- 3:21:26खास नहीं। बस पार्टी में जाने के लिए
- 3:21:28तैयार होने जा रही हूं। शिप्रा ढीले स्वर
- 3:21:30में बोली। फिर कुछ याद आते ही उसने चिंतित
- 3:21:33[संगीत] स्वर में पूछा तुम्हारा क्या रहा?
- 3:21:36आज तुम्हारे घर चौहान फैमिली से लोग आने
- 3:21:38वाले थे ना? अब क्या बताऊं? कुछ भी सही
- 3:21:41नहीं हो रहा है। विक्रमजीत जी तो जिद
- 3:21:43पकड़े हुए हैं कि कनिका की शादी मुझसे ही
- 3:21:46करवा कर रहेंगे। मुझे तो कुछ समझ नहीं आ
- 3:21:48रहा है कि [संगीत] अब मैं करूं तो करूं
- 3:21:50क्या? शौर्य अपनी चिंता जाहिर करते हुए
- 3:21:52बोला। शौर्य की बात सुनकर शिप्रा का दिल
- 3:21:55तो धक से रह गया। उसे समझ नहीं आया कि वो
- 3:21:58इस बात पर शौर्य को क्या बोले। शौर्य को
- 3:22:01दूसरी तरफ की खामोशी से चिंता हुई कि
- 3:22:03शिप्रा को कोई सदमा तो नहीं लग गया। वो
- 3:22:06जल्दी से बोला क्या हुआ? तुम्हारी आवाज
- 3:22:08क्यों नहीं आ रही? मुझे नहीं पता तुम क्या
- 3:22:11करोगे और [संगीत] कैसे करोगे। पर तुम्हें
- 3:22:13यह बात सबको बतानी ही पड़ेगी कि तुम पहले
- 3:22:16से शादीशुदा हो। मैं अब और अंधेरे में
- 3:22:18नहीं रह सकती। शिप्रा किसी जलबिन मछली के
- 3:22:21जैसे तड़पती हुई बोली। अब इसमें मैं क्या
- 3:22:24कर सकता हूं? तुम हूं क्यों नहीं अपनी
- 3:22:26दोस्त कनिका को बता देती कि तुम मुझसे
- 3:22:28शादी कर चुकी हो। शौर्य शिप्रा को एक राह
- 3:22:31दिखाते हुए बोला, मैं क्यों बोलूं? तुम
- 3:22:34क्यों नहीं उसको बोल देते कि तुम शादीशुदा
- 3:22:36हो, बात ही खत्म हो जाएगी। वो तो वैसे ही
- 3:22:39तुमसे शादी नहीं करना चाहती। उसे तो अपनी
- 3:22:42शादी तोड़ने का बहाना मिल जाएगा। शिप्रा
- 3:22:44शौर्य पर ही यह बात डालती हुई बोली कि
- 3:22:47कनिका से पीछा छुड़ाना उसी की जिम्मेदारी
- 3:22:49है। तुम एक काम करो तुम राजमहल आ जाओ।
- 3:22:53देखते हैं कि हम क्या कर सकते हैं। शौर्य
- 3:22:55अपने मतलब पर आता हुआ बोला। अभी नहीं मैं
- 3:22:59अभी नहीं आ सकती और फिर मैं वहां आकर किसी
- 3:23:02से क्या कहूंगी कि मैं यहां क्यों आई हूं
- 3:23:04और दूसरी बात अभी मुझे राधिका की
- 3:23:06इंगेजमेंट पार्टी के लिए भी निकलना है।
- 3:23:08शिप्रा इंकार करती हुई बोली तो फिर ठीक
- 3:23:11है। फिर बाद में मुझे मत कहना कि मैंने
- 3:23:14कुछ नहीं किया। वैसे कनिका इतनी बुरी भी
- 3:23:16नहीं है। अगर जबरदस्ती उसको मुझसे शादी
- 3:23:19करनी भी पड़ेगी तो देर सवेेर वो मुझे पसंद
- 3:23:21तो करने ही लगेगी। शौर्य बेचारगी से बोली
- 3:23:25अगर तुमने ऐसा किया तो पहले मैं तुम्हारा
- 3:23:27खून करूंगी उसके बाद खुद को मार लूंगी।
- 3:23:30शिप्रा गुस्सा दिखाती हुई बोली फिर तो
- 3:23:33शायद तुमको यही करना पड़ेगा क्योंकि हमारे
- 3:23:36पास दूसरा कोई चारा ही नहीं होगा। शौर्य
- 3:23:38अफसोस भरे स्वर में बोला शौर्य की बात पर।
- 3:23:42दूसरी तरफ थोड़ी देर शांति छाई रही। फिर
- 3:23:45शिप्रा का हारा हुआ स्वर सुनाई दिया। पर
- 3:23:48मैं वहां आकर क्या करूंगी? किससे मिलूंगी?
- 3:23:51तुम आकर नीलिमा से मिल लेना। उसे तो
- 3:23:53तुम्हारे बारे में सब पता ही है। तुम
- 3:23:55दादाजी से भी मिलने के बहाने तो आ ही सकती
- 3:23:57हो। शौर्य शिप्रा को समझाते हुए बोला,
- 3:24:00"तुम ना मुझे फंसा रहे हो। मुझे डर लग रहा
- 3:24:03है। शिप्रा मायूष से बोली, तुम्हें डर लग
- 3:24:06रहा है। तुम मुझे डरा कर रखती हो और कह
- 3:24:08रही हो कि तुम्हें डर लग रहा है। शौर्य
- 3:24:10अपने चेहरे पर मुस्कान लाते हुए बोला,
- 3:24:13"तुम्हें तो हैंडल करना आसान है।" पर
- 3:24:15सासससुर के सामने पड़ना कितना मुश्किल है।
- 3:24:18वो भी तब जब उन्हें पता ही नहीं है कि
- 3:24:20उनकी कोई बहू भी है। वो क्या सोचेगी कि
- 3:24:22मैंने तुम्हें बहला फुसलाकर तुमसे शादी कर
- 3:24:24ली है। शिप्रा अपनी चिंता जाहिर करती हुई
- 3:24:27बोली। तुम्हारी सास इतनी भी डरावनी नहीं
- 3:24:30है। अगर तुम्हें नहीं आना है तो ठीक है।
- 3:24:32बाद में मुझसे शिकायत मत करना। शौर्य
- 3:24:34शिप्रा के ऊपर ही सब छोड़ता हुआ बोला। पर
- 3:24:37अगर किसी ने वह पूछ लिया कि मैं राजमहल
- 3:24:39क्या करने आई हूं तो क्या जवाब दूंगी?
- 3:24:42शिप्रा एक तरह से खुद को राजमहल जाने के
- 3:24:44लिए तैयार करती हुई बोली। अरे तुम फैब्रिक
- 3:24:47ट्रेंड की सीईओ हो। कह देना दादाजी से कोई
- 3:24:49साइन लेने आई हूं या दादाजी ने ही बुलाया
- 3:24:51है। अब यह बहाने भी क्या मुझे तुमको
- 3:24:54समझाना पड़ेगा? शौर्य समझाता हुआ बोला।
- 3:24:57ठीक है मैं आ रही हूं। [संगीत] मुझे नहीं
- 3:24:59पता वहां मेरे आने के बाद क्या होगा। पर
- 3:25:02जो भी होगा उसके लिए तुम ही जिम्मेवार
- 3:25:04होंगे। तुम मुझे फंसा रहे हो। इसका हिसाब
- 3:25:07तो मैं तुमसे बाद में लूंगी। शिप्रा
- 3:25:10भुनभुनाती [संगीत]
- 3:25:10हुई बोली। शौर्य कुछ बोला नहीं। बस शिप्रा
- 3:25:13की बेबसी पर मुस्कुरा भर दिया। इसके बाद
- 3:25:16शौर्य वहां उपस्थित लोगों में शामिल हो
- 3:25:17गया। उसने नीलिमा को मैसेज करके पूछा।
- 3:25:20कहां हो तुम? काम बताओ। क्या करना है या
- 3:25:23क्या काम है? नीलिमा शौर्य को अच्छे से
- 3:25:26समझती थी। उसे पता था कि उसका भाई बिना
- 3:25:28किसी काम के तो उसको याद नहीं करता है।
- 3:25:30अगर उसने मैसेज किया है तो इसका मतलब जरूर
- 3:25:33उसको उससे कोई काम होगा। शौर्य ने भी उसके
- 3:25:36साथ ज्यादा माथापच्ची करना जरूरी नहीं
- 3:25:38समझा और उससे बोला तुम्हारी भाभी यहां आ
- 3:25:40रही है। आज सोच रहा हूं उसे मां से मिला
- 3:25:43दूं। नहीं तो वो फालतू में मेरे लिए टेंशन
- 3:25:46लेती रहेगी। नीलिमा ने जैसे ही यह मैसेज
- 3:25:48पढ़ा वो अपनी जगह पर उठकर बैठ गई। उसने
- 3:25:51तुरंत टाइप किया। यह तुमने पहली बार सही
- 3:25:53काम किया है भैया। मैं तो कब से इस पल का
- 3:25:56इंतजार कर रही थी। अब तुम निश्चिंत हो
- 3:25:58जाओ। आने [संगीत] दो भाभी को। मैं हैंडल
- 3:26:00कर लूंगी। वैसे तुम्हारी दूसरी शादी का
- 3:26:02क्या हुआ? अभी तो तुम्हारे दूसरे ससुराल
- 3:26:05वाले घर में ही हैं। देखो लग तो रहा है कि
- 3:26:08यह मुसीबत टल जाएगी। पर इसी बात से तो
- 3:26:10पापा मम्मी को टेंशन हो रहा है। इसलिए
- 3:26:13सोचा कम से कम मां को तो उसकी बहू से
- 3:26:15मिलवा दूं। तब शायद उन्हें अफसोस नहीं
- 3:26:17होगा कि उनके बेटे के साथ कुछ गलत हो गया
- 3:26:19है। शौर्य ने नीलिमा को अपनी प्लानिंग
- 3:26:22समझाया। [संगीत] नीलिमा भी इस बात से खुश
- 3:26:24हो गई और बोली, मैं अभी भाभी से बात कर
- 3:26:26लेती हूं। अब तुम इधर से निश्चिंत हो जाओ।
- 3:26:29इतना कहकर नीलिमा ने फोन काट दिया। शिप्रा
- 3:26:33ने फोन पर शौर्य से यह कह तो दिया था कि
- 3:26:35वो राजमहल आ रही है। पर उसे यह सोच-सच कर
- 3:26:39डर लग रहा था कि वो राजमहल जाकर शौर्य के
- 3:26:43मम्मी पापा का सामना कैसे करेगी। कहीं
- 3:26:45उन्होंने उसे एक गोल डीगर समझ लिया तो वह
- 3:26:48कैसे अपनी सफाई देगी? शौर्य ने उसे किस
- 3:26:52मुश्किल में फंसा दिया? [संगीत] एक बार को
- 3:26:54तो उसने सोचा अभी वह राजमहल नहीं जाएगी।
- 3:26:57बाद में शौर्य को बोल देगी कि उसे अपनी
- 3:26:59मां के पास होते हुए राधिका की इंगेजमेंट
- 3:27:01पार्टी में जाना था। इसलिए उसे जल्दी से
- 3:27:04अपने घर के लिए निकलना पड़ा। उसने ऐसा सोच
- 3:27:06तो लिया। पर फिर अगले ही पल उसके मन में
- 3:27:09यह ख्याल आया कि अगर वह नहीं जाती है तो
- 3:27:12इसका नुकसान तो उसे ही उठाना होगा। अगर
- 3:27:15शौर्य को मजबूरन कनिका के साथ रिश्ते में
- 3:27:17बंधना पड़ा तो क्या वह इसे बर्दाश्त कर
- 3:27:19पाएगी? इस सोच ने तुरंत कनिका के शरीर में
- 3:27:22एक झुरझुरी सी पैदा कर दी। नहीं वो यह
- 3:27:26रिस्क नहीं ले सकती। शौर्य किसी और का हो
- 3:27:29जाएगा। इस सोच ने ही शिप्रा के अंदर एक डर
- 3:27:33पैदा कर दी। वो तुरंत तैयार होकर राजमहल
- 3:27:36के लिए निकल गई। जल्दी ही वह राजमहल के
- 3:27:38सामने मौजूद थी। वो तुरंत अंदर की तरफ बढ़
- 3:27:41गई क्योंकि गार्ड उसे पहले से ही जानता
- 3:27:43था। इसलिए उन्होंने शिप्रा को रोकने की भी
- 3:27:45कोशिश नहीं की। महल के चार दीवारी के अंदर
- 3:27:48आने के बाद शिप्रा अभी शौर्य को फोन करने
- 3:27:50की सोच ही रही थी कि तभी उसने देखा सामने
- 3:27:53से प्रतीक चला आ रहा है। प्रतीक ने शिप्रा
- 3:27:56को यहां देखा तो उसने आश्चर्य से पूछा अरे
- 3:27:59तुम यहां इस समय शिप्रा को इसी बात का डर
- 3:28:03था। वो नहीं चाहती थी कि उसका सामना
- 3:28:05प्रतीक से हो। पर जब उसने देखा उसका सामना
- 3:28:08प्रतीक से हो ही गया तो उसने मुस्कुराने
- 3:28:10का प्रयास करते हुए कहा। कुछ खास नहीं।
- 3:28:13राजा साहब से काम था तो उन्हीं से मिलने
- 3:28:15के लिए आई थी। राजा साहब से उनसे भला
- 3:28:18तुम्हें अभी क्या काम हो सकता है? ऑफिस के
- 3:28:21जो भी काम होते हैं उसे करने के लिए तो
- 3:28:23तुम खुद ही कोई भी डिसीजन ले सकती हो। तो
- 3:28:25फिर इस समय राजा साहब से मिलना कुछ समझ
- 3:28:27नहीं आया। प्रतीक शंका भरी नजरों से
- 3:28:30शिप्रा को देखते हुए बोला। तुम गलत समझ
- 3:28:33रहे हो। यह ऑफिस का कोई काम नहीं है।
- 3:28:35बल्कि उन्होंने ही मुझे फोन करके किसी काम
- 3:28:38के लिए यहां बुलाया था। यह तो उनसे मिलने
- 3:28:40पर ही पता चलेगा कि उन्होंने मुझे किस लिए
- 3:28:42बुलाया है। शिप्रा प्रतीक की बात सुनकर
- 3:28:45हड़बड़ा गई थी। फिर उसे जो भी समझ में आया
- 3:28:48उसने तुरंत वैसा बोल दिया। इसी समय कहीं
- 3:28:51से नीलिमा उसके सामने प्रकट हुई। उसने
- 3:28:53शिप्रा की अंतिम बात सुन ली थी। इसलिए
- 3:28:55[संगीत] वो उसके पास आती हुई बोली। आप आ
- 3:28:58गई। मेरे ही कहने पर दादा जी ने आपको यहां
- 3:29:00बुलाया है। एक्चुअली मुझे कुछ मार्केटिंग
- 3:29:02करनी थी और यहां के बारे में मैं कुछ
- 3:29:04ज्यादा जानती नहीं तो मेरी मदद के लिए
- 3:29:07दादा जी ने आपको बुला लिया। नीलिमा की बात
- 3:29:09सुनकर शिप्रा ने राहत की सांस ली और उसने
- 3:29:12जिस तरह से उसकी बात को संभाल लिया इस बात
- 3:29:14से उसकी समझदारी का भी पता चल रहा था।
- 3:29:17अच्छा तो यह बात है पर इस समय राजा साहब
- 3:29:20कहां है? शिप्रा नीलिमा की तरफ ध्यान देती
- 3:29:22हुई बोली अभी हमारे यहां कुछ गेस्ट बाहर
- 3:29:25से आए हुए थे। उनको छोड़ने के बाद दादाजी
- 3:29:28अपने कमरे में ही गए हैं। अगर तुमको उनसे
- 3:29:30मिलना है तो चलो मैं तुम्हें उनके कमरे
- 3:29:32में ले चलता हूं। प्रतीक शिप्रा की आंखों
- 3:29:34में देखते हुए बोला। अरे आप क्यों तकलीफ
- 3:29:37कर रहे हैं प्रतीक भैया? मैं हूं ना। मैं
- 3:29:39इन्हें दादा जी के पास ले जाती हूं। आखिर
- 3:29:42यह यहां आई भी तो मेरे लिए ही है। फिर
- 3:29:45मुझे इनके साथ मार्केटिंग के लिए भी जाना
- 3:29:46है। नीलिमा प्रतीक को रोकते हुए बोली।
- 3:29:50नीलिमा की बात सुनकर प्रतीक के पास अब कुछ
- 3:29:52कहने के लिए रह नहीं गया। इसलिए वो शिप्रा
- 3:29:54से विदा लेते हुए बोला। ठीक है फिर तुम ही
- 3:29:58ले जाओ। मैं तुमसे बाद में मिलता हूं।
- 3:29:59शिप्रा। नीलिमा शिप्रा के साथ महल के अंदर
- 3:30:02की तरफ बढ़ गई। प्रतीक से अलग होने पर
- 3:30:05शिप्रा ने राहत की सांस ली और नीलिमा से
- 3:30:07बोली थैंक गॉड तुम मिल गई नहीं तो फिर
- 3:30:11प्रतीक से पीछा छुड़ाना इतना आसान नहीं
- 3:30:12था। दूसरी तरफ जब राठौर फैमिली ने चौहान
- 3:30:16फैमिली को अपने यहां से विदा कर दिया तो
- 3:30:18सभी अपने-अपने कमरे की तरफ चल दिए।
- 3:30:20सूर्यभान और कल्पना जी भी उदास कदमों से
- 3:30:23अपने कमरे की तरफ बढ़ गए। शौर्य उनकी
- 3:30:26उदासी का कारण समझ रहा था। पर वह अभी
- 3:30:28उन्हें समझाने की स्थिति में नहीं था।
- 3:30:31हां, आज उसने यह निश्चय कर लिया था कि कम
- 3:30:34से कम वह अपनी मां को शिप्रा के बारे में
- 3:30:36जरूर बता देगा ताकि उसकी मां उसके लिए
- 3:30:39उदास ना हो। क्योंकि शौर्य के पिता तो खुद
- 3:30:42को समझा सकते थे। पर शौर्य की मां शौर्य
- 3:30:44की शादी को लेकर बहुत उत्साहित हो गई थी।
- 3:30:47और उन्होंने जैसे मान भी लिया था कि अब
- 3:30:49कुछ ही दिनों में उनकी बहू इस घर में आ
- 3:30:51जाएगी। पर आज जो कुछ भी हुआ उससे उनको
- 3:30:55इतना तो समझ आ गया कि इस घर में कोई यह
- 3:30:57चाहता ही नहीं कि शौर्य की शादी कनिका से
- 3:31:00हो। शौर्य अपने मम्मी पापा के साथ उनके
- 3:31:03कमरे में आया। कमरे में आने के बाद
- 3:31:05सूर्यभान जी शौर्य को उदासी भरी नजरों से
- 3:31:08देखते हुए बोले, पता नहीं क्यों। पर मुझे
- 3:31:12लग रहा है कि इस परिवार में कोई यह चाहता
- 3:31:14नहीं कि तुम्हारी शादी चौहान फैमिली में
- 3:31:16हो।
- 3:31:18यहां तक कि आज मुझे पिताजी का भी रवैया
- 3:31:20थोड़ा बदला हुआ सा लगा। जैसे वह भी नहीं
- 3:31:23चाहते हो कि तुम्हारी शादी विक्रमजीत जी
- 3:31:26की पोती से हो। शौर्य अपने पिताजी की
- 3:31:29तकलीफ को समझ रहा था। पर वो उन्हें कैसे
- 3:31:31बताता कि दादाजी ऐसा क्यों कर रहे थे? वो
- 3:31:34अपने पिता को ढांडस बंधाते हुए बोला आप
- 3:31:37चिंता क्यों करते हैं पापा? जो होना होगा
- 3:31:39वह तो होगा ही। और फिर मुझे खुद ही इस
- 3:31:42शादी में कोई इंटरेस्ट नहीं है। सूर्यभान
- 3:31:45जी को लगा कि शौर्य ऐसा उन्हें सिर्फ
- 3:31:46तसल्ली देने के लिए कह रहा है। नहीं तो
- 3:31:49भला कौन कनिका जैसी खूबसूरत लड़की के साथ
- 3:31:51शादी करना नहीं चाहेगा। उनके मन में बहुत
- 3:31:54कुछ चल रहा था। अपने परिवार वालों की बात
- 3:31:57तो उन्हें समझ आ रही थी। पर उन्हें अपने
- 3:31:59पिता का रवैया समझ में नहीं आया। उन्होंने
- 3:32:02सोचा एक बार उन्हें इस बारे में अपने पिता
- 3:32:04से बात करनी चाहिए। यह सोचकर उन्होंने
- 3:32:07कल्पना जी से कहा। मैं अभी जरा एक बार
- 3:32:09पिताजी से बात करके आता हूं। शौर्य अपने
- 3:32:12पिता को इसके लिए रोकना चाहता था। पर वह
- 3:32:14यह नहीं समझ पाया कि इसके लिए वह अपने
- 3:32:17पिता को क्या बोले। सूर्यभान जी को कमरे
- 3:32:19से बाहर जाते देखकर शौर्य भी उनके साथ
- 3:32:22कमरे से बाहर की तरफ निकल गया। अभी वह
- 3:32:24राहदारी में कुछ ही आगे गया था कि उसने
- 3:32:26देखा सामने से नीलिमा शिप्रा के साथ चली आ
- 3:32:29रही थी। शिप्रा को आया देखकर उसके चेहरे
- 3:32:32पर चमक आ गई। वो जल्दी से अपने पापा के
- 3:32:35पास गया और उनके कान के पास फुसफुसाया।
- 3:32:38पापा नीलिमा के साथ जो यह लड़की दिख रही
- 3:32:40है यह आपको कैसी लगती है? सूर्यभान जी
- 3:32:44शिप्रा से पहले भी मिल चुके थे और उन्हें
- 3:32:46शिप्रा बहुत अच्छी भी लगी थी। शौर्य की
- 3:32:48बात सुनकर उनके कदम ठिटक गए और वह शौर्य
- 3:32:51की ओर देखकर बोले क्या मतलब हुआ तुम्हारी
- 3:32:54इस बात का? पहले आप यह तो बताइए कि यह
- 3:32:57लड़की आपको कैसी लगती है? शौर्य अपने पापा
- 3:33:00की बात को नजरअंदाज करके बोला, "अच्छी
- 3:33:02लड़की है। पर तुम कहना क्या चाहते हो?
- 3:33:05सूर्यभान जी असमंजस की स्थिति में बोले
- 3:33:08अगर कनिका मुझे पसंद नहीं करती तो आप
- 3:33:11चिंता क्यों करते हो? मैं इस लड़की से
- 3:33:13शादी कर लूंगा। आपको मेरी शादी की ही तो
- 3:33:15चिंता है ना। इस तरह आपकी यह चिंता भी दूर
- 3:33:18हो जाएगी। शौर्य मुस्कुराते हुए बोला।
- 3:33:21शौर्य की बात सुनकर सूर्यभान जी ने इस बार
- 3:33:24गौर से शिप्रा की तरफ देखा। उन्होंने बहुत
- 3:33:26सी लड़कियों को देखा था। पर शिप्रा की
- 3:33:28खूबसूरती उन्हें सचमुच बहुत ही अद्वितीय
- 3:33:31लगी थी। उन्हें इस बात से एक उम्मीद बंधी
- 3:33:34कि शौर्य के मन में कनिका के द्वारा
- 3:33:36रिजेक्ट किए जाने की चिंता नहीं है। नहीं
- 3:33:38तो उन्हें यह भी चिंता लगी हुई थी कि कहीं
- 3:33:40कनिका के साथ उसका रिश्ता पक्का हो जाने
- 3:33:43के बाद शौर्य ने कहीं यह उम्मीद ना पाल ली
- 3:33:45हो कि अब कनिका उसकी पत्नी होने [संगीत]
- 3:33:47वाली है। अगर ऐसा होता तो कनिका के द्वारा
- 3:33:50नापसंद किए जाने पर शौर्य का दिल टूट
- 3:33:52जाता। इसी समय नीलिमा शिप्रा के साथ अपने
- 3:33:55पापा के पास पहुंच गई थी। शिप्रा ने एक
- 3:33:58उड़ती निगाह शौर्य पर डाली। फिर सूर्यभान
- 3:34:01जी को देखकर नीचे झुकी और उनके पैर को
- 3:34:03छूकर प्रणाम किया। सूर्यभान जी का हाथ
- 3:34:06स्वतः ही आशीर्वाद देने की मुद्रा में
- 3:34:08शिप्रा के सर पर पड़ा। पर उन्हें इस बात
- 3:34:10से आश्चर्य भी हुआ [संगीत] कि शिप्रा ने
- 3:34:12उन्हें पैर छूकर क्यों प्रणाम किया? वो
- 3:34:15पहले भी शिप्रा से फैब्रिक ट्रेंड के सीईओ
- 3:34:17के रूप में मिल चुके थे। उस समय तो उसने
- 3:34:19नमस्ते ही किया था। फिर आज यूं पैर छूकर
- 3:34:22प्रणाम करने का क्या मतलब हुआ? फिर उन्हें
- 3:34:25लगा इसका कारण यह हो सकता है कि उस दिन वह
- 3:34:27सब ऑफिस में थे और आज वह उनके घर आई हुई
- 3:34:30है। उन्होंने खुद को संयत करते हुए शिप्रा
- 3:34:33से पूछा तुम यहां कैसे? कुछ काम था क्या?
- 3:34:37शिप्रा कुछ जवाब देती उससे पहले नीलिमा
- 3:34:39बोली, "मेरे कहने पर दादाजी ने इन्हें
- 3:34:42यहां बुलाया है। मुझे मार्केटिंग करनी थी
- 3:34:44और मैं यहां किसी को जानती तो हूं नहीं।
- 3:34:46इसलिए मैंने सोचा कि यह मेरी इसमें मदद कर
- 3:34:48सकती हैं। अच्छा यह बात है। पर तुम्हें इस
- 3:34:51बात के लिए इन्हें तकलीफ नहीं देनी चाहिए
- 3:34:53थी। तुम्हें समझना चाहिए कि इनका काम
- 3:34:56कितना इंपॉर्टेंट है। सूर्यभान जी नीलिमा
- 3:34:59को समझाते हुए बोले, अगर आपने भाई की शादी
- 3:35:01कर दी होती तो मुझे यूं किसी को अपनी मदद
- 3:35:04के लिए ऐसे नहीं बुलाना पड़ता। फिर हम
- 3:35:06ननंद भौजाई की जोड़ी खुद ही पूरा विशालगढ़
- 3:35:08घूम लेती। नीलिमा शिप्रा का हाथ पकड़ती
- 3:35:11हुई बोली। इसके बाद नीलिमा एक कदम और आगे
- 3:35:14बढ़ते हुए अपने पापा से बोली, "मैं तो
- 3:35:16कहती हूं कि आप भूल जाओ उस चौहान फैमिली
- 3:35:19की बेटी को। क्यों ना इन्हीं से भाई की
- 3:35:21शादी कर दें। देखो तो कितनी खूबसूरत है।
- 3:35:24दिया लेकर भी ढूंढेंगे तो भाई के लिए इतनी
- 3:35:26खूबसूरत लड़की नहीं मिलेगी। सूर्यभान जी
- 3:35:29ने एक निगाह शिप्रा की तरफ डाली। उन्होंने
- 3:35:31देखा कि नीलिमा की बात सुनकर शिप्रा थोड़ी
- 3:35:34अनकंफर्टेबल फील करने लगी थी। इसलिए
- 3:35:36उन्होंने नीलिमा को डांटते हुए कहा। बोलने
- 3:35:39से पहले कुछ सोच तो लिया करो कि इस तरह
- 3:35:41बोलने [संगीत] से सामने वाले को तुम्हारी
- 3:35:42यह बात अनकंफर्टेबल भी फील करा सकती है।
- 3:35:45देखा तुमने शिप्रा को कैसे शर्मिंदा कर
- 3:35:47दिया है। जब यह जो कुछ हो रहा था, इससे
- 3:35:50शिप्रा का मन आंदोलित होता जा रहा था। जिस
- 3:35:53तरह नीलिमा उसको लेकर अपने पिता के सामने
- 3:35:55बात कर रही थी, यह बात उसके दिल को
- 3:35:57गुदगुदा रही थी। इस समय वह शौर्य की तरफ
- 3:35:59देखने की हिम्मत नहीं ला पा रही थी।
- 3:36:01सूर्यभान जी ने जब शिप्रा को नर्वस होते
- 3:36:03महसूस किया तो उन्होंने कहा, तुम इसकी बात
- 3:36:06का बुरा मत मानना। यह तो ऐसे ही कुछ भी
- 3:36:09बोलती रहती है। पर मैं चाहूंगा कि तुम
- 3:36:11मेरी बेटी को थोड़ा सा अपने साथ इस शहर
- 3:36:13में घुमा दो तो उसे अच्छा लगेगा। जी यह
- 3:36:16बात आपको कहने की जरूरत नहीं है। पहले ही
- 3:36:19से हमारी दोस्ती हो गई है। तो मैं जितना
- 3:36:21भी बन पड़ेगा इसको यह शहर अच्छे से दिखा
- 3:36:23दूंगी। शिप्रा नीलिमा के कंधे पर हाथ रखकर
- 3:36:26उसकी अपनी तरफ खींचती हुई बोली। ठीक है,
- 3:36:29तुम इसके साथ जाओ, मैं भी जाता हूं। इतना
- 3:36:32कहकर सूर्यभंजी शौर्य के साथ आगे बढ़ गए।
- 3:36:35शिप्रा अपनी जगह से पलटकर सूर्यभंजी और
- 3:36:38शौर्य को जाते हुए देखती रही। नीलिमा ने
- 3:36:41शिप्रा के कमर पर चींटी काटते हुए कहा, अब
- 3:36:44चलें या यहां खड़े-खड़े ऐसे ही भाई को
- 3:36:46जाते हुए घूरती रहेंगी? शिप्रा नीलिमा की
- 3:36:49तरफ पलटी और झेपती हुई बोली। तुम कुछ
- 3:36:52ज्यादा ही शरारती नहीं होती जा रही हो।
- 3:36:54बहुत अच्छे। एक तो मैं आपकी मदद कर रही
- 3:36:56हूं और उस पर भी आप मुझे शरारती कह रही
- 3:36:58हैं। ठीक है फिर तो मैं कहीं नहीं जाती।
- 3:37:01आप खुद अपनी मदद कर लो।
- 3:37:03नीली मां उसी जगह अपने कमर पर दोनों हाथ
- 3:37:05रखकर खड़ी हो गई और एक तक शिप्रा को देखती
- 3:37:08हुई रूठे अंदाज में बोली अरे ऐसा मत करो
- 3:37:11मेरी मां इस समय मैं तेरा रूठना बर्दाश्त
- 3:37:13नहीं कर पाऊंगी तुम सही मैं गलत तुम्हारे
- 3:37:16भरोसे ही तो मेरी नैया अटकी हुई है शिप्रा
- 3:37:19नीलिमा से विनती भरे स्वर में बोली शिप्रा
- 3:37:22की बात सुनकर नीलिमा के चेहरे पर मुस्कान
- 3:37:24आ गई तुरंत वह मुस्कुराते हुए बोली थोड़ा
- 3:37:28ड्रामा तो करना पड़ता है ना भाभी नहीं तो
- 3:37:30आप क्या समझती हो कि मैं आपसे रूठ कर खुश
- 3:37:32रह पाऊंगी
- 3:37:33नीलिमा की बात सुनकर शिप्रा का मन भर आया।
- 3:37:36उसे नीलिमा पर बहुत प्यार आया। उसने
- 3:37:38उम्मीद नहीं की थी कि उसे इतनी प्यारी ननद
- 3:37:41मिलेगी। उसने नीलिमा के चेहरे को अपने
- 3:37:43हाथों में भरा और उसके गालों को चूम लिया।
- 3:37:46अब चलो जल्दी से मां के कमरे में चलते
- 3:37:48हैं। देखते हैं वह क्या कर रही हैं।
- 3:37:51नीलिमा शिप्रा का हाथ पकड़ कर अपने मां के
- 3:37:53कमरे की तरफ बढ़ती हुई बोली। कल्पना जी
- 3:37:57अपने कमरे में आने के बाद शौर्य के लिए ही
- 3:37:59परेशान थी। आज जो कुछ भी चौहान फैमिली के
- 3:38:02साथ बातचीत के दौरान हुआ था, इस बात से
- 3:38:05उन्हें लगने लगा कि उनकी फैमिली ने उन्हें
- 3:38:07अभी तक पूरी तरह अपनाया नहीं है। जिस तरह
- 3:38:10से सभी का जोर इस बात पर था कि विक्रमजीत
- 3:38:13जी को अपनी पोती के रिश्ते के लिए कनिका
- 3:38:15की राय लेनी चाहिए। इस बात से वह आहत थी।
- 3:38:18अगर पहले ही यह बात होती तो उन्हें तकलीफ
- 3:38:20नहीं होती। पर सब कुछ फाइनल करने के बाद
- 3:38:23दोबारा कनिका की राय जानने की बात करना
- 3:38:25उनके मन में संदेह पैदा कर रहा था। अभी वह
- 3:38:28अपनी सोच में ही उलझी हुई थी कि तभी
- 3:38:30दरवाजे पर आहट सुनकर उन्होंने दरवाजे की
- 3:38:32तरफ देखा तो सामने से नीलिमा को शिप्रा के
- 3:38:35साथ आते देखा। नीलिमा ने अपनी मां के
- 3:38:37चेहरे पर चिंता की झलक देखी तो उसने अपनी
- 3:38:40मां से पूछा क्या हुआ मां? सब ठीक तो है?
- 3:38:43देखो तो आपसे कौन मिलने आई है? कल्पना जी
- 3:38:46शिप्रा को देखकर अपने चेहरे पर मुस्कान
- 3:38:48लाती हुई बोली। अरे शिप्रा बेटी तुम आज
- 3:38:51ऑफिस छोड़कर घर कैसे आ गई? शिप्रा कल्पना
- 3:38:54जी के पास गई और उनके पैर छूकर प्रणाम की।
- 3:38:57वह कुछ बोलती उससे पहले नीलिमा उत्साहित
- 3:39:00स्वर में बोली दादाजी से कहकर मैंने
- 3:39:02इन्हें बुलवाया है। आप लोग तो मुझे कहीं
- 3:39:04घुमाती नहीं। सोचा भाभी के साथ ही इस शहर
- 3:39:06को घूम लूंगी। थोड़ी बहुत मार्केटिंग भी
- 3:39:08कर लूंगी। नीलिमा की बात सुनकर शिप्रा के
- 3:39:11साथ कल्पना जी हैरानी से उसकी तरफ देखने
- 3:39:13लगे। जबकि नीलिमा को समझ ही नहीं आया कि
- 3:39:16वो ऐसा क्या बोल गई कि दोनों हैरान नजरों
- 3:39:18से उसकी तरफ देखने लगी हैं। बोलने से पहले
- 3:39:21सोच तो लिया करो कि क्या बोल रही हो।
- 3:39:23कल्पना जी नीलिमा को झिरकते हुए बोली। वो
- 3:39:26शिप्रा के चेहरे पर ए्ब्रेसमेंट साफ देख
- 3:39:28पा रही थी। क्यों ऐसा क्या बोल दिया जो
- 3:39:31मुझे सोचना चाहिए? नीलिमा अनजान बनती हुई
- 3:39:34बोली। नीलिमा की बात सुनकर कल्पना जी फिर
- 3:39:37से नीलिमा को आंख दिखाते हुए बोली। शिप्रा
- 3:39:40तुम्हारी भाभी कब से हो गई जो तुम इसे
- 3:39:42भाभी बोल रही हो। इतना बोलने के बाद वो
- 3:39:44शिप्रा को देखती हुई आगे बोली। सॉरी बेटी।
- 3:39:48पता नहीं इस लड़की का दिमाग कहां रहता है।
- 3:39:51अपनी मां की बात सुनकर नीलिमा को समझ आया
- 3:39:53कि उसने क्या गलती कर दी है। वो बोलने के
- 3:39:55प्रवाह में शिप्रा को भाभी बोल दी थी। वो
- 3:39:58खुद को दुरुस्त करती हुई बोली अच्छा मैंने
- 3:40:01इन्हें भाभी बोल दिया था। काश कि यह बात
- 3:40:04सच हो जाती। अगर मेरा बस चलता [संगीत] तो
- 3:40:07मैं इन्हें ही अपनी भाभी बना लेती। नीलिमा
- 3:40:10की बात सुनकर कल्पना जी के मन में भी यह
- 3:40:11हसरत [संगीत] जागी। काश ऐसा हो पाता।
- 3:40:14उन्होंने जब से शिप्रा को देखा था, उनके
- 3:40:17मन में [संगीत] उसी समय यह विचार आया था।
- 3:40:19उन्होंने उसी समय सोचा था कि अगर
- 3:40:21विक्रमजीत जी ने शौर्य के लिए अपनी पोती
- 3:40:23के रिश्ते की बात नहीं की होती, तो वह
- 3:40:25शिप्रा को अपनी बहू बना लेती। पर आज जो
- 3:40:28कुछ हुआ था उसको देखकर एक बार फिर से उनके
- 3:40:30मन में यह विचार आया कि अगर कनिका शौर्य
- 3:40:33को पसंद नहीं करती तो वह शिप्रा को अपनी
- 3:40:34बहू बनाने के बारे में जरूर सोचेगी। अपनी
- 3:40:37सोच से बाहर आती हुई कल्पना जी फिर से
- 3:40:39नीलिमा को डांटते हुए बोली तुम क्यों इस
- 3:40:42बेचारी को शर्मिंदा फील करा रही हो? यह
- 3:40:44यहां आई है तो इसे चाय कॉफी तो कुछ
- 3:40:46पिलवाओ। इतना कहकर वो शिप्रा को सोफे पर
- 3:40:49बैठने का इशारा करती हुई बोली। तुम आराम
- 3:40:52से बैठो बेटी। यह तो कुछ करेगी नहीं। मैं
- 3:40:54ही तुम्हारे लिए चाय मंगवाती हूं। अरे
- 3:40:56नहीं आंटी इसकी कोई जरूरत नहीं [संगीत]
- 3:40:58है। मैं तो बस आपसे मिलने के लिए यहां आ
- 3:41:01गई थी। शिप्रा सोफे पर बैठती हुई बोली।
- 3:41:04अगर यह आपकी बहू होती तो यह आपको चाय
- 3:41:06पिलाती मां। नीलिमा सोफे के हुड पर बैठती
- 3:41:09हुई शिप्रा के कंधे पर अपना हाथ रखती हुई
- 3:41:11बोली। तभी शौर्य ने उस कमरे में प्रवेश
- 3:41:14किया। उसने नीलिमा की लास्ट लाइन सुन ली
- 3:41:16थी। कौन किसको चाय पिलाता? कल्पना जी ने
- 3:41:20शौर्य को कमरे में आया देखा तो वो नीलिमा
- 3:41:22पर खींचती हुई बोली। यह लड़की तो आज कुछ
- 3:41:25भी बकवास किए जा रही है। क्यों नीलिमा की
- 3:41:27बच्ची तुम क्या बकवास किए जा रही हो?
- 3:41:30शौर्य नीलिमा के कान को खींचता हुआ बोला।
- 3:41:33ओई मां यह तुम क्या कर रहे हो? एक तो मैं
- 3:41:36तुम्हारा घर बसाने की कोशिश कर रही हूं और
- 3:41:38तुम मेरा ही कान खींच रहे हो। नीलिमा
- 3:41:40शौर्य से अपना कान चुराती हुई बोली अच्छा
- 3:41:43तो तुम मेरा घर [संगीत] बसाने की कोशिश कर
- 3:41:45रही हो। वो भला कैसे? शौर्य कल्पना जी के
- 3:41:49पास गया और उनके पीछे से उनके गले में हाथ
- 3:41:51डालकर उनके कंधे पर अपनी ठोरी रखते हुए
- 3:41:53बोला। यहां से वो नीलिमा और शिप्रा दोनों
- 3:41:56को एक साथ देख सकता था। मैंने कहां किसी
- 3:41:59और लड़की के चक्कर में पड़ी है जब सामने
- 3:42:02ही इतनी खूबसूरत लड़की है तो इसी से क्यों
- 3:42:05ना आपकी शादी कर दी जाए। नीलिमा शिप्रा के
- 3:42:08गाल पर चिकोटी काटती हुई बोली क्यों
- 3:42:11तुम्हें कोई और इससे अच्छी लड़की नहीं
- 3:42:13मिली जो किसी को भी मेरे लिए पसंद कर
- 3:42:15लिया। शौर्य नीलिमा का उपहास उड़ाने वाले
- 3:42:18अंदाज में बोला। शौर्य की बात सुनकर
- 3:42:21शिप्रा की दो त्योरियां चढ़ गई। अगर ऐसी
- 3:42:23बात उसने अकेले में कही होती तो शिप्रा
- 3:42:26उसकी अच्छे से खबर लेती। कल्पना जी को भी
- 3:42:28शौर्य की बात पसंद नहीं आई। वो शौर्य से
- 3:42:31खुद को चुराकर शिप्रा के पास गई और उसके
- 3:42:34पास बैठती हुई बोली, कैसी बात कर रहे हो
- 3:42:37तुम? इतनी अच्छी लड़की मिलना तो किसी के
- 3:42:39नसीब की बात होगी। क्या तुम दोनों
- 3:42:42जानबूझकर शिप्रा को शर्मिंदा कर रहे हो?
- 3:42:44शर्मिंदा करने का काम तो आपकी बेटी कर रही
- 3:42:47है मां। किसी को भी मेरे लिए पसंद कर ले
- 3:42:49रही है। शौर्य नीलिमा पर उपहास करता हुआ
- 3:42:52बोला। शौर्य की बात सुनकर तो शिप्रा घूर
- 3:42:55कर उसे देखने लगी। तुम ऐसे कैसे कुछ भी
- 3:42:58बोले जा रहे हो? तुम चाहकर भी ऐसी लड़की
- 3:43:00नहीं ढूंढ पाओगे। मैं तो ऐसी ही किसी
- 3:43:02लड़की को अपनी बहू के रूप में देखना चाहती
- 3:43:04हूं। शिप्रा बेटी तुम इन दोनों की बात का
- 3:43:07बुरा मत मानना। यह दोनों जरूर जानबूझकर
- 3:43:10तुम्हें छेड़ रहे हैं। कल्पना जी शिप्रा
- 3:43:12के सार पर हाथ फेरती हुई बोली। क्या मां?
- 3:43:16क्या तुम्हें सच में यह लड़की इतना पसंद
- 3:43:18है? ऐसी क्या खास बात है इसमें? शौर्य
- 3:43:21अपनी मां के पास जाकर फर्श पर घुटने के बल
- 3:43:23बैठकर शिप्रा की तरफ देखते हुए बोला, इसकी
- 3:43:27खासियत देखने के लिए तेरे पास नजर भी तो
- 3:43:29वैसी होनी चाहिए। कल्पना जी शौर्य का गाल
- 3:43:32खींचती हुई बोली, "अगर यह लड़की तुम्हें
- 3:43:34इतना ही पसंद है, तो फिर क्यों ना मैं
- 3:43:36इससे ही शादी कर लूं। धीरे-धीरे मुझे इसकी
- 3:43:39खासियत भी पता चल जाएगी। शौर्य कल्पना जी
- 3:43:42की आंखों में देखता हुआ बोला, "कल्पना जी
- 3:43:45को समझ नहीं आ रहा था कि दोनों भाई-बहन
- 3:43:47[संगीत]
- 3:43:47क्यों शिप्रा के पीछे पड़े हैं। वो देख
- 3:43:49रही थी कि शिप्रा के चेहरे पर नर्वसनेस का
- 3:43:52भाव था और वह कुछ बोल भी नहीं रही थी।
- 3:43:54उन्हें यह भी ध्यान आया कि शिप्रा ने आते
- 3:43:56ही उसका पांव छुआ था। उनके मन में एक शक
- 3:43:59ने जन्म लिया और वह ध्यान से कभी शौर्य को
- 3:44:01तो कभी शिप्रा को देख रही थी। शौर्य भी
- 3:44:04कल्पना जी के चेहरे के एक्सप्रेशन से यह
- 3:44:06समझ गया कि कल्पना जी को शौर्य और शिप्रा
- 3:44:08पर शक होने लगा है। वो कुछ और रिएक्शन
- 3:44:11देती उससे पहले शौर्य शिप्रा के सामने
- 3:44:13खड़ा होकर बोला। मिस शिप्रा जरा आप 1 मिनट
- 3:44:17के लिए खड़ी होना। शौर्य की बात पर शिप्रा
- 3:44:20का दिल बल्लियों उछलने लगा। वो घबराती हुई
- 3:44:23अपनी जगह पर खड़ी हुई। शौर्य ने उसका हाथ
- 3:44:25पकड़ा और कहा, क्या तुम मेरी मां की बहू
- 3:44:28बनना स्वीकार करोगी? शिप्रा को समझ नहीं
- 3:44:31आया कि वो इस [संगीत] स्थिति में क्या
- 3:44:33बोले? वो कभी शौर्य को तो कभी कल्पना जी
- 3:44:35को देख रही थी। कल्पना जी को तो दोनों
- 3:44:38भाई-बहन का खेल समझ में आ ही [संगीत] गया
- 3:44:40था। अब उन्होंने खुद खेल करने की सोची और
- 3:44:43बोली शिप्रा से पूछने से पहले मुझसे तो
- 3:44:46पूछ लो कि मुझे यह बहू के रूप में चाहिए
- 3:44:48भी या नहीं? मैं क्या ऐसे ही किसी को अपनी
- 3:44:51बहू बना लूंगी? कल्पना जी की बात सुनकर
- 3:44:53शौर्य को हैरानी हुई कि उसकी मां का सुर
- 3:44:56कैसे बदल गया। नीलिमा का भी कमोमेश यही
- 3:44:59हाल था। शिप्रा भी कल्पना जी का भाषा
- 3:45:01बदलते देखकर आश्चर्य में थी। क्या तुम यह
- 3:45:05कहना चाहती हो कि तुम्हें शिप्रा जैसी बहू
- 3:45:07नहीं चाहिए। मैंने तो पहले ही कहा था कि
- 3:45:10इसमें ऐसा भी कुछ खास नहीं है जो मां को
- 3:45:12यह बहू के रूप में पसंद होगी। शौर्य अपनी
- 3:45:15मां की बात सुनकर उसी के सुर में सुर
- 3:45:18मिलाते हुए बोला। पर अंदर से उसे अपना दिल
- 3:45:20बैठता हुआ लगा। दिल तो शिप्रा [संगीत] को
- 3:45:23भी अपना बैठता हुआ लगा। वो निराशा से
- 3:45:25शौर्य की ओर देख रही थी। बात मेरे पसंद
- 3:45:28करने या ना करने से क्या होता है? शिप्रा
- 3:45:31को भी तो हमारा बेटा पसंद आना चाहिए। अगर
- 3:45:34शिप्रा ने तुमसे शादी करने से मना कर दिया
- 3:45:36तो फिर उसे कैसे मेरी बहू बनाओगे? कल्पना
- 3:45:39जी शिप्रा का मन टटोलते हुए बोली। क्या
- 3:45:42मां तुम यह कैसी बात कर रही हो? कोई लड़की
- 3:45:45तुम्हारे बेटे को नापसंद कर सकती है?
- 3:45:47शौर्य गर्व से सीना चौड़ा करता हुआ बोला,
- 3:45:50"क्यों तुम में ऐसा क्या खास है जो मैं
- 3:45:53तुमसे शादी करने को तैयार हो जाऊंगी?
- 3:45:55सॉरी। पर मैं इसके लिए तैयार नहीं हो
- 3:45:57सकती। शिप्रा शौर्य से अपने लिए यह सुनकर
- 3:46:01कि उसमें ऐसी कोई खासियत नहीं है जो उससे
- 3:46:04शादी की जा सके। यह सुनकर आहत थी। इसीलिए
- 3:46:07उसने शौर्य को सबक सिखाने के लिए उसका
- 3:46:09शब्द उसी को वापस कर दिया। शिप्रा की बात
- 3:46:12सुनकर शौर्य के होश पाकता हो गए। उसने
- 3:46:15सोचा अब यह शिप्रा को क्या हो गया जो वो
- 3:46:18ऐसे बोल रही है? शौर्य के चेहरे के बदलते
- 3:46:21रंग को देखकर कल्पना जी बोली देख लिया
- 3:46:24तुम्हें खुद पर कुछ ज्यादा ही गुमान था।
- 3:46:26शिप्रा ने तुम्हें नापसंद कर दिया ना। अरे
- 3:46:28मां तुम इसकी बातों पर मत जाओ। यह तो मजाक
- 3:46:31में ऐसा बोल रही है। शौर्य कल्पना जी से
- 3:46:33बोला, "अच्छा, तुमको अभी भी लग रहा है कि
- 3:46:37शिप्रा तुमसे शादी करने को तैयार हो
- 3:46:38जाएगी?" कल्पना जी दोनों के चेहरे को
- 3:46:40देखती हुई बोली। शौर्य ने सोच लिया अब
- 3:46:43ज्यादा पर्दा करने की कोई जरूरत नहीं है।
- 3:46:45अब उसे खुलकर अपनी बात कह देनी चाहिए।
- 3:46:48इसलिए वह शिप्रा के करीब गया और उसके कंधे
- 3:46:50पकड़ते हुए बोला, "यह अगर मुझसे शादी नहीं
- 3:46:53भी करना चाहती, तो भी अब इसके हाथ में कुछ
- 3:46:55नहीं है। मां, यह पहले से ही तुम्हारी बहू
- 3:46:58बन चुकी है। क्या? कल्पना जी आश्चर्य से
- 3:47:01शिप्रा की तरफ देखने लगी। जबकि शौर्य की
- 3:47:03स्वीकारोक्ति के बाद शिप्रा कल्पना जी का
- 3:47:05रिएक्शन देखना चाहती थी। कल्पना जी के
- 3:47:08चेहरे पर आश्चर्य के भाव थे। उन्हें
- 3:47:10विश्वास नहीं हो रहा था कि जो कुछ शौर्य
- 3:47:12कह रहा है, वह सच हो सकता है। तुम मजाक कर
- 3:47:15रहे हो ना? कल्पना जी अविश्वास भरे स्वर
- 3:47:18में बोली, नहीं मां, यह कोई मजाक नहीं है।
- 3:47:21शिप्रा से मेरी शादी बहुत पहले ही हो चुकी
- 3:47:24है। यह सच में तुम्हारी बहू है। शौर्य
- 3:47:26कल्पना जी को विश्वास दिलाते हुए बोला,
- 3:47:29कल्पना जी शिप्रा की ओर देखने लगी जैसे
- 3:47:31उससे [संगीत] पूछ रही हूं कि शौर्य जो कह
- 3:47:33रहा है वह सच में मजाक ही है ना? पर
- 3:47:35शिप्रा ने कल्पना जी को अपनी तरफ देखते
- 3:47:38पाकर अपनी नजर झुका ली। शिप्रा के झुके सर
- 3:47:41को देखकर कल्पना जी समझ गई कि शौर्य जो कह
- 3:47:43रहा है वह सच है। मैं तुम्हें और पापा को
- 3:47:46जिस दिन तुम [संगीत] लोग यहां आई थी उसी
- 3:47:48दिन बताने वाला था। पर पार्टी वाले दिन
- 3:47:50विक्रमजीत जी की बात में आकर पापा ने उनकी
- 3:47:53पोती से मेरा रिश्ता पक्का कर दिया था।
- 3:47:55इसी कारण मैं तुम्हें यह बात उस दिन बता
- 3:47:57नहीं सका। शौर्य कल्पना जी के पास जाकर
- 3:48:00उनकी आंखों में देखता हुआ [संगीत] बोला।
- 3:48:01कल्पना जी शिप्रा के पास गई और उसके झुके
- 3:48:04हुए सर को ऊपर उठाया और शौर्य की तरफ
- 3:48:06देखकर [संगीत] बोली यह तुमने सही नहीं
- 3:48:09किया। इतने दिनों तक मेरी बहू मेरी नजर के
- 3:48:11सामने रही और मुझे पता भी नहीं चला।
- 3:48:14कल्पना जी की बात सुनकर शिप्रा की आंखों
- 3:48:16में चमक आ गई। उसे लगा उसको स्वीकार कर
- 3:48:18लिया गया। और कौन जानता है इस बारे में कि
- 3:48:21शिप्रा तुम्हारी पत्नी है। कल्पना जी
- 3:48:23शौर्य से पूछी।
- 3:48:25दादाजी को हमारी शादी के बारे में पता है।
- 3:48:27यह जानने के बाद ही कि शिप्रा उनकी बहू
- 3:48:29है। इसलिए उन्होंने इसे फैब्रिक ट्रेन का
- 3:48:31सीईओ बना दिया। शौर्य की बात ने कल्पना जी
- 3:48:34को एक और झटका दिया। अब कल्पना जी को समझ
- 3:48:38आ रहा था क्यों शौर्य के दादाजी पूरे
- 3:48:40परिवार के सामने इस बात के लिए राजी थे कि
- 3:48:43कनिका की पसंद को भी ध्यान में रखा जाए।
- 3:48:45जबकि सूर्यभान और कल्पना जी सोच रहे थे कि
- 3:48:48शौर्य के दादाजी चाहते ही नहीं कि शौर्य
- 3:48:50[गला साफ़ करने की आवाज़] की शादी कनिका
- 3:48:52के साथ हो। कल्पना जी को खुद पर खेद हुआ
- 3:48:55कि उन्होंने चंद्रभान जी के लिए गलत सोचा।
- 3:48:58उन्हें याद आया कि सूर्यभान जी इसी बारे
- 3:49:00में अपने पिता से बात करने गए हैं। अब तक
- 3:49:03तो उन्होंने बात कर भी ली होगी। पता नहीं
- 3:49:05पिताजी ने शौर्य के पापा को असलियत बताई
- 3:49:08होगी कि नहीं। उन्होंने सोचा जैसे ही
- 3:49:10सूर्यभान जी यहां आएंगे, वह सबसे पहले
- 3:49:12उन्हें इसकी जानकारी देंगी। यह सोचकर
- 3:49:14उन्होंने नीलिमा से कहा। तुम जाकर जल्दी
- 3:49:17से अपने पापा को बुला लो। यह जानकर वह
- 3:49:19बहुत खुश होंगे। मां की बात सुनकर नीलिमा
- 3:49:22शौर्य की तरफ देखने लगी। शौर्य अपनी मां
- 3:49:24के सामने आकर बोला, "यह बात अभी पिताजी को
- 3:49:27नहीं बतानी है। मां, वह पहले ही विक्रमजीत
- 3:49:30जी को उनकी पोती के साथ मेरी शादी करने का
- 3:49:32वचन दे चुके हैं। अगर उन्हें पता चलेगा कि
- 3:49:34मेरी शादी तो पहले ही हो चुकी है, तो
- 3:49:36विक्रमजीत जी को दिए वचन के कारण उन्हें
- 3:49:38अपनी बात के लिए शर्मिंदगीगी होगी। हम
- 3:49:41पापा को यह बात तब बताएंगे जब पूरी तरह से
- 3:49:43यह कंफर्म हो जाएगा कि कनिका ने अपनी तरफ
- 3:49:45से मुझे नापसंद कर दिया। फिर पापा के ऊपर
- 3:49:48यह बोझ नहीं रहेगा कि वह अपने बात की
- 3:49:50इज्जत नहीं रख पाए। कल्पना जी को भी बात
- 3:49:53समझ आई। बड़ी मुश्किल से उन्होंने
- 3:49:54सूर्यभान जी से यह बात छुपाने का फैसला
- 3:49:57किया। और हां मां सिर्फ पापा के ही नहीं
- 3:50:00यह बात बाकी लोगों की निगाह में भी नहीं
- 3:50:02आनी चाहिए। शौर्य ने अपनी मां से यह भी
- 3:50:04रिक्वेस्ट किया। तुमने मुझे अजीब स्थिति
- 3:50:07में फंसा दिया है। मैं अपनी बहू को सबके
- 3:50:09सामने बहू भी नहीं कह सकती। जब यही करना
- 3:50:12था तो मुझे बताया किस लिए कि यह मेरी बहू
- 3:50:14है। कल्पना जी दुखी स्वर में बोली वो तो
- 3:50:17तुम मेरी शादी को लेकर परेशान थी तो मुझसे
- 3:50:20तुम्हारी परेशानी देखी नहीं गई और मैंने
- 3:50:22तुम्हें बताने का फैसला कर लिया। शौर्य
- 3:50:25कल्पना जी की आंखों में देखता हुआ बोला।
- 3:50:27नीलिमा को कब पता चला कि तुम दोनों की
- 3:50:29शादी हो रखी है। कल्पना जी नीलिमा की ओर
- 3:50:32देखकर बोली यह भी उसी दिन से जानती है जिस
- 3:50:35[संगीत] दिन तुम सब यहां आई थी। शौर्य ने
- 3:50:38जवाब दिया। देखो तो इस बदमाश ने भी मुझे
- 3:50:40नहीं बताया। कल्पना जी नीलिमा को आंख
- 3:50:43दिखाते हुए बोली, मुझे तो भाई ने मना किया
- 3:50:46था तो मैं कैसे बताती? नीलिमा ने सफाई
- 3:50:48दिया। कल्पना जी के पास कहने को अब कुछ रह
- 3:50:51नहीं गया। वो अपने अलमीरा के पास गई और
- 3:50:54उसको खोलकर उसमें से एक बॉक्स निकाली और
- 3:50:56शिप्रा के हाथ में देते हुए बोली, अभी
- 3:50:59फिलहाल तो मेरे पास तुम्हें देने के लिए
- 3:51:00कुछ खास नहीं है। पर यह छोटा सा गिफ्ट इस
- 3:51:04समय तुम्हें मेरी तरफ से। शिप्रा ने उसे
- 3:51:06खोल कर देखा तो उसमें एक ज्वेलरी का सेट
- 3:51:09था जो देखने से ही काफी कीमती लग रही थी।
- 3:51:12इस गिफ्ट को देखकर उसकी आंखें बड़ी हो गई।
- 3:51:14वो कल्पना जी से मना करती हुई बोली आंटी
- 3:51:17मैं इतना महंगा गिफ्ट आपसे नहीं ले सकती।
- 3:51:20मां तुम रहने दो। तुम भी किसको गिफ्ट दे
- 3:51:23रही हो? जिसको गिफ्ट की कोई कदर ही नहीं
- 3:51:25है। तुम यह मुझे दो। मैं इसे कनिका को
- 3:51:28दूंगा तो शायद उसकी नजर में मेरी हैसियत
- 3:51:30थोड़ी बढ़ जाएगी। अभी तो वह मुझे राह चलता
- 3:51:32सड़क छाप समझती है। इतना बोलकर शौर्य आगे
- 3:51:36बढ़कर शिप्रा के हाथ से वह गिफ्ट ले लिया।
- 3:51:38शौर्य ने जैसे ही शिप्रा के हाथ से गिफ्ट
- 3:51:41लिया, शिप्रा को शौर्य के द्वारा रुचि को
- 3:51:43दिए गए गिफ्ट का ध्यान आया। उसने तुरंत
- 3:51:45शौर्य के हाथ से वो गिफ्ट छीन लिया और
- 3:51:47कल्पना जी को वापस करती हुई बोली, "आंटी,
- 3:51:50इसे आप अपने पास ही रखिए। इसके हाथ मत
- 3:51:53लगने दीजिए। यह तो इसे किसी को भी दे
- 3:51:55देगा। तो फिर तुम क्यों इसे वापस कर रही
- 3:51:58हो? कल्पना जी शिप्रा को देखकर मुस्कुराती
- 3:52:00हुई बोली। फिर उन्होंने उस बॉक्स में से
- 3:52:03गले में पहनने के लिए जो हार थी उसको
- 3:52:05निकालकर खुद शिप्रा के गले में पहनाया।
- 3:52:08शिप्रा मना करना चाहती थी। पर शौर्य ने
- 3:52:10उसे आंखों के इशारे से ऐसा करने से रोका।
- 3:52:13हार पहनाने के बाद उन्होंने शिप्रा से
- 3:52:16कहा। गिफ्ट की कीमत नहीं देखी जाती। देने
- 3:52:19वाले की भावना देखी जाती है। और दूसरी बात
- 3:52:22यह भी है कि हमारे पास जो कुछ भी है वह
- 3:52:24किसके लिए है। शिप्रा को अपनी गलती का
- 3:52:27एहसास हुआ। उसे कल्पना जी की बात समझ आई
- 3:52:30और वो बोली सॉरी आंटी आगे से ध्यान
- 3:52:33रखूंगी। और यह आंटी आंटी क्या लगा रखा है?
- 3:52:37अभी भी आंटी ही बोलोगी। कल्पना जी शिप्रा
- 3:52:40को सॉरी मां। शिप्रा ने जल्दी से अपनी
- 3:52:43गलती सुधारा। कल्पना जी के चेहरे पर
- 3:52:46मुस्कान आ गई। शिप्रा के मन से एक बहुत
- 3:52:49बड़ा बोझ उतर गया था। नीलिमा सास बहू का
- 3:52:52मिलन देखकर बोली, देखो भैया, मां को बहू
- 3:52:55मिली नहीं कि बेटी को भूल गई। यह भी याद
- 3:52:58ना रहा कि इसी बेटी ने उन्हें अभी बहू से
- 3:53:00मिलाया है। बस बस ज्यादा नौटंकी करने की
- 3:53:03जरूरत नहीं है। जो काम तुम्हें पहले ही कर
- 3:53:05देना चाहिए था, उसमें तुमने इतना समय लगा
- 3:53:08दिया। तुम्हें तो इसके लिए सजा मिलनी
- 3:53:10चाहिए। कल्पना जी नीलिमा को आंखें दिखाती
- 3:53:12हुई बोली, मैंने तो गलती कर दी। मुझे आपको
- 3:53:16आज भी भाभी से नहीं मिलाना चाहिए था।
- 3:53:19नीलिमा आंखें तरेरती हुई बोली, बहुत जुबान
- 3:53:22चलने लगी है तुम्हारी। अभी तुम्हारी खबर
- 3:53:24लेती हूं। इतना कहकर कल्पना जी ने नीलिमा
- 3:53:27के कान पकड़ लिए। मां, दर्द हो रहा है
- 3:53:30मेरे कान छोड़ दो। देखो भाभी, आपके सामने
- 3:53:33मां मेरे कान खींच रही है। नीलिमा ने ऐसा
- 3:53:36जताया जैसे उसे बहुत तकलीफ हो रही है।
- 3:53:38शिप्रा ने आगे बढ़कर उसे अपनी बाहों में
- 3:53:40भर लिया। रहने दीजिए मां। कल्पना जी
- 3:53:44मुस्कुराती हुई नीलिमा के कान को छोड़ दी।
- 3:53:47मुस्कान नीलिमा के चेहरे पर भी आ गया था।
- 3:53:49आज उसे यह देखकर अच्छा लग रहा था कि आज
- 3:53:52उसकी भाभी को उसकी मां से एक्सेप्टेंस मिल
- 3:53:54गई थी। शौर्य को भी लगा उसने एक किला तो
- 3:53:57फतेह कर लिया। जल्दी हो कनिका का मामला
- 3:53:59निपट जाएगा तो फिर शिप्रा को छुपा कर रखने
- 3:54:02की नौबत नहीं आएगी। उसने प्यार से शिप्रा
- 3:54:05की तरफ देखा। पर शिप्रा के चेहरे पर ऐसे
- 3:54:07भाव थे जैसे वह कह रही हो। यहां जितना
- 3:54:10बनना है बन लो। अकेले में मिलो फिर
- 3:54:12तुम्हारी खबर लेती हूं। शिप्रा ने शौर्य
- 3:54:15पर से अपना नजर हटाया और कल्पना जी की तरफ
- 3:54:18देखती हुई बोली अभी मुझे जाना होगा मां।
- 3:54:21आज मुझे अपनी फैमिली की एक इंगेजमेंट
- 3:54:23पार्टी भी अटेंड करनी है। ठीक है अभी तो
- 3:54:26जाओ। पर जब भी समय मिले इस मां से मिलते
- 3:54:29आते रहना। कल्पना जी शिप्रा के गाल पर
- 3:54:31प्यार से हाथ फेरती हुई बोली। जी मां।
- 3:54:35शिप्रा ने कहा और कल्पना जी के पांव छूकर
- 3:54:37आशीर्वाद लिया। कल्पना जी ने प्यार से
- 3:54:40उसके सर पर अपना हाथ फराया। शिप्रा अकेले
- 3:54:42हो कमरे से बाहर जाने लगी तो कल्पना जी ने
- 3:54:44शौर्य को डांटते हुए कहा, अब तुम यहां
- 3:54:47खड़े क्या कर रहे हो? जाकर इसको बाहर
- 3:54:49छोड़ोगे कि कैसी बात कर रही हो मां? यहां
- 3:54:52किसी ने मुझे इसके साथ देख लिया तो फालतू
- 3:54:54में कहानी बनाने लगेंगे। शौर्य क्या हो
- 3:54:57सकता है यह? अपनी मां को समझाने की कोशिश
- 3:54:59करता हुआ बोला, "कहानी बनती है तो बनती
- 3:55:02रहे। पर इस डर से मेरी बहू ऐसे अकेली घर
- 3:55:05से बाहर तक नहीं जाएगी। कल्पना जी ने
- 3:55:07शौर्य को डांटते हुए कहा, सिर्फ डांटने से
- 3:55:10काम नहीं चलेगा मां। जिस तरह आपने अभी
- 3:55:12मेरा कान खींचा वैसे भैया के कान भी खींचो
- 3:55:14तो बात बनेगी। नीलिमा अपनी मां को उकसाती
- 3:55:17हुई बोली। शौर्य को अपने लिए ऐसे अपनी मां
- 3:55:20से डांट खाते देखकर शिप्रा को अच्छा लगा।
- 3:55:22वो भी चाहती थी कि शौर्य उसको छोड़ने बाहर
- 3:55:25तक आए। मां की डांट सुनकर शौर्य शिप्रा के
- 3:55:28साथ कमरे से बाहर निकला। वो शिप्रा के साथ
- 3:55:30चल तो रहा था पर एक डिस्टेंस बनाए हुए था
- 3:55:32कि कोई उन दोनों को साथ भी देखे तो कोई
- 3:55:35कहानी ना बनाए। उसे पता था कि उसकी
- 3:55:37स्वर्णलता आंटी, उसके अंकल जयभान जी,
- 3:55:39प्रतीक, कुणाल, अरविंद यह सभी अभी महल में
- 3:55:42होंगे। सब पहले हो उसको कनिका के रास्ते
- 3:55:45से हटाने की प्लानिंग कर रहे होंगे। उसको
- 3:55:48शिप्रा के साथ देखकर कुछ और भी कहानी करने
- 3:55:50लगेंगे। वो नहीं चाहता था जब तक उसकी
- 3:55:53कनिका से रिश्ते की बात खत्म नहीं हो जाती
- 3:55:55तब तक किसी को उसके और शिप्रा की हकीकत
- 3:55:57पता चले। एक बार कनिका से उसके रिश्ते की
- 3:56:00बात खत्म हो जाएगी तो उसके बाद उसे फर्क
- 3:56:02नहीं पड़ने वाला था कि कौन क्या सोचता है।
- 3:56:04वह अपने पापा पर यह इल्जाम लगते नहीं
- 3:56:06देखना चाहता था कि उन्होंने भी अपने पिता
- 3:56:08की तरह अपनी बात की लाज नहीं रखी। इसलिए
- 3:56:11शौर्य की यही कोशिश थी कि कनिका के साथ
- 3:56:14रिश्ते के लिए मना हो तो वह चौहान फैमिली
- 3:56:16की तरफ से हो ना कि उसकी तरफ से। शौर्य को
- 3:56:19खुद से दूर चलते देखकर शिप्रा को शरारत
- 3:56:21सूझी। वो चलते हुए शौर्य के करीब आई और
- 3:56:24उसकी उंगलियों में अपनी उंगली फंसा ली।
- 3:56:27पहले तो शौर्य को समझ नहीं आया कि शिप्रा
- 3:56:29ने यह जानबूझकर किया या उससे अनजाने में
- 3:56:31यह हो गया। उसने शिप्रा से दूर जाने की
- 3:56:34कोशिश की तो पाया कि शिप्रा ने उसकी
- 3:56:36उंगलियों को मजबूती से पकड़ रखा था। वो
- 3:56:38हड़बड़ा कर शिप्रा से कहा यह तुम क्या कर
- 3:56:41रही हो? किसी ने देख लिया तो वे क्या
- 3:56:43समझेंगे? कोई कुछ भी समझे उससे मुझे क्या?
- 3:56:46मैंने किसी गैर का तो हाथ नहीं पकड़ रखा
- 3:56:48है। शिप्रा ने अभी भी शौर्य मुझ पर रहम
- 3:56:52करो मेरी मां। तुम क्यों मेरी पोल खोलने
- 3:56:54पर तुली हुई हो? शौर्य बेचारगी से बोला,
- 3:56:57आखिर शिप्रा को शौर्य पर तरसा हो गई और
- 3:56:59उसने उसका हाथ छोड़ दिया। मां के सामने तो
- 3:57:02बड़ी आवाज निकल रही थी कि मुझ में ऐसी
- 3:57:04क्या खासियत है जो तुम मुझे पसंद करो।
- 3:57:06मेरी खासियत देखनी है। एक तो इसी महल में
- 3:57:09है। मुझे देखते हो दीवाने की तरह मेरे
- 3:57:11पीछे घूमने लगता है। कहूं तो अभी फोन करके
- 3:57:14बुला लूं। मेरे यहां आते हो मुझे खुद
- 3:57:16तुम्हारे दादाजी के पास ले जाने को तैयार
- 3:57:18हो गया था। अरे तुम्हें पता है वो तो एक
- 3:57:21ड्रामा था। वो तो मां के सामने थोड़ी
- 3:57:23एक्टिंग तो करनी थी ना। शौर्य सफाई देते
- 3:57:25हुए बोला, "अच्छा, तो फिर थोड़ी एक्टिंग
- 3:57:28मैं भी कर लेती हूं। यह कहते हुए शिप्रा
- 3:57:31ने फिर से शौर्य की उंगलियों में अपनी
- 3:57:33उंगली फंसा ली। शिप्रा की इस हरकत पर
- 3:57:36शौर्य अपनी चारों तरफ देखने लगा कि कोई
- 3:57:38उसको देख तो नहीं रहा है। तभी एक गैलरी से
- 3:57:41प्रतीक प्रकट हुआ। शौर्य ने घबराकर शिप्रा
- 3:57:44को झटका देकर अपना हाथ चुराया। शिप्रा ने
- 3:57:46ऐसा जाहिर किया जैसे शौर्य उसका हाथ
- 3:57:48पकड़ने की कोशिश कर रहा था। प्रतीक
- 3:57:50क्योंकि अचानक वो गैलरी से सामने आया था।
- 3:57:52वो यह उम्मीद भी नहीं कर रहा था कि सामने
- 3:57:55उसे शिप्रा नजर आ जाएगी। वो यह नहीं देख
- 3:57:58पाया था कि शौर्य ने उससे अपना हाथ छुराया
- 3:58:00था। वो यही समझा कि शौर्य शिप्रा के पास
- 3:58:02जाने की कोशिश कर रहा था। जैसे ही उसने
- 3:58:05उसे देखा वो उससे दूर जाने की कोशिश करने
- 3:58:07लगा। वो उन दोनों के सामने खड़ा हो गया।
- 3:58:10तुम शिप्रा के साथ क्या कर रहे थे? प्रतीक
- 3:58:13शौर्य को संदेह से घूरते हुए बोला। मैं
- 3:58:16क्या कर रहा था? कुछ भी तो नहीं? तुमने
- 3:58:18ऐसा क्या देख लिया जो ऐसे बोल रहे हो?
- 3:58:20शौर्य खुद को नॉर्मल दिखाने की कोशिश करता
- 3:58:22हुआ बोला, कुछ तो शरारत करने की कोशिश कर
- 3:58:25रहे थे। तभी तो मुझे देखते हो तुम
- 3:58:27हड़बड़ाकर शिप्रा से दूर होने की कोशिश
- 3:58:29करने लगे। प्रतीक की आंखों में उसका संदेह
- 3:58:32और भी गहरा गया। शौर्य को यह सुनकर तसल्ली
- 3:58:35हुई [संगीत] कि प्रतीक ने शौर्य और शिप्रा
- 3:58:36को हाथ पकड़े हुए नहीं देखा था। अब वो
- 3:58:39अपने अंदर कॉन्फिडेंस दिखाते हुए बोला,
- 3:58:41"तुम कुछ बड़ा ही इल्जाम लगाने की कोशिश
- 3:58:43मुझ पर नहीं कर रहे हो। अगर मैं शिप्रा के
- 3:58:45साथ शरारत करने की कोशिश करता तो क्या
- 3:58:47उन्हें पता नहीं चलता? अपने मन से कुछ भी
- 3:58:50कहानी बनाने की कोशिश मत करो। शौर्य की
- 3:58:52बात सुनकर प्रतीक बस शौर्य को घूरता रहा।
- 3:58:55उसे यह तो विश्वास था कि शौर्य ने शिप्रा
- 3:58:58के साथ कुछ तो शरारत करने की कोशिश की थी।
- 3:59:00पर संयोग से वह उसी समय सामने आ गया।
- 3:59:02इसलिए शौर्य अपने मकसद में कामयाब नहीं हो
- 3:59:05पाया। अब तुम सामने से हटोगे? मुझे दादाजी
- 3:59:08ने कहा था शिप्रा को बाहर तक छोड़ आने को।
- 3:59:11इसलिए मैं इसको बाहर छोड़ने जा रहा हूं।
- 3:59:13प्रतीक उसके सामने से हट गया और शौर्य
- 3:59:15शिप्रा के साथ बाहर की तरफ बढ़ गया। बाहर
- 3:59:18आने तक फिर शिप्रा ने कोई हरकत नहीं की।
- 3:59:20पर अभी कुछ देर पहले शौर्य के साथ जो हरकत
- 3:59:22उसने की थी, इससे उसे खुशी हुई थी। अब तो
- 3:59:25उसे शौर्य को छेड़ने में भी मजा आने लगा
- 3:59:27था। महल के द्वार पर खड़े दरबान ने शौर्य
- 3:59:30के साथ शिप्रा को सैल्यूट मारा। शिप्रा की
- 3:59:33कार बाहर ही खड़ी थी। शौर्य ने आगे बढ़कर
- 3:59:36कार का दरवाजा खोलकर शिप्रा को बैठने का
- 3:59:38इशारा किया। क्या तुम मुझे ऐसे हो विदा
- 3:59:41करोगे? शिप्रा संदेह भरे स्वर में बोली।
- 3:59:44क्या मतलब? ऐसे [संगीत] ही विदा करोगे? तो
- 3:59:47और कैसे विदा करेंगे? शौर्य हकलाता हुआ
- 3:59:49बोला, मुझे बाहों में भरकर एक झप्पी दो।
- 3:59:52शिप्रा उसके कान के पास धीरे से बोली।
- 3:59:55शिप्रा की बात सुनकर शौर्य महल के गेट पर
- 3:59:58खड़े गार्ड की तरफ देखने लगा। गार्ड उसी
- 4:00:00की तरफ देख रहे थे। कोई और समय होता तो
- 4:00:04शौर्य तो शिप्रा की इस बात पर खुशी से
- 4:00:06फुला नहीं समाता। पर इस समय वह समझ रहा था
- 4:00:10कि शिप्रा जानबूझकर उसके साथ शरारत कर रही
- 4:00:12है। वह जानती थी कि शौर्य अभी चाहकर भी
- 4:00:15उसकी बात नहीं मान सकता था। शौर्य ने
- 4:00:17बेबसी से उसकी तरफ देखा और बोला अभी तो
- 4:00:20तुम्हें जाने की जल्दी थी। क्या अब लेट
- 4:00:22नहीं हो रहा? शौर्य वहां की स्थिति का
- 4:00:24जायजा लेने के बाद बोला वही तो जितनी
- 4:00:27जल्दी तुम मुझे झप्पी दोगे उतनी जल्दी मैं
- 4:00:29यहां से जा पाऊंगी। शिप्रा शौर्य के चेहरे
- 4:00:32के बदलते रंग को देखते हुए बोला तुम
- 4:00:34जानबूझकर यह कर रही हो ना? तुम्हें पता है
- 4:00:36कि इस समय मैं ऐसा नहीं कर सकता। शौर्य ने
- 4:00:38एक बार फिर से गार्ड की तरफ देखा। वे अभी
- 4:00:41भी शौर्य और शिप्रा की तरफ ही नजरें गराए
- 4:00:43हुए थे। तुम इधर-उधर क्या देख रहे हो?
- 4:00:45वैसे तो दिखाते हो कि मुझे बहुत प्यार
- 4:00:47करते हो और मुझे विदा करने के लिए मुझे
- 4:00:49गले भी नहीं लगा सकते। शिप्रा शौर्य के
- 4:00:52थोड़ा करीब आती हुई बोली, ऐसा करता हूं कि
- 4:00:54मैं भी तुम्हारे साथ ही चलता हूं। तुम
- 4:00:56मुझे घर छोड़ती हुई चली जाना। फिर मैं
- 4:00:58तुम्हें अच्छे से विदा करूंगा। इतना कहकर
- 4:01:00शौर्य बिना शिप्रा के जवाब की प्रतीक्षा
- 4:01:02किए जाकर कार में बैठ गया। शिप्रा हैरान
- 4:01:05नजरों से देखती रह गई। अब तो वह कुछ बोल
- 4:01:07भी नहीं सकती थी। मजबूरन शिप्रा को कार की
- 4:01:10ड्राइविंग सीट पर बैठना पड़ा। उसने
- 4:01:12बैठे-बैठे शौर्य की तरफ देखा। अब मेरी तरफ
- 4:01:14क्या देख रही हो? कार [संगीत] आगे बढ़ाओ।
- 4:01:16शौर्य चलने का इशारा करता हुआ बोला।
- 4:01:18शिप्रा ने कार आगे बढ़ाया। अभी वो कार को
- 4:01:21मुश्किल से 200 300 मीटर ही आगे ले गई थी
- 4:01:23कि शौर्य ने कहा, एक मिनट जरा कार रोकना।
- 4:01:27शिप्रा को समझ नहीं आया कि अब वो कार
- 4:01:29क्यों रुकवा रहा है। पर उसने कार को रोका।
- 4:01:31जैसे ही कार रुकी, शौर्य कार से बाहर आ
- 4:01:34गया। वो ड्राइविंग डोर के पास पहुंचा और
- 4:01:36शीशे पर नॉक किया। शिप्रा ने अपनी साइड का
- 4:01:39शीशा नीचे किया तो शौर्य बोला, "मुझे लगता
- 4:01:41है कि मैं कुछ भूल आया हूं। इसलिए मैं बाद
- 4:01:43में ही आऊंगा। तुम ऐसा करो एक मिनट के लिए
- 4:01:46कार के बाहर आना।" शिप्रा यदि समझ गई थी
- 4:01:48कि शौर्य के दिमाग में कुछ ना कुछ खुराफात
- 4:01:51तो जरूर चल रहा है। फिर भी वह कार से बाहर
- 4:01:53आई। मैं सोच रहा हूं तुम्हें यहीं से विदा
- 4:01:55कर दूं। तुम झप्पी के लिए बोल रही थी ना
- 4:01:57तो सोचा तुम्हें विदा करने से पहले झप्पी
- 4:01:59दे ही दूं। शौर्य मुस्कुराता हुआ बोला।
- 4:02:02शिप्रा ने अपने आसपास नजर डाली तो उसने
- 4:02:04[संगीत] देखा वह महल के दरवाजे से दूर आ
- 4:02:06गई थी और यहां उसे कोई देख भी नहीं सकता
- 4:02:08था। वो शौर्य की चालाकी समझ गई। वो कार से
- 4:02:11टेक लगाते हुए बोली इतना दिमाग लाते कहां
- 4:02:14से हो? कनिका से पीछा छुड़ाने में यह
- 4:02:16दिमाग कहां चला जाता है? दिमाग को कहीं से
- 4:02:19लाने की जरूरत ही नहीं है। विरासत में
- 4:02:21मिली [संगीत] है। जहां तक कनिका से पीछा
- 4:02:22छुड़ाने की बात है तो देर सवेेर यह भी हो
- 4:02:25ही जाएगा। शौर्य शिप्रा के करीब गया और
- 4:02:27शिप्रा के दोनों तरफ कार पर अपना हाथ टिका
- 4:02:29दिया। अब यह क्या है? तुमने मेरे दोनों
- 4:02:32तरफ ही अपनी बाहों का घेरा क्यों डाल
- 4:02:34दिया? शिप्रा धड़कते दिल के साथ बोली,
- 4:02:36विदा करने से पहले झप्पी चाहिए था ना
- 4:02:38तुम्हें? तो सोचा थोड़ा अच्छे से दे दूं
- 4:02:40ताकि तुम्हें कोई शिकायत ना रह जाए। शौर्य
- 4:02:43अपना चेहरा शिप्रा के कान के पास ले जाते
- 4:02:45हुए बोला, रहने दो अब नहीं [संगीत] चाहिए।
- 4:02:48जब मांगा था तो दिया नहीं। अब प्यार जता
- 4:02:50रहे हो। शिप्रा शौर्य और अपने बीच में
- 4:02:52अपना हाथ अराती हुई बोली। उसने [संगीत]
- 4:02:54शौर्य को पीछे की तरफ धक्का दिया। यह तो
- 4:02:57गलत बात है। तुमने कहा था विदा करने से
- 4:02:59पहले तुमको झप्पी चाहिए था। तो विदा तो अब
- 4:03:01हो रहा हूं ना तो दे रहा हूं ना झप्पी।
- 4:03:04शौर्य ने फिर से शिप्रा को कार से सटा
- 4:03:06दिया। पर अब मुझे नहीं चाहिए। शिप्रा रूखे
- 4:03:09स्वर में बोली। वो शौर्य को धक्का देने
- 4:03:11लगी। पर शौर्य उस पर जबरदस्ती करने की
- 4:03:13कोशिश करने लगा। दूर रहो मुझसे। मेरे पास
- 4:03:16आने की कोई जरूरत नहीं है। शिप्रा शौर्य
- 4:03:19को पीछे करने की कोशिश कर रही थी। पर
- 4:03:20शौर्य पर उसकी ताकत का कोई प्रभाव नहीं
- 4:03:22पड़ रहा था। यह क्या हो रहा है यहां? तुम
- 4:03:25शिप्रा के साथ जबरदस्ती क्यों कर रहे हो?
- 4:03:27तभी शौर्य के पीछे से आवाज आई। आवाज सुनकर
- 4:03:30शिप्रा ने शौर्य को तेज धक्का दिया। शौर्य
- 4:03:33लड़खड़ाते हुए पीछे गया। पर लास्ट में
- 4:03:35उसने खुद को गिरने से संभाल लिया। उसने
- 4:03:38पलट कर पीछे देखा तो पीछे प्रतीक अपनी कार
- 4:03:40में बैठा था। उसके साइड का शीशा खुला हुआ
- 4:03:43था। जिससे झांकते हुए वह शौर्य और शिप्रा
- 4:03:46की तरफ ही देख रहा था। उसने जो देखा था
- 4:03:48उसमें उसे दिखा था कि शौर्य शिप्रा के साथ
- 4:03:51जबरदस्ती कर रहा था। जबकि शिप्रा उसको
- 4:03:53पीछे करने की कोशिश कर रही थी। प्रतीक कार
- 4:03:56से बाहर आया और शौर्य के पास जाकर बोला,
- 4:03:58"यह तुम क्या कर रहे थे? मुझे तुमसे ऐसी
- 4:04:00उम्मीद नहीं थी। शौर्य को भी उम्मीद नहीं
- 4:04:03थी कि अचानक प्रतीक यहां टपक जाएगा। उसे
- 4:04:05समझ नहीं आ रहा था कि अब वह किस तरह इस
- 4:04:07स्थिति को संभाले।" उसने पहले खुद को
- 4:04:09संभाला और बेशर्मी से बोला, "ऐसा क्या
- 4:04:12किया जो तुम इस तरह से बोल रहे हो?" इसकी
- 4:04:14आंखों में कुछ चला गया था। मैं तो वही
- 4:04:16देखने की कोशिश कर रहा था। तुम क्या मुझे
- 4:04:18बेवकूफ समझ रहे हो? जो मैं तुम्हारी बात
- 4:04:20पर विश्वास कर लूंगा। मुझे दिख नहीं रहा
- 4:04:22था क्या कि कैसे शिप्रा तुम्हें खुद से
- 4:04:24दूर करने की कोशिश कर रही थी और तुम उसके
- 4:04:26साथ जबरदस्ती किए जा रहे थे। प्रतीक को
- 4:04:29मौका मिल गया था शौर्य पर चढ़ बैठने का
- 4:04:31इसलिए वह कोई कसर छोड़ना नहीं चाहता था।
- 4:04:34तुम गलत समझ रहे हो। मैं उसके साथ कोई
- 4:04:36जबरदस्ती नहीं कर रहा था। वो मुझे पसंद
- 4:04:38करती है। हम बस साथ में थोड़ी ठिठोली कर
- 4:04:41रहे थे। शौर्य सफाई देता हुआ बोला। वो मन
- 4:04:43ही मन प्रतीक को कोस रहा था कि उसे इसी
- 4:04:46वक्त इधर आना था। इन सब बातों के बीच
- 4:04:48शिप्रा खामोश खड़ी थी। उसे समझ नहीं आ रहा
- 4:04:51था कि वह उनके बीच कैसे रिएक्ट करें। वह
- 4:04:53कभी शौर्य को तो कभी प्रतीक को देख रही
- 4:04:56थी। तुम कैसे इस आदमी पर भरोसा कर सकती
- 4:04:58हो? देख लिया तुमने इसकी हरकत। पता नहीं
- 4:05:01तुम इसको क्या समझती थी। प्रतीक शिप्रा से
- 4:05:03बोला। अब क्या किसी के चेहरे पर लिखा हुआ
- 4:05:06होता है कि वो कैसा है। मैं तो बस इसे एक
- 4:05:08दोस्त के रूप में देखती थी। जैसे तुम्हें
- 4:05:10दोस्त मानती हूं। शिप्रा मासूमियत से
- 4:05:13प्रतीक से बोली। पर तुमने इसे अपने पास
- 4:05:15आने कैसे दिया। अगर मैं वक्त पर नहीं आता
- 4:05:18तो पता नहीं यह तुम्हारे साथ क्या कर
- 4:05:19जाता। प्रतीक शिप्रा को यह एहसास कराने की
- 4:05:22कोशिश करता हुआ बोला कि आज उसने उसे बचा
- 4:05:25लिया। प्रतीक की बात सुनकर शौर्य को बड़ी
- 4:05:27तेज गुस्सा आया। तुमको क्या लगता है कि
- 4:05:29मैं इसके साथ जबरदस्ती करता? यूं भरे रोड
- 4:05:32पर मैं ऐसा कर लेता। तुम्हारे पास दिमाग
- 4:05:34है कि नहीं जो ऐसा सोच भी लिया। मैं
- 4:05:37तुम्हें इतना बेवकूफ नजर आता हूं जो यूं
- 4:05:39चलते सड़क पर किसी लड़की के साथ जबरदस्ती
- 4:05:41करूंगा। तो और तुम कर क्या रहे थे? उसे
- 4:05:44[संगीत] जबरदस्ती करना नहीं कहेंगे तो और
- 4:05:46क्या कहेंगे? प्रतीक शौर्य पर तंज कसते
- 4:05:48हुए बोला, तुम कुछ ज्यादा ही सोच रहे हो।
- 4:05:51अगर मुझ पर विश्वास नहीं है तो तुम शिप्रा
- 4:05:53से ही पूछ लो। शौर्य शिप्रा की तरफ देखते
- 4:05:56हुए बोला। प्रतीक शिप्रा की ओर देखने लगा।
- 4:05:59शिप्रा ने जब प्रतीक को यूं अपनी तरफ
- 4:06:00देखते पाया तो वह बोली इसने मुझे कहा था
- 4:06:03कि मेरे चेहरे पर कुछ लगा हुआ है। मैंने
- 4:06:05[संगीत] खुद साफ किया था। पर शायद फिर भी
- 4:06:08साफ नहीं हुआ तो इसने कहा यह साफ कर देगा।
- 4:06:10मैंने मना भी किया। पर यह जबरदस्ती साफ
- 4:06:13करने की कोशिश करने लगा। प्रतीक गौर से
- 4:06:15शिप्रा का चेहरा देखने लगा। मुझे तो
- 4:06:18तुम्हारे चेहरे पर कुछ भी लगा हुआ नहीं
- 4:06:20दिखाई दे रहा। फिर यह क्या साफ करने की
- 4:06:22कोशिश कर रहा था? प्रतीक व्यंग भरे स्वर
- 4:06:24में बोला। शौर्य बेचारगी से शिप्रा को
- 4:06:27देखने लगा। [संगीत] जैसे उसे कह रहा हो कि
- 4:06:29तुम मुझे बचा रही हो कि मुझे फंसा रही हो।
- 4:06:32जबकि शिप्रा उसकी तरफ देखकर कुटिलता से
- 4:06:34मुस्कुराई। [संगीत] जैसे उसे चैलेंज कर
- 4:06:36रही हो कि तुम्हारे अंदर इतना ही दिमाग है
- 4:06:39तो अब इस स्थिति से सुरक्षित निकल कर
- 4:06:40दिखाओ। बताया नहीं तुमने तुम शिप्रा के
- 4:06:43चेहरे से क्या साफ करने की कोशिश कर रहे
- 4:06:45थे? मुझे तो इसका चेहरा एकदम साफ नजर आ
- 4:06:48रहा है। प्रतीक शौर्य को चुप देखकर दोबारा
- 4:06:50बोला, अब साफ हो गया। पर पहले इसके चेहरे
- 4:06:54पर धूल लगा हुआ था। जब शिप्रा ने शौर्य की
- 4:06:56बात का समर्थन नहीं किया तो शौर्य शिप्रा
- 4:06:59को बात को ही आधार बनाकर प्रतीक को जवाब
- 4:07:01दिया। मतलब तुम अभी भी नहीं मानोगे कि तुम
- 4:07:04शिप्रा के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर
- 4:07:06रहे थे। प्रतीक इस बार तीखे स्वर में
- 4:07:09बोला। तुम्हारे कहने से मैं कुछ भी मान
- 4:07:11लूंगा क्या? यह तुम्हें यूं ही बहका रही
- 4:07:13है और तुम कुछ भी बोले जा रहे हो। इसने एक
- 4:07:16बार भी कहा कि मैं इसके साथ जबरदस्ती कर
- 4:07:18रहा था। बस तुम अपने मन से लगे हुए हो कि
- 4:07:20मैं उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर
- 4:07:23रहा था। तुम जहां जा रहे थे जाओ ना। क्यों
- 4:07:25तुम हमारे बीच यहां सरपंच बन रहे हो? इतनी
- 4:07:28देर में शौर्य का सब्र जवाब देने लगा।
- 4:07:30इसलिए उसने प्रतीक को ही यहां से जाने के
- 4:07:32लिए कह दिया। तुम्हारे कहने से क्या मैं
- 4:07:34शिप्रा को यहां यूं ही तुम्हारे भरोसे
- 4:07:36छोड़कर चला जाऊंगा? तुम इस काबिल नहीं हो
- 4:07:39कि किसी लड़की को तुम्हारे भरोसे छोड़ा जा
- 4:07:41सकता है। प्रतीक शौर्य को घृणा से देखते
- 4:07:43हुए बोला क्या जब शिप्रा खुद तुम्हें
- 4:07:45बोलेगी यहां से जाने को तब तुम जाओगे?
- 4:07:48शौर्य प्रतीक को गहरी नजरों से देखते हुए
- 4:07:50बोला अच्छा तुमको अभी भी लगता है कि
- 4:07:53शिप्रा तुम पर अभी भी भरोसा करेगी। कितने
- 4:07:55बड़े गधे हो तुम। प्रतीक शौर्य का उपहास
- 4:07:58उड़ाते हुए बोला। शौर्य को शिप्रा पर
- 4:08:01गुस्सा आने लगा कि वह प्रतीक को यहां से
- 4:08:03जाने को क्यों नहीं बोल रही? प्रतीक की
- 4:08:05बात सुनकर भी शिप्रा ने जब कुछ नहीं कहा
- 4:08:07तो शौर्य तोरे रूखे स्वर में शिप्रा से
- 4:08:09बोला तुम इसे यहां से जाने को क्यों नहीं
- 4:08:11बोल रही? शिप्रा यह अंदाजा नहीं लगा पाई
- 4:08:13कि मामला इतना सीरियस हो जाएगी। उसे
- 4:08:15प्रतीक से भी इस तरह रूढ़ होकर यह कहना
- 4:08:18उचित नहीं लगा कि वह उसको यहां से चले
- 4:08:19जाने को कहे। वो स्थिति को संभालने की
- 4:08:22कोशिश करती हुई बोली। अब इस बात को यहीं
- 4:08:24खत्म करते हैं ना। ऐसा कुछ भी गलत नहीं
- 4:08:26हुआ जो बात को इतना बढ़ाया जाए। मुझे लगता
- 4:08:29है कि कुछ गलतफहमी हो गई है समझने में।
- 4:08:31शौर्य को विश्वास नहीं हुआ कि इतना होने
- 4:08:34के बाद भी शिप्रा प्रतीक को यहां से जाने
- 4:08:36के लिए नहीं बोल पाई। उल्टा वह बात को
- 4:08:38नॉर्मलाइज करने की कोशिश कर रही है। क्या
- 4:08:40शौर्य के यह कहने के बाद भी कि वह प्रतीक
- 4:08:42को वहां से चले जाने के लिए कहे उसे
- 4:08:44प्रतीक को वहां से जाने के लिए नहीं कहना
- 4:08:46चाहिए था। इस बात ने शौर्य को आहत कर
- 4:08:49दिया। अब शौर्य को वहां रुकना मुश्किल
- 4:08:51लगने लगा। वो प्रतीक की तरफ पलटा और उससे
- 4:08:53कहा। शायद तुम ही सही थे। मैं कुछ ज्यादा
- 4:08:56ही कर गया। लगता है मुझे ही यहां से चले
- 4:08:58जाना चाहिए। इतना कहने के बाद शौर्य पलटा
- 4:09:01और महल की तरफ बढ़ गया। उसके चेहरे का रंग
- 4:09:04उड़ गया था। शिप्रा समझ ही नहीं पाई कि एक
- 4:09:07पल में यह क्या हो गया। उसने शौर्य को
- 4:09:09पीछे से आवाज दिया। अरे रुको तो ऐसी तो
- 4:09:12कोई बात नहीं है कि किसी को यहां से जाने
- 4:09:14की जरूरत हो। पर शौर्य अब तक उससे दूर चला
- 4:09:17गया था। उसकी चाल में तेजी थी। जितनी
- 4:09:19जल्दी हो सके वह उन दोनों से दूर चले जाना
- 4:09:22चाहता था। शिप्रा तो बूत बनी अपनी जगह पर
- 4:09:24खड़ी रह गई। उसने कल्पना भी नहीं की थी कि
- 4:09:27बात इस हद तक चली जाएगी। उसके चेहरे का
- 4:09:29रंग भी उतर गया। प्रतीक ने शिप्रा के
- 4:09:31चेहरे की उदासी को देखा तो यही सोचा कि
- 4:09:34शायद उसके मन में यह डर हो कि वह सोच रही
- 4:09:36होगी कि कहीं शौर्य के नाराज होने से उसकी
- 4:09:39नौकरी पर ना बनाए। इसीलिए शौर्य की
- 4:09:41बदतमीजी के बाद भी वो सीधे शौर्य को कुछ
- 4:09:43करा बोल नहीं पाई। शायद अभी भी उसके मन
- 4:09:46में अपनी जॉब जाने का डर हो। यह सोचकर
- 4:09:48उसने शिप्रा को हिम्मत देते हुए कहा। तुम
- 4:09:51उसकी चिंता मत करो। वह तुम्हारे खिलाफ कुछ
- 4:09:53नहीं कर पाएगा। मैं हूं ना मैं तुम्हारा
- 4:09:55कुछ भी नुकसान नहीं होने दूंगा। शिप्रा
- 4:09:58निराशा से प्रतीक की तरफ देखी। अब उसको
- 4:10:00प्रतीक को कुछ बोलने का भी फायदा नहीं था।
- 4:10:02जब शौर्य के सामने उसको बोलना चाहिए था तब
- 4:10:05तो बोली नहीं। अब उसके जाने के बाद इस बात
- 4:10:07का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। आदमी को सबसे
- 4:10:10ज्यादा तकलीफ तब होती है जब वह व्यक्ति
- 4:10:13जिससे वह सबसे ज्यादा उम्मीद करता है और
- 4:10:16वह आपकी उम्मीद पर खरा नहीं उतरता है।
- 4:10:18शौर्य के साथ भी ऐसा ही था। उसने यही सोचा
- 4:10:21था कि अगर एक बार वह शिप्रा से यह बोल
- 4:10:23देगा कि वह प्रतीक को उनके बीच से चले
- 4:10:25जाने को कहे तो शिप्रा बिना कुछ सोचे समझे
- 4:10:28ऐसा ही करेगी। पर उस वक्त भी शिप्रा सही
- 4:10:31गलत के चक्कर में परी थी। वो प्रतीक से
- 4:10:33ज्यादा हार्ड होना नहीं चाहती थी। उस वक्त
- 4:10:36भी जब शौर्य प्रतीक से बहुत ज्यादा
- 4:10:38क्षुब्ध ही गया था तब भी शिप्रा बातचीत से
- 4:10:41उस मसले को सुलझाना चाहती थी। यह बात
- 4:10:43शौर्य को आहत करने वाली थी। उसके विश्वास
- 4:10:46को झटका सा लगा। उसने महसूस किया कि उसने
- 4:10:49शिप्रा से ज्यादा ही उम्मीद पाल ली थी। वह
- 4:10:52महल की तरफ चला जा रहा था। उसकी आंखें
- 4:10:54अपने भरोसे को टूटने के कारण डबडबा आई थी।
- 4:10:57उसने मुश्किल से अपनी आंखों से बाहर आने
- 4:10:59वाले आंसूओं को रोका। इसने खुद को तसल्ली
- 4:11:02दिया कि इसमें शिप्रा की गलती नहीं है।
- 4:11:04बल्कि उसी की गलती है कि उसने इतने कम समय
- 4:11:07में शिप्रा से कुछ ज्यादा ही उम्मीद पाल
- 4:11:09ली थी। उसने महल के अंदर जाने से पहले खुद
- 4:11:12को नॉर्मल किया। अपने चेहरे की उदासी को
- 4:11:14दूर किया और अपनी मां के कमरे की तरफ बढ़
- 4:11:16गया। जबकि दूसरी तरफ शिप्रा अभी भी जर की
- 4:11:20स्थिति में खड़ी थी। शौर्य के यूं वहां से
- 4:11:22चले जाने के बाद उसे समझ नहीं आया कि वह
- 4:11:24क्या करें। उसे बुरा फील हो रहा था।
- 4:11:27प्रतीक शिप्रा के चेहरे के बदलते रंग को
- 4:11:29देखकर बोला, अब तुम उसके बारे में ज्यादा
- 4:11:31मत सोचो। वो तुम्हारी दोस्ती के काबिल
- 4:11:33नहीं है। उससे दूर रहने में ही तुम्हारी
- 4:11:35भलाई है। शुक्र मनाओ कि आज उसकी असलियत
- 4:11:38तुम्हारे सामने आ गई। प्रतीक की बात सुनकर
- 4:11:40शिप्रा की आंखों में अंगार सी दहकने लगी।
- 4:11:43एक तो उसके कारण शौर्य उससे नाराज होकर
- 4:11:45चला गया था और प्रतीक उसको उपदेश दे रहा
- 4:11:48था। उसको अब प्रतीक के सामने भी एक पल के
- 4:11:50लिए ठहरना मुश्किल लगने लगा। उसने कार का
- 4:11:53दरवाजा खोला और उसमें बैठकर जल्दी से वहां
- 4:11:55से निकल गई। प्रतीक उसको रोकना चाहता था।
- 4:11:58पर शिप्रा के चेहरे पर अचानक आई कठोरता को
- 4:12:00देखकर उसकी हिम्मत नहीं हुई कि वह शिप्रा
- 4:12:02को रोकने की कोशिश करे। उसे यही लगा कि
- 4:12:05शिप्रा के चेहरे पर जो यह कठोरता आई है वह
- 4:12:08शौर्य के कारण ही था। शिप्रा के चले जाने
- 4:12:11के बाद प्रतीक ने उसके बारे में सोचा तो
- 4:12:13उसे लगा कि आज की घटना के बाद अब शौर्य और
- 4:12:15शिप्रा शायद ही आगे कभी दोस्त की तरह भी
- 4:12:18रह पाएंगे। शिप्रा तेज गति से कार को
- 4:12:20ड्राइव किए जा रही थी। कुछ देर पहले वह
- 4:12:23कितनी खुश होकर महल से बाहर आई थी। आज
- 4:12:25अपनी सास से मिलकर वह कितनी खुश थी। उसे
- 4:12:28लगने लगा कि जल्दी ही उसकी जिंदगी पटरी पर
- 4:12:30आ जाएगी। पर एक घटना हुई और उसकी खुशी गम
- 4:12:33में बदल गई। इसे खुद पर गुस्सा आने लगा कि
- 4:12:36उसे क्या जरूरत थी शौर्य को खुद से दूर
- 4:12:38करने की। प्रतीक ने ऐसा देखा तभी तो उसे
- 4:12:40मौका मिल गया शौर्य को गलत साबित करने का।
- 4:12:43उसे इस बात का भी अफसोस हो रहा था कि जब
- 4:12:45प्रतीक शौर्य को गलत साबित करने की कोशिश
- 4:12:48कर रहा था। उस समय भी उसने शौर्य का साथ
- 4:12:50नहीं दिया। अब जब बात बिगड़ गई है तो उसका
- 4:12:53इस बारे में अफसोस करने का क्या फायदा?
