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My begger husband episode 121 to 140 — Transcript

by SK Hindi Novel · 40,184 words · 4,680 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00नमस्कार दोस्तों, आपका स्वागत है आपके
  2. 0:03अपने चैनल ऑडियो स्टोरी वर्ल्ड में। यहां
  3. 0:07आपको सुनने को मिलेंगी ऐसी दमदार ऑडियो
  4. 0:10स्टोरीज जो आपके दिल को छू जाएंगी।
  5. 0:13रोमांस, सस्पेंस, फैमिली ड्रामा, एक्शन,
  6. 0:17इमोशन और जबरदस्त ट्विस्ट से भरी कहानियां
  7. 0:20जो आपको शुरू से अंत तक बांधे रखेंगी। हर
  8. 0:24कहानी में मिलेगा नया रोमांच, नए किरदार
  9. 0:27और ऐसे मोड़ जिनकी आपने कभी कल्पना भी
  10. 0:30नहीं की होगी। अगर आपको ऑडियो स्टोरीज
  11. 0:33सुनना पसंद है तो आपने बिल्कुल सही चैनल
  12. 0:36चुना है। वीडियो शुरू करने से पहले हमारे
  13. 0:40चैनल को सब्सक्राइब करें। बेल आइकन दबाएं
  14. 0:43और वीडियो को लाइक व शेयर करना बिल्कुल ना
  15. 0:45भूलें। तो तैयार हो जाइए एक नई और रोमांचक
  16. 0:49कहानी की दुनिया में खो जाने के लिए। चलिए
  17. 0:52शुरू करते हैं सिर्फ ऑडियो स्टोरी वर्ल्ड
  18. 0:55पर। शिप्रा मेघना के साथ सदर बाजार से
  19. 0:59अपने घर के लिए निकल गई। वह अपने घर को
  20. 1:01निकलने से पहले मेघा को फोन की और उसे बता
  21. 1:05दिया कि उसने कुछ सामान खरीदा है। वह उसे
  22. 1:08उसके द्वारा चूज किए गए रूम में रखवा दे।
  23. 1:11मेघा को भी यह जानकर खुशी हुई कि शायद
  24. 1:14जल्दी ही शिप्रा खुद भी वहां रहने के लिए
  25. 1:16आ जाए। उसने शिप्रा को आश्वस्त किया कि वह
  26. 1:19रूम को अच्छे से सेट करवा देगी। इसके बाद
  27. 1:22शिप्रा अपने घर के लिए निकल गई। वह जल्दी
  28. 1:25से जल्दी अपने दादाजी को उनका दिया हुआ
  29. 1:28पैसा वापस करना चाहती थी। देखा जाए तो यह
  30. 1:32एक तरह से उसका अपने दादाजी के प्रति
  31. 1:34विद्रोह ही था। क्योंकि उसके दादाजी का
  32. 1:36मकसद शिप्रा से पैसे वापस लेने का नहीं
  33. 1:39था। बल्कि शिप्रा को विहान से शादी करने
  34. 1:41के लिए मजबूर करने का था। पर शिप्रा ने
  35. 1:44निश्चय कर लिया कि वह अपने दादाजी के
  36. 1:47ब्लैकमेल के सामने झुकेगी नहीं। वह थोड़ी
  37. 1:50देर में अपने घर पहुंच गई। शिप्रा को
  38. 1:52डाइनिंग रूम में ही राजदीप जी और बिना जी
  39. 1:55बैठे हुए नजर आ गए थे। शिप्रा को देखकर
  40. 1:58राजदीप जी ने उत्सुकता बस पूछा क्या रहा?
  41. 2:02कैसा रहा मीटिंग? मोहित रैना के साथ कुछ
  42. 2:04काम बना। मैंने अपनी कंपनी भेज दी। बाबा
  43. 2:07मैं अभी दादा जी को उनका पैसा ब्याज के
  44. 2:09साथ वापस कर दूंगी। शिप्रा राजदीप जी के
  45. 2:12सामने सोफे पर बैठती हुई बोली। बीना जी
  46. 2:14शिप्रा की बात सुनकर हैरान रह गई। उन्हें
  47. 2:17इतना कुछ पता नहीं था कि आज शिप्रा का
  48. 2:20उसके दादाजी के साथ क्या बात हुई थी और
  49. 2:23शिप्रा ने अपनी कंपनी बेचने का निर्णय
  50. 2:25क्यों ले लिया। अभी तक राजदीप जी भी श्योर
  51. 2:28नहीं थे कि शिप्रा अपनी कंपनी को बेच ही
  52. 2:31देगी। उनके तो दिमाग में था कि अगर वह
  53. 2:34कंपनी बेचना भी चाहेगी तो इतनी जल्दी तो
  54. 2:36कोई बायर मिलने से रहा और हो सकता है एक
  55. 2:39दो दिनों में बलवंत राय भी अपनी जिद छोड़
  56. 2:41दे। इसलिए मामला शांत होने की भी संभावना
  57. 2:44है। पर शिप्रा ने जल्दबाजी दिखाई। वह
  58. 2:48हैरान स्वर में बोली तुम तो मोहित रैना से
  59. 2:51बात करने के लिए गई थी। फिर यह कंपनी
  60. 2:53किसको भेजती? राजदीप जी की बात सुनकर
  61. 2:56शिप्रा ने मोहित रैना के साथ हुई अपनी
  62. 2:58बातों के बारे में बताया और यह भी बताया
  63. 3:00कि उसने मोहित रैना को ही अपनी कंपनी बेच
  64. 3:04दी। ऑलरेडी उसके पास एडवांस के 60 करोड़
  65. 3:07भी आ गए थे। जैसे ही राजदीप जी ने यह सुना
  66. 3:10कि अब कुछ नहीं हो सकता। वह सोफे पर निढाल
  67. 3:14से हो गए। जबकि बिना जी के चेहरे को देखकर
  68. 3:16लग रहा था कि वह किसी शौक में चली गई हो।
  69. 3:19वह उदास स्वर में बोली, तुम्हें क्या
  70. 3:22जरूरत थी अपनी कंपनी बेचने की? कितनी
  71. 3:24मेहनत से तुमने इसे खड़ा किया था। एक बार
  72. 3:27भी नहीं सोचा। बिना जी के उदास चेहरे को
  73. 3:29देखकर शिप्रा बोली, मैं कुछ समय में ही
  74. 3:32खुद को फिर से खड़ा कर लूंगी। पर मैं दादा
  75. 3:34जी के प्रेशर के सामने नहीं झुकूंगी। वैसे
  76. 3:37भी मैं इतनी लायक हूं कि मैं कोशिश करूंगी
  77. 3:40तो किसी अच्छी कंपनी में कोई अच्छा जॉब
  78. 3:43मिल जाएगा। इसलिए आपको मेरी चिंता करने की
  79. 3:46कोई जरूरत नहीं है। जब हालात ठीक हो
  80. 3:49जाएंगे तो फिर देखूंगी कि फिर से कोई नया
  81. 3:52स्टार्टअप शुरू करूं। क्या फिर से कोई नया
  82. 3:54स्टार्टअप शुरू करना इतना आसान है? लोगों
  83. 3:57को बरसों लग जाते हैं किसी ब्रांड को
  84. 3:59एस्टैब्लिश करने में और तुमने अपने अच्छे
  85. 4:02भले एस्टैब्लिश ब्रांड को बेच दिया। मुझे
  86. 4:05तो समझ नहीं आ रहा है कि तुमने यह कौन सी
  87. 4:07जिद पाल ली है। आखिर ऐसा क्या है उस
  88. 4:10भिखारी में जो तुम उसे तलाक देने को तैयार
  89. 4:12नहीं हो। बिना जी गुस्से में बोली मेरे
  90. 4:16श्रवण को तलाक देने से भी बात कहां बन रही
  91. 4:18थी मां दादा जी की तो जिद है कि वह मेरी
  92. 4:21शादी विहान से कराना चाहते हैं जो कि मैं
  93. 4:23किसी भी सूरत में नहीं कर सकती अगर सिर्फ
  94. 4:26मेरे तलाक लेने की बात होती तो उसके लिए
  95. 4:28तो मैं एक बार भी मना नहीं करता पर शादी
  96. 4:32वह अब मैं दोबारा कभी नहीं करूंगी शिप्रा
  97. 4:36जिद भरे स्वर में बोली बीना जी इस बात से
  98. 4:38अनजान थी कि शिप्रा के दादाजी ने शिप्रा
  99. 4:41की शादी विहान से दोबारा करवाने की जिद
  100. 4:44ठान ली थी। इस बात को जानने के बाद वह
  101. 4:47राजदीप जी की तरफ देखने लगी और उनसे
  102. 4:50कंफर्म करने के लिए बोली क्या शिप्रा जो
  103. 4:52कह रही है वह सच है? राजदीप जी अपनी सहमति
  104. 4:56जताते हुए बोले पिताजी चाहते हैं कि
  105. 4:58शिप्रा दोबारा विहान से शादी कर ले। तो
  106. 5:01इसमें बुराई क्या है? अगर देखा जाए तो
  107. 5:04विहान श्रवण से तो लाख गुना अच्छा है। उन
  108. 5:07दोनों की हैसियत में जमीन आसमान का अंतर
  109. 5:10है। और वैसे भी तो तुम पहले विहान से शादी
  110. 5:12करने जा ही रही थी तो अब क्या दिक्कत है?
  111. 5:15बीना जी अपनी बात पर जोर देते हुए बोली
  112. 5:18शिप्रा को अपनी मां की बात सुनकर आश्चर्य
  113. 5:20हुआ। वह बेबसी में बोली यह तुम कह रही हो
  114. 5:24मां जिसने खुद श्रवण से कहा था कि वह शादी
  115. 5:28के लिए तैयार हो जाए क्योंकि उस समय
  116. 5:30तुम्हारे बेटे के गले पर चाकू रखा हुआ था।
  117. 5:33तब तुम्हारी विनती पर ही श्रवण मुझसे शादी
  118. 5:36करने के लिए तैयार हुआ था। और अब उस
  119. 5:38भगोड़े की वकालत कर रही हो जो मुसीबत आने
  120. 5:41पर सबसे पहले मुझे मुसीबत में छोड़कर भाग
  121. 5:44गया था। यह तुम कैसे कर सकती हो मां?
  122. 5:48शिप्रा की बात सुनकर बिना जी ने अपना सर
  123. 5:50नीचे कर लिया। उनसे अब कुछ बोलते नहीं
  124. 5:53बना। पर तभी राजदीप जी बोले तुम अपनी जगह
  125. 5:56सही हो बेटी। पर तुम्हें समझना चाहिए कि
  126. 5:59हम लोगों का जो सामाजिक दायरा है उसमें
  127. 6:02श्रवण कहीं फिट नहीं होता। इसलिए हमें
  128. 6:04अपने सोशल स्टेटस को देखना पड़ता है। आप
  129. 6:06किस जमाने की बात कर रहे हैं पापा? अगर
  130. 6:09आपको अपने सोशल स्टेटस को ही देखना है या
  131. 6:12दादाजी को ही उनके सोशल स्टेटस की पड़ी
  132. 6:14होती तो वह सिर्फ इस बात से भी तैयार हो
  133. 6:17जाते कि मैं शौर्य से तलाक ले लेती। लेकिन
  134. 6:21मेरी शादी विहान से कराने की जिद का क्या
  135. 6:24मतलब हुआ? अगर आप भी ऐसा चाहते हैं पापा
  136. 6:27तो माफ कीजिएगा। मैं इस बात के लिए कभी भी
  137. 6:30तैयार नहीं हो सकती। जहां तक शादी की बात
  138. 6:32थी वह मेरी एक बार हो गई। अब श्रवण से
  139. 6:35तलाक के बाद भी मैं दोबारा कभी शादी नहीं
  140. 6:38करूंगी। यह बात आप कांठ बांध लीजिए और मैं
  141. 6:41चाहूंगी कि आप दोबारा मुझे इसके लिए कभी
  142. 6:43प्रेशराइज भी ना करें। शिप्रा मजबूत
  143. 6:46इरादों के साथ बोली। राजदीप जी समझ गए कि
  144. 6:49शिप्रा से अब कुछ भी कहने का कोई फायदा
  145. 6:51नहीं है। इसलिए अब वह यह भी नहीं चाहते थे
  146. 6:54कि शिप्रा शौर्य से तलाक ले। शिप्रा के
  147. 6:58स्पष्ट इरादों को जानकर बिना जी ने भी
  148. 7:00दोबारा उसे कुछ नहीं कहा। मौसा जी आपको भी
  149. 7:03शिप्रा से अब कम से कम विहान से शादी के
  150. 7:06लिए जिद नहीं करनी चाहिए क्योंकि सही
  151. 7:08मायने में वह इस लायक नहीं है कि शिप्रा
  152. 7:11विहान से शादी करें जो आपके मुसीबत के
  153. 7:14वक्त पीठ दिखा दे उससे कोई भी लड़की शादी
  154. 7:17करना नहीं चाहेगी। मेघना ने भी अपने विचार
  155. 7:21को राजदीप जी के सामने व्यक्त किया। मैं
  156. 7:23समझता हूं बेटी मैं खुद भी ऐसा नहीं चाहता
  157. 7:26पर मैं पिताजी के कारण कुछ बोल नहीं पा
  158. 7:28रहा। राजदीप जी ने अभी इतना कहा ही था कि
  159. 7:31तभी मेन गेट पर किसी की दस्तक सुनाई दिया।
  160. 7:34यह जानकर कि कोई दरवाजे पर खड़ा है। सभी
  161. 7:37एक दूसरे की तरफ देखने लगे। तभी मेघना
  162. 7:40अपनी जगह से उठी और जाकर मेन गेट को खोल
  163. 7:42दिया। उसने देखा उसके सामने बलवंत राय के
  164. 7:45साथ धर्मवीर रायजादा और विहान रायजादा
  165. 7:48दोनों खड़े थे। राजदीप जी भी मेघा के
  166. 7:51पीछेछे दरवाजे पर पहुंच गए थे। उन्होंने
  167. 7:54जब बलवंत राय को दरवाजे पर खड़े देखा तो
  168. 7:56वह आश्चर्य से बोले पिताजी आप फिर उनकी
  169. 7:59निगाह धर्मवीर रायजादा और विहान रायजादा
  170. 8:02पर भी पड़ी। उनके माथे में ठंड का सा हुआ
  171. 8:05कि उसके पिताजी को कल तक इंतजार भी नहीं
  172. 8:08किया गया और वह धर्मवीर रायजादा और विहान
  173. 8:11रायजादा को लेकर उसके घर आ गए हैं। राजदीप
  174. 8:14जी दरवाजे के सामने से हटते हुए उन सबको
  175. 8:16अंदर आने का इशारा किया। बलवंत राय,
  176. 8:19धर्मवीर रायजादा और विहान रायजादा के साथ
  177. 8:22डाइनिंग हॉल में आए और सोफे पर बैठे गए।
  178. 8:24उन्होंने जब सबको यहां मौजूद देखा तो वह
  179. 8:27अपने होठों पर हल्की मुस्कान लिए हुए
  180. 8:29बोले, चलो यह अच्छा है कि तुम सब यहीं हो।
  181. 8:33इसलिए एक साथ ही सबसे बात हो जाएगी।
  182. 8:36शिप्रा अपने दादाजी के साथ धर्मवीर
  183. 8:38रायजादा और विहान रायजादा को देखकर गुस्से
  184. 8:41से लाल ही गई थी। उसे उम्मीद नहीं था कि
  185. 8:44यह लोग इतने बेशर्म निकलेंगे कि उसके घर
  186. 8:47भी आ जाएंगे। शिप्रा ने अपनी तरफ से कुछ
  187. 8:49नहीं कहा। वह इंतजार करती रही कि सामने से
  188. 8:52कुछ ना कुछ जरूर उससे बोला जाएगा। बलवंत
  189. 8:56राय बात की शुरुआत करते हुए बोले देखो अभी
  190. 8:59मेरा यहां आने का कोई इरादा नहीं था। पर
  191. 9:02क्योंकि धर्मवीर साहब मेरे पास आए हुए थे
  192. 9:04और यह एक बार शुप्रा से मिलकर उसकी
  193. 9:06गलतफहमी को दूर करना चाह रहे थे। इसलिए हम
  194. 9:09इनको यहां ही लेकर आ गए। बात किसी गलतफहमी
  195. 9:12को दूर करने से बहुत आगे निकल गई है पापा।
  196. 9:15अब शिप्रा नहीं चाहती कि वह दोबारा इस
  197. 9:17बंधन में बंधे। इसलिए अब इन लोगों को भी
  198. 9:20समझ जाना चाहिए कि अब कुछ नहीं हो सकता।
  199. 9:23अगर इन लोगों को शिप्रा से इतना ही ज्यादा
  200. 9:26प्यार था तो इन्हें उस समय सामने आना
  201. 9:28चाहिए था और शिप्रा के साथ खड़ा होना
  202. 9:31चाहिए था। पर उस समय तो उनका कोई पता नहीं
  203. 9:34था। और आज यह लोग शिप्रा के लिए प्यार
  204. 9:36दिखा रहे हैं तो आप समझ लीजिए कि अब यह सब
  205. 9:40शिप्रा को कबूल नहीं है। राजदीप जी ने
  206. 9:43बहुत हिम्मत करके बलवंत राय को जवाब दिया।
  207. 9:46राजदीप जी को इस तरह बोलते देखकर बलवंत
  208. 9:48राय भी आश्चर्य से राजदीप को देखने लगे।
  209. 9:51उन्हें राजदीप से ऐसी उम्मीद नहीं थी। वह
  210. 9:54तो सोच रहे थे कि राजदीप शिप्रा को मनाने
  211. 9:56में अपनी भूमिका निभाएगा। पर वह तो खुद
  212. 9:59शिप्रा की बात को ही समर्थन दे रहा है।
  213. 10:02उन्हें राजदीप जी पर भी गुस्सा आया और वह
  214. 10:04बोले राजदीप मुझे तुमसे यह उम्मीद नहीं थी
  215. 10:08कि तुम अपनी बेटी की जिद के सामने झुक
  216. 10:10जाओगे। मुझे लगा तुम अपनी बेटी को
  217. 10:13समझाओगे। उसको अपने अच्छे बुरे का ज्ञान
  218. 10:16कराओगे। पर तुम तो खुद ही उनके रंग मेंंगे
  219. 10:18हुए हो। अरे नहीं बलवंत जी आप राजदीप को
  220. 10:22इस तरह से मत भूलिए। राजदीप अपनी जगह सही
  221. 10:25है। पर इन्हें नहीं पता कि इस बात का हमें
  222. 10:28कितना अफसोस है। विहान तो कई रातों सो
  223. 10:31नहीं पाया था। बड़ी मुश्किल से यह उस दौड़
  224. 10:34से बाहर आया है। इसलिए हम यह नहीं चाह रहे
  225. 10:37कि हमारे कारण शिप्रा बिटिया की जिंदगी
  226. 10:39बर्बाद हो। इसलिए हम शिप्रा बिटिया को
  227. 10:42अपने घर की बहू बनाना चाहते हैं। अगर
  228. 10:45शिप्रा हमारे घर की बहू बन जाती है तो हम
  229. 10:48भी इस शर्मिंदगीगी के बोझ से निकल आएंगे
  230. 10:51कि हम मुसीबत में अपनी बहू का साथ नहीं दे
  231. 10:53पाए। धर्मवीर रायजादा इमोशनल होकर बोले
  232. 10:56अगर आप ऐसा सोचते हैं तो मैं आपकी आभारी
  233. 10:59हूं अंकल। पर आप मेरी इस बात को समझ लीजिए
  234. 11:02कि मैं अब आपके घर की बहू नहीं बन पाऊंगी।
  235. 11:05मैं क्षमा के साथ आपसे विनती करती हूं कि
  236. 11:09आप अपना यह इरादा त्याग दीजिए और मुझे
  237. 11:11अपने घर की बहू बनाने की बात को भी भूल
  238. 11:14जाइए क्योंकि मेरी ऐसी कोई इच्छा नहीं है
  239. 11:17और अब मैं अपनी इस स्थिति से खुश हूं।
  240. 11:20शिप्रा धर्मवीर रायजादा से रिक्वेस्ट करते
  241. 11:23हुए बोली धर्मवीर रायजादा को उम्मीद नहीं
  242. 11:26था कि शिप्रा सामने से आकर उनसे से यह बात
  243. 11:29करेगी। वह हैरान होकर बलवंत राय का चेहरा
  244. 11:32देखने लगे। उन्होंने तो सोचा था कि शिप्रा
  245. 11:35के घर आकर वह कुछ इमोशनल ड्रामा करेंगे तो
  246. 11:38शायद राजदीप राय और बिना जी के प्रेशर से
  247. 11:41शिप्रा झुक जाएगी। पर यहां तो पासा ही
  248. 11:43उल्टा पड़ रहा था। राजदीप जी के साथ बिना
  249. 11:46जी भी शिप्रा का समर्थन करते नजर आ रहे
  250. 11:49थे। पर इस बात से बलवंत राय गुस्सा हो गए
  251. 11:51थे। वह राजदीप जी से गुस्से में बोले।
  252. 11:54राजदीप मैंने तुम्हें शिप्रा को समझाने के
  253. 11:57लिए कहा था। पर तुम तो खुद ही उसके रंग
  254. 11:59में रंग गए। तुमसे तो कुछ उम्मीद करना ही
  255. 12:02बेकार है। इतना कहने के बाद बलवंत राय
  256. 12:05शिप्रा की ओर मुड़े और उससे बोले मैंने
  257. 12:08तुम्हें आज सुबह में ही कहा था तुम्हारे
  258. 12:11पास दूसरा कोई रास्ता नहीं है। हम जो भी
  259. 12:13कर रहे हैं तुम्हारी भले के लिए कर रहे
  260. 12:15हैं। मैं तुम्हें स्पष्ट कर दूं कि
  261. 12:18तुम्हें हर हाल में विहान से शादी करनी
  262. 12:20है। और मैं अब इसमें कुछ भी सुनना नहीं
  263. 12:23चाहता। नहीं तो तुम्हें पता ही है जो
  264. 12:25मैंने कहा था। अगर तुम अपनी जिद पर अड़ी
  265. 12:28रहोगी तो फिर मेरे पास में भी दूसरा कोई
  266. 12:30रास्ता नहीं है। बलवंत राय अब कुछ भी
  267. 12:34सुनने के मूड में नहीं थे। इस बीच मेनका
  268. 12:37अपने मोबाइल में खेलती रही। फिर कुछ पल के
  269. 12:39बाद उसने अपना सर उठाया और अपने दादाजी की
  270. 12:42ओर देखकर बोली अगर आप अपनी जिद पर अड़े
  271. 12:45हुए हैं तो फिर ठीक है। मैंने आपका दिया
  272. 12:48हुआ 50 करोड़ ब्याज के साथ आपको वापस करती
  273. 12:51हूं। आप चेक कर लीजिए। मैंने अभी आपके
  274. 12:53करंट अकाउंट में ₹60 करोड़ ट्रांसफर कर
  275. 12:56दिया है। अब मैं उम्मीद करती हूं कि अब आप
  276. 13:00मुझे ब्लैकमेल करने की कोशिश नहीं करेंगे।
  277. 13:02शिप्रा की बात सुनकर बलवंत राय आश्चर्य से
  278. 13:05शिप्रा का चेहरा देखते रह गए। बलवंत राय
  279. 13:08को यह समझ नहीं आया कि यह कैसे संभव हुआ।
  280. 13:11आखिर शिप्रा के पास इतने पैसे कहां से आए
  281. 13:14कि उसने एक बार में ही 60 करोड़ उनको
  282. 13:17ट्रांसफर कर दिया। फिर उनके मन में एक
  283. 13:19ख्याल यह भी आया कि कहीं राजदीप ने तो
  284. 13:22उसको यह पैसे नहीं दिए हैं। हां, यही बात
  285. 13:25होगी। उन्होंने मन ही मन सोचा, जरूर
  286. 13:28राजदीप ने ही शिप्रा को पैसे दिए होंगे।
  287. 13:30नहीं तो वह एक साथ 60 करोड़ उनको कहां से
  288. 13:34वापस कर पाती। यह सोचकर उन्होंने राजदीप
  289. 13:37जी की ओर मुड़कर कहा, राजदीप, मुझे तुमसे
  290. 13:40ऐसी उम्मीद नहीं थी कि तुम यूं शिप्रा की
  291. 13:42मदद करोगे। तुम्हें शिप्रा को पैसे देने
  292. 13:44की क्या जरूरत थी? यह तुमने सही नहीं
  293. 13:47किया। राजदीप जी बलवंत राय की बात सुनकर
  294. 13:50परेशान होते हुए बोले मैंने शिप्रा की
  295. 13:53पैसे से कोई मदद नहीं की है पापा उसने खुद
  296. 13:56ही इन पैसों का इंतजाम किया है तुम क्या
  297. 13:59मुझे बेवकूफ समझते हो मुझे पता नहीं है
  298. 14:02क्या कि शिप्रा अपनी कमाई का ज्यादातर
  299. 14:04पैसा अपनी कंपनी में ही इन्वेस्ट कर देती
  300. 14:07है तो फिर उसके पास इतने पैसे कैसे हो
  301. 14:10सकते हैं? बलवंत राय अविश्वास भरे स्वर
  302. 14:13में बोले मैंने पापा से कोई पैसे नहीं
  303. 14:16लिया है दादा जी बल्कि मैंने अपनी कंपनी
  304. 14:18ही बेच दी आप इसी से परेशान थे ना अब आपकी
  305. 14:21यह परेशानी भी दूर हो गई शिप्रा बलवंत राय
  306. 14:24को अपने पापा के ऊपर इल्जाम लगाते देखकर
  307. 14:26बोली बलवंत राय ने जब यह सुना तो वह हैरान
  308. 14:30होकर शिप्रा की ओर देखने लगे उन्हें
  309. 14:33विश्वास नहीं हो रहा था कि शिप्रा ने उनको
  310. 14:35पैसे वापस करने के लिए अपनी कंपनी ही बेच
  311. 14:38दी। अगर देखा जाए तो वह ऐसा बिल्कुल नहीं
  312. 14:41चाहते थे। वह तो यह जो भी कर रहे थे यह सब
  313. 14:45वह सिर्फ शिप्रा पर एक प्रेशर बनाने के
  314. 14:48लिए कर रहे थे। जिससे शिप्रा विहान से
  315. 14:50शादी करने के लिए तैयार हो जाए। शिप्रा की
  316. 14:53कंपनी बेचने की बात सुनकर सिर्फ बलवंत राय
  317. 14:55ही नहीं बल्कि धर्मवीर रायजादा और विहान
  318. 14:58भी हैरान था। उन्होंने नहीं सोचा था कि
  319. 15:00शिप्रा इस हद तक जाएगी कि अपने दादाजी के
  320. 15:04ब्लैकमेल से बचने के लिए अपनी कंपनी ही
  321. 15:06बेच देंगी। क्योंकि कहीं ना कहीं धर्मवीर
  322. 15:09रायजादा और विहान को भी शिप्रा से यह लालच
  323. 15:12था कि अगर शिप्रा की शादी विहान से हो
  324. 15:15जाती है तो एक तरह से यह कंपनी भी उनकी हो
  325. 15:17जाएगी। पर शिप्रा ने अपनी कंपनी को बेचकर
  326. 15:20उनके सोचे हुए सारे प्लान पर पानी फेर
  327. 15:23दिया। धर्मवीर रायजादा और रिहान दोनों एक
  328. 15:26दूसरे का चेहरा देखने लगे और अपनी बेबसी
  329. 15:29को अपने चेहरे पर आने से रोक नहीं पाए।
  330. 15:33अगर इस समय कोई उनके चेहरे पर ध्यान देता
  331. 15:35तो यह सोचता कि उन दोनों की लंका ही लुट
  332. 15:39गई है। पर वह इस हालात में ज्यादा कुछ कर
  333. 15:43नहीं सकते थे। बलवंत राय को समझ नहीं आ
  334. 15:45रहा था कि वह शिप्रा से क्या बोले।
  335. 15:48उन्होंने तो दूर-दूर तक इसकी कोई कल्पना
  336. 15:50ही नहीं की थी क्योंकि वह यह भी अच्छी तरह
  337. 15:54समझते थे कि किसी कंपनी को खरीदने और
  338. 15:57बेचने की प्रक्रिया इतनी आसान नहीं होती।
  339. 16:00सबसे पहले तो किसी कंपनी को बेचने के लिए
  340. 16:02उसका खरीदार ढूंढना ही मुश्किल होता है।
  341. 16:05और अगर खरीदार मिल भी जाता है तो सारा
  342. 16:08प्रोसेस पूरा होने में सप्ताह 10 दिन तो
  343. 16:11लग ही जाता है। पर शिप्रा ने तो आज के आज
  344. 16:14में ही कंपनी को बेच दिया। आखिर ऐसा कौन
  345. 16:16बायर मिल गया था शिप्रा को जो आज के आज
  346. 16:19में ही उसको पैसे भी दे दिए। उन्हें खुद
  347. 16:22पर ही गुस्सा आ रहा था कि उन्होंने इस बात
  348. 16:24की ओर ध्यान क्यों नहीं दिया। वह खुद को
  349. 16:28कंट्रोल करते हुए बोले, तुमने अपनी कंपनी
  350. 16:31बेच दी और इस बारे में हम लोगों से कुछ
  351. 16:34विचार करने की जरूरत भी नहीं समझी। तुम
  352. 16:36कुछ ज्यादा ही मनमानी नहीं करने लग गई हो।
  353. 16:39इसके लिए भी तो आपने ही मजबूर किया है
  354. 16:41दादा जी। अब आप यही समझ लीजिएगा कि आपके
  355. 16:45दूसरे बच्चों की तरह मैं भी अपने
  356. 16:47स्टार्टअप में फेल हो गई। पर मैंने कुलवंत
  357. 16:50भैया, मयूर और राधिका की तरह आपके पैसे का
  358. 16:54नुकसान नहीं होने दिया। बल्कि मैंने तो
  359. 16:56आपको उस पर 10 करोड़ का ब्याज भी कमा कर
  360. 16:59दे दिया। इसलिए आपको मुझसे यह शिकायत तो
  361. 17:01नहीं होगी कि मैंने आपके बाकी बच्चों की
  362. 17:04तरह आपका कोई नुकसान कर दिया। शिप्रा
  363. 17:07बलवंत राय से तंज भरे स्वर में बोली।
  364. 17:09बलवंत राय को तो ऐसा लगा जैसे किसी ने
  365. 17:12उन्हें भरे बाजार चांटा मार दिया हो। वह
  366. 17:15शिप्रा से ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं कर रहे
  367. 17:18थे। उन्हें शिप्रा के कंपनी बेचने की
  368. 17:20बेवकूफी पर गुस्सा आ रहा था। वह गुस्से
  369. 17:24में ही बोले बेवकूफ लड़की तुमने यह सोचा
  370. 17:27भी है कि अपनी कंपनी को बेचने के बाद तुम
  371. 17:29क्या करोगी। पता नहीं क्या करूंगी। पर यह
  372. 17:32पक्का है कि फिर कभी कोई काम शुरू करने के
  373. 17:35लिए अगर पैसे की जरूरत होगी भी तो आपके
  374. 17:38पास पैसे के लिए तो नहीं आऊंगी। शिप्रा के
  375. 17:41दिल का सारा दर्द बलवंत राय के सामने उसकी
  376. 17:44बातों से जाहिर हो रहा था। बलवंत राय का
  377. 17:47दिमाग कुछ सोचने की स्थिति में नहीं था।
  378. 17:50वह यह कभी नहीं चाहते थे कि शिप्रा अपनी
  379. 17:52कंपनी को बेच दे। क्योंकि यह उनके लिए एक
  380. 17:55प्राउड की बात थी कि उनके सभी बच्चों में
  381. 17:58शिप्रा ने ही उनके दिए हुए पैसों का सही
  382. 18:01उपयोग किया था और एक वही थी जिसने अपने
  383. 18:04स्टार्टअप को कामयाब किया था। बाकी सब ने
  384. 18:07तो उनके दिए पैसे को डूबा ही दिया था और
  385. 18:10आज वह सब बलवंत राय के द्वारा खड़े किए गए
  386. 18:14दूसरी कंपनियों में ही अलग-अलग पोस्ट का
  387. 18:17काम देख रहे थे। अब उन्हें अपनी उस बात के
  388. 18:19लिए अफसोस हो रहा था जब उन्होंने शिप्रा
  389. 18:22से उनके द्वारा दिए हुए पैसों को इंटरेस्ट
  390. 18:24के साथ वापस करने के लिए कहा था। उस समय
  391. 18:27उन्होंने यह बात सिर्फ शिप्रा पर प्रेशर
  392. 18:30बनाने के लिए कहा था। पर इसके परिणाम में
  393. 18:33उन्होंने यह नहीं सोचा था कि शिप्रा इस हद
  394. 18:36तक चली जाएगी कि वह अपनी कंपनी को ही बेच
  395. 18:39देगी। उन्हें इस बात से भी गुस्सा आ रहा
  396. 18:41था कि इस बेवकूफ लड़की को अपनी कंपनी को
  397. 18:44बेचना तो कबूल हुआ पर वह विहान से शादी के
  398. 18:47लिए राजी नहीं हुई। वह शिप्रा के जज्बात
  399. 18:50को समझ ही नहीं सके। अगर शिप्रा के कंपनी
  400. 18:53बेचने के फैसले के बारे में उन्हें पहले
  401. 18:55पता चल जाता तो वह किसी भी सूरत में
  402. 18:57शिप्रा को ऐसा करने नहीं देते। यह बात
  403. 19:00उन्हें और गुस्सा दिला रहा था कि इस
  404. 19:03बेवकूफ लड़की ने एक बार यह बात उनके नॉलेज
  405. 19:06में लाने की कोशिश भी नहीं की कि वह उनका
  406. 19:09पैसा वापस करने के लिए अपनी कंपनी को ही
  407. 19:12बेचने जा रही है। यह बात उनके गुस्से को
  408. 19:15और बढ़ाता जा रहा था। वह गुस्से में बोले
  409. 19:19अगर तुम्हें श्रवण की पत्नी बनकर ही रहना
  410. 19:21है तो फिर तुम यहां क्या कर रही हो?
  411. 19:23तुम्हें तो फिर श्रवण के पास होना चाहिए
  412. 19:26था ना क्योंकि एक शादीशुदा लड़की का घर तो
  413. 19:29उसका पति का ही घर होता है ना। यह बात
  414. 19:31समझती हो कि नहीं? शादीशुदा लड़की अपने
  415. 19:34मायके तो किसी पर्व त्यौहार या किसी
  416. 19:36फंक्शन में ही आती है। अच्छा हुआ कि आपने
  417. 19:39मुझे यह एहसास भी करा दिया कि यह घर अब
  418. 19:42मेरे लिए पराया हो गया है। चिंता मत
  419. 19:44कीजिए। मैं जल्दी ही आपकी यह इच्छा भी
  420. 19:47पूरी कर दूंगी। शिप्रा अपने प्रवाह में
  421. 19:49बोलती चली गई। उसने यह भी नहीं सोचा कि इस
  422. 19:53बात के क्या मायने हैं। जबकि राजदीप जी और
  423. 19:56बीना जी बलवंत राय और शिप्रा दोनों की बात
  424. 19:58को सुनकर परेशान नजर आने लगे। उन्हें यह
  425. 20:01उम्मीद नहीं थी कि बात इस हद तक चली जाएगी
  426. 20:05कि फिर उसे कंट्रोल करना मुश्किल हो
  427. 20:07जाएगा। पर वह बलवंत राय के सामने कुछ बोल
  428. 20:10भी नहीं सकते थे। वह यही उम्मीद कर रहे थे
  429. 20:12कि यह बातें जितनी जल्दी बंद हो जाए उतना
  430. 20:15अच्छा। जबकि धर्मवीर रायजादा और विहान
  431. 20:18शिप्रा के पहले के व्यवहार से आहत तो थे
  432. 20:21ही। इसलिए वह बलवंत राय की बात सुनकर खुश
  433. 20:24हो रहे थे कि शायद इस लड़की का दिमाग घर
  434. 20:27से निकाले जाने के बाद ही सही होगा। इस
  435. 20:30बीच धर्मवीर रायजादा ने अपने आप को शिप्रा
  436. 20:33का हितैषी दिखाते हुए कहा, "यह तुम कैसी
  437. 20:36बात कर रही हो? शिप्रा बेटी? तुम क्यों इस
  438. 20:38घर को छोड़कर जाओगी? तुम यही चाहती हो ना
  439. 20:41कि तुम्हें विहान से शादी नहीं करनी है।
  440. 20:44अगर ऐसी बात थी तो तुम मुझसे बात कर सकती
  441. 20:46थी। मेरे सामने अपनी बात रखती तो मैं क्या
  442. 20:49तुम्हारे साथ जबरदस्ती करता? मैं तो बस
  443. 20:52तुम्हारी जिंदगी खराब होते नहीं दिखा सकता
  444. 20:54था। इसलिए मैंने बलवंत राय जी के सामने
  445. 20:56विहान से तुम्हारी शादी की बात रखी थी।
  446. 20:59क्योंकि तुम्हारी इस हालत का जिम्मेदार
  447. 21:02कहीं ना कहीं मैं और विहान भी तो थे।
  448. 21:05तुम्हें विहान से शादी नहीं करनी है। कोई
  449. 21:07बात नहीं। अब तुम्हें कोई भी इसके लिए
  450. 21:09प्रेशराइज नहीं करेगा। पर तुम इस घर को
  451. 21:12छोड़ने की बात भूल जाओ। हमारे कारण
  452. 21:14तुम्हें अपना घर छोड़ना पड़े यह ठीक नहीं
  453. 21:17है। राय साहब आप भी इस बात को छोड़िए। जब
  454. 21:20शिप्रा बेटी श्रवण के साथ खुश है तो फिर
  455. 21:23इसे खुश रहने दीजिए। हमारे लिए तो सबसे
  456. 21:26बढ़कर शिप्रा बेटी की खुशी ही है। सुन रही
  457. 21:29हो कुछ? देख रही हो तुम्हारे लिए कितने
  458. 21:31चिंतित हैं। धर्मवीर जी और एक तुम हो जिसे
  459. 21:35अपनी अच्छे बुरे का ही ज्ञान नहीं है।
  460. 21:37बलवंत राय धर्मवीर जी की बात सुनकर शिप्रा
  461. 21:40को ताना मारते हुए बोले फिर वह धर्मवीर
  462. 21:43रायजादा से बोले माफ कीजिएगा धर्मवीर जी
  463. 21:46हम अपनी इस नादान बेटी को समझाने में
  464. 21:48नाकाम रहे पर मैं चाहता हूं कि हमारे
  465. 21:51परिवार में जो एक संबंध बनने जा रहा था वह
  466. 21:54ऐसे ही ना रहे अगर आप चाहेंगे तो भी हमारे
  467. 21:56परिवार में संबंध बन सकता है मैं कुछ समझा
  468. 21:59नहीं आप कहना क्या चाहते हैं राय साहब
  469. 22:02धर्मवीर रायजादा को बलवंत राय की बात
  470. 22:05सुनकर कुछ उम्मीद जगी की क्या अभी भी कुछ
  471. 22:07हो सकता है? जब धर्मवीर रायजादा ने बलवंत
  472. 22:11राय से जानना चाहा कि वह क्या कहना चाहते
  473. 22:13हैं तो बलवंत राय ने कहा अगर आप चाहेंगे
  474. 22:18तो हमारी दूसरी पोती युविका के साथ हम
  475. 22:21विहान की शादी कर सकते हैं। मुझे उम्मीद
  476. 22:24है कि बृजभूषण भी इस बात से खुश ही होगा।
  477. 22:28आप क्या कहते हैं? वैसे तो इसकी कोई जरूरत
  478. 22:30नहीं है राय साहब। लेकिन अगर आप चाहते हैं
  479. 22:33कि हमारे परिवार में कोई संबंध बन ही जाए
  480. 22:36तो मैं आपको मना कैसे कर सकता हूं। आप
  481. 22:39जैसा चाहेंगे मैं उसके लिए हमेशा तैयार
  482. 22:41हूं। शायद ऊपर वाला भी यही चाहता है कि हम
  483. 22:44सिर्फ बिजनेस पार्टनर ही ना बने बल्कि हम
  484. 22:47संबंधी भी बन जाए। धर्मवीर रायजादा मन ही
  485. 22:50मन खुश होता हुआ बोला। अभी तक जो उसे लग
  486. 22:53रहा था कि उसकी योजना खटाई में पड़ गई।
  487. 22:56उसके पास जो मौका था उसे उसने खो दिया।
  488. 22:59अचानक ही उसे लगने लगा कि फिर से वह अपने
  489. 23:01मकसद को पूरा कर सकता है। धर्मवीर रायजादा
  490. 23:04की सहमति पाकर बलवंत राय ने कहा तो फिर
  491. 23:08ठीक है मैं बृजभूषण से बात करके कोई अच्छा
  492. 23:11सा दिन निश्चित करके दोनों की सगाई कर
  493. 23:13देते हैं। यह सब आप देख लीजिए राय साहब आप
  494. 23:16जैसा कहेंगे मैं उसके लिए तैयार हूं। आखिर
  495. 23:19आप हमारे भी तो बड़े हैं। धर्मवीर रायजादा
  496. 23:22चापलूसी भरे स्वर में बोला राजदीप जी और
  497. 23:24बीना जी बातचीत का स्वरूप चेंज होते देखकर
  498. 23:27हैरान थे। बीना जी को जलन भी हुआ कि जो
  499. 23:29विहान उनका दामाद बन सकता था। अब वह
  500. 23:32बृजभूषण का दामाद बन जाएगा। बीना जी समझ
  501. 23:36नहीं पा रही थी कि वह खुश हुए कि रोए।
  502. 23:38कमोबेश यही हाल राजदीप जी का भी था। उनकी
  503. 23:42भी चाहत नहीं थी कि शिप्रा की शादी विहान
  504. 23:45से हो। पर जब उन्होंने यह जाना कि अब
  505. 23:47विहान की शादी युविका से होने जा रही है
  506. 23:50तो उनके मन में भी जलन का भाव पैदा हो
  507. 23:53गया। पर उन्हें तसल्ली थी कि चलो कम से कम
  508. 23:56बातचीत का स्वरूप तो चेंज हुआ। अब बलवंत
  509. 23:58राय का फोकस शिप्रा से हट गया था। शिप्रा
  510. 24:02इस बात से हैरान थी कि कैसे धर्मवीर
  511. 24:04रायजादा तुरंत ही युविका को अपनी बहू
  512. 24:07बनाने के लिए तैयार हो गया। अब भी कहां
  513. 24:09गया विहान का प्यार जो दावा करता था कि वह
  514. 24:12शिप्रा से बहुत प्यार करता है। जैसे ही
  515. 24:15युविका के साथ शादी करने की बात आई एक बार
  516. 24:17गलती से भी विहान ने प्रतिरोध करने की
  517. 24:19कोशिश नहीं की बल्कि उसके चेहरे को देखकर
  518. 24:22लग रहा था वह भी इस फैसले से संतुष्ट था।
  519. 24:27ठीक है राय साहब आप देख लीजिए कि आगे क्या
  520. 24:30करना है। बाकी अभी मैं चलता हूं। जैसा भी
  521. 24:32होगा उस हिसाब से आगे की प्लानिंग कर
  522. 24:34लेंगे। धर्मवीर रायजादा सोफे से उठता हुआ
  523. 24:37बोला। विहान भी धर्मवीर रायजादा के साथ हो
  524. 24:40लिया। फिर दोनों उस घर से निकल गए।
  525. 24:42धर्मवीर रायजादा और विहान के जाने के बाद
  526. 24:46बलवंत राय ने राजदीप और बिना जी की ओर
  527. 24:48देखकर कहा, ठीक है, मैं भी चलता हूं। अब
  528. 24:52आगे की प्लानिंग भी करनी है। इतना बोलकर
  529. 24:54उन्होंने एक नजर शिप्रा की ओर देखा। फिर
  530. 24:57वह भी वहां से निकल गए। बलवंत राय के वहां
  531. 25:00से जाने के बाद राजदीप जी और बीना जी ने
  532. 25:03चैन की सांस ली। पर शिप्रा का मूड थोड़ा
  533. 25:06उखड़ा हुआ था। उसको बलवंत राय की इस बात
  534. 25:09ने थोड़ा इमोशनल कर दिया था। जब उन्होंने
  535. 25:12कहा था कि जब तुमने शादी कर ही ली है तो
  536. 25:15फिर यहां क्या कर रही हो? तुम्हें तो अपने
  537. 25:17पति के पास होना चाहिए। शिप्रा समझ रही थी
  538. 25:20कि यह बलवंत राय का फ्रस्ट्रेशन था। पर यह
  539. 25:23बात कहीं ना कहीं उसको चुभ गई थी। उसने
  540. 25:26खुद भी सोच लिया था कि अब उसके लिए भी यही
  541. 25:28सही है कि वह कुछ समय के लिए अपना घर छोड़
  542. 25:31ही दे ताकि बाद में उसके घर वाले भी
  543. 25:34दोबारा कभी उससे उसकी शादी को लेकर कुछ
  544. 25:37बात ना कर सके। वैसे भी शिप्रा प्लान कर
  545. 25:39रखी थी कि वह शौर्य के घर जाकर कुछ दिन
  546. 25:42रहेगी। अब उसको इसका सही बहाना भी मिल गया
  547. 25:44था। उसने शौर्य की कोठी में अपने लिए एक
  548. 25:48रूम को अपने हिसाब से डेकोरेट करने के लिए
  549. 25:50खरीदारी भी कर ली थी। दूसरी तरफ वीणा जी
  550. 25:53को यह बात खाई जा रही थी कि शिप्रा के मना
  551. 25:56करने के बाद बलवंत राय ने विहान की शादी
  552. 25:59युविका के साथ फिक्स कर दी थी। जब तक वीणा
  553. 26:02जी को यह नहीं लगा था कि बलवंत राय ऐसा
  554. 26:05कुछ करने वाले हैं। तब तक वह भी शिप्रा की
  555. 26:08शादी विहान से करने के पक्ष में नहीं थी।
  556. 26:11लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि अब बलवंत
  557. 26:14राय ने युविका के साथ विहान की शादी करने
  558. 26:16की सोच ली है तो उनके मन में जलन की भावना
  559. 26:20आ गई थी। जिसे उन्होंने छुपाया भी नहीं और
  560. 26:24इस बात को उन्होंने शिप्रा के सामने ही
  561. 26:26जाहिर कर दिया। देखा तुमने तुम्हारी जिद
  562. 26:30के कारण आज पापा जी विहान की शादी युविका
  563. 26:33से करने जा रहे हैं। मुझे तो समझ नहीं आ
  564. 26:36रहा है कि तुमने यह कैसी जिद ठान ली है कि
  565. 26:39विहान से शादी नहीं करनी है। राजदीप जी ने
  566. 26:42जब बीना जी को यह कहते सुना तो उन्हें
  567. 26:45शिप्रा के लिए थोड़ा बुरा भी लगा क्योंकि
  568. 26:47वह पहले ही एक मेंटल ट्रॉमा से गुजर रही
  569. 26:50थी। क्योंकि जितना कुछ अभी बलवंत राय उससे
  570. 26:53बोल कर गए थे। यहां तक कि उसे घर छोड़ने
  571. 26:56के लिए भी बोल दिया था। यह एक तरह से
  572. 26:59शिप्रा के लिए मेंटल ट्रॉमा ही था। पर
  573. 27:01बीना जी यह कहां समझने वाली थी। इसलिए
  574. 27:04बीना जी की बात शिप्रा को और प्रभावित ना
  575. 27:07करे। यह सोचकर उन्होंने बीना जी को झिरकते
  576. 27:10हुए कहा। तुम भी बिना कुछ सोचे समझे कुछ
  577. 27:13भी बोलने लगती हो। अभी पिताजी जो इसको
  578. 27:15इतना बोल कर गए। वह क्या काम था? जो अब
  579. 27:18तुम भी शुरू हो गई। अब जब यह फैसला हो गया
  580. 27:21कि शिप्रा को विहान से शादी नहीं करनी है
  581. 27:24तो अब तुम उस बात को लेकर कोई भी बात नहीं
  582. 27:27करोगी। अगर पिताजी चाहते हैं कि विहान की
  583. 27:29शादी युविका से हो जाए तो फिर ठीक है ऐसा
  584. 27:32ही हो। पर अब इस बात के लिए शिप्रा को
  585. 27:34कोषना बंद करो। राजदीप जी की बात से बीना
  586. 27:38जीत चुप हो गई। वह भी शिप्रा के चेहरे का
  587. 27:40बदलते भाव को देख रही थी। फिर वह बात को
  588. 27:44संभालने के लिए प्यार से बोली। मैं शिप्रा
  589. 27:47को कोश थोड़ी रही हूं। मैं तो बस इसलिए
  590. 27:49ऐसा बोल दी कि अब पापा जी विहान की शादी
  591. 27:52यूका से करने जा रहे हैं। हां तो क्या
  592. 27:54हुआ? विहान की शादी किसी ने किसी के साथ
  593. 27:57तो होनी थी। ऐसा तो है नहीं कि शिप्रा ने
  594. 27:59विहान से शादी नहीं की तो उसकी शादी ही
  595. 28:02नहीं होगी। जब किसी और से भी होनी थी तो
  596. 28:04युविका के साथ हो जाएगी। तुम इस बात को
  597. 28:07अन्यथा क्यों ले रही हो? राजदीप जी बीना
  598. 28:10जी को समझाते हुए बोले राजदीप जी और बीना
  599. 28:13जी की बात चालू थी। इसी बीच में शिपरा
  600. 28:15बोली मां पापा मैं कुछ समय के लिए श्रवण
  601. 28:19के साथ रहने के लिए जा रही हूं। शायद इस
  602. 28:21घर से अलग रहकर मैं यह भी निश्चय कर
  603. 28:23पाऊंगी कि मेरे लिए क्या सही है और क्या
  604. 28:26गलत। जब राजदीप जी ने यह सुना कि शिप्रा
  605. 28:29श्रवण के साथ शिफ्ट होने की सोच रही है तो
  606. 28:32उन्हें झटका सा लगा। उन्होंने यही सोचा कि
  607. 28:35अभी पिताजी ने जो शिप्रा से कहा था कि तुम
  608. 28:38अपने पति के साथ क्यों नहीं रह रही हो।
  609. 28:40शायद इसी कारण शुप्रा ऐसा बोल रही है। यह
  610. 28:43सोचकर ही राजदीप जी सफाई देते हुए बोले,
  611. 28:46यह तुम कैसी बात कर रही हो? अरे पिताजी ने
  612. 28:49तो गुस्से में पता नहीं क्या कुछ बोल
  613. 28:51दिया। इसका मतलब यह थोड़े ही है कि
  614. 28:53तुम्हें यह घर छोड़कर जाना है। तुम ज्यादा
  615. 28:56कुछ सोचो मत। आज तुम आराम करो। सब कुछ कल
  616. 28:59से नॉर्मल हो जाएगा। अब वैसे भी पिताजी ने
  617. 29:03विहान की शादी युविका के साथ करने की सोच
  618. 29:05ली है। तो तुम्हारी तरफ वह ज्यादा ध्यान
  619. 29:08अब नहीं देंगे। नहीं पापा मैं ऐसा इसलिए
  620. 29:11नहीं बोल रही हूं कि दादा जी ने ऐसा कहा
  621. 29:14इसलिए मैं श्रवण के साथ शिफ्ट होने की सोच
  622. 29:16रही हूं। मैंने यह पहले ही सोच रखा था कि
  623. 29:20मुझे श्रवण के साथ शिफ्ट होना है। शिप्रा
  624. 29:23ने राजदीप जी के सामने सफाई दी। पर बेटी
  625. 29:27उसका तो अपना खुद ही ठिकाना नहीं है। तो
  626. 29:29तुम उसके साथ कहां शिफ्ट होगी? राजदीप जी
  627. 29:32ने अपनी चिंता जाहिर की। ऐसा नहीं है
  628. 29:35पापा। श्रवण जहां काम करता है उस कंपनी से
  629. 29:38उसको रहने के लिए घर मिला है। वह अब वहीं
  630. 29:41रहने लगा है। मैं जाकर उस घर को देख भी ली
  631. 29:44हूं। वह अच्छा घर है। इसलिए मैं अभी वहीं
  632. 29:48रहने की सोच रही हूं। शिप्रा ने अपने दिल
  633. 29:50की बात अपनी मां और पापा के सामने जहीर कर
  634. 29:53दी। क्या कहा तुमने? श्रवण को उसकी कंपनी
  635. 29:56की तरफ से रहने के लिए घर भी मिला है।
  636. 29:59तुमने यह बात मुझे पहले क्यों नहीं बताई?