- 4:12:55उसे शौर्य के लिए सोच-सच कर बुरा लग रहा
- 4:12:58था। शिप्रा बेध्यानी में गाड़ी चलाती रही।
- 4:13:00जब उसने कार रोका तो देखा वह अपने पापा के
- 4:13:03घर आ गई थी। उसका मूड खराब था। वैसे
- 4:13:06शिप्रा को आना भी वहीं था। यहां से वह
- 4:13:08अपने पापा के साथ ही राधिका की इंगेजमेंट
- 4:13:10पार्टी में जाना चाहती थी क्योंकि शौर्य
- 4:13:12का इस पार्टी में आने का कोई प्लान नहीं
- 4:13:14था। सो शिप्रा अकेले उस पार्टी में नहीं
- 4:13:16जाना चाहती थी। शिप्रा कार को पार्किंग
- 4:13:19में खड़ी करने के बाद अपने घर गई तो
- 4:13:21ड्राइंग रूम में ही राजदीप जी बीना जी के
- 4:13:23साथ बैठे हुए थे। शिप्रा को यहां आया
- 4:13:25देखकर उन्हें आश्चर्य भी हुआ। शिप्रा ने
- 4:13:28पहले से अपने यहां आने की सूचना उन्हें
- 4:13:30नहीं दी थी। तुम यहां [संगीत] अचानक सब
- 4:13:34ठीक तो है? राजदीप जी शिप्रा को बिना
- 4:13:36सूचना के आई देखकर बोले मैंने तो समझा था
- 4:13:39तुमसे पार्टी में ही मुलाकात होगी। क्यों
- 4:13:41आप मुझे यहां देखकर खुश नहीं हुए? मैं
- 4:13:43पार्टी में अकेले नहीं जाना चाहती थी।
- 4:13:45इसलिए [संगीत] यहां आ गई कि आप लोगों के
- 4:13:47साथ चली जाऊंगी। शिप्रा नॉर्मल भाव में
- 4:13:50बोली। क्यों अकेले क्यों जाती? श्रवण भी
- 4:13:53तो तुम्हारे साथ होता। राजदीप जी शक भरे
- 4:13:56स्वर में बोले। शिप्रा को अकेले आया देखकर
- 4:13:58उन्हें अचरज हो रहा था। नहीं श्रवण इस
- 4:14:01पार्टी में नहीं आ रहा है। मैंने भी उसे
- 4:14:03पार्टी में आने के लिए प्रेस नहीं किया।
- 4:14:05शिप्रा अनमने भाव से बोली यह तुम कैसी बात
- 4:14:08कर रही हो? तुम्हारी बुआ तो खास करके
- 4:14:10चाहती थी कि शौर्य इस पार्टी में आए।
- 4:14:13राजदीप जी बेसब्र होकर बोले क्यों? पहले
- 4:14:17जो श्रवण की बेइज्जती करते रहे हैं उससे
- 4:14:19उनका मन नहीं भरा है। जो वह दोबारा शौर्य
- 4:14:22को अपनी पार्टी में इनवाइट करना चाहते
- 4:14:24हैं। आप सबको तो श्रवण की बेइज्जती करने
- 4:14:26का मौका चाहिए होता है। बोलते हुए शिप्रा
- 4:14:29का शब्द थोड़ा तीखा हो गया था। राजदीप जी
- 4:14:32ने गौर किया कि शिप्रा ने अपनी बात में
- 4:14:34उनको भी शामिल कर लिया। मैं भला श्रवण की
- 4:14:37बेइज्जती क्यों करना चाहूंगा? राजदीप जी
- 4:14:40ने अपनी सफाई देना चाहा। क्यों? पिछली बार
- 4:14:43आप सब ने मिलकर श्रवण के साथ कैसा व्यवहार
- 4:14:46किया था? उस बात को आप भूल गए हैं क्या?
- 4:14:48आप यह मत कहिएगा कि आपने कुछ नहीं किया
- 4:14:51था। [संगीत] क्योंकि जो कुछ भी मेरी
- 4:14:52बर्थडे वाली पार्टी में श्रवण के साथ हुआ
- 4:14:55था, उसमें आपकी भी मिलीभगत थी। बोलते हुए
- 4:14:58शिप्रा का स्वर और भी तीखा हो गया था।
- 4:15:01शिप्रा की बात सुनकर राजदीप जी का सर झुक
- 4:15:04गया। मैं मानता हूं कि उस समय श्रवण के
- 4:15:07साथ जो भी होने वाला था, मुझे उसकी
- 4:15:09जानकारी थी। पर मैं दिल से ऐसा नहीं चाहता
- 4:15:12था। यह मेरी गलती थी कि मैं अपने पिताजी
- 4:15:15की बात का विरोध नहीं कर पाया। पर मैं सच
- 4:15:17में नहीं चाहता था कि श्रवण से तुमको तलाक
- 4:15:20लेना पड़े। मैं आपको किसी बात के लिए दोष
- 4:15:22नहीं दे रही। पर उतना सब होने के बाद इस
- 4:15:25परिवार में से किसी का यह चाहना कि श्रवण
- 4:15:28उसकी पार्टी में आए ठीक नहीं है। इसलिए
- 4:15:30मैंने भी उसे आने के लिए नहीं कहा। शिप्रा
- 4:15:33ने शौर्य के आज की पार्टी में नहीं आने का
- 4:15:35कारण बताया। राजदीप जी थोड़े परेशान नजर
- 4:15:38आए। तुम्हारी बुआ को पता है कि श्रवण आज
- 4:15:41की पार्टी में नहीं आएगा? नहीं। मैंने
- 4:15:44उन्हें ऐसा कुछ नहीं बताया। उन्होंने
- 4:15:46श्रवण को भी पार्टी में लाने के लिए कहा
- 4:15:48तो था पर मैंने यह भी नहीं कहा कि वह
- 4:15:50पार्टी में आएगा ही आएगा। शिप्रा ने जवाब
- 4:15:53दिया। फिर अपने पिता को श्रवण के पार्टी
- 4:15:56में आने की बात पर जोर देते देखकर शिप्रा
- 4:15:58ने उनसे पूछ लिया। क्या कोई बात है जो
- 4:16:00मुझे नहीं पता है? आपकी बात से लग रहा है
- 4:16:03कि बुआ यह उम्मीद लगाए हुए हैं कि शौर्य
- 4:16:06आज की पार्टी में आएगा ही। तुम्हें पता तो
- 4:16:08है ना कि आज की पार्टी कहां है? होटल
- 4:16:11राजकमल में। पिछली बार राजकुमार जी को पता
- 4:16:14चल गया था कि श्रवण का राजकमल की मैनेजर
- 4:16:16मोनिका से अच्छे संबंध हैं। तो वह यह
- 4:16:18उम्मीद लगाए हुए हैं कि श्रवण के कारण
- 4:16:20उन्हें होटल से कुछ डिस्काउंट मिल जाएगा।
- 4:16:23राजदीप जी ने वह कारण बताया जिसके कारण
- 4:16:25उसकी बुआ चाहती थी कि श्रवण इस पार्टी में
- 4:16:28आए। अब जाकर शिप्रा को उस दिन अपनी बुआ का
- 4:16:31शौर्य को भी पार्टी में लाने की जिद करने
- 4:16:33का कारण समझ में आया। पर यह जानने के बाद
- 4:16:36भी उसने सोचा यही ठीक है कि शौर्य इस
- 4:16:39पार्टी में ना आए। उसे पहले से ही शौर्य
- 4:16:42को लेकर चिंता हो रही थी। वो जब से यहां
- 4:16:44आई थी उसने सोचा था सबसे पहले वह शौर्य से
- 4:16:47ही बात करेगी। पर यहां आकर वो अपने पिता
- 4:16:50से बातों में उलझ गई। शौर्य का नाराज होकर
- 4:16:53उसके सामने से चले जाने के कारण वह पहले
- 4:16:55ही बुरा फील कर रही थी। वह अपने कमरे में
- 4:16:58जाकर पहले शौर्य से बात करना चाहती थी। जब
- 4:17:00तक शौर्य से उसकी बात नहीं हो जाएगी, इसे
- 4:17:03चैन नहीं आने वाला था। वह अपने पिता के
- 4:17:05सामने से उठी और बोली, मैं अपने कमरे में
- 4:17:08जा रही हूं। थोड़ी देर वही रेस्ट करूंगी।
- 4:17:11उसके बाद आपके साथ ही पार्टी में चलूंगी।
- 4:17:13पर आप यह जान लीजिए शौर्य इस पार्टी में
- 4:17:16नहीं आएगा। जाने का मन तो मेरा भी नहीं
- 4:17:19है। पर कल को बुआ को यह कहने का मौका नहीं
- 4:17:21देना चाहती कि उनके घर आकर कहने के बाद भी
- 4:17:24मैं उनकी बेटी की सगाई में नहीं आई।
- 4:17:26राजदीप जी और बीना जी शिप्रा का चेहरा
- 4:17:29देखने लगे। शिप्रा अपने कमरे की तरफ बढ़ने
- 4:17:31लगी तो बीना जी बोली मेघना तुम्हारे कमरे
- 4:17:35में सो रही है। अभी एक घंटे पहले ही वो आई
- 4:17:38है। थकी हुई थी तो तुम्हारे कमरे में जाकर
- 4:17:40सो गई है। वो भी बोली थी कि पार्टी में
- 4:17:43जाने से पहले उसे उठा दूं ताकि वो भी समय
- 4:17:45से तैयार हो जाए। शिप्रा को पता नहीं था
- 4:17:48कि आज मेघना भी इस पार्टी के लिए आने वाली
- 4:17:50थी। उसे इस बात से आश्चर्य भी हुआ कि
- 4:17:53शिप्रा इस शहर में आई और उसे बताया भी
- 4:17:55नहीं। वो सीढ़ियां चढ़ते हुए अपने कमरे की
- 4:17:58तरफ बढ़ गई। अपने कमरे के पास पहुंचकर वो
- 4:18:01अपने कमरे में ना जाकर उस कमरे में चली गई
- 4:18:03[संगीत] जिसमें उसने पहले कभी शौर्य को
- 4:18:05ठहराया था। कमरे में जाने के बाद उसने
- 4:18:08कमरा बंद किया और अपना मोबाइल निकालकर
- 4:18:11शौर्य को फोन लगाने लगी। पूरा रिंग गया पर
- 4:18:14दूसरी तरफ से फोन नहीं उठाया गया। शिप्रा
- 4:18:18के चेहरे पर परेशानी के भाव आ गया। उसने
- 4:18:20लगातार दो-तीन बार फोन किया पर फोन नहीं
- 4:18:24उठाया गया। शिप्रा का मन और भी उद्वेलित
- 4:18:27होने लगा। उसे लगा उसने यहां आकर गलती कर
- 4:18:30दी। पहले उसे शौर्य के पास जाना चाहिए था।
- 4:18:33उससे बात करने के बाद ही उसे यहां आना
- 4:18:35चाहिए था। पर अब पछताने से क्या होने वाला
- 4:18:38था? उसे रह-रह कर मन में बुरे ख्याल आ रहे
- 4:18:41थे। वो सोचने लगी वो शौर्य से कैसे बात
- 4:18:43करें? उसने तुरंत नीलिमा का नंबर निकाल कर
- 4:18:46उसको कॉल लगाया। उसे लगा नीलिमा शौर्य से
- 4:18:49उसकी बात करवा सकती है। दो रिंग के बाद ही
- 4:18:52दूसरी तरफ से नीलिमा ने फोन उठाया। क्या
- 4:18:55बात है भाभी? मुझे उम्मीद नहीं थी कि इतनी
- 4:18:58जल्दी आपका फोन मेरे पास आ जाएगा। नीलिमा
- 4:19:01क्या तुम्हारे भैया अभी वहीं हैं? क्या
- 4:19:04तुम मुझसे मेरी बात करा सकती हो? शिप्रा
- 4:19:06सकुचाते हुए बोली मैं तो फालतू में खुश हो
- 4:19:09रही थी कि आपने मुझसे बात करने के लिए फोन
- 4:19:11किया है। पर आपने तो भैया से बात करने के
- 4:19:14लिए फोन किया है। पर अफसोस कि मैं उनसे
- 4:19:16आपकी बात नहीं करवा सकती। क्योंकि आधे
- 4:19:19घंटे पहले ही वो यहां से चले गए हैं।
- 4:19:21नीलिमा ने जवाब [संगीत] दिया।
- 4:19:23ओहो शिप्रा के मुंह से अफसोस भरा स्वर
- 4:19:26निकला। सब ठीक तो है भाभी। आप उनके फोन पर
- 4:19:30फोन क्यों नहीं कर लेते? नीलिमा ने पूछा।
- 4:19:33वो फोन नहीं उठा रहा इसलिए उससे बात नहीं
- 4:19:35हो पा रही है। शिप्रा की बातों में उसकी
- 4:19:38परेशानी साफ झलक रही थी। आप दोनों के बीच
- 4:19:41में कोई बात हुई है क्या? नीलिमा उसकी
- 4:19:43बातों में परेशानी के भाव महसूस कर बोली।
- 4:19:46नीलिमा की बात सुनकर शिप्रा ने खुद को
- 4:19:48नॉर्मल किया और मुस्कुराने का प्रयास करती
- 4:19:50हुई बोली। नहीं ऐसी कोई बात नहीं है। मैं
- 4:19:53उसे फोन लगा रही थी। उसने उठाया नहीं था
- 4:19:56तो मैंने सोचा शायद वो अभी वहीं होगा
- 4:19:58इसलिए तुमको फोन कर लिया। तुम चिंता मत
- 4:20:01करो। कहीं बिजी होगा। जैसे [संगीत] ही
- 4:20:03फ्री होगा वो फोन कर लेगा। ठीक है भाभी।
- 4:20:06अगर मेरी बात होती है तो मैं उन्हें आपको
- 4:20:08फोन करने को बोल दूंगी। इतना कहकर नीलिमा
- 4:20:11ने फोन रख दिया। दूसरी तरफ शिप्रा के
- 4:20:14चेहरे पर परेशानी के भाव और गहरे हो गए।
- 4:20:16वो सोचने लगी अब कहां गया होगा वो? कहीं
- 4:20:20मॉडल टाउन वाले घर ही तो नहीं गया है। यह
- 4:20:22सोचकर उसने गिरजा को फोन लगाकर उससे पूछा
- 4:20:25कि शौर्य घर तो नहीं आया है? गिरजा ने भी
- 4:20:28मना कर दिया। शौर्य मॉडल टाउन वाले घर भी
- 4:20:30नहीं पहुंचा था। शिप्रा का मन बेचैन होने
- 4:20:33लगा। उसका मन किया कि वो अभी यहां से निकल
- 4:20:36कर शौर्य के पास चली जाए। पर वो जाएगी
- 4:20:39कहां? उसे तो पता ही नहीं है कि शौर्य इस
- 4:20:42समय कहां है। दूसरी तरफ शौर्य जब राजमहल
- 4:20:45पहुंचा था तो वह वहां ज्यादा देर रुका
- 4:20:47नहीं। उसका मन तो पहले ही खिन्न हो रखा
- 4:20:49था। वो अपने इस माइंडसेट से निकलना चाहता
- 4:20:51था। उसे ध्यान आया कि जहांगीर खान दो दिन
- 4:20:54से छगन मगन के कैद में है। उसको उससे
- 4:20:57पूछताछ भी करनी है। उसे अभी तक यह पता
- 4:20:59नहीं चला था कि उसके यहां इंडिया आते ही
- 4:21:01किसने उसकी जान लेने की कोशिश की थी।
- 4:21:04शौर्य छगन मगन के अड्डे पर पहुंचा। छगन
- 4:21:07मगन उसको लेकर जहांगीर खान के पास पहुंचा।
- 4:21:10इस समय जहांगीर खान और उसके चेले सब एक ही
- 4:21:13जगह कैद थे। सबकी हालत खराब हो रखी थी। दो
- 4:21:16दिनों में ही जहांगीर खान काफी कमजोर नजर
- 4:21:18आने लगा था। रूबिया और सिकंदर तो उससे भी
- 4:21:21पहले से उनकी कैद में थे। सिकंदर की हालत
- 4:21:24और भी खस्ता हो रखी थी। जहांगीर खान ने जब
- 4:21:27शौर्य को आया देखा तो वह बेबस स्वर में
- 4:21:29बोला इस तरह मुझे यहां कैद रखने का क्या
- 4:21:32मतलब है? या तो मुझे छोड़ दो या पुलिस के
- 4:21:34हवाले कर दो। क्या इतने मासूम हो आप कि
- 4:21:37आपको यूं छोड़ा जा सके? आप शुक्र मनाइए कि
- 4:21:40आप अभी [संगीत] तक जीवित हैं। आपने तो
- 4:21:42मुझे मारने की सुपारी ली हुई है। कायदे से
- 4:21:45तो अब तक मुझे आप सबको ऊपर वाले के पास
- 4:21:47भेज देना चाहिए था। पर मैं अभी तक आप सबको
- 4:21:50जीवित रखे हुए हूं। अगर आप सच में छूटना
- 4:21:52चाहते हैं तो फिर मुझे बता दीजिए कि मुझे
- 4:21:55मारने की सुपारी आपको किसने दी थी। मैं
- 4:21:57वादा करता हूं कि आपको सही सलामत [संगीत]
- 4:21:59छोड़ दूंगा।
- 4:22:01जहांगीर खान गहरी आंखों से शौर्य को देखने
- 4:22:04लगा कि क्या वह [संगीत] सच कह रहा है कि
- 4:22:07अगर वह उसे बता देता है कि उसको मारने की
- 4:22:10सुपारी उसे किसने दी है तो क्या वह सच में
- 4:22:12सही सलामत उसे छोड़ देगा? उसे शौर्य की
- 4:22:15बात [संगीत] पर विश्वास नहीं हो रहा था।
- 4:22:17उसे शक था कि उससे उस शख्स का नाम जानने
- 4:22:20के बाद शौर्य उसे और उसके साथियों को भी
- 4:22:22नहीं छोड़ेगा। शौर्य को उसके चेहरे
- 4:22:25[संगीत] के भाव को देखकर यह समझ आ गया कि
- 4:22:27वह क्या सोच रहा है। शौर्य मुस्कुराया और
- 4:22:29बोला तुम्हें शायद मेरी बात पर विश्वास
- 4:22:32नहीं हो रहा है। पर यकीन मानो मैं
- 4:22:34तुम्हारी तरह कोई हत्यारा नहीं हूं या
- 4:22:36मेरा काम किसी की जान लेना नहीं है। मुझे
- 4:22:39बस उस आदमी का नाम चाहिए जिसने तुम्हें
- 4:22:41मुझे मारने की सुपारी दी है। साथ ही
- 4:22:43तुम्हें यह विश्वास भी दिलाना होगा कि तुम
- 4:22:45या तुम्हारा कोई आदमी भविष्य में मेरे
- 4:22:48रास्ते में आने की कोशिश नहीं करेगा।
- 4:22:50जहांगीर खान अभी भी शौर्य को गहरी नजरों
- 4:22:52से देख रहा था। यह कहना अभी भी मुश्किल था
- 4:22:55कि वह शौर्य की बात पर विश्वास कर पा रहा
- 4:22:57है कि नहीं। कुछ [संगीत] सोचकर वह शौर्य
- 4:22:59से बोला, "सही बात यह है कि मुझे भी नहीं
- 4:23:02पता कि तुम्हें मारने की सुपारी मुझे
- 4:23:04किसने दी है। मैं सिर्फ तुम्हें उस आदमी
- 4:23:06तक पहुंचा सकता [संगीत] हूं जिसके द्वारा
- 4:23:08तुम्हें मारने की सुपारी मुझे मिली है।
- 4:23:10मुझे समझ नहीं आया कि तुम्हारा कहने का
- 4:23:12मतलब क्या है। क्या यह तुम्हारा मुझे कुछ
- 4:23:14नहीं बताने का नया प्लान है। शौर्य
- 4:23:16गंभीरता से बोला। तुम गलत समझ रहे हो।
- 4:23:19मुझे डार्क वेब के द्वारा इस तरह की
- 4:23:21सुपारी [संगीत] मिलती है। जो लोग मुझे
- 4:23:23सुपारी देते हैं उन्हें भी नहीं पता होता
- 4:23:25है कि उन्होंने यह सुपारी किसको दी है।
- 4:23:27मुझे जो पेमेंट होती है वह भी क्रिप्टो
- 4:23:29करेंसी के द्वारा होता है। इस तरह से
- 4:23:31लेनदेन का भी कोई रिकॉर्ड नहीं होता।
- 4:23:33जहांगीर खान ने समझाया। पर इस तरह कोई तुम
- 4:23:36पर कैसे विश्वास करेगा कि जिसको सामने
- 4:23:38वाले ने सुपारी दी है वो उसका काम करेगा
- 4:23:40भी कि नहीं? [संगीत] इस तरह तो तुम सामने
- 4:23:42वाले के पैसे खाकर बैठ जाओगे। तो कोई
- 4:23:44तुम्हारा क्या ही बिगाड़ लेगा। शौर्य ने
- 4:23:47जहांगीर खान की बात पर शंका जाहिर की।
- 4:23:49तुम्हें पता नहीं है कि डार्क वेब की
- 4:23:51दुनिया में मेरा बड़ा नाम है। वहां कहा
- 4:23:54जाता है कि एक बार मैंने किसी की सुपारी
- 4:23:56ले ली तो समझो उसका काम तमाम है। तुम वो
- 4:23:58पहले ऐसे शख्स हो जिसको मारने में मैं
- 4:24:00नाकाम रहा हूं। डार्क वेब की दुनिया में
- 4:24:03मुझे लोग किलर फॉक्स के नाम से जानते हैं।
- 4:24:05जहांगीर खान गर्व से बोला। जहांगीर खान की
- 4:24:08बात सुनकर शौर्य के बगल में खड़े छगन मगन
- 4:24:11की आंखें आश्चर्य से बड़ी हो गई। छगन
- 4:24:13आश्चर्य से बोला, "तुम यह कह रहे हो कि वह
- 4:24:16फेमस किलर फॉक्स तुम ही हो।" शौर्य ने जब
- 4:24:19छगन मगन की आंखों में आश्चर्य देखा, तो
- 4:24:21उसने छगन से पूछा, क्या तुम किलर फॉक्स के
- 4:24:24नाम से वाकिफ हो? मैं क्या बॉस? जरायम की
- 4:24:27दुनिया से वास्ता रखने वाला हर एक बंदा इस
- 4:24:29नाम से वाकिफ है। सच में ही यह कहावत हम
- 4:24:31लोगों के बीच में फेमस है कि अगर [संगीत]
- 4:24:33किलर फॉक्स ने किसी की सुपारी ली, तो उसकी
- 4:24:35मौत फाइनल समझो। यह भी सच है कि आज तक कोई
- 4:24:39यह भी नहीं जानता कि किलर फॉक्स कौन है और
- 4:24:41कहां रहता है। छगन ने शौर्य की बात का
- 4:24:44जवाब दिया। छगन की बात सुनकर शौर्य अब
- 4:24:47जहांगीर खान की तरफ गहरी नजरों से देखते
- 4:24:49हुए बोला, "अगर मुझे तुमसे कोई काम की
- 4:24:52जानकारी नहीं मिली, तो फिर तुम हमारे किस
- 4:24:54मतलब [संगीत] के हुए?"
- 4:24:55शौर्य की आंखों में अपने लिए निराशा देखकर
- 4:24:57जहांगीर खान बोला, "मैं तुम्हें उस आदमी
- 4:25:00तक पहुंचा सकता हूं जिसने मुझे तुम्हें
- 4:25:02मारने की सुपारी दी है।" शौर्य को लगा,
- 4:25:05"यह क्या बेवकूफी [संगीत] है?" वो अभी तक
- 4:25:07उससे और क्या पूछ रहा था? वो भी तो
- 4:25:09जहांगीर खान से यही पूछ रहा था कि उसको
- 4:25:11[संगीत] मारने की सुपारी उसे किसने दी है?
- 4:25:13वो व्यंग भरे स्वर में बोला, और मैं आपसे
- 4:25:16अब तक क्या पूछ रहा था? तुम गलत समझ रहे
- 4:25:19हो। जिसने मुझे तुम्हें मारने की सुपारी
- 4:25:21दी है, मुझे लगता [संगीत] है कि उसको भी
- 4:25:23यह कहीं से सुपारी के रूप में ही मिली थी।
- 4:25:26उसने किया यह कि कहीं से सुपारी लेकर उसने
- 4:25:28यह सुपारी मुझे दे दी। मतलब वो डायरेक्ट
- 4:25:32वो बंदा तो नहीं है जो तुम्हें मरवाना
- 4:25:33चाहता है। अंडरवर की दुनिया में लोग अक्सर
- 4:25:36ऐसा करते हैं। किसी एक बंदे को ही मारने
- 4:25:38की सुपारी कई [संगीत] लोगों से होकर
- 4:25:40गुजरती हुई कहीं और चली जाती है। जहांगीर
- 4:25:43खान ने शौर्य को अंडरवर की पेचीदगी
- 4:25:45समझाया। शौर्य ने छगन [संगीत] की तरफ देखा
- 4:25:48जैसे उससे पूछ रहा हो कि क्या जो जहांगीर
- 4:25:50खान कह रहा है उसमें कोई सच्चाई है? छगन
- 4:25:54ने आंख के इशारे से जहांगीर खान की बात
- 4:25:56ठीक है तो आप यही कीजिए कि मुझे उस बंदे
- 4:25:59तक ही पहुंचाइए। उसके बाद देखेंगे कि वह
- 4:26:02भी मुझे मेरी मंजिल तक पहुंचाता है या
- 4:26:04नहीं। शौर्य जहांगीर खान की बात से सहमत
- 4:26:07होता हुआ बोला। फिर शौर्य के दिमाग में
- 4:26:09कुछ आया तो उसने पूछा अभी तो आप कह रहे थे
- 4:26:12कि आपके पास यह सुपारी डार्क वेब के
- 4:26:14द्वारा आती है? फिर आपको यह कैसे पता चला
- 4:26:16कि जिसने आपको यह सुपारी दी है वो कौन हो
- 4:26:19सकता है? जहांगीर खान शौर्य की समझदारी पर
- 4:26:22मुस्कुराया और बोला एक बार जब हम किसी की
- 4:26:25सुपारी ले लेते हैं तो एक सोशल मीडिया ऐप
- 4:26:27के द्वारा एक दूसरे के कनेक्ट में आते
- 4:26:29हैं। वहां भी हम अपने ओरिजिनल नाम से नहीं
- 4:26:31होते हैं। इसलिए इस ऐप के द्वारा भी एक
- 4:26:34दूसरे को पहचानना मुश्किल ही है। पर यह जो
- 4:26:36सुपारी मुझे मिली वो विशालगढ़ से ही संबंध
- 4:26:39रखता है। इसलिए मुझे उसको जानने की
- 4:26:41उत्सुकता हुई थी कि सुपारी देने वाला कौन
- 4:26:43है? और तुम्हारे केस में यह मामला भी था
- 4:26:45कि तुमको मारने का पूरा पेमेंट मुझे नहीं
- 4:26:47मिला था। हमारी जानकारी के हिसाब से तो
- 4:26:49तुम मारे जा चुके थे। पर दूसरी पार्टी यह
- 4:26:52मानने को तैयार नहीं थी कि तुम मर चुके
- 4:26:54हो। और हमारे पास भी यह कंफर्म करने का
- 4:26:56कोई जरिया नहीं था कि तुम जीवित हो या मर
- 4:26:58चुके हो। कि हमारा जो आदमी तुम्हें मारने
- 4:27:01गया था उसका भी कोई पता नहीं था। इसलिए हम
- 4:27:03भी श्योर नहीं थे कि तुम मर चुके हो। फिर
- 4:27:06हमारे मन में यह भी डर था कि कहीं मुझे
- 4:27:08सुपारी देने वाला कहीं मेरे साथ डबल गेम
- 4:27:10तो नहीं खेल रहा है। इसलिए हमने उसकी
- 4:27:12जानकारी निकलवानी शुरू की है। और जल्दी ही
- 4:27:14हमने उसकी जानकारी भी निकाल ली। जहांगीर
- 4:27:17खान की बात सुनकर बात शौर्य को समझ में
- 4:27:19आई। इस कहानी में ऐसी [संगीत] कोई पेचीदगी
- 4:27:22नहीं थी कि बात शौर्य को समझ में नहीं
- 4:27:23आती। वो जहांगीर खान की तरफ देखते हुए
- 4:27:26बोला, ठीक है आप मुझे उस आदमी का नाम
- 4:27:29बताइए। जहांगीर [संगीत] खान खामोशी से
- 4:27:32शौर्य की तरफ देखता रहा। जब शौर्य ने
- 4:27:34जहांगीर खान को खामोश देखा तो वह शंका भरे
- 4:27:36स्वर में बोला, "क्या हुआ? फिर से आपका
- 4:27:39प्लान बदल तो नहीं गया? मैं तुम्हें उस
- 4:27:41आदमी के बारे में बता दूंगा। कहोगे तो मैं
- 4:27:44[संगीत] तुम्हें उस जगह भी पहुंचा दूंगा
- 4:27:45जहां वह रहता है। पर पहले तुम्हें मेरे
- 4:27:47सारे आदमियों को छोड़ना पड़ेगा। जहांगीर
- 4:27:50खान अपने आदमियों की तरफ देखते हुए बोला
- 4:27:52शौर्य और जहांगीर [संगीत]
- 4:27:53खान की बातें होती देखकर उसके आदमियों को
- 4:27:55भी भरोसा होने लगा कि अब शायद वो लोग इनकी
- 4:27:58कैद से छूट जाएंगे। उनके चेहरे पर एक
- 4:28:00उम्मीद नजर आने लगी। शौर्य को जहांगीर खान
- 4:28:03का अपने आदमियों के [संगीत] लिए कंसर्न
- 4:28:04देखकर अच्छा लगा कि यह बंदा खुद से पहले
- 4:28:07अपने आदमियों के लिए सोचा। अगर वह खुद को
- 4:28:09छोड़ने की बात करता तो शायद शौर्य उनकी
- 4:28:11बात पर विश्वास नहीं करता। पर उसको अपने
- 4:28:14आदमियों के लिए चिंतित देखकर शौर्य को
- 4:28:16जहांगीर खान पर भरोसा हुआ कि वो उसके साथ
- 4:28:18धोखा नहीं करेगा। शौर्य ने छगन मगन को
- 4:28:21देखकर बोला, इन सब लोगों को छोड़ दो।
- 4:28:24शौर्य की बात सुनकर छगन के चेहरे पर चिंता
- 4:28:26नजर आई। उसे [संगीत] लगा इस तरह तो इन
- 4:28:28लोगों को उसके अड्डे का पता चल जाएगा।
- 4:28:31शौर्य छगन की चिंता समझकर बोला, [संगीत]
- 4:28:33"तुम इन लोगों की आंख पर पट्टी बांधकर
- 4:28:35यहां से ले जा सकते हो। इनके क्लब के पास
- 4:28:37जाकर ही इन्हें छोड़ना। वहां [संगीत] से
- 4:28:38वीडियो कॉलिंग से इनकी बात भी करा देना
- 4:28:40ताकि जहांगीर खान को भी विश्वास हो जाए कि
- 4:28:42इनके आदमी सुरक्षित हैं। छगन ने जहांगीर
- 4:28:45खान के सारे आदमियों को खोल दिया और सबकी
- 4:28:48तरफ काले कपड़े की पट्टी बढ़ा दिया कि वह
- 4:28:50[संगीत] खुद ही अपनी आंखों पर काला पट्टी
- 4:28:51बांध ले। सभी ने छगन से वो काली पट्टी ले
- 4:28:54ली। पर रुबिया ने ऐसा नहीं किया। वो
- 4:28:56जहांगीर खान [संगीत] की तरफ देखकर बोली,
- 4:28:58"मैं आपके बिना यहां से नहीं जाऊंगी। यह
- 4:29:01तुम कैसी बात कर रही हो? मेरे बाद तुम्हें
- 4:29:03ही हमारे क्लब की देखरेख करनी है। तुम
- 4:29:05[संगीत] यूं यहां नहीं रह सकती। तुम जाओ
- 4:29:07यहां से। जहांगीर खान रुबिया को आदेश देते
- 4:29:10हुए बोले, आप कुछ भी कहिए, [संगीत] मैं
- 4:29:12आपको यहां अकेले छोड़कर नहीं जाऊंगी।
- 4:29:15रुबिया दृढ़ इरादों के साथ बोली। उन दोनों
- 4:29:18की बातें सुनकर शौर्य मुस्कुराया। उसने
- 4:29:20छगन के हाथ से एक पट्टी लिया और जहांगीर
- 4:29:22खान की तरफ बढ़ाकर बोला, "यह लीजिए, आप
- 4:29:25[संगीत] भी अपनी आंख पर पट्टी बांध लीजिए।
- 4:29:27आप भी अपने शागिर्दों के साथ यहां से जा
- 4:29:29रहे हैं। मैं आप पर भरोसा कर रहा हूं कि
- 4:29:31आप अपनी जुबान पर रहेंगे।
- 4:29:33[संगीत]
- 4:29:33यहां से छूटने के बाद आप मुझे उस आदमी का
- 4:29:35नाम जरूर बता देंगे। ऐसी मैं उम्मीद करता
- 4:29:38हूं।
- 4:29:39जहांगीर खान के साथ रूबिया भी आश्चर्य से
- 4:29:42शौर्य की तरफ देखने लगी। उसे उम्मीद नहीं
- 4:29:44था कि शौर्य इस तरह सब कुछ छोड़ने का
- 4:29:46निर्णय कर लेगा। तुम्हें डर नहीं है कि
- 4:29:49यहां से जाने के बाद मैं अपनी बात से मुकर
- 4:29:51सकता हूं। जहांगीर खान गहरी नजरों से
- 4:29:54शौर्य की तरफ देखते हुए बोला, डर तो है पर
- 4:29:57फिर भी आप पर विश्वास करने का मन कर रहा
- 4:29:59है। मैं ऐसी बेवकूफी करता रहता हूं। शौर्य
- 4:30:02मुस्कुराता हुआ बोला। अभी भी जहांगीर खान
- 4:30:05के चेहरे पर अविश्वास के भाव था। उसने
- 4:30:07अपनी आंखों पर पट्टी बांध लिया। जब छगन
- 4:30:09सबको अपने साथ ले जाने लगा तो पीछे से
- 4:30:11शौर्य ने जहांगीर खान से कहा। खान साहब
- 4:30:14[संगीत] कल मैं दोपहर तक आपके क्लब में
- 4:30:16आऊंगा। उम्मीद करता हूं कि तब तक आप मुझे
- 4:30:18उस शख्स का नाम बताने को तैयार रहेंगे।
- 4:30:20इसके बाद मगन अपने आदमियों के साथ सबको
- 4:30:23लेकर वहां से चला गया। छगन शौर्य के साथ
- 4:30:25पीछे ठहर [संगीत] गया। उन सबके जाने के
- 4:30:27बाद शौर्य ने अपना मोबाइल निकालकर उसकी
- 4:30:29तरफ देखा। जब वो जहांगीर खान और उसके
- 4:30:32आदमियों से बात कर रहा था। [संगीत] उस
- 4:30:33वक्त कई बार उसका फोन वाइब्रेट किया था।
- 4:30:36उसने देखा उस पर शिप्रा के कई मिस कॉल था।
- 4:30:39लास्ट में एक कॉल उसकी बहन नीलिमा का भी
- 4:30:41था। दूसरी तरफ शिप्रा अभी भी उस कमरे में
- 4:30:44परेशान सी बैठी थी। उसका दिमाग काम नहीं
- 4:30:46कर रहा था कि वह कैसे शौर्य [संगीत] से
- 4:30:48बात करें। जब कोई भी तरीका उसे नजर नहीं
- 4:30:50आया तो उसने सोचा क्या उसे विक्रम से बात
- 4:30:53करनी चाहिए? अभी वह यह सोच ही रही थी कि
- 4:30:55तभी कमरे का दरवाजा खुला और मेघना उस कमरे
- 4:30:58में प्रवेश की। तुम यहां बैठी हो? मैं
- 4:31:01तुम्हें नीचे सब जगह ढूंढ आई। मेघना
- 4:31:03शिप्रा के सामने अपनी कमर पर दोनों हाथ
- 4:31:06रखकर उसको एक टक देखती हुई बोली, कुछ
- 4:31:09नहीं। कुछ कॉल करनी थी इसलिए इस कमरे में
- 4:31:11आ गई। मुझे लगा था कि तुम शायद अगले कमरे
- 4:31:14में सो रही होगी। इसलिए [संगीत] तुम्हें
- 4:31:15डिस्टर्ब करना सही नहीं समझा। शिप्रा खुद
- 4:31:18को नॉर्मल दिखाने की कोशिश करती हुई बोली
- 4:31:20वो तो ठीक है पर तुम यहां अकेले क्यों आई
- 4:31:23श्रवण क्यों नहीं आया मैंने सोचा था
- 4:31:25तुम्हारे साथ श्रवण से भी मुलाकात हो
- 4:31:27जाएगी मेघना [संगीत] मुंह बनाती हुई बोली
- 4:31:30मुझे यह भी कहां पता था कि तुम यहां आई
- 4:31:31हुई हो अगर तुम्हें श्रवण से मिलना था तो
- 4:31:34पहले फोन करके बताना था ना कि तुम भी इस
- 4:31:36पार्टी में शामिल होने के लिए आ रही हो
- 4:31:38शिप्रा मेघना को जवाब देती हुई बोली वैसे
- 4:31:41भी जब [संगीत] पार्टी में जा रही हो तो
- 4:31:43तुम्हें श्रवण को भी अपने साथ पार्टी में
- 4:31:44लाना चाहिए नहीं तो लोग तरह-तरह की बातें
- 4:31:47बनाएंगे। [संगीत]
- 4:31:47मेघना ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा,
- 4:31:50"िछली बार की बात भूल गई क्या कि मेरे
- 4:31:52परिवार वालों ने शौर्य के साथ कैसा
- 4:31:54व्यवहार किया था?" उसके बाद भी तुम्हें
- 4:31:56लगता है कि उसको इस परिवार के किसी फंक्शन
- 4:31:58में लाना सही होगा?" शिप्रा व्यंग में
- 4:32:01बोली, अरे यार, [संगीत] एक बार वैसा हो
- 4:32:04गया तो क्या तुम उस बात को जिंदगी भर
- 4:32:05पकड़ी रहोगी? इस तरह तो यह संबंध हमेशा
- 4:32:07बिगड़ा ही रहेगा। लोग कोशिश करते हैं कि
- 4:32:10बिगड़े हुए रिश्ते सुधार जाए। और एक तुम
- 4:32:12हो कि [संगीत] पुरानी बात को अभी भी गांठ
- 4:32:14बांध कर रखी हुई हो। चलो जल्दी से शौर्य
- 4:32:17को फोन करो और उसे यहां बुलाओ। मेघना
- 4:32:20शिप्रा को आदेश करती हुई बोली। शिप्रा
- 4:32:23मेघना को क्या बताती कि शौर्य [संगीत]
- 4:32:24उसका फोन ही नहीं उठा रहा है। अचानक
- 4:32:26शिप्रा के दिमाग में एक विचार कौंधा। उसने
- 4:32:29मेघना से कहा अगर तुमको लगता है कि श्रवण
- 4:32:32को इस पार्टी में बुलाना चाहिए तो तुम ही
- 4:32:34उसको फोन करो। मुझ में इतनी हिम्मत नहीं
- 4:32:36है कि मैं उसको इस पार्टी में आने के लिए
- 4:32:38कहूं। ठीक है। अगर तुम ऐसा चाहती हो तो
- 4:32:41ऐसा ही सही। मैं ही उसे फोन करके बुलाती
- 4:32:44हूं। इतना कहकर मेघना शौर्य को फोन लगाने
- 4:32:47लगी। शौर्य जहांगीर खान और उसके आदमियों
- 4:32:50के जाने के बाद छगन के ठिकाने से निकल गया
- 4:32:53था। अपनी कार में बैठकर वो यही सोच रहा था
- 4:32:56कि अब वो कहां जाए? उसे ध्यान आया कि
- 4:32:58शिप्रा के साथ उसकी बहन नीलिमा का भी मिस
- 4:33:01कॉल उसके फोन पर था। क्या शिप्रा ने
- 4:33:03नीलिमा से उसके बारे में पूछा होगा?
- 4:33:05इसीलिए नीलिमा ने उसे फोन किया था। हां,
- 4:33:08यही बात हो सकती है। शौर्य ने सोचा, उसका
- 4:33:11मन अभी किसी भी काम में नहीं लगने वाला
- 4:33:13था। आज शिप्रा, प्रतीक और उसके बीच जो हुआ
- 4:33:16था, उससे उसका मन बहुत दुखी था। यही कारण
- 4:33:19था कि वह जहांगीर खान से अपनी सुपारी देने
- 4:33:22वाले के नाम जानने की प्रतीक्षा नहीं कर
- 4:33:24सका। वो आज जो भी हुआ उस बात को भूलना
- 4:33:27चाहता था। अगर वह घर भी जाता तो कमरे में
- 4:33:29जाते ही उसे शिप्रा की याद आती। उसने सोचा
- 4:33:32वो होटल राजकमल ही चला जाता है। वहीं अपनी
- 4:33:34प्रेसिडेंसी रूम में जाकर आराम करेगा।
- 4:33:37उसने अपनी कार आगे बढ़ाया ही था कि तभी
- 4:33:39उसका मोबाइल रिंग करने लगा। उसने फ्लैश
- 4:33:42होते नंबर की तरफ देखा तो उस पर मेघना का
- 4:33:44नाम फ्लैश हो रहा था। मेघना का कॉल आता
- 4:33:47देखकर उसने सोचा कहीं शिप्रा ने उससे भी
- 4:33:49तो उसके बारे में बात नहीं किया होगा। फिर
- 4:33:51खुद उसने खुद को समझाया नहीं ऐसा संभव
- 4:33:54नहीं है। शिप्रा मेघना से कम से कम अपने
- 4:33:57और उसके बीच हुई घटना के बारे में तो नहीं
- 4:33:59बताएगी। फिर मेघना उसे किस लिए फोन कर
- 4:34:02[संगीत] रही है? उसका फोन नहीं उठाने का
- 4:34:04कोई कारण शौर्य के पास नहीं था। उसने कॉल
- 4:34:06उठाया और खुद को नॉर्मल दिखाने की कोशिश
- 4:34:08करता हुआ बोला हेलो मेघना क्या बात है आज
- 4:34:12इतने दिनों बाद तुम्हें मेरी याद कैसे
- 4:34:13[संगीत] आ गई मैं तुम्हारे शहर में आई हुई
- 4:34:16हूं और अभी मासी के यहां हूं मैंने सोचा
- 4:34:18था आज तुमसे मुलाकात हो जाएगी पर तुम यहां
- 4:34:20शिप्रा के साथ तो आई ही नहीं मेघना
- 4:34:23शिकायती लहजे में बोली अब मुझे यह सपना तो
- 4:34:25नहीं आया था कि तुम विशालगढ़ आई हुई हो
- 4:34:28मुझसे मिलना था तो तुम्हें पहले बताना
- 4:34:29चाहिए था तब शायद मैं तुमसे मिलने आ भी
- 4:34:32जाता शौर्य ने जवाब दिया तो अभी क्या हुआ
- 4:34:35है। तुम अभी भी आ सकते हो। तुम जल्दी से आ
- 4:34:38जाओ। मैं यहीं तुम्हारा इंतजार कर रही
- 4:34:40हूं। मेघना जवाब देती हुई बोली। अभी शौर्य
- 4:34:44संशय भरे स्वर में बोला। फिर आगे अपनी बात
- 4:34:47को कंटिन्यू करते हुए बोला, "देखो अभी तो
- 4:34:49संभव नहीं है। वैसे भी आज तो तुम राधिका
- 4:34:51की इंगेजमेंट पार्टी में जाने वाली हो। तो
- 4:34:53ऐसा करता हूं मैं कल तुमसे मिलता हूं।"
- 4:34:56शौर्य टालने वाले अंदाज में बोला, "अरे यह
- 4:34:59क्या बात हुई? आज तो सबसे बढ़िया समय है
- 4:35:01[संगीत] एक दूसरे से मिलने का। तुमको भी
- 4:35:03तो पार्टी में आना चाहिए। तुम भी तो आज की
- 4:35:06पार्टी में इनवाइटेड हो। राधिका चाहती थी
- 4:35:08कि किसी तरह शौर्य इस पार्टी में शामिल
- 4:35:10हो। लगता है तुम पिछली बार का मेरा किया
- 4:35:13गया स्वागत भूल गई हो। मुझे तो माफ ही
- 4:35:15करो। मैं कल तुमसे मिलता हूं। शौर्य की
- 4:35:18कोई भी इच्छा राधिका की पार्टी में शामिल
- 4:35:20होने का नहीं था। इस तरह कैसे बात बनेगी?
- 4:35:22[संगीत]
- 4:35:23इस तरह तो तुम्हारे और शिप्रा के परिवार
- 4:35:25में दूरियां बढ़ती ही रहेगी। तुम नहीं
- 4:35:27चाहते कि शिप्रा की उसके परिवार से
- 4:35:29दूरियां कम हो। मेघना शौर्य पर सवाल खड़े
- 4:35:31करती हुई बोली तुम भी कमाल करती हो मैंने
- 4:35:35कौन सा शिप्रा को उसके परिवार से मिलने से
- 4:35:37रोक रखा है वो अपने परिवार से मिलने के
- 4:35:39लिए आजाद है और इस तरह तुम मुझे इमोशनल
- 4:35:42ब्लैकमेल करने की कोशिश मत करो अब मैं फोन
- 4:35:44रखता हूं इतना कहकर शौर्य फोन रखने ही
- 4:35:47वाला था कि तुरंत दूसरी तरफ से आवाज आई।
- 4:35:50रुको अभी फोन मत रखना। अभी मेघना आगे भी
- 4:35:53कुछ और बोलने वाली थी। पर तब तक शौर्य ने
- 4:35:55फोन रख दिया। शौर्य कुछ देर शिप्रा और
- 4:35:58मेघना के बारे में सोचता रहा। फिर उसने
- 4:36:00कार को होटल राजकमल की तरफ बढ़ा दिया।
- 4:36:03ज्यादा समय नहीं बीता कि तभी फिर से शौर्य
- 4:36:05का मोबाइल रिंग करने लगा। उसने स्क्रीन की
- 4:36:08तरफ देखा तो इस बार उस पर शिप्रा का नंबर
- 4:36:10फ्लैश हो रहा था। शिप्रा का नंबर देखकर
- 4:36:13शौर्य समझ गया था कि शिप्रा उससे क्या बात
- 4:36:15कर सकती थी और अभी वह शिप्रा से बात करने
- 4:36:17की स्थिति में नहीं था। इसलिए उसने फोन
- 4:36:20नहीं उठाया। लेकिन मोबाइल लगातार रिंग
- 4:36:22होता रहा। शौर्य को लगा अगर वह ज्यादा
- 4:36:25शिप्रा के कॉल को इग्नोर करता रहा तो उसके
- 4:36:27साथ मौजूद मेघना को उन दोनों के बारे में
- 4:36:29कुछ गलतफहमी ना हो जाए। इसलिए उसने फाइनली
- 4:36:32शिप्रा का कॉल उठा लिया। हेलो शौर्य ने
- 4:36:35हल्के स्वर में कहा। शिप्रा कुछ पल खामोश
- 4:36:38दूसरी तरफ से शौर्य की सांसों की आवाज
- 4:36:40सुनती रही। फिर सपाट स्वर में बोली कहां
- 4:36:44हो तुम? शौर्य को समझ नहीं आया कि वो
- 4:36:46शिप्रा को इस बात का क्या जवाब दे? पर कुछ
- 4:36:49तो बोलना था। इसलिए वो शिप्रा के सवाल को
- 4:36:52इग्नोर करते हुए बोला, "क्या बात है? फोन
- 4:36:55किस लिए कर रही हो? मैं कुछ पूछ रही हूं।
- 4:36:58क्या तुम बताओगे कि इस समय तुम कहां हो?"
- 4:37:00शिप्रा ने दोबारा अपना सवाल दोहराया। तुम
- 4:37:03बताओ तो सही कि तुमने फोन किस लिए किया
- 4:37:05है? मैं अभी तुम्हें बताने की स्थिति में
- 4:37:08नहीं हूं कि इस समय मैं कहां हूं? शौर्य
- 4:37:10फिर से शिप्रा के जवाब को टालते हुए बोला,
- 4:37:13क्या तुम चाहते हो कि मैं यहां परेशान
- 4:37:14रहूं? प्लीज मुझे बताओ कि इस वक्त तुम
- 4:37:17कहां हो? शिप्रा अपने सवाल पर अड़ी रही।
- 4:37:20पर तुम यह क्यों जानना चाहती हो कि मैं
- 4:37:22अभी कहां हूं? तुम्हें अभी कोई और काम की
- 4:37:24बात नहीं करनी है तो मैं फोन रखता हूं।
- 4:37:27शौर्य शिप्रा को चेताते हुए बोला, तुम ऐसा
- 4:37:30क्यों कर रहे हो? मुझे अच्छा नहीं लग रहा
- 4:37:32है। मुझे अभी तुमसे मिलना है। तुम्हें
- 4:37:35यहां आने की कोई जरूरत नहीं है। तुम सिर्फ
- 4:37:38मुझे बता दो कि तुम कहां हो? मैं वहां खुद
- 4:37:40ही आ जाऊंगी। शिप्रा रुआ सीसी होकर बोली,
- 4:37:43"तुमको अभी राधिका की इंगेजमेंट पार्टी
- 4:37:45में शामिल होना है ना? पार्टी के बाद फोन
- 4:37:48करना। मैं तुम्हें लेने आ जाऊंगा। शौर्य
- 4:37:51शिप्रा को आगे का प्लान बनाते हुए बोला,
- 4:37:54"अगर तुम मुझसे पार्टी में जाने से पहले
- 4:37:56नहीं मिले, तो मैं इस पार्टी में नहीं
- 4:37:58जाऊंगी।" शिप्रा इमोशनल होकर बोली, "तुम
- 4:38:01यूं बेवकूफों वाली बात करोगी तो फिर मैं
- 4:38:03फोन रख दूंगा।" और दूसरी बात यह है कि मैं
- 4:38:06अभी तुम्हें नहीं बता सकता कि इस समय मैं
- 4:38:08कहां हूं।" शौर्य दृढ़ इरादों [संगीत] के
- 4:38:11साथ बोला। शिप्रा को अपना दिल डूबता सा
- 4:38:13प्रतीत हुआ। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह
- 4:38:16शौर्य को कैसे मनाए। मैं अब फोन रख रहा
- 4:38:19हूं। शौर्य शिप्रा से अंतिम बात करते हुए
- 4:38:22बोला, तुम समझ क्यों नहीं रहे हो? मैं जब
- 4:38:26तक तुमसे मिल नहीं लेती, मुझे चैन नहीं
- 4:38:28आएगा। प्लीज मुझे बेस्ट कि तुम इस वक्त
- 4:38:30कहां हो? शिप्रा शौर्य से विनती करती हुई
- 4:38:33बोली, "इस बार शौर्य ने शिप्रा की बात
- 4:38:36सुना और इत्मीनान से बोला, "मैं तुमसे बाद
- 4:38:39में बात करता हूं।" इस समय मैं फोन रख रहा
- 4:38:41हूं। इतना कहकर उसने फोन काट दिया। शिप्रा
- 4:38:45को कुछ कहने का मौका ही नहीं मिला। शौर्य
- 4:38:47को इस तरह शिप्रा का फोन काटना अच्छा तो
- 4:38:50नहीं लगा पर इस समय वह अपने आप को कुछ समय
- 4:38:52अकेले में रखना चाहता था। इसलिए शौर्य ने
- 4:38:55अपनी कार को होटल राजकमल की तरफ बढ़ा
- 4:38:57दिया। दूसरी तरफ शिप्रा शौर्य से बात करने
- 4:39:00के लिए फिर से एकांत में चली गई थी। वो
- 4:39:02नहीं चाहती थी कि उसके और शौर्य के बीच की
- 4:39:04अनबन मेघना को पता चले। जब शौर्य ने फोन
- 4:39:08काट दिया तो वह फोन की तरफ देखती रह गई।
- 4:39:10उसका चेहरा उतर गया था। अगर उसे पता होता
- 4:39:13कि शौर्य इस वक्त कहां होगा तो वह बिना एक
- 4:39:16भी पल गवाए तुरंत शौर्य से मिलने चली
- 4:39:18जाती। शौर्य के फोन काटने के बाद वो
- 4:39:21[संगीत] उदास नजरों से फोन की तरफ देखने
- 4:39:23लगी। वो सोचने लगी कि वह कैसे पता करें कि
- 4:39:26शौर्य इस वक्त कहां है। अचानक उसके दिमाग
- 4:39:30में ख्याल आया कि शायद विक्रम [संगीत] को
- 4:39:31पता हो कि शौर्य इस वक्त कहां है। यह
- 4:39:34सोचकर उसने अपने मोबाइल में विक्रम का
- 4:39:36नंबर तलाश किया और उसे फोन लगाया। दो-तीन
- 4:39:39रिंग के [संगीत] बाद ही फोन दूसरी तरफ से
- 4:39:41उठाया गया। हेलो शिप्रा मेम कहिए [संगीत]
- 4:39:44आपने कैसे फोन किया? विक्रम भैया आप अभी
- 4:39:48कहां हैं? शिप्रा विक्रम को आदर के साथ
- 4:39:50बोली। मैं तो अभी होटल में आराम कर रहा
- 4:39:53हूं। कहिए क्या बात [संगीत] है? कोई काम
- 4:39:56है क्या? विक्रम आदर से बोला। विक्रम भैया
- 4:40:00क्या आप मुझे बता सकते हैं कि इस वक्त
- 4:40:02शौर्य कहां है? शिप्रा सकुचाते हुए बोली।
- 4:40:06क्या हुआ? बॉस से आपकी कोई बात हुई है
- 4:40:08क्या जो आप ऐसा पूछ रही हैं? पूछते हुए
- 4:40:11विक्रम के चेहरे पर स्माइल थी। विक्रम
- 4:40:14भैया शौर्य से मेरी कुछ कहासनी हो गई।
- 4:40:17उसके बाद से वो मुझसे बात ही नहीं कर रहा।
- 4:40:20प्लीज अगर आपको कुछ पता है तो मुझे बताइए
- 4:40:23कि शौर्य इस वक्त कहां मिलेगा। शिप्रा
- 4:40:26विक्रम से विनती करती हुई बोली। वैसे मुझे
- 4:40:29इस [संगीत] वक्त यह तो नहीं पता कि बॉस इस
- 4:40:31वक्त कहां है। पर अगर वह आपसे नाराज हैं
- 4:40:33और घर पर नहीं है तो देर सवेर वो होटल
- 4:40:36राजकमल जरूर आएंगे। विक्रम शिप्रा को क्लू
- 4:40:39देते हुए बोला होटल राजकमल पर वो वहां
- 4:40:43कहां ठहरेगा? शिप्रा हैरान स्वर में
- 4:40:45विक्रम [संगीत] से बोली होटल राजकमल के
- 4:40:48प्रेसिडेंसी रूम में विक्रम ने जवाब दिया।
- 4:40:50शिप्रा को शौर्य का एक ठिकाना पता चला तो
- 4:40:53[संगीत] अब वो यहां एक पल के लिए भी ठहर
- 4:40:55नहीं सकती थी। उसे जल्दी से होटल राजकमल
- 4:40:57जाकर देखना था कि शौर्य वहां है या नहीं।
- 4:41:00अगर शौर्य होटल राजकमल में नहीं भी मिला
- 4:41:02तो वह विक्रम के साथ मिलकर शौर्य का पता
- 4:41:05लगाने की कोशिश करेगी। शिप्रा यह निश्चय
- 4:41:07करने के बाद मेघना के पास पहुंची और उससे
- 4:41:10कहा कि वो अभी जा रही है। वो उससे होटल
- 4:41:12राजकमल में मिलेगी। शिप्रा मेघना से बोलकर
- 4:41:15कमरे से निकलती हुई बोली। घर से बाहर आने
- 4:41:17के बाद उसने अपनी मम्मी को बताया कि अभी
- 4:41:20वह किसी काम से बाहर जा रही है। वो उन
- 4:41:22सबसे होटल राजकमल में ही मिलेगी। इतना
- 4:41:24कहकर वह अपनी कार में जाकर बैठ गई और कार
- 4:41:27को आगे बढ़ाया। थोड़ी देर बाद वो कार से
- 4:41:29होटल राजकमल जा रहा था। लगभग 20 मिनट बाद
- 4:41:32शिप्रा होटल राजकमल में थी। उसने विक्रम
- 4:41:35को फोन करके बताया कि वो [संगीत] होटल
- 4:41:37लॉबी में उसका इंतजार कर रही है। जल्दी ही
- 4:41:39विक्रम उसके पास पहुंचा। शिप्रा जल्दी से
- 4:41:41विक्रम के पास आकर बोली, विक्रम भैया,
- 4:41:44शौर्य का कुछ पता चला? विक्रम मुस्कुराया
- 4:41:46और बोला, "अभी 5 मिनट पहले ही वह होटल में
- 4:41:49आया और सीधा अपने कमरे में चला गया।"
- 4:41:51"प्लीज आप मुझे उसके कमरे के पास पहुंचा
- 4:41:53दीजिए।" शिप्रा जल्दबाजी दिखाते हुए बोली
- 4:41:56विक्रम मुस्कुराया और शिप्रा को लेकर
- 4:41:58प्रेसिडेंसी रूम की तरफ बढ़ गया। 5 मिनट
- 4:42:00बाद वो शौर्य के कमरे के बाहर शिप्रा के
- 4:42:03साथ खड़ा था। शिप्रा [संगीत] सोचने लगी कि
- 4:42:05वह दरवाजे पर दस्तक दे या नहीं। तभी
- 4:42:07विक्रम ने अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाया।
- 4:42:09विक्रम [संगीत] के हाथ में एक कार्ड था।
- 4:42:11यह इस कमरे की की है। विक्रम ने कमरे की
- 4:42:13चाबी शिप्रा की तरफ बढ़ाया। अब आप यहां से
- 4:42:16जाइए। मैं [संगीत] खुद देख लूंगा। शिप्रा
- 4:42:18विक्रम से बोली। विक्रम ने भी किसी से अभी
- 4:42:21बहस करना उचित नहीं समझा। विक्रम के जाने
- 4:42:24के बाद शिप्रा थोड़ी देर दरवाजे के पास
- 4:42:26खड़ी रही। फिर उसने अपना कार्ड निकालकर
- 4:42:28दरवाजे पर दिखाया। दरवाजा खुल गया। शिप्रा
- 4:42:31धीरे से कमरे के अंदर पहुंची तो उसने देखा
- 4:42:33शौर्य बेड पर बेसुद होकर लेटा हुआ था।
- 4:42:36शौर्य को यूं बेसुध सोए देखकर शिप्रा को
- 4:42:38तसल्ली हुई कि आखिर उसने शौर्य को ढूंढ
- 4:42:41लिया। शिप्रा ने सबसे पहले शौर्य को देखा।
- 4:42:44वो बेड के कोने पर जाकर बैठ गई। उसने
- 4:42:46ध्यान से शौर्य की तरफ देखा।
- 4:42:47[संगीत]
- 4:42:48अचानक उसने अपना पैर खाली किया और बेड पर
- 4:42:50जाकर शौर्य के बगल में लेट गई। शौर्य शायद
- 4:42:53ज्यादा ही गहरी नींद में सो रहा था। इसलिए
- 4:42:55उसको शिप्रा का अपने पास लेटना पता नहीं
- 4:42:57चला था। शिप्रा का चेहरा शौर्य के एकदम
- 4:42:59पास था। उसकी सांसों की महक उसको बेचैन
- 4:43:02किए जारेमेन किए जा रहा था। शिप्रा शौर्य
- 4:43:04को देखे जा रही थी। उस दिन में घटी घटना
- 4:43:07याद आई कि [संगीत] किस तरह शौर्य उससे
- 4:43:09नाराज होकर चला गया था। वह सोच रही थी कि
- 4:43:12वह किस तरह से शौर्य को मनाएगी क्योंकि वह
- 4:43:15समझ रही थी उससे नाराज होने के कारण ही
- 4:43:18शौर्य घर ना जाकर यहां होटल में आकर सो
- 4:43:20रहा है। वो सोते हुए शौर्य को बस घूरती
- 4:43:23रही। [संगीत] उसके चेहरे के सामने एक-एक
- 4:43:25कर वो दृश्य घूमने लगा कि किस तरह शौर्य
- 4:43:28उसकी जिंदगी में आया था। किस तरह वह सिर्फ
- 4:43:31उसको अपना डमी पति बनाकर रखना चाहती थी और
- 4:43:33आज जब वह सोचती है तो उसको [संगीत] लगता
- 4:43:35है कि वह शौर्य के बिना अपनी जिंदगी की
- 4:43:37कल्पना भी नहीं कर सकती। यह सब सोचते हुए
- 4:43:39अचानक उसका मन शौर्य को किस करने का किया।
- 4:43:41[संगीत] उसने आगे बढ़कर हल्के से शौर्य के
- 4:43:43होठों पर किस कर लिया। शौर्य गहरी नींद
- 4:43:46में था इसलिए उसे एहसास भी नहीं हुआ।
- 4:43:48शिप्रा ने सोचा क्या वो शौर्य को उठा दे।
- 4:43:50[संगीत] फिर उसने खुद ही अपने आप को
- 4:43:52समझाया। नहीं यह ठीक नहीं होगा। लगता है
- 4:43:55कहीं से थक कर आया है इसीलिए गहरी नींद
- 4:43:57में है। पता नहीं जागने पर फिर कहीं निकल
- 4:43:59जाए। उससे अच्छा तो सोता ही रहे। कम से कम
- 4:44:01[संगीत] वो उसके पास तो है। शिप्रा ने
- 4:44:04अपनी घड़ी पर नजर डाली तो उसने देखा 6:00
- 4:44:06बजने वाले थे। यानी एक घंटे बाद लोग बाघ
- 4:44:09राधिका की पार्टी में आना शुरू कर देंगे।
- 4:44:11उसने सोचा यह भी ठीक है। उसे कहीं और जाना
- 4:44:13नहीं पड़ेगा। वो अपने कमरे से निकलेगी और
- 4:44:16राधिका की पार्टी में पहुंच जाएगी। शौर्य
- 4:44:18के बगल में लेटे-लेटे उसे भी आलस आने लगा।
- 4:44:20[संगीत] जाने कब शौर्य को देखतेदेखते ही
- 4:44:22वो भी नींद की आगोश में चली गई। पता नहीं
- 4:44:25कितना ही समय बीत गया। तभी शौर्य के
- 4:44:27मोबाइल की रिंग बजने लगी। मोबाइल की आवाज
- 4:44:29से शौर्य की आंख खुली। [संगीत] नींद तो
- 4:44:31शिप्रा की भी मोबाइल की आवाज से टूट गई
- 4:44:33थी। पर उसने अपनी आंखें नहीं खोली। वो
- 4:44:35सोने का बहाना करके यह देखना चाहती थी कि
- 4:44:38[संगीत] शौर्य का रिएक्शन क्या होता है।
- 4:44:39आंख खुलते ही शौर्य ने अपने मोबाइल को
- 4:44:41ढूंढा। अचानक उसकी निगाह अपने पास ही लेटी
- 4:44:44शिप्रा पर गई। वो आश्चर्य से शिप्रा की
- 4:44:46तरफ देखने लगा। उसने सोचा यह [संगीत] यहां
- 4:44:49कैसे पहुंच गई और पहुंच गई तो पहुंच गई।
- 4:44:52वो कमरे के अंदर कैसे आ गई और सिर्फ आ
- 4:44:54नहीं गई बल्कि उसके साथ सो भी गई है और
- 4:44:56उसको [संगीत] इस बात की खबर भी नहीं लगी।
- 4:44:58अभी वो इन ख्यालों में ही गुम था कि
- 4:45:00मोबाइल की आवाज ने फिर से उसका ध्यान अपनी
- 4:45:02तरफ आकर्षित कर लिया। उसने मोबाइल पर
- 4:45:04फ्लैश होते नाम को देखा। हर्षल [संगीत]
- 4:45:06मेहता यही नाम फ्लैश हो रहा था। शौर्य ने
- 4:45:09एक नजर शिप्रा की तरफ देखा और बेड पर सीधा
- 4:45:12होते हुए फोन उठा लिया। हेलो मिस्टर शौर्य
- 4:45:15आजकल आप कहां बिजी हैं? आप तो [संगीत]
- 4:45:16बसंत विहार की तरफ आ ही नहीं रहे हैं।
- 4:45:18हर्षल मेहता ने अपने चिर परिचित अंदाज में
- 4:45:20शौर्य [संगीत] से पूछा। जब आप वहां सब कुछ
- 4:45:23देखने के लिए हैं मेहता साहब तो मुझे किसी
- 4:45:25बात की चिंता नहीं है। फोन करने का कोई
- 4:45:27खास उद्देश्य है क्या? शौर्य मतलब की बात
- 4:45:30पर आता हुआ बोला। नहीं दरअसल जमीन के
- 4:45:33चारों तरफ बाउंड्री वॉल करने का काम लगभग
- 4:45:35पूरा हो गया है। मैं तो यह चाहता था कि आप
- 4:45:37एक बार मीटिंग करके आगे के प्लान [संगीत]
- 4:45:39पर एक बार चर्चा कर लेते तो हमें यहां काम
- 4:45:41को किस तरह से आगे बढ़ाना है वो भी शुरू
- 4:45:43हो जाता। अगर ऐसी बात है तो मैं एक-द दिन
- 4:45:46में आता हूं आपके पास। शौर्य ने हर्षल
- 4:45:48मेहता को संतुष्ट करने की नियत से बोला।
- 4:45:50इसके बाद शौर्य ने फोन रख दिया। फोन रखने
- 4:45:53के बाद शौर्य ने शिप्रा की तरफ देखा। उसे
- 4:45:56देखने से वह उसे गहरी नींद में लग रही थी।
- 4:45:58सोए हुए में शिप्रा के चेहरे की मासूमियत
- 4:46:00ने शौर्य का ध्यान बरबस ही अपनी ओर खींच
- 4:46:03लिया। फिर अचानक उसे आज दिन वाली घटना
- 4:46:05[संगीत] याद आई कि किस तरह शिप्रा के कारण
- 4:46:07प्रतीक के सामने उसे डिमोरलाइज होना पड़ा।
- 4:46:10यह सोचकर अचानक उसके चेहरे पर एक उदासी छा
- 4:46:12गई। उसने अपना गला खराशा। उसे लगा शायद
- 4:46:15इससे शिप्रा उठ जाएगी। पर शिप्रा जस की तस
- 4:46:18उसी अवस्था में लेटी रही। उसने हल्के से
- 4:46:20उसके हाथ को पकड़ कर उसको उठाने की कोशिश
- 4:46:22की। पर शिप्रा पर अभी भी कोई प्रभाव नहीं
- 4:46:24पड़ा। उल्टा उसने उसके हाथ को पकड़ कर
- 4:46:27अपने गाल के नीचे कर लिया। शौर्य ने धीरे
- 4:46:29से अपना हाथ वापस खींचा। इस बार शौर्य ने
- 4:46:32शिप्रा का सर पकड़ कर हिलाया। इस बार भी
- 4:46:34शिप्रा थोड़ी सी गुनगुनाई पर उसने अपनी
- 4:46:36आंख नहीं खोली। अब शौर्य को शक होने लगा
- 4:46:39कि शिप्रा जानबूझकर कहीं सोने का दिखावा
- 4:46:41तो नहीं कर रही है। उसे यकीन होने लगा।
- 4:46:44जरूर यही बात होगी। नहीं तो कोई नई जगह पर
- 4:46:47इतनी गहरी नींद कैसे सो सकता है? और
- 4:46:49शिप्रा तो होटल के इस रूम में आज पहली बार
- 4:46:51ही आई [संगीत] है। यह बात दिमाग में आते
- 4:46:53ही शौर्य ने थोड़ी ऊंची आवाज में कहा,
- 4:46:56"मैं समझता हूं कि तुम जाग गई हो और सोने
- 4:46:59का सिर्फ दिखावा कर रही हो। अब सीधे-सीधे
- 4:47:02उठ जाओ। नहीं तो फिर मैं इस कमरे से ही
- 4:47:04जाता हूं। शौर्य ने बेड से उठने का उपक्रम
- 4:47:07किया। जैसे ही शौर्य ने बेड से उतरने के
- 4:47:10लिए कदम नीचे की तरफ बढ़ाया, उसी समय
- 4:47:12शिप्रा ने अपनी आंखें खोल दी। वो तेजी से
- 4:47:15बेड के ऊपर की ओर खिसकी और शौर्य के सीने
- 4:47:18से लगकर उसको अपनी बाहों में भर लिया।
- 4:47:21शिप्रा की इस हरकत को देखकर शौर्य से कुछ
- 4:47:23कहते नहीं बना। पर [संगीत] यह साबित हो
- 4:47:25गया कि शिप्रा अभी जाग रही है। तुम यहां
- 4:47:28कमरे के अंदर कैसे आई? शौर्य शिप्रा की ओर
- 4:47:31देखते हुए उदासीन भाव से बोला। इससे क्या
- 4:47:34फर्क पड़ता है कि मैं यहां कैसे आई? जब
- 4:47:37तुम यहां हो तो मुझे तो यहां होना ही था।
- 4:47:40शिप्रा ढीठता से बोली। तो ठीक है तुम यहां
- 4:47:44आराम से सोओ। मैं जा रहा हूं अपने काम से।
- 4:47:47शौर्य ने नाराजगी से कहा और ऐसा लगा जैसे
- 4:47:50वो अब उठकर यहां से चला जाएगा। शिप्रा
- 4:47:52तुरंत सीधी होकर बैठ गई। वो शौर्य की तरफ
- 4:47:55देखती हुई अपने कान पकड़ ली और [संगीत]
- 4:47:57बड़ी ही मासूमियत से बोली। सॉरी मुझे माफ
- 4:48:01कर दो। मुझसे ऐसे नाराज मत हो। मैं
- 4:48:04तुम्हारी नाराजगी नहीं झेल [संगीत] सकती।
- 4:48:06इस सब की कोई जरूरत नहीं है। तुम आराम से
- 4:48:09अपनी नींद लो। [संगीत] मैं तुमसे कुछ कह
- 4:48:11नहीं रहा हूं। बोलते हुए शौर्य का भाव
- 4:48:13उदासीन था। शिप्रा को देखकर शौर्य के
- 4:48:17चेहरे पर जो एक खुशी झलकती थी, आज वो खुशी
- 4:48:20शौर्य के चेहरे से गायब थी। ऐसे बेगानों
- 4:48:23की तरह मुझसे बात मत करो। मैंने कहा
- 4:48:25[संगीत] ना मैं यह बर्दाश्त नहीं कर
- 4:48:27पाऊंगी। शौर्य का उदासीन भाव देखकर शिप्रा
- 4:48:30की आंखें डब डबा आई। शौर्य ने शिप्रा की
- 4:48:33आंखों में पानी तैरते हुए देखा तो उसको
- 4:48:35लगा जैसे किसी ने उसके दिल को छलनी कर
- 4:48:37दिया। वो तुरंत तड़प कर बोला, मैंने ऐसा
- 4:48:41कुछ तुम्हें तो नहीं कहा जो तुम ज्यादा ही
- 4:48:43इमोशनल हो रही हो। मैं जानती हूं [संगीत]
- 4:48:46मुझे दिन में प्रतीक को इतना सुनने की कोई
- 4:48:48जरूरत नहीं थी। तुम्हारी बात मानकर उसे
- 4:48:50उसी समय जवाब दे देना चाहिए था। पर मैंने
- 4:48:53तुम्हारी बात ना मानकर प्रतीक को खुद को
- 4:48:55सही साबित करने का मौका देती रही। पर क्या
- 4:48:58करूं? मैं तुम्हारी तरह इतनी हिम्मती नहीं
- 4:49:01हूं ना कि मैं एक बार में ही किसी से इतना
- 4:49:03रूढ़ हो सकूं कि [संगीत] उसके चेहरे पर ही
- 4:49:05उसे उसकी औकात दिखा सकूं। मैं जानती हूं
- 4:49:08कि मैं उसे तुम्हारी बेइज्जती करने का
- 4:49:10मौका देती रही। तुम जानते हो [संगीत] जब
- 4:49:12से तुम राजमहल के बाहर से मुझसे मुंह मोड़
- 4:49:14कर गए हो, मुझे एक पल के लिए भी चैन नहीं
- 4:49:17आया है। मैं उसी पल से तुमसे माफी मांगने
- 4:49:19के लिए तड़प रही हूं और एक तुम हो।
- 4:49:22तुम्हें मेरी भावनाओं का कदर ही नहीं है।
- 4:49:24तुम तो मेरा फोन भी नहीं उठा रहे हो।
- 4:49:27तुम्हें समझ ही नहीं आ रहा है कि मेरे दिल
- 4:49:29पर क्या बीत रही है। मैं कितनी मुश्किल से
- 4:49:32तुम्हारे बारे में पता करके यहां तक आ
- 4:49:34[संगीत] पाई हूं और तुम्हारे चेहरे पर
- 4:49:35मुझे देखने की कोई खुशी ही दिखाई नहीं दे
- 4:49:38रही। तुम समझ रहे हो यह सब देखकर [संगीत]
- 4:49:40मेरे दिल पर क्या बीत रही है। बोलते हुए
- 4:49:43शिप्रा पूरा इमोशनल हो गई। शौर्य ने देखा
- 4:49:46और सोचा अगर उसने शिप्रा को अभी नहीं
- 4:49:48बहलाया तो अभी शिप्रा की आंखें गंगा जमुना
- 4:49:51बहाना शुरू कर देगी। वो शिप्रा का माइंड
- 4:49:53डायवर्ट करने के लिए कहा। मैंने तुमसे कुछ
- 4:49:56कहा है क्या जो तुम जबरदस्ती का इतना
- 4:49:58[संगीत] इमोशनल हो रही हो? तो कहो ना जो
- 4:50:00कहना है। मैं कुछ नहीं बोलूंगी। तुमको अगर
- 4:50:04मुझे डांटना है तो डांटो। तुम्हें जो भी
- 4:50:06पनिशमेंट देना है दो। पर मुझसे यूं अपनी
- 4:50:09बेरुखी मत दिखाओ। मैं यह बर्दाश्त नहीं कर
- 4:50:11पाऊंगी। शिप्रा इमोशनल होकर बोली। शिप्रा
- 4:50:15की इस बात ने शौर्य को तड़पा दिया। पहले
- 4:50:18की बनिस्बत [संगीत] शौर्य थोड़ा नॉर्मल
- 4:50:19बिहेव करता हुआ बोला। मैंने ऐसा कुछ
- 4:50:22तुम्हें नहीं कहा जो तुम इस तरह बात कर
- 4:50:24रही हो। मैं भी इंसान हूं। [संगीत] मुझे
- 4:50:27भी सामने वाले से कुछ अपेक्षाएं हो जाती
- 4:50:29है। जब वो पूरी नहीं होती तो दिल को
- 4:50:31उम्मीद टूटने का झटका लगता [संगीत] है। उस
- 4:50:34माइंडसेट से निकलने में थोड़ा समय लगता
- 4:50:36है। शौर्य शिप्रा को समझाने की कोशिश करता
- 4:50:39हुआ बोला। शिप्रा शौर्य के दर्द को अब समझ
- 4:50:42पा रही थी। पर वो खुद के लिए शौर्य की
- 4:50:45बेरुखी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। एक
- 4:50:48बार फिर से वह शौर्य के करीब होकर
- 4:50:50मासूमियत से अपने कान पकड़ कर बोली, सॉरी
- 4:50:54ना, अब तो माफ कर दो। तुम्हें नहीं पता
- 4:50:57तुम्हारा मुझसे बात नहीं करने से पहले ही
- 4:50:59मैं पूरे दिन परेशान रही हूं। अब जाकर
- 4:51:01तुम्हें देखने के बाद तो थोड़ा सा सुकून
- 4:51:03मिला। अगर तुम अब भी मुझसे नॉर्मली बिहेव
- 4:51:06नहीं करोगे, तुम्हें सच कहती हूं। मैं यही
- 4:51:09रोना शुरू कर दूंगी। शिप्रा का कान पकड़े
- 4:51:12हुए मासूमियत भरी बातें शौर्य के दिल में
- 4:51:14हलचल मचाने के लिए काफी थी। शिप्रा का यह
- 4:51:17मासूम अंदाज शौर्य के दिल को गुदगुदा गया।
- 4:51:20उसने शिप्रा की आंखों में देखते हुए धीरे
- 4:51:23से कहा, ठीक है, अब इस तरह ड्रामा करने की
- 4:51:26कोई जरूरत नहीं है। मैं उस बात को भूल गया
- 4:51:28हूं। नहीं, तुम झूठ बोल रहे हो। अगर तुम
- 4:51:31उस बात को भूल [संगीत] जाते, तो तुम्हारा
- 4:51:33रिएक्शन इतना ठंडा नहीं होता। शिप्रा गहरी
- 4:51:36नजरों से शौर्य की आंखों में देखती हुई
- 4:51:38बोली देखो मेरे लिए भी नॉर्मल बिहेव करना
- 4:51:41इतना आसान नहीं है। तुम यह उम्मीद करोगी
- 4:51:43[संगीत] कि एक झटके में मैं नॉर्मल बिहेव
- 4:51:46करने लगूं तो यह संभव नहीं है। नॉर्मल
- 4:51:48होने में थोड़ा समय तो लगेगा। शौर्य ने
- 4:51:51अपनी दलील दी। मुझे नहीं पता तुम यह कैसे
- 4:51:54करोगे। मैं माफी मांग तो रही हूं। देखो
- 4:51:56मैंने अपने कान भी पकड़े हुए हैं। अब अगर
- 4:51:59तुमने मुझे माफ नहीं किया तो अब मुझे रोना
- 4:52:01आ जाएगा। शिप्रा ने अभी भी अपना कान नहीं
- 4:52:04छोड़ा। बोला तो कि मैं सब भूल गया। अब तुम
- 4:52:07भी इस बात को भूल जाओ। और हां, तुम्हें
- 4:52:10अपनी बहन की इंगेजमेंट पार्टी में भी तो
- 4:52:12जाना है। तो फिर तुम अभी तक यहां क्या कर
- 4:52:14रही हो? शौर्य राधिका के बारे में सोचता
- 4:52:17हुआ बोला। बात बदलने की कोई जरूरत नहीं
- 4:52:19है। मुझे अभी भी यह क्यों नहीं लग रहा है
- 4:52:22कि तुमने मुझे माफ कर दिया है। पहले मुझे
- 4:52:24यकीन [संगीत] दिलाओ कि तुमने मुझे माफ कर
- 4:52:26दिया है। उसके बाद होगी। अब शिप्रा अपनी
- 4:52:29पहली वाले अंदाज में वापस आती हुई बोली।
- 4:52:32बोल तो दिया। अब इससे ज्यादा मैं क्या कर
- 4:52:34सकता हूं तुमको यकीन दिलाने के लिए? शौर्य
- 4:52:37बेरूखी अंदाज में बोला। ज्यादा कुछ नहीं।
- 4:52:40[संगीत] बस मुझे अपनी बाहों में लेकर जोर
- 4:52:42से कस लो। मुझे यकीन हो जाएगा। शिप्रा
- 4:52:45अंगराई सी लेती हुई बोली। पर शौर्य ने ऐसा
- 4:52:48कुछ नहीं किया। वो खामोशी से शिप्रा को
- 4:52:50देखता रहा। जब शिप्रा [संगीत] ने देखा कि
- 4:52:53शौर्य अभी भी अपनी तरफ से कोई कदम नहीं
- 4:52:55उठा रहा तो उसने शौर्य की किसी पहल का कोई
- 4:52:57इंतजार नहीं किया और खुद ही आगे बढ़कर
- 4:52:59शौर्य की बाहों में समा गई और उसको कसकर
- 4:53:02अपनी बाहों में भी लिया। इतने से भी उसका
- 4:53:05मन नहीं भरा तो उसके तपते अधर शौर्य के
- 4:53:07अधर से जा मिले। यह चिंगारी काफी थी शौर्य
- 4:53:10की भावनाओं को भड़काने के लिए। शौर्य की
- 4:53:12भावनाएं भी मचलने लगी। उसका हाथ भी शिप्रा
- 4:53:15के शरीर पर रेंगने लगा। शौर्य के मन में
- 4:53:18जो थोड़ी देर पहले शिप्रा के लिए एक गांठ
- 4:53:20बन गया था। जाने [संगीत] कब का वो पिघलकर
- 4:53:22पानी बन गया था। उसका रोम रोम अब शिप्रा
- 4:53:25को खुद में समा लेने को आतुर होने लगा। अब
- 4:53:27जाकर शिप्रा को यकीन हुआ कि शौर्य के दिल
- 4:53:30में जो उसके लिए एक बर्फ जम गया था, अब
- 4:53:32उसका कोई निशान नहीं रह गया था। शिप्रा भी
- 4:53:35अब खुद को शौर्य के साथ बह जाने दे रही
- 4:53:37थी। शौर्य को पूर्ण रूप से पा लेने की
- 4:53:40लालसा में शिप्रा खुद ही आगे बढ़कर अपने
- 4:53:42और शौर्य के बीच में कोई दीवार आने देना
- 4:53:44[संगीत] नहीं चाह रही थी। अधों का तूफान
- 4:53:47भी अपने चरम पर पहुंच गया था। शिप्रा के
- 4:53:49चेहरे का कोई हिस्सा ऐसा नहीं रहा जो
- 4:53:51शौर्य के होठों की छुवन से बचा हो। अंत
- 4:53:54में निढाल होकर शौर्य अपने [संगीत] बिस्तर
- 4:53:56पर ढेर हो गया और शिप्रा संतृप्तता का भाव
- 4:53:59लिए उसकी बाहों में कैद उसके सीने पर
- 4:54:01आंखें बंद किए हुए लेटी थी और इससे अलग
- 4:54:04शिप्रा का फोन अपनी कर्क ध्वनि से उस कमरे
- 4:54:06[संगीत] की शांति को भंग कर रही थी। पर
- 4:54:09शिप्रा को अपने फोन को उठाने की कोई जल्दी
- 4:54:11नहीं पड़ी थी।
- 4:54:13पूरे दिन शौर्य का सर भारीभारी सा रहा था।
- 4:54:16अब जाकर उसे अपना सर हल्का सा लग रहा था।
- 4:54:19[संगीत] शायद इसका कारण शिप्रा के साथ जो
- 4:54:21उसकी दिन वाली घटना हुई थी, यही था। अब जब
- 4:54:24दोनों एक दूसरे की बाहों में थे, तो शौर्य
- 4:54:27को अपना सर हल्का लग रहा था। उसने शिप्रा
- 4:54:30की बात की तरफ ध्यान दिया था। अब वह समझ
- 4:54:32सकता था कि शिप्रा क्यों दिन में प्रतीक
- 4:54:35के साथ इतना हार्ड व्यवहार कर सकती थी।
- 4:54:38लोगों को एक दूसरे के सामने प्रेजेंट करने
- 4:54:40का अपना-अपना तरीका होता है। शिप्रा का भी
- 4:54:43अपना तरीका था। शौर्य के कहने के बाद भी
- 4:54:46कुछ समय तो आदमी को कोई बात प्रोसेस करने
- 4:54:48में ही लग जाता है। शिप्रा भी शौर्य की
- 4:54:51बात को इतनी जल्दी प्रोसेस नहीं कर पाई
- 4:54:53थी। पर अब शौर्य को अपनी जल्दबाजी पर तरस
- 4:54:56आ रहा था। उसने एक नजर शिप्रा की फोन की
- 4:54:59तरफ देखा जो साइड टेबल पर रिंग हुए जा रही
- 4:55:02थी। और शिप्रा को देखकर लग ही रहा था कि
- 4:55:05उसे इस बात की कोई फिक्र थी कि उसका फोन
- 4:55:07बजे जा रहा है। उसने शिप्रा के बालों को
- 4:55:10सहलाते हुए कहा, "तुम कहां खोई हुई हो?
- 4:55:13तुम्हारा फोन तब से बजे जा रहा है।" बजने
- 4:55:16दो, अभी मेरा मूड नहीं है फोन देखने का।
- 4:55:19शिप्रा शौर्य के सीने पर अपना गाल रगरती
- 4:55:22हुई बोली। अरे देख तो लो। कोई इंपॉर्टेंट
- 4:55:25कॉल होगा। शौर्य शिप्रा का सर पकड़ कर ऊपर
- 4:55:28उठाकर उसकी आंखों में देखते हुए बोला,
- 4:55:31"मेरे लिए तो सबसे इंपॉर्टेंट तुम हो और
- 4:55:34तुम तो मेरे पास हो। तो फिर तुमसे ज्यादा
- 4:55:37इंपॉर्टेंट मेरे लिए क्या हो सकता है?"
- 4:55:39शिप्रा शौर्य के दोनों गाल पकड़ कर खींचती
- 4:55:42हुई बोली, इतना ज्यादा प्यार का ओवरडोज मत
- 4:55:45दो कि मैं संभाल ही नहीं पाऊं। शौर्य
- 4:55:48शिप्रा की नाक पकड़ कर हिलाता हुआ बोला,
- 4:55:50संभालने की जरूरत ही नहीं है। तुम उससे
- 4:55:53दुगना करके मुझे वापस कर दिया करो। शिप्रा
- 4:55:56शौर्य के सीने पर लेटे हुए ही अपनी हथेली
- 4:55:59की तलहटी पर अपना ठुडी जमाकर शौर्य के
- 4:56:01चेहरे की तरफ देखती हुई बोली तुम में इतना
- 4:56:04परिवर्तन कहां से आ गया है शौर्य आश्चर्य
- 4:56:07से शिप्रा की तरफ देखकर बोला क्या मतलब
- 4:56:10हुआ तुम्हारी बात का मुझ में ऐसा क्या
- 4:56:12परिवर्तन आया है शिप्रा अपनी आंखों को
- 4:56:15सिकोड़ती हुई बोली पहले तुम कितना कम
- 4:56:18बोलती थी पर अब तो तुम्हारे पास हर सवाल
- 4:56:20का जवाब होता है शौर्य बोला अच्छा तुम्हें
- 4:56:24ऐसा लगता पर मुझे तो ऐसा कुछ नहीं लगता।
- 4:56:27मैं उनके पास नहीं बोलती जिनसे मेरा
- 4:56:29ज्यादा लगाव नहीं होता। पर जो मेरे करीब
- 4:56:31होते हैं उनसे बात करने में मैं कोई
- 4:56:33कंजूसी नहीं करती। शिप्रा ने जवाब दिया।
- 4:56:37शौर्य शिप्रा की आंखों में देखता रहा। फिर
- 4:56:39कुछ सोच कर बोला। कभी तुमने सोचा था कि एक
- 4:56:42दिन तुम मुझे इतना प्यार करने लगोगी? इतना
- 4:56:45कि तुम [संगीत] मेरी नाराजगी दूर करने के
- 4:56:47लिए मुझसे कान पकड़ कर माफी भी मांगोगी?
- 4:56:50वो तो मैं अपनी गलती होने पर किसी से भी
- 4:56:52कान पकड़ कर माफी मांग सकती हूं। जहां तक
- 4:56:55रहा तुम्हें प्यार करने की बात तो यह तो
- 4:56:57सच है कि मैं तुम्हारे कररेक्टर को पहले
- 4:56:59से ही पसंद करने [संगीत] लगी थी।
- 4:57:02धीरे-धीरे मेरी पसंद कब प्यार में बदल गई
- 4:57:04पता ही नहीं चला। शिप्रा ने अपने मन की
- 4:57:07बात [संगीत] बयान किया। शौर्य शिप्रा को
- 4:57:09खामोशी से देखता रहा। उसने खुद कभी नहीं
- 4:57:12सोचा था कि शिप्रा इस हद तक उसको पसंद
- 4:57:14करने लगेगी। सोचते हुए ही शौर्य को ध्यान
- 4:57:17आया कि वो यहां कैसे पहुंची। उसने शिप्रा
- 4:57:20से पूछ लिया, तुमने बताया नहीं कि तुम
- 4:57:22यहां कैसे पहुंची। तुम तो मुझसे बात कर
- 4:57:25नहीं रहे थे। फिर यह जानने के लिए कि तुम
- 4:57:27कहां हो सकते हो। मैंने सबको फोन करना
- 4:57:29शुरू किया। विक्रम को फोन करने के बाद
- 4:57:32मुझे पता चला कि तुम यहां हो। शिप्रा ने
- 4:57:35शौर्य को उसके बारे में पता चलने का कारण
- 4:57:37बताया। अच्छा तो यह विक्रम ने किया। मुझे
- 4:57:41उससे बात करनी पड़ेगी। शौर्य अपने ही
- 4:57:43होठों में बुदबुदाया। खबरदार जो तुमने
- 4:57:46विक्रम से कुछ कहा तो तुम क्या चाहते हो
- 4:57:49कि मैं फिर से तुमसे लड़ाई करूं। शिप्रा
- 4:57:51शौर्य के ऊपर अपनी आंखें तरेरती हुई बोली।
- 4:57:54शौर्य ने शिप्रा के चेहरे के भाव को बदलते
- 4:57:57देखा तो तुरंत खुद को नियंत्रित करते हुए
- 4:57:59कहा, ठीक है अपना चेहरा मत बिगाड़ो। मैं
- 4:58:02उससे कुछ नहीं कहूंगा। अभी शौर्य ने अपनी
- 4:58:05बात खत्म ही किया था कि फिर से शिप्रा का
- 4:58:07मोबाइल रिंग करने लगा। इसने शिप्रा की तरफ
- 4:58:10देखते हुए कहा, "अभी अपना फोन देखोगी कि
- 4:58:13नहीं?"
- 4:58:14शिप्रा अनमने ढंग से शौर्य से अलग हुई।
- 4:58:17उसने टेबल से अपना फोन उठाकर उसकी तरफ
- 4:58:19देखा तो उसे स्क्रीन पर मेघना का नाम
- 4:58:21फ्लैश होते दिखा। उसने एक नजर शौर्य की
- 4:58:24तरफ और मेघना का कॉल पीक किया। कहां हो
- 4:58:28तुम? इतनी देर से कॉल कर रही हूं। तो मेरा
- 4:58:30फोन क्यों नहीं उठा रही थी? मेघना थोड़े
- 4:58:33गुस्से में बोल रही थी। शिप्रा को ध्यान
- 4:58:35आया कि थोड़ी देर पहले कई बार उसका फोन
- 4:58:37रिंग होता रहा था। पर उस समय उसने इन कॉल
- 4:58:40की तरफ ध्यान ही नहीं दिया। कमरे में पूरी
- 4:58:42शांति थी। इस कारण मोबाइल के स्पीकर से
- 4:58:45आवाज बाहर तक आ रही थी। शौर्य ने जब यह
- 4:58:47जाना कि मोबाइल पर दूसरी तरफ मेघना है तो
- 4:58:50वो अपनी जगह से ही [संगीत] ऊंची आवाज में
- 4:58:52बोला तुम इसके लिए इतनी इंपॉर्टेंट नहीं
- 4:58:54हो कि तुम्हारा फोन आते ही वो झट से उठा
- 4:58:56ले। शौर्य को बोलते देखकर शिप्रा ने जल्दी
- 4:58:59से कोशिश की कि मोबाइल के माइक को बंद कर
- 4:59:02दे जिससे मेघना तक शौर्य की आवाज ना पहुंच
- 4:59:05सके। पर शिप्रा कुछ कर पाती तब तक मेघना
- 4:59:08के कानों में शौर्य की आवाज पहुंच गई थी।
- 4:59:11शिप्रा की बच्ची तुम शौर्य के पास गई हो
- 4:59:14और मुझे बताया भी नहीं। तुम मुझसे मिलो तब
- 4:59:16मैं तुम्हारी क्लास लेती हूं। मेघना
- 4:59:18गुस्से में [संगीत] बोली अरे वैसी बात
- 4:59:20नहीं है जो तुम सोच रही हो। मैं तुमसे
- 4:59:22मिलकर बताऊंगी [संगीत] कि मुझे अचानक
- 4:59:24तुम्हारे पास से यहां क्यों आना पड़ा।
- 4:59:26शिप्रा मेघना को सफाई देने की कोशिश करती
- 4:59:28हुई बोली। वो तो जब तुम मिलोगी तब पता
- 4:59:31चलेगा [संगीत] कि कैसी बात है और मैं क्या
- 4:59:33सोच रही थी। पर पहले यह बताओ कि इस समय
- 4:59:36तुम दोनों कहां हो? मेघना ने शिप्रा से
- 4:59:38पूछा। शिप्रा को समझ नहीं आया कि वह मेघना
- 4:59:41से क्या कहे। क्या उसे बता दे कि वह अभी
- 4:59:43होटल राजकमल में ही है। उसने मोबाइल का
- 4:59:46माइक बंद किया और शौर्य की तरफ देखती हुई
- 4:59:48उससे बोली, "अब मैं इसे क्या कहूं?" "तुम
- 4:59:52यह मुझसे क्यों पूछ रही हो? तुम्हारी बहन
- 4:59:54है। तुम्हें जवाब देना है?" शौर्य
- 4:59:56मुस्कुराता हुआ बोला। शिप्रा की तरफ से
- 4:59:58कोई जवाब आता ना देखकर फिर से मेघना की
- 5:00:00आवाज आई। [संगीत] क्या हुआ? तुम कुछ बोल
- 5:00:03क्यों नहीं रही हो? कहां हो तुम? मैं मैं
- 5:00:07अभी होटल राजकमल में ही हूं। शिप्रा
- 5:00:09लड़खराती जुबान के साथ बोली। शिप्रा के
- 5:00:12मुंह से यह जानकर कि वो होटल राजकमल पहुंच
- 5:00:14भी गई और श्रवण भी उसके साथ ही है। उसके
- 5:00:17दिमाग में एक विचार कोधा। क्या दोनों होटल
- 5:00:20राजकमल के प्रेसिडेंसी रूम में हो? शिप्रा
- 5:00:22के दिमाग कुछ झटका सा लगा। उसे समझ नहीं
- 5:00:25आया कि यह बात मेघना को कैसे पता चला कि
- 5:00:27वह दोनों होटल के प्रेसिडेंसी रूम में
- 5:00:29हैं। उसने घूर कर शौर्य की तरफ देखा जैसे
- 5:00:32जानना चाहती हो कि इसमें कहीं उसका हाथ तो
- 5:00:34नहीं पर शौर्य भोलेपन से शिप्रा की ओर
- 5:00:37देखता रहे। शिप्रा से जब नहीं रहा गया तो
- 5:00:39उसने मेघना से पूछ लिया। तुम्हें कैसे पता
- 5:00:42चला कि मैं प्रेसिडेंसी रूम में हूं।
- 5:00:44श्रवण तुम्हारे साथ है और तुम इस समय होटल
- 5:00:47राजकमल में हो तो मुझे लगा तुम वहीं हो
- 5:00:49सकती हो? मेघना मुस्कुराती हुई बोली वही
- 5:00:53तो पर तुमने यह अनुमान कैसे लगाया कि वो
- 5:00:55कमरा होटल का प्रेसिडेंसी रूम ही होगा।
- 5:00:57अभी भी शिप्रा का आश्चर्य कम होने का नाम
- 5:00:59नहीं ले रहा था क्योंकि मैं भी उस रूम में
- 5:01:02ठहर चुकी हूं और मुझे भी वो रूम उपलब्ध
- 5:01:04कराने वाला श्रवण ही था। इसलिए अनुमान लगा
- 5:01:07लिया कि तुम दोनों उसी कमरे में होंगे।
- 5:01:09मेघना ने अपनी बात बताई। मेघना की बात
- 5:01:12सुनकर शिप्रा शौर्य को घूर कर देखने लगी।
- 5:01:14पर कुछ बोली नहीं क्योंकि अभी भी फोन पर
- 5:01:17दूसरी तरफ मेघना मौजूद थी। शिप्रा को
- 5:01:20खामोश देखकर मेघना [संगीत] बोली, अब तो
- 5:01:22तुम्हारा घर वापस आना मुश्किल ही है
- 5:01:24क्योंकि यहां आकर वापस होटल ही जाना थकाने
- 5:01:26वाला काम होगा। इसलिए तुम वहीं रहो। मैं
- 5:01:29[संगीत] भी मौसाम मौसी के साथ आधे घंटे
- 5:01:31में होटल आ ही रही हूं। इतना कहकर मेघना
- 5:01:34ने फोन काट दिया। फोन कटने के बाद शिप्रा
- 5:01:37बेड के पास जाकर शौर्य के बगल में बैठ गई
- 5:01:39और [संगीत] उसको घूरते हुए बोली, "तुमने
- 5:01:42मेघना को कब इस कमरे में ठहराया था?"
- 5:01:44यह तो उसी दिन की बात है जब वह इस होटल
- 5:01:46में नताशा कपूर से मीटिंग के लिए आई थी।
- 5:01:49उस दिन नताशा कपूर के साथ मेघना इसी
- 5:01:51[संगीत] कमरे में ठहरी थी। शौर्य बोला
- 5:01:54नताशा कपूर का नाम सुनकर शिप्रा को ध्यान
- 5:01:56आया कि शौर्य [संगीत] दो दिनों के लिए शूट
- 5:01:58पर गया था। शूट कैसा रहा? इस बारे में
- 5:02:01उसने तो कुछ पूछा ही नहीं। तुमने बताया
- 5:02:04नहीं कि तुम जो शूट करने गए थे वो कैसा
- 5:02:06रहा? शिप्रा शौर्य को घूरती हुई बोली। अरे
- 5:02:09यह क्या बात हुई? काम था करके [संगीत] आ
- 5:02:12गया। सब बढ़िया हो गया। शौर्य ने बताया,
- 5:02:15दो दिन में ही तुम्हारी फिल्म की शूट
- 5:02:16कंप्लीट हो गई। शिप्रा आश्चर्य से बोली,
- 5:02:19अरे [संगीत] नहीं, अभी तो सिर्फ एक सॉन्ग
- 5:02:21का शूट हुआ है। फिल्म की शूट तो अभी होने
- 5:02:24वाली है। शौर्य फिल्म के मुद्दे पर बात
- 5:02:27करने में शिप्रा से [संगीत] अनकंफर्टेबल
- 5:02:29फील कर रहा था। तुम्हारी फिल्म के गाने
- 5:02:31रिकॉर्ड हो भी गए और तुमने मुझे बताया भी
- 5:02:34नहीं। शिप्रा शिकायत करते हुए बोली, "यह
- 5:02:37क्या बात हुई? यह तुमसे रिलेटेड काम तो था
- 5:02:39नहीं। इसलिए इस बारे में कोई बात नहीं
- 5:02:41हुई। शौर्य ने सफाई दी। मुझसे रिलेटेड
- 5:02:44नहीं है तो क्या हुआ? तुम इस फिल्म में
- 5:02:46काम कर रहे हो इसलिए मुझे इस बारे में
- 5:02:48जानना है। शिप्रा जिद भरे स्वर में बोली।
- 5:02:51अरे समझा करो इस फिल्म की बात तुमसे करने
- 5:02:54में मैं कंफर्टेबल फील नहीं करता। शौर्य
- 5:02:56सच में इस बारे में शिप्रा से बात नहीं
- 5:02:58करना चाहता था। पर उसे समझ नहीं आ रहा था
- 5:03:00कि वो [संगीत] कैसे शिप्रा को इस बारे में
- 5:03:02बात करने से रोके क्योंकि उसे पता था कि
- 5:03:05फिल्म की बात एक बार शुरू हो जाने पर
- 5:03:07शिप्रा का सवाल खत्म होने का नाम नहीं
- 5:03:09लेगा। शिप्रा भी समझ रही थी कि शौर्य
- 5:03:12क्यों [संगीत] इस फिल्म के बारे में बात
- 5:03:13करने में अनकंफर्टेबल फील कर रहा है। वो
- 5:03:15अच्छे से समझ रही थी कि जब शौर्य इस फिल्म
- 5:03:18में काम कर रहा है तो उसके और नताशा कपूर
- 5:03:20के बीच में कुछ [संगीत] रोमांटिक सीन भी
- 5:03:22होंगे जिसको शौर्य शिप्रा से डिस्कस तो
- 5:03:24नहीं ही करना चाहेगा। यह ख्याल दिमाग में
- 5:03:27आते ही शिप्रा बोली तुम मेरी चिंता मत
- 5:03:30करो। मैं इतनी नैरो माइंडेड नहीं हूं कि
- 5:03:32फिल्म के शूट को लेकर मैं तुम्हारे बारे
- 5:03:34में अपनी कोई थिंकिंग बना लूंगी। मैं इतना
- 5:03:36समझ सकती हूं कि जब फिल्म है तो इसमें
- 5:03:38रोमांटिक सीन भी होंगे। मैं तुम्हें
- 5:03:40ऑकवर्ड स्थिति में नहीं डालना चाहती। पर
- 5:03:42क्या करूं? तुम इसमें काम कर रहे हो तो
- 5:03:44इसके बारे में जानने की अपनी इच्छा दबा भी
- 5:03:46नहीं पाऊंगी। शौर्य को शिप्रा की बात
- 5:03:49सुनकर तसल्ली हुई कि वो उसकी स्थिति को
- 5:03:51समझ पा रही है। शिप्रा की बात सुनकर उसने
- 5:03:53कहा अगर तुम यह समझती हो तो अच्छी बात है।
- 5:03:56पर बाद में कभी इस बात के लिए मुझे उलाहना
- 5:03:58नहीं देना। ऐसा भी नहीं है। थोड़ा बहुत तो
- 5:04:01शिकायत कर सकती हूं। शिप्रा शौर्य को
- 5:04:03छेरने वाले अंदाज में बोली तो फिर मुझे उस
- 5:04:06बारे में तुमसे कोई बात नहीं करनी है।
- 5:04:08शौर्य भी फैसला सुनाते हुए बोला अच्छा
- 5:04:11बाबा कोई शिकायत नहीं करूंगी अब तो खुश।
- 5:04:14शिप्रा शौर्य की बाह में अपनी बाह फंसाकर
- 5:04:16उसके कंधे पर अपना सर रखती हुई बोली देखा
- 5:04:19लेना। अगर कभी भी मैंने तुमसे कोई
- 5:04:21कंप्लेंट सुना तो उसके बाद तुमसे फिल्म के
- 5:04:23बारे में कोई डिस्कशन नहीं होगी। शौर्य
- 5:04:26गंभीरता से बोला। फिर शौर्य को कुछ ध्यान
- 5:04:28आया तो वह बोला, "तुम यहां इतने इत्मीनान
- 5:04:31से बैठी [संगीत] हो। क्या तुम्हें पार्टी
- 5:04:32में नहीं जाना है? अब तो गेस्ट आने भी लगे
- 5:04:34होंगे। जाऊंगी ना? पर जल्दी क्या है? वैसे
- 5:04:38भी कौन वहां मेरा इंतजार कर रहा होगा?" सच
- 5:04:40कहूं तो मेरा इस पार्टी में जाने का कोई
- 5:04:42मन [संगीत] नहीं है। शिप्रा इस पार्टी के
- 5:04:44लिए उदासीनता दिखाते हुए बोली, फिर तो
- 5:04:47बढ़िया है। तुम कहो तो मैं यही तुम्हारे
- 5:04:49लिए कुछ खाने को मंगाता हूं। शौर्य खुशी
- 5:04:51जताते हुए बोला नहीं इसकी कोई जरूरत नहीं
- 5:04:54है। मेरे चाहने से क्या होगा? जाना तो
- 5:04:57पड़ेगा। पापा टी कह रहे थे तुम्हें भी
- 5:04:58पार्टी में आने के लिए। नैना [संगीत] बुआ
- 5:05:00खास करके तुम्हारे बारे में कई बार बोली
- 5:05:02हैं कि तुम्हें भी पार्टी में आना है।
- 5:05:04शिप्रा शौर्य का हाथ अपने हाथ में लेती
- 5:05:06हुई बोली ना बाबा ना मुझे माफ करो। शौर्य
- 5:05:11हाथ जोड़ता हुआ बोला। शौर्य ने शिप्रा को
- 5:05:14साफ-साफ मना कर दिया कि वो उस पार्टी में
- 5:05:17नहीं जा सकता। शिप्रा ने एक बार फिर उसे
- 5:05:20प्यार से मनाने की कोशिश की। तुम जब यहीं
- 5:05:23होटल में हो तो चल लो ना। मुझे भी अच्छा
- 5:05:26लगेगा। शौर्य ने हल्की सी नाराजगी के साथ
- 5:05:30उसकी ओर देखा। क्या तुम मेरी बेइज्जती
- 5:05:32होते देखना चाहती हो? मुझे तो यह [संगीत]
- 5:05:35भी नहीं पता था कि इसी होटल में राधिका की
- 5:05:37इंगेजमेंट पार्टी है। अगर पहले से इसकी
- 5:05:39जानकारी होती तो मैं यहां आता ही नहीं।
- 5:05:42शिप्रा को मेघना की कही बातें याद आ गई।
- 5:05:45कब तक पुरानी बात को गांठ बांध कर बैठी
- 5:05:47रहोगी? इस तरह तुम्हारे परिवार और शौर्य
- 5:05:49के बीच कभी भी रिश्ते सामान्य नहीं हो
- 5:05:51पाएंगे। दोनों का आमने-सामने आना ही जरूरी
- 5:05:55है। तभी उनके बीच की दूरियां कम होंगी।
- 5:05:58मेघना की बातों में दम था। बाकी
- 5:06:00रिश्तेदारों को नजरअंदाज करना एक बात थी।
- 5:06:03लेकिन अपने मम्मी पापा और भाई से वह हमेशा
- 5:06:05के लिए दूरी नहीं बना सकती थी। अगर उसके
- 5:06:08परिवार और शौर्य के बीच की कड़वाहट बनी
- 5:06:10रही तो कहीं ऐसा ना हो कि धीरे-धीरे उसके
- 5:06:13अपने माता-पिता से भी उसका रिश्ता
- 5:06:14प्रभावित होने लगे। यही सोचकर उसने एक बार
- 5:06:17फिर प्यार से शौर्य का हाथ थाम लिया।
- 5:06:20प्लीज चलो ना। पापा भी तुम्हें साथ लेकर
- 5:06:23आने के लिए कह रहे थे। शौर्य ने उसकी
- 5:06:26आंखों में झांका। वहां उसके लिए उम्मीद
- 5:06:28साफ दिखाई दे रही थी। वो बार-बार उसे मना
- 5:06:31नहीं करना चाहता था। इसलिए उसने उसे सुबह
- 5:06:34की बात याद दिलाते हुए कहा, "मुझे समझ
- 5:06:36नहीं आ रहा कि तुमने अचानक यह जिद क्यों
- 5:06:38पकड़ ली है। आज सुबह तक तो तुम भी मेरे
- 5:06:41फैसले से सहमत थी। शिप्रा ने शांत स्वर
- 5:06:44में कहा। उस समय मैं नहीं चाहती थी कि
- 5:06:46मेरे परिवार वाले एक बार फिर तुम्हारी
- 5:06:48बेइज्जती करें। अगर ऐसा दोबारा होता तो
- 5:06:51मुझे भी बहुत बुरा लगता। लेकिन आज जब पापा
- 5:06:54से मिली तो उन्होंने भी चाहा कि तुम
- 5:06:56पार्टी में आओ। शायद इसी बहाने हमारे
- 5:06:59बिगड़े रिश्ते फिर से पटरी पर आ जाए। अब
- 5:07:01शौर्य को उसकी ज़िद का असली कारण समझ में
- 5:07:04आया। शिप्रा उसे किसी जबरदस्ती या दबाव
- 5:07:06में पार्टी में नहीं ले जाना चाहती थी। वो
- 5:07:09केवल इस डर से परेशान थी कि कहीं पिछली
- 5:07:11बार की तरह फिर कोई अप्रिय घटना ना हो
- 5:07:13जाए। यह सोचकर उसके होठों पर हल्की सी
- 5:07:16मुस्कान आ गई। तुम्हारे लिए तो मैं ऐसी
- 5:07:18बेइज्जती हजार बार सह सकता हूं। वो
- 5:07:21मुस्कुराते हुए बोला, "मुझे उससे कोई फर्क
- 5:07:23नहीं पड़ता। लेकिन मेरी चिंता अपनी नहीं
- 5:07:26थी। मैं तो बस यही सोच रहा था कि कहीं
- 5:07:28मेरी वजह से तुम्हारे परिवार को कोई अपमान
- 5:07:31ना झेलना पड़े। अगर ऐसा हुआ तो सबसे
- 5:07:34ज्यादा तकलीफ तुम्हें होगी। और मैं
- 5:07:36तुम्हें दुखी होते नहीं देख सकता। दोनों
- 5:07:38की चिंता अलग-अलग थी। लेकिन वजह [संगीत]
- 5:07:41एक दूसरे की खुशी थी। शिप्रा अपने परिवार
- 5:07:44के हाथों शौर्य का अपमान दोबारा नहीं देख
- 5:07:46सकती थी। जबकि शौर्य नहीं चाहता था कि
- 5:07:49उसकी किसी बात से शिप्रा के परिवार को ठेस
- 5:07:51पहुंचे और उसका असर [संगीत] शिप्रा पर
- 5:07:53पड़े। शिप्रा की आंखें नम सी हो गई। वो
- 5:07:56मुस्कुराते हुए बोली अगर बात सिर्फ इतनी
- 5:07:59सी है तो मेरी चिंता छोड़ दो। अगर मेरे
- 5:08:02परिवार वाले फिर से तुम्हारी बेइज्जती
- 5:08:04[संगीत] करने की कोशिश भी करेंगे और तुम
- 5:08:06उन्हें जवाब दोगे तब भी मुझे बुरा नहीं
- 5:08:08लगेगा। इतना कहकर उसने बिना किसी झिझक के
- 5:08:11शौर्य को अपनी बाहों में भर लिया। शौर्य
- 5:08:14भी मुस्कुरा उठा। अगर मुझे पहले से पता
- 5:08:17होता कि इस पार्टी में जाने का इनाम इतना
- 5:08:19खास मिलने वाला है तो मैं कब का तैयार हो
- 5:08:21गया होता। उसने उसे अपनी बाहों में समेटे
- 5:08:24हुए ही उसके कान के पास धीरे से [संगीत]
- 5:08:26कहा। शिप्रा उसके इस शरारती अंदाज पर
- 5:08:29हल्के से शर्मा गई। वो उससे अलग होने के
- 5:08:32लिए छटपटाई। लेकिन शौर्य ने अपनी बाहों की
- 5:08:34पकड़ और मजबूत कर ली। तुम इतनी जल्दी मेरा
- 5:08:37इनाम वापस नहीं ले सकती। अभी तो खुशी-खुशी
- 5:08:40मेरी बाहों में आई थी और अब इतनी जल्दी
- 5:08:42दूर जाना चाह रही हो। शौर्य ने उसे छोड़ने
- 5:08:45की कोई कोशिश नहीं की। शिप्रा मुस्कुराई
- 5:08:48और किसी तरह खुद को उसकी बाहों से छुड़ाते
- 5:08:50हुए बोली ऐसा है कि तुम्हारा यह इनाम
- 5:08:53फिलहाल के लिए होल्ड पर रखा जाता है। जब
- 5:08:56तुम मेरी यह शर्त पूरी कर दोगे तब तुम्हें
- 5:08:58यह इनाम दोबारा मिल जाएगा। यह कहकर वो
- 5:09:01बिस्तर से उठ खड़ी हुई। फिर शौर्य का हाथ
- 5:09:04पकड़ते हुए बोली, चलो अब जल्दी से उठो
- 5:09:06[संगीत] और तैयार हो जाओ। शौर्य ने हल्की
- 5:09:09मुस्कान के साथ अपना हाथ छुड़ाया। ऐसा करो
- 5:09:12तुम पहले पार्टी में पहुंचो। मैं थोड़ी
- 5:09:14देर में आता हूं। शिप्रा ने तुरंत आंखें
- 5:09:17तरेड़ दी। नहीं, तुम्हारे जाते ही तुम फिर
- 5:09:21से सो जाओगे। चलो, जल्दी उठो और तैयार हो
- 5:09:25जाओ। शौर्य हंस पड़ा। अरे ऐसा बिल्कुल
- 5:09:28नहीं होगा। मैं इतना भी बेवकूफ नहीं हूं
- 5:09:30कि अपने इनाम को यूं ही हाथ से जाने दूं।
- 5:09:33तुम पार्टी में पहुंचो। मैं बस थोड़ी ही
- 5:09:36देर में तैयार होकर आ जाता हूं। शिप्रा ने
- 5:09:38कमरे में नजर दौड़ाई और [संगीत] फिर बोली,
- 5:09:41लेकिन तुम्हारे पास पहनने के लिए कपड़े
- 5:09:43कहां है? शौर्य ने कमरे में रखी अलमारी की
- 5:09:46ओर इशारा किया। उसकी चिंता मत करो। मेरे
- 5:09:49कुछ कपड़े पहले से ही यहां रखे हुए हैं।
- 5:09:51मैं वही पहन लूंगा। [संगीत]
- 5:09:53शिप्रा अलमारी तक गई। उसने उसे खोल कर
- 5:09:56देखा तो उसमें कई सूट टंगे हुए थे। उसने
- 5:09:58[संगीत] अपनी पसंद का एक सूट निकाला और
- 5:10:01शौर्य की ओर बढ़ाते हुए बोली, तुम यह पहन
- 5:10:03लेना। शौर्य ने सूट [संगीत] पर एक नजर
- 5:10:06डाली और सहमति में सिर हिला दिया। शिप्रा
- 5:10:09ने कपड़े बिस्तर के [संगीत] एक किनारे पर
- 5:10:10करीने से रख दिए। तभी उसका मोबाइल फिर से
- 5:10:13बज उठा। स्क्रीन पर मेघना का नाम देखकर
- 5:10:16उसने तुरंत कॉल रिसीव कर ली। कहां हो तुम?
- 5:10:19मैं होटल के बाहर पहुंच चुकी हूं। मेघना
- 5:10:21ने पूछा। मैं होटल के अंदर हूं। हॉल नंबर
- 5:10:24पांच में राधिका की पार्टी है। तुम वहीं आ
- 5:10:26जाओ। मैं बाहर ही मिल जाऊंगी। ठीक है, मैं
- 5:10:30अभी पहुंचती हूं। इतना कहकर मेघना [संगीत]
- 5:10:32ने फोन रख दिया। शिप्रा ने शौर्य की ओर
- 5:10:35देखा। मम्मी पापा होटल पहुंच गए हैं। मैं
- 5:10:38उनके पास जा रही हूं। तुम भी जल्दी से
- 5:10:40तैयार होकर आ जाना। ठीक है, तुम चलो। मैं
- 5:10:43[संगीत] भी थोड़ी देर में तैयार होकर
- 5:10:45पहुंचता हूं। यह कहते हुए शौर्य भी बिस्तर
- 5:10:47से उठ खड़ा हुआ। अब वह मानसिक रूप से भी
- 5:10:50पार्टी में जाने के लिए तैयार हो चुका था।
- 5:10:52शिप्रा कमरे से बाहर निकलकर हॉल नंबर पांच
- 5:10:55की ओर बढ़ गई। हॉल तक जाने वाली गैलरी
- 5:10:58बेहद खूबसूरती से सजाई गई थी। जगह-जगह
- 5:11:01राधिका और उसके मंगेतर की तस्वीरें लगी
- 5:11:03हुई [संगीत] थी। एक तस्वीर पर नजर पड़ते
- 5:11:05ही शिप्रा कुछ पल के लिए ठिड़क गई। ना
- 5:11:08जाने क्यों उस लड़के का चेहरा उसे जाना
- 5:11:11पहचाना सा लगा। उसने उस विचार पर ज्यादा
- 5:11:13ध्यान नहीं दिया। इस [संगीत] समय उसकी
- 5:11:15नजरें तो मेघना और अपने मम्मी पापा को
- 5:11:17तलाश रही थी। तभी सामने से राहुल तेजी से
- 5:11:20उसकी ओर आता दिखाई दिया। अरे दीदी आप यहां
- 5:11:24हैं। कितने दिनों बाद आपसे मुलाकात हुई
- 5:11:26है? आपको पता है मैं आपको कितना याद करता
- 5:11:29हूं? शिप्रा ने मुस्कुराते हुए उसके कान
- 5:11:31पकड़ लिए। अच्छा जरा बताओ तो कितना याद
- 5:11:35करते [संगीत] हो? अगर सच में इतनी याद आती
- 5:11:37थी तो कभी मिलने क्यों नहीं आए? राहुल
- 5:11:40तुरंत सफाई देने लगा। अरे आता कैसे? मुझे
- 5:11:43आपके घर का पता ही कहां पता था? शिप्रा
- 5:11:46हंस [संगीत] पड़ी। अगर सच में मिलने का मन
- 5:11:48होता तो मेरा पता निकालना इतना भी मुश्किल
- 5:11:50नहीं [संगीत] था। इतने में मेघना भी
- 5:11:52राजदीप जी और बीना जी के साथ वहां पहुंच
- 5:11:55गई। राहुल अपने कान छुड़ाने की कोशिश करते
- 5:11:57हुए बोला, "अरे दीदी, यह क्या कर रही हैं?
- 5:12:01अब मैं बड़ा हो गया हूं। इस तरह कान
- 5:12:03खिंचवाते हुए अच्छा लगता हूं क्या? शिप्रा
- 5:12:05ने उसका कान छोड़ दिया और मुस्कुरा कर
- 5:12:07बोली, तू कितना भी बड़ा क्यों ना हो जाए,
- 5:12:10मेरे [संगीत] लिए तो हमेशा छोटा ही रहेगा।
- 5:12:12राजदीप जी ने इधर-उधर नजर दौड़ाई और पूछा,
- 5:12:16"तुम तो अकेली हो। श्रवण कहां है? क्या वह
- 5:12:19नहीं आया? वह थोड़ी देर में आ जाएगा पापा।
- 5:12:22इसके बाद सभी लोग हॉल के अंदर चले गए। हॉल
- 5:12:25के प्रवेश द्वार पर राजकुमार टंडन जी
- 5:12:27स्वयं मेहमानों का स्वागत कर रहे थे।
- 5:12:30उन्होंने राजदीप जी और उनके परिवार को
- 5:12:32देखा तो मुस्कुराते हुए आगे बढ़े। अभिवादन
- 5:12:35के बाद उनकी नजर अनायास ही शौर्य को खोजने
- 5:12:38लगी। जब शौर्य कहीं दिखाई नहीं दिया तो
- 5:12:41उन्होंने शिप्रा से पूछा। शौर्य दिखाई
- 5:12:43नहीं दे रहा। कहां रह गया? शिप्रा ने सहज
- 5:12:46स्वर में उत्तर दिया। उसे थोड़ा सा काम आ
- 5:12:49गया था। काम निपटाकर वह भी जल्दी ही आ
- 5:12:51जाएगा। राजकुमार टंडन जी के चेहरे पर
- 5:12:54हल्की सी व्यंगपूर्ण मुस्कान उभर आई। ऐसा
- 5:12:57भी कौन सा बड़ा काम है जिसे वह एक दिन के
- 5:12:59लिए छोड़ नहीं सकता। तुम इतनी बड़ी कंपनी
- 5:13:02की सीईओ होकर भी समय पर आ गई और वह खुद को
- 5:13:05बहुत व्यस्त दिखा रहा है। थोड़ा ध्यान रखा
- 5:13:08करो उस पर। उसकी हर बात पर आंख मूंद कर
- 5:13:10भरोसा मत किया करो। उनकी बात सुनकर शिप्रा
- 5:13:14भीतर तक संग रह गई। उसने कल्पना भी नहीं
- 5:13:17की थी कि फूफा जी आते ही इस तरह का व्यंग
- 5:13:19करेंगे। एक पल के लिए उसे अपने निर्णय पर
- 5:13:22पछतावा होने लगा। शायद शौर्य का पार्टी
- 5:13:25में ना आने का फैसला ही सही था। उसने कुछ
- 5:13:28नहीं कहा। बस चुपचाप मेघना की ओर देखा।
- 5:13:31[संगीत] मेघना भी सब समझ चुकी थी। अंदर
- 5:13:34पहुंचने के बाद शिप्रा धीरे से उसके पास
- 5:13:36आई और बोली, [संगीत]
- 5:13:38फूफा जी की बातें सुनी तुमने? और तुम ही
- 5:13:41मुझे समझा रही थी कि शौर्य को जरूर लेकर
- 5:13:43आना। मैं भी तुम्हारी बातों में आ गई। अगर
- 5:13:47उसके आने के बाद कोई गड़बड़ हुई [संगीत]
- 5:13:49तो मैं खुद को कभी माफ नहीं कर पाऊंगी।
- 5:13:52मेघना ने पूरी निश्चिंतता [संगीत] से कहा,
- 5:13:54"तुम बेवजह चिंता कर रही हो। शौर्य के साथ
- 5:13:57कुछ भी गड़बड़ नहीं होगी। और अगर किसी ने
- 5:14:00उसकी बेइज्जती करने की कोशिश की तो क्या
- 5:14:02तुम्हें लगता है कि वो चुपचाप सब सुनता
- 5:14:04रहेगा? उल्टा लेने के दिन ही पड़ जाएंगे।
- 5:14:06तुम्हें अपना जन्मदिन याद नहीं है? उस दिन
- 5:14:09बेइज्जती शौर्य की नहीं बल्कि तुम्हारे
- 5:14:11अपने परिवार वालों की हुई थी। उसने किसी
- 5:14:13को जवाब देने में कोई कसर नहीं छोड़ी
- 5:14:15[संगीत] थी। मेघना की बात सुनते ही शिप्रा
- 5:14:18को शौर्य की कही हुई बात याद आ गई। मुझे
- 5:14:21अपनी बेइज्जती की चिंता नहीं है। डर तो इस
- 5:14:24बात का है कि कहीं मेरी वजह से तुम्हारे
- 5:14:26परिवार को अपमानित ना होना पड़े क्योंकि
- 5:14:28उसका सबसे [संगीत] ज्यादा दुख तुम्हें
- 5:14:30होगा। यह याद आते ही शिप्रा के होठों पर
- 5:14:33अनायास ही मुस्कान आ गई। मेघना ने उसकी
- 5:14:36मुस्कान [संगीत] देख ली। अब यह मुस्कान
- 5:14:39किस बात की है? उसने उत्सुकता से पूछा।
- 5:14:42शिप्रा मुस्कुराते हुए बोली, तुम्हारी बात
- 5:14:44सुनकर मुझे शौर्य की कही हुई एक बात याद आ
- 5:14:47गई। उसने मुझसे कहा था कि उसे अपनी
- 5:14:49बेइज्जती की चिंता बिल्कुल नहीं है। उसे
- 5:14:51तो बस इस बात का डर था कि कहीं उसकी वजह
- 5:14:54से मेरे परिवार को अपमानित ना होना पड़े।
- 5:14:56क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो सबसे ज्यादा दुख
- 5:14:59मुझे होगा। मेघना ने संतोष भरी मुस्कान के
- 5:15:02साथ कहा। मैंने तो पहले ही कहा था कि तुम
- 5:15:04बेवजह शौर्य को लेकर परेशान हो। बात
- 5:15:07करते-करते उसने महसूस किया कि पिछली बार
- 5:15:10की तुलना में इस बार शिप्रा कहीं अधिक
- 5:15:12आत्मविश्वासी और खुश दिखाई दे रही थी।
- 5:15:14उसके चेहरे की चमक साफ बता रही थी कि उसके
- 5:15:17जीवन में कुछ बदल चुका है। मेघना ने
- 5:15:20मुस्कुरा कर पूछा। एक बात पूछूं क्या अब
- 5:15:23तुम्हारे और शौर्य के बीच सब कुछ ठीक हो
- 5:15:25गया है? शिप्रा ने अनजान बनने की कोशिश
- 5:15:27की। मतलब हमारे बीच कब कुछ गड़बड़ थी?
- 5:15:31मेघना ने उसे घूरते हुए कहा, इतनी भी भूली
- 5:15:34मत बनो कि मेरी बात समझ में ही ना [संगीत]
- 5:15:36आए। मैं उस शर्त की बात कर रही हूं जो तुम
- 5:15:38दोनों के बीच पहले तय हुई थी कि तुम लोग
- 5:15:41सिर्फ नाम के पतिप्नी रहोगे और तुम्हारे
- 5:15:43बीच पति-पत्नी जैसा कोई [संगीत] संबंध
- 5:15:45नहीं होगा। मेघना की बात सुनते ही शिप्रा
- 5:15:48की नजरें इधर-उधर भटकने लगी। वो चाहकर भी
- 5:15:51उसकी आंखों में आंखें डालकर जवाब नहीं दे
- 5:15:53[संगीत] पा रही थी। मेघना ने मुस्कुराते
- 5:15:55हुए फिर टोका। इधर-उधर क्या देख रही हो?
- 5:15:58मेरी तरफ देखकर जवाब दो। शिप्रा ने हल्की
- 5:16:01सी झेप के साथ कहा, "क्या जवाब दूं? हम
- 5:16:04पतिप्नी हैं।" थोड़ी बहुत नोकझोंक तो हर
- 5:16:06रिश्ते में होती है। इसका यह मतलब तो नहीं
- 5:16:09कि हमारे बीच कोई शर्त अब भी कायम है। सच
- 5:16:12कहूं तो वो मेरी नादानी थी जो मैंने ऐसी
- 5:16:14बेवकूफी भरी शर्त शौर्य के सामने रख दी
- 5:16:17थी। अब मेघना के चेहरे की मुस्कान और गहरी
- 5:16:19हो गई। मतलब तुम दोनों के बीच की वो शर्त
- 5:16:22अब खत्म हो चुकी है। लेकिन मैं जान सकती
- 5:16:25हूं कि ऐसा अचानक कैसे हो गया। तुम तो
- 5:16:27बड़े विश्वास के साथ कहती थी कि तुम्हें
- 5:16:29सिर्फ नाम का पति चाहिए क्योंकि [संगीत]
- 5:16:31तुम दोबारा शादी जैसा रिश्ता नहीं निभाना
- 5:16:33चाहती थी। फिर ऐसा क्या हुआ कि तुम्हारी
- 5:16:35सोच ही बदल गई। उसके स्वर में हल्का सा
- 5:16:38व्यंग भी था और अपनापन भी। शिप्रा ने उसे
- 5:16:41तीखी नजरों से देखा। तुम्हें हमारे रिश्ते
- 5:16:44में इतनी दिलचस्पी क्यों हो रही है? हमारे
- 5:16:46बीच क्या [संगीत] है और क्या नहीं? यह
- 5:16:48जानने की इतनी कोशिश मत करो। मेघना
- 5:16:51खिलखिला कर हंस पड़ी। वाह बात [संगीत] तो
- 5:16:54अब यहां तक पहुंच गई कि तुम इस बारे में
- 5:16:56बात करना भी पसंद नहीं कर रही हो। वो
- 5:16:58शिप्रा के थोड़ा और करीब आई और शरारत से
- 5:17:01उसकी कमर में हल्की सी चिकोटी काटते हुए
- 5:17:03बोली, सीधे-सीधे क्यों नहीं मान लेती कि
- 5:17:06तुम अब शौर्य से प्यार करने लगी हो? इसमें
- 5:17:08छिपाने वाली कौन सी बात है? इस बार शिप्रा
- 5:17:11ने बिना झिझक मेघना की आंखों में देखा और
- 5:17:13मुस्कुरा कर बोली, [संगीत] "मैं भला यह
- 5:17:16बात क्यों छिपाऊंगी?" वो मेरे पति हैं।
- 5:17:19अगर मैं अपने पति से प्यार नहीं करूंगी तो
- 5:17:21फिर किससे करूंगी? उसका उत्तर सुनते ही
- 5:17:23मेघना के चेहरे पर संतोष छलक उठा। तो
- 5:17:26आखिरकार तुम पूरी तरह शौर्य के प्यार में
- 5:17:28पड़ ही गई। मुझे पहले से पता था कि तुम
- 5:17:32ज्यादा दिनों तक खुद को उससे दूर नहीं रख
- 5:17:35पाओगी। उसमें कुछ तो ऐसी बात है कि
- 5:17:37लड़कियां उसके आकर्षण से खुद को ज्यादा
- 5:17:40समय तक बचा नहीं पाती। यह कहते हुए उसने
- 5:17:43प्यार से शिप्रा के कंधे पर हाथ थपथपा
- 5:17:45दिया। शिप्रा ने उसे शक भरी नजरों से
- 5:17:48देखा। कहीं तुम भी तो उसके आकर्षण में
- 5:17:50नहीं फंस गई थी। मेघना हल्का सा हंसती दी।
- 5:17:53जानती हो जब मैं पहली बार शौर्य से मिली
- 5:17:56थी तब वो मुझे बिल्कुल पसंद नहीं आया था।
- 5:17:59लेकिन फिर उससे एक दो बार और मुलाकात हुई।
- 5:18:02धीरे-धीरे उसके बारे में मेरी राय बदलने
- 5:18:04लगी और मैं भी उसके प्रति एक [संगीत] अजीब
- 5:18:07सा आकर्षण महसूस करने लगी। वो एक पल के
- 5:18:10लिए रुकी और फिर मुस्कुराते हुए बोली।
- 5:18:13लेकिन फिर एक दिन पता चला कि वो तो मेरे
- 5:18:16जीजा जी हैं। और उसी पल मेरा सारा आकर्षण
- 5:18:18हवा हो गया। यह पहली बार था जब मेघना ने
- 5:18:22अपने मन की यह बात किसी से कही थी। शिप्रा
- 5:18:25हंस पड़ी। उसने प्यार से मेघना के गाल
- 5:18:27खींचते हुए कहा, "मुझे पहले से पता था जिस
- 5:18:30दिन तुम्हें यह मालूम चला था कि शौर्य
- 5:18:32मेरे पति हैं। उसी दिन मैंने तुम्हारे
- 5:18:34चेहरे का रंग बदलते हुए देख लिया था। उसी
- 5:18:36समय समझ गई थी कि मामला क्या है। बातें
- 5:18:39करते-करते शिप्रा और मेघना हॉल के अंदर आ
- 5:18:42चुकी थी। राजदीप जी और बीना जी अपने
- 5:18:44भाइयों, बहनों तथा अन्य रिश्तेदारों से
- 5:18:46मिलने चले गए। जबकि राहुल भी अपनी हम उम्र
- 5:18:49युवाओं की टोली में शामिल हो गया। शिप्रा
- 5:18:52का भी अपने परिवार के दूसरे रिश्तेदारों
- 5:18:54से मिलने का कोई विशेष मन नहीं था। इसलिए
- 5:18:56वह मेघना के साथ हॉल के एक कोने में खड़ी
- 5:18:58होकर इधर-उधर का माहौल देखने लगी। तभी
- 5:19:01उसके बगल से एक व्यंग भरी आवाज सुनाई दी।
- 5:19:04अरे वाह, यह देखो तो कौन आई है। शिप्रा
- 5:19:08बड़े दिनों बाद दर्शन हुए। एक बड़ी कंपनी
- 5:19:11की सीईओ क्या बन गई? अपने घर परिवार को ही
- 5:19:13भूल बैठी। कोई इतना एहसान फरामोश भी होता
- 5:19:16है क्या? आवाज सुनते ही शिप्रा ने उस दिशा
- 5:19:19में नजर घुमाई। सामने खड़ी महिला को देखते
- 5:19:21ही उसके चेहरे की मुस्कान पल भर में गायब
- 5:19:23हो गई। वो अच्छी तरह जानती थी कि उनसे
- 5:19:26मीठे शब्दों या आत्मीय स्वागत की उम्मीद
- 5:19:28करना व्यर्थ है। उनके मुंह से निकला हर
- 5:19:31शब्द हमेशा की तरह ताने और कटाक्ष से भरा
- 5:19:33हुआ था। शिप्रा ने गहरी सांस ली और खुद को
- 5:19:36संयत करने की कोशिश की। उसे एहसास हो गया
- 5:19:39था कि पार्टी की शुरुआत जितनी शांत दिख
- 5:19:41रही थी, आगे का माहौल उतना ही तूफानी होने
- 5:19:44वाला था।
- 5:19:45जैसा कि शिप्रा को पहले से ही अंदाजा
- 5:19:47[संगीत] था। इस तरह की बात करने वाली कोई
- 5:19:49और नहीं बल्कि सरला जी ही थी। उनके साथ
- 5:19:52बिंदु जी भी खड़ी थी। शिप्रा सीधे उनके
- 5:19:55पास पहुंची और शांत लेकिन दृढ़ स्वर में
- 5:19:58बोली मैंने ऐसा क्या कर दिया बड़ी मां जो
- 5:20:00मैं आपको एहसान फरामोश दिखाई देने लगी।
- 5:20:03मैंने आखिर किसका क्या ले लिया [संगीत] या
- 5:20:05फिर किसने मेरे लिए ऐसा क्या किया है
- 5:20:07जिसके बदले आप आज मुझसे इस तरह [संगीत] की
- 5:20:09बातें कर रही हैं? और नहीं तो क्या? सरला
- 5:20:12जी अपने मन की भड़ास निकालते हुए बोली,
- 5:20:14"इसी घर ने तुम्हें इस मुकाम तक पहुंचाया
- 5:20:16कि आज तुम एक बड़ी [संगीत] कंपनी की सीईओ
- 5:20:19बन गई हो। लेकिन जैसे ही वह कुर्सी मिली,
- 5:20:21तुमने यह घर ही छोड़ दिया। लोग ऐसी ऊंची
- 5:20:24जगह पर पहुंचकर अपने परिवार और करीबियों
- 5:20:26का हाथ थामते हैं। उनकी मदद करते हैं। मगर
- 5:20:29तुमने तो किसी के लिए कुछ किया ही नहीं।
- 5:20:31शिप्रा हल्का सा मुस्कुराई। उसकी मुस्कान
- 5:20:34में व्यंग साफ झलक रहा था। कमाल है बड़ी
- 5:20:36मां। इस घर ने मुझे सीईओ नहीं बनाया बल्कि
- 5:20:39मैं अपनी काबिलियत के दम पर [संगीत] यहां
- 5:20:41तक पहुंची हूं। उल्टा इस घर ने तो मुझसे
- 5:20:43वो भी छीन लिया था जिसकी बदौलत मैं अपनी
- 5:20:46एक अलग पहचान बना सकती थी। फिर आप यह दावा
- 5:20:48कैसे कर सकती हैं कि मेरी [संगीत] सफलता
- 5:20:50का श्रेय इस परिवार को जाता है और अगर
- 5:20:52सचमुच यह परिवार इतना ही समर्थ है तो आपके
- 5:20:55बेटे और बेटी आज तक [संगीत] ऐसी किसी
- 5:20:57ऊंचाई पर क्यों नहीं पहुंच पाए? जहां तक
- 5:20:59दादा जी की बात है, उन्होंने मुझे मेरी
- 5:21:01बिजनेस शुरू करने के लिए जो भी पैसा निवेश
- 5:21:03[संगीत] किया था, उसका एक एक मैं उन्हें
- 5:21:06ब्याज सहित लौटा चुकी हूं। अब आप ही बताइए
- 5:21:08दादाजी ने कुलवंत भैया और युविका पर जो
- 5:21:11निवेश किया है, उसमें से कितना उन्होंने
- 5:21:13वापस किया है। सच तो यह है [संगीत] कि अगर
- 5:21:15दादाजी का हाथ कुलवंत भैया और युविका के
- 5:21:17सिर से हट जाए तो उन्हें अपनी पहचान बनाए
- 5:21:20रखने में भी मुश्किल हो जाएगी। इसलिए
- 5:21:22बेहतर होगा कि आगे से मेरे बारे में ऐसी
- 5:21:24बातें कहने से पहले एक बार जरूर सोच लें।
- 5:21:26शिप्रा ने सरला जी को आईना दिखाने में कोई
- 5:21:28कसर नहीं [संगीत] छोड़ी। सरला जी के साथ
- 5:21:30खड़ी बिंदु जी ने जब देखा कि बात हाथ से
- 5:21:33निकलती जा रही है और शिप्रा आज चुप रहने
- 5:21:35के मूड में बिल्कुल नहीं है तो उन्होंने
- 5:21:37तुरंत माहौल संभालने की कोशिश की। तुम गलत
- 5:21:40समझ रही हो शिप्रा। उन्होंने नरम स्वर में
- 5:21:42कहा सरला दीदी का इरादा तुम्हें नीचा
- 5:21:44दिखाने का बिल्कुल नहीं था। वो कहना तो
- 5:21:47कुछ और चाहती थी लेकिन शायद उनकी जुबान
- 5:21:49फिसल गई। आखिर इस परिवार में ऐसा कौन है
- 5:21:52जिसे तुम्हारी काबिलियत पर गर्व ना हो।
- 5:21:54शिप्रा इन दोनों की जोड़ी को अच्छी तरह
- 5:21:56समझती थी। एक का काम घाव देना होता था तो
- 5:21:59दूसरी का उसी घाव पर मरहम लगाने का। आज भी
- 5:22:02वही हो रहा था। जैसे ही बिंदु जी ने देखा
- 5:22:04कि हर बार सबकी बातें चुपचाप सह जाने वाली
- 5:22:06शिप्रा इस बार सरला जी को करारा [संगीत]
- 5:22:08जवाब दे रही है। उन्होंने हमेशा की तरह
- 5:22:10हालात संभालने की जिम्मेदारी उठा ली।
- 5:22:13लेकिन इस बार शिप्रा भी [संगीत] चुप रहने
- 5:22:15वालों में से नहीं थी। वो तुरंत बिंदु जी
- 5:22:17की ओर मुड़ी और बोली आप भी मुझे गलत समझ
- 5:22:19[संगीत] रही हैं छोटी मां। मैं भी बड़ी
- 5:22:21मां से कहना तो कुछ और चाहती थी लेकिन
- 5:22:23शायद मेरी भी जुबान फिसल गई और गलती से
- 5:22:26उन्हें आईना दिखा बैठी। नहीं तो इस घर में
- 5:22:28ऐसा कौन है जिसे यह ना पता हो कि मैं बड़ी
- 5:22:30मां का कितना सम्मान करती हूं। शिप्रा के
- 5:22:33व्यंग से भरे इस जवाब ने बिंदु जी [संगीत]
- 5:22:34को पूरी तरह निरुत्तर कर दिया। उन्होंने
- 5:22:37एक नजर सरला जी की ओर देखा। लेकिन दोनों
- 5:22:39में से किसी के पास कहने के लिए शब्द नहीं
- 5:22:41थे। बिंदु जी यह देखकर भीतर [संगीत] ही
- 5:22:43भीतर हैरान थी कि जो शिप्रा पहले ऐसे
- 5:22:45तानों को अनसुना कर देती थी। वही आज पूरी
- 5:22:48बेबाकी से उनका जवाब दे रही थी। अब वह
- 5:22:50अपने सम्मान के लिए खुलकर खड़ी हो रही थी।
- 5:22:53उसी क्षण उन्होंने मन ही मन तय कर लिया कि
- 5:22:56आगे से शिप्रा पर कोई भी कटाक्ष करने से
- 5:22:58पहले उन्हें 100 बार सोचना पड़ेगा। उधर
- 5:23:00सरला जी का चेहरा भी उतर चुका था।
- 5:23:02उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि
- 5:23:04शिप्रा इस तरह उनके सामने डटकर जवाब देगी।
- 5:23:08लेकिन सरला जी भी इतनी आसानी से हार मानने
- 5:23:10वालों में से नहीं थी। इतना सुन लेने के
- 5:23:12बाद भला वे चुप कैसे रहती। मैं देख रही
- 5:23:15हूं कि तुम पहले नाशुक्री थी और इस घर से
- 5:23:17जाने के बाद बदतमीज भी हो गई हो। अपने
- 5:23:19बड़ों से बात करने की सारी तमीज और तहजीब
- 5:23:22भूल चुकी हो। शिप्रा ने बिना विचलित हुए
- 5:23:24उनकी आंखों में देखा। जब बड़ों को ही अपने
- 5:23:27सम्मान की परवाह ना हो तो हम छोटे और कर
- 5:23:29भी क्या सकते हैं? केवल आरोप लगा देने से
- 5:23:32कोई बात सच नहीं हो जाती। बड़ी मां आप
- 5:23:35बताइए मैं किसके प्रति नाशुक्री रही हूं?
- 5:23:39और अभी मैंने ऐसी कौन सी बदतमीजी कर दी?
- 5:23:42आपने जो कहा मैंने सिर्फ उसका जवाब दिया
- 5:23:44है। अगर आप में जवाब सुनने का धैर्य नहीं
- 5:23:47है तो मुझ पर बदतमीजी का इल्जाम किस आधार
- 5:23:50पर लगा रही हैं? एक बार फिर शिप्रा ने
- 5:23:53उनकी बात यूं ही नहीं जाने दी। इस बार
- 5:23:55सरला जी के पास कोई ठोस जवाब नहीं था। वो
- 5:23:58असहज होकर अपने आसपास देखने लगी। सौभाग्य
- 5:24:01से वहां अधिकतर राय परिवार के सदस्य ही
- 5:24:03मौजूद थे। जगताप जी, कुलवंत, युविका, मयूर
- 5:24:08और परिवार [संगीत] के कुछ अन्य लोग।
- 5:24:10हालांकि कुछ बाहरी मेहमान भी वहां खड़े थे
- 5:24:12जो हैरानी से पूरा घटनाक्रम देख रहे थे।
- 5:24:15फैब्रिक ट्रेंड की सीईओ बनने के बाद शहर
- 5:24:18[संगीत] के बिजनेस जगत में शिप्रा का कद
- 5:24:20काफी ऊंचा हो चुका था। लोग उससे मिलने और
- 5:24:22[संगीत] उसके साथ काम करने का अवसर पाने
- 5:24:24के लिए उत्सुक रहते थे। ऐसे में अपनी ही
- 5:24:27बेटी के लिए सरला जी की कटु बातें सुनकर
- 5:24:29बाहरी मेहमान आश्चर्यचकित थे। वे समझ नहीं
- 5:24:32पा रहे थे कि जिस महिला का सम्मान पूरा
- 5:24:34कॉर्पोरेट जगत करता है, उसके साथ उसके
- 5:24:36अपने ही परिवार में ऐसा व्यवहार क्यों
- 5:24:38किया जा रहा है। शायद परिवार से बाहर का
- 5:24:41कोई व्यक्ति तो यह जानते हुए कभी उसकी इस
- 5:24:43तरह बेइज्जती करने का साहस भी ना करता।
- 5:24:46उधर कुलवंत और युविका शर्म से सिर झुकाए
- 5:24:49खड़े थे। वे अच्छी तरह जानते थे कि आज
- 5:24:51बिजनेस [संगीत] वर्ल्ड में शिप्रा का
- 5:24:53कितना बड़ा नाम है। लोग महीनों तक उसकी एक
- 5:24:55मीटिंग के लिए इंतजार करते हैं और उनकी
- 5:24:58अपनी मां भरी महफिल में अपनी कुंठा उस पर
- 5:25:00निकालने से खुद को रोक नहीं पा रही थी।
- 5:25:03असल में अपने बेटे और [संगीत] बेटी से
- 5:25:04शिप्रा को बहुत आगे निकलते देखना सरला जी
- 5:25:07के लिए कभी सहज नहीं रहा था। कुलवंत चाहता
- 5:25:10तो था कि बीच में आकर मां को रोक दे लेकिन
- 5:25:12तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सरला जी अपने
- 5:25:15मन का सारा जहर उगल चुकी थी। उधर राजदीप
- 5:25:18जी को भी किसी से खबर मिल गई कि सरला जी
- 5:25:20और शिप्रा के बीच कहासनी हो गई है। वह
- 5:25:23तुरंत वहां पहुंचे। माहौल की गंभीरता
- 5:25:25देखकर उन्हें समझते देर नहीं लगी कि बात
- 5:25:28काफी [संगीत] बढ़ चुकी है। उन्हें देखते
- 5:25:30ही सरला जी बोली राजदीप [संगीत] अपनी बेटी
- 5:25:33को समझाइए। यह अपने बड़ों से बात करने की
- 5:25:36सारी तहजीब भूल चुकी है। लगता है अपने उस
- 5:25:39भिखारी पति का असर इस पर भी पड़ गया है।
- 5:25:41इतना सुनते ही पास खड़ा कुलवंत घबरा गया।
- 5:25:44[संगीत]
- 5:25:44उसे लगा कि अब मामला पूरी तरह हाथ से निकल
- 5:25:46जाएगा। वो तुरंत बीच में आकर बोला, "मां
- 5:25:50आप यह क्या कह रही हैं? आपको पता है ना कि
- 5:25:53हम सब कहां खड़े [संगीत] हैं? तो क्या
- 5:25:55हुआ? सरला जी झल्ला कर बोली, क्या मैं
- 5:25:58किसी से डरती हूं? मैं सच ही तो कह रही
- 5:26:00हूं। जो लड़की पहले मेरे [संगीत] सामने
- 5:26:02सिर उठाकर बात नहीं करती थी, आज एक कंपनी
- 5:26:05की सीईओ बन गई है, तो क्या मुझसे ही जुबान
- 5:26:07लड़ाएगी? भाभी, आप कुछ [संगीत] ज्यादा
- 5:26:10नहीं कर रही हैं। राजदीप जी ने संयत स्वर
- 5:26:12में कहा, आखिर इस सब का मतलब क्या है?
- 5:26:15उन्हें अच्छा नहीं लग रहा था कि इतने
- 5:26:17लोगों के सामने [संगीत] शिप्रा के
- 5:26:19संस्कारों पर सवाल उठाए जा रहे थे। कमाल
- 5:26:21है राजदीप। सरला जी ने पलट कर कहा, "आप
- 5:26:24मुझे समझा रहे हैं।" आपको तो अपनी बेटी से
- 5:26:27पूछना चाहिए कि वो अपने बड़ों से बात करने
- 5:26:29की सारी मर्यादा कैसे भूल गई? तभी एक कड़क
- 5:26:33आवाज पूरे माहौल में गूंज उठी। बहू सबकी
- 5:26:37निगाहें उसी दिशा में उठ गई। बलवंत राय
- 5:26:40तेज कदमों से वहां आ चुके थे।
- 5:26:41[संगीत]
- 5:26:41उन्होंने सरला जी और राजदीप जी की बातचीत
- 5:26:44का अंतिम हिस्सा सुन लिया था और उनका
- 5:26:46चेहरा गुस्से [संगीत] से तमतमा उठा था।
- 5:26:49यहां अपनी तहजीब कौन भूल रहा है? यह सब
- 5:26:51कुछ साफ दिखाई [संगीत] दे रहा है। तुम्हें
- 5:26:53इतनी भी समझ नहीं कि किस जगह कैसी बातें
- 5:26:56करनी चाहिए? बाहर वालों के सामने अपने ही
- 5:26:59परिवार का [संगीत] तमाशा बनाकर आखिर साबित
- 5:27:01क्या करना चाहती हो। परिवार की मर्यादा का
- 5:27:03जरा भी ध्यान है या नहीं। सरला जी ने
- 5:27:06घबराकर उनकी ओर देखा। उन्हें एहसास ही
- 5:27:09नहीं हुआ था कि बलवंत राय [संगीत] कब वहां
- 5:27:11आ पहुंचे थे। क्षण भर में उन्होंने अपना
- 5:27:13स्वर बदल लिया। अच्छा हुआ पिताजी [संगीत]
- 5:27:16आप आ गए। आप ही देख लीजिए अपनी इस लाडली
- 5:27:18पोती को। उस भिखारी के साथ रहते [संगीत]
- 5:27:21यह भी सारी तहजीब भूल गई है। आज सीईओ बन
- 5:27:24गई है तो इस परिवार के सारे एहसान भूल
- 5:27:27बैठी है। आपने इसके लिए कितना कुछ किया।
- 5:27:30लेकिन इसे कुछ याद [संगीत] नहीं। सरला जी
- 5:27:32को पूरा विश्वास था कि पिछले कुछ समय से
- 5:27:34बलवंत राय भी शिप्रा से नाराज चल रहे थे।
- 5:27:37इसलिए वह उनका समर्थन करेंगे। लेकिन बलवंत
- 5:27:40राय का जवाब उनकी उम्मीद के बिल्कुल
- 5:27:42विपरीत था। बहू यह कोई अदालत नहीं है जहां
- 5:27:46तुम अपने तर्क रख रही हो? क्या तुम्हें
- 5:27:48परिवार के मामलों पर चर्चा करने के लिए
- 5:27:50यही समय और यही जगह मिली थी? उसी समय
- 5:27:53बृजभूषण जी भी वहां पहुंच गए। इतने सारे
- 5:27:56मेहमानों के सामने अपने परिवार [संगीत] का
- 5:27:58तमाशा बनते देख उनका सिर शर्म से झुक गया।
- 5:28:01वो धीरे से बलवंत राय के पास आए और बोले
- 5:28:04आप शांत हो जाइए पिताजी। मैं सरला को
- 5:28:07संभालता हूं। आप तो जानते ही हैं [संगीत]
- 5:28:09कई बार यह बिना सोचे समझे ऐसी गलती कर
- 5:28:12बैठती हैं। बलवंत राय ने कठोर स्वर में
- 5:28:14कहा, बृजभूषण [संगीत]
- 5:28:16अपनी पत्नी को संभालना सीखो। इसे घर और
- 5:28:19बाहर का अंतर तक समझ नहीं है। जो बातें
- 5:28:21परिवार की चार दीवारी के भीतर थी, आज इसकी
- 5:28:24नासमझी के कारण सबके सामने आ गई। बृजभूषण
- 5:28:27जी अभी कुछ कहते उससे पहले नैना जी भी
- 5:28:29वहां पहुंच गई। उन्होंने नाराज होकर कहा
- 5:28:32क्या भाभी आज के दिन भी आप शांत नहीं रह
- 5:28:34सकती थी। आज राधिका की सगाई है और आपने इस
- 5:28:37पार्टी हॉल को भी घर का अखाड़ा बना दिया।
- 5:28:40शुक्र है कि लड़के वालों के ज्यादा लोग
- 5:28:42अभी तक नहीं पहुंचे। वरना हम किसी को मुंह
- 5:28:44दिखाने लायक भी नहीं रहते। हाथ जोड़कर
- 5:28:47विनती है आज के दिन कोई और तमाशा मत
- 5:28:49कीजिए। लेकिन सरला जी कहां मानने वाली थी?
- 5:28:52कमाल है। जिसे देखो वही मुझे ही दोष दे
- 5:28:55रहा है। किसी को यह क्यों नहीं दिखाई देता
- 5:28:57कि गलती शिप्रा की है। सीईओ बन गई है तो
- 5:29:00क्या आप किसी से भी कुछ भी बोल देगी? नैना
- 5:29:02जी समझ गई कि इस समय सरला जी को समझाना
- 5:29:05व्यर्थ है। उन्होंने शिप्रा की ओर मुड़कर
- 5:29:07कहा शिप्रा बेटी तुम समझदार हो। अपनी बड़ी
- 5:29:11मां का स्वभाव तो जानती ही हो। थोड़ी देर
- 5:29:13के [संगीत] लिए तुम ही खुद पर संयम रख लो।
- 5:29:16शिप्रा की आंखों में क्षण भर के लिए पीड़ा
- 5:29:18तैर गई। सॉरी बुआ। मेरी वजह से आपकी खुशी
- 5:29:21के मौके पर यह सब हो गया। सच कहूं तो शायद
- 5:29:25मैं आपकी इस खुशी में शामिल होने के योग्य
- 5:29:27ही नहीं हूं। मुझे माफ कर दीजिए। मैं अब
- 5:29:30यहां से जाना चाहती हूं। इतना कहकर उसने
- 5:29:32नैना जी को प्रणाम किया और भारी कदमों से
- 5:29:35हॉल से बाहर की ओर बढ़ गई। वह अभी कुछ ही
- 5:29:38कदम चली थी कि पीछे से एक गंभीर और
- 5:29:40अधिकारपूर्ण आवाज गूंजी। रुक जाओ शिप्रा
- 5:29:43बेटी तुम कहीं नहीं जाओगी। मैं अच्छी तरह
- 5:29:46जानता हूं कि इस पूरे मामले में तुम्हारी
- 5:29:48कोई गलती नहीं है। उस आवाज ने शिप्रा के
- 5:29:50कदम वहीं रोक दिए। धीरे-धीरे उसने पलट कर
- 5:29:53उस दिशा में देखा। शिप्रा ने आवाज की दिशा
- 5:29:56में देखा तो सामने राजकुमार टंडन जी खड़े
- 5:29:59थे। वो शिप्रा के करीब गए और समझाते हुए
- 5:30:02बोले, तुम्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं
- 5:30:04है। मैं समझता हूं नैना से तुम्हें ऐसा
- 5:30:07नहीं बोलना चाहिए था क्योंकि इसमें
- 5:30:09तुम्हारी कोई गलती नहीं थी। पर इसमें उसकी
- 5:30:12भी कोई गलती नहीं है। वो बेचारी तो बस यही
- 5:30:15चाहती थी कि उसकी बेटी की सगाई में कुछ
- 5:30:17ऊंचनीच ना हो। अभी राजकुमार जी आगे भी कुछ
- 5:30:20कहते कि उससे पहले ही बृजभूषण जी शिप्रा
- 5:30:23के पास आए और उसे समझाते हुए बोले अरे
- 5:30:26शिप्रा बेटी तुम तो अपनी बड़ी मां की आदत
- 5:30:29जानती हो। वो इतनी समझदार होती तो बात ही
- 5:30:32क्या थी? उसकी बेवकूफी भरी बातों से मैं
- 5:30:35खुद शर्मिंदा [संगीत] हूं। तुम भूल जाओ
- 5:30:37उसकी बातों को। शिप्रा ने एक नजर अपने
- 5:30:39बड़े पापा की तरफ देखा। फिर उसने अपनी नजर
- 5:30:42फेर ली। इस बीच बिंदु [संगीत] जी बीना जी
- 5:30:45को लेकर वहां से हट गई थी। वो समझती थी कि
- 5:30:47इस समय सरला जी का वहां से हट जाना ही सही
- 5:30:50था। तभी नैना जी को भी अपनी गलती का एहसास
- 5:30:53हुआ और वो शिप्रा के पास दोबारा आकर धीरे
- 5:30:55से बोली, शिप्रा तुम तो जानती हो अपनी
- 5:30:58बड़ी मां को। ऐसे शुभ घड़ी में उनकी
- 5:31:00नौटंकी और बढ़ जाती है। चलो चलकर तुम
- 5:31:04राधिका से मिलो। वो तुम्हारे बारे में पूछ
- 5:31:06भी रही थी। बीना जी के वहां से जाने के
- 5:31:08बाद शिप्रा का भी मन थोड़ा शांत हुआ। उसे
- 5:31:11भी लगा कि कहीं वह ओवर रिएक्ट तो नहीं कर
- 5:31:13रही है। वो अपनी बड़ी मां की आदत से तो
- 5:31:16अच्छी तरह वाकिफ थी। उनके बच्चों से
- 5:31:18ज्यादा कोई उनके परिवार में तरक्की करे तो
- 5:31:20[संगीत] यह बात उन्हें पसंद नहीं आती थी।
- 5:31:22पहले जब जिंग मर्चेंडाइज पॉपुलर हुआ था,
- 5:31:25तभी से वह उनकी आंखों में खटकने लगी थी और
- 5:31:27अब तो वह फैब्रिक ट्रेंड की सीईओ बन गई
- 5:31:30थी। [संगीत] यह बात तो उनके लिए और भी जले
- 5:31:32पर नमक छिड़कने जैसी थी। मन थोड़ा शांत
- 5:31:35होने पर उसने अपनी बुआ से कहा, "आको और भी
- 5:31:38बहुत काम होंगे। बुआ, आप उन्हें देखिए।
- 5:31:40मैं खुद जाकर राधिका से मिल लूंगी। इतना
- 5:31:43कहकर उसने मेघना का हाथ पकड़ा और एक तरफ
- 5:31:45बढ़ [संगीत] गई। मेघना शिप्रा का मूड चेंज
- 5:31:48करने की नियत से मस्खरे अंदाज में बोली।
- 5:31:51तुम्हारी आंटी भी हद है। वो कहीं भी शुरू
- 5:31:53हो जाती हैं। मुझे [संगीत] लगता है दुनिया
- 5:31:56में वह एक ही पीस हैं। शिप्रा ने घूर कर
- 5:31:59मेघना को देखा। वह समझ रही थी कि मेघना
- 5:32:02उसका मूड चेंज करने का प्रयास कर रही है।
- 5:32:04फिर उसने हल्की मुस्कान के साथ कहा, वैसे
- 5:32:07मानना पड़ेगा तुम पर शौर्य का कुछ तो
- 5:32:09प्रभाव पड़ा है। चलते-चलते [संगीत]
- 5:32:11शिप्रा रुक गई और मेघना को देखते हुए
- 5:32:13बोली, "क्या मतलब हुआ तुम्हारी इस बात
- 5:32:15का?" मेघना मुस्कुराते हुए बोली, क्या आज
- 5:32:18से पहले तुमने कभी अपनी बड़ी मां [संगीत]
- 5:32:20को इस तरह जवाब दिया था? पर आज तो तुमने
- 5:32:22सारी सीमाएं तोड़ दी। आज तुम्हारी ईगो को
- 5:32:25अपनी इंसल्ट बर्दाश्त नहीं हुई। वैसे ही
- 5:32:28शौर्य को भी अपना ईगो बड़ा प्यारा है।
- 5:32:30शिप्रा भी इस बारे में सोचने लगी। मेघना
- 5:32:33सही कह रही थी। वो आज तक अपनी बड़ी मां का
- 5:32:35ताना सुनती आ रही थी। पर उसने पलट कर कभी
- 5:32:38उन्हें जवाब नहीं दिया था। कुछ देर पहले
- 5:32:40हुई घटना के बारे में सोचते हुए शिप्रा
- 5:32:42बोली शायद तुम जो कह रही हो वह सही हो
- 5:32:45सकता है या इसका कारण यह भी हो सकता है कि
- 5:32:48अब अगर मैं अपनी मम्मी पापा को छोड़ दूं
- 5:32:50तो बाकी सबका व्यवहार अब मुझे अपने लिए
- 5:32:52खोखला सा लगता है। सबके व्यवहार अब मुझे
- 5:32:55अपने लिए बनावटी से लगते हैं। वैसे देखा
- 5:32:58जाए तो दादाजी ने आकर बड़ी मां को चुप
- 5:33:00कराने की कोशिश की। पर पता नहीं क्यों
- 5:33:03मुझे उनका बीच में बोलना भी अधूरा अधूरा
- 5:33:05सा लगा। अब तक हॉल में गेस्टों की संख्या
- 5:33:08बढ़ गई थी। शिप्रा ने उस ओर ध्यान दिया
- 5:33:10जहां [संगीत] राधिका खड़ी थी। वो भी अपनी
- 5:33:13दोस्तों से घिरी हुई थी। शिप्रा ने महसूस
- 5:33:15किया कि अभी शायद वो लड़का वहां नहीं आया
- 5:33:17था जिसके साथ राधिका की इंगेजमेंट होने
- 5:33:19वाली थी। शिप्रा राधिका के पास पहुंच गई।
- 5:33:22राधिका ने शिप्रा को देखते ही अपना कंसर्न
- 5:33:25दिखाते हुए कहा, "अरे शिप्रा, तुम आ गई?"
- 5:33:28"मैंने सुना कि तुम्हारी बड़ी मामी से कुछ
- 5:33:30कहासनी हो गई?"
- 5:33:31शिप्रा ने अपने चेहरे पर नकली मुस्कान
- 5:33:33लाते हुए कहा, "ऐसा तो कुछ नहीं हुआ।"
- 5:33:36हां, उनका जो मेरे लिए प्यार है, वह छलक
- 5:33:39कर बाहर आ गया था। शिप्रा की बात सुनकर
- 5:33:42राधिका खिसियानी सी हंसी-हंसी। फिर वो
- 5:33:45शिप्रा के आसपास देखते हुए बोली, "हमारे
- 5:33:48प्यारे जीजाजी कहां है?" वो दिखाई नहीं दे
- 5:33:50रहे हैं। शिप्रा ने अपने चेहरे पर
- 5:33:52मुस्कुराहट लाते हुए कहा, "अभी वो आया
- 5:33:55नहीं है।" आएगा तो दिखाई भी दे जाएगा। और
- 5:33:58कुछ नहीं तो तुम्हें बधाई के दो बोल तो
- 5:34:00बोल ही जाएगा। मेरी तरफ से भी तुम्हें
- 5:34:02तुम्हारी इंगेजमेंट की बहुत-बहुत बधाई।
- 5:34:05राधिका मुस्कुरा कर बोली थैंक यू। अभी
- 5:34:08दोनों बात कर ही रही थी कि राहुल वहां आया
- 5:34:10और शिप्रा से बोला दीदी आपको फूफा जी अपने
- 5:34:13पास बुला रहे हैं। शिप्रा को समझ नहीं आया
- 5:34:16कि अब वो उसे क्यों बुला रहे हैं। अभी तो
- 5:34:18वह उनके पास से ही आई थी। पर फिर भी वह
- 5:34:20राहुल के साथ वापस अपने फूफा जी [संगीत]
- 5:34:22के पास जाने के लिए चल दी। उनके पास
- 5:34:25पहुंचकर उसने देखा कि इस समय उसके फूफा जी
- 5:34:27के साथ एक 35-40 साल का शख्स खड़ा था।
- 5:34:30शिप्रा [संगीत] जब राजकुमार टंडन जी के
- 5:34:32पास पहुंची तो राजकुमार जी ने अपने साथ
- 5:34:34खड़े शख्स से शिप्रा का परिचय कराते हुए
- 5:34:36कहा शिप्रा इनसे मिलो। यह हैं अशोक
- 5:34:40सोलंकी। अशोक सोलंकी से परिचय कराने के
- 5:34:43बाद राजकुमार जी ने शिप्रा की तरफ इशारा
- 5:34:45करते हुए कहा और [संगीत] यही शिप्रा है
- 5:34:47जिसके बारे में आप पूछ रहे थे। शिप्रा ने
- 5:34:50हाथ जोड़कर अशोक सोलंकी को नमस्कार किया।
- 5:34:52उसे समझ नहीं आया कि अशोक सोलंकी उसके
- 5:34:54बारे में क्यों पूछ रहे थे। कहिए मैं आपकी
- 5:34:57क्या सेवा कर सकता हूं। शिप्रा अपने माथे
- 5:34:59पर बल डालते हुए बोली। राजकुमार जी ने
- 5:35:02अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा, इनका
- 5:35:04विशालगढ़ में अपेरल मैन्युफैक्चरिंग का
- 5:35:06बहुत बड़ा आउटलेट है। इनका अपेरल ज्यादातर
- 5:35:08एक्सपोर्ट ही होता है। अशोक जी तुम्हारी
- 5:35:11कंपनी के साथ बिजनेस करना चाहते हैं।
- 5:35:13इसलिए यह तुमसे मिलना चाहते थे। तो यह बात
- 5:35:16थी। इसीलिए राजकुमार जी आज उसको कुछ
- 5:35:18ज्यादा ही सम्मान दे रहे थे। शिप्रा ने मन
- 5:35:20ही मन सोचा। शिप्रा ने अशोक जी की तरफ
- 5:35:22देखा जैसे पूछ रही हो। कहिए आप मुझसे
- 5:35:25क्यों मिलना चाहते थे? अशोक सोलंकी ने
- 5:35:28शिप्रा को देखा तो उनकी आंखों में एक
- 5:35:30विशेष चमक आ [संगीत] गई थी। उनकी निगाह तो
- 5:35:32शिप्रा के ऊपर ही जम गई थी। उन्हें शायद
- 5:35:34उम्मीद नहीं थी कि शिप्रा की खूबसूरती इस
- 5:35:37कदर किसी को पागल करने वाली होगी। अशोक
- 5:35:39सोलंकी की आंखों में शिप्रा को अपने लिए
- 5:35:41गलत इरादा साफ नजर आया था। अशोक सोलंकी
- 5:35:44शिप्रा को तारीफ भरी नजरों से घूरते हुए
- 5:35:46कहा। सच में मैंने आपके बारे में जैसा
- 5:35:49सुना था आप तो उससे भी बढ़कर खूबसूरत हैं।
- 5:35:52आपको अपनी नजरों पर कंट्रोल रखना चाहिए।
- 5:35:53मिस्टर सोलंकी आंखें आपके दिल के इरादे को
- 5:35:56बहुत हद तक बयान कर देती हैं। मुझे आपको
- 5:35:58समझाने [संगीत] की जरूरत नहीं है। जहां तक
- 5:36:01रही मेरी तारीफ करने की बात, आप वो फिर
- 5:36:03कभी कर लीजिएगा। अभी तो आप सिर्फ यह बताइए
- 5:36:05कि आप मुझसे किस लिए मिलना चाहते थे? अशोक
- 5:36:08सोलंकी अपनी बातों को चाशनी में लपेट कर
- 5:36:10बोला, अब तो हम रिश्तेदार होने जा रहे हैं
- 5:36:12शिप्रा जी। टंडन जी ने तो बता ही दिया कि
- 5:36:15मेरा अपेरल मैन्युफैक्चरिंग का बहुत बड़ा
- 5:36:16आउटलेट है। जिसके लिए कच्चा माल मैं
- 5:36:18अलग-अलग कंपनियों से लेता हूं। क्योंकि
- 5:36:20आपकी कंपनी भी अपेरल मैन्युफैक्चरिंग के
- 5:36:22लिए जरूरी सामान बड़े लेवल पर निर्माण
- 5:36:24करती है और आसानी से प्रोवाइड भी करा सकती
- 5:36:26है। तो क्यों ना हम इसके लिए आपस में डील
- 5:36:28कर लें। आपसे अगर हमें कुछ फेवर मिल जाएगा
- 5:36:31[संगीत] तो इससे हमें जरूर बहुत फायदा
- 5:36:32होगा। राजकुमार जी अशोक जी को शिप्रा की
- 5:36:35तरफ से भरोसा देते हुए बोले आप चिंता ना
- 5:36:38करें अशोक जी शिप्रा जरूर आपकी बातों को
- 5:36:40ध्यान में रखेंगी। आखिर एक रिश्तेदार
- 5:36:42[संगीत] दूसरे रिश्तेदार के काम तो आता ही
- 5:36:44है। शिप्रा व्यवसायिक मुस्कान के साथ
- 5:36:46बोली, "यह कोई बड़ी बात नहीं है [संगीत]
- 5:36:48अशोक जी। आखिर हमें भी अपना माल सप्लाई तो
- 5:36:50करना ही है। इस तरह ऐसे माहौल में इस तरह
- 5:36:53की बातें करना ठीक नहीं है। इसके लिए हम
- 5:36:56अलग से एक मीटिंग [संगीत] रख सकते हैं
- 5:36:57जिसमें बाकी टर्म एंड कंडीशन पर बात कर
- 5:36:59सकते हैं। हम बस यही कर सकते हैं कि फूफा
- 5:37:02जी के कहने पर [संगीत] आपको कुछ फेवरेबल
- 5:37:04सपोर्ट तो दे ही सकते हैं। अशोक सोलंकी
- 5:37:06उत्साहित स्वर में बोला अगर ऐसी बात है तो
- 5:37:09क्यों ना अभी ही हम इस बारे में एक मीटिंग
- 5:37:11कर लेते हैं। अगर आप कहें तो अभी हम इस
- 5:37:13होटल में एक कमरा रिजर्व कर लेते हैं।
- 5:37:15जहां हम इत्मीनान से अपनी मीटिंग कर सकते
- 5:37:17हैं। शिप्रा ने अभी मीटिंग रखने से अशोक
- 5:37:20जी को साफ मना करते हुए कहा, "आप तो कुछ
- 5:37:22ज्यादा ही जल्दी में हैं। अशोक जी, पर यह
- 5:37:24इसके लिए सही समय नहीं है। अभी मैं अपनी
- 5:37:27कजिन की इंगेजमेंट पार्टी में आई हुई हूं
- 5:37:29और यहां आकर भी बिजनेस की बातें करना सही
- 5:37:31नहीं है। मैंने कहा ना जल्दी ही हम इसके
- 5:37:34[संगीत] लिए एक सेपरेट मीटिंग रखेंगे।"
- 5:37:36शिप्रा की बात सुनकर अशोक जी राजकुमार
- 5:37:38टंडन की ओर देखने लगे। राजकुमार जी अशोक
- 5:37:40सोलंकी को भरोसा देते हुए बोले आप
- 5:37:43निश्चिंत रहें अशोक [संगीत] जी जब शिप्रा
- 5:37:45ने कहा है तो वह जरूर जल्दी ही आपसे अपनी
- 5:37:47मीटिंग रखेंगी और आप दोनों के बीच बिजनेस
- 5:37:49रिलेशन भी जरूर आगे बढ़ेगा। [संगीत]
- 5:37:51शिप्रा को समझ नहीं आ रहा था कि अशोक
- 5:37:54सोलंकी को उससे बात करने की इतनी जल्दी
- 5:37:56क्यों है? कुछ सोचकर उसने अशोक सोलंकी से
- 5:38:00उसकी फर्म का नाम पूछा। आपकी फर्म का नाम
- 5:38:03क्या है? अशोक सोलंकी सकुचाते हुए बोला
- 5:38:07एएस मिल लिमिटेड जैसे ही शिप्रा ने अशोक
- 5:38:11सोलंकी की कंपनी [संगीत] का नाम सुना उसका
- 5:38:13माथा ठनका। उसने पहले भी इस कंपनी का नाम
- 5:38:17सुन [संगीत] रखा था। उसकी इस कंपनी के
- 5:38:19मैनेजर से पहले मीटिंग भी हो रखी थी।
- 5:38:22जिसमें उसने इनके साथ काम करने से साफ-साफ
- 5:38:25मना कर दिया था। एएस मिल का रेपुटेशन पहले
- 5:38:28ही मार्केट [संगीत] में बहुत खराब था।
- 5:38:30पहले जिन कंपनियों से भी वह कच्चा माल
- 5:38:32लेते रहे हैं, किसी की भी देनदारी
- 5:38:34उन्होंने समय पर पूरी नहीं की। पूरी करने
- 5:38:37की तो बात [संगीत] ही क्या? जब एक कंपनी
- 5:38:39की देनदारी ज्यादा हो जाती है, तो वह उससे
- 5:38:41काम बंद करके दूसरी कंपनी के साथ काम करना
- 5:38:44शुरू कर देती है। इस तरह एएस मिल ने
- 5:38:47मार्केट की ज्यादातर कंपनियों के साथ यही
- 5:38:49कर रखा था। जिसके कारण कोई भी कंपनी अब
- 5:38:52एएस मिल को उधारी में माल देना बंद कर
- 5:38:54चुकी थी।
- 5:38:55यही कारण था कि शिप्रा ने पहले की मीटिंग
- 5:38:57[संगीत] में एएस मिल के प्रपोजल को ठुकरा
- 5:39:00दिया था। अब शिप्रा को अशोक सोलंकी की
- 5:39:02जल्दबाजी समझ आ रही थी। इसी समय उसका
- 5:39:05ध्यान हॉल के दरवाजे की तरफ गया जहां से
- 5:39:08उसे हॉल में शौर्य प्रवेश करता दिखाई
- 5:39:10दिया। इस समय वो शिप्रा के द्वारा सिलेक्ट
- 5:39:13किए गए उसी सूट में था जिसे शिप्रा ने उसे
- 5:39:15पहनने के लिए दिया था। शौर्य की
- 5:39:18स्मार्टनेस उसे भीड़ से अलग कर देती थी।
- 5:39:21हॉल में मौजूद जवान लड़कियों का ध्यान
- 5:39:23बरबसी शौर्य की तरफ चला गया। शिप्रा अशोक
- 5:39:26सोलंकी से एक्सक्यूज करके वहां से चली गई।
- 5:39:29अशोक सोलंकी शिप्रा को पीछे से जाते हुए
- 5:39:31देखता रहा। अशोक सोलंकी ने शंका भरे स्वर
- 5:39:34में पूछा, राजकुमार जी, क्या आपको लगता है
- 5:39:37कि आपकी यह भतीजी हमारे साथ काम करेगी?
- 5:39:40पहले इसने हमारे साथ काम करने से मना कर
- 5:39:42दिया था। राजकुमार जी ने अशोक सोलंकी को
- 5:39:45आश्वस्त करने की कोशिश करते हुए कहा, आपको
- 5:39:47भी जरा अपनी कंपनी की रेपुटेशन पर ध्यान
- 5:39:49देना चाहिए। मिस्टर अशोक जहां तक आपकी
- 5:39:52कंपनी के साथ फैब्रिक ट्रेंड के डील करने
- 5:39:54की बात है, तो मैं इसको लेकर अकेले में भी
- 5:39:56शिप्रा से बात करूंगा। मुझे लगता नहीं कि
- 5:39:59वह यह जानने के बाद कि आपके परिवार में
- 5:40:00हमारी रिशेदारी होने जा रही है। उसके बाद
- 5:40:03भी वह आपके साथ डील करने से पीछे हटेगी।
- 5:40:06अशोक सोलंकी की नजर अभी भी शिप्रा की पीठ
- 5:40:08पर जमी हुई थी। उसने कहा [संगीत] जो भी
- 5:40:11कहिए आपकी भतीजी की खूबसूरती के बारे में
- 5:40:13जो मैंने सुना था वो उससे बढ़कर निकली।
- 5:40:16मुझे तो उस भिखारी से जलन होने लगी है
- 5:40:18जिसके साथ इसकी शादी हुई है। साले ने क्या
- 5:40:22किस्मत पाई है? राजकुमार जी एंबरेस होते
- 5:40:24हुए बोले, आप यह कैसी बात कर रहे हैं अशोक
- 5:40:27जी? शिप्रा मेरी वाइफ की भतीजी है। अशोक
- 5:40:30सोलंकी की बातों से लग रहा था कि उस पर
- 5:40:32नशा हावी होने लगा है। तभी वह बहकी बहकी
- 5:40:36बातें करने लगा। उसने राजकुमार जी की बात
- 5:40:38पर कहा, "आप भी कैसी बात कर रहे हैं टंडन
- 5:40:40साहब? वो आपकी वाइफ की भतीजी है, बेटी
- 5:40:43नहीं। तो क्यों आप इतना शर्मिंदा महसूस कर
- 5:40:46रहे हैं? अब उसकी खूबसूरती है ही इतनी
- 5:40:49कातिलाना कि कोई कैसे खुद पर कंट्रोल
- 5:40:51करें। राजकुमार जी को पता था कि अशोक
- 5:40:54सोलंकी अय्याश टाइप का आदमी है। यही कारण
- 5:40:57है कि वह अपनी कंपनी पर ज्यादा ध्यान नहीं
- 5:40:59देता है। विशालगढ़ के प्रभावशाली परिवारों
- 5:41:02में से एक होने के कारण वो दूसरों पर अपनी
- 5:41:04धौस जमाकर भी अपना काम करना जानता है। जिस
- 5:41:08तरह से वह शिप्रा को जाते हुए देख रहा था।
- 5:41:10[संगीत] उससे राजकुमार जी को यह भय भी हुआ
- 5:41:12कि कहीं अशोक सोलंकी इस पार्टी में कोई
- 5:41:14उल्टा सीधा काम ना कर दे। [संगीत]
- 5:41:16शौर्य हॉल में पहुंचने के बाद इधर-उधर
- 5:41:19देखने लगा। वो किसी जाने पहचाने चेहरे की
- 5:41:22तलाश में था। शिप्रा ने उसे आते ही देख
- 5:41:24लिया था। इसलिए वो सीधा शौर्य के पास
- 5:41:27पहुंच गई। शौर्य ने भी शिप्रा को अपनी ओर
- 5:41:30आते देख लिया था। इसलिए वो अपनी जगह पर ही
- 5:41:33खड़ा हो गया। शिप्रा मेघना के साथ उसके
- 5:41:36पास पहुंची। आखिर तुम आ ही गए। [संगीत]
- 5:41:38मैं कब से तुम्हारे आने का इंतजार कर रही
- 5:41:40थी? मेघना आगे बढ़कर शौर्य से हाथ मिलाते
- 5:41:44हुए बोली। शिप्रा ने गौर किया कि हॉल में
- 5:41:47मौजूद बहुत सी जवान लड़कियों का ध्यान
- 5:41:49बरबस ही शौर्य की तरफ चला गया था। यह
- 5:41:52देखकर शिप्रा को अच्छा भी लगा। वहां मौजूद
- 5:41:55ज्यादातर लोग शौर्य [संगीत] की इस असलियत
- 5:41:57से वाकिफ नहीं थे कि यही शिप्रा का पति
- 5:41:59है। एक समय था जब शिप्रा के लिए यह
- 5:42:02शर्मिंदगीगी की बात होती थी कि शौर्य उसका
- 5:42:05पति है। क्योंकि वह खुद भी उसे मन से
- 5:42:07स्वीकार नहीं कर पाई थी। लेकिन तब की
- 5:42:09स्थिति और आज की स्थिति में शौर्य के भीतर
- 5:42:12इतना परिवर्तन आ चुका था कि अब उसे दूसरी
- 5:42:14लड़कियों का शौर्य की तरफ आकर्षित होना
- 5:42:16खलने लगा था। उसे खुद से ही जलन महसूस हो
- 5:42:19रही थी। हॉल में मौजूद लड़कियों की आंखों
- 5:42:22में शौर्य के लिए आकर्षण देखकर शिप्रा
- 5:42:25उसके पास गई और उसकी बाह में अपनी बाह
- 5:42:28फंसाकर खड़ी हो गई। अब कोई भी उन दोनों को
- 5:42:30एक साथ देखकर उन्हें कपल समझ सकता था। आज
- 5:42:34से पहले शिप्रा ने किसी भी सार्वजनिक
- 5:42:36स्थान पर इस तरह की हरकत नहीं की थी।
- 5:42:38इसलिए शौर्य भी आश्चर्य से उसकी ओर देखने
- 5:42:40लगा। मेघना के चेहरे पर भी शिप्रा की इस
- 5:42:44हरकत को देखकर मुस्कान आ गई थी। लेकिन
- 5:42:46शिप्रा को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।
- 5:42:48आखिर शौर्य ने पूछ ही लिया क्या है यह? आज
- 5:42:52से पहले तो तुमने कभी इस तरह की हरकत नहीं
- 5:42:53की। फिर आज इसका क्या मतलब है? क्यों? ऐसा
- 5:42:57कोई नियम है कि जो आज से पहले नहीं हुआ वो
- 5:42:59आगे भी कभी नहीं होगा। कहते हुए शिप्रा ने
- 5:43:02शौर्य की बाह को और कसकर थाम लिया। शौर्य
- 5:43:06को शिप्रा का यह अंदाज पसंद आया। वो साफ
- 5:43:08देख पा रहा था कि वहां मौजूद लड़कियों की
- 5:43:11निगाहों में शिप्रा के लिए जलन स्पष्ट
- 5:43:13दिखाई दे रही थी। इसका एक बड़ा कारण यह भी
- 5:43:16था कि उन लड़कियों को शौर्य की हिस्ट्री
- 5:43:18के बारे में कुछ पता नहीं था। अगर उन्हें
- 5:43:21पता होता कि यही शौर्य पहले भिखारी हुआ
- 5:43:23करता था तो शायद उनके मन में बनी शौर्य की
- 5:43:26वह छवि उसी वक्त समाप्त हो जाती। शिप्रा
- 5:43:29शौर्य को लेकर अपने पापा के पास पहुंची।
- 5:43:32शौर्य ने राजदीप जी और बीना जी को झुककर
- 5:43:34प्रणाम किया। राहुल ने जब शौर्य को देखा
- 5:43:37तो वह भी उसके पास आकर उससे गले मिल लिया।
- 5:43:40सबसे ज्यादा [संगीत] खुश तो रागिनी शौर्य
- 5:43:42से मिलकर हुई थी। उसकी नजर में शौर्य असली
- 5:43:45हीरो था क्योंकि [संगीत] वह यही समझती थी
- 5:43:47कि स्टेट टेनिस टीम में उसका सिलेक्शन
- 5:43:49सिर्फ शौर्य के कारण ही हुआ है। शौर्य ने
- 5:43:52बलवंत राय को भी पार्टी में देखा था लेकिन
- 5:43:55उसने उनके पास जाने का कोई प्रयास नहीं
- 5:43:56किया। उसने बलवंत राय के साथ धर्मवीर
- 5:43:59रायजादा को भी पार्टी में देखा। उसे
- 5:44:02आश्चर्य हुआ कि इतना सब होने के बाद भी
- 5:44:05बलवंत जी धर्मवीर रायजादा के साथ नजर आ
- 5:44:08रहे थे। उसने शिप्रा से [संगीत] पूछा क्या
- 5:44:10तुम्हारे दादाजी अभी भी धर्मवीर रायजादा
- 5:44:13के साथ बिजनेस कर रहे हैं? क्या करेंगे?
- 5:44:15उनके पास दूसरा कोई ऑप्शन ही नहीं है।
- 5:44:18उन्होंने पहले ही धर्मवीर रायजादा के साथ
- 5:44:20वसंत विहार में एक प्रोजेक्ट में अच्छा
- 5:44:22खासा इन्वेस्टमेंट कर दिया है। अब चाहकर
- 5:44:25भी [संगीत] इस प्रोजेक्ट से बाहर नहीं जा
- 5:44:26सकते। इसलिए मजबूरी की दोस्ती है। पर
- 5:44:30विहान के कर्मों के खुलासे से एक [संगीत]
- 5:44:32चीज अच्छी हुई है कि अब वह अपने किसी
- 5:44:34बच्चे की शादी विहान से कराने के पक्ष में
- 5:44:36नहीं है। दिखाने के लिए धर्मवीर रायजादा
- 5:44:40भी यही दिखाते हैं कि [संगीत] उन्हें
- 5:44:41विहान के करतूतों की कोई जानकारी नहीं थी।
- 5:44:44वह भी विहान की करतूत जानकर बहुत आहत हैं।
- 5:44:47बस इस तरह से ही इनकी पार्टनरशिप चल रही
- 5:44:50है। शिप्रा ने शौर्य को दोनों के गठबंधन
- 5:44:53के बारे में बताया। तभी शौर्य ने देखा कि
- 5:44:55बलवंत राय धर्मवीर [संगीत] रायजादा के साथ
- 5:44:58उसकी तरफ ही आ रहे थे। उन्हें अपनी ओर आते
- 5:45:01देखकर शौर्य ने शिप्रा से कहा, "यह क्या?
- 5:45:04तुम्हारे दादाजी हमारी तरफ क्यों आ रहे
- 5:45:06हैं?" शौर्य की बात सुनकर शिप्रा ने उसी
- 5:45:09दिशा में देखा जिधर उसने इशारा किया था।
- 5:45:12अपने दादाजी को अपनी तरफ आते देखकर शिप्रा
- 5:45:14असमंजस भरे स्वर में बोली मुझे नहीं पता
- 5:45:17कि वह इधर क्यों आ रहे हैं। अपने दादाजी
- 5:45:20को पास आते देखकर शिप्रा ने शौर्य की बाह
- 5:45:23छोड़ दी और सीधी खड़ी हो गई। वो जब से आई
- 5:45:26थी उसने [संगीत] अपने दादाजी का अभिवादन
- 5:45:28तक नहीं किया था। अब वो थोड़ा नर्वस महसूस
- 5:45:31करने लगी। उसे पिछली बार की घटना याद आ गई
- 5:45:34जब उसके दादाजी ने शौर्य को उसकी औकात
- 5:45:36दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
- 5:45:39हालांकि यह बात अलग थी कि उस समय शौर्य ने
- 5:45:42उल्टा उन्हें ही उनकी असली औकात दिखा दी
- 5:45:44थी। शौर्य ने देखा कि बलवंत [संगीत] राय
- 5:45:47लगभग उसके पास पहुंच चुके थे। उसी समय
- 5:45:49उसने अपने पास से गुजर रहे एक वेटर की
- 5:45:51ट्रे से ड्रिंक का एक गिलास उठा लिया और
- 5:45:54उसका एक घूंट लेने लगा। उसने बलवंत राय को
- 5:45:57पूरी तरह इग्नोर करने की कोशिश की। बलवंत
- 5:46:00राय ने एक उचड़ती निगाह शौर्य पर डाली और
- 5:46:02फिर शिप्रा की तरफ मुड़ गए। शिप्रा ने झुक
- 5:46:05कर उन्हें प्रणाम किया। क्या तुम इसके साथ
- 5:46:07रहकर [संगीत] सारी तहजीब भूल गई हो? अपने
- 5:46:09बड़ों का सम्मान कैसे किया जाता है? यह भी
- 5:46:11याद नहीं रहा। बलवंत राय ने नाराजगी भरे
- 5:46:14स्वर में कहा। हालांकि ऐन वक्त पर शिप्रा
- 5:46:17के द्वारा प्रणाम कर लिए जाने पर उनके
- 5:46:20चेहरे की सख्ती में थोड़ी नरमी भी आ गई
- 5:46:22थी। सही कहा बलवंत जी आपने। यह आजकल के
- 5:46:25बच्चे पता नहीं किस दुनिया में रहते हैं।
- 5:46:27उन्हें तो लगता है कि उनके बड़े उनके
- 5:46:29दुश्मन हैं। देखिए तो यह शिप्रा यह मुझसे
- 5:46:32जब भी मिलती थी तो आगे बढ़कर प्रणाम करती
- 5:46:34थी। पर अभी इससे एक अभिवादन [संगीत]
- 5:46:37के बोल तक नहीं बोले गए। धर्मवीर रायजादा
- 5:46:39ने और आग में घी डालने का काम किया। उनके
- 5:46:42मन में शौर्य के लिए तो पहले से ही गुस्सा
- 5:46:44था। पिछली बार विहान की इंगेजमेंट युविका
- 5:46:47से नहीं हो पाई थी तो उसका सबसे बड़ा कारण
- 5:46:49शौर्य ही था। शौर्य के कारण ही पिछली बार
- 5:46:52विहान के कर्म उजागर हुए थे। आज की तारीख
- 5:46:55में उनका सबसे बड़ा दुश्मन कोई था तो वह
- 5:46:58शौर्य ही था जिसने उनके बनाए बनाए प्लान
- 5:47:00पर पानी फेर दिया था। यह तो शौर्य के लिए
- 5:47:03बलवंत राय का गुस्सा ही था जिसके कारण उन
- 5:47:06दोनों की पार्टनरशिप चल रही थी। शिपरा ने
- 5:47:09धर्मवीर रायजादा की तरफ देखते हुए अपने
- 5:47:11दिल में दबे गुबार को बाहर आने से नहीं
- 5:47:13रोक पा रही [संगीत] थी। सम्मान दिल से आना
- 5:47:15चाहिए अंकल। जब दिल में वो भाव रहा ही
- 5:47:18नहीं तो मैं लोगों को दिखाने के लिए अच्छा
- 5:47:20बनने का नाटक नहीं कर सकती। जहां तक
- 5:47:22दादाजी [संगीत] के सम्मान की बात है तो वह
- 5:47:24मेरे दादाजी हैं। मैं चाहकर भी इनका अनादर
- 5:47:27नहीं कर सकती। इनका जो कर्ज मुझ पर है
- 5:47:30उससे मैं कभी भी उण नहीं हो सकती। अभी तक
- 5:47:33मैं इनके पास नहीं जा सकी। उसका कारण आपको
- 5:47:35भी पता ही होगा। यहां आते ही [संगीत] जिस
- 5:47:38तरह की घटना हो गई थी उस स्थिति में मुझे
- 5:47:40खुद को ही सामान्य बनाए रखना मुश्किल था।
- 5:47:42तो और किसी बात का होश कहां रहता? फिर भी
- 5:47:45जैसे ही यह मेरे पास [संगीत] आए, मुझे
- 5:47:47इनके सम्मान की ही पड़ी थी। मैं मानती हूं
- 5:47:50यह मेरी गलती थी कि मैंने अभी तक आगे
- 5:47:52बढ़कर इनका अभिवादन नहीं किया था। इसके
- 5:47:54लिए सबसे बड़ा कारण तो आप ही थे क्योंकि
- 5:47:57मैं आपके सामने [संगीत] आना नहीं चाहती थी
- 5:47:59और जब से मैं यहां आई हूं तब से आप दादाजी
- 5:48:01के साथ ही चिपके हुए थे। शिप्रा ने अपने
- 5:48:04दिल में दबे हुए सारे उद्गार बाहर निकाल
- 5:48:06दिए थे। बलवंत जी को भी शिप्रा से जो
- 5:48:08नाराजगी थी वो उसकी बात सुनकर कुछ कम हो
- 5:48:11गई। उन्हें यह कारण समझ आ गया था कि
- 5:48:13शिप्रा अभी तक उनके पास आकर उनका अभिवादन
- 5:48:16क्यों नहीं कर पाई थी। लेकिन साथ ही
- 5:48:18धर्मवीर रायजादा के लिए शिप्रा के कटु
- 5:48:21शब्द सुनकर उन्हें दुख भी हुआ। हालांकि वह
- 5:48:24इसका कारण भी अच्छी तरह समझते थे। पर
- 5:48:27धर्मवीर रायजादा शिप्रा की यह सब सुनकर
- 5:48:29कहां चुप रहने वाले थे? उन्होंने तुरंत
- 5:48:32शिप्रा की बात का जवाब देना शुरू कर दिया।
- 5:48:35यह तुम नहीं बोल रही हो शिप्रा बेटी। यह
- 5:48:37जो तुम्हारी आंखों पर इस फटीचर ने अपनी
- 5:48:39मक्कारी की पट्टी चढ़ा रखी है, यह तुमसे
- 5:48:41ऐसा बुलवा रही है। एक दिन तुम्हारी आंखों
- 5:48:44से इसकी मक्कारी की पट्टी जरूर हटेगी। तब
- 5:48:47देखना तुम्हें सही गलत का एहसास होगा। पर
- 5:48:50मुझे डर इस बात का है कि उस समय तक कहीं
- 5:48:52बहुत देर ना हो जाए। धर्मवीर रायजादा ने
- 5:48:55अपनी बात को प्रभावशाली अंदाज में रखते
- 5:48:57हुए शौर्य को उसकी औकात दिखाने की भी
- 5:48:59कोशिश की। राजदीप जी और [संगीत] बीना जी
- 5:49:02भी वहीं पास में खड़े थे। धर्मवीर रायजादा
- 5:49:05की बातें उन्हें भी चुभ रही थी। लेकिन
- 5:49:07अपने पिता की वजह से वे चुप थे। हालांकि
- 5:49:10उन्हें इस बात की तसल्ली थी कि उनकी बेटी
- 5:49:13उन्हें जवाब देने में कोई कमी नहीं छोड़
- 5:49:15रही थी। यहां चल रही बातों को सुनकर
- 5:49:17बृजभूषण जी भी वहां आ गए थे। वह भी मौके
- 5:49:21की तलाश में थे। फिलहाल वह भी शिप्रा के
- 5:49:24खिलाफ नहीं जाना चाहते थे क्योंकि वो
- 5:49:26जानते थे कि बिजनेस वर्ल्ड में आजकल
- 5:49:28शिप्रा का रुतबा बहुत बड़ा हो गया था।
- 5:49:31वहीं मौजूद युविका तो सिर्फ शिप्रा की
- 5:49:34किस्मत पर जल सकती थी। धर्मवीर रायजादा की
- 5:49:37बात सुनकर शिप्रा के चेहरे पर हंसी आ गई।
- 5:49:40वो अपने चारों तरफ देखते हुए बोली देखिए
- 5:49:43तो मक्कारी की बात कर भी कौन रहा है?
- 5:49:45जिसकी मक्कारी के किस्से पहले ही
- 5:49:47सार्वजनिक हो चुके हैं वो हमें मक्कारी पर
- 5:49:50उपदेश दे रहा है। वैसे आज आपका वो मक्कार
- 5:49:53बेटा नहीं दिख रहा जिसने आपका नाम बहुत
- 5:49:55रोशन किया है। उसने तो जरूर आपकी शोहरत
- 5:49:58में चार चांद लगा दिए होंगे। कभी अपने
- 5:50:00गिरेबान में झांक कर देखिएगा तो आपको खुद
- 5:50:03दिख जाएगा कि किसी मक्कार का चेहरा कैसा
- 5:50:05होता है। शिप्रा की बात सुनकर धर्मवीर
- 5:50:08रायजादा का चेहरा गुस्से से लाल हो गया।
- 5:50:10जबकि शौर्य चुपचाप शिप्रा के इस नए अंदाज
- 5:50:13[संगीत] का आनंद ले रहा था। उसे कुछ बोलने
- 5:50:15की जरूरत ही नहीं थी। बलवंत राय को भी
- 5:50:18उम्मीद नहीं थी कि शिप्रा इस तरह धर्मवीर
- 5:50:20रायजादा को सुना देगी। उन्हें धर्मवीर
- 5:50:22रायजादा के लिए बुरा भी लगा। उन्होंने
- 5:50:24शिप्रा को डांटते हुए कहा, शिप्रा क्या
- 5:50:27तुम बोलने से पहले सोचती नहीं हो कि किससे
- 5:50:28क्या बोल रही हो? धर्मवीर जी हमारे
- 5:50:30सम्मानित अतिथि हैं। अरे रहने दीजिए बलवंत
- 5:50:34जी। आप किसको समझाने की कोशिश कर रहे हैं?
- 5:50:36अब यह आपकी वो शिप्रा नहीं रही। सुशील,
- 5:50:39समझदार और संस्कारी। अब तो यह एक भिखारी
- 5:50:42के सानिध्य में रहकर अच्छे बुरे का सारा
- 5:50:44ज्ञान ही भूल गई है। अब इससे किसी के
- 5:50:47सम्मान [संगीत] की बात करना तो बेईमानी ही
- 5:50:48है। धर्मवीर रायजादा ने तंज भरे स्वर में
- 5:50:51कहा और फिर अपनी बात जारी रखते हुए बोले
- 5:50:54एक कहावत है कि आप जिसके साथ रहते हैं
- 5:50:56उसका प्रभाव आपके व्यक्तित्व पर पड़ता है।
- 5:50:59तो आप समझ ही सकते हैं कि जब यह एक भिखारी
- 5:51:02के साथ रह रही है तो उसके प्रभाव से कैसे
- 5:51:04बच सकती है। आपने अभी देखा ना? चलिए मैंने
- 5:51:08अपने बारे में मान लिया कि मैं आपके
- 5:51:09परिवार से नहीं हूं। लेकिन शिप्रा के इस
- 5:51:12भिखारी पति ने आपका सम्मान भी कहां किया।
- 5:51:15आप तो शिप्रा के दादाजी हैं। कायदे से आप
- 5:51:17तो इसके ससुर हुए। तो आपका सम्मान करना तो
- 5:51:20इसे बनता है। लेकिन इसने एक बार भी आपकी
- 5:51:23तरफ सम्मान भरी नजरों से देखा हो। यह तो
- 5:51:25कहिए। धर्मवीर रायजादा अब पूरी तरह अपनी
- 5:51:28सीमा भूल चुके थे। इस भिखारी का नसीब
- 5:51:31अच्छा है कि बीबी सीईओ मिल गई है। अब और
- 5:51:34कुछ करने की जरूरत ही क्या है? बीवी के
- 5:51:36पैसों पर अय्याशी हो ही रही है। बीवी को
- 5:51:39अपने घर परिवार से अलग कर ही दिया [संगीत]
- 5:51:40है और अब तो उसकी बातों में भी अच्छी तरह
- 5:51:42आ चुकी है। यह कहिए कि बोल शिप्रा रही है।
- 5:51:46लेकिन इसकी नकेल किसी और के हाथ में है।
- 5:51:48अब धर्मवीर रायजादा को इस बात का भी ध्यान
- 5:51:50नहीं रहा था कि वो कहां और क्या बोल रहे
- 5:51:53हैं। हॉल में मौजूद ज्यादातर लोगों का
- 5:51:55ध्यान अब इसी ओर था। अब तक लगभग सारे
- 5:51:58गेस्ट भी आ चुके थे। लेकिन इस वक्त सबके
- 5:52:01आकर्षण का केंद्र यह चर्चा ही बन चुकी थी।
- 5:52:04थोड़ी देर पहले तक शौर्य हॉल में मौजूद
- 5:52:06जवान लड़कियों के आकर्षण का केंद्र था।
- 5:52:08मगर अब यह खुलासा [संगीत] होने के बाद कि
- 5:52:10वह कभी भिखारी हुआ करता था और आज उसके
- 5:52:13सारे ठाट उसकी बीवी के पैसों पर हैं।
- 5:52:16लोगों का नजरिया [संगीत] अचानक उसके लिए
- 5:52:17बदल गया था। कुछ लोग उसे हैरानी से देख
- 5:52:20रहे थे तो कुछ आपस में धीमी आवाज में
- 5:52:22बातें करने लगे थे। हालांकि इसी हॉल में
- 5:52:25कुछ ऐसे भी चेहरे [संगीत] थे जिन्होंने
- 5:52:27यहां शौर्य को देखने की कल्पना तक नहीं की
- 5:52:29थी। लेकिन जब उन्होंने उसे यहां देख लिया
- 5:52:31[संगीत] था तो अब वे भी उत्सुकता से जानना
- 5:52:33चाह रहे थे कि आगे क्या होता है। उसी भीड़
- 5:52:36में एक [संगीत] ऐसी लड़की भी थी जिसकी
- 5:52:38निगाहों में शौर्य के लिए कुछ अलग ही
- 5:52:40प्यार नजर आ रहा था। वो अपनी जगह पर खड़ी
- 5:52:43शौर्य के खिलाफ बोले जा रहे एक-एक शब्द को
- 5:52:45सुन रही थी। उसकी आंखों में गुस्सा बढ़ता
- 5:52:48जा रहा था और उसकी मुट्ठियां धीरे-धीरे
- 5:52:50कसती जा रही थी। शौर्य खामोशी से पूरे
- 5:52:54घटनाक्रम को देख रहा था। कुछ देर पहले तक
- 5:52:57बात शिप्रा उसके परिवार और धर्मवीर
- 5:52:59रायजादा के बीच थी। लेकिन अब अचानक पूरा
- 5:53:03निशाना बदल चुका था। [संगीत]
- 5:53:05निशाना शौर्य बन चुका था। शिप्रा जो कुछ
- 5:53:08भी बोल रही थी उसे उसके अपने विचार मानने
- 5:53:11के बजाय ऐसा साबित करने की कोशिश की जा
- 5:53:13रही थी जैसे उसके हर शब्द के पीछे शौर्य
- 5:53:16का दिमाग काम कर रहा हो। जैसे शिप्रा की
- 5:53:19अपनी कोई सोच ही ना हो और वह महज शौर्य की
- 5:53:22एक कठपुतली हो। धर्मवीर रायजादा ने जब
- 5:53:24महसूस किया कि शिप्रा के सवालों और तर्कों
- 5:53:27का उनके पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं है तो
- 5:53:30उन्होंने बड़ी चालाकी से बातचीत [संगीत]
- 5:53:32की दिशा ही बदल दी और शौर्य उनकी नजर में
- 5:53:35वही सबसे कमजोर कड़ी था क्योंकि शौर्य पर
- 5:53:38हमला होते ही शिप्रा के अपने लोग ही उसके
- 5:53:40खिलाफ खड़े हो सकते थे। बृजभूषण जी ने भी
- 5:53:43मौके की नज़ाकत को भाप लिया। वो आगे बढ़े
- 5:53:45और बेहद समझाने वाले अंदाज में बोले, "यह
- 5:53:48जो हो रहा है, वह ठीक नहीं है। शिप्रा, हम
- 5:53:50सब तुम्हारे दुश्मन नहीं है। तुम हमारे
- 5:53:53परिवार की एक काबिल बेटी हो। लेकिन एक
- 5:53:55भिखारी के चक्कर में क्यों अपने ही परिवार
- 5:53:57की मान मर्यादा को धूमिल कर रही हो? अभी
- 5:53:59भी कुछ नहीं बिगड़ा है। छोड़ दो इसे और
- 5:54:02वापस अपने घर आ जाओ। शिप्रा ने उनकी तरफ
- 5:54:04देखा मगर कुछ नहीं बोली। तभी बलवंत राय भी
- 5:54:08आगे बढ़ाए। उन्होंने शिप्रा के कंधे पर
- 5:54:10हाथ रखा। आवाज में वही पुराना अपनापन था।
- 5:54:13लेकिन शब्दों में छिपा तिरस्कार साफ महसूस
- 5:54:15किया जा सकता था। तुम्हें यह बात क्यों
- 5:54:17नहीं समझ आती कि अब तुम एक मामूली लड़की
- 5:54:20नहीं हो। तुम्हारा स्टेटस समाज में बहुत
- 5:54:22ऊंचा हो चुका है। तुम एक फटीचर इंसान के
- 5:54:24चक्कर में क्यों अपना विवाहिस्ट बर्बाद कर
- 5:54:26रही हो? वो एक पल के लिए रुके। फिर बोले,
- 5:54:30तुम्हें पता भी है समाज में तुम्हें लेकर
- 5:54:32कैसी-कसी बातें हो रही हैं। तुम्हें लगता
- 5:54:34है यह भिखारी [संगीत] तुम जैसी लड़की को
- 5:54:35डिर्व करता है जिसे यह तक नहीं पता कि
- 5:54:38अपने से बड़ों का सम्मान कैसे किया जाता
- 5:54:40है। तुम इसकी बोली बोल रही [संगीत] हो।
- 5:54:42शिप्रा की आंखों में आक्रोश उभर आया।
- 5:54:45लेकिन बलवंत राय रुके नहीं। तुम्हारा
- 5:54:47दादाजी तुमसे रिक्वेस्ट करता है कि अब
- 5:54:49इससे आगे बढ़ जाओ। मैं मानता हूं कि
- 5:54:51शुरुआती कुछ समय इसने [संगीत] तुम्हारा
- 5:54:53साथ दिया था। लेकिन इसका यह मतलब तो नहीं
- 5:54:55कि तुम उसका बदला इस तरह उसकी पत्नी बनकर
- 5:54:57चुका हो। तुम्हें समझना चाहिए कि शीशा
- 5:55:00कितना ही चमकदार क्यों ना हो उसे हीरे की
- 5:55:02जगह नहीं दी जा सकती। एक पल के लिए पूरा
- 5:55:05हॉल शांत रहा और तभी ताली की आवाज गूंजी
- 5:55:09एक बार। फिर दूसरी बार सबकी गर्दनें एक
- 5:55:12साथ उस दिशा में [संगीत] घूम गई। शौर्य
- 5:55:14ताली बजा रहा था। उसकी नजर सीधी बलवंत राय
- 5:55:17पर थी। चेहरे पर ना गुस्सा था ना
- 5:55:20उत्तेजना। बस एक हल्की सी मुस्कान। बलवंत
- 5:55:23राय का चेहरा देखते ही देखते तमतमा उठा।
- 5:55:26अब तुम्हारी इस बदतमीजी को मैं क्या समझ?