  637. 30:01यह तो अच्छी बात है कि श्रवण इतनी जल्दी
  638. 30:03तरक्की कर रहा है। पर फिर भी अभी तुम्हें
  639. 30:06वहां जाकर रहने की क्या जरूरत है? राजदीप
  640. 30:10जी यह जानकर कि श्रवण को उसकी कंपनी से
  641. 30:12रहने के लिए घर मिला है। उस बात से खुश
  642. 30:15होते हुए बोले बात जरूरत की नहीं है पापा।
  643. 30:18बात अब अपने स्वाभिमान की भी है। आप मुझे
  644. 30:22रोकिए मत। मैं ऐसा दादा जी की बात सुनकर
  645. 30:24नहीं कर रही हूं। अभी मुझे यही ठीक भी लग
  646. 30:27रहा है। यह मेरा अपना फैसला है कि मुझे
  647. 30:30श्रवण के साथ अपनी शादी को कंटिन्यू करना
  648. 30:32है। इसलिए भी मेरा यह फैसला सही है।
  649. 30:36शिप्रा अपनी बात को स्पष्ट करते हुए बोली
  650. 30:39मैं तुम्हारी बात से इंकार नहीं कर रहा।
  651. 30:41पर इस समय मुझे तुम्हारा वहां शिफ्ट होना
  652. 30:44सही नहीं लग रहा है। इसलिए मैं ऐसा बोल
  653. 30:47रहा हूं। अगर तुमको श्रवण के साथ शिफ्ट ही
  654. 30:50होना है तो कुछ दिनों के बाद हो जाना। पर
  655. 30:53अभी नहीं। नहीं तो सबको यही लगेगा कि
  656. 30:56तुमने ऐसा पिताजी की बात को सुनकर ही
  657. 30:58किया। राजदीप जी ने अपनी चिंता जाहिर की।
  658. 31:01अगर ऐसी बात है तो फिर यही सही है पापा कि
  659. 31:04मैं अभी ही श्रवण के साथ शिफ्ट हो जाऊं।
  660. 31:06इससे दादाजी की बात का मान भी रह जाएगा।
  661. 31:08पर हां मैं आपसे यह अशोर करती हूं कि अगर
  662. 31:11कभी भी आप मुझे याद करेंगे या बुलाएंगे तो
  663. 31:14मैं आपके पास हाजिर हो जाऊंगी। पर प्लीज
  664. 31:17आप मुझे अभी वहां जाने से मत रोकिए।
  665. 31:19शिप्रा राजदीप जी से रिक्वेस्ट करती हुई
  666. 31:21बोली। दूसरी तरफ मेनका और श्रवण की मीटिंग
  667. 31:25हंसल मेहता के साथ समाप्त हो गई थी। हंसल
  668. 31:28मेहता अपने घर को चले गए थे। उनके जाने के
  669. 31:31बाद मेनका ने बताया कि होटल पैराडाइज के
  670. 31:34बडिंग के लिए उसने फॉर्म वगैरह फील कर
  671. 31:36दिया था। उसने वहां पर विक्रम के नाम से
  672. 31:39बड करने के लिए नॉमिनेशन किया था। क्योंकि
  673. 31:42वह नहीं चाहती थी कि राघव चड्ढा को यह पता
  674. 31:46चले कि उस बिल्डिंग में मेनका भी भाग ले
  675. 31:49रही है। अगर राघव चढा को यह पता चल जाता
  676. 31:52कि मेनका भी होटल पैराडाइज की नीलामी के
  677. 31:55में हिस्सा ले रही है तो वह सचेत हो जाता।
  678. 31:58यही सोचकर मेनका ने उसमें अपना नाम नहीं
  679. 32:01दिया। उसने बडिंग के लिए जो होटल के
  680. 32:03प्राइस का 10 से 15 फट अमाउंट डिपॉजिट
  681. 32:06करनी होती है, वह भी करवा दिया था और वह
  682. 32:09उस तरफ से अब निश्चित हो गई थी। श्रवण ने
  683. 32:11मेनका को अशोर किया कि वह भी उस बिल्डिंग
  684. 32:14में विक्रम के साथ हिस्सा लेगा और कोशिश
  685. 32:17करेगा कि वह मेनका के सपनों को साकार कर
  686. 32:19दे। शौर्य की बात सुनकर मेनका खुश हो गई
  687. 32:22थी। अगर राघव चड्ढा को यह बात पता चल जाता
  688. 32:25कि मेनका ने होटल पैराडाइज के लिए क्या
  689. 32:27प्लान कर रखा है तो शायद वह इस नीलामी
  690. 32:31प्रक्रिया को रोकने की कोशिश करता।
  691. 32:33क्योंकि राघव चढा ने अपने सोर्स से इस
  692. 32:36नीलामी की ज्यादा पब्लिसिटी नहीं होने
  693. 32:38दिया था। इसका कारण यह था कि वह नहीं
  694. 32:41चाहता था कि ज्यादा लोग इस बिल्डिंग में
  695. 32:43हिस्सा ले। पर मेनका की नजर पहले से ही इस
  696. 32:46पर थी और उसने अपना एक बंदा भी राघव चड्ढा
  697. 32:49की टीम में शामिल कर रखा था। जिससे उसे
  698. 32:52वहां की वस्तु स्थिति का पता चलता रहता
  699. 32:54था। मेनका ने श्रवण को बताया कि नीलामी का
  700. 32:58टाइम कल 11 0 बजे का है। इसलिए वह समय से
  701. 33:03आ जाए। शौर्य ने मेनका को आश्वस्त किया कि
  702. 33:05वह समय से आ जाएगा। इसके बाद शौर्य होटल
  703. 33:09राजकमल से अपने घर के लिए निकल गया। होटल
  704. 33:12से निकलकर शौर्य सीधा मॉडल टाउन वाली अपनी
  705. 33:14कोठी पर पहुंचा। जिस समय वह अपने घर
  706. 33:17पहुंचा। उसने देखा उसके घर के बाहर एक
  707. 33:20ट्रक खड़ा था जिसमें से लोग सामान उतार
  708. 33:22रहे थे। शौर्य को यह समझ नहीं आया कि यह
  709. 33:25सामान किसने मंगवाया है। उसने देखा वहीं
  710. 33:28पर मेघा खड़ी है तो उसने मेघा से पूछा यह
  711. 33:31किसका सामान है और किसने इसे मंगवाया है?
  712. 33:34मेघा ने शौर्य से बताया कि इसे शिप्रा
  713. 33:36भाभी ने अपने कमरे के लिए मंगवाया है।
  714. 33:39शौर्य को यह जानकर सुखद आश्चर्य हुआ कि
  715. 33:42शिप्रा ने सच में उस कमरे के लिए फर्नीचर
  716. 33:45के साथ और भी जरूरी सामान मंगवाया था।
  717. 33:47पहले उसे लगा नहीं था कि शिप्रा ऐसा कुछ
  718. 33:49करेगी। वैसे जब शिप्रा यहां आई थी तो उसने
  719. 33:52मेघा को बताया था कि वह उस कमरे को किसी
  720. 33:55को ना दे। वह उसे अपने हिसाब से डेकोरेट
  721. 33:57करेगी। पर उस समय शौर्य को उसकी बात पर
  722. 34:00विश्वास नहीं हुआ था। पर अब जब उसने सामान
  723. 34:03को उतरते देखा तो उसे एक आश्चर्य के साथ
  724. 34:06सुखद अनुभूति भी हुआ। उसके मन के किसी
  725. 34:09कोने में एक गुदगुदी से भी हुई कि शिप्रा
  726. 34:12उसके साथ रहने यहां आएगी। वह घर के अंदर
  727. 34:15गया और उस कमरे में जाकर उसने वहां की
  728. 34:18स्थिति को देखा। सामान के साथ आए लोगों ने
  729. 34:21खुद ही हर एक सामान को उसकी सही जगह पर
  730. 34:24सेट किया। शौर्य ने देखा उस कमरे की
  731. 34:26स्थिति अब बहुत अच्छी हो गई थी। वह खाली
  732. 34:29कमरा अब सामान भर जाने के बाद पूरी तरह से
  733. 34:32एक कमरा लग रहा था। उसने ध्यान दिया उस
  734. 34:35कमरे का हर एक आइटम प्रिशियस था और आंखों
  735. 34:38को सुकून देने वाला था। यहां तक कि जो
  736. 34:40विंडो के ऊपर पर्दा भी लगा हुआ था, वह भी
  737. 34:43अपनी खूबसूरती को [संगीत] बयां कर रहा था।
  738. 34:46इसी समय कमरे में मेघा भी आई और कमरे को
  739. 34:49निहारती हुई बोली देखा आपने कितना सुंदर
  740. 34:52लग रहा है यह कमरा अब तो मजा आएगा जब भाभी
  741. 34:54यहां रहने आ जाएंगी मेघा की बात सुनकर
  742. 34:57शौर्य मुस्कुराया और बोला तुम्हें लगता है
  743. 35:00कि शिप्रा यहां रहने के लिए आएगी तो और
  744. 35:03क्या आपको क्या लगता है उन्होंने जो यह
  745. 35:06कमरा अपने हिसाब से सजाया है वह क्या
  746. 35:08सिर्फ दिखावे के लिए किया है आप देख नहीं
  747. 35:11रहे हैं कि यहां जो भी सामान लगाया गया है
  748. 35:14वह कितना अच्छा और खूबसूरत है। मेघा पूरे
  749. 35:17कमरे में अपनी नजर दौड़ाती हुई बोली।
  750. 35:20शौर्य ने मेघा की नजरों का अनुसरण किया।
  751. 35:23उसे मेघा सही बोलती प्रतीत हुई क्योंकि
  752. 35:26शिप्रा ने उस कमरे की हर एक छोटी से बड़ी
  753. 35:29चीजों के ऊपर खास ध्यान दिया था। वह समझ
  754. 35:32सकता था कि शिप्रा ने इस पर अच्छा खासा
  755. 35:35पैसा खर्च किया है। शौर्य को घर आए हुए
  756. 35:38लगभग 1 डेढ़ घंटा हो गया था। वह मेघा के
  757. 35:41साथ डाइनिंग हॉल में बैठा हुआ था। इसी समय
  758. 35:43गोपाल की वाइफ गीता दो कप चाय लेकर उसके
  759. 35:46सामने आ गई थी और उसने दोनों के सामने
  760. 35:49उसका कप पड़ा दिया। गिरजा लगभग 35 36 साल
  761. 35:53की युवती थी। जब उन्होंने शौर्य और मेघा
  762. 35:55के सामने चाय रखी तो शौर्य ने पूछा भाभी
  763. 35:59आपकी चाय कहां है? आपने अपना चाय क्यों
  764. 36:01नहीं लिया? शौर्य की बात सुनकर गिरजा
  765. 36:04हैरानी से शौर्य की ओर देखने लगी। जैसे वह
  766. 36:07उससे कह रही हो कि उसके सामने वह कैसे चाय
  767. 36:10पी सकती है? शौर्य ने गिरजा के भाव को
  768. 36:12महसूस कर लिया और मुस्कुराते हुए बोला
  769. 36:15दीदी आप यहां काम करती हैं तो इसका मतलब
  770. 36:18यह नहीं हुआ कि आप अपने मन का नहीं कर
  771. 36:20सकती। आप भी यहां एक तरह से हमारे परिवार
  772. 36:23का ही हिस्सा हैं और अभी तो यहां कोई
  773. 36:25ज्यादा लोग भी नहीं है। इसलिए जब आप हमारे
  774. 36:27लिए कुछ भी बनाती हैं तो आप अपने लिए भी
  775. 36:30बना लिया कीजिए। आप यह कभी मत सोचिए कि आप
  776. 36:34यहां एक नौकर के रूप में हैं। शौर्य की
  777. 36:36बात सुनकर मेघा भी गिरजा की ओर देखकर
  778. 36:39मुस्कुराते हुए बोली जाइए दीदी आप भी अपने
  779. 36:43लिए चाय बनाकर ले आइए। नहीं तो कहीं ऐसा
  780. 36:45ना हो कि श्रवण भैया ही आपके लिए चाय
  781. 36:47बनाने चले जाएं। नहीं नहीं उसकी कोई जरूरत
  782. 36:50नहीं है। मैं जाती हूं। मैं अपने लिए चाय
  783. 36:53बनाकर पी लूंगी। तब तक आप दोनों पीजिए।
  784. 36:55गिरजा सकुचाते हुए बोली। शिप्रा ने इतना
  785. 36:59बोला ही था कि तभी उसने बाहर किसी गाड़ी
  786. 37:02के खड़े होने की आवाज सुनी तो उसने गिरजा
  787. 37:04को रोकते हुए कहा रुक जाइए दीदी लगता है
  788. 37:08कोई बाहर आया है पहले देख लीजिए हो सकता
  789. 37:10है कि आपको कुछ और कप चाय बनानी पड़ जाए
  790. 37:13आप रहने दीजिए मैं जाकर देखती हूं कि बाहर
  791. 37:15कौन आया है। इतना बोलकर गिरजा बाहर गेट की
  792. 37:18तरफ बढ़ गई। इधर शौर्य भी सोच रहा था कि
  793. 37:22पता नहीं इस समय कौन आया है। शौर्य और
  794. 37:24मेघा दोनों की निगाह गेट की तरफ ही लगी
  795. 37:27हुई थी। तभी उसने देखा गिरजा के पीछेछे
  796. 37:31शिप्रा और मेघना दोनों आ रही थी। शिप्रा
  797. 37:34को देखकर मेघा अपनी जगह से खड़ी हो गई और
  798. 37:36वह भागकर शिप्रा के पास पहुंची। शिप्रा ने
  799. 37:39मेघा को अपनी तरफ आते देखा तो उसको खींच
  800. 37:41कर अपने गले से लगा लिया। मेघा शिप्रा से
  801. 37:44अलग होते हुए बोली भाभी आप आ गई। सच कहो
  802. 37:48तो मैं आपका दिन से ही इंतजार कर रही थी।
  803. 37:50इसके बाद मेघा ने मेघना को भी नमस्ते
  804. 37:53किया। शौर्य अपनी जगह पर खड़ा होकर दोनों
  805. 37:56को अपनी तरफ आते हुए देखता रहा। शौर्य की
  806. 37:59नजर मेघना से मिली तो मेघना ने मुस्कुराते
  807. 38:03हुए कहा तुमने तो मुझे अपने घर बुलाया
  808. 38:06नहीं। पर देखो मैं कितनी बेशर्म निकली कि
  809. 38:10बिन बुलाए ही तुम्हारे घर आ गई। शौर्य ने
  810. 38:12मेघना की बात को सुना। तो उसने भी मेघना
  811. 38:15को ऐसा ही जवाब दिया। क्यों झूठ बोल रही
  812. 38:17हो? तुम मेरे पास नहीं आई हो बल्कि तुम तो
  813. 38:19अपनी बहन के घर आई हो। शौर्य का यह जवाब
  814. 38:22सुनकर मेघना की आंखें बड़ी हो गई। उसने मन
  815. 38:26ही मन सोचा कितना तेज है यह लड़का। ऐसा
  816. 38:29जवाब दिया कि उसने एक लाइन में ही इस घर
  817. 38:32से शिप्रा का अपनापन जोड़ दिया। एक पल में
  818. 38:34ही शिप्रा को उसने यह एहसास करा दिया कि
  819. 38:37वह किसी और के पास नहीं बल्कि अपने घर में
  820. 38:40आई है। अब मेघना चाहकर भी कुछ नहीं बोल
  821. 38:43सकती थी। जबकि इस समय शिप्रा को यह सुनकर
  822. 38:46अच्छा लगा जो शौर्य ने मेघना से कहा कि वह
  823. 38:49अपने बहन के घर आई है। इस एक शब्द में है।
  824. 38:52शौर्य ने शिप्रा को कितना बड़ा अधिकार दे
  825. 38:54दिया था। शौर्य के यह कुछ शब्द ने ही
  826. 38:57शिप्रा के मन का झिंझक समाप्त कर दिया।
  827. 39:00यहां आने से पहले शिप्रा के मन में कई
  828. 39:02सवाल चल रहे थे कि श्रवण क्या सोचेगा कि
  829. 39:05वह बिना कुछ बोले ही उसके घर में आ गई है।
  830. 39:08ना इस बारे में दोनों ने कोई बात किया।
  831. 39:11आने से पहले वह इस बारे में भी कई बार
  832. 39:13सोची कि वह श्रवण को कैसे अपने इस उलझे मन
  833. 39:16स्थिति के बारे में समझा पाएगी। पर अब वह
  834. 39:19सारी भाव शिप्रा के मन से समाप्त हो गई
  835. 39:22थी। उसने यह महसूस कर लिया कि अब उसे इस
  836. 39:25बारे में शौर्य से कोई बात करने की जरूरत
  837. 39:27ही नहीं है। शौर्य की इन कुछ बातों को
  838. 39:30सुनने के बाद ही उसके मन में यह अनुभूति आ
  839. 39:33गई कि यह उसका अपना ही घर है। यहां आने से
  840. 39:36पहले जो उसके मन में एक परायापन का बोध
  841. 39:39था, वह अब समाप्त हो गया था। मेघा के कहने
  842. 39:42पर शिप्रा और मेघना भी उस डाइनिंग हॉल में
  843. 39:45ही शौर्य के सामने बैठ गए। उन दोनों के
  844. 39:47बैठने के बाद गिरजा ने शिप्रा और मेघना की
  845. 39:50ओर देखकर पूछा दीदी आप लोग क्या लेंगी चाय
  846. 39:53या कॉफी? गिरजा की बात सुनकर शिप्रा ने
  847. 39:56मेघा की ओर देखा तो मेघा बोली भाभी मैं और
  848. 39:59श्रवण भैया तो चाय पी रहे हैं। आप बोल
  849. 40:02दीजिए आपको क्या चाहिए? अभी दीदी बना
  850. 40:04लाएंगी। मेघा की बात सुनकर शिप्रा गिरजा
  851. 40:08से बोली तो फिर ठीक है। आप मेरे लिए भी
  852. 40:11चाय ही बना लाइए। शिप्रा की बात सुनकर
  853. 40:14गिरजा किचन में चली गई और कुछ ही देर में
  854. 40:16उन दोनों के लिए चाय बनाकर ले आई। गिरजा
  855. 40:19ने शिप्रा और मेघना के सामने चाय की कप रख
  856. 40:22दी और वह वहां से चली गई। गिरजा के वहां
  857. 40:24से जाने के बाद मेघा ने शिप्रा से पूछा
  858. 40:28भाभी आपके सामान कहां है? शिप्रा ने
  859. 40:30आश्चर्य से मेघा की ओर देखा। जैसे वह
  860. 40:33जानना चाहती हो कि मेघा ने यह कैसे समझा
  861. 40:36कि शिप्रा अपने सामान को भी लेकर आई हुई
  862. 40:39होगी। उसके भाव को समझकर शिप्रा फिर से
  863. 40:42बोली भाभी मैं अब इतनी भी नादान नहीं हूं।
  864. 40:45मुझे पता है जब आप आई हैं तो आपका सामान
  865. 40:47भी आपके साथ होना चाहिए। मेघा का जवाब
  866. 40:49सुनकर शिप्रा बोली मेरे सामान का बैग कार
  867. 40:52में ही है। शिप्रा का जवाब सुनकर मेघा ने
  868. 40:55गिरजा को बुलाया और उससे कहा दीदी आप
  869. 40:59गोपाल भैया को बोलकर भाभी की कार से उनका
  870. 41:01बैग निकालकर उनके कमरे में पहुंचा देने को
  871. 41:04बोल दीजिए ना। मेघा की बात सुनकर गिरजा
  872. 41:07वहां से चली गई। शौर्य देख रहा था कि मेघा
  873. 41:10कितनी होशियारी से हर एक चीज को संभाल रही
  874. 41:13थी। जबकि शौर्य को समझ नहीं आ रहा था कि
  875. 41:15वह शिप्रा के सामने कैसे व्यवहार करें। इस
  876. 41:18बीच मेघना ने बात की। शुरुआत करते हुए कहा
  877. 41:22तुमने यह घर तो बड़ा अच्छा लिया है। श्रवण
  878. 41:24मुझे नहीं पता था कि तुम्हारा घर इतना
  879. 41:26खूबसूरत होगा। वाकई यह जगह भी बहुत शानदार
  880. 41:30है और तुम्हारी कोठी भी मेघना की बात
  881. 41:33सुनकर शौर्य बोला शायद मेरी किस्मत ज्यादा
  882. 41:36अच्छी थी जो मुझे यह घर मिल गया। बाकी तुम
  883. 41:39बताओ तुम्हारा क्या चल रहा है? शौर्य का
  884. 41:42सवाल सुनकर मेघना बोली मैं तो तुम्हारे
  885. 41:45भरोसे हूं। जितनी जल्दी तुम मेरा काम पूरा
  886. 41:47करवा दोगे, उतनी जल्दी मैं फ्री हो
  887. 41:49जाऊंगी। आखिर नताशा कपूर कब वापस आ रही
  888. 41:53है? मेघना के सवाल के जवाब में शौर्य ने
  889. 41:56कहा, नताशा कपूर परसों आ जाएंगी। एक्चुअली
  890. 42:00परसों ही हंसल मेहता ने अपने स्ट्रांग
  891. 42:02एनर्जी ड्रिंक की लॉन्च पार्टी रखी है।
  892. 42:05उसी में नताशा कपूर आएंगी। उसके बाद हमारा
  893. 42:08काम समाप्त होने के बाद ही उसका यहां से
  894. 42:10जाना होगा। चलो यह बढ़िया है। वो आ जाएगी
  895. 42:13तो कम से कम शूटिंग तो कंप्लीट हो जाएगी।
  896. 42:16उसके बाद मैं अपनी आगे की प्लानिंग कुछ कर
  897. 42:17पाऊंगी। मेघना चैन की सांस लेते हुए बोली
  898. 42:21क्योंकि अभी तक वह भी इसी उधेड़बन में थी
  899. 42:24कि उसकी शूटिंग कब पूरी होगी। शौर्य के
  900. 42:27जवाब से अब उसे तसल्ली हुई। क्या भैया आप
  901. 42:30घर पर भी बिजनेस संबंधी बातें करने लगे?
  902. 42:33मेघा शौर्य और मेघना को काम की बात करते
  903. 42:35देखकर बोली ऐसा कुछ नहीं है। यह कोई
  904. 42:38बिजनेस संबंधी बात नहीं है। बस थोड़ी सी
  905. 42:41जानकारी है जिसका आदानप्रदान हुआ है।
  906. 42:43शौर्य मुस्कुराते हुए बोला, वह मेघा की
  907. 42:45होशियारी पर मुस्कुरा रहा था। मेघा ने
  908. 42:48देखा कि अब जब शौर्य और मेघना दोनों का
  909. 42:50ध्यान उसकी तरफ है तो उसने शुरा से कहा
  910. 42:53भाभी क्या आप अपना कमरा देखना नहीं
  911. 42:56चाहेंगी एक बार चलकर देखिए तो सही कि वह
  912. 42:59अब आपके हिसाब से डेकोरेट है या नहीं सही
  913. 43:02कहा चलो चल कर देखते हैं। मैं भी कब से
  914. 43:06यही सोच रही थी। पता नहीं उन लोगों ने किस
  915. 43:09तरह से सारे सामान को कमरे में एडजस्ट
  916. 43:12किया है। इतना बोलकर शिप्रा अपनी जगह पर
  917. 43:15खड़ी हो गई। उसके साथ ही मेघा और मेघना भी
  918. 43:18उठकर खड़ी हो गई। मेघा सबसे आगे-आगे चल
  919. 43:21दी। शिप्रा और मेघना उसके पीछेछे बढ़ गए।
  920. 43:24मेघना ने जब शौर्य को वहीं बैठे देखा तो
  921. 43:27उसने शौर्य से कहा, "क्या तुम हमारे साथ
  922. 43:29नहीं चलोगे?" मेघना का सवाल सुनकर शौर्य
  923. 43:32बोला, "मैंने पहले ही उस कमरे को देख लिया
  924. 43:35है। कमरा अच्छे से डेकोरेट हो रखा है। तुम
  925. 43:37सब जाकर देख लो। मैं यहीं बैठा हूं।"
  926. 43:39शौर्य का जवाब सुनकर मेघना ने कहा, ठीक
  927. 43:43है, फिर मैं अभी एक बार ऊपर देख कर आती
  928. 43:46हूं। अभी मुझे तुम्हारी इस कोठी को भी
  929. 43:48पूरा देखना है। जल्दी क्या है? तुम आराम
  930. 43:51से इस घर को देखो। मैं अभी यहीं हूं और
  931. 43:53तुम भी यहीं हो। शौर्य ने जवाब दिया। फिर
  932. 43:56अपने मोबाइल में कुछ करने लगा। उसके बाद
  933. 43:59मेघा शिप्रा और मेघना तीनों ऊपर वाले
  934. 44:03फ्लोर पर चले गए और शिप्रा के लिए तैयार
  935. 44:05कमरे में गए। शुप्रा ने देखा कि उसका कमरा
  936. 44:08बहुत ही सुंदर ढंग से सजा हुआ था। अपने
  937. 44:10कमरे को देखकर वह संतुष्ट नजर आई। मेघना
  938. 44:14भी इस कमरे को देखकर खुश थी। अब उसे समझ
  939. 44:17में आया कि शिप्रा ने वहां इतना सामान
  940. 44:19क्यों लिया था। अपने कमरे से संतुष्ट होने
  941. 44:22के बाद शिप्रा मेघा के साथ मेघना को पूरी
  942. 44:26कोठी का भ्रमण कराने लगी। हर एक हिस्से को
  943. 44:28उसने मेघना को दिखाया। अब शिप्रा मेघना को
  944. 44:32आगेआगे चलकर खुद ही कोठी के बारे में बता
  945. 44:34रही थी। इस बात को मेघा ने नोटिस किया पर
  946. 44:37उसने कुछ कहा नहीं पर उसके होठों पर एक
  947. 44:40मुस्कान बिखर गई थी जो अपने आप में ही
  948. 44:43बहुत कुछ कह रही थी। पूरी कोठी का भ्रमण
  949. 44:46करने के बाद मेघा शिप्रा के साथ फिर से
  950. 44:48आकर डाइनिंग रूम में बैठ गई थी। शौर्य अभी
  951. 44:51तक वहीं बैठा उन सबका इंतजार कर रहा था।
  952. 44:54कोई और वक्त होता तो शौर्य अपने कमरे में
  953. 44:56आराम कर रहा होता। पर क्योंकि आज शिप्रा
  954. 44:59और मेघना यहां आई हुई थी। इसलिए वह अपने
  955. 45:02कमरे में नहीं गया था। डाइनिंग हॉल में
  956. 45:05बैठे-बैठे समय कब बीत गया पता ही नहीं
  957. 45:08चला। गिरजा ने सबके लिए रात का खाना बनाया
  958. 45:10और सबने एक साथ खाना खाया। रात के समय
  959. 45:14शौर्य मेघा को लेकर उसके हॉस्पिटल छोड़ने
  960. 45:16चला गया क्योंकि अभी मेघा का नाइट शिफ्ट
  961. 45:19चल रहा था। शौर्य के मेघा के साथ जाने के
  962. 45:22बाद शिप्रा और मेघना शिप्रा के कमरे में
  963. 45:25चली गई थी और दोनों जाकर अपने बिस्तर पर
  964. 45:28ढेर हो गई थी। दोनों अपने कमरे में अकेले
  965. 45:31हो गए थे। तो मेघना ने शिप्रा से पूछा तो
  966. 45:34कैसा फील हो रहा है अपने घर में आकर?
  967. 45:36मेघना का सवाल सुनकर शिप्रा मेघना की ओर
  968. 45:39पलटी और फिर कुछ सोच कर बोली सच कहूं तो
  969. 45:43मैं यह एहसास बया नहीं कर सकती। मैंने
  970. 45:45पहले कभी ऐसा महसूस नहीं किया था। यहां तक
  971. 45:47कि मुझे यहां आने से पहले भी यह एहसास
  972. 45:51नहीं था कि इस घर में आने के बाद मुझे यह
  973. 45:54एक अलग ही अनुभूति होगी। मुझे यह फीलिंग
  974. 45:56आज तक अपने घर में नहीं हुई थी। जो मुझे
  975. 45:59यहां हो रहा है। श्रवण की उस एक बात ने ही
  976. 46:03मुझे यह फील करा दिया कि यह घर मेरा अपना
  977. 46:06है। मेघना ने शिप्रा की बात को ध्यान से
  978. 46:08सुना और कहा तुम्हें पता है जब मेघा यह घर
  979. 46:12मुझे दिखा रही थी तो तुम मेघा से पहले खुद
  980. 46:14ही आगे चलकर मुझे इस घर के बारे में बता
  981. 46:17रही थी। मेघा की बात सुनकर शिप्रा ने जब
  982. 46:20उस पल के बारे में सोचा तो उसे एहसास हुआ
  983. 46:23कि मेघा सच कह रही थी। पता नहीं कब। पर
  984. 46:26उसके मन में इस घर के लिए यह अपनात्व की
  985. 46:29भावना जागृत हो गई थी। शौर्य दरवाजे पर
  986. 46:32नौक की आवाज से उठा। उसने जाकर दरवाजा
  987. 46:34खोला तो सामने गिरजा चाय का कप थामे खड़ी
  988. 46:37थी। शौर्य ने दरवाजा खोल दिया। गिरजा अंदर
  989. 46:40आकर टेबल पर चाय का कप रखती और वहां से
  990. 46:43चली गई। शौर्य चाय का प्याला लेकर बालकनी
  991. 46:46में आ गया तो उसने देखा बालकनी में पहले
  992. 46:49से ही मेघना बैठी हुई थी। एक्चुअली शौर्य
  993. 46:52का कमरा और शिप्रा के कमरे दोनों की
  994. 46:54बालकनी एक ही थी। दोनों के कमरे का बैक
  995. 46:57डोर इस बालकनी में आकर खुलती थी। शौर्य ने
  996. 47:00मेघना को पहले से बैठे देखा तो उसने उसे
  997. 47:03गुड मॉर्निंग कहा। जवाब में मेघना ने भी
  998. 47:06गुड मॉर्निंग कहा। शौर्य भी वहां पहले से
  999. 47:09मौजूद दूसरे चेयर पर बैठ गया और रात कैसी
  1000. 47:12बीती? शौर्य चाय का शिप लेते हुए बोला।
  1001. 47:15बढ़िया अभी तक अच्छी नींद आई। कुछ भी कहो।
  1002. 47:17यह जगह बहुत अच्छी है। ना कोई शोरसरावा,
  1003. 47:20ना कोई भीड़ भरा का। सब तरफ शांति। मेघना
  1004. 47:23लंबी सांस लेती हुई बोली। हां, यह तो है।
  1005. 47:26शौर्य मेघना से सहमति जताते हुए बोला। फिर
  1006. 47:29उसने मेघना के कमरे की तरफ ध्यान दिया पर
  1007. 47:31दरवाजा बंद था। इसलिए अंदर शिप्रा सो रही
  1008. 47:34थी या जाग रही है? यह पता नहीं चल रहा था।
  1009. 47:37यह देखकर शौर्य मेघना से पूछा, क्या
  1010. 47:40तुम्हारी बहन अभी तक सो ही रही है? यह
  1011. 47:42तुमने कैसे समझा कि वह अभी तक सो रही है?
  1012. 47:45मेघना शौर्य को घूरते हुए बोली, अरे नहीं,
  1013. 47:48मैं तो यह बात यूं ही पूछ लिया। एक्चुअली
  1014. 47:50तुम यहां अकेली बैठी थी ना इसलिए शौर्य ने
  1015. 47:52जवाब दिया, नहीं ऐसा नहीं है। वह अभी
  1016. 47:56फ्रेश हो रही थी। मेघना बोली, तुमने चाय
  1017. 47:58पी लिया? सॉरी। चाय का सीख लेते हुए बोला,
  1018. 48:02जवाब में मेघा बोली, हां, मैंने और शिप्रा
  1019. 48:04नेपाली चाय पी लिया था। ओ एसएस मेघना का
  1020. 48:08जवाब सुनकर शौर्य के मुंह से निकला। फिर
  1021. 48:10कुछ देर दोनों में शांति छाई रही। उसके
  1022. 48:13बाद मेघना ने कुछ सोचकर शौर्य से पूछा।
  1023. 48:16मैं एक बात तुमसे पूछूं? क्या तुम इसका
  1024. 48:18सही सही जवाब दोगे? मेघना का सवाल सुनकर
  1025. 48:22शौर्य मेघना की ओर देखते हुए बोला, पूछो
  1026. 48:25क्या पूछना चाहती हो? पहले तुम यह तो कहो
  1027. 48:27कि तुम उसका जवाब सही दोगे या नहीं? मेघना
  1028. 48:30शौर्य के ऊपर अपनी नजर गिराए हुए बोली, अब
  1029. 48:33मैं तुम्हारा सवाल सुने बिना यह कैसे कह
  1030. 48:35सकता हूं कि मैं तुमको इसका जवाब सही
  1031. 48:38दूंगा या गलत? यह तो तुम्हारे सवाल पर
  1032. 48:40निर्भर करता है। शौर्य यह समझने की कोशिश
  1033. 48:43करता हुआ बोल कि मेघना क्या पूछ सकती है।
  1034. 48:47ठीक है। मैं यह जानना चाहती हूं कि तुम
  1035. 48:49अपना और शिप्रा का भविष्य क्या देखते हो।
  1036. 48:53मेघना शौर्य की आंखों में देखती हुई बोली
  1037. 48:56जैसे वह यह जानने का प्रयास कर रही थी कि
  1038. 48:59शौर्य सच बोलने वाला है या गलत। शौर्य ने
  1039. 49:04मेघना की बात को सुना और कुछ सोचते हुए
  1040. 49:06बोला क्या तुमने यह सवाल शिप्रा से किया
  1041. 49:09है और अगर किया है तो उसका क्या जवाब है
  1042. 49:12पहले मैं यह जानना चाहता हूं शौर्य ने
  1043. 49:15बहुत ही खूबसूरती से अपना जवाब डाल दिया
  1044. 49:18पर मेघना पीछे हटने वाली नहीं थी उसने कहा
  1045. 49:22सच कहूं तो मुझे उसका जवाब समझ में ही
  1046. 49:24नहीं आया इसलिए तो मैंने तुमसे पूछा कि
  1047. 49:27तुम अपने इस रिश्ते के भविष्य को कैसे
  1048. 49:29देखते हो अच्छा ऐसा क्या जवाब दिया उसने
  1049. 49:32जो [संगीत] तुम्हें समझ में नहीं आया आया।
  1050. 49:34क्या तुम वो जवाब मुझे भी बता सकती हो?
  1051. 49:37शौर्य आश्चर्य भरे स्वर में बोला। उसने
  1052. 49:40कहा वह तुम्हारे साथ रिश्ते में तो रहना
  1053. 49:43चाहती है पर तुम दोनों के बीच में कोई
  1054. 49:45पति-पत्नी का संबंध नहीं चाहती। अब यह बात
  1055. 49:48कैसे समझ में आ सकती है। मेघना शौर्य के
  1056. 49:52चेहरे का रिएक्शन को देखना चाहती थी कि
  1057. 49:54उसके जवाब से शौर्य के चेहरे पर क्या भाव
  1058. 49:56आता है। पर शौर्य के चेहरे पर मेघना का
  1059. 49:59जवाब सुनकर एक मुस्कान आ गई। उसे ऐसे ही
  1060. 50:03जवाब की उम्मीद थी क्योंकि शिप्रा ने उससे
  1061. 50:05यही कंडीशन तो रखा था। वह उसी मुस्कान के
  1062. 50:08साथ बोला शिप्रा ने पहले ही मेरे सामने यह
  1063. 50:11कंडीशन रख दी थी और इस बात में ऐसा क्या
  1064. 50:15रहस्य छुपा था जो तुम्हें समझ में नहीं
  1065. 50:17आया। शौर्य का जवाब सुनकर मेघना आश्चर्य
  1066. 50:20से शौर्य को देखती हुई बोली क्यों?
  1067. 50:23तुम्हें क्या इसमें ना समझ में आने वाली
  1068. 50:25कोई बात नजर नहीं आ रही है? आखिर यह किसको
  1069. 50:28समझ में आएगा कि पतिप के बीच में जो पतिप
  1070. 50:31का एक वास्तविक संबंध होता है वही ना हो।
  1071. 50:35सभी पुरुष हो या स्त्री सबके शरीर की अपनी
  1072. 50:38एक नीड होती है। अगर उसकी पूर्ति ही ना हो
  1073. 50:41तो फिर इस रिश्ते का मतलब क्या रह गया?
  1074. 50:43तुम्हारी बात अपनी जगह सही है। पर यहां एक
  1075. 50:45बात और भी है ना कि उसने अपनी यह कंडीशन
  1076. 50:48मेरे सामने पहले ही जाहिर कर दी है। और यह
  1077. 50:51मेरे ऊपर था कि मैं इसे मानता हूं या नहीं
  1078. 50:54मानता हूं। अगर नहीं मानता हूं तो वह मुझे
  1079. 50:57तलाक देने के लिए तैयार थी। पर मैं उसकी
  1080. 51:00इस कंडीशन को मान गया हूं। मैंने उसे बोल
  1081. 51:02दिया है कि मुझे इस रिश्ते में रहने से
  1082. 51:05कोई ऐतराज नहीं है और मैं उसकी कंडीशन को
  1083. 51:08मानने को तैयार हूं। शौर्य ने शांत स्वर
  1084. 51:11में जवाब दिया। शौर्य का जवाब सुनकर मेघा
  1085. 51:14उसको हैरानी से देखने लगी। वह इस बात को
  1086. 51:18मानने को तैयार ही नजर नहीं आ रही थी कि
  1087. 51:20कोई लड़का एक लड़की से अपनी शारीरिक जरूरत
  1088. 51:23की पूर्ति के बिना अपनी शादी को कंटिन्यू
  1089. 51:26रखने के लिए तैयार हो सकता है। वह
  1090. 51:29अविश्वास भरे स्वर में बोली पता नहीं
  1091. 51:32क्यों पर मुझे तुम्हारी इस बात पर विश्वास
  1092. 51:35नहीं हो रहा है। आखिर तुम क्यों इस रिश्ते
  1093. 51:37में बंधे रहना चाह रहे हो? जहां तुम्हें
  1094. 51:39पत्नी का सुख ही ना मिले। क्या तुम कोई
  1095. 51:42महात्मा हो? या तुम्हारे शरीर की अपनी कोई
  1096. 51:45नीड नहीं है। ना ऐसा कुछ नहीं है। ना ही
  1097. 51:49मैं कोई महात्मा हूं और ना ही बनने का कोई
  1098. 51:51इरादा है। और जैसा तुम समझ रही हो। मेरी
  1099. 51:55अपनी कोई नीड नहीं है। तो मैं कहूंगा मैं
  1100. 51:58पूरी तरह से तंदुरुस्त हूं तो इसलिए मेरे
  1101. 52:00शरीर की भी अपनी नीड तो है। पर उसने इस पर
  1102. 52:03कोई प्रतिबंध तो लगाया नहीं है। मैं उसके
  1103. 52:06साथ संबंध नहीं रख सकता। पर ऐसा भी नहीं
  1104. 52:08है कि अगर बाहर कहीं मैं किसी के संबंध
  1105. 52:11में आता हूं तो उसे उससे कोई ऐतराज होगा।
  1106. 52:15तो इसीलिए तुम भी अपने दिमाग से इस बात को
  1107. 52:18निकाल दो कि मैं कोई महात्मा बनने वाला
  1108. 52:20हूं क्योंकि उसने मुझ पर इस तरह का कोई
  1109. 52:23प्रतिबंध नहीं लगाया है। इसलिए मुझे इस
  1110. 52:25रिश्ते में रहने से कोई ऐतराज नहीं है।
  1111. 52:28शौर्य ने जवाब दिया। पर शौर्य के इस जवाब
  1112. 52:31ने मेघना को और भी कंफ्यूज कर दिया। उसने
  1113. 52:34पूछा जब तुम किसी और के साथ संबंध में जा
  1114. 52:38सकते हो तो फिर शादी को कंटिन्यू करने का
  1115. 52:40क्या मतलब है? इससे तुम्हें क्या मिलने
  1116. 52:43वाला है? यह शिप्रा ही इस रिश्ते से क्या
  1117. 52:46प्राप्त कर लेंगी? मेघना का सवाल सुनकर
  1118. 52:48शौर्य सोच में पड़ गया कि उसे मेघना को
  1119. 52:50क्या जवाब देना चाहिए। इसी समय उसने महसूस
  1120. 52:53किया कि शिप्रा के कमरे का दरवाजा थोड़ा
  1121. 52:56सा हिला था। पर फिर वह खुला नहीं। उसे लगा
  1122. 53:00शायद कोई दरवाजे के पीछे खड़ा है। फिर
  1123. 53:02अगले ही पल शौर्य के दिमाग में यह बात भी
  1124. 53:05आई कि कहीं शिप्रा अपने कमरे के दरवाजे के
  1125. 53:07पीछे से उन दोनों की बात को सुन तो नहीं
  1126. 53:10रही है। यह सोच दिमाग में आते ही उसने कुछ
  1127. 53:14निश्चय किया और मेघना से बोलना शुरू किया।
  1128. 53:17क्या शिप्रा ने तुम्हें हम दोनों के बीच
  1129. 53:20इस शादी को लेकर क्या कंडीशन रखी गई है?
  1130. 53:22उसके बारे में नहीं बताया। अगर बताया होगा
  1131. 53:25तो तुम्हें समझ में आ जाना चाहिए था। देखो
  1132. 53:28जहां तक मेरी बात है तो अगर शिप्रा मुझसे
  1133. 53:30तलाक ले भी लेती तो यह जरूरी नहीं था कि
  1134. 53:33मुझसे उसके जैसे कोई लड़की शादी करती।
  1135. 53:36दूसरी बात मैं दोबारा कहीं शादी करने को
  1136. 53:39इंटरेस्टेड भी नहीं होता। सच कहूं तो मैं
  1137. 53:42खुद भी इस बर्डन में रहना नहीं चाहता। पर
  1138. 53:44शिप्रा के साथ शादी में होने से ऐसे बर्डन
  1139. 53:47से फ्री हूं। जिस तरह के रिश्ते में अभी
  1140. 53:50हम हैं, उसमें ना उसे मुझसे कोई अपेक्षा
  1141. 53:53है, ना ही मुझे उससे कोई अपेक्षा है।
  1142. 53:56इसलिए हमारे बीच कोई क्लेश होने की
  1143. 53:58संभावना भी नहीं है। और जहां तक यह बात है
  1144. 54:01कि इस रिश्ते में क्यों रहना है, तो मैं
  1145. 54:04तुम्हें बताऊं कि मैं पैरेंटिंग का सुख
  1146. 54:07चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि मेरे कोई
  1147. 54:09बच्चा हो और इस बात के लिए शिप्रा भी
  1148. 54:12तैयार है। वह इसके लिए तैयार है। हम
  1149. 54:15भविष्य में आईवीएफ के थ्रू बच्चे कर सकते
  1150. 54:17हैं। तो इस तरह से हमारी यह जरूरत भी पूरी
  1151. 54:20हो जाएगी और जहां तक रही शारीरिक जरूरत की
  1152. 54:23बात तो उसके लिए और भी कई रास्ते हैं।
  1153. 54:26इसलिए मुझे इस रिश्ते में रहने से कोई
  1154. 54:28आपत्ति नहीं है। तो तुम कह सकती हो कि हम
  1155. 54:32दोनों की शादीशुदा जिंदगी का भविष्य मेरी
  1156. 54:35तरफ से तो लंबा ही रहेगा। बाकी अगर शिप्रा
  1157. 54:38का कभी इरादा चेंज होता है तो कह नहीं
  1158. 54:40सकता। शौर्य की पूरी बात को सुनकर मेघना
  1159. 54:43समझ गई कि इन दोनों को समझाने का कोई
  1160. 54:45फायदा नहीं है क्योंकि उसने यह महसूस कर
  1161. 54:48लिया कि दोनों की अपनी-अपनी अलग ही जरूरत
  1162. 54:51है और दोनों उसको एक तरह से फुलफिल भी कर
  1163. 54:55रहे हैं। इसलिए वह यह तो समझ गई कि शौर्य
  1164. 54:57अपनी तरफ से तो इस रिश्ते से बाहर निकलने
  1165. 55:00की कोशिश नहीं करेगा। हां, अगर भविष्य में
  1166. 55:03शिप्रा का ही विचार चेंज हो गया तो शायद
  1167. 55:05बात दूसरी हो। पर मेघा को इसकी भी संभावना
  1168. 55:09कम ही दिख रही थी। पर उसे एक बात जरूर सता
  1169. 55:12रही थी कि जब सच में ही शौर्य का कहीं
  1170. 55:16किसी दूसरी लड़की के साथ रिलेशन होगा तो
  1171. 55:19क्या शिप्रा उस बात को एक्सेप्ट कर पाएगी?
  1172. 55:22यह बात तो भविष्य में ही छुपा हुआ था। जब
  1173. 55:24कुछ ऐसा होगा तभी इस बात का पता चलेगा। यह
  1174. 55:28सब सोचकर मेघना शौर्य से बोली, सही है।
  1175. 55:31दोनों एक जैसे हो पर देखते हैं कि कब तक
  1176. 55:34तुम दोनों का यह रिश्ता कायम रह पाता है।
  1177. 55:37शौर्य ने मेघना की बात को सुना और
  1178. 55:39मुस्कुरा कर रह गया। इसी समय शिप्रा के
  1179. 55:42कमरे का दरवाजा खुला और शिप्रा अपने हाथ
  1180. 55:44में चाय का कप लिए हुए बालकनी में प्रवेश
  1181. 55:47की। शिप्रा को देखकर लग रहा था कि वह पूरी
  1182. 55:50तरह से तैयार होकर आई थी। इस समय उसने एक
  1183. 55:53वाइट सूट पहन रखा था। वाइट सूट में उसका
  1184. 55:56गोरा चेहरा और भी खिल कर आ रहा था। एक पल
  1185. 56:00को तो शौर्य की निगाह शिप्रा पर जम ही गई
  1186. 56:03थी। पर जल्दी ही उसने खुद को कंट्रोल किया
  1187. 56:05और उससे अपनी नजर हटा ली। मेघना ने जब
  1188. 56:08शिप्रा के हाथ में चाय का कप देखा तो बोली
  1189. 56:11क्या तुमने दोबारा चाय ले लिया? तो शिप्रा
  1190. 56:14बोली पहले जो मुझे चाय मिली थी वह तो ठंडी
  1191. 56:16हो गई। इसलिए मैं नीचे जाकर गिरजादी से
  1192. 56:19बोलकर दोबारा अपने लिए बनवा ली। शिप्रा का
  1193. 56:22जवाब सुनकर मेघना बुरा सा मुंह बनाती हुई
  1194. 56:25बोली कमीनी जब अपने लिए बनवाई ही थी तो
  1195. 56:29मेरे लिए भी [संगीत] एक कप ले आती। मेघना
  1196. 56:32की बात सुनकर शिप्रा मुस्कुरा पड़ी और
  1197. 56:34बोली अगर तुम्हें और चाय पीनी है तो तुम
  1198. 56:38अभी भी जाकर ले सकती हो। मेरे ख्याल से
  1199. 56:40अभी चाय बची हुई ही होगी। क्योंकि अभी ही
  1200. 56:43मेघा घर आई है। उसको भी चाय पीनी होगी।
  1201. 56:46देख लो अगर तुम्हें पीना है तो नीचे जाकर
  1202. 56:48ले आओ। शिप्रा की बात सुनकर मेघना उठी और
  1203. 56:51कमरे से होती हुई नीचे की ओर चली गई।
  1204. 56:54शिप्रा मेघना की खाली की हुई कुर्सी पर
  1205. 56:56बैठ गई। उसने शौर्य की तरफ देखा और बोली
  1206. 56:59लगता है तुम अभी ही सोकर उठे हो। शौर्य भी
  1207. 57:03अब तक चाय पी चुका था। वह शिप्रा से सहमति
  1208. 57:05जताते हुए बोला, हां बस। थोड़ी देर पहले
  1209. 57:08गिरजा दीदी ने ही आकर उठाया तो उठा था।
  1210. 57:11थैंक यू। शिप्रा बात बदलकर शौर्य को देखते
  1211. 57:14हुए बोली। शौर्य ने जब शिप्रा को थैंक यू
  1212. 57:16बोलते देखा तो उसने आश्चर्य से कहा यह
  1213. 57:19थैंक यू किस लिए इसीलिए कि तुमने मेरे लिए
  1214. 57:22मोहित रैना से बात की थी जिसके बाद मेरी
  1215. 57:25सारी परेशानी दूर हो गई नहीं तो उससे पहले
  1216. 57:28मैं बहुत घबराई हुई थी शिप्रा ने जवाब
  1217. 57:31दिया अच्छा उसलिए अरे वो इतनी भी बड़ी बात
  1218. 57:34नहीं थी वैसे क्या बात हुई तुम्हारी मोहित
  1219. 57:37सर से शौर्य ने अनजान बनते हुए पूछा जैसे
  1220. 57:41उसे उसके मामले के बारे में कुछ पता ही
  1221. 57:43नहीं था शिप्रा को भी लगा कि उसे कम से कम
  1222. 57:46अपनी वर्तमान हालात के बारे में श्रवण को
  1223. 57:48बताना चाहिए। इसलिए उसने कहा तुम्हें शायद
  1224. 57:51नहीं पता। पर मैंने अपनी कंपनी मोहित रैना
  1225. 57:54को बेच दी है। वैसे तो शौर्य को पहले से
  1226. 57:57यह पता था पर वो अपने चेहरे पर आश्चर्य
  1227. 58:01प्रकट करते हुए बोला। यह तुम क्या कह रही
  1228. 58:04हो? तुमने अपनी अच्छी भली कंपनी को बेच
  1229. 58:07दी। पर उसकी क्या जरूरत थी? सौरश तुम्हें
  1230. 58:10नहीं पता। पर दादाजी के कारण हालात कुछ इस
  1231. 58:12तरह के बन गए थे कि मुझे मजबूरन यह कदम
  1232. 58:16उठाना पड़ा। अगर देखा जाए तो एक तरह से यह
  1233. 58:18ठीक भी है। कम से कम अब मैं फ्री महसूस कर
  1234. 58:21रही हूं। शिप्रा ने जवाब दिया। शौर्य अपने
  1235. 58:24चेहरे पर दुख प्रकट करते हुए बोला। अब जब
  1236. 58:27तुमने अपनी कंपनी बेच दी है तो फिर सोचा
  1237. 58:29है कि अब आगे क्या करोगी? हां। अभी कुछ
  1238. 58:33समय मैंने जॉब करने की सोची है। उसको लेकर
  1239. 58:35मोहित रैना से कुछ बात भी हुई है। शायद आज
  1240. 58:38मिलने पर हो सकता है कुछ पक्का हो जाए।
  1241. 58:41शिप्रा बोली अगर मोहित रैना ने कहा है तो
  1242. 58:45जरूर कुछ अच्छा ही जॉब होगा उसके पास
  1243. 58:47तुम्हारे लिए। शौर्य शिप्रा को आश्वस्त
  1244. 58:50करते हुए बोला। शौर्य की बात सुनकर शिप्रा
  1245. 58:53मुस्कुराते हुए बोली। वैसे यह कोई इतनी
  1246. 58:56बड़ी बात नहीं है। मेरी कंपनी शुरू करने
  1247. 58:58से पहले भी मेरे पास दूसरी कई बड़ी
  1248. 59:00कंपनियों के जॉब प्रपोजल थे। पर मैंने उस
  1249. 59:04समय अपनी कंपनी को खड़ा करने में अपना
  1250. 59:05ध्यान लगाया। पर अगर मैं दोबारा भी कोशिश
  1251. 59:08करती तो मुझे कोई ज्यादा परेशानी नहीं
  1252. 59:11होती। मेरी निगाह में वैसे भी एक दो जगह
  1253. 59:14मेरे लिए जॉब के ऑप्शन है। आज मोहित रहना
  1254. 59:18से मिलकर देख लेते हो कि उनके पास मेरे
  1255. 59:20लिए किस तरह का जॉब है। उसके बाद सोचूंगी
  1256. 59:24शिप्रा नॉर्मल भाव में बोली अब आगे क्या
  1257. 59:27होगा। आखिर मोहित रैना से शिप्रा को किस
  1258. 59:31तरह का जॉब मिलने वाला है। शौर्य और
  1259. 59:34शिप्रा की बातें ज्यादा लंबी नहीं चली थी।
  1260. 59:36तभी मेघना फिर से वहां पर आ गई थी। अब
  1261. 59:39उसके भी हाथ में चाय का प्याला था। वह
  1262. 59:41वहां आते ही शौर्य से बोली, तुम्हारी यह
  1263. 59:45ग्रेजा दीदी बहुत अच्छा खाना बनाती है।
  1264. 59:47हां, यह तो है। शौर्य मुस्कुराते हुए
  1265. 59:50बोला, इसके बाद शौर्य अपनी जगह से उठ गया।
  1266. 59:53एक्चुअली उस बालकनी में दो ही चेयर था। तो
  1267. 59:56शौर्य को लगा शायद मेघना को भी यहां बैठना
  1268. 59:59होगा। और दूसरी बात यह भी थी कि शौर्य को
  1269. 1:00:02आज मेनका के पास भी जाना था। क्योंकि उसे
  1270. 1:00:05वहां से पैराडाइज होटल की नीलामी में भी
  1271. 1:00:08जाना था। इसलिए शौर्य बोला ठीक है तुम
  1272. 1:00:12दोनों बातें करो मैं भी जरा जाकर तैयार हो
  1273. 1:00:14जाऊं क्योंकि मुझे अभी किसी काम से जाना
  1274. 1:00:16भी है। पता नहीं कुछ तो बात थी जो शिप्रा
  1275. 1:00:20को शौर्य का वहां से उठकर जाना अच्छा नहीं
  1276. 1:00:23लग रहा था। वह चाह रही थी कि शौर्य भी
  1277. 1:00:25उसके साथ ही वहां पर बैठा रहे। उसे वहां
  1278. 1:00:28पर अचानक फिर से मेघना का आ जाना भी पसंद
  1279. 1:00:30नहीं आया था। पर वह यह बात जाहिर नहीं कर
  1280. 1:00:33सकती थी। यह क्या बात हुई? मैं आई और तुम
  1281. 1:00:36चल दिए। चले जाना जल्दी क्या है? सुबह की
  1282. 1:00:39गुनगुनी धूप अच्छी लग रही है। मेघना शौर्य
  1283. 1:00:43को रोकने की कोशिश करती हुई बोली। वह
  1284. 1:00:45चाहती थी कि शिप्रा और शौर्य में थोड़ी
  1285. 1:00:48बातें हो जिससे शायद उन दोनों की दूरियों
  1286. 1:00:51को कम किया जा सके। मेघना शौर्य के खाली
  1287. 1:00:54किए कुर्सी पर बैठी नहीं बल्कि वह बालकनी
  1288. 1:00:57की रेलिंग से टेक लगाकर खड़ी हो गई। शौर्य
  1289. 1:01:01ने भी खड़ा होने के बाद बैठने का उपक्रम
  1290. 1:01:03नहीं किया। बल्कि वह भी बालकनी की रेलिंग
  1291. 1:01:06को पकड़ कर सामने उगते सूरज की ओर मुंह
  1292. 1:01:09करके खड़ा हो गया था। शौर्य और शिप्रा को
  1293. 1:01:12चुप हो जाते देखकर मेघना को लगा शायद उसे
  1294. 1:01:15इतनी जल्दी वापस नहीं आना चाहिए था। अकेले
  1295. 1:01:18में शायद यह दोनों कुछ ज्यादा बातें करते।
  1296. 1:01:20पर शायद उसके सामने यह दोनों बात करने में
  1297. 1:01:23कंफर्टेबल नहीं है। यह सोचकर उसने माहौल
  1298. 1:01:26को हल्का करने की नियत से कहा। कहीं मैंने
  1299. 1:01:29तुम दोनों पतिप के बीच में आकर रंग में
  1300. 1:01:33भंग तो नहीं डाल दिया। ऐसा कुछ नहीं है।
  1301. 1:01:36तुम कुछ ज्यादा ही सोच रही हो। शौर्य
  1302. 1:01:39मेघना की ओर देखकर बोला मेरे सोचने से
  1303. 1:01:42क्या होता है? मैं तो चाह रही थी कि तुम
  1304. 1:01:44दोनों के बीच कुछ बातें हो। कुछ ऐसे
  1305. 1:01:46मोमेंट क्रिएट हो कि तुम दोनों थोड़े करीब
  1306. 1:01:49आ जाओ। पर फिर लगता नहीं कि मेरे ऐसा
  1307. 1:01:52सोचने से तुम दोनों की सोच में कोई फर्क
  1308. 1:01:54आने वाला है। मेघना आह भरती हुई बोली सब
  1309. 1:01:58कुछ पता होने के बाद भी तुमको ऐसा बोलना
  1310. 1:02:01जरूरी है क्या? शिप्रा मेघना को करी नजरों
  1311. 1:02:05से देखते हुए बोली। शिप्रा को नाराज होते
  1312. 1:02:07देखकर मेघना बोली अच्छा ठीक है बाबा अब
  1313. 1:02:11मैं ऐसा कुछ नहीं बोलती। तुम दोनों की जो
  1314. 1:02:13मर्जी हो तुम वही करो। वैसे तो मुझे भी
  1315. 1:02:16मोहित रैना से मिलने जाना है। बाकी जो
  1316. 1:02:19पेपर वर्क है उसे भी पूरा करके मोहित रैना
  1317. 1:02:22को देना है और अपने जॉब को लेकर भी बात
  1318. 1:02:24करनी है। शिप्रा चेयर से उठती हुई बोली
  1319. 1:02:27उसने अपना चाय अब तक समाप्त कर लिया था।
  1320. 1:02:30यह बढ़िया है। तुम सबको तो यहां अपना काम
  1321. 1:02:33है। पर मैं ही यहां फालतू में बैठी हुई
  1322. 1:02:35हूं। मेघना हताशा में बोली, "क्यों? तुम
  1323. 1:02:39क्यों खाली हो? तुम भी शहर में अपनी कंपनी
  1324. 1:02:42का आउटलेट खोलने का क्यों नहीं सोच रहे?
  1325. 1:02:44तुम्हें भी अपने स्टोर को विस्तार देना
  1326. 1:02:47चाहिए। शौर्य मेघना का उत्साहवर्धन करते
  1327. 1:02:50हुए बोला हां मैंने ऐसी प्लानिंग कर तो
  1328. 1:02:53रखी है पर उससे पहले मेरा भी यह प्लान है
  1329. 1:02:56कि मैं भी मोहित रैना से मीटिंग करके बिग
  1330. 1:02:59बुल में अपनी कंपनी का एक सेक्शन तो खुलवा
  1331. 1:03:01ही लूं। मेघना अपना इरादा स्पष्ट करती हुई
  1332. 1:03:04बोली फिर तो यह बढ़िया रहेगा कि तुम भी
  1333. 1:03:07शिप्रा के साथ ही मोहित रैना से मिलने चली
  1334. 1:03:09जाओ। शौर्य मेघना की बात से अपनी बात को
  1335. 1:03:12जोड़ते हुए बोला तो मेघना भी शौर्य की बात
  1336. 1:03:16से सहमति जताते हुए बोली हां तुम यह ठीक
  1337. 1:03:20कह रहे हो शिप्रा तो पहले से तैयार है तो
  1338. 1:03:23फिर मैं भी जाती हूं जल्दी से तैयार हो
  1339. 1:03:25जाती हूं इतना बोलकर मेघना फिर से अपने
  1340. 1:03:29कमरे के अंदर चली गई एक बार फिर से शौर्य
  1341. 1:03:32और शिप्रा बालकनी में अकेले रह गए थे
  1342. 1:03:35मेघना के जाने के बाद शौर्य को कुछ याद
  1343. 1:03:37आया तो वह बोला अरे हां मैं तो भूल ही
  1344. 1:03:41गया। तुम वह ज्वेलरी सेट तो लाई ही होगी
  1345. 1:03:44जो मैंने तुम्हें गिफ्ट में दिया था।
  1346. 1:03:46शिप्रा को समझ नहीं आया कि शौर्य ऐसा
  1347. 1:03:49क्यों पूछ रहा है? वह शौर्य की और अन्य
  1348. 1:03:51भिज्जता से देखते हुए बोली क्यों? क्या
  1349. 1:03:55बात है? तुम यह क्यों पूछ रहे हो? अरे मैं
  1350. 1:03:58तो यह इसलिए पूछ रहा हूं कि तुम्हें वह
  1351. 1:04:00गिफ्ट वापस भी तो करनी होगी। तुम तो उसे
  1352. 1:04:03वैसे भी नहीं लेने वाली हो। इसलिए वह
  1353. 1:04:05गिफ्ट मेरे काम तो आ ही जाएगा। इसलिए
  1354. 1:04:07मैंने यह पूछ लिया। शौर्य सफाई देते हुए
  1355. 1:04:10बोला। शौर्य की बात सुनकर शिप्रा सोचने को
  1356. 1:04:13मजबूर हो गई कि क्या श्रवण उससे उसका दिया
  1357. 1:04:17हुआ गिफ्ट वापस मांग रहा है। पर इस बार
  1358. 1:04:20शिप्रा ने शौर्य को उसका गिफ्ट वापस देने
  1359. 1:04:23के बारे में सोचा ही नहीं था। पर शौर्य की
  1360. 1:04:26बात सुनकर उसे याद आया कि उसने शौर्य से
  1361. 1:04:29क्या कह रखा था कि वह उससे कोई महंगा
  1362. 1:04:32गिफ्ट नहीं ले सकती। शायद इसीलिए शौर्य
  1363. 1:04:35उससे उस गिफ्ट के बारे में पूछ रहा है। वह
  1364. 1:04:37शौर्य की ओर देखते हुए बोली क्या तुम उस
  1365. 1:04:40गिफ्ट को वापस चाहते हो? वापस चाहते हो का
  1366. 1:04:43क्या मतलब हुआ? तुमने खुद ही तो कहा था कि
  1367. 1:04:45तुम ऐसे गिफ्ट मुझसे ले नहीं सकते। तो
  1368. 1:04:48मुझे लगा शायद तुम्हें वह वापस करना हो।
  1369. 1:04:50इसलिए मैंने यह पूछ लिया। शौर्य ने जवाब
  1370. 1:04:54दिया। शौर्य का जवाब सुनकर शिप्रा को
  1371. 1:04:57ध्यान आया कि किस तरह शौर्य ने उसको दिए
  1372. 1:05:00हुए पहले गिफ्ट को जिसे उसने वापस कर दिया
  1373. 1:05:02था उसको शौर्य ने रुचि मल्होत्रा को गिफ्ट
  1374. 1:05:05कर दिया था जिसे देखकर शिप्रा को बहुत
  1375. 1:05:08बुरा भी लगा था। वैसे इस बात को शिप्रा ने
  1376. 1:05:11कहीं जाहिर नहीं किया था कि शौर्य ने
  1377. 1:05:13शिप्रा के लिए गिफ्ट को किसी और को दे
  1378. 1:05:16दिया। अब एक बार फिर से शिप्रा सोचने को
  1379. 1:05:19मजबूर थी कि कहीं ऐसा ना हो कि शिप्रा
  1380. 1:05:22शौर्य को वह नेकलेस का सेट वापस करें और
  1381. 1:05:25शौर्य फिर से वह किसी और को दे दे जो कि
  1382. 1:05:28शिप्रा किसी भी हाल में ऐसा नहीं चाहती
  1383. 1:05:30थी। इसलिए उसने शौर्य से पूछ लिया। क्या
  1384. 1:05:34तुम फिर से इस ज्वेलरी आइटम को किसी को
  1385. 1:05:36देने की सोच रहे? शिप्रा का सवाल सुनकर
  1386. 1:05:39शौर्य बोला अभी तक ऐसा कुछ नहीं है। लेकिन
  1387. 1:05:42हो सकता है कि भविष्य में अगर मुझे ऐसी
  1388. 1:05:45किसी और की पार्टी में जाना पड़ा तो हो
  1389. 1:05:47सकता है शायद मैं उसे इस ज्वेलरी को गिफ्ट
  1390. 1:05:50कर दूं। तुम ऐसा कैसे कर सकते हो? किसी और
  1391. 1:05:53को दिया हुआ गिफ्ट किसी और को कैसे दे
  1392. 1:05:55सकते हो? शिप्रा तीखे स्वर में बोली, "यह
  1393. 1:05:58क्या बात हुई? अगर मेरे पास कोई सामान है
  1394. 1:06:01और मैं उसे किसी को देता हूं तो उससे
  1395. 1:06:03तुम्हें क्या फर्क पड़ने वाला है? और ऐसा
  1396. 1:06:06कहने का क्या मतलब हुआ? शौर्य नासमझ बनते
  1397. 1:06:08हुए बोला, क्या तुम सच में इतने नासमझ हो?
  1398. 1:06:13तुमने जब उस गिफ्ट को जिसे मैंने तुमको
  1399. 1:06:15वापस किया था, उसको रुचि मल्होत्रा को
  1400. 1:06:18देते देखा तो मुझे अच्छा नहीं लगा। तुम वह
  1401. 1:06:21गिफ्ट पहले मुझे दे चुके थे। फिर तुमने उस
  1402. 1:06:24गिफ्ट को रुचि मल्होत्रा को कैसे दे दिया?
  1403. 1:06:27शिप्रा अपनी बड़ी-बड़ी आंखों से शौर्य को
  1404. 1:06:30देखते हुए बोली। शौर्य हैरानी से शिप्रा
  1405. 1:06:32की ओर देखते हुए बोला, अरे तो मैं उस
  1406. 1:06:36गिफ्ट का क्या करता? तुमको वह चाहिए नहीं
  1407. 1:06:39था। या यह कहूं कि तुम मुझसे वह गिफ्ट ले
  1408. 1:06:41नहीं सकती थी और मुझे रुचि को उसके बर्थडे
  1409. 1:06:45पर गिफ्ट देना था। जब मेरे पास पहले से ही
  1410. 1:06:47एक ज्वेलरी आइटम थी तो फिर मैं क्यों
  1411. 1:06:50दूसरे किसी गिफ्ट आइटम को खरीदने में अपने
  1412. 1:06:52पैसे को खर्च करता। इसलिए जो मेरे पास था
  1413. 1:06:56उसे मैं उसको दे दिया। इसमें तुमको बुरा
  1414. 1:06:59लगने वाली क्या बात है? बुरा लगने वाली ही
  1415. 1:07:02बात है। तुम लड़कियों की साइकोलॉजी नहीं
  1416. 1:07:04समझोगे। यह किसी को अच्छा नहीं लगता कि
  1417. 1:07:06उसको दी हुई चीज कोई किसी और को दे दे।
  1418. 1:07:10शिप्रा समझाती हुई बोली, देखो बात ऐसी
  1419. 1:07:13नहीं है। मुझे नहीं पता था कि तुम भी उस
  1420. 1:07:15पार्टी में आने वाली हो। नहीं तो तुम्हें
  1421. 1:07:17तो पता भी नहीं चलता कि मैं वह गिफ्ट
  1422. 1:07:20किसको दिया है और शायद आगे भी जब तुम मुझे
  1423. 1:07:24यह गिफ्ट वापस करने वाली हो तो तुम्हें
  1424. 1:07:26कहां पता चलेगा कि मैंने इसको किसी को
  1425. 1:07:29दिया नहीं दिया। मेरे पास है या मैंने इसे
  1426. 1:07:31वापस कर दिया। शौर्य सफाई देते हुए बोला
  1427. 1:07:35हर बार तो पिछली बार की तरह नहीं होगा कि
  1428. 1:07:37तुम्हें पता चल जाएगा कि मैं इस गिफ्ट को
  1429. 1:07:40किसी को दिया या नहीं दिया। वह तो उस दिन
  1430. 1:07:44भी तुम्हें पता नहीं चलता। अगर वह विजय
  1431. 1:07:46दीवान बीच में आकर फालतू में अपने आप को
  1432. 1:07:48ज्यादा दिखाता नहीं तो। वैसे एक बात कहूं
  1433. 1:07:52वह बंदा तुम पर भी फिदा हो रखा था। शौर्य
  1434. 1:07:55शिप्रा की तारीफ में बोला। शिप्रा महसूस
  1435. 1:07:58कर रही थी कि शौर्य अब उससे थोड़ा खुलकर
  1436. 1:08:00बात करने लगा था। नहीं तो पहले वह उससे
  1437. 1:08:03जितनी जरूरत होती थी, उतना ही बात करता
  1438. 1:08:05था। शौर्य का यह बोलना कि विजय दीवान
  1439. 1:08:09शुक्रा पर फिदा था। यह दिखा रहा था कि वह
  1440. 1:08:12अब शिप्रा से थोड़ा खुलता जा रहा था।
  1441. 1:08:15शिप्रा को अपने विचारों में गुम देखकर
  1442. 1:08:17शौर्य ने फिर से पूछा, क्या हुआ? तुमने
  1443. 1:08:20बताया नहीं कि वह नेकलेस तुम्हारे पास ही
  1444. 1:08:22है या नहीं? है तो मेरे पास ही पर अगर तुम
  1445. 1:08:26इसे भी किसी और को गिफ्ट करने वाले हो तो
  1446. 1:08:29फिर मैं तुम्हें इसे वापस नहीं देने वाली।
  1447. 1:08:32अब शिप्रा की झिझक भी शौर्य से बात करते
  1448. 1:08:35हुए खत्म होती जा रही थी। यार तुम्हें
  1449. 1:08:38क्या फर्क पड़ता है कि मैं उसे किसी को
  1450. 1:08:40देता हूं या नहीं देता हूं। वैसे मैंने
  1451. 1:08:43कहा ना कि तुम्हें तो पता भी नहीं चलेगा
  1452. 1:08:45कि मैंने उसे किसी को दिया या नहीं दिया।
  1453. 1:08:49शौर्य समझाने वाले भाव में बोला पर शिप्रा
  1454. 1:08:52उसे वह गिफ्ट वापस देने से मूड में नहीं
  1455. 1:08:54दिख रही थी। उसने शौर्य से पूछा भी कि तुम
  1456. 1:08:57उस नेकलेस को वापस लेकर क्या करोगे? तो
  1457. 1:09:00शौर्य ने जवाब दिया यह तो अभी मुझे भी
  1458. 1:09:03नहीं पता कि मैं उसका आगे क्या करूंगा।
  1459. 1:09:05लेकिन जब वह मुझे वापस मिल जाएगा तो कुछ
  1460. 1:09:07ना कुछ तो करूंगा ही। पर तुम यह सब क्यों
  1461. 1:09:10पूछ रही हो? तुमने तो पहले कहा था तुम्हें
  1462. 1:09:14मेरी एक बात से कोई मतलब नहीं होगा। मैं
  1463. 1:09:16क्या करता हूं? क्या नहीं करता? तो फिर अब
  1464. 1:09:19इन बातों का क्या मतलब हुआ? शौर्य शिप्रा
  1465. 1:09:22को उसकी पुरानी बातें याद दिलाते हुए
  1466. 1:09:24बोला। अच्छा मैं एक काम करती हूं। वह
  1467. 1:09:27नेकलेस जितने का था। मैं तुम्हें वह पैसे
  1468. 1:09:30वापस कर देती हूं। उसके बाद तो उससे
  1469. 1:09:33तुम्हें जो भी लेना हो तुम वह ले सकते हो।
  1470. 1:09:35यह तो ठीक रहेगा। शिप्रा शौर्य से बोली
  1471. 1:09:38मुझे समझ नहीं आ रहा है कि तुम ऐसा क्यों
  1472. 1:09:40कर रही हो। क्या तुम्हें वह नेकलेस का सेट
  1473. 1:09:44पसंद है? कहीं इसलिए तो तुम मुझे उस
  1474. 1:09:47नेकलेस के सेट के बदले में पैसे वापस नहीं
  1475. 1:09:49कर रही। शौर्य शक भरी नजरों से शिप्रा को
  1476. 1:09:52देखते हुए बोला। तुम ऐसा कह सकते हो कि वह
  1477. 1:09:55नेकलेस का सेट मुझे बहुत पसंद है। इसलिए
  1478. 1:09:58मैं उसे वापस नहीं कर रही। हां, मैं
  1479. 1:10:00तुम्हें उसके पैसे अभी वापस करने को तैयार
  1480. 1:10:02हूं। शिप्रा बोली, शौर्य समझ गया कि अब
  1481. 1:10:05उसे वह नेकलेस नहीं मिलने वाला। पर शौर्य
  1482. 1:10:08यही तो चाहता था। वह इस बात से खुश ही था।
  1483. 1:10:12इसलिए शिप्रा की बात के जवाब में वह बोला,
  1484. 1:10:14"अगर तुम्हें वह इतना पसंद है तो फिर मुझे
  1485. 1:10:17वह वापस नहीं चाहिए और ना ही मुझे पैसे
  1486. 1:10:20चाहिए।" वह तो सही मायने में मेरी तरफ से
  1487. 1:10:23तुम्हारे लिए गिफ्ट ही था। तुम ही उसे
  1488. 1:10:26स्वीकार नहीं कर रही थी। इसलिए तो मैं उसे
  1489. 1:10:29वापस लेने की बात कर रहा था। जब तुम्हें
  1490. 1:10:31वह पसंद है तो फिर तो कोई बात ही नहीं है।
  1491. 1:10:35शौर्य मुस्कुराता हुआ बोला। इतना बोलने के
  1492. 1:10:38बाद शौर्य शिप्रा से इजाजत लेते हुए बोला
  1493. 1:10:41ठीक है फिर अभी मैं निकलता हूं क्योंकि
  1494. 1:10:44मुझे तैयार भी होना है। उसके बाद एक जरूरी
  1495. 1:10:47काम के लिए मुझे कहीं जाना है। इतना बोलकर
  1496. 1:10:51शौर्य बालकनी से अपने कमरे में आ गया। और
  1497. 1:10:54जाकर बाथरूम में घुस गया और जल्दी से नहा
  1498. 1:10:58धोकर बाहर आया और अपने कपड़े पहनकर तैयार
  1499. 1:11:01हो गया। शौर्य ने घड़ी पर नजर दौड़ाया तो
  1500. 1:11:03अभी लगभग 9:30 बजने वाले थे। घड़ी देखने
  1501. 1:11:06के बाद वह जल्दी से घर से निकल गया। शौर्य
  1502. 1:11:09का गंतव्य होटल राजकमल ही था। शौर्य होटल
  1503. 1:11:12राजकमल पहुंचा तो उसने मेनका और विक्रम को
  1504. 1:11:15अपना इंतजार करते पाया। शौर्य मेनका के
  1505. 1:11:17सामने चेयर पर बैठते हुए बोला। मैं लेट तो
  1506. 1:11:20नहीं हुआ? मेनका ने मुस्कुरा कर जवाब
  1507. 1:11:22दिया। नहीं तुम टाइम पर ही हो। मेनका का
  1508. 1:11:26जवाब सुनकर शौर्य बोला तो फिर अब आगे का
  1509. 1:11:29क्या प्लान है? मेनका ने जवाब दिया हम
  1510. 1:11:32तैयार हैं। चलो चलते हैं। इसके बाद शौर्य
  1511. 1:11:35विक्रम और मेनका तीनों होटल से बाहर आए और
  1512. 1:11:38मेनका की कार से ही निकल गए। आधे घंटे में
  1513. 1:11:41मेनका की कार बिल्डिंग लोकेशन पर पहुंची।
  1514. 1:11:43मेनका ने पहले से ही सारी तैयारी कर रखी
  1515. 1:11:46थी। इसलिए ज्यादा कोई फॉर्मेलिटी नहीं
  1516. 1:11:49करनी थी। मेनका अपनी कार को ले जाकर सीधा
  1517. 1:11:52पार्किंग में खड़ा किया और तीनों कार से
  1518. 1:11:54बाहर आए। मेनका ने विक्रम की ओर देखकर
  1519. 1:11:57कहा, "पता तो करो यह मोहित रैना कितनी देर
  1520. 1:12:00में पहुंच रहा है?" मेनका की बात सुनकर
  1521. 1:12:03शौर्य आश्चर्य से मेनका की ओर देखते हुए
  1522. 1:12:05पूछा, क्या मोहित रैना भी यहां आ रहा है?
  1523. 1:12:08मेनका ने जवाब दिया, हां, वह भी आ रहा है।
  1524. 1:12:12हमने उसे पहले ही यहां पहुंचने के लिए बोल
  1525. 1:12:14दिया है। पर इसकी क्या जरूरत थी?
  1526. 1:12:17यहां पर शौर्य को समझ नहीं आया था कि
  1527. 1:12:19मेनका ने मोहित रैना को भी यहां क्यों
  1528. 1:12:22बुलाया है। शौर्य की इस बात पर मेनका ने
  1529. 1:12:24जवाब दिया, एक्चुअली हमने बिड़ंग के लिए
  1530. 1:12:27दो अलग-अलग नाम से अप्लाई किया है। इसलिए
  1531. 1:12:30मैंने मोहित रैना को भी विक्रम के कहने पर
  1532. 1:12:32बुला लिया। विक्रम और मोहित एक साथ जाएंगे
  1533. 1:12:36और मैं और तुम एक साथ रहेंगे। शौर्य मेनका
  1534. 1:12:39की बात सुनकर बोला, पर इसकी क्या जरूरत
  1535. 1:12:42थी? अगर हम एक ही नाम से विड करते तो क्या
  1536. 1:12:45मुश्किल होने वाली थी?
  1537. 1:12:47यह तुम्हें अभी समझ नहीं आएगा। एक बार
  1538. 1:12:49बडिंग कंप्लीट हो जाने दो। फिर तुम्हें
  1539. 1:12:51समझ आ जाएगा कि मैं ऐसा क्यों कर रही हूं।
  1540. 1:12:54मेनका मुस्कुराती हुई बोली। ठीक है। जब
  1541. 1:12:58तुम कह रही हो तो कुछ सोच कर ही तुमने ऐसा
  1542. 1:13:00प्लान किया होगा। अब तो मैं भी देखना
  1543. 1:13:02चाहता हूं कि यहां क्या होने वाला है।
  1544. 1:13:05इतना कहकर तीनों पार्किंग से बाहर आ गए।
  1545. 1:13:08इतनी देर में विक्रम ने अपने फोन से मोहित
  1546. 1:13:10रैना को फोन करके पूछ लिया कि वह कहां है?
  1547. 1:13:13मोहित रैना ने भी उसे जवाब दिया कि मैं
  1548. 1:13:16लोकेशन पर पहुंच चुका हूं। मैं बिल्डिंग
  1549. 1:13:18हॉल के बाहर ही खड़ा हूं। मोहित रैना की
  1550. 1:13:20बात पर विक्रम ने कहा ठीक है। मैं पहुंच
  1551. 1:13:24रहा हूं। इतना कहकर विक्रम ने अपना फोन रख
  1552. 1:13:27दिया और उसने शौर्य और मेनका की तरफ देखकर
  1553. 1:13:30कहा मोहित रैना पहले ही आ रखा है। वह हाल
  1554. 1:13:34के बाहर ही हमारा इंतजार कर रहा है तो फिर
  1555. 1:13:36ठीक है। चलो फिर चलते हैं। इसके बाद तीनों
  1556. 1:13:40पार्किंग से बाहर आ गए। पार्किंग से बाहर
  1557. 1:13:43आते हुए मेनका ने विक्रम से कहा अब ऐसा
  1558. 1:13:46करो तुम हम दोनों से अलग हो जाओ क्योंकि
  1559. 1:13:49मैं नहीं चाहती कि तुम्हें कोई भी हमारे
  1560. 1:13:51साथ देखे जिससे किसी को शक हो कि हम दोनों
  1561. 1:13:54एक ही टीम से हैं। मेनका कि इस बात को
  1562. 1:13:57सुनकर शौर्य को मामला कुछ कुछ समझ में आने
  1563. 1:14:00लगा था। इसके बाद विक्रम मेनका और शौर्य
  1564. 1:14:03के पास से आगे निकल गया और मेनका शौर्य के
  1565. 1:14:06साथ थोड़ी सी धीमी हो गई ताकि विक्रम उससे
  1566. 1:14:09थोड़ा सा डिस्टेंस बना ले। अभिशौर्य और
  1567. 1:14:11मेनका बिल्डिंग हॉल से थोड़ी दूर ही थी कि
  1568. 1:14:15तभी मेनका के मुंह से निकला। मैंने इसकी
  1569. 1:14:18उम्मीद नहीं की थी यह यहां क्या कर रहा
  1570. 1:14:20है? मेनका की बात सुनकर शौर्य मेनका की ओर
  1571. 1:14:23देखने लगा और धीरे से बोला, "तुम किसकी
  1572. 1:14:26बात कर रही हो? ऐसा किससे देख लिया तुमने?
  1573. 1:14:29जो तुम यह कह रही हो कि तुम उसकी उम्मीद
  1574. 1:14:31नहीं कर रही थी। शौर्य की बात सुनने से
  1575. 1:14:34पहले ही मेनका के कदम रुक गए थे। जिसके
  1576. 1:14:37कारण मजबूरन शौर्य को भी उसके साथ रुकना
  1577. 1:14:40पड़ा। फिर शौर्य ने मेनका की नजरों का
  1578. 1:14:43पीछा किया तो उसने देखा उससे कुछ दूर आगे
  1579. 1:14:46एक लड़का किसी लड़की के साथ खड़ा था जिसके
  1580. 1:14:50ऊपर ही मेनका की निगाह टिकी हुई थी। शौर्य
  1581. 1:14:53ने मेनका को उस लड़के को देखते पाया तो
  1582. 1:14:56उसने पूछा कौन है यह? जिसकी तुम उम्मीद
  1583. 1:14:59नहीं कर रही थी। शौर्य की बात सुनकर मेनका
  1584. 1:15:03ने जवाब दिया, यह प्रतीक है। प्रतीक राठौर
  1585. 1:15:06तुम्हारा कजन। मेनका की बात सुनकर शौर्य
  1586. 1:15:08को झटका सा लगा। इसके बाद शौर्य ने भी गौर
  1587. 1:15:12से उसे लड़के की तरफ देखा और होठों में
  1588. 1:15:14बुदबुदाया। अच्छा तो यही है प्रतीक। पर यह
  1589. 1:15:17यहां क्या कर रहा है? कहीं यह भी तो यहां
  1590. 1:15:20होटल की बिल्डिंग के लिए ही तो नहीं आया
  1591. 1:15:21है। शौर्य की बात सुनकर मेनका ने शौर्य की
  1592. 1:15:24तरफ देखा। फिर कुछ सोचने लगी। उसे भी यकीन
  1593. 1:15:28हो गया कि प्रतीक भी शायद पैराडाइज होटल
  1594. 1:15:30के बिल्डिंग के लिए ही यहां आया है
  1595. 1:15:32क्योंकि उसके साथ जो लड़की खड़ी थी वह कोई
  1596. 1:15:35और नहीं। सुधाकर खुराना की बेटी मालिनी
  1597. 1:15:38खुराना थी। सुधाकर खुराना भी होटल व्यवसाय
  1598. 1:15:41से संबंध रखता था। इसलिए मेनका समझ सकती
  1599. 1:15:44थी। जरूर मालिनी के कारण ही प्रतीक भी इस
  1600. 1:15:48बिडिंग के लिए यहां आया हुआ है। मेनका को
  1601. 1:15:51इस बात से थोड़ा आश्चर्य भी हुआ था कि
  1602. 1:15:53प्रतीक ने उसे बताया नहीं था कि वह होटल
  1603. 1:15:55पैराडाइज के बिल्डिंग में हिस्सा लेने जा
  1604. 1:15:57रहा है क्योंकि मेनका होटल लाइन में ही
  1605. 1:16:00काम कर रही थी। इसलिए यह स्वाभाविक था कि
  1606. 1:16:04प्रतीक उससे पूछता या उससे चर्चा करता। पर
  1607. 1:16:08होटल पैराडाइज के बिल्डिंग में हिस्सा
  1608. 1:16:11लेने से पहले उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया।
  1609. 1:16:15जबकि प्रतीक का मेनका से अच्छा संबंध था।
  1610. 1:16:18वैसे मेनका को यह पता नहीं था कि प्रतीक
  1611. 1:16:21और मालिनी दोनों इतने करीब हैं कि साथ में
  1612. 1:16:24ही दोनों इस बिल्डिंग के लिए आए हैं। क्या
  1613. 1:16:27हुआ? तुम किस सोच में खो गई? शौर्य मेनका
  1614. 1:16:30को किसी सोच में गुम देखकर बोला। मेनका यह
  1615. 1:16:33नहीं समझ पा रही थी कि क्या उसे प्रतीक का
  1616. 1:16:35सामना करना चाहिए कि नहीं। पर उसने सोचा
  1617. 1:16:39वह क्यों पीछे हटे। कायदे से तो इस बारे
  1618. 1:16:42में प्रतीक को उससे बात करनी चाहिए थी। पर
  1619. 1:16:44प्रतीक ने ऐसा कुछ भी नहीं किया। मेनका
  1620. 1:16:47अपनी सोच से बाहर आते हुए बोली, कुछ नहीं।
  1621. 1:16:51मुझे उम्मीद नहीं था कि मैं इसे यहां
  1622. 1:16:52देखूंगी। इसलिए सोच में खो गई थी कि अगर
  1623. 1:16:56प्रतीक इस बिल्डिंग में हिस्सा लेने जा
  1624. 1:16:57रहा था। उसके बाद भी उसने मेरे से एक बार
  1625. 1:17:00भी इसकी चर्चा [संगीत] नहीं की। क्या यह
  1626. 1:17:03इतनी बड़ी बात है कि तुम इसके कारण उसके
  1627. 1:17:06बारे में सोचने को मजबूर हो गई? शौर्य
  1628. 1:17:09गंभीरता से बोला, नहीं ऐसा नहीं है। मेरा
  1629. 1:17:12उसके यहां होने पर सोचने का कारण यह है कि
  1630. 1:17:15प्रतीक मुझे अपना अच्छा दोस्त कहता था।
  1631. 1:17:18उसके बाद भी यह होटल के बिल्डिंग में
  1632. 1:17:20हिस्सा लेने जा रहा है। और वह जानता है कि
  1633. 1:17:22मैं होटल राजकमल को इतने समय से संभाल रही
  1634. 1:17:26हूं। तो मैं यह उम्मीद तो कर ही सकती थी
  1635. 1:17:29कि वह कम से कम इस बारे में मुझसे एक बार
  1636. 1:17:32चर्चा तो जरूर करता। पर उसने तो मुझे इसकी
  1637. 1:17:36भनक भी नहीं लगने दी। तो यह है तुम्हारी
  1638. 1:17:38परेशानी का मेन कारण कि उसने तुमसे पूछा
  1639. 1:17:41नहीं। पर तुम मुझसे ऐसा उम्मीद क्यों कर
  1640. 1:17:43रही हो? शौर्य दूर खड़े प्रतीक की ओर
  1641. 1:17:46देखता हुआ बोला। खैर छोड़ो इन बातों को।
  1642. 1:17:49अगर उसने नहीं पूछा तो मुझे भी मुझसे बात
  1643. 1:17:52करने की कोई जरूरत नहीं है। चलो हम लोग
  1644. 1:17:54अंदर चलते हैं। यह बोलकर मेनका शौर्य के
  1645. 1:17:58साथ प्रतीक को इग्नोर कर आगे बढ़ने लगी।
  1646. 1:18:00पर इसी समय प्रतीक ने शायद नोटिस कर लिया
  1647. 1:18:03था कि मेनका भी यहां आई हुई है। इसलिए वह
  1648. 1:18:06मेनका की ओर बढ़ते हुए दूर से ही उसको
  1649. 1:18:08आवाज दिया। अरे मेनका तुम यहां मुझे
  1650. 1:18:12उम्मीद नहीं था कि मैं तुम्हें यहां
  1651. 1:18:14देखूंगा। प्रतीक की बात सुनकर मजबूरन
  1652. 1:18:17मेनका को उसके लिए रुकना पड़ा। अगर वह
  1653. 1:18:19प्रतीक की बात को इग्नोर कर आगे बढ़ती तो
  1654. 1:18:22यह अच्छा मैनर नहीं कहा जाता। इसलिए उसने
  1655. 1:18:25ऐसा जाहिर किया जैसे उसने अभी ही यह नोटिस
  1656. 1:18:28किया कि प्रतीक भी यहां है। मेनका भी
  1657. 1:18:31आश्चर्य प्रकट करते हुए बोली प्रतीक
  1658. 1:18:35तुम यहां मैंने भी नहीं सोचा था कि मैं
  1659. 1:18:38तुम्हें यहां देखूंगी। कहो कैसे आना हुआ?
  1660. 1:18:41मैं तो होटल पैराडाइज के बिल्डिंग के लिए
  1661. 1:18:43आया हूं। पर तुम यहां क्या कर रही हो?
  1662. 1:18:45क्या तुम भी यहां बिडिंग में हिस्सा लेने
  1663. 1:18:47के लिए आई हो? प्रतीक मुस्कुराता हुआ
  1664. 1:18:50बोला। जैसे वह मेनका का उपहास कर रहा हो
  1665. 1:18:54कि उसकी इतनी हैसियत ही नहीं है कि वह
  1666. 1:18:57होटल पैराडाइज के बिल्डिंग में हिस्सा ले
  1667. 1:19:00सके। इनाशी
  1668. 1:19:02मुझे नहीं पता था कि तुम भी इस बिल्डिंग
  1669. 1:19:04में हिस्सा ले रहे हो। तुमने इसके बारे
  1670. 1:19:06में बताया भी नहीं। पर मैं भी यहां इस
  1671. 1:19:08बिल्डिंग के लिए ही आई हूं। मैं भी देखना
  1672. 1:19:10चाहती हूं कि आखिर किसके नसीब में यह होटल
  1673. 1:19:13पैराडाइज जाता है। मेनका भी उसी मुस्कान
  1674. 1:19:17के साथ बोली जैसा प्रतीक के चेहरे पर था।
  1675. 1:19:20तो क्या तुम्हारी हैसियत इतनी हो गई है कि
  1676. 1:19:22अब तुम भी इतने बड़े होटल की मालिक बनना
  1677. 1:19:25चाहती हो? प्रतीक का इरादा अभी भी मेनका
  1678. 1:19:28का उपहास उड़ाने का ही था। बनना या ना
  1679. 1:19:30बनना तो बाद की बात है। पर कोशिश करने में
  1680. 1:19:33क्या जाता है? कोशिश तो कर ही सकती है।
  1681. 1:19:36प्रतीक और मेनका की बात के बीच में आते
  1682. 1:19:38हुए शौर्य ने यह बात कही। शौर्य की बात को
  1683. 1:19:42सुनकर प्रतीक ने शौर्य की तरफ देखा। फिर
  1684. 1:19:45मेनका की तरफ देखकर पूछा। इन महाशय का
  1685. 1:19:48परिचय यह कौन है जो बीच में तुम्हारी
  1686. 1:19:50वकालत करने आ गए हैं? मेनका को प्रतीक की
  1687. 1:19:53बात सुनकर गुस्सा तो बहुत आ रहा था पर वह
  1688. 1:19:55मन महसूस कर चुप रह गई थी। वह समझ रही थी
  1689. 1:19:59कि प्रतीक जानबूझकर मालिनी के ऊपर अपना
  1690. 1:20:02इंप्रेशन जमाने के लिए उसके साथ इस तरह से
  1691. 1:20:04व्यवहार कर रहा है। पर इस बीच में शौर्य
  1692. 1:20:07को उसका पक्ष लेते देखकर उसे खुशी हुई। वह
  1693. 1:20:11कुछ कहते हैं। शौर्य के बारे में उससे
  1694. 1:20:14पहले श्रवण बोल पड़ा। मैं श्रवण हूं। इसका
  1695. 1:20:18दोस्त। तुम्हें शायद किसी लड़की से बात
  1696. 1:20:20करने का तरीका नहीं आता। इसलिए मुझे
  1697. 1:20:23तुम्हारे बीच में आना पड़ा। तुम्हें शायद
  1698. 1:20:25अपने पैसे वाले होने का कुछ ज्यादा ही
  1699. 1:20:28घमंड है। जिसे शायद तुम संभाल नहीं पा रहे
  1700. 1:20:32हो। तुम हो कौन जो मुझसे ऐसी बात करने की
  1701. 1:20:35हिम्मत कर रहे हो? तुम मुझे जानते भी हो।
  1702. 1:20:38किसी को कुछ भी बोलने से पहले तुम्हें
  1703. 1:20:40उसके बारे में पता कर लेना चाहिए। नहीं तो
  1704. 1:20:43किसी राह पर हाथ पैर तुड़वाए पड़े हुए
  1705. 1:20:45होंगे। प्रतीक शौर्य को खुद को ऐसे बोलते
  1706. 1:20:49देखकर बर्दाश्त नहीं कर पाया और वह गुस्से
  1707. 1:20:52में शौर्य की तरफ बढ़ते हुए बोला। मेनका
  1708. 1:20:55को लगा कि बात ज्यादा ना बढ़ जाए। इसलिए
  1709. 1:20:57वह उन दोनों के बीच में आ गई और प्रतीक को
  1710. 1:21:00समझाती हुई बोली। इसे तुम्हारे बारे में
  1711. 1:21:02पता नहीं है। इसलिए यह इतना बोल गया। तुम
  1712. 1:21:06रहने दो। मैं इसे बता दूंगी कि तुम कौन
  1713. 1:21:08हो। अभी जिस काम के लिए आए हो पहले उसे
  1714. 1:21:10देखते हैं। मेनका की बात सुनकर प्रतीक
  1715. 1:21:13अपनी जगह पर खड़ा हो गया। पर वह अभी भी
  1716. 1:21:16शौर्य को गुस्से से देखता रहा। पर शौर्य
  1717. 1:21:20अपनी जगह पर खड़ा स्माइल करता रहा। शौर्य
  1718. 1:21:23की स्माइल प्रतीक का खून को और जला रही
  1719. 1:21:25थी। प्रतीक फिर से कुछ बोलते ही वाला था
  1720. 1:21:28कि तभी मालिनी सामने आती हुई बोली मुझे
  1721. 1:21:31लगता है मैंने इसे पहले भी कहीं देखा है।
  1722. 1:21:34पर याद नहीं आ रहा है कहां? मालिनी की बात
  1723. 1:21:38सुनकर प्रतीक शौर्य का उपहास उड़ाते हुए
  1724. 1:21:41बोला अरे देखा होगा किसी सड़क किनारे भीख
  1725. 1:21:45मांगते हुए जैसे ही मालिनी ने प्रतीक के
  1726. 1:21:48मुंह से सड़क किनारे शब्द सुना उसे ध्यान
  1727. 1:21:51आ गया और उसने कहा अरे हां मुझे याद आ गया
  1728. 1:21:55आज ही तो देखा था जब हम यहां आ रहे थे तो
  1729. 1:21:57रास्ते में सड़क किनारे बड़े से बैनर में
  1730. 1:22:00यह नताशा कपूर के साथ था जैसे ही प्रतीक
  1731. 1:22:03ने मालिनी के मुंह से यह सुना कि वह नताशा
  1732. 1:22:05कपूर के साथ किसी बैनर में था। इसका मतलब
  1733. 1:22:08वह कोई मॉडल होगा। तो उसने और भड़कते हुए
  1734. 1:22:12कहा, "तुम भी क्या बकवास कर रही हो। कहां
  1735. 1:22:15इस कहां इस सड़क छाप को को नताशा कपूर के
  1736. 1:22:18साथ इमेजिन कर रही हो। तुम तो इसका कद
  1737. 1:22:20बढ़ा रही हो। प्रतीक का शौर्य के लिए ऐसा
  1738. 1:22:23बोलने का कारण यह था कि प्रतीक शौर्य को
  1739. 1:22:25पहचान गया था कि उसने कभी उस पर अपना कजिन
  1740. 1:22:29समझकर हमला करवाया था। पर बाद में उसे
  1741. 1:22:31मेनका से ही पता चला था कि यह लड़का उसका
  1742. 1:22:34कजिन नहीं है। बल्कि वह उसके लिए काम करने
  1743. 1:22:36वाला उसका मुलाजिम है। यह सोचकर उसे
  1744. 1:22:40विश्वास था यह कोई मॉडल नहीं हो सकता जो
  1745. 1:22:42नताशा कपूर के साथ काम कर रहा होगा। पर
  1746. 1:22:45मालिनी को पूरा यकीन था कि नहीं। उसने इसी
  1747. 1:22:48चेहरे को उस बैनर में देखा था। इसलिए उसने
  1748. 1:22:51कंफर्म करने के लिए शौर्य से ही पूछा।
  1749. 1:22:54क्या तुम मॉडलिंग करते हो? शौर्य मालिनी
  1750. 1:22:57की बात सुनकर मुस्कुराया और बोला तुम्हारी
  1751. 1:23:02नजर के दांत देनी पड़ेगी। मैं मॉडलिंग
  1752. 1:23:04नहीं करता पर हां उस पोस्टर में तुमने
  1753. 1:23:07जिसे देखा था वह मैं ही हूं। शौर्य की बात
  1754. 1:23:10सुनकर मालिनी खुश होती हुई बोली। देखा
  1755. 1:23:14मैंने कहा था ना मेरी नजरें धोखा नहीं खा
  1756. 1:23:16सकती। मैंने सचमुच इसे ही देखा था। मालिनी
  1757. 1:23:20को शौर्य के लिए खुश होते देखकर प्रतीक के
  1758. 1:23:23चेहरे पर नागवारी के भाव आ गए। वह
  1759. 1:23:25खिसियानी बिल्ली की तरह छिड़कर बोला तो
  1760. 1:23:28कौन सी बड़ी बात हो गई? ऐसे सड़क छाप मॉडल
  1761. 1:23:30मेरे आगे पीछे सैकड़ों में घूमते रहते
  1762. 1:23:32हैं। बात को अलग दिशा में जाते देखकर
  1763. 1:23:35मेनका फिर से बीच में आती हुई बोली अब
  1764. 1:23:38रहने भी दो। तुम किस चक्कर में पड़ गए?
  1765. 1:23:42अभी जिस काम के लिए आए हो पहले उस काम को
  1766. 1:23:44करते हैं। टाइम भी हो रहा है। तुम्हें भी
  1767. 1:23:47हॉल के अंदर जाना चाहिए और मुझे भी समय से
  1768. 1:23:50हॉल में जाना है। इसलिए इस फालतू की बात
  1769. 1:23:53को यही विराम देते हैं। इतना कहकर मेनका
  1770. 1:23:57शौर्य का हाथ पकड़ कर उसको खींचती हुई उस
  1771. 1:23:59हॉल की तरफ बढ़ गई जहां बीडिंग होने वाली
  1772. 1:24:02थी। जबकि प्रतीक मेनका को उसे इग्नोर करके
  1773. 1:24:05शौर्य का हाथ पकड़ कर खींचते हुए देखकर जल
  1774. 1:24:08रहा था। क्योंकि कोई समय था जब प्रतीक
  1775. 1:24:11मेनका के पीछे पड़ा हुआ था। उसने कई बार
  1776. 1:24:14कोशिश किया था कि मेनका को वह अपने
  1777. 1:24:16कंट्रोल में कर ले। पर मेनका कभी भी उसके
  1778. 1:24:19काबू में नहीं आ पाई क्योंकि मेनका
  1779. 1:24:22चंद्रभान राठौर के मित्र की बेटी थी।
  1780. 1:24:24इसलिए भी प्रतीक मेनका के साथ जबरदस्ती
  1781. 1:24:28नहीं कर सकता था। अब आगे क्या होगा? शौर्य
  1782. 1:24:31और प्रतीक के टकराव का क्या परिणाम होगा?
  1783. 1:24:35आखिर होटल पैराडाइज का नीलामी कौन जीतेगा?
  1784. 1:24:39मेनका शौर्य का हाथ पकड़ कर खींचते हुए
  1785. 1:24:42बिल्डिंग हॉल की तरफ पड़ गई। उसे यहां पर
  1786. 1:24:44कई जाने पहचाने चेहरे नजर आ गए थे। वह यह
  1787. 1:24:47जानकर हैरान थी कि होटल पैराडाइज की
  1788. 1:24:50नीलामी की बात हर तरफ फैल गई थी। तभी उसे
  1789. 1:24:53यहां इतने सारे जाने पहचाने चेहरे नजर आ
  1790. 1:24:56रहे थे। यानी इस बार राघव चड्ढा की होटल
  1791. 1:24:59की नीलामी आम ना होने देने की कोशिश फेल
  1792. 1:25:02हो गई थी। मेनका को इसी समय हॉल से बाहर
  1793. 1:25:04आता हुआ राघव चड्ढा भी दिखाई दिया। जिसके
  1794. 1:25:07चेहरे की नाराजगी साफ देखी जा सकती थी।
  1795. 1:25:10इतने सारे जाने पहचाने चेहरों को देखकर
  1796. 1:25:12राघव चढा भी परेशान था। उसका जो प्लान फेल
  1797. 1:25:15हो रहा था, उसकी झलक उसके चेहरे पर देखी
  1798. 1:25:18जा सकती थी। अब राघव चढा चाहकर भी अपने
  1799. 1:25:21मकसद में कामयाब नहीं हो सकता था। क्योंकि
  1800. 1:25:23अगर वह होटल को नीलामी से बचना चाहता तो
  1801. 1:25:27अब तक उसका लिया हुआ पैसा ब्याज के साथ
  1802. 1:25:30इतना ज्यादा हो गया होगा कि उस होटल की
  1803. 1:25:32कीमत से ज्यादा कीमत उसकी नीलामी को रोकने
  1804. 1:25:35के लिए पे करना पड़ता। इसलिए राघव चढ़ा यह
  1805. 1:25:39जोखिम तो ले नहीं सकता था। अब वह यही
  1806. 1:25:41कोशिश कर सकता था कि नीलामी में ही सही।
  1807. 1:25:44पर वह अपने होटल को बचाने में कामयाब हो
  1808. 1:25:46जाए। मेनका राघव चड्ढा के चेहरे के भाव से
  1809. 1:25:50स्पष्ट समझ पा रही थी कि वह कितना परेशान
  1810. 1:25:53है। मेनका यहां पर इतने सारे जाने पहचाने
  1811. 1:25:56चेहरे को देखकर शौर्य से बोली लगता है इस
  1812. 1:25:58बार राघव चड्ढा का प्लान फेल हो गया है
  1813. 1:26:00क्योंकि इस बार वह होटल की नीलामी की बात
  1814. 1:26:03को राज नहीं रख सका। तभी यहां इतने सारे
  1815. 1:26:07चेहरे नजर आ रहे हैं। तुम किन की बात कर
  1816. 1:26:10रही हो? शौर्य मेनका की बात सुनकर बोला,
  1817. 1:26:13"तुम जो यहां पर इतने सारे लोगों को देख
  1818. 1:26:15रहे हो, इनमें से बहुत सारे लोग इस शहर के
  1819. 1:26:18बहुत ही प्रतिष्ठित लोगों में से एक हैं
  1820. 1:26:21और उनका यहां होना यही जताता है कि वह सब
  1821. 1:26:24भी यहां इस होटल की बिल्डिंग के लिए ही आए
  1822. 1:26:26हैं। मेनका ने शौर्य को जवाब दिया। मेनका
  1823. 1:26:30की बात सुनकर शौर्य वहां उपस्थित लोगों के
  1824. 1:26:33चेहरे को देखने लगा। इसी समय उसकी निगाह
  1825. 1:26:36राघव चढ़ा के ऊपर भी गई। उसने उसके चेहरे
  1826. 1:26:39पर झलक रही परेशानी को देखकर मेनका से
  1827. 1:26:41पूछा वह जो सामने शख्स खड़ा है वह कौन है
  1828. 1:26:45और वह इतना परेशान क्यों नजर आ रहा है?