- 5:55:28एक शौर्य ने ताली [संगीत] बजाना बंद किया।
- 5:55:30उसने एक कदम आगे बढ़ाया और बेहद शांत आवाज
- 5:55:33में कहा। एक कहावत है कुत्तों को घी हजम
- 5:55:37नहीं होता। हॉल में कुछ लोगों की नजरें
- 5:55:39झुक गई। शौर्य ने तुरंत अपनी बात आगे
- 5:55:42बढ़ाई। आप इससे यह मत समझिएगा कि मैं आपको
- 5:55:44कुत्ता कह रहा हूं। मैं तो बस आपको समझाने
- 5:55:46की कोशिश कर रहा हूं। आपको मुझसे सम्मान
- 5:55:49[संगीत] चाहिए तो मैं अभी तक आपका सम्मान
- 5:55:51ही कर रहा था। इतना कुछ होने के बाद भी
- 5:55:54आपके और आपकी पोती के बीच बातचीत चल रही
- 5:55:56थी और मैंने एक शब्द तक नहीं कहा। उसकी
- 5:55:59आवाज में अब भी शांति थी लेकिन हर शब्द
- 5:56:02सीधा वार कर रहा था। पर आपको तो मेरा चुप
- 5:56:05रहना भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था। आखिर
- 5:56:07किस तरह का सम्मान आप मुझसे [संगीत] चाहते
- 5:56:09हैं? कहीं आप यह तो नहीं चाहते थे कि आपकी
- 5:56:12पोती की तरह मैं भी झुककर आपको प्रणाम
- 5:56:13करूं। कुछ लोगों ने बेचैनी से एक दूसरे की
- 5:56:16तरफ देखा। शौर्य आगे बोला या फिर किसी
- 5:56:20पपेट [संगीत] की तरह आपके आगे पीछे डोलकर
- 5:56:22आपसे मुझे अपने दामाद के रूप में स्वीकार
- 5:56:24कर लेने की विनती करनी चाहिए थी। उसके
- 5:56:26चेहरे की मुस्कान अब गायब हो चुकी थी।
- 5:56:29लेकिन मुझे पता [संगीत] है अगर मैं ऐसा
- 5:56:31करता भी तो आप मुझे मेरी औकात दिखाने में
- 5:56:33कोई कसर नहीं छोड़ते। आप मुझसे ऐसे किसी
- 5:56:36सम्मान की उम्मीद तब करते जब आपने मुझे
- 5:56:38शिप्रा के पति या अपने दामाद के [संगीत]
- 5:56:40रूप में स्वीकार किया होता। उसने बलवंत
- 5:56:42राय की आंखों में आंखें डाल दी। आप जब
- 5:56:45मुझे कुछ मानते ही नहीं तो किस हक से यह
- 5:56:48उम्मीद करते हैं कि मैं आपके पास [संगीत]
- 5:56:49आकर आपके पैर छू। शौर्य की आवाज थोड़ी और
- 5:56:52सख्त हुई। माफ कीजिए मैं इस तरह अपनी
- 5:56:55बेइज्जती करने का अधिकार किसी को नहीं दे
- 5:56:57सकता। शुरुआती समय में मैंने कोशिश की थी
- 5:57:00लेकिन उस समय मुझे मेरी [संगीत] औकात दिखा
- 5:57:02दी गई थी। वो एक पल रुका। फिर बोला मेरा
- 5:57:06आपके लिए यही सम्मान काफी है कि मैं आपके
- 5:57:08और आपके परिवार वालों के बीच चुप रहता
- 5:57:10हूं। अगर आप मुझे कुछ मानेंगे तो यकीन
- 5:57:13कीजिए। मैं आपको उसका 10 गुना वापस
- 5:57:16करूंगा। शौर्य ने आखिरी बात बेहद ठहर कर
- 5:57:19कही। उम्मीद करता हूं मेरी बात समझ आ गई
- 5:57:21होगी। बस इतना कहकर वह चुप हो गया। हॉल
- 5:57:25में ऐसी खामोशी छाई कि जैसे किसी ने अचानक
- 5:57:27पूरी आवाज बंद कर दी हो। बलवंत राय के पास
- 5:57:30जवाब था ही नहीं। उन्हें ऐसा महसूस हो रहा
- 5:57:32था जैसे किसी ने सबके सामने उनका मुखौटा
- 5:57:35नोच कर फेंक दिया हो। गुस्सा इतना था कि
- 5:57:37अगर उन्हें अपने सम्मान की चिंता ना होती
- 5:57:39तो वह खुद आगे बढ़कर शौर्य का कॉलर पकड़
- 5:57:42लेते और दो-चार थप्पड़ रसीद कर देते।
- 5:57:44लेकिन वह जानते थे [संगीत] एक कदम गलत
- 5:57:46पड़ा तो मामला हाथ से निकल सकता था। इसलिए
- 5:57:49वह बस किसी ऐसे व्यक्ति का इंतजार कर रहे
- 5:57:51थे जो उनके सम्मान के लिए सामने आए और
- 5:57:54उनकी यह उम्मीद ज्यादा देर तक अधूरी नहीं
- 5:57:56रही। अशोक सोलंकी को जैसे अपना मौका मिल
- 5:57:58गया था। उन्हें लगा बलवंत राय के लिए
- 5:58:01सामने आकर वो राय फैमिली की नजर में हीरो
- 5:58:03बन सकते हैं। लेकिन उनके मन में सिर्फ यही
- 5:58:06भावना नहीं थी। वो शौर्य को शिप्रा के पति
- 5:58:08के [संगीत] रूप में बिल्कुल बर्दाश्त नहीं
- 5:58:10कर पा रहे थे। एक भिखारी और उसके साथ
- 5:58:13शिप्रा जैसी खूबसूरत लड़की। यह ख्याल ही
- 5:58:16उनके भीतर जलन पैदा कर रहा था। दो साल
- 5:58:19पहले कैंसर के कारण उनकी पत्नी की मौत हो
- 5:58:21चुकी थी। इस समय वह अकेले [संगीत] थे।
- 5:58:24शायद इसी अकेलेपन में उन्होंने शिप्रा को
- 5:58:26लेकर अपने मन में भविष्य के ताने-बाने भी
- 5:58:28बुनने शुरू कर दिए थे। उन्हें लग रहा था
- 5:58:31अगर किसी तरह शौर्य और शिप्रा का रिश्ता
- 5:58:33टूट जाए तो शायद अगला नंबर उनका हो सकता
- 5:58:35है। अशोक सोलंकी आगे बढ़े। मुझे समझ नहीं
- 5:58:39आ रहा कि राय फैमिली आखिर इस लड़के की बात
- 5:58:41क्यों सुन रही है। यह बलवंत जी की
- 5:58:43बेइज्जती [संगीत] किए जा रहा है और आप सब
- 5:58:45चुपचाप सुन रहे हैं। राय फैमिली के लोग भी
- 5:58:47एक दूसरे का चेहरा देखने लगे। उन्हें
- 5:58:50उम्मीद नहीं थी कि सोलंकी फैमिली [संगीत]
- 5:58:51का कोई व्यक्ति इस तरह उनके बीच आकर बलवंत
- 5:58:54राय के समर्थन में खड़ा हो जाएगा। दूसरी
- 5:58:57तरफ सोलंकी फैमिली भी अशोक [संगीत] की इस
- 5:58:58हरकत से हैरान थी। गजराज सोलंकी और
- 5:59:01गिरिराज सोलंकी चुपचाप सब देख रहे थे।
- 5:59:04लेकिन उनकी खामोशी के पीछे कई राज छिपे
- 5:59:06थे। गजराज सोलंकी उस घटना को भूल नहीं पाए
- 5:59:09थे जिसकी वजह से उन्हें जेल तक जाना पड़ा
- 5:59:11था। श्रव्या के समझौता कराने के बाद ही वह
- 5:59:14जेल से बाहर आए थे। इसलिए वह किसी भी कीमत
- 5:59:17पर शौर्य के खिलाफ [संगीत] जाने का जोखिम
- 5:59:19नहीं लेना चाहते थे। गिरिराज सोलंकी भी
- 5:59:21खुलकर शौर्य के खिलाफ नहीं जाना चाहते थे।
- 5:59:24आखिर समझौते के समय वह [संगीत] भी शौर्य
- 5:59:26के साथ खड़े थे। और सबसे बड़ी बात वो नहीं
- 5:59:30चाहते थे कि उनके भाई और शौर्य के बीच हुआ
- 5:59:32पुराना पंगा सबके सामने आए। लेकिन अशोक इन
- 5:59:35सब बातों से पूरी तरह अनजान [संगीत] था।
- 5:59:38उसकी नजर में शौर्य बस एक भिखारी था। एक
- 5:59:40ऐसा भिखारी जो किस्मत से शिप्रा का पति बन
- 5:59:43गया था। और अशोक को यकीन था कि थोड़ी सी
- 5:59:46कोशिश बस थोड़ी सी कोशिश और शिप्रा फिर
- 5:59:50उसकी हो जाएगी। वहीं एक तरफ श्रव्या भी
- 5:59:52खड़ी यह सब देख रही थी। शौर्य के साथ हो
- 5:59:55रही बेइज्जती देखकर उसके भीतर गुस्सा जरूर
- 5:59:57था लेकिन कहीं ना कहीं उसके मन का एक
- 5:59:59हिस्सा इस बात से खुश भी था। उसे लग रहा
- 6:00:02था कि अगर मामला ज्यादा बढ़ा तो शायद
- 6:00:05शौर्य और शिप्रा अलग हो जाए।
- 6:00:07लेकिन तभी उसके छोटे चाचा अशोक को राय
- 6:00:09फैमिली के पक्ष में खड़ा देखकर उसका
- 6:00:11गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उसने
- 6:00:14अपने पिता गजराज सोलंकी की तरफ देखा।
- 6:00:16गजराज ने सिर्फ इशारे से उसे समझा [संगीत]
- 6:00:18दिया। बीच में मत आना। श्रव्या समझ गई
- 6:00:22लेकिन समस्या यह [संगीत] थी कि वो अपने
- 6:00:24चाचा को रोके भी तो कैसे? आज उसके कजिन
- 6:00:26प्रवीण सोलंकी की राधिका से सगाई थी। ऐसे
- 6:00:29मौके पर सोलंकी फैमिली का राय फैमिली के
- 6:00:31निजी मामले में कूदना उसे बिल्कुल सही
- 6:00:33नहीं लग रहा था। उधर राजकुमार टंडन भी
- 6:00:36बेचैन हो उठे थे। उन्हें डर था कि कहीं यह
- 6:00:39मामला इतना ना बढ़ जाए कि उनकी बेटी की
- 6:00:41सगाई ही खतरे [संगीत] में पड़ जाए। वो मन
- 6:00:43ही मन बस यही प्रार्थना कर रहे थे। किसी
- 6:00:46तरह यह मामला शांत हो जाए। लेकिन तभी अशोक
- 6:00:49सोलंकी को खुलकर अपने पक्ष में बोलते
- 6:00:51देखकर बृजभूषण जी की हिम्मत और बढ़ गई। वो
- 6:00:54शौर्य के सामने आकर बोले, तुमने तो
- 6:00:57बेशर्मी की सारी हदें पार कर दी। इस
- 6:00:59परिवार ने तुम्हें इज्जत दी। नाम दिया उस
- 6:01:02कचरे के ढेर से बाहर निकाला जहां से निकल
- 6:01:05कर अब तुम इस लायक हो गए हो कि चार लोगों
- 6:01:08के सामने खड़े होकर बोल सको। उन्होंने
- 6:01:11शौर्य की तरफ उंगली उठाई। आज मेरी बेटी ही
- 6:01:14है जिसकी कमाई तुम खा रहे हो। उसके कारण
- 6:01:17ही आज दो-चार लोग तुम्हें पूछ रहे हैं।
- 6:01:19तुम्हें अगर उसकी इज्जत की परवाह होती तो
- 6:01:21तुम्हें खुद ही उससे अलग हो जाना चाहिए
- 6:01:23था। उनकी आवाज और ऊंची हो गई। तुम्हें
- 6:01:26समझना चाहिए कि उसका जो सामाजिक रुतबा है
- 6:01:29उसमें तुम्हारा नाम उसके नाम के साथ
- 6:01:31जुड़ना भी [संगीत] उसकी इज्जत को कम कर
- 6:01:33देता है। तुम अगर उसके जीवन में नहीं होते
- 6:01:35तो वह कितनी ऊंचाइयां छूती। [संगीत] शौर्य
- 6:01:38चुप रहा। वह क्या कहता? अगर इन लोगों को
- 6:01:41उसकी असली हैसियत का पता चल जाता, तो शायद
- 6:01:43आज उसके सामने खड़े होकर बोलने की हिम्मत
- 6:01:46भी ना करते। यहां तो ऐसा कोई नहीं था जो
- 6:01:48उसकी हैसियत से मैच कर पाता। यही बात
- 6:01:51शिप्रा के मन में भी चल रही थी। उसका मन
- 6:01:53कर रहा था कि वह चीख कर सबके सामने बता दे
- 6:01:56शौर्य कौन है? उसकी हैसियत क्या है? और
- 6:01:59उसकी हैसियत के सामने यह लोग कहीं नहीं
- 6:02:01ठहरते। उसने शौर्य की तरफ देखा। वह जानना
- 6:02:04चाहती थी कि आखिर उसके भीतर क्या चल रहा
- 6:02:07है। लेकिन शौर्य के चेहरे पर गुस्सा नहीं
- 6:02:09था। आक्रोश नहीं था बल्कि एक अजीब सी
- 6:02:12शांति थी। और शायद यही शांति आने वाले
- 6:02:15तूफान का संकेत थी। लेकिन अशोक सोलंकी उस
- 6:02:18शांति को कमजोरी समझ बैठे। उन्होंने
- 6:02:20तिरस्कार से शौर्य की तरफ देखा और कहा माफ
- 6:02:23कीजिएगा बृजभूषण जी आपने इस भिखारी को कुछ
- 6:02:26[संगीत] ज्यादा ही सिर पर चढ़ा रखा है।
- 6:02:28नहीं तो क्या इसकी इतनी हिम्मत होती कि यह
- 6:02:30आप लोगों [संगीत] के सामने सिर उठाकर बात
- 6:02:32कर पाता। जिसकी कोई औकात नहीं है उसे भी
- 6:02:35आपने हीरो बना दिया है। आखिर आज इस भिखारी
- 6:02:37की इतनी हिम्मत कैसे हो गई कि यह आप लोगों
- 6:02:40के सामने सिर उठाकर बात कर [संगीत] रहा
- 6:02:41है। और तभी प्रवीण सोलंकी की आंखों में भी
- 6:02:44पुरानी बेइज्जती की आग भड़क उठी। उसे याद
- 6:02:47आ गया कि किस तरह शौर्य ने शिप्रा के
- 6:02:50सामने उसकी [संगीत] बेइज्जती की थी। आज
- 6:02:52उसे पता चला था कि जिसे वह उस दिन अपना
- 6:02:54अपमान करने वाला समझ रहा था। वह तो उसकी
- 6:02:57नजर में एक भिखारी [संगीत] था। प्रवीण का
- 6:02:59अहंकार और भड़क उठा। उसने सोचा क्या उसके
- 6:03:02बड़े पापा को उस समय शौर्य की असली स्थिति
- 6:03:05का पता नहीं था जो उन्होंने उससे शौर्य से
- 6:03:07माफी [संगीत] मांगने को कहा था। आज वह इस
- 6:03:09मौके को हाथ से नहीं जाने देगा। आज वह
- 6:03:12सबके सामने उस दिन का बदला लेगा। उसने
- 6:03:14गजराज और गिरिराज की तरफ देखा। दोनों चुप
- 6:03:17थे। प्रवीण ने उनकी चुप्पी का गलत अर्थ
- 6:03:20निकाल लिया। उसे लगा शायद उन्हें भी शौर्य
- 6:03:23की असली स्थिति का पहले पता नहीं था। वह
- 6:03:25आगे बढ़ा और अशोक का समर्थन करते हुए
- 6:03:27बोला, "आप सही कह रहे हैं अंकल। इस परिवार
- 6:03:31ने इसको कुछ ज्यादा [संगीत] ही सिर पर
- 6:03:32चढ़ा रखा है। तभी तो यह सबके सामने इस
- 6:03:34परिवार के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति को
- 6:03:36बेइज्जत करने की हिम्मत कर रहा है। मैं इस
- 6:03:39लड़की शिप्रा को भी बहुत पहले से जानता
- 6:03:40हूं। पता नहीं इसे इसमें ऐसा क्या दिख गया
- 6:03:43जो यह इस फटीचर के साथ इस तरह के रिश्ते
- 6:03:46में बंधी हुई [संगीत] है। वो सब भी ठीक
- 6:03:48है। लेकिन इसके हाथों अपने परिवार की
- 6:03:50बेइज्जती होते यह कैसे देख सकती है? शौर्य
- 6:03:53की नजर पहली बार सीधे प्रवीण पर गई। फिर
- 6:03:56उसकी नजर कुछ दूरी पर खड़े गजराज और
- 6:03:58गिरिराज पर पड़ी और फिर उसने पूरे हॉल में
- 6:04:01नजर दौड़ाई। शव्या वहां खड़ी थी। प्रवीण
- 6:04:05को बन ठन कर तैयार देखकर शौर्य समझ गया।
- 6:04:08तो राधिका की सगाई इसी से होने वाली है।
- 6:04:10उसने गजराज के चेहरे को गौर [संगीत] से
- 6:04:12देखा। वहां साफ नाखुशी थी। बस उसी एक भाव
- 6:04:16ने शौर्य को बहुत कुछ समझा दिया। उसे
- 6:04:18एहसास हो गया कि गजराज और उसके बीच जो कुछ
- 6:04:21हुआ था उसके बारे में अशोक और प्रवीण को
- 6:04:24कुछ पता नहीं है। वरना अशोक इतनी आसानी से
- 6:04:27उसके सामने खड़ा होने की हिम्मत नहीं
- 6:04:28करता। शौर्य के होठों पर एक बेहद हल्की
- 6:04:31व्यंग्यात्मक मुस्कान आई। वह अशोक और
- 6:04:34प्रवीण को देखते हुए बोला। इसे कहते हैं
- 6:04:37बकरी बोला तो बोला अब मेमना भी बोलने की
- 6:04:40हिम्मत कर रहा है। प्रवीण का चेहरा तमतमा
- 6:04:43गया। शौर्य दो कदम आगे बढ़ा और अगले ही पल
- 6:04:46उसके बिल्कुल सामने खड़ा था। उसने बेहद
- 6:04:49सहज अंदाज में प्रवीण के गाल पर थपकी दी।
- 6:04:52मैं समझता हूं कि तुम क्या करने की कोशिश
- 6:04:54कर रहे हो। लगता है तुम अपनी पहले वाली
- 6:04:56[संगीत] शर्मिंदगीगी भूल गए हो जब हमारे
- 6:04:58सामने गिड़गिड़ा कर माफी मांगी थी। बस
- 6:05:01इतना सुनना था कि अशोक सोलंकी का खून खौल
- 6:05:04उठा। गजराज और गिरिराज अभी मामले की
- 6:05:07गंभीरता समझ [संगीत] ही रहे थे कि अशोक
- 6:05:09तेज कदमों से शौर्य की तरफ बढ़े। उनकी
- 6:05:12आंखों में गुस्सा था। तुम्हारी इतनी
- 6:05:14हिम्मत कि तुम हमारे भतीजे के साथ ऐसे पेश
- 6:05:17आओगे वो शौर्य के बिल्कुल करीब पहुंच गए।
- 6:05:20तुम क्या हमें राय फैमिली के जैसा कमजोर
- 6:05:22[संगीत] समझ रहे हो? जो कुछ भी मुंह में
- 6:05:24आएगा और बोल दोगे तुम्हें तुम्हें ऐसा सबक
- 6:05:27दूंगा कि तुम्हें अफसोस करने का मौका भी
- 6:05:29नहीं मिलेगा कि तुमने आखिर पंगा लिया तो
- 6:05:31लिया किसके साथ? अशोक की आवाज पूरे हॉल
- 6:05:34में गूंज रही थी और फिर उन्होंने हाथ
- 6:05:38बढ़ाया सीधा शौर्य के कॉलर की तरफ। लेकिन
- 6:05:42उसका हाथ शौर्य के कॉलर तक पहुंचता उससे
- 6:05:44पहले ही एक तेज आवाज पूरे हॉल में गूंज
- 6:05:47उठी। चटाक। एक करारा थप्पड़ अशोक सोलंकी
- 6:05:51के गाल पर पड़ा। अशोक का शरीर झटका खाकर
- 6:05:54पीछे हुआ। एक पल के लिए वह जैसे समझ ही
- 6:05:57नहीं पाए कि हुआ क्या है। फिर उनके पैर
- 6:06:00लड़खड़ाए और वह धड़ाम से फर्श पर जा गिरे।
- 6:06:03पूरा हॉल पत्थर की मूर्तियों में बदल गया।
- 6:06:06किसी की आवाज नहीं निकली। किसी की सांस तक
- 6:06:08जैसे अटक गई। सबकी निगाहें एक ही जगह थी।
- 6:06:12शौर्य पर और फिर फर्श पर पड़े अशोक सोलंकी
- 6:06:16पर। उस एक थप्पड़ ने सिर्फ अशोक के गाल पर
- 6:06:19निशान नहीं छोड़ा था। उसने पूरी महफिल के
- 6:06:22समीकरण बदल दिए थे। अब सवाल सिर्फ इतना
- 6:06:24नहीं था कि थप्पड़ किसने मारा? सवाल था अब
- 6:06:28इसका अंजाम क्या होगा? क्या थप्पड़ खाकर
- 6:06:30अशोक सोलंकी चुप बैठेंगे? क्या सोलंकी
- 6:06:33फैमिली शौर्य के खिलाफ कोई कारवाई करेगी?
- 6:06:36सन्नाटा और सिर्फ सन्नाटा।
- 6:06:40हॉल में जैसे अचानक समय ठहर गया था। किसी
- 6:06:44को समझ नहीं आ रहा था कि अभी-अभी वहां हुआ
- 6:06:47क्या था। फर्श पर पड़े अशोक सोलंकी को भी
- 6:06:50यह समझने में एक मिनट लग गया कि आखिर हुआ
- 6:06:54क्या है। उसने धीरे-धीरे अपना सिर उठाया
- 6:06:57और चारों तरफ देखा। हर नजर उसी पर टिकी
- 6:07:00हुई थी। तभी उसे अपनी स्थिति का एहसास
- 6:07:03हुआ। बेइज्जती से उसका चेहरा लाल पड़ गया।
- 6:07:07सबकी नजरों से होते हुए उसकी आंखें
- 6:07:09आखिरकार शौर्य पर जाकर ठहर गई। तुम्हारी
- 6:07:12इतनी हिम्मत कि तुमने हमारे ऊपर हाथ
- 6:07:14उठाया। मैं मैं तुम्हें छोडूंगा नहीं।
- 6:07:18कहते हुए अशोक सोलंकी फिर से अपने पैरों
- 6:07:21पर खड़ा हो गया। शौर्य के पास खड़ा प्रवीण
- 6:07:24भी [संगीत] हैरान नजरों से कभी शौर्य की
- 6:07:26तरफ तो कभी अपने अंकल की तरफ देखने लगा।
- 6:07:29जब उसे समझ आया कि अभी यहां क्या हुआ है
- 6:07:31तो वह गुस्से में शौर्य की तरफ बढ़ने ही
- 6:07:33वाला था कि शौर्य ने उसे चेताते हुए कहा।
- 6:07:36भूलकर भी ऐसी कोई कोशिश मत करना जिसका
- 6:07:39परिणाम तुम झेल ना सको। थप्पड़ खाकर लाल
- 6:07:42गालों के साथ सगाई करना चाहते हो तो मुझे
- 6:07:45कोई ऐतराज नहीं है। तुम आगे बढ़ सकते हो।
- 6:07:48शौर्य की चेतावनी सुनते ही प्रवीण के कदम
- 6:07:51वहीं ठिटक गए। उसने घूमकर एक बार अपने
- 6:07:54चाचा गजराज सोलंकी की तरफ देखा। लेकिन
- 6:07:56उनके चेहरे पर किसी तरह का कोई भाव नहीं
- 6:07:59था। प्रवीण को समझ नहीं आ रहा था कि उसके
- 6:08:02अंकल के थप्पड़ खाने के बावजूद गजराज
- 6:08:04सोलंकी या गिरिराज सोलंकी के चेहरे पर जरा
- 6:08:07सा भी आक्रोश क्यों नहीं था। प्रवीण अभी
- 6:08:10इसी उलझन में था कि उसी वक्त अशोक सोलंकी
- 6:08:13अपना गुस्सा नियंत्रित नहीं कर पाया। बिना
- 6:08:16कुछ सोचे समझे वो शौर्य पर घूंसा लेकर टूट
- 6:08:19पड़ा। शौर्य ने तुरंत अपना चेहरा एक तरफ
- 6:08:21कर लिया और खुद को अशोक सोलंकी के घूंसे
- 6:08:24से बचा लिया। अगले ही पल चटाक। एक और
- 6:08:28जोरदार थप्पड़ अशोक सोलंकी के गाल पर
- 6:08:30पड़ा। वही नतीजा एक बार फिर सामने था।
- 6:08:34अशोक सोलंकी फर्श पर जा गिरा।
- 6:08:36[संगीत]
- 6:08:37लेकिन इस बार उसके मुंह के कोने से खून भी
- 6:08:39निकल आया था। शायद मुंह के अंदर उसके गाल
- 6:08:42का कोई हिस्सा कट गया था। अशोक सोलंकी
- 6:08:45उठकर फर्श पर बैठ गया। उसे अपना सिर घूमता
- 6:08:48हुआ महसूस हो रहा था। उसने सिर घुमाकर हॉल
- 6:08:51के एक कोने की तरफ देखा जहां [संगीत] उसके
- 6:08:53चारों बॉडीगार्ड दीवार से लगे खड़े थे।
- 6:08:56मेहमानों के बीच आने की उन्हें इजाजत नहीं
- 6:08:59थी। इसलिए वे अब तक एक तरफ खड़े होकर सब
- 6:09:01कुछ देखते रहे थे। अशोक सोलंकी ने गुस्से
- 6:09:04से अपने बॉडीगार्डों की तरफ देखते हुए
- 6:09:06चिल्लाकर कहा, कमबख्तों क्या इसी दिन के
- 6:09:10लिए मैंने तुम्हें पाला है कि मेरी पिटाई
- 6:09:12होते देखते रहो। अशोक सोलंकी की चीख सुनते
- 6:09:15ही उसके बॉडीगार्ड समझ गए कि अब उन्हें
- 6:09:17क्या करना है। वे कुल चार लोग थे और चारों
- 6:09:20ही हट्टे-कट्टे और मजबूत कद काठी वाले थे।
- 6:09:24अब तक उन्हें मेहमानों के बीच आने की
- 6:09:26अनुमति नहीं थी। इसलिए वे किनारे खड़े
- 6:09:28होकर सब देख रहे थे।
- 6:09:30लेकिन जैसे ही अशोक सोलंकी ने उन्हें
- 6:09:32कारवाई का इशारा दिया चारों तेजी से शौर्य
- 6:09:35की तरफ बढ़े और उसे चारों तरफ से घेर
- 6:09:37लिया। शौर्य ने उन
- 6:09:39[संगीत]
- 6:09:39चारों को देखा और फिर अपने चेहरे पर हल्की
- 6:09:41सी मुस्कान लाते हुए अशोक सोलंकी से कहा,
- 6:09:45"अभी तुम्हारे साथ जितना हुआ, क्या उससे
- 6:09:47तुम्हारा मन नहीं भरा?" "अभी तो सिर्फ
- 6:09:49तुम्हारे मुंह से खून आया है।" अब अगर एक
- 6:09:52और गलत हरकत हुई तो मैं सुनिश्चित करूंगा
- 6:09:54कि तुम इस पार्टी हॉल से बाहर अपने पैरों
- 6:09:57पर चलकर नहीं जा पाओगे। शौर्य की चेतावनी
- 6:10:00सुनकर एक पल के लिए अशोक सोलंकी का
- 6:10:02आत्मविश्वास डगमगाया। लेकिन अगले ही पल
- 6:10:05उसके मन में विचार आया। क्या एक आदमी उसके
- 6:10:08चार हट्टे-कट्टे बॉडीगार्डों का मुकाबला
- 6:10:10कर सकता है? यह सोचते ही उसका आत्मविश्वास
- 6:10:13फिर [संगीत] लौट आया। मुझे आश्चर्य है कि
- 6:10:16तुम अभी भी ऐसा कहने की हिम्मत कर पा रहे
- 6:10:18हो। अब अगर तुम अपने घुटनों पर बैठकर अपने
- 6:10:21लिए रहम की भीख भी मांगोगे तब भी मैं
- 6:10:23तुम्हें नहीं छोडूंगा। कहते हुए भी अशोक
- 6:10:26सोलंकी फर्श पर ही बैठा था और उसका एक हाथ
- 6:10:29फर्श पर टिका हुआ था। हॉल में मौजूद लगभग
- 6:10:33हर चेहरे पर अब एक ही भाव था। अब शौर्य की
- 6:10:36खैर नहीं। उसने गलत आदमी से पंगा ले लिया
- 6:10:39था। इतनी बेइज्जती के बाद तो अशोक सोलंकी
- 6:10:42उसे आसानी से माफ करने वाला नहीं था।
- 6:10:44[संगीत] हॉल में जो कुछ भी हो रहा था, वह
- 6:10:47हर किसी के लिए अनपेक्षित था। राय फैमिली
- 6:10:49के लोगों ने भी कल्पना नहीं की थी कि
- 6:10:51शौर्य बात को इतनी दूर तक ले जाएगा। बलवंत
- 6:10:55राय और बृजभूषण जी को तो अब तक विश्वास ही
- 6:10:57नहीं हो रहा था कि शौर्य ने सबके सामने
- 6:11:00अशोक सोलंकी को दो थप्पड़ लगा दिए थे।
- 6:11:03इसकी इतनी हिम्मत लेकिन बात इतनी आगे बढ़
- 6:11:06चुकी थी कि वे केवल दांत पीसकर आगे होने
- 6:11:10वाली घटना को देख सकते थे। अब उन्हें यह
- 6:11:13भी लगने लगा था कि शौर्य जिस हद तक जा
- 6:11:16चुका [संगीत] है, वहां से उसके लिए इतनी
- 6:11:18आसानी से इस जंजाल से बाहर निकलना संभव
- 6:11:21नहीं होगा।
- 6:11:22सोलंकी फैमिली इतनी आसानी से शौर्य को
- 6:11:25यहां से जाने देने [संगीत] वाली नहीं थी।
- 6:11:27आखिर विशालगढ़ में सोलंकी फैमिली का रुतबा
- 6:11:30क्या था? यह बात वे भली-भांति जानते थे।
- 6:11:34उन्हें लगने लगा था कि अब तो शौर्य का
- 6:11:36भगवान ही मालिक है। वहीं दूसरी तरफ
- 6:11:40राजकुमार टंडन एक अलग ही तनाव में थे।
- 6:11:43उन्हें चिंता थी कि उनकी बेटी की सगाई पर
- 6:11:45कोई आंच ना आ जाए। वो अशोक सोलंकी के
- 6:11:49व्यवहार से खुश तो बिल्कुल नहीं थे। लेकिन
- 6:11:51वह यह भी नहीं चाहते [संगीत] थे कि भरी
- 6:11:53महफिल में किसी मेहमान के साथ इस तरह
- 6:11:55मारपीट हो। देखा जाए तो [संगीत] इस पूरे
- 6:11:58मामले में राजकुमार जी की कोई गलती नहीं
- 6:12:01थी। लेकिन अब जो कुछ हो रहा था उससे उनकी
- 6:12:04चिंता [संगीत] लगातार बढ़ती जा रही थी।
- 6:12:07बहुत हिम्मत जुटाकर वो अशोक सोलंकी और
- 6:12:09शौर्य के बीच पहुंचे और हिचकते हुए बोले
- 6:12:13अशोक जी अगर हम बात करके मामले को निपटाने
- 6:12:16की कोशिश करें तो अच्छा होगा। मैं समझता
- 6:12:19हूं कि [संगीत] यहां जो कुछ भी हुआ वो ठीक
- 6:12:21नहीं है। लेकिन बातचीत से हर मसले का हल
- 6:12:24निकाला जा सकता है। अशोक सोलंकी ने उनकी
- 6:12:27तरफ घूर कर देखा। अब वह समय निकल गया टंडन
- 6:12:30साहब जब बातचीत से यह मामला निपट सकता था।
- 6:12:34अब तो मैं देखूंगा कि यह लड़का कैसे इस
- 6:12:36पार्टी से अपने पैरों पर सलामत चलकर बाहर
- 6:12:38जा पाता है। अशोक सोलंक की घृणा भरी नजरों
- 6:12:42से शौर्य को देखने लगा। धीरे-धीरे वह अपने
- 6:12:45पैरों पर खड़ा हुआ और फिर शिप्रा की तरफ
- 6:12:48देखते हुए बोला, मैं आपसे पहले ही सॉरी
- 6:12:51बोलना चाहूंगा। शिप्रा जी, यह आदमी एकदम
- 6:12:53आपके काबिल नहीं है। जितनी जल्दी हो सके
- 6:12:57आप इस आदमी से अपना पीछा छुड़ाइए और अपने
- 6:12:59परिवार की पसंद के किसी लड़के से शादी
- 6:13:01रचाइए। आपका काम आसान करने के लिए मैं अभी
- 6:13:05इसके हाथ पैर तुड़वाता [संगीत] हूं।
- 6:13:07शिप्रा ने अशोक सोलंकी की तरफ घृणा से
- 6:13:09देखा और बिना किसी झिझक के जवाब दिया।
- 6:13:13आपकी इतनी औकात है कि आप मेरे पति के
- 6:13:15सामने खड़े भी हो पाएंगे और आप उनका हाथ
- 6:13:17पैर तोड़ने की बात कर रहे हैं। अभी
- 6:13:19[संगीत] शायद दो थप्पड़ आपके लिए काफी
- 6:13:21नहीं थे। मेरे पति का हाथ पैर तुड़वाने के
- 6:13:24चक्कर में कहीं [संगीत] आप अपना हाथ पैर
- 6:13:26ना तुड़वा लें। अभी तो आपने उनकी वार्निंग
- 6:13:28सुनी ही थी कि आपके आदमी [संगीत] की एक और
- 6:13:31हरकत हुई तो आप यहां से अपने पैरों पर
- 6:13:33जाने लायक नहीं रहेंगे। अशोक सोलंकी को
- 6:13:36शिप्रा से ऐसे जवाब की बिल्कुल उम्मीद
- 6:13:38नहीं थी। अशोक सोलंकी ही क्या? वहां मौजूद
- 6:13:42किसी भी व्यक्ति ने शिप्रा से इस तरह के
- 6:13:44जवाब की उम्मीद नहीं की थी। अशोक सोलंकी
- 6:13:47के साथ पूरी राय फैमिली भी हैरानी से
- 6:13:50शिप्रा की तरफ देखने लगी। [संगीत]
- 6:13:52शौर्य पर शिप्रा का इतना अटूट विश्वास
- 6:13:55आखिर इसका कारण क्या था? मेघना भी शिप्रा
- 6:13:58की बात सुनकर हैरान थी। उसे [संगीत]
- 6:14:00विश्वास नहीं हो रहा था कि इतने कम समय
- 6:14:03में शिप्रा शौर्य पर इतना भरोसा कैसे करने
- 6:14:05लगी थी। अशोक सोलंकी ने व्यंग से शिप्रा
- 6:14:09[संगीत] की तरफ देखा। मानना पड़ेगा यह
- 6:14:12भिखारी आपके दिल में कितनी गहराई तक अपनी
- 6:14:14पैट बना चुका है। कमाल है। आप एक सीईओ हैं
- 6:14:18और इस फर्टीचर के चक्कर में अपना स्टेटस
- 6:14:20क्यों खराब कर रही हैं? अभी आपको इसकी
- 6:14:23हालत पर तरस आएगा। इतना कहकर अशोक सोलंकी
- 6:14:26ने अपने बॉडीगार्डों की तरफ देखा। अब तुम
- 6:14:29लोग देख क्या रहे हो? इसकी ऐसी हालत कर दो
- 6:14:32कि यह इस हॉल से अपने पैरों पर चलकर बाहर
- 6:14:35ना जा सके। अशोक सोलंकी के आदमी कोई हरकत
- 6:14:39कर पाते। उससे पहले ही हॉल में धरधराते
- 6:14:41हुए सात-आठ सिक्योरिटी गार्ड दाखिल हो गए।
- 6:14:44उन्होंने तुरंत अशोक सोलंकी के चारों
- 6:14:46बॉडीगार्डों [संगीत]
- 6:14:47को घेर लिया। अशोक सोलंकी समझ ही नहीं
- 6:14:50पाया कि अचानक यह सब क्या हो गया। यह
- 6:14:53सिक्योरिटी वाले कहां से आ गए। वो अभी यह
- 6:14:56समझने की कोशिश ही कर रहा था कि तभी
- 6:14:58मोनिका दरवाजे से चलती हुई उनके सामने आकर
- 6:15:01खड़ी हो गई। उसने सिक्योरिटी वालों की तरफ
- 6:15:04देखते हुए कहा। इन चारों को घसीटते हुए
- 6:15:07यहां से ले जाओ और होटल के बाहर फेंक आओ।
- 6:15:10अशोक सोलंकी ने मोनिका की बात सुनी तो
- 6:15:12घबरा कर बोला, "मिस मोनिका, यह आप क्या कर
- 6:15:16रही हैं? आप नहीं जानती कि इस शख्स ने
- 6:15:18यहां क्या किया है।" मोनिका ने उसकी तरफ
- 6:15:21बिना किसी भाव के देखा। मुझे यह जानने में
- 6:15:24भी कोई इंटरेस्ट नहीं है कि इसने यहां
- 6:15:26क्या किया है। मैं सिर्फ इतना जानती हूं
- 6:15:28कि होटल के अंदर बॉडीगार्ड का आना अलाउ
- 6:15:30नहीं है। उसके बाद भी आपके इस आश्वासन के
- 6:15:33बाद कि यह सिर्फ एक साइड में खड़े रहेंगे।
- 6:15:35मैंने इसकी अनुमति दी थी।
- 6:15:37[संगीत]
- 6:15:37लेकिन अब मैं देख रही हूं कि आपने अपने
- 6:15:39बॉडीगार्डों के द्वारा अनुचित हरकत करने
- 6:15:41की कोशिश की है। जो मेरे होटल में अलाउ
- 6:15:44नहीं है। अशोक सोलंकी ने तुरंत अपने कटे
- 6:15:46हुए गाल की तरफ इशारा करते हुए कहा, लेकिन
- 6:15:49आपको नहीं पता। इस शख्स ने मुझ पर हाथ
- 6:15:51उठाया है। यह देखिए मेरे मुंह से खून भी आ
- 6:15:54गया है। फिर भी आप इस शख्स को बचाना चाहती
- 6:15:56हैं। मोनिका ने सपाट लहजे में जवाब दिया।
- 6:15:59अगर आपको लगता है कि आपके साथ गलत हुआ है
- 6:16:01तो कहिए। मैं पुलिस को यहां बुला देती
- 6:16:03हूं। वही फैसला करेगी कि गलत किसने किया
- 6:16:05है। पुलिस को अगर जरूरत होगी तो मैं यहां
- 6:16:08की सीसीटीवी फुटेज भी प्रोवाइड कराने के
- 6:16:10लिए तैयार हूं। मोनिका की बात सुनकर अशोक
- 6:16:12सोलंकी सोच में पड़ गया। उसे याद था कि
- 6:16:15पहले उसी ने शौर्य पर हमला किया था और
- 6:16:17उसके जवाब में उसे शौर्य का थप्पड़ पड़ा
- 6:16:19था। अगर सीसीटीवी फुटेज सामने आती तो साफ
- 6:16:22हो जाता कि पहल उसकी तरफ से हुई थी। ऐसे
- 6:16:24में पुलिस या कारवाही में शौर्य के खिलाफ
- 6:16:26कोई खास कारवाई नहीं हो पाती। मोनिका ने
- 6:16:29अपने आदमियों से कहा। इन्हें [संगीत]
- 6:16:30जल्दी से बाहर फेंक आओ। फिर उसने अशोक
- 6:16:33सोलंकी और शौर्य की तरफ देखते हुए कहा,
- 6:16:35"अगर आपको पुलिस बुलानी हो, तो आप खुद भी
- 6:16:37फोन कर सकते हैं। मुझे इसमें कोई आपत्ति
- 6:16:39नहीं होगी।" इतना कहकर मोनिका हॉल से बाहर
- 6:16:42निकल गई। राजकुमार टंडन उसकी इस कारवाही
- 6:16:44से इतना तो समझ गए थे कि मोनिका यहां
- 6:16:47सिर्फ शौर्य की मदद करने आई थी। तभी तो वह
- 6:16:49अशोक सोलंकी के बॉडीगार्डों को बाहर करवा
- 6:16:51कर चली गई थी। लेकिन राजकुमार टंडन को यह
- 6:16:54समझ नहीं आ रहा था कि आखिर मोनिका शौर्य
- 6:16:56की मदद करने के लिए इस स्तर तक कैसे जा
- 6:16:59सकती है। क्या उसे सोलंकी फैमिली से अपने
- 6:17:01रिश्ते बिगड़ने की चिंता नहीं थी? लोग
- 6:17:03विशालगढ़ में सोलंकी फैमिली से रिश्ता
- 6:17:05जोड़ने में गर्व महसूस करते थे। खुद
- 6:17:08राजकुमार टंडन भी जब उन्हें पता चला था कि
- 6:17:10प्रवीण उनकी बेटी से शादी करना चाहता है
- 6:17:12तो सिर्फ सोलंकी फैमिली से रिश्ता जोड़ने
- 6:17:14के लालच में उन्होंने राधिका की शादी
- 6:17:16प्रवीण से करने के लिए हामी भर दी थी। वो
- 6:17:19तो यह सोचकर खुश थे कि सोलंकी फैमिली में
- 6:17:21रिश्ता होने [संगीत] से विशालगढ़ में उनका
- 6:17:23सोशल स्टेटस बहुत बढ़ जाएगा। लेकिन इस
- 6:17:26पार्टी में शौर्य ने जिस तरह अकेले ही
- 6:17:28प्रवीण और अशोक सोलंकी दोनों की हवा निकाल
- 6:17:30दी थी, उससे वह यह सोचने पर मजबूर हो
- 6:17:32[संगीत] गए थे कि आखिर शौर्य का
- 6:17:34बैकग्राउंड क्या है? जो सोलंकी फैमिली
- 6:17:36उसका कुछ बिगाड़ नहीं पा रही थी। वह इस
- 6:17:38बात से भी हैरान थे कि इतना कुछ होने के
- 6:17:40बावजूद गजराज सोलंकी और गिरिराज सोलंकी
- 6:17:43दोनों ने अभी तक बीच में आने की कोशिश
- 6:17:45नहीं की थी। आखिर इस पूरे मामले के पीछे
- 6:17:48चक्कर क्या था? राजकुमार जी अब उम्मीद
- 6:17:50[संगीत] कर रहे थे कि जब बात इतनी आगे
- 6:17:52निकल गई है तो शायद गजराज सोलंकी अपनी तरफ
- 6:17:54से बीच में जरूर आएंगे। लेकिन तभी मोनिका
- 6:17:57के जाने के बाद शौर्य अशोक सोलंकी के पास
- 6:17:59पहुंचा। उसने उसकी आंखों में देखते हुए
- 6:18:02कहा, आपके आदमी भले ही मेरा इकबाल भी
- 6:18:04बांका नहीं कर पाए, लेकिन आपने उन्हें
- 6:18:06अपनी तरफ से मुझे मारने का आदेश तो दे
- 6:18:08दिया था। आपको पता ही है कि मैंने इस
- 6:18:10स्थिति में आपको क्या कहा था। अगर ऐसी कोई
- 6:18:12हरकत आपकी तरफ से हुई तो आप यहां से अपने
- 6:18:14पैरों पर चलकर नहीं जा पाएंगे। इतना कहते
- 6:18:17ही शौर्य ने एक तेज किक अशोक सोलंकी के
- 6:18:19पैर पर दे मारी। ठड़ाम। अशोक सोलंकी एक
- 6:18:23बार फिर फर्श पर जा गिरा। किसी ने कल्पना
- 6:18:25भी नहीं की थी कि शौर्य अचानक बिना किसी
- 6:18:28चेतावनी के अशोक सोलंकी पर हमला कर देगा।
- 6:18:30बलवंत राय और बृजभूषण जी को तो विश्वास ही
- 6:18:33नहीं हो रहा था कि शौर्य इस तरह बेरहमी से
- 6:18:35अशोक सोलंकी पर टूट पड़ेगा। शिप्रा भी यह
- 6:18:38उम्मीद नहीं कर रही थी। जब मामला लगभग
- 6:18:41कंट्रोल में आ चुका था तो फिर शौर्य ने
- 6:18:43अशोक सोलंकी पर हमला क्यों किया? लेकिन
- 6:18:45शौर्य का असली गुस्सा अशोक सोलंकी की उस
- 6:18:48बात को लेकर था जिसमें उसने शिप्रा से कहा
- 6:18:50था कि उसे शौर्य से अलग हो जाना चाहिए।
- 6:18:53राजकुमार टंडन भी समझ नहीं पा रहे थे कि
- 6:18:55मिस मोनिका के आने के बाद जब मामला लगभग
- 6:18:58निपट गया था तो फिर शौर्य ने दोबारा अशोक
- 6:19:00सोलंकी पर हमला क्यों किया। शौर्य फिर से
- 6:19:03अशोक सोलंकी की तरफ बढ़ा। राजकुमार टंडन
- 6:19:06का दिल कांप उठा। उन्हें समझ नहीं आ रहा
- 6:19:08था कि अब आगे क्या होने वाला है। वो जल्दी
- 6:19:11से दोनों के बीच आए और शौर्य से बोले
- 6:19:14श्रवण ये तुम क्या कर रहे हो? जब मामला
- 6:19:17निपट गया था तो फिर तुम इसे आगे क्यों
- 6:19:20बढ़ा रहे हो? शौर्य ने उनकी तरफ देखा।
- 6:19:23आपको हमारे बीच पहले आना चाहिए था। टंडन
- 6:19:26साहब जब इसके बॉडीगार्ड हमें घेरे हुए थे।
- 6:19:29आपने भी उस समय मेरी वार्निंग सुनी होगी
- 6:19:30कि मैंने उनसे क्या कहा था। अब आपके बीच
- 6:19:33में आने का कोई फायदा नहीं है। मैंने जो
- 6:19:36कहा था वो होकर रहेगा। इतना कहकर शौर्य ने
- 6:19:39अपने हाथ से राजकुमार टंडन को एक तरफ कर
- 6:19:42दिया और फिर अशोक सोलंकी की तरफ बढ़ गया।
- 6:19:45अशोक सोलंकी की आंखों में अब पहली बार
- 6:19:47शौर्य को लेकर खौफ साफ नजर आ रहा था। किसी
- 6:19:51को भी विश्वास नहीं हो रहा था कि शौर्य
- 6:19:53इतनी हिम्मत करेगा। कोई रोको इसे। इस
- 6:19:56लड़के का दिमाग खराब हो गया है। बलवंत राय
- 6:19:59अपने चारों तरफ देखते हुए चिल्लाए। आज से
- 6:20:01पहले उन्होंने शौर्य का यह रूप कभी नहीं
- 6:20:03देखा था। आखिर कहां से एक भिखारी के अंदर
- 6:20:06इतनी हिम्मत आ गई थी कि वह शहर के एक
- 6:20:08प्रतिष्ठित व्यक्ति की इस तरह पिटाई कर
- 6:20:10सकता था। लेकिन बलवंत राय की बात सुनकर भी
- 6:20:13किसी ने सामने आने की हिम्मत नहीं की। जब
- 6:20:15बलवंत राय ने किसी को आगे आते नहीं देखा
- 6:20:18तो उन्होंने शिप्रा से कहा तुम खड़ी तमाशा
- 6:20:21क्या देख रही हो? रोको उसे। शिप्रा ने
- 6:20:24शांति से अपने दादाजी की तरफ देखा और
- 6:20:25बोली, "मुझे माफ कीजिए [संगीत] दादाजी।
- 6:20:28मैं इसमें कुछ भी नहीं कर सकती। मैंने भी
- 6:20:31इस शख्स को पहले ही वार्निंग दी थी कि वो
- 6:20:33श्रवण से उलझने की कोशिश ना करें। लेकिन
- 6:20:35इसने मेरी बात नहीं मानी। बलवंत राय की
- 6:20:38आंखों में निराशा के भाव तैर गए। वहीं
- 6:20:41खड़ी श्रव्या भी यह सब देख रही थी। एक पल
- 6:20:44के लिए उसने सोचा कि उसे बीच में जाकर
- 6:20:46शौर्य को रोकना चाहिए। लेकिन अगले ही पल
- 6:20:49उसे याद आया कि उसके पापा ने उसे बीच में
- 6:20:51आने से मना किया था। फिर उसके दिमाग में
- 6:20:54एक और बात आई। अगर उसे बीच बचाव ही करना
- 6:20:57था तो उसे पहले ही उनके बीच आना चाहिए था।
- 6:20:59जब उसके चाचा ने अपने बॉडीगार्डों [संगीत]
- 6:21:01से शौर्य के हाथ पैर तोड़ने के लिए कहा
- 6:21:03था। अब जब पलड़ा शौर्य का [संगीत] भारी था
- 6:21:06तो बीच में जाने का क्या मतलब? इधर
- 6:21:08राजकुमार टंडन को एक तरफ करके शौर्य फिर
- 6:21:11अशोक सोलंकी के पास पहुंचा। अशोक सोलंकी
- 6:21:14अभी भी जमीन पर पड़ा हुआ था। शौर्य ने
- 6:21:17अपना पैर आगे बढ़ाया और अशोक सोलंकी के
- 6:21:19घुटने पर रख दिया। अगले ही पल वहां मौजूद
- 6:21:22लोगों को समझ आ गया कि शौर्य क्या करने की
- 6:21:24सोच रहा है। शौर्य अभी अपने पैर का दबाव
- 6:21:27अशोक सोलंकी के घुटने पर बढ़ाता। उससे
- 6:21:30पहले ही हॉल में एक रबदार आवाज गूंज उठी।
- 6:21:33ठहरिए मिस्टर श्रवण। सब ने आवाज की दिशा
- 6:21:36में देखा। गजराज सोलंकी अब तक शौर्य और
- 6:21:39अशोक सोलंकी के पास आ चुके थे। उन्होंने
- 6:21:42ही शौर्य को रुकने के लिए कहा था। शौर्य
- 6:21:44ने नजर उठाकर गजराज सोलंकी की तरफ देखा और
- 6:21:47अपने उसी घमंड भरे अंदाज में बोला आपको
- 6:21:50क्या लगता है मिस्टर गजराज सोलंकी आपने
- 6:21:52कहा और मैं रुक जाऊंगा। गजराज सोलंकी ने
- 6:21:55एक पल के लिए शौर्य को देखा और फिर बेहद
- 6:21:58संयमित स्वर में बोले मैं मैं अपने छोटे
- 6:22:02भाई की तरफ से आपसे उसके किए गए व्यवहार
- 6:22:04के लिए माफी मांगता हूं। शौर्य की आंखों
- 6:22:07में कोई नरमी नहीं आई। माफ कीजिएगा मिस्टर
- 6:22:10गजराज सोलंकी। मुझे आपकी माफी कबूल नहीं
- 6:22:12है। अगर माफी मांगनी है तो आपका भाई खुद
- 6:22:15मांगेगा। जिस तरह वह मुझसे चाहता था कि
- 6:22:18मैं अपने घुटनों के बल बैठकर उससे माफी
- 6:22:20मांगू उसी तरह अब माफी भी वही मांगेगा।
- 6:22:23शौर्य की बात सुनकर पूरा हॉल जैसे फिर से
- 6:22:25स्तब्ध रह गया। शौर्य गजराज सोलंकी से इस
- 6:22:28तरह बात कर सकता है। यह बात ही लोगों को
- 6:22:30हैरान करने के लिए काफी थी। लेकिन उससे भी
- 6:22:33बड़ी बात यह थी कि गजराज सोलंकी खुद शौर्य
- 6:22:36से माफी मांग रहे थे। गजराज सोलंकी ने
- 6:22:39अशोक सोलंकी की तरफ देखा और गुस्से में
- 6:22:41बोले, सुना तुमने? मिस्टर श्रवण तुमसे
- 6:22:44क्या चाहते हैं? अभी के अभी उनसे माफी
- 6:22:47मांगो। पूरी राय फैमिली हैरान नजरों से
- 6:22:50शौर्य को देख रही थी। विशालगढ़ की इतनी
- 6:22:52बड़ी [संगीत] हस्ती खुद शौर्य से माफी
- 6:22:54मांग रही थी। एक ऐसे आदमी से जिसे वे अब
- 6:22:57तक भिखारी समझते आए थे। अशोक सोलंकी ने जब
- 6:23:01गजराज सोलंकी की बात सुनी तो वह हैरानी से
- 6:23:03अपने बड़े भाई की तरफ देखने लगा। उसे यकीन
- 6:23:06ही नहीं हो रहा था कि उसका बड़ा भाई उसे
- 6:23:09शौर्य से माफी मांगने के लिए कह रहा था।
- 6:23:11आखिर ऐसा कैसे हो सकता था? वो अविश्वास
- 6:23:14भरी नजरों से गजराज सोलंकी को देखने लगा।
- 6:23:17एक पल के लिए तो उसके मन में यह ख्याल भी
- 6:23:19आया कि कहीं उसने कुछ गलत तो नहीं सुन
- 6:23:21लिया। गजराज सोलंकी ने जब अशोक के चेहरे
- 6:23:24पर साफ नजर आ रहे अविश्वास के भाव देखे तो
- 6:23:27उन्होंने उसे दोबारा डपटते हुए कहा,
- 6:23:29तुम्हें सुनाई नहीं दिया? मैंने कहा,
- 6:23:31मिस्टर श्रमण से अभी के अभी माफी मांगो।
- 6:23:33वह भी घुटने पर बैठकर। गजराज सोलंकी को
- 6:23:36अपने भाई को इस तरह शौर्य से माफी मांगने
- 6:23:38का आदेश देते देखकर शौर्य ने अशोक के पैर
- 6:23:41पर रखा अपना पैर हटा लिया और उसकी तरफ
- 6:23:43देखने लगा। अब वह भी देखना चाहता था कि
- 6:23:46अशोक अपने बड़े भाई की बात मानता है या
- 6:23:48नहीं। अपने भाई से दोबारा वही आदेश सुनकर
- 6:23:50अशोक के सामने अब कोई रास्ता नहीं बचा था।
- 6:23:53आखिरकार वो घुटनों के बल बैठ गया और शौर्य
- 6:23:56की तरफ देखते हुए बोला, "आई एम सॉरी।"
- 6:23:59शौर्य ने उसकी बात सुनी और तिरस्कार भरे
- 6:24:02स्वर में कहा, आगे से यह बात गांठ बांध
- 6:24:04लेना कि किसी के फटे में अपना हाथ डालने
- 6:24:06की कोशिश मत करना। नहीं तो अगली बार इससे
- 6:24:09भी बुरी गत हो सकती है। शौर्य की बात
- 6:24:11सुनकर अशोक ने अपना सिर झुका लिया। फिर वह
- 6:24:14बड़ी मुश्किल से अपने पैरों पर खड़ा हुआ।
- 6:24:16यह पूरा मंजर देखकर प्रवीण स्तब्ध सा अपनी
- 6:24:19जगह खड़ा था। उसकी समझ में ही नहीं आ रहा
- 6:24:21था कि आखिर अभी यहां हुआ क्या था। क्यों
- 6:24:24उसके बड़े पापा ने उसके चाचा को शौर्य से
- 6:24:26माफी मांगने के लिए मजबूर कर दिया था।
- 6:24:28आखिर इस भिखारी की असलियत क्या थी? जिसके
- 6:24:31सामने उसके बड़े पापा भी उसका नाम इतनी
- 6:24:33इज्जत से ले रहे थे। एक तरफ राय फैमिली ही
- 6:24:36शौर्य को इज्जत देने के लिए तैयार नहीं थी
- 6:24:38तो फिर उसका अपना परिवार उससे क्यों डर
- 6:24:40रहा [संगीत] था? प्रवीण के दिमाग में
- 6:24:42सवालों का तूफान उठ रहा था। लेकिन इस वक्त
- 6:24:45उसे किसी भी सवाल का जवाब नहीं मिल रहा
- 6:24:46था। हालात को अपने अनुकूल ना देखकर उसने
- 6:24:49चुप रहना ही बेहतर समझा। शौर्य ने भी अशोक
- 6:24:52को माफ कर दिया। उसे लगा कि जितना सबक वो
- 6:24:55अशोक को सिखाना चाहता था, वह उसे मिल चुका
- 6:24:57था। इसके अलावा वह यह भी नहीं चाहता था कि
- 6:25:00राधिका की इंगेजमेंट में किसी तरह की
- 6:25:02अड़चन आए। एक बार पहले ही उसकी वजह से
- 6:25:04युविका की इंगेजमेंट विहान से होते-होते
- 6:25:06रह गई थी। अगर इस बार भी यह इंगेजमेंट टल
- 6:25:09जाती तो उसकी सारी जिम्मेदारी शौर्य पर ही
- 6:25:11आ जाती। शौर्य साफ देख पा रहा था कि राय
- 6:25:14फैमिली इस बात से पूरी तरह हैरान थी कि
- 6:25:17आखिर गजराज सोलंकी उसे इतनी इज्जत क्यों
- 6:25:19दे रहा है। लेकिन कोई भी गजराज सोलंकी से
- 6:25:22यह सवाल पूछने की हिम्मत नहीं कर पा रहा
- 6:25:24था। उल्टा शौर्य [संगीत] ने उनके भाई अशोक
- 6:25:26सोलंकी का बुरा हाल कर दिया था। इसके
- 6:25:29बावजूद गजराज सोलंकी के चेहरे पर शौर्य के
- 6:25:31लिए जरा सा भी गुस्सा नजर नहीं आ रहा था।
- 6:25:34जब शौर्य ने देखा कि वहां का मामला अब
- 6:25:36शांत हो चुका है तो वह राजकुमार टंडन की
- 6:25:38तरफ मुड़ा और बोला मैं समझता हूं कि यहां
- 6:25:41जो कुछ भी हुआ उसके [संगीत] बाद आप नहीं
- 6:25:43चाहेंगे कि मैं आपकी पार्टी में और ठहरूं।
- 6:25:45इसलिए आप मुझे इजाजत दीजिए। मैं यहां से
- 6:25:48जाता हूं। राजकुमार टंडन के चेहरे पर
- 6:25:50असमंजस के भाव थे। वह समझ नहीं पा रहे थे
- 6:25:53कि शौर्य से क्या कहें। उन्होंने अपनी
- 6:25:55आंखों से देखा था कि एक [संगीत] समय ऐसा
- 6:25:57भी आया था जब शौर्य उनके होने वाले दामाद
- 6:26:00पर हाथ उठाने वाला था। इसलिए उन्हें भी
- 6:26:03यही लगा कि फिलहाल शौर्य का वहां से चले
- 6:26:05जाना ही ठीक होगा। ऊपर से उन्होंने राय
- 6:26:08फैमिली को भी शौर्य से नाराज ही देखा था।
- 6:26:10वो किसी भी कीमत पर नहीं चाहते थे कि उनकी
- 6:26:13बेटी की इंगेजमेंट पार्टी का माहौल और
- 6:26:15खराब हो। उन्होंने झिझकते हुए शौर्य से
- 6:26:17कहा, "मैं समझता हूं कि यह सही नहीं है।
- 6:26:21हमने ही तुम्हें अपनी पार्टी में बुलाया
- 6:26:22था, लेकिन जिस तरह के हालात बन गए हैं,
- 6:26:25उसमें तुम्हारा यहां से चले जाना ही ठीक
- 6:26:27है। राजकुमार टंडन ने शौर्य से सीधे-सीधे
- 6:26:29[संगीत]
- 6:26:30पार्टी छोड़कर जाने को नहीं कहा था।
- 6:26:32उन्होंने हालात का हवाला देते हुए अपनी
- 6:26:34मजबूरी जाहिर की थी। शौर्य उनकी बात समझ
- 6:26:37गया। वो हल्का सा मुस्कुराया और बोला,
- 6:26:41"मैं आपके हालात समझ सकता हूं। मैं यहां
- 6:26:43से जा रहा हूं। शिप्रा को शौर्य के लिए
- 6:26:46बुरा लगा। वो तो पहले से ही इस पार्टी में
- 6:26:48नहीं आना चाहता था। उसी [संगीत] ने जिद
- 6:26:50करके उसे यहां आने के लिए कहा था। शिप्रा
- 6:26:52ने मेघना की तरफ देखते हुए कहा, सब मेरी
- 6:26:55गलती है। वो तो पहले से ही इस पार्टी में
- 6:26:57आने के लिए तैयार नहीं था। मेरे जिद करने
- 6:27:00पर ही वो यहां आया। [संगीत] मुझे पहले ही
- 6:27:02शौर्य को यहां आने के लिए नहीं कहना चाहिए
- 6:27:04था। अब जब वो यहां से जा रहा है तो मुझे
- 6:27:07भी उसके साथ जाना चाहिए। यह कहकर शिप्रा
- 6:27:10मेघना से विदा लेकर शौर्य के पास आ गई।
- 6:27:13मेघना को भी अफसोस हुआ कि आखिर उसने
- 6:27:16शिप्रा को शौर्य को इस पार्टी में लाने के
- 6:27:18लिए क्यों कहा था? शौर्य ने जब मेघना को
- 6:27:20भी उसके साथ जाने के लिए तैयार देखा तो
- 6:27:23उसने हैरानी से पूछा तुम्हें क्या हुआ?
- 6:27:25[संगीत] तुम कहां जा रही हो? शिप्रा ने
- 6:27:28अपने चेहरे पर फीकी सी मुस्कान लाते हुए
- 6:27:30कहा, "मैं जानती हूं कि यह सब मेरे कारण
- 6:27:32ही हुआ है। तो फिर [संगीत] मैं यहां कैसे
- 6:27:34रह सकती हूं?"
- 6:27:36पास ही खड़े राजकुमार टंडन ने जब देखा कि
- 6:27:38शिप्रा भी शौर्य के साथ जाने की बात कर
- 6:27:40रही है तो उनके माथे पर चिंता की लकीरें
- 6:27:43उभर [संगीत] आई। वो बिल्कुल नहीं चाहते थे
- 6:27:45कि शिप्रा उनकी पार्टी से जाए। आजकल जिस
- 6:27:48तरह शिप्रा का सितारा बुलंदियों पर था।
- 6:27:50उन्हें भविष्य में उससे काफी फायदे नजर आ
- 6:27:53रहे थे। सिर्फ शिप्रा के साथ नाम जुड़ा
- 6:27:55होने से ही बिजनेस वर्ल्ड में उन्हें काफी
- 6:27:57फायदा हो सकता था। वो खुद भी भविष्य में
- 6:28:00शिप्रा की कंपनी के साथ काम करने के
- 6:28:02[संगीत] सपने देख रहे थे। यहां तक कि
- 6:28:04शिप्रा के दादाजी भी फैब्रिक प्रिंट के
- 6:28:06साथ काम करना चाहते थे। उनका अपना अपेरल
- 6:28:09मैन्युफैक्चरिंग यूनिट [संगीत] था जिसे वह
- 6:28:11फैब्रिक प्रिंट के साथ काम करके और
- 6:28:13विस्तार देना चाहते थे। अगर शिप्रा आज की
- 6:28:16इस पार्टी से नाराज होकर चली जाती तो उनके
- 6:28:18सारे सपने धरे के धरे रह जाते। इससे आगे
- 6:28:21चलकर शिप्रा के साथ उनके संबंध और भी खराब
- 6:28:23हो सकते थे। राजकुमार टंडन के पास खड़ी
- 6:28:26नैना जी भी अपने पति की सोच से वाकिफ थी।
- 6:28:29वह भी यह नहीं समझ पाई थी कि शौर्य को
- 6:28:31यहां से जाने के लिए कहने पर शिप्रा भी
- 6:28:33उसके साथ चली जाएगी। वो तुरंत शिप्रा के
- 6:28:36पास आई और खुशामद भरे स्वर में बोली, "यह
- 6:28:39तुम कैसी बात कर रही हो शिप्रा बेटी?" तुम
- 6:28:41भला अपनी बहन की सगाई से पहले कैसे जा
- 6:28:43सकती हो? शिप्रा ने दृढ़ स्वर में कहा,
- 6:28:47माफ करना बुआ। आपने हमें यहां बुलाया तो
- 6:28:49हम आ गए। अब मुझे भी यहां से जाना पड़ेगा।
- 6:28:52राजकुमार टंडन ने रिश्ते की दुहाई देते
- 6:28:54हुए कहा, "तुम भी कैसी बच्चों जैसी बात
- 6:28:57करती हो? शिप्रा बेटी। क्या यह अच्छा
- 6:28:59लगेगा कि कोई बहन अपनी बहन की सगाई बीच
- 6:29:01में छोड़कर चली जाए? शिप्रा ने बिना अपना
- 6:29:04फैसला बदले दृढ़ता से कहा, माफ कीजिएगा
- 6:29:07फूफा जी। मैं जानती हूं राधिका मेरी बहन
- 6:29:10है। लेकिन वो मेरे लिए मेरे [संगीत] पति
- 6:29:12से बढ़कर तो नहीं है। और फिर ऐसा भी नहीं
- 6:29:15है कि मेरे यहां नहीं होने से उसकी सगाई
- 6:29:17रुक जाएगी। आप अच्छे से उसकी सगाई संपन्न
- 6:29:20कीजिए। मेरी शुभकामनाएं उसके साथ हैं।
- 6:29:24शिप्रा का यह फैसला सुनकर शौर्य को खुशी
- 6:29:26हुई। उसे अच्छा लगा कि शिप्रा ने उसके साथ
- 6:29:28[संगीत] ही वहां से जाने का फैसला किया
- 6:29:30था। शिप्रा ने शौर्य की आंखों में देखते
- 6:29:32हुए पूछा तो अब चलें। शौर्य ने उसकी बात
- 6:29:36पर सहमति जताई और हॉल के दरवाजे की तरफ
- 6:29:38बढ़ गया। लेकिन जब शौर्य दरवाजे की तरफ
- 6:29:41बढ़ रहा था उस समय श्रव्या अपने पिता
- 6:29:43गजराज सोलंकी के साथ खड़ी कुछ बात कर रही
- 6:29:46थी। अचानक वो अपनी जगह से पलटी और शौर्य
- 6:29:49की तरफ बढ़ते हुए जोर से चिल्लाई। रुको
- 6:29:51श्रवण। शौर्य का दरवाजे की तरफ बढ़ता कदम
- 6:29:54वहीं रुक गया। उसने आवाज की दिशा में
- 6:29:57देखा। श्रव्या तेजी से उसकी तरफ बढ़ती चली
- 6:30:00आ रही थी। हॉल में मौजूद बाकी लोगों का
- 6:30:02ध्यान भी अब [संगीत] उनकी तरफ चला गया था।
- 6:30:05हर कोई सोचने लगा कि आखिर श्रव्या ने अब
- 6:30:07शौर्य को किस लिए रोका है? बलवंत राय के
- 6:30:10साथ पूरी राय फैमिली भी यही जानना [संगीत]
- 6:30:12चाहती थी कि गजराज सोलंकी की बेटी ने अब
- 6:30:14शौर्य को क्यों रोक लिया था? श्रव्या
- 6:30:17शौर्य के [संगीत] पास पहुंची। शौर्य ने
- 6:30:19जिज्ञासा भरी नजरों से उसकी तरफ देखते हुए
- 6:30:21पूछा, "क्या हुआ? अब तुम क्या कहना चाहती
- 6:30:25हो? श्रव्या ने शौर्य [संगीत] की तरफ
- 6:30:27देखते हुए कहा, "मैं जानती हूं कि
- 6:30:29तुम्हारे ससुराल वालों ने तुम्हें इस
- 6:30:31पार्टी में शामिल होने का इनविटेशन वापस
- 6:30:33ले लिया है। लेकिन मैं तो तुम्हारी दोस्त
- 6:30:35हूं। तो मैं तुम्हें अपने भाई की
- 6:30:37इंगेजमेंट [संगीत] पार्टी में इनवाइट कर
- 6:30:39ही सकती हूं। इसलिए प्लीज मेरे भाई की
- 6:30:42इंगेजमेंट में शामिल होकर मुझे और मेरे
- 6:30:44परिवार को गौरवान्वित होने का मौका दो।
- 6:30:47मुझे और मेरे परिवार दोनों को बहुत खुशी
- 6:30:50होगी। अगर तुम हमारे गेस्ट के रूप में इस
- 6:30:52पार्टी में शामिल होते हो। शौर्य के मन
- 6:30:55में एक पल के लिए अजीब सी मुस्कान [संगीत]
- 6:30:57तैर गई। उसने मन ही मन सोचा वोरी किस्मत
- 6:31:01तुम भी दिखाने वाले को क्या-क्या दिन दिखा
- 6:31:03देते हो जो अभी मुझे यहां से बाहर करके
- 6:31:06खुश हो रहे थे। उन्हें खुशी मनाने से पहले
- 6:31:09ही दुख दे दिया। बेचारे अभी सही से अपनी
- 6:31:13खुशी सेलिब्रेट भी नहीं कर पाए थे। उसने
- 6:31:16एक उड़ती हुई निगाह बलवंत राय और बृजभूषण
- 6:31:19राय पर डाली। दोनों ही आश्चर्य भरी आंखों
- 6:31:22से शौर्य को देख रहे थे। वहीं सरला जी का
- 6:31:25चेहरा तो ऐसा बिगड़ गया था जैसे किसी ने
- 6:31:28उनकी मनोकामना पूरी करने के बाद उसी पल
- 6:31:31उनसे वापस ले ली हो। दूसरी तरफ राजकुमार
- 6:31:34टंडन ने जब श्रव्या की बात सुनी तो उन्हें
- 6:31:37और भी बड़ा झटका लगा। उन्होंने शौर्य को
- 6:31:40पार्टी से जाने के लिए सिर्फ इसलिए कहा था
- 6:31:42क्योंकि उन्हें लग रहा था कि इतने बड़े
- 6:31:44हंगामे के बाद सोलंकी फैमिली को शौर्य का
- 6:31:47इस पार्टी में रहना अच्छा [संगीत] नहीं
- 6:31:48लगेगा। बड़ी मुश्किल से उन्होंने खुद को
- 6:31:51इस फैसले के लिए तैयार किया था और अब यही
- 6:31:53सोलंकी फैमिली खुद शौर्य को पार्टी में
- 6:31:55इनवाइट कर रही थी। क्या उन्हें अपने भाई
- 6:31:58की शौर्य के हाथों हुई पिटाई का जरा भी
- 6:32:00मलाल नहीं था? आखिर शौर्य से इन लोगों का
- 6:32:03इतना जुड़ाव [संगीत] कब से हो गया था? और
- 6:32:05सबसे बड़ी बात श्रवण कब से श्रव्या सोलंकी
- 6:32:08का दोस्त [संगीत] हो गया था। राजकुमार
- 6:32:11टंडन को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि आखिर
- 6:32:13यह सब हो क्या रहा था। उधर शौर्य की नजर
- 6:32:16हॉल में मौजूद सभी लोगों पर [संगीत] घूमती
- 6:32:18हुई आखिरकार श्रव्या पर आकर ठहर गई। उसने
- 6:32:22अपने चेहरे पर सहज मुस्कान लाते हुए कहा,
- 6:32:24"मुझे इस बात की [संगीत] खुशी है कि तुम
- 6:32:26ऐसा सोचती हो। लेकिन क्या है कि मैं पहले
- 6:32:29से ही इस पार्टी में मौजूद था और एक
- 6:32:31अनचाही सिचुएशन के कारण मुझे यहां से जाना
- 6:32:34पड़ रहा है। मुझे [संगीत] लगता है कि इस
- 6:32:36समय तुम्हारे प्रपोजल को स्वीकार करना सही
- 6:32:38नहीं होगा। बहुत लोगों को अच्छा भी नहीं
- 6:32:40लगेगा। हां अगर तुम आगे जाकर अपने किसी
- 6:32:43फंक्शन में मुझे बुलाती हो तो मैं उसमें
- 6:32:45जरूर शामिल होऊंगा। लेकिन आज नहीं। शौर्य
- 6:32:48ने जिस तरह से शव्या के प्रपोजल को
- 6:32:50अस्वीकार किया उसकी वजह शव्या भी समझ गई
- 6:32:53थी। इसलिए उसने दोबारा शौर्य को रुकने के
- 6:32:56लिए नहीं कहा। हालांकि शौर्य के वहां से
- 6:32:58निकलने से पहले उसने मुस्कुरा कर कहा। ठीक
- 6:33:01है आज नहीं सही। लेकिन आगे जब भी मैं
- 6:33:04तुम्हें अपने किसी फंक्शन में इनवाइट
- 6:33:06करूंगी तो तुम्हें उसमें जरूर शामिल होना
- 6:33:08पड़ेगा। शौर्य ने मुस्कुराते हुए जवाब
- 6:33:11दिया, जरूर। शिप्रा इस वक्त शौर्य के
- 6:33:14बिल्कुल पास खड़ी थी। जिस तरह शव्या शौर्य
- 6:33:17को देख रही थी, वो शिप्रा को बिल्कुल
- 6:33:19अच्छा नहीं लग रहा था। उसे आभास हो गया था
- 6:33:22कि जरूर यह लड़की शौर्य को पसंद करने लगी
- 6:33:24है। जब श्रव्या ने अपनी तरफ से शौर्य को
- 6:33:27पार्टी में शामिल होने का इनविटेशन दिया
- 6:33:28था, तब शिप्रा को अच्छा लगा था। उसने कुछ
- 6:33:31घमंड के साथ अपने परिवार वालों के साथ
- 6:33:33खड़े राजकुमार टंडन और नैना बुआ की तरफ
- 6:33:36देखा था। मानो उसकी आंखें कह रही हो। देखा
- 6:33:39आपने? जिसे आप अपनी पार्टी में शामिल करने
- 6:33:42लायक नहीं समझते उसे आपके होने वाले
- 6:33:44रिश्तेदार खुद इनवाइट करके गौरवान्वित
- 6:33:46महसूस कर रहे हैं। लेकिन जब शौर्य ने अपनी
- 6:33:49वजह बताते हुए श्रव्या के इस इनविटेशन को
- 6:33:52स्वीकार करने से इंकार कर दिया तो शिप्रा
- 6:33:54को उसके फैसले पर और भी गर्व हुआ। क्योंकि
- 6:33:57इतना बड़ा हंगामा होने के बाद वह खुद भी
- 6:34:00नहीं चाहती थी कि शौर्य अब इस पार्टी में
- 6:34:02रुके। हां, पहले यहां से जाते वक्त उसके
- 6:34:06मन में जो अपमान का एहसास था, वह अब पूरी
- 6:34:08तरह खत्म हो चुका था। अब वह शौर्य के साथ
- 6:34:11इस पार्टी का इनविटेशन ठुकरा कर जा रही
- 6:34:13थी। इधर शिप्रा के ख्यालों से बेखबर शौर्य
- 6:34:17ने शव्या से कहा, ठीक है, अब मैं चलता
- 6:34:19हूं। इसके बाद वहां से निकलने से पहले
- 6:34:22शौर्य ने पूरे हॉल पर एक नजर दौड़ाई और
- 6:34:25फिर शिप्रा के साथ हॉल से बाहर चला गया।
- 6:34:28कुछ देर पहले जिन चेहरों पर शौर्य के जाने
- 6:34:30की खुशी साफ छलक रही [संगीत] थी। बदली हुई
- 6:34:33परिस्थिति में उसके वहां से चले जाने के
- 6:34:35बाद भी उन चेहरों पर पहले जैसी खुशी नजर
- 6:34:37नहीं आ रही थी। धीरे-धीरे हॉल का माहौल
- 6:34:40सामान्य होने लगा। लेकिन हलचल अभी पूरी
- 6:34:43तरह खत्म नहीं हुई थी। क्योंकि वहां कुछ
- 6:34:45और लोग भी थे जो शौर्य के जाने के बाद इस
- 6:34:48पार्टी को छोड़कर जाने वाले थे। शौर्य को
- 6:34:51शिप्रा के साथ पार्टी हॉल से निकले अभी
- 6:34:54ज्यादा [संगीत] समय नहीं हुआ था कि अब
- 6:34:56राजदीप जी का सब्र भी जवाब दे गया। उनका
- 6:35:00भी मन अब एक पल के लिए वहां रुकने का नहीं
- 6:35:02कर रहा था। अभी पार्टी में शौर्य के साथ
- 6:35:05जो कुछ हुआ था [संगीत] उन्होंने अपनी
- 6:35:07आंखों से देखा था। शौर्य ने आगे बढ़कर
- 6:35:10किसी से पंगा नहीं लिया था। लोग खुद उसके
- 6:35:13सामने आकर उसे उकसा रहे थे और जब बात हद
- 6:35:16से आगे बढ़ गई तभी शौर्य ने उन्हें जवाब
- 6:35:19दिया था। अगर राजकुमार जी को शौर्य का इस
- 6:35:22तरह जवाब देना गलत लगा था तो उन्हें उसी
- 6:35:25वक्त सामने आना चाहिए था। जब सभी लोग
- 6:35:28मिलकर शौर्य को घेर रहे थे। लेकिन उस समय
- 6:35:31उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया। और जब शौर्य
- 6:35:34का जवाब सब पर भारी पड़ गया तब उन्होंने
- 6:35:37शौर्य को ही अपनी पार्टी [संगीत] से जाने
- 6:35:39के लिए कह दिया। राजदीप जी को यह बात
- 6:35:42बिल्कुल नागवार गुजर रही थी। उन्हें यह भी
- 6:35:45[संगीत] याद था कि शिप्रा ने पहले ही
- 6:35:47उन्हें बताया था कि शौर्य इस पार्टी में
- 6:35:49आने वाला तक नहीं था। खुद उन्होंने ही
- 6:35:52शिप्रा से कहा था कि [संगीत] वह किसी तरह
- 6:35:54शौर्य को पार्टी में लेकर आए। और अब वही
- 6:35:57शौर्य इस तरह पार्टी से निकल चुका था।
- 6:36:00राजदीप जी को पहली [संगीत] बार ऐसा महसूस
- 6:36:02हो रहा था जैसे उन्होंने अपनी बेटी और
- 6:36:05दामाद को इस पार्टी में भेजकर [संगीत] खुद
- 6:36:07ही उनके अपमान का रास्ता खोल दिया हो। वह
- 6:36:10जानते थे कि उनके परिवार के बाकी सदस्य
- 6:36:13शौर्य को शिप्रा के पति के रूप में पसंद
- 6:36:15नहीं करते थे। लेकिन राजदीप जी को [संगीत]
- 6:36:18अब शौर्य व्यक्तिगत रूप से पसंद आने लगा
- 6:36:20था। आखिर वो हर मुश्किल घड़ी में शिप्रा
- 6:36:23के सामने एक मजबूत दीवार बनकर खड़ा रहता
- 6:36:26था। उनके मन में एक ही [संगीत] बात थी। जो
- 6:36:29इंसान मुश्किल वक्त में उनकी बेटी का साथ
- 6:36:31छोड़ने के बजाय उसके सामने ढाल बनकर खड़ा
- 6:36:34हो सकता है। उससे बेहतर इंसान [संगीत]
- 6:36:35शिप्रा के लिए मिलना शायद मुश्किल था। इसी
- 6:36:38वजह से वह अपने पिता बलवंत राय के खिलाफ
- 6:36:41जाकर भी शौर्य का साथ देने लगे थे। और यही
- 6:36:44बात बलवंत राय को बिल्कुल पसंद नहीं थी।
- 6:36:46राजदीप जी को परिवार के साथ पार्टी छोड़ने
- 6:36:49की तैयारी करते देखकर राहुल भी अपने मम्मी
- 6:36:52पापा के साथ वहां से जाने का फैसला कर
- 6:36:54चुका था। अपने मौसी मौसा को पार्टी छोड़कर
- 6:36:57जाते देखकर मेघना भी अब वहां कैसे रुक
- 6:36:59सकती थी? वो भी उनके साथ पार्टी से बाहर
- 6:37:02निकलने के लिए तैयार हो गई। राजकुमार टंडन
- 6:37:05ने जब राजदीप जी को अपनी पूरी फैमिली के
- 6:37:07साथ पार्टी से जाते देखा तो वह तुरंत उनके
- 6:37:10सामने आ गए और उन्हें रोकते हुए बोले
- 6:37:13राजदीप भाई साहब आप कहां जा रहे हैं? अब
- 6:37:16तो कुछ ही समय में राधिका की रिंग
- 6:37:18एक्सचेंज होने वाली है। राजदीप जी ने
- 6:37:20नाराजगी भरी नजरों से उनकी तरफ देखा और
- 6:37:23बोले माफ कीजिए राजकुमार जी अब इस पार्टी
- 6:37:26में मेरे लिए कुछ नहीं बचा [संगीत] है। आप
- 6:37:28अच्छे से राधिका की इंगेजमेंट पार्टी
- 6:37:30सेलिब्रेट कीजिए। राजकुमार जी ने आगे
- 6:37:32बढ़कर उन्हें रोकते हुए पूछा। लेकिन आप जा
- 6:37:35कहां रहे हैं? राजदीप जी ने बिना किसी
- 6:37:38झिझक के जवाब दिया। मैं वापस अपने घर जा
- 6:37:41रहा हूं। मैंने अभी यहां अपनी बेटी और
- 6:37:43उसके पति का अपमान होते देखा है। यह सब
- 6:37:46देखने के बाद भी मैं यहां कैसे रुक सकता
- 6:37:47हूं? इसलिए मुझे माफ कीजिए। राजकुमार जी
- 6:37:51ने सफाई देने की कोशिश करते हुए कहा, पर
- 6:37:54आपको तो पता है मैंने शिप्रा को रोकने की
- 6:37:56कोशिश की थी, लेकिन वही नहीं रुकी। राजदीप
- 6:37:59जी की आंखों में नाराजगी साफ दिखाई देने
- 6:38:01लगी। उन्होंने सख्त लहजे में कहा। आप क्या
- 6:38:05मजाक कर रहे हैं? उसके सामने आपने उसके
- 6:38:07पति को इस पार्टी से जाने के लिए कह दिया
- 6:38:10और उसके बाद भी आप चाहते थे कि वह इस
- 6:38:12पार्टी में रुकी रहे। अगर आपको शौर्य इतना
- 6:38:15ही नापसंद था तो आपने उसे इस पार्टी में
- 6:38:17बुलाया ही क्यों था? राजकुमार जी के पास
- 6:38:20इस सवाल का कोई सीधा जवाब नहीं था। तभी
- 6:38:23बलवंत राय ने राजदीप जी को राजकुमार जी से
- 6:38:26नाराजगी जताते देखा तो वह बीच में बोल
- 6:38:28पड़े। उनके स्वर में झुंझुलाहट थी। राजदीप
- 6:38:32[संगीत] अब तुम यह क्या ड्रामा कर रहे हो?