  1829. 1:26:48शौर्य के इशारे करने वाली दिशा में देखती
  1830. 1:26:50हुई मेनका बोली यही है राघव चड्ढा जिसका
  1831. 1:26:53यह होटल हुआ करता था जो कि अब नीलाम होने
  1832. 1:26:56वाला है। यहां उपस्थित लोगों को देखकर वह
  1833. 1:27:00समझ गया है कि आज उसके लिए बहुत ही
  1834. 1:27:03परेशानी भरा दिन होने वाला है। मेनका की
  1835. 1:27:06बात सुनकर शौर्य ने गौर से राघव चड्ढा की
  1836. 1:27:09तरफ देखा। वह शक्ल से हनिया नजर आ रहा था।
  1837. 1:27:13मेनका शौर्य के साथ राघव चढा के पास से
  1838. 1:27:15गुजरते हुए हॉल में प्रवेश कर गई। जब वह
  1839. 1:27:18राघव चड्ढा के पास से गुजर रही थी, उस समय
  1840. 1:27:21दोनों की नजरें भी मिली थी। मेनका को यहां
  1841. 1:27:24देखकर एक पल को तो राघव चड्ढा के चेहरे पर
  1842. 1:27:26हैरानी भी नजर आई। वह मेनका से कुछ बोलना
  1843. 1:27:29भी चाहता था। पर मेनका राघव चड्ढा को
  1844. 1:27:32इग्नोर कर आगे बढ़ गई। मेनका शौर्य के साथ
  1845. 1:27:35उस हॉल में पहुंच गई और एक सही जगह देखकर
  1846. 1:27:38वह शौर्य के साथ जाकर वहां पर बैठ गई।
  1847. 1:27:41उसने देखा विक्रम और मोहित रैना पहले ही
  1848. 1:27:43उस हॉल में पहुंच चुके थे और वे भी अपने
  1849. 1:27:46लिए एक जगह देखकर वहां पर बैठ गए थे। धीरे
  1850. 1:27:50धीरे बाहर के लोग भी अब हॉल के अंदर आने
  1851. 1:27:52लगे थे और अपनी-अपनी जगह पर आकर बैठने लगे
  1852. 1:27:55थे। इस दरमियान वहां पर कई ऐसे लोग भी आए
  1853. 1:27:58थे जो मेनका को पहले से जानते थे और उन
  1854. 1:28:00लोगों ने मेनका से हाई हेलो भी किया था।
  1855. 1:28:03प्रतीक भी मालिनी खुराना के साथ उस हाल
  1856. 1:28:06में आ गया था। वह मेनका से कुछ दूरी पर
  1857. 1:28:08आकर मालिनी के साथ बैठ गया था और वह
  1858. 1:28:11बार-बार घुरकर शौर्य की तरफ देख रहा था।
  1859. 1:28:14पर शौर्य उसको इग्नोर किए हुए था। शौर्य
  1860. 1:28:17ने गौर किया कि मालिनी बार-बार पलट कर
  1861. 1:28:20उसकी तरफ देख रही थी। शौर्य को समझ नहीं
  1862. 1:28:22आया कि मालिनी ऐसा क्यों कर रही है। पर वह
  1863. 1:28:26यह बात नोटिस कर रहा था कि मालिनी की
  1864. 1:28:28आंखों में शौर्य को लेकर कोई नाराजगी का
  1865. 1:28:32भाव नहीं था। बल्कि उसके चेहरे को देखकर
  1866. 1:28:35ऐसा लग रहा था। जैसे वह शौर्य को और जानना
  1867. 1:28:38चाहती हो। जब सभी अपनी जगह पर बैठ रहे थे,
  1868. 1:28:40इस समय मालिनी अपनी जगह से उठी और शौर्य
  1869. 1:28:44के करीब आकर बोली, मिस्टर श्रवण, मैं आपसे
  1870. 1:28:47एक बार मिलकर बात करना चाहती हूं। क्या आप
  1871. 1:28:50मुझे अपना नंबर देंगे? शौर्य को उम्मीद
  1872. 1:28:53नहीं था कि मालिनी इस तरह से उसके पास आकर
  1873. 1:28:55उसका नंबर मांगेंगी। पर उसने जितने शभ्य
  1874. 1:28:58तरीके से शौर्य से बात की उसके कारण शौर्य
  1875. 1:29:01मालिनी से इंकार नहीं कर सका और शौर्य ने
  1876. 1:29:04मालिनी को अपना नंबर नोट कर दिया। शौर्य
  1877. 1:29:07से नंबर मिलने के बाद मालिनी ने अपने
  1878. 1:29:09मोबाइल में उसका नंबर डायल किया। एक रिंग
  1879. 1:29:12जाने के बाद मालिनी ने फोन कट किया और
  1880. 1:29:14शौर्य से बोली यह मेरा नंबर है। जिससे अभी
  1881. 1:29:17मैंने आपको कॉल किया है। आप मेरे नंबर को
  1882. 1:29:20सेव कर लीजिएगा। मैं जल्दी ही आपसे बात
  1883. 1:29:22करूंगी। इतना कहकर मालिनी फिर से वापस
  1884. 1:29:25अपनी जगह पर चली गई। इस बीच प्रतीक घूर कर
  1885. 1:29:29मालिनी को देखता रहा। जैसे वह जानना चाहता
  1886. 1:29:32हो कि आखिर मालिनी शौर्य से क्या बात
  1887. 1:29:34करेगी या क्या बात करना चाहती है। जिसके
  1888. 1:29:37लिए वह उससे उसका नंबर लेकर आई है। प्रतीक
  1889. 1:29:40के चेहरे पर मालिनी के लिए भी नाराजगी के
  1890. 1:29:43भाव आ गए थे। पर वह कुछ बोला नहीं। मालिनी
  1891. 1:29:46फिर से जाकर अपनी सीट पर बैठ गई। तो
  1892. 1:29:48प्रतीक नाराजगी भरे स्वर में बोला तुम
  1893. 1:29:51क्या करने गई थी उस लड़के के पास? मालिनी
  1894. 1:29:53ने प्रतीक की बात को सुना तो वह उसे धीरे
  1895. 1:29:56से बोली अरे तुम इस छोटी सी बात पर नाराज
  1896. 1:30:00क्यों हो रहे हो? कुछ ऐसी बात है जो मुझे
  1897. 1:30:02उससे करनी है। पर अभी जिस काम के लिए यहां
  1898. 1:30:05आए हो उस पर ध्यान दो। उसके बारे में हम
  1899. 1:30:07बाद में बात करेंगे। तुम यूं छोटी-छोटी
  1900. 1:30:10बातों पर नाराज मत हो जाया करो। मालिनी के
  1901. 1:30:13इस बात को सुनकर प्रतीक ना चाहते हुए भी
  1902. 1:30:15चुप हो गया और वह हमें स्टेज की तरफ देखने
  1903. 1:30:18लगा। दूसरी तरफ स्टेज पर मौजूद एक व्यक्ति
  1904. 1:30:21होटल पैराडाइज की नीलामी से संबंधित
  1905. 1:30:23जानकारी वहां उपस्थित सभी लोगों को दे रहा
  1906. 1:30:26था। इस बीच दो लोगों ने वहां उपस्थित सभी
  1907. 1:30:30लोगों के बीच सबके हाथों में एक नंबर लिखा
  1908. 1:30:32हुआ छोटा सा कार्डबोर्ड दे दिया था। शौर्य
  1909. 1:30:35ने नोट किया था कि राघव चड्ढा सबसे आगे
  1910. 1:30:38जाकर बैठा हुआ था और बार-बार घुड़कर वहां
  1911. 1:30:40मौजूद भीड़ को देखे जा रहा था। आखिरकार वह
  1912. 1:30:44समय आ गया जब नीलामी स्टार्ट हो गई। होटल
  1913. 1:30:46की शुरुआती बोली 10,500 करोड़ से स्टार्ट
  1914. 1:30:49हुई थी और जो सबसे पहले बोली लगाने वाला
  1915. 1:30:52शख्स था, वह शख्स राघव चढा के साथ वाली
  1916. 1:30:55टेबल पर ही बैठा हुआ था। यानी वह जो कोई
  1917. 1:30:59भी था, राघव चढा के द्वारा ही तैयार किया
  1918. 1:31:01गया बीडर था। मेनका और शौर्य बस उस
  1919. 1:31:05शुरुआती बोली को देखते और सुनते रहे। अभी
  1920. 1:31:08उन्होंने अपनी ओर से कोई बोली नहीं लगाई
  1921. 1:31:11थी। वह इंतजार कर रही थी कि जब कुछ लोग इस
  1922. 1:31:14नीलामी से बाहर हो जाएंगे तभी वह इसमें
  1923. 1:31:17एंट्री करेंगे। धीरे धीरे बोली 10,650
  1924. 1:31:21करोड़ तक पहुंच गए। पर अभी भी वहां पर कई
  1925. 1:31:24लोग थे जिन्होंने कोई शुरुआती बोली भी
  1926. 1:31:26नहीं लगाई थी। 10,700 करोड़ जाते। जाते अब
  1927. 1:31:30ज्यादा लोग उसमें पार्टिसिपेट नहीं कर रहे
  1928. 1:31:32थे। जब मेनका और शौर्य ने देखा कि अब
  1929. 1:31:35ज्यादा लोग बीच में नहीं आ रहे हैं तो
  1930. 1:31:37शौर्य ने एक ही बार में 10,750 करोड़ की
  1931. 1:31:41बोली लगा दी। जैसे ही शौर्य ने बोली लगाई
  1932. 1:31:44ज्यादा इंतजार भी नहीं करना पड़ा कि अगली
  1933. 1:31:46बोली सामने आ गई। जो 1775 करोड़ की थी। यह
  1934. 1:31:50बोली लगाने वाला शख्स कोई और नहीं प्रतीक
  1935. 1:31:54ही था। ऐसा लगा जैसे प्रतीक शौर्य के बोली
  1936. 1:31:57लगाने का ही इंतजार कर रहा था। जैसे ही
  1937. 1:31:59शौर्य ने अपनी तरफ से बोली लगाई, तुरंत
  1938. 1:32:02प्रतीक ने उससे आगे की बोली लगा दी। शौर्य
  1939. 1:32:05ने यह देखा तो उसके चेहरे पर एक मुस्कान
  1940. 1:32:07खिल गई। वह समझ गया कि प्रतीक उसको टारगेट
  1941. 1:32:11कर रहा है। शौर्य ने भी अगली बोली तुरंत
  1942. 1:32:1410,800 करोड़ की लगा दी। पर प्रतीक कहां
  1943. 1:32:17पीछे रहने वाला था। उसने भी तुरंत 10,825
  1944. 1:32:20करोड़ की बोली लगा दी। धीरे धीरे करके यह
  1945. 1:32:23बोली 2000 करोड़ तक पहुंच गई। मेनका ने जब
  1946. 1:32:27देखा कि प्रतीक शौर्य के बोली लगाने के
  1947. 1:32:30बाद तुरंत ही अपनी बोली को बढ़ा दे रहा है
  1948. 1:32:32तो उसने शौर्य को हाथ दबाकर बोली लगाने से
  1949. 1:32:35मना कर दिया। वैसे शौर्य मूड में था कि वह
  1950. 1:32:38प्रतीक से कंपटीशन करता रहे। पर जब मेनका
  1951. 1:32:41ने उसको रोकने का इशारा किया तो वह रुक
  1952. 1:32:43गया। थोड़ी देर 2000 करोड़ पर ही बोली
  1953. 1:32:47अटकी रहे जब सॉरी की तरफ से बोली को आगे
  1954. 1:32:50नहीं बढ़ाया गया। तो प्रतीक ने गर्व से
  1955. 1:32:52शौर्य की तरफ देखा। प्रतीक कि इस हरकत पर
  1956. 1:32:55शौर्य के चेहरे पर एक मुस्कान खिल गई। जब
  1957. 1:32:58किसी ओर से कोई और बोली को बढ़ाने सामने
  1958. 1:33:01नहीं आ रहा था तो एक बार फिर से राघव चढा
  1959. 1:33:04ने 2025 करोड़ की बोली लगाई। राघव चढा ने
  1960. 1:33:07बोली बढ़ा तो दिया पर वह खुश नहीं था।
  1961. 1:33:10क्योंकि उसने सोचा नहीं था कि वह अपने ही
  1962. 1:33:12इस होटल की बोली को इतना ऊपर तक ले जाएगा।
  1963. 1:33:15पर अब मरता क्या ना करता वाली हालत थी। एक
  1964. 1:33:19बार फिर से बोली 2025 करोड़ पर रुक गई थी।
  1965. 1:33:23इसी समय प्रतीक ने एक बार शौर्य की तरफ
  1966. 1:33:25देखा। पर शौर्य की तरफ से कोई हरकत ना
  1967. 1:33:28देखकर उसने मालिनी से बात किया। पर उसने
  1968. 1:33:31बोली को बढ़ाया नहीं। जब शौर्य ने देखा कि
  1969. 1:33:34प्रतीक बोली नहीं लग रहा है तो वह सिर्फ
  1970. 1:33:37यह जांचने के लिए कि अगर वह बोली लगाता है
  1971. 1:33:40तो क्या प्रतीक फिर से बोली लगाएगा? यह
  1972. 1:33:43सोचकर उसने 2050 करोड़ की बोली लगा दी।
  1973. 1:33:47शौर्य की आवाज सुनकर प्रतीक ने आश्चर्य से
  1974. 1:33:50मुड़कर शौर्य की तरफ देखा और उसने फिर
  1975. 1:33:54तुरंत थे 2075 करोड़ की बोली लगा दी। उसकी
  1976. 1:33:58इस हरकत पर शौर्य ने कोई रिएक्शन तो नहीं
  1977. 1:34:00दिया पर उसके होठों पर एक मुस्कान खिल गई।
  1978. 1:34:04शौर्य फिर से शांत हो गया। प्रतीक ने बोली
  1979. 1:34:07लगा तो दी पर वह देख रहा था कि उसके साथ
  1980. 1:34:09बैठी मालिनी के चेहरे पर नाराजगी के भाव
  1981. 1:34:12था। दूसरी तरफ राघव चढा भी अपनी जगह पर
  1982. 1:34:15बैठा हुआ प्रतीक की ओर देख रहा था। जैसे
  1983. 1:34:18वह भी समझ रहा था कि यहां पर उसके दो
  1984. 1:34:20कंपटीिटर हैं। एक शौर्य और दूसरा प्रतीक।
  1985. 1:34:24जब थोड़ी देर बोली हुई रुकी रहे तो एक बार
  1986. 1:34:27फिर से राघव चढा ने 2100 करोड़ की बोली
  1987. 1:34:30लगा दी। इसके बाद फिर से थोड़ी देर हाल
  1988. 1:34:32में शांति छाई रही। कोई भी दूसरी बोली
  1989. 1:34:35इसके ऊपर नहीं आई। जब लगा कि यही अंतिम
  1990. 1:34:38बोली होगी। इस समय विक्रम और मेनका की नजर
  1991. 1:34:41मिली। मेनका ने इशारे में ही विक्रम को
  1992. 1:34:43समझा दिया। जैसे काउंटिंग एक दो हुई। तभी
  1993. 1:34:47विक्रम ने अपना बैनर उठाकर बोली को आगे
  1994. 1:34:50बढ़ा दिया। 2125 करोड़। इस नए शख्स को
  1995. 1:34:53बोली लगाते देख सबकी निगाह विक्रम की ओर
  1996. 1:34:57मुड़ गई। कोई भी इस शख्स को नहीं जानता
  1997. 1:34:59था। सभी सोचने लगे कि यह बंदा कौन आ गया
  1998. 1:35:02जिसने इतनी बड़ी बोली लगा दी? आखिर
  1999. 1:35:05विशालगढ़ में ऐसे कितने रईस हैं, जो इतनी
  2000. 1:35:07बड़ी बोली लगा सकते हैं? हॉल में कान्हा
  2001. 1:35:10फुशी भी शुरू हो गई कि क्या कोई शख्स को
  2002. 1:35:12जानता है। पर सभी विक्रम से अनजान थे।
  2003. 1:35:16प्रत्येक भी आश्चर्यचकित होकर विक्रम की
  2004. 1:35:20ओर देख रहा था। प्रत्येक के लिए विक्रम
  2005. 1:35:22अनजान ही था। पर विक्रम ने इससे आगे बोली
  2006. 1:35:26को नहीं बढ़ाया। दूसरी तरफ राघव चढा को
  2007. 1:35:29चैन नहीं आ रहा था। वह गुस्से भरी आंखों
  2008. 1:35:31से विक्रम को घूर रहा था। पर विक्रम उसकी
  2009. 1:35:34ओर देख ही नहीं रहा था। जब राघव चड्ढा को
  2010. 1:35:37कोई और चारा नजर नहीं आया तो उसने एक बार
  2011. 1:35:40फिर से अपनी बोली को बढ़ा दिया। पर उसके
  2012. 1:35:43साथ ही विक्रम ने भी अपनी बोली को बढ़ाकर
  2013. 1:35:462200 करोड़ पर पहुंचा दिया। अगर इससे ऊपर
  2014. 1:35:49राघव चढ़ा जाता तो उसको यह नीलामी बहुत
  2015. 1:35:52भारी पड़ने वाला था। उसने तो सपने में भी
  2016. 1:35:55ऐसी उम्मीद नहीं की थी कि नीलामी ₹200
  2017. 1:35:58करोड़ तक पहुंच जाएगी। काफी देर तक स्टेज
  2018. 1:36:00पर खड़ा शख्स इस इंतजार में रहा था कि कोई
  2019. 1:36:03इस बोली को आगे बढ़ाएगा। पर अब कोई भी
  2020. 1:36:05सामने नहीं आ रहा था। एक बार फिर से बहुत
  2021. 1:36:08हिम्मत करके राघव चंदा ने 2225 करोड़ की
  2022. 1:36:13बोली लगाई। पर थोड़े इंतजार के बाद ही
  2023. 1:36:16विक्रम ने 2250 करोड़ तक बोली को पहुंचा
  2024. 1:36:19दिया। इसके बाद कोई भी शख्स इससे ऊपर बोली
  2025. 1:36:22लगाने की हिम्मत नहीं कर पाया। फाइनली
  2026. 1:36:24नीलामी ₹250 करोड़ पर जाकर खत्म हुई। राघव
  2027. 1:36:28चड्ढा का चेहरा लटक गया था। बाकी वहां
  2028. 1:36:31मौजूद दूसरे शख्स को इससे कोई खास फर्क
  2029. 1:36:34नहीं पड़ रहा था। फाइनली होटल पैराडाइज का
  2030. 1:36:37नीलामी समाप्त हुआ और यह नीलामी विक्रम ने
  2031. 1:36:40अपने नाम किया। वहां उपस्थित सभी लोगों की
  2032. 1:36:43निगाह विक्रम पर ही जमी हुई थी। यह कौन
  2033. 1:36:46शख्स है जिसने होटल पैराडाइज को नीलामी
  2034. 1:36:49में खरीद लिया है क्योंकि विक्रम इस शहर
  2035. 1:36:52के लिए एक अननोन फेस था। वहां पर कोई भी
  2036. 1:36:55ऐसा नहीं था जो उसको पहले से जानता हो।
  2037. 1:36:57हालांकि लोगों के मन में विक्रम को जानने
  2038. 1:37:00की इच्छा हो रही थी। पर अभी लोग समझ नहीं
  2039. 1:37:02पा रहे थे कि वह कैसे विक्रम से अपनी जान
  2040. 1:37:06पहचान को आगे बढ़ाएं। पर यहां पर कुछ लोग
  2041. 1:37:09ऐसे भी थे जो इस बात से खुश थे कि उनके
  2042. 1:37:12किसी कंपटीिटर ने इस होटल को अपने नाम
  2043. 1:37:14नहीं किया। प्रतीक को इस बात की खुशी थी
  2044. 1:37:17कि उसने इस नीलामी को मेनका के हाथों में
  2045. 1:37:20नहीं जाने दिया। वह जानबूझकर उस समय ही
  2046. 1:37:22अपने बेड के रेंज को बढ़ा रहा था। जब
  2047. 1:37:24शौर्य कोई बोली लग रहा था। यही देखकर
  2048. 1:37:27मेनका ने विक्रम को कहा, क्या तुम
  2049. 1:37:30जानबूझकर हमारी लगाई बोली को बढ़ा दे रहे
  2050. 1:37:32थे? मेनका की बात सुनकर प्रतीक बोला, तो
  2051. 1:37:36तुमको क्या लगता है? एक तुम ही तो यहां
  2052. 1:37:38नीलामी के लिए नहीं आई थी। हम भी तो यहां
  2053. 1:37:41मौजूद थे। तो मैं अपने सामने यह होटल तुम
  2054. 1:37:44दोनों के नाम कैसे होने दे सकता था? पर
  2055. 1:37:47तुम ऐसा क्यों कर रहे थे? इससे तुम्हें
  2056. 1:37:49क्या मिलने वाला था? मिनका थोड़ा आश्चर्य
  2057. 1:37:51[संगीत] से बोली क्योंकि वह यह नहीं समझ
  2058. 1:37:54पा रही थी कि प्रतीक का अंदाज उसको लेकर
  2059. 1:37:57यूं बदला हुआ क्यों है। यह तो अच्छा हुआ
  2060. 1:38:00था कि वह पहले ही प्रतीक का इरादा समझ गई
  2061. 1:38:02थी। इसलिए उसने विक्रम को आगे बोली लगाने
  2062. 1:38:06का इशारा कर दिया था। इसके बाद विक्रम आगे
  2063. 1:38:08बोली लगाने लगा था। प्रतीक को तो सिर्फ
  2064. 1:38:10शिप्रा और शौर्य से कंपटीशन था। इसलिए
  2065. 1:38:13उसने किसी तीसरे शख्स को बोली लगाते देखकर
  2066. 1:38:16उसने खुद बोली लगाना बंद कर दिया। इसी
  2067. 1:38:19कारण प्रतीक ने आगे बोली लगाने की कोशिश
  2068. 1:38:21नहीं की। जबकि दूसरी तरफ राघव चड्ढा ने भी
  2069. 1:38:24नहीं सोचा था कि पैराडाइज होटल की बोली
  2070. 1:38:27इतनी ऊपर तक चली जाएगी। अगर उसे यह पहले
  2071. 1:38:29एहसास होता तो वह कभी भी अपने इस होटल को
  2072. 1:38:33नीलामी में जाने नहीं देता। पर उससे कहीं
  2073. 1:38:35ना कहीं चूक हो गई थी। जिसके कारण इस
  2074. 1:38:38नीलामी की खबर आम हो गई थी। क्योंकि शहर
  2075. 1:38:40के ज्यादातर बड़े लोग इस नीलामी में भाग
  2076. 1:38:43लेने के लिए आ गए थे। यह सब देखकर ही राघव
  2077. 1:38:46चढा समझ गया कि उसने गलती कर दिया है।
  2078. 1:38:49बैंक वाले विक्रम को अपनी कुछ कागजी
  2079. 1:38:51कार्यवाही के लिए अपने साथ ले गए थे। उस
  2080. 1:38:54दरमियान शौर्य और मेनका बाहर उसका इंतजार
  2081. 1:38:58करने लगे। इसी समय प्रतीक मालिनी के साथ
  2082. 1:39:01चलते हुए मेनका के पास पहुंचा और मेनका से
  2083. 1:39:04बोला मानना पड़ेगा। तुमने कोशिश बहुत की
  2084. 1:39:07इस नीलामी को अपने नाम करने की पर कामयाब
  2085. 1:39:10नहीं हो सकी। मेनका ने प्रतीक की बात को
  2086. 1:39:12सुना तो वह बोली पर तुम ऐसा क्यों रहे थे
  2087. 1:39:16मैं नोट कर रही थी जब हमारी तरफ से बोली
  2088. 1:39:18लग रहे थे तब तुम जानबूझकर उस बोली को
  2089. 1:39:20बढ़ाते रहे थे मेनका की बात सुनकर प्रतीक
  2090. 1:39:24मुस्कुराया वह मेनका को गौर से देखते हुए
  2091. 1:39:27बोला मैं क्या तुम्हें समझ नहीं रहा हूं
  2092. 1:39:30कि आजकल तुम किसी और के हाथ की कठपुतली
  2093. 1:39:32बनी हुई हो फिर तुम यह कैसे उम्मीद कर
  2094. 1:39:35सकती हो कि मैं तुम्हें थोड़ी सी भी ढील
  2095. 1:39:38दे सकता था मेरा कोई मकसद नहीं था इस होटल
  2096. 1:39:41को इतनी ऊंची बोली लगाने का। पर अगर तुम
  2097. 1:39:44या तुम्हारा पार्टनर इस भीड़ को बढ़ाते
  2098. 1:39:46रहते तो मैं कभी भी तुम्हें इस बीड को
  2099. 1:39:49जीतने नहीं देता। भले ही कितनी भी ऊंची
  2100. 1:39:51बोली लगानी पड़ती पर मैं तुम्हें या
  2101. 1:39:54तुम्हारे दोस्त को कामयाब नहीं होने देता।
  2102. 1:39:57प्रतीक की यह बात सुनकर अब मेनका को
  2103. 1:40:00अंदाजा हो गया कि उसको लेकर जरूर प्रतीक
  2104. 1:40:02के मन में कुछ गलत धारणा बन गई है। जिसके
  2105. 1:40:06कारण ही उसने उसे इस नीलामी में शामिल
  2106. 1:40:08होने वाली बात नहीं बताई और सिर्फ इतना ही
  2107. 1:40:12नहीं उसकी नफरत उसको लेकर इतनी बड़ी हुई
  2108. 1:40:16है कि वह किसी भी हाल में उसे जीतने भी
  2109. 1:40:20देना नहीं चाहता था। उसने कभी सोचा नहीं
  2110. 1:40:22था कि प्रतीक इस तरह से उसको लेकर अपनी
  2111. 1:40:25धारणा बना लेगा। पर वह खुश थी कि वह समय
  2112. 1:40:28रहते सचेत हो गई। अब वह यह सोच कर खुश थी
  2113. 1:40:32कि अगर अब प्रतीक को पता चल जाए कि असलियत
  2114. 1:40:35में इस होटल की नीलामी को उसने या उसके
  2115. 1:40:37साथी ने ही अपने नाम किया है तो ऐसी
  2116. 1:40:40स्थिति में प्रतीक का क्या हाल होगा। अभी
  2117. 1:40:42यह ख्याल मेनका के दिमाग में आ ही रहा था
  2118. 1:40:45कि इसी समय विक्रम मोहित रैना के साथ उसके
  2119. 1:40:48पास आ गया और उससे बोला बधाई हो मेनका।
  2120. 1:40:52तुम्हारा प्लान कामयाब हो गया। विक्रम ने
  2121. 1:40:55जब यह कहा था उस समय तक उसने प्रतीक को
  2122. 1:40:57देखा नहीं था क्योंकि प्रतीक की पीठ उसकी
  2123. 1:41:00तरफ था इसलिए उसने सोचा नहीं था कि मेनका
  2124. 1:41:03के सामने जो शख्स खड़ा है वह प्रतीक ही
  2125. 1:41:06होगा पर अब तक तो उसने यह बात बोल दी थी
  2126. 1:41:09इसलिए अब कुछ हो नहीं सकता था पर मेनका इस
  2127. 1:41:12बात से खुश थी कि जो बात उसे प्रतीक को
  2128. 1:41:15बतानी पड़ती वह उसे अपने आप ही पता चल गया
  2129. 1:41:17प्रतीक ने जो विक्रम की बात को सुना तो वह
  2130. 1:41:20विक्रम की तरफ पलटा और यह देखकर कि विक्रम
  2131. 1:41:23वही शख्स है जिसने इस नीलामी को अपने नाम
  2132. 1:41:26किया। वह मेनका से यह बोलते हुए मिल रहा
  2133. 1:41:29है कि उसका प्लान कामयाब हो गया। प्रतीक
  2134. 1:41:32का चेहरे का रंग उड़ गया। यह एहसास उसके
  2135. 1:41:36लिए भारी पड़ गया कि असल में यह नीलामी
  2136. 1:41:39मेनका के ही नाम रहा है। जबकि वह अब भी
  2137. 1:41:43इसी बात को लेकर मेनका का माहौल उड़ाने की
  2138. 1:41:46कोशिश कर रहा था। मेनका ने जब प्रतीक के
  2139. 1:41:49चेहरे के उड़े हुए रंग को देखा तो वह
  2140. 1:41:51मुस्कुराते हुए बोली क्या हुआ? अब
  2141. 1:41:54तुम्हारी बोलती क्यों बंद हो गई? अब और
  2142. 1:41:57मेरा माहौल नहीं उड़ाओगे। बोलो और कितना
  2143. 1:41:59जहर तुम्हारे मन में भरा हुआ है। मैंने
  2144. 1:42:02कभी तुम्हारे लिए यह नहीं सोचा था कि तुम
  2145. 1:42:04मेरे लिए ऐसा सोचोगे। पर अच्छा हुआ आज
  2146. 1:42:07मेरी यह गलतफहमी भी दूर हो गई। प्रतीक के
  2147. 1:42:10साथ खड़ी मालिनी ने जब यह जाना कि मेनका
  2148. 1:42:12की टीम ने ही इस नीलामी को अपने नाम किया
  2149. 1:42:15है तो वह मेनका को बधाई देते हुए बोली
  2150. 1:42:18मुबारक हो मेनका जो तुमने यह नीलामी अपने
  2151. 1:42:21नाम की। मैंने पहले भी तुम्हारे बारे में
  2152. 1:42:24सुना हुआ है। लेकिन आज का तुम्हारा यह
  2153. 1:42:26मास्टर प्लान देखने के बाद मैं खुद को
  2154. 1:42:28तुम्हारी तारीफ करने से रोक नहीं सकती।
  2155. 1:42:31मैं तो सोच भी नहीं सकती थी कि तुम अपने
  2156. 1:42:34साथ एक दमी ब्रीडर भी लाए थे जिसने
  2157. 1:42:36तुम्हारा काम आसान कर दिया। मेनका ने
  2158. 1:42:39महसूस किया कि मालिनी ने जो उसको बधाई दी
  2159. 1:42:42थी उसमें कहीं कोई फरेब नहीं था। इसलिए
  2160. 1:42:45उसने मालिनी को धन्यवाद किया। पर अभी भी
  2161. 1:42:47मालिनी के साथ खड़े प्रतीक के चेहरे का
  2162. 1:42:50रंग उड़ा हुआ ही था। उसका चेहरा ऐसा सफेद
  2163. 1:42:53पड़ गया था जैसे लग रहा था कि वह कहीं
  2164. 1:42:56मुंह दिखाने लायक नहीं है। मेनका प्रतीक
  2165. 1:42:58के चेहरे के उरे हुए रंग को देखकर बोली
  2166. 1:43:00तुम्हारा चेहरा ही बता रहा है कि तुम पर
  2167. 1:43:03क्या गुजर रही है। तुम जिसकी उम्मीद नहीं
  2168. 1:43:05कर रहे थे वही हो गया। अब क्या करोगे? अब
  2169. 1:43:09तो मैं यही उम्मीद कर सकती हूं कि अब तुम
  2170. 1:43:11कभी मेरे सामने नहीं आओगे। मेनका निश्चित
  2171. 1:43:15इरादे के साथ बोली। उसने आज निश्चय कर
  2172. 1:43:18लिया था कि वह आगे से कभी भी प्रतीक के
  2173. 1:43:20साथ कोई संबंध नहीं रखेगी। प्रतीक को अभी
  2174. 1:43:23भी वहीं खड़ा देखकर मेनका बोली, अब क्या
  2175. 1:43:27यह खड़े-खड़े मेरा चेहरा देखते रहोगे? अब
  2176. 1:43:29तुम्हारे लिए यही अच्छा है कि तुम मेरे
  2177. 1:43:31सामने से चले जाओ। मेनका की बात सुनकर
  2178. 1:43:34प्रतीक का चेहरा गुस्से से लाल हो गया।
  2179. 1:43:36अगर उसका बस चलता तो वह मेनका के साथ बहुत
  2180. 1:43:39बुरा करने वाला था। पर वह ऐसा सिर्फ सोच
  2181. 1:43:42ही सकता था। करना उसके बस का नहीं था।
  2182. 1:43:45क्योंकि वह जानता था कि मेनका उसके दादाजी
  2183. 1:43:47की लाडली है। अगर वह उसके साथ कुछ गलत
  2184. 1:43:50करने की कोशिश करेगा तो यह बात उसके
  2185. 1:43:52दादाजी को पता चल जाएगी। फिर प्रतीक के
  2186. 1:43:55दादाजी उसको छोड़ने वाले नहीं थे। इसी
  2187. 1:43:57कारण प्रतीक मेनका के साथ कुछ ज्यादती
  2188. 1:44:00नहीं कर सकता था। प्रतीक वहां से
  2189. 1:44:03जाते-जाते मेनका से भूल गया। याद रखना मैं
  2190. 1:44:07इस बात को इतनी आसानी से भूलने वाला नहीं
  2191. 1:44:09हूं। मैं चाहती भी नहीं तुम इस बात को
  2192. 1:44:11भूलो। कम से कम मेरी यह बात तुम्हें यही
  2193. 1:44:14याद दिलाती रहेगी कि तुम एक लड़की से हार
  2194. 1:44:17गए। इतना बोलकर मेनका प्रतीक को जाते हुए
  2195. 1:44:20देखती रही। तभी उसे पीछे [संगीत] से एक
  2196. 1:44:23आवाज सुनाई दी। मुझे उम्मीद नहीं था कि
  2197. 1:44:25इतने समय के बाद मैं फिर से तुम्हें यहां
  2198. 1:44:28देखूंगा। पर तुम्हें देखकर लग रहा है कि
  2199. 1:44:30तुम अपने मकसद में कामयाब हो गई। यह आवाज
  2200. 1:44:33किसी और की नहीं बल्कि राघव चड्ढा की थी।
  2201. 1:44:37चलिए अब मैं यह उम्मीद कर सकती हूं कि ऊपर
  2202. 1:44:40वाला आपको सद्बुद्धि दे और आप आगे से अपने
  2203. 1:44:43काम में थोड़ी समझदारी दिखाएंगे और किसी
  2204. 1:44:46को इतना छोटा समझने की गलती नहीं ना करें
  2205. 1:44:48कि एक दिन वही आपके सर का ताज तक बन जाए।
  2206. 1:44:51मेनका राघव चढ़ा के ऊपर कटाक्ष करती हुई
  2207. 1:44:54बोली मेनका की बात सुनकर राघव चढा बोला आज
  2208. 1:44:58तुम्हारा दिन है। इसलिए आज तुम कुछ भी बोल
  2209. 1:45:01सकती हो। वैसे एक बात के लिए तुम्हारी
  2210. 1:45:03तारीफ करनी पड़ेगी कि आज तुमने इस नीलामी
  2211. 1:45:06में अपना एक अच्छा मूव दिखाया। नहीं तो
  2212. 1:45:09अगर मुझे पता होता कि यह लड़का भी
  2213. 1:45:11तुम्हारी टीम का हिस्सा है तो मैं इतनी
  2214. 1:45:14आसानी से नीलामी से पीछे नहीं हटता। पर
  2215. 1:45:17क्या फायदा अब इस अफसोस मनाने का जबकि अब
  2216. 1:45:20आप चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते। इसलिए यही
  2217. 1:45:22बेहतर होगा कि आप अपने घर जाकर मातम
  2218. 1:45:25मनाएं। मेनका अपने चेहरे पर पूर्ववत
  2219. 1:45:29मुस्कान बनाए हुए बोली। जबकि इस दरमियान
  2220. 1:45:31शौर्य मेनका के साथ खड़ा रहा और उसने उनके
  2221. 1:45:34बीच में कुछ भी बोलने की कोशिश नहीं किया।
  2222. 1:45:37शौर्य मेनका के साथ खड़ा रहकर सिर्फ
  2223. 1:45:39स्थिति का जायजा लेना चाहता था। मेनका की
  2224. 1:45:42फटकार सुनकर राघव चंडा भी वहां से चला
  2225. 1:45:44गया। अब वहां पर सिर्फ शौर्य मेनका,
  2226. 1:45:47विक्रम और मोहित रैना यही बाकी रह गए। अभी
  2227. 1:45:51शौर्य और विक्रम आपस में बात करने वाले थे
  2228. 1:45:53कि तभी मोहित रैना के फोन पर कॉल आने लगा।
  2229. 1:45:56शौर्य की निगाह मोहित रैना की ओर घूम गई
  2230. 1:45:59क्योंकि मोहित रैना उसके पास ही खड़ा था।
  2231. 1:46:02इसलिए शौर्य ने देखा उसके मोबाइल पर
  2232. 1:46:04शिप्रा का कॉल आ रहा है। अपने मोबाइल पर
  2233. 1:46:07शिप्रा का कॉल आते देखकर मोहित रैना ने
  2234. 1:46:10शौर्य की ओर देखा। शौर्य ने उसे कॉल उठाने
  2235. 1:46:13को कहा तो मोहित रैना ने कॉल उठाया और
  2236. 1:46:16बोला हेलो शिप्रा जी कहिए कैसे कॉल किया?
  2237. 1:46:19शिप्रा ने जवाब में कहा मैं अभी घर से
  2238. 1:46:22निकल रही हूं। आपसे कहां पर मिलना होगा?
  2239. 1:46:25शिप्रा का सवाल सुनकर मोहित रैना ने शौर्य
  2240. 1:46:28की ओर देखा तो शौर्य ने उसे इशारों में
  2241. 1:46:30कहा उससे कहो वह न्यू सिटी टावर वाले ऑफिस
  2242. 1:46:33में ही आकर तुमसे मिले। शौर्य से यह बात
  2243. 1:46:36सुनने के बाद मोहित रैना ने शिप्रा से कहा
  2244. 1:46:39आप न्यू सिटी टावर के ऑफिस में आ जाइए।
  2245. 1:46:41मैं अभी बाहर हूं। जब तक आप पहुंचेंगी,
  2246. 1:46:43मैं भी तब तक ऑफिस पहुंच जाऊंगा। इतना
  2247. 1:46:46कहकर मोहित रैना ने फोन काट दिया और फिर
  2248. 1:46:48शौर्य की ओर देखने लगा। जैसे वह उससे अगला
  2249. 1:46:51आदेश पाने की अपेक्षा कर रहा था। शौर्य ने
  2250. 1:46:55जब यह महसूस किया तो उसने मोहित रैना से
  2251. 1:46:58कहा वैसे भी अब यहां का काम समाप्त हो गया
  2252. 1:47:00तो फिर तुम जाओ और शिप्रा से मिल लो। बाकी
  2253. 1:47:03तुम्हें पता ही है कि उससे तुम्हें क्या
  2254. 1:47:05बात करनी है और कैसे अपना ऑफर देना है।
  2255. 1:47:09शौर्य की बात सुनकर मोहित रैना मुस्कुराते
  2256. 1:47:12हुए बोला। जी सर आपको याद दिलाने की जरूरत
  2257. 1:47:16नहीं पड़ेगी। मुझे अपना काम अच्छे से पता
  2258. 1:47:18है। इसमें आपको कोई शिकायत नहीं मिलेगी।
  2259. 1:47:20इतना कहकर मोहित रैना अपनी कार से वहां से
  2260. 1:47:23निकल गया। मोहित रैना के वहां जाने के बाद
  2261. 1:47:26शौर्य भी विक्रम और मेयनका के साथ
  2262. 1:47:28पार्किंग की तरफ बढ़ गया। अब आगे क्या
  2263. 1:47:31होगा? आखिर शौर्य ने मोहित रैना को शिप्रा
  2264. 1:47:34से बात करने के लिए क्या समझा दिया था।
  2265. 1:47:36मोहित रैना को शिप्रा के साथ किस तरह के
  2266. 1:47:40डील करने थे। शिप्रा मेघना के साथ न्यू
  2267. 1:47:42सिटी टावर के लिए निकली। वह देखना चाहती
  2268. 1:47:45थी कि मोहित रैना के पास उसके लिए किस तरह
  2269. 1:47:49का जॉब प्रपोजल था। बाकी दूसरा काम यह भी
  2270. 1:47:52था कि जिंक कलेक्शन का पेपर वर्क भी पूरा
  2271. 1:47:54करना था। मेघना को भी अपनी ब्रांड के लिए
  2272. 1:47:57बिग बुल में स्पेस चाहिए था। इसीलिए वह
  2273. 1:48:00उसके साथ थी। शिप्रा न्यू सिटी टावर के
  2274. 1:48:03ऑफिस में पहुंची तो उस समय तक मोहित रैना
  2275. 1:48:06भी ऑफिस पहुंच चुका था। शिप्रा मेघना के
  2276. 1:48:08साथ मोहित रैना के ऑफिस में पहुंची। मोहित
  2277. 1:48:12रैना ने शिप्रा और मेघना के लिए कॉफी
  2278. 1:48:14मंगवाया। इसी बीच मोहित ने अपने लीगल वाले
  2279. 1:48:17को भी वहां बुलवाया। जिसने पूरा पेपर वर्क
  2280. 1:48:19तैयार कर रखा था। उसने शिप्रा से साइन
  2281. 1:48:22लिया। बहुत सारे पेपर होने के कारण शिप्रा
  2282. 1:48:24को कई जगह साइन करने पड़े। पेपर वर्क पूरा
  2283. 1:48:28होने के बाद सबसे पहले मेघना ने बिग बबुल
  2284. 1:48:31में अपनी ब्रांड के स्पेस के लिए बात
  2285. 1:48:33किया। प्रॉफिट शेयरिंग कंफर्म करने के बाद
  2286. 1:48:36मोहित रैना ने मेघना के लिए भी पेपर तैयार
  2287. 1:48:38करवाया और और सेटिस्फाई होने के बाद दोनों
  2288. 1:48:41ने पेपर पर साइन किया और उसकी एक कॉपी
  2289. 1:48:44मेघना को भी दिया। जब यह सारे काम पूरे हो
  2290. 1:48:47गए तो उसके बाद मेघना ने मोहित रैना से
  2291. 1:48:50कहा कल आपने शिप्रा के जॉब के लिए कहा था
  2292. 1:48:53क्या आप बताएंगे कि आप जिस जॉब की बात कर
  2293. 1:48:55रहे हैं वह किस तरह का जॉब है? मेघना का
  2294. 1:48:58सवाल सुनकर मोहित रैना मुस्कुराते हुए
  2295. 1:49:00बोला उसकी तो आप चिंता ही ना करें।
  2296. 1:49:03एक्चुअली हमारे बॉस के पास इस समय आपके
  2297. 1:49:05लिए जॉब के कई ऑफर हैं। यह आप पर डिपेंड
  2298. 1:49:07करता है कि आप उसमें से अपने लिए कौन सा
  2299. 1:49:10जॉब प्रेफर करती हैं। शिप्रा को यह जानकर
  2300. 1:49:14आश्चर्य हुआ कि उसके लिए जिस जॉब की बात
  2301. 1:49:16हो रही है, वह मोहित रैना के बॉस के लिए
  2302. 1:49:19हो रही है। फिर भी आपको तो पता ही होगा कि
  2303. 1:49:22आप जिस जॉब की बात कर रहे हैं, वह किस तरह
  2304. 1:49:24की जॉब है। मेघना ने मोहित रैना से उसकी
  2305. 1:49:28बात सुनने के बाद यह सवाल किया। हम जॉब की
  2306. 1:49:31भी बात करेंगे। लेकिन उससे पहले हम यह बात
  2307. 1:49:33कर लें कि आप क्या सैलरी अपने लिए
  2308. 1:49:35एक्सपेक्ट कर रही हैं। मोहित रैना शिप्रा
  2309. 1:49:39की ओर देखते हुए बोला यह सवाल शिप्रा के
  2310. 1:49:42लिए आश्चर्य भरा था क्योंकि उसको अभी तक
  2311. 1:49:45जॉब के बारे में तो बताया नहीं गया पर वह
  2312. 1:49:47क्या सैलरी एक्सपेक्ट कर रही है। यह उससे
  2313. 1:49:50पूछ लिया गया। उसे समझ नहीं आया कि वह
  2314. 1:49:53बिना जॉब का प्रोफाइल जाने क्या सैलरी
  2315. 1:49:55बताएं। क्योंकि अभी उसे यह भी नहीं पता था
  2316. 1:49:58कि मोहित रैना उसके लिए किस तरह के जॉब की
  2317. 1:50:01बात कर रहा है। पर मेघना चुप नहीं रह सकी।
  2318. 1:50:05उसने मोहित रैना से सवाल किया। आप भी कमाल
  2319. 1:50:08करते हैं मिस्टर मोहित। बिना जॉब का
  2320. 1:50:11प्रोफाइल जाने कोई कैसे अपनी सैलरी
  2321. 1:50:13निर्धारित कर सकता है? चलिए अगर ऐसी बात
  2322. 1:50:16है तो मैं आपकी मुश्किल को थोड़ा आसान कर
  2323. 1:50:18देता हूं। क्या आप बताएंगी कि आप अपनी इस
  2324. 1:50:20कंपनी से इयरली क्या प्रॉफिट कमा रही थी?
  2325. 1:50:23मोहित रैना हल्की मुस्कान के साथ बोला। जब
  2326. 1:50:26शिप्रा ने मोहित देना की बात को सुना तो
  2327. 1:50:29उसने मन ही मन कुछ कैलकुलेशन किया और बोली
  2328. 1:50:33यही कोई लगभग 1 करोड़ के आसपास। शिप्रा का
  2329. 1:50:36जवाब सुनकर मोहित रैना मुस्कुराया और
  2330. 1:50:39बोला, तो फिर ठीक है। आपके लिए इयरली 1
  2331. 1:50:42करोड़ का पैकेज कैसा रहेगा? क्या आप इस
  2332. 1:50:44पैकेज से सेटिस्फाइड हैं? मोहित रैना की
  2333. 1:50:46बात सुनकर शिप्रा का तो माथा ही भरना गया।
  2334. 1:50:49उसने तो सपने में भी कल्पना नहीं की थी कि
  2335. 1:50:51उसको शुरुआत में ही 1 करोड़ का पैकेज मिल
  2336. 1:50:54जाएगा। एक करोड़ की तो बात ही दूर। उसने
  2337. 1:50:57तो 50 लाख भी इयरली अपने लिए एक्सपेक्ट
  2338. 1:51:00नहीं किया था। वह हैरान होकर मोहित रैना
  2339. 1:51:03की ओर देखने लगी कि क्या जो उसने सुना वह
  2340. 1:51:06सही है या मोहित? रैना उसके साथ कोई मजाक
  2341. 1:51:09तो नहीं कर रहा। उसे जब भरोसा नहीं हुआ तो
  2342. 1:51:13उसने मोहित रैना से सवाल भी कर दिया। क्या
  2343. 1:51:16आप मुझसे मजाक कर रहे हैं मिस्टर मोहित?
  2344. 1:51:18आपको ऐसा क्यों लग रहा है कि मैं आपसे
  2345. 1:51:20मजाक कर सकता हूं? क्या आपको अपने ऊपर
  2346. 1:51:23विश्वास नहीं है? क्या आप अपने आप को इस
  2347. 1:51:26लायक नहीं समझती कि आप इससे ज्यादा भी
  2348. 1:51:29सैलरी प्राप्त कर सकती हैं? मोहित रैना
  2349. 1:51:33सवालिया नजरों से शिप्रा की ओर देखते हुए
  2350. 1:51:35बोला, नहीं ऐसी बात नहीं है। बात दरअसल यह
  2351. 1:51:39है कि मैं अभी किसी भी और कंपनी में जॉब
  2352. 1:51:43के लिए अपनी शुरुआत करने जा रही हूं। बिना
  2353. 1:51:45किसी एक्सपीरियंस के मैं कैसे इतनी बड़ी
  2354. 1:51:48सैलरी एक्सपेक्ट कर सकती हूं। अभी मैंने
  2355. 1:51:50किसी भी दूसरी कंपनी के लिए कोई काम नहीं
  2356. 1:51:52किया है। इसलिए विश्वास करना थोड़ा
  2357. 1:51:54मुश्किल है। हां, अगर मैं जॉब कर रही
  2358. 1:51:57होती, उसके बाद अगर मुझे यह सैलरी हक
  2359. 1:51:59मिलता तो बात दूसरी होती। शिप्रा ने
  2360. 1:52:02ईमानदारी से मोहित रैना को अपना जवाब
  2361. 1:52:05दिया। मोहित रैना भी शिप्रा की ईमानदारी
  2362. 1:52:08से दिए गए जवाब से प्रभावित हुए बिना खुद
  2363. 1:52:11को रोक नहीं सका। अभी तक वह यही समझ रहा
  2364. 1:52:13था कि शिप्रा को जो जॉब मिल रहा है वह एक
  2365. 1:52:17तरह से शौर्य का शिप्रा के लिए एक उपहार
  2366. 1:52:19है। नहीं तो वह इस काबिल क्या ही होगी जो
  2367. 1:52:22उसको इतनी सैलरी मिले। पर शिप्रा से मिले
  2368. 1:52:25जवाब ने उसको प्रभावित किया। इसलिए उसने
  2369. 1:52:29शिप्रा को जवाब देते हुए कहा मिस शिप्रा
  2370. 1:52:32यहां जॉब सिर्फ एक्सपीरियंस से नहीं बल्कि
  2371. 1:52:35काबिलियत से भी मिलती है और मुझे पता है
  2372. 1:52:38कि आप क्या काबिलियत रखती हैं क्योंकि आज
  2373. 1:52:41जो कंपनी आपने हमारे नाम की है उसको आप
  2374. 1:52:44अपनी काबिलियत के कारण ही तो इस मुकाम तक
  2375. 1:52:46ला पाई तभी तो आज आप उसके लिए अपने मन
  2376. 1:52:49मुताबिक कीमत पा सकी और इसको इस स्थिति
  2377. 1:52:51में लाने के लिए जो आपने काम किया वह
  2378. 1:52:53एक्सपीरियंस क्या कम है जो मैं यह देखूं
  2379. 1:52:56कि आपने किसी और कंपनी के लिए कितना काम
  2380. 1:52:59किया है। इसलिए अपनी कंपनी को खड़ा करने
  2381. 1:53:01में जो काबिलियत अपने दिखाई है, वह आपकी
  2382. 1:53:03योग्यता साबित करने के लिए काफी है।
  2383. 1:53:06इसीलिए मैंने आपकी योग्यता के हिसाब से
  2384. 1:53:09आपको यह इयरली पैकेज ऑफर किया है ताकि बाद
  2385. 1:53:12में आप कम से कम पैसे के कारण तो आप हमारे
  2386. 1:53:15यहां से जॉब छोड़ने की नहीं सोचेंगी।
  2387. 1:53:18शिप्रा के साथ मेघना भी मोहित रैना की बात
  2388. 1:53:21सुनकर इंप्रेस हुए बिना नहीं रह सकी।
  2389. 1:53:23कितनी खूबसूरती से मोहित रैना ने यह जता
  2390. 1:53:26दिया कि शिप्रा कितनी काबिल है। शिप्रा ने
  2391. 1:53:28हिचकते हुए मोहित रैना से कहा तो क्या आप
  2392. 1:53:32सच में मुझे यह पैकेज ऑफर कर रहे हैं? अगर
  2393. 1:53:35सच में आप यह पैकेज मुझे ऑफर कर रही हैं
  2394. 1:53:37तो मैं आपको यकीन दिलाती हूं कि मैं अपनी
  2395. 1:53:40इस सैलरी को जस्टिफाई करने की पूरी कोशिश
  2396. 1:53:42करूंगी। मुझे पता है आप जरूर ऐसा कर
  2397. 1:53:46लेंगी। मोहित रहना शिप्रा की तारीफ करते
  2398. 1:53:49हुए बोला अगर हमने आपके ऊपर यह भरोसा किया
  2399. 1:53:52है तो कुछ सोच कर ही किया होगा। हमें आपकी
  2400. 1:53:56योग्यता पर पूरा भरोसा है। पर आपने हमें
  2401. 1:53:59अभी तक हमारे काम के बारे में नहीं बताया
  2402. 1:54:01है। जबकि सबसे पहले तो आपको हमें हमारे
  2403. 1:54:04काम के बारे में ही बताना चाहिए था।
  2404. 1:54:06शिप्रा बड़ी ही बेसब्री से यह जानने को
  2405. 1:54:08उत्सुक थी कि मोहित रैना ने उसके लिए क्या
  2406. 1:54:10काम सोचा हुआ है। शिप्रा का सवाल सुनकर
  2407. 1:54:13मोहित रैना मुस्कुराते हुए बोला। एक काम
  2408. 1:54:16तो यही है जो आप अभी तक करती रही हैं।
  2409. 1:54:18यानी कि आपने जो हमें अपनी कंपनी बेची है
  2410. 1:54:22उसका काम आगे भी आपको ही देखना होगा। इसके
  2411. 1:54:25अलावा भी एक और जिम्मेदारी है जो आपको कल
  2412. 1:54:27दिया जा सकता है। शिप्रा यह जानकर हैरान
  2413. 1:54:30रह गई कि जिम कलेक्शन का काम आगे भी उसी
  2414. 1:54:33को देखना है। यानी उसको अपनी शुरू की गई
  2415. 1:54:36कंपनी को ऊंचाइयों तक पहुंचाने का मौका
  2416. 1:54:39अभी भी उसके पास है। और उसकी उत्सुकता इस
  2417. 1:54:42बात से भी बढ़ गई थी कि आखिर कल उसे और
  2418. 1:54:45किस कंपनी की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
  2419. 1:54:48यह सोच दिमाग में आते ही शिप्रा ने मोहित
  2420. 1:54:50रैना से पूछ लिया। आखिर आप और किस कंपनी
  2421. 1:54:53की बात कर रहे हैं और कौन सी दूसरी कंपनी
  2422. 1:54:56है जिसकी जिम्मेदारी मुझे दी जा सकती है।
  2423. 1:54:59इसके लिए आपको कल तक इंतजार करना पड़ेगा।
  2424. 1:55:01मैं आपको बता दूं कि कल एक पार्टी में
  2425. 1:55:04आपको आना है। हो सकता है वहीं आपको आपकी
  2426. 1:55:07दूसरी जिम्मेदारी दी जा सकती है। मोहित
  2427. 1:55:09रैना सस्पेंस बनाते हुए बोला आप किस
  2428. 1:55:12पार्टी में आने की बात कर रहे हैं? आखिर
  2429. 1:55:15कल मुझे कहां आना है? शिप्रा मोहित रैना
  2430. 1:55:18का सवाल सुनकर बोली कल होटल सन साइन में
  2431. 1:55:22स्ट्रांग एनर्जी ड्रिंक की ल्चिंग इवेंट
  2432. 1:55:24है। इसके उपलक्ष में एक बड़ी पार्टी रखी
  2433. 1:55:27गई है। आप उस पार्टी में आमंत्रित हैं।
  2434. 1:55:30इतना कहकर मोहित रैना ने अपने टेबल के
  2435. 1:55:33ड्रार से इनविटेशन कार्ड निकालकर शिप्रा
  2436. 1:55:36की तरफ बढ़ा दिया। फिर अपनी बात को जारी
  2437. 1:55:39रखा। मिस मेघना आप भी इस पार्टी में
  2438. 1:55:41आमंत्रित हैं। आप कहीं उस स्ट्रांग एनर्जी
  2439. 1:55:44ड्रिंक की बात तो नहीं कर रहे हैं जिसकी
  2440. 1:55:46शूटिंग अभी कुछ ही दिनों पहले नताशा कपूर
  2441. 1:55:50और श्रवण ने किया था। मेघना को मोहित के
  2442. 1:55:53मुंह से स्ट्रांग एनर्जी ड्रिंक का नाम
  2443. 1:55:56सुनकर यह ख्याल आया। हां, मैं उसी एनर्जी
  2444. 1:56:00ड्रिंक की बात कर रहा हूं। कल उस पार्टी
  2445. 1:56:02में नताशा कपूर भी आ रही हैं। आपको फिर से
  2446. 1:56:04उनसे मिलने का मौका मिल जाएगा। मोहित रैना
  2447. 1:56:07मेघना की ओर देखकर बोला फिर तो मैं जरूर
  2448. 1:56:10आऊंगी। मुझे नताशा कपूर से भी मिलना है।
  2449. 1:56:13मेघना बोली क्या स्ट्रांग एनर्जी ड्रिंक
  2450. 1:56:16आपकी कंपनी की है? शिप्रा ने सवाल किया।
  2451. 1:56:19उसे याद आया कि अभी कुछ दिन पहले ही तो
  2452. 1:56:21उसने उसका पोस्टर देखा था। जिसमें श्रवण
  2453. 1:56:24नताशा कपूर के साथ था। इस पोस्टर को देखकर
  2454. 1:56:26ही तो उसके मन में श्रवण को लेकर कई ख्याल
  2455. 1:56:29आने लगे थे। उसने इतनी बार नताशा कपूर के
  2456. 1:56:32बारे में सुन लिया था कि अब उसकी भी इच्छा
  2457. 1:56:36एक बार नताशा कपूर से मिलने की हो गई थी।
  2458. 1:56:39उसका भाई राहुल भी तो नताशा कपूर का बहुत
  2459. 1:56:42बड़ा फैन था। यह सोचकर शिप्रा ने मोहित
  2460. 1:56:46रैना से पूछा। क्या मैं इस पार्टी में
  2461. 1:56:49अपने भाई को भी ला सकती हूं? एक्चुअली वह
  2462. 1:56:51नताशा कपूर का बहुत बड़ा फैन है। शिप्रा
  2463. 1:56:54की बात सुनकर मोहित रैना मुस्कुराते हुए
  2464. 1:56:56बोला। आप और भी किसी को लाना चाहती हैं तो
  2465. 1:56:59ला सकती हैं। कोई दिक्कत नहीं है। आप समय
  2466. 1:57:02देख लीजिएगा और समय से होटल सनशाइन पहुंच
  2467. 1:57:05जाइएगा। मैं भी आपको वहीं मिलूंगा। ठीक
  2468. 1:57:08है। मैं समय से पहुंच जाऊंगी। क्या उस
  2469. 1:57:11पार्टी में आपके बॉस भी होंगे? शिप्रा ने
  2470. 1:57:13अगला सवाल किया। शिप्रा के मुंह से यह
  2471. 1:57:16सवाल सुनकर मोहित रैना कुछ पल के लिए सोच
  2472. 1:57:19में डूब गया और सोचने लगा कि उसे शिप्रा
  2473. 1:57:21के सामने क्या बताना चाहिए। यह सोचकर वह
  2474. 1:57:24बोला, हां, हमारे बॉस भी उस पार्टी में
  2475. 1:57:27जरूर होंगे। शायद आपका भी मिलना उनसे वहां
  2476. 1:57:29पर हो जाए। मोहित रैना की बात सुनकर
  2477. 1:57:32शिप्रा थोड़ी रोमांचित हो गई। उसे खुशी
  2478. 1:57:34हुई कि कल वो बिग बुल के ओनर से भी मिलने
  2479. 1:57:37वाली है। सब कुछ फाइनल होने के बाद शिप्रा
  2480. 1:57:40मोहित रैना से इजाजत लेते हुए बोली, ठीक
  2481. 1:57:43है मिस्टर मोहित। अब आप मुझे इजाजत दीजिए।
  2482. 1:57:46कल मिलते हैं आपसे। ठीक है अभी आप जा सकते
  2483. 1:57:49हैं। बाकी कल मिलते हैं। इतना बोलकर मोहित
  2484. 1:57:53रैना भी अपनी जगह पर खड़ा हो गया। शिप्रा
  2485. 1:57:56मेघना के साथ न्यू सिटी टावर से बाहर आई।
  2486. 1:57:59शिप्रा मोहित रैना से इस जॉब का ऑफर पाकर
  2487. 1:58:02बहुत खुश थी। उसे इस बात की भी खुशी थी कि
  2488. 1:58:05जिम कलेक्शन के आगे का काम वहीं देखेगी।
  2489. 1:58:08बाकी उसे इंतजार था कि कल उसे और कौन सी
  2490. 1:58:11दूसरी जिम्मेदारी मिलती है। न्यू सिटी
  2491. 1:58:14टावर के ऑफिस से बाहर आने के बाद शिप्रा
  2492. 1:58:16कार में बैठी और कार को अपने घर की तरफ
  2493. 1:58:19बढ़ा दिया। वहां घर जाकर अपने मम्मी पापा
  2494. 1:58:22को भी यह खुशखबरी देना चाहती थी कि उसको
  2495. 1:58:24जॉब मिल गया है और जब वह अपने पापा को
  2496. 1:58:27अपनी सैलरी पैकेज के बारे में बताएगी तो
  2497. 1:58:29वह और भी खुश होंगे। बाकी उसे अपने भाई
  2498. 1:58:32राहुल को कल की पार्टी के लिए इनवाइट भी
  2499. 1:58:35करना था। वह जानती थी कि राहुल किसी भी
  2500. 1:58:38सूरत में नताशा कपूर से मिलने का मौका
  2501. 1:58:41नहीं चूक सकता। अब आगे क्या होगा? शिप्रा
  2502. 1:58:44न्यू सिटी टावर के ऑफिस से निकल कर सीधा
  2503. 1:58:46अपने घर पहुंची। वह खुश थी कि जितनी
  2504. 1:58:50ज्यादा उसकी स्थिति खराब हो गई थी, वह
  2505. 1:58:52जल्दी ही पटरी पर आ गई और अब उसे कोई कुछ
  2506. 1:58:55कहने वाला नहीं था। शिप्रा को अभी अपना घर
  2507. 1:58:58छोड़े एक ही दिन हुआ था। लेकिन उसे ऐसा लग
  2508. 1:59:01रहा था मानो कितना समय बीत गया है। उसे
  2509. 1:59:04अपने घर को छोड़े हुए। वह घर पहुंची तो
  2510. 1:59:07बीना जी राजदीप जी के साथ उसे डाइनिंग हॉल
  2511. 1:59:10में ही मिल गई। शिप्रा को देखकर दोनों
  2512. 1:59:12बहुत खुश हुए। उन्हें भी शिप्रा के बिना
  2513. 1:59:14रहने की आदत नहीं थी। इसलिए इस एक दिन में
  2514. 1:59:17है। उन्हें शिप्रा की कमी बहुत खली।
  2515. 1:59:20राजदीप जी दोनों को बैठने का इशारा करते
  2516. 1:59:22हुए बोले, तुम्हें क्या जरूरत पड़ गई?
  2517. 1:59:25अपना घर छोड़कर कहीं और रहने की। तुम्हारे
  2518. 1:59:28दादाजी तो तुम्हें पता है किस कारण इतना
  2519. 1:59:30कुछ भूल गए। ऐसे अगर उनकी बात को ऐसे दिल
  2520. 1:59:34से लगाओगी तो फिर आगे चलकर बहुत मुश्किल
  2521. 1:59:36होगी। कुछ बातों को इग्नोर करना सीखो।
  2522. 1:59:39शिप्रा अपने पापा की चिंता को जानकर बोली
  2523. 1:59:42आप चिंता मत कीजिए पापा। मैं ठीक हूं और
  2524. 1:59:45मुझे ऐसी कोई तकलीफ भी नहीं है। जहां तक
  2525. 1:59:48घर से बाहर रहने की बात है तो दादाजी ने
  2526. 1:59:50तो ठीक ही कहा था। अगर मुझे श्रवण के साथ
  2527. 1:59:53अपनी जिंदगी बितानी है तो घर तो छोड़ना
  2528. 1:59:56पड़ेगा और अब वैसे भी मुझे अपनी
  2529. 1:59:58जिम्मेवारी खुद ही उठानी है। मैं समझता
  2530. 2:00:01हूं तुम खुद में ही इतनी कैपेबल हो कि
  2531. 2:00:04तुम्हें किसी की सहायता की जरूरत नहीं है।
  2532. 2:00:07पर अभी तो तुमने अपनी कंपनी भी बेच दी। जब
  2533. 2:00:10तक कोई अच्छा काम शुरू नहीं कर देती तब तक
  2534. 2:00:13तुम्हें कोई जरूरत नहीं है कहीं और जाकर
  2535. 2:00:16रहने की। राजदीप जी शिप्रा से अपना कंसर्न
  2536. 2:00:19दिखाते हुए बोले मैंने कहा ना पापा आप
  2537. 2:00:23मेरी चिंता मत कीजिए वैसे भी मुझे अपने
  2538. 2:00:25लिए काम मिल गया है तो अब आपको इस बारे
  2539. 2:00:27में भी सोचने की कोई जरूरत नहीं है। कुछ
  2540. 2:00:30ही दिनों में सब फिर पहले जैसा हो जाएगा।
  2541. 2:00:33शिप्रा अपने पापा को तसल्ली देती हुई
  2542. 2:00:35बोली, राजदीप जी को यह जानकर खुशी हुई कि
  2543. 2:00:38शिप्रा ने कोई जॉब ज्वाइन कर लिया है। पर
  2544. 2:00:41फिर भी उनके मन में एक कसक तो थी ही कि
  2545. 2:00:44कहां वह पहले अपनी कंपनी की मालकिन हुआ
  2546. 2:00:46करती थी और कहां अब वह किसी और के लिए जॉब
  2547. 2:00:49करेगी और फिर उन्हें यह भी नहीं पता था कि
  2548. 2:00:52शिप्रा ने जो जॉब ज्वाइन किया है वह किस
  2549. 2:00:55तरह का है। यही सोचकर उन्होंने पूछा। वैसे
  2550. 2:00:59मैं जान सकता हूं कि तुमने कहां और किस
  2551. 2:01:02कंपनी को ज्वाइन किया है। मैं आपको जरूर
  2552. 2:01:04बताऊंगी कि मैंने कहा और किस कंपनी को
  2553. 2:01:06ज्वाइन किया है। पर वह आज नहीं जब सब कुछ
  2554. 2:01:09फाइनल होकर ओके हो जाएगा उसके बाद ही मैं
  2555. 2:01:12आपको यह बताऊंगी। शिप्रा नहीं चाहती थी कि
  2556. 2:01:16वह अभी ही ज्यादा खुश हो। क्योंकि जब तक
  2557. 2:01:19उसके पास जॉइनिंग लेटर नहीं आ जाता तब तक
  2558. 2:01:22वह इस तरह से खुश होकर सबको यह नहीं बता
  2559. 2:01:26सकती थी कि उसने कहां जॉब ज्वाइन किया है।
  2560. 2:01:29यानी अभी तुम्हारे जॉइनिंग नहीं हुई है।
  2561. 2:01:32राजदीप जी शंकित स्वर में बोले अरे पापा
  2562. 2:01:35आप चिंता मत करो। अभी जॉइनिंग नहीं हुई
  2563. 2:01:38है। लेकिन फिर भी सब कुछ फाइनल है। बस मैं
  2564. 2:01:41यह चाहती हूं कि एक बार पूरी तरह से यह
  2565. 2:01:44ओके हो जाए। बस इतनी सी बात है। वैसे भी
  2566. 2:01:47आप मेरी चिंता तो छोड़ ही दो। अगर यहां
  2567. 2:01:49नहीं भी होता है तो भी मेरे पास जॉब के कई
  2568. 2:01:52ऑप्शन है। अरे मौसा जी आप शिप्रा की कुछ
  2569. 2:01:56ज्यादा ही चिंता कर रहे हैं। जब यह अपने
  2570. 2:01:58दम पर एक कंपनी खड़ी कर सकती है तो क्या
  2571. 2:02:01उसके लिए एक अच्छा जॉब ढूंढना इतना
  2572. 2:02:03मुश्किल होगा? आप इसकी चिंता छोड़ दीजिए
  2573. 2:02:06और अपना ध्यान रखिए। मेघना राजदीप जी को
  2574. 2:02:09व्यर्थ की चिंता करते देखकर बोली मैं
  2575. 2:02:11समझता हूं मेरी बच्ची बड़ी हो गई है पर
  2576. 2:02:14हूं तो एक बाप भी ना तो चिंता तो होगी ही
  2577. 2:02:18खैर जब तुम इतनी निश्चित हो तो अब मैं भी
  2578. 2:02:21तुम्हारे लिए कोई चिंता नहीं करूंगा
  2579. 2:02:22राजदीप जी मुस्कुराते हुए बोले यह राहुल
  2580. 2:02:26कहां है दिख नहीं रहा है शिप्रा राहुल को
  2581. 2:02:29यहां नहीं देखकर स्वाभाविक रूप से पूछ
  2582. 2:02:31बैठी उसका कोई टेनिस का मैच था वहीं गया
  2583. 2:02:35होगा आजकल उसको टेनिस का भूत चढ़ा हुआ है।
  2584. 2:02:38बिना जी जवाब देते हुए बोली फिर तो उसका
  2585. 2:02:41बैड लक है। शिप्रा अफसोस करती हुई बोली
  2586. 2:02:45क्यों ऐसा क्या हुआ जो उसका बैड लक है?
  2587. 2:02:48राजदीप जी शिप्रा की बात सुनकर बोली
  2588. 2:02:51एक्चुअली कल हम एक पार्टी में जा रहे हैं
  2589. 2:02:53जहां पर नताशा कपूर भी आ रही है। और नताशा
  2590. 2:02:56कपूर राहुल की फेवरेट है। तो मैंने सोचा
  2591. 2:02:59उसे अपने साथ ले जाऊंगी तो वह अपनी फेवरेट
  2592. 2:03:01स्टार से मिल लेगा। पर वह तो यहां है ही
  2593. 2:03:04नहीं। शिप्रा ने जवाब दिया। अरे तो ऐसा
  2594. 2:03:07क्या है? जब वह आएगा तो हम उसे बता देंगे।
  2595. 2:03:10अगर उसको जाना होगा तो वह तुमसे बात करके
  2596. 2:03:13आ जाएगा। बीना जी मुस्कुराते हुए बोली।
  2597. 2:03:16इतनी देर में संतो ने शिप्रा और मेघना के
  2598. 2:03:19लिए चाय बना दिया था। चाय पीने के बाद
  2599. 2:03:21शिप्रा खड़ी होती हुई बोली ठीक है पापा।
  2600. 2:03:23अब मैं चलती हूं। अरे जल्दी क्या है? अभी
  2601. 2:03:26तो आई हो और जाने की भी बात करने लगी। कोई
  2602. 2:03:29जरूरत नहीं है। आज यहीं रहो। राहुल आ
  2603. 2:03:32जाएगा तो उससे मिलकर भले चली जाना। राजदीप
  2604. 2:03:35जी शिप्रा को रोकते हुए बोले क्या पापा आप
  2605. 2:03:38भी कैसे जिद करने लगते हैं राहुल का कुछ
  2606. 2:03:40पता तो है नहीं कि वह कब तक आएगा इसलिए जब
  2607. 2:03:43वह आए तो आप उसे बता दीजिएगा शिप्रा
  2608. 2:03:47मुस्कुराती हुई भूली उसे अपने पापा का यूं
  2609. 2:03:49जिद करना उसे अच्छा भी लग रहा था अचानक
  2610. 2:03:52राजदीप जी के दिमाग में कोई बात आई तो
  2611. 2:03:55उन्होंने शक भरे स्वर में कहा जहां तुम रह
  2612. 2:03:59रही हो वह जगह ठीक तो है पता नहीं तुम्हें
  2613. 2:04:02भी क्या जिद चढ़ी कहीं भी जाकर रहने लगी
  2614. 2:04:05हो। राजदीप जी की बात सुनकर मेघना
  2615. 2:04:07मुस्कुराते हुए बोली, अरे मौसा जी आप कैसी
  2616. 2:04:10बात कर रही हैं? आप कभी आकर श्रवण के घर
  2617. 2:04:13को देखिए। एक तो वह घर विशालगढ़ के इतने
  2618. 2:04:15प्राइम लोकेशन पर है और वह भी इतनी
  2619. 2:04:18खूबसूरत कि आपको लगेगा कि आप भी यह घर
  2620. 2:04:20छोड़कर वहीं रहने आ जाए। मेघना की बात
  2621. 2:04:24सुनकर राजदीप जी को तसल्ली हुई। पर उन्हें
  2622. 2:04:26आश्चर्य भी हुआ कि आखिर शौर्य ने इतनी
  2623. 2:04:29जल्दी इतनी खूबसूरत कोठी का इंतजाम कैसे
  2624. 2:04:32कर लिया। उनके मन में भी यह इच्छा जागी कि
  2625. 2:04:35उन्हें एक बार जाकर श्रवण के घर को देखना
  2626. 2:04:37चाहिए। इसलिए उन्होंने शिप्रा से कहा मैं
  2627. 2:04:40देखता हूं एक दो दिनों में आकर एक बार
  2628. 2:04:43जहां तुम रह रही हो। आखिर ऐसा क्या उस घर
  2629. 2:04:45में है जो तुम इतनी तारीफ कर रही हो? ठीक
  2630. 2:04:48है आपकी। जब इच्छा हो आप आकर देख लीजिए।
  2631. 2:04:51पर अभी हम निकलते हैं। इतना कहकर शिप्रा
  2632. 2:04:54मेघना के साथ घर से निकल गई। दूसरी तरफ
  2633. 2:04:57शौर्य मेनका के साथ होटल राजकमल वापस आ
  2634. 2:05:00गया था। आज मेनका बहुत खुश थी क्योंकि
  2635. 2:05:02उसका जो वर्षों पुराना सपना था वह एक तरह
  2636. 2:05:05से पूरा हो गया था। शौर्य मेनका को खुश
  2637. 2:05:08देखकर बोला अब बताओ तुम अब इस होटल को
  2638. 2:05:11कैसे चलाने वाली हो? शौर्य की बात सुनकर
  2639. 2:05:14मेनका आश्चर्य से बोली क्या कहा तुमने? इस
  2640. 2:05:17होटल को मुझे ही चलाना है। शौर्य मेनका की
  2641. 2:05:20बात सुनकर बोला तो और कौन चलाएगा?
  2642. 2:05:23तुम्हारे कहने पर ही तो इसको लिया है और
  2643. 2:05:25फिर तुम्हारा इमोशन भी तो इस होटल के साथ
  2644. 2:05:27जुड़ा हुआ है। इसलिए तुमको ही इस होटल को
  2645. 2:05:30अपने हिसाब से चलाना है। वैसे तो मेनका भी
  2646. 2:05:34यही चाहती थी पर वह शौर्य के सामने ऐसा
  2647. 2:05:37बोल नहीं सकती थी। पर जब शौर्य ने उसे यह
  2648. 2:05:40अथॉरिटी दे दे कि उसे ही इस होटल को भी
  2649. 2:05:42अपने हिसाब से चलाना है तो उसे यह जानकर
  2650. 2:05:45अच्छा लगा। अभी शौर्य मेनका के साथ बातों
  2651. 2:05:48में लगा था कि इसी समय उसका फोन बजने लगा।
  2652. 2:05:50उसने नंबर देखा तो पाया कि आज कई दिनों के
  2653. 2:05:54बाद रत्नाकर शेट्टी का फोन उसके पास आ रहा
  2654. 2:05:56है। शौर्य ने फोन उठाया और बोला हेलो सेठी
  2655. 2:06:00साहब आज बहुत दिनों के बाद आपको हमारी याद
  2656. 2:06:02आई। कहिए कैसे याद किया? रत्नाकर शेट्टी
  2657. 2:06:05ने जब देखा कि दूसरी तरफ लाइन पर शौर्य है
  2658. 2:06:08तो वह मुस्कुराते हुए बोला हेलो मिस्टर
  2659. 2:06:11सरन। क्या आपके पास अभी थोड़ा सा टाइम हो
  2660. 2:06:14सकता है? एक्चुअली मुझे आपसे अभी मिलना
  2661. 2:06:16था। शौर्य को समझ नहीं आया कि अचानक
  2662. 2:06:19रत्नाकर सेट्टी को उससे क्या काम आ पड़ा
  2663. 2:06:22जो वह उससे मिलना चाहता है। उसने पूछा
  2664. 2:06:25क्या बात है सेट्ठी साहब ऐसी क्या बात हो
  2665. 2:06:28गई जो आप अभी मिलना चाह रहे हैं? रत्नाकर
  2666. 2:06:30सेठी शौर्य की बात सुनकर बोला यह तो मैं
  2667. 2:06:33आपसे मिलने के बाद ही बता सकता हूं।
  2668. 2:06:35मिस्टर सरवन यदि आप अगर फ्री हैं तो आप
  2669. 2:06:38यहां मेरे पास पास आ जाइए। नहीं तो अगर आप
  2670. 2:06:40कहिए तो मैं वहीं आपके पास आ जाता हूं।
  2671. 2:06:43शौर्य ने इस बारे में सोचा। अभी रत्नाकर
  2672. 2:06:46शेट्टी को शौर्य की हकीकत पता नहीं थी।
  2673. 2:06:49इसलिए शौर्य चाहता भी नहीं था कि अभी
  2674. 2:06:52रत्नाकर शेट्टी को उसके बारे में कुछ
  2675. 2:06:54ज्यादा पता चले। इसलिए शौर्य को रत्नाकर
  2676. 2:06:57शेट्टी को होटल राजकमल में बुलाना ठीक
  2677. 2:06:59नहीं लगा। इसलिए उसने खुद ही रत्नाकर
  2678. 2:07:02शेट्टी के पास जाकर उससे मिलने का निर्णय
  2679. 2:07:05लिया। यही सोचकर उसने उसने रत्नाकर शेट्टी
  2680. 2:07:08से ही पूछ लिया। बताइए आप कि मुझे कहां
  2681. 2:07:11आना है? मैं आता हूं आपके पास। शौर्य ने
  2682. 2:07:14रत्नाकर शेट्टी को सीधा जवाब दिया।
  2683. 2:07:16रत्नाकर शेट्टी शौर्य की बात सुनकर खुश
  2684. 2:07:19होते हुए बोला, "यह आपने अच्छा किया
  2685. 2:07:21मिस्टर श्रवण, मैं अभी होटल रीगल में हूं।
  2686. 2:07:24आप यहीं आ जाइए। मैं यहीं आपका इंतजार कर
  2687. 2:07:26रहा हूं। रत्नाकर शेट्टी की बात सुनकर
  2688. 2:07:29शौर्य बोला, होटल रीगल में आप कहां पर
  2689. 2:07:32मिलेंगे? कुछ देर की शांति के बाद दूसरी
  2690. 2:07:35तरफ से रत्नाकर शेट्टी ने कहा, "आप होटल
  2691. 2:07:38रीगल के रेस्टोरेंट वाले एरिया में आ
  2692. 2:07:40जाइए। मैं यहीं पर आपका इंतजार करता हूं।"
  2693. 2:07:43ठीक है। मैं आधे घंटे में आपके पास
  2694. 2:07:45पहुंचता हूं। इतना कहकर शौर्य ने फोन रख
  2695. 2:07:47दिया। मेनका शौर्य के फोन रखने का इंतजार
  2696. 2:07:50कर रही थी। वह शौर्य को बातें करते हुए
  2697. 2:07:52सुन रही थी। इसलिए वह समझ गई थी कि फोन पर
  2698. 2:07:56दूसरी तरफ रत्नाकर शेट्टी मौजूद है। शौर्य
  2699. 2:07:59के फोन रखने के बाद मेनका ने शौर्य से
  2700. 2:08:02पूछा। यह रत्नाकर शेट्टी तुम्हें अभी किस
  2701. 2:08:05लिए फोन कर रहा था? अभी उसको तुमसे क्या
  2702. 2:08:08काम आ गया? जो वह अभी तुम्हें फोन कर रहा
  2703. 2:08:10था। मेनका की बात सुनकर शौर्य बोला हो
  2704. 2:08:14सकता है उससे कुछ शूटिंग से रिलेटेड बात
  2705. 2:08:16करनी हो क्योंकि उसे भी पता होगा कि नताशा
  2706. 2:08:19कपूर कल आ जाएगी इसलिए शायद इसी बारे में
  2707. 2:08:22वह कुछ बात करना चाह रहा हो शौर्य की बात
  2708. 2:08:25सुनकर मैंने कहा बोली शायद ऐसा ही हो देख
  2709. 2:08:28लो तुम कि तुम्हें क्या करना है ठीक है
  2710. 2:08:31कोई बात नहीं मेरा भी थोड़ा घूमना हो
  2711. 2:08:33जाएगा मैं अभी उससे मिलकर आता हूं इतना
  2712. 2:08:36कहकर शौर्य मेनका के पास से निकल गया आधे
  2713. 2:08:40घंटे बाद शौर्य की कार होटल रीगल के
  2714. 2:08:42पार्किंग में खड़ा था। उसने गाड़ी को
  2715. 2:08:44पार्क किया और होटल में प्रवेश कर गया। वह
  2716. 2:08:48सीधा रेस्टोरेंट एरिया में पहुंचा। उसे
  2717. 2:08:50दूर से ही रत्नाकर शेट्टी नजर आ गया।
  2718. 2:08:53दोनों की नजरें मिली। शौर्य ने नोटिस किया
  2719. 2:08:56कि रत्नाकर शेट्टी के साथ कोई लड़की भी
  2720. 2:08:59बैठी हुई थी। जिसका कि पीछे वाला हिस्सा
  2721. 2:09:02शौर्य की तरफ था। इसलिए शौर्य उसका चेहरा
  2722. 2:09:06नहीं देख पा रहा था। शौर्य रत्नाकर शेट्टी
  2723. 2:09:09के पास पहुंचा। रत्नाकर शेट्टी के टेबल के
  2724. 2:09:12पास जाने के बाद जब शौर्य ने उसके साथ
  2725. 2:09:14बैठी लड़की की तरफ देखा तो उसकी आंखें फैल
  2726. 2:09:17गई। वह तो उम्मीद भी नहीं कर सकता था कि
  2727. 2:09:20उसकी मुलाकात दोबारा इस लड़की से इस तरह
  2728. 2:09:23से होगा। वह हैरानी से रत्नाकर शेट्टी के
  2729. 2:09:26सामने बैठी लड़की को देख रहा था। जहां
  2730. 2:09:28शौर्य के चेहरे पर आश्चर्य का भाव था।
  2731. 2:09:31वहीं उस लड़की के चेहरे को देखकर लग नहीं
  2732. 2:09:33रहा था कि उसे शौर्य को यहां देखकर कोई
  2733. 2:09:36आश्चर्य हो रहा हो। यानी इसका तो एक ही
  2734. 2:09:39कारण हो सकता था कि उस लड़की को पहले से
  2735. 2:09:42ही उम्मीद थी कि शौर्य यहां आने वाला है।
  2736. 2:09:45शौर्य को देखकर उस लड़की के चेहरे पर
  2737. 2:09:47मुस्कुराहट थी। अब आगे क्या होगा? आखिर
  2738. 2:09:50कौन थी वह लड़की? जो रत्नाकर शेट्टी के
  2739. 2:09:53पास बैठी पहले से शौर्य का इंतजार कर रही
  2740. 2:09:56थी। आखिर रत्नाकर शेट्टी ने शौर्य को
  2741. 2:09:59मिलने के लिए क्यों बुलाया था? शौर्य को
  2742. 2:10:01उम्मीद नहीं था कि वह यहां इस लड़की से
  2743. 2:10:03दोबारा मिलेगा। उसने एक बार रत्नाकर
  2744. 2:10:05शेट्टी की तरफ देखा। फिर उस लड़की की तरफ
  2745. 2:10:08देखते हुए बोला, "मुझे उम्मीद नहीं था कि
  2746. 2:10:11एक ही दिन में दो बार मेरा तुमसे मिलना
  2747. 2:10:14होगा। इसे मैं इत्तेफाक समझूं या ऐसा आपके
  2748. 2:10:17कारण हुआ है। मिस मालिनी खुराना। यह वही
  2749. 2:10:21मालिनी थी जो शौर्य से होटल पैराडाइज के
  2750. 2:10:23बिल्डिंग के दौरान प्रतीक के साथ में मिली
  2751. 2:10:26थी। नहीं इसके पीछे कोई इत्तेफाक नहीं है।
  2752. 2:10:29यहां मेरे आग्रह पर ही रत्नाकर शेट्टी ने
  2753. 2:10:32तुम्हें बुलाया है। मालिनी मुस्कुराते हुए
  2754. 2:10:34बोली पर मुझे समझ नहीं आया कि आप मुझसे
  2755. 2:10:37क्यों मिलना चाहते हैं। शौर्य ने जिज्ञासा
  2756. 2:10:40बस पूछा अभी आए हो। पहले बैठ तो जाओ। पहले
  2757. 2:10:44दो सांस ले लो। फिर तुम्हारे हर एक सवाल
  2758. 2:10:46का जवाब भी मिल जाएगा। मालिनी शौर्य को
  2759. 2:10:48चेयर पर बैठने का इशारा करता हुआ बोला।
  2760. 2:10:51मालिनी की बात सुनकर शौर्य कुछ बोला नहीं।
  2761. 2:10:54बस एक चेयर खींच कर उस पर बैठ गया। जबकि
  2762. 2:10:57रत्नाकर शेट्टी हैरानी से कभी शौर्य को तो
  2763. 2:11:00कभी मालिनी खुराना को देख रहा था। उसे
  2764. 2:11:02नहीं पता था कि यह दोनों एक दूसरे को पहले
  2765. 2:11:05से जानते हैं। वह हैरान स्वर में शौर्य से
  2766. 2:11:08पूछा तो क्या आप दोनों एक दूसरे को पहले
  2767. 2:11:11से जानते हैं? माफ कीजिएगा। मिस्टर शौर्य
  2768. 2:11:15मुझे यह पता नहीं था कि आप मालिनी खुराना
  2769. 2:11:17को पहले से जानते हैं? नहीं तो मैं बुलाने
  2770. 2:11:20से पहले अपना पर्पस भी आपको बता दिया
  2771. 2:11:22होता। रत्नाकर शेट्टी के चेहरे के भाव को
  2772. 2:11:24देखकर शौर्य समझ गया कि रत्नाकर शेट्टी सच
  2773. 2:11:27बोल रहा है। इसलिए उसने बिना कोई नाराजगी
  2774. 2:11:30शो किए रत्नाकर शेट्टी से बोला, कोई बात
  2775. 2:11:33नहीं मिस्टर शेट्टी। अब जबकि मैं यहां आ
  2776. 2:11:36गया हूं तो अब आप मुझे यहां बुलाने का
  2777. 2:11:38अपना मकसद भी बता दीजिए। शौर्य की बात
  2778. 2:11:41सुनकर रत्नाकर शेट्टी ने एक बार मालिनी की
  2779. 2:11:44तरफ देखा जैसे वह जानना चाहता हो कि क्या
  2780. 2:11:47वह अपनी तरफ से ही बात की शुरुआत करें या
  2781. 2:11:49मालिनी स्वयं कुछ बोलना चाहती है। पर
  2782. 2:11:52मालिनी को चुप देखकर उसने शौर्य से कहना
  2783. 2:11:55शुरू किया। जैसा कि मुझे पता है कि आप मिस
  2784. 2:11:58मालिनी खुराना को पहले से जानती ही हैं।
  2785. 2:12:00तो थोड़ा सा मैं आपको इनके बारे में बता
  2786. 2:12:01दूं। यह मालिनी खुराना मशहूर बिजनेसमैन
  2787. 2:12:05सुधाकर खुराना जी की बेटी हैं। यह जो आप
  2788. 2:12:09रीगल होटल का देख रहे हैं, वह इन्हीं का
  2789. 2:12:11है। रीगल होटल का पूरा एक चैन है। आप समझ
  2790. 2:12:14सकते होटल इंडस्ट्री में रीगल होटल एक
  2791. 2:12:17बड़ा नाम है। रत्नाकर शेट्टी शौर्य को
  2792. 2:12:20मालिनी खुराना के बारे में बता रहा था। पर
  2793. 2:12:22शौर्य को यह समझ नहीं है। आ रहा था कि
  2794. 2:12:25रत्नाकर शेट्टी उसके सामने मालिनी खुराना
  2795. 2:12:28का पूरा बायोग्राफी क्यों बता रहा है।
  2796. 2:12:30इसलिए उसने बीच में ही बोला, मिस्टर
  2797. 2:12:33शेट्टी यह ज्यादा बेहतर होगा कि आप सीधा
  2798. 2:12:36मुद्दे की बात पर आए। मैं समझ सकता हूं कि
  2799. 2:12:38मालिनी खुराना विशालगढ़ की एक बड़ी हस्ती
  2800. 2:12:41है। पर अभी भी मुझे यह समझ नहीं आया कि
  2801. 2:12:45मुझे यहां बुलाने का आपका क्या मकसद है।
  2802. 2:12:47इसलिए आप अगर मुद्दे की बात करें तो
  2803. 2:12:50ज्यादा बेहतर होगा। शौर्य की अधीरता को
  2804. 2:12:52देखकर रत्नाकर शेट्टी बोला, ठीक है मिस्टर
  2805. 2:12:55शौर्य मैं सीधा मुद्दे की बात पर आता हूं।
  2806. 2:12:59ऐसा है कि मिस खुराना को एक्टिंग का बहुत
  2807. 2:13:01शौक है और यह अपनी कंपनी के प्रोडक्शन में
  2808. 2:13:04ही एक बड़े बजट की फिल्म बनाना चाहती है।
  2809. 2:13:07स्वाभाविक है जिसकी हीरोइन यह खुद ही
  2810. 2:13:09होंगी। बहुत समय से हम इनकी मूवी के लिए
  2811. 2:13:12किसी हीरो की तलाश में थे। मालिनी जी ने
  2812. 2:13:15कहीं आपका स्ट्रांग एनर्जी ड्रिंक वाला
  2813. 2:13:17पोस्टर देखा था। तो उस पोस्टर में आपको
  2814. 2:13:20देखकर इन्हें लगा कि उनकी फिल्म के लिए आप
  2815. 2:13:23एक परफेक्ट चॉइस है। इसीलिए मैंने आपको
  2816. 2:13:26यहां बुलाया है ताकि हम इस बारे में बात
  2817. 2:13:28कर सकें। शौर्य को समझ नहीं आया कि वह
  2818. 2:13:31रत्नाकर शेट्टी की बात पर कैसे रिएक्ट
  2819. 2:13:33करें। पर फिर भी वह रत्नाकर शेट्टी को
  2820. 2:13:36समझाते हुए बोला। मिस्टर शेट्टी आप तो
  2821. 2:13:40जानते हैं कि उस ऐड में मैं किस स्थिति
  2822. 2:13:43में काम करना स्वीकार किया था। आपको पता
  2823. 2:13:45है कि मुझे इस एक्टिंग लाइन में जाने का
  2824. 2:13:47कोई भी इंटरेस्ट नहीं है। तो आपको समझना
  2825. 2:13:50चाहिए था कि वह मेरा फर्स्ट एंड लास्ट
  2826. 2:13:52प्रोजेक्ट था। इतना कहकर शौर्य मालिनी
  2827. 2:13:56खुराना की तरफ मुड़ा और उससे बोला मिस
  2828. 2:13:59मालिनी मुझे नहीं पता कि आपको मुझ में
  2829. 2:14:02क्या अच्छा लगा जो आपने मुझे इस लायक समझा
  2830. 2:14:05कि अपनी फिल्म में मुझे हीरो लेना चाह रही
  2831. 2:14:07हैं। पर मैं आपको बता दूं कि मुझे एक्टिंग
  2832. 2:14:10लाइन में जाने का कोई भी इंटरेस्ट नहीं
  2833. 2:14:11है। इसलिए यह अच्छा होगा कि आप किसी और को
  2834. 2:14:15अपने फिल्म में हीरो के लिए चुन लीजिए।
  2835. 2:14:18मालिनी खुराना धैर्य से शौर्य की बात को
  2836. 2:14:20सुनती रही क्योंकि उसे पहले से ही पता था
  2837. 2:14:23कि शौर्य का इंटरेस्ट एक्टिंग लाइन में
  2838. 2:14:26नहीं है। इस बारे में उसे पहले ही रत्नाकर
  2839. 2:14:29शेट्टी ने बता दिया था। पर मालिनी को पता
  2840. 2:14:32नहीं शौर्य में क्या अच्छा लगा जो उसने
  2841. 2:14:35रत्नाकर शेट्टी से बोलकर शौर्य को मिलने
  2842. 2:14:38के लिए बुला लिया था। उसने शौर्य की बात
  2843. 2:14:41को आराम से सुना। फिर शौर्य के चुप होने
  2844. 2:14:43के बाद बोलना शुरू किया। मिस्टर श्रवण
  2845. 2:14:47मुझे नहीं पता कि आपको इस एक्टिंग लाइन
  2846. 2:14:49में क्यों इंटरेस्ट नहीं है। पर मैं आपको
  2847. 2:14:51बताऊं मुझे एक्टिंग को लेकर इतना ज्यादा
  2848. 2:14:54क्रेज है कि मैं इस लाइन में कुछ करना
  2849. 2:14:57चाहती हूं। मैं कोलाज करते हुए कई थिएटर
  2850. 2:15:00ग्रुप ज्वाइन कर रखे थे। अभी तक मैं बहुत
  2851. 2:15:02सारे थिएटर भी किए हैं। एक्टिंग की
  2852. 2:15:05बारीकियों को जानने के लिए मैंने बाकायदा
  2853. 2:15:08ट्रेनिंग भी लिया। जब मैंने खुद को इस
  2854. 2:15:10लायक तैयार पाया कि अब मैं किसी मूवी में
  2855. 2:15:13अपने आप को लॉन्च कर सकती हूं। तो मुझे
  2856. 2:15:16अपने साथ किसी बड़े स्टार को लेने की
  2857. 2:15:18इच्छा नहीं हुई। अगर मैं चाहूं तो बड़े
  2858. 2:15:21आराम से इंडस्ट्री के बड़े से बड़े हीरो
  2859. 2:15:24को अपनी मूवी में काम करने के लिए बुला
  2860. 2:15:26सकती हूं। पर मेरा अप्रोच अलग है। मैं
  2861. 2:15:28नहीं चाहती कि अगर लोग मुझे इस लाइन में
  2862. 2:15:31जाने तो वह किसी बड़े हीरो के साथ आने के
  2863. 2:15:34कारण जाने। मैं अपने काम के कारण पहचानी
  2864. 2:15:36जाना चाहती हूं। और हमारे पास जो स्टोरी
  2865. 2:15:39है उसके लिए जो हीरो का कैरेक्टर है वह
  2866. 2:15:43फेस एक अननोन फेस होना चाहिए। जिसे पब्लिक
  2867. 2:15:46पहले से ना जानती हो। आज जब मैंने
  2868. 2:15:48तुम्हारा पोस्टर देखा तो पहली बार में ही
  2869. 2:15:51मुझे लगा मुझे अपने साथ काम करने के लिए
  2870. 2:15:53इसी फेस की तलाश थी। और उसके बाद जब मैं
  2871. 2:15:56तुमसे मिली तो मैं और भी श्योर हो गई कि
  2872. 2:15:59तुम मेरी पसंद पर एकदम खड़े उतरते हो।
  2873. 2:16:02उसके बाद मैंने रत्नाकर शेट्टी से
  2874. 2:16:04तुम्हारे बारे में पूछा तो उन्होंने मुझे
  2875. 2:16:06तुम्हारे द्वारा किया गया ऐड भी दिखाया और
  2876. 2:16:09जैसा कि मुझे पता चला कि तुमने यह काम
  2877. 2:16:11पहली बार किया है। उसके बाद भी तुमने जो
  2878. 2:16:14एक्टिंग की है उसमें कहीं से कोई दिखावा
  2879. 2:16:17नजर नहीं आया। तुम्हारी एक्टिंग में एक
  2880. 2:16:20नेचुरल फील है जो लगता है कि वह अपने आप
  2881. 2:16:23ही आती है। तुमको उसके लिए कोई ज्यादा
  2882. 2:16:26प्रयास नहीं करना पड़ता। यह बात मुझे और
  2883. 2:16:29भी अच्छी लगी। इसलिए मैं तुमसे रिक्वेस्ट
  2884. 2:16:31करती हूं कि प्लीज तुम मेरी रिक्वेस्ट को
  2885. 2:16:34मानकर इस मूवी में काम करने के लिए तैयार
  2886. 2:16:37हो जाओ। भले तुम इसके बाद अभिनय करो या ना
  2887. 2:16:40करो। इतना बोलने के बाद मालिनी खुराना
  2888. 2:16:45उम्मीद भरी नजरों के साथ शौर्य को देखने
  2889. 2:16:48लगी। जबकि शौर्य को समझ नहीं आ रहा था कि
  2890. 2:16:50वह मिस मालिनी खुराना को कैसे मना करें।
  2891. 2:16:53क्योंकि मालिनी खुराना ने शौर्य से इतना
  2892. 2:16:56पोलाइट होकर अपनी बात को कही कि शौर्य को
  2893. 2:16:59मना करते नहीं बन पड़ा। मालिनी खुराना का
  2894. 2:17:02बोलने का अंदाज इतना प्यारा था। इतना
  2895. 2:17:04मनभावन था कि वह स्वतः ही शौर्य को अपनी
  2896. 2:17:07तरफ आकर्षित करने लगी। शौर्य भी एक पल को
  2897. 2:17:10हैरान था कि मालिनी खुराना जैसी लड़की
  2898. 2:17:13कैसे इतना सलीके से प्रभावशाली तरीके से
  2899. 2:17:16अपनी बात को कह रही है। मालिनी खुराना की
  2900. 2:17:18आवाज की मधुरता किसी को भी अपनी तरफ
  2901. 2:17:21आकर्षित करने में सक्षम थी। शौर्य समझ
  2902. 2:17:23नहीं पा रहा था कि वह कैसे मालिनी खुराना
  2903. 2:17:26से ना कहे। उसने टालने के मकसद से कहा।
  2904. 2:17:30मिस मालिनी मुझे अच्छा नहीं लग रहा है
  2905. 2:17:33आपको मना करते हुए। पर मैं अभी यह निर्णय
  2906. 2:17:35लेने की स्थिति में नहीं हूं। मैं समझ
  2907. 2:17:37सकता हूं कि आप अच्छी एक्टर होंगी क्योंकि
  2908. 2:17:40आपका बात करने का सलीका आपकी प्रतिभा को
  2909. 2:17:42प्रदर्शित कर रही है। मालिनी ने शौर्य की
  2910. 2:17:46बात को सुना तो उसके चेहरे पर थोड़ी
  2911. 2:17:48परेशानी तो नजर आई पर फिर अगले ही पल वह
  2912. 2:17:52नॉर्मल हो गई और उसने शौर्य से कहा सबसे
  2913. 2:17:55पहले तो तुम मुझे मिस मालिनी कहना बंद
  2914. 2:17:57करो। तुम मुझे सीधा मालिनी कह सकते हो और
  2915. 2:18:00दूसरी बात मैं इतनी जल्दी तुम्हारा पीछा
  2916. 2:18:03नहीं छोड़ने वाली। रत्नाकर शेट्टी ने इससे
  2917. 2:18:05पहले मुझे बहुत सारे नए लड़कों के पिक्चर
  2918. 2:18:08दिखाए, मिलवाया भी पर मुझे कोई भी इस हद
  2919. 2:18:11तक पसंद नहीं आया कि मैं उसके साथ काम कर
  2920. 2:18:14सकूं और अब जाकर मेरी तलाश तुम पर खत्म
  2921. 2:18:17हुई है और तुम मेरे साथ काम करने को तैयार
  2922. 2:18:20नहीं हो। सो प्लीज इट्स माय हम्ल
  2923. 2:18:22रिक्वेस्ट। मैं पहली बार अपनी पसंद के
  2924. 2:18:25हिसाब से काम करना चाहती हूं। इसलिए एक
  2925. 2:18:28बार थोड़ी दरियादिल्ली से मेरी रिक्वेस्ट
  2926. 2:18:30पर विचार करना। मलिनी खुराना ने अपनी बात
  2927. 2:18:33समाप्त की ही थी थी कि इसी समय वेटर ने
  2928. 2:18:35आकर कुछ खाने की चीज उसके टेबल पर सजा दी।
  2929. 2:18:39शायद शौर्य के आने से पहले ही मालिनी
  2930. 2:18:41खुराना ने अपना आर्डर दे रखा था। शौर्य
  2931. 2:18:44मना करना चाहता था। पर उससे पहले ही
  2932. 2:18:46मालिनी बोल पड़ी प्लीज खाने से मत मना
  2933. 2:18:49करना। काम करना या ना करना अपनी जगह है।
  2934. 2:18:52लेकिन हम दोस्त तो हो ही सकते हैं। तो
  2935. 2:18:54इसलिए एक दोस्त के साथ में बैठकर खाना तो
  2936. 2:18:57खा ही सकते हैं। मालिनी की बात सुनकर अब
  2937. 2:19:00शौर्य से आगे कुछ बोलते नहीं बना। वेटर ने
  2938. 2:19:04साथ लाए हुए रेड वाइन की बोतल को खोला और
  2939. 2:19:07तीनों के सामने गिलास में रेड वाइन डालने
  2940. 2:19:08लगा। शौर्य महसूस कर रहा था कि मालिनी में
  2941. 2:19:12एक ऐसी चीज तो थी जो किसी को भी अपनी तरफ
  2942. 2:19:15आकर्षित कर सकती थी। वह था उसका व्यवहार
  2943. 2:19:18जो वह दूसरे के साथ इतने पोलाइट होकर
  2944. 2:19:21व्यवहार करती थी कि सामने वाला चाहकर भी
  2945. 2:19:24उसके विपरीत नहीं जा सकता था। शौर्य को
  2946. 2:19:27लगा अगर वह थोड़ी देर मालिनी की बात को
  2947. 2:19:29सुनता रहा तो वह यहां से जाने से पहले
  2948. 2:19:32उसकी मूवी में काम करने के लिए तैयार होकर
  2949. 2:19:34जाएगा। शौर्य बड़ी मुश्किल से अपने आप को
  2950. 2:19:37जज्ब किए हुए था। दूसरी तरफ रत्नाकर
  2951. 2:19:40शेट्टी को समझ नहीं आ रहा था कि शौर्य
  2952. 2:19:43इतने अच्छे ऑफर को मना क्यों कर रहा है।
  2953. 2:19:45जब तक शौर्य यहां नहीं आया था। रत्नाकर
  2954. 2:19:48शेट्टी यही सोच रहा था कि शौर्य ने पहले
  2955. 2:19:50भले ही उसे यह कह रखा था कि वह आगे कोई
  2956. 2:19:53एक्टिंग नहीं करने वाला। लेकिन उसे लग रहा
  2957. 2:19:56था इतने अच्छे ऑफर को पकड़ शौर्य मना कर
  2958. 2:19:59ही नहीं पाएगा। पर वह शौर्य के इस व्यवहार
  2959. 2:20:02से हैरान था। वह सोच भी नहीं सकता था कि
  2960. 2:20:05शौर्य के जैसा कोई आदमी इतने बड़े ऑफर को
  2961. 2:20:07ठुकरा भी सकता है। किस्मत उसके दरवाजे पर
  2962. 2:20:10खड़ा था। पर एक वह था जो अपना दरवाजा ही
  2963. 2:20:12नहीं खोल रहा था। इसे तो बेवकूफी कहना ही
  2964. 2:20:15उचित होगा। यह सोचकर रत्नाकर शेट्टी शौर्य
  2965. 2:20:19से बोला, मिस्टर श्रवण मुझे नहीं पता कि
  2966. 2:20:22आपका इस मूवी में काम नहीं करने के पीछे
  2967. 2:20:24क्या रीजन है। पर मैं यह समझ नहीं पा रहा
  2968. 2:20:27कि आप ऐसा क्यों कर रहे हैं। आप जानते हैं
  2969. 2:20:30इस काम को करने के बदले आपको कितने पैसे
  2970. 2:20:33मिल सकते हैं और आगे भी इस फिल्म के बाद
  2971. 2:20:36जो आपकी किस्मत चमकेगी तो आपको यह
  2972. 2:20:38छोटे-मोटे काम करने की जरूरत ही नहीं
  2973. 2:20:40पड़ेगी। जो कि अभी आप कर रहे हैं। इसलिए
  2974. 2:20:43मैं आपसे कहना चाहूंगा कि आप ऐसे मौके को
  2975. 2:20:46अपने हाथ से जाने मत दीजिए और आप मिस
  2976. 2:20:49मालिनी के ऑफर को स्वीकार कर लीजिए। और
  2977. 2:20:51मैं आपको एक बात कहूं इसमें मेरा अपना भी
  2978. 2:20:54एक बड़ा स्वार्थ है। मैं अभी तक ऐसे ऐड
  2979. 2:20:57फिल्मों को ही डायरेक्ट करता आया हूं। मैं
  2980. 2:20:59भी इस मूवी से फिल्म इंडस्ट्री में एक
  2981. 2:21:02डायरेक्टर के तौर पर कदम रखना चाहता हूं।
  2982. 2:21:05तो प्लीज आप मेरे लिए भी इस मूवी में काम
  2983. 2:21:08करने के लिए तैयार हो जाइए क्योंकि मेरा
  2984. 2:21:10भी करियर इस मूवी से बहुत हद तक जुड़ा हुआ
  2985. 2:21:13है। रत्नाकर शेट्टी की बात को सुनकर शौर्य
  2986. 2:21:17का मन किया कि वह अपना माथा पीट ले। अब वह
  2987. 2:21:20रत्नाकर शेट्टी को कैसे बताएं कि उसके लिए
  2988. 2:21:23पैसे कमाना हाथ के मैल के जैसा है। अगर
  2989. 2:21:26रत्नाकर शेट्टी को डायरेक्टर ही बनना है
  2990. 2:21:29तो वह उसके लिए फिल्मों की लाइन लगा सकता
  2991. 2:21:31है। पर शौर्य इस समय ऐसा सिर्फ सोच ही
  2992. 2:21:34सकता था, बोल नहीं सकता था। पर इसी समय इस
  2993. 2:21:37होटल में कोई ऐसा भी था जिसकी आंखें शौर्य
  2994. 2:21:40के ऊपर टिकी हुई थी। वह उसकी हर एक हरकत
  2995. 2:21:43को नोटिस कर रहा था। अब आगे क्या होगा?