- 6:38:34जो हो गया उस बात को जाने दो। यहां कोई
- 6:38:38नहीं चाहता था कि शिप्रा [संगीत] इस
- 6:38:39पार्टी से जाए। यह उसका अपना फैसला था। हम
- 6:38:43सब ने देखा था कि राजकुमार जी और नैना ने
- 6:38:45शिप्रा को रोकने की कोशिश की थी। वो अपनी
- 6:38:48जिद के कारण यहां से गई है। हम बाद में
- 6:38:51शिप्रा को समझाने की कोशिश करेंगे। हम
- 6:38:54नहीं चाहते [संगीत] कि हमारी बेटी किसी
- 6:38:55फटीचर के बहकावे में आकर अपने परिवार से
- 6:38:58दूर हो जाए। इस समय राधिका [संगीत] की
- 6:39:00इंगेजमेंट ज्यादा जरूरी है। इसलिए अभी इसी
- 6:39:03पर ध्यान देना बेहतर है। राजदीप जी ने
- 6:39:06अपने पिता की तरफ देखा। इस [संगीत] बार
- 6:39:08उनकी आंखों में वो सम्मान नहीं था जो
- 6:39:10हमेशा हुआ करता था। उन्होंने शांत [संगीत]
- 6:39:13लेकिन दृढ़ आवाज में कहा, माफ कीजिएगा
- 6:39:16पिताजी। लेकिन मुझे भी लगता है कि शौर्य
- 6:39:18[संगीत]
- 6:39:19शिप्रा के लिए एकदम सही है। मैं खुद अब
- 6:39:22दोनों को साथ देखना चाहता हूं। शौर्य तो
- 6:39:24इस पार्टी में आ भी नहीं रहा था। मैंने ही
- 6:39:27शिप्रा से उसे पार्टी में बुलाने के लिए
- 6:39:29कहा था। अब जबकि उसे इस पार्टी से निकाल
- 6:39:32दिया गया है तो मैं खुद भी इसके लिए
- 6:39:34जिम्मेदार महसूस कर रहा हूं। इसलिए मैंने
- 6:39:38भी इस पार्टी से जाने का फैसला किया है।
- 6:39:40यह पहली बार था जब राजदीप जी ने खुले तौर
- 6:39:43पर अपने पिता के खिलाफ जाकर कोई फैसला
- 6:39:44लिया था। बलवंत राय कुछ पल के लिए उन्हें
- 6:39:47देखते ही रह गए। उन्हें यकीन ही नहीं हो
- 6:39:49रहा था कि राजदीप ने उनकी बात को नजरअंदाज
- 6:39:51करके यहां से जाने का फैसला कर लिया था।
- 6:39:54सरला जी को जैसे अपने मन की बात कहने का
- 6:39:56मौका मिल गया था। उन्होंने तुरंत बलवंत
- 6:39:59राय के मन में राजदीप जी के प्रति नाराजगी
- 6:40:01पैदा करने की कोशिश करते हुए कहा, आपने
- 6:40:03देख लिया पिताजी आपके कहने के बाद भी
- 6:40:06राजदीप कैसे श्रवण के लिए अपना प्यार
- 6:40:08जाहिर कर रहे हैं। तभी तो उस भिखारी की
- 6:40:11इतनी [संगीत] हिम्मत हो गई थी कि वह आपको
- 6:40:12भी आंख दिखाने की गुस्ताखी करता था। यह सब
- 6:40:15इन्हें सहने की वजह से ही संभव हुआ था।
- 6:40:18मुझे तो पहले ही शक था कि राजदीप चाहते ही
- 6:40:20नहीं थे कि शिप्रा उस भिखारी से अलग हो।
- 6:40:23तभी तो आपकी कोशिशों के बाद भी शिप्रा उस
- 6:40:25भिखारी से अलग नहीं हुई। सरला जी ने अपने
- 6:40:28दिल की सारी भड़ास निकाल दी थी। उनकी
- 6:40:30बातें सुनकर राजदीप जी ने घूर कर उनकी तरफ
- 6:40:33देखा। सरला जी एक पल के लिए सकपकाई जरूर
- 6:40:36लेकिन अगले ही पल उन्होंने अपने चेहरे के
- 6:40:38भाव सामान्य कर लिए। उन्हें इस बात से कोई
- 6:40:41फर्क नहीं पड़ रहा था कि राजदीप जी पार्टी
- 6:40:43में रुकते हैं या वहां से चले जाते
- 6:40:45[संगीत] हैं। राजदीप जी अच्छी तरह समझते
- 6:40:48थे कि उनकी भाभी सरला को उनकी बेटी शिप्रा
- 6:40:50फूटी आंख नहीं सुहाती। वह हमेशा ऐसे मौके
- 6:40:53की तलाश में रहती थी जहां उन्हें शिप्रा
- 6:40:55को नीचा दिखाने का मौका मिल सके। राजदीप
- 6:40:58जी ने सरला जी की बात को नजरअंदाज किया और
- 6:41:00बीना जी, राहुल और मेघना के साथ हॉल से
- 6:41:03बाहर निकल गए। राय फैमिली के बाकी लोग
- 6:41:06उन्हें जाते हुए देखते रह गए। पार्टी हॉल
- 6:41:08से बाहर निकलकर राजदीप जी और उनका परिवार
- 6:41:11होटल राजकमल की लॉबी में पहुंच गया। उधर
- 6:41:14इससे [संगीत] कुछ देर पहले ही शिप्रा
- 6:41:16शौर्य के साथ पार्टी हॉल से बाहर निकल
- 6:41:18चुकी थी। लॉबी में आते [संगीत] ही शिप्रा
- 6:41:20ने शौर्य की तरफ देखा और पूछा अब क्या
- 6:41:23करना है? कहां जाना है? शौर्य ने उसकी तरफ
- 6:41:26देखा और अचानक पूछा भूख लगी है? शिप्रा ने
- 6:41:30अपने पेट पर हाथ फेरते हुए तुरंत जवाब
- 6:41:32दिया और क्या? पार्टी में जाते ही कुछ ना
- 6:41:35कुछ बातें होती रही इसलिए कुछ खाया भी
- 6:41:37नहीं। तो भूख तो लगेगी ना। शौर्य के चेहरे
- 6:41:41पर हल्की मुस्कान आ [संगीत] गई। उसने
- 6:41:43सहजता से कहा तो चलो। फिर देर किस बात की
- 6:41:46है? पहले इसी होटल में खाना खाते हैं।
- 6:41:49उसके बाद कुछ सोचेंगे। इतना कहकर शौर्य ने
- 6:41:52अपना फोन निकाला। लेकिन वह किसी को फोन
- 6:41:55लगाता उससे पहले ही मोनिका उसके सामने आकर
- 6:41:58खड़ी हो गई। शौर्य अभी मोनिका को ही फोन
- 6:42:00करने वाला था। उसे अपने सामने अचानक देखकर
- 6:42:03शौर्य समझ गया कि जरूर [संगीत] मोनिका
- 6:42:05सीसीटीवी के जरिए उस पर नजर रखे हुए होगी।
- 6:42:09तभी तो उसके पार्टी हॉल से बाहर निकलते ही
- 6:42:11वो उसके सामने पहुंच गई थी। शौर्य कुछ
- 6:42:14बोलता उससे [संगीत] पहले ही मोनिका ने कहा
- 6:42:16तुम नंबर वन केबिन में पहुंचो। मैं अभी
- 6:42:19राम सिंह को तुम्हारे आर्डर के साथ
- 6:42:20तुम्हारे केबिन में भेजती हूं। शौर्य ने
- 6:42:23सिर हिलाया और बोला ठीक है। इतना कहकर वो
- 6:42:26नंबर वन केबिन की तरफ बढ़ गया। यह होटल का
- 6:42:29एक वीआईपी केबिन था। शौर्य शिप्रा के साथ
- 6:42:32अंदर जाकर बैठ गया। शिप्रा अब जानती थी कि
- 6:42:36यह होटल शौर्य का ही था। उसके दादाजी ने
- 6:42:38यह होटल शौर्य को गिफ्ट किया था। जब शौर्य
- 6:42:41और शिप्रा दोनों उस केबिन में अकेले रह गए
- 6:42:44तो शिप्रा कुछ पल चुप रही। फिर उसने धीमे
- 6:42:47स्वर में कहा, "आई एम सॉरी।" शौर्य ने
- 6:42:50अपनी आंखें बड़ी करते हुए उसकी तरफ देखा
- 6:42:52और पूछा, "यह सॉरी किस लिए?" शिप्रा ने
- 6:42:57अपनी नजरें झुका ली और बोली, "तुम तो पहले
- 6:42:59ही इस पार्टी में नहीं आ रहे थे।" "मेरी
- 6:43:02जिद के कारण ही तो तुम इस पार्टी में आए।"
- 6:43:04अगर मैं तुमसे इसमें शामिल होने की ज़िद
- 6:43:06नहीं करती, तो तुम्हारी बेइज्जती की कोशिश
- 6:43:08तो नहीं होती।
- 6:43:10शौर्य ने उसे परेशान ना करने की कोशिश
- 6:43:12करते हुए मुस्कुरा कर कहा, "अरे इसकी कोई
- 6:43:15जरूरत नहीं है। उल्टा आज जो कुछ [संगीत]
- 6:43:18हुआ, उससे मैं तो खुश हूं। कम से कम
- 6:43:20तुम्हारे साथ खाना खाने का मौका तो मिला।"
- 6:43:22शिप्रा उसकी आंखों में देखते हुए समझ गई
- 6:43:25कि वो उसे दुखी नहीं करना चाहता था। उसने
- 6:43:27धीरे से शौर्य के हाथ पर अपना हाथ रखा और
- 6:43:30पूछा, "तुम मुझे दुखी नहीं करना चाहते।"
- 6:43:32इसलिए [संगीत] ऐसा बोल रहे हो ना? लेकिन
- 6:43:34सच यह था कि शौर्य आज जो कुछ हुआ उससे
- 6:43:37सचमुच खुश था। आज भरी महफिल में अशोक
- 6:43:40सोलंकी को सबक सिखाने का मौका उसे मिल गया
- 6:43:42था। शौर्य अभी शिप्रा से कुछ और कहता उससे
- 6:43:45पहले ही उसका फोन बज उठा। शिप्रा ने
- 6:43:47स्क्रीन की तरफ देखा तो मेघना का फोन आ
- 6:43:50रहा था। उसने शौर्य की तरफ देखा और फिर
- 6:43:52कॉल रिसीव करके स्पीकर पर कर दिया। दूसरी
- 6:43:55तरफ से मेघना ने फोन उठाते ही पूछा, कहां
- 6:43:57हो तुम? शिप्रा ने हैरानी से पूछा, "क्या
- 6:44:00[संगीत] हुआ? तुम यह क्यों जानना चाहती हो
- 6:44:02कि मैं कहां हूं?" मेघना ने बनावटी गुस्से
- 6:44:04में कहा, तुम्हारे चक्कर में मैं भी उस
- 6:44:06पार्टी को छोड़कर आ गई हूं और मुझे भूख लग
- 6:44:08रही है। अब खाना कौन खिलाएगा? शिप्रा
- 6:44:11झुंझुला कर बोली, "तुम क्या बेवकूफ हो जो
- 6:44:13पार्टी छोड़कर आ गई? ऐसी बेवकूफी करने की
- 6:44:15क्या जरूरत थी? शिप्रा अपनी बात आगे
- 6:44:18बढ़ाती। उससे पहले ही मेघना ने उसकी बात
- 6:44:20बीच में काटते हुए कहा, "एक [संगीत] मिनट,
- 6:44:22मैं अकेली ऐसी बेवकूफ नहीं हूं। मेरे साथ
- 6:44:25तीन और ऐसे बेवकूफ हैं जो पार्टी से बिना
- 6:44:27खाए पार्टी छोड़कर आ गए हैं। शिप्रा को
- 6:44:30समझ नहीं आया कि मेघना और [संगीत] किसकी
- 6:44:31बात कर रही थी। उसने चिंतित स्वर में पूछा
- 6:44:34तुम साफ-साफ बताओगी कि तुम्हारे साथ और
- 6:44:36कौन-कौन है? मेघना ने जवाब दिया। मेरे साथ
- 6:44:39मौसा, मौसी और राहुल भी हैं। यह भी
- 6:44:41तुम्हारे पार्टी छोड़कर आने के बाद वहां
- 6:44:43से निकल आए। अब इनको भी तो खाना खाना है।
- 6:44:46मेघना से अपने मम्मी पापा के बारे में यह
- 6:44:48जानकर कि वे बिना खाना खाए [संगीत] पार्टी
- 6:44:50से बाहर आ गए हैं। शिप्रा ने तुरंत शौर्य
- 6:44:52की तरफ देखा। फोन स्पीकर पर था इसलिए
- 6:44:55शौर्य ने सारी बातें साफ-साफ [संगीत]
- 6:44:56सुन ली थी। उसने इशारे से शिप्रा से कहा
- 6:44:59कि वह उन सबको यहीं बुला ले। शिप्रा ने
- 6:45:01तुरंत मेघना से कहा तुम सब अभी के अभी
- 6:45:04होटल राजकमल केबिन [संगीत] नंबर एक में
- 6:45:06पहुंचो। मेघना ने हैरानी से पूछा क्या तुम
- 6:45:09अभी होटल में ही हो? हां, मेघना की आवाज
- 6:45:12दूसरी तरफ से आई। कुछ ही देर बाद बीना जी,
- 6:45:14राजदीप जी, राहुल और मेघना उस केबिन में
- 6:45:17पहुंच गए। शौर्य तुरंत अपनी जगह से उठा और
- 6:45:20उन सभी को अलग-अलग चेयर पर बैठाया। राम
- 6:45:22सिंह के आने पर [संगीत] शौर्य ने वहां
- 6:45:24मौजूद सभी लोगों को ध्यान में रखते हुए
- 6:45:26उनसे कुछ और खाने का सामान लाने को कहा।
- 6:45:29शिप्रा से रहा नहीं गया तो उसने राजदीप
- 6:45:30[संगीत] जी से पूछा, "आप लोग पार्टी से
- 6:45:32चले आए तो क्या दादाजी ने आप लोगों से कुछ
- 6:45:34कहा नहीं?" राहुल ने उत्साहित स्वर में
- 6:45:37जवाब [संगीत] दिया। वो भी हम लोगों से
- 6:45:39नाराज हो गए थे। लेकिन आज पापा ने पहली
- 6:45:41बार दादाजी की नाराजगी की तरफ ध्यान नहीं
- 6:45:43दिया। इसके बाद सभी ने आराम से जी भरकर
- 6:45:46खाना खाया। खाना खाने के बाद [संगीत]
- 6:45:48शौर्य और शिप्रा ने राजदीप जी, बीना जी,
- 6:45:51राहुल और मेघना को उनके घर तक छोड़कर आए।
- 6:45:54लेकिन दूसरी तरफ पार्टी हॉल में अशोक
- 6:45:56सोलंकी की नाराजगी कम होने का नाम नहीं ले
- 6:45:58रही थी। मौका मिलते ही वो गजराज सोलंकी और
- 6:46:01गिरिराज सोलंकी के पास पहुंचा और नाराजगी
- 6:46:03भरे स्वर में बोला, "आसे मुझे ऐसी उम्मीद
- 6:46:06नहीं थी। अपने भतीजे की इंगेजमेंट पार्टी
- 6:46:08में मुझे इतनी बेइज्जती का मुंह देखना
- 6:46:10पड़ा। और हद तो तब हो गई जब श्रव्या उस
- 6:46:13शख्स को अपनी तरफ से इस पार्टी में इनवाइट
- 6:46:14कर रही थी। और आप लोग चुपचाप खड़े होकर यह
- 6:46:17सब देखते रहे। आखिर कौन है वह श्रवण का
- 6:46:19बच्चा जिसके सामने आप सब ने भी घुटने टेक
- 6:46:22दिए? गजराज सोलंकी का चेहरा तमतमा उठा।
- 6:46:25उन्होंने भड़कते हुए कहा, अब इस तमाशे का
- 6:46:27कोई मतलब नहीं है। अगर तुम इतने ही
- 6:46:29पावरफुल थे तो खुद क्यों नहीं श्रवण को
- 6:46:31जमीन सुंघा दिया। तुम्हें तो हमारा
- 6:46:33शुक्रगुजार होना चाहिए। हमारे ही कारण
- 6:46:36तुम्हारे पैर सलामत है। गजराज सोलंकी की
- 6:46:39बात ने अशोक सोलंकी को जैसे आईना दिखा
- 6:46:41दिया। अशोक सोलंकी का गुस्सा शांत होने का
- 6:46:44नाम नहीं ले रहा था। उसे गजराज सोलंकी की
- 6:46:47सफाई समझ में नहीं आई। वह अपना गुस्सा
- 6:46:49जाहिर करते हुए फिर से बोला, "मुझे यह बात
- 6:46:51समझ नहीं आ रही कि जब उसके फैमिली वाले
- 6:46:53उसका सपोर्ट नहीं कर रहे हैं, तो फिर आप
- 6:46:55उसके खिलाफ कुछ भी बोलने से क्यों बच रहे
- 6:46:57थे।" मैं देख रहा था कि आप शुरू से ही दूर
- 6:47:00खड़े होकर उसे देखते रहे, लेकिन बीच में
- 6:47:02आने की आपने कोई कोशिश नहीं की। अगर आप
- 6:47:05शुरू में ही बीच में आकर बोलते, तो उसकी
- 6:47:07हिम्मत नहीं होती मुझ पर हाथ उठाने की।
- 6:47:09पता नहीं आप किस बात का इंतजार कर रहे थे।
- 6:47:12तुम जैसा सोच रहे हो वैसा कुछ नहीं है।
- 6:47:15मेरे बीच में ना बोलने का दूसरा कारण था।
- 6:47:18तुम जानते हो कुछ दिन पहले मैं जेल गया
- 6:47:21हुआ था। गजराज सोलंकी की आवाज में उनकी
- 6:47:24निराशा साफ झलक रही थी। अशोक सोलंकी को
- 6:47:27समझ नहीं आया कि अब उसका भाई किस बारे में
- 6:47:29बात कर रहा है। उसने उलझन भरे स्वर में
- 6:47:32पूछा। अब इस बात का इस लड़के से क्या मतलब
- 6:47:35है? मतलब है तभी तो मैं बोल रहा हूं। मैं
- 6:47:40जो जेल गया था वो इसी लड़के के कारण गया
- 6:47:43था। गजराज सोलंकी ने अशोक के सामने
- 6:47:45[संगीत] शौर्य से जुड़ी वो बात रखी। यह
- 6:47:48जानकर कि उसका बड़ा भाई इसी लड़के के कारण
- 6:47:51जेल गया था। अशोक सोलंकी के चेहरे पर
- 6:47:54आश्चर्य उभर आया। वो कुछ असंतुष्ट भाव से
- 6:47:57बोला अगर आप इस लड़के के कारण जेल गए थे
- 6:48:01फिर तो आपको और भी ज्यादा उसके खिलाफ होना
- 6:48:03चाहिए था लेकिन आप तो उसे ऐसे सम्मान दे
- 6:48:06रहे थे जैसे पता नहीं वो कितना बड़ा आदमी
- 6:48:08हो और बाद में शव्या ने तो बाकायदा उसे इस
- 6:48:12पार्टी में इनवाइट भी किया फिर इस सब का
- 6:48:15क्या मतलब था गजराज सोलंकी ने गहरी सांस
- 6:48:18लेते हुए उसकी तरफ देखा और बोले तुम्हें
- 6:48:21यह तो पता है कि मैं उसके कारण जेल गया था
- 6:48:24लेकिन यह यह नहीं पता कि मैं जेल से छूटा
- 6:48:27भी तो उसी के कारण था। श्रव्या ने ही उससे
- 6:48:30बात करके उसे मनाया था कि वह अपना केस
- 6:48:32वापस ले जिसके कारण मैं जेल से बाहर आ
- 6:48:35पाया था। इसी वजह से श्रव्या से उसकी
- 6:48:38दोस्ती हो गई। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है
- 6:48:40कि मेरे दिल में उसके लिए सम्मान आ गया
- 6:48:42है। बस मैं उसके खिलाफ खुलकर कुछ नहीं बोल
- 6:48:45सकता। उन्होंने कुछ पल रुक कर अशोक की तरफ
- 6:48:48देखा और आगे कहा मेरा तुम्हें ना रोकने का
- 6:48:51एक कारण यह भी था। मैं भले ही सामने से
- 6:48:54उसे कुछ नहीं बोल सकता लेकिन अगर तुम उसे
- 6:48:56सबक सिखा पाते तो मैं उससे खुशी होता।
- 6:49:00इसलिए जब तुम उससे उलझे थे तब मैं खामोश
- 6:49:02था। मैं इस उम्मीद में था कि तुम शायद
- 6:49:05उसकी अकड़ शांत कर पाओगे। लेकिन उल्टा वो
- 6:49:09तुम पर भी भारी पड़ गया। इसलिए जब मैंने
- 6:49:12देखा कि अब बात हाथ से निकलती जा रही है
- 6:49:14तब मैंने बीच में आने का फैसला किया। अब
- 6:49:17तुम ही बताओ मैंने जो किया वो [संगीत] सही
- 6:49:19था या गलत? अगर मैं उस समय भी बीच में आकर
- 6:49:23उसे नहीं रोकता तो शायद तुम अभी अपने
- 6:49:25पैरों पर खड़े नहीं होते। गजराज सोलंकी ने
- 6:49:28अशोक को वह हकीकत बता दी जो अब तक उनके
- 6:49:30दिल में दबी हुई थी। अब जाकर अशोक सोलंकी
- 6:49:34को असलियत का पता चला तो अपने भाई के लिए
- 6:49:36उसके मन में उठ रहा गुस्सा कुछ कम हुआ। वो
- 6:49:39जिज्ञासा भरी नजरों से गजराज [संगीत]
- 6:49:41सोलंकी की तरफ देखते हुए बोला आखिर एक
- 6:49:44भिखारी में इतनी हिम्मत कहां से आ सकती
- 6:49:45है? क्या सच में जो अफवाह है कि वह एक
- 6:49:48भिखारी है वह सच है? वो किसी भी एंगल से
- 6:49:51देखने पर भिखारी तो नहीं लगता। यही बात तो
- 6:49:54मुझे [संगीत] भी समझ नहीं आ रही। लेकिन यह
- 6:49:56सच है कि इस शहर में 4 महीने पहले [संगीत]
- 6:49:59तक इसका कोई पता ठिकाना नहीं था। शिप्रा
- 6:50:02से शादी के बाद ही लोगों ने इसे जाना है।
- 6:50:05मैंने पता किया है उससे पहले वह सच में
- 6:50:08बैकुंठपुर के एक मंदिर में भिखारी की
- 6:50:11जिंदगी ही जी रहा था। गजराज सोलंकी ने
- 6:50:14सोचपूर्ण स्वर में कहा। अशोक सोलंकी खुद
- 6:50:16में खोया हुआ बोला। अगर यह सच है तो फिर
- 6:50:20वाकई यह आश्चर्य की बात है कि इसे हम जैसे
- 6:50:24लोगों से उलझने में जरा [संगीत] भी डर
- 6:50:25नहीं लगता। गजराज सोलंकी ने शौर्य के बारे
- 6:50:28में एक और जानकारी देते हुए कहा, एक बात
- 6:50:31और है शिप्रा से शादी के बाद इसने तेजी से
- 6:50:34तरक्की भी की है। हाल फिलहाल में तो वो
- 6:50:37फिल्मों में हीरो के रूप में भी काम कर
- 6:50:39रहा है। एक और बात भी इसके बारे में है कि
- 6:50:41इतने छोटे से समय में ही इसने कई बड़े
- 6:50:44लोगों से पंगा ले लिया है। और मजेदार बात
- 6:50:46यह है कि यह हर किसी पर भारी भी पड़ रहा
- 6:50:48है। यहां तक कि जिस मुख्तार भाई ने इसकी
- 6:50:51शादी जबरदस्ती शिप्रा से कराई है, उसकी भी
- 6:50:53ऐसी तैसी करने में इसने कोई कसर नहीं
- 6:50:56छोड़ी है। गजराज सोलंकी मानो शौर्य का
- 6:50:59पूरा बायोडेटा अशोक सोलंकी के सामने रख
- 6:51:01रहे थे। अशोक सोलंकी ने अपने दांत पीसते
- 6:51:04हुए कहा, ज्यादा समय नहीं लगेगा, भैया।
- 6:51:07मैं अपनी इस बेइज्जती को इतनी आसानी से
- 6:51:09नहीं भूलने वाला हूं। मैं इस लड़के को सबक
- 6:51:12सिखा कर रहूंगा। दूसरी तरफ अपने मां पापा
- 6:51:15को उनके घर छोड़ने के बाद शिप्रा शौर्य के
- 6:51:17साथ अपने घर के लिए निकल गई। लगभग आधे
- 6:51:20घंटे बाद वे मॉडल टाउन वाले घर पहुंच गए।
- 6:51:23गोपाल ने आकर मेन गेट खोला। इस समय रात के
- 6:51:25लगभग 12:00 बज रहे थे। शौर्य कार पार्क
- 6:51:28करने लगा। इसी बीच शिप्रा कार से निकल कर
- 6:51:31अपने कमरे में चली गई थी। उसे वाशरूम जाना
- 6:51:34था इसलिए उसने शौर्य के आने का इंतजार
- 6:51:36नहीं किया। शौर्य भी कार पार्क करने के
- 6:51:38बाद अपने कमरे की तरफ बढ़ गया। अपने कमरे
- 6:51:41के दरवाजे पर रुक कर उसने एक पल को सोचा
- 6:51:44कि क्या वह शिप्रा के कमरे में ही चला
- 6:51:46जाए। लेकिन [संगीत] तभी उसे दिन वाली घटना
- 6:51:48याद आ गई। जब शिप्रा ने उसके कहने के बाद
- 6:51:51भी प्रतीक के सामने उसका पक्ष नहीं लिया
- 6:51:53था। वैसे शिप्रा ने शाम को होटल राजकमल
- 6:51:56में उससे मिलकर सॉरी भी कहा [संगीत] था और
- 6:51:59शौर्य ने उसकी माफी स्वीकार भी कर ली थी।
- 6:52:02लेकिन फिर भी उसके दिल में एक गांठ रह गई
- 6:52:04थी जो अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी। वही
- 6:52:07गांठ शौर्य को शिप्रा की तरफ से खुद पहल
- 6:52:10करने से रोक रही थी। इस समय रात भी काफी
- 6:52:13हो चुकी थी और उसे अगली सुबह बॉक्सर
- 6:52:15जहांगीर खान से मिलने भी जाना था। इसलिए
- 6:52:17[संगीत] वह अपने कमरे में सोने चला गया।
- 6:52:20पहले उसने वाशरूम जाकर हाथ मुंह धोया। फिर
- 6:52:22कमरे में आकर कपड़े बदलने के लिए अपनी
- 6:52:24अलमारी खोली तो उसमें उसके ज्यादातर कपड़े
- 6:52:27थे ही नहीं। तभी उसे ध्यान आया कि शिप्रा
- 6:52:30ने उसके कपड़े अपने कमरे में शिफ्ट कर दिए
- 6:52:32थे। शौर्य ने अपना एक पुराना नाइट सूट
- 6:52:34निकाला और पहनकर अपने बिस्तर पर चला गया।
- 6:52:37दूसरी तरफ शिप्रा वाशरूम से निकल कर बाहर
- 6:52:40आई तो शौर्य उसे अपने कमरे में नजर नहीं
- 6:52:42आया। उसने सोचा अब तक तो उसे आ जाना चाहिए
- 6:52:46था। आखिर वो कहां रह गया? वैसे ही आज जो
- 6:52:49कुछ भी हुआ था उसे लेकर शिप्रा पहले से ही
- 6:52:52चिंतित थी। पार्टी से निकलने के बाद उसे
- 6:52:55शौर्य से इस बारे में बात करने का मौका
- 6:52:57नहीं मिला था। क्योंकि थोड़ी देर बाद ही
- 6:52:59मेघना और उसके मम्मी पापा उसके साथ खाना
- 6:53:02खाने आ गए थे। फिर अपने मम्मी पापा के घर
- 6:53:04से अपने घर आने के दौरान थकावट के कारण
- 6:53:07उसे नींद भी आ गई थी। वॉशरूम से आने के
- 6:53:10बाद अब वो थोड़ा [संगीत] फ्रेश महसूस कर
- 6:53:12रही थी। उसे एहसास हुआ कि अब तक तो शौर्य
- 6:53:15को आ जाना चाहिए था। वो कमरे से बाहर आई
- 6:53:18तो हर तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था। उसने
- 6:53:21शौर्य के कमरे का दरवाजा खोलकर अंदर
- 6:53:23झांका। अंदर अंधेरा था। उसे कुछ आशंका हुई
- 6:53:28तो उसने अंदर जाकर कमरे की लाइट जला दी।
- 6:53:32रोशनी होते ही उसे शौर्य अपने बिस्तर पर
- 6:53:35लेटा हुआ नजर आया। कमरे में अचानक रोशनी
- 6:53:38होने से उसने मिचमिचाते हुए आंखें खोली और
- 6:53:40दरवाजे की तरफ देखा। सामने शिप्रा नाइट
- 6:53:44ड्रेस में दरवाजे के पास खड़ी थी। शिप्रा
- 6:53:47ने उम्मीद नहीं की थी कि शौर्य यहां अपने
- 6:53:49कमरे में आकर सो गया होगा। उसके दिल में
- 6:53:52सबसे पहला विचार यही आया। क्या शौर्य ने
- 6:53:55अभी भी उसे माफ नहीं किया है? तभी तो वह
- 6:53:58अपने कमरे में आकर सो गया। अचानक ही उसे
- 6:54:01अपना दिल बैठता हुआ महसूस हुआ। शौर्य ने
- 6:54:04यह जानने की भी कोशिश नहीं की कि शिप्रा
- 6:54:06अपने कमरे में जाकर सोई है या अभी जाग रही
- 6:54:09है। क्या होटल में वह सिर्फ उसका दिल रखने
- 6:54:12के लिए उसके साथ प्यार से व्यवहार कर रहा
- 6:54:14था। उसे तो खुद लगा था कि शौर्य ने दिल
- 6:54:17में घटी प्रतीक वाली घटना के लिए उसे माफ
- 6:54:20कर दिया था। लेकिन अब जाकर उसे लगा कि
- 6:54:23नहीं शौर्य अभी भी उस बात को भुला नहीं
- 6:54:25पाया है। इस सोच के साथ अचानक उसकी आंखें
- 6:54:29भर आईं। उसे लगा कि अगर वह थोड़ी देर और
- 6:54:32यहां ठहरी तो वो अपने आंसुओं को बहने से
- 6:54:35रोक नहीं [संगीत] पाएगी। उसने तुरंत लाइट
- 6:54:38बंद की और कमरे से बाहर आ गई। वो तुरंत
- 6:54:41अपने कमरे में आई और दरवाजा बंद करके उससे
- 6:54:44टेक लगाकर खड़ी हो गई। अब जाकर उसके
- 6:54:47आंसुओं ने उसका साथ छोड़ दिया और वे बह
- 6:54:50निकले। जबकि अपने कमरे में मौजूद शौर्य ने
- 6:54:53जब शिप्रा को दरवाजे के पास देखा तो उसे
- 6:54:56लगा कि अब वह जरूर उससे कुछ बोलेगी। लेकिन
- 6:54:59शिप्रा ने उसे लेटे हुए देखा और एक पल
- 6:55:01खामोशी से देखने के बाद लाइट बंद करके
- 6:55:04कमरे से निकल गई। यह बात शौर्य को परेशान
- 6:55:07करने लगी। शिप्रा का उससे बिना कुछ कहे
- 6:55:10चले जाना अपने आप में परेशान करने वाली
- 6:55:12बात थी। इसका मतलब था कि किसी बात ने उसके
- 6:55:16दिल को चोट पहुंचाई थी। शौर्य ने महसूस
- 6:55:19[संगीत] किया कि वह इसलिए इतनी जल्दी कमरे
- 6:55:21से बाहर गई थी क्योंकि उसकी आंखें भर आई
- 6:55:23थी और वह यह बात शौर्य के सामने नहीं लाना
- 6:55:26चाहती थी। इस सोच से शौर्य और ज्यादा
- 6:55:30परेशान हो गया। कहा तो वह सोने वाला था
- 6:55:33लेकिन अब नींद उसकी आंखों से कोसों दूर जा
- 6:55:35चुकी थी। उसे लगा [संगीत] क्या उसने अपने
- 6:55:38कमरे में आकर गलती कर दी? क्या उसे शिप्रा
- 6:55:41से बात करने के बाद ही अपने कमरे में आना
- 6:55:43चाहिए था? उसे महसूस हुआ कि शायद उससे
- 6:55:46गलती हो गई थी। [संगीत] शिप्रा के माफी
- 6:55:49मांगने के बाद भी उसे प्रतीक वाली बात को
- 6:55:51किसी गांठ की तरह अपने दिल में नहीं रखना
- 6:55:54चाहिए था। वो उठकर बेड पर बैठ गया। उसे
- 6:55:58चिंता होने लगी कि अब शिप्रा अपने कमरे
- 6:56:00में जाकर क्या कर रही होगी। अब उसे यहां
- 6:56:02बैठकर चैन नहीं आ रहा था। वो उठा और अपने
- 6:56:06कमरे से बाहर आया। शिप्रा के कमरे के
- 6:56:08दरवाजे पर जाकर उसने उस पर दबाव डाला तो
- 6:56:11पाया कि दरवाजा अंदर से बंद था।
- 6:56:14अब उसे शिप्रा की और भी ज्यादा चिंता होने
- 6:56:16लगी। कहीं उसने शिप्रा को ज्यादा नाराज तो
- 6:56:19नहीं कर दिया? वो दोबारा अपने कमरे में
- 6:56:22आया और वहां से बालकनी में पहुंचा। बालकनी
- 6:56:25से शिप्रा के कमरे में जाने वाले दरवाजे
- 6:56:28पर शौर्य ने हल्का सा दबाव डाला तो वह
- 6:56:30दरवाजा बिना किसी आवाज के अंदर की तरफ खुल
- 6:56:33गया। शौर्य ने मन ही मन ऊपर वाले का
- 6:56:36धन्यवाद किया कि दरवाजा खुला हुआ था। बिना
- 6:56:40कोई आवाज किए शौर्य कमरे के अंदर चला गया।
- 6:56:42[संगीत]
- 6:56:43कमरे की लाइट बंद थी और उसे अंदर का कुछ
- 6:56:46भी दिखाई नहीं दे रहा था। धीरे-धीरे उसकी
- 6:56:49आंखें [संगीत] अंधेरे में देखने की
- 6:56:51अभ्यस्त हुई तो उसने देखा कि शिप्रा अपने
- 6:56:54बेड पर लेटी हुई थी। वो पलंग के एक कोने
- 6:56:57पर बाई करवट लेकर एक छोटे [संगीत] से
- 6:56:59स्पेस में ही सिमटी हुई थी। उसकी इस हालत
- 6:57:02को देखकर ही शौर्य समझ [संगीत] गया कि
- 6:57:04जरूर वह रो रही है। शायद उसे भी एहसास हो
- 6:57:08गया था कि शौर्य कमरे में आ चुका है। उसने
- 6:57:12अपनी कोहनी मोड़कर हाथ से अपना चेहरा ढक
- 6:57:14लिया था। शायद वह नहीं चाहती थी कि उसके
- 6:57:17आंसू शौर्य को दिखाई दें। शिप्रा को इस
- 6:57:20हालत में देखकर शौर्य को खुद पर गुस्सा
- 6:57:22आया कि उसने खामखा शिप्रा को रुला दिया।
- 6:57:26उसका दिल अचानक शिप्रा को अपनी बाहों में
- 6:57:28भरने के लिए तड़प उठा। वो धीरे से बेड की
- 6:57:31तरफ बढ़ा और जाकर उसके पास बैठ गया। लेकिन
- 6:57:34शिप्रा के शरीर में कोई हरकत नहीं हुई। वो
- 6:57:37उसी अवस्था में लेटी रही। शौर्य धीरे से
- 6:57:40बेड पर लेट गया और खिसक कर शिप्रा के पास
- 6:57:43चला गया। उसने धीरे से अपना हाथ उसके कंधे
- 6:57:46पर रखा। लेकिन शिप्रा ने झटक कर उसका हाथ
- 6:57:49अपने कंधे से हटा दिया। उसने दोबारा यही
- 6:57:52कोशिश की लेकिन शिप्रा ने फिर उसका हाथ
- 6:57:55झटक दिया। अब शौर्य के चेहरे पर मुस्कान आ
- 6:57:58गई। वह समझ गया कि अब उसे मनाने में थोड़ी
- 6:58:01मेहनत तो करनी पड़ेगी। वो अपना चेहरा उसके
- 6:58:04कान के पास ले जाकर धीरे से बोला, क्या
- 6:58:08तुम रो रही हो? शिप्रा अपने आप में और
- 6:58:11सिमट गई लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। अब
- 6:58:15शौर्य ने अपना हाथ उसके कंधे पर रखने के
- 6:58:17बजाय उसकी कमर के गिर्द लपेट लिया और उसे
- 6:58:21खींचकर अपनी छाती से सटा लिया। शिप्रा के
- 6:58:24शरीर में एक सिहरन सी दौड़ गई। उसने शौर्य
- 6:58:27के हाथ को अपनी कमर से छुड़ाने का प्रयास
- 6:58:30किया। लेकिन शौर्य ने अपनी पकड़ मजबूत कर
- 6:58:33रखी थी। जब शिप्रा खुद को शौर्य की पकड़
- 6:58:36से छुड़ाने में असमर्थ महसूस करने लगी तो
- 6:58:39उसने दांत भी कर कहा मैं कह रही हूं छोड़ो
- 6:58:42मुझे। लेकिन शौर्य ने उसे कोई जवाब नहीं
- 6:58:45दिया। उसने शिप्रा को छोड़ने के बजाय उसके
- 6:58:48और करीब होकर अपना गाल शिप्रा के गाल पर
- 6:58:51रख दिया। क्योंकि थोड़ी देर पहले शिप्रा
- 6:58:54अपने हाथों से अपना चेहरा ढके हुए थी और
- 6:58:57अब वह अपने हाथों से शौर्य की कमर के
- 6:58:59गिर्द लिपटी उसकी पकड़ को छुड़ाने का
- 6:59:01प्रयास कर रही थी। [संगीत] इसलिए इस समय
- 6:59:04उसके चेहरे पर कोई आवरण नहीं था। जैसे ही
- 6:59:08शौर्य का गाल शिप्रा के गाल से छुआ उसे
- 6:59:11उसके गाल पर गीलेपन का एहसास हुआ। उसे
- 6:59:14यकीन हो [संगीत] गया कि उसका शक सही था।
- 6:59:17शिप्रा सचमुच रो रही थी। शौर्य ने धीमे से
- 6:59:20फुसफुसाकर [संगीत] कहा
- 6:59:22यानी मेरा शक सही था। तुम सचमुच रो रही
- 6:59:28थी। मैंने कहा छोड़ो मुझे। शिप्रा अभी भी
- 6:59:31शौर्य की बात को नजरअंदाज करते हुए खुद को
- 6:59:34उसकी पकड़ से छुड़ाने का प्रयास करती हुई
- 6:59:36बोली। लेकिन शौर्य ने अभी भी अपनी पकड़
- 6:59:39ढीली नहीं की। जब शिप्रा ने खुद को शौर्य
- 6:59:42की पकड़ से छूटने में असहाय महसूस किया तो
- 6:59:45वह करवट लेकर शौर्य की तरफ पलट गई। अब
- 6:59:48[नाक से की जाने वाली आवाज़] दोनों के
- 6:59:48चेहरे आमने-सामने थे। शिप्रा ने सामने से
- 6:59:51धक्का देकर शौर्य [संगीत] को खुद से दूर
- 6:59:53कर दिया। शिप्रा से शौर्य की पकड़ तो छूट
- 6:59:56गई लेकिन अब वह सामने से उसके चेहरे को
- 6:59:59देख [संगीत] सकता था। उसने हाथ बढ़ाकर
- 7:00:02शिप्रा के गाल पर ढलके आंसुओं को पोंछा।
- 7:00:05शिप्रा ने फिर से झटक कर उसका हाथ खुद से
- 7:00:07अलग कर दिया। शौर्य यही शुक्र मना रहा था
- 7:00:10कि शिप्रा ने उसे बेड से बाहर धक्का नहीं
- 7:00:13दिया। [संगीत]
- 7:00:14इसका मतलब था कि वह शौर्य को अपने पास आने
- 7:00:17नहीं देना चाहती थी।
- 7:00:18[संगीत]
- 7:00:18लेकिन वो यह भी नहीं चाहती थी कि शौर्य
- 7:00:21उसके बेड से उठकर चला जाए। शिप्रा का यह
- 7:00:24अंदाज भी निराला था। उसे शौर्य को अपने
- 7:00:27पास आने भी नहीं देना था और उसे खुद से
- 7:00:29दूर जाने भी नहीं देना था। जब शिप्रा ने
- 7:00:33शौर्य के हाथ को झटक कर खुद से अलग कर
- 7:00:36दिया तो शौर्य वहीं रुक गया। वो दूर से ही
- 7:00:39शिप्रा की तरफ देखता रहा। वो शिप्रा की
- 7:00:42नाराजगी का कारण तो समझ गया था लेकिन उसकी
- 7:00:45आंखों में आंसू क्यों आए थे? यह उसकी समझ
- 7:00:48से बाहर था। आखिरकार उसने वहीं से पूछा,
- 7:00:52"तुम रो क्यों रही थी?" शौर्य का सवाल
- 7:00:55सुनकर शिप्रा ने अपनी नजरें उठाकर उसकी
- 7:00:58तरफ देखा। लेकिन अगले ही पल [संगीत] बिना
- 7:01:00कुछ कहे वो दूसरी दिशा में पलट गई। शौर्य
- 7:01:04को शिप्रा का यह रिएक्शन समझ नहीं आ रहा
- 7:01:06था। वो दोबारा उसके करीब गया और उसके कान
- 7:01:10के पास धीरे से बोला। कुछ बताओगी तभी तो
- 7:01:13समझ आएगा कि दिक्कत क्या है। लेकिन शिप्रा
- 7:01:16ने फिर भी कोई जवाब नहीं दिया। शौर्य अब
- 7:01:20उसे मनाते मनाते थकने लगा था। उसने थोड़ी
- 7:01:23झुंझुलाहट के साथ कहा देखो अगर तुम्हें
- 7:01:26मुझसे बात नहीं करनी है तो कोई बात नहीं।
- 7:01:29[संगीत]
- 7:01:29लेकिन इतना तो बता ही सकती हो कि तुम मेरे
- 7:01:31कमरे में आई थी तो फिर बिना कुछ बोले वापस
- 7:01:33क्यों आ गई थी? और वापस आने के बाद रो भी
- 7:01:36रही थी। शौर्य के मन में भी खीज उठने लगी
- 7:01:40थी। हद है। [संगीत] नाराज तो मुझे इससे
- 7:01:42होना चाहिए। लेकिन उल्टा यही मुझसे नाराज
- 7:01:45हो रही है। उसने एक बार आखिरी कोशिश करने
- 7:01:48की सोची और शिप्रा को अपनी बाहों के घेरे
- 7:01:51में ले लिया। लेकिन शिप्रा ने तुरंत उसके
- 7:01:54हाथ खुद से दूर कर दिए और खिसक कर बेड के
- 7:01:57एकदम किनारे जा बैठी। अब शौर्य को भी बुरा
- 7:02:00लगने लगा। उसने भावहीन स्वर में कहा। अब
- 7:02:04और किनारे गई तो बेड से ही गिर पड़ोगी।
- 7:02:07तुम नहीं चाहती कि मैं तुम्हारे बेड पर
- 7:02:09रहूं।
- 7:02:10लेकिन शिप्रा की तरफ से कोई जवाब नहीं
- 7:02:12आया। हां, वो थोड़ा खिसक कर बेड के अंदर
- 7:02:15जरूर हो गई, लेकिन उसने शौर्य से एक दूरी
- 7:02:18बनाए रखी। शौर्य ने जब यह देखा तो वह भी
- 7:02:22अपनी तरफ थोड़ा और खिसकाया ताकि [संगीत]
- 7:02:24शिप्रा के लिए बेड पर पर्याप्त जगह बन
- 7:02:26जाए। उसे इस बात से थोड़ी तसल्ली हुई कि
- 7:02:29अब शिप्रा के आंसू बहना बंद हो गए थे। जब
- 7:02:33शौर्य ने महसूस किया कि शिप्रा अब सामान्य
- 7:02:35नजर आ रही है तो वह भी उसकी विपरीत दिशा
- 7:02:38में करवट लेकर सोने की कोशिश करने लगा।
- 7:02:41उसे सुबह जल्दी उठना भी था। शिप्रा इस बात
- 7:02:44से अनजान थी कि शौर्य ने उसकी तरफ से अपनी
- 7:02:47पीठ दूसरी ओर फेर ली है। 5 मिनट बीते। फिर
- 7:02:5110 मिनट। जब दोबारा शौर्य की तरफ से कोई
- 7:02:54हलचल नहीं हुई तो शिप्रा ने धीरे से पलट
- 7:02:57कर उसकी तरफ देखा। शौर्य को खुद से दूर
- 7:03:00दूसरी तरफ करवट लेकर सोते देखकर उसका दिल
- 7:03:03धक से रह गया। उसने मन ही मन सोचा इतनी
- 7:03:08जल्दी हार मान ली। थोड़ी और कोशिश नहीं कर
- 7:03:11सकता था क्या? वो खुद शौर्य के करीब जाते
- 7:03:14हुए मन ही मन सोचने लगी। लेकिन अब शौर्य
- 7:03:17की तरफ से कोई हलचल नहीं हो रही थी। क्या
- 7:03:21वो सच में सो गया है? यह ख्याल आते ही
- 7:03:24उसके दिल में एक सुई सी चुभ। शौर्य की तरफ
- 7:03:27से कोई प्रतिक्रिया ना देखकर वह धीरे-धीरे
- 7:03:30[संगीत] उसके एकदम करीब गई और उसे अपनी
- 7:03:32बाहों में भर लिया। लेकिन अब कमरे में
- 7:03:36गहरी खामोशी छा चुकी थी। तभी उसे समझ आया
- 7:03:39[संगीत] कि थकान की वजह से शौर्य सो चुका
- 7:03:42था। अब उसे खुद पर गुस्सा आने लगा था।
- 7:03:45[संगीत]
- 7:03:46मुझे इतना भाव खाने की क्या जरूरत थी। वो
- 7:03:49उठकर बैठ गई और फिर बेड से उतर कर दूसरी
- 7:03:52तरफ चली गई। वहां शौर्य के सामने लेटने के
- 7:03:55लिए जगह बहुत कम [संगीत] थी। फिर भी उसने
- 7:03:58अपने लिए थोड़ी सी जगह बनाई और शौर्य के
- 7:04:00सीने से चिपक गई। उसने एक नजर शौर्य के
- 7:04:04चेहरे पर डाली और उसे ध्यान से देखने लगी।
- 7:04:07फिर उसके होठों पर हल्का सा किस किया।
- 7:04:10शौर्य के शरीर में कोई हरकत नहीं हुई।
- 7:04:13इसके बाद शिप्रा ने अपना चेहरा शौर्य के
- 7:04:16सीने में छिपा लिया और आंखें बंद कर ली।
- 7:04:19इसी अवस्था में जाने कब उसे नींद आ गई।
- 7:04:23सुबह 7:00 बजे शौर्य की आंख अपने फोन की
- 7:04:25आवाज से खुली। उसने देखा [संगीत] कि
- 7:04:28शिप्रा अभी भी उसके सीने से लिपट कर सोई
- 7:04:31हुई थी। शौर्य ने प्यार से उसकी तरफ
- 7:04:33[संगीत] देखा।
- 7:04:35रात तो मेरे पास आने नहीं दे रही थी और
- 7:04:37अभी कैसे चिपक कर सोई हुई है। उसने साइड
- 7:04:41टेबल से अपना फोन उठाया। स्क्रीन पर उसके
- 7:04:44पापा का नाम फ्लैश हो रहा था। सुबह-सुबह
- 7:04:47पापा का फोन। शौर्य ने जल्दी से फोन
- 7:04:50उठाया। [संगीत]
- 7:04:51हेलो पापा। क्या बात है? आप सुबह-सुबह फोन
- 7:04:54कर रहे हैं? शौर्य ने पूछा, [संगीत]
- 7:04:57सूर्यभान जी ने बिना भूमिका बांधे
- 7:04:59जल्दबाजी में कहा, सुनो, आज [संगीत] 9:00
- 7:05:02बजे तक तुम कान्हा फॉरेस्ट पहुंच जाना।
- 7:05:04वहां कनिका अपने भाई बहनों के साथ तुमसे
- 7:05:06मिलेगी। तुम्हारे दूसरे भाई भी वहीं
- 7:05:09जाएंगे। [संगीत]
- 7:05:10आज सब ने जंगल सफारी पर जाने का प्लान
- 7:05:12किया है। इस तरह तुम सबकी आपस [संगीत] में
- 7:05:15जान पहचान भी हो जाएगी। शौर्य ने घड़ी की
- 7:05:18तरफ देखा और फिर हैरानी से बोला, पर पापा
- 7:05:237 तो बज गए हैं। मुझे तो पता भी नहीं है
- 7:05:26कि वहां पहुंचने में कितना समय लगेगा। अगर
- 7:05:29ऐसा कोई प्लान था तो आपको पहले बताना
- 7:05:32चाहिए था। सूर्यभान जी ने अपनी नाराजगी
- 7:05:35जाहिर करते हुए कहा। मैंने तुम्हें पहले
- 7:05:38भी फोन किया था। लेकिन तुमने फोन ही नहीं
- 7:05:40उठाया। वीरभद्र ने मुझे कल शाम को ही अपने
- 7:05:44बच्चों के प्लान के बारे में बता दिया था।
- 7:05:46मैंने सोचा रात में तुम आओगे। लेकिन तुम
- 7:05:49तो पता नहीं अभी भी कहां रहते हो। शौर्य
- 7:05:52ने इस बारे में अपने पापा से और बहस करना
- 7:05:55सही नहीं समझा। वो तुरंत बोला ठीक है मैं
- 7:05:59चला जाऊंगा। सूर्यभंजी ने समझाते हुए कहा,
- 7:06:04ठीक है समय से पहुंच जाना [संगीत]
- 7:06:06और देखना कनिका से जरा ढंग से पेश आना।
- 7:06:10मैं जानता हूं कि कुणाल और प्रतीक उन सबको
- 7:06:12अपनी तरफ आकर्षित करने का पूरा प्रयास
- 7:06:15करेंगे। और यहां शायद कोई चाहता भी नहीं
- 7:06:18[संगीत] है कि कनिका तुम्हें पसंद करे।
- 7:06:20लेकिन तुम अपनी तरफ से पूरी कोशिश करना।
- 7:06:23सूर्यभं जी की आवाज में शौर्य के लिए
- 7:06:26चिंता थी। उन्हें लग रहा था कि अगर कहीं
- 7:06:28कनिका ने शौर्य को पसंद नहीं किया तो उसे
- 7:06:31बहुत दुख होगा। शौर्य भली-भांति अपने पापा
- 7:06:34की भावनाओं को समझ रहा था। वह कैसे अपने
- 7:06:37पापा को समझाता कि वह तो खुद चाहता था कि
- 7:06:40कनिका उसे पसंद ना करें। अब तो शौर्य को
- 7:06:43पूरा यकीन था कि कनिका पहली फुर्सत में ही
- 7:06:46उसे अपना फैसला सुना देगी। बल्कि यह कहना
- 7:06:49ज्यादा उचित होगा कि पिछली मुलाकात में ही
- 7:06:52कनिका ने एक तरह से उसे बता दिया था कि वह
- 7:06:54उसे पसंद नहीं करती। बस वह चाहती थी कि
- 7:06:58शौर्य अपनी तरफ से इस रिश्ते के लिए इंकार
- 7:07:00कर दे जिसके लिए शौर्य तैयार नहीं था।
- 7:07:04लेकिन अब तो कनिका को शौर्य की जगह प्रतीक
- 7:07:07या कुणाल में से किसी एक को पसंद करना था।
- 7:07:10और अगर ऐसा हो जाता तो शौर्य अपने आप इस
- 7:07:13रिश्ते से आजाद हो जाता। इसी ख्याल ने
- 7:07:16शौर्य को भीतर से रिलैक्स कर दिया। शौर्य
- 7:07:19को समझाने के बाद सूर्य भांजी ने फोन काट
- 7:07:21दिया। शौर्य ने एक बार फिर शिप्रा की तरफ
- 7:07:24देखा। वह अभी भी बेसुध सोई हुई थी और उसने
- 7:07:28अब तक शौर्य को छोड़ा नहीं था। शौर्य ने
- 7:07:31बेड के सिरहाने से खुद को टिकाकर अपना सिर
- 7:07:34थोड़ा ऊपर कर लिया था। लेकिन शिप्रा का
- 7:07:36सिर अभी भी उसके सीने पर ही था। शौर्य ने
- 7:07:40अपना मोबाइल एक तरफ रखा और सोचा कि
- 7:07:42[संगीत] शिप्रा को सहारा देकर साइड कर दे
- 7:07:44ताकि वह बेड से उठ सके। उसने दोनों हाथों
- 7:07:48से शिप्रा के कंधे पकड़ कर उसे धीरे से
- 7:07:50साइड करना चाहा। तभी शिप्रा की आंखें खुल
- 7:07:53गई। अपनी स्थिति का भान होते ही उसे ऐसा
- 7:07:56लगा जैसे उसकी चोरी पकड़ी गई हो। शौर्य की
- 7:08:00नजर [संगीत] में तो वह उससे नाराज होकर
- 7:08:02सोई थी। फिर वह शौर्य के इतने करीब कैसे आ
- 7:08:05गई? अपनी घबराहट छिपाते हुए शिप्रा ने
- 7:08:08कहा, मैं शायद नींद में तुम्हारे करीब आ
- 7:08:11गई। यह मत सोचना कि मैंने ऐसा जानबूझकर
- 7:08:14किया। शौर्य ने बिना किसी खास प्रतिक्रिया
- 7:08:17के कहा, "मैं समझता हूं, तुम ऐसा जानबूझकर
- 7:08:21करने से तो रही। तुम शायद नींद में ही
- 7:08:23मेरे पास आ गई होगी। ठीक है, अब अलग हो
- 7:08:26[संगीत] जाओ।" शौर्य ने भी शिप्रा में कोई
- 7:08:29खास दिलचस्पी लेने की कोशिश नहीं की। उसे
- 7:08:32जल्दी निकलना था। अगर वह शिप्रा के साथ
- 7:08:34उलझ गया तो यहीं देर हो जाएगी। आज उसे
- 7:08:38कनिका के साथ वाला अपना मामला किसी भी तरह
- 7:08:41समाप्त करना था। तभी तो वह शिप्रा को अपने
- 7:08:44घर लेकर जा सकता था। लेकिन शिप्रा को
- 7:08:47शौर्य के ऐसे [संगीत] बेरुखे व्यवहार की
- 7:08:49उम्मीद नहीं थी। उसके जवाब से उसे जैसे
- 7:08:52धक्का सा लगा। वह गौर से शौर्य के चेहरे
- 7:08:55की तरफ देखने लगी। लेकिन शौर्य उससे अपनी
- 7:08:58नजरें मिलाने का साहस नहीं जुटा सका।
- 7:09:01शिप्रा ने शिकायत भरे अंदाज में कहा,
- 7:09:04"मुझे तो लगता है तुमने ही जानबूझकर मुझे
- 7:09:07सोते हुए अपने करीब कर लिया होगा और अब
- 7:09:10ऐसा जता रहे हो जैसे मैं ही जानबूझकर
- 7:09:12तुम्हारे पास आ गई। शिप्रा चाहती थी कि
- 7:09:15शौर्य उससे [संगीत] बात करें। लेकिन शौर्य
- 7:09:18तो उसकी तरफ ध्यान ही नहीं दे रहा था।
- 7:09:20शौर्य अब भली-भांति समझ रहा था कि शिप्रा
- 7:09:23क्या चाहती है। कोई और समय होता तो वह भी
- 7:09:26इस तरह [संगीत] शिप्रा से बहस करने में
- 7:09:28आनंद लेता। लेकिन अभी उसे 9:00 बजे तक
- 7:09:31कान्हा फॉरेस्ट पहुंचना था। इसलिए वह
- 7:09:34फिलहाल शिप्रा से बहस करने के मूड में
- 7:09:36नहीं था। शिप्रा को लगा कि शौर्य जानबूझकर
- 7:09:40उसे इग्नोर कर रहा है। वह बड़े बेमन से
- 7:09:43शौर्य से अलग हुई। शौर्य तुरंत बिस्तर से
- 7:09:46उठा और वॉशरूम में फ्रेश होने चला गया।
- 7:09:49शौर्य की जल्दबाजी देखकर शिप्रा को बेचैनी
- 7:09:52होने लगी। उसके वाशरूम में जाते ही शिप्रा
- 7:09:55बेड पर बैठ गई और वाशरूम के दरवाजे की तरफ
- 7:09:59देखने लगी। उसे लगा कि जिस जल्दबाजी में
- 7:10:02शौर्य वाशरूम गया है, इसका मतलब है कि वह
- 7:10:05कहीं बाहर जाने वाला है। जिस तरह वो मुझे
- 7:10:09इग्नोर कर रहा है, अगर ऐसे ही चला गया, तो
- 7:10:12फिर हम दोनों के बीच की नाराजगी बनी
- 7:10:14[संगीत] ही रहेगी। नहीं, मैं ऐसे नाराज
- 7:10:17होकर शौर्य को बाहर नहीं जाने [संगीत]
- 7:10:19दूंगी। ज्यादा समय नहीं बीता। शौर्य जल्दी
- 7:10:24ही नहाकर वाशरूम से बाहर आ गया। उसने अपने
- 7:10:27शरीर पर सिर्फ तौलिया लपेट रखा था। उसका
- 7:10:30ऊपरी शरीर वैसे [संगीत] ही दिखाई दे रहा
- 7:10:32था। शौर्य ने बिल्कुल उम्मीद नहीं की थी
- 7:10:36कि शिप्रा [संगीत] इस तरह बेड पर बैठकर
- 7:10:38वॉशरूम के दरवाजे की तरफ टकटकी लगाए उसका
- 7:10:41इंतजार कर रही होगी। वो जल्दी से अलमारी
- 7:10:44के पास [संगीत] गया और उसमें से अपने
- 7:10:46कपड़े निकालने लगा। सबसे पहले उसने अपनी
- 7:10:49बनियान निकाली और पहन ली।
- 7:10:52लेकिन वाशरूम से बाहर आने के बाद भी शौर्य
- 7:10:54का खुद को इग्नोर करना शिप्रा को बिल्कुल
- 7:10:57पसंद नहीं आ रहा था। उसे गुस्सा आने लगा।
- 7:11:01एक मैं हूं जो इसके वाशरूम से निकलने के
- 7:11:03इंतजार में यहां बैठी हूं। और इस महाशय ने
- 7:11:06[संगीत] एक बार मेरी तरफ देखने की जरूरत
- 7:11:09तक नहीं समझी। उसने मन ही मन ठान लिया।
- 7:11:13कभी जितना भाव [संगीत] खाना है खा लो।
- 7:11:15इसका सबक तो मैं तुम्हें बाद में चखाऊंगी।
- 7:11:18शिप्रा बेड पर बैठी शौर्य को कपड़े बदलते
- 7:11:21देखती रही। उसे शौर्य का यूं इग्नोर करना
- 7:11:24बिल्कुल पसंद नहीं [संगीत] आ रहा था।
- 7:11:26अचानक वो उठी और शौर्य के पास जाकर उसे
- 7:11:30पीछे से अपनी बाहों में भर लिया। शौर्य तब
- 7:11:33तक अपने कपड़े पहन चुका था। उसे बिल्कुल
- 7:11:35उम्मीद नहीं [संगीत] थी कि शिप्रा ऐसा कुछ
- 7:11:37करेगी। वो अभी सोच ही रहा था कि कैसे
- 7:11:41रिएक्ट करें कि तभी शिप्रा की आवाज उसके
- 7:11:43कानों में पड़ी। शिकायत भरे स्वर में उसने
- 7:11:47कहा, "तुम ऐसा क्यों कर रहे हो मेरे साथ?"
- 7:11:50शौर्य ने अनजान बनने की कोशिश करते हुए
- 7:11:52कहा, अब मैं क्या कर रहा हूं? अभी तो
- 7:11:56मैंने कुछ कहा भी नहीं। तो अब यह शिकायत
- 7:11:58किस लिए? शिप्रा ने उसकी कमर को थामे रखते
- 7:12:02हुए शिकायत की। तुम यूं अनजान बनकर क्या
- 7:12:05दिखाना चाहते हो? जब से उठे हो, मुझे ऐसे
- 7:12:08इग्नोर किए जा रहे हो जैसे मैं इस कमरे
- 7:12:11[संगीत] में हूं ही नहीं। शौर्य ने शिप्रा
- 7:12:14का हाथ अपने पेट से हटाने की कोशिश करते
- 7:12:16हुए समझाया। तुम गलत समझ रही हो। मुझे अभी
- 7:12:20बाहर जाना है इसलिए जल्दी से तैयार होना
- 7:12:23था। तुम्हें भी फ्रेश हो लेना चाहिए।
- 7:12:27लेकिन शिप्रा की शिकायतें अभी खत्म नहीं
- 7:12:29हुई थी। उसने दुखी स्वर में कहा। रात भी
- 7:12:33मैं तुम्हारा इंतजार करती रही [संगीत] और
- 7:12:35तुम दूसरे कमरे में जाकर लाइट बंद करके सो
- 7:12:37गए थे। कभी सोचा भी कि इस बात से मुझे
- 7:12:40कितना दुख हुआ? और यहां आए भी तो इतनी
- 7:12:43जल्दी सो गए कि कुछ बात भी नहीं हो पाई।
- 7:12:46फिर सोचा था कि सुबह उठोगे तो प्यार से
- 7:12:49मुझसे [संगीत] बात करोगे। लेकिन तुम तो
- 7:12:51मेरी तरफ देख भी नहीं रहे हो। शौर्य ने भी
- 7:12:55सफाई देते हुए कहा, उल्टी बात है। [संगीत]
- 7:12:58मैं जल्दी नहीं सो गया था। तुम्हें ही
- 7:13:00मुझसे बात करने में कोई इंटरेस्ट नहीं था।
- 7:13:03मैंने तुम्हें मनाने की कितनी कोशिश की
- 7:13:05लेकिन तुम तो मुझसे बात करने के लिए ही
- 7:13:07तैयार नहीं थी। मैं तो वैसे ही थका हुआ
- 7:13:10[संगीत] था।
- 7:13:11पता नहीं कब नींद आ गई। शिप्रा रूठे हुए
- 7:13:14अंदाज में बोली, थोड़ी देर और भी तो मना
- 7:13:17सकते थे। तुमने तो जल्दी ही हार मान ली
- 7:13:20थी। शौर्य ने हल्की झुंझुलाहट के साथ कहा,
- 7:13:24"अब मुझे क्या पता था कि तुम्हें कितनी
- 7:13:26देर मनाना है।" मेरे पास कोई टाइम मशीन तो
- 7:13:29थी नहीं जिससे पता चल जाता कि कितना मनाने
- 7:13:32से तुम मानने वाली हो। लेकिन अब इस बहस का
- 7:13:35कोई फायदा नहीं होने वाला। जो होना था वह
- 7:13:39तो हो गया। शिप्रा तुरंत उसके सामने आ गई
- 7:13:42और उसकी तरफ देखते हुए बोली क्या हो गया?
- 7:13:47मैं सुबह से तुम्हारी एक प्यार भरी नजर
- 7:13:49पाने के लिए तरस [संगीत] गई हूं और तुम तो
- 7:13:51पता नहीं किस दुनिया में गुम हो। यह कहते
- 7:13:55[संगीत] हुए उसने सामने से शौर्य को कसकर
- 7:13:57पकड़ लिया। शौर्य ने उसे खुद से अलग करने
- 7:14:00की कोशिश करते हुए कहा। यह तुम क्या कर
- 7:14:03रही हो? मुझे एक जगह अर्जेंटली पहुंचना
- 7:14:06है। मैं शाम को आकर तुमसे बात करूंगा।
- 7:14:10लेकिन शिप्रा ने उसे नहीं छोड़ा। वो रूठते
- 7:14:13हुए बोली, "मुझे नहीं पता, मैं रात भर
- 7:14:17तुम्हारे कारण सो नहीं पाई [संगीत] और अभी
- 7:14:19सुबह-सुबह तुम जल्दी में निकलने वाले हो।"
- 7:14:22शौर्य समझ गया [संगीत] कि अगर उसने जल्दी
- 7:14:24से शिप्रा को शांत नहीं किया, तो वह ऐसे
- 7:14:27ही उसे उलझाती रहेगी। उसने दोनों हाथों से
- 7:14:30शिप्रा का चेहरा थामा। उसकी तरफ झुका और
- 7:14:33उसके होठों पर किस करते हुए बोला, "मैं
- 7:14:36तुम्हें इग्नोर नहीं कर रहा। मुझे बस
- 7:14:38जल्दी है। 9:00 बजे तक मुझे कान्हा
- 7:14:40फॉरेस्ट पहुंचना है। सुबह-सुबह पापा का
- 7:14:43फोन आया था। उन्होंने कनिका और उसके
- 7:14:45भाइयों से मिलने के लिए मुझे वहां बुलाया
- 7:14:47है। [संगीत] इसीलिए अभी जल्दी है। मैं शाम
- 7:14:50को आकर तुमसे मिलता हूं। अब जाकर शिप्रा
- 7:14:53को समझ आया कि शौर्य को किस बात की जल्दी
- 7:14:56[संगीत] थी। शौर्य ने खुद को शिप्रा से
- 7:14:58अलग किया और उसका चेहरा दोनों हाथों में
- 7:15:00थामते हुए प्यार से बोला। [संगीत]
- 7:15:02अब अगर तुम इजाजत दो तो मैं जाऊं। शौर्य
- 7:15:05की बात सुनते ही शिप्रा ने एक बार फिर उसे
- 7:15:08कसकर अपनी बाहों में भी लिया। लगभग 2 मिनट
- 7:15:11तक वह शौर्य से लिपटी हुई खड़ी रही। फिर
- 7:15:14आखिरकार धीमे स्वर में बोली, "अभी जाओ।
- 7:15:17लेकिन शाम को जल्दी आना। मैं तुम्हारा
- 7:15:19इंतजार करूंगी।" इसके बाद शौर्य अपने घर
- 7:15:23से निकला और अपनी कार में सवार होकर
- 7:15:25कान्हा फॉरेस्ट के लिए निकल गया। लेकिन अब
- 7:15:27सवाल यह था कि आगे क्या होने वाला था?
- 7:15:30क्या कनिका शौर्य को नापसंद करके कुणाल या
- 7:15:33प्रतीक में से किसी एक को पसंद कर लेगी?
- 7:15:36शौर्य ने अपने मोबाइल में कान्हा फॉरेस्ट
- 7:15:39की लोकेशन डाली तो यहां से उसकी दूरी 85
- 7:15:42कि.मी. दिखाई दे रही थी। उसने [संगीत] समय
- 7:15:45देखा। सुबह के 7:40 हो रहे थे। उसे हर हाल
- 7:15:49में 9 बजे तक वहां पहुंचना था। हाईवे पर
- 7:15:52पहुंचते ही उसकी [संगीत] गाड़ी की रफ्तार
- 7:15:54हवा से बातें करने लगी। लगभग पौ:45 बजे के
- 7:15:58करीब वो कान्हा फॉरेस्ट पहुंच गया। अब
- 7:16:01उसके सामने [संगीत] सबसे बड़ा सवाल था कि
- 7:16:03कनिका कहां ठहरी हुई है। वो कनिका को फोन
- 7:16:06करने के बारे में सोच ही रहा था कि तभी
- 7:16:09उसके मोबाइल पर खुद कनिका का फोन आ गया।
- 7:16:12शौर्य ने तुरंत फोन उठाया। कनिका की आवाज
- 7:16:15दूसरी तरफ से सुनाई दी। तुम यहां कान्हा
- 7:16:17फॉरेस्ट आने वाले थे? क्या हुआ? अभी तक आए
- 7:16:20नहीं? आने का इरादा है भी या नहीं? शौर्य
- 7:16:24थोड़ा हकलाते हुए बोला,
- 7:16:27मैं आ तो गया हूं पर मुझे पता नहीं है कि
- 7:16:30तुमसे मिलना कहां है। कनिका ने सहजता से
- 7:16:33जवाब दिया। तुम किसी से भी वाइल्ड विस्टा
- 7:16:35रिसोर्ट के बारे में पूछ लो। हम यहीं ठहरे
- 7:16:38[संगीत] हुए हैं। शौर्य ने कहा, ठीक है।
- 7:16:42मैं थोड़ी देर में पहुंचता [संगीत] हूं।
- 7:16:44इतना कहकर उसने अपने मोबाइल में वाइल
- 7:16:46विस्टा की लोकेशन डाली। लोकेशन देखकर उसे
- 7:16:49पता चला कि रिसोर्ट उससे महज 1.5 कि.मी.
- 7:16:52की दूरी पर [संगीत] था। शौर्य ने बिना देर
- 7:16:54किए अपनी कार उसी दिशा में बढ़ा दी। लगभग
- 7:16:575 मिनट बाद उसकी [संगीत] कार वाइल्ड
- 7:16:59विस्टा के गेट पर पहुंच चुकी थी। उसने
- 7:17:02हॉर्न बजाया तो दरबान ने तुरंत गेट खोल
- 7:17:04दिया। शौर्य ने कार अंदर ले जाकर पार्किंग
- 7:17:08में खड़ी की और फिर कार से बाहर आ गया।
- 7:17:10उसके दिमाग में एक सवाल लगातार घूम रहा
- 7:17:13था। अगर उसके सारे भाइयों को कनिका से
- 7:17:16मिलना ही था तो उन्होंने मिलने के लिए
- 7:17:18इतनी दूर कान्हा फॉरेस्ट की लोकेशन क्यों
- 7:17:20चुनी? वे विशालगढ़ के ही किसी होटल में
- 7:17:23मिलकर भी तो बात कर सकते थे। लेकिन अब इन
- 7:17:26सब बातों के बारे में सोचने का कोई फायदा
- 7:17:28नहीं था। जब वह यहां आ ही गया था तो उनसे
- 7:17:31मिलकर ही जाएगा। जहां तक कनिका [संगीत] की
- 7:17:34पसंद की बात थी, शौर्य को पहले से ही पता
- 7:17:37था कि वह उसे नापसंद करती है। अभी वह कार
- 7:17:40से उतरने के बाद यही सोच रहा था कि अब
- 7:17:42किधर जाए। तभी फिर से कनिका का फोन आ गया।
- 7:17:46फोन उठाते ही कनिका ने उसे [संगीत] सीधे
- 7:17:48रेस्टोरेंट एरिया में आने के लिए कहा। वे
- 7:17:51सभी वहीं नाश्ता करने के लिए बैठे हुए थे।
- 7:17:54शौर्य अंदाजे से एक तरफ बढ़ गया जहां उसे
- 7:17:57लग रहा था कि रेस्टोरेंट [संगीत] होगा। इस
- 7:17:59समय वहां ज्यादा भीड़ नहीं थी। रेस्टोरेंट
- 7:18:02में प्रवेश करते ही उसकी नजर कनिका पर
- 7:18:04पड़ी। वो अपने भाइयों के साथ [संगीत] एक
- 7:18:07लंबी टेबल पर बैठी हुई थी। शौर्य ने देखा
- 7:18:10कि टेबल पर कनिका के साथ विराज, करण,
- 7:18:13नंदिनी और उसके दोनों कजिन ब्रदर प्रतीक
- 7:18:16और कुणाल भी मौजूद थे। विराज ने दूर से ही
- 7:18:19शौर्य को आते [संगीत] देख लिया। वो अपनी
- 7:18:21जगह से उठकर आगे बढ़ा और शौर्य का स्वागत
- 7:18:23करते हुए बोला, आओ, मैं तुम्हारा ही
- 7:18:26इंतजार कर रहा था। हम सब बस नाश्ता शुरू
- 7:18:29ही करने वाले थे। लेकिन जब पता चला कि तुम
- 7:18:32बस पहुंचने [संगीत] ही वाले हो, तो
- 7:18:33तुम्हारा इंतजार करने लगे। शौर्य ने हल्की
- 7:18:37मुस्कान के साथ अपनी शिष्टता दिखाते हुए
- 7:18:39कहा, "मुझे पहले से नहीं पता था कि यहां
- 7:18:42आना है। इसलिए शायद मैं थोड़ा [संगीत] लेट
- 7:18:44हो गया। कर्ण ने शौर्य के चेहरे के भाव
- 7:18:47पढ़ते हुए कहा, नहीं ऐसा नहीं है। तुम समय
- 7:18:51पर ही हो। लेकिन यह समझ नहीं आया कि तुम
- 7:18:53सब भाई अलग-अलग क्यों आए हो। तुम भी तो
- 7:18:56प्रतीक और कुणाल के साथ आ सकते थे। प्रतीक
- 7:18:59ने करण की बात का जवाब देते हुए ऐसा जताने
- 7:19:02की कोशिश की मानो शौर्य की अभी राठौर
- 7:19:05परिवार में कोई खास अहमियत [संगीत] ना हो।
- 7:19:07वो बोला ऐसा मुमकिन नहीं था क्योंकि अभी
- 7:19:11यह हमारे महल में शिफ्ट नहीं हुआ है।
- 7:19:13अभी-अभी तो इसकी एंट्री हमारे राजमहल में
- 7:19:16हुई [संगीत] है। करण ने उसकी बात सुनकर
- 7:19:18सामान्य भाव से कहा, "अच्छा, ऐसी बात है।
- 7:19:22यह बात मुझे पता नहीं थी।" शौर्य ने बस एक
- 7:19:25उड़ती हुई निगाह प्रतीक और कुणाल पर डाली।
- 7:19:28फिर वह आगे बढ़कर करण से हाथ मिलाने लगा
- 7:19:31और कनिका तथा नंदिनी का सिर हिलाकर
- 7:19:33अभिवादन किया। करण ने शौर्य को चेयर पर
- 7:19:36बैठने का इशारा किया। शौर्य करण के बगल
- 7:19:39वाली कुर्सी पर जाकर बैठ गया। करण ने एक
- 7:19:42प्लेट उसकी तरफ बढ़ा दी। टेबल पर नाश्ते
- 7:19:44के लिए तरह-तरह के व्यंजन रखे हुए थे। सभी
- 7:19:48अपनी पसंद [संगीत] की चीज वहां से लेकर खा
- 7:19:49रहे थे। शौर्य भी जल्दी में घर से निकला
- 7:19:52था। इसलिए उसने नाश्ता नहीं किया था। उसने
- 7:19:55अपने लिए एक परांठा और एक बाउल [संगीत]
- 7:19:57में दही ले लिया। विराज ने सबकी तरफ देखते
- 7:20:00हुए कहा, "अब सब अपना नाश्ता शुरू कर सकते
- 7:20:03हैं।
- 7:20:04हालांकि प्रतीक [संगीत] और कुणाल ने तो
- 7:20:06पहले ही अपना नाश्ता शुरू कर दिया था।
- 7:20:08उन्हें शौर्य के लिए रुकना शायद ठीक नहीं
- 7:20:11लगा था। करण ने शौर्य की तरफ देखते
- 7:20:13[संगीत] हुए उसे यहां आने की वजह समझाई।
- 7:20:17तुम्हें शायद पता नहीं होगा कि तुम यहां
- 7:20:19क्यों आए हो तो मैं तुम्हें बता दूं।
- 7:20:22दरअसल हम [संगीत] भाई-बहनों का पहले से
- 7:20:25जंगल सफारी करने का प्लान था। क्योंकि तुम
- 7:20:28सबसे [संगीत] मिलने का प्लान पिताजी ने भी
- 7:20:31बना लिया था। इसलिए उन्होंने सोचा कि अगर
- 7:20:34तुम सब भी यहां आ जाओगे तो पूरे दिन एक
- 7:20:37साथ [संगीत] रहने का मौका मिलेगा। इससे
- 7:20:39शायद हम एक दूसरे को बेहतर तरीके से जान
- 7:20:42पाएंगे। इसलिए तुम सबको [संगीत] भी यहां
- 7:20:44आना पड़ा। करण की बात सुनकर शौर्य को समझ
- 7:20:48आया कि आखिर उसे प्रतीक और कुणाल [संगीत]
- 7:20:50के साथ यहां क्यों आना पड़ा था। उसने मन
- 7:20:53ही मन सोचा चलो अच्छा है। इसी बहाने आज वो
- 7:20:58कान्हा [संगीत] फॉरेस्ट भी देख लेगा।
- 7:21:00प्रतीक मुस्कुराते हुए बोला, वैसे यह
- 7:21:03बढ़िया रहा कि तुमने पहले से ही कान्हा
- 7:21:05फॉरेस्ट घूमने का प्लान [संगीत] कर रखा
- 7:21:07था। इसी बहाने हमें भी यहां आने का मौका
- 7:21:10मिल गया। कुणाल भी बीच में अपनी बात रखते
- 7:21:13हुए बोला, प्रतीक सही कह रहा है। हम भी
- 7:21:16बहुत समय से कान्हा फॉरेस्ट घूमने का
- 7:21:18प्लान कर रहे थे। आज तुम सबके कारण यह
- 7:21:20मौका भी हमें मिल गया। कुणाल और प्रतीक
- 7:21:23[संगीत] के बात करने के अंदाज से साफ लग
- 7:21:25रहा था कि वे यहां आते ही करण और विराज
- 7:21:27[संगीत] पर अपना प्रभाव जमाने की कोशिश
- 7:21:29शुरू कर चुके थे। कनिका चुपचाप कुणाल और
- 7:21:33प्रतीक दोनों को ऑब्जर्व कर रही थी। उसे
- 7:21:36पता चल चुका [संगीत] था कि नंदिनी के
- 7:21:38रिश्ते की बात पहले ही प्रतीक के लिए की
- 7:21:40जा चुकी थी और अब उसे सिर्फ शौर्य और
- 7:21:42कुणाल में से किसी एक को पसंद करना था।
- 7:21:46फिर भी वह यह देखना चाहती थी कि इन दोनों
- 7:21:49में से कौन उसे बेहतर प्रतीत होता [संगीत]
- 7:21:50है। जिस तरह से कुणाल और प्रतीक ने आते ही
- 7:21:54अपना प्रभाव दिखाने की कोशिश [संगीत] की
- 7:21:56थी, उससे कनिका दोनों से प्रभावित हुई थी।
- 7:22:00लेकिन क्योंकि यह उसके भविष्य का मामला
- 7:22:02था, इसलिए वह जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं
- 7:22:05लेना चाहती थी। वैसे कनिका पहले से ही
- 7:22:08कुणाल [संगीत] और प्रतीक के बारे में
- 7:22:09जानती थी, लेकिन उसे कभी भी उन दोनों से
- 7:22:12मिलकर बात करने का मौका नहीं मिला था।
- 7:22:14इसका कारण यही [संगीत] था कि दोनों
- 7:22:16परिवारों के बीच संबंध अच्छे नहीं थे।
- 7:22:19हालांकि वह इस बात से भली-भांति परिचित थी
- 7:22:22कि विशालगढ़ में जब भी किसी मोस्ट एलिजिबल
- 7:22:24बैचलर की बात होती थी तो प्रतीक और कुणाल
- 7:22:27दोनों का नाम सबसे ऊपर लिया [संगीत] जाता
- 7:22:29था। नंदिनी तो चुपके-चुपके प्रतीक को ही
- 7:22:32देखे जा रही थी। प्रतीक ने उसकी नजरों को
- 7:22:35नोटिस भी कर लिया था। सच तो यह था कि
- 7:22:38[संगीत] नंदिनी उसे पसंद भी आई थी। लेकिन
- 7:22:41उसे कनिका भी पसंद आ रही थी। दोनों बहनें
- 7:22:44खूबसूरती में [संगीत] किसी से कम नहीं थी।
- 7:22:46फर्क सिर्फ इतना था कि कनिका बिजनेस के
- 7:22:49मामले में तेज तर्रार थी। उसने अभी से
- 7:22:52अपने [संगीत] बिजनेस को एक अच्छा खासा
- 7:22:54मुकाम दे दिया था और बिजनेस जगत में उसका
- 7:22:57नाम भी बड़े सम्मान के साथ लिया [संगीत]
- 7:22:59जाने लगा था। जबकि नंदिनी के साथ ऐसा नहीं
- 7:23:01था। प्रतीक को खुद पर अफसोस हुआ कि उसे
- 7:23:04कनिका को पसंद करने का मौका नहीं मिला और
- 7:23:07उससे पहले ही उसका रिश्ता नंदिनी के साथ
- 7:23:09तय [संगीत] कर दिया गया था। अगर उसे कनिका
- 7:23:12को पसंद करने का मौका मिला होता तो वह
- 7:23:14अपनी तरफ से पूरी कोशिश करता कि वह कनिका
- 7:23:17से ही शादी करें। जैसी भी हो। कनिका
- 7:23:20वीरभद्र [संगीत] जी की अपनी बेटी थी और
- 7:23:22वीरभद्र जी का नाम भी विशालगढ़ में बड़े
- 7:23:25सम्मान के साथ लिया जाता था। अब प्रतीक बस
- 7:23:28यही उम्मीद कर [संगीत] सकता था कि कनिका
- 7:23:30ही उसे पसंद कर ले और कोई ऐसा अजूबा हो
- 7:23:33जाए कि उसका रिश्ता कनिका के साथ फिक्स हो
- 7:23:35जाए। वो उस पर अपना इंप्रेशन जमाने की
- 7:23:38कोशिश जरूर [संगीत] करेगा। प्रतीक ने मन
- 7:23:40ही मन ठान लिया। जबकि शौर्य इन सब बातों
- 7:23:44से [संगीत] पूरी तरह दूर था। वो तो बस
- 7:23:46इंतजार कर रहा था कि कितनी जल्दी कनिका
- 7:23:49उसे अपना फैसला सुनाए और वो यहां से विदा
- 7:23:51हो सके। शौर्य इन भाई बहनों से मिलकर इतना
- 7:23:54तो समझ चुका था कि इन चारों में करण ही
- 7:23:57[संगीत] ऐसा था जो अपनी बात को बड़े सलीके
- 7:23:59से रखता और समझाता था। वहीं विराज ऐसा
- 7:24:02जताता था जैसे उससे ज्यादा [संगीत]
- 7:24:04पावरफुल कोई हो ही नहीं। विराज को अपनी
- 7:24:07फाइटिंग स्किल पर बहुत गर्व था और वह इस
- 7:24:10बात को जाहिर करने में कोई कंजूसी भी नहीं
- 7:24:12करता था। शौर्य ने खाते-खाते सबकी तरफ
- 7:24:15देखते हुए पूछा तो अब आगे का क्या प्लान
- 7:24:18है? करण ने जवाब दिया। नाश्ता करने के बाद
- 7:24:22हम सब जंगल सफारी के लिए निकलेंगे। हमने
- 7:24:24एक जीप हायर कर रखी [संगीत] है। तो यह समझ
- 7:24:27लो कि पूरे दिन हम सभी का समय जंगल में ही
- 7:24:29बीतने वाला है। इतना कहकर करण ने शौर्य की
- 7:24:32तरफ देखा और पूछा तुम अपने कुछ कपड़े लाए
- 7:24:36हो क्या? क्योंकि जंगल के अंदर ही एक जगह
- 7:24:39[संगीत]
- 7:24:39झील है जहां लोग स्विमिंग वगैरह भी करते
- 7:24:42हैं। अगर हमें समय मिला तो हम भी जरूर
- 7:24:45स्विम करना चाहेंगे। जब आ ही गए हो तो
- 7:24:48अच्छे से इस जगह को एंजॉय करो। शौर्य ने
- 7:24:51जवाब दिया। नहीं मैं कोई कपड़े वगैरह तो
- 7:24:55नहीं लाया हूं। लेकिन अगर ऐसा है तो देखते
- 7:24:58हैं। बाहर कहीं से ले लेंगे। प्रतीक बीच
- 7:25:02में मुस्कुराते हुए बोला। वो तो ठीक है
- 7:25:05लेकिन पहले इससे पूछ तो लेते कि इसे तैरना
- 7:25:08आता भी है या नहीं? कुणाल भी शौर्य का
- 7:25:11मजाक उड़ाने वाले अंदाज में बोला।
- 7:25:14तुम भी कैसी बात कर रहे हो प्रतीक? आज के
- 7:25:17समय में भला तैरना किसे नहीं आता? थोड़ा
- 7:25:20बहुत तो सबको आ ही जाता है। हां अच्छा
- 7:25:23तैराक ना सही लेकिन किनारे पर तैरने का
- 7:25:26मजा तो ले ही सकता है। कुणाल और प्रतीक के
- 7:25:29बात करने के अंदाज से कनिका को लग रहा था
- 7:25:32कि शौर्य को राठौर फैमिली में उतना सम्मान
- 7:25:34नहीं मिलता। तभी तो वे दोनों शौर्य से इस
- 7:25:38तरह की बातें कर रहे थे। यह देखकर उसे
- 7:25:40अपना फैसला सही प्रतीत हो रहा था। उसने
- 7:25:43अच्छा किया था जो शौर्य से शादी के लिए
- 7:25:45तैयार नहीं हुई थी। उसका ध्यान-बार कुणाल
- 7:25:49की तरफ जा रहा था। कुणाल देखने में भी
- 7:25:51स्मार्ट था। हां, अगर शौर्य से तुलना करें
- 7:25:54तो उसके जैसा तो नहीं था, लेकिन कोई लड़की
- 7:25:57उसे नापसंद भी नहीं कर सकती थी। एक तरह से
- 7:26:00कनिका का मन कुणाल को पसंद करने के लिए
- 7:26:02तैयार था। फिर भी उसने तय कर लिया था कि
- 7:26:05वह पूरे दिन उन सभी को ऑब्जर्व करेगी और
- 7:26:08उसके बाद ही कोई फैसला करेगी। अभी सभी
- 7:26:11नाश्ता कर ही रहे थे कि तभी होटल का एक
- 7:26:13स्टाफ मेंबर वहां आया और विराज से बोला सर
- 7:26:17आपकी जीप आ गई है। आप जब भी चाहे सफारी के
- 7:26:20लिए निकल सकते हैं। इसके बाद सभी ने अपना
- 7:26:23नाश्ता जल्दी-जल्दी समाप्त किया। करण,
- 7:26:26कनिका और नंदिनी अपने कमरे में गए और कुछ
- 7:26:29देर बाद सभी अपने साथ एक छोटा सा बैग लेकर
- 7:26:32वापस वहां उपस्थित हुए। शौर्य समझ गया कि
- 7:26:35जरूर इनमें उनके कपड़े होंगे जो वे जंगल
- 7:26:37में नहाने के लिए लेकर आए थे। पूरी तरह
- 7:26:40तैयार होने के बाद सभी होटल के बाहर आए।
- 7:26:43वहां उनकी जीप पहले से ही तैयार खड़ी थी।
- 7:26:46शौर्य ने गौर किया कि प्रतीक और कुणाल के
- 7:26:49पास भी उनका लगेज था। इसका मतलब था कि वे
- 7:26:52दोनों भी यहां पूरी तरह से तैयार होकर आए
- 7:26:54थे। एक वही था [संगीत] जो खाली हाथ यहां आ
- 7:26:57गया था। शौर्य ने सोचा कि अगर रास्ते में
- 7:27:00कहीं कुछ मिला तो वह [संगीत] अपने लिए
- 7:27:02चेंज करने के लिए कुछ कपड़े ले लेगा। जीप
- 7:27:05के पास पहुंचते ही विराज सबसे पहले उसके
- 7:27:07ऊपर चढ़ा और अपनी पसंद की सीट पर कब्जा कर
- 7:27:10लिया। प्रतीक और कुणाल भी पीछे नहीं रहे।
- 7:27:13वे [संगीत] भी जल्दी से जाकर सामने वाली
- 7:27:15दो सीटों पर अपना कब्जा जमा चुके थे।
- 7:27:18शौर्य ने जीप पर चढ़ने में कोई जल्दबाजी
- 7:27:20नहीं दिखाई। जब उसने देखा कि सभी ने
- 7:27:22अपनी-अपनी जगह ले ली है [संगीत] तो सबसे
- 7:27:24आखिर में वह जीप के ऊपर चढ़ा और जाकर सबसे
- 7:27:27पीछे वाली सीट पर बैठ गया। कनिका ने एक
- 7:27:30नजर शौर्य पर डाली। आज उसे शौर्य कुछ
- 7:27:33ज्यादा ही चुपचुप सा लग रहा था। उसने सोचा
- 7:27:37कहीं [संगीत] इसका कारण यह तो नहीं कि वह
- 7:27:39पहले ही समझ गया है कि मैं उसे पसंद नहीं
- 7:27:41करने वाली इसलिए वह उदास है। हां यही बात
- 7:27:45होगी। उसने मन ही मन कहा। मैंने तो उसी
- 7:27:48दिन इस बेवकूफ को कहा था कि वह अपनी तरफ
- 7:27:51से इस रिश्ते के लिए मना कर दे। लेकिन
- 7:27:53नहीं उसे [संगीत] तो मुझसे ही शादी करनी
- 7:27:55थी। इसके बाद कनिका ने कुणाल की तरफ देखा
- 7:27:58तो पाया कि वह भी उसी की तरफ देख रहा था।
- 7:28:02दोनों की नजरें मिली तो कनिका ने तुरंत
- 7:28:04अपनी निगाह उससे फेर ली और दूसरी तरफ
- 7:28:07देखने लगी। करण ने विराट से कहा अगर वो
- 7:28:11गधा भी हमारे साथ चलता तो कितना अच्छा
- 7:28:13होता। लेकिन नहीं उसे तो अकेले जाना था।
- 7:28:17विराज ने जवाब दिया। अरे छोड़ो उसको। उसे
- 7:28:21अपनी गर्लफ्रेंड के साथ प्राइवेसी चाहिए
- 7:28:23थी। [संगीत]
- 7:28:23हम सबके साथ रहता तो उसे वो प्राइवेसी
- 7:28:26कहां मिलती? इसलिए तो सुबह-सुबह ही उसने
- 7:28:29अपनी जीभ बुला ली थी ताकि हम में से कोई
- 7:28:31भी उसके साथ ना जा सके। इसी बीच करण ने
- 7:28:34शौर्य को अकेले पीछे बैठे देखा तो अपनी
- 7:28:37सीट से उठकर उसके पास चला गया और [संगीत]
- 7:28:39वहीं बैठ गया। शौर्य ने भी करण और विराज
- 7:28:42की बात सुन ली थी। इसलिए जब उसने करण को
- 7:28:44अपने पास बैठे देखा तो उससे पूछा क्या कोई
- 7:28:48और भी तुम्हारे साथ था? करण ने मुस्कुराते
- 7:28:51हुए जवाब दिया। हां, हमारे घर में भी एक
- 7:28:54बिगड़ा शहजादा है। वो हम सबको छोड़कर
- 7:28:57अकेले ही अपनी गर्लफ्रेंड के साथ
- 7:28:59सुबह-सुबह [संगीत] जंगल सफारी के लिए निकल
- 7:29:01गया है। लेकिन करण की इस बात के पीछे छिपा
- 7:29:04राज अभी शौर्य से अनजान [संगीत] था। होटल
- 7:29:08वाइल विस्टा से निकलकर कनिका की जीप
- 7:29:10कान्हा फॉरेस्ट की ओर बढ़ गई। जंगल के
- 7:29:13अंदर प्रवेश करने से पहले रास्ते में एक
- 7:29:16छोटा सा मार्केट पड़ता था। करण के कहने पर
- 7:29:19ड्राइवर ने जीप को 10 मिनट के लिए उसी
- 7:29:21मार्केट में रोक दिया। इसके बाद उसने सभी
- 7:29:25की तरफ देखते हुए कहा, "अगर अगर किसी को
- 7:29:27कुछ चाहिए तो अभी [संगीत] यहीं से ले लें
- 7:29:29क्योंकि एक बार जंगल के अंदर जाने के बाद
- 7:29:31जरूरत की कोई भी चीज मिलना मुश्किल होगा।"
- 7:29:34जहां तक पानी और कोल्ड ड्रिंक की बात है
- 7:29:37उन्हें मैंने जीप में रखे फ्रीजर में रखवा
- 7:29:39लिया [संगीत] है। इसके अलावा अगर किसी को
- 7:29:41किसी और चीज की जरूरत हो तो वह अभी यहां
- 7:29:44से ले सकता है। वैसे शौर्य को किसी चीज की
- 7:29:47जरूरत नहीं थी लेकिन उसने सोचा कि जब जंगल
- 7:29:50के अंदर जा ही रहे हैं तो पता नहीं कब किस
- 7:29:52चीज की जरूरत पड़ [संगीत] जाए। उसके पास
- 7:29:55बदलने के लिए कोई कपड़ा नहीं था। इसलिए
- 7:29:57उसने अपने लिए एक जोड़ी कपड़े और एक
- 7:29:59तौलिया ले लिया। उसे लगा शायद इनकी जरूरत
- 7:30:02पड़ सकती है।
- 7:30:04सामान रखने के लिए उसने एक कैरी बैग भी
- 7:30:06लिया और फिर जीप में आकर बैठ गया। प्रतीक
- 7:30:09ने शौर्य को इन सामानों के साथ देखा तो
- 7:30:11उसने कहा, "अरे अगर तुम्हें इन कपड़ों की
- 7:30:14जरूरत थी तो पहले बताते। मेरे पास
- 7:30:17एक्स्ट्रा थे। मैं तुम्हें दे देता।"
- 7:30:19शौर्य ने प्रतीक की तरफ देखते हुए कटाक्ष
- 7:30:21भरे अंदाज में कहा। मुझे नहीं पता था कि
- 7:30:24तुम यहां दो-चार दिनों के लिए आए हो जो
- 7:30:26पूरी पैकिंग के साथ ही आ गए हो। नंदिनी को
- 7:30:30शौर्य का यूं प्रतीक पर कटाक्ष करना अच्छा
- 7:30:32नहीं लगा। वो चिढ़ते हुए बोली, [संगीत] एक
- 7:30:35तो वह तुम्हारी मदद करने की कोशिश कर रहा
- 7:30:37है और तुम उस पर सरकाजम कर रहे हो। नंदिनी
- 7:30:40का प्रतीक के लिए इस तरह तड़प कर बोलना
- 7:30:42देखकर शौर्य को आश्चर्य हुआ। वो
- 7:30:45मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देखकर बोला,
- 7:30:47"मुझे नहीं पता था कि आप इसकी वकील बन गई
- 7:30:49हैं। प्रतीक को तो समझ नहीं आया। [संगीत]
- 7:30:52लेकिन आपको जल्दी समझ आ गया कि मैं उस पर
- 7:30:54सरकाजम कर रहा हूं। अगर उसको मेरी इतनी
- 7:30:57चिंता थी, तो यह [संगीत] काम उसने पहले कर
- 7:30:59दिया होता। मेरे सामान लेने के बाद यह बात
- 7:31:02कहने का क्या मतलब रह गया? इस बार नंदिनी
- 7:31:05ने कुछ नहीं कहा। वह बस प्रतीक की ओर
- 7:31:07देखने लगी। जैसे अब आगे की सफाई प्रतीक ही
- 7:31:10दे। और प्रतीक भी चुप नहीं रहा। उसने
- 7:31:13तुरंत कहा। मुझे यह कहां पता था कि तुम
- 7:31:16कपड़े लाने ही गए हो। अगर तुम बताते कि
- 7:31:18तुम कपड़े लाने जा रहे हो, तब मैं शायद
- 7:31:20तुम्हें मना भी करता। शौर्य ने चेहरे पर
- 7:31:23बनावटी मुस्कान लाते हुए कहा, "सो नाइस ऑफ
- 7:31:26यू। मुझे नहीं पता था कि तुम्हें मेरी
- 7:31:29इतनी चिंता थी। सॉरी यार, यह [संगीत] मेरी
- 7:31:32गलती थी। पर अब क्या करें? मैंने तो कपड़े
- 7:31:35ले लिए। शौर्य की बात [संगीत] सुनकर कनिका
- 7:31:37भी उसकी ओर देखने लगी। वो मन ही मन सोचने
- 7:31:40लगी कि क्या यह शौर्य के दिल से निकली
- 7:31:42अपोलॉजी थी या फिर यह भी उसका एक सरकाज्म
- 7:31:45ही था। लेकिन शौर्य के चेहरे के भाव देखकर
- 7:31:48वो कुछ [संगीत] समझ नहीं सकी। शौर्य अब
- 7:31:51जाकर अपनी सीट पर बैठ गया। जिस जीप से यह
- 7:31:54लोग जंगल सफारी के लिए जा रहे थे, वह खुली
- 7:31:56छत वाली जीप थी, जिसके ऊपर लोहे के डंडे
- 7:31:59लगे हुए थे। लेकिन ऊपर आसमान पूरी तरह
- 7:32:02खुला था। सबसे आगे एक सीट पर विराज अकेला
- 7:32:05बैठा था। उसके पीछे दाई तरफ प्रतीक और करण
- 7:32:08साथ बैठे थे। जबकि दूसरी तरफ नंदिनी और
- 7:32:11कनिका एक साथ बैठी [संगीत] थी। सबसे पीछे
- 7:32:14शौर्य बैठा था और उसके पास आकर करण भी बैठ
- 7:32:17गया था। जब सभी दोबारा अपनी-अपनी सीटों पर
- 7:32:21बैठ गए तो विराज ने ड्राइवर से गाड़ी आगे
- 7:32:23बढ़ाने के लिए कहा और [संगीत] एक बार फिर
- 7:32:25जीप जंगल की ओर बढ़ गई। लगभग 1 कि.मी. आगे
- 7:32:29जाने के बाद वो गेट आ गया [संगीत] जहां से
- 7:32:32जंगल के अंदर प्रवेश करना था। अंदर जाने
- 7:32:35से पहले फॉरेस्ट वालों [संगीत] ने सभी
- 7:32:37लोगों के नाम दर्ज किए और उसके बाद जीप
- 7:32:39जंगल के अंदर प्रवेश कर गई। उस समय लगभग
- 7:32:4210:00 बजने वाले थे और धीरे-धीरे धूप भी
- 7:32:45तेज होती जा रही थी। शौर्य ने अपने कैरी
- 7:32:48बैग से सनग्लास और एक ट्रैकिंग हैट निकाली
- 7:32:51और उसे अपने सिर पर पहन लिया। जीप में
- 7:32:54मौजूद सभी लोगों के पास सनग्लास तो
- 7:32:56[संगीत] थे लेकिन ट्रैकिंग हैट किसी के
- 7:32:58पास नहीं था। जैसे ही सभी की निगाहें
- 7:33:00शौर्य पर गई उन्हें अपनी गलती का एहसास
- 7:33:03हुआ। [संगीत]
- 7:33:04अब उन्हें भी ट्रैकिंग हैट की जरूरत महसूस
- 7:33:06हो रही थी क्योंकि धूप सीधे उनके सिर पर
- 7:33:09पड़ रही थी और ऐसे में यह हैट [संगीत]
- 7:33:11काफी कारगर साबित हो रहा था। शौर्य को हैट
- 7:33:14पहने देखकर सभी मन ही मन [संगीत] सोच रहे
- 7:33:17थे कि उन्होंने इतनी जरूरी चीज साथ लाने
- 7:33:19की गलती कैसे कर दी। शौर्य के पास ही बैठे
- 7:33:22करण ने उससे कहा, "अरे यार, जब तुम यह हैट
- 7:33:26ले रहे थे, तो कम से कम मेरे बारे में तो
- 7:33:28सोचते।" [संगीत] "मुझे तो ध्यान ही नहीं
- 7:33:30रहा कि यह हैट भी लेना चाहिए।" शौर्य ने
- 7:33:33करण की आंखों में देखते हुए पूछा, [संगीत]
- 7:33:35"क्या तुमको यह हैट चाहिए?"
- 7:33:37करण ने अफसोस भरे स्वर में कहा, चाहिए
- 7:33:40[संगीत] तो, पर मैं यह तुम्हारा वाला कैसे
- 7:33:43ले सकता हूं? यह तो तुमने अपने लिए लिया
- 7:33:45है ना। करण की बात पर शौर्य ने कुछ नहीं
- 7:33:48कहा। बस अपने कैरी बैग से एक और हैट
- 7:33:50निकाला और करण की तरफ बढ़ा दिया। [संगीत]
- 7:33:53करण ने आश्चर्य से शौर्य की तरफ देखा और
- 7:33:55बोला, तुमने पहले ही मेरे लिए भी ले लिया
- 7:33:58था। थैंक यू शौर्य। [संगीत]
- 7:34:00करण के थैंक्स के जवाब में शौर्य सिर्फ
- 7:34:03मुस्कुरा दिया। करण को भी हैट पहने देखकर
- 7:34:06बाकी [संगीत]
- 7:34:06लोगों को उससे ईर्ष्या होने लगी। कनिका ने
- 7:34:09करण से शिकायत करते हुए कहा, "यह तो गलत
- 7:34:12बात है करण। तुमने अपने लिए तो हैट ले
- 7:34:14लिया और हमारे बारे में सोचा भी नहीं।"
- 7:34:17करण ने तुरंत जवाब [संगीत] दिया। हेलो, यह
- 7:34:20मैंने नहीं लिया है। यह तो मुझे शौर्य ने
- 7:34:22दिया है। करण की बात सुनकर [संगीत] कनिका
- 7:34:25और नंदिनी दोनों शौर्य की ओर देखने लगी।
- 7:34:28कनिका ने शिकायत भरे स्वर में कहा,
- 7:34:30तुम्हें पता था शौर्य कि हमें [संगीत] भी
- 7:34:32इस हैट की जरूरत पड़ सकती है और जब यह बात
- 7:34:35हमारे ध्यान में नहीं थी और तुम अपने लिए
- 7:34:38ले रहे थे तो कम से कम हमसे भी पूछ लेते।
- 7:34:41कुणाल ने शौर्य पर तंज कसते हुए कहा, "तुम
- 7:34:44भी कैसी बात करती हो कनिका?" [संगीत]
- 7:34:46"इतनी करसी अगर शौर्य में होती, तो फिर
- 7:34:48बात ही क्या थी?" कुणाल की बात सुनकर
- 7:34:51शौर्य मुस्कुराया और कनिका की तरफ देखकर
- 7:34:53बोला, "क्या तुमको भी यह हेट चाहिए?"