  2996. 2:21:46शिप्रा मेघना के साथ अपने घर से निकली और
  2997. 2:21:49अपनी कार में बैठकर मॉडल टाउन के लिए निकल
  2998. 2:21:52ली। राजदीप जी ने कहा भी था कि मेघना को
  2999. 2:21:55तो यहां रहने देती। उसको तुम अपने साथ
  3000. 2:21:58क्यों ले जा रही हो? तो मेघना ने जवाब
  3001. 2:22:00दिया था अंकल इसके साथ तो मेरा थोड़ा मन
  3002. 2:22:03बहल जाता है। नहीं तो यहां तो मैं बोर ही
  3003. 2:22:06हो जाऊंगी। इसके बाद राजदीप जी भी कुछ बोल
  3004. 2:22:09नहीं पाए। जब शिप्रा की कार सदर बाजार से
  3005. 2:22:12गुजर रही थी। मेघना ने कहा चलो ना चलकर
  3006. 2:22:15कुछ खाते हैं। उसके बाद तो घर जाना ही है।
  3007. 2:22:18शिप्रा को भी मेघना की बात ठीक जान पड़ी।
  3008. 2:22:20इसलिए वह भी तैयार हो गई। इस समय शिप्रा
  3009. 2:22:23की कार होटल रीगल के सामने से गुजर रही
  3010. 2:22:26थी। इसलिए उसने अपनी कार को होटल रीगल की
  3011. 2:22:29ओर ही मोड़ दिया। शिप्रा ने कार को
  3012. 2:22:31पार्किंग में खड़ी किया और दोनों होटल
  3013. 2:22:34रीगल के रेस्टोरेंट एरिया की तरफ बढ़ गई।
  3014. 2:22:37दोनों जाकर एक खाली टेबल पर बैठ गई। इसी
  3015. 2:22:39समय मेघना की निगाह शौर्य
  3016. 2:22:41[नाक से की जाने वाली आवाज़] पर पड़ गई जो
  3017. 2:22:42कि उसे इसी रेस्टोरेंट में एक अलग टेबल पर
  3018. 2:22:45बैठा नजर आया था। शौर्य इस समय रत्नाकर
  3019. 2:22:48शेट्टी और मालिनी के साथ बैठा अपनी बातों
  3020. 2:22:51में मशगूल था। मेघना उसी की ओर गौर से देख
  3021. 2:22:54रही थी। उसे यह उम्मीद नहीं था कि शौर्य
  3022. 2:22:57उसे यहां मिल जाएगा। पर अच्छी बात यह थी
  3023. 2:23:00कि शौर्य ने अभी तक उसको देखा नहीं था।
  3024. 2:23:03मेघना ने इशारे से शिप्रा को उधर देखने के
  3025. 2:23:06लिए कहा जिधर शौर्य बैठा हुआ था। शिप्रा
  3026. 2:23:09ने मेघना के इशारे की तरफ देखा। शिप्रा भी
  3027. 2:23:12शौर्य को यहां देखकर हैरान रह गई। यह भी
  3028. 2:23:15अच्छा [संगीत] इत्तेफाक था कि वह दोनों इस
  3029. 2:23:17होटल में खाने के लिए आई और शौर्य यहां
  3030. 2:23:20पहले से किसी और के साथ टेबल पर बैठा कुछ
  3031. 2:23:23खा रहा था। शिप्रा ने जब शौर्य को किसी और
  3032. 2:23:26लड़की के साथ बैठे देखा तो उसे थोड़ा अजीब
  3033. 2:23:28भी लगा क्योंकि वह गौर कर रही थी कि वह
  3034. 2:23:31अक्सर शौर्य को किसी ना किसी नई लड़की के
  3035. 2:23:33साथ ही देखती है। अभी कुछ दिन पहले ही वह
  3036. 2:23:36श्रव्या के साथ घूम रहा था और आज फिर एक
  3037. 2:23:39नई लड़की के साथ शिप्रा ने उसे देखा। उसने
  3038. 2:23:42गौर से मालिनी की ओर देखा। वह कभी पहले
  3039. 2:23:45उससे मिली नहीं थी। इसलिए वह मालिनी को
  3040. 2:23:48जानती नहीं थी। पर उसकी खूबसूरती कहीं ना
  3041. 2:23:51कहीं शिप्रा को जेलस फील करा रही थी। वह
  3042. 2:23:54समझ नहीं पाई ऐसा क्यों हो रहा है। वह ना
  3043. 2:23:56चाहते हुए भी खुद की तुलना मालिनी से करने
  3044. 2:23:59लगी थी। मेघना भी गौर से उन्हीं दोनों की
  3045. 2:24:02तरफ देख रही थी। उसने शौर्य से नजर हटाकर
  3046. 2:24:05शिप्रा पर डालते हुए कहा। क्या तुम शौर्य
  3047. 2:24:08के साथ बैठी हुई उस लड़की को जानती हो?
  3048. 2:24:11शिप्रा इंकार में सर हिलाते हुए कहा, नहीं
  3049. 2:24:14मैं उसे नहीं जानती। पर जो भी कहो लड़की
  3050. 2:24:17खूबसूरत है कहीं श्रवण का उससे कोई चक्कर
  3051. 2:24:20तो नहीं चल रहा है मेघना शरारत भरे स्वर
  3052. 2:24:23में बोली शिप्रा मेघना के इरादों को समझ
  3053. 2:24:26रही थी इसलिए उसने उसका कोई जवाब नहीं
  3054. 2:24:29दिया पर उसकी निगाह अभी भी मालिनी के ऊपर
  3055. 2:24:32ही टिकी हुई थी क्या हुआ कुछ बोलोगे नहीं
  3056. 2:24:36कहीं तुम्हें श्रवण को किसी और लड़की के
  3057. 2:24:38साथ देखकर जलन तो नहीं हो रही है मेघना
  3058. 2:24:41शिप्रा को जवाब देते ना देखकर दोबारा बोली
  3059. 2:24:44किसी लड़की के साथ बैठे होने का यह मतलब
  3060. 2:24:46तो नहीं कि उसका उसके साथ कोई चक्कर ही चल
  3061. 2:24:49रहा है। वह किसी काम के कारण भी तो साथ
  3062. 2:24:52बैठे हो सकते हैं। तुम ज्यादा अपना दिमाग
  3063. 2:24:54मत चलाओ। बहन मैं तो तुम्हें आगाह कर रही
  3064. 2:24:58हूं कि अभी उसे अपने कंट्रोल में कर लो।
  3065. 2:25:01नहीं तो कहीं ऐसा ना हो कि वह तुम्हारे
  3066. 2:25:03हाथ से निकल जाए और तुम बस यूं दूर से ही
  3067. 2:25:06उसे देखते रह जाओ। अभी भी मेघना शिप्रा को
  3068. 2:25:09समझाने की पूरी कोशिश कर रही थी। तुम्हें
  3069. 2:25:12पता होना चाहिए कि हमारे बीच अपनी बातें
  3070. 2:25:16पहले ही स्पष्ट हो चुकी हैं। वह किसके साथ
  3071. 2:25:19क्या करता है या नहीं करता उससे हमारा कोई
  3072. 2:25:21मतलब नहीं। बस हम एक दूसरे के फटे में
  3073. 2:25:24टांग नहीं फसाएंगे। बस इसका ध्यान रखना
  3074. 2:25:26है। इसके बाद हमारे रिश्ते पर कोई फर्क
  3075. 2:25:29नहीं पड़ने वाला है। शिप्रा अपनी बात
  3076. 2:25:31स्पष्ट करते हुए बोली यानी उसका रिलेशन
  3077. 2:25:34उसके सामने बैठी लड़की से होगा तो भी
  3078. 2:25:37तुम्हें चलेगा। तुम यही कहना चाहती हो।
  3079. 2:25:40मेघना शिप्रा की आंखों में देखती हुई बोली
  3080. 2:25:43तुम जबरदस्ती श्रवण का रिश्ता किसी और के
  3081. 2:25:45साथ जोड़ने की कोशिश मत करो। साफ दिख रहा
  3082. 2:25:48है उन दोनों के बीच में ऐसा कुछ भी नहीं
  3083. 2:25:50है। वह दोनों जरूर किसी काम के कारण ही
  3084. 2:25:53मिले हैं। शिप्रा मेघना को भी और खुद को
  3085. 2:25:56भी समझाते हुए बोली। शिप्रा और मेघना ने
  3086. 2:25:59शौर्य को देखने के बाद खुद को इस स्थिति
  3087. 2:26:01में कर लिया था कि शौर्य आसानी से उसे देख
  3088. 2:26:04ना पाए और वह उसे देखती रहे। जब हम यहां
  3089. 2:26:08है ही तो क्यों ना मैं उसे जाकर मिलकर
  3090. 2:26:10आऊं। इस तरह मुझे पता भी चल जाएगा कि वह
  3091. 2:26:12लड़की कौन है। मेघना शिप्रा से अचानक बोल
  3092. 2:26:16पड़ी। तुम्हें क्या जरूरत है उनके बीच में
  3093. 2:26:18जाने की। पता नहीं उनके बीच कुछ जरूरी
  3094. 2:26:21बातें हो रही होगी तो तुम क्यों उसे
  3095. 2:26:23डिस्टर्ब करना चाहती हो? शिप्रा मेघना से
  3096. 2:26:25प्रतिरोध करती हुई बोली। शिपला की बात
  3097. 2:26:28सुनकर मेघना बोली तुम्हें भले कोई फर्क
  3098. 2:26:30नहीं पड़ता हो पर मुझे फर्क पड़ता है। मैं
  3099. 2:26:33यह जानना चाहती हूं कि शौर्य का उस लड़की
  3100. 2:26:37से क्या संबंध है और यह जानने में बुराई
  3101. 2:26:40भी क्या है? कोई बुराई नहीं है। पर कहीं
  3102. 2:26:43उसे ऐसा ना लगे कि हम दोनों उसका पीछा कर
  3103. 2:26:45रहे हैं। क्योंकि हम यहां उसके बाद ही आए
  3104. 2:26:47हैं। अगर ऐसी बात उसके दिमाग में आई तो वह
  3105. 2:26:50हमारे बारे में क्या सोचेगा? शिप्रा ने
  3106. 2:26:53अपना कंसर्न जताया।
  3107. 2:26:55वह क्या सोचता है यह मेरी हेडेक नहीं है।
  3108. 2:26:58मुझे तो बस जानना है कि वह लड़की कौन है।
  3109. 2:27:01इसलिए मैं तो जा रही हूं उसके पास। इतना
  3110. 2:27:04बोलकर मेघना अपनी जगह से खड़ी हो गई और
  3111. 2:27:06शौर्य के टेबल की तरफ पड़ गई। शिप्रा
  3112. 2:27:09मेघना को शौर्य के पास जाने से रोकना
  3113. 2:27:11चाहती थी। पर फिर अचानक ही उसने अपना
  3114. 2:27:14इरादा बदल दिया। वो बस अपनी सीट पर बैठी
  3115. 2:27:17हुई मेघना को शौर्य की तरफ बढ़ते देखती
  3116. 2:27:19रही। मेघना शौर्य के पास पहुंची और उसको
  3117. 2:27:22आवाज देती हुई बोली अरे श्रवण तुम यहां
  3118. 2:27:26मुझे नहीं पता था कि तुम मुझे यहां
  3119. 2:27:28मिलोगे। शौर्य ने जब यह आवाज सुना तो उसने
  3120. 2:27:30मेघना की ओर देखा। वह अब भी मेघना को यहां
  3121. 2:27:33देखकर आश्चर्य में था कि यह लड़की अचानक
  3122. 2:27:37यहां कैसे आ गई। अचानक कुछ सोचकर वह अपनी
  3123. 2:27:40नजर को पूरे हॉल में घूमा आने लगा तो उससे
  3124. 2:27:43दूर एक टेबल पर शिप्रा नजर आ गई। वह यह
  3125. 2:27:46समझ रहा था कि अक्सर यह दोनों साथी होती
  3126. 2:27:49हैं। मैंने खुद नहीं सोचा था कि मेरी
  3127. 2:27:51मुलाकात तुमसे यहां होगी। कहो यहां कैसे
  3128. 2:27:54आना हुआ? शौर्य ने एक व्यवहारिक सवाल
  3129. 2:27:56किया। हम तो यहां खाना खाने आए थे। पर
  3130. 2:27:59तुमको यहां देख लिया इसलिए तुमसे मिलने आ
  3131. 2:28:01गए। तुम कहो तुम यहां क्या कर रहे हो?
  3132. 2:28:04मेघना का इरादा शौर्य से यह जानने का था
  3133. 2:28:07कि वह यहां क्यों और किस लिए बैठा है।
  3134. 2:28:10शौर्य अभी भली-भांति मेघना के मकसद को समझ
  3135. 2:28:13रहा था। पर वह अपनी तरफ से उसे कुछ बोलना
  3136. 2:28:16नहीं चाहता था। पर उसे मेघना को जवाब तो
  3137. 2:28:19देना था। इसलिए उसने कहा कुछ खास नहीं।
  3138. 2:28:22मिस्टर रत्नाकर शेट्टी और मिस मालिनी के
  3139. 2:28:25साथ हमारा मीटिंग था। उसी के लिए आया हुआ
  3140. 2:28:28था। फिर उसने शौर्य का परिचय मालिनी से
  3141. 2:28:30कराते हुए कहा यह मालिनी है। मिस्टर
  3142. 2:28:34सुधाकर खुराना की बेटी और यह रत्नाकर
  3143. 2:28:36शेट्टी। इनसे तो तुम शायद पहले भी मिल
  3144. 2:28:39चुकी हैं। शौर्य मेघना को याद दिलाते हुए
  3145. 2:28:42कहा, फिर मेघना की ओर देखते हुए मालिनी से
  3146. 2:28:45कहा, तुमने शायद गार्सिया ब्यूटी प्रोडक्ट
  3147. 2:28:47के बारे में सुना होगा। वो इन्हीं का है।
  3148. 2:28:50मालिनी को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि मेघना
  3149. 2:28:53इतने बड़े ब्यूटी प्रोडक्ट के कंपनी के
  3150. 2:28:55सीईओ है। मालिनी मेघना से हाथ मिलाते हुए
  3151. 2:28:59बोली, तुमसे मिलकर खुशी हुई। मुझे नहीं
  3152. 2:29:02पता था कि गढ़शिया ब्यूटी प्रोडक्ट की
  3153. 2:29:05सीईओ इतनी खूबसूरत है और यंग भी मेघना को
  3154. 2:29:08मालिनी का बोलने का तरीका बहुत ही पसंद
  3155. 2:29:10आया। पर वह अभी भी मेघना के बारे में
  3156. 2:29:13ज्यादा कुछ नहीं जान पाई थी। पर उसे
  3157. 2:29:15रत्नाकर शेट्टी के बारे में याद आ गया था
  3158. 2:29:17कि रत्नाकर शेट्टी डायरेक्टर है। उन्होंने
  3159. 2:29:21अभी कुछ समय पहले ही शौर्य और नताशा कपूर
  3160. 2:29:24को लेकर एक ऐड बनाया था जो शायद कुछ दिनों
  3161. 2:29:27में लॉन्च भी होने वाली थी। मेघना ने सोचा
  3162. 2:29:30कहीं ऐसा तो नहीं कि मालिनी भी कोई मॉडल
  3163. 2:29:32हो। उसे अपना यह विचार जचा भी। दूसरी तरफ
  3164. 2:29:36शौर्य की बातें भी लगभग पूरी हो गई थी।
  3165. 2:29:38इसलिए वह उठते हुए बोला ऐसा है मिस
  3166. 2:29:41मालिनी। अभी तो मैं आपसे इजाजत चाहूंगा।
  3167. 2:29:44बाकी सोचता हूं आपका प्रपोजल के बारे में।
  3168. 2:29:46फिर आपको जवाब देता हूं। शौर्य के खड़े
  3169. 2:29:49होने पर मालिनी भी अपनी जगह पर खड़ी हो गई
  3170. 2:29:53और वह शौर्य से बोली। मुझे उम्मीद है कि
  3171. 2:29:55तुम मेरे प्रपोजल के बारे में गंभीरता से
  3172. 2:29:58सोचोगे। अगर तुम्हारी कोई डिमांड हो तो
  3173. 2:30:00तुम वह मुझे बता सकते हो। मैं तुम्हारी हर
  3174. 2:30:03डिमांड पूरा करने को तैयार हूं। पर प्लीज
  3175. 2:30:06तुम इस प्रपोजल के लिए मना मत करना। शौर्य
  3176. 2:30:09अजीब धर्म संकट में फंस गया था। वह समझ
  3177. 2:30:12नहीं पा रहा था कि वह मालिनी को कैसे मना
  3178. 2:30:14कर पाएगा। वह चलते चलते बोला। ठीक है। मैं
  3179. 2:30:18देखता हूं। जल्दी आपको जवाब देता हूं।
  3180. 2:30:21इतना कहकर वह मेघना के साथ शिप्रा की ओर
  3181. 2:30:24बढ़ गया। मेघना ने शौर्य और मालिनी की
  3182. 2:30:26जितनी बातें सुनी उसके आधार पर उसने यह तो
  3183. 2:30:29समझ लिया था कि मालिनी कोई काम शौर्य से
  3184. 2:30:33चाहती है जिसके लिए शौर्य तैयार नहीं है।
  3185. 2:30:35जबकि वह हर हाल में शौर्य के साथ ही काम
  3186. 2:30:38करना चाहती है। शौर्य के साथ चलते चलते
  3187. 2:30:42मेघना यही सोच रही थी कि आखिर इस लड़के
  3188. 2:30:45में ऐसी क्या बात है जो सभी उसके साथ काम
  3189. 2:30:47करना चाहते हैं। पर मेघना को अब तक यह
  3190. 2:30:50नहीं समझ आया था कि मालिनी आखिर शौर्य से
  3191. 2:30:53किस तरह के प्रपोजल के बारे में बात कर
  3192. 2:30:56रही थी। इसलिए उसने चलते चलते ही शौर्य से
  3193. 2:30:59पूछा वो तुमसे क्या काम कराना चाहती है जो
  3194. 2:31:02तुमसे बहुत रिक्वेस्ट कर रही थी? छोड़ो ना
  3195. 2:31:04तुम क्या करोगी यह जानकर? शौर्य मेघना की
  3196. 2:31:08बात को टालते हुए बोला। अब तक दोनों
  3197. 2:31:10शिप्रा के टेबल के पास पहुंच [संगीत] गए
  3198. 2:31:12थे। शिप्रा ने जो आर्डर दिए थे, वह उसके
  3199. 2:31:14टेबल पर सर्व भी हो गई थी। मेघना अपने
  3200. 2:31:18टेबल पर बैठती हुई बोली तुम भी बैठो और
  3201. 2:31:21हमारे साथ कुछ खा भी लो। मेघना की बात
  3202. 2:31:23सुनकर शौर्य बोला अब और खाना मेरे बस का
  3203. 2:31:26नहीं है। मैं पहले ही फूल हो रखा हूं। तुम
  3204. 2:31:29खाओ। मेरा तो काम यहां हो गया। इसलिए मैं
  3205. 2:31:32अब तो यहां से चलूंगा। तुम खाना खाने के
  3206. 2:31:34बाद आ जाना। जाने की इतनी जल्दी क्या है?
  3207. 2:31:37थोड़ी देर हमारे साथ भी बैठ जाओ। शिप्रा
  3208. 2:31:40शौर्य की बात सुनकर बोली। मुझे यहां बैठने
  3209. 2:31:43में कोई दिक्कत नहीं है। पर अभी मैं
  3210. 2:31:45मालिनी के पास से उठकर आया हूं और यहां
  3211. 2:31:48बैठूंगा तो पता नहीं वह क्या सोचेंगी।
  3212. 2:31:51शौर्य एक नजर मालिनी और रत्नाकर शेट्टी के
  3213. 2:31:54टेबल की तरफ देखता हुआ बोला। उसने गौर
  3214. 2:31:57किया कि मालिनी अभी भी उसी की तरफ देख रही
  3215. 2:31:59हैं। उसने जल्दी से मेघना और शिप्रा से
  3216. 2:32:02कहा। वह मुझे घरे जा रही है। इसलिए मैं
  3217. 2:32:05यहां अगर थोड़ी देर और रुक गया तो पता
  3218. 2:32:08नहीं वह क्या सोचने लगे। मैं बाद में
  3219. 2:32:10मिलता हूं तुमसे। इतना कहकर शौर्य बाहर की
  3220. 2:32:13तरफ बढ़ गया। जबकि शिप्रा कभी शौर्य की
  3221. 2:32:16तरफ तो कभी मालिनी की तरफ देख रही थी।
  3222. 2:32:19मालिनी की निगाह अभी भी शौर्य पर जमी हुई
  3223. 2:32:22थी। जब तक कि वह होटल से बाहर नहीं चला
  3224. 2:32:24गया था। शौर्य के जाने के बाद शिप्रा ने
  3225. 2:32:27मेघना से पूछा तो कुछ पता लगा पाई कि उन
  3226. 2:32:30दोनों के बीच में क्या संबंध है। यह तो
  3227. 2:32:33नहीं पता। पर वह लड़की मालिनी बार-बार
  3228. 2:32:36शौर्य से अपने किसी प्रपोजल के बारे में
  3229. 2:32:38गंभीरता से सोचने को कह रही थी। उसने तो
  3230. 2:32:42उसे यहां तक कहा कि उसकी जो भी डिमांड
  3231. 2:32:44होगी वह उसको पूरी करने की कोशिश करेंगी।
  3232. 2:32:46अब आगे क्या होगा? शौर्य के वहां से जाने
  3233. 2:32:49के बाद मेघना शिप्रा के साथ वाली चेयर पर
  3234. 2:32:52बैठ गई। शिप्रा अभी भी शौर्य के बारे में
  3235. 2:32:54ही सोच रही थी कि उसके शौर्य को रुकने के
  3236. 2:32:57लिए कहने के बाद भी शौर्य वहां रुका नहीं
  3237. 2:33:00बल्कि वहां से चला गया। उसको मालिनी की
  3238. 2:33:03चिंता थी कि वह क्या सोचेगी। उसके चेहरे
  3239. 2:33:07पर थोड़े नागवारी के भाव भी आए जिसे मेघना
  3240. 2:33:10ने साफ-साफ नोटिस किया। अब तुम्हें क्या
  3241. 2:33:12हुआ? यह तुम्हारे चेहरे पर 12 क्यों बज
  3242. 2:33:15गए? तुमने देखा नहीं। मैंने उसे रुकने को
  3243. 2:33:17कहा। उसके बाद भी वह चला गया। उसको उस
  3244. 2:33:20मालिनी की चिंता थी कि वह क्या सोचेगी?
  3245. 2:33:23शिपराज शिकायती लहजे में बोली। अरे तो
  3246. 2:33:26उसने सही तो कहा। हमारे यहां आने से पहले
  3247. 2:33:28वह मालिनी के साथ बैठा हुआ था। उसके पास
  3248. 2:33:30से उठने के बाद वह यहां आकर हमारे साथ बैठ
  3249. 2:33:33जाता तो क्या यह सही लगता और यह भी इसके
  3250. 2:33:36बाद कि वह लड़की उसको किसी बात के लिए मना
  3251. 2:33:39रही थी। मेघना उसको समझाने की कोशिश करती
  3252. 2:33:41हुई बोली पर फिर भी मुझे अच्छा नहीं लगा।
  3253. 2:33:45शिप्रा किसी बच्ची की तरह बोली शिप्रा की
  3254. 2:33:48इस तरह की बात सुनकर मेघना के चेहरे पर
  3255. 2:33:51मुस्कान आ गई। अभी वह आगे कुछ और बोलती
  3256. 2:33:54शिप्रा को इससे पहले ही उसका को एक आवाज
  3257. 2:33:57सुनाई दिया। एक्सक्यूज मी। मेघना ने जब
  3258. 2:34:00आवाज की दिशा में देखा तो उसे सामने
  3259. 2:34:03मालिनी खड़ी नजर आई। वह आश्चर्य से मालिनी
  3260. 2:34:06की ओर देखती हुई बोली, "आप यहां? क्या मैं
  3261. 2:34:10थोड़ी देर आपके साथ बैठ सकती हूं?" मालिनी
  3262. 2:34:12ने एक प्यारी मुस्कान के साथ कहा। मेघना
  3263. 2:34:15ने एक बार शिप्रा की तरफ देखा और फिर
  3264. 2:34:17मालिनी की तरफ देखती हुई बोली, हां हां
  3265. 2:34:21क्यों नहीं? बैठिए। मालिनी एक चेयर खींच
  3266. 2:34:24कर उस पर बैठ गई और मेघना की ओर देखते हुए
  3267. 2:34:27बोली, मैंने अभी आपको श्रवण के साथ देखा
  3268. 2:34:30था। आप दोनों की बात करने से ऐसा लगा जैसे
  3269. 2:34:32आप एक दूसरे के काफी करीब हैं। इसीलिए
  3270. 2:34:34मुझे आपका एक फेवर चाहिए। मेघना को समझ
  3271. 2:34:38नहीं आया कि मालिनी उससे क्या चाहती है।
  3272. 2:34:41उसने मालिनी की बात सुनकर शिप्रा की ओर
  3273. 2:34:43देखा। शिप्रा के चेहरे पर भी यह जानने की
  3274. 2:34:46जिज्ञासा साफ छलक रही थी कि मालिनी उससे
  3275. 2:34:49किस तरह का फेवर चाहती है। मेघना ने पूछ
  3276. 2:34:52लिया। कहिए मैं आपके लिए क्या कर सकती
  3277. 2:34:54हूं। मुझे नहीं पता कि आप मेरे लिए यह काम
  3278. 2:34:57कर पाएंगी कि नहीं। लेकिन मैं चाहती हूं
  3279. 2:35:00अगर आपसे यह पॉसिबल हो पाए तो आप जरूर
  3280. 2:35:03श्रवण को इसके लिए तैयार करने में हमारी
  3281. 2:35:05मदद करें। एक्चुअली मैं एक फिल्म बनाने जा
  3282. 2:35:09रही हूं जिसमें मुझे फिल्म के मेन लीड रोल
  3283. 2:35:12के लिए श्रवण चाहिए। पर वह तैयार नहीं हो
  3284. 2:35:15रहा है। अगर आप इस मामले में मेरी कोई
  3285. 2:35:17सहायता कर सके तो यह मेरे लिए अच्छा होगा।
  3286. 2:35:20मालिनी ने संकोच भरे स्वर में अपनी बात
  3287. 2:35:22कही। मालिनी की बात सुनकर मेघना को लगा कि
  3288. 2:35:26क्या श्रवण इतना बेवकूफ है जो वह इतने
  3289. 2:35:29अच्छे ऑफर को ठुकरा रहा है। उसे बैठे-बठाए
  3290. 2:35:32इतना अच्छा ऑफर मिल रहा है और वह इसके लिए
  3291. 2:35:34तैयार नहीं है? क्या वह बेवकूफ है जो इतनी
  3292. 2:35:38अच्छी अपॉर्चुनिटी को ठुकरा रहा है। अगर
  3293. 2:35:40वह इस काम को करने को तैयार हो जाता है तो
  3294. 2:35:42फिल्म इंडस्ट्रीज में उसके लिए अपार
  3295. 2:35:45संभावनाएं खुल जाएंगी। अब जाकर मेघना को
  3296. 2:35:49समझ आया कि कुछ देर पहले मालिनी ने अपने
  3297. 2:35:52किस प्रपोजल के बारे में श्रवण से विचार
  3298. 2:35:54करने को कहा था। मालिनी के प्रपोजल के
  3299. 2:35:57बारे में जानकर मेघना एक बार फिर से
  3300. 2:35:59शिप्रा की ओर देखने लगी। कमोबेश शिप्रा का
  3301. 2:36:02विचार भी मेघना के जैसी ही थी। उसे भी
  3302. 2:36:05शौर्य का यह कदम बेवकूफी भरा ही लगा। वह
  3303. 2:36:08समझ रही थी कि अभी जो शौर्य काम कर रहा
  3304. 2:36:11है, उससे वह कितना ही कमा लेगा। पर अगर वह
  3305. 2:36:14एक बार किसी फिल्म में हीरो बन जाता है तो
  3306. 2:36:17उसके लिए भविष्य में आसमान छूने के रास्ते
  3307. 2:36:19खुल जाएंगे। मालिनी ने जब मेघना और शिप्रा
  3308. 2:36:22को किसी सोच में डूबा देखा तो वह फिर से
  3309. 2:36:25मेघना से बोली क्या सोचने लगी आप? क्या आप
  3310. 2:36:29इस काम में मेरी कुछ मदद कर सकती हैं?
  3311. 2:36:32मालिनी की बात सुनकर मेघना होश में आई और
  3312. 2:36:36वह असमंजस भरे स्वर में बोली। मैं यकीन से
  3313. 2:36:40तो कुछ नहीं कह सकती पर मैं आपके लिए
  3314. 2:36:43कोशिश जरूर करूंगी। आपका इतना करना ही
  3315. 2:36:45मेरे लिए काफी है। हो सकता है कि आपके
  3316. 2:36:48प्रयास से वह मेरे प्रपोजल को स्वीकार कर
  3317. 2:36:51ले। मालिनी अपने चेहरे पर मुस्कान लाती
  3318. 2:36:53हुई बोली। मेघना को मालिनी बहुत ही स्वीट
  3319. 2:36:56लगी। वह मालिनी से फॉर्मल होते हुए बोली
  3320. 2:36:59हम दोनों लगभग एक ही उम्र के हैं। इसलिए
  3321. 2:37:02एक दूसरे को आप बोलने से अच्छा है कि हम
  3322. 2:37:05तुम कह कर ही संबोधन करें।
  3323. 2:37:08मेरा खुद का भी यही मानना है। मालिनी खुश
  3324. 2:37:11होती हुई बोली, "मैं भी अपनी रिलेशन में
  3325. 2:37:13फ्रैंक रहना पसंद करती हूं। पर किसी से
  3326. 2:37:16पहली बार मिलने पर ज्यादा फ्रैंकनेस
  3327. 2:37:18दिखाने से भी कुछ लोगों को आपत्ति होने
  3328. 2:37:20लगती है। इसलिए जब तक सामने वाले का मिजाज
  3329. 2:37:23का पता ना चले, तब तक एक दायरा मेंटेन
  3330. 2:37:26करना जरूरी होता है। शिप्रा मालिनी की
  3331. 2:37:29समझदारी से बहुत प्रभावित हुई। वह कुछ और
  3332. 2:37:32जानने की जिज्ञासा में पूछ बैठी। यह तुम
  3333. 2:37:35किस तरह की फिल्म बनाने की बात कर रही हो
  3334. 2:37:38और उसमें दूसरे कौन आर्टिस्ट हैं? मालिनी
  3335. 2:37:41ने शिप्रा की ओर देखा। उसके चेहरे पर
  3336. 2:37:43शिप्रा को जानने की जिज्ञासा साफ झलक रही
  3337. 2:37:46थी। वो पहले से ही उसकी खूबसूरती से
  3338. 2:37:49प्रभावित थी। उसे शिप्रा का चेहरा कुछ
  3339. 2:37:51जाना पहचाना सा लग रहा था। उसे यकीन था कि
  3340. 2:37:55उसने पहले भी शिप्रा को कहीं देखा है। पर
  3341. 2:37:59उसे याद नहीं आ रहा था कि कहां। शिप्रा को
  3342. 2:38:02जवाब देने से पहले उसने शिप्रा से उसके
  3343. 2:38:04बारे में पूछा। क्या मैं तुम्हारा नाम जान
  3344. 2:38:07सकती हूं? पता नहीं क्यों? पर मुझे लगता
  3345. 2:38:10है कि मैंने तुम्हें पहले भी कहीं देखा
  3346. 2:38:12है। मालिनी की बात सुनकर मेघना बीच में
  3347. 2:38:15आती हुई बोली। इसका नाम शिप्रा है। शायद
  3348. 2:38:19तुमने पहले इसका कोई वीडियो देखा होगा।
  3349. 2:38:21इसलिए तुम्हें यह चेहरा जाना पहचाना लग
  3350. 2:38:23रहा है। मेघना की बात सुनते ही मालिनी को
  3351. 2:38:26याद आ गया कि उसने शिप्रा का कहां देखा
  3352. 2:38:29था। उसे शिप्रा के वायरल वीडियो का ध्यान
  3353. 2:38:31आ गया। वह आश्चर्य से बोली तो तुम वही
  3354. 2:38:35शिप्रा राय हो जिसकी शादी का वीडियो सोशल
  3355. 2:38:37मीडिया पर वायरल हुआ था। फिर अगले ही पल
  3356. 2:38:40मालिनी को एहसास हुआ कि वह क्या बोल रही
  3357. 2:38:43है तो वह अफसोस भरे स्वर में गोली माफ
  3358. 2:38:46करना। मेरा तुम्हें हर्ट करने का कोई
  3359. 2:38:48इरादा नहीं था। शुक्ला ने जब मालिनी को
  3360. 2:38:51अफसोस करते देखा तो वह बोली ना ना इसमें
  3361. 2:38:54अफसोस करने की कोई बात नहीं है। इसमें गलत
  3362. 2:38:57क्या है? जो तुमने देखा वैसा सच में हुआ
  3363. 2:38:59था और मुझे उसका कोई अफसोस नहीं है। तो
  3364. 2:39:02फिर तुम क्यों अफसोस कर रही हो? शिप्रा की
  3365. 2:39:05बात सुनकर मालिनी आश्चर्य से बोली ये तुम
  3366. 2:39:08कैसी बात कर रही हो? तुम्हारे साथ इतना
  3367. 2:39:11बड़ा हादसा हुआ और तुम कह रही हो तुम्हें
  3368. 2:39:14उसका कोई अफसोस नहीं है। मैं तुम्हारी
  3369. 2:39:16हिम्मत की दाद देती हूं। इतना सब होने के
  3370. 2:39:19बाद भी तुम जैसी हिम्मती लड़की ही
  3371. 2:39:22मुस्कुरा सकती है। अच्छा छोड़ो इन बातों
  3372. 2:39:24को। तुम अपने बारे में बताओ कि तुम किस
  3373. 2:39:28तरह की फिल्म बनाने जा रही हो। शिप्रा
  3374. 2:39:31अपने बारे में हो रही चर्चा को बदलते हुए
  3375. 2:39:33बोली। शिप्रा की बात सुनकर मालिनी बोली,
  3376. 2:39:36एक्चुअली मुझे एक्टिंग लाइन में बहुत
  3377. 2:39:38इंटरेस्ट है। मैंने एक्टिंग के फील्ड में
  3378. 2:39:40जाने के लिए पहले बड़े डायरेक्टर के साथ
  3379. 2:39:43असिस्ट भी किया है। एक्टिंग की बारीकियों
  3380. 2:39:46को भी सीखा है। इसीलिए मैं खुद को लेकर एक
  3381. 2:39:49मूवी प्लान कर रही हूं। बहुत समय से
  3382. 2:39:52स्टोरी के हिसाब से मूवी के लिए हीरो की
  3383. 2:39:54तलाश में थी। बहुत सारी एक्टर्स से मिली।
  3384. 2:39:57बहुत सारे चेहरे को देखा। पर जब मैंने
  3385. 2:40:00श्रवण को देखा तो मुझे लगा मेरी फिल्म की
  3386. 2:40:03स्टोरी के लिए श्रवण एकदम परफेक्ट है।
  3387. 2:40:06इसलिए आज मैंने उसे यहां बुलाया था। पर वो
  3388. 2:40:08इसके लिए तैयार नहीं हो रहा है। यही मेरी
  3389. 2:40:11प्रॉब्लम है। मालिनी ने अपनी मजबूरी बताई।
  3390. 2:40:14शिप्रा को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि जिस
  3391. 2:40:17फिल्म में मालिनी शौर्य को हीरो के रूप
  3392. 2:40:19में लेना चाहती है, उस फिल्म की हीरोइन
  3393. 2:40:22मालिनी ही होने वाली है। मालिनी खूबसूरत
  3394. 2:40:25थी। उसकी बातें बड़ी प्यारी थी। शिप्रा को
  3395. 2:40:30समझ नहीं आ रहा था कि शौर्य क्यों उसकी
  3396. 2:40:33फिल्म में काम करने को तैयार नहीं था। अभी
  3397. 2:40:36कुछ दिन पहले तो उसने नताशा कपूर के साथ
  3398. 2:40:38एक ऐड में काम किया ही था। तो अब उसे एक
  3399. 2:40:42फिल्म में काम करने में क्या दिक्कत है?
  3400. 2:40:44बल्कि उसके लिए तो यह अच्छा ही है। इससे
  3401. 2:40:46उसे अच्छा एक्सपोज़र ही मिलेगा। इधर जब
  3402. 2:40:49शिप्रा इस विचार में खोई हुई थी। उसी समय
  3403. 2:40:52मेघना ने मालिनी से कहा हम अपनी तरफ से
  3404. 2:40:55पूरी कोशिश करेंगे कि श्रवण तुम्हारी
  3405. 2:40:57फिल्म में काम करने को तैयार हो जाए।
  3406. 2:40:59थैंक्स बस मैं तुमसे इतना ही मदद चाहती
  3407. 2:41:02हूं। मालिनी आभार प्रकट करते हुए बोली इसी
  3408. 2:41:06समय वेटर शिप्रा के पास पहुंचा और पूछा
  3409. 2:41:08आपको कुछ और भी चाहिए मिस? तो शिप्रा ने
  3410. 2:41:11जवाब दिया नहीं बस हो गया। तुम जाकर बिल
  3411. 2:41:14ले आओ। शिप्रा की बात सुनकर वेटर वापस
  3412. 2:41:17जाने लगा। तो मालिनी ने उसको रोक कर कहा
  3413. 2:41:20नहीं इसकी कोई जरूरत नहीं है। तुम मैनेजर
  3414. 2:41:22को बोल देना। मैंने इनके बिल को वेव ऑफ
  3415. 2:41:25करने के लिए बुलाया। जी मेम इतना बोलकर
  3416. 2:41:28वेटर वहां से चला गया। शिप्रा समझ नहीं
  3417. 2:41:30पाई कि मालिनी उसके बिल को माफ कैसे करवा
  3418. 2:41:33सकती है। इसलिए वह हैरानी से मालिनी की ओर
  3419. 2:41:36देखने लगी। जब मालिनी ने शिप्रा को हैरान
  3420. 2:41:39होकर अपनी ओर देखते पाया तो वह बोली इसमें
  3421. 2:41:43हैरान होने वाली कोई बात नहीं है। यह होटल
  3422. 2:41:45मेरा ही है और अब तुम दोनों मेरी दोस्ती
  3423. 2:41:47हो गई है तो फिर हमारा यह होटल तुमसे पैसे
  3424. 2:41:50कैसे ले सकता है? शिप्रा यह जानकर और
  3425. 2:41:52आश्चर्यचकित रह गई कि मालिनी ही इस होटल
  3426. 2:41:55की मालिक है। उसने पूछा भी तुम ऑलरेडी
  3427. 2:41:58इतनी अच्छी बिजनेस में हो तो फिर तुम्हें
  3428. 2:42:00क्या जरूरत है हीरोइन बनने की? शिप्रा की
  3429. 2:42:04बात सुनकर मालिनी मुस्कुराई और बोली यह
  3430. 2:42:07होटल व्यवसाय मेरा पु्तैनी बिजनेस है। पर
  3431. 2:42:10मुझे पर्सनली एक्टिंग बहुत पसंद है। मैं
  3432. 2:42:13खुद को इस लाइन में प्रूफ करना चाहती हूं।
  3433. 2:42:15इसी कारण मैंने खुद का प्रोडक्शन हाउस भी
  3434. 2:42:18खोल लिया है। तुम सही कह रही हो। भले ही
  3435. 2:42:21तुम बिजनेस में सफल हो पर इसका मतलब यह
  3436. 2:42:24नहीं है कि तुम अपनी इच्छा को मार दो।
  3437. 2:42:27क्योंकि असली खुशी तुम्हें अपने मन
  3438. 2:42:29मुताबिक काम करके ही मिलती है। मेघना
  3439. 2:42:33मालिनी की तारीफ करती हुई बोली जब लगभग
  3440. 2:42:35दोनों की बातें पूरी हो गई तो मेघना और
  3441. 2:42:38शिप्रा अपने टेबल से उठती हुई बोली ठीक है
  3442. 2:42:41फिर अब हम दोनों इजाजत चाहते हैं बाकी
  3443. 2:42:44मिलते हैं फिर कभी। इतना बोलकर मेघना वहां
  3444. 2:42:47से निकलने की सोच ही रही थी कि तभी कुछ
  3445. 2:42:50याद आने पर उसने मालिनी से कहा अरे यहां
  3446. 2:42:54से जाने से पहले तुम अपना नंबर तो दे दो
  3447. 2:42:56ताकि आगे अगर मैं तुमसे बात करना चाहूं तो
  3448. 2:42:58तुम्हें कांटेक्ट करने का कोई माध्यम तो
  3449. 2:43:00हो। मालिनी को भी अपनी गलती का एहसास हुआ।
  3450. 2:43:04उसने तुरंत अपने पर्स से एक विजिटिंग
  3451. 2:43:07कार्ड निकालकर मेघना की ओर बढ़ा दिया।
  3452. 2:43:10इसके बाद मेघना ने भी अपना कार्ड मालिनी
  3453. 2:43:14की ओर बढ़ा दिया। अब जब मेघना और शिप्रा
  3454. 2:43:16वहां से निकलने वाले थे कि तभी मालिनी ने
  3455. 2:43:19दोबारा शिप्रा को रोकते हुए कहा अगर तुम
  3456. 2:43:22बुरा ना मानो तो क्या मैं तुमसे एक पर्सनल
  3457. 2:43:25सवाल कर सकती हूं? मालिनी की बात सुनकर
  3458. 2:43:29शिप्रा मालिनी की आंखों में देखती हुई
  3459. 2:43:31बोली इसमें बुरा मानने की कोई बात नहीं
  3460. 2:43:34है। तुम जो भी जानना चाहती हो मुझसे पूछ
  3461. 2:43:36सकती हो। शिप्रा के चेहरे का कॉन्फिडेंस
  3462. 2:43:39देखकर मालिनी की हिम्मत बढ़ी और उसने
  3463. 2:43:42शिप्रा से पूछा मैं जानना चाहती हूं कि
  3464. 2:43:45तुम्हारी उस शादी का क्या हुआ जिसमें
  3465. 2:43:47तुम्हारी शादी जबरदस्ती एक भिखारी से कर
  3466. 2:43:50दी गई थी। मालिनी का सवाल सुनकर शिप्रा
  3467. 2:43:53मुस्कुराई और बोली मुझे इस सवाल से कोई
  3468. 2:43:56परेशानी नहीं होती। वैसे मैं तुम्हें बता
  3469. 2:43:58दूं कि जिस भिखारी से मेरी शादी हुई थी वह
  3470. 2:44:02अभी भी मेरा पति है और मेरा आगे भविष्य
  3471. 2:44:04में उससे अलग होने का कोई इरादा भी नहीं
  3472. 2:44:07है। अब शिप्रा मालिनी को कैसे बताती कि वह
  3473. 2:44:10जिस भिखारी पति के बारे में बात कर रही है
  3474. 2:44:13वह कोई और नहीं। वह श्रवण ही है जिसे वह
  3475. 2:44:16अपनी फिल्म का हीरो बनाना चाहती है। अगर
  3476. 2:44:19मालिनी को यह पता चल जाता कि श्रवण ही वह
  3477. 2:44:22भिखारी है जो शिप्रा का पति है तो पता
  3478. 2:44:25नहीं उसके बाद उसका क्या रिएक्शन होता।
  3479. 2:44:28शिप्रा जानती थी कि उसका जो वीडियो वायरल
  3480. 2:44:30हुआ था उसमें श्रवण भी था। पर उस फोटो को
  3481. 2:44:34देखने के बाद कोई भी आज के श्रवण को पहचान
  3482. 2:44:36नहीं सकता। क्योंकि उस शादी वाले वीडियो
  3483. 2:44:39में श्रवण का चेहरा घनी दाढ़ियों से ढका
  3484. 2:44:42हुआ था और कोई इमेजिन भी नहीं कर सकता था
  3485. 2:44:45कि उन दाढ़ियों को साफ करने के बाद उसके
  3486. 2:44:48पीछे का जो चेहरा निकल कर आया है वह ऐसा
  3487. 2:44:50भी हो सकता है। अब आगे क्या होगा? क्या
  3488. 2:44:53मालिनी को पता चलेगा? शौर्य होटल रीगल से
  3489. 2:44:56निकलने के बाद फिर होटल राजकमल के लिए ही
  3490. 2:44:59अपनी गाड़ी को बढ़ा दिया। उसके दिमाग में
  3491. 2:45:02मालिनी के प्रपोजल की ही बात चल रहा था।
  3492. 2:45:05वह निर्णय नहीं कर पा रहा था कि उसे क्या
  3493. 2:45:07करना चाहिए। वैसे तो उसका कोई भी इरादा
  3494. 2:45:10हीरो बनने का नहीं था। पर जितने भरोसे के
  3495. 2:45:13साथ और जितनी पोलाइटली मालिनी ने उससे
  3496. 2:45:16रिक्वेस्ट की थी, इस कारण शौर्य को मना
  3497. 2:45:18करते नहीं मना था। फिर भी कहीं ना कहीं
  3498. 2:45:21उसने अपने दिमाग में निश्चय कर लिया था कि
  3499. 2:45:24वह मालिनी से क्षमा के साथ इस प्रपोजल के
  3500. 2:45:26लिए मना कर देगा। इन्हीं ख्यालों में गुम
  3501. 2:45:29शौर्य अब भी कुछ ही दूर गया था कि अचानक
  3502. 2:45:32एक स्कर्पियो आकर उसकी गाड़ी के आगे खड़ा
  3503. 2:45:34हो गया। शौर्य को मजबूरन अपनी गाड़ी का
  3504. 2:45:37ब्रेक लगाना पड़ा। गाड़ी रुकने के बाद
  3505. 2:45:39शौर्य ने गौर किया कि वह आबादी से दूर आ
  3506. 2:45:42गया था। वह इलाका थोड़ा सुनसान सा ही था।
  3507. 2:45:45उसने देखा उसकी गाड़ी के एकदम सामने ही वह
  3508. 2:45:48स्कर्पियो थोड़ा बैक होकर उसकी गाड़ी से
  3509. 2:45:50सट कर खड़ा हो गया। उसने सोचा वह अपनी
  3510. 2:45:53गाड़ी को थोड़ा पीछे करके फिर से आगे
  3511. 2:45:55निकाल ले। अभी उसने इतना सोचा ही था कि
  3512. 2:45:57तभी उसने महसूस किया कि उसके पीछे से भी
  3513. 2:46:00आकर एक गाड़ी खड़ी हो गई थी। शौर्य को
  3514. 2:46:03एहसास हो गया कि किसी ने जानबूझकर उसका
  3515. 2:46:07रास्ता रोका है। वह अपनी गाड़ी में बैठा
  3516. 2:46:10सामने वाली गाड़ी से कोई हरकत होने का
  3517. 2:46:12इंतजार करने लगा। तभी उसने देखा सामने
  3518. 2:46:15वाली गाड़ी का दरवाजा खुला और दो
  3519. 2:46:18हट्टेकट्टे पहलवान जैसे आदमी उस गाड़ी से
  3520. 2:46:20बाहर आए और स्कर्पियो के पास पीछे वाले
  3521. 2:46:23हिस्से के पास आकर उससे टेक लगाकर खड़े हो
  3522. 2:46:26गए और बिना कोई हरकत किए वह शौर्य की
  3523. 2:46:28गाड़ी की तरफ देखते रहे। शौर्य इंतजार
  3524. 2:46:31करता रहा कि वे लोग उसके पास आकर जरूर कोई
  3525. 2:46:35हरकत करेंगे। पर उन दोनों बंदों ने ऐसी
  3526. 2:46:37कोई हरकत नहीं की। इसी अवस्था में 5 मिनट
  3527. 2:46:40गुजर गए। 10 मिनट गुजर गए। यहां तक कि 15
  3528. 2:46:43मिनट भी गुजर गए। अब जाकर शौर्य का पेशेंस
  3529. 2:46:46जवाब देने लगा। उसे समझ नहीं आ रहा था कि
  3530. 2:46:48आखिर यह चल क्या रहा है। ना ही वह दोनों
  3531. 2:46:51बंदे उससे कुछ बोल रहे हैं ना ही कोई हरकत
  3532. 2:46:54कर रहे हैं। बस अपनी जगह पर खड़े उसकी कार
  3533. 2:46:58को देखे जा रहे हैं। आखिर थक हार कर शौर्य
  3534. 2:47:01अपनी कार से बाहर आया और सामने खड़े उन
  3535. 2:47:04दोनों आदमी के पास पहुंचा और उनसे बोला
  3536. 2:47:07क्या मैं जान सकता हूं कि तुम लोगों ने
  3537. 2:47:09मेरा रास्ता क्यों रोका हुआ है। शौर्य की
  3538. 2:47:12बात सुनकर उन दोनों में से एक आदमी ने
  3539. 2:47:14जमहाई लेते हुए कहा, चुपचाप जाकर अपनी कार
  3540. 2:47:18में बैठ जा और 5 मिनट इंतजार कर। तुम्हें
  3541. 2:47:21अपने सवाल का जवाब मिल जाएगा। शौर्य को
  3542. 2:47:24कुछ समझ तो आ नहीं रहा था। पर उसने सोचा
  3543. 2:47:27चलो जब इतनी देर इंतजार किया तो 5 मिनट और
  3544. 2:47:29सही। यह सोचकर वह वापस गया और अपनी सीट पर
  3545. 2:47:32जाकर बैठ गया। लगभग 5 मिनट बाद एक रेंज
  3546. 2:47:36रोवर आकर Scorpio के आगे खड़ा हो गया।
  3547. 2:47:39रेंज रोवर का दरवाजा खुला और उससे एक शख्स
  3548. 2:47:42बाहर आया और चलता हुआ शौर्य की कार के पास
  3549. 2:47:44पहुंचा और ड्राइविंग सीट के बगल वाला
  3550. 2:47:46दरवाजा खोलकर कार के अंदर आकर बैठ गया।
  3551. 2:47:49शौर्य बिना कोई हरकत किए उस शख्स को देखता
  3552. 2:47:52रहा। उस शख्स को देखकर शौर्य की भवन थोड़ी
  3553. 2:47:55सी तनी पर वह नॉर्मल भाव से उस शख्स के
  3554. 2:47:58आगे बोलने का इंतजार करता रहा। वह शख्स
  3555. 2:48:01कोई और नहीं प्रतीक राठौर था। शौर्य को
  3556. 2:48:04प्रतीक के यहां होने का कारण समझ में आ
  3557. 2:48:06गया। वह समझ गया कि जरूर प्रतीक मालिनी पर
  3558. 2:48:09नजर रखता होगा और शौर्य को मालिनी से
  3559. 2:48:12मिलते देखकर ही उसने उसका रास्ता रोकने की
  3560. 2:48:14कोशिश की। मुझे पहले यह समझ जाना चाहिए था
  3561. 2:48:17कि ऐसी हरकत तुम ही कर सकते हो। अब जब तुम
  3562. 2:48:21यहां आ ही गए हो तो बता भी दो कि चाहते
  3563. 2:48:24क्या हो। शौर्य प्रतीक के उसके बगल में
  3564. 2:48:27बैठ जाने के बाद बोला बहुत खूब। जब इतना
  3565. 2:48:30समझ गए कि ऐसी हरकत मैं ही कर सकता हूं तो
  3566. 2:48:33फिर तो तुम्हें यह भी समझ जाना चाहिए था
  3567. 2:48:36कि आखिर मैंने ऐसी हरकत क्यों की। प्रतीक
  3568. 2:48:38सीक्रेट के पैकेट से एक सिगरेट निकालते
  3569. 2:48:40हुए बोला समझ तो गया हूं पर मैं यह बात
  3570. 2:48:44तुम्हारे मुंह से ही सुनना चाहता हूं।
  3571. 2:48:47शौर्य खिड़की का शीशा खोलते हुए बोला लगता
  3572. 2:48:50नहीं कि तुम मुझे अच्छे से जानते हो। अगर
  3573. 2:48:52नहीं जानते तो पहले मेरे बारे में थोड़ी
  3574. 2:48:55सी जानकारी इकट्ठा कर लेना। उसके बाद ही
  3575. 2:48:58मेरे रास्ते में आने की कोशिश करना। अगर
  3576. 2:49:01मुझे जानने के बाद भी तुमने मेरे रास्ते
  3577. 2:49:03में आने की कोशिश की तो मैं समझ जाऊंगा कि
  3578. 2:49:06तुम सही मायने में मर्द हो। प्रतीक सिगरेट
  3579. 2:49:10का कश लेते हुए बोला तुम ऐसा क्यों नहीं
  3580. 2:49:13करते कि मैं जितना टाइम तुम्हें जानने के
  3581. 2:49:15लिए बाहर बर्बाद करूंगा। उससे अच्छा होगा
  3582. 2:49:18कि तुम मुझे इसी पल अपने बारे में बता दो
  3583. 2:49:21ताकि मुझे तुम्हें जानने के लिए इधर-उधर
  3584. 2:49:24धक्का ना खाना पड़े। शौर्य प्रतीक की तरफ
  3585. 2:49:26देखते हुए बोला, आज मैंने तुम्हें मेनका
  3586. 2:49:29के साथ देखा। तुम ऐसा क्यों नहीं करते कि
  3587. 2:49:32तुम मेनका से ही मेरे बारे में पूछ लेना।
  3588. 2:49:34वह तुम्हें मेरे बारे में ज्यादा बेहतर
  3589. 2:49:36बताएंगी। प्रतीक भी उसके चेहरे की तरफ
  3590. 2:49:39देखते हुए बोला। चलो यह भी ठीक है। अगर
  3591. 2:49:43तुम ऐसा कहते हो तो मैं तुम्हारे बारे में
  3592. 2:49:45मेनका से ही पता कर लूंगा। पर तुम अब भी
  3593. 2:49:48मुझे यह तो बता दो कि मैं तुम्हारे बारे
  3594. 2:49:51में जानकर करूंगा क्या? शौर्य इस तरह से
  3595. 2:49:53अनजान बनते हुए पूछा जैसे उसे समझ ना रहा
  3596. 2:49:57हो कि उसे प्रतीक के बारे में क्यों जानना
  3597. 2:49:59चाहिए। क्या तुम सच में इतने नादान हो जो
  3598. 2:50:02तुम्हें समझ नहीं आया कि मैंने तुम्हें
  3599. 2:50:05क्यों रोका है? शौर्य की बात को सुनकर
  3600. 2:50:08प्रतीक शौर्य को घूरते हुए बोला। फिर वह
  3601. 2:50:11थोड़ा पोलाइट होकर बोला, "तुम मालिनी के
  3602. 2:50:14पास क्यों गए थे? क्या मतलब हुआ? क्यों
  3603. 2:50:16गया था? उसने मुझे बुलाया था। इसलिए मैं
  3604. 2:50:18गया था। शौर्य लापरवाही से बोला क्यों
  3605. 2:50:21बुलाया था? प्रतीक ने अगला सवाल किया। वह
  3606. 2:50:25चाहती है कि मैं उसकी फिल्म में उसका हीरो
  3607. 2:50:27बनूं। शौर्य बोला। शौर्य की बात सुनकर
  3608. 2:50:30प्रतीक ने पूछा तो तुमने उसे क्या जवाब
  3609. 2:50:33दिया? पथिक के सवाल पर शौर्य को थोड़ी
  3610. 2:50:35शरारत सूझी और उसने कहा मैं क्या जवाब
  3611. 2:50:38देता? कोई इतने अच्छे मौके को अपने हाथ से
  3612. 2:50:41जाने देता है तो मैं भी उसके लिए तैयार हो
  3613. 2:50:44गया। तैयार हो गए। प्रतीक शौर्य की बात को
  3614. 2:50:47रिपीट करता हुआ बोला। फिर उसने अपनी बात
  3615. 2:50:50को कंटिन्यू करते हुए कहा, कोई बात नहीं,
  3616. 2:50:53अगर तुम तैयार हो भी गए हो, तो अब तुम
  3617. 2:50:55उससे मना कर देना। उससे कह देना कि तुम
  3618. 2:50:58उसकी मूवी में काम नहीं कर सकते। पर मैं
  3619. 2:51:00ऐसा भला क्यों करूंगा? मैं इतने अच्छे ऑफर
  3620. 2:51:03को अपने हाथ से कैसे जाने दूंगा? शौर्य
  3621. 2:51:06बोला तुम इसलिए मना करोगे क्योंकि मैंने
  3622. 2:51:08तुम्हें ऐसा करने को कहा है। तुम्हें
  3623. 2:51:11मुझसे ज्यादा सवाल करने की जरूरत नहीं है।
  3624. 2:51:13अगर तुम अपनी भलाई चाहते हो तो तुम वही
  3625. 2:51:16करना जो मैं तुम्हें कह रहा हूं। इस बार
  3626. 2:51:19प्रतीक थोड़ा रोज भरे स्वर में शौर्य से
  3627. 2:51:22बोला। पर मेरे ऐसा करने से तुम्हें क्या
  3628. 2:51:25फायदा होगा? तुम क्यों मेरे पेट पर लात
  3629. 2:51:27मारने की कोशिश कर रहे हो? अगर मैं उस
  3630. 2:51:30फिल्म में काम नहीं करूंगा तो मालिनी फिर
  3631. 2:51:33किसी और को उसमें काम करने के लिए साइन कर
  3632. 2:51:35लेगी। शौर्य अपनी मजबूरी जताते हुए बोला
  3633. 2:51:39तुम्हें ज्यादा बकवास करने की जरूरत नहीं
  3634. 2:51:41है। जैसा मैंने कहा है वैसा ही करना। इसी
  3635. 2:51:44में तुम्हारी भुलाई है। ज्यादा चालाक बनने
  3636. 2:51:46की कोशिश करोगे तो ना इधर के रहोगे ना उधर
  3637. 2:51:49के रहोगे। मैं समझता हूं तुम्हें अपने
  3638. 2:51:52अच्छे बुरे की समझ तो होगी ही। बाकी मेरे
  3639. 2:51:55बारे में तुम मेनका से जान लेना। इतना
  3640. 2:51:58कहकर प्रतीक शौर्य की कार से बाहर आया और
  3641. 2:52:00अपनी कार में जाकर बैठ गया। इसके बाद सारी
  3642. 2:52:03गाड़ियां वहां से चली गई। प्रतीक के वहां
  3643. 2:52:06से जाने के बाद शौर्य के चेहरे पर एक
  3644. 2:52:08मुस्कुराहट खिल गई। अब उसने मन ही मन
  3645. 2:52:11निश्चय कर लिया कि अभी तक वह जिस काम को
  3646. 2:52:15करने की नहीं सोच रहा था, अब वह उस काम को
  3647. 2:52:18जरूर करेगा। यह सोचकर उसने सीटी बजाते हुए
  3648. 2:52:22अपने कार को स्टार्ट किया और आगे बढ़ गया।
  3649. 2:52:25थोड़ी देर बाद ही वह होटल राजकमल में
  3650. 2:52:27मेनका के पास बैठा हुआ था। उसने मेनका को
  3651. 2:52:30सारी बात बताई। उसकी बात सुनकर मेनका ने
  3652. 2:52:33कहा, चलो अच्छा ही है जो तुमने पहले ही
  3653. 2:52:36मालिनी को उसकी मूवी में काम करने के लिए
  3654. 2:52:38मना कर दिया। पर मेनका की बात सुनकर शौर्य
  3655. 2:52:41ने उससे कहा तुम गलत समझ रही हो। मैंने
  3656. 2:52:44पहले उसे मना तो कर दिया था। पर अब मैंने
  3657. 2:52:47सोच लिया है कि मैं उसकी फिल्म में जरूर
  3658. 2:52:49काम करूंगा। शौर्य की बात सुनकर मेनका
  3659. 2:52:52हैरानी से उसका चेहरा देखने लगी और शौर्य
  3660. 2:52:56को समझाते हुए बोली क्यों उससे दुश्मनी
  3661. 2:52:59लेने की कोशिश कर रहे हो? वह सही आदमी
  3662. 2:53:01नहीं है। उसे अगर पता चलेगा कि तुम
  3663. 2:53:04जानबूझकर उससे पंगे लेने की कोशिश कर रहे
  3664. 2:53:06हो तो फिर वह किसी भी हद तक चला जाएगा।
  3665. 2:53:09इसलिए तुम मेरी बात मानो और इस पचरे में
  3666. 2:53:12मत पड़ो। तुम फिर गलत समझ रही हो। मैं
  3667. 2:53:15उसके पचरे में नहीं पड़ रहा बल्कि वह मेरे
  3668. 2:53:17पचरे में पड़ रहा है। मैं तो जाने कब से
  3669. 2:53:20इस पल का इंतजार कर रहा था कि उसका और
  3670. 2:53:22मेरा सीधा सामना हो। अब मुझे मौका मिल गया
  3671. 2:53:25है। तो मैं पीछे हटने से तो रहा। मेनका
  3672. 2:53:28समझ गई कि शौर्य को अब समझाने का कोई
  3673. 2:53:31फायदा नहीं है क्योंकि जब उसने मन में ठान
  3674. 2:53:34लिया है तो वह कुछ भी कर ले। शौर्य पीछे
  3675. 2:53:36नहीं हटेगा। मेनका से बात होने के बाद
  3676. 2:53:39शौर्य होटल राजकमल से सीधा अपने घर
  3677. 2:53:42पहुंचा। अभी उसे घर आए ज्यादा समय नहीं
  3678. 2:53:45हुआ था। वह आराम से जाकर सोफे पर बैठ गया।
  3679. 2:53:48शौर्य डाइनिंग एरिया में ही बैठा हुआ था।
  3680. 2:53:51गिरजा ने उसके लिए चाय बनाकर अभी उसको
  3681. 2:53:53दिया ही था कि तभी वहां पर मेघना और
  3682. 2:53:56शिप्रा भी आ गई थी। उन दोनों को आया देखकर
  3683. 2:53:59गिरजा ने उन दोनों से भी पूछा। क्या आपके
  3684. 2:54:02लिए भी चाय बना दूं? तो शिप्रा ने शौर्य
  3685. 2:54:05के सामने चाय की कप देखकर कहा। जरूर दीदी
  3686. 2:54:08मेरे लिए भी बना दूं? शिप्रा की बात सुनकर
  3687. 2:54:11गिरजा वहां से चली गई तो मेघना और शिप्रा
  3688. 2:54:13भी शौर्य के पास ही बैठ गई। शौर्य के
  3689. 2:54:16सामने बैठी मेघना बात की शुरुआत करते हुए
  3690. 2:54:18बोली मैंने सुना कि मालिनी खुराना तुम्हें
  3691. 2:54:22अपनी फिल्म में लेना चाहती है। शौर्य को
  3692. 2:54:25समझ नहीं आया कि मेघना को यह बात कैसे पता
  3693. 2:54:28है कि मालिनी ने उसे क्या ऑफर किया था
  3694. 2:54:31क्योंकि उसके सामने यह स्पष्ट नहीं था कि
  3695. 2:54:34मालिनी उसे अपनी फिल्म में लेना चाहती है।
  3696. 2:54:36तो फिर यह बात मेघना को कैसे पता चली?
  3697. 2:54:39इसका मतलब जरूर उसके होटल रीगल से निकलने
  3698. 2:54:43के बाद मालिनी और मेघना की आपस में बातें
  3699. 2:54:47हुई होंगी। तभी उसे इस बारे में पता है।
  3700. 2:54:50यह सोचकर शौर्य ने मेघना से पूछा पर
  3701. 2:54:53तुम्हें कैसे पता है कि वह मुझे अपनी
  3702. 2:54:55फिल्म में लेना चाहती है? शौर्य की बात
  3703. 2:54:57सुनकर मेघना मुस्कुराने लगी। वह समझ गई कि
  3704. 2:55:01शौर्य यह समझ गया है कि उसके आने के बाद
  3705. 2:55:04उसकी मालिनी से बातें हुई होंगी। यह सोच
  3706. 2:55:06कर उसने कहा, तुम समझ तो गए ही हो कि मुझे
  3707. 2:55:09कैसे पता पर मुझे यह नहीं समझ आ रहा कि
  3708. 2:55:12तुमने उसकी ऑफर को ठुकरा क्यों दिया? तो
  3709. 2:55:15तुम्हें यह भी पता है कि मैंने उसकी ऑफर
  3710. 2:55:17को ठुकड़ा दिया है। और क्या क्या बताया
  3711. 2:55:20उसने तुम्हें या और क्या बातें हुई
  3712. 2:55:22तुम्हारी उससे? शौर्य ने उससे पूछा, मेघना
  3713. 2:55:26ने शौर्य को उसके और मालिनी के बीच में
  3714. 2:55:29हुई बातों के बारे में बताया। उसकी बात
  3715. 2:55:31सुनने के बाद शौर्य सोच में गुम हो गया कि
  3716. 2:55:34उसे क्या करना चाहिए। वैसे तो उसने निश्चय
  3717. 2:55:37कर ही लिया था कि उसको मालिनी की फिल्म
  3718. 2:55:39में काम करना है। पर उसे यह जानकर भी सुखद
  3719. 2:55:43अनुभूति हुई कि मालिनी कितनी डिटरमाइन थी
  3720. 2:55:45कि शौर्य को उसे अपनी फिल्म में लेना ही
  3721. 2:55:48है। शौर्य अपनी सोच से बाहर आया और मेघना
  3722. 2:55:51की ओर देखकर उससे पूछा तुम ही बताओ मुझे
  3723. 2:55:55क्या करना चाहिए? क्या मुझे उसकी फिल्म
  3724. 2:55:57में काम करनी चाहिए? शौर्य का सवाल सुनकर
  3725. 2:56:00मेघना बोली इसमें इतना सोचने की क्या बात
  3726. 2:56:03है? तुम्हें इतना अच्छा मौका मिल रहा है
  3727. 2:56:06और तुम उसको ठुकरा रहे हो। तुम समझ भी पा
  3728. 2:56:09रहे हो अगर तुम इस काम को करते हो और
  3729. 2:56:12थोड़ा भी तुम्हारी किस्मत ने साथ दिया तो
  3730. 2:56:14इस एक मूवी के बाद ही तुम कितने बड़े
  3731. 2:56:17स्टार बन सकते हो। तो तुम्हारे विचार से
  3732. 2:56:19मुझे मालिनी खुराना के ऑफर को स्वीकार कर
  3733. 2:56:22लेना चाहिए। शौर्य मेघना की ओर देखते हुए
  3734. 2:56:25बोला। इधर शौर्य और मेघना के बीच मालिनी
  3735. 2:56:29के ऑफर को लेकर बातें हो रही थी। दूसरी
  3736. 2:56:31तरफ शिबरा जो वहां बैठी उन दोनों की बातों
  3737. 2:56:34को सुन रही थी। उसके मन में भारी उथल-पुथल
  3738. 2:56:38मची हुई थी। उसे अच्छा नहीं लग रहा था कि
  3739. 2:56:40उसके वहां होने के बावजूद शौर्य उसको
  3740. 2:56:42इग्नोर कर मेघना से इस बारे में बात किए
  3741. 2:56:45जा रहा था और अपनी बातचीत के बीच में उसकी
  3742. 2:56:48राय लेना भी जरूरी नहीं समझ रहा था। जबकि
  3743. 2:56:51उसके लिए मेघना की बात ज्यादा मायने रख
  3744. 2:56:54रही थी। अब आगे क्या होगा? शौर्य मेघना से
  3745. 2:56:58मालिनी के प्रपोजल के बारे में बात किए जा
  3746. 2:57:00रहा था। पर वह इस बारे में शिप्रा का क्या
  3747. 2:57:03विचार है? यह जानने की कोई कोशिश नहीं की।
  3748. 2:57:06यह बात शिप्रा को बुरी लग रही थी। उसे ऐसा
  3749. 2:57:09लग रहा था जैसे शौर्य जानबूझकर उसको
  3750. 2:57:12इग्नोर कर रहा है। इसी बीच शौर्य ने मेघना
  3751. 2:57:16से पूछा था कि उसके ख्याल से उसे क्या
  3752. 2:57:18करना चाहिए? क्या उसको मालिनी का प्रपोजल
  3753. 2:57:21स्वीकार करना चाहिए या नहीं? शौर्य के
  3754. 2:57:24सवाल के जवाब में मेघना ने कहा, "मेरे
  3755. 2:57:27ख्याल से तो इसमें सोचने की भी कोई जरूरत
  3756. 2:57:29नहीं है। तुम्हें तो तुरंत ही उसका
  3757. 2:57:31प्रपोजल स्वीकार करना चाहिए था।" मेघना का
  3758. 2:57:34जवाब सुनकर जब शिप्रा से रहा नहीं गया तो
  3759. 2:57:38उसने कहा, तुम्हें क्यों लगता है कि श्रवण
  3760. 2:57:41को मालिनी के ऑफर को स्वीकार करना चाहिए।
  3761. 2:57:44अभी श्रवण अच्छा खासा अपना जॉब कर रहा है।
  3762. 2:57:46इस फिल्म को करने के चक्कर में इसका यह
  3763. 2:57:49जॉब भी चला जाएगा और फिल्म लाइन का क्या
  3764. 2:57:51भरोसा यह जरूरी तो नहीं कि यह वहां सफल हो
  3765. 2:57:55ही जाएगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो फिर यह
  3766. 2:57:58उधर से भी जाएगा और अपने काम से भी। इसलिए
  3767. 2:58:02मेरे ख्याल से तो इसे अपने काम पर ही फोकस
  3768. 2:58:04करना चाहिए ना कि मूवी में काम करने के
  3769. 2:58:07चक्कर में यह अपने जॉब से भी हाथ धो ले।
  3770. 2:58:09शिप्रा की बात सुनकर मेघना हैरान होकर
  3771. 2:58:12शिप्रा की ओर देखने लगी। अभी तक शिप्रा की
  3772. 2:58:15राय भी शौर्य के लिए यही था कि उसे मालिनी
  3773. 2:58:18के ऑफर को स्वीकार कर लेना चाहिए। पर होटल
  3774. 2:58:21से यहां आने के बीच में ही उसका विचार बदल
  3775. 2:58:24कैसे गया। यह देखकर मेघना बोली ये तुम
  3776. 2:58:27कैसी बात कर रही हो? जब हम होटल में थे और
  3777. 2:58:30हमारी बात मालिनी से हो रही थी तब तो
  3778. 2:58:33तुम्हें भी ऐसा ही लग रहा था कि श्रवण को
  3779. 2:58:36मालिनी के ऑफर को स्वीकार कर लेना चाहिए।
  3780. 2:58:39पर अब इतनी देर में ही तुम्हारे विचार
  3781. 2:58:41कैसे बदल गए? मेरा कोई विचार नहीं बदला
  3782. 2:58:44है। उस समय मैं प्रैक्टिकल होकर नहीं सोच
  3783. 2:58:47पाई थी। इसीलिए उस समय मुझे भी यही लगा था
  3784. 2:58:50कि यह श्रवण के लिए एक अच्छा ऑफर है। पर
  3785. 2:58:53अब मैं जब थोड़ा प्रैक्टिकल होकर सोच रही
  3786. 2:58:55हूं तो मुझे लग रहा है कि ज्यादा पानी की
  3787. 2:58:58चाहत में कहीं ऐसा ना हो कि जो हमारे पास
  3788. 2:59:01है वो अभी खो जाए। बस इतनी सी बात है।
  3789. 2:59:04शिप्रा ने अपने विचार बदलने का रीजन दिया।
  3790. 2:59:06अब तक गिरजा ने चाय लाकर शिप्रा और मेघना
  3791. 2:59:09दोनों के सामने रख दिया। दोनों ने अपनी
  3792. 2:59:12चाय को उठाया और एक-एक शिप लिया। मेघना ने
  3793. 2:59:15शिप्रा की बात को सुना पर वह उसकी बात से
  3794. 2:59:18कन्विंस नहीं हुई। उसे शिप्रा को देखकर
  3795. 2:59:20लगा कि जरूर इसके दिमाग में कुछ और ही चल
  3796. 2:59:23रहा है। कहीं यह मालिनी से जेलस तो नहीं
  3797. 2:59:25फील करने लगी और क्या बात हो सकती है।
  3798. 2:59:28शिप्रा के विचार को यूं बदलने का मेघना मन
  3799. 2:59:31ही मन सोच रही थी। मालिनी एक खूबसूरत
  3800. 2:59:34लड़की थी और जिस तरह से वह शौर्य के बारे
  3801. 2:59:37में बात कर रही थी या जितनी शिद्दत से वह
  3802. 2:59:40चाहती थी कि शौर्य उसकी मूवी में काम करने
  3803. 2:59:44को तैयार हो जाए यह बात शिप्रा को कहीं ना
  3804. 2:59:48कहीं परेशान कर रही थी। उसे ऐसा फील हो
  3805. 2:59:51रहा था कि जैसे मालिनी जानबूझकर श्रवण के
  3806. 2:59:54करीब जाने की कोशिश कर रही है। अब शिप्रा
  3807. 2:59:57के मन में यह बात स्ट्रांगली घर करने लगी
  3808. 2:59:59थी। श्रवण का मालिनी की फिल्म में काम
  3809. 3:00:01करना तो एक बहाना था। वह बस जानबूझकर
  3810. 3:00:05श्रवण के करीब जाना चाहती है। आजकल शिप्रा
  3811. 3:00:08किसी भी लड़की को शौर्य के पास देखती थी
  3812. 3:00:10तो उसके मन में एक असुरक्षा की भावना आ
  3813. 3:00:13जाती थी। शिप्रा भी यह नहीं समझ पा रही थी
  3814. 3:00:16कि ऐसा क्यों हो रहा है। पर मेघना के
  3815. 3:00:19दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। उसने
  3816. 3:00:22श्रवण को नताशा कपूर के साथ स्ट्रांग
  3817. 3:00:25एनर्जी ड्रिंक की ऐड में एक्टिंग करते
  3818. 3:00:27देखा था। उसे भी श्रवण में एक्टिंग करने
  3819. 3:00:29की गुंजाइश साफ दिख रही थी। बल्कि यह कहना
  3820. 3:00:33ज्यादा सही होगा कि वह खुद शौर्य की
  3821. 3:00:36एक्टिंग देखने के बाद उससे अच्छा खासा
  3822. 3:00:39प्रभावित हो गई थी। नताशा के साथ काम करते
  3823. 3:00:42देखकर ही शौर्य को लेकर उसके विचार बदल गए
  3824. 3:00:45थे। उसके बाद तो ऐसी स्थिति थी कि अगर उसे
  3825. 3:00:48यह नहीं पता होता कि शौर्य शिप्रा का पति
  3826. 3:00:50है तो वह खुद शौर्य के लिए अपने दिल में
  3827. 3:00:53एक खास जगह महसूस करने लगती। यह सोच कर ही
  3828. 3:00:57उसने शिप्रा से कहा, "मुझे लगता है तुम
  3829. 3:00:59कुछ ज्यादा ही सोच रही हो।" तुमने श्रवण
  3830. 3:01:02की एक्टिंग नहीं देखी है। मैंने उसे नताशा
  3831. 3:01:04के साथ काम करते देखा है और मैं यह पूरे
  3832. 3:01:06यकीन के साथ कह सकती हूं कि श्रवण में यह
  3833. 3:01:09पोटेंशियल है कि वह एक सफल अभिनेता बन
  3834. 3:01:12सकता है। मेघना की बात सुनकर शिप्रा के
  3835. 3:01:15चेहरे पर नागवारी के भाव आए। वह श्रवण की
  3836. 3:01:18ओर देखने लगी। जैसे वह जानना चाहती हो कि
  3837. 3:01:20श्रवण क्या फैसला करता है। पर श्रवण
  3838. 3:01:23शिप्रा को पूरी तरह इग्नोर करते हुए मेघना
  3839. 3:01:26से बोला, शायद तुम ठीक कह रही हो। मुझे
  3840. 3:01:29मालिनी के ऑफर को स्वीकार कर लेना चाहिए।
  3841. 3:01:31शायद ऐसे ही मेरी किस्मत बदल जाए। शिप्रा
  3842. 3:01:34को यह बात और बुरी लगी कि श्रवण ने अपना
  3843. 3:01:37फैसला करते हुए एक बार भी शिप्रा की तरफ
  3844. 3:01:40देखा तक नहीं। वह तो ऐसे शिप्रा को इग्नोर
  3845. 3:01:42किए हुए था जैसे वह वहां उसके लिए एकिस्ट
  3846. 3:01:45ही नहीं कर रही हो। जबकि शौर्य ऐसा
  3847. 3:01:48जानबूझकर कर रहा था। उसे लग रहा था कि अगर
  3848. 3:01:51वह ऐसे ही शिप्रा को इस तरह के मौके पर
  3849. 3:01:53इग्नोर करता रहेगा तो शायद वह उसकी अहमियत
  3850. 3:01:56को समझे। अभी भी वह शिप्रा के गुस्से को
  3851. 3:01:59साफ महसूस कर रहा था। वह यही तो चाहता था
  3852. 3:02:02कि प्यार से ना सही पर गुस्से से ही सही
  3853. 3:02:05शिप्रा उस पर अपना हक जताए। एक पत्नी होने
  3854. 3:02:08का जो हक है इसका एहसास कराए। शायद इस तरह
  3855. 3:02:11से दोनों के बीच की दूरियां कुछ कम हो। पर
  3856. 3:02:14शौर्य महसूस कर रहा था कि जिस तरह से
  3857. 3:02:17शिप्रा के चेहरे का रंग बदल रहा था, कहीं
  3858. 3:02:20ऐसा ना हो कि वह उठकर ही वहां से चली जाए।
  3859. 3:02:24यह सोचकर कि शिप्रा वहां से चली ना जाए।
  3860. 3:02:27शौर्य शिप्रा की ओर देखते हुए बोला, वैसे
  3861. 3:02:30तुम ऐसा क्यों सोचती हो कि मैं फिल्म लाइन
  3862. 3:02:32में सफल नहीं हो पाऊंगा? सोचो अगर ऐसा हो
  3863. 3:02:35पाया तो मेघना सही कह रही है। मेरी तो
  3864. 3:02:38जिंदगी ही चेंज हो जाएगी। शौर्य ने बड़े
  3865. 3:02:41मौके पर शिप्रा से यह सवाल कर दिया। नहीं
  3866. 3:02:44तो शिप्रा वहां से उठकर जाने ही वाली थी।
  3867. 3:02:46पर जब उसने शौर्य को खुद से बात करते देखा
  3868. 3:02:49तो उसे थोड़ा सुकून आया। वह शौर्य की
  3869. 3:02:52आंखों में देखते हुए बोली ऐसा नहीं है कि
  3870. 3:02:55मैं ऐसा सोच रही हूं कि तुम उसमें सफल
  3871. 3:02:57नहीं हो पाओगे। पर एक पर्सन के लिए मान लो
  3872. 3:03:00कि अगर ऐसा कुछ हुआ तो फिर जो तुम बड़ी
  3873. 3:03:02मुश्किल से अपनी जिंदगी को पटरी पर लाए
  3874. 3:03:04हो। फिर आगे चलकर मुश्किल में ना आ जाए।
  3875. 3:03:07बस मेरा यही कंसर्न था। शौर्य को अच्छा
  3876. 3:03:11लगा कि शिप्रा उसको लेकर अपना कंसर्न दिखा
  3877. 3:03:14रही है। वह यही तो चाहता है पर शौर्य ने
  3878. 3:03:17तो पहले ही फैसला कर लिया था कि वह मालिनी
  3879. 3:03:20के ऑफर को स्वीकार करेगा क्योंकि उसे इससे
  3880. 3:03:23मतलब नहीं था कि वह इसमें सफल होता है या
  3881. 3:03:26नहीं होता है। उसे तो बस प्रतीक से पंगा
  3882. 3:03:29लेने का एक मौका मिल रहा था और वह इस मौके
  3883. 3:03:32को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था।
  3884. 3:03:35प्रतीक ने जिस तरह से उसको रोक कर मालिनी
  3885. 3:03:38से अलग रहने के लिए कहा था उससे एक बात तो
  3886. 3:03:41साबित हो रही थी कि मालिनी प्रतीक के
  3887. 3:03:43टारगेट में थी। प्रतीक किसी ना किसी तरह
  3888. 3:03:46से मालिनी से कुछ चाहता था और जब उसे लगा
  3889. 3:03:49कि शौर्य उसके बीच में आ रहा है तो उसने
  3890. 3:03:52शौर्य को धमका कर उससे अलग करने की कोशिश
  3891. 3:03:55किया। जबकि प्रतीक की इसी बात ने शौर्य को
  3892. 3:03:58मालिनी के ऑफर को स्वीकार करने के लिए
  3893. 3:04:00प्रेरित किया। अपने मन में यह फैसला करने
  3894. 3:04:03के बाद शौर्य मेघना और शिप्रा की ओर देखते
  3895. 3:04:06हुए बोला। वैसे मैंने फैसला कर लिया है कि
  3896. 3:04:09मैं मालिनी की मूवी में काम करूंगा। देखता
  3897. 3:04:12हूं आगे किस्मत मुझे किस ओर ले जाती है।
  3898. 3:04:14शिप्रा को अच्छा नहीं लगा कि आखिर शौर्य
  3899. 3:04:16ने मेघना की बात को ही माना। पर अब उसे कम
  3900. 3:04:20से कम इतनी तसल्ली थी कि शौर्य अब उसको
  3901. 3:04:24इग्नोर नहीं कर रहा। शौर्य ने शिप्रा को
  3902. 3:04:27थोड़ा और अच्छा फील कराने के लिए उससे
  3903. 3:04:28कहा। मैं तुम्हारी कंसर्न को भी अच्छे से
  3904. 3:04:31समझ रहा हूं। शिप्रा। पर एक बात तो सही है
  3905. 3:04:34कि अगर कुछ अच्छा पाना है तो थोड़ा रिस्क
  3906. 3:04:36तो लेना पड़ेगा। शौर्य ने जो यह सीधी बात
  3907. 3:04:40शिप्रा से की इस बात से शिप्रा ने थोड़ा
  3908. 3:04:43और अच्छा फील किया। चलो अच्छी बात है। अगर
  3909. 3:04:46तुमने यह फैसला किया है तो मैं यही
  3910. 3:04:48चाहूंगी कि तुम अच्छे से यह काम करना।
  3911. 3:04:51शिप्रा शौर्य का हौसला बढ़ाते हुए बोली।
  3912. 3:04:54अब तक तीनों ने अपनी चाय को समाप्त कर
  3913. 3:04:56लिया था। इसी समय शौर्य का फोन बजने लगा।
  3914. 3:04:59उसने जब नंबर की तरफ ध्यान दिया तो उसने
  3915. 3:05:02देखा कि यह उसके दादाजी का कॉल था। अपने
  3916. 3:05:05दादाजी के कॉल को देखते ही शौर्य वहां से
  3917. 3:05:07उठ खड़ा हुआ और अपने कमरे की तरफ बढ़ गया।
  3918. 3:05:11शिप्रा के दिमाग में यह बात आया कि यह
  3919. 3:05:13किसका कॉल था जो नंबर देखते ही शौर्य वहां
  3920. 3:05:17से उठकर अपने कमरे में चला गया। दूसरी तरफ
  3921. 3:05:20शौर्य ने अपने कमरे में पहुंचकर अपने
  3922. 3:05:23दादाजी के फोन को उठाया। वह जानता था कि
  3923. 3:05:25उसने कई दिनों से अपने दादाजी को अपनी कोई
  3924. 3:05:28खबर नहीं दी थी। इसलिए वह उसको लेकर
  3925. 3:05:30चिंतित जरूर होंगे। इसलिए शौर्य फोन उठाते
  3926. 3:05:34ही जल्दी से बोला प्रणाम दादा जी आप कैसे
  3927. 3:05:37हैं? कमबख्त मेरे फोन करने के बाद तुमको
  3928. 3:05:40यह पूछना ध्यान आया कि मैं कैसा हूं?
  3929. 3:05:42चंद्रभान जी नाराजगी भरे स्वर में बोले
  3930. 3:05:45नहीं दादा जी ऐसी कोई बात नहीं थी।
  3931. 3:05:47एक्चुअली इन दिनों मैं कुछ और दूसरे कामों
  3932. 3:05:49में उलझ गया था। इसलिए आपको कॉल नहीं कर
  3933. 3:05:52पाया। शौर्य खेद प्रकट करते हुए बोला
  3934. 3:05:56अच्छा छोड़ इन बातों को पहले यह बता मैंने
  3935. 3:05:59जो तुमको कहा था कि मुझे अपनी बहू से
  3936. 3:06:01मिलना है तो तुमने उसके लिए क्या किया है
  3937. 3:06:05अगर तुमने जल्दी कुछ नहीं किया तो मैं खुद
  3938. 3:06:08जाकर उससे मिलूंगा और तुम्हारी कोई बात
  3939. 3:06:11नहीं सुनूंगा चंद्रभान जी शौर्य को
  3940. 3:06:13वार्निंग देते हुए बोले शौर्य सोच में पड़
  3941. 3:06:16गया कि वह अपने दादाजी को कैसे समझाएं कि
  3942. 3:06:19अभी वह उनकी बहू को उनसे मिलाने की स्थिति
  3943. 3:06:22में नहीं है। पर फिर कुछ सोचकर वह बोला
  3944. 3:06:26दादा जी आपको सिर्फ अपनी बहू को देखना है
  3945. 3:06:28ना तो मैं इसकी व्यवस्था कर सकता हूं। पर
  3946. 3:06:31आपको यह वादा करना होगा कि आप उसके सामने
  3947. 3:06:33यह नहीं बताएंगे कि मेरा आपका कोई रिश्ता
  3948. 3:06:36है या आप मेरे दादाजी हैं। कहिए आपको अगर
  3949. 3:06:40यह कबूल है तो फिर मैं आपको आपकी बहू से
  3950. 3:06:43मिलाने की व्यवस्था कर सकता हूं। बदमाश
  3951. 3:06:46तुम मुझे ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहे
  3952. 3:06:48हो। यह कैसे संभव है कि मैं अपनी बहू से
  3953. 3:06:51मिलूंगा और उसे अपना आशीर्वाद भी नहीं दे
  3954. 3:06:53पाऊंगा। चंद्रभान जी शौर्य को डांटते हुए
  3955. 3:06:56बोले, अगर आपको अपनी बहू से मिलना है तो
  3956. 3:06:59यही कंडीशन है। अगर आपको मंजूर है तो
  3957. 3:07:01बोलिए नहीं तो फिर इंतजार करिए। शौर्य अभी
  3958. 3:07:05हथियार डालने को तैयार नहीं था। जब
  3959. 3:07:07चंद्रभान जी ने महसूस किया कि शौर्य इस
  3960. 3:07:10कंडीशन के बिना उसे अपनी बहू से मिलाने को
  3961. 3:07:13तैयार नहीं होगा। तो उन्होंने कहा ठीक है
  3962. 3:07:16मैं तैयार हूं। बताओ तुम उसे मुझसे कब
  3963. 3:07:18मिलवा रहे हो? शौर्य ने कहा, अगर ऐसी बात
  3964. 3:07:22है तो मैं आपको कल ही उससे मिलवा दूंगा।
  3965. 3:07:24पर आप याद रखिएगा आपने जो बात अभी मुझसे
  3966. 3:07:27प्रॉमिस किया है उस बात का। हां हां समझ
  3967. 3:07:29गया। अब बार-बार यह बोलकर मुझे पकाओ मत।
  3968. 3:07:33बस मुझे यह बताओ कि मैं अपनी बहू से कहां
  3969. 3:07:35मिलूंगा। चंद्रभान जी जल्दबाजी दिखाते हुए
  3970. 3:07:39बोले तो फिर ठीक है कल डम्स इंडिया के
  3971. 3:07:42स्ट्रांग एनर्जी ड्रिंक की लॉन्चिंग
  3972. 3:07:44पार्टी है। आपको उस पार्टी में आना है।
  3973. 3:07:46वहां आपकी बहू भी आएगी। वहीं आप उससे मिल
  3974. 3:07:49लीजिएगा। शौर्य बोला डिम्स इंडिया का नाम
  3975. 3:07:52सुनकर चंद्रभान जी कुछ पल सोचते रहे। फिर
  3976. 3:07:56उन्होंने कहा क्या कहा तुमने? डिमim्स
  3977. 3:07:59इंडिया। इसमें शामिल होने के लिए तो मेरे
  3978. 3:08:02पास पहले से इनविटेशन आया हुआ है। चलो यह
  3979. 3:08:05भी बढ़िया है। पहले तो मैं इसमें आने की
  3980. 3:08:07नहीं सोच रहा था। पर अब जब मेरी बहू उस
  3981. 3:08:09पार्टी में आ रही है तो अब तो मैं जरूर
  3982. 3:08:11आऊंगा। शौर्य अपने दादाजी से बात करने के
  3983. 3:08:14बाद फिर से ड्राइंग रूम में वापस आ गया।
  3984. 3:08:16शिप्रा और मेघना अभी भी वहीं बैठी हुई थी।
  3985. 3:08:19शायद वह अभी भी शौर्य के वापस आने का
  3986. 3:08:22इंतजार कर रही थी। क्योंकि शौर्य बीच में
  3987. 3:08:25फोन आने के कारण वहां से उठकर चला गया था।
  3988. 3:08:28इसलिए वह दोनों उम्मीद कर रही थी कि बात
  3989. 3:08:31होने के बाद शौर्य वापस आएगा। शौर्य को
  3990. 3:08:34वापस आते देखकर मेघना शरारत भरे स्वर में
  3991. 3:08:37बोली ऐसा किसका फोन आ गया था जो उठकर यहां
  3992. 3:08:40से अपने कमरे में चले गए थे। कोई
  3993. 3:08:42गर्लफ्रेंड तो नहीं थी। शौर्य ऐसा उम्मीद
  3994. 3:08:44नहीं कर रहा था कि मेघना शिप्रा के सामने
  3995. 3:08:47उससे ऐसा सवाल करेंगी। इसका तो यह मतलब हो
  3996. 3:08:50सकता है कि शिप्रा ने उसे अपने और उसके
  3997. 3:08:53बीच के रिलेशन के बारे में सब कुछ बता
  3998. 3:08:55दिया होगा कि उन दोनों के बीच में क्या
  3999. 3:08:58कंडीशन निर्धारित हुई है। ऐसे हमारे नसीब
  4000. 3:09:01कहां कि कोई हमारी गर्लफ्रेंड बनेगी।
  4001. 3:09:04शौर्य भी मजाकिया लहजे में ही बोला। क्यों
  4002. 3:09:08झूठ बोल रहे हो? अगर तुम्हारी गर्लफ्रेंड
  4003. 3:09:10का फोन नहीं था तो फिर तुम उठकर यहां से
  4004. 3:09:12अपने कमरे में क्यों चले गए थे? मेघना
  4005. 3:09:15शौर्य की आंखों में देखती हुई बोली। उठकर
  4006. 3:09:18जाने का कारण यह था कि मैं तुम्हारे सामने
  4007. 3:09:20बात नहीं कर सकता था। पर इसका यह मतलब तो
  4008. 3:09:23नहीं हुआ कि मैं यहां से उठकर गया था। तो
  4009. 3:09:26अपनी गर्लफ्रेंड से फोन पर बात करने गया
  4010. 3:09:28था। एक्चुअली अभी जो फोन मेरे पास आया था
  4011. 3:09:32वह मेरे दादाजी का था। और अभी हमारे बीच
  4012. 3:09:35सब कुछ ठीक नहीं है। इसलिए मैं पब्लिकली
  4013. 3:09:37उनसे बात करने को अवॉइड करता हूं। शौर्य
  4014. 3:09:40बातें बनाते हुए बोला। तुम्हारे दादाजी भी
  4015. 3:09:43हैं। तो फिर वह तुम्हारे साथ क्यों नहीं
  4016. 3:09:45रहते? या तुम उनके साथ क्यों नहीं रहते?
  4017. 3:09:48मेघना यह जानकर आश्चर्य से बोली कि शौर्य
  4018. 3:09:51के दादाजी भी हैं जिससे उसकी बातें भी
  4019. 3:09:53होती हैं। मेघना के मन में यह सवाल भी था
  4020. 3:09:57कि अगर शौर्य के दादाजी हैं तो वह उसके
  4021. 3:10:00साथ क्यों नहीं रहता या शौर्य उनके साथ
  4022. 3:10:02क्यों नहीं रहता? बताया तो कि हमारे बीच
  4023. 3:10:05सब कुछ सही नहीं है। इसलिए हम साथ नहीं
  4024. 3:10:08रहते। शौर्य टालने वाले भाव से बोला। इतना
  4025. 3:10:11बोलकर शौर्य ने अपने मोबाइल का डायल नंबर
  4026. 3:10:14स्क्रीन पर लाकर मेघना को दिखाया। मेघना
  4027. 3:10:17ने दिखा कि लास्ट रिसीव नंबर दादाजी नाम
  4028. 3:10:20से सेव था। शौर्य के मोबाइल का लास्ट
  4029. 3:10:22रिसीवर नंबर देखकर मेघना को यकीन हुआ कि
  4030. 3:10:25शौर्य सही कह रहा था। दूसरी तरफ शिप्रा यह
  4031. 3:10:29जानना चाह रही थी कि क्या शौर्य सच में
  4032. 3:10:31मालिनी की मूवी में काम करने को तैयार हो
  4033. 3:10:34गया है? यह सोचकर उसने सस से पूछा, क्या
  4034. 3:10:37तुमने फैसला कर लिया है कि तुम्हें मालिनी
  4035. 3:10:39की मूवी में काम करना है या नहीं? नहीं अब
  4036. 3:10:43उस मामले में सोचने समझने की जरूरत नहीं
  4037. 3:10:46है। मैंने फाइनल कर लिया है कि मुझे उसके
  4038. 3:10:48साथ काम करना है। शौर्य दृढ़ स्वर में
  4039. 3:10:51बोला शिप्रा यह चाहती तो नहीं थी कि शौर्य
  4040. 3:10:54मालिनी की मूवी में काम करें। पर वह इसको
  4041. 3:10:57लेकर शौर्य को कुछ बोल नहीं सकती थी। पता
  4042. 3:11:00नहीं क्यों। पर मालिनी की खूबसूरती कहीं
  4043. 3:11:03ना कहीं शिप्रा के मन में थोड़ी असुरक्षा
  4044. 3:11:06की भावना पैदा कर रही थी। उसे लग रहा था
  4045. 3:11:08कि मालिनी शौर्य को उससे दूर ना कर दे।
  4046. 3:11:11शिप्रा के मन जब यह सब चल रहा था तो वह
  4047. 3:11:14खुद अपनी सोच पर हैरान थी कि वह इस बात को
  4048. 3:11:17लेकर इतना परेशान क्यों है। उसने तो खुद
  4049. 3:11:20शौर्य से कहा था कि उसका किसी लड़की के
  4050. 3:11:22साथ रिलेशन भी होता है तो उसे इस बात से
  4051. 3:11:24कोई फर्क नहीं पड़ेगा। पर अब उसके मन में
  4052. 3:11:27मालिनी को लेकर असुरक्षा की भावना क्यों आ
  4053. 3:11:30रही है? वह खुद ही अपनी बेचैनी को नहीं
  4054. 3:11:32समझ पा रही थी। शौर्य की जब बातें समाप्त
  4055. 3:11:35हो गई तो वह मेघना और शिप्रा को यह बोलकर
  4056. 3:11:38कि वह अपने कमरे में जा रहा है। वहां से
  4057. 3:11:40चला गया। अब शिप्रा और मेघना वहां अकेली
  4058. 3:11:43रह गई। मेघना बहुत कुछ शिप्रा के मन के
  4059. 3:11:46भाव को समझ रही थी। इसलिए उसने शौर्य के
  4060. 3:11:49वहां से जाने के बाद शिप्रा से पूछा। मुझे
  4061. 3:11:52ऐसा क्यों लग रहा था कि तुम नहीं चाहती थी
  4062. 3:11:54कि श्रवण मालिनी की मूवी में काम करें।
  4063. 3:11:57मेघना की बात सुनकर शिपरा मेघना का चेहरा
  4064. 3:12:00देखने लगी और उससे नजर चुराते हुए बोली
  4065. 3:12:04मैं भला ऐसा क्यों चाहूंगी मैं कोई श्रवण
  4066. 3:12:07की दुश्मन थोड़ी हूं तुम बोल कुछ रही हो
  4067. 3:12:10और तुम्हारा चेहरा कुछ और कह रहा है मेघना
  4068. 3:12:13शिप्रा की आंखों में देखते हुए बोली पता
  4069. 3:12:16नहीं तुम क्या बोले जा रही हो ऐसा कुछ भी
  4070. 3:12:18नहीं है समझे शिप्रा ऐसा बोल तो रही थी पर
  4071. 3:12:22उसकी आवाज में कॉन्फिडेंस नहीं था तुम
  4072. 3:12:24कितनी भी इस तरह की बातें कर लो पर
  4073. 3:12:26तुम्हारा चेहरा चेहरा कुछ और ही कह रहा
  4074. 3:12:28है। तुम मान क्यों नहीं लेती? मेघना
  4075. 3:12:31गंभीरता से बोली। मेघना की इस तरह की
  4076. 3:12:34बातें सुन शिपरा बगले झांकने लगी। वह हार
  4077. 3:12:37कर बोली। तुम जो कह रही हो वह सच है। पता
  4078. 3:12:41नहीं क्यों पर मुझे श्रवण का मलिनी के साथ
  4079. 3:12:43काम करना ठीक नहीं लग रहा है। कहीं
  4080. 3:12:46तुम्हें श्रवण से प्यार तो नहीं हो गया।
  4081. 3:12:48मेघना मुस्कुराती हुई बोली। मेघना की बात
  4082. 3:12:52सुनकर शिप्रा फिर से भड़कते हुए बोली
  4083. 3:12:55तुम्हें तो पता नहीं हमेशा यही क्यों लगता
  4084. 3:12:58है कि मुझे श्रवण से प्यार हो गया। ऐसा
  4085. 3:13:01तुम्हारी हरकत के कारण ही लगता है। मेघना
  4086. 3:13:03तंज भरे स्वर में बोली अब जाकर शिपला ने
  4087. 3:13:07मेघना की बात के जवाब में कुछ नहीं कहा।
  4088. 3:13:09वह भावहीन चेहरे के साथ बस मेघना को देखती
  4089. 3:13:13रही। दूसरी तरफ शौर्य अपने कमरे में
  4090. 3:13:15पहुंचा। वह मालिनी को अपने फैसले से अवगत
  4091. 3:13:18करा देना चाहता था। इसीलिए उसने अपने कमरे
  4092. 3:13:21में पहुंचकर दरवाजा बंद कर लिया। वह सोचने
  4093. 3:13:24लगा कि क्या अभी मालिनी से बात करना सही
  4094. 3:13:26होगा। फिर खुद ही उसका सर इंकार में हिलने
  4095. 3:13:30लगा। तभी उसे ध्यान आया कि वह क्यों ना
  4096. 3:13:33रत्नाकर शेट्टी से इस बारे में बात कर ले।
  4097. 3:13:36यह सोचकर उसने अपना मोबाइल निकाला और
  4098. 3:13:39रत्नाकर शेट्टी का नंबर डायल करने लगा।
  4099. 3:13:42थोड़ी देर बाद ही दूसरी तरफ से फोन उठाया
  4100. 3:13:44गया और उसके कानों में रत्नाकर शेट्टी की
  4101. 3:13:47आवाज पड़ी और मिस्टर सरवन कहिए कैसे याद
  4102. 3:13:50किया शौर्य रत्नाकर शेट्टी की बात सुनकर
  4103. 3:13:53बोला मिस्टर शेट्टी मैं कल सुबह आपसे
  4104. 3:13:56मिलना चाहता हूं शौर्य की इस बात को सुनकर
  4105. 3:13:59रत्नाकर शेट्टी खुश होता हुआ बोला जरूर
  4106. 3:14:03मिस्टर श्रवण कहिए मैं आपसे मिलने कहां आ
  4107. 3:14:05जाऊं नहीं आपको आने की कोई जरूरत नहीं है
  4108. 3:14:07मिस्टर शेट्टी मैं ही सुबह 9:00 बजे आपके
  4109. 3:14:10पास होटल रिगल में आता हूं। बाकी बातें
  4110. 3:14:13वहीं पर होंगी। पर हां, आप सुबह मिस
  4111. 3:14:16मालिनी को भी बुला लीजिएगा। मैं चाहता हूं
  4112. 3:14:18उनके सामने ही सारी बात हो जाए। शौर्य
  4113. 3:14:21बोला, शौर्य की बात सुनकर रत्नाकर शेट्टी
  4114. 3:14:24को उम्मीद बंधी कि शौर्य उसकी मूवी में
  4115. 3:14:27काम करने को तैयार हो गया होगा। अब आगे
  4116. 3:14:29क्या होगा? हंसल मेहता की पार्टी में क्या
  4117. 3:14:32गुल खेलेगा। दूसरे दिन शौर्य समय से होटल
  4118. 3:14:34रिगल पहुंच गया। जहां रत्नाकर शेट्टी पहले
  4119. 3:14:38से ही उसका इंतजार कर रहा था। मालिनी अभी
  4120. 3:14:41आई नहीं थी इसलिए रत्नाकर शेट्टी अकेला ही
  4121. 3:14:44बैठा शौर्य का इंतजार कर रहा था। जब शौर्य
  4122. 3:14:48पहुंचा तो उसने रत्नाकर शेट्टी को अकेले
  4123. 3:14:51देखकर कहा क्या बात है शेट्टी साहब आप तो
  4124. 3:14:54अकेले हैं। मिस मालिनी कहीं दिख नहीं रही
  4125. 3:14:57है। वह भी बस पहुंचने ही वाली होंगी। अभी
  4126. 3:15:00थोड़ी देर पहले मेरी उनसे बात हुई थी जब
  4127. 3:15:03वह रास्ते में थी। रत्नाकर शेट्टी शौर्य
  4128. 3:15:06की बात सुनकर बोला और बताइए आपका बाकी सब
  4129. 3:15:10कैसा चल रहा है? शौर्य ने रत्नाकर शेट्टी
  4130. 3:15:13का हालचाल लेते हुए पूछा। आप जैसे लोगों
  4131. 3:15:16की कृपा से सब बढ़िया है? आप बताइए आप
  4132. 3:15:20अपने ऐड के शूट कब शुरू करने की सोच रहे
  4133. 3:15:22हैं? रत्नाकर शेट्टी काम की बात पर आते
  4134. 3:15:25हुए बोला। देखिए आज ही पता चल जाएगा। आज
  4135. 3:15:29जब नताशा कपूर शाम की पार्टी में आएंगी तो
  4136. 3:15:32उनसे बात करके शूटिंग का शेड्यूल फाइनल कर
  4137. 3:15:35लेंगे। आप अपनी तरफ से तो तैयार हैं।
  4138. 3:15:38शौर्य रत्नाकर शेट्टी से बोला आप मेरी
  4139. 3:15:42चिंता ना करें। मैं तो हमेशा तैयार रहता
  4140. 3:15:44हूं। बस एक बार आप शेड्यूल फाइनल कर
  4141. 3:15:47लीजिए। फिर आपको किसी भी चीज के लिए मुझे
  4142. 3:15:50बोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। रत्नाकर
  4143. 3:15:52शेट्टी खुशामद भरे स्वर में बोला, "आप तो
  4144. 3:15:56आज रात की पार्टी में आ रहे हैं ना। शौर्य
  4145. 3:15:58ने रत्नाकर शेट्टी से पूछा क्योंकि उसे
  4146. 3:16:01पता नहीं था कि हर्षल मेहता ने रत्नाकर
  4147. 3:16:04शेट्टी को आज रात वाली पार्टी में
  4148. 3:16:07आमंत्रित किया है कि नहीं। हां हां मैं आ
  4149. 3:16:10रहा हूं। मेहता साहब ने मुझे पहले ही
  4150. 3:16:12इनवाइट कर रखा है। रत्नाकर शेट्टी
  4151. 3:16:15मुस्कुराते हुए बोला। इसी समय मालिनी वहां
  4152. 3:16:18पर तेजी से आई और शौर्य से अफसोस जाहिर
  4153. 3:16:21करते हुए बोली सॉरी मिस्टर सर्व मेरे कारण
  4154. 3:16:26आपको थोड़ा इंतजार करना पड़ा। इसकी कोई
  4155. 3:16:28जरूरत नहीं है मिस मालिनी। मुझे भी आए हुए
  4156. 3:16:31अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है इसलिए आपको
  4157. 3:16:34सॉरी फील करने की कोई जरूरत नहीं है।
  4158. 3:16:37शौर्य मालिनी को जवाब देते हुए बोला मुझे
  4159. 3:16:40अच्छा लगा कि आपने मुझे ज्यादा इंतजार
  4160. 3:16:43नहीं कराया और इतनी जल्दी आप मुझसे मिलने
  4161. 3:16:46के लिए आ गए। मालिनी शौर्य का धन्यवाद
  4162. 3:16:49करते हुए बोली इसके बाद अपनी बात को आगे
  4163. 3:16:53बढ़ाते हुए बोली आपने मेरे प्रपोजल के
  4164. 3:16:56बारे में क्या सोचा मिस्टर सरवन शौर्य कुछ
  4165. 3:16:59पल मालिनी की बात सुनकर सोचता रहा फिर वह
  4166. 3:17:02अपनी सोच से बाहर आते हुए बोला मैं आपको
  4167. 3:17:06अपना जवाब दूं उससे पहले मैं आपसे कुछ
  4168. 3:17:08पूछना चाहता हूं मालिनी ने जब शौर्य को
  4169. 3:17:10ऐसे बात करते देखा तो उसे समझ नहीं आया कि
  4170. 3:17:14श्रवण आखिर उससे और क्या जानना चाहता है
  4171. 3:17:17यह देखकर मालिनी शौर्य से बोली, ठीक है।
  4172. 3:17:21पूछो तुम क्या पूछना चाहते हो? यह प्रतीक
  4173. 3:17:24कौन है और आपका उससे क्या रिश्ता है?