- 7:34:56कनिका ने मुंह बनाते हुए कहा, बोल तो ऐसे
- 7:35:00रहे हो जैसे मैं कहूंगी [संगीत] कि हां
- 7:35:02मुझे चाहिए और तुम अपनी जादुई पिटारी से
- 7:35:04हैट निकाल कर मुझे दे दोगे। शौर्य ने सपाट
- 7:35:08स्वर में कहा तुम सीधे सिंपल जवाब नहीं दे
- 7:35:11सकती कि तुमको [संगीत] हैट चाहिए या नहीं
- 7:35:13चाहिए। जरूरी है कि हर बात अपने शिकायती
- 7:35:16अंदाज में ही बोलनी है। कनिका ने रुष्ट
- 7:35:19[संगीत] स्वर में जवाब दिया। अगर मुझे हैट
- 7:35:21नहीं चाहिए होता तो मैं तुमसे ऐसा क्यों
- 7:35:23बोलती? मुझे चाहिए था। तभी तो [संगीत] मैं
- 7:35:26तुमसे ऐसा बोल रही हूं। शौर्य ने शांत
- 7:35:29स्वर में कहा। तुम यही बात पहले [संगीत]
- 7:35:31भी सीधे-सीधे बोल सकती थी। इतना कहते हुए
- 7:35:34शौर्य ने एक बार फिर अपने कैरी बैग से एक
- 7:35:37हैट निकाला और कनिका की तरफ बढ़ा दिया।
- 7:35:40कनिका को हैट लेते देखकर नंदिनी भी आशा
- 7:35:43भरी नजरों से शौर्य की ओर देखने लगी।
- 7:35:45नंदिनी की नजरों को समझते हुए शौर्य
- 7:35:47[संगीत] ने उससे पूछा। क्या तुमको भी हैट
- 7:35:50चाहिए? नंदिनी ने पहले एक नजर प्रतीक की
- 7:35:53तरफ देखा और फिर शौर्य की तरफ देखते हुए
- 7:35:56हां में सिर हिला दिया। शौर्य ने एक हैट
- 7:35:59नंदिनी की तरफ भी बढ़ा दिया। नंदिनी ने भी
- 7:36:02शौर्य से हैट लेकर खुशी से पहन लिया। अब
- 7:36:05उस जीप में सिर्फ तीन लोग ऐसे रह [संगीत]
- 7:36:07गए थे जो बिना हैट के थे। एक विराज और दो
- 7:36:11भाई प्रतीक और कुणाल। जब विराज ने देखा कि
- 7:36:15शौर्य सबके लिए हैट लेकर आया [संगीत] है
- 7:36:17तो उसने अंदाजा लगाया कि उसके लिए भी
- 7:36:19शौर्य के पास हैट जरूर होगा। उसने शौर्य
- 7:36:22से कहा यार जब इन सबके लिए तुम हैट लेकर
- 7:36:25आए हो तो इसका मतलब मेरे लिए भी जरूर लाए
- 7:36:28होंगे। तो प्लीज मुझे भी दे ही दो। शौर्य
- 7:36:32ने एक हैट विराज को भी दे दिया। अब प्रतीक
- 7:36:35और कुणाल [संगीत] शौर्य की तरफ देख रहे
- 7:36:37थे। लेकिन उन्होंने अपनी जुबान से शौर्य
- 7:36:40से यह नहीं कहा कि वह उन्हें [संगीत] भी
- 7:36:41हैट दे दे। इसलिए शौर्य ने भी अपनी तरफ से
- 7:36:44कोई कोशिश नहीं की। कनिका ने एक नजर
- 7:36:47प्रतीक और कुणाल की तरफ डाली और फिर शौर्य
- 7:36:50की ओर देखा। शौर्य इस समय जंगल का नजारा
- 7:36:53देखने में व्यस्त हो गया था क्योंकि
- 7:36:55[संगीत] जीप घने जंगलों के बीच से होकर
- 7:36:57गुजर रही थी। कनिका समझ गई थी कि शौर्य उन
- 7:37:00दोनों को बिना मांगे हैट देने वाला नहीं
- 7:37:03है। इसलिए वह दोनों की तरफ देखते हुए बोली
- 7:37:06क्या तुम दोनों को हैट नहीं चाहिए? शौर्य
- 7:37:09से अपने लिए हैट मांगकर तुम छोटे नहीं हो
- 7:37:12जाओगे। मुझे पता है [संगीत] जब वह हम सबके
- 7:37:15लिए हैट लाया है तो इसका मतलब है कि वह
- 7:37:18तुम दोनों के लिए भी जरूर लाया होगा।
- 7:37:20कुणाल खुद की कही बात को लेकर शर्मिंदा
- 7:37:22महसूस कर रहा था। क्योंकि अभी कुछ ही देर
- 7:37:25पहले उसने कहा [संगीत] था कि शौर्य में
- 7:37:27इतनी करर्ट सी होती तो फिर बात ही क्या
- 7:37:29थी। अब जबकि कुणाल की बात गलत साबित हो गई
- 7:37:32थी। वो किस मुंह से शौर्य से हैट मांगता।
- 7:37:36प्रतीक ने मजबूरी में शौर्य की तारीफ करते
- 7:37:38हुए कहा तुमने शौर्य के लिए गलत कहा कुणाल
- 7:37:42शौर्य में इतनी करसी तो [संगीत] है कि
- 7:37:44उसने अपनी समझ से सबके लिए हैट लिया है जब
- 7:37:48वो हमारे लिए भी हैट लाया है तो हमें उसका
- 7:37:51धन्यवाद करना चाहिए हमें भी हैट दे दो
- 7:37:54शौर्य सचमुच तुमने समझदारी वाला काम किया
- 7:37:58है प्रतीक की बात सुनकर शौर्य मुस्कुराया
- 7:38:02और दो हैट निकालकर कुणाल [संगीत] और
- 7:38:04प्रतीक की तरफ बढ़ा दिए। विराज ने प्रतीक
- 7:38:08और कुणाल को शौर्य से ठीक से बात करते
- 7:38:10नहीं देखा। तो इतना तो समझ गया कि इन
- 7:38:13भाइयों के बीच ज्यादा बनाव नहीं है। उसने
- 7:38:17सहजता से पूछा।
- 7:38:19लगता है तुम भाइयों के बीच ज्यादा बनती
- 7:38:22नहीं है। प्रतीक ने विराज को समझाने की
- 7:38:25कोशिश करते हुए कहा। ऐसी बात नहीं है
- 7:38:28[संगीत] विराज भाई। दरअसल शौर्य अभी तक
- 7:38:31हमारे परिवार का हिस्सा हुआ नहीं करता था।
- 7:38:34और अभी तो इसने महल [संगीत] में रहना भी
- 7:38:36शुरू नहीं किया है। इसलिए स्वाभाविक रूप
- 7:38:39से अभी हमारा रिश्ता सामान्य नहीं है।
- 7:38:41[संगीत]
- 7:38:42और वैसे भी अभी सूर्यभान अंकल को दादाजी
- 7:38:45ने महल में आने की अनुमति दी है। अब उनको
- 7:38:48दादाजी की तरफ से कितना अधिकार मिलता है,
- 7:38:50बहुत [संगीत] कुछ इस पर भी डिपेंड करता
- 7:38:52है। प्रतीक की बात सुनकर विराज शौर्य की
- 7:38:56तरफ देखने लगा। करण जो शौर्य के साथ ही
- 7:38:59बैठा हुआ था, उसे शौर्य पर दया आई। उसने
- 7:39:03शौर्य से पूछा, क्या तुम्हें सच में
- 7:39:05दादाजी की संपत्ति में से कुछ नहीं मिलने
- 7:39:07जा रहा? करण की बात पर शौर्य के चेहरे पर
- 7:39:11एक फीकी सी मुस्कान आई। उसने करण से कहा,
- 7:39:15"मैंने तो अभी दादाजी के साथ रहना भी शुरू
- 7:39:18नहीं किया है। प्रतीक ही उनके साथ रहता
- 7:39:21है, तो इस बारे में प्रतीक को ही ज्यादा
- 7:39:23पता होगा।" प्रतीक ने भी शौर्य की बात
- 7:39:26सुनी। शौर्य की बात सुनकर उसका हौसला और
- 7:39:29बढ़ गया। कनिका को यह जानकर दुख हुआ कि
- 7:39:32चंद्रभान राठौर ने अपनी संपत्ति में से
- 7:39:35[संगीत] शौर्य को कुछ नहीं दिया है। उसने
- 7:39:38कहा पर यह तो गलत है ना। पुश्तैनी संपत्ति
- 7:39:42में तो सभी का अधिकार होता है। प्रतीक ने
- 7:39:45कनिका को संतुष्ट करने की नियत से कहा।
- 7:39:48इसमें गलत जैसा कुछ नहीं है। मिस कनिका।
- 7:39:50सूर्यभान अंकल को सालों पहले ही दादाजी ने
- 7:39:53अपने घर से बेदखल कर दिया था। अब जब इतने
- 7:39:57वर्षों के बाद वह वापस आए हैं तो सब कुछ
- 7:39:59इतनी आसानी से सामान्य नहीं हो जाएगा और
- 7:40:02फिर इतने वर्षों तक मेरे पिताजी और हम
- 7:40:05भाइयों ने अपनी मेहनत से बिजनेस को इतनी
- 7:40:08ऊंचाइयों तक पहुंचाया है तो अब आकर उस पर
- 7:40:11अपना अधिकार जमाना भी तो सही नहीं है। अब
- 7:40:14कनिका को इस बारे में बात करना ठीक नहीं
- 7:40:16लगा। विराज ने बातचीत का रुख बदलते हुए
- 7:40:19प्रतीक की तारीफ की और कहा [संगीत]
- 7:40:22मैंने तुम्हारे बिजनेस के बारे में सुना
- 7:40:24है प्रतीक बहुत कम समय में तुमने भी
- 7:40:26बिजनेस वर्ल्ड में अपना अच्छा नाम बना
- 7:40:28लिया है। तुम्हारी फार्मा कंपनी का शेयर
- 7:40:31तो बहुत तेजी से ग्रो कर रहा है। प्रतीक
- 7:40:34ने गर्व से कहा आपने सही कहा विराज भाई।
- 7:40:38वैसे तो यह हमारी पुश्तैनी कंपनी ही है।
- 7:40:41लेकिन जब से मैंने अरविंद भाई के साथ इस
- 7:40:43कंपनी को संभालना शुरू किया है। तब से
- 7:40:45कंपनी के शेयर में डेढ़ गुने से ज्यादा
- 7:40:48उछाल देखने को मिला है। अभी सब अपनी बातों
- 7:40:51में उलझे हुए थे कि तभी जीप उन्हें लेकर
- 7:40:54एक खुले मैदान में आ गई। वहां पहले से ही
- 7:40:57कई जीप और बसें खड़ी थी। सभी गाड़ियां
- 7:41:00खुली बॉडी वाली थी और उनमें बैठे टूरिस्ट
- 7:41:03अपने आसपास की तस्वीरें खींचने में व्यस्त
- 7:41:05थे। मैदान में चारों तरफ हिरणों का झुंड
- 7:41:08घास चर रहा था। कुछ साहसी लोग तो गाड़ियों
- 7:41:11से उतर कर हिरणों के पास जाकर सेल्फी लेने
- 7:41:14की भी कोशिश कर रहे थे। शौर्य की जीप
- 7:41:17[संगीत] में बैठे लोगों का ध्यान भी उन
- 7:41:18हिरणों की तरफ चला गया और वे भी उनकी
- 7:41:21तस्वीरें खींचने लगे। अभी सब उस खुशनुमा
- 7:41:24पल का आनंद ले ही रहे थे कि अचानक हिरणों
- 7:41:27के झुंड में खलबली मच गई। सारे हिरण
- 7:41:30इधर-उधर भागने लगे। शौर्य को समझ नहीं आया
- 7:41:33कि अचानक यहां यह हंगामा क्यों मच गया।
- 7:41:36तभी उसकी नजर अपनी जीभ से कुछ दूरी पर
- 7:41:38मौजूद [संगीत]
- 7:41:39एक काले तेंदुए पर पड़ी। तेंदुए ने अपने
- 7:41:43पंजों में एक हिरण को जकड़ रखा था। उसके
- 7:41:46दांत हिरण की गर्दन पर गड़े हुए थे और
- 7:41:49उसके शिकंजे में फंसी वो हिरण बुरी तरह
- 7:41:51तड़प रही थी। शिकार और शिकारी अब लोगों के
- 7:41:55आकर्षण का केंद्र बन गए थे। कनिका उस
- 7:41:59तेंदुए [संगीत] को देखकर कुछ ज्यादा ही
- 7:42:01उत्साहित थी। वो खुशी से बोली, आज मैंने
- 7:42:05पहली बार किसी जानवर का शिकार दूसरे जानवर
- 7:42:08को करते देखा है। [संगीत] कुणाल किसी
- 7:42:10ज्ञानी की तरह ज्ञान बघारते हुए बोला, यही
- 7:42:14तो जंगल की रीत है। ताकतवर कमजोर को खा
- 7:42:17जाता है। प्रतीक ने कुणाल का हाथ पकड़ते
- 7:42:20हुए कहा, देखो तो हिरण कैसे तड़प-तड़प
- 7:42:23[संगीत]
- 7:42:24कर मरा है। वहीं विराज, करण और नंदिनी
- 7:42:27अपने मोबाइल से उस तेंदुए की तस्वीर
- 7:42:29[संगीत] खींचने की कोशिश कर रहे थे।
- 7:42:31नंदिनी को ऐसा करते देखकर कनिका ने भी
- 7:42:34अपना मोबाइल निकाल लिया और बैकग्राउंड में
- 7:42:36तेंदुए को रखते हुए सेल्फी लेने लगी।
- 7:42:39थोड़ी देर में ही हिरण ने दम तोड़ दिया।
- 7:42:42उसके बाद तेंदुए [संगीत]
- 7:42:43ने भी इंतजार नहीं किया। उसने हिरण की लाश
- 7:42:46को खींचा और पास ही मौजूद [संगीत] एक पेड़
- 7:42:48के ऊपर लेकर चला गया। बाकी हिरण तो पहले
- 7:42:51ही उस जगह को छोड़कर दूर जा चुके थे।
- 7:42:54धीरे-धीरे वहां मौजूद गाड़ियां एक-एक करके
- 7:42:57वहां से जाने लगी। शौर्य की जीभ को आगे
- 7:43:00बढ़ाते हुए ड्राइवर ने कहा, "आप लोग बड़े
- 7:43:03सौभाग्यशाली हैं जो जंगल के अंदर आते ही
- 7:43:05आपको हिरण का शिकार करता हुआ तेंदुआ दिख
- 7:43:07गया। नहीं तो पूरा दिन यूं ही निकल जाता
- 7:43:10है। जानवर तो कई दिख जाते हैं
- 7:43:12[संगीत]
- 7:43:12लेकिन इस तरह का नजारा देखने को नहीं
- 7:43:14मिलता। विराज ने खुश होते हुए कहा, "अगर
- 7:43:18ऐसा है तो फिर हम सचमुच सौभाग्यशाली हैं।"
- 7:43:21जीप एक बार फिर आगे के सफर पर निकल गई।
- 7:43:24रास्ते में विभिन्न प्रकार के जानवर दिखाई
- 7:43:26देते रहे। लेकिन अभी तक उन्हें शेर नहीं
- 7:43:28दिखा था और [संगीत] सभी को शेर देखने की
- 7:43:31ही सबसे ज्यादा लालसा थी। प्रतीक और कुणाल
- 7:43:34आपस में बात करते हुए अपने बीच नंदिनी और
- 7:43:36कनिका को भी शामिल कर लेते थे। विराज भी
- 7:43:39उनकी बातचीत में शामिल हो जाता था। लेकिन
- 7:43:42शौर्य इन सबसे अलग जानवरों और पक्षियों को
- 7:43:45देखने में मशगूल था। शौर्य [संगीत] सचमुच
- 7:43:48जंगल सफारी का आनंद ले रहा था। वो जन्म से
- 7:43:51ही यूके में रहा था। उसने चिड़ियाघर में
- 7:43:54तो कई बार जानवरों को देखा था। लेकिन
- 7:43:56[संगीत] पहली बार वह उन्हें उनके
- 7:43:58प्राकृतिक वातावरण में देख रहा था और यही
- 7:44:00चीज [संगीत] उसे सबसे ज्यादा आकर्षित कर
- 7:44:02रही थी। उसने भी अपना मोबाइल निकाल लिया
- 7:44:05था और जानवरों के साथ-साथ पक्षियों की
- 7:44:08तस्वीरें [संगीत] भी क्लिक करने लगा था।
- 7:44:10प्रतीक, कुणाल या कनिका के साथ बातचीत में
- 7:44:13शौर्य की कोई खास दिलचस्पी नहीं थी। वो
- 7:44:16अपने ही संसार में मस्त था। जबकि कनिका
- 7:44:19शौर्य को लेकर कुछ और ही सोच रही थी। उसे
- 7:44:22लग रहा था कि शौर्य यहां अकेला महसूस कर
- 7:44:24रहा है इसलिए किसी से बात नहीं कर रहा।
- 7:44:27साथ ही अब वह इस एहसास से भी परिचित हो
- 7:44:30चुका होगा कि कनिका उसे पसंद नहीं करने
- 7:44:32वाली है। इसलिए [संगीत] भी उसकी बातचीत
- 7:44:34में दिलचस्पी खत्म हो गई है। अचानक कनिका
- 7:44:37के दिमाग में कुछ ख्याल आया और वह शौर्य
- 7:44:39की तरफ देखने लगी। उसने मन ही मन शौर्य से
- 7:44:42अकेले में बात करने का निश्चय किया। इस
- 7:44:45समय शौर्य से बात करना उसे मुनासिब नहीं
- 7:44:47लगा। उसने सोचा सही समय देखकर वह शौर्य से
- 7:44:51बात करेगी। इसी समय उनकी जीप एक ऐसी
- 7:44:54[संगीत] जगह जाकर खड़ी हुई जहां पहले से
- 7:44:57ही बहुत सी गाड़ियां खड़ी थी। जंगल के बीच
- 7:45:00[संगीत] फॉरेस्ट अधिकारियों और जंगल घूमने
- 7:45:02आए टूरिस्टों के लिए वॉशरूम आदि की
- 7:45:04व्यवस्था थी। यहां बंदरों की संख्या भी
- 7:45:07बहुत अधिक थी। कुछ लोग बंदरों को मूंगफली,
- 7:45:10केला आदि खिला रहे थे। जीप के रुकते ही
- 7:45:13बाकी [संगीत] सभी लोग उतर कर वाशरूम चले
- 7:45:15गए। लेकिन शौर्य जीप के अंदर ही बैठा रहा।
- 7:45:18करण ने शौर्य से पूछा भी था [संगीत] कि
- 7:45:20क्या उसे वाशरूम नहीं जाना? लेकिन शौर्य
- 7:45:23ने मना कर दिया। थोड़ी देर में कनिका वापस
- 7:45:26जीप में आई और शौर्य के पास जाकर बैठ गई।
- 7:45:29शौर्य समझ [संगीत] गया कि जरूर कनिका को
- 7:45:31उससे कुछ बात करनी होगी। इसलिए कनिका के
- 7:45:34कुछ कहने से पहले ही शौर्य [संगीत] बोल
- 7:45:36पड़ा। अब तो तुम्हारे रास्ते का कांटा
- 7:45:39बिना किसी जोर के ही हट गया। अब तो तुम
- 7:45:41जरूर खुश होगी। कनिका शांत भाव से बोली।
- 7:45:45मैं समझ रही [संगीत] थी इसीलिए तुम चुपचाप
- 7:45:48थे। तुम समझ गए कि अब जब मेरे पास ऑप्शन
- 7:45:51है तो तुम्हारा नंबर नहीं लगने वाला। वो
- 7:45:54इस बात का पूरा ध्यान रख रही थी कि उसकी
- 7:45:56बात से [संगीत] शौर्य को बुरा ना लगे।
- 7:45:59शौर्य ने सौम्य मुस्कान के साथ कहा। यह तो
- 7:46:02मैं उसी समय समझ गया था जब तुम्हारे
- 7:46:04[संगीत] दादाजी के साथ बातचीत में यह बात
- 7:46:06शामिल हो गई थी कि तुम हम भाइयों में से
- 7:46:08किसी को भी पसंद कर सकती हो। तुम तो पहले
- 7:46:11ही मुझसे [संगीत] शादी नहीं करना चाहती
- 7:46:13थी। तो यह समझना कोई मुश्किल तो नहीं था।
- 7:46:16कनिका ने संकोच [संगीत] के साथ कहा, "सॉरी
- 7:46:19शौर्य, तुम मेरी मजबूरी समझ सकते हो।
- 7:46:21[संगीत]
- 7:46:22मैंने पहले ही तुम्हें कह दिया था कि मैं
- 7:46:24तुमसे शादी नहीं कर सकती इसलिए तुम मुझे
- 7:46:27दोष नहीं दे सकते।" शौर्य ने तुरंत कहा,
- 7:46:30अरे ना, तुम चिंता मत करो। मैं तुम्हें
- 7:46:33कोई दोष नहीं दे रहा। बस मुझे यह जानकर
- 7:46:36हैरानी थी कि जब यह पहले ही पक्का था कि
- 7:46:39तुम मुझे पसंद नहीं करने वाली हो तो फिर
- 7:46:42मुझे यहां बुलाने का मकसद क्या था? कनिका
- 7:46:45ने उसे समझाते हुए कहा, तुम यहां मेरे
- 7:46:48बुलाने के कारण थोड़े ही आए हो। तुम तो
- 7:46:51यहां दादाजी के आदेश के कारण आए हो। शौर्य
- 7:46:54खुद [संगीत] को यह सवाल पूछने से रोक नहीं
- 7:46:56सका। उसने कनिका की तरफ देखते हुए पूछा।
- 7:46:59तो क्या तुमने अभी तक अपने दादाजी को अपनी
- 7:47:02पसंद नहीं बताई है? कनिका ने जवाब दिया,
- 7:47:05अभी नहीं। [संगीत]
- 7:47:06शाम को मुझे उनको बताना है कि मुझे कौन
- 7:47:09पसंद है। शौर्य ने अपनी बात पर जोर देते
- 7:47:12हुए [संगीत] कहा, पर इतना इंतजार करने की
- 7:47:15क्या जरूरत है? जब तुम्हें पहले से
- 7:47:17[संगीत] सब पता है तो फिर शाम तक इंतजार
- 7:47:19क्यों करना? कनिका ने अपनी बात स्पष्ट
- 7:47:22करते हुए कहा, दादाजी को भी तो यह लगना
- 7:47:25चाहिए कि हमने साथ में कुछ समय बिताया।
- 7:47:28[संगीत] उसके बाद एक दूसरे को समझने बूझने
- 7:47:30के बाद हमने यह फैसला किया। अपनी पसंद
- 7:47:33बताने से ज्यादा जरूरी यह है कि [संगीत]
- 7:47:36दादाजी को ऐसा नहीं लगना चाहिए कि हमने
- 7:47:38जल्दबाजी में कोई फैसला कर लिया है। शौर्य
- 7:47:41ने मोबाइल को अपने हाथों में नचाते हुए
- 7:47:43कहा ओके तो यह बात है। तो बताओ फिर तुम
- 7:47:47प्रतीक और कुणाल में से किसको पसंद करने
- 7:47:49वाली हो? कनिका ने सफाई देते हुए कहा,
- 7:47:52[संगीत] अब इतने भी ऑप्शन नहीं है मेरे
- 7:47:54पास कि मैं प्रतीक और कुणाल में से किसी
- 7:47:56एक को पसंद कर सकूं। प्रतीक का रिश्ता
- 7:47:59पहले ही नंदिनी के लिए तय कर दिया गया है।
- 7:48:02इसलिए [संगीत] अब दूसरा ऑप्शन मेरे पास
- 7:48:03कुणाल का ही बचता है। और वैसे भी मुझे
- 7:48:06प्रतीक की तुलना में कुणाल ही पसंद है।
- 7:48:09शौर्य ने भी अपनी राय देते हुए कहा। वैसे
- 7:48:12मुझे भी [संगीत] यही लगता है कि कुणाल
- 7:48:14प्रतीक से बेहतर है तुम्हारे लिए। कनिका
- 7:48:16को आश्चर्य हुआ कि [संगीत] शौर्य ने बिना
- 7:48:18किसी दुख के मुस्कुराते हुए कुणाल को उसके
- 7:48:21लिए पसंद किया। वह हैरानी से बोली।
- 7:48:24तुम्हें देखकर लगता नहीं कि तुम्हें मेरे
- 7:48:26तुम्हें पसंद नहीं करने का कोई दुख हुआ
- 7:48:28है। शौर्य ने चेहरे पर हल्की मुस्कान लाते
- 7:48:31हुए कहा, "अब तुम क्या चाहती हो कि मैं
- 7:48:34देवदास [संगीत] बनकर अपनी रोनी सूरत बना
- 7:48:35लूं?" जबकि मुझे पहले ही समझ आ गया है कि
- 7:48:39अब मेरा कोई नंबर नहीं लगने वाला। तुम
- 7:48:41मेरी चिंता मत करो। मैंने यह बात स्वीकार
- 7:48:44कर ली है कि मैं तुम्हें नहीं पा सकता।
- 7:48:47कनिका कुछ पल चुप रही। फिर बोली, मैं
- 7:48:50तुमसे एक बात कहूं शौर्य। इतना कहकर उसने
- 7:48:53शौर्य के जवाब की प्रतीक्षा किए बिना कहना
- 7:48:55शुरू कर दिया। मैंने सुना है कि तुम
- 7:48:58शिप्रा को बहुत पसंद करते थे। वह [संगीत]
- 7:49:00भी तुमको पसंद करती है। क्यों ना तुम
- 7:49:03शिप्रा से शादी कर लो। वो बहुत अच्छी
- 7:49:05लड़की [संगीत] है। शौर्य ने सहजता से कहा
- 7:49:08मैं जानता हूं मैं तुम्हें बता दूं कि
- 7:49:11जैसे [संगीत] ही मुझे पता चला कि अब मैं
- 7:49:13तुम्हारी पसंद नहीं बन सकता। उसी समय
- 7:49:16मैंने सोच लिया था कि मेरे लिए शिप्रा ही
- 7:49:18सही है। अब तुमसे क्लियर होने के बाद मेरे
- 7:49:21पास कोई चॉइस ही नहीं [संगीत] है। पर एक
- 7:49:23बात मेरे दिमाग में चल रही है। तुम अगर
- 7:49:26इजाजत दो [संगीत] तो मैं तुमसे पूछूं।
- 7:49:28कनिका ने उसे अनुमति देते हुए कहा, हां
- 7:49:31हां पूछो। शौर्य ने सवालिया नजरों से उसे
- 7:49:34देखते हुए पूछा। मैं यह जानना चाहता था कि
- 7:49:37तुम्हें [संगीत] मैं क्यों पसंद नहीं आया?
- 7:49:39क्या यह सिर्फ इसलिए है कि मैं तुम्हारे
- 7:49:41स्टेटस को मैच नहीं [संगीत] करता? या
- 7:49:44प्रतीक या कुणाल की हैसियत मुझसे कहीं
- 7:49:46ऊंची है और मैं उनके स्टेटस को भी मैच
- 7:49:48नहीं करता। शौर्य की बात [संगीत] सुनकर
- 7:49:51कनिका कुछ पल तक उसे देखती रही। फिर कुछ
- 7:49:54सोच कर बोलना शुरू किया। देखो शौर्य मुझे
- 7:49:58इस सच्चाई को कबूल करने में कोई हर्ज नहीं
- 7:50:00है। मेरे लिए स्टेटस मायने रखता [संगीत]
- 7:50:02है। तुम अच्छे हो पर मेरे जीवन साथी को
- 7:50:05लेकर जो आकांक्षाएं हैं, तुम उन्हें मैच
- 7:50:08नहीं करते। [संगीत]
- 7:50:09अगर तुम्हारा स्टेटस भी प्रतीक या कुणाल
- 7:50:11की तरह होता तो शायद इतनी बातें ही नहीं
- 7:50:14होती। शौर्य अब कनिका की सोच को ऑब्जर्व
- 7:50:17करने की कोशिश करते हुए बोला, "अगर मैं
- 7:50:20कहूं कि मैं कुछ ही समय में प्रतीक या
- 7:50:22कुणाल के स्टेटस को मैच कर लूंगा, तो क्या
- 7:50:25तुम तब मुझसे शादी करने को तैयार होती?
- 7:50:27कनिका ने संकोच भरे स्वर में कहा, "मैं
- 7:50:30तुम्हें झूठी दिलासा नहीं देना चाहती,"
- 7:50:32शौर्य, "तुम अब इस बारे में बात करके मुझे
- 7:50:35शर्मिंदा कर रहे हो।"
- 7:50:37शौर्य ने शांत भाव से कहा, ठीक है अब नहीं
- 7:50:40करता। मेरी तरफ से तुम्हें बेस्ट विशेस है
- 7:50:44आगे के जीवन के लिए। शौर्य के दिल को अब
- 7:50:47तसल्ली मिली थी कि आखिरकार [संगीत]
- 7:50:49उसका पीछा कनिका से छूट गया था। एक अनचाहा
- 7:50:52बोझ जो उसके सिर पर रखा हुआ था। आज वह हट
- 7:50:56गया था। कनिका को शौर्य के लिए बुरा लग
- 7:50:58रहा था। लेकिन उसे इस बात का आश्चर्य भी
- 7:51:01था कि शौर्य को देखकर ऐसा नहीं लग रहा था
- 7:51:03कि उसे इस बात की कोई ज्यादा तकलीफ हुई
- 7:51:05है। जबकि उसे लग रहा था कि जब शौर्य को
- 7:51:08पता चलेगा कि कनिका उसे पसंद नहीं कर रही
- 7:51:10है तो उसे बहुत दुख होगा। वो उसे [संगीत]
- 7:51:12मनाने का पूरा प्रयास करेगा। लेकिन ऐसा
- 7:51:15कुछ भी नहीं हुआ। इस बात से कनिका के ईगो
- 7:51:18को भी ठेस पहुंची। लेकिन उसने खुद को
- 7:51:20समझाया कि ऐसा इसलिए है क्योंकि उसने
- 7:51:22शौर्य को पहले ही बता दिया था कि वह उससे
- 7:51:25[संगीत] शादी नहीं करेगी। और जब बात कनिका
- 7:51:27की पसंद पर छोड़ दी गई तो शौर्य समझ गया
- 7:51:30कि कनिका को मनाना उसके बस की बात नहीं
- 7:51:32[संगीत] है। इसलिए उसने इस बात को पहले ही
- 7:51:34कबूल कर लिया है। इसी कारण वह ऐसा दिखावा
- 7:51:37कर पा रहा है कि उसे कनिका के ना पसंद
- 7:51:39करने से कोई फर्क नहीं पड़ रहा। शौर्य को
- 7:51:42लगा कि जब यह स्पष्ट हो ही गया है कि
- 7:51:44कनिका किसको पसंद करने वाली है तो उसका
- 7:51:46यहां रुकने का अब कोई मतलब नहीं रह गया
- 7:51:48है। उसने पूछा अब जब सब कुछ क्लियर है तो
- 7:51:51क्या मैं वापस जा सकता हूं? कनिका को
- 7:51:54शौर्य की बात से आश्चर्य हुआ। शौर्य जाने
- 7:51:56की बात कर रहा था। यानी [संगीत] उसने अब
- 7:51:58हथियार डाल दिए थे। वह उसे मनाने का कोई
- 7:52:01प्रयास नहीं करने वाला था। कनिका ने अपने
- 7:52:03आसपास [संगीत] देखते हुए कहा, "अब अभी
- 7:52:05कहां जाओगे?" अब जब यहां आए हो तो इस जगह
- 7:52:08को एंजॉय करो। शौर्य को भी ध्यान आया कि
- 7:52:11वो इस वक्त कहां [संगीत] है। वो अपने
- 7:52:12चेहरे पर मुस्कान लाते हुए बोला, ओह,
- 7:52:15सॉरी। मैं तो भूल ही गया था कि हम अभी
- 7:52:17जंगल के अंदर हैं। शौर्य की बात पर कनिका
- 7:52:20भी मुस्कुरा दी। फिर वह शौर्य [संगीत] की
- 7:52:22तरफ पलटती हुई अपना हाथ बढ़ाकर बोली, "अब
- 7:52:24जब हम दोनों के बीच सब कुछ क्लियर है, तो
- 7:52:27क्या हम अच्छे दोस्त हो सकते हैं?" शौर्य
- 7:52:29ने कनिका के पीछे थोड़ी दूरी पर खड़े
- 7:52:31कुणाल की ओर देखते हुए कहा, "सच लो, तुम
- 7:52:34मेरी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा तो रही हो,
- 7:52:36पर हो सकता है कि तुम जिससे शादी करने
- 7:52:39वाली हो, उसे यह बात पसंद ना आए। पीछे
- 7:52:41खड़ा कुणाल उन दोनों को ही देख रहा था।
- 7:52:44उसके चेहरे के भाव देखकर आसानी से समझा जा
- 7:52:46सकता था कि उसे कनिका का शौर्य के साथ
- 7:52:48होना बिल्कुल पसंद [संगीत] नहीं आ रहा था।
- 7:52:50शौर्य की बात पर कनिका ने पीछे एक उचटती
- 7:52:53निगाह डाली और कुणाल को देखा। फिर शौर्य
- 7:52:56की तरफ देखते हुए बोली तुम उसकी चिंता मत
- 7:52:58करो। सिर्फ अपनी कहो [संगीत]
- 7:53:00क्या हम अच्छे दोस्त हो सकते हैं? शौर्य
- 7:53:03ने मुस्कुराते हुए कहा, "अगर तुम्हें कोई
- 7:53:05प्रॉब्लम नहीं है, तो फिर मुझे क्या
- 7:53:07प्रॉब्लम होगी?" "मुझे तो तुम्हारा दोस्त
- 7:53:09बनकर खुशी होगी।" बोलते हुए शौर्य ने अपना
- 7:53:12हाथ बढ़ाया और कनिका से हाथ मिला लिया।
- 7:53:15शौर्य ने कनिका के पीछे देखा तो उसे कुणाल
- 7:53:17जीभ की तरफ आता दिखाई दिया। उसके चेहरे के
- 7:53:20भावों से साफ समझ आ रहा था कि उसके दिल
- 7:53:23में हलचल मची हुई थी। शौर्य ने कुणाल के
- 7:53:25दिल का हाल समझते हुए कहा, "मुझे लगता है
- 7:53:28कि तुम्हें अपनी सीट पर चले जाना चाहिए।
- 7:53:30नहीं तो कोई जलकर राख ना हो जाए।" कनिका
- 7:53:33के होठों पर भी शौर्य की बात सुनकर
- 7:53:35मुस्कान आ गई। कुणाल जल्दी से जीभ [संगीत]
- 7:53:37के अंदर आ गया। उसे देखकर कनिका शौर्य के
- 7:53:40पास से उठकर खड़ी हो गई और कुणाल की तरफ
- 7:53:42देखते हुए बोली, क्या तुम मुझे शौर्य के
- 7:53:45साथ बातें करते देखकर जलस फील कर रहे थे?
- 7:53:47कुणाल को उम्मीद नहीं थी कि कनिका [संगीत]
- 7:53:49उससे इस तरह का सवाल करेगी। उसे थोड़ी
- 7:53:52नर्वसनेस महसूस हुई लेकिन चेहरे पर
- 7:53:54खिसियानी हंसी लाते हुए वह बोला, "तुम भी
- 7:53:57कैसी बात करती हो?" शौर्य से भला मैं जेलस
- 7:54:00फील क्यों करूंगा? कनिका ने कुणाल की
- 7:54:02आंखों में देखते हुए पूछा, "क्या सच में
- 7:54:04तुमने शौर्य से जेलस फील नहीं किया?" अगर
- 7:54:07तुम हां कहते तो मुझे खुशी होती। कुणाल को
- 7:54:10समझ नहीं आया कि कनिका की इस बात का क्या
- 7:54:12मतलब था। [संगीत] उसके चेहरे पर असमंजस के
- 7:54:15भाव आ गए। कनिका ने अपनी बात स्पष्ट करते
- 7:54:18हुए कहा, "अगर मैं किसी लड़के को पसंद
- 7:54:20करती और उसे किसी लड़की के साथ देखती,
- 7:54:22[संगीत] तो स्वाभाविक रूप से मैं भी जेलस
- 7:54:25फील करती। शौर्य भी कनिका की बात सुन रहा
- 7:54:28था। उसकी बातें यह [संगीत] साबित करने के
- 7:54:30लिए काफी थी कि कनिका एक मैच्योर लड़की
- 7:54:32थी। साथ ही वह काफी समझदार भी थी। कनिका
- 7:54:36ने एक [संगीत] तरह से शौर्य को साफ कर
- 7:54:39दिया था कि वह उसकी पसंद नहीं बन सकता।
- 7:54:42हां, उसने उसकी तरफ दोस्ती का हाथ जरूर
- 7:54:45बढ़ाया था और शौर्य ने भी उसे स्वीकार कर
- 7:54:49लिया था। शौर्य को तो बस इस बात की खुशी
- 7:54:52थी कि अब उसे कनिका से अपनी शादी तोड़ने
- 7:54:55के लिए कोई जुगाड़ नहीं करना पड़ेगा।
- 7:54:58[संगीत] यह काम तो अपने आप ही आसानी से
- 7:54:59निपट गया था। कनिका भी इस बात से खुश थी
- 7:55:03कि उसने शौर्य के सामने अपनी बात स्पष्ट
- 7:55:05कर दी [संगीत] थी और उसे इससे ज्यादा
- 7:55:07तकलीफ भी नहीं हुई थी। जो बात दो दिन पहले
- 7:55:11तक उसके लिए सिर दर्द बनी हुई थी कि उसे
- 7:55:13[संगीत] शौर्य से शादी करनी पड़ेगी। आज
- 7:55:16शौर्य को यह कह देने के बाद कि वह उसे
- 7:55:18पसंद नहीं करती। उसका [संगीत] सिर काफी
- 7:55:20हल्का हो गया था। लेकिन इसके बाद भी उसने
- 7:55:24कुणाल के लिए हां नहीं कही थी। आज पहली
- 7:55:27बार [संगीत] उसकी कुणाल से बात हुई थी और
- 7:55:29इतनी सी मुलाकात के आधार पर वह तुरंत यह
- 7:55:32फैसला नहीं कर सकती थी कि उसे कुणाल से
- 7:55:35शादी करनी चाहिए या नहीं। हां, अगर बात
- 7:55:38शौर्य और कुणाल में से किसी एक को [संगीत]
- 7:55:40पसंद करने की होती, तो उसकी पसंद कुणाल ही
- 7:55:43होता। दूसरी तरफ प्रतीक और नंदिनी भी
- 7:55:46कुणाल के पीछे-पीछे बातें करते हुए जीप
- 7:55:49में आ गए। नंदिनी के चेहरे पर खुशी साफ
- 7:55:52दिखाई दे रही थी। आखिर उसके पेरेंट्स
- 7:55:55[संगीत] जो चाहते थे वह पूरा हो गया था।
- 7:55:57वहीं प्रतीक भी नंदिनी की खूबसूरती से
- 7:56:00प्रभावित था। एक बार फिर सभी जीप के अंदर
- 7:56:02बैठ गए और जंगल का सफर दोबारा शुरू हो
- 7:56:05गया। करण फिर से शौर्य के पास आकर बैठ
- 7:56:08गया। वो कुणाल और प्रतीक से भी मिला था।
- 7:56:11लेकिन उन दोनों की तुलना में [संगीत] उसे
- 7:56:13शौर्य ही ज्यादा पसंद आया था। हालांकि वह
- 7:56:16यह भी जानता था कि विशालगढ़ में कुणाल का
- 7:56:19स्टेटस बहुत बड़ा था। इसलिए उसे लगता था
- 7:56:22कि कनिका शौर्य की तुलना में कुणाल को ही
- 7:56:25पसंद करेगी। करण को शौर्य के लिए बुरा लग
- 7:56:28रहा था। वो उसके पास बैठते हुए बोला तो
- 7:56:31आखिर कनिका ने तुम्हें अपना फैसला सुना ही
- 7:56:33दिया? करण की बात सुनकर शौर्य के चेहरे पर
- 7:56:36एक फीकी सी मुस्कान आ गई। उसने शांत स्वर
- 7:56:39में कहा। हां, सुना ही दिया। [संगीत]
- 7:56:42करण ने उसके चेहरे को गौर से देखते हुए
- 7:56:45आश्चर्य से पूछा। पर लगता नहीं कि तुम्हें
- 7:56:48उसके फैसले से कोई दुख हुआ है। शौर्य ने
- 7:56:50सहजता से [संगीत] जवाब दिया। दुख इसलिए
- 7:56:53नहीं हुआ क्योंकि मुझे पहले से ही ऐसे
- 7:56:55जवाब की उम्मीद थी। करण ने उसके कंधे पर
- 7:56:58हाथ रखते हुए कहा, "मुझे [संगीत] लगा नहीं
- 7:57:00था कि तुम इतनी आसानी से इस फैसले को
- 7:57:02एक्सेप्ट कर लोगे।"
- 7:57:04शौर्य ने बिना किसी झिझक के कहा, "मैंने
- 7:57:07तो उस दिन भी कहा था कि वह अपनी तरफ
- 7:57:09[संगीत] से इस रिश्ते के लिए इंकार कर
- 7:57:10सकती है। मैं बस अपनी तरफ से इंकार करके
- 7:57:13तुम्हारे दादाजी की नजरों में फिर से वैसा
- 7:57:15नहीं दिखना चाहता था कि उन्हें यह कहने का
- 7:57:18मौका मिले कि हम अपनी जुबान के पक्के नहीं
- 7:57:20हैं। मैं तो बस हमारे परिवारों के बीच की
- 7:57:23दुश्मनी खत्म करना चाहता था जो कभी मेरे
- 7:57:26पिताजी के कारण शुरू हुई थी। करण कुछ पल
- 7:57:29शौर्य को देखता रहा। फिर उसके मन की थाह
- 7:57:32लेने की कोशिश करते हुए बोला तो तुम्हें
- 7:57:34दुख नहीं है कि मेरी बहन का रिश्ता तुमसे
- 7:57:36ना होकर कुणाल के साथ होने की संभावना
- 7:57:39[संगीत] है? शौर्य ने हल्की सी सांस
- 7:57:41छोड़ते हुए कहा इसमें मैं क्या कर सकता
- 7:57:44हूं। अगर मेरे दुखी होने [संगीत] से कनिका
- 7:57:47मान जाती तो शायद मैं दुखी भी हो लेता।
- 7:57:50लेकिन मैं जानता हूं कि मैं कितना [संगीत]
- 7:57:52भी दुखी हो लूं। कनिका किसी भी सूरत में
- 7:57:55मुझे पसंद नहीं करने वाली। करण ने शौर्य
- 7:57:58के कंधे पर हाथ रखते हुए सहानुभूति
- 7:58:00[संगीत]
- 7:58:00से कहा, मुझे तुमसे सिंपथी है शौर्य।
- 7:58:04मैंने पहले तुम्हारे बारे में गलत सोचा
- 7:58:06था। लेकिन अब कह सकता हूं कि तुम्हारे
- 7:58:08[संगीत] लिए मेरी पहले की सोच गलत थी। तुम
- 7:58:11अच्छे आदमी हो। पर अफसोस तुम्हारी हैसियत
- 7:58:14[संगीत] कुणाल और प्रतीक की तुलना में कुछ
- 7:58:16नहीं है। इसलिए तुम मेरी बहन की पसंद नहीं
- 7:58:19बन सकते। शौर्य ने चेहरे पर कोई शिकन नहीं
- 7:58:22आने दी। वो [संगीत] शांत स्वर में बोला।
- 7:58:25अब मैं अपनी किस्मत तो नहीं बदल सकता। जो
- 7:58:28है सो है। करण ने उसकी तरफ देखते हुए कहा,
- 7:58:32चलो यह [संगीत] भी बढ़िया है कि तुम अपने
- 7:58:34और अपने भाइयों के बीच का अंतर समझते हो।
- 7:58:37वैसे अगर सच [संगीत] कहूं तो मैं समझ सकता
- 7:58:39हूं कि तुम्हारे भाइयों के साथ-साथ
- 7:58:41तुम्हारे दादाजी ने भी तुम्हारे साथ
- 7:58:43अन्याय किया है। शौर्य ने बात को वहीं
- 7:58:46खत्म करते हुए संतुष्ट भाव से कहा। अब इन
- 7:58:49सब बातों का कोई फायदा नहीं। मुझे तो बस
- 7:58:52इस बात से तसल्ली है कि कम से कम अब मेरे
- 7:58:54लिए यह तो नहीं कहा जाएगा कि मैं अपनी
- 7:58:56जुबान से फिर गया। इस बीप जिंगल के रास्ते
- 7:59:00पर आगे बढ़ती रही। बीच-बीच में अलग-अलग
- 7:59:02जानवर दिखाई देते रहे। लेकिन शेर या बाघ
- 7:59:06अभी तक नजर नहीं आया था। इसी बीच [संगीत]
- 7:59:09जीप एक किले के पास जाकर रुकी। किला एक
- 7:59:12पहाड़ी के ऊपर बना हुआ था। जहां नीचे से
- 7:59:15ऊपर तक सीढ़ियां जाती थी।
- 7:59:18किले के अंदर एक प्राचीन शिव मंदिर भी था
- 7:59:22जिसे देखने और दर्शन करने के लिए लोग
- 7:59:25दूर-दूर से आते थे। किले से लगा हुआ एक
- 7:59:29बड़ा सा तालाब था जो किले से लगे होने के
- 7:59:32कारण जंगली [संगीत] जानवरों से सुरक्षित
- 7:59:34था।
- 7:59:36तालाब की बाकी दो-तीन तरफ जंगल से घिरी
- 7:59:39हुई दा थी। जंगल के बीच से बहती हुई एक
- 7:59:42नदी आकर उसी तालाब में मिलती थी।
- 7:59:46ड्राइवर ने जीप पार्किंग में खड़ी कर दी
- 7:59:49और सभी लोग नीचे उतर गए। विराज ने सबकी
- 7:59:52तरफ देखते हुए [संगीत] पूछा क्या किसी को
- 7:59:55शिव मंदिर देखने जाना है? कनिका ने उत्साह
- 7:59:58से [संगीत] सबकी तरफ देखते हुए कहा, सब
- 8:00:00चलते हैं। जब यहां तक आए हैं तो पहले
- 8:00:03मंदिर के दर्शन कराते हैं। उसके बाद
- 8:00:05[संगीत] झील में तैराकी का आनंद लिया
- 8:00:07जाएगा। सभी लोग जाने के लिए तैयार हो गए।
- 8:00:11[संगीत] लेकिन तभी शौर्य ने कहा आप सब
- 8:00:14मंदिर घूम कर आओ मैं यहीं इंतजार करूंगा।
- 8:00:17कनिका ने हैरानी से उसकी तरफ देखते हुए
- 8:00:20कहा तुम अकेले यहां क्या करोगे? तुम भी
- 8:00:23साथ चलो। यहां आकर भी मंदिर के दर्शन नहीं
- 8:00:26करना ठीक है क्या? शौर्य ने हल्की मुस्कान
- 8:00:29के साथ जवाब दिया। मैं इतना बड़ा आस्तिक
- 8:00:32भी नहीं हूं। तुम लोग दर्शन करके आओ। मैं
- 8:00:34यहीं [संगीत] इंतजार करता हूं। असल में
- 8:00:37शौर्य का सबके साथ जाने का मन नहीं था। वह
- 8:00:40कुछ देर अकेले घूमना चाहता था इसलिए उसने
- 8:00:43साफ मना कर दिया। विराज ने शौर्य को
- 8:00:46नजरअंदाज करते हुए कहा, ठीक है जैसी
- 8:00:49तुम्हारी मर्जी [संगीत] हम सब मंदिर के
- 8:00:51दर्शन करके आते हैं। इसके बाद सभी [संगीत]
- 8:00:54सीढ़ियां चढ़कर किले के ऊपर वाले हिस्से
- 8:00:56की तरफ जाने लगे। सीढ़ियों के किनारे बनी
- 8:01:00दीवारों पर बंदरों की पूरी फौज जमा थी।
- 8:01:03आने जाने वाले लोग उन्हें मूंगफली, केले
- 8:01:06और दूसरी चीजें खिला रहे थे और साथ
- 8:01:08[संगीत] ही उनके साथ सेल्फी भी ले रहे थे।
- 8:01:12विराज, करण, नंदिनी, कनिका, [संगीत]
- 8:01:14प्रतीक और कुणाल मंदिर देखने चले गए। जबकि
- 8:01:18शौर्य उन लोगों को छोड़कर झील की तरफ बढ़
- 8:01:21गया। शौर्य अभी झील के पास पहुंचा ही था
- 8:01:24कि तभी उसे पीछे से लड़खड़ाते कदमों की
- 8:01:27आवाज सुनाई दी। वो तेजी से पलटा लेकिन तब
- 8:01:31तक देर हो चुकी थी। एक लड़की का शरीर आकर
- 8:01:34सीधे शौर्य के सीने से टकराया। शौर्य ने
- 8:01:38फुर्ती दिखाते हुए खुद को गिरने से बचाया
- 8:01:40और साथ ही [संगीत] लड़की को उसके कंधे से
- 8:01:43पकड़ लिया ताकि वह भी नीचे ना गिर जाए।
- 8:01:46शौर्य अभी समझ भी नहीं पाया था कि हुआ
- 8:01:49क्या है कि तभी दो लड़के उसके सामने आकर
- 8:01:51खड़े हो गए। शौर्य ने गौर से सामने खड़े
- 8:01:55लड़के को देखा। उसका चेहरा कुछ जाना
- 8:01:58पहचाना सा लग रहा था। उसने याद करने की
- 8:02:00कोशिश की कि उसने इस लड़के को पहले कहां
- 8:02:03देखा था। तभी उसके दिमाग में बिजली सी
- 8:02:06कौंधी। उसे याद आ गया यह तो रुद्र था। अभी
- 8:02:11कुछ दिन पहले ही तो उसका इससे पंगा हुआ
- 8:02:13था। रुद्र आग बरसाती आंखों से शौर्य को
- 8:02:16घूरते हुए बोला, "तुम्हारी हिम्मत कैसे
- 8:02:19हुई मेरी गर्लफ्रेंड को पकड़ने की?" रुद्र
- 8:02:22इस समय स्विम सूट पहने हुए था। उसके पीछे
- 8:02:24खड़ा लड़का भी स्विम सूट में ही नजर आ रहा
- 8:02:27था। और उस लड़के के पीछे एक लड़की भी
- 8:02:30स्विम सूट में खड़ी थी। वही लड़की जिसे
- 8:02:33शौर्य ने अभी अपने कंधे से पकड़ रखा था।
- 8:02:36शौर्य ने उस लड़की को देखकर समझ लिया था
- 8:02:39कि शायद वह पानी में उतरना नहीं चाहती थी।
- 8:02:41जबकि रुद्र और उसके साथी उसे जबरदस्ती
- 8:02:44पानी में भिगोने की कोशिश कर रहे थे।
- 8:02:47शौर्य ने लड़की को छोड़ दिया। लड़की ने भी
- 8:02:50पलट कर अपने पीछे खड़े रुद्र की तरफ देखा।
- 8:02:53उसके लिए तो शौर्य एक बिल्कुल अनजान शख्स
- 8:02:56था। इसके बावजूद रुद्र ने उस पर इतना
- 8:02:59गुस्सा क्यों किया? यह बात उसकी समझ से
- 8:03:01बाहर थी। वो कभी शौर्य की तरफ देखती तो
- 8:03:04कभी रुद्र की तरफ। रुद्र एक बार फिर शौर्य
- 8:03:08के करीब आया और उसकी आंखों में आंखें
- 8:03:10डालते हुए बोला, "ल लगता नहीं कि तुम मुझे
- 8:03:13भूले होंगे। उस दिन तो हमसे बच गए थे।
- 8:03:16लेकिन आज तुम्हें कौन बचाएगा?"
- 8:03:18शौर्य ने बिना पीछे हटे व्यंग्यात्मक
- 8:03:21मुस्कान के साथ कहा। क्या कहा? मैं तुमसे
- 8:03:24बच गया था या तुम बच गए थे? [संगीत]
- 8:03:26अपने साथियों का उस दिन का हाल भूल गए
- 8:03:29क्या? क्यों अपनी गर्लफ्रेंड के सामने
- 8:03:30[संगीत] अपनी बेइज्जती करवाना चाहते हो?
- 8:03:33रुद्र के पीछे खड़ा उसका साथी शौर्य पर
- 8:03:36धौस जमाते हुए बोला, "कौन है यह जो तुमसे
- 8:03:40[संगीत] ऐसी टोन में बात करने की हिम्मत
- 8:03:42कर रहा है।" "गता है इसका लास्ट टाइम आ
- 8:03:44गया है।" शौर्य ने उसकी तरफ देखकर तंज
- 8:03:47[संगीत] कसते हुए कहा, "कमाल है। तुम सब
- 8:03:50के सब जाहिल ही हो। किसी में बात करने की
- 8:03:52तमीज नहीं है। रुद्र के साथी के चेहरे पर
- 8:03:56असमंजस के भाव उभर आए। उसने रुद्र की तरफ
- 8:03:59देखते हुए पूछा, रुद्र कौन है यह आदमी जो
- 8:04:02तुमसे इस तरह बात करने की हिम्मत कर रहा
- 8:04:04है? उसके लिए यह हैरानी की बात थी कि कोई
- 8:04:07[संगीत] रुद्र के साथ इस तरह बेखौफ होकर
- 8:04:09बात कैसे कर सकता था? रुद्र ने अपने साथी
- 8:04:12की तरफ देखते हुए कहा, सिवा यह [संगीत]
- 8:04:15वही आदमी है जिसने पहले भी एक बार मेरा
- 8:04:18रास्ता काटने की कोशिश की थी। लेकिन आज
- 8:04:20इसको सबक सिखाना पड़ेगा। शौर्य रुद्र के
- 8:04:23और करीब जाते हुए व्यंग से बोला, "ल लगता
- 8:04:26है पिछली बार का सबक भूल गए हो। इसलिए आज
- 8:04:29फिर से बेइज्जत होने का कीड़ा शरीर में
- 8:04:31कुलबुला रहा है। शौर्य अभी रुद्र के पास
- 8:04:34पहुंच भी नहीं पाया था कि तभी वो लड़की
- 8:04:37जिसे शौर्य ने संभाला था, दोनों के बीच
- 8:04:39आकर खड़ी हो गई। उसने दोनों को रोकते हुए
- 8:04:42कहा, ठहरो। लगता है कुछ गलतफहमी हो गई है
- 8:04:46इसलिए इस तरह की बातें होने लगी हैं। इतना
- 8:04:49कहकर वह लड़की रुद्र की तरफ पलटी और अपनी
- 8:04:51बात जारी रखते हुए बोली रुद्र यह तुम क्या
- 8:04:54कर रहे हो? इसने मेरे साथ ऐसा कुछ गलत
- 8:04:57नहीं किया है जो तुम इसके लिए इस तरह
- 8:04:59दुश्मनी का भाव दिखा रहे हो। गलती मेरी ही
- 8:05:02थी। मैं ही जाकर इस लड़के से टकराई थी।
- 8:05:05उल्टा इसने तो मुझे गिरने से बचाया है।
- 8:05:08रुद्र घूर कर उस लड़की की तरफ देखने लगा।
- 8:05:10फिर गुस्से में बोला दिव्या तुम अभी इस
- 8:05:13लड़के की हकीकत नहीं जानती। यह एक बार
- 8:05:16पहले भी हमसे उलझ चुका है। आज हमने इसको
- 8:05:19सबक नहीं सिखाया तो मेरा नाम रुद्र नहीं।
- 8:05:22शौर्य के चेहरे पर शरारती मुस्कान आ गई।
- 8:05:25उसने बेफिक्री [संगीत] से कहा। पता नहीं
- 8:05:27तुम्हें अपना नाम चेंज करने की इतनी जल्दी
- 8:05:30है तो फिर मैं क्या ही कर [संगीत] सकता
- 8:05:31हूं। कोशिश करके देख लो। मैं भी तो देखूं
- 8:05:35कि तुम मेरा क्या बिगाड़ते हो। रुद्र ने
- 8:05:37गुस्से से उसकी तरफ देखते हुए कहा। बस
- 8:05:39[संगीत] थोड़ी देर सब्र रखकर यहां रुक
- 8:05:41जाओ। फिर देखना तुम्हारे साथ क्या होता
- 8:05:44है। दिव्या ने एक बार फिर रुद्र को समझाने
- 8:05:47की कोशिश करते हुए कहा, रुद्र इसकी क्या
- 8:05:50जरूरत है? क्यों बिना बात के बात बढ़ा रहे
- 8:05:53हो? मैंने कहा ना वो मैं थी जो इससे
- 8:05:56टकराने वाली थी। इसने तो उल्टा मुझे गिरने
- 8:05:59से बचाया है। लेकिन रुद्र समझने वालों में
- 8:06:02से नहीं था। उसने बेचैनी से कहा बात सिर्फ
- 8:06:05अभी क्या हुआ उसको लेकर नहीं है दिव्या।
- 8:06:08इसका मामला पहले की घटना से संबंधित है।
- 8:06:10इसने एक बार पहले मेरी बेइज्जती की थी। आज
- 8:06:14इसको उसका हिसाब चुकाना पड़ेगा। शौर्य ने
- 8:06:17जहरीली मुस्कान के साथ कहा अगर ऐसा है तो
- 8:06:20जो करना है जल्दी कर लो क्योंकि अभी थोड़ी
- 8:06:23देर मेरा यहीं रुकने का प्लान है। रुद्र
- 8:06:26ने घमंड से सीना तानते हुए कहा ठीक है।
- 8:06:29अगर तुम एक बाप की औलाद हो तो अभी थोड़ी
- 8:06:32देर तक यहीं रुकना। मैं भी देखता हूं कि
- 8:06:34आज तुम यहां से बचकर कैसे [संगीत] जाते
- 8:06:36हो। शौर्य ने एक कदम आगे बढ़ते हुए बेखौफ
- 8:06:40अंदाज में कहा, मैंने बोला तो कि मैं अभी
- 8:06:43कहीं नहीं जाने वाला हूं। तुम जिसको चाहे
- 8:06:46उसको बुला लो। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 8:06:49शौर्य की बात सुनकर रुद्र का गुस्सा और
- 8:06:51भड़क उठा। उसने तुरंत अपना मोबाइल निकाला
- 8:06:54और किसी को कॉल करने लगा। कुछ ही देर में
- 8:06:57दूसरी तरफ से कॉल उठाया गया। रुद्र ने फोन
- 8:07:00पर गुस्से से कहा।
- 8:07:02भाई मुझे आपकी जरूरत है। कोई है जो आपके
- 8:07:06भाई को परेशान कर रहा है? शौर्य शांति से
- 8:07:09रुद्र को फोन करते हुए देखता रहा। दूसरी
- 8:07:12तरफ से शायद रुद्र को कुछ कहा गया था
- 8:07:15क्योंकि अगले ही पल उसने जवाब दिया। मैं
- 8:07:17किले के अंदर झील के पास हूं। आप जल्दी से
- 8:07:20आ जाइए। इतना कहकर रुद्र ने फोन काट दिया
- 8:07:23और गुस्से से शौर्य की ओर देखने लगा।
- 8:07:26रुद्र के फोन रखते ही शौर्य ने इत्मीनान
- 8:07:28से कहा, बहुत अच्छे। मैं भी यहीं झील के
- 8:07:32किनारे हूं। जब तुम्हारा मददगार आ जाए तो
- 8:07:34उसे यहीं ले आना। शौर्य के चेहरे पर जरा
- 8:07:38भी डर या घबराहट नहीं थी। यह देखकर रुद्र
- 8:07:40है [संगीत] था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि
- 8:07:43शौर्य को उससे जरा भी खौफ क्यों नहीं था।
- 8:07:46उल्टा शौर्य का यह बेफिक्र अंदाज उसके
- 8:07:49गुस्से को और भड़का रहा था। दिव्या ने
- 8:07:52रुद्र को समझाने की कोशिश करते हुए कहा,
- 8:07:55"रुद्र, यह तुम क्या कर रहे हो? इसकी कोई
- 8:07:58जरूरत नहीं है। तुम बेवजह किसी पुरानी बात
- 8:08:01को लेकर किसी से क्यों उलझ रहे हो? अगर
- 8:08:03कोई बात है तो उसे बातचीत से भी हल किया
- 8:08:06जा सकता है। रुद्र ने गुस्से से शौर्य को
- 8:08:09घूरते हुए कहा, "आज नहीं दिव्या, आज अगर
- 8:08:12इसके हाथ पैर नहीं टूटे तो मुझे चैन नहीं
- 8:08:15मिलेगा।" उस वक्त रुद्र के चेहरे का
- 8:08:18गुस्सा ऐसा था जैसे वह शौर्य को अपनी
- 8:08:20आंखों से ही निगल जाएगा। शिवा ने रुद्र के
- 8:08:23कंधे पर हाथ रखते हुए दिव्या की ओर देखकर
- 8:08:25कहा, "तुम चिंता क्यों करती हो दिव्या?"
- 8:08:28कभी-कभी कुछ नकचढ़े लोगों को सबक सिखाना
- 8:08:31जरूरी होता है। रुद्र और शिवा के पीछे
- 8:08:34स्विम सूट में खड़ी लड़की अब आगे आई। उसने
- 8:08:37परेशान होकर कहा, दोस्तों, यह ठीक नहीं हो
- 8:08:40रहा है। हम लोग यहां मजे करने आए हैं और
- 8:08:43तुम दोनों बेवजह किसी से उलझकर पूरा माहौल
- 8:08:46क्यों खराब कर रहे हो? किरण को भी यह
- 8:08:49लड़ाई बिल्कुल पसंद नहीं आ रही थी। वह
- 8:08:51अपने दोस्तों के साथ यहां घूमने और मस्ती
- 8:08:53करने आई थी। लेकिन आते ही यह [संगीत]
- 8:08:56बेवजह का झगड़ा उसके पूरे मूड का मजाक
- 8:08:58किरकिरा कर रहा था। रुद्र ने किरण को
- 8:09:01तसल्ली देते हुए कहा, किरण तुम चिंता मत
- 8:09:04करो। इसमें ज्यादा समय नहीं लगेगा। बस
- 8:09:0710-15 मिनट की बात है। फिर मामला खत्म हो
- 8:09:10जाएगा। उसके बाद देखना यही [संगीत] आदमी
- 8:09:13हमारे सामने घुटनों पर बैठकर माफी नहीं
- 8:09:15मांगेगा तो कहना। शिवा ने रुद्र की बात
- 8:09:18पूरी होने का भी इंतजार नहीं किया। वो
- 8:09:21अकड़ते हुए बोला, अरे यार, इस पिद्दी को
- 8:09:24घुटनों पर लाने के लिए 10-15 मिनट इंतजार
- 8:09:27क्यों करना? मैं तो इसे 1 मिनट में घुटनों
- 8:09:29पर ले आता हूं। इतना कहकर शिवा बिना किसी
- 8:09:33और बात का इंतजार किए शौर्य पर झपट पड़ा।
- 8:09:36उसने रुद्र की बात सुनने की भी कोशिश नहीं
- 8:09:38की। शौर्य के करीब पहुंचते ही उसने पूरी
- 8:09:42ताकत से अपना घूंसा शौर्य पर चला दिया।
- 8:09:45लेकिन शौर्य ने बस अपने शरीर को हल्का सा
- 8:09:47मोड़कर उसके वार से खुद को बचा लिया। अगले
- 8:09:50ही पल उसने अपने खुले पंजे से शिवा की
- 8:09:53छाती पर ऐसा वार किया कि शिवा उछल करीब 5
- 8:09:56फीट पीछे जा गिरा। शिवा को चोट तो लगी थी
- 8:10:00लेकिन उससे कहीं ज्यादा उसके चेहरे पर
- 8:10:02हैरानी थी। उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि
- 8:10:05शौर्य के सिर्फ एक पंजे के वार ने उसे
- 8:10:08इतनी दूर फेंक दिया था। और सबसे डराने
- 8:10:11वाली बात यह थी कि [संगीत] उसे साफ महसूस
- 8:10:13हो रहा था कि शौर्य ने उस वार में अपनी
- 8:10:16पूरी ताकत इस्तेमाल भी नहीं की थी। शिवा
- 8:10:19ने कांपते हुए सोचा अगर शौर्य ने खुले
- 8:10:22पंजे की जगह घूंसा मारा होता तो उसकी छाती
- 8:10:24की एक-दो पसलियां जरूर टूट जाती। यह ख्याल
- 8:10:28आते ही उसका पूरा शरीर सिहर उठा। सिर्फ एक
- 8:10:32वार ने शौर्य को लेकर उसकी पूरी सोच बदल
- 8:10:35दी थी। अब उसे अपनी जल्दबाजी पर पछतावा हो
- 8:10:38रहा था। किरण तुरंत आगे बढ़ी और शिवा को
- 8:10:41सहारा देकर उठाने लगी। जबकि रुद्र का
- 8:10:44चेहरा गुस्से से लाल हो चुका था। रुद्र ने
- 8:10:47दांत पीसते हुए कहा, तुम्हारी इतनी हिम्मत
- 8:10:50[संगीत]
- 8:10:51तुमने एक बार फिर अपनी सीमा लांग दी।
- 8:10:54शौर्य ने ठंडे लहजे में जवाब दिया, सीमा
- 8:10:57नहीं लांगी बल्कि तुम्हारे दोस्त को उसकी
- 8:11:00सीमा के अंदर भेज दिया है। [संगीत]
- 8:11:02अगर मैंने सच में अपनी सीमा लांग दी होती
- 8:11:04तो तुम्हें क्या लगता है? तुम्हारा यह
- 8:11:07दोस्त अपने पैरों पर खड़ा होने के लायक भी
- 8:11:09बचता। शौर्य की बात सुनते ही शिवा के शरीर
- 8:11:12[संगीत] में फिर से सिहरन दौड़ गई। दिव्या
- 8:11:15और किरण के चेहरों के भाव भी अचानक बदल
- 8:11:17[संगीत] गए। दिव्या ने सख्ती से कहा, "इस
- 8:11:21बात को यहीं खत्म करो रुद्र। और शिवा,
- 8:11:24तुम्हें किसी पर हमला करने से पहले सोचना
- 8:11:26चाहिए था। उल्टा पड़ गया ना तुम्हीं पर।
- 8:11:29शौर्य ने दिव्या और किरण की तरफ तारीफ भरी
- 8:11:32नजरों से देखते हुए कहा, "तुम दोनों से
- 8:11:34समझदार तो तुम्हारी यह दोस्त है जो बेवजह
- 8:11:37के झगड़े में नहीं पड़ना चाहती।
- 8:11:40अपनी इन दोस्तों से ही कुछ [संगीत] सीख
- 8:11:42लेते तो आज यूं शर्मिंदगीगी नहीं झेलनी
- 8:11:44पड़ती।
- 8:11:46शिवा का हाल देखकर रुद्र बेबसी में अपने
- 8:11:49हाथ मल रहा था। वो भी नहीं चाहता था कि
- 8:11:51शिवा शौर्य पर हमला करने में जल्दबाजी
- 8:11:53करे। लेकिन शिवा ने उसकी बात सुने बिना ही
- 8:11:56शौर्य पर हमला कर दिया था। और अब उसका
- 8:11:59खामियाजा भुगत रहा था। फिर भी रुद्र अपनी
- 8:12:02हार मानने को तैयार नहीं था। उसने शौर्य
- 8:12:04को धमकाते हुए कहा, बहुत जुबान चल रही है
- 8:12:07तुम्हारी। बस थोड़ी देर और इंतजार कर लो।
- 8:12:10फिर देखना तुम्हारा क्या हाल होता है।
- 8:12:13शौर्य ने उसका उपहास उड़ाते हुए कहा। पूरे
- 8:12:16कुत्ते की दुम हो तुम। कितना भी समय नली
- 8:12:19में बिता लो टेढ़े के टेढ़े ही रहोगे।
- 8:12:22रुद्र ने गुस्से में कहा। जितना बोलना है
- 8:12:25अभी बोल लो। थोड़ी देर बाद कुछ भी बोलने
- 8:12:28लायक नहीं रहोगे। शौर्य ने बेफिक्री से
- 8:12:31कहा, ठीक है फिर जब तक तुम्हारा वो मसीहा
- 8:12:34नहीं आ जाता तब तक तुम अपने मसीहा का
- 8:12:37इंतजार करो। मैं यहीं झील के किनारे
- 8:12:39तुम्हारा इंतजार करूंगा। इतना कहकर शौर्य
- 8:12:43[संगीत] उन सबको पीछे छोड़ता हुआ सीढ़ियां
- 8:12:45उतरने लगा और उस प्लेटफार्म की तरफ बढ़
- 8:12:47गया जो कुछ दूरी तक झील के अंदर बना हुआ
- 8:12:50था। वहां पहुंचकर वो कुछ पल झील के
- 8:12:53खूबसूरत नजारे को निहारता रहा। प्लेटफार्म
- 8:12:56की दाई तरफ ऊपर से नीचे तक सीढ़ियां
- 8:12:58[संगीत] झील के पानी के अंदर जा रही थी।
- 8:13:01जहां कई लड़के लड़कियां नहा रहे थे।
- 8:13:04किनारे से करीब 6- सात फीट अंदर लोहे के
- 8:13:06खंभे पानी में नजर आ रहे थे। जिनसे मोटी
- 8:13:09लोहे की चैन बंधी हुई [संगीत] थी। यह चैन
- 8:13:12एक तरह की चेतावनी थी कि इसके आगे पानी की
- 8:13:15गहराई ज्यादा है। इसलिए [संगीत] जिन्हें
- 8:13:16तैरना नहीं आता वे उस सीमा को पार ना
- 8:13:19करें। इसी वजह से बहुत से बच्चे झील के
- 8:13:22किनारे ही नहा रहे थे। कुछ बड़े लड़के
- 8:13:25लड़कियां भी इसी सीमा के अंदर रहकर पानी
- 8:13:27में उतर रहे थे। जाहिर था वे तैरना नहीं
- 8:13:30जानते थे। जो लोग तैरना जानते थे वे लोहे
- 8:13:33के खंभों के पार जाकर बेफिक्र होकर तैर
- 8:13:36रहे थे। शौर्य को पानी के अंदर [संगीत] कई
- 8:13:39बोट भी दिखाई दी। उनमें कई प्रेमी युगल
- 8:13:42झील के बीच बोटिंग का मजा ले रहे थे। कुछ
- 8:13:45लोग तो बोट से झील के बीच जाकर पानी में
- 8:13:47छलांग लगाते और फिर तैर कर वापस बोट पर आ
- 8:13:50जाते। यह मनमोहक नजारा शौर्य को भी पानी
- 8:13:54में उतरने [संगीत] के लिए उत्साहित कर रहा
- 8:13:56था। झील को देखते ही उसके दिमाग में
- 8:13:59शिप्रा का ख्याल आया। उसने मन ही मन सोचा
- 8:14:02कि अगर कभी समय मिला तो वह दोबारा यहां
- 8:14:04शिप्रा के साथ जरूर आएगा। शौर्य को
- 8:14:07स्विमिंग बहुत पसंद [संगीत] थी। एक समय था
- 8:14:10जब स्विमिंग ही उसकी प्रमुख एक्सरसाइज हुआ
- 8:14:12करती थी। उसे लगता था कि अगर 1 घंटे
- 8:14:15स्विमिंग कर ली जाए तो उसके [संगीत] बाद
- 8:14:17किसी दूसरी एक्सरसाइज की जरूरत ही नहीं रह
- 8:14:19जाती। शौर्य अभी यही सोच रहा था कि क्या
- 8:14:22वह कपड़े बदलकर पानी में उतर जाए। फिर
- 8:14:25उसने सोचा कि आखिर कपड़े बदले कहां? उसकी
- 8:14:29नजर अपने गले में झूल रहे कैरी बैग पर
- 8:14:31पड़ी। उसने आसपास देखा तो सीढ़ियों के ऊपर
- 8:14:34ही उसे एक चेंजिंग रूम दिखाई दिया। वहां
- 8:14:38शायद लॉकर की सुविधा भी थी। जहां लोग अपने
- 8:14:40बैग और कपड़े सुरक्षित रख सकते थे। शौर्य
- 8:14:44तुरंत वहां पहुंचा। काउंटर पर जाकर उसने
- 8:14:47अपने लिए [संगीत] एक लॉकर लिया और चेंजिंग
- 8:14:49रूम में जाकर कपड़े बदल लिए। अपना बैग
- 8:14:52उसने लॉकर [संगीत] के अंदर रखा। लॉकर की
- 8:14:55चाबी एक रिस्ट बैंड से बंधी हुई थी। शौर्य
- 8:14:58ने वो रिस्ट बैंड [संगीत] अपनी कलाई में
- 8:15:00पहन लिया। अब उसे लॉकर की चाबी खोने की भी
- 8:15:03कोई चिंता नहीं थी। कुछ देर बाद [संगीत]
- 8:15:06वो फिर झील के अंदर बने प्लेटफार्म पर आ
- 8:15:08गया। वो प्लेटफार्म के बिल्कुल किनारे तक
- 8:15:10पहुंचा। वहां से साफ पता चल रहा था कि इस
- 8:15:14जगह झील काफी गहरी थी। प्लेटफार्म से कई
- 8:15:17[संगीत] लोग झील के अंदर छलांग लगा रहे थे
- 8:15:20और पानी में तैरने का मजा ले रहे थे।
- 8:15:22प्लेटफार्म पर पहले से ही बहुत से लड़के
- 8:15:25लड़कियां मौजूद थे। यहां एक अलग ही तरह की
- 8:15:28प्रतियोगिता भी चल रही थी। प्लेटफार्म के
- 8:15:31बाई तरफ शौर्य ने देखा कि लड़कियां अपनी
- 8:15:33कोई ना कोई [संगीत] चीज पानी में फेंक रही
- 8:15:35थी और उनके साथी पानी में छलांग लगाकर उस
- 8:15:38चीज को ढूंढने की कोशिश कर रहे थे।
- 8:15:41अगर कोई लड़का अपनी फ्रेंड की चीज [संगीत]
- 8:15:43पानी से निकाल लाता तो वह लड़की खुद को
- 8:15:45भाग्यशाली समझती। शौर्य को यह खेल [संगीत]
- 8:15:48काफी मजेदार लग रहा था। वो भी इस पूरे
- 8:15:51नजारे का आनंद लेने लगा। तभी अचानक
- 8:15:55[संगीत] उसके दिमाग में रुद्र का ख्याल
- 8:15:56आया। शौर्य ने रुद्र की तरफ देखा और उसकी
- 8:16:00आंखें वहीं ठहर गई। रुद्र के साथ कुछ ऐसे
- 8:16:03चेहरे खड़े थे जिन्हें देखते ही शौर्य की
- 8:16:06आंखें खुली की खुली रह गई। अचानक उसने
- 8:16:11रुद्र को अपनी तरफ इशारा करते देखा। शौर्य
- 8:16:14तुरंत पीछे पलट गया। अब वह इंतजार करने
- 8:16:17लगा कि आगे क्या होता है। कुछ पल बाद उसने
- 8:16:20एक बार फिर चोरी छिपे पीछे की तरफ देखा।
- 8:16:24एक शख्स तेजी से शौर्य की तरफ बढ़ रहा था।
- 8:16:27शौर्य के कान खड़े हो गए। वो चलता हुआ
- 8:16:30प्लेटफार्म के बिल्कुल किनारे तक चला गया।
- 8:16:33लेकिन उसके कान अपने पीछे होने वाली हर
- 8:16:35छोटी बड़ी हलचल पर लगे हुए थे। पल बीत रहे
- 8:16:39थे। अचानक शौर्य को कुछ खटका सा महसूस हुआ
- 8:16:42और वह तेजी से वहीं घुटनों के बल बैठ गया।
- 8:16:46उसी क्षण दो पैर उसकी पीठ से टकराए और एक
- 8:16:49शरीर उसके ऊपर से होता हुआ सीधे झील के
- 8:16:52अंदर जा गिरा। शौर्य ने तुरंत घबराहट का
- 8:16:55ऐसा प्रदर्शन किया जैसे उसे समझ ही नहीं
- 8:16:58आया हो कि अभी वहां क्या हुआ। प्लेटफार्म
- 8:17:00पर मौजूद बाकी लोग भी [संगीत] उसी की तरफ
- 8:17:02देखने लगे। तभी शौर्य के पीछे से रुद्र की
- 8:17:05आवाज आई। यह तुमने ठीक नहीं किया। तुमने
- 8:17:08मेरे भाई को पानी में गिरा दिया। अब देखना
- 8:17:11वो तुम्हारा क्या हाल करता है। पीछे से
- 8:17:13आवाज देने वाला कोई और नहीं बल्कि रुद्र
- 8:17:16ही था। शौर्य पलट कर पीछे मुड़ा तो उसने
- 8:17:19रुद्र के साथ करण और कनिका को खड़ा देखा।
- 8:17:22उनसे दो कदम पीछे नंदिनी प्रतीक के साथ
- 8:17:25खड़ी थी और प्रतीक के साथ ही कुणाल भी
- 8:17:27मौजूद था। लेकिन वहां विराज नजर नहीं आ
- 8:17:30रहा था। शौर्य समझ गया कि अभी जो पानी में
- 8:17:33गिरा है वह विराज ही था। विराज झील की सतह
- 8:17:37पर तैर रहा था। शौर्य ने मन ही मन सोचा कि
- 8:17:40विराज ने शायद नहीं सोचा था कि उसके साथ
- 8:17:42ऐसा हादसा हो जाएगा। वो तो शौर्य को धक्का
- 8:17:45देकर झील में गिराने आया था। लेकिन ऐन
- 8:17:48वक्त पर शौर्य के बैठ जाने की वजह से वो
- 8:17:50अपनी ही रफ्तार में शौर्य के ऊपर से होता
- 8:17:53हुआ झील में जा गिरा। दृश्य ऐसा था कि
- 8:17:56वहां मौजूद कोई भी व्यक्ति यही समझता कि
- 8:17:58यह एक हादसा था। शौर्य ने जानबूझकर उसे
- 8:18:02पानी में नहीं गिराया था। कनिका ने हैरानी
- 8:18:04से शौर्य की ओर देखते हुए कहा, "तुम
- 8:18:07यहां?" शौर्य ने अपनी आंखें बड़ी करते हुए
- 8:18:09पलट कर कहा, "क्यों? क्या मैं यहां नहीं
- 8:18:13हो सकता?" पानी में तैर रहे विराज ने भी
- 8:18:16जब शौर्य को देखा, तो उसकी आंखों में
- 8:18:18हैरानी साफ नजर आई। उसने रुद्र से कहा,
- 8:18:21"मुझे पानी से निकालो।" रुद्र हड़बड़ाकर
- 8:18:24प्लेटफार्म के किनारे पहुंचा। उसने अपना
- 8:18:27हाथ आगे बढ़ाकर विराज का हाथ पकड़ा और उसे
- 8:18:30खींच कर वापस प्लेटफार्म पर ले आया। विराज
- 8:18:33के पूरे कपड़े खराब हो चुके थे। बाहर आते
- 8:18:35ही वह बेहद शर्मिंदा नजर आ रहा था। फिर
- 8:18:38उसने शौर्य की तरफ देखते हुए रुद्र से
- 8:18:40पूछा, "तुम इसी के बारे में कह रहे थे?"
- 8:18:44तुम इसी को सबक सिखाना चाहते थे। रुद्र ने
- 8:18:47तुरंत शिकायत भरे अंदाज में कहा, "हां
- 8:18:50भाई, आपको इसे सबक सिखाना पड़ेगा। इसकी
- 8:18:53वजह से मुझे अपने दोस्तों के सामने बहुत
- 8:18:55बेइज्जत होना पड़ा था। और आज भी इसने मेरे
- 8:18:58दोस्त शिवा पर हाथ उठाया है। रुद्र की बात
- 8:19:01सुनकर कनिका को यकीन ही नहीं हो रहा था।
- 8:19:04क्या शौर्य सच में रुद्र के साथ ऐसा कर
- 8:19:06सकता था? क्या शौर्य में इतनी हिम्मत थी?
- 8:19:10उसने एक नजर शिवा पर डाली और मन ही मन
- 8:19:12सोचने लगी। क्या सच में शौर्य शिवा पर हाथ
- 8:19:15उठा सकता है? देखने में तो शिवा की डील
- 8:19:18डोल काफी अच्छी थी। क्या सच [संगीत] में
- 8:19:20वह शौर्य से पिट सकता था? उसे रुद्र की
- 8:19:23बात पर विश्वास नहीं हो रहा था। विराज के
- 8:19:25दिमाग में भी यही सवाल घूम रहा था। उसे भी
- 8:19:28यकीन नहीं हो रहा था कि शौर्य इतनी हिम्मत
- 8:19:31कर सकता है। विराज ने अविश्वास से रुद्र
- 8:19:33की ओर देखते हुए कहा, "यह तुम कैसी बात कर
- 8:19:36रहे हो रुद्र?" शौर्य भला ऐसा कैसे कर
- 8:19:39सकता है? और वैसे भी यह तो अभी तक हमारे
- 8:19:42साथ था। मुझे इसे यहां छोड़े अभी ज्यादा
- 8:19:45समय भी नहीं हुआ। इतनी देर में इसने तुमसे
- 8:19:48पंगा कैसे ले लिया? अब रुद्र की आंखों में
- 8:19:51भी आश्चर्य उभर आया। विराज शौर्य को पहले
- 8:19:54से जानता था। सिर्फ विराज ही नहीं कनिका
- 8:19:57भी शौर्य को जानती थी। आखिर कैसे? रुद्र
- 8:20:00ने हैरानी से पूछा, क्या आप इसे पहले से
- 8:20:03जानते हैं? कर्ण आगे बढ़कर बोला, " सिर्फ
- 8:20:07जानते ही नहीं है। यह यहां आया भी हमारे
- 8:20:09साथ ही है।" लेकिन तुम शौर्य से उलझे
- 8:20:12कैसे? रुद्र ने झूठ बोलते हुए कहा, अब मैं
- 8:20:16तुम्हें क्या बताऊं? इसने कुछ समय पहले
- 8:20:18मेरे दोस्तों के सामने मेरी बेइज्जती की
- 8:20:21थी और आज भी इसने मेरी गर्लफ्रेंड के साथ
- 8:20:23बदतमीजी [संगीत]
- 8:20:24करने की कोशिश की है। रुद्र की बात सुनकर
- 8:20:27वहीं पास खड़ी [संगीत] दिव्या बड़ी-बड़ी
- 8:20:29आंखों से उसे घूरने लगी। विराज ने शौर्य
- 8:20:33को घूरते हुए कड़े स्वर में पूछा। शौर्य
- 8:20:36[संगीत]
- 8:20:37क्या रुद्र सच कह रहा है? विराज को शौर्य
- 8:20:40पर गुस्सा आ रहा था क्योंकि उसी की वजह से
- 8:20:43उसे झील में गिरना पड़ा था। शौर्य ने शांत
- 8:20:47भाव से दिव्या की तरफ देखते हुए कहा, "यह
- 8:20:50बात मुझसे पूछने [संगीत] से बेहतर है कि
- 8:20:53आप यह सवाल उसकी गर्लफ्रेंड से ही क्यों
- 8:20:55नहीं पूछ लेते? विराज की निगाह भी [संगीत]
- 8:20:57तुरंत दिव्या की तरफ घूम गई। अब असली सवाल
- 8:21:00यह था दिव्या क्या कहेगी? क्या वह रुद्र
- 8:21:04का साथ देगी या शौर्य के पक्ष में सच
- 8:21:07सामने रखेगी? और कनिका को आखिर क्यों यकीन
- 8:21:10नहीं हो रहा था कि शौर्य ने ऐसा कुछ किया
- 8:21:13होगा।
- 8:21:14दिव्या कुछ भी कहने से हिचकिचा रही थी।
- 8:21:17रुद्र ने जब उसकी झिझक देखी तो आंखों के
- 8:21:19इशारे से उसे अपनी बात कहने के लिए कहा।
- 8:21:23लेकिन दिव्या को समझ नहीं आ रहा था कि वो
- 8:21:25एक झूठ को सच कैसे बना दे? वो अभी इसी
- 8:21:29[संगीत] उलझन में थी कि तभी विराज ने उसका
- 8:21:31ध्यान अपनी तरफ खींचते हुए पूछा। तुम कुछ
- 8:21:33बोल क्यों नहीं रही हो दिव्या? क्या सच
- 8:21:36में शौर्य ने तुम्हारे साथ बदतमीजी की थी?
- 8:21:38विराज की बात सुनकर दिव्या एक पल के लिए
- 8:21:41हिचकिचाई। उसने पहले रुद्र की तरफ देखा और
- 8:21:44फिर विराज की ओर देखते हुए बोली दरअसल
- 8:21:47भैया रुद्र को कुछ गलतफहमी हो [संगीत] गई
- 8:21:50है। शौर्य ने मेरे साथ कोई भी बदतमीजी
- 8:21:52करने की कोशिश नहीं की थी। यह सिर्फ एक
- 8:21:55गलतफहमी थी। दिव्या ने माहौल को सामान्य
- 8:21:58करने की कोशिश की। लेकिन उसकी बात सुनते
- 8:22:00ही रुद्र की आंखों में उसके [संगीत] लिए
- 8:22:02नाराजगी साफ नजर आने लगी। दिव्या की बात
- 8:22:05सुनकर विराज ने रुद्र की तरफ देखते हुए
- 8:22:07सवाल किया। यह क्या है रुद्र? तुम तो कह
- 8:22:10रहे थे कि शौर्य ने दिव्या [संगीत] के साथ
- 8:22:12बदतमीजी की है। लेकिन दिव्या तो इस बात से
- 8:22:14साफ इंकार कर रही है। रुद्र ने अपनी बात
- 8:22:17को प्रभावशाली दिखाने की कोशिश करते हुए
- 8:22:19कहा पता नहीं भाई मुझे [संगीत] समझ नहीं आ
- 8:22:22रहा कि दिव्या इस बात से क्यों इंकार कर
- 8:22:24रही है। लेकिन यह सिर्फ आज की बात नहीं
- 8:22:26है। आज से कुछ दिन पहले भी इसने मेरे
- 8:22:29दोस्तों के सामने [संगीत] मुझे बहुत
- 8:22:30बेइज्जत किया था और मैं चाहकर भी इसका कुछ
- 8:22:33नहीं कर पाया था। आपको इसे सबक सिखाना
- 8:22:35पड़ेगा भाई। कनिका ने रुद्र को शौर्य पर
- 8:22:38आरोप लगाते देखा तो उसे रोकते हुए कहा
- 8:22:41रुद्र तुम्हें शौर्य के बारे में कुछ भी
- 8:22:43बोलने से पहले यह जान लेना चाहिए कि शौर्य
- 8:22:46कौन है? अब जाकर रुद्र को एहसास हुआ कि वह
- 8:22:49जिस शौर्य को अपने भाई से सबक सिखवाना
- 8:22:51चाहता था उसे उसका भाई और बहन पहले से
- 8:22:53जानते थे। आखिर शौर्य था कौन? रुद्र ने
- 8:22:57खुद को संयमित करते हुए हैरानी से पूछा।
- 8:23:00मुझे नहीं पता था कि आप सब इस लड़के को
- 8:23:03पहले से जानते हैं। लेकिन कैसे? कौन है
- 8:23:06यह? रुद्र की आंखें अब शौर्य पर ही टिकी
- 8:23:09थी। इतना तो वह समझ चुका था कि शौर्य की
- 8:23:11पहचान में कुछ तो खास था। तभी उसके
- 8:23:14भाई-बहन उसे पहले से जानते थे। रुद्र अभी
- 8:23:17इसी सोच में था कि करण [संगीत] उसके सामने
- 8:23:19आकर बोला, "यह राठौर फैमिली का पोता शौर्य
- 8:23:22राठौर है।" इसी के साथ दादाजी ने पहले
- 8:23:25कनिका का रिश्ता तय किया था। [संगीत]
- 8:23:27लेकिन उसके बाद क्या हुआ? यह तो तुमको पता
- 8:23:29ही है। दादाजी ने अब यह बात कनिका के ऊपर
- 8:23:32छोड़ दी है कि वह चंद्रभान [संगीत]
- 8:23:34राठौर जी के पोते या नाती में से किसी एक
- 8:23:36को पसंद कर ले। रुद्र है से शौर्य की ओर
- 8:23:39देखने लगा। उसने सपने में भी कल्पना नहीं
- 8:23:42की थी कि शौर्य उसका [संगीत] जीजा भी बन
- 8:23:44सकता है और वह उसी को सबक सिखाने की कोशिश
- 8:23:46कर रहा था। जाने कितने ख्याल [संगीत] उसके
- 8:23:48दिमाग में आने लगे। यह सोच कर ही उसे खुद
- 8:23:51पर दया आने लगी। अगर सच में कनिका ने
- 8:23:54शौर्य को पसंद कर लिया तो वह कभी भी शौर्य
- 8:23:56के सामने सिर उठाकर देखने लायक नहीं रह
- 8:23:58पाएगा। वो तुरंत कनिका की तरफ पलटा और
- 8:24:01बेचैनी से पूछ [संगीत] बैठा। तुमने अपने
- 8:24:04लिए शौर्य को तो पसंद नहीं किया है ना?
- 8:24:06कनिका आंखें बड़ी करके रुद्र की ओर देखने
- 8:24:08लगी। इस समय रुद्र का सवाल उसे बेहद
- 8:24:11[संगीत] अजीब लगा। वो समझ गई थी कि रुद्र
- 8:24:13के दिमाग में क्या चल रहा होगा। लेकिन जब
- 8:24:16रुद्र ने उससे पूछ ही लिया [संगीत] तो
- 8:24:17उसने संतुलित जवाब देना बेहतर समझा। वो
- 8:24:20शांत स्वर में बोली अभी मैंने कुछ डिसाइड
- 8:24:23नहीं किया है। अभी हम पहले एक दूसरे को
- 8:24:25[संगीत] जान लें। उसके बाद ही मैं इस बारे
- 8:24:27में कोई निर्णय ले सकूंगी। इतना जानकर ही
- 8:24:30रुद्र को थोड़ी तसल्ली हुई। उसने मन ही मन
- 8:24:33सोचा। चलो कम से कम अभी तक तो कनिका ने
- 8:24:36शौर्य को अपने लिए पसंद नहीं किया है। आगे
- 8:24:39वह इस बात को सुनिश्चित [संगीत] करेगा कि
- 8:24:41कनिका शौर्य को पसंद ना करे। इधर विराज
- 8:24:44अभी भी इसी उलझन में था कि अब वह शौर्य से
- 8:24:46क्या कहे। उसे खुद पर इस बात की
- 8:24:48शर्मिंदगीगी थी कि बिना [संगीत] जाने बुझे
- 8:24:51वो शौर्य को पानी में धक्का देने के लिए
- 8:24:53उसके पीछे आ गया था और उसकी जगह खुद ही
- 8:24:56पानी में जा गिरा था। उसे इस बात का भी
- 8:24:58अफसोस था कि अगर उसने पहले ही जान लिया
- 8:25:00होता कि जिसे वह झील में धक्का देने जा
- 8:25:02रहा है वह शौर्य है तो कम से कम उस समय
- 8:25:05उसने यह बेवकूफाना हरकत नहीं की होती।
- 8:25:08दरअसल शौर्य ने अपने कपड़े बदल लिए थे।
- 8:25:10इसी कारण विराज उसे पीछे से पहचान नहीं
- 8:25:13सका था। लेकिन इसके बावजूद उसके मन में
- 8:25:16शौर्य को लेकर गुस्सा था क्योंकि उसने
- 8:25:18उसके भाई को उसके दोस्तों के सामने
- 8:25:21बेइज्जत किया था। विराज ने थोड़ी नाराजगी
- 8:25:24के साथ शौर्य से पूछा शौर्य क्या तुम
- 8:25:27बताओगे कि तुमने पहले मेरे भाई को उसके
- 8:25:30दोस्तों के सामने [संगीत] क्यों बेइज्जत
- 8:25:32किया था? शौर्य ने रुद्र की तरफ देखते हुए
- 8:25:35शांत लेकिन व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा।
- 8:25:38क्या विराज भाई आपको ऐसा लगता है कि मैं
- 8:25:41आपके भाई को उसके दोस्तों के सामने
- 8:25:43बेइज्जत कर सकता हूं? आप ही पूछिए अपने
- 8:25:46भाई से कि मैंने कब और कैसे उसकी बेइज्जती
- 8:25:49उसके दोस्तों के सामने कर दी थी। शौर्य यह
- 8:25:52जानने की कोशिश कर रहा था कि क्या रुद्र
- 8:25:55अपने भाइयों के सामने सच बताने की हिम्मत
- 8:25:57कर पाएगा कि आखिर उसे शौर्य के सामने
- 8:26:00बेइज्जत क्यों होना पड़ा था। वो उस दिन
- 8:26:03विशालगढ़ के किले पर क्या कर रहा था। ऐसे
- 8:26:06कई सवालों के जवाब रुद्र को देने पड़ सकते
- 8:26:08थे। शौर्य की चालाकी के सामने रुद्र की
- 8:26:11बोलती बंद हो गई। वह कैसे बता सकता था कि
- 8:26:15उसने उस दिन नताशा कपूर के साथ किस तरह की
- 8:26:17हरकत करने की कोशिश की थी और कैसे उसने
- 8:26:20खुद ही उसका रास्ता रोका था जिसके बाद
- 8:26:23शौर्य ने उसके दोस्तों को सबक सिखाया था।
- 8:26:26रुद्र को समझ नहीं आया कि वह विराज को
- 8:26:28अपनी बात कैसे बताएं। जब उसे लगा कि अपनी
- 8:26:31ही बात में फंस सकता है तो उसने तुरंत बात
- 8:26:33संभालते हुए कहा अब रहने भी दीजिए विराज
- 8:26:36भाई। वो इतनी बड़ी बात नहीं है। उस समय
- 8:26:39मुझे पता भी नहीं था कि शौर्य कौन है। अब
- 8:26:41जबकि पता है कि शौर्य चंद्रभान राठौर जी
- 8:26:44का पोता है तो उस बीती बात का कोई मतलब
- 8:26:46नहीं है। कनिका रुद्र की एक-एक बात ध्यान
- 8:26:49से सुन रही थी। उसके चेहरे के बदलते भाव
- 8:26:52देखकर वह समझ गई थी कि इन दोनों के बीच
- 8:26:55जरूर कुछ ऐसा हुआ था जिसके बारे में रुद्र
- 8:26:57[संगीत] अब बात नहीं करना चाहता था। लेकिन
- 8:26:59आखिर क्यों? उसने मन ही मन तय किया कि वह
- 8:27:02इस बारे में रुद्र से बाद में जरूर
- 8:27:04पूछेगी। विराज ने हुई घटना पर खेद जताते
- 8:27:07हुए शौर्य से कहा, "सॉरी शौर्य, मैंने
- 8:27:10तुम्हें बिना जानेबूझे पानी में धक्का
- 8:27:12देने की कोशिश की।" शौर्य ने चेहरे पर
- 8:27:15व्यंग भरी मुस्कान लाते हुए जवाब दिया,
- 8:27:17कैसी बात कर रहे हैं विराज भाई? सॉरी तो
- 8:27:20मुझे आपको बोलना चाहिए कि मेरे कारण आपको
- 8:27:22पानी में गिरना पड़ा। विराज ने माहौल को
- 8:27:25[संगीत] सामान्य करने की कोशिश करते हुए
- 8:27:27कहा, ठीक है फिर अब हम इस बात को यहीं
- 8:27:30छोड़ते हैं। शौर्य, यह मेरा भाई रुद्र
- 8:27:33[संगीत] है जिससे तुम्हारी मुलाकात तो हो
- 8:27:35ही गई है। मैं समझता हूं कि तुम दोनों के
- 8:27:38अनुभव एक दूसरे के साथ अच्छे नहीं रहे
- 8:27:40हैं। लेकिन अब जब हम जान गए हैं कि हम कौन
- 8:27:42हैं तो आगे से हमारे बीच ऐसी कोई अजीब
- 8:27:45स्थिति पैदा नहीं होगी। शौर्य ने हल्की
- 8:27:47मुस्कान के साथ कहा, "मैं तो वैसे भी इस
- 8:27:50बात को लेकर खास सतर्क रहता हूं कि कहीं
- 8:27:52किसी से पंगा ना हो जाए।" यह कहते हुए
- 8:27:55शौर्य खुद को शिवा की तरफ देखने से रोक
- 8:27:57नहीं [संगीत] सका। यहां सभी अपनी जगह ठीक
- 8:27:59ही थे। एक शिवा ही था जो खाली पीली अपनी
- 8:28:03जल्दबाजी के कारण शौर्य के हाथों पिट गया
- 8:28:06था। स्थिति सामान्य होते देखकर दिव्या और
- 8:28:09किरण अब खुश नजर आ रही थी। दिव्या ऊपर
- 8:28:12वाले को धन्यवाद दे रही थी कि रुद्र की
- 8:28:14बातों में आकर उसने शौर्य पर बदतमीजी का
- 8:28:17झूठा इल्जाम लगाने से इंकार कर दिया था।
- 8:28:19दिव्या खुद विशालगढ़ के एक बड़े बिजनेस
- 8:28:22घराने से आती थी और उसके पिता के राठौर
- 8:28:24फैमिली से भी व्यवसायिक संबंध थे। अगर आज
- 8:28:27उसने रुद्र की बातों में आकर शौर्य पर
- 8:28:30झूठा इल्जाम लगा दिया होता तो पता नहीं
- 8:28:32बाद में इसका क्या प्रभाव पड़ता। प्रतीक
- 8:28:35सब कुछ देख रहा था। उसे उम्मीद थी कि
- 8:28:37मामला कुछ बिगड़ेगा। लेकिन [संगीत] जब
- 8:28:39रुद्र बैकफुट पर आ गया तो उसे बड़ी निराशा
- 8:28:42हुई। वो लंबी सांस लेते हुए बोला, चलो यह
- 8:28:46बढ़िया है कि सब कुछ अच्छे से निपट गया
- 8:28:48है। लेकिन अब आगे का क्या प्लान है? करण
- 8:28:52ने उत्साहित स्वर में कहा, "मेरा तो अभी
- 8:28:54स्विमिंग करने का प्लान है। बाकी तुम सब
- 8:28:56अपना प्लान बताओ।" विराज ने अपने कपड़ों
- 8:28:59की तरफ देखते हुए कहा, [संगीत]
- 8:29:01"मैं तो ऑलरेडी गीला हो गया हूं। तो फिर
- 8:29:03अब स्विमिंग कर लेने में कोई बुराई नहीं
- 8:29:05है।" करण ने शौर्य की तरफ देखते हुए कहा,
- 8:29:08शौर्य तुम तो पहले से ही कपड़े चेंज करके
- 8:29:11पानी में जाने को तैयार [संगीत] हो। शौर्य
- 8:29:13ने झील की तरफ देखते हुए सहजता से कहा, बस
- 8:29:17मैंने सोचा है कि जब यहां तक आ ही गया हूं
- 8:29:19तो एक दुबकी तो लगा ही लूं। कुणाल ने भी
- 8:29:22उत्साहित होकर कहा, "मैं भी सोच रहा हूं
- 8:29:25कि आज इस झील की गहराई नाप ही लूं।" विराज
- 8:29:28ने कुणाल की तारीफ करते हुए कहा, "क्या
- 8:29:30बात है कुणाल?" लगता है तुम माहिर तैराक
- 8:29:34हो। तभी झील की गहराई नापने की बात कर रहे
- 8:29:36हो।" विराज ने एक तरह से कुणाल को कनिका
- 8:29:39के लिए पसंद कर लिया था। उसे तो शौर्य
- 8:29:42पहले से ही पसंद नहीं [संगीत] था। अब जब
- 8:29:44कनिका के सामने यह विकल्प था कि वह दोनों
- 8:29:47में से किसी एक को पसंद कर सकती है तो
- 8:29:49विराज बिना किसी संदेह के चाहता था कि वह
- 8:29:52कुणाल को ही पसंद करें। इस वक्त भी विराज
- 8:29:55ने भले ही शौर्य से सबके सामने कुछ नहीं
- 8:29:57कहा था। लेकिन जब वह शौर्य के कारण झील
- 8:29:59में गिरा था तो उसे शौर्य पर बहुत गुस्सा
- 8:30:02आया था। उसे खुद पर इतना गुस्सा था कि
- 8:30:04आखिर उसके जैसा फाइटर शौर्य को पानी में
- 8:30:07धक्का देने से कैसे चूक गया। विराज की नजर
- 8:30:10में तो शौर्य उसके सामने एक मच्छर के समान
- 8:30:13था और वह उसे पानी में धक्का देने [संगीत]
- 8:30:15से चूक गया था। यही बात उसके ईगो को अंदर
- 8:30:18तक परेशान कर रही थी। उसने मन ही मन ठान
- 8:30:21लिया था कि इसका बदला वह शौर्य से जरूर
- 8:30:23लेगा। कुणाल ने सबको चैलेंज करते हुए कहा
- 8:30:26जब सभी स्विमिंग करना चाहते हैं तो क्यों
- 8:30:28ना एक रेस हो जाए आपस में। रुद्र ने कुणाल
- 8:30:31की तारीफ करते हुए कहा, "क्या बात है
- 8:30:33कुणाल? लगता है तुम्हें अपनी तैराकी पर
- 8:30:35कुछ ज्यादा ही भरोसा है।" कुणाल ने विनम्र
- 8:30:38बनने की कोशिश करते हुए कहा, नहीं ऐसा
- 8:30:41नहीं है। बस चैलेंज होने से किसी भी काम
- 8:30:43को करने का मजा दोगना हो जाता है। एक
- 8:30:46कंपटीशन की भावना आ जाती है जो उस खेल के
- 8:30:48स्तर को बढ़ा देती है। करण ने कुणाल की
- 8:30:51बात से सहमत होते हुए कहा, "अगर ऐसी बात
- 8:30:53है तो एक कंपटीशन हो ही जाए, मजा आएगा।"
- 8:30:56रुद्र ने एक तरह से कुणाल को चुनौती देते
- 8:30:58हुए कहा, अगर तुम इतने ही अच्छे तैराक हो
- 8:31:01कुणाल तो क्यों [संगीत] ना तुम इस
- 8:31:02प्लेटफार्म के सामने झील में से कनिका के
- 8:31:04द्वारा डाली गई उसकी कोई प्यारी वस्तु
- 8:31:06निकालकर ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करो।
- 8:31:09कुणाल ने नासमझी भरे भाव से पूछा तुम्हारी
- 8:31:12इस बात का मतलब क्या हुआ? रुद्र ने इस जगह
- 8:31:15की मान्यता बताते हुए कहा इस जगह के बारे
- 8:31:18में कहा जाता है कि अगर कोई लड़की अपनी
- 8:31:20कोई वस्तु इस झील में डालती है और उसका
- 8:31:22लवर या मंगेतर उस वस्तु को झील से निकाल
- 8:31:25लाता है तो उन दोनों का रिश्ता बहुत मजबूत
- 8:31:27हो जाता है। दिव्या ने रुद्र पर व्यंग
- 8:31:30करते हुए कहा, खुद तो मेरे द्वारा डाले गए
- 8:31:32कंगन को तलाश नहीं पाए और दूसरे को सलाह
- 8:31:35दे रहे हो। रुद्र ने अपनी झेंप मिटाते हुए
- 8:31:38कहा, "अब यह जरूरी तो नहीं कि जो मैं नहीं
- 8:31:40कर सका, वो कुणाल भी नहीं [संगीत] कर
- 8:31:42सकेगा।" रुद्र की बात सुनकर कुणाल कनिका
- 8:31:45की तरफ देखने लगा और विश्वास भरे स्वर में
- 8:31:47बोला, "अगर ऐसा है तो मैं जरूर अपनी
- 8:31:50किस्मत आजमाना चाहूंगा।" कनिका को थोड़ा
- 8:31:53एंबरेसमेंट महसूस हुआ। लेकिन उसी समय
- 8:31:55विराज ने उसे प्रोत्साहित करते हुए कहा
- 8:31:58कनिका तुम्हें अपना लक एक बार आजमाना
- 8:32:00चाहिए। नंदिनी ने जब इस बारे में सुना तो
- 8:32:03वह उम्मीद भरी नजरों से प्रतीक की ओर
- 8:32:05देखने लगी। प्रतीक ने जब उसे अपनी तरफ
- 8:32:07देखते पाया तो मुस्कुरा कर पूछा। कहीं तुम
- 8:32:09यह तो नहीं चाहती कि मैं भी तुम्हारे लिए
- 8:32:11ऐसा करूं। नंदिनी ने आशा भरी नजरों से
- 8:32:14उसकी तरफ देखते हुए कहा, वैसे तो मैं ऐसी
- 8:32:16किसी बात पर विश्वास नहीं करती पर ट्राई
- 8:32:19करने में क्या जाता है? प्रतीक ने
- 8:32:21कॉन्फिडेंस के साथ कहा तो ठीक है फिर
- 8:32:24क्यों ना पहल हम ही करें नंदिनी ने सहजता
- 8:32:27से कहा तो ठीक है पहले तुम जाकर अपने
- 8:32:30कपड़े चेंज कर लो प्रतीक के साथ बाकी सब
- 8:32:32भी अपने कपड़े चेंज करने चले गए जल्दी ही
- 8:32:35सबने अपने कपड़े बदल लिए नंदिनी ने गौर
- 8:32:38किया कि सीढ़ियों के ऊपर आर्टिफिशियल
- 8:32:40ज्वेलरी की एक दुकान थी जहां लड़के
- 8:32:42लड़कियों की भीड़ लगी हुई थी ऐसा लग रहा
- 8:32:45था कि लड़कियां वहां से अपने लिए कोई
- 8:32:47ज्वेलरी आइटम खरीद कर झील में डालती होंगी
- 8:32:49और लड़के उस आइटम को ढूंढने का चैलेंज
- 8:32:52लेते होंगे। कनिका के साथ नंदिनी भी वहां
- 8:32:54गई और अपने लिए एक-एक कंगन खरीद लाई।
- 8:32:57दोनों ने उन कंगनों पर अपने नाम भी गुदवा
- 8:32:59लिए ताकि उनकी पहचान हो सके। दोनों झील के
- 8:33:02प्लेटफार्म पर वापस आ गई। प्रतीक और कुणाल
- 8:33:05दोनों इस बात से उत्साहित थे कि वे कनिका
- 8:33:07और नंदिनी के लिए झील में डुबकी लगाकर
- 8:33:10उनके कंगन ढूंढने वाले थे। कुणाल इस बात
- 8:33:13से कुछ ज्यादा ही खुश था। उसकी खुशी का
- 8:33:15कारण यह था कि कनिका का कंगन झील से
- 8:33:18ढूंढने का मौका उसे मिल रहा था ना कि
- 8:33:21शौर्य को। इसका मतलब उसके लिए यही था कि
- 8:33:25कनिका ने शायद पहले ही शौर्य को नापसंद कर
- 8:33:28दिया है। यह सोचकर उसके चेहरे की खुशी और
- 8:33:31बढ़ गई। नंदिनी ने प्रतीक की तरफ देखते
- 8:33:34हुए कहा, रुको। मैं पहले अपनी किस्मत
- 8:33:38आजमाती हूं। तुम तैयार हो प्रतीक? प्रतीक
- 8:33:41ने पूरे विश्वास के साथ कहा, "यह भी कोई
- 8:33:44पूछने की बात है? मैं तैयार हूं। तुम अपना
- 8:33:47कंगन पानी में फेंको।" प्रतीक की बात
- 8:33:50सुनकर नंदिनी ने अपना कंगन पानी के अंदर
- 8:33:53डाल दिया। अगले ही पल जिस जगह कंगन पानी
- 8:33:56के अंदर गया था, वहीं प्रतीक ने छलांग
- 8:33:59[संगीत] लगा दी। इसी समय प्लेटफार्म पर
- 8:34:01मौजूद शौर्य की जेब में रखा फोन वाइब्रेट
- 8:34:04करने लगा। शौर्य ने फोन जेब से बाहर
- 8:34:06निकाला। उसका मोबाइल एक प्लास्टिक के वाटर
- 8:34:09प्रूफ थैले में था। उसने ऐसा इसलिए किया
- 8:34:12था क्योंकि अगर वह पानी में मोबाइल के साथ
- 8:34:14उतरे भी तो उसके मोबाइल के अंदर पानी ना
- 8:34:16जा सके। शौर्य ने मोबाइल स्क्रीन पर फ्लैश
- 8:34:19हो रहे नंबर को देखा और उसके होठों पर एक
- 8:34:22हल्की सी मुस्कान आ गई। प्रतीक नंदनी का
- 8:34:25कंगन ढूंढने के लिए झील में डुबकी लगा
- 8:34:28चुका था। सभी उसके बाहर निकलने का इंतजार
- 8:34:31करने लगे। इसी बीच शौर्य ने अपने फोन पर
- 8:34:34शिप्रा का कॉल आते देखा। वो थोड़ा साइड
- 8:34:37में हुआ और कॉल रिसीव कर लिया। क्या कर
- 8:34:40रहे हो? कॉल उठाते ही दूसरी तरफ से शिप्रा
- 8:34:43की आवाज आई। कान्हा फॉरेस्ट के अंदर एक
- 8:34:46किला है जिसके अंदर एक शिव मंदिर है और
- 8:34:49उसके साथ एक बड़ी सी झील भी है। अब बस उसी
- 8:34:53में स्विमिंग करने की सोच रहा हूं। शौर्य
- 8:34:55झील के उस हिस्से की तरफ देखते हुए बोला
- 8:34:58जहां प्रतीक ने डुबकी लगाई थी। क्या कनिका
- 8:35:01से कुछ बात हुई? शिप्रा ने हिचकिचाते हुए
- 8:35:03सवाल किया। शौर्य समझ रहा था [संगीत] कि
- 8:35:06शिप्रा किस बारे में बात करना चाहती है।
- 8:35:09हां, बात तो हुई है। शौर्य ने संक्षिप्त
- 8:35:11[संगीत] सा जवाब दिया। क्या बात हुई यह तो
- 8:35:14बताओ। शिप्रा बेसब्री से बोली। वो कह रही
- 8:35:18थी कि मैं उसकी प्रॉब्लम को समझूं। अगर वो
- 8:35:20मुझे पसंद नहीं करती तो मुझे इस बात का
- 8:35:22बुरा नहीं मानना चाहिए। शौर्य ने
- 8:35:25मुस्कुराते हुए शिप्रा को जवाब दिया। यानी
- 8:35:27तुम्हारा और कनिका का मामला निपट [संगीत]
- 8:35:29गया। अब तुम पर यह पाबंदी नहीं है कि
- 8:35:32तुम्हें कनिका से शादी करनी पड़ेगी।
- 8:35:34शिप्रा खुश होते हुए बोली, इतनी जल्दी खुश
- 8:35:37होने की जरूरत [संगीत] नहीं है। अभी उसने
- 8:35:39यह बात सिर्फ मुझसे कही है। जब तक वो यह
- 8:35:42बात अपनी फैमिली को नहीं बता देती तब तक
- 8:35:44खुश होने का कोई मतलब नहीं [संगीत] है।
- 8:35:46शौर्य ने शिप्रा को समय से पहले खुश होने
- 8:35:48से रोका। क्यों? अब इसमें क्या उलझन हो
- 8:35:51[संगीत] सकती है? जब तुमसे उसने अपने दिल
- 8:35:53की बात कह दी है तो वह भला अपनी फैमिली को
- 8:35:56यह बताने में देर क्यों करेगी? शिप्रा ने
- 8:35:58अपनी आशंका शौर्य के सामने जाहिर की।
- 8:36:01मैंने यह नहीं कहा कि वह ऐसा नहीं करेगी।
- 8:36:03मैं तो बस यह कह रहा हूं कि जब तक वह अपने
- 8:36:06घर वालों को नहीं बता देती और उसके घरवाले
- 8:36:08इसे कंफर्म नहीं कर देते कि कनिका की शादी
- 8:36:11कुणाल [संगीत] के साथ तय हो गई है तब तक
- 8:36:13खुश होने की जरूरत नहीं है। शौर्य ने अपना
- 8:36:16डर शिप्रा के सामने जाहिर किया। तुम ऐसा
- 8:36:18बोलकर मुझे डरा क्यों रहे हो? मैं तो यह
- 8:36:21मानकर चल [संगीत] रही थी कि आज सब क्लियर
- 8:36:23हो जाएगा। बोलते हुए शिप्रा की आवाज में
- 8:36:26उदासी उतर आई। अब छोड़ो इस बात को। जो
- 8:36:29होना होगा वो तो हो ही जाएगा। फालतू में
- 8:36:32उसके बारे में सोचकर अपना आज क्यों खराब
- 8:36:34करना? शौर्य शिप्रा को तसल्ली देते हुए
- 8:36:37बोला। शौर्य की बात सुनकर शिप्रा ने भी अब
- 8:36:40इस टॉपिक पर बात ना करने का फैसला किया।
- 8:36:43ठीक है तो अब यह बताओ कि इस समय कनिका
- 8:36:46क्या कर रही है? शिप्रा की सुई घूम फिर कर
- 8:36:48कनिका पर ही आकर अटक जाती थी। इस समय
- 8:36:51प्रतीक नंदनी के कंगन को ढूंढने के लिए
- 8:36:53झील में डुबकी लगा चुका है। सब उसके बाहर
- 8:36:56आने का इंतजार कर रहे हैं। शौर्य झील के
- 8:36:59प्लेटफार्म की तरफ देखते हुए बोला इस बात
- 8:37:02का क्या मतलब हुआ कि प्रतीक नंदिनी के
- 8:37:04कंगन को ढूंढने के लिए झील में डुबकी लगा
- 8:37:06चुका है। शिप्रा को समझ नहीं आया कि
- 8:37:09प्रतीक [संगीत] झील में कंगन क्यों ढूंढ
- 8:37:11रहा है। शौर्य ने शिप्रा को विस्तार से उस
- 8:37:14मान्यता के बारे में बताया जो वहां वर्षों
- 8:37:16से प्रचलित थी। काश मैं भी वहां होती तो
- 8:37:20तुम भी मेरे सामान को ढूंढने के लिए पानी
- 8:37:22में डुबकी लगाते। [संगीत]
- 8:37:24शिप्रा अफसोस जाहिर करते हुए बोली शिप्रा
- 8:37:27की बात सुनकर शौर्य के चेहरे पर मुस्कान आ
- 8:37:29गई। तो क्या तुम भी इस मान्यता को मानती
- 8:37:32हो? शौर्य ने मुस्कुराते [संगीत] हुए पूछा
- 8:37:35ऐसा कुछ नहीं है। लेकिन जब कोई मान्यता
- 8:37:37वर्षों से चली [संगीत] आ रही है तो कुछ ना
- 8:37:39कुछ तो उसमें सच्चाई होने की संभावना है।
- 8:37:42शिप्रा असमंजस भरे स्वर में बोली मुझे
- 8:37:45आश्चर्य है कि तुम भी इस दयानु सी बात पर
- 8:37:47विश्वास करती हो। शौर्य हल्की [संगीत]
- 8:37:50मुस्कान के साथ बोला मैंने यह तो नहीं कहा
- 8:37:53कि मुझे इस बात पर विश्वास है। लेकिन अगर
- 8:37:55थोड़ी भी इसमें सच होने की संभावना होती
- 8:37:57तो मैं इसे आजमाने से नहीं चूकती। मैं तो
- 8:38:01एक बार जरूर तुम्हारे साथ वहां जाऊंगी।
- 8:38:03शिप्रा ने अपनी सोच शौर्य के सामने जाहिर
- 8:38:05की। ठीक है फिर जब तुम्हारी यही इच्छा है
- 8:38:09तो जल्दी [संगीत] ही तुम्हारे साथ भी यहां
- 8:38:11एक चक्कर लगाऊंगा। शौर्य ने शिप्रा को
- 8:38:13विश्वास दिलाया। सुनो ना वीडियो कॉल करूं
- 8:38:17क्या? शिप्रा ने अचानक एक नई डिमांड शौर्य
- 8:38:20के सामने रख दी। मैडम यह सच है [संगीत] कि
- 8:38:24यहां का माहौल पिकनिक जैसा ही है। लेकिन
- 8:38:26इसका मतलब यह नहीं है कि तुम मुझसे
- 8:38:28[संगीत] वीडियो कॉल पर बात कर सकती हो। अब
- 8:38:30वैसे भी बहुत समय हो गया है। फोन रखो। अब
- 8:38:33तो कनिका भी मेरी तरफ शक भरी नजरों से
- 8:38:36देखने लगी है कि मैं फोन पर किससे बात कर
- 8:38:38रहा हूं। शौर्य मजाकिया लहजे में बोला
- 8:38:41तुम्हें कुछ ज्यादा ही जल्दी नहीं है फोन
- 8:38:43रखने की। तुम्हें मेरी भावनाओं की तो कदर
- 8:38:45ही नहीं है। शिप्रा शिकायत भरे स्वर में
- 8:38:48बोली अब मैं तुमसे क्या ही कहूं। अगर
- 8:38:50कनिका का सवाल जवाब शुरू हो गया या उसे शक
- 8:38:53हो गया तो उसे जवाब देना मुश्किल हो
- 8:38:55जाएगा। इसलिए मेरी प्रॉब्लम को समझकर अभी
- 8:38:58फिलहाल के लिए फोन रख दो। शौर्य ने शिप्रा
- 8:39:01से रिक्वेस्ट की। शौर्य की बात पर कुछ देर
- 8:39:03दूसरी तरफ खामोशी छाई रही। फिर शिप्रा की
- 8:39:06आवाज सुनाई दी। आई लव यू। शौर्य के दिल
- 8:39:10में जैसे गुदगुदी सी हुई। वो शिप्रा की
- 8:39:12बात सुनकर हैरान था। इस [संगीत] तरह अचानक
- 8:39:14शिप्रा उसे आई लव यू बोलेगी उसने सोचा भी
- 8:39:17नहीं था। उन तीन शब्दों को सुनकर शौर्य
- 8:39:20जैसे कुछ पल के [संगीत] लिए वहीं ठहर सा
- 8:39:22गया। अब तुम कुछ बोलोगे? शौर्य की तरफ से
- 8:39:25कोई प्रतिक्रिया ना पाकर शिप्रा खींचते
- 8:39:28हुए बोली, "अब मैं क्या बोलूं?" बोलते हुए
- 8:39:31शौर्य को अपना गला फंसा हुआ सा महसूस हुआ।
- 8:39:34मैंने सोचा नहीं था कि मुझे तुम्हारी तरफ
- 8:39:36से इस तरह की प्रतिक्रिया मिलेगी। शिप्रा
- 8:39:39की आवाज की कड़वाहट शौर्य साफ महसूस कर
- 8:39:41सकता था। देखो मैं अभी जहां पर हूं वहां
- 8:39:45से तुम्हें तुम्हारी उम्मीद के मुताबिक
- 8:39:46जवाब नहीं दे [संगीत] सकता। मेरी प्रॉब्लम
- 8:39:49को समझो। शौर्य धीमे स्वर में शिप्रा से
- 8:39:51रिक्वेस्ट करता हुआ बोला। वो मैं नहीं
- 8:39:54जानती। मुझे तो बस तुम्हारी तरफ से
- 8:39:56रिप्लाई चाहिए। शिप्रा जिद भरे स्वर में
- 8:39:59बोली यह बढ़िया है। मैं रात भर तुम्हें
- 8:40:02मनाने की कोशिश करता रहा। तुम्हें तो मुझ
- 8:40:04पर दया नहीं आई थी। और तुम चाहती हो कि
- 8:40:07मैं तुरंत ही तुम्हारी विश पूरी कर दूं।
- 8:40:09जैसे मैं रात में तुम्हारे लिए तरसा हूं,
- 8:40:11वैसे तुम्हें भी मेरा जवाब सुनने के लिए
- 8:40:13थोड़ा तड़पना चाहिए। शौर्य ने मन ही मन
- 8:40:15शिप्रा को भी थोड़ा सताने की ठान ली।
- 8:40:18संजोग से इसी समय कनिका ने शौर्य को किसी
- 8:40:20से बात करते देखा तो वह उसके पास आकर
- 8:40:23बोली, किससे बात कर रहे हो जो सबसे अलग हो
- 8:40:26गए हो और बात भी धीरे-धीरे कर रहे हो?
- 8:40:28कनिका कब शौर्य के इतने करीब आ गई थी?
- 8:40:31शौर्य ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया था।
- 8:40:33कनिका का सवाल सुनकर अचानक उसके मन में एक
- 8:40:36शरारती ख्याल आया और वह तुरंत उससे बोला
- 8:40:39मैं तुम्हारी बात पर ही ध्यान दे रहा हूं।
- 8:40:41अब जबकि तुमने साफ कर ही दिया है [संगीत]
- 8:40:43कि मैं तुम्हारी जिंदगी का हिस्सा नहीं बन
- 8:40:45सकता। तो सोच रहा हूं कि कम से कम जिसे
- 8:40:48अपनी लाइफ का हिस्सा बना सकता हूं उसे तो
- 8:40:50अपनी तरफ कर लूं। नहीं तो पता चलेगा कि वह
- 8:40:53भी किसी और को पसंद कर लेगी। फिर मैं
- 8:40:55अकेला अपना हाथ मलता ही रह जाऊंगा। क्या
- 8:40:58तुम शिप्रा से बात कर रहे हो? कनिका
- 8:41:00आश्चर्य से बोली [संगीत] तुमने सही पहचाना
- 8:41:03क्यों ना तुम भी अपनी तरफ से शिप्रा के
- 8:41:04सामने मेरी थोड़ी पैरवी कर दो। मैं नहीं
- 8:41:07चाहता कि वह भी मेरे हाथों से चली जाए।
- 8:41:09शौर्य कनिका से रिक्वेस्ट [संगीत] करता
- 8:41:11हुआ बोला। तो क्या तुमने शिप्रा से अपनी
- 8:41:13फीलिंग्स शेयर कर दी है? कनिका ने शौर्य
- 8:41:16से पूछा। हां, अभी-अभी किया है। वह तो
- 8:41:20पिछले कुछ समय से मुझे यह एहसास करा रही
- 8:41:22थी कि वह मुझे पसंद करने लगी है। लेकिन उस
- 8:41:24समय मैंने उसे इग्नोर किया था। अब जब मुझे
- 8:41:27यह पता है कि तुम मेरी जिंदगी का हिस्सा
- 8:41:29[संगीत] नहीं बन सकती तो कम से कम शिप्रा
- 8:41:31तो मेरी जिंदगी में शामिल हो जाए। शौर्य
- 8:41:34ने अपना दुख कनिका को समझाया। अगर ऐसी बात
- 8:41:37है तो अपना फोन मुझे दो। मैं शिप्रा से
- 8:41:40बात करती हूं। कनिका शौर्य के मोबाइल की
- 8:41:42तरफ हाथ बढ़ाते हुए बोली। अब तक शौर्य का
- 8:41:45मोबाइल वाला हाथ नीचे झुक गया था। कनिका
- 8:41:47की बात सुनकर उसने अपना मोबाइल [संगीत]
- 8:41:49उसकी तरफ बढ़ा दिया। कनिका ने शौर्य के
- 8:41:51हाथ से मोबाइल लिया और उसे अपने कान से
- 8:41:54लगाते हुए बोली, शिप्रा क्या यह सचमुच तुम
- 8:41:57[संगीत] ही हो? कनिका तुम? सच में तुम
- 8:42:00दोनों कान्हा फॉरेस्ट में घूमने गए हो।
- 8:42:03मैं तो समझ रही थी कि शौर्य मुझे जानबूझकर
- 8:42:06इंप्रेस करने की कोशिश कर रहा है। फोन पर
- 8:42:08कनिका की आवाज सुनकर शिप्रा बोली। वो पहले
- 8:42:11से ही फोन पर शौर्य और कनिका की बातें सुन
- 8:42:13रही थी। इसलिए शिप्रा ने तुरंत परिस्थिति
- 8:42:15का आकलन कर लिया था। चलो अच्छा है। तुमसे
- 8:42:19बात करने का मौका मिल गया। देखो मैं
- 8:42:21तुम्हें बता दूं कि मैं अब शौर्य से आगे
- 8:42:23बढ़ने का निर्णय कर चुकी हूं। जल्दी ही
- 8:42:26अपनी बात अपनी फैमिली को भी बता दूंगी।
- 8:42:29इसलिए अगर तुम चाहो तो शौर्य के प्रपोजल
- 8:42:32को एक्सेप्ट कर सकती [संगीत] हो। कनिका ने
- 8:42:34एक तरह से शिप्रा को शौर्य के प्रपोजल को
- 8:42:37स्वीकार करने की वजह दे दी। क्या तुम सच
- 8:42:39में चाहती हो कि मैं शौर्य के प्रपोजल को
- 8:42:41स्वीकार कर लूं? शिप्रा ने कनिका से सवाल
- 8:42:44किया। अगर तुम ऐसा करती हो तो मुझे खुशी
- 8:42:47ही होगी। दरअसल मुझे शौर्य के प्रपोजल को
- 8:42:50अस्वीकार करने पर दुख हो रहा था। लेकिन
- 8:42:52अगर तुम उसके प्रपोजल को स्वीकार कर लेती
- 8:42:55हो तो मुझे दिली खुशी होगी। कनिका ने
- 8:42:57शिप्रा से कहा सोच लो कहीं ऐसा ना हो कि
- 8:43:00मैं शौर्य के प्रपोजल को स्वीकार करूं और
- 8:43:03तुम भी शौर्य को पसंद करने लगो। अगर ऐसा
- 8:43:05हुआ तो सच में मुझे बड़ी शर्मिंदगीगी
- 8:43:08होगी। शिप्रा ने कनिका को जवाब दिया। अगर
- 8:43:11मुझे पहले पता होता कि तुम्हारे दिल में
- 8:43:13भी शौर्य बसने लगा है तो मैं तुम्हें भी
- 8:43:15यहां बुला लेती। फिर तो हम साथ में मजे
- 8:43:17करते लेकिन कोई नहीं जल्दी ही ऐसा मौका भी
- 8:43:20मिलेगा जब तुम दोनों साथ में घूम सकोगी।
- 8:43:23कनिका शिप्रा को तसल्ली देते हुए बोली ना
- 8:43:26बाबा ना पहले तुम अपने रिश्ते के लिए
- 8:43:28तैयार हो जाओ फिर मैं देखूंगी कि मुझे
- 8:43:31क्या करना है। अभी फिलहाल के लिए तुम
- 8:43:33शौर्य को समझा देना। अब मैं फोन रख रही
- 8:43:36हूं। इतना कहकर शिप्रा ने फोन रख दिया।
- 8:43:39क्या हुआ? क्या उसने फोन रख दिया? शौर्य
- 8:43:42उदास नजरों से कनिका को देखते [संगीत] हुए
- 8:43:44बोला, "तुम चिंता मत करो। मुझे लगता है कि
- 8:43:47जल्दी ही वह तुम्हारे प्रपोजल को स्वीकार
- 8:43:49कर लेगी।" कनिका शौर्य को हिम्मत देते हुए
- 8:43:52बोली, "चलो, जब तुम कहती हो, तो मैं
- 8:43:54तुम्हारी बात पर विश्वास कर लेता हूं।"
- 8:43:57शौर्य ने बड़ा दिल दिखाते हुए कहा, फिर
- 8:43:59कुछ ध्यान आते ही उसने आगे पूछा, वैसे उधर
- 8:44:02क्या रिजल्ट रहा? क्या प्रतीक ने नंदिनी
- 8:44:05का कंगन ढूंढ लिया? हां, कंगन तो ढूंढा,
- 8:44:08लेकिन वह किसी पल्लवी का था। नंदिनी का
- 8:44:11कंगन तो अभी भी झील की गहराई में ही कहीं
- 8:44:13डूबा हुआ है। कनिका व्यंग भरे स्वर में
- 8:44:15बोली [संगीत] तो क्या प्रतीक ने हार मान
- 8:44:17ली? क्या वह अब नंदिनी का कंगन नहीं ढूंढ
- 8:44:20पाएगा? शौर्य [संगीत] की जिज्ञासा यह
- 8:44:22जानने को बढ़ गई कि प्रतीक कंगन ढूंढ पाया
- 8:44:24या नहीं? तुम भी चलो। क्यों ना तुम भी
- 8:44:27नंदिनी का कंगन ढूंढने का प्रयास करो।
- 8:44:29शौर्य से बातें करती हुई कनिका फिर से झील
- 8:44:32के अंदर बने प्लेटफार्म की तरफ बढ़ी और
- 8:44:34शौर्य भी उसके साथ हो लिया। शौर्य ने देखा
- 8:44:37कि प्रतीक अभी भी नंदिनी [संगीत] के कंगन
- 8:44:39को ढूंढने के प्रयास में जुटा हुआ था।
- 8:44:41प्रतीक का चेहरा लाल हो गया था। अब उसे
- 8:44:44अपने फैसले पर पछतावा होने लगा था। प्रतीक
- 8:44:47को फेल होते देखकर अब कुणाल को भी लगने
- 8:44:49लगा कि कहीं [संगीत] उसने यह चैलेंज लेने
- 8:44:51में जल्दबाजी तो नहीं कर दी। करण ने कुणाल
- 8:44:53के चेहरे पर उभरते असमंजस के भाव को देख
- 8:44:56लिया था। प्रतीक को नाकाम होते देखकर वह
- 8:44:58कुणाल पर तंज कसते हुए बोला। तो अब तुम
- 8:45:01किस बात [संगीत] का इंतजार कर रहे हो
- 8:45:03कनिका? तुम क्यों नहीं अपना कंगन झील में
- 8:45:05डाल रही हो? कुणाल को भी तो मौका दो कि वह
- 8:45:08तुम्हारा कंगन ढूंढे। विराज भी अब कुणाल
- 8:45:10के प्रदर्शन को परखना चाहता था। वह कनिका
- 8:45:13की तरफ देखते हुए बोला, हां भाई, आप सही
- 8:45:16कह रहे हैं। अब कनिका को अपना कंगन झील
- 8:45:18में डाल देना चाहिए। तभी रुद्र सामने आते
- 8:45:21हुए बोला, तो फिर देर किस बात की? रुद्र
- 8:45:24शौर्य के पास पहुंचा और जानबूझकर
- 8:45:27लड़खड़ाते हुए उससे टकरा गया। शौर्य
- 8:45:29प्लेटफार्म के एकदम किनारे खड़ा था। रुद्र
- 8:45:32के टकराते ही उसका संतुलन बिगड़ा और वह
- 8:45:35झील में गिरने लगा। आखिरी पल में उसने
- 8:45:38गिरते-गिरते रुद्र का हाथ पकड़ लिया और
- 8:45:40अगले ही पल हुआ यह कि शौर्य रुद्र के साथ
- 8:45:44झील में जा [संगीत] गिरा। शौर्य और रुद्र
- 8:45:47दोनों के झील में गिरने पर कनिका ने साफ
- 8:45:49महसूस किया कि रुद्र जानबूझकर शौर्य को
- 8:45:52झील में गिराना चाहता था। लेकिन आखिर में
- 8:45:54शौर्य ने फुर्ती दिखाते हुए रुद्र को भी
- 8:45:57अपने साथ झील में खींच लिया था। विराज ने
- 8:45:59मजाकिया लहजे में कहा क्या तुम दोनों को
- 8:46:02भी नंदिनी का कंगन ढूंढने का मन कर रहा है
- 8:46:04जो पानी में कूद गए? शौर्य प्लेटफार्म के
- 8:46:06करीब तैरते हुए बोला ना ना मेरा ऐसा कोई
- 8:46:09इरादा नहीं है। उसके लिए प्रतीक अभी तक
- 8:46:11कोशिश कर ही रहा है। शौर्य [संगीत] को
- 8:46:13वैसे भी पानी में उतरना था। इसलिए उसने
- 8:46:15बाहर निकलने की कोई कोशिश नहीं की। रुद्र
- 8:46:18ने प्रतीक पर तंज कसते हुए कहा। अब रहने
- 8:46:20भी दो प्रतीक और कितनी कोशिश करोगे? यह
- 8:46:23तुम्हारे बस का नहीं है। थक कर प्रतीक भी
- 8:46:25प्लेटफार्म के करीब आ गया। अब उसने एक तरह
- 8:46:28से हार मान ली थी। प्रतीक [संगीत] ने
- 8:46:30कुणाल की तरफ देखते हुए कहा, "मेरी किस्मत
- 8:46:32ने तो मुझे धोखा दे दिया। कुणाल, [संगीत]
- 8:46:34अब तुम भी अपनी किस्मत ट्राई कर लो।"
- 8:46:36"क्या पता शायद तुम्हारी किस्मत तुम्हारा
- 8:46:39साथ दे दे?" प्रतीक की बात सुनकर कुणाल
- 8:46:41[संगीत] ने कनिका की तरफ देखा। उसे अपनी
- 8:46:43तरफ देखते पाकर कनिका ने पूछा, तो क्या
- 8:46:45तुम तैयार हो? कुणाल ने पूरे आत्मविश्वास
- 8:46:48से जवाब दिया। बिल्कुल। कनिका ने भी
- 8:46:51ज्यादा इंतजार नहीं किया और अपना कंगन झील
- 8:46:54में फेंक दिया। [संगीत] कुणाल ने गौर से
- 8:46:56उस जगह को देखा जहां कंगन पानी में गिरा
- 8:46:58था। अगले ही पल उसने प्लेटफार्म [संगीत]
- 8:47:00से झील में छलांग लगा दी। शौर्य
- 8:47:02प्लेटफार्म के किनारे से ही यह सब देख रहा
- 8:47:04था। बाकी सभी का ध्यान भी कुणाल की तरफ
- 8:47:07था। सबकी निगाहें उसी जगह पर जमी हुई थी
- 8:47:10जहां कुणाल ने झील में छलांग लगाई थी।
- 8:47:12शौर्य को अचानक एक शरारत सूझी। इस समय सभी
- 8:47:15का ध्यान कुणाल की तरफ था। इसलिए उसने
- 8:47:18अपनी जगह से ही पानी में डुबकी [संगीत]
- 8:47:19लगाई और पानी के अंदर ही अंदर अंदाजन उस
- 8:47:22तरफ बढ़ गया जहां कनिका ने अपना कंगन
- 8:47:24फेंका था। इधर प्लेटफार्म पर मौजूद सभी
- 8:47:26लोग कुणाल के बाहर आने का इंतजार कर रहे
- 8:47:28थे। लगभग डेढ़ मिनट बाद कुणाल पानी से
- 8:47:31बाहर आया। उसके हाथ में कंगन था। उसने हाथ
- 8:47:34ऊपर करके सबको वो कंगन दिखाया। लेकिन अगले
- 8:47:37ही पल उसे गौर से देखते ही उसके चेहरे के
- 8:47:40भाव बदल गए। यह वो कंगन नहीं था जिसे
- 8:47:43कनिका ने पानी में डाला था। कुणाल ने उस
- 8:47:45कंगन को खुद से दूर फेंका और फिर से पानी
- 8:47:48के अंदर गोता लगा दिया। कनिका यह सब देख
- 8:47:50रही थी। कुणाल के हाथ में कंगन देखकर उसके
- 8:47:53मन में उम्मीद जगी थी कि शायद [संगीत] वह
- 8:47:55उसका कंगन ढूंढने में सफल हो गया है।
- 8:47:57लेकिन कंगन का रंग देखते ही वो समझ गई कि
- 8:47:59यह उसका कंगन नहीं था। जब कुणाल दोबारा
- 8:48:02पानी में गोता लगा चुका था। तब कनिका ने
- 8:48:04अपने चारों तरफ देखा। सभी के चेहरों पर
- 8:48:07निराशा के भाव [संगीत] थे। तभी उसकी नजर
- 8:48:09उस जगह पर गई जहां थोड़ी देर पहले शौर्य
- 8:48:11तैर रहा था। लेकिन अब शौर्य वहां नजर नहीं
- 8:48:14आ रहा था। कनिका ने दोबारा चारों तरफ
- 8:48:17देखा। शौर्य आखिर कहां गायब हो गया था? वो
- 8:48:20अभी दूसरों से इस बारे में पूछने ही वाली
- 8:48:22थी कि तभी उसने देखा रुद्र से थोड़ी दूरी
- 8:48:25पर शौर्य पानी से बाहर आया। उसने अपने
- 8:48:27चेहरे पर हाथ फेर कर पानी साफ किया और फिर
- 8:48:30उस तरफ देखने [संगीत] लगा जिधर कुणाल ने
- 8:48:32गोता लगाया था। अभी भी सभी कुणाल के बाहर
- 8:48:35आने का इंतजार कर रहे थे। शौर्य के चेहरे
- 8:48:37पर एक हल्की सी मुस्कान [संगीत] फैल गई।
- 8:48:39उसने पलट कर कनिका की तरफ देखा तो पाया कि
- 8:48:42कनिका भी उसी की तरफ देख रही थी। कनिका को
- 8:48:44अपनी तरफ देखते पाकर शौर्य के चेहरे का
- 8:48:47रंग बदल गया। उसे लगा कहीं उसकी चोरी
- 8:48:50पकड़ी तो नहीं [संगीत] गई लेकिन उसने अपने
- 8:48:52चेहरे पर कोई भाव नहीं आने दिया। वो तुरंत
- 8:48:54कनिका से नजरें हटाकर फिर उसी तरफ देखने
- 8:48:56लगा जहां कुणाल ने गोता लगाया था। कुछ देर
- 8:49:00बाद कुणाल [संगीत] फिर पानी से बाहर आया।
- 8:49:02लेकिन अब उसके चेहरे पर निराशा साफ नजर आ
- 8:49:04रही थी। करण ने व्यंग भरे स्वर में कहा
- 8:49:07क्या बात है कुणाल? अभी थोड़ी देर पहले तो
- 8:49:10तुम बड़ी-बड़ी बातें कर रहे थे। अब क्या
- 8:49:12हुआ? कहीं कनिका के कंगन को कोई मछली तो
- 8:49:14नहीं निगल गई जो वो तुम्हें मिल ही नहीं
- 8:49:16रहा। करण की बात सुनकर कुणाल खिसियानी
- 8:49:19हंसी-हंसते हुए बोला, हो सकता है तुम्हारी
- 8:49:22बात सच हो। शायद कोई मछली ही कनिका के
- 8:49:24कंगन को निगल गई हो। करण ने कुणाल को उसकी
- 8:49:27हार स्वीकार ना करते देखकर कहा, "मुझे
- 8:49:29तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी कुणाल कि तुम
- 8:49:31[संगीत] अपनी हार भी स्वीकार नहीं कर
- 8:49:33पाओगे।" अगर कुछ और कोशिश करनी है तो तुम
- 8:49:36वो भी कर सकते हो। करण की बात ने कुणाल को
- 8:49:38और गुस्सा दिला दिया। वह इतनी जल्दी हार
- 8:49:41मानना नहीं चाहता था। यहां पानी [संगीत]
- 8:49:43की गहराई भी काफी अधिक थी जिसके कारण उसकी
- 8:49:46सांसे फूल रही थी। लेकिन फिर भी उसने एक
- 8:49:49दो कोशिश और की। नतीजा वही रहा। उसे कनिका
- 8:49:52का कंगन नहीं मिला। जब आखिरकार [संगीत]
- 8:49:55कुणाल ने भी अपनी हार मान ली तो प्रतीक को
- 8:49:57भी इस बात से थोड़ी राहत मिली। कम से कम
- 8:50:00अब वह अकेला नहीं था जो नंदिनी का कंगन
- 8:50:02नहीं ढूंढ पाया था। विराज [संगीत] ने
- 8:50:04माहौल को सामान्य करने की नियत से कहा,
- 8:50:06"मैं तो यही कहूंगा कि आज नंदनी और कनिका
- 8:50:09दोनों का दिन अच्छा नहीं था। इसलिए कुणाल
- 8:50:11और प्रतीक में से कोई भी दोनों में से
- 8:50:13किसी का कंगन नहीं ढूंढ पाया। कनिका ने भी
- 8:50:15अब मान लिया था कि कुणाल उसका कंगन नहीं
- 8:50:17ढूंढ पाएगा। लेकिन [संगीत] इस पूरे
- 8:50:19घटनाक्रम के बीच उसके मन में कहीं ना कहीं
- 8:50:21शौर्य को लेकर एक संदेह जरूर पैदा हो गया
- 8:50:24था। उसने सोचा कहीं शौर्य ने तो कुणाल के
- 8:50:26ढूंढने से पहले ही उसका कंगन नहीं ढूंढ
- 8:50:28लिया। लेकिन अगले ही पल उसके मन [संगीत]
- 8:50:30ने खुद ही इस सवाल का जवाब दे दिया। यह
- 8:50:33भला कैसे संभव था? शौर्य तो उस जगह से
- 8:50:35काफी दूर था जहां [संगीत] उसने अपना कंगन
- 8:50:37फेंका था। जहां शौर्य तैर रहा था, वहां से
- 8:50:40गोता लगाकर उस जगह तक जाने और फिर वापस
- 8:50:43[संगीत] आने में ही ढाई-3 मिनट लग जाते।
- 8:50:45क्या कोई इतना लंबा समय पानी के अंदर रह
- 8:50:47सकता था? नहीं, यह संभव ही नहीं था। यह
- 8:50:50सोचकर [संगीत] उसके मन का संदेह भी दूर हो
- 8:50:52गया। जरूर जब वह शौर्य को देख रही थी, उस
- 8:50:55समय उसने अपनी जगह पर ही तैरने के लिए
- 8:50:57डुबकी लगाई होगी। जिसके कारण वह उसे कुछ
- 8:50:59देर दिखाई नहीं दिया। फिर वह बाहर आया
- 8:51:01होगा [संगीत] और यही देखकर उसे गलतफहमी
- 8:51:03हुई होगी। यह सब सोचकर कनिका के मन का
- 8:51:05संदेह पूरी तरह खत्म हो गया। विराज ने अब
- 8:51:08कंगन ढूंढने की इस होड़ को पीछे छोड़ने के
- 8:51:10इरादे से कहा, कोई बात नहीं कुणाल इस बात
- 8:51:13को दिल पर
- 8:51:13[संगीत]
- 8:51:14लेने की कोई जरूरत नहीं है। कंगन नहीं
- 8:51:16मिला तो क्या हुआ? चलो अब हम सबके बीच
- 8:51:18स्विमिंग की एक रेस ही हो जाए। विराज
- 8:51:21मुद्दा बदलना चाहता था। लेकिन करण ने
- 8:51:23शौर्य की तरफ देखते हुए कहा, "इतनी जल्दी
- 8:51:25भी क्या है विराज भाई? आपको नहीं लगता कि
- 8:51:27एक मौका हमें [संगीत] शौर्य को भी देना
- 8:51:29चाहिए कि क्या वह कनिका का कंगन ढूंढ पाता
- 8:51:31है? दरअसल करण को शौर्य पसंद आने लगा था।
- 8:51:34वो नहीं चाहता था कि कनिका सिर्फ किसी की
- 8:51:36हैसियत देखकर शौर्य को ना पसंद कर दे।
- 8:51:39दूसरी तरफ कुणाल की खुद को सबसे बेहतर
- 8:51:41दिखाने की आदत भी करण को खटक रही थी।
- 8:51:43इसलिए उसने इस मुकाबले [संगीत] में शौर्य
- 8:51:45को भी उतारने का फैसला किया। शौर्य ने
- 8:51:47तुरंत इंकार करते हुए कहा, "अरे नहीं, तुम
- 8:51:50यह कैसी बात कर रहे और शायद यह मेरे बस का
- 8:51:53भी नहीं है।" करण ने उसे समझाते हुए कहा,
- 8:51:56मैं [संगीत] समझता हूं शौर्य लेकिन कोशिश
- 8:51:58करने में क्या जाता है? तुम एक बार कोशिश
- 8:52:00करके तो देखो। भले ही तुम इसमें सफल ना हो
- 8:52:03पाओ। इससे कोई तुम्हें जज नहीं करने वाला।
- 8:52:05कुणाल ने शौर्य का मजाक उड़ाते हुए कहा,
- 8:52:08क्या करण तुम भी यह कैसी बात कर रहे हो?
- 8:52:10जो काम मैं नहीं कर पाया, तुम्हें क्या
- 8:52:12लगता है कि वह शौर्य कर लेगा? यह एक मिनट
- 8:52:15भी पानी [संगीत] के अंदर बिना सांस लिए
- 8:52:16नहीं रह पाएगा। और तुम्हें लगता है कि यह
- 8:52:18इतनी गहराई में गोता लगाकर उस कंगन को भी
- 8:52:21ढूंढ लेगा। विराज भी शौर्य पर हंसते हुए
- 8:52:23बोला, "क्या करण, कहीं तुम यह मजाक तो
- 8:52:26नहीं कर रहे? तुम्हें लगता है कि शौर्य सच
- 8:52:28में यह कर पाएगा?" करण ने कुणाल पर कटाक्ष
- 8:52:31करते हुए कहा, "मैंने सिर्फ कोशिश करने की
- 8:52:33बात की है भाई।" मैंने यह कभी नहीं कहा कि
- 8:52:35शौर्य यह कर ही लेगा। लेकिन एक कोशिश करना
- 8:52:38तो उसका भी बनता है जैसे अभी कुणाल ने
- 8:52:40किया था। वो भी तो बड़ी-बड़ी बातें कर रहा
- 8:52:42था कि वह कितना बड़ा स्विमर है। कनिका ने
- 8:52:45करण को रोकते हुए कहा, "इसे रहने दो करण।
- 8:52:48अब इसकी कोई जरूरत नहीं है। वह नहीं चाहती
- 8:52:50थी कि शौर्य भी इस रेस में हिस्सा ले
- 8:52:52क्योंकि वह पहले ही उसे अपनी पसंद से बाहर
- 8:52:54कर चुकी थी। करण ने कनिका की तरफ देखते
- 8:52:57हुए समझाया, "यह तुम्हारे लिए नहीं है
- 8:52:59कनिका। तुम यह मत सोचो कि अगर शौर्य उस
- 8:53:01कंगन को ढूंढ लेगा, तो तुम पर उसे पसंद
- 8:53:03करने का कोई दबाव होगा। मैं तो बस चाहता
- 8:53:06हूं कि जैसे कुणाल ने उस कंगन को ढूंढने
- 8:53:08की कोशिश की, वैसे ही शौर्य भी एक कोशिश
- 8:53:11जरूर करें। ताकि हम भी देख सकें कि
- 8:53:13[संगीत] शौर्य और कुणाल कहां स्टैंड करते
- 8:53:15हैं। शौर्य को समझ नहीं आ रहा था कि इस
- 8:53:18स्थिति में उसे क्या करना चाहिए। वो इस
- 8:53:20समय कोई हिरइक कारनामा करके कनिका की
- 8:53:23नजरों में नहीं आना चाहता था। कनिका ने एक
- 8:53:26लंबी [संगीत] सांस छोड़ते हुए कहा अगर ऐसी
- 8:53:28बात है तो फिर मुझे कोई ऐतराज नहीं है।
- 8:53:31तुम परख सकते हो कि शौर्य किस काबिल है।
- 8:53:34अब वह भी देखना चाहती थी कि क्या शौर्य
- 8:53:37उसके फेंके हुए कंगन को ढूंढ पाता है या
- 8:53:39नहीं। विराज ने शौर्य का उपहास उड़ाते हुए
- 8:53:42कहा, अब तुम जिसकी इतनी वकालत कर रहे हो
- 8:53:45करण, पहले उससे भी तो पूछ लो [संगीत] कि
- 8:53:47क्या वो यह कोशिश करना चाहता भी है या
- 8:53:49नहीं? करण को विराज का इस तरह शौर्य का
- 8:53:52मजाक उड़ाना अच्छा नहीं लगा। उसने शौर्य
- 8:53:54से कहा शौर्य प्लीज एक बार मेरे लिए तुम
- 8:53:59यह कोशिश जरूर करो। मैं समझता हूं कि यह
- 8:54:02आसान [संगीत] नहीं है। लेकिन दोस्त एक
- 8:54:05कोशिश करना तो बनता है। करण को अपने ऊपर
- 8:54:08इतना विश्वास करते देखकर शौर्य को आश्चर्य
- 8:54:10हुआ। वो महसूस कर रहा था कि करण की पसंद
- 8:54:13उसके लिए बढ़ती जा रही थी। उसे यह अच्छा
- 8:54:15भी [संगीत] लग रहा था। लेकिन वो फिर भी इस
- 8:54:17सब से बचना चाहता था। जब तक यह मामला साफ
- 8:54:20नहीं हो जाता कि कनिका और उसका कोई रिश्ता
- 8:54:22हो सकता है या नहीं। कुणाल ने फिर शौर्य
- 8:54:25का मजाक उड़ाते हुए कहा, "अच्छा, यह बात
- 8:54:28है। तो फिर मैं भी देखना चाहूंगा [संगीत]
- 8:54:30कि शौर्य क्या कर सकता है। अगर वह 1 मिनट
- 8:54:32तक पानी के अंदर समय भी बिता ले, तो मैं
- 8:54:34समझता हूं कि यह भी उसके लिए बड़ी बात
- 8:54:36होगी। और तुम समझते हो कि वो इतनी गहराई
- 8:54:39में जाकर उस कंगन को ढूंढ भी लेगा तो मैं
- 8:54:42सिर्फ तुम्हारी सोच पर हंस सकता हूं और
- 8:54:43कुछ नहीं। प्रतीक भी कुणाल का साथ देते
- 8:54:46हुए बोला, "लता है करण को शौर्य पर कुछ
- 8:54:48ज्यादा ही विश्वास है। कुणाल? तभी वह ऐसी
- 8:54:51बातें कर रहा है। शायद तुम सबको पता नहीं
- 8:54:53है कि कुणाल स्विमिंग का चैंपियन [संगीत]
- 8:54:55है। जब वो उस कंगन को नहीं ढूंढ पाया तो
- 8:54:58फिर शौर्य उसे ढूंढ लेगा। यह सिर्फ शौर्य
- 8:55:00का ख्वाब ही हो सकता है। रुद्र जो शौर्य
- 8:55:03के पास ही पानी में तैर रहा था, उसकी तरफ
- 8:55:06देखते हुए बोला, शौर्य, लगता है तुमने करण
- 8:55:09को कुछ ज्यादा ही इंप्रेस कर दिया है जो
- 8:55:11वो तुम पर इतना विश्वास कर रहा है। उसे
- 8:55:13बता दो यार यह तुम्हारे बस का नहीं है।
- 8:55:16पता नहीं वो तुम्हें क्या समझ रहा है।
- 8:55:19शौर्य ने एक साथ सब कुछ चुप कराने के
- 8:55:21इरादे से कहा। तुम सब फालतू में इस बहस
- 8:55:23में पड़े हुए हो। मुझे किसी के सामने कुछ
- 8:55:25भी साबित करने की जरूरत नहीं है। जिसको
- 8:55:28मेरे बारे में जो सोचना है वह सोचता रहे
- 8:55:30और करण तुम्हें भी यह जिद छोड़ देनी
- 8:55:33चाहिए। इसके बाद वो प्लेटफार्म के करीब
- 8:55:35गया और एक छलांग लगाकर प्लेटफार्म के ऊपर
- 8:55:38चढ़ गया। धीरे-धीरे रुद्र और कुणाल भी
- 8:55:40प्लेटफार्म पर आ गए। कुणाल ने शौर्य का
- 8:55:43उपहास उड़ाते हुए कहा, "देख देख लिया करण,
- 8:55:46तुम इसी शौर्य पर इतना विश्वास कर रहे थे।
- 8:55:48इसमें तो इतनी भी हिम्मत नहीं थी कि
- 8:55:50दिखावे के [संगीत] लिए एक कोशिश भी कर
- 8:55:52सके। तुमने इससे कुछ ज्यादा ही बड़ी
- 8:55:54उम्मीद पाल ली थी कि यह झील में गोता
- 8:55:56लगाकर कनिका का कंगन ढूंढ पाएगा। क्या
- 8:55:59मजाक था? करण उसकी बात से चिढ़कर बोला,
- 8:56:02"तुम तो शौर्य का उपहास ऐसे उड़ा रहे हो
- 8:56:04कुणाल जैसे तुमने तो यह कारनामा कर लिया
- 8:56:06हो। खुद को तो देखो। इतने [संगीत]
- 8:56:08बड़े-बड़े बोल बोलने के बाद भी तुम कनिका
- 8:56:11का कंगन ढूंढने में असफल रहे। और अब शौर्य
- 8:56:13पर सवाल उठा रहे हो। करण की बात से कुणाल
- 8:56:16की हंसी पर ब्रेक लग गया। अपनी खीज मिटाने
- 8:56:18के लिए वह बोला। मैं मानता हूं कि मैं
- 8:56:21[संगीत] इसमें सफल नहीं रहा। लेकिन यहां
- 8:56:23सब ने देखा कि मैंने कितनी बेहतरीन कोशिश
- 8:56:25की थी। पर शौर्य तो वह कोशिश भी नहीं कर
- 8:56:28पाया। फिर भी तुम्हें इस पर इतना भरोसा
- 8:56:30है। क्या यह इतना आसान है? अभी तो इसको
- 8:56:34ढंग से तैरना भी नहीं आता होगा। और तुम
- 8:56:36इससे झील की गहराई से कंगन ढूंढने की
- 8:56:38उम्मीद लगाए बैठे थे। यह मजाक ही तो है।
- 8:56:41अब शौर्य से कुणाल का इस तरह सबके सामने
- 8:56:43उसका मजाक बनाना बर्दाश्त नहीं हो रहा था।
- 8:56:46उसने अपनी जेब में हाथ डाला और एक कंगन
- 8:56:48निकालकर कुणाल की तरफ बढ़ाते हुए कहा,
- 8:56:51कहीं यह वही कंगन तो नहीं जिसे तुम झील
- 8:56:53में ढूंढ नहीं पाए थे। इसे ढूंढना इतना भी
- 8:56:56मुश्किल नहीं था। [संगीत]
- 8:56:57कुणाल के सामने वो कंगन देखते ही सबकी
- 8:57:00आंखें फैल गई। कनिका भी बड़ी-बड़ी आंखों
- 8:57:02से कभी अपने कंगन की तरफ तो कभी शौर्य की
- 8:57:05तरफ देख रही थी। करण जल्दी से कुणाल के
- 8:57:07पास गया। [संगीत] उसने उसके हाथ से कंगन
- 8:57:10लिया और उसे गौर से देखते ही उसकी आंखों
- 8:57:13में हैरानी छा गई। करण ने जोर से कहा,
- 8:57:16हां, यह वही कंगन है जिसे कनिका ने झील
- 8:57:20में फेंका था। लेकिन तुमने इसे कब और कैसे
- 8:57:23ढूंढ लिया? कुणाल ने सपने में भी नहीं
- 8:57:26सोचा था कि शौर्य यूं एक पल में बाजी पलट
- 8:57:29देगा। वो अभी यह समझने की कोशिश [संगीत]
- 8:57:31ही कर रहा था कि आखिर यह कब हुआ। तभी
- 8:57:34अचानक एक तरफ से शोर की आवाज गूंजी। सभी
- 8:57:37का ध्यान [संगीत] उसी तरफ चला गया। विराज
- 8:57:39ने हैरानी से पूछा। यह शोर क्यों हो रहा
- 8:57:42है? सभी की निगाहें [संगीत] शोर वाली दिशा
- 8:57:44में उठ गई। अगले ही पल जो दृश्य सामने था
- 8:57:47उसे देखकर सभी का कलेजा हिल गया। [संगीत]
- 8:57:50प्लेटफार्म पर मौजूद सभी लोग अभी इस एहसास
- 8:57:54से उभर भी नहीं पाए थे कि शौर्य ने वो
- 8:57:57कंगन कब ढूंढ निकाला था कि तभी अचानक वहां
- 8:58:01उठे शोर ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
- 8:58:04जब उन्हें समझ आया कि शोर किस बात का है
- 8:58:07तो सभी की आंखें हैरानी से फैल गई।
- 8:58:11उन्होंने देखा कि एक नाव जिसमें कुछ
- 8:58:13टूरिस्ट सवार थे अचानक डूबने लगी थी।
- 8:58:17उसमें एक पूरी फैमिली सवार थी जिसमें दो
- 8:58:19छोटे बच्चे भी थे। नाव किनारे से लगभग 100
- 8:58:23मीटर की दूरी पर थी और वहां मौजूद लोग दूर
- 8:58:26से बस तमाशबीन बने हुए थे। किसी में भी
- 8:58:29उन्हें बचाने के लिए झील में उतरने की
- 8:58:31हिम्मत नहीं हो रही थी। नाव में मौजूद
- 8:58:34बड़े लोग तो किसी तरह हाथ पैर मारकर खुद
- 8:58:36को बचाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन दोनों
- 8:58:38बच्चे पानी में ऊपर नीचे हो रहे थे।
- 8:58:41बच्चों की मां ने जब उन्हें बचाने की
- 8:58:42कोशिश की तो एक [संगीत] बच्चे ने घबराहट
- 8:58:45में उसे बेतरतीब ढंग से कसकर पकड़ लिया।
- 8:58:47इसके कारण वो ठीक से तैर नहीं पा रही थी
- 8:58:50और खुद भी बच्चे के साथ डूबने लगी। शौर्य
- 8:58:53ने जैसे ही यह देखा उसने बिना एक पल गवाए
- 8:58:56झील में छलांग लगा दी। वो सीधे डूबते हुए
- 8:58:59लोगों की तरफ नहीं गया बल्कि उसने पास ही
- 8:59:02एक आदमी को ट्यूब के सहारे तैरते देखा।
- 8:59:04शौर्य ने उससे वह ट्यूब लिया और उसे अपने
- 8:59:07साथ रखते हुए तेजी से उस [संगीत] दिशा में
- 8:59:09तैरने लगा जहां लोग डूब रहे थे। शौर्य की
- 8:59:12फुर्ती आश्चर्यजनक रूप से तेज थी। किनारे
- 8:59:15पर मौजूद बाकी लोगों को जब तक यह होश आया
- 8:59:18कि उन्हें भी कुछ करना चाहिए तब तक शौर्य
- 8:59:21लगभग आधी दूरी तय कर चुका था। कुछ ही देर
- 8:59:24में वह उस जगह पहुंच गया जहां लोग डूबने
- 8:59:26के लिए संघर्ष कर रहे थे। शौर्य ने सबसे
- 8:59:29पहले उस औरत को पकड़ा जो अपने बच्चे के
- 8:59:32साथ पानी [संगीत] में ऊपर नीचे हो रही थी।
- 8:59:34उसने बच्चे को उसकी मां से अलग किया औरत
- 8:59:37को ट्यूब का सहारा दे दिया। फिर उसने
- 8:59:39बच्चे को भी [संगीत] ट्यूब में लगे एक हुक
- 8:59:41को पकड़ने के लिए कहा। बच्चे की मां ने
- 8:59:44उसे संभाल लिया। तभी उस औरत को एहसास हुआ
- 8:59:47कि उसकी [संगीत] बेटी कहीं नजर नहीं आ रही
- 8:59:49थी। वो घबराकर शौर्य से बोली, "प्लीज मेरी
- 8:59:53बेटी को बचा लीजिए। वो भी यहीं पर थी।"
- 8:59:56[संगीत]
- 8:59:56जल्द ही शौर्य को वो छोटी लड़की भी बदहवास
- 8:59:59हालत में नजर आ गई। उसने तुरंत गोता लगाया
- 9:00:02और लड़की को लेकर पानी से बाहर आ गया।
- 9:00:05ज्यादा पानी पी लेने के कारण बच्ची बेहोश
- 9:00:08हो चुकी थी। इसी दौरान शौर्य का ध्यान एक
- 9:00:11युवक पर गया जो पानी में लगातार हाथ पैर
- 9:00:14मार रहा था। वो युवक बदहवास होकर बस खुद
- 9:00:17को बचाने की कोशिश कर रहा था। उसे देखकर
- 9:00:20ही लग रहा था कि वह ठीक से [संगीत] तैरना
- 9:00:22नहीं जानता था। शायद इसी वजह से जिंदगी
- 9:00:26बचाने की जद्दोजहद में [संगीत] वो बेतरतीब
- 9:00:28ढंग से हाथ पैर चला रहा था। शौर्य ने पहले
- 9:00:31बच्चों को सहारा देते हुए ट्यूब के ऊपर
- 9:00:34रखा और फिर उस युवक की [संगीत] तरफ बढ़
- 9:00:36गया। उसने दूर से ही उसकी ओर हाथ बढ़ाते
- 9:00:39हुए कहा, "आप ज्यादा तेज हाथ [संगीत] पैर
- 9:00:42मत चलाइए। बस अपने शरीर को थोड़ा ढीला
- 9:00:44छोड़ दीजिए और आराम से एक हाथ से मेरा
- 9:00:47कंधा थाम लीजिए। इसी समय शौर्य [संगीत] ने
- 9:00:50देखा कि एक बोट उनके पास आ गई थी। उसमें
- 9:00:53मौजूद लोगों ने सहारा देकर पहले उस औरत और
- 9:00:56उसके बच्चों को बोट के ऊपर खींच लिया और
- 9:00:59उसके बाद उस युवक [संगीत] को भी बोट में
- 9:01:01चढ़ा लिया। यह वहां का बचाव दल था जो पता
- 9:01:04नहीं अब तक कहां था लेकिन फिर भी देखा जाए
- 9:01:06तो उन्होंने [संगीत] ज्यादा देर नहीं की
- 9:01:08थी। शौर्य भी छलांग लगाकर बोट के ऊपर आ
- 9:01:11गया। उसने सबसे पहले उस बच्ची को देखा जो
- 9:01:14अभी भी बेहोश थी। बचाव दल के लोगों ने भी
- 9:01:17तुरंत अपना काम शुरू कर दिया। उन्होंने
- 9:01:20बच्ची को उल्टा लिटाकर उसकी पीठ पर दबाव
- 9:01:22डालना शुरू किया जिससे उसके मुंह से पानी
- 9:01:25निकलने लगा। कुछ ही पलों में बच्ची को होश
- 9:01:28आ गया। बच्ची को होश में देखकर उसकी मां
- 9:01:30ने राहत की सांस ली। वो शौर्य की ओर मुड़ी
- 9:01:33और आभार से भरे स्वर में बोली, "आपका
- 9:01:36बहुत-बहुत धन्यवाद। आपने सही समय पर हमें
- 9:01:39डूबने से बचा लिया। आप तो आज मेरे लिए
- 9:01:42भगवान बनकर प्रकट हुए हैं। मैं चाहकर भी
- 9:01:45आपका यह एहसान कभी नहीं उतार पाऊंगी। वो
- 9:01:48युवक जो [संगीत] शायद उस बच्चे का पिता
- 9:01:50था। शौर्य का हाथ पकड़ कर भावुक स्वर में
- 9:01:53बोला। आपने आज हम पर बहुत बड़ा एहसान किया
- 9:01:56है। हम जिंदगी भर आपके आभारी रहेंगे।
- 9:02:00शौर्य संकोच भरे स्वर में बोला अरे आप ऐसा
- 9:02:03कहकर मुझे शर्मिंदा कर रहे हैं। यह तो
- 9:02:06मेरा फर्ज था। इसी समय शौर्य ने देखा कि
- 9:02:09प्रतीक, कुणाल, [संगीत] रुद्र और करण भी
- 9:02:11तैरते हुए उनके पास आ गए थे। जब तक वे
- 9:02:14यहां पहुंचे बचाव दल के लोग सभी को बोट के
- 9:02:18ऊपर खींच चुके थे। शौर्य ने अपने साथियों
- 9:02:21को तैरते हुए देखा तो वह उस युवक से बोला
- 9:02:24[संगीत]
- 9:02:24अब आप सुरक्षित हैं। आप बोट से किनारे तक
- 9:02:27जाइए। मैं अपने साथियों के साथ तैर कर
- 9:02:30किनारे तक आता हूं। इतना कहकर शौर्य ने
- 9:02:33बोट से फिर झील में छलांग लगा दी और करण
- 9:02:36के पास पहुंचते हुए बोला [संगीत] यहां सब
- 9:02:38ठीक है अब वापस चलते हैं। करण भी शौर्य के
- 9:02:42साथ वापस लौटने के लिए मुड़ गया। उसके मन
- 9:02:44में शौर्य को लेकर जो सोच बनी थी उस पर
- 9:02:47उसे गर्व महसूस हो रहा था। अब उसे शौर्य
- 9:02:50और भी अच्छा लगने लगा था। कनिका, विराज,
- 9:02:53दिव्या, नंदिनी और किरण प्लेटफार्म से
- 9:02:56[संगीत] ही सब कुछ देख रहे थे। अभी जो कुछ
- 9:02:58हुआ था उससे सभी हैरान थे। किसी ने भी
- 9:03:02शौर्य से इस तरह के एक्शन की उम्मीद नहीं
- 9:03:04की थी। बीच झील में बिना किसी सपोर्ट के
- 9:03:08किसी को बचाने के लिए जाना बेहद खतरनाक हो
- 9:03:10सकता था। क्योंकि डूबता हुआ व्यक्ति अच्छे
- 9:03:13तैराग के लिए भी खतरा बन सकता है। घबराया
- 9:03:16हुआ व्यक्ति बिना सोचे समझे अपने बचाने
- 9:03:18वाले को ही कसकर पकड़ लेता है। जिससे
- 9:03:21बचाने वाले को [संगीत] तैरने में मुश्किल
- 9:03:22होती है और कई बार किसी की जान बचाने की
- 9:03:25कोशिश में वो खुद भी डूबने लगता है। लेकिन
- 9:03:28शौर्य ने जिस तरह बिना सोचे समझे उन डूबते
- 9:03:31[संगीत] लोगों को बचाने के लिए झील में
- 9:03:33छलांग लगा दी थी और उसी मुश्किल वक्त में
- 9:03:36समझदारी दिखाते हुए एक ट्यूब को अपने साथ
- 9:03:38ले लिया था। वह मुश्किल परिस्थितियों में
- 9:03:41सही फैसला लेने की उसकी क्षमता का भी
- 9:03:43परिचय था। कनिका को याद आया कि थोड़ी देर
- 9:03:46पहले [संगीत] उसने शौर्य को गायब पाया था
- 9:03:48और वह किसी से उसके बारे में पूछने ही
- 9:03:50वाली थी कि तभी शौर्य पानी से बाहर आ गया
- 9:03:53था। तो क्या शौर्य ने उसी समय उसका फेंका
- 9:03:56हुआ कंगन ढूंढ निकाला था। उसे यह भी याद
- 9:04:00आया कि जब उस [संगीत] समय शौर्य से उसकी
- 9:04:02नजर मिली थी तो उसके चेहरे पर ऐसा भाव आया
- 9:04:05था जैसे उसकी [संगीत] कोई चोरी पकड़ी गई
- 9:04:07हो। कनिका इन्हीं ख्यालों में गुम थी कि
- 9:04:10तभी शौर्य, करण, रुद्र, प्रतीक और कुणाल
- 9:04:13भी वापस आ गए। विराज ने शौर्य से अपनी
- 9:04:16नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, तुम्हें यूं
- 9:04:19बिना सोचे समझे किसी को बचाने के लिए नहीं
- 9:04:21कूदना चाहिए था शौर्य। यह तुम्हारे लिए भी
- 9:04:24खतरनाक हो सकता था। कुणाल ने शौर्य पर तंज
- 9:04:27कसते हुए कहा, "आप कैसी बात कर रहे हैं
- 9:04:30विराज भाई? इसे तो दूसरों की नजर में हीरो
- 9:04:32बनना था। इसे दिखाना था ना कि इसे दूसरों
- 9:04:35की कितनी परवाह है। शौर्य ने शांत रहते
- 9:04:38हुए फीकी मुस्कान के साथ कहा, "अगर आपका
- 9:04:41कोई अपना ऐसी स्थिति में फंसा होता, तो
- 9:04:43क्या तब भी आप लोग ऐसी ही बात करते? खैर,
- 9:04:46आप ऐसा कर सकते हैं। लेकिन मैं ऐसा नहीं
- 9:04:49कर सकता। इसलिए [संगीत] उस समय जो भी मुझे
- 9:04:52उचित लगा मैंने वही कदम उठाया और मेरे
- 9:04:55किसी एक्शन की जिम्मेदारी आप पर थोड़ी ही
- 9:04:57पड़ती है। इसलिए आपको मेरी चिंता [संगीत]
- 9:04:59करने की कोई जरूरत नहीं है। विराज की सोच
- 9:05:02पर शौर्य को हैरानी हुई। यह बात अलग थी कि
- 9:05:06उन्होंने डूबते लोगों को बचाने के लिए कोई
- 9:05:08एक्शन नहीं लिया। लेकिन अगर किसी ने
- 9:05:10उन्हें बचाने की कोशिश की तो क्या उसे यह
- 9:05:12कहना सही था कि उसे ऐसा नहीं करना चाहिए
- 9:05:15था। प्रतीक ने भी शौर्य का उपहास उड़ाते
- 9:05:18हुए कहा। सीधा कहो ना कि तुम्हें कनिका को
- 9:05:21यह दिखाना था कि तुम कितने बहादुर हो।
- 9:05:24इसलिए तुम डूबते लोगों को बचाने के लिए
- 9:05:26कूद पड़े। लेकिन ऐसी दिखावटी हरकतों से
- 9:05:29लड़कियां नहीं पड़ती। शौर्य ने प्रतीक की
- 9:05:32बात पर [संगीत] तंज कसते हुए कहा, "अगर
- 9:05:34तुम्हें लगता है कि यह सब मैंने कनिका की
- 9:05:37नजर में हीरो बनने के लिए किया था, तो फिर
- 9:05:39यही काम तुम उसकी नजर में हीरो बनने के
- 9:05:41लिए कर लेते और उसकी निगाह में हीरो
- 9:05:43[संगीत] बन जाते।" कहां से ऐसी बेसिर पैर
- 9:05:46की बातें सोच लेते हो? कनिका ने प्रतीक को
- 9:05:49झिड़कते हुए कहा, "तुम सब यह फालतू की बहस
- 9:05:51क्यों करने लगे हो?" क्या प्रतीक, तुम्हें
- 9:05:54यह नहीं दिखा कि अगर सही समय पर शौर्य
- 9:05:56वहां नहीं पहुंचता, तो उन बच्चों के साथ
- 9:05:58कुछ भी हो सकता था। जब तक तुम लोग कोई
- 9:06:01फैसला भी नहीं ले पाए थे कि क्या करना
- 9:06:04चाहिए उतने समय में शौर्य ने तो लगभग आधी
- 9:06:07दूरी भी तय कर ली थी। तुम्हें समझना चाहिए
- 9:06:10कि किसी को बचाने के लिए शुरुआती समय ही
- 9:06:12सबसे खास होता है। [संगीत] अगर तुम सब
- 9:06:15उसकी तारीफ नहीं कर सकते तो कम से कम उसके
- 9:06:17किए गए काम की आलोचना तो मत करो। कनिका की
- 9:06:20बात सुनकर [संगीत] प्रतीक की बोलती बंद हो
- 9:06:22गई। लेकिन शौर्य इस बात से परेशान हो गया
- 9:06:25था। वो नहीं चाहता था कि कनिका की नजर में
- 9:06:28उसकी कोई हीरो वाली इमेज बने। कम से कम तब
- 9:06:32तक तो वह ऐसा नहीं चाहता था जब तक कि
- 9:06:35कनिका का रिश्ता कुणाल के साथ फाइनल नहीं
- 9:06:38हो जाता। शौर्य इस बात का शुक्र मना रहा
- 9:06:42था कि उन डूबते लोगों को बचाने के चक्कर
- 9:06:44में झील से कंगन निकालने वाली उसकी बात
- 9:06:47पीछे रह गई थी। कुणाल और प्रतीक भी अब उस
- 9:06:50बारे में बात नहीं करना चाहते थे। क्योंकि
- 9:06:53कुणाल जिस तरह अपने बारे में गप्पे हाक
- 9:06:55रहा था और शौर्य को चुनौती दे रहा था।
- 9:06:58लेकिन शौर्य ने जिस तरह उसके हाथों में
- 9:07:00कंगन थमा दिया था उस बात ने कुणाल की सारी
- 9:07:03हवा निकाल दी थी। अच्छा हुआ कि उसी समय
- 9:07:06शोर सुनकर शौर्य ने झील में छलांग लगा दी
- 9:07:09थी और कुणाल को इस सवाल का जवाब देने से
- 9:07:11बचने का मौका मिल गया था कि आखिर शौर्य ने
- 9:07:14यह काम कैसे कर लिया था। विराज ने विषय
- 9:07:17बदलते हुए कहा, चलो, ठीक है। अब छोड़ो इन
- 9:07:21बातों को और यह बताओ कि आगे का क्या प्लान
- 9:07:23है। विराज को शौर्य की यूं तारीफ होना
- 9:07:26पसंद नहीं आ रहा था। अब तो सभी के
- 9:07:28स्विमिंग रेस करने का विचार भी पीछे रह
- 9:07:30गया था। प्रतीक और कुणाल तो अब जल्दी से
- 9:07:33जल्दी यहां से जाना चाहते थे। नहीं तो
- 9:07:36उन्हें लग रहा था कि शौर्य के उन डूबते
- 9:07:38लोगों को बचाने वाली बात उनका पीछा करती
- 9:07:40रहेगी। कुणाल ने अपना विचार रखते हुए कहा,
- 9:07:44अब हमें लगता है कि हमें यहां से निकलना
- 9:07:46चाहिए। अभी तक हमें शेर के दर्शन तो हुए
- 9:07:48नहीं। जंगल सफारी में आने के बाद अगर शेर
- 9:07:51नहीं दिखा, तो फिर जंगल सफारी का मजा
- 9:07:54अधूरा ही रह जाएगा। विराज ने भी कुणाल की
- 9:07:57बात का समर्थन करते हुए कहा, "तुम सही कह
- 9:07:59रहे हो।" हमें अब यहां से निकलना चाहिए।
- 9:08:02शौर्य ने भी मन ही मन तय कर लिया था कि अब
- 9:08:05उसे यहां से निकल जाना चाहिए। वह बोला,
- 9:08:08"मुझे लगता है कि मुझे अब वापस जाना
- 9:08:10चाहिए। मुझे कुछ काम भी है। शायद अभी
- 9:08:13निकलूूंगा [संगीत] तो समय पर विशालगढ़
- 9:08:15पहुंच जाऊंगा। शौर्य का मन अब यहां से
- 9:08:18खिन्न हो गया था। वो समझ रहा था [संगीत]
- 9:08:21कि जितनी जल्दी वो यहां से चला जाएगा यह
- 9:08:23कुणाल और कनिका दोनों के लिए अच्छा रहेगा।
- 9:08:26तब शायद दोनों खुलकर आपस में अपनी बातें
- 9:08:28शेयर कर पाएंगे और उनकी केमिस्ट्री भी
- 9:08:31बनने लगेगी। उसके यहां होने से कुछ ना कुछ
- 9:08:34ऐसी बातें होती रहेंगी जिनके कारण कनिका
- 9:08:36अनजाने में उन दोनों के बीच तुलना करने
- 9:08:39लगेगी। करण नहीं चाहता था कि शौर्य बीच
- 9:08:42सफारी से वापस जाए। उसने [संगीत] उसे
- 9:08:44रोकते हुए कहा, "यह तुम कैसी बात कर रहे
- 9:08:47हो शौर्य? तुम भला यहां से वापस कैसे
- 9:08:49जाओगे?" काम तो होता ही रहता है। जब यहां
- 9:08:53आए हो, तो इस जगह का भरपूर आनंद लो। करण
- 9:08:57को लग रहा था कि अगर शौर्य ज्यादा समय
- 9:08:59कनिका के साथ बिताएगा तो हो सकता है कि
- 9:09:01कहीं कनिका का विचार शौर्य के लिए बदलने
- 9:09:04लगे। लेकिन शौर्य मन बना चुका था। इसलिए
- 9:09:08वह अब करण की बात में आकर यहां रुकने वाला
- 9:09:10नहीं था। वो गौर कर चुका था कि करण का
- 9:09:13विचार भी उसके लिए बदल गया था। वो नहीं
- 9:09:15चाहता था कि कनिका की सोच भी उसके लिए बदल
- 9:09:18जाए। अब बस उसे यह चिंता थी कि वह यहां से
- 9:09:21जंगल के बाहर कैसे जाएगा। शौर्य इन्हीं
- 9:09:24विचारों में खोया हुआ था कि तभी उसने एक
- 9:09:26जोड़े को अपनी तरफ आते देखा। उसने गौर से
- 9:09:30देखा [संगीत] तो यह वही जोड़ा था जिसे
- 9:09:32उसने अभी डूबने से बचाया था। उनके चेहरों
- 9:09:35को देखकर शौर्य समझ [संगीत] सकता था कि वे
- 9:09:37अब पूरी तरह ठीक थे। उनके बच्चे भी उनके
- 9:09:40साथ थे और जो छोटी बच्ची उस समय बेहोश हो
- 9:09:43गई थी वो अब काफी बेहतर नजर आ रही थी। वो
- 9:09:46जोड़ा शौर्य के पास आया और फिर [संगीत] से
- 9:09:48उसका अभिवादन करते हुए युवक ने कहा आपको
- 9:09:51यहां देखा तो फिर से आपका धन्यवाद करने आ
- 9:09:53गया। आज आपने हम पर जो एहसान किया है उसे
- 9:09:56[संगीत] चाहकर भी मैं नहीं उतार पाऊंगा।
- 9:09:59यह रहा मेरा कार्ड। अगर कभी भी आपको हमारी
- 9:10:02कोई जरूरत महसूस हो तो बेहिचक हमें याद
- 9:10:04कीजिएगा। हमें आपके लिए कुछ करके खुशी
- 9:10:07होगी। शौर्य ने कार्ड पर नजर डाली तो उसने
- 9:10:10देखा कि उस युवक का नाम शेखर श्रीवास्तव
- 9:10:13था और वह विशालगढ़ नॉर्थ में एसपी [संगीत]
- 9:10:15के पद पर कार्यरत था। शौर्य ने कार्ड अपनी
- 9:10:18जेब में रख लिया और उनका अभिवादन करते हुए
- 9:10:21कहा, जरूर। अगर कभी जरूरत पड़ी [संगीत] तो
- 9:10:25जरूर आपको याद करूंगा। शौर्य उनसे बात
- 9:10:28करने के लिए थोड़ा अलग हो गया था। कनिका
- 9:10:31दूर से [संगीत] ही शौर्य को उस युवक से
- 9:10:33बात करते देख रही थी। शेखर की पत्नी ने
- 9:10:36हल्की मुस्कान [संगीत] के साथ कहा, जरूरी
- 9:10:38नहीं कि कोई काम हो तभी आप हमें याद
- 9:10:41कीजिएगा भैया। आप वैसे भी कभी हमारे घर आ
- 9:10:44सकते हैं। हमें बहुत अच्छा लगेगा। बच्चे
- 9:10:47भी आपको देखकर बहुत खुश होंगे। शौर्य ने
- 9:10:50मुस्कुराते हुए कहा, "मुझे तो यह देखकर
- 9:10:52[संगीत] खुशी है कि आप लोग एकदम सही सलामत
- 9:10:55हैं।" जरूर अगर समय मिला तो मैं इन बच्चों
- 9:10:59से मिलने जरूर आऊंगा। वो महिला कुछ झिझकते
- 9:11:02हुए बोली, "अगर अगर आप बुरा ना माने तो एक
- 9:11:06बात कहूं भैया।" शौर्य मुस्कुराते हुए
- 9:11:09बोला, कमाल [संगीत] है। मुझे भैया भी कह
- 9:11:12रही हैं और बात कहने की इजाजत भी मांग रही
- 9:11:15हैं। आप निश्चिंत होकर अपनी बात कह सकती
- 9:11:18हैं। वो महिला भावुक होकर बोली मेरा कोई
- 9:11:22भाई नहीं है। अगले सप्ताह राखी है। अगर आप
- 9:11:26उस दिन मेरे घर आएंगे तो मुझे बहुत खुशी
- 9:11:28होगी। शेखर थोड़ा हिचकिचाते हुए बोला क्या
- 9:11:33सुमन तुम कुछ ज्यादा ही डिमांडिंग नहीं हो
- 9:11:36गई हो। शौर्य ने तुरंत सहमति जताते हुए
- 9:11:39कहा इसमें डिमांडिंग की क्या बात है? अब
- 9:11:42तो मैं अपनी बहन से राखी बंधवाने जरूर
- 9:11:44आऊंगा। फिर अपनी बात आगे बढ़ाते हुए उसने
- 9:11:47पूछा, वैसे अब आप लोगों का क्या प्लान है?
- 9:11:51शेखर ने जवाब दिया, अब तो हम वापस शहर जा
- 9:11:55रहे हैं। अब और यहां रुकने का कोई इरादा
- 9:11:57नहीं है। अचानक शौर्य को लगा कि वो इनके
- 9:12:00साथ जंगल से बाहर जा सकता है। उसने पूछा,
- 9:12:04क्या आपकी गाड़ी में एक एक्स्ट्रा आदमी के
- 9:12:06बैठने के लिए स्पेस होगा? दरअसल, मैं भी
- 9:12:09अब वापस जाने की सोच रहा हूं। लेकिन इस
- 9:12:12समय जंगल [संगीत] से बाहर जाने का कोई
- 9:12:14साधन नहीं है। शेखर मुस्कुराते हुए बोला,
- 9:12:17"यह भी कोई पूछने की बात है। हमारी जीप
- 9:12:20में हम चार लोग ही तो हैं। उसमें बहुत
- 9:12:23स्पेस है। हमें खुशी होगी आपको लिफ्ट
- 9:12:26देकर।" शौर्य ने कहा, एक मिनट। मैं अपने
- 9:12:29साथ के लोगों को बोल कर आता हूं। इतना
- 9:12:32कहकर शौर्य कनिका के पास वापस आया और उससे
- 9:12:35बोला, "अब आप सब आराम से जंगल सफारी का
- 9:12:38मजा लीजिए।"
- 9:12:39मैं इस फैमिली के साथ जंगल से बाहर चला
- 9:12:42जाऊंगा। विराज ने व्यंग भरे स्वर में कहा,
- 9:12:46"चलो, बढ़िया है कि तुम समझ गए हो कि
- 9:12:48कनिका की पसंद क्या है। मुझे लग रहा था कि
- 9:12:50तुम कहीं अभी भी यह उम्मीद ना पाले हुए हो
- 9:12:53कि कनिका तुमको पसंद कर सकती है। विराज की
- 9:12:56बात सुनकर कुणाल भी खुश हो गया। वो यह
- 9:12:59सोचकर भी खुश था कि अब उसके पास कनिका के
- 9:13:02साथ समय बिताने का पूरा मौका होगा। शौर्य
- 9:13:05वापस जाने से पहले कनिका के पास गया और
- 9:13:07गंभीर स्वर में बोला आदमी बहुत कुछ चाहता
- 9:13:11है पर जरूरी नहीं कि उसकी चाहत पूरी हो
- 9:13:13जाए। अगर मेरी चाहत पूरी हो भी जाती तो यह
- 9:13:17तुम्हारे साथ अन्याय होता। शायद ऊपर वाले
- 9:13:20को तुम पर रहम आ गया और उसने तुम्हारी सुन
- 9:13:22ली। उसने तुम्हें यह मौका दे दिया कि तुम
- 9:13:25अपनी पसंद के आदमी को चुन सको। अब मैं भी
- 9:13:28कोशिश करूंगा कि शिप्रा के साथ अपनी बात
- 9:13:31आगे बढ़ा सकूं। अगर हो सके तो उसके पास
- 9:13:35मेरी थोड़ी सिफारिश कर देना। शायद
- 9:13:37तुम्हारे कहने से बात बन जाए। शौर्य ने
- 9:13:40अपनी बात इस तरह कही थी कि उसने कनिका को
- 9:13:43यह भी जता दिया कि अब वह उसके बारे में
- 9:13:45नहीं सोच रहा है और शिप्रा के साथ गंभीरता
- 9:13:48से आगे बढ़ने का मन बना चुका है। शिप्रा
- 9:13:51के मन में शौर्य को लेकर जो थोड़ा बहुत
- 9:13:53संदेह [संगीत] बाकी था, शौर्य की इस बात
- 9:13:55से वह भी खत्म हो गया। शौर्य शेखर के पास
- 9:13:58वापस गया और उसके साथ जंगल से बाहर निकल
- 9:14:01गया। शौर्य का प्लान था कि अगर वह समय से
- 9:14:04विशाल घर पहुंच जाता है तो सबसे पहले
- 9:14:06जहांगीर खान से मिलने जाएगा। अगर आज उसे
- 9:14:10यहां नहीं आना होता तो अब तक वह जहांगीर
- 9:14:12खान से मिल चुका होता। शेखर शौर्य को उसके
- 9:14:16होटल पर लाकर छोड़ चुका था। वहां से शौर्य
- 9:14:19ने अपनी कार ली और शहर की तरफ बढ़ गया। इस
- 9:14:23वक्त वह खुद को काफी हल्का महसूस कर रहा
- 9:14:25था। उसे यकीन था कि कनिका फोन करके उसके
- 9:14:29परिवार को बता ही देगी कि उसकी पसंद
- 9:14:31[संगीत] कुणाल है। इसलिए उसने मन ही मन तय
- 9:14:35कर लिया था। आज से कनिका का चैप्टर बंद।
- 9:14:39जैसे ही कनिका और कुणाल [संगीत] का रिश्ता
- 9:14:41फाइनल होगा, वह भी शिप्रा के साथ अपनी
- 9:14:44शादी की बात सार्वजनिक कर देगा। उसके बाद
- 9:14:47उसे किसी से छिप कर रहने की जरूरत नहीं
- 9:14:49पड़ेगी। लेकिन अभी उसके दिमाग में सिर्फ
- 9:14:52एक ही बात घूम रही थी। आज ही जहांगीर खान
- 9:14:56से मिलकर उस शख्स तक पहुंचना [संगीत]
- 9:14:58जिसने उसे मारने की सुपारी दी थी। शौर्य
- 9:15:01ने मोबाइल निकाला और Google मैप पर शैडो
- 9:15:04बॉक्सर क्लब की लोकेशन डाली। फिर उसने कार
- 9:15:07उसी रास्ते पर दौड़ा दी। लगभग 2 घंटे बाद
- 9:15:11वो शैडो बॉक्सर क्लब के बाहर पहुंच चुका
- 9:15:13था। क्लब के बाहर एक बड़ा सा बोर्ड लगा
- 9:15:15हुआ था। शौर्य ने एक तरफ अपनी कार पार्क
- 9:15:18की और गेट की ओर बढ़ गया। गेट पर एक गार्ड
- 9:15:22तैनात था। उसका शरीर भी पूरी तरह कसा हुआ
- 9:15:25था। उसने शूट बूट में शौर्य को देखा और
- 9:15:28बेपरवाह अंदाज में पूछा, हां भाई किससे
- 9:15:31मिलना है? शौर्य ने एक नजर गार्ड पर डाली
- 9:15:35और बेहद सौम्य स्वर में कहा। मुझे जहांगीर
- 9:15:38खान से मिलना है। शौर्य के मुंह से
- 9:15:40जहांगीर खान का नाम सुनते ही गार्ड
- 9:15:43[संगीत] की त्योरियां चढ़ गई। वो गुस्से
- 9:15:45में लाल होता हुआ बोला, "तुम्हारी इतनी
- 9:15:48हिम्मत कि तुम यूं बिना इज्जत के हमारे
- 9:15:49उस्ताद का नाम ले रहे हो?"
- 9:15:51शौर्य को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसे समझ
- 9:15:55आ गया कि इस क्लब के लड़के अपने उस्ताद को
- 9:15:57भगवान की तरह मानते हैं। ऐसे में सीधे
- 9:16:00उनका नाम लेना शायद यहां किसी को पसंद
- 9:16:02नहीं आएगा। उसने तुरंत अपनी बात संभालते
- 9:16:06हुए कहा, "सॉरी। मैं मास्टर जहांगीर खान
- 9:16:09से मिलना चाहता हूं। क्या वह अभी यहां
- 9:16:11है?" दोबारा शौर्य को अपने उस्ताद को
- 9:16:14इज्जत देते देखकर गार्ड के चेहरे का
- 9:16:16रूखापन कुछ कम हुआ। उसने शौर्य को घूरते
- 9:16:20हुए कहा, "अभी तो उस्ताद यहां नहीं है,
- 9:16:23लेकिन 5:00 बजे तक वह आ जाएंगे। तुम बैठक
- 9:16:26में जाकर उनका इंतजार [संगीत] कर सकते
- 9:16:27हो।" शौर्य ने सहमति में सिर हिलाया। तभी
- 9:16:31बाहर से एक लड़का क्लब के अंदर जाने लगा।
- 9:16:34गार्ड ने उसे आवाज देते हुए कहा, रेंबो
- 9:16:37भाई, आप इनको बैठक में ले जाकर बिठा देना।
- 9:16:40इनको उस्ताद से मिलना [संगीत] है। रमबो ने
- 9:16:43शौर्य को सूट बूट में देखकर ऊपर से नीचे
- 9:16:45तक देखा और सहजता से बोला, ठीक है तुम
- 9:16:49मेरे पीछे आ जाओ। शौर्य उसके पीछे-पीछे
- 9:16:52गेट के अंदर चला गया। अंदर पहुंचते ही
- 9:16:55शौर्य [संगीत] ने देखा कि क्लब काफी बड़ा
- 9:16:57और खुला हुआ था। सामने का पूरा एरिया खाली
- 9:17:01था और थोड़ा आगे जाने पर एक बड़ा सा रिंग
- 9:17:04बना हुआ था। जहां कुछ लड़के बॉक्सिंग की
- 9:17:06प्रैक्टिस कर रहे थे। शौर्य उन लड़कों को
- 9:17:09देखते हुए रमबो के पीछे चलता रहा था।
- 9:17:12रास्ते में रमबो ने उससे पूछा, क्या तुम
- 9:17:14यहां मार्शल आर्ट सीखने के लिए आए हो?
- 9:17:17शौर्य ने तुरंत सिर हिलाते हुए कहा, नहीं
- 9:17:20ऐसा कुछ नहीं है। मैं तो यहां बस मास्टर
- 9:17:23जहांगीर खान से मिलने आया हूं। मुझे उनसे
- 9:17:25कुछ काम [संगीत] है। रमबो मुस्कुराते हुए
- 9:17:28बोला, "मुझे लगा ही था तुम जिस तरह से छुई
- 9:17:31मुई से लग रहे हो, तुम्हें देखकर नहीं
- 9:17:33लगता कि मार्शल आर्ट सीखना तुम्हारे बस की
- 9:17:35बात है।" मार्शल आर्ट सीखने के लिए रफ
- 9:17:38[संगीत] एंड टफ बंदा चाहिए होता है। शौर्य
- 9:17:41ने उसकी बात का बुरा नहीं माना। उल्टा
- 9:17:44उसकी तरफ तारीफ [संगीत] भरी नजर से देखते
- 9:17:46हुए बोला, "तुम सही कह रहे हो?" लेकिन
- 9:17:49तुम्हें क्या लगता है? अगर मैं सीखना
- 9:17:51चाहूं तो क्या जहांगीर खान मुझे अपना
- 9:17:53शिष्य बनाएंगे?
- 9:17:55शौर्य की बात सुनकर रमबो ने उसे घूर कर
- 9:17:57देखा। उसके चेहरे पर नाराजगी उभर आई। वो
- 9:18:01सख्त स्वर में बोला, [संगीत]
- 9:18:02"तुम उस्ताद का नाम कैसे ले रहे हो?"
- 9:18:04तुम्हें इतना भी नहीं पता कि उस्ताद का
- 9:18:07नाम [संगीत] इज्जत से लिया जाता है? शौर्य
- 9:18:10को फिर अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने
- 9:18:12तुरंत कहा, "सॉरी, मुझे माफ करना।" रमबो
- 9:18:16ने उसकी माफी को नजरअंदाज करते हुए कहा,
- 9:18:19तुम मेहनत करोगे तो सीख सकते हो लेकिन
- 9:18:22तुम्हें बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। तुम्हें
- 9:18:25लगता है कि तुम इतनी मेहनत कर पाओगे?
- 9:18:28शौर्य और रमबो रिंग के पास पहुंच चुके थे।
- 9:18:31तभी शौर्य की नजर रिंग के अंदर पड़ी।
- 9:18:34रुबिया एक लड़के से फाइट कर रही थी। जिस
- 9:18:37वक्त शौर्य रिंग के पास पहुंचा, उसी समय
- 9:18:39रुबिया ने अपने प्रतिद्वंदी पर जोरदार
- 9:18:41फ्लाइंग किक मारी। उसका प्रतिद्वंदी
- 9:18:44लड़खड़ाता हुआ जमीन पर जा गिरा। अगले ही
- 9:18:47पल रुबिया ने उसके पास पहुंचकर उसकी पीठ
- 9:18:50पर सवार होकर उसे दबोच लिया। हार स्वीकार
- 9:18:53करते हुए उसके प्रतिद्वंदी ने हाथ जमीन
- 9:18:55[संगीत] पर मार दिया। रुबिया ने उसे
- 9:18:58छोड़कर खड़े होते हुए जैसे ही सामने देखा
- 9:19:01उसकी नजर रमबो के पीछे खड़े शौर्य पर पड़
- 9:19:04गई। वो रिंग से बाहर आई। शौर्य ने रुबिया
- 9:19:08को अपने सामने देखा तो वहीं रुक गया। उसे
- 9:19:11देखते ही रुबिया के चेहरे पर नापसंद के
- 9:19:14भाव उभर आए। वो कुछ कहती उससे पहले ही
- 9:19:18रमबो ने रुबिया से कहा सीनियर यह बंदा
- 9:19:21मास्टर से मिलना चाहता है। इसे देखकर लगता
- 9:19:24है कि शायद यह मार्शल आर्ट सीखना चाहता
- 9:19:27है। रुबिया भावहीन चेहरे के साथ शौर्य को
- 9:19:30देखती रही। उसे याद आ गया कि कैसे शौर्य
- 9:19:34ने अकेले ही उसे और सिकंदर दोनों को धूल
- 9:19:37चटा दी थी। और अब रमबो कह रहा था कि शायद
- 9:19:41वो मार्शल आर्ट सीखना चाहता है। उसे यह भी
- 9:19:44याद था कि इसी शौर्य के कारण उसके साथी
- 9:19:47महंत की मौत हुई थी। रूबिया ने शौर्य का
- 9:19:50कोई अभिवादन नहीं किया। ऐसा लग रहा था
- 9:19:53जैसे वह मजबूरी में उसे यहां बर्दाश्त कर
- 9:19:56रही हो और इसकी वजह शायद उसके मास्टर का
- 9:19:59दिया हुआ वचन था। शौर्य उसके चेहरे के भाव
- 9:20:02बढ़ चुका था। उसे साफ समझ आ गया था कि
- 9:20:05रुबिया उसे बिल्कुल पसंद नहीं करती। फिर
- 9:20:08भी वो चेहरे पर हल्की मुस्कान लाते हुए
- 9:20:10बोला, "मुझे लग रहा है कि तुम्हें मुझसे
- 9:20:13कुछ ज्यादा ही नाराजगी है।" रूबिया ने
- 9:20:15नफरत भरे स्वर में जवाब दिया, "यह तो
- 9:20:18मास्टर ने तुम्हें वचन दे दिया है। इसलिए
- 9:20:21नहीं तो अब तक तो मैं तुम्हारे हाथ पैर
- 9:20:23तोड़ चुकी होती। शौर्य ने उसकी आंखों में
- 9:20:26देखते हुए जिज्ञासा से पूछा, "इतनी नफरत?"
- 9:20:29[संगीत]
- 9:20:30लेकिन क्या तुम मुझे बताओगी कि तुम मुझसे
- 9:20:32इतनी नफरत क्यों करती हो? रुबिया ने दांत
- 9:20:35पीसते हुए कहा, "तुम्हारे कारण मेरा एक
- 9:20:38साथी आज जिंदा नहीं है और तुम मुझसे पूछ
- 9:20:41रहे [संगीत] हो कि मैं तुमसे नफरत क्यों
- 9:20:42कर रही हूं?" शौर्य ने उसकी बात का जवाब
- 9:20:45बेहद गंभीरता से देते हुए कहा, "मेरे
- 9:20:48कारण?" यह तुम कैसे कह सकती [संगीत] हो?
- 9:20:51वो मेरे कारण नहीं, तुम लोगों के स्वार्थ
- 9:20:54के कारण मारा गया। हां, यह हो सकता था कि
- 9:20:58मैं तुम लोगों के कारण मारा जाता। तुम यह
- 9:21:00सोचो कि मुझे तुम सबसे कितना [संगीत]
- 9:21:02गुस्सा होना चाहिए क्योंकि तुम सब ने मुझे
- 9:21:05मारने की कोशिश की थी और जहां तक तुम्हारे
- 9:21:08साथी के मरने की बात है तो वो भी अपनी
- 9:21:11गलती [संगीत] के कारण ही मरा। उसी के गोली
- 9:21:13चलाने के कारण प्लेन क्रैश हुआ था। तुम
- 9:21:16लोग तो मेरे कब्जे में भी थे। यह जानने के
- 9:21:19बाद कि तुम लोगों ने मुझे मारने की कोशिश
- 9:21:21की थी। मुझे तुम लोगों के साथ क्या करना
- 9:21:24चाहिए था। शौर्य की बातों ने रुबिया को
- 9:21:27जैसे आईना दिखा दिया। उसका मुंह बंद हो
- 9:21:29गया। उसके पास कहने के लिए कुछ [संगीत]
- 9:21:32नहीं बचा था। सही तो कहा था शौर्य ने। वो
- 9:21:36और उसका मास्टर उसी के रहमोकरम पर थे।
- 9:21:39शौर्य चाहता तो किसी को कुछ पता भी नहीं
- 9:21:42चलता और एक ही बार में उसे और [संगीत]
- 9:21:44उसके मास्टर को गायब कर सकता था। लेकिन
- 9:21:47उसने ऐसा नहीं किया। अचानक रूबिया के मन
- 9:21:50में शौर्य के लिए मौजूद नफरत खत्म होने
- 9:21:53[संगीत] लगी। उसे समझ आ गया कि महंत की
- 9:21:56मौत का कारण शौर्य नहीं बल्कि उसका अपना
- 9:21:59गलत [संगीत] काम था जो वह अपने मास्टर के
- 9:22:01साथ मिलकर कर रही थी। वैसे महंत की मौत के
- 9:22:04बाद जहांगीर खान ने किसी और की सुपारी
- 9:22:07नहीं ली थी। उसने उसके बाद यह काम ही छोड़
- 9:22:10दिया था। रुबिया ने एक लड़के को बुलाकर
- 9:22:13रिंग के पास ही दो कुर्सियां मंगवाई और
- 9:22:16शौर्य को बैठने का इशारा किया। दूसरी तरफ
- 9:22:19शौर्य के चले जाने के बाद कनिका देख रही
- 9:22:22थी कि कुणाल कुछ ज्यादा ही खुश नजर आ रहा
- 9:22:25था। [संगीत] उसने एक तरह से मान ही लिया
- 9:22:27था कि कनिका ने उसे पसंद कर लिया है। अब
- 9:22:30वह कनिका से कुछ ज्यादा ही खुलकर बात करने
- 9:22:33की कोशिश कर रहा था। एक बार फिर सभी जीप
- 9:22:36में बैठकर सफारी के लिए निकल गए। इस बार
- 9:22:39एक बदलाव जरूर था। प्रतीक नंदिनी के साथ
- 9:22:42जाकर बैठ गया था। नंदिनी भी प्रतीक का साथ
- 9:22:45एंजॉय कर रही थी। कनिका को अकेले बैठे
- 9:22:48देखकर कुणाल भी उसके पास आकर बैठ गया और
- 9:22:51उससे बात करने का बहाना ढूंढने लगा। मौका
- 9:22:54देखकर कुणाल ने अपनी जेब से एक घड़ी
- 9:22:56निकाली और कनिका का ध्यान अपनी तरफ
- 9:22:58आकर्षित करते हुए कहा मिस कनिका मैं जब
- 9:23:02आपसे मिलने आ रहा था तो मैंने आपके लिए एक
- 9:23:04गिफ्ट लिया था। [संगीत]
- 9:23:06उम्मीद करता हूं कि यह आपको जरूर पसंद
- 9:23:08आएगा। कुणाल की बात सुनकर कनिका ने उसकी
- 9:23:11तरफ देखा। उसके हाथ में घड़ी देखकर वह
- 9:23:14हैरानी से उसे देखने लगी और बोली [संगीत]
- 9:23:17यह क्या है मिस्टर कुणाल? कुणाल ने घड़ी
- 9:23:20को हाथ में लेकर अपनी उंगलियों के बीच
- 9:23:22घुमाते हुए मुस्कुरा कर कहा। बस एक छोटा
- 9:23:25सा गिफ्ट [संगीत] है। मुझे अच्छा लगा था
- 9:23:27तो मैंने यह आपके लिए ले लिया। कनिका ने
- 9:23:30विनम्रता से सिर हिलाते हुए कहा, माफ
- 9:23:33कीजिएगा मिस्टर कुणाल। लेकिन मैं आपका यह
- 9:23:36गिफ्ट अभी एक्सेप्ट नहीं कर सकती। कुणाल
- 9:23:38को समझ नहीं आया कि वो कनिका को गिफ्ट
- 9:23:41लेने के लिए कैसे मनाए। वो जिद करते हुए
- 9:23:44बोला इस गिफ्ट ने आपका क्या बिगाड़ा है?
- 9:23:46मिस कनिका आप इसे लेने से भला क्यों मना
- 9:23:50कर रही हैं? मैं आपको बहुत पसंद करता हूं
- 9:23:53और मुझे उम्मीद है [संगीत] कि आपको भी
- 9:23:55मुझसे कोई नाउदी तो नहीं होगी। आज नहीं तो
- 9:23:59कल हम एक होने ही वाले हैं। तो आप इस
- 9:24:02गिफ्ट को लेने से भला क्यों मना कर रही
- 9:24:05हैं? कनिका ने उसे समझाते हुए कहा, "मैं
- 9:24:09जानती हूं कि आप सही कह रही हैं।" लेकिन
- 9:24:12फिर भी मैं यही चाहती हूं कि जब तक सब कुछ
- 9:24:15फाइनल नहीं हो जाता, तब तक हम इतने महंगे
- 9:24:18गिफ्ट एक दूसरे को देने से बचें तो ज्यादा
- 9:24:21अच्छा रहेगा। कुणाल के पास अब कोई रास्ता
- 9:24:24नहीं बचा था कि वो कनिका को अपना गिफ्ट
- 9:24:27लेने के लिए कैसे मनाएं। आखिरकार वो
- 9:24:30खिसियानी हंसी-हंसते हुए बोला, ठीक है मिस
- 9:24:33कनिका। अगर आप अभी यह गिफ्ट नहीं लेना
- 9:24:36चाहती तो कोई बात नहीं। मैं उस समय का
- 9:24:38इंतजार करूंगा जब आप मेरे गिफ्ट को लेने
- 9:24:41के लिए तैयार हो जाएंगी। कनिका ने
- 9:24:43मुस्कुराकर कुणाल की तरफ देखा। करण कुणाल
- 9:24:46को कनिका को गिफ्ट देते हुए देख रहा था।
- 9:24:48[संगीत]
- 9:24:49वह भी यही चाहता था कि कनिका कुणाल का
- 9:24:52गिफ्ट स्वीकार ना करे और आखिरकार कनिका ने
- 9:24:54भी वह गिफ्ट स्वीकार नहीं किया। कनिका ने
- 9:24:57व्यवहार कुशल मुस्कान के साथ कहा। मैं
- 9:25:00उम्मीद करती हूं कि आप इस बात का बुरा
- 9:25:02नहीं मानेंगे। मिस्टर कुणाल कुणाल ने
- 9:25:04खिसियानी हंसी-हंसते [संगीत] हुए बस उसकी
- 9:25:06तरफ देखा। दूसरी तरफ फैब्रिक ट्रेंड के
- 9:25:10ऑफिस में बैठी शिप्रा शौर्य के बारे में
- 9:25:12ही सोच [संगीत] रही थी। उसे यह जानकर
- 9:25:15थोड़ी तसल्ली हुई थी कि संभवतः कनिका
- 9:25:17शौर्य को नापसंद कर देगी। जब उससे रहा
- 9:25:20नहीं गया [संगीत] तो उसने शौर्य को फोन
- 9:25:22लगा दिया। एक रिंग जाते ही फोन उठा लिया
- 9:25:25गया। [संगीत]
- 9:25:26शौर्य ने मुस्कुराते हुए कहा, "क्या बात
- 9:25:29है? आज तुम कुछ ज्यादा ही फोन नहीं कर रही
- 9:25:31हो?"
- 9:25:32शिप्रा ने उसके सवाल [संगीत] को नजरअंदाज
- 9:25:34करते हुए पूछा, कहां हो तुम? शौर्य ने
- 9:25:38हंसते हुए [संगीत] उसकी बात टालने की
- 9:25:39कोशिश की और बोला, "तुम्हारी सुई हमेशा
- 9:25:42इसी सवाल पर क्यों अटकी रहती है?" शिप्रा
- 9:25:45ने तुरंत पलट कर कहा, "तुम जवाब भी तो
- 9:25:48नहीं देते।" अगर तुम मेरे सवाल का जवाब दे
- 9:25:50देते, तो फिर इतने ज्यादा सवाल जवाब ही
- 9:25:53नहीं होते। अब बताओ अभी भी जंगल में ही हो
- 9:25:57या बाहर आ गए? शौर्य ने सहजता [संगीत] से
- 9:26:00जवाब दिया। मैं तो वापस विशालगढ़ आ गया
- 9:26:02हूं। कुछ काम से एक जगह आया हुआ हूं।
- 9:26:06शौर्य की बात सुनते ही [संगीत] शिप्रा की
- 9:26:08आवाज में खननक बढ़ गई। उसने आदेश देते हुए
- 9:26:11कहा, अभी 5:00 बज रहे हैं। [संगीत] आधे
- 9:26:14घंटे में फैब्रिक ट्रेंड के ऑफिस पहुंचो।
- 9:26:16शौर्य ने अपनी मजबूरी बताते हुए कहा, "अरे
- 9:26:20मैंने कहा ना कि मैं अभी कुछ काम से कहीं
- 9:26:22आया हुआ हूं। इतनी जल्दी आना [संगीत]
- 9:26:25मुश्किल है।" शिप्रा ने नाराजगी से कहा,
- 9:26:28"मैं कुछ नहीं जानती। आधे घंटे में
- 9:26:31तुम्हें आना है तो आना है। अभी जब जंगल
- 9:26:33सफारी के लिए गए हुए थे तब इस आदमी से
- 9:26:36मिलना याद नहीं था। अब जब मैं बुला रही
- 9:26:38हूं तो काम याद आ रहा है। शौर्य कुछ कहता
- 9:26:42उससे पहले ही शिप्रा [संगीत] ने जैसे अपना
- 9:26:44फैसला सुना दिया था। अब सवाल यह था कि
- 9:26:47क्या शौर्य आधे घंटे में शिप्रा के पास
- 9:26:49पहुंच पाएगा? शिप्रा का फोन कटने के बाद
- 9:26:53शौर्य ने रुबिया की तरफ देखा। रुबिया उसके
- 9:26:56पास ही बैठी थी। शौर्य को पता नहीं था कि
- 9:26:59जहांगीर खान कब तक आएगा। [संगीत]
- 9:27:01उसने रुबिया की तरफ देखकर पूछा, तुम्हें
- 9:27:04पता तो है ना कि मैं यहां किस लिए आया
- 9:27:06हूं? रुबिया ने भावहीन स्वर में जवाब
- 9:27:08दिया। जानती हूं तुम्हें याद दिलाने की
- 9:27:12जरूरत नहीं है। तुमने पहले से समय नहीं
- 9:27:14बताया था। इसलिए मास्टर अभी यहां मौजूद
- 9:27:16नहीं है। तुम चिंता मत करो। मास्टर अपनी
- 9:27:19जुबान से फिरने वाले नहीं है। शौर्य ने
- 9:27:22अपनी घड़ी की तरफ देखते हुए पूछा। क्या
- 9:27:24तुम पता करके बता सकती हो कि तुम्हारे
- 9:27:26मास्टर कब तक यहां पहुंचेंगे? रुबिया ने
- 9:27:29तुरंत कहा, अभी पता करके बताती हूं। इतना
- 9:27:32[संगीत] कहकर रुबिया ने अपने मास्टर को
- 9:27:34फोन लगाया। दो रिंग के बाद ही फोन उठा
- 9:27:36लिया गया। रुबिया ने फोन पर कहा, "हेलो
- 9:27:39मास्टर, [संगीत] मिस्टर शौर्य यहां आए हुए
- 9:27:41हैं। आप कब तक यहां आइएगा?" दूसरी तरफ से
- 9:27:45कुछ कहा गया तो रुबिया ने फोन शौर्य की
- 9:27:47तरफ बढ़ा दिया। शौर्य ने फोन कान से
- 9:27:50लगाया। जहांगीर खान ने अपनी स्थिति स्पष्ट
- 9:27:52करते हुए कहा, हेलो [संगीत] मिस्टर शौर्य।
- 9:27:55मुझे पहले से पता नहीं था कि आप इस समय
- 9:27:57आएंगे इसलिए मैं यहां उपस्थित नहीं था।
- 9:28:00अभी भी मुझे क्लब पहुंचने में लगभग आधा
- 9:28:02घंटा लगेगा। अगर आप रुकना चाहे तो रुक
- 9:28:04सकते हैं नहीं तो आप सुबह भी आ [संगीत]
- 9:28:06सकते हैं। सुबह आने का एक फायदा यह होगा
- 9:28:09कि मैं आपके साथ ही उस शख्स के पास चल
- 9:28:11लूंगा जिसने मुझे आपकी सुपारी दी है।
- 9:28:14जहांगीर खान ने सारी स्थिति शौर्य के
- 9:28:16सामने स्पष्ट कर दी। शौर्य ने एक पल
- 9:28:19[संगीत] के लिए सोचा। फिर उसे भी यही ठीक
- 9:28:21लगा क्योंकि अब शाम होने वाली थी और इस
- 9:28:23वक्त किसी के पास जाना उसे उचित नहीं लगा।
- 9:28:26इसलिए उसने तय किया कि वह सुबह ही जहांगीर
- 9:28:29खान से मिलेगा। शौर्य ने शांत स्वर में
- 9:28:31कहा। ठीक है खान साहब मैं आपसे कल सुबह
- 9:28:34मिलता हूं। इतना कहकर शौर्य ने फोन रुबिया
- 9:28:37की तरफ बढ़ा दिया। जहांगीर खान से बात
- 9:28:40करते हुए 5-7 मिनट बीत चुके थे। तभी शौर्य
- 9:28:43को शिप्रा की धमकी याद आई कि उसे आधे घंटे
- 9:28:46के अंदर उसके पास पहुंचना है। वह अपनी जगह
- 9:28:49से उठते हुए बोला, [संगीत]
- 9:28:50रुबिया जी, मैं अभी चलता हूं। सुबह आकर
- 9:28:53खान साहब से मिलता हूं। इतना कहकर शौर्य
- 9:28:56तेजी से बाहर की तरफ बढ़ गया। रुबिया अभी
- 9:28:59उसे रोकना चाहती थी, लेकिन शौर्य की
- 9:29:01जल्दबाजी देखकर वह चुप रह गई। शौर्य वहां
- 9:29:04से निकलते ही फैब्रिक ट्रेंड के [संगीत]
- 9:29:06ऑफिस की तरफ बढ़ गया। लगभग 20 मिनट बाद वह
- 9:29:09फैब्रिक ट्रेंड के ऑफिस के बाहर था। आज
- 9:29:12पहली बार [संगीत] वह इस ऑफिस में आया था।
- 9:29:14शिप्रा की चेतावनी उसे अच्छी तरह याद थी
- 9:29:17कि उसे आधे घंटे के अंदर उसके पास पहुंचना
- 9:29:19है। इसलिए वह बेधड़क ऑफिस के अंदर जाने
- 9:29:22लगा। लेकिन दरवाजे पर मौजूद गार्ड ने उसे
- 9:29:25पहली बार [संगीत] देखा था। वह उसे पहचानता
- 9:29:27नहीं था। इसलिए उसने शौर्य को गेट पर ही
- 9:29:30रोक लिया। गार्ड ने आवाज लगाते हुए कहा, ओ
- 9:29:33साहब, ओ साहब, ऐसे कहां घुसे जा रहे हो?
- 9:29:37शौर्य को मजबूरन रुकना पड़ा। उसने जल्दी
- 9:29:40से गार्ड से कहा, "मुझे सीईओ मैडम से
- 9:29:43मिलना है।" गार्ड ने शौर्य को घूरते हुए
- 9:29:46पूछा, "आपके पास अपॉइंटमेंट है?" शौर्य ने
- 9:29:49हड़बड़ाते हुए जवाब दिया, नहीं, मेरे पास
- 9:29:52अपॉइंटमेंट तो नहीं है, लेकिन उन्होंने
- 9:29:54मुझे बुलाया है। गार्ड की निगाहें शौर्य
- 9:29:57की जल्दबाजी देखकर और संदेह से सिकुड़ गई।
- 9:30:00उसने पूछा, आपको सीईओ मैडम ने बुलाया है,
- 9:30:04लेकिन आप हैं कौन? मैंने तो आपको पहले कभी
- 9:30:06यहां नहीं देखा। शौर्य को यह कहना ठीक
- 9:30:09नहीं लग रहा था कि वह राजा साहब का पोता
- 9:30:11है। वह इसी उधेड़बुन में था कि इस गार्ड
- 9:30:14से [संगीत] कैसे अपना पीछा छुड़ाए। तभी एक
- 9:30:17आवाज उसके कानों में पड़ी। शौर्य तुम यहां
- 9:30:20क्या कर रहे हो? शौर्य ने पलट कर आवाज की
- 9:30:23दिशा में देखा। सामने स्वर्णलता जी खड़ी
- 9:30:26थी। वह ऑफिस से बाहर की तरफ ही आ रही थी।
- 9:30:29शौर्य के मुंह से अचानक निकला। बुआ आप
- 9:30:33[संगीत]
- 9:30:34स्वर्णलता जी ने आश्चर्य से पूछा। तुम
- 9:30:37यहां? शौर्य ने जल्दी से बहाना बनाते हुए
- 9:30:40कहा, बस दादाजी से मिलने आया था। शौर्य की
- 9:30:44बात सुनते ही स्वर्णलता [संगीत]
- 9:30:46जी की आंखें सिकुड़ गई। वहीं गार्ड शौर्य
- 9:30:49के मुंह से स्वर्णलता जी के लिए बुआ सुनकर
- 9:30:51[संगीत] हैरानी से उसकी ओर देखने लगा।
- 9:30:54उसने तुरंत स्वर्णलता जी से पूछा। मैडम
- 9:30:57क्या आप इनको जानती हैं? स्वर्णलता जी ने
- 9:30:59हैरानी से गार्ड की तरफ देखा और पूछा,
- 9:31:02"क्या तुम लोग इन्हें नहीं जानते?"