  4174. 3:17:27शौर्य मालिनी की आंखों में देखते हुए
  4175. 3:17:29बोला। मालिनी को समझ नहीं आया कि शौर्य
  4176. 3:17:33प्रतीक के बारे में क्यों पूछ रहा है।
  4177. 3:17:35उसको क्या जरूरत है उसके पर्सनल में आने
  4178. 3:17:38की? यह सोचकर उसने शौर्य से सवाल किया।
  4179. 3:17:42क्या मैं जान सकती हूं कि तुम प्रतीक के
  4180. 3:17:45बारे में क्यों पूछ रहे हो? जरूर जान सकती
  4181. 3:17:48हो। दरअसल जब मैं कल यहां से निकला था
  4182. 3:17:51उसके बाद रास्ते में मुझे प्रतीक ने अपने
  4183. 3:17:54कुछ कुन्नों के साथ घेर लिया था और मुझे
  4184. 3:17:56वार्निंग देकर छोड़ा कि मैं आगे से तुमसे
  4185. 3:17:59ना मिलूं। काम करने की तो बात ही दूर है।
  4186. 3:18:03शौर्य ने अपनी और प्रतीक के बीच का वाक्य
  4187. 3:18:06मालिनी को सुनाया। शौर्य की बात सुनकर
  4188. 3:18:09मालिनी का चेहरा गुस्से से लाल हो गया।
  4189. 3:18:12उसका तो मन कर रहा था वह अभी प्रतीक के
  4190. 3:18:14पास जाए और जमकर उसकी क्लास ले। लेकिन
  4191. 3:18:17पहले उसे शौर्य के साथ अपना मामला सेट
  4192. 3:18:20करना था। देखो हमारा और प्रतीक का ऐसा कोई
  4193. 3:18:23खास रिश्ता नहीं है। पर यह है कि उसके
  4194. 3:18:26पापा और मेरे पापा दोनों चाहते हैं कि मैं
  4195. 3:18:30और प्रतीक शादी कर ले। पर अभी मैं इतनी
  4196. 3:18:33जल्दी शादी करने के मूड में नहीं हूं। पर
  4197. 3:18:36प्रतीक मानने को तैयार नहीं हो रहा है। तो
  4198. 3:18:39मैंने भी उसे बोल दिया अब तुमको जो करना
  4199. 3:18:42है करते रहो। पर मैं अब भी तुमसे शादी
  4200. 3:18:45नहीं करूंगी। पर अगर कल उसने तुमको धमकाने
  4201. 3:18:48की कोशिश की है तो मैं इस बात को इतनी
  4202. 3:18:51आसानी से जाने नहीं दूंगी। उसे इस बात का
  4203. 3:18:54जवाब देना पड़ेगा। मालिनी शौर्य की बात
  4204. 3:18:57सुनकर प्रतीक पर भड़कते हुए बोली अगर ऐसी
  4205. 3:19:01बात है तो फिर मैं तुम्हारे प्रपोजल को
  4206. 3:19:04स्वीकार करने को तैयार हूं। शौर्य मालिनी
  4207. 3:19:07की बात सुनने के बाद इत्मीनान से बोला
  4208. 3:19:10मालिनी ने जब यह सुना कि शौर्य उसकी मूवी
  4209. 3:19:13में काम करने को तैयार है तो वह खुश होकर
  4210. 3:19:16बोले थैंक यू थैंक यू सो मच। थैंक यू।
  4211. 3:19:20मुझे बोलने की जरूरत नहीं है। अगर तुमको
  4212. 3:19:23किसी को थैंक यू बोलना ही है तो तुम मेघना
  4213. 3:19:26को बोल देना। क्योंकि मैं तो पहले मना ही
  4214. 3:19:28कर रहा था। पर मेघना ने मुझे समझाया यह
  4215. 3:19:32उसकी जिद ही है कि मैं तुम्हारी मूवी में
  4216. 3:19:35काम करने को तैयार हो गया। नहीं तो जिस
  4217. 3:19:38तरह प्रतीक ने मेरा रास्ता रोक कर मुझे
  4218. 3:19:40धमकाया उससे तो मैं और निश्चित हो गया था
  4219. 3:19:44कि मुझे तुम्हारे साथ काम ही नहीं करना
  4220. 3:19:46है। पर मेघना से बात होने के बाद मैं इस
  4221. 3:19:50काम को करने के लिए तैयार हो गया। अब तुम
  4222. 3:19:53देख लेना तुम्हें प्रतीक से कैसे निपटना
  4223. 3:19:56है। शौर्य इत्मीनान से बोला। तुम उसकी
  4224. 3:19:59चिंता छोड़ दो। उससे तो मैं निपट लूंगी।
  4225. 3:20:02पर तुमने मेरा प्रपोजल स्वीकार करके मेरा
  4226. 3:20:05काम आसान कर दिया। इतना बोलकर मालिनी
  4227. 3:20:08रत्नाकर शेट्टी की ओर मुरी और उनसे बोली
  4228. 3:20:11अब तो सब कुछ पक्का है रत्नाकर जी इसलिए
  4229. 3:20:14आप शूटिंग के लिए शेड्यूल फाइनल कर लीजिए।
  4230. 3:20:17फिर हम उस हिसाब से आगे बढ़ेंगे। मालिनी
  4231. 3:20:20ने जवाब दिया। मुझे प्रतीक की कोई चिंता
  4232. 3:20:24नहीं है और ना ही उसका कोई खौफ है। मैं तो
  4233. 3:20:27बस ऐसा इसलिए बोला क्योंकि वह हमारे बीच
  4234. 3:20:30में आ रहा था। अब अगर आगे भी उसने ऐसी
  4235. 3:20:32हरकत की तो फिर मैं खुद ही उसे अच्छे से
  4236. 3:20:35जवाब दूंगा। शौर्य बेपरवाह अंदाज में
  4237. 3:20:38मुस्कुराते हुए बोला। शौर्य का जवाब सुनकर
  4238. 3:20:42मालिनी को लगा कि शौर्य उसके सामने खुद को
  4239. 3:20:45कुछ ज्यादा ही पावरफुल दिखाने की कोशिश कर
  4240. 3:20:48रहा है। अच्छा अभी छोड़ो इन बातों को। अब
  4241. 3:20:52तुम मुझे यह बताओ कि क्या तुम फिल्म की
  4242. 3:20:55स्टोरी को सुनना चाहोगे? अगर हां तो फिर
  4243. 3:20:57एक बार तुम रत्नाकर शेट्टी के साथ बैठकर
  4244. 3:21:00स्टोरी को सुन लेना। मालिनी ने शौर्य को
  4245. 3:21:04कहा। ठीक है मैं रत्नाकर शेट्टी से इस
  4246. 3:21:07बारे में बात कर लूंगा। शौर्य एक नजर
  4247. 3:21:10रत्नाकर शेट्टी की ओर देखकर फिर से मालिनी
  4248. 3:21:13की ओर देखता हुआ बोला। इसी बीच मालिनी ने
  4249. 3:21:16सबके लिए खाने का आर्डर कर दिया था वेटर
  4250. 3:21:19ने। जल्दी से सबके सामने प्लेट लगा दिया।
  4251. 3:21:22खाना खाने के बाद शौर्य ने मालिनी से वहां
  4252. 3:21:26से जाने की इजाजत मांगी। मालिनी ने भी अब
  4253. 3:21:28शौर्य को रोकना सही नहीं समझा। होटल रीगल
  4254. 3:21:32से निकलकर शौर्य सीधा होटल राजकमल पहुंचा।
  4255. 3:21:35वह सीधा मेनका केबिन में पहुंच गया। अभी
  4256. 3:21:38वह मेनका के सामने वाले चेयर पर बैठने के
  4257. 3:21:41सोच ही रहा था कि तभी उसकी निगाह बगल वाली
  4258. 3:21:45चेयर पर पहले से बैठे शख्स पर पड़ा। जो
  4259. 3:21:48कोई और नहीं हर्षल मेहता था। शौर्य ने
  4260. 3:21:51हर्षल मेहता को यहां देखा तो उसने उनसे
  4261. 3:21:53पूछा
  4262. 3:21:55अरे मेहता साहब आप यहां आज तो स्ट्रांग
  4263. 3:21:59एनर्जी ड्रिंक की इनोग्रल पार्टी है। आपको
  4264. 3:22:02तो अभी सनशाइन होटल में पार्टी की
  4265. 3:22:04तैयारियों में लगे होना चाहिए था। आप उसकी
  4266. 3:22:07चिंता ना करें। मिस्टर श्रवण सारी
  4267. 3:22:09तैयारियां अच्छे से हो गई हैं। बाकी मेरी
  4268. 3:22:11बेटी देख रही हैं। हर्षल मेहता आश्वासन
  4269. 3:22:15भरे स्वर में बोला। अगर ऐसा है तो बढ़िया
  4270. 3:22:18है। शौर्य आश्वस्त होते हुए बोला, मिस्टर
  4271. 3:22:22श्रवण, मैंने वहां मीडिया को भी आमंत्रित
  4272. 3:22:25किया हुआ है। अगर आप कहेंगे तो आपके बारे
  4273. 3:22:27में भी यह प्रेस रिलीज कर दिया जाएगा कि
  4274. 3:22:30अब इस कंपनी के 90 हार्ड शेयर के मालिक आप
  4275. 3:22:33हैं। अगर ऐसा है तो आप विक्रम को ही फ्रंट
  4276. 3:22:37पर रखिएगा। अभी मेरा नाम सामने नहीं आना
  4277. 3:22:40चाहिए। शौर्य की बात सुनकर हंसल मेहता
  4278. 3:22:44आश्वस्त हुआ। उन्होंने शौर्य से कहा, मैं
  4279. 3:22:47भी अब निकलने वाला ही हूं। पार्टी शुरू
  4280. 3:22:49होने से पहले तो मैं पहुंच ही जाऊंगा। फिर
  4281. 3:22:52भी आपके यहां होने का कोई खास मकसद है
  4282. 3:22:55क्या? शौर्य हंसल मेहता के यहां होने का
  4283. 3:22:58कारण जानना चाहता था। हां, वह जो हम नया
  4284. 3:23:01फर्म को रजिस्टर करने जा रहे हैं। उसी से
  4285. 3:23:04संबंधित कुछ फॉर्मेलिटी थी जिसके लिए मेरा
  4286. 3:23:06यहां आना हुआ। हर्षल मेहता ने कहा बाद
  4287. 3:23:09शौर्य को समझ में आया। उसने देखा हर्षल
  4288. 3:23:12मेहता के हाथों में एक फाइल था। शौर्य एक
  4289. 3:23:15चेयर खींचकर उसमें बैठते हुए बोला, आपने
  4290. 3:23:18फर्म को रजिस्टर करवा लिया। हां, अब तो सब
  4291. 3:23:20कुछ फाइनल हो गया है। आप भी एक बार इस
  4292. 3:23:22फाइल को देख लीजिए। इतना कहकर हर्षल मेहता
  4293. 3:23:25ने अपने हाथ का फाइल शौर्य की तरफ बढ़ा
  4294. 3:23:28दिया। शौर्य ने अच्छे से एक बार उस पूरे
  4295. 3:23:31फाइल का मुआयना किया। उसने देखा कि हर्षल
  4296. 3:23:34मेहता ने जो नया फॉर्म रजिस्टर करवाया था,
  4297. 3:23:36वह भी डीम्स इंडिया के नाम से ही करवाया
  4298. 3:23:38था। डिम्स इंडिया डेवलपर के नाम से
  4299. 3:23:40रजिस्टर्ड इस कंपनी में शौर्य 80% का
  4300. 3:23:43हिस्सेदार था और हंसल मेहता 20% का। शौर्य
  4301. 3:23:48फाइल को अच्छी तरह देखने के बाद हंसल
  4302. 3:23:50मेहता को वापस करते हुए बोला बहुत बढ़िया
  4303. 3:23:53मेहता साहब। अब आप जितनी जल्दी हो सके
  4304. 3:23:56उतनी जल्दी जमीन अधिग्रह के काम में लग
  4305. 3:23:58जाइए। जितना ज्यादा से ज्यादा जमीन हो सके
  4306. 3:24:01आप अपने नाम करवाइए। एक बार जमीन अधिग्रह
  4307. 3:24:04होने के बाद फिर हम पूरे लेआउट को लेकर
  4308. 3:24:07बात करेंगे। फिर देखेंगे कि हमें
  4309. 3:24:09क्या-क्या प्रोजेक्ट को लेकर आगे बढ़ना
  4310. 3:24:12है। जमीन अधिग्रह को लेकर भी हमारी बात चल
  4311. 3:24:14रही है। बहुत सारी बातें फाइनल हो चुकी
  4312. 3:24:16हैं। बस हमें जाकर रजिस्ट्री करवानी है।
  4313. 3:24:19अब क्योंकि हमारी कंपनी रजिस्टर हो गई है।
  4314. 3:24:23इसलिए कल से हम इसी काम में लग जाएंगे।
  4315. 3:24:26हंसल मेहता ने शौर्य को जवाब दिया। बढ़िया
  4316. 3:24:29है। अगर आपको मेरी किसी तरह की जरूरत कभी
  4317. 3:24:31महसूस हो तो आप हमें कह सकते हैं। बाकी
  4318. 3:24:34आपकी मदद के लिए विक्रम और मैनका तो है
  4319. 3:24:37ही। शौर्य संतुष्ट भाव से बोला अभी तो सब
  4320. 3:24:41ठीक चल रहा है। पर शायद जल्दी ही आपकी मदद
  4321. 3:24:44की भी जरूरत पड़े क्योंकि अब बहुत से लोग
  4322. 3:24:47वहां पर जमीन लेने में अपना इंटरेस्ट
  4323. 3:24:48दिखाने लगे हैं। इसलिए मुझे लगता है कुछ
  4324. 3:24:51समय में जमीन खरीदने के लिए भी वहां पर
  4325. 3:24:53कंपटीशन होने वाली है। हंसल मेहता ने अपनी
  4326. 3:24:56शंका जाहिर की। दूसरी तरफ शिप्रा और मेघना
  4327. 3:25:00मॉडल टाउन वाली कोठी में ही मौजूद थे। वह
  4328. 3:25:03दोनों आज कहीं निकले नहीं थे। आज शिप्रा
  4329. 3:25:06ने आधा दिन लगभग अपने कमरे को सजाने में
  4330. 3:25:08ही लगा दिया था क्योंकि शिप्रा को अब यह
  4331. 3:25:11जगह राश आने लगी थी। शिप्रा को इस जगह का
  4332. 3:25:14एनवायरमेंट बहुत पसंद आ रहा था। सबसे बड़ी
  4333. 3:25:17बात थी कि कोठी को लेकर उसके मन में एक
  4334. 3:25:19अपनत्व की भावना जागृत हो गई थी। वह यह
  4335. 3:25:23फील करने लगी थी कि यह उसकी अपनी कोठी है।
  4336. 3:25:27जबकि अपने पापा के घर में वह कभी इस तरह
  4337. 3:25:30की फीलिंग को महसूस नहीं कर पाई थी और
  4338. 3:25:32इसका सबसे बड़ा कारण यह था कि वह यह मानकर
  4339. 3:25:35चल रही थी कि उसे पूरी जिंदगी शौर्य की
  4340. 3:25:38पत्नी के रूप में ही रहना है। जहां तक
  4341. 3:25:41बच्चे की बात है, उसके लिए उसने यह प्लान
  4342. 3:25:43कर लिया था कि वह आईवीएफ के थ्रू बच्चे भी
  4343. 3:25:46कर ही लेंगी। शिप्रा के मन में अभी-अभी यह
  4344. 3:25:49भी चलने लगा था कि वह शौर्य से बात करके
  4345. 3:25:53जल्दी ही बच्चे की प्लानिंग करेगी क्योंकि
  4346. 3:25:55वह नहीं चाहती थी कि बाद में कभी श्रवण का
  4347. 3:25:58माइंड चेंज हो। इसलिए वह श्रवण का मन चेंज
  4348. 3:26:01हो। उससे पहले इस चीज को अमल में लाना
  4349. 3:26:03चाहती थी। इसके बारे में वह आज पूरे दिन
  4350. 3:26:07सोचती रही। इस समय मेघना उसके बगल में
  4351. 3:26:09लेटी हुई थी। जब शिप्रा का मन ज्यादा
  4352. 3:26:12सोचने की स्थिति में नहीं रहा तो उसने
  4353. 3:26:14मेघना से पूछा मेघना मेरे दिमाग में कुछ
  4354. 3:26:18विचार चल रहे हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा है
  4355. 3:26:20कि मैं यह सही सोच रही हूं कि नहीं। मेघना
  4356. 3:26:23ने पलट कर शिप्रा की ओर देखा। वह पहले से
  4357. 3:26:25ही यह महसूस कर रही थी कि वह किसी विचार
  4358. 3:26:28में खोई हुई है। पर उसने उसे डिस्टर्ब
  4359. 3:26:30करना ठीक नहीं समझा। इसलिए वह चुपचाप बेड
  4360. 3:26:34पर पड़ी अपने मोबाइल में उलझी रही। जब
  4361. 3:26:37उसने शिप्रा की बात को सुना तो उसने पूछा
  4362. 3:26:41ऐसा क्या विचार चल रहा है तुम्हारे दिमाग
  4363. 3:26:43में जो तुम कुछ सोच नहीं पा रही या निश्चय
  4364. 3:26:47नहीं कर पा रही हो मैं बच्चे करने की सोच
  4365. 3:26:49रही हूं तुम क्या सोचती हो क्या मेरा यह
  4366. 3:26:52निर्णय ठीक है शिप्रा मेघना की ओर देखती
  4367. 3:26:55हुई बोली बच्चे करने की सोच रही हो
  4368. 3:26:58तुम्हारा दिमाग तो ठीक है क्या चल रहा है
  4369. 3:27:00तुम्हारे दिमाग में मेघना हैरान होकर बोली
  4370. 3:27:04सीरियसली मैं सोच रही हूं कि मुझे मुझे
  4371. 3:27:07बच्चे कर लेना चाहिए। इसके बाद फिर कोई भी
  4372. 3:27:09मुझे श्रवण से तलाक लेने के लिए नहीं
  4373. 3:27:11कहेगा। शिप्रा मेघना को समझाने वाले भाव
  4374. 3:27:14में बोली। उससे क्या होगा? और फिर बच्चे
  4375. 3:27:17कर लेना इतना आसान है क्या? मेघना बोली
  4376. 3:27:21अरे अभी से प्लानिंग करूंगी तब तो साल
  4377. 3:27:23जाते-जाते मैं मां बन सकती हूं। शिप्रा
  4378. 3:27:26नॉर्मल भाव में बोली। मुझे तुम एक बात
  4379. 3:27:29बताओ। तुम्हें यह अचानक बच्चे करने की
  4380. 3:27:31क्या सूझी? मेघना असमंजस के भाव में बोली
  4381. 3:27:35और मान लो अगर तुम बच्चे करना भी चाहती हो
  4382. 3:27:37तो वह करोगी कैसे यह कोई बड़ी बात नहीं है
  4383. 3:27:40मैं आईवीएफ के द्वारा बच्चा करूंगी इसको
  4384. 3:27:43लेकर मेरे और श्रवण के बीच पहले ही बात हो
  4385. 3:27:45चुकी है उसे भी इस बात से कोई ऐतराज नहीं
  4386. 3:27:48है शिप्रा बड़ी मासूमियत से बोली यानी यह
  4387. 3:27:51बच्चा तुम्हारा और श्रवण का होगा मेघना ने
  4388. 3:27:54पूछा तो और किसका होगा हम दोनों के साथ
  4389. 3:27:57रहने की कंडीशन ही यही थी शिप्रा ने बताया
  4390. 3:28:01तुम मुझे मुझे एक बात बताओ जब बच्चा तुम
  4391. 3:28:03दोनों का ही होगा तो फिर आईवीएफ से करने
  4392. 3:28:06की क्या जरूरत है? मेघना शिप्रा से प्रश्न
  4393. 3:28:09करती हुई बोली क्या मतलब हुआ इस बात का?
  4394. 3:28:13अगर मुझे बच्चे करने हैं तो अपने आप तो
  4395. 3:28:15होगा नहीं ना। उसके लिए तो आईवीएफ के
  4396. 3:28:18द्वारा ही बच्चे कर सकती हूं। शिप्रा बोली
  4397. 3:28:21क्यों आईवीएफ? क्यों? दो रात दोनों साथ
  4398. 3:28:23में बिताओ। देखो कुछ ही दिनों में तुम्हें
  4399. 3:28:26किसी आईवीएफ की जरूरत नहीं होगी। मेघना
  4400. 3:28:29हल्की मुस्कान के साथ बोली। अब जाकर
  4401. 3:28:32शिप्रा को मेघना की बात समझ में आई कि वह
  4402. 3:28:35क्या कहना चाहती है। वह थोड़ी नाराजगी से
  4403. 3:28:38बोली तुम्हें हम दोनों की कंडीशन पता है।
  4404. 3:28:41उसके बाद भी तुम ऐसी बात बोल रही हो। जो
  4405. 3:28:43नहीं हो सकता उसकी बात क्यों करना? क्यों?
  4406. 3:28:47क्यों ऐसा नहीं हो सकता? तुम्हारी यह जिद
  4407. 3:28:49किस लिए? देखो श्रवण बहुत अच्छा लड़का है।
  4408. 3:28:52वो तुमसे दूर हो जाए। उससे पहले उसे अपने
  4409. 3:28:55करीब ले आओ। नहीं तो बाद में कहीं ऐसा ना
  4410. 3:28:57हो कि तुम उसे इतना दूर कर दो कि फिर
  4411. 3:28:59चाहकर भी उसके करीब ना जा सको। मेघना शुरा
  4412. 3:29:03को समझाती हुई बोली तुम क्यों इस कोशिश
  4413. 3:29:06में लगी हो जो नहीं हो सकता। मैंने
  4414. 3:29:09तुम्हें पहले ही हम दोनों के बीच की
  4415. 3:29:11कंडीशन को बता दिया है क्योंकि मुझे
  4416. 3:29:13दोबारा किसी से शादी नहीं करनी है। इसीलिए
  4417. 3:29:16श्रवण मुझे पति के रूप में चाहिए और उसे
  4418. 3:29:18भी इससे कोई आपत्ति नहीं है। इस रिश्ते को
  4419. 3:29:21बांधने के लिए जो करी चाहिए वह है एक
  4420. 3:29:24बच्चा जो कि हम दोनों का होगा। क्योंकि
  4421. 3:29:27मुझे भी बच्चे पसंद है। इसीलिए मैं किसी
  4422. 3:29:30सरोगेसी में ना जाकर खुद मां बनना चाहती
  4423. 3:29:32हूं। जब मेरे बच्चे हो जाएंगे तो वह करीबी
  4424. 3:29:35बन जाएगी जो हमारे रिश्ते को मजबूती
  4425. 3:29:37प्रदान करेगा। शिप्रा ने अपनी बात को
  4426. 3:29:40स्पष्ट किया। एक बात तो माननी पड़ेगी कि
  4427. 3:29:43तुम दोनों ही नमूने हो। किसी को सीधी बात
  4428. 3:29:45समझ ही नहीं आती। दोनों एक दूसरे के साथ
  4429. 3:29:48पति-पत्नी बनकर रहना पसंद करते हैं और
  4430. 3:29:50पतिप्नी का जो रिश्ता है वो नहीं बनाना।
  4431. 3:29:53बच्चे दोनों को चाहिए पर तरीका ईवीएफ का।
  4432. 3:29:57एक घर में रहना है पर कमरा एक नहीं करना।
  4433. 3:30:00तुम दोनों को कोई नहीं समझा सकता। जब सब
  4434. 3:30:03अपनी मन का ही कर रही हो तो यह पूछकर हम
  4435. 3:30:06पर इतना एहसान क्यों कर रही हो? मेघना
  4436. 3:30:08चिढ़ती हुई बोली शिप्रा ने जब देखा कि
  4437. 3:30:11मेघना नाराज ही रही है तो वह बात को टालते
  4438. 3:30:14हुए बोली अच्छा ठीक है तुम रहने दो मैं
  4439. 3:30:17तुमसे नहीं पूछती मैं खुद ही देख लूंगी कि
  4440. 3:30:20मुझे क्या करना है तुम नाराज मत हो मैं
  4441. 3:30:22क्यों नाराज होऊंगी तुम पर और मैं तुम पर
  4442. 3:30:25नाराज होकर भी क्या कर लूंगी मेघना इरिटेट
  4443. 3:30:28होकर बोली अच्छा छोड़ो इन बातों को पता है
  4444. 3:30:31ना आज होटल सन साइन भी जाना है शिप्रा
  4445. 3:30:35मेघना को याद दिलाती हुई बोली शिप्रा की
  4446. 3:30:37बात सुनकर मेघना ने घड़ी की ओर देखा। इस
  4447. 3:30:40समय 4:00 बजने वाले थे। वह जल्दी से
  4448. 3:30:43बिस्तर से उठकर बैठ गई और शिप्रा से बोली,
  4449. 3:30:46अभी तुम्हें पार्टी के लिए तैयार होना
  4450. 3:30:48चाहिए। तो तुम इन फालतू की बातों को लेकर
  4451. 3:30:51बैठी हुई हो। अच्छा तुम्हें मेरी यह बातें
  4452. 3:30:54फालतू की लग रही है। ठीक है फिर। मैं आगे
  4453. 3:30:58से तुमसे कभी इस बारे में बात ही नहीं
  4454. 3:30:59करूंगी। शिप्रा भीड़ उठती हुई बोली। बस बस
  4455. 3:31:03हो गया। अब ज्यादा ड्रामा करने की जरूरत
  4456. 3:31:06नहीं है। जल्दी से तैयार हो जाओ और मुझे
  4457. 3:31:08भी तैयार होने दो। इस पार्टी में ज्यादा
  4458. 3:31:12लेट होने की जरूरत नहीं है। पता नहीं आज
  4459. 3:31:14तुम्हारे लिए वहां पर कौन सा सरप्राइज
  4460. 3:31:16इंतजार कर रहा है। मेघना शिप्रा को झरकती
  4461. 3:31:19हुई बोली। शिप्रा जल्दी से उठी और बाथरूम
  4462. 3:31:22में चली गई। मेघना प्यार से मुस्कुराती
  4463. 3:31:24हुई शिप्रा को देखती रही। दूसरी तरफ होटल
  4464. 3:31:28राजकमल में शौर्य को यह ध्यान आने पर कि
  4465. 3:31:31उसके दादा जी ने कहा था कि हर्षल मेहता कि
  4466. 3:31:35पार्टी में वह पहले से इनवाइटेड है। यह
  4467. 3:31:37याद करके उसने हर्षल मेहता से पूछा मेहता
  4468. 3:31:41साहब क्या आपने आज की पार्टी में राजा
  4469. 3:31:46साहब को भी आमंत्रित किया है। शौर्य की
  4470. 3:31:48बात सुनकर हर्षल मेहता आश्चर्य से शौर्य
  4471. 3:31:51को देखने लगा और सोचने लगे कि यह बात
  4472. 3:31:54शौर्य को कैसे पता? उन्होंने शौर्य से
  4473. 3:31:57पूछा भी आपको यह कैसे पता है? हां, मैंने
  4474. 3:32:00उन्हें भी इनवाइट किया है। पर वह शायद ही
  4475. 3:32:03आए। हर्षल मेहता की बात सुनकर शौर्य
  4476. 3:32:06मुस्कुराया और बोला, "मेरी उनसे बात हुई
  4477. 3:32:08थी तो उन्होंने बताया था। वैसे मैं आपकी
  4478. 3:32:11जानकारी के लिए बता दूं कि आज की पार्टी
  4479. 3:32:13में वह भी आएंगे। शिप्रा मेघना के साथ
  4480. 3:32:16होटल क्षण शाइन पहुंची। उसने घड़ी पर
  4481. 3:32:18निगाह डाली तो उसने देखा 7:30 बजने वाले
  4482. 3:32:22थे। वह मेघना की ओर देखकर बोली, कहीं हम
  4483. 3:32:26लोग ज्यादा जल्दी तो नहीं आ गए। अब यहां आ
  4484. 3:32:28जाने के बाद यह सोचने का क्या मतलब? वैसे
  4485. 3:32:31भी 8:00 बजे स्ट्रांग एनर्जी ड्रिंक की
  4486. 3:32:33लॉन्चिंग होने वाली है। इसलिए मुझे नहीं
  4487. 3:32:36लगता कि हम लोग जल्दी आए हैं। मेघना मुंह
  4488. 3:32:39बनाती हुई बोली। पता नहीं क्यों पर मुझे
  4489. 3:32:42थोड़ी घबराहट हो रही है। शिप्रा होटल की
  4490. 3:32:45तरफ बढ़ती हुई बोली। तुम्हें किस बात के
  4491. 3:32:48लिए घबराहट हो रही है। तुम पहली बार तो इस
  4492. 3:32:52तरह की पार्टी में नहीं जा रही हो। मेघना
  4493. 3:32:55आश्चर्य से बोली, अरे यह बात नहीं है।
  4494. 3:32:58तुम्हें याद नहीं है। मोहित रैना ने कहा
  4495. 3:33:01था कि मुझे इस पार्टी में कोई जिम्मेदारी
  4496. 3:33:03मिल सकती है। बस इसी बात को लेकर। वैसे
  4497. 3:33:06मेरी समझ में यह भी नहीं आया कि यह पार्टी
  4498. 3:33:08हर्षल मेहता दे रहा है। फिर मोहित रैना ने
  4499. 3:33:11हमें इस पार्टी में क्यों इनवाइट किया है।
  4500. 3:33:14शिप्रा सोच भरे स्वर में बोली, कमाल है।
  4501. 3:33:18तुम्हें यह सब बातें अब ध्यान आ रही हैं।
  4502. 3:33:20तुम्हें पहले इस बारे में नहीं सोचना
  4503. 3:33:22चाहिए था। मेघना नाराजगी से बोली अरे उस
  4504. 3:33:27समय यह सोचने का मौका ही नहीं मिला। वह तो
  4505. 3:33:30यहां आने के बाद जब इस बैनर को देखा तो
  4506. 3:33:33ध्यान आया कि यह पार्टी तो हर्षल मेहता के
  4507. 3:33:36द्वारा दिया जा रहा है। फिर मोहित रैना ने
  4508. 3:33:40हमें यहां आने का इनविटेशन क्यों दिया है?
  4509. 3:33:42शिप्रा होटल के सामने एक बैनर की तरफ
  4510. 3:33:45इशारा करती हुई बोली जिस पर वह सारी
  4511. 3:33:48इंफॉर्मेशन दिया हुआ था कि यह पार्टी
  4512. 3:33:51किसके द्वारा दिया जा रहा है और किस हॉल
  4513. 3:33:53में होने जा रहा है अरे तो तुम इस बात से
  4514. 3:33:56क्यों घबरा रही हो हमारे पास इनविटेशन
  4515. 3:33:58कार्ड तो है फिर क्या फर्क पड़ता है कि
  4516. 3:34:01हमें किसने इनवाइट किया और कौन यहां
  4517. 3:34:02पार्टी दे रहा है मेघना चिढ़ती हुई बोली
  4518. 3:34:06मेरी चिंता करने की बात दूसरी है शिप्रा
  4519. 3:34:09बेचारगी से मेघना की ओर देखती हुई बोली अब
  4520. 3:34:12वो दूसरी कौन सी बात है वो भी बता दो।
  4521. 3:34:15मेघनाथ चलते-चलते खड़ी हो गई और शिप्रा की
  4522. 3:34:18ओर एक टक देखती हुई बोली मानसी मेहता
  4523. 3:34:21हर्षल मेहता की बेटी शिप्रा बोली मानसी
  4524. 3:34:24मेहता पर वह तुम्हारे लिए चिंता का कारण
  4525. 3:34:27कैसे हो गई? मेघना हैरान स्वर में बोली
  4526. 3:34:30देखो मोहित रैना ने मुझे इस पार्टी में
  4527. 3:34:32बुलाया है। कहीं ऐसा तो नहीं कि मुझे जो
  4528. 3:34:34दूसरी जिम्मेदारी देने की बात हो रही है।
  4529. 3:34:36कहीं वह हर्षल मेहता की ही कंपनी में तो
  4530. 3:34:38नहीं। शिपरा मेघना को समझाने की कोशिश
  4531. 3:34:41करती हुई बोली अगर एक मिनट के लिए इस बात
  4532. 3:34:44को मान भी लिया जाए कि मोहित रैना तुम्हें
  4533. 3:34:47हर्षल मेहता की कंपनी में ही कोई
  4534. 3:34:49जिम्मेदारी देने की बात कर रहा हो तो इस
  4535. 3:34:51बात से क्या फर्क पड़ता है मेघना को समझ
  4536. 3:34:54नहीं आ रहा था कि शिप्रा के लिए इसमें
  4537. 3:34:56परेशानी की क्या बात है अरे मैंने कहा ना
  4538. 3:34:59मानसी मेहता मैं और मानसी एक ही कोलाज में
  4539. 3:35:02पड़ती थी और हम दोनों दोस्त तो बिल्कुल ही
  4540. 3:35:05नहीं थे बल्कि एक दूसरे के प्रतिद्वंद
  4541. 3:35:08मानसी मेहता मुझे बिल्कुल ही पसंद नहीं
  4542. 3:35:11करती थी और सच तो यह है कि मैं भी उसे
  4543. 3:35:14पसंद नहीं करती थी। शिप्रा अपनी बात को
  4544. 3:35:17स्पष्ट करती हुई बोली। अब मेघना को शिप्रा
  4545. 3:35:20की बात कुछ-कुछ समझ में आने लगी। उसने
  4546. 3:35:23अपनी बड़ी आंखों से शिप्रा को घूरते हुए
  4547. 3:35:25पूछा। पर तुम दोनों एक दूसरे को पसंद
  4548. 3:35:27क्यों नहीं करती थी? मानसी मेहता बहुत
  4549. 3:35:30खूबसूरत है और कोलाज में एक मैं ही ऐसी थी
  4550. 3:35:33जो उसकी खूबसूरती को कहीं ना कहीं चैलेंज
  4551. 3:35:35करती थी। जो खास अटेंशन वह पाना चाहती थी।
  4552. 3:35:39मेरे कारण कहीं ना कहीं वह इसमें पीछे रह
  4553. 3:35:41जाती थी। पढ़ने में भी वह अच्छी थी। पर कल
  4554. 3:35:44आज की फाइनल एग्जाम में भी वह मुझसे पिछड़
  4555. 3:35:48गई। मैं फर्स्ट रैंक होल्डर थी और वह
  4556. 3:35:51सेकंड रैंक होल्डर। तो समझ ही सकती हो कि
  4557. 3:35:54मैं हर जगह उसका रास्ता काटती रही तो उसको
  4558. 3:35:57मुझसे कितना प्यार होगा और आज उसकी पार्टी
  4559. 3:35:59में जा रही है। पता नहीं मुझे अपनी पार्टी
  4560. 3:36:02में देखकर वह कैसे बिहेव करेगी। शिप्रा ने
  4561. 3:36:05अपनी चिंता जाहिर की। तो यह बात है कहीं
  4562. 3:36:08ऐसा ना हो कि आज फिर से तुम उसका रास्ता
  4563. 3:36:10काटने आ गई हो। मेघना हंसते हुए मजाक भरे
  4564. 3:36:14स्वर में बोली। वैसे तो मेरी उससे बहुत
  4565. 3:36:16समय से कोई मुलाकात नहीं हुई है। पर पता
  4566. 3:36:19नहीं आज मुझे यहां देखकर वह कैसे रिएक्ट
  4567. 3:36:22करेगी? शिप्रा चिंतित स्वर में बोली। तुम
  4568. 3:36:25क्यों चिंता करती हो? तुम यहां उसके
  4569. 3:36:27बुलाने से थोड़ी ही आई हो। तुम्हें यहां
  4570. 3:36:29मोहित रैना ने बुलाया है। इसलिए वह कैसे
  4571. 3:36:32रिएक्ट करती है या नहीं करती है। उससे
  4572. 3:36:34क्या फर्क पड़ता है? पहले अंदर तो चलो फिर
  4573. 3:36:38देखते हैं। मेघना शिप्रा की चिंता कम करती
  4574. 3:36:41हुई बोली। शिप्रा मेघना के साथ उस हॉल में
  4575. 3:36:44पहुंची जहां पार्टी हो रही थी। उसने जब उस
  4576. 3:36:46हॉल में कदम रखा तो वह सबसे पहले किसी ऐसे
  4577. 3:36:50चेहरे को ढूंढ रही थी जिसे वह जानती
  4578. 3:36:52पहचानती हो। पर ऐसा तो कोई उसे अभी नजर
  4579. 3:36:54नहीं आया। हां, एक खूबसूरत लड़की उसे हाल
  4580. 3:36:58के गेट के पास ही नजर आ गई जो वहां आने
  4581. 3:37:00वाले गेस्ट का स्वागत कर रही थी। एक्चुअली
  4582. 3:37:02वो लड़की कोई और नहीं मानसी मेहता ही थी।
  4583. 3:37:06दूर से ही मानसी मेहता की नजर शिप्रा पर
  4584. 3:37:08पड़ गई थी। शिप्रा को यहां देखकर उसकी
  4585. 3:37:11आंखों में आश्चर्य नजर आने लगा। उसे नहीं
  4586. 3:37:14पता था कि शिप्रा को यहां किसने इनवाइट
  4587. 3:37:16किया था। शिप्रा की भी नजर मानसी मेहता से
  4588. 3:37:19मिली। शिप्रा ने मानसी मेहता को अपनी तरफ
  4589. 3:37:21देखते पाया तो वह उस हल्के स्वर में
  4590. 3:37:24बुदबुदाई जिसका डर था वही हो गया। मैं
  4591. 3:37:27नहीं चाहती थी कि मेरी मुलाकात सबसे पहले
  4592. 3:37:29इसी से हो पर देखो अंदर आई तो सबसे पहले
  4593. 3:37:33इसी लड़की से सामना हो गया। शिप्रा की बात
  4594. 3:37:36सुनकर मेघना ने सामने से आ रही उस लड़की
  4595. 3:37:38की तरफ देखा जो कि शिप्रा की ओर ही बड़ी
  4596. 3:37:41हुई आ रही थी। वह भी मानसी मेहता की
  4597. 3:37:44खूबसूरती देखकर उसकी तारीफ किए बिना नहीं
  4598. 3:37:46रह सकी। उसने भी हल्के स्वर में शिप्रा से
  4599. 3:37:49कहा मानना पड़ेगा यह अभी खूबसूरती में
  4600. 3:37:52किसी से कम नहीं है। मैंने तो पहले ही कहा
  4601. 3:37:54था पर वह हमारी तरफ क्यों आ रही है?
  4602. 3:37:56शिप्रा फुसफुसाती हुई बोली चिंता मत करो
  4603. 3:37:59अभी पता चल जाएगा। वो खुद ही बोल देगी।
  4604. 3:38:02मेघना मानसी को पास आते देखकर बोली अब तक
  4605. 3:38:05मानसी मेहता भी शिप्रा और मेघना के पास आ
  4606. 3:38:08गई थी। उसके चेहरे पर एक मुस्कान खेल रही
  4607. 3:38:11थी। वह उसी मुस्कान के साथ बोली शिप्रा
  4608. 3:38:14राय आज बहुत समय के बाद तुम्हें देखना
  4609. 3:38:17होगा। मुझे नहीं पता था कि तुम भी आज की
  4610. 3:38:20पार्टी में इनवाइटेड हो। बुरा मत मानना।
  4611. 3:38:23पर क्या मैं जान सकती हूं कि तुम्हें यहां
  4612. 3:38:25किसने बुलाया है। अब जब मैं यहां आई हूं
  4613. 3:38:27तो पक्का है। किसी ने तो मुझे यहां बुलाया
  4614. 3:38:30ही होगा। तभी मैं यहां हूं। नहीं तो मेरी
  4615. 3:38:33ऐसी कोई बुरी आदत नहीं है कि मैं किसी की
  4616. 3:38:35पार्टी में बिन बुलाए ही पहुंच जाऊं।
  4617. 3:38:39शिप्रा भी व्यंग भरे स्वर में बोली। मैंने
  4618. 3:38:42तो पहले ही कहा था कि बुरा मत मानना। पर
  4619. 3:38:45तुम तो बुरा मान रही हो। यह तो मैं भी समझ
  4620. 3:38:47रही हूं कि जब तुम यहां आई हो तो इसका
  4621. 3:38:50मतलब है कि तुम यहां बिन बुलाए तो आई नहीं
  4622. 3:38:53होगी। मैं तो बस यह जानना चाह रही हूं कि
  4623. 3:38:55तुम्हें यहां इनवाइट किसने किया है। मानसी
  4624. 3:38:58मेहता बोली मानसी मेहता तो बस यह जानना
  4625. 3:39:02चाहती थी कि किसी ने अगर शिप्रा को यहां
  4626. 3:39:04इनवाइट किया तो उसे इसके बारे में पता
  4627. 3:39:07क्यों नहीं था। वह जानती थी कि लास्ट समय
  4628. 3:39:10में मेनका की तरफ से भी इस पार्टी में कुछ
  4629. 3:39:12लोगों को इनवाइट किया गया है। पर ऐसे
  4630. 3:39:15कितने लोग मेनका की तरफ से इनवाइटेड हैं
  4631. 3:39:18इसके बारे में मानसी को पता नहीं था।
  4632. 3:39:20शिप्रा भी मानसी को कोई जवाब देती उससे
  4633. 3:39:22पहले ही वहां एक आवाज सुनाई दी। मिस मानसी
  4634. 3:39:26इन्हें मैंने इनवाइट किया है। शिप्रा जी
  4635. 3:39:28यहां मेरी गेस्ट है। आप कुछ और भी जानना
  4636. 3:39:30चाहती हैं। तभी मानसी के पीछे से वहां
  4637. 3:39:33मोहित रैना प्रकट हुआ और वह सामने आते हुए
  4638. 3:39:35बोला। मानसी ने जब मोहित रैना को सामने
  4639. 3:39:38आकर यह बताते देखा कि उसने ही यहां शिप्रा
  4640. 3:39:41को इनवाइट किया है तो वह खुद को संयमित
  4641. 3:39:44करती हुई बोली। अरे मिस्टर मोहित आप मुझे
  4642. 3:39:48नहीं पता था कि शिप्रा को आपने यहां
  4643. 3:39:50बुलाया है। मैं तो बस यही जानने के लिए
  4644. 3:39:52शिप्रा से पूछ रही थी। अच्छा हुआ आपने बता
  4645. 3:39:55दिया। वैसे मैं आपको बता दूं कि हम दोनों
  4646. 3:39:58पहले से ही एक दूसरे से परिचित हैं। हम
  4647. 3:40:01दोनों कॉलेज के समय के फ्रेंड हैं। मानसी
  4648. 3:40:04की बात सुनकर मोहित ने शिप्रा की ओर देखा।
  4649. 3:40:07जैसे वह पूछ रहा हो कि क्या मानसी जो कह
  4650. 3:40:10रही है वह सच है। शिप्रा ने जब मोहित के
  4651. 3:40:13चेहरे के भाव को देखा तो वह भी व्यवहार
  4652. 3:40:15सुलभ मुस्कान के साथ बोली। हां बिल्कुल सच
  4653. 3:40:19है। हम दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते थे।
  4654. 3:40:22फिर तो आप दोनों को हमें थैंक यू बोलना
  4655. 3:40:23चाहिए क्योंकि मेरे कारण ही आप दोनों
  4656. 3:40:26दोस्त का आज मिलना हो रहा है। मोहित रैना
  4657. 3:40:29मुस्कुराता हुआ बोला हां जरूर क्यों नहीं
  4658. 3:40:32मानसी मेहता खिहड़ भरे स्वर में बोली
  4659. 3:40:35मोहित रैना शिप्रा और मेघना की ओर आकर्षित
  4660. 3:40:38होकर बोला पहले हम सब अंदर चलते हैं और
  4661. 3:40:40पार्टी को एंजॉय करते हैं। शिप्रा जैसे ही
  4662. 3:40:43हाल के अंदर पहुंची उसने बहुत से ऐसे
  4663. 3:40:46लोगों को देखा जिसे वह अच्छे से पहचानती
  4664. 3:40:49थी। अचानक ही उसकी निगाह अपने दादाजी
  4665. 3:40:53बलवंत राय के ऊपर पड़ी। उसे नहीं पता था
  4666. 3:40:55कि बलवंत राय भी यहां इनवाइटेड है। इस समय
  4667. 3:40:58बलवंत राय के साथ ही हर्षल मेहता भी खड़े
  4668. 3:41:01थे। शिप्रा अपने दादाजी की नजरों से बचना
  4669. 3:41:03चाहती थी। पर उसके कहीं छुपने से पहले ही
  4670. 3:41:06उसके दादाजी ने उसे यहां देख लिया था।
  4671. 3:41:09शिप्रा को यहां देखकर बलवंत राय के चेहरे
  4672. 3:41:11पर भी आश्चर्य के भाव आ गया था। वह समझने
  4673. 3:41:15की कोशिश कर रहे थे कि शिप्रा यहां कैसे
  4674. 3:41:18इनवाइटेड है। पर जब उन्होंने मोहित रैना
  4675. 3:41:20को शिप्रा के साथ देखा तो समझ गए कि
  4676. 3:41:23शिप्रा यहां मोहित रैना के बुलावे पर ही
  4677. 3:41:26आई होगी। अब आगे क्या होगा? क्या होगा जब
  4678. 3:41:30शौर्य इस पार्टी में आएगा। राजा साहब,
  4679. 3:41:34चंद्रभान राठौर और शुरा की मुलाकात कैसी
  4680. 3:41:38रहेगी?

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