- 9:31:04गार्ड भयभीत स्वर में बोला, "यह आप कैसी
- 9:31:07बात कर रही हैं मैडम?" हमने तो आज पहली
- 9:31:09बार इन साहब को देखा है। तो मैं इन्हें
- 9:31:11कैसे जानूंगा? अब तक वो इतना समझ चुका था
- 9:31:14कि शौर्य राजा साहब के परिवार का सदस्य
- 9:31:16है। स्वर्णलता जी ने जवाब दिया। यह
- 9:31:20सूर्यभान भाई साहब के बेटे हैं। लेकिन
- 9:31:22उनके चेहरे से साफ जाहिर था कि उन्हें
- 9:31:24शौर्य का यहां आना पसंद नहीं आया था।
- 9:31:27उन्हें लग रहा था कि यह कंपनी [संगीत] अब
- 9:31:29उनके हाथ से जाती हुई नजर आ रही है।
- 9:31:31स्वर्णलता जी से शौर्य की पहचान जानकर
- 9:31:34गार्ड तुरंत बोला मुझे माफ कीजिएगा साहब।
- 9:31:37मैं आपको जानता नहीं था इसलिए आपका रास्ता
- 9:31:39रोकने की हिम्मत कर बैठा। शौर्य ने हल्की
- 9:31:42मुस्कान के साथ कहा। कोई बात नहीं। लेकिन
- 9:31:45अब तो जान गए हो ना? तो क्या मैं अंदर जा
- 9:31:47सकता हूं? गार्ड ने तुरंत उसे सैल्यूट
- 9:31:50मारते हुए कहा। आप कैसी बात कर रहे हैं
- 9:31:52साहब? अब मेरी मजाल है कि मैं आपको रोकने
- 9:31:54की हिम्मत करूं। शौर्य स्वर्णलता जी को
- 9:31:57गेट पर ही छोड़कर अंदर चला गया। वो
- 9:31:59रिसेप्शन पर पहुंचा और वहां बैठी एक
- 9:32:01खूबसूरत लड़की से पूछा, क्या आप बता सकती
- 9:32:04हैं कि कंपनी की सीईओ का कैबिन कौन सा है?
- 9:32:06शौर्य का सवाल सुनकर रिसेप्निशनिस्ट ने
- 9:32:08उसे घूरते हुए पूछा। आप कौन हैं? आपको
- 9:32:12सीईओ मैडम से क्या काम है? शौर्य ने जवाब
- 9:32:15दिया। मेरी उनसे बात हुई थी। उन्होंने
- 9:32:17मुझे मिलने के लिए बुलाया है।
- 9:32:19रिसेप्शनिस्ट ने कहा, "आप एक मिनट यहीं
- 9:32:22रुकिए। मैं मैडम से पूछ कर बताती [संगीत]
- 9:32:24हूं। इसके बाद रिसेप्शनिस्ट अपनी सीट से
- 9:32:27उठी और एक कैबिन की तरफ बढ़ गई। शौर्य ने
- 9:32:29उसकी तरफ देखा तो सामने ही सीईओ का बोर्ड
- 9:32:32लगा कमरा दिखाई दिया। रिसेप्शनिस्ट ने
- 9:32:34कैबिन का दरवाजा खोला और अंदर चली गई।
- 9:32:36शौर्य भी उसका पीछा करते हुए कैबिन के
- 9:32:38अंदर पहुंच गया। रिसेप्शनिस्ट ने जब शौर्य
- 9:32:41को अपने पीछे आते देखा तो हैरानी से उसे
- 9:32:43रोकते हुए बोली। अरे आप बिना पूछे मेरे
- 9:32:46पीछे कैबिन के अंदर कहां आ गए? शिप्रा
- 9:32:49किसी फाइल में उलझी हुई थी। रिसेप्शनिस्ट
- 9:32:51की आवाज सुनकर उसने जैसे ही नजर उठाई
- 9:32:54सामने शौर्य को देखकर उसका दिल खुशी से भर
- 9:32:56गया। रिसेप्निशनिस्ट ने शौर्य को डांटते
- 9:32:59हुए कहा, "मैंने आपसे बाहर इंतजार करने को
- 9:33:02कहा था ना? फिर आप बिना पूछे अंदर कैसे आ
- 9:33:04गए?" शिप्रा ने तुरंत उसे रोकते हुए कहा,
- 9:33:07नेहा, इन्हें रहने दो। मैंने ही इन्हें
- 9:33:09बुलाया है। तुम जाओ अपना काम करो।" नेहा
- 9:33:13ने एक बार शौर्य को देखा और फिर शिप्रा
- 9:33:15को। इसके [संगीत] बाद शौर्य को गुस्से से
- 9:33:17घूरती हुई कमरे से बाहर चली गई। नेहा के
- 9:33:19बाहर जाने के बाद शौर्य शिप्रा की टेबल के
- 9:33:22सामने रखी विजिटर चेयर पर जाकर बैठ गया।
- 9:33:24शिप्रा ने बनावटी तेवर के साथ कहा, "यह
- 9:33:27क्या है? इतना भी नहीं जानते कि सीईओ के
- 9:33:29कमरे में बैठने से पहले सीईओ की इजाजत भी
- 9:33:31लेनी पड़ती है। शौर्य ने बेचारगी से कहा,
- 9:33:35"अरे बाप रे, तुमसे मिलना तो मानो
- 9:33:37राष्ट्रपति से मिलने से भी मुश्किल है। और
- 9:33:39अब इतनी मेहनत करके यहां तक पहुंचा हूं तो
- 9:33:42बैठने के लिए भी तुम्हारी इजाजत लेनी
- 9:33:43पड़ेगी।"
- 9:33:44शिप्रा ने अपनी घड़ी की तरफ देखते हुए
- 9:33:46[संगीत] कहा, "तुम पूरे 12 मिनट लेट हो तो
- 9:33:49इसकी तो पनिशमेंट बनती है।" शौर्य शिकायत
- 9:33:52भरे अंदाज में बोला, "मैं तो यहां समय से
- 9:33:54ही आ गया था। एक तो पहले तुम्हारे गार्ड
- 9:33:56ने मुझे अंदर नहीं घुसने दिया और जब
- 9:33:58[संगीत] गेट से अंदर आ गया तो उसके बाद यह
- 9:34:00रिसेप्शनिस्ट भी मुझे अंदर नहीं आने दे
- 9:34:02रही थी। इस तरह तो लेट होना ही था। और जब
- 9:34:05इतनी मुश्किलों के बाद यहां तक पहुंच गया
- 9:34:07हूं तो उसके बाद भी तुम पनिशमेंट देने की
- 9:34:09बात कर रही हो। शिप्रा ने लापरवाही से कहा
- 9:34:12वो मैं नहीं जानती। मैंने [संगीत] तुम्हें
- 9:34:14कहा था कि आधे घंटे के अंदर तुम्हें मेरे
- 9:34:16पास होना था तो तुम्हें समय का ध्यान रखना
- 9:34:18चाहिए था। कहते हुए शिप्रा अपनी सीट से
- 9:34:21खड़ी हुई और घूमकर शौर्य की चेयर के पास
- 9:34:23चली गई। वो गौर से शौर्य के चेहरे को
- 9:34:26देखने लगी। शौर्य ने आसपास के हालात को
- 9:34:28देखते हुए पूछा। [संगीत] अब ऐसे क्या देख
- 9:34:31रही हो? और हां इतनी इमरजेंसी में यहां
- 9:34:34बुलाने का क्या कारण है? शिप्रा ने तंज
- 9:34:36भरे स्वर में पूछा। तो क्या जब कोई काम
- 9:34:39होगा तभी तुम मेरे पास आओगे? शौर्य ने
- 9:34:42बेचारगी से कहा, "मैंने ऐसा तो नहीं कहा?
- 9:34:45वो तो मैं एक जरूरी काम से कहीं जा रहा
- 9:34:47था। लेकिन बीच [संगीत] में तुम्हारा फरमान
- 9:34:49सुनकर उस काम को छोड़कर आना पड़ा। शिप्रा
- 9:34:51ने नाक भ सिकोड़ते हुए कहा, "अच्छा, वो
- 9:34:55जरूरी काम तब याद नहीं था जब किसी के साथ
- 9:34:57जंगल सफारी कर रहे थे।" मैंने फोन किया तो
- 9:35:00काम याद आ गया। शौर्य ने आंखें बड़ी करते
- 9:35:03हुए कहा, "तुम अब कुछ ज्यादा ही हुकुम
- 9:35:05नहीं चलाने लगी हो मुझ पर।"
- 9:35:07शिप्रा ने शरारत भरी मुस्कान के साथ कहा,
- 9:35:10"तुम पर नहीं चलाऊंगी तो और किस पर
- 9:35:12चलाऊंगी?" कहते हुए शिप्रा शौर्य की चेयर
- 9:35:15के पीछे जाकर उसके कंधे पर हाथ रखकर खड़ी
- 9:35:17हो गई। शिप्रा को अपने पीछे देखकर शौर्य
- 9:35:20खड़ा हो गया। उसने पलट कर उसकी तरफ देखते
- 9:35:23हुए पूछा, "यह तुम क्या कर रही हो? तुम
- 9:35:26अपनी सीट छोड़कर यहां क्यों आ गई? शिप्रा
- 9:35:29ने आंखें [संगीत] तरेरते हुए पूछा, "यह
- 9:35:31तुम्हारे शरीर से किसके सेंट की खुशबू आ
- 9:35:33रही है?"
- 9:35:34शिप्रा की बात सुनकर शौर्य की आंखें
- 9:35:36सिकुड़ गई। वह अपना नाक कंधे के आसपास ले
- 9:35:39जाकर सूंघने की कोशिश करने लगा। लेकिन उसे
- 9:35:42अपने शरीर से किसी भी तरह की खुशबू महसूस
- 9:35:44नहीं हुई। उसने हैरानी से कहा, "यह तुम
- 9:35:47कैसी बात कर रही हो? मुझे तो कोई खुशबू
- 9:35:49नहीं आ रही है।" शिप्रा उसके और करीब आते
- 9:35:52हुए बोली, "अगर ऐसा है तो तुम पीछे क्यों
- 9:35:55जा रहे हो? मुझे सूंघने दो। अभी पता चल
- 9:35:57जाएगा।" शौर्य अनिश्चित सा खड़ा रहा।
- 9:36:00शिप्रा उसके एकदम करीब आ गई। वह ऐसा
- 9:36:02[संगीत] जताने लगी जैसे सच में शौर्य के
- 9:36:04शरीर से किसी खुशबू को सूंघने की कोशिश कर
- 9:36:07रही हो। शौर्य को उसकी सांसों की तपिश
- 9:36:09अपनी गर्दन पर महसूस हुई। उसके [संगीत]
- 9:36:12पूरे शरीर में जैसे करंट सी दौड़ गई।
- 9:36:14शिप्रा का सीना उसके सीने से सटने लगा था।
- 9:36:17शौर्य समझ गया कि यह सब उसके करीब आने का
- 9:36:19सिर्फ एक बहाना था। शौर्य के चेहरे पर
- 9:36:22शरारती मुस्कान खिल गई। उसे भी [संगीत] एक
- 9:36:24शरारत सूझी तो उसने हैरानी जताते हुए कहा।
- 9:36:28अरे मुझे तो तुम्हारे शरीर से किसी मेल
- 9:36:30परफ्यूम की खुशबू आ रही है। शिप्रा ने सिर
- 9:36:33पीछे करके उसकी आंखों में देखते हुए कहा,
- 9:36:36"अच्छा, "मेरी बिल्ली मुझे से म्याऊं?"
- 9:36:38मेरा हथकंडा मुझी पर आजमा रहे हो?"
- 9:36:40[संगीत]
- 9:36:41शौर्य ने मुस्कुराते हुए कहा, तो क्या
- 9:36:44सिर्फ तुम ही मुझसे खेल सकती हो? मैं क्या
- 9:36:46खड़ा सिर्फ [संगीत] तमाशा देखता रहूंगा?
- 9:36:48कहते हुए शौर्य ने शिप्रा को अपनी बाहों
- 9:36:50में भर लिया। जवाब में शिप्रा ने [संगीत]
- 9:36:52भी अपनी बाहें शौर्य के चारों तरफ लपेट
- 9:36:54दी। कुछ पल शौर्य उसकी बाहों में खोया
- 9:36:57रहा। फिर उसके कान के पास मुंह ले जाकर
- 9:36:59उसने पूछा, [संगीत]
- 9:37:01"यह क्या फरमान था कि आधे घंटे में
- 9:37:03तुम्हारे पास पहुंचूं?" शिप्रा ने चिंतित
- 9:37:05स्वर में [संगीत] कहा, तो और क्या करती?
- 9:37:08सुबह से मन में बुरे-बुरे ख्याल आ रहे थे।
- 9:37:10तुम तो मजे से कनिका के साथ घूम रहे थे।
- 9:37:13मेरे दिल पर क्या बीत रही थी? इसका कुछ
- 9:37:15एहसास भी है। शौर्य ने शिप्रा को थोड़ा
- 9:37:18पीछे करते हुए मुस्कुरा कर पूछा। अच्छा तो
- 9:37:21यह बात है। तो इसलिए वह फरमान जारी हुआ
- 9:37:24था। यह सब जलन के कारण था। कहते हुए शौर्य
- 9:37:28उसे टेबल के पास ले गया और हल्के से उठाकर
- 9:37:30[संगीत] टेबल पर बैठा दिया। शिप्रा ने
- 9:37:32शौर्य की शर्ट के बटन से खेलते हुए कहा,
- 9:37:35"तुमको क्या है? तुम तो वहां कनिका के साथ
- 9:37:37मजे कर रहे थे और मैं यहां इस ऑफिस में
- 9:37:40बंद सोच-सच कर हलकान हुई जा रही थी कि पता
- 9:37:42नहीं तुम्हारे और कनिका के बीच क्या चल
- 9:37:44रहा होगा।" वहीं शौर्य शिप्रा के चेहरे के
- 9:37:47सामने लहरा रही एक लट को उसके कान के पीछे
- 9:37:50करता रहा। शिप्रा ने अपनी आंखें शौर्य के
- 9:37:52चेहरे पर टिकाते हुए पूछा। तुम दोनों का
- 9:37:55मामला सेटल हुआ? शौर्य ने जवाब दिया, बस
- 9:37:59यूं समझ लो लगभग सेटल ही है। बस एक बार
- 9:38:02कनिका अपनी फैमिली को अपने फैसले [संगीत]
- 9:38:04से अवगत करा दे तो फिर हम अपने रिश्ते को
- 9:38:06सार्वजनिक कर सकते हैं। कहते हुए शौर्य
- 9:38:09अपने होठ शिप्रा के होठों के करीब ले गया।
- 9:38:11वह अभी उसके होठों को छूने ही वाला था कि
- 9:38:14तभी शिप्रा ने अपनी उंगली उसके होठों के
- 9:38:16सामने रख दी। शौर्य की भौहें तन गई। उसने
- 9:38:20शिकायती अंदाज में कहा, "अब यह क्या है?
- 9:38:23आग भड़का दी और [संगीत] अब उस पर पानी भी
- 9:38:25नहीं डालने दे रही।" शिप्रा ने कहा, "यह
- 9:38:28घर नहीं ऑफिस है और यहां पर रोमांस एक
- 9:38:32लिमिट तक ही अलाउड है।" बोलती हुई शिप्रा
- 9:38:34टेबल से नीचे उतर गई। उसने अपनी उंगली
- 9:38:37शौर्य के सीने पर टिकाई और उसे पीछे किया।
- 9:38:40शौर्य ने बुरा सा मुंह बनाते हुए कहा,
- 9:38:43देखो, यह गलत बात है। यूं आग लगाकर दूर से
- 9:38:46तमाशा देखना सही नहीं है। इससे अच्छा तो
- 9:38:48हमारा पहले वाला रिश्ता ही था। कम से कम
- 9:38:50मैं ऐसे टॉर्चर से तो बचा हुआ था। शिप्रा
- 9:38:53ने उसके मजे लेते हुए पूछा, "अच्छा, तो
- 9:38:56मैं तुम्हें टॉर्चर कर रही हूं।" शौर्य ने
- 9:38:58शिकायत करते हुए कहा, और नहीं तो क्या? यह
- 9:39:02तो किसी टॉर्चर से भी ज्यादा खतरनाक है।
- 9:39:04और तुम तो मुझे लगता है कि मुझे सताने के
- 9:39:06नए-नए तरीके ढूंढती रहती हो। इतना कहकर
- 9:39:09शौर्य अपनी कुर्सी पर जाकर बैठ गया। शौर्य
- 9:39:12को किसी बच्चे की तरह रूठा हुआ देखकर
- 9:39:14शिप्रा के चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान आ
- 9:39:16गई। वो उसके चेयर के पीछे गई और झुककर
- 9:39:19अपनी ठोड़ी उसके कंधे पर रख [संगीत] दी।
- 9:39:21फिर अपना गाल उसके गाल से सटाते हुए अपनी
- 9:39:24बाहों का हार उसकी गर्दन के चारों तरफ डाल
- 9:39:26दिया। शिप्रा ने प्यार से कहा, "पता है
- 9:39:30यूं रूठे हुए तुम कितने क्यूट लग रहे हो।"
- 9:39:32"मन तो कर रहा है तुम्हें बस अभी के अभी
- 9:39:35खा जाऊं।" शौर्य ने उसका हाथ अपनी गर्दन
- 9:39:37से हटाते हुए कहा, पहले घाव देती हो फिर
- 9:39:40मलहम लगाती हो। [संगीत]
- 9:39:42मुझे इसकी कोई जरूरत नहीं है। इससे अच्छा
- 9:39:44है तुम मुझसे दूर से ही बात करो। कहते हुए
- 9:39:47उसने शिप्रा को खुद से अलग कर दिया।
- 9:39:49शिप्रा हैरानी से शौर्य को देखने लगी। उसे
- 9:39:52उम्मीद नहीं थी कि शौर्य इस तरह उसे खुद
- 9:39:54से अलग [संगीत] कर देगा। शौर्य ने उसे
- 9:39:56समझाते हुए कहा, तुम्हें पता है ना कि यह
- 9:39:59घर नहीं ऑफिस है। सो बिहेव लाइक अ वर्किंग
- 9:40:02गर्ल। इतना कहकर शौर्य उठा और शिप्रा को
- 9:40:05उसकी चेयर तक ले जाकर बैठा दिया। शिप्रा
- 9:40:08बस आंखें बड़ी किए उसे देखती रही। कुछ पल
- 9:40:11बाद शिप्रा ने शौर्य का हाथ पकड़ते हुए
- 9:40:12मासूमियत से कहा, "मुझे भूख लगी है। शौर्य
- 9:40:16उसे उसकी चेयर पर बैठाकर वापस अपनी चेयर
- 9:40:18की तरफ जा रहा था। शिप्रा के हाथ पकड़ने
- 9:40:21पर वो उसकी तरफ पलटा और हैरानी से पूछा।
- 9:40:24इस समय यह कौन सा भूख लगने का समय है?
- 9:40:27शिप्रा ने मासूमियत से कहा, "मैंने सुबह
- 9:40:30से कुछ खाया नहीं है।" शौर्य का चेहरा
- 9:40:32गंभीर हो गया। उसने नाराजगी से पूछा, क्या
- 9:40:36तुमने अभी तक खाना नहीं खाया है? तुम्हारा
- 9:40:38दिमाग तो ठीक है ना? क्या मतलब हुआ अभी तक
- 9:40:41भूखे रहने का? शिप्रा ने बच्चे जैसी
- 9:40:44मासूमियत से कहा, "तुम कनिका के साथ थे,
- 9:40:46तो चिंता में मेरी भूख ही मर गई थी।" अब
- 9:40:49तुम सामने हो तो पेट में मरोड़ सी उठ रही
- 9:40:51है। शौर्य ने एक पल उसे घूर कर देखा। फिर
- 9:40:55उसका हाथ पकड़ कर उसे उठाते हुए बोला, चलो
- 9:40:58बाहर [संगीत] चलते हैं। अब तो मुझे भी भूख
- 9:41:01लगने लगी है। शिप्रा अपनी चेयर से उठी और
- 9:41:04खुश होते हुए उसी केबिन में मौजूद एक
- 9:41:06आदमकद शीशे के सामने चली गई। उसने अपने
- 9:41:09कपड़े ठीक किए और मेकअप संवारा। फिर शौर्य
- 9:41:12के सामने आकर उसकी बाहों में अपनी बाहें
- 9:41:14फंसाते हुए बोली, चलो, मैं तैयार हूं।
- 9:41:17शौर्य ने एक नजर उसकी बाह की तरफ डाली और
- 9:41:20अपना हाथ छुड़ाते हुए कहा, "अं खुद को और
- 9:41:23सताने का मौका नहीं दूंगा।"
- 9:41:25इसलिए मुझसे दूर होकर ही चलो। वैसे भी यह
- 9:41:28तुम्हारा ऑफिस है। कोई अगर तुम्हें मेरे
- 9:41:30इतने पास देखेगा तो तुम्हारे लिए बातें
- 9:41:32बनना शुरू हो जाएंगी। शिप्रा ने इस समय
- 9:41:35शौर्य से तर्क करना सही नहीं समझा। वो
- 9:41:38उसके साथ अपने ऑफिस से बाहर निकल गई।
- 9:41:41शिप्रा शौर्य के साथ फैब्रिक [संगीत]
- 9:41:43ट्रेन के ऑफिस के पास ही मौजूद दावत
- 9:41:45रेस्टोरेंट में पहुंच गई। अचानक उसकी नजर
- 9:41:48रेस्टोरेंट की एक टेबल [संगीत] पर पड़ी।
- 9:41:50वहां बैठे दो लोगों को देखते ही उसकी
- 9:41:53आंखें हैरानी से फैल गई। अगले ही पल वह
- 9:41:56दोनों की नजरों से बचने की कोशिश करने लगी
- 9:41:59[संगीत] और जल्दी से शौर्य के साथ एक
- 9:42:01कैबिन में चली गई। उसके चेहरे पर परेशानी
- 9:42:04के भाव साफ नजर आ रहे थे। शौर्य ने भी इसे
- 9:42:07तुरंत महसूस कर लिया। चेयर पर बैठते ही
- 9:42:10[संगीत] उसने शिप्रा की तरफ देखते हुए
- 9:42:12पूछा। क्या हुआ? यहां आते हुए तो तुम्हारा
- 9:42:15मूड बिल्कुल ठीक था। लेकिन अब ऐसा लग रहा
- 9:42:18है जैसे किसी सोच में उलझ गई हो। [संगीत]
- 9:42:20शिप्रा ने चिंतित स्वर में कहा, "तुमने
- 9:42:23देखा नहीं?" यहां एक टेबल पर अभी तुम्हारी
- 9:42:26स्वर्णलता बुआ और अशोक सोलंकी दोनों साथ
- 9:42:29बैठे हुए थे। शौर्य ने संदेह भरी नजरों से
- 9:42:32उसकी तरफ देखते हुए पूछा। क्या? तुम किस
- 9:42:36अशोक सोलंकी की बात कर रही हो?" शिप्रा ने
- 9:42:39कैबिन के दरवाजे की तरफ देखते हुए [संगीत]
- 9:42:41कहा, "इतनी जल्दी भूल गए?" अभी दो दिन
- 9:42:44पहले ही तो राधिका की इंगेजमेंट पार्टी
- 9:42:46में मिले थे। शौर्य के चेहरे पर उलझन के
- 9:42:48[संगीत] भाव आ गए। उसने पूछा लेकिन यह
- 9:42:51अशोक सोलंकी स्वर्णलता बुआ से क्यों मिल
- 9:42:54रहा है? शिप्रा ने अपनी आशंका जाहिर करते
- 9:42:57हुए कहा अभी दो दिन पहले [संगीत] जब वो
- 9:43:00राधिका की इंगेजमेंट पार्टी में तुमसे
- 9:43:01मिला था तब वो फैब्रिक ट्रेंड के साथ
- 9:43:03[संगीत] बिजनेस करना चाहता था। लेकिन वहां
- 9:43:06पार्टी में जिस तरह की घटना हुई उससे तुम
- 9:43:08समझ सकते हो कि वह अच्छी तरह समझ गया होगा
- 9:43:10कि अब उसकी डील [संगीत] फैब्रिक ट्रेन से
- 9:43:12होने से रही। तो हो सकता है कि वह फैब्रिक
- 9:43:16ट्रेन में घुसने का कोई दूसरा रास्ता तलाश
- 9:43:18रहा हो। शायद इसी वजह से [संगीत] वो
- 9:43:20स्वर्णलता बुआ से मिल रहा है। शौर्य को
- 9:43:23शिप्रा की आशंका सही जान पड़ी। उसने उसकी
- 9:43:26तरफ देखते [संगीत] हुए पूछा। तो फिर अब
- 9:43:29तुम्हारा क्या विचार है? शिप्रा कुछ पल
- 9:43:31सोचती रही। फिर टेबल पर शौर्य की तरफ
- 9:43:34थोड़ा झुकते हुए बोली, पता नहीं मैंने अभी
- 9:43:37कुछ सोचा नहीं है। क्या मैं एक बार उनके
- 9:43:40सामने चली जाऊं? शौर्य ने जिज्ञासा से
- 9:43:43पूछा, [संगीत]
- 9:43:44लेकिन इससे क्या होगा? तुम उनके सामने
- 9:43:46जाकर क्या बोलोगी? शिप्रा ने धीरे से कहा,
- 9:43:50"मैं सोच रही हूं कि उनके सामने [संगीत]
- 9:43:52जाकर उन्हें चौंका दूं।" अगर उनके मन में
- 9:43:54कुछ चोरी होगी, तो मुझे देखते ही उनके
- 9:43:56चेहरे पर ऐसा भाव जरूर नजर आएगा जैसे वे
- 9:43:59कुछ गलत करते हुए पकड़े गए हो। [संगीत]
- 9:44:01तुम बताओ क्या यह सही रहेगा? शिप्रा की
- 9:44:05बात सुनकर शौर्य के चेहरे पर मुस्कान आ
- 9:44:07गई। वो मुस्कुराते हुए बोला, जब तुम्हारे
- 9:44:10दिमाग में यह करने का विचार आ ही गया है
- 9:44:12तो फिर सोच क्या रही हो? जाओ जाकर उन्हें
- 9:44:15चौंका दो। शिप्रा ने उसकी तरफ देखते हुए
- 9:44:18दोबारा पुष्टि की। तुम सच कह रहे हो?
- 9:44:21पक्का चली जाऊं। शौर्य ने उसे उत्साहित
- 9:44:24करते हुए कहा, "अब इसमें इतना सोचने की
- 9:44:27क्या जरूरत है? जब तुमने सोच ही लिया
- 9:44:29[संगीत] है तो चली जाओ।" शिप्रा बिना कुछ
- 9:44:31बोले टेबल से उठी और कैबिन से बाहर आ गई।
- 9:44:35उसने दूर से ही एक नजर स्वर्णलता जी और
- 9:44:37अशोक सोलंकी की तरफ डाली और फिर धीरे-धीरे
- 9:44:40उनकी ओर कदम बढ़ा दिए। स्वर्णलता जी के
- 9:44:43सामने पहुंचकर वो आश्चर्यचकित होने का
- 9:44:46अभिनय करते हुए बोली। अरे स्वर्णलता जी आप
- 9:44:50यहां? क्या संयोग है कि आप यहां मिल गई?
- 9:44:53मैं भी यहां अपने एक दोस्त के साथ खाना
- 9:44:55खाने के लिए आई थी। इतना कहकर शिप्रा ने
- 9:44:57ऐसा जताया [संगीत] जैसे उसने अभी-अभी अशोक
- 9:45:00सोलंकी को देखा हो। उसने तुरंत अपनी बात
- 9:45:03आगे बढ़ाई। अरे मिस्टर अशोक सोलंकी भी
- 9:45:06यहां है। क्या कोई बिजनेस डीलिंग की बात
- 9:45:09[संगीत] हो रही है सोलंकी साहब के साथ?
- 9:45:10स्वर्णलता जी? शिप्रा को अपने सामने खड़ा
- 9:45:13देखकर स्वर्णलता जी की आंखें सिकुड़ गई।
- 9:45:16सिर्फ स्वर्णलता जी ही नहीं बल्कि अशोक
- 9:45:19सोलंकी की आंखें भी आश्चर्य से फैल गई।
- 9:45:22दोनों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि
- 9:45:24उनकी मुलाकात इस तरह अचानक [संगीत] सामने
- 9:45:26आ जाएगी। स्वर्णलता जी ने बात संभालते हुए
- 9:45:30कहा, "ऐसा कुछ खास नहीं है। बस अशोक जी ने
- 9:45:33मिलने के लिए बुलाया था तो मैं आ गई।
- 9:45:35[संगीत] बाकी कोई खास बात नहीं है। लेकिन
- 9:45:39तुम यहां क्या कर रही हो?" शिप्रा ने
- 9:45:41सहजता से कहा, लगता है मैं बीच में आकर आप
- 9:45:45लोगों को डिस्टर्ब कर रही हूं। कोई बात
- 9:45:47नहीं। आप लोग बात कीजिए। मैं तो यहां खाना
- 9:45:50खाने के लिए आई थी। इसलिए अब जाती हूं।
- 9:45:52इतना कहकर शिप्रा वहां से हट गई और मौका
- 9:45:56देखकर वापस उसी कैबिन में चली गई जहां
- 9:45:58शौर्य पहले से बैठा हुआ था। शिप्रा के
- 9:46:02अंदर आते ही शौर्य ने उत्सुकता से पूछा।
- 9:46:05तो फिर कैसा रहा? शिप्रा ने नाराजगी से
- 9:46:08कहा, अब क्या बताऊं? मुझे देखते ही उन
- 9:46:11दोनों के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी। अब
- 9:46:14मैं भी देखती हूं कि तुम्हारी बुआ अशोक
- 9:46:16सोलंकी के साथ काम करने की बात कैसे करती
- 9:46:19हैं। शौर्य ने उसे समझाते हुए कहा, उनके
- 9:46:23लिए तुम अपना मूड क्यों खराब कर रही हो?
- 9:46:25उनको जो करना है [संगीत] करने दो। लेकिन
- 9:46:27फाइनली डिसीजन तो तुम्हें ही लेना है कि
- 9:46:30उनके साथ आगे काम करना है या नहीं। शिप्रा
- 9:46:33ने उसकी बात समझते हुए कहा, "तुम सही कह
- 9:46:36रहे हो।" मैं क्यों अपना दिमाग खराब कर
- 9:46:38रही हूं।
- 9:46:39[संगीत]
- 9:46:39वे दोनों भले ही कितनी भी मीटिंग कर लें
- 9:46:42लेकिन अशोक सोलंकी के साथ काम करना है या
- 9:46:44नहीं करना है यह फैसला तो आखिरकार मुझे ही
- 9:46:47लेना है और यह तो मैं कभी होने नहीं
- 9:46:50दूंगी। शौर्य ने मुस्कुराते हुए उसका
- 9:46:53उत्साह बढ़ाया। यह बात हुई ना? अब तुम लग
- 9:46:56रही हो कि तुम किसी कंपनी की सीईओ [संगीत]
- 9:46:58हो। उसी समय वेटर शिप्रा का आर्डर लेकर
- 9:47:02केबिन में आ गया। उसने दोनों के सामने
- 9:47:04प्लेटें रखी और फिर केबिन से बाहर चला
- 9:47:06गया। [संगीत]
- 9:47:08इस समय शिप्रा शौर्य के सामने बैठी हुई
- 9:47:10थी। अचानक उसके मन में कुछ ख्याल आया तो
- 9:47:13वह अपनी जगह से उठी और जाकर शौर्य के साथ
- 9:47:16उसके सोफे पर बैठ गई। शिप्रा को अपने पास
- 9:47:19बैठा [संगीत] देखकर शौर्य ने हैरानी से
- 9:47:21पूछा। अच्छा भला तू सामने बैठी हुई थी। अब
- 9:47:25यहां क्यों आ गई? शिप्रा ने मासूमियत से
- 9:47:28पूछा। क्यों? मैं यहां क्यों नहीं बैठ
- 9:47:31सकती? कहते हुए उसने अपना दाया हाथ शौर्य
- 9:47:34के बाएं [संगीत] हाथ में फंसा लिया। शौर्य
- 9:47:37ने अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करते हुए
- 9:47:39कहा, अब फिर से तुम यह क्या करने लगी हो?
- 9:47:42अभी यहां आने से पहले बात हुई थी ना कि
- 9:47:44तुम मुझसे दूर [संगीत] रहकर ही बात करोगी
- 9:47:46तो अब यह क्या है? शिप्रा ने उसका हाथ और
- 9:47:50कसकर पकड़ते हुए कहा, "वो तो ऑफिस की बात
- 9:47:53थी ना? यहां उसकी क्या जरूरत है?" शौर्य
- 9:47:57थोड़ा खिसक कर उससे दूर होने की कोशिश
- 9:47:59करते हुए बोला, [संगीत]
- 9:48:00"ऑफिस ही नहीं, हर जगह इसकी जरूरत है।
- 9:48:03तुम्हें तो कोई फर्क पड़ता नहीं। तुम मेरे
- 9:48:06अंदर आंख भड़का कर फिर दूर होकर तमाशा
- 9:48:08देखती रहती हो। इसलिए ज्यादा पास आने की
- 9:48:11जरूरत नहीं है। [संगीत]
- 9:48:13इसके बाद शौर्य ने शिप्रा की प्लेट उसके
- 9:48:15सामने खिसका दी। फिर अपनी प्लेट से चम्मच
- 9:48:17में पास्ता लेकर वह [संगीत] अपने मुंह की
- 9:48:19तरफ ले ही जा रहा था कि शिप्रा ने उसका
- 9:48:21चम्मच वाला हाथ पकड़ लिया और अपना मुंह
- 9:48:24आगे करके चम्मच [संगीत] से पास्ता खा
- 9:48:26लिया। शौर्य ने उसे खुद से अलग करने की
- 9:48:29कोशिश करते [संगीत] हुए कहा, "यह क्या है?
- 9:48:31अपना खाना खुद खा सकती हो ना?"
- 9:48:34शिप्रा ने किसी बच्ची की तरह जिद करते हुए
- 9:48:36कहा, मैं तुम्हारे कारण पूरे [संगीत] दिन
- 9:48:39भूखी रही हूं। इसलिए खाना भी तुम्हारे हाथ
- 9:48:41से ही खाऊंगी। मुझे बहुत जोर की भूख लगी
- 9:48:44है। इसलिए बिना किसी हुज्जत के सीधे-सीधे
- 9:48:47[संगीत] अपने हाथों से खाना खिला दो।
- 9:48:50शौर्य ने उसे झिड़कते हुए कहा, बच्चों की
- 9:48:53तरह जिद करने का क्या मतलब हुआ? अपना हाथ
- 9:48:55सलामत है [संगीत] ना? इसलिए खुद ही खाओ।
- 9:48:59लेकिन शिप्रा ने चम्मच पकड़ने की कोई
- 9:49:00कोशिश नहीं की। [संगीत]
- 9:49:02शौर्य ने कुछ पल उसे नजरअंदाज करने की
- 9:49:04कोशिश की और फिर से चम्मच में पास्ता लेकर
- 9:49:07अपने [संगीत] मुंह की तरफ बढ़ाया। इस बार
- 9:49:09भी शिप्रा ने अपना मुंह खोलकर उसकी तरफ कर
- 9:49:12दिया। शौर्य का हाथ वहीं ठिटक गया। मजबूरन
- 9:49:16उसे चम्मच शिप्रा के मुंह में ही डालना
- 9:49:18पड़ा। शौर्य समझ गया कि अब शिप्रा को कुछ
- 9:49:21भी समझाने का [संगीत] कोई फायदा नहीं है।
- 9:49:24आखिरकार उसने अपने हाथ से ही उसे खाना
- 9:49:26खिलाना शुरू कर दिया। शिप्रा भी शौर्य के
- 9:49:30बाएं हाथ को अपने दोनों हाथों में थामे
- 9:49:32हुए अपना सिर उसके कंधे पर टिका बैठी रही।
- 9:49:36जब शिप्रा का पेट भर गया तो उसने और खाने
- 9:49:38से मना कर दिया। तभी उसकी नजर [संगीत]
- 9:49:41शौर्य की प्लेट पर गई। उसे एहसास हुआ कि
- 9:49:44उसे खिलाने के चक्कर में शौर्य ने खुद कुछ
- 9:49:46खाया ही नहीं था। अब शिप्रा ने अपने हाथों
- 9:49:49से शौर्य को खिलाना शुरू कर दिया। शौर्य
- 9:49:52ने मना भी किया। लेकिन [संगीत] शिप्रा
- 9:49:54कहां मानने वाली थी? आखिरकार उसे भी
- 9:49:57शिप्रा के हाथों से खाना पड़ा। शौर्य ने
- 9:50:00उसे रोकने की कोशिश करते हुए कहा, "अब
- 9:50:03क्या तुम मुझे बच्चा बनाकर ही मानोगी?"
- 9:50:05शिप्रा ने नै नेकिन से खुद ही शौर्य का
- 9:50:07मुंह साफ करते हुए मुस्कुरा कर कहा। मुझे
- 9:50:11कोई ऐतराज नहीं है। कम से कम तब तो तुम
- 9:50:13मेरी बात बिना किसी हुज्जत के मानोगे। जब
- 9:50:17दोनों का खाना हो गया तो शौर्य ने कहा अब
- 9:50:20खाना हो गया है तो घर चलें। [संगीत]
- 9:50:23शिप्रा ने बुरा सा मुंह बनाकर शिकायत की।
- 9:50:26ऑफिस की बात को लेकर कितनी देर तक अपना
- 9:50:28मूड खराब रखोगे? ऐसे तुम अच्छे भी नहीं
- 9:50:31लगते। शौर्य ने सफाई देते हुए कहा, अब तो
- 9:50:34मैं कुछ बोल भी नहीं रहा [संगीत] हूं।
- 9:50:36खाना हो गया इसलिए तो घर चलने की बात कर
- 9:50:39रहा हूं। शिप्रा ने प्यार भरे स्वर में
- 9:50:42पूछा। घर जाने की इतनी जल्दी क्या है?
- 9:50:46क्या मेरे साथ अच्छा नया नहीं लग रहा?
- 9:50:49शिप्रा की बात सुनकर शौर्य उसकी तरफ देखने
- 9:50:51लगा। शिप्रा उसकी आंखों में झांकते हुए
- 9:50:54बोली लगता है पहले मैंने तुम्हारा मूड कुछ
- 9:50:57ज्यादा ही खराब कर दिया है तो क्या पहले
- 9:51:00तुम्हारा मूड अच्छा करना पड़ेगा शौर्य भी
- 9:51:03भावहीन चेहरे के साथ उसकी आंखों में देखने
- 9:51:05लगा जैसे [संगीत] वो जानना चाहता हो कि
- 9:51:08शिप्रा आखिर किस तरह उसका मूड अच्छा करने
- 9:51:11वाली है। शिप्रा अपनी जगह से उठी और घूम
- 9:51:14कर शौर्य के दूसरी तरफ चली गई। उसने एक
- 9:51:17बार कैबिन के दरवाजे की तरफ देखा और फिर
- 9:51:20धीरे से शौर्य की गोद में बैठ गई। उसने
- 9:51:23अपनी बाहों का हार शौर्य के गले में डाल
- 9:51:25दिया। फिर धीरे से उसके गाल पर एक किस
- 9:51:28किया और उसके कान के पास अपने होंठ ले
- 9:51:31जाकर फुसफुसाई। क्या अब कुछ मूड ठीक हुआ
- 9:51:34या [संगीत] अभी भी कोई शिकायत है? शिप्रा
- 9:51:37के इतना करीब आते ही शौर्य का गला सूखने
- 9:51:40लगा। उसके [संगीत] कानों के पास शिप्रा की
- 9:51:43गर्म सांसों को महसूस करते ही उसके पूरे
- 9:51:46शरीर में एक सिहरन सी दौड़ गई। उसकी
- 9:51:48बेचैनी बढ़ने लगी। शिप्रा के सवाल का जवाब
- 9:51:51देते हुए शौर्य ने धीमे स्वर में कहा,
- 9:51:55"प्यास पूरे ग्लास की है और तुम एक बूंद
- 9:51:58से ही [संगीत] प्यास बुझाना चाहती हो।" इस
- 9:52:00तरह तो तुम मेरी प्यास और बढ़ा रही हो।
- 9:52:03शौर्य की बात सुनकर [संगीत] शिप्रा के
- 9:52:05होठों पर प्यारी सी मुस्कान खिल गई। उसने
- 9:52:08अपनी नाक शौर्य [संगीत] की नाक से हल्के
- 9:52:10से सटाते हुए पूछा। अच्छा तो फिर यह भी
- 9:52:14बता [संगीत] दो कि तुम्हारी प्यास कैसे
- 9:52:16बुझेगी? शौर्य ने मुस्कुराते हुए कहा, अब
- 9:52:20तो यह प्यास यहां बुझने से [संगीत] रही।
- 9:52:23यह तो घर जाकर ही बुझेगी। कहते हुए शौर्य
- 9:52:26की [संगीत] बाहें भी शिप्रा के चारों तरफ
- 9:52:28लिपट गई। उसे महसूस हो रहा था कि शिप्रा
- 9:52:32खुद पर से अपना नियंत्रण [संगीत] खोती जा
- 9:52:33रही है। इसलिए उसने उसके कान में धीरे से
- 9:52:36फुसफुसाया।
- 9:52:38यह हमारा घर नहीं [संगीत] है। सच कहूं तो
- 9:52:41मैं भी नहीं चाहता कि तुमसे अलग हूं।
- 9:52:43लेकिन यह जगह ठीक नहीं है। चलो घर चलते
- 9:52:47हैं। शिप्रा बेमन से शौर्य की गोद से उठी
- 9:52:50[संगीत] और उसके सामने आकर बैठ गई। उसने
- 9:52:53खुद को दुरुस्त किया। इसके बाद शौर्य ने
- 9:52:56बेल बजा दी। अगले ही पल वेटर कैबिन में आ
- 9:52:59गया। दूसरी तरफ कनिका, कुणाल, प्रतीक और
- 9:53:03अपने भाइयों के साथ जंगल सफारी से होटल
- 9:53:05वापस आ गई थी। प्रतीक और कुणाल भी कनिका
- 9:53:08से विदा लेकर अपने घर के लिए निकल गए थे।
- 9:53:11अब वहां सिर्फ कनिका, नंदिनी, [संगीत]
- 9:53:13करण, विराज और रुद्र रह गए थे। कुणाल और
- 9:53:17प्रतीक के जाने के बाद सभी कनिका के
- 9:53:19रिश्ते को लेकर आपस में विचार विमर्श करने
- 9:53:22लगे। [संगीत] इन सभी भाई बहनों में विराज
- 9:53:25सबसे बड़ा था। जबकि बाकी सभी लगभग एक ही
- 9:53:28उम्र के थे। कनिका और करण जुड़वा थे। जबकि
- 9:53:31रुद्रविराज का छोटा भाई था और नंदिनी भी
- 9:53:34उन्हीं के साथ थी। सभी भाई बहनों की आपस
- 9:53:37में खूब बनती [संगीत] थी और अब सभी एक
- 9:53:39निर्णय पर पहुंचना चाहते थे कि कनिका के
- 9:53:42लिए क्या बेहतर रहेगा। विराज ने अपनी राय
- 9:53:45स्पष्ट करते हुए कहा, "मुझे लगता है
- 9:53:48ज्यादा सोचने की जरूरत ही नहीं है। कुणाल
- 9:53:51तुम्हारे लिए एकदम परफेक्ट है। उसने अपनी
- 9:53:54फैमिली का बिजनेस बहुत अच्छे से संभाल रखा
- 9:53:56है। पिछले एक साल में उसकी कंपनी ने अच्छी
- 9:53:59खासी ग्रोथ की है। जहां तक रुतबे की बात
- 9:54:02है तो विशालगढ़ में उसकी पहचान के बारे
- 9:54:04में भी कुछ कहने की जरूरत नहीं है। विराज
- 9:54:08ने जैसे कनिका के लिए कुणाल के नाम पर
- 9:54:10अपनी मोहर लगा दी थी। कनिका ने करण की तरफ
- 9:54:13देखते हुए पूछा इस बारे में तुम्हारा क्या
- 9:54:16विचार है करण करण ने कुछ सोच कर कहा देखो
- 9:54:20तुमने पहले ही शौर्य को नापसंद कर दिया है
- 9:54:23इसलिए [संगीत] तुम्हारे पास ज्यादा ऑप्शन
- 9:54:25नहीं है ले देकर कुणाल ही बचता है विराज
- 9:54:28भाई ने सही कहा शहर में उसका अच्छा खासा
- 9:54:31नाम और पहचान है इसलिए अब इसमें ज्यादा
- 9:54:34[संगीत] सोचने की जरूरत कहां रह जाती है
- 9:54:37वैसे अगर आज मुझे एक व्यक्ति के तौर पर
- 9:54:40दोनों में से किसी एक को पसंद करना पड़े
- 9:54:42तो मैं निसंकोच शौर्य को पसंद करूंगा। बस
- 9:54:47रुतबे के मामले में ही वह कुणाल से पीछे
- 9:54:49रह जाता है। करण की बात सुनकर विराज के
- 9:54:52चेहरे पर हल्की शरारती मुस्कान आ गई। उसने
- 9:54:55तंज कसते हुए पूछा। कमाल है। मुझे नहीं
- 9:54:58लगा था कि एक ही दिन में शौर्य को लेकर
- 9:55:01तुम्हारा विचार बदल जाएगा। वैसे क्या मैं
- 9:55:04जान सकता हूं कि इसका कारण क्या है? करण
- 9:55:07ने अपने कंधे उचकाते हुए कहा। यह तो मुझे
- 9:55:10भी समझ नहीं आ रहा। आज शौर्य से मिलने से
- 9:55:13पहले तक मुझे वह जरा भी पसंद नहीं था।
- 9:55:16लेकिन पता नहीं क्यों आज वो मुझे कुछ
- 9:55:19ज्यादा ही बहाने लगा। अब कनिका ने रुद्र
- 9:55:22की तरफ देखा और पूछा इस बारे में तुम्हारा
- 9:55:26क्या विचार है रुद्र? रुद्र ने बिना किसी
- 9:55:29झिझक के कहा अगर मेरी पसंद जानना चाहती हो
- 9:55:32तो मुझे भी [संगीत] कुणाल ही पसंद है।
- 9:55:35शौर्य तो मुझे पहले से ही नापसंद है।
- 9:55:37कनिका को रुद्र और शौर्य के बीच हुए
- 9:55:40पुराने पंगे की बात याद आ गई। उसने
- 9:55:42उत्सुकता से पूछा अच्छा रुद्र तुम बताओगे
- 9:55:45कि तुम्हारा और शौर्य का पहले क्या पंगा
- 9:55:47हुआ था जिसके कारण तुम शौर्य के दुश्मन
- 9:55:50बने हुए हो? रुद्र बीती बातों को याद करते
- 9:55:53हुए बोला कुछ खास नहीं। वो हीरोइन है ना
- 9:55:57नताशा कपूर उसी को लेकर दो-तीन दिन पहले
- 9:56:01शौर्य के साथ पंगा हो गया था। नताशा कपूर
- 9:56:04का नाम सुनते ही कनिका की जिज्ञासा अचानक
- 9:56:07बढ़ गई। उसने [संगीत] तुरंत पूछा नताशा
- 9:56:10कपूर उससे भला शौर्य का क्या रिश्ता है?
- 9:56:14रुद्र ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा। जब
- 9:56:18मैं विशालगढ़ किला घूमने गया था तब मैंने
- 9:56:20नताशा कपूर को शौर्य के आगे पीछे घूमते
- 9:56:23देखा [संगीत] था। दोनों को देखकर ही लगता
- 9:56:26था कि दोनों एक दूसरे के लिए ही बने हैं।
- 9:56:29कनिका कुछ पल तक खामोश रही। उसके चेहरे पर
- 9:56:32अचानक कई सवाल उभर आए थे। क्या सच में
- 9:56:36नताशा कपूर और शौर्य के बीच कुछ है? क्या
- 9:56:39कनिका कुणाल को पसंद करेगी या शौर्य को?
- 9:56:42विशाल घर के पाम गार्डन स्थित दलाल हाउस
- 9:56:45के सामने एक कार आकर रुकी। कार से अशोक
- 9:56:48सोलंकी बाहर निकला। उसकी नजर सामने लगे
- 9:56:51गेट की नेमप्लेट पर पड़ी। उस पर लिखा था
- 9:56:55नटवर दलाल और उसके ठीक नीचे ब्रैकेट में
- 9:56:58लिखा था मुख्तार भाई। नेमप्लेट पढ़ते ही
- 9:57:01अशोक ने मन ही मन सोचा अच्छा तो मुख्तार
- 9:57:06भाई का असली नाम नटवर दलाल है। मुझे तो आज
- 9:57:10तक यह पता ही नहीं था। तभी एक सिक्योरिटी
- 9:57:12गार्ड दौड़कर कार के पास आया। अशोक ने
- 9:57:15उसकी तरफ देखते हुए कहा, "मेरा पहले से ही
- 9:57:18मुख्तार भाई से अपॉइंटमेंट फिक्स [संगीत]
- 9:57:19है। उन्हें इनफॉर्म कर दो कि अशोक सोलंकी
- 9:57:22आया हुआ है।" गार्ड ने अपने दूसरे साथी को
- 9:57:25गेट खोलने का इशारा किया और अदब से अशोक
- 9:57:28से कहा, "साहब आपका ही इंतजार कर रहे
- 9:57:30हैं।" अगले ही पल अशोक सोलंकी की कार दलाल
- 9:57:34हाउस के अंदर दाखिल हो गई। कुछ देर बाद
- 9:57:37अशोक सोलंकी दलाल हाउस के डाइनिंग रूम में
- 9:57:40बैठा मुख्तार भाई का इंतजार कर रहा था।
- 9:57:43उसके सामने कल्ला दोनों हाथ सामने जोड़े
- 9:57:46खड़ा था। उसने विनम्रता से कहा, आप बैठिए।
- 9:57:50मुख्तार भाई अभी हाजिर होते हैं। अशोक ने
- 9:57:53कल्ला को अपने सामने देखा तो उसके मन में
- 9:57:55उठ रही जिज्ञासा आखिरकार सवाल बनकर बाहर आ
- 9:57:59गई। उसने [संगीत] पूछा मुझे तो पता ही
- 9:58:02नहीं था कि मुख्तार भाई का असली नाम नटवर
- 9:58:05दलाल है। उनका नाम मुख्तार भाई कैसे पड़ा?
- 9:58:08कल्ला अशोक की बात सुनकर मुस्कुराया और
- 9:58:11सहजता से बोला, "यह इतना बड़ा कोई राज
- 9:58:14नहीं है। मुख्तार भाई को जानने वाले सारे
- 9:58:17पुराने लोग उनके असली नाम से वाकिफ हैं।
- 9:58:20हां, बहुत सारे लोगों को उनके इस उपनाम के
- 9:58:23कारण गलतफहमी हो जाती है कि उनका नाम
- 9:58:25मुख्तार अंसारी या मुख्तार [संगीत] अहमद
- 9:58:28है। अशोक ने भी अपनी पुरानी गलतफहमी बताते
- 9:58:31हुए कहा, इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं
- 9:58:34है। [संगीत] मैं खुद उनके इस उपनाम के
- 9:58:36कारण उन्हें कोई मुस्लिम शख्स ही समझता
- 9:58:38था। कल्ला ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा
- 9:58:42ऐसा नहीं है। शुरुआत में वह यहां के लोअर
- 9:58:45कोर्ट में मुख्तारी का काम किया करते थे।
- 9:58:48उनके पास जो मामले आया करते थे, उनमें से
- 9:58:50ज्यादातर मामले कोर्ट के बाहर ही निपट
- 9:58:52जाया करते थे। शुरुआत में कोर्ट के कुछ
- 9:58:55छुटभ्य वकील अपने काम कोर्ट के बाहर ही
- 9:58:58इनके जरिए निपटाने लगे। आप यह समझ सकते
- 9:59:00[संगीत] हैं कि इस तरह के छोटे वकीलों के
- 9:59:03यह प्रतिनिधि बन गए थे। धीरे-धीरे इनका
- 9:59:06रुआबाब बढ़ता चला गया। एक समय ऐसा भी आया
- 9:59:09जब सिर्फ छोटे वकील ही नहीं बल्कि [संगीत]
- 9:59:12बड़े वकीलों के मामले भी इनके पास आने लगे
- 9:59:14जो कोर्ट के बाहर मामला निपटाना चाहते थे।
- 9:59:17कम समय में ही इनकी प्रसिद्धि बहुत बढ़ गई
- 9:59:20थी। तब लोग इन्हें इनके असली नाम से कम और
- 9:59:23वकीलों द्वारा दिए गए उपनाम मुख्तार भाई
- 9:59:26के नाम से ज्यादा जानने लगे। इसी दौरान
- 9:59:29राजू पटनायक जो अंडरवर के डॉन थे उनकी नजर
- 9:59:32इन पर पड़ी। उनके साथ काम करते हुए इनकी
- 9:59:35शोहरत और भी बढ़ गई। बाद में राजू पटनायक
- 9:59:38[संगीत] ने इन्हें अपना उत्तराधिकारी
- 9:59:40घोषित कर दिया। कल्ला ने संक्षेप में अशोक
- 9:59:43सोलंकी को मुख्तार भाई की पूरी हिस्ट्री
- 9:59:45[संगीत] बता दी। अशोक ने हैरानी से पूछा।
- 9:59:49कमाल है। राजू पटनायक के अपने बच्चे नहीं
- 9:59:52थे क्या जो उन्होंने मुख्तार भाई को अपना
- 9:59:54उत्तराधिकारी घोषित कर दिया? कल्ला ने
- 9:59:57रहस्यमय मुस्कान के साथ जवाब दिया, आपको
- 10:00:00नहीं पता मुख्तार भाई की पत्नी [संगीत]
- 10:00:02राजू पटनायक की बेटी है। कल्ला की बात
- 10:00:05सुनकर अशोक के चेहरे पर भी समझ आने वाला
- 10:00:08भाव उभर आया। इसी समय मुख्तार भाई ने हॉल
- 10:00:11में प्रवेश किया। वह आकर अशोक सोलंकी के
- 10:00:15सामने अपनी टांग पर टांग चढ़ाकर बैठ गए और
- 10:00:17सीधे उसकी तरफ देखते हुए बोले हां तो
- 10:00:20मिस्टर अशोक सोलंकी आपके भाई गजराज सोलंकी
- 10:00:24पहले से ही इस शहर के प्रतिष्ठित लोगों
- 10:00:26में शुमार हैं। उसके बाद भी आपको मुझसे
- 10:00:29क्या काम आ पड़ा है? अशोक को अच्छा लगा कि
- 10:00:32मुख्तार भाई बिना किसी इधर-उधर की बात के
- 10:00:34सीधे मुद्दे पर आ गए थे। इसलिए वह भी सीधे
- 10:00:38मुद्दे पर आते हुए बोला। बात ऐसी है
- 10:00:41मुख्तार भाई कि जिस वजह से मैं आपके पास
- 10:00:43आया हूं वह सीधा आपसे ही जुड़ी हुई है।
- 10:00:47इसलिए मुझे लगा कि इस काम को निपटाने में
- 10:00:49आपसे ज्यादा मददगार कोई दूसरा मेरे लिए
- 10:00:52नहीं हो सकता। भले ही वह मेरा अपना भाई ही
- 10:00:55क्यों ना हो। [संगीत]
- 10:00:56मुख्तार भाई को समझ नहीं आया कि अशोक आखिर
- 10:00:58कहना क्या चाहता है। उन्होंने थोड़े सख्त
- 10:01:01स्वर में पूछा। अच्छा होगा कि आप [संगीत]
- 10:01:04अपनी बात को स्पष्ट करके कहें क्योंकि
- 10:01:06मुझे कुछ समझ नहीं आया कि आप कहना क्या
- 10:01:08चाहते हैं। अशोक ने बिना झिझके अपनी बात
- 10:01:11रख दी। उसने कहा बात यह है मुख्तार भाई कि
- 10:01:15आपने एक भिखारी को हीरो बना दिया है जो आज
- 10:01:18सबके सिर पर चढ़कर नाच रहा है। ना उसकी
- 10:01:21अपनी कोई इज्जत है और ना ही वह किसी दूसरे
- 10:01:24की इज्जत करता है। मुझे यह भी पता चला है
- 10:01:26कि वह आपके लिए भी सिर दर्द बना हुआ है।
- 10:01:29इसलिए मुझे लगा कि अगर उसे निपटाना है तो
- 10:01:32इस काम के लिए आपसे बेहतर आदमी और कौन हो
- 10:01:34सकता है। अशोक ने एक तरह से साफ इशारा कर
- 10:01:38दिया था कि वो किसकी बात कर रहा है।
- 10:01:40मुख्तार भाई को अगले ही पल समझ आ गया कि
- 10:01:43अशोक सोलंकी शौर्य के बारे में बात कर रहा
- 10:01:45है। उनके चेहरे पर गंभीरता छा गई।
- 10:01:49उन्होंने धीमे-मगर तल्ख स्वर में कहा इतने
- 10:01:53वर्षों में अपने [संगीत] किए गए किसी काम
- 10:01:55पर अगर मुझे अफसोस हुआ है सोलंकी साहब तो
- 10:01:58वो यही काम है कि मैंने इस भिखारी की शादी
- 10:02:01शिप्रा से करवा दी। मैं तो उससे बदला लेना
- 10:02:04चाहता था। लेकिन मेरा यह बदला उसके लिए
- 10:02:07उसकी जिंदगी का सबसे [संगीत] अच्छा काम
- 10:02:09साबित हो गया। उस भिखारी के कारण मुझे खुद
- 10:02:12कई बार बेइज्जती का घूंट पीना पड़ा है।
- 10:02:14पहले उसे निपटाना आसान भी था। लेकिन जब से
- 10:02:17शिप्रा राजा साहब की कंपनी की सीईओ बनी है
- 10:02:20तब से मुझे भी उस पर कोई एक्शन लेने से
- 10:02:22पहले कई बार सोचना पड़ता है। यही बात मुझे
- 10:02:26डरा रही है कि कहीं उसके चक्कर में राजा
- 10:02:28साहब से दुश्मनी ना हो जाए। अशोक ने
- 10:02:31मुख्तार भाई की कमजोर नस पकड़ ली थी। वो
- 10:02:34उसके अहंकार पर चोट करते हुए बोला, "ल
- 10:02:37लगता है मुख्तार भाई का प्रभाव अब
- 10:02:39विशालगढ़ में पहले जैसा नहीं रहा।"
- 10:02:41[संगीत]
- 10:02:41आप कब से सोचने लगे कि आपकी दुश्मनी किससे
- 10:02:44हो जाएगी? मुझे एक बार उसके हाथों बेइज्जत
- 10:02:47होना पड़ा और मैं उसे मरने मारने पर उतारू
- 10:02:49हूं। और जैसा मैंने अफवाह सुनी है, आपके
- 10:02:52भाई को मरवाने में भी उसी शौर्य का हाथ
- 10:02:55है। उसके बाद भी आप शांत बैठे हुए हैं।
- 10:02:58अशोक की बात सुनते ही मुख्तार भाई का
- 10:03:00चेहरा गुस्से से लाल हो गया। उन्होंने
- 10:03:03तीखे स्वर में कहा, "यह आप कैसी बात कर
- 10:03:05रहे हैं? मिस्टर सोलंकी? मेरे भाई की मौत
- 10:03:08एक एक्सीडेंट के कारण हुई है। इससे भला उस
- 10:03:11शौर्य का क्या मतलब?" [संगीत] अशोक ने
- 10:03:14व्यंग्ञात्मक मुस्कान के साथ जवाब दिया।
- 10:03:16यह बोलकर आप किसको बहला रहे हैं मुख्तार
- 10:03:18भाई? मैंने [संगीत] सिर्फ दो दिन उसके
- 10:03:20बारे में जानने में लगाए और मेरे सामने यह
- 10:03:23बात आ गई कि आपके [संगीत] भाई की मौत में
- 10:03:25शौर्य का हाथ है और आप खुद यह माने बैठे
- 10:03:28हैं कि आपके भाई की मौत एक्सीडेंट में हुई
- 10:03:30है। कमाल है। लगता है आपके दिल में उस
- 10:03:34शौर्य का खौफ बैठ गया है। इसलिए आप यह
- 10:03:36मानने को तैयार ही नहीं है कि आपके भाई की
- 10:03:39मौत में शौर्य का भी कोई हाथ हो सकता है।
- 10:03:42अशोक की बात मुख्तार भाई को ऐसी लगी जैसे
- 10:03:45किसी ने उनके मुंह पर तमाचा मार दिया हो।
- 10:03:47उन्होंने घूर कर [संगीत] कल्ला की तरफ
- 10:03:49देखा। कल्ला ने सकुचाते हुए कहा, सोलंकी
- 10:03:53साहब सही कह रहे हैं बॉस। मार्केट में हर
- 10:03:56तरफ यही चर्चा है कि रजत बाबा की मौत में
- 10:03:58शौर्य का हाथ है। कोई आपके सामने डर के
- 10:04:01कारण यह बात कहने की हिम्मत नहीं करता।
- 10:04:04अशोक ने आखिरी वार करते हुए कुटिलता से
- 10:04:06कहा, "अगर आपको अपनी पुरानी इज्जत [संगीत]
- 10:04:09चाहिए मुख्तार भाई, तो भले ही आपके भाई की
- 10:04:11मौत में शौर्य का हाथ ना भी हो, फिर भी इस
- 10:04:14अफवाह को शांत करने के लिए आपको शौर्य का
- 10:04:16कुछ ना कुछ तो करना पड़ेगा। तभी [संगीत]
- 10:04:18आप अपना रुतबा कायम रख पाएंगे। अशोक की
- 10:04:22बात सुनकर मुख्तार भाई गहरी सोच में पड़
- 10:04:24गए। कुछ पल बाद अचानक जैसे वह किसी निर्णय
- 10:04:27पर पहुंचे, उन्होंने अपना मोबाइल निकाला
- 10:04:29और किसी को कॉल लगा दिया। उधर चौहान
- 10:04:32फैमिली में विक्रमजीत चौहान, वीरभद्र
- 10:04:35चौहान, भानुमती, कनिका, नंदिनी, [संगीत]
- 10:04:38करण और विराज अपने घर के डाइनिंग रूम में
- 10:04:41बैठे हुए थे। अचानक [संगीत] डाइनिंग हॉल
- 10:04:43की खामोशी तोड़ते हुए विक्रमजीत जी ने
- 10:04:46कनिका से पूछा, "अब बताओ कि तुम्हारा
- 10:04:49फैसला क्या [संगीत] है?" विक्रमजीत जी की
- 10:04:52बात सुनते ही कनिका के चेहरे पर असमंजस के
- 10:04:54भाव उभर आए। वह अभी भी संशय की स्थिति में
- 10:04:57थी। उसने एक बार करण और विराज की तरफ देखा
- 10:05:01और फिर सकुचाते हुए अपने दादाजी [संगीत]
- 10:05:03से बोली अभी मैं किसी निर्णय पर नहीं
- 10:05:05पहुंच पाई हूं दादा जी मुझे अपना फैसला
- 10:05:08लेने के लिए कुछ और समय चाहिए। कनिका की
- 10:05:12बात सुनकर विक्रमजीत जी का धैर्य जवाब
- 10:05:15देने लगा। उन्होंने नाराजगी से कहा, "यह
- 10:05:18तुम क्या खेल खेल रही हो?" तुमने [संगीत]
- 10:05:20पहले कहा था कि तुम्हें शौर्य पसंद नहीं
- 10:05:22है। इसलिए मैंने राठौर फैमिली की वह बात
- 10:05:24मान ली कि तुम लोग एक दूसरे से मिलकर अपने
- 10:05:27बारे में फैसला कर लो। और अब मिलने के बाद
- 10:05:30भी तुम निर्णय नहीं ले पा रही हो। मैं
- 10:05:32क्या जवाब दूंगा चंद्रभान को कि मेरी पोती
- 10:05:35कोई फैसला नहीं कर पा रही है। अब मैं समझ
- 10:05:38सकता हूं कि उस समय चंद्रभान पर भी
- 10:05:40[संगीत] क्या बीती होगी। जब सूर्यभान ने
- 10:05:42उसकी मर्जी के बिना शादी कर ली होगी।
- 10:05:45बच्चों की गलती के कारण हम दोनों दोस्तों
- 10:05:47की दोस्ती दुश्मनी [संगीत] में बदल गई।
- 10:05:49तुमसे सही तो नंदिनी है जिसने एक बार में
- 10:05:52फैसला कर लिया कि उसे प्रतीक से शादी करनी
- 10:05:54है। विराज भी कनिका की बात सुनकर हैरान
- 10:05:57था। वो तो सोच रहा था कि कनिका ने कुणाल
- 10:06:00के साथ अपना रिश्ता आगे बढ़ाने का फैसला
- 10:06:02कर लिया है। लेकिन उसका जवाब सुनकर वह भी
- 10:06:05आश्चर्य से बोला। कनिका यह तुम [संगीत]
- 10:06:08कैसी बात कर रही हो? जब तुमने पहले ही कह
- 10:06:10दिया कि तुम्हें शौर्य पसंद नहीं है तो
- 10:06:12फिर तुम्हें कुणाल के साथ रिश्ते को आगे
- 10:06:14बढ़ाने में क्या दिक्कत है? तुम क्यों
- 10:06:17फालतू में समय बर्बाद कर रही हो? कुणाल
- 10:06:19अच्छा लड़का है। अब [संगीत] इसमें ज्यादा
- 10:06:21सोचने की क्या जरूरत है? कनिका ने गंभीरता
- 10:06:24से जवाब दिया। भाई, [संगीत] यह मेरी पूरी
- 10:06:27जिंदगी का फैसला है। मैं नहीं चाहती कि
- 10:06:30मेरे एक फैसले के कारण मुझे आगे जाकर
- 10:06:33पछताना पड़े। विक्रमजीत जी ने झुंझलाते
- 10:06:36हुए कहा, "तुम्हें क्या लगता है? हम
- 10:06:38तुम्हारे दुश्मन हैं। हमें तुम्हारी फिक्र
- 10:06:40नहीं है। अब मैं तुम्हें कोई और समय नहीं
- 10:06:43दे सकता। तुम्हें अभी फैसला करके बताना है
- 10:06:46कि तुम किसके साथ शादी करने का फैसला करती
- 10:06:48हो। अगर तुम अपना फैसला नहीं सुनाती हो तो
- 10:06:51मैं शौर्य के साथ ही तुम्हारी शादी फिक्स
- 10:06:53कर देता हूं। मैंने बहुत तुम्हारी बात सुन
- 10:06:55ली। अपने दादाजी की बात सुनकर कनिका के
- 10:06:58होश उड़ गए। उसने तुरंत उनसे रिक्वेस्ट
- 10:07:01करते हुए कहा, दादाजी बस आप मुझे दो और
- 10:07:04दिनों की मोहलत दे दीजिए। मैं दो दिनों
- 10:07:07में आपको अपना फैसला सुना दूंगी। [संगीत]
- 10:07:09विक्रमजीत जी गुस्से भरी आंखों से कनिका
- 10:07:11की तरफ देखते रहे। फिर [संगीत] उन्होंने
- 10:07:13वीरभद्र की तरफ देखते हुए कहा, वीरभद्र
- 10:07:16परसों तक अगर यह अपना निर्णय नहीं [संगीत]
- 10:07:18लेती है तो कनिका के बर्थडे के दिन शौर्य
- 10:07:21से इसकी इंगेजमेंट कर दी जाएगी। और इसी
- 10:07:24महीने का कोई ऐसा दिन देख लो जिस दिन
- 10:07:26अच्छा मुहूर्त हो। इसकी शादी का दिन भी
- 10:07:28फाइनल कर दो। अब इसके ऊपर निर्भर करता
- 10:07:31[संगीत] है कि 2 दिन में यह अपना फैसला
- 10:07:32सुनाती है या नहीं। अपने दादाजी की
- 10:07:35[संगीत] बात सुनकर कनिका के चेहरे का रंग
- 10:07:37उड़ गया। वो डरी हुई नजरों से अपने भाइयों
- 10:07:40की तरफ [संगीत] देखने लगी। भानुमती ने भी
- 10:07:43उसे समझाते हुए कहा, "मुझे समझ नहीं आ रहा
- 10:07:46कनिका [संगीत] कि तुम्हें अपना निर्णय
- 10:07:48लेने में इतना समय क्यों लग रहा है। इसमें
- 10:07:50सोचने की जरूरत [संगीत] ही नहीं है।
- 10:07:52तुम्हें तो बिना सोचे समझे कुणाल के साथ
- 10:07:55अपने रिश्ते के लिए आगे बढ़ जाना चाहिए।
- 10:07:58वैसे भी सूर्यभान के लड़के की क्या औकात
- 10:08:00होगी। इसलिए तुम्हारे लिए यह इतना मुश्किल
- 10:08:03भी नहीं होना चाहिए। कनिका ने अपने मन को
- 10:08:06कड़ा करते हुए कहा, "मैं समझती हूं बुआ,
- 10:08:09बस मैं परसों तक यह निर्णय ले लूंगी। इधर
- 10:08:12बलवंत राय अपने ऑफिस अभी पहुंचे ही थे कि
- 10:08:15उसी समय उनके फोन की घंटी बज उठी। बृजभूषण
- 10:08:18जी अभी उनके पास ही बैठे थे। बलवंत राय ने
- 10:08:21मोबाइल स्क्रीन पर नजर डाली तो उस पर
- 10:08:23मुख्तार भाई का नाम चमक रहा था। उन्होंने
- 10:08:26कुछ सोचते हुए फोन उठा लिया। दूसरी तरफ से
- 10:08:29मुख्तार भाई ने कहा बलवंत जी मुझे आपसे
- 10:08:32मिलना है कुछ अर्जेंट है बताइए कब मिल
- 10:08:36सकते हैं बलवंत जी ने बृजभूषण जी की तरफ
- 10:08:39देखा और संशय भरे स्वर में पूछा कोई खास
- 10:08:42बात है क्या मुख्तार भाई जो आप मुझसे
- 10:08:45मिलना चाहते हैं मुख्तार भाई ने
- 10:08:47व्यंग्ञात्मक अंदाज में कहा यह तो आपको
- 10:08:50मिलने पर ही पता चलेगा बलवंत जी मिल लीजिए
- 10:08:53यह आपके हक में ही है मैं नहीं चाहता कि
- 10:08:56बाद में आप मुझसे कोई शिकायत त करें कि
- 10:08:58मैंने आपके साथ कुछ गलत कर दिया या मैंने
- 10:09:01आपका मान नहीं रखा।
- 10:09:04मुख्तार भाई की बात सुनकर बलवंत राय कुछ
- 10:09:07पल सोचते रहे। फिर उन्होंने मोबाइल अपने
- 10:09:09चेहरे से थोड़ा दूर किया और बृजभूषण जी से
- 10:09:13बोले यह मुख्तार हमसे मिलना चाहता है। पता
- 10:09:16नहीं इसे क्या बात करनी है। बृजभूषण जी ने
- 10:09:19तुरंत कहा मिलने में क्या बुराई है
- 10:09:22पिताजी? मिल लीजिए। आखिर पता तो चले कि
- 10:09:25क्या बात करना है। इसी बीच सुबह के 8:00
- 10:09:28बज चुके थे। शौर्य [संगीत] अभी तक बेड पर
- 10:09:30ही सो रहा था। तभी कनिका कमरे में हाथ में
- 10:09:33चाय का कप लिए दाखिल हुई। उसके बाल खुले
- 10:09:36हुए थे जो [संगीत] उसके कंधों पर लहरा रहे
- 10:09:39थे। देखकर ही लग रहा था कि वह थोड़ी देर
- 10:09:41पहले ही नहा कर आई है। उसके बालों से पानी
- 10:09:44की बूंदे अब भी टपक रही थी। उसने चाय का
- 10:09:47कप [संगीत] सामने टेबल पर रखा और शौर्य को
- 10:09:50जगाने के लिए उसके पास गई। अचानक उसके
- 10:09:53दिमाग में एक शरारत सूझी। वो बेड पर बैठ
- 10:09:56गई और शौर्य के चेहरे के ऊपर अपनी गीली लट
- 10:09:59लटका दी। उसके बालों से टप-टप करके पानी
- 10:10:02की बूंदे शौर्य के चेहरे पर गिरने लगी।
- 10:10:04चेहरे पर पानी पड़ने का एहसास होते ही
- 10:10:07शौर्य की आंखें खुल गई। उसने अपने ऊपर
- 10:10:10झुका हुआ चेहरा देखा तो उसे पूरा मामला
- 10:10:12समझते देर नहीं लगी। उसने भी बिना कुछ
- 10:10:15सोचे कनिका को पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया
- 10:10:18और बेड के दूसरी तरफ पलट गया। अब हालात
- 10:10:21ऐसे थे कि कनिका [संगीत] नीचे थी और शौर्य
- 10:10:24उसके ऊपर। शौर्य ने एक हाथ से अपने चेहरे
- 10:10:26पर आया पानी पोंछते हुए पूछा। क्या था यह?
- 10:10:30कनिका ने मासूम बनने की कोशिश करते हुए
- 10:10:32कहा, "मुझे क्या पता? मैंने [संगीत] कुछ
- 10:10:35नहीं किया।" शौर्य ने उसकी आंखों में
- 10:10:37देखते हुए शरारती अंदाज में कहा, "अच्छा।"
- 10:10:40तो बिना तुम्हारे कुछ किए ही मेरी नींद
- 10:10:42टूट गई। कितनी अच्छी नींद में था मैं। यह
- 10:10:46कहते हुए शौर्य ने अपनी उंगलियों से कनिका
- 10:10:48के होठों को हल्के से छुआ। कनिका ने तुरंत
- 10:10:51उसकी उंगलियों को अपने होठों से हटाते हुए
- 10:10:53कहा, "यह क्या कर रहे हो? तुम्हारे इरादे
- 10:10:57मुझे ठीक नहीं लग रहे हैं।" शौर्य उसके
- 10:10:59बेहद करीब झुकते हुए [संगीत] शरारती स्वर
- 10:11:01में बोला। तुम्हारे इतने पास होने के बाद
- 10:11:04भी अगर मेरे इरादे ठीक रहे तो फिर
- 10:11:06तुम्हारी इस खूबसूरती का क्या मतलब रह
- 10:11:08जाएगा? कनिका ने उसे घूरते हुए कहा,
- 10:11:11"अच्छा, अब तो तुम्हें बातें भी बनाना आ
- 10:11:14गया है, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं है।
- 10:11:17चलो छोड़ो मुझे। मुझे जल्दी से तैयार भी
- 10:11:20होना है। वो शौर्य को अपने ऊपर से हटाने
- 10:11:23की कोशिश करने लगी। लेकिन शौर्य कहां
- 10:11:26मानने वाला था? वो धीरे-धीरे उसके और करीब
- 10:11:29झुका। दोनों के चेहरे एक दूसरे के बेहद
- 10:11:32करीब आ चुके थे। उनके होठ बस मिलने ही
- 10:11:35वाले थे कि [संगीत] तभी शौर्य का मोबाइल
- 10:11:37जोर से रिंग करने लगा। शौर्य के होठ वहीं
- 10:11:40रुक गए। उसने [संगीत] मोबाइल तलाशने के
- 10:11:42लिए अपनी गर्दन इधर-उधर घुमाई। फोन की
- 10:11:45आवाज सुनकर कनिका के चेहरे का रंग थोड़ा
- 10:11:47बिगड़ गया। [संगीत]
- 10:11:48वैसे तो कुछ पल पहले वही शौर्य को अपने
- 10:11:51ऊपर से हटने के लिए कह रही थी। लेकिन जैसे
- 10:11:53ही शौर्य फोन की आवाज सुनकर उससे दूर होने
- 10:11:56लगा, उसे यह जरा भी अच्छा [संगीत] नहीं
- 10:11:58लगा। शौर्य जैसे ही उठने लगा, कनिका ने
- 10:12:01तुरंत उसका कॉलर पकड़ कर उसे रोक लिया।
- 10:12:04कनिका की इस हरकत पर शौर्य मुस्कुराया और
- 10:12:06बोला, अब क्या हुआ? अभी तो तुम खुद मुझे
- 10:12:09अपने ऊपर से हटने को कह रही थी और अब खुद
- 10:12:12रोक रही हो। मुझे समझ नहीं आ रहा कि तुम
- 10:12:15चाहती क्या हो। कनिका ने उसे देखते हुए
- 10:12:18धीमे-मगर शरारती अंदाज में कहा। तुम्हें
- 10:12:21कभी कुछ समझ भी नहीं आएगा। [संगीत]
- 10:12:23इतना कहते ही कनिका ने अचानक शौर्य के
- 10:12:25होठों को अपने होठों में कैद कर लिया और
- 10:12:28पलट कर खुद उसके ऊपर आ गई। अचानक शौर्य के
- 10:12:32मुंह से चीख निकल गई क्योंकि कनिका ने
- 10:12:34उसके होठों पर अपने दांत गड़ा दिए थे। उधर
- 10:12:37शौर्य का रिंग करता मोबाइल बंद होकर
- 10:12:40दोबारा बजने लगा था। शौर्य ने हाथ से
- 10:12:42टटोलकर मोबाइल अपने हाथ में लिया और
- 10:12:45कनंखियों से स्क्रीन की तरफ देखा। स्क्रीन
- 10:12:48पर कनिका का नाम देखकर वह चौंक गया। उसने
- 10:12:51कनिका को खुद से अलग करने की कोशिश करते
- 10:12:53हुए मोबाइल उसकी आंखों के सामने लहराया।
- 10:12:56मोबाइल स्क्रीन पर कनिका का नाम देखकर
- 10:12:59शिप्रा भी अनमने ढंग से शौर्य से अलग हो
- 10:13:01गई। शिप्रा ने नाराजगी [संगीत] से अपने
- 10:13:03होठों में ही बुदबुदाते हुए कहा, "यह
- 10:13:06कमबख्त मुझे शौर्य से दूर करने का कोई
- 10:13:08मौका नहीं चूकती। शौर्य उठकर बैठ गया।"
- 10:13:12शिप्रा ने भी अपना सिर शौर्य के कंधे पर
- 10:13:14रख दिया। [संगीत]
- 10:13:15अब शौर्य कनिका का फोन उठाने के लिए तैयार
- 10:13:18था। लेकिन सवाल यह था कि आखिर कनिका ने
- 10:13:21शौर्य को फोन किस लिए किया था? क्या कनिका
- 10:13:25कुणाल के साथ रिश्ते के लिए तैयार हो
- 10:13:27पाएगी?
- 10:13:29शौर्य ने एक नजर शिप्रा की तरफ देखा और
- 10:13:32फिर कॉल एक्सेप्ट कर लिया। कॉल उठाते ही
- 10:13:36शौर्य ने कनिका से हल्के-फुल्के अंदाज में
- 10:13:39सवाल किया। मुझे यकीन नहीं था कि यूं
- 10:13:42सुबह-सुबह मुझे तुम्हारा कॉल आएगा। कहो
- 10:13:45कैसे याद किया? कनिका ने उसे चिढ़ाने वाले
- 10:13:48अंदाज में जवाब दिया। अच्छा [संगीत]
- 10:13:50तो और क्या उम्मीद कर रहे थे? क्या
- 10:13:52सुबह-सुबह मेरा फोन आना अच्छा नहीं लगा?
- 10:13:55शौर्य ने मजाकिया लहजे में कहा, कैसी बात
- 10:13:58करती हो? मैं तो चाहता था कि मैं डेली
- 10:14:00तुम्हारे उठाने से ही उठूं और तुम्हारे
- 10:14:02सुलाने से ही सोऊं। पर तुमने तो मेरे सारे
- 10:14:05अरमानों को एक ही झटके में फूंक [संगीत]
- 10:14:07मारकर उड़ा दिया। अब तो यह काम तुम कुणाल
- 10:14:10मियां के लिए करोगी। कनिका व्यंग भरे स्वर
- 10:14:13में बोली, "क्यों? मैं उसके लिए यह काम
- 10:14:16क्यों करूंगी? अभी तो मैंने कुछ डिसाइड ही
- 10:14:19नहीं किया है कि मुझे क्या करना है। इतनी
- 10:14:21जल्दी हार क्यों मान रहे हो? अभी मैंने
- 10:14:24तुम्हें रिजेक्ट नहीं किया है। कनिका की
- 10:14:26बात सुनकर शौर्य का दिल धक से रह गया। अभी
- 10:14:30कुछ देर पहले तक तो वह यह सोचकर खुश हो
- 10:14:32रहा था कि कनिका से उसका पीछा छूट गया है।
- 10:14:35लेकिन अब उसे यह सुनने को मिल रहा था कि
- 10:14:38कनिका [संगीत] ने अभी तक यह फैसला ही नहीं
- 10:14:40किया है कि वह किससे शादी करेगी। शिप्रा
- 10:14:43भी शौर्य के मोबाइल से अपना कान लगाए हुए
- 10:14:46थी। [संगीत] जिससे उसके कानों में कनिका
- 10:14:48की आवाज साफ-साफ सुनाई दे रही थी। जैसे ही
- 10:14:51उसने कनिका के मुंह से यह सुना कि उसने
- 10:14:53अभी तक अपने परिवार के लोगों के सामने
- 10:14:55अपनी पसंद जाहिर नहीं की है। उसकी पकड़
- 10:14:58शौर्य के कंधे पर और मजबूत हो गई। उसे ऐसा
- 10:15:01लगा जैसे कोई जबरदस्ती शौर्य को उससे दूर
- 10:15:04ले जा रहा हो। शौर्य ने भी व्यंग भरे
- 10:15:06अंदाज में कहा। क्यों तुम मुझे झटके पर
- 10:15:10झटके दिए जा रही हो? तुमने तो पहली मीटिंग
- 10:15:12में ही बता दिया था कि मैं तुम्हारी पसंद
- 10:15:14कभी नहीं बन [संगीत] सकता। और अब जब
- 10:15:16तुम्हारे पास यह ऑप्शन है कि तुम अपने मन
- 10:15:19से अपना जीवन साथी चुन सकती हो तो मैं
- 10:15:21[संगीत] कैसे यह उम्मीद कर सकता हूं कि
- 10:15:22तुम मुझे पसंद करोगी। कनिका की आवाज से
- 10:15:25साफ महसूस हो रहा था कि वह मुस्कुरा रही
- 10:15:28होगी। उसने चुटकी लेते हुए कहा। सही है कि
- 10:15:32मैंने पहली बार में तुम्हें मना कर दिया
- 10:15:34था। पर कोशिश करते रहो। क्या पता तुम्हारा
- 10:15:36नसीब बदल जाए या मेरा दिल पिघल जाए। शौर्य
- 10:15:40ने एक तरह से विलाप करते हुए कहा, सपने
- 10:15:43जगाकर सपने तोड़ना तुम्हारी आदत है क्या?
- 10:15:45मैं तो तुमसे नाउद होकर आज शिप्रा को
- 10:15:48फाइनली प्रपोज करने जा रहा हूं। अब तुम
- 10:15:51ऐसी बात बोलकर क्यों मेरा घर बसने से पहले
- 10:15:53ही तोड़ना चाहती हो। बाद में पता चलेगा कि
- 10:15:56मैं तुम्हारी तरफ से भी गया और शिप्रा भी
- 10:15:58मुझे कोई भाव नहीं देगी। कनिका ने शौर्य
- 10:16:01की बातों को नजरअंदाज करते हुए सीधे
- 10:16:03मुद्दे [संगीत] पर आते हुए कहा, "मैं आज
- 10:16:06तुमसे मिलना चाहती हूं। बताओ कहां मिलोगे?
- 10:16:09और हां अभी शिप्रा से कुछ भी बोलने की कोई
- 10:16:11जरूरत नहीं है। हम एक बार फाइनली मिल लेते
- 10:16:14हैं। उसके बाद देखते हैं कि क्या करना है।
- 10:16:17शौर्य ने शिप्रा का बहाना बनाकर कनिका को
- 10:16:19टालने की कोशिश करते हुए कहा। यह तुम कैसी
- 10:16:22बात कर रही हो? अभी 10:00 बजे मैंने उसे
- 10:16:24मिलने के लिए बुलाया है। अगर समय देकर मैं
- 10:16:27ही उससे नहीं मिला तो मेरा रिश्ता बनने से
- 10:16:30पहले [संगीत] ही नहीं टूट जाएगा। कनिका ने
- 10:16:32उसकी बात काटते हुए कहा। अभी उससे कोई
- 10:16:35बहाना कर देना। पहले तुम मुझसे मिल
- 10:16:37[संगीत] लो। मेरे पास समय नहीं है। मुझे
- 10:16:39परसों तक दादाजी को अपना फैसला सुनाना है।
- 10:16:42उससे पहले मैं सब कुछ क्लियर कर लेना
- 10:16:44चाहती हूं। शौर्य समझ नहीं पा रहा था कि
- 10:16:47आखिर कहां गड़बड़ हो गई। क्या कुणाल इतना
- 10:16:49बेवकूफ था कि सब कुछ उसके पक्ष में होने
- 10:16:52के बाद भी वो इस लड़की पर अपना जादू नहीं
- 10:16:54चला पाया। अब उसे समझ नहीं आ रहा था कि
- 10:16:57किस तरह वह कनिका से अपना पीछा छुड़ाए।
- 10:17:00इसी बीच उसके दिमाग में कुछ नया खुराफात
- 10:17:03चलने लगा। मन ही मन कुछ डिसाइड करके शौर्य
- 10:17:06ने कनिका से पूछा ठीक है बताओ फिर कहां और
- 10:17:10कब मिलना है कनिका ने कुछ सोच कर कहा ठीक
- 10:17:14है फिर 10:00 बजे तुम होटल पैराडाइज में
- 10:17:16मुझसे मिलो वहीं साथ में नाश्ता करेंगे
- 10:17:19शौर्य ने खुशी जाहिर करते हुए कहा बढ़िया
- 10:17:22मैं समय पर आ जाऊंगा [संगीत]
- 10:17:24पर ध्यान रखना इस बार मेरा दिल मत तोड़ना
- 10:17:27फिर कुछ ध्यान आने पर उसने आगे पूछे क्या
- 10:17:30तुम्हारे साथ कोई और भी होगा अचानक ही
- 10:17:33कनिका का बोलने का अंदाज बदल गया। उसके
- 10:17:36दिमाग में जरूर कुछ चलने लगा था। उसने
- 10:17:38सवालिया लहजे [संगीत] में पूछा, क्या तुम
- 10:17:41चाहते हो कि मैं किसी और के साथ आऊं?
- 10:17:44शौर्य को भी कनिका की आवाज में आया बदलाव
- 10:17:46समझ में आ गया था। इसलिए उसने जल्दी से
- 10:17:49कहा, और क्या यह क्या अच्छा लगता है कि
- 10:17:52तुम हमेशा अपने भाइयों को अपना बॉडीगार्ड
- 10:17:53बनाए साथ घूमती हो? कनिका ने दोबारा संदेह
- 10:17:56[संगीत] भरे स्वर में सवाल घुमाते हुए
- 10:17:58पूछा। अच्छा तो तुम नहीं चाहते कि मेरे
- 10:18:01भाई मेरे साथ हो। [संगीत]
- 10:18:03शौर्य ने अपनी आपत्ति जाहिर करते हुए कहा
- 10:18:06यह भी कोई कहने की बात है। कौन भला ऐसा
- 10:18:08चाहेगा कि किसी लड़की से मिलते हुए उसका
- 10:18:10भाई साथ हो? कुछ पल की खामोशी के बाद
- 10:18:13दूसरी तरफ से कनिका की आवाज आई। ठीक है।
- 10:18:1610:00 बजे होटल पैराडाइज में मिलते हैं।
- 10:18:18शौर्य ने फोन रख दिया। तभी उसे ध्यान आया
- 10:18:22कि शिप्रा भी उन दोनों की बात सुन रही थी।
- 10:18:24उसने शिप्रा की तरफ देखा तो उसके चेहरे का
- 10:18:26रंग उड़ा हुआ था। उसका सफेद पड़ा चेहरा
- 10:18:29देखकर शौर्य ने पूछा अब तुम्हें क्या हुआ?
- 10:18:32तुम्हारे चेहरे पर यह सफेदी क्यों छा गई?
- 10:18:35शिप्रा ने भावहीन चेहरे के साथ कहा, "तुम
- 10:18:38तो कह रहे थे कि तुम्हारा और कनिका का
- 10:18:39मामला निपट गया। तो फिर यह क्या था? शौर्य
- 10:18:43ने जैसे खुद भी कनिका को समझने की कोशिश
- 10:18:45करते हुए कहा, "अब तुम्हें क्या बोलूं?"
- 10:18:48जिस तरह कनिका के साथ हमारी बात आगे बढ़ी
- 10:18:50थी, उसमें तो यही उम्मीद थी। पर पता नहीं
- 10:18:54इस लड़की [संगीत] के दिमाग में क्या चल
- 10:18:55रहा है। शिप्रा के चेहरे पर नाराजगी साफ
- 10:18:58नजर आने लगी थी। उसने तंज कसते हुए कहा,
- 10:19:01[संगीत]
- 10:19:02तुम्हें पहले से ही पता होगा कि कुछ ऐसा
- 10:19:04ही होने वाला होगा। अभी कैसे हंस-हंस कर
- 10:19:06बातें कर रहे थे। उससे मिलना भी है तो
- 10:19:09अकेले मिलना है। उसका [संगीत] भाई साथ में
- 10:19:11नहीं चाहिए। जरा बताओगे? अकेले में मिलकर
- 10:19:15उससे क्या बात करोगे? अब तो मुझे लगता है
- 10:19:18तुम चाहते ही नहीं कि कनिका तुम्हें
- 10:19:19नापसंद करे। शौर्य ने सोचा भी नहीं था कि
- 10:19:22बात [संगीत] यूं बिगड़ जाएगी। वो जल्दी से
- 10:19:25शिप्रा को मनाने की कोशिश करते हुए बोला,
- 10:19:28"यह तुम कैसी बात कर रही हो?" मैं भला ऐसा
- 10:19:30क्यों चाहूंगा कि कनिका मुझसे यूं चिपटी
- 10:19:32[संगीत] रहे? जहां तक अकेले मिलने के लिए
- 10:19:35कहने की बात है। वो तो इसलिए कहा कि जो
- 10:19:37काम सबके सामने होने पर नहीं हो सका। शायद
- 10:19:40वह काम अकेले मिलने पर हो जाए। शिप्रा
- 10:19:43संदेह भरी नजरों से शौर्य की तरफ देखने
- 10:19:45लगी। शौर्य ने उसे भरोसा दिलाने की कोशिश
- 10:19:48करते हुए कहा, सच कह रहा हूं। मेरे दिमाग
- 10:19:51में कुछ प्लान चल रहा है। अगर यह वर्क
- 10:19:54किया तो शायद फिर [संगीत] दोबारा कनिका
- 10:19:56मुझसे शादी करने के बारे में सोचेगी भी
- 10:19:58नहीं। शौर्य की बात सुनकर भी शिप्रा ने
- 10:20:00कुछ नहीं कहा। बस ठंडी नजरों से वो उसे
- 10:20:03देखती रही। उसने शौर्य का कंधा छोड़ दिया
- 10:20:06था और उससे अलग हो गई थी। फिर उसकी नजर उस
- 10:20:08चाय [संगीत] के कप पर पड़ी जिसे वो शौर्य
- 10:20:10के लिए लाई थी। चाय कप की ठंडी हो चुकी
- 10:20:13थी। वो बेड से उतरने ही वाली थी कि शौर्य
- 10:20:16ने [संगीत] जल्दी से उसका हाथ पकड़ कर
- 10:20:18अपनी ओर खींचते हुए कहा अब कहां जा रही हो
- 10:20:21आओ हम फिर से अपना रोमांस जारी करें लेकिन
- 10:20:25शिप्रा ने झटका देकर शौर्य से अपना हाथ
- 10:20:27छुड़ा लिया और गुस्से [संगीत] में बोली जा
- 10:20:30रहे हो ना कनिका से मिलने वो भी अकेले उसी
- 10:20:33के साथ अब रोमांस करना शौर्य ने उसे
- 10:20:36समझाने की कोशिश करते हुए कहा देखो यह
- 10:20:39[संगीत]
- 10:20:39ठीक बात नहीं है उसका गुस्सा तुम मुझ पर
- 10:20:42निकाल रही हो मैंने तो अपनी तरफ से पूरी
- 10:20:45कोशिश की थी कि वह मुझे रिजेक्ट कर दे।
- 10:20:47उसने जाहिर भी यही किया था। पर पता नहीं
- 10:20:51उस लड़की के दिमाग [संगीत] में क्या चल
- 10:20:52रहा है कि लास्ट मिनट में उसने सबको उलझा
- 10:20:55दिया है। जरूर वो कुणाल को भी इसी डायलेमा
- 10:20:58में रखी होगी। वो बेचारा भी इसी उम्मीद
- 10:21:00में होगा कि जल्दी ही कनिका से उसे
- 10:21:02पॉजिटिव रिस्पांस मिलेगा। लेकिन शिप्रा के
- 10:21:05चेहरे के भावों में कोई परिवर्तन नहीं
- 10:21:07आया। दूसरी तरफ हिलटॉप हेवन के एक ऑफिस
- 10:21:11में बलवंत राय और बृजभूषण जी के सामने
- 10:21:13मुख्तार भाई और अशोक सोलंकी दोनों बैठे
- 10:21:15हुए थे। वहां का माहौल गंभीर था। मुख्तार
- 10:21:19भाई ने सख्त स्वर में कहा मैं सिर्फ आपकी
- 10:21:22इज्जत के कारण अभी तक चुप बैठा हुआ था।
- 10:21:24बलवंत जी नहीं तो कब का मैं शिप्रा और
- 10:21:27श्रवण दोनों की अक्ल ठिकाने लगा दिया
- 10:21:29होता। पर अब स्थिति मेरे हाथ से निकलती जा
- 10:21:31रही है। आपकी इज्जत सवारने के चक्कर में
- 10:21:34मेरी इज्जत धूल में मिलती जा रही है जो
- 10:21:36मैं किसी भी हालत में होने नहीं दे सकता।
- 10:21:39बलवंत राय अपना पहलू बदलते हुए बोले आप
- 10:21:42कैसी बात कर रहे हैं मुख्तार भाई? ऐसा
- 10:21:45क्या हो गया है और इसमें मेरा क्या रोल
- 10:21:47है? मुख्तार भाई ने गंभीरता से कहा आपको
- 10:21:51पता है अभी कुछ समय पहले मेरे भाई की मौत
- 10:21:55हो गई है। वैसे तो यह एक सिंपल सा
- 10:21:58एक्सीडेंट नजर आ रहा है पर मार्केट में
- 10:22:01यही हवा है कि मेरे भाई की मौत के पीछे
- 10:22:04शौर्य का हाथ है। अब बात यह है कि अगर यह
- 10:22:08बात गलत भी है तब भी मुझे अपनी इज्जत
- 10:22:10बचाने के लिए शौर्य को अपने रास्ते से
- 10:22:13हटाना पड़ेगा। मुख्तार भाई की यह बात
- 10:22:16सुनकर बलवंत राय और बृजभूषण राय दोनों के
- 10:22:19चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी। दोनों ने एक
- 10:22:22दूसरे की तरफ देखा। बृजभूषण जी ने खुद को
- 10:22:26इस मामले से अलग करने की कोशिश करते हुए
- 10:22:28कहा, "आप तो जानते हैं मुख्तार भाई, श्रवण
- 10:22:32अब हमारे कहे में नहीं है। उसने शिप्रा को
- 10:22:35पता नहीं क्या पट्टी पढ़ा दी है कि वह भी
- 10:22:37घर छोड़कर अब उसके साथ ही रहने चली गई है।
- 10:22:40इससे हमारा अब कोई वास्ता भी नहीं है। आप
- 10:22:43देख लीजिए। आपको जो सही लगता है कीजिए।
- 10:22:46लेकिन बलवंत राय के चेहरे को देखकर साफ लग
- 10:22:49रहा था कि वह बृजभूषण जी के जवाब [संगीत]
- 10:22:51से संतुष्ट नहीं थे। मुख्तार भाई ने
- 10:22:54बृजभूषण जी की बात सुनकर कहा फिर तो ठीक
- 10:22:57है अब अगर श्रवण के साथ कुछ होता भी है तो
- 10:23:00आपको कोई तकलीफ नहीं होगी बलवंत राय ने आह
- 10:23:04भरते हुए कहा यह शिप्रा के लिए ठीक नहीं
- 10:23:07होगा मुख्तार भाई अगर शौर्य को कुछ हो
- 10:23:10जाता है तो शिप्रा विधवा हो जाएगी किसी
- 10:23:13तरह उन दोनों का तलाक हो जाता तो बात
- 10:23:15दूसरी थी। अशोक सोलंकी ने पहली बार उन
- 10:23:18सबके सामने अपनी जुबान खोलते हुए कहा,
- 10:23:21वैसे अगर आप चाहें [संगीत] तो उन दोनों का
- 10:23:24तलाक होना भी कोई नामुमकिन काम नहीं है।
- 10:23:26अगर आप अपना सहयोग करें तो मुख्तार भाई यह
- 10:23:29काम भी आराम से करवा सकते हैं। बलवंत राय
- 10:23:32के चेहरे पर परेशानी [संगीत] के भाव नजर
- 10:23:34आने लगे। उन्होंने पूछा आपका कहने का क्या
- 10:23:38मतलब हुआ सोलंकी साहब? यह काम मुख्तार भाई
- 10:23:41कैसे करवा [संगीत] सकते हैं? मुख्तार भाई
- 10:23:43मुस्कुराते हुए बोले यह कोई मुश्किल काम
- 10:23:46नहीं है बलवंत जी बस आपको अपना जी [संगीत]
- 10:23:49खड़ा करना पड़ेगा बलवंत राय ने परेशानी
- 10:23:52भरे स्वर में कहा जरा अपनी बात को स्पष्ट
- 10:23:55कीजिए मुख्तार भाई मुख्तार भाई ने अपनी
- 10:23:58कुटिल मुस्कान के साथ कहा अगर आप जानना ही
- 10:24:01चाहते हैं तो सुनिए मेरे दिमाग में एक
- 10:24:04प्लान है मुझे आपकी पोती को किडनैप करना
- 10:24:07पड़ेगा मैं उसे इस स्थिति में ले आऊंगा कि
- 10:24:10उसे अपनी तलाक के लिए मानना नहीं पड़ेगा।
- 10:24:13उसके बाद शौर्य का क्या होता है उससे आपको
- 10:24:16कोई फर्क नहीं पड़ेगा। बलवंत राय ने अपना
- 10:24:19विचार व्यक्त करते हुए कहा, नहीं यह ठीक
- 10:24:22नहीं होगा। मैं चाहता हूं कि शिप्रा का
- 10:24:25तलाक श्रवण से हो जाए। पर शिप्रा को तलाक
- 10:24:28दिलवाने के चक्कर में कहीं [संगीत] हम
- 10:24:29उसके ही दुश्मन ना बन जाए। मुख्तार भाई ने
- 10:24:32बलवंत राय को समझाते हुए कहा, आपको डरने
- 10:24:36की कोई जरूरत नहीं है बलवंत जी। ऐसा कुछ
- 10:24:39नहीं होगा। हम शिप्रा का खास ध्यान
- 10:24:41रखेंगे। हां, दो-तीन दिनों तक उसे हमारी
- 10:24:45कैद में रहना पड़ सकता है। बृजभूषण जी ने
- 10:24:48मुख्तार भाई के सामने अपने सारे पत्ते
- 10:24:51ढीले करते हुए कहा, ठीक है मुख्तार भाई
- 10:24:54अगर आपको लगता है कि आप इस मामले को अच्छे
- 10:24:57से निपटा सकते हैं तो हमें कोई आपत्ति
- 10:24:59नहीं है। लेकिन इसके तुरंत बाद बलवंत जी
- 10:25:02की आवाज भी सुनाई दी। अब आगे क्या होगा?
- 10:25:06क्या मुख्तार भाई अपने प्लान में कामयाब
- 10:25:09होंगे? क्या शौर्य अपने मकसद में कामयाब
- 10:25:12हो पाएगा? जानने के लिए सुनते रहिए कहानी
- 10:25:15का अगला
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This page contains the full transcript of My begger husband | Episode 251 to 300 | Full Episode | क्या इस भिखारी पति का राज सब बदल देगा? | by SK Hindi Novel, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 121,361 words across 14,440 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